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तरुण रुचिका की बात मान कर चुप चाप बीएड पर लेट जाता है .... रुचिका भी उसके बगल में आकर लेट जाती है ... रुचिका शायद शावर लेकर hi यहाँ आती थी क्यूंकि उसके बालो से बहुत hi प्यारी भीनी भीनी खुसबू आ रही थी ...
रुचिका बड़े प्यार से तरुण के साथ कुड्लिंग करके सो जाती है .... दोनों भाई बहन जल्द hi एक प्यारी सी नींद में खो जाते हैं .....
आगे
अगले दिन सुबह को सभी लोग ब्रेकफास्ट के लिए एक साथ बैठे थे .... सुहानी अभी प्रियांशी और रुचिका के बीच में बैठी थी ... तभी सुहानी की नजर खुसबू पर पड़ती है जो की दूसरे टेबल पर बैठी ब्रेकफास्ट कर रही थी .... तरुण अभी वह नहीं था वो सुबह को hi अपने फूफा जी के साथ कही बहार गया हुआ था ....
सुहानी : रुचिका दीदी ये ब्लू साड़ी वाली आंटी कौन हैं ...
रुचिका : ये हमारी मंझली चची है पर क्यों ...
सुहानी : वो क्या है की मैंने इस आंटी को पहले भी बहुत बार अपने घर में देखा है ....
रुचिका : तुम्हे पक्का यकीं है ये वही हैं ...
सुहानी : हाँ दीदी मैं आपसे झूट क्यों बोलूंगी ...
रुचिका : ok ठीक है ... वैसे तुम्हे यहाँ मन तो लग रहा है न ...
सुहानी : हाँ दीदी आप लोगो से मिले हुए एक दिन hi हुआ है पर ऐसा कभी लगा hi नहीं हम पहली बार मिल रहे ....
ठीक ुशी वक्त राहुल अंदर आता है .... जब उसकी नजर सुहानी पर पड़ी तो उसकी नजर तो जैसे वही जैम गयी .... राहुल ने पहली बार उसको देखा था ...
राहुल को ऐसे खुद को घूरता प् कर सुहानी एक पल को घबरा जाती है .... जब रुचिका की नजर सुहानी को ऐसी हालत में देखती है तो उसकी नजर सामने उसको घूरते हुए राहुल पर पड़ती है तो उसका खून खौल उठता है वो पास में पड़े चाकू को जोर से टेबल पर मरती है जिससे राहुल का ध्यान टूट जाता है .... जब उसकी नजर रुचिका पर पड़ती है तो वो बिना कोई रिएक्शन दिए अपना पिछवाड़ा लेकर वह से भाग लेता है ...
ये सब देख प्रियांशी की तो हसी छूट पड़ती है वो जोर जोर से हसने लगती है ....
प्रियांशी : कुत्ते की दम है रूचि वो इतनी जल्दी सीधा नहीं होगा ... (धीरे से सुहानी के कण में) सुहानी इससे बच के रहना इस घर का दुशाशन है वो ....
उसके बाद सभी का ब्रेकफास्ट ख़त्म हो जाता है .... रुचिका सुहानी को अपने रूम में ले जाकर उससे और भी कुछ तहकीकात करती है ...
इवनिंग को तरुण छत पर खड़ा चलने वाली ठंडी हवा का लुत्फ़ ले रहा था .,.. आज काफी दिनों बाद वो अपने घर की छत पर आया था ....
वो इधर उधर चहलकदमी करता हुआ अपने रीसेंट पास्ट के बारे में सोच रहा था ....
"क्या हुआ हीरो क्या सोच रहा है ..."
ये आवाज़ तरुण की सबसे बड़ी सगी बहन ऋचा की थी ...
तरुण कुछ पल ऋचा को देखता है ...
तरुण : कुछ भी नहीं दीदी .... कैसी हो आप ... कल से नहीं दिखी आप ....
ऋचा : वो मेरी एक सहेली की शादी थी तो वही गयी हुयी थी ....
तरुण : ओह नीस तो हो गयी शादी ठीक से न ...
ऋचा : हाँ आज दोपहर को hi वो अपने ससुराल चली गयी तो मैं यहाँ आ गयी ... मुझे पता नहीं था की तुम आने वाले हो वर्ण मैं नहीं जाती ...
तरुण : कैसा है आपका चाहता भाई ...
ऋचा : कौन ... मेरे भाई तो तुम hi हो ...
तरुण : मैं तो बस ऐसे hi टाइम पास हु आपका रियल भाई तो वो है न राहुल ... वो भी कल से नहीं दिखा साथ hi गयी थी क्या ....
ऋचा समझ जाती है की तरुण उसको तना मार रहा है ...
ऋचा : नहीं वो कुत्ता मेरा भाई नहीं है वो भाई के नाम पर कलंक है ...
तरुण : 22 साल का प्यार इतनी जल्दी एक hi झटके में तो ख़तम नहीं हो सकता न ....
ऋचा : नहीं भाई इंसान को समझने में मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी .... मुझे अपने किये पर बहुत पछतावा है .... मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया है .... मैं अपनी गलती का पश्चाताप करना चाहती हु ....
तरुण : मुझे आपके ऊपर भरोषा नहीं ... वो क्या है न की आप लोगो ने मेरे इस नन्हे से दिल को इतनी बार तोडा है की आप लोगो पर भरोषा hi नहीं होता .... आप लोगो को पता नहीं होगा पर मेरी हालत इतनी ख़राब हो चुकी थी आप सब में मेन्टल टॉर्चर की वजह से की मैं दिमागी तौर पर बीमार हो गया था .... मल्टीप्ल पर्सनालिटी डिसऑर्डर नाम की बीमारी का नाम अपने सुना है क्या मुझे वही बीमारी हो गयी थी पता है क्यों बस आपलोगो की वजह से ..... वो तो भला हो मेरे दोस्त की दीदी का की उन्होंने न सिर्फ मेरा इलाज करवाया बल्कि मुझे मेन्टल सपोर्ट दिया .... कहने को तो मेरी कुछ नहीं लगती पर रिश्तो की अहमियत क्या होती है उनसे hi मुझे पता चला ....
तरुण की कड़वी मगर सच्ची बात सुन कर ऋचा की तो अंतरात्मा तक छलनी हो रही थी क्यूंकि तरुण के साथ जो कुछ भी हुआ था उसमे वो भी एक कड़ी थी .... बहने तो अपने छोटे भाई के लिए दुनिया से लड़ जाती है पर उसने तो खुद अपने भाई के साथ गैरो से भी बुरा बर्ताव किया .... ऋचा वही जमीन पर तरुण की कदमो में बैठ कर रोने लगती है ....
जब तरुण को अपने पाओ पर ठंडक का एहसास होता है तब उसको पता चलता है की ऋचा तो रो रही है वो तो बस अपनी धुन में अपने अतीत के पन्नो को खोल कर ऋचा को सुनाये जा रहा था ... उसको ऋचा के सिसकिया भी सुनाई दे रही थी .....
अपनी बड़ी बहन को ऐसे रट देख एक बार तो तरुण का दिल पिघल उठा पर तुरंत hi उसने अपना दिल कड़ा कर लिया ....
तरुण : ये क्या कर रही हो आप .... मैंने भी बचपन में बहुत बार आपके सामने रोया गिड़गिड़ाया था पर अपने मेरी तब सुनी थी क्या अपने ये घड़ियाली आंशू बचा कर रखो ....
ऋचा अब रट हुए हिचकिया लेने लगी थी ....
ऋचा : बताओ मेरे भाई अपना भरोषा जताने के लिए मुझे क्या करना होगा .... यहाँ छत से कूद जॉन तब तो तुम्हे यकीं होगा न की मैं बदल गयी हु ....
तरुण : ऐसे खुदखुशी करना तो कायरो का काम होता है ... आप कह रही थी न की उस दिन राहुल ने आपकी इज्जत पर हाथ डाला था ... तो अपने उसके साथ क्या किया ....
ऋचा : अब मैं उससे बात नहीं करती ... वो मेरे लिए मर चूका है मुझे उससे कोई मतलब नहीं .... अब सिर्फ तुम मेरे भाई हो ....
तरुण : मेरे कहने का मतलब है की अपने उससे बदला लिया अपना की नहीं ....
ऋचा : रूचि ने तो उसको इतना मारा था की वो अब सपनो में भी कुछ गलत करने की नहीं सोच सकता ....
तरुण : वो तो रूचि दीदी ने अपने बहन होने का फ़र्ज़ निभाया पर अपने क्या किया ...
ऋचा : मुझे कुछ करने की जरुरत hi नहीं पड़ी ...
तरुण : ऐसे नहीं होता गलत आपके साथ हुआ है तो बदला लेने का हक़ तो आपका भी बनता है ....
ऋचा : ठीक है बताओ मुझे क्या करना होगा ....
तरुण : आज रात को डिनर के वक्त सबके सामने आप उसको थप्पड़ मरोगी ....
ऋचा : पर सबके सामने कैसे मंझली चची मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगी ...
तरुण : देख लिया की आप कितनी बदल गयी हो ... पहले तो मुझे बेवजह थप्पड़ जड़ देती थी पर आज उसकी गलती होने पर भी उसको थप्पड़ नहीं मार सकती मुझे मेरा जवाब मिल गया ... आप मेरी बहन हो hi नहीं सकती .... मैं hi गलत था की बिना सोचे समझे आपको अपनी बहन मैंने लगा था पर सच्चाई तो ये है की आप अब भी ुशी राहुल की hi बहन हो ...
इतना बोल कर तरुण अब वह और नहीं रुकता और वह से नीचे आ जाता है ....
थोड़े देर रोने धोने के बाद ऋचा भी नीचे आ जाती है ...
तरुण को अभी रूम में आये हुए कुछ देर hi बीते थे की प्रियांशी तरुण को डिनर के लिए बुलाने आ गयी .... तरुण उसके साथ hi ग्राउंड फ्लोर पर आ जाता है ...
दिंनिंग टेबल पर सभी लोग मौजूद थे तरुण के dada,papa,manjhli Chachi,sumitra और सब भी ... राहुल अभी वह मौजूद नहीं था ... Richa,rani और राघव की बीवी शिवानी सबको खाना सर्वे कर रहे थे ....
तरुण और प्रियांशी भी जाकर अपनी जगह बैठ जाते हैं ...
तरुण के दादा : बहु राहुल नहीं दिख रहा ... वो खाना नहीं खायेगा क्या ....
खुसबू : बाबू जी मैंने उसको बोलै था आने को आ hi रहा होगा वो ....
तभी राहुल भी हिलते डुलते वह आ जाता है ... तरुण पर जैसे hi उसकी नजर पड़ती है वो हड़बड़ा जाता है और खाना सर्वे कर रही ऋचा से टकरा जाता है ...
ऋचा तो जैसे इसी पल का इंतजार कर रही थी उसने घूम कर राहुल के गालो पर खींच कर 2 - 3 थप्पड़ जड़ दिए ... सब कुछ इतना जल्दी हुआ की सब बिलकुल हैरान परेशान रह गए ...
राहुल खुद पर हुए इस अचानक हमले से बौखला गया ... वो ऋचा को खा जाने वाली नजरो से घूरता है ....
खुसबू : ऋचा ये क्या बेहूदगी है ... तुमने मेरे बेटे को मारा कैसे .... आज तो यहाँ वो प्रिय भी नहीं है आज तुमने कोई नहीं बचा सकता ....
राहुल : साली अंधी हो गयी है क्या ... एक तो मुझसे टकरा गयी और मुझे hi मरती है ... रुक अभी तुझे बताता हु ....
राहुल ने ऋचा पर हाथ उठाया hi था की उसके हाथ हवा में hi रुक गए ... ये तरुण hi था जिसने राहुल के हाथ को रोक लिया था ...
तरुण : बीटा अभी उसका भाई जिन्दा है ... मेरे रहते हुए कोई मेरी बहन को छू कर तो दिखाए .... इन्ही गंदे हाथो से तूने मेरी बहन को छुवा था न ....
तरुण ने राहुल के हाथ को घुमा का एक जोर का झटका दिया जिससे वो कड़क की आवाज़ के साथ टूट जाता है ...
राहुल दर्द से कराह उठता है जमीन पर बिन पानी मछली की तरह छटपटाने लगता है ....
तरुण के पापा अपनी जगह से खड़े हो जाते हैं और तरुण को एक थप्पड़ लगा देते हैं ....
तरुण जोर जोर से हसने लगता है ....
तरुण : वह क्या बात है आज कल आपका भी हाथ उठने लगा है ...
लक्समन : तू क्या समझता है मैं तुझसे डरता हु .... तुमने राहुल का हाथ तोडा क्यों तोडा .... यहाँ तेरी गुंडागर्दी नहीं चलेगी ...
रुचिका : कौन सी गुंडागर्दी पापा ... आज तक तरुण के साथ आप लोगो ने जो किया था वो क्या था ... अभी तो तरुण ने कुछ किया भी नहीं है .... आज इस किस्से का फुल एंड फाइनल hi कर देती हु ....
रुचिका चल कर खुसबू के पास जाती है और उसके बाल को पकड़ कर इतनी जोर से खींचती है की वो दर्द से कराहती हुयी फर्श पर गिर जाती है ....
रुचिका : बड़ी चची आपको पता है बड़े पापा या राघव भैया की ऐसी हालत का जिम्मेवार कौन है ....
बड़ी चची : रूचि बीटा बड़ो के साथ ऐसे बेहवे नहीं करते ....
रुचिका : बड़ी चची ये ऐसी जहरीली नागिन है जिसने अपने खुद के सुहाग तक को नहीं छोड़ा ... मंझले चाचा की मौत की जिम्मेवार एहि कुटिया है ... एहि नहीं बड़े chacha,raghav भैया की ऐसी हालत की जिम्मेवार भी एहि है ....
बड़ी चची : ये तुम क्या कह रही हो बेटी ....
खुसबू अब तक कड़ी hi चुकी थी और वो एक चाकू से रुचिका पर वार करती है ऐन वक्त पर रुचिका हैट जाती है जिससे उसका वॉर खली चला जाता है ....
खुसबू : साली रंडी की पैदाइश तेरे अनाप सनाप कहने से क्या होता है तेरे पास क्या सबूत है .... आज मैं तुझे जान से मार दूंगी ...
तभी पीछे से प्रियांशी खुसबू को जोर से धक्का दे देती है जिससे उसके हाथ से वो चाकू छूट जाता है ...
सुमित्रा : हाँ दीदी रूचि सही बोल रही है इस घर में आज तक जो भी बुरा हुआ है उसमे इसका hi हाथ है तरुण को मनहूस बताने वाली ये hi है ... हमारे कुलगुरु को ब्लैकमेल करके इसने hi उसकी गलत जन्म कुंडली बनवायी थी ... ये साडी बात खुद हमारे कुलगुरु ने hi मुझे बताया था ... इसका सबूत उनके द्वारा hi ीखि गयी उनकी डायरी के कुछ पन्नो की फोटो मेरे मोबाइल में ये रही ...
और फिर सुमित्रा अपने मोबाइल से वो फोटो निकल कर बड़ी चची के हाथो में दे देती है ...
खुसबू : ाचा तो ये तुम माँ बेटी का प्लान था ... अपने सांड जैसे बेटे पर इतना न उछाल मैं तुम लोगो को जेल की चक्की पिसवा कर रहूंगी ... मेरे बेटे का हाथ तोडा कैसे तेरे बेटे ने ....
रुचिका : ये ऐसे नहीं मानेगी ....
रुचिका और प्रियांशी ने ऋचा की हेल्प से खुसबू को चेयर से बांध दिया ... और फिर उन्होंने उसके मुँह में कपडा भी थिस दिया ताकि वो चिल्ला न सके ...
तरुण का दादा : तुम लोग अपने बड़ो से ऐसे बदतमीजी क्यों कर रही हो एहि संस्कार दिया था मैंने तुम लोगो को ... खोलो बहु रानी को ...
सुमित्रा : पापा जी आपको पता है क्या की माँ जी को इसने hi छत पर से धक्का दे दिया था और इल्जाम मेरे नन्हे से तरुण पर लगा दिया .... इसके द्वारा भरे गए ज़हर का hi परिणाम है की आज मेरे और मेरे बेटे के बीच इतनी गहरी खाई बन चुकी है की शायद hi हम कभी मिल पाए ... (अपने पति से) और आप अपने मेरे बेटे को थप्पड़ मारा कैसे ... वो भी इस राहुल के लिए ... आपकी बेटी के साथ उस दिन कितना गलत किया था राहुल ने पर आप तो अपनी भाभी के घड़ियाली आंशू में बह गए ... मैं तो अपने बेटे की माँ कहलाने के लायक नहीं हु पर आप तो बाप के नाम पर एक कलंक हैं ... मेरे बेटे की गलती क्या थी एहि न की उसने अपनी बहन के लिए स्टैंड लिया ... मुझे गर्व है अपने बेटे पर .... शायद आप लोगो को पता न हो पर इस घर में पीछे कुछ महीनो में गलत हुआ है उसका बदला मेरे बेटे ने hi लिया .... अब बताओ इस घर के लिए मनहूस कौन है मेरा बीटा या ये डायन जिसने अपने पति तक को खा लिया और डकार भी नहीं लिया ... मुझे गर्व है मेरे बेटे पर की मैं उसकी माँ हु ....
तरुण के दादा : बहु तुम्हारे पास कोई सबूत है क्या की ये सब मंझली बहु ने किया है ....
सुमित्रा : ये सब तो रानी बिटिया hi बताएगी ...
तरुण का दादा : बताओ रानी बीटा सच्चाई क्या है ....
रानी ने वो साडी बातें सुना डाली जो उसने उस दिन अपनी माँ को शेर सिंह से बात करते हुए सुना था ....
रुचिका : दादा जी अब तो आपको यकीं हुआ न .... या और भी सबूत चाहिए आपको ... अगर चाहिए तो बता देना ...
तरुण के दादा : पर इसका ये मतलब नहीं है न की तुम लोग इनके साथ ऐसे बेहवे करो .... तुम लोग अपने मेजोरिटी का फायदा उठा रहे हो ...
तरुण : हाहाहा दादा जी मेजोरिटी की बात आप न hi करो तो ाचा ... आप लोगो ने मेजोरिटी में एक छोटे से बच्चे पर जो जुल्म किया था वो क्या था ... एक बार अपनी हवस को दरकिनार कर सोचो की इस जाहिल और बदचलन औरत के साथ क्या करना चाहिए .... आपको क्या लगता है ये सिर्फ आपके साथ hi रातें रंगीन करती थी अरे इसके और भी ढेर सरे यार हैं ... और ये जो नमूना देख रहे हो न ये इस घर का खून नहीं है .... ये इसकी ऐयाशी का hi एक प्रोडक्ट है ... अगर अब भी आपको लगता है की मैं गलत हु तो फिर मैं इस घर से चला जाता हु ... (अपने बाप से) और मिस्टर आप भी सुन लीजिये सिर्फ बाप बन जाने से उसका फ़र्ज़ पूरा नहीं हो जाता ...
कुछ देर के लिए वह शान्ति छ जाती है ...
तरुण : लगता है आप लोगो ने मुझे hi गलत मन है .... जब मैं इस घर का कोई हु hi नहीं तो यहाँ की किसी चीज पर मेरा क्या अधिकार ... Ok चलता हु दुआओं में याद रखना ...
और फिर तरुण सबको नमस्ते करके मैं गेट की तरफ बढ़ने लगता है ....
तरुण के पीछे उसकी चारो बहने भी आ जाती है और उसके साथ hi चलने लगती है ....
तरुण : दीदी आप लोग मेरे साथ क्यों जा रही हो ....
ऋचा : तू जहा जायेगा हम भी वही चलेगी ... एक बार तुझे अकेला छोड़ कर देख चुकी हु पर अब और नहीं ....
रानी : हाँ भाई मैं अब इस घटिया औरत की शकल भी नहीं देखना चाहती जिसके वजह से मेरे फूल से भाई को इतने सालो तक दर्द सहना पड़ा ....
प्रियांशी : मेरा भाई मुझे जहा भी जिस हाल में भी रखेगा मैं रह लुंगी ... ी लव यू भाई अब मैं तुझसे एक पल भी दूर
नहीं रह सकती ....
तरुण : नहीं दीदी आप लोग लौट जाओ ... इस घर के लिए आपकी कुछ फ़र्ज़ हैं ... मैं तो पहले भी इस घर के लिए कोई मायने नहीं रखता था तो अब मेरे जाने से क्या hi फर्क पड़ेगा ....
रुचिका : फर्क कैसे नहीं पड़ेगा इतना प्यारा भाई अब मैं कहा से लाऊंगी जिसने हमारे हर जुर्म को ख़ुशी ख़ुशी सेह लिया और बदले में कभी हमारा बुरा नहीं चाहा ...
तरुण : दीदी क्या करे शायद हमारा साथ एहि तक था ... आप सबको मेरी कसम है आज मुझे न रोको ....
और फिर तरुण आगे जाने लगता है की तभी किसी ने उसको पीछे से जकड लिया ... ये तरुण की बड़ी चची थी ...
बड़ी चची : रुक जा लल्ला ... मेरा दिल हमेसा कहता था की मेरा लल्ला गलत नहीं है .... मैंने तेरी माँ को भी बहुत बार मन करने की कोसिस की थी पर ये उस वक्त उस चुड़ैल की अंधभक्त बानी हुयी थी ... तू भी बीटा किस इंसान से न्याय मांग रहा था जो खुद hi अपराधी है .... इस घर की बड़ी बहु होने के नाते मैं तुझे रोकती हु ... जिसने गलती की है वो सजा भुगते हर बार मेरे लल्ला को hi दुःख क्यों सहना पड़े ...
तरुण के दादा : बड़ी बहु सही कह रही है तरुण बीटा ... इस नागिन ने इस घर में ऐसा ज़हर भरा है की मैं भी अपराधी बन बैठा .... मैंने तो हमेसा से सोचा था की मैं ऐसा क्या करू की मेरे घर के सरे लोग एक hi छत के नीचे आ जाये ... इसी वजह से मैंने अपनी बेटी को भी खुद से दूर नहीं होने दिया .... पर इन् सब के बीच मैं कब हवस के दलदल में फंस गया पता hi न चला .... बड़ी बहु मुझे माफ़ करना मैंने तुम्हारा भी गुनेहगार हु ... पता नहीं मेरी गलती की कोई माफ़ी भी है या नहीं .... बेटे अब पता नहीं मैं कब तक जिन्दा राहु .... अपने बूढ़े दादा को ऐसे छोड़ कर मत जाओ बीटा वर्ण मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाउँगा ... कहने को तो मेरे तीन पोते हैं पर तुम सबसे अलग हो ... अब तुम जो चाहोगे वही होगा ...
बड़ी चची : अब तो मान जाओ न लल्ला ... इस चुड़ैल को इसके किये की सजा जरूर मिलेगी ... तुम्हे इस घर से बहुत दुःख मिले हैं अब जब ख़ुशी मिलने की बारी आयी तो कहा भागे जा रहे ....
चारो बहनो तरुण को अंदर ले आते हैं ...
तरुण पहले अपने दादा जी के पास जाता है जो तरुण को अपने सीने से लगा कर दिल से रो पड़ते हैं .... अपने दादा के गले लग कर तरुण को भी बहुत ाचा लगता है ....
दादा पोते का मिलान देख सुमित्रा भी बहुत खुस होती है वही तरुण के पापा एक चेयर पर अपना सर पकडे बैठे हुए थे ... सुमित्रा को लगता है शायद आज तरुण उसको गले लगा ले पर आज भी उसको निराशा hi हाथ लगती है ....
बड़ी चची : रूचि बीटा जाओ प्रिय और बाकियो को भी बुला लाओ .... आज हम सब साथ में अपने बेटे की घर वापसी का जश्न मनाएंगे ....
थोड़े hi देर में तरुण की बुआ वह आती है ... सुहानी भी उसके घर में hi थी तो वो भी उनके साथ वह आती है ... सबको साडी बातें बताई जाती है .... जिसे सुन कर सब बहुत खुस होते हैं ...
तरुण के अतीत को जान कर सुहानी के नजरो में तरुण के लिए इज्जत और भी बढ़ जाती है ....
प्रिय : चलो देर से hi सही मेरे बच्चे को इंसाफ तो मिला ... आजा बीटा अपनी बुआ के गले नहीं लगेगा ....
प्रिय तरुण को गले लगा कर उसका मुँह चुम लेती है ....
प्रिय : अब इस घर को बर्बाद करने वाली इस डायन को भी ऐसी सजा मिलनी चाहिए की वो मौत को टरशे पर मौत भी न मिले ....
सभी औरतें और लड़किया पहले तो खुसबू के ऊपर अपना हाथ साफ़ करती हैं .... सुमित्रा ने आज दिल खोल कर खुसबू पर अपने दिल की भड़ास निकली थी ... जो आग वो इतने दिनों से अपने सीने में दबा कर राखी थी उसका ट्रेलर आज उसने दिखा दिया था .... और फिर उसके बाद सब मिल कर उसके मुँह पर कालिख पॉट देती हैं ...
स्टोर रूम को खली करके उसमे बस एक चादर और उसके hi कुछ पुराने कपडे दे दिए जाते हैं और उसमे दोनों माँ बेटे को दाल दिया जाता है और खाने के नाम पर दिन की बची हुवा खाना दे दिया जाता है .... राहुल का बैंडेज तरुण ने पहले hi करवा दिया था ....
अब सभी लोगो ने साथ में डिनर किया क्यूंकि सबको बहुत जोरो की भूक लगी थी ....
डिनर के बाद काफी देर तक सभी लोगो ने तरुण की जीत का जश्न मनाया ....
तरुण रुचिका की बात मान कर चुप चाप बीएड पर लेट जाता है .... रुचिका भी उसके बगल में आकर लेट जाती है ... रुचिका शायद शावर लेकर hi यहाँ आती थी क्यूंकि उसके बालो से बहुत hi प्यारी भीनी भीनी खुसबू आ रही थी ...
रुचिका बड़े प्यार से तरुण के साथ कुड्लिंग करके सो जाती है .... दोनों भाई बहन जल्द hi एक प्यारी सी नींद में खो जाते हैं .....
आगे
अगले दिन सुबह को सभी लोग ब्रेकफास्ट के लिए एक साथ बैठे थे .... सुहानी अभी प्रियांशी और रुचिका के बीच में बैठी थी ... तभी सुहानी की नजर खुसबू पर पड़ती है जो की दूसरे टेबल पर बैठी ब्रेकफास्ट कर रही थी .... तरुण अभी वह नहीं था वो सुबह को hi अपने फूफा जी के साथ कही बहार गया हुआ था ....
सुहानी : रुचिका दीदी ये ब्लू साड़ी वाली आंटी कौन हैं ...
रुचिका : ये हमारी मंझली चची है पर क्यों ...
सुहानी : वो क्या है की मैंने इस आंटी को पहले भी बहुत बार अपने घर में देखा है ....
रुचिका : तुम्हे पक्का यकीं है ये वही हैं ...
सुहानी : हाँ दीदी मैं आपसे झूट क्यों बोलूंगी ...
रुचिका : ok ठीक है ... वैसे तुम्हे यहाँ मन तो लग रहा है न ...
सुहानी : हाँ दीदी आप लोगो से मिले हुए एक दिन hi हुआ है पर ऐसा कभी लगा hi नहीं हम पहली बार मिल रहे ....
ठीक ुशी वक्त राहुल अंदर आता है .... जब उसकी नजर सुहानी पर पड़ी तो उसकी नजर तो जैसे वही जैम गयी .... राहुल ने पहली बार उसको देखा था ...
राहुल को ऐसे खुद को घूरता प् कर सुहानी एक पल को घबरा जाती है .... जब रुचिका की नजर सुहानी को ऐसी हालत में देखती है तो उसकी नजर सामने उसको घूरते हुए राहुल पर पड़ती है तो उसका खून खौल उठता है वो पास में पड़े चाकू को जोर से टेबल पर मरती है जिससे राहुल का ध्यान टूट जाता है .... जब उसकी नजर रुचिका पर पड़ती है तो वो बिना कोई रिएक्शन दिए अपना पिछवाड़ा लेकर वह से भाग लेता है ...
ये सब देख प्रियांशी की तो हसी छूट पड़ती है वो जोर जोर से हसने लगती है ....
प्रियांशी : कुत्ते की दम है रूचि वो इतनी जल्दी सीधा नहीं होगा ... (धीरे से सुहानी के कण में) सुहानी इससे बच के रहना इस घर का दुशाशन है वो ....
उसके बाद सभी का ब्रेकफास्ट ख़त्म हो जाता है .... रुचिका सुहानी को अपने रूम में ले जाकर उससे और भी कुछ तहकीकात करती है ...
इवनिंग को तरुण छत पर खड़ा चलने वाली ठंडी हवा का लुत्फ़ ले रहा था .,.. आज काफी दिनों बाद वो अपने घर की छत पर आया था ....
वो इधर उधर चहलकदमी करता हुआ अपने रीसेंट पास्ट के बारे में सोच रहा था ....
"क्या हुआ हीरो क्या सोच रहा है ..."
ये आवाज़ तरुण की सबसे बड़ी सगी बहन ऋचा की थी ...
तरुण कुछ पल ऋचा को देखता है ...
तरुण : कुछ भी नहीं दीदी .... कैसी हो आप ... कल से नहीं दिखी आप ....
ऋचा : वो मेरी एक सहेली की शादी थी तो वही गयी हुयी थी ....
तरुण : ओह नीस तो हो गयी शादी ठीक से न ...
ऋचा : हाँ आज दोपहर को hi वो अपने ससुराल चली गयी तो मैं यहाँ आ गयी ... मुझे पता नहीं था की तुम आने वाले हो वर्ण मैं नहीं जाती ...
तरुण : कैसा है आपका चाहता भाई ...
ऋचा : कौन ... मेरे भाई तो तुम hi हो ...
तरुण : मैं तो बस ऐसे hi टाइम पास हु आपका रियल भाई तो वो है न राहुल ... वो भी कल से नहीं दिखा साथ hi गयी थी क्या ....
ऋचा समझ जाती है की तरुण उसको तना मार रहा है ...
ऋचा : नहीं वो कुत्ता मेरा भाई नहीं है वो भाई के नाम पर कलंक है ...
तरुण : 22 साल का प्यार इतनी जल्दी एक hi झटके में तो ख़तम नहीं हो सकता न ....
ऋचा : नहीं भाई इंसान को समझने में मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी .... मुझे अपने किये पर बहुत पछतावा है .... मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया है .... मैं अपनी गलती का पश्चाताप करना चाहती हु ....
तरुण : मुझे आपके ऊपर भरोषा नहीं ... वो क्या है न की आप लोगो ने मेरे इस नन्हे से दिल को इतनी बार तोडा है की आप लोगो पर भरोषा hi नहीं होता .... आप लोगो को पता नहीं होगा पर मेरी हालत इतनी ख़राब हो चुकी थी आप सब में मेन्टल टॉर्चर की वजह से की मैं दिमागी तौर पर बीमार हो गया था .... मल्टीप्ल पर्सनालिटी डिसऑर्डर नाम की बीमारी का नाम अपने सुना है क्या मुझे वही बीमारी हो गयी थी पता है क्यों बस आपलोगो की वजह से ..... वो तो भला हो मेरे दोस्त की दीदी का की उन्होंने न सिर्फ मेरा इलाज करवाया बल्कि मुझे मेन्टल सपोर्ट दिया .... कहने को तो मेरी कुछ नहीं लगती पर रिश्तो की अहमियत क्या होती है उनसे hi मुझे पता चला ....
तरुण की कड़वी मगर सच्ची बात सुन कर ऋचा की तो अंतरात्मा तक छलनी हो रही थी क्यूंकि तरुण के साथ जो कुछ भी हुआ था उसमे वो भी एक कड़ी थी .... बहने तो अपने छोटे भाई के लिए दुनिया से लड़ जाती है पर उसने तो खुद अपने भाई के साथ गैरो से भी बुरा बर्ताव किया .... ऋचा वही जमीन पर तरुण की कदमो में बैठ कर रोने लगती है ....
जब तरुण को अपने पाओ पर ठंडक का एहसास होता है तब उसको पता चलता है की ऋचा तो रो रही है वो तो बस अपनी धुन में अपने अतीत के पन्नो को खोल कर ऋचा को सुनाये जा रहा था ... उसको ऋचा के सिसकिया भी सुनाई दे रही थी .....
अपनी बड़ी बहन को ऐसे रट देख एक बार तो तरुण का दिल पिघल उठा पर तुरंत hi उसने अपना दिल कड़ा कर लिया ....
तरुण : ये क्या कर रही हो आप .... मैंने भी बचपन में बहुत बार आपके सामने रोया गिड़गिड़ाया था पर अपने मेरी तब सुनी थी क्या अपने ये घड़ियाली आंशू बचा कर रखो ....
ऋचा अब रट हुए हिचकिया लेने लगी थी ....
ऋचा : बताओ मेरे भाई अपना भरोषा जताने के लिए मुझे क्या करना होगा .... यहाँ छत से कूद जॉन तब तो तुम्हे यकीं होगा न की मैं बदल गयी हु ....
तरुण : ऐसे खुदखुशी करना तो कायरो का काम होता है ... आप कह रही थी न की उस दिन राहुल ने आपकी इज्जत पर हाथ डाला था ... तो अपने उसके साथ क्या किया ....
ऋचा : अब मैं उससे बात नहीं करती ... वो मेरे लिए मर चूका है मुझे उससे कोई मतलब नहीं .... अब सिर्फ तुम मेरे भाई हो ....
तरुण : मेरे कहने का मतलब है की अपने उससे बदला लिया अपना की नहीं ....
ऋचा : रूचि ने तो उसको इतना मारा था की वो अब सपनो में भी कुछ गलत करने की नहीं सोच सकता ....
तरुण : वो तो रूचि दीदी ने अपने बहन होने का फ़र्ज़ निभाया पर अपने क्या किया ...
ऋचा : मुझे कुछ करने की जरुरत hi नहीं पड़ी ...
तरुण : ऐसे नहीं होता गलत आपके साथ हुआ है तो बदला लेने का हक़ तो आपका भी बनता है ....
ऋचा : ठीक है बताओ मुझे क्या करना होगा ....
तरुण : आज रात को डिनर के वक्त सबके सामने आप उसको थप्पड़ मरोगी ....
ऋचा : पर सबके सामने कैसे मंझली चची मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगी ...
तरुण : देख लिया की आप कितनी बदल गयी हो ... पहले तो मुझे बेवजह थप्पड़ जड़ देती थी पर आज उसकी गलती होने पर भी उसको थप्पड़ नहीं मार सकती मुझे मेरा जवाब मिल गया ... आप मेरी बहन हो hi नहीं सकती .... मैं hi गलत था की बिना सोचे समझे आपको अपनी बहन मैंने लगा था पर सच्चाई तो ये है की आप अब भी ुशी राहुल की hi बहन हो ...
इतना बोल कर तरुण अब वह और नहीं रुकता और वह से नीचे आ जाता है ....
थोड़े देर रोने धोने के बाद ऋचा भी नीचे आ जाती है ...
तरुण को अभी रूम में आये हुए कुछ देर hi बीते थे की प्रियांशी तरुण को डिनर के लिए बुलाने आ गयी .... तरुण उसके साथ hi ग्राउंड फ्लोर पर आ जाता है ...
दिंनिंग टेबल पर सभी लोग मौजूद थे तरुण के dada,papa,manjhli Chachi,sumitra और सब भी ... राहुल अभी वह मौजूद नहीं था ... Richa,rani और राघव की बीवी शिवानी सबको खाना सर्वे कर रहे थे ....
तरुण और प्रियांशी भी जाकर अपनी जगह बैठ जाते हैं ...
तरुण के दादा : बहु राहुल नहीं दिख रहा ... वो खाना नहीं खायेगा क्या ....
खुसबू : बाबू जी मैंने उसको बोलै था आने को आ hi रहा होगा वो ....
तभी राहुल भी हिलते डुलते वह आ जाता है ... तरुण पर जैसे hi उसकी नजर पड़ती है वो हड़बड़ा जाता है और खाना सर्वे कर रही ऋचा से टकरा जाता है ...
ऋचा तो जैसे इसी पल का इंतजार कर रही थी उसने घूम कर राहुल के गालो पर खींच कर 2 - 3 थप्पड़ जड़ दिए ... सब कुछ इतना जल्दी हुआ की सब बिलकुल हैरान परेशान रह गए ...
राहुल खुद पर हुए इस अचानक हमले से बौखला गया ... वो ऋचा को खा जाने वाली नजरो से घूरता है ....
खुसबू : ऋचा ये क्या बेहूदगी है ... तुमने मेरे बेटे को मारा कैसे .... आज तो यहाँ वो प्रिय भी नहीं है आज तुमने कोई नहीं बचा सकता ....
राहुल : साली अंधी हो गयी है क्या ... एक तो मुझसे टकरा गयी और मुझे hi मरती है ... रुक अभी तुझे बताता हु ....
राहुल ने ऋचा पर हाथ उठाया hi था की उसके हाथ हवा में hi रुक गए ... ये तरुण hi था जिसने राहुल के हाथ को रोक लिया था ...
तरुण : बीटा अभी उसका भाई जिन्दा है ... मेरे रहते हुए कोई मेरी बहन को छू कर तो दिखाए .... इन्ही गंदे हाथो से तूने मेरी बहन को छुवा था न ....
तरुण ने राहुल के हाथ को घुमा का एक जोर का झटका दिया जिससे वो कड़क की आवाज़ के साथ टूट जाता है ...
राहुल दर्द से कराह उठता है जमीन पर बिन पानी मछली की तरह छटपटाने लगता है ....
तरुण के पापा अपनी जगह से खड़े हो जाते हैं और तरुण को एक थप्पड़ लगा देते हैं ....
तरुण जोर जोर से हसने लगता है ....
तरुण : वह क्या बात है आज कल आपका भी हाथ उठने लगा है ...
लक्समन : तू क्या समझता है मैं तुझसे डरता हु .... तुमने राहुल का हाथ तोडा क्यों तोडा .... यहाँ तेरी गुंडागर्दी नहीं चलेगी ...
रुचिका : कौन सी गुंडागर्दी पापा ... आज तक तरुण के साथ आप लोगो ने जो किया था वो क्या था ... अभी तो तरुण ने कुछ किया भी नहीं है .... आज इस किस्से का फुल एंड फाइनल hi कर देती हु ....
रुचिका चल कर खुसबू के पास जाती है और उसके बाल को पकड़ कर इतनी जोर से खींचती है की वो दर्द से कराहती हुयी फर्श पर गिर जाती है ....
रुचिका : बड़ी चची आपको पता है बड़े पापा या राघव भैया की ऐसी हालत का जिम्मेवार कौन है ....
बड़ी चची : रूचि बीटा बड़ो के साथ ऐसे बेहवे नहीं करते ....
रुचिका : बड़ी चची ये ऐसी जहरीली नागिन है जिसने अपने खुद के सुहाग तक को नहीं छोड़ा ... मंझले चाचा की मौत की जिम्मेवार एहि कुटिया है ... एहि नहीं बड़े chacha,raghav भैया की ऐसी हालत की जिम्मेवार भी एहि है ....
बड़ी चची : ये तुम क्या कह रही हो बेटी ....
खुसबू अब तक कड़ी hi चुकी थी और वो एक चाकू से रुचिका पर वार करती है ऐन वक्त पर रुचिका हैट जाती है जिससे उसका वॉर खली चला जाता है ....
खुसबू : साली रंडी की पैदाइश तेरे अनाप सनाप कहने से क्या होता है तेरे पास क्या सबूत है .... आज मैं तुझे जान से मार दूंगी ...
तभी पीछे से प्रियांशी खुसबू को जोर से धक्का दे देती है जिससे उसके हाथ से वो चाकू छूट जाता है ...
सुमित्रा : हाँ दीदी रूचि सही बोल रही है इस घर में आज तक जो भी बुरा हुआ है उसमे इसका hi हाथ है तरुण को मनहूस बताने वाली ये hi है ... हमारे कुलगुरु को ब्लैकमेल करके इसने hi उसकी गलत जन्म कुंडली बनवायी थी ... ये साडी बात खुद हमारे कुलगुरु ने hi मुझे बताया था ... इसका सबूत उनके द्वारा hi ीखि गयी उनकी डायरी के कुछ पन्नो की फोटो मेरे मोबाइल में ये रही ...
और फिर सुमित्रा अपने मोबाइल से वो फोटो निकल कर बड़ी चची के हाथो में दे देती है ...
खुसबू : ाचा तो ये तुम माँ बेटी का प्लान था ... अपने सांड जैसे बेटे पर इतना न उछाल मैं तुम लोगो को जेल की चक्की पिसवा कर रहूंगी ... मेरे बेटे का हाथ तोडा कैसे तेरे बेटे ने ....
रुचिका : ये ऐसे नहीं मानेगी ....
रुचिका और प्रियांशी ने ऋचा की हेल्प से खुसबू को चेयर से बांध दिया ... और फिर उन्होंने उसके मुँह में कपडा भी थिस दिया ताकि वो चिल्ला न सके ...
तरुण का दादा : तुम लोग अपने बड़ो से ऐसे बदतमीजी क्यों कर रही हो एहि संस्कार दिया था मैंने तुम लोगो को ... खोलो बहु रानी को ...
सुमित्रा : पापा जी आपको पता है क्या की माँ जी को इसने hi छत पर से धक्का दे दिया था और इल्जाम मेरे नन्हे से तरुण पर लगा दिया .... इसके द्वारा भरे गए ज़हर का hi परिणाम है की आज मेरे और मेरे बेटे के बीच इतनी गहरी खाई बन चुकी है की शायद hi हम कभी मिल पाए ... (अपने पति से) और आप अपने मेरे बेटे को थप्पड़ मारा कैसे ... वो भी इस राहुल के लिए ... आपकी बेटी के साथ उस दिन कितना गलत किया था राहुल ने पर आप तो अपनी भाभी के घड़ियाली आंशू में बह गए ... मैं तो अपने बेटे की माँ कहलाने के लायक नहीं हु पर आप तो बाप के नाम पर एक कलंक हैं ... मेरे बेटे की गलती क्या थी एहि न की उसने अपनी बहन के लिए स्टैंड लिया ... मुझे गर्व है अपने बेटे पर .... शायद आप लोगो को पता न हो पर इस घर में पीछे कुछ महीनो में गलत हुआ है उसका बदला मेरे बेटे ने hi लिया .... अब बताओ इस घर के लिए मनहूस कौन है मेरा बीटा या ये डायन जिसने अपने पति तक को खा लिया और डकार भी नहीं लिया ... मुझे गर्व है मेरे बेटे पर की मैं उसकी माँ हु ....
तरुण के दादा : बहु तुम्हारे पास कोई सबूत है क्या की ये सब मंझली बहु ने किया है ....
सुमित्रा : ये सब तो रानी बिटिया hi बताएगी ...
तरुण का दादा : बताओ रानी बीटा सच्चाई क्या है ....
रानी ने वो साडी बातें सुना डाली जो उसने उस दिन अपनी माँ को शेर सिंह से बात करते हुए सुना था ....
रुचिका : दादा जी अब तो आपको यकीं हुआ न .... या और भी सबूत चाहिए आपको ... अगर चाहिए तो बता देना ...
तरुण के दादा : पर इसका ये मतलब नहीं है न की तुम लोग इनके साथ ऐसे बेहवे करो .... तुम लोग अपने मेजोरिटी का फायदा उठा रहे हो ...
तरुण : हाहाहा दादा जी मेजोरिटी की बात आप न hi करो तो ाचा ... आप लोगो ने मेजोरिटी में एक छोटे से बच्चे पर जो जुल्म किया था वो क्या था ... एक बार अपनी हवस को दरकिनार कर सोचो की इस जाहिल और बदचलन औरत के साथ क्या करना चाहिए .... आपको क्या लगता है ये सिर्फ आपके साथ hi रातें रंगीन करती थी अरे इसके और भी ढेर सरे यार हैं ... और ये जो नमूना देख रहे हो न ये इस घर का खून नहीं है .... ये इसकी ऐयाशी का hi एक प्रोडक्ट है ... अगर अब भी आपको लगता है की मैं गलत हु तो फिर मैं इस घर से चला जाता हु ... (अपने बाप से) और मिस्टर आप भी सुन लीजिये सिर्फ बाप बन जाने से उसका फ़र्ज़ पूरा नहीं हो जाता ...
कुछ देर के लिए वह शान्ति छ जाती है ...
तरुण : लगता है आप लोगो ने मुझे hi गलत मन है .... जब मैं इस घर का कोई हु hi नहीं तो यहाँ की किसी चीज पर मेरा क्या अधिकार ... Ok चलता हु दुआओं में याद रखना ...
और फिर तरुण सबको नमस्ते करके मैं गेट की तरफ बढ़ने लगता है ....
तरुण के पीछे उसकी चारो बहने भी आ जाती है और उसके साथ hi चलने लगती है ....
तरुण : दीदी आप लोग मेरे साथ क्यों जा रही हो ....
ऋचा : तू जहा जायेगा हम भी वही चलेगी ... एक बार तुझे अकेला छोड़ कर देख चुकी हु पर अब और नहीं ....
रानी : हाँ भाई मैं अब इस घटिया औरत की शकल भी नहीं देखना चाहती जिसके वजह से मेरे फूल से भाई को इतने सालो तक दर्द सहना पड़ा ....
प्रियांशी : मेरा भाई मुझे जहा भी जिस हाल में भी रखेगा मैं रह लुंगी ... ी लव यू भाई अब मैं तुझसे एक पल भी दूर
नहीं रह सकती ....
तरुण : नहीं दीदी आप लोग लौट जाओ ... इस घर के लिए आपकी कुछ फ़र्ज़ हैं ... मैं तो पहले भी इस घर के लिए कोई मायने नहीं रखता था तो अब मेरे जाने से क्या hi फर्क पड़ेगा ....
रुचिका : फर्क कैसे नहीं पड़ेगा इतना प्यारा भाई अब मैं कहा से लाऊंगी जिसने हमारे हर जुर्म को ख़ुशी ख़ुशी सेह लिया और बदले में कभी हमारा बुरा नहीं चाहा ...
तरुण : दीदी क्या करे शायद हमारा साथ एहि तक था ... आप सबको मेरी कसम है आज मुझे न रोको ....
और फिर तरुण आगे जाने लगता है की तभी किसी ने उसको पीछे से जकड लिया ... ये तरुण की बड़ी चची थी ...
बड़ी चची : रुक जा लल्ला ... मेरा दिल हमेसा कहता था की मेरा लल्ला गलत नहीं है .... मैंने तेरी माँ को भी बहुत बार मन करने की कोसिस की थी पर ये उस वक्त उस चुड़ैल की अंधभक्त बानी हुयी थी ... तू भी बीटा किस इंसान से न्याय मांग रहा था जो खुद hi अपराधी है .... इस घर की बड़ी बहु होने के नाते मैं तुझे रोकती हु ... जिसने गलती की है वो सजा भुगते हर बार मेरे लल्ला को hi दुःख क्यों सहना पड़े ...
तरुण के दादा : बड़ी बहु सही कह रही है तरुण बीटा ... इस नागिन ने इस घर में ऐसा ज़हर भरा है की मैं भी अपराधी बन बैठा .... मैंने तो हमेसा से सोचा था की मैं ऐसा क्या करू की मेरे घर के सरे लोग एक hi छत के नीचे आ जाये ... इसी वजह से मैंने अपनी बेटी को भी खुद से दूर नहीं होने दिया .... पर इन् सब के बीच मैं कब हवस के दलदल में फंस गया पता hi न चला .... बड़ी बहु मुझे माफ़ करना मैंने तुम्हारा भी गुनेहगार हु ... पता नहीं मेरी गलती की कोई माफ़ी भी है या नहीं .... बेटे अब पता नहीं मैं कब तक जिन्दा राहु .... अपने बूढ़े दादा को ऐसे छोड़ कर मत जाओ बीटा वर्ण मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाउँगा ... कहने को तो मेरे तीन पोते हैं पर तुम सबसे अलग हो ... अब तुम जो चाहोगे वही होगा ...
बड़ी चची : अब तो मान जाओ न लल्ला ... इस चुड़ैल को इसके किये की सजा जरूर मिलेगी ... तुम्हे इस घर से बहुत दुःख मिले हैं अब जब ख़ुशी मिलने की बारी आयी तो कहा भागे जा रहे ....
चारो बहनो तरुण को अंदर ले आते हैं ...
तरुण पहले अपने दादा जी के पास जाता है जो तरुण को अपने सीने से लगा कर दिल से रो पड़ते हैं .... अपने दादा के गले लग कर तरुण को भी बहुत ाचा लगता है ....
दादा पोते का मिलान देख सुमित्रा भी बहुत खुस होती है वही तरुण के पापा एक चेयर पर अपना सर पकडे बैठे हुए थे ... सुमित्रा को लगता है शायद आज तरुण उसको गले लगा ले पर आज भी उसको निराशा hi हाथ लगती है ....
बड़ी चची : रूचि बीटा जाओ प्रिय और बाकियो को भी बुला लाओ .... आज हम सब साथ में अपने बेटे की घर वापसी का जश्न मनाएंगे ....
थोड़े hi देर में तरुण की बुआ वह आती है ... सुहानी भी उसके घर में hi थी तो वो भी उनके साथ वह आती है ... सबको साडी बातें बताई जाती है .... जिसे सुन कर सब बहुत खुस होते हैं ...
तरुण के अतीत को जान कर सुहानी के नजरो में तरुण के लिए इज्जत और भी बढ़ जाती है ....
प्रिय : चलो देर से hi सही मेरे बच्चे को इंसाफ तो मिला ... आजा बीटा अपनी बुआ के गले नहीं लगेगा ....
प्रिय तरुण को गले लगा कर उसका मुँह चुम लेती है ....
प्रिय : अब इस घर को बर्बाद करने वाली इस डायन को भी ऐसी सजा मिलनी चाहिए की वो मौत को टरशे पर मौत भी न मिले ....
सभी औरतें और लड़किया पहले तो खुसबू के ऊपर अपना हाथ साफ़ करती हैं .... सुमित्रा ने आज दिल खोल कर खुसबू पर अपने दिल की भड़ास निकली थी ... जो आग वो इतने दिनों से अपने सीने में दबा कर राखी थी उसका ट्रेलर आज उसने दिखा दिया था .... और फिर उसके बाद सब मिल कर उसके मुँह पर कालिख पॉट देती हैं ...
स्टोर रूम को खली करके उसमे बस एक चादर और उसके hi कुछ पुराने कपडे दे दिए जाते हैं और उसमे दोनों माँ बेटे को दाल दिया जाता है और खाने के नाम पर दिन की बची हुवा खाना दे दिया जाता है .... राहुल का बैंडेज तरुण ने पहले hi करवा दिया था ....
अब सभी लोगो ने साथ में डिनर किया क्यूंकि सबको बहुत जोरो की भूक लगी थी ....
डिनर के बाद काफी देर तक सभी लोगो ने तरुण की जीत का जश्न मनाया ....