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Update-27(A) (मेघा अपडेट)
कुछ दूर पर कड़ी आसमा के आँखों में भले hi आंसूं थे मगर वो अपनी नज़रें नीचे झुकाये उस भीड़ के बीचों बीच कड़ी thi..............hari कुछ देर तक ऐसे hi सबको घूरता रहा फिर सबको भागता हुआ आसमा के तरफ बड़े प्यार से देखने laga.................wo फिर हौले हौले आसमा के करीब गया और आसमा के सामने जाकर किसी गुनेहगार की तरह चुप चाप से खड़ा हो gaya...........uske हाथ में थमा लाठ अब छूटकर सड़क पर गिर चूका tha................dono के लैब खामोश they....................na हरी कुछ कह रहा tha.....................aur न आसमा..........................................
अब आगे..........................................................
हरी आसमा के करीब गया और उसके सर पर अपना हाथ धीरे धीरे बड़े hi प्यार से फेरने laga.....................jaise कोई माँ अपने बाचे को दुलारती ho..................aasma के आँखों से बहते उन आंसुओं को पूछने laga............wahin आसमा एक नज़र देखती हुई हरी के सीने से फ़ौरन लिपट गयी और फुट फुट कर रू padi................hari के लिए ये किसी बड़े सरप्राइज जितना tha..............magar वो एक बात जनता था की आसमा इस वक़्त बहुत दरी हुई thi........aur सदमे में thi................aur वो उसके अंदर के उस दुर्र को बहार निकलना चाहता tha...............us सड़क पर सबके बीच आसमा हरी के सीने से लिपटी हुई थी वहां मौजूद लोग उसके बारे में क्या कुछ सोच रहे होंगे अब उसे किसी चीज़ की परवाह नहीं thi....................aaj उसे हरी के सीने से लिपटकर एक सुकून मिल रहा tha...............wo सुकून जिसकी तलाश में वो न जाने कब से दर दर भटक रही थी............
" memsaheb.................sab लोग हमें देख rahe..............aap पहले अपने आंसूं poochiye............fir पानी पीजिये..............." और हरी आसमा को अपने से थोड़ा दूर करता हुआ................ उसकी आँखों में बड़े hi प्यार से देखने laga.........wahin आसमा एक नज़र हरी की तरफ देखती हुई.................... अपने आँखों से बहते उन आंसुओं को फिर पूछने lagi...............hari पास में रखा पानी की बोतल आसमा के तरफ बढ़ता हुआ बड़े गौर से देखने laga.............wahin जब आसमा की नज़रें उसके फाटे हुए हाथ पर जब गयी वो अंदर hi अंदर तड़प uthi..................kyon की उसका एक हाथ उसके खून से पूरी तरह रंगा हुआ tha............jo उसके कपड़ों पर भी कहीं कहीं लग गया tha..................khoon अब भी बेहटा हुआ नीचे सड़क पर टपक रहा था मगर हरी को उस दर्द की कोई परवाह नहीं थी................
" तुम्हारे हाथों से खून निकल रहा हैं..............." और आसमा हरी का वो हाथ थमती हुई बड़े गौर से देखने lagi.................hari का ज़ख्म गहरा था मगर उतना चोट उसे अक्सर लगता रहता था तो उसके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं thi.............magar आसमा के लिए तो थी naa..................wo हरी के उन ज़ख्मों को देखकर अंदर hi अंदर तड़प uthi.................issey पहले हरी कुछ समझता वो अपने साड़ी के एक कोना पकड़कर तेज़ी से फाड़ने लगी और जब साड़ी थोड़ी सी फुट गयी वो अपने साड़ी को और भी फाड़ती चली gayi...............uski बेशकंति साड़ी ख़राब हो गयी thi............magar उसके लिए ये सब चीज़ कोई मायने नहीं रखती थी..................
वो साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर हरी के कलाई पर बांधने लगी वहीँ हरी हैरत से आसमा को बस देखता raha.................aaj वाकई में उसकी किस्मत बुलंद thi...............aaj से पहले कभी उसके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ tha.........jo आज हो रहा tha................itni हसीं लड़की आज उसके ज़ख्मों पर मरहम लगा रही थी क्या ये कम बात थी...................
" आपने ये क्या किया memsaheb................aapki इतनी महंगी saari.........aur आपने उसे फाड़ दी.............." और हरी आसमा को बड़े hi प्यार से देखने लगा वहीँ आसमा उसके हाथों पर अपनी साड़ी का टुकड़ा ाचे से लपेटती हुई ............... उसे बांधने लगी..............
" मैंने बाँध दिया हैं इससे तुम्हारा खून रुक jayega................hum चलते हैं यहीं पास के हॉस्पिटल में.............." और आसमा पानी की बोतल अपने हाथों में लेती हुई अपने आँख और मुँह को धोनी lagi............aab वो काफी हुड्ड तक नार्मल हो चुकी thi.............wo हरी को ज़बरदस्ती ले गयी और पास के क्लिनिक में उसके हाथों पर मरहम और पट्टी karwayi..............hari आसमा को बड़े प्यार से बस देख रहा था...................
" ये क्या memsaheb.....................main बिलकुल ठीक hoon........itne छोटे मोठे चोट तो अक्सर मुझे लगते hi रहते hain................aap ख्वामख्वाह परेशां हो रही............" और हरी धीरे से आसमा की तरफ देखता हुआ बोल pada...............wahin आज आसमा उसकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं thi................wo फिर वहीँ पास के शॉपिंग मॉल में गयी और अपने लिए दो तीन साड़ी सेलेक्ट की और हरी के लिए भी तीन चार सेट कपड़े खरीदने lagi.........wahin हरी बार बार आसमा को मन करता raha...........magar आसमा को उसकी एक न सुननी thi...............so वो न suni.........................aaj वो हरी पर अपना हुकुम nahin.................balki अपना हक़ जाता रही thi................aasma के अंदर हरी के लिए अब प्यार बेशुमार उमड़ पड़ा था..................
अब उसके अंदर की साडी झिझक हरी के लिए काफी हुड्ड तक ख़तम हो गयी thi...............usey हरी अब अपना लगने लगा tha..................yehi तो हर औरत चाहती हैं की मर्द हमेशा उसकी रक्षा kare............usey हर मुसीबत से bachaye...............hari भले hi उसका शौहर नहीं था मगर आज वो बीच बाजार में उसकी लाज और इज़्ज़त बचने वाला उसकी नज़र में हीरो ज़रूर बन गया tha.............bhale वो कैसा भी क्यों न ho..............aasma अब उसे दिल hi दिल में अपना सब कुछ मान चुकी थी..............
शॉपिंग करने के बाद हरी आसमा के साथ चलता हुआ कार में आया और सामने वाली सीट पर आकर बैठ gaya...................wahin आसमा भी सामान का पैकेट पिछली सीट पर रखती हुई ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गयी और कार स्टार्ट कर di..............kuch दूर जाने पर कुछ सुनसान एरिया में आसमा कार को साइड में पार्क करती hui............apni कार बंद कर दी और हरी की तरफ बड़े प्यार से देखने lagi.............wahin हरी अजीब सी नज़रियों से आसमा को देखे जा रहा tha...................aasma के मुन्न में क्या चल रहा था उसे थोड़ा भी अंदाज़ा नहीं था...........
" memsaheb..............aapne कार यहाँ क्यों रोक दी.....................!!!!!!!!!!!! " और हरी थोड़ा हैरान होता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा padi..............issey पहले वो कुछ कहती सैम का फ़ोन आ गया और उसने उससे ये कहकर बात ताल दी की वो अभी मार्किट में हैं और शॉपिंग कर रही ...............और सब कुछ ठीक hain........meri फ़िक्र करने की कोई बात nahin............jab वो घर जाएगी तो उससे बात karegi...............ye कहकर उसने फ़ोन काट di..........wahin हरी बड़े गौर से आसमा को बस देखे जा रहा था.................
" memsaheb.................aapne साहेब से झूठ क्यों bola...............ki आप अभी मार्किट में hain............market तो कब का हो चूका.............." और हरी आसमा के मुन्न में क्या चल रहा था वो कुछ समझ नहीं पा रहा tha................................wo बड़े गौर से आसमा के खूबसूरत से चेहरे को बस निहारता रहा...................
" hari.....................mujhse तुमसे कुछ बात करनी hain.....................is लिए मैंने यहाँ कार रोक di.................waise.....................main तुम्हें कैसी लगती hoon...............sach सच बताना................" और आसमा सीरियस होती हुई हरी के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने lagi................wahin हरी की तो जैसे चंडी हो gayi..................aab वो ये बात बहुत ाचे से समझ चूका था की आसमा अब उसकी पूरी तरह से मुट्ठी में आ चुकी hain.................aaj के इस घटना ने हरी के लिए उसके दिल के सरे दरवाज़े खोल दिए थे वहीँ आसमा की सोच अब पूरी तरह से बदल चुकी थी...........
" आप तो बहुत खूबसूरत हैं memsaheb.................aapke आगे तो हीरोइन भी फीकी पढ़ जाती hain..............kasam से............." और हरी धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा टकटकी लगाए हरी के चेहरे को बस निहारती rahi...............shayad उसे जो सुनना था हरी ने उसे वैसा जवाब नहीं दिया था..............
" मैं खूबसूरत हूँ या nahin............maine ये नहीं पुछा tumse...............main ये पूछ रही की मैं तुम्हें कैसी लगती हूँ................." और आसमा बड़े गौर से हरी की तरफ फिर से देखती हुई बोल पड़ी.............
" आप मुझे बहुत ाची लगती हैं memsaheb.....................itni ाची की मैं बता नहीं सकता................." और हरी धीरे से बोल pada...........aaj आसमा के बदले हुए तेवर से हरी भी थोड़ा मुन्न hi मुन्न घबरा रहा था..................
" सच कह रहे हो naa..........fir तुम्हें शांति कैसी लगती hain...................wo भी तो तुम्हें ाची hi लगती होगी .........हैं ना................." और आसमा ताने मरती हुई हरी की तरफ अजीब नज़रियों से देखने lagi...............wahin हरी कुछ देर तक चुप raha..................wo ाचे से जनता था की उसने शांति को उससे चढ़ते हुए आज खुद देखा tha...........is लिए वो इस बात को झुटला नहीं सकता tha..............magar आसमा को नाराज़ भी तो नहीं कर सकता था...................
" आपके आगे सब फीकी हैं memsaheb.................aapse किसी का कोई मुक़ाबला nahin.................aap बेजोड़ hain............main तो बस उसके साथ टाइम पास करता hoon.............bus................wo मुझे ज़्यादा पसंद नहीं............." और हरी सफाई देते हुए बोल पड़ा ............... वहीँ आसमा बड़े गौर से हरी की आँखों में आँखें डेल उसे देख रही thi............shayad वो उसका झूठ पकड़ना चाहती हो............
" अगर वो तुम्हें पसंद नहीं फिर भी तुम उसके साथ अपना जिस्मानी सम्बन्ध कायम किये हुए ho................hain naa...............agar वो तुम्हें पसंद होती तो तुम क्या करते..............." और आसमा थोड़ी चिढ़ते हुए हरी की तरफ गुस्से से देखने लगती हैं वहीँ हरी एक शब्द कुछ नहीं कहता और बस खामोश रहता हैं..............
" देखो hari...........mujhe तुम्हारा शांति से मिलना जुलना अब पसंद nahin............haan..............pehle की बात कुछ और thi............magar आगे से ये सब नहीं चलेगा............." और आसमा जैसे हरी को हुकुम देती हैं वहीँ हरी अपने चेहरे पर थोड़ी सी उदासी लता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं................
कुछ दूर पर कड़ी आसमा के आँखों में भले hi आंसूं थे मगर वो अपनी नज़रें नीचे झुकाये उस भीड़ के बीचों बीच कड़ी thi..............hari कुछ देर तक ऐसे hi सबको घूरता रहा फिर सबको भागता हुआ आसमा के तरफ बड़े प्यार से देखने laga.................wo फिर हौले हौले आसमा के करीब गया और आसमा के सामने जाकर किसी गुनेहगार की तरह चुप चाप से खड़ा हो gaya...........uske हाथ में थमा लाठ अब छूटकर सड़क पर गिर चूका tha................dono के लैब खामोश they....................na हरी कुछ कह रहा tha.....................aur न आसमा..........................................
अब आगे..........................................................
हरी आसमा के करीब गया और उसके सर पर अपना हाथ धीरे धीरे बड़े hi प्यार से फेरने laga.....................jaise कोई माँ अपने बाचे को दुलारती ho..................aasma के आँखों से बहते उन आंसुओं को पूछने laga............wahin आसमा एक नज़र देखती हुई हरी के सीने से फ़ौरन लिपट गयी और फुट फुट कर रू padi................hari के लिए ये किसी बड़े सरप्राइज जितना tha..............magar वो एक बात जनता था की आसमा इस वक़्त बहुत दरी हुई thi........aur सदमे में thi................aur वो उसके अंदर के उस दुर्र को बहार निकलना चाहता tha...............us सड़क पर सबके बीच आसमा हरी के सीने से लिपटी हुई थी वहां मौजूद लोग उसके बारे में क्या कुछ सोच रहे होंगे अब उसे किसी चीज़ की परवाह नहीं thi....................aaj उसे हरी के सीने से लिपटकर एक सुकून मिल रहा tha...............wo सुकून जिसकी तलाश में वो न जाने कब से दर दर भटक रही थी............
" memsaheb.................sab लोग हमें देख rahe..............aap पहले अपने आंसूं poochiye............fir पानी पीजिये..............." और हरी आसमा को अपने से थोड़ा दूर करता हुआ................ उसकी आँखों में बड़े hi प्यार से देखने laga.........wahin आसमा एक नज़र हरी की तरफ देखती हुई.................... अपने आँखों से बहते उन आंसुओं को फिर पूछने lagi...............hari पास में रखा पानी की बोतल आसमा के तरफ बढ़ता हुआ बड़े गौर से देखने laga.............wahin जब आसमा की नज़रें उसके फाटे हुए हाथ पर जब गयी वो अंदर hi अंदर तड़प uthi..................kyon की उसका एक हाथ उसके खून से पूरी तरह रंगा हुआ tha............jo उसके कपड़ों पर भी कहीं कहीं लग गया tha..................khoon अब भी बेहटा हुआ नीचे सड़क पर टपक रहा था मगर हरी को उस दर्द की कोई परवाह नहीं थी................
" तुम्हारे हाथों से खून निकल रहा हैं..............." और आसमा हरी का वो हाथ थमती हुई बड़े गौर से देखने lagi.................hari का ज़ख्म गहरा था मगर उतना चोट उसे अक्सर लगता रहता था तो उसके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं thi.............magar आसमा के लिए तो थी naa..................wo हरी के उन ज़ख्मों को देखकर अंदर hi अंदर तड़प uthi.................issey पहले हरी कुछ समझता वो अपने साड़ी के एक कोना पकड़कर तेज़ी से फाड़ने लगी और जब साड़ी थोड़ी सी फुट गयी वो अपने साड़ी को और भी फाड़ती चली gayi...............uski बेशकंति साड़ी ख़राब हो गयी thi............magar उसके लिए ये सब चीज़ कोई मायने नहीं रखती थी..................
वो साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर हरी के कलाई पर बांधने लगी वहीँ हरी हैरत से आसमा को बस देखता raha.................aaj वाकई में उसकी किस्मत बुलंद thi...............aaj से पहले कभी उसके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ tha.........jo आज हो रहा tha................itni हसीं लड़की आज उसके ज़ख्मों पर मरहम लगा रही थी क्या ये कम बात थी...................
" आपने ये क्या किया memsaheb................aapki इतनी महंगी saari.........aur आपने उसे फाड़ दी.............." और हरी आसमा को बड़े hi प्यार से देखने लगा वहीँ आसमा उसके हाथों पर अपनी साड़ी का टुकड़ा ाचे से लपेटती हुई ............... उसे बांधने लगी..............
" मैंने बाँध दिया हैं इससे तुम्हारा खून रुक jayega................hum चलते हैं यहीं पास के हॉस्पिटल में.............." और आसमा पानी की बोतल अपने हाथों में लेती हुई अपने आँख और मुँह को धोनी lagi............aab वो काफी हुड्ड तक नार्मल हो चुकी thi.............wo हरी को ज़बरदस्ती ले गयी और पास के क्लिनिक में उसके हाथों पर मरहम और पट्टी karwayi..............hari आसमा को बड़े प्यार से बस देख रहा था...................
" ये क्या memsaheb.....................main बिलकुल ठीक hoon........itne छोटे मोठे चोट तो अक्सर मुझे लगते hi रहते hain................aap ख्वामख्वाह परेशां हो रही............" और हरी धीरे से आसमा की तरफ देखता हुआ बोल pada...............wahin आज आसमा उसकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं thi................wo फिर वहीँ पास के शॉपिंग मॉल में गयी और अपने लिए दो तीन साड़ी सेलेक्ट की और हरी के लिए भी तीन चार सेट कपड़े खरीदने lagi.........wahin हरी बार बार आसमा को मन करता raha...........magar आसमा को उसकी एक न सुननी thi...............so वो न suni.........................aaj वो हरी पर अपना हुकुम nahin.................balki अपना हक़ जाता रही thi................aasma के अंदर हरी के लिए अब प्यार बेशुमार उमड़ पड़ा था..................
अब उसके अंदर की साडी झिझक हरी के लिए काफी हुड्ड तक ख़तम हो गयी thi...............usey हरी अब अपना लगने लगा tha..................yehi तो हर औरत चाहती हैं की मर्द हमेशा उसकी रक्षा kare............usey हर मुसीबत से bachaye...............hari भले hi उसका शौहर नहीं था मगर आज वो बीच बाजार में उसकी लाज और इज़्ज़त बचने वाला उसकी नज़र में हीरो ज़रूर बन गया tha.............bhale वो कैसा भी क्यों न ho..............aasma अब उसे दिल hi दिल में अपना सब कुछ मान चुकी थी..............
शॉपिंग करने के बाद हरी आसमा के साथ चलता हुआ कार में आया और सामने वाली सीट पर आकर बैठ gaya...................wahin आसमा भी सामान का पैकेट पिछली सीट पर रखती हुई ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गयी और कार स्टार्ट कर di..............kuch दूर जाने पर कुछ सुनसान एरिया में आसमा कार को साइड में पार्क करती hui............apni कार बंद कर दी और हरी की तरफ बड़े प्यार से देखने lagi.............wahin हरी अजीब सी नज़रियों से आसमा को देखे जा रहा tha...................aasma के मुन्न में क्या चल रहा था उसे थोड़ा भी अंदाज़ा नहीं था...........
" memsaheb..............aapne कार यहाँ क्यों रोक दी.....................!!!!!!!!!!!! " और हरी थोड़ा हैरान होता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा padi..............issey पहले वो कुछ कहती सैम का फ़ोन आ गया और उसने उससे ये कहकर बात ताल दी की वो अभी मार्किट में हैं और शॉपिंग कर रही ...............और सब कुछ ठीक hain........meri फ़िक्र करने की कोई बात nahin............jab वो घर जाएगी तो उससे बात karegi...............ye कहकर उसने फ़ोन काट di..........wahin हरी बड़े गौर से आसमा को बस देखे जा रहा था.................
" memsaheb.................aapne साहेब से झूठ क्यों bola...............ki आप अभी मार्किट में hain............market तो कब का हो चूका.............." और हरी आसमा के मुन्न में क्या चल रहा था वो कुछ समझ नहीं पा रहा tha................................wo बड़े गौर से आसमा के खूबसूरत से चेहरे को बस निहारता रहा...................
" hari.....................mujhse तुमसे कुछ बात करनी hain.....................is लिए मैंने यहाँ कार रोक di.................waise.....................main तुम्हें कैसी लगती hoon...............sach सच बताना................" और आसमा सीरियस होती हुई हरी के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने lagi................wahin हरी की तो जैसे चंडी हो gayi..................aab वो ये बात बहुत ाचे से समझ चूका था की आसमा अब उसकी पूरी तरह से मुट्ठी में आ चुकी hain.................aaj के इस घटना ने हरी के लिए उसके दिल के सरे दरवाज़े खोल दिए थे वहीँ आसमा की सोच अब पूरी तरह से बदल चुकी थी...........
" आप तो बहुत खूबसूरत हैं memsaheb.................aapke आगे तो हीरोइन भी फीकी पढ़ जाती hain..............kasam से............." और हरी धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा टकटकी लगाए हरी के चेहरे को बस निहारती rahi...............shayad उसे जो सुनना था हरी ने उसे वैसा जवाब नहीं दिया था..............
" मैं खूबसूरत हूँ या nahin............maine ये नहीं पुछा tumse...............main ये पूछ रही की मैं तुम्हें कैसी लगती हूँ................." और आसमा बड़े गौर से हरी की तरफ फिर से देखती हुई बोल पड़ी.............
" आप मुझे बहुत ाची लगती हैं memsaheb.....................itni ाची की मैं बता नहीं सकता................." और हरी धीरे से बोल pada...........aaj आसमा के बदले हुए तेवर से हरी भी थोड़ा मुन्न hi मुन्न घबरा रहा था..................
" सच कह रहे हो naa..........fir तुम्हें शांति कैसी लगती hain...................wo भी तो तुम्हें ाची hi लगती होगी .........हैं ना................." और आसमा ताने मरती हुई हरी की तरफ अजीब नज़रियों से देखने lagi...............wahin हरी कुछ देर तक चुप raha..................wo ाचे से जनता था की उसने शांति को उससे चढ़ते हुए आज खुद देखा tha...........is लिए वो इस बात को झुटला नहीं सकता tha..............magar आसमा को नाराज़ भी तो नहीं कर सकता था...................
" आपके आगे सब फीकी हैं memsaheb.................aapse किसी का कोई मुक़ाबला nahin.................aap बेजोड़ hain............main तो बस उसके साथ टाइम पास करता hoon.............bus................wo मुझे ज़्यादा पसंद नहीं............." और हरी सफाई देते हुए बोल पड़ा ............... वहीँ आसमा बड़े गौर से हरी की आँखों में आँखें डेल उसे देख रही thi............shayad वो उसका झूठ पकड़ना चाहती हो............
" अगर वो तुम्हें पसंद नहीं फिर भी तुम उसके साथ अपना जिस्मानी सम्बन्ध कायम किये हुए ho................hain naa...............agar वो तुम्हें पसंद होती तो तुम क्या करते..............." और आसमा थोड़ी चिढ़ते हुए हरी की तरफ गुस्से से देखने लगती हैं वहीँ हरी एक शब्द कुछ नहीं कहता और बस खामोश रहता हैं..............
" देखो hari...........mujhe तुम्हारा शांति से मिलना जुलना अब पसंद nahin............haan..............pehle की बात कुछ और thi............magar आगे से ये सब नहीं चलेगा............." और आसमा जैसे हरी को हुकुम देती हैं वहीँ हरी अपने चेहरे पर थोड़ी सी उदासी लता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं................