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तभी फ़ोन फिर से बजता है. सरिता फ़ोन उठती है और hello बोलती है. उधर तब तक फ़ोन कट हो चूका होता है.
उधर इस घटना की खबर पूरे शहर में हो गई तह. निश्छल इस बात से अनजान अपने केबिन में बैठा कुछ जरुरी काम कर रहा था की तभी निश्छल का फ़ोन बजने लगा. निश्छल ने जब अपना फ़ोन देखा तो एसएसपी का फ़ोन था, उसने रिसीव किया और कहा.
निश्छल- जय हिन्द सर.
एसएसपी- जय हिन्द निश्छल. पहले ये बताओ की ये सब हो क्या रहा है. तुम्हारे अंदर काम करने वाली सरिता ये क्या कर रही है. आज उसने फिर कोई कांड किया है.
निश्छल- क्या बात कर रहे हैं आप. क्या कांड किया उसने. मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं हैं.
एसएसपी- (थोड़ा गुस्से से) ये तुम क्या बोल रहे हो निश्छल. वो तुम्हारे अंदर में है और तुम्हे hi ये नहीं पता की तुम्हारी वो अफसर क्या करती फिर रही है. आखिर तुम कर क्या रहे हो. तुम अपने अंदर काम करने वाले के ऊपर नियंत्रण नहीं रख प् रहे हो. अगर ऐसा है तो अपनी नौकरी छोड़ दो समझे. हमारे डिपार्टमेंट को तुम्हारे जैसे लज़ी अफसर की कोई जरूरत नहीं है.
एसएसपी की बात सुनकर निश्छल ये समझ गया था की जरूर सरिता ने कुछ ऐसा किया है जिसके कारन एसएसपी सर उसके ऊपर भड़क रहे हैं. निश्छल ने एसएसपी सर से पूछा.
निश्छल- ये आप क्या कह रहे हैं सर. आखिर सरिता ने ऐसा क्या कर दिया है जो आप मुझको नौकरी छोड़ने के लिए बोल रहे हैं.
एसएसपी- (गुस्से में) ददप, अगर तुम्हे अपने अफसर की करतूत के बारे में पता नहीं है तो तुम किस बात के दसप हो. तुम न्यूज़ देखो पहले.
एसएसपी की बात सुनकर निश्छल ने टीवी ों कर दी. न्यूज़ में सरिता ने जो किया था उसकी hi खबर दिखाई जा रही थी. न्यूज़ देखने के बाद निश्छल ने एसएसपी से कहा.
निश्छल- सर उसने जो भी किया वो तो बहादुरी का काम है न. उसने तो डिपार्टमेंट का नाम ुचा किया है.
निश्छल की बात सुनकर एसएसपी को और भी ज्यादा गुस्सा आ गया और वो दहाड़े हुवे निश्छल से बोलै.
एसएसपी- दसप. एक तो तुम अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा प् रहे हो और ऊपर से मुझे नसीहत दे रहे हो. ऊपर से फ़ोन आया है मुझे. बिना प्रॉपर परमिशन की कैसे इस काम को अंजाम दिया गया. किसने परमिशन दी थी इस काम के लिए. तुम किसी काम के नहीं हो.
उसके बाद एसएसपी ने निश्छल को बहुत खरी खोटी सुनाई. यहाँ तक की उसे और सरिता को अपनी मनमानी करने के कारन फायर्ड करने की धमकी भी दे दी. जिसके कारन निश्छल को सरिता के ऊपर बहुत ज्यादा गुस्सा आ गया, क्योंकि आजतक उसके किसी काम पर किसी बड़े अधिकारी ने ऊँगली नहीं उठायी थी.
लेकिन सरिता के कारन उसे महीने भर के अंदर दूसरी बार एसएसपी से दन्त sun-ni पड़ी थी, उसके बाद तो उसे कई बड़े अधिकारीयों के फ़ोन आये और सबने निश्छल को खरी खोटी सुनाई. निश्छल को गुस्सा इस बात पर ज्यादा आ रहा था की सरिता ने उसे इस बारे में बताना जरूरी नहीं समझा. वो काम से काम उसे एसएसपी के फ़ोन आने से पहले बता देती तो वो किसी तरह एसएसपी को डील कर लेता. यही सब सोचकर निश्छल गुस्से से उठा और सरिता से मिलने के लिए चल पड़ा.
उधर सरिता को दूसरी तरफ से कोई जवाब न मिलने पर वो फ़ोन रखने hi वाली होती है की तभी निश्छल गुस्से से तमतमाया हुवा उसके केबिन में घुसता है और उसके हाँथ से फ़ोन छीनकर काट देता है और रिसीवर फ़ोन से अलग रख कर गुस्से से चिल्लाते हुवे बोलता है.
निश्छल- मैंने तुमसे कहा था न की इस केस से दूर रहना. मैं इसे अपने तरीके से हैंडल करूँगा. तो क्या जरूरत थी तुम्हे झाँसी की रानी ban-ne की. क्या आग लगी थी तुम्हारे अंदर जो सब कुछ इतनी जल्दबाज़ी में किया तुमने.
तुम्हे तो बस यही एक थाना संभालना पड़ता है, लेकिन मुझे इस जैसे 6-7 ठाणे सँभालने पड़ते हैं. मैं रोज रोज तुम्हारे पीछे hi लगा राहु क्या. तुम्हे रोज समझाता राहु की तुम्हे क्या करना है और क्या नहीं करना है. तुम्हे पता भी है तुमने जो कांड किया है एसएसपी सर कितना गुस्सा हो रहे हैं मुझपर. तुम्हे कोई बात एक बार में समझ में नहीं आती है क्या.
सरिता- (गुस्से में) क्या समझू मैं आपका. हैं बोलिये…. क्या समझू मैं. कब हैंडल करते आप इस केस को. जब ये साडी लड़किया शहर के बहार चली जाती तब हैंडल करते आप. या जब इन साडी लड़कियों को किसी कोठे पर बेच दिया जाता तब हैंडल करते आप इस केस को. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब ये लड़किया किसी हवसी के बिस्टेर की शोभा बढ़ा रही होती. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब इनकी नाक, कान, आँख, किडनी, गुर्दे निकल कर बेच दिए जाते. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब इन्हे भीख मांगने पर मजबूर कर दिया जाता. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब इन लड़कियों को ह्यूमन बम्ब बनाकर उसे किया जाता. बताइये. कब हैंडल करते आप इस केस को. अपने तरीके से हैंडल करने की बात करते हैं.
निश्छल- स्टॉप थिस मिस जोशी. तुम होश में तो हो. तुम क्या बोले जा रही हो तुम्हे कुछ पता भी है.
सरिता- हाँ मैं बिलकुल होश में हूँ, लेकिन शायद आप होश में नहीं हैं. अगर मैं आज 15 मिनट भी लेट हो जाती तो……. तो मैं सभी लकियो को खो detiii…main दादी से किया हुवा अपना वडा नहीं निभा पति. मैं बिलकुल होश में हूँ और क्या बोल रही हूँ ये भी मुझे पता है.
सरिता की बात सुनकर निश्छल उसे घूर कर देखने लगा तो सरिता ने कहा.
सरिता- ऐसे घूर घूर कर क्या देख रहे हैं आप. आपको क्या लगता है की आप दादी को अपने घर में छुपकर रखोगे और मुझे पता भी नहीं चलेगा. तो ये आपकी भूल थी. मैं उनसे मिली थी. और उन्होंने मुझे सारा सच बता दिया. वो बड़ी उम्मीद के साथ मुझसे बोल रही थी की मैं उनकी गुड़िया को उनके पास ले आऊं. इसलिए मैं उनका कहना नहीं ताल सकीय और मैंने उनसे वडा किया की मैं उनकी गुड़िया को उनके पास ले आउंगी. मैंने आज अपना वडा निभाया.
निस्चल- (गुस्से से) मैंने तुम्हे उनसे दूर रहने के लिए कहा था. उसके बाद भी तुम्हारी इतनी हिम्मत पद गयी की तुम चोरी छुपे मेरे घर में घुसकर उनसे मिली.
सरिता- मैं आप से डर्टी नहीं हूँ समझे आप और न hi मैं कोई दूध पीती छोटी बच्ची हूँ. जो आप मुझे बोलेंगे की सरिता ये करो तो मैं करने लगूंगी. सरिता वो करो तो मैं करने लगूंगी. मुझे भी आपकी तरह hi ट्रेनिंग देकर ड्यूटी के लिए भेजा गया है. जितना हक़ आपका है अपने अंडर काम करने वाले ठाणे के बारे में देखने का. उस्ता हक़ मुझे भी है अपने पस के बारे में निर्णय लेने का. इसलिए आप मुझे बच्ची समझने की भूल मत कीजिये.
निस्चल- (चिल्लाते हुवे) तुम्हे मेरी बात समझ में क्यों नहीं आती. ये तुम जो कांड करके आयी हो इसकी न्यूज़ पूरी मीडिया में फैल चुकी है और सबसे बड़ी बात ये है की तुम्हारे और तुम्हारे कुछ स्टाफ के सिवाय इस कांड के बारे में कोई नहीं जनता. वो सब तो छोडो. तुमने एक बार मुझे भी बताना जरूरी नहीं समझा.
सरिता- अच्छा. मैं इतनी पागल दिखती हूँ क्या आपको. अगर मैं आपको बताती तो क्या आप मुझे परमिशन देते क्या ऐसा करने की. जिसने मुझे दादी से मिलने के लिए मन कर दिया. वो मुझे इस काम के लिए परमिशन कभी नहीं देता. इसलिए मैंने आपको कुछ नहीं बताया.
निश्छल- (गुस्से से) तुम्हे ये सब एक मजाक लग रहा है. तुम्हे क्या लगता है की एक बच्चा सिंह को पकड़ लेने से ये पूरा केस सोल्वे हो जायेगा. तुम्हारे पास दिमाग है भी या नहीं. तुम्हे इतनी छोटी सी बात क्यों समझ में नहीं आती की बच्चा सिंह एक प्यादा है. राजा तो कही और बैठकर अपनी बिसात बिछा रहा है.
लेकिन तुन ठहरी बैल बुद्धि. तुम्हारे ऊपर तो बस बच्चा सिंह को पकड़ने का भूत सवार है. लेकिन तुम इसे जितना आसान समझ रही हो ये इतना आसान भी नहीं है. तुम्हे ये समझ में नहीं आता की कलुवा जैसे मामूली से गुंडे के लिए तुम्हारे पास फ़ोन आता है उसे छोड़ने के लिए. तो बच्चा सिंह को पकड़कर तुम उसे लॉक उप में रख पाओगी.
लेकिन तुम्हे समझने से कोई मतलब नहीं है. सुबह से तुम्हारी वजह से मेरा दिमाग एकदम ख़राब हो गया है. मुझे ऊपर से इतने फ़ोन आ रहे हैं की मैं फ़ोन उठा उठाकर परेशां हो गया हूँ. ये सब तुम्हारी वजह से हुवा है. अब तुम्ही उनके सवालो का जवाब देना.
सरिता- मैंने कोई गुनाह नहीं कर दिया है जिसकी वजह से आप मुझे इतना कुछ सुना रहे हैं. आपको और ऊपर के ऑफिसर्स को तो मेरे इस काम से खुश होना चाहिए. मुझे अप्प्रेसियते करना चाहिए. लेकिन आप तो मुझे hi दोषी ठहरा रहे हैं. आप जैसे पुलिस ऑफिसर्स की वजह से hi ये लोग ईंटे स्वछन्द और बिना किसी दर के अपने काम को अंजाम देते हैं. आप जैसे पुलिस वालो के hi कारन जनता का विश्वास पुलिस पर से उठ गया है. इसीलिए कोई मदद के लिए पुलिस के पास नहीं आता.
निश्छल- (गुस्से से चिल्लाते हुवे) स्टॉप थिस नॉनसेन्स. तुम्हे समझ में आ रहा है की तुम क्या बोल रही हो. मैं ये बात बिलकुल भी टोलेराते नहीं करूँगा.
सरिता- (गुस्से से) मैं क्यों चुप हो जॉन. मैं चुप नही होउंगी. सच सबको कड़वा लगता है लेकिन सच यही है. आपको शर्म नहीं आती. आप बेसहारा और मदद के तलबगार लोगो की हेल्प करने के बजाय इन दो टेक के गुंडों के तलवे चाट रहे हैं. इन्ही लोगो की सेवा के लिए आपने ये वर्दी पहनी है न. भले hi आपका और मेरा मनमुटाव है लेकिन मैं आपको एक अच्छा और ईमानदार पुलिस अफसर समझती थी. लेकिन मैं गलत थी. आप ने भी चाँद पैसो के लिए अपना इमां बेच दिया. ठयऊ है आप जैसे कर्रप्ट अफसर पर. लेकिन मैं बिकाऊ नहीं हूँ. मैं उस बच्चा सिंह को छोडूंगी नहीं.
निश्छल- (अपना आप खोते हुवे) बस मिस जोशी. बहुत ज्यादा बोल दिए तुमने और बहुत ज्यादा सुन लिया मैंने. अब इसके आगे एक लफ्ज़ भी मत बोलना.
सरिता- (दहाड़ते हुवे) मैं क्यों बस करू. मैं बोलूंगी. मुझे कोई नहीं रोक सकता. मैं सच बोल रही हूँ तो मिर्ची लग रही है. आज आप जैसे कर्रप्ट ऑफिसर्स की वजह से hi पुलिस डिपार्टमेंट बदनाम है. आप जैसे लोगो के कानन hi करप्शन बाहड़ता है. आप जैसे लोग या तो पैसे लेकर गुंडों को रिहा है देते हैं, या ऊपर से अपने वाले अपने आकाओं के फ़ोन पर गुंडों को छोड़ देते हैं.
आप लोग ये भी नहीं सोचते की वो गुंडा बहार निकलकर फिर से कितने लोगो को नुकसान पहुचायेगा. अगर पहले hi बच्चा सिंह जैसे गुंडों पर लगाम लगायी गयी होती और उसे सजा दिलवाई गयी होती हो आज ये नौबत hi नहीं आती. वो पुलिस के साथ चूहे बिल्ली का खेल नहीं खेलता. मुझे तो लगता है की आपके साथ साथ एसएसपी सर, डगप सर और उससे भी बड़े ऑफिसर्स सब लोग उनसे मिले हुवे हो.
सरिता की बात सुनकर निश्छल ने अपना कण्ट्रोल खो दिया और एक झन्नाटेदार थप्पड़ सरिता के गाल पर जमा दिया. वो सरिता पर हाँथ नहीं उठाना चाहता था. उसने आज तक किसी लड़की के ऊपर हाँथ नहीं उठाया था, लेकिन सरिता चुप होने का नाम hi नहीं ले रही थी और जो भी मन में आ रहा था वो बोले जा रही थी. निश्छल को सरिता को चुप करने का इससे अच्छा रास्ता कोई नजर नहीं आ रहा था. लेकिन उसे नहीं पता था की सरिता उसके थप्पड़ से चुप होने वालो में से नहीं है.
निश्छल- एनफ इस एनफ. बहुत हो गयी तुम्हारी बकवास. इसके आगे एक शब्द और मत बोलना नहीं तो तुम्हारे लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं होगा.
निश्छल ने थप्पड़ बहुत जोर का मारा था. जिसके कारन उसकी उंगलिया सरिता के गलो पर छाप गयी थी, सरिता की आँखों से आँशु निकल रहे थे. सरिता ने निश्छल से कहा.
सरिता- क्या अच्छा नहीं होगा मेरे लिए. क्या कर सकते हैं आप लोग मेरा. ज्यादा से ज्यादा मुझे ससपेंड कर देंगे और क्या. आप जैसे लोग कर hi क्या सकते हैं. कर दीजिये मुझे ससपेंड. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. काम से काम मुझे इस बात का मलाल तो नहीं रहेगा की मैंने अपनी वर्दी के साथ इंसाफ नहीं किया. आप जैसे बिकाऊ लोगो के साथ काम करने से तो अच्छा है की आप मुझे ससपेंड hi कर दीजिये. अगर मैं जॉब में रही तो मैं बच्चा सिंह को नहीं छोडूंगी चाहे कुछ भी हो जाये.
इतना कहकर सरिता अपने केबिन से बहार निकल गयी. सरिता के जाने के बाद निश्छल को ये आभास हो गए की उसे सरिता को थप्पड़ नहीं मरना चाहिए था. आखिर उसने कोई जुर्म तो नहीं किया था. उसने काम तो शाबाशी वाला hi किया था. सरिता के जाने के बाद निश्छल ने सोचा की वो सरिता से माफ़ी मांग लेगा. यही सोचकर जैसे hi वो बहार निकला. रावत सर ने उसे बुला लिया.
रावत सर- क्या था ये सब बीटा. सरिता बेटी रट हुवे पस से बहार गयी है. और तुम दोनों इतना चिल्ला चिल्ला कर क्यों बात कर रहे थे. तुम दोनों के चिल्लाने की आवाज़ बहार तक आ रही थी.
निस्चल- कुछ नहीं सर. आज जो भी कांड किया है उसने उसी के बारे में उससे पूछ रहा था. आपको इसके बारे में कुछ पता है
रावत सर- नहीं बता. मुझे तो इसके बारे में कुछ भी पता नहीं. बल्कि मैं तो खुद सरिता से पूछना छह रहा था इसके बारे में.
निश्छल- सिर्फ आपको hi नहीं. उसने मुझे भी कुछ नहीं बताया इस बारे में. पता नहीं क्यों वो समझ hi नहीं रही है की वो इस मटर को जितना आसान समझ रही है. ये उतना आसान नहीं है. लेकिन वो कोई बात sun-ne के लिए तैयार hi नहीं है. मैंने उसे इस मटर से दूर रहने के लिए कहा था, लेकिन उसने मेरी बात को इग्नोर कर दिया.
रावत सर- जाने दो बीटा. अभी वो नै नै आई है. उसे इन सब के बारे में ज्यादा पता नहीं है. उसे क्या पता की जिन लोगो से वो सीधे भिड़ने जा रही है उस लोगो से बड़े बड़े ऑफिसर्स भी सामना करने में कतराते हैं. धीरे धीरे उसके समझ में भी ये बात आ जाएगी.
निश्छल- वो इतनी भी नासमझ नहीं है जितना वो अपने आपको दिखती है. उसके दिल में कुछ और और दिमाग में कुछ और चलता है. मेरे मन करने के बाद भी वो नहीं मणि.
रावत सर- उसे उसके हॉल पर छोड़ दो बीटा. अभी जैसा चल रहा है वैसा hi चलने दो. बाद में इसके बारे में कुछ सोचते हैं.
निस्चल- वो तो ठीक है सर. लेकिन मुझे बार बार एसएसपी सर के फ़ोन आ रहे हैं. वो तो मुझसे hi सवाल कर रहे हैं न. वो पूछ रहे हैं की ये ओपरेशन किसकी परमिशन से किया गया है. अब आप hi बटिये मैं उन्हें क्या जवाब दूँ.
रावत सर- तो उनसे बोल दो न की तुम्हारे पास उतना समय नहीं था की तुम उनसे इस बाटे में डिसकस करते. इसलिए तुमने सरिता को परमिशन दे दी. या मैं आपको बताने वाला hi था, लेकिन ये अचानक से हो गया इसलिए आपको नहीं बता पाया. ऐसा कोई बहाना बना दो उनसे. वो तुम्हारी बात जरूर समझेंगे.
निश्छल- अब कुछ भी नहीं हो सकता. अगर इस लड़की ने मुझे थोड़ा बहुत भी इसके बारे में बताया होता तो मैं एसएसपी सर को संभल लेता, लेकिन मुझे तो कुछ पता hi नहीं था इसके बारे में तो एसएसपी सर के फ़ोन करने पर मैंने उन्हसे बोल दिया की मुझे कुछ पता नहीं है इस बारे में.
रावत सर- (सोचते हुवे) देखो निश्छल बीटा, अब इस तरह चिल्लाने से या लड़ने झगड़ने से कुछः नहीं होगा. अभी थोड़ा दिमाग को अपने शांत रखो और जैसे चल रहा है वैसे चलने दो. बाद में देखते हैं की क्या करना है.
निस्चल रावत सर की बात से सहमति जताकर पस से बहार निकल जाता है. उधर सरिता निश्छल से lad-jhagad कर सीधे हॉस्पिटल पहुंच गयी जहाँ पर सभी लड़कियों को भर्ती करवाया गया था. वह सीधे डॉक्टर के केबिन में पहुंच गयी और बोली.
सरिता- अब कैसी तबियत है लड़कियों की डॉक्टर.
डॉक्टर- ये सब पहले से थोड़ा ठीक है. लेकिन इतनी भी नहीं की इन्हे यहाँ से डिस्चार्ज किया जा सके. अभी इन्हे काम से काम दो दिन और रखना पड़ेगा.
सरिता- वैसे डॉक्टर. एक बात बताइये इनकी इस हालत के पीछे क्या वजह हो सकती है.
डॉक्टर- मैडम, इन्हे बेहोशी के इंजेक्शन के साथ कोई नशीला पदार्थ दिया गया था. जिसके कारन इनकी ऐसी हालत हुई है. लेकिन अब सब ठीक है. दो दिन बाद इन्हे डिस्चार्ज मिल जायेगा.
सरिता- थैंक यू डॉक्टर. क्या मैं उनसे मिल सकती हूँ.
डॉक्टर- जी जरूर मिल सकती हैं
सरिता डॉक्टर के केबिन से निकल कर वार्ड में जाती है जहा लड़कियों को एडमिट किया गया था. लड़किया अभी सो रही थी. सरिता जाकर एक कुसरी पर बैठ जाती है जो वही पर पास में लगी होती है. सरिता सभी बच्चियों को देखकर सोचने लगती हैं
सरिता- सब बछिया कितनी मासूम दिख रही हैं. इनकी उम्र भी ज्यादा से ज्यादा 15 वर्ष के भीतर hi है. इन्होने तो अभी ठीक से दुनिया भी नहीं देखि और वो कमीने इनकी दुनिया hi उजड़ने चले थे. पता नहीं ये सब कहा से पकड़कर लायी गयी हैं. पता नहीं इनके घरवाले कैसे हैं. उनके ऊपर क्या बीत रही होगी.
अगर मैं थोड़ा सा भी लेट हो जाती तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता. उस हिटलर को ये छोटी सी बात समझ में नहीं आती. उसे लगता है की मैंने गलत किया है. गलत तो तब हो जाता अगर मैंने कुछ किया न होता. अब चाहे जो हो, मेरी जॉब रहे या जाये मुझे कोई परवाह नहीं है. काम से काम मुझे जीवन भर इस बात का मलाल तो नहीं रहेगा की मैंने अपना फ़र्ज़ निभाने में आनाकानी की.
यही सब सोचते हुवे सरिता वार्ड में बैठी हुई थी. धीरे धीरे दवाई का असर ख़तम होने लगता है और लड़कियों की आँख खुलने लगती है.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
तभी फ़ोन फिर से बजता है. सरिता फ़ोन उठती है और hello बोलती है. उधर तब तक फ़ोन कट हो चूका होता है.
उधर इस घटना की खबर पूरे शहर में हो गई तह. निश्छल इस बात से अनजान अपने केबिन में बैठा कुछ जरुरी काम कर रहा था की तभी निश्छल का फ़ोन बजने लगा. निश्छल ने जब अपना फ़ोन देखा तो एसएसपी का फ़ोन था, उसने रिसीव किया और कहा.
निश्छल- जय हिन्द सर.
एसएसपी- जय हिन्द निश्छल. पहले ये बताओ की ये सब हो क्या रहा है. तुम्हारे अंदर काम करने वाली सरिता ये क्या कर रही है. आज उसने फिर कोई कांड किया है.
निश्छल- क्या बात कर रहे हैं आप. क्या कांड किया उसने. मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं हैं.
एसएसपी- (थोड़ा गुस्से से) ये तुम क्या बोल रहे हो निश्छल. वो तुम्हारे अंदर में है और तुम्हे hi ये नहीं पता की तुम्हारी वो अफसर क्या करती फिर रही है. आखिर तुम कर क्या रहे हो. तुम अपने अंदर काम करने वाले के ऊपर नियंत्रण नहीं रख प् रहे हो. अगर ऐसा है तो अपनी नौकरी छोड़ दो समझे. हमारे डिपार्टमेंट को तुम्हारे जैसे लज़ी अफसर की कोई जरूरत नहीं है.
एसएसपी की बात सुनकर निश्छल ये समझ गया था की जरूर सरिता ने कुछ ऐसा किया है जिसके कारन एसएसपी सर उसके ऊपर भड़क रहे हैं. निश्छल ने एसएसपी सर से पूछा.
निश्छल- ये आप क्या कह रहे हैं सर. आखिर सरिता ने ऐसा क्या कर दिया है जो आप मुझको नौकरी छोड़ने के लिए बोल रहे हैं.
एसएसपी- (गुस्से में) ददप, अगर तुम्हे अपने अफसर की करतूत के बारे में पता नहीं है तो तुम किस बात के दसप हो. तुम न्यूज़ देखो पहले.
एसएसपी की बात सुनकर निश्छल ने टीवी ों कर दी. न्यूज़ में सरिता ने जो किया था उसकी hi खबर दिखाई जा रही थी. न्यूज़ देखने के बाद निश्छल ने एसएसपी से कहा.
निश्छल- सर उसने जो भी किया वो तो बहादुरी का काम है न. उसने तो डिपार्टमेंट का नाम ुचा किया है.
निश्छल की बात सुनकर एसएसपी को और भी ज्यादा गुस्सा आ गया और वो दहाड़े हुवे निश्छल से बोलै.
एसएसपी- दसप. एक तो तुम अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा प् रहे हो और ऊपर से मुझे नसीहत दे रहे हो. ऊपर से फ़ोन आया है मुझे. बिना प्रॉपर परमिशन की कैसे इस काम को अंजाम दिया गया. किसने परमिशन दी थी इस काम के लिए. तुम किसी काम के नहीं हो.
उसके बाद एसएसपी ने निश्छल को बहुत खरी खोटी सुनाई. यहाँ तक की उसे और सरिता को अपनी मनमानी करने के कारन फायर्ड करने की धमकी भी दे दी. जिसके कारन निश्छल को सरिता के ऊपर बहुत ज्यादा गुस्सा आ गया, क्योंकि आजतक उसके किसी काम पर किसी बड़े अधिकारी ने ऊँगली नहीं उठायी थी.
लेकिन सरिता के कारन उसे महीने भर के अंदर दूसरी बार एसएसपी से दन्त sun-ni पड़ी थी, उसके बाद तो उसे कई बड़े अधिकारीयों के फ़ोन आये और सबने निश्छल को खरी खोटी सुनाई. निश्छल को गुस्सा इस बात पर ज्यादा आ रहा था की सरिता ने उसे इस बारे में बताना जरूरी नहीं समझा. वो काम से काम उसे एसएसपी के फ़ोन आने से पहले बता देती तो वो किसी तरह एसएसपी को डील कर लेता. यही सब सोचकर निश्छल गुस्से से उठा और सरिता से मिलने के लिए चल पड़ा.
उधर सरिता को दूसरी तरफ से कोई जवाब न मिलने पर वो फ़ोन रखने hi वाली होती है की तभी निश्छल गुस्से से तमतमाया हुवा उसके केबिन में घुसता है और उसके हाँथ से फ़ोन छीनकर काट देता है और रिसीवर फ़ोन से अलग रख कर गुस्से से चिल्लाते हुवे बोलता है.
निश्छल- मैंने तुमसे कहा था न की इस केस से दूर रहना. मैं इसे अपने तरीके से हैंडल करूँगा. तो क्या जरूरत थी तुम्हे झाँसी की रानी ban-ne की. क्या आग लगी थी तुम्हारे अंदर जो सब कुछ इतनी जल्दबाज़ी में किया तुमने.
तुम्हे तो बस यही एक थाना संभालना पड़ता है, लेकिन मुझे इस जैसे 6-7 ठाणे सँभालने पड़ते हैं. मैं रोज रोज तुम्हारे पीछे hi लगा राहु क्या. तुम्हे रोज समझाता राहु की तुम्हे क्या करना है और क्या नहीं करना है. तुम्हे पता भी है तुमने जो कांड किया है एसएसपी सर कितना गुस्सा हो रहे हैं मुझपर. तुम्हे कोई बात एक बार में समझ में नहीं आती है क्या.
सरिता- (गुस्से में) क्या समझू मैं आपका. हैं बोलिये…. क्या समझू मैं. कब हैंडल करते आप इस केस को. जब ये साडी लड़किया शहर के बहार चली जाती तब हैंडल करते आप. या जब इन साडी लड़कियों को किसी कोठे पर बेच दिया जाता तब हैंडल करते आप इस केस को. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब ये लड़किया किसी हवसी के बिस्टेर की शोभा बढ़ा रही होती. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब इनकी नाक, कान, आँख, किडनी, गुर्दे निकल कर बेच दिए जाते. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब इन्हे भीख मांगने पर मजबूर कर दिया जाता. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब इन लड़कियों को ह्यूमन बम्ब बनाकर उसे किया जाता. बताइये. कब हैंडल करते आप इस केस को. अपने तरीके से हैंडल करने की बात करते हैं.
निश्छल- स्टॉप थिस मिस जोशी. तुम होश में तो हो. तुम क्या बोले जा रही हो तुम्हे कुछ पता भी है.
सरिता- हाँ मैं बिलकुल होश में हूँ, लेकिन शायद आप होश में नहीं हैं. अगर मैं आज 15 मिनट भी लेट हो जाती तो……. तो मैं सभी लकियो को खो detiii…main दादी से किया हुवा अपना वडा नहीं निभा पति. मैं बिलकुल होश में हूँ और क्या बोल रही हूँ ये भी मुझे पता है.
सरिता की बात सुनकर निश्छल उसे घूर कर देखने लगा तो सरिता ने कहा.
सरिता- ऐसे घूर घूर कर क्या देख रहे हैं आप. आपको क्या लगता है की आप दादी को अपने घर में छुपकर रखोगे और मुझे पता भी नहीं चलेगा. तो ये आपकी भूल थी. मैं उनसे मिली थी. और उन्होंने मुझे सारा सच बता दिया. वो बड़ी उम्मीद के साथ मुझसे बोल रही थी की मैं उनकी गुड़िया को उनके पास ले आऊं. इसलिए मैं उनका कहना नहीं ताल सकीय और मैंने उनसे वडा किया की मैं उनकी गुड़िया को उनके पास ले आउंगी. मैंने आज अपना वडा निभाया.
निस्चल- (गुस्से से) मैंने तुम्हे उनसे दूर रहने के लिए कहा था. उसके बाद भी तुम्हारी इतनी हिम्मत पद गयी की तुम चोरी छुपे मेरे घर में घुसकर उनसे मिली.
सरिता- मैं आप से डर्टी नहीं हूँ समझे आप और न hi मैं कोई दूध पीती छोटी बच्ची हूँ. जो आप मुझे बोलेंगे की सरिता ये करो तो मैं करने लगूंगी. सरिता वो करो तो मैं करने लगूंगी. मुझे भी आपकी तरह hi ट्रेनिंग देकर ड्यूटी के लिए भेजा गया है. जितना हक़ आपका है अपने अंडर काम करने वाले ठाणे के बारे में देखने का. उस्ता हक़ मुझे भी है अपने पस के बारे में निर्णय लेने का. इसलिए आप मुझे बच्ची समझने की भूल मत कीजिये.
निस्चल- (चिल्लाते हुवे) तुम्हे मेरी बात समझ में क्यों नहीं आती. ये तुम जो कांड करके आयी हो इसकी न्यूज़ पूरी मीडिया में फैल चुकी है और सबसे बड़ी बात ये है की तुम्हारे और तुम्हारे कुछ स्टाफ के सिवाय इस कांड के बारे में कोई नहीं जनता. वो सब तो छोडो. तुमने एक बार मुझे भी बताना जरूरी नहीं समझा.
सरिता- अच्छा. मैं इतनी पागल दिखती हूँ क्या आपको. अगर मैं आपको बताती तो क्या आप मुझे परमिशन देते क्या ऐसा करने की. जिसने मुझे दादी से मिलने के लिए मन कर दिया. वो मुझे इस काम के लिए परमिशन कभी नहीं देता. इसलिए मैंने आपको कुछ नहीं बताया.
निश्छल- (गुस्से से) तुम्हे ये सब एक मजाक लग रहा है. तुम्हे क्या लगता है की एक बच्चा सिंह को पकड़ लेने से ये पूरा केस सोल्वे हो जायेगा. तुम्हारे पास दिमाग है भी या नहीं. तुम्हे इतनी छोटी सी बात क्यों समझ में नहीं आती की बच्चा सिंह एक प्यादा है. राजा तो कही और बैठकर अपनी बिसात बिछा रहा है.
लेकिन तुन ठहरी बैल बुद्धि. तुम्हारे ऊपर तो बस बच्चा सिंह को पकड़ने का भूत सवार है. लेकिन तुम इसे जितना आसान समझ रही हो ये इतना आसान भी नहीं है. तुम्हे ये समझ में नहीं आता की कलुवा जैसे मामूली से गुंडे के लिए तुम्हारे पास फ़ोन आता है उसे छोड़ने के लिए. तो बच्चा सिंह को पकड़कर तुम उसे लॉक उप में रख पाओगी.
लेकिन तुम्हे समझने से कोई मतलब नहीं है. सुबह से तुम्हारी वजह से मेरा दिमाग एकदम ख़राब हो गया है. मुझे ऊपर से इतने फ़ोन आ रहे हैं की मैं फ़ोन उठा उठाकर परेशां हो गया हूँ. ये सब तुम्हारी वजह से हुवा है. अब तुम्ही उनके सवालो का जवाब देना.
सरिता- मैंने कोई गुनाह नहीं कर दिया है जिसकी वजह से आप मुझे इतना कुछ सुना रहे हैं. आपको और ऊपर के ऑफिसर्स को तो मेरे इस काम से खुश होना चाहिए. मुझे अप्प्रेसियते करना चाहिए. लेकिन आप तो मुझे hi दोषी ठहरा रहे हैं. आप जैसे पुलिस ऑफिसर्स की वजह से hi ये लोग ईंटे स्वछन्द और बिना किसी दर के अपने काम को अंजाम देते हैं. आप जैसे पुलिस वालो के hi कारन जनता का विश्वास पुलिस पर से उठ गया है. इसीलिए कोई मदद के लिए पुलिस के पास नहीं आता.
निश्छल- (गुस्से से चिल्लाते हुवे) स्टॉप थिस नॉनसेन्स. तुम्हे समझ में आ रहा है की तुम क्या बोल रही हो. मैं ये बात बिलकुल भी टोलेराते नहीं करूँगा.
सरिता- (गुस्से से) मैं क्यों चुप हो जॉन. मैं चुप नही होउंगी. सच सबको कड़वा लगता है लेकिन सच यही है. आपको शर्म नहीं आती. आप बेसहारा और मदद के तलबगार लोगो की हेल्प करने के बजाय इन दो टेक के गुंडों के तलवे चाट रहे हैं. इन्ही लोगो की सेवा के लिए आपने ये वर्दी पहनी है न. भले hi आपका और मेरा मनमुटाव है लेकिन मैं आपको एक अच्छा और ईमानदार पुलिस अफसर समझती थी. लेकिन मैं गलत थी. आप ने भी चाँद पैसो के लिए अपना इमां बेच दिया. ठयऊ है आप जैसे कर्रप्ट अफसर पर. लेकिन मैं बिकाऊ नहीं हूँ. मैं उस बच्चा सिंह को छोडूंगी नहीं.
निश्छल- (अपना आप खोते हुवे) बस मिस जोशी. बहुत ज्यादा बोल दिए तुमने और बहुत ज्यादा सुन लिया मैंने. अब इसके आगे एक लफ्ज़ भी मत बोलना.
सरिता- (दहाड़ते हुवे) मैं क्यों बस करू. मैं बोलूंगी. मुझे कोई नहीं रोक सकता. मैं सच बोल रही हूँ तो मिर्ची लग रही है. आज आप जैसे कर्रप्ट ऑफिसर्स की वजह से hi पुलिस डिपार्टमेंट बदनाम है. आप जैसे लोगो के कानन hi करप्शन बाहड़ता है. आप जैसे लोग या तो पैसे लेकर गुंडों को रिहा है देते हैं, या ऊपर से अपने वाले अपने आकाओं के फ़ोन पर गुंडों को छोड़ देते हैं.
आप लोग ये भी नहीं सोचते की वो गुंडा बहार निकलकर फिर से कितने लोगो को नुकसान पहुचायेगा. अगर पहले hi बच्चा सिंह जैसे गुंडों पर लगाम लगायी गयी होती और उसे सजा दिलवाई गयी होती हो आज ये नौबत hi नहीं आती. वो पुलिस के साथ चूहे बिल्ली का खेल नहीं खेलता. मुझे तो लगता है की आपके साथ साथ एसएसपी सर, डगप सर और उससे भी बड़े ऑफिसर्स सब लोग उनसे मिले हुवे हो.
सरिता की बात सुनकर निश्छल ने अपना कण्ट्रोल खो दिया और एक झन्नाटेदार थप्पड़ सरिता के गाल पर जमा दिया. वो सरिता पर हाँथ नहीं उठाना चाहता था. उसने आज तक किसी लड़की के ऊपर हाँथ नहीं उठाया था, लेकिन सरिता चुप होने का नाम hi नहीं ले रही थी और जो भी मन में आ रहा था वो बोले जा रही थी. निश्छल को सरिता को चुप करने का इससे अच्छा रास्ता कोई नजर नहीं आ रहा था. लेकिन उसे नहीं पता था की सरिता उसके थप्पड़ से चुप होने वालो में से नहीं है.
निश्छल- एनफ इस एनफ. बहुत हो गयी तुम्हारी बकवास. इसके आगे एक शब्द और मत बोलना नहीं तो तुम्हारे लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं होगा.
निश्छल ने थप्पड़ बहुत जोर का मारा था. जिसके कारन उसकी उंगलिया सरिता के गलो पर छाप गयी थी, सरिता की आँखों से आँशु निकल रहे थे. सरिता ने निश्छल से कहा.
सरिता- क्या अच्छा नहीं होगा मेरे लिए. क्या कर सकते हैं आप लोग मेरा. ज्यादा से ज्यादा मुझे ससपेंड कर देंगे और क्या. आप जैसे लोग कर hi क्या सकते हैं. कर दीजिये मुझे ससपेंड. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. काम से काम मुझे इस बात का मलाल तो नहीं रहेगा की मैंने अपनी वर्दी के साथ इंसाफ नहीं किया. आप जैसे बिकाऊ लोगो के साथ काम करने से तो अच्छा है की आप मुझे ससपेंड hi कर दीजिये. अगर मैं जॉब में रही तो मैं बच्चा सिंह को नहीं छोडूंगी चाहे कुछ भी हो जाये.
इतना कहकर सरिता अपने केबिन से बहार निकल गयी. सरिता के जाने के बाद निश्छल को ये आभास हो गए की उसे सरिता को थप्पड़ नहीं मरना चाहिए था. आखिर उसने कोई जुर्म तो नहीं किया था. उसने काम तो शाबाशी वाला hi किया था. सरिता के जाने के बाद निश्छल ने सोचा की वो सरिता से माफ़ी मांग लेगा. यही सोचकर जैसे hi वो बहार निकला. रावत सर ने उसे बुला लिया.
रावत सर- क्या था ये सब बीटा. सरिता बेटी रट हुवे पस से बहार गयी है. और तुम दोनों इतना चिल्ला चिल्ला कर क्यों बात कर रहे थे. तुम दोनों के चिल्लाने की आवाज़ बहार तक आ रही थी.
निस्चल- कुछ नहीं सर. आज जो भी कांड किया है उसने उसी के बारे में उससे पूछ रहा था. आपको इसके बारे में कुछ पता है
रावत सर- नहीं बता. मुझे तो इसके बारे में कुछ भी पता नहीं. बल्कि मैं तो खुद सरिता से पूछना छह रहा था इसके बारे में.
निश्छल- सिर्फ आपको hi नहीं. उसने मुझे भी कुछ नहीं बताया इस बारे में. पता नहीं क्यों वो समझ hi नहीं रही है की वो इस मटर को जितना आसान समझ रही है. ये उतना आसान नहीं है. लेकिन वो कोई बात sun-ne के लिए तैयार hi नहीं है. मैंने उसे इस मटर से दूर रहने के लिए कहा था, लेकिन उसने मेरी बात को इग्नोर कर दिया.
रावत सर- जाने दो बीटा. अभी वो नै नै आई है. उसे इन सब के बारे में ज्यादा पता नहीं है. उसे क्या पता की जिन लोगो से वो सीधे भिड़ने जा रही है उस लोगो से बड़े बड़े ऑफिसर्स भी सामना करने में कतराते हैं. धीरे धीरे उसके समझ में भी ये बात आ जाएगी.
निश्छल- वो इतनी भी नासमझ नहीं है जितना वो अपने आपको दिखती है. उसके दिल में कुछ और और दिमाग में कुछ और चलता है. मेरे मन करने के बाद भी वो नहीं मणि.
रावत सर- उसे उसके हॉल पर छोड़ दो बीटा. अभी जैसा चल रहा है वैसा hi चलने दो. बाद में इसके बारे में कुछ सोचते हैं.
निस्चल- वो तो ठीक है सर. लेकिन मुझे बार बार एसएसपी सर के फ़ोन आ रहे हैं. वो तो मुझसे hi सवाल कर रहे हैं न. वो पूछ रहे हैं की ये ओपरेशन किसकी परमिशन से किया गया है. अब आप hi बटिये मैं उन्हें क्या जवाब दूँ.
रावत सर- तो उनसे बोल दो न की तुम्हारे पास उतना समय नहीं था की तुम उनसे इस बाटे में डिसकस करते. इसलिए तुमने सरिता को परमिशन दे दी. या मैं आपको बताने वाला hi था, लेकिन ये अचानक से हो गया इसलिए आपको नहीं बता पाया. ऐसा कोई बहाना बना दो उनसे. वो तुम्हारी बात जरूर समझेंगे.
निश्छल- अब कुछ भी नहीं हो सकता. अगर इस लड़की ने मुझे थोड़ा बहुत भी इसके बारे में बताया होता तो मैं एसएसपी सर को संभल लेता, लेकिन मुझे तो कुछ पता hi नहीं था इसके बारे में तो एसएसपी सर के फ़ोन करने पर मैंने उन्हसे बोल दिया की मुझे कुछ पता नहीं है इस बारे में.
रावत सर- (सोचते हुवे) देखो निश्छल बीटा, अब इस तरह चिल्लाने से या लड़ने झगड़ने से कुछः नहीं होगा. अभी थोड़ा दिमाग को अपने शांत रखो और जैसे चल रहा है वैसे चलने दो. बाद में देखते हैं की क्या करना है.
निस्चल रावत सर की बात से सहमति जताकर पस से बहार निकल जाता है. उधर सरिता निश्छल से lad-jhagad कर सीधे हॉस्पिटल पहुंच गयी जहाँ पर सभी लड़कियों को भर्ती करवाया गया था. वह सीधे डॉक्टर के केबिन में पहुंच गयी और बोली.
सरिता- अब कैसी तबियत है लड़कियों की डॉक्टर.
डॉक्टर- ये सब पहले से थोड़ा ठीक है. लेकिन इतनी भी नहीं की इन्हे यहाँ से डिस्चार्ज किया जा सके. अभी इन्हे काम से काम दो दिन और रखना पड़ेगा.
सरिता- वैसे डॉक्टर. एक बात बताइये इनकी इस हालत के पीछे क्या वजह हो सकती है.
डॉक्टर- मैडम, इन्हे बेहोशी के इंजेक्शन के साथ कोई नशीला पदार्थ दिया गया था. जिसके कारन इनकी ऐसी हालत हुई है. लेकिन अब सब ठीक है. दो दिन बाद इन्हे डिस्चार्ज मिल जायेगा.
सरिता- थैंक यू डॉक्टर. क्या मैं उनसे मिल सकती हूँ.
डॉक्टर- जी जरूर मिल सकती हैं
सरिता डॉक्टर के केबिन से निकल कर वार्ड में जाती है जहा लड़कियों को एडमिट किया गया था. लड़किया अभी सो रही थी. सरिता जाकर एक कुसरी पर बैठ जाती है जो वही पर पास में लगी होती है. सरिता सभी बच्चियों को देखकर सोचने लगती हैं
सरिता- सब बछिया कितनी मासूम दिख रही हैं. इनकी उम्र भी ज्यादा से ज्यादा 15 वर्ष के भीतर hi है. इन्होने तो अभी ठीक से दुनिया भी नहीं देखि और वो कमीने इनकी दुनिया hi उजड़ने चले थे. पता नहीं ये सब कहा से पकड़कर लायी गयी हैं. पता नहीं इनके घरवाले कैसे हैं. उनके ऊपर क्या बीत रही होगी.
अगर मैं थोड़ा सा भी लेट हो जाती तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता. उस हिटलर को ये छोटी सी बात समझ में नहीं आती. उसे लगता है की मैंने गलत किया है. गलत तो तब हो जाता अगर मैंने कुछ किया न होता. अब चाहे जो हो, मेरी जॉब रहे या जाये मुझे कोई परवाह नहीं है. काम से काम मुझे जीवन भर इस बात का मलाल तो नहीं रहेगा की मैंने अपना फ़र्ज़ निभाने में आनाकानी की.
यही सब सोचते हुवे सरिता वार्ड में बैठी हुई थी. धीरे धीरे दवाई का असर ख़तम होने लगता है और लड़कियों की आँख खुलने लगती है.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..