Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani - Page 8 - SexBaba
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Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani

अपडेट- 26

तभी फ़ोन फिर से बजता है. सरिता फ़ोन उठती है और hello बोलती है. उधर तब तक फ़ोन कट हो चूका होता है.

उधर इस घटना की खबर पूरे शहर में हो गई तह. निश्छल इस बात से अनजान अपने केबिन में बैठा कुछ जरुरी काम कर रहा था की तभी निश्छल का फ़ोन बजने लगा. निश्छल ने जब अपना फ़ोन देखा तो एसएसपी का फ़ोन था, उसने रिसीव किया और कहा.

निश्छल- जय हिन्द सर.

एसएसपी- जय हिन्द निश्छल. पहले ये बताओ की ये सब हो क्या रहा है. तुम्हारे अंदर काम करने वाली सरिता ये क्या कर रही है. आज उसने फिर कोई कांड किया है.

निश्छल- क्या बात कर रहे हैं आप. क्या कांड किया उसने. मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं हैं.

एसएसपी- (थोड़ा गुस्से से) ये तुम क्या बोल रहे हो निश्छल. वो तुम्हारे अंदर में है और तुम्हे hi ये नहीं पता की तुम्हारी वो अफसर क्या करती फिर रही है. आखिर तुम कर क्या रहे हो. तुम अपने अंदर काम करने वाले के ऊपर नियंत्रण नहीं रख प् रहे हो. अगर ऐसा है तो अपनी नौकरी छोड़ दो समझे. हमारे डिपार्टमेंट को तुम्हारे जैसे लज़ी अफसर की कोई जरूरत नहीं है.

एसएसपी की बात सुनकर निश्छल ये समझ गया था की जरूर सरिता ने कुछ ऐसा किया है जिसके कारन एसएसपी सर उसके ऊपर भड़क रहे हैं. निश्छल ने एसएसपी सर से पूछा.

निश्छल- ये आप क्या कह रहे हैं सर. आखिर सरिता ने ऐसा क्या कर दिया है जो आप मुझको नौकरी छोड़ने के लिए बोल रहे हैं.

एसएसपी- (गुस्से में) ददप, अगर तुम्हे अपने अफसर की करतूत के बारे में पता नहीं है तो तुम किस बात के दसप हो. तुम न्यूज़ देखो पहले.

एसएसपी की बात सुनकर निश्छल ने टीवी ों कर दी. न्यूज़ में सरिता ने जो किया था उसकी hi खबर दिखाई जा रही थी. न्यूज़ देखने के बाद निश्छल ने एसएसपी से कहा.

निश्छल- सर उसने जो भी किया वो तो बहादुरी का काम है न. उसने तो डिपार्टमेंट का नाम ुचा किया है.

निश्छल की बात सुनकर एसएसपी को और भी ज्यादा गुस्सा आ गया और वो दहाड़े हुवे निश्छल से बोलै.

एसएसपी- दसप. एक तो तुम अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा प् रहे हो और ऊपर से मुझे नसीहत दे रहे हो. ऊपर से फ़ोन आया है मुझे. बिना प्रॉपर परमिशन की कैसे इस काम को अंजाम दिया गया. किसने परमिशन दी थी इस काम के लिए. तुम किसी काम के नहीं हो.

उसके बाद एसएसपी ने निश्छल को बहुत खरी खोटी सुनाई. यहाँ तक की उसे और सरिता को अपनी मनमानी करने के कारन फायर्ड करने की धमकी भी दे दी. जिसके कारन निश्छल को सरिता के ऊपर बहुत ज्यादा गुस्सा आ गया, क्योंकि आजतक उसके किसी काम पर किसी बड़े अधिकारी ने ऊँगली नहीं उठायी थी.

लेकिन सरिता के कारन उसे महीने भर के अंदर दूसरी बार एसएसपी से दन्त sun-ni पड़ी थी, उसके बाद तो उसे कई बड़े अधिकारीयों के फ़ोन आये और सबने निश्छल को खरी खोटी सुनाई. निश्छल को गुस्सा इस बात पर ज्यादा आ रहा था की सरिता ने उसे इस बारे में बताना जरूरी नहीं समझा. वो काम से काम उसे एसएसपी के फ़ोन आने से पहले बता देती तो वो किसी तरह एसएसपी को डील कर लेता. यही सब सोचकर निश्छल गुस्से से उठा और सरिता से मिलने के लिए चल पड़ा.

उधर सरिता को दूसरी तरफ से कोई जवाब न मिलने पर वो फ़ोन रखने hi वाली होती है की तभी निश्छल गुस्से से तमतमाया हुवा उसके केबिन में घुसता है और उसके हाँथ से फ़ोन छीनकर काट देता है और रिसीवर फ़ोन से अलग रख कर गुस्से से चिल्लाते हुवे बोलता है.

निश्छल- मैंने तुमसे कहा था न की इस केस से दूर रहना. मैं इसे अपने तरीके से हैंडल करूँगा. तो क्या जरूरत थी तुम्हे झाँसी की रानी ban-ne की. क्या आग लगी थी तुम्हारे अंदर जो सब कुछ इतनी जल्दबाज़ी में किया तुमने.

तुम्हे तो बस यही एक थाना संभालना पड़ता है, लेकिन मुझे इस जैसे 6-7 ठाणे सँभालने पड़ते हैं. मैं रोज रोज तुम्हारे पीछे hi लगा राहु क्या. तुम्हे रोज समझाता राहु की तुम्हे क्या करना है और क्या नहीं करना है. तुम्हे पता भी है तुमने जो कांड किया है एसएसपी सर कितना गुस्सा हो रहे हैं मुझपर. तुम्हे कोई बात एक बार में समझ में नहीं आती है क्या.

सरिता- (गुस्से में) क्या समझू मैं आपका. हैं बोलिये…. क्या समझू मैं. कब हैंडल करते आप इस केस को. जब ये साडी लड़किया शहर के बहार चली जाती तब हैंडल करते आप. या जब इन साडी लड़कियों को किसी कोठे पर बेच दिया जाता तब हैंडल करते आप इस केस को. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब ये लड़किया किसी हवसी के बिस्टेर की शोभा बढ़ा रही होती. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब इनकी नाक, कान, आँख, किडनी, गुर्दे निकल कर बेच दिए जाते. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब इन्हे भीख मांगने पर मजबूर कर दिया जाता. या तब हैंडल करते आप इस केस को जब इन लड़कियों को ह्यूमन बम्ब बनाकर उसे किया जाता. बताइये. कब हैंडल करते आप इस केस को. अपने तरीके से हैंडल करने की बात करते हैं.

निश्छल- स्टॉप थिस मिस जोशी. तुम होश में तो हो. तुम क्या बोले जा रही हो तुम्हे कुछ पता भी है.

सरिता- हाँ मैं बिलकुल होश में हूँ, लेकिन शायद आप होश में नहीं हैं. अगर मैं आज 15 मिनट भी लेट हो जाती तो……. तो मैं सभी लकियो को खो detiii…main दादी से किया हुवा अपना वडा नहीं निभा पति. मैं बिलकुल होश में हूँ और क्या बोल रही हूँ ये भी मुझे पता है.

सरिता की बात सुनकर निश्छल उसे घूर कर देखने लगा तो सरिता ने कहा.

सरिता- ऐसे घूर घूर कर क्या देख रहे हैं आप. आपको क्या लगता है की आप दादी को अपने घर में छुपकर रखोगे और मुझे पता भी नहीं चलेगा. तो ये आपकी भूल थी. मैं उनसे मिली थी. और उन्होंने मुझे सारा सच बता दिया. वो बड़ी उम्मीद के साथ मुझसे बोल रही थी की मैं उनकी गुड़िया को उनके पास ले आऊं. इसलिए मैं उनका कहना नहीं ताल सकीय और मैंने उनसे वडा किया की मैं उनकी गुड़िया को उनके पास ले आउंगी. मैंने आज अपना वडा निभाया.

निस्चल- (गुस्से से) मैंने तुम्हे उनसे दूर रहने के लिए कहा था. उसके बाद भी तुम्हारी इतनी हिम्मत पद गयी की तुम चोरी छुपे मेरे घर में घुसकर उनसे मिली.

सरिता- मैं आप से डर्टी नहीं हूँ समझे आप और न hi मैं कोई दूध पीती छोटी बच्ची हूँ. जो आप मुझे बोलेंगे की सरिता ये करो तो मैं करने लगूंगी. सरिता वो करो तो मैं करने लगूंगी. मुझे भी आपकी तरह hi ट्रेनिंग देकर ड्यूटी के लिए भेजा गया है. जितना हक़ आपका है अपने अंडर काम करने वाले ठाणे के बारे में देखने का. उस्ता हक़ मुझे भी है अपने पस के बारे में निर्णय लेने का. इसलिए आप मुझे बच्ची समझने की भूल मत कीजिये.

निस्चल- (चिल्लाते हुवे) तुम्हे मेरी बात समझ में क्यों नहीं आती. ये तुम जो कांड करके आयी हो इसकी न्यूज़ पूरी मीडिया में फैल चुकी है और सबसे बड़ी बात ये है की तुम्हारे और तुम्हारे कुछ स्टाफ के सिवाय इस कांड के बारे में कोई नहीं जनता. वो सब तो छोडो. तुमने एक बार मुझे भी बताना जरूरी नहीं समझा.

सरिता- अच्छा. मैं इतनी पागल दिखती हूँ क्या आपको. अगर मैं आपको बताती तो क्या आप मुझे परमिशन देते क्या ऐसा करने की. जिसने मुझे दादी से मिलने के लिए मन कर दिया. वो मुझे इस काम के लिए परमिशन कभी नहीं देता. इसलिए मैंने आपको कुछ नहीं बताया.

निश्छल- (गुस्से से) तुम्हे ये सब एक मजाक लग रहा है. तुम्हे क्या लगता है की एक बच्चा सिंह को पकड़ लेने से ये पूरा केस सोल्वे हो जायेगा. तुम्हारे पास दिमाग है भी या नहीं. तुम्हे इतनी छोटी सी बात क्यों समझ में नहीं आती की बच्चा सिंह एक प्यादा है. राजा तो कही और बैठकर अपनी बिसात बिछा रहा है.

लेकिन तुन ठहरी बैल बुद्धि. तुम्हारे ऊपर तो बस बच्चा सिंह को पकड़ने का भूत सवार है. लेकिन तुम इसे जितना आसान समझ रही हो ये इतना आसान भी नहीं है. तुम्हे ये समझ में नहीं आता की कलुवा जैसे मामूली से गुंडे के लिए तुम्हारे पास फ़ोन आता है उसे छोड़ने के लिए. तो बच्चा सिंह को पकड़कर तुम उसे लॉक उप में रख पाओगी.

लेकिन तुम्हे समझने से कोई मतलब नहीं है. सुबह से तुम्हारी वजह से मेरा दिमाग एकदम ख़राब हो गया है. मुझे ऊपर से इतने फ़ोन आ रहे हैं की मैं फ़ोन उठा उठाकर परेशां हो गया हूँ. ये सब तुम्हारी वजह से हुवा है. अब तुम्ही उनके सवालो का जवाब देना.

सरिता- मैंने कोई गुनाह नहीं कर दिया है जिसकी वजह से आप मुझे इतना कुछ सुना रहे हैं. आपको और ऊपर के ऑफिसर्स को तो मेरे इस काम से खुश होना चाहिए. मुझे अप्प्रेसियते करना चाहिए. लेकिन आप तो मुझे hi दोषी ठहरा रहे हैं. आप जैसे पुलिस ऑफिसर्स की वजह से hi ये लोग ईंटे स्वछन्द और बिना किसी दर के अपने काम को अंजाम देते हैं. आप जैसे पुलिस वालो के hi कारन जनता का विश्वास पुलिस पर से उठ गया है. इसीलिए कोई मदद के लिए पुलिस के पास नहीं आता.

निश्छल- (गुस्से से चिल्लाते हुवे) स्टॉप थिस नॉनसेन्स. तुम्हे समझ में आ रहा है की तुम क्या बोल रही हो. मैं ये बात बिलकुल भी टोलेराते नहीं करूँगा.

सरिता- (गुस्से से) मैं क्यों चुप हो जॉन. मैं चुप नही होउंगी. सच सबको कड़वा लगता है लेकिन सच यही है. आपको शर्म नहीं आती. आप बेसहारा और मदद के तलबगार लोगो की हेल्प करने के बजाय इन दो टेक के गुंडों के तलवे चाट रहे हैं. इन्ही लोगो की सेवा के लिए आपने ये वर्दी पहनी है न. भले hi आपका और मेरा मनमुटाव है लेकिन मैं आपको एक अच्छा और ईमानदार पुलिस अफसर समझती थी. लेकिन मैं गलत थी. आप ने भी चाँद पैसो के लिए अपना इमां बेच दिया. ठयऊ है आप जैसे कर्रप्ट अफसर पर. लेकिन मैं बिकाऊ नहीं हूँ. मैं उस बच्चा सिंह को छोडूंगी नहीं.

निश्छल- (अपना आप खोते हुवे) बस मिस जोशी. बहुत ज्यादा बोल दिए तुमने और बहुत ज्यादा सुन लिया मैंने. अब इसके आगे एक लफ्ज़ भी मत बोलना.

सरिता- (दहाड़ते हुवे) मैं क्यों बस करू. मैं बोलूंगी. मुझे कोई नहीं रोक सकता. मैं सच बोल रही हूँ तो मिर्ची लग रही है. आज आप जैसे कर्रप्ट ऑफिसर्स की वजह से hi पुलिस डिपार्टमेंट बदनाम है. आप जैसे लोगो के कानन hi करप्शन बाहड़ता है. आप जैसे लोग या तो पैसे लेकर गुंडों को रिहा है देते हैं, या ऊपर से अपने वाले अपने आकाओं के फ़ोन पर गुंडों को छोड़ देते हैं.

आप लोग ये भी नहीं सोचते की वो गुंडा बहार निकलकर फिर से कितने लोगो को नुकसान पहुचायेगा. अगर पहले hi बच्चा सिंह जैसे गुंडों पर लगाम लगायी गयी होती और उसे सजा दिलवाई गयी होती हो आज ये नौबत hi नहीं आती. वो पुलिस के साथ चूहे बिल्ली का खेल नहीं खेलता. मुझे तो लगता है की आपके साथ साथ एसएसपी सर, डगप सर और उससे भी बड़े ऑफिसर्स सब लोग उनसे मिले हुवे हो.

सरिता की बात सुनकर निश्छल ने अपना कण्ट्रोल खो दिया और एक झन्नाटेदार थप्पड़ सरिता के गाल पर जमा दिया. वो सरिता पर हाँथ नहीं उठाना चाहता था. उसने आज तक किसी लड़की के ऊपर हाँथ नहीं उठाया था, लेकिन सरिता चुप होने का नाम hi नहीं ले रही थी और जो भी मन में आ रहा था वो बोले जा रही थी. निश्छल को सरिता को चुप करने का इससे अच्छा रास्ता कोई नजर नहीं आ रहा था. लेकिन उसे नहीं पता था की सरिता उसके थप्पड़ से चुप होने वालो में से नहीं है.

निश्छल- एनफ इस एनफ. बहुत हो गयी तुम्हारी बकवास. इसके आगे एक शब्द और मत बोलना नहीं तो तुम्हारे लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं होगा.

निश्छल ने थप्पड़ बहुत जोर का मारा था. जिसके कारन उसकी उंगलिया सरिता के गलो पर छाप गयी थी, सरिता की आँखों से आँशु निकल रहे थे. सरिता ने निश्छल से कहा.

सरिता- क्या अच्छा नहीं होगा मेरे लिए. क्या कर सकते हैं आप लोग मेरा. ज्यादा से ज्यादा मुझे ससपेंड कर देंगे और क्या. आप जैसे लोग कर hi क्या सकते हैं. कर दीजिये मुझे ससपेंड. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. काम से काम मुझे इस बात का मलाल तो नहीं रहेगा की मैंने अपनी वर्दी के साथ इंसाफ नहीं किया. आप जैसे बिकाऊ लोगो के साथ काम करने से तो अच्छा है की आप मुझे ससपेंड hi कर दीजिये. अगर मैं जॉब में रही तो मैं बच्चा सिंह को नहीं छोडूंगी चाहे कुछ भी हो जाये.

इतना कहकर सरिता अपने केबिन से बहार निकल गयी. सरिता के जाने के बाद निश्छल को ये आभास हो गए की उसे सरिता को थप्पड़ नहीं मरना चाहिए था. आखिर उसने कोई जुर्म तो नहीं किया था. उसने काम तो शाबाशी वाला hi किया था. सरिता के जाने के बाद निश्छल ने सोचा की वो सरिता से माफ़ी मांग लेगा. यही सोचकर जैसे hi वो बहार निकला. रावत सर ने उसे बुला लिया.

रावत सर- क्या था ये सब बीटा. सरिता बेटी रट हुवे पस से बहार गयी है. और तुम दोनों इतना चिल्ला चिल्ला कर क्यों बात कर रहे थे. तुम दोनों के चिल्लाने की आवाज़ बहार तक आ रही थी.

निस्चल- कुछ नहीं सर. आज जो भी कांड किया है उसने उसी के बारे में उससे पूछ रहा था. आपको इसके बारे में कुछ पता है

रावत सर- नहीं बता. मुझे तो इसके बारे में कुछ भी पता नहीं. बल्कि मैं तो खुद सरिता से पूछना छह रहा था इसके बारे में.

निश्छल- सिर्फ आपको hi नहीं. उसने मुझे भी कुछ नहीं बताया इस बारे में. पता नहीं क्यों वो समझ hi नहीं रही है की वो इस मटर को जितना आसान समझ रही है. ये उतना आसान नहीं है. लेकिन वो कोई बात sun-ne के लिए तैयार hi नहीं है. मैंने उसे इस मटर से दूर रहने के लिए कहा था, लेकिन उसने मेरी बात को इग्नोर कर दिया.

रावत सर- जाने दो बीटा. अभी वो नै नै आई है. उसे इन सब के बारे में ज्यादा पता नहीं है. उसे क्या पता की जिन लोगो से वो सीधे भिड़ने जा रही है उस लोगो से बड़े बड़े ऑफिसर्स भी सामना करने में कतराते हैं. धीरे धीरे उसके समझ में भी ये बात आ जाएगी.

निश्छल- वो इतनी भी नासमझ नहीं है जितना वो अपने आपको दिखती है. उसके दिल में कुछ और और दिमाग में कुछ और चलता है. मेरे मन करने के बाद भी वो नहीं मणि.

रावत सर- उसे उसके हॉल पर छोड़ दो बीटा. अभी जैसा चल रहा है वैसा hi चलने दो. बाद में इसके बारे में कुछ सोचते हैं.

निस्चल- वो तो ठीक है सर. लेकिन मुझे बार बार एसएसपी सर के फ़ोन आ रहे हैं. वो तो मुझसे hi सवाल कर रहे हैं न. वो पूछ रहे हैं की ये ओपरेशन किसकी परमिशन से किया गया है. अब आप hi बटिये मैं उन्हें क्या जवाब दूँ.

रावत सर- तो उनसे बोल दो न की तुम्हारे पास उतना समय नहीं था की तुम उनसे इस बाटे में डिसकस करते. इसलिए तुमने सरिता को परमिशन दे दी. या मैं आपको बताने वाला hi था, लेकिन ये अचानक से हो गया इसलिए आपको नहीं बता पाया. ऐसा कोई बहाना बना दो उनसे. वो तुम्हारी बात जरूर समझेंगे.

निश्छल- अब कुछ भी नहीं हो सकता. अगर इस लड़की ने मुझे थोड़ा बहुत भी इसके बारे में बताया होता तो मैं एसएसपी सर को संभल लेता, लेकिन मुझे तो कुछ पता hi नहीं था इसके बारे में तो एसएसपी सर के फ़ोन करने पर मैंने उन्हसे बोल दिया की मुझे कुछ पता नहीं है इस बारे में.

रावत सर- (सोचते हुवे) देखो निश्छल बीटा, अब इस तरह चिल्लाने से या लड़ने झगड़ने से कुछः नहीं होगा. अभी थोड़ा दिमाग को अपने शांत रखो और जैसे चल रहा है वैसे चलने दो. बाद में देखते हैं की क्या करना है.

निस्चल रावत सर की बात से सहमति जताकर पस से बहार निकल जाता है. उधर सरिता निश्छल से lad-jhagad कर सीधे हॉस्पिटल पहुंच गयी जहाँ पर सभी लड़कियों को भर्ती करवाया गया था. वह सीधे डॉक्टर के केबिन में पहुंच गयी और बोली.

सरिता- अब कैसी तबियत है लड़कियों की डॉक्टर.

डॉक्टर- ये सब पहले से थोड़ा ठीक है. लेकिन इतनी भी नहीं की इन्हे यहाँ से डिस्चार्ज किया जा सके. अभी इन्हे काम से काम दो दिन और रखना पड़ेगा.

सरिता- वैसे डॉक्टर. एक बात बताइये इनकी इस हालत के पीछे क्या वजह हो सकती है.

डॉक्टर- मैडम, इन्हे बेहोशी के इंजेक्शन के साथ कोई नशीला पदार्थ दिया गया था. जिसके कारन इनकी ऐसी हालत हुई है. लेकिन अब सब ठीक है. दो दिन बाद इन्हे डिस्चार्ज मिल जायेगा.

सरिता- थैंक यू डॉक्टर. क्या मैं उनसे मिल सकती हूँ.

डॉक्टर- जी जरूर मिल सकती हैं

सरिता डॉक्टर के केबिन से निकल कर वार्ड में जाती है जहा लड़कियों को एडमिट किया गया था. लड़किया अभी सो रही थी. सरिता जाकर एक कुसरी पर बैठ जाती है जो वही पर पास में लगी होती है. सरिता सभी बच्चियों को देखकर सोचने लगती हैं

सरिता- सब बछिया कितनी मासूम दिख रही हैं. इनकी उम्र भी ज्यादा से ज्यादा 15 वर्ष के भीतर hi है. इन्होने तो अभी ठीक से दुनिया भी नहीं देखि और वो कमीने इनकी दुनिया hi उजड़ने चले थे. पता नहीं ये सब कहा से पकड़कर लायी गयी हैं. पता नहीं इनके घरवाले कैसे हैं. उनके ऊपर क्या बीत रही होगी.

अगर मैं थोड़ा सा भी लेट हो जाती तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता. उस हिटलर को ये छोटी सी बात समझ में नहीं आती. उसे लगता है की मैंने गलत किया है. गलत तो तब हो जाता अगर मैंने कुछ किया न होता. अब चाहे जो हो, मेरी जॉब रहे या जाये मुझे कोई परवाह नहीं है. काम से काम मुझे जीवन भर इस बात का मलाल तो नहीं रहेगा की मैंने अपना फ़र्ज़ निभाने में आनाकानी की.

यही सब सोचते हुवे सरिता वार्ड में बैठी हुई थी. धीरे धीरे दवाई का असर ख़तम होने लगता है और लड़कियों की आँख खुलने लगती है.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
कोई बात नहीं महोदय, व्यक्तिगत जिंदगी ज्यादा मायने रखती है।।

इस समाज मे हर तरह के लोग रहते हैं कोई सबकी मदद करना चाहता है तो कोई सबको हानि पहुंचाना चाहता है।। ये बात सच है कि महिलाएं ही महिलाओं की सबसे बड़ी दुश्मन होती हैं। वो कभी भी एक महिला की कामयाबी को सपोर्ट नहीं करेंगी बल्कि उसमे तरह तरह की कमियां निकालेंगी। घर में जो पारिवारिक कलह होती है उसकी मुख्य जिम्मेदार महिला ही होती है। संयुक्त परिवार टूटने के पीछे 95 फीसदी महिलाएं ही हैं, लेकिन उनको ये समझ मे नहीं आता।।

ये सही बात है कि सरिता का बर्ताव उसके स्वभाव के विपरीत ही है। क्योंकि पुलिस में आने के बाद उसका बर्ताव बिल्कुल बदल गया है वो तो अभिषेक से भी ज्यादा खतरनाक होती जा रही है। वो अपन3 आगे किसी की नहीं सुनती है।। कुछ भी करने से पहले उसे निश्चल को तो कम से कम बता तो देना चाहिए था।

निश्चल बहुत ही सीधा सदा लड़का है। वो सबसे दोस्ताना व्यवहार रखने पर विश्वास करता है इसलिए उसका व्यवहार सरिता के प्रति भी नरम ही है। लेकिन सरिता उसका नाजायज फायदा उठा रही है। अगले भाग में निश्चल ने सख्ती बरतने की कोशिश की लेकिन वो फिर भी नहीं मान रही है।।

बुढ़िया की नातिन को बच्चा सिंह ने अगवा कर लिया इसीलिए उठाने सरिता को फंसाने की कोशिश की। बाकी बच्चा सिंह तो बच्चा सिंह ही है। कहानी भी फिल्मी ही है क्योंकि बच्चा सिंह के ऊपर भी उसके दो बाप बैठे हुए हैं।

रघु ही अभिषेक है या नहीं वो आने वाले भागों में पता चल जाएगा।।

सविता सच्ची और अच्छी है तभी तो उसका पेशा भी अच्छाई वाला है। अब रात के समय वो किससे बात कर रही थी वो तो आगे पता चलेगा।

सरिता का दिमाग खराब हो गया है ये कहा जाए तो गलत नहीं होगा। वो जितने भी काम कर रही है वो सभी एक ईमानदार अधिकारी को करना ही चाहिए, लेकिन सरिता का वो काम करने का तरीका बिल्कुल ही गलत है। क्योंकि अपने बड़े अधिकारियों का सम्मान करना भी उसका फ़र्ज़ है।।

अभी बहुत कुछ होने वाला है सरिता के साथ जो उसकी उम्मीद से परे है, जिसके बारे मर सरिता ने सपने में भी नहीं सोचा होगा।।

बहुत बहुत धन्यवाद इस खूबसूरत समीक्षा के लिए।

साथ बने रहिए।।
 
धन्यवाद आपका महोदय।।

वो तो बन गई है तभी तो उसे निश्छल लेडी डॉन कहता है।😂😁

हर इंसान के अंदर ये बदलाव आता है जब भ्रष्ट और बेईमान लोगों के बीच काम ईमानदारी से करना हो तो अपने स्वभाव में बदलाव लाना बहुत जरूरी है नहीं तो आप कभी भी ईमानदारी से काम नहीं कर पाएंगे।।

अभी वो पुलिस में नई नई है इसलिए उसके अंदर जोश भी है। वो समझती है कि वो जो कर रही है सही कर रही है, इसमें कोई शक नहीं है कि वो अपने कर्तव्य क्व पफटी ईमानदार है लेकिन कहीं न कहीं वो गलती ये कर रही है कि वो अपने बड़े अधिकारियों को कुछ भी नहीं बता रही है कम से कम उसे निश्चल को तो बताना ही चाहिए।।

मामला सच मे बहुत ज्यादा गंभीर हो चुका है। क्योंकि बच्चा सिंह अब सरिता की जान के पीछे पड़ चुका है और बहुत जल्द सरिता को इसका सामना करना है ऊपर से वो निहचल से भी उलझ रही है। इसलिए उसके ऊपर दोनों तरफ से परेशानी बढ़ गई है।।

अगर सरिता इस मुद्दे पर विचार करती तो आज ये स्थिति ही नहीं आती।। सीबीआई ने अपना काम किया, क्योंकि सीबीआई का काम यही है कि वो हर स्थिति में गुनाहगारों को पकड़े। वो तो भला हो निश्चल का की उसने सरिता को बचा लिया। सरिता थोड़ा आत्मविश्वास का शिकार हो चुकी है जिसके कारण वो अपना बुद्धि विवेक खो चुकी है।।

बस यहीं तो आप चूक गए। वो दोनों इस समय थाने में नहीं है। और बाहर वो अपने स्वभाव के अनुसार जीवन जी सकते हैं। वैसे भी निश्चल का व्यवहार अपने सभी काम करने वालों के साथ दोस्ताना ही है। जहां तक सरिता के प्रति निश्चल के नजरिया है वो बदल चुका है, क्योंकि वो निश्चल को पसंद आ चुकी है जिनके बारे में उसे खुद नहीं पता है अभी।।

संघ बने रहिए।।
 
अपडेट- 27

जब लड़कियों की नींद खुलती है तो सरिता सबसे मिलने जाती है, पहले तो सभी सरिता को देखकर डर्टी हैं, लेकिन बाद में नार्मल हो जाती हैं. सरिता उनसे बात करने लगती हैं. सभी का नाम jan-ne की कोशिश करती है. उन सब में दादी की नातिन भी थी.

सरिता सभी से बात करके बहुत खुश थी और वो थोड़ी देर पहले निस्चल के साथ हुवे झगडे को लगभग भूत hi गयी थी. सभी लड़किया आज बहुत दिन बाद सरिता के साथ खुलकर हंस रही थी. थोड़ी देर उनके साथ रहने के बाद सरिता हॉस्पिटल से बहार आ गयी और फ़ोन करके हॉस्पिटल में लड़कियों की सुरक्षा के लिए दो हवलदार तैनात कर दिए.


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बॉस अपनी चेयर पर बैठा आज के घटनाक्रम के बारे में सोच रहा था. उसे जैसे भरोषा hi नहीं हो रहा था की सरिता उसके धंधे को चौपट करने पर तुली हुई है. इतने काम समय में सरिता ने उसका बहुत ज्यादा नुकसान कर दिया था. अब वो सरिता को अपने रिश्ते से हटाने की तरकीब ढूंढ रहा था. तभी उसके पास में रखा उसका मोबाइल बजा.

फ़ोन करने वाला सर्कार था. सर्कार का नाम अपने मोबाइल की स्क्रीन पर देखकर उसके माथे पर बल पद गए. वो सोचने लगा की अब सर्कार के सवालो का क्या जवाब देगा वो. लेकिन फ़ोन तो उठाना hi था. बॉस ने फ़ोन उठाया तो उधर से सर्कार की कड़कती आवाज़ उसके कानो में पड़ी.

सर्कार- बॉस. ये सब क्या हो रहा है. एक भी काम तुम लोग ढंग से नहीं कर प् रहे हो.

बॉस- सर्कार. काम तो अभी तक अच्छी तरीके से हुवा है अपना. लेकिन जब से ये नयी लेडी इंस्पेक्टर आयी है. तब से इसकी बुरी नजर लग गयी है अपने काम को. इसने अपना करोड़ो का माल पकड़ लिया और आज तो इसने अपने एक और धंधे का भन्दा फोड़ दिया और साडी लड़कियों को छुड़ाकर ले गयी.

सर्कार- मैंने तुमसे कितनी बार कहा है की जो भी काम करो एकदम मुस्तैदी से करो, लेकिन तुम और तुम्हारे आदमी कोई न कोई गलती कर hi देते हैं. उसने इतनी बड़ा प्लान बनाया और तुमको उसकी भनक भी नहीं लगी.

बॉस- मुझे सच में कुछ भी पता नहीं चला. अरे मुझे क्या सर्कार. उसके साथ काम करने वाले किसी भी आदमी को उसके इस प्लान के बारे में भनक नहीं लगी. बस जो उसके प्लान का हिस्सा थे. उनको छोड़कर.

सर्कार- ह्ह्ह्हम्मम्मम्म. अपने सभी पंटरों को अलर्ट करो और इस इंस्पेक्टर का कोई परमानेंट बंदोबस्त करो. अगर ऐसा hi चलता रहा तो बहुत जल्दी हम लोग कटोरा लेकर भीख मांगते हुवे नजर आएंगे. समझ गए न. आगे से मुझे अपने धंधे में नुकसान नहीं चाहिए.

बॉस- जी सर्कार. मैं करता हूँ कुछ इसका. आप निश्चिंत रहिये. आगे से आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा.

बॉस की बात सुनकर सर्कार ने फ़ोन रख दिया. सर्कार के फ़ोन रखने के बाद ने किसी को फ़ोन किया.


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हॉस्पिटल से निकलने के बाद दो हवलदार को वह की सुरक्षा में कड़ी करके सरिता पस के लिए निकल गयी. रस्ते में सरिता का फ़ोन बजने लगा. मोबाइल स्क्रीन पर सविता का नाम देखकर सरिता न अपनी गाड़ी किनारे कड़ी की और फ़ोन पिच किया.

सरिता- Hello दी. कैसी हैं आप.

सवी- मैं अच्छी हूँ. तुम कैसी हो और कहा पर हो.

सरिता- मैं भी बहुत अच्छी हूँ दी. बस किसी काम से बहार आयी थी. आप बताइये कुछ काम था क्या.

सवी- सबसे पहले तो तुम्हे कोंग्रटुलतिओं सरिता. तुमने बहुत बहादुरी का काम किया है. हम तो तुम्हारे फैन हो गए हैं.

सरिता- थैंक यू दी. ये तो मेरा फ़र्ज़ था दी. आखिर इस के लिए hi तो मुझे ये वर्दी दी गयी है. वैसे ये सब छोड़िये आप कुछ कहने वाली थी.

सवी- कल हमारे ंगो की तरफ से बच्चो के लिए एक फंक्शन रखा गया है और मैं चाहती हूँ की तुम उसमे शामिल हो. तुम आओगी तो बच्चो का हौसला बढ़ेगा.

सरिता- वो तो ठीक है दी. लेकिन मैं कैसे आ सकती हूँ. आपको तो पता है की मुझे कितनी व्यस्तता है आजकल.

सवी- (नाराजगी के साथ) क्यों नहीं आ सकती हो तुम. और मैंने तुमसे आने के लिए रिक्वेस्ट नहीं की है. मैंने तुम्हे आने के लिए आर्डर दिया है समझी. तो अब अपना ज्यादा दिमाग मत चलाओ.

सरिता- (हँसते हुवे) ठीक है दी. मैं पूरी कोशिश करुँगी आने की. आप एड्रेस सेंड कर दीजिये.

सवी- कोशिश नहीं तुम्हे आना hi पड़ेगा. अगर तुम नहीं आयी तो समझ लेना फिर. मैं एड्रेस सेंड कर रही हूँ.

सरिता फ़ोन रखने जा रही थी तभी उसके दिमाग में कुछ आया तो उसने सविता से कहा.

सरिता- दी आपसे मुझे एक हेल्प चाहिए.

सवी- हाँ सरिता बोलो.

सरिता- दी आपको तो पता है की ऑपरेशन के दौरान मैंने 12-13 लड़कियों को छुड़ाया है. जिनको गंभीर हालत में हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है. दो दिन बाद उनको डिस्चार्ज कर दिया जायेगा. तो मैं सोच रही थी की जब तक उनके पेरेंट्स उन्हें आकर ले नहीं जाते तब तक उन्हें आप अपने ंगो में रख लें.

सवी- ये भी कोई कहने की बात है सरिता. मैं इतना तो कर hi सकती हूँ. जब उनको डिस्चार्ज मिले तो मुझे बता देना.

सरिता- थैंक यू दी. आप बहुत अच्छी है दी.

सवी- दी भी बोलती हो और थैंक यू भी बोलती हो. ये अच्छी बात नहीं है. चलो ठीक है कल मिलते हैं फिर. अपना ख्याल रखना

सरिता- आप भी दी. Bye.

इतना कहकर सरिता ने फ़ोन रख दिया और पस के लिए निकल गयी.

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पस से 5 किलोमीटर दूर एक सुनसान जगह पर बच्चा सिंह, कलुवा, शम्भू और रखा बैठे हुवे थे. आज ये सब उस खँडहर में न मिलकर यहाँ मिलने का दिसदे किये थे. चारो के चेहरे पर परेशानी साफ़ झलक रही थी. कुछ सोचते हुवे बच्चा सिंह ने कहा.

बच्चा सिंह- मैं इस इंस्पेक्टर को छोडूंगा नहीं. इसके कारन मेरा बहुत नुकसान हो रहा है.

कलुवा- हाँ भाई. साली बहुत hi कड़क मिजाज औरत है. किसी की बात नहीं सुनती. अभी कुछ समय पहले ठाणे से हमका पता चलल है की आज उसकी और उस इंस्पेक्टर की लड़ाई हुआ है. जिस इंस्पेक्टर ने ओका रिश्वत वाले केस से बचाया था.

बच्चा सिंह- क्या बात कर रहा है बे तू. लेकिन लड़ाई कहे लिए हुई थी.

कलुवा- उसने बिना किसी को बताये Hi हमारे ठिकाने पर छपा मारा था और उन लड़कियों को छुड़ाकर ले गयी. यही बात पे दोनों आपस में भीड़ गए थे.

बच्चा- ये तो बहुत अच्छी बात है. मतलब अब वो इंस्पेक्टर भी उसके साथ नहीं है. हमको जल्दी hi इस लड़की का कुछ करना पड़ेगा.

अभी ये सब आपस में बात कर hi रहे थे की बच्चा सिंह का फ़ोन बजने लगा. स्क्रीन पर नाम देखकर बच्चा सिंह के पसीने छूटने लगे. उसने डरते हुवे फ़ोन उठाया.

बॉस- और बच्चा भाई. क्या हल चल हैं तुम्हारे. सब ठीक तो है न.

बच्चा- बॉस. ये आप क्या बोल रहे हैं. आपको तो सबकुछ पता hi है .

बॉस- (गुस्से से) सबकुछ पता है तभी तो पूछ रहा हूँ तुझसे मैं. तुम लोग एकदम निकम्मे और कामचोर हो गए हो. एक भी काम तुम लोगो से ठिक्क से नहीं होता.

बच्चा- हमने अपना काम बहुत hi सावधानी के साथ किया था, लेकिन पता नहीं उसे कैसे खबर लग गयी और उसने ये कांड कर दिया. हमको भी खबर मिली थी की वो लड़कियों को खोज रही है, लेकिन जब तक हम कुछ कर पते तब तक उसने वो गाड़ी पकड़ ली.

बॉस- क्योंकि वो तुम लोगो से ज्यादा चालक और शातिर है. तुम लोग किसी काम के नहीं रह गए हो. तुम लोगो के कारन मुझे सर्कार की दन्त sun-ni पड़ती है. जल्दी से कुछ करो इस लड़की का. नहीं तो मैं तुम लोगो के बारे में कुछ सोच लूंगा फिर. जो तुम लोगो के लिए अच्छा नहीं होगा. रघु को फ़ोन करो और उसे बुलाओ. अब ये काम तुम लोगो के बस का नहीं रह गया है. ये काम रघु hi कर सकता है.

बच्चा सिंह- जी बोस. मैं ाभ्ही भाई को फ़ोन करके आपका सन्देश उन्हें देता हूँ.

बॉस ने फ़ोन रख दिया. बच्चा फ़ोन रखने के बाद गुस्से से चिल्लाया.

बच्चा- इस साली लौंडिया के चक्कर में मुझे कितनी बाटे sun-ni पद रही हैं.


*********

सवी से बात करने के बाद सरिता पस पहुंच गयी. जब सरिता वह पहुंची तो उसने देखा की वो अपना सरकारी फ़ोन जो पस से जाते वक्त जल्दी जल्दी में पस में hi भूल गयी है उसपर और ऑफिस के फ़ोन पर आ रहे कॉल को उठाने में जान्हवी उलझी हुई है. सरिता को ये देखकर हलकी सी हंसी आ गयी. सरिता अंदर जाकर अपनी चेयर पर बैठ गयी. सरिता को देखते hi जान्हवी ने कहा.

जान्हवी- थैंक गॉड मैडम, आप आ गयी. मैं तो फिछले कितनी देर से फ़ोन उठा उठा कर परेशां हो गयी थी. किस किस के सवालों का जवाब दूँ. मुझे समझ में नहीं आ रहा था.

सरिता- तुम्हे फ़ोन रिसीव करने hi नहीं चाहिए थे जान्हवी.

जान्हवी- मैं तो उठाना hi नहीं चाहती थी फ़ोन, लेकिन ये कब से बजे जा रहे थे, इसलिए मजबूरन मुझे फ़ोन उठाना पड़ा.

सरिता- तुम नहीं उठती तो कुछ देर बाद अपने आप hi फ़ोन आना बंद हो जाता.

जान्हवी- अच्छा ये सब छोड़िये मैडम, पहले ये बताइये की सभी बछिया कैसी हैं. डॉक्टर ने क्या कहा.

सरिता- सभी बिलकुल ठीक है जान्हवी. डॉक्टर ने कहा है की दो दिन के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर देंगे. तुम्हे पता है सब बहुत hi क्यूट हैं और बहुत hi प्यारी प्यारी बातें करती हैं.

जान्हवी- तभी तो आपका मूड एकदम ठीक लग रहा है. नहीं तो जिस तरह से गुस्से में आप पस से गयी थी. उसे देखकर तो एक बार को मुझे भी आपसे दर लगने लगा था.

सरिता- अरे इसमें डरने की क्या बात है. उस समय बस थोड़ा गुस्से में थी. वो गुस्सा तो बस उस हिट… मतलब सर के लिए था. तुम्हे मुझसे डरने की कोई जरूरत नहीं है. अच्छा तुम्हे एक काम करना है.

जान्हवी- जी मैडम बोलिये.

सरिता- नई चैनल में सभी बच्चियों की फोटो भिजवा दो और न्यूज़ जारी करवा दो और ठाणे का एड्रेस और मेरा फ़ोन नंबर भी दे देना. जिनकी बछिया हैं काम से काम उनको पता तो चल जाये की उनकी बच्ची अब सुरक्षित हैं और यहाँ पर हैं. साथ में ये भी न्यूज़ में दाल डलवा देना की बच्ची की फोटो और ईद प्रोफ्फ साथ में लेकर आये.

जान्हवी- ठीक है मैडम. मैं आज hi ये काम कर देती हूँ.

इतना कहकर जान्हवी बहार चली गयी. उसके बहार जाने के बाद सरिता ने कौशल को अपने केबिन में बुलाया. कौशल सरिता के पास आया और बोलै.

कौशल- जी मैडम. आपने मुझे बुलाया.

सरिता- हाँ कौशल जी. कुछ बताया उसने बच्चा सिंह के बारे में.

कौशल- अभी तक तो कुछ नहीं बताया मैडम.

सरिता- ठीक है. आप अपना काम चालू रखो और उसकी खुराकी थोड़ी सी और बढ़ा दो.

कौशल- ठीक है मैडम.

कौशल के जाने के बाद सरिता ने कुछ देर पस का काम किया फिर उसके बाद देर रात वो पस से निकली और अपने क्वार्टर जाने के बजाय हॉस्पिटल चली गयी. सभी लड़किया सरिता को देखकर बहुत खुश हुई. सरिता ने सभी से बातचीत की. तभी सरिता का फ़ोन बजने लगा. सरिता ने फ़ोन देखा तो मनीषा का फ़ोन था. सरिता वार्ड से बहार कॉरिडोर में आकर फ़ोन उठाया.

सरिता- हे मनीषा. कैसी है तू.

मनीषा- मैं अच्छी हूँ दिदिया. आप कैसी हो.

सरिता- मैं भी बहुत अच्छी हूँ.

मनीषा- क्या बात है दिदिया. तुम तो बहुत फेमस हो गयी. हर जगह तुम्हारे hi चर्चे हो रहे हैं. ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू दिदिया. तुमने बहुत hi बहादुरी का काम किया है.

सरिता- ये तो मेरा फ़र्ज़ था मनीषा. मैं ये सब तुम्हारे प्यार और मम्मी पापा के आशीर्वाद के कारन hi कर पायी. मम्मी पापा कहा पर हैं.

मनीषा- यही पर हैं. लो बात करो.

इतना कहकर मनीषा ने फ़ोन स्पीकर दाल दिया. आनंद ने सरिता से कहा.

आनंद जी- कैसी हो मेरी बेटी.

सरिता- मैं बहुत अच्छी हूँ पापा. आप कैसे हैं और मम्मी कैसी हैं.

रानी जी- हम दोनों भी बहुत अचे हैं सरिता. अच्छा ये बता अपने बर्थडे पर आ रही है न हमारे पास.

सरिता- क्या मम्मी. आप अभी तक वही अटकी हुई हैं. मैंने दोपहर में hi आपको बता दिया था की मैं नहीं आ पाऊँगी. मुझे बहुत काम है पस में.

रानी जी- काम तो हमेशा hi करना है तुझे. एक दिन के लिए आ जाओ फिर चली जाना.

सरिता- पापा आप समझाइये न मम्मी को. मुझे सच में बहुत काम है नहीं तो मैं आ जाती.

आनंद जी- ठीक है बीटा. तुम पहले अपना काम पूरा कर लो. काम ज्यादा जरूरी है. बर्थडे इस साल नहीं तो अगले साल मन लेंगे.

रानी जी- आप भी न. उसे बुलाने के बजाय मन कर रहे हैं आने के लिए. आपने hi उसे बिगड़ कर रखा हुआ है.

आनंद जी- तुम अपनी मम्मी की बातो पर ध्यान न दो बेटी. तुमने आज जो काम किया है. उससे मैं बहुत खुश हूँ बेटी. तुमने मेरा सर गर्व से ुचा कर दिया है बेटी.

सरिता- ये सब आपके और मम्मी के आशीर्वाद के कारन hi संभव हुआ है पापा. अच्छा पापा अभी मैं उन लड़कियों के साथ हॉस्पिटल में hi हूँ. मैं फ़ोन रखती हूँ बाद में बात करुँगी.

आनंद जी- ठीक है बेटी.

इना कहकर आनंद ने फ़ोन रख दिया. सरिता अपना फ़ोन रखकर कॉरिडोर में hi टहलने लगी. तभी उसे निश्छल आता हुवा दिखाई दिया. सरिता ने उसे देखकर अपना मुंह दूसरी तरफ फेर लिया और वह से जाने लगी. सरिता को अंदाज़ा नहीं था की निश्छल वह पर आएगा.

शामे यही सेतुएशन निश्छल की भी थी. उसे बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था की सरिता इस समय हॉस्पिटल में मिलेगी. वो तो बस लड़कियों की हॉल खबर लेने आया था. सरिता को वह देख निश्छल सोचने लगा.

निश्छल- (मन में) क्या यार ये यहाँ पर है. लगता है अभी भी मुझसे नाराज़ है. लेकिन मैं क्या करूँ. मैं ऐसा कुछ करना तो नहीं चाहता था लेकिन मैं मजबूर था.

सरिता- (मन में) ये यहाँ पर क्या कर रहा है. मैं तो इससे बात hi नहीं करुँगी अब.

निस्चल चलता हुवा सरिता के पीछे आकर खड़ा हो गया. सरिता को अंदाज़ा हो गया की निश्छल उसके पास खड़ा है, लेकिन सरिता ने उसकी तरफ नहीं देखा और उसकी तरफ पीठ करके कड़ी रही. कुछ पल इंतज़ार के बाद निश्छल ने कहा.

निस्चल- ी ऍम सॉरी. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. मुझे माफ कर दो.

निश्छल के माफी मांगने पर भी सरिता ने कोई जवाब नहीं दिया तो निश्छल ने फिर से कहा.

निस्चल- ी ऍम सॉरी. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. मुझे माफ कर दो.

सरिता ने फिर से कोई जवाब नहीं दिया तो निश्छल ने फिर से कहा.

निस्चल- ी ऍम सॉरी. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. मुझे माफ कर दो.

सरिता ने फिर से उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया तो निश्छल ने फिर से कहा.

निस्चल- ी ऍम सॉरी. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. मुझे माफ कर दो.

अब सरिता ने न रहा गया तो सरिता घूमकर उसके सामने कड़ी हो गयी और गुस्से से बोली.

सरिता- नहीं चाहिए मुझे आपकी माफ़ी. आप यहाँ क्या करने आये हैं. एक थप्पड़ मार्कर भी आपका मन नहीं भरा क्या अभी आपका. और थप्पड़ मरना है आपको.

निश्छल- अरे यार मैं माफ़ी तो मांग रहा हूँ न. फिर तुम इतना गुस्सा क्यों दिखा रही हो. हाँ मैंने जो किया वो मुझे नहीं करना चाहिए था. मुझसे गलती हो गयी. जिसके लिए मैं माफी मांग रहा हूँ.

सरिता- अपनी हद में रहिये आप. मैं आपकी यार नहीं हूँ. और माफी मांगकर आप एहसान कर रहे हैं क्या.

निस्चल- मुझे ये समझ में नहीं आता की तुम हर बात का गलत मतलब क्यों निकल लेती हो. कभी तो मेरी बात सुन लिया करो. तुम्हे मुझे कितनी बार बिना गलती के थप्पड़ मारा है. और आज तक माफी भी नहीं मांगी है. लेकिन फिर भी मैंने तुमसे कुछ नहीं कहा.

सरिता- आह्ह्ह्हह्ह. कितना कुछ कहा आपने मुझे. मुझे धमकी भी दे दी की अगर मैंने माफ़ी नहीं मांगी तो आप मुझे पस में रहने नहीं देंगे. और यहाँ भोला ban-ne का नाटक कर रहे हैं.

निश्छल- हाँ तो तुमने कितनी जोर से मारा था मुझे. दोनों तरफ के गाल लाल कर दिए थे तुमने मेरे. लेकिन मैंने तो तुम्हे एक hi थप्पड़ मारा. वो भी तुम्हारी गलती के लिए. और अब तुमसे माफ़ी भी तो मांग रहा हूँ न.

सरिता- मुझे आपकी माफ़ी नहीं चाहिए. माफी मांगकर कोई एहसान नहीं कर रहे हो आप.

निस्चल- अरे यार तुमसे तो बात करना hi बेकार है. हर बात का उल्टा मतलब निकल लेती हो.

सरिता- तो मत किये न मुझसे बात. मैंने थोड़ी hi आपको बुलाया था की मुझसे माफी मांगे आप. आप hi आये हैं मेरे पास माफी मांगने के लिए.

इन दोनों की nok-jhonk धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी. तभी उन लड़कियों में से एक बच्ची जो उनमे से सबसे छोटी थी लगभग 10 साल की. उसका नाम अक्कू था. वो वार्ड से बहार आयी और सरिता और निश्छल को लड़ते हुवे देखकर उन्हें पास जाकर कड़ी हो गयी. सरिता और निश्छल अपनी लड़ाई में hi व्यस्त थे. तो दोनों ने उस पर ध्या नहीं दिया. कुछ देर कड़ी रहने के बाद अक्कू ने कहा.

अक्कू- दीदी. ये अंकल कौन हैं और आपसे झगड़ा क्यों कर रहे हैं.

अक्कू की बात सुनकर दोनों का ध्यान उसकी तरफ गया. अक्कू को देखकर सरिता ने अपने गुस्से पर काबू किया और अक्कू से कहा.

सरिता- कुछ नहीं बीटा. हम दोनों बस बात कर रहे हैं. तुम अंदर जाओ मैं आ रही हूँ कुछ देर में.

सरिता की बात सुनकर अक्कू वार्ड में चली गयी. उसके जाने के बाद सरिता निश्छल से कहा.

सरिता- मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी है आप अभी यहाँ से चले जाइये.

निश्छल ने सोचा की अभी इसका मूड ठीक नहीं हुआ है अभी गुस्सा hi है ये और अभी गुस्से में ये कब क्या कर दे कोई भरोषा भी नहीं है. पता लगा गुस्से में इसने फिर से मेरे दोनों गाल लाल कर दिए तो खामखाह हॉस्पिटल में बेइज्जती हो जनि है, इसलिए अभी जाता हूँ. बाद में इससे बात करूँगा.

यही सोचकर निस्चल सरिता की बात का जवाब दिए बिना hi हॉस्पिटल के बहार चला गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका महोदय,

अब जब उनके धंधे में नुकसान पर नुकसान होगा तो कोई न कोई व्यवस्था तो करेंगे ही न। मुझे जहां तक लगता है उसे निश्चल को माफ कर देना चाहिए था क्योंकि निश्चल ने कोई गलती नहीं कि थी, उनके बाद भी भाव खा रही है।।

बॉस और सरकार तो नहीं जानते अभिषेक को, लेकिन कोई है जो बहुत अच्छी तरह से जानता है उसे।

साथ बने रहिए।।
 
अपडेट- 28

सरिता की बात सुनकर निश्छल हॉस्पिटल से बहार चला गया और बहार जाकर एक चाय की दुकान पर बैठ गया और छै का आर्डर दे दिया. कुछ hi देर में चाय आ गयी तो निश्छल चाय पिने लगा. चाय की दुकान पर लगभग 1 घंटे बैठे रहने के बाद निश्छल फिर से हॉस्पिटल के अंदर आया तो उसने देखा की सरिता वार्ड में लड़कियों के बिस्टेर के पास लगे बेंच पर बैठकर सो रही है.

उसने अपने सर का टेक दीवार से लगाया हुवा था. उसकी गर्दन एक और झुकी हुई थी. जिसके कारन सरिता की लातें उसके चेहरे पर आ गयी थी. जो सीलिंग फैन की हवा के कारन लहराकर उसके चेहरे को चुम रहे थे. जिसके कारन सरिता का चेहरा और भी निखार आया था. निश्छल तो सरिता के इस रूप को देखकर मंत्र मुग्ध हो गया. वो सरिता को एकटक निहारने लगा. सरिता के चेहरे पर दुनिया जहाँ को ढेरो मासूमियत इस समय छै हुई थी. वो सरिता के चेहरे को देखते हुवे सोच रहा था.

निश्छल- (अपने मन में) देखो तो सोते हुवे कितनी मासूम दिखती है. ऐसा लगता है जैसे कुछ जानती hi नहीं. कितनी कशिश है इसके चेहरे पर. किसी को भी इस रूप को देखकर प्यार हो जाये. लेकिन जब अपना मुंह खोलती है तो बाप रे बाप. जीना मुश्किल कर देती है. एक बार बोलना शुरू करती है तो रुकने का नाम hi नहीं लेती. इसे देखकर कौन कहेगा की इसने बच्चा सिंह जैसे शातिर गुंडे की नाक में डैम कर रखा है. सच में ये लेडी डॉन है.

निश्छल यही सब सोचते हुवे सरिता के पास पहुंच गया और बड़े प्यार से उसका चेहरा देखने लगा. सरिता का चेहरा देखते हुवे उसे पता नहीं क्या हुवा उसने अपना हाँथ बढाकर सरिता के चेहरे पर उड़ रही उसकी लातो को उसके कण के पीछे करने की कोशिश की, इस कोशिश में निश्छल का हाँथ सरिता के चेहरे पर लग गया जिससे सरिता की नींद खुल गयी. अपने चेहरे पर किसी का हाँथ महसूस होते hi सरिता तुरंत कड़ी हो गयी. ये देखकर निश्छल हड़बड़ा कर पीछे हैट गया. सरिता ने उसे घूरते हुवे कहा.

सरिता- ये क्या बदतमीज़ी है आपकी. आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की. कोई मन्नेर वगैरह है या नहीं की किसी लड़की को बिना उसकी इज़ाज़त के टच नहीं करना चाहिए.

निस्चल- (हरकते हुवे) अरे तू.... तुम गलत समझ रही हो. मैं तो वो तुम्हारे चेहरे पर कुछ लगा हुवा था उसे hi साफ कर रहा था.

सरिता- मुझे पता है की आप क्या करने की कोशिश कर रहे थे. अभी मेरा मोड़ बहुत ख़राब है. आप जाइये यहाँ से. कही ऐसा न हो की मेरे मुंह से कुछ ऐसा निकल जाये जो आपको अच्छा न लगे.

निस्चल उसकी बात सुनकर चुपचाप बहार निकल गया. सरिता फिर से बेंच पर बैठ गयी और थोड़ी देर बाद उसे नींद आ गयी. सुबह सरिता की आँख पास में होने वाली खत पैट की आवाज़ से खुली.

सरिता ने देखा की अक्खु उसके पास बेंच पर hi बैठी हुई है और उसे देख रही है. सरिता ने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरा और उसके माथे पर एक चुम्बन अंकित कर वह पर उपस्थित नर्स से कुछ बात करके अपने कमरे में चली गयी और काम मरने चली गयी. वह से फ्रेश होकर वो पस चली गयी. उसने थोड़ी देर पस का काम किया और मार्किट चली गयी.

वह जाकर उसने अक्कू के लिए कपडे और शूज लिए और हॉस्पिटल के लिए निकल गयी. वो रस्ते में hi थी की तभी सरिता का फ़ोन बजने लगा. फ़ोन सविता का था तो उसने फ़ोन उठाकर कुछ देर में आने के लिए बोल दिया और हॉस्पिटल में पहुंच गयी.

सभी लड़कियों में अक्कू की हालत बेहतर थी इसलिए वो अक्कू को अपने साथ ले जाना चाहती थी. सरिता ने अक्कू को कपडे और शूज दिए तो वो खुश हो गयी और जल्दी से तैयार हो गयी. सरिता उसको लेकर ंगो पहुंच गयी.

सरिता ने सविता को फ़ोन किया. सविता बहार गेट तक आयी और सरिता को लेकर अंदर चली गयी. वह एक बड़े से हॉल में ये प्रोग्राम रखा गया था. हॉल को बहुत hi अच्छी तरीके से सजाया गया था. हॉल के बहार hi खाने पिने की व्यवस्था थी.

सविता सरिता को लेकर सबसे आगे की रौ में गयी. सरिता ने देखा की वह पर बहुत बड़े बड़े नमी गिरामी लोग चीफ गेस्ट बैंकर आये हुवे हैं, लेकिन अब सरिता भी उस दिन के एक्शन के कारन काफी फेमस हो गयी थी. सभी सरिता को pahchan-ne लगे थे. सभी से सरिता ने अभिवादन किया और वही पर खली कुरहि पर बैठ गयी. अक्कू भी उसकी बगल में बैठ गयी. स्टेज पर छोटे बच्चे अपने कार्यक्रम की प्रस्तुति कर रहे थे. जिसे देखकर अक्कू बहती खुश हो रही थी और ताली भी बजा रही थी.

तभी उसे निश्छल आता हुवा दिखाई दिया जो उसी की तरफ आ रहा था. निश्छल उसके पास आया और उसके बगल की खली चेयर पर बैठ गया. सरिता ने उसे पूरी तरह से इग्नोर किया और मन hi मन उसे भला बुरा कहने लगी.

सरिता- (मन में) ये हिटलर अँधा हो गया है क्या. इसे और कोई जगह नहीं दिखी पूरे हॉल में . कही भी बैठ सकता था, लेकिन नहीं इसे तो मेरे सर के ऊपर आकर नाचना था..

मन hi मन सोचते हुवे सरिता ने अक्कू को अपने बगल से उठाया और अपनी शीट पर बिथा दिया और खुद अक्कू की शीट पर बैठ गयी. निस्चल ने सरिता को घूरकर एक नजर देखा और सामने की तरफ देखने लगा. बिच बिच में वो अक्कू से भी बात कर लेता था. कुछः देर ऐसे hi बैठे रहने के बाद निस्चल ने अक्कू से पुछा.

निस्चल- आप बहुत प्यारी हो. आप का नाम क्या है बीटा.

अक्कू- मेरा नाम अक्कू है अंकल. आपका नाम क्या है अंकल.

अक्कू के मुंह से अंकल सुनकर निश्छल हैरान रह जाता है. वही अक्कू का निश्चल को अंकल बोलने पर सरिता से चेहरे पर मुस्कान तैर जाती है. जैसे hi निश्छल की नजर सरिता की तरफ जाती है उसे मुस्कुराते हुवे देखकर उसके चेहरे पर खिसियाने वाले भाव आ जाते हैं. उसने अक्कू से कहा.

निस्चल- अक्कू बीटा. मैं अंकल कहाँ से लगता हूँ. अभी मेरी उम्र hi क्या है.

अक्कू- अब आप अंकल लगते हैं तभी तो मैंने आपको अंकल कहा.

निस्चल- तो अगर मैं अंकल हूँ. तो उस हिसाब से तो आपके बगल में जो बैठी हुई हैं वो आपकी आंटी हुई न.

निस्चल ने सरिता की तरफ इशारा करते हुवे अक्कू से कहा, जब सरिता ने निस्चल की बात सुनी तो वो निस्चल को घूरने लगी. निस्चल की बात सुनकर अक्कू ने कहा.

अक्कू- नहीं वो मेरी दीदी हैं (फिर किछ सोचते हुवे बोली) अगर आप अंकल हैं और आप दीदी को आंटी बोल रहे हैं तो क्या आप दोनों की शादी हो गयी है क्या.

निश्छल अक्कू की बात सुनकर मुस्कुराने लगा वहीँ सरिता अक्कू की बात सुनकर सरिता ने उसे घूरकर देखा और बोली.

सरिता- नहीं अक्कू मैं तुम्हारी दीदी हूँ. इनको तुम्हे जो बुलाना हो वो तुम बुला सकती हो. अगर तुमने अब मुझे दीदी के आलावा और कुछ कहा तो मैं तुमसे बात नहीं करुँगी. अब चुपचाप बैठकर फंक्शन इंजॉय करो.

सरिता की बात सुनकर अक्कू चुपचाप बैठकर प्रोग्रमम देखने लगती है. थोड़ी देर बाद कुछ बच्चियों का डांस परफॉरमेंस होने लगता है जिसे देखकर अक्कू बहुत खुश होती है और ताली बजने लगती है. अक्कू ताली बजाते हुवे सरिता को देखते हुवे पूछती है.

अक्कू- दीदी, क्या आप भी इस तरह का डांस कर सकती हैं. अगर आपको आता होगा तो मुझे भी सीखा दीजियेगा. मुझे डांस करने का बहुत शौक है.

अभी अक्कू की बात का जवाब सरिता देती. इससे पहले hi निश्छल बोल पड़ा.

निश्छल- तुम्हारी दीदी को डांस वन्स करना नहीं आता. तुम्हारी दीदी को एक काम बहुत अच्छे से आता है, वो है ladna-jhagadna और गुस्सा करना. अगर तुम्हे ये सब सीखना हो तो तुम्हारी दीदी तुम्हे बहुत अचे से सीखा सकती हैं.

अक्कू- नहीं मेरी दीदी बहुत अच्छी है. ये किसी से लड़ाई झगड़ा नहीं करती.

निश्छल- लेकिन मुझसे तो हमेशा लड़ती झगड़ती रहती हैं.

अक्कू- दीदी. आप इन अंकल से क्यों लड़ती झगड़ती रहती हैं.

सरिता- मुझे पागल कुत्ते ने कटा है. जो मैं इनसे लड़ती झगड़ती रहती हूँ.

निश्छल- सही कहा. मुझे भी ऐसा hi लगता है,

सरिताई- आप चुपचाप बैठ नहीं सकते. जब देखो मेरे पीछे hi पड़े रहते हो. क्या मिल जाता है आपको ऐसा करके. प्ल्ज़ मेरा पीछा करना छोड़ दीजिये.

निश्छल- ओह्ह्ह Hello, मेरे इतने भी बुरे दिन नहीं आये हैं की मैं तुम्हारा पीछा करू. समझी

सरिता- तो फिर पूरा हॉल में आपको यही जगह मिली थी बैठने के लिए. हॉल में इतनी जगह खली है कही भी बैठ सकते थे. तो फिर यहाँ पर क्यों आये. इससे तो यही साबित होता है की आप मेरा पीछा कर रहे हैं.

निस्चल- कितनी गलत फहमी पल राखी है तुमने मेरे बारे में. तुम्हारी तरह मुझे भी इन्विते किया गया है. तो मैं भी फर्स्ट रौ में बैठने का हक़दार हूँ. इसलिए मैं यहाँ बैठा. और ये बात अपनने दिमाग से निकल दो की मैं तुम जैसी नकचढ़ी का पीछा करूँगा. माय फुट.

सरिता- मुझे नकचढ़ी कहा आपने. आप भी नकचढ़े हो.

सरिता और निश्छल के बिच में बैठी अक्कू सामने चल रहे प्रेजेंटेशन को छोड़कर जब सरिता बोलती तो उसकी तरफ देखती और जब निश्छल बोलता तो उसकी तरफ देखने लगती. इन दोनों की तू तू मैं मैं से तंग आकर अक्कू ने कहा.

अक्कू- दीदी. मुझे भूख लगी है. चलो न खाना कहते हैं. आप क्यों अंकल के मुंह लग रही हैं.

सरिता- सही कहा तुमने. मैं क्यों इनके मुंह लग रही हूँ. चलो खाना कहते हैं.

इतना कहकर सरिता अक्कू को लेकर खाने के काउंटर की तरफ निकल जाती हैं. निश्छल उन दोनों को फ़ूड काउंटर की तरफ जाते हुवे देखता रहता है और सोचता है.

निश्छल- (मन में) क्या लड़की है यार. कितना बोलती है. लगता है इसने गलत प्रोफेशन चुन लिया है. इसे तो पॉलिटिक्स में होना चाहिए था. वह तो ये सबकी खटिया कड़ी कर देती.

निश्छल अभी ये सब सोच hi रहा था की तभी उसके कंधे पर किसी ने हाँथ रखा. निश्छल ने जब हाँथ रखने वाले इंसान को देखा तो वह पर राघव खड़ा था.

(राघव 23-24 साल का एक बहुत hi आकर्षक युवक था. वो निस्चल की तरह अग्रेसिव और तेज tar-rar नहीं बल्कि शांत स्वाभाव का व्यक्ति था. दोनों की दोस्ती बचपन से थी, ये दोनों दोस्त काम भाई ज्यादा थे)

राघव को देखकर निश्छल बहुत खुश हुवा. उसने तुरंत उठाकर उसको गले लगा लिया और बोलै.

निश्छल- राघव मेरे भाई. कैसा है यार तू.

राघव. ठीक हूँ भाई. तू अपना बता.

निस्चल- मैं भी बहुत अच्छा हूँ और तेरे सामने खड़ा हूँ. तू कब आया.

राघव- बस अभी आया और तेरे पास hi चला आ रहा हूँ.

निश्छल- फिर तो दी से अभी मिला नहीं होगा.

राघव- अभी नहीं मिला दी से.

निश्छल- क्या करता है भाई. पिटवायेगा क्या मुझे. अगर दी ने जान लिया तो मेरी क्लास लगा देंगी. चल पहले दी से मिल ले.

निश्छल और राघव दोनों सविता के पास आये. राघव ने सविता की आँख पर अपने दोनों हाँथ रख दिए. सविता ने उसके हाथों के स्पर्श से तुरंत उसे पहचान लिया और कहा.

सवी- राघव. तुम आ गए.

राघव- क्या दी. आप तो मुझे हमेशा पहचान लेती हैं.

सवी- तुझे पता है न की तू मुझे कितना अजीज है. एक बार को मैं निशु को pahchan-ne में भूल कर सकती हूँ. लेकिन तुझे pahchan-ne में कभी भूल नहीं कर सकती. तुम कब आये.

राघव- बस दी. कुछ hi देर हुई है. आप ने बुलाया था तो आना hi था मुझे.

सवी- सफर कैसा रहा तुम्हारा.

राघव- बहुत अच्छा रहा दी.

अभी सवी इसके आगे कुछ कहती निश्छल बिच में बोल पड़ा.

निश्छल- ये क्या बात हुई. मैं भी यही पर हूँ. मुझसे तो आपने कभी इतने प्यार से बात नहीं की. और राघव के आते hi मुझे भूल गयी आप दी.

सवी- तू तो मेरे पास रहता है. राघव तो मेरे पास नहीं रहता न. तो मुझे राघव को बहुत प्यार करना है. अच्छा ये सब छोडो. चलो खाना कहते हैं. ये सरिता कहाँ गयी. दिखाई hi नहीं दे रही है.

निश्छल- जाएगी कहाँ. भुक्खड़ जो है तो खाने के स्टाल पर hi होगी वो देखो.

सरिता को सामने की कुर्सी पर न पाकर सविता ने उसके बारे में जब निश्छल से पुछा तो निश्छल ने जवाब दिया. उसके जवाब पर सवी ने कहा.

सवी- खा रही है ये अक्कू के पीछे hi परेशां है. चलो राघव मैं तुम्हे उससे मिलती हूँ.

निश्छल- (चिढ़कर) वो कोई प्राइम मिनिस्टर ये चीफ मिनिस्टर नहीं है जो आप उससे मिलवाने ले जा रही हैं राघव को. जंगली बिल्ली है वो.

सवी- तो तुम्हे क्या परेशानी है. मैं तुम्हे तो नहीं ले जा रही हूँ उससे मिलवाने.

इतना बोलकर सविता राघव को लेकर सरिता के पास गयी और कहा.

सवी- अरे सरिता तुम यहाँ हो और मैं तुम्हे उधर ढूंढ रही थी.

सरिता- वो अक्कू को भूख लगी थी तो मैंने सोचा इसे खाना खिला दूँ.

सवी- सरिता इससे मिले. ये है निशु का दोस्त और मेरा सबसे प्यारा भाई. और राघव ये हैं हमारे शहर की सबसे काबिल, होनहार, और निडर पुलिस अफसर सरिता जोशी.

दोनों ने एक दुसरे को hello कहा. कुछ देर वह रहने के बाद सवी न सरिता से कहा.

सवी- अच्छा तुम लोग बातें करो मैं थोड़ा गेस्ट को देखकर आती हूँ.

इतना कहकर सविता वह से चली गयी. उसके जाने के बाद राघव ने सरिता से कहा.

राघव- आप वही हैं न जिन्होंने अभी कल गुंडों के हाथों लड़कियों को छुड़ाया था.

राघव की बात सुनकर सरिता ने अपना सर हाँ में हिलाया तो राघव ने खुश होते हुवे कहा.

राघव- आपसे मिलकर बहुत ख़ुशी हुई. आपने सच में बहुत hi अच्छा काम किया है.

सरिता- धन्यवाद राघव जी.

राघव- तो आप यही से हैं क्या.

सरिता- जी नहीं. मेरा घर अल्लाहाबाद में है. ये मेरी पहली जॉब है और पोस्टिंग यहाँ हुई तो मुझे यहाँ आना पड़ा.

राघव- तो इसका मतलब आप यहाँ अकेली रहती हैं.

सरिता- हाँ. अब जॉब करनी है तो रहना तो पड़ेगा hi.

राघव- अच्छा… निस्चल भी तो आपके hi डिपार्टमेंट में है न.

सरिता- (मुंह बनाकर) जी नहीं वो तो दसप हैं तो बस कभी कभी राउंड के लिए आते रहते हैं. मेरी उनसे ज्यादा बात नहीं हो पायी है अभी तक.

राघव- अच्छा. आपको एक बात पता है. वो तो मुझे भी इसी लाइन में घसीट रहा था. लेकिन मुझे इस फील्ड में इंट्रेस्ट नहीं था इसलिए मैंने मन कर दिया उसे.

सरिता- (धीरे से) हिटलर कही का. अपने दोस्त पर भी हुकुम चलता रहता है. मैं तो सोचती थी की ये मुझपर hi अपना हुकुम चलता है.

राघव- आपने कुछ कहा क्या??

सरिता- नहीं तो. वो मैं कह रही थी की आप क्या करते हैं.

राघव- वो अपना बस एक छोटा मोटा बिज़नेस है. बस उसी में लगा रहता हूँ और अपना गुजरा हो जाता है.

सरिता- ऐसा नहीं है राघव जी. कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. काम के प्रति अपनी म्हणत, ईमानदारी और निष्ठां hi उसे छोटा बड़ा बनती है.

राघव- आपकी बात बिलकुल सही है सरिता जी.

इधर निश्छल को ये बात अच्छी नहीं लग रही थी की सरिता राघव से बात कर रही है. लेकिन उसकी मजबूरी ये थी की वो उनके पास जा नहीं सकता था, नहीं तो सरिता फिर से भड़क सकती थी, इसलिए उसने राघव को फ़ोन किया तो राघव ने सरिता से कहा.

राघव- मुझे अब जाना होगा. निश्छल का फ़ोन आ रहा है.

सरिता- हाँ क्यों नहीं.

सरिता का जवाब सुनकर राघव वह से चला गया और सरिता अक्कू को लेकर सविता के पास चली गयी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका महोदय।।

आपकी बात सही है कि सरिता ने जो भी काम अभी तक किया है वो बहुत ही बढ़िया थे। एक ईमानदार पुलिसवाले को जो करना चाहिए उसने वही किया, लेकिन उसके काम करने का तरीका गलत था, उसने कोई भी काम दिमाक से नहीं किया हर काम भावना में बहकर किया।। ऊपर से। अपराधियों के साथ साथ उसने अपने आला अधिकारियों को भी अपना दुश्मन बना लिया है। निश्चल अब उसके प्रेम में पड़ गया है तो वो केवल उसे समझेगा इसके अलावा कुछ नहीं करेगा, लेकिन और जो हैं उनसे सरिता को बहुत बड़ा खतरा है।।

वो तो समय बताएगा कि सरिता कब इस बात को समझती है।

साथ बने रहिए।।
 
धन्यवाद आपका महोदय।

निश्चल ने अपनी बहन की बात मानकर सरिता को झूठे रिश्वत के केस से बरी करवाया।। सरिता को निश्चल का एहसान मानना चाहिए, लेकिन सरिता ऐसा करने से रही।।

दादी को ढूंढने के उसका मुख्य उद्देश्य ये है कि वो जानना चाहती है कि उसने सरिता को क्यों फसाया झूठे केस में। इसका कारण क्या था।

साथ बने रहिए।।
 
अपडेट- 29

राघव के जाने के बाद सरिता अक्कू को लेकर सविता के पास चली जाती है और सविता से कहती है.

सरिता- दी. कल सुबह hi डॉक्टर सभी बच्चियों को डिस्चार्ज कर देंगे. तो मैं सोच रही थी की कल hi मैं उन्हें यहाँ पर छोड़ दूँ. जब तक उनके माता पिता नहीं आ जाते उन्हें लेने के लिए. आपको तो पता है की मुझे पस के काम से कभी कभी बहुत देर हो जाती है कमरे पर लौटने में तो इनके लिए मेरे कमरे में दिक्कत हो जाएगी.

सवी- तो इसमें इतना सोचना क्या. कल सभी बच्चियों को लेकर आ जाना. वैसे भी निशु भी यही कह रहा था की जब तक इनके माँ बाप नहीं आ जाते इन्हे लेने के लिए तब तक मैं उन बच्चियों को अपने ंगो में hi राखु. अगर तुम न भी कहती तब भी मैं उन्हें यहाँ रखती.

सरिता- क्या सर ने ऐसा कहा. चलिए अच्छा है कोई तो अच्छा काम किया उन्होंने. थैंक यू दीदी आपने मेरी इतनी बड़ी परेशानी दूर कर दी.

इतना कहकर सरिता सविता के गले लग जाती है. थोड़ी देर गले लगे रहने के बाद वो सविता से अलग होती है और उससे कहती है.

सरिता- ठीक है दी अब मैं निकलती हूँ. सुबह मुझे पस भी जाना है.

सवी- इतनी रात को तुम कहाँ जाओगी. मैं तुम्हे जाने की परमिशन नहीं दे सकती. ऐसा करो आज रात यही रुक जाओ. मैं निशु और राघव भी यही रुकेंगे. सुबह यही से पस निकल जाना.

सरिता- अरे नहीं दीदी. आप क्यों तकलीफ करती हैं. मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी रात को जाने में. मैं चली जाउंगी.

सवी- अच्छा ठीक है जब तुम जाना hi चाहती हो तो मैं तुम्हे नहीं रोकूंगी, मैं निशु को बोल देती हूँ वो तुम्हे कमरे तक छोड़ आएगा.

सरिता ने जब ये सुना की हिटलर को उसे छोड़ने के लिए सविता भेज रही है तो उसे उस दिन वाली घंटा याद आ गयी जब रात में डिनर के बाद निस्चल उसे छोड़ने घर आया था. सरिता ने सोचा की हिटलर के साथ जाने से अच्छा है की मैं आज रात यही पर रुक जॉन. यही सोचकर सरिता ने कहा.

सरिता- अरे नहीं दी. मैं जा hi नहीं रही हूँ. मैं तो मजाक कर रही थी. मैं तो ये देखना चाहती थी की आप मुझे फिर से कहन्ति हैं की नहीं रुकने के लिए.

सवी- (मुस्कुराते हुवे) हाँ मैं समझ रही हूँ सरिता की तुम मजाक कर रही थी. क्योंकि निशु के साथ तो तुम जाने से रही. अच्छा अब तुम दोनों मेरे साथ आओ चलकर सोते हैं.

इतना कहकर सविता उसे और अक्कू को लेकर एक कमरे में चली गयी. बीएड पर बैठने के बाद अक्कू ने सरिता से कहा.

अक्कू- क्या हम यहाँ पर रहेंगे दीदी.

सरिता- हाँ. कल से आप सबको यही पर रहना है. बहुत मज़ा आएगा आप सबको यहाँ पर. यहाँ पर आप सबको खेलने के लिए भी मिलेगा. लेकिन अभी आप सो जाइये. रात बहुत हो गयी है. सुबह जल्दी से उठकर आप खेल सकती हूँ.

अक्कू ने सरिता की बात सुनकर अपनी आँखे बंद कर ली और थोड़ी hi देर में वो सो गयी. उसके सो जाने के बाद सरिता ने सविता से कहा.

सरिता- क्या आप हमेशा रात में यहीं पर रूकती हैं क्या.

सवी- हमेशा तो नहीं, लेकिन जब कभी भी कोई फंक्शन होता है तो मैं यही पर रूकती हूँ. अच्छा अब बहुत रात हो गयी है तुम भी अब सो जाओ.

सरिता- मुझे नींद नहीं आ रही है दी. क्या मैं कुछ देर बहार जाकर बैठ सकती हूँ.

सवी- ठीक है. तब तक मैं भी बहार की स्थिति देख लून.

दोनों बात करते हुवे बहार की तरफ आने लगे. दोनों जैसे hi कमरे के दरवाज़े के पास पहुंचते हैं बहार से कमरे में आ रहे निस्चल से सरिता की टक्कर हो जाती है. दोनों के सर आपस में टकरा गए.

हुवा यूँ था की निश्छल अपने मोबाइल से बात करते हुवे सर निचे किये हुवे कमरे में आ रहा था और सरिता सविता से बात करने में व्यस्त थी, दोनों में से किसी का भी दयँ एक दुसरे की तरफ नहीं था. सर में टक्कर हो जाने से सरिता और निस्चल दोने ने अपना सर पकड़कर कहा.

सरिता- कौन है यार. देख कर नहीं चल सकता है क्या.

निस्चल- कौन है……….

इसके आगे के शब्द उसके मुंह में hi रह गए जब उसने सामने की तरफ देखा. सरिता भी निस्चल से कुछ नहीं बोलती बस अपना सर सहलाती रहती है. सवी ने दोनों से कहा.

सवी- चलो अपना सर एक बार फिर से लड़ाओ.

सरिता- (हैरानी से)- क्यों.

सवी- अगर दोबारा सर नहीं लड़ाया तो पागल कुत्ता काट लेगा.

सरिता- क्या बात कर रही हैं दी. सर न लड़ने से पागल कुत्ता कैसे कटेगा.

निस्चल- अपने दांतो से कटेगा और कैसे कटेगा.

सरिता- (घूरकर) मैंने आपसे पूछा क्या ?

निश्छल- तो तुमको बता hi कौन रहा है. मैं तो दी को बता रहा था.

सरिता- देखो ज्यादा स्मार्ट ban-ne की कोशिश मत करो आप. समझे.


निश्छल- मैं क्यों स्मार्ट बनूँगा. मैं तो बचपन से स्मार्ट हूँ.

सरिता- चुप रहिये आप नहीं तो..

निस्चल- नहीं तो क्या. क्या कर लोगी तुम.

दोनों की तू तू, मैं मैं फिर से शुरू हो गयी. सविता ने बिच में रोकते हुवे कहा.

सवी- बस करो तुम दोनों. जब देखो तब तुम दोनों शुरू हो जाते हो. न जगह देखते हो और न hi समय देखते हो. पहले जो बोलै है वो करो.

सरिता- मैं इन सब बातों को नहीं मानती दी.

निश्छल- (एकदम धीमे से) मत मनो. जब पागल कुत्ता कटेगा तब पता चलेगा.

सरिता- देखिये जो भी बोलना है आपको वो सामने से बोलिये. ऐसे मधुमक्खियों की तरह भिनभिनाना बंद कर दीजिये.

निश्छल- तुम क्या समझती हो की मैं तुमसे डरता हूँ जो तुम्हारे सामने बोलने में मैं थार थार कंपनी लगूंगा.

सरिता- डरते हो तभी तो मक्खी की तरह भिनभिना रहे हो.

सवी- (गुस्से से) बस बहुत हुवा तुम दोनों का बच्चो की तरह झगड़ना. अगर अभी भी तुम दोनों शांत नहीं हुवे तो मैं तुम दोनों को एक कमरे में बंद कर दूंगी. फिर लड़ते रहना दोनों रात भर. कब से कह रही हूँ चुप हो जाओ चुप हो जाओ लेकिन मेरी बात समझ में hi नहीं आती तुम दोनों को.

निस्चल- (एकदम से) मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है कमरे में बंद होने में.

सरिता & सवी- क्या कहा ???

निस्चल- (मन में) अरे यार. ये क्या बोल गया मैं. पता नहीं दोनों क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में. (फिर सवी से) वो…. दी.. मेरा मतलब था की मुझे सर वाला जो मटर है उसके लिए मैं तैयार हूँ.

सवी- अच्छा तुम इसके लिए तैयार हो. मैं तो कुछ और समझी थी.

सवी की बात सुनकर सरिता निस्चल के बगल में जाकर कड़ी हो गयी और अपने सर से उसके सर में हलकी सी टक्कर मर दी और सविता से कहा.

सरिता- अब तो मैंने दोबारा सर लड़ा दिया है. अब तो पागल कुत्ता नहीं कटेगा न.

सरिता की बात सुनकर सविता जोर जोर से हंसने लगी. तभी पीछे से राघव की आवाज़ आयी.

राघव- क्या दी. अभी तक आपकी मज़ाक करने की आदत नहीं गयी है.

सरिता- (छौंकर) मज़ाककक.

राघव- हाँ ये जो अभी दीदी कर रही थी न ये इनकी बहुत पुराणी आदत है. मैं ये सर लड़ने वाली hi बात कर रहा हूँ. दी हमेशा ऐसे hi करती थी. अगर किसी का सर गलती से दुसरे से टकरा जाता था तो दी हमेशा उसका सर दूसरी बार लड़वाती थी. इस चक्कर में कई बात झगड़ा भी हो जाया करता था जब दूसरी बार गुस्से के कारन कोई बहुत जोर से अपना सर दुसरे के सर पर मरता था. ये देखकर दीदी मज़ा लेती थी. ये पागल कुत्ता वुत्ता कुछ नहीं kat-ta. ये तो बस दीदी मज़ाक में बोलै करती थी. अरे पागल कुत्ता काटने से ज्यादा तो दीदी पहले hi उनका सर फोड़वा देती थी.

राघवव की बात सुनकर सरिता सवी की तरफ हैरान होकर देखने लगी थी. उधर निश्छल का कोई फ़ोन आ जाता है तो वो वह से बहार चला जाता है. सरिता के हैरानी से देखने के कारन सवी उससे कहती है.

सवी- अरे सरिता ऐसे मत देखो मुझे. मैंने तो ये मज़ाक सिर्फ तुम्हारा मूड ठिक्क करने के लिए किया था. इसके आलावा मेरा कोई और इरादा नहीं था.

सरिता- कोई बात नहीं दी. अब मैं बहार जा कर बैठती हूँ.

इतना कहकर सरिता बहार आ जाती है और कुछ hi दूरी पर लगी बेंच पर आकर बैठ जाती है. कुछ देर बाद राघव भी वह आ जाता है और बेंच के दुसरे कोने पर बैठ जाता है. बैठने के कुछ देर बाद राघव सरिता से कहता है.

राघव- लगता है आप ने दीदी की बातो का बुरा मन लिया.

सरिता- नहीं राघव जी. मुझे दी की बात का बिलकुल भी बुरा नहीं लगा.

राघव- अगर दी की बात का आपको ब्यूरेन यही लगा तो फिर आप यहाँ पर आकर क्यों बैठ गयी हैं.

सरिता- अरे ऐसी बात नहीं है. आज दी को मैंने पहली बार इतना खुश देखा है. उनको देखकर आज मुझे अपनी छोटी बहन की याद आ गयी. वो भी ऐसे hi हंसती मुस्कुराती रहती है.

राघव- दी ऐसी hi हैं सरिता जी. सबको हमेशा खुश रखने की कोशिश करती रहती हैं. आप मुझे hi देख लीजिये. उनसे मेरा खून का रिश्ता नहीं है. फिर भी वो मुझे अपना भाई मानती हैं. निश्छल से ज्यादा वो मुझे प्यार करती हैं.

सरिता- क्या आप उनके सेज भाई नहीं हैं??

राघव- नहीं सरिता जी. दी से मेरी मुलाकात ंगो में हुई थी.

सरिता- ओह्ह्ह्ह अच्छा. तो आप भी ंगो में काम करते हैं.

राघव- नहीं तो. मैं तो आपको पहले hi बता दिया है की मैं एक छोटा सा बिज़नेस करता हूँ. दरअसल बात ये है की मैं एक अनाथ हूँ. मैं भी इन बच्चों की तरह ंगो में रहता था. वही पर मेरी मुलाकात दी और निश्छल से हुई थी. निश्छल ने मुज्झे अपना दोस्त बन आलिया और दी ने मुझे अपना भाई. आज दी, निस्चल और उनके मम्मी पापा hi मेरे परिवार हैं.

सरिता- ओह्ह्ह्ह. ी ऍम सॉरी, मेरा इरादा आपका दिल दुखने का नहीं था.

राघव- अरे नहीं सरिता जी. इसमें सूर्य्य की कोई बात है hi नहीं. अच्छा अब रात बहुत हो गयी है. मैं सोने जा रहा हूँ. गुड नाईट.

सरिता- गुड नाईट.

इतना बोलकर राघव सोने के लिए चला गया. कुछ देर बैठने के बाद सरिता भी सोने के लिए चली गयी. वो जाकर अक्कू के बगल में लेट गयी और नींद की आगोश में चली गयी. सुबह सरिता की नींद सविता का जगाने से खुली.

सवी- गुड मॉर्निंग इंस्पेक्टर साहिबा. आपको ड्यूटी पर नहीं जाना क्या?

सरिता झाट्ने से अपने आँखे खोल दी और इधर उधर देखने लगी. सरिता ने सवी को देखकर कहा.

सरिता- गुड मॉर्निंग दी. आप यहाँ कैसे दी.

सवी- यहाँ कैसे का क्या मतलब. अच्छा अब समझी. तुम अपने घर पर नहीं हो. तुम मेरी ंगो में हो. अब उठ जाओ.

सरिता- सॉरी दी. मैंने सोचा की मैं अपने कमरे में हूँ और आप सुबह सुबह मेरे कमरे में आ गयी हैं.

सवी- वो सब छोडो. तुमने जो कारनामा किया है उसकी खबर आज भी न्यूज़ पेपर में छै हुई है. हर तरफ तुम्हारे hi चर्चे हैं. सरिता

सरिता- अरे दी. मैंने ऐसा क्या कर दिया.

सवी- अच्छा. तो बछीयो के रेस्क्यू करना कोई आसान काम था क्या. और कह रही हो मैंने ऐसा क्या कर दिया.

सरिता- अच्छा आप उसकी बात कर रही हैं. वो तो मेरा फ़र्ज़ था दी. 8 बज गए हैं मुझे पस भी जाना है तो मैं चलती हूँ अभी. पस से हॉस्पिटल जाकर बच्चियों को लेकर आ जाउंगी मैं. अक्कू को मैं यही पर छोड़ देती हूँ.

सरिता और सविता साथ में hi घर जाने के लिए निकलते हैं. बहार आने के बाद सविता ने एक गाड़ी की रेफर इशारा करते हुवे कहा.

सवी- सरिता राघव कुछ काम के सिलसिले में उसी तरफ जा रहा है मैंने उसे बोल दिया है. वो तुम्हे तुम्हारे क्वार्टर तक छोड़ देगा. वो उस गाड़ी में बैठा हुआ है.

सरिता- ठीक है दी.

इतना कहकर सरिता सविता की बताई हुई गाड़ी की तरफ जाने लगती है. जब वो उस गाड़ी का गेट खोलकर उसमे बैठने लगती है तो उसे उस गाड़ी में राघव की जगह निश्छल बैठा हुआ दिखाई देता है. उसे देखकर सरिता ने कहा.

सरिता- सॉरी. ी थिंक मैं गलत गाड़ी में आ गयी हूँ.

इतना कहकर सरिता बहार निकलने लगती है तो निस्चल ने उसका हाँथ पकड़ लिया और कहा.

निश्छल- तुम बिलकुल सही गाड़ी में बैठ रही हो सरिता. राघव दी को छोड़ने जा रहा है.

सरिता- देखिये मेरा हाँथ छोड़िये. मैं ऑटो से चली जाउंगी.

निश्छल- कही नहीं जा रही हो तुम. अब चुपचाप गाड़ी में बैठो. दी ने बोलै है तुम्हे ड्राप करने के लिए तो मुझे कोई ड्रामा नहीं चाहिए. मैं दी को क्या जवाब दूंगा.

सरिता- दी ने आपको नहीं राघव को बोलै था मुझे ड्राप करने के लिए. इसलिए आप मेरा हाँथ छोड़िये.

निश्छल- अब चाहे राघव को बोले या मुझे बोले. बात तो ये है की तुम्हे ड्राप करना है. अब वो मैं ड्राप करूँ या राघव ड्राप करे.

सरिता- (मासूमियत के साथ) अच्छा मेरा हाँथ छोडिया. मैं कहीं नहीं जा रही हूँ. आप hi मुझे ड्राप करियेगा.

सरिता की बात सुनकर निश्छल को दाल में कुछ कला लगा. वो सोचने लगा की ये जंगली बिल्ली इतनी आसानी से मन कैसे गयी. जरूर कुछ सोच रही होगी. फिर भी निश्छल ने सरिता का हाथ छोड़ दिया. सरिता का हाथ छूटने भर की देर थी की सरिता गाड़ी का गेट खोलकर 9-2-11 हो गयी और रोड की दूसरी तरफ भाग गयी. निश्छल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी और उसने एपनिया आप से कहा.

निस्चल- मुझे पता था की इसके मन में कुछ न कुछ जरूर चल रहा है. आखिर इतनी आसानी से कैसे मान गयी ये. अपनी आदत से कभी बाज़ नहीं आएगी ये लड़की. मुझे इसका हाँथ छोड़ना hi नहीं चाहिए था. जंगली बिल्ली..

सरिता रोड के दूसरी तरफ कड़ी ऑटो में बैठ गयी और अपने क्वार्टर की तरफ चल पड़ी.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
बहुत बहुत धन्यवाद आपका महोदय।।

बचकाना किस बात का लग रहा है महोदय।

आखिर नौकरी के साथ साथ थोड़ा बहुत मस्ती भी चलती है। निश्चल के दिल मे प्यार की चिंगारी लग चुकी है तभी वो सरिता से ज्यादा सख्ती से पेश नहीं आ रहा है।। धीरे धीरे ये बात सरिता के समझ में आ जाएगी। आप इतने ज्यादा अनुभवी व्यक्ति हैं आपको भी पता है कि लड़कियाँ बहुत जिद्दी होती हैं अगर एक बार वो कुछ ठान लेती हैं तो अपने मन का ही करती हैं।।😆😀

ये बात तो सही है कि अब सरिता की जान को खतरा बढ़ गया है। रघु जिसके बारे में बात हो रही है वो सरिता को मारने की कोशिश जरूर करेगा, लेकिन वो कामयाब होता है या नहीं ये तो वक्त ही बताएगा।

ये भी सही है कि ऐसा गैरकानूनी काम करने वाले ऊपर तक हैं। बिना राजनीतिक मदद और आला अधिकारियों से साथ गांठ के ऐसा काम हो भी नहीं सकता। लेकिन सरिता को अभी ये समझ मे नहीं आ रहा है। वो निश्चल से भिड़ी हुई है बिना मतलब के। आगे बहुत कुछ होने वाला है जो सरिता की उम्मीद से परे है।

साथ बने रहिए।।
 
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