अपडेट-13
उधर दोनों बहाने लॉज में पहुँचती हैं और अपने कमरे में जाकर सामान रखकर फ्रेश होती हैं सरिता का मूढ़ अभी भी उसी बात को लेकर उखाड़ा हुवा था. मनीषा उससे बात कर रही थी और वो हाँ हूँ में hi जवाब दे रही थी. जिसे देखकर मनीषा जान गयी की उसकी बहन का मूड अभी भी ख़राब है तो वो हंसी मजाक करने लगी लेकिन सरिता का मूड वैसे hi रहा. जिसे देखकर मनीषा ने कहा.
मनीषा- ये क्या है दिदिया. कब से देख रही हूँ की आप उसी बात को लेकर अभी तक बैठी हुई हैं. जो हो आज्ञा सो हो गया. वैसे भी गलती आपकी hi थी. उस बेचारे को थप्पड़ मरने से पहले एक बार सोचना चाहिए था की मार्किट में कितनी भीड़ थी, गलती से हाँथ लग गया होगा, लेकिन नहीं उसे थप्पड़ भी मारा आपने. फिर भी आपका मन नहीं भरा अभी तक.
सरिता- तू ज्यादा उसकी वकील मत बन. तूने मुझे रोका न होता तो आज मैं उसका वो हाल करती की वो किसी लड़की की तरफ आँख उठाकर भी न देखता दोबारा.
मनीषा- अच्छा बाबा. मुझे माफ़ कर दो. अब तो चिल करो न दिदिया. आप उसे इतनी सिद्दत से याद कर रही हैं कही वो बेचारा हिचकी से hi न मर जाये. आपकी ये आदत बहुत hi ख़राब है. किसी एक चीज़ के पीछे पद गयी तो उसका पीछा hi नहीं छोड़ती आप.
मनीषा ने ये बात मुस्कुराते हुवे कही थी. जिसे sun-ne के बाद सरिता ने उसे गुस्से से देखते हुवे कहा.
सरिता- उसी याद करे मेरी जुटी. अब तू ज्यादा अपनी बक बक मत कर. और चुपचाप बैठ जा.
मनीषा- ठीक है मेरी माँ. आप से तो बात करना hi बेकार है.
सरिता- मुझसे बात मत कर. अपनी किताब निकल कर पढाई कर पहले.
इसके बाद मनीषा कुछ नहीं बोली और अपनी किताब निकल कर पढ़ाई करना लगी. रात में दोनों ने खाना खाया और सो गए. अगले दिन सुबह तड़के सरिता उठी. आज उसके ऑफिस का पहला दिन था और आज उसे ऑफिस ज्वाइन भी करना था तो वो अपने ऑफिस के पहले hi दिन लेट नहीं होना चाहती थी, इसलिए वो उठाने के बाद जल्दी जल्दी बाथ लेकर तैयार होने लगी. मनीषा उसके लिए नाश्ता लेकर आयी और बोली.
मनीषा- बहुत hi प्यारी लग रही हो दिदिया. आज तुम्हारे ऑफिस का पहला दिन है तो जल्दी से नाश्ता करके ऑफिस के लिए निकल जाओ. पहले दिन hi मेरी इंस्पेक्टर दिदिया लेट नहीं होनी चाहिए.
सरिता- हाँ सही कह रही है तू मनीषा. मैं पहले दिन hi ऑफिस में लेट नहीं होना चाहती हूँ. ला जल्दी से मुझे नाश्ता दे.
सरिता जल्दी जल्दी नाश्ता करके मनीषा को अच्छे से रहने की हिदायत देखर अपने ऑफिस के लिए चली गयी. जब सरिता वह पहुंची तो उसका जोरदार स्वागत किया गया. उसके जोइनिंग की खबर किसी को नहीं थी की वो किस दिन आकर ज्वाइन करने वाली है. इसलिए कोई खास तयारी नहीं की गयी थी, लेकिन उसके ऑफिस पहुंचने पर उसका जैसा स्वागत किया गया था.
उसे देखकर उसे ऐसा लग रहा था की वो इस जगह पर पहली बार नहीं आयी है. सरिता को ऑफिस के सभी लोगो से इंट्रोडस करवाया गया. सरिता से सीनियर बस एक hi अफसर थे, रावत सर. बाकि सभी officers/officials उससे जूनियर hi थे. ये अलग बात है की उम्र के हिसाब से बहुत सरे officer/official उससे बड़े थे, लेकिन जॉब में उम्र नहीं पोस्ट बड़ी होती है.
सरिता के निचे काम करने वाले जो स्टाफ थे उसमे sub-inspector मोहित शर्मा, रंजना, विकास कुमार और जावेद अख्तर थे. और असिस्टेंट सुब- इंस्पेक्टर जान्हवी, कुशल और अमित थे. सरिता ने सभी स्टाफ से प्रेम पूर्वक मुलाकात की और अपने काम में लग गयी. पूरा दिन वो अपने केबिन में काम करती रही. छुट्टी होने पर वह लॉज चली गई.
इसी तरह दो दिन गुजर गया. पुलिस स्टेशन में सरिता पूरा मन लगाकर अपना काम करती थी. उसका मन भी पुलिस स्टेशन में लगने लगा. पुलिस स्टेशन (पस) में सभी उसके साथ ाचा बर्ताव करते थे और वह भी सभी के साथ अच्छा व्यवहार करती थी.
दो दिनों में सरिता ने सब के मन में अपनी एक अलग पहचान बना ली थी. सरिता को ऑफिस की तरफ दे उसका यूनिफार्म और रहने के लिए क्वार्टर दे दिया गया. सरिता ने छूती होने के बाद लॉज से अपना सारा सामान अपने क्वार्टर में सिफत किया और अपने क्वार्टर में आ गयी. क्वार्टर पर आने के बाद सरिता ने मनीषा से कहा.
सरिता- मनीषा. अब तुम अपना सामान पैक कर लो. कल तुम घर के लिए निकल रही हो न.
मनीषा- अभी कहाँ दिदिया. काम से काम 2-3 दिन तो और रहने दो.
सरिता- नहीं बहुत रह लिया तुमने मेरे साथ. अब चुपचाप घर जाओ और मन लगाकर पढ़ाई करो. तुम्हे इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आईएएस) की तयारी करनी है. जिसके लिए बहुत म्हणत करनी पड़ेगी. लेकिन तुम हो की पढाई में ध्यान hi नहीं देती हो.
मनीषा- इतनी म्हणत का काम मुझसे नहीं होगा दिदिया. ये पढाई लिखे मेरे बस की बात नहीं है. मैं तो बस एक क्लेअरक की भी नौकरी प् जाउंगी तो उसी में खुश हो जाउंगी. मेरा इतना बड़ा सपना नहीं है दिदिया तुम्हारी तरह.
सरिता- बस बस. तुमसे जब भी पढाई लिखे की बात करो तो तुम्हारी बक बक शुरू हो जाती है. तुम्हारे इसी नेगेटिव थॉट की वजह से तुम्हारा कुछ नहीं होने वाला. कभी तो मेरी बातो को सीरियसली ले लिया करो. हर समय मस्ती मजाक करना सही नहीं होता. कभी तो मेरी बात मन जाया कर.
मनीषा- अरे मेरी प्यारी दिदिया. ये आईएएस, पचस, डॉक्टर, इंजीनियर की पढ़ाई मेरे लिए नहीं बानी है. मैं तो एक अच्छी टीचर ban-na चाहती हूँ. ताकि तुम जैसे कितने लोगो को आईएएस, पचस, डॉक्टर और इंजीनियर बना सकू. बस मैं उठी hi पढाई करुँगी.
मनीषा की बात सुनकर सरिता ने अपना माता पिट लिया और बोली.
सरिता- तुमसे तो बात करना hi बेकार है. तुमसे बात करने का मतलब है पत्थर पर अपना सर पटकना. तुम्हारा इस जनम में कुछ भी नहीं हो सकता है.
मनीषा- मैं तो सोने जा रही हूँ अब तुम भी सो जाओ दिदिया. तुम भी दिन भर काम करके थक्क गयी होगी न.
सरिता- नहीं तुम सो जाओ. मुझे अभी कुछ देर पढाई करनी है. उसके बाद मैं भी सो जाउंगी
मनीषा- ओफ्फोऊ दिदिया. तुम और तुम्हारी पढ़ाई. कितनी ज्यादा पढाई करती हो तुम. चाचा चौधरी ban-na है क्या तुमको.
सरिता- अब ये कौन सी बाला है यार.
मनीषा- क्या. आपको चाचा चौधरी के बारे में नहीं पता. उसे तो सब जानते हैं. इसीलिए मैं कहती हूँ आपसे की कभी अपनी पढाई की किताबो को छोड़ कर कुछ और किताबे पढ़ लिया करो.
सरिता- अपनी बकवास बंद कर और ये बता ये चाचा चौधरी कौन है.
मनीषा- अरे दिदिया. वो कॉमिक्स के चाचा चौधरी और सबु हैं न. जिनका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज़ चलता है. मैं उन्ही चाचा चौधरी की बात कर रही थी.
सरिता- बस तुम्हारा दिमाग इन्ही सब में लगता है. अगर इतनी ध्यान से तुम अपने सब्जेक्ट की पढाई करो तो आईएएस, पचस क्लियर कर सकती हो.
मनीषा- मुझसे ये सब नहीं होगा. आप hi पढ़िए अपने विषय की किताब को. मैं जा रही हूँ सोने. गुड नाईट दिदिया.
सरिता भी उसे गुड नाईट विश करती है और पढ़ने बैठ जाती है. लगभग 1 हॉर्स पढाई करने के बाद वो अपनी किताब बंद करती है और सो जाती है.
सुबह उठकर फिर से वही रूटीन फॉलो करती है. आज सरिता ने अपनी पुलिस की ड्रेस पहनी थी. मनीषा जब नाश्ता लेकर आती है तो अपनी दिदिया को खाकी रंग में देखकर कहती है.
मनीषा- दिदिया. ये खाकी रंग तुम पर बहुत जांच रहा है. तुम बहुत hi प्यारी इंस्पेक्टर साहिबा लग रही हो. कहीं तुमको मेरी नजर न लग जाये.
सरिता मनीषा की बात सुनकर आत्मविश्वास के साथ कहती है.
सरिता- इस खाकी को पहनकर मुझे गर्व का अनुभव हो रहा रहा है. इसे पहन कर मुझे अपनी जिम्मेदारी का बखूबी अनुभव हो रहा है. मैं भगवन से यही प्रार्थना करती हूँ की मैं अपने काम को पूरी ईमानदारी और निष्ठां के साथ करू. मुझसे न्याय करने में कभी कोई गलती न हो. मैं हर उस इंसान की मदद कर सकू जो सही हो. जो मेरे पास अपनी समस्याए लेकर आये. तुम भी मेरे लिए प्रार्थना करना मनीषा.
मनीषा- ये भी कोई कहने की बात है दिदिया. मैं तो तुम्हारे लिए हमेशा प्रार्थना करती हूँ. और मुझे अचे से पता है की तुम अपनी जिम्मेदारी बहुत अचे से निभाओगी और सबके साथ न्याय करोगी. अब चलो जल्दी से नाश्ता करके ऑफिस जाओ नहीं तो देर हो जाएगी.
मनीषा के कहने के बाद सरिता ने मनीषा के साथ मिलकर नाश्ता किया और उसे फिर से पढ़ने की हिदायत देखर अपने ऑफिस चली गयी. सारा दिन ऑफिस का काम करती रही. जो भी उससे बात करता उनसे प्रेम से बात करती और शाम को ऑफिस से अपने कमरे पर वापस आ गयी. अगले दिन सरिता की छुट्टी थी और मनीषा को भी घर वापस लौटना था.
सुबह सरिता न मनीषा को स्टेशन पर अल्लाहाबाद जाने वाली ट्रैन पर बैठा दिया. दोनों बहनो की आँखों में आँशु थे. आज पहली बार वो इतने दिनों के लिए एक दुसरे से बिछड़ रही थी. मनीषा ने डबडबाई हुई आँखों से सरिता से कहा.
मनीषा- दिदिया. मुझे नहीं जाना घर. मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी.
सरिता- तुझे क्या लगता है मैं तुम्हारे बिना यहाँ पर रह पाऊँगी, मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आएगी, लेकिन तुम्हे घर जाना होगा. क्योंकि वह पर मम्मी पापा अकेले हैं. तुम्हे उनके साथ रहकर उनका हौसला बढ़ाना है.
मनीषा- मुझे रोज फ़ोन करना दिदिया. मुझसे रोज़ बात करना. अगर तुमने मुझसे रोज़ बात नहीं की तो मैं चली आउंगी यहाँ पर तुम्हारे पास.
सरिता- ठिक्क हैई. मैं तुझसे रोज़ बात करुँगी. अब अपने आँशु साफ कर ले. तू रट हुवे बिलकुल भी अछहि नहीं लगती.
तभी ट्रैन ने दूसरी सिटी बजे और प्लेटफार्म से रवाना होने लगी. मनीषा ने खिडके से कहा.
मनीषा- अपना ख्याल रखना दिदिया और मुझे रोज़ फ़ोन करना.
सरिता- तुम भी अपना और मम्मी पापा का ख्याल रखना.
ट्रैन के चले जाने के बाद सरिता अपने कमरे पर वापस आयी और खाना खाकर सो गयी. आज का दिन सरिता का उदासी भरा गुजरा मनीषा के चले जाने के बाद. रात में खाना खाना खाने के बाद जब सरिता लेती तो उसे ठिक्क से नींद नहीं आ रही थी. आधी रात तक करवाते बदलती रही. जब उसे नींद नहीं आई तो उसने मनीषा को फ़ोन कर दिया. इतनी रत को मनीषा सरिता का फ़ोन देखकर हड़बड़ा गयी और जल्दी से फ़ोन उठाकर बोली.
मनीषा- Hello. दिदिया. क्या बात है तुम ठीक तो हो न. कुछ हुवा तो नहीं है न तुमको.
सरिता- अरे नहीं. मैं बिलकुल ठीक हूँ. मुझे कुछ भी नहीं हुवा है. बस नींद नहीं आ रही थी तो सोचा तुमसे थोड़ा बात कर लून.
मनीषा- मैं तो दर गयी थी दिदिया. इतनी रात में तुम्हारा फ़ोन देखकर.
इसके बाद दोनों बहाने कुछ देर ऐसे hi बात करती रही. सरिता को अब अच्छा महसूस हो रहा था. थोड़ी देर बात करने के बाद सरिता ने फ़ोन रख दिया और सोने को कोशिश करने लगी. थोड़ी देर में hi उसे नींद आ गयी. देर रात सोने के कारन उसकी नींद देर से खुली.
वो रात में अलार्म लगाना भूल गयी थी. वो जल्दी से बाथरूम में घुस गयी और जल्दी जल्दी नहाधोकर बहार आयी. थोड़ा बहुत नाश्ता बनाया. खाया और पुलिस स्टेशन (पस) का लिए निकल गयी. जब वो पस पहुंची तो वह का माहौल सब कुछ शांत शांत था. पूरे पस में सन्नाटा पसरा हुवा था. सभी अपनी अपनी टेबल पर चुपचाप बैठकर काम कर रहे थे. सरिता ने जान्हवी से पूछा.
सरिता- क्या बात है जान्हवी. आज पस का महुअल बहुत शांत है. सब लोग इतने चुपचाप हैं कोई बात हो गयी है क्या.
जान्हवी (फुसफुसाते हुवे). वो दसप (सर्किल अफसर सिटी) सर ने आज इधर का राउंड लगा दिया है. कितने लोगो की क्लास लगा दी है उन्होंने आज. वो आपके बारे में कई बार पूछ चुके हैं.
सरिता- अच्छा ये बताओ दसप सर का स्वाभाव कैसा हैं. मतलब वो गुस्से वाले तो नहीं हैं न.
जान्हवी- मैडम. दसप सर गुस्से वाले तो नहीं हैं. सबसे अच्छे से बात करते हैं, लेकिन वो अनुशाशन प्रिय हैं. अगर किसी से गलती होती है तो वो उसे छोड़ते नहीं हैं. मुझे तो लगता है की आज आपकी भी खैर नहीं है मैडम आप बहुत लेट ऑफिस आयी हैं. वो तो हम लोगो के आने से पहले hi पस आ गए थे. और आपके केबिन मैं बैठकर आपका इंतज़ार कर रहे हैं.
जान्हवी की बात सुनकर सरिता को ये एहसास हो गया की आज दन्त तो पक्का पड़ेगी. उसने मन में सोचा की मेरी तो किस्मत hi ख़राब है. रोज समय से ऑफिस आती थी तो कोई हाई रैंक अफसर नहीं आता था और आज थोड़ी सी देर हो गयी तो दसप को आज hi आना था. वो अपना कलेजा मज़बूत करते हुवे अपने केबिन की तरफ कदम बढ़ा दिए. अपने केबिन का दरवाज़ा खोलकर देखा तो एक सख्स उसकी चेयर पर बैठा था. उसकी पीठ दरवाज़े की तरफ थी. सरिता ने पूछा.
सरिता- क्या मैं अंदर आ सकती हूँ सर.
सीओ सिटी- जी जरूर आपका hi केबिन है. आ जाइये.
इतना कहकर वो सख्स सरिता की तरफ घूम गया. जिसे देख कर सरिता का मुंह खुला का खुला रह गया. सरिता की आँखे बड़ी बड़ी हो गयी. सरिता का चेहरा देखकर उस सख्स के होंठो पर एक कातिल मुस्कान आ गयी. उस सख्स को देखकर सरिता के मुंह से अनायास hi निकल गया.
सरिता- तुम.........
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..