Pyaar Nafrat or Kismat - Page 15 - SexBaba
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Pyaar Nafrat or Kismat

अपडेट 97



मनु का हंसना और राकेश का हैरान होना अपने आप में वहां देखने लायक tha.jahan बचा अपने माँ बाप का नाम बताकर राकेश को हैरत में डूबा चुक्का था वहीँ …..हैरत का हाल राकेश की साइड से कुछ ऐसा था की …राकेश कभी अपने हाथ में पुलिस की ुनोफ़्फ़िसल सेंड की हुई (ुनोफ़्फ़िसल इसलिए क्युकी जब केस में इन्फ्लुएनएल पीपल इन्वॉल्व होते हैं तब बहुत से pre-caution लिए जाते हैं )पिक को देखता तोह कभी उस बचे को ….

बचा अपने में मगन था ..पैर मनु ने पास खड़े उस बचे को पिछ से मैच किया और राकेश के कंधे पैर हाथ रख कर कहा “” तोह सुपरहेरो साब काम से काम इस बचे के maa-baap को बता तोह दो की उनका बचा सेफ है “””

राकेश अपने हैरानी के भवर से बहार आकर बचे को देखता है तब उसका धयान उस ऑटोवाले के तरफ जाता है जो साइड में सोच में गम था …राकेश की वर्दी उस ऑटोवाले को अनजाने में डरा रही थी …



बड़ी अज़ाब है यह वर्दी भी जब इंसान डरा हुआ होता है तब उसकी ढाल होती है यह वर्दी और जब गलत होता है तब उसी इंसान के सामने किसी और मासूम के लिए फिर ढाल होती है यह वर्दी …


खैर इधर मनु का धयान इस समय बचे से ज़ादा उस ऑटोवाले के चेहरे पैर लगा हुआ था …जो जाने अनजाने में उसके और राकेश के हीरो वाले प्लान का सबसे बड़ा चंडीड- गवाह था …

राकेश ने जब मनु की बात सुनी तोह हु अपने भंवर से बहार आया और उसने उस बचे से थोड़ी बात की बचा (आप सोच रहे होंगे की बचा कितना बड़ा होगा तोह यहाँ इतना समझ लो की डोरेमोन कार्टून समझने लायक होगा …उस बचे की आगे यहाँ मशन नहीं कर रहा हूँ उसकी सिर्फ एक वजह है की अगर उस बचे की आगे मेंशन की तोह स्टोरी में फिर से आगे की स्ट्राइक आ जाएगी सो आप अंदाज़ा लगा सकते है की बचा कितना बड़ा होगा … )

खैर राकेश ने उधर पिक से रिलेटेड नंबर पैर कॉल करके इन्फॉर्म कर दिया की बचा उसके पास सेफ है …और उसके कॉल कट करते hi जज साब की डिअर वाइफ उर्फ़ बचे की माँ का कॉल राकेश के पास आया जिसके बाद राकेश से बचे की माँ ने उससे बात करवाने की कहा …

बचे ने अपनी माँ से बात की और उसके बाद राकेश को फ़ोन (मोबाइल) दे दिया ..राकेश ने बचे को साफल्य उनके पास लेन को कहा और कॉल कट कर दिया …और मनु के पास आकर उसने धीरे से कहा “ बचे को उसके घर छोड़ना है उसकी माँ से बात हो चुकी है अब ???”

राकेश ने अधूरी बात कही थी उस ऑटोवाले को देखकर मनु उसके अधूरी बात का मतलब समझ गया था …सो उसने उस ऑटोवाले को देखा और राकेश से धीरे से कहा “ सुपरहेरो तोह आप बने हैं इंस्पेक्टर साब अब अपने फैन को बिच में क्यों ला रहे हो ?? वैसे भी यहाँ काम जो आपके तेवर से हो सकता है उसके लिए मेरा म्हणत करना सही नहीं होगा “ मनु का इशारा राकेश समझ चुक्का था …

राकेश ने ऑटोवाले को एक कड़क तरीके से देखा जिससे ऑटोवाला अंदर तक कांप गया ..और उसके बाद राकेश ने उसको बुलाकर पूछा “ हाँ तोह तुमने यहां क्या देखा ???”

ऑटोवाला बेशक बकचोद किसम का इंसान था पैर जब सामने वर्दी में एक इंस्पेक्टर कड़क आवाज़ में कुछ पूछता है तब अचे से अचे कानून माननेवाला इंसान भी डर जाता है सो उसका भी ठीक वैसा hi हाल था …

ऑटोवाला दोनों हाथ जोड़ कर “ साब .. मैं बहुत गरीब आदमी हूँ मुझे इनसब से कुछ लेना देना नहीं है …आप दोनों बड़े लोग हो जो कहोगे मैं वही मान लूंगा बस मुझे यहाँ से जाने दो ..”

राकेश “ तोह ठीक है यहाँ तुम थे hi नहीं और न तुमने कुछ देखा और न कुछ सुना ..और अगर भूले से भी किसी से कुछ कहा या कुछ कहने की कोशिश की तोह …” राकेश ने बात अधूरी छोड़ दी पैर उसकी अधूरी बात का मतलब हु अचे से समझ चुक्का था …

पैर रही सही कसार मनु ने उसके कंधे पैर हाथ रखकर पूरी कर दी मनु ने ऑटोवाले से बड़े hi मुस्कराहट भरे तरीके से कहा “ बात यहाँ गरीब या अमीर इंसान की नहीं है तुमने हर बार गरीब का राता लगा कर रखा मैं सुनता रहा ..जब इस मासूम बचे को बचने में और तुमको हीरो बैंकर आगे आने को कहा तुमने उस्मने भी अपना पीछा छुड़ाया तब भी मैंने कुछ नहीं कहा ..पैर इसके बाद जो कुछ भी तुमने इंस्पेक्टर साब ने कहा है उसमे भी गरीबी का रट्टा लगा लिया ..तोह एक बात अचे से समझ लो की आजके बाद न तुम हमदोनो को जानते नहीं हो और न hi इस शहर में नज़र आओगे और अगर इस शहर में नज़र आये और तुमने मुँह खोला तोह इतना अचे से समझलो की पहले इंस्पेक्टर साब से मुलाकात होगी तुम्हारी जो शायद तुमको अछि न लगे …और उसके बाद शायद मुझसे मिलना पड़े हु भी आखिरी बार ..आगे तुम समझदार हो …” मनु ने भी हलके और भरी दोनों तरीके से उसको समझा दिया था ..की राकेश से हु कानूनी तरीके से बच नहीं पायेगा और अगर बचा तोह फिर मनु का हु इतने हथियार बंद kidnaper’s का दुनिआ छोड़ जाना उसके आँखों के सामने था ..जिसके बाद शायद hi ऑटोवाला मनु को दुबारा अपने सामने देखना चाहेगा …

मनु के और राकेश के कड़क तरीके का अंदाज़ देखकर ऑटोवाला समझ चुक्का था की उसकी छुपी hi उसकी उम्र की लाइन चलने की गारंटी थी …सो उसने हाथ जोड़ कर “ साब आपने जो कहा है वही होगा मैं आप दोनों को नहीं जानता हूँ और न आप दोनों से कभी मिला हूँ ..और आज hi शहर छोड़ दूंगा “

उसके बाद हु ऑटोवाला वहाँ से निकल गया… राकेश मनु और उस बचे के साथ अपनी गाड़ी की तरफ चलने लगा ..

राकेश “ मनु पैर तुमको नहीं लगता उसको शहर छोड़ने के लिए कहना ज्यादा नहीं हो गया ..”

मनु “ सुपरहेरो साब यह आपके और हमारी सेफ्टी के साथ उस ऑटोवाले की अपनी सेफ्टी के लिए ज्यादा जरूरी है …और इतनी कीमत उस लिहाज़ से ज्यादा नहीं है ..”

राकेश “ पैर “

मनु “ पैर वॉर कुछ नहीं हु बड़बोला इंसान है ..और बड़बोला इंसान जितना आपके बारे में काम जाने उतना आपके लिए सही है …और क्युकी आज नहीं तोह कल को बड़बोला इंसान खुद की ज़बान की गुलामी के चलते किसी को कुछ भी बक देगा तब उसकी सिर्फ ज़बान हिलेगी पैर दिखात हम दोनों को होगी …सो जोभी मैंने किया सोच समझ कर किया ..और वैसे भी फैसले को लेने और फैसले को अप्लाई हमेशा सख्ती से hi किया जाता है वर्ण फैसला की कीमत सही नहीं हुआ करती और कभी कभी सकती करनी पड़ती है वैसे भी उसको पुरे रस्ते मैंने अचे से नोटिस किया था ..वह अपनी ज़बान का गुलाम है और जो इंसान ज़बान का गुलाम होता है हु जितना काम आपके सामने आये उतना ाचा …तुम ज़ादा मत सोचो …”

राकेश समझ गया मनु के सख्त रुख के पीछे का मतलब समझ गया tha..ab दोनों राकेश के गाडी में बैठे और चल दिए उस बचे के घर की तरफ ..

पैर रस्ते में मनु ने राकेश से कहा “ हीरो साब इसको (बचे को) तोह आप अकेले भी छोड़ सकते हैं पैर प्लीज पहले मुझे कोर्ट में छोड़ दो वहां अभी मुझे होना चाहिए …क्युकी उन्दोनो (जस और नीता) को थोड़ी देर जाने का बोलकर निकला था ..पैर रस्ते में यह सब हो गया ..सो प्लीज मुझे पहले ड्राप कर दो ..”

राकेश वैसे तोह बोलने को था पर ज्यादा कुछ नहीं बोलै और उसने गाडी कोर्ट की तरफ मोड़ दी ..

उधर जज साब (बचे के पिता ) अपने चैम्बर में बैठे हुए सोच में गम थे की उनके बेटे का क्या हुआ होगा ??

क्युकी बचे की माँ को तोह राकेश ने बता दिया था ..पैर उसकी माँ जज साब को बताना चाहती थी पैर क्युकी उनको टाइम मिला नहीं (इसमें उनकी इंटेंशन थी की जैसे hi टाइम मिलेगा हु सबसे पहले अपने हस्बैंड को इन्फॉर्म करदेंगी की उनका बीटा सेफ है ..पैर जॉब इस जॉब और चाहते हुए भी हु कॉल नहीं कर पायी) सो जज साब सोच में गम थे ..की उनका बीटा जो आगे में छोटा है कहाँ और किस हाल में होगा ??

पैर काम से न कोई बच पाया है न hi इस bhaagm-bhaag भरी दुनिआ में पॉसिबल है सो जैसे hi उनके केस का टाइम हुआ हु न चाहते हुए भी अनमने मैं से बहार चलने लगे ..

जज साब का दिल इस समय ऐसा कर रहा था की सब कुछ छोड़कर हु कैसे भी अपने बेटे और बेटी को देख पते ..पैर यह पॉसिबल नहीं था ..सो बड़े hi बेमानन से हु उठे ..और अपने चैम्बर से बहार निकले ..

और मैं में सोचते हुए चलने लगे की उनका बीटा इस भीड़ भाड़ भरे शहर में दिन दहाड़े कैसे गायब हो गया ??

की जज साब आगे चलने लगे पैर पीछे से उनको एक आवाज़ आयी “ पापा …पापा “

जज साब को लगा उनके कान बज रहे हैं उनको लगा की उनका बाप का मैं उनको उनके बेटे की आवाज़ सुना रहा है ..सो बेचारे उस आवाज़ को अनसुना करके आगे चलने लगे ..

पैर आवाज़ फिर आयी “ पापा …..पापा “ जज साब का एक बाप का मैं अब भारी हो चला था ..एक सख्त इंसान एक सख्त जज साब जिनके एक फैसले से लोगों के जीवन की दिशा बदल जाया करती थी ..उनका आज बुरा हाल था …उनका dil-o-dimaag आज हर उस maa-baap का दर्द समझ सकता था जिनके बचे किडनैप हो जाया करते थे ..और पैसे और जमीन जायदाद देने के बावजूद भी जिन्दा नहीं मिला करते थे ..क्युकी जज साब एक क्रिमिनल माइंडेड पर्सन को अचे से समझा करते थे ..और हु यह भी समझा करते थे की अक्सर किडनैपिंग के केस में किडनैपर्स जिसको किडनैप किया जाता है उसको ज़िंदा मुश्किल से hi छोड़ा करते थे इसकी कई वजह है जिनमे से एक वजह किडनैपर्स की अपनी पहचान जिसका किडनैप हुआ है हु न बता दे इस वजह से उसको ज़िंदा छोड़ना पॉसिबल नहीं हुआ करता है ..और अक्सर जिनको कुछ सबक सीखने के लिए किडनैप किया जाता है उसतरह की किडनैपिंग में भी …अपना सबकुछ देने के बाद भी ाक्सुसेड (किदनपेड़ पर्सन) को ज़िंदा नहीं छोड़ा जा सकता है ..सो एक क्रिमिनल साइकोलॉजी को समझने वाला इंसान बखूबी समझ सकता है …सो जज साब अंदर से बहुत साड़ी ुधिद्बुण में थे ..जिनका दिल और दिमाग अभी अपने आप में उलझा हुआ था …जिनकी आत्मा बस अंदर से अपने बचे की दुआ मांग रही थी की कैसे भी उनका बचा सही सलामत उनको मिल जाये …

और ऐसे हालत में इंसान अक्सर िल्लुसिओं का शिकार हो जाता है सो उनके कानो और दिलो दिमाग पे अपने बेटे का ख़याल हावी था ..

पैर यह आवाज़ और तेज़ी से सुनाई देने लगी thi…judge साब ने खुद पैर बड़ी मुश्किल से काबू किया हुआ था ..आज उनका मैं हर किडनैपर को और हर क्रिमिनल को दुनिआ से मिटा देने का कर रहा था ..पैर न तोह सब क्रिमिनल उनके कोर्ट में उनके सामने पेश थे और नहीं सब क्रिमिनल को सजा देना उनके अभी बस में था ..सो उनके दिल की छटपटाहट एक बाप hi समझ सकता है जिसने यह सब फेस किया होगा ..

पैर “” पापा ….पापा “” की आवाज़ जज साब को इस टाइम कितना दर्द दे रही होगी इसको तोह जज साब का दिल hi बता सकता है …

सो जज साब अपने ख्यालों में खोये हुए चलते जा रहे थे की अचानक से उनके पीछे किसीने आकर उनको पीछे से पकड़ा जिसको जज साब के साथी अर्दली (जो जज साब के साथी होते हैं उनको आपने देखा होगा मूवीज में दरबान की तरह दिखते हैं जबकि असल ज़िन्दगी में सिक्योरिटी के लोग जज साब के साथ होते हैं जिनको सिक्योरिटी न कहकर कभी कभी अर्दली भी कहा जाता है .. )क्युकी यहाँ जज साब चौके तोह सिक्योरिटी वाले ने भी पीछे पलट कर देखा तोह स्कूल ड्रेस में एक बचा जज साब को रोक रहा था …

बचे के पीछे पीछे राकेश और मनु आ रहे थे क्युकी राकेश का धयान हल्का सा चुक्का तोह बचा भागने लगा था और अनजाने में hi हु अपने बाप तक आ चुक्का था तोह मनु और राकेश उसके पीछे भागते हुए आये ..

जज साब को पहले तोह यकीं hi नहीं हुआ की उनका बीटा उनके सामने किसी चमत्कार की तरह उनके सामने आ चूका था …

राकेश ने जज साब को सोच में गम देखा तोह जज साब से कहा “ सॉरी सर मेरा ध्यान कहीं और था सो यह बचा गलती से आपको तंग कर रहा है आईएम सो सॉरी सर …चलो बीटा आपको घर भी छोड़ना है आपकी मम्मी ने क्या कहा था याद है न आपको घर पैर चलना है आपकी मम्मी और पापा घर पैर आपका वेट कर रहे होंगे …”

राकेश ने बचे को जज साब से अलग करना चाहा ..तोह बचा बोलै “ अंकल मुझे पापा के साथ hi घर जाना है ..मम्मी से बाद में मिल लूंगा …”

जज साब जो अभी तक ठगे से खड़े थे उन्होंने अब अपने बचे को गॉड में उठा लिया और उसको अपने सीने से लगा लिया और बचे से बोले “ हाँ बीटा मम्मी से यहाँ से फ्री होकर दोनों बाप बेटे साथ में मिलेगें ok ना …”

राकेश और मनु के साथ बाकी सब हैरत में जज साब को देख रहे थे …जज साब ने जी भरकर अपने बचे को सीने से लगाकर अपना प्यार दिखाया ..

(बहुत से लोग सोच रहे होंगे की जब जज साब की सिक्योरिटी वाले उनके साथ रहते हैं तोह उनको कैसे नहीं पता की उनका बीटा दीखता कैसा है ..तोह क्लियर कर दूँ सिक्योरिटी ऑफिस की अलग और घर की अलग होती है मैं ऑफिसियल ंद पर्सनल सिक्योरिटी बोथ अरे डिफरेंट फॉर सिक्योरिटी पर्पस ..सो don’t गेट तो कन्फ्यूज्ड आईटी..)

जज साब राकेश से “ थैंक यू मैंने तोह बहुत कुछ सोचा था ..की पता नहीं कैसे और कहाँ और पता नहीं किस हालत में अपने बचे को देखूंगा पैर थैंक यू की आपने मुझे मेरे बचे से मिलवा दिए ..”

राकेश “ सर विथ देय रेस्पेक्ट थिस इस आवर ड्यूटी तो सर्वे पीपल लिखे ु ..आपको थैंक्स कहने की ज़रूरत नहीं है सर यह तोह हमारा काम है ..”

जज साब “ नहीं यह आप भी जानते हैं और हम भी की अक्सर किडनैपिंग में क्या होता है ..पैर आपका यह मुझपर एहसान है की मेरा बचा सही सलामत है …सो लेट में प्रॉपरलय थैंक यू ..”

राकेश “ सर कैसी बात कर रहे हैं आप और हम अलग नहीं हैं दोनों hi कानून के मुलाज़िम हैं तोह थैंक्स का तकल्लुफ कैसा .प्लीज सर लेट में क्लियर माय साइड थिस इस आवर ड्यूटी …सो don’t वोर्री अबाउट आईटी..”

जज साब कुछ सुनने को तैयार नहीं थे ..और राकेश मन करने में लगा हुआ था ..तो ऐसे में मनु ने धीरे से राकेश को उसके कंधे पैर हाथ रखकर रोका ..जिसे जज साब ने अचे से नोट किया मनु के इशारे पैर राकेश भी जज साब की बात मान गया … और बातों में तय हुआ की यहां केस निबटा कर राकेश उनके घर जायेगा जहाँ उसको जज साब एक ट्रीट (फॅमिली ट्रीट ) देकर प्रॉपर वे में थैंक्स कहेंगे ..

राकेश क्युकी अकेला रहता था तोह उसके लिए यह फॅमिली ट्रीट अब थोड़ा सा उनकंफर्टबले सा था ..ऐसे में उसने जज साब को अपने साथ मनु को लेन के लिए राज़ी कर लिया ..

इधर यह सब बातें चल रही थी की जज साब को केस के लिए जाने का बुलावा आया … बचे को उन्होंने सिक्योरिटी और राकेश के साथ भेज दिया …अब क्युकी मनु वहां आया था नीता मम के केस के लिए सो हु उनके पास जाने के लिए कॉल करके उनसे पूछने लगा की कोर्ट नंबर (कोर्ट रूम नंबर ) कौनसा है ..और मनु को उन्होंने नंबर बताया तोह मनु उस रूम की तरफ चल दिया ..

मनु जब उस रूम में गया तोह हु थोड़ा हैरान भी हुआ क्युकी जज साब उसी रूम में थे जिस रूम का नंबर उसको मिला था ..जज साब का भी शामे रिएक्शन था ..

खैर केस शुरू हुआ तोह क्युकी जज साब के सामने सब कुछ मौजूद था मीन्स केस की डिटेल्स तोह उनके समझ में सब कुछ आ गया की कैसे नीता मम के साथ वैस्यत को लेकर केस था मीन्स जज साब एक्सपीरियंस से समझ गए की प्रॉपर्टी डिस्प्यूट में कहाँ और क्या लोचा है ..पैर क्युकी उनको वहां मनु का कनेक्शन समझ नहीं आया तोह उन्होंने इस पैर ज्यादा ध्यान भी नहीं दिया ..और क्युकी यहाँ एक साइड से hi आर्गुमेंट थी मीन्स नीता मम के भाई का साइड रखने के लिए वहां कोई नहीं था …सो जज साब को जग्गू अंकल का बीटा कन्विंस करने में लगा हुआ था की डिस्प्यूट को एक्वीरे करने का स्टेटमेंट कोर्ट हैंडओवर करदे ..

सिंपल भाषा में मैं मटर यह था की केस जब कोर्ट में चलता है तोह एक तरफा सुनवाई नहीं हुआ करती दूसरा साइड भी कोर्ट सुनता है ..और अगर दूसरा साइड वहां मौजूद न हो तोह ऐसे में वहां सुनवाई को अगली डेट दे दी जाती है ताकि दूसरा साइड भी क्लियर कर सके …और यहाँ क्युकी जज साब अचे से समझ रहे थे केस की फाइल देखकर की वसीयत के हिसाब से नीता हिस्सा क्लेअर्ल्य था पैर क्युकी कोर्ट का प्रोसेस होता है सो जज साब ने लंच के बाद सुनवाई करने को कहा और अपने चैम्बर में चले गए ..

इधर मनु और रिया और राज के निकलते hi सुमन को उसके मायके यानि उसके बाप के घर से कॉल आया की उसके बाप और भाई इस दुनिआ में नहीं रहे …और जैसा की सुमन को पहले hi यह सब पता था सो उसने फ़ोन पैर hi रोना धोना शुरू कर दिया जिसके बाद जगन भी उठा और सुमन का रोना धोना सुनकर फ़ोन ले लेता है ..जहां उसको पता चलता है की उसका ससुर और उसका साला अब इस दुनिआ में नहीं रहे ..

और क्युकी रिस्तेदार दूर से आने बाकी थे सो अंतिम संस्कार अगले दिन का तय हुआ था …सुमन को अंदर से बेशक़क़ इतना दुःख नहीं था पैर क्युकी जगन सामने था सो उसका रोना धोना ज़ोर शोर से ba-dastoor ज़ारी था ..

इधर जज साब जैसे hi अपने चैम्बर में आये तोह उन्होंने राकेश से पूछा की उसका दोस्त मनु वहां केस में क्या कर रहा है???

तोह राकेश ने बताया की यह केस उसकी मुँहबोली माँ का है ..राकेश ज्यादा कुछ बताने में हिचक रहा था ..पैर उसकी यह हिचक ने जज साब का शक थोड़ा और पक्का कर दिया की गड़बड़ कुछ तोह है …

पैर जब जज साब सोचने लगे तोह राकेश ने जज साब को कहा की खुद मनु hi उनको क्लियर कर देगा और उसने मनु को मस्सगे करके वहां बुला लिया ..

जज साब ने केस को लेकर मनु से पूछा की उसका क्या रोले है इस बारे में तोह मनु ने उनको क्लियर कर दिया की हु सिर्फ नीता मम को उनका हक़ दिलवाना चाहता है ..और क्युकी इसी जायदाद के चलते नीता और खुद राकेश किडनैप हो चुके थे तोह ऐसे में मनु ने सिर्फ नीता का किडनैप बताया ..क्युकी यहाँ अगर हु राकेश का किडनैप बता देता तोह जज साब और उनकी वाइफ के सामने राकेश का हीरो बनाने का प्लान मनु का खुल जाना था …

सो मनु ने सिर्फ जितना ज़रूरी था उतना बताया ताकि बाकी चीज़ अगर खुले तोह उसको कण्ट्रोल कर सके ..जज साब राकेश और मनु की अंडरस्टैंडिंग देखकर हैरान थे ..पैर उन्होंने दोस्ती समझ कर इग्नोर कर दिया ..पैर जब नीता के किडनैपिंग का मामला उनके सामने आया तोह हु समझ गए की जागु का बीटा और यहाँ यह सब एक तरफ़ा केस क्यों चल रहा है …

सो लंच के बाद उन्होंने एक नोटिस जारी करवा दिया नीता के नाम पैर अगर किसी को ऑब्जेक्शन हो तोह केस को कंटिन्यू किया जा सकता है और अगर नहीं तोह वैसे भी वैस्यत के हिसाब से नीता एक लौटी मालिक तोह है hi …

सो जैसा होना था हुआ और उसके बाद कोर्ट में नीता के बाद केस आया अन्थोनी और फरहान के बन्दों का अब क्युकी जज साब पहले से भरे बैठे थे ..उनका सकत रवैया पहले से बदनाम था और क्युकी उनकी ईमानदारी भी कुछ ऐसी थी की उनके फैसले पैर हायर कोर्ट भी हमेशा एग्री रहा करते थे …सो जज साब ने जैसे पहले से hi तय किया हुआ था …केस क्युकी एट्रोसिटी से भरा हुआ था सो ऐसे में उन्होंने उनसब को पुलिस रिमांड के बाद (पुलिस रिमांड में पहले से hi थे हु सब )सीड के लिए रेफेर कर दिया ..जिसके बाद अन्थोनी ने तोह सर पकड़ लिया की उसके बन्दे हाथ में आते आते और दूर हो गए …पैर उससे बुरा हाल तोह फरहान का था ..जिसके समझ में अभी तक यह नहीं आ रहा था की …इतना सब प्लानिंग के बाद भी फ़ैल हुआ कैसे और उसके किडनैपर आखिर गए तोह गए कहाँ …

अब फरहान को क्या पता उसके किडनैपर चेले अब उसको तोह क्या किसी को कभी नहीं मिलने वाले क्युकी मनु उनको वहां बेहज चुक्का था जहां से कोई वापस नहीं आता …

जहाँ फरहान और अन्थोनी अपना सर पिट रहे थे गुस्से और टेंशन में वहां जज साब के घर का चिराग आज ज़िंदा बच गया था मनु के वजह से …उसने खुद कहाँ सोचा होगा की किस्मत ने खुद उसको जज साब के बेटे को बचने के लिए वहां भेजा होगा ..पैर मनु ने वहां भी अपने काम का सारा सक्सेस हीरो बनाकर राकेश को दे दिया था ..

जैसे hi इधर नीता का नोटिस आया उधर से मनु ने जैसा सुबह प्लान किया हुआ था ..नीता और जस को कोर्ट से सिद्ध वापस जगन के घर भेज दिया …और खुद राकेश के साथ रुक गया क्युकी जज साब के साथ जाना था …वैसे मनु जज साब के घर जाने में ज़रा भी इंटरेस्टेड नहीं था ..पैर जब राकेश ने कहा तोह उसके साथ जाने को राज़ी हुआ उसकी दो वजह थी ..एक राकेश अपने से बड़े और एक्सपीरियंस लोगों के बिच में उनकंफर्टबले न हो जिससे मैं फोकस में राकेश hi हीरो रहे और दूसरा राकेश वहां गड़बड़ न कर दे …

सो जैसा तय हुआ था ..यह दोनों शाम होते hi जज साब के घर चल दिए ..रस्ते में hi मनु को विरंदा का मस्सगे आया की राज और रिया उसके फार्म हाउस पैर hi हैं रेतुर्न में मनु ने भी उसको मस्सगे में कुछ लिख दिया …जज साब की कार अपने रफ़्तार से घर की तरफ जा रही थी ..


अब जज साब के घर पैर पुलिस वाली बीवी और उसके बाद फार्म हाउस पैर राज और रिया विरंदा और उधर जगन और सुमन के लिए अगले दिन हिरेन और धीरेन का अंतिम संस्कार …यहां यह सब एक चीज़ें मनु को लेजा कहाँ रही हैं यह तोह सिर्फ वक़्त और किस्मत को hi पता है …….:हिंट:
 
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