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तो दोस्तों जैसा की अब तक की कहानी में आपने देखा कैसे प्रीति अपने भाई सनी की तरफ आकर्षित होने लगी है और अब उसके भाई की कल्पना और ख्यालो से hi अपने यौवन में गर्मी का एहसास करने लगती है और साथ hi सनी को अपने पास महसूस करने के लिए अब उसके पसंद के कपडे यहाँ तक की ब्रा और पंतय भी भी उसकी पसंद की पहनने लगी है.
इतना सब कुछ होने के बाद भी फिलहाल प्रीति के दिल और दिमाग में एक जंग छिड़ी हुई है और अब भी वप इस पशोपेश में है की क्या उसका सनी की तरफ इस तरह आकर्षित होना और उसके ख्यालो से अपने शरीर में इस तरह एक्ससिटेमेंट महसूस करना सही है या नहीं, लेकिन अब जवानी की इस कामुक अवस्था में जहा प्रीति ने अब तक अपना यौवन सहेज कर रखा था वो सनी के ख्याल मात्रा से hi भांग होने के लिए मचलने लगा था और आज रात भी प्रीति के साथ कुछ ऐसा hi होता है....
रात में अपने बिस्तर पर लेती हुई प्रीति जिसकी आँखों में नींद की बजाय उस वक्त टेरेस पर सनी के साथ हुई मस्ती भरी बात चित और मस्ती के ख्याल घूम रहे थे उनके बारे में सोचते हुए, चेहरे पर एक हसीं मुस्कराहट लिए, " उफ़ क्या हो रहा है मुझे ये आजकल, क्यों में सनी की तरफ इस तरह से खींची जा रही हु, ".
और हर एक बात को वापस यद् करते हुए, उफ्फ्फ मेरा भाई आज इतने फ्रैंकली मुझसे ये बात पूछ रहा था की उसके द्वारा खरीदी हुई ब्रा पंतय में उसकी बेहेन कैसी दिखाई देती है, अब उसे कैसे और क्या बताती मैं, जब से उसने मुझे ये ब्रा पंतय दिलाई है और मेने इनको पहना है, ये सोच hi मुझे इतना गरम महसूस करवा रही है की बता नहीं सकती हु....
उफ्फ्फ बातो बातो में और मस्ती में उस दिन शॉपिंग के वक्त मेने उससे कह तो दिया की मुझे अपनी गफ समझ ले लेकिन में ये कैसे भूल गयी की गफ बनने के बाद एक लड़के को लड़की भोत सरे हक़ दे बैठती है, जैसे की सनी मुझसे वो साडी बाटे पूछ रहा है.... वैसे अगर सनी सच में मुझे अपनी गफ बना ले तो बुरा भी क्या है, इतना हॉट एंड हैंडसम लड़का मेरा बर्फ होगा, कैसे लड़किया मर रही है उसे अपना यार बनाने के लिए और मेरे साथ तो वो इसी घर में है फिर क्यों में खुद को नहीं आगे बढ़ा प् रही.
एक तरफ जहा दिल में इतने सरे अलग अलग विचार चल रहे थे वही दिमाग ये भी प्रश्न कर रहा था की, क्या सनी के मन में भी मेरे लिए कुछ है या वो बस मस्ती में hi मुझसे ये सब बाटे कर रहा था, कुछ करने से पहले ये जानना भी तो जरुरी है न....
और तभी प्रीति को पता भी नहीं होता है और अपने भाई सनी के बारे में सोचते हुए आज फिर उसके हाथ उसकी कमसिन कुंवारी छूट पर पहुंच जाते है जो इस वक्त भाई के बारे में सोच कर पूरी तरह से अपना रास बहा रही थी, जिसे महसूस करते hi प्रीति की जवानी का जोश अपनी चरम पर पहुंच जाता है और तुरंत एक झटके से बिस्तर से उठ कर वो अपने रूम में लगे आयने के सामने पहुंच जाती है...
वह कड़ी हो कर कुछ देर खुद को निहारने के बाद प्रीति मुस्कुराते हुए अपने सरे कपडे उतर भाई सनी द्वारा दिलाई गयी वो रेड ब्रा और पंतय में खुद को देखने लगती है. आज पहली बार प्रीति ने खुद को इतने गौर से देखा था और खास कर जब वो अपनी चूचिया उन रेड ब्रा में कासी हुई देखती है तो एक साथ दोनों हाथो से उन चुचिओ को ब्रा सहित पकड़ कर मसलते हुए, अह्ह्ह्ह सनी देख ले कैसी दिख रही है तेरी गफ और बेहेन इस रेड ब्रा में उम्मम्मम, उफ्फ्फ पता नहीं मुझमे वो हिम्मत कब आएगी जब में हकीकत में तेरे सामने इस रूप में औ और मेरे हाथो की जगह तेरे हाथ मेरे इस गरम तड़पते हुए जिस्म पर पड़े और मुझे मर्दाने स्पर्श का एहसास कराएंगे...
उम्म्म्म अह्ह्ह उम्मम्मम तुझे नहीं पता लेकिन अब तो में खुद चाहती हु की तुम्हारे सामने ऐसे कड़ी राहु उम्मम्मम ओह्ह्ह मेरे भाई... और इसी सोच के साथ प्रीति का एक हाथ पीछे की तरफ जाता है और ब्रा के हुक खोलने की म्हणत कर देता है, ब्रा का हुक खुलते hi एक झटके से वो कैसे मुलायम से चुके पुरे आज़ाद हो जाते है और कप्स से बहार झाकने लगते है.
प्रीति, जिसने आज तक कभी ये सब कामुक क्रीड़ाये करने की सोची भी नहीं थी, खुद को आयने के सामने ये सब करते देख बहुत ज्यादा कामुक महसूस करने लगी थी और साथ hi उसके जिस्म की कामाग्नि उसे और बहका रही थी जिसके एवज में वो उस ब्रा को तुरंत अपने शरीर से अलग कर निचे जमीं पर फेक देती है और दोनों हाथो में अपनी दोनों चुचिओ को भर, निप्पल्स को उंगलिओ के बिच फसा कर मरोड़ते हुए चूचिया मसलने लगती है, अह्हह्ह्ह्ह सनी उम्मम्मम मसल न भाई ऐसे hi मेरी चूचिया उम्म्म्म उफ्फ्फ्फ़ आज तक किसी ने हाथ तक नहीं लगाया है इनको अब नहीं रहा जाता है उफ्फफ्फ्फ़ आकर चूस ले न अपनों बेहेन की चूचिया उम्मम्मम्म ओह्ह्ह सनी प्ललस्सस्स्स्स आजाए भाई...
जिस्म की गर्मी और वासना की आग में जल रही प्रीति को अब कुछ नहीं सूझ रहा था और वो अपना कण्ट्रोल खुद पर से खोटी जा रही थी और इसी कारन एक हाथ उसकी चुकी से हैट कर उसकी पंतय के अंदर घुस चूका होता है, और उसकी उंगलिया इस वक्त उस कासी हुई पनियाई छूट की फको को फैलते हुए असली कौमार्य को छेड़ने लगती है... ऐसा न था की प्रीति के लिए अपनी छूट पर हाथ लगा कर घिसना पहली बार था लेकिन जबसे सनी को ज़हन में रख कर उसका हाथ उसकी छूट पर पड़ा है तो उसके जिस्म में एक अलग hi करंट की लेहेर दौड़ उठती है और आज भी वैसे hi हुआ, पंतय में डेल हुए हाथ की उंगलिओ ने जब उसकी छूट की फैंको को फैला छूट के डेन पर दस्तक दी तो प्रीति की टंगे कम्प सी गयी और आँखे भरी होते हुए अपने आप बंद हो चली और..
अब बस उसकी बंद आँखों के सामने उसके भाई सनी का चेहरा घूम रहा था और दोनों हाथ अपनी अपनी जगह, चुकी और छूट पर अपना हमला बोल रहे थे, उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह सुन्न्नीयीय उम्मम्मम्म प्लस छोड़ड़ड़ड़ूऊ मुझे अह्ह्ह्ह भईईई उम्म्म छोड़ो अपनी छोटी बेहेन को अपने लू डी से, घुसा दो पूरा इस छूट में अह्ह्ह्हह एसससस फुकककक मीटी ओह्ह्ह्हह सुन्न्नीयीय... और इसी विचार से छूट घिसते हुए जब उसकी आँखे एक बार को खुलती है तो वो खुद को आयने में अपने भाई को सोच कर अपनी छूट घिसते हुए देख और ज्यादा बहक जाती है और आयने के करीब आ कर खुद की नजरो से नजरे मिला कर एक तंग उप्पेर की तरफ उठा छूट को आयने के सामने नजर आये ऐसा कुछ दृश्य करके दोबारा घिसने लगती है...
अह्ह्ह्हह सुन्न्नीयीय उम्मम्मम छोड़ो न मुझे अहहहहह उम्मम्मम भांग कर दो मेरे कामुमार्य को अब, नहीं सही जाती मुझसे ये तड़प अह्ह्ह, नहीं रहना मुझे अब और कुंवारी, उम्मम्मम्म प्लस अपनी बेहेन का कुंवारा पैन उससे छिन्न कर उसे भी इस कामुक खेल को महसूस करने की रेहम कर दो अह्ह्ह्हह आओ न सनी छोड़ दो मुझे उम्म्म्म मुझे लुंड चाहिए अब तेरा मेरी इस छूट में बस्सस अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्मम्मम अह्ह्ह छोड़ दे अपनी गफ रूपी बेहेन को.. उम्म्म अह्ह्ह्हहबहहहहहह सनी उम्म्म्म और ऐसे hi इस खेल को कुछ देर और लहेल्ते हुए अपने भाई से छोड़ने के बारे में सोचते सोचते आज भी प्रीति की छूट अपना काम रास बहा देती है और जैसे hi प्रीति की छूट अपना पानी बहती है, प्रीति का जिस्म कंपते हुए हवा में उड़ने लगता है और प्रीति ऐसे hi अधनंगी, जिस्म पर सिर्फ एक पंतय डाली बिस्तर पर गिर पड़ती है और अपनी साँसों पर काबू पाने की कोशिश करती है....
छूट रास निकलने के बाद दोबारा प्रीति उसी पशोपेश में आजाती है, " उफ़ ये मुझे क्या हो रहा है, क्या सनी के बारे में इस तरह सोचना सही है, वो मेरा भाई है और अगर ये सही मन भी लू तो क्या सनी मुझे इस रूप में अपनाएगा, क्या वो मेरे साथ हमारे इस रिश्ते को स्वीकारेगा.... और इन्ही सब बातो को सोच चेहरे पर एक रहत भरी मुस्कान के साथ प्रीति कब नींद की आगोश में चली जाती है उसे hi नहीं पता चलता है...
वह दूसरी तरफ जैसा की हमें पता है की मेरे पापा मीन्स मर मानव के घर पर न रहने की वजह से जब तक वो वापस नहीं लौट आता तब तक महिमा (मेरी मम्मी ) ने मुझे अपने साथ अपने कमरे में अपने बिस्तर पर सुलाने का वडा किया होता है..
तो इसी वजह से अभी इस वक्त में अपनी मम्मी के रूम में उनके बिस्तर पर बैठा हुआ होता हु और मम्मी अलमारी में कपडे ज़माने में व्यस्त होती है. मम्मी ने इस वक्त एक लाइट येलो रंग का गाउन पहना हुआ था, जिसमे में से उसकी काळा रंग की ब्रा और पंतय कुछ हद तक नजर आ रही थी, और मम्मी का मुँह अलमारी की तरफ होने से उनके चूतड़ इस वक्त ठीक मेरी आँखों के सामने होते है और चूँकि गाउन पारदर्शी था तो मम्मी की काळा रंग की ब्रा और पंतय मुझे काफी हद तक दिखाई दे रही थी..
घर की सबसे मस्त और गदरायी औरत का ये रूप देख मेरे लुंड ने एक झटके से फुंकार भरी और पाजामे में hi अपनी औकाद में आने लगा था और मम्मी की गांड देख, " उफ्फफ्फ्फ़ सच क्या गांड है मुनमय की उम्म्म पिछली रात इसी गांड को उप्पेर उप्पेर से रगड़ा था नींद के बहाने, उफ्फफ्फ्फ़ मन तो कर रहा है की अभी मम्मी का ये गाउन उठाऊ और लुंड को एक hi झटके में गांड में उतर दू अह्ह्ह्ह मुम्ममय. " एक तरफ प्रीति है जिसकी जाने को आज सुबह से देख देख कर लुंड की हालत ख़राब हो रही है और एक तरफ मम्मी, उफ्फ्फ दोनों माँ बेटी ने तो लुंड की हालत ख़राब कर रखी है, मन तो करता है की सच में दोनों को पटक के कास के रगड़ दालु ahhhhhhh....Abhi में ये सोच hi रहा था की मम्मी मेरी तरफ पलट जाती है और ये देख में तुरंत वह पड़ा कम्बल अपने पेरो पर दाल देता हु जिससे की मेरे खड़े लुंड पर मम्मी की नज़र न पड़े...
मम्मी, मेरी तरफ मुद कर :- क्या बात है सनी, आज इतना चुप चुप क्यों बैठा है तू..
मैं, कम्बल में से लुंड पर हाथ रख :- कुछ नहीं मम्मी बस ऐसे hi, देख रहा हु आप दिन भर कितना काम करती हो.. थकती नहीं हो क्या अब..
मम्मी :- अरे बीटा में एक हाउसवाइफ हु और मुझे अब काम न करू तो थकन लगेगी..
मैं, असली थकन तो तब लगेगी जब में अपने लुंड से तुम्हारी दुमदार चुदाई करूँगा:- मुझे वो सब नहीं पता, अब सब काम चोरो भोत हो गया, अपने बेटे के लिए भी वक्त निकालो न.. भूल गयी आपने वडा किया था की अब आप मेरे लिए भी पूरा वक्त निकलोगी..
मम्मी:- ओह्हो देखो तो इसको, बीटा इसी लिए तो तुझे अपने पास सुलाती हु, फिर भी अब्ब तक तुझे मुझसे शिकायत है...
मैं:- हैं मुझे शिकायत है क्युकी आज मुझे आपने मेरी किश नहीं दी अब तक..
मम्मी, हस्ते हुए मेरे पास आ कर बिस्तर पर बैठ जाती है, और मेरे दोनों गलो पर एक एक किश करते हुए :- उम्मम्माह उम्मम्माह मेरा बीटा, अब तो खुश है न...
मैं, मम्मी क होठो को गलो पर महसूस कर लुंड को हाथ में दबाते हुए: हाय मम्मी सच्ची जब आप ऐसे प्यार करती हो तो भोत ाचा लगता है..
मम्मी :- ः बढम्याश, चल ाव मेरा काम भी हो गया, अब सो जाते है...
और ये बोल कर हम दोनों रोज की तरह सो गए और में जान करके मम्मी से एक दम चिपक कर सोया था जिससे की मुझे मम्मी के उन मोठे दुधारू स्तनों का एहसास मिलता रहे...
दोस्तों यहाँ में आपको बता दू की महिमा ने उस अनजान कॉलर से मिलने की बात पर हाँ कर दी थी तो
सोते सोते इस वक्त महिमा के दिमाग में ये बात भी चल रही थी की, " क्या मेने उस अनजान कॉलर से मिलने को रज़्ज़ी हो कर सही किया, कही कुछ गलत तो नहीं होगा.. लेकिन उसने ये भी कहा है की ये एक जनरल मीटिंग होगी तो मिलने में हर्ज़ भी क्या है. काम से काम मुझसे ये तो पता चल जायेगा की आखिर कौन है वो घर का hi सदस्य जो मुझे पाने के लिए ये सब कर रहा है और रिश्तो को इस तरह बदनाम करना चाहता है. परागर कही उसने मेरे साथ कुछ गलत करने की कोशिश की तो... "
और इन्ही सब बातो में अपने दिमाग को झंझोरते हुए, " ओफ्फो अब इतना सोच कर क्या फायदा, एक बार मिल तो लेती हु ताकि उससे पिक्सहा छूटे, ये रोज रोज के उसके कॉल करने के नाटक खत्महो जायेंगे और ऐसे कैसे कुछ गलत करेगा वो मेरे साथ... नहीं, और वैसे भी उसकी बातो से भले उसके अंदर की ठरक और हवस झलकती होगी लेकिन वो मुझे खुद का रिश्तेदार होने का दवा करता है तो इतना तो लिहाज करेगा hi की मेरी मर्जी के खिलाफ कोई कदम न उठाये... " और खुद को इस बात की तसल्ली देते हुए वो भी नींद की आगोश में चली जाती है.
वही दूसरी तरफ दूसरे शहर में जहा सीमा, मानव और रागिनी बिज़नेस के किसी काम से गए हुए थे, और हमने देखा की शाम को रागिनी अपने पुराने दोस्त राजीव से मिल कर कुछ खास काम को अंजाम देने की बात करके आयी थी, वो मानव और सीमा जो एक hi कमरे में रह रहे थे उनके पास आती है....
रागिनी :- भैया, जिस कॉन्ट्रैक्ट के लिए हम यहाँ आये है, उसकी ब्रीफिंग मेने आज क्लाइंट को दे दी है और अब कल वो आपसे मिलना छह रहे है ताकि ये डील सिग्न हो सके...
मानव :- थॉट्स ा वैरी फैंटास्टिक न्यूज़ रागिनी, ऑफ़ कोर्स में कल मिल लूंगा उन लोगो से, बताओ कितनी बजे जाना है हमे वह...
रागिनी :- भैया जाना तो 11 बजे है सुबह पर कल में नहीं आ पाऊँगी, वैसे भी मेने सारा पेपर वर्क तो आज रेडी करवा दिया है कल मेरी जरुरत नहीं है और में सोच रही थी की में और सीमा कल थोड़ा मार्किट में भी घूम लेंगे...
मानव, ये सोच की इसी बहाने सीमा रागिनी के साथ रहेगी और में श्वेता को ले कर बहार जा सकूंगा :- ठीक है रागिनी, जैसा तुम्हे ठीक लगे मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है..
सीमा, जो इस वक्त इन दोनों की बाटे चुप चाप बैठे सुन रही थी, मन में विचार करते हुए, " इसका मतलब कल फिर वो श्वेता पापा के साथ अकेली होगी, क्या ये ठीक रहेगा, में नहीं चाहती की पापा उसके साथ अकेले रहे पर अब में बुआ को कैसे ना कहु और वैसे भी कुछ hi देर की बात है फिर तो हम वापस लौट आएंगे hi और मुझे नहीं लगता अब पापा ऐसा कुछ करेंगे, क्युकी यहाँ आये हमे इतने दिन हो गए अब तक उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है, " और यही सोच सीमा भी रागिनी की बात में हामी भर देती है...
इसके बाद रागिनी अपने कमरे की तरफ बढ़ते हुए मन में विचार कर मन hi मन खुश होते हुए " बस कल अब सही मौका है मुझे मेरा प्लान एक्सेक्यूटे करने का " और इसी विचार के साथ वो अपने मोबाइल से राजीव को मैसेज कर देती है, फाइनली वे अरे मीटिंग टुमारो और ये समझ लो की अब कल का दिन पूरा तुम्हारे नाम, और ख़ुशी से अपने रूम म जा कर सो जाती है....
दोस्तों उम्मीद है में वापस सबसे वैसे hi जुड़ पाव जैसे कहानी के शुरू से जुड़ा हुआ हु और आशा करता हु आप अपना साथ बनाये रखेंगे...
अपने कमैंट्स दे कर मुझे मोटीवेट करना न भूले
तो दोस्तों जैसा की अब तक की कहानी में आपने देखा कैसे प्रीति अपने भाई सनी की तरफ आकर्षित होने लगी है और अब उसके भाई की कल्पना और ख्यालो से hi अपने यौवन में गर्मी का एहसास करने लगती है और साथ hi सनी को अपने पास महसूस करने के लिए अब उसके पसंद के कपडे यहाँ तक की ब्रा और पंतय भी भी उसकी पसंद की पहनने लगी है.
इतना सब कुछ होने के बाद भी फिलहाल प्रीति के दिल और दिमाग में एक जंग छिड़ी हुई है और अब भी वप इस पशोपेश में है की क्या उसका सनी की तरफ इस तरह आकर्षित होना और उसके ख्यालो से अपने शरीर में इस तरह एक्ससिटेमेंट महसूस करना सही है या नहीं, लेकिन अब जवानी की इस कामुक अवस्था में जहा प्रीति ने अब तक अपना यौवन सहेज कर रखा था वो सनी के ख्याल मात्रा से hi भांग होने के लिए मचलने लगा था और आज रात भी प्रीति के साथ कुछ ऐसा hi होता है....
रात में अपने बिस्तर पर लेती हुई प्रीति जिसकी आँखों में नींद की बजाय उस वक्त टेरेस पर सनी के साथ हुई मस्ती भरी बात चित और मस्ती के ख्याल घूम रहे थे उनके बारे में सोचते हुए, चेहरे पर एक हसीं मुस्कराहट लिए, " उफ़ क्या हो रहा है मुझे ये आजकल, क्यों में सनी की तरफ इस तरह से खींची जा रही हु, ".
और हर एक बात को वापस यद् करते हुए, उफ्फ्फ मेरा भाई आज इतने फ्रैंकली मुझसे ये बात पूछ रहा था की उसके द्वारा खरीदी हुई ब्रा पंतय में उसकी बेहेन कैसी दिखाई देती है, अब उसे कैसे और क्या बताती मैं, जब से उसने मुझे ये ब्रा पंतय दिलाई है और मेने इनको पहना है, ये सोच hi मुझे इतना गरम महसूस करवा रही है की बता नहीं सकती हु....
उफ्फ्फ बातो बातो में और मस्ती में उस दिन शॉपिंग के वक्त मेने उससे कह तो दिया की मुझे अपनी गफ समझ ले लेकिन में ये कैसे भूल गयी की गफ बनने के बाद एक लड़के को लड़की भोत सरे हक़ दे बैठती है, जैसे की सनी मुझसे वो साडी बाटे पूछ रहा है.... वैसे अगर सनी सच में मुझे अपनी गफ बना ले तो बुरा भी क्या है, इतना हॉट एंड हैंडसम लड़का मेरा बर्फ होगा, कैसे लड़किया मर रही है उसे अपना यार बनाने के लिए और मेरे साथ तो वो इसी घर में है फिर क्यों में खुद को नहीं आगे बढ़ा प् रही.
एक तरफ जहा दिल में इतने सरे अलग अलग विचार चल रहे थे वही दिमाग ये भी प्रश्न कर रहा था की, क्या सनी के मन में भी मेरे लिए कुछ है या वो बस मस्ती में hi मुझसे ये सब बाटे कर रहा था, कुछ करने से पहले ये जानना भी तो जरुरी है न....
और तभी प्रीति को पता भी नहीं होता है और अपने भाई सनी के बारे में सोचते हुए आज फिर उसके हाथ उसकी कमसिन कुंवारी छूट पर पहुंच जाते है जो इस वक्त भाई के बारे में सोच कर पूरी तरह से अपना रास बहा रही थी, जिसे महसूस करते hi प्रीति की जवानी का जोश अपनी चरम पर पहुंच जाता है और तुरंत एक झटके से बिस्तर से उठ कर वो अपने रूम में लगे आयने के सामने पहुंच जाती है...
वह कड़ी हो कर कुछ देर खुद को निहारने के बाद प्रीति मुस्कुराते हुए अपने सरे कपडे उतर भाई सनी द्वारा दिलाई गयी वो रेड ब्रा और पंतय में खुद को देखने लगती है. आज पहली बार प्रीति ने खुद को इतने गौर से देखा था और खास कर जब वो अपनी चूचिया उन रेड ब्रा में कासी हुई देखती है तो एक साथ दोनों हाथो से उन चुचिओ को ब्रा सहित पकड़ कर मसलते हुए, अह्ह्ह्ह सनी देख ले कैसी दिख रही है तेरी गफ और बेहेन इस रेड ब्रा में उम्मम्मम, उफ्फ्फ पता नहीं मुझमे वो हिम्मत कब आएगी जब में हकीकत में तेरे सामने इस रूप में औ और मेरे हाथो की जगह तेरे हाथ मेरे इस गरम तड़पते हुए जिस्म पर पड़े और मुझे मर्दाने स्पर्श का एहसास कराएंगे...
उम्म्म्म अह्ह्ह उम्मम्मम तुझे नहीं पता लेकिन अब तो में खुद चाहती हु की तुम्हारे सामने ऐसे कड़ी राहु उम्मम्मम ओह्ह्ह मेरे भाई... और इसी सोच के साथ प्रीति का एक हाथ पीछे की तरफ जाता है और ब्रा के हुक खोलने की म्हणत कर देता है, ब्रा का हुक खुलते hi एक झटके से वो कैसे मुलायम से चुके पुरे आज़ाद हो जाते है और कप्स से बहार झाकने लगते है.
प्रीति, जिसने आज तक कभी ये सब कामुक क्रीड़ाये करने की सोची भी नहीं थी, खुद को आयने के सामने ये सब करते देख बहुत ज्यादा कामुक महसूस करने लगी थी और साथ hi उसके जिस्म की कामाग्नि उसे और बहका रही थी जिसके एवज में वो उस ब्रा को तुरंत अपने शरीर से अलग कर निचे जमीं पर फेक देती है और दोनों हाथो में अपनी दोनों चुचिओ को भर, निप्पल्स को उंगलिओ के बिच फसा कर मरोड़ते हुए चूचिया मसलने लगती है, अह्हह्ह्ह्ह सनी उम्मम्मम मसल न भाई ऐसे hi मेरी चूचिया उम्म्म्म उफ्फ्फ्फ़ आज तक किसी ने हाथ तक नहीं लगाया है इनको अब नहीं रहा जाता है उफ्फफ्फ्फ़ आकर चूस ले न अपनों बेहेन की चूचिया उम्मम्मम्म ओह्ह्ह सनी प्ललस्सस्स्स्स आजाए भाई...
जिस्म की गर्मी और वासना की आग में जल रही प्रीति को अब कुछ नहीं सूझ रहा था और वो अपना कण्ट्रोल खुद पर से खोटी जा रही थी और इसी कारन एक हाथ उसकी चुकी से हैट कर उसकी पंतय के अंदर घुस चूका होता है, और उसकी उंगलिया इस वक्त उस कासी हुई पनियाई छूट की फको को फैलते हुए असली कौमार्य को छेड़ने लगती है... ऐसा न था की प्रीति के लिए अपनी छूट पर हाथ लगा कर घिसना पहली बार था लेकिन जबसे सनी को ज़हन में रख कर उसका हाथ उसकी छूट पर पड़ा है तो उसके जिस्म में एक अलग hi करंट की लेहेर दौड़ उठती है और आज भी वैसे hi हुआ, पंतय में डेल हुए हाथ की उंगलिओ ने जब उसकी छूट की फैंको को फैला छूट के डेन पर दस्तक दी तो प्रीति की टंगे कम्प सी गयी और आँखे भरी होते हुए अपने आप बंद हो चली और..
अब बस उसकी बंद आँखों के सामने उसके भाई सनी का चेहरा घूम रहा था और दोनों हाथ अपनी अपनी जगह, चुकी और छूट पर अपना हमला बोल रहे थे, उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह सुन्न्नीयीय उम्मम्मम्म प्लस छोड़ड़ड़ड़ूऊ मुझे अह्ह्ह्ह भईईई उम्म्म छोड़ो अपनी छोटी बेहेन को अपने लू डी से, घुसा दो पूरा इस छूट में अह्ह्ह्हह एसससस फुकककक मीटी ओह्ह्ह्हह सुन्न्नीयीय... और इसी विचार से छूट घिसते हुए जब उसकी आँखे एक बार को खुलती है तो वो खुद को आयने में अपने भाई को सोच कर अपनी छूट घिसते हुए देख और ज्यादा बहक जाती है और आयने के करीब आ कर खुद की नजरो से नजरे मिला कर एक तंग उप्पेर की तरफ उठा छूट को आयने के सामने नजर आये ऐसा कुछ दृश्य करके दोबारा घिसने लगती है...
अह्ह्ह्हह सुन्न्नीयीय उम्मम्मम छोड़ो न मुझे अहहहहह उम्मम्मम भांग कर दो मेरे कामुमार्य को अब, नहीं सही जाती मुझसे ये तड़प अह्ह्ह, नहीं रहना मुझे अब और कुंवारी, उम्मम्मम्म प्लस अपनी बेहेन का कुंवारा पैन उससे छिन्न कर उसे भी इस कामुक खेल को महसूस करने की रेहम कर दो अह्ह्ह्हह आओ न सनी छोड़ दो मुझे उम्म्म्म मुझे लुंड चाहिए अब तेरा मेरी इस छूट में बस्सस अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्मम्मम अह्ह्ह छोड़ दे अपनी गफ रूपी बेहेन को.. उम्म्म अह्ह्ह्हहबहहहहहह सनी उम्म्म्म और ऐसे hi इस खेल को कुछ देर और लहेल्ते हुए अपने भाई से छोड़ने के बारे में सोचते सोचते आज भी प्रीति की छूट अपना काम रास बहा देती है और जैसे hi प्रीति की छूट अपना पानी बहती है, प्रीति का जिस्म कंपते हुए हवा में उड़ने लगता है और प्रीति ऐसे hi अधनंगी, जिस्म पर सिर्फ एक पंतय डाली बिस्तर पर गिर पड़ती है और अपनी साँसों पर काबू पाने की कोशिश करती है....
छूट रास निकलने के बाद दोबारा प्रीति उसी पशोपेश में आजाती है, " उफ़ ये मुझे क्या हो रहा है, क्या सनी के बारे में इस तरह सोचना सही है, वो मेरा भाई है और अगर ये सही मन भी लू तो क्या सनी मुझे इस रूप में अपनाएगा, क्या वो मेरे साथ हमारे इस रिश्ते को स्वीकारेगा.... और इन्ही सब बातो को सोच चेहरे पर एक रहत भरी मुस्कान के साथ प्रीति कब नींद की आगोश में चली जाती है उसे hi नहीं पता चलता है...
वह दूसरी तरफ जैसा की हमें पता है की मेरे पापा मीन्स मर मानव के घर पर न रहने की वजह से जब तक वो वापस नहीं लौट आता तब तक महिमा (मेरी मम्मी ) ने मुझे अपने साथ अपने कमरे में अपने बिस्तर पर सुलाने का वडा किया होता है..
तो इसी वजह से अभी इस वक्त में अपनी मम्मी के रूम में उनके बिस्तर पर बैठा हुआ होता हु और मम्मी अलमारी में कपडे ज़माने में व्यस्त होती है. मम्मी ने इस वक्त एक लाइट येलो रंग का गाउन पहना हुआ था, जिसमे में से उसकी काळा रंग की ब्रा और पंतय कुछ हद तक नजर आ रही थी, और मम्मी का मुँह अलमारी की तरफ होने से उनके चूतड़ इस वक्त ठीक मेरी आँखों के सामने होते है और चूँकि गाउन पारदर्शी था तो मम्मी की काळा रंग की ब्रा और पंतय मुझे काफी हद तक दिखाई दे रही थी..
घर की सबसे मस्त और गदरायी औरत का ये रूप देख मेरे लुंड ने एक झटके से फुंकार भरी और पाजामे में hi अपनी औकाद में आने लगा था और मम्मी की गांड देख, " उफ्फफ्फ्फ़ सच क्या गांड है मुनमय की उम्म्म पिछली रात इसी गांड को उप्पेर उप्पेर से रगड़ा था नींद के बहाने, उफ्फफ्फ्फ़ मन तो कर रहा है की अभी मम्मी का ये गाउन उठाऊ और लुंड को एक hi झटके में गांड में उतर दू अह्ह्ह्ह मुम्ममय. " एक तरफ प्रीति है जिसकी जाने को आज सुबह से देख देख कर लुंड की हालत ख़राब हो रही है और एक तरफ मम्मी, उफ्फ्फ दोनों माँ बेटी ने तो लुंड की हालत ख़राब कर रखी है, मन तो करता है की सच में दोनों को पटक के कास के रगड़ दालु ahhhhhhh....Abhi में ये सोच hi रहा था की मम्मी मेरी तरफ पलट जाती है और ये देख में तुरंत वह पड़ा कम्बल अपने पेरो पर दाल देता हु जिससे की मेरे खड़े लुंड पर मम्मी की नज़र न पड़े...
मम्मी, मेरी तरफ मुद कर :- क्या बात है सनी, आज इतना चुप चुप क्यों बैठा है तू..
मैं, कम्बल में से लुंड पर हाथ रख :- कुछ नहीं मम्मी बस ऐसे hi, देख रहा हु आप दिन भर कितना काम करती हो.. थकती नहीं हो क्या अब..
मम्मी :- अरे बीटा में एक हाउसवाइफ हु और मुझे अब काम न करू तो थकन लगेगी..
मैं, असली थकन तो तब लगेगी जब में अपने लुंड से तुम्हारी दुमदार चुदाई करूँगा:- मुझे वो सब नहीं पता, अब सब काम चोरो भोत हो गया, अपने बेटे के लिए भी वक्त निकालो न.. भूल गयी आपने वडा किया था की अब आप मेरे लिए भी पूरा वक्त निकलोगी..
मम्मी:- ओह्हो देखो तो इसको, बीटा इसी लिए तो तुझे अपने पास सुलाती हु, फिर भी अब्ब तक तुझे मुझसे शिकायत है...
मैं:- हैं मुझे शिकायत है क्युकी आज मुझे आपने मेरी किश नहीं दी अब तक..
मम्मी, हस्ते हुए मेरे पास आ कर बिस्तर पर बैठ जाती है, और मेरे दोनों गलो पर एक एक किश करते हुए :- उम्मम्माह उम्मम्माह मेरा बीटा, अब तो खुश है न...
मैं, मम्मी क होठो को गलो पर महसूस कर लुंड को हाथ में दबाते हुए: हाय मम्मी सच्ची जब आप ऐसे प्यार करती हो तो भोत ाचा लगता है..
मम्मी :- ः बढम्याश, चल ाव मेरा काम भी हो गया, अब सो जाते है...
और ये बोल कर हम दोनों रोज की तरह सो गए और में जान करके मम्मी से एक दम चिपक कर सोया था जिससे की मुझे मम्मी के उन मोठे दुधारू स्तनों का एहसास मिलता रहे...
दोस्तों यहाँ में आपको बता दू की महिमा ने उस अनजान कॉलर से मिलने की बात पर हाँ कर दी थी तो
सोते सोते इस वक्त महिमा के दिमाग में ये बात भी चल रही थी की, " क्या मेने उस अनजान कॉलर से मिलने को रज़्ज़ी हो कर सही किया, कही कुछ गलत तो नहीं होगा.. लेकिन उसने ये भी कहा है की ये एक जनरल मीटिंग होगी तो मिलने में हर्ज़ भी क्या है. काम से काम मुझसे ये तो पता चल जायेगा की आखिर कौन है वो घर का hi सदस्य जो मुझे पाने के लिए ये सब कर रहा है और रिश्तो को इस तरह बदनाम करना चाहता है. परागर कही उसने मेरे साथ कुछ गलत करने की कोशिश की तो... "
और इन्ही सब बातो में अपने दिमाग को झंझोरते हुए, " ओफ्फो अब इतना सोच कर क्या फायदा, एक बार मिल तो लेती हु ताकि उससे पिक्सहा छूटे, ये रोज रोज के उसके कॉल करने के नाटक खत्महो जायेंगे और ऐसे कैसे कुछ गलत करेगा वो मेरे साथ... नहीं, और वैसे भी उसकी बातो से भले उसके अंदर की ठरक और हवस झलकती होगी लेकिन वो मुझे खुद का रिश्तेदार होने का दवा करता है तो इतना तो लिहाज करेगा hi की मेरी मर्जी के खिलाफ कोई कदम न उठाये... " और खुद को इस बात की तसल्ली देते हुए वो भी नींद की आगोश में चली जाती है.
वही दूसरी तरफ दूसरे शहर में जहा सीमा, मानव और रागिनी बिज़नेस के किसी काम से गए हुए थे, और हमने देखा की शाम को रागिनी अपने पुराने दोस्त राजीव से मिल कर कुछ खास काम को अंजाम देने की बात करके आयी थी, वो मानव और सीमा जो एक hi कमरे में रह रहे थे उनके पास आती है....
रागिनी :- भैया, जिस कॉन्ट्रैक्ट के लिए हम यहाँ आये है, उसकी ब्रीफिंग मेने आज क्लाइंट को दे दी है और अब कल वो आपसे मिलना छह रहे है ताकि ये डील सिग्न हो सके...
मानव :- थॉट्स ा वैरी फैंटास्टिक न्यूज़ रागिनी, ऑफ़ कोर्स में कल मिल लूंगा उन लोगो से, बताओ कितनी बजे जाना है हमे वह...
रागिनी :- भैया जाना तो 11 बजे है सुबह पर कल में नहीं आ पाऊँगी, वैसे भी मेने सारा पेपर वर्क तो आज रेडी करवा दिया है कल मेरी जरुरत नहीं है और में सोच रही थी की में और सीमा कल थोड़ा मार्किट में भी घूम लेंगे...
मानव, ये सोच की इसी बहाने सीमा रागिनी के साथ रहेगी और में श्वेता को ले कर बहार जा सकूंगा :- ठीक है रागिनी, जैसा तुम्हे ठीक लगे मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है..
सीमा, जो इस वक्त इन दोनों की बाटे चुप चाप बैठे सुन रही थी, मन में विचार करते हुए, " इसका मतलब कल फिर वो श्वेता पापा के साथ अकेली होगी, क्या ये ठीक रहेगा, में नहीं चाहती की पापा उसके साथ अकेले रहे पर अब में बुआ को कैसे ना कहु और वैसे भी कुछ hi देर की बात है फिर तो हम वापस लौट आएंगे hi और मुझे नहीं लगता अब पापा ऐसा कुछ करेंगे, क्युकी यहाँ आये हमे इतने दिन हो गए अब तक उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है, " और यही सोच सीमा भी रागिनी की बात में हामी भर देती है...
इसके बाद रागिनी अपने कमरे की तरफ बढ़ते हुए मन में विचार कर मन hi मन खुश होते हुए " बस कल अब सही मौका है मुझे मेरा प्लान एक्सेक्यूटे करने का " और इसी विचार के साथ वो अपने मोबाइल से राजीव को मैसेज कर देती है, फाइनली वे अरे मीटिंग टुमारो और ये समझ लो की अब कल का दिन पूरा तुम्हारे नाम, और ख़ुशी से अपने रूम म जा कर सो जाती है....
दोस्तों उम्मीद है में वापस सबसे वैसे hi जुड़ पाव जैसे कहानी के शुरू से जुड़ा हुआ हु और आशा करता हु आप अपना साथ बनाये रखेंगे...
अपने कमैंट्स दे कर मुझे मोटीवेट करना न भूले