Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh - Page 6 - SexBaba
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Pariwarik Rishto Me Chudai Ke Majbut Sambandh

अपडेट - 42


अगली सुबह जैसा की पिछली रात तय हुआ था ठीक वैसे hi पापा, बुआ और सीमा दीदी अपनी ट्रिप के लिए निकल पड़ते है और अब उनके बाद घर में मैं, मम्मी , प्रीति ,कामिनी भाभी और राहुल भैया hi रह जाते है. जिसमे से सब ब्रेकफास्ट करने के बाद अपने अपने काम को निकल जाते है और घर में सिर्फ मम्मी अकेली hi रह जाती है.

यहाँ मैं घर से निकल कर कॉलेज की तरफ जा hi रहा होता हु की मेरी नजर अजित चाचा के घर की तरफ पड़ती है जहा इस वक्त चाचा अपने ऑफिस के लिए जाने के लिए घर से बहार निकलते हुए दिखाई देते है और उन्हें दरवाजे तक चोर्ने के लिए अंजलि चची एक ब्लैक कलर के अर्ध पारदर्शी गाउन में कड़ी हुई थी, जिन्हे देख मेने अपनी बाइक उनके घर के आगे hi रोक दी और उतर कर उन दोनों से बात करने चल पड़ता हु..

मैं: गुड मॉर्निंग चाचा , चची... क्या बात है ऑफिस जाने की तयारी हो रही है चाचा...

अजित: अरे सनी बीटा तुम, गुड मॉर्निंग, हाँ बस अब ऑफिस का समय हो रहा तो वही जा रहा हाहाहा..

अंजलि, चाचा से: अरे अब ये साहबज़ादे तो बड़े आदमी हो गए है चाचा और चची को मिलने का समय भी नहीं अजित इसके पास तो... पता नहीं आज सूर्य किस दिशा से निकला जो इनके दर्शन मिल गए...

अजित, मन hi मन अंजलि के बारे में ये सोचते हुए की हैं अब तुम्हे अपने बचे के असली बाप से मिलने की तड़प जो है, अब उसका hi तो मौका चाहिए , मेरी क्या जरुरत है: हाँ वही तो अंजलि जरूर आज कुछ काम होगा तभी आया है ये वार्ना नहीं आता यहाँ , क्यों सनी...

मैं: अरे नहीं चाचा क्या आप भी, ऐसी बात नहीं है, आप लोग जानते तो हो अभी कॉलेज और पढाई से hi वक्त नहीं मिलता...

चची: चल चल अब बहाने कही और बनाना समझा, बड़ा आया सुबह सुबह बेवकूफ बनाने हमे... सीधे सीधे बताओ क्यों आये हो...

मैं, अपनी नजरे चची के गाउन से उभरती चुचिओ पर गड़ाए उन्हें इशारे करते हुए की आपका ये दूध पिने आया हु, जिसे देख चची भी मेरी भावनाये समझते देर नहीं करती और चोरी छिपे चाचा की नजरो से बच कर मुस्कुरा देती है...

मैं: अरे चची सच कुछ काम नहीं, बाद कॉलेज जा रहा था तो यहाँ नज़र पड़ी तो सोचा मिलता चालू..

अजित चाचा, वाह सनी बीटा , मेरी बीवी की चूचिया घूरते हुए इतना सफ़ेद झूट , सब समझ रहा हु की इसने मुझे जाते हुए देखा बस इसलिए मेरी बीवी को लूटने आ गया है: हाहाहा ाचा चलो भाई अब अंजलि मान लेते है इसकी बात भी.. वैसे सीमा बेटी कैसी है, ससुराल से आने के बाद उसे भी वक्त नहीं मिला हमसे मिलने का क्या?

मैं: अरे नहीं चाचा, दरअसल पापा और बुआ आज से एक हफ्ते के लिए किसी बिज़नेस ट्रिप के लिए गए है तो सीमा दीदी भी उनके साथ गयी है घूमने के हिसाब से ...

चची: ओह्ह चलो ये तो बढ़िया बात है फिर तो घर पर तुम चार लोग hi बचे रह गए और दिन के वक्त तो महिमा भाभी अकेली कुकी तुम सब तो कॉलेज या ऑफिस चले जाते हो..

मैं: हाँ चची अभी हफ्ते भर तो मम्मी अकेली hi रहेगी घर में ः..

चाचा, ये सुन कर की महिमा घर में अकेली है, और खुद से विचार करता है की और मन hi मन मुस्कुराता है की इससे ाचा मौका क्या हो सकता है की महिमा भाभी दिन भर घर में अकेली होंगी, शायद मैं इस चीज का फायदा उठा सनी से अपना बदला पूरा कर सकू , और यही सोच : ाचा भाई सनी तुम और अंजलि बाटे करो मुझे ऑफिस के लिए देरी हो रही है , मैं चलता हु bye..

मैं: okay चाचा bye bye, हैवे ा गुड डे...

चची: आओ सनी कब तक बहार खड़े रहोगे , अंदर आओ na..ya तुम्हे भी कॉलेज के लिए देर हो रही है..

यहाँ अजित चाचा ने जाते हुए ये नोटिस किया की अंजलि ने उसे bye भी नहीं कहा क्युकी वो सनी को घर के अंदर बुलाने के लिए इतनी जल्दी में थी... कोई बात नहीं सनी बीटा जा घर के अंदर और खिला दे उसे तेरा लुंड... अभी वक्त तुम्हारा है पर जल्दी hi मेरा आएगा और ये सोचते हुए वो घर से निकल जाता है..

और यहाँ दूसरी तरफ घर के अंदर घुसते hi जैसे hi चची दरवाजा बंद करती है में झट से उनकी दोनों चूचिया अपने हथेली में पकड़ भींच देता हु...

मैं: हैइए चची क्या मस्त उभर दिखा रही हो गाउन में, जब बाइक पर से आप पर नज़र पड़ी तब से दबोचने क लिये मचल गया था , मन तो किया था की चाचा के सामने hi दबोच लू हाहाहा...

चची: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ईशःठ सुन्न्नीयी हहै,, तो तुम्हे देख मुझसे भी कहा रुका जा रहा था में भी बस यही इंतज़ार कर रही थी की कब तुम्हारे चाचा जाये और तुम्हे घर के अंदर बुलाऊ अह्ह्ह्ह , एक तो हफ्ते हफ्ते तक दिखाई नहीं देते हो , कितना मुस्खिल होता है मेरे लिए तुम्हारे लुंड क बिना रहना सनी उम्मम्मम्म...

मैं, वही हॉल में चची के कपडे उतर नंगी करते हुए: अरे चची अब नहीं तड़पना पड़ेगा आपको, अब मेरे पास कुछ फ्री समय रहने वाला है और उस वक्त आकर में अपने बच्चे की माँ को जैम कर रगड़ने वाला हु u.mmmmmaaaah...

चची: हैएएइ सनी अब बाटे कर के और न तड़पा मुझे , जल्दी से रगड़ दो न फिर अपने बच्चे की मा को उम्म्म ओह्ह्ह्ह...

और फिर चची को वही हॉल में सोफे पर पटक कर अपने लुंड को उनकी छूट में पेल एक घमासान दौर शुरू कर देता हु और अगले कुछ देर में ऐसे hi चची की बुरी तरह से रगड़ रगड़ के पेलने के बाद मेरे और उनके काम रास का उनकी छूट में hi मिश्रण कर के उनके घर से निकल कॉलेज की तरफ बढ़ चलता हु...

यहाँ करीब दोपहर के समय मम्मी घर के सरे काम ख़तम कर अपने रूम में बीएड पर बैठी हुई hi होती है की उनके फ़ोन पर रिंग बजने लगती है और स्क्रीन पर नंबर देख ,जो की अब मम्मी के लिए जाना पहचाना सा नम्बर बन गया था क्युकी पहले भी इस नंबर से कॉल आये हुए थे, उसे देख थोड़ी रहत की सांस लेती है की शुक्र है आज घर पर मैं अकेली hi हु ... और तीखे स्वर वाले अंदाज में फ़ोन रेसिएवे करके भड़कते हुए...

महिमा: अब क्यों कॉल किया है तुमने.. आखरी बार कहा था न की अब मुझे कभी कॉल मत करना..

कॉलर, (जी हाँ दोस्तों ये वही कॉलर जो पिछले कई दिनों से महिमा सक्सेना के पीछे पड़ा हुआ है): अरे महिमा जी , आपने तो जैसे आदत hi बना ली है की सीधा तीखे स्वर में hi बात करोगी मुझसे..

महिमा: तो क्या प्यार से बात करू मैं तुमसे, जब इतनी दफा ना कहने पर भी तुम्हे मेरी बात समझ नहीं आती है तो फिर..

कॉलर: ः क्या महिमा जी आप भी न, कसम से कह रहा हु, आपको इस तरह भड़कते हुए देखने का भी एक अलग hi मजा होता होगा,,, काश वो मौका मुझे मिल पाए कभी...

महिमा, अब अपनी आवाज नार्मल करते हुए: में तंग आ गई हुई तुमसे, पिछली बार भी तुमने एक अधूरी पहेली से बात करके फ़ोन काट दिया , बिना मेरी बात का जवाब दिए... अब आज मुझसे उस बात का जवाब दो सीधे सीधे तभी बात करुँगी वार्ना फ़ोन रखो...

कॉलर: उम्मम्मम माफ़ कीजियेगा महिमा जी लेकिन मुझे आपका सवाल hi याद नहीं जवाब कैसे दू भला ः..

महिमा: हे भगवन!!! ठीक है मुझे सबसे पहले ये बताओ की तुम हो kaun,kya नाम है तुम्हारा...

कॉलर: हाहाहा बस इतनी सी baat..iska जवाब तो में आपको कई दफा दे चूका हु की में आपका कोई अपना hi हु जो तहे दिल से आपको चाहता हु और आपको पाने की हसरत रखता हु...

महिमा: अपनी ये सब बकवास बंद करो ये सब नहीं सुन्ना मुझे, सीधा सीधा अपना नाम बताओ मुझे बस ...

कॉलर: अब नाम में क्या रखा है महिमा जी, कुछ भी बता दूंगा नाम तो मैं अपना ,क्या फरक पद जायेगा उससे भला...

महिमा: उससे फरक ये पड़ेगा की मुझे ये पता चलेगा की ऐसा कौनसा रुश्तेदारहै मेरा जो रिश्तो को बदनाम करना चाहता है...

कॉलर: कैसी बात कर रही हो आप महिमा जी, में तो अपने रिश्ते को नया नाम देना चाहता हु, न की बदनाम करना ..

महिमा: वो सब मुझे नहीं पता, या तो मुझे अपना नाम बताओ या मुझे ये बताओ की तुम्हारा मुझसे क्या रिश्ता है..

कॉलर: ठीक है आज बात ख़तम करने से पहले आपको इन दो में से कोई एक का जवाबिल जायेगा लेकिन फिलहाल मुझे आपके बारे में कुछ चीजे जननी है जो पिछली बार जननी रह गयी थी...

महिमा: नहीं अभी नहीं , मेरे पास वक्त भी नहीं है और में बताना भी नहीं चाहती जैसा की मेने हर वक्त कहा की में घर परिवार वाली औरत हु और...

कॉलर, इससे पहले की महिमा अपनी बात पूरी करती: हाँ जनता हु आप घर परिवार वाली औरत हो और लेकिन... इस वक्त आप घर में अकेली हो और अगले एक हफ्ते तक अकेली hi रहने वाली हो हैं न..

महिमा, चौकते हुए: तुम्हे किसने कहा की में इस वक्त अकेली हु?

कॉलर: हाहाहा अरे महिमा जी, इंसान अपने चाहने वाली हर खबर रखता है , साहू बात है न की आपके प्यारे पतिपरमेश्वर और घर के दो और सदस्य एक हफ्ते के लिए बहार गए हुए है और बाकि घर के सदस्य इस वक्त रोज की hi तरह अपनी रोजमर्रा जिंदगी में व्यस्त होने के कारन घर में आप अकेली है...

महिमा, कुछ देर सोचने के बाद: हाँ सही है सब कुछ एक दम पर तुम्हे कैसे पता चला , कहा से मिलती है तुम्हे मेरे घर में होने वाली चीजों की खबर..

कॉलर: ऐसे hi थोड़े खुद को आपका आशिक़ कहता हु में, खबर रखता हु और ये सुनिश्चित करता हु की कही आपको किसी चीज की जरुरत तो नहीं...

महिमा: ाचा जी... और मान लो मुझे किसी चीज की जरुरत होगी तो तुम्हे कैसे पता चलने वाला है.. कौन बताएगा क्युकी मैं तो कभी तुमसे कुछ कहने वाली हु नहीं..

कॉलर: आपके कहने की जरुरत hi नहीं पड़नी मुझे, और वैसे भी मुझे ये बात भोत अचे से पता है की आम जिंदगी की जरूरते तो आपके पति और परिवार वाले पूरी करने में भोत अचे तरीके से सक्षम में , वह तो मुझे किसी तरह की कोई दखल अंदाजी करने की जरुरत भी नहीं पड़ने वाली...

महिमा, बात को समझते हुए: ाचा तो अगर इंसान की आम जिंदगी की साडी जरूरते पूरी हो रही है तो उसके बाद बचता hi क्या है जिसके लिए मुझे तुम्हारी मदद की जरुरत पड़ने वाली है.

कॉलर: अब महिमा जी आप खुद से झूट बोल रही हो या तो फिर नासमझ होने का नाटक कर रही है की इंसान की आम जरूरते पूरी होने पर उसे ख़ुशी मिल जाती है..

महिमा: हाँ तो अब मुझे जो चाहिए वो मिल रहा है तो फिर और क्या अपेक्षण रखने की आवश्यकता ह भला मुझे..

कॉलर: हाँ मन की आपकी वो जरूरते पूरी हो रही लेकिन आपकी शारीरिक जरूरतों का क्या? क्या वो जरूरते भी ठीक से पूरी हो रही है आपकी....

महिमा, कॉलर की ये बात सुन कर एक दम से चुप्पी साढ़े मन hi मन सोचते हुए की कही न कही ये जो कोई भी है सब कुछ अचे से जनता है लेकिन कैसे...: अब इस बारे में तुम्हे बताना जरुरी नहीं समझतिऐं, ये पति पत्नी के बिच की बात होती है किसी गैर को कहने की नहीं.

कॉलर: ः ऐसे गैर बोल कर दिल न दुखाओ अब hamara...vaise भी अगर आपके पति इस बात को समझते तो शायद आज आप शारीरिक रूप से भी खुश होती , सही है न.

महिमा, उसकी हर बात का मन hi मन समर्थन देते हुए लेकिन असलियत छिपाते हुए: तो तुमसे ये किसने कह दिया की में अपने पति से शारीरिक रूप से खुश नहीं.

कॉलर: ये किसी के कहने की जरुरत नहीं होती है महिमा जी , और चलो मान भी लू मैं की आप अपने पति से खुश हो तो ये बताओ की अभी एक हफ्ते के लिए आपके पति बहार गए है तो कल की बीती हुई रात आपके पति ने आपको कितनी दफा छोड़ा...

महिमा, उसके मुँह से सीधा चुदाई के बारे में सवाल सुन रोंगटे से खड़े होते हुए: तुम न बकवास बंद करो समझे अपनी, मेने कहा न ये मेरे और मेरे पति की बात है तुम्हे क्यों बताऊ भला...

कॉलर: हाहाहा ाचा चलो इस बात को एक दूसरे तरीके से रखता हु... अगर में कही एक हफ्ते जैसे अंतराल के लिए कही बहार जा रहा हु और मेरे पास महिमा सक्सेना जैसी sundar,hasin और कामुक बीवी होइ तो...

महिमा, न चाहते हुए भी उसकी बात कही न कही मन में उत्सुकता जागते हुए: तो क्या???

कॉलर: तो यकीं मानिये , मेने अपनी महिमा को बहार जाने के पहले वाली रत को सोने नहीं दिया होता, पूरी रत उसके जिस्म को रगड़ रगड़ के छोड़ा होता ताकि एक हफ्ते तक वो उस रत हुई चुदाई को यद् कर मेरे वापस लौटने का इंतज़ार करती रहती...

महिमा, उसके मुँह में अपना नाम शूम अजीब एहसास महसूस कर और रत भर चूड़े जाने की बात से जिस्म पर असर होता देख: ाचा जी तो अब मुझे पता नहीं तुम शादी शुदा हो या नहीं पर ये चीज तुम अपमी बीवी के सतहज जरूर करना , भोत खुश रहेगी तुमसे ,, और हाँ ये मेरी महिमा क्या होता है.. कुछ भी मत बोलै करो समझे...

कॉलर: हाहाहा अरे महिमा जी अगर आप जैसी हो बीवी तो वो पति पागल ह जो उसे अकेला घर चोर जाये मैं तो साथ ले जाऊ हर ट्रिप पर... और रही बात खुश करने की तो इस वक्त में वही तो जानना छह रहा की क्या आप भी उस तरह खुश है जिस तरह मेने बताया...

महिमा: हैं हैं हैं हु में भी उसी तरह खुश बिलकुल...

कॉलर: ाचा तो आप ये कहना चाहती है की कल रत आप रात भर नहीं सोइ, रात भर आपको आपके पति ने नंगा करके पटक पटक के रगड़ रगड़ के छोड़ा हैं न...

महिमा, इस तरह के शब्दों को सुन उत्तेजना महसूस करते हुए: हाँ बिलकुल...

कॉलर: ाचा और अब आप अपने पति को मिस भी कर रही हो की कब वो वापस आये और दोबारा आपको इतनी hi बुरी तरह से आपकी छूट में लुंड पेले जैसा कल रत पेल कर आपकी बजे...

महिमा, हकीकत ज़हन में लेट हुए और इस तरह की चुदाई की जरुरत को समझते हुए लेकिन अपनी आवाज और सांसो को एक चुप्पी के साथ कण्ट्रोल करने के बाद: हैं कर रही हु में अपने पति का इंतज़ार की कब वो आये और मुझे इतना प्यार डीएई...

कॉलर: हाहाहाहा देखो अब आपने hi मेरी बात सच साबित कर दी की आप खुश नहीं है , और आप झूट बोल रही है की आपको कल रत आपके पति ने मजा दिया बल्कि सच तो ये हैकि कल रत क्या पिछली कई रातो से आपके पति ने आपको छुआ भी नहीं है...

महिमा, अपनी टैंगो को कस के भींच कर रगड़ते हुए, छूट की खुजली को मिटने की कोशिश करते हुए, कम्पन भरी आवाज मैं: नहीं में कोई झूट नहीं बोल रही हु, हर वक्त तुम सही नहीं हो सकते समझे..

कॉलर: कॉमन माहि डार्लिंग, अब मेने तो सच का आइना दिखाया है आपको, बाकि ये आप पर है की आप उस पर कब तक झूट का पर्दा डेल रखना चाहती हो...

महिमा, अब खुद मन hi मन ये मानते हुए की ये शख्स जो कोई भी है पर इसकी हर बात सही है, अपनी साड़ी का पल्लू हटा चुकी को एक दफा दबा कर हलकी सिसकी भरते हुए: झूठे हो तुम और क्या लगता है तुम्हे की तुम्हारी बाटू में आ कर में तुम्हे सच्चा साबित होने दूंगी कभी नहीं..

कॉलर: अरे नहीं महिमा जी, भला मुझे क्या फायदा या मुकसान है आपसे मेरी बातो को सच्चा या जूठा साबित करवाने में, में तो बस आपको आपका सच बता रहा हु जिसे आप जानते हुए भी इस वक्त अनजान बनने की कोशिश कर रही हो...

कॉलर: मुझे तो बस इस बात का मलाल है जिस हसीं खूबसूरत औरत का हक़ बनता है की हर रत उसे बिस्तर नंगा कर एक एक अंग को अचे से मसल मसल कर उसकी जवानी को लुटा जाये , वो अपने पति द्वारा दरकिनार की जा रही है और उसे खुद अपने जिस्म की आग ठंडी करने के लिए म्हणत करनी पद रही है, और अगर वो औरत वही हो जिसे में तहे दिल और जान से पानं चाहता हु ... बस यही एक वजह है की में आपको नाखुश देख कर खुश नहीं रह पता हु .. मन तो करता है की अभी आपके घर औ और आपको पटक पटक के छोड़ दू महिमा जी...

महिमा, अब अपने जिस्म की कामाग्नि को भड़काए जाने के कारन सुलगती हुई आग को काबू नहीं कर पति है और एक हाथ टैंगो केबीच दाल खुद को सहलाते हुए ,ऊपरी मन से उस अनजान शख्स को इंकार जताते हुए: तुम चाहे कुछ भी कहो और समझो में अपने पति से खुश हु और तुमने अभी जिस तरह मुझे उपयोग में लिए जाने का वर्णन किया , ठीक वैसे hi मेरे पति करते भी है इसलिए तुम्हे न खुश होने की कोई जरुरत नहीं है समझे...

कॉलर, मन hi मन महिमा की आग को भड़काने और उसकी तड़प बढ़ाने का सही मौका देख: ठीक है महिमा जी अब आप अगर नहीं मन्ना चाहती सचाई को तो आपकी मर्जी,... वैसे भी मुझे अब किसी काम से जाना है , अभी तो एक हफ्ता आप अकेली हो तो कल फिर इसी समय बात करता हु apse..bbye महिमा जी ..

और ये बोल बिना महिमा का जवाब सुने फ़ोन कट कर देता है और यहाँ महिमा का जिस्म उस अनजान शख्स द्वारा की गयी शाट प्रतिशत सही बातो की वजह से पूरी तरह गरमा गया था और इसी वजह से उसके द्वारा की गयी बाटे जिसमे उसने महिमा के जिस्म को रोंदने , रगड़ने , और मसलते हुए पेलने की बाटे की थी , बस उन्ही सब को यद् कर और ये मानते हुए की उसके शरीर को बिलकुल hi वैसी चुदाई की जरुरत भी है जैसा इस शख्स ने वर्णन किया , उन्हें यद् करते हुए अपनी साड़ी और पेटीकोट उठा उंगलिओ से अपनी पंतय सरका कर तीन उंगलिया छूट में दाल खुद के साथ खेलने लग पड़ती है और कुछ देर अपनी प्यासी छूट के साथ खेलने के बाद अपना काम रास बहा कर नींद के आगोश में चली जाती है...

वही दूसरी तरफ प्रीति कैंटीन में अपनी फ्रेंड मोनाल के साथ बैठी हुई होती है और बीती रत पार्टी में जो कुछ हुआ वो सब के बारे में डिस्कशन कर रही thi...chunki मोनाल भी उस पार्टी में मौजूद थी सो वह जो कुछ हुआ उसने भी अपनी आँखों से देखा और कानो से सुना था , लेकिन वह हुई कुछ ऐसी घटनाये जो उसे समझ नहीं आई थी तो उन्ही को ले कर वो प्रीति के साथ चर्चा कर रही थी..

मोनाल: यार प्रीति बता न विराट सर वह पार्किंग में किसके साथ थे और क्या कर रहे थे तूने देखा क्या... मुझे ये बात कल से समझ नहीं आ रही की तेरे साथ आये उस ladke(yaha मेरा ज़िकर हो रहा है) ने ऐसा क्या देख लिया..

प्रीति, जिसे मेने सच उसी वक्त बता दिया था, चेहरे पर मुस्कराहट लेट हुए: यार वो एक सीक्रेट है में नहीं बता सकती और तू अगर जान गयी न तो सच कह रही हु तेरा भी दिमाग चक्र जायेगा हेहेहे..

मोनाल: अरे अब बता भी न मुझसे भी छिपाएगी तू हँ...

प्रीति: ाचा बाबा बताती हु पर तू प्रॉमिस कर की किसी और से नहीं कहेगी...

मोनाल: हाँ चल ी प्रॉमिस ये बात कही नहीं जाएगी तेरे और मेरे अलावा.. वैसे भी में यहाँ किसी को बता के क्या hi करुँगी.. अब बता भी न जल्दी..

प्रीति: दरअसल पार्किंग एरिया में न एक रूम था वह विराट सर के साथ नीता ma'am थी...

मोनाल, ये बात सुन चौकते हुए: व्हाटटटटट..... तू क्या बोल रही है... सच में नीता ma'am ??? लेकिन वो तो अंशुल सर के साथ है ?

प्रीति: हहै हाँ में भी ऐसे hi चौकी थी लेकिन यही सच है, अंशुल सर के साथ सिर्फ घूमने फिरने के लिए और बाकि काम नीता मां के उस विराट के साथ हो रहे है...

मोनाल: यार क्या गज़ब कर दिया नीता मां ने तो.. एक साथ दो दो का मजा वाह, सही खेल रही है वो तो हाहाहा

प्रीति: इसमें सही क्या है पगली... धोका हुआ न ये तो, प्यार व्यार तो बस नाम का है इसका मतलब तो...

मोनाल: अरे प्रीति तू कब समझेगी चीजों को, आज कल प्यार व्यार कुछ नहीं है सबको बस सेक्स की भूख है समझी...

प्रीति: यार अब तू फिर से शुरू मत हो जा इसी बात को ले कर, तुझे तो बस मौका मिलना चाहिए हैं न...

मोनाल: ः अब क्या करू जिनगी का असली सच और असली मज़ा दोनों एक hi चीज है और वो है सेक्स... और अब तू hi देख नीता ma'am को पता है अंशुल सर से पैसो की कमी नहीं रेहनी तो उसको फसा rakha,kuch दिन उनको अपने जिस्म उसे करने दिया और दूसरी तरफ विराट सर इतने जाना मन नाम है तो उसको भी फसा रखा है... और दोनों को फ़साने के लिए काम क्या आया बता..

प्रीति: क्या???

मोनाल: बस एक छोटी सी चीज जो अपनी टैंगो के बिच में है, जिसके लिए कोई भी लड़का अपना सब कुछ लुटा दे हाहाहा...

प्रीति: चीई यार कैसी बाटे करतीहै तू सच्ची.. बोर नहीं होती हर वक्त बस दिमाग में यही कचरा भरे घूमती है..

मोनाल: मेरी जान तू ऐसा इसलिए बोल रही है क्युकी तूने अब तक उस मजे का स्वाद नहीं चखा, वर्जिन है इसलिए, जिस दिन किसी लड़के ने तेरी सील तोड़ दी उसके बाद देखना तुझे भी इसी खेल में जन्नत मिलने वाली है और हर वक्त यही कचरा ाचा लगने वाला है हाहाहा.

प्रीति: शट उप प्रीति, मुझे कोई शोक नहीं है समझी इस सब गंदगी में पड़ने का, तू hi कर ये सब ...

मोनाल: हाहाहा ाचा बाबा ठीक है लकिन ये सब चोर मुझे एक जरुरी बात तो बता न...

प्रीति: कौनसी बात..

मोनाल: यही की वो हैंडसम लड़का कौन था जिसने तेरी तरफ से बोलै और तेरा स्टैंड लेते हुए पार्टी में सबकी वात लगा दी थी..

प्रीति: क्यों तुझे क्या करना है उसके बारे में जान कर...

मोनाल: यार बता न प्लस, में तो कल रात से hi उसकी फैन हो गयी थी, ऐसे लड़के भोत काम मिलते है यार जो ऐसे भरी महफ़िल में विराट जैसे नामी इंसान को भी धूल छठा दे..

प्रीति, मन hi मन खुश होते हुए की आज मेरे भाई की तारीफ हो रही उसके काम की वजह से : हाँ ये बात तो है ..

मोनाल: बता न यार, तू कहा मिली उसे और कौन है, कब से जानती है... कही तेरा बॉयफ्रेंड तो नहीं जिससे तूने मुझे बी न मिलवाया हो?

प्रीति, अपने भाई को अपना बर्फ होने की बात सुनते hi उसकी बॉडी में सिहरन सी मच जाती है: क्या कुछ भी बोलती है, कोई बर्फ नहीं वो मेरा, बस एक ाचा दोस्त है , किसी फॅमिली फंक्शन में मुलाकात हुई थी मेरी उससे.

मोनाल: यार बर्फ नहीं है तो बना ले सच में.. और तुझे नहीं बनाना हो तो मुझे bol..me तो कुछ भी कर्जो ऐसा लड़का पाने के लिए..

प्रीति: हहहहए तू न पागल है सच्ची, ऐसा क्या देख लिया तूने उसमे..

मोनाल: यार जिस तरफ उसने तेरा साथ दिया कसम से बोल रही हु भोत काम बन्दे मिलते है, उसे परवाह थी तेरी, और जैसे उसने तेरी तारीफ की ऐसा लगा मनो की वाकई तुझे अचे से जनता हो और कदर करता हो...

प्रीति, मोनाल की बाटे अब मन hi मन उसे अपने भाई के प्रति वही फील करवा रही थी जो कल रत खुद उसने बी फील किया था : हाँ वो है यार मुझे भी बिलकुल ऐसा hi लगा, और सच कहु तो उसका इस तरह सब कुछ कहना मेरे साथ खड़े रहना मुझे बड़ा ाचा लगा..

मोनाल: हम्म्म वैसे बाद में तूने उसे थैंक यू तो कहा न और कहा तो कैसे कहा..

प्रीति: कैसे कहा का क्या मतलब , अब थैंक यू जैसे कहते वैसे hi कहूँगी न इडियट..

मोनाल: उफ्फ्फ इडियट में नहीं तू है प्रीति... अगर मुझे तो कोई लड़का ऐसा परवाह, केयर करने वाला और साथ निभाने वाला मिल जाये तो में तो उसे थैंक यू बोलने के लिए अपना सब कुछ दे दू ... सब कुछ मतलब तू समझ रही hi है न, में अपना सब कुछ उसके नाम कर देती...

प्रीति: तू फिर घुमा फिरा के वही बात पर आ गई न , कुछ नहीं हो सकता तेरा..

मोनाल: यार तू ये सब चोर और बता न वो सच में तेरा बर्फ नहीं na..kyuki नहीं है तो मुझे मिलवा दे उससे यार, में तो पक्का उसको अपना बर्फ बना लू, इतना हैंडसम और फिट हाय कसम से जिस लड़की को उसका साथ मिले वो जिंदगी भर खुश रहेगु हर तरह से..

प्रीति, मोनाल के मुँह से भाई के साथ सम्बन्ध बनाने की बात सुन पहली बार उसे जलन का एहसास होता है और इसी कारन वो उसे एक दम चुप कर देती है: चुप कर मोनाल, हर किसी को उसी पैमाने पर मत नापा कर तू और रही बात उस लड़के की तो वो तेरे टाइप का नहीं है समझी.. तो बर्फ बनाने की बात सोच भी मत...

मोनाल: अरे तो गुस्सा क्यों हो रही है इतना , ठीक है न कोनसा मेने सच में उसके साथ कुछ कर दिया है हाहाहा...

प्रीति: फिर भी मुझे ऐसी बाटे नहीं पसंद , न किया कर मर्रे sath..khas कर उनके बारे में जो मेरे दोस्त हो...

मोनाल: ाचा बाबा ठीक है पर में तो बस यही कहूँगी तुझसे की अगर तुझे इतनी केयर करने वाला और तेरी कदर करने वाला लड़का जिंदगी में दूसरा नहीं मिलने वाला तो कुछ कर pagli..varna मुझसे hi मिलवा दे हाहाहा..

प्रीति: तू नहीं सुधरने वाली hehe..chal भोत बकवास हो गई अब में घर जा रही हु bye.. और ये बोल प्रीति कैंटीन से निकल कर घर को बढ़ चलती है..

वह बिज़नेस ट्रिप के लिए गए हुए मानव, सीमा और रागिनी और उनके साथ श्वेता चारो hi अब अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच चुके थे, लेकिन उन चारो में से दो लोग कुछ हद तक नाखुश दिखाई पद रहे थे और वो दो लोग थे मानव और श्वेता.. इसका कारन ये था की उनकी सोच के विपरीत सीमा भी इस वक्त उनके साथ थी जिस कारन वो दोनों मन hi मन ये समझ चुके थे की जिस तरह की मस्ती की प्लानिंग वो ट्रिप पर आने से पहले कर रहे थे अब वो मस्ती कर पाना इतना आसान नहीं होगा और इस बात का एहसास उन्हें तब से होने लगा था जब से सभी लोग घर से निकले थे क्युकी सीमा ने अपनी नज़र शुरू से hi दोनों पर गड़ाए हुई थी और वो बात पर को सुनिश्चित कर रही थी की उसके पापा मानव और श्वेता किसी भी तरह से करीब न आये ..

और गंतव्य पर पहुंचने पर उसने इस बात को और अचे से उनके सामने रख दिया जब वह रुकने के लिए होटल में कमरे लेने की बरी आयी... मानव ने सब लोगो के लिए अलग अलग कमरे लेने की बात कही जिसके विरोध में सीमा ने कहा की सिर्फ दो रूम लिए जायेंगे , जहा एक में वो और मानव रहेंगे और दूसरे में रागिनी और श्वेता साथ में रहेंगे...

सीमा के इस निर्णय के बाद तो अब मानव और श्वेता की मनो उम्मीदे hi ख़तम हो गयी की अब उनका मिलना और अगले एक हफ्ते में किसी तरह की मस्ती करने का मौका हाथ लग्न मुमकिन हो पायेगा...

जैसे hi सीमा और मानव अपने कमरे में पहुंचे सीमा ने अपनी बात पूरी तरह स्पष्ट रूप से उसके सामने रख दी ..

सीमा: पापा आपको यद् है न अपने मुझसे कुछ वडा किया है, भूल तो नहीं गए न..

मानव, सीमा की बात अचे से समझते हुए: बेटी तुझे क्या अब भी मुझ पर यकीं नहीं है , मेने अगर तुझसे कोई वडा किया है तो में उसे निभाउंगा बी सही..

सीमा: वो में कुछ नहीं जानती पापा, पर आपका उस श्वेता को इस तरह साथ लाना, यहाँ आकर अलग अलग कमरे लेना , ये सब चीजे मुझे कही से भी सही नहीं लगी बस इसलिए आपको दोबारा याद दिला रही हु..

मानव: अब तुझे कैसे समझौ बेटी ये की श्वेता को में कोई अपने लिए नहीं साथ लाया हु, रागिनी ने भी तुझे बताया न की इस डील में उसकी मौजूदगी कितनी जरुरी है और कमरे अलग में इस लिए ले रहा था ताकि हम चारो कमफोर्डबल हो कर रह सके..

श्वेता: हो सकता है आप और बुआ जो कह रागे वो सही भी हो पर में अब खुद को इतनी आसानी से नहीं समझा सकती वो भी इतना कुछ देखने के बाद , तो ाचा यही होगा की आप उस औरत से दुरी बना कर hi rakho..or हम दो कमरों में अचे से कम्फर्टेबले है तो आप इस चीज की फ़िक्र ना करो...

मानव: हम्म ठीक है बेटी , में फिर वही कहूंगा की तुम्हे मेरी तरफ से अब दोबारा किस तरह की शिकायत का मौका नहीं मिलेगा...

सीमा: अगर ऐसा hi होता है तो शायद में आप पर वापस यकीं कर पाव, जिससे खुशु भी मुझे hi सबसे ज्यादा होगी...

और ये बोल कर सीमा अपने बैग्स को खोल चीजे हमने लगी और यहाँ मानव के दिमाग में अब भी यही चल रहा था की अब जो भी करना है सीमा से बच कर करना पड़ेगा, उसे किसी तरह का मौका नहीं देना चाहता हु जहा वो फिर मुझ पर ऊँगली उठा सके... रही बात श्वेता की जवानी लूटने की, तो उसका कोई ाचा सा इंतेज़ाम करना पड़ेगा वार्ना पकडे जा सका hu..or ये बात मुझसे श्वेता को भी समझनी होगी, क्युकी कही न कही वो इस ट्रिप पर आई hi मुझसे चुदाई करवा कर अपनी छूट को भूख मिटने क लिए है uff..khair जो होगा देखेंगे अभी तो थोड़ा आराम कर लेता हु..

कॉलेज से लौटने के बाद में सीधा अपने कमरे में जा कर कुछ देर के लिए सो गया , शाम के समय वापस से मेरी नींद खुलती है और हाथ मुँह धो कर छत की तरफ बढ़ चलता हु. छत पर पहुंचने पर मेरी आँखों के सामने पीठ मेरी तरफ किये आगे की तरफ छत की बाउंड्री पर झुकी हुई मम्मी पर पड़ती है जो इस वक्त सर्रे पहने हुए थी, और चूँकि वो इस तरह आगे की तरफ झुकी हुई थी तो मेरी नजर सीधा मम्मी के उभरते हुए चूतड़ों पर पड़ती है..

उन भरी भरकम चूतड़ों को देखने मात्रा से hi मेरे लुंड में hulchul.mach जाती है और पिछली रात किचन में मम्मी का खुद को बैंगन लिए शांत करने अला वाकिया मेरी नजरो के सामने आजाता हैऔर मन hi मन खुद से ये कह बैठता हु की "सच सनी क्या गरम माल है यार मम्मी , जब से कल जिस्म को मसलते देखा उनका नंगा खूबसूरत बदन नजरो के सामने से दूर हटने का नाम hi नहीं ले रहा उफ्फ्फ, कितने बेवकूफ है पापा जो ऐसी हसीं औरत का मजा नहीं ले रहे" ..और यही सोच में अपना लुंड सहला देता हु और मम्मी की तरफ बढ़ जाता हु...

अपने बेटे की मौजूदगी से बेखबर महिमा इस वक्त उस कॉलर के बारे में सोच रही थी की आखिर कौन है वो शख्स जो मेरे बारे में इतने अचे से और पक्की खबर रखता है, जिसे मेरे और मानव के रिश्ते के बारे में इतनी गहराई से पता है..

ये जो कोई भी शख्स है , है वो भोत स्मार्ट, बातो hi बातो में हर वक्त मेरी दबी भावनाओ को झंझोर क्र के रख देता है और खुद को उसकी बातो में आने पर मजबूर कर देता है, अब अगर कल उसका कॉल आता है तो पक्का किसी भी तरह उससे ये जानूँगी की आखिर वो है कौन ...

मैं, पीछे से आवाज लगते हुए मम्मी के बगल में पहुंच कर: क्या बात है मम्मी आप इस वक्त यहाँ...

मेरी आवाज सुन कर मम्मी जो की झुक कर कड़ी हुई थी वो सीधी हो जाती है और मेरी तरफ पलट जाती है, उनके पलटने से मनो मुझे एक और झटका सा लगता है कुकी जैसे hi वो मेरी तरफ ोालत टी है तो उस पारदर्शी साड़ी में से मम्मी का ब्लाउज साफ दिखाई पद रहा ठौर ब्लाउज इतना कैसा हुआ था की उसके अंदर छिपे उनकी पहाड़नुमा चूचिया बहार आने को जैसे तरस रही हो, इतना कसाव भरा था की उनको सांस लेने में भी मनो तकलीफ हो जाये ... मम्मी की उन गोरी मोती मुलायम गोलाईओ से मेर ध्यान तब हैट ता है जब मेरे कान में उनकी आवाज पड़तीहै...

मम्मी : अरे सनी तू कब जगा .. मुझे लगा अब तक सोया होगा तू तो..

मैं : हाँ बस अभी अभी जगा मम्मी, सोचा थोड़ी देर छत पर टहल लू, यहाँ आया तो आपको देखा.. आप क्या कर रही यहाँ अकेले..

मम्मी : कुछ नहीं बीटा बस ऐसे hi बोर हो रही थी निचे तो यहाँ चली आई ...

मैं: हम्म्म ाचा किया वैसे भी दिन भर घर के कामो में रहती हो कभी अपने लिए भी वक्त निकल लिया करो

मम्मी: अरे बीटा एक हाउसवाइफ बिना काम लिए नहीं रह ससक्ति, फ्री वक्त उसके लिए बोरियत सा लगता है ः...

मैं: हेहेहे हाँ फिर भी आप जितना काम करती हो उतना तो शायद hi कोई कर paye...aaram भी किया करो थोड़ा अब..

मम्मी: अच्छा तो मुझे आराम hi करवाना है तो अब जल्दी से पढाई पूरी करके छोटी बहु ले आते है घर ki,fir आराम hi आराम ः..

मैं: हाहाहा मम्मी आप भी न, मुझे कोई शोक नहीं चढ़ा अपनी आज़ादी नीलम करने का.. .में ऐसे hi ठीक हु ..आपके आराम के चक्क्र में मुझे सूली पर न चढ़ाओ...

मम्मी: क्यों अब क्या हुआ, और सूली पर क्या चढ़ना इसमें सनी, आज नहीं तो कल ये तो होना hi है na..puri ज़िन्दगी तो कुंवारे रहोगे नहीं ः...

मैं: हाँ पर अभी तो मेरे मस्ती के दिन है अभी शादी के चक्कर में कहा दाल रही हो आप...

मम्मी: इसमें बुराई क्या है, अब अर्रंगे मैरिज के लिए लड़की भी कौनसा तुरंत मिल जाएगी , ढूंढने में भी तो वक्त बीतेगा hi न बीटा. हाँ कोई पहले से देख राखी हो तूने तो वो बात अलग है ...

Main,muh बनाते हुए: क्या मम्मी आप भी फालतू की बाटे ले कर बैठ गयी हो, ये भी कोई टॉपिक हुआ बात करने का....

मम्मी, मुस्कुराते हुए अपना हाथ मेरे गाल पर फेरते हुए: हाहाहा अरे मजाक कर रही हु मई तो तू भी न, अभी तो तुझे पढाई पूरी करके करार बनाना है , वो ज्यादा जरुरी है ..

मैं: हाँ मम्मी पता है मुझे और मुझे कोई शोक नहीं शादी वादी का ...

मम्मी: अभी सब यही कहते है बीटा लेकिन जीवन साथी की जरुरत तो हर मोड़ पर होती है, अभी तुझे ये बात समझ नहीं आएगी..

मैं: ः ाचा ठीक है मम्मी अभी मुझे ये ज्ञान की बाटे सुनने का कोई मूड नहीं है फिर कभी सुनना...

मम्मी, मेरे गाल खींचते हुए: ाचा तो अभी किस बात का मूड है तेरा ..

मम्मी की बात सुन में उन्हें कास के अपनी बहो में जकड लेता हु और एक प्यार भरी झप्पी देदेता हु.. मेरे ऐसा करने से में अछि तरह से अब मम्मी की उन मुलायम चूचिया का एहसास मेरे साइन पर ले प् रहा था और वो एहसास इतना हसीं था की उनसे अलग होने का सोचना भी ख्याल में नहीं आने वाला था..

मैं, मम्मी को ऐसे hi हुग करते हुए: अभी अपनी मम्मी से ऐसे गले लगने का मूड है मेरा ः...

मम्मी, बेटे के प्रति ममता भरा प्यार दिखते हुए, वैसे hi मुझसे गले लगे हुए: ः सनी तू भी न.. आज इतना प्यार कहा से आ गया तुझे मम्मी पर...

मैं: मम्मी में तो हमेशा से hi प्यार करता आया हु आपसे, पहले भी आपसे कहा था की काम से काम एक बार अपने बेटे को गले लगा कर प्यार से एक किश क्र दिया करो पर आपको फुर्सत hi कहा है..

मम्मी, मेरी बात सुन मुझे थोड़ा पीछे सरकते हुए: ाचा बच्चू तो ये शिकायत है तेरी , चलभी तेरी शिकायत दूर कर देती हु ..

और ये बोल कर मम्मी ने मेरा चेहरा पकड़ लिया और बरी बरी दोनों गलो पर प्यार भरे दो चुम्बन दे दिए , मम्मी के होठो का वो एहसास मनो भूले न भुलाया जाये ऐसा था...

मम्मी, चुम्बन के बाद मेरी नजरो में देखते हुए: अब तो खुश ह न मेरा लाल, अब तो कोई शिकायत नहीं है न...

मैं, मम्मी को दोबारा हुग करते हुए: नहीं मम्मी कोई शिकायत नहीं, बस ऐसे hi रोज मुझे प्यार से किश कर दिया करो मेरा दिन अचे से गुजरेगा ः...

मम्मी, चुराते हुए: ः चाट अब पीछे हैट भोत मस्का हो गया आज के लिए..

मैं: मस्का नहीं ये बेटे का प्यार है मम्मी के लिए हँ...

मम्मी, हस्ते हुए: हाहाहा ठीक है ठीक है मन लेतिहुँ मेरे शैतान बेटे...

मैं, कुछ सोच कर: वैसे मम्मी, पापा का कोई कॉल aaya..phuch गए क्या वो लोग?

मम्मी: पापा का तो नहीं सीमा से बात हुई मेरी, कुछ देर पहले hi पहुंचे है वो लोग..

मम्मी: ाचा चल अब भोत बाटे हो गयी, मुझे निचे जाने दे डिनर भी बनाना है ...

मैं: हाँ मम्मी जाओ आप में आता हु कुछ देर में...

और यही बोल मम्मी छत से निचे चली जाती है और कुछ देर रुकने के बाद में भी निचे आजाता हु..

 
अपडेट- 43


अगले दिन ऐसे hi सब रोज की तरह अपने अपने कामो में लग जाते है और में भी अपनी कॉलेज चला जाता हु. कॉलेज में वक्त ऐसे hi कुछ क्लास अटेंड क्र और इधर उधर की मस्ती में बिट जाता है और अभी घूमते हुए में कैंटीन की तरह पहुँचता हु तो आज दोबारा कामिनी भाभी और प्राची मां को एक साथ बैठे हुए पता हु और दोनों hi आपस में बड़े अचे से घूम मिल कर गप्पे लगाने में व्यस्त थी..

तो अब यहाँ इन दोनों को आपस में गप्पे लगाने देते है और देखते है वह प्रीति की कॉलेज में की हो रहा है..

अभी एक दो लेक्चर अटेंड करने के बाद प्रीति अपने क्लास से बहार निकल कर कैंटीन की तरफ बढ़ hi रही थी की उसको सामने उसकी सहेली मोनाल किसी लड़के के साथ दिखा देती है और वो दोनों hi काफी खुश लग रहे थे और जैसे hi प्रीति उनके करीब पहुँचती है तो वो लड़का मोनाल को bye बोल कर वह से चला जाता है और मोनाल अब प्रीति की सवालिया नजरो से समझ जाती है की उसकी तरफ से क्या सवाल आने वाले है, और ये जानते हु वो पहले उसे कैंटीन में एक तरफ ले जाती है और दोनों वह जा कर बैठ जाते है...

प्रीति, उसके साथ बैठते hi: बताएगी भी अब या पूछना पड़ेगा मुझे???

मोनाल: ः यार बता रही हु जल्दी क्या है तुझे..

प्रीति: बता न मोनाल, वो तो हमारा सीनियर है न, तू उसके साथ क्या कर रही थी और कहा गयी थी सुबह से आज क्लास में भी नहीं थी तू...

मोनाल: हैं बाबा हाँ प्रीति वो हमारा सीनियर hi है, दरअसल कल रत से में इसके साथ थी इसलिए आने में देर हो गई..

प्रीति, मोनाल की बात सुन चौकते हुए: इसके साथ थी मतलब?? कहा थी और क्या कर रही थी इसके साथ..

मोनाल: अब एक जवान लड़की और लड़का रत भर साथ रहे तो क्या करेंगे ये तुझे जैसे नहीं पता है न..

प्रीति: हाँ नहीं पता मुझे कुछ, अब साफ साफ बात तू मुझे..

मोनाल: यार हुआ ये की कुछ दिनों से हमारी बात हो रही थी तो कल हमने मिलने का डीडे किया था, और चूँकि ये अकेला रहता है फ्लैट ले क्र तो जगह वही फ़िनलिसे की... और अब तू जानती है न खली घर में दो जवान जिस्म मिले तो क्या होगा हहै..

प्रीति, एक दम चौकते हुए: तू पागल है क्या.. उसने तुझे मिलने बुलाया और तू चली गयी, एक अकेले लड़के के घर में...

मोनाल: हाँ तो इसमें की खराबी है यर, और वैसे भी हम काफी वक्त से जानते ह एक दूसरे को और रही बात अकेले लड़के से मिलने की तो मेरी जान जो काम हमे करना था वो अकेले में hi होता न, बिच बाजार में तो करते नहीं...

प्रीति: ओह तो इसका मतलब तू पहले से डीडे करके hi गयी थी की तुझे उसके साथ सेक्स करना है..

मोनाल: हाँ ऑब्वियस्ली और नहीं तो क्या, वार्ना मिलने क्यों जाती वो बी उसके फ्लैट में, दरअसल मिलने की वजह hi यही थी की मुझे उससे छुड़वाना था और वो मुझे छोड़ना छह रहा था😉

प्रीति, आँखे बड़ी करते हुए: पहली बात तो धीरे बोल कोई सुन लेगा.. और दूसरी बात, ऐसे कैसे तू किसी के साथ भी सेक्स कर लेती है मोनाल, दर नहीं लगता तुझे क्या यार...

मोनाल: देख प्रीति अब दर दर के रहने से तो कुछ होना है नहीं और तुझे तो पता है न मुझे इस सब का कितना शौक है, लड़को के साथ मस्ती का कितना मजा मिलता है याररर सछहि, और इस बार तो काफी वक्त भी हो गया था कोई नया बकरा फसाये और तभी ये सामने आ गया तो बुराई क्या है हहै.

प्रीति: हे भगवन तू कभी नहीं सुधरेगी, मतलब सिर्फ सेक्स के लिए तू ये सब करती है हैं न..

मोनाल: हाँ यार, में तो कहती हु तुझे भी बिंदास ऐश करना चाहिए यार कब तक ऐसे hi उंगलिओ से काम चलाएगी...

प्रीति: चुप क्र पगली, मुझे कोई शोक नहीं टेरिन्त्रः और में जैसी हु खुश हु समझी.. और तू भी सुधर जा, बिना कुछ सोचे समझे बस ैशियाँ करती है..

मोनाल: ओह्हो भोली भली देवी, एक तरीके से तो में इस लड़के के साथ रत बीते इसका कारन भी तू hi है समझी..

प्रीति: क्या.. क्या मतलब तेरा, में भला कैसे हो सकती हु तेरे इस सब चीजों का कारन, मेने तो उस लड़के से कभी बात तक नहीं की न...

मोनाल: अरे हाँ पर मुझे इस लड़के की बात मैंने और उसके साथ रात बिताने पर मजबूर भी तो तूने hi किया न..

प्रीति: क्या मतलब तेरा, मेने कैसे मजबूर किया..

मोनाल: हैए तेरेको पार्टी वाले दिन से पूछ रही की तेरी तरफ से बोलने वाला हो हैंडसम लड़का कौन था, उसके बारे में बता या उससे मिलवा दे, बात करवा दे पर तू है की बता hi नहीं रही...

प्रीति, ये जान क्र की मोनाल सनी की बात कर रही: क्या मतलब, उसके बारे में जान क्र तू की करती और वो तेरी मज़बूरी कैसे दूर करता...

मोनाल: देख तूने hi कहा था न की वो तेर बॉयफ्रेंड तो नहीं है तेरा उसके साथ कोई अफेयर नहीं चल रहा...

प्रीति: हाँ तो?

मोनाल: तो यार मेने जब से उसे देखा तब से पसंद आ गया है वो मुझे और पता नहीं क्यों पर उसको किसी भी तरह अपना बॉयफ्रेंड बनाना चाहती हु यार, कितना केयरिंग बाँदा था वो, और दिखने में भी फिट, बस जब से उसे देखा उसको hi पाने की हसरत सी हो गई है यार...

प्रीति, ये जान कर चौकते हुए की मेरी सहेली मेरेही भाई के लिए पागल हो रही: पाने की हसरत हो गयी का क्या मतलब है तेरा,...

मोनाल: यार मेराये मतलब की आज तक लड़के मेरे पीछे भागते आये है पर एक वो शख्स था जिसके लिए मई पागल हुए जा रही थी और उसको देख तब से hi वही मेरे ज़हन में घूम रहा था और ये कल्पना मात्रा से hi "की काश वो मुझे अपने निचे लिटा दे और सिर्फ एक बार मेरा जिस्म रगड़ क्र मेरी चुदाई कर दे", में पागल सी हो रही थी और कल शाम भी में उसे सोचते हुए ऊँगली क्र रही थी की इस सीनियर का फ़ोन आया की आज मौका बी है और दस्तूर भी मिलना हो तो आजाओ, और मुझसे मेरे जिस्म की आग संभल नहीं रही थी तो इसी वजह से कल साडी रत में अपना जिस्म इससे रगड़वा कर आई यार....

प्रीति को जब ये पता लगा की मोनाल उसके भाई सनी के साथ छुड़वाने की बात कर रही है, उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के सपने देख रही है, उसके मन में एक अजीब सी जलन सी उत्पन्न हो रही थी मनो की सनी उसका भाई न हो कर उसका कोई खास हो जिसे वो किसी और के साथ बाँटने का सोच भी नहीं सकती और इसी वजह से वो मोनाल की बात सुनते hi भड़कते हुए..

प्रीति: मोनाल तू पागल वागल तो नहीं हो गयी है, तूने ऐसा सब सोचा भी कैसे उसके बारे में, रही बात उसके साथ ये सब करने की तो वो ऐसा लड़का नहीं की ऐसे किसी के भी चंगुल में फास जाये, तू सेक्स के नशे में इतनी पागल हो गयी है की तुझे इसके अलावा कुछ और सूझता भी है क्या... और हाँ अगर तुझे यही सब सोचना य करना है न तो भोत लड़के है तुझे भोत मिल जायेंगे पर आइंदा से इसके बारे में कभी ऐसा कुछ न मेरे सामने बोलना और न hi सोचना समझी...

मोनाल, प्रीति का गुस्सा देख हौले से: यार तू इतना क्यों भड़क रही है लेकिन, वो न तो तेर कोई सैग लागत है जा hi तू उससे प्यार करती है कोई अफेयर है, तुझे क्यों बुरा लग रहा है मेरा उसके बड़े में ये सब बोलना..

प्रीति: वो मुझे कुछ नहीं पैट और मेरा उसके साथ की रिश्ता है वो में बताना जरुरी नहीं समझती, में बीएस ितं जानती हु की तू आइंदा उसे ले क्र ऐसी कोई बकवास बात नहीं करेगी समझी, वर्ण तेरी मेरी दोस्ती ख़तम..

मोनाल, मामले की गंभीरता को समझते हुए: ाचा बाबा शांत हो जा अब यार, तू तो ऐसे भड़क रही जैसे मेने तेरे से उसे छिन्न लिया हो, मैंने इसलिए पहले तुझसे पूछा की वो तेर बॉयफ्रेंड हो तो में पीछे हैट जाऊ हहै...

प्रीति: दुनिया में सिर्फ एक वही रिश्त तो होता नहीं है न अब..

मोनाल: मन की नहीं होता पर जिस तरह उस दिन वो तेर साथ दे रहा था न, तेरे लिए सब से लड़ रहा था कोई बी देख के यही कहेगा की तुम दोनों में भोत गहरा रिश्ता है और सच कहु न, अगर तेरी जगह में होती तो जिंदगी भर के लिए उसे अपना लेती..

मोनाल: वैसे चाहे तू कितना भी नकार ले पर तेरे अंदर भी उसके लिए कुछ तो फीलिंग्स है वार्ना इस तरह मेरी बातो को सुन क्र इतना भड़कती नहीं तू समझी...

प्रीति, मोनाल की बातो को गौर करते हुए सोच में पद जाती है की आखिर क्यों उसे ये सेहेन नहीं हुआ की सनी किसी और लड़की से किसी तरह क रिश्त बनाये, क्यों इतनी जलन हुई मुझे: ऐसा कुछ नहीं है समझी और भड़की इसलिए क्युकी तुझे ऐसा लगता है की सभी लड़के एक जैसे होते है, लड़कीओ के साथ सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने के लिए वक्त बिताते है...

मोनाल: हाँ तो इसमें गलत की ह मेरी जान, आजकल एक लड़का और लड़की बीएस इसी लिए साथ होते है, कुछ महीनो में अचे से चुदाई की मस्ती का मजा लेलो एक दूसरे से और फिर दोनों अपने अपने रस्ते..

प्रीति: में ऐसा नहीं सोचती मोनाल, और मेरा मन्ना है की आज भी दुनिया में प्यार, इज्जत और केयर जैसिचिजे होती है और तूने खुद कहा न की तूने पार्टी में उसकी तरफ से मेरे लिए केयर और फाइटिंग स्परिट देखि न, फिर तू ये कैसे सोच सकती है की वो तुझसे सिर्फ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए रिश्ता बना लेता... वो बाकि मर्दो जैसा बिलकुल नहीं है समझी तू...

मोनाल: अरे मेरी जान व्ही तो बात पसंद आई न मुझे उसमे की वो बाकिओ जैसा नहो कर सबसे अलग है, और देख एक बात कहु तुझसे गेनुइनेली, ठीक है तू मुझे तो उससे नहीं मिलने देगी में समझ गई हु ये बात हहै, पर अगर तू उसके लिए थोड़ा भी फील करती है न तो वो महसूस कर और बता उसे और उससे भी जानने की कोशिश कर, ऐसा लड़का नसीब से मिलत है यार,

प्रीति, अब मन hi मन ये जानने की कोशिश करते हुए की क्या सच में मेरे मन में सनी केलिए कोई भावनाये है या नहीं, और इसी पशोपेश में खो सी जाती है : मुझे ये सब नहीं पता यर, न hi मेने इस बारे में कभी कुछ सोचा है,

मोनाल: सोचा नहीं hi तो सोच वार्ना अब तो में पक्क कह रही हु की अगर में उससे मिल गयी कही तो पक्का अपने बिस्तर तक ले जाउंगी हेहेहे...

प्रीति दोबारा मोनाल की इस बात पर उसे गुस्से भरी नजरो से देखती है जिसे देख मोनाल है देती है ये बोल की वो मजाक क्र रही है और इसी तरह दोनों अपनी बाटे खतम क्र कैंटीन से बहार निकल पड़ते है...

दोपहर के समय यहाँ घर पर महिमा (मम्मी) भी अपना सारा काम निपटा कर कमरे में लेती हुई होती है की न चाहते हुए भी अब उसके ज़हन में उस अनजान कॉलर की बाटे आजाती है और मन hi मन खुद से ये सवाल करने लगती है की उसने कहा था की वो आज भी कॉल करेगा, क्या सच में उसका कॉल आएगा या नहीं... फिर अपने मन को झकोरते हुए की नहीं महिमा तू क्यों उसके बारे में इतना सोच रही है और तुझे क्यों उसके कॉल आने या न आने से इतना फरक पद रहा है तू तो उसे जानती भी नहीं है...

अभी महिमा के मन में यही सब चल रहा होता है की उसका फ़ोन बज उठता hi और स्क्रीन पर नम्बर देख वो समझ जाती है की ये उसी अनजान शख्स का फ़ोन है, जिसे देख आज महिमा को गुस्सा नहीं आता है बल्कि एक अजीब सा भाव होता है की पता नहीं अब आज ये कैसी बाटे करने वाला है, आज तो इससे इसका परिचय ले क्र hi रहूंगी और यही सब सोचते हुए वो फ़ोन रिसीव करती है...

महिमा: hello...

कॉलर: ही, ककौन बोल रहा है..

महिमा: क्या मतलब कौन बोल रहा है, जैसे तुम्हे पता नहीं हो..

कॉलर: ः अरे नहीं महिमा जी, दरसल आज आप कॉल रिसीव करके भड़की नहीं न तो मुझे लगा कही गलत जगह तो कॉल नहीं लग गया या किसी और ने तो नहीं उठा लिया फ़ोन..

महिमा: अब ज्यादा स्मार्ट मत बनो समझे, तुम्हे अचे से मालूम है की इस वक्त घर में मेरे सिवई कोई नहीं है..

कॉलर: अरे वाह, क्या बात है मतलब आज तो आप खुद सामने से सब कुछ मन रही हो, लागत है मेरे hi कॉल का इंतज़ार भी था आपको ः..

महिमा: अब जयदा हवा में मत ऊधो समझे और हाँ अगर तुम चाहते हो की में तुमसे बात करती राहु तो मुझे अपना परिचय दो वार्ना आअज कोई बट नहीं होगी...

कॉलर, ये समझते हुए की ये औरत अब लाइन पर आ रही है: देखिये महिमा जी परिचय देने में मुझे कोई आपत्ति नहीं लेकिन में इस वक्त इतनी जल्दी आपको मेरे बारे में नहीं बता सकता क्युकी अभी उसक सही समय आया नहीं hi और वैसे भी एक औरत अनजान को अपने राज़ ज्याद अचे से बता सकती है हैं न...

महिमा: पर तुम अनजान कहा हो तुम hi तो कहते हो न की तुम मेरे hi कोई करीबी चाहने वाले रिश्तेदार हो, और ये जान क्र की तुम मेरे परिवार में से कोई एक हो, में कैसे अपने राज़ बात दू तुम्हे भला.. वैसे ऐसे कोई खस राज़ है भू नहीं मेरे जो मेने दबा रखे हो...

कॉलर: जी वो तो आप मेरे लिए अनजान नहीं हो पर आपके लिए तो में अनजान hi हु न और मन की में आपक कोई करीबी हु लेकिन आप यकीं करिये ये राज़ सिर्फ मुझ तक रहेंगे और मेरे अंदर hi दफ़न हो जाने वाले है...

महिमा: फिर भी मेने कहा न की ऐसे कोई राज़ है hi नहीं जो मुझे किसी को बताने की जरूरत पड़े..

कॉलर: जी ठीक है वो तो वक्त hi बताएगा ः, वैसे ाचा लगा ये जान कर की आज आप बात करने में दिलचस्पी तो दिखा रही हो, वर्नरोज की तरह भड़क नहीं रही ः..

महिमा: दिलचस्पी न कहो इसे, ये समझ लो की अकेली घर में बोर हो रही हु और तुम भी सीधी तरह से तो मैंने वाले हो नहीं तो बस बात कर रही..

कॉलर: ः सच न मैंने की आदत अब भी नहीं आई आपमें मतलब, खैर कोई बात नहीं जैसे आप कह रही वैसा hi मन लेट हु, अकेली औरत की बोरियत मिटने क भी सौभाग्य कहा रोज मिलता है जी..

महिमा: हम्म्म पर बी तुमसे बात करू तो करू भी क्या, तुम्हरे बारे में मैं कुछ जानती नहीं हु और तुम कुछ बताने वाले नहीं हो...

कॉलर: ाजी इस नाचीज के बारे में बात करके फयदा भी क्या, जब यहाँ एक इतनी हसीं खूबसूरत औरत मौजूद है जिसके बारे में जितनी बाटे करो काम है.

महिमा: थकते नहीं हो की तुम ये घटिया लाइन्स बोल बोल कर के, पता नहीं की दिखा तुम्हे मुझमे ऐसा, चार बचो की माँ हु, बचो की शादी हो गयी मेरे अब की बचा है मुझमे जो...

कॉलर: इस बात का जवाब तो मैंने आपको पहले भिडिया था न महिमा जी, और वैसे भी आपने सुना नहीं शराब जितनी पुराणी हो उतनी नशीली होती है..

महिमा: हाँ तो में कोई शराब दिख रही तुम्हे..

कॉलर: आप शराब से भी जिद नशीली हो, जो तुम्हारा नशा कर ले एक बार उसे कोई और नशा पसंद hi नहीं आएगा..

महिमा, मन hi मन मुस्कुराते हुए: अच्छा, खैर मुझे एक बात पूछनी थी तुमसे

कॉलर: हाँ पूछिए न..

महिमा: आखरी बार तुमने अधूरी बात करके चोर दी थी, तुम कह रहे थे की तुम्हे लगता है की में अपनी जिंदगी में शारीरिक रूप से खुश नहीं हु, तुम्हे ऐसा क्यों लगता है? इस बात का जवाब दिए बिना hi चले गए थे तुम..

कॉलर: ओह तो इसका मतलब आपको मेरा सवाल परेशां कर रहा था अब तक इसका मतलब आपको यकीं था की में दोबारा कॉल करूँगा और आपको इंतज़ार भी था है न..

महिमा: जी नहीं, ऐसा कुछ नहीं, कोई इंतज़ार नहीं था ये तो हमारी बट हो रही वपस तो सोचा पूछ लू बाकि न बताओ तो भी चलेगा...

कॉलर: हाहाहा यही ऐडा तो ढेर कर देती है आपकी मुझे...

महिमा: तो नहीं बताना चाहते तुम जवाब यही समझू में..

कॉलर: अरे बता रहा हु रुकिए भी... दरअसल सही कहा आपने मुझे आप शारीरिक रूप से न खुश लगती है और इसकी वजह भी जैसे मेने पिछली बार आपको बताई थी की आपको अपने पति से जितना प्यार और शारीरिक साथ मिलना चाहिए वो नहीं मिल रहा है..

महिमा: वही तो में पूछ रही हु की तुम ितमे दृढ़ता से कैसे कह रहे हो की मेरे पति से मुझे वो प्यार नहीं मिल रहा है..

कॉलर: क्युकी अगर मिल रहा होता तो आज आपके पति इस तरह अकेले चोर के न जाते, और जाते भी तो जैसा की मेने कहा था जाने से पहली रात आपको बिस्तर में रत भर बुरी तरह से रगड़ के जाते, जैसा की उन्होंने नहीं किया..

महिमा, उसकी बातो को चुप चाप बीएस सुनते हुए: ह्म्म्मम्म

कॉलर: और सिर्फ एक यही वाकिये नहीं ऐसे में और कई वाकिये साबित क्र सकता हु जो ये साबित करेंगे की आप नाखुश हो

महिमा: अच्छा तो बताओ कौनसे वाकिये है ऐसे में भी तो जणू...

कॉलर: ठीक है पर इसके लिए आपको सच सच बताना होगा जो में पुछु वो, झूट नहीं चलेगा तो..

महिमा: हाँ ठीक है..

कॉलर: ये बताओ की आप अपने पति के साथ आखरी बहार घर से बहार कब गयी थी जहा उन्होंने आपको अचे से शारीरिक सुख भी दिया हो...

महिमा: उम्म्म अभी अभी तो भोत वक्त सा हो गया है... वैसे उससे ये कैसे साबित होगा कुछ..

कॉलर: वो ऐसे होगा की हर औरत, औरत hi क्या हर इंसान एक hi जगह रह क्र एक समय बाद बोर होता है कुछ नया करने की कोशिश करता है, और ऐसे में एक हॉलिडे ट्रिप या बहार जा कर खुल कर मस्ती करना मायने रखता है...

कॉलर: वैसे में बी कहा बहार जाने की बात कर रहा आप तो बस ये बताओ की क्या अआप अपने पति से घर के हर कोने हर कमरे में जा कर चूड़ी हो या नहीं...

महिमा, घर में इस तरह छोड़ने के इस एहसास से गर्माते हुए: नहीं, कभी नहीं, बैडरूम के सिवई हमने कही नहीं किया...

कॉलर: हम्म्म और अब ये बताइये की रूम में भी आप दोनों के बिच जो सम्भोग होता है वो कैसा रहता है, सिंपल स्मूथ या रफ़, वाइल्ड, गन्दी गन्दी बातो से भरा हुआ...

महिमा: एक दम सिंपल और स्मूथ सा होता है..

कॉलर: हम्म्म्म और जहा तक में समझता हु आप उन औरतो में से है जिनके मन में इस प्रकार की इच्छाएं दबी रहती है की आपको घर क्र हर कोने में हर कमरे में रगड़ रगड़ के छोड़ा जाये, चाहे आप किचन में हो तो प्लेटफार्म पर झुका कर आपको पीछे से छोड़ा जये, चाहे आप ड्राइंग रूम में होतो सोफे पर और ऐसे hi हर कमरे में अलग तरह से, साथ hi आपको गन्दी बाटे सुन्ना, रफ़ और हार्ड चुदाई जयदा पसंद आएगी हैं न..

महिमा, इस सब बातो से गर्माते हुए और ये मानते हुए की वाकई मुझे ऐसी hi चुदाई की जरुरत है: हाँ मुझे जरुरत है इसी तरह की मस्ती की और हाँ मुझे पसंद है ये सब करना..

कॉलर: हाँ तो आपको जो पसंद है वो आपको आपके पति से मिल नहीं रहा है, और आप पहले भी बता चुकी है की अब आपका उनसे शारीरिक सम्बन्ध भी भोत काम बनने लगा है और इस वजह से अब आपका शरीर छह क्र भी ूटन खुश नहीं रह पता है जितना उसे रहना चाहिए...

महिमा: हम्म्म चलो मन लेती हु की ये बात तो तुमने सही समझी की में अपने पति से शारीरिक रूप से इतनी खुश नहीं हु, और ये भी मानती हु की तुमने इस बात को भोत अचे से समझा भी..

कॉलर: हाहाहा शुक्रिया महिमा जी, और यही कारन है की मुझसे ये नहीं देखा जाता है की एक इतनी हसीं महिला इस तरह से अकेलेपन में रह रही जबकि उसे दिन रत भर भर के प्यार मिलना चाहिए..

महिमा: खैर अब जो किस्मत में है वही मिलता है उससे ज्यादा नहीं....

कॉलर: नाह जी अगर आप चाहो तो जिद क्या भरपूर मात्रा में मिल सकता है, बस आपको कदम बढ़ाना पड़ेगा 😉

महिमा: तुम क्या कहना चाहते हो भोत अचे से समझ रही हु लेकिन ज्यादा ख्याली पुलाव न पकाओ समझे, मेने अपनी बाटे बताई इसका ये मतलब नहीं की तुम्हे कोई मौका मिल जायेगा...

अभी इन दोनों की बात चल hi रही थी की घर की दूर बेल्ल बज उठती है...

और दूर बेल्ल की आवाज सुन महिमा की नजर घडी पर पड़ती है जिसे देख वो समझ जाती है की प्रीति के लौटने का समय हो रहा है और दरवाजे पर प्रीति hi होगी... इसीलिए वो झट से उस कॉलर को स्तिथि से वाकिब करा कर कॉल कट कर देती है और इस वक्त मन हु मन प्रीति को कोसते हुए की, थोड़ी और देर से नहीं आ सकती ये लड़की, बिस्तर से उठ खड़ी हो दरवाजे की तरफ बाद जाती है.... और वही दूसरी तरफ वो अनजान शख्स, कॉलर, मन hi मन खुश होता है की आखिर वो जो चाहता है वैसा धीरे धीरे हो रहा है, ये औरत महिमा अब धीरे धीरे लाइन पर आ रही है और अगले कुछ दिनों में इसका जिस्म मेरे निचे रगड़ रहा होगा ः....

यहाँ मैं भी अब अपनी कॉलेज से बस घर के लिए रवाना हो hi रहा था की गेट पर मुझे प्राची मां अकेली कड़ी नज़र आ जाती है जिसे देख में अपनी बाइक उनके पास जा क्र रोक देता हु...

मैं: क्या बात है मां यहाँ क्यों कड़ी हो आप इस तरह..

Ma'am : अरे कुछ नहीं सनी बस घर के लिए निकल रही हु में भी..

मैं: तो फिर सोच की रही हो बैठ जाओ मेरी बाइक पर में चोर देता हु न आपको आपके घर ma'am..

Ma'am : तुम्हारे साथ, हहै जी बिलकुल hi नहीं..

मैं: क्यों नहीं भला, वैसे भी मेरी बाइक पर राइड करने का मौका चूर्ण नहीं चाहिए, आँख मरते हुए कहा..

Ma'am, शर्मा कर नजरे नीची करते हुए: जी जनाब बस इसीलिए तो नहीं करनीं आपकी बाइक की सवारी, पिछली दफा घर पर चोर्ने का बोल कर बिठा दिया और फिर घर पहुंचने पर पता नहीं कहा कहा की सवारी करवाई तुमने..

मैं: ः तो अब क्या करता, घर के अंदर आने का न्योता भी तो आपने hi दिया था न मां, और ऐसा तो है नहीं की आपको मेरी सवारी कर के मजा न आया हो, मेने अचे से महसूस बी किया और देखा भी की किस तरह मस्ती में उछाल उछाल कर मेरे हथियर की सवारी क्र रही थी आप ः..

Ma'am : उफ्फ्फ्फ़ सनी तुम भी न कही बी कुछ भी बोल देते हो, अभी हम घर में नहीं कॉलेज के गेट पर है ये तो देखो..

मैं: हाय वही तो गम है प्राची ma'am, घर पर होते तो अजा बी बाइक की जगह आप मेरे निचे होती. वैसे कब औ दोबारा आपके घर आपकी सेवा करने, भोत दिन हो गए है न हाहाहा...

Ma'am : चुप करो तुम भी न सनी, और हाँ मुझे नहीं करवानी कोई सेवा तुमसे, उल्टा तुम्हारी सेवा के बाद मेरा बदन ज्याद टूटने लगा था हहै...

मैं: हाहाहा ाचा अब चलो सच में ड्राप क्र दू आपको घर पर सीरियसली..

Ma'am : आज नहीं सनी, आज वो कामिनी ma'am के साथ जा रही हु मैं, उन्होंने कहा है की वो ड्राप कर देंगी मुझे, बस आती hi होंगी कार ले क्र..

मैं, मन hi मन ये सोचते हुए की आजकल भाभी और मां के बिच बड़ी नजदीकियां आ रही है लागत है किसी दिन दोनों को एक साथ पेलने का मौका मिल जाये हहाहा.. मैं ये सोच hi रहा था की मेरे पास कामिनी भाभी की कार आकर रुक जाती है..

कामिनी: क्या बात है प्राची ma'am चलना नहीं है क्या अब... और सनी तुम यह की क्र रहे..

मैं: कुछ नै ma'am वो मेने प्राची मां को अकेले खड़े देखा तो पूछने आया था कही उन्हें मेरी राइड की तो जरूरत नहीं...

एक तरफ कामिनी भ्भी मेरी बात सुन और समझकर आंखे बड़ी करते हुए मुझे बनावटी गुस्से से देखने लग जाती है वही प्राची अपनी मेरी तरफ देख घबरा सी जाती है की ये मेने खुल्ले में कामिनी के सामने क्या बोल दिया ः और कोई कुछ बोलता उससे पहले hi प्राची बोल पड़ती है..

प्राची: हाँ ma'am वो सनी मुझे घर ड्राप करने के लिए कह रहा था बस...

कामिनी, मेरी तरफ हस्ते हुए: सनी इसकी कोई जरूरत नहीं है, में प्राची ma'am को ड्राप कर दूंगी अब तुम भी अपने घर जाओ...

और कामिनी भाभी की बात सुन में वह से घर की तरफ निकल पड़ता हु और यहाँ प्राची ma'am, कामिनी के साथ वाली सीट पर बैठ जाती है और दोनों प्राची ma'am के घर की तरफ चल पड़ते है..

रस्ते में उन्दोनो के बिच भोत सी बात चित होती रहती है और इसी बिच गाड़ी प्राची मम के घर के अगर जा कर रूकती है, जहा पहुंचने पर प्राची कामिनी को भी जिद करके अपने घर के अंदर आने के लिए मजबूर कर देती है..

घर में पहुंचने के बाद प्राची कामिनी को बैठने का बोल उसके लिए पानी लेने जाने hi लगती है की कामिनी उसे मन क्र देती है की इसकी कोई जरुरत नहीं बीएस थोड़ी देर ऐसे hi बैठ कर बाटे करते है..

कॉलेज में भले hi वो दोनों एक दूसरे से अछि तरह बाटे करती थी लेकिन अपनी निजी जिंदगी के बारे में दोनों hi एक दूसरे से बेखबर थी और यहाँ प्राची के घर पहुंचने पर किसी और को न पा कर..

कामिनी: प्राची, वैसे आपका घर भोत ाचा है लेकिन इतने बड़े घर में और कोण कोण रहता है आपके साथ..

प्राची: में अकेली रहती हु ma'am बस और कोई नहीं रहता..

कामिनी: देखो पहली बात तो अब हम कॉलेज में नहीं है इसलिए ये ma'am कहना बंद करो, यहाँ में तुम्हारी सहेली के नाते बैठी हु स्टाफ मेंबर के नाते नहीं समझी..

प्राची: हहै ाचा अच् ठीक है कामिनी..

कामिनी: थॉट्स बेटर, वैसे तुम अकेली क्यों, मतलब में समझी नहीं, तुम्हारे पति कहा रहते है फिर.

प्राची, चेहरे पर शिकन लेट हुए: बस ये समझ लो कामिनी की अभी वो मेरे साथ नहीं रह रहे, कुछ ऐसे कारन है जो हम दोनों को एक साथ नहीं रहने दे रहे है..

कामिनी: देखो में जानती हु की हर किसी के जिंदगी. में कुछ दिक्कते होती है और में तुम्हे फाॅर्स नहीं करुँगी वो बाटे शेयर करने के लिए, पर सच कहु तो मुझे आश्चर्य हो रहा है, तुम्हे देख कर कोई कह नहीं सकता की तुम भी इस तरह जिंदगी गुजर रही हो...

प्राची: हम्म्म पर कभी कभी शायद आगे कुछ ाचा होना हो इसलिए वर्त्तमान में थोड़ी दिखाते सेहेन करनी पद जाती है, और मेने खुद इस जिंदगी को चुना है तो मुझे अफ़सोस नहीं है..

कामिनी, प्राची की बातो को पूरी तरह नहीं समझ पति है पर इस बात को यही विराम देना ठीक समझती है: हम्म्म खैर जो होगा ाचा hi होगा.. वैसे एक बात बताओ कॉलेज गेट पर सनी और तुम्हारे बिच क्या बाटे हो रही थी..

प्राची, सनी का नाम सुन थोड़ा घबराते हुए: अरे वो... उसने बताया न वो बस मुझे घर ड्राप करने के लिए पूछ रहा था...

कामिनी: ः वाह लगता है भोत खास ma'am होतुम उसकी, क्युकी और किसी ने तो नहीं पूछा तुम्हे उसने hi क्यों और वैसे भी मेने पहले भी तुम्हे उसके साथ कॉलेज कैंटीन में बैठे हुए देखा हाउ..

प्राची: क्या कामिनी तुम भी na,vo पहले एक दो बार मेने उससे लिफ्ट लेली थी इसलिए उसे लगा शायद मुझे आज भी जरुरत होगी बस और कुछ नहीं,..

कामिनी: हाहाहा ाचा चलो मान लेती हु तुम्हारी बात, वैसे अगर तुम दोनों के बिच कुछ चल भी रहा हो तो कोई बुराई नहीं है, लड़का दिखने में तो इतना बुरा बी नहीं क्यों...

प्राची, आँख बड़ी करते हुए: कामिनी,,, कुछ भी हाँ मतलब, तुम जानती हो न में भी तुम्हारी तरह शादी शुदा हु, किसी और के साथ कोई अफेयर रखने का सोच भी कैसे सकती हो..

कामिनी: ले इसमें बुराई क्या है अब, वैसे भी शादी शुदा होना आग बात है और एक मर्द का साथ पाना अलग बात, और अब तुम खुद कह रही हो की तुम आरसे से अपने पति से दूर हो तो इसमें बुराई भी क्या है..

प्राची: ाचा, तो इसका मतलब अगर तुम मेरी जगह होती और अकेले रह रही होती तो ऐसे अफेयर करती..

कामिनी, मन में ये सोच की में तो पति के होते हुए भी इसी लड़के की रंडी बन बैठी हु, टपक से: हाँ बिलकुल में तो रखती अफेयर, इसके गलत क्या है, जिंदगी में प्रोब्लेम्स अपनी जगह है और जरूरते अपनी जगह है...

प्राची, कामिनी की बात सुन हैरानी से: हावववव मुझे नहीं पता था की तुम इतनी चालू निकलोगी हेहेहे..

कामिनी: ः अब में स्टाफ मेंबर को नहीं बता सकती मेरा ये चेहरा न लेकिन अब हम स्टाफ से ज्यादा है तो तुम्हरे सामने क्या छिपाना, वैसे भी अगर में अकेली राहु और सनी जैसा ाचा लड़का मिले तो बुराई hi क्या है..

प्राची: कभी कभी सिर्फ ाचा दिखना काफी नहीं होता कामिनी, इंसान का परिवारिक बैकग्राउंड और रवैया भी मायने रखता है..

कामिनी, इस बात पर गंभीर होते हुए: क्या मतलब तुम्हारा, क्या सनी के फॅमिली बैकग्राउंड में कुछ बात है क्या, क्या उसने तुमसे कुछ कहा जो..

प्राची, बात को सँभालते हुए: उसने तो कुछ नहीं कहा और ना hi मुझे कोई डाउट है, में बस इतना कह रही की हमे इंसान को अचे से पहचानने के बाद अपनी जिंदगी में दाखिल करना चाहिए और दुनिया में ऐसे भी मतलबी लोग भोत है जो अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक गिर जाते है और उसका नुकसान हमे जिंदगी भर भुगतना पड़ता है..

कामिनी को ये समझते देर नहीं लगती की यहाँ कुछ न कुछ बात में गड़बड़ है और कही न कही ये सब उसके hi परिवार से जुड़ा हुआ लग रहा हाउ लेकिन उसे ये भी लगता है की हो सकता है वो कुछ ज्यादा सच रही हो, प्राची अपनी जिंदगी में शायद उस दौर से गुजरी हो इसलिए बोल रही हो... फिर भी वो मन hi मन सनी से इस बारे में बात करने का सोच कर प्राची से अलविदा ले कर अपने घर की तरफ निकल पड़ती है..
 
अपडेट- 44


शाम के वक्त रोज की hi तरह में घर पर टेरेस की तरफ बढ़ चलता हु और वह अभी मुझे टहलते हुए कुछ समय hi होता है की आज प्रीति भी अपने हाथ में चाय का कप लिए पहुंच जाती है...

प्रीति जो इस वक्त एक कुरता जो की एक दम उसके जिस्म से कैसा हुआ था, जिसमे उसके जिस्म के हर एक अंग का अकार बड़े hi अचे से दिखाई पद रहा था और ये कुरता भी उसने शार्ट पहना हुआ था जिस वजह से टेरेस पर चल रही हवा के कारन उसका कुरता पीछे से सरक जाता और उसकी कासी गदराई गांड बार बार पहनी हुई लेग्गिंग से दर्शन देने में लगी हुई थी... अभी मेरी नज़र इस सब पर hi घूम रही थी की उसकी आवाज मेरे कानो के पड़ती है...

प्रीति, चाय की चुस्की लेते हुए: अरे सनी तू यहाँ क्या कर रहा अकेले अकेले..

मैं, चोरी छिपे उसके कुर्ते से निकलते उभर को देखते हुए: कुछ नहीं बीएस मेरी तो रोज की आदत है इस वक्त यहाँ टहलने की, लेकिन आज तू यहाँ कैसे आ गई..

प्रीति, मुँह बनाते हुए: क्यों में यहाँ नहीं आ सकती क्या, कोई मनाही है या अब यहाँ आने के लिए तेरी परवानगी की जरूरत है..

मैं: ः अबे पगली मेने ऐसे hi पूछा था ितं भड़कती क्यों है, हर बात पर जैसे मनो बिल्ली की तरह पंजा मरने की आदत हो गई है तेरी

प्रीति: मुझे तूने बिल्ली कहा, रुक अब तो तुझे सच में पंजा मार के hi रहूंगी..

और इतना बोल प्रीति चाय का कप एक साइड में रख मेरी तरफ भगति हुई आती है जैसे की उसके हाथके नाख़ून से मेरे चेहरे को दबोचने वाली हो लेकिन उसके करीब आते hi में एक तरफ हैट जाता हु और इस कारन वो टेरेस की बाउंड्री की तरफ चली जाती है, जिससे की मैं अब उसके पीछे से आकर अपने हाथ उसकी कमर में डालकर पीछे से दबोच लेता हु...

इस वक्त ये सब मस्ती में अचानक स्वरुप hi है था और अब प्रीति मुझसे छूटने की नाकाम कोशिश कर रही थी...

प्रीति: ोुछःह सनी देख चोर मुझे वार्ना भोत पिटेगा समझा तू..

मैं: ः क्यों भोत उछाल रही थी न, ज्यादा होशियार बन रही थी न तू अब क्या हुआ, मर पंजा, मेरी बिल्ली हाहाहा..

प्रीति, कसमसाते हुए: उफ्फ्फ्फ़ मुम्मा, प्लस चोर न सनी

ये सब अब तक जो मस्ती चल रही थी उसी बिच अब मुझे ये महसूस होता है की प्रीति की कासी गांड मेरे शरीर से पूरी तरह से सटी हूँ थी और एक मर्द को ये अनुभव करने में देरी नहीं लगती और मेरे सतह भी बिलकुल वैसा hi हुआ और जैसे hi मुझे ये एहसास हुआ की मेरी बेहेन प्रीति की कासी गांड मेरे लुंड से सटी हुई है, उस गांड के दबाव और मुलायम एहसास से उसमे गर्मी पैदा होने लग जाती है और अब में इस पल का और मजा लें चाहता था इसलिए उसे और कास के पकड़ लिया था...

मेरे ऐसा करने से अब प्रीति भी पूरी कोशिश कर रही थी की वो मेरी पकड़ से आज़ाद हो जाये लेकिन ऐसा हो नहीं प् रहा था और तभी थक हार कर..

प्रीति: उफ्फ्फ्फ़ भाई प्लस छोड़ न मुझे, मुझमे इत्तनी हिम्मत नहीं की अब तेरी शक्ति की बर्बरी करू, चोर न यार

ये बोलने के लिए प्रीति आगे की तरफ हो कर पीछे मुड़ने की कोशिश क्र रही थी लेकिन ऐसा तो नहीं हुआ बल्कि मुझे उसके कुर्ते से उसकी नंगी बैक की एक झलक दिखाई दे गई, गोरी चमड़ी की वो सुन्दर सी बैक और साथ hi उसके कसमसाने से अंदर पहनी हुई ब्रा के पतले पतले स्ट्रैप्स भी मेरी नज़र में आ रहे थे और ये सब देख मुझसे रहा नहीं गया और मेने अपना मुँह आगे ले जा क्र पीछे से उसकी बायीं तरफ की गर्दन और कंधे के बिच में हलके से चुम्बन के साथ जोर से दांत गदा दिए..

मैं, इस तरह उसके कंधो पर दन्त रगड़ने के बाद: जा नहीं चोरता तू जो करना है कर और देख तू पंजा नहीं मर पाई लेकिन मेने तो तुझे काट लिया 😛

प्रीति, मेरे होती का एहसास अपने गर्दन और कंधे पर प् कर सिहर सी जाती है और साथ हु दांतो की गाड़ी से दर्द का एहसास करते हुए: ोुछहहहह भाई क्या कर रहा है ये तू, दर्द होता है मुझे ऐसे कोण काट ता है भला, देख चोर मुझे अब तो में मम्मी को बताउंगी की तू इंसान से जानवर बन गया है काटने लगा है िष्ठ्हह..

मैं, उसकी ये बात सुन कर उसकी कमर को और अपनी तरफ खींच लेता हु जिससे की इतनी देर से हो रही मस्ती की वजह से मेरे लुंड में जो गर्मी पैदा हुई थी वो अब धीरे धीरे आकर ले रही थी और इसी वजह से प्रीति को पीछे खींचते वक्त इस बार शायद प्रीति को भी मेरे लुंड का दबाव उसकी गांड पर महसूस हुआ होगा और इसी बिच में एक बार और उसके कंधे और गर्दन के बीचो बिच काट देता हु..

और इस वजह से अब प्रीति इस एहसास को झेल नहीं पाई और बुरी तरह से सिहर सी गई मनो उसकी टंगे कंपनी लग गई हो पर खुद को सँभालते हुए..

प्रीति: सनी प्लस चोर न अब मुझे दर्द हो रहा है, मत काट न ऐसे क्या कर रहा है तू..

मैं, अब हालत समझते हुए: ः तो अब बनेगी ज्यादा स्मार्ट, करेगी होशियारी बड़ी आयी मुझे पंजा मरने वाली...

प्रीति: उफ्फ्फ नहीं भाई नहीं करुँगी गलती हो गई बाबाब चोर भी यार...

और उसकी बता सुन कर धीरे से में अपनी पकड़ ढीली कर देता हु और वो झट से मुझसे अलग हो कर अपना एक हाथ पीछे की तरफ ले जाती है जहा मेने हलके से बाईट किया था, वह अब भी मेरे दांतो की गड़ाई उसकी उंगलिओ को महसूस होती है..

प्रीति: उफ्फ्फ सनी तू इंसान है या जनवर, ऐसे कोण कट्टा है भला, निशान पद गए पुरे,

मैं: ः तो अगर तेरा पंजा मुझे लगता तो तेरे इन बड़ेबड़े नखूनो से मेरे चेहरे का भी यही हल होता न, सो जैसे को तैसा..

प्रीति: हाँ पर मेने नाख़ून लगाए तो नहीं थे न हँ..

मैं: ः कोशिश तो पूरी की थी तूने, वैसेतु कहे तो ला में उस दर्द को काम करने में मदद क्र सकता हु तेरी..

प्रीति: तू क्या मदद करेगा अब, जब ये किय hi तूने है..

मैं, उसे पीछे की तरफ पलटा कर चुप चाप कड़ी रहने को बोलता हु और झा मेने उसे कटा था उस भाग पर अपने हाथो को हलके से सहलाने के बाद अपने होठो को वह रख एक के बढ़ एक दो बर प्यार से चुम लेता हु...

वही दूसरी तरफ मुँह किये खड़ी प्रीति को इस बात का बिलकुल इल्म नहीं था लेकिन पहली बार मेरे हठ से सहलाने से शायद उसे ाचा महसूस हुआ था तो उसने अपनी आंखे बंद सी कर ली थी और मेरे पहले चुम्बन पर शायद उसे मजे के आगे ये एहसास नहीं हुआ लेकिन दूसरी बार चूमने पर वो तुरंत आगे की तरफ हो जाती है और पलट कर मेरी और देखते हुए...

प्रीति: सनी ये क्या क्र रहा है तू..

मैं: क्या कर रहा मतलब, तुझे मेने कटा था न तो उस दर्द की दवा कररहा था.

प्रीति, जिसे न जाने क्यों मन hi मन अपने भाई का इस तरह उसके शरीर क किसी हिस्से को चुना और चूमना ाचा सा लगा : ऐसे कौन दवा करता है, कुछ भी मतलब

मैं: क्यों इसमें क्या गलत है, तू बेहेन है मेरी और वैसे भी तूने देखा नहीं छोटे बचे को कभी चोट लगती हिअ तो उसे ऐसे hi प्यार से चुम कर कहते है की अब दर्द काम हो जायेगा ः.

प्रीति, सुन कर हस्ते हुए: तो तुझे क्या में छोटी बची लगती हु जो ऐसे कर रहा था इडियट

मैं: हाँ अब तू मुझसे छोटी है तो मेरे लिए तो हुई न वैसे hi छोटी बची..

प्रीति: ाचा किस एंगल से तुझे में छोटी बची लगती हु बताना जरा, और ये बोल प्रीति पूरा घूम कर दिखती है, बताना जरा..

मैं, उसे इस तरह घूमते हुए देख उसका पूरा शरीर उप्पेर से निचे तक देखता हु और फिर उसकी नज़रो में देख: हाँ यार तू अब इतनी छोटी भी नहीं रही, क़ाफीबड़ी हो गई है ः..

प्रीति, मेरी बात सुन इतराते हुए: पद गयी न कलेजे को ठंडक अब तो, मन लिया न की में छोटी नहीं और वैसे भी तुझमे और मुझमे कोई ज्यादा उम्र का फरक नहीं है समझा..

मैं: हाँ फिर भी बड़ा तो मई hi हु ठीक है न..

प्रीति: हाँ पता है मुझे इसलिए तो तुझे भाई कहना पड़ता हिअ कभी कभी..

मैं: ः वैसे एक बात कहु तुझसे, ाचा लगता है जब तू मुझे भाई कहती है तो, भोत प्यार आता है तुझपर, और जब सनी बोल क्र भड़कती हुई आती ह तो ऐसा लगता है की कोई जंगली बिल्ली मेरे पीछे चोर दी हो..

प्रीति, मेरी बात सुन जोर से हस्ते हुए: हाहाहा सच ालेलेले मेरा प्यारा भाई, ाचा चल एक बात बट सिर्फ मुझे की उस पार्टी में तू जंगली बिल्ली की तरफ से आया था या अपनी प्यारी बेहेन के लिए आया था..

मैं: सच कहु तो में अपनी तेरे लिए आया था, क्युकी चाहे तू मेरे आगे बिल्ली बने या न बने पर है तो तू मेरी बेहेन और तेरे लिए कोई कुछ गलत कहे तो उसकी जान लैलूंगा मैं..

प्रीति, मेरी बात सुन करीब आते हुए: सच इतनी फ़िक्र है तुझमेरी..

मैं: तुझे कोई शक है क्या अब..

प्रीति: नाह उस रात के बाद कोई शक नहीं रहा मुझे, और तेरे प्रति सच मेरी रेस्पेक्ट बाद गयी है भाई और आज से में तुझे हमेशा भाई hi कहूँगी ी प्रॉमिस..

मैं: हैइए अब बीएस क्र रुलायेगी क्या हाहाहा, तेते मुँह से मेरर बारे में इतनी अछि बाटे सुन्ना अजीब लगता है

प्रीति, है कर झट से मुझे अपने गले से लगा लेती है और इस बार उसने खुद मुझे इतना कास के गले लगाया था मनो ये एक भाई बेहेन का मिलान काम और दो प्रेमिओ का मिलान ज्यादा लग रहा था...

गले लगी हुई प्रीति के मन में भी अभी शायद यही भाव चल रहे थे मनो वो अपने भाई से ज्यादा किसी ऐसे लड़के से लिपटी हुई है जो सिर्फ उसके लिए बना हो, जो उसकी हर तरह से कदर करना जनता हो और आज उसे ऐसे शख्स से मिलने के बाद ऐसा लगा हो मनो सालो से इसी शख्स का इंतज़ार कर रही हो..

कुछ देर इसी तरह एक दूजे से लिपटे रहने के बाद उसे शायद ये बात दोबारा यद् आजातु है की वो जिस शख्स के बारे में सोच रही वो उसका भाई है और इसी कारन वो दोबारा से मुझसे अलग होती है और देर होने का बहाना कर वह से निचे की तरफ भागने लगती है ुर सीडीओ से उतरते हुए उसके चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान भी चाय हुई होती है और मन में अजीब सी हलचल की ये उसे क्या हो रहा है, क्यों उसे मोनाल का सनी के बारे में बोलना जलन महसूस करवाता है, गुस्सा दिलाता है और अब इस तरह भाई के प्रति ये सब महसूस करना, आखिर ये सब हो क्या रहा है.. और इसी नासमझी में वो निचे उतर अपने कमरे में पहुंच जाती है..

रत को डिनर के बाद सभी अपने अपने कमरे में चले गए थे सिवई मेरे और मम्मी के, चुकी हम दोनों hi ड्राइंग रूम में बैठे हुए टीवी देख रहे होते है, मम्मी जो इस वक्त एक लॉन्ग गाउन पहनी हुई थी जिसमे बिना किसीनतारह से सिंगार के भी एक बेहद खूबसूरत औरत नजर आ रही थी, मेरी नजर तो हर थोड़ी थोड़ी देर में कंही उनके चेहरे पर तो कभी उनके बाकि जिस्म पर जा कर रुक जाती थी, उन्हें देख कर कोई कह भी नहीं सकता था की बहार से इतनी खुश और मुस्कान लिए घूमने वाली औरत अंदर से इतनी प्यासी और पति के प्यार की प्यासी है लेकिन घर परिवार और बच्चो के आगे उसे इस सब की कोई पड़ी नहीं होती है..

अभी में मम्मी के साथ बैठे बैठे यही सब सोच रहा होता हु की मेरे कानो में मम्मी की आवाज पड़ती है..

मम्मी: चलो बीटा सनी ये टीवी में भी कुछ ढंग का नहीं आ रहा अब, मुझे तो बोरियत सी हो रही है, तुम देखो में तो सोने जा रही हु अब..

मैं, मम्मी की तरफ देखते हुए: क्या मम्मी इतनी जल्दी कहा सोने जा रही हो और में अकेले बैठ क्या करूँगा, टीवी देखने में भी मजा नहीं आएगा बोर हो जाऊंगा में, बैठो न थोड़ी देर..

मम्मी: नहीं बीटा क्या फायदा ऐसे बैठे रहने का, कोई ढंग का प्रोग्रमम भी नहीं आरहा और अगर यहाँ नहीं बैठना तो जाओ तुम भी कमरे में और सो जाओ..

मैं: क्या मम्मी इतनी जल्दी किसे नींद आती है भला, चलो ठीक है टीवी देखना बोरिंग होगा पर आप अपने इस बेटे के साथ बैठ तो सकती हो न, थोड़ी देर बाते hi करते है..

मम्मी: हहै ाचा दिन भर तो तुझे फुर्सत नहीं अब रात को वक्त मिला है तुझे माँ से बात करने का..

मैं: ः ऐसा नहीं है मम्मी दिन में टी आपको भी काम होते है अभी रात में अचे से हम बात कर सकते है न..

मम्मी: ाचा मेरा बीटा, चल फिर एक काम करते है यहाँ लाइट ऑफ कर दे वार्ना थोड़ी देर में प्रीति चिल्लायेगी लाइट ऑफ करने के लिए ( क्युकी प्रीति का रूम ग्राउंड फ्लोर पर hi है ), और हम मेरे कमरे में चल कर गप्पे मरते है..

मैं, खुश होते हुए: हाँ मम्मी ये भी सही कहा आपने, उस चुड़ैल की दखल अंजडजी नहीं किए अब बिच में ः..

और ये बोल क्र में और मम्मी दोनों hi मम्मी के कमरे में चले जाते है, और कमरे में जा कर हम उनके बिस्तर पर बैठ जाते है..

मम्मी: हाँ तो बीटा जी अब बोलो क्या बाटे करनी है आपको..

मैं, मम्मी के इस तरह प्यार से पूछने पर उनको देखते हुए: है मम्मी कितना ाचा लगता है जब आप इतने प्यार से आप मुझे बीटा कहती हो

मम्मी: ाचा, अब क्या करू माँ के लिए तो अपना सब कुछ बच्चे hi होते है न..

मैं: हम्म और मेरे लिए आप hi सबसे बेस्ट हो मम्मी, पर आप न हर बार अपनी बात से मुकर जाती हो और मुझे ये बिलकुल ाचा नहीं लगता है..

मम्मी: क्यों अब में कौनसी बात से मुकर गई तेरी.

मैं, मुँह बनाते हुए: क्यों यद् करो कल hi टेरेस पर अपने वडा किया था की रोज अपने इस बेटे को दिन में काम से काम एक बार प्यार से गले लगाओगी और एक प्यार भरी चुम्मी डौगी.. कहा था न आपने?

मम्मी, मेरे मुँह देख कर हस्ते हुए: हहहहए ाचा जनाब में मुकर रही, मुझे तो यद् था पर तू hi बता सुबह से आया की तू मेरे पास, फुर्सत कहा होती ह तेरे पास माँ से मिलने की.

मैं, उनकी बात सुन उनकी आँखों में देखते हुए: हाँ तो अब तो आपके पास बैठा हु न अब किसका इंतज़ार है आपको मम्मी..

मम्मी मेरी इस बात पर मुस्कुराते हुए मेरे पास खिसक जाती है और करीब आकर अपने होठो को मेरे गलो पर लगा देती है और भोत hi हौले से प्यार से गलो को चुम लेती है..

मम्मी, चुम्बन ख़तम करने के बाद: अब तो खुश है न तू..

मम्मी की इस बात पर में बिना कुछ बोले दूसरा गाल उनके होठो की तरफ बड़ा डेट हु जिसे देख वो खुद मेरी भावनाओ को समझ जाती है और अगले hi कुछ पालो में दूसरे गाल पर भी अपने उन रसीले मुलायम गद्दीदार होठो से चुम लेती है..

मम्मी: अब खुश है न तू..

मैं, मम्मी को बिस्तर पर बैठे बैठे hi गले लग क्र: हैं भोत खुश हु, वाकई मम्मी आप जब ऐसे चूमती हो न तो भोत ाचा लगता है, ऐसा लगता है की बस आपसे चुमवाता राहु लगातार और आप मुझे कभी चूमना बंद करो hi नहीं..

मम्मी: हेहेहे चल चल अब बस कर समझा, अब बच्चा नहीं रहा तू जो ये सब करता रहे..

मैं: बच्चा नहीं रहा तो क्या हुआ हु तो आपका बीटा hi न मम्मी, और अगर बड़े होने से अपनी मम्मी से इस तरह क पैर मिलना बंद होता है तो मुझे बच्चा hi होना किए था बड़े होना hi नहीं था..

मम्मी, मेरी बात सुन हस्ते हुए: हेहेहे ाचा क्यों अभी क्या कमी लगती है तुझे मेरे प्यार में भला..

मैं, शिकायत करते हुए: क्यों नहीं भोत चीजे है जो अब मुझे मिलना बंद हो गई..

मम्मी: ाचमुझे भी तो बता जैसे की क्या कमी हो गयी है ऐसी..

मैं: सबसे पहले तो यही देख लो की पहले आप बिना कहे मुझे दिन में हज़ारो बार खेलते हुए चूमती रहती थी है न..

मम्मी, मुझे देख हस्ते हुए: ः हाँ चलो मन लेती हु ये पहली बात तो तेरी..

मैं: हाँ और दूसरी शिकायत ये की जब में छोटा था तो रोज आप मुझे अपने पास इस कमरे में सुलाती थी अब बड़ा हुआ तो अलग कमरा दे दिया😛..

मम्मी: हाँ तो अब तू इतना छोटा नहीं रहा की तुझे साथ ले क्र सोते वैसे भी तू खुद उछलता था न की भैया और दीदी की तरह तुझे भी अपना अलग कमरा चाहिए..

मैं: हाँ तो में तो बच्चा था न मुझे समझ कहा थी पर आप तो मुझे रोक सकती थी न, अपने पास huh..mere कहने पर पापा मान गए अलग कमरे के लिए तो आपने उनको भी नहीं रोका..

मम्मी: हहै ाचा तो चल आज रोक लेती हु आज तू यहाँ सो जा मेरे पास बस,, और तुझे शिकायत है न की मेने तेरे पापा को भी नहीं समझाया तो एक काम करते है जब तक वो वापस नहीं आते तू यहाँ मेरे साथ hi सो जाया करना बस..

मैं, मम्मी की बात सुन जहा मेरा अंदर का बीटा एक तरह से खुश होता है वही दूसरी तरफ एक मर्द होने के नाते मेरी नज़र में अब तक की सबसे कामुक औरत के साथ एक बिस्तर में सोने की बात सुन जोश से भर जाता है और इसी जोश में उछलते हुए: क्या... सच मम्मी आप मजाक तो नहीं कर रही हो न, सच हम दोनों एक hi साथ एक बिस्तर में सोयेंगे न पापा के आने तक..

मम्मी, शायद वो भी मन hi मन ये जानती थी की अब उनका बीटा छोटा नहीं रहा जवान हो चूका है और जवान लड़के के साथ हमबिस्तर होना उनके लिए भी शायद अलग तरह का रोमांच होने वाला था: हाँ मेरे बच्चे, में कोई मजाक नहीं कर रही, अगर तू मेरे साथ सोने से खुश है तो मुझे कोई दिक्क्त क्यों होगी भला..

मम्मी की बात सुन मेने उन्हें कास के अपने गले से लगा लिया जिससे की उनके मोठे रसीले ामो का दबाव अब अचे से मुझे मेरे साइन पर हो रहा था और इसका अनुभव पते hi जैसे मेरे साइन को बेहद ठंडक सी पहुंची हो, और कुछ देर ऐसे hi अपने आलिंगन में मम्मी को रखने के बाद उनसे अलग हो कर बिना कुछ कहे में भी अपने होठो से मम्मी के दोनों गलो पर बरी बरी से चुम्बन जड़ देता हु..

मेरी तरफ से हुए इस अचानक से चुम्बन से कुछ पालो के लिए मम्मी भी हैरत में पद जाती है लेकिन बाद में बेटे का प्यार समझ कर एक माँ जैसी प्रतिकिर्या देती है ठीक वैसे hi वो भी मुस्कुरा देती है..

मम्मी, अब पलग के सहारे धक्के लग टंगे लम्बी करके बैठ जाती है और में अब भी उनके सामने उनकी कमर और पेट के पास बैठा हुआ था और वैसे hi बैठे हुए वो पूछती है: अब तो कोई शिकायत नहीं बची न तेरी या और कुछ भी है.. आज जो भी शिकायते है सब कह दाल..

मैं, मम्मी के इस तरह मेरे सामने बैठने से अब उनके बूब्स उस गाउन में बिलकुल मेरी नजरो के सामने थे, पिछले कुछ दिनों में जिन रसीले ामो को मेने कई दफा नंगे देख लिए थे और जिनसे रास पिने के लिए मेरी प्यास दिनों दिन बढ़ती जा रही थी, आज वो आम बिलकुल मेरे सामने थे पर फिर भी में उनका रसास्वादन नहीं कर प् रहा था और इसी तड़प में : हाँ मम्मी एक शिकायत और है पर वो श्याद अब पूरी होने से रही क्युकी न तो में इस लयकरः हु और न hi अब में उम्र के उस पड़ाव में हु की आप अपने बेटे की वो शिकायत दूर करने का सोचोगी भी..

मम्मी, थोड़ा सीरियस हो मुझे देखते हुए: ाचा ऐसी क्या शिकायत है, तू बोल तो सही एक बार..

मैं: नहीं मम्मी रहने दो चोरो, आपने आज दो बाटे मन क्र मुझे भोत खुश किया है तीसरी शिकायत फिर कभी बताऊंगा वैसे भी अभी तो एक हफ्ता है आपके साथ रात बिताने को, तो इसी बिच वो इच्छा भी जाहिर कर hi दूंगा..

मम्मी: हेहेहे ाचा चल ठीक है जब तेरा मन करे बोल देना, अगर मेरे बस में हुआ तो शायद पूरी हो भी जाये तेरी वो इच्छा..

मैं, मन hi मन, वो तो पूरी तरह आपके hi बस में है मम्मी, आप चाहोगी तभी होने वाली है वो इच्छा पूरी तो, उसमे कोई जोर जबरदस्ती काम की भी नहीं है..

मैं: हाँ वैसे आज तो मुझे भोत अछि नींद आने वाली है, कितने सालो बाद आपके साथ सोने का मौका मिल रहा है..

मम्मी: हेहेहे तो इसमें कौनसी कोई नई बात है, अगर तूने पहले कहा होता की तू इतना मिस करता है मेरे साथ सोना तो में खुद तेरे कमरे में आकर सुला दिया करती तुझे..

मैं: नहीं मम्मी उस कमरे में नहीं, में बचपन से आपके साथ इसी कमरे में सोता आया हु न तो यही सोने में मजा है..

मम्मी: ः चल अब भोत बाटे हो गई, तुझे तेरे मन की इच्छा पूरी करने का मौक भी मिल गया अब चल सो जाते है..

चूँकि इतने आरसे बात मम्मी के साथ इस तरह बिस्तर शेयर करने का मौका मिला था वो भी पुरे एक हफ्ते के लिए, तो इस मौके में जल्दबाजी में मैं मेरी तरफ से कोई गलती नहीं करना चाहता था और इसलिए मम्मी की सोने की बात सुन बिना और कुछ कहे या किये में भी उनके बगल में लेट जाता हु और

तभी मम्मी लाइट्स ऑफ कर देती है और हम दोनों hi माँ बेटे एक साथ उस एक बिस्तर पर सो जाते है...

अब जिसके बगल में इतनी हसीं औरत हमबिस्तर हो कर सोइ हो उसको तो नींद कहा hi आणि थी, ना जाने कितनी hi देर तक मम्मी के सोने के बाद में उनसे चिपक के लेता रहा, जब मुझे ये एहसास हुआकि मम्मी पूरी तरह नींद के आगोश में जा चुकी है तो अपने हाथो से उनकी उन मोती मोती गोलाइओ को नापने की कोशिश करता रहा और साथ hi गाउन को हल्का सा इधर उधर सरकते हुए मम्मी की उन मुलायम पहाड़ जैसे उरोजों को हाथो में महसूस करता रहा और ये कल्पना करता रहा की मम्मी खुद मुझे अपने ये रसीले आम अपने हाथो से मेरे मुँह में दाल कर पीला रही है..

साथ hi जैसे hi मम्मी ने करवट ली और उनकी पीठ मेरी तरफ की तो मेरे लुंड को जैसे झटके से लगे हो, उनके वो भरी भरकम चूतड़ों को इतने करीब पा कर hi मेरा लुंड हिलोरे खाने लग पड़ता है और बिलकुल सहजता से और हौले हौले से अपना लुंड मम्मी के चूतड़ों क्र करीब सरकते हुए कमर को हौले से ऐसे हिलने लगता हु जैसे की लुंड को मम्मी के उस गाउन के उप्पेर से hi उन मुलायम भरी चूतड़ों का स्पर्श सा मिल रहा हो और साथ hi गाउन के पीछे से उनकी नंगी पीठ हईये उसे देख तो मनो मन कर रहा था की बस अभी चुम लू,

लेकिन समय की गंभीरता और माहौल को ध्यान में रखते हुए हर बार होठ मनो पीठ के पास जा कर रुक से जाते और एक दम से सूखे पद जाते... हईये न जाने कब माँ के इस जिस्म को में बिना किसी दर के और उनकी परवानगी से भोगूँगा और साथ hi उन्हें ये साबित करूँगा की उनके इस कामुक जिस्म की प्यास बुझाने का जिम्मा अब उनके इस बेटे का है, वो उन्हें कटाई hi जिस्म की आग में तड़पते नहीं देखना चाहता है... और इसी सब सोच के साथ लुंड को पकड़े कब में नींद के आगोश में चला जाता हु मुझे हु नहीं पता लगता है...

एक तरफ जहा घर में सभी सदस्य मस्ती से नींद के मजे ले रहे होते है वही दूसरी तरफ आधी रत को प्रीति के कमरे में उसके साथ एक अजीब सा hi हादसा होता है..

दरअसल डिनर के बाद कमरे में लौटने के बाद प्रीति कुछ hi देर में सो चुकी होती है और गहरी नींद में जाने के कुछ की पालो के बाद उसे ये एहसास होता है की कोई शख्स उसके कमरे में मौजूद है..

वो अनजान शख्स अब धीरे धीरे प्रीति के करीब आ पहुँचता है और उसके बिस्तर पर पहुंच कर ठीक उसकी टैंगो के पास बैठ जाता है, कुछ देर वह बैठे रहने के बाद वो अपने दोनों हाथ प्रीति की टैंगो पर रखता है और उन्हें सहलाने लगता है.

एक शॉट घुटनो तक की लम्बाई के गाउन में प्रीति की टंगे पूरी तरह नंगी होने की वजह से उस शख्स के ठन्डे हाथो के स्पर्श से प्रीति के शरीर में कुछ पालो के लिए करंट सा दौड़ जाता है लेकिन वो इस स्पर्श को समझ नहीं पति है और वैसे ही सोई रह जाती है..

इसी बात से हिम्मत प् क्र वो शख्स अब अपने हाथो को हौले हौले से उप्पेर की तरफ बढ़ाते हुए उसकी मांसल गोरी चिकनी जांघो की तरफ पहुंच जाता है, और जिस हिसाब से उसका हाथ उप्पेर की तरफ बढ़ रहा होता है ठीक वैसे hi उसका गाउन भी अब उप्पेर की तरफ सरकते हुए प्रीति की जवानी को नंगा करने में लगा हुआ था..

चूँकि अँधेरा होने की वजह से अब तक प्रीति को उस शख्स का चेहरा नहीं दिखाई दे रहा था और तभी उसे अपनी जांघो पर उस शख्स के होठो का स्पर्श महसूस होता है, जिसके एहसास मात्रा से hi उसके शरीर में कंपकपी सी चढ़ जाती है और वो अपनी जंघे सिकोड़ सी लेती है.

उसके ऐसा करने पर वो शख्स अब धीरे से अपने हाथो को उसकी सिकुड़ी हुई जांघो के हीच फसा वापस दोनों जांघो को आपस में से अलग करते हुए टैंगो के बिच गैप सा बना लेता है और अपने हाथ को प्रीति की उस ज़हीनी सी पंतय के उप्पेर रख कर हौले से दबाव बना देता है..

अब जवानी की इस दहलीज पर अगर किसी लड़की को अपने यौवन पर इस तरह की छेड़खानी का एहसास हो और वो भी रत के इस हसीं समय पर तो स्वाभाविक सी बात है की एक हल्का सा भी सुरूर तो जरूर hi बनेगा, और प्रीति के साथ भी अब वैसा hi कुछ होने लगा था और दररर और उत्सुकता के मिश्रण भरे भावो के बिच प्रीति अपने हाथ को आगे बढ़ाते हुए उस शख्स के हाथो को पकड़ लेती है और अपने यौवन से हटाने की कोशिश करती है.

प्रीति के हाथो को से इस तरह अपने हाथ पकडे जाने पर वो शख्स कुछ देर वही थम सा जाता है लेकिन अपने हाथ न हटा कर अपने दूसरे हाथ से प्रीति के हाथ को पकड़ उसे चुम लेता है और चूमने के साथ hi जो हाथ पंतय के उप्पेर घूम रहा था उसे अब उसके पतले गोर पेट पर ले जा ंभी के आसपास घूमने लगता है.

न चाहते हुए भी अब प्रीति को अपने पेट पर उस शख्स के हथो क स्पर्श आनंद मई लगता है और इसी मस्ती में जैसे hi उसे उस हाथ क स्पर्श महसूस होता है वो अपने पेट को अंदर की तरफ खींच लेती है और उसके ऐसा करने से अब उसकी पंतय की पट्टियां ढीली सी पद गई और कमर और प्नत्य के बिच एक गैप सा बन जाता है..

और इसी गैप को पते hi जो हाथ उस शख्स के बही नाभि के इर्द गिर्द घूम रहे होते है, अगले hi पल में प्रीति की पंतय के अंदर समां जाते है और उसके यौवन को अपनी मुट्ठी में भींच से लेते है...

अपनी जवान कासी कमसिन छूट को इस तरह किसी मर्द के हाथो में कैद होते हुए महसूस कर अब प्रीति से रहा नहीं जाता और उसके मुँह से एक मीठे से दर्द भरी सिसकीई निकल जाती है इस्स्स्सस्स्स्स उम्मम्मम्मम चोरोऊ नाआ..

लेकिन उसे सामने से किसी तरह का जवाब नहीं मिलता है और वो अनजान शख्स अब हौले हौले से प्रीति की उस कासी खूबसूरत गुलाब सी पंखुडिओ के बिच छिपी हुई हसीं छूट को हौले हौले से सहलाने लगता है और साथ hi अपने अंगूठे से उसके जिस्म की काम वासना को बढ़ाने का काम करते छूट के उस डेन को दबान शुरू कर देता है.

इस जिस के रोम रोम को मदमस्त क्र देने वाले अनुभव को अब प्रीति और अचे से जीना छह रही, और अचे से महसूस करना छह रही थी क्युकी अब उसके जिस्म ने भी उस शख्स का साथ दें शुरू कर दिया था मनो काफी आरसे से उसका ये कैसा हुआ कमसिन जिस्म भी इसी समय का इंतज़ार कर रहा हो और इसी कारन अब उस शख्स की उंगलिओ की घिसाई के अनुरूप hi प्रीति के कमर के निचे क पूरा हिस्सा उप्पेर निचे होते हुए नशे में गम गईं हुए जा रहा था..

प्रीति को इस तरह पूरा मस्ती लेते हुए देख अब वो शख्स अपना दूसरा हाथ उसके ऊपरी हिस्सों मतलब की पेट के उप्पेर की तरफ सरकने लगा था और इससे पहले की वो शख्स कुछ और आगे बढ़ता इससे पहले hi कामाग्नि में जलती हुई प्रीति खुद उस शख्स के हाथ को पकड़ अपने उन मुलायम और अभी अभी पके हुए ामो जैसे कैसे हुए उरोजों पर रख देती है और अपने हाथो से hi उससे उन उरोजों पर दबाव बनवाना शुरू कर देती है...

छूट पर घिसती हुई उंगलिया और अपनी इन मुलायम सी चुचिओ को सहलते हुए हाथो की वजह से अब प्रीति के मुँह से लगातार सिसकिया निकालनी शुरू हो गयी थी और कमरे में दबी आवाज में ाजहठ उम्मम्मम उफ्फ्फ्ग इस्स्स्सस्स जैसी आवाज आने सी लग गई थी और प्रीति के जिस्म के जोश को देखते हुए मनो ये लग रहा था की अब वो समय दूर नहीं जह वो अपना काम रास बहा देगी..

अभी प्रीति और उसका तड़पत हुआ मादक जिस्म जो इन्ही पालो का इंतज़ार कर रहे थे और अगले कुछ hi पालो में मनो प्रीति की छूट अपना रास बहाने hi वाली होती ही की तभी जोश और उत्सुकता में प्रीति की आँखों के सामने उस शख्स का चेहरा आजाता है, और उस चेहरे को देखने के तो जैसे उसे एक झटका सा लगता है मनो किसी ने बिजली के तार हथो में पकड़ा दिए हो. और इसी झटके के साथ वो एक hi पल में अपने बिस्तर पर उठ बैठती है...
और जोर से चिल्ला देती है सुननीयिययियीय तू......
 
अपडेट - 45


इतनी हसीं रात को अपने कामुक जिस्म के साथ हो रहे खिलवाड़ और कमसिन यौवन को चेह्डे हुए हाथो के स्पर्श से मदहोश होने से अपने जिस्म के रोम रोम को महसूस करती हुई प्रीति तब एक दम से हैरान होते हुए स्तब्ध सी रह जाती है जब उसके नज़रो के सामने उसके भाई का चेहरा आजाता है और तभी वो झट से अपने बिस्तर पर उठ बैठती है मनो किसी ने हाथ में बिजली का तार थमा दिया होता है और उसके मुँह से मनो एक तेज चीख सी निकल जाती है सुननीयीय टूउउउउ....

एक hi झटके से पहात से उठ कर बैठने के बाद प्रीति को कुछ hi देर में ऐसा एहसास होता है की उसके कमरे में तो उसके अलावा कोई और नहीं है और इसी बात ोी पुष्टि करने के लिए वो तुरंत hi अपने कमरे की लाइट जला देती है और जैसा की उसने महसूस किया इस वक्त उसके कमरे में उसके अलावा कोई और मौजूद नहीं था..

बिस्तर पर बैठी प्रीति अब ये सोच कर परेशां सी हो जाती है की कमरे में तो कोई भी नहीं फिर ऐसा क्यों लगा की यहाँ सनी भी मौजूद है और वो मेरे जिस्म को सहला रहा था..

जिस्म को सहलाने की बात से प्रीति को तुरंत उसके साथ हुए सरे वाकिये यद् आ जाते है की कैसे उसे उसकी कमसिन कासी छूट पर हाथो ोा स्पर्श महसूस होता और फिर उसके उभरे हुए स्तनों पर कोई मरदाना सा हाथ का पड़ना ुम्हे दबोचना और निचोड़ना और अंत में उसके सामने सनी का चेहरा आना, लेकिन हकीकत में वो देखती है की उसके जिस्म पर उसके पहने हुए कपडे बिलकुल वैसे hi थे जैसे की नींद आने से पहले थे..

इन सब बातो को ध्यान में रहते हुए प्रीति अब अपने आप से सवाल कर बैठी है, "तो क्या ये सब एक सपना था? पर ऐसा कैसे हो सकता है और ये कैसा अजीब सा सपना आया मुझे जिसमे में होने hi भाई के हाथो अपनी काम वासना को तृप्त करवा रही थी, आखिर मुझे हो क्या रहा है, क्यों में आजकल सनी के प्रति अलग अलग चीजे महसूस कर रही हु"

हैरानी और परेशानी के साथ hi सपने की वजह से जिस्म में उत्पन्न हुई गर्मी के कारन प्रीति के माथे पर पसीना पसीना हो चूका था और उसी पसीने को पोछते हुए अब वो दोबारा ये सोचने लगती है की आखिर ये सब मेरे साथ क्यों हो रहा है, "पहले तो मेरा सनी के लिए, उसके प्रति सोच का बदलना, फिर मोनाल के मुँह से सनी की बाटे सुन मन hi मन खुश होना की मेरी जिंदगी में सनी के रूप में कोई है जो मेरी इतनी कदर करता है, इसके बाद फिर मोनाल के मुँह से जब सनी के लिए अछि बाटे सुनी और जब ये जाना की वो उसे पाना चाहती है तो उसके प्रति जलन और गुस्सा होना.

फिर घर का आकर क्यों मुझे टेरेस पर सनी का मुझे इस तरफ कास के पकड़ना और मेरे गर्दन और कंधे पर इस तरह चूमना ाचा लगता है, क्यों में उसे कुछ कह नहीं पति हु और अब रत में तरह का सपना आना, जहा मेरा अपना भाई hi मेरे जिस्म को सहला रहा, में अपने hi हाथो से अपने भाई को अपना यौवन सौप रही थी और सपने में ये देखना की किस ततः मेने अपने आप को उसके आगे समर्पित कर दिया था और बिना किसी विरोध के सम्पूर्ण समर्थन के साथ में उसका हर एक कार्य में साथ दे रही थी uffff,aur इस सब में मुझे क्यों इतना मजा आ रहा था जबकि अपने भाई के साथ इस तरह के रिश्ते के बारे में सोच मुझे खुद पर गुस्सा होना चाहिए था".

इन्ही सब सवालो के बिच घिरी गेहेन सोच में डूबी प्रीति वापस बिस्तर पर लेट जाती है और न जाने उसे क्या होता है की अपने आप hi प्रीति का हाथ हौले हौले उसके लोअर के अंदर घुस जाता है और जैसे hi उसका हाथ उसकी पंतय के उप्पेर पड़ता है तो उसे ये एहसास होता है की उसकी पंतय इस वक्त पूरी तरह से गीली हो चुकी है और ये गीलेपन का एहसास एक बार फिर प्रीति को हैरानी में दाल देता है.

" उफ्फ्फ हे भगवन ये क्या इतना गीलापन, उफ्फ्फ इतना गीलापन तो आजसे पहले मेने कभी महसूस नहीं किया, क्या ये सब इस सपने की वजह से हुआ.. नहीं नहीं ये कैसे हो सकता है, ऐसे भी थोड़ी होता है भला, सनी मेरा भाई है और उसके साथ ये सब करने के ख्याल से मेरी छूट इतनी गीली हो रही है, नहीं प्रीति ये तुझे क्या हो रहा है"..

एक तरफ तो प्रीति के दिमाग में इस तरह hi हज़ारो बाटे चल रही थी, सही गलत के बिच एक कोई परिणाम न निकलने वाली लड़ाई सी चल रही थी वही दूसरी तरफ मनो अपने दिमाग के विपरीत प्रीति के हाथ धीरे धीरे लोअर और पंतय के अंदर घुस अब उसकी छूट को सच्चे हौले हौले से सहलाना शुरूकर चुके थे...

बंद आखो से न जाने अपने सवालो के जवाब ढूंढते हुए अब प्रीति को भी ये पता नहीं चल पता है की उसका शरीर इस वक्त एक अलग सी hi वासना की आग में जल रहा है और उसके हाथ इस वक्त उसी आग को तृप्त करने में लगे हुए है..

वैसे तो प्रीति ने कई बार अपनी उंगलिओ से अपनी छूट को शांत किया हुआ था पर आज की रत उसे ऐसा करने में एक अलग सा मजा आ रहा था, हर बार जब वो अपनी छूट पर हाथ फिरा रही थी या छूट के होठो को फैला अपनी उंगलिओ को अंदर की तरफ धकेल रही थी तो मनो उसे वो मजा मिल रहा था जो शायद असली चुदाई से भी बढ़कर हो और इस सब का कारन था उसका अपने भाई के प्रति बदलता रवैया, अपने भाई सनी के प्रति जगता हुआ प्यार...

दिमाग जो इस सब को गलत साबित करने परतुला हुआ था लेकिन उसके विपरीत जाते हुए अब प्रीति मन hi मन्ये बात मैंने लगती है की सच कह रही थी मोनाल, सनी वाकई में वैसा लड़का है जो किसी भी लड़की को पसंद आएगा और जिस तरह उसने मेरी मदद की मेरी केयर करता है वाकई में वो एक प्रेमी होने के लायक है..

और तभी अपनी छूट में एक ऊँगली को अंदर सरकते हुए और चूतड़ों को उप्पेर हवा में उठाते हुए साथ hi एक चुकी को हाथो में भीचते हुए प्रीति के मुँह से सिसकिया निकल जाती है उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह भईईई भैई मममम, की किस तरह शाम को टेरेस पर हुआ वाकिया जहा सनी उसके कंधे और गर्दन पर चुम रहा होता है और किस तरह उसने उसे पीछे से दबोच रखा था, ओह्ह्ह्ह सनी कितने अचे से पकड़ बनाई थी तूने तब उम्म्म और जब तूने मुझे चूमा था अह्ह्ह्ह सच भोत hi हसीं एहसास था सुन्न्नी उम्म्म्म अह्ह्ह और तभी अपना एक हाथ कंधे के उस जगह ले जाती है जहा सनी ने उसे चूमा था उम्म्म्म ओह्ह्ह भाई...

और अब प्रीति इतनी गरमा चुकी थी की उसने अपनी उंगलिओ की गति और तेज कर दी थी और इतनी देर से जो वो सपने में देख रही थी वो सब अब अपनी आंखे बंद किये खुद से कल्पना किये जा रही थी मनो इस वक्त उसकी उंगलिया और हाथ उसके यौवन से न खेल कर सच में उसके भाई सनी के हाथ लगे हुए हो अह्ह्ह सुननयीय और जोर से हिस्स्स ने मेरी छूट उफ्फफ्फ्फ़ और अचे से दबा मेरी चूचिया ुफड़ में झड़ने वाली हु मेरे भाई उम्मम्मम, बहा लेने दो अपनी बेहेन को अपनी छूट का रास अह्ह्ह और इसी के साथ प्रीति का जिस्म अकड़ने लग जाता है और एक के बाद एक करके कुछ देर तक जिस्म झटके खता हुआ छूट से पानी चोर देता है मममममम..

पानी चोर्ने के बाद अब प्रीति के चेहरे पर एक मुस्कान सी आजाती है और अपनी पानी बहने से गीली पड़ी छूट पर हाथ फेर सहलाते हुए उफ्फ्फ्फ़ सनी क्या करवा दिया तूने ये आज हहै, मेने जिंदगी में कभी नहीं सोचा था की मेरा भाई मेरी छूट के गीली होने और उसमे ऊँगली करने का कारन बनेगा उफ्फ्फफ्फ्फ़, सच कहती है मोनाल, की तू है hi इतना ाचा, पिछले कुछ दिनों में hi मुझे ये एहसास दिला दिया की मेरे लिए तुमसे बेहतर और कोई लड़का नहीं सनी उम्मम्मम...

और तभी प्रीति अपनी चुकी को एक हलके हाथो से धीरे से थप्पड़ मर कर हहै कामिनी कैसी बेहेन है तू अपने hi भाई के नाम की ऊँगली कर बैठी उफ्फ्फ्फ़ सनी क्या होगा अब मेरा, अभी तो ये बी नहीं पता की वो मेरे बारे में क्या सोचता है, क्या हम दोनों सच में कभी एक होंगे भी या में बस अब ऐसे hi सपने देखती रह जाउंगी उम्म्म....

और एक बार दोबारा प्रीति खुद से हस्ते हुए सवाल करने लग जाती है की "प्रीति कही तुझे अपने भाई दुननय से hi तो प्यार नहीं हो गया? उसके लिए इतना पोस्सेस्सिवे होना, उसकी वजह से मोनाल से जलन महसूस करना और अब आधी रत में उसके प्यार को पाने की तड़प में अपने खुद के जिस्म से इस तरह खेलना, उफ्फ्फ्फ़ मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है, क्या होरहा है मुझे उम्म्म"...

हो सकता है ये सिर्फ मोनाल की बातो और मेरे बहकने का असर हो, और अगर सनी को ये सब पता चला तो वो कैसे बर्ताव करेगा, क्या वो मुझे अपनाएगा, क्या एक भाई का अपनी बेहेन के साथ इस तरह रिश्ता बनाना ठीक रहेगा, क्या एक भाई और एक बेहेन प्रेमी हो सकते है, क्या हमारे बिच शारीरक सम्बन्ध होना वाजिब बात है उफ्फ्फ्फ़ मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है, पता नहीं ये में किस संकट में फास गयी हु उम्म्म्म... और इन्ही सब सवालो को सोचते हुए कब प्रीतिको नींद आजाती है उसे भी पता नहीं चलता है और वो ऐसे hi बिस्तर पर सो जाती है...

उप्पेर उठे हुए टीशर्ट और ब्रा के खुले हुक के कारन बहार निकली नंगी चुचिओ और निचे से अपनी टैंगो से निचे सरके हुए पायजामे के दत्त पंतय की वजह से हवा से बाते करती वो कासी नशीली छूट लिए लेती हुई सुबह जब प्रीति की नींद खुलती है तो उसे अपनी इस हालत का ज्ञान होता है और खुद hi को कोसते हुए की उफ्फ्फ्फ़ ये क्या हाल बना रखा है मेने अपना...

तभी उसे रात में खुद के साथ उसके अपने hi हाथो से खेला गया सारा खेल यद् आजाता है और उसके चेहरे पर एक लाली सी आजाती है और होठो पर एक खूबसूरत सी मुस्कान... साथ hi साथ उसके ज़हन में अपने भाई सनी की तस्वीर सी आजाती है और उसे उस पर भोत प्यार आने लगता है..

इसी सब के बिच उसकी नज़र घडी पर पड़ती है जिसे देख उसे ये पता लगता है की आज उसने उठने में देरी कर दी है और इसी कारन झट से अपने बिस्तर से उठ कर वो कपडे जो उसका बदन नाम मात्रा से ढके हुए थे उन्हें पूरी तरह निकल फेकती है और सीधा बाथरूम में घुस जाती है...

बाथरूम में जाने के बाद अभी वो नहाने hi जा रही होती है की उसकी नज़र ेने के सामने ोादती है और वो नंगी hi उसके सामने जा कर कड़ी हो जाती है और खुद के इस नग्न जिस्म की सुंदरता को निहारने लग जाती है.

अपने दोनों कोमल रसीले स्तनों को हाथ में लिए हौले हौले से दबाते हुए खुद से बाटे करने लगती है की हैए प्रीति वाकई जिस्म तो तेरा अब पूरी तरह से निखार गया है, पूरी तरह से यौवन विकसित हो चूका है और अब इसको किसी न किसी मर्दाने हाथो की जरुरत है,,, और अपने हाथो को टैंगो के बिच ले जाते हुए साडी रात जिस छूट को घिसती रही उसे सहलाते हुए उफ्फ्फ्फ़ कब तक अब उंगलिया करूंगी में, नहीं रहा जा रहा है उम्म्म मुझे भी अब कोई ऐसा चाहिए जो भरपूर ोयर दे उफ्फफ्फ्फ़...

और इसी सब के बिच उसकी नजर अपने कंधे के उस हिस्से पर पड़ती है जहा सनी ने पिछली शाम चूमने के बहाने कतलिया था और उसे देख वो थोड़ी और जिस्म में गर्मी महसूस करती है और उसका एक हाथ अपने आप hi उस कंधे पर पहुंच जाता है और दूसरा हाथ जो टैंगो के बिच था वो अपनी हलचल और बड़ा देती है...

आँखे बंद किये बस अपने हाथो को इस तरह जिस्म पर घूमते हुए और छूट को घिसते हुए अब बस उसके ज़हन में एक hi ख्याल चल रहा था की, "ओह्ह्ह प्रीति तुझे भरपूर प्यार देने वाला शख्स तेरे अपने hi घर में है उम्म्म, जिस लड़के को पाने के लिए तेरी अपनी सहेलिया तड़प रही वो तेरे साथ एक hi घर में रहता है इससे ाचा अवसर और भाग्य क्या होगा उफ्फ्फ."

आंखे खोल अपनी चुकी की निप्पल क उंगलिओ में फसा उन्हें खींचते हुए आयने में खुद से नज़रे मिला कर अब प्रीति अपनी एक ऊँगली छूट में घुसा देती है और, उम्म्म अह्ह्ह अब तक संभल रखा है मेने मेरा ये जिस्म और यौवन, किसी को हाथ तक नहीं लगाने दिया है पर अब नहीं रहा जाता है िष्ठ और कल रत से तो पता hi नहीं क्या हो सा गया है मुझे, क्यों बार बार में सनी के लिए इतनी पागल हुए जा रही हु उफ्फ्फ, अह्ह्ह्हह सौप दू क्या में मेरा ये जिस्म अपने भाई को, पर क्या वो मुझे अपनाएगा ईशःठ, कही में पिछले कुछ दिनों से अपने hi भाई से मन hi मन प्यार तो नहीं बैठी उफ्फ्फ्फ़ ओह्ह्ह सनी ये कैसी बीमारी लगा दी ह तूने िष्ठ...

वैसे मोनाल बोल तो सही रही थी की सनी ऐसा लड़का है जो सिर्फ मेरे जिस्म से प्यार नहीं करेगा बल्कि मेरा भरपूर ख्याल रखेगा, दुनिया से लड़ जायेगा और मुझे जी भर के प्यार भी देगा, लेकिन अब पता ये करना ह की क्या वो अपनी बेहेन को एक प्रेमिका की तरह अपनाएगा और वैसा प्यार देगा...

और तभी अपनी उंगलिओ की गति बढ़ाते हुए अब प्रीति जोर जोर से छूट को घिसने लगती है और मन hi मन अपने भाई सनी से अपना यौवन लुटाने का सोच्छ्ते हुए वही खड़े खड़े झटके कहते हुए छूट रास बहा देती है, अह्ह्ह उफ्फ्फ ओह्ह्ह्ह सुंननीयियय उम्मम्मम..

कुछ देर तक अपनी साँसों को सँभालने के बाद वो बाथरूम में घुस पानी चालू कर नहाने लगती है और उसे उस वक्त ये भी समझ आ रहा था की वासना में लगी आग और सच्चाई में ये सब होने में भोत फरक है, लेकिन कही न कही उसे ये भी यकीं हो चला था की अब उसके दिल में अपने hi भाई के लिए एक खास जगह बन चुकी थी और उसने सनी को उस शख्स के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है जिस शख्स को वो एक बार को आँख बंद किये अपना शरीर भी समर्पित कर देगी... यही सब सोच में डूबी प्रीति अब नाहा कर अपने कमरे में आजाती है और कॉलेज जाने के लिए तैयार हो निचे नास्ता करने पहुंच जाती है.

नास्ते की टेबल पर रोज की hi तरह सब लोग मौजूद होते है और प्रीति को आज लेट आते देख..

मम्मी: क्या बात है प्रीति, आज लेट कैसे हो गयी तू..

मैं: ः ये मुझे आलसी बुलाया करती थी आज देखो, मुझसे बड़ी आलसी तो ये है, सोइ होगी देर तक और क्या.

प्रीति, मन hi मन, ओह मेरे भाई तुझे क्या बताऊ रात भर तूने सोने hi कहा दिया मुझे, सब तेरी वजह से तो हो रहा है: हाँ मम्मी वो आज आँख देर से खुली सुबह मेरी इसलिए..

प्रीति का ये जवाब सुन मुझे थोड़ी हैरानी सी हुई की आज वो मेरी बात का उल्टा जवाब न दे क्र अपनी गलती मान रही थी...

मम्मी: तो रात को देर तक जगती क्यों है सो जाया कर न..

प्रीति, मुझे देखते हुए: अरे मम्मी सो hi गयी थी पर रात को मुझे एक अजीब सा सपना देखा मेने बस वो देख मेरी नींद खुल गयी और बाद में भोत देर बाद नींद आयी..

भाभी, जो वह बैठी हुई थी: ाचा, ऐसा क्या सपना देख लिया मेरी ननद ने की नींद hi उड़द गई हहै..

प्रीति, अब भाभी आपको कैसे बताऊ क्या देखा: भाभी अब तो मुझे ठीक से याद भी नहीं बस ये मान लो की भोत अजीब था..

मैं: ः भाभी लगता है इसके सपने में चुड़ैल आ गयी होगी, अब दो चुड़ैल आपस में रात को hi मिल सकती ह न ः..

भाभी मेरी बात सुन हसने लग जाती है..

प्रीति, क्यूट सा मुँह बनाते हुए: ः वैरी फनी भाई, और मुझे चुड़ैल बोल रहे हो न तुम तो बोल लो, हु तो तुम्हारी बेहेन hi न...

अब बरी चौकने की मम्मी और भैया भाभी की भी थी और तभी

भाभी: क्या बात है, मुम्ममय जी अपने देखा, प्रीति आज तुम सनी से बेहेस नहीं कर रही वो इतना कुछ कह रहा और ये भाई कब से कहने लगी तुम इसे...

प्रीति, फिर से क्यूट सी स्माइल लिए: अब भाभी कब तक लड़ते रहेंगे हम ऐसी छोटी छोटी बातो पर, और अब वो मुझसे बड़ा है न तो मेने कल hi उससे कहा की अबसे में उसे भाई hi बुलाया करुँगी..

भाभी, मेरी और देख: क्या बात है सनी, ऐसा क्या जादू कर दिया है तूने इस पर, ये तो बिलकुल hi बदल सी गयी ः..

मैं: हाहाहा भाभी कोई जादू नहीं बस अब इसको मेरी एहमियत समझ में आई की ये जिसे वो हमेशा उल्टा सीधा कहती थी, वो असल में इसके कितने काम आता है...

प्रीति, मेरी तरफ देख मन hi मन ये कहते हुए की वाकई तू भोत hi अलग है और मेरे लिए अब भोत खास भी: हाँ भाभी भाई सही कह रहा, में इसे जितना दुफर समझती थी इतना ये है नहीं हहै..

मम्मी: चलो भाई ाचा है काम से काम अब तुम दोनों के झगडे तो ख़तम होंगे और घर में शांति रहेगी..

प्रीति: वैसे सनी भाई आज मुझे थोड़ी शॉपिंग करनी है तो क्या कॉलेज के बाद मुझे पिक कर सकते हो प्लस...

मैं, भाव कहते हुए: वैसे तो तेरी शॉपिंग मुझे भोत बोरिंग लगती गई पर जा तू भी क्या यद् रखेगी की मेने तुझे शॉपिंग में कंपनी दी ः, आजाऊंगा तुझे पिक करने...

और मेरी बात सुन वो खुश हो कर थैंक्स बोल शाम को मिलने का बोल कॉलेज के लिए निकल जाती है और यहाँ हम भी अपने अपने रस्ते चल पड़ते है.

 
अपडेट- 46


सब लोगो के जाने ले बाद घर में अब अकेली बची मेरी मम्मी यानि महिमा रोज की hi तरह अपने सरे काम निपटा लेती है और शायद कही न कही रोज जिस गति से काम ख़तम कर रही होती है आज वो उससे तेजी से काम निपटने में लगी हुई थी, और इसका कारन था श्याद वो एक अंजाम शख्स का कॉल..

जी हाँ, भले hi वो इस बात को स्वीकारमा नहीं छह रही थी लेकिन ांररमन किसी एक कोने में वो खुद कही न कही उस अनजान शख्स के फ़ोन का इंतज़ार कर रही थी और इसी कारन अपना काम ख़तम कर वो अपने कमरे में बिस्तर पर लेट आराम फरमाने लगती है..

दिमाग जहा एक तरफ कुछ और hi सोचने को कह रहा था वही घूम फिर कर महिमा के ज़हन में बार बार घडी को देखते हुए यही बात आ रही थी की काल तो उसने इसी समय फ़ोन किया था और पहले भी हमेशा इसी वक्त बता हुई है मेरी तो आज फ़ोन क्यों नहीं आया..

जहा एक तरह मन में ये सवाल चल रहे तह वही महिमा का दिमाग ये कह रहा था की, " तुझे क्यों इतनी परवाह है उसके फ़ोन की, क्यों इतना सोच रही और हमेशा से यही तो चाहती थी की फ़ोन न आये, अब जब नहीं आ रहा तो अछि बता है न, पीछा छूटा उससे पता नहीं कोण है जो पहचान बताने में भी इतने भाव खा रहा है. "

और अब दिमाग की सुन खुद को झकझोरते हुए वो अपना ध्यान दूसरी जगह लगा देती है लेकिन वापस थोड़ी देर में बाईट हुए कल में हुई बाटे यद् आती है की कैसे उसे मेरे जिंदगी से जुडी हर एक बात अचे से पता है, ये भी की मुझेशरीरिक ख़ुशी कहा और कैसी मिलेगी और सम्भोग के दौरान मुझे क्या पसंद है और क्या नहीं, कुछ भी कहो वो शख्स है तो भोत hi अनुभवी और बातो से मज़ेदार भी लग रहा था..

दिमाग से तभी दोबारा आवाज आती है, ये क्या सोच रही है तू महिमा, किसी अनजान पराये मर्द के बारे में ये सब सोचना गलत है तेरे लिए, वो भी जिंदगी के इस पड़ाव में जहा तू चार बचो की माँ हो चुकी है, अब भी तुझमे इतनी वासना है की एक पराये मर्द के लिए इस तरह के विचार मन में ला रही है..

बात तो सही है मुझे ये सब नहीं सोचना चाहिए था पर मुझे अब ये समझ नहीं आ रहा है की क्यों में इस शख्स से बात करती रही, अगर इतना hi गलत लग रहा है अब तो में इससे बात करना बंद भी तो कर सकती थी, लेकिन न जाने क्यों हर बार मेरे मन ने मुझे इससे बात करने से नहीं रोका और ये बात भी पूरी तरह से सही है की हर बार उससे बात करते हुए मेरे जिस्म में गर्मी उत्पन्न हुई है और कही न कही उसकी बातो ने मेरे जिस्म. पर असर छोरा है और मेरी उस दुखती राग पर निशाना साधा है जिस कारन में न चाहते हुए भी इस वासना की आग में जलने लगी हु...

और शायद आज यही वजह है की मैं जिस इंसान का नाम पहचान कुछ नहीं जानती बस उसके मुँह से मेरे लिए निकलते वो तारीफ के शाद और मेरे जिस्म के बारे में निकलती वो रसभरी मजेदार बाटे सुनने के लिए इतना इंतज़ार कर रही हु...

और अब इंतज़ार करते हुए एक घंटे से जयदा होने को आया था और तब भी उसका फ़ोन न आने पर एक बार तो महिमा के मन में खुद उसे फ़ोन करने का विचार आया लेकिन वो उसके सामने ये साबित नहीं करना चाहती थी की उसे ा उससे बात करना ाचा लगने लगा है और इसी कारन से वो फ़ोन करने का इरादा चोर देती है और कुछ देर के और इंतज़ार में पता नहीं उसकी आंख लग जाती है और सो जाती है..

यहाँ कॉलेज में आज मेरे पास भी कुछ खास काम नहीं था और इसी वजह से अपने दोस्तों के साथ कभी क्लास तो कभी कैंटीन या इधर उधर और इसी तरह दिन निकल दिया और जब में अपनी बाइक लिए कॉलेज से प्रीति की कॉलेज की तरफ जाने को निकलता हु तभी मेरी नज़र कॉलेज के गेट पर पड़ती है जहा में देखता हु की कामिनी भाभी और प्राची मां दोनों hi भाभी की कार में बैठ कही जाने लगी थी..

इन दोनों को आज दोबारा साथ में देख फिर मेरे दिमाग में यही बात आती है की आजकल इनदोनो के बिच में कफी गहरी दोस्ती होने लगी है आखिर ऐसा क्या हो गया है, कही भाभी ने मेरी प्यारी सी ma'am को भी अपने बहकावे में तो नहीं लेलिया वैसे भी दोनों hi औरते है तो बड़ी गरम चीज़ज़्ज़ ः...

कार में बैठ दोनों hi बाला की खूबसूरत हसीं जिस्म की मालकिन औरते प्राची और कामिनी आज भी प्राची के घर की तरफ बढ़ चलती है और प्राची के घर पहुंचते है, चूँकि कॉलेज से आज दोनों रोज से थोड़ा जल्दी निकल गयी थी इसलिए प्राची कामिनी को गप्पे मरने के हिसाब से आज भी अपने घर के अंदर ले जाती है..

घर के अंदर पहुंच कर बैठते hi..

कामिनी: प्राची तू भी न, कल hi तो आई थी में यहाँ अब रोज रोज क्यों इतनी जिद्द करती है मुझे ाचा नहीं लगता..

प्राची: क्या कामिनी तुम भी, अब हम इतनी अछि सहेलिया बन चुकी है फिर इतना क्या सोच रही हो, और कल आई थी तो क्या हुआ में तो चाहती हु तुम रोज यहाँ आया करो ताकि मुझे थोड़ी कंपनी मिल जाये हहै, वैसे भी अकेले अकेले क्या करू में इस घर में..

कामिनी: ाचा ऐसी बात है तो मुझे क्यों कोई ाचा हैंडसम सा बॉयफ्रेंड बना लो न हहै.. में रो सिर्फ बाते करके टाइमपास करवा रही उसके साथ तो तू और भी भोत कुछ कर सकती है न क्यों...

प्राची, सुन कर चेहरे पर लालिमा लेट हुए: धत्त कुछ भी बोलती हो तुम सच्ची यर, वैसे भी अब शादी के बाद ये बॉयफ्रेंड वाले लफड़े कहा पाल सकते है भला...

कामिनी: क्यों क्या दिक्कत है इसमें, तू तो रहती भी अकेली है भोत आसानी से पाल सकती है, तुझे कहा फुल फॅमिली के साथ रहना पद रहा जहा सास ससुर ननद देवर सब हो जैसे मेरे है यर..

प्राची: हाँ बात तो सही है फिर भी अब कितना रिस्क है आज की दुनिया में और इस सब से उप्पेर में अपने पति को दोजः दूंगी ये सब कर और ये में कभी नहीं कर सकती, भोत प्यार करती हु में उनसे यार.. (मन hi मन ये जमते हुए की धोखा तो मेने पहले hi दे दिया है सनी के निचे अपनी टंगे फैला कर लेट कर और उसकी कुटिया बन कर).

कामिनी: देख यार में तो मानती हु की अपनी ख़ुशी और जरूरते पूरी करना अपने हाथ में है, और माफ़ करना लेकिन ये भी तो हो सकता है न की कही तेरे पति भी बहार कोई अफेयर क्र रखे हो, प्रक्टिकली इतने वक्त अपनी पत्नी से दूर रहना और शारीरिक सम्बन्ध न बनाने से हर इंसान के अरमान जागते है और जरूरते पूरी करने की िकघा जाग्रत होती hi है...

प्राची: होती होगी और में तेरी सब बात समझ रही हु लेकिन यार वही है न की मेने अपने पति को ऐसा करते कभी देखा नहीं न hi मुझे उन पर किसी तरह का शक है और में हमेशा यही चाहूंगी की ऐसा कुछ हो भी नहीं जिससे की मुझे मेरे प्यार पर भरोसा रहे..

कामिनी: यार सच्ची तू कैसे संभालती है हहै मई तो तेरी जगह होती तो कॉलेज के hi तीन चार लड़को के निचे आ चुकी होती अब तक हेहेहे.. (मन जी मन, यहाँ में तो पति के होते हुए भी देवर की रंडी बानी बैठी हु और अब तो मुझे पति से ज्यादा उसके लुंड की आदत हो गई है िशः)

प्राची: हे भगवन तू तो बोलने में भी नहीं शर्माती यार, कुछ तो सोच लिया कर बोलने से पहले हहै..

कामिनी: अब सहेली के सामने कैसी शर्म यार, वैसे मन की तू अफेयर नई करना चाहती है पर किसी न किसी मर्द को देख कर इच्छा तो होती होगी न की काश एक बार ये मुझे रगड़ ले हहै, जैसेउझे तो भोत बार ऐसा फील होता है..

प्राची: यार तू भी न कैसी बाटे ले कर बैठ गई कामिनी, कुछ और बात नहीं कर सकती है क्या हहै.

कामिनी, प्राची के करीब खिसकर बैठते हुए उसके चेहरे को उठाते हुए: ोये होये देखो तो इसको शर्मा तो ऐसे रही जैसे नयी नवेली दुल्हन हो ः, यार शादी के इतने वक्त बाद तो इन मामलो में औरत अपने आप बेशरम बन जाती है और तू है की इतने नाटक...

प्राची: हाँ क्युकी सभी औरते तेरे जैसी कामिनी नहीं होती समझी हँ..

कामिनी: हेहेहे हैए कितनी प्यारी है यर तू sachi..par बता न अब स्काह सच नहीं होता तेरा ऐसा मन मर्दो को डेल्ह कर की बस भोत दिनों से ाके हु आज तो कोई आकर छोड़ दे मुझे..

प्राची, अपने हाथो को कामिनी के हाथ में देते हुए: हहै हम्म्म होता है यार भोत बार होता है, तू तो समझती है न की जब हम औरतो को मन होता है तो कुवह नहीं सूझता हहै..

कामिनी: अरे वाह मेरी जान ये हुई न बात हहै..

और इससे पहले की कामिनी अभी आगे कोई शब्द बोल पति की उसे उसके उन रसीले मीठे मीठे होठो पर प्राची के नमी भरे सुन्दर से होठो का स्पर्श महसूस होने लगता है... प्राची के दोनों हाथो के बिच फसे अपने चेहरे और उसके होठो से लगते हुए अपने होठो को इस तरह अचानक हुए वॉर से महसूस करते hi कामिनी को एक करंट सा लगता है और उसकी आंखे खुल कर एक दम बड़ी सी हो जाती है..

लेकिन मस्ती में डूबी प्राची जो इस वक्त बस कामिनी के होठो का पूरा रास पिने में लगी हुई थी उसे दुनियादारी से कोई मतलब माहि था उसे किसी की कोई परवाह नहीं थी और बिना कुछ जाने समझे सोचे समझे वो बस कामिनी के होठो को चूमने का मजा ले रही थी....

थोड़ी देर में सँभालने के बाद कामिनी झट से एक धक्का देते हुए प्राची को पीछे की तरफ सरका कर अपने आप से दूर करती है और अपने होठो पर उंगलिया रख साफ करते हुए...

कामिमि: ये क्या कर रही हो प्राची तुम....

प्राची, दोबारा से कामिनी के होठो के करीब आते हुए: क्यों ाचा नहीं लगा क्या तुझे कामिनी...

कामिनी, खुद को थोड़ा पीछे सरकते हुए: नहीं मेने तुमसे तो ये नहीं उम्मीद की थी और वो भी इस तरह अचानक... और ना hi मुझे इस तरह के किसी रिश्ते में इंट्रेस्ट है...

प्राची, ये समझते हुए की शायद उसने इस बार जल्दबाजी कर दी, कामिनी का हाथ पकड़ते हुए: आईएम सॉरी कामिनी मुझे लगा की हम इतनी अछि सहेलिया और शायद तुम्हे भी ये सब ाचा लगेगा इसलिए में खुद को रोक नहीं पायी..

कामिनी: नहीं प्राची ऐसा बिलकुल भी नहीं है, में तुझसे थोड़ा खुल कर क्या बात करने लगी तूने तो बिलकुल उल्टा मतलब निकल दिया...

प्राची: यार सच कहु तो ना जाने क्यों जब भी में तुम्हारे साथ होती हु तो मुझे भोत ाचा लगता है, ऐसा लगता है की कोई मेरा अपना है और तुझे भोत प्यार करने का मन करता है, और शायद इसी वजह से आअज में ये कर बैठी..

कामिनी: ाचा लग्न अलग बात है प्राची लेकिन इसका ये मतलब नहीं की तुम मुझे इस तरह चुम लोगी यार, और वैसे भी मेने कभी किसी औरत से इस तरह के सम्बन्ध नहीं बनाये, ये सब भोत अजीब सा था मेरे लिए...

प्राची: ोकक बाबा आईएम सॉरी, माफ़ कर दे मुझे, अब से ऐसा नहीं होगा और हाँ अब नहीं चूमुंगी में तुझे, अब माफ़ भी कर दे यार..

कामिनी: हम्म ठीक है पर आगे से इस बात का ध्यान रखना, और इसलिए बोल रही हु की किसी मर्द को पता ले वार्ना फिर मुझ पर hi चढ़ जाएगी हहै..

प्राची : हहै बूत सीरियसली कह रही हु, अगर कोई तेरे साथ टाइम स्पेंट करे तो उसे तुझसे पक्का प्यार हो जाये, में तो औरत होते हुए भी तुझे पसंद कर बैठी तो किसी मर्द के तो क्या कहने हहै..

कामिनी: ः अगर एक मर्द पसंद कर ले तो बड़ी बात नहीं मेरे लिए पर इस तरफ किसी औरत के साथ ऐसे सम्बन्ध मेने कभी नहीं सोचे, शायद इसलिए आज ये एक दम अजीब सा था मेरे लिए...

प्राची: हम्म्म सॉरी यार में थोड़ा ज्यादा बहक गयी हहै..

कामिनी: हम्म इतस okay इस बार तो माफ़ क्र रही पर अगली बार दूर रहना मुझसे हेहेहे, चल अब देर हो रही में निकलती हु घर के लिए...

और ये बोल कामिनी प्राची के घर से अपने घर के लिए निकल जाती है और रस्ते में ये आज के इस नए अनुभव को सोच उस वाकिये तो यद् करते हुए खुद से कहती है की, " वैसे इतना बुरा भी नहीं था प्राची का ये चुम्बन, मर्दो की तुलना में ज्यादा मुलायम थे उसके होठ और चुम्बन में भी ज्यादा गहराई थी पर भोत अजीब है न एक औरत को चूमना, पता नहीं कैसा होता होगा ये एक औरत का दूसरी औरत को प्यार करना हहै" और इसी सोच के साथ वो अब अपने घर पर पहुंच चुकी होती है.

यहाँ मैं कॉलेज से निकल कर सीधा प्रीति की कॉलेज पहुँचता हु जहा प्रीति पहले से hi माकन गेट पर मेरा इंतज़ार क्र रही थी और दूर से hi अपने भाई को ात्व हुए देख मन hi मन मुस्कुर रही थी..

इस वक्त प्रीति एक टाइट जीन्स और टीशर्ट पहनी हुई थी जिसमे से उसकी कासी हुई गदराई हुई सी गांड और उसके मुलायम पुरे परफेक्ट आकर में उभरे हुए बूब्स उसके जिस्म की सुंदरता को चार चाँद लगा रहे थे, इस खूबसूरती की मालकिन से शायद hi कोई अपनों मजरे जाता सकता है..

मैं, उसके पास पहुंच कर बाइक रोकते हुए: क्या बात है तू तो पहले hi यहाँ कड़ी है मुझे लगा था कही मई तो जल्दी नहीं पहुंच जाऊंगा ः..

प्रीति: ः नहीं एक तो बड़ी मुश्किल से तू आज शॉपिंग के लिए तैयार हुआ है फिर तुझे इंतज़ार करवा कर मेरा नुकसान थोड़े करना था..

मैं: हाँ बात तो सही की तूने और में ये भी अचे समझ रहा हु की आज तेरे मतलब की हाट है इसलिए इतना इंतज़ार कर रही, मेने मेरे काम के लिए रोका होता तो अब तक भड़क गयी होती ः..

प्रीति, इतराते हुए: हाँ तो इसमें गलत भी क्या है और वैसे भी तुझ पर तो में जब चहु भड़क सकती समझा... चल अब बाटे बाद में करेंगे मेरे भैयाआ, और जल्दी से शॉपिंग को चलते है बस..

और ये बोल में और प्रीति दोनों hi मेरी बाइक से बाजार की तरफ बढ़ जाते है और यहाँ बाइक पर प्रीति मुझसे एक दम चिपक कर बैठी हुई थी, आज से पहले भी वो मेरे साथ बाइक पर बैठी थी पर इस तरह इतना चिपक कर उसे बैठे हुए मेने आज पहली बार महसूस किया था, में भोत hi अचे से उसके मुलायम रसीले स्तनों के स्पर्श और शर्पश से हो रहे दबाव को अपनी पीठ पर महसूस कर प् रहा था और उस स्पर्श से ये अनुभव कर प् रहा था की प्रीति के बूब्स भी उसकी तरह hi एक दम मुलायम और लचीले से होंगे...

जहा एक तरफ म अपनी बेहेन के कैसे मम्मो के स्पर्श से उत्साहित हो रहा था वह प्रीति भी मन hi मन अपने भाई के लिए उत्पन्न हुए प्यार की वजह से उससे एक दम करीब रहना छह रही थी और शायद इसी प्यार की वजह से उसे इस बात का एहसास भी नहीं था की उसके भाई को उसके बूब्स का स्पर्श इस तरह महसूस भी हो रहा होगा लेकिन इस बात से विपरीत वो तो बस अपने hi ख्यालो में खोई खुस होते हुए अपने भाई से चिपक कर बैठी हुई सफर का मजा लूट रही थी..

इस सुहाने से सफर का अंत तब होता है जब मैं अपनी बाइक को बाजार में एक बड़े से मॉल के बहार जा कर रोकता हु और प्रीति को उतरने के लिए बोलता हु.

मॉल के अंदर जा कर प्रीति मुझे उसके लिए कुछ कपडे खरीदने के लिए एक दुकान में ले कर जाती है...

प्रीति, मेरी तरफ देख क्र: भाई बता न किस तरह की ड्रेस खरीदू, यहां तो भोत साडी है मुझे कुछ समझ नहींआ रहा है..

मैं: अब यर तुम लड़कीओ के कपड़ो के बारे में भला मुझे क्या पता होगा, देख ले तेरे हिसाब से जो तुझे पसंद आये वो..

प्रीति: यार अब तू ऐसे मूड मत ख़राब कर, प्लस बता न.. और तू तो ऐसे बोल रहा जैसे कभी किसी लड़की के साथ शॉपिंग hi नहीं की, अभी तेरी गफ साथ होती तो उसको तो अचे से मदद करता है न..

मैं: ऐसा कुछ नहीं है समझी बकवास मत कर अब ः..

प्रीति, दिमाग में कोई आईडिया सोच क्र: ाचा चल एक काम कर ये समझ ले की में तेरी बेहेन नहीं गफ हु, अब इसी नाते मुझे ये बता की तू अपनी गफ को कैसे कपडे पहने देखना चाहता..

मैं, अगर तुझ जैसी हॉट लड़की गफ होती मेरी तो में उसे कपडे hi न पहनने दू,, हर वक्त नंगी राखु : ः ाचा तो ये बात है ठीक है फिर तू पक्का वो लेगी जो मेरी पसंद का होगा, नाटक तो नहीं करेगी न..

प्रीति, ये जान कर खुश होती ह की उसके भाई ने उसके लिए कपडे चुनने केलिए हामी भर दी जैसा की वो छह रही थी: हाँ पक्का, तू जो कहेगा वही खरीदूंगी में..

यहाँ मुझे आज एक और बार आश्चर्य हुआ प्रीति के स्वाभाव को ले कर, क्युकी आज सुबह से hi उसका मेरे प्रति बात करने का और मेरे प्रति हर तरीके से व्यवहार में बदलाव सा नजरिया था, वो अब मेरी बातो को कटा क्र या विरोध करने की बजे मेरी राइ ले रही थी या मेरिबातो को तवज्जो देने लगी थी..

खैर जो भी हो और खुद को ऐसे hi समझाता हु और तभी मेरी नज़र वह दुकान में टंगे एक भोत hi प्यारे से ब्लू रंग के कुर्ते पर पड़ती है जो में प्रीति को दिखते हुए इशारा करता हु की ये वाला ाचा लगेगा तुझ पर..

कुर्ते को देख प्रीति भी मुस्कुरा देती है और मेरी पसंद से खुश हो क्र उस कुर्ते को निकलवा के तरय करने के लिए अपने पास रख लेती है..

प्रीति: सनी भाई ये तो एक hi हुआ मुझे और भी ड्रेस लेने, तू और भी पसंद कर ले न ताकि में सब एक साथ तरय कर लुंगी..

मैं: ठीक है तू ये ले जा कर ट्रायल रूम में जा तब तक में दूसरे पसंद करके लता हु तेरे लिए..

और ये बोल प्रीति उस कुर्ते को तरय करने चली जाती है और यहाँ में उसके लिए कुछ और चीजे पसंद करके रख लेता हु.. जब वो उस नील रंग के कुर्ते को पहन लार बहार निकलती है तो क़यामत सी लग रही होती है... कुरता उसके शरीर ओर एक दम फिट बैठा हुआ था, आएगी से गाला थोड़ा गहरा होने के कारन उसकी चुचिओ की गहरी लाइन का कुछ हिस्सा मुझे नज़र आ रहा था साथ hi, और वह से जैसे hi मेरी नज़र निचे की तरफ सरकती है तो उसके वो कैसे हुए मोठे मोठे दूध के भंडार मजो जैसे सलामी से दे रहे हो, जिन्हे देख बस मन में एक hi सवाल की याररर कीटमे कैसे हुए है इसके मम्मी, बिलकुल hi लटक नहीं है एक दम स्ट्रैट उफ्फ्फ्फ़...

प्रीति: कैसा लग रहा है बता न...

मैं, प्रीति की आवाज सुन होश में आते हुए: सच कहु तो भोत जांच रहा तुझ पर, एक दम मस्त लग रहे है, फिटिंग भी सही है पूरी...

मेरी बात सुन प्रीति खुश hi जाती है और मुझसे दूसरा ड्रेस मांग कर उसे ले जा कर वापस ट्रायल करने चली जाती है..

ये ड्रेस इस बार एक ओने पीेछे था और जब वो उसे पेहेन कर आई तो उसमे एक दुख हॉट पटाखा लग रही थी, उसकी चिकनी लम्बी टंगे बिलकुल नंगी मेरे सस्मने थी और ड्रेस की लम्बाई घुटनो से थोड़ी काम थी जिस कारन उसकी मांसल जांघो का कुछ हिस्सा भी मेरी आँखों के सामने ा रहा था और प्रीति को ऐसे देख मेरे मन में बस hi बात चल रही थी की वाकई एक से बाद क्र एक माल है मेरे अपने hi घर में उफ़, क्या मस्त चीज है मेरी बेहेन प्रीति भी, किसी का भी मन मचल इसे ऐसे देख कर तो हईये... और अब ऐसे hi कुछ ड्रेसेस और तरय करने के बाद हम उस दुकान से बहार निकलते है..

मैं, दुकान से बहार निकलते हुए: ठीक है अब तो खुश है न हो गयी तेरी शॉपिंग यार बची है..

प्रीति: नहीं हुई न भाई अभी कुछ सामान और लेना बचा है बस थोड़ी देर और..

मैं: हे भगवन अब क्या बाकि रह गया सब कुछ तो तूने ले लिया..

प्रीति, कुछ देर सोच क्र: यार अब कहा न बाकि है, मुझे कुछ निघ्त्य और उन्देर्गर्मेन्ट्स भी लेने है बस वो लेकर चलते है न..

मैं, प्रीति के मुँह से हे सुन मुझे थोड़ा अजीब लगा क्युकी आज से पहले वो मुझसे इतनी फ्रैंक नहीं हुई थी, पर अब मेरे मन में भी लालसा थी की देखु तो सही प्रीति कैसे उन्देर्गर्मेन्ट्स पहनती है : हम्म्म ाचा चल ठीक है पर जल्दी करना अब..

और ये बोल हम एक मस्त सी लेडीज उन्देर्गर्मेन्ट्स की दुकान में घुस जाते है... अभी हम दोनों दुकान में घुसे hi थे की मेरी नज़र वह कड़ी एक मदमस्त सी औरत पर पड़जाति हैऔर जैसे hi हम दोनों की नज़रे आपस में मिलती है तो वो मुझे देख खुश सी होते हुए मुस्कुरा देती है..

मैं, उन्हें देख कर पास जा कर: अरे कुसुम aunty(vahi डॉ कुसुम जिसके समझने पर अंजलि चची मेरे बच्चे की माँ बनने को राज़ी हुई थी) आप यहाँ, कैसी हो आप..

कुसुम: अरे सनी बीटा तुम.. में तो अछिहु तुम बताओ कैसे हो, बड़े दिनों बाद दिखाई दे रहे हो.

मैं: ः बस आंटी अब वक्त hi नहीं मिल पता क्या करू, आप भी तो नहीं यद् करती मुझे (एक नटखट सी मस्कुराहट देते हुए)

कुसुम, मेरी बात समझकर: में तो भोत यद् करती हु तुम्हे पर देखो न काम की वजह से कही जाने का मौका hi नहीं मिलता हहै..

तभी कुसुम आंटी की नज़र प्रीति. पर पड़ती है जोमे देख लेता हु तो उन्हें प्रीति से िंट्रिडुके करवाता हु, यहाँ प्रीति मेरी बेहेन है इस बात का ज़िक्र करना मुझे ठीक नहीं laga...aur प्रीति को भी में इनसे यही कह कर मिलवाता हु की मेरी उनसे मुलाकात अंजलि चची की प्रेगनेंसी के दौरान हुई थी.

अभी हमारी बात चल hi रही थी की आंटी के पीछे से एक लड़कीकी आवाज आती है, अरे प्रीति तू...

और ये आवाज़ किसी और की नहीं बल्कि उसकी सहेली मोनाल की hi थी, जिसे देख अब प्रीति भी थोड़ा सरप्राइज सी हो जाती है..

प्रीति: ओह ही मोनाल, तू यहाँ क्या कर रही, और आज तू कॉलेज भी नहीं आयी थी..

मोनाल: हाँ यार आज मन नहीं ठमेररा बस इसलिए.. और तभी उसकी नज़र मुझ पर पड़ती है...

मोनाल, मुझे देख कर: ओह माय माय माय आप भी यहाँ हो प्रीति के साथ, आपको तो मेने देखा hi नहीं..

मैं, थोड़ा हैरान होते हुए: आईएम सॉरी पर क्या हम एक दूसरे को जानते है...

मोनाल: आप मुझे नहीं जानते हो पर में आपको थड़ा भोत जानती हु जनाब..

मैं: में कुछ समझा नहीं...

इससे पहले की मोनाल कुछ और बोलती यहाँ प्रीति थोड़ा पोस्सेस्सिवे महसूस करती है और खुद बोल. पति है..

प्रीति: वो सनी ये मोनाल है मेरी कॉलेज की सहेली, इसने तुम्हे उस रात पार्टी में देखा था तो बस वह से जानती है..

मैं, हाथ आगे बढ़ाते हुए: ओह ाचा okay, नीस तो मीट यू मोनाल.

मोनाल, जवाब में अपना हाथ मिलते हुए: नीस तो मीट यू तू सनी.

प्रीति, मोनाल को इस तरह मुझसे हाथ मिलता देख टोकते हुए, और इशारे में हाथ चोर्ने का बोलते हुए: वैसे तू यहाँ क्या कर रही है मोनाल..

मोनाल, प्रीति की भावनाओ को समझ अपना हाथ अलग करते हुए: कुछ नहीं यार आज कॉलेज नवहि आयी तो अकेली थी इसलिए कुसुम चची ने कहा की उनके साथ थोड़ी शॉपिंग करने चल लू तो आ गई बस.

मैं: ओह तो कुसुम आंटी आपकी चची है..

कुसुम: हाँ सनी, मोनाल मेरे जेठ की बेटी है..

मैं: ारेट वाह मतलब सब एक दूसरे के कही न कही जानकर निकले कितनी अछि बात है न ः..

मोनाल, प्रीति की तरफ नटखटी नज़रो से देख: वैसे तू कॉलेज के बाद घर जाने की बजे सनी जी के साथ यहाँ क्या कर रही...

प्रीति, शर्म भरी मुस्कान के साथ: बस में भी थोड़ी शोपोइन्ग करने आई हु और क्या...

मोनाल, कुछ देर सोच क्र मुस्कुराते हुए: ओह ाचा, वैसे यहाँ एक नयी शॉप खुली तू वह गयी या नहीं भोत ाचा कलेक्शन है वह..

प्रीति: कौनसी शॉप मुझे तो नहीं दिखी ऐसी कोई शॉप..

Monal,kan में ये बोलते हुए की बहार चल कुछ बात करनी है, हुए वो प्रीति का हाथ पकड़ उसेबहार ले जाती है: चल इधर आ में तुझे दिखती हु, सनी और चची आप यही रुकिए हम अभी आते है.. और ये बोल वो दोनों वह से बहार चली जाती है...
 
थैंक यू बीआरओ...

एंड यस, ी टेक ुर सुग्गेस्टिव व्होले हेयरटडलय बीआरओ, एंड ी वद वांट तो से तहत no part ऑफ़ थे स्टोरी वल्ल बी ुणवंतेड़लय स्ट्रेचेड, ेगेरी थिंग है सम इम्प पर्पस इन थे लॉन्ग रन व्हिच ु लल गेट इन किंग उपदटेस.. थैंक्स वन्स अगेन ंद कीप सुग्गेस्टिंग ंद गिविंग ुर ओपिनियन लिखे थिस...

ी वद रियली अप्प्रेसियते आईटी िफ़ आल थे रीडर्स विल कीप गिविंग थेइर सुग्गेशंस ंद ोपीनियंस रेगुलरली, ितवल्ल बी वैरी हेल्पफुल एंड मोटिवेटिंग.. थैंक्स अगेन
 
अपडेट - 47


(पिछले अपडेट में हमने ये देखा था की मैं और प्रीति उसकी कॉलेज से शॉपिंग के लिए जाते हुआ वह हमे कुसुम आंटी और मोनाल भी मिल जाती है और वही मोनाल प्रीति को नयी दुकान दिखने के बहाने बहार ले जाती है , अब आगे..)

प्रीति और मोनाल के दुकान से बहार चले जाने के बाद यहाँ में और कुसुम आंटी दुकान में रह जाते हैतो तभी..

कुसुम: क्या बात है सनी, लगता है अब मेरी यद् hi नहीं आती तुम्हे तो..

मैं, आँख मरते हुए: कैसे नहीं आती होगी भला आपकी यद् आंटी, आपको भूल सकता है क्या भला ः.

कुसुम, प्रीति के बारे में बोलते हुए: अब जिसके साथ इतनी खूबसूरत, सेक्सी और पीरी सी लड़की हो उसे मुझ जैसी पुराणी ईमारत की क्या जरूरत पड़ेगी हहै..

मैं, प्रीति के बारे में ये सुन मन hi मन, कैसे बताऊ की जिस लड़की की आप बात कर रही वो मेरी बेहेन है और इस नाते छह कर भी में वो सब नहीं कर सकता जो आप जैसी पुराणी ईमारत hi दे सकती : ः ऐसा कुछ नहीं है आंटी और वैसे भी पुराणी चीजे ज्यादा मज़ेदार औरनाशीली होती है, यहाँ जगह और मौका सही नहीं वार्ना अभी नशा कर लेता में (कण के पास अपने होठ ले जा खुसफुसाती हुए), और लुटे लेता मेरी डॉक्टर रंडी की इज्जत उफ़..

कुसुम, मेरी बात सुन इधर उधर देखते हुए मुस्कुरा कर: वैसे लुटवाने के लिए भी तैयार रहती हु मई तो अगर लूटने वाला ितं मज़ेदार हो पर पहिलाल जैसा तुमने कहा ये जगह ठीक नहीं तो बस अपनी पसंद की कुछ ब्रा दिला दो मुझे और क्या, ये टोकर सकते हो न हहै..

मैं: ः हाँ क्यों नहीं jarur..or ये बोल में कुसुम आंटी के लिएकुछ नए दसिग्नस की ब्रा खरीदने में मदद करने लगता हु..

वही बहार ले जाने के बाद मोनाल प्रीति को छेड़ने लगती है..

मोनाल: ोये होये तू तो बड़े नाटक कर रही थी की तेरे और सनी के बिच कुछ नहीं और आज सीधा उसको ले अपने लिए ब्रा पंतय खरीदने आ गयी वाह रे भोली सहेली मेरी..

प्रीति: चुप कर पगली तू, कुछ भी बोलती है और सच्ची वैसा कुछ नहीं वो तो बस मुझे कुछ शॉपिंग करनी थी इसलिए उसको साथ ले आई..

मोनाल: ाचा में तुझे पागल दिखती हु क्या प्रीति, कोण लड़की ऐसे hi किसी लड़के को अपने साथ ब्रा पंतय और निघ्त्य की शोपोइन्ग करवाने लती है भला बता तो.

प्रीति: यार अब तू फालतू बात कर रही है, और मेने और भी ड्रेसेस और सामान लिए है वो नहीं दिखा तुझे..

मोनाल: देख में सब समझती हु, वो ड्रेसेस तो बहनहै असलमे तो तू उसकेसाथ वक्त बिता रही यहाँ आकर और अब उस ब्रा पंतय के बहाने ये साफ ज़ाहिर कर रही की वो तेरा सिर्फ एक दोस्त तो नहीं है बात इससे भी कुचजीदा है, चाहे तू मुझे सच बताये या न बताये हँ...

अभी इनकी बात पूरी हो hi रही होती है की कुसुम दुकान से बहार निकलती है, अगर बाते ख़तम हो गई हो तो घर चले अब मोनाल...

मोनाल, (हाँ चची बस दो मं): ाचा चलमे चलती हु अब तू जा खरीद ले अपने यार के पसंद की ब्रा और कछिया हहै, क्या पता इससे तेरी छूट को भी मजा मिल जाये... ौर्ये बोल मोनाल हस्ते हुए आँख मर कर वह से चली जाती है और यहाँ प्रीति मन hi मन इस बात को स्वीकारते हुए की आखिर बात तो मोनाल ने सही कही, ये सब में अपने भाई के साथवक्त बिताने और उसकी पसंद को अपनाने के लिए hi तो. कर रही... कही न कही में भी तो यही छह रही की जो सनी को पसंद है अब से वही पहना kru...or यही सब सोचते हुए मुस्कुराते हुए प्रीति वापस दुकान के अंदर चली जाती है...

मैं: अब और कितना वक्त लगेगा तुझे खरीदने में, जल्दी से खरीद ले में तेरा बहार इंतज़ार कर रहा हु..

प्रीति, मुझे रोकते हुए: बहार क्यों यही रुक न, तुझे किस बात की शर्म आ रही यहाँ, इतनी देर तो रुका था न...

मैं: मुझे क्यों शर्म आएगी भला, चल अब जल्दी से पसंद कर ले...

प्रीति: भूल गया तू, हमारी डील हुई थी न की आज साडी शॉपिंग तेरी पसंद से होगी..

मैं, हैरान होते हुए: अब ये भी में पसंद करू तेरे लिए क्या... ड्रेस लेना अलग बात है और ये लेना अलग समझी,

प्रीति: क्यों इसमें क्यालाग है, ये भू कपडे hi है न, इतना क्यों शर्मा रहा है तू इसमें जब में नाहीशर्मा रही तो..

मैं, अब बात ईगो पर आती हुई लगती है: मेने कहा न में नहीं शर्माता हु समझी, और रही बात ये खरीदने की तो ठीक है तू साइज तो बता तेरा में अभी सेलेक्ट करता हु...

प्रीति, अपने भाई द्वारा ऐसे दुकान में साइज पूछे जाने पर खुद शर्मा सी जाती है पर मन hi मन उत्साहित और उत्तेजित महसूस करती है और इसी उत्तेजना में धीरे से कामुक सी आवाज में : 34स साइज है मेरा सनी.. करो अब सेलेक्ट...

मैं, प्रीति के मुँह से उसका साइज सुन अब मेरे लुंड को भी झटका सा लगता है, उफ्फ्फ क्या मस्त साइज है प्रीति का, वाकई एक दम सटीक, उम्र के हिसाब से भोत बेहतरी से जिस्म बना हुआ है, इतनी बड़ी और मोती चूचिया काश किसी दिन इन रसीले ामो के दर्शन हो जाये और साथ hi रास भी पिने मिल जाये यह..

और इसी सोच के साथ अब में बिलकुल नयी डिज़ाइन और लेटेस्ट पैटर्न वाले कुछ ब्रा पंतय के सेट पसंद करता हु और प्रीति के सामने रख देता हु..

पसंद की हुई साडी ब्रा सिर्फ दो hi रंग में थी ब्लैक और रेड, मैंने हर पत्तेर डिज़ाइन एक एक दोनों कलर की पसंद की थी, पैटर्न और डिज़ाइन भी कुछ तो ऐसे थे की एक डीएम पारदर्शी या जाली वाले जिनमे से प्रीति की छूछीया ब्रा होने के बाद भी नंगी दिखने वाली थी, या ऐसी ब्रा थी जिसके कप आधे थे जिससे की पहनने के बावजूद भी उसी मोती चूचिया आधी तो ब्रा से हमेशा बहार hi रहने वाली थी..

इस तरह की नयी और सेक्सी ब्रा सेट को देखेक बार तो प्रीति बी ये बोल. देती है की..

प्रीति: सनी ये क्या,. ऐसी डिज़ाइन की और छोटे कप्स वाली तो मेने आज से पहले कभी नहीं खरीदी..

मैं : अब तूने मुझसे पसंद करवाई, में तो अपनी गफ के लिए ये सब hi ख़रीदुंग अब तू देख लेना तुझे लेमी ह तो ठीक वार्ना मत ले..

प्रीति, मन hi मन ये सोचते हुए की, " हैए सच कितनी अछि पसंद है सनी की, में भी इतनी मस्त मस्त ब्रा आज से पहले नहीं उसे की हु, पता नहीं कैसी लगेगी ये साडी मुझपर लेकिन अब चूँकि ये मेरे प्यारे भाई ने पसंद की है तो लुंगी जरूर और अब से यही पेहेन्ने की आदत बनाउंगी.. उफ़ क्या पता किसी दिन इन्ही में से किसी ब्रा में सनी भी मुझे देखे, हैए कैसे सामना करुनगज में उसका ऐसी इतनी सेक्सी ब्रा मैं. "

जहा एक तरह प्रीति अपने भाई के सामने इन ब्रा पंतय में आने के ख्याली पुलाव पका रही थी वही दूसरी तरफ सनी यानि की मैं भी अपनी बेहेन को न जाने कब ये साडी ब्रा पहने सच में देख पाउँगा.. देख पाउँगा भी या नहीं कभी इन्ही सब विचारो में खोया हुआ रहता हु...

प्रीति: नहीं नहीं, मुझे भी अछि लगी ये साडी, चल. लेलेती हु अब तूने इतनी. म्हणत की है तो हहै.. और ये बोल वह से सारा सामान ले में और प्रीति दोनों सीधा घर पर आजाते है..

और सरे रस्ते और फिर घर आने के बाद भी अब मेरे मन में बस यही सवल्ता की आखिर प्रीति. को हो क्या गया है जो लड़की आज तक एक कपडे का टुकड़ा मेरी पसंद का नहीं ली आज सरे कपडे इवन ब्रा पंतय तक भी मुझसे पसंद करवा रही है, सनी कही ये कोई इशारा तो नहीं जो वो देने की कोशिश कर रही है पर में समझ नहीं प् रहा हु..

और अगर ये वैसा hi कोई इशारा है तो मुझे पहले इस बात को पूरी तरह से कन्फर्म करना होगा इसके बाद hi आगे बढ़ने की सोचूंगा, क्युकी हो सकता है की प्रीति ये सब बस नादानी में या फिर मुझे एक दोस्त के नाते या उस पार्टी वाली रत के बाद हमारे बिच एक दूसरे के प्रति बात चित और व्यवहार में जो खुलासा हुआ उसे और ाचा और बेहतर बनाने के लिए कर रही हो, खैर जो भी हो इस मामले को में इतनी सरल तरीके से नहीं ले सकता और अभी जिस तरह प्रीति ने मेरी तरह एक कदम बढ़ाया है चाहे वो जिस किसी भी रूप में है, अब मुझे भी वैसे hi परिपक्वता दिखते हुए उसके साथ वैसा hi बर्ताव करना चाहिए....

वैसे जो भी कहो इस घर की औरते और लड़किया सब एक से बढ़ कर एक है yr...ek तरफ मम्मी है जो आज भी इतनी मस्त गदराये जिस्म की. मालकिन बानी बैठी है और दूसरी तरफ ये प्रीति है, हैए कितनी सेक्सी और मस्त लड़की है ये भी न... 34स की साइज होना इस उम्र में, दिखने में तो कितनी क्यूट सी और जिस्म बिलकुल किसी पटाखे जैसा, मेरा तो मन कर रहा था की वही बोल्दु की में उसे इन सब ब्रा में देखना चाहता हु, यर कितनी मस्त लगेगी न वो ब्लैक और रद ब्रा में अपने गोर जिस्म पर उफ्फफ्फ्फ़..
 
अपडेट- 48


रत को डिनर के बाद में अब सीधा मम्मी के कमरे में hi चला जाता हु चूँकि जैसे की मम्मी ने कहा था की जब तक पापा वापस नहीं लौट जाते में उनके साथ उनके hi बिस्तर पर सो सकता हु..

कमरे में आने के कुछ देर बाद hi मम्मी जो की इस वक्त साड़ी पहनी हुई थी, किचन का बचा हुआ काम ख़तम कर वो भी कमरे में आजाती है और मुझे पहले से अपने कमरे में मौजूद देख मुस्कुरा देती है..

मम्मी: ओह सनी तू यही है, मुझे लगा की तू शायद अपने कमरे में होगा..

मैं: अब अपने कमरे में क्यों जाऊंगा में मम्मी भला, जब आपने hi मुझे यहाँ रात गुजरने की इज़ाज़त दी है तो ः..

मम्मी: हाँ बीटा मेने hi इजाजत दी है जानती हु पर वो क्या है न की थोड़ी देर के लिए में खुद ये भूल गयी थी पर तुझे यहाँ देख अब वापस यद् आ गया हहै..

मैं, खड़े हो मम्मी के पास जा कर: ः ाचा चलो अब आज की किश दो मुझे मम्मी..

और मेरी बात सुन मम्मी भी बिना कुछ सोचे चुप चाप एक एक कर दो चुम्मिया मेरे दोनों गलो पर जड़ देती है...

मैं, मम्मी के हाथ पकड़: सच मम्मी जब आप चूमती हो न तो वाकई भोत ाचा महसूस होता है, मन करता है डिज भर आप ऐसे hi मुझे चूमते रहो ः..

मम्मी: हहै चल हैट बधंस कही का, दिन भर यही करू तोबाकि के काम कोण करेगा

मैं: ः पर वाकई भोत ाचा लगता है मुझे आपका इस ततः पैर करना, वैसे मम्मी पापा कितने नसीब वाले है आप उनको तो रोज hi ऐसे कितने hi सरे चुम्बन देती होगी हैं न, और मुझे तो सिर्फ गाल पर मिले उन्हें तो आप होठो कर भी चूमती होगी न जैसे आजकल के कपल करते है...

मम्मी, मेरी बात सुन कर चौकते हुए: क्या कहा तूने, कहा से सिख के आता है तू ये सब और कोई अपनी मम्मी से इस ततः की बाटे करता है क्या बेशरम...

मैं: इसमें बेशरमी क्या मम्मी, आजकल तो ये सब कितना नार्मल है, मेरी. कॉलेज में तो जो लड़के लड़किया बर्फ गफ होते है वो सब भी करते है, वो तो बर्फ गफ हो कर ये सब करते है तो पति पत्नी के बिच तो ये भोत स्वाभाविक सी बात हो गई है न..

मम्मी, बनावटी गुस्सा दिखते हुए: तो तू ये सब करने जाता है कॉलेज अब, ये सब दिखा है तू कॉलेज जा कर सनी..

मैं: क्या मम्मी आप भी, कौनसे ज़माने में जी रही हो अब दुनिया मॉडर्न होती जा रही है, और वैसे भी आप आज की नारी हो मॉडर्न नारी कोई पुराने ज़माने की तो नहीं न ः..

मम्मी, हस्ते हुए: तू न मार खायेगा मेरे से, भोत बाटे बनाने लगा है सच्ची सनी.. चल अब हैट साइड में मुझे कपडे बदलने दे अब...

मैं, जैसे hi मम्मी अपनी कप्बोर्ड खोलने के लिए पीछे मुड़ती है में पीछे से जा कर अपने हाथो को साड़ी में उनके नंगे पेट पर ले जा कर पीछे से कस के पकड़ लेता हु: मम्मी आज आप कपडे मत बदलो न...

मम्मी, मेरे इस तरह के अचानक से हुए वॉर से सेहम सी जाती है और अपने जिस्म को इस तरह आरसे बाद किसी मर्द के हाथो की गिरप्त में पते हुए खुद का समर्पण दिखते हुए: क्यों बीटा, साड़ी में कैसे सोऊंगी में फिर अगर कपडे नहीं बदलूंगी तो..

मैं, अपने मुँह को उनके कंधे पर रख उनके गलो पर होठ लगा क्र : प्लस न मम्मी आप मुझे साड़ी में ज्याद अछि लगती हो और पहले भी आप साड़ी में सोती hi थी न जब में छोटा था बस आज मुझे वही बचपन के दिन यद् आगये इसलिए प्लस. प्लस प्लस

मम्मी, मेरी जिद्द के आगे हारते हुए, अपने पेट को जकड़े हुए मेरे हाथो पर उनके हाथ रख: हाहाहा ाचा बाबा ठीक है नहीं बदल रही हु बस अब तो चोर मुझे, कितना जिद्दी हो गया ह तू सनी सच में..

मैं, एक बार दोबारा उनके गलो को चुम कर, उन्हें अपनी गिरफ्त से आज़ाद कर देता हु: थैंक यू मम्मी, जिद्द नहीं ये प्यार है मेरा मेरी खूबसूरत सी प्यारी मम्मी के लिए ः...

मम्मी: ः वाह खूबसूरत और प्यारी, बड़ी त्रिफे कर रहा है आज तो तू मेरी क्या बात है...

मैं: आज hi क्या में रो. हमेशा से तारीफ करता आया हु आपकी और आप हो तारीफ के काबिल सच्ची.. वैसे आपने जवाब नहीं दिया मुझे, क्या आप भी पापा के होठो को चूमती हो या नहीं...

मम्मी, क्या बताऊ बीटा तुझे, होठो को तो चोर उन्होंने मुझे गाल पर चूमने भी कितना वक्त हो गया, तरस गए है मेरे होठ तो उनके होठो के स्पर्श पाने के लिए...: तू फिर आ गया उस बात पर, अब जब तू इतना कुछ सिख गया है कॉलेज में तो इस सवा का जवाब भी हाँ hi है जैसे बाकि पति पत्नी के बिच रिश्ता होता है वैसे hi तेरे पापा और मेरा है और अब इसके आगे एक और सवाल नहीं पूछना समझा...

मैं, मन में, आप शायद झूट बोल रही हो क्युकी मेने आपको प्यार के लिए तड़पते हुए देखा हाउ, उस प्यार के लिए जो आप अपने पति से अपेक्षा कर रही है पर आपको नहीं मिल रहा है: ः ाचा ठीक है नहीं पूछता कोई सवाल अब आपसे मई बस...

मैं: वैसे मुंय आपको यद् है पहले में कैसे आपका पेट चूमता रहता था है न..

मम्मी: वो में कैसे भूल. सकती हु भला, आदत सिपादगायी थी तेरी हमेशा मेरा पेट चूमने की बस हहै...

मैं, अपना हाथ मम्मी के पेट पर ले जाते हुए साड़ी को सरका कर के: तो मम्मी आज फिरमान कर रहा है मेरा उन यादो को ताज़ा करने का, क्या एक बार में आपका पेट चुम लू प्लस..

मम्मी: ओफ्फो सनी वो तू बचपन में करता था अब तू बच्चा नहीं रहा न लेकिन..

मैं: आपने hi कहा था न की आपके लिए में हमेशा बच्चा hi रहूँगा ः अब बोलो..

मम्मी: ओफ्फो तुझसे कोई नहीं जित सकता बातो में, ठीक है चुम ले पर सिर्फ एक बार hi...

मैं: ऐसे नहीं मम्मी आप लेट जाओ न तो में अचे से चुम पाउँगा आपका पेट..

मम्मी, मेरी बात सुन मुस्कुरा देती है और पीठ के बल बिस्तर पर लेट जाती है और अब मई उनकी साड़ी को एक तरफ सरका देता हु और मेरे हाथ को मेरी मम्मी के इस गोर गद्दार हुए चिकने पेट पर सहलाते हुए अपने मुँह को उनके पेट के करीब ले जाने लगता हु.

यहाँ अब में मम्मी के पेट के इतने करीब पहुंचने से उनके पेट को उनकी सास लेने और चोर्ने के साथ hi अंदर बहार होते हुए भली भांति देख सशक्त था और जैसे hi अब मई अपने होठो को मम्मी की नाभि के ठीक बगल में रख कर एक हल्का सा चुम्बन लेता हु की तभी मुझे मम्मी के पेट में हुए कम्पन का एहसास होता है..

पलंग पर सीधी लेती हुई मम्मी को जैसे hi अपने बेटे के होठो का स्पर्श मिलता है तो उनके मुँह से एक हलकी सी सिसकी अह्ह्ह्ह िष्ठ की निकल जाती है, वैसे तो महिमा अपनी सिसकियों को मुँह में hi दबा लेती है लेकिन कही न कही उन्हें इ भी इस एहसास से आनंद की अनुभूति जरूर हुई थी..

यहाँ अब मेने भी अपने दोनों हाथो को मम्मी की कमर में दाल कर अछि पकड़ बना ली थी और अब अपने मुँह को खोल उनके पेट को जितना अपने मुँह में भर सकता था उतना भर कर चूमता जा रहा था, मुश्किल से मिले इस मौके को मैं अब हाथ से जाने नहीं देना चाहता था और कही न कही मुझे ये भी पता था की मम्मी को भी ये सब ाचा सा लग रहा है और अगर में यहाँ रुक गया तो मम्मी वापस मुझे ये मौका नहीं देने वाली और इसीलिए बिना रुके अब मेने मम्मी के पुरे पेट को धीरे धीरे से चेतना और चूमना शुरू कर दिया था...

मेरे इस तरह प्यार से पेट को चाटने और चूमने से अब मम्मी भी अपनी आंखे बंद किये हर हरकत का मजा सा ले रही थी और ले भी क्यों न, उनके शरीर को ये थोड़े न पता था की इस ततः प्यार देने वाला इंसान इस औरत का बीटा hi है, उमके जिस्म के लिए तो मैं बस कोई एक मर्द था जो आज आरसे बाद इस गदराये जिस्म को मर्दाने हाथो की गिरफ्त में होने का अनुभव करा रहा था..

और मम्मी का शरीर जो की न जाने कितने hi समय से मनो इस अनुभव और एहसास को पाने के लिए विचलित था आज मेरी गिरफ्त में आते hi पूरी तरह से कांप उठा था और खुद ने मनो अपने आप को समर्पित कर दिया हो...

अपने हाथो को मेरे बालो में फिरा मुझे सहकाते हुए मम्मी भी अब आँखे बंद किये मेरे द्वारा इस तरह उनके पेट को चूमे जाने का मजा लूट रही थी और साथ hi प्यार भरी आवाज में ये भी बोले जा रही थी की, " ओह्ह्ह सनी बीटा अब बस भी कर एक बार चूमने की hi बात हुई थी न हमारी. "

मैं, उनकी नाभि में जीभ घुसा कर फिरते हुए: उम्म्म्महहह ओह मम्मी प्लस चूमने दो न कितने दिनों बाद तो आज आपने ये मौका दिया है, आपको ाचा नहीं लग रहा है क्या..

मम्मी, अब भी आंखे नन्द किये मेरर सर में हाथ फिरते हुए, और साथ hi ये समझते हुए की अगर इस वक्त उन्होंने मुझे नहीं रोका तो उनका शरीर बाद में उनकी नहीं सुनेगा और माँ बेटे के बिच कुछ ऐसा हो जायेगा जो नहीं होना चाहिए: उम्म्म बीटा ाचा तो लग रहा है लेकिन अब कितनी देर तक चूमेगा तू, वैसे भी अब तू बच्चा तो नहीं रहा है न, चल हैट अब वह से सनी...

मैं, अपनी उंगलिओ से उनकी नाभि के इर्द गिर्द खेलते हुए और जीभ को नाभि की पूरी गहराई में उतर कर: उमंमेंमम मम्मी बस पांच मिनट और चूमने दो न फिर हैट जाऊंगाआ..

मम्मी, मेरे इस ततः उनकी नाभि से खेलने और जीभ घुसाने से जो पूरी तरह से गरमा चुकी थी, और ये बात भी तय थी की इतने वक्त बाद आज किसी मर्द के हाथो इस तरह प्यार मिलने से उनकी टैंगो के बिच छिपी उस खूबसूरत सी छूट में भी नमी चने लगी थी और उसने भी कुछ हद तक अपना रास बहाना शुरू कर दिया था, पर फिर भी इस सब से काबू पते हुए क्युकी ये जानते हुए की जो मर्द उनकी छूट को बहने पर मजबूर कर रहा वो उनका अपना बीटा है, वो अब मेरे सर को पकड़ मुझे उठाते हुए: ओह्ह्ह सनी बीटा ुम यह बस भी कर देख पूरा पेट गिला कर दिया तूने चुम चुम के उफ्फ्फ हहै और कितना चूमेगा चल दूर हट अब, मुझे नींद भी आ रही है अब सोने दे मुझे चल..

मैं, जिसने पहले से hi मम्मी को तड़पते हुए और अपने जिस्म की आग के आगे हारते हुए ले दफा देखा हुआ था, मम्मी के इस तरह मुझे हटाने के उपरांत भी ये समझ चूका होता हु की इस वक्त शायद मम्मी का शरीर ये सब पसंद कर रहा होगा लेकिन एक माँ का अपने बेटे के साथ इस तरह के सम्बन्ध बनाने की बात उन्हें गवारा नहीं हो रही और इसीलिए वो मुझे अपने से इस तरह से पीछे खींच रही है...

और इसी बात को समझते हुए मई भी मन hi मम ये थान लेता हु की, " कोई बात नहीं मम्मी भोत hi जल्द में आपकी सोच को भी बदल दूंगा और आपको इतना प्यार दूंगा जो आप पापा से छह रही हो, जो प्यार पापा आपको नहीं दे प् रहे उससे भी कई गुना प्यार आपको आपका ये बीटा देगा, और ये बात नहीं तय है की मुझसे वो प्यार पाने के लिए आप खुद सामने से कहोगी और आपके मन में ये माँ बेटे के रिश्ते के प्रति जो संकोच है वो भी ख़तम हो चूका होगा, इन कुछ दिनों में मैं आपके शरीर और मन में आपके इस बेटे के प्यार के लिए इतनी तड़प जगा दूंगा की आप छह कर भी खुद को नहीं रोक पाओगी ः.." ुर यही सोच एक आखरी बार मम्मी के पेट को चुम कर में वह से हैट जाता हु और पलंग पर मम्मी की तरफ करवट ले कर लेट जाता हु...

चाहे उप्पेर से mahima(mummy) ने कुछ भी कह करअपने बेटे को अपने पेट पर चूमने से रोक कर हटा दिया हो लेकिन अंदर hi अंदर वो भी ये बात समझ चुकी थी और जान रही थी की अपने बेटे के इस तरह चूमने मात्रा से hi उसके शरीर में गर्मी उत्पन्न हो चुकी है और न चाहते हुए भी अब उसकी छूट में खुजली होने लग गई थी जैसे मनो की अगर सुमन्य उसका बीटा ना होता तो आज रत शायद वो उसे बिना रोके अपना सब कुछ सौप देती और इतने समय से तड़प रहे अपने जिस्म को तृप्त कर लेती...

मैं, अब पलंग पर लेट ते हुए और अपना चेहरा उनके सामने करके उनके गलो को एक बार कर चुम कर: उम्मम्माह थैंक यू समुच मम्मी मुझे ये मौका देने के लिए...

मम्मी, मेरी तरफ करवट ले मेरी आँखों में देखते हुए: हहै बस अब तो खुश है न मेरा बच्चा, भर गया न मन तेरा अपनी इच्छा पूरी करके..

मैं: कहा मम्मी आपके पेट को चूमने में इतना मजा आ रहा था की में साडी रात फहुता रह जाता अगर आप. टोकती नहीं तो ः, सच बचपन में भी इतना मजा नहीं आया जितना आज आया, उस वक्त से जयदा मुलायम और नरम सा हो गया है अब आपका पेट ः...

मम्मी, मन hi मन ये सोच की मजा तो मुझे भी भोत आया बीटा, खास कर जब तू मेरी नाभि से खेल रहा था उफ्फ्फ मन तो किया था की में भी तुझसे रात भर चुस्वाति राहु पर क्या करू ये में होने नहीं दे सकती हु न: हहै चुप बदमाश, कुछ भी बोलता है बिना सोचे समझे तू.. चल अब सो जा सुबह उठना भी है न, भोत देर हो चुकी है...

मैं: नहीं मम्मी आज मई ऐसे नहीं सोना चाहता हु आपके साथ, मुझे एक और इच्छा पूरी करनी. है मेरी प्लस..

मम्मी, अब और क्या करना है इस लड़के को, और कितना गरम करेगा ये मुझे उफ्फ्फ: हे भगवन ऐसी कितनी िकव्हये है जो तूने दबा राखी है अपने मन में सनी..

मैं, मम्मी को कास के अपनी बहो में जकड लेता हु, इस तरह से की अब मेरा मुँह उनकी छाती में धंस सा गया होता है और उनके दोनों हाथ मेरी पीठ पर और मेरे दोनों हाथ उनकी. पीठ पर ब्लाउज के उप्पेर फिर रहे होते है: आज मुझे आपसे ऐसे चिपक के सोना है मम्मी, कैसे आप बचपन में मुझे ऐसे hi अपने आप से चिपका के सुलतक थी आज भी वैसे hi सोने दो मुझे प्लस..

यहाँ में तो उनसे कास के चिपक गया लेकिन मम्मी की हालत इस कारन से औरबुरी हो चुकी थी क्युकी न जाने कितने वक्त के बाद आज उनके अपने बिस्तर में वो इस तरह किसी मर्द की बहो में लिपटी हुई सोइ होगी लेकिन वो ये भी जानती थी की में अपनी बात मम्वा के रहूँगा इसलिए वो भी मर्ज बात के आगे हारते हुए मुझसे ऐसे hi चिपक क्र सो जाती है...

मम्मी की बहो में, उनके ब्लाउज में कैसे हुए कैद उन दो विशाल पहाड़ो के इतने करीब होते हुए नींद भला किसे आने वाली थी, में तो बस उनके जिस्म से जितना चिपक सकता था उतना चिपक के लेटने का नाटक कर रहा था, जिससे की में उनके जिस्म की महक का मोहक मजा ले सकू.. वही दूसरी तरफ मम्मी की भी नींद शायद उड़ सी चुकी थी, और उड़े भी क्यों नहीं, जिस औरत को उसके पति ने न जाने कितने आरसे से हाथ तक नहीं लगाया छोड़ना तो दूर की बात है, जिसके श्री के अंगो को किसी मर्द ने छुआ न हो, आज उसी औरत का पुर ाजिसम किसी मर्द की जकड में फसा हुआ हो और उसके साथ रत भर के लिए हमबिस्तर होते हुए सोइ हुई हो, चाहे वो मर्द उसका अपना बीटा भी क्यों न हो, वासना और जिस्म की असंतुष्टि कोई रिश्ता ना देखते हुए बस अपनी शारीरिक भूख मिटने के बारे में सोचती है और इसी सोच के कारन आज इस वक्त मम्मी का जिस्म भी वासना की उस आग में तपने लगा था और बस इस हासिम एहसास को जीना छह रहा था...

हम दोनों hi सोने का बहाना किये अंदर hi अंदर जग रहे होते है लेकिन दोनों को एक दूसरे के लिए ऐसा hi लग रहा होता है की हम सो चुके है और इसी बात का फायदा उठाने का सोच अब मैं हलके हाथो से मम्मी के ब्लाउज के उप्पर से उनका पल्लू सरका देता हु और अपने चेहरे को उनकी दोनों मोती. मोती चुचिओ के बिच धंसा देता हु, उफ्फ्फ्फ़ हईये क्या मस्त हसीं पल था वो जब मेने अपना चेहरा उन पहाड़ो के बिच गहराई में दुनोया उफ्फ्फ्फ़, चुचिओ की मुलायम नरम सी त्वचा, अकार में तरबूज जैसे बड़े और उनके बीचो बिच उफ़ वो सुराही hi एक दम पतली और गहरी सी खाई, और उस खाई से ऑटो मम्मी के जिस्म की मादक सी खुशबु हैइए ये सब का एहसास लेते hi मेरे. लुंड को मनो एक जोर का झटका सा लग जाता है और इसी कारन जोश में आते हुए में अपना चेहरा और उनकी चुचिओ के बिच धंसा देता हु और साथ hi साथ अब अपनी जीभ को बहार निकल उनके ब्लाउज से बहार निकले हुए क्लीवेज पर फिरने लगता हु और चूमते हुए चुचिओ के बिच की उस गहराई को नापने लगता हु, ओह्ह्ह मम्मी क्या मस्त जिस्म है क्या रसीली मस्त हसीं चूचिया है उफ्फ्फ न जाने कब सच में इनको अपने मुँह में लिए पिने का मौकामिलेगा....

जहा मैंने मम्मी के नींद में होने की सोच कर ये हरकत की थी वही मम्मी ने जैसे hi मेरी इस हरकत का एहसास किया तो उनके जिस्म में भी एक करंट सा दौड़ जाता है और जो भी हलके से मेरा सर अपनी चुचिओ पर दबाने की कोशिश करती है और शायद मेरी जीभ और मुँह से हुए अपनी चुचिओ पर इस तरह के स्पर्श से उनके जिस्म की आग और भड़क सी गयी होती हैऔर इसी वजह से उनकी दोनों टंगे एक दम से आपस में सिकुड़ सी जाती है मनो छूट को संभल रही हो की अब किसी तरह ये अपना रास बहाना बंद करे और इसकी गर्मी शांत हो सके उफ्फफ्फ्फ़...

पर ये जान कर की अगर वो इसी तरह मुझसे चिपकी रही तो पूरी रात भर उनका जिस्म इसी तरह तड़पता रहेगा और जिस्म की आग सोने नहीं देने वाली साथ hi बेटे के साथ न जाने किस हद तक ये शारीरिक सम्बन्ध का सिलसिला आगे बढ़ जाये, और इसी लिए अपनी भावनाओ और वासना पर काबू पते हुए वो धीरे से मेरे हाथो को खोलते हुए मुझे सीधा लिटा दिया (यहाँ अब मुझे सच में नींद में होने का नाटक करना पड़ा वार्ना उन्हें शक हो जाता इसलिए जैसे वो मुझे अलग कर रही थी में भी वैसे hi हिलता रहा) और वो बिस्तर से उतर कर सीधा बाथरूम में घुस जाती है...

मम्मी के बाथरूम में घुसते hi यहाँ में झट से अपना हाथ लोअर में दाल लुंड को पकड़ के जोर से जकड के हिलना शुरू कर देता हु, "ओह्ह्ह मम्मी क्या माल हो तुम यार उफ्फफ्फ्फ़, कहा पापा ने इतनी हॉट गरम औरत को अकेला चोर रखा उफ्फ्फ मुझसे तो रहा नहीं जा रहा मन तो कर रहा अभी पटक के छोड़ न दू ईशःठ अह्ह्ह और उनकी साडी जरूरते पूरी कर दालु उफ्फ्फ्फ़ मुम्मिलेलो न अपने बेटे का ये कड़क लौड़ा, दे दो आपकी छूट मुझे उम्म्म और हईये क्या रसीले मम्मी है यार मम्मी के उफ्फ्फफ्फ्फ़ ब्लाउज न फाड् दू इनको चूसने के लिए तो उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्हह" और यही सब सोचते हुए अब में मम्मी के नाम की मुठ मरने लग पड़ा था और कुछ hi देर में अपना माल बहा देता हु..

वह बाथरूम में जा कर महिमा (मम्मी) का भी हाल कुछ ऐसा hi था जिस वजह से बाथरूम. में घुसते hi वो अपनी साड़ी और पेटीकोट उठा कर पंतय झट से निचे सकर्ता देती है और बेटे की प्यार भरी हरकतों से जगी जिस्म की आग के कारन गीली हुई अपनी छूट में झट से दो उंगलिया घुसा लार छूट छोडन शुरू कर देती है, आँखे बंद करने पर बेटे का hi चेहरा नजरो के सामने घूमता दिखाई पड़ता है लेकिन इस वक्त वासना की आग्मे जलती हुईस औरत को सही गलत की परवाह नहीं होती है और बस पिछली कुछ देर में अपने बेटे के साथ हुई साडी बातो और वाकियो को यद् कर छूट में उंगलियों की गति बढ़ाते हुए एक समय बाद अपनी छूट से काम रास की धरा बहा देती है..

यहाँ मई तो लुंड का माल चोर्ने के बाद सच में सो चूका होता हु लेकिन अब छूट का रास बहने के बाद जिस्म की आग ठंडी होने के उपरांत जैसे hi महिमा बाथरूम से बहार निकलती है और बिस्तर पर अपने बेटे को प्यार भरी नींद लेते हुए देखती है तो उसे अब मन hi मन खुद पर अफ़सोस होता अहइ और एक ग्लानि सी महसूस होती है की में ये ससब क्या सोच रही थी और अपने hi बेटे के साथ ये सब करने के लिए इतनी तड़प गयी, सनी तो बस मुझसे एक मा होने के नाते वो प्यार मांग रहा था और मेने िसेपता नहीं किस नजरिये से देखा... नहीं महिमा तू तेरे जिस्म की आग के आगे इतनी कमजोर पद गयी और वासना में इतनी दुब गयी की तू अपने hi बेटे के साथ ये सब करने का सोच भी कैसे सकती है...

और इसी सब सोच के साथ अब वो भी बिस्तर पर आकर अपने बेटे सनी के माथे को चुम कर उसके पास hi लेट जाती है और सो जाती है...

 
अपडेट - 49


यहाँ घर पर तो हर सदस्य अपने अपने तरीके से अपने हक़ की मस्ती पमे में और अपने मन की इच्छा पूरी करने की हर संभव कोशिश करने में लगा हुआ था, लेकिन वह दुसरिणतर्फ सीमा दीदी, मेरी बीवी बानी रागिनी बुआ और मेरर पापा यानि मर मानव खन्ना और उनकी सेक्रेटरी जो की शहर पहुंच हैं, देखते है वह क्या हो रहा है....

तो जैसा की सब जानते है की सीमा के कहने पर ना चाहते हुए भी मानव को अपनी इच्छा के विपरीत जा कर सिर्फ दो कामने hi लेने पर मजबूर होना पड़ता है जिसमे से एक कमरे में रागिनी और श्वेता तो दूसरे कमरे में सीमा खुद अपने पापा मानव के साथ रहने का तय करती है..

और यहाँ कमरे में पहुंचने के बाद सीमा एक बार फिर मानव को चेतावनी देते हुए की वो उस श्वेता से दूर रहे और यहाँ अब किसी भी तरह की हरकते न करते हुए सिर्फ ऑफिस का काम करने को कहती है... और चूँकि मानव इस बात को अचे से समझता था की उसकी बेटी अब भी उसे माफ़ नहीं की है और उसका भरोसा दोबारा जितना इतना आसान काम नहीं होगा और इसी वजह से वो भी उसे वडा करता है की बा आगे से उसे किसी तरह की शिकायत का मौका नहीं मिलेगा..

लेकिन कहते है न की अगर अपनी पसंदीदा चीज आपके आँखों के सामने हो तो उसे खाये बिना नहीं रहा जा सकता, ठीक वैसे hi मानव जो की पहले से हीस ट्रिप पर श्वेता के साथ पूरी जोरो शोरो से मस्ती मरने के मूड से आया था अब जब उसकी बेटी की मौजूदगी में श्वेता का जवान जिस्म सामने होते हुए भी वो कुछ नहीं कर प् रहा था और इसी वजह से अब उसकी बेचैनी और जवान छूट के लिए प्यास भी काफी हद तक बाद चुकी थी..

शहर पहुंचने के उपरांत पहली रात तो थकन के मरे सब अपनी अपनी जगह सो जाते है और अगली सुबह मानव, रागिनी और श्वेता तीनो hi ऑफिस के जिस काम के लिए आये थे उसे पूरा करने चले जाते है..

पूरा दिन ऐसे hi निकल जाता है और शाम के समय वापस होटल लौटने के समय रागिनी कुछ सामान खरीदने के बहाने से मानव और श्वेता का साथ चोर अलग चली जाती है और यहाँ मानव और श्वेता दोनों hi वापस होटल की तरफ लौटने लगते है...

यहाँ आने के बाद ये पहला मौका था जब श्वेता मानव के साथ अकेले वक्त बिता रही थी और इसी कारन अब उससे अपनी बात कहने का मौका मिल जाता है और वो बिना कुछ सोचे अपने मन की बात कह देती है..

श्वेता: सर, ऐसा कब तक चलने वाला है बताइये न..

मानव: क्या कब तक चलने वाला है में समझा नहीं श्वेता..

श्वेता: सर आप अचे से जानते है की मई क्या कहना छह रही हु, आप जानते है न में आपके साथ इस ऑफिसियल ट्रिप पर आने के लिए क्यों राज़ी हुई हु और मेरी आपसे की जरूरते है फिर भी पूछ रहे हो..

मानव: हाँ में सब जनता हु लेकिन तुम क्या ये नहीं समझ रही हो या समझ के बी समझना नहीं छह रही हो की इस वक्त हमारे साथ सीमा भी आयी है और उस दिन रश्मि द्वारा किये गए कांड के बाद मेरे और सीमा के बिच रिश्ते में खटास सी आ गई है, हम बाप बेटी के बिच ोेहले सा रिश्ता नहीं रहा और में किसी तरह उस रिश्ते को सँभालने की कोशिश कर रहा हु, और तुम्हे अभी अपने जिस्म की आग बुझाने की पड़ी है..

श्वेता: सर वो सब में जानती हु और समझती हु लेकिन सर आप मेरी भी तो बात समझिये न, अब मैं यहाँ आपके साथ ये देखने तो आई नहीं हु की आप अपनी बेटी के साथ बिगड़े हुए रिश्ते को कैसे सँभालते है, मैं यहाँ इसलिए आई थी ताकि आपके साथ इस एक हफ्ते में वो हसीं एडगर लम्हे गुज़र सकू जो शायद अपने शहर में गुज़ारना आसान नहीं हो पता...

मानव, ये देख की श्वेता अब उखड सी रही, उसका हाथ पकड़ते हुए: अब कुछ समय की बात है न, में यहाँ कोई गलती करके दोबार सीमा की नज़रो में नहीं गिरना चाहता हु प्लस समझो न इस बात को भी तो...

श्वेता: मुझे कुछ नहीं समझना है सर, मन की आप मेरे बॉस हो, न सिर्फ ऑफिस के हिसाब से बल्कि जिस्मानी तौर से भी में जानती हु की मेरा जिस्म अब आपके लिए hi हो चूका है और ये बात आप भी अचे से जानते है की आपसे प्यार पाने आपसे छोड़ने के लिए में हर जगह आयी हु जहा आपने मुझे बुलाया है, चाहे ऑफिस हो, होटल हो या कही भी जब आपने मुझे छोड़ने की इच्छा जताई तब मेने अपनी टंगे फैला के आपका स्वागत किया है.. और इस सब में मेने ये कभी नहीं सोचा की आपसे चुड़ते हुए में अपने पति को धोका भी दे रही लेकिन सर चूँकि मुझे आपसे छोड़ना ाचा लगता है इसलिए मुझे ये सब मंजूर था और है भी, पर इस सब के बदले अब आप क्या कर रहेहो, मुझे अकेला चोर रहे हो.. आखिर क्यों सर..

मानव, ये देखते हुए की श्वेता वाकई उसके साथ लिए तेदेपा रही है: यार श्वेता तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे की ये सब सिर्फ मेरी मर्जी से हुआ, अगर मेने बुलाया तो तुम भी तुम्हारी मर्जी से आई हो न और में ये कहा कह रहा हु की अब मुझे तुम्हारी जरुरत नहीं... तुम जानती हो न की तुम जैसी भरी जवानी वाली शादी शुदा औरत hi तो मेरी कमजोरी है और आज भी मेरा लुंड तुम्हारी छूट फाड़ने के लिए वैसे hi मचलता है... मई बस ये कह रहा हु की अभी कुछ दिनों के लिए हमे ये सब नहीं करना छाइये ताकि में सीमा को यकीं दिला सकू और उसके मन में मेरे प्रति जो खटास है वो दूर कर सकू...

श्वेता: लेकिन उन कुछ दिनों के चक्कर में ये हफ्ता पूरा ख़तम हो जायेगा सर, और फिर वापस घर जाने के बाद वही रोजाना वाली जिंदगी जिनि पड़ेगी, मुझे लगा था इस एक हफ्ते में तो काम से काम आप सिर्फ मेरे साथ रहोगे, मेरी जैम कर चुदाई करोगे और यहाँ न किसी का दर न कोई रोकने वाला होगा लेकिन अब तो यहाँ उतना भी नहीं मिल रहा जितना आप ऑफिस में मजा देदेते थे...

मानव: ाचा चलो ठीक है में कोई तरीका ढूंढ़ता हु बस, कोशिश करता हु की किसी तरह यहाँ भी तुम्हे वो सब मजा दे सकू.. अब मूड ठीक करो अपना प्लस..

श्वेता, मुस्कुराते हुए: ठीक है सर आप कह रहे हो तो भरोसा कर रही हु पर जो करना है जल्दी करना सर, अब नहीं रहा जाता मुझसे ऐसे अकेले आपसे बिना चूड़े...

मानव, आँख मरते हुए : क्या बात है इतना तड़प रही है तू मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने के लिए ः..

श्वेता, अपने निचले होठ को दन्त में फसा काट ते हुए: सच कहु तो सर में तो जब से ये ट्रिप प्लान हुई तब से hi भोत एक्ससिटेड थी, तब से hi मेरी छूट ने रिसना शुरू कर दिया था, और हाँ तड़प तो होगी hi न आपका लुंड है hi इतना मज़ेदार, भोत आग लग जाती है उसके बारे में सोच कर hi सर उफ्फ्फ...

मानव: ः इतनी औरते छोड़ी मेने लेकिन तुझ जैसी इतनी वफादार रंडी कभी नहीं मिली मुझे...

श्वेता: उम्म्म सर मिलेगी भी नहीं, शायद hi ऐसी कोई औरत होगी जो अपने पति से छोड़ने क बजे अपने बॉस की रंडी बन कर रहने में ख़ुशी पति है और यहाँ तक की अपनी शादी की एनिवर्सरी पर भी पति की जगह बॉस की रैंड बन उसके निचे लेती होगी हहै..

मानव : ः बात ये तो सही है और वैसे भी तुम हो hi इतनी मज़ेदार जितना लूटो उतना काम है मेरी रंडी... चल में कुछ करता हु जल्दी hi की तेरी छूट की भी आग ठंडी हो जाये पर जो भी करना है वो संभल के करना पड़ेगा वार्ना अगर सीमा को कुछ भनक बी लगी तो इस बार पता नहीं वो क्या करेगी...

श्वेता: हाँ सर पर जो भी करना है जल्दी करना हहै.. और ये बोल कर दोनों सीमा और मानव वापस होटल में पहुंच जाते है...

कमरे में पहुंचने पर जब सीमा को ये पता चलता है की रागिनी बुआ किसी काम से इन दोनों को साथ में अकेले चोर कर चली गयी थी तो सीमा मानव की तरफ शक भरी निगाहो से देखती है, और मानव अपनी बेटी की निगाहो को पढ़ कर ये समझ जाता है की उसके मन में क्या सवाल उठ रहा होगा और इससे पहले की सीमा कुछ पूछती मानव खुद सामने से बोल पड़ता है..

मानव: मुझे पता है बेटी अब भी तुझे यही लग रहा होगा की रागिनी के जाने के बाद में श्वेता के साथ अकेला था और मेरे पास एक ाचा मौका भी था लेकिन मेरा विश्वास करो बेटी, मेने तुमसे वडा किया है और इस वेड को में कभी नहीं तोडूंगा, थोड़ा तो भरोसा कर सकती हो न अपने पापा पर अब तुम...

सीमा, ये सोच कर की शायद अब में कुछ ज्यादा hi सोचने लगी हु: हम्म्म ठीक है पापा लेकिन इस बात का ध्यान रखना की आप इस बार अपनी बेटी का भरोसा न तोड़ो वार्ना जिंदगी में कभी में आपको पापा होने का सम्मान नहीं दे पाऊँगी.. मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए बस अपनी इस आदत को बदलो आप..

मानव, भले सीमा खुल कर कुछ न बोल रही हो पर सब कुछ समझते हुए: हाँ बेटी में तुझे सब कुछ बदल कर दिखाऊंगा देख लेना..

रात में मानव, सीमा, रागिनी और श्वेता इन चारो में से सिर्फ एक hi इंसान था जो चैन की नींद ले प् रहा था और वो थी सीमा, क्युकी बाकि तीनो अपनी अपनी अलग hi सोच में दुबे हुए थे जिनकी आँखों से नींद मनो ओझल सी हो चुकी थी..

जहा मानव इस सोच में डूबा हुआ था, " की क्या करू ऐसा की किसी तरह बगल के कमरे में मेरे लुंड के लिए तड़पती छूट लिए सोइ श्वेता को छोड़ने का मौका भी बन जाये और यहाँ सीमा को किसी तरह का शक भी नहीं हो, क्युकी सिर्फ श्वेता hi नहीं है जो छोड़ने के लिए तड़प रही है, मुझे भी जवान छूट को चोदे हुए अब काफी दिन हो गए है और किसी न किसी तरह कोई तरीका ढूंढ कर लुंड की तड़प दूर करनी hi पड़ेगी. "

वह बगल के कमरे में श्वेता भी अपने बॉस मानव से छोड़ने के सपने देख रही थी और साथ hi मन hi मन सीमा को गालिया भी दे रही थी की उसकी वजह से इतनी अचे ट्रिप का पूरा सत्यानाश सा हो गया है, क्या सोच कर आयी और अब क्या हो रहा है, बॉस से छोड़ना तो दूर उनसे आसपास रहने का भी मौका हाथ नहीं लग रहा है...

और हमारी प्यारी रागिनी बुआ वो अपने भतीजे से नयी नयी शादी होने के बाद पहली बार ुःस्व दूर हुई थी और एक दिन की दुरी में hi अब उसके जिस्म ने उसके पति यानि सनी को मिस करना शुरू कर दिया था, उसका मन तो भोत कर रहा होता है की वो अभी इसी वक्त सनी को फ़ोन करे लेकिन वो ये बी जानती थी की अगर उससे बात करने लागितो उसकी छूट को बहने से नहीं रोक पायेगी और दूसरी तरफ सनी ने hi उसे कसम दे राखी है की इस एक हफ्ते में वो अपनी छूट के साथ किसी तरह का खेल नहीं खेलेगी और इसीकारण वो अपनी तड़पती हुई छूट और भतीजे के निचे लेट कर मसले जाने की इच्छा लिए अकेली उस बिस्तर पर सोने की कोशिश करने लगती है..

 
अपडेट- 50


सुबह सुबह अभी मानव की बस आँख खुली hi होती है की उसके कानो में अपने मोबाइल पर एक मैसेज आयने की घंटी सुनाई पड़ती है. जैसे hi वो अपना मोबाइल हाथ में ले कर वो मैसेज खोलता है तो उसे स्क्रीन पर श्वेता का नाम दिखाई पड़ता है, जिसका मतलब ये था की मैसेज श्वेता ने किया था.

श्वेता का मैसेज है ये जानते hi वो एक बार अपने कमरे में चारो तरफ निगाहे घूमने लगता है मनो उसकी नज़रे अपनी बेटी सीमा को ढूंढ रही, लेकिन तभी उसे बाथरूम से पानी छलकने की आवाज आती है जिसका मतलब साफ था की सीमा इस वक्त बाथरूम में नाहा रही होगी..

एक रहत की सास लेने के बाद मानव अपने मोबाइल को वापस देखते हुए श्वेता के उस मैसेज को खोल कर देखता है और मैसेज देखते hi सुबह सुबह कुछ देर पहले नींद से जगे मानव की आँखों में चमक सी आजाती है और टैंगो के बिच लटक रहे हथियार में मनो एक जान सी आ जाती है और झट से अंगड़ाई लेते हुए अकड़ने लग पड़ता है.

जो मैसेज श्वेता ने मानव को भेजा था उस मैसेज में श्वेता ने अपनी कुछ तसवीरें भेजी थी, जिन्हे देख कर hi लग रहा था की ये तसवीरें श्वेता ने अभी सुबह सुबह hi निकली थी..

दरअसल ये कोई आम तसवीरें नहीं थी बल्कि श्वेता ने अपने मादक कामुक जिस्म को दिखते हुए बाथरूम में खड़े खड़े अपने कपडे निकलते हुए भेजी थी... अभी श्वेता ने मनो उप्पेर के कपडे hi निकले हो और सिर्फ ब्रा पंतय में कड़ी हुई थी और ऐसे hi तभी श्वेता का मानव पर वीडियो कॉल आजाता है..

चूँकि यहाँ मानव को सीमा के होने का दर था तो एक बार के लिए वो फ़ोन काट देता है लेकिन मन hi मन उसकी ीचा हो रही थी की इतनी हसीं जवान औरत को इस रूप में कैसे चोर दोय जाये जब वो सामने से सब दिखाना छह रही और यही सोच रहा होता है की उसके पास दोबारा श्वेता का फ़ोन आजाता है और अब थोड़ा रिस्क लेते हुए मानव कॉल रिसीव कर लेता है...

सुबह सुबह मोबाइल की स्क्रीन पर एक जवान कैसे हुए जिस्म की कामुक औरत अगर सिर्फ ब्रा और पंतय में कड़ी हो तो किसी भी मर्द के लुंड में करंट दौड़ जायेगा और यहाँ मानव के साथ भी ऐसा hi हुआ लेकिन अंदर hi अंदर उसे ये दर था की कही सीमा उसे पकड़ न ले और इसी कारन वो धीमी आवाज में..

मानव: ये क्या कर रही हो तुम, कॉल क्यों किया सीमा ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी, और ये सब क्या है (तस्वीरो के बारे में पूछते हुए)..

श्वेता, एक कामुक औरत की तरह मदहोश करने वाली अदाए दिखते हुए: क्यों सर, नहीं पसंद आयी क्या आपकी इस रंडी की तसवीरें आपको, और में तो बस अपना काम कर रही हु, अपने बॉस को खुश करने का सर..

मानव: वो सब तो ठीक है पर मेने कहा न की अभी ये सब करना इतना आसान नहीं, कुछ भी गड़बड़ हो सकती है..

श्वेता, जो शायद सुबह सुबह पुरे मूड में थी, अपनी उंगलिओ से ब्रा की स्ट्राप को निचे खींचते हुए मानव को चिढ़ाते हुए कुछ hi देर में ब्रा निकल फेकती है: सर अब इतना भी न तड़पाओ न मुझे और मेरी इन चुचिओ को (हाथ में पकड़ कैमरा के क्लोज लेट हुए), देखो कैसे तड़प रही है ये आपके हाथो मसले जाने के लिए... कब तक इन्हे ऐसे hi अपने हाथो से दबती रहूंगी...

मानव, अब जवान औरत की नंगी चूचिया देख भला कब तक सख्त बना रहता और उन्हें देखते hi अपने आप अपने हाथो को लुंड तक पहुंचने का रास्ता देते हुए उसे सहलाने लगता है: उफ्फ्फ श्वेता तुम सच्ची मरवाओगी मुझे, मेने कहा न थोड़ा सब्र कर लो बस, में कुछ इंतेज़ाम बैठा लूंगा..

श्वेता, जो अब अपने जिस्म की आग के आगे हर सी चुकी थी और चुदाई के लिए बुरी तरह तड़प सी रही थी, उसी समय अपनी पंतय भी निकल फेकती हैऔर बाथरूम में पड़े पत्ते पर बैठती हुई अपनी टंगे पूरी तरह फैला कर छूट के होठो को अपनी उंगलिओ से सहलाते हुए झट से उन्हें भी फैला छूट के अंदर की वो खूबसूरती और गुलाबी रैंड के उस छूट के डेन को सहलाते हुए मानव को दिखने लगती है..

श्वेता, छूट रगड़ते हुए सिसकिया लेकर: अह्ह्ह्ह सर पता नहीं कब करोगे आप कोई इंतजाम, मुझसे अब नहीं रहा जा रहा है नहीं सेह सकती में मेरे जिस्म की ये तड़प सर, मुझे बस कुछ भी कर के आपका लुंड चाहिए मेरी इस छूट में, छुड़वाना हैमुझे बस, मुझे अब आपके कोई बहाने नहीं सुनने है सर...

मानव, ये देख की श्वेता अब बुरी तरह गरमा गयी है और उत्तेजना में उसकी आवाज भी तेज सी हो रही है: क्या कर रही हो, धीरे बोलो रैंड, यहाँ सीमा सुन लेगी और वह बी तुम अकेली नहीं हो रागिनी को भी सब सुनाई दे सकता है, अपनी छूट की खुजली को थोड़ा शांत रखो मेने कहा न जल्दी hi तुम्हारी छूट को मजा दूंगा...

श्वेता: मुझे ये सब कुछ नहीं पता सर, मुझसे अब नहीं रहा जा रहा है, अगर घर से इतनी दूर आकर भी मुझे छूट में ऊँगली करनी पड़रही तो फायदा क्या हुआ मेरे आने का, इससे ाचा काम से काम घर पर पति का लुंड तो नसीब होरहा था मुझे, और अगर आग बुझा नहीं सकते थे मेरी तो मुझे आपके लुंड की आदत लगाई hi क्यों, क्यों मुझे इतना मजबूर कर दिया की आज आपकी रैंड कहलाने में भी मुझे ख़ुशी होती है, आखिर मुझे आपसे चाहिए hi क्या, यही मांग रही हु न की मेरे इस जवान प्यासी जिस्म को अपने मुसल लुंड से रगड़ कर मेरी प्यास बुझाओ, अब आपकी बेटी को सब पता चल गया तो इसमें मेरी तो कोई गलती नहीं है न...

अभी श्वेता अपनी बात पूरी करती या मानव जवाब में कुछ कहता इससे पहले hi बाथ्ररोम के दरवाजे पर आहात सी होती है और इस आहात से मानव समझ जाता है की शायद सीमा बहार निकलने वाली है और इसीलिए झट से श्वेता को इतना कह देता है और फ़ोन रख देता है की, " सीमा आ गयी में बाद में बात करता हु अभी रखो फ़ोन. "

इस तरह बिच में फ़ोन काटने से अपने बाथरूम में नंगी बैठी श्वेता को अब सीमापार भोत गुस्सा आता है और मन में hi गालिया देते हुए अपनी भड़ास निकलने लगती है की, "उफ्फ्फ साली कामिनी क्या जरुरत थी इसे यहाँ साथ आने की और अगर इतनी hi फ़िक्र है माँ बाप के रिश्ते की या इज्जत की तो पहले क्यों नहीं संभाला अपने पापा को, पहले संभल लिया होता तो आज में ऐसे उसके पापा के लौड़े के लिए तड़प तो नहीं रहो होती. िष्ठ मेरी भी क्या किस्मत है दुनिया में उसी का लुंड पसंद आया जिसकी अपने बेटी के सामने इतनी फैट रही है उफ्फ्फ्फ़, पता नहीं कब नसीब होगा मुझे सर का वो मुसल लुंड और न जाने कब वो मेरी वैसी hi दुमदार चुदाई करके मेरी प्यास बुझाएंगे जैसे पहले बुझाया करते थे, अह्ह्ह सर जल्दी कुछ कीजिये न, आपकी रंडी भोत तड़प रही है आपके लुंड से छोड़ने के लिए उम्म्म्म." और यही सब सोचते हुए वो वह अपनी छूट में ऊँगली करते हुए नहाने लगती है...

यहाँ सीमा के बाथरूम से बहार आते hi मानव, जिसका अपनी रंडी सी सेक्रेटरी का सुबह सुबह नंगा जिस्म देख पहले hi बुरा हाल हो चूका था वो सीमा से: गुड मॉर्निंग बेटी, क्या बात है इतनी जल्दी उठ कर नाहा भी ली तुम..

सीमा, आईने के सामने अपने गीले बाल झटकते हुए : गुड मॉर्निंग पापा, हाँ रोज इसी समय उठने की आदत हैना मुझे इसलिए.

मानव: हाँ ये भी सही है आदत बन जाये तो जाती नहीं वैसे भी..

सीमा, तना मरने के अंदाज में: हाँ पापा लेकिन आदते अछि हो तभी अछि बात होती है वार्ना बुरी आदते अगर न जाये तो फिर सब बिगड़ के रख देती है..

मानव, बेटी द्वारा कैसा हुआ तना समझते हुए थोड़ा मुँह बिगड़ते हुए: अब तुम फिर सुबह सुबह उसी बात को न उठाओ सीमा, मेने तुमसे कहा न की अब कोई शिकायत नहीं मिलेगी तुम्हे मुझसे, यहाँ में बस ऑफिस के काम पर लगा हुआ हु बस..

सीमा, सुबह सुबह दोनों का मूड नहीं बिगड़ने देने की सोच: हाँ पापा तो मेने भी कहा आपको कुछ कहा है, वैसे भी यही ाचा है की आप मुझे कोई शिकायत का मौका न दे.. वैसे चाय नाश्ता किया आपने या नहीं..

मानव, बिस्तर से उठते हुए: नहीं अभी में पहले नाहा लेता हु फिर करूँगा और वही से फिर आज एक क्लाइंट से मिलना है तो वह चले जायेंगे...

सीमा: ठीक है जैसी आपकी iccha...aaplog ऑफिस का काम ख़तम करो, मई थोड़ी शॉपिंग कर लेती हु फिर जैसे hi काम हो जाये में बुआ से कह दूंगी वो मुझे कॉल कर लेंगी में भी आपको वही मिल जाउंगी..

यहाँ सीमा ने बुआ को कॉल करने की बात इसलिए कही क्युकी वो नहीं चाहती थी की रागिनी बुआ पुरे वक्त इन लोगो के साथ hi रहेगी और काम ख़तम होते hi कही मन और श्वेता किसी तरह का बहाना बना कर मौका बनाये इससे पहले वो वह पहुंच जाये और शायद मन hi मन मानव भी अपनी बेटी की होशियारी को अचे से समझ चूका था.. और इसलिए बिना बोले सीधा बाथरूम में घुस जाता है.

बाथरूम के घुस कर मानव अब बस यही सोच रहा था की आखिर ऐसा क्या किया जाये की सीमा को पता भी न चले और उसे श्वेता की चुदाई करने का मौका मिल जाये क्युकी चाहे कोई जाने या न जाने, समझे या न समझे, जितनी तड़प वह श्वेता को मानव के लुंड से छोड़ने की तभी उतनी hi हवस यहाँ मानव को भी एक जवान छूट को फाड़ने की मची हुई थी, ऐसा नहीं था की उसे ये जवान छूट के रूप में सिर्फ श्वेता की छूट जरुरी हो, उसे बस जवान भरे बदन की कासी हुई कामुक औरत की छूट से मतलब था लेकिन वो ये भी अचे से जनता था की रागिनी और सीमा के इर्द गिर्द होते हुए कोई नयी छूट का जुगाड़ करना भोत मुश्किल होगा और ऐसे वक्त में ऐसी औरत जो खुद सामने से नंगी छूट खोले टंगे फैलाये लुंड लेने के लिए तड़प रही हो उसी को अपनी रैंड बनाये रखने में ज्यादा फयदा है, लेकिन फिलहाल तो स्तिथि ये है की उस बानी बनाई रैंड की छूट मरने के लिए भी मशक्कत करनी पद रही है...

अभी वो अपना लुंड पकडे श्वेता द्वारा कुछ hi समय पहले नंगे जिस्म दिखाए जाने के वाकिये को यद् कर सहला हिरहा होता है की अब उसकी नज़र वह तंग रही एक काळा रंग की फैशनेबुल डिज़ाइन की ब्रा पर पड़ती है (जो शायद धोने के बाद सीमा ने वही टेंगा दी थी क्युकी होटल के कमरे में और कही कपडे सूखने की जगह नहीं थी), लुंड हाथ में लिए छूट का प्यासा मर्द हो और उसके सामने अब ऐसी कामुक चीज हाथ लग जाये तो कहा खुद को रोक पता hai,aur बिना कुछ सोचे वो झट से उस ब्रा को अपने हाथ में ले लेता है..

एक हाथ से लुंड पड़े दूसरे हाथ में उस ब्रा को आगे पीछे घूमते हुए देखते वक्त पीछे हुक के पास लगे एक स्टीकर पर उसे अब ब्रा की साइज लिखी हुई मिलती है "36", जैसे hi साइज के रूप में वो इन नंबर्स को पड़ता है उसके लुंड ने एक झटका मर दिया होता है...

चूँकि इस वक्त इस कमरे में वो और उसकी बेटी सीमा hi रह रहे होते है तो उसके लिए ये बात तो तय hi थी की उसके हाथ में जो ब्रा है वो किसी और की न हो कर उसकी अपनी बेटी सीमा की hi है... और ये बात ज़हन में आते hi पहले से छूट के लिए प्यासा लुंड पर उसने अपनी पकड़ और मजबूत सी बना ली...

लुंड पकडे ब्रा के कप्स के मुलायम से कपडे को सहलाते हुए अब मानव के मन में ये बात उभरने लगी की, इसका मतलब सीमा की चुचिओ का साइज 36 है, मतलब की उसकी चूचिया भी है तो काफी बड़ी, मेने कभी उसके जिस्म पर इतना गौर नहीं किया लेकिन आज मालूम चला की मेरी बेटी की जवानी भी किसी से काम नहीं, उफ्फ्फ कितना मुलायम कपडा है इस ब्रा का, और ये कप्स ये वही है जो मेरी बेटी की वो बड़ी बड़ी मुलायम चुचिओ को कैद कर के रखते है, कितनी खुशनसीब है ये ब्रा भी जो मेरी बेटी सीमा के शरीर के उस अंग से इतना चिपक के रहती है जो शायद उसके शरीर के सबसे खूबसूरत अंगो में से एक होगा...

वासना और हवस की आग में जल रहे मानव को अब अपने दिमागपर काबू खो सा गया था और उसे ये नहीं पता होता है की वो किसके बारी सोच रहा है, और हवस की इस आग को और हवा तब मिलती है जब उसकी नज़र वही ब्रा के पास तंगी हुई ोांत्य पर भी जाती है और बिना किसी देर के वो उस पंतय को अपने हाथ में ले सीधा नाक पर लगा सूंघने लग जाता है और एक गहरी सास भरते हुए बेटी की जवानी के रास की मादक सुगंध लेने की कोशिश करता है...

उसकी इस कोशिश में जैसे hi उसे उस पंतय में से बेटी सीमा की छूट की मादक कामुक खुशबु का एहसास अपने नाक में होता है उससे रुका नहीं जाता है और दूसरे हाथ में पकड़ी हुई बेटी की उस ब्रा को अपने लुंड के चारो तरफ लपेट कर लुंड को घिसना शुरू कर देता है, आँखे बंद किये नाक से पंतय सुँघ्हटे हुए और लुंड को ब्रा से लपेट मुठियाते हुए ज़हन में अपनी बेटी की मासूम सी तस्वीर को लेट हुए अब वो हवस में पूरी तरह दुब चूका होता है और बस यही ख्याल के साथ लुंड को जोर जोर से हिलना शुरू कर देता है, " ओह्ह्ह्ह सीमा मेने क्यों पहले तुम पर इतना ध्यान नहीं दिया, मेरे अपने घर में मेरी अपनी जवान बेटी है जो खुद इतने कैसे खूबसूरत और गदराये हुए जिस्म की मालकिन है उफ्फ्फफ्फ्फ़ हईये अह्ह्ह सीमा, कितना मस्त होगा न सीमा का नंगा जिस्म िष्ठ्हह कितनी सुन्दर दिखती होगी जब उसका गोरा जिस्म इस काली ब्रा और पंतय में ढाका होगा ईशःठ काश मुझे ये मौका मिल जाये की बेटी की जवानी का मजा लूट सकू ुगफ़ ओह्ह्ह्हह्हह सीमा बेटी उम्मम्मम भोत तड़प है तुम्हारे पापा में अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हैं बेटीइ. " और इसी भावना के साथ अब मानव का लुंड एक तेज धार वाली पिचकारी चोर देता है जो की सीमा की ब्रा क्व कप्स के उप्पेर गिरती है और ब्रा के वो मुलायम कप्स वीर्य से भर से जाते है...

वीर्य के रूप में अपनी हवस का लावा निकलने के कुक्सह क्षणों बाद मानव को ये एहसास होता है की वो अपनी hi बेटी के बारे में सोच कर ये सब हरकते कर रहा है, और पहली बार मनो उसे खुद पर घिन्न सी आने लगती है की " ये मैंने क्या किया, में अपनों hi बेटी केबारे में ऐसा कैसे सोच सकता हु, और वो भी उस बेटी के बारे में जिसके बारे में कोई छह क्र भी ऐसे ख्याल नहीं ला सकता, सबकी लाड़ली और सुलझी हुई सीमा के बारे में आखिर ऐसा कैसे सोच सकता हु, ये सब शायद श्वेता की तस्वीरें और उसे नंगी देखने की वजह से हुआ है. "

लेकिन ये जैसे भी हुआ जो भी हुआ है आज अभी इस वक्त, ये बिलकुल गलत हुआ है और आगे से सीमा के बारे में ऐसा सोचने से पहले हज़ार बार सोच लेना मानव, घर की सबसे प्यारी और लाड़ली बेटी है जिसने कभी किसी का गलत नहीं चाहा, आज अपनी माँ के लिए मुझसे लड़ रही और में क्या कर रहा, उसी के कपड़ो में उसकी को महसूस कर उसे hi छोड़ने के ख्याल ला रहा, नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए था, और आगे से तो ऐसा बिलकुल भी नहीं होना चहिये.... और उस रंडी श्वेता को तो अब में देखता हु भोत आग लगी पड़ी है साली में, आज मुझे मेरी hi बेटी के लिए ऐसा सोचने पर मजबूर कर दिया कामिनी ने...

और यही सब सोच नाहा कर मानव भी कमरे में आ जाता है और तैर हो कर अपने काम के लिए निकल पड़ता है.
 
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