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- Dec 5, 2013
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अगली सुबह जैसा की पिछली रात तय हुआ था ठीक वैसे hi पापा, बुआ और सीमा दीदी अपनी ट्रिप के लिए निकल पड़ते है और अब उनके बाद घर में मैं, मम्मी , प्रीति ,कामिनी भाभी और राहुल भैया hi रह जाते है. जिसमे से सब ब्रेकफास्ट करने के बाद अपने अपने काम को निकल जाते है और घर में सिर्फ मम्मी अकेली hi रह जाती है.
यहाँ मैं घर से निकल कर कॉलेज की तरफ जा hi रहा होता हु की मेरी नजर अजित चाचा के घर की तरफ पड़ती है जहा इस वक्त चाचा अपने ऑफिस के लिए जाने के लिए घर से बहार निकलते हुए दिखाई देते है और उन्हें दरवाजे तक चोर्ने के लिए अंजलि चची एक ब्लैक कलर के अर्ध पारदर्शी गाउन में कड़ी हुई थी, जिन्हे देख मेने अपनी बाइक उनके घर के आगे hi रोक दी और उतर कर उन दोनों से बात करने चल पड़ता हु..
मैं: गुड मॉर्निंग चाचा , चची... क्या बात है ऑफिस जाने की तयारी हो रही है चाचा...
अजित: अरे सनी बीटा तुम, गुड मॉर्निंग, हाँ बस अब ऑफिस का समय हो रहा तो वही जा रहा हाहाहा..
अंजलि, चाचा से: अरे अब ये साहबज़ादे तो बड़े आदमी हो गए है चाचा और चची को मिलने का समय भी नहीं अजित इसके पास तो... पता नहीं आज सूर्य किस दिशा से निकला जो इनके दर्शन मिल गए...
अजित, मन hi मन अंजलि के बारे में ये सोचते हुए की हैं अब तुम्हे अपने बचे के असली बाप से मिलने की तड़प जो है, अब उसका hi तो मौका चाहिए , मेरी क्या जरुरत है: हाँ वही तो अंजलि जरूर आज कुछ काम होगा तभी आया है ये वार्ना नहीं आता यहाँ , क्यों सनी...
मैं: अरे नहीं चाचा क्या आप भी, ऐसी बात नहीं है, आप लोग जानते तो हो अभी कॉलेज और पढाई से hi वक्त नहीं मिलता...
चची: चल चल अब बहाने कही और बनाना समझा, बड़ा आया सुबह सुबह बेवकूफ बनाने हमे... सीधे सीधे बताओ क्यों आये हो...
मैं, अपनी नजरे चची के गाउन से उभरती चुचिओ पर गड़ाए उन्हें इशारे करते हुए की आपका ये दूध पिने आया हु, जिसे देख चची भी मेरी भावनाये समझते देर नहीं करती और चोरी छिपे चाचा की नजरो से बच कर मुस्कुरा देती है...
मैं: अरे चची सच कुछ काम नहीं, बाद कॉलेज जा रहा था तो यहाँ नज़र पड़ी तो सोचा मिलता चालू..
अजित चाचा, वाह सनी बीटा , मेरी बीवी की चूचिया घूरते हुए इतना सफ़ेद झूट , सब समझ रहा हु की इसने मुझे जाते हुए देखा बस इसलिए मेरी बीवी को लूटने आ गया है: हाहाहा ाचा चलो भाई अब अंजलि मान लेते है इसकी बात भी.. वैसे सीमा बेटी कैसी है, ससुराल से आने के बाद उसे भी वक्त नहीं मिला हमसे मिलने का क्या?
मैं: अरे नहीं चाचा, दरअसल पापा और बुआ आज से एक हफ्ते के लिए किसी बिज़नेस ट्रिप के लिए गए है तो सीमा दीदी भी उनके साथ गयी है घूमने के हिसाब से ...
चची: ओह्ह चलो ये तो बढ़िया बात है फिर तो घर पर तुम चार लोग hi बचे रह गए और दिन के वक्त तो महिमा भाभी अकेली कुकी तुम सब तो कॉलेज या ऑफिस चले जाते हो..
मैं: हाँ चची अभी हफ्ते भर तो मम्मी अकेली hi रहेगी घर में ः..
चाचा, ये सुन कर की महिमा घर में अकेली है, और खुद से विचार करता है की और मन hi मन मुस्कुराता है की इससे ाचा मौका क्या हो सकता है की महिमा भाभी दिन भर घर में अकेली होंगी, शायद मैं इस चीज का फायदा उठा सनी से अपना बदला पूरा कर सकू , और यही सोच : ाचा भाई सनी तुम और अंजलि बाटे करो मुझे ऑफिस के लिए देरी हो रही है , मैं चलता हु bye..
मैं: okay चाचा bye bye, हैवे ा गुड डे...
चची: आओ सनी कब तक बहार खड़े रहोगे , अंदर आओ na..ya तुम्हे भी कॉलेज के लिए देर हो रही है..
यहाँ अजित चाचा ने जाते हुए ये नोटिस किया की अंजलि ने उसे bye भी नहीं कहा क्युकी वो सनी को घर के अंदर बुलाने के लिए इतनी जल्दी में थी... कोई बात नहीं सनी बीटा जा घर के अंदर और खिला दे उसे तेरा लुंड... अभी वक्त तुम्हारा है पर जल्दी hi मेरा आएगा और ये सोचते हुए वो घर से निकल जाता है..
और यहाँ दूसरी तरफ घर के अंदर घुसते hi जैसे hi चची दरवाजा बंद करती है में झट से उनकी दोनों चूचिया अपने हथेली में पकड़ भींच देता हु...
मैं: हैइए चची क्या मस्त उभर दिखा रही हो गाउन में, जब बाइक पर से आप पर नज़र पड़ी तब से दबोचने क लिये मचल गया था , मन तो किया था की चाचा के सामने hi दबोच लू हाहाहा...
चची: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ईशःठ सुन्न्नीयी हहै,, तो तुम्हे देख मुझसे भी कहा रुका जा रहा था में भी बस यही इंतज़ार कर रही थी की कब तुम्हारे चाचा जाये और तुम्हे घर के अंदर बुलाऊ अह्ह्ह्ह , एक तो हफ्ते हफ्ते तक दिखाई नहीं देते हो , कितना मुस्खिल होता है मेरे लिए तुम्हारे लुंड क बिना रहना सनी उम्मम्मम्म...
मैं, वही हॉल में चची के कपडे उतर नंगी करते हुए: अरे चची अब नहीं तड़पना पड़ेगा आपको, अब मेरे पास कुछ फ्री समय रहने वाला है और उस वक्त आकर में अपने बच्चे की माँ को जैम कर रगड़ने वाला हु u.mmmmmaaaah...
चची: हैएएइ सनी अब बाटे कर के और न तड़पा मुझे , जल्दी से रगड़ दो न फिर अपने बच्चे की मा को उम्म्म ओह्ह्ह्ह...
और फिर चची को वही हॉल में सोफे पर पटक कर अपने लुंड को उनकी छूट में पेल एक घमासान दौर शुरू कर देता हु और अगले कुछ देर में ऐसे hi चची की बुरी तरह से रगड़ रगड़ के पेलने के बाद मेरे और उनके काम रास का उनकी छूट में hi मिश्रण कर के उनके घर से निकल कॉलेज की तरफ बढ़ चलता हु...
यहाँ करीब दोपहर के समय मम्मी घर के सरे काम ख़तम कर अपने रूम में बीएड पर बैठी हुई hi होती है की उनके फ़ोन पर रिंग बजने लगती है और स्क्रीन पर नंबर देख ,जो की अब मम्मी के लिए जाना पहचाना सा नम्बर बन गया था क्युकी पहले भी इस नंबर से कॉल आये हुए थे, उसे देख थोड़ी रहत की सांस लेती है की शुक्र है आज घर पर मैं अकेली hi हु ... और तीखे स्वर वाले अंदाज में फ़ोन रेसिएवे करके भड़कते हुए...
महिमा: अब क्यों कॉल किया है तुमने.. आखरी बार कहा था न की अब मुझे कभी कॉल मत करना..
कॉलर, (जी हाँ दोस्तों ये वही कॉलर जो पिछले कई दिनों से महिमा सक्सेना के पीछे पड़ा हुआ है): अरे महिमा जी , आपने तो जैसे आदत hi बना ली है की सीधा तीखे स्वर में hi बात करोगी मुझसे..
महिमा: तो क्या प्यार से बात करू मैं तुमसे, जब इतनी दफा ना कहने पर भी तुम्हे मेरी बात समझ नहीं आती है तो फिर..
कॉलर: ः क्या महिमा जी आप भी न, कसम से कह रहा हु, आपको इस तरह भड़कते हुए देखने का भी एक अलग hi मजा होता होगा,,, काश वो मौका मुझे मिल पाए कभी...
महिमा, अब अपनी आवाज नार्मल करते हुए: में तंग आ गई हुई तुमसे, पिछली बार भी तुमने एक अधूरी पहेली से बात करके फ़ोन काट दिया , बिना मेरी बात का जवाब दिए... अब आज मुझसे उस बात का जवाब दो सीधे सीधे तभी बात करुँगी वार्ना फ़ोन रखो...
कॉलर: उम्मम्मम माफ़ कीजियेगा महिमा जी लेकिन मुझे आपका सवाल hi याद नहीं जवाब कैसे दू भला ः..
महिमा: हे भगवन!!! ठीक है मुझे सबसे पहले ये बताओ की तुम हो kaun,kya नाम है तुम्हारा...
कॉलर: हाहाहा बस इतनी सी baat..iska जवाब तो में आपको कई दफा दे चूका हु की में आपका कोई अपना hi हु जो तहे दिल से आपको चाहता हु और आपको पाने की हसरत रखता हु...
महिमा: अपनी ये सब बकवास बंद करो ये सब नहीं सुन्ना मुझे, सीधा सीधा अपना नाम बताओ मुझे बस ...
कॉलर: अब नाम में क्या रखा है महिमा जी, कुछ भी बता दूंगा नाम तो मैं अपना ,क्या फरक पद जायेगा उससे भला...
महिमा: उससे फरक ये पड़ेगा की मुझे ये पता चलेगा की ऐसा कौनसा रुश्तेदारहै मेरा जो रिश्तो को बदनाम करना चाहता है...
कॉलर: कैसी बात कर रही हो आप महिमा जी, में तो अपने रिश्ते को नया नाम देना चाहता हु, न की बदनाम करना ..
महिमा: वो सब मुझे नहीं पता, या तो मुझे अपना नाम बताओ या मुझे ये बताओ की तुम्हारा मुझसे क्या रिश्ता है..
कॉलर: ठीक है आज बात ख़तम करने से पहले आपको इन दो में से कोई एक का जवाबिल जायेगा लेकिन फिलहाल मुझे आपके बारे में कुछ चीजे जननी है जो पिछली बार जननी रह गयी थी...
महिमा: नहीं अभी नहीं , मेरे पास वक्त भी नहीं है और में बताना भी नहीं चाहती जैसा की मेने हर वक्त कहा की में घर परिवार वाली औरत हु और...
कॉलर, इससे पहले की महिमा अपनी बात पूरी करती: हाँ जनता हु आप घर परिवार वाली औरत हो और लेकिन... इस वक्त आप घर में अकेली हो और अगले एक हफ्ते तक अकेली hi रहने वाली हो हैं न..
महिमा, चौकते हुए: तुम्हे किसने कहा की में इस वक्त अकेली हु?
कॉलर: हाहाहा अरे महिमा जी, इंसान अपने चाहने वाली हर खबर रखता है , साहू बात है न की आपके प्यारे पतिपरमेश्वर और घर के दो और सदस्य एक हफ्ते के लिए बहार गए हुए है और बाकि घर के सदस्य इस वक्त रोज की hi तरह अपनी रोजमर्रा जिंदगी में व्यस्त होने के कारन घर में आप अकेली है...
महिमा, कुछ देर सोचने के बाद: हाँ सही है सब कुछ एक दम पर तुम्हे कैसे पता चला , कहा से मिलती है तुम्हे मेरे घर में होने वाली चीजों की खबर..
कॉलर: ऐसे hi थोड़े खुद को आपका आशिक़ कहता हु में, खबर रखता हु और ये सुनिश्चित करता हु की कही आपको किसी चीज की जरुरत तो नहीं...
महिमा: ाचा जी... और मान लो मुझे किसी चीज की जरुरत होगी तो तुम्हे कैसे पता चलने वाला है.. कौन बताएगा क्युकी मैं तो कभी तुमसे कुछ कहने वाली हु नहीं..
कॉलर: आपके कहने की जरुरत hi नहीं पड़नी मुझे, और वैसे भी मुझे ये बात भोत अचे से पता है की आम जिंदगी की जरूरते तो आपके पति और परिवार वाले पूरी करने में भोत अचे तरीके से सक्षम में , वह तो मुझे किसी तरह की कोई दखल अंदाजी करने की जरुरत भी नहीं पड़ने वाली...
महिमा, बात को समझते हुए: ाचा तो अगर इंसान की आम जिंदगी की साडी जरूरते पूरी हो रही है तो उसके बाद बचता hi क्या है जिसके लिए मुझे तुम्हारी मदद की जरुरत पड़ने वाली है.
कॉलर: अब महिमा जी आप खुद से झूट बोल रही हो या तो फिर नासमझ होने का नाटक कर रही है की इंसान की आम जरूरते पूरी होने पर उसे ख़ुशी मिल जाती है..
महिमा: हाँ तो अब मुझे जो चाहिए वो मिल रहा है तो फिर और क्या अपेक्षण रखने की आवश्यकता ह भला मुझे..
कॉलर: हाँ मन की आपकी वो जरूरते पूरी हो रही लेकिन आपकी शारीरिक जरूरतों का क्या? क्या वो जरूरते भी ठीक से पूरी हो रही है आपकी....
महिमा, कॉलर की ये बात सुन कर एक दम से चुप्पी साढ़े मन hi मन सोचते हुए की कही न कही ये जो कोई भी है सब कुछ अचे से जनता है लेकिन कैसे...: अब इस बारे में तुम्हे बताना जरुरी नहीं समझतिऐं, ये पति पत्नी के बिच की बात होती है किसी गैर को कहने की नहीं.
कॉलर: ः ऐसे गैर बोल कर दिल न दुखाओ अब hamara...vaise भी अगर आपके पति इस बात को समझते तो शायद आज आप शारीरिक रूप से भी खुश होती , सही है न.
महिमा, उसकी हर बात का मन hi मन समर्थन देते हुए लेकिन असलियत छिपाते हुए: तो तुमसे ये किसने कह दिया की में अपने पति से शारीरिक रूप से खुश नहीं.
कॉलर: ये किसी के कहने की जरुरत नहीं होती है महिमा जी , और चलो मान भी लू मैं की आप अपने पति से खुश हो तो ये बताओ की अभी एक हफ्ते के लिए आपके पति बहार गए है तो कल की बीती हुई रात आपके पति ने आपको कितनी दफा छोड़ा...
महिमा, उसके मुँह से सीधा चुदाई के बारे में सवाल सुन रोंगटे से खड़े होते हुए: तुम न बकवास बंद करो समझे अपनी, मेने कहा न ये मेरे और मेरे पति की बात है तुम्हे क्यों बताऊ भला...
कॉलर: हाहाहा ाचा चलो इस बात को एक दूसरे तरीके से रखता हु... अगर में कही एक हफ्ते जैसे अंतराल के लिए कही बहार जा रहा हु और मेरे पास महिमा सक्सेना जैसी sundar,hasin और कामुक बीवी होइ तो...
महिमा, न चाहते हुए भी उसकी बात कही न कही मन में उत्सुकता जागते हुए: तो क्या???
कॉलर: तो यकीं मानिये , मेने अपनी महिमा को बहार जाने के पहले वाली रत को सोने नहीं दिया होता, पूरी रत उसके जिस्म को रगड़ रगड़ के छोड़ा होता ताकि एक हफ्ते तक वो उस रत हुई चुदाई को यद् कर मेरे वापस लौटने का इंतज़ार करती रहती...
महिमा, उसके मुँह में अपना नाम शूम अजीब एहसास महसूस कर और रत भर चूड़े जाने की बात से जिस्म पर असर होता देख: ाचा जी तो अब मुझे पता नहीं तुम शादी शुदा हो या नहीं पर ये चीज तुम अपमी बीवी के सतहज जरूर करना , भोत खुश रहेगी तुमसे ,, और हाँ ये मेरी महिमा क्या होता है.. कुछ भी मत बोलै करो समझे...
कॉलर: हाहाहा अरे महिमा जी अगर आप जैसी हो बीवी तो वो पति पागल ह जो उसे अकेला घर चोर जाये मैं तो साथ ले जाऊ हर ट्रिप पर... और रही बात खुश करने की तो इस वक्त में वही तो जानना छह रहा की क्या आप भी उस तरह खुश है जिस तरह मेने बताया...
महिमा: हैं हैं हैं हु में भी उसी तरह खुश बिलकुल...
कॉलर: ाचा तो आप ये कहना चाहती है की कल रत आप रात भर नहीं सोइ, रात भर आपको आपके पति ने नंगा करके पटक पटक के रगड़ रगड़ के छोड़ा हैं न...
महिमा, इस तरह के शब्दों को सुन उत्तेजना महसूस करते हुए: हाँ बिलकुल...
कॉलर: ाचा और अब आप अपने पति को मिस भी कर रही हो की कब वो वापस आये और दोबारा आपको इतनी hi बुरी तरह से आपकी छूट में लुंड पेले जैसा कल रत पेल कर आपकी बजे...
महिमा, हकीकत ज़हन में लेट हुए और इस तरह की चुदाई की जरुरत को समझते हुए लेकिन अपनी आवाज और सांसो को एक चुप्पी के साथ कण्ट्रोल करने के बाद: हैं कर रही हु में अपने पति का इंतज़ार की कब वो आये और मुझे इतना प्यार डीएई...
कॉलर: हाहाहाहा देखो अब आपने hi मेरी बात सच साबित कर दी की आप खुश नहीं है , और आप झूट बोल रही है की आपको कल रत आपके पति ने मजा दिया बल्कि सच तो ये हैकि कल रत क्या पिछली कई रातो से आपके पति ने आपको छुआ भी नहीं है...
महिमा, अपनी टैंगो को कस के भींच कर रगड़ते हुए, छूट की खुजली को मिटने की कोशिश करते हुए, कम्पन भरी आवाज मैं: नहीं में कोई झूट नहीं बोल रही हु, हर वक्त तुम सही नहीं हो सकते समझे..
कॉलर: कॉमन माहि डार्लिंग, अब मेने तो सच का आइना दिखाया है आपको, बाकि ये आप पर है की आप उस पर कब तक झूट का पर्दा डेल रखना चाहती हो...
महिमा, अब खुद मन hi मन ये मानते हुए की ये शख्स जो कोई भी है पर इसकी हर बात सही है, अपनी साड़ी का पल्लू हटा चुकी को एक दफा दबा कर हलकी सिसकी भरते हुए: झूठे हो तुम और क्या लगता है तुम्हे की तुम्हारी बाटू में आ कर में तुम्हे सच्चा साबित होने दूंगी कभी नहीं..
कॉलर: अरे नहीं महिमा जी, भला मुझे क्या फायदा या मुकसान है आपसे मेरी बातो को सच्चा या जूठा साबित करवाने में, में तो बस आपको आपका सच बता रहा हु जिसे आप जानते हुए भी इस वक्त अनजान बनने की कोशिश कर रही हो...
कॉलर: मुझे तो बस इस बात का मलाल है जिस हसीं खूबसूरत औरत का हक़ बनता है की हर रत उसे बिस्तर नंगा कर एक एक अंग को अचे से मसल मसल कर उसकी जवानी को लुटा जाये , वो अपने पति द्वारा दरकिनार की जा रही है और उसे खुद अपने जिस्म की आग ठंडी करने के लिए म्हणत करनी पद रही है, और अगर वो औरत वही हो जिसे में तहे दिल और जान से पानं चाहता हु ... बस यही एक वजह है की में आपको नाखुश देख कर खुश नहीं रह पता हु .. मन तो करता है की अभी आपके घर औ और आपको पटक पटक के छोड़ दू महिमा जी...
महिमा, अब अपने जिस्म की कामाग्नि को भड़काए जाने के कारन सुलगती हुई आग को काबू नहीं कर पति है और एक हाथ टैंगो केबीच दाल खुद को सहलाते हुए ,ऊपरी मन से उस अनजान शख्स को इंकार जताते हुए: तुम चाहे कुछ भी कहो और समझो में अपने पति से खुश हु और तुमने अभी जिस तरह मुझे उपयोग में लिए जाने का वर्णन किया , ठीक वैसे hi मेरे पति करते भी है इसलिए तुम्हे न खुश होने की कोई जरुरत नहीं है समझे...
कॉलर, मन hi मन महिमा की आग को भड़काने और उसकी तड़प बढ़ाने का सही मौका देख: ठीक है महिमा जी अब आप अगर नहीं मन्ना चाहती सचाई को तो आपकी मर्जी,... वैसे भी मुझे अब किसी काम से जाना है , अभी तो एक हफ्ता आप अकेली हो तो कल फिर इसी समय बात करता हु apse..bbye महिमा जी ..
और ये बोल बिना महिमा का जवाब सुने फ़ोन कट कर देता है और यहाँ महिमा का जिस्म उस अनजान शख्स द्वारा की गयी शाट प्रतिशत सही बातो की वजह से पूरी तरह गरमा गया था और इसी वजह से उसके द्वारा की गयी बाटे जिसमे उसने महिमा के जिस्म को रोंदने , रगड़ने , और मसलते हुए पेलने की बाटे की थी , बस उन्ही सब को यद् कर और ये मानते हुए की उसके शरीर को बिलकुल hi वैसी चुदाई की जरुरत भी है जैसा इस शख्स ने वर्णन किया , उन्हें यद् करते हुए अपनी साड़ी और पेटीकोट उठा उंगलिओ से अपनी पंतय सरका कर तीन उंगलिया छूट में दाल खुद के साथ खेलने लग पड़ती है और कुछ देर अपनी प्यासी छूट के साथ खेलने के बाद अपना काम रास बहा कर नींद के आगोश में चली जाती है...
वही दूसरी तरफ प्रीति कैंटीन में अपनी फ्रेंड मोनाल के साथ बैठी हुई होती है और बीती रत पार्टी में जो कुछ हुआ वो सब के बारे में डिस्कशन कर रही thi...chunki मोनाल भी उस पार्टी में मौजूद थी सो वह जो कुछ हुआ उसने भी अपनी आँखों से देखा और कानो से सुना था , लेकिन वह हुई कुछ ऐसी घटनाये जो उसे समझ नहीं आई थी तो उन्ही को ले कर वो प्रीति के साथ चर्चा कर रही थी..
मोनाल: यार प्रीति बता न विराट सर वह पार्किंग में किसके साथ थे और क्या कर रहे थे तूने देखा क्या... मुझे ये बात कल से समझ नहीं आ रही की तेरे साथ आये उस ladke(yaha मेरा ज़िकर हो रहा है) ने ऐसा क्या देख लिया..
प्रीति, जिसे मेने सच उसी वक्त बता दिया था, चेहरे पर मुस्कराहट लेट हुए: यार वो एक सीक्रेट है में नहीं बता सकती और तू अगर जान गयी न तो सच कह रही हु तेरा भी दिमाग चक्र जायेगा हेहेहे..
मोनाल: अरे अब बता भी न मुझसे भी छिपाएगी तू हँ...
प्रीति: ाचा बाबा बताती हु पर तू प्रॉमिस कर की किसी और से नहीं कहेगी...
मोनाल: हाँ चल ी प्रॉमिस ये बात कही नहीं जाएगी तेरे और मेरे अलावा.. वैसे भी में यहाँ किसी को बता के क्या hi करुँगी.. अब बता भी न जल्दी..
प्रीति: दरअसल पार्किंग एरिया में न एक रूम था वह विराट सर के साथ नीता ma'am थी...
मोनाल, ये बात सुन चौकते हुए: व्हाटटटटट..... तू क्या बोल रही है... सच में नीता ma'am ??? लेकिन वो तो अंशुल सर के साथ है ?
प्रीति: हहै हाँ में भी ऐसे hi चौकी थी लेकिन यही सच है, अंशुल सर के साथ सिर्फ घूमने फिरने के लिए और बाकि काम नीता मां के उस विराट के साथ हो रहे है...
मोनाल: यार क्या गज़ब कर दिया नीता मां ने तो.. एक साथ दो दो का मजा वाह, सही खेल रही है वो तो हाहाहा
प्रीति: इसमें सही क्या है पगली... धोका हुआ न ये तो, प्यार व्यार तो बस नाम का है इसका मतलब तो...
मोनाल: अरे प्रीति तू कब समझेगी चीजों को, आज कल प्यार व्यार कुछ नहीं है सबको बस सेक्स की भूख है समझी...
प्रीति: यार अब तू फिर से शुरू मत हो जा इसी बात को ले कर, तुझे तो बस मौका मिलना चाहिए हैं न...
मोनाल: ः अब क्या करू जिनगी का असली सच और असली मज़ा दोनों एक hi चीज है और वो है सेक्स... और अब तू hi देख नीता ma'am को पता है अंशुल सर से पैसो की कमी नहीं रेहनी तो उसको फसा rakha,kuch दिन उनको अपने जिस्म उसे करने दिया और दूसरी तरफ विराट सर इतने जाना मन नाम है तो उसको भी फसा रखा है... और दोनों को फ़साने के लिए काम क्या आया बता..
प्रीति: क्या???
मोनाल: बस एक छोटी सी चीज जो अपनी टैंगो के बिच में है, जिसके लिए कोई भी लड़का अपना सब कुछ लुटा दे हाहाहा...
प्रीति: चीई यार कैसी बाटे करतीहै तू सच्ची.. बोर नहीं होती हर वक्त बस दिमाग में यही कचरा भरे घूमती है..
मोनाल: मेरी जान तू ऐसा इसलिए बोल रही है क्युकी तूने अब तक उस मजे का स्वाद नहीं चखा, वर्जिन है इसलिए, जिस दिन किसी लड़के ने तेरी सील तोड़ दी उसके बाद देखना तुझे भी इसी खेल में जन्नत मिलने वाली है और हर वक्त यही कचरा ाचा लगने वाला है हाहाहा.
प्रीति: शट उप प्रीति, मुझे कोई शोक नहीं है समझी इस सब गंदगी में पड़ने का, तू hi कर ये सब ...
मोनाल: हाहाहा ाचा बाबा ठीक है लकिन ये सब चोर मुझे एक जरुरी बात तो बता न...
प्रीति: कौनसी बात..
मोनाल: यही की वो हैंडसम लड़का कौन था जिसने तेरी तरफ से बोलै और तेरा स्टैंड लेते हुए पार्टी में सबकी वात लगा दी थी..
प्रीति: क्यों तुझे क्या करना है उसके बारे में जान कर...
मोनाल: यार बता न प्लस, में तो कल रात से hi उसकी फैन हो गयी थी, ऐसे लड़के भोत काम मिलते है यार जो ऐसे भरी महफ़िल में विराट जैसे नामी इंसान को भी धूल छठा दे..
प्रीति, मन hi मन खुश होते हुए की आज मेरे भाई की तारीफ हो रही उसके काम की वजह से : हाँ ये बात तो है ..
मोनाल: बता न यार, तू कहा मिली उसे और कौन है, कब से जानती है... कही तेरा बॉयफ्रेंड तो नहीं जिससे तूने मुझे बी न मिलवाया हो?
प्रीति, अपने भाई को अपना बर्फ होने की बात सुनते hi उसकी बॉडी में सिहरन सी मच जाती है: क्या कुछ भी बोलती है, कोई बर्फ नहीं वो मेरा, बस एक ाचा दोस्त है , किसी फॅमिली फंक्शन में मुलाकात हुई थी मेरी उससे.
मोनाल: यार बर्फ नहीं है तो बना ले सच में.. और तुझे नहीं बनाना हो तो मुझे bol..me तो कुछ भी कर्जो ऐसा लड़का पाने के लिए..
प्रीति: हहहहए तू न पागल है सच्ची, ऐसा क्या देख लिया तूने उसमे..
मोनाल: यार जिस तरफ उसने तेरा साथ दिया कसम से बोल रही हु भोत काम बन्दे मिलते है, उसे परवाह थी तेरी, और जैसे उसने तेरी तारीफ की ऐसा लगा मनो की वाकई तुझे अचे से जनता हो और कदर करता हो...
प्रीति, मोनाल की बाटे अब मन hi मन उसे अपने भाई के प्रति वही फील करवा रही थी जो कल रत खुद उसने बी फील किया था : हाँ वो है यार मुझे भी बिलकुल ऐसा hi लगा, और सच कहु तो उसका इस तरह सब कुछ कहना मेरे साथ खड़े रहना मुझे बड़ा ाचा लगा..
मोनाल: हम्म्म वैसे बाद में तूने उसे थैंक यू तो कहा न और कहा तो कैसे कहा..
प्रीति: कैसे कहा का क्या मतलब , अब थैंक यू जैसे कहते वैसे hi कहूँगी न इडियट..
मोनाल: उफ्फ्फ इडियट में नहीं तू है प्रीति... अगर मुझे तो कोई लड़का ऐसा परवाह, केयर करने वाला और साथ निभाने वाला मिल जाये तो में तो उसे थैंक यू बोलने के लिए अपना सब कुछ दे दू ... सब कुछ मतलब तू समझ रही hi है न, में अपना सब कुछ उसके नाम कर देती...
प्रीति: तू फिर घुमा फिरा के वही बात पर आ गई न , कुछ नहीं हो सकता तेरा..
मोनाल: यार तू ये सब चोर और बता न वो सच में तेरा बर्फ नहीं na..kyuki नहीं है तो मुझे मिलवा दे उससे यार, में तो पक्का उसको अपना बर्फ बना लू, इतना हैंडसम और फिट हाय कसम से जिस लड़की को उसका साथ मिले वो जिंदगी भर खुश रहेगु हर तरह से..
प्रीति, मोनाल के मुँह से भाई के साथ सम्बन्ध बनाने की बात सुन पहली बार उसे जलन का एहसास होता है और इसी कारन वो उसे एक दम चुप कर देती है: चुप कर मोनाल, हर किसी को उसी पैमाने पर मत नापा कर तू और रही बात उस लड़के की तो वो तेरे टाइप का नहीं है समझी.. तो बर्फ बनाने की बात सोच भी मत...
मोनाल: अरे तो गुस्सा क्यों हो रही है इतना , ठीक है न कोनसा मेने सच में उसके साथ कुछ कर दिया है हाहाहा...
प्रीति: फिर भी मुझे ऐसी बाटे नहीं पसंद , न किया कर मर्रे sath..khas कर उनके बारे में जो मेरे दोस्त हो...
मोनाल: ाचा बाबा ठीक है पर में तो बस यही कहूँगी तुझसे की अगर तुझे इतनी केयर करने वाला और तेरी कदर करने वाला लड़का जिंदगी में दूसरा नहीं मिलने वाला तो कुछ कर pagli..varna मुझसे hi मिलवा दे हाहाहा..
प्रीति: तू नहीं सुधरने वाली hehe..chal भोत बकवास हो गई अब में घर जा रही हु bye.. और ये बोल प्रीति कैंटीन से निकल कर घर को बढ़ चलती है..
वह बिज़नेस ट्रिप के लिए गए हुए मानव, सीमा और रागिनी और उनके साथ श्वेता चारो hi अब अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच चुके थे, लेकिन उन चारो में से दो लोग कुछ हद तक नाखुश दिखाई पद रहे थे और वो दो लोग थे मानव और श्वेता.. इसका कारन ये था की उनकी सोच के विपरीत सीमा भी इस वक्त उनके साथ थी जिस कारन वो दोनों मन hi मन ये समझ चुके थे की जिस तरह की मस्ती की प्लानिंग वो ट्रिप पर आने से पहले कर रहे थे अब वो मस्ती कर पाना इतना आसान नहीं होगा और इस बात का एहसास उन्हें तब से होने लगा था जब से सभी लोग घर से निकले थे क्युकी सीमा ने अपनी नज़र शुरू से hi दोनों पर गड़ाए हुई थी और वो बात पर को सुनिश्चित कर रही थी की उसके पापा मानव और श्वेता किसी भी तरह से करीब न आये ..
और गंतव्य पर पहुंचने पर उसने इस बात को और अचे से उनके सामने रख दिया जब वह रुकने के लिए होटल में कमरे लेने की बरी आयी... मानव ने सब लोगो के लिए अलग अलग कमरे लेने की बात कही जिसके विरोध में सीमा ने कहा की सिर्फ दो रूम लिए जायेंगे , जहा एक में वो और मानव रहेंगे और दूसरे में रागिनी और श्वेता साथ में रहेंगे...
सीमा के इस निर्णय के बाद तो अब मानव और श्वेता की मनो उम्मीदे hi ख़तम हो गयी की अब उनका मिलना और अगले एक हफ्ते में किसी तरह की मस्ती करने का मौका हाथ लग्न मुमकिन हो पायेगा...
जैसे hi सीमा और मानव अपने कमरे में पहुंचे सीमा ने अपनी बात पूरी तरह स्पष्ट रूप से उसके सामने रख दी ..
सीमा: पापा आपको यद् है न अपने मुझसे कुछ वडा किया है, भूल तो नहीं गए न..
मानव, सीमा की बात अचे से समझते हुए: बेटी तुझे क्या अब भी मुझ पर यकीं नहीं है , मेने अगर तुझसे कोई वडा किया है तो में उसे निभाउंगा बी सही..
सीमा: वो में कुछ नहीं जानती पापा, पर आपका उस श्वेता को इस तरह साथ लाना, यहाँ आकर अलग अलग कमरे लेना , ये सब चीजे मुझे कही से भी सही नहीं लगी बस इसलिए आपको दोबारा याद दिला रही हु..
मानव: अब तुझे कैसे समझौ बेटी ये की श्वेता को में कोई अपने लिए नहीं साथ लाया हु, रागिनी ने भी तुझे बताया न की इस डील में उसकी मौजूदगी कितनी जरुरी है और कमरे अलग में इस लिए ले रहा था ताकि हम चारो कमफोर्डबल हो कर रह सके..
श्वेता: हो सकता है आप और बुआ जो कह रागे वो सही भी हो पर में अब खुद को इतनी आसानी से नहीं समझा सकती वो भी इतना कुछ देखने के बाद , तो ाचा यही होगा की आप उस औरत से दुरी बना कर hi rakho..or हम दो कमरों में अचे से कम्फर्टेबले है तो आप इस चीज की फ़िक्र ना करो...
मानव: हम्म ठीक है बेटी , में फिर वही कहूंगा की तुम्हे मेरी तरफ से अब दोबारा किस तरह की शिकायत का मौका नहीं मिलेगा...
सीमा: अगर ऐसा hi होता है तो शायद में आप पर वापस यकीं कर पाव, जिससे खुशु भी मुझे hi सबसे ज्यादा होगी...
और ये बोल कर सीमा अपने बैग्स को खोल चीजे हमने लगी और यहाँ मानव के दिमाग में अब भी यही चल रहा था की अब जो भी करना है सीमा से बच कर करना पड़ेगा, उसे किसी तरह का मौका नहीं देना चाहता हु जहा वो फिर मुझ पर ऊँगली उठा सके... रही बात श्वेता की जवानी लूटने की, तो उसका कोई ाचा सा इंतेज़ाम करना पड़ेगा वार्ना पकडे जा सका hu..or ये बात मुझसे श्वेता को भी समझनी होगी, क्युकी कही न कही वो इस ट्रिप पर आई hi मुझसे चुदाई करवा कर अपनी छूट को भूख मिटने क लिए है uff..khair जो होगा देखेंगे अभी तो थोड़ा आराम कर लेता हु..
कॉलेज से लौटने के बाद में सीधा अपने कमरे में जा कर कुछ देर के लिए सो गया , शाम के समय वापस से मेरी नींद खुलती है और हाथ मुँह धो कर छत की तरफ बढ़ चलता हु. छत पर पहुंचने पर मेरी आँखों के सामने पीठ मेरी तरफ किये आगे की तरफ छत की बाउंड्री पर झुकी हुई मम्मी पर पड़ती है जो इस वक्त सर्रे पहने हुए थी, और चूँकि वो इस तरह आगे की तरफ झुकी हुई थी तो मेरी नजर सीधा मम्मी के उभरते हुए चूतड़ों पर पड़ती है..
उन भरी भरकम चूतड़ों को देखने मात्रा से hi मेरे लुंड में hulchul.mach जाती है और पिछली रात किचन में मम्मी का खुद को बैंगन लिए शांत करने अला वाकिया मेरी नजरो के सामने आजाता हैऔर मन hi मन खुद से ये कह बैठता हु की "सच सनी क्या गरम माल है यार मम्मी , जब से कल जिस्म को मसलते देखा उनका नंगा खूबसूरत बदन नजरो के सामने से दूर हटने का नाम hi नहीं ले रहा उफ्फ्फ, कितने बेवकूफ है पापा जो ऐसी हसीं औरत का मजा नहीं ले रहे" ..और यही सोच में अपना लुंड सहला देता हु और मम्मी की तरफ बढ़ जाता हु...
अपने बेटे की मौजूदगी से बेखबर महिमा इस वक्त उस कॉलर के बारे में सोच रही थी की आखिर कौन है वो शख्स जो मेरे बारे में इतने अचे से और पक्की खबर रखता है, जिसे मेरे और मानव के रिश्ते के बारे में इतनी गहराई से पता है..
ये जो कोई भी शख्स है , है वो भोत स्मार्ट, बातो hi बातो में हर वक्त मेरी दबी भावनाओ को झंझोर क्र के रख देता है और खुद को उसकी बातो में आने पर मजबूर कर देता है, अब अगर कल उसका कॉल आता है तो पक्का किसी भी तरह उससे ये जानूँगी की आखिर वो है कौन ...
मैं, पीछे से आवाज लगते हुए मम्मी के बगल में पहुंच कर: क्या बात है मम्मी आप इस वक्त यहाँ...
मेरी आवाज सुन कर मम्मी जो की झुक कर कड़ी हुई थी वो सीधी हो जाती है और मेरी तरफ पलट जाती है, उनके पलटने से मनो मुझे एक और झटका सा लगता है कुकी जैसे hi वो मेरी तरफ ोालत टी है तो उस पारदर्शी साड़ी में से मम्मी का ब्लाउज साफ दिखाई पद रहा ठौर ब्लाउज इतना कैसा हुआ था की उसके अंदर छिपे उनकी पहाड़नुमा चूचिया बहार आने को जैसे तरस रही हो, इतना कसाव भरा था की उनको सांस लेने में भी मनो तकलीफ हो जाये ... मम्मी की उन गोरी मोती मुलायम गोलाईओ से मेर ध्यान तब हैट ता है जब मेरे कान में उनकी आवाज पड़तीहै...
मम्मी : अरे सनी तू कब जगा .. मुझे लगा अब तक सोया होगा तू तो..
मैं : हाँ बस अभी अभी जगा मम्मी, सोचा थोड़ी देर छत पर टहल लू, यहाँ आया तो आपको देखा.. आप क्या कर रही यहाँ अकेले..
मम्मी : कुछ नहीं बीटा बस ऐसे hi बोर हो रही थी निचे तो यहाँ चली आई ...
मैं: हम्म्म ाचा किया वैसे भी दिन भर घर के कामो में रहती हो कभी अपने लिए भी वक्त निकल लिया करो
मम्मी: अरे बीटा एक हाउसवाइफ बिना काम लिए नहीं रह ससक्ति, फ्री वक्त उसके लिए बोरियत सा लगता है ः...
मैं: हेहेहे हाँ फिर भी आप जितना काम करती हो उतना तो शायद hi कोई कर paye...aaram भी किया करो थोड़ा अब..
मम्मी: अच्छा तो मुझे आराम hi करवाना है तो अब जल्दी से पढाई पूरी करके छोटी बहु ले आते है घर ki,fir आराम hi आराम ः..
मैं: हाहाहा मम्मी आप भी न, मुझे कोई शोक नहीं चढ़ा अपनी आज़ादी नीलम करने का.. .में ऐसे hi ठीक हु ..आपके आराम के चक्क्र में मुझे सूली पर न चढ़ाओ...
मम्मी: क्यों अब क्या हुआ, और सूली पर क्या चढ़ना इसमें सनी, आज नहीं तो कल ये तो होना hi है na..puri ज़िन्दगी तो कुंवारे रहोगे नहीं ः...
मैं: हाँ पर अभी तो मेरे मस्ती के दिन है अभी शादी के चक्कर में कहा दाल रही हो आप...
मम्मी: इसमें बुराई क्या है, अब अर्रंगे मैरिज के लिए लड़की भी कौनसा तुरंत मिल जाएगी , ढूंढने में भी तो वक्त बीतेगा hi न बीटा. हाँ कोई पहले से देख राखी हो तूने तो वो बात अलग है ...
Main,muh बनाते हुए: क्या मम्मी आप भी फालतू की बाटे ले कर बैठ गयी हो, ये भी कोई टॉपिक हुआ बात करने का....
मम्मी, मुस्कुराते हुए अपना हाथ मेरे गाल पर फेरते हुए: हाहाहा अरे मजाक कर रही हु मई तो तू भी न, अभी तो तुझे पढाई पूरी करके करार बनाना है , वो ज्यादा जरुरी है ..
मैं: हाँ मम्मी पता है मुझे और मुझे कोई शोक नहीं शादी वादी का ...
मम्मी: अभी सब यही कहते है बीटा लेकिन जीवन साथी की जरुरत तो हर मोड़ पर होती है, अभी तुझे ये बात समझ नहीं आएगी..
मैं: ः ाचा ठीक है मम्मी अभी मुझे ये ज्ञान की बाटे सुनने का कोई मूड नहीं है फिर कभी सुनना...
मम्मी, मेरे गाल खींचते हुए: ाचा तो अभी किस बात का मूड है तेरा ..
मम्मी की बात सुन में उन्हें कास के अपनी बहो में जकड लेता हु और एक प्यार भरी झप्पी देदेता हु.. मेरे ऐसा करने से में अछि तरह से अब मम्मी की उन मुलायम चूचिया का एहसास मेरे साइन पर ले प् रहा था और वो एहसास इतना हसीं था की उनसे अलग होने का सोचना भी ख्याल में नहीं आने वाला था..
मैं, मम्मी को ऐसे hi हुग करते हुए: अभी अपनी मम्मी से ऐसे गले लगने का मूड है मेरा ः...
मम्मी, बेटे के प्रति ममता भरा प्यार दिखते हुए, वैसे hi मुझसे गले लगे हुए: ः सनी तू भी न.. आज इतना प्यार कहा से आ गया तुझे मम्मी पर...
मैं: मम्मी में तो हमेशा से hi प्यार करता आया हु आपसे, पहले भी आपसे कहा था की काम से काम एक बार अपने बेटे को गले लगा कर प्यार से एक किश क्र दिया करो पर आपको फुर्सत hi कहा है..
मम्मी, मेरी बात सुन मुझे थोड़ा पीछे सरकते हुए: ाचा बच्चू तो ये शिकायत है तेरी , चलभी तेरी शिकायत दूर कर देती हु ..
और ये बोल कर मम्मी ने मेरा चेहरा पकड़ लिया और बरी बरी दोनों गलो पर प्यार भरे दो चुम्बन दे दिए , मम्मी के होठो का वो एहसास मनो भूले न भुलाया जाये ऐसा था...
मम्मी, चुम्बन के बाद मेरी नजरो में देखते हुए: अब तो खुश ह न मेरा लाल, अब तो कोई शिकायत नहीं है न...
मैं, मम्मी को दोबारा हुग करते हुए: नहीं मम्मी कोई शिकायत नहीं, बस ऐसे hi रोज मुझे प्यार से किश कर दिया करो मेरा दिन अचे से गुजरेगा ः...
मम्मी, चुराते हुए: ः चाट अब पीछे हैट भोत मस्का हो गया आज के लिए..
मैं: मस्का नहीं ये बेटे का प्यार है मम्मी के लिए हँ...
मम्मी, हस्ते हुए: हाहाहा ठीक है ठीक है मन लेतिहुँ मेरे शैतान बेटे...
मैं, कुछ सोच कर: वैसे मम्मी, पापा का कोई कॉल aaya..phuch गए क्या वो लोग?
मम्मी: पापा का तो नहीं सीमा से बात हुई मेरी, कुछ देर पहले hi पहुंचे है वो लोग..
मम्मी: ाचा चल अब भोत बाटे हो गयी, मुझे निचे जाने दे डिनर भी बनाना है ...
मैं: हाँ मम्मी जाओ आप में आता हु कुछ देर में...
और यही बोल मम्मी छत से निचे चली जाती है और कुछ देर रुकने के बाद में भी निचे आजाता हु..
अगली सुबह जैसा की पिछली रात तय हुआ था ठीक वैसे hi पापा, बुआ और सीमा दीदी अपनी ट्रिप के लिए निकल पड़ते है और अब उनके बाद घर में मैं, मम्मी , प्रीति ,कामिनी भाभी और राहुल भैया hi रह जाते है. जिसमे से सब ब्रेकफास्ट करने के बाद अपने अपने काम को निकल जाते है और घर में सिर्फ मम्मी अकेली hi रह जाती है.
यहाँ मैं घर से निकल कर कॉलेज की तरफ जा hi रहा होता हु की मेरी नजर अजित चाचा के घर की तरफ पड़ती है जहा इस वक्त चाचा अपने ऑफिस के लिए जाने के लिए घर से बहार निकलते हुए दिखाई देते है और उन्हें दरवाजे तक चोर्ने के लिए अंजलि चची एक ब्लैक कलर के अर्ध पारदर्शी गाउन में कड़ी हुई थी, जिन्हे देख मेने अपनी बाइक उनके घर के आगे hi रोक दी और उतर कर उन दोनों से बात करने चल पड़ता हु..
मैं: गुड मॉर्निंग चाचा , चची... क्या बात है ऑफिस जाने की तयारी हो रही है चाचा...
अजित: अरे सनी बीटा तुम, गुड मॉर्निंग, हाँ बस अब ऑफिस का समय हो रहा तो वही जा रहा हाहाहा..
अंजलि, चाचा से: अरे अब ये साहबज़ादे तो बड़े आदमी हो गए है चाचा और चची को मिलने का समय भी नहीं अजित इसके पास तो... पता नहीं आज सूर्य किस दिशा से निकला जो इनके दर्शन मिल गए...
अजित, मन hi मन अंजलि के बारे में ये सोचते हुए की हैं अब तुम्हे अपने बचे के असली बाप से मिलने की तड़प जो है, अब उसका hi तो मौका चाहिए , मेरी क्या जरुरत है: हाँ वही तो अंजलि जरूर आज कुछ काम होगा तभी आया है ये वार्ना नहीं आता यहाँ , क्यों सनी...
मैं: अरे नहीं चाचा क्या आप भी, ऐसी बात नहीं है, आप लोग जानते तो हो अभी कॉलेज और पढाई से hi वक्त नहीं मिलता...
चची: चल चल अब बहाने कही और बनाना समझा, बड़ा आया सुबह सुबह बेवकूफ बनाने हमे... सीधे सीधे बताओ क्यों आये हो...
मैं, अपनी नजरे चची के गाउन से उभरती चुचिओ पर गड़ाए उन्हें इशारे करते हुए की आपका ये दूध पिने आया हु, जिसे देख चची भी मेरी भावनाये समझते देर नहीं करती और चोरी छिपे चाचा की नजरो से बच कर मुस्कुरा देती है...
मैं: अरे चची सच कुछ काम नहीं, बाद कॉलेज जा रहा था तो यहाँ नज़र पड़ी तो सोचा मिलता चालू..
अजित चाचा, वाह सनी बीटा , मेरी बीवी की चूचिया घूरते हुए इतना सफ़ेद झूट , सब समझ रहा हु की इसने मुझे जाते हुए देखा बस इसलिए मेरी बीवी को लूटने आ गया है: हाहाहा ाचा चलो भाई अब अंजलि मान लेते है इसकी बात भी.. वैसे सीमा बेटी कैसी है, ससुराल से आने के बाद उसे भी वक्त नहीं मिला हमसे मिलने का क्या?
मैं: अरे नहीं चाचा, दरअसल पापा और बुआ आज से एक हफ्ते के लिए किसी बिज़नेस ट्रिप के लिए गए है तो सीमा दीदी भी उनके साथ गयी है घूमने के हिसाब से ...
चची: ओह्ह चलो ये तो बढ़िया बात है फिर तो घर पर तुम चार लोग hi बचे रह गए और दिन के वक्त तो महिमा भाभी अकेली कुकी तुम सब तो कॉलेज या ऑफिस चले जाते हो..
मैं: हाँ चची अभी हफ्ते भर तो मम्मी अकेली hi रहेगी घर में ः..
चाचा, ये सुन कर की महिमा घर में अकेली है, और खुद से विचार करता है की और मन hi मन मुस्कुराता है की इससे ाचा मौका क्या हो सकता है की महिमा भाभी दिन भर घर में अकेली होंगी, शायद मैं इस चीज का फायदा उठा सनी से अपना बदला पूरा कर सकू , और यही सोच : ाचा भाई सनी तुम और अंजलि बाटे करो मुझे ऑफिस के लिए देरी हो रही है , मैं चलता हु bye..
मैं: okay चाचा bye bye, हैवे ा गुड डे...
चची: आओ सनी कब तक बहार खड़े रहोगे , अंदर आओ na..ya तुम्हे भी कॉलेज के लिए देर हो रही है..
यहाँ अजित चाचा ने जाते हुए ये नोटिस किया की अंजलि ने उसे bye भी नहीं कहा क्युकी वो सनी को घर के अंदर बुलाने के लिए इतनी जल्दी में थी... कोई बात नहीं सनी बीटा जा घर के अंदर और खिला दे उसे तेरा लुंड... अभी वक्त तुम्हारा है पर जल्दी hi मेरा आएगा और ये सोचते हुए वो घर से निकल जाता है..
और यहाँ दूसरी तरफ घर के अंदर घुसते hi जैसे hi चची दरवाजा बंद करती है में झट से उनकी दोनों चूचिया अपने हथेली में पकड़ भींच देता हु...
मैं: हैइए चची क्या मस्त उभर दिखा रही हो गाउन में, जब बाइक पर से आप पर नज़र पड़ी तब से दबोचने क लिये मचल गया था , मन तो किया था की चाचा के सामने hi दबोच लू हाहाहा...
चची: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ईशःठ सुन्न्नीयी हहै,, तो तुम्हे देख मुझसे भी कहा रुका जा रहा था में भी बस यही इंतज़ार कर रही थी की कब तुम्हारे चाचा जाये और तुम्हे घर के अंदर बुलाऊ अह्ह्ह्ह , एक तो हफ्ते हफ्ते तक दिखाई नहीं देते हो , कितना मुस्खिल होता है मेरे लिए तुम्हारे लुंड क बिना रहना सनी उम्मम्मम्म...
मैं, वही हॉल में चची के कपडे उतर नंगी करते हुए: अरे चची अब नहीं तड़पना पड़ेगा आपको, अब मेरे पास कुछ फ्री समय रहने वाला है और उस वक्त आकर में अपने बच्चे की माँ को जैम कर रगड़ने वाला हु u.mmmmmaaaah...
चची: हैएएइ सनी अब बाटे कर के और न तड़पा मुझे , जल्दी से रगड़ दो न फिर अपने बच्चे की मा को उम्म्म ओह्ह्ह्ह...
और फिर चची को वही हॉल में सोफे पर पटक कर अपने लुंड को उनकी छूट में पेल एक घमासान दौर शुरू कर देता हु और अगले कुछ देर में ऐसे hi चची की बुरी तरह से रगड़ रगड़ के पेलने के बाद मेरे और उनके काम रास का उनकी छूट में hi मिश्रण कर के उनके घर से निकल कॉलेज की तरफ बढ़ चलता हु...
यहाँ करीब दोपहर के समय मम्मी घर के सरे काम ख़तम कर अपने रूम में बीएड पर बैठी हुई hi होती है की उनके फ़ोन पर रिंग बजने लगती है और स्क्रीन पर नंबर देख ,जो की अब मम्मी के लिए जाना पहचाना सा नम्बर बन गया था क्युकी पहले भी इस नंबर से कॉल आये हुए थे, उसे देख थोड़ी रहत की सांस लेती है की शुक्र है आज घर पर मैं अकेली hi हु ... और तीखे स्वर वाले अंदाज में फ़ोन रेसिएवे करके भड़कते हुए...
महिमा: अब क्यों कॉल किया है तुमने.. आखरी बार कहा था न की अब मुझे कभी कॉल मत करना..
कॉलर, (जी हाँ दोस्तों ये वही कॉलर जो पिछले कई दिनों से महिमा सक्सेना के पीछे पड़ा हुआ है): अरे महिमा जी , आपने तो जैसे आदत hi बना ली है की सीधा तीखे स्वर में hi बात करोगी मुझसे..
महिमा: तो क्या प्यार से बात करू मैं तुमसे, जब इतनी दफा ना कहने पर भी तुम्हे मेरी बात समझ नहीं आती है तो फिर..
कॉलर: ः क्या महिमा जी आप भी न, कसम से कह रहा हु, आपको इस तरह भड़कते हुए देखने का भी एक अलग hi मजा होता होगा,,, काश वो मौका मुझे मिल पाए कभी...
महिमा, अब अपनी आवाज नार्मल करते हुए: में तंग आ गई हुई तुमसे, पिछली बार भी तुमने एक अधूरी पहेली से बात करके फ़ोन काट दिया , बिना मेरी बात का जवाब दिए... अब आज मुझसे उस बात का जवाब दो सीधे सीधे तभी बात करुँगी वार्ना फ़ोन रखो...
कॉलर: उम्मम्मम माफ़ कीजियेगा महिमा जी लेकिन मुझे आपका सवाल hi याद नहीं जवाब कैसे दू भला ः..
महिमा: हे भगवन!!! ठीक है मुझे सबसे पहले ये बताओ की तुम हो kaun,kya नाम है तुम्हारा...
कॉलर: हाहाहा बस इतनी सी baat..iska जवाब तो में आपको कई दफा दे चूका हु की में आपका कोई अपना hi हु जो तहे दिल से आपको चाहता हु और आपको पाने की हसरत रखता हु...
महिमा: अपनी ये सब बकवास बंद करो ये सब नहीं सुन्ना मुझे, सीधा सीधा अपना नाम बताओ मुझे बस ...
कॉलर: अब नाम में क्या रखा है महिमा जी, कुछ भी बता दूंगा नाम तो मैं अपना ,क्या फरक पद जायेगा उससे भला...
महिमा: उससे फरक ये पड़ेगा की मुझे ये पता चलेगा की ऐसा कौनसा रुश्तेदारहै मेरा जो रिश्तो को बदनाम करना चाहता है...
कॉलर: कैसी बात कर रही हो आप महिमा जी, में तो अपने रिश्ते को नया नाम देना चाहता हु, न की बदनाम करना ..
महिमा: वो सब मुझे नहीं पता, या तो मुझे अपना नाम बताओ या मुझे ये बताओ की तुम्हारा मुझसे क्या रिश्ता है..
कॉलर: ठीक है आज बात ख़तम करने से पहले आपको इन दो में से कोई एक का जवाबिल जायेगा लेकिन फिलहाल मुझे आपके बारे में कुछ चीजे जननी है जो पिछली बार जननी रह गयी थी...
महिमा: नहीं अभी नहीं , मेरे पास वक्त भी नहीं है और में बताना भी नहीं चाहती जैसा की मेने हर वक्त कहा की में घर परिवार वाली औरत हु और...
कॉलर, इससे पहले की महिमा अपनी बात पूरी करती: हाँ जनता हु आप घर परिवार वाली औरत हो और लेकिन... इस वक्त आप घर में अकेली हो और अगले एक हफ्ते तक अकेली hi रहने वाली हो हैं न..
महिमा, चौकते हुए: तुम्हे किसने कहा की में इस वक्त अकेली हु?
कॉलर: हाहाहा अरे महिमा जी, इंसान अपने चाहने वाली हर खबर रखता है , साहू बात है न की आपके प्यारे पतिपरमेश्वर और घर के दो और सदस्य एक हफ्ते के लिए बहार गए हुए है और बाकि घर के सदस्य इस वक्त रोज की hi तरह अपनी रोजमर्रा जिंदगी में व्यस्त होने के कारन घर में आप अकेली है...
महिमा, कुछ देर सोचने के बाद: हाँ सही है सब कुछ एक दम पर तुम्हे कैसे पता चला , कहा से मिलती है तुम्हे मेरे घर में होने वाली चीजों की खबर..
कॉलर: ऐसे hi थोड़े खुद को आपका आशिक़ कहता हु में, खबर रखता हु और ये सुनिश्चित करता हु की कही आपको किसी चीज की जरुरत तो नहीं...
महिमा: ाचा जी... और मान लो मुझे किसी चीज की जरुरत होगी तो तुम्हे कैसे पता चलने वाला है.. कौन बताएगा क्युकी मैं तो कभी तुमसे कुछ कहने वाली हु नहीं..
कॉलर: आपके कहने की जरुरत hi नहीं पड़नी मुझे, और वैसे भी मुझे ये बात भोत अचे से पता है की आम जिंदगी की जरूरते तो आपके पति और परिवार वाले पूरी करने में भोत अचे तरीके से सक्षम में , वह तो मुझे किसी तरह की कोई दखल अंदाजी करने की जरुरत भी नहीं पड़ने वाली...
महिमा, बात को समझते हुए: ाचा तो अगर इंसान की आम जिंदगी की साडी जरूरते पूरी हो रही है तो उसके बाद बचता hi क्या है जिसके लिए मुझे तुम्हारी मदद की जरुरत पड़ने वाली है.
कॉलर: अब महिमा जी आप खुद से झूट बोल रही हो या तो फिर नासमझ होने का नाटक कर रही है की इंसान की आम जरूरते पूरी होने पर उसे ख़ुशी मिल जाती है..
महिमा: हाँ तो अब मुझे जो चाहिए वो मिल रहा है तो फिर और क्या अपेक्षण रखने की आवश्यकता ह भला मुझे..
कॉलर: हाँ मन की आपकी वो जरूरते पूरी हो रही लेकिन आपकी शारीरिक जरूरतों का क्या? क्या वो जरूरते भी ठीक से पूरी हो रही है आपकी....
महिमा, कॉलर की ये बात सुन कर एक दम से चुप्पी साढ़े मन hi मन सोचते हुए की कही न कही ये जो कोई भी है सब कुछ अचे से जनता है लेकिन कैसे...: अब इस बारे में तुम्हे बताना जरुरी नहीं समझतिऐं, ये पति पत्नी के बिच की बात होती है किसी गैर को कहने की नहीं.
कॉलर: ः ऐसे गैर बोल कर दिल न दुखाओ अब hamara...vaise भी अगर आपके पति इस बात को समझते तो शायद आज आप शारीरिक रूप से भी खुश होती , सही है न.
महिमा, उसकी हर बात का मन hi मन समर्थन देते हुए लेकिन असलियत छिपाते हुए: तो तुमसे ये किसने कह दिया की में अपने पति से शारीरिक रूप से खुश नहीं.
कॉलर: ये किसी के कहने की जरुरत नहीं होती है महिमा जी , और चलो मान भी लू मैं की आप अपने पति से खुश हो तो ये बताओ की अभी एक हफ्ते के लिए आपके पति बहार गए है तो कल की बीती हुई रात आपके पति ने आपको कितनी दफा छोड़ा...
महिमा, उसके मुँह से सीधा चुदाई के बारे में सवाल सुन रोंगटे से खड़े होते हुए: तुम न बकवास बंद करो समझे अपनी, मेने कहा न ये मेरे और मेरे पति की बात है तुम्हे क्यों बताऊ भला...
कॉलर: हाहाहा ाचा चलो इस बात को एक दूसरे तरीके से रखता हु... अगर में कही एक हफ्ते जैसे अंतराल के लिए कही बहार जा रहा हु और मेरे पास महिमा सक्सेना जैसी sundar,hasin और कामुक बीवी होइ तो...
महिमा, न चाहते हुए भी उसकी बात कही न कही मन में उत्सुकता जागते हुए: तो क्या???
कॉलर: तो यकीं मानिये , मेने अपनी महिमा को बहार जाने के पहले वाली रत को सोने नहीं दिया होता, पूरी रत उसके जिस्म को रगड़ रगड़ के छोड़ा होता ताकि एक हफ्ते तक वो उस रत हुई चुदाई को यद् कर मेरे वापस लौटने का इंतज़ार करती रहती...
महिमा, उसके मुँह में अपना नाम शूम अजीब एहसास महसूस कर और रत भर चूड़े जाने की बात से जिस्म पर असर होता देख: ाचा जी तो अब मुझे पता नहीं तुम शादी शुदा हो या नहीं पर ये चीज तुम अपमी बीवी के सतहज जरूर करना , भोत खुश रहेगी तुमसे ,, और हाँ ये मेरी महिमा क्या होता है.. कुछ भी मत बोलै करो समझे...
कॉलर: हाहाहा अरे महिमा जी अगर आप जैसी हो बीवी तो वो पति पागल ह जो उसे अकेला घर चोर जाये मैं तो साथ ले जाऊ हर ट्रिप पर... और रही बात खुश करने की तो इस वक्त में वही तो जानना छह रहा की क्या आप भी उस तरह खुश है जिस तरह मेने बताया...
महिमा: हैं हैं हैं हु में भी उसी तरह खुश बिलकुल...
कॉलर: ाचा तो आप ये कहना चाहती है की कल रत आप रात भर नहीं सोइ, रात भर आपको आपके पति ने नंगा करके पटक पटक के रगड़ रगड़ के छोड़ा हैं न...
महिमा, इस तरह के शब्दों को सुन उत्तेजना महसूस करते हुए: हाँ बिलकुल...
कॉलर: ाचा और अब आप अपने पति को मिस भी कर रही हो की कब वो वापस आये और दोबारा आपको इतनी hi बुरी तरह से आपकी छूट में लुंड पेले जैसा कल रत पेल कर आपकी बजे...
महिमा, हकीकत ज़हन में लेट हुए और इस तरह की चुदाई की जरुरत को समझते हुए लेकिन अपनी आवाज और सांसो को एक चुप्पी के साथ कण्ट्रोल करने के बाद: हैं कर रही हु में अपने पति का इंतज़ार की कब वो आये और मुझे इतना प्यार डीएई...
कॉलर: हाहाहाहा देखो अब आपने hi मेरी बात सच साबित कर दी की आप खुश नहीं है , और आप झूट बोल रही है की आपको कल रत आपके पति ने मजा दिया बल्कि सच तो ये हैकि कल रत क्या पिछली कई रातो से आपके पति ने आपको छुआ भी नहीं है...
महिमा, अपनी टैंगो को कस के भींच कर रगड़ते हुए, छूट की खुजली को मिटने की कोशिश करते हुए, कम्पन भरी आवाज मैं: नहीं में कोई झूट नहीं बोल रही हु, हर वक्त तुम सही नहीं हो सकते समझे..
कॉलर: कॉमन माहि डार्लिंग, अब मेने तो सच का आइना दिखाया है आपको, बाकि ये आप पर है की आप उस पर कब तक झूट का पर्दा डेल रखना चाहती हो...
महिमा, अब खुद मन hi मन ये मानते हुए की ये शख्स जो कोई भी है पर इसकी हर बात सही है, अपनी साड़ी का पल्लू हटा चुकी को एक दफा दबा कर हलकी सिसकी भरते हुए: झूठे हो तुम और क्या लगता है तुम्हे की तुम्हारी बाटू में आ कर में तुम्हे सच्चा साबित होने दूंगी कभी नहीं..
कॉलर: अरे नहीं महिमा जी, भला मुझे क्या फायदा या मुकसान है आपसे मेरी बातो को सच्चा या जूठा साबित करवाने में, में तो बस आपको आपका सच बता रहा हु जिसे आप जानते हुए भी इस वक्त अनजान बनने की कोशिश कर रही हो...
कॉलर: मुझे तो बस इस बात का मलाल है जिस हसीं खूबसूरत औरत का हक़ बनता है की हर रत उसे बिस्तर नंगा कर एक एक अंग को अचे से मसल मसल कर उसकी जवानी को लुटा जाये , वो अपने पति द्वारा दरकिनार की जा रही है और उसे खुद अपने जिस्म की आग ठंडी करने के लिए म्हणत करनी पद रही है, और अगर वो औरत वही हो जिसे में तहे दिल और जान से पानं चाहता हु ... बस यही एक वजह है की में आपको नाखुश देख कर खुश नहीं रह पता हु .. मन तो करता है की अभी आपके घर औ और आपको पटक पटक के छोड़ दू महिमा जी...
महिमा, अब अपने जिस्म की कामाग्नि को भड़काए जाने के कारन सुलगती हुई आग को काबू नहीं कर पति है और एक हाथ टैंगो केबीच दाल खुद को सहलाते हुए ,ऊपरी मन से उस अनजान शख्स को इंकार जताते हुए: तुम चाहे कुछ भी कहो और समझो में अपने पति से खुश हु और तुमने अभी जिस तरह मुझे उपयोग में लिए जाने का वर्णन किया , ठीक वैसे hi मेरे पति करते भी है इसलिए तुम्हे न खुश होने की कोई जरुरत नहीं है समझे...
कॉलर, मन hi मन महिमा की आग को भड़काने और उसकी तड़प बढ़ाने का सही मौका देख: ठीक है महिमा जी अब आप अगर नहीं मन्ना चाहती सचाई को तो आपकी मर्जी,... वैसे भी मुझे अब किसी काम से जाना है , अभी तो एक हफ्ता आप अकेली हो तो कल फिर इसी समय बात करता हु apse..bbye महिमा जी ..
और ये बोल बिना महिमा का जवाब सुने फ़ोन कट कर देता है और यहाँ महिमा का जिस्म उस अनजान शख्स द्वारा की गयी शाट प्रतिशत सही बातो की वजह से पूरी तरह गरमा गया था और इसी वजह से उसके द्वारा की गयी बाटे जिसमे उसने महिमा के जिस्म को रोंदने , रगड़ने , और मसलते हुए पेलने की बाटे की थी , बस उन्ही सब को यद् कर और ये मानते हुए की उसके शरीर को बिलकुल hi वैसी चुदाई की जरुरत भी है जैसा इस शख्स ने वर्णन किया , उन्हें यद् करते हुए अपनी साड़ी और पेटीकोट उठा उंगलिओ से अपनी पंतय सरका कर तीन उंगलिया छूट में दाल खुद के साथ खेलने लग पड़ती है और कुछ देर अपनी प्यासी छूट के साथ खेलने के बाद अपना काम रास बहा कर नींद के आगोश में चली जाती है...
वही दूसरी तरफ प्रीति कैंटीन में अपनी फ्रेंड मोनाल के साथ बैठी हुई होती है और बीती रत पार्टी में जो कुछ हुआ वो सब के बारे में डिस्कशन कर रही thi...chunki मोनाल भी उस पार्टी में मौजूद थी सो वह जो कुछ हुआ उसने भी अपनी आँखों से देखा और कानो से सुना था , लेकिन वह हुई कुछ ऐसी घटनाये जो उसे समझ नहीं आई थी तो उन्ही को ले कर वो प्रीति के साथ चर्चा कर रही थी..
मोनाल: यार प्रीति बता न विराट सर वह पार्किंग में किसके साथ थे और क्या कर रहे थे तूने देखा क्या... मुझे ये बात कल से समझ नहीं आ रही की तेरे साथ आये उस ladke(yaha मेरा ज़िकर हो रहा है) ने ऐसा क्या देख लिया..
प्रीति, जिसे मेने सच उसी वक्त बता दिया था, चेहरे पर मुस्कराहट लेट हुए: यार वो एक सीक्रेट है में नहीं बता सकती और तू अगर जान गयी न तो सच कह रही हु तेरा भी दिमाग चक्र जायेगा हेहेहे..
मोनाल: अरे अब बता भी न मुझसे भी छिपाएगी तू हँ...
प्रीति: ाचा बाबा बताती हु पर तू प्रॉमिस कर की किसी और से नहीं कहेगी...
मोनाल: हाँ चल ी प्रॉमिस ये बात कही नहीं जाएगी तेरे और मेरे अलावा.. वैसे भी में यहाँ किसी को बता के क्या hi करुँगी.. अब बता भी न जल्दी..
प्रीति: दरअसल पार्किंग एरिया में न एक रूम था वह विराट सर के साथ नीता ma'am थी...
मोनाल, ये बात सुन चौकते हुए: व्हाटटटटट..... तू क्या बोल रही है... सच में नीता ma'am ??? लेकिन वो तो अंशुल सर के साथ है ?
प्रीति: हहै हाँ में भी ऐसे hi चौकी थी लेकिन यही सच है, अंशुल सर के साथ सिर्फ घूमने फिरने के लिए और बाकि काम नीता मां के उस विराट के साथ हो रहे है...
मोनाल: यार क्या गज़ब कर दिया नीता मां ने तो.. एक साथ दो दो का मजा वाह, सही खेल रही है वो तो हाहाहा
प्रीति: इसमें सही क्या है पगली... धोका हुआ न ये तो, प्यार व्यार तो बस नाम का है इसका मतलब तो...
मोनाल: अरे प्रीति तू कब समझेगी चीजों को, आज कल प्यार व्यार कुछ नहीं है सबको बस सेक्स की भूख है समझी...
प्रीति: यार अब तू फिर से शुरू मत हो जा इसी बात को ले कर, तुझे तो बस मौका मिलना चाहिए हैं न...
मोनाल: ः अब क्या करू जिनगी का असली सच और असली मज़ा दोनों एक hi चीज है और वो है सेक्स... और अब तू hi देख नीता ma'am को पता है अंशुल सर से पैसो की कमी नहीं रेहनी तो उसको फसा rakha,kuch दिन उनको अपने जिस्म उसे करने दिया और दूसरी तरफ विराट सर इतने जाना मन नाम है तो उसको भी फसा रखा है... और दोनों को फ़साने के लिए काम क्या आया बता..
प्रीति: क्या???
मोनाल: बस एक छोटी सी चीज जो अपनी टैंगो के बिच में है, जिसके लिए कोई भी लड़का अपना सब कुछ लुटा दे हाहाहा...
प्रीति: चीई यार कैसी बाटे करतीहै तू सच्ची.. बोर नहीं होती हर वक्त बस दिमाग में यही कचरा भरे घूमती है..
मोनाल: मेरी जान तू ऐसा इसलिए बोल रही है क्युकी तूने अब तक उस मजे का स्वाद नहीं चखा, वर्जिन है इसलिए, जिस दिन किसी लड़के ने तेरी सील तोड़ दी उसके बाद देखना तुझे भी इसी खेल में जन्नत मिलने वाली है और हर वक्त यही कचरा ाचा लगने वाला है हाहाहा.
प्रीति: शट उप प्रीति, मुझे कोई शोक नहीं है समझी इस सब गंदगी में पड़ने का, तू hi कर ये सब ...
मोनाल: हाहाहा ाचा बाबा ठीक है लकिन ये सब चोर मुझे एक जरुरी बात तो बता न...
प्रीति: कौनसी बात..
मोनाल: यही की वो हैंडसम लड़का कौन था जिसने तेरी तरफ से बोलै और तेरा स्टैंड लेते हुए पार्टी में सबकी वात लगा दी थी..
प्रीति: क्यों तुझे क्या करना है उसके बारे में जान कर...
मोनाल: यार बता न प्लस, में तो कल रात से hi उसकी फैन हो गयी थी, ऐसे लड़के भोत काम मिलते है यार जो ऐसे भरी महफ़िल में विराट जैसे नामी इंसान को भी धूल छठा दे..
प्रीति, मन hi मन खुश होते हुए की आज मेरे भाई की तारीफ हो रही उसके काम की वजह से : हाँ ये बात तो है ..
मोनाल: बता न यार, तू कहा मिली उसे और कौन है, कब से जानती है... कही तेरा बॉयफ्रेंड तो नहीं जिससे तूने मुझे बी न मिलवाया हो?
प्रीति, अपने भाई को अपना बर्फ होने की बात सुनते hi उसकी बॉडी में सिहरन सी मच जाती है: क्या कुछ भी बोलती है, कोई बर्फ नहीं वो मेरा, बस एक ाचा दोस्त है , किसी फॅमिली फंक्शन में मुलाकात हुई थी मेरी उससे.
मोनाल: यार बर्फ नहीं है तो बना ले सच में.. और तुझे नहीं बनाना हो तो मुझे bol..me तो कुछ भी कर्जो ऐसा लड़का पाने के लिए..
प्रीति: हहहहए तू न पागल है सच्ची, ऐसा क्या देख लिया तूने उसमे..
मोनाल: यार जिस तरफ उसने तेरा साथ दिया कसम से बोल रही हु भोत काम बन्दे मिलते है, उसे परवाह थी तेरी, और जैसे उसने तेरी तारीफ की ऐसा लगा मनो की वाकई तुझे अचे से जनता हो और कदर करता हो...
प्रीति, मोनाल की बाटे अब मन hi मन उसे अपने भाई के प्रति वही फील करवा रही थी जो कल रत खुद उसने बी फील किया था : हाँ वो है यार मुझे भी बिलकुल ऐसा hi लगा, और सच कहु तो उसका इस तरह सब कुछ कहना मेरे साथ खड़े रहना मुझे बड़ा ाचा लगा..
मोनाल: हम्म्म वैसे बाद में तूने उसे थैंक यू तो कहा न और कहा तो कैसे कहा..
प्रीति: कैसे कहा का क्या मतलब , अब थैंक यू जैसे कहते वैसे hi कहूँगी न इडियट..
मोनाल: उफ्फ्फ इडियट में नहीं तू है प्रीति... अगर मुझे तो कोई लड़का ऐसा परवाह, केयर करने वाला और साथ निभाने वाला मिल जाये तो में तो उसे थैंक यू बोलने के लिए अपना सब कुछ दे दू ... सब कुछ मतलब तू समझ रही hi है न, में अपना सब कुछ उसके नाम कर देती...
प्रीति: तू फिर घुमा फिरा के वही बात पर आ गई न , कुछ नहीं हो सकता तेरा..
मोनाल: यार तू ये सब चोर और बता न वो सच में तेरा बर्फ नहीं na..kyuki नहीं है तो मुझे मिलवा दे उससे यार, में तो पक्का उसको अपना बर्फ बना लू, इतना हैंडसम और फिट हाय कसम से जिस लड़की को उसका साथ मिले वो जिंदगी भर खुश रहेगु हर तरह से..
प्रीति, मोनाल के मुँह से भाई के साथ सम्बन्ध बनाने की बात सुन पहली बार उसे जलन का एहसास होता है और इसी कारन वो उसे एक दम चुप कर देती है: चुप कर मोनाल, हर किसी को उसी पैमाने पर मत नापा कर तू और रही बात उस लड़के की तो वो तेरे टाइप का नहीं है समझी.. तो बर्फ बनाने की बात सोच भी मत...
मोनाल: अरे तो गुस्सा क्यों हो रही है इतना , ठीक है न कोनसा मेने सच में उसके साथ कुछ कर दिया है हाहाहा...
प्रीति: फिर भी मुझे ऐसी बाटे नहीं पसंद , न किया कर मर्रे sath..khas कर उनके बारे में जो मेरे दोस्त हो...
मोनाल: ाचा बाबा ठीक है पर में तो बस यही कहूँगी तुझसे की अगर तुझे इतनी केयर करने वाला और तेरी कदर करने वाला लड़का जिंदगी में दूसरा नहीं मिलने वाला तो कुछ कर pagli..varna मुझसे hi मिलवा दे हाहाहा..
प्रीति: तू नहीं सुधरने वाली hehe..chal भोत बकवास हो गई अब में घर जा रही हु bye.. और ये बोल प्रीति कैंटीन से निकल कर घर को बढ़ चलती है..
वह बिज़नेस ट्रिप के लिए गए हुए मानव, सीमा और रागिनी और उनके साथ श्वेता चारो hi अब अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच चुके थे, लेकिन उन चारो में से दो लोग कुछ हद तक नाखुश दिखाई पद रहे थे और वो दो लोग थे मानव और श्वेता.. इसका कारन ये था की उनकी सोच के विपरीत सीमा भी इस वक्त उनके साथ थी जिस कारन वो दोनों मन hi मन ये समझ चुके थे की जिस तरह की मस्ती की प्लानिंग वो ट्रिप पर आने से पहले कर रहे थे अब वो मस्ती कर पाना इतना आसान नहीं होगा और इस बात का एहसास उन्हें तब से होने लगा था जब से सभी लोग घर से निकले थे क्युकी सीमा ने अपनी नज़र शुरू से hi दोनों पर गड़ाए हुई थी और वो बात पर को सुनिश्चित कर रही थी की उसके पापा मानव और श्वेता किसी भी तरह से करीब न आये ..
और गंतव्य पर पहुंचने पर उसने इस बात को और अचे से उनके सामने रख दिया जब वह रुकने के लिए होटल में कमरे लेने की बरी आयी... मानव ने सब लोगो के लिए अलग अलग कमरे लेने की बात कही जिसके विरोध में सीमा ने कहा की सिर्फ दो रूम लिए जायेंगे , जहा एक में वो और मानव रहेंगे और दूसरे में रागिनी और श्वेता साथ में रहेंगे...
सीमा के इस निर्णय के बाद तो अब मानव और श्वेता की मनो उम्मीदे hi ख़तम हो गयी की अब उनका मिलना और अगले एक हफ्ते में किसी तरह की मस्ती करने का मौका हाथ लग्न मुमकिन हो पायेगा...
जैसे hi सीमा और मानव अपने कमरे में पहुंचे सीमा ने अपनी बात पूरी तरह स्पष्ट रूप से उसके सामने रख दी ..
सीमा: पापा आपको यद् है न अपने मुझसे कुछ वडा किया है, भूल तो नहीं गए न..
मानव, सीमा की बात अचे से समझते हुए: बेटी तुझे क्या अब भी मुझ पर यकीं नहीं है , मेने अगर तुझसे कोई वडा किया है तो में उसे निभाउंगा बी सही..
सीमा: वो में कुछ नहीं जानती पापा, पर आपका उस श्वेता को इस तरह साथ लाना, यहाँ आकर अलग अलग कमरे लेना , ये सब चीजे मुझे कही से भी सही नहीं लगी बस इसलिए आपको दोबारा याद दिला रही हु..
मानव: अब तुझे कैसे समझौ बेटी ये की श्वेता को में कोई अपने लिए नहीं साथ लाया हु, रागिनी ने भी तुझे बताया न की इस डील में उसकी मौजूदगी कितनी जरुरी है और कमरे अलग में इस लिए ले रहा था ताकि हम चारो कमफोर्डबल हो कर रह सके..
श्वेता: हो सकता है आप और बुआ जो कह रागे वो सही भी हो पर में अब खुद को इतनी आसानी से नहीं समझा सकती वो भी इतना कुछ देखने के बाद , तो ाचा यही होगा की आप उस औरत से दुरी बना कर hi rakho..or हम दो कमरों में अचे से कम्फर्टेबले है तो आप इस चीज की फ़िक्र ना करो...
मानव: हम्म ठीक है बेटी , में फिर वही कहूंगा की तुम्हे मेरी तरफ से अब दोबारा किस तरह की शिकायत का मौका नहीं मिलेगा...
सीमा: अगर ऐसा hi होता है तो शायद में आप पर वापस यकीं कर पाव, जिससे खुशु भी मुझे hi सबसे ज्यादा होगी...
और ये बोल कर सीमा अपने बैग्स को खोल चीजे हमने लगी और यहाँ मानव के दिमाग में अब भी यही चल रहा था की अब जो भी करना है सीमा से बच कर करना पड़ेगा, उसे किसी तरह का मौका नहीं देना चाहता हु जहा वो फिर मुझ पर ऊँगली उठा सके... रही बात श्वेता की जवानी लूटने की, तो उसका कोई ाचा सा इंतेज़ाम करना पड़ेगा वार्ना पकडे जा सका hu..or ये बात मुझसे श्वेता को भी समझनी होगी, क्युकी कही न कही वो इस ट्रिप पर आई hi मुझसे चुदाई करवा कर अपनी छूट को भूख मिटने क लिए है uff..khair जो होगा देखेंगे अभी तो थोड़ा आराम कर लेता हु..
कॉलेज से लौटने के बाद में सीधा अपने कमरे में जा कर कुछ देर के लिए सो गया , शाम के समय वापस से मेरी नींद खुलती है और हाथ मुँह धो कर छत की तरफ बढ़ चलता हु. छत पर पहुंचने पर मेरी आँखों के सामने पीठ मेरी तरफ किये आगे की तरफ छत की बाउंड्री पर झुकी हुई मम्मी पर पड़ती है जो इस वक्त सर्रे पहने हुए थी, और चूँकि वो इस तरह आगे की तरफ झुकी हुई थी तो मेरी नजर सीधा मम्मी के उभरते हुए चूतड़ों पर पड़ती है..
उन भरी भरकम चूतड़ों को देखने मात्रा से hi मेरे लुंड में hulchul.mach जाती है और पिछली रात किचन में मम्मी का खुद को बैंगन लिए शांत करने अला वाकिया मेरी नजरो के सामने आजाता हैऔर मन hi मन खुद से ये कह बैठता हु की "सच सनी क्या गरम माल है यार मम्मी , जब से कल जिस्म को मसलते देखा उनका नंगा खूबसूरत बदन नजरो के सामने से दूर हटने का नाम hi नहीं ले रहा उफ्फ्फ, कितने बेवकूफ है पापा जो ऐसी हसीं औरत का मजा नहीं ले रहे" ..और यही सोच में अपना लुंड सहला देता हु और मम्मी की तरफ बढ़ जाता हु...
अपने बेटे की मौजूदगी से बेखबर महिमा इस वक्त उस कॉलर के बारे में सोच रही थी की आखिर कौन है वो शख्स जो मेरे बारे में इतने अचे से और पक्की खबर रखता है, जिसे मेरे और मानव के रिश्ते के बारे में इतनी गहराई से पता है..
ये जो कोई भी शख्स है , है वो भोत स्मार्ट, बातो hi बातो में हर वक्त मेरी दबी भावनाओ को झंझोर क्र के रख देता है और खुद को उसकी बातो में आने पर मजबूर कर देता है, अब अगर कल उसका कॉल आता है तो पक्का किसी भी तरह उससे ये जानूँगी की आखिर वो है कौन ...
मैं, पीछे से आवाज लगते हुए मम्मी के बगल में पहुंच कर: क्या बात है मम्मी आप इस वक्त यहाँ...
मेरी आवाज सुन कर मम्मी जो की झुक कर कड़ी हुई थी वो सीधी हो जाती है और मेरी तरफ पलट जाती है, उनके पलटने से मनो मुझे एक और झटका सा लगता है कुकी जैसे hi वो मेरी तरफ ोालत टी है तो उस पारदर्शी साड़ी में से मम्मी का ब्लाउज साफ दिखाई पद रहा ठौर ब्लाउज इतना कैसा हुआ था की उसके अंदर छिपे उनकी पहाड़नुमा चूचिया बहार आने को जैसे तरस रही हो, इतना कसाव भरा था की उनको सांस लेने में भी मनो तकलीफ हो जाये ... मम्मी की उन गोरी मोती मुलायम गोलाईओ से मेर ध्यान तब हैट ता है जब मेरे कान में उनकी आवाज पड़तीहै...
मम्मी : अरे सनी तू कब जगा .. मुझे लगा अब तक सोया होगा तू तो..
मैं : हाँ बस अभी अभी जगा मम्मी, सोचा थोड़ी देर छत पर टहल लू, यहाँ आया तो आपको देखा.. आप क्या कर रही यहाँ अकेले..
मम्मी : कुछ नहीं बीटा बस ऐसे hi बोर हो रही थी निचे तो यहाँ चली आई ...
मैं: हम्म्म ाचा किया वैसे भी दिन भर घर के कामो में रहती हो कभी अपने लिए भी वक्त निकल लिया करो
मम्मी: अरे बीटा एक हाउसवाइफ बिना काम लिए नहीं रह ससक्ति, फ्री वक्त उसके लिए बोरियत सा लगता है ः...
मैं: हेहेहे हाँ फिर भी आप जितना काम करती हो उतना तो शायद hi कोई कर paye...aaram भी किया करो थोड़ा अब..
मम्मी: अच्छा तो मुझे आराम hi करवाना है तो अब जल्दी से पढाई पूरी करके छोटी बहु ले आते है घर ki,fir आराम hi आराम ः..
मैं: हाहाहा मम्मी आप भी न, मुझे कोई शोक नहीं चढ़ा अपनी आज़ादी नीलम करने का.. .में ऐसे hi ठीक हु ..आपके आराम के चक्क्र में मुझे सूली पर न चढ़ाओ...
मम्मी: क्यों अब क्या हुआ, और सूली पर क्या चढ़ना इसमें सनी, आज नहीं तो कल ये तो होना hi है na..puri ज़िन्दगी तो कुंवारे रहोगे नहीं ः...
मैं: हाँ पर अभी तो मेरे मस्ती के दिन है अभी शादी के चक्कर में कहा दाल रही हो आप...
मम्मी: इसमें बुराई क्या है, अब अर्रंगे मैरिज के लिए लड़की भी कौनसा तुरंत मिल जाएगी , ढूंढने में भी तो वक्त बीतेगा hi न बीटा. हाँ कोई पहले से देख राखी हो तूने तो वो बात अलग है ...
Main,muh बनाते हुए: क्या मम्मी आप भी फालतू की बाटे ले कर बैठ गयी हो, ये भी कोई टॉपिक हुआ बात करने का....
मम्मी, मुस्कुराते हुए अपना हाथ मेरे गाल पर फेरते हुए: हाहाहा अरे मजाक कर रही हु मई तो तू भी न, अभी तो तुझे पढाई पूरी करके करार बनाना है , वो ज्यादा जरुरी है ..
मैं: हाँ मम्मी पता है मुझे और मुझे कोई शोक नहीं शादी वादी का ...
मम्मी: अभी सब यही कहते है बीटा लेकिन जीवन साथी की जरुरत तो हर मोड़ पर होती है, अभी तुझे ये बात समझ नहीं आएगी..
मैं: ः ाचा ठीक है मम्मी अभी मुझे ये ज्ञान की बाटे सुनने का कोई मूड नहीं है फिर कभी सुनना...
मम्मी, मेरे गाल खींचते हुए: ाचा तो अभी किस बात का मूड है तेरा ..
मम्मी की बात सुन में उन्हें कास के अपनी बहो में जकड लेता हु और एक प्यार भरी झप्पी देदेता हु.. मेरे ऐसा करने से में अछि तरह से अब मम्मी की उन मुलायम चूचिया का एहसास मेरे साइन पर ले प् रहा था और वो एहसास इतना हसीं था की उनसे अलग होने का सोचना भी ख्याल में नहीं आने वाला था..
मैं, मम्मी को ऐसे hi हुग करते हुए: अभी अपनी मम्मी से ऐसे गले लगने का मूड है मेरा ः...
मम्मी, बेटे के प्रति ममता भरा प्यार दिखते हुए, वैसे hi मुझसे गले लगे हुए: ः सनी तू भी न.. आज इतना प्यार कहा से आ गया तुझे मम्मी पर...
मैं: मम्मी में तो हमेशा से hi प्यार करता आया हु आपसे, पहले भी आपसे कहा था की काम से काम एक बार अपने बेटे को गले लगा कर प्यार से एक किश क्र दिया करो पर आपको फुर्सत hi कहा है..
मम्मी, मेरी बात सुन मुझे थोड़ा पीछे सरकते हुए: ाचा बच्चू तो ये शिकायत है तेरी , चलभी तेरी शिकायत दूर कर देती हु ..
और ये बोल कर मम्मी ने मेरा चेहरा पकड़ लिया और बरी बरी दोनों गलो पर प्यार भरे दो चुम्बन दे दिए , मम्मी के होठो का वो एहसास मनो भूले न भुलाया जाये ऐसा था...
मम्मी, चुम्बन के बाद मेरी नजरो में देखते हुए: अब तो खुश ह न मेरा लाल, अब तो कोई शिकायत नहीं है न...
मैं, मम्मी को दोबारा हुग करते हुए: नहीं मम्मी कोई शिकायत नहीं, बस ऐसे hi रोज मुझे प्यार से किश कर दिया करो मेरा दिन अचे से गुजरेगा ः...
मम्मी, चुराते हुए: ः चाट अब पीछे हैट भोत मस्का हो गया आज के लिए..
मैं: मस्का नहीं ये बेटे का प्यार है मम्मी के लिए हँ...
मम्मी, हस्ते हुए: हाहाहा ठीक है ठीक है मन लेतिहुँ मेरे शैतान बेटे...
मैं, कुछ सोच कर: वैसे मम्मी, पापा का कोई कॉल aaya..phuch गए क्या वो लोग?
मम्मी: पापा का तो नहीं सीमा से बात हुई मेरी, कुछ देर पहले hi पहुंचे है वो लोग..
मम्मी: ाचा चल अब भोत बाटे हो गयी, मुझे निचे जाने दे डिनर भी बनाना है ...
मैं: हाँ मम्मी जाओ आप में आता हु कुछ देर में...
और यही बोल मम्मी छत से निचे चली जाती है और कुछ देर रुकने के बाद में भी निचे आजाता हु..