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अपडेट-62
बस ऐसे HI उसे याद करते करते दिन बिट रहे थे अब 4 दिन बाद सोल्लगे सुरु HI गया तो जयादा टाइम सोल्लगे मई HI जाटों लोगो का और जब सोल्लगे मई मनीष कारन सब लोग साथ मई बेथ के भी राज को बहुत याद करते THE...OR गर एके भी निशा उसके बारे मई सोच सोच कर सो जाती थी वही संजू भी उसके कहायलो मई खोयी रहती THI..BAS ऐसे HI दिन काट रहे थे और आज 5 दिन हो गए थे उसे गर से गए हुए लेकिन सब उसे अंदर HI नफर बहुत मिस कर रहे थे चाहे फ्रेंड HI फॅमिली हो या उसकी गफ हो और उतना HI नहीं कमला भी मनीष की माँ कारन की बहन और माँ काजल अंकिता सब के सब उसे याद करए थे ..
वह शिल्पा भी उसे काफी याद करती थी की कब राज आएंगे बहार से और कब वो वह दिल्ही जाए ऐसे HI याद करते सब उसको..
@स्टार्ट@
वह गए हुए मुझे 5 दिन हो गए थे मई काफी कुछ सिख रहा था और लोगो के साथ ाची से गुल मिल गया था और उतना hi नहीं मेरा इतना जल्दी सिखने की वजह से गुरु जी बहुत खुश भी थे और बाकि लोग भी बहुत खुश थे मेरे जैसा दोस्त पाके और मई भी लेकिन कभी कभी रात को याद आ जाती गर की मई अपना पर्श निकलता उसमे हमारी फॅमिली फोटो मई ने एते वकुट राखी थी वो मई ने वो निकल के डेल्ह कर सो जाता बस ीासे hi दिन बिट रहे थे और मुझे यहाँ बहुत कुछ सिखने को मिल रहा था जीवन जीने क असली मायने तो यहाँ गुरुकुल मई रह कर hi पता चलता है इतना भी आसान नहीं होता यहाँ शिक्षा ग्रहण करना .
कभी कभी गुरुमा के साथ बेथ क बाते भी करता उनको भी अच्छा लगता था वो मुझे अपने बेटे की तरह hi रखते थे मुझे कभी यहाँ माँ की कमी महसूस नहीं होने दी उन्होंने और तो और वो बहुत कुछ जानती थी हमारे बारे मई मई उनसे रोज कुछ न कुछ अलग सुनता था उन्होंने मुझे बतया और सिखाया भी की प्रेम का असली महत्त्व क्या होता है ..और किसी से भी परेम हो सकता है..
मुझे उनकी बाते सुन कर अच्छा लगता था तो एक दिन हम दोनों अकेले बैठे बात कर रहे थे तो मई वह बैठे बैठे प्रेम की बात सुनते हुए कही खो गया था तो उन्होंने मेरा चेहरा देखा फिर बोली..
सकुंतला- क्या बात है राज बीटा कहा खो गया कुछ परशानी है तो बता मुझे सायद तेरा कुछ हल मिल जाय ..
राज- kkk..kkuch नहीं गुरुमा कुछ नहीं..
शकुतंला- तुम बे जीजाक मुझे अपना दोस्त समाज कर बातो सिर्फ इ बात हमरे बीच hi रहे ंगी बोलो क्या बात है सच बातो..
राज- मुझे न एक बात बहुत सताती है
सकुंतला- क्या बोलो..
राज- देखो गुरुमा आप मुझे गलत मत समाज न क्यों की ऐ जो कुछ होता है उसमे मेरा भी दोष होता है..
सकुंतला- बोलो तो सही मई तुम्हारी कोई बात को गलत नहीं समझती सायद इस बात बाटने से तुम्हे उसका उपाय मिल जाय..
राज- क्या हमें एक से जयादा लोगो से प्यार हो सकता है..
सकुंतला- हम्म तो ऐसी बात है ऐ प्यार का मामला है तब तो तुम मुझे पूरी बात बातो तो hi मई समाज सकती hu..or समजा भी सकती हु..
राज- फिर मैंने अपने जीवन मई हुए सेक्स और उसे जुडी बाते और निशा तक लेके सबकुछ बता दिया जिसे सुन के गुरु माँ के चहरे पे स्माइल आ gayi..to मई पूरी बात बता के शर्मा रहा था..
शकुतंला- ओह्ह लगता है तुम्हारी जनम कुंडली की अनुसार तुम्हारा जीवन सुरु हो गया है ..
राज- क्या ऐ सब भी उसमे लिखा है..
सकुंतला- हां जब तुम्हारे माँ और डैड तुम्हे पहली बार यहाँ लेके आये थे तब गुरु राग्वेंद्र ने तुम्हारी पूरी कुंडली को ध्यान से बनाया और पढ़ा भी था उसमे लिखा है की तुम्हारा जनम प्यार बाटने के लिए हुवा है तुम जहा भी जाते हो वह खुशिया hi लाएंगे और उतना hi नहीं तुम राजो के वंशज हो तो स्वाभाविक है की राजा ो की कई पत्निया होती है वैसे hi तुम्हारे जीवन मई भी होंगे तुम 1 से अधिक विवाह करेंगे और इतना hi नहीं तुम जी भी औरत से शारीरिक सम्बन्ध बनोगे वो औरत तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती है और वो खुद माँ भी बन सकती है तुम्हारे अनादर जो फार्मूला डाला गया है उसे तुम्हारे हॉर्मोन्स की ताकत बहुत ज्यादा हो गयी है इसे तुम जैसे माँ बनाना चाओ वो माँ का सुख भी तुमसे प्राप्त करेंगी ऐसा भी लिखा हुवा hai..or...bhi है..
राज- और क्या गुरुमा मुझे बातो ना आप ऐ सब तो मई समाज गया लेकिन मेरी खुद की बेहेन स्व प्यार होना सहावाभिक है क्या..
सकुंतला- देखो मनुष्य कोई भी हो और उसके सामने किसी भी स्त्री हो उसे प्यार हो सकता है क्यों नहीं होंगे जब बरसो पहल पृथ्वी का निर्माण हुवा तब 2 hi लोग बजे थे और उन दो से कई लोग पीड़ा हुए और सम्ब्नध बंधे थे तो क्या वो एक दुआरे के भाई और बेहेन नहीं थे और तुम्हारी कुंडली के अनुसार तो तुम्हारे जीवन मई जयादा से जयादा तुम्हारे परिवार की कन्या ो का प्यार लिखा है और तुम से सबसे जयादा प्यार भी ध्वंगी और तुम्हारी ताकत भी बनेगी वो सब इस लिए तुम इस बारे मई जयादा सोचो मत जैसा भगवान छठा है वो होकर hi रहता hai..tumhara जनम प्यार बाटने के लिए हुवा है तुम्हे सिर्फ अपना प्यार बाटना hai.samja गए और इस प्यार से तुम्हे अपने सरे परिवार को बांध के रखना hai..samaj गए..
राज- क्या और भी कई मेरी परिवार की लड़कियों से प्यार होंगे मुझे .
सकुंतला- हां ऐसा hi समाज लो.. और इतना hi नहीं तुम्ह अपने इस पायर से पूरा परिवार एक कर सकेंगे और तुम्हे सब को एक करने क लिए कई ोर्टो के साथ शारीरिक सम्ब्नध भी बनाना पड़ेंगे तो इसके लिए तुम्हे तैयार रहना होंगे समाज गए..
राज- सब समाज गया आपने मेरे दिल का और मन का बोज हल्का कर दिया गुरुमा ऐ सब बताके..
गुरुमा- हम तो एक माधयम है बीटा सब तो नियति का खेल खेला है..
राज- क्या आप के अल्वा कोण कोण मेरी कुंडली के बारे मई जनता है..
सकुंतला- मेरे अल्वा गुरु राग्वेंद्र उनके अल्वा मंगल हु. तीन hi लोग सब कुछ जानते है..
राज- तो मेरे माता और पिता को ऐ सब मालूम नहीं है..
सकुंतला- उन्हें भी समय आने पे बताना पड़ेंगे फ़िलहाल उसका समय नहीं हुवा है जब उसका समय आएंगे तब अपने आप तुम समाज जाएंगे की उन्हें कब बताना है..
राज- समाज गया मई आपका धन्यवाद गुरु माँ..
फिर हम कुछ देर बाते की और मई जेक सो गया और ऐसे hi दिन बाईट ते गए और 15 दिन हो गए थे मुझे बहुत कुछ ट्रेनिंग मई सफलता मिली थी अभी आधी ट्रेनिंग तो पूरी कर ली थी आज वो दिन था 15 व दिन मंगल भाई मुझे मिलने आने का वादा किया था इस लिए मई सुबह से उनकी पार्टीखा कर रहा था...
राघवेंद्र- क्या हुवा बीटा तुम बार बार गेट की तरफ क्या देख रहा है मई सुबह से देख रहा हु तुम्हारा ध्यान कही और जगह hi है..
राज- गुरु जी आज 15 दिन हो गए मुझे यहाँ ए हुए और मंगल भाई मुझे वडा करके गए थे यहाँ 15 दिन बाद मिलने आने का और साथ मई पिताजी को लेके आने वाले थे अभी तक आये क्यों नहीं वो यही देख रहा हु.
राग्वेंद्र- ओह्ह ऐसी बात है तुम चिंता मत करो वो किसी काम मई फास गए होंगे उसने बोलै है तो वो जरूर आएंगे मंगल अपनी जुबान का पका है वो कभी वाडे तोड़ता नहीं तुम तब तक तलवार की प्रेक्टिस करो..
राज- जी गुरु जी...
फिर मई एक तलवार उठायी और उसे मई तलवार के अलग अलग डाव पेच कर रहा था मेरी स्पीड देख कर सब लोग हैरानी से देख रहे थे और जब मई प्रेक्टिस करता तो अपनी hi धुन मई रहता मुझे ाएस पास क्या होता है उसका भी धायण नहीं रहता क्यों की मई पूरी एकाग्रता से मन लगाकर प्रेक्टिस करता मेरे सब मुझे ऐसे देख रहे थे की जैसे मई कोई अजूबा hu..mai लगता प्रेक्टिस कर रहा था सामने रखे मिटटी के पुतलो पे वार कर रहा था सब पुतलो पे इतना तेजी से वार करता की किसी की गर्दन तो किसी के हाथ तो किसी पुतले का सरीर से बीच मई भाग कर रहा था और जब मई नाट्यम परहर किया पुतले पे तो उसके हर एक अंग को मैंने इतना तेजी से काटा की थोड़ी देर तो वो पुतला ऐसा hi रहा और जैसे मई रुका और उसे देखने लगा तो वो पूरी तरह से एक एक अंग अलग अलग होक गिरने लगे..
सब ऐ दुख कर तालिया बजने लगे तब मुझे पता चला की सब मुझे hi देख रहे है तब मेरी नजर सामने खड़े गुरु राग्वेंद्र और उनके साथ मंगल भाई और पापा भी मुझे दुख कर हंस के तालिया बजा रहे the..to जैसे hi मई उन्हें देखा अपनी तलवार रख कर मई भाग के पापा के पास गया और उनके पेअर छू क ैसरवाद लिए.
राज- बहगते huye.....papa .....अप्प्प यहाँ आ gaye......jake उनके पेअर छुए..
पापा- उठ बीटा अजा अपने बाप क गले नहीं लगेगा..
उन्हीने मुझे अपने गले लगा लिया और हमदोनो की आंख से आंसू निकल गए ऐ प्यार था अपने परिवार से इतना दिन दूर रहने की वजह से आंख से बहार निकल गया..
पापा - मुझे अलग किया फिर बोले ार रो मत मेरे बेटे आज तुम्हे देख कर मुझे गर्व हो रहा है..
राज- मुझे कितनो दिनों बाद आप मिले हो तो मेरे अंदर का प्यार बहार आ गया..
यहाँ िमस्टोनल दारमा चल रहा था तो माहौल को हल्का करने के लिए मंगल भाई बोले..
मंगल- हम भी ए है यहाँ हमसे तो कोई मिलता भी नहीं..
राज- हआ हां
और मेरे हसने से सब हसने lage...sab के चहरे पर मुस्कान आ गयी...
मई जेक मंगल भाई के भी पीर छू रहा था तो मंगल ने मुझे रोक दिया और गले लगा लिया..
मंगल- भाई के पीर नहीं छूटे छोटे उसे तो गले लगया जाता है..
फिर हम सब को गुरु राग्वेंद्र अंदर ले गए जहा हमें गुरुमा ने चाय और नास्ता दिया और फिर बाते सुरु हुयी..
राज- पापा आप लोग कब आये..
परताप- जब तुमने तलवार हाथ मई पकड़ के अपनी प्रेक्टिस सुरु की तब से हम खड़े वह तुम्हे hi देख रहे थे क्या कमल की तलवार बजी करता है तू हां बहुत होसियार हो गया है यहाँ aake..tumhe पता hi नहीं चला तुम्हारे आस पास क्या हो रहा है तुम तो अपनी धुन मई बस एक क बाद एक वार कर रहे थे..
राज- नहीं पापा जब भी मई प्रेक्टिस करता हु तो अपना पूरा ध्यान एक hi चीज पे केंद्रित करता हु और उसमे hi खो जाता हु पूरा मई और ऐ सब कमल मई गुरु राग्वेंद्र जी के सिखाये गए योग और धायण की मदद से कर रहा हु..
राग्वेंद्र- नहीं राज मेरा कर्त्वय तुम्हे सीखने का है लेकिन उसे कैसे ठीक तरह से उसे करना है वो काम तो तुम्हे खुद करना होता है आज तो मई भी तुम्हारी एकाग्र सकती और प्रहार डेल्ह कर दांग रह गया तुम्हारे अंदर असीम ऊर्जा भरी पड़ी है ाक उसका कुछ हिस्सा hi तुमने उपयोग किया है लेकिन जब तुम ये सब लगतार प्रेक्टिस करते रहेंगे तो उसे भी जयादा जातक हो जाएंगे tum...mai आज बहुत खुश हु की मुझे तुम्हारे जैसा शिष्य मिला...
राज- गुरु जी ऐ तो आपका बड़ापन है जो आप ऐसा कह रहे हो लेकिन मेरी इन सब खूबी तो सिर्फ अपने बहार निकली है इसी लिए असली हक़दार तो आप हो..
राग्वेंद्र- बस बीटा इसी बात पे तो तुम मेरे प्रिय शिष्य हो तुम कभी अपने आप के अंदर अभिमान नहीं आने देते छाए कोई भी बात हो उसे दुअरो को hi उसका हकदार समज ते हो ये गन तुम्हारे तुमको सब से अलग करते है बीटा ..
परतप- गुरुदेव ऐ सब तो आपकी hi सिक्सः के कारन hi हो सका है आज मई उस राज से मिला जिसे मई देखना चाहता था इसमें काफी बदलाव आ गया है अब ऐ जिमे दरी सँभालने के काबिल बन कर hi निकलेंगे यहाँ से..
राग्वेंद्र- तुम परताप कह तो सही रहे हो जब ऐ आया तब वो अलग राज था लेकिन अब जब यहाँ से निकलेगा तो वो राज कुछ अलग hi बांके निकलेंगे और ऐ जो बाते करने मई माहिर हो गया है न इसका कमल तो हमारी बहगायवान को जाता है ऐ मा बेटे की बीच की बात है बीटा..
परताप- क्या सही मई गुरुमा के साथ बेथ के बाते करता है .
सकुंतला- क्यों मई अपने बेटे क साथ बेथ के बाते नहीं कर सकती क्या..
परतप- नहीं नहीं गुरुमा ऐ आपका hi बीटा है और आप जितनी चाहो बाते कर सकती हो इसकी बड़ी बड़ी बाते करना सब आपका hi कमला hai..guru जी सही कह रहे है आपका पास से तो और भी गायनी हो जाएंगे मेरा बीटा..
राज- पापा गुरुमा के पास जैसा ज्ञान है वो सायद इस आश्रम मई किसी के पास नहीं होंगे किताबी गायन मई उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता hi न गुरूजी मई सही कह रहा हु..
राग्वेंद्र- हां बिलकुल सही पहचाना तूने ऐ और्वेद से लेले पुराणों ग्रंथो और उपनिषदों का गायन इसे एक एक सब्द आते hai..iske आगे तो मई फीका पद जाओ..
हम सब ऐसे hi बाते करते रहे फिर मई पिता जी दोनों मेरे कमरे मई गए वह बेथ के बाटे करने लगे..
राज- पापा गर पे सब कैसे hai..mom निशा और संजू ..
पापा- तेरी माँ और निशा और संजू तो मुझे रोज पूछ पूछ के हिरन करती है और बात बात पे तुम्हे याद कोफ्ते है वो बहुत याद करते है सब तुम्हे राज कब आएंगे वो आएंगे तो ऐ करेंगे वो karenge..yaar बस सब तुजे hi याद करते है ऐसा क्या जादू किया है उनपे..
राज- अरे मैंने कहा जादू किया है लेकिन अप्प याद माहि करते मुझे..
पापा- मई जब भी ऑफिस जाता हु न तब तुम्हे बहुत मिस करता हु ऐसी कोई मोमेंट नहीं होंगी जिसमे मैमे तुजे याद न किया हो बीटा ..सायद मेरे जितना तुम्हे और कोई याद नहीं करता होंगे फिर सोचता हु की वो ाही जाएंगे न 1 महीना तो है फिर वापिस आएंगे न मेरा बीटा ऐसे सोच क मन को मन लेता हु..
राज- सच पापा आप लोग मुझे इतना मिस करते है ..ी लव यो पा और गले लग जाता हु उनके..
परताप- तुम्हे याद नहीं आती बीटा हमरी..
राज- पापा मुझे आप लोगो की बहुत याद आती है दिन मई तो कैसे भी टाइम निकल जाता है लेकिन जब रात होती है न तो मई जब अकेला पड़ता हु तो आप लोगो को यद् करके हर रोज मई रोटा हु लेकिन यहाँ गुरुमा और राग्वेंगारा गुरु मुझे कभी आप लोगो की कमी महसूस नहीं होने dete.papa.
परतप- हां बीटा उमके जैसा गुरु सबको दुन्ढ़मे से नहीं milte..beta..
राज- हां अपने बिलकुल सही kaha..abb बातो माँ ने मेरे लिए क्या बेजा है..
पापा- तुम्हे किसे पता की उसने तुम्हारे लिए कुछ बेजा है..
राज- मुझे पता है माँ मेरी पसनद का हलवा तो जरूर बेजा honga..kyu सही कहा मैंने .
परताप- हां बिलकुल वह मन्ना पड़ेगा माँ बेटे का प्रेम तो कमल का है बिना बताये माँ ने कह दिया की उनका बीटा जरूर कुछ मांगे ga..or बीटा ने भी बिना बातये जान लिया की उसकी मने उसके लिए क्या बेजा honga..wah भाई वह..
राज- दीजिये न पापा माँ बनाया हलवा तो मई कब से मिस कर रहा हु..
प्रताप- अरे देता हु बीटा अभी देता हु रुक..
फिर पापा ने मुझे हलवा दिया मई कहने लगा और फिर आधा दबा रख दिया कुटिया मई और फिर हम दोनों बाते करने lage..phir वो बात बाटइ पापा ने पूरी विस्तार से की कैसे डॉ ने मेरा जीवन और उनकी वजह से हमरा इतना बड़ा बिसनेस हुवा कैसे कैसे पापा ने सब म्हणत कर के सब बनवाया hai..wo सब बाटने क बाद मई बोलै..
राज- पापा बस अब कुछ दिन और फिर मई आपका सपना पूरा करूँगा और उतना hi नहीं डॉ अंकल का बदला भी मई longa..wo जो भी लोग थे उन्हें ढूंढ कर ख़तम कर दूंगा mai..ek एक को चुन चुन के मरूंगा..
परताप- हां बीटा ऐसा hi करना है उन लोगो का लेकिन ऐसे नहीं सही प्लानिंग के साथ करना है ऐ सब पहले तुम पूरी तरह से तैयार हो जाओ बाद मई सब देख lenge..samaj गए..
राज- हां पापा समाज गया मई...
फिर इतने मई मंगल आया हमरे पास हम तीनो मिलके बाते की फिर पापा गुरु जी के पास चले गए और मंगल और मई बाटे करने लगे..
मंगल- तो भाई केसा चल रहा है यहाँ..
राज- बस बढ़िया चल रहा है तुम बताओ क्या हल है वह दिल्ही मई..
मंगल- बस सब जैसा था वैसा है यार लेकिन तेरे बिना वह मजा नहीं आता ..
राज- अरे मेरे लेटर दिया था माँ को की नहीं..
मंगल- अरे हां मई तो भूल hi गया था की भाभी ने लेटर दिया था ले ऐ लेटर तुम्हारी माँ ने दिया है..
राज- मैंने वो लेतीर लिया और खोल के पड़ने लगा उसमे माँ निशा और संजू कैसे उसे रोज याद करते है गर मई क्या हो रहा है मेरे बिना और कल्लोगे का रिजल्ट के बारे मई लिखा था जिसमे मैमे टॉप किया था मेरी क्लास मई और संजू 2ंद no पे आयी मेरे क्लास मई मनीष 3रद और 4 no पे वो कारन आया thaa..sab कुछ लिखा था उसमे और सोल्लगेबमे भी सब मुझे याद करते है कारन .मनीष और अंकिता काजल सब के बारे मि सब पढ़ के मई खुश हुवा की सब मुझे बहुत याद करए hai..or बहुत कुछ लिखा था सब पढ़ के ..
मैंने एक पेन पेपर लिया और फिर ेल और लीटर लिखा उसमे मैंने सब को याद करता हु और सब को कोंग्रटुलतिओन्स बोलने का कहा था और सबकी बहुत मिस करता हु मुझे यहाँ गुरुमा का प्यार मिलता है गुरुजीका भी सब बतया और सब कुसल मंगल है सब लिख के लास्ट मई कहा मई अब बस 15 दिनों मई आने वाला हु वापिस ऐ सब लिख के लिखा निचे ...आपका प्रिय लाडला राज ...
राज- ले भाई ऐ लेटर माँ को दे देना और हां उनको बोल न मई उन्हें बहुत याद करता हु साथ मई निशा और संजू को भी..
मंगल- भाई समाज gaya..baki बता केसा चल रहा है..
राज- बस भाई सब अच्छा चल रहा है..
मंगल- अच्छा चलो हम गुरु जी के पास जाते है..
फिर मई और मंगल गुरूजी के पास गए जो पिताजी के साथ बेथ के बाटे कर रहे the...hum गए और फिर शाम का टाइम हुवा था तो फिर से खाना खाया और फेर पापा और मंगल हमें बोलके सब से विदा लेके निक गए..
उनके जाने के बाद हम लोग ने बेथ के बाटे की फिर हम सो gaye..or सुबह से उठ के फिर से सुरु हो गया रोज का रूटीन work..or ऐसे hi दिन बीतने lage...or देखते hi देखते 15 दिन और बिट गए आज मेरा लास्ट डे था यहाँ पे मैंने बहुत कुछ सीखा था इस आसाराम मई और गुरु जी गुरुमा से सबसे अच्छा लगाव हो गया था सब के साथ मुझे बहुत ाचा लगमे लगा था ेल परिवार की तरह हम सब साथ रहे इतने दिन मेरे वो दोस्तों ने भी मुझे बहुत कुछ सिखाया था और उनके साथ भी मुझे मजा आगया था इतने दिन बस अब अल्हरी दिन था मेरे जाने के लेकिन यहाँ से जाने से पहले मेरे सरिरस ऐसा हो गया था की कोई देख ले तो देखता hi रह जाय बिना सीरत के जब मई निकलू तो मेरे बॉडी का हर एक अंग कैसा हुवा और निखार गया था उभर ke..sab विधाय ो मई मैंने महारथ हासिल कर ली थी...
बस ऐसे HI उसे याद करते करते दिन बिट रहे थे अब 4 दिन बाद सोल्लगे सुरु HI गया तो जयादा टाइम सोल्लगे मई HI जाटों लोगो का और जब सोल्लगे मई मनीष कारन सब लोग साथ मई बेथ के भी राज को बहुत याद करते THE...OR गर एके भी निशा उसके बारे मई सोच सोच कर सो जाती थी वही संजू भी उसके कहायलो मई खोयी रहती THI..BAS ऐसे HI दिन काट रहे थे और आज 5 दिन हो गए थे उसे गर से गए हुए लेकिन सब उसे अंदर HI नफर बहुत मिस कर रहे थे चाहे फ्रेंड HI फॅमिली हो या उसकी गफ हो और उतना HI नहीं कमला भी मनीष की माँ कारन की बहन और माँ काजल अंकिता सब के सब उसे याद करए थे ..
वह शिल्पा भी उसे काफी याद करती थी की कब राज आएंगे बहार से और कब वो वह दिल्ही जाए ऐसे HI याद करते सब उसको..
@स्टार्ट@
वह गए हुए मुझे 5 दिन हो गए थे मई काफी कुछ सिख रहा था और लोगो के साथ ाची से गुल मिल गया था और उतना hi नहीं मेरा इतना जल्दी सिखने की वजह से गुरु जी बहुत खुश भी थे और बाकि लोग भी बहुत खुश थे मेरे जैसा दोस्त पाके और मई भी लेकिन कभी कभी रात को याद आ जाती गर की मई अपना पर्श निकलता उसमे हमारी फॅमिली फोटो मई ने एते वकुट राखी थी वो मई ने वो निकल के डेल्ह कर सो जाता बस ीासे hi दिन बिट रहे थे और मुझे यहाँ बहुत कुछ सिखने को मिल रहा था जीवन जीने क असली मायने तो यहाँ गुरुकुल मई रह कर hi पता चलता है इतना भी आसान नहीं होता यहाँ शिक्षा ग्रहण करना .
कभी कभी गुरुमा के साथ बेथ क बाते भी करता उनको भी अच्छा लगता था वो मुझे अपने बेटे की तरह hi रखते थे मुझे कभी यहाँ माँ की कमी महसूस नहीं होने दी उन्होंने और तो और वो बहुत कुछ जानती थी हमारे बारे मई मई उनसे रोज कुछ न कुछ अलग सुनता था उन्होंने मुझे बतया और सिखाया भी की प्रेम का असली महत्त्व क्या होता है ..और किसी से भी परेम हो सकता है..
मुझे उनकी बाते सुन कर अच्छा लगता था तो एक दिन हम दोनों अकेले बैठे बात कर रहे थे तो मई वह बैठे बैठे प्रेम की बात सुनते हुए कही खो गया था तो उन्होंने मेरा चेहरा देखा फिर बोली..
सकुंतला- क्या बात है राज बीटा कहा खो गया कुछ परशानी है तो बता मुझे सायद तेरा कुछ हल मिल जाय ..
राज- kkk..kkuch नहीं गुरुमा कुछ नहीं..
शकुतंला- तुम बे जीजाक मुझे अपना दोस्त समाज कर बातो सिर्फ इ बात हमरे बीच hi रहे ंगी बोलो क्या बात है सच बातो..
राज- मुझे न एक बात बहुत सताती है
सकुंतला- क्या बोलो..
राज- देखो गुरुमा आप मुझे गलत मत समाज न क्यों की ऐ जो कुछ होता है उसमे मेरा भी दोष होता है..
सकुंतला- बोलो तो सही मई तुम्हारी कोई बात को गलत नहीं समझती सायद इस बात बाटने से तुम्हे उसका उपाय मिल जाय..
राज- क्या हमें एक से जयादा लोगो से प्यार हो सकता है..
सकुंतला- हम्म तो ऐसी बात है ऐ प्यार का मामला है तब तो तुम मुझे पूरी बात बातो तो hi मई समाज सकती hu..or समजा भी सकती हु..
राज- फिर मैंने अपने जीवन मई हुए सेक्स और उसे जुडी बाते और निशा तक लेके सबकुछ बता दिया जिसे सुन के गुरु माँ के चहरे पे स्माइल आ gayi..to मई पूरी बात बता के शर्मा रहा था..
शकुतंला- ओह्ह लगता है तुम्हारी जनम कुंडली की अनुसार तुम्हारा जीवन सुरु हो गया है ..
राज- क्या ऐ सब भी उसमे लिखा है..
सकुंतला- हां जब तुम्हारे माँ और डैड तुम्हे पहली बार यहाँ लेके आये थे तब गुरु राग्वेंद्र ने तुम्हारी पूरी कुंडली को ध्यान से बनाया और पढ़ा भी था उसमे लिखा है की तुम्हारा जनम प्यार बाटने के लिए हुवा है तुम जहा भी जाते हो वह खुशिया hi लाएंगे और उतना hi नहीं तुम राजो के वंशज हो तो स्वाभाविक है की राजा ो की कई पत्निया होती है वैसे hi तुम्हारे जीवन मई भी होंगे तुम 1 से अधिक विवाह करेंगे और इतना hi नहीं तुम जी भी औरत से शारीरिक सम्बन्ध बनोगे वो औरत तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती है और वो खुद माँ भी बन सकती है तुम्हारे अनादर जो फार्मूला डाला गया है उसे तुम्हारे हॉर्मोन्स की ताकत बहुत ज्यादा हो गयी है इसे तुम जैसे माँ बनाना चाओ वो माँ का सुख भी तुमसे प्राप्त करेंगी ऐसा भी लिखा हुवा hai..or...bhi है..
राज- और क्या गुरुमा मुझे बातो ना आप ऐ सब तो मई समाज गया लेकिन मेरी खुद की बेहेन स्व प्यार होना सहावाभिक है क्या..
सकुंतला- देखो मनुष्य कोई भी हो और उसके सामने किसी भी स्त्री हो उसे प्यार हो सकता है क्यों नहीं होंगे जब बरसो पहल पृथ्वी का निर्माण हुवा तब 2 hi लोग बजे थे और उन दो से कई लोग पीड़ा हुए और सम्ब्नध बंधे थे तो क्या वो एक दुआरे के भाई और बेहेन नहीं थे और तुम्हारी कुंडली के अनुसार तो तुम्हारे जीवन मई जयादा से जयादा तुम्हारे परिवार की कन्या ो का प्यार लिखा है और तुम से सबसे जयादा प्यार भी ध्वंगी और तुम्हारी ताकत भी बनेगी वो सब इस लिए तुम इस बारे मई जयादा सोचो मत जैसा भगवान छठा है वो होकर hi रहता hai..tumhara जनम प्यार बाटने के लिए हुवा है तुम्हे सिर्फ अपना प्यार बाटना hai.samja गए और इस प्यार से तुम्हे अपने सरे परिवार को बांध के रखना hai..samaj गए..
राज- क्या और भी कई मेरी परिवार की लड़कियों से प्यार होंगे मुझे .
सकुंतला- हां ऐसा hi समाज लो.. और इतना hi नहीं तुम्ह अपने इस पायर से पूरा परिवार एक कर सकेंगे और तुम्हे सब को एक करने क लिए कई ोर्टो के साथ शारीरिक सम्ब्नध भी बनाना पड़ेंगे तो इसके लिए तुम्हे तैयार रहना होंगे समाज गए..
राज- सब समाज गया आपने मेरे दिल का और मन का बोज हल्का कर दिया गुरुमा ऐ सब बताके..
गुरुमा- हम तो एक माधयम है बीटा सब तो नियति का खेल खेला है..
राज- क्या आप के अल्वा कोण कोण मेरी कुंडली के बारे मई जनता है..
सकुंतला- मेरे अल्वा गुरु राग्वेंद्र उनके अल्वा मंगल हु. तीन hi लोग सब कुछ जानते है..
राज- तो मेरे माता और पिता को ऐ सब मालूम नहीं है..
सकुंतला- उन्हें भी समय आने पे बताना पड़ेंगे फ़िलहाल उसका समय नहीं हुवा है जब उसका समय आएंगे तब अपने आप तुम समाज जाएंगे की उन्हें कब बताना है..
राज- समाज गया मई आपका धन्यवाद गुरु माँ..
फिर हम कुछ देर बाते की और मई जेक सो गया और ऐसे hi दिन बाईट ते गए और 15 दिन हो गए थे मुझे बहुत कुछ ट्रेनिंग मई सफलता मिली थी अभी आधी ट्रेनिंग तो पूरी कर ली थी आज वो दिन था 15 व दिन मंगल भाई मुझे मिलने आने का वादा किया था इस लिए मई सुबह से उनकी पार्टीखा कर रहा था...
राघवेंद्र- क्या हुवा बीटा तुम बार बार गेट की तरफ क्या देख रहा है मई सुबह से देख रहा हु तुम्हारा ध्यान कही और जगह hi है..
राज- गुरु जी आज 15 दिन हो गए मुझे यहाँ ए हुए और मंगल भाई मुझे वडा करके गए थे यहाँ 15 दिन बाद मिलने आने का और साथ मई पिताजी को लेके आने वाले थे अभी तक आये क्यों नहीं वो यही देख रहा हु.
राग्वेंद्र- ओह्ह ऐसी बात है तुम चिंता मत करो वो किसी काम मई फास गए होंगे उसने बोलै है तो वो जरूर आएंगे मंगल अपनी जुबान का पका है वो कभी वाडे तोड़ता नहीं तुम तब तक तलवार की प्रेक्टिस करो..
राज- जी गुरु जी...
फिर मई एक तलवार उठायी और उसे मई तलवार के अलग अलग डाव पेच कर रहा था मेरी स्पीड देख कर सब लोग हैरानी से देख रहे थे और जब मई प्रेक्टिस करता तो अपनी hi धुन मई रहता मुझे ाएस पास क्या होता है उसका भी धायण नहीं रहता क्यों की मई पूरी एकाग्रता से मन लगाकर प्रेक्टिस करता मेरे सब मुझे ऐसे देख रहे थे की जैसे मई कोई अजूबा hu..mai लगता प्रेक्टिस कर रहा था सामने रखे मिटटी के पुतलो पे वार कर रहा था सब पुतलो पे इतना तेजी से वार करता की किसी की गर्दन तो किसी के हाथ तो किसी पुतले का सरीर से बीच मई भाग कर रहा था और जब मई नाट्यम परहर किया पुतले पे तो उसके हर एक अंग को मैंने इतना तेजी से काटा की थोड़ी देर तो वो पुतला ऐसा hi रहा और जैसे मई रुका और उसे देखने लगा तो वो पूरी तरह से एक एक अंग अलग अलग होक गिरने लगे..
सब ऐ दुख कर तालिया बजने लगे तब मुझे पता चला की सब मुझे hi देख रहे है तब मेरी नजर सामने खड़े गुरु राग्वेंद्र और उनके साथ मंगल भाई और पापा भी मुझे दुख कर हंस के तालिया बजा रहे the..to जैसे hi मई उन्हें देखा अपनी तलवार रख कर मई भाग के पापा के पास गया और उनके पेअर छू क ैसरवाद लिए.
राज- बहगते huye.....papa .....अप्प्प यहाँ आ gaye......jake उनके पेअर छुए..
पापा- उठ बीटा अजा अपने बाप क गले नहीं लगेगा..
उन्हीने मुझे अपने गले लगा लिया और हमदोनो की आंख से आंसू निकल गए ऐ प्यार था अपने परिवार से इतना दिन दूर रहने की वजह से आंख से बहार निकल गया..
पापा - मुझे अलग किया फिर बोले ार रो मत मेरे बेटे आज तुम्हे देख कर मुझे गर्व हो रहा है..
राज- मुझे कितनो दिनों बाद आप मिले हो तो मेरे अंदर का प्यार बहार आ गया..
यहाँ िमस्टोनल दारमा चल रहा था तो माहौल को हल्का करने के लिए मंगल भाई बोले..
मंगल- हम भी ए है यहाँ हमसे तो कोई मिलता भी नहीं..
राज- हआ हां
और मेरे हसने से सब हसने lage...sab के चहरे पर मुस्कान आ गयी...
मई जेक मंगल भाई के भी पीर छू रहा था तो मंगल ने मुझे रोक दिया और गले लगा लिया..
मंगल- भाई के पीर नहीं छूटे छोटे उसे तो गले लगया जाता है..
फिर हम सब को गुरु राग्वेंद्र अंदर ले गए जहा हमें गुरुमा ने चाय और नास्ता दिया और फिर बाते सुरु हुयी..
राज- पापा आप लोग कब आये..
परताप- जब तुमने तलवार हाथ मई पकड़ के अपनी प्रेक्टिस सुरु की तब से हम खड़े वह तुम्हे hi देख रहे थे क्या कमल की तलवार बजी करता है तू हां बहुत होसियार हो गया है यहाँ aake..tumhe पता hi नहीं चला तुम्हारे आस पास क्या हो रहा है तुम तो अपनी धुन मई बस एक क बाद एक वार कर रहे थे..
राज- नहीं पापा जब भी मई प्रेक्टिस करता हु तो अपना पूरा ध्यान एक hi चीज पे केंद्रित करता हु और उसमे hi खो जाता हु पूरा मई और ऐ सब कमल मई गुरु राग्वेंद्र जी के सिखाये गए योग और धायण की मदद से कर रहा हु..
राग्वेंद्र- नहीं राज मेरा कर्त्वय तुम्हे सीखने का है लेकिन उसे कैसे ठीक तरह से उसे करना है वो काम तो तुम्हे खुद करना होता है आज तो मई भी तुम्हारी एकाग्र सकती और प्रहार डेल्ह कर दांग रह गया तुम्हारे अंदर असीम ऊर्जा भरी पड़ी है ाक उसका कुछ हिस्सा hi तुमने उपयोग किया है लेकिन जब तुम ये सब लगतार प्रेक्टिस करते रहेंगे तो उसे भी जयादा जातक हो जाएंगे tum...mai आज बहुत खुश हु की मुझे तुम्हारे जैसा शिष्य मिला...
राज- गुरु जी ऐ तो आपका बड़ापन है जो आप ऐसा कह रहे हो लेकिन मेरी इन सब खूबी तो सिर्फ अपने बहार निकली है इसी लिए असली हक़दार तो आप हो..
राग्वेंद्र- बस बीटा इसी बात पे तो तुम मेरे प्रिय शिष्य हो तुम कभी अपने आप के अंदर अभिमान नहीं आने देते छाए कोई भी बात हो उसे दुअरो को hi उसका हकदार समज ते हो ये गन तुम्हारे तुमको सब से अलग करते है बीटा ..
परतप- गुरुदेव ऐ सब तो आपकी hi सिक्सः के कारन hi हो सका है आज मई उस राज से मिला जिसे मई देखना चाहता था इसमें काफी बदलाव आ गया है अब ऐ जिमे दरी सँभालने के काबिल बन कर hi निकलेंगे यहाँ से..
राग्वेंद्र- तुम परताप कह तो सही रहे हो जब ऐ आया तब वो अलग राज था लेकिन अब जब यहाँ से निकलेगा तो वो राज कुछ अलग hi बांके निकलेंगे और ऐ जो बाते करने मई माहिर हो गया है न इसका कमल तो हमारी बहगायवान को जाता है ऐ मा बेटे की बीच की बात है बीटा..
परताप- क्या सही मई गुरुमा के साथ बेथ के बाते करता है .
सकुंतला- क्यों मई अपने बेटे क साथ बेथ के बाते नहीं कर सकती क्या..
परतप- नहीं नहीं गुरुमा ऐ आपका hi बीटा है और आप जितनी चाहो बाते कर सकती हो इसकी बड़ी बड़ी बाते करना सब आपका hi कमला hai..guru जी सही कह रहे है आपका पास से तो और भी गायनी हो जाएंगे मेरा बीटा..
राज- पापा गुरुमा के पास जैसा ज्ञान है वो सायद इस आश्रम मई किसी के पास नहीं होंगे किताबी गायन मई उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता hi न गुरूजी मई सही कह रहा हु..
राग्वेंद्र- हां बिलकुल सही पहचाना तूने ऐ और्वेद से लेले पुराणों ग्रंथो और उपनिषदों का गायन इसे एक एक सब्द आते hai..iske आगे तो मई फीका पद जाओ..
हम सब ऐसे hi बाते करते रहे फिर मई पिता जी दोनों मेरे कमरे मई गए वह बेथ के बाटे करने लगे..
राज- पापा गर पे सब कैसे hai..mom निशा और संजू ..
पापा- तेरी माँ और निशा और संजू तो मुझे रोज पूछ पूछ के हिरन करती है और बात बात पे तुम्हे याद कोफ्ते है वो बहुत याद करते है सब तुम्हे राज कब आएंगे वो आएंगे तो ऐ करेंगे वो karenge..yaar बस सब तुजे hi याद करते है ऐसा क्या जादू किया है उनपे..
राज- अरे मैंने कहा जादू किया है लेकिन अप्प याद माहि करते मुझे..
पापा- मई जब भी ऑफिस जाता हु न तब तुम्हे बहुत मिस करता हु ऐसी कोई मोमेंट नहीं होंगी जिसमे मैमे तुजे याद न किया हो बीटा ..सायद मेरे जितना तुम्हे और कोई याद नहीं करता होंगे फिर सोचता हु की वो ाही जाएंगे न 1 महीना तो है फिर वापिस आएंगे न मेरा बीटा ऐसे सोच क मन को मन लेता हु..
राज- सच पापा आप लोग मुझे इतना मिस करते है ..ी लव यो पा और गले लग जाता हु उनके..
परताप- तुम्हे याद नहीं आती बीटा हमरी..
राज- पापा मुझे आप लोगो की बहुत याद आती है दिन मई तो कैसे भी टाइम निकल जाता है लेकिन जब रात होती है न तो मई जब अकेला पड़ता हु तो आप लोगो को यद् करके हर रोज मई रोटा हु लेकिन यहाँ गुरुमा और राग्वेंगारा गुरु मुझे कभी आप लोगो की कमी महसूस नहीं होने dete.papa.
परतप- हां बीटा उमके जैसा गुरु सबको दुन्ढ़मे से नहीं milte..beta..
राज- हां अपने बिलकुल सही kaha..abb बातो माँ ने मेरे लिए क्या बेजा है..
पापा- तुम्हे किसे पता की उसने तुम्हारे लिए कुछ बेजा है..
राज- मुझे पता है माँ मेरी पसनद का हलवा तो जरूर बेजा honga..kyu सही कहा मैंने .
परताप- हां बिलकुल वह मन्ना पड़ेगा माँ बेटे का प्रेम तो कमल का है बिना बताये माँ ने कह दिया की उनका बीटा जरूर कुछ मांगे ga..or बीटा ने भी बिना बातये जान लिया की उसकी मने उसके लिए क्या बेजा honga..wah भाई वह..
राज- दीजिये न पापा माँ बनाया हलवा तो मई कब से मिस कर रहा हु..
प्रताप- अरे देता हु बीटा अभी देता हु रुक..
फिर पापा ने मुझे हलवा दिया मई कहने लगा और फिर आधा दबा रख दिया कुटिया मई और फिर हम दोनों बाते करने lage..phir वो बात बाटइ पापा ने पूरी विस्तार से की कैसे डॉ ने मेरा जीवन और उनकी वजह से हमरा इतना बड़ा बिसनेस हुवा कैसे कैसे पापा ने सब म्हणत कर के सब बनवाया hai..wo सब बाटने क बाद मई बोलै..
राज- पापा बस अब कुछ दिन और फिर मई आपका सपना पूरा करूँगा और उतना hi नहीं डॉ अंकल का बदला भी मई longa..wo जो भी लोग थे उन्हें ढूंढ कर ख़तम कर दूंगा mai..ek एक को चुन चुन के मरूंगा..
परताप- हां बीटा ऐसा hi करना है उन लोगो का लेकिन ऐसे नहीं सही प्लानिंग के साथ करना है ऐ सब पहले तुम पूरी तरह से तैयार हो जाओ बाद मई सब देख lenge..samaj गए..
राज- हां पापा समाज गया मई...
फिर इतने मई मंगल आया हमरे पास हम तीनो मिलके बाते की फिर पापा गुरु जी के पास चले गए और मंगल और मई बाटे करने लगे..
मंगल- तो भाई केसा चल रहा है यहाँ..
राज- बस बढ़िया चल रहा है तुम बताओ क्या हल है वह दिल्ही मई..
मंगल- बस सब जैसा था वैसा है यार लेकिन तेरे बिना वह मजा नहीं आता ..
राज- अरे मेरे लेटर दिया था माँ को की नहीं..
मंगल- अरे हां मई तो भूल hi गया था की भाभी ने लेटर दिया था ले ऐ लेटर तुम्हारी माँ ने दिया है..
राज- मैंने वो लेतीर लिया और खोल के पड़ने लगा उसमे माँ निशा और संजू कैसे उसे रोज याद करते है गर मई क्या हो रहा है मेरे बिना और कल्लोगे का रिजल्ट के बारे मई लिखा था जिसमे मैमे टॉप किया था मेरी क्लास मई और संजू 2ंद no पे आयी मेरे क्लास मई मनीष 3रद और 4 no पे वो कारन आया thaa..sab कुछ लिखा था उसमे और सोल्लगेबमे भी सब मुझे याद करते है कारन .मनीष और अंकिता काजल सब के बारे मि सब पढ़ के मई खुश हुवा की सब मुझे बहुत याद करए hai..or बहुत कुछ लिखा था सब पढ़ के ..
मैंने एक पेन पेपर लिया और फिर ेल और लीटर लिखा उसमे मैंने सब को याद करता हु और सब को कोंग्रटुलतिओन्स बोलने का कहा था और सबकी बहुत मिस करता हु मुझे यहाँ गुरुमा का प्यार मिलता है गुरुजीका भी सब बतया और सब कुसल मंगल है सब लिख के लास्ट मई कहा मई अब बस 15 दिनों मई आने वाला हु वापिस ऐ सब लिख के लिखा निचे ...आपका प्रिय लाडला राज ...
राज- ले भाई ऐ लेटर माँ को दे देना और हां उनको बोल न मई उन्हें बहुत याद करता हु साथ मई निशा और संजू को भी..
मंगल- भाई समाज gaya..baki बता केसा चल रहा है..
राज- बस भाई सब अच्छा चल रहा है..
मंगल- अच्छा चलो हम गुरु जी के पास जाते है..
फिर मई और मंगल गुरूजी के पास गए जो पिताजी के साथ बेथ के बाटे कर रहे the...hum गए और फिर शाम का टाइम हुवा था तो फिर से खाना खाया और फेर पापा और मंगल हमें बोलके सब से विदा लेके निक गए..
उनके जाने के बाद हम लोग ने बेथ के बाटे की फिर हम सो gaye..or सुबह से उठ के फिर से सुरु हो गया रोज का रूटीन work..or ऐसे hi दिन बीतने lage...or देखते hi देखते 15 दिन और बिट गए आज मेरा लास्ट डे था यहाँ पे मैंने बहुत कुछ सीखा था इस आसाराम मई और गुरु जी गुरुमा से सबसे अच्छा लगाव हो गया था सब के साथ मुझे बहुत ाचा लगमे लगा था ेल परिवार की तरह हम सब साथ रहे इतने दिन मेरे वो दोस्तों ने भी मुझे बहुत कुछ सिखाया था और उनके साथ भी मुझे मजा आगया था इतने दिन बस अब अल्हरी दिन था मेरे जाने के लेकिन यहाँ से जाने से पहले मेरे सरिरस ऐसा हो गया था की कोई देख ले तो देखता hi रह जाय बिना सीरत के जब मई निकलू तो मेरे बॉडी का हर एक अंग कैसा हुवा और निखार गया था उभर ke..sab विधाय ो मई मैंने महारथ हासिल कर ली थी...