अपडेट 117
आओ गौरव.
निशा की पापा ने एक मुस्कान के साथ गौरव का स्वागत किया.
गौरव भी बिना कुछ बोले घर के अंदर आ जाता है.
न. डैड:- और bataao...Kya चल रहा है आज कल?
गौरव:- सब कुछ ठीक है.
एक फींका सा जवाब दिया गौरव ने.
न. डैड:- परेशान दिख रहे ho!!!Koi बात है क्या?
गौरव:- बात hi कुछ ऐसा है Uncle...Kaise बताओ कुछ समझ में नहीं आ रहा है.
गौरव परेशान होने का दिखावा अच्छे से कर रहा tha.Karta भी क्यों नहीं? इससे अच्छा मौका शायद hi उससे कभी मिलता.
बात ये था की अतुल और निशा कॉलेज लाइफ कम्पलीट होने के बाद एक हेल्थ अवेयरनेस प्रोग्राम के लिए एक गांव गए थे 3 दिन के liye...Jaha फ़ोन नेटवर्क था hi नहीं...3 दिन तक अतुल और निशा से कांटेक्ट करना लगभग नामुमकिन tha...Yahi मौका था जितना हो सके उतना झूठ बोलने का और निशा की पापा को अतुल के खिलाफ भड़काने ka...Nisha भी यहाँ नहीं थी जो अपने पापा को इमोशनल हो कर किसी तरह अपने पापा से अपनी बात मनवाती.
न. डैड:- बेफिक्र हो कर bolo...Kya बात है?
गौरव:- वो अतुल ने कुछ कहा था गांव जाने से पहले.
न. डैड:- मुझे भी बता सकता tha...Khair तुम bolo...Kya कहा था अतुल ने?
अब्ब निशा की पापा भी थोड़ा सीरियस हो गए थे.
गौरव:- शादी से पहले कुछ कंडीशंस.
न. डैड:- पूरी बात तो बताओ?
अब्ब गौरव की बात से वो छिड़ने भी लगे थे जो गौरव चाहता tha...Nisha की पापा को थोड़ा बहुत अंदाजा तोह हो गया था लेकिन वो गौरव की मुंह से सुन्ना चाहते थे.
गौरव:- दहेज़...40 लक्ष की.
न. डैड:- व्हाट?
उनकी आवाज में गुस्से के साथ साथ हैरानी भी था.
गौरव चुप रहा.
न. डैड:- लेकिन अतुल ने तोह पहले ये बात कभी नहीं कहा tha...Aur ना hi ऐसी बात तुम्हारे पेरेंट्स के साथ हुआ था.
गौरव:- ये सब तोह मुझे पता नहीं Uncle...Lekin जाने से पहले अतुल ने ये बात मुझे आपको बता देने के लिए कहा था.
निशा की पापा कुछ नहीं kehte...Abhi भी वो हैरानी में कुछ सोच रहे थे.
गौरव:- तो क्या मई हां समझू अंकल?
न. डैड:- बिलकुल नहीं.
गौरव:- (बड़बड़ाते हुए) पहले भी बोलै था अतुल को इनसे रिश्ता मत jod...Lekin मानता hi नहीं.
गौरव ने धीरे से बड़बड़ाते हुए कहा और वो काफी था निशा की पापा की कानो तक पहुँचने में.
न. डैड:- क्या मतलब?
गौरव:- कुछ nahi...Lekin आप को प्रॉब्लम क्या है? सिर्फ 40 लक्ष की hi तो बात है.
न. डैड:- 40 लक्ष तो दूर की बात hai...Mai 40 पैसे भी नहीं dunga...Mai दहेज़ जैसी चीजों की सख्त खिलाफ हूँ.
निशा की पापा ने सख्त आवाज में कहा.
गौरव:- लेकिन ये निशा के लिए hi तो है? आखिर फायदा निशा को hi तो होगा.
न. डैड:- और वो कैसे?
गौरव:- अतुल ये पैसा आगे की पढ़ाई के लिए मांग रहा hai...MS करने के liye...Aap hi सोचिये जब वो न्यूरोसर्जन बनेगा तोह कितना पैसा कमायेगा और कितनी अच्छी तरह से निशा का ख्याल रखेगा?
न. डैड:- मैंने इस लिए इस रिश्ते को सहमति नहीं दिया था की अतुल बाद में ज्यादा या काम पैसा kamayega...Sirf इस लिए क्यों की अतुल के रूप में मैंने निशा के लिए अच्छा जीवनसाथी देखा था.
और अतुल को क्या जरुरत पड़ने लगा पैसों का पढ़ाई के लिए? इतना अच्छा स्टूडेंट hai...Mehnat करेगा तो फुल स्कालरशिप मिल जाएगा उससे.
गौरव:- आप hi sochiye...Itna अच्छा स्टूडेंट है क्युकी आज तक पढ़ाई में म्हणत करते आया hai...Abb म्हणत करते करते थक गया है wo...Abb उससे और नहीं होगा.
न. डैड:- जिस दिन इंसान म्हणत करना बंद कर de...Uss दिन से उसका कोई मोल नहीं rehta...Aur ऐसे इंसान किसी काम के nahi...Jindagi में सुख और दुःख दोनों पल आते hain...Aise इंसान दुःख के पल का सामना कैसे करेंगे जब वो इतनी जल्दी हार मान लेंगे.
अतुल को अपनाने की एक वजह ये भी था की वो एक मेहनती लड़का है.
गौरव:- बस अंकल आप अपने ज्ञान अपने पास hi rakhiye...Aur मेरा भाई का और बेइज़्ज़ती मत kijiye...Mai बर्दास्त नहीं कर पाऊंगा.
आप बस इतना बता दीजिये आपको अतुल का शर्त मंजूर है या नहीं?
न. डैड:- बिलकुल nahi...Mai एक बार अतुल से बात karunga...Agar उसका यही शर्त है तो ये रिश्ता ख़त्म.
निशा की पापा भी अब्ब काफी हद्द तक गुस्सा हो गए थे.
गौरव:- आप हमारे बेइज़्ज़ती कर रहे है?
न. डैड:- जैसा तुम सोचो.
निशा की पापा ने गौरव के बिलकुल करीब आ कर बोले आँखों में आँख दाल कर.
गौरव अपना एक मुख्या पाशा फेंक देता है.
वो खिंच कर एक थप्पड़ निशा की पापा को मारने hi वाले थे की निशा की पापा बिच में hi उसके हाथ को पकड़ लेते है.
न. डैड:- बच्चे हो tum...Nadaan समझ कर छिड़ रहा hu...Warna.
इतना कह कर निशा की पापा गौरव के हाथ को मरोड़ने लगते hai...Gaurav दर्द में कराहने लगता है.
न. डैड:- हड्डियों को लकड़ी की तरह तोड़ दूंगा.
इतना कह कर वो गौरव को दूर धकेल देते है.
न. डैड:- निकल जाओ abhi...Warna मुझे धक्का मार कर भी निकालना आता है.
गौरव भी जाने लगता hai...Jab वो गेट में पहुँचता है तब.
न. डैड:- और haan...Jab अतुल वापस आ जाए तोह एक बार भेज देना मुझसे बात करने के लिए.
गौरव वह से चला जाता hai...Usse अपना बेइज़्ज़ती से कोई फर्क नहीं padta...Wo अपना काम कर चूका था.
घर से बाहर निकलते hi वो रवि को मैसेज कर देता है. "मैंने अपना काम कर दिया hai...Abb तुम्हारा बारी."
फिर गौरव जाता है अपना आखिरी और सबसे जरुरी काम को अंजाम देने.
वही निशा की पापा अभी भी हॉल में बैठे थे परेशान और कुछ सोंचते hue...Tabhi पीछे से निशा की माँ आती है लंच रेडी करने के बाद.
न. माँ:- क्या हुआ? आप इतने परेशान क्यों है? और वो गौरव? क्या कह रहा था? बातें तोह ऊँची आवाज में कर रहा था.
[Friends aane wale week mai thoda free hun...Aur koshish karunga jyada se jyada updates post karne ki...Jitna jaldi aap sab ka reviews aayega utna jaldi updates post hoga kyuki mujhe reviews ka wait karna nahi padega.

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