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- Dec 5, 2013
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विक्की- मम्मी देखो उजाला होने लगा है साब से पहले कुछ खाने का इंतज़ाम करना होगा..
रजनी- हाँ सही है. मई भी तुम्हारी मदत करती हु
विक्की- हाँ टिक है मम्मी देखो यहाँ नारियल पानी की थो कमी है नहीं . सिर्फ कहने का जुगाड़ ढूढ़ना होगा
रजनी- ok हनी..
विक्की - और हाँ हमको साम होने से पहले एक सेलटर हाउस भी बनना होगा रहने क लिए
रजनी - ( सेक्सली) हाँ.. ी क्नोव यू विल दो आईटी..
विक्की भी अपनी मम्मी का सेक्सी फेस देखता है और स्माइल करता है उफ़.. अभी सुबह थो उसकी मम्मी ने इसी सेक्सी फेस से लुंड का पानी निचोड़ लिया था
विक्की- (उफ़.. कुछ देर पहले थो अपने मुझे शांत किया था .. माँ.. ऐसे ऐडा से मात देखो और काम करने दो )
रजनी- मई क्या करू मुझे बटवो हनी..
विक्की- मम्मी आप न जो हमरी बोट पेड़ से बड़ी पड़ी है देखो उसमे को नेट जाल टाइप का है या कुछ और नहीं तो अपने बेग मई भी देखो मई तब तक ये लकड़ियों का पिलर लगता हु
रजनी दिए गए इंस्ट्रक्शन को फॉलो करती है और अपनी कच्ची पहनी गांड मटीले हुए आइलैंड क उस तारीफ निकलने लेती है
विक्की की नज़ारे भी अपनी माँ की गांड पर ताब तक रहती है जब तक वो दूर जा क ोहजल न हो गयी हो
वो फटाफट बड़ी बड़ी लकड़ियों क काम्बे लगता है जिससे वो अपने और अपने माँ क लिए कोई रहनबसेरा बना सके उदार रजनी को बोट मई एक नेट जल मिल जाता है वो बड़ी कुश नज़र अति है .
उनका बैग भी बोट है एक साइड मई मिल जाता है वो राइट मई बैग को खोलती है .
काफी देर होने जाने क बाद करीब सुबह 9.45 तक
विक्की काम चालू पर 1 हूत बना लेता है. कोई कस नहीं पर रात को टांड से बचने क लिए ये काफी था.. उस्सने हूत थो बना ली पर इतनी देर होने पर भी उसकी माँ नहीं आयी थो उसको फ़िक्र सटने लगती है.
विक्की - सहित मम्मी थो वह से आयी नहीं
उसके कदम तेज़ी से अपनी माँ की और बड चलते है.. उसको अपनी माँ बोट क पास नहीं देकयी देती थो उसका डिल की दरकने बढ़ने लग जाती है..
विक्की- मम्मी .. मुम्ममय... कहा हो आप... मम्मी..
वो इधर उदार आवाज़ दे दे कर खोजने लता है सामने दूर एक अलग किनारे की चट्टान क पास उसी काळा काळा बाल उड़ाते से देखई देते है
वो वही चल पड़ता है.
बालो क साथ साथ उसको अपनी माँ क साइड फेस देकयी देता है जो की आँखे मुड़े आसमान की और है .. उसकी साँस मई साँस अति है पर वो जो देखता है उसका पेण्ट ने पैर से तम्बू बना hi दिया..
रजनी- आह... अहा.... ससससस.... आह.. vi..iicky ससस..
एक साइड नेट जाली पड़ी थी दूसरी साइड बैग चट्टान क एक सिरी से आड़ ले क उसकी माँ पंतय को साइड किये अपने छूट की गुलाबी लिप्स मई उंगल कर रही थी और दूसरे हाट से अपने चुचवो को जोर जोर से मसल रही थी...
विक्की- उह माँ.... व्हाई शी एक्ट सो डर्टी??

रजनी- vick..y प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़ आह ससस... मां.. विक्की ससस..
आज उसकी माँ कुछ सुन या देख क मुट्ठ नहीं मार रही थी आज वो अपने बेटे को सोच, उसका नाम बड़बड़ाते अपनी छूट मई ऊँगली कर रही थी .. और सिसकारी ले ले क उसका नाम ले रही थी..
रजनी- ुम्मम्ह प्ल्ज़ विक्की . इतस तू बिग आह विक्की उम्म्म ससससस..
विक्की भी अपनी माँ को डिसट्रब नहीं करता और पास जा क अपना तना हुआ तम्बू माँ क एकदम पास लेजाता है ... वो ये जानने क लिए भी इच्छुक है वुसकी माँ क्या करेगी. सरमएगी या अपना चालू काम पुर करेगी..
रजनी-- ममम विक्की तुम आगये मेरी पसस बीटा.. उम्म्म.. उम्म्ह.
वो बिलकुल भी नहीं सरमाती बस कामुकता से लुंड चुम्म्म लेती है और जइब से बेटे क कच्चे को बहार से चेतना सुरु कर देती है
विक्की- वोओओओ.... मा. (अब पता चला aah..aabhi तक वापस क्यों नहीं ayi).uff.. सो सॉरी मम्मी .. रिलेक्स मई आपकी हेल्प करता हु
वो अपनी माँ से दूर हो क उसके दोनो टैंगो क बिच घुटनो क साथ बैठ जाता है और प्यार से उसकी दूडिया जंगो को पकड़ क अपने मुँह क लिए जगह बनता है . सामने उसकी माँ की गुलाबी लिप वाली छूट जैसे वुसका hi इंतज़ार कर रही थी
बिना पल गौए वो अपनी जीब अपनी माँ की क्लीट पर रख देता है
रजनी - ाववऊओं... माँ... àahsss.s.
वो अपनी गोल मटोल गांड उठा क सिसकिर्या लेती है जोर जोर से
वुसके क लिए ये अहसास न्य था . उसको थो पता hi नहीं था की मर्द असा भी करते है जो आज उसका बीटा कर रहा था जिसको उसने यही से पैदा किया था.. आज वही बीटा जनम डेन वाली माँ की छूट को चाट रा था ..
रजनी- उम्मंस ss...aaah... सष उम्मम्मम आआà ..
रजनी को जायदा देर नहीं लगी और वो चिल्ला चिल्ला क कुह्ले आसमान और वीरने टापू. मई जरने लगी .
तो बे कॉन्टिनुई..
रजनी- हाँ सही है. मई भी तुम्हारी मदत करती हु
विक्की- हाँ टिक है मम्मी देखो यहाँ नारियल पानी की थो कमी है नहीं . सिर्फ कहने का जुगाड़ ढूढ़ना होगा
रजनी- ok हनी..
विक्की - और हाँ हमको साम होने से पहले एक सेलटर हाउस भी बनना होगा रहने क लिए
रजनी - ( सेक्सली) हाँ.. ी क्नोव यू विल दो आईटी..
विक्की भी अपनी मम्मी का सेक्सी फेस देखता है और स्माइल करता है उफ़.. अभी सुबह थो उसकी मम्मी ने इसी सेक्सी फेस से लुंड का पानी निचोड़ लिया था
विक्की- (उफ़.. कुछ देर पहले थो अपने मुझे शांत किया था .. माँ.. ऐसे ऐडा से मात देखो और काम करने दो )
रजनी- मई क्या करू मुझे बटवो हनी..
विक्की- मम्मी आप न जो हमरी बोट पेड़ से बड़ी पड़ी है देखो उसमे को नेट जाल टाइप का है या कुछ और नहीं तो अपने बेग मई भी देखो मई तब तक ये लकड़ियों का पिलर लगता हु
रजनी दिए गए इंस्ट्रक्शन को फॉलो करती है और अपनी कच्ची पहनी गांड मटीले हुए आइलैंड क उस तारीफ निकलने लेती है
विक्की की नज़ारे भी अपनी माँ की गांड पर ताब तक रहती है जब तक वो दूर जा क ोहजल न हो गयी हो
वो फटाफट बड़ी बड़ी लकड़ियों क काम्बे लगता है जिससे वो अपने और अपने माँ क लिए कोई रहनबसेरा बना सके उदार रजनी को बोट मई एक नेट जल मिल जाता है वो बड़ी कुश नज़र अति है .
उनका बैग भी बोट है एक साइड मई मिल जाता है वो राइट मई बैग को खोलती है .
काफी देर होने जाने क बाद करीब सुबह 9.45 तक
विक्की - सहित मम्मी थो वह से आयी नहीं
उसके कदम तेज़ी से अपनी माँ की और बड चलते है.. उसको अपनी माँ बोट क पास नहीं देकयी देती थो उसका डिल की दरकने बढ़ने लग जाती है..
विक्की- मम्मी .. मुम्ममय... कहा हो आप... मम्मी..
वो इधर उदार आवाज़ दे दे कर खोजने लता है सामने दूर एक अलग किनारे की चट्टान क पास उसी काळा काळा बाल उड़ाते से देखई देते है
वो वही चल पड़ता है.
बालो क साथ साथ उसको अपनी माँ क साइड फेस देकयी देता है जो की आँखे मुड़े आसमान की और है .. उसकी साँस मई साँस अति है पर वो जो देखता है उसका पेण्ट ने पैर से तम्बू बना hi दिया..
रजनी- आह... अहा.... ससससस.... आह.. vi..iicky ससस..
एक साइड नेट जाली पड़ी थी दूसरी साइड बैग चट्टान क एक सिरी से आड़ ले क उसकी माँ पंतय को साइड किये अपने छूट की गुलाबी लिप्स मई उंगल कर रही थी और दूसरे हाट से अपने चुचवो को जोर जोर से मसल रही थी...
विक्की- उह माँ.... व्हाई शी एक्ट सो डर्टी??
रजनी- vick..y प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़ आह ससस... मां.. विक्की ससस..
आज उसकी माँ कुछ सुन या देख क मुट्ठ नहीं मार रही थी आज वो अपने बेटे को सोच, उसका नाम बड़बड़ाते अपनी छूट मई ऊँगली कर रही थी .. और सिसकारी ले ले क उसका नाम ले रही थी..
रजनी- ुम्मम्ह प्ल्ज़ विक्की . इतस तू बिग आह विक्की उम्म्म ससससस..
विक्की भी अपनी माँ को डिसट्रब नहीं करता और पास जा क अपना तना हुआ तम्बू माँ क एकदम पास लेजाता है ... वो ये जानने क लिए भी इच्छुक है वुसकी माँ क्या करेगी. सरमएगी या अपना चालू काम पुर करेगी..
रजनी-- ममम विक्की तुम आगये मेरी पसस बीटा.. उम्म्म.. उम्म्ह.
वो बिलकुल भी नहीं सरमाती बस कामुकता से लुंड चुम्म्म लेती है और जइब से बेटे क कच्चे को बहार से चेतना सुरु कर देती है
विक्की- वोओओओ.... मा. (अब पता चला aah..aabhi तक वापस क्यों नहीं ayi).uff.. सो सॉरी मम्मी .. रिलेक्स मई आपकी हेल्प करता हु
वो अपनी माँ से दूर हो क उसके दोनो टैंगो क बिच घुटनो क साथ बैठ जाता है और प्यार से उसकी दूडिया जंगो को पकड़ क अपने मुँह क लिए जगह बनता है . सामने उसकी माँ की गुलाबी लिप वाली छूट जैसे वुसका hi इंतज़ार कर रही थी
बिना पल गौए वो अपनी जीब अपनी माँ की क्लीट पर रख देता है
रजनी - ाववऊओं... माँ... àahsss.s.
वो अपनी गोल मटोल गांड उठा क सिसकिर्या लेती है जोर जोर से
वुसके क लिए ये अहसास न्य था . उसको थो पता hi नहीं था की मर्द असा भी करते है जो आज उसका बीटा कर रहा था जिसको उसने यही से पैदा किया था.. आज वही बीटा जनम डेन वाली माँ की छूट को चाट रा था ..
रजनी- उम्मंस ss...aaah... सष उम्मम्मम आआà ..
रजनी को जायदा देर नहीं लगी और वो चिल्ला चिल्ला क कुह्ले आसमान और वीरने टापू. मई जरने लगी .
तो बे कॉन्टिनुई..