Incest Sex Kahani Kasoor - Page 3 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Kasoor

अपडेट 18

अब तक

अपने पढ़ा की कैसे अनुभव ने नकुल को अपने इंवेंट किये हुए मेडिसिन लगा देता है और फिर अपना आखरी अविष्कार जो सबसे खास और अनोमल था उसे अपनी बेटी कनिका को लगा दिया बहुत hi मस्कट के बाद.

अब आगे

अनुभव अपनी बेटी कनिका और नकुल को देखने लगा. फिर समय समय पर उन दोनों के शरीर को निरक्षण भी करता. उन दोनों का शरीर चेक करने के बाद उसको बिस्वास हो जाता की उन्हें कुछ नहीं होने वाला. क्युकी उन दोनों के हार्ट बीट्स नार्मल हो गयी थी. उन दोनों को देखते देखते अनुभव को पता hi नहीं चला कब उसको नींद आ गयी.

अनुभव की नींद तो तब खुल जब किसी के कराहने आवाज़ उसके कानो में पड़ी. जब अनुभव उठ कर सामने देख तोह कनिका को होस आने लगा था,

तोह वही नकुल जस के तस लेता हुआ था. अनुभव जल्दी से वह खड़ा हुआ और कनिका के पास आ कर उसको चेक करने लग गया.

"पिता जी मैं बिलकुल ठीक हु. आप मेरी चितना छोड़िये, पहले आप ये बताईये नकुल कैसा है." कनिका अपने मां से कही, कहने को तोह अनुभव उसका मां hi लगता था पर कनिका अनुभव को अपना पिता hi मानती थी. अनुभव अपनी बेटी की बात सुन, उसको चेक करते हुए बोलै, "बेटी कनिका नकुल को अभी होस नहीं आया है. पर जल्दी hi उसे होस आ जायेगा क्योकि उसके शरीर की क्रिया बिलकुल ठीक है. अब तुम मुझे चेक करने दो."

"ठीक है पिता जी. पिता जी अब से मैं hi नकुल की देख भल करुँगी. जब तक उसको होस नहीं आ जाता." अनुभव कनिका की शारीरिक प्रक्रिया एक के बाद चेक करना लगा. तोह वही कनिका अपनी पिता को बिना रोके अपनी बात कही. अपनी बात कह कर जैसे hi कनिका ने नकुल की तरफ देखि, तोह उसने पाया की नकुल को होस आ रहा था. कनिका अनुभव को अपने से जल्दी अलग की और कड़ी हो नकुल के पास आ गयी. .

"क्या हुआ कनिका" अनुभव कनिका के इस बर्ताव को देख ये सवाल उसे किया. जिस पर कनिका ने कहा, "पिता जी नकुल को होस आ रहा है." कनिका के चेहरे पर ख़ुशी साफ़ देखि जा सकती थी. उसके चेहरे पर जो नूर था उसे देख कर किसका का भी मान एक पल ले लिए खो जाता, और अनुभव का हाल भी कुछ वैसा hi था अभी के लिए.

"एक मिनट बीटा मुझे नकुल को चेक करने दो." अनुभव कनिका को एक तरफ करते हुए उसे कहा और उसके बाद अनुभव ने नकुल को चेक करना सुरु कर दिया.

"पिता जी नकुल कैसा है अब." कनिका व्याकुलता पूर्वक अपने पिता से पूछी. अनुभव कनिका की मैं की दशा को अच्छी तरह से समझता था की उसकी बेटी नकुल से कितना प्यार करती है. अनुभव कनिका को धीरज धरती हुए बोलै, "कनिका तुम चिंता मई करो अब नकुल ठीक है." नकुल को अपनी आँखे खोलते हुए देख कनिका ख़ुशी से झूम उठी थी. अनुभव भी बाबत खुश था और अपने ख़ुशी को शयद hi वह इस समय दर्शा पता.

"नकुल अब तुम कैसा महसूस कर रहे हो." अनुभव ने नकुल से पूछा.

"पिता जी मैं बिलकुल ठीक हु और पर मुझे कुछ भरपान महसूस हो रहा है." नकुल अपने जिस्म में हो रहे परिवर्तन को देख कर अनुभव से कहा. कनिका ये सुन कर चिंतित हो गयी पर उसने कुछ कहा नहीं. क्योकि उसका प्यार बिलकुल ठीक थक उसके सामने मौजूद था.

"बीटा नकुल ये पास कुछ hi पालो के लिए है. बहुत hi जल्दी तुम्हारा शरीर पहले से कही ज्यादा मजबूत और फुर्तीला हो जायेगा. तुम थोड़े देर आराम करो. उसके बाद तुम कनिका को ले कर यहाँ से दिल्ली चले जाओ." अनुभव कनिका की और देखते हुए ये बात नकुल से कही थी. नकुल भी अनुभव की बार सुन अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया. उसके बाद अनुभव उन दोनों को अकेल छोड़ वह से निकल गया.

"तुम कुछ परेशां सी लग रही हो कनिका. कही तुम मुझे लेकर तोह परेशां तोह नहीं हो न." नकुल उठ कर बैठ गया था और बिस्तर का तक लेकर के. फिर कनिका की और देखते हुए उसने ये कनिका से पूछा. कनिका ने भी अपनी गर्दन हाँ में हिला कर उसकी बात कर समर्थन दे दी की वह उसी के वजह से परेशां थी.

"तुम इस तरह से पेरशान नहीं होना चाहिए कनिका. क्योकि आने वाले वक़्त में इस तरह की नज़ाने कितनी परेशानी आने वाली है हमारे जीवन में." नकुल कनिका को अपनी बाँहों में भर कर उसके सर पर हाथ फिरते हुए बोलै. कनिका भी नकुल के इस स्पर्श से बहुत hi खुश हो गयी थी और उसका मैं किसी शांत सरोवर की तरह शांत हो गया था.

"तुम्हारे ऊपर आने वाली हर मुसीबत को पहले मुझसे टकराना hoga.......Uske बाद तुमसे." कनिका अपनी बात को बहुत hi बिना किसी भाव के नकुल से बोल गयी. तोह नकुल कनिका बात सुन कर मुस्कुरा दिया

"अच्छा सुन अब हमें यहाँ से निकलना चाहिए. वर्ण हम यहाँ फास सकते है." कनिका को अपने से अलग कर नकुल ने ये बात कही थी. उसके बाद नकुल कनिका को लेकर निकल गया. जब वह हॉल में आया तोह अनुभव सोफे पर बैठ हुआ उनका इंतज़ार कर रहा था और उसके हाथ में कुछ कक्जाद थे. नकुल अनुभव के सामने पहुंच कर बोलै, "पिता जी अब आपको किसीसे डरने की जरुरत नहीं है. मैं तुम्हे देख लूंगा."

"बीटा अभी तुम कमजोर हो. मैं नहीं चाहता तुम्हें कुछ हो. अगर तुम्हे कुछ हो गया तोह कनिका भी जीवित नहीं रहेगी. इसलिए तुम्हे कनिका को लेकर अभी निकलना होगा." अनुभव नकुल को प्यार से समझते हुए बोलै. उसका कहना भी बिलकुल सही था क्योकि नकुल के शरीर को मजबूत होने में समय लगने वाला था, अगर अभी उसने लडडत तोह, उसे कुछ नहीं तोह पर उसको गंभीर चोट आ सकती थी, जिस वजह से वह बेहोस भी हो सकता था, फिर नकुल को जान से मरना की धमकी दे कर कनिका और उसको उनके साथ जाने पर मजबूर कर देते. जो किसी भी तरह से न उनके लिए सही था और नहीं देश के लिए.

"कप मेरी चिंता मत कीजिये अब मैं सबको देख लूंगा. चाहे वो कितना hi तककटवार क्यों न हो." नकुल ने एक बार फिर से कहा.

"मैं मंटा हु तुम सब लड़ भी सकते. अगर कनिका को उनमे से किसने कुछ कर दिया तोह तब तुम क्या करोगे. बताओगे जरा मुझे. इसलिए तुम्हें यहाँ से जाने के लिए कह रहा हु. ताकि मेरी बेटी सुरक्षित रह सके." अनुभव ने अनुरोध करते हुए कहा. इस बार नकुल ने कुछ नहीं कहा सिवाए इसके, "ठीक पिता जी."

"नकुल ये एक बैंक अकाउंट का पेपर है, जिसके मद्दत से तुम कही भी आराम से रह सकते हो. ये पेपर दिल्ली बने हुए एक मकान का है, जहाँ पर तुम आराम से रह सकते हो." अनुभव नकुल के तरफ पहले बैंक अकाउंट के पेपर बढ़ते हुए अपनी बात कही उसके बाद अलग दिल्ली के मकान के दस्तावेज देते हुए. कनिका इस बिच अपने पिता से एक शब्द भी नहीं कहे थे.

"ठीक है पिता जी, मैं कनिका को अपने साथ ले जा रहा हु यहाँ से, पर आप अपना ख्याल रखना. क्युकी मुझे पता है हम दोनों के साथ नहीं आने वाले है." नकुल अनुभव से कहा. क्योकि नकुल अनुभव की बात को अच्छी तरह से समझ गया था की वह क्या करना छह रहे थे. ये बात कनिका भी समझती थी पर उसने एक बार प्रयन्त करने की कोशिश की शयद इस बार उसके पिता मान जाए. इसलिए कनिका रट हुए अनुभव से बोली, "पिता जी आप भी हमारे साथ चलिए न."

"नहीं बीटा मैं तुम्हारे साथ नहीं चल सकता. पर मैं तुमसे वादा करता हु की मैं तुमसे जल्दी hi मिलूंगा. एक बात ध्यान रखना नकुल बीटा. अब तुम पहले जैसे नहीं रहे और तुम बिलकुल ठीक हो चुके हो. इसलिए अब तुम्हें एक से ज्यादा लड़कियों के साथ हमबिस्तर होना पड़ेगा." अनुभव ने कनिका से अपनी बात कही उसके बाद नकुल को एक तरफ ले जा लार अपनी आखरी के शब्द कहे. जिसको सुन कर नकुल की आँखे बड़ी हो गयी, उसे समझा नहीं आ रहा था की अनुभव ऐसा क्यों कहा था.

"मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा. मैं कनिका को धोखा नहीं दे सकता चाहिए मुझे कुछ भी हो जाये." नकुल ने अनुभव को साफ़ मन कर दिया था की वह कनिका के सिवाए किसी और लड़की से सम्बन्ध नहीं बनाएगा. जब ये बात अनुभव ने सुनी तोह उसने कनिका को भी वह बात बता दी जिसको नकुल से अकेले में कहा था. अनुभव नहीं चाहता था की कभी नकुल अपने जिस्म के आग में विवश हो कर किसी लड़की से हमबिस्तर हो गया, और ये बात कनिका को पता चली तोह कही कुछ गलत न बैठे. इसलिए उसने ये बात कनिका को भी बता दी.

कनिका ने एक बार फिरसे अपने पिता से अनुरोध की पर अनुभव नहीं माने. फिर नकुल कनिका को ले कर घर के पीछे रस्ते से निकल गया.
 
अभी नकुल और कनिका कुछ दूर गए थे की एक तेज़ धमका हमें सुनाई दी. जब वह दोनों ने पीछे मुद कर देखा तोह पता चला को जहा पे पहले कोई घर था. अब उस जगह पर सिर्फ राख और कुछ जलती लकडिया hi रहा गयी थी.

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"पिता जी." ये देख कर कनिका जोर से चीखी और घर की तरफ डूअड़ gayi.ye देख कर नकुल जल्दी से भाग कर कनिका को पकड़ा और अपनी बाँहों में भर लिए. कनिका उसे छूटने के लिए अपनी पूरी ताकत लग दी, पर नकुल के बाँहों से निकल न सकीय. नकुल कनिका को शमझाते हुए बोलै, "कनिका अपने आप को सम्भालो. पिता जी ये जानते थे इसलिए उन्होंने हमें जाने के लिए कहा था. तुम्हे ज्यादा है न पिता जी ने हमसे क्या कहा था की वह हमारे पर जरूर आएगा. अब हमें यहाँ से चलना चाहिए. मैं नहीं चाहता की हमें कोई यहाँ देख ले." फिर नकुल कनिका को वह से जबरदस्ती ले गया. कनिका नकुल से लड़ती रही की उसे उसके पिता के पास जाने क्यों नहीं दिया. नकुल उसको समझता रहा. अंत में कनिका को समझा आ गया था की नकुल ने उसे क्युकी नहीं जाने दिए. फिर कनिका भावुक होते हुए बोली, "ये क्या हो गया नकुल. पिता जी ने ऐसा क्यों किया. वो हमारे साथ क्यों नहीं आये."

"कनिका पहले अपने आपको शांत करो, पिता जी ने जो भी किया होगा कुछ सोच कर hi ऐसा किया होगा. हमें उसकी बातो पर भरोषा होना चाहिए. उन्होंने हमसे वादा किया है तोह वह जरूर आएंगे." नकुल ये बात अच्छी तरह से जनता था की वह जो कुछ भी कह रहा था वह बिलकुल झूठ था. पर कनिका को सेफ रखने और वहां से ले जाने के लिए बहुत जरूररी था. कनिका भी नकुल की बात मान गयी थी पर उसके मैं में उठ रहे गलत ख्याल जाने का नाम hi नहीं ले रहे थे. जिस वजह से उसका चेहरे उदास था.

उसके बाद नकुल कनिका को दिल्ली नहीं ले गया. बल्कि नकुल कनिका को ले कर देहरादून चला गया. जब कनिका और नकुल देहरादून रेलवे स्टेशन पहुंचे तोह उस समय रात के 2 बज रहे थे. जब ट्रैन रुकी तोह नकुल और कनिका उसमे से उतर गया. फिर नकुल कनिका को लेकर बहार आया और एक टैक्सी ली और वह से निकल गया. अब तक कनिका अपने आपको संभल चुकी थी.

"साहब कहा जाना है." टैक्सी ड्राइवर ने नकुल से पूछा. जिस पर नकुल ने कहा, "भाई किसी बढ़िया से होटल में ले चलो. पर सस्ता हो."

"ठीक है साहब, साहब आप ये पर घूमने आये है." टैक्सी ड्राइवर ने कहा.

"कुछ ऐसा hi समझ लो दोस्त. तोह कोई ऐसी जगह है क्या जहाँ पर हम आराम रात बिता सके. क्यों मुझे लगता है की इस समय हमें होटल में रूम भी नहीं मिलेगा." नकुल ने कहा.

"आप बिलकुल सही कह रहे हो साहब. मेरे एक दोस्त का घर खली है जो अभी खली है. जब तक चेहे आप वह रह सकते है. अगर कही घूमने का मैं हो तोह आप मुझे बुला भी सकते है क्युकी मेरे दोस्त के बगल में hi मेरा घर है. जहाँ पर में अपने बीवी और अपनी गुड़िया के साथ रहता हु." टैक्सी ड्राइवर ने खुश होते हुए अपनी बात कही थी. नकुल और कनिका उसकी बात को सुन कर मंद मंद मुस्कुरा रहे थे. टैक्सी ड्राइवर दिल का बहुत hi भुला था, जो अनजान राहगीर को अपने बारे में सब कुछ बता दिया था.

"तोह भाई उस में रहने के लिए हमें कितना देना होगा." नकुल ने उस टैक्सी ड्राइवर से पूछा.

"सबह 5000 रुपये. साहब आपको सुबह ब्रेकफास्ट में चाइये और पराठे, लंच और डिनर में आप जो कहोगे वह आपको मिल जाएगा." टैक्सी ड्राइवर ने कहा. नकुल मुस्कुराते ह बोलै, "ठीक है फिर." उसके बाद टैक्सी ड्राइवर नकुल ऐसे hi इधर उधर की बात करते हुए टैक्सी चलने लगा. वही कनिका नकुल के कंधे पर अपना सर रख सो गयी थी.

"कनिका उठा हम पहुंच गए." टैक्सी अपने गंतव्य पर पहुंच चुकी थी. नकुल कनिका को प्यार से उठा रहा था. जब तक कनिका उठती टैक्सी ड्राइवर अपनी पत्नी को लेकर आ गया था. कनिका भी नकुल के जगाने से उठ गयी थी थी टैक्सी से उतर चुकी थी.

"साहब आप मेरी बीवी सिमरन के साथ अंदर चलिए. मैं आपका सामान ले कर आता हु." फिर नकुल और कनिका सिमरन के पीछे हो लिए तोह वही टैक्सी ड्राइवर दिखय से सामान निकला और दिखय बंद दिया. उसके बाद सामान लेकर उस डिश की तरफ चल गया जिस तरफ सिमरन गयी थी.

"कनिका घर तो बहुत hi अच्छा है. क्या कहती हो." नकुल घर को देखते हुए बोलै. घर एक मंजिला था और 400 गज के एरिया में बना हुआ था. घर के बहार एक झूला भी था और एक तरफ टेबल और कुर्शी भी राखी हुई थी जो बल्ब के रौशनी में दिखाई दे रही थी. एक तरफ फूल भी लगे हुए थे तोह कुछ पेड़ भी थे.

"साहब अंदर आयी." सिमरन घर का दरवाजा खोल और घर को रोशन कर चुकी थी. और जब उसने देखा की उसके मेहमान बहार का नज़ारा देखने में खोये हुए थे तोह उन्हें आवाज़ देते हुए अंदर आने के किये बोली. फिर दोनों अंदर चले गए.

"हाँ जान घर जितना बहार से ख़ूबसूरत है उतना hi अगर से सुन्दर है." कनिका अंदर का दृश्य देखने बाद बोली. नकुल ने अपनी गर्दन हाँ में हिला कर इस उसकी बात को सुविकरा था.

"साहब किसी भी कमरे जा कर फ्रेश हो जाईये. ताकि सफर का थकन मीट जाये. जब तक मैं आपके लिए कुछ खाने के लिए ले आती हु." इतना कहने के बाद सिमरन वहां से चली गयी. सिमरन का पति ने अपनी पत्नी की बात सुन ली थी, इसलिए उसने सामान नकुल को दिए और वहां से चला गया.

"तोह कनिका पहले तुम बाथ लेलो, उसके बाद आगे क्या करना हम सोचेंगे." नकुल कनिका से बोलै. उसके बाद कनिका एक रूम की तरफ बढ़ गयी, बैग को लेकर तोह वही नकुल सेफ पर बैठ गया.

"मुझे पहले रहने रहने के लिए घर ढूंढना है उसके बाद कनिका और अपना आदिमिसों किसी अच्छे से कॉलेज में करवाना है." नकुल ऐसे hi अपने मैं में आँखे बंद कर सोच रहा था. तोह वही कनिका बैग खोल अपने लिए बढ़िया सा नाईट ड्रेस और ब्रा पंतय निकल कर बिस्तर रख दी. फिर कनिका टॉवल ले कर बाथरूम में घुस गयी.
 
अपडेट 19

अब तक

अपने पढ़ा की कैसे अनुभव कैसे नकुल और कनिका को होस आने के बाद उन्हें समझता है की वह उनके साथ नहीं चल सकता. फिर आपने देखा की अनुभव नकुल को कुछ पेपर देने के बाद उसको कनिका के साथ दिल्ली जाने के लिए कहता है, पर नकुल देहली न जा कर देहरादून चला गया. फिर अपने पढ़ा की नकुल एक टैक्सी लेकर होटल की तरफ निकल पर उसके और टैक्सी ड्राइवर के बात चित के बाद वह टैक्सी ड्राइवर के साथ hi उसके बताये गए घर पर रहने का निर्णय लेता है. उसके बाद कनिका बाथरूम में नहाने चली गयी तोह वही नकुल हॉल में बैठ कर सोचने लगा.

अब आगे.

कनिका बाथरूम के अनादर जा कर अपने कपडे उतर कर वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गयी. फिर कनिका अपने शरीर के हर हिस्से को अच्छी तरह सामने लगे शीशे में देखने लगी. कुछ पल अपने जिस्म को निहारने के बाद कनिका शावर चालू कर उसके निचे कड़ी हो गयी. पानी से अपनी बदन को भीगोने के बाद कनिका साबुन उठा ली और साबुन को अपने जिस्म के हर हिस्से पर लगा ली. फिर कनिका अपने हाथ से अपने जिस्म पर लगे साबुन को मलने लगी. कनिका के हाथ जब उसके ुनत स्तनों पर जाते तोह उन्हें पहले प्यार से मालती, तोह कभी जोर से. जिस वहां से उसके निचे हलचल से होने लगी.

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कनिका अपनी चुकी पर अच्छी तरह से साबुन का झाग बनाने के बाद उसने अपने हाथ को अपनी योनि के द्वार पर लगा दी और उसके ऊपर साबुन के झाग बनाने लगी. इस क्रिया की वजह से कनिका की योनि से पानी निकल कर उसके कोमल हाथ में आने सुरु हो गए, जिसको कनिका अपनी hi योनि पर मेल जा रही थी.

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कुछ पल अपनी योनि और स्तनों के साथ खेलने के बाद कनिका फिरसे शावर चला दी और अपने जिस्म पर लगे साबुन को मॉल कर हटाने लग गयी. कनिका अपने जिस्म को शांत नहीं होने दी थी क्योकि वह चाहती थी की उसका जिस्म उसका प्रेमी hi शांत करे.


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नाहने के बाद कनिका अपनी जिस्म पर टॉवल लपेटी और बाथरूम से बहार निकल, अपने कमरे में आ गयी. जहाँ पर उसके वस्त्र रखे हुए थे. फिर कनिका अपने जिस्म पर से टॉवल लग की और अपने जिस्म पर लगे हुए पानी को उसी टॉवल से पॉच कर साफ़ करने लगी. कनिका बड़े हौले हौले अपने जिस्म पर लगे हुए पानी के बूंदो को धीरे धीरे दबा के हटाने लगी थी. कमरे के अंदर कनिका पूर्णरूप से निर्वस्त्र थी, जिस वजह से उसके हर अंग एक लग hi दिव्याभा प्रदान कर रही थी. कनिका जब अपने पैरो पर लगे पानी को साफ़ करने के लिए जब झुकी तोह उसकी मासमस्त गांड खुल कर सामने आ गए थे. पर उस दृश्य को देखने के लिए वहां पर कोई मौजूद नहीं थी. कनिका अपने जिस्म लगे हुए पानी को साफ़ करने के बाद टॉवल के तरफ फेक दी. फिर उसी तरह आईने के सामने बैठ कर अपने बाल बनाने लगी.

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"साहब खाना लायी हु." सिमरन घर के अंदर प्रवेश करने के बाद नकुल से बोली. जो आँखे बंद किये हुए सोफे पर लेता हुआ था. सिमरन की आवाज़ सुन कर नकुल ने अपनी आँखे खोली तोह उसने पाया की सिमरन ने अपने हाथ में खाने की थाली पकड़ राखी थी. "साहब खाना अपने कमरे में खायेगे या यही टेबल पर लगा दू."

"आप यही टेबल पर रख दीजिये. हम थोड़े देर में खा लगे." नकुल ने सिमरन से बोलै. नकुल की बार सुनाने के बाद सिमरन ने अपने हाथो पकडे हुए खाने को सामने टेबल रख दी. फिर नकुल को हाथ जोड़ी और घर से बहार जाने के किये मुद गयी. अभी सिमरन घर के दरवाजे के पास तक hi आयी थी की नकुल ने उसे आवाज़ दे कर रोक दिया और बोलै, "आपके पति का क्या नाम है?"

"साहब मेरे पति का नाम गणेश है. और मेरा नाम सिमरन है. साहब अगर आपको किसी और चीज़ की जरुरत होतो हमें आवाज़ लगा देना. मेरे पति आपके पास आ जायेगे." सिमरन जो नकुल की आवाज़ सुन कर पीछे मुद कर उसको देखने लगी थी. फिर उसके प्रशन्न का उत्तर देते हुए अपनी बात कही थी. नकुल भी मुस्कुरा कर नमस्ते किया हुए जाने का इशारा कर दिया. फिर सिमरन वहां से निकल गयी. उसके बाद नकुल उठ कर घर का दरवाजा बंद किया और कनिका जिस कमरे में गयी थी उसे तरफ चल दिया.

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कनिका अपनी स्तनों को ब्रा से धक् चुकी थी और जब वह अपने योनि के ढकने के लिए अपनी पंतय उठाने के लिए निचे गयी, जो बिस्तर पर रखे हुए थे. तभी कनिका के कानो में कमरे के दरवाजा का खुलने की आवाज़ आयी हुए जब उसने पीछे मुद कर देखि तोह नकुल खड़ा था और उसको बड़े hi ध्यान से देख रहा था. कनिका नकुल को अपनी तरफ इस तरह से देख हुए पा कर उसका मैं मचल उठा और मुस्कुराते हुए उसको देखने लगी. कनिका पंतय उठाने की कोई जल्दी न की, मनो वह छह रही थी की उसका प्यार उसके इस खजाने को जब तक चाहिए देखता रहे.

"तुम्हारे ये मदमस्त और रोई के सामान कुह्ले बहुत hi आकर्षक है. इन्हे छू कर ऐसा लग रहा जैसे मैं ने कोई माखन को छू रहा हु." नकुल कनिका के पास चला आया था उसके अनमोल खजाने को देखते हुए. उसके बाद नकुल उसके कूल्हे पर अपने हाथ रख दिए और फिर उसके ऊपर अपने हाथ को घुअमाने लगा था. फिर नकुल कनिका के कोमल कूल्हों अपने हाथ से कभी मसलता तोह कभी उसके ऊपर फिरता. नकुल ये सब करते हुए अपनी बात कही थी. जिस पर कनिका मुस्कुराते हुए नकुल के द्वारा ये सब करते हुए देखना जारी राखी. शयद कनिका को ये सब देखना अच्छा लग रहा था. फिर ऐसे hi कुछ पल कनिका नकुल के द्वारा किये गए हरकतों का आनंद लेती रही उसके वाद उसे अलग हो गयी. और भोली, "इतना अभी के लिए काफी है इसके आगे खाना खाने के बाद, तुम जल्दी से फ्रेश हो लो, तक मैं निचे हु."

"ठीक है मेरी जान. सिमरन खाना रख गयी है, जब तक तुम निचे खाना लगवा तब तक मैं फ्रेश हो कर आता हु." नकुल कनिका के कोमल गाल को चुम लिया अपनी बात कहने के बाद. कनिका के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी थी, अपने प्रेमी के इस प्यार भरे चुम्मन को पाने के बाद से. नकुल बाथरूम में टॉवल ले कर चला गया, तोह वही कनिका नकुल के कपडे निकल कर बिस्तर बार रख दी, फिर अपनी पंतय पहनी और निघ्त्य दाल कर निचे चली गयी.

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"तुमने कुछ सोचा है, हमें आगे क्या करना चाहिए." नकुल नहाने के बाद हाल में आ गया. उसके बाद नकुल कनिका के सामने टेबल पर बैठ कर कर उसके चेहरे का दीदार करने लगा. वही कनिका नकुल के इस पागलपन को देख कर मंद मंद मुस्कुराये जा रही थी. कनिका मुस्कुराते हुए टेबल पर राखी थाली में से एक थाली नकुल के तरफ बढ़ा दी और खाने का इशारा की. नकुल पहले निवाला खुद न खा कर कनिका के तरफ बढ़ा दिया, जिस पर कनिका ने मुँह खोल कर उसे निवाले को खा ली. उसके बाद नकुल खाना खाने लगा गया. जब कनिका के मुँह का निवाला ख़त्म हुआ तोह उसने ये सवाल की, जो उसके मैं में बहुत पहले से क्रियावन्त थी.

"मैं तोह अभी तक कुछ नहीं सोचा है. पर क्या तुमने कुछ सोचा है, की हमें आगे क्या करना चाहिए." नकुल अपने मुख का निवाला ख़त्म करने बाद अपनी बात कही थी. जिसको सुन कर कनिका एक लम्बी सांस ली और नकुल से बोली, "नकुल अभी तुम्हें बहुत कुछ सीखना है. हर वो कला तुम्हे आना चाहिए जिसे तुम किसी को भी आसानी से हर सको."

"साडी लड़ाई लड़ के hi नहीं जीती जा सकती, क्योकि ये निपूर्ण योद्धा वही तोह है, जिसके पास हर वह गुण हो, समय के साथ इस्तेमाल कर सके. दुश्मन चुप कर भी हम पे वार कर सकता है, जिसके लिए हमें पहले से तैयार रहना होगा ताकि मैं उसने मुकाबला कर सके. दुश्मन अपनी जीत को पहले ले लिए लड़कियों का भी प्रयोग करेगा, लड़कियों का प्रयोग किस लिए किया जाता है ये बात तुम भी अच्छी तरह से जानते हो." कनिका इतना कहने के बाद नकुल के तरफ देखने लगी, जो अपना खाना ख़त्म कर चूका था. और कनिका को बड़े ध्यान से सुन रहा था. कनिका आगे कहँ जारी की, "लड़कियां तुम्हे फ़साने के लिए तुमसे जिस्मानी सम्बन्ध बनाएगी, या हम ऐसे कह सकते है की तुम्हे उनको हारने के लिए उनके साथ सेक्स भी करना पद सकता है. तुम्हे काम कला में भी निपूर्ण होना पड़ेगा. क्यों की हम जो लड़ाई लड़ने जा रहे उसमे हमारे सामने ये सब मुस्बते आएगी."

"क्या बात है मेरी जान तोह बहुत हुसियार हो गयी है." कनिका के गाल को चूमते हुए नकुल ने कहा. कनिका नकुल की हरकत को देख कर उस पर प्यार आने लगा था. कनिका अपने बातो के दौरान अपना खाना जारी राखी हुई थी. "तुम बिलकुल सही कह रही हो कनिका, हमें अब से हर कदम संभल कर रखना होगा. अभी कुछ हम कुछ नहीं करेंगे क्योकि मैं तुम्हारे साथ कुछ समय तक प्यार भरे पल बीतने चाहता हु."

"मैं ये जानती हु, पर इसकी तयारी हमें जल्द करनी होगी. ताकि हम आने वाले खतरे के लिए तैयार हो सके. हम मस्ती तोह आपकी आगे की एजुकेशन जारी रखते हुए भी कर सेक्टर है. इसलिए हमें कल hi जाकर यहाँ के किसी टॉप कॉलेज में एडमिशन ले लेना चाहिए." कनिका खाना खा चुकी थी अपने बातो को विराम देने के साथ hi. कनिका अपने हाथ को थाली में धो. कनिका नकुल के कुछ कहने का प्रतीकाक्षा करने लगी. "तुम्हे कुछ कहना नहीं है क्या इस बार में."

"फ़िलहाल तोह मुझे तुमसे प्यार करना है. रही बात ये सब करने की तोह इसे कल देखेंगे. अभी तुम जल्दी से ये थाली किचन में रख कर आओ. नहीं नहीं तुम कमरे में जाओ मैं इसे रख कर आता हु." इतना कहने के बाद नकुल दोनों थाली उठा कर रसोई घर की और चला गया. तोह वही कनिका कमरे की तरफ. कनिका नकुल के उतावलेपन को देख कर ख़ुशी से चहक ने लगी थी.
 
कंटिन्यू......

"तुम इस निघ्त्य में बहुत सुन्दर दिख रही हो. इस निघ्त्य में तुम्हे देख कर मेरा मैं ऐसा कर रहा है की बस तुम्हे खा जाऊं." जब कमरे में नकुल दाखिल हुआ तोह उसने पाया की कनिका पेट के बल लेती हुई कोई किताब पढ़ रही थी. जिस वजह से उसके विलक्क्षण नितम्ब पूरी तरह से उजागर रहे थे. नकुल उन पठार के सामान कूल्हों के देख कर उसका धैर्य पल पल डेग मनागने लगा था, जिस कारन उसका प्रलय करि लिंग अपने अकार को प्राप्त करने तरफ बढ़ चला था. नकुल कनिका के नितम्ब को देखते हुए उसके पास चला आया था. फिर नकुल उसके नितम्ब के ऊपर अपने हाथ फेरते हुए अपनी बात कही थी.

"फिर तुमको रोका किसने है. मैं तोह खुद चाहती हु की तुम मुझ में इस कदर शमा जाओ जैसे पानी में नमक." कनिका अपने पिछवाड़े पर अपने प्रियतम के हाथो को महसूस कर इस तरह से खिल गयी थी जैसे पडझड में कोयल की कुक. नकुल की तरफ अपनी मनमोहन मुस्कान का जादू बिखरते हुए अपने दिल की बात अपने प्रियतम से कही थी. जिसको सुन कर नकुल का मैं में मचल उठा उस रास का पैन करने के लिए जिसको कनिका धीरे धीरे अपनी योनि से बहा रही थी.

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"मेरा दिल तुम्हारे इस youvan-kalash को देख कर पागल होता जा रहा है कनिका, मेरे दिल पर मेरा अब कोई बस नहीं चल रहा है. पथरो के बिछे की ये खाई मुझको इस कदर अपनी और आकर्षित कर रहे है की मैं इसमें डूबता चला जाओ, जब तक मैं इस खाई के धरातल तक न पहुंच जाओ." नकुल का दिल की यन्त्र की तरह दौर रहा था. तोह वही नकुल की ुन्डली हर छान उस धरातल की तरफ बढ़ रहा था, जहाँ की ज़मीन भूरे रंग से सराबोर थी और सख्त इतना की उसको खोदने के लिए काफी ज्यादा म्हणत करना पड़ता नकुल को आने वाले पालो में. कनिका की योनि पहले से ज्यादा अपना रास बहाने लागु थी, जिसका एहसास उसको भी हो चला था क्योकि उसकी पंतय आगे से काफी गीली हो चुकी थी, उस गीलेपन का दायरा पहले बढ़ गया था. नकुल की ऊँगली भी अब उसके रास भीगने लगी थी "तुम्हारी ज़मीन के पानी में बहुत hi मिठास है कनिका. क्या मुझे ये मीठा पानी पीने को मिलेगा."

"हाँ, मैं तोह खुद चाहती हु की मेरे ज़मीन का सारा मीठा पानी तुम हर छान पीते रहो. ताकि तुम्हे कभी प्यास न लगे." कनिका मुस्कुराते हुए अपने प्रियतम से बोली. जो उसके सुन्दर यौवन के साथ खेलने में मस्त था, ये जानते हुए भी की उसकी प्रियतमा किसी कदर उसके प्यार के लिए तड़प रही थी.

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"जानेमन तुम्हारे ये अमृत कलश बहुत hi सुन्दर और चमक से भरी हुई है. तोह वही इसमें से निकल रही मदहोश कर ने वाली खुशबू किसी को भी अपनी और खींच ले, मेरा हाल तोह इस चकोर की तरह है जो औष की के बून्द के लिए ऊपर आसमान में देखे जा रहा है. तुम्हारे ये सुन्दर काय मेरे तन बदन में आग लगा रही है. ये अनमोल काय जो इन वस्त्रो के अंदर छुपे हुए है मेरे तन मैं पर कैहर बर्षा रहे है." नकुल कनिका को सीधे लेता चूका था, उसके नितम्बो के साथ जी भर खेलने के बाद से. निघ्त्य के ऊपर से नकुल कनिका के कोमल और सुडोल चूचियों को मर्दन करते हुए अपनी हर बात कह रहा था. जिसको सुन कर कनिका मदहोशी के आलम में जाने लगी थी. तोह वही उसकी योनि से निकल रहे तरह प्रदार्थ उसकी मखमली अंदरूनी वस्त्रो को भिगाये जा रही थी, तोह वही उसके रास के निशान उसके रात्रि परिधान पर भी साफ़ देखे जा सकते थे जो उसके योनि को ढके हुए थे.

"अच्छा जी. तुम्हे मेरे ये कंचन काय पागलपन की उस उचाई पर ले जा रहे है जहाँ से उतरना तब तक मुंकिन नहीं है जब तक तुम्हारे अंदर की उत्तेजना का अंत नहीं हो जरा है ना." कनिका नकुल के लिंग को उसके अंडरवियर के पर से hi सहलाते हुए बोली. कनिका अपनी हथेली उस विशाल अंग के ऊपर रख कर जोर से ऊपर निचे कर देती थी कभी कभी, जिस वजह से नकुल के मुख से मज़े की सिसकारी फुट पड़ती. कनिका ने भी अब नकुल का हाल अपने जैसे करने में लगी हुई थी. पर उसके लिंग से बहुत hi मुश्किल से एक बून्द वीर्य बाहर आया था. जिसको कनिका ने अंडरवियर के माध्यम से उसके लिंगमुण्ड पर hi माल दी. कनिका के बात का समर्थन नकुल अपनी गर्दन हाँ में हिला कर रहा था.

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"तुम्हारे ये पहाड़ की तरह उठ रही चूचिया, उसके ऊपर ये अंगूर के सामान डेन. किसी को भी अपनी और खींच ले. उनको अपने मुँह में भर का चूसने का मैं करने लगे." इसी के साथ नकुल ने उस कथायी रंग के चूचक को अपने मुँह में भर कर चूसने लग गया. नकुल के मुख के अंदर उसके चूचक के जाते hi कनिका का मुँह से जोर दर सिसकारी निकल आयी, उसके कमरे के वातावरण को और मदहोशी में बदलने का काम करने लगा. जहाँ नकुल कनिका के अमृत कलश का रसपान करने में लगा हुआ था तोह वही कनिका नकुल के लिंग अंडरवियर से बहार निकल उसकी खाल को ऊपर निचे करने लगी थी जिस वजह से महरूम रंग का वह मोटा लिंगमुण्ड बहार निकल आता.

"ऐसे hi करते रहो नकुल. आआअह्ह्ह्ह उईईई मा मुझे ाआईईएससस्सस्स बहुत hi माहाजाआ आ रहा है. जोर से मेरे इस चुकी का रास निचोड़ कर पी जाओ आअह्ह्ह मा." कनिका नकुल के द्वारा अपनी चूचक के चूसै से उसके अंतर्मन उस ऊंचाई के तरफ बढ़ने लगा था जहाँ पर कनिका जब पहुँचती तोह उसे उस स्वर्गीय आनंद की अनुभूति मिलती जिसकी कॉमन आज से पहले कनिका ने कतयी नहीं की थी. नकुल कनिका के सुडोल और नाज़ुक स्तनों के रसपान करने में लगा हुआ था, जिस वजह से उसके सतांन लाल पण्डे लगे थे. नकुल जब दोनों स्तनों को बर्बरी मर्दन कर रहा था, जिस वजह से उसके दोनों स्तन के चूचक फूल कर बड़े हो गए थे तोह वही उसके सुन्दर और सुडोल चुकी के ऊपर नकुल के उँगलियों के निशान बन आये थे. कनिका का जिस्म में उत्तेजना लहार पल पल बढ़ते जा रही थी जिस वजह से उसके कूल्हे ऊपर उठ जाते तोह कभी निचे आ जाते.

"ाःहाहा मैं आआआहहह गएआईई.", कनिका के मुख से एक चीख निकल वातावरण में फ़ैल गयी. कनिका संकलित हो गयी थी. पर सांकल से के पल उसको मदमस्त कूल्हे 4 इंच ऊपर उठ आये थे, और जैसे hi उसकी योनि ने अपना अनमोल रास बहाई उसके कूल्हे धाम से बिस्तर पर आ गिरे थे. कनिका की सांसे धौकनी के तरफ चल रही थी, उसके स्तन ऊपर निचे हो रहे थे. देख कर ऐसा लग रहा था की मानो कोई उसके स्तनों में हवा भर रहा हो, ताकि और फूल कर बड़े हो जाए. नकुल कनिका से अलग हो कर उसके चेहरे को देखे जा रहा था, जिस पर एक लग hi संतुष्टि के भाव विद्यमान थे.

"मज़ा आया तुम्हे ये बस करने मेरी जान." कनिका की सांसे सामने होने के बाद नकुल फिरसे उसके स्तनों को धीरे धीरे दबाते हुए ये बात कही थी. जिस पर कनिका चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी. कनिका के चेहरे की तरफ नकुल झुक गया और उसके रसीले होठ को चुम लिए. नकुल जब कनिका के रसीले होठो से अलग हुआ तोह कनिका मुस्कुराते हुए बोली, "मज़ा तोह मुझसे पूछा मत की कितना आया है. और मैं इस स्वर्गीय आनंद को हर एक पल फिरसे जीना चाहती हु. तुम बताओ."

"ऐसी बात है तोह मैं ये आनंद हर पल देने को तैयार राहु. पर रही मेरे मज़े की बात तोह कनिका मुझे बहुत मजा आ तुम्हारे इस अंगो को साथ खेल कर. मैं ऐसा कर रहा है की ये पल कभी ख़त्म hi न हो. बस तुम मैं इस खेल को खेलते रहे अनंतकाल तक." नकुल कनिका के एक चूचक को अपने मुख में फिरसे भर लिया था अपनी बात कहने के बाद से. कनिका एक बार फिरसे उस खेल को खेलने में मस्त हो गयी थी, जिसके हर ने उसके अंदर के पानी तक को बाहर निकल दिया था तथा उसके सांसो को उखड दी थी.

"ायः माआ नकुल तुम बस इनके मजे लो." कनिका अपने स्तनों का मर्दन का आनंद लेती हुई नकुल से बोली. नकुल कनिका की बात सुन कर मस्त हो चला था और उसके चूचियों का रास एक बार फिर से निचोड़ने में लग गया था. ये खेल हर पल के साथ पहले से कही ज्यादा प्रबल होने लगा था. पर पहले जहाँ कनिका संकलित होने से पहले खुद को रोक न सकीय थी पर इस बार उसने अपने संकलन से पहले hi नकुल से अलग हो गयी. कनिका को अपने से दूर हटते देख नकुल हैरान हो गया. नकुल अपनी पलके उचक के पूछा की क्या हुआ, जिस पर कनिका ने कहा, "अब मेरी बारी है, इस लिए तुम आराम से बिस्तर पर लेटो. और मज़े लो बाकि काम मुझे करने दो." उसके बाद कनिका नकुल के लुंड को अपने नाज़ुक हाथ में थम की और धीरे धीरे सहलाने लगी कुछ पल उसके लिंग के साथ खेलती रही, फिर एक hi बार में मोटा और लांब लिंग ले ली. पहले थोड़ा सा अंदर ली उसके बाद उतने hi लिंग को मुँह के अंदर बहार करने लगी, जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे नकुल का लिंग कनिका के मुख में समाता गया. अब तोह आलम ये हो गया था की कनिका पूरा का पूरा लुंड मुँह लेती. कुछ लुंड को अपने मुँह में रख कर चूसती तोह कुछ पर अपने हाथ का जादू दिखती.

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जिस तरह से कनिका मेरे लिंग को चूस रही थी मेरे मुँह से कामुक आवाज़े निकलने लगी थी. पल पल मेरे जिस्म की गर्मी बढ़ाने लगी थी, नकुल को ऐसा लगने लगा था उसके खून में दहकत लावा दाल दिया हो, जी उसके नसों से बहता हुआ उसके लिंग को और आने लगा था.

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कनिका सर्प्प पपपपपप सूर्पपपपपपपप कर के उसके लुंड कप चूस रही थी. तोह वही नकुल के मुख से 'उम्म्म ुउउइइम्मम आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह' मधुर आवाज निकल कर वातावरण को और कामुक बनाने लगी थी. कनिका नकुल के विशालकाय लुंड को पूरा अपने मुँह में ले के चूस रही थी. कनिका के द्वारा किये गए इस चुसाई को नकुल के बस के बहार हो चला था. "आआहा" के साथ नकुल के लिंग से वीर्य की धार फुट पड़ी. पर अपने लिंग से वीर्य से पहले नकुल ने कनिका के सर को अपने लिंग पर दबा दिया था. जिस वजह से उसका सारा वीर्य कनिका के गले से होते हुए उसके पेट के अंदर जाने लगा. नकुल ने अपने हाथ का दबाव तब तक रखा जब तक उसके लिंग से वीर्य की आखिर बून्द तक न निकल आयी.

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जैसे hi नकुल के लिंग से वीर्य का बौछार बंद हुई वह के तरह लुढ़क गया. देख कर ऐसा लग रहा रहा जैसे उसके अंदर जान hi नहीं थी. तोह कनिका अपनी सास को दुरुस्त करने में लैब गयी.
 
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जहाँ कुछ पालो तक नकुल बेशुद बिस्तर पर लेता हुआ था तोह वही कनिका अपने सांसो को दुरुस्त करने में लगी हुई थी. जहाँ कनिका पहली बार अपने मुख के अंदर इतना बड़ा और मोटा लुंड अपने गले तक ली थी, जिस वजह से उसकी ये हालत हुई थी. तोह वही नकुल जिंदगी में पहली बार झाड़ा था, जिस वजह से उसकी शक्ति क्षणभर के लिए विलुप्त हो गयी थी, जिसको पुनः प्राप्त करने के लिए नकुल लगा हुआ था. कोई 10 मिनट के बाद नकुल के पास कनिका आयी और उसके चेहरे को चूमने लगी, जिस वजह से एक फिरसे उसके अंदर काम संचार सुरु हो चला था. फिर नकुल ने कनिका के चेहरे को अपने हाथो से पकड़ा और अपने होठ उसके होठ रख दिए और धीरे धीरे चूसने लगा मनो मीठी गोली चूस रहा हो. नकुल ने जैसे hi अपनी जुबान बहार निकल के उसके गुलाब के पंखुड़ी निहार होठो पर रखा, कनिका ने मुँह खोल दी, जिस वजह से नकुल की जुबान कनिका के मुँह के अंदर चली गयी, फिर क्या था कनिका अपने प्रेमी के जुबान को चूसने लगी बहुत hi लगन के साथ, तोह वही नकुल भी पशनातेली कनिका का साथ दे रहा था

फिर नकुल ने कनिका के सुन्दर काय पर बने हुए सुडोल और नाज़ुक चुकी को पकड़ कर मसलने लगा. "आआह्ह्ह्हह माँ" की आवाज़ कनिका के मुख से निकली पर होठ के चूसे जाने के कारन बहार न निकले. नकुल ने कनिका के होठ से अपने होठ अलग किये और अपने मुँह में चेरी के सामान चूचक को भर कर चूसने लगा. नकुल स्तनपान करते समय उसने कनिका के चूचक को दांतो टेल दबा दिया,

"आअह्ह्ह मार गयी हुयी माय." कनिका जोर से छिलाई. अभी कनिका कुछ कहती उसे पहले hi नकुल अपनी जुबान को उस जगह पर रख कर चाटने लगा जिसको दांतो टेल दबाया था. कनिका इस एहसास में इस कदर संमोहति हुई की जोर बोली, "ऐसे hi करते रहो, ाएहा मा उउउउउइइइ बहुत hi मज़ा आ रहा है." अभी कनिका ने इतना hi कहा था की नकुल ने जोर से उसकी दूसरी चुकी को मसल दिया, जिसपर कनिका ने फिर कहा, "आराम से मसलो न बहुत hi दर्द होता है, आराम से मसलो न"

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"डार्लिंग मैं सुना था की लड़कियों और औरतो की चूचियों को जब ऐसे मसाला, दबाया और कटा जाता है तोह उन्हें बहुत मज़ा आता" नकुल ने कहा, जिस पर कनिका अपनी आँखे बड़ी कर के उसको देखने लगी क्योकि आज तक उसने ऐसा नहीं सुना tha."Darling इसी दर्द में hi तोह मजा है. और हाँ आज मैं तुम्हारी ऐसी चुदाई काऊंगा की तुम जिंदगी भर याद करोगी." फिर नकुल ने अपना मुख का स्थान बदल लिया, अब उसके मुँह में कनिका की दूसरी चुकी थी, जिसको बड़े डेरे से जोर से तोह कभी धीरे से मसाले जा रहा था, तोह वही उसके थूक से भीगे हुए सुडोल और कोमल चुकी उसके हाथ में, जिस पर वैसे hi करामात दिखने लगा जैसे पहली वाली पर दिखाई थी. नकुल अपने हाथ का कमल थूक से साणे हुए पर दिखा रहा तोह वही दूसरे वाली चुकी को जो लाल पद गए थे उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा था, तोह कभी कभी उसके निप्पल को नकुल अपने दातो से काट रहा था और कनिका बस आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह इस्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह कर रही थी

एक फिर नकुल ने कनिका का हाथ पकड़ा और अपने लुंड पे रख दिया धीरे से बोलै, "मेरी की जरा मेरे इस भोले भले बच्चे का तोह कुछ ख्याल रखो. तुम्हारे हाथो का प्यार न मिलने पर कैसे मुरझा गया है." कनिका अपने प्रेमी की बात सुन कर खिलखिला कर हंस दी और फिर कनिका अपने मूलय और नाज़ुक हाथ से नकुल का लुंड को पकड़ ली और सहलाने लगी. "आआअह्ह्ह्हह मेरी जान सच में hi तुम्हारी हाथो में जादू है. तुम्हारे हाथ में आते hi कैसे ये खिल उठा है. ऐसे करती रहो." नकुल कनिका के द्वारा प्रदान किये जा रहे आनंद में डूबते हुए बोलै.

"जान अब जरा मेरा लुंड को एक फिर से मुँह में लेके गिला कर दो ताकि ये तुम्हारी योनि में आराम से जा सके." पता नहीं नकुल के मुख से ऐसी बाते कहा से निकले जा रही थी. न तोह नकुल को समझ आ रहा था और नहीं कनिका कप. पर मज़ा दोनों को आ रहा था, जहाँ नकुल कह कर तोह वही कनिका को अपने प्रेमी की बात सुन कर. कनिका अपने पति का लिंग मुँह में ले कर चूसे जा रही थी ताकि अच्छी तरह से गिला और खड़ा हो सके.. कनिका अपने घुटनो के बल बैठे हुए नकुल के लुंड को बड़े hi प्यार से चूमती और चुस्ती. फिर नकुल एक बार फिर से उसी आनंदमयी दुनिया में डूबने लगा था, जिस में कुछ समय पहले डूबा चूका था, उसका हाथ एक बार फिरसे कनिका के बाल पर चला गया और उसके बाल को पकड़ के उसके मुँह के अंदर अपना लुंड दबाने लगा. और इस बार कनिका को पहले जैसे परेशानी नहीं हुई थी अपने प्रेमी के बड़ा और मोटा लिंगमुण्ड अपने गले के आखरी छोर तक ले जाने में. "ओह ओह मेरी की क्या चुस्ती, मैं तोह पागल हो गया तुम्हारे इस प्रेम बौछार में, देखो मेरा lund.kis तरह से झूम रहा है तुम्हारे मुख के अंदर." कनिका ये बात सुने के मुस्कुराते हुए नकुल के लुंड को अपने मू में लिया और बड़े hi प्यार से चूसने लगी हुई थी तोह वही नकुल मुख से मदहोश भरे आहे निकल कर वातावरण में फ़ैल रही थी. कनिका के मुख से भी आवाज़ निकल रही थी पर सिर्फ चूसै की जो वातावरण को और काम्पुर्न बना रहा था. फिर उसकी आँखे मजे बंद हो गयी.

"कनिका तुम कितना मस्त लुंड चुस्ती हो. मेरा तोह रोम रोम रोमांचित हो गया है." कनिका नकुल की बात सुन उसके लंग अपने मुख से निकल दी और मुस्कुराते हुए देखि. बिना कुछ कहे उसके लिंग चूसने लगी. फिर नकुल ने कनिका से फिरसे कहा, "तुम्हारे ये दो आम कितने बड़े दिख रहे है. जिसका मुँह में ले कर निचोड़ कर चूसने का दिल कर रहा है." नकुल अपनी बात कहने के बाद अपने हाथ से कनिका के दसहरी आम फिरसे दबाने लग गया, तोह वही कनिका के बल पकड़ के उसके मुँह में नकुल अपना लुंड पेल रहा था. कनिका भी बिना विरोध किये, मस्ती से लुंड चूस रही थी

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कुछ समय बाद नकुल ने अपना लुंड कनिका के मुँह से निकला और बोलै, " मेरी जान बहुत चूस लिया इस लिंग अब जरा मैं तुम्हारी इस रासमली को स्वाद लेना चाहता हु. इसलिए तुम आराम से अपने पेअर फैला कर लेट जाओ." कनिका नकुल की बात सुन बिस्तर पर पीठ के बल लेट गयी और अपनी कूल्हों के निचे एक तकिया रख दी ताकि उसकी योनि ऊपर उठ जाए और उसका प्रेमी आराम से के बार फिर से उसका सेवन कर सके. फिर नकुल कनिका के पैरो को बिच लेट गया और उसकी छूट को चाटने लगा, तोह वही उसकी जीभ लपा लैप कनिका की छूट पर चल रहा था, योनि से बहने वाले रास को नकुल अपनी जीभ से कहते जा रहा था. साथ hi नकुल कनिका की गांड की छेड़ को भी अपनी जीभ से चाट रहा था. कनिका इस हमले को बर्दास्त न कर सकीय उसकी योनि से एक मोती धार बाह कर नकुल मुँह में जा गारी. कनिका का जिस्म इस कदर काम उत्तेजना के भसीभूत हो गया था की उसने अपने संकरी की आवाज़ बड़े मुश्किल से रोकते हुए, कनिका नकुल से बोली, "नकुल अब मुझसे एक पल भी रहा नहीं जाएगा तुम्हारे इस मुसल के बिना. प्लीज अपना लुंड मेरी बूर में दाल कर मुझसे इस तरह से रौंदो की मैं कल सही से चल न पाऊं."

नकुल कनिका की बात को अनसुना कर और अपनी खुदरी जुबान कनिका की छूट में दाल कर उसका रास निकल अपने मुँह भरने लगा. नकुल कनिका की योनि को अपने मुँह में भर कर छाते जा रहा था. और तोह वही कनिका के मुँह से ीिस्स्सस्स ोुह्ह्हह्ह की आवाज निकले का जा रही थी. फिर नकुल ने अपनी जुबान को कनिका की बूर के छेड़ पे रखा, अपनी जीभ को उसके अंदर घुसा दिया. जिस वजह से कनिका के मुँह से ययययय माआ िस्स्सस्स ूममममम आवाज तेज़ हो गयी थी. इस हमले को बर्दाश्त करना कनिका के बस के बाहर हो गया था और कांपती हुई आवाज़ में नकुल से कही, "बस भी करो, मेरी जान ले के मानोगे क्या? उईईईईई मा नाहाककककककुल अब अपने इस विशाल लुंड को मेरी नाज़ुक बूर में दाल कर मेरी जोर से चुदाई कर दो ताकि मेरी बूर में उठ रही खुजली शांत हो जाए."

ये बात सुनते hi नकुल ने अपनी जुबान कनिका की छूट से बहार निकला और अपना 10 इंच लम्बा और 4.5 इंच मोटा लुंड कनिका के बूर के छेड़ पर रख कर नकुल ने कहा, "कनिका तुम रेडी हो, अरे यू रेडी." कनिका ने अपना सर हाँ में हिला कर ये बात दी की आने वाले दर्द के किये वह पूरी तरह से तैयार थी. फिर नकुल ने कनिका की कमर पकड़ ली और एक झटका दे दिया और लुंड उसकी छूट म न जा कर निचे चला गया. फिर कनिका अपना हाथ को निचे ले जा कर नकुल के लुंड को पकड़ ली और अपने छूट के मुँह पे कर बोली, "नकुल अब अपना लुंड मेरी छूट में डालो." नकुल कनिका की जांघ को पकड़ा और अपने लुंड को धीरे धीरे अंदर डालने लगा, जैसे hi नकुल ने देखा की उसका मोटो सूपड़ा छेड़ अंदर धस चूका है तोह उसने एक झटका दे मारा. कनिका की मुँह से एक तेज़ चीख निकल गयी और इसी के साथ नकुल का मोटा लुंड कनिका के छूट के अंदर 4 नीच तक चला गया था.

कनिका की इतनी तेज़ आवाज सुन नकुल रुक गया और कनिका की छूट से अपना लुंड बहार निकलने के लिए जैसे hi हिला, दर्द को एक तेज़ लहार कनिका के बदन में दौड़ गयी. जिस वजह से उसके मुँह से एक बार और चीख निकल गयी. ये देख कर कनिका नकुल को इशारे से अपना लुंड निकलने के लिए मन की. और साथ hi कुछ देर ठैहर जाने के लिए बोली. कनिका की बात सुन कर नकुल बिना हिले उसके ऊपर झुकता चला गया और उसके रसीले होठो को चुम सुरु कर दिया, साथी hi उसके कोमल स्तन को दबाने भी लगा. कुछ समय पश्चात किनका के जिस्म से दर्द गायब होने लगा और उसके जगह उत्तेजना जनम लेने लगी, जिस कारन या उसके भसीभूत हो कर कनिका अपनी कमर हिलना सुरु कर दी. ये इस बात इशारा था की वह से चुदाई के लिए तैयार थी. नकुल ये देख कर जितना लुंड अंदर गया था उतने से hi कनिका की चुदाई करने लग गया.

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10 मिनट्स के बाद कनिका के मुँह से कामुक आवाज़े निकलने लगी और वातावरण को मदहोश करने लगी थी. नकुल का लिंग अब आराम से उसके अंदर आने जाने लगा था और कनिका अपने प्रेमी आगे बढ़ने का इशारा की, पर कनिका को फिर से दर्द नहीं देना चाहता था इस लिए उसने उतने hi लुंड को अंदर डाले चौड़े जा रहा था. "जान मैं चाहती हु की तुम्हारा ये मजबूत अंग अपने आखरी पड़ाव या छोर तक महसूस करना चाहती हु." कनिका की गुहार सुन नकुल ने उसकी कमर को पकड़ लिए और एक तेज़ धक्का दे मर. फिर क्या था कनिका की बूर के अंदर 9 इंच तक चला गया था.

इस करारे धक्के से कनिका पूरी तरह हिल गयी. इस बार कनिका के मुँह से कोई आवाज तक न निकल सकीय. उसकी सुन्दर और झील सी आँखों से आंसू बहा निकले थे. दर्द इतना था की उसका बदन पास्ट पद गया था. नकुल कनिका को जब देख तोह उसके होश उड़ गए थे, कनिका के आँख में ासु देख उसके आँख में भी पानी भर आया था. नकुल के आँख में आये सायलाब को देख कर कनिका आगे बढ़ कर उसके निचले लबो को अपने लबो में जकड ली और ढेर धीरे चभुलाने लगी देख कर ऐसा लग रहा था मानो कोई बच्ची अपनी मनपंसदीदा चीज़ को चूस रही हो. नकुल ने भी कनिका के ऊपर ले लैब को मुँह में भर के चूसने लगा था. थोड़े देर बाद कनिका के जिस्म में हलचल होने लगी थी. कनिका के जिस्म में हलचल देख कर नकुल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी थी और जब ने नकुल निचे देखा तोह उसके लुंड के चारो तरफ लाल निशान बन आये थे ये इस बात के सबूत थे की कनिका की छूट से खून बाह रहे थे. ये देख कर नकुल ने कनिका छूट से अपना लुंड बहार निकलने लगा, अभी नकुल का लुंड बस कनिका की छूट से सुप्पादे तक hi बहार आया था की कनिका अपने पैरो को नकुल के कूल्हों पर रख निचे की तरफ दबा दी थी. जिसका नतीजा ये हुआ की एक बार फिर से नकुल पूरा लुंड कनिका की छूट में गुस्स गया.
 
"जान तुम क्या करने जा रहे थे. मैं कहा था न की मुझे तुम्हारा ये मुसल योनि अंतिम किनारे तक महसूस करना चाहती हु. फिर तुम ने इस बहार क्यों निकलने की कोशिश की." नकुल के आँखों में देखते हुए बोली. उसकी बात सुन कर नकुल बस मुस्कुरा दिया. नकुल एक बार फिर से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाया तोह कनिका ने फिर अपने पैरो का दबाव बना कर निचे कर दी. ये खेल ऐसे hi चलता रहा उन दोनों के बिच में कुछ पालो तक. कनिका तब तक नकुल को अपने ऊपर से उठने नहीं दी जब तक उसे आराम नहीं मिला. 10 मिनट्स के बाद कनिका के बदन से दर्द जा चूका था और उसके मुख से फिर से सिसकारी निकालनी सुरु हो चुकी थी. फिर नकुल होल होल अपना लुंड संकरी योनि के अंदर बहार करता जा रहा था. कनिका की बात को मान कर अपना लुंड कनिका के छूट म धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा था जिस वजह से उसके जिस्म में उत्तेजना की लहार सुचारु रूप से सुरु हो चुकी थी. कनिका आहे भरते हुए अपने अंदर नकुल के मुसल को महसूस करती रही. तोह वही नकुल कनिका के कुंए ली गहराई नापने में लगा हुआ था. इस मिशनरी पोस्टिव में कनिका को चौडाते हुए 20 मिनट हो चुके थे, कनिका के बूर से खून निकलना बंद हो गया था और उसकी जगह पर अब सफ़ेद पानी निकल रहा था, जो नकुल के मोठे तगड़े लंग को भिगो रहा था. कनिका का इशारा मिलते hi नकुल ने अपनी गति बढ़ा दी थी.

"ऐसे hi अपना मोटा लुंड मेरी बूर के अंदर पेलते रहो मेरे प्रियतम. आआह मा ताकि मेरी प्यास मिट सके." कनिका आहे भरते हुए नकुल से बोल रही थी उसके हर शब्द के बाद कामुक आवाज़ निकल रही थी जो कमरे को और काम्पुर्न बना रही थी. नकुल का लुंड आराम से कनिका की छूट में घुस रहा था और कनिका के मुँह से आह्ह्हह्ह्ह्ह उउइइइइइ माआ की आवाज निकल रही थी, फिर नकुल अपने लुंड से कनिका की योनि की गहराई नापते हुए बोलै, "कनिका तुम्हारी छूट मेरे लिंग को ऐसे अंदर समां गयी है जैसे इसका कोई वजूद hi ना हो. तुम्हारी ये गुफा तोह बहुत hi लम्बी और बड़ी लग रही है.

"अच्छा जी और मुझसे ऐसा लग रहा है की मैं ने अपने अंदर किसी गरम सलाख को ले ली हु. जो मेरी बूर को और गरम कर रही है. तुम्हारा ये हथियार मेरी तोह जान लेने पर तुला हुआ है." कनिका इतना कहने के बाद नकुल के होठो को चूमने लगी थी. ये बताने के लिए ी उसको इसमें बहुत मज़ा आ रहा था. "काजीका क्या में अपना लुंड पीछे तुम्हारी बूर में दाल कर छोड़ सकता हु. इस तरह तुम्हें छोड़ने में बहुत मजा आएगा. कनिका तुम्हारी गांड कितनी मस्त है."

नकुल की बात सुन कनिका समझ गयी थी की उसका प्रेमी उर्फ़ पति उसकी सुन्दर गांड को देख कर उसकी चुदाई करना चाहता था. कनिका अपने मैं में आने वाले दृश्य के बार में सोच कर और ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी. तोह वही नकुल अपना मोटा लम्बा लिंग उसकी बूर में दाल कर उसकी चुदाई किये जा रहा था और तोह कनिका की छूट से पहच पहच आवाज निकल रही थी हर धक्के के साथ. कनिका के जिस्म में अब दर्द नाम की कोई चीज़ नहीं थी अगर थी तोह सिर्फ आनंद जो उसको चुदाई से मिल रही थी. अब नकुल कनिका के ऊपर झुक कर उसकी कोमल और सुडोल चुकी को मुँह में भर के चाभूल रहा था, पर उसने उसकी छूट में अपना डंडा पेलना जारी रखा था. नकुल अपने हाथ से कनिका के माध्यम आकर के स्तनों को कास के मसल भी रहा था. कनिका अपने स्तन में उठ रहे दर्द को काम करने ले लिए नकुल से बोली, "प्लीज स्वीटहार्ट slowly......slowly... प्रेस आईटी..... उउइइइ मा. नकुल आराम से मेरे boob's मसलो" नकुल उसकी बातो को अनसुना कर के कनिका की छूट में अपना लुंड है है पेलने जा रहा था. और अपने पेलने की गति में कोई कमी ना लेते हुए नकुल बोलै, "डार्लिंग योर पुसी इस सो डिलीशियस, शी गिवेस में यूनिक प्लेअसुरे. कनिका इस तरह तुम्हारी चुदाई कर के बहुत मजा आ रहा है. ऐसा लग रहा है की मैं जानन्त की सैर कर रह हु. कनिका आज तक मुझे नहीं पता था की किसी लड़की की चुदाई करने में इतना मजा आता है."

"आआह मा I'm क्युम्मिंग. ाआईईएससस्सस्स मैं झड़ने वाली हु आअह्ह्ह मा गएआईईई." इसी के साथ कनिका के बूर से पानी का सैलाब चला जो नकुल के लिंग को सरबोर करते हुए बाहर आ रहा था. लुंड अंदर होने की वजह से कनिका की योनि अपना रास सही से नहीं बाहा प् रही थी. कनिका ने जैसे hi संकलित हुई उसका जिस्म थार थार काँप ने लगा गया था. और जैसे नकुल ने अपना लिंग उसकी बूर से बाहर निकला उसकी बूर से योनि रास की तेज़ धरा बाह कर बिस्तर पर आने लगी.

"आराम से इस दर्द हो रहा है, इस पोज़ में तुम्हारा कहता अंदर लेने में." कनिका कुछ समय बाद जब अपने खुमार से बहार आयी तोह उसने देखा की नकुल उसके पैरो के बिच बैठा हुआ अपने मुसल को सहला रहा था. उसको देख कनिका समझ गयी थी नकुल क्या चाहता है और उसके लिंग में जिस तरह तंव बरकरा था ये साफ़ बता रहा था की नकुल अभी झाड़ा नहीं था. कनिका बिना कुछ कहे डोग्गिस्टीले में आ गयी. फिर नकुल को पीछे से करना का इशारा की. कनिका इशारा मिलते hi नकुल उसके पीछे चला गया और उसकी गीली योनि पर अपने लिंग को दो तीन बार फिराया, फिर अपना लिंगमुण्ड को गुलाबी छेड़ पर रख अंदर ढलने लगा. जैसी hi लुंड का सूपड़ा उस योनि छेड़ को भेद कर अंदर गया, कनिका के मुँह से ाः निकल गयी जो इस बात का सबूत था की उसके फिर से दर्द हुआ था इस मुसल को अपने अंदर लेने में. अपने योनि के अंदर लिंग जाते या आगे बढ़ाते हुए उसको जो दर्द महसूस हो रहा था उसकी दर्द को काम करने के लिए कनिका ये बात अपने पति से कही थी.

"बस मेरी जान, बस थोड़ा आ और बाकी है." नकुल ने अपना 6 नीच लुंड कनिका के योनि के अंदर दाल चूका था, जब तक उसने कनिका की बात सुनी थी. नकुल कनिका को दिलासा देने के लिए ये बात कही थी. कनिका बिना कुछ कहे पीछे गर्दन घुमा कर देखि और इशारे से बना करते हुए बोली की बस इतने से hi अभी करो बाकि का बाद में दाल लेना, जब उसको मज़ा आने लगे. नकुल भी कनिका के इशारा को समझ कर उतने से hi उसकी चुदाई करना सुरु कर दिया. नकुल अपने लुंड को सुपडे तक बाहर लाया और फिर उसी रफ़्तार में अंदर दाल दिया जिस रफ़्तार से बहार आया था. कनिका के पुरे जिस्म में एक दर्द की लहार फ़ैल गयी थी इस हमले से. कनिका अपने दर्द को बर्दाश्त करते हुए बोली, "आराम से करना बहुत दर्द हो रहा है. इतने बेरहमी से मत करो दर्द हो रहा है." पर नकुल धक्के जारी रखते हुए कहा, "जान मैं तोह धीरे से hi कर रहा हु. इस दर्द को कुछ पालो के लिए बर्दाश्त करलो फिर तुम्हे बहुत hi आनंद आने वाला है." नकुल की बात सुन कनिका मिले वाले मज़े को याद कर अपने दर्द को बर्दाश्त करने लगी, कुछ पालो के बाद उसके बदन से दर्द गायब होने अलग और उसके जगह पर मज़े ने लेना सुरु कर दिया. कनिका को तोह आज पहली बार ऐसा मजा मिल रहा था. तोह वही नकुल को कनिका की सिर्फ आहे hi सुनाई दे रही थी जो नकुल को और आनंदित कर रही थी. नकुल ने अपने धक्को की रफ़्तार तेज़ कर दी थी, जब उसने देखा की कनिका का जिस्म पहले की तरह हिल रही थी. नकुल अपने हाथ निचे से कनिका के दूध पर रख दिए और उन्हें मसलते हुए कनिका की बूर में अपना पेले रहा था. जिस वह से वातावरण में कामुक संगीत बजने लगा था, नकुल है है कनिका की छूट में अपना मोटा डंडा पेल रहा था और कनिका आआअह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह्ह प्लीज आआह्ह्ह्ह कर रही थी और फुट्छ फुट्छ फुट्छ फुट्छ की आवाज आ रही थी उसके मुख से.

नकुल ने धीरे धीरे कर के अपना सारा लुंड कनिका के संकरी गुफा में उतर चूका था. फिर नकुल कनिका के कोमल और सुडोल चूचियों का मर्दन करते हुए उसकी बूर में अपना लुंड दाल कर उसकी चुदाई कर रहा था. कनिका को बहुत hi मज़ा आने रहा था पीछे से लेने में. जब नकुल अपना लिंङ्ग बहार निकलता तोह कनिका आगे की तरह हो जाती और जैसे hi नकुल लुंड को योनि पेलता कनिका जोर से अपना पिछवाड़ा कर देती, जिस नकुल वशाल लुंड उसकी गर्भसे जा टकराता. जिस वजह से कनिका के मुँह से ाः निकल जाती. नकुल भी अपने पांडव के तरफ बढ़ने लगा था और वह तेजी से कनिका को छोड़ने लगा था, क्योकि 40 मिनट्स से ऊपर हो गए थे उसको.

"आराम से छोड़ो तुम्हारा लुंड मेरे बचे दानी से टकरा रहा है आआह्ह मा प्लीज आराम से करो ना." कनिका को अपने गर्भसे पर लग रहे ठोकर से जहाँ पहले माज़ा और आनंद मिल रहा था तोह वही अब दर्द होने लगा था. क्योकि कनिका तीन बार झाड़ चुकी थी और पहले से काफी ज्यादा पानी बहाया था उसकी छूट ने और इसी का नतीजा था की उसकी योनि सूस्का हो चली थी और अब आनंद के जगह दर्द मिल रहा था. कनिका अपने इस दर्द को जब बर्दाश्त न कर सकीय तोह उसने ये बात नकुल से कही थी. जिस पर नकुल ने कहा, "मैं जनता हु मेरी जानेमन तुम्हे दर्द हो रहा है. पर मैं ने सुना है की तुम्हारी जैसी सुन्दर लड़की को ऐसी तगड़ी चुदाई से hi मज़ा आता है. वैसे भी मैं किसी भी वक़्त परास्त हो सकता हु. मैदान में हथियार डालने से पहले मैं तुम्हारी ऐसी प्यास बुझाऊंगा की तुम भी याद रखोगी." नकुल घापा है कनिका की छूट छोड़ने में लगा गया तोह वही कनिका आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह किये जा रही थी.

"आआअह्ह्ह्ह मैं झड़ने वाली हु मेरे प्रियतम तुम ऐसे hi छोड़ते रहो आआह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह." कनिका के योनि में एक बार फिरसे हलचल होने लगी थी और योनि में फिर से गीलापन उत्पन होने लगा था. जैसे hi कनिका को फिर से आनंद मिलान सुरु हुआ वह समझ गयी थी की उसकी योनि फिरसे पानी बहाने वाली थी और इसी के साथ कनिका ने कहना सुरु किया था और जैसे hi उसके शब्द ख़त्म हुए कनिका की छूट ने पानी छोड़ दिया.

नकुल भी अब अपने अंतिम पांडव पर था और वह बिना रुके अपना लुंड कनिका की छूट में अंदर बहार किया जा रहा था, उसके हर धक्के के साथ फातच फातच की आवाज़ निकल रही थी. नकुल कुछ समय तक कनिका को उसी पोजीशन में छोड़ने के बाद बिस्तर पर लेट गया अपना लुंड उसकी योनि से निकल कर. नकुल मोटा और लांब लुंड कुतुबमिएर की तरह सीधा खड़ा था. नकुल ने कनिका को अपने ऊपर आने को बोलै, फिर कनिका बिना कुछ कहे नकुल के लुंड को अपनी छूट पे सेट कर की और धीरे धीरे बैठने लगी, कुछ hi पालो में नकुल का 8 नीच लुंड कनिका की छूट में समां गया.

कनिका की रुई के सामान कूल्हे जैसे hi नकुल के हाथ में आये कास कर मसलना सुरु कर दिया. नकुल के इस हमले से ाः की आवाज़ कनिका के मुख से फुट पड़े, साथ hi उसके कमर और निचे हो गए, जिस वजह बचा हुआ मुसल उसको गुफा के अंदर समां गया. कनिका नकुल के साइन अपने कोमल हाथ रख अपनी कमर/ कुह्ले ऊपर निचे करने लगी. कनिका पहले धीरे धीरे अपनी कूल्हों ऊपर निचे कर रही थी, पर कुछ समय बाद उसकी ऊपर निचे होने की गति बढ़ गयी. देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कोई मशीन चल रही थी, कनिका नकुल के ऊपर झुक गयी और अपने होठ अपने प्रेमी के होठ पर रख कर चूमने लगी. तोह वबी नकुल उसकी कमर को पकड़ के अपने ऊपर झुकाये हुए कनिका की छूट छोड़ने में लगा हुआ था. कनिका का जिस्म एक बार फिर से ैठने लगा और जैसे hi कनिका की छूट ने पानी छोड़ा उसके बदन की ऐठन सम्पत हो गयी. झड़ते समय कनिका के मुँह से एक चीख निकल आयी थी. इस के साथ कनिका 5 बार झाड़ चुकी थी.

उसके जिस्म में की साडी शक्ति ख़त्म हो गयी थी. वह नकुल के ऊपर लुढ़क गयी थी. नकुल कनिका को नकुल मिशनरी पोज़ में करने के बाद उसके बूर में लुंड दाल कर छोड़ने लगा, साथ hi कनिका के boob's भी चूस रहा था. कनिका ूमममममम आआह्ह्ह्हह करने लगी. नकुल ने कनिका की कमर कास के पकड़ा फिर तेजी से तगड़े झटके देने लगा, इसी के साथ कनिका को तगड़े धक्को के साथ छोड़ रहा था. कनिका के मुँह से बस आआअह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल रही थी, कमरे में thupppppppppp थपप्पपपपपप और कनिका की सिसकारियों की आवाजे गूंज रही थी. नकुल बेरहमी से कनिका को चैड़े जा रहा था क्योकि उसका जिस्म का सारा खून नकुल के लुंड की तरफ बढ़ने लगा था.

"जान मुझसे ऐसा लग रहा है की मेरी साडी शक्ति मेरे लुंड के रस्ते बहार निकले वाली. सायद मैं झड़ने वाला हु." नकुल बोलते हुए तेजी से कनिका की चुदाई कर रहा था और पुरे रूम म ठम्पपपपप ठम्पपपपप की आवाज से गूंज रही थी देख कर ऐसा लग रहा था की नकुल भी अपनी चार्म सिमा पे पहुंच गया था. "मैं गया मेरी जाएं." इस के साथ नकुल कनिका की छूट में खाली होने लगा. नकुल अपने कीमती पानी से कनिका की सुखी ज़मीन को सींचना सुरु कर दिया था. अपने अंदर वीर्य की गरम धार महसूस कर कनिका फिर से संकलित होने लगी थी. नकुल के लिंग इसे काफी मात्रा में वीर्य निकल था. नकुल ने जब अपना लुंड छूट से निकला तोह छूट से वीर्य बाह कर बाहर आने लगा था.

"मुझे आज तक इतना मज़ा नहीं आया." नकुल अपने साँस को दुरुस्त करने के बाद कनिका से बोलै. कनिका नकुल की बात सुन कर मुस्कुरा दी और फिर उसकी तरफ पलट उसके होठ को चुम ली. नकुल ने दीवाल पर तंगी घंडी को देखा तोह उसमे रात के 3 बज रहे थे. फिर दोनों एक दूसरे के बाँहों में लिप्त कर सो गए.
 
अपडेट 21

रात के 3 बज रहे थे, जब कनिका की आँख पेशाब लगने की वजह से खुल गयी थी. कनिका एक अंगड़ाई लेने के लिए जैसे hi उसने अपने हाथो को ऊपर की और उठाया उसके माध्यम आकर के सुदल चुकी ऊपर की और तन के खड़े हो गए. चुकी के ऊपर बने हुए अंगूर के बड़े से दाने ऐसे लग रहे थे जैसे तीर के नोक हो. कनिका धीरे से बिस्तर उतरी ताकि नकुल की आँख न खुल जाए. जैसे hi कनिका अपने पैरो पर कड़ी हुई उसके पुरे बदन में दर्द की लहार दौड़ गयी. एक पल के लिए तोह कनिका के पेअर तक दगमंगा गए थे. पर जल्दी hi कनिका hi खुद को संभल ली. कनिका धीरे धीरे चलते हुए कमरे बने हुए बाथरूम में घुस गयी, और अपने प्रेमी यानि अपने पति को सोता हुआ देख, उसने बाथरूम का दरवाजा बंद न की. कमांडो बैठ कर अपनी बूर से पीला पानी बहाने लगी. उसकी बूर से निकल रही पेशाब की बूँद जैसे hi उसकी योनि के छेड़ से गए उसकी जान hi निकल गयी. फिर कनिका के मुँह से आह माँ की आवाज़ निकल गयी.

"ुई मा सससससुउउउउउररर ससूररर." जैसे hi कनिका की दर्द भरी आवाज़ नकुल के कान में पड़ी उसकी आँख एक पल में hi खुल गयी. अभी नकुल कनिका को आवाज़ देता hi की तभी उसके कानो में सीटी की मधुर धुन सुनाई दी. फिर जब उसने अपने नज़र उठा कर सामने देखा तोह उसकी आँखे बड़ी हो गए क्योकि कनिका कमोडो पर बैठ हुई मूट रही थी. इस धरिया के आवरण में तोह नकुल पूरी तरह hi खो चूका था, उसका पूरा ध्यान कनिका को मूतते हुए देखने पर था. नकुल अपने आप को संभल नहीं पाया और वह कनिका की और बढ़ चला. कनिका के पास पहुंच नकुल उसके पैरो के पास बैठ गया ए उसकी कोमल जांघ को पकड़ फैला कर कनिका की छूट से निकल रही मूट देखने लगा. कनिका तोह हैरान हो चुकी थी नकुल के इस क्रिया को देख कर उसका मुख से तोह एक शब्द तक न निकल सके. तोह नकुल अपनी प्रेमिका की बूर से निकल रहे स्वर्ण को देखता रहा, जब तक उस स्वर्ण का निकलना बंद नहीं हो गया, और जैसे hi कनिका मूतना बंद की वैसे hi नकुल ने अपना मुँह कनिका की छूट पर रख उसको चाट के साफ करने लगा गया. कनिका का पूरा शरीर काँप गया जैसे hi नकुल की जीभ उसकी योनि पर लगी. कनिका का जिस्म में एक कामाग्नि की जवाला प्रजवलिय हो गयी थी इस क्रिया के दौररन. नकुल कनिका की योनि को अच्छी तरह से अपनी जीभ से चाट कर साफ़ करने के बाद कनिका को छोड़ कर लगा गया और उसके बाद नकुल और कनिका एक दूसरे को अच्छी तरह नहलाये. नहाने के बाद कमरे में आकर वैसे hi सो गए. दोनों के जिस्म पर एक ब्बि वस्त्र नहीं थी,

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सुबह के सादे पांच हो रहे थे जब नकुल की आँख खुल ली. नकुल उठ कर बिस्तर पर बैठ गया, फिर कनिका की तरफ देखा, जो किसी मासूम बच्चे की तरह सो रही थी. नकुल कनिका के माथे को चुम कर फ्रेश होने बाथरूम में चला गया. फ्रेश होने के बाद नकुल अपने बदन को एक टीशर्ट और शार्ट पंत से धक् घर से बहार निकल गया एक्सरसाइज करने के लिए. नकुल ने पहले बगीचे के 20 चक्कर लगाए उसके बाद उसने पुषप करने सुरु कर दिए. नकुल न्र पुषप करने की गति धीरे राखी थी और समय के साथ उसकी पुषप गति बढ़ाते गया.

नकुल अपना पुषप समाप्त करने के बाद उसने थोड़े बहुत और एक्सरसाइज किये जिसमे उसको 30 मिनट्स और लगे. फिर नकुल घर के अंदर चला गया नहाने के लिए. जैसे hi नकुल कमरे प्रवेश किया उसके पेअर वही के वही जैम से गए क्योकि कनिका अपने दोनों पैरो फैला के सो रही होती थी, जिस वजह से उसकी गुलाबी योनि के छेड़ साफ़ दिख रहे थे. नकुल तोह उस अद्भुत दृश्य को देख खो गया था. नकुल को ऐसा महसूस हो रहा था की कनिका अपनी kamal-pushp देखा के नकुल को चुदाई के लिए आमंत्रित कर रही हो.

नकुल खुद पर बड़ी मासुकिल से खुद पर काबू किया और फिर कनिका को अनदेखा कर के बाथरूम में नहाने चला गया. नहाने के बाद नकुल बिना कपडे के hi कमरे में दाखिल हुआ. उसके खास अंग में अभी भी तन्वा बरकरा था. कनिका को अभी भी उसी अवस्था में सो रही थी. नकुल अब की बार खुद को रोक न सका और वह कनिका की तरफ बढ़ चला. फिर कनिका के पास आने के बाद नकुल अपनी खुदरी जुबान निकल उस चिकनी त्वच पर रख निचे से ऊपर तक फिर दिया. अपनी योनि पर गर्माहट का ऐसा होते hi कनिका की रोम रोम रोमांचित हो चला था. वही नकुल अपनी जुबान को योनि के ऊपर ऐसे चला रहा था जैसे वह ice-cream चाट रहा हो. कनिका की योनि को नकुल अपनी जुबान से चाटने लगा रखा था

"ाएहा मा उउउउउइइइ इस्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह" की आवाज़ कनिका की मुख से निकल रही थी, जो नकुल के प्यास को और प्रबल करने में मदद कर रहे थे. कनिका की आँख अभी बंद थे, देख कर ऐसा लग रहा रहा की कनिका सामने में यही सब नकुल के साथ कर रही थी. नकुल कनिका की छूट को कुछ पालो तक चाटने के बाद अपनी जुबान उस रसमलाई के ऊपर बिमुख कर, नकुल खड़ा हुआ और अपना लुंड कनिका की योनि के गुलाबी छेड़ पर रख के एक जोर का धक्का मर दिया. इस क्रिया ने दो काम किये पहला ये की नकुल का 7 इंच का मोटा तगड़ लंग कनिका को गुफा में उतर चूका था और दूसरा ये की कनिका की नींद खुल गयी साथी hi कनिका की मुँह से चीख निकल गयी. "आआअह्ह्ह्हह मममममअअअअ माआरररर गायियी" की दर्द भरी आवाज सुन नकुल वही के वही रुक गया. कनिका नकुल को घर कर देख रही थी और उसके चेहरे पर दर्द भरी पीड़ा साफ़ दिखाई दे रही थी.

"सॉरी जान तुम्हारे रूप सौंदर्य में मैं इस कदर को गया था की मुझे एहसास hi नहीं हुआ की मैं क्या कर रहा हु. तुम्हारे यौवन रास ने मुझे इतना ज्यादा उत्तेजित कर दिया की मैं अपने आप को रोक न सका और मुझसे ये गलती हो गयी." नकुल कनिका के गाल को चूमते हुए अपनी ये बात कही थी. अपने हर चुमन के साथ नकुल के मुख के अंदर कनिका के आँखों से बहते आंसू समाहित होते जा रहे थे, जो नकुल के एक अलग hi दुनिया में डूबने पर मजबूर करने लगा था. अपने पति की बात सुन कनिका मुस्कुराते हुए उसे आगे बढ़ने के लिए बोली, कनिका की बात सुन नकुल धीरे धीरे अपने मुसल को उसकी योनि के अंदर, अंदर बहार कारण3 लग गया. कुछ hi पालो के बाद कनिका के योनि की अंधरुनि त्वचा तरल प्रदार्थ छूने लगी थी, जिस वजह से नकुल का लुंड आसानी से कनिका के बूर में अंदर आने जाने लगा था और कनिका के मुख से सिसकारी निकालनी भी सुरु हो गयी थी नकुल कनिका की चुदाई के साथ साथ कनिका की चूचियों को भी रसपान कर रहा था और मसल भी रहा था. कनिका की मुँह से बस अजीब अजीब तरह की आवाजे निकल वातावरण को और भी ज्यादा कामुक और मदहोस बना रही थी. नकुल कनिका को 10 मिनट्स तक इस पोजीशन में उसकी चुदाई करता रहा. उसके बाद नकुल ने कनिका की पोजीशन बदल दी.

"धीरे दुखता है, इस पोजीशन में तुम्हारा लुंड मेरी बछेडेनि तक जा रहा है. तुम्हारा बहुत hi बड़ा और मोटा है, और मैं पहले बार अपनी बूर में कुछ ला रही हु." कनिका ने ाहने भरते हुए बोल रही थी, पर उसकी आह सुन कर ऐसा लग रहा था की जैसे उसको बहुत दर्द हो रहा था नकुल का मुसल अपने अंदर लेने में. कनिका के हर शब्द बहुत hi मुश्किल से निकल रहा था. नकुल ने कनिका के एक पेअर को अपने कंधे पर रख कर उसकी योनि के अंदर अपना मोटा लुंड पेले जा रहा था, जिस तरह से कनिका की चुदाई हो रही थी देख कर ऐसा लगा था की जैसे कोई अप्सरा किसी दनव के निचे लेती हुई थी. इस पोजीशन में नकुल का लुंड कनिका की बच्चेदानी तक नाप रह था और जैसे hi लिंगमुण्ड कनिका की बच्चेदानी से लगता उसका रोम रोम स्वर्गीय आनंद में बूब जाता. कनिका आहे भरते हुए अपने प्रेमी से कही "नकुल तुम्हारा लुंड मेरी बछेडेनि तक जा रहा है और मेरे रोम रोम को किसी काली के तरह खिलने पर मजबूर कर रहा है. आज ऐसा लग रहा है की मैं सवर्ग की सैर कर रही हु. आआअह्ह्ह्ह नायककककुअलल मम्मीयिनननन जजजजजहहहहहहाआररनन्ने वाली हु आए,"

इसी के साथ कनिका की योनि ने पानी बहा दी. उसकी साँस हैसे चल रही थी मनो वह 400 मीटर दौर कर आयी हो. उसके माध्यम आकर के चुकी ऊपर निचे हो रही थी देख कर ऐसा लग रहा था की कोई उसके अंदर हवा भर रहा हो. नकुल के होठो को चूमते हुए और अपनी गति में बिना ारोध किये हुए लुंड उसकी बूर में पेल रहा था. नकुल कनिका को देखते हुए बोलै, "जान मेरा भी होने वाला है. मैं किसी भी वक़्त संकलित हो सकता हु. अपना पानी में तुम्हारी ज़मीन पर गिराऊं या कूवये में."

"आहा ऐसे hi, तुम अपना ये अनमोल पानी मेरी बंज़र ज़मीन पर बहा दो की ये ज़मीन हरी भरी हो सके." कनिका सिसकारियां लेते हुए ये बात कही थी. नकुल के धक्को अपने संकलन के दौरान भी अच्छी तरह महसूस किया था कनिका ने. उसने पाया था की उसके संकलन के बाद उसके प्रेमी का लिंग पहले से कही ज्यादा प्रबल और आसानी से सुकि बूर में आ और जा रहा था. नकुल कनिका की बूर को अच्छी तरह से अपने लुंड परिधि के हिसाब चौड़ा और गहरा कर रहा था

नकुल ने और 10 15 धक्के कनिका की छूट के अंदर पेलते रहा उसके बाद कनिका की छूट में hi अपना गरम वीर्य छोड़ने लगा. और अपने अंदर गरम धरा को महसूस कर एक बार फिरसे कनिका नकुल के साथ झरने लगा गयी..

नकुल का लुंड उस छोर तक चला गया था जहाँ तक उसके पेलने के समय भी न जा सका था. नकुल ने तब तक अपना लुंड बहार नहीं निकला जब तक कनिका योनि उसके वीर्य ऐ पूरी तरह से भर नहीं गया. जब नकुल अपना लुंड कनिका की छूट से बहार निकला तोह पकक्का की आवाज़ कनिका की योनि से आयी. कनिका की बूर से लुंड बहार निकलते hi कनिका की छूट से दोनों की पानी का मिश्रण बहने लगा.

कनिका उसी तरह कुछ पालो तक लेती रही ताकि उसकी योनि अच्छी तरह से अपने पति का पानी को अपनी ज़मीन के अंदर सोख सके. उसको ये अच्छी तरह से मालून था की नकुल ने काफी मात्रा में अपना पानी उसकी योनि के अंदर बहाया था, वह ये भी जानती थी की वह भी अपने प्रेमी के साथ एक बार और झड़ी थी. तोह उसकी योनि से रास निकला लाजमी था. नकुल भी कनिका के साथ लेट गया था.
 
अपडेट 22

"सिमरन में टैक्सी ले कर जा रहा हु. तुम जा कर साहेब को नास्ता दे आना. अगर मेरे बारे में पूछे तोह बता देना की मैं टैक्सी चला कर 11 बजे तक आ जायेगे." गणेश अपनी पति सिमरन से बोलै, जो रसोई घर में नास्ता बना रही थी. उसके बाद गणेश टैक्सी की चाभी दिवाला से निकल कर घर से बहार निकल गया, जो की एक कील में तंगी हुई थी. अभी गणेश द्वाराजे तक hi पंहुचा था की उसको अपनी पति की आवाज़ सुनी दी. "बोल क्या ले कर आना है मार्किट से."

"लाना तोह बहुत कुछ है, पर उसके पहले मुझे ये जाना है की क्या साहेब को अभी जगाना सही होगा वह भी इतनी सुबह सुबह. आप तोह जानते hi है की सेहर के लोग कैसी होते है और उन्हें देर तक सोने जी आदत होती है. तोह मैं...." सिमरन अपने आखरी के विचार अपने hi अंदर ख़त्म कर दी. या ये कह सकते है की सिमरन को आगे कहने की बिलकुल जरुरत नहीं थी क्योकि गणेश उसकी बात को अच्छी तरह से समझ गया था की उसकी बीवी उससे क्या कहना चाहती थी.

"ऐसा है जान, जैसे तुम कह रही हो या सोच रही हो. साहेब ऐसे बिलकुल नहीं है. वह तोह सुबह hi उठ गए थे और बगीचे में कसरत कर रहे थे." गणेश ने अपनी बीवी सिमरन से कहा. गणेश रसोई घर में अपनी बीवी सिमरन को अपने बाँहों में कैद कर रखा था पीछे से. "और हाँ थोड़ा लेट hi जान पता है न उनकी नयी नयी शादी हुई है तोह.... समझा गयी न मेरी बुलबुल, जैसा मैं तेरे साथ करता था सुबह सुबह वैसे hi साहेब."

"धत्त तुम तोह बहुत hi निर्लज हो गए हो. बच्ची बड़ी हो गयी है और तुम्हे अभी मस्ती सूझ रही है. देख रहे हो न सामने सोफे बैठी हु अपना मनपंसदीदा कार्टून देख रही है. उसने सुन लिया तोह क्या sochegi."Ganesh की बात से सरमते हुए सिमरन उससे शिकायत करने लगी. उसके चेहरे के भाव कुछ और hi भाव व्यक्त कर रहे थे, जब की उसका जिस्म उसका साथ छोड़ने पर मजबूर होने लगा था.

"अच्छा छोड़ ये बताओ मार्किट से तुम्हारे लिए क्या लेकर आऊं." गणेश सिमरन के स्तनों को हलके हलके मईशते हुए अपनी बात कही थी. गणेश और सिमरन का ये रोज का काम था, जब भी गणेश बिना उसके साथ मस्ती किये बिना घर से बहार जानने लगता तोह सिमरन उसे आवाज़ देख कर रोक देती थी. उसके बाद उनका ये खेल काम से काम 10 या 20 मिनट तक चलता था पर दोनों में से किसी का भी कुछ नहीं जाता था. कहने का मतलब ये है की न hi सिमरन झड़ती थी और न hi गणेश. पर कभी कभी गणेश सिमरन के आगे अपने घुटने तक देता था.

"अच्छा सुनो, मार्किट से तुम मेरे लिए वही सामान लाना जो सुहागरात के आगे दिन ला कर दिया था. और हाँ अपनी बेटी के लिए उसका चॉकलेट लाना मत भूलना." सिमरन की बात सुन गणेश उसके कोमल गाल को चूमा और घर से बाहर निकल गया. वही सिमरन रसोई घर का काम ख़त्म करने में लग gayi.Wahi उसकी छोटी सी बेटी जो की 5 या 6 वर्ष होगी हॉल में बैठी हुई टीवी देख रही थी.

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20 मिनट्स के बाद कनिका बिस्तर से जैसे hi उठी उसकी बदन में एक तीस सी उठी कारन था उसकी योनि में होने वाला दर्द. कनिका के मुख से का दर्द भरी आवाज़ भी निकल गयी थी, जिसको सुन नकुल बिस्तर से उठ गया. फिर उठाने के साथ hi नकुल ने कनिका का हाथ पकड़ उसे वही रोक दिया. "जान तुम रुक में तुम्हे ले चलता हु." नकुल कनिका की और देखते हुए बोलै.

कनिका मुस्कुराते नकुल की और देखि और इशारे से ले चलने के लिए बोली. उसके बाद नकुल कनिका को अपनी बाँहों में उठा कर बाथरूम के तरफ चल दिया. बाथरूम में दाखिल होते hi नकुल कनिका को निचे उतर दिया, उसके बाद कनिका वही बैठ कर अपनी बूर से पानी बहाने लगी, मूट की बुँदे जैसे hi उसकी बूर के छेड़ पर लगी उसके मुँह से एक आह सी निकल आयी. जिसको कनिका अपने अंदर जबपत करते हुए पेशाब करना जारी राखी. नकुल कनिका को अपने सामने इस तरह से मोटे हुए देख कर एक बार फिर से उसके लिंग में अकड़न सुरु हो गयी.

नकुल अपने लिंग हो सहलाते हुए अपनी prem-sangani को मूत्र विषर्जन करते हुए देख रहा था. वही कनिका इस बात से अनजान की उसका प्रेमी उसको पेशाब करते हुए की हसरत से देख रहा था और अपने लिंग के साथ खेल रहा था.

"बस भी करो इसको हिलना, पता है न मैं तुम्हारे इस दानव को और नहीं झेल सकती." कनिका की योनि से पीले रंग का पानी निकला बंद हुआ तोह उसने अपना सर उठा कर जब ऊपर की और देखि तोह उसका आँखे हैरानी से बड़ी हो गयी क्योकि कनिका पाया की नकुल हस्थमैथुन कर रहा था, जिस वजह से उसका लिंग किसी लोहे की रोड की तरह खड़ा था. नकुल के लिंग को hi देख कर कनिका ने अपनी बात कही थी. जिस पर नकुल मुस्कुराते हुए उसको अपने बाँहों में भर लिया और उसके गाल को चूमते हुए बोलै, "क्या करू जान तुम्हारा अंदाज़ hi ऐसा की मेरा मैं हर पल तुम्हे प्यार करने को करता है."

"पर तुम चितना मत करो. मैं तुम्हे कुछ नहीं करने वाला." इतना कहने के बाद नकुल ने शावर चालू कर दिया और कनिका के साथ भीगने लगा. नकुल कनिका की चुकी पर साबुन लगा कर उसकी चूचियों को नकुल अपने हाथ से मसलने लगा. चुकी पर अच्छी तरह से साबुन लगा कर मलने के बाद नकुल ने अपने हाथो का रुख कनिका की छूट की तरफ कर दिया, फिर नकुल उसकी योनि पर साबुन लगाने लगा. कनिका की योनि पर साबुन लगाने के बाद नकुल उसकी छूट को भी माल माल के साफ करने लगा. ऐसे hi कनिका भी नकुल के पुरे शरीर पे साबुन लगा कर उसके अंगो को मॉल मॉल कर साफ़ की. कनिका ने अपने हाथ से नकुल के लुंड पर भी साबुन लगा कर साफ़ की थी. कनिका नकुल के लुंड के साथ और नकुल कनिका की गांड के साथ खेल रहे थे. ऐसे hi मस्ती करते हुए दोनों नाहा कर बाथरूम से निकल आये. उसके बाद दोनों ने अपने अपने कपडे पहने लिए और तैयार हो कर कमरे से भर आ गए जहाँ पर सिमरन उनका इंतज़ार कर रही थी नास्ता लिए हुए.

"सिमरन जी आप इस वक़्त" कनिका जब कमरे से बाहर आयी तोह सिरमन को हॉल में बैठी हुई देख कर ये सवाल किया. जिसको सुन कर सिमरन मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ कर सुबह का अभिवादन करते हुए बोली, "कनिका जी कुछ क्षणिक हुए मुझे आया आये हुए और मैं आप दोनों के लिए ब्रेकफास्ट लायी हु."

"धन्यवाद सिमरन जी. ब्रेकफास्ट के लिए." सिमरन की बात को सुन कर कनिका अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए बोली. कनिका नील सफ़ेद रंग की suit-salwar में किसी कुमुदनी के फूल की तरह दिख रही थी उसके बदन से आने वाली खुशबू सिमरन को भी अपने तरफ कुछ पल के लिए खींच ली थी. "आप भी हमारे साथ ब्रेकफास्ट कर लिए सिमरन जी." सिमरन को खोया हुआ देख कर ये बात कही थी, वही कनिका का बात सुन कर सिमरन मुस्कुराते हुए बोली, "धन्यवाद् ब्रेकफास्ट के लिए, मुझे अभी जाना पड़ेगा क्योकि मेरी बेटी मेरा इंतज़ार कर रही होगी. अब मुझे आज्ञा दीजिये, फिर कभी आपके साथ ब्रेकफास्ट करुँगी." इतना कहने के बाद सिमरन वह से चली गयी.

"तोह कनिका अब क्या करना है." एक बार फिर से आगे क्या करना है इस चर्चा सुरु हो गयी थी कनिका और नकुल के बिच में. वही कनिका जो नकुल के लिए प्लेट में ब्रेकफास्ट निकल रही थी उसकी बात सुन कर मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखि, फिर ब्रेकफास्ट आगे बढ़ते हुए बोली, "पहले तोह ब्रेकफास्ट कर लीजिये, क्युकी आपको भूक लगी होगी," कनिका प्लेट में रखे हुए 2 पराठे और एक गिलास दूध नकुल की और बढ़ा दी थी.

"अब बताओ." नकुल पराठे का निवाला तोड़ने के बाद ये बात कही थी. जिसको सुन कर कनिका मुस्कुरा दी. वही नकुल कनिका के कोमल और नाज़ुक होठो को देख कर उसका मैं पागल हो चला था, नकुल अपना थे रखे हुए निवाले को खुद न कहते हुए वह कनिका की तरफ बढ़ा दिया था. नकुल का प्रेम देख कर कनिका का मैं ख़ुशी से चहक उठा था, ख़ुशी खुसबी कनिका ने उस निवाले को अपने मुँह में ले कर खाना सुरु कर दी थी. कनिका ने भी नकुल को अपने हाथ से खिलना सुरु कर दी. ऐसे hi एक दूसरे को ब्रेकफास्ट करने लगा गए.

"तोह सुनो पहले हमे कॉलेज में एडमिशन लेना होगा ताकि हम आगे की पढ़ाई जारी रख सके. उसके बाद तुम्हें अपने लिए एक घर ढूंढना है. फिर तुम्हारे ट्रेनिंग के लिए एक कमांडो को देखना है ताकि वह तुम्हें लड़ाई की तकनीक सीखा सके. उसके बाद तुम्हें सेक्सुअल हरस्मेंट सेक्सुअल पनिशमेंट टेक्निक्स ेट्स. इनके लिए भी के ट्रेनर तलाशना है ताकि तुम सिख सको." कनिका अपना ब्रेकफास्ट करते हुए ये बात बोल रही थी वही नकुल उसकी बात को बड़े ध्यान से सुन रहा था. नकुल जब देखता की कनिका के मुँह का निवाला ख़त्म हो गया तोह फिर एक निवाला आगे बढ़ा देता और कनिका भी ऐसा hi कर रही थी.

ऐसे hi दोनों ने अपना नास्ता ख़त्म करते है उसके बाद कनिका बर्तन को उठा कर रसोई घर के तरफ चली गयी वही नकुल हॉल में बैठ कर सोचने लगा.
 
अपडेट 23

"साहब जी कहा चलना है?" नकुल अपने hi सोच में डूबा हुआ और घर का मुख्या दरवाजा खुला हुआ था, क्योकि सिमरन के जाने के बाद न hi कोमल ने दरवाजा बंद किया था और न hi नकुल ने. इसलिए गणेश बिना किसी रुकावट के घर के अंदर चला आया और फिर उसने ये बात कही थी, जिस पर नकुल का ध्यान टूट गया.

अब आगे

"गणेश तुम्हारे नज़र में कोई घर है, जिसको मैं खरीद सकू. वह क्या है न कनिका को ये जगह बहुत hi पसंद आ गया है और उसने निर्णय लिया है की आगे की पाध्ये हम यही से करेंगे. एडमिशन के लिए हमें कॉलेज भी देख लिया है. बस रहने के लिए घर का और बंदोबस्त हो जाये तोह मज़ा hi आ जाये." नकुल गणेश को सामने रखे हुए एक सोफे पर बैठने कहा, जिस पर गणेश संकोचित होते हुए बैठा. उसके सोफे पर बैठ जाने के बाद ये बात कही थी नकुल ने उससे.

"साहब के मुझे एक दिन का समय दीजिये. मैं आपको एक अच्छा सा घर देख कर बता हु. वैसे ये घर आपको कैसा लगा." गणेश कुछ देर सोचने के बाद नकुल के सामने अपनी बात राखी. जिसको सुन कर नकुल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

"क्या ये घर सेल्स के किये उपलब्ध है. अगर ऐसा है तोह मैं इसे खरीदने के किये तैयार हु. वैसे भी कनिका को ये घर बहुत hi पसंद है." नकुल कनिका की बात को याद कर ये बात गणेश से कहा. जिसको सुन कर गणेश भी खुश हो गया, क्योकि घर बेचने के बाद जो कमीशन मिलता उसे उसकी हालत में काफी सुधर हो जाता. "वैसे इस घर की कीमत कितनी है."

"साहब अभी तोह मुझे इस घर की कीमत नहीं पता. पर इस घर का मालिक इस घर को बेचना चाहता है, उसने मुझसे कहा भी था की मैं इस घर को बेचवा दू. पर मैं नहीं चाहता था की इस घर को खरीदने वाला कोई बिजनेसमैन हो या..." गणेश ने अपने मैं की बात एक बार फिर से नकुल के सामने राखी. वही कनिका अपना काम ख़त्म कर के अपने रूम में चली गयी थी इस बिच और जब अपने कमरे से बहार आयी तोह उसके हाथ में उसका पर्स था.

"चले." कनिका हॉल में दाखिल होते hi ये बात नकुल से बोली. जिसको सुन कर नकुल ने उसे अपने पास बैठने का इशारा किया. जिसके बाद कनिका उसके पास बैठ गयी. कनिका के बैठते hi नकुल ने कहा, "कनिका तुम्हे ये घर पसंद है न. और तुमने कहा भी था की अगर ये घर सेल्स के लिए होता तोह तुम इसे खरीदना चाहती थी."

"तोह घर ये घर सेल्स के लिए उपस्थिस्थ है." कनिका अपने प्रेमी की बात सुन कर खुश हो गयी थी. और उसकी ख़ुशी को उसके बात से hi महसूस की जा सकती थी. वैसे भी उसके चेहरे पर जो चमक आयी थी उसको देख कर कोई भी उसकी ख़ुशी का अंदाज़ा लगा सकता था.

"हाँ." नकुल ने बस इतना hi बोलै था की उसके चेहरे की चमक और बढ़ गयी और उसके नकुल को अपने गले लगा ली. कुछ देर अपने बाहों में समेटे रहने के बाद नकुल कनिका को अपने से जुड़ा करा और गणेश की और रुख करते हुए कहा. "तोह ठीक है गणेश भाई आप इस घर के मालिक से बात कर के मुझे इसकी कीमत बता देना. और हाँ आप हमें क्सक्सक्सक्सक्सक्स कॉलेज छोड़ दीजिये."

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गणेश ने अपनी टैक्सी कॉलेज के सामने hi रोकी उसको बाद नकुल और कनिका टैक्सी से उतरे. दोनों hi टैक्सी से एक साथ उतरे थे और उनको देख कर वहां पर खड़े लड़के और लड़किया बस देखते hi रह गए. जहाँ लड़किया नकुल को देख रही थी तोह लड़के कनिका को.

"गणेश भाई हमें यहाँ पर समय लगेगा, काम से काम 1 या 2 घंटे. तब तक आप अपना काम देख लीजिये." नकुल ने गणेश से कहा. फिर गणेश अपनी टैक्सी ले कर वह से चला गया. उसके बाद नकुल और कनिका भी कॉलेज अंदर की तरफ चल दिए. कॉलेज में मौजूद सभी स्टूडेंट्स एंड कुछ टीचर्स भी बस नकुल और कनिका की और देखने लगते ह.

सभी लड़को का सारा ध्यान कनिका के ऊपर hi था, कनिका के यौवन को देख कर उनके मैं उसके बस के बहार हो चला था, जिसका सबूत उनके पंत को देख कर साफ़ पता लग रहा था, कुछ मेल टीचर का भी यही हाल था. कनिका के सुडोल चुकी और गद्देदार पिछवाड़ा कमायत hi ध रही थी उनके ऊपर. तोह गर्ल्स का हाल भी कुछ अच्छी न थी नकुल के मजबूत शरीर और उसकी पर्सनालिटी को देख कर लड़कियों का भी चुकी तीर की तरह तन चुके थे ये वह साफ़ महसूस कर सकती थी उनकी पंतय भी गीली हो चुकी थी उनके योनि से निकलने वाले रास के कारन. सभी लड़किया नकुल को देख कर पागल सी हो चली थी कुछ ने तोह अपनी योनि को अपने हाथो से मसलने लगी थी. फीमेल टीचर भी अपने आपको रोक न सकती थी. नकुल और कनिका उनके तरफ बिना ध्यान दिए hi आगे बढ़ गए थे.

"माल आयी है यार एक बार मिल गयी न तोह अच्छी तरह निचोड़ कर hi छोडूंगा." एक लड़के ने अपने साथ से बोलै. उसकी बात सुन कर हस्ते हुए बोलै, "पांच मिनट्स तोह टिका नहीं जाता, बड़ा आया उसको निचोड़ने वाला. इसको तोह मैं भी 10 मिनट्स नहीं संभल सकता."

"मेरे ख्याल से तोह सिर्फ अपने बॉस hi संभल सकते है. पता नहीं कहा रह गए." उन दोनों के बगल में खड़े हुए एक तीसरे लड़के ने कहा. उसकी बात सुन कर उस जगह पर खड़े सभी लड़के ठहाके लगा कर हांसे लगे थे.

तोह वही दूसरी तरफ लड़कियों भी अलग hi बात चल रही थी. उन्ही में से के लड़की ने कहा, "यार चिकना माल आया है अपने कॉलेज में. उसकी मजबूत बॉडी देख कर तोह मेरी बूर hi रो दी. जिस तरह का शरीर है न, उससे भी बढ़के उसका हथियार होगा. एक बार मेरी बूर में चली गयी न तोह तृप्त हो हो जाउंगी."

"सपना देखा छोड़ दे सपना, आगे गलती से भी तेरी बूर में चली गयी न तोह मर hi जायेगी. समझी, पता है 4 5 तोह वैसे भी तूने लिया hi है. पर उसका तेरे बस का नहीं है झेल पाना." उसकज सहेली ने कहा. जहाँ लड़कियों में नकुल को ले कर बात चल रही थी तोह वही एक ग्रुप और भी था लड़कियों का और उसके ग्रुप की एक लड़की बड़े ध्यान से नकुल कप देख रही थी. नकुल भी उन्ही लड़कियों के ग्रुप के पास चला आया. उनके पास पहुंच कर ग्रुप को देखा, फिर उन में से एक लड़की से प्रिंसिपल के ऑफिस का पता पूछा.

"सक्से में कैन यू तेल्ल में थे वे ऑफ़ प्रिंसिपल ऑफिस" ग्रुप को अपनी तरफ ध्यान खींचते हुए नकुल ने उनमे से एक लड़की से पूछा. जिस पर एक लड़की ने जवाब दिया, "तुम यहाँ क्या कर रहे हो."

"क्या आप मुझे जानती है." उस लड़की की बात सुन अपने चेहरे पर बिना कोई भाव लाये ये बात पूछी थी. कनिका की भी हैरान हो गयी थी उस लड़की की बात सुन कर. "दो यू क्नोव वह ी ऍम?"

"यस, ी क्नोव. मैं अच्छी तरह से जानती हु की तुम कौन हो." उस लड़की ने नकुल को घूरते हुए बोली. उसकी बात सुन कर कनिका नकुल को देखने लगी, तोह वह पर मौजूद या कड़ी लड़की अपनी सहेली की बार सुन कर हैरान हो गयी. उन्हें तोह भरोसा hi नहीं हो रहा था की उनकी सहेली इतने हैंडसम और स्मार्ट जानती थी वह भी पहले से hi, जब की उन्होंने पहली बार देखि थी.

"बूत ी don't क्नोव यू?" नकुल सपाट लहजे में उस लड़की से बोल. तोह वही नकुल की बात सुन वह लड़की गुस्सा हो गयी और गुस्से में hi उसने नकुल से कहा, ी ऍम ज्योति ठाकुर, योर सिस्टर. मैं तुम्हारी बहिन हु."
 
अपडेट 24

अब तक

"यस, ी क्नोव. मैं अच्छी तरह से जानती हु की तुम कौन हो." उस लड़की ने नकुल को घूरते हुए बोली. उसकी बात सुन कर कनिका नकुल को देखने लगी, तोह वह पर मौजूद या कड़ी लड़की अपनी सहेली की बार सुन कर हैरान हो गयी. उन्हें तोह भरोसा hi नहीं हो रहा था की उनकी सहेली इतने हैंडसम और स्मार्ट जानती थी वह भी पहले से hi, जब की उन्होंने पहली बार देखि थी.

"बूत ी don't क्नोव यू?" नकुल सपाट लहजे में उस लड़की से बोल. तोह वही नकुल की बात सुन वह लड़की गुस्सा हो गयी और गुस्से में hi उसने नकुल से कहा, ी ऍम ज्योति ठाकुर, योर सिस्टर. मैं तुम्हारी बहिन हु"

अब आगे

"एक्सक्यूज़ में, तुम मेरी बहिन हो नहीं सकती, क्योकि मेरी कोई बहिन है hi नहीं." ज्योति ठाकुर की बात सुनाने के बाद नकुल ने कहा. नकुल ने जिस तरह से अपनी बात कही थी उससे सुन कर उसके बदन में आग लग गयी थी. पर इस समय वह कुछ कर नहीं सकती थी. इसलिए उसे अपने अंदर के गुस्से को जब्त करना पड़ा. वही कनिका की भी आँखे भी हो गयी थी ज्योति ठाकुर की बात सुन कर, मान तोह किया की अभी उसके गाल पर एक जो का तमाचा रख दे, फिर कुछ सोच कर कनिका चुप रह गयी.

"तुम झूट बोल रहे हो. तुम hi मेरे भाई हो. मुझे पता है तुम ऐसा मेरे साथ क्यों कर रहे हो." ज्योति ठाकुर नकुल की कलर पकड़, फिर जोर से छीलते हुए अपनी बात कही थी. जिसको सुन आस पास के विद्द्यार्थी भी उनके तरफ देखने लगे थे. वही नकुल ज्योति ठाकुर की बात सुन कर हंसने लगा. नकुल को हँसता देख कर ज्योति ठाकुर को बहुत hi ज्यादा गुस्सा उसके ऊपर आया, पर नकुल को मरने के लिए अपना हाथ जोर से उसके गाल तरफ बढ़ा दी. परन्तु नकुल ने उसका हाथ बिच में hi रख लिया. "हाथ छोड़ मेरा वर्ण अच्छा नहीं होगा. तुम जानते हो न मैं तुम्हारे साथ क्या कर सकती और क्या क्या हो सकता है."

"तुम्हारी इतनी हिम्मत की तुमने मेरे पति पर हाथ उठाया." कनिका आगे बढ़ कर ज्योति ठाकुर के बाल को पकड़ कर अपनी तरफ घूमने के बाद ये बात कही थी. जिस तरह से कनिका ने ज्योति के बाल को पदक के अपनी तरफ की थी उसके वजह से उसके मुँह से आह निकल आयी थी. पर नकुल ने कनिका के हाथ से उसके बाल छोड़ दिए. और यहाँ से चलने के इशारा किया.

"तुम मेरे साथ अच्छा नहीं किया. तुम्हारे साथ ये लड़की है न वह भी नहीं बचने वाली." ज्योति ठाकुर नकुल की तरफ अपनी ऊँगली करते हुए बोली. पर नकुल को उसके बात से कोई फर्क नहीं पड़ा. "मैं अभी बड़ी माँ को फ़ोन करके बताती हु की तुम घर से भाग कर देहरादून आये हुए हो वह मेरे hi कॉलेज में एडमिशन लेने. फिर देखो तुम्हारे साथ क्या होता है."

"नकुल कौन है ये जो तुम्हें अपना भाई बता रही है और तुम्हे मरने के किये हाथ भी उठा दी. यहाँ तक तुम्हे धमकी भी दे रही है. क्या तुम इस लड़की को जानते हो." कनिका ज्योति के बात से चीड़ गयी थी उसको ज्योति के बात पर गुस्सा तोह बहुत आया पर नकुल के वजह से उसने कुछ नहीं बोली. ात जाते स्टूडेंट्स इन्हे hi देख रहे थे. नकुल कनिका के कंधे को पकड़े हुए बोलै, "नहीं यार, गुस्सा नहीं करते. डार्लिंग मुझे नहीं पता ये लड़की कौन है और मुझे क्या चाहती है. मुझे अपना भाई क्यों बोल रही है."

"ोये लड़की नकुल से तुम दूर hi रहना वर्ण तुम्हारे लिए अच्छा नानी होगा, चलो नकुल यहाँ से." कनिका ज्योति ठाकुर को धमकाते हुए बोली और नकुल यहाँ से चलने को कहा. वही ज्योति कनिका की बात सुन कही, "मेरा नाम लड़की नहीं है ज्योति ठाकुर है, और जो आपके साथ है न वह मेरा भाई है."

"चलो यार यहाँ से, ये लड़की मुझे पागल दिखती hai."Nakul ने कनिका से कहा. फिर नकुल कनिका को ले कर आगे बढ़ गया, कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद जब नकुल पीछे मुद कर देखा तोह ज्योति ठाकुर किसी से फ़ोन पर बाते कर रही थी. फिर बिना ध्यान दिए नकुल आगे बढ़ गया. फिर थोड़े देर चलने के बाद उसे एक लड़का दिखाई दिया तोह बहुत पढ़ाकू लग रहा था, नकुल आगे बढ़ कर उस लड़के से प्रिंसिपल के ऑफिस का पता पूछा, "Hi मैं नकुल, क्या तुम प्रिंसिपल सर का ऑफिस बता सकते हो किस तरफ है."

"Hi नकुल, मैं कमल शर्मा. क्यों नहीं भाई, मैं भी वही जा रहा हु. आप दोनों मेरे साथ चल सकते है. मुझे भी साथी मिल जाएगा वह तक" कमल नकुल से हाथ मिलाने के बाद उसने नकुल का अभिवादन किया उसके बाद अपना परिचय दिया और ये भी बता दिया की वह भी प्रिंसिपल के ऑफिस hi जा रहा था. फिर नकुल कनिका को ले कर उस लड़के के साथ चल दिया. "आपके साथ जो मोहतरमा है अपने उनका परिचय नहीं दिया भाई."

"ये मेरी वाइफ है. अभी अभी हमारी शादी हुई है. और हमने निर्णय लिया की अपनी आगे की स्टडी देहरादून से करेंगे. फिर क्या था हम यहाँ आ गए." नकुल कनिका की तरफ देख कर अपनी बात कही थी, जिसको सुन कर कनिका के चेहरे पर शर्म मकई लालली आ गयी. वही कमल ये सुन कर थोड़ा हैरान हुआ, फिर उसे ध्यान आया की गाओं में छोटी उम्र में शादी कर दी जाती है. फिर कमल मुस्कुराते हुए पहले नकुल की तरफ देखा उसके बाद कनिका की और देखते हुए बोलै, Hello भाभी. माफ़ कीजियेगा मैं आपको भाभी कह कर सम्बोधन किया बिना आपसे पूछे. तोह क्या मैं आपको भाभी कहा सकता हु."

"हाँ! क्यों नहीं तुम मुझे भाभी कहा सकते हो. वैसे कौन कौन तुम्हारे घर में." कनिका कमल को हाँ बोली उसके बाद उसे उसके घर के बारे में पूछी. जिस पर कमल मुस्कुराते हुए बोलै, "मेरे घर में मैं मेरी माँ और दो बहने है. माँ और दीदी काम पर जाती है. मैं और छोटकी अभी पढ़ रहे है."

"और तुम्हारे पिता." कनिका ने जा देखा की कमल ने सबका परिचय दे दिया, सिवाए अपने पिता को छोड़ कर तोह उसने कमल से पूछ hi लिया उसके पिता के बारे में. कमल थोड़ा मायुश हो गया अपने पिता के बारे में पूछे जाने पर. कमल को इस तरह से उदास देख कर कनिका और नकुल को समझ आ गया की कनिका ने कुछ तोह गलत पूछ बैठी थी. जिस वजह से कमल उदास हो गया. कुछ पल मौन रहने के बाद उसने मुस्कुराते हुए कहा, "अब वह इस दुनिया में नहीं है. उनकी एक एक्सीडेंट में डेथ हो गयी."

"सॉरी मुझे ये सवाल नहीं करना चाहिए था. फिर तोह घर चला बड़ा hi मुश्किल होता होगा, तुम्हारे और छोटकी के पढ़ाई के साथ साथ." कनिका कमल से अपने पूछे गए सवाल के लिए पहले माफ़ी मागि उसके बाद उसने कमल से आगे पूछा. कमल भी बाबत hi ज़िंदा दिल इन्शान था लिए उसने मुस्कुरा कर कनिका की तरफ देख और आगे कहा, "मेरी बड़ी सिस्टर एक कमपनी मरीन सेल्स गर्ल है, माँ एक शॉप पे काम करती है."

"फिर तोह तुम दोनों पड़े का खर्चा बड़े मुश्किल से चलता होगा." कमल की बात सुन कर उसके चेहरे पर चिंता की लकीर आ गयी थी. उसको अच्छी तरह से मालूम था की मजबूर में कैसे औरतो का फायदा उठाते थे. आखिर उसने भी तोह देखा था अपने गाओं में साहूकार चाँद पैसो के लिए लड़कियों और औरतो अपने बिस्तर पर ले आते थे.

"ऐसी कोई बात नहीं है. माँ और दीदी सिर्फ छोटकी के लिए पैसे खर्च करती है उसके पढ़ाई पर. मुझे स्कालरशिप मिला है तोह माँ और दीदी को मेरे लिए कोई टेंशन नहीं है. कॉलेज मैनेजमेंट मेरी पड़े का सारा खर्चा उठती है. शिवाये जब खर्च के."

"कमल इसका मतलब तुम पढ़ने में बहुत हुसियार हो." कनिका बोली.

"जी! 12तह में मैं तोह किया था वह पुरे डिस्ट्रिक्ट में. और इस साल भी मैंने कॉलेज में टॉप किया है. इस वर्ष का भी खर्च कॉलेज मैनेजमेंट hi उठाएगी." कमल मुस्कुराते हुए अपने प्रतिभा के बारे बोलै. जिसको सुन कर कनिका और नकुल भी खुश हुई क्योकि उन्हें ये जान कर अच्छा लगा कमल उन लड़को में से नहीं था जो माँ और बाप का पैसा बे मतलब के उदा देते थे अपने घर की परिस्थिति जानने के बाद भी.

"ये तो बहुत hi अच्छी बात ह. एक बात पुछु." कनिका मुस्कुराते हुए कमल बोली. कमल कनिका की बात सुन कर अपना सर हाँ में हिला दिया. कनिका फिर से कमल से पूछी, "वैसे तुम्हारा जेब खर्च कैसे चलते है.."

"कुछ पैसे तोह घर से आ जाते है. और मैं यहाँ के कुछ अमरि लड़को को ट्यूशन दे देता हु. जिस से मेरे जेब खर्च चल जाता है. और कभी कभी प्रिंसिपल के काम में मद्दत कर देता हु तोह वहां से भी कुछ पैसे मिल जाते है." कमल अपने जेब खर्च के बारे में कनिका कुब्बताया की उसका जेब खर्च कैसा चलता है. वही ये सुन कर नकुल और कनिका भी उसकी प्रशंशा करने से न रोक सके.

"ये तुमने बहुत hi अच्छा किया." ऐसी बातो बातो में का उन्हें प्रिंसिपल सर के ऑफिस के सामने आ गए पता न चला, जब तक कमल ने उसने नहीं कहा, "ये लीजिये बातो बातो म पता hi नहीं चल प्रिंसिपल सर का ऑफिस के सामने आ खड़े हुए."

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"मई ी के इन, सर!" ऑफिस के दूर पर नॉक करने के बाद कमल ने दरवाजा अंदर की तरफ खोल अपना मुँह अंदर करके, अंदर आने की इजाज़त मांगी थी. वही प्रिंसिपल अपने आँखों पर नज़र का चश्मा लगाए हुए किसी फाइल को देख रहे थे, जैसे कमल की आवाज़ उनके कानो में पड़ी बिना नज़र हटाए कहा, "यस के इन कमल, मैं तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहा था."

"गुड मॉर्निंग सर." कमल ने पहले प्रिंसिपल सर का अभिवादन किया उसके बाद फिर बोलै, "कहिये सर मैं आपकी किसी प्रकार मदत कर सकता हु."

"वैरी गुड मॉर्निंग कमल." प्रिंसिपल ने भी prati-uttar में कमल का अभिवादन कर, फिर उस फाइल कप बंद कर के तरफ रखा. उसके बाद अपना सर उठा कर कमल की तरफ देखते हुए बोले, "पहले यहाँ बैठो, और हाँ तुमने अपने साथ आये दोस्तों का परिचय नहीं करवाया अभी तक. आप दोनों भी बैठ जाईये."

"सॉरी सर. मैं आपसे बातें करने में इनको भूल hi गया था." कमल ने प्रिंसिपल से क्षमा मंगाते हुए अपनी बात कही. फिर नकुल की तरफ एक बार देखते हुए बोलै, "मित्र तुम्ही अपना परिचय प्रिंसिपल सर को दो."

"सुप्रभात प्रधानाचार्य जी. मेरा नाम नकुल कुशवाहा है, और ये है मेरी भार्या, मेरा मतलब है मेरी जीवनसंगिनी कनिका कुशवाहा." नकुल अपना परिचय शुद्ध हिंदी में प्रिंसिपल सर को दिया. नकुल की हिंदी सुन कर प्रिंसिपल सर मुस्कुरा दिए, आखिर बहुत समय के बाद किसी ने उनके सामने शुद्ध हिंदी में अपना परिचय दिया था, वर्ण हर कोई इंग्लिश में बात करता.

"बहुत समय बाद मैं इस तरह की भाष सुना है. मुझे बहुत hi अच्छा लगा तुम्हारा हिंदी में परिचय सुन कर. कहो कैसे आना हुआ यहाँ पर." प्रिंसिपल सर ने पहले नकुल की प्रशंशा की इस तरह हिंदी में बात करने पर. उसके बाद उन्होंने नकुल से यहाँ आने कारन पूछा. प्रिंसिपल के चेहरे पर एक अलग hi तेज़ ब्रिजमान था, जिसको देख कर है कोई उनके आगे झुकाने पर मजबूर हो hi जाता. वही प्रधानाचार्य की बात सुन कर नकुल खुश हो गया और फिर मुस्कुराते हुए बोलै, "श्रीमान हमें आपके महाविद्दयाल में प्रवेश चाहिए, ताकि हम अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर सके."

"ठीक है. तुम कमल के साथ चले जाना वह तुम्हारा प्रवेश तुम्हारे मनचाहे कक्षा में करवा देगा." प्रिंसिपल ने मुस्कुराते हुए नकुल के तरह hi उसका जवाब दिया और ये बता दिए की वह जिस सब्जेक्ट से अपनी आगे की स्टडी करने चाहता था, कमल के साथ वह अपना एडमिशन उस कक्षा में करवा सकते थे. नकुल ने अपना हाथ जोड़ कर धन्यवाद किया उनके इस उपकार के लिए. प्रिंसिपल सर ने कमल की और रुख करते हुए बोले, "कमल तुम्हें तोह पता है की इस साल हमारा कॉलेज नेशनल लेवल पर क़ज़ कांटेस्ट में भाग ले रहा है."

"जी सर, मुझे मालूम है." कमल ने प्रिंसिपल सर की बात सुनाने के बाद अपनी बात बोली उसको मालूम है.

"तोह मैं चाहता हु की इस बार का ये क़ज़ कांटेस्ट हमारा hi कॉलेज जीते. इसलिए मैं चाहता हु की तुम कांटेस्ट में हिस्सा लो. और हाँ इस बार जो कांटेस्ट हो रहा है, ये जोड़ी में है. तोह तुम कॉलेज से एक गर्ल स्टूडेंट को चुनो ताकि वह तुम्हारे साथ पार्टिसिपेट कर सके."

"ठीक है सर, इस बार ये कांटेस्ट हम hi जीतेंगे और हमारे hi कॉलेज को मिलेगा." कमल ने पुरे आत्मविस्वास से अपने शब्द कहे. जिस पर प्रिंसिपल सर मुस्कुराते हुए बोले, "बहुत अच्छा, मुझे तुम से यही उम्मीद थी. और हाँ इस बार जो कांटेस्ट के लिए प्राइज रखा गया है वह बहुत hi बड़ा है. अगर ये कांटेस्ट तुमने जीत लिया तो इनाम के रूप 2 लाख मिलेंगे दोनों प्रतियोगी को."

"थैंक यू सर," कमल प्रिंसिपल सर का धन्यवाद किया. उसके बाद प्रिंसिपल से जानने के लिए इजाज़त मांगी. उसके बाद कमल के साथ नकुल और कनिका एडमिशन के लिए निकल गए प्रिंसिपल के ऑफिस से. मर. चंद्र के पास कमल हम दोनों ले कर आया, फिर हमने अपना अड्मिशन करवाया. फिर कमल के साथ इस कॉलेज के बारे में और जानकारी ली. उसके बाद हम घर के लिए निकल गए.
 
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