Incest Sex Kahani Kasoor - SexBaba
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Incest Sex Kahani Kasoor

ये मेरी सेकंड स्टोरी है. इस स्टोरी में आप सभी को एक ऐसे व्यक्ति जीवन के बारेमे पता चलेगा. उसके जीवन में क्या क्या हुआ और क्या जय होता है. फिर उसने अपने आपको कैसे संभाला ये सब पढ़ने को मिलेगा.

अपडेट 1

"मुझे मत मारो मुझे छोड़ दो मैं तुम्हारा क्या बिगड़ा है. जो इस तरह से मुझे मर रहे हो. आआह मा." उस लड़के मुँह से ये दर्द भरी आवाज़ निकल कर वर्तावारा अशांत कर दिया. उस लड़के शरीर पर एक पता हुआ शर्ट और एक लोअर था. शरीर को देख कर ऐसा लग रहा था की उसे खाने को भी न मिलता हो.

"जो हम कहते है वो चुप कर, नहीं तो तेरी माँ को इस घर के सभी नौकरो परोक्ष देंगे और वो सभी तेरी माँ के जिस्म को नोच डालेंगे, और वो अपने लुंड इस्तेमाल ऐसा करेंगे की तेरी माँ की चीखे पुरे हवेली में गूंज उठेगी. या सभी के सामने बिना कपड़ो के एक वीक कर रहना पड़ेगा और जिसके जो मन में आएगा, वो तेरी माँ के साथ वैसा hi करेगा." ये औरत एक मर्द के बाँहों में बैठी हुई अपने जिस्म को मसलवाने में लगी हुई थी और उसी ने ये बात बड़े जोर से कही थी. वह पर मौजूद सभी जोर से हांसे लगे और जो मर्द से अपने लुंड को पंत के ऊपर से hi मसलने लग गए.

"नहीं नहीं तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे. मैं तुम्हारे पेअर पड़ता हु. यहाँ तक तुम सब जो भी कहोगे वो सब कुछ करूँगा. पर आप सब मेरी माँ के साथ ऐसा मत करना. इस में मेरी माँ का कोई कसूर नहीं है. मैं हाथ जोड़ता हु आप सभी के सामने." उस लड़के ने गिड़गिड़ाते हुए बोलै. उसके आँख से आशु इस कदर बहा रहे थे की उसके गलो से होते हुए उसके शर्ट को भिगो रहे थे. सामने बैठे हुए सभी मर्द औरत उसे देख कर जोर जोर से हंस रहे थे.

"हरिया जा और उसे इंजेक्शन को ले कर आ और इस कुत्ते को लग दे. ताकि अपने औकात में रहे." एक आदमी ने कहा जो उस औरत के साथ खेल रहा था. उस आदमी की बात सुनते hi हरिया वहां से चला गया. "भाभी ये आपकी ये रसीली चूचिया चूस कर मस्त हो जाता हु. और इन्हे दबाने में इस कदर खो जाता हु की मुझे कुछ पता नहीं चलता."

"तुम तो रहने hi देवर जी. मुझे मसका लगाना बंद कर दो. ये हथियार है न तुम्हारा जो मेरे निचे चुभ रहा है, उसे शांत रखो." उस औरत ने उसके हथियार को अपनी निचे से निकल एक तरफ करते हुए बोली. वह पर बैठे हुए सभी ये देख कर गरम भी हो रहे थे, पर किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी की वो सब भी ऐसा कुछ कर सके. तभी हरिया इंजेक्शन ले कर आ गया और उसे देख वो औरत फिर से बोली, "हरिया जा लगा दे."

"जो हुमुक मालकिन. अभी लगता हु इस कुत्ते को." इतना कहने के बाद हरिया उस लड़के के पास चला गया. फिर हरिया ने वो इंजेक्शन उस लड़के को लगा दिया. हरिया इतने वर्षो से ये इंजेक्शन लगते आ रहा था पैट उसे ये नहीं पता था की इस इंजेक्शन से होता क्या है इस लिए हरिया ये पूछने कर निर्णय लिया और पूछ hi लिया. "मालकिन लग दिया. आप बुरा ना माने तो ये बात सकती है की इस इंजेक्शन लगने से क्या होगा."

"हरिया तुम हमारा वफादार है इस लिए मैं तुझे ये बात बता रही हु. पर ये बात बहार नहीं जाना चाहिए समझा." उस औरत ने हैरया की तरफ ऐसे देख कर बोली थी की हरिया भी एक पल के लिए दर गया था, दर उसे इस बात का था की अगर उसके मुँह से गलती से भी ये बहार निकल गया तो पता नहीं उसके साथ क्या हो जाये. "हरिया ये कोई ऐसा वैसा इंजेक्शन नहीं है, इस इंजेक्शन को अगर किसी को भी लगा दिया तो उसका लुंड कभी खड़ा नहीं होगा."

"पर मालकिन मुझे ये समझ नहीं आ रहा की कुत्ते को हम इंजेक्शन अब तक क्यों लग रहे है. जहाँ तक मुझे पता है की आप ने ये इंजेक्शन बहुत hi ज्यादा पैसे दे कर मंगवाया है. इसको एक बार लग दिया जाये तो उसका लुंड कभी नहीं खड़ा होगा." हरिया ने ये बात इस लिए पूछा था. क्योकि हरिया और इस दोस्त आपस में hi की मेडिसिन को ले कर बात कर रहे थे तो ये टॉपिक भी दोनों के पीछे में आ गया और उसके दोस्त ने इस तरह के मेडिसिन के बारे में उसे बताया था. और जब अपनी मालकिन से इस मेडिसिन के बार में सुना तो यहाँ बात पूछ hi लिया.

"हरिया तुम बिलकुल ठीक कह रहे हो. ये इंजेक्शन अगर किसी भी व्यक्ति को एक बार लग जाये तो वो जिंदगी भर के लिए नामर्द बन जाये. पर पता नहीं इस कुत्ते के ऊपर असर hi नहीं होता. इस लिए हमें इस हर तीसरे दिन देना पड़ता है. कही फिरसे इसका ये खड़ा न हो जाये." उस औरत ने हांसे हुए कहा. वो लड़का भी ये बात सुन रहा था, आज उसे पता चला था की ये लोग उसे ये इंजेक्शन किस लिए देते थे.

तभी वह बैठने वालो में से एक औरत बोल पड़ी, "वो कुत्ते के पिले इधर आ कर मेरी छूट को चाट शांत कर, अपना मुँह मेरी इस छूट से तभी हटाना तक म झाड़ नहीं जाती." और वो लड़का उस औरत के पास जा कर उसकी छूट को चाटने लगा. एक आवाज़ आयी "क्या हेमा भाभी आपकी छूट में इतनी खुजली होने लगी की इस पिले से तुम अपनी छूट चटवा रही हो. मैं क्या मर गया हु."

"ऐसी बता नहीं है देवर जी आप तो जब चाहे मेरी छूट चाट सकते हो. मैं ने कब मन किया है, जब चाहे आ जाना और चाट लेना. पर अपने भाई क्या ध्यान रखना. अभी तो यह पर नहीं है तो मैं इस कुत्ते के बीज को सेवा का मौका दे रही हु. और आज ये मेरी छूट रास के साथ साथ मेरा पेशाब भी पियेगा." हेमा आहे भरते हुए बोल रही थी. उसकी छूट से रास की धरा बाह कर उस लड़के के मुँह में जा रहा था. हेमा भी छूट चूसै का आनंद ले रही थी. वही हेमा का देवर अपनी भाभी को मस्ती में देख कर अपने पास वाली औरत की छूट को कास के दबा दिया अपने हाथ को निचे ले जा कर, और उस औरत के मुँह से भी आअह्ह्ह की आवाज़ निकल गयी. खुद को काबू करते हुए बोली, " महेंद्र बाबू, तुम चाहो तो पिले की गांड मर सकते हो इसकी गांड भी किसी लड़की से काम मजा नहीं देगी, क्यों रे हरिया सही बोल रही हु न मैं."

हरिया मुस्कुराते हुए कहा, "जी मालकिन आप बिलकुल सौ आना सही बोल रही है. आखिर मैं ने भी तो मज़े लिए है. महेंद्र बाबू आप एक बार तरय करो. मेरा विश्वास मानिये आप अपनी भाभी को भूल जायेगे."

"भाभी मुझे ऐसे कोई सूखा नहीं है. बस आप की ये प्यारी छूट मिल जाये वही बहुत hi मेरे लिए.' महेंद्र अपने 10 इंच लम्बे 4 इंच मोठे लुंड को अपने हाथ में ले कर हिलते हुए कहा. और फिर वह से उठा कर उस लड़के गांड पे एक लत मर दिया बुरी तरह से. जिस कारन वो लड़का रोने लग गया, पर उसके मुँह से एक चीख तक नहीं निकला, क्योकि वो जनता था की अगर उसने चिलाय तो वो सब उसकी माँ को नहीं छोड़ेगे.

महेंद्र एक स्टिक उठा कर फिर से उस लड़के की गांड पर मर दिया. वह रोटा रहा और महेन्दर उसे लगातार उस लड़के के गांड पे स्टिक से मरता गया. जब तक उसका पिछवाड़ा उसके मरने से छील नहीं गया. वह पर मौजूद सभी लोग हाससस रहे थे. जब वो लड़का अधमरा हो गया, तब जा कर उसे छोड़ा.

"हरिया इसे ले जा और उसकी माँ के पास छोड़ आ." उसके बाद हरिया उस लड़के को उठाया और उसकी माँ के पास छोड़ने चला गया.

"महेंद्र तुम बहुत hi बुरे हो. तुमने मुझे झड़ने नहीं दिया. मैं आने hi वाली थी की तुमने उसके गांड पर मर कर मुझसे अलग कर दिया. आज फिर से मुझे ऊँगली दाल कर खुद को शांत करना पड़ेगा." हेमा ने गुस्सा होते हुए बोली. ये सच भी था की अगर कोई इस हालत में तो उसका गुस्सा होना जायज था. वही महेंद्र अपनी भाभी की बात सुन मुस्कुरा दिया.

"ये बात तो आपको बड़ी भाभी से कहना चाहिए, जिसकी वजह से ये हुआ. मुझसे नहीं. मैं तो वही करता हु जो भाभी कहती है." महेंद्र हँसते हुए बोल, जा कर अपनी बड़ी भाभी के पास बाथ गया.

"हाँ मुझे मेरी जेठानी की बूर कभी मुझे खुश होता हुआ नहीं देख सकती है. क्योकि इनकी बूर में आग जो लग जाती है मुझे खुश देख कर. इसलिए उसको बुझाने के लिए ये सब करती है." हेमा गुस्सा होते हुए बोली. वही उसकी जेठानी ये देख कर मुस्कुरा दी.

"रेशमा ये लगत बात है, तुम सिर्फ अपना hi सोचती हो कभी कभी हमारे लिए भी सोच लिया करो." हेमा ठाकुर से कुछ दूर बैठे हुए एक औरत बोलै पड़ी. क्योकि उसकी बूर में आग लगी हुई थी ये सब देख कर ऊपर से उसे कुछ दिनों से चुदाई नहीं करने दिया गया था.

"रजनी तेरी आग में शांत करवाती हु. बड़ी जुबान चलने लगी है तेरी. 15 दिन और न तू अपनी छूट हाथ लगाएगी और नहीं तुझे कोई चौडेगा. महेंद्र जा कर हेमा की छूट की आग शांत कर, पर ध्यान रहे सिर्फ मुँह से. और मैं चली अपने रूम में." उसके बाद रेशमा ठाकुर उठ गयी और अपने रूम की तरफ चली गयी. वही रजनी ठाकुर उसके पीछे हो ली क्योकि वह रहने पर उसे कुछ नहीं मिलने वाला था. जब की महेंद्र हेमा की छूट पर टूट पड़ा.

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"माँ तुम ठीक तो होना, तुम्हे बड़ी माँ और चेचक ने कुछ किया तो नहीं." वो लड़का उठाते hi अपनी माँ को अपने पास देख कर पूछने लगा. उसकी माँ भी उसे प्यार से गले लग ली और बोली, "न मेरे लाल, मुझे कुछ नहीं किया उन्होंने, मैं बिलकुल ठीक हु. तू बस आराम कर, जब तक मैं तेरे लिए खाना लती हु." उसके बाद उसकी माँ उसके लिए खाना लेने उसे वही छोड़ चली गयी. वो लड़का भी उस ठन्डे पर्श पर लेट गया और आराम करने लगा. अभी तक उसके जिस्म में उस मर का दर्द था, खास कर उसकी चुत्तड़ो में. उसकी माँ खाने ले कर जब आयी तो देखा की उसका बीटा फिरसे सो गया था.

"नकुल उठ बीटा और ये गरमा गरम खाना खड़ा ले. ताकि मैं तुझे ये दवा दे सकू." उसकी माँ ने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए जगाने लगी. वही नकुल अपनी माँ की बात सुन और दुलार को देख, अपना सारा दर्द भूल गया और उठ कर अपनी माँ के गले लग गया. फिर उसकी माँ ने अपने लग कर नकुल को खाना खिलने लगी. खाना खिलने के बाद उसकी माँ ने उसे दवा खिला दी. फिर नकुल वही फर्श पर सो गया. उसके बाद उसकी माँ उठी और झूठा प्लेट ले कर वह से चली गयी.
 
अपडेट 2

चरक्टेर्स इंट्रोडक्शन

हीरो_ नकुल ( देखने म एक बचे जैसा ह और पर्सनालिटी एक मोडल की तरह ह. हाइट 6.7फट ह. ये अपनी माँ से बहुत प्यार करता है. उसके लिए अपनी जान भी दे सकता है.)

हेरोइन_ सोनिआ ठाकुर ( ये राजघराने से सम्बन्ध रखती है. इस के पास ऐसी पावर है जो पुरे ब्रम्हांड को ख़त्म के सकती है. ये देखने बहुत hi ख़ूबसूरत है. सोनिआ ठाकुर देखने म बहुत सुन्दर ह. फिगर भी कमाल का ह, कोई एक बार देख ले बस देखता hi रह जाये. इस के करैक्टर के बारे में बाकि की जानकारी कहानी साथ पता चल जायेगा.)

हेरोइन 2 _ ज़रीन खान ( ये एक घमंडी लड़की है. इसके पिता एक डॉन है पर ज़रीने को इस बारे में पता नहीं है. ये देहरादून में रहती है. ज़रीन खान एक बड़े बाप बिगड़ी हुई लड़की ह. देखने म हॉट एंड सेक्सी, ये हर लड़के को अपना गुलाम समझती ह. फिगर 34 28 36 है. हेगत 5.7इंच है. कोरे वाइट पिंक है. बाकि कहानी के साथ)

हेरोइन3_ खुशबू सिंह ( ये इंडिया के no बिज़नेस मन की बेटी है. इसके पास भी पावर है. इसके पस पावर है किसी को भी नहीं पता है शिवाये इसके गुरु के छोड़ ke.khushboo सिंह ये बहुत hi सिंपल ह. पर बहुत hi खतरनाक. आईटी सेक्शन म गोल्ड मैडल ले चुकी ह बहुत hi काम आगे म. फिगर 32 28 34 है. हाइट 5.9 इंच. कलर व्हिटिस है.)

मानव ठाकुर_ ये हीरो के पिता है और बहुत बड़े बिज़नेस मन ह, 30 गाओं के मालिक ह. पर सिर्फ नाम के है. ऐसा क्यों है आपको कहानी में पता चल जायेगा. ये अपनी सबसे छोटी पत्नी से बहुत प्यार करते है.

रेशमा ठाकुर_ मानव ठाकुर की पहली पत्नी देखने म हॉट ह, पर इसकी िछाये बहुत ह. फिगर 36 30 38 है और हाइट 5.6फट है. कलर फेयर है. ये बहुत hi लालची किस्म की औरत है.

पद्मनी खुश्वाहा _ ये हीरो की माँ. यह एक गरीब घर की बेटी है. Maa-baap ने पद्मनी को 10 तक पढ़ कर इस काबिल बना दिया था की वो अपना पेट मुश्किल समय में भर सकती थी. पर इसकी किस्मत में कुछ और hi लिखा था इस लिए इसकी शादी मानव ठाकुर से हो गयी. मैले कपड़ो में भी ये बहुत hi सुन्दर लगती थी देखने में.

रणजी ठाकुर _ मानव ठाकुर की दूसरी पत्नी है. ये अपनी पति से बहुत प्यार करती ह फिगर 36 30 36 है और हाइट 5.7फट है. अगर ये अपने मैं में खुश सोच ले उसे पूरा कर के hi रहती है चाहे इस लिए कुछ भी करना पड़े.

रेशमा ठाकुर के बचे

कारन ठाकुर_ रेशमा ठाकुर का बीटा. ये अपनी माँ बे गया हुआ ह. लड़कियों की अपनी जागीर समझता ह. देखने म गुड लुकिंग ह. हाइट 5.8फट. बाकि के कहानी के साथ.

रागनी ठाकुर_ रेशमा ठाकुर की बड़ी बेटी ये हीरो से बहुत नफरत करती ह, ये अपने माँ पर गयी ह, फिगर 32 28 34 ह, इस लड़को मरने बहुत मज़ा आता है. बाकि का कहानी के साथ पता चलेगा.

करीना ठाकुर_ रेशमा ठाकुर की दूसरी बेटी. ये अपने माँ से बिलकुल अलग ह. ये अपने दुश्मन को कभी नहीं बख्श्ती ह, फिगर 34 29 34 ह. ये लड़को से दूर hi रहती है,

काजोल ठाकुर_ रेशमा ठाकुर की सबसे छोटी बेटी. ये बहुत hi संत ह और बहुत hi सुन्दर ह. ज्यादातर समय स्टडी म बिताती ह. फिगर 28 26 30 ह.

रजनी ठाकुर के बचे

प्रिय ठाकुर_ रजनी ठाकुर के बड़ी बेटी. ये बहुत hi चालक ह और उतना hi हॉट एंड सेक्सी फिगर 28 26 30 है. ये. इस ने ब किया हुआ है. फ़िलहाल ये घर पर hi रहती है.

नैना ठाकुर_ रजनी ठाकुर की दूसरी बेटी. इस स्टडी से ज्यादा दूसरे कामो में मैं लगता है, फिगर 30 28 32 ह.

ज्योति ठाकुर_ रणजी ठाकुर की सबसे छोटी बेटी ये हीरो से बहुत प्यार करती ह पर किसी से कहती नहीं ह. ये अभी देहरादून कॉलेज में पद्धति है.. फिगर 34 28 34 है. इस का एक राज़ है जो इसको भी नहीं पता.

हेरिओ के चाचा का परिवार

राज ठाकुर_ हीरो के बड़े चाचा देखने म ठीक है. ये अपनी काम से काम रखता है. पर जवान और कमसिन लड़कियों का आशिक़ है. ये के बिज़नेस मन है. पर इसका मैं काम कुछ और है.

हेमा ठाकुर_ राज ठाकुर की पत्नी किसी मोडल से काम नहीं लगती ह. फिगर 36 30 38 है. हाइट 5.8फट है. ये हमेश सेक्स के नशे में रहती है. ये अपने बचो से बहुत प्यार करती है खासकर अपने बेटे से.

राजन ठाकुर_ ये भी अपनी माँ के तरह ह. इस बस एक hi काम आता है. लड़कियों के साथ सेक्स करना. ये अपनी माँ के साथ भी सेक्स करना चाहता है.

रंजना ठाकुर_ ये भी अपनी माँ के तरह ह. फिगर 34 30 43 ह. हाइट भी ठीक थक है. ब 2ंद ईयर में पढ़ती है. ये सेक्स करना चाहती पर इस दर के मारे कभी नहीं किया.

सोनी ठाकुर_ ये देखने म बहुत hi सुन्दर ह. B,com फाइनल ईयर में है. लड़को को कुछ भी नहीं समझती है. ये नकुल से नफ़रत करती है. ऐसा क्यों दिन नहीं गया इसने नकुल मारा न हो. फिगर भी कमल का है.

रमन ठाकुर _ हीरो के मझोले चाचा देखने म किसी मोडल से काम नहीं लगते ह. लड़कियों का आशिक़ है. जहाँ लड़की देखनी उसे पीछे पद जाता है. ये अपनी सबसे छोटी भाभी के साथ सेक्स करना छह पर सफल नहीं हो पाया. इस का एक्सपोर्ट इम्पोर्ट का बिज़नेस है. पर क्या एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट करता है. किसी को नहीं पता है. हाँ पर कहने की इलेक्ट्रॉनिक्स.

रानी ठाकुर _ रमन ठाकुर की पत्नी ये रेशमा ठाकुर से कुछ काम नहीं ह. इसका फिगर भी मस्त ह. पैसे के लिए कुछ भी कर सकती है. पैसे के लिए hi इसने रमन ठाकुर से शादी भी किया.

उमा ठाकुर_ बहुत hi सुन्दर और सेक्सी हैं ये अपनी माँ रानी ठाकुर पर गयी है. ये भी पैसो की लालची है. बाकि कहीं के साथ.

कविता ठाकुर_ ये रानी ठाकुर की दूसरी बेटी है. ये हॉट एंड सेक्सी फिगर की मालकिन है. अगर कोई इसे बिना कपडे के देख ले खड़े खड़े पानी निकल जाये. ये अपनी जिस्म की नुमाइश करने अच्छा लगता है. पर से इस कवी बुलाते है.

प्रदीप ठाकुर_ ये बहुत hi कमीना ह ये अपने छोटे चाचा और बाप पर गया ह. ये B.com 2ंद ईयर में है. ये कॉलेज सिर्फ लड़कियों के लिए जाता है.

सुनीता ठाकुर_ ये नकुल की सबसे छोटी बुआ है. ये नकुल से एक बार भी नहीं मिली है. विदेश में hi स्टडी कम्पलीट करने के बाद वही एक साइंस लेबोरेटरी में जूनियर आशस्त. है. ये अपनी भाभी पद्मनी से बहुत प्यार करती है. अभी तक कुंवारी है.

महेन्दर ठाकुर_ हीरो के सबसे छोटे चाचा, इनकी बॉडी किसी बॉडीबिल्डर से काम नहीं ह. ये अपने आपको सबसे बहुत बड़े तीस मरखा समझते ह. ये सोचते ह की इनके जैसा लुंड धरी कोई नहीं ह इस डर्टी पर. इसका अपने भाभी रेशमा और रजनी ठाकुर से जिस्मानी सम्बन्ध है. ये उनके लिए कुछ के सकता है.

रुक्मणि शर्मा _ महेंद्र ठाकुर की मासूका. माध्यम परिवार की लड़की है. इसके mata-pita की मौत एक कार एक्सीडेंट में हो गयी थी जब ये B.com फाइनल ईयर में थी. फिगर भी कमाल का है 36 28 38 है.

हीरो के बुआ का परिवार

रीना सिंह_ हीरो की बुआ किसी मोडल से काम नहीं है. ये सेक्स के लिए पागल रहती है किसी से भी सेक्स कर ले. पर समाज की दर से ऐसा नहीं करती है.

अमन सिंह_ रीना सिंह का पति पर किसी काम का नहीं ह. एक बैंक में मैनेज है.

तानिया सिंह_ ये रीना और अमन सिंह की बड़ी बेटी है. ये बहुत hi सेक्सी ह, इसे लड़को को मरने बहुत hi मजा आता ह. इसका अपना ग्रुप है जो बड़े घर के लड़को लड़कियों का है

गोरी सिंह_ ये अपनी माँ की तरह कमल की फिगर की मालकिन है. इसे पढाई में बहुत hi इंटेलीजेंट ह.

राहुल सिंह_ ये B.A. 1सत ईयर में है. इसकी हाइट भी इसके बाप की तरह है. ये जितना छोटा है उतना hi खोता है. ये नकुल से बहुत जलता ह

मंजू रावत_ ये हीरो की दूसरी बुआ बहुत hi सुन्दर ह. इन होने पोस्ट ग्रेजुएशन किया हुआ है. इन्हे सिर्फ अपने हुए अपने परिवार से मतलब रखती है.

तरुण रावत_ मध्यम कद काठी के ह. ये अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता ह. जो इनकी पत्नी कहती ह वो ये करते ह. पर पैसो के लिए कुछ भी कर सकते है.

चांदनी रावत_ ये मंजू की बड़ी बेटी है. इसका फिगर किसी की भी जान ले सकता ह. ये बेस लड़को को अपने सामने नंगा करने के बाद बहुत hi ज्यादा टॉर्चर करती ह. ये नकुल से बहुत नफ़रत करती है. इसका कारन क्या है आपकी कहीं के साथ पता चल जायेगा.

रम्भा रावत_ ये मंजू की दूसरी बेटी है. ये हीरो से बहुत hi नफरत करती ह. ये M.sc कर रही है.

जतिन रावत_ ये बहुत hi कमीना ह और इसका बस चले तो घर की किसी भी औरत को न छोड़े.

इतर करैक्टर

हरिया

लखन

जोया

कविया

रोनित शर्मा

सीमा रॉय

चन्दन कुमार

राहुल महरा

मोहित वडवा

अनुभव घुसे_ ये बहुत hi बड़ा साइंटिस्ट ह. पर लोग इसे बस ये डॉ के रूप म जानते ह. इनका एक छोटा सा क्लिनिक एक छोटे से गाओं म ह. इनके पास के अपनी लेबोटरी ह, जो इनके शिव को नहीं जनता ह

विलियन _ सस्पेंस ह

बाकि के करैक्टर जैसे जैसे कहानी बढ़ेगी वैसे आपको पता चलता जायेगा.
 
अपडेट 3

नकुल सुबह जल्दी उठ गया और फ्रेश हो कर घर का सारा काम करने लगा. नकुल ने घर सरे काम दिया था, बस अब उसे अपने बड़ी माँ रेशमा ठाकुर को उठना था जो की अपने रूम सो रही थी. नकुल अपनी बड़ी माँ को उठाने के लिए उनके रूम के तरफ चल दिया और जैसे hi उसने अपना पहला कदम सीडी पर, चढ़ने के लिए रख. उसी समय नकुल किसी लड़की से टकरा गया और वो लड़की निचे गिरी गयी. गिरने की वजह से उस लड़की को चोट लगी और वो बहुत जोर से रोने लगी. उसकी आवाज सुने के उस घर के सभी लोग बहार आ गए.

"क्या हुआ सोनी बीटा? क्यों रो रही है?" हेमा ठाकुर अभी अभी नहं कर hi बाथरूम्स से बहार आयी थी और अपनी की रोने की आवाज़ सुन रूम से बहार आ गयी. आते hi अपनी बेटी को गले लग ये सवाल किया था. हेमा ने सिर्फ अपने जिस्म पर एक निघ्त्य डाली थी, और कुछ भी नहीं पहना हुआ था अंदर जिसके वह से उसके चूचक साफ़ दिख रहे थे, जो तने हुए थे. वही निचे योनि के पास के काळा बाल भी हलक दिखाई दे रहा था.

"माँ इस कुत्ते के पिले ने मुझे निचे गिरा दिया." सोनी ने रट हुए बोली. इतना सुनते hi हेमा ठाकुर ने नकुल 15 थप्पड़ जड़ दिए. थप्पड़ इतना जोर के मारा था की उसके होठ के बगल से खून निकल कर बहार आ गया था.

"मैंने जान बुझ कर नहीं किया चची. मैं बड़ी माँ को जगाने उनके रूम में आ रहा था और जैसे hi मैं सीडी पर अपना पहला पेअर रखा उसी समय दीदी आ गयी और उनसे लड़ गया और दीदी निचे गिर गयी. इस में मेरी क्या गलती ह." नकुल ने अपनी चची से कहा. नकुल इतना दर्द था की उसे बोलने में भी बहुत तकलीफ हो रही थी, पर फिर भी उसने अपनी सफाई दी ताकि और मार न पड़े. पर घर वालो को इसे क्या फर्क पड़ने वाला था, उन्हें तो सिर्फ कोई मौका चाहिए उस बेचारे को पीटने के लिए. महेंद्र बाबू कहा मानाने वाले थे उन्होंने तो नकुल सब के पूरा नंगा कर के उसे एक टेबल से बांध दिया और एक पतीली सी लकड़ी उठा के उसके गांड पर मरना सुर कर दिया. बेचारा कल के hi मर से अभी उभरा नहीं था और आज फिर से वही पर मर पड़ने लगी. तब तक मर पड़ती रही जब तक वो लकड़ी टूट नहीं गयी. नकुल बेचरा चिलता रहा की मेरी कोई गलती नहीं थी, ये सब अनाजे में हुआ. पर किसी को क्या फर्क पड़ने वाला था और किसी ने भी उसकी नहीं सुनी.

उसके बाद नकुल को छोड़ दिया गया. हद तो तब हो गयी जब घर की मालकिन रेशमा ठाकुर ने एक अलग hi फरमान सुना दिया. "नकुल, आज तुम्हे स्कूल पैदल hi जाना होगा और वो भी बिना कुछ खाये."

फिर सभी वह से चले गए, आपने अपना काम करने. अब वह पर कोई था तो सिर्फ नकुल जो मर खाने के बाद अपना पंत बड़े मुश्किल से उठ कर पहना और लड़खड़ते हुए अपने रूम में चला गया. जब नकुल अपने रूम में दाखिल हुआ तो उसकी माँ अपने बेटे की हालत देख कर रोने लगी. नकुल अपना दुःख दर्द भुला अपनी माँ के पास भाग कर चला गया. "माँ तू क्यों रोटी है. ये तो मेरा नसीब है. जिस मैं भोग रहा हु. तू चुप हो जा माँ मुझे कुछ नहीं हुआ है." नकुल अपनी माँ के गले लगे हुए कहा. पर नकुल का दिल इस कदर दुखी था की अपनी माँ के प्यार भरे दुलार पर का उसकी आँखों से आशु बाह निकले और अपने माँ से रट हुए पूछने लगा, "माँ मेरा क्या कसूर है, जो मुझे कोई भी नहीं जनता है और न hi कोई मुझसे प्यार करता है. जब को मैं उन सब को खुश रखने के लिए क्या नहीं करता. मैंने उन सब का क्या बिगाड़ा है."

"तुम्हारा कोई कसूर नहीं है मेरे लाल और न hi तुमने उनका कुछ बिगाड़ा है. बीटा आज तुम स्कूल मत जाओ." नकुल की माँ ने अपने बेटे को प्यार से सर पर हाथ फेरते हुए बोली.

"माँ आज स्कूल जाना जरुरी ह क्यों की आ स्कूल में बहुत hi इम्पोर्टेन्ट टेस्ट है." नकुल ने अपनी माँ से कहा.

"ठीक है. फिर तुम स्कूल जाओ, मैं तुम्हे नहीं रोकूंगी. तुम तैयार हो, मैं खाना ले कर आती हु." उसकी माँ ने कहा. उसकी माँ रूम से चली गयी, अपने बेटे के लिए खाना लेने. वही नकुल एक बार फिर से बाथरूम में घुस गया. जब बहार आया तो उसकी माँ नहीं आयी थी. नकुल ने जल्दी से स्कूल ड्रेस पहन कर रेडी हो गया. अभी अपने बालो में कंघी कर hi रहा था, नकुल की माँ खाना ले कर आ गयी. नकुल ने जल्दी से खाना खाया और पैदल hi स्कूल की और चल दिया.

नकुल के जाने के बाद उसकी माँ वह से निकला कर एक तरफ चल दी. जहाँ पर महेंद्र ठाकुर कर रूम था. नकुल की माँ एक रूम में प्रवेश की. नकुल की माँ एक बहुत hi झीनी से साडी पहनी हुई थी जो उसके जिस्म के हर कटव को साफ़ उजागर कर रहा था. उसके रूपयौवन को देख कर सामने लेता हुआ सख्श पागल हो गया था और अपने हथियार को अंडरवियर के ऊपर से मसलने लग गया.

"जानेमन रुक्मणि क्या लग रही हो इन कपड़ो में. तुम्हारे इस हुश्न मुझे पागल कर देता है. और ये देख इसका सबूत." बिस्तसर पर लेते हुए महेंद्र ने कहा. महेंद्र के हथियार के तरफ देख कर रुक्मणि हसने लगी. उसके हँसते हुए देख एक बार फिर से उसने कहा, "बिना कपड़ो की और भी बेमिशाल लगती हो. मन करता ह अभी तुम्हे छोड़ दू."

"जान तुम्हे रोका किसने है. मैं तो खुद hi पागल हो जाती हु, जब एक बिना चूड़े गुजरता है. ये काम कब तक करना पड़ेगा. ###यरस हो गए है. नकुल को सँभालते हुए. अब मेरा मन नहीं करता है ऐसा करने को." रुक्मणि ने अपने कपडे निकलते हुए बोली. रुक्मणि ने एक एक कर के अपने कोमल और नाज़ुक जिस्म से सरे कपडे निकल एक तरफ फैक दी. और चलते हुए महेंद्र के पास आ गयी. बड़े hi ऐडा के साथ उसने अपना पहला पेअर बिस्तर पर रखा, जिससे उसकी योनि के होठो फैयल गए. "देख लो महेंद्र बाबू देख लो ऐसा नज़र तुम्हे फिर नहीं मिलने वाला कुछ दिनों तक."

महन्दर रुकमणी की बात सुन आगे बढ़ा कर उसे अपने बाँहों में खींच लिया. और उसके योनि को अपने हाथ से रगड़ते हुए कहा, "रुक्मणि बस सिक्स मोनथस की और बात है. फिर उस कुत्ते को तुम्हे नहीं झेलना पड़ेगा. भाभी कह रही थी सिक्स मंथ बाद वो कुत्ता 18 यरस का हो जायेगा. और साडी जमीं जायदाद उस कुत्ते नाम हो जाएगी. उसके बाद हम कुत्ते को धमका कर साडी प्रॉपर्टी हम अपने नाम करवा लगे. फिर उस कुत्ते को जान से मर देंगे." महेंद्र का हाथ अब रुक्मणि के योनि द्वार के अंदर चला गया था और अपने हाथ को आगे पीछे कर yoni-ras निकलने में लग गया था.

"जान मुझे आज तक ये बात समझे नहीं आयी की तुम उस वो इंजेक्शन क्यों देते हो." रुक्मणि आहे भरते हुए बोली. उसकी छूट ने भी बहुत hi ज्यादा पानी बहा रही थी.

महेन्दर उसको योनि से अपनी चार उंगली निकल कर उसके मुँह के सामने लाया और उसकी उंगली को देख अपना मुँह खोल उसे अंदर ले कर चूसने लगी. महेंद्र ये देख मुस्कुरा दिया और बोलै, "रुक्मणि तुम ने उसका लुंड तो देखा hi होगा. इस ुरम में भी बिना खड़ा हुए hi कितना बड़ा दीखता है."

"हाँ देखा तो मैं ने भी है. फिर उसे क्या?" रुक्मणि अपने मुँह से उंगलियों को बहार निकल कर बोली.

"तुम्हे ये नहीं पता होगा जब उसका जनम हुआ था उस समय भी उसका वो अंग काफी बड़ा और मोटा था. उसे देख कर कोई भी नहीं कह सकता था की ये जनम लिए हुए बचे की नुन्नी है. उसका वो खास अंग 7 वर्ष के लड़के के सामान था. भैया भी ये देख कर हैरान थे. जब भैया ने उसकी कुंडली दिखाई थी उसे समय पंडित ने भैया को कुछ ऐसा कहा था की वो विश्वास नहीं कर पर रह थे." महेंद्र रुकमणी की एक उभर को अपने हाथ से दबाते हुए कहा. रुक्मणि को भी आगे जानने की इच्छा हुई और उसने पूछ hi लिया की क्या कहा था पंडित ने.

फ्लैशबैक

"मानव ठाकुर जी आपकी पत्नी पद्मनी जे जिस बेटे को जनम दिया है. ये आपके वंस का नस करके रख देगा. और जिस बेटे को आपकी dharm-patni पद्मनी ने जनम दिया है. ये आपका बीटा नहीं है, बल्कि किसी और का है. ये मुझे आपके की जनम कुंडली देखने से पता चला है." पंडित भैया से कहा. पंडित की बात सुनाने के बाद भी भैया को उसकी बातो पर विश्वास नहीं हो रहा था. पर भैया ने उसे dan-dakshina देने के बाद पंडित जी को जाने के लिए कहते दिया. पंडित जी वह से चले गए. और भैया इस बात को ले कर चिंतित रहने लग गए. उन्हें पंडित जी की बातो पर बिस्वाश नहीं हो रहा था. पर बार बार पंडित जी की बाते हु भैया के दिम्माग में आने लग गया था. ये बात हम सब ने भी सुनी थी सिवाए पद्मनी भाभी के.

जैसा हम सब ने प्लान बनाया था वैसा hi हो रहा था. पर भैया अभी पद्मनी को बहुत प्यार करते थे. और हमेशा से hi भैया पद्मनी से ज्यादा प्यार करते आ रहे थे. ये बात मेरी दोनों बड़ी भाभियो को पसंद नहीं थी. क्योकि उस समय दोनों भाभियों ने एक भी लड़के को जनम नहीं दिया था. दिया था तो सिर्फ लड़की. भैया को वंस चलने के लिए लड़के का चाहिए था न की लड़की. इसलिए उन्होंने पद्मनी भाभी से भी शादी की थी, पर भैया भाभी के रूपयौवन में इस कदर खोये की अपनी पहली दोनों पत्नी को भुला बैठे.

ये सब भाभियो से देखा न गया की उनका पति उन्हें छोड़ कर पद्मनी से सबसे ज्यादा प्यार करने लगा. इसका बदल लेने के लिए उन्होंने ये षडियंत्र रिच डाला. जिस करना भैया चिंतित रहने लगे.

हमारा पहला कार्य पूरा हो चूका था. अब बरी थी पद्मनी भाभी की. इस लिए पंडित जी से मिलकर, हम ने पद्मनी भाभी के लिए ये सब कहलवा दिया की उनके बेटे पर मृत्यु दोष है.

जब ये बात भाभी को पता चली तो वह पंडित जी से मिलने चली गयी. पंडित जी ने फिरसे वही कहा जो हमें उसने कहने को कहा. पद्मनी भाभी पंडित जी की बात मन गयी और कहा, "पंडित जी तो आप बताईये मैं कैसे अपने बेटे की मृत्यु दोष ख़त्म कर सकती हु. इसका कोई को उपपाये होगा. जिसे मेरे बेटे की ताली जा सके."

"बेटी पद्मनी इस का एक उपाए है. पर शायद hi तुम इसे कर सकती हो." पंडित जी ने कुछ देर सोचने के बाद कहा. और फिर वो रुक गए. जैसे वह देखना छह रहे थे की पद्मनी भाभी क्या कहेगी. पद्मनी भाभी तो ये सुन कर की उनका बीटा बच सकता है तो भाभी ने पंडित जी के पारी hi पकड़ ली. भाभी ने पंडित जी का पेअर तब तक नहीं छोड़ा जब तक उन्होंने आगे नहीं कहा, "बेटी यहाँ से 3कम दूर एक जांगले है, तुम्हे वह जाना है. जब तुम वह पहुँचोगी, उसके बाद तुम्हे जांगले के बीचो भींच जाना होगा. जहाँ पर एक गुफा मिलेगा. उस गुफा में तुमको एक महीने तक पूजा करनी है, वो भी मध्य रात में. हाँ पूजा करते समय तुम्हे एक सफ़ेद साडी hi पहनी है और कुछ नहीं होना चाहिए, तुम्हारे शरीर पर."

"ध्यानवाद पंडित जी. मैं आपके लिए कुछ भी करू वो काम hi होगा. आप ये रख लीजिये." भाभी ने अपने गले से एक हीरो हार निकल पंडित जी को दे जिया. उसके बाद भाभी वहां से चली गयी. हमारे ये बहुत hi अच्छा हुआ की भाभी ने पंडित जी की बात मन ली थी. अब पद्मनी भाभी पूजा के लिए मध्य रात्रि निकल जाती और सुबह 5 बजे से पहले वापस घर आ जाती. ऐसे hi 25 दिन निकल गए. इस बिच हमने ये पता लगा लिया था जहा पद्मनी भाभी पूजा कर रही है वही पर एक अघोरी साधना में बैठा हुआ है कोई वर्षो से.

ऐसे hi एक दिन भाभी पूजा करने के लिए निकल गयी. अभी भाभी को निकले हुए 10 मिंट hi हुए थे उसी समय उनका बीटा उठा गया. जिस कारन भैया की नींद टूट गयी और उठ गए. भैया बेटे को काफी देर तक चुप करते रहे पर वो चुप नहीं हो रहा था. भैया ने पद्मनी भाभी को भी बहुत आवाज गयी. पर वो नहीं आयी. भैया की आवाज सुन कर हम सब भी वह पहुंच गए. हम सब ने भैया से पूछा गया बात है भैया. तो भैया ने बतया की पद्मनी कही दिख नहीं रही है. तब रश्मा भाभी ने उन्हें पद्मनी भाभी के बारे म सब बता दिया. पर भैया को विश्वाश नहीं हुआ और हमने चुप करा कर वह से अपने कमरे म भेज दिया. उसके बाद भैया अपने बेटे को चुप करा के सो गए. जैसे हमने सोचा था भैया ने वैसा hi हमारे साथ किया.

अगले दिन जब पद्मनी भाभी पूजा के लिए निकली तो कुछ देर बाद भैया भी भाभी के पीछे चल दिए. भैया उनका पीछा करते हुए जांगले में पहुंच गए. पर जांगले में जाने के बाद भाभी भैया को कही दिखी. फिर भी भैया भाभी को ढूंढते हुए उस जहा पहुंच hi गए. जहाँ भाभी पूजा कर रही थी. जब भैया उस गुफा के अंडर गए तो देखा ये अगोरी भाभी के सामने खड़ा ह. और अपने शरीर को आगे पीछे कर रह था. उस समय भाभी एक डैम नंगी थी, क्योकि भाभी के जिस्म से वो साडी कब निचे गिरा इस बात का पता भी नहीं चला उन्हें. और वो अगोरी भी नंगा था. ये देख भैया को अपने आँखों पर विश्वाश नहीं हो रहा था. उसनी पत्नी कुछ ऐसा भी कर सकती थी. भैया थोड़ा आगे hi बड़े थे की अगोरी और भाभी की पूजा सम्पन हो गयी. पर वक्त ने कुछ और hi सोच रख था. अगोरी की पूजा सम्पन होते hi उसके लुंड से एक तेज़ धार वीर्य की भाभी के मुँह पे जा गिरा. उसे समय भैया भी वह पहुंच गए. जब वह पहुंचे तो उन्होंने देखा की भाभी के चेहरा पूरा वीर्य से भरा हुआ था. ये देख कर भैया बहुत क्रोधित हुए. फिर भैया ने अगोरी और भाभी को बहुत कुछ कहा. और भाभी और अघोरी ने बहुत समझाया पर भैया ने एक न सुनी और उन्होंने ने भाभी को वही पे जान से मर दिया उसके बाद अगोरी को भी उस अघोरी ने मरते हुए भैया को सर्फ़ दे गया, "जिससे तुम सबसे ज्यादा प्यार करते हो उसकी का बीटा तुम्हरे घर की बेटियों को छोड़ेगा. और तुम कुछ नहीं करवल पाओगे." उसके बाद अघोरी ने अपने प्राण त्याग दिए. फिर भैया वह से घर चले आये.

नोट :- अपडेट 3ा
 
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अब आगे

उसके बाद भैया ने पद्मनी के बेटे को कभी अपना नहीं मन. फिर भी वो पद्मनी भाभी से प्यार करते थे इस लिए उन्होंने उसे घर से नहीं निकला. पर भैया को ये बात खाये जा रही थी कही अघोरी का सर्फ़ सच न हो जाये. इस लिए एक दिन अपने मैं में उठ रहे इस दर को या इस बात को अपनी पहली पत्नी रेशमा बताने के लिए उनके रूम में गए.

"अरे क्या बात है? आज इतनी जल्दी घर कैसे आ गए. काम में मैं नहीं लगा क्या?" रेशमा भाभी ने भाई से या बात कही. उस समय भाभी एक बहुत hi नाईट में थी जो उसके जांघो तक आ रहा था. भैया भाभी के पास आ गए और उन्हें गले लगा लिया. "क्या बात है जी आज बड़ा प्यार आ रहा है, अपने इस पत्नी पर."

"मैं कभी भी तुम तीनो में अंतर नहीं किया है, रेशमा. मैं हमेशा तुम तीनो से दिल से प्यार किया है और करता रहूँगा." भैया ने भाभी के गाल को चूमते हुए कहा. फिर रेशमा भाभी उनके गले में अपनी बहे दाल दी और बोलो, "मुझे पता है, आप ने हमेशा हमें एक सा प्यार दिया है. ये सब छोड़िये और ये बाटिये आप इतना उदाश क्यों है."

"रेशमा मुझे उस अघोरी की चिंता खाये जा रही है. खास कर उसके दिए गए सराफ की." भैया माथे पर चिंता की लकीर आ गयी थी ये कहते हुए. भाभी ने पहले कुछ सोचने का नाटक किया था की वो दिखा सके की उनको भी उतना hi दुःख है, जितना भैया को. उसके बाद रेशमा भाभी ने भैया से बोली, "मन लो अगर पद्मनी ने सच कहा, और वो आपका hi बीटा हो तब आप क्या करोगे. उस समय आपके पास पछताने के सिवा कुछ नहीं रहेगा. क्युकी अघोरी की सराफ सच हो सकती है तो पद्मनी की बात भी सच होगी ये मेरा मन है." भाभी इतना कहने के बाद रुक गयी और भैया की तरफ देखने लगी. शायद भाभी भैया के चहरे का भाव को पढ़ने की कोशिश कर रही थी. कुछ पल बाद फिरसे भाभी कहना सुरु करि, "पर आपने जो हालत वह देखा उसे अपने सच मन लिया, और आप से वो गलती हो गयी. और आप ने वो सब कर दिया. क्या पता आपने को देख वो सच भी हो. मैं इसमें कुछ नहीं कह सकती. Hrishi-muniyon, sadhu-shant और ये अघोरी का सराफ कभी खली नहीं जाता. रही अघोरी की सराफ की बात तो उसे भी आप बच सकते है. बस आपको एक इंजेक्शन अपने बेटे को देना होगा जिसे आपके बेटे का लुंड कभी भी खड़ा नहीं होगा." फिर क्या था भैया रेशमा भाभी के बातो में आ गए और उन्होंने अपने बेटे को वो इंजेक्शन दे दिया.

इस घटना को पांच साल हो गए थे. पर एक दिन भैया ने अपने बेटे के लुंड में कुछ हरकत देखा. और इस बात को भैया रेशमा भाभी को बताने के लिए उनके रूम की और चल दिए. भैया जब रेशमा भाभी के रूम के पास पूछे तो कुछ आवाज़ सुनाई दी उनके रूम से, भैया ये आवाज़ अच्छी तरह से समझते थे की ये आवाज़ की तरह की है. भैया ने भाभी का रूम का दरवाजा धीरे से खोला और सामने के नज़ारा देख उनकी आँखे बड़ी हो गयी.

हमारी किस्मत देखो भैया ने मुझे और रेशमा भाभी को चुदाई करते हुए देख लिए, पर उन्होंने हमे कुछ नहीं कहा. हमें इस बात का पता तक न चला. पर अब भैया के मन में हम लोगो को ले कर सक पैदा हो गया. वो उन्होंने बिना ततए साडी प्रॉपर्टी पद्मनी के बेटे के नाम कर दिया. जब इस बात का हम पता चला तो भैया को अपने रस्ते से हटा दिया.

पर हमारे लिए भैया ने एक काम अच्छा कर दिया था. वो ये था की भैया ने अपने बेटे को ये बताया था की उसकी माँ किसी काम के सिनसिले में बहार गयी हुई है. जैसे hi उसकी माँ का काम ख़त्म हो जायेगा, वो आपसे मिलने आ जाएगी. और पद्मनी के बेटे ने अपने माँ को कभी देखा नहीं था इस लिए हम ने तुम्हे उसकी माँ बना के यहाँ ले आये. पर भाभी ने वो इंजेक्शन उसे डरा देना स्टार्ट कर दिया. क्योकि एक दिन उन्होंने भी नकुल के लिंग में तनाव देख दिया था. उसके बाद तुम जानती hi उसके साथ क्या किया हुआ.

फ्लैशबैक एन्ड

"जी जानती हु अब और मत तड़पाओ मेरी प्यास बुझा दो अपने लुंड से. ये छूट बहुत दिनों प्यासी है और ये आपका ये लुंड hi बुझा सकती है." रुकमणी ने महेंद्र का लुंड को अपनी छूट पर रखते हुए बोली. महेंद्र भी काफी देर से उत्तेजित था इसलिए उसने अपना लुंड एक hi बार में रुक्मणि के छूट में दाल दिया और धक्के लगाने लगा. उसके बाद वो दोनों चुदाई में लग गए.

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वही जब नकुल स्कूल पहुंच तो उसकी मैडम ने कहा, " नकुल, आज भी तुम लेट हो. आज तो तुम्हे जाने दे रही हु, पर नेक्स्ट टाइम नहीं छोड़ोगी. अपना बैग यहाँ रखो, हॉल में जा कर आपने टेस्ट दो. टेस्ट सुरु होने hi वाला होगा." उसके बाद नकुल टेस्ट देने हॉल में चला गया. नकुल हॉल में पुरे 1 घंटे तक अपना टेस्ट लिखा और एग्जामिनर को अपना टेस्ट देइया. 3 घंटे का टेस्ट नकुल ने सिर्फ 1 घंटे में कर दिया था. फिर अपना टेस्ट देने के बाद नकुल अपने क्लास अटेंड करने चला गया. स्कूल की छुट्टी के बाद नकुल अपने घर चल दिया.

इसी तरह दिन बिताते गए. वो दिन भी आ गया जब नकुल 18 वर्ष का हो गया और उसके नाम साडी प्रॉपर्टी हो गयी. उसके अगले दिन नकुल को स्कूल नहीं भेजा गया. बल्कि उसको और उसकी माँ पद्मनी उर्फ़ रुक्मणि को कार में ले कर चल दिए. कार को जगल के पास आये और एक कच्ची सड़क पर उतर दिया. उसके बाद दोनों माँ बेटे को घसीटते हुए जांगले के एक पहाड़ी के छोटी पे लाये.

"नकुल इस पेपर पर सिग्न करो." महेंद्र ने एक ब्लेंक पेपर आगे बढ़ते हुए बोलै. नकुल महेंद्र की तरफ देखने लग, जैसे पूछ रहो इस पर किस लिए. "सिग्न करो. और मुझे देखना बंद करो." पर पद्मनी उर्फ़ रुक्मणि ने मन करते हुए बोली, "बीटा तुम इस पर सिग्न मत करना. अगर तुमने इस पर सिग्न कर दिया तो ये तुम्हारी साडी प्रॉपर्टी अपने नाम कर लेंगे." उसके बाद नकुल ने सिग्न करने से मन कर दिया. हमने नकुल को मरना सुरु कर दिया और इतना मर की उसे बोलै भी नहीं जा रहा था, यहाँ तक वह खाद भी नहीं हो प् रहा था.

"हरिया ये ऐसे नहीं मानेगा तुम इसके हाथ पेअर बांध दो." रेशमा भाभी ने अपने खास नौकरो हरिया से बोली. जो हमरे साथ hi यहाँ पर आया हुआ था. फिर हरिया ने नकुल के हाथ पेअर बांध दिया. "मालकिन मैंने इस बांध दिया." हरिया के तरफ होते हुए कहा.

"अच्छा तू इस पर सिग्न नहीं करेगा." रेशमा भाभी ने नकुल के सर के बाल अपने हाथ में पकड़ ली और बालो को कीचते हुए उसका चेहरा ऊपर उठा दी. फिर भाभी ने ये बात कही. नकुल में अपनी गर्दन न में हिला कर मन कर दिया. रेशमा भाभी एक बार मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखि और फिर नकुल के तरफ देख मुस्कुरा दी. 'हम्म्म तू मेरी बात को नहीं मानेगा. फिर ठीक है मुझे पता है तुझ जैसे कुत्ते को कैसे मानना है. महेंद्र जाकर इसकी माँ की इज़्ज़त लूट लो."

"जी भाभी अभी जाता हु. मैं तो इस दिन का कबसे इंतज़ार कर रहा था. पर आप ने hi मन किया था. वर्ण कब लूट लिया होता." इतना बोल महेंद्र जोर जोर से हसने लगा. उसके बाद महेंद्र पद्मनी उर्फ़ रुकमणी के तरफ बढ़ गया और बालो से कीच कर नकुल के सामने ले आया और उसके सामने पद्मनी उर्फ़ रुक्मणि की साडी निकल कर नंगा करने लगा. महेन्दर ने रुक्मणि को सरे कपडे निकल दिए थे नकुल चिलता रहा की उसकी माँ के साथ ऐसा मत करो. पर कोई भी उसकी पुरस्कार सुनाने वाला वह पर मौजूद नहीं था. महेंद्र तब जा कर रुका जब नकुल की माँ सिर्फ ब्रा और पेंटी रह गयी. पद्मनी उर्फ़ रुक्मणि सबके सामने बस प्र और पंतय में कड़ी थी. उसके बाद महेन्दर उसकी चूचियों को मिलने लग गया.

ये देख नकुल फिरसे रोने और छिलने लगा. नकुल रेशमा भाभी के पैरो पर गिर गया और रट हुए बोलै, "मेरी माँ को छोड़ दो. तुम जहाँ कहोगे, मैं सिग्न करने को तैयार हु." रुक्मणि मन करते हुए बोली, "नहीं बेटे, तुम ऐसा मत करना." पर नकुल अपनी माँ की एक भी बात को नहीं सुना. और नकुल ने उस ब्लेंक पेपर पर सिग्न कर दिया.

"छोड़ दो महेंद्र इसकी माँ को." रेशमा भाभी उस पेपर उठा कर कड़ी हो गयी और उसको देखने के बाद ये बात कही. उसके बाद पद्मनी उर्फ़ रुक्मणि हो छोड़ दिया. नकुल भाग कर अपनी माँ के पास गया और जब उसने अपनी माँ के गले लगा लिया, उसे समय रुक्मणि ने एक चाकू निकल नकुल के पेट में मर दिया और उसे अलग हो गयी. ये देख कर नकुल हैरान हो गया और रट हुए अपनी माँ को देखने लगा और बोलै, "माँ तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया."

"मैं तुम्हारी माँ नहीं हु, तुम्हारी माँ तो पद्मनी ठाकुर थी जिसको तुम्हारे बाप मानव ठाकुर ने मार दिया." रुक्मणि हस्ते हुए नकुल से बोली. और महेंद्र के बाँहों में चली गयी. महेंद्र रुकमणी के रसीले होठो को चुम लिया. नकुल के आँखों से आशु बाह कर गलो से होते हुए निचे गिर रहे थे.

"मैंने तो आपको माँ hi मन है, जब से आप मेरी जिंदगी में आयी. अगर आप मुझे से एक बार कहती तो साडी प्रॉपर्टी हँसते हुए आपके नाम कर देता. यहाँ तक अपनी जान व् दे देता. आप एक बार कह कर तो देखती. पर आपने एक माँ के नाम को कलंकित कर दिया. अगर मेरा डरा जनम होता है तो मैं आप के कोख से जनम लेना चाहूंगा. बस आप एक बार बता दो अपने ऐसा क्यों किया." नकुल अपनी उखड़ी हुई सांसो को काबू करते हुए ये बात कही थी. नकुल के आखिर शब्द सुन कर रुक्मणि के आँखों पानी आ गया. और उसके अपने पलको से निचे नहीं गिरने दिया.

"रुक्मणि से मैं ने ये सब करवाया है. यहाँ तक तुम्हारी असली माँ पद्मनी को भी, मैंने hi मारा था. ना की तुम्हरे पिता ने, उन्होंने तो सिर्फ खली पिस्तौल पकड़ी थी, जब उन्होंने पिस्तौल का ट्रिगर दब्या उसे समय मैंने भी दबा दिया. मेरे भाई और तेरे बाप को ये लगा की उन्होंने मारा है, इस में मेरा साथ दिया यहाँ पर मौजूद सभी लोगो ने." महेंद्र ने रुकमणी को किश करने लग गया. रुक्मणि भी महेंद्र कर पूरा साथ दे रही थी.

उसके बाद जितने लोग वह पर थे सभी ने नकुल को चाकू से मारा और अंत में रुक्मणि ने पिस्तौल से तीन फायर किये जो नकुल के पेट और सीने पर जा के लगा. नकुल वही गिर गया, पर उसकी सांस अभी चल रही थी.

"हरिया इस कुत्ते के पिले को निचे फेक दो ताकि इसकी लॉस का कोई पता न चल सके." रेशमा भाभी ने कहा, जब नकुल निचे गिर गया था. उसके बाद हरिया ने नकुल की लॉस को निचे खाई में फेक दिया. उसके बाद वह से चले गए.

पर नकुल निचे बहती हुए एक नदी में जा कर गिरा और वो उसमे बेहटा हुआ चला गया.
 
अपडेट 4

शहर से दूर प्राकृतिक के गॉड में बस हुआ एक गाओं था. प्राकृतिक ने इस बहुत hi निराले ढंग से सजाया हुआ था. आम, सीसम, जामुन, अमरुद अदि के वृक्ष से ये गाओं भरा हुआ था वही सफेदा, चीड़, बांस, बलूत के बड़े बड़े वृक्ष आसमान को छू रहे थे. चिड़ियों चहचहाट, मोर का नाचना, कोयल की मधुर बोली, ऐसे hi अनेको पक्षी के मधुर स्वर वहां के लोगो के कानो में प्राकृतिक संगीत घोल रहे थे. प्राकृतिक ने अपना हर रंग इस गाओं और आसपास के इलाके में बिखेर रख थे.

गाओं के लोग प्रातः उठ कर अपने काम में लग जाते और शाम को जल्दी खाने के बाद सो जाते. ऐसे एक दिन प्रातः कल कुछ लड़किया की टोली निकल पड़ी नदी में नहाने के लिए. वो लड़किया नदी पर आने के बाद अपने कपडे उतर के तरफ रख दिया और नदी में उतर गयी. उनके तन पर सिर्फ antr-vastr hi रह गए थे. सभी लड़कियां अपने hi मस्ती में नाहा रही थी. यहाँ तक वो सभी आपस में अटखेलिया कर रही थी. जहाँ पर वो सभी लड़किया नहं रही थी और आपस में बाते कर रही थी

"सखी कितना सुन्दर है तुम्हारी ये रूप यौवन, नजाने कितने hi लड़को को अपना दीवाना बना दिया है और कितनो का खड़े खड़े hi पानी निकल दिया." एक लड़की ने कहा. जिसके शरीर पर एक लाल रंग का ब्लाउज पहना हुआ था और उसके बड़े और कोमल उरोज को ढाका हुआ था. Nain-naksh उसके भी बड़े hi जानलेवा थे पर उसकी सखी से काम.

"लज्जो तू भी तो कुछ काम नहीं है. अपना पिछवाड़ा देखा कितना बड़ा और बहार को निकले हुए है. तेरे ये दो अमृत रास से भरपूर ये स्तन. बड़े और जवान लड़के दिन रात तुझे पाने के लिए लालायित रहते है. लड़के तो दिन रात तेरे पिछवाड़े के hi सपने देखते है और पता नहीं कितनी बार मुठ मरते होंगे तेरे पिछवाड़े को याद करके." एक दूसरी लड़की ने कहा, जिसका नाम राधा था. अपने स्तन को एक पीले रंग के कपडे से बांध राखी थी और निचे एक कपडा पहना हुई थी जो उसके कूल्हों को अपने अंदर समेटे हुए थी. कूल्हों के दरार में वो खास कपडा फंसा हुई थी, जो उसके दोनों पतों को कर रही थी. स्तनों का आकर बड़े से संतरे के सामान था. अगर कोई उसे निचोड़ दे तो सारा रास बहार आ जाए.

"मेरा छोडो, अपना देखा है राधा. तेरा ये तरबूजे के सामान ये पिछवाड़ा, देख कितना खतरनाक है, गाओं के लड़के अपना कहता उठाये हुए तेरे इस पिछवाड़े में डालने के लिए हमेशा तैयार रहते है, तूने बस एक बार किसी को दे दिया न, सच कहती हु उसके भाग hi खुल जायेगे," लज्जो ने राधा से कहा. लज्जो की बात सुन कर रद्द शर्म से पानी पानी हो गयी. वही लज्जो अपने हाथो को निचे ला कर अपनी योनि को मॉल मॉल कर पानी से धो रही थी. दोनों की nauk-jhok सुन सभी हंस रही थी और मजे भी ले रही थी.

"अरे यार आपसे म लड़ना बंद करो, जल्दी से नहाओ, घर भी जाना है हमें. पता है कितना देर हो गया है. राधा तुम्हारी माँ तो तुम्हे जान से मर देगी. और तुम्हारे वजह से हमें भी आज पड़ने वाली है." उस लड़की की बात सुन सभी जल्दी जल्दी नहाने लगी. कोई बाते नहीं कर रही थी.

जळफदी hi सभी पानी से बहार निकल àआयी, और अपने अपने कपडे बदलने के लिए एक तरफ चल दी, जहाँ पर उन्होंने अपने पकडे रखे हुए थे. कपडे बदलने के baad.jaise hi अपने गंदे कपडे उठा के धोने के लिए नदी के किनारे बैठी hi थी की तभी एक लड़के का बहते हुए उनके पास आ गया. जिसे देख कर सभी दर गयी. फिर डरते डरते उस लड़के को पानी से बहार निकली.

"अरे राधा इसकी जरा नब्ज तो चेक कर, देख सच में मारा हुआ है या अभी जिन्दा है." लज्जो ने कहा. फिर राधा आगे आयी और उसकी नब्ज चेक करने लगी. नब्ज देखने के बाद राधा बोली, "अभी तो ये जिन्दा है और उसकी सांसे भी चल रही है. जल्दी से इसको डॉ के बस ले चलो." और वो सभी उसे उठा क्र जल्दी से गाओं में जो क्लिनिक था वह ले आयी. जब डॉ ने राधा और बाकि लड़कियों के साथ उस लड़के को देखा तो उसने पूछा, "ये कौन है और ऐसी हालत किसने की इसकी"

"मुझे नहीं पता डॉ. अंकल, हम सब जहाँ नाहा रही थी वह ये बहते हुए चला आया. और इस उठा के आपके पास ले आयी." राधा ने साफ़ साफ़ डॉ. को बता दी की वो लड़का उन्हें कैसे मिला.

"ठीक है रद्द अब तुम जाओ, घर पे तुम्हारी माँ इंतज़ार कर रही होगी और तुम सब भी आपने अपने घर जाओ, मैं इसका इलाज करता हु." डॉ. ने सभी को उनके घर जाने के लिए कहा दिया. फिर सभी लड़कियां वह से निकल गयी. डॉ. अपनी नर्स को आवाज़ दिया, "रॉय इसे ऑपरेशन थिएटर में ले चलो." रॉय ने उसके बाद उस लड़के को ऑपरेशन थिएटर में ले आयी और ऑपरेशन की तयारी करने लगी. साडी तयारी करने के बाद. उसने डॉ को बता दिया.

उसके बाद डॉ ने उस लड़के का ऑपरेशन करने लगा. ऑपरेशन में 4 घंटे लगे. ऑपरेशन सक्सेसफुल raha..Dr. वह से निकल गया और उसके बाद उस लड़के को दूसरे रूम में सिफत कर दिया गया.

"रॉय तुम इस का ध्यान रखना. मैं नहीं चाहता इसे कुछ हो. मैं घर आराम करने जा रहा हु. अगर कोई बह दिक्कत हो तो मुझे फ़ोन कर देना." Dr.ne रॉय से कहा और उसके तरफ देखने लगे. जैसे उसके जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हो. डॉ. को अपनी तरफ इस तरह देखते पाया तो उसने कहा, "ठीक है सर. मैं ध्यान रखूंगी. आप आराम से कर लीजिये." इतना कहने के बाद डॉ. वहां से निकल गए, अपने घर की और. उस गोअन से मुश्किल से 1कम दूर होगी. घर पहुंच कर जब डॉ. ने दूर बेल्ल प्रेस करा तो 2 मिनट्स के बाद घर का दरवाजा खुला. सामने एक सुन्दर सी लड़की कड़ी थी.

"आज आप फिर लेट आये हो पापा. और अच्छी बात नहीं है." उस सुन्दर सी लड़की ने अपने कमर पर अपने दोनों हाथ रख कर लो. उसके चेहरे पर आया गुस्स उसे और भी सुन्दर बना रहा था उसके शरीर नील और सफ़ेद रंग की suit-salwar पहनी हुई थी. इन कपड़ो में उसके जिस्म का हर हिस्सा अपना होने का अस्तित्व बता रहा था. डॉ. अपनी लाडली बेटी को गुस्सा होता देख कर अपने कान को पकड़ और कहा, "सॉरी बीटा एक बहुत hi सीरियस केस आ गया था. उसी कारन मुझे आने में देरी हो गयी. अब से नहीं करुगा,"

"ठीक है. अगर अगली बार से आपने ऐसा किया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. अपना ये कान छोड़िये और अंदर चलिए." उस लड़की ने कहा और एक तरह हो गयी ताकि उसके पिता अंदर आ सके. डॉ. साहब अंदर हो लिए. उसक लड़की ने दरवाजा बंद किया और अंदर चल दी.

"कनिका बीटा नेक्स्ट टाइम ऐसा नहीं होगा. अब तो मुझे खाना खिला दो, भूख के मरे में पेट में चूहे कूद रहे है." डॉ. साहब ने अपनी लाडली बेटी के गाल पर किश करने के बाद ये बात कहा था. अपने पिता का दुलार देख कर वो भी खुश हो गयी और बोली, "अभी देती हु. आप जब तक फ्रेश हो के आयी. तब तक मैं खाना निकलती हु."

कुछ देर बाद डॉ. साहब फ्रेश हो कर हॉल में आ गए और डाइनिंग टेबल पर बैठ गए. फिर कनिका अपने पिता के लिए खाना निकल कर दी और खुद के लिए भी निकली. अभी दो चार निवाले hi खाये थे की उनका फ़ोन बज उठा. डॉ साहब फ़ोन रिसीव उठा लिया.

"Hello कौन." कान पर रिसीवर लगते हुए डॉ साहब ने कहा. दूसरी तरफ से जो बात सुना, उनके चहरे का रंग की उड़ गया. "उसे पैन किलर साथ बेहोशी का इंजेक्शन दे देदो मैं अभी आता हु. और उसे सिफत करने की तयारी करो" फ़ोन उनके क्लिनिक से आया हुआ था और उसे रॉय ने किया था. उसके बाद फ़ोन कट गया. डॉ ने अपने बेटी से कुछ कहा और उसके बाद वह से निकल गए, और उनकी बेटी अपने काम में लग गयी..
 
अपडेट 5

जब तक डॉ साहब क्लिनिक पहचे, रॉय ने साडी तयारी कर दी थी उसकी सिफ्टिंग की. एक तो उस लड़के की किस्मत कुछ ठीक नहीं थी. और वही आज तो यमराज ने भी थान लिया था की उस लड़के के प्राण ले कर रहेंगे. क्योकि मौसम रंग बदलने लग गया था, आसमान में काळा बदल छाने लग गए थे, और एक समय ऐसा आया की दिन में भी अमावस की रात के जैसा माहौल हो गया था. मौसम उस लड़के के खिलाफ थी उस पर अपना कैहर धोने के लिया तैयार बैठी तह. एक कड़क के साथ बिजली कड़की और आसमान में कुछ पल के लिए उज्जला हुआ, फिर इसी के साथ खूब जोरो की बारिश होने लगी. उसी बारिश में डॉ साहब किसी अपने क्लिनिक पहुंचे थे. रॉय बहार hi डॉ साहब का इंतज़ार कर रहे थी.

"रॉय जल्दी से उसे मेरी कार में सिरफ़्त करो. रुको मैं भी चलता हु." फिर डॉ साहब भी रॉय के साथ अंदर चल दिए और उस लड़के को अपनी गाड़ी में रखवाने के लिए. रॉय ने कुछ वार्ड बॉयज की सहायता से उस लड़के को डॉ की कार में सिफत किया. उसके बाद डॉ साहेब फुल स्पीड में अपनी कार को अपने घर की मोड़ लिया. जैसे जैसे कार की स्पीड बढ़ती उसी रफ़्तार से बारिश ने भी आपने रुख बदलने लगा. अभी डॉ साहेब आपने घर से थोड़े hi दूर पर hi थे की उनकी कार बंद हो गयी. उन्होंने अपने कार को फिर से स्टार्ट किया और जैसे hi आगे बड़ी उसी समय जहाँ उनकी कार रुकी थी के एक बिजली आ गिरी. और उस जगह पर बहुत hi बड़ा गड्ढा कर दिया. ये देख कर डॉ साहेब भी अपने किस्मत को और उस लड़के की किस्मत पर नाज करने लगे. फिर डॉ साहेब ने भगवन का ध्यानवाद करते हुए घर की और बढ़ चले. घर के सामने hi अपने कार को रोका और कार से उतर गए. जब उन्होंने सामने देखा तो उनकी बेटी कनिका दरवाजे पर hi कड़ी उनका इंतज़ार कर रही थी.

"बेटी जल्दी से मेरी सहायता करो. समय बहुत hi काम है." फिर क्या था, कनिका आगे बढ़ उस लड़के को उठाने म अपने पापा की सहायता करने लगी. उसके बाद उस लड़के को उठा के दोनों ने अपने लेबोटरी में आये,

"बेटी कनिका सामने जो ड्रा दिख रहा है न, वह से तुम रेड कलर की तुबे में जो मेडिसिन है उसको ले कर आओ." डॉ साहब ने अपनी बेटी से कहा. कनिका भी अपने पिता को बात मान के उस तरफ चल दी. और फिर उस ड्रा को खोल, रेड तुबे को निकली और ड्रा को वापस बंद कर दी. और अपने पिता के पास आ गयी और बोली, "पिता जी ये लीजिये." कनिका ने अपना हाथ आगे बढ़ दी. कनिका के पिता बिना एक पल भी गवाए उस तुबे को किया और उस लड़के के शरीर में इंजेक्ट कर दिया. फिर उसके बाद ग्रीन कलर का पाउच उठा कर एक तरफ टांग दिया और एक पाइप से उस ग्रीन लिक्विड को कनेक्ट कर उस लड़के के शरीर में इंजेक्ट कर दिया.

"बेटी ध्यान रखना, इसका प्लस रेट गिरना नहीं चाहिए. वर्ण बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो जाएगी." कनिका के पिता ने अपनी बेटी को समझते हुए कहा. कनिका ने भी अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया. दोनों hi अपने काम को बड़े hi कुशलता पूर्वक कर रहे थे. सब कुछ ठीक होने के बाद डॉ. साहब ने अपनी बेटी से कहा, "बेटी ये ब्लू कलर के इंजेक्शन को, ग्लूकोज़ दाल कर, इस लड़के को चढ़ चढ़ दो."

उसके बाद कनिका ने उस ब्लू कलर के इंजेक्शन को ग्लूकोज़ में मिला कर उस लड़के को चढ़ा दी.. 15 मिनट्स hi हुए थे की उस लड़के प्लस रेट एक डैम बढ़ने लग गया. उस लड़के के शरीर ऊपर निचे उठाने लग, ऐसा लग रहा था जैसे बिजली के शार्ट दिए जा रहे हो. ये खेल कोई 15 मिनट्स चला, उसके बाद उस लड़के का शरीर एक डैम शांत हो गया. ये नज़ारा कनिका और उसके पिता देख कर दर गए, कही कुछ हो तो नहीं गया उस लड़के को. इसलिए जल्दी से डॉ साहेब उस लड़के को चेक करने लग गए.

"क्या हुआ पापा, जिन्दा तो है न." कनिका घबराहट में उसके मुँह से ये शब्द निकल पड़ा. कनिका का डरना तब तक काम नहीं हुआ जब तक उसके पिता ने अपना मुँह नहीं खोला. कनिका के पिता अपनी बेटी से कहा, " हे इस no मोरे. वह अब इस दुनिया में नहीं रहा. वो मर चूका है." ये सुनते hi कनिका जोर जोर से रोने लगी. ये देख कर उसके पिता उसको चुप करने लग गए. पर वो चुप होने का नाम hi नहीं ले रही थी. उसे तो ऐसा लग रहा था की जैसे कोई अपना hi उसे छोड़ कर चला गया हो. अभी कुछ hi समय हुआ था की दुबारा से उस लड़के के जिस्म में हलचल होने लगी. आतंरिक मशीन जो दिल की धनदकं को बताता है वो जोर जोर से आवाज़ करने लगी. आवाज़ सुन कर जब उन दोनों ने उस तरफ देखा तो कनिका का रोना एक डैम बंद हो गयी और उस लड़के जिस्म में हलचल देख कनिका जोर चिल्ला कर बोली, "पिता जी जल्दी कीजिये उसके शरीर में हलचल हो रहा है...... पिता जी जल्दी से चेक कीजिये. उसे कुछ नहीं होना चाहिए अब." अपने बेटी की बात सुन डॉ साहब जल्दी से उठ गए और उसके चेक करने लग गए.
 
अपडेट 6

अब तक

अपने पढ़ा कैसे वो लड़का अपने मौत से लड़ते हुए क्लिनिक से डॉ साहब के लेबोटरी तक सफर किया. किस तरह से उस इंजेक्शन को उस लड़के को दिया गया और साथ hi उसके शरीर में हलचल हुई, अंत में उसका शरीर शांत हो गया. फिर कनिका रोने लगी और उसके पिता ने उसको शमझाया. फिर से उस लड़के शरीर में हलचल हुई और डॉ साहब ने अपनी बेटी के कहने पर फिर उस लड़की को चेक करने चले गए.

अब आगे

"पिता जी सब ठीक तो है न. वो बच तो जायेगा न." कनिका के जिस्म में उस लड़के को ले कर दर उसके अंदर महसूस किया जा सकता था. उसके सवाल और बोलने के तरीके से ये बार साफ़ पता चल रही थी. वही कनिका के पिता जी बिना कोई प्रतिक्रिया दिए बगैर अपने काम में लगे हुए थे. सब कुछ सही से चेक करने के बाद अंत में उन्होंने कहा, "हे इस फाइन. वो बच गया है. मेडिसिन ने काम करना सुरु कर दिया है. अब वो जल्दी hi ठीक हो जायेगा. तुम निश्चिंत रहो. उसके मैं कुछ नहीं होने दूंगा."

कनिका अपने पिता की बात सुन कर बहुत खुश हो गयी, यहाँ तक उसके सुन्दर नयन से पानी भी बहार आ गया, जो उसके कोमल गलो को भिगो दिया. वही अपनी बेटी को रोटा देख डॉ साहब उसके पास आ गया और उसको अपने गले लगा लिया. फिर कनिका का सर सहलाते हुए बोले, "बीटा रट नहीं है. रोना अच्छा नहीं होता जब कोई बीमार हो. चलो अब अपने मोती साफ़ करो और हम आराम करते है. और हाँ जो थोड़ा सा बच गया है. तुम उस इंजेक्शन को दुबारा वही रख दो जहा से उठाया था." कनिका अपने पिता की बात सुन जोर से गले लगा लिया और फिर उनके गाल पर किश कर दी. डॉ सबह भी अपनी बेटी के इस प्यार को देख कर खुश हो गए और खुद से दूर करते हुए उसके माथे को चुम लिया. वही अपने पिता की बात सुन कर कनिका थोड़ी परेशां हो गयी थी कोई उसने उस इंजेक्शन को उस लड़के को पूरा लगा दिया था. कनिका धीरे से अपने पिता से बोली, "मैं तो रेड तुबे में जो था सारा उसको इंजेक्ट कर दी. अब तो वो ख़त्म हो गयी."

"क्या?????? पर मैं ने तो आधा hi दिया रहा." अपने बेटी की बात सुन उन्होंने कहा. फिर वह अपनी बेटी के तरफ देखने लगे. जैसे वह कुछ जानने की कोशिश कर रह हो. अपने पिता को अपने तरफ इस तरह देखते हुए कनिका बड़े hi प्यार से और मस्सों सा चेहरा बना कर कहने लगी. "वो क्या है पिता जी मुझे लगा, की उसकी हालत देख कर मुझे लगा वो ज्यादा सीरियस है. थोड़े से क्या होगा ये सोच के मैंने बाकि का बचा हुआ सारा उसको लगा दिया."

डॉ साहब अपनी लाडली बेटी की बात सुन कर अपना सर पीट लिया और कहा, "बेटी तुम ने ये क्या कर दिया." अपने पिता की बात सुन और उनके हावभाव देख परेशां हो गयी. उसके लगने लगा की कही उसने बहुत बड़ी लगाती तो नहीं कर दी. इस बात को जानने के लिए अपने पिता जी से पूछ पड़ी, "मैं कोई गलती तो नहीं कर दी और ऐसा क्या है उस इंजेक्शन में. जो आप इस तरह से चिंतित हो गए है."

"कनिका कभी भी कोई मेडिसिन और इंजेक्शन हमेशा सही मात्रा में देना चाहिए. और ये उस मरीज के लिए बहुत जरुरी होता है, जब तक जरुरी न हो उस मेडिसिन और इंजेक्शन को डबल दोसे नहीं देते. रही बात सी इंजेक्शन की तो सुनो जो इंजेक्शन तुम लगाया है उसकी सबसे बड़ी खाशियत ये है की जिसको भी ये इंजेक्शन दिया जायेगा, उसकी सेक्सुअल पावर बहुत अधिक बढ़ जाएगी साथ hi उसकी दिमाग की और शरीर सकती में कई गुना हो जाएगी. वो एक आम आदमी से कही ज्यादा ताकतवर हो जायेगा, उसकी मात्र 10 बून्द से, मैं ने तो फिर भी आधा दिया था और तुमने तो उसे पूरा का पूरा लगा दिया. पता नहीं अब इस लड़के का क्या होगा. जब इसे होस आएगा. अब तो भगवन hi इस बचा सकता है."

"पिता जी इस इंजेक्शन का असर कितनी देर बाद सुरु होगा," कनिका अपने पिता की बात सुन कर उनसे पूछने लगी. कनिका को भी अब दर लगने लगा था कही उस लड़के को कुछ हो न जाये. अपनी बेटी को चिंतित देख कर डॉ साहब ने फिरसे कहा, "कनिका तुम टेंशन मत लो उसे कुछ नहीं होगा. जिस मात्रा में तुमने इसे दिया है इसका असर तो सुरु हो चूका है, इसका उदहारण उसके दिल की धनदकं कर फिरसे चलना. बाकि का भी जल्दी दिखने लगेगा. पर कब तक ये मैं नहीं कह सकता."

"मुझे एहि रुकना होगा. तुम जा के आराम करो. अब मैं नहीं चाहता इस लड़के को कुछ भी हो. इस लिए मुझे यह रुकना hi होगा." कनिका के पिता ने अपनी लाडली बेटी के सर पर हाथ फेरते हुए बोले. कनिका भी अपने पिता की बात समझ गयी थी वह क्या कहना चाहते थे. और इस लिए कनिका भी वहां पर न रुकी. वह से निकल कर अपने रूम में आ गयी. फिर कनिका ने अपना सलवार सूट उतर के एक नाईट पहन ली और अपने बिस्तर पर जा पसरी. कनिका बिस्तर पर लेते हुए वह उस लड़के के बारे म सोचने लगी. उसके बारे में सोचते हुए, कनिका को कब नींद ने घेर लिया उसको पता भी नहीं चली और वो सो गयी.

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वही दूसरी नकुल को मरने के बाद जब सभी घर पहुंच गए. सभी बहुत खुश थे खास कर रेशमा ठाकुर और महेंद्र ठाकुर. जब सभी घर के अंदर आये तो सामने हॉल में कुछ लोगो आये हुए देख, सभी परेशां हो गए. क्योकि वहां पर सभी सरकारी कर्मचारी थे. सभी के सभी साधारण कपड़ो में थे. सिर्फ एक को छोड़ कर.

"आप सभी कौन है और यहाँ क्यों आये हुए है." रेशमा ठाकुर ने गरजते हुए बोली. उसकी आवाज़ को सुन, सभी एक साथ आवाज की दिशा में मुद गए. रेशमा ठाकुर इस समय एक हलक गुलाबी रंग की साडी पहनी हुई थी, जो उसके जिस्म को और सुन्दर बना रही थी. वही उसकी आवाज़ में वो भारीपन था की सामने वाला कोई साधारण व्यक्ति होता तो अभी दर के मरे हालत ख़राब हो गयी होती. रेशम ठाकुर चलते हुए उन सब की पास आ गयी और उसके पीछे hi बाकि सभी फिर.

"नमस्ते ठकुरियन जी. मैं राजेश शर्मा. मैं पेशे से एक वकील हु. मैं यहाँ पर मानव ठाकुर के वसीयत (विल) ले कर आया हु. मुझे नकुल से मिलना है." मर. राजेश शर्मा ने कहा. जो एक 55 वर्ष के वृद्ध व्यक्ति थे. उसके बोलने के तरीके से, उनके वक्तित्व का साफ़ पता चल रहा था की वह कैसे व्यक्ति है. शरीर पर एक सफ़ेद रंग का शर्ट पंत और गले में काळा रंग का टाई बंधा हुआ था और ऊपर से काळा रंग का कोट डाला हुआ था. मर. राजेश शर्मा की बात सुन, रेशमा ठाकुर भी शांत हो गयी थी और बाकि सभी भी. किसी को भी इतनी जल्दी वकील का आने की आकांक्षा नहीं था.

"माफ़ कीजिये का मैं आपको पहचान नहीं पायी. वो क्या है न आपको बहुत समय पहले देखा था. और उसके बाद आज, इस लिए मुझसे ऐसी गलती हो गयी. वैसे आप यहाँ इतनी जल्दी कैसे आना हुआ." रेशमा ठाकुर ने हाथ जोड़ा कर माफ़ी मांगने लगी. अब रेशमा ठाकुर के बात में नमी आ गयी. बोलने का तरीका भी बदल गया था.

"ठकुरियन जी इसमें माफ़ी मांगने की कोई बात नहीं है. आप बस नकुल को बुला दीजिये, ताकि हम उसे मिल सके और ये वसीहत उसके सामने पढ़ सके." मर. राजेश शर्मा ने बहुत शांत और साफ़ शब्दों में कहा था. उनकी बात ऐसा लग रहा था की उस वसीहत में कुछ खास लिखा हुआ था, जो उसके सामने hi पढ़ा जाना था. रेशमा ठाकुर के साथ साथ बाकि सब भी परेशां हो गए थे, मरस. राजेश शर्मा की बात को सुन कर. उन्होंने समझा नहीं आ रहा था की कैसे नकुल के बारे में बात करे.

"इतनी सुबह सुबह वो भी नकुल से मिलने, सिर्फ इस वसीहत के लिए. सब खैरियत से तो है न." रेशमा ठाकुर ने कहा. "कजरी जरा सभी लिए चाय और कॉफ़ी का बना कर जल्दी से ला कर आ." अपने नौकरानी को आवाज़ लग कर बोली. कजरी रसोई घर से भाग कर बहार आयी और हाथ जोड़ कर बोली, "जी मालकिन अभी लायी." कजरी वह से चली गयी. कजरी की ुरम कोई 35 होगी, पर देखने में 30 की लगती थी, उसका शरीर भरा हुआ था और प्राकृतिक ने उसके बदन के हर खास हिस्से को अच्छी तरह सजाया रखा था.

"इसकी कोई जरुरत नहीं है ठकुरियन जी. हम सब ने पहले ले लिया है. अगर हो सके तो जरा नकुल को जल्दी बुला दीजिये. हमें कही और भी जान है, किसी काम से." मर. राजेश शर्मा ने चाय कॉफ़ी के लिए मन करते हुए कहा. वही उनके साथ आये हुए अभी तक शांत बैठे हुए थे, जैसे उनका होना और न होना बराबर था.

"ऐसे कैसे आप बिना कुछ लिए चले जायेगे. भले hi आपने और आपके साथ आये सभी लोगो ने पहले hi पी लिया हो. तो क्या हुआ आप सब हमारे साथ भी पी लीजिये." रेशमा ठाकुर ने कहा. अभी रेशमा ठाकुर की बात ख़त्म hi हुई थी की कजरी ट्राई में चाय और कॉफ़ी ले आयी, उसके साथ एक औरत भी थी. वही महेंद्र और रजनी ठाकुर रष्मा ठाकुर के बातो का सर्मथन किया. "ये लीजिये चाय और कॉफ़ी आ भी गया. कजरी सब को पूछ कर उनके हिसाब से पीने को दो. अभी तो नकुल यहाँ पर नहीं है, वो बहार गया हुआ है. और ये लोग कौन है आपके साथ अपने इनका परिचय नहीं दिया अभी तक."

"ये सब उस प्रॉपर्टी के सिलसले में आये हुए है. ये है यहाँ के दिग मर अनुभव सिन्हा, इनके बगल में जो बैठे हुए वो है यहाँ मजिस्ट्रेट मर. अनुराग रॉय, ये है इस इलाके (एरिया) के इंस्पेक्टर मर. अरुण शर्मा." मर. राजेश शर्मा ने अपने साथ आये सभी लोगो को परिचय रेशमा ठाकुर से करवाया. वही कजरी ने सभी के कॉफ़ी और चाय दे दिया था और वहां से जा चुकी थी.

"कही क्या कहना है." रेशमा ठाकुर ने कहा. और कॉफ़ी का घुट अपने मुँह में ले कर पीने लगी.

"बात ये है ठकुरियन जी. आप तो जानती hi है की साडी प्रॉपर्टी नकुल के नाम है." मर. राजेश शर्मा इतना कहने के बाद चुप हो गए. वही रेशमा ठाकुर शर्मा जी आगे कहने का इंतज़ार कर रही थी. जब रेशमा ठाकुर ने देख की शर्मा जी कुछ नहीं बोलै रहे तो.

"शर्मा जी मैं जानती हु. कहिये क्या कहना है." रेशमा ठाकुर ने कहा. फिर कॉफ़ी का आखरी घुट पी, कप को निचे रख दी.

"वसीहत के अनुरसर उसमे लिखे बातो को तो मैं उसके सामने hi पढूंगा. पर आप इतना कह रही है तो मैं आपको कुछ बाते बता देता हु. उसमे लिखा है की अगर नकुल को कुछ हो हुआ तो ये साडी प्रॉपर्टी सर्कार के हाथो म काली जाएगी. जब तक वो कोर्ट में आ कर हम लोगे के सामने अपनी साडी प्रॉपर्टी किसी के नाम नहीं कर देता. तब तक उसकी प्रॉपर्टी उसकी के नाम नहीं हो सकती." मर रेशमा शर्मा ने कहा और टेबल पर राखी फाइल को उठा लिया. रेशमा ठाकुर इतना समझ चुकी थी की उसने जल्दबाजी बहुत बड़ी मूर्खता का काम कर बैठी थी.

"पर शर्मा जी कल रात के पार्टी मैं तो आपने ऐसा कुछ नहीं कहा था. पर आज कहा से ये बात आ गयी." रेशमा ठाकुर ने कहा. और ये बात उसकी मूर्खता का एक बहुत बड़ा उदहारण दिया था, यहाँ मौजूद सबके सामने.

"ठकुरियन आप सही बोल रही है. और पार्टी में भला कोई ऐसी बात बोलता है क्या? मैं तो यहाँ पर सिर्फ नकुल से मिलने और उसे ये एनवलप देने आया था. उस समय मुझे जो सही लगा वो मैं वह वसीयत के अनुसार कहा, क्योकि उस समय ये सभी मेरे साथ वहां पर नहीं थे. इस लिए मुझे उतना hi कहा या पढ़ा." मर. राजेश शर्मा ने एनवलप को निकल एक तरफ रख ने और फिर उसे रेशमा ठाकुर को दिखा ये बात कहा था.

"ठीक है शर्मा जी. अब इसमें क्या लिखा है." रेशमा ठाकुर ने शर्मा जी से पूछ लिया, एनवलप की तरफ इशारा करते हुए. मर रेशमा शर्मा बात सुन मुस्कुरा दिए.

"ठीक ठकुरियन जी इसमें क्या लिखा है ये तो नहीं जनता मैं. पर वसीहत के कुछ और बात आपको बता देता हु. जब तक नकुल नहीं आ जाता. तब तक आप सभी को हर महीने खर्चे के एक 1लक रुपये दिए जायेगे. और नकुल की माँ को 5लक." मर. राजेश शर्मा जी वसीहत की कुछ बात बताई. शर्मा जी की बात सुन सभी हैरान हो गए थे उन्हें इस बात का बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था, नकुल के न रहने पर इतना कुछ हो जायेगा. "अब हम सब को जाने की इजाजत दीजिये."

"ठीक है शर्मा जी. आप सबको इजाजत है." रेशमा ठाकुर ने खड़े होते हुए बोली. उसके बाद सभी खड़े हो गए. मर. राजेश शर्मा जाते हुए फिरसे कहा, "नमस्ते ठकुरियन जी और जितनी जल्दी हो सके नकुल को बुला ली जिजयेगा." उसके बाद सभी रेशमा ठाकुर को नमस्ते कर वहां से सभी चले गए. अब वहां पर रह गया था तो सिर्फ रेशमा ठाकुर और उसके साथ के लोग.

"भाभी अब क्या होगा. हम सब ने मिल के नकुल को मर दिया है. कहा से लगेंगे नकुल को." महेंद्र ठाकुर ने चिंतित होते हुए कहा. सभी को यही बात खाये जा रही थी.

"देवर जी जो हुआ उसे भूल जाईये, अब हमें इस मुसीबत से कैसे निकलना है वो देखना है. फालतू की बात मैं कुछ नहीं रखा हुआ है." रेशमा ठाकुर ने सभी को शांत करते हुए बोली. उसकी बात को सुन कर सब शांत बैठ गए. सभी सोचने लग गए की वो क्या करे.

"भाभी सही कह रही है और मेरे पास एक प्लान है. अगर आप कहो तो मैं उस प्लेन को आप सके सामने राखु." रुक्मणि ने कुछ सोचने के बाद बोली. उसकी बात सुन सभी उसकी तरह देखने लग गए. वही रेशमा ठाकुर ने कहा, "क्या प्लान है. बताओ सभी को. अगर सभी को सही कहा तो हम सब वही करेंगे."

"हम वकील (मर. राजेश शर्मा) से कह देते ह की नकुल अपनी आगे की स्टडी के लिए बहार गया हुआ है अपने दोस्तों के साथ." रुक्मणि ने कहं

"मान लो मैं ने शर्मा जी से ये सब कह भी दिया तो वह कहेगे नहीं की उसे बात करो मेरी तो क्या कहोगी. कहा गया है स्टडी के लिए जब शर्मा जी पूछा तो फिर क्या करोगी." रेशमा ठाकुर ने तर्क देते हुए अपनी बात रुक्मणि से कही. रेशमा ठाकुर की बात सब को सही लग रही थी.

"हम कह देंगे की वो उसे क्या हुआ है स्टडी के लिए और उन्होंने जैसा अपने कहा अगर कह तो मन कर देंगे की नकुल ने किसी को भी बताने से मन किया है. उसे में कहा पर स्टडी कर रहा है." रुक्मणि ने कहा. उसकी बात भी सही लगी. रेशमा ठाकुर रुक्मणि की बात मान गयी और ये निर्णय हुआ की रुक्मणि का hi प्लान वर्कआउट करेंगे. उसके बाद सभी आराम करने आपने अपने रूम चले गए.

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वही दूसरी और सुहब जब वो लड़का उठा तो देखता है को वह एक रूम में है और चारो तरफ मेडिकल से रिलेटेड मशीन रखा हुआ है और उसके हाथ में भी इन्सुलिन लगा हुआ है. और पास में hi कोई लेता हुआ है. उस लड़के ने अपने हाथ से इन्सुलिन निकल दिया. उस लड़के ने कनिका ने पिता को जगाया जो थोड़े से दुरी में कुर्शी पर सो रहे थे.

"तुम बिस्तर से कैसे उठ गए, अभी तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है. और तुम्हे आराम की जरुरत है " कनिका के पिता ने उस लड़के को वापस बीएड पर ला कर लेता दिया. वो लड़का भी चुपचाप जा कर बीएड पर लेट गया और बोलै, "मैं ठीक हु. मैं यह कैसे आया. मुझे यहाँ कौन के कर आता. आपका नाम क्या है."

"मेरा नाम अनुभव घुसे है, मैं एक साइंटिस्ट हु और डॉक्टर भी. यही पास के गाओं में मेरा एक छोटा सा क्लिनिक है, जहाँ पर लोगो का इलाज करता हु. जब मैं अपने क्लिनिक में गोअन के लोगो का इलाज कर रहा था तभी गाओं की लड़किया तुम्हें मेरे पास कर आयी थी. उस समय तुम बहुत hi सीरियस हालत में थे. इस लिए तुम्हें यहाँ ले आया. तुम्हारा नाम क्या है," अनुभव घुसे ने नकुल के हाथ में फिरसे ग्लूकोज़ लगा दिया. नकुल ये देख रहा था की उसके हाथ में फिरसे ग्लूकोज़ लगा जा रहा था पर अपनी हालत देख कर वह चुपचाप लगने दिया.

"मेरा नाम नकुल खुश्वाहा है. पर मेरा घाव इतनी जल्दी ठीक कैसे हो गया. जब की मुझे तो उठा भी नहीं जाना चाहिए." नकुल ने अपना परिचय के साथ जल्दी ठीक होने का कारन पुचन्द लगा.

"नकुल तुम इस लिए इतनी जल्दी ठीक हो गए क्युकी मैंने तुम्हें एक ऐसा इंजेक्शन दिया है, जिसे मैं ने सालो के म्हणत के बाद बनाया था. इस की एक खाशियत ये थी की ये इंजेक्शन जिसे भी लगया जायेगा वो जल्दी ठीक हो जायेगा साथ hi उसकी सेक्सुअल पावर भी बाद जायेगा. पर तुम्हारे साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ ये मुझे कुछ समझा नहीं आ रहा है."

"मुझे पता है की मेरे साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ क्योकि मुझे बचपन से hi एक ऐसा इंजेक्शन दिया जाता रहा है जो मुझे नामर्द बना दे. उस इंजेक्शन की खाशियत ये है की अगर किसी को भी एक बार लग गया तो वो जिनगी भर के लिए नामर्द बन जायेगा. शायद वजह से मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ." नकुल ने दुखी होते हुए कहा. इस बात को सुन कर अनुभव घुसे को भी बहुत दुख हुआ की एक छोटे से बचे के साथ ऐसा करते हुए आ रहे थे और अभी तक दिया जा रहा था. नकुल का उदास चेहरा देख कर अनुभव घुसे बोले, " नकुल तुम चिंता मत करो. मैं तुम्हे जो इंजेक्शन दिया है. तुम्हे पूरी तरह ठीक कर देगा."

उसी समय एक लड़की आवाज आयी, "पिता जी चलिए खाना खा लीजिये, 2 बजे रहे सुबह के, पिता जी ये कौन है और वो लड़का कहा गया." नकुल का चेहरा में काफी बदलाव आ गए थे, यहाँ तक उसके शरीर में भी. जहाँ उसका शरीर पहले मरियल सा था, वही अब एक रेसलर की तरह हो गया था.

"बेटी ये वही लड़का ह जिसका हम इलाज कर रहे थे. इसका नाम नकुल है." अनुभव घुसे ने अपने बेटी को हैरान और परेशां देख कर नकुल के बारे में बताया. 'नकुल के शरीर में ये सरे बदलाव उस इंजेक्शन के वजह से आया हुआ है."

"hello नकुल, अब तुम कैसे हो." कनिका ने अपना हाथ आगे बढ़ दिया. नकुल ने भी उसके हाथ मिला कर बोलै, " मैं ठीक हु."
 
अपडेट 7

अब तक

आपने पढ़ा की कैसे नकुल मौत के मुँह से बहार आया, सिर्फ उस रेड तुबे मेडिसिन की वजह से जिसको अनुभव घुसे ने वर्षो के म्हणत के बाद बनाया था. उस मेडिसिन के वजह से नकुल का पूरा शरीर बदल गया था. वही नकुल और कनिका आपस में परिचय हो गया था.

अब आगे

"मेरे नाम कनिका है. और मैं अपने पापा के साथ रहती हु.", कनिका ने नकुल से कहा. कनिका इस समय एक पिले रंग का सूट सलवार पहनी हुई थी. सरसो की फूल की तरह उसका रंग भी खिला हुआ था. उस पिले रंग के कपडे में बहुत सुन दर लग रही थी. उसके स्तन अपने होने का एहसास दिल रहे थे. नकुल भी उसके रूप सौंदर्य से बच नहीं पाया था, वह तो उसके चेहरे पर मुस्कान को देख कर एक पल के लिए खो सा गया था.

"बहुत hi प्यारा नाम है आपका. उतनी मीठी बाते भी करती हो." नकुल ने कनिका की तारीफ करते हुए कहा. नकुल की बात को सुन कर कनिका भी मुस्कुरा दी. कनिका ने चहरे पर अपनी मुस्कान बरकरा रखते हुए बोली, "शुक्रिया मेरी तारीफ के लिए. चलिए खाना कहते है. पिता जी आप भी चलिए, आपने भी रात का hi खाया हुआ, वो भी सिर्फ चार निवाले."

"माफ़ कीजिये कनिका जी. अभी तो मैं आपके साथ नहीं चल सकता." नकुल ने कहा. नकुल के ऐसे मन करंट देख, कनिका उसके तरफ हैरानी के भाव देखने लग गयी थी. "मेरी तरफ इस तरह मत देखिये. मैं ने मन इस लिए किया है, क्योकि अभी मुझे ग्लूकोज़ चढ़ रहा है और हम सब जहाँ पर है वहां पर खाना खाना सही नहीं होगा." नकुल ने मुस्कुराते हुए कनिका के तरफ देखते हुए कहा. कनिका भी जब नकुल की बात सुन कर उसकी तरफ देखि तो वो भी हंस दी.

"अच्छा ठीक है. तुम आराम करो यहाँ पर." कनिका से मुस्कान के साथ बोली. फिर एक बार उस ग्लूकोज़ के बोतल की तरफ देखि, जो थोड़ा सा hi रहा गया था, जिसको ख़त्म होने में काम से काम 15 मिनट्स लगने थे. "10 या 15 मिनट्स और लगेंगे इस ख़त्म होने में. तब तक मैं यही तुमसे बात करती हु. और पिता जी आप जाकर फ्रेश हो लीजिये." कनिका की बात सुन अनुभव घुसे वह से चले गए. उसके बाद सिर्फ नकुल और कनिका hi लेबोटरी में रह गए थे.

फिर कनिका नकुल को अपने बारे में और यहाँ और गाओं के बारे में बताने लग गयी. नकुल बेचरा कनिका की बातो को सुनते हुए मंद मंद मुस्कुरा रहा था. कनिका भी ये देख कर खुश हो रही थी. ऐसे hi नकुल को लगा हुआ ग्लूकोज़ ख़त्म हो गया था. फिर कनिका उसे निकल नकुल को अपने साथ ले कर लेबोटरी से निकल गयी. जब बहार आयी तो उसने देखा की उसके पापा रूम से बहार आ रहे थे."

"नकुल तुम मेरे रूम में चले जाओ वहां पर जा कर फ्रेश हो लो." अनुभव घुसे ने दोनों के पास आने के बाद नकुल से कहा. नकुल ने अपनी गर्दन हाँ में हिलाया. "मैं ने तुम्हारे लिए बीएड पर कपडे निकल दिए है. शायद तुम्हे छोटा होगा, पर अभी के लिए काम चला लो. शाम तक मैं तुम्हारे लिए कपडे का इंतेज़ाम करता हु." फिर नकुल वहां से निकल गया. वही कनिका रसोई की तरफ और डॉ साहब डाइनिंग टेबल की तरफ.

20 मिनट के बाद नकुल फ्रेश हो कर जब आया तो, देखा की डाइनिंग टेबल पर सिर्फ अनुभव घुसे बैठे हुए अख़बार पढ़ रहे थे. नकुल वह जा कर बैठ गया और उसने इधर उधर की बात करने लग गया. कनिका जब खाना ले कर रसोई से बहार आयी तो देखा उसके पिता जी और नकुल बाटे कर रहे थे.

"क्या बात हो रही है आप दोनों में." कनिका खाना एक तरफ टेबल पर रख कर बोली. अपनी बेटी की बात सुन उन्होंने मुस्कुरा दिया.

"कुछ खास बाते नहीं हो रही बेटी. मैं तो नकुल से उसके बारे में पूछा और फिर यहाँ वहां की बाते सुरु हो गयी." अनुभव घुसे ने अपनी लाडली बेटी के बातो का हँसते हुए जवाब दिया. कनिका भी अपने पिता जी की बात सुन कर हंस दी.

"क्या पूछ रहे थे पिता जी नकुल से, हमें नहीं बतायेगे." कनिका कुर्शी पर बैठी हुई थी और दोनों के लिए प्लेट में खाना निकलने में लगी ल थी. खाने के प्लेट पहले नकुल के तरफ बढ़ाया और फिर अपने पिता के तरफ बढ़ा दी. उसके बाद कनिका अपने लिए खाना निकलते हुए ये बात कही थी.

'क्यों नहीं बतायेगे आपको. आपका तो पहला हक़ बनता है सब कुछ जाने का." अनुभव घुसे ने हँसते हुए कहा. और रोटी को तोड़, उस रोटी के टुकड़े को सब्जी में लगा, अपने मुँह में ले कर खाने लगे. "तुम्हारे हाथो में तो जादू है बेटी." नकुल भी चुपचाप खाने में लगा हुआ था

"बताईये न अब, क्यों तंग कर रहे है मुझे." कनिका ने कहा और रोटी का एक टुकड़ा अपने मुँह में दाल ली, जो सब्जी से भरा हुआ था मोड़ कर. नकुल दोनों बाप बेटी का नोकझोक देखते हुए खाना खा रहा था.

"बेटी कनिका मैं तो नकुल से पूछ रहा था की कुछ दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाओगे तो तुम यही रहना चाहोगे या फिर अपने घर जाना कहते हो." अनुभव घुसे ने अपनी लाडली से बोले. थोड़े देर तंग करने के बाद. नकुल भी ये देख मुस्कुरा दिया. नकुल आज पहली बार ऐसा प्यार देख रहा था, जो उसको अपने साथ बैठ कर खाना खिला रहे थे. "क्या कह नकुल ने." कनिका बोली.

"वो हमारे साथ यही रहना चाहता है. और बाकि की बाते तुम hi पूछ लो." अनुभव घुसे ने कहा. और अपने खाने में लग गए.

"नकुल अब बताओ क्या करना चाहते हो. तुम्हारे बातो से तो इतना तो मुझे पता चल गया है की तुम पढ़े लिखे पर कहा तक ये मैं नहीं कह सकती." कनिका ने बातो का सिसिला सुर किया. नकुल ने भी मुस्कुरा दिया इस तरह कनिका के कहने पर. नकुल ने कहा, "अभी मैंने कुछ सोचा नहीं है. पर तुम्हारी ऐसे बाते सुन कर हंसी आ रही है. की किसी के बोलने या बातो के तरीके से कैसे तुम कह सकती हो की सामने वाला पढ़ा लिखा है या नहीं."

"तो फिर तुम कहना चाहते हो की तुम पढ़े लिखे नहीं हो." कनिका ने कहा और फिर अपने प्लेट का आखरी टुकड़ा और सब्जी के आखरी टकरा उस टुकड़े में समेत कर अपने मुँह दाल ली. कहते हुए नकुल की तरफ देखने लग गयी. नकुल एक बार फिरसे हांसे लगा. "ये हंसना बंद करो और मैं जो पूछा है उसका जवाब सीधे सीधे दो. समझे."

"तुम्हारा अंदाज़ा सही है. मैं ने अभी अभी 12 का एग्जाम दिए है. अगर मैं 12तह क्लियर हो गया तो मैं बसा कर लू. तुम बताओ मुझे क्या करना चाहिए." नकुल ने अपना प्लेट एक तरफ करते हुए कहा. क्योकि नकुल ने खाना खा चूका था.

"अरे प्लेट उधर क्यों किया. एक रोटी और ले लो." कनिका ने नकुल को प्लेट एक तरफ करते देख कर बोली. नकुल ने मन कर दिया ये कह कर की पेट भर गया है. "कोई नहीं फिर तुम ये दूध ले लो." कनिका ने तरफ रखे दूध को एक गिलास में डालते हुए उसके तरफ कर दी. नकुल ने इस बात के लिए मन नहीं किया और दूध ले कर पीने लग गया.

"नकुल तुम ने बहुत hi अच्छा कोर्स चुना है. मैं बी. सक करा चाहती हु. पर तुम्हारे लिए सबसे बड़ी परेशानी 12तह की मार्कशीट है. तुम वो कैसे ले कर आओगे, क्योकि तुम अपने वहां जाना नहीं चाहते हो." कनिका खाना खा चुकी थी और प्लेट को समेटते हुए ये बात कही थी.

"उसकी चिंता नहीं है मुझे. वो तो मैं बोर्ड से ले आऊंगा. वो मुझे दे देंगे." नकुल ने कुछ याद करते हुए कहा था. कनिका ये सुन कर खुश हो गयी थी. फिर मुस्कुराते हुए कनिका ने कहने लगी, "ये तो मैंने सोचा hi नहीं था. तो कब जा रहे हो लेने."

"अभी रिजल्ट आने में काम से काम 1 महीने है. है. और जब तक मेरी तबियत भी ठीक हो जाएगी." नकुल ने कहा. कनिका ये सुन कर हँसते हुए प्लेट उठा रसोई के तरफ चल दी. नकुल भी उठ कर घर से बहार चला गया घूमने के लिए."
 
अपडेट 8

अब तक

आप सब ने देखा की कैसे नकुल ठीक होने के बाद कनिका और उसके पिता अनुभव घुसे के साथ बैठ कर भोजन किया और उनसे बाते की. लास्ट में देखा की नकुल ने आगे स्टडी करने की बात कनिका से कही और कनिका ने उसे.

अब आगे

नकुल थोड़े देर बहार घूमने के बाद जब घर में आया तो नकुल ने देखा की कनिका हॉल में बैठी हुई घर के दरवाजा पर hi अपनी नज़र राखी हुई थी. और खुश परेशां सी लग रही थी. नकुल को देखते hi वो कड़ी हुई और उसके पास आ गयी.

"कहा गए थे बिना बताये. पता है मैं कितना परेशां हो गयी थी, तुम्हारे वजह से." कनिका ने गुस्से में बोली. नकुल कनिका के इस गुस्से को देख कर सोच में पद गया, वह उसके लिए इस तरह से क्यों परेशां हो रही थी.

"मैं तो बहार घूमने गया था. क्योकि मुझे खाना खाने के बाद थोड़ा घूमने की आदत है." नकुल ने कहा.

"तो बता कर तो जाना चाहिए था. मैं कितना परेशां हो गयी थी तुम्हारे लिए. तुम्हे पता भी है." कनिका ने नकुल को खींचते हुए अपने साथ हॉल में ले कर आ गयी थी और उसे अपने पास hi सोफे पर बैठा दी. कनिका के इस व्यवहार से नकुल इतना तो समझ गया था की कनिका के दिल में उसके लिए कुछ तो था पर क्या ये उसे समझ नहीं आ रहा था.

"अच्छा सुनो मैं ने तुम्हारा रूम साफ़ कर दिया है. तुम एक बार चल कर देख लो. पापा शाम को आते समय तुम्हारे लिए कुछ कपडे लेते आएंगे. मैं जब उनसे बात की तो उन्होंने मुझे कहा था." कनिका ने नकुल से कहा. कनिका ने उसको जिस तरह से पकड़ा हुआ था उसको देख कर ऐसा लग रहा था की वह नकुल से प्यार करने लगी थी. नकुल को भी ये एहसास तो हो रहा था पर उसका मैं मैंने को तैयार नहीं हो रहा था. वह उसे सिर्फ एक दोस्त के नज़र से hi देख रहा था.

"अच्छा ठीक है. चलो दिखो मुझे मेरा रूम." नकुल ने कहा. उसके बाद कनिका नकुल को ले कर रूम दिखने चली गयी जो उसके hi रूम के बगल में था. रूम को दिखते हुए बहुत hi खुश हो रही थी और उसे बात भी करते जा रही थी. रूम देखने के बाद नकुल और कनिका बीएड पर hi बैठ गए. वही नकुल बिस्तर लेट गया. कनिका की बातो का मज़ा लेते हुए रूम को देख रहा था और उसकी बातो का हाँ और न में जवाब भी दे रहा था. कनिका ने जब काफी देर बाद जब नकुल का कोई प्रतिक्रिया न पायी तो जब उसके तरफ देखा तो वह सो चूका था. कनिका ने उसके ऊपर चादर दाल दी और रूम से निकल गयी.

शाम को अनुभव घुसे आये तो उनके हाथ में कुछ बैग थे. शायद जिसमे नकुल के लिए hi कपडे थे. कनिका अपने पिता जी को देख कर खुश हो गयी और उनके गले जा लगी.

"कनिका इसमें नकुल के लिए कपडे और कुछ जरुरी सामान है. इसमें एक फ़ोन भी है, तुम सिम दाल कर उसे चालू कर दो. जब तक मैं फ्रेश हो कर आया." अनुभव घुसे ने अपनी बेटी के माथे पर किश कर अपने रूम की तरफ चल दिए. वही कनिका अपने काम में लग गयी. कनिका जब फ़ोन को बॉक्स को देखा तो एक एंड्राइड सेट था, जैसा उसके पास था, पर मोडल नया था.

'क्या कर रही हो कनिका." नकुल नींद खुलने के बाद जब टाइम देखा तो 6 बज रहे थे. नकुल पहले बैठरूम में जा कर फ्रेश हुआ. उसके बाद रूम से निकल कर हॉल में. उस समय कनिका उस फ़ोन के बॉक्स को थैले से बहार निकल देख रही थी, जब नकुल हॉल में आया था. कनिका को इस तरह किसी चीज़ को देखते हुए नकुल ने ये बात कही थी.

"ओह तुम उठ गए. नकुल इधर आओ." कनिका ने बिना मुद hi नकुल अपने पास बुला लिया. नकुल भी कनिका के पास आ कर बैठ गया. "ये बातो ये सेलफोन कैसे है."

"ये बहुत hi अच्छा है. और ये मोडल तो 6 महीने पहले hi लांच हुआ है." नकुल ने ज्याद न कह कर सिर्फ उतना hi कहा, जितना अपने दोस्तों से क्लास टाइम सुना था. नकुल ने उस टेक्नोलॉजी में रूचि रखता था इस लिए उसने इस फ़ोन के बारे में साडी जानकर जुताई थी. और उसने सोचा भी था की जब वह कमरे लगे का तो सबसे पहले इसको hi लेगा. पर उसके साथ ऐसा नहीं हो पाया था. "ओह तुम्हे तो काफी नॉलेज है. कुछ और भी जानते हो इस के बारे में."

"हाँ ये एंड्राइड 7 ीोस पर काम करता है. 2जब राम है और 3ग सपोर्ट करता है. बैटरी 4000मह की है. इनबिल्ट स्टोरेज 32जब, मेमोरी कार्ड से 64जब तक बढ़ाया जा सकता है." नकुल कहा. कनिका नकुल के इस जानकारी से काफी प्रभावित हुई थी.

"ओह हो तुम्हे तो मोस्टली इसकी साडी जानकारी है. वैसे मैं ये बात दू ये फ़ोन तुम्हारे लिए hi है और पापा आज hi ले कर आये है." कनिका ने कहा और बातो बातो में उस फ़ोन में सिम भी दाल दिया था. और उसे चालू कर दी थी

"पर मैं कैसे ले सकता हु." नकुल ने कहा और तभी पीछे से एक आवाज़ आयी. "क्यों नहीं ले सकते. मैं तुम्हे जो कुछ भी दे रहा हु, उसे चुपचाप रखते जाओ. मैं जान गया हु की तुम बहुत खुदर हो. इस लिए तुम्हारा दिल ये सब लेने ी मन कर रहा है." अनुभव घुसे चल कर नकुल और कनिका के पास आ के बैठ गए थे. थोड़ा रुकने के बाद फिर से अपनी बात को आगे बढ़ाते कहा, "तुम्हारे जब पैसे हो, तुम मुझे वापस कर देना. यहाँ तक मेरी फीस भी. अब तो ठीक है न. अब तुम्हे इन सबसे को लेने में कोई परेशानी नहीं होना चाहिए."

"ठीक है. अब मैं आपको मन नहीं करूँगा." नकुल ने कहा और उसे फ़ोन ले लिया. और चला कर देखने लगा. जब कॉन्टेक्ट्स में गया तो कनिका ने अपना no. सेव कर दिया था. फिर कनिका की और देखा, कनिका ने मुस्कुरा दी.

कनिका उठा कर रसोई घर रात का खाना बनाने चली गयी. वही अनुभव और नकुल फिरसे से बातो में लगा गे.

रात को तीनो मिल कर खाना खाये और सोने चले गए. ऐसे नई दिन बिताने लगे. नकुल अब सुबह उठ कर रनिंग भी करने लगा था और थोड़ा बहुत एक्सरसाइज भी करने लगा गया था. कनिका और नकुल के बिच नज़दीकिया आने लग गयी थी और एक hi एक कनिका नकुल अपने मैं की बात बता दी और नकुल ने भी. अनुभव घुसे को इस बात कोई खबर नहीं थी. 1 महीना कैसे बिता पता hi नहीं चला. रिजल्ट भी आ गया था और नकुल अच्छे अंक से पास हुआ था. नकुल के रिजल्ट आने 2 दिन बाद, नकुल अपना मार्कशीट लेने के लिए निकलने वाला था. कनिका ने भी ज़िद्द कर के उसके साथ हो ली.

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जब नकुल और कनिका रेलवे स्टेशन पहुंचे तो देखा की प्लेटफार्म पर बहुत भीड़ थी. इतना भीड़ देख कर कनिका दर गयी क्युकी आज तक उसने ऐसी भीड़ नहीं देखि थी, उसकी शिक्षा गाओं में हुई थी. पर नकुल को अपने साथ देख कर उसका सर दर निकल गया.

"नकुल हम अपने ट्रैन तक कैसे पहुचेगे. देखो कितना भीड़ है." कनिका ने नकुल को भीड़ की तरफ इशारा करते हुए बोली. वही रेलवे स्टेशन पर खड़े यात्री दोनों को hi देख रहे थे. जहाँ लड़के कनिका को, वही लड़किया नकुल को. नकुल एक ग्रीन कलर की टीशर्ट पहना हुआ था जो उसके शरीर पर पूरी तरह चिपक गया था और निचे जीन्स ब्लैक कलर की. नकुल को देख कर वहां पर मौजूद औरतो और लड़कियों की योनि रोने लग गयी थी. वही कनिका सफ़ेद और गुलाबी रंग की परिधान में उसकी सुंदरता को और निखार दिया था. उसकी यौवन को देख कर बूढ़े और जवान लड़को की लिंग hi खड़ा कर दिया था यहाँ तक कईओ ला तो पंत में भिगो दिया था.

"कनिका वह तक पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं है, दिखात तो ये है की ट्रैन किस प्लेटफार्म पर आने वाली है. जिसमे बैठ कर हमें जाना है." नकुल ने कनिका से कहा और तरफ कनिका को ले कर खड़ा हो गया. कोई पीछे से किस महिला ने उन्हें रास्ता छोड़ने के लिए कही थी.

"क्या??? मुझे तो लगा जो सामने कड़ी है वही उसी में जाना है. अब इतने भीड़ में हमें पता कैसे चलेगा." कनिका ने बड़े hi ऐडा के साथ अपने कमर पर दोनों हाथ रखते हुए बोली. वही नकुल कनिका की बात सुन कर हंस दिया. "अब हंसना बंद करो. नहीं तो मैं तुम्हारे दांत तोड़ दूंगी. ",

"मुझे तो ऐसा लगता है लाइफ में पहली बारे जा रही हो रेल गाड़ी से. और मेरे दांत मत तोडना वर्ण मुझसे शादी कौन करेगा." नकुल इतना कह कर फिर से हंसने लग गया. कनिका नकुल की आखरी बात सुन कर उसके पेट में मुक्का मरते हुए बोली, "मेरे होते हुए तुम दूसरे के बारे सोच भी कैसे सकते हो. अगर तुमने ऐसा किया न तो सरे दांत तोड़ दूंगी और फिर तुमसे कोई शादी नहीं करेगा. समझे. और हाँ आज पहली बार इस तरफ ट्रवेल कर रही हु."

"OK. अब चलो मेरे साथ." नकुल ने कनिका हाथ पकड़ आगे बढ़ गया. थोड़ा आगे जाने पर उन्हें सामने hi तट दिख गया. नकुल कनिका के लिए तट के पास चला गया और अपने ट्रैन के बारे पता किया. उसके बाद दोनों वह से अपने ट्रैन में जाकर बैठ गए. कुछ समय बाद ट्रैन स्टार्ट हो गयी. दोनों ने अपना अपना सामान बर्थ निचे कर दिया. और बैठ गए.

"नकुल एक बात पुछु क्या,?" कनिका ने नकुल कहा. कनिका ने इतने प्यार से पूछा था की नकुल ने अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया. नकुल के हाँ करते hi कनिका के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गे. फिर एक तरफ इशारा करते हुए बोली, "तुम्हरा वो इतना बड़ा क्यों है."

"क्या मेरा इतना बड़ा?" नकुल ने बिना कनिका के तरफ ध्यान दिए हुए कहा. नकुल अपने बैग से एक बुक निकल रहा था पढ़ने के लिए. इसलिए उसका ध्यान कनिका के तरफ बिलकुल भी नहीं था. वही कनिका ने फिरसे कहा, "वो इतना बड़ा क्यों है?"

"क्या मेरा इतना बड़ा है. कुछ बोल कर बताओगी भी." नकुल ने कहा.

"वही जो तुम लड़को के पस होता है और हमरे पास नहीं होता." कनिका बोली.

"दिमाग. वो तो हम लड़को में अक्सर बड़ा होता है. और तुम लड़कियों का छोटा." नकुल ने हँसते हुए कहा. कनिका ये सुन कर चीड़ गयी और बोली, "वैरी फनी. वो तो तुम लड़को से ज्यादा, हम लड़कियों के पास होता है."

"यार जो पूछना साफ साफ़ पूछो न. क्यों तंग कर रही हो. मुझे मेरी बुक नहीं मिल रही मेरे बैग में. ऊपर से तुम्हारी ये पहेलियाँ." नकुल ने कहा.

"तुम्हारा लुंड इतना बड़ा क्यों है." कनिका की बात सुन, अपना सर उठा कर उसकी तरफ देखने लग गया. "यार बताओ न. मैं सच में जानना चाहती हु."

"यार तुम हर बार यही क्यों पूछती हु. शर्म आराम है की नहीं." नकुल ने थोड़ा गुस्सा होते हुए कहा. कनिका ने आज 20वि बार ये सवाल किया था नकुल से, जब से सुने नकुल अंडरवियर में देखि थी. कनिका मासूम सा चेहरे बनाते हुए एक बार फीस नकुल से कही तो नकुल ने कहा, "मेरा तो बचपन से hi बड़ा है."

"क्या मैं इस छू कर देख सकती हु. तुम ये मत समझना उस तरह की लड़की हु. अगर ऐसा समझा न तो जान से मर दूंगी. वैसे भी अब इसे मेरे हक है." कनिका ने कहा और उसके पास जा कर बैठ गयी. दोनों उस काउच अकेले थे. नकुल ये जनता था की आज कनिका नहीं मानाने वाली थी.

"मैंने ऐसा कब कहा तुम उस टाइप की हो. मुझे पता है तुम बहुत hi शरीफ और स्मार्ट एंड प्रीटी लड़की हो. तुम छू सकती हो पर यहाँ नहीं." नकुल ने कहा. नकुल की बात सुन कर कनिका खुश हो गयी और उसके होठो को चूम ली.

"तो जल्दी से अपनी पंत उतरो. ताकि मैं इसे देख और छू सकू." नकुल खड़ा हुआ और सबसे पहले अपने काउच का दूर लॉक्ड कर दिया. फिर कनिका के पास आ कर अपना पंत खोल कर निचे कर दिया. " इसको भी उतरो न." कनिका अंडरवियर की तरफ इशारा करते हुए कही.

"ऐसा देखना तुम्हे है इसलिए इसे तुम hi उतरो. वर्ण मैं चला सो कर बुक पढ़ने." नकुल ने कहा. नकुल की बात सुन कर कनिका ने जल्दी से उसका अंडरवियर पकड़ कर निचे खींच दी और उसका लिंगा बहार आ गया लहराते हुए. शिदा कनिका के होठ पर जा लगा.

"बदमाश मुझे मरता है. अगर ज्यादा उछाल कूद किया न तो निचोड़ डालूंगी तुझे समझा." कनिका लिंग को अपने हाथ में कपडे हुए बोल रही थी. वही कनिका के हाथ में आते hi लिंग अपने पुरे औकात में आ गया था. "नकुल तुम्हारा ये तो बहुत बड़ा और मोटा है. ऐसा मैं विदेशी फिल्मो में देखा है."

"अच्छा मुझे नहीं पता था की तुम वैसे फिल्मे भी देखती हु." नकुल ने कनिका से कहा और उसके सर पर हाथ रख दिया. नकुल के ऐसा करते हुए कनिका पता नहीं क्या हुआ की लिंग को मुँह में ले कर चूसने लग गयी वही कनिका के इस हरकत से नकुल एक लग hi दुनिया में चला गया था. कनिका 15 मिनट्स तक नकुल के लुंड को मुँह में ले कर चूसती रही और अपने हाथो से सहालती रही. कनिका लिंग अपने मुँह से निकल जल्दी से तरफ मोड़ दी थी. अगर के पल की देरी हुई होती तो सारा का सारा वीर्य कनिका के ऊपर होता.

नकुल झस्डत्ते hi अपने साइड के सीट पर बैठ कर लेट गया. वही कनिका ने अपना चेहरा अपने रुमाल से पूछा और फिर निचे गिरे हुए वीर्य को उसके बाद उस रुमाल को खिड़की से बहार फेक दी.

"डिअर अब अपनी पंत और अंडरवियर पहन लो. क्योकि चली सोने." कनिका ने कहा और फिर उसने पानी पीया और अपने साइड के सीट पर लेट गयी. वही नकुल भी अपनी पंत और अंडरवियर पहन कर सही से ले गया.

उसके बाद नकुल और कनिका सो गए, उनकी आंख सुबह खुली जब तट टिकट चेक करने के किये दरवाजा नॉक कर रहा था.. फिर नकुल दरवाजा खोल, अपना टिकट दिखाया और पूछा की दिल्ली पहुंचने में कितना समय और लगेगा. 10 मिन्ट्स म hi पहुंचने वाला ह तट कहते हुए चला गया..
 
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