Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 15 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

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ममी नाहा के डेसिंग टेबल के सामने पोहंची. और एक लोशन निकल पर अपने बदन पर लगाने लगी.

ममी पहले कभी कभी hi खुद का ख्याल रखा करती थी. पर राज से मिलने के बाद आटोमेटिक hi खुद की केयर करने लगी थी.

रूम लॉक था. ममी नुदे hi मिरर के सामने कड़ी हुई थी.. ममी को आदत थी अक्सर बंद कमरे में ऐसे hi नुदे हो जाया करती थी..

अब भी वह मस्त मूड में अपने जिस्म को लोशन से चमका रही थी. मोबाइल के घंटी बजी तो ममी ने बीएड की और देखा.. बडबडी.. इस समय किसकी कॉल आ गई..

ममी अपनी गदराई गांड मटकते हुए बीएड की और जाने लगी. बड़े 38 के चुके ठालठालने लगे. ममी बीएड के पास पोह्ची.. झुक कर मोबाइल को देखने लगी. अनजान नंबर से कॉल आ रही थी..

ममी झुकी तो पीछे से बड़ी कमल के दिखने लगी थी. कोई होता तो खुद पर काबू न रख पता. ममी के गांड एकदुम्म बंद थी. ममी के गांड शुरू में कुछ बार मां ने खोली थी. उसके बाद मां ने ममी की गांड नहीं मरी थी. जिस कारन ममी की गांड का छेड़ टाइट था.. पर ज़यादा तर घोड़ी बन के छोड़ने के कारन ममी की गांड की शेप बड़ी कमल की हो गई थी..

ममी ने मोबाइल उठा कर कान से लगाया.. एक पेअर उठा कर बीएड पर रखा और दूसरे हाथ से पेअर पर लगा लोशन मलने लगी.

ममी-- hello.

दूसरी और राज था--- अरे जाने मैं.. कैसे हाँ आप..

राज की आवाज़ सुनते hi--- तुममममम.. मेरे नंबर कहाँ से लिए तुमने.. फिर जैसे ममी को यद् आया.. निशा से तुमने मेरा नंबर भी ले लिए. ममी हैरान हो गई थी..

राज-- अरे आप को भूल hi पाया में तो.. नंबर लिए बिना कैसे चैन आता मुझे. आज मिलने का मैं होने लगा था. तोह कॉल कर दी.. वैसे आप ऐसी पोजीशन में बहुत कमल की दिख रही हाँ.. मैं वहां होता तो उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ मा कसम मज़ा hi आ जाता..

ममी के हाथ से फोन छूटते छूटते बचा.. ममी लड़खड़ा गई. बीएड से पेअर हटा कर रूम में चरों और देखने लगी..

ममी हकला कर boli--tt..tummm...tum कहाँ से देख रहे हो मुझे..

राज-- हाहाहा.. मतलब आप कुछ खास कर रही हाँ क्या..

ममी की सांस में सांस आई.. थोड़ी नाराज़गी से बोली-- तुमने तो मेरी जान hi निकल दी थी.. में समझी तुम..

राज-- में आप के कमरे में हों.

ममी-- तुम्हे कैसे पता में अपने रूम में हों

राज-- आपकी घबराहट से अंदाज़ा लगाया मेने.

वैसे राज ने निशा से जान लिए था.. ममी कहाँ हाँ.. निशा से ममी की कुछ रूटीन भी जान ली थी राज ने

ममी-- बड़े आये मेरी घबराहट से मुझे जानने वाले.. फोन कैसे किया तुमने

राज-- मिलने के लिए..

ममी शोखी से-- मिलने को. में तुम्हारी गफ हों क्या.. मई नहीं मिलने वाली तुमसे..

राज-- पक्का नहीं मिलना छाती आप मुझसे..

ममी-- हाँ पक्का. और क्यों मीलों में तुमसे.. तुम मेरे हो भी कोण.

राज-- नहीं हों तोह बन जाऊँगा..

ममी-- क्या मतलब

राज-- मतलब का क्या है सुधा जी..

ममी-- सुधा जी....???? कुछ तो शर्म करो. मुझे नाम से बुला रहे हो

राज-- क्यों मिरर में देख के आपको नहीं लगा. आप आज भी जवान हाँ. हसीं हाँ. निशा से कुछ hi बड़ी दिखती हाँ..

ममी फिरसे रूम में देखने लगी..

ममी-- तुम बाद में कॉल करना.. अभी में बिजी हो

राज-- दिल तोड़ने का इरादा है क्या आपका सुधा जी

ममी हस्ती हुई-- दिल का तोह पता नहीं. तुम मिले तोह मोह ज़रूर रोड दूँ में तुम्हारा.. मुझसे फ़्लर्ट करने लगे हो अब तुम.

राज-- आप फ़्लर्ट करने की चीज नहीं हाँ सुधा जी.. आप तो प्यार करने की चीज हाँ

ममी का मोह खुल गया-- प्याआआरर... क्या मतलब है तुम्हारा.

राज-- जब मिलोगी तो बताऊंगा मैं आपको

राज ने कॉल कर कर दी..

ममी.. hello.hello hi करती रही.. पहले तो फोन को हैरानगी से देखती रही. फिर धीरे से हसने लगी.. पागल लड़का.. मुझे भी पागल कर देगा.. इस उम्र में मुझे क्या बना रहा है..

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सिमरन-- तुम सिवाए मज़े मारने के कुछ और भी करते हो क्या..

राज ने सिमरन को कॉल मिलायी तोह सिमरन पहात से बोल पड़ी

राज-- मज़े मरने की उम्र है तोह मज़ा hi करूँगा न..

सिमरन-- धयान रखना. कहीं मज़े के चक्रों में अपने असली मकसद को न भूल जाना.

राज-- हायईए.. कितनी बेचैनी है तुम्हे मेरी सफलता को लेके

सिमरन-- हाहाहा.. तुम्हारी सफलता.. हाहाहा.. मुझे तो तुम्हे हराना है.. तुम्हे खुद से जीतता हुआ तो मैं नहीं देख सकती..

राज-- पक्का ऐसे hi विचार हाँ तुम्हारे..

सिमरन-- पक्का क्या.? जैसी मैं हों मेरे विचार भी वैसे hi होंगे

राज-- लड़कियों झूट बहुत बोलती है सिमरन.. तुम भी झूट बोल रही हो

सिमरन-- मैं क्यों झूट बोलने लगी. झूट बोल के मुझे क्या हासिल हो जायेगा..

राज-- दिल की बार किसी को बता कर एक तरह से हारना hi होता है सिमरन.. वर्ण तो तुम भी दिल से मेरी सक्सेस के लिए दुआ मांग रही हो.. तुम्हे दर है, कहीं में हार गया तोह तुम्हारी ज़िन्दगी से आउट हो जाऊँगा

सिमरन--- क्याआ.. हाहाहा.. बड़े ऊंचे ख्वाब देखने लगे हो तू राज.. ऐसे खवाब मत देखो.. जिसके अधूरा रह जाने पर तुम्हे दुःख मिले.

राज-- न बोलो. पर तुम्हारे दिल की बार मुझे फोन पर भी सुनाई दे रही है. जब से तुम्हारे दिल में मेरे लिए फीलिंग्स आने लगी हाँ.. तब से तुम्हारा दिल मेरी सफलता को लेके चिंतित भी है और प्रार्थना भी कर रहा है

सिमरन-- हाहाहा.. राज तुम जोके अच्छा सुना लेते हो.. btw तुम मेरे अगले वॉर के लिए तैयार रहो. जल्द hi तुम्हे एक बड़ी चोट मिलने वाली है.. ये मई तुम्हे पहले से बता रही हों

राज-- हाय तेरी इस ऐडा पे मैं मर न जाओं कहीं ऐ सनम.. मुझे वार्निंग दे के मुझे चोट देने की बात करती हो

राज मेह्बुबना अंदाज़ में बोलै तोह सिमरन और भी खुल कर हसने लगी.

सिमरन-- तुम ऐसे hi मज़े करते रहो.. इस बार सच में तुम्हे वह मज़ा चखाऊँगी. तुम मेरे साथ लास्ट टाइम जो कर गुज़रे थे. उसे सोच सोच के अपने लुंड को थप्पड़ लगते फिरोगे.. उसी के कारण तुम्हारा खुद पर काबू नहीं रहता न.. देखना तुम्हरा और मैं तुम्हारा उसका क्या हाल करती हो

राज-- हाहाहा.. सिमरन मज़ा आता है तुमसे ऐसे बातें करके.. तुम सच में मुझे मेरी टक्कर की मिली हो

सिमरन- बच्चू अब बच के रहना.. मेरे पहले के वॉर काम खतरनाक थे. पर इस बार के वॉर मैं तुम्हारे दिल पर करुँगी. न रहेगा तुम्हारे पास दिल और न करोगे तुम मुझसे दिल वाली बातें..

राज हस्ता रहा सिमरन बढ़ चढ़ कर बोलने लगी.. कुछ देर और ऐसे hi दोनों में नोक झोक होती रही..

राज एक रोड किनारे बाइक पर बैठा हुआ सिरमन से फोन पर बात कर रहा था..

एक गाडी दूर से राज को लहराती हुई दिखाई दी.. जैसे ड्राइवर नशे में हो.. या फिर उसके साथ कुछ और मटर हुआ हो..

राज ने सिमरन से कुछ भी बात किये बिना कॉल कट कर दी और गाड़ी को देखने लगा.. इस साइड रोड पर ज़यादा ट्रैफिक नहीं थी..

राज बाइक से उतरा और गाड़ी को धयान से देखने लगा.. गाडी कुछ और लहराने के बाद साइड फुटपाथ पर चढ़ दौड़ी.. अब तक राज को ड्राइविंग सीट पर एक लड़की दिखाई दे गयी थी.

गाडी फुटपाथ पर चढ़ कर रुक गई थी.. लड़की का सर स्टेरिंग पर आया.. हॉर्न रेगुलर बजने लगा..

राज भाग कर गाडी के पास जा पोहंचा. दूर खोल कर लड़की को देखा. तो उसका पूरा चेहरा पसीने से भीगा हुआ था. जैसे उसके साथ कोई गड़बड़ हो..

राज ने फ़ौरन सीटबेल्ट खोल क्र लड़की को पीछे सीट पर लिटाया.. अपनी बाइक को वहीँ छोड़ कर लकड़ी की गाड़ी को खुद से ड्राइव करता हुआ स्पीड के साथ करीबी हॉस्पिटल की और बढ़ने लगा.
 
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कार के अंदर बहुत hi सुंदर लड़की थी. राज उसे देख कर उसकी सुंदरता की तारीफ किये बिना नहीं रह सका. पर उसकी हालत सही नहीं थी. राज ने ज़यादा धयान न देकर स्पीड से कार ड्राइव करनी जारी राखी. कुछ hi देर में वो एक करीबी हॉस्पिटल के पास था.

लड़की को कुछ होश आई. तो वो राज से बोली- प्ल्ज़ मुझे हॉस्पिटल मच ले जाइये. वहां पहले से मेरा रेगुलर ट्रीटमेंट चल रहा है. आज मैं अपनी मेडिसिन लेना भूल गई थी. इसलिए मेरी हेल्थ बिगड़ गई. प्ल्ज़ मुझे मेरे घर ड्राप कर दें.

राज ने लड़की को देखा. जिसके चेहरे पर सफेदी छै हुई थी.

राज-- देख लें. मुझे कोई मसला नहीं है

लड़की होंटो पर जीब फेर कर राज को देखते हुए रिक्वेस्ट भरे लहजे में बोली-- प्ल्ज़ मुझे जल्दी से घर पोहंचा दें

राज ने गाड़ी वापिस मोदी और लड़की से एड्रेस जान कर उसी दिशा में गाड़ी ड्राइव करने लगा.

25 मिनट में राज एक खबसूरत hi कोठी के सामने था. गाड़ी देख क्र वॉचमन ने गेट खोल दिए था. राज गाड़ी अंदर लेता चला गया. इस बीच लड़की शायद बेहोश हो चुकी थी.

जैसे hi राज ने सामने देखा. तो एक ब्यूटीफुल इस ठण्ड में भी ट्रांसपेरेंट साड़ी में गाड़ी को hi देख रही थी. राज को ड्राइविंग सीट पर देख कर उसके गोर मुखर पर चिंता की लकीरें आ गयी. राज ने गाड़ी रोकी और दूर खोल कर बहार आ गया.

फिर राज ने बच दूर खोला और लड़की को बहन में उठा कर गाड़ी से निकल लिया.

राज की बहन में लड़की को देख औरत चीख पड़ी. भाग कर राज के पास पोहंची और कनपटुई आवाज़ में बोली-- kkk..kya हुआ मेरी बची को

राज-- ji..wo.. ये.. शायद इनकी हेल्थ बिगड़ गई है. बीच दिरवे करती हुई स्टेरिंग पर सर गिरा गई थी. शायद इसे कोई बीमारी है..

औरत रोटी हुई-- प्ल्ज़ इसे अंदर ले चलें.. इस बीच एक मेल और दो फीमेल सर्वेंट भी वहीँ आ गए थे.

राज कुछ देर में लड़की को बहन में उठाये एक कमरे में था. राज ने लेडी के कहने पर लड़की को बीएड पर लिया दिया..

लेडी लड़की का एक हाथ थाम कर रोने लगी..

राज-- शायद उसे मेडिसिन की ज़रूरत है.. कह रही thi,iski मेडिसिन घर पर पड़ी है

औरत तुरंत उठी और बीएड दराज़ खोल कर उसके अंदर से मेडिसिन निकलने लगी..
 
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औरत के स्पर्श में आते hi लड़की कुछ कुछ बड़बड़ाने लगी थी. मीन्स वो पूरी तरह से बेहोश नहीं थी. राज उसे बड़े धयान से देख रहा था. फूलों सी नाज़ुक थी लड़की. दूध सी गोरी थी. किसी फ़िल्मी हीरोइन सा फिगर था उसका. लेटने से उसका कातिलाना फिगर राज के शरीर में आग सी भरने लगा था.

आग तो राज को औरत की सूरत में दिखाई पद रही थी. दूर से hi उसके शरीर से निकल रही आग की लपटें राज को जलाये जा रही थी. सर्दी के मौसम में बारीक के अंदर से झांकता हुआ गोरा चिंका पेट और ऊपर से उसके झुकने से आधे दिखाई दे रहे बूब्स राज के लुंड में सनसनी सी दौड़ा रहे थे. राज के लिए लड़की और औरत को देखने मज़े वाला हो गया था.

मेडिसिन उठा कर औरत ने लड़की का सर अपनी गॉड में रखा. आंसू बहते हुए लड़की से बोली---- मोह खोल मेरी बची.. ले ले दवा.. भगवन तुझे मेरी उम्र भी लगा दे.. कैसे फूल सा चेहरा मुरझा कर रह गया है. कितना कहा मैंने ज़यादा घर से बहार न रहा कर..

लड़की की आँखों में भी औरत के लिए मोहब्बत फूटी पद रही थी. लड़की ने मोह खोला अरुआत ने उसके मोह में एक टेबलेट दी और साइड टेबल पर रखा पानी का गिलास उठा कर उसे पानी पिलाने लगी.

औरत लड़की के सर के बहाल सहलाने लगी. कुछ देर में लड़की सो गयी तो औरत लड़की का सर तकिये पर दाल कर कड़ी हो गई.

राज का अब यहाँ कोई काम नहीं था. उसे चले जाना चाहिए था. पर वो नहीं गया था. साला हरामी कुत्ता... इतनी छूट होते हुए भी औरत के लिए मचल उठा था.

औरत उसके पास aai..sorry आपकी सेवा नहीं कर सकीय. आओ मेरे साथ

राज उसके बूब्स को देखता हुआ-- हाँ सर्दी बहुत है. इतनी सर्दी में गरमा गर्म दूध मिल जाये तो क्या hi बात है

औरत ने राज की आँखों में ाशकहरया से देखा. राज हरामी स्माइल पास करने लगा. औरत ने नज़रें चुरा कर राज को जवाब नहीं दिए.. दोनों चलते हुए ड्राइंग रूप में पोहंचे. औरत का नाम पद्मा था

पद्मा-- बैठिये. मैं कॉफ़ी बना कर लाती हों

राज- किसी नौकर से कह दें. आप मेरे साथ बैठें..... राज फिर इधर उधर देखता हुआ

.. लगता है इस घर में कोई मर्द नहीं है

पद्मा-- आप कैसे कह सकते हाँ

राज उसके शरीर को ताड़ते हुए-- आपके शरीर से निकल रही लपटें मुझे यहीं से महसूस हो रही है. आप बहुत समय से प्यासी हाँ. या फिर बहुत समय से कोई तगड़ा मर्द नहीं मिला आपको.

पद्मा राज की बात सुनकर घुसे में आती हुई उठ कड़ी हुई. राज भी खड़ा हुआ और पुरे हरामीपन से स्माइल देने लगा

पद्मा-- क्या बकवास कर रहे हाँ तुम. हेल्प क्या करदी हमारी. घटियापन पर उतर आये तुम तो

राज चलता हुआ उसके पास pohncha.aur एकदम से उसकी कमर में हाथ दाल कर उसे अपने सीने से लगा लिया.

राज उसके गालो पर होंठ रगड़ता हुआ बोलै-- साली तू भी बड़ी कुट्टी चीज़ है. भाव भढने के लिए इतना बोल रही है. तुझ जैसी औरतो की मैं राग राग जानता हों. जितनी पियासी तू है. उतनी hi बड़ी तू चुड़क्कड़ भी है. अपने शरीर की गर्मी दिखा कर मेरे लुंड के करंट दौड़ा कर तू मुझसे अब बच नहीं सकती.

पद्मा राज को हैरत से देखने लगी. कितनी सही बात बोली थी राज ने.. पर पद्मा भी चालू माल थी. राज की जकड से निकलने के लिए ज़ोर लगाने लगी.

पद्मा-- छोड़ मुझे. वर्ण मई शोर मचा दूंगी.

राज-- हाहाहा.. शोर मचेगी.. वो भी तुम.. शोर मचाओगी तो पियासी hi मर जाओगी. तहदा लुंड नहीं लेना चाहोगी. राज उसकी होंटो पर ऊँगली फेरता हुआ बोलै. लुंड का अकड़ा लैंड पद्मा की छूट पर चुभने लगा था. पद्मा की छूट की झुजलि और आग बढ़ने लगी थी. राज ने जो भी कहा था वो सच था. पद्मा बड़ी हैरान थी. उसके hi घर में कोई उसके साथ इतना ज़यादा कर रहा था.

राज ने एक हाथ उसके बूब्स पर रखा और दबाने लगा. अपने होंटो उसके होंटो से मिला कर सर्दी भागने लगा. पद्मा झूट मूट का ज़ोर लगा कर खुद को छुड़ाने लगी. वर्ण राज की दीदा दलेरी पर वो फ़िदा हो गई थी. राज जैसा एक भी उसे नहीं मिला था.

राज वहीँ ड्राइंग रूम में खड़े खड़े उसे वाइल्ड किश करने लगा.. उसके बूब्स दबाने लगा. पहले तो पद्मा खुद को राज से छुड़ाती रही. पर छूट में बढ़ी आग ने उसे ढीला कर दिए. वो भी किश में राज का साथ देने लगी. कुछ देर तक राज उसके होंटो को चुस्त रहा.. फिर छोड़ दिए

राज-- साली तू बड़ी गर्म और रसीली है. बड़ी आग है तुझमे. आज तेरी साडी आग बुझा कर hi जाऊँगा.

पद्मा लम्बी साँसे लेती हुई राज को देखने लगी. राज ने किचन की और देखा. पास hi दूर था. राज ने पद्मा का हाथ पदक-- चल मुझे कॉफी बना कर पीला..

राज पद्मा का हाथ पकड़ कर उसे किचन में ले गया. पद्मा खुद बेचैन हो उठी. पर वो एक औरत थी. खाई खेली थी. न नकुर कर रही थी. पर दिल से वो अब राज के साथ सेक्स करने को बेताब थी. किचन में पोहंचे तो राज ने कप और दूसरा सामान उठा कर पद्मा के सामने किया... पद्मा को घुअमाया-- चल कॉफ़ी बना..

पद्मा नशे में होने लगी थी. राज की छेड़ छड़ और किश ने, बूब्स प्रेसिंग ने उसे बेहाल कर दिए था. वो कॉफ़ी बनाने लगी. राज का हाथ निचे हुआ और पद्मा की साड़ी और पेटीकोट को ऊपर करता चला गया. पद्मा सिहार उठी. उसके हाथ कांपने लगे.

बिजली की एक लहार उसके पुरे शरीर में दौड़ गई थी. अपनी मर्ज़ी से वो हमेशा hi चुदती आई थी. आज पहली बार एक स्ट्रेंजर के साथ सेक्स कर रही थी. वो भी अपने hi घर में, इतनी जल्दी जल्दी में. राज को जाने बिना वो पागल होने लगी.

राज निचे बैठा और पद्मा की पंतय निचे सरका कर, पद्मा की गांड नंगी करके अपनी जीब उसकी गांड पर लगा दी. बड़ी कामुक गंध आ रही थी पद्मा की गांड से. राज का लुंड फटने वाला हो गया. पर राज लुंड पर धयान हटा कर पद्मा की गांड चरना लगा. ऊपर से निचे, निचे से ऊपर तक पद्मा की गांड को चाटने लगा..

पद्मा कॉफ़ी के कप में चमच हिलाते हुए-- उम्मम्मम आह्ह्हह्ह्ह्ह ufffffffffff क्याआ नाम है तुम्हारा

राज मोह हटा कर अपने होंटो पर फेरते हुए-- जो मैं कहे पुकार लो

पद्मा--- आह्ह्ह्ह ऐसा तो एक पति hi प्यार देता है अपनी पत्नी को. एक प्रेमी देता एक प्रेमिका को.

राज-- तो फिर तुम मुझे क्या कहोगी

पद्मा सिसकते हुए-- प्रेमी

राज स्माइल करता हुआ उसके चुत्तड़ खोल कर गांड चाटने लगा..

पद्मा की छूट पानी छोड़ कर टपकने लगी थी. राज वो चाटने लगा. पद्मा के लिए खड़े रहना मुश्कल होने लगा. वो कंपनी लगी. शरीर के रुएँ खड़े हो चुके थे. चुके पहले hi राज ने दबा कर पहला दिए थे. वैसे भी पद्मा पियासी थी. बहुत गर्म माल थी. हमेशा उसके चुके अकड़े hi रहते थे. अब और भी अकड़ने लगे.

कुछ देर और चाटने के बाद राज खड़ा हुआ. किचन का दूर बंद कर दिए था राज ने पहले hi.. कोई मदाखलत न करें..

राज ने अपनी पंत लूसे करके अंडरवियर समेत निचे खिसकाई. पद्मा सामने कॉफ़ी के कप को थामे कड़ी थी.. राज ने अपना लुंड उसकी गांड के छेड़ पर सेट किया तो पद्मा बुरी तरह से काँप उठी

पद्मा ने राज के लुंड का अनुभव करते hi मुद कर निचे देखा.. तो उसकी ऑंखें खुली की खुली रह गई. चमक भी बढ़ गई../

पद्मा-- ओह्ह्ह बड़ा स्ट्रांग घोडा है तुम्हारा

राज-- अपने लुंड को उसकी गांड पर रगड़ता हुआ... तू भी काम नहीं है साली.. तेरी गांड मुझे पसंद आई. छूट का तो पता नहीं.. पर तेरी गांड सच में कमल की है.. मज़ा आया चाट कर तेरी गांड

पद्मा का चेहरा घुमा हुआ था. राज ने पद्मा के होंटो पर किश कर दी

पद्मा-- तू फिर अब तुम भी इसी ख़ुशी में मुझे वो मज़ा दो. जो तुम्हारे हिसाब से मुझे आज तक नहीं मिला.. सच कहा था तुमने.. मुझे सच में कोई तगड़ा मर्द आज तक नहीं मिला मैं बहुत पियासी हों. बड़ी आग है मेरे अंदर.. बुझा दो मेरी पियास.. ठंडी कार्डो मेरी आग..

राज पद्मा को किश करता हुआ उसके चुत्तड़ को खोल कर अपने लुंड को उसकी गांड के छेड़ में फंसता हुआ धक्का मार गया..

पद्मा तड़पती हुई आगे को झुक गई. राज का बड़ा लुंड उसकी टाइट गांड में फसा तो दर्द से बिलबिला उठी थी. राज है पड़ा.. दोनों हथु से पद्मा की कमर पकड़ कर धक्के मारता हुआ अपने लुंड को उसकी गांड में और भी अंदर घसने लगा..

पद्मा कराहती हुई-- धीरे धीरे प्रेमी.. गांड ज़यादा नहीं खुली हुई मेरी. छूट खुली हुई है. वहां घुसा कर जैसे मर्ज़ी छोड़ लेना.. आह्ह्ह्ह आआआआईईईई बड़ा दर्द हो रहा है

राज-- साली तू जयंती रसभरी है. धीरे से मज़ा नहीं आएगा

पद्मा- आअह्ह्ह्ह प्रेमी.. दर्द में hi मज़ा है. पर मैं मेरी बेटी के आगे लंगड़ा कर नहीं चलना चाहती. उसे कोई शक न हो जाए

राज- हाल तो तेरी छूट का भी ऐसा hi करूँगा.. राज सरे लुंड को पद्मा की गांड में उतारते हुए बोलै..

पद्मा और भी तड़पने लगी. जितने मज़े में थी. उतने hi दर्द में भी आ गयी..

पद्मा-- छूट की परवा नहीं है मुझे. उसकी कई बार बुरी हालत हो चुकी है. गांड की चिंता ज़यादा है मुझे.. आह्हः माआआआआ सच में तू असली मर्द है.. मुझ जैसी चुड़ककर को भी माँ याद दिला दी..

राज कुछ देर रुकने के बाद स्पीड से पद्मा की गांड मारने लगा.. चल अब कॉफ़ी बना. पीते हुए छोडूंगा..

पद्मा हप्ते हुए- एक बहार पानी निकल दे.. फिर बना पाउंगी कॉफ़ी.. अभी मुश्किल होही बनानी

राज पद्मा के चत्तड़ मसलता हुआ-- चल जैसे तू खुश.. वैसे मई खुश.. कच देर में स्पीड से गांड बजती रही. किचन में आवाज़ें आती रहे.. फिर पद्मा आगे झुक कर कनपटी हुई झड़ने लगी.

राज ने लुंड निकाल कर पद्मा को बेंड कर दिए.. फिर अपने लंड को पद्मा की छूट पर सेट करता हुआ उसकी छूट में उतारने लगा. छूट पानी से लबा लैब चुकी थी. लुंड बिना किसी परेशानी के अंदर घुसता चला गया. पद्मा को झड़ने के बाद भी असली मर्द के लुंड का अनुभव हुआ तो वो और भी झूम उठी.. रिलैक्स होने के बाद पुरे मैं से राज के लिए कॉफ़ी बनाने लगी

राज-- तुम्हरा नाम क्या है

पद्मा-- पद्मा

राज-- और तुम्हरी बेटी का

पद्मा-- प्रीति

राज-- है तो वो भी मस्त माल

पद्मा-- मेरी बेटी पर धयान मत देना. वो पहले hi बीमार है

राज- प्यार करूँगा तो ठीक हो जाएगी. क्या उसका कोई बॉफ्रैंड है

पद्मा- वो ऐसी नहीं है. उसकी बीमारी ने वैसे hi उसे अधमरा कर रखा. बॉयफ्रेंड का कभी नहीं सोचा उसने.

राज-- अब सोचेगी.

पद्मा थोड़े से घुसे में-- नहीं .. मेरी बेटी के पास भी मत जाना.

राज-- क्यों उसे लाइफ के मज़े नहीं चाहिए क्या

पद्मा-- वो खुद से तलश लेगी. तुझे ज़रूरत नहीं है. मैं हों, तेरा मैं करता है तू मेरे साथ जब भी करना चाहे कर सकता है. मैं रंडी हों, पर मेरी बेटी नहीं.

राज-- वो बड़ी सेक्सी है

पद्मा धीरे से है पड़ी-- मुझपर गई है

राज-- हाँ तुझपर गई है. तुझमे इतना मज़ा है तू वो तो फिर भी कुंवारी होगी. उनतोच होगी, सोचो कितना मज़ा देगी.

पद्मा-- अहह तू मुझे स्पीड से छोड़. वो जिस का नसीब है. उसे hi मिलेगी. पता नहीं किसी का नसीब है भी या नहीं..

पद्मा दुखी होते हुए बोली..

राज-- ठीक हो जाएगी. भगवन ने चाहा तो ठीक हो जाएगी

पद्मा-- हाँ.. दिल से तो हर समय ये प्रे निकलती है.. भगवन उसे जल्दी से ाचा कर दे.. वो अपने घर की हो जाये..

कॉफ़ी बन चुकी थी. पद्मा राज का लुंड छूट में लिए मस्त चुड़ते हुए राज को कॉफ़ी पकड़ने लगी. राज कॉफ़ी पकड़ कर सिप लेता हुआ धक्के मारने लगा

राज-- पहली बार कॉफी विथ चुदाई का मज़ा ले रहा हों.. तेरी गांड और छूट के साथ साथ कॉफ़ी भी खूब टेस्टी है

पद्मा-- आठ प्रेमी ये तो तुम्हारा बड़ापन है.. वर्ण असली कमल तो तुम्हारे घोड़े का है. सच में ऐसा तगड़ा घोडा पहले कभी नहीं लिया मैंने.

राज और पद्मा की चुदाई किचन में hi चलती रही... राज ने छोड़ छोड़ कर पद्मा की छूट पानी पानी बना दी.. राज जब झड़ने लगा तो अपना लुंड छूट से निकल कर पद्मा की गांड में घुसा कर माल निकलने लगा..

कुछ देर बाद राज वहां से निकल रहा था.. पद्मा की छूट की झुजलि मिट चुकी थी. उसकी छूट की आग सार्ड पद चुकी थी.

padma--fir कब आओगे

राज-- जल्द.. अभी कुछ बिजी हों. टाइम मिलते hi चक्कर लगाऊंगा.. राज पद्मा के होंठ अचे से चूसने एक बाद वहां से निकल पड़ा.

एक टैक्सी करि और बाइक के पास जा पोहंचा. वहां से सुनैना के घर की ऑर्डर जाने लगा.
 
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दादी-- आ गई हमारी याद तुझे

राज ने दादी की छूट में ऊँगली कर दी... आपकी तो नहीं पर आपकी छूट की याद मुझे यहाँ ले आई.

सुनैना हसने लगी

दादी-- चलो ाचा है न, कैसे भी तो घर लो लौटा

राज-- चल न फिर कमरे दे. और दे मुझे अपनी छूट

दादी राज के करीब होक ज़ोर की सांस लेते हुए-- लगता है, तू अभी अभी किसी को छोड़ आया है.

राज-- वाह दादी, आप तो कमल की है.. सूंघ कर hi जान लिया. फिर सुनैना से.. सुनैना जी दादी रंडी तो बड़ी तेज़ हो गई है.

सुनैना मुस्कुराती हुई- ये सब आपके प्रेम का परिणाम है स्वामी जी. दादी जो पहले उठ नहीं सकती थी. अब भागने लगी हाँ

दादी-- हेहेहे और सूंघने भी लगी हों

संजना भी आ गई-- क्या बाटने हो रही han..ohh.. राज के हाथ को दादी की छूट पर देख कर संजना मोह पर हाथ रख गई

सुनैना धीरे से है पड़ी..

दादी-- आखरी उम्र में अब ये दिन भी देखने थे मुझे. मेरी पोती के सामने hi कोई मेरी छूट में ऊँगली कर रहा है

अखिल भी वहीँ आ गया.. और दादी के चुके को मसलने लगा.

अखिल-- दादी आप हो hi इतनी हॉट. कोई भी आपको देख कर खुद पर काबू भूल जाये

दादी-- अभी शैफाली यही है. वो साथ नहीं मिली है हमारे. वो देखेगी तो क्या सोचेगी

राज-- अरे दादी ये आप कह रही हाँ.

दादी-- हाँ मैं hi कह रही हों. पहले उसे सेट करो. उसे साथ मिलाओ. वो सबसे अलग है. कहीं मंद न कर जाये

राज दादी को सीने से लगा कर किश करता हुआ बोलै-- दादी मेरे कारन घर का माहौल रंडी खाने जैसा बन गया है न. आप के साथ के सामने कितना गलत होने लगा है

दादी प्यार से- बकवास न कर राज. ये हवस नहीं प्यार है. अखिल को देख, तेरे कारन कैसा बदल गया है. सच में इस घर में तेरे आएं से पहले सब सभी खुशियों को तरसा करते थे.

राज दादी के होंठ चूसने लगा. सुनैना, संजना और अखिल साइड खड़े हो गए.

अखिल- सही कहा दादी आपने. अभी hi तो जाना है मैंने परिवार के सच्चे प्यार को. पहले ऐसा कुछ भी मेरी ज़िन्दगी में नहीं था.

रुपाली-- अरे मेरे बिना hi सब मज़े में लगे हुए हाँ. रुपाली भी आती हुई दिखी.

राज ने उसे देखा तो एक हाथ से उसे अपने साथ जुड़ने को कहा. रुपाली सबके सामने राज से मिली तो राज ने उसके होंटो पर होंठ रख दिए.. कैसी है तू मेरी जान

रुपाली-- एकदम बढ़िया. मौसी कैसी हाँ, सब कैसे हाँ.

राज- एकदम तना तन. वहां भी यहाँ के जैसा hi माहौल बनने लगा है. बस एक दिन और फिर वहां भी सब यहाँ के जैसा हो जायेगा.

सुनैना- शुक्र है भगवन का. मेरी बहन को भी कुछ खुशियां मिली.

राज-- अरे सुनैना जी. अर्चना जी बोहत खुश हाँ

संजना-- लगता है मौसी के साथ भी सब कर लिया है. तभी मौसी को नाम से बुला रहे हो

दादी हस्ती- राज की बात hi क्या है. राज जहाँ भी जाता है, वहां का सब और सरे बदल जाते हाँ.

अगले दिन राज बाजार में ममी के पीछे गया तो उसे पद्मा दिखी ममी के साथ. देख कर राज को हैरानगी हुई. राज पर सुधा की नज़र पड़ी तो देख कर खुश हुई पर भाव ज़यादा नहीं दिए सुधा ने. पद्मा जो साथ में थी.

राज ममी से मिला... तो पद्मा उसे देख कर हैरान रह गयी. पर वो नार्मल भी रही.

राज-- ये कोण है. बड़ी सुंदर हाँ ये भी आपकी तरह.

ममी-- क्यों तुम क्यों पूछ रहे हो

राज-- वो इसलिए, मैं भी सोचो आप इतनी हॉट कैसे हाँ. आग साथ लिए फिरती हाँ आप.

पद्मा हसी तो ममी अपने भी अपनी मुस्कराहट छुपा न सकीय.

ममी... तुम क्यों मेरे पीछे पीछे फिरने लगे हो. कोई और काम नहीं है क्या तुझे

राज-- ये भी तो एक काम hi है.

ममी.. क्या मतलब है तुम्हारा.

राज-- सुना है, सुंदरियों को देखने से ऑंखें ठीक रहती हाँ. जल्दी ख़राब नहीं होती.

पद्मा खिलखिला कर है पड़ी. राज की ऐसी बातें कल उसे सुनने को नहीं मिली थी. अब सुनी तो है है कर कमली होने लगी. ममी को भी राज की ऐसी hi बातों पर मज़ा आता था. पर वो खुद को संभालना भी जानती थी. पद्मा की सहेली थी. पर पद्मा जैसी नहीं थी.

ममी-- अब तुम जाओ. मेरा बीटा आने वाला है कुछ देर में.

राज-- तो क्या हो जायेगा

ममी-- जाओ न बाबा. वो आया तो क्या सोचेगा मेरे बारे में. घर से बहार मैं किसी मर्द से नहीं मिलती.

पद्मा इस बार अपनी हसी दबा गई

राज खुल कर स्माइल करने लगा-- ओह्ह्ह मर्द.. थैंक आपने मेरी तारीफ की

ममी भी राज को लड़का न बोल कर मर्द बोल गई थी. अब कड़ी झेंपने लगी. ममी का चेहरा श्रम से कुछ लाल पद गया था.

राज पद्मा को इशारा करके वहां से निकल गया. पद्मा भी राज का इशारा समझ कर मुस्कुराती हुई राज को हाँ का इशारा कर गई थी.
 
सिमरन दिनेश की हुई की राज की रही. सब कहानी में पता चलेगा

ष्प के कई बड़े बड़े जाने मने वरिटेरस और रीडर्स लाइफ में बिजी हुए और ष्प से दूर हो गए. ऐसे hi मेरी लाइफ भी बिजी चल रही है. समय न मिल पाने के कारन स्टोरी आगे नहीं बढ़ा प् रहा हों...

क्या मई स्ट्रोय की स्पीड बढ़ा कर, कई तरह के सेक्स सीन्स को स्किप करके स्टोरी का थे एन्ड कर दूँ.. मेरे हिसाब से एहि सही रहेगा. ऐसे कहानी पर इन्कम्प्लीट का ठप्पा भी नहीं लगेगा

क्या कहते हो आप रीडर्स लोग
 
133---- प्रीवियस अपडेट

************************


दादी-- आ गई हमारी याद तुझे

राज ने दादी की छूट में ऊँगली कर दी... आपकी तो नहीं पर आपकी छूट की याद मुझे यहाँ ले आई.

सुनैना हसने लगी

दादी-- चलो ाचा है न, कैसे भी तो घर तो लौटा

राज-- चल न फिर कमरे में. और दे मुझे अपनी छूट

दादी राज के करीब होक ज़ोर की सांस लेते हुए-- लगता है, तू अभी अभी किसी को छोड़ आया है.

राज-- वाह दादी, आप तो कमल की है.. सूंघ कर hi जान लिया. फिर सुनैना से.. सुनैना जी दादी रंडी तो बड़ी तेज़ हो गई है.

सुनैना मुस्कुराती हुई- ये सब आपके प्रेम का परिणाम है स्वामी जी. दादी जो पहले उठ नहीं सकती थी. अब भागने दौड़ने लगी हाँ.

दादी-- हेहेहे और सूंघने भी लगी हों

संजना भी आ गई-- क्या बाटने हो रही han..ohh.. राज के हाथ को दादी की छूट पर देख कर संजना मोह पर हाथ रख गई

सुनैना धीरे से है पड़ी..

दादी-- आखरी उम्र में अब ये दिन भी देखने थे मुझे. मेरी पोती के सामने hi कोई मेरी छूट में ऊँगली कर रहा है

अखिल भी वहीँ आ गया.. और दादी के चुके को मसलने लगा.

अखिल-- दादी आप हो hi इतनी हॉट. कोई भी आपको देख कर खुद पर काबू भूल जाये

दादी-- अभी शैफाली यही है. वो साथ नहीं मिली है हमारे. वो देखेगी तो क्या सोचेगी

राज-- अरे दादी ये आप कह रही हाँ.

दादी-- हाँ मैं hi कह रही हों. पहले उसे सेट करो. उसे साथ मिलाओ. वो सबसे अलग है. कहीं मंद न कर जाये

राज दादी को सीने से लगा कर किश करता हुआ बोलै-- दादी मेरे कारन घर का माहौल रंडी खाने जैसा बन गया है न. आप के साथ के सामने कितना गलत होने लगा है

दादी प्यार से- बकवास न कर राज. ये हवस नहीं प्यार है. अखिल को देख, तेरे कारन कैसा बदल गया है. सच में इस घर में तेरे आएं से पहले सब सभी खुशियों को तरसा करते थे.

राज दादी के होंठ चूसने लगा. सुनैना, संजना और अखिल साइड खड़े हो गए.

अखिल- सही कहा दादी आपने. अभी hi तो जाना है मैंने परिवार के सच्चे प्यार को. पहले ऐसा कुछ भी मेरी ज़िन्दगी में नहीं था.

रुपाली-- अरे मेरे बिना hi सब मज़े में लगे हुए हाँ. रुपाली भी आती हुई दिखी.

राज ने उसे देखा तो एक हाथ से उसे अपने साथ जुड़ने को कहा. रुपाली सबके सामने राज से मिली तो राज ने उसके होंटो पर होंठ रख दिए.. कैसी है तू मेरी जान

रुपाली-- एकदम बढ़िया. मौसी कैसी हाँ, सब कैसे हाँ.

राज- एकदम तना तन. वहां भी यहाँ के जैसा hi माहौल बनने लगा है. बस एक दिन और फिर वहां भी सब यहाँ के जैसा हो जायेगा.

सुनैना- शुक्र है भगवन का. मेरी बहन को भी कुछ खुशियां मिली.

राज-- अरे सुनैना जी. अर्चना जी बहुत खुश हाँ

संजना-- लगता है मौसी के साथ भी सब कर लिया है. तभी मौसी को नाम से बुला रहे हो

दादी हस्ती- राज की बात hi क्या है. राज जहाँ भी जाता है, वहां का सब और सरे बदल जाते हाँ.

अगले दिन राज बाजार में ममी के पीछे गया तो उसे पद्मा दिखी ममी के साथ. देख कर राज को हैरानगी हुई. राज पर सुधा की नज़र पड़ी तो देख कर खुश हुई पर भाव ज़यादा नहीं दिए सुधा ने. पद्मा जो साथ में थी.

राज ममी से मिला... तो पद्मा उसे देख कर हैरान रह गयी. पर वो नार्मल hi रही.

राज-- ये कोण है. बड़ी सुंदर हाँ ये भी आपकी तरह.

ममी-- क्यों तुम क्यों पूछ रहे हो

राज-- वो इसलिए, मैं भी सोचो आप इतनी हॉट कैसे हाँ. आग साथ लिए फिरती हाँ आप. यही कारन है आपके हॉट होने का.

पद्मा हसी तो ममी भी अपनी मुस्कराहट छुपा न सकीय.

ममी... तुम क्यों मेरे पीछे पीछे फिरने लगे हो. कोई और काम नहीं है क्या तुझे

राज-- ये भी तो एक काम hi है.

ममी.. क्या मतलब है तुम्हारा.

राज-- सुना है, सुंदरियों को देखने से ऑंखें ठीक रहती हाँ. जल्दी ख़राब भी नहीं होती.

पद्मा खिलखिला कर है पड़ी. राज की ऐसी बातें कल उसे सुनने को नहीं मिली थी. अब सुनी तो है है कर कमली होने लगी. ममी को भी राज की ऐसी hi बातों पर मज़ा आता था. पर वो खुद को संभालना भी जानती थी. पद्मा की सहेली थी. पर पद्मा जैसी नहीं थी.

ममी-- अब तुम जाओ. मेरा बीटा आने वाला है कुछ देर में.

राज-- तो क्या हो जायेगा

ममी-- जाओ न बाबा. वो आया तो क्या सोचेगा मेरे बारे में. घर से बहार मैं किसी मर्द से नहीं मिलती.

पद्मा इस बार अपनी हसी दबा गई

राज खुल कर स्माइल करने लगा-- ओह्ह्ह मर्द.. थैंक्स आपने मेरी तारीफ की. मुझे मर्द कहा

ममी राज को लड़का न बोल कर मर्द बोल गई थी. अपनी कही बात याद आई तो झेंपने लगी. ममी का चेहरे शर्म की सुर्खी उमड़ आई.

राज पद्मा को इशारा करके वहां से निकल गया. पद्मा भी राज का इशारा समझ कर मुस्कुराती हुई राज को हाँ का इशारा कर गई थी.
 


134 नई अपडेट

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पद्मा अपने घर चली गई. सुधा का बीटा आया और उसे अपने साथ ले गया. पद्मा अभी घर hi पोहंची थी. राज की कॉल आ गई

राज--- कैसी हो रंडी

पद्मा--- रंडी. राज मई रंडी नहीं हों

राज--- तो फिर क्या हो तुम मेरी

पद्मा--- प्रेमिका बोल सकते हो. माशूक़ा बोल सकते हो

राज--- प्रेमिका और माशूका अपने प्रेमी अपने आशिक़ के लिए कुछ भी कर जाती हाँ

पद्मा--- तुम्हारी ये प्रेमिका भी तुम्हारे लिए कुछ भी कर जाएगी.. तो कब लॉन मई मेरी सहेली को अपने प्रेमी के नीचे

राज--- अरे वाह्ह्ह. मेरी जान तो सब समझती है

पद्मा--- शुक्रिया.. धन्यवाद.. थैंक्स.. एक औरत की नज़रें बड़ी तेज़ होती हाँ राज..

राज- जैसा की

पद्मा---- ऐसा की. उसकी नज़रों से कुछ भी छुप नहीं सकता. तुम्हारी आँखों की चमक जो सुधा को देख बढ़ी थी. मई सब समझ गई थी. और जिस तरह से वो तुमसे और तुम उससे बात कर रहे थे. मेरे लिए कुछ भी समझ पाना मुश्किल नहीं रहा था.

राज--- वहहह एक hi बार की चुदाई ने तो तुम्हे जीनियस बना दिए

पद्मा है पड़ी--- हेहेहे. मई शुरू से hi जीनियस थी.. बास छूट की आग ने मुझे बचें रखा है हमेशा.. वर्ण मई ऐसी नहीं थी. जैसी मई बन गई थी.. खैर छोडो इस सभी बातों को. बताओ मई तुम्हारे लिए क्या करूँ

राज---- वही जो एक प्रेमिका को करना चाहिए

पद्मा---- ठीक है.. मई तैयार हों. पर राज सुधा मेरी बड़ी अच्छी दोस्त है. कहीं मेरी उससे बिगड़ न जाये

राज- अरे नहीं बिगड़ने दूंगा मैं तुम्हारी उसके साथ. मई तो तुम दोनों की दोस्ती को और भी गहरा कर दूंगा

पद्मा---- ऐसा है तो, मई जल्द से जल्द उसे तुम्हारे लिए तैयार करुँगी.

राज---- तुम कुछ मत करो. सब मई कर लूंगा. तुम बास ये करो. अपनी बेटी को कल किसी दोस्त के घर भेज देना. अपनी दोस्त को बुलवा लेना. बाकि का सारा काम मई खुद देख लूंगा

पद्मा---- ठीक है. ये मई कर लुंगी

राज---- अब बताओ तुम्हारी छूट के क्या हाल हाँ

पद्मा--- तुम बिन बुरी तरह रो रही है. उसे आदत सी पढ़ गई है तुम्हारी. तुम्हारे प्यार के लिए तरस रही है

राज--- मेरे प्यार के लिए या मेरे लुंड के लिए

पद्मा---- वही तो है तुम्हारा असली प्यार

राज--- उसका कोई नाम भी होगा

पद्मा--- हाहाहा.. है न. उसका नाम भी है

राज--- क्या नाम है

पद्मा--- जैसे मेरी छूट है.. वैसे hi तुम्हारा लुंड है

राज--- वाह्ह तुम तो खुल कर बात करना जानती हो जाने मैं

पद्मा--- पहली hi बार तुझसे चुद गई. खुल कर चुदाई करवा ली. अब क्या बचा है. पति और प्रेमी से खुल कर hi बात करते हाँ

राज---- फिर तो तुम्हारी गांड भी मेरे लिए आंसू बहा रहे होगी

पद्मा फिरसे है पड़ी---- हाँ.. मोठे मोठे आंसू बहा रही है मेरी गांड. आ जाओ, मेरे और मेरी दोनों के आंसू पंच जाओ.

राज--- आऊँगा ना.. कल आता है.. तेरे साथ साथ तेरी सहेले के भी आंसू साफ़ करूँगा

पद्मा--- हाँ जैसा तुम्हारा हथियार है. सुधा के तो ढेर सरे आंसू निकल आएंगे

राज--- चल ठीक है. कल मिलता हों तुझसे..

राज ने कॉल एन्ड कर दी.. फिर सोचने लगा. अब कहाँ कॉल करे. फिर उसे अपनी और बहनो का ख्याल आया.

राज ने अपनी दीपिका को कॉल मिला दी
 
135

***

दीपिका-- बोल साले हरामी कुत्ते. कॉल क्यों की है तुमने

राज फोन फेस के सामने करते हुए हैरानी से देखने लगा.. फिर उसके होंटो पर मुस्कान आ गई

राज---- हाहाहा.. वहहह मेरी रानी. मुझसे चुद कर भी तू मुझे गलियां देना नहीं भूली

दीपिका--- साले कुत्ते तुझे तो अब मई फोन पर गलियां दे रही हों. कमीने कुत्ते तू जब से मुझे छोड़ कर गया है. तब से हर समय मई पेट भर भर तुझे गलियां दे रही हों

राज---- ऐसा क्यों

दीपिका-- साले कुत्ते तू तो जैसे कुछ जानता hi नहीं है.. पहले सालों तक हमें परेशां किये रखा.. न दिन को चैन लेने दिए. न रात को सुकून से कभी सोने दिए.. फिर ऐसा समय को बदला तुएँ. मुझे hi नहीं सबको छोड़ दिए.. साले कुत्ते, हमें चुदाई की लत लगा कर तू हम सब से दूर हो गया है. रोज़ तेरी वजा से छूट में ऊँगली करनी पड़ती है. इतनी साडी छूट तू खोल कर गया था. कैसे एक hi बार में चुद कर सबको चैन मिल जाता. हर छूट की झुजलि बढ़ा कर चला गया है तू.. कसी और का लुंड कोई अब ले नहीं सकती. तू रोज़ रोज़ ा कर हर किसी की छूट में घुस नहीं सकता. छूट की खुजली मिटने के लिए सब हर दो चार घंटे बाद किसी ने किसी के सामने नंगी हुई रहती है. जिसे देखो, टांगें उठा कर बोलती है. राज नजाने कब आये. प्ल्ज़ मेरी छूट चाट कर मेर खुजली को hi काम कर दो..

राज---- हहहह. सबकी छूट की खुजली समझ में आती है. तेरी तो गांड पहाड़ी थी मैंने.. तेरी छूट में खुजली का क्या मतलब. मई समझ नहीं पाया

(डिअर रीडर्स! ी थिंक की स्टोरी में राज ने दीपिका की गांड मारी थी. छूट नहीं खोली थी. अगर मई गलत हों तो मुझे बता दीजियेगा)

दीपिका--- कुत्ते छूट गांड से अलग थोड़ी न होती है. असल चीज़ तो वही है.

राज-- हाहाहा.. गांड का छूट से कैसा सम्बन्ध

दीपिका--- हाथ कहीं भी लगे तेरा तो खुजली छूट में hi बढ़ेगी न हरामी साले कुत्ते.. गांड छुड़ेगी तो मज़े छूट को भी मिलेगा. गांड मरवा कर छूट से पानी निकल आता है..

राज---- हाहाहा.. तो मेरी रानी की छूट उसे बहुत परेशां कर रही है

दीपिका--- क्या नहीं करना चाहिए उसे मुझे परेशां

राज---- आ जाता हों. और छोड़ देता हों मई तुझे

दीपिका--- तू रहने दे.. वही रह.. जिस काम में लगा है. उसे जल्द से जल्द पूरा कर. और लौट आ हमेशा के लिए.

राज---- माँ कैसी है

दीपिका हैरान होक बोली--- माआ??? कोण माँ.. किसकी माँ.. तुम्हारी माँ तो अब रही नहीं

राज बोखला गया

राज---- क्या मतलब. माँ नहीं रही.. ये क्या कह रही हो तुम यार..

दीपिका ज़ोर से हसने लगी-- तू सच में छूट में घुस कर बाकि सब भूल जाता है हरामी साले... माँ से शादी करके उसे पत्नी बना बैठा है तू.. माँ पत्नी बन गई. अब पूछता है माँ कहाँ है..

राज की साँस में सांस आई--- मेरी तो जान hi निकल के रख दी तुमने तो यार

दीपिका-- दिमाग से भी कभी सोच लिए कर

राज---- जब से तेरी गांड मारी है न मैंने. तब से तू बड़ी तेज़ हो गई है. बात ऐसे करती है. अगले को चक्कर दे देती है.

दीपिका हसने लगी-- थैंक्स फॉर थे कॉम्पलिमेंट

राज--- माँ कहाँ है

दीपिका-- होगी चची के कमरे में

राज--- क्यों

दीपिका-- दोनों नंगी हुई एक दूसरे की छूट चाट रही होंगी

राज हसने लगा-- बाकि सब क्या कर रही हाँ

दीपिका--- पता नहीं. मई अपने कमरे में हों.. बाकि सब अपने अपने कमरे में होंगी.

कहो तो बात करवा दूँ

राज---- नहीं रहने दे.. तुझसे बात करके मेरा लुंड खड़ा हो गया है. अब मई किसी को छोड़ कर पहले अपने लुंड को बिठाऊंगा. फिर सुकून से बात करूँगा.

दीपिका---- हेहेहे.. हरामी साला कुत्ता.. भेनचोद मादरचोद.. तुझे सिवाए चुदाई के कुछ और सूझता भी है.

राज---- हाय मेरी जान.. आज तो तुम हरी मिर्च खाये बैठी हो.. या गांड में खुजली कुछ ज़यादा hi बढ़ गई है.. जो ऐसी तीखी बातें भी कर रही हो और खूब मज़े मज़े की गलियां भी दे रही हो

दीपिका--- क्या करूँ. तूने इस हद तक आने पर मुझे मजबूर कर दिए है. रहा नहीं जाता. जब तक तुझे खूब पेट भर गलियां न दे दूँ. और रही बात खुजली की तो वो तो जवानी आने के बाद, छूट या गांड खुजली के बाद जाती hi नहीं है. डे बी डे बढ़ती hi जाती है.. चल ठीक है तू घुस किसी की छूट में. फिर बात करते हाँ. वैसे तो तू ज़रूर किसी रोड पर खड़ा है. ट्रैफिक का शोर भी बहुत है.. कुछ शर्म किया कर.. ऐसे खुले में माँ बहनो से गन्दी गन्दी बाटने मत किया कर

दीपिका अब फ्रेश मूड में थी.

दो चार बातें और हुई.. फिर राज ने कॉल कट कर दी.. और सोचने लगा. किस की छूट में घुसे.. यहाँ तो लाइन लगी पड़ी थी... किसकी छूट में अब घुसा जाए!!.
 
136

****

राज को याद आया. उसने तो संजना और इशिता को एक साथ छोड़ने का डीडे किया था.

राज ने संजना को कॉल कर दी. इशिता और उसे एक जगा मिलने के लिए बुलाया. संजना तो सुनकर hi खिल उठी. वो जान गई थी. राज दोनों को क्यों बुलवा रहा है.

संजना ने ishita(simran के चाचा की बेटी) को कॉल मिला दी

संजना--- hello.. इशिता!

इशिता--- क्या बात है sanjana.awaz से तुम बड़ी एक्ससिटेड लग रही हो

संजना--- तुम सुनोगी तो तुम भी मेरी तरह एक्ससिटेड हो जाओगी

इशिता---- ाचा! ऐसी बात है तो बताने में देर मत करो.

संजना--- राज ने हम दोनों को एक होने को कहा है

इशिता--- मई कुछ समझी नहीं. हम दोनों पहले से hi एक हाँ

संजना--- स्टुपिड. हम दोनों के साथ राज आज--

संजना को शर्म सी आने लगी. इशिता सब समझ गई

इशिता--- व्हाट! अरे यू सीरियस संजना. नहीं मेरा मतलब है. ओह्ह माय गुडनेस. संजना.. तुम सब कह रही हो

संजना--- हाँ यार. कसम से मई सच कह रही हों. राज की अभी अभी कॉल आई थी.

इशिता का भी जोश बहुत बढ़ गई थी. ख़ुशी से उसका चेहरा दमक उठा था.

इशिता--- कहाँ. कहाँ बुलाया है राज ने

संजना--- तुम्हारी उसी कोठी में. जहाँ हम दोनों---

इशिता--- बस.. तो फिर ठीक है. तुम पोहंचो. मई भी पोहंचती हो

दोनों फटाफट तयारी में लग गई..

इधर राज भी उसी कोठी की ऑर्डर जाने लगा. राज बाइक पर था. राज ोनेवाय रोड से गुज़र रहा था. दूसरे रोड पर राज को पब्लिक दिखी. रोड ब्लॉक था. राज ने धयान नहीं दिए. और पब्लिक को देखता हुआ वहां से गुजरने लगा. राज रोड पर पब्लिक को देख सामने देखने hi वाला था. राज की नज़र सिमरन पर पड़ी. तभी राज ने एकदम से बाइक की ब्रेक लगा दी.

सिमरन अपने आप में एक पीेछे थी. लाइफ को फुल्ली एन्जॉय करना, अपने अंदाज़ में एन्जॉय करना, उसकी आदत थी. आज वो अपनी फ्रेंड्स के साथ स्पोर्ट्स कार में कहीं जा रही thi.dusre शहर के कुछ आवारा लड़के जो दिल्ली ए हुए थे. सिमरन को देख, सिमरन की ब्यूटी देख सिमरन पर कमेंट करने लगे.

और सिमरन को कोई ऐसे बोल जाए और सिमरन सहन कर जाए. न मुमकिन था. एक राज hi था. जिसने सिमरन की मांग भर कर सिमरन को अपना बना लिए था. अपना बना कर भी सिमरन का दिल नहीं जीत स्का था राज. किसी और की दाल कैसे गलती.

सिमरन ने एक बाइक वाले को तकर मार दी. वो गिर पड़ा. सिमरन ने गाड़ी रोकी. और गाड़ी से उतर कर बड़ी शान से कड़ी हो गई. सिमरन के हाथ में एक फोल्डिंग रोड था. सिमरन की फ्रेंड्स भी बहार आ कर सिमरन से पीछे कड़ी हो गई.

जिस लड़के की बाइक को सिमरन ने टक्कर मारी थी. उसके सर से खून निकलने लगा था. ट्रैफिक रुक चुकी थी. घायल लड़के के दोस्त भी बाइक्स रोक अपने दोस्त के पास गए.

फिर सब खड़े होकर सिमरन को घुसे से देखने लगे. और सिमरन चल्लेंजिंग स्माइल से उनको देखने लगी.

वही घायल लकड़ा सबसे पहले बोलै--- साली तू मेरे हथु से अब बचेगी नहीं

सिमरन--- साली.......... हाहाहा.

सिमरन अपने फ्रेंड्स को देखने लगी. जो सिमरन के असल रूप को अचे से पहचानती थी. सिमरन की हसी पर लड़के कुछ हैरान हुए.

सिमरन---- साली. साले मुझे साली कहता है. हाहाहा.. साली वो बताना है. जो मर्द हो. जो हो hi हिजड़ा. न उसकी कोई पत्नी बन सकती है और न साली.

ये बहुत बड़ी गली लड़के के लिए. गली एक को पड़ी थी. पर थी सभी के लिए.

लड़का अपने घायल चेहरा भूल कर घुसे से सिमरन की ऑर्डर बढ़ा. सिमरन के हाथ फोल्डिंग रोड था. जिसे वो लड़का देख कर भी अनदेखा समझा.

वो लड़का और दो और लड़के उस लड़के के साथ मिल सिमरन के करीब आने लगी. सिमरन की फ्रेंड्स अब स्माइल से सिमरन को पीछे से देख रही थी. ऐसे hi दिलचस्त नज़ारे तो सिमरन के साथ देखने को मिला करते थे. सिमरन की बात hi अलग थी.

लड़का सिमरन के करीब पोहंच कर- अब ये भुवन तुझे सबके बीच बताएगा, वो कितना बड़ा मर्द---

उसकी बात बीच में hi रह गई. सिमरन ने अपनी तंग उठा कर ज़ोर से उस लड़के की टांगों के बीच मार दी..

लड़का चीखा----- aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh

लड़का अपना लुंड पकडे झुकता चला गया. सिमरन तो नहीं हसी. उसकी दोस्त और तमाशा देख रहे सब हसने लगे. एक लड़की ने एक लड़के के लौड़े को फुटबॉल समझते हुए किक मार दी थी. नज़ारा काफी मज़ेदार लगा सबको. दूसरे लड़के घुसे में आ गए.

घायल लड़का चीखता. सिमरन चीख पड़ी--- बेचारे की मर्दानगी खतरे में आ गई. ोुह्ह्ह सो साद. एहि से hi तो तुम मर्द थे. मैंने तुम्हे यहाँ से भी बेकार कर दिए.

लड़का अपने दोस्तों से--- साली को पकड़ कर साथ ले जाओ. जो भी होआ. मई देख लूंगा. मेरे पापा तुम सब को कुछ नहीं होने देंगे.

सिमरन अब उस लड़के को घूर कर देखने लगी. सिमरन को अब लड़के पर गुसा भी आने लगा और अफ़सोस भी होने लगा. उसके अंदर की असली सिमरन भी पूरी तरह जाग उठी. लड़के सिमरन पर पल पड़ते. सिमरन ने रोड को हरकत में लाते हुए उन लड़कों की पिटाई शुरू कर दी. सिमरन अकेली hi काफी थी लड़को के लिए.

पब्लिक में जो सिमरन को जानते थे. वो ये बात अचे से जानते थे. सिमरन क्या चीज़ है. इन लड़कों के लिए अकेली hi काफी है.

तभी एक लड़के ने चाकू निकल लिए.

सिमरन की एक दोस्त चीखी---- सिमरन. तेरे पीछे लड़के चाहाकु

सिमरन तुरंत घूम गई और रोड वाला हाथ भी पुरे ज़ोर से घुमा दिए. सिमरन का रोड लड़के के चाकू पर लगा. चाकू गिर पड़ा. लड़का अपना हाथ पकडे कराहने लगा.

दो और के सर से सिमरन ने खून निकल दिए था.. सिमरन अब सब को घुसे से देख रही थी.

सिमरन कुछ बोलती. तभी राज वहां आ गया

राज--- वहहहह रे मेरी बुलबुल. बिना टिकट के hi फिल्म दिखने लगी तुम तो.

सिमरन राज की आवाज़ सुन पलट कर राज को देखने लगी. सिमरन के होंटो पर राज को देख मुस्कान उभर आई. सिमरन की फ्रेंड्स एक दूसरे को देखने लगी. उनके होंटो पर राज को देख मुस्कान आ गई थी.

जिस लड़के के हाथ में चाकू था. राज उसके पास पोहंचा और उसका घायल हाथ पकड़ कर झटके देने लगा.

राज--- शर्म से डूब मारो सालो तुम. एक लड़की से लड़ने के लिए चाकू का इस्तेमाल करते हो. सही कहा मेरी सिमरन ने. तुम सब नामर्द हो सालो.

लड़का --- तुम कोण हो?

राज सिमरन को देख स्माइल करता हुआ लड़के से बोलै --- प्रेमी हों उसका. पति हों उसका. उसके जिस्म ो जान का मालिक हों.

तभी पुलिस वन शोर मचती हुई वही ा गई

राज ने लड़के को छोड़ा और सिमरन के पास जा कर सिमरन का हाथ पकड़ कर उसके हाथ से रोड ले लिए

राज---- हथियार साथ लिए घूमती हो. बड़ी खतरनाक हो तुम. शुक्र है जब हमारी पहली मुलाक़ात हुई थी. तब ये तुम्हारे पास नहीं था

सिमरन--- ये वक़्त मेरे पास रहता है राज. बास उस दिन मेरे हाथ में नहीं था. तुम्हारी बेहूदा हरकत ने मेरे दिमाग की वाटत लगा दी थी. मई अपनी असली चल भूल गई थी. वर्ण तुम्हारा हाल भी इन लड़कों से काम नहीं होने वला था

राज--- खैर काम तो तुमने भी नहीं किया था. मुझे टक्कर मार कर जान से मारने की कोशिश तो तुमने पूरी करि थी

सिमरन-- मारने की कोशिश करती तो कबकी मार चुकी होती. बस मई तो तुम्हे सबक़ सीखना चाहती थी. इसलिए टक्कर मारी.

राज --- हाहाहा. तुम्हारी फूटी किस्मत. जो उस दिन की टक्कर ने तुम्हे मेरी पत्नी बना दिए.. हाहाहा.. सच में तुम्हारी उस दिन की टक्कर मेरे लिए बहुत hi फायदेमंद रही.

सिमरन--- ये तो वक़्त hi बताएगा. टक्कर कितनी फायदेमंद रही.

पब्लिक में कई राज और सिमरन को मज़े ले ले के देख रहे थे. ऐसे जैसे सिमरन को काबू में करके राज स्पेशल बन गया था. राज और सिमरन की जोड़ी पर कइयों के दिलों से दुआएं भी निकल रही थी. कई तो ये सोच रहे थे. इतनी खतरनाक लड़की अब देखो कैसे शांत कड़ी राज से बात कर रही है

पुलिस आई. हंगामा हुआ. पता चला पहला घायल होने वाला लड़का पास वाले शहर के एक जाने मने बिजनेसमैन का बीटा है. पुलिस उसे अरेस्ट नहीं कर पाई. वही पर कॉल खड़कई गई. गिरफ्तारी अमल में नहीं लाइ गई. सब लड़को को पुलिस हॉस्पिटल ले गई..

सिमरन -- तुम मिलते hi नहीं हो. बहुत बिजी हो गए हो

राज--- तुम्हारे लिए तो मई फ्री hi फ्री हों

सिमरन की एक दोस्त --- सिमरन राज को साथ लिए किसी रेस्टोरेंट में चलते हाँ. तुम दोनों के साथ कभी टाइम स्पेंड नहीं किया हमने यार. कसम से मज़ा आ जायेगा.

सिमरन --- चलो राज. आज इनकी भी सुन लेते हाँ

राज --- तुम कहो और हम इंकार कर दें. ये तो हो नहीं सकता. तुम कहो, पहाड़ से कूद जाओ. तुम्हारा ये प्रेमी पहाड़ से कूद जायेगा. तुम कहां अंधे कुँए में छलांग लगा दो ये प्रेमी---

सिमरन--- बास बस्स्स इतना बहुत है. मुझे तुम्हारी चाहत पर कोई शक नहीं. अब चलो चलते हाँ. देखो कैसी अब भी स्टुपिड सिटीजन मुझे घूर रहे हाँ. इनको भी किसी दिन सीधा करना पड़ेगा. कमीनो को जहाँ तमाशा देखने को मिले. सब काम छोड़ तमाशा देखने लग जाते हाँ

राज ने संजना को संस कर दिए. वो देर से आएगा. इस वक़्त वो सिमरन और उसकी फ्रेंड्स के साथ है.
 
लास्ट मेगा अपडेट .....



शार्ट में स्टोरी को एन्ड कर रहा हों गाइस!

राज ने एक एक करके अपनी सभी ममियों के साथ सम्बन्ध बनाये. उन्हें छोड़ छोड़ कर अपना दीवाना बना डाला. सरे ममे ममियों के कण्ट्रोल में थे. राज ने अपने मामाओं की बेटियों के साथ भी खूब मज़े किये. तब राज ने बता दिए वो कोण है.

सब ये जान कर हैरान हुई.. राज उनका अपना hi था. उनकी आराधना का बीटा था. सब ख़ुशी से उछाल पड़े थे. बाद में राज के प्लान अनुसार सभी मामाओं के परिवार वाले नाना नानी के पास गए. दोनों से शमा मांगी.. नाना अब तक अनजान था राज से.

नाना अपने बेटो से माफ़ी मांगने पर खिल उठा था. वहीँ जब उन्हें पता चला राज आराधना का बीटा है. वो हैरान हुआ..

नानी -- राज ने मुझे शुरू में hi बता दिए

नाना उसे देख हैरान रह गया. नाना ने भी समझ लिया था. उससे भी गलती हुई है. सब मिलकर इंदौर जा पोहंचे. वहां आराधना परसों बाद अपने माता पिता से मिल बड़ी जज़्बाती हो गई. खुल कर रोइ. ऐसा रोइ. उसने सब को रुला दिए.. राज के मामाओं ने भी आराधना से शमा मांगी. वो उसके लिए कुछ कर नहीं पाए थे. वर्ण यौन इतने बरस एक दूसरे से बिछड़ कर न रहना पड़ता..

इस बीच राज ने कई काम और भी किये थे.. सिमरन के परिवार में जो उसके हाथ लगी राज ने उसे छोड़ डाला. सिमरन के दाद्दु के साथ मिलकर एक हाउसिंग स्कीम की कंस्ट्रक्शन स्टार्ट कर दी गई.. जहाँ देश भर के बेसहारा परिवार फ्री में रह सकते थे. उन परिवारों के बच्चों के लिए फ्यूचर बेस्ट मेकिंग प्लानर्स की एक टीम भी अर्रंगे कर डाली गई. पैसे की कोई कमी नहीं थी. लेकिन राज की इस सोच को जान सबने बेपनाह ख़ुशी का इज़हार किआ. यौन सिमरन के परिवार के सभी सदस्य राज के साथ मिल गए..

इस बीच राज और सिमरन का भी खूब तमाशा जारी रहा. सिमरन मौका मिलने पर राज को चीट करने से बाज़ नहीं रहती. निशा की सगाई हो चुकी थी. राज निशा की शादी तुड़वा कर निशा को अपनी मन पसंद लाइफ जीने का मौका देना चाहता था. लेकिन सिमरन बीच में कूद पड़ी. उसने निशा के मंगेतर को अपने हाथ में लिए.. और उसे मजबूर करने लगी.. जल्द से जल्द निशा से शादी करे. वो भी मुच्छड़ था. निशा को जल्द से जल्द पाना चाहता था..

लेकिन नहीं प् सका. राज ने प्लान बना कर निशा के मंगेतर की माँ को छोड़ डाला. और राज जिसे एक बार छोड़ डालता था. वो राज की फैन हो जाया करती थी. यौन यहाँ भी सिमरन को मोह की कहानी पड़ी.. पर सिमरन बाज़ नहीं रहने वाली थी. राज से हार कर वो फिर से प्लान बनाने लगी.. कई और मोके आये राज को चीट करने के.. पर राज तो राज था. हरामी साला कुत्ता था. कैसे सिमरन उससे जीत सकती थी.

इसी बीच राज एक चक्कर मुंबई का भी लगा आया.. वहां राज ने दिनेश के परिवार के एक डरमै एंट्री मारी. तब दिनेश सिमरन के चक्कर में दिल्ली आया हुआ था. नहीं जनता था वह दिल्ली में है सिमरन के लिए. और सिमरन का राज मुंबई उसके परिवार के बीच है..

राज की मज़े मज़े की बातों में आ कर सभी राज के दीवाने हो गए.. वहां राज ने दिनेश की माँ पर ऐसे दौरे डाले. वो संस्कारी माँ राज के नीचे आने पर मजबूर हो गई.. दिनेश की बड़ी बहन निहारिका जिसकी शादी को बहुत समय हो चूका था. लेकिन अब तक वह माँ नहीं बन पाई थी.. लेकिन जैसा हरामी साला कुत्ता उसे भी छोड़ गया... और उसे भी प्रेग्नेंट कर डाला..

तब राज ने बताया.. वो दिल्ली वाली सिमरन का राज है.. दिनेश की माँ और निहारिका राज की हक़ीक़त जान कर शॉकेड रह गई. दोनों डर गई..

राज --- मुझसे डरो मत स्वीटहार्ट.. मई भी तो तुम दोनों का दिनेश हों.

दिनेश की माँ-- राज.. दिनेश मेरी जान है.. वह जज़्बाती लड़का है. मई उसे रोक भी नहीं प् रही हों

निहारिका -- मैंने भी बहुत बार सम्भाय. लेकिन वो सुनता नहीं है. वो कहता है. सिमरन राज की कोई नहीं है. एक दिन वो सिमरन को जीत कर आएगा.

राज -- तुम दोनों ने जान लिए. जो मेरी हो जाए.. वो फिर किसी और की नहीं हो सकती

दिनेश की माँ -- दिनेश बहुत ज़िद्दी है. मुझे डर है. कहीं उसकी ज़िद्द उसका पागलपन उसकी जान न ले ले

राज -- मई वडा करता हों तुम दोनों से.. दिनेश के सर से इश्क़ का भूत भी उतरूंगा और उसे पहले जैसा.. बल्कि पहले से भी अच्छा दिनेश बना कर तुम दोनों को लौटा दूंगा..

दोनों राज की बात सुनकर ख़ुशी से खिल उठी थी.

राज वापिस दिल्ली लौट आया था. मुंबई जाने से पहले राज और सिमरन के बीच सेक्स हो चूका था.. हुआ ये था.. सिमरन की कुछ ने एक पार्टी में, जिस में राज भी शामिल था. सिमरन को चैलेंज कर दिए. वो पीने में उनका साथ नहीं दे सकती.. बस फिर क्या था.. सिमरन पहले hi राज से बार बार की हार पर घुसे में थी. उसने चैलेंज एक्सेप्ट क्र लिए.. सिमरन फुल नशे में हो गई..

राज उसे लिए गाड़ी में दाल वहां से निकल पड़ा.. लेकिन सिमरन नशे में धुत अपनी कोठी न जा कर राज को एक दूसरी कोठी पर जाने के लिए फाॅर्स कर गया. राज सिमरन को वहां ले पोहंचा

सिमरन बहुत बोल रही थी. नशे में उसके मैं की साडी बातें खुल कर सामने आ रही थी.. राज उसकी बातें सुन बड़ा हैरान हुआ. सिमरन ने मन वह राज से प्यार करने लगी है. राज का उसे बार बार हराना उसे भा गया है. लेकिन वो चूँकि बचपन से लेकर अब तक किसी से हरी नहीं है. इसलिए मरते दम तक एक बार राज को हराना चाहती है.. और जिस दिन वो राज से हार गई. उस दिन राज को छोड़ देगी.. लेकिन दिल से वो राज को खोना नहीं चाहती थी. इसलिए ये भी चाहती थी. वो उम्र भर हारती रहे. और ऐसे hi ज़ोर ज़बरदस्ती राज उसे पा ले..

राज सिमरन के अंदर की बात जान कर हैरान रह गया. लेकिन राज फिर राज था. हरामी साला कुत्ता था. लेकिन उसके कुछ रूल्स भी थे. जिन्हे वो कभी नहीं तोडा करता था. सिमरन राज के लिए स्पेशल थी.

सिमरन नशे में धुत राज पर चढ़ दौड़ी.. राज को किश करने लगी. चाहने लगी. राज भी उसका साथ दे. और आज के आज उसे छोड़ डाले. लेकिन राज खुद को बचता रहा. वो नहीं चाहता था. होश में आने के बाद सिमरन उससे ये कहे. तुमने धोका किआ है. मेरी मदहोशी का फायदा उठाया है.

लेकिन मान के नहीं दे रही थी. तब राज ने मजबूर हो कर मोबाइल ोंन किआ और सरे सन की रिकॉर्डिंग करने लगा.. सिमरन ने राज को इतना मजबूर कर दिए था. राज को सिमरन को छोड़ना hi पड़ा...

वही हुआ.. सुबह राज से लड़ पड़ी.. राज के कई थप्पड़ मार बैठी. तब राज ने मोबाइल में रिकॉर्ड की रात की साडी घटना उसके सामने कर दी.. सिरमन वह देख बुरी तरह शॉकेड हुई.. फिर राज से दूरी बना कर बेथ गई.....

राज -- मई समझता रहा था. तुम मुझसे कभी नहीं जीत सकोगी सिमरन. लेकिन तुम जीत गई.

सिमरन घुसे में बैठी थी. राज की बात सुन उसे देखने लगी.

राज -- मैंने सोच रखा था. कभी तुम्हारे मैं की इच्छा अनुसार तुम्हारे साथ सेक्स नहीं करूँगा.. मस्ती मज़ाक छेड़ छड़ और फाॅर्स रोमांस तो होता hi है. लेकिन इतना सब मई नहीं करना चाहता था. मई उम्र भर के लिए तुम्हे प्यार से पाना चाहता था. कैसे एक रात के चक्कर में मई तुम्हे पा कर उम्र भर के लिए खो देता. रात जो भी हुआ.. वो तुम्हारी ज़िद्द, तुम्हारे मेरे लिए प्यार के चलते हुए.. देखो सिमरन. मई अपने इरादों का पक्का हों. लेकिन रात तुमने मुझे इरादों में फ़ैल कर दिए. यौन तुम पहली बार मुझसे जीत गई.

सिमरन ने राज की बात सुनी. कुछ देर घोर किआ.. फिर एकदम से उछाल कर कड़ी हो गई. और चहकती हुई बोली. मतलब मैंने हरा दिए

राज -- हाँ

सिमरन राज से चुद चुकी थी. सिमरन ने राज को पूरा मैं से मान लिए.. राज सिमरन को बता कर मुंबई गया था.

अब दिल्ली वापिस लौटा तो सिमरन और राज अच्छे से टाइम स्पेंड करने लगे. दोनों ने दुन्या से अलग एक दूसरे के साथ टाइम स्पेंड करने का मैं बनाया. प्लान बना कर दोनों शिमला के लिए निकल पड़े..

दिनेश सिमरन को राज के करीब होता देख और भी शिद्दत के साथ सिमरन के चक्कर में पद गया. वो भी शिमला जा पोहंचा...

तीसरे hi दिन आउटिंग करते हुए सिमरन उल्टियां करने लगी. पता चला सिमरन माँ बनने वाली है.. दूर छुप कर देख रहा दिनेश सिमरन को उल्टियां करते देख पहले तो हैरान हुआ. फिर बाद में सिमरन और राज के ख़ुशी से चमकते चेहरे देख दिनेश घुसे से पागल हो बैठा. वो अब तक एहि समझ रहा था. सिमरन ने राज को अपना जिस्म नहीं दिए है..

सिमरन का माँ बनना दिनेश को पागल बना गया. वो खुल कर सामने आ गया. सिमरन और राज दिनेश को वहां देख कर हैरान हुए. लेकिन दिनेश ने राज के किक मार दी.. राज पहले खुद को दिनेश के हमलों से बचता रहा. सिमरन के फाॅर्स करने पर भी राज दिनेश को नहीं पीट रहा था..

सिमरन को गुसा आया.. सिमरन ने एक मोके पर दिनेश के सर के बाल पकड़ कर दिनेश को घुमा कर एक साइड फ़ेंक दिए.. अब तक तीनो एक पहाड़ी की छोटी पर थे. सिमरन धयान नहीं दे पाई. उसने बड़ी पावर के साथ दिनेश को एक साइड धक्का दिए..

दिनेश के गिरते hi राज चीखता हुआ दिनेश की ऑर्डर भगा. सिमरन ने धयान दिए तो पता चला. दिनेश खाई से नीचे गिर रहा है. सिमरन का दिल धक् से रह गया. दिनेश खाई में गिर जायेगा. इतना भी उसने नहीं सोचा था..

राज ढलान पर दिनेश के पीछे स्लिप होता हुआ जाने लगा.. और राज ने दिनेश को पकड़ लिए.. न पकड़ता तो दिनेश हज़ारों फट नीचे खाई में गिर जाता. नीचे एक नदी बाह रही थी... जाने दिनेश मरने के बाद कहाँ से कहाँ जा पोहचता

दिनेश को अपनी मौत नज़र आने लगी थी. लेकिन सिमरन को खो देने के बाद वह मौत से भी नहीं डरा

दिनेश -- मई मर जाऊँगा. सिमरन अगर मेरी नहीं हो सकीय तो अब से मई उसे तुम्हारी भी नहीं रहने दूंगा. मई मर जाऊँगा.. लेकिन तुम्हे भी साथ लेकर मरूंगा

राज -- और मैंने निहारिका दीदी और तुम्हारी माँ से वडा किआ है.. मैं तुम्हे मरने नहीं दूंगा.. हर हाल में तुम्हे बदल कर रहूँगा

राज के मोह से अपनी माँ और दीदी का नाम सुन कर दिनेश को शॉक लगा

दिनेश -- तुम.. तुम मेरी माँ और दीदी को कैसे जानते हो

राज -- मई कुछ दिन मुंबई तुम्हारे परिवार के बीच रह कर आया हो. वही मैंने सब को बता दिए था मई कोण हों. दिनेश मई तुम्हे भाई मंटा हों. इसलिए ज़िद्द छोड़ दो.. सिमरन न कभी तुम्हारी थी और न hi हो सकती है.. अब तो सिमरन मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है

दिनेश तो अपनी माँ और दीदी का सुन कर hi सुरप्रीसेड रह गया..

बहुत देर से दोनों लटके हुए थे.. राज खतरनाक सिचुएशन में था.. दिनेश रिस्की जगा पर अटका हुआ था.. वही लटके लटके दोनों बातें कर रहे थे.. रभी सिमरन के ऊपर आने से एक पत्थर उसके पैरों के चलते लुढ़क कर नीचे आने लगा

सिमरन चीखी -- राज.. बचोऊ

लेकिन राज नहीं बच सका. पत्थर छोटा था. लेकिन ऊपर से गिरा था.. राज खतरनाक किनारे पर था. पत्थर राज के सर पर लगा. राज का सर चक्र गया. उसकी पकड़ दिनेश पर कमर पड़ने लगी. दिनेश और नीचे हुआ.. अब उसे मौत का डर सताया

राज होश में आया. ऊपर सिमरन चीख रही थी.. पहली बार वो भी दरी थी.. इधर राज होश में आता, खुद को संभालता दिनेश को ऊपर खेंचने लगा.. जैसे hi राज दिनेश को ऊपर खेंचा. तभी राज को एक चक्कर और आया.. फिर वो खुद को नहीं संभल सका.. और खाई में हज़ारों फट नीचे गिरने लगा..

सिमरन का दिल धक् से रह गया. वही दिनेश भी जुनूनी अंदाज़ में चीखने लगा.. लेकिन राज नदी में गिर दोनों की नज़रों से ओझल हो गया...

सिमरन नयी नयी सुहागन फिर माँ बानी थी. राज का खाई में गिरने उसे जैसे मार गया. वो वही गिर पड़ी.. दिनेश को अब खुद से जैसे नफरत होने लगी थी. दिनेश सिमरन को बाज़ुओं में उठा कर होटल जा पोहंचा. वहां उसने सब को कॉल कर दी. अपने घर और सिमरन के परिवार वळून को..

सबने जाना. राज के साथ कैसी घटना घाट चुकी है. जहाँ राज और सिमरन थे. वहां दिनेश था. सबको लगा. दिनेश का सारा किआ धरा है.. दोनों परिवार पॉवरफुल थे.. दोनों परिवारों के खास सदस्य हेलिकोप्तेर्स पर वहां आ पोहंचे. और मिल कर ग्रैंड सर्च ऑपरेशन फॉर राज शुरू कर दिए गया.

निहारिका और दिनेश की माँ ने खूब थप्पड़ बरसाए दिनेश के मोह पर.. वहां सिमरन ने दिनेश की जान छुड़वाई..

तब सबने जाना सिमरन माँ बनने वाली है.. अब तक सब एहि समझ रहे थे. सिमरन और राज के बीच अभी बहुत फैसले हाँ. लेकिन सिमरन का माँ बनना उन्हें ऐसी ख़ुशी दे गया.. जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता था. लेकिन राज मिसिंग था. ये ऐसा घाव था.. कोई सहन नहीं क्र प् रहा था. राज के अपने परिवार वळून से अभी सब कुछ छुपाया जा रहा था..

दो हफ़्तों की लगातार सर्च के बाद भी राज का कोई पता नहीं चला. सब ने सोचा राज मर चूका है. इतनी हाइट से गिरने वाला भला ज़िंदा कैसे बच सकता है. लेकिन सिमरन का दिल नहीं मन..

सिमरन और सब दिल्ली लौट आये. वहां राज ने जो हाउसिंग स्कीम की बेस राखी थी. वही एक माकन में सिमरन रहने लगी. वही राज का पूरा परिवार भी बुलवा लिए गया.. वहां सबने जाना.. राज के साथ क्या घटना घाट चुकी है..

सब को सदमा लग गया.. राज की चाहने वालियां बिस्तर की होकर रह गयी. आराधना और राज की बहनो का रो रो कर बुरा हाल हो गया. नहाना धोना खाना पीना सब भूल गई..

नाना नानी सरे मां और उनके बच्चे सब राज के लिए दुखी थी. वही जब पता चला सिमरन राज के बच्चों को जनम देने वाली है तो सब सिमरन से होने वाले राज के बच्चों के कारन सिमरन के साथ जुड़ गए. राज के बच्चों की और भी कई मायें बनने वाली थी. दीपिका को छोड़ राज की साडी बहने राज की अपनी माँ उधर इंदौर वाली राज की पत्नी सब माँ बनने वाली थी. सब के सब दुखी थे..

राज की सर्च जारी रही..

दिनेश ने सिमरन को सब के सामने खुले दिल से बहन मान लिए.. वो मुंबई न जा कर राज के मिलने तक दिल्ली में hi रहने का निर्णय ले गया..

समय गुज़रता रहा.. और फिर सिमरन ने राज के जुड़वां बेटो को जनम दिए. जहाँ सब के दिल ख़ुशी से भर गए.. वहीँ राज के अभी तक न मिल पाने का दर्द पहले दिन के जितना हो गया..

उधर राज खाई के नीचे बाह रही नदी में बहता हुआ मनोरमा की बस्ती जा पोहंचा. होश में आने के बाद राज अपनी याददाश्त खो चूका था. राज अपने पैरों पर चलने लायक हुआ और फिर वहीँ का होक रह गया. मनोरमा को राज से और राज को मनोरमा से मोहब्बत हो गई. मनोरमा के बाबा ने बस्ती वळून से मश्वरा करने के बाद दोनों की शादी कर दी...

राज और मनोरमा की सेक्स लाइफ अच्छे से काटने लगी. फिर मनोरमा भी परगनेन्ट हो गई. राज के बच्चे की माँ बनने लगी...

महीने बीते और मनोरमा ने राज की एक बेटी को जनम दिए. 4 महीने बाद राज बस्ती में शहर से आये कुछ आवारा लड़कों ने बस्ती की एक लड़की को नदी के पास से किडनैप कर लिए.. वहां और भी लड़कियां थी. वो भाग कर बस्ती आई और साडी बात बता दी..

राज भी बस्ती वळून के साथ लड़की की इज़्ज़त बचने के लिए निकल पड़ा.. राज सबसे पहले वहां पोहंचा. वहां फाइट हुई और राज ने लड़की की इज़्ज़त बचा ली.. वहीँ राज के सर पर कई घाव आये. बस्ती वाले पोहंचे तो शहरी लड़कों को पकड़ कर बस्ती वळून ने वही काट कर नदी में फ़ेंक दिए..

राज बेहोश हो चूका था.. बुरी तरह घायल हो चूका था. राज को बस्ती लाया गया. वहां मनोरमा राज को इतना घायल देख दहल उठी..

राज 3 दिन बाद होश में आया. होश में आते hi वो इधर उधर देखने लगा. फिर उसे सब याद अत चला गया.. वो भी जो 3 दिन पहले उसके साथ हुआ था. वो भी जो बरसों पहले उसके दिनेश और सिमरन की मौजूदगी में हुआ था.. राज तड़प उठा.. अपने घर जाने के लिए बच्चें हो उठा..

तब बस्ती वळून ने जाना राज की याददाश्त वापिस ा चुकी थी. मनोरमा दरी.. कहीं राज उसे छोड़ कर तो नहीं चला जाएगा..

राज ठीक हुआ तो उसने बाबा को अपने बारे से ज़रूरी सब बता दिए. ये भी बता दिए उसकी पहली से दो पत्नियां हाँ. जो उसके बच्चों की मायें बनने वाली थी तब. ये सुन बाबा और मनोरमा को बड़ा धचका लगा. तब राज ने बाबा का हाथ थम कर यकीन दिलाया. वो मनोरमा को उम्र भर ऐसे hi प्यार करता रहेगा.. वो भी मनोरमा के साथ उसके साथ चले

अलगे कुछ दिनों में बाबा और मनोरमा को बस्ती वलु को यकीन आ गया. राज जैसा कह रहा है वो सच है. और फिर राज ने बस्ती की एक लड़की की इज़्ज़त बचते हुए अपनी जान की परवा नहीं करि थी.

बाबा ने बस्ती छोड़ शहर जाने से इंकार कर दिए. हाँ पर राज मनोरमा और बच्ची को अपने साथ ले जा सकता है.. मनोरमा अपने बाबा से दूर होने की सोच बहुत रोइ.

राज ने यकीन दिलाया. वो उसे लेकर बस्ती में बाबा और सबसे मिलने आता रहेगा

यौन राज मनोरमा और मनोरमा से अपनी बेटी को लेकर कुछ बस्ती वळून के साथ अपनी दुन्या में लौट निकला..

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राज अपणु में पोहंच चूका था. जिस जिस को खबर मिली.. राज लौट आया है.. वो सब सभी काम छोड़ राज से मिलने आ गए.. सिमरन से राज के दोनों बेटे अब भागने दौड़ने लगे थे.. दोनों को पता चला राज उन दोनों का पापा है.. दोनों ख़ुशी से सब को बताते फायर..

वही राज के बेटो और बेटियों की कई और भी मायें बानी थी. राज ने संध्या को प्रेग्नेंट किआ था. अपनी दूसरी मौसी और ममियों में से एक को और एक बड़ी ममी की बड़ी बेटी जो शादी शुदा थी उसे भी प्रेग्नेंट कर दिए.. थोड़े से hi समय ने राज कई बच्चों का बाप बन चूका था.

आते समय भी राज मनोरमा की बेटी की सूरत एक और बेटी ले आया था.. सब हैरान भी थे और खुश भी. खुश थे. राज लौट आया था. हैरान थे ये राज करता क्या फिर रहा है. भला किसी एक पर्सन के इतने बच्चे भी होते हाँ क्या..

ये अंदर की बातें थी. बहार का कोई नहीं जनता था. आराधना ने राज के एक बेटे को जनम दिए था. लेकिन आराधना की प्रेगनेंसी को गुप्त रखा गया था.. केवल राज से छोड़ने वालियां hi सच जानती थी. और राज से छोड़ने वालियों की कोई कमी नहीं थी. राज का परिवार था. इंदौर वाली लेडी और उसकी बहन थी. राज की नानी राज की माँ का परिवार.. राज की मौसियों का परिवार और फिर दिनेश और सिमरन का परिवार.. जहाँ जहाँ राज को मौका मिला. राज झंडे गाढ़ता गया था..

राज के खो जाने का दुःख सबसे ज़यादा राज की लड़का बहन दीपिका को था. राज जब इंदौर गया था. वहां राज ने सबकी सील खोली थी. सब को प्रेग्नेंट किआ था. लेकिन दीक्षा जिसके मैं में ज़रा बराबर ये बात नहीं थी. राज मिसिंग hi हो सकता है. राज के साथ कोई घटना भी घाट सकती है..

दीपिका ने राज से अपनी गांड की सील तो खुलवाई थी. लेकिन छूट की सील नहीं खुल सकीय थी. एहि दीपिका के दिल का सबसे बड़ा दर्द था. वो राज के प्लान अनुसार राज के दोस्त के साथ शादी तो कर गई थी. लेकिन अभी तक कुंवारी थी. और राज के बच्चे की माँ नहीं बन सकीय थी. बाकि उसकी साडी बहने राज के बच्चों की मायें बन गई थी.

ऊपर ऊपर से वो हसा करती थी. लेकिन राज से देर तक मिसिंग रहने के कारन वो धीरे धीरे अंदर से मर रही थी. वो राज को पूरा नहीं प् सकीय थी.

लेकिन अब राज लौट आया था. मर रही दीपिका फिर से जी उठी थी.. वो खुद को 24 हरष दुल्हन की तरह कर रखने लगी... राज को भी अपनी लड़का बहन के दिल की आरज़ू का पूरा पूरा अहसास था..

इधर सिमरन एक सच्ची पत्नी बन गई थी.

राज ने सबसे पहले दीपिका की भी छूट की सील खोली.. फिर कई दिनों तक रेगुलर दीपिका की छूट में माल भरता रहा.. आखरी दीपिका भी प्रेग्नेंट हो गई..

राज के दोस्त के सभी परिवार भी अब वहीँ थे. कोई नहीं रहा था राज के जानने वळून में. जो उस हाउसिंग स्कीम में नहीं रह रहा था..

यौन सभी एक खुश हाल ज़िन्दगी जीने लगे.. जहाँ बरसों राज के मिसिंग होने के कारन ग़म के बदल छाये हुए थे. अब मौसम सुहाना हो गया था. हर तरफ खुशियों की बरसात जारी थी...

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राज के बेटे अब जवान हो गए थे.. लेकिन राज अभी तक जवान का जवान था.

राज सिमरन के कमरे में बीएड पर नंगा लेता हुआ था. सिमरन राज के ऊपर राज के लुंड को अपनी छूट में लिए राज के चेहरे पर झुक कर राज के होंटो को चूस रही थी..

राज के लुंड में आज भी उतना hi दम था. जितना 20 बरस पहले हुआ करता था. सिमरन मज़े से आह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह करती राज से चुद रही थी..

तभी सिमरन और राज के दोनों बेटे बीएड के नीचे से निकल कर बीएड पर आ गए.. दोनों नंगे थे. दोनों अपने अपने लुंड मसल रहे थे.. राज और सिमरन दोनों को देख कर चौंक गए.. दोनों चुदाई भूल अपने बेटों को देखने लगे.

और दोनों अपने भाई अपने चेहरे पर हरामी साले कुत्ते जैसा दिखाई देने वाले सरे भाव सजाये राज और सिमरन को बरी बरी देखने लगे.

राज -- तुम दोनों.. तुम दोनों मेरे कमरे में क्या कर रहे हो

सिमरन दोनों को नंगे अपने अपने लुंड मसलते देख राज को देख ज़ोर ज़ोर से हसने लगी.

सिमरन -- मेरे बेटे हाँ.. मेरे कमरे में कभी भी आ सकते हाँ..

राज -- लेकिन इस समय..

सिमरन -- इन दोनों को खुली छूट है. किसी भी समय आ सकते हाँ

एक का नाम हरीश और दूसरे का नाम मनीष था.

मनीष सिमरन के नंगे बदन को देखता हुआ बोलै -- बच करो पापा.. बहुत बरस आपने मम्मी को और की चुदाई कर ली..

हरीश -- अब हम जवान हो गए हाँ.. अब आप के हिस्से की चुदाई हम किया करेंगे

राज दोनों को घुसे से देखता हुआ बोलै -- तुम.. मई कहता हों जाओ कमरे से बहार

सिमरन -- चुप कर हरामी साले कुत्ते.. मेरे बेटे हाँ. मई नहीं चाहूंगी तो ये कहीं नहीं जाएंगे.

मनीष - ू मम्मी आप बहुत अछि हो

हरीश -- देखो पापा.. आप हरामी साले कुत्ते हो. और हम आप के hi लुंड से चलते इस दुन्या में आये हाँ.. हम हर प्रकार से आप के जैसे हाँ.. इसलिए ये ऑंखें किसी और को दिखने के लिए रख छोड़िये

मनीष -- और हाँ. हम आज के ज़माने के हाँ. बचपन से जवानी तक का एक एक पल हमने शहर में गुज़ारा है

हरीश -- आप ने अपनी जवानी तक गाओं की हवा खाई है

मनीष -- इसलिए आप हमारी टक्कर के नहीं है

हरीश -- ये मत समझिये गए आप पापा. आप के लुंड जितना स्ट्रांग हमारे लुंड नहीं हाँ

मनीष -- हमने मनोरमा मम्मी की बस्ती जा कर वहां रह कर खास अपने अपने लुंड इतने पॉवरफुल बना लिए हाँ..

हरीश -- कभी हमारे लुन्डों में दम काम नहीं होगा..

मनीष -- और हम वो सरे नुस्खे और जड़ी बूड़ियाँ अपनी साथ भी ले आये हाँ.. हमने अपनी तरह अपने सरे भाइयो को सेक्स के मामले में सुपरमैन बना दिए है..

हरीश -- वो क्या है न पापा. आप फॅमिली के बेस्ट चुड़ककर हो..

मनीष -- आप ने परिवार में किसी को नहीं छोड़ा.. गाओं में जिसपर मैं आया उसे छोड़ा.. दादी को साडी बुआओं को, यहाँ नानी और मम्मी की दादी समेत आप ने किसी को नहीं बख्शा

हरीश -- बचपन से हम सब देखते ा रहे हाँ.. फॅमिली के चुदाई हमारे खून में है

मनीष -- और हम सभी भाइयों ने मिलकर प्लान बनाया है.. हम सब मिलकर आखरी सांस तक इन्सेस्ट लाइफ जियेंगे

हरीश -- और इतने बच्चे पैदा करेंगे.. जितने आप भी पैदा न कर पाए हों

सिमरन दोनों को नॉटी और जॉयफुल स्माइल के साथ देख रही थी

सिमरन -- इसे कहते हाँ नहले पर दहला.. शाबाश मेरे शेरोन.. तुम्हारा बाप राज बड़ा hi कमीना है.. मैंने कभी किसी से हार नहीं मणि थी. बड़ा ग़रूर था मुझे खुद पर.. लेकिन राज ने मेरा सारा ग़रूर मिटटी में मिला दिए

मनीष-- अरे मम्मी.. कसम से हमें आपके ग़रूर के टूटने पर बड़ा दुःख है

हरीश -- लेकिन क्या करें.. जब दुन्या में आये तो एक लुल्ली लेकर आये..

मनीष -- बड़े हुए तो पता चला हमारा बाप कितना बड़ा हरामी है

हरीश -- हमने भी कसम खा ली.. हरामी बाप के हरामी बेटे बनकर जियेंगे

मनीष - और ऐसे हरामी बनकर जियेंगे.. कभी कोई न जिया होगा

हरीश -- इसलिए हम ने पहले सरे भाइयों के साथ मिलकर एकता बनाई..

मनीष - कमल तो तब हुआ पापा.. जब आप के लुंड से पैदा होने वाली हमारी साडी बहने हमारा प्लान जान नाचने लगी

हरीश -- पापा आप ने आज तक अपनी किसी बेटी को नहीं छोड़ा नहीं

मनीष -- और कोई भी हमारी बहन हमारी इच्छा के बिना आपसे छुड़ेगी नहीं

हरीश - हालाँकि वो भी सबकी तरह आपकी फैन हाँ

मनीष सिमरन को देखता हुआ बोलै - तो फिर मम्मी क्या इरादे हाँ

सिमरन नॉटी स्माइल से राज को देखने के बाद मनीष को देखती हुई बोली - मेरे इरादे बड़े अच्छे हाँ.. जैसे राज एक hi छूट पर गुज़ारा नहीं कर सकते.. ऐसे hi राज से छोड़ने वालियां भी एक राज के लुंड से चुद चुद कर बोर हो चुकी हाँ.. और फिर एक राज है. सब को कितने कितने दिनों बाद समय देता है.. भला एक इन्सेस्ट छूट कहाँ इतना समय रह पति है.. मुझे hi देख लो. महीने में 2 hi बार राज मुझे छोड़ता है

मनीष -- तभी तो.. तभी तो हमने प्लान बनाया है. अब हम सरे भाई मिलकर साडी मम्मियों को पापा की साडी छूट वालियों को मिलकर छोड़ा करेंगे.

हरीश -- तभी सरियों की बरसों की प्यास बुझ पायेगी

सिमरन -- जियो मेरे बच्चो

राज कभी सिमरन को देखता.. कभी मनीष और कभी हरीश को

राज एक गहरी सांस लेता हुआ बोलै -- मैंने सोचा भी नहीं था.. जैसी ज़िन्दगी मई जी रहा हों. कभी ऐसा मोड़ भी मेरी ज़िन्दगी में ा सकता है. मेरे hi लुंड से जन्मे मेरे बेटे मुझे ऑंखें दिखाएंगे

सिमरन -- तो.. क्या तुम क्या समझते थे.. तुम इकलौते hi मर्द हो इस दुन्या में क्या.

राज -- हाँ मई इकलौता hi मर्द हों दुन्या में.. देखो हरीश मनीष को देखो. भले hi ये हमारे बेटे हाँ.. लेकिन ये भी मई hi हों..

सिमरन - ये भी तुमने खूब कहा राज..

राज -- अरे हरामियों के लौडो.. खड़े खड़े क्या देख रहे हो.. आओ और मेरे साथ मिलकर अपनी मम्मी की प्यास बुझाओ.. ये साली भी पता नहीं बेशरम कैसे बन गई.. क्यों इतनी प्यासी हो गई है...

मनीष -- ो hello पापा.. हम हमारी मर्ज़ी के मालिक हाँ..

हरीश -- और आज चाहते हाँ. आप साइड बेथ कर हमारी मम्मी की चुदाई देखें

सिमरन -- हेहेहे.. वहहह वहहहह... आज बरसों बाद मेरा कलेजा ठंडा हुआ है

राज फिरसे भरी सांस छोड़ता हुआ ढीला पद गया...

सिमरन हस्ती हुई राज के लुंड से उठ कड़ी हुई..

मनीष और हरीश ने "yaaaaahooooooooooo" का नैरा मारा.. और सिमरन पर टूट पड़े..

यौन राज की इन्सेस्ट लाइफ की दिशा बदलने जा रही थी.. पहले परिवार का राज इकलौता महा चुड़ककर था.. अब राज के सरे बेटे मिलकर चुड़ककर बनने वाले थे..

दोनों भाई मिलकर सिमरन के एक चुके के साथ मोह लगाए चूसने लगे.. सिमरन अपने दोनों के लुँडो को थाम कर मसलने लगी.. उसे कोई दुःख नहीं था. बल्कि वो खुश थी.. उसे इस बात की ख़ुशी नहीं थी. राज बेटो के आगे बेबस हो गया था. वो इसलिए खुश थी. अपने hi बेटो के साथ मज़े करने जा रही थी...

राज एक बीटा होकर माँ को छोड़ सकता है. नानी को छोड़ सकता है. अपनी सास और सास की सास को छोड़ सकता है. अपनी मौसियों से शादी कर सकता. उन्हें अपने बच्चों की मायें बना सकता है. परिवार में हर उस लड़की को माँ बना सकता है.. जिसकी शादी कहीं और हुई थी.. तो फिर सिमरन अपने बेटों से क्यों न चुदती..

सबसे बड़ी बात जो सिमरन सोचा करती थी. इन्सेस्ट उसके परिवार में आम बात बनकर रह गई थी. और राज अकेला hi मर्द नहीं था. घर में और भी मर्द थे. राज एकला सब को छोड़ नहीं सकता था. राज को सबको छोड़ते जान राज के बेटे कैसे खुद को रोक पते..

सिमरन ने जान लिए था.. राज का शुरू किया ये सिलसिला बहुत दूर तक चलते रहने वाला था..

सिमरन ने बरी बरी दोनों बेटो के लुंड चूस चूस कर चिकने किये..

मनीष राज के बराबर लेट गया.. सिमरन मनीष के ऊपर आई उसे किश करती मनीष के लुंड को पकड़ कर अपनी छूट में घुसा गई.. हरीश पीछे से आया और अपना मोटा तगड़ा लुंड पकड़ कर अपनी मम्मी सिमरन की गांड के साथ रगड़ता हुआ एक झटके के साथ सिमरन की गांड में घुसेड़ दिए..

सिमरन चीख पड़ी -- aaaaaaahhhhhhhhhh.. आह्हः राज .. कितने बरस बीत गए.. तुमने मेरी ऐसी चीख नहीं निकल...

राज -- बोल ले साली.. आज तेरा दिन है बोल ले.

सिमरन राज को देखती राज का लुंड पकड़ कर राज को करीब कर गई.. राज सिमरन को देखता हुआ अपना लुंड सिमरन के मोह के करीब कर गया..

सिमरन -- मई कुछ भी कहूं राज.. पर हमारे ये दोनों शेर तेरे दम से हाँ.. तुम न होते तो ये भी न होते.. मई भी ऐसी ख़ुशी कभी न प् रही होती..

राज ने सिमरन के सर पर हाथ फेरा.. सिमरन राज का लुंड चूसने लगी. उधर दोनों भाई एक साथ सिमरन की छूट और गांड में लुंड घुसा कर सिमरन की ताबड़ तोड़ चुदाई करने लगे..

सिमरन राज का लुंड चूसना भूल कर आठ ोूहः करने लगी...

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राज 80 साल का हो चूका था. राज हडियों का ढांचा बन कर रह गया. एक तो राज की उम्र हो गई थी. दूसरे राज ने इतनी चुदाई करि थी अपनी ज़िन्दगी में.. कहाँ राज के अंदर कुछ बाकि रह पता

एक एक करके राज के सरे अपने राज का साथ छोड़ कर परलोक सुधर चुके थे. अपने दौर के ज़िंदा लोगो में राज इकलौता ऐसा था जिसकी साँसें अभी तक चल रही थी. राज के लौट आने के दो hi साल बाद के अंदर अंदर पहले नाना फिर नानी चल बसी..

15 बरस पहले राज की माँ चल बसी.. फिर एक एक करके सरे मरने लगे.. राज एक एक को मरता हुआ देखता रहा. और हसरत से आहें भरता रहा.. कितनी हसीं ज़िन्दगी उसने सब के साथ जी थी.. लेकिन सब उसे छोड़ कर जा रहे थे.

आज राज मौत के बिस्तर पर लेता हुआ एक एक को याद कर रहा था. राज एक अंदर हिलने की भी ताकत नहीं बची थी.. राज के गालों पर गधे पद गए थे.. चेहरे पर इतनी झुर्रियां आ गई थी.. देखने वाले राज को देख हमदर्दी करने लगते...

1 घंटे पहले राज की एक बेटी मालिनी राज को दूध के साथ 12 वियाग्रा की गोलियां पीस कर पीला गई थी. बहुत समय के बाद राज अपने अंदर कुछ एनर्जी महसूस कर प् रहा रहा था. लेकिन राज हिल नहीं सकता था. हाँ पर राज के लुंड में सनसनी सी दौड़ रही थी..

कमरे का दरवाज़ा खुला और मालिनी की सबसे छोटी बेटी ज्योति कमरे में प्रवेश करि.. राज ने उसे देखा.. और आठ भर कर रह गया. ज्योति कमरे में नंगी दखल हुई थी.. ज्योति कुछ मिंटो पहले hi 18 की हुई थी. और उसकी इच्छा थी.. वो अपने नाना राज के साथ पहला सेक्स करेगी.. और पुरे परिवार ने ज्योति के फैसले को सम्मान दिए था.

सो ज्योति कमरे से बहार से hi नंगी होकर राज के कमरे में आई थी..

ज्योति राज के पास पोहंच कर बोली -- नाना जी.. ी लव यू नाना जी.. नाना जी आपने बहुत अच्छी ज़िन्दगी जी.. इतनी सुंदर की कल्पना भी नहीं की जा सकती. आप के होने से हमारी ज़िन्दगी में वह बदलाव आये हाँ. जो शायद किसी और परिवार में जनम लेने पर हम में आ पाते.. नाना जी.. आप ने इन्सेस्ट लाइफ की बेस रख कर हम साडी परिवार की लड़कियों को खुल कर, अपनी मन मर्ज़ी से जीने का मौका दिए है.. मुझे बड़ा दुःख है नाना जी. आज आप की ऐसी हालत हो राखी है.. कसम से मई आप की जुदाई सहन नहीं कर पाऊँगी.. भगवन करे आप को मेरी भी उम्र लग--

राज हाथ नहीं उठा सका. लेकिन सर हिला कर उसे ऐसा कहने से रोक दिए.. फिर बड़ी मुश्किल से बोलै -- नहीं बेटी.. मैंने जी ली अपनी ज़िन्दगी.. अब तुम्हारी उम्र है. तुम जियो

इतना hi बोल पाया था राज.. फिर वो हांपने लगा..

ज्योति बड़े प्यार के साथ राज के बूढ़े लुंड को थाम गई.. कुछ सहलाती रही. फिर मोह में लेके चूसने लगी..

राज का लुंड आज 4 बरस के बाद कोई चूस रही थी. राज के खून में 4 बरसों के बाद सेक्स का खुमार दौड़ने लगा.. ज्योति बड़ी लगन के साथ राज का लुंड चुस्ती रही. फिर राज को देख राज के होंटो पर ै और राज के बूढ़े और ढलक चुके होंटो को चूसने लगी.

दरवाज़ा खुल गया. ज्योति ने सर घुमा कर जो बहार देखा.. ज्योति को अपना पूरा परिवार दिखाई दिए.. सब ज्योति को देखने लगे.. ज्योति सब को देख मुस्कुराई.. फिर

राज को देख बोली -- काश आप भी मेरी छूट चूस कर गीली कर सकते नानी जी...

राज दिल मासूस कर रह गया. कितनी छह के साथ वो छूट और गांड छठा और चूसा करता था. अब तो उसके मोह का सारा पानी hi ख़तम होकर रह गया. बोल नहीं पता था. छूट कैसे चाट पता..

ज्योति उठी और अपनी छूट पर आयल लगा कर नरम करने लगी.. फिर राज के ऊपर आई और राज के कुछ कुछ अकड़ चुके लुंड को पकड़ कर बैठने लगी.. राज का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा था.

ज्योति की छूट से जैसे hi राज का लुंड टच हुआ.. ज्योति सिसक पड़ी.. आह्हः नानी जी. मई बता नहीं सकती. आपके लुंड के मेरी छूट पर स्पर्श ने मुझे कितना आनंद दिए है..

ज्योति अचे से अपनी छूट पर राज के लुंड का सेट करती एक झटके में बेथ गई.. ज्योति बुरी तरह चीख पड़ी थी. बहार कड़ी मालिनी अपनी बेटी के दर्द को जान भाग कर अंदर आई.. और ज्योति को गले से लगा कर पच्कार्ने लगी.. जल्द hi ज्योति ने खुद पर काबू प् लिए.

इधर राज की हालत ख़राब थी..

ज्योति -- नाना जी.. अब का आखरी ज़ोर का धक्का लगाऊँगी.. और फिर मेरी सील आपके लुंड के कारन टूट जाएगी.. और मई भी उन भागशाली बेटियों में शामिल हो जाऊँगी.. जो आप से पहले चुदती रही हाँ...

इतना बोल ज्योति बड़े जोश के साथ राज के लुंड पर प्रेशर दाल गई..

ज्योति अपनी माँ से लिपट कर बुरी तरह चीखने लगी. दरवाज़े से बहार खड़े कुछ ज्योति को गर्व से देख रहे थे. कुछ ज्योति के दर्द पर तड़प उठे थे.

इधर ज्योति की सील खुली. राज का आधे से ज़यादा लुंड ज्योति की छूट में घुस चूका था. मालिनी अपनी बेटी के दर्द को काम करने में सहायता कर रही थी.

सब का धयान ज्योति पर था. रिलैक्स होने के बाद ज्योति ने जैसे hi आखरी धक्का मारा. राज का सारा लुंड उसकी छूट में अंदर तक घुसता चला गया. ज्योति फिरसे भयंकर चीख पड़ी..

तभी राज के बूढ़े शरीर को एक बड़ा झटका लगा.. राज का सर उठा. फिर राज गिरा.. और राज की ऑंखें और मोह खुला रह गया.

राज की आत्मा उसके शरीर से निकल चुकी थी. ज्योति की सील राज के लुंड से खुल चुकी थी. राज की आत्मा राज के शरीर से निकली तो राज का लंग ज्योति की छूट में ढीला और ठंडा पड़ने लगा..

तभी बहार से कोई चीख मरती हुई अंदर घुसी और राज से लिपट कर रोने लगी..

पता चला राज मर चूका है..

राज की कहानी का थे एन्ड हो चूका है...

सब कमरे में आये और राज से लिपट कर रोने लगे.....

----------------थे एन्ड--------------------
 
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