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- Dec 5, 2013
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प्रेजेंट
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राज-- बाबा मैं मनोरमा से शादी करना चाहता हों. कुछ दिनों बाद राज ने बाबा से अपने दिल की बात बोल दी.
बाबा-- मैं पहले से hi जान गया था राज बीटा. ऐसा hi कुछ मुझे सुनने को मिलने वाला है. मुझे अपनी बेटी की खुशियों से बढ़कर कुछ नहीं चाहिए राज बीटा. मेरी बेटी तुम्हारे आने से आने से बहुत खिल उठी है. वह भी तुम्हारे बिना रह नहीं सकती. तुम दोनों एक हो जाओ. ये मेरे दिल की भी इच्छा है. पर राज बीटा समस्या कुछ और है. तुम.. तुम खुद को भूल चुके हो. तुम अपने बारे में कुछ नहीं जानते. कभी न कभी तुम्हारी यादें वापिस आएँगी. तब फिर यहाँ रह नहीं सकोगे. तुम अपने पीछे नजाने क्या कुछ छोड़ के आये हो. तुम्हारे हाथ पर माँ लिखा है. ज़रूर तुम अपनी माँ से बहुत प्यार करते हो. यहाँ रह नहीं पाओगे. कैसे फिर ऐसे लड़के से मैं अपनी बेटी की शादी कर सकता हों. जो का नहीं है. जिसे एक दिन वापिस लौटना है.
राज सोच में पद गया. कुछ देर सोचता रहा फिर bola--baba मई नहीं जनता. मेरे कोई परिवार है भी या नहीं. अगर है तोह कोण कोण है. मैं कुछ भी नहीं जनता. मैं कुछ जनता हों तो बस इतना. मई मनोरमा को खो नहीं सकता. हाँ अगर कभी ऐसा हुआ तोह मैं वडा करता हों, मनोरमा को और आपको अपने साथ ले जाऊँगा.
बाबा-- नहीं बीटा. मैं अपनी बस्ती नहीं छोड़ सकता. मेरी आखरी सांस तक यहीं पूरी होगी. मैं जंगली हों. जंगल में पैदा हुआ. जंगल में hi मरूंगा. शहर गया तोह मैं सांस भी नहीं ले पाऊँगा. यहाँ सब मेरे हाँ. वहां तुम दोनों के शिव कोई नहीं होगा. मैं ऐसा नहीं कर सकता.
राज-- तोह फिर मैं मनोरमा को अपने साथ ले जाऊँगा. और आपसे मिलने आता रहूँगा.
बाबा की ऑंखें नाम हो गई-- मेरी एक hi बेटी है राज बीटा. मैं उसे खुद से दूर होते हुए भी तोह नहीं देख सकता..
राज परेशान हो गया. कैसे बाबा को मनाये-- बाबा अभी तोह मई कुछ नहीं जनता मैं तब क्या करूँगा. पर मुझे एक बात पर पूरा विश्वास है बाबा. याददाश्त जाने से पहले मैं कैसा था. नहीं जनता. पर एक बात ज़रूर जनता हों. मैं जिसे एक बार अपना बना लून, उसे छोड़ नहीं सकता. ये बात मेरे दिल में ऐसी है जो मुझे हर पल हर लम्हा महसूस होती रहती है बाबा. मुझे खुद से जुडी कोई चीज या इंसान बहुत प्यारा लगता है. यहाँ भी जो मुझसे प्यार करते हाँ. मेरे दिल में भी उनके लिए उतना hi प्यार है. जितना सबके दिल में मेरे लिए. बाबा मसला मेरे दिमाग का है दिल का नहीं. मैं कभी भी आपको निराश नहीं करूँगा. ज़रूर कुछ करूँगा.. जिससे आपको परेशानी नहीं बनेगी.
बाबा-- तुम्हारी याददाश्त लौट आती है. तुम यहाँ से चले जाते हो. अगर मैं अपनी बेटी का हाथ तुम्हारे हाथ में नहीं दूंगा तोह मैं ये बात भी जनता हों. मेरी बेटी उम्र भर के लिए दुखी हो जाएगी. वह भी तुमसे उतना hi प्यार करती है राज बीटा. जितना तुम उससे करने लगे. तुमसे अच्छा लड़का मुझे मेरी बेटी के लिए कोई और नहीं मिलेगा. सच कहूं तोह मुझे मेरी hi बस्ती में मेरी बेटी लायक कभी कोई नहीं दिखा. मेरी बेटी हीरा है राज बीटा. और तुम भी एक हीरे हो. तुझे एक नज़र देख कर hi मैं जान गया था. उम्र बीत चुकी है इंसानो के बीच रहते हुए. एक बेटी का बाप भी हों. कैसे नै सब समझ सकता.
राज ने बाबा के हाथ थाम लिए-- बाबा बहगवां पर भरोसा रखें. ज़रूर वह अच्छा hi करेगा..
बाबा-- ठीक है मैं बस्ती वळून से बात करके देखता हो. मैं कोई भी फ़ासिला अकेला नहीं ले सकता. सब एक साथ रहते हाँ. सबकी बात को जानना ज़रूरी है.
मनोरमा दरवाज़े पर कड़ी सब सुन रही थी. साड़ी बातें जान कर गुलाब के जैसे उसके गालों की लाली बढ़ गई थी..
बाबा उठ कर बस्ती वळून से मिलने चले गए तोह राज ने मुद कर मनोरमा को देखा. मनोरमा शर्मा राज को देखने लगी..
राज- मनोरमा तुम खुश होना..
मनोरमा शर्मा गयी थी. फिर भी राज की बात पर मस्ती करते हुए-- नहीं.. मैं खुश नहीं हों. एक आंख से तुम भंगे हो. नक् भी कुछ टेढ़ी है तुम्हारी. रंग के भी सांवले हो. मेरी जैसी गोरी चिति लड़की का तुमसे कोई जोड़ नहीं बनता.. मुझे नहीं करनी तुमसे शादी. जाओ बस्ती में कोई और अपने लायक ढूंढ लो. मेरे लिए तोह किसी राजकुमार को आना पड़ेगा..
राज-- हाहाहाहा.. राजकुमार.. वह भी एक जंगली बिल्ली के लिए.. जाओ जाओ. तुमसे तोह अच्छा है मई किसी गाढ़ी से शादी कर लूँ.
मनोरमा साडी शर्म भूल कर गर्म हो गयी.. भाग कर आई और राज की पीठ पर मुक्के मारने लगी.-- जाओ करलो किसी गाढ़ी से शादी.. मुझे भी तुमसे सुंदर लड़का मिल जायेगा. बड़ा आया हुँहहह..
राज और भी खुल कर हसने लगी. कुछ देर में मनोरमा राज के गाल को चुम कर अंदर भाग गयी..
राज-- सरे बदले लूंगा तुमसे.. बस एक बाद शादी हो लेने दो..
मनोरमा-- मेरा भी बड़ा उधर रहता है तुम्हारी तरफ.. मुझे भी तुमसे सभी उधर चुकता करने है. मैं भी उस दिन के इंतज़ार में हों.
राज-- हाहाहा.. और मैं उस दिन की रात के इंतज़ार में हों.
मनोरमा-- बेशरम.. फिर खिलखिला कर हस्ती हुई अंदर भाग गई.
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फलशबैक
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राज सुबह किचन में घुसा तोह चची और आराधना किचन में बिजी थी. बाकि सब सोइ पड़ी थी. किसी की छूट में दर्द और सूजन थी तोह दीपिका की गांड राज ने मार मार कर सुजा दी थी.. सुबह उठ कर राज ने देखा तोह तोह उसे अफ़सोस भी हुआ और हसी भी आई थी. फिर दीपिका को किश करके बाथरूम में घुस गया था..
अब राज किचन में घुसा तोह अपनी माँ को पीछे से जा कर बहन में भर लिए.
राज-- कैसे है मेरी जान.
आराधना ने चची को देखा और कुछ शर्मा गई-- मैं अच्छी हों राज जी..
चची-- हाँ अब तोह ये तुम्हरे लिए राज जी होंगे हाँ.
चची मज़े लेते हुए बोली.. राज ने पीछे से अपनी माँ को बहन में भरा था. तोह निचे से अपने लुंड को अपनी माँ की गांड पर नहीं लगाया था. आराधना को राज का ऐसा करना अच्छा लगा था..
राज ने साइड आराधना के गाल पर किश कर दी.. और एक हाथ बढ़ा कर चची के गाल पर फेर दिए था..
चची-- क्या बात है. आज बड़ा तमीज़ से पेश आ रहे हो.
चची की बात पर आराधना मुस्कुरा गई.
राज-- सोचा बाद में हमेशा hi आप सब की बजा बजा कर सुजनी है तोह इस बने नए रिलेशन में कुछ दिन आप सबको सम्मान और बहुत सा प्यार दे डॉन.
आराधना-- बड़ी अच्छी बात कहीं आपने राज.. मुझे भी ख़ुशी हुई आपकी ऐसी बात से.
पहले जब भी आपको मौका मिलता था तोह आप कहीं न कहीं हाथ लगा दिए करते थे. अब तोह मैं और सब पूरी की पूरी आपकी हो चुकी हाँ. आप हमारे साथ कुछ भी करने का हक़ प् चुके हाँ. अब तोह हम आपको रोक भी नहीं सकती. फिर भी आपने हमेशा पहले जैसे अंदाज़ में परेशान नहीं किया. एक नारी ऐसा hi प्यार और सम्मान तोह चाहती है अपने पति से..
राज ने अपनी माँ को घुमा दिए और माथे पर किश कर दिए.
राज-- अरे माँ आप तोह स्पेशल हो मेरे लिए. और सब भी स्पेशल हाँ मेरे लिए. आप सब ने मुझे बदल दिए है. वर्ण मुझे ऐसे ठंडा प्यार कभी हज़म नहीं करता था. अब होने लगा है. रेगुलर इसी हल में रहूँगा तोह परेशानी बनेगी मुझे. मुझे परेशानी बनेगी तोह फिर मैं सबको परेशान करूँगा.. इसलिए कुछ दिनों के मज़े मिले हाँ आप सबको तो कर लें मज़े..
आराधना ने भी राज के माथे पर दोनों गालों पर किश कर दी.
राज-- हमें छोट चाहिए भी नहीं. हम सब मस्ती भी करेंगे खुल कर प्यार भी.. क्यों दीदी.
चची-- हाँ क्यों नहीं. मुझे भी अब की नयी मिली ज़िन्दगी और स्टाइल बहुत पसंद आये हाँ. मैं भी कुछ सालो की बची ज़िन्दगी को पुरे मज़े से जीना चाहती हों.
"कोण कोण मज़े करना चाहती है."
देखा तोह दिशा थी.
आराधना ने सुना था. देखा नहीं था. वह राज से चुद कर सो गई थी. राज अपनी माँ की आँखों में प्रश्न देख कर दिशा को माँ के बारे में और माँ को दिशा के बारे में बताने लगा.
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प्रेजेंट
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राज-- बाबा मैं मनोरमा से शादी करना चाहता हों. कुछ दिनों बाद राज ने बाबा से अपने दिल की बात बोल दी.
बाबा-- मैं पहले से hi जान गया था राज बीटा. ऐसा hi कुछ मुझे सुनने को मिलने वाला है. मुझे अपनी बेटी की खुशियों से बढ़कर कुछ नहीं चाहिए राज बीटा. मेरी बेटी तुम्हारे आने से आने से बहुत खिल उठी है. वह भी तुम्हारे बिना रह नहीं सकती. तुम दोनों एक हो जाओ. ये मेरे दिल की भी इच्छा है. पर राज बीटा समस्या कुछ और है. तुम.. तुम खुद को भूल चुके हो. तुम अपने बारे में कुछ नहीं जानते. कभी न कभी तुम्हारी यादें वापिस आएँगी. तब फिर यहाँ रह नहीं सकोगे. तुम अपने पीछे नजाने क्या कुछ छोड़ के आये हो. तुम्हारे हाथ पर माँ लिखा है. ज़रूर तुम अपनी माँ से बहुत प्यार करते हो. यहाँ रह नहीं पाओगे. कैसे फिर ऐसे लड़के से मैं अपनी बेटी की शादी कर सकता हों. जो का नहीं है. जिसे एक दिन वापिस लौटना है.
राज सोच में पद गया. कुछ देर सोचता रहा फिर bola--baba मई नहीं जनता. मेरे कोई परिवार है भी या नहीं. अगर है तोह कोण कोण है. मैं कुछ भी नहीं जनता. मैं कुछ जनता हों तो बस इतना. मई मनोरमा को खो नहीं सकता. हाँ अगर कभी ऐसा हुआ तोह मैं वडा करता हों, मनोरमा को और आपको अपने साथ ले जाऊँगा.
बाबा-- नहीं बीटा. मैं अपनी बस्ती नहीं छोड़ सकता. मेरी आखरी सांस तक यहीं पूरी होगी. मैं जंगली हों. जंगल में पैदा हुआ. जंगल में hi मरूंगा. शहर गया तोह मैं सांस भी नहीं ले पाऊँगा. यहाँ सब मेरे हाँ. वहां तुम दोनों के शिव कोई नहीं होगा. मैं ऐसा नहीं कर सकता.
राज-- तोह फिर मैं मनोरमा को अपने साथ ले जाऊँगा. और आपसे मिलने आता रहूँगा.
बाबा की ऑंखें नाम हो गई-- मेरी एक hi बेटी है राज बीटा. मैं उसे खुद से दूर होते हुए भी तोह नहीं देख सकता..
राज परेशान हो गया. कैसे बाबा को मनाये-- बाबा अभी तोह मई कुछ नहीं जनता मैं तब क्या करूँगा. पर मुझे एक बात पर पूरा विश्वास है बाबा. याददाश्त जाने से पहले मैं कैसा था. नहीं जनता. पर एक बात ज़रूर जनता हों. मैं जिसे एक बार अपना बना लून, उसे छोड़ नहीं सकता. ये बात मेरे दिल में ऐसी है जो मुझे हर पल हर लम्हा महसूस होती रहती है बाबा. मुझे खुद से जुडी कोई चीज या इंसान बहुत प्यारा लगता है. यहाँ भी जो मुझसे प्यार करते हाँ. मेरे दिल में भी उनके लिए उतना hi प्यार है. जितना सबके दिल में मेरे लिए. बाबा मसला मेरे दिमाग का है दिल का नहीं. मैं कभी भी आपको निराश नहीं करूँगा. ज़रूर कुछ करूँगा.. जिससे आपको परेशानी नहीं बनेगी.
बाबा-- तुम्हारी याददाश्त लौट आती है. तुम यहाँ से चले जाते हो. अगर मैं अपनी बेटी का हाथ तुम्हारे हाथ में नहीं दूंगा तोह मैं ये बात भी जनता हों. मेरी बेटी उम्र भर के लिए दुखी हो जाएगी. वह भी तुमसे उतना hi प्यार करती है राज बीटा. जितना तुम उससे करने लगे. तुमसे अच्छा लड़का मुझे मेरी बेटी के लिए कोई और नहीं मिलेगा. सच कहूं तोह मुझे मेरी hi बस्ती में मेरी बेटी लायक कभी कोई नहीं दिखा. मेरी बेटी हीरा है राज बीटा. और तुम भी एक हीरे हो. तुझे एक नज़र देख कर hi मैं जान गया था. उम्र बीत चुकी है इंसानो के बीच रहते हुए. एक बेटी का बाप भी हों. कैसे नै सब समझ सकता.
राज ने बाबा के हाथ थाम लिए-- बाबा बहगवां पर भरोसा रखें. ज़रूर वह अच्छा hi करेगा..
बाबा-- ठीक है मैं बस्ती वळून से बात करके देखता हो. मैं कोई भी फ़ासिला अकेला नहीं ले सकता. सब एक साथ रहते हाँ. सबकी बात को जानना ज़रूरी है.
मनोरमा दरवाज़े पर कड़ी सब सुन रही थी. साड़ी बातें जान कर गुलाब के जैसे उसके गालों की लाली बढ़ गई थी..
बाबा उठ कर बस्ती वळून से मिलने चले गए तोह राज ने मुद कर मनोरमा को देखा. मनोरमा शर्मा राज को देखने लगी..
राज- मनोरमा तुम खुश होना..
मनोरमा शर्मा गयी थी. फिर भी राज की बात पर मस्ती करते हुए-- नहीं.. मैं खुश नहीं हों. एक आंख से तुम भंगे हो. नक् भी कुछ टेढ़ी है तुम्हारी. रंग के भी सांवले हो. मेरी जैसी गोरी चिति लड़की का तुमसे कोई जोड़ नहीं बनता.. मुझे नहीं करनी तुमसे शादी. जाओ बस्ती में कोई और अपने लायक ढूंढ लो. मेरे लिए तोह किसी राजकुमार को आना पड़ेगा..
राज-- हाहाहाहा.. राजकुमार.. वह भी एक जंगली बिल्ली के लिए.. जाओ जाओ. तुमसे तोह अच्छा है मई किसी गाढ़ी से शादी कर लूँ.
मनोरमा साडी शर्म भूल कर गर्म हो गयी.. भाग कर आई और राज की पीठ पर मुक्के मारने लगी.-- जाओ करलो किसी गाढ़ी से शादी.. मुझे भी तुमसे सुंदर लड़का मिल जायेगा. बड़ा आया हुँहहह..
राज और भी खुल कर हसने लगी. कुछ देर में मनोरमा राज के गाल को चुम कर अंदर भाग गयी..
राज-- सरे बदले लूंगा तुमसे.. बस एक बाद शादी हो लेने दो..
मनोरमा-- मेरा भी बड़ा उधर रहता है तुम्हारी तरफ.. मुझे भी तुमसे सभी उधर चुकता करने है. मैं भी उस दिन के इंतज़ार में हों.
राज-- हाहाहा.. और मैं उस दिन की रात के इंतज़ार में हों.
मनोरमा-- बेशरम.. फिर खिलखिला कर हस्ती हुई अंदर भाग गई.
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फलशबैक
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राज सुबह किचन में घुसा तोह चची और आराधना किचन में बिजी थी. बाकि सब सोइ पड़ी थी. किसी की छूट में दर्द और सूजन थी तोह दीपिका की गांड राज ने मार मार कर सुजा दी थी.. सुबह उठ कर राज ने देखा तोह तोह उसे अफ़सोस भी हुआ और हसी भी आई थी. फिर दीपिका को किश करके बाथरूम में घुस गया था..
अब राज किचन में घुसा तोह अपनी माँ को पीछे से जा कर बहन में भर लिए.
राज-- कैसे है मेरी जान.
आराधना ने चची को देखा और कुछ शर्मा गई-- मैं अच्छी हों राज जी..
चची-- हाँ अब तोह ये तुम्हरे लिए राज जी होंगे हाँ.
चची मज़े लेते हुए बोली.. राज ने पीछे से अपनी माँ को बहन में भरा था. तोह निचे से अपने लुंड को अपनी माँ की गांड पर नहीं लगाया था. आराधना को राज का ऐसा करना अच्छा लगा था..
राज ने साइड आराधना के गाल पर किश कर दी.. और एक हाथ बढ़ा कर चची के गाल पर फेर दिए था..
चची-- क्या बात है. आज बड़ा तमीज़ से पेश आ रहे हो.
चची की बात पर आराधना मुस्कुरा गई.
राज-- सोचा बाद में हमेशा hi आप सब की बजा बजा कर सुजनी है तोह इस बने नए रिलेशन में कुछ दिन आप सबको सम्मान और बहुत सा प्यार दे डॉन.
आराधना-- बड़ी अच्छी बात कहीं आपने राज.. मुझे भी ख़ुशी हुई आपकी ऐसी बात से.
पहले जब भी आपको मौका मिलता था तोह आप कहीं न कहीं हाथ लगा दिए करते थे. अब तोह मैं और सब पूरी की पूरी आपकी हो चुकी हाँ. आप हमारे साथ कुछ भी करने का हक़ प् चुके हाँ. अब तोह हम आपको रोक भी नहीं सकती. फिर भी आपने हमेशा पहले जैसे अंदाज़ में परेशान नहीं किया. एक नारी ऐसा hi प्यार और सम्मान तोह चाहती है अपने पति से..
राज ने अपनी माँ को घुमा दिए और माथे पर किश कर दिए.
राज-- अरे माँ आप तोह स्पेशल हो मेरे लिए. और सब भी स्पेशल हाँ मेरे लिए. आप सब ने मुझे बदल दिए है. वर्ण मुझे ऐसे ठंडा प्यार कभी हज़म नहीं करता था. अब होने लगा है. रेगुलर इसी हल में रहूँगा तोह परेशानी बनेगी मुझे. मुझे परेशानी बनेगी तोह फिर मैं सबको परेशान करूँगा.. इसलिए कुछ दिनों के मज़े मिले हाँ आप सबको तो कर लें मज़े..
आराधना ने भी राज के माथे पर दोनों गालों पर किश कर दी.
राज-- हमें छोट चाहिए भी नहीं. हम सब मस्ती भी करेंगे खुल कर प्यार भी.. क्यों दीदी.
चची-- हाँ क्यों नहीं. मुझे भी अब की नयी मिली ज़िन्दगी और स्टाइल बहुत पसंद आये हाँ. मैं भी कुछ सालो की बची ज़िन्दगी को पुरे मज़े से जीना चाहती हों.
"कोण कोण मज़े करना चाहती है."
देखा तोह दिशा थी.
आराधना ने सुना था. देखा नहीं था. वह राज से चुद कर सो गई थी. राज अपनी माँ की आँखों में प्रश्न देख कर दिशा को माँ के बारे में और माँ को दिशा के बारे में बताने लगा.