Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 7 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

राज खाना खा के वही कमरे में hi रहा. मौसी कुछ देर बाद राज के लिए चाय और कपडे ले आई.

राज-- चची ये

मौसी-- चाय तो हर कोई पिता है बीटा. और कपडे इसलिए ले हों, तुम्हारे पहले वाले कपडे बहुत ख़राब हाँ. चाय पि के इसे बदल लेना.

मौसी कपडे और चाय रख कर चली गई. राज हरामी पीछे से मौसी की गांड को देखते हुए सोचने लगा. मौसी कितनी ग्राम होगी अआप्की गांड. उफ़ कितने समय से मौसा का लुंड नहीं गया होगा आपकी गांड. गया भी होगा क नहीं. नहीं गया तोह फिर तोह मेरे डबल मज़े हो जायेंगे.

वही कॉलेज में इशिता गुमसुम सी थी. उसकी फ्रेंड्स उसे देख कर हैरान थी. इशिता ऐसी तोह कभी नहीं थी.

अब इशिता उसे क्या बताती. कल से उसकी हालत किसी है. साली छूट रिसना बंद hi नहीं हो रही.. अपनी सभी फ्रेंड्स में इशिता चुपचाप थी.

एक्ने उसके बूब्स को पकड़ कर दबाया तोह इशिता चीख पड़ी-- संजना कुत्तिया तुझे कितनी बार कहा है मेरे बूब्स मत दबाया कर..

संजना जो राज की मौसी की बेटी थी. वो इशिता की बेस्ट फ़िरेन्द भी थी. बड़ी चालू लड़की थी. अक्सर hi इशिता के बूब्स दबा दिए करती थी.

संजना-- क्या करूँ यार. तेरे बूब्स कसम से बहुत अट्रैक्टिव हाँ. बार बार मन होने लगता है इन्हे दबाने का.

दूसरी फ्रेंड्स भी है पड़ी.

इशिता-- तेरे भी तोह किसी से काम नहीं है कामिनी.. मैंने कभी दबा दिए न तोह--

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संजना-- हाय दबा ने. कितनी बार कहा है तुझे, दबा दिया कर. मुझे तोह मज़ा hi आयेगा न. देख यार मैं कितनी हॉट हों. मुझे और भी हॉट बना दे यार. कसम से बहुत मचल रही हों में..

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इशिता है पड़ी. पर उसकी छूट से दो बूंदें और ज़रूर टपक गई थी. राज के लुंड को देख कर उसकी बेचैनी बहुत बढ़ गई थी. पहले वो जो थोड़े से मज़े के लिए मचल रही थी. अब उसके अंदर का मौसम कुछ और hi डिमांड कर रहा था.

संजना कॉलेज से घर पोहंची तोह घर में कोई और नहीं लौटा था.

संजना सबसे पहले अपने कमरे में गयी. कपड़ चेंज किये और दादी के कमरे में जा पोहंची. दादी बीमार थी अक्सर hi लेती रहा करती थी.

मौसी के परिवार का परिचय

purnima----70..mahesh माँ

महेश मौसा--47

सुनैना मौसी-46

रुपाली..25

वैशाली.22

संजना.21

अखिल--20

संजना जितनी नटखट थी, उतना hi अपनी दादी से प्यार करती थी, उनकी केयर किया करती थी.

दादी-- तू लौट आयी मेरी बच्ची.

संजना-- हाँ दादी. आप किसी हाँ अब

दादी हास्के-- मई तोह अब आखरी सांस तक ऐसे hi रहने वाली हो संजना बेटी. अब उम्र भी तोह हो गई है न.

संजना -- ऐसा न कहा करें आप दादी. भगवन आपको मेरी उम्र भी लगा दे.. 100 साल आप और जियें

दादी-- अब तोह बस एक hi छह है मेरे दिल में संजना बेटी

संजना शोखी से-- आप हम सब की शादी होते देखना चाहती हाँ. हमारे बच्चू को अपनी गॉड में लेके प्यार करना चाहती हाँ. उन्हें चूमना चाहती हाँ. दादी आप रोज़ hi ये बात बोलती रहती हाँ. देखना भगवन आप की ये छह ज़रूर पूरी करेंगे.

दादी भी मुस्कुरा पड़ी-- और कर भी क्या सकती हों संजना बेटी. अब तोह बाकि की बची ज़िन्दगी इसी बिस्तर पर hi पूरी करनी है.

संजना-- दादी आप भी तोह हिम्मत नहीं करती.. डॉक्टर ने कितना कहा आप खुद से हिम्मत करें तोह आपकी बीमारी काम हो सकती है. आप ज़यादा से ज़यादा चला करें. हर टाइम लेटने से आपकी ताक़त और भी काम हो रही है दादी.

दादी-- क्या करूँ संजना बेटी. सच में मेरी हिम्मत नहीं होती. थोड़ा चलने के बाद hi थक जाती हों.

मौसी--- संजना बेटी तू नहीं समझा सकती अपनी दादी को. तुम्हारी दादी जितनी हिम्मत वाली हुआ करती थी, अब उतनी hi हिम्मत खो बैठी हाँ.

राज भी द्वार पे आ के सुनने लगा. वो अंदर आया और दादी के पेअर छू लिए.. दादी और संजना उसे देख कर हैरान हो गई. मौसी ने अभी दादी को भी नहीं बताया था. संजना तोह अभी अभी आई थी.

राज-- दादी आपकी खोई हिम्मत मई लौटा के दे सकता हों.

मौसी खुश हुई तोह संजना हैरान हो गई. दादी भी हैरान हुई.

दादी--- सुनैना बेटी कौन है ये लड़का. पहले तोह कभी नहीं देखा.

मौसी-- माँ जी मेने इसे काम पे रखा है. बहुत अच्छा लड़का है. घर का काम कर दिए करेगा

संजना राज को ऊपर से निचे तक देख रही थी. राज शलवार कमीज़ में विलेज बॉय hi दिख रहा था. पर बॉडी सहोदय से एक पहलवान. संजना राज को बड़े घोर से देख रही थी.

दादी-- बीटा तुम कोण हो कहाँ से आये हो. सूरत से तोह किसी भले घर के लगते हो. किसी गाओं से आये हो क्या.

संजना-- माँ ये ड्रेस तोह पापा का है न

मौसी-- हाँ उनका hi है. इसके पास कपडे नहीं थे तोह तेरे पापा के दे दिए पहनने को.

राज बीएड के करीब दादी के पास बेथ गया और दादी के पाऊँ दबाने लगा. राज के हथु में ताक़त थी तोह दादी को कुछ सुकून मिलने लगा. सुनैना या बच्चियां दबा दिए करती थी. घर का कोई मर्द उन्हें नहीं दबाता था. अब लड़कियों के हथु में ताक़त तोह होती नहीं. कैसे दादी को सुकून मिलता. राज की ताक़त के आगे दादी सुकून से होने लगी.

दादी खुश हो गई. राज सर झुका क्र दादी के पेअर दबाने लगा. मौसी ये देख कर और भी ज़यादा खुश हो गई थी. राज कितना अच्छा लड़का है, मौसी मैं में बोलने लगी. राज का ऐसा करना मौसी को बहुत पसंद आया था.

मौसी राज को दादी और संजना का बताने लगी और घर के दूसरे मेंबर्स के बारे में बताने लगी. राज तोह पहल से hi सब जनता था.

संजना उठ के चली गई. राज दादी और मौसी बातें करने लगे. राज से उसके घर के बारे में पूछने लगी. राज हरामी अपनी माँ और बहनो की अच्छी बातें दोनों को बताने लगा. बड़ी बेहेन की टूटी शादी को भी मिर्च मसाला लगा के बताने लगा. राज हरामी ऐसी एक्टिंग करने कर रहा था. सुनकर मौसी और दादी दोनों की आँखों में आंसू आ गए थे. दोनों राज के झूठे दर्द के आंसू बहाने लगी.

राज ने फिर दोनों को चुटकले सुनाने शुरू कर दिए.. दोनों हसने लगी.. दोनों कुछ मिंटो में hi राज की ऐसी दीवानी हुई, ऐसे लगने लगा अब राज के बिना वो रह नहीं पाएंगी.

राज-- चची गाओं में रहके बहुत कुछ जान गया हों. शहर में भी ऐसा आयल मिल जाता है, जिसकी मालिश से दादी एकदुम्म ठीक हो जाएँगी. माँ और चची भी मुझसे मालिश करवा कर घोड़ी के जैसी भगति रहती हाँ.

राज ने बड़े सीधे अंदाज़ में कहा. मौसी और दादी तोह सुनकर हैरान hi रह गई.

दादी-- तुम अब भी अपनी माँ और चची की मालिश करते हो

राज-- हानन दादी.. माँ और चची की अब भी में मालिश कर दिए करता हों. क्यों इसमें कुछ बुरा है क्या. माँ तो माँ होती है न दादी और चची भी तोह माँ के सम्मान hi होती हाँ न.

मौसी मैं में.. कितना सीधा लड़का है.. इसकी माँ और चची भोली तोह नहीं हो सकती. ज़रूर रघु बीटा hi बहुत अच्छा होगा. तभी तोह वो अब भी इससे मालिश कर लेती हाँ.

दादी मैं में--- पर में तोह नहीं नहीं करवा सकती इससे मालिश.. मालिश का काम तोह महिला hi महिला की कर सकती हाँ.

राज-- दादी मेरी मालिश से आप भी माँ और चची के जैसी भली चंगी हो जाएँगी. देखना सब आपको देख कर कीटने खुश होंगे.

दादी घबराई के-- नहीं.. नहीं रघु बीटा. में ऐसे hi ठीक हों.

मौसी जो राज को लेके नाना नानी के जैसे hi कुछ अपनापन फील करने लगी थी. और राज बहुत सीधा और प्यारा लड़का भी दिख रहा था.

मौसी-- माँ जी इतनी देर से रघु बीटा आपके पाऊँ दबा रहे हाँ. कितना फर्क महसूस कर प् रही हाँ आप. हमारे और रघु बेटे के दबाने में..

दादी -- बहुत ज़यादा सुनैना बेटी. ऐसे लगता है, जैसे मेरे अंदर ताक़त आने लगी हो. साडी थकन भी उत्तरी हुई लग रही है

मौसी-- तोह मेरा ख्याल है माँ जी. आपको रघु बेटे से मालिश करवा लेनी चाहिए.

दादी-- ये तुम क्या कह रही हो सुनैना.. दादी कुछ सीरियस होक बोली

मौसी-- रघु बीटा तुम जाओ अपने कमरे में. में अभी आती हों.

राज बहार चला गया तोह मौसी बोली-- माँ जी, आप आखरी सांस तक इसी बिस्तर पर hi पड़ी रहना चाहती हाँ क्या

दादी-- नहीं मेने ऐसा कब कहा. में hi क्या, कोई भी बीएड पर लेते लेते पूरी उम्र क्यों बिताया चाहेगा. पर मेरी तोह मज़बूरी है न.

मौसी-- कोई मज़बूरी नहीं है माँ जी. डॉक्टर ने भी कहा है. आप हम्मत करें तोह जल्द अच्छी भी हो सकती हाँ. रघु बेटे में ताक़त भी है और उसे सलीका भी है. आप करवा लें उससे मालिश.. मुझे पक्का यकीं है, दो चार दिन में hi आप बहुत अच्छी हो जाएँगी

दादी-- पर सुनैना बेटी में कैसे उसके सामने अपने कपडे

मौसी-- सरे उतरने की क्या ज़रूरत है माँ जी. ब्रा और चड्डी पहने रहे अआप. में भी कमरे में आपके साथ रहूंगी.

दादी- तुम भी... नहीं नहीं.. फिर तोह मुझे और भी ज़यादा शर्म आएगी. नहीं. नहीं में नहीं करवाने वाली कोई मालिश वालिश

मौसी-- वो तो अब आपको करवानी hi पड़ेगी माँ जी. में आपको ऐसे हमेशा बिस्तर पर पड़े नहीं देख सकती.. मौसी अटल फैसले से बोली तोह दादी मौसी को देखने लगी..

दादी मैं में--- अहह बिगड़े बेटे ने कभी भी मेरी बहु को सुख नहीं दिया. फिर भी सदा मुझे एक माँ बराबर hi सम्मान दिए है. अब भी मेरी चिंता में hi सब कर रही है.. चलो मान लेती हों इसकी बात. इसका दिल भी नहीं दुख सकती मैं. पहले hi बहुत दुखी है. तन से भी और मैं से भी. पर मैं इसके सामने मालिश नहीं करवाऊंगी. इतनी हिम्मत नहीं है. एक लड़के से मालिश करवाएं और मेरी बहु मुझे देखे

दादी-- तुम नहीं मानती तोह ठीक है. मैं करवा लेती हों मालिश.. पर तुम कमरे में नहीं रहूगी.

मौसी खिल उठी-- मुझे तोह बस आपको अच्छा देखना है. जैसे आपको सही लगे और मुझे रघु बेटे पर भी पुर पूरा विश्वास भी है.

मौसी ने जा के राज से कह दिए.. जाओ और आयल ले आओ.. राज भी चहक उठा और मौसी से पैसे लेके 2 घंटे में hi आयल लेके आ गया.

कई किसम के आयल को राज ने मिक्स कर दिए था. टोटका कोई था नहीं. बस राज तोह मज़े मरना चाहता था. और हरामी था पूरा का पूरा. जनता था मालिश करने से कोई भी भला चंगा हो जाता है. और मालिश के साथ किसी महिला को अगर लुंड भी मिल जाये तोह फिर उसके ठीक होने में देर नहीं रहती..

राज घर में दाखिल हुआ तोह शाम होने में 1 घंटा बाकि था और महेश अभी नहीं लौटा था. बाकि सब घर में थे.

राज घर पोहंचा तोह सब उसे ड्राइंग रूम में hi मिल गए. घर बड़ा था. दो मंज़िला था. निचे वाली मंज़िल पर च कमरे थे और चरों कमरे के बीच के बैठने की जगा थी. उसे hi ड्राइंग रूम का नाम भी दिए गया था.

रुपाली, वैशाली और संजना, अखिल ऊपर वाले कमरों में hi रहते थे. दादी, मौसी और मौसा निचे वाले कमरों में. अब राज भी निचे रहने वाला था.

सब राज को देखने लगे. मौसी, दादी और संजना राज से पहले hi मिल चुके थे. वैशाली, रुपाली और अखिल राज को देखने लगा.. राज हरामी से एक सीधा साधा लल्लू टाइप लड़का दिखाई देने लगा.

मौसी-- आ गए तुम रघु बीटा.. इनसे मिलो ये हाँ, रुपाली, वैशाली और अखिल.. और ये हाँ रघु आज से यही काम करेगा.

सभी मोडरें लाइफ जीने वाले थे. सभी राज को बड़े घोर से देखने लगा. अखिल कुछ ज़यादा hi धयान से देख रहा था.

राज कुछ कंफ्यूज होने की एक्टिंग करने लगा. सबको लगा, ऐसे देखते हुए रहे तोह कहीं गिर वीर न जाए. सा नोर्मल्ली राज को देखने लगे.
 
राज ने मौसी के घर आने की सोची थी तोह राज जनता था. सिमरन का कोई न कोई चमचा उसके पीछे होगा. वो उसे देख रहा होगा.

राज शहर से बहार जा कर उस चमके की नज़रों से ोजल होक दूसरी और निकल गया था. वही से बाइक को एक जगा छोड़ के मार्किट से लिए कपडे बदल कर, हुलिया बदल कर मौसी के घर क लिए निकल पड़ा था.

सिमरन अपने उसी चमचे पर खूब गरम हुई थी. राज के कही ग़ायब हो जाने पर वो कुछ चिंचित भी हो गई थी. वो जान नहीं पाई. राज कहा गया है. राज अपने मौसा के घर hi जायेगा. ये उसके मंद में नहीं था. राज ने उसे हवा भी नहीं लगने दी थी. बस इतना hi सिमरन से कहा था. महेश की बेटी उसे बहुत भाई थी. महेश के साथ रहते हुए उसके घर में घुस जाता तोह महेश की बेटी को छोड़ने में आसानी हो जाती. जो अब नहीं बन सकती थी. सिमरन महेश के घर को भूल गई और पुरे शहर में राज को ढूंढ़ने लगी. पर राज नहीं मिल प् रहा था. सिमरन को इस बात पर बड़ा ग़ुस्सा भी था.

क्यों था, ये समझ नहीं प् रही थी.

राज को देख कर, राज को जान कर सब उसे देखते रह गए.

अखिल चलता हुआ राज के सामने जा पोहंचा और नज़र भर कर राज को देखता हुआ राज से हाथ मिलाने लगा.

अखिल-- नीस तो मीट यू रघु

अखिल ने इंग्लिश में पूछा तोह राज स्टुपिड लोगों के जैसे उसका मोह देखता रह गया.

अखिल- ओह्ह माफ़ करना भाई में इंग्लिश में बोल गया... मेरा मतलब था. मुझे तुमसे मिलके अच्छा लगा..

अखिल को डाउट हुआ था, राज वो नहीं दिख दिख रहा है. पर राज हरामी था. ऐसे भाव दिए. अखिल समझ गया. राज पढ़ा लिखा नहीं है.

रुपाली और वैशाली भी आगे बढ़ी और राज hello हाय की.. पर हैंड शेक नहीं किया. बस राज को करीब से देखने आई थी. उन दोनों को भी राज की पर्सोनालित्य से कुछ अजीब लगा था.

राज दोनों के करीब आने से घबरा कर मौसी को देखने लगा.

मौसी-- क्या सब उसपर चढ़ गए हाँ. उसे दो दिन दो. अभी नया नया आया है शहर में. अदि होने में दो चार दिन लगने

रुपाली-- माँ हमें किसी नौकर की ज़रूरत तो थी नहीं. फिर आपने क्यों रख लिए इसे

वैशाली-- हाँ माँ. घर में काम hi कितना होता है. सफाई के लिए माइड आ जाती है न.

संजना-- हाँ और दादी की सेवा के लिए भी हमने चार चार नर्स राखी हुई हाँ न.

संजना ने जले कटे अंदाज़ में कहा तोह मौसी है पड़ी.

अखिल-- इसका दादी से क्या वास्ता

मौसी-- जा के देखो कैसे दादी कितनी फ्रेश दिख रही है..

रुपाली-- हाँ माँ मेने देखा था. पर रघु का दादी के क्या कनेक्शन.. कुछ समझ नहीं आया माँ

संजना-- रघु ने दादी की बड़ी सेवा करि है. दादी के पाऊँ दबाये हाँ.

अखिल-- ओह्ह तोह रघु बड़े काम का लड़का है.

राज बस शरीफ बच्चू के तरह hi खड़ा रहा.

राज से किसी ने कोई और काम नहीं लिया. डिनर से कुछ देर पहले महेश भी घर आ गए. तब राज अपने कमरे में था.

डिनर हुआ, राज कमरा से नहीं निकला.. मौसी की महेश से ज़्यादा बनती नहीं थी, उन्हों ने रघु का नहीं बताया. किसी और ने भी नहीं बताया. सब अपनी लाइफ में मस्त थे. राज की पहले दिन छूट हो गई थी.

डिनर के बाद मौसी ने राज को कमरे में खाना ला के दिया. राज ने वही कमरे में रहते हुए खाना खाया और पड़ा रहा खटिया पर.

रत के 10 बजे मौसी राज के पास आई.

मौसी-- रघु बीटा तुम माँ जी के कमरे में जा के उनकी मालिश कर सकते हो.

राज-- जी चची जी.. राज ने अभी भी मौसी को मालिकान नहीं कहा था. मौसी ने भी ज़्यादा भाव नहीं खाया था. मौसी को मालिकान कहलवाने की आदत भी नहीं थी. राज के चची कहने पे उन्हें कोई ऐतराज़ नहीं हुआ.

मौसी चली गई तोह राज हरामी आयल की बोतल की उठा के दादी के कमरे में घुस गया. दादी के शिव कोई और कमरे में नहीं था. अखिल बहार निकल गया था. बाकि सब अपने अपने कमरों में जा घुसी थी.

राज ने दूर को अंदर से बंद कर दिए.

दादी राज को देख कर कुछ परेशान हो उठी थी. जो भी था. किसी गैर के सामने ब्रा चड्डी में कैसे आ सकती थी वह.. इसलिए उनके चेहरे पर कुछ पसीना आने लगा. राज दूर बंद समय hi अपने होंटो पर आई मुस्कान पर कण्ट्रोल कर गया था. मुद कर दादी को देखा तोह फिरसे एक सीधा साधा शरीफ बच्चा बन गया था.

दादी को कुछ हौसला मिला. राज का सर जो निचे था.

राज दादी के पास पोहंचा और बोलै-- दादी आप को ज़रूर शर्म आएगी. आप ऐसा करें. अपने ऊपर कोई चादर ले लें. और मेरी आँखों पर पट्टी बांध दें. राज ने बोलै तोह दादी का दर और भी काम हो गया. राज की बात पर वो खुश भी हो गई. जो भी था, राज बड़ा सीधा और अच्छा लड़का था. दादी का मैं खुश हुआ तो दादी बोल पड़ी

दादी-- रघु बीटा तू भी तो मेरा पोता hi है न. तुझसे कैसी शर्म.. राज ने सर नहीं उठाया और ख़ुशी के भाव चेहरे पर दिखा दिए. दादी अपने कमीज़ और शलवार खोलने लगी. अब इस उम्र में वो यही पहन सकती थी. आदत भी अब इसकी hi रह गई थी.

दादी ब्रा चड्डी में उलटी लेट गई-- रघु बीटा शरू करो

राज ने सर उठा के देखा तोह दादी की बूढ़े शरीर को देख के मैं में बोलै. दादी आप मस्त नहीं रही तोह क्या हुआ. मेरा लुंड फिर भी आपकी छूट में घुस जायेगा. मुझे मज़ा न भी आया तोह आपको मज़ा ज़रूर आएगा. आपके मज़े के बाद hi तोह मौसी भी मेरे जाल में फस जाएँगी. और दूसरी सब भी. एक hi दिन के कमल से मेरे बहुत से काम बन जायेंगे दादी..

दादी सिंगल बीएड पर थी. राज विलेज बॉय बांके आया था तोह वो बिना अंडरवियर के था. गाओं वाले क्या जाने अंडरवियर के बारे में..

राज अपने लुंड को मसल के बीएड पर चढ़ गया और दादी के पैरों पर आयल गिराने लगा.

राज-- देखना दादी कुछ मिंटो में hi आज को लगेगा, जैसे आप जवान हो गई हाँ. ऐसे hi करंट आपके अंदर दौड़ने लगेगा. दादी है पड़ी-- रघु बीटा मुझे जवान नहीं बनना है. मई तोह बस इतना चाहती हों. चलती फिरती रहूं. इससे ज़यादा नहीं.

राज--- अरे दादी आप बस देखती जाइये. देखना कैसे आपको घोड़ी के जैसे दौड़ती हुई सबको दिखेंगी..

दादी हस्ती हुई-- मई दौड़ी न. तोह फिर ऐसी गिरेंगी. दो चार हड्डियां ज़रूर टूट जाएँगी मेरी..

राज -- ये नहीं हो सकता दादी. बस आप देखती जाएँ.. राज तखनो से लेकर दादी की जंगों के जोड़ कर अपने दोनों हाथ लेजा रहा था. सर्दी के कारण पहले दादी को राज के हाथ ठन्डे लगे थे. पर अब आयल ने बहुत हीट छोड़नी शुरू कर दी थी. दादी का शरीर खुलने लगा था. राज ज़ोर लगा कर मालिश कर रहा था. दादी को टांगों में दर्द भी हो रहा था. राज के ज़ोर से दबाने की वजा से.. दादी कभी कबि कराह भी देती थी. पर राज नहीं रुका था.

राज लगा रहा.. दादी को दर्द के साथ सुकून बी मिलने लगा.. दादी बोली-- राज बीटा सच में तेरे हथु में जादू है. मुझे बड़ा फर्क अभी से hi दिखने लगा है. ऐसा लग रहा है जैसे पैरो में जान पड़ती जा रही हो.

राज-- अभी तोह कुछ भी नहीं दादी. बस मालिश पूरी हो जाने दें. फिर बताना मुझे..

टांगों की मालिश अच्छे से करने के बाद राज दादी की पीठ पर आया. इस समय राज दादी की जंगो पर था और दोनों घुटनो फोल्ड करके साइड में किये हुए थे.

राज दादी की पीठ पर आयल गिराने लगा. अब दादी मस्त होती जा रही थी. बूढ़े शरीर में गर्मी बढ़ने लगी थी. दादी को अपनी जंगों के जोड़ पर, छूट के करीब भी राज के हाथ लगने से न तो बुरा लगा था. न hi दादी के मैं में कुछ और गया था. न hi दादी ने खड़ में कहीं कोई सनसनी महसूस कृ थी. दादी एक ठंडी औरत थी..

राज दादी को गरम करके दादी को छोड़ने के मूड में था. और राज ऐसा करने में ज़रूर सफल रहता. राज कुछ भी करे और नाकाम रहे. अब तक तोह ऐसा नहीं हो पाया था.

पीठ की मालिश राज बड़े धयान से कर रहा था. दादी की दोनों टांगो से लगने से खुद को बचाया हुआ था. दादी जानती थी. राज किस पोजीशन में है. फिर भी दादी ने कुछ नहीं कहा. दादी तोह राज की मालिश से मस्त होती जा रही थी.

पीठ कमर, कमर से निचे चड्डी तक राज दादी की मालिश कर रहा था.

राज-- दादी केसा लग है अब आपको

दादी मस्त मूड में-- बहुत अच्छा रघु बीटा

राज का हाथ दादी की ब्रा पर कई बार लगा था. पर राज कुछ नहीं बोलै था. अब वो बोलै

राज-- दादी इसकी खोल खोल डॉन.

दादी कुछ नहीं बोली--

राज-- दादी ऐसे पीठ की मालिश अच्छे से होगी.

dadi--hmmmmm

दादी ने हम्म्म बोल के राज को परमिशन दे दी. राज ने हुक खोल दी. ब्रा को खेंच कर ऊपर कर दिया. फिर राज दोनों हथु से ऊपर से लेकर निचे गांड की लाइन तक हाथ चलने लगा. दादी के पुरे शरीर में अब चिंगारियां सी दौड़ने लगी थी. राज सख्ती से कुछ स्पीड से मालिश कर रहा था. बैकबोन को दोनों हथु के अंगूठे मिला कर खूब रगड़ रहा था. दादी ऐसा होने से बहुत ज़यादा अच्छा फील करने लगी. दादी और भी मस्त होने लगी. सुरूर का भी नशा होता है. दादी भी नशे में होने लगी. राज मालिश करते करते दोनों घुटनो को दादी की टांगो के साथ लगा गया. राज का लुंड खड़ा हो चूका था. राज ने अपने लुंड को दादी की गांड पर अब तक लगने नहीं दिया था.

पर अब टाइम आ गया था. दादी को अब कुछ अंदाज़ा नहीं होने वाला था. होता भी तोह राज कहाँ अब दादी की सुनने वाला था. उसे तो आज की hi रत दादी को छोड़ कर इस घर में अपनी एंट्री पक्की करनी थी. कल को कोई मसला न रहे.

राज अपने दोनों अंगूठे से दादी की चड्डी को पीछे करके गांड की दरार में भी चलने लगा था. दादी ने कुछ नहीं बोलै. दोनों हाथ ऊपर लेजाते हुए राज अपने दोनों हथु की उँगलियों से साइड से दादी के चुके भी रगड़ देता था. जो उलटे लेटने से साइड को निकले हुए थे.

गांड की दरार तक तोह दादी सहन करती रही. चुचु पर भी दादी सहन कर गई. पर जब राज का खड़ा लुंड अपनी गांड पर दादी ने महसूस किया तोह दादी को जैसे होश आ गया.

दादी-- रघु बीटा कुछ ऊपर होक मालिश करो न.

राज-- क्या हुआ दादी. ऊपर hi तोह हों.. राज अनजान बनते हुए बोलै

दादी-- नहीं तुम पीछे से कुछ ऊपर हो जाओ.. दादी सुरूर के नशे में थी तोह उनकी आवाज़ भी कुछ लड़खड़ा रही थी. मालिश से शरीर खुलने लगा था तोह दादी पर खुमारी छाने लगी थी. बरसों बाद तोह पुरे शरीर पर मालिश करवा रही थी दादी. ऊपर से मरदाना स्पर्श का नशा भी बहुत होता है. दादी कैसे न बेखुद होती.

पर लुंड की चुभन पर वो ज़रूर राज को टोक गई थी.

राज-- दादी मुझे कुछ समझ नहीं आ रही.. आप क्या कह रही हाँ.

दादी भी खुल के नहीं बोल सकीय.. कीज़ राज को कहती, तेरे लुंड मेरी गांड पर चुभ रहा है. दादी ने दो बार और ऐसे hi कहा तोह राज भोला बना रहा.. दादी ने फिर कुछ नहीं कहा

कहा तोह बस इतना hi.. चलो तुम जल्दी से अपना काम ख़तम करके अपने कमरे में जाओ.. मुझे भी नींद आने लगी है.

राज-- अच्छा है न, दादी आप सो जाएँ. में अपनी मालिश करके चला जाऊँगा.

दादी-- नहीं तेरे जाने के बाद मुझे कपडे भी पहनने हाँ. तुम जल्दी से मालिश पूरी करो

राज-- दादी अभी तोह सामने वाले हिस्से की भी मालिश रहती है न.

दादी-- वो कल कर लेना. आज बैक की करलो.. दादी भी अब राज से जान छुड़ाना चाहती थी. राज कैसे दादी की जान छोड़ देता.. वो तोह अभी के अभी दादी को छोड़ने के मूड में था..

राज दादी की चड्डी पर और अपने लुंड पर धयान देने लगा. राज का लुंड बहुत ज़यादा हार्ड हो चूका था. राज ऐसे तोह नहीं सो सकता था आज की रत. मुठ की आदत भी नहीं थी उसे. राज दादी की चड्डी को घूरने लगा.

राज ने अपनी कमीज़ का अगला पल्ला साइड क्र दिए. अपनी शलवार का नाडा खोल कर लुंड को भी आज़ाद कर दिए. अब राज का लुंड दादी की गांड से कुछ hi ऊपर था.

राज ने दादी की मालिश ज़ोर ज़ोर से करने लगा. कमर की और गांड की दरार की hi मालिश कर रहा था. दादी राज की इस स्पीड पर और भी मस्त होने लगी. दादी को अपने शरीर से अंगारे से निकलते हुए महसूस होने लगे. दादी आनंद में डूबती चली गई. और राज थोड़ी थोड़ी करके दादी की चड्डी निचे सरकता चला गया. दादी को अंदर hi नहीं हो सका..

जब चड्डी चुत्तड़ो से निचे हुई तो राज बोलै-- दादी अब केसा लग रहा है..

दादी-- आह्हः रघु बीटा.. तुम जादूगर हो.. ऐसा सुकून मुझे कभी नहीं मिला

राज दादी के चुत्तड़ो पर आयल गिराने लगा तोह दादी को अंदाज़ा हुआ क उनकी चड्डी निचे है तोह वो चंक गई.

दादी-- रघु बीटा ये क्या किया तुमने..

राज-- क्या हुआ दादी

दादी-- उसे क्यों निचे कर दिए तुमने.. उसे ऊपर करो और अब जाओ यहाँ से..

राज-- नहीं दादी यही तोह असल चीज हाँ दादी. क्या आपको बैठने में परेशानी नहीं होती.

दादी-- होती है पर

राज-- इनकी मालिश अचे से होगी तोह आपको बैठने में परेशानी नहीं बनेगी.

दादी-- मुझे नहीं करवानी वहां पर मालिश.. उसे ऊपर करो

राज ने दादी की नहीं सुनी और दोनों चुत्तड़ो पर और भी आयल गिरा कर ज़ोर ज़ोर से मालिश करने लगा

दादी-- आठ रघु बीटा.. मुझे नहीं करवानी वहां मालिश.. राज दादी के चुत्तड़ खेंच भी रहा था. दादी की गांड और छूट राज को दिख रही थी. दादी नशे में न होती तोह कभी राज को इस हद तक न जाने देती.. दादी के शरीर के हीट hi इतनी निकल रही थी. जितनी ज़यादा हीट निकल रही थी. उतना hi दादी को आनंद प्राप्त भी हो रहा था.

जंगों के जोड़ो की भी अच्छे से मालिश करने के बाद. अच्छे से दादी की छूट का व्यू देख कर राज ने अपने लुंड को एकदुम्म से hi दादी की छूट पर सेट किया और हल्का सा धक्का मार कर अपने लुंड को थोड़ा सा दादी की छूट में भी फंसा दिए.

आगे झुक कर दादी के मोह पर हाथ भी रख दिए. और दूसरे हाथ से दादी की चड्डी भी कुछ और निचे कर दी..

दादी लुंड घुसने से और राज के मोह बंद कर देने से हड़बड़ा गई. पर अब राज नहीं रुकने वाला था. राज दादी के मोह पर हाथ रखे हुए hi दादी की सूखी छूट में लुंड को थोड़ा थोड़ा हिलने लगा. लुंड पर भी और छूट पर भी कुछ आयल लग गया था. छूट नहीं थी भोसड़ा थी. लुंड जिंटा बड़ा भी होता, इस आगे में तोह वो दर्द देता पर घुसता hi चला जाता

राज ने भी अपने लुंड को 3ंच राज दादी की छूट में घुसा कर अंदर बहार करना शरू कर दिए. दादी राज के निचे दबी हुई पूरी जी जान से मचल रही थी. राज दादी का रपे क्र रहा था. दादी तोह ये सोच कर भी सदमे में हो गई थी. मालिश के बहाने कैसे राज उसकी बजा रहा था.

दादी मचलती रही और राज अपने थोड़े से hi लुंड से दादी को छोड़ता रहा.

आखरी कब तक दादी राज के मोटा लुंड को अपनी में सहन कर सकती थी... बरसों की बंजर ज़मीन के सूखे छेड़ो के अंदर से पानी ने रिसना शुरू कर दिए. दादी की छूट गीली होने लगी.. राज को महसूस हुआ तोह राज ने धक्का मार मर दादी की छूट में 2इंच लुंड और भी घुसा दिए. दादी की छूट अंदर से टाइट थी. दर्द हुआ तोह उम्र की आखरी स्टेज पर भी दादी को छूट के दर्द के कारण आंसू आने लगे.

दादी को सदमा भी था. अपने hi घर में चुद गई थी. राज जितना सीधा नज़र आता था. उसकी बहु को राज़ी करके मालिश के बहाने उसे छोड़ गया था. दादी ने कभी भी अपने पति के शिव कसी के साथ ऐसा सब नहीं किया था. दादी को ये सोच भी बहुत दुःख हो रहा था.

पर लुंड की रेगुलर सर्विस ने दादी को मज़ा भी देना शुरू क्र दिए.

राज ने देखा दादी अब मस्त हो गई हाँ तो राज ने दादी के मोह से हाथ हटा दिए. दादी लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

दादी रट हुए--- क्यों किया तुमने ऐसा.. तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आई. मुझे दादी कह कह के मेरे साथ ये सब कर गए. मुझे जान से मार देते. पर ऐसा न करते..

राज-- दादी आपको बुरा लग रहा है.

दादी-- बुरा-- कितना बड़ा पाप करवा दिए तुमने मुझसे..

राज-- मज़ा ा रहा है क नहीं

दादी-- मझे मज़ा क्यों आएगा

राज-- तो फिर आपकी छूट में पानी क्यों आने लगा है दादी. क्यों आपकी छूट मेरे लुंड को ख़ुशी ख़ुशी अंदर ले रही है. आपको मज़ा आ रहा है, तभी तोह आपकी छूट रिसने लगी है. बोलेन न दादी कितना मज़ा आ रहा है आपको.

दादी दुःख में थी. सदमे में थी. पर बरसो बाद चुदाई का मज़ा भी उन्हें बिना मर्ज़ी के मिल रहा था. दादी चुप हो गई.

राज-- मुझे पता है दादी. आपको भी मज़ा आ रहा है.

दादी-- नहीं मुझे मज़ा नहीं ा रहा है.

राज-- चलें ठीक है दादी.. अगले 5 मिंट में अगर आप झाड़ गई तोह में समझ लूंगा आपको मज़ा आ रहा है. आप नहीं झड़ी तोह मैं समझ लूंगा, आपको मज़ा नहीं आ रहा..

दादी मैं में.. कमीने इस काम में मैं न भी हो तोह भी मज़ा आता hi आता है. हे भगवन ये क्या कर दिए इस लड़के ने मेरे साथ.. आह्ह्ह्ह मुझ बूढी को भी इस उम्र में क्यों मज़ा आने लगा.. माआआआआ.. आह्ह्ह्ह सुनैना बेटी आ के मुझे बचा ले..

राज आप स्पीड से अपने लुंड को दादी की छूट में अंदर बहार कर रहा था. दादी अब राज को बोल नहीं रही थी. दादी राज को अब रोक भी नहीं सकती थी. राज के निचे जो दबी हुई. शोर करती तोह इस उम्र में रपे का ढंढोरा भी नहीं पीट सकती थी. कैसे सबकी नज़रों का वो सामना कर सकेगी.

अगले पांच मिनट में दादी की छूट की राज ताबड़ तोड़ चुदाई करता रहा, दादी की छूट पानी पानी हो चुकी थी. दादी भी न चाहते हुए मस्त होने लगी थी. वह भी राज के लुंड की अपनी छूट में रगड़ पर मदहोश हो चुकी थी.

राज ने देखा दादी अब झड़ने वाली हाँ. दादी अब अपने होश में नहीं हाँ तोह राज झट से उठ बैठा और अपने लुंड को दादी की छूट से निकल कर दादी को पलट दिया. दादी नशीली आँखों से राज को देखने लगी. वो कुछ बोलती.. उससे पहली hi राज ने दादी की चड्डी पकड़ कर पूरी hi दादी के परिजन से निकल दी और दादी के पेअर खोल कर लुंड को पानी पानी हो चुकी छूट पर सेट करते हुए धक्का मार दिए.. लुंड 5इंच तक अंदर घुसता चला गया. दादी को एक बार ग़ुस्सा भी आया. राज सामने जो आ गया था. पर नशा बढ़कर था.

राज दादी की ब्रा को ऊपर करके दादी के निप्पल को मोह में भर कर चूसने लगा. साथ hi अपने लुंड को भी दादी की छूट में अंदर बाहर करने लगा.

दादी ख़ामोशी से राज से छोड़ने लगी.

कुछ देर में दादी झाड़ गई... पर राज नहीं रुका. राज ने धक्का मार कर पूरा लुंड hi दादी की छूट में घुसा दिए. दादी की छूट गीली थी. पर अंदर से तंग थी. इतना बड़ा लुंड नहीं था दादी के पति का. दादी को दर्द हुआ वो ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कर गई.. राज स्माइल करने लगा. दादी अपनी सांसो को बहाल करने लगी.

राज पुरे पुरे लुंड से दादी को छोड़ने लगा.

कुछ देर में दादी रिलैक्स हुई तोह अपनी छूट में अब राज के लुंड को पूरा पूरा महसूस करते हुए बोली..

दादी-- कोण हो तुम.. तुम इस घर में कैसे आये.. ज़रूर तुम वो नहीं हो जो दीखते हो. दादी अब होश में थी. सुरूर में भी थी.

राज-- पहले आप बताएं, आपको मज़ा आया न.

दादी ग़ुस्से से बोली-- जो कहा है वो बताओ.. वर्ण में शोर मचा दूंगी

राज-- हाहाहा दादी क्यों बच्चू जैसी बात करती हाँ. आपकी छूट का पानी देख कर सब समझ जायेंगे अपने अपनी मर्ज़ी से मेरा लुंड लिया है. अब भी तो ले hi रही हाँ न.

दादी -- बड़े हरामी हो तुम

राज-- हर्मियो का भी बाप हों दादी..

दादी-- तो बोलो किस मकसद से इस घर में घुसे थे.

राज-- आपकी बहु को छोड़ने के लिए..

दादी-- ये क्या बकवास कर रहे हो तुम.. दादी को ग़ुस्सा आ गया.

राज---- जो काम आपका बीटा नहीं कर प् रहा, वो मुझे hi करना पड़ेगा न. आप नहीं जानती क्या अपने बेटे के बारे में. साडी दुन्या जानती है. वो बहार मिलने वाली हर नयी छूट में लुंड घुसाने के लिए पागल रहता है. पर घर में अपनी hi पत्नी की छूट उसे दिखाई नहीं देती.

दादी राज की ऐसी गन्दी बातें सुनके शॉकेड रह गई. वो मोह खोल के राज को देखने लगी.

राज रुका नहीं था. पुरे पुरे लुंड से दादी को छोड़ भी रहा था.

दादी-- तुझे ये सब किसने बताया

राज-- पहले मुझे ये बताएं. क्या आप को अपनी बहु पर तरस नहीं आता.

दादी सुनैना को सोच के दुखी हो गई.. बहुत दिल दुखता है मेरा. मेरा बीटा उसे कभी भी खुश नहीं रख पाया. फिर भी साडी उम्र उसने मेरी सेवा की है. पर मई उसके लिए कुछ नहीं कर पाई

राज-- में हों न आपके दुःख को काम करने वला. में छोडूंगा न आपकी बहु को.. उसके दर्द को और आपके दर्द को काम क्र दूंगा.. आप टेंशन न लें दादी

दादी-- तू उसे कुछ मत कहना. वो ऐसे नहीं है. वो बहुत शरीफ है.

राज- हाहाहा दादी शरीफ तो आप भी हाँ न. आप भी देखो अब पुरे होश में हाँ.. फिर भी कितनी देर से छोड़ रहा हों आपको. झड़ने के बाद एक बार भी आपने नहीं कहा हटो मेरे ऊपर से..

दादी राज की बात पर शर्मिंदा हो गई थी. ये सच था. दादी को पहले दुःख अफ़सोस हुआ था. अब भी कुछ कुछ था. पर जितनी देर से राज छोड़ रहा था. दादी को बहुत मज़ा आ रहा था,. इतनी देर तक दादी ने कभी लुंड लिया भी तोह नहीं था. उअप्र से राज ने दादी की मालिश करके भी दादी को मस्त क्र दिए था.

राज-- दादी आप क्यों सर्मिन्दा हो रही हाँ. मेने ऐसे hi कहा था. वैसे एक बात तो बताएं

दादी-- क्याआ

राज-- मेरा लुंड सच में कमाल का है ना..

दादी कच्ची होक मोह साइड कर गई. दादी शर्मा गई थी.

राज-- दादी आप चाहती हाँ आपकी बहु हमेशा खुश रहे.

dadi--haan रघु बीटा

राज-- तोह उसके लिए ज़रूरी है न, उनकी ज़िंदगी के सरे दुःख ख़तम हो जाएँ.

दादी-- ये तो मेरी सबसे बड़ी परेशानी है बीटा

राज-- आपने कभी उनसे ये नहीं कहा कह वो अपने माँ बाप से मिलने चली जाया करें

दादी-- मैं तोह थक गई कह कह के रघु बीटा. पर वो मेरी सुनती hi नहीं. एक मिंट तुम्हे कैसे पता, वो अपने माता पिता से नहीं मिलती..

राज हरामी स्माइल से-- क्यों की मैं नाना नानी के पास कुछ दिन रह के आया हों. अब मौसी को नाना नानी के साथ हमेशा के लिए जोड़ने आया हों

दादी को फिरसे झटका लगा था.

दादी-- नाना नानी, मौसी... तुम कोण हो, में तोह सबको जानती हों.. तुम्हे कभी नहीं देखा मेने.. तुम archana(chhoti मौसी) के बेटे तोह नहीं हो.. फिर क्यों सुनैना को मौसी बोल रहे हो.

राज दादी को छोड़ते हुए स्माइल करता रहा. पर दादी को कुछ समझ नहीं आई.

राज-- जानना चाहती हाँ आप..

दादी-- हाँ

राज-- तो उसके लिए आपको मेरा लुंड अपनी गांड में लेना होगा. दादी पजल होगी.. दादी मोह साइड कर गई. राज बड़ा हरामी था. एक तोह दादी को ज़बरदस्ती छोड़ रहा था. दूसरा वह दादी के साथ मस्ती भी कर रहा था.

राज-- चलें गांड में नहीं लेना तोह मोह में लेके थोड़ा सा चूस दें..

दादी राज को देखे बिना hi बोली-- रघु तुम कैसे लड़के हो. एक तो ज़बरदस्ती मेरे साथ इतना सब कर गए. ऊपर से ऐसी बातें

राज-- मई ऐसा hi हों दादी. ऐसा न होता तोह आपको इतने बरसों बाद चैन कहाँ से मिलता. आप तोह फिरसे चुदाई का सुख लिए बिना hi इस दुन्या से चली जाती.

दादी कुछ नहीं बोली. राज बेशरम था. पर वो नहीं

राज झुका और दादी के होंटो पर किस कर दी. दादी शॉक होक राज को देखने लगी. राज हसने लगा.

दादी-- बस करो रघु में अब थक गई हों

राज-- जानना नहीं है दादी में कोण हों

दादी-- तुम बताओ तो पता चलेगा.. तुम तो बातें बदल करने लगते हो.

राज-- आराधना का नाम सुना है कभी

दादी सोचने लग पड़ी.. फिर झटके से राज के चेहरे को पकड़ कर देखने लगी.

दादी-- तुम आराधना के बेटे हो. जो घर से भाग गई थी.

राज-- हाँ मैं आराधना का hi बीटा हों. और अब यहाँ सब को मिलाने आया हों.

दादी ढीली पद गई. दादी की ऑंखें नाम होने लगी.

दादी-- तेरी माँ ने कोई गलती नहीं करि थी रघु बीटा. इतनी खुशियां तोह हम नारी की होती hi हाँ. तेरे नाना बड़े पत्थर दिल थे. जो आराधना को भागना पड़ा

राज-- आप बी जानती थी मेरी माँ को.

दादी-- हाँ रघु बीटा. मेरे पति तेरे नाना के दोस्त भी थे. इसी लिए हमारा आना जाना रहता था. आराधना बहुत अच्छी लड़की थी. मुझसे भी बड़ा प्यार करती थी. पर किस्मत ने सब उजाड़ कर रख दिए.

दादी आंसू बहाने लगी. राज ने दादी को छोड़ने की स्पीड बढ़ा दी. दादी चुदाई के मज़े लेते हुए दुःख से, ख़ुशी से आंसू बहाने लगी. उनकी छूट भी सहन नहीं कर पाई और दूसरी बार आंसू बहाने लगी.

दादी की आँखों की नमी तोह नहीं गई. पर झड़ने के कारण प्राप्त होने वाले आनंद के मज़े लेने लगी.

राज ने लुंड निकला और दादी के बराबर ले गया.

कुछ देर में दादी रिलैक्स हुई तोह राज को साइड देख कर राज को लुंड को देखने लगी. राज का लुंड देख कर वो मोह पर हाथ रख गई.

दादी-- इतना बड़ा.. इतनी देर से ये मेरे अंदर था..

राज ने दादी के बड़े बड़े चुके पकड़ कर मसल दिए तोह दादी ने राज के हाथ को झटक दिए.

दादी-- अभी मेरी शर्म गई नहीं है रघु बीटा. ऐसा न करो

राज-- क्यों न करू.. दो बार तो छूट का पानी निकलवा चुकी हाँ आप दादी.. अब आप को भी बेशरम बन जाना चाहिए..

दादी-- ज़यादा बकवास की ज़रूरत नहीं है

राज-- बकवास तो अब हमेशा चलती रहेगी दादी. जब तक आप ज़िंदा हाँ. आपकी छूट और गांड में भी मेरा लुंड ऐसे hi घुसता रहेगा.

दादी-- फिरसे शुरू हो गए तुम.. ये बताओ कैसे करोगे तुम सब ठीक..

राज-- अभी दिमाग नहीं कर रहा.. आप ऐसा करें मेरे लुंड पर आ कर बेथ जाएँ. जब तक मेरे लुंड का पानी नहीं निकलेगा. मेरा दिगमग काम नहीं करेगा.. दादी इस बार है पड़ी

दादी-- रघु तुम बड़े हरामी हो बीटा..

राज- हाँ बहुत बड़ा हरामी हों में.. जल्दी करें कोई आ गया तोह

दादी-- अच्छा है न कोई आ जाये. फिर तो तुजे जाना hi पड़ेगा

राज-- नहीं मैं नहीं जाने वाला.. गया तोह ऊपर के किसी कमरे में घुस जाऊँगा और तीनो में से जो भी मिली उसे छोड़ के लुंड ठंडा कर दूंगा.

दादी-- बंद करो ये सब बकवास. मेरी पोतियों को गन्दी नज़र से मत देखना.. वर्ण

दादी ग़ुस्से में आ गई थी..

राज-- लगता है मुझे आपकी गांड में लुंड डालना hi पड़ेगा.. राज उठने लगा तोह दादी ग़ुस्सा भूल कर डरने लगी.

दादी-- रघु बीटा.. नहीं.. वहां नहीं.. मई वहां नहीं लुंगी.....

राज-- तो मेरे साथ ऐसे कभी बात मत करना. खुद तोह मुझसे चुद कर दो बार मज़ा ले लिए. मैं कसी और के साथ मज़े लूँ तोह आपको ग़ुस्सा आने लगता है.

दादी-- रघु बीटा वह लड़कियां है और कुंवारी

राज-- किसने कहा वो अब भी कुंवारी होंगी. आज कल के ज़माने में कोई भी कुंवारी नहीं रहती.. जवान होते hi चुद जाती हाँ किसी न किसी से..

दादी कुछ नहीं बोली--

राज-- अब आप मेरे लुंड पर बैठेंगी या मैं आपकी गांड में लुंड डालूं

दादी राज को घूरती हुई उठी और राज के दोनों और पेअर करके राज के लुंड को खुद से अपनी छूट में लेके छोड़ने लगी.

अब वो अपनी मर्ज़ी से अपने अंदाज़ से राज के लुंड को अपनी छूट में ले रही थी. ऐसा करके राज एक hi रत में दादी को बेशरम बना देना चाहता था.

हुआ भी ऐसा hi.. राज एक बार झाड़ा तोह फिरसे लंड को खड़ा करके दादी को छोड़ने लगा. दादी भी धीरे धीरे अपनी शर्म भूलती चली गई और चुदाई के दूसरे राउंड के ख़तम होने तक दादी राज से है है के चुद रही थी.

दादी की अच्छे से बजा के दादी को बहुत कच समझ के राज 12 बजे के बाद कमरे से निकल कर अपने कमरे में जा पोहचा.. दादी भी बरसों बाद एक सुकून भरी नींद सो रही थी.
 
मौसी सूबा उठी तोह सबसे पहले सास के कमरे में hi गई. वहां दादी को न पा कर कुछ चिंतित हुई. घर में देखा, पर वो दिखाई नहीं दी. मौसी कुछ और भी चिंतित हो गयी.

राज से जानने के लिए राज के कमरे में गयी तो राज जो मौसी से भी पहले उठा हुआ था. मौसी को घर में दादी को ढूंढ़ते देख लिया था राज ने.

मौसी जब राज के कमरे में आने लगी तोह राज हरामी जल्दी से खटिया पर लेट कर, रज़ाई लुंड पर से हटा कर सोता बन गया. लुंड वो पहले से hi खड़ा कर चूका था. कमीज़ साइड थी और शलवार में तम्बू बना हुआ था.

मौसी जो चिंतित अपनी सास के बारे में जानने के लिए राज के कमरे में आई थी. राज के पास पांच कर राज को उठाने hi वाली थी. ये पूछने के लिए माँ जी कहाँ हाँ. पर राज के लुंड को देख कर वो स्टेचू बन गयी. मौसी एक मुद्दत से पियासी भी थी. राज के बड़े लुंड को देख कर वो सिहर उठी. ऑंखें फाड़े राज के लुंड को देखती रह गई. राज हरामी आँखों में झरि बना कर मौसी को देखने लगा. मन hi मन में बहुत खुश हो रहा था. मौसी जो राज के लुंड को hi निहार रही थी. लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. राज की आँखों में न देख सकीय.

कुछ पल में hi मौसी ने खुद पर काबू पाया. राज के लुंड पर रज़ाई दाल कर राज को उठाने लगो. आवाज़ नहीं निकल पाई थी. राज के बाज़ो को पाकर कर हिला डाला था. राज कुछ सेक् में हिलने के बाद उठ बैठा. और अनखन माल्टा हुआ मौसी को देखने लगा.

मौसी -- दादी अपने कमरे में नहीं हाँ रघु बीटा. मौसी नज़रें चुराते हुए बोली..

राज -- अच्छा.. राज एक झटके से रज़ाई साइड करके खटिआ से उतर कर मौसी के बराबर खड़ा हो गया.

मौसी दादी की चिंता में थी-- सरे घर में देख लिया रघु बीटा. पर माँ जी कहीं नहीं हाँ.

राज -- अच्छा.. चलें देखते हाँ.. राज मौसी के साथ कमरे से बहार जाने लगा तोह मौसी को यद् आया, राज का लुंड खड़ा है. और चलने से इधर उधर झूल रहा है. मौसी टेंशन में आ गई. राज को बोल भी नहीं सकती थी. राज भोला बना हुआ था. मौसी को टेंशन थी, कहीं उसकी कोई बेटी न उठ के देख ले.

मौसी मैं में-- अब इसको कैसे रोकू. इतना बड़ा हो गया है. फिर भी अंडरवियर नहीं पेंटा. गधा कहीं का.

मौसी-- तो रुक कमरे में. में फिरसे देखती हों. राज अपने लंड से अनजान मौसी से बोलै

राज-- चची में भी देखता हों आपके साथ. घर में hi होंगी वो.

मौसी-- नहीं नहीं तुम अपने कमरे में hi रहो.. नहीं तुम ऐसा करो, बाथरूम जा के पहले फ्रेश हो लो. मौसी न चाहते हुए भी राज के लुंड को देख गई थी. मौसी अंदर से अभी भी कैंप रही थी. सर्दी भी थी. पर अब कुछ गर्मी भी बढ़ने लगी थी कहीं.

राज ने मौसी को ज़्यादा परेशान नहीं किआ और बहार बने बाथरूम में जा घुसा.

मौसी ने महेश को उठाया, ऊपर के कमरों में जा के सब को उठा दिए. सबको बता दिए.. माँ जी मिशन हाँ.

सब परेशान हो गए. सब उठ के निचे ड्राइंग रूम में आ गए. राज बाथरूम से निकला तोह महेश की नज़र पद गई.

महेश मौसी से बोलै-- ये लड़का कोण है.. महेश बड़े घोर से राज को देख रहा था. राज सारा नहीं बदला था. कुछ कुछ बदला था. महेश राज को घोर से देखने लगा.

मौसी-- इसे काम पे रखा है. कल hi आया है यहाँ.. आप इसे छोड़ें और माँ जी को देखें. पर महेश राज को hi देखता रह गया.

अखिल, रुपाली, वैशाली और संजना स्लीपिंग ड्रेस में थे. अखिल की तो खैर थी. पर बाकि तीनो बहुत दिख रही थी. सब इस समय दादी को लेके परेशान थी.

राज की नज़र घर के गेट पर पड़ी तोह वो बोल पड़ा-- चची गेट खुला हुआ है.

kyaaaaaaaaaa.. सब गेट को देखने लगे.. अखिल भाग कर गेट को देखने लगा. गेट अंदर से लॉक था. साइड वाला छोटा दूर जो अंदर से लॉक नहीं था. उसे देख कर राज आगे बढ़ा और खोलने लगा. मिनी दूर बहार से बंद था.

राज-- दरवाज़ा बहार से बंद है

महेश राज के पास पोहंचा-- कोण हो तुम.. कल तुम आये और आज मेरी माँ घर से ग़ायब है. राज कुछ नहीं बोलै और मौसी को देखने लगा.

मौसी-- उससे क्या पूछते हाँ आप.. जा के पुलिस कम्प्लेन क्यों नहीं करवा आते.

महेश राज ko,mausi को देखता हुआ फोन निकल कर किसी को कॉल करने लगा.. उसी समय बहार से दूर खुलने की आवाज़ आई. महेश फोन डिसकनेक्ट करके देखने लगा.

दूर खुला तोह सामने वाले को देख कर महेश के हाथ से फोन गिर पड़ा.. महेश फटी फटी आँखों से गेट के बहार से अंदर आने वाले को देखने लगा. राज भी आने वाले को देख कर हैरान रह गया. और तो और मौसी, अखिल और तीनो लड़कियां भी शॉकिंग फेस के साथ अंदर प्रवेश कर रहे व्यक्ति को देखती रह गयी..
 
घर में प्रवेश करने वाली दादी hi थी. राज देख के हैरान नहीं था. दादी के रूप को देख कर हैरान ज़रूर हुआ था. दादी अपनी आगे से 10 साल काम की दिखाई दे रही थी. दादी हाथ में पूजा की थाली थामे अंदर आ कर सब के सामने आ कड़ी हुई.

सब मोह खोले दादी को देख रहे थे. और राज हरामी दादी को ऊपर से निचे तक देख रहा था. दादी अंदर आते समय लंगड़ा कर चल रही थी. ये देख कर भी राज मन में है रहा था.

मौसी-- माँ जी.. मौसी बड़ी हैरान थी. मौसी तेज़ी से चलती हुई आगे बढ़ी.. माँ जी आप इतनी सुबह सुबह मंदिर गई थी.

दादी स्माइल से-- हाँ मंदिर पास में hi तोह है. मई दिनों से मंदिर नहीं गई थी तोह सोचा आज चली जाओं. अब आंख भी जल्दी खुल गई थी.

संजना-- दादी आप चल के गई थी मंदिर. संजना भी आगे दादी के पास पोहंच के हैरानगी से बोली तोह रुपाली और वैशाली भी पास आ गई. वो भी बड़ी हैरान थी. महेश फोन उठाना भुला हुआ था. अखिल भी हैरानगी से दादी को देख रहा था.

रुपाली-- दादी ये चमत्कार कैसे हुआ.

वैशाली-- दादी तोह अपने कमरे से बहार भी नहीं निकल पति थी. कितनी जल्दी थक जाती थी. पर आज दादी मंदिर..

दादी-- रा--

दादी रघु कहने लगा तोह दादी रा hi बोली थी कह मौसी बोल पड़ी. महेश रा सुनके राज को देखने लगा. उसने खुद से रा से राज बना लिया. वो राज को देख के भी कुछ डाउट में था. अब दादी के मोह से रा सुना तोह राज को घोर से देखने लगा.

मौसी तुरंत दादी को टोक गई थी. मौसी बोली- रघु बेटे ने.. ओह्ह्ह अब में समझी, ये सब रघु बेटे की मालिश का कमल है.

सब पूछने लगे.. मालिश.. कैसी मालिश..

मौसी सबको बताने लगी तोह महेश राज को घर कर देखने लगा. महेश राज और रघु में फर्क तलाश करने लगा. जैसे जैसे महेश राज को घूरता गया. महेश जान गया ये रघु असल में राज है. महेश हैरान नहीं हुआ. ग़ुस्से में भी नहीं आया. अपनी माँ की मालिश सुनकर भी नहीं चूंकि. या ये नहीं सोचा एक जवान लड़का कैसे उसकी माँ की मालिश कर सकता है. वो लड़का जो सबके लिए अनजान भी था.

महेश तोह राज को जान कर सिमरन को याद करने लगा. साथ hi वो समझ गया अब उसकी खैर नहीं.. महेश को दर सताने लगा. कहीं सिमरन को पता चला तोह सिमरन उससे नया दिया कॉन्ट्रैक्ट भी वापिस ले लेगी. और उसे बर्बाद भी करदेगी..

राज ने भी महेश को देख कर जान गया कह महसः सेल ने उसे पहचान लिया है. राज ने महेश को घोर कर देखा और आंख से इशारा क्र दिए. कोई बकचोदी करि न तोह तेरी गांड मार लूंगा साले. महेश और भी दर गया. राज जैसा लड़का जो सिमरन की मांग बीच सड़क पर भर सकता था. वह सिमरन से काम भी नहीं हो सकता था. महेश कांपता हुआ पीछे हटा और सोफे पर जा बैठा. महेश अपने सर को थाम गया था.

वही सब दादी से बड़े खुश खुश बातें कर रहे थे. दादी से मालिश के बारे में जान रहे थे. दादी को छेड़ भी रहे थे. इतना मौहोल तोह ओपन था hi घर का. अखिल फ़ौरन ऊपर अपने कमरे में चला गया था. उसे सब जान कर कोई ज़यादा फर्क नहीं पड़ा था. वह तोह राज से और भी ज़यादा खुश हो गया था. अखिल रत को घर लेट आया था, उसकी नींद अभी रहती थी. वह वापिस अपने कमरे में जा के सो गया.

दादी राज को देखते हुए बहुत स्माइल कर रही थी. राज हरामी ने एक hi रत में दादी को भी बदल दिए था. दादी को छोड़ा hi नहीं था. दुमदार छोड़ा था और दादी की छूट में दो बार माल छोड़ कर दादी को हिम्मत भी दे दी थी. दादी चलने भी लगी थी और दादी को हिम्मत भी मिल गई थी.

दादी सबको मंदिर से लाया हुआ प्रसाद ख्यालन लगी. सबसे पहले राज को करीब आने का कहा, सबसे पहले उसे hi खिलाया. फिर सबको.

संजना-- दादी आप लंगड़ा कर क्यों चल रही थी

दादी मैं में.. इतना बड़ा लुंड लिया है रत भर. दर्द तोह होगा hi.

दादी संजना से-- बहुत दिनों बाद चली हों न तोह एक घुटने में कुछ दर्द होने लगा है. रघु बीटा है न. यही अब मेरे घुटने का दर्द भी ख़तम करदेगा..

मौसी-- रघु तुमने माँ जी को अच्छा करके हम सब पर बहुत बड़ा एहसान किया है.

राज-- एहसास कहाँ चची ये तोह मेरा फ़र्ज़ था. दादी मेरी भी तोह दादी हाँ न. राज दादी को देख कर, मौसी को देख कर महेश को देखते हुए बोलै तोह महेश जो राज को hi देख रहा था. सुनकर उसके माथे पर पसीने की कतरे चमकने लगे. सर्दी में भी महेश के पसीना छूटने लगे थे.

राज का लुंड अब बेथ चूका था. सब ठीक था. कुछ ठीक नहीं था तोह वह महेश के साथ ठीक नहीं था.

महेश उठा और अपने कमरे में जाने लगा. राज भी उसके पीछे हो लिया. दादी को राज ने इशारा कर दिए था. तीनो लड़कियां ऊपर चली गयी तोह दादी मौसी को लेके अपने कमरे में घुस गई.

राज महेश के कमरे में पोहंचा तोह महेश कमरे में hi टहल रहा था. राज को देख कर महेश राज के पैरों में गिर पड़ा.

साले को पैरों में गिरने की बड़ी आदत थी.

महेश-- राज बीटा क्यों मुझे मरवाना चाहते हाँ आप. प्ल्ज़ मेरे हाल पे रेहम खाएं. सिमरन मैडम मुझे बर्बाद कर देंगी. मैं कहीं का नहीं रहूँगा.

राज ने दूर को देखा जो अभी खुला हुआ था. पहले दूर बंद कर लें महेश जी..

महेश को कोई फर्क नहीं पड़ा. वह ऐसे hi राज के पैरों को छोड़े बिना hi फिरसे बोल पड़ा. राज बीटा सिरमन मैडम को पता चला, आप मेरे घर पर हाँ तोह वह मेरे साथ--

राज-- उसे कोण बताएगा. आप भी उसे कुछ मत बताना. मैंने सिमरन को देखा, दिल ने कहा सिमरन मेरी ज़िन्दगी में होनी चाहिए. तोह मैंने उसे अपनी ज़िन्दगी में शामिल कर दिए. मैंने मैं बनाया आपके घर में घुस के सबको छोडना है तो घुस गया. रात भर दादी को छोड़ता रहा मैं. एक दो दिन में तेरी पत्नी को छोडूंगा. फिर तेरी बेटियों को छोडूंगा.. बस कुछ दिन तक सिमरन को पता न चलने दो. फिर मैं यहाँ से चला जाऊँगा. सबको छोड़ने का सोचा है तोह छोड़ के रहूँगा. सिमरन को बताने की सोची तोह मैं सिमरन से भी बढ़कर हों. एक बार आपकी सुन ली. दूसरी बार नहीं सुनूंगा में.

महेश राज की बातें सुनकर और भी ज़यादा दर गया था. सब जनता था राज के बारे में. उर्वशी जैसी लड़की को पता कर छोड़ और उससे छुड़वा सकता था तोह राज कुछ भी कर सकता था. महेश ने साडी उम्र काम hi यही किया था. कैसे न राज को उसके इरादों को समझ पता.

महेश-- अगर मेरे न बताने पर भी मैडम को पता चल गया तोह

राज-- तोह भी कुछ नहीं होगा. तुम्हारा जो नुकसान होगा, वह में पूरा करदूंगा. चालाकी करने की सोचना भी मत. तेरी गांड पर कितने बाल हाँ, में वह भी जनता हों.

महेश दर गया.-- नहीं नहीं में कोई चालाकी नहीं करूँगा. फिर अपने होंटो पर जीब फेरते हुए बोलै-- माँ के साथ आपने सब कर लिया. ये जान कर मुझे अच्छा लगा राज बीटा. क्या में भी

राज---- हाहाहा तू बहुत बड़ा ठरकी है साले. तू अपनी बूढी माँ को भी छोड़ने की सोचने लगा.

महेश खड़ा हुआ अब बात छूट पर आ गई थी तोह नार्मल हो गया था. उसके लुंड में सरसराहट होने लगी थी. सिमरन का दर राज की बातों से काम हो गया था. राज का दर काम नहीं हुआ था. पर एक बार राज के साथ मिलकर सेक्स कर चूका था. इसलिए कुछ नार्मल भी था.

महेश-- ये तो मेरा हमेशा से सपना रहा है राज बीटा. पर हिम्मत नहीं कर पाया कभी. मज़ा आये न आये अब. पर सोच के hi अंदर करंट सा दौड़ने लगा है.

राज-- और अपनी बेटियों के बारे में क्या ख्याल है. राज महेश के कंधे पर हाथ फेरते हुए बोलै तोह महेश अपने लुंड को मसलने लगा जो अब खड़ा हो रहा था.

महेश-- राज बीटा अब आप घर में घुस hi आये हाँ तोह सबको छोड़ने के बाद, एक एक बार मुझे भी मौका दे देना..

राज महेश की बात पर है पड़ा.. एक नज़र दूर के बहार देख कर फिर बोलै- देखो महेश जी.. मैं इस घर में अपने अंदाज़ से घुमा हों और सब मेने अपनी म्हणत से सेट किया है. आपका कुछ भी हाथ नहीं है इस सब में. तो

महेश-- तोह?

राज-- अब आपको आपके घर की कोई छूट या गांड नहीं मिलेगी. आप भी ऐसा मत सोचना. वर्ण बहार मिलने वाली भी मैं बंद करवाऊंगा और फक्ट्री--

महेश दर गया-- नहीं नहीं.. मैं फिरसे ऐसी बात नहीं करूँगा.

राज-- सोचना भी मत. बहार का मॉल तेरा है तोह तेरे घर का सारा माल मेरा है. तेरी किस्मत ख़राब थी जो तू सिमरन से दर गया. वर्ण मेरा साथ देता तोह तुझे तेरे घर की मलाई चखने खाने को मिल जाती. अब मुझे कहते हुए देखना.. अब में चलता हों. और मेरा नाम किसी को मत बताना.

महेश-- नहीं बताऊंगा.. राज निकल पड़ा और दादी के कमरे में जा पोहंचा. मौसी और दादी बैठी बातें कर रही थी. राज दादी के पैरों में बेथ गया था.. मौसी और दादी पास पास बैठी हुई थी. राज ने दादी को आंख मर दी. और एक हाथ से दादी के पेअर को तोह दूसरा हाथ से मौसी के पेअर को दबाने लगा.

दादी को राज हरामी रत को hi सब समझा चूका था.

दादी मौसी से बोली-- सुनैना बेटी में तो कहती हों एक मालिश तुम भी रघु बेटे से करवा लो.. मौसी को झटका लगा दादी की बात सुनकर. मौसी जवान नहीं थी तोह बूढी भी नहीं थी. राज दादी को आंख मर के दादी और मौसी के पाऊँ दाबने लगा.

मौसी-- mm..main..nn.. नहीं माँ जी मुझे ज़रूरत नहीं है.

दादी-- सारा दिन काम कर करके थक जाती हो तुम सुनैना बेटी. रघु की मालिश का रिजल्ट तुम भी देख चुकी हो. में तोह कहती हों एक मालिश तुम भी करवा hi लो..

मौसी-- नहीं माँ जी मैं नहीं करवा सकती रघु बेटे से मालिश..

दादी-- क्यों मेरी बारी तो बड़ा कह रही है. मैं तुम्हारी मान सकती हों तो तुम क्यों नहीं मान सकती. और फिर हम दोनों एक साथ रहेंगी न कमरे में. रघु हमारा अपना है. इससे कैसे शर्माना. कितना सीधा और सुघर है रघु.

मौसी पेरशान थी. कैसे दादी को हाँ बोलती. राज और दादी एक दूसरे की आँखों में देख कर आँखों hi आँखों में स्माइल भी कर रहे थे.
 
ब्रेकफास्ट के बाद अखिल और उसकी बहने कॉलेज उसी चले गए. महेश फैक्ट्री चला गया. घर में राज, दादी और मौसी hi रह गए.

मौसी नाश्ते के बाद बर्तन वगेरा समेत क्र किचन में रखने लगी. मौसी को अभी समय लग्न था किचन में.

राज दादी के कमरे में घुसा और दादी को पकड़ लिए.

राज-- ो मेरी दादी डार्लिंग कितनी देर से मई खुद पर काबू प् रहा था. सुबह सुबह कटनी मस्त दिख रही हाँ आप.

दादी -- ये सब भी तुम्हारे कारन hi है रघु बीटा

राज दादी को पकड़ कर किश करने लगा. दादी हड़बड़ा कर राज से अलग हुई और खुले दूर को देखने लगी.

दादी धीमे से-- रघु बीटा सुनैना आ सकती है, दूर खुला हुआ है.

राज-- तोह क्या हुआ दादी. मौसी आती है तो आने दो. उसे भी तोह छोड़ना hi है न

दादी-- नहीं ऐसे नहीं कर सकती में राज बीटा. मुझे बड़ी शर्म आएगी, अगर सुनैना ने देख लिए

राज हस्ता हुआ-- हाहाहा दादी अभी तोह आपको मौसी के सामने भी छोड़ना है मुझे.

दादी मोह पर हाथ रख के हैरानगी से-- सुनैना के सामन.. नहीं रघु बीटा, कुछ तोह मेरी श्रम रहने दो.

राज-- नहीं रहने दे सकता दादी. जब नाना के सामने नानी को छोड़ दिए मेने तोह आपको मौसी और आपके बेटे के सामने भी छोडूंगा में.

दादी-- हाँ बताया था रत में तुमने. रघु बीटा तुम कितने अलग हो. कितने ख़राब हो. क्तिने बेसहराम हो. मुझसे ये सब नहीं होगा

राज-- अरे दादी आपके hi तोह मौसी को भी छोडूंगा

दादी कुछ सोचते हुए-- रघु बीटा मेरा बीटा बड़ा कमीना है. साडी उम्र उसने मेरी बहु को कभी सुख नहीं दिए. क्या तुम सुनैना को वो सरे सुख डोज

राज ने दादी को फिरसे किश करदी.-- इसी लिए तोह आया हों में दादी यहाँ. आपको सुख दिए है तोह मौसी को भी दूंगा. मौसी को मौसा जी से बड़ी परेशानी रही है न. अब देखना कैसे मौसा जी के सामने में मौसी को छोड़ता हों. देख के मौसी का सारा दुःख दर्द ऐसे भागेगा. मौसी फिर हमेशा hi सुखी रहा करेंगी.

दादी को राज पर अब पूरा पूरा विश्वास होने लगा था. राज ने दादी को पैरों में बिठा और बोलै- दादी चलो न मेरा लुंड चुसो. देखो तोह कैसे आपकी इस नै जवानी पर झूम झूम रहा है.

दादी दरी हुई भी थी और राज से चुद के मस्त भी थी. राज के ऐसा करने से दादी को मज़ा भी खूब आ रहा था. दादी ने राज का खड़ा लुंड थाम लिया और दबाने लगी.

दादी-- रघु बीटा तुम्हारा घोडा है बहुत दुमदार

राज-- क्यों दादा जी का नहीं था.

दादी राज की आँखों में देखती हुई शरारत से-- तुम्हे बड़ी छह है जानने की..

राज दादी के सर के बालों में हाथ चलने लगा. हाँ जानने की छह तोह रहेगी न दादी. पता तोह चले पूरी उम्र आपने कितने बड़े लुंड के मज़े लिए हाँ

दादी हस्ते हुए-- चल बदमाश कहीं का. अपनी दादी से ऐसी बातें करता है.

राज-- दादी अब hi देर कर रही हाँ. सच कहता हों. अब मौसी आ भी गई न तोह भी में आपके साथ ये सब बंद नहीं करूँगा. जल्दी से मेरे लुंड को नंगा करके मोह में लें और चूसें.. पहले बताएं दादा का कितना बड़ा था.

दादी राज की शलवार का नाडा ढीला करके लुंड को निकलती हुई-- जितना बी था, इसकी बराबरी नहीं कर सकता.. दादी झुकी और राज के लुंड को मोह में भर कर चूसने लगी. राज भी गांड हिला हिला कर दादी के मोह में लुंड डालने लगा. दादी ने राज को देखा फिर अपना पूरा मोह खोल गई. खुद से लुंड चूसना बंद कर दिए.

राज भी स्माइल करता हुआ दादी के मोह को छोड़ने लगा. दादी का मज़ा बढ़ने लगा था. रत जैसी चुदाई राज ने करि थी. दादी जवान नहीं हुई थी तोह जवानी वाले रंग ज़रूर दादी में लौट आये थे.

राज दादी के गले तक अपने लुंड को घुसा घुसा कर छोड़ने लगा.

कुछ देर में दादी थकी तोह राज ने लुंड निकल क्र वही दादी को खड़ा किया दादी भी कड़ी हुई और राज को उसकी मर्ज़ी करने देने लगी. राज ने दादी की शलवार ढीली करि और पीछे से गांड नंगी करके अपने लुंड को दादी की गांड और छूट पर रगड़ने लगा. दादी अपनी शलवार पकड़ कर झुक कर कड़ी हो गई.

दादी-- रघु बीटा. सुनैना आ जाएगी

राज-- आने दो न दादी..

दादी-- बीटा वो जान जाएगी, तुम मेरे साथ क्या कर रहे हो.

राज-- इसका भी सलूशन है मेरे पास पास दादी.

दादी -- वो क्या राज बीटा.

राज-- आप थोड़ा सा और झुक जाये.. छूट कुछ और खुल जाएगी. लुंड आसानी से जा पायेगा.

दादी झुक गई. रज ने छूट पर लुंड सेट करा और धक्का मार दिए

दादी-- आह्हः रघु बीटा धीरे .. धीरे .. अभी भी रत का दर्द बाकि है

राज-- वही तोह काम करने वाला हों दादी. बार बार लुंड घुसे तोह छूट आदि हो जाएगी. फिर दर्द भी चला जायेगा

दादी-- अच्छा.. फिर तोह ठीक है. मुझे भी दर्द से छुटकारा चाहिए रघु बीटा.

राज-- उसके लिए सारा अंदर दाल कर छोड़ना पड़ेगा दादी

दादी-- तोह दाल दो न. सोच क्यों रहे हो

राज ने दूसरे धक्के में सारा लुंड दादी की छूट में घुसा दिए और छोड़ने लगा. दादी की छूट गीली होने लगी. राज तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा. दादी एक हाथ मोह पर रख कर राज से छोड़ने लगी.

किचन ज़यादा दूर नहीं था. दादी की सिसकियों की आवाज़ मौसी तक पोहंची तोह मसूई वहीँ से बोल पड़ी..

मौसी-- क्या हुआ माँ जी.. ऐसे क्यों सिसक रही हाँ आप.

दादी कुछ नहीं बोली राज बोलै-- चची दादी के घुटने की मालिश कर रहा हों न तोह आयल गर्म होक दादी को मज़ा भी दे रहा है. दादी इस लिए सिसक रही हाँ

मौसी-- हाहाहा रघु बीटा.. लगता है तुम आज के आज hi माँ जी को घोड़ी बना डोज

दादी मोह से हाथ हटा के धीरे से बोली-- आके देख तो सही सुनैना बेटी. घोड़ी hi तो बानी हुई हों..

राज-- हाहाहा दादी डार्लिंग आप ऐसे खुल के चुड़ते हुए कितनी प्यारी लगती हाँ.

दादी-- ये सब भी तेरे दादा की दें है रघु बीटा. तेरे दादा को मेरा ऐसा बोलना बड़ा पसंद था.

राज-- ओह्ह कितना बड़ा लुंड था दादा जी का दादी

दादी-- तुझसे आधा hi था रघु बीटा. तेरे जैसा कभी देखा भी नहीं था मेने तो

राज दादी की छूट से पानी निकल कर लुंड को भी निकल गया. दादी सीढ़ी होक एक हाथ से शलवार थामे लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

कुछ देर में दादी रिलैक्स हुई तोह राज फिरसे दादी को बिठा के दादी के मोह में लुंड डालने hi वाला था. कह धदमममम की आवाज़ के साथ मौसी की चीख भी सुनाई दी.

मौसी किचन में गिर पड़ी थी. मौसी भयंकर चीखी तोह राज और दादी सब भूल कर किचन की और भागे.. राज का लुंड बहार था तोह दादी एक हाथ से अपनी शलवार थामे किचन की और भाग कड़ी हुई थी.

राज को अपने लुंड का होश न रहा और दादी को अपनी छूट का. आधी निचे शलवार के साथ, नंगी गांड लिए दादी भी राज के साथ किचन में जा पोहंची.. वहां निचे फर्श पर मौसी अपनी कमर को पकडे कराह रही थी. राज और दादी किचन में पोहंचे तोह मौसी अपनी कमर का दर्द भूल गई और फटी फटी आँखों से राज के बड़े लुंड को देखने लगी. राज की कमीज़ आगे से उठी हुई थी और पूरा लुंड क्लियर दिखाई दे रहा था. दादी की छूट का पानी कमीज़ को गीला किये हुए था. सुपड वाली जगा पर कमीज़ गीली थी. दादी को देखा तोह वो हाथ में शलवार थामे आधी नंगी उनके सामने थी.

मौसी को शॉकेड देख कर राज और दादी भी शॉकेड हो गए. दोनों समझ गए. मौसी के गिरने के कारण दोनों अपनी हालत को भूल कर दौड़ पड़े थे. दादी सोचने लगी.. आठ गड़बड़ हो गई

राज सोचने लगा.. अच्छा हुआ मौसी ने सब देख लिया.. अब मौसी को अलग अंदाज़ से छोड़ना पड़ेगा.. कोई न दूसरा अंदाज़ पहले वाले से भी मस्त होगा... ः
 
ये सब देख कर तोह दादी जहाँ झटका खा गई. वहीँ शर्म के मारे उन्हें चुल्लो भर पानी नहीं नज़र आ रहा था. वो उसमे दुब मरे..

ऐसा दादी सोच रही थी. ऐसे अचानक से भेद खुलेगा, ये वो नहीं जानती थी. मौसी के गिरने पर वो राज के साथ साथ भागी भागी चली आई थी. आधी गांड नंगी किये हाथ में शलवार थामे वह भागी भागी ा गई थी.

दादी शर्म से पानी पानी हो चुकी थी. मौसी की नज़रों का सामना न कर सकीय. और उसी हालत में वापिस भाग कड़ी हुई. मौसी भी राज के लुंड को देख कर, दादी की गांड देख कर बहुत कुछ समझ गई थी. वो जान गई थी. माँ जी क्यों इतनी जल्दी इतनी अच्छी हो गई हाँ. छूट में माल जाये तोह मुर्दा हड्डियों में भी जान पद जाया करती है.

मौसी समझ गई, रत मालिश के समय रघु और माँ जी ने जैम कर चुदाई करि है.. मौसी तोह ये जान कर बेहद ग़ुस्से में आ गई. इस घर में एक छूट बरसों से पियासी थी. और बूढी छूट मज़े ले रही थी.

दूसरा मौसी को ये सब पसंद भी नहीं था. अगर पसंद होता तोह कबका किसी और का लुंड लेके अपनी पियास बुझा चुकी होती.

मौसी अपने दर्द को भूल कर ग़ुस्से से उठी और चलती हुई राज के पास ा के राज के गालों पर थप्पड़ मारने लगी.

मौसी चीखते हुए-- harami..saale..kutte..neech..ghattiya insan..isliye तुम बोल रहे थे माँ की मालिश के लिए. कितनी घट्टिया सोच के निकले तुम तो. क्या सोच कर तुमने इतना घट्टिया काम किया. कितने सीधे दीखते थे तुम. और कितने नीच निकले तुम.

10 12 थप्पड़ मौसी ने राज के दोनों गालों पर मार दिए. राज को घुसा नहीं आया. मौसी राज को फिरसे थप्पड़ मारती हुई गलियां देने लगी.

मौसी का घुसा तोह ठंडा होने वाला था नहीं. राज ने मौसी को पकड़ कर अपनी बहन में कास लिया. राज का खड़ा लुंड मौसी की छूट से कुछ ऊपर दबने लगा. राज हरामी थोड़ा सा निचे हुआ और मौसी की छूट पर लुंड सेट कर गया.

मौसी को पहले hi राज पर बड़ा ग़ुस्सा था. राज की इस हरकत पर मौसी का ग़ुस्सा और भी बढ़ गया.

मौसी-- छोड़ मुझे हरामी.. मेह कहती हों छोड़ मुझे. घर में कोई और नहीं था. मौसी लॉडली बोल रही थी. घर से बहार आवाज़ जा नहीं सकती थी. राज को परवा नहीं थी और दादी अपने कमरे में बीएड पर सर झुकाये चिंता में बैठी हुई थी.

राज-- नहीं छोड़ँगा आपको. आपने देख hi लिया है. दादी को छोड़ चूका हों मैं. आपको भी अब छोड़ना पड़ेगा. आप भी तोह बरसों से छूट की आग की आग में जल रही हाँ न.

मौसी गुहसे में भी थी और लुंड के स्पर्श पर भी मचल उठी थी. आग hi इतनी बढ़ी हुई थी उनकी. पर उनका खुद पर कण्ट्रोल भी बोहत था. किसी अनजान से तोह वो ऐसा सब कर नहीं सकती थी.

पास hi किचन काउंटर भी था. मौसी ने वहां पड़ी छुरी उठाई और राज के लुंड की जड़ पर रख दी.

मौसी-- काट दूंगी मैं तेरा ये.. क्या समझ रखा है तूने. सब बिकाऊ माल हाँ क्या. माँ जी को तुमने अपने वश में लिया है. पर मेरे साथ ऐसा सोचना भी मत..

राज छुरी को लुंड पर देख कर भी नहीं डरा था. बोहतु बड़ा हरमि था. छुरी के साथ राज का सीधा हाथ भी छुरी पर था. मौसी ने बड़ी सख्ती से छुरी को पकड़ रखा.

मौसी-- तू नहीं हटा, या मुझसे छुरी छीनने की करि तोह कहे देती हों, मैं सच में hi काट दूंगी. चल छोड़ मुझे..

राज ने अपने अंघूठे को छुरी की तेज़ धार पर चला दिए था. जिससे खून निकलने लगा था. मौसी को पता नहीं चला.. राज ने हाथ हटाया तोह मौसी की आँखों में चमक आ गई. मौसी समझी राज उससे दर गया है.

पर राज ने तोह वह किया जो मौसी सोच भी नहीं सकती थी. राज ने अपने खून से मौसी की मांग भर दी.

राज-- अपने hi पति के लुंड को काटने चली हो मेरी रानी. लुंड काट दिए तोह सुख कैसे प्राप्त होगा.

मौसी तोह मोह खोल के राज को देखती रह गई. छुरी वाली हाथ ढीला पद गया था. राज ने मौसी के हाथ से छुरी ली तोह मौसी को अंदाज़ा नहीं हुआ. राज ने छुरी लेके साइड फ़ेंक दी.

मौसी-- कुत्ते कमीने ये तूने क्या किया.. एक तोह माँ के साथ इतना सब घट्टिया कर डाला. ऊपर से तूने इतना बड़ा पाप भी कर डाका.. अब तो मैं तुझे ज़िंदा hi नहीं रहने दूंगी.

मौसी का घुसा सातवे आस्मां पर था. मौसी की ऑंखें पूरी लाल हो चुकी थी. दादी ये सुन रही थी पर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था. वह तोह अपनी hi टेंशन में थी.

राज-- ने मौसी को और भी कस दिए- जाने मैं मांग भरने के बाद तोह पत्नी को अपने पति के पाऊँ सबसे पहले छूने चाहिए.. पर आप तोह मेरी जान की hi दुश्मन बन बैठी हाँ..

मौसी-- छोड़ दे मुझे हरामज़ादे

राज-- सात फेरे नहीं हुए तो क्या हुआ. मांग तोह भर दी है न मेने आपकी. पति हों, अब तो उम्र भर नहीं छोडूँगा.

मौसी ग़ुस्से में भी अब खुद को बेबस महसूस करने लगी थी. लुंड का दबाओ भी सहन नहीं कर प् रही थी, खुद ग़ुस्से में थी पर मुनिया रोने लगी थी.

राज आगे हुआ और मौसी के होंटो पर एक हल्का सा किस कर दिए.

राज-- मेरी पत्नी बनने पर बधाई हो सुनैना रानी..

मौसी तोह और भी ग़ुस्से में आई. पर राज के होंटो की तपिश पर अपने दोनों होंटो को दांतो से काटने भी लगी थी. छूट के बाद अब होंटो में भी आग लगने लगी थी. मौसी ढीली पड़ने लगी.

राज ने मौसी को गॉड में उठा लिया.. मौसी थोड़ी सी भरी थी तोह गिरने से बचने के लिए राज के गले में बहन दाल दी.

राज मौसी को ले के चलता हुआ दादी के कमरे में जा पोहंचा. दादी चिंतित थी पर मौसी को राज की गॉड में देख कर अंदर से खुश तोह बहार से हैरान होने लगी.

राज-- रंडी दादी उठ न बीएड से. देख नहीं रही मेरी नयी दुल्हन आई है

दादी शॉकेड-- नयी दुल्हन..

राज मौसी को बीएड पर लिटाये हुए-- और नहीं तोह क्या.. मेरी दुल्हन की भरी मांग नहीं देखि आपने रंडी दादी..

दादी मौसी की मांग देख कर हैरान रह गई. दादी दोनों हाथ मोह पर रख कर मौसी को राज को देखने लगी. अब मौसी शर्मा रही थी. खुजल भी थी, कुछ गरम भी थी. छूट उबाल रही थी तोह होंठ जलने लगे थे.

राज-- जाओ न रंडी दादी मेरी दुल्हन के लिए कुछ पिने को ले आओ.. दादी भागी भागी बहार चली गई.

मौसी राज को देखने लगी.

राज-- मैं जनता हों सुनैना आपको ग़ुस्सा आया है. पर मैं ये भी जनता हों, आपको प्यार की बड़ी ज़रूरत है. दादी को इसलिए छोड़ा था, क्यूंकि दादी को नई वाटर की और हिम्मत की ज़रूरत थी. वर्ण आपके ज़यादा सूंदर तोह नहीं हाँ न दादी. अब देखने कैसे मैं आपको आपकी रूठी खुशियां लौटता हों. आपको जो अपनी ज़न्दगी से शिकवे हाँ सब दूर कर दूंगा. रज मौसी के गालो पर हाथ फेरता हुआ बोलै तोह राज के नरम स्पर्श पर मौसी मचलने लगी थी. मैं न चाहते हुए भी राज के स्पर्श पर झूम झूम उठा था.

सब गलत था. पर वह भी तोह बरसों से खुद को संभाले हुए थी. बहुत कुछ सोच रही थी. दादी चुद सकती है तोह वो क्यों नहीं. अब तोह उसकी मांग भी भरी जा चुकी है.

मौसी राज की आँखों में देखने लगी. मौसी की आँखों में लाल दौरे टेरने लगे थे. राज हरामी मौसी को अपनी और करने के लिए मौसी के नाज़ुक हिस्सों को बड़े प्यार से छू रहा था. मौसी को ऐसे टच कर रहा था, जैसे मौसी माँ की बानी हो.

एक औरत यही सब तोह चाहती है. कोई उससे प्यार करे. मौसी तोह प्यार की भुकी थी. शादी के बाद कुछ साल छूट की आग तोह बुझती रही थी. पर मैं की शांति कभी प्राप्त नहीं हुई थी.

राज के स्पर्श पर मौसी को वही शांति प्राप्त होने लगी, जो कभी उनकी छह रही थी.

राज हरामी उर्वशी जैसी रंडी को पिघला सकता था. तोह मौसी को क्यों नहीं.. मौसी तोह इस सब के लिए तरस भी रही थी. गालों, होंटो और गर्दन पर छूने के बाद राज झुका और बड़े प्यार से मौसी के होंटो पर हलके हलके किश करने लगा. धीरे धीरे मौसी की आँखों में नशा उतरने लगा. मौसी तोह सुबह hi राज के लुंड को देख कर एक बार मचल चुकी थी.

किचन में इतनी देर से राज के स्ट्रांग लुंड की हीट पर भी वह अपनी सहन शक्ति खोटी रही थी. अब राज के प्यार वले स्पर्श ने उन्हें पागल कर दिए था. वह जो सोच रही थी, राज की जान hi ले लेंगी. कमरे में दादी को सामने प् के भी वह राज के खूब ज़लील करेंगी. पर वो ये भूल गई थी. वह बरसों से पिसाई हाँ, शरीर से भी और आत्मा से भी.

लुंड के स्पर्श से शरीर को आनंद मिला था. पियास बुझने का रास्ता भी दिख गया था. अब राज के प्यार से उसकी ज़ख्मो से चूर चूर आत्मा बी शांत पड़ने लगी थी. ऐसा लगने लगा था. बरसों बाद धुप में रहने के बाद अब छोङ भी नसीब होने लगी और साथ hi प्यार की बारिश भी शरू हने लगी है.

मौसी जहाँ राज के हथु के प्यार भरे से स्पर्श से घायल हो रही थी. वही राज के हलके हलके किश उन्हें किसी और hi दुन्या में ले जा रहे थे. मौसी मज़े में होते हुए भी आंसू बहाने लगी. दादी मौसी के लिए पिने को ले आई थी. एक साइड कड़ी होक मौसी की आँखों से बह रहे आंसू देखे तोह वो ख़ुशी बी मिली दादी को और दुखी भी हो गई.

दादी, राज और मौसी दोनों को बड़े प्यार से निहार रही थी. राज के आ जाने से मौसी की भी ज़िन्दगी के दुःख दूर हो रहे थे. दादी ये देख कर आंसू बहाने लगी थी.
 
राज मौसी के साथ सच में hi प्यार कर रहा था. हरामी था, chut,gand का रॉय था. पर भावनाओ को भी समझता था. मौसी को मैं से प्यार दिए तोह मौसी ने भी पुरे मैं से राज के प्यार को महसूस करा.

मौसी राज के प्यार के कारण इमोशनल होने लगी और आंसू बहाने लगी. शरीर के लहरें दौड़ रही थी. पर जो शांति मैं को प्राप्त हो रही थी. वह कहीं बढ़ कर थी.

राज कुछ देर में सीधा हुआ और मौसी को निहारने लगा. मौसी ऑंखें बंद किये पड़ी हुई थी. दादी चलती हुई पास आ गई. दादी की ऑंखें भी नाम थी.

राज ने दादी को देखा तोह एक हाथ से गैस थम कर दूसरे हाथ से दादी की छूट को थाम लिया. जो अभी भी गीली थी. चुदाई के बाद साफ करने का मौका hi नहीं मिला था. मौसी के गिर जाने से दोनों भाग खड़े हुए थे.

दादी राज को देखने लगी और राज दादी को देख के बोलै.-- रंडी दादी.. चलो दूसरी और आ कर बेथ जा जाओ. दादी पलटी और बीएड के दूसरी और कर बेथ गई.

राज ने मौसी के होंटो पर ुतली ऊँगली फेर दी. मौसी ने ऑंखें खोल के राज को देखा. फिर एक झटके से उठ बहती.

मौसी : क्यों कर रहे हो तुम ऐसा सब मेरे साथ. मौसी ग़ुस्से में नहीं आई. मौसी राज की आँखों में देखती हुई बोली

राज-- प्यार किया है तोह ऐसा सब तोह करना पड़ेगा न. अब पत्नी बनाया है तो फिर पति का फ़र्ज़ भी तोह निभाना है न मुझे.

मौसी अपने माथे पर हाथ रख के अपनी मांग को महसूस करने लगी.

मौसी जैसे किसी और दुन्या में थी-- एक औरत एक समय पर दो की पत्नी नहीं बन सकती.

दादी राज को देख रही थी. बोली कुछ नहीं

राज-- हाँ तो मई भी यही करूँगा न. अब से महेश आपकी ज़िन्दगी में नहीं रहेगा. आप केवल मेरी hi पत्नी बांके रहेंगी.

दादी-- रघु बेटे ने कहा है तोह मुझे भी ऐसा होने से ख़ुशी मिलेगी सुनैना बेटी.

मौसी दादी को देखने लगी. मौसी की आँखों में दर्द भी था और ख़ुशी भी. चिंता भी थी और खवाब भी. राज ने जो किया था, उस सब को यद् करके बेयक़ीनी भी थी. ग़ुस्सा भी था और मैं में भी कुछ कुछ हो रहा था. राज के प्यार ने मौसी को अंदर से निहाल भी कर दिए था.

दादी ने मौसी का हाथ थाम लिया. ये मत सोचना सुनैना बेटी मैंने या रघु बेटे ने कोई पाप किया है. मैं से जो भी किये जाए तोह सही hi तोह होता है. तुमने देखा न मैं कितनी जल्दी भली चंगी हो गई. क्या तुम नहीं जानती मैं भी तोह तुम्हारे जैसे संस्कारों वाली थी. आज भी वैसी hi हों. बस रघु बेटे के लिए, उसका प्यार पाने के लिए कुछ बदल गई हों. तू भी बदल जा मेरी बच्ची. तुझे भी तोह खुशियों की ज़रूरत है. कितने दुःख देखे हाँ तुमने.

मौसी की आँखों में फिरसे आंसू आ गए. ख़ुशी मिली थी मौसी को. एक ऐसी ज़िन्दगी मिल रही थी मौसी को. जिसके बारे में कभी सोचा नहीं था मौसी ने.

मौसी ने फिर कुछ सोचा और निराश नज़र आने लगी.. पर मेरे बच्चे तोह जवान हाँ. इस उम्र में मैं कैसे रघु--

राज ने मौसी के मोह पर हाथ रख दिए.. मैं हों न, सब ठीक कर दूंगा.. चलें हम दूसरे कमरे में चल के सुहागरात मानते हाँ.. राज मौसी को छेड़ते हुए बोलै तोह मौसी ने राज के हाथ को झटक दिए और शर्मा गई. दादी है पड़ी.

दादी-- तुम दोनों यही पर सुहागरात मन लो.. में चलती हों दूसरे कमरे में.. मौसी ने दादी को देखा.. कुछ बोलने के लिए मोह खोला.. पर कुछ बोल नहीं पायी.

दादी हस्ती हुई कमरे से निकल गई. दूर भी बंद नहीं किया. कोई और भी तोह नहीं था कमरे में.. राज ने मौसी को लिया दिए और मौसी के ऊपर झुकता चला गया..

मौसी का चेहरा शर्म से अब और भी लाल होने लगा था. अब की बात और थी. राज मौसी को निहारने लगा.

मौसी-- आपने ऐसा सब क्यों किया..

राज-- आपने.. आप मुझे आप कह रही हाँ. मतलब आप मुझे अपना पति मान रही हाँ..

मौसी कुछ और शर्म से लाल पीली हो गई-- अब मांग भर के ये हक़ प्राप्त कर चुके हाँ स्वामी जी..

राज-- ओह्ह्ह.. ये तोह अच्छी बात है. अब तोह आपको कोई दुःख नहीं है न.

मौसी-- नहीं.. मुझे अब कोई दुःख नहीं है.. पर चिंता है. महेश और बच्चू को क्या कहूँगी में.

राज-- वह में देख लूंगा. महेश मुझे बोहत अचे से जनता है.

मौसी-- हैरान होक.. क्या वो आपको पहले से जानते हाँ

राज-- हाँ कुछ और भी ऐसा है जो मैंने अभी आपको नहीं बताया..

मौसी-- क्या है वो बात

राज मौसी को हल्का सा किश करता हुआ- सुहागरात के बाद बताऊंगा. पहले नहीं बताऊंगा.

सुहागरात का सुनके मौसी शर्मा गई. राज के लुंड को बहुत अच्छे से मौसी ने जान लिया था. मौसी के शरीर में चिंगारिया सी दौड़ने लगी थी. मौसी आने वाले पल को सोच के अभी से आनंद लेने लगी थी.

राज- देखो मैं क्या करूँगा महेश का

मौसी-- हम्म्म

मौसी अब खुलती जा रही थी. दादी की चुदाई का जान कर वो पहले हैरान हुई थी. पर अब ये सोच के उन्हें शर्म नहीं आ रही थी. दूर खुला है और घर में माँ जी भी हाँ. मौसी भी बदल रही थी.

राज ने मोबाइल निकला और महेश को कॉल लगा दिए.

राज का ये नंबर बदला हुआ था. तोह महेश जान नहीं पाया-- hello

राज-- मैं हों महेश.. राज की आवाज़ सुनके महेश के हथुन से मोबाइल छूटते छूटते बचा..

महेश--- जी जी.. राज beta..kk.kese यद् किया मुझे..

राज-- घर आ सकते हो अभी

महेश-- ji..ji... ज़रूर.. कोई काम था क्या

राज-- अआप आ जाएँ तोह काम भी बता दूंगा..

राज ने फोन रख दिए और मौसी को देखके बोलै.. देखना कुछ hi देर में महेश घर पर होगा..

मौसी-- मुझे दर लग रहा है..

राज मौसी के ऊपर hi था. सुकून से मौसी के होंटो को अपने होंटो में लिया और चूसने लगा. मौसी की ऑंखें फिरसे बंद होने लगी. मौसी नशे में डूबने लगी. छूट मुसलसल पानी छोड़ रही थी. राज का लुंड भी अब मौसी की छूट पर था. पर राज ने अपने लुंड को दबाया नहीं था.

राज कभी मौसी को किश करता तोह कभी मौसी के पुरे चेहरे को चूमता.. कुछ देर दुर्बल हुई तोह राज किश तोड़ कर मौसी से बोलै-- देखा न आ गया..

राज-- दादी दूर तो खोल दो.. राज ऊंची आवाज़ में बोलै तोह दादी जा के दूर खोल आई. बहार महेश hi था.. वह घबराया घबराया घर में दाखिल हुआ..

मौसी-- अब तोह मेरे ऊपर से हैट जाएँ.. कहीं

राज-- आने दो उसे.. आप चिंता न करें. कुछ नहीं होगा..

मौसी-- वह बड़े गरम दिमाग के हाँ..

राज-- देख लेते हाँ वो कितने गरम दिमाग के हाँ

महेश अंदर दाखिल हुआ तोह राज को अपनी पत्नी के निचे देख कर अपने माथे पर आया पसीना साफ़ करने लगा.

राज मौसी से-- देखा कैसे मुझे देख कर परेशान होने लगा है...

मौसी भी देख कर हैरान थी. महेश उसका पति रह चूका था. राज के निचे थी तोह कुछ टेंशन में भी थी. पता नहीं क्या कुछ हो जाये.

महेश-- मुझे कैसे याद किया आपने

राज-- आगे आओ.. महेश आगे आया.. देखो महेश सुनैना की मांग में मेरा खून.. अब से सुनैना मेरी पत्नी है. तुम अपने लिए कोई और ढूंढ लेना..

महेश के लिए ये वाली बात बहुत हैट के थी. उसे ग़ुस्सा भी आ रहा था. पर राज और सिमरन का दर कहीं बढ़कर था.. ठरकी भी था. हिम्मत नहीं कर पाया पर बोलै ज़रूर

महेश-- सर ये सब सही नहीं है. आपने तोह कुछ और कहा था. ऐसे तोह मैं बदनाम हो जाऊँगा

राज-- चूतिये तुझे बड़ी चिंता है अपनी बदनामी की. बरसों से रंडियो को छोड़ रहा है. पहले कभी अपनी पत्नी की चिंता नहीं हुई. आज मेने उसे अपनी पत्नी बना लिया है तोह तुझे अपनी इज़्ज़त की पड़ी है.

महेश दर गया राज को घुसे में देख के-- mm..mm..mai तोह केवल इतना hi कह रहा सुनैना मेरी पत्नी है. ww...wo..wo आपकी पत्नी कैसे बन सकती है

मौसी तोह महेश के रंग देख कर hi हैरान रह गई थी. मौसी के अंदर भी अब हिम्मत आने लगी थी.

राज-- तुझे सुनैना को डाइवोर्स देनी होगी.

mahesh--nn..nahi..nahi.. ये सही नहीं है सर

रजा-- अबे चूतिये.. डाइवोर्स मतलब तुझे सबके सामने ढंढोरा नहीं पीनट है. तुझे मेरे दादी और सुनैना के सामने ये बोलना होगा. तूने सुनैना को डाइवोर्स दी.. तू फिर कभी भी सुनैना की ज़िन्दगी में नहीं आएगा. घर में hi रहेगा. तेरा कमरा भी अलग होगा. जब मुझे सही लगा, घर में भी सबको बता दूंगा. सब घर वाले जान लेंगे तू सुनैना का अब कुछ नहीं रहा. सुनैना केवल मेरी पत्नी है..

महेश अपने चेहरे पर आये पसीना को साफ करता हुआ-- ऐसे तोह में अपने बच्चू की नज़रों में भी गिर जाऊँगा..

मौसी बोल पड़ी-- पहले कौनसा आप अपने बच्चू की नज़रों में महँ हाँ

राज-- हे मेरी रानी.. आप को महेश को अब सम्मान देने की ज़रूरत नहीं है. सम्मान केवल मेरे लिए hi रह गया है.

मौसी को भी समझ आ गई. मौसी खुश भी हो गई और कुछ शर्मा भी गई.

मौसी-- सही कहा जी आपने.. महेश से अब मैं भी कोई वास्ता नहीं रखना चाहती. मुझे इसे सम्मान देने की भी ज़रूरत नहीं है.

दादी बहुत देर से चुप कड़ी थी.

महेश-- माँ आप hi कुछ कहें.. ऐसे कैसे सब हो सकता है

दादी-- चुप कर पापी कहीं के.. क्या दिए है तूने इस घर को. तेरे बाप के पैसो से फैक्ट्री भी चल रही है. वो न होता तो आज सड़क पर होता.

दादी ग़ुस्से से बोली तो महेश हैरान हो गया. उसे बहुत से झटके लग रहे थे

राज-- खड़े रहोगे या फिर कुछ बोलोगे भी..

महेश राज को देखता हुआ.. ठीक है.. पर मुझे समाज में गिरना नहीं है.

राज-- तोह बोलो फिर जो तुझसे कहा है..

महेश ने दादी, राज और सुनैना के सामने बोल दिए. भगवन को साक्षी मान कर महेश से सुनैना को डाइवोर्स दे दी. और मेरे लिए मान गया..

मौसी जज़्बाती हो गई. राज को गले से लगा कर फूट फूट कर रोने लगी.. राज ने महेश को जाने का कह दिए. महेश सर झुका कर वहां से चला गया. महेश घर से भी निकल गया.. महेश को ग़ुस्सा भी था. पर कुछ कर नहीं सकता था. राज के सम्बन्ध वर्मा परिवार से न होते तोह महेश कुछ भी कर जाता.. जान गया था. राज बहुत पावरफुल है और महेश बदले के लिए सबकुछ बर्बाद नहीं कर सकता था. फैक्ट्री थी, रोज़ नयी नयी छूट भी मिल जाया करती थी. कैसे वो अपनी इतनी सूंदर ज़िन्दगी को तबाह होते देख सकता था. ग़ुस्सा मन में ज़यादा देर रख भी नहीं सकता था. महेश वापिस फैक्ट्री लौट गया.

दादी पास बेथ कर मौसी की पीठ सेहलनि लगी. राज ने मौसी को उठा के अपने गले से लगा लिया था. मौसी राज के गले लग के फूट फूट कर रो रही थी.
 
राज और दादी के कारण मौसी जल्द hi चुप हो गई.

मौसी राज से अलग हुई और राज की अंकों में देखने लगी. भीगी आँखों से राज को निहारने लगी मौसी. अपने बच्चू से भी छोटे लड़के के पत्नी बन गई थी सुनैना. अपने hi भांजे की पत्नी बन गई थी. पर जानती नहीं थी. खुश बहुत होने लगी थी. इस उम्र में उसे ऐसे ख़ुशी milegi.usne सोचा नहीं था.

राज ने दादी के सामने hi मौसी के होंटो पर किश कर दिए. मौसी राज की आँखों में रखती रही. यद् आया दादी भी पास है तोह शर्माने लगी.

दादी है पड़ी-- मुझसे कैसे शर्म सुनैना बेटी. एक हिसाब से तोह हम दोनों एक दूसरे की सौतन hi हुई न.. दादी हस्ते हुए बोली.

राज-- दादी कुछ ज़्यादा hi पर नहीं निकलने लगे हाँ आपके.

दादी-- हेहेहे अब तोह निकलेंगे hi. अब तो मैं भी बदल गई हों न. मौसी और भी लज्जाने लगी. राज ने मौसी को एक किश और कर दिए.

राज-- क्यों मेरी चंदा रानी.. अपनी सौतन के सामने शर्म आ रही है. मौसी बोली कुछ नहीं हाँ में सर हिला दिए.

राज-- दादी चल उठ और मौसी की शर्म काम कर.. उतर दे कपडे. आज मिलकर मज़ा करते हाँ और सुनैना को भी आनंद देते हाँ. उसकी झिझक और शर्म कुछ काम करते हाँ..

दादी को भी कुछ शर्म आई थी. पर तीन बार चुद के काम हो चुकी थी. मौसी हैरानगी से राज को और दादी को देखने लगी. दादी उठी और नंगी होने लगी.

राज मौसी के गालों पर उँगलियाँ चलते हुए निचे लाने लगा और गले से निचे फेरने लगा. मौसी की शर्म भी बढ़ी और मज़ा भी. राज का स्पर्श मौसी को पागल भी कर रहा था. ऐसा स्पर्श कब पाया था मौसी ने पहले.. राज की उँगलियाँ मौसी के गले पर, क्लीवेज पर चलने लगी.. मौसी राज को तोह दादी को देखने लगी. मौसी भी नशे में होने लगी.

औरत औरत के सामने जल्द अपनी झिजक भूल जाती है. मौसी भी अब भूलती जा रही थी. बरसों की गर्मी ने भी मौसी को सब भूलना शुरू कर दिए था.

दादी नंगी हो गई तोह राज ने भी अपनी कमीज़ उतर दी.. मौसी नशीली आँखों से राज के बदन को निहारने लगी. दादी ने अपना हाथ बढ़ाया और राज की शलवार का नाडा खोलना शरू कर दिए. जल्द hi राज के लुंड को निकल कर सहलाने लगी.

मौसी राज को तोह कभी राज के लुंड को देखने लगी. मौसी की सांस भरी होने लगी. कितने समय से मौसी इस सब से दूर थी. महेश को अब मौसी की छूट से कोई दिलचस्पी भी नहीं रह गई थी. बस एक hi कमरे में एक hi बीएड पर सो जाया करते थे. पर महेश ने बहुत समय से मौसी के साथ सेक्स नहीं किया था. मौसी हलकी हलकी कंपनी लगी. जबज़ट बेकाबू होने लगे थे.

राज ने मौसी के चेहरे को थामा और किश करने लगा. मौसी भी कुछ देर में खुद को भूल कर राज की किश में साथ देने लगी. पर वो ज़यादा नहीं कर रही थी. राज एक हाथ से मौसी के चुके को भी दबा रहा था. मौसी को बड़े प्यार से राज ट्रीट कर रहा था. राज समझ गया था. मौसी को सेक्स से ज़्यादा प्यार की छह है. मौसी की असल भूक भी यही थी.

दादी लगी हुई थी राज के लुंड को मसलने में. दादी भी पूरी बेशरम बन गई थी. अपनी बहु के सामने बे नक़ाब हो गयी तोह. और राज का लुंड लेके भी वो बदल गई थी. अब वह मस्त होक बिना शर्म किये मौसी के सामने hi राज के लुंड से खेल रही थी.

राज ने किश तोड़ी और मौसी को देखा.. मौसी ऑंखें बंद किये आनंद में डूबी हुई थी. ऐस दिख रहा था. जैसे मौसी ने शराब पि ली हो. राज ने दादी को एक किश करि और खड़ा हो गया. शलवार उतर कर मौसी की पीठ पर हहत लेजा के मौसी का ब्लाउज खोलने लगा. ब्लाउज पीछे से दूरी से बंधा हुआ था.

राज ने ब्लाउज खोल के ब्रा की हुक भी खोल दी और ब्लाउज ब्रा को मौसी के बदन से अलग कर दिए.. मौसी के बड़े बड़े चुके चमकने लगे. मौसी की ऑंखें अब भी बंद hi थी. राज ने मौसी को हल्का सा किश किया और बीएड पर लिटा दिए.

मौसी किचन में थी तोह पेटीकोट और ब्लाउज में थी. साड़ी उतरी हुई थी मौसी ने. राज ने दादी को इशारा किया मौसी के पेटीकोट की और. और खुद झुक कर मौसी के पुरे चेहरे को चाटने में. हलके हलके किश करने लगा. राज मौसी को वो सब आज hi दे देना चाहता था जो मौसी बरसों से प्राप्त नहीं कर पाई थी.

मौसी पूरी तरह से राज के प्यार के नशे में थी. अब तोह राज उसका असली वाला पति था. आनंद तोह मौसी को मिलना hi था. दादी ने पेटीकोट खोल कर मौसी के पैरों से निकल दिए. मौसी ने भी अपनी गांड उठा कर दादी की हेल्प करि थी.

राज निचे हुआ और मौसी की गर्दन को छत्ता हुआ मौसी के चुचु पर आ गया. मौसी के एक चुके को अपने मोहन में लेकर राज चूसने लगा. मौसी हिल गई. राज ने दूसरे हाथ से मौसी के दूसरे चुचु और निप्पल को दबाना, कुरेदना भी शुरू कर दिए था. मौसी की छूट अब पानी पानी होने लगी थी. मौसी अपनी जंगों को रैगर कर अपनी छूट में बढ़ रही बेचैनी को काम करने लगी. पर वो बढ़ती hi जा रही थी.

मौसी कुछ बोली नहीं थी. राज दूसरे चुके को मोह में भर कर चूसने लगा. मौसी अब अपनी सिसकियाँ रोक नहीं पाई. मौसी के चुके बुरी तरह से फूलने लगे थे. राज बहुत देर तक मौसी के दोनों चुचु के साथ hi लगा रहा था. और महेश साला कभी भी मौसी के इन अनमोल चुचु की कदर नहीं कर पाया था.

मौसी मैं में राज के एक एक स्पर्श को फील कर रही थी. राज कितने चाओ से एक एक अंग को चुम चाट रहा था. कितना आनंद दे रहा था मौसी को. मौसी बहुत अच्छे से एक एक पल को महसूस कर रही थी.

मौसी के चुके फूलने गए. निप्पल्स अकड़ते गए. मौसी को जहाँ मज़े की इन्तहा मिल रही थी. वहीँ मौसी की बेचैनी भी अपने अंतिम सीमा पर पोहंचती जा रही थी. पुरे शरीर में करंट दौड़ने लगा था.

मौसी-- आठ मेरे स्वामी.. मेरे पति.. आपकी पत्नी बहुत जलने लगी है. उफ्फ्फ्फ़ उसे शांत करदें स्वामी जी..

राज ने सर उठा कर देखा तोह मौसी ऑंखें बंद किये हुए अपना सर इधर उधर पटख रही थी. राज मौसी की तड़प देख कर सीधा हो गया. वह समझ गया था मौसी बहुत समय के बाद आनंद में डूबी है तोह खुद पर सहन नहीं कर पा रही.

राज सीधा हुआ तोह दादी भी अपनी पानी पानी छूट के लिए थोड़ी साइड में हो गयी. दादी भी अब बेचैन होने लगी थी. पर मौसी के लिए खामोश थी. जानती थी, जितनी मौसी को ज़रूरत है, उतनी उसे नहीं.

राज मौसी के पैरों में आया और दोनों पेअर खोल दिए. मौसी की छूट को देखा तोह ऐसा लगा, जैसे मौसी की छूट का दूर बरसों से बंद पड़ा हुआ हो.. मौसी की छूट बड़ी थी. पर लैब कुछ कुछ आपस में मिले हुए थे. राज को मौसी की छूट पर प्यार भी आया और तरस भी. बहुत सा चुतरस मौसी की छूट से बह बह कर निचे बीएड की चादर पर टपकता रहा था.. मौसी की छूट में ढेरों पानी था. राज को वही निकल कर मौसी को शांत करना था.

राज झुका और मौसी की छूट पर मोह लगा दिए.

मौसी-- उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ स्वआआआअमि jiiiiiiiiiiiii ... मौसी तड़प गई. छूट तोह महेश ने भी मौसी की बहुत छाती थी. पर राज के जैसा आनंद मौसी को पहले कभी प्राप्त नहीं हुआ था.

राज ने पहले मौसी की छूट का पानी छठा. फिर बड़े प्यार से मौसी की छूट को अपने होंटो में भर कर चूसने लगा. मौसी उछाल पड़ी थी राज की छूट चूसै पर. दादी मौसी को प्यार से निहार रही थी. कैसे तड़प रही मौसी.. दादी मौसी को सुख प्राप्त होते देख कर निहाल हो रही थी. दादी मौसी के सर की और आई और मौसी के सर के बालों में उँगलियाँ चलने लगी. मौसी ने ऑंखें खोल कर दादी को देखा. जहाँ आनंद hi आनंद था. मौसी ने फिरसे ऑंखें बंद कर लीं.

राज एक ऊँगली मौसी की छूट में दाल कर अंदर बाहर करने लगा. साथ hi मौसी की छूट के दाने को मोह में भर कर चूसने लगा. मौसी की हालत पहले hi पतली हो चुकी थी. अब और भी ज़यादा पतली होने लगी. मौसी झटके पर झटके खाने लगी और राज बड़ी स्पीड के साथ, पर प्यार के साथ मौसी की छूट में ऊँगली कर रहा था. मौसी की छूट को चूस रहा था.

मौसी कुछ देर और तड़पती रही. फर मौसी के झटके बढे तोह मौसी कांपती हुई भल भल बहने लगी... राज अपनी पत्नी की छूट प् पहला चुतरस अपने अंदर उतरने लगा..
 
कुछ देर में राज मौसी की छूट चाट कर सर उठा गया. वहीँ मौसी भी ऑंखें खोल कर दादी को देखने लगी.

मौसी की आँखों असीम शांति थी. ऐसा आनंद मौसी ने लाइफ में पहली बार प्राप्त किया था. चुतरस बहना और बात थी. पर इतने प्रेम के साथ मौसी की छूट ने पहली बार चुतरस बहाया था.

दादी-- खुश हो न सुनैना अब तोह तुम.

मौसी हम्म्म्म hi कर सकीय.

दादी ने स्माइल से मौसी के गाल पर हाथ फेर दिए.

दादी-- देख रहो हो न अपने पति की आँखों में. कितना प्यार करता है तुमसे. यहाँ तुझे केवल प्यार hi दिखेंगे. शरीर का मिलान तो होता hi है पत्नी पत्नी के बीच में. प्यार करने वळून के बीच में. पर हवस का वहां कोई काम नहीं होता. मुझे देख लो. इस उम्र में अब मैं क्या हवस रखूंगी अपने दिल में. शरीर मिलान की कोई छह भी तोह इस उम्र में बाकि नहीं रहती. मैं भी रत से रघु बेटे के प्यार में नाहा रही हों. तू भी खुल कर जी अब की मिली अपनी इस ज़िन्दगी को. भूल जाओ, जो कुछ भी पहले था.

मौसी बड़े धयान से दादी की बातें सुन रही थी. राज झुका और मौसी को किश कर दिए.

राज-- भूल जाओ अपनी मेरी उम्र को. आप कभी भी ऐसा मत सोचना कह मैं आपके बच्चू की उम्र का हों. आप मेरी पत्नी है तोह खुद को मेरी hi उम्र का सोचें. ऐसे मिलने वाला एक एक पल जीने में मज़ा भी आएगा तोह बेपनाह आनंद में देगा.

मौसी राज की आँखों में देखती हुई राज पर कुर्बान होने लगी थी. सच में hi ऐसे प्यार के लिए hi तोह वह मचला करती थी. अपनी जवानी में किसी से प्यार नहीं किया था. पर शादी ऐसे और महेश जैसे से होगी, उसने सोचा नहीं था.

नाना नानी के तुरंत शादी कर देने से वह टूट कर रह गई थी. महेश अच्छा होता तोह नाना नानी का दिया दर्द काम भी हो सकता था. पर ऐसा हो नहीं पाया था.

मौसी राज की आँखों में देखती हुई फिरसे इमोशनल होने लगी तोह राज ने झुक कर मौसी की आँखों को चुम लिया.

राज-- अब बस. अब नहीं रोना है.

मौसी भीगी आँखों के साथ हाँ में मुंडी हिलने लगी.

दादी-- रोने के दिन गए सुनैना. अब तोह खुसियो भरे दिन आये हाँ.

राज ने दादी को पकड़ लिया और किश करने लगा. मौसी देख के स्माइल करने लगी. राज ने एक ऊँगली मौसी के मोह में दाल दी. मौसी भी राज का मैं समझते हुए राज की ऊँगली को चूसने लगी.

राज-- मौसी आप साडी बदल जाएँगी, देखना कितना सब लौटेंगे तोह आपको देख कर शॉकेड रह जायेंगे.

राज दादी को किश करता हुआ दादी के निप्पल को पकड़ के मरोड़ने लगा.

राज ने किश तोड़ी और मौसी से बोलै.

राज- मेरी पत्नी का क्या दिल छह रहा है अब.

मौसी-- अपने पति से इतने प्यार की छह. इतना प्यार पाना को मैं है कह दुन्या में कसी को भी उतना प्यार न मिल पाया हो.

राज-- तो जाइये और नाहा धु कर एक ब्यूटी क्वीन बन कर आइये. एक पत्नी बांके आइये. एक

ऐसी पत्नी जो अपने पति को प् के, अपने प्रेमी पति को प् के खिल उठती है. भूल जाएँ आपके बच्चे भी हाँ. समझ लें आप आज भी कुंवारी हाँ और पहली बार लाइफ में अपने पति के साथ मिलान करने वाली हाँ. वह सब अपने दिल में ले आइये जो कभी आपके दिल में हुआ करता था. जो सब करिये जो कभी आपका करने को मैं हुआ करता था. वह सरे शोक पुरे कीजिये वह साडी फीलिंग्स को अपने अंदर वापिस लाइए जो कभी हुआ करती थी. जिनकी छह कभी आपके मैं से गई hi नहीं थी.

मौसी एकदुम्म से खिल उठी और उठ कर बेथ गई. मौसी की आँखों में सरे खवाब मचलने लगे थे. राज ने मौसी का हाथ पकड़ क्र मौसी को बीएड से उतर दिए.

मौसी के होंटो पर बहुत प्यारी मुस्कान आ गई थी.

दादी-- जाओ सुनैना अपने पति के लिए त्यार होक आओ.

मौसी-- हाँ मैं भी आज बरसो बाद मैं से खुद को सजा के आती हों. कभी छह hi नहीं थी खुद पर धयान देने की. आज मई अपने मैं की साडी पूरी करुँगी.

राज ने मौसी को पकड़ और किश करने लगा. मौसी भी राज के सीने पर हाथ फेरते हुए राज को किश करने लगी.

राज ने किश तोडा तोह मौसी अपने होंटो पर ज़ुबान फेरती हुई कुछ शर्मा कर वहां से जाने lagi.piche से राज और दादी मौसी को देखने लगी.

दादी-- रघु बीटा, भगवन ने तुम्हे भेज कर हमें ज़माने भर की खुशियां लौटा दी हाँ.

राज ने दादी के मोह पर हाथ रख दिए. रंडी सोच कर बोलै कर. अभी मौसी चूड़ी नहीं है चुद ले, फिर जो मर्ज़ी बोल लेना. कुछ गड़बड़ हुई तोह परइ सोसाइटी के सामने तेरी गांड मारूंगा में..

दादी दर गयी और राज दादी की गांड पर हाथ फेरने लगा.

राज-- वैसे खूब याद आया.. चल घोड़ी बन जा, आज तेरी गांड में लुंड दाल के देखता हों. दादी और भी दर गयी.

दादी-- नहीं रघु बीटा. गैंग में नहीं ले सकती में. मम

राज-- चल नाटक न कर. मेने देखि है तेरी गांड. आज भी कुछ कुछ दम ख़म बाकि है उसमे.. छूट से ज़यादा मज़ा मुझे तेरी गांड दे जायेगी.

दादी-- नहीं रघु बीटा.. प्ल्ज़ मेरी गांड को भूल जाओ

राज ने दादी को बीएड पर गिरा दिए... प्यार से लेगी तोह अच्छा है. नहीं तोह-- अंदाज़ा तोह होगा कितना दर्द सहन करना पड़ेगा. प्यार से लोगी तोह काम होगा.

दादी मैं में-- हरामी कैसा लड़का है तू रे.. कभी इतना प्यार देता है, मैं निहाल हो जाता है. कभी इतना बड़ा हरामी बन जाता है. लौड़ा डाले बिना hi गांड फाड़ने लगता है. हे भगवन इस उम्र में अब मुझे फिरसे गांड मारवणी पड़ेगी. इतना बड़ा लौड़ा कैसे लुंगी में गांड में.

राज-- बोलो न. ज़बरदस्ती या प्यार

दादी रोहणसी होती हुई-- प्यार से दाल लो रघु बीटा. कोसिस करना काम से काम दर्द देना मुझे.

राज हस्ता हुआ-- में तो बिलकुल भी नहीं दूंगा दर्द आपको दादी. दर्द तो मेरा लौड़ा देगा

दादी-- उसी की तोह चिंता है रघु बीटा. तुम तोह बहुत प्यारे हो.

राज झुका और दादी की गांड चाटने लगा. दादी की गांड की हालत छूट से बेटर थी. राज दादी की छूट में दो उँगलियाँ दाल कर दादी की गांड चाटने लगा. अचे से दादी की गांड को गीला करके राज सीधा हुआ

राज-- दादी अब में डालने वाला हों. चीखना चाहें तोह चीख सकती हाँ. घर से बहार आवाज़ नहीं जायेगी आपकी.. राज हरामीपन से बोलै

दादी-- जानती हों में सब. चीखें तोह में छह के भी नहीं रोक सकती. वहां ज़यादा भी नहीं लिया मेने कभी. लिए हुए भी तोह बार्सोब बीत गए हाँ. तेरा लौड़ा भी बड़ा है और मेरी सहन शक्ति भी काम है.

राज ने दादी के चुत्तड़ खेंच के दादी की गांड के छेड़ को थोड़ा सा खोला और फिर अपने लुंड के सुपड को दादी की गांड के छेद में फंसा कर थोड़ा सा बढ़ाओ दे दिए

दादी-- आआआआई.. अभी से दर्द होने लगा है रघु बीटा

राज-- भूल जाओ सब दर्द को. मज़े लो. सुनैना को तोह बड़े मज़े करने का कह रही थी. उसकी भी तोह गांड में घुसेगा न. आप भी लें

दादी-- वह मेरी जितनी आगे की नहीं है न. जितनी आग उसमे है, उतनी मुझमे नहीं. जितनी शक्ति उसमे है उतनी मुझहे नहीं. झेल पाना आसान नहीं है... aaaahhhhhhhhhhhhhhhhh

राज ने धक्का मार दिए और दादी की बोधि गांड में लुंड घुसता चला गया. दादी चीख पड़ी.

मौसी बाथरूम में नहाते हुए स्माइल करने लगी. बोली- मेरे स्वामी जी आप कितने शक्तिशाली, कितने प्यारे हाँ.. मौसी मॉल मॉल के खुद को साफ़ कर रही थी. मौसी बरसों बाद मैं से खुद को चमका रही थी

राज दादी की चीखों पर कुछ देर रुक जाता, फिर एक धक्का मार कर अपना लुंड कुछ और दादी की गांड में घुसा देता. दादी तड़पने लगी, चीखने लगी. दादी की गांड फटती जा रही थी. उतना बड़ा लुंड कभी नहीं लिया था दादी ने गांड. थोड़ा सा खून भी निकलने लगा.

बहुत जलन होने लगी थी दादी को अपनी गांड में..

5 धक्को में राज ने सारा लुंड दादी की गांड में उतर दिए. रुक कर दादी की छूट ुण्डलियों से छोड़ने लगा. दादी कुछ देर चीखती रही. फिर दादी मस्त होने लगी. गांड का दर्द छूट के मज़े में गम होने लगा.

दादी मस्त हुई तोह राज लुंड निकल कर धीरे धीरे दादी की गांड मरने लगा.

दादी-- आह्हः माआआ.. रघु बीटा कितना दर्द दे दिए इस बुढ़िया को तूने तो.. आअह्ह्ह मुझे नानी यद् दिला दी.

राज-- दादी आपकी गांड कसम से आज भी बहुत मस्त है.

दादी-- हाँ तुझे तोह लगेगी hi न. लौड़ा जो डाला हुआ है. छूट टाइट नहीं है, पर गांड तुझे टाइट मिल गई है. तू भी खुश और तेरा लौड़ा भी खुश. मैं भले जियो या मारों. तुझे या तेरे लौड़े को इससे क्या.

राज हस्ता हुआ-- दादी आप बोलती हुई बहुत मस्त लगती हाँ.

दादी-- तू ने hi तो मुझे बोलना सिखाया है. चल अब मुझे मज़ा भी करा. कितनी देर से दर्द दे रहा है

राज-- मुझे स्पीड पकड़नी पड़ेगी

दादी-- तोह

राज-- आपको फिरसे दर्द होगा.

दादी-- पहले तोह तू मुझे दर्द नहीं दे रहा है. अब थोड़ा सा दर्द होता है तो होने दे. मेरी गांड में अपना बड़ा लौड़ा दाल hi दिए है तोह मुझे भी बड़े लौड़े से गांड मरवाने का मज़े लेने दो.

राज-- दादी आप कितनी मस्त हाँ आज भी.

दादी हस्ती हुई-- तेरे लौड़े ने मस्त बना दिए है मुझे रघु बीटा. तेरे प्यार ने मुझे मस्त बना दिए है. वर्ण सुनैना के दर्द को, सूने पैन को देख कर भी मैं अपनी साँसे पूरी कर रही थी. मैं बता नहीं सकती कल रात से मैं कितनी खुश हों.. जब से तुमने मुझे बता है तुम आरा----------- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

पूरा लुंड निकल कर राज ने जी जान से धक्का मार दिए था.. दादी चीख पड़ी. कहा भी था उसे अभी मौसी चूड़ी नहीं है. भले hi मेरी पत्नी बन गई है. अभी भेद नहीं खोला जा सकता. इमोशंस में बह जाने के बाद हालत किसी भी दिशा में मुद सकते थे. राज मौसी के साथ हरामीपन नहीं करना चाहता था. वह अंदर से बहुत दुखी थी. सुनैना मौसी को प्यार की ज़रूरत थी, चुदाई की भी थी. पर असल में उन्हें प्यार की ज़रूरत थी. और वही प्यार दे कर राज मौसी को छोड़ना चाहता था. बाद में मौसी को ये जान कर काम झटका लगता कह राज उनका भांजा हों

दादी भी समझ गई थी-- रघु बीटा मुझसे भूल होने लगी थी. अच्छा किया.. अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह

ओह्ह्ह्ह हाआआआआईए रघु बीटा.. अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ maaaaaaaaaaa aiiiiiiiiiii नाहीइइइइइइइ

अब्ब्ब्ब नहीं बोलूंगी कुछ भी.. धीरे धीरे .. अह्ह्ह्ह

दादी फिरसे पटड़ी से उतरने लगी थी. राज दादी की जैम कर गांड मारने लगा. दादी कुछ बोलने लायक नहीं रही.

कुछ देर में दादी की गांड सही से खुली हो गई थी. दादी मस्त होने लगी. राज ने लुंड निकल कर छूट में डाला तो दादी और भी मस्त होने लगी.

दादी-- आठ रघु बीटा, ऐसा लगने लगा है. जैसे तेज़ धुप से किसी पेड़ की छाओं में आ गई हों. कितनी भयंकर गांड मारी है मेरी तुमने तो.. हाय कितनी जलन होने लगी है मुझे गांड में. और तेज़ छोड़ मुझे रघु बीटा. निकल दे मेरी छूट से पानी. करदे मुझे शानत अब और सहन नहीं होता

राज ने दादी को छोड़ छोड़ के दादी की छूट से पानी निकल दिए. फिर बीएड पर लिटा कर गांड में दाल के छोड़ने लगा. झड़ते समय दादी की छूट में लुंड दाल कर खली कर गया.

दादी के ऊपर hi गिर कर राज लम्बी लम्बी साँसे ले रहा था. दादी अब सही से मैट मारी थी राज ने. दादी ने शायद पूरी उम्र ऐसी चुदाई नहीं करि थी.

आधे घंटे बाद राज एक और कमरे में था. और बीएड पर बैठा हुआ था. मौसी अपने अपने कमरे में त्यार हो रही थी. कुछ देर में दूर खुला और मौसी होंटो पर स्माइल लिए हुए अंदर दाखिल हुई..

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मौसी को देख कर राज झटके से सीधा हो बैठा. मौसी बहुत हसीं दिख रही थी. मौसी के होंटो पर स्माइल थी. कहीं से भी मौसी कुछ घंटों पहले वाली मौसी दिखाई नहीं दे रही थी. मौसी अपने चेहरे पर ख़ुशी लाये हुए अपने मन की करती हुई हॉट ड्रेस में राज के सामने थी. ऐसी hi छह तोह कभी मौसी के मैं में रही थी. अपने मैं की पूरी छह से जीने की..

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राज बड़े प्यार से अपनी मौसी को अपनी पत्नी को निहारने लगा. राज को अपनी और इतने प्यार से, इतने चाओ से देखते पा कर मौसी अंदर से खिलती चली गयी.. एक प्यारी सी मुस्कान उसके होंटो कर आ गयी.. मैं की ख़ुशी हज़ारों गुना बढ़ गयी थी. ये तोह हमेशा से उसकी छह रही थी.
 
कॉलेज में संजना, इशिता और फ्रेंड एक खली पीरियड में कॉलेज के पार्क में बैठी हुई थी. एक लड़की रिद्धिमा ने अपना मोबाइल निकला और सबको दिखने लगी. सबने देखा तोह रिद्धिमा को देख कर बोली

तू सारा समय लुंड hi देखती रहती है क्या.

रिद्धिमा-- हेहेहे क्या करूँ, हर रात सपने में दिखाई देते हाँ. रियल में तोह कभी इतना बड़ा दिखेगा नहीं. तोह सपनो में और पिक्स में देख लेती हों. रिद्धिमा हस्ते हुए बोली

तोह संजना ने मोबाइल उसके हाथ से झपट लिया. और पिछ देखने लगी. एक काले लुंड की पिछ थी. साइज में बहुत बड़ा था. संजना बड़े धयान से देखने लगी.

संजना-- कामिनी तू कहाँ से कमल कमल के लुंड ढूंढ निकलती है. हर रोज़ नयी पहले से भी बढ़िया लुंड की फोटो दिखने लगती है

इशिता ने उसे चुटकी काट दी- तुझे पसंद है तो ले ले कोई भी एक.

सब हसी तोह संजना हसरत से बोली- काश मुझे भी कोई दिख जाए. कसम से बड़ा मैं होने लगा है, ऐसे hi एक लुंड को रियल में देखने का

एक और लड़की बोली-- हेहेहे देखने का मैं है या हाथ में पकड़ के उसकी गर्मी फील करने का.

दूसरी बोली-- नहीं इसे तोह उस लुंड को लोल्लिपोप समझ के चूसने का मैं है.

सब ज़ोर से हसने लगी. संजना भी है पड़ी- जब हाथ में आयेगा तोह आगे का भी सोच लुंगी. पहले मिले तोह सही. संजना चटखारे लेते हुए बोली

इशिता संजना के कण में बोली- मुझे तो एक दिख भी गया है. हाय पता नहीं वो मेरे हाथ में आता भी है या नहीं. इशिता भी चटखारे लेने लगी

ये चीटिंग है.. सब गर्ल्स बोली तोह

संजना-- हाँ है तोह.

रिद्धिमा- कामिनियों में तुम दोनों को अपनी साडी बातें बता देती हों और तुम दोनों हम से hi छुपा रही हो.

दूसरी गर्ल्स-- हाँ हाँ हमें भी बताओ. हमें भी चटखारे लेने हाँ.

संजना और इशिता हसने लगी. इशिता के गाल कुछ लाल भी होने लगे थे.

संजना- राज जा नाम सुना है कभी.

रिद्धिमा- कोण राज.. वह सिमरन वाला राज..

दूसरी लड़की-- दिल वाले दुल्हनिया लेजायेंगे वाला राज.. मीन्स शाहरुख़ खान

एक लड़की ने उसके कान में कुछ बोलै तोह चीख पर इशिता को देखने लगी. इशिता राज तुम्हारे जीजू का बोल रही है संजना

इशिता ने स्माइल के साथ सर हिला डाला

फिर तोह सब चटखारे लेते हुए बोलने लगी-- कुछ मिर्च मसाले वाली न्यूज़ है क्या

संजना-- हाँ.. बूत कुछ मिर्च मसाले वाली बात नहीं है. पूरी डिश hi मसाले से भरी पड़ी है.

रिद्धिमा-- अब बता भी दो कामिनी. क्यों हमारा चार्म काम करने पे तुली हुई है.

संजना-- हेहेहे रिद्धिमा तुमने जो पिछ दिखाई है अभी अभी लुंड वाली

रिद्धिमा-- हाँ तोह..

संजना इशिता के बूब्स को दबती हुई boli--ishita का कहना है राज का लुंड पिछ वाले लुंड से भी बड़ा है.

सब-- क्याआआआआ.. पर इसने कैसे देख लिया.. सब हैरान थी. सब मस्ती में आ गई थी.

संजना सब को डिटेल बताने लगी. सब सुनकर इशिता को छेड़ने लगी.

एक बोली -- इशिता तेरी तोह निकल पड़ी

इशिता-- कामिनी मेने कोनसा वो लेने है. जिसका है, वह ले रही थी.. कितना चाओ से वह चूस रही थी. उफ्फ्फ्फ़ में बता नहीं सकती तुम सबको कमीनो. तब से लेके अब तक मेरी छूट hi नहीं सूख रही है.

रिद्धिमा बेशर्मी से इशिता का हाथ पकड़ पर अपनी छूट पर देखते हुए बोली.. देख कामिनी मेरी तो सुनके hi गीली होने लगी है. तूने तोह रियल में देखा था. तेरा हाल तोह सच में बुरा होना hi था.

एक लड़की बोली-- पर सिमरन कैसे ऐसा कर सकती है. वह बोली तोह सब उसे देखने लगी.

वो फिरसे बोली-- सुना नहीं है क्या आप सबने.. जानती नहीं हाँ क्या आप सब सिमरन को. कितनी बड़ी गुंडई है वह. जैसे इशिता ने बताया. मुझे तो बिलीव hi नहीं हो रहा. ऐसा सन भी बना होगा. सिमरन राज का लुंड न काट दे.

सब हसने लगी-- हाँ सही कहा तूने. पता नहीं कैसे राज ने इतनी हिम्मत कर डाली. लुंड तोह वो सिमरन से चुसवा hi नहीं सकता. सिमरन और टाइप की लड़की है. अगर सुधरती भी है तोह उसे समय तोह लगेगा न.

रिद्धिमा-- जो भी है. पर सुनके मुझे बहुत अच्छा लगा. आज तो पिछ देखे बिना hi ऊँगली कर लुंगी मैं तो. अब मेरे ख्यालों में राज का लुंड है न. रिद्धिमा हस्ते हुए बोली तोह सब हसने लगी.

सब हटके राउंड में बैठी थी. कोई नहीं जाना पाया. ये चुलबुली सी दिखने वाली लड़कियां कितनी गन्दी गन्दी बातें कर रही हाँ.

दिल्ली की hi एक कोठी में सिमरन और आईएनएस शिवानी आमने सामने बैठी हुई थी.

सिमरन ने एक बात करि थी शिवानी से.. सुनके शिवानी को पहले तोह ग़ुस्सा आया था. बाद में वह हैरान रह गई थी.

शिवानी-- मैडम आप जो कह रही है. उसका मतलब भी समझती हाँ आप.

सिमरन-- सब समझती हों. तू बता, तू ये काम कर सकती है या नहीं.

शिवानी कश्मकश में थी.

सिमरन-- आज कल तोह हर लड़की जवान होते hi अपनी सील खुलवा लेती है. तूने अभी तक नहीं खुलवाई. तेरी मर्ज़ी. अगर तू राज से खुलवा लेगी तोह तुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. तुझे एक बढ़िया लुंड से सील खुलवाने का सवाद भी मिल जाएगा और प्रमोशन भी मिल जाएगी. सील खुलवा के भी तोह तेरी शादी में कोई रुकावट नहीं बनने वाली. आज कल तोह सभी को टूटी सील वाली hi लड़कियां मिल रही हाँ. तू भी उन्ही में एक हो गयी तोह तेरे पति को कोई फर्क नहीं पड़ेगा. सोच ले..

शिवानी सच में सोच में पद गई थी.

शिवानी- सच कहा आपने मैडम. ऐसे मेरी लाइफ पर कोई असर भी नहीं पड़ेगा. पर राज. मैडम राज बहुत डेंजरस लड़का है. आपकी उसके आगे नहीं चली तोह मेरी कैसे चल सकती है.

सिमरन ग़ुस्से से शिवानी को देखने लगी-- मैं दाल गली है या नहीं. तू कुछ नहीं जानती. और रही बात राज की तोह वह भी अब मुझे बहुत अच्छे से जान गया है. तू बोल करेगी मेरा काम. ये फिर किसी और को ढूंढ लूँ. राज के लुंड के लिए पुलिस फाॅर्स भरी पड़ी है छूट वालियों से.

शिवानी सोच में पद गयी. सिमरन की बात को नकारना मतलब अपने फ्यूचर को डिस्ट्रॉय करना था. सिमरन के काम आ जाती तोह पूरी लाइफ सेट हो सकती थी. सिमरन ने पहले भी कइयों की लाइफ सेट करि थी. शिवानी अच्छे से जानती थी. शिवानी साडी बुरी नहीं थी, पर कभी कभी अपनी पॉकेट भरी कर लिया करती थी.

सिरमन का पैकेज उसे सही लग रहा था. पर राज को लेके वह नर्वस भी थी. पुलिस वाली होक भी राज से नर्वस थी..

शिवानी-- ठीक है मैडम. अगर मुझे कोई और परशानी बानी तोह आप--

सिमरन ख़ुशी से उसे टोकती हुई-- अरे वह मैं सब देख लुंगी. तू बस अब से अपनी छूट को चमका के रख. जैसे hi तेरी छूट की सील खुलेगी. अगले दिन तेरा प्रमोशन माँ करवा दूंगी. मैं भी सिमरन हों कोई आम लड़की नहीं.

शिवानी छूट की सील टूटने के सर को भूल कर सुहाने सपनो में खोने लगी. प्रमोशन तोह उसका खवाब था. ऐसे hi वह स्टेप बी स्टेप आगे बढ़ती जायेगी और फिर---

शिवानी पुलिस वाली होक भी दिन में खवाब देखने लगी थी.
 
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