Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 6 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

राज, आदित्य और उर्वशी पास के एक रेस्टोरेंट में जा घुसे. आदित्य स्टुपिड इतनी ब्यूटीफुल वाइफ लेके राज के साथ कॉफ़ी पिने निकल पड़ा था. राज कहा कभी ऐसा मौका मिस कर सकता था.

आदित्य-- राज तुम सच में कमल के लड़के हो. मेने तुम जैसा एक भी नहीं देखा.

राज पूरा हरामी था-- में कहा कमल का हूँ आदि.. कमल तो तुमने किया है, उर्वशी जैसी हॉट लड़की को पता के शादी भी कर ली.

राज बोलै तोह आदित्य और उर्वशी दोनों है पड़ी. जहा आदित्य ने हस्ते हुए राज के कंधे पर हाथ मारा, वहीँ उर्वशी राज को एक दूसरे एंगल से देखने लगी. राज की स्माइल, बात करने का अंदाज़, कॉन्फिडेंस, और फिर सिमरन वाला काण्ड राज को सबसे अलग दिखा रहा था. उर्वशी दिल hi दिल में राज पर फ़िदा होने लगी. उर्वशी ऐसी hi लड़की थी, आदि के बाद किसी और में अट्रैक्शन पाती तोह कुछ दिन उसके साथ भी मज़ा मार लिया करती थी. अब भी वो राज को लेके सोच रही थी. उर्वशी ऐसी hi थी. और फिर राज था भी एक विलेज गाए, फिटनेस एंड लुक में राज शहरी लड़कों से बहुत हटके था. ये बार उर्वशी ने ज़यादा नोट करि थी.

और राज हरामी लड़कियों की ऐसी सोचें बहुत जल्द जान जाया करता था.

आदित्य-- तुम्हारे साथ खूब जमेगी राज. तुम बात भी अछि करते हो, जिजकते भी नहीं. ऐसी hi लड़के मुझे भी पसंद हाँ. उर्वशी को देखो, सच में बहुत हॉट है राज. पर हम ऐसी hi लाइफ जीना चाहते हाँ. ऐसे जीने में बहुत मज़ा आता है. खुद को दबा के रखना. मुझे ऐसे लोग पसंद नहीं हाँ. जो मैं में हो, वो मैं में hi रखे रहें.

राज-- तोह मेरे मैं में जो है वह में भी बोल दूँ. राज नॉटी स्माइल से उर्वशी को देख के आदित्य से बोलै तोह आदित्य ज़ोर से है पड़ा.

आदित्य-- हाहाहा उर्वशी सिर्फ मेरी है. उसे लेके दूसरी बात मत सोचना, बाकि सब ठीक है. उर्वशी स्माइल से आदित्य को देखने लगी.

उर्वशी-- राज क्या तुम आदि से दर जाओगे. क्या तुम मेरे साथ सिमरन के जैसे आदि के सामने कुछ नहीं कर सकते.

आदित्य-- no no no उर्वशी बेबी, माय डार्लिंग ऐसा मैट कहु.. हाहाहा मेरे पास एक तुम hi हो. राज बहुत आगे की चीज है, सिमरन के बाद तुम्हे भी ले उदा तोह में कहाँ जाऊँगा.

उर्वशी भी है पड़ी. तोह राज ने उर्वशी का हाथ पकड़ लिया. और आदित्य को देखने लगा.

राज--- सिमरन पहले मिल गई थी आदि, उर्वशी पहले मिलती तोह इसकी मांग पर मांग भर देता. फिर उर्वशी हम दोनों की हो जाती.

आदित्य-- हाहाहा सच में बड़े कमीने हो तुम राज. पर एक लड़की की दो लड़के मांग नहीं भर सकते.

उर्वशी भी राज को देख के नशीली आँखों से बोली-- भरने दो ने आदि राज को मेरी मांग, तुम्हे क्या, तुम कुछ स्नैप्स और लेके अपने फ्रेंड्स में शेयर कर देना. उर्वशी हस्ते हुए बोली. तोह राज और आदि भी है पड़े.

आदित्य-- उर्वशी बेबी मुझे राज में ट्रस्ट नहीं है. कहीं तुम्हे मुझसे छीन न ले. ः

नहीं नहीं बेबी, पहले hi बड़ी मुश्किलों से तुम्हे पाया है.

तीनो ऐसी hi बातें करते रहे, कॉफ़ी आई, तीनो पीते हुए हंसी मज़ाक करने लगे. आदि भी ऐसी लाइफ जीने का आदि था. तोह बहुत समय के बाद उर्वशी को भी राज की सूरत में एक मर्द पसंद आने लगा था. वर्ण कहाँ कोई इतनी जल्दी उसकी निघून में कोई जचता था.

कॉफ़ी के बाद आदित्य बोलै-- उर्वशी तुम राज के साथ बहार चलो, में वाशरूम होक आता हों. उर्वशी और राज दोनों खुश हो गए.

राज ने बहार निकल के उर्वशी का हाथ थाम लिया. उर्वशी तुम्हारे मस्त बदन से आ रही मस्त खुशबु मुझे बड़ी बेचैन कर रही है. सुनने में आया है तुम्हे अच्छे पार्टनर की ज़रूरत हमेशा रहती है.

उर्वशी राज की आँखों में देखती हुई बेशर्मी से बोली.. पार्टनर ऐसे hi पसंद नहीं आ जाते मुझे राज.. राज के लुंड को देखती हुई, कुछ दुम्म्म भी होना चाहिए. तुम हैंडसम हो, दूसरों से अलग हो पर

राज हरामीपन से वही खड़े खड़े hi उर्वशी के हाथ को पकड़ के अपने लुंड पर रख दिए. चेक करो, इतना एक्सपीरियंस तोह होगा तुम्हे, हाथ लगा के सोये हुए शेर के बारे में जान जाओ.

उर्वशी पहले कुछ कंफ्यूज हुई और इधर उधर देखने लगी, पर किसी का धयान नहीं था. उर्वशी राज के लुंड के मसलने लगी, तोह राज हरामी के लुंड उसी समय खड़ा होने लगा. उर्वशी ने सख्ती और हीट महसूस की तोह इतने दिनों से जो सनसनी आदि से चुड़ते हुए उसे अपने शरीर में फील नहीं हुई थी, वो अब होने लगी थी. ऐसी hi थी उर्वशी, सोसाइटी में जीने क लिए आदि जैसों की भी ज़रूरत थी.

पर वो एक बढ़िया लुंड के बिना, बढ़िया और नए नए लुंड के बिना भी तोह उर्वशी नहीं जी सकती थी. वह राज जैसे लुंड की hi तोह दीवानी थी. कोई भ जाता था तोह कुछ एक्सट्रा डेज उसके साथ बिता लिया करती थी.

अब राज के लुंड की हेल्थ फिर राज की डेरिंग पर भी उर्वशी फ़िदा हो गई थी. कुछ देर राज के लुंड को मसल कर उर्वशी ने अपना हाथ हटा लिया और फिरसे चरों और देख कर वो राज से बोली.

उर्वशी-- तुम बहुत अलग हो राज. तुम्हारे साथ टाइम स्पेंड करके यक़ीनन मेरे कुछ डेज कच अच्छे बीत जायेंगे. सही कहा तुमने मुझे आदि के बाद भी तुम जैसों की ज़रूरत रहा करती है. पर मेरा एक स्टैण्डर भी है. मैं ऐसे hi किसी पर लट्टू नहीं होती. तुमने सिमरन की मांग भरके भी खुद को ख़ास सबत कर चुके हो. ऊपर से तुम ने आदि के सामने खुल के बात करके भी मुझे कन्विंस कर दिए.

राज-- मुझे भी हर किसी पर लट्टू होने की आदत नहीं है उर्वशी, मैं भी माल देख के, प्यूरिटी देख के hi आगे बढ़ता हों. सिमरन अपने आप में स्पेशल है तोह तुम भी काम नहीं हो. सच कहता हों तुम बेमिसाल सुंदरता की मालिक हो.

राज उर्वशी का हाथ पकड़ के सहलाते हुए बोलै तोह उर्वशी राज की आँखों में देखते हुए स्माइल से बोली--- अब छोडो भी मेरा हाथ, किसी ने पिछ निकल दी तोह वायरल करदेगा. मैं भी काम फेमस नहीं हों.

आदि आया तोह दोनों को बातें करते देख कर वहीँ आ गया.

आदित्य-- राज तुम्हारा नंबर...

राज ने अपना नंबर दे के दोनों से उनका नंबर ले लिया.. राज बाइक पे बैठा अपने नाना के घर की और बढ़ गया तोह आदित्य और उर्वशी भी अपनी गाड़ी की और बढ़ने लगे. उर्वशी ने मुद के राज को एक स्माइल ज़रूर दी थी. राज भी उसे स्माइल दे के बाइक पर बैठा और निकल लिया.
 
राज घर पोहंचा तोह नानी राज को देख के चहक उठी. नाना राज को घूर कर देखने लगे. राज नाना को खुद की और ऐसे देखते पा के कुछ हैरान हुआ

राजा-- दादी दाद्दु मुझे ऐसे क्यों देख रहे हाँ.

नानी- राज बीटा तुमने हमें बताया क्यों नहीं, तुम राकेश वर्मा की पोती की मांग भर चुके हो. राज को याद आया, चोट के कारण और दादी की छूट में गम होक वो बताना भूल गया था.

राज धीरे नानी के कान में-- कैसे बताता दादी डार्लिंग, मेरा तो खयालो में आप सुंदर शरीर हैट hi नहीं रहा था. राज नानी को देख के हरामीपन से बोलै तोह दादी शर्मा गई.

नानी-- चल अब अपने दादा को सब बता.

राज हैरान होक-- क्या दाद्दु को बता दूँ, मैंने आपके साथ क्या किया है, आपके शरीर को सोचते हुए में बताना भूल गया था.

नानी ने कुछ शर्मा के, कुछ नॉटी ग़ुस्से से राज के कंधे पर एक धप्प मार दी. नाना भी ये सब देख रहे थे. अब की राज की नौटंकी उन्हें भी पसंद ा रही थी. पर बहार हुई बात पर नाना का मूड अब भी बिगड़ा हुआ था.

दोनों नाना के पास पोहंचे तोह ने नाना के पाऊँ छू लिए.

राज-- दाद्दु आप नाराज़ हाँ न मुझमे, मेने आप दोनों को सिमरन की मांग भरने वाली बात नहीं बताई.

नाना-- देखो राज बीटा, बताना भी ज़रूरी था, मुझे बहार किसी बेगाने से पता पड़ा तोह कितनी शर्मिंदगी हुई मुझे. दूसरा ऐसा सब करना भी मुझे बिलकुल पसंद नहीं आया. तुम ऐसे लड़के हो क्या..

नानी कुछ परेशान हुई तोह राज के होंटो पर स्माइल आ गई.

राज-- दाद्दु आप भी तो सब नहीं जानते न.

नानी-- राज बीटा सब बता दू. पता तो है न तेरे दाद्दु कैसे हाँ.

दोनों राज को देखने लगे, राज के फुल्ली दोनफिडेंट फेस के कारण नाना भी कुछ सुकून से हो गए थे. वर्ण कोई चोरी करे, बेग़ैरती करे तोह वो कुछ कंफ्यूज हो जाता है, पर राज नहीं हुआ था. नाना भी दुन्या देख चुके थे.

राज-- दाद्दु एक्सीडेंट की बात तो बताई थी न. उसी के कारण हुआ था और फिर मुझे उसकी मांग भरनी पड़ी. मांग भरने से पहले मैं और राकेश दाद्दु एक साथ उनकी कोठी में थे.

दोनों -- kyaaaaaaaaaaa? दोनों हैरान रह गए थे. राज राकेश वर्मा के साथ था.

नाना-- पर तुम उसके पास क्यों थे.

राज दोनों को सब बताने लगा, कैसे पुलिस उसे ठाणे ले गई. फिर वहीँ कम और राकेश वर्मा खुद आ गए थे. वहां क्या बातें हुई और कोठी पर किसी हुई थी.

नानी-- कहा था न मेने शर्मा जी राज बेटे जैसा कोई नहीं है. राज ने तोह सिमरन को उसी के अंदाज़ में जवाब दिए है. अब तोह सब राज के साथ भी हाँ. अब तोह राज कुछ भी करे तोह कोई शक नहीं कर सकता, कोई कुछ गलत नहीं बोल सकता. अगर राज गलत होता तोह क्या वर्मा परिवार राज को सिमरन की मांग भरने देता, अपने घर में घुसने देता.

नाना भी अब राज से पूरी तरह से संतुष्ट थे. बहार पण्डे से हुई बातों के कारन उनका झुका सर अब उठ गया था. उनके घर में रहने वाला लड़का बहुत महँ सबत हो रहा था. शहर के सबसे रिचेस्ट परिवार की लड़की की मांग भर चूका था और सब उसके साथ भी थे. नाना को अब पहले से भी बढ़कर सुकून प्राप्त हो रहा था.

नाना-- सही किया तुमने राज बीटा. सिमरन अगर ऐसी hi लकड़ी है तोह उसे सुधारना तुम्हारा काम hi नहीं कर्तव्य भी है. अब वो तुम्हारी पत्नी भी है न.

नानी-- राज कभी उसे हमारे हाँ भी ले के आना.

"लेकर आने की ज़रूरत hi क्या है, मैं तोह खुद hi आ गई हों"

राज को झटका लगा सिमरन की आवाज़ सुनके. वह सोच भी नहीं सकता था, सिमरन यहाँ आएगी, वो भी इतनी जल्दी. और ऐसे अंदाज़ में. सिमरन बहुत आगे की चीज निकली थी. पर वह यहाँ आयी क्यों थी. राज समझ नहीं पाया. अभी घोर करने का समय नहीं था.

नाना नानी दोनों सिमरन को सूरत से नहीं जानते थे. पर सिमरन की भरी मांग देख कर नानी समझ गयी.

सिमरन राज की आँखों में विजयी मुस्कान के साथ देखती हुई, बड़ी कातिल चाल चलती हुई पास पोहंची.

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नाना -- कोण हो तुम बेटी और यहाँ--

नानी-- शर्मा जी मुझे लगता है, यही हमारे राज की सिमरन है.

सिमरन राज को देख स्माइल करती हुई-- सही कहा अपने दादी, में hi राज की सिमरन हों.

नाना नानी दोनों खुश भी हुए और कुछ हैरान भी. राज तोह सिर्फ सिमरन को देख रही रहा था. राज अब कुछ कुछ समझने लगा था, सिमरन यहाँ क्यों आई है.

नानी-- अरे राज बीटा तुम ऐसे क्यों खड़े हो, बहु आयी है हमारे घर, चलो सब अंदर चलते हाँ.

सिमरन -- नहीं दादी मुझे देर हो रही है, मुझे कहीं जाना था, यहाँ से गुज़री तोह सोचा आप दोनों से भी मिलती चालों और राज से भी. मुझे आप दोनों से भी कुछ बात करनी थी.

नाना-- हाँ हाँ कहु बेटी, क्या कहना चाहती हो तुम.

सिमरन के हाथ में के मोबाइल था और सिमरन मोबाइल में से एक वीडियो निकल के प्ले करने लगी. वीडियो प्ले करके सिमरन ने वीडियो नाना को दिखा दी. साथ hi सिमरन ये भी बोली.

सिमरन-- दादा जी आपके बारे में तोह सुनने में आया है, आप राज जैसे लड़को को अपने पास भी नहीं फटकने देते, आपने तोह उसे अपने hi घर में रखा हुआ है. कैसे अजीब इंसान है आप दादा जी. सबको कुछ और बताते हाँ, करते कुछ हाँ. सबको शिक्षा देते हाँ तोह राज जेसो को भी अपने घर में ठहराते हाँ.

वीडियो में राज और उर्वशी थी, राज ने उर्वशी का हाथ पकड़ के अपने लुंड पर रखा था तोह उर्वशी भी राज के लुंड को दबा रही थी. नाना और नानी ये देख गए थे. नानी तोह नार्मल hi रही, पर नाना के चेहरे के भाव एकदुम्म से बहुत बदलने लगे.

सिमरन मोबाइल राज के सामने करते हुए वीडियो को डिलीट करने लगी. और कामिनी मुस्कान से बोली.. हम दोनों फिर बात करेंगे, मेरे ख्याल से मुझे अब जाना चाहिए.

राज कुछ नहीं बोलै पर सिमरन के इस खेल को देख कर बहुत ज़यादा हैरान था. सिमरन ऐसा खेल भी खेल सकती है राज ने सोचा नहीं था. इन दोनों बूढी बूढ़े को भी लपेट में ले सकती है, ये भी राज ने नहीं सोचा था.

नाना नानी को घुसे से देखते हुए--- सब गलत था, सब दिखाया था, सब झूट था. राज वो नहीं है, जो दीखता है. कितनी घट्टिया हरकत करि है राज ने एक रंडी के साथ सड़क पर रहते हुए छियई छियई.. पहले सिमरन को परेशान किया, उसकी मांग भरी, अब इस लड़की को परेशान कर रहा है, फिर इसकी भी मांग bharega.humen कहीं और से पता चलेगा तोह झूट बोल के हमें बेवक़ूफ़ बनाने की कोशिश करेगा.

नानी-- पर शर्मा जी........

नाना ने हाथ खड़ा कर दिए..... बसससससस.. मल्टी अब कुछ और मत बोलना. राज अब से तुम यहाँ नहीं रह सकते. कोई और आ कर मुझे ऐसे बोले, उससे पहले मैं मर जाना पसंद करूँगा. तुमने सच बोलै, झूट बोलै या जो भी किया, पर तुमने कुछ दिन हमारी सेवा भी करि है. उसी सेवा के चलते मैं सख्ती से बात नहीं करूँगा तुमसे. बस इतना hi कहूंगा, चले जाओ यहाँ से. फिर कभी लौट के मैट आना.

नाना दुःख से, शर्म से आंसू बहते, सर झुकाते हुए अंदर जाने लगे. नानी भी आंसू बहा के राज को देख रही थी.

नानी--- राज बीटा, क्यों किया तुमने ऐसा. करना hi था तोह कहीं छुप के करते, किसी को कानो कान खबर न होती. अब कैसे रहूंगी मैं तुम्हारे बाद. मुझे अब आदत हो चली है तुम्हारी राज बीटा. नानी राज के गले लग के रोने लगी.

और राज हरामी था, उससे बड़ा कोई और हरामी पैदा hi नहीं हो सकता था. राज को सिमरन की हरकत पर ग़ुस्सा नहीं आया, दुःख तोह होना hi नहीं था. राज तोह मन hi मन में है रहा था. सिमरन के लिए भी राज गलत नहीं सोच रहा था. बस ये सोच रहा था, इन दोनों बूढी बूढ़े को परेशान नहीं करना चाहिए था.

राज तो अपनी लाइफ अपने अंदाज़ से hi जीने वाला था. अब सिमरन कैसे कोई चाल चलती है, राज को उस चाल कर जवाब देना था. राज को नाना नानी के घर से निकल देने पर सिमरन जहाँ खुश थी, वहीँ राज के हरामी मंद में कुछ और hi प्लान बन रहा था.

नाना अपने कमरे में चले गए तोह राज नानी को लेके अपने कमरे में जा घुसा. वहीँ नानी की शलवार उतर के अपने लुंड को नानी की छूट पर रख के रगड़ने लगा. अंदर नहीं डाला था राज ने. नानी ये देख के और भी हैरान हुई, राज को कोई चिंता hi नहीं थी नाना के बोलने पर, नाना के घर से निकल देने पर.

राज कुछ देर धक्के मारने के बाद नानी को मस्त क्र चूका था.

राज-- दादी खुद से अब मेरे लुंड को पकड़ के अपनी छूट पर रगड़ो न.

नानी-- राज बीटा तुम्हे कोई चिंता नहीं हो रही क्या. मेरे दिल फटने वाला हो रहा है और तुम फिर भी इतने नार्मल दिख रहे हो.

राज नानी को किश करते हुए-- पहले मेरे लुंड को पकड़ के अपनी छूट पर रगड़ो न दादी.

दादी भी राज की और से मिली हिम्मत पर रिलैक्स होते हुए राज के लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर रगड़ने लगी.

राज फिरसे नानी को किश करने लगा. नानी भी राज को किश में साथ देते हुए लुंड को अपनी छूट पर रगड़ने लगी. कैसे अजीब दिन गुज़र रहे थे नानी के. एक hi दिन में कभी ख़ुशी मिलती थी तोह कभी परेशानी, कभी दुःख मिलते थे, तो कभी शॉक तोह कभी मज़े.

बड़े अजीब दिन आ गए थे नानी की ज़िन्दगी में. नानी ये सब सोचते हुए मस्त होने हुए राज के गरम लुंड को अपने छूट पर रगड़े जा रही थी..

राज ने किश तोड़ी और अपनी पूरी निकल के नानी के मोह में दाल दी. ऐसा राज ने पहले कभी नहीं किया था. नानी राज को खुश होक देखती हुई राज की पूरी जीब अपने मोह में भर के चूसने लगी.

राज ने अपने लुंड को नानी की छूट पर सेट करा और धक्का मार दिए. नानी ने राज की जीब अपने होंटो में भींच ली. राज भी आज पूरा दिन मस्त hi रहा था. उसकी किस्मत में नानी की hi छूट लिखी हुई थी. सिमरन की छूट और गांड छाती, पर आगे नहीं बढ़ पाया, सिमरन दादी और चची के साथ मस्ती करि, पर कुछ नहीं कर पाया था.

नानी का हक़ ज़यादा था राज अपर, राज के लुंड पर, इसी लिए राज का लुंड नानी की hi छूट में घुस के हक़ निभाने लगा.

पूरा पूरा लुंड नानी की छूट में अंदर बहार हो रहा था, राज बड़े प्यार से नानी की छूट मार रहा था. नानी भी उतनी hi मस्त होक राज के जीब चूस रही थी. नानी बहुत ज़यादा खुश थी. नानी समझ गई थी राज उन्हें खुद से कभी जुड़ा नहीं होने देगा. सिमरन के जुड़ा करने के बावजूद भी. नानी को राज पर, राज के प्यार पर, राज के लुंड गर्व होने लगा. कुछ गर्व अपनी बूढी छूट पर भी होने लगा. खास थी तभी तोह राज बार बार अपना लुंड उसमे घुसा दिए करता था.

नानी ने मोह ढीला छोड़ा तोह राज ने जीब निकल दी. राज बीटा तुम्हारे जैसा कोई नहीं मेरे पुरे परिवार में. सच में तुम बहुत स्पेसेल हो राज बीटा. पता है मैं कितनी परेशान हो गई थी. जब तेरे दादा ने तुझे घर से निकल जाने को बोल दिए था. मुझे लगा मई एक बार फिरसे उजाड़ गई हों. पर मैं भूल गई थी तुम राज हो. तुम्हारे जैसा कोई नहीं है.

राज-- तो इसी ख़ुशी में मुझे अपनी गांड में भी लुंड डालने दो न. नानी है पड़ी

नानी-- राज बीटा, छूट तो नरम होती है, लुंड बड़ा भी हो तोह घुस जाता है. अब इस बूढी की गांड भी तुम मारोगे तोह मास्स पहात जायेगा राज बीटा. नानी भी मस्ती में नौटंकी करने लगी. राज प्यार से नानी को छोड़ रहा था तो नानी को ज़यादा बेचैनी नहीं हो रही थी.

राज -- पहात जाने दो न नानी, अब उस सील पैक hi इस दुन्या से ले के जाना चाहती हाँ क्या आप.

नानी है पड़ी-- राज बीटा, सच कहूं तोह तुम्हारे प्यार में हर हद पार कर जाने को जी करता है. पर दर्द बहुत होगा मुझे राज बीटा.

राज-- होने दो न दादी. इसी दर्द में तो मज़ा है

राज ने लुंड निकला तोह नानी राज के लुंड को मुठी में भर के पुरे लुंड को मसल गई. नानी की छूट के पानी से सना हुआ लुंड नानी की मुठी को भी गीला कर गया.

राज नानी को किश करते हुए-- नानी छतो न अपनी hi छूट के रास को.

नानी चाटने लगी. अब तोह मैं कुछ भी कर जाऊँगी. अब मुझे यकीं हो चला है तुम सदा मेरे साथ रहोगे.

नानी झुकी और राज के लुंड को थाम के चूसने लगी..

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राज भी नानी से खुश था. राज ने सोच लिया अब क्या करना है. कैसे करना है और आज hi नानी को ये भी बता देना है, वो उनकी आराधना बेटी का बीटा है. नानी अब राज से अलग नहीं हो सकती थी.

कुछ देर में राज भी नंगा हुआ और निचे लेग गया. नानी राज के लुंड को चूस के कुछ उठी थी. नाना दूसरे कमरे में दुखी बीएड पर लेते हुए थे और राज नानी को अपने कमरे में छोड़ में लगा हुआ था.

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नानी राज के लुंड के बैठे उछाल रही थी. और राज भी निचे से धक्के मार मार के पूरा पूरा लुंड नानी की छूट में घुसा के अंदर बहार कर रहा था.

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नानी अब बिना किसी चिंता के राज से चुद रही थी. आज उसे और भी ज़यादा मज़ा आ रहा था. आज वो और भी ज़यादा खुश थी.

राज में नानी को लिटाया और नानी को किश करते हुए नानी को छोड़ने लगा. नानी राज का भरपूर साथ देते हुए चुद रही थी.

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राज नानी की छूट में लुंड को खली करके कपडे पहहने लगा तोह नानी भी कुछ देर में रिलैक्स होक उठ कड़ी हुई..

नानी-- राज बीटा अब क्या करने वाले हो. कैसे सब ठीक करोगे. मैं तुम्हे जाने नहीं दूंगी.

राज-- स्माइल से-- मैं आप दोनों को आज hi यहाँ से ले चुलुंगा.

नानी-- कहाँ ले के चलोगे तुम मुझे राज बीटा.

राज-- है एक जगा नानी.. वह आपको कुछ सरप्राइज भी मिलेगा.

*********

रात के 1 बजे नाना की आंख खुली तोह आस पास का मंज़र देख के वो झटके से उठ खड़े हुए..

कमरे में तीन गर्ल्स को देख कर नाना को झटका लगा था. राज दो लड़कियों के साथ कुछ ऐसी हालत में था.

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नाना ये देख कर झटका खाने लगे. राज नाना को देख कर स्माइल करने लगा. नाना ने घोर किया तोह दो लड़कियां उसी के मोहल्ले की थी. एक नेहा तो दूसरी नैना थी.

राज नाना को देखते हुए पोज़ बदल बदल छूट और गांड बदल बदल कर दोनों को छोड़ने लगा,

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श्रुति साइड में बैठे हुए राज को नाना को देख के स्माइल कर रही थी.

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राज श्रुति की एक दुसरो कोठी में था. जिसके बारे में काम hi लोग जानते थे. श्रुति ने भले समय के लिए इस कोठी को ख़रीदा था. राज नाना को बेहोशी की हालत में कोठी में ले आया था. नानी दूसरे कमरे में बीएड पर लेती हुई सोच रही थी. राज शर्मा जी को बदल सकेगा या नहीं.

पर नानी भूल रही थी, राज जैसा हरामी था, वो कुछ भी कर सकता था. नाना के साथ वो केसा खेल खेलने वाला था, नानी बस अंदाज़ा hi लगा सकती थी. सही से जान नहीं सकती थी.

जब तक राज के लुंड ने माल नेहा और नैना के ऊपर चूड़ा..

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तक तब नाना के लुंड की अकड़न उस पहले वाली रात से भी कहीं बढ़कर थी. नाना राज को देख के जहाँ झटके खा रहे थे. राज को देख के घुसे में आ रहे थे, वहीँ इतने सालों बाद जवान लड़कियों को नंगी देख कर भी नाना पागल हो उठे थे. वियाग्रा की हैवी दोसे के कारण नाना के लुंड की सख्ती बहुत ज़यादा बढ़ी हुई थी तोह नाना की हालत बहुत ज़यादा ख़राब थी. नाना राज को चुदाई करते देख कर अपने लुंड को भी मसल रहे थे. नाना भी तोह नंगे hi थे.

श्रुति बदली थी, नेहा और नैना नहीं. नाना को बदलने के लिए नेहा और नैना दोनों ने राज की बात पर एग्री कर लिया था. दोनों नाना के सामने बेशरम बांके राज से चुद रही थी. राज के लुंड के माल को चाट पि कर दोनों हरकत में आयी और नाना की और बढ़ने लगी.

दोनों के कदमो की चाप कर नाना की दिल की धड़कन बढ़ रही थी, साथ hi नाना के लुंड के ठुमके भी बढ़ रहे थे.

नाना नेहा और नैना के मस्त जवानी से भरपूर शरीरो को ललचाई नज़रों से देखने लेन.

दोनों कातिल चाल चलती हुई नाना के पास जा पोहंची और एक साथ दोनों ने नाना के लुंड को थाम लिया. नाना को भी राज ने हरामी बनाने का सोच लिया था. सिमरन के वॉर का जवाब इसके शिव किसी और अंदाज़ में दे भी नहीं सकता था. और राज का ये जवाब कमल का था.
 
थैंक्स फॉर रिव्यु भाई... क्या करू भाई, राज हरामी है तोह उसके लिए बी तो कोई चाहिए थी न. राज को आदत है न ऐसे hi पंगे लेने की, सिमरन शरीफ होती तोह फिर से नज़र न आती, जैसे राज अपने दोस्तों के साथ अपने शहर गया था और वही एक दीदी और उसकी सास के साथ मस्ती कर गया था. सिमरन कुछ ज़यादा भ गई तो पन्गा ले बैठा. शादी तो हर किसी को करनी पड़ती है, राज ने भी सिमरन को देख के सोच लिया . शादी करेगा तो इसी से.

सिमरन का तड़का hi तो स्टोरी में अलग चीज है. वर्ण अपने हरामीपन से सब को एक करना राज के लिए मुश्किल नहीं रहा था. नानी को छोड़ दिया. नाना को भी साथ मिला के सब उसके साथ हो जाते. क्यूंकि नाना नानी दोनों राज के हिसाब से बन चुके होते. और स्टोरी थे एन्ड हो जाती.

हवस का नंगा नाच तो राज ने दिखाना hi था. वो ऐसा hi तो है. निम्मी शिम्मी दोनों कौसिन्स को भी तो एक साथ किया था राज ने. बाजार में सास बहु के साथ एक साथ छेड़ छड़ कर दी थी. ुंजा के साथ नौरीन को ज़बरदस्ती छोड़ दिए था. नानी के साथ इतना सब कर गया. आगे भी उसे सब करना hi था. अपने मौसा के साथ भी तो उर्वशी को मिला के थ्रीसम का सोचा था उसने. वो भी तोह प्लान के साथ हवस hi थी.

देखते हाँ स्ट्रोय में चार्म काम होता है या बढ़ता है. अपनी ऑर्डर से स्टोरी को बेस्ट बनाने का प्रयास रहेगा भाई. बेस्ट राइटर नई हों में. ऐसा चेंज ा hi जाता है. ऐसे hi सुग्गेस्टिव पहले दिए होते तोह कुछ चेंज भी होता. पर अब देर हो गई है. जैसी भी जा रही है, अब लिखनी तो है hi.
 
नेहा और नैना एक मन पसंद लाइफ जीने वाली लड़कियां थी. श्रुति इन सब में आगे थी. पर राज के कारण तीनो बदली तोह श्रुति कुछ ज़्यादा hi बदल गई थी. नेहा और नैना राज कह कहने पर नाना के सामने hi राज से छोड़ने के लिए रेडी हो गई थी. उन्हें इस सब में कोई प्रॉब्लम भी नहीं थी. होती भी क्यों.

दोनों तोह राज के लुंड की दीवानी हो गई थी. और फिर राज कहे तोह वो कुछ भी कर सकती थे. पहले भी तोह कैयो के सामने चुद चुकी थी, ये खेल उनके लिए नया भी नहीं था. नाना को भी बदलने के लिए ऐसा सब करना ज़रूरी था.

दोनों एक साथ मिलके खूब राज के साथ मज़े करती रही. पहले भी लुंड बदल बदल कर चुद चुकी थी. अब राज से छोड़ने के बाद नाना से भी छोड़ना पड़ता तोह दोनों के लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी. राज से छोड़ने के बाद दोनों नाना की ऑर्डर बढ़ी और पास पोहंच कर नाना के खड़े लुंड को थाम लिया.

नाना की लाइफ का ये पहला चांस था, दो दो जवानी और हसीं, सेक्सी फिगर वाली उनके सामने थी. नाना अंदर से पहले तोह कुछ लाडे थे, राज को लेके कुछ और भी अलग ढंग से सोच रहे थे. पर उनकी सोच ज़्यादा देर ठहर नहीं पाई.

राज की ताबड़ तोड़ चुदाई को देख के उन्हें इतना आनंद आने लगा था, उनका लुंड झटके पर झटके खाने लगा था. नाना को ये सब देखना बहुत अच्छा लगने लगा था. नाना नेहा और नैना के मस्त बदन देख कर दोनों को ललचाई नजरू से देखने लगे थे.

दोनों ने नाना का लुंड पकड़ा तो नाना के बूढ़े शरीर में करंट के साथ साथ सुरूर की िहतेहै भी उतरने लगी. ऐसा आनंद नाना को पहले कभी प्राप्त नहीं हुआ था.

नेहा-- अंकल आप मेरे स्तन नहीं पकड़ेंगे.

नैना-- अंकल मेरे स्तन भी तोह आपके हथु के स्पर्श के लिए मचल रहे हाँ. इन्हे भी पकड़ के दबाइये न.

नाना अपने होंटो पर जीब फेरने लगे. जहाँ लुंड झटके पर जहटके मार रहा था. दोनों के शरीरो को देख के नाना नशे में होने लगे थे. वहीँ उनके अंदर का मौसम भी बदल रहा था. सब बोहत कामुक और लुस्फुल भी तोह था. मज़े से भरपूर सन भी तोह था. नाना ठरकी बनते हुए खुद को रोक नहीं पाए और कांपते हथु से दोनों का एक एक स्तन पकड़ लिया.

नेहा ने नाना के लुंड को मसलना शुरू कर दिए तो नैना नाना के सीने पर हाथ चलने लगी.

नैना-- उम्म्म्म अंकल आप तोह आप भी आज के मर्दों को पीछे करते हाँ.

नेहा-- आज भी आप इतने स्ट्रांग और हैंडसम हाँ अंकल.. उम्म्म आपके हाथ की हीट मुझे पागल बनाने लगी है.

नैना -- नेहा कितना जानदार लुंड है न अंकल का.

नेहा--- हाँ नैना बहुत जानदार और शानदार है अंकल का लुंड

नैना-- फिर तोह मैं इसे खूब मोह में ले चूसूंगी

नेहा-- नहीं पहले में चूसूंगी, मेरा हक़ पहले बनता है. मैं अंकल के पड़ोस में रहती हों. इसलियए पहले में चूसूंगी, छूट में भी मई hi पहले लुंगी.

नैना-- ठीक है नेहा. पर गांड में पहले में लुंगी.

नेहा-- चल चीक है. नाना दोनों की बातें सुनकर और भी ज़्यादा बेचैन हो उठे थे. इतने कामुक और लज़्ज़त से बहरी बातें नाना ने पहले कभी नहीं सुनी थी. वियाग्रा का असर भी सर चढ़ कर बोल रहा था. नाना अपनी लाइफ के सबसे बड़े मज़े में आये हुवे थे. जहाँ का लुंड नेहा के हाथ में मचलने लगा तोह नाना के होंटो पर जीब की स्पीड भी बढ़ने लगी. उनके हाथ दोनों के स्तन पर कसावट बढ़ने लगे.

राज और श्रुति एक साथ बैठे हुए सब देख रहे थे. दोनों है भी रहे थे.

श्रुति-- तुम कितने बड़े हरामी हो, बूढ़े को भी नहीं छोड़ा तुमने

राज-- अभी तुमने देखा hi क्या है. मेरे बारे में तुम सब जानती hi कहाँ हो. एक बार दाद्दु नेहा और नैना को छोड़ ले. फिर देखना में क्या करता हों.

श्रुति राज को किश करते हुए -- क्या करने वाले हो राज. मुझे नहीं बताओगे. राज ने खेंच के शरती को अपनी गॉड में बिठा दिए. श्रुति भी नंगी hi थी. उसकी गीली छूट राज के गीले लुंड को हीट देने लगी. राज श्रुति को किश करता हुवा बोलै

राज-- दादी को दाद्दु के सामने hi छोडूंगा.

श्रुति-- हेहेहे राज तुम मेरी सोच से भी बड़े हरामी निकले. सच में तुम्हारे जैसा कोई नहीं. अभी कुछ दिन हुए तुम्हे शहर आये हुए और इतना सब कर गुज़रे हो. और भी नजाने क्या कुछ तुम करने वाले हो.

श्रुति किश करते हुए अपनी छूट को राज के लुंड पर रगड़ने लगी थी. राज का लुंड खड़ा हुआ तोह श्रुति उसे अपनी छूट में लेके छोड़ने लगी. राज भी श्रुति के बूब्स प्रेस करता हुआ श्रुति को छोड़ने लगा. साथ hi राज नाना को भी देख रहा था.

नाना लेता हुआ था और नेहा नाना का लुंड चूसने के बाद नाना के लुंड पे बैठी उछाल रही थी. नैना नाना के मोह पर बैठी थी और नाना अनारी होते हुए भी नैना की छूट चाट रहे थे. नाना अपनी गांड भी साथ में हिला हिला कर नेहा की छूट में अपने लुंड को अंदर बाहर कर रहे थे.

नाना ने थ्रीसम कभी किया नहीं था. आज करने का चांस बना तोह पागल हो उठे थे. खूब एन्जॉय करते हुए वो नेहा और नैना के मज़े ले रहे थे. राज और श्रुति भी है है कर तीनो को देखते हुए अपनी चुदाई जारी रखे हुए थे.

राज ने वही श्रुति को घोड़ी बना के श्रुति की गांड मारनी शुरू कर दी तोह नैना भी अब घोड़ी बानी अपनी गांड में नाना का लुंड ले ले के चुद रही थी. वियाग्रा की हैवी दोसे के कारन नाना पुरे चार्म पर थे. नाना बिना ज़्यादा सोचे नैना की गांड में लुंड दाल कर धक्के मार रहे थे.

नेहा राज और श्रुती को देख कर स्माइल कर रही थी. सच में नेहा बहुत आगे की लड़की थी. सेक्स के नशे में वो सच में hi बहुत आगे निकल चुकी थी. राज के कहने पे नाना से चुद के भी नेहा को बुरा नहीं लग रहा था. कोई दर भी नहीं रहा था उसे.

चुदाई का डोर ख़तम हुआ, राज ने अपने लुंड का माल श्रुति को पिलाया तोह नाना नैना की गांड में अपना लुंड खली कर गए थे.

पर उनके लुंड की अकड़न जा hi नहीं रही थी. नेहा और नैना राज के कहने पर वहां से चली गई. श्रुति भी चली गई.

राज चलता हुआ नाना के पास पोहंचा और बोलै --- दाद्दु केसा लगा ये सब'

नाना अपने लुंड को पकड़ के राज को देखने लगे. एक दो बार अपनी आँखों को भेंचा. फि राज को देखते हुए बोले.. राज बीटा तुमने ये सब कर के सही नहीं किया है. पर जाने क्यों मुझे ये सब कर बहुत मज़ा आया. अब भी मैं नहीं भर रहा है मेरा. अब भी मैं कर रहा है दोनों फिर से मेरे साथ ऐसा सब करती जाएँ. नाना के भाव ग़ुस्से वाले नहीं थे, ठर्कियो वाले थे.

राज ने नानी को समझा कर भेजा था. नानी कमरे में दाखिल हुई तोह कमरे को अंदर से लॉक करके चलती हुई राज और नाना के पास पोहंच गई.

नाना तो नानी को देख कर हैरान भी हुए और शॉकेड थी. नानी के बारे में वो इतनी देर से कुछ सोच hi नहीं सके थे. अब देखा तो याद आया वो तो अपने घर में सो रहे थे और नानी उनके साथ hi थी.

नानी मुस्कुराती हुई नाना के लुंड को पकड़ गई--- शर्मा जी कैसा लगा नेहा और नैना के साथ सेक्स करके

नाना--- मल्टी ये सब क्या है.

नानी-- अभी बताती हों.. नानी बैठी और राज के लुंड को थाम के मोह में भर लिया.

नाना ग़ुस्से से चीख पड़े-- maaaaaaaaaaallttttiiiiiiiiiiiii

नानी नहीं दरी और दूसरे हाथ से नाना का लुंड थाम कर मसलते हुए राज के लुंड को चूसने लगी.

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नाना का ग़ुस्सा हैरत में बदल गया. मल्टी जो उनके सामने कभी बोल नहीं सकती थी. आज उनके ग़ुस्से के आगे भी वो नार्मल hi थी. और राज के लुंड को चूसते हुए उनके लुंड को पकड़ कर मसल रही थी. नाना जितना हैरान हुए, लुंड के मसले जाने पर उल्टे हे मस्त भी होने लगे.

नाना-- मल्टी तुम ये सब सही नहीं कर रही हो. बहुत hi घट्टिया काम है ये. छियई मेरे सामने तुम राज के---- निकालो उसे मोह से.. आह्ह्ह्ह मुझे क्यों इतना मज़ा आ रहा है आज.. हे भगवन इतना सवाद.. उम्म्म्म पूरी ज़िन्दगी में नहीं आया. और कास के दबाओ मल्टी मेरे लौड़े को..

नाना की टोन बदलने लगी. राज देख के हसने लगे..

राज-- दादी दाद्दु का लुंड चुसू अब.. देख नहीं रही, दाद्दु कितने बेचैन हाँ, उनके लुंड को भी मज़े कराओ न.

नानी एक बार कड़ी हुई और राज को किश करके नाना के पैरों में बैठे और लुंड मोह में ले चूसने लगी. नेहा और नैना की छूट और गांड से सना लुंड नानी अपने मोह में लिए सुर्र्र्रुप्प्प सुर्र्र्रुप्प्प करके चूस रही थी. नानी भी रंडियो जैसी बनती जा रही थी. राज नानी को देख कर हसने लगा. नाना राज को देख कर शर्मिंदा हुआ तो नानी राज को ऑंखें दिखा के स्माइल करने लगी.

कुछ देर में नाना बीएड पर लेते हुए थे तो नानी नाना का लुंड छूट में लिए नाना को किश कर रही थी. नाना भी पुरे पागल बने नानी को किश करते हुए निचे से धक्के मार रहे थे.

राज ने पीछे से नानी को देखा तोह नानी की गांड देख क्र राज अपने लुंड को मसलने लगा.

राज नानी के पीछे हुआ और नानी की गांड पर लुंड सेट करके धक्का मार दिया.

ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh नानी चीख पड़ी. नाना ने देखा तोह

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नाना-- क्या हुआ मल्टी तुम चीखी क्यों.. और ये राज .. राज मल्टी के पीछे क्या कर रहे हो

नानी आंसू बहती हुई-- शर्मा जी राज ने मेरी गांड में लुंड दाल दिए है.

नाना-- शॉक होक.. kyaaaaaaaaaaa.. पर वो अंदर घुसा कैसे. मेने भी तो कभी नहीं डाला था. नाना हैरान हो गया था.

नानी-- मुझे नहीं पता शर्मा जी, कैसे अंदर घुस गया. आह्हः राज बीटा बहुत दर्द हो रहा है.

राज-- होने दो न नानी..

नाना नानी-- naaaaaaaanniiiiiiiiii

राज हरामीपन से--- क्यों दादी को नानी नहीं कह सकता मैं. दादी को छोड़ सकता हो तोह दादी को नानी क्यों नहीं कह सकता.

नाना न चाहते हुए भी निचे से धक्का मार गए. उनके लुंड की हीट कर मज़े बढ़ते जा रहे थे. नानी की गांड के दर्द की परवा न करते हुए भी वो धक्का मर गए थे.

राज--- क्यों नाना आपकी पत्नी एक साथ आपसे मुझसे चुद रही है, बुरा नहीं लग रहा आपको. राज हरामीपन से हंसा

नानी-- शर्मा जी अब क्यों ग़ुस्सा करेंगे, दो दो जवान लड़कियों को छोड़ चुके हाँ शर्मा जी.

नाना को नेहा और नैना मस्त शरीर याद आने लगे तोह नाना नानी और राज की बातों को भूल कर नानी को किश करते हुए निचे से धक्के मरने लगे.

राज ने एक और धक्का मार दिए. आधा लुंड नानी की गांड में. नानी फिरसे चीखी पर नाना अपना मज़ा ख़राब नहीं करना चाहते थे. वो धक्के लगा लगा कर नानी को छोड़ रहे थे. जिसे उम्र भर छोड़ा था. उसे छोड़ने में जितना मज़ा अब ा रहा था, पहला कभी नहीं आया था.

नाना छोड़ते रहे और राज ढके पर ढके मरता हुआ नानी की गांड को खोलता चला गया. नानी तड़पने लगी.. दो दो लुंड एक साथ लेके वो जहाँ बहुत दर्द में थी, वहीँ बहुत मज़े में भी आने लगी थी.

10 मिंट बाद राज सुकून से नानी की गांड मार रहा था. नाना भी झाड़ गए थे. पर उनका लुंड बेथ नहीं रहा था. व ऐसे hi लगे रहे, कुछ देर में उनका लुंड फिरसे पुरे चरम पर था. वो फिरसे मज़ा लेते हुए, सुरूर में डूबता हुए नानी को छोड़ने लगे.

राज भी नानी की गांड पूरी खोलने के बाद अब सुकून से नानी की गांड मार रहा था. नानी की छूट में भी एक बार बारह आ चुकी थी. अब वो भी पूरी तरह से मस्त होक दो दो लुंड से चुद रही थी.

राज-- नाना अब तोह आप भी मेरे जैसे बन गए हाँ. कितनी देर से मैं आपके साथ मिलके आपकी पत्नी को छोड़ रहा हों, फिर भी आपने कुछ नहीं कहा.

नानी-- अब क्या कहेंगे ये राज बीटा. अब तोह ये हमारे जैसे हो गए हाँ.

नाना-- मल्टी ये तुम दोनों ने सही नहीं किया. मेरा सर-----

नानी ग़ुस्से से-- शर्मा जी.. आप अभी भी नहीं बदले. दो दो लड़कियों को छोड़ के भी आप नहीं बदले. राज बेटे के साथ मिलके मुझे छोड़ रहे हाँ, फिर भी आप अपने सर के पीछे पड़े हुए हाँ. इसी सर के कारण hi आराधना बेटी हमें अपने दिल का हाल खुल के नहीं बता सकीय, और भाग निकली अपने प्रेमी के साथ. इसी सर के कारण इतने बच्चू के होते हुए भी हमें सब से अलग रहना पड़ा. शर्मा जी बेकार की बातों पर सर नहीं झुका करते. माता पिता तो अपने बच्चू की ख़ुशी के लिए अपने सर कटवा दिए करते हाँ. और एक हाँ----

नानी नाना का लुंड लेते हुए भी ग़ुस्से से नाना से बोल गयी थी. नाना धक्के लगाना भूल कर नानी को हेरात से देखने लगे थे.

राज-- नाना आज आप लुंड की बढ़ी अकड़न पर खुद पर काबू भूल बैठे. माँ तोह फिर भी अपने ज़िन्दगी की खुशियों के लिए घर से भागी थी. आज भी वो आप को याद करके रोया करती हाँ.

राज हरामी नानी की गांड मरता हुआ सच खोलने लगा. नाना धक्के पहले hi भूल चुके थे, उनका चेहरे पर शॉकिंग भाव और भी बढ़ गए थे.

नानी जो नाना का लुंड लिए हिल रही थी. वो भी हिलना भूल गयी. राज नानी के दोनों बड़े बड़े चुत्तड़ पकड़ कर नानी की गांड मारना नहीं भुला था.

नानी ने मुद के राज को देखा--- rrr..raj बीटा क्या कहा तुमने अभी.

नाना--- rr..raj bb..beta tt..tummm

राज-- हाँ नाना जी मैं hi हों आपकी आराधना का इकलौता बीटा राज..

राज के मोह से ये सुनके नाना नानी दोनों को झटके लग रहे थे. राज नहीं रुका, सच बता कर वो नानी की गांड मरते हुए नानी के झटको को बढ़ा रहा था.
 
स्टोरी ठंडी नहीं होगी बीआरओ.. प्लाट के हिसाब से सही जा रही है. स्टोरी में तुरंस को लेके hi आप सब को ज़्यादा मज़ा आने लगा था. यहाँ भी कुछ तरुणस थे. अब और भी आएंगे. स्टोरी में मज़ा काम नहीं होगा. अब और भी बढ़ेगा भाई. वेट.. सफर में कहीं स्टॉप आते हाँ तोह कहीं ऐसा भी लगता है, जैसे इस सफर का मज़ा नहीं आ रहा .पर जल्द hi फिरसे सफर का मज़ा भी आने लगता है..

इस कहानी में भी कुछ ऐसा hi होगा भाई
 
नानी एक माँ थी, और एक माँ ऐसी ख़ुशी सहन कैसे कर सकती ा. नानी अपनी गांड में लुंड लिए पीछे राज को देखते हुए बोली--- राज बीटा तुम मेरी आराधना के बेटे हो.

राज-- हाँ नानी मुझे भी कुछ दिन पहले पता चला था आप सब के बारे में. वर्ण पहले में कुछ नहीं जनता था आप सब के बारे में. जैसे पता चला, मई यहाँ आ गया. माँ के लिए आप सब के दिलों को नरम करना था. माँ को फिरसे आप सब से मिलाना था. माँ बड़ी दुखी हाँ नानी आप सब के से मिलने के लिए. माँ ने कोई गलती नहीं करि थी नानी. माँ ने अपनी ज़िंदगी की कुछ खुशियां जीने के लिए ऐसा कदम उठाया था. पर माँ की ज़िन्दगी में खुशिया ज़यादा दिन नहीं रह सकीय. मैं बहुत छोटा था, जब पिता जी गुज़र गए.

नाना--- क्याआआ.. नाना को अब माँ के दर्द का कुछ एहसास हुआ था. जितना भी वह माँ से नाराज़ थे, माँ के जीवन साथी के गुज़र जाने की खबर उन्हें भी झटके दे गई थी.

नानी-- मेरी आराधना... शर्मा जी.. देखा आपने. आपने भी तोह आराधना बेटी को श्राप दिया था. देख लें शर्मा जी आपके शराब ने मेरी बेटी की ज़िन्दगी की खुशियां छीन ली. जिस जीवन साथी के लिए वो हमें छोड़ गई thi.wo भी उसके पास नहीं रहा. हाय मेरी बच्ची ने किसी काटा होगा पहाड़ सा जीवन.

नाना नानी दोनों आंसू बहाने लगे. राज इमोशनल होते हुए भी नानी की गांड के मज़े ले रहा था. नानी बेटी के लिए दुखी थी तोह दो दो लुंड लेके खुश भी थी.

राज लगा रहा धीरे धीरे धक्के मरने में. नाना चुदाई भूल चुके थे.

राज--- नाना आप एक बात जानते हाँ. आज आपने दो दो जवान लड़कियों को देख कर खुद पर काबू खो दिए. दोनों के साथ बहुत देर तक आप पाप करते रहे नाना. ऐसा hi होता है नाना, ऐसे बहुत से लम्हे इंसान की ज़िन्दगी में आते हाँ, जब उन लम्हो पर उनका अख्त्यार नहीं रहता. माँ ने तो फिरसे अपनी कुछ खुशियां के लिए वो कदम उठाया था. एक गलती माँ ने करि थी तोह आप ने भी तो अब दो दो कर दी हाँ. अपने मज़े के लिए अपनी खुशियों के लिए दो दो लड़कियों को छोड़ कर भी, मेरे साथ मिलकर नानी को छोड़ रहे हाँ. क्या ये सब सोच के भी आप कुछ नहीं समझ प् रहे. अक्सर ऐसा hi हो जाया करता है किसी की बी ज़िन्दगी में नाना.

नानी रट हुए-- राज बीटा तेरे नाना को अब भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. तेरे नाना को तो बस अपने सर की चिंता रहती है. कोई उन्हें देख क्र ये न कह दे, देखो इसकी बेटी भाग गई थी. देखो आज भी इसके बचे इससे दूर हाँ. देखो-------

नाना भी रट हुए नानी के मोह पर हाथ रख गए---- और कुछ मत बोल मल्टी.. आज मुझे एहसास हो रहा है, मैं कितना गलत था. राज ने बहुत अच्छे से मेरे साथ ये खेल खेल के मुझे सब समझा दिया है. जो बात मई कभी नहीं समझ सका, वो आज मुझे बहुत अच्छे से समझ आ गई है. आराधना बेटी शादी के बाअद मुझसे माफ़ी मांगने भी आई थी एक बार. मुझे पता चला था. पर हम पुराण घर बेच चुके थे. मैं चाहता तोह उससे मिल सकता था. दामाद जी से भी मिल सकता ता. पर मैं अपनी झूठे असूलूं पर जीने वाला अपनी hi बेटी को खुद से हमेशा के लिए दूर कर बैठा. कितना दर्द दे दिए मैंने अपनी बेटी को.

नानी नाना को हैरत से देखने लगी तोह राज के हरामी होंटो पर हरामी मुस्कान आ गई.

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सुबह हो चुकी थी. सिमरन अभी तक अपने कमरे में बीएड पर गहरी नींद सो रही थी. यस्य अपने होंटो पर कुछ गर्म सा, कुछ गीला सा फील हुआ तोह उसने ऑंखें खोल दीं.

सामने राज को देख के सिमरन के होंटो पर बड़ी कातिल स्माइल आ गई.

राज-- हाय जाने मन, कैसे लगा मुझे अपने सपने में देख कर. सिमरन की मुस्कान और भी गहरी हो गयी.

सिमरन-- मेरी ज़िन्दगी में ऐसा कोई सन अभी तक तो नहीं है राज. जो मुझे तुम्हारे सपने देखने पड़े. तुम कभी मेरे सपनो में जगा नहीं प् सकोगे. तुम रियल में मेरे सामने हो.

राज ने सिमरन को खेंच के अपने ऊपर कर लिया और किश करते हुए बोलै-- अभी दिन hi कितने हुए हाँ तुम्हे मेरी लाइफ में आये हुए. बस तुम देखती जाओ, कैसे तुम्हे सोते जागते में hi में दिखाई देता हों.

सिमरन राज के सर के बालों को पकड़ कर खेंचते हुए बोली-- बड़े रोमांटिक हस्बैंड बनने की कोशिश कर रहे हो तुम राज. सुबह सुबह पत्नी के साथ ऐसी छेड़ छड़ पर तोह कोई भी पत्नी ख़ुशी से निहाल हो उठती होगी. तुम जैसा प्यार करने वाला पति किसी को भी मिल जाए तो. पर मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं है राज.

राज ने एक किश और करि फिर बोलै-- वही तोह कर रहा हों, तुम्हारे दिल में हलचल मचने की कोशिश तोह जारी hi रहेगी.

सिमरन हस्ती हुई-- दिल की बात पर लुंड का क्या काम राज. वो क्यों मेरी पारी को छूटे hi सलामी देने लगा. कल का सब भूल गए क्या तुम. बड़ी हेरात की बात है.'

राज-- कल वाला सन.. ओह्ह उसके लिए तोह मैं तुम्हे थैंक्स बोलने आया हों.

सिमरन हैरान होक-- थैंक्स.. इसमें थैंक्स कैसा. सिमरन को कुछ समझ नहीं आया था.

राज हरामी किश करता हुआ बोलै-- पहले मेरे लुंड को चुसू फिर बताओगे.

सिमरन हस्ती हुई राज से अलग होक लेट गई. बड़ी छह है तुम्हे राज, अपने लुंड को मेरे मोह में देखने की.

राज-- हाँ वो तो होगी hi. तुम लुंड बहुत अच्छे से चुस्ती हो सिमरन. बड़ी हीट है तुम्हारे लुंड में. हर समय तुम्हारा फिगर और मोह में लुंड होना hi याद आता रहता है. सिमरन राज की इस बात पर खुश हो गई. राज को ऐसे hi लल्लू बना देना चाहती थी वह. राज के ट्रॉउज़र को निचे करके राज के लुंड को बहार निकल कर वो सहलाने लगी.

सिमरन-- राज गर्म तोह तुम्हारा लुंड भी बहुत है. सिमरन राज के खुश्क लुंड को निचे से ऊपर तक सहलाते हुए बोली.

राज-- तोह इसे मोह में लेके इसकी हीट कुछ और काम कार्डो.

सिमरन-- भूल जाओ तुम राज. मैं ऐसा फिरसे नहीं करने वाली. कल भी तुम्हे कुछ दिखने, कुछ समझने के लिए किया था. अपने लुंड की हीट और माल का खुद से hi कोई जुगाड़ करो.

उसी समय आधा खुला हुआ दूर पूरा खुल गया. और सिमरन की मम्मी कॉफ़ी ट्रे के साथ अंदर दाखिल होती हुई दिखाई दी. पर अंदर का सन देख कर उसके हाथ काँप कर रह गए. सिमरन ने झट से अपना हाथ राज के लुंड से हटा लिया. सिमरन कुछ ावक्वार्ड सा फील करने लगी. उसे राज पर ग़ुस्सा भी आने लगा. राज ने दूर को अंदर से बंद क्यों नहीं किया था. सिमरन जैसी भी थी, राज के साथ इतनी बढ़ कर वो किसी और के सामने नहीं आना चाहती थी. लुंड थाम कर अपनी मम्मी की नज़रों में सिमरन सेक्स कामदेवी के रूप में सामने आई थी. राज का बड़ा लुंड बड़ा चाओ से सिमरन ने थाम रखा था. ऐसे सिमरन मम्मी को दिखाई पद गया था.

मम्मी "sss..sorry..ww..woo..mmmm.main...ddd..dooorr.. मुम्मत कंप्नति हुई वापिस लौट गई. और राज ज़ोर से हसने लगा.

सिमरन बड़े ग़ुस्से से राज को देखने लगी-- राज तुमने ये सही नहीं किया.. हम दोनों के खेल को किसी और के सामने नहीं आना चाहिए था. राज तुमने मम्मी से क्यों कहा कॉफ़ी के लिए.. दूर बंद क्यों नहीं किया तुमने. राज.. राज.. सिमरन का बस नहीं चल रहा था, राज को कच्चा hi खा जाए. हाथ में बंदूक थमने वाली लड़की, हमेशा ऐटिटूड में रहने वाली लड़की, शादी के नाम पर भागने वाली लड़की, अपने पति के लुंड को थाम कर मसल रही थी.

सिमरन ये सोच के hi बहुत ग़ुस्से में ा गई थी. क्या इमेज रह जायेगी उसकी अब उसकी मम्मी की नज़रों में.. उसकी मम्मी तोह अब और भी ज़यादा सपने देखने लगेंगी. उनकी बेटी अब एक अच्छी मैरिड लाइफ जीने लगी है.

पर सिमरन को ऐसी हार मंज़ूर नहीं थी. सिमरन राज को ग़ुस्से देख रही थी और राज ज़ोर ज़ोर से है रहा था. राज ने सिमरन को बीएड पर लिटाया और उसके ऊपर आ के लेट गया. अपने लुंड को सिरमन की छूट पर रगड़ते हुए बोलै.

राज-- कल एक खेल तुमने खेला मेरी जान. दूसरा खेल आज मेने खेल लिया. तुम्हारे खेल ने तो उस बूढ़े बूढी को ज़यादा hi दर्द दे दिए था सिमरन. तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए था. इस आगे में किसी का दिल दुखाना अच्छी बात नहीं थी. पता है, ऐसी स्टेज पर झटके सहन करने की शक्ति बहुत काम होती है. दोनों मुझसे कितना प्यार करते थे, कितना विश्वास करते थे. जीने की छह उनके अंदर आ गई थी. पर तुमने मुझे निचा दिखने के लिए दोनों से जीने की छह hi छीन ली.

तुम तो बहुत डायलो भी हो न. तोह उन दोनों को दर्द देकर तुम्हे क्या मिल जाता. खैर जो भी तुमने किया मुझे इससे कोई परेशानी नहीं हुई. मैं अब वहां नहीं रह सकता तोह और बहुत सी जागें हाँ, मई वहां रह लूंगा. तुम्हारे दिल में जो भी आये तुम कर सकती हो सिमरन. राज एक किश करता हुआ बोलै.. बिकॉज़ यू अरे माय लव, माय लाइफ. कुछ भी करने का हक़ आज में तुम्हे देता हों. मैं करे तोह मौका मिलने पर तुम मुझे शूट भी कर सकती हो.

सिमरन को राज की बातों पर और भी ज़यादा ग़ुस्सा आने लगा था. राज बिना रुके सिमरन की छूट पर लुंड को रैगर रहा था. सिमरन ने कहा था, पत्थर पर भी कटरा कटरा पानी का गिरता जाए, तोह उसमे भी छेड़ बनने लगता है. राज वही छेड़ बनाने की कोशिश में लगा हुआ था. राज हरामी था, तोह दिल तक पोहचने के लिए वो सिमरन की छूट का hi सहारा लेना चाहता था.

कल जो सिमरन खुद को नार्मल शो करवा के बड़ी खुश थी. आज उसकी छूट में कुछ कुछ हलचल होने लगी थी. राज का लुंड था भी तोह बहुत स्ट्रांग और हीट वाला. कैसे सिमरन सहन कर सकती थी. सिमरन घुस्ससे से राज को धक्का देते हुए

सिमरन-- राज हरामी तुम मुझे हार देना चाहते हो क्या.

राज हरामीपन से-- ऐसा कभी नहीं हो सकता. राज सिमरन की छूट को देखते हुए बोलै.

सिमरन इस बार नहीं देख पाई अपनी छूट में. वो चीखी-- तो फिर क्यों ऐसा सब कर रहे हो मेरे साथ. लिमिट में रह के सब करो, फिर मुझसे जीत के दिखाओ.

राज उठता हुआ-- लिमिट में hi तो हों. मैंने किया hi क्या है.

सिमरन चीखती हुई-- किया hi क्या है तुम्हे... दुफर अपनी हद भूल रहे हो तुम. इतनी देर तक अपने डिक को रगडोगे तोह क्या मुझे कुछ नहीं होगा.

राज-- कुछ हुआ क्या.. ओह्ह्ह्ह मेने तोह धयान hi नहीं दिए था.

राज हस्ता हुआ कमरे से बहार निकल पड़ा. और सिमरन बाथरूम में जा के नंगी होक अपनी छूट में ऊँगली लगा के देखने लगी. सच में आज सिमरन की छूट में कुछ नमी थी. सिमरन आईने में देखती हुई फिरसे चीखः पड़ी.. राज तुम्हे बहुत गलत किया है मेरे साथ. मैं ऐसी नहीं बनना चाहती.. तुमने मुझे पत्नी बना hi लिया है तो ये सब मैं तुम्हे नहीं करने दूंगी. चाहे उसके लिए मुझे किसी भी हद तक जाना पड़े. चीटिंग से मुझे पत्नी बना सकते हो तुम राज. पर मुझे पा नहीं सकते..

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राज चलता हुआ किचन में घुसा तो मम्मी वहीँ थी. राज हरामी अंदर घुस कर पीछे से मम्मी को हुग कर गया.

मम्मी तो काँप hi गई थी.

राज-- डरो नहीं मम्मी में हों आपका बीटा राज-... राज हरामी खड़ा लुंड मम्मी की गांड पर लगते हुए बड़े सुकून से बोलै..

मम्मी जो सिमरन और राज को देख कर पहले hi बहुत अपसेट थी. सिमरन के लिए खुश थी तोह राज के बड़े लुंड को देख कर उत्सुक थी. अब राज ने वही बड़ा और गरम लुंड मम्मी की गांड पर लगाया तोह मम्मी सिहर उठी. बड़ी मुश्किल से अपनी साँसों पर काबू प् के वो बोली.

मम्मी--- राज बीटा मुझे ऐसे हुग मत करो. मुझे ऐसे बड़ा अजीब लग रहा है.

राज मम्मी को थाम के थोड़ा सा लहरा गया-- मम्मी मुझे आज अपनी मम्मी की बहुत याद ा रही है. आप भी तो मेरी मम्मी हाँ न. मझे खुद से दूर मत करें प्ल्ज़..

मम्मी की तोह जान hi निकलती जा रही थी. मम्मी ने पापा के लुंड के शिव किसी दूसरे लुंड की हीट hi कहाँ सहन की थी. वो आदि बी तो नहीं थी.

मम्मी मैं में-- राज बीटा हटा लं न अपने लुंड को मेरी गांड से. मत लगाओ न उसे मेरे पीछे. मुझे परेशानी बन रही है. ये सब तो सिमरन बेटी के साथ करने वाली हरकतें हाँ न. प्ल्ज़ राज बीटा न करो न. अब तो सिमरन बेटी भी बदल रही है. कैसे एक पत्नी का हक़ निभा रही थी वो. सच में मुझे बड़ी ख़ुशी मिली थी राज बीटा. प्ल्ज़ उसी के साथ ये सब करो और जल्द से उसे बदल कर मुझे नानी बना दो.

राज ने साइड गाल पर एक किश करदी तोह मम्मी जैसे होश में आ गई. मम्मी कुछ बोलती राज ने मम्मी के पेट कर उँगलियों से सहलाना शुरू कर दिए. मम्मी हैरान रह गई.

राज-- पता है आपको मम्मी, मेरी मम्मी को भी मेरा ऐसा प्यार बहुत अच्छा लगता है. हम दोनों माँ बेटे खूब एक दूसरे में गम रहते हाँ. माँ के स्पर्श से बढ़ कर कोई और स्पर्श भी तो नहीं होता न मम्मी. ी लव यू मम्मी..

"ये क्या हो रहा है भाई" मम्मी घबरा गई तोह राज के होंटो पर मुस्कान आ गई. आवाज़ चची की थी. राज ने ऐसे hi मम्मी को घुमा के चची को देखा तो एक स्माइल कर दी.

चची भी स्माइल के साथ आगे बढ़ी और राज की कमर पर कस के चुटकी काट ली. राज फ़ौरन मम्मी को छोड़ कर अपनी कमर को मसलने लगा.

चची हसने लगी तोह मम्मी अपने होंटो को दबा गई. हंसी तो उन्हें भी आ रही थी. पर राज के लुंड का एहसास भी गया नहीं था. मुर के एक नज़र वो ज़रूर देख गई थी राज के लुंड को.

चची ने मम्मी को मुड़ते देख कर राज के लुंड को पकड़ कर दबा दिए और राज की आँखों में देखती हुई धीमे से बोली-- राज इसे कण्ट्रोल में रखना sikho.dant पीसते हुए.. वर्ण में इसे काट दूंगी.

मम्मी कुछ नहीं सुन पाई तोह राज ने चची को देख के चची को पकड़ना चाहा तोह चची ने राज के हाथ पर हाथ मार दिए..

चची-- दीदी ये रज कुछ ज़ायदा ख़राब नहीं है क्या.. मुझे इसके लच्छन सही नहीं लगदे. चची ग़ुस्से में नहीं थी. राज से नाराज़ भी नहीं थी.

मम्मी-- राज बीटा बहुत अच्छा है दीप्ति. मम्मी ने राज को कॉफ़ी का कप थमा दिए. राज वो कप लेके बहार निकल पड़ा. राज दोनों को कुछ टाइम देना चाहता था. समझ गया था दोनों बड़ी मिलके कमरे वाली बात करेंगी.

मम्मी ने ख़ुशी ख़ुशी दीप्ति को राज और सिमरन की बात बता दी.

मम्मी-- मुझे पूरा विश्वास हो गया है दीप्ति, राज ज़रूर सिमरन को बदल कर रख देगा. दो दिन में hi कितनी बदल गई है मेरी सिरमन.. चची सब सुनके अपने माथे पर हाथ मारने लगी..

चची मैं में-- राज तुम तोह मेरी सोच से भी बड़े हरामी निकले. मम्मी को भी नज़ारे दिखा दिए तुमने. ज़रूर ये सब तुमने प्लान किया होगा.

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राकेश वर्मा बहुत कुछ था. सिमरन के लिए राज को पा के. राज भी सबके साथ खूब घुल मिल गया था. सबसे खूब बातें, खूब मस्ती करि थी राज ने. तोह सब भी राज के साथ खूब बातें करते रहे थे.

इशिता के मैं में राज कुछ और भी अंदर तक समता चला गया था. राज मैं में इशिता को लेके ये सोचता था. जी ले कुछ दिन ऐसी ज़िन्दगी तू भी इशिता डार्लिंग, बस कुछ दिनों की बात है. फिर तू भी मेरे लुंड से चुद जायेगी. बड़ी मस्त कुड़ी है तू भी इशिता. तुझे छोड़ने में ज़रूर मुझे बड़ा मज़ा आएगा.

राज ब्रेकफास्ट के बाद उर्वशी को कॉल करके उससे मिलने के लिए निकल पड़ा.
 
राज बिना डरे उर्वशी से मिलने जा पोहंचा था. सिमरन अगर फिरसे उर्वशी को लेके कोई खेल खेलती तोह भी राज को कोई परवा नहीं थी. उसके हरामी मंद में बहुत कुछ चलने लगता था. अब तक तो उसके हरामी मंद में हर प्रॉब्लम का सलूशन था. आगे का पता नहीं.

उर्वशी की एक दोस्त के सिटी से बहार एक फार्महाउस था, वही दोनों मिले. उर्वशी भी पुबलिक प्लेस पर ऐसे झमेलों से दूर रहा करती थी. मैरिड थी, मस्त लाइफ जीती थी पर सब ओपनली नहीं किया करती थी.

राज ने उर्वशी को फ़ौरन hi अपनी बहन में भर लिया.

उर्वशी : हेहेहे राज तुम कुछ ज़यादा hi फ़ास्ट नहीं हो.

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राज-- फ़ास्ट न होता तोह क्या तुम मुझे मिल पति

उर्वशी ; हम्म्म ये बात भी है.

उर्वशी भी जानती थी, वो भी राज के बड़े लुंड के लिए hi आयी है. रोमांस के लिए उसके पास आदित्य hi काफी था. पर बोहत दिनों से एक बड़े लुंड की छह उसे होने लगी थी. वो भी राज के लुंड को थाम के, उसकी सख्ती, लेंथ, हीट जान कर बहुत बेचैन हुई थी. उसी रात उर्वशी आदित्य के लुंड पर बैठी बड़े जोश से उछाल रही थी. छूट में आदित्य का लुंड था तोह मैं में राज के लुंड का एहसास..

राज ने उर्वशी को पकड़ और एक किश करदी.

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उर्वशी ने एक छोटी सी किश के बाद खुद को राज से अलग कर दिए.

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राज -- क्या हुआ..

उर्वशी -- मुझे पहले अपने वेपन तोह दिखाओ. सच में hi वह एक लम्बे समय तक साथ देने वाला है या खली दिखावे का hi है.

राज-- साली तुम जैसी लड़कीवीन को पहले से सब जान्ने की बड़ी छह होती है.

उर्वशी -- हस्ते हुए. करना पड़ता है राज... आज कल के लड़के मुठ मार के अपने लुंड भी तोह ढीले कर बैठते हाँ. पता चले तुमने डाला नहीं और झाड़ भी गए. और मैं--

राज हस्ता हुआ.... तू भी काम हरमन नहीं है साली. उर्वशी भी है पड़ी. तो दिखाओ ने मुझे अपना लुंड.. देखों तो सही, उसमे कितना दुम्म है...

राज-- खुद से hi देख लो. राज ने शर्ट उतर फेंकी.. राज ट्रॉउज़र शर्ट में था.. ऐसे hi घर से निकला हुआ था.

उर्वशी आगे बढ़ी और राज के सीने पर हाथ फेरने लगी. राज तुम्हारे बदन तोह बहुत सख्त है. देखने से लगता है कभी गयम भी नहीं गए हो. फिर भी अच्छी सेहत है तुम्हारी. स्ट्रांग मुस्कलेर बॉय हो.

राज-- मेरे लुंड के मुस्कले सबसे बढ़कर हाँ.. देख कर बताओ तोह मुझे.

उर्वशी -- okay. देखती हों सच में hi उतने स्ट्रांग हाँ, जितने तुम बोल रहे हो. या लम्बी लम्बी फ़ेंक रहे हो. हसीं लड़की देख कर भी तोह लड़के ऐसे hi फेंका करते हाँ.

ूर्वसहि भी राज के जैसे मूड में आ गई थी. उर्वशी भी खाई खेली लड़की थी. बहुत चालू भी थी वो. राज के ट्रॉउज़र की डोरी खोल कर निचे सरका दिए. अंडरवियर में लुंड को देख कर-- वववव सच कहा तुमने राज. इतना एक्सपीरियंस मुझे भी है. तुम लुंड के मामले में बोहत लकी हो राज.

राज-- अभी कहा अभी तोह तुमने ऊपर से hi देखा, लाइव जलवे देख कर बताओ.

उर्वशी ने अंडरवियर भी निचे कर दिए. तोह राज का लुंड जो उर्वशी के स्पर्श, और बदन की महक पर जग उठा था, झटके के साथ निचे से ऊपर को हुआ.

उर्वशी ने फ़ौरन hi राज के लुंड को थाम लिया और लुंड की नसें देखने लगी.

उर्वशी -- मानना पड़ेगा राज. तुम्हारा कहा एक एक शब्द सच है. सच में hi तुम्हारे लुंड के मसल्स बहुत बढ़िया हाँ.

राज-- पर मुझे नहीं लगता तुम्हारी छूट की दीवारें मेरे लुंड की सख्ती को सहन कर पाएंगी.

उर्वशी है पड़ी. क्यों मेरी छूट की दीवारों को देखने के बाद फिर अपना लुंड मेरी छूट में डालोगे.

राज-- नहीं देखने के बाद नहीं, चूसने के बाद. देख के सही से पता नहीं चलता. चूसूंगा तो सही से पता चलेगा.

उर्वशी कड़ी हुई -- फिर तोह तुम्हारी तसली होनी भी ज़रूरी है. तुम लुंड से कमल के हो तो मैं भी छूट से कमल की हों. क्या यद् करोगे तुम भी. उर्वशी की छूट देखने, chusne,lene का मौका मिल रहा है तुम्हे. वर्ण तो आधी दुन्या मेरे लिए पागल है.

राज मैं में.. और उन्ही पागलों में एक मेरा मौसा भी है.

राज-- देखता हों में पागल बनता हों या तुम्हे बनता हं.

उर्वशी-- बड़ा मान है तुम्हे खुद पर.

राज हस्ता हुआ---- मेरे लुंड ने हमेशा hi मेरे मान को बढ़ाया है उर्वशी

उर्वशी भी हस्ती-- और मेरे इस फिगर ने मुझे भी मेरी सही कीमत का बहुत ज्ञान दे दिए है मुझे. मैं भी काम नहीं हों राज तुमसे कहीं से भी भी.

उर्वशी खुद hi अपने कपडे उतरने लगी.

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इस काम में उसे शर्म नहीं आती थी. रंडी थी पर स्टैण्डर्ड भी रखती थी. जगा जगा नहीं चुदती थी. राज जैसो से चुदती आई थी. जब भी चुदती थी, कभी शर्म नहीं खाया करती थी. साली बहुत आगे की चीज थी.

राज भी ट्रॉउज़र को खुद से अलग कर चूका था. उर्वशी को नंगा देख कर बोल पड़ा

राज-- उर्वशी तुम बहुत ज़यादा सूंदर हो. तुम्हरा जिस्म तारीफ के लायक है.

उर्वशी अपनी तारीफ पर खिल उठी -- राज ऐसा तोह सब बोलते हाँ.

राज आगे बढ़ा और उर्वशी के दूध पकड़ के दबा कर चेक करने लगा. उर्वशी राज को स्माइल से देखने लगी.

राज-- तुम बेमिसाल हुसैन की मालिक हो उर्वशी, तुम्हारे बूब्स की शेप किसी संगरे से काम नहीं है. यक़ीनन इनका रास भी मुझे मदहोश करदेगा. राज अपने हाथ ऊपर लेजाते हुए.

तुम्हारी ये सुराहीदार गर्दन तुम्हे बेहद सूंदर बना देती है. तुम्हारी ये ज़ुल्फ़ें जिनका रंग बहुत गहरा है. इनके अंदर से आती मस्त खुशबु और रंगत तुम्हारे इस गोर चिकने, बदन को और भी बेपनाह हसीं बना देती है.

उर्वशी के लिए अपनी तारीफ सुन्ना कोई आम बात नहीं थी. पर राज का के शब्द और अंदाज़ बहुत ज़यादा रोमांटिक था. उर्वशी अंदर तक खिलती जा रही थी.

राज ऊँगली से उर्वशी के होंटो को छेड़ते हुए --- इन शराबी होंटो की शराब पि कर किसी के लिए खुद पर काबू रख पाना मुमकिन नहीं है उर्वी.. तुम्हारी इन आँखों में गहराई में उतर कर डूब जाने का मैं करता है. इन गुलाबी गालों की चमक और नर्माहट तोह किसी की भी जान ले ले. तुम ऐसी hi चिक हो उर्वी..

उर्वशी अब बहकने लगी थी. राज के पास होक वो इतनी ख़ुशी प्राप्त कर पाएगी, उसने सोचा भी नहीं था. उर्वशी और भी ज़यादा खिल उठी थी.

राज अपनी उँगलियों को चलता हुए निचे लाने लगा. नाभि पर आ कर राज अपनी ऊँगली को नाभि के गिर्द गोल गोल घूमने लगा. ऐसा रोमांस उर्वशी की लाइफ में पहले कभी किसी ने नहीं किया था. राज के गरम हथु के स्पर्श और मीठे शब्दों पर उर्वशी मधसोः होने लगी. राज झुका और उर्वशी के एक निप्पल को मोह में भर कर धीरे धीरे चूसने लगा. उर्वशी ने ऑंखें बंद कर ली और राज के लिए पागल होने लगी. राज ऊँगली चलता हुआ निचे छूट पर लाया. और छूट में ऊँगली न करके छूट के गिर्द मूव करने लगा.

निप्पल भी साथ साथ राज चूस रहा था. उर्वशी के जिस्म से खेलने वाले तोह हमेशा उसे किश किया करते थे, दूध पिया करते थे, छूट और गांड चाट लिया करते the.ya फिर छोड़ दिए करते थे. ऐसा किसी ने नहीं किया था. इसलिए ऐसा आनंद भी उर्वशी पहले कभी नहीं पा सकीय थी. इतने सालों से चुदती आ रही थी. ऐसा मज़ा भी पहले कभी नहीं प् सकीय थी. राज को उर्वशी से काम था तोह साला हरामी उर्वशी को पागल बना देने पर तुला हुआ था.

उर्वशी के जिस्म के रुएँ खड़े हो चुके थे. उसकी सांस कुछ तेज़ हो चुकी थी. राज दूसरे निप्पल को मोह में भर कर चूसने लगा. उँगलियों से छूट को हलके से टच करके साइड में चलने लगता. उर्वशी बेचैन होने लगी. मज़ा भी उसका बहुत बढ़ चूका था. सेक्स की आग में वो जलने लगी. मैं होने लगा आज राज उसकी छूट में ऊँगली करदे..

पर दूसरा मैं ये भी कर रहा था, नहीं राज ऐसे hi उसे तरसरा रहे, वर्ण ऐसा आनंद आना बंद हो जायेगा.

राज ने एक बार अपनी पूरी ऊँगली छूट लिप्स में घुसा दी. छूट के छेड़ को टेढ़ी ऊँगली से एक पल के लिए कुरेदा और फिर ऐसे hi टेढ़ी ऊँगली ऊपर को ला कर बहार निकल ली. वही गीली चुतरस से सनी ऊँगली उर्वशी की जांग पर चलते हुए उर्वशी के चूतड़ पर ले आया और वहां मूव करने लगा. चुत्तड़ो का रुएँ भी खड़े हो चुके थे. उर्वशी की सांस कुछ और भी तेज़ होने लगी. वो बोली कुछ नहीं और न hi राज कुछ बोल रहा था.

राज उर्वशी को पागल कर रहा था और उर्वशी भी पागल हो रही थी.

दोनों चुत्तड़ पर उँगलियाँ चलते हुए राज ने अपनी ऊँगली गांड की दरार में मूव करनी शुरू कर दी.. उर्वशी और भी ज़यादा काँप उठी. उसकी छूट बहुत ज़यादा फड़फड़ा कर पानी छोड़ रही थी. दोनों बूब्स आखरी हद तक सख्त हो चुके थे. दोनों निप्पल दुल्ली अकड़ चुके थे.

राज की ऊँगली अभी उर्वशी की गांड की दरार में hi चल रही थी. उर्वशी ने दोनों हथु से राज के सर को थाम लिया और उसी पल उर्वशी झाड़ गई.

राज ने भी महसूस कर लिया उर्वशी झाड़ गई है. राज हरामी मुस्कान के साथ उर्वशी को गॉड में उठा के सोफे पर बैठ गई. उर्वशी के दोनों पेअर साइड में करके राज ने उर्वशी को अपने गले से लगा लिया. उर्वशी भी राज की गर्दन में बहन दाल कर लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

राज --- क्या हुआ उर्वी डार्लिंग..

उर्वशी कुछ नहीं बोली.. खुद को रिलैक्स करने में लगी रही. राज उर्वशी की पीठ सहलाने लगा. कुछ देर में उर्वशी रिलैक्स हुई तोह पागलों की तरह राज के चेहरे को थाम कर किश करने लगी. उसकी आँखों की चमक बहुत बढ़ गई थी. उर्वशी बड़ी शिद्दत से राज को किश करने लगी.

राज जान गया उसने मैदान मार लिया है. राज भी उर्वशी को उसी के अंदाज़ में किश करने लगा. साथ hi उर्वशी की गांड की दरार में ऊँगली चलने लगा.

उर्वशी ने किश तोड़ कर राज की आँखों में देखा, जहाँ राज के लिए बहुत कुछ था.

उर्वशी-- रआआआआअज... उर्वशी बड़ी छह से बोली... राज तुम कहाँ से चले आये मेरी ज़िन्दगी में राज.. उफ्फ्फ्फ़ राज ऐसा आनंद मेने अपनी पूरी लाइफ में प्राप्त नहीं किया राज. ये तोह मैं जान hi गई थी तोह बोहत बड़े खिलाडी हो. पर इतने बड़े खिलाडी हो सकते हो मैं नहीं जानती थी. कितनी खूबसूरती से तुमने मेरी तारीफ की, कितने डिफ्रेंट वे से तुमने मेरे जिस्म को छुआ.. राज में अपनी पूरी लाइफ में अब तक, इतनी जल्दी और टच से कभी डिस्चार्ज नहीं हुई. इवन मुझे तोह गर्म करने के लिए भी सामने वाले को म्हणत करनी पड़ती है. पर तुमने तोह.. तुमने तोह कमल hi कर दिए राज. इतना ज़यादा आनंद देकर मुझे बिना देरी के hi मुझे गरमा कर शांत भी कर दिए.

फिर स्माइल से बोली-- राज अब तोह मैं तुम्हे कभी अपनी लाइफ से जाने नहीं दूंगी.

राज-- तुम चीज hi ऐसी हो उर्वशी तुम्हे खुद से दूर करने वाला पागल hi हो सकता है.

उर्वशी- थैंक यू राज.. राज मेने ज़यादा से भी ज़यादा 2 वीक तक किसी एक के साथ रिलेशन रखे हाँ. एक आदित्य hi है जो मेरे साथ है. वो मेरा पति है राज. उसके साथ लाइफ स्पेंड करनी है. पर मेरा एक hi मर्द को लम्बे समय तक लेके चलने का मैं नहीं होता. मुझे कोई ऐसा मिला भी तोह नहीं राज, जिसके साथ लम्बे आरसे तक चलने की छह दिल में पाली हो. पर तुम.. राज तुम मुझे बहुत भा गए हो. मैं हमेशा तुम्हारे साथ टच में रहना चाहूंगी राज. क्या तुम..

राज ने उर्वशी के होंटो को अपने होंटो में भरा और चूसने लगा. उर्वशी भी राज का साथ देने लगी. लुंड खड़ा था, उर्वशी की छूट के निचे दबा हुआ था. उर्वशी की छूट का पानी राज के लुंड को नेहला चूका था. पर उर्वशी या राज दोनों ने उसपर धयान नहीं दिए.

राज---- उर्वशी मैं भी तुम जैसी लड़की को खुद से दूर नहीं करना चाहूंगा. पर तुम्हे मेरे साथ रेगुलर टच में रहने के लिए मेरे एक काम करना होगा.

उर्वशी-- कैसा काम राज.. उर्वशी हैरान रह गई थी. अभी मिले समय hi कितना हुआ था. और राज को उससे काम भी पद गया था.

राज-- पहले ये बताओ तुम्हारे पति की फाइनेंसियल कंडीशन क्या है.

उर्वशी हस्ते हुए-- क्यों उन्हें लूटने का इरादा है क्या.

राज उर्वशी के बूब्स प्रेस करता हुआ-- लूट तोह चूका हों में तेरे पति को. इससे बढ़कर कीमती चीज है hi क्या उसके पास.

उर्वशी खुश होक राज को फिरसे चूमने लगी-- राज तुम बातें बड़ी मज़े की करते हो. अपनी तारीफ हर लड़की को hi अच्छी लगती है. बूत टुंगरी बात सबसे अलग है.

राज-- तोह बताओ न फिर मुझे अपने पति के बारे में.

उर्वशी-- के फर्म में जनरल मैनेजर हाँ वो राज..

राज-- और अगर तुम्हे भी खुद से कोई बिज़नेस करना पड़ा. मतलब कुछ ऐसा जिससे हम दोनों हमेशा रेगुलर टच में भी रहें और तुम फिनांकिअल्ली तुअर पर भी बौह्त ज़यादा स्ट्रांग हो जाओ.

उर्वशी और भी खुश हो गई. ये तोह उसका सपना था. वह बहुत ज़यादा पैसे वाली बने. पर लालची नहीं थी. उर्वशी में लालच नहीं था. एक सेक्स पार्टनर बदलने वाली आदत थी उसकी. मिडिल क्लास फॅमिली से बिलोंग करती थी. आदित्य से आत्ताच होक अच्छी लाइफ जी रही थी. पर सरे खवाब तोह पुरे नहीं हो सकते थे.

उर्वशी-- ज़रूर ऐसी छह किसकी नहीं होगी भला. पर मैं तुम्हारा मतलब नहीं सम्भि.

राज-- सिंपल सी बात है उर्वशी.. मैं कभी शहर में नहीं रहा hon.par अब सिमरन के साथ जुड़ जाने के बाद मुझे भी शहरी बनना पड़ेगा. और मैं मर्द हों तोह सिमरन के पैसों पर राज तोह नहीं कर सकता. करना चहु तोह सिमरन के परिवार के पास इतना पैसा है, मैं साडी उम्र बेथ के भी खाएं तोह ख़तम नहीं होगा. पर मैं ऐसा नहीं हों और न hi ऐसा करने की सोच सकता हों. मुझे भी अब एक बड़ा आदमी बनना है. पैसे कामना है. इस लायक बनना है कोई देख क्र ये न कहे "सिमरन से शादी करके इसके तोह मज़े hi हो गए".. ऐसे मज़े मुझे कभी भी पसंद नहीं हाँ. हमेहा खुद के दम पर जिया हों तोह आगे भी खुद के दम पर जियूँगा. कभी सोचा नहीं था पैसे कमाने का. पर अब कामना पड़ी.

उर्वशी -- राज तुम इतने अच्छे ho,jaan कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई राज. मुझसे जैसी भी मदद चाहिए होगी मैं करुंडी राज. पर मुझे बिज़नेस का कोई एक्सपीरियंस नहीं है.

राज-- बिज़नेस के लिए बिज़नेस नॉलेज होना ज़रूरी है उर्वशी.. मैं तोह खुद अभी स्टूडेंट हों. ज़यादा कुछ नहीं जनता. पर लोगों को बड़ी बारीकी से जांचने की आदत है मुझे. बहुत कुछ जनता समझता भी हों में. कैसा बिज़नेस करना है, कैसे करना है वो बाद में देखेंगे. तुम ये बात फ़िलहाल खुद रक् hi रखना.

उर्वशी-- okay राज.. कोई और काम भी है क्या मुझसे..

राज हरामीपन से-- हाँ वो काम बहुत बड़ा है उर्वशी. तुम्हारे लिए कुछ भी है. अगर तुम करना चहु तोह.. न करना चहु तोह बहुत बड़ा

उर्वशी-- ऐसा क्या काम है राज.

राज स्माइल से-- थ्रीसम सेक्स किया है कभी तुमने.

उर्वशी को झटका लगा-- थ्रीसम.... no राज मई इतनी भी चीप नहीं हों. ठीक है मैं अपने मज़े के लिए पार्टनर्स बदल लिया करती हों पर थ्रीसम. no चांस

राज-- मेरे लिए भी नहीं..

उर्वशी कुछ परेशान हो गई. राज उसके दिल में सामने लगा था पर राज की बात पर वह कुछ टेंशन में आ गई थी. राज ने उसे बहुत अच्छी ऑफर भी दी थी. राज उसे बहुत ज़यादा भ भी गया था. पर राज की इस बात पर उसे कुछ समझ नहीं आ रही थी. फिर भी वो बोल पड़ी

उर्वशी-- किसके साथ थ्रीसम के लिए कह रहे हो तुम राज.. उर्वशी सीरियस होक राज की आँखों में देखते हुए बोली..

राज हरामी स्माइल से बोलै-- अगर आदित्य के साथ करने को कहूं तोह

उर्वशी-- पागल हो क्या तुम.. ठीक है आदित्य मेरे पति है, फिर भी मैं तुम्हारे साथ हों. मुझे उससे मोहब्बत उतनी नहीं है, जितनी एक पत्नी को होनी चाहिए. पर आदित्य मुझसे मोहब्बत करता है. मेरे बारे में सब जनता भी है. पर ऐसे खुल्लम खुल्ला. वो भी तहरीमसोमे... no राज.. नेवर, ऐसा कभी सोचना भी मत.. आदित्य के साथ मैं एक हैप्पी लाइफ जी रही हों. मुझे उससे कोई परेशानी नहीं है. मैं उसे नहीं छोड़ सकती राज. उसे कोई दर्द भी नहीं दे सकती.

राज-- अगर कभी उसे मेरा और तुम्हारा पता चला तोह

उर्वशी-- दो चार मुझसे नाराज़ रहेगा.. फिर ठीक हो जायेगा. पर मुझसे दूर नहीं रह सकता वह.

राज-- फिर तुम क्यों ऐसी लाइफ जी रही हो.

उर्वशी-- ये तोह मैंने उसे पहले भी बता दिए था. तभी तोह एक स्टैंडर बना रखा है मैंने राज.. तुम ख़ास न होते तोह मुझे कितने भी पैसो की ऑफर कर देते, मैं तुम्हारी तन्हाई में नहीं आने वाली थी. पैसो की छह है मुझे पर मैं लालची नहीं हों राज. मैं बिकाऊ मॉल भी नहीं हों. अगर होती तोह तुम्हारा ऐसा प्यार प् कर कह न देती राज मैं आदित्य को छोड़ देती हों तुम मुझसे शादी कर लो. पर राज में ऐसी नहीं हों. फॉर गॉड सके फिरसे ऐसी कोई बात मत करना.

राज-- नहीं करुणा उर्वी.. वह तोह बस ऐसे hi बोल दिए था मैंने. थ्रीसम तोह किसी और के साथ करना है.

उर्वशी-- कौन है वह... उर्वशी अब भी बेहद सीरियस थी.

राज-- तुम्हारी hi सोसाइटी के महेश---

उर्वशी चीख पड़ी.. झटके से राज की गॉड से उठ कड़ी हुई और राज को देखने लगी. उसके चेहरे पर बहुत से भाव थे.
 
उर्वशी को झटका लगा था महेश के बारे जान के. राज ने अपनी अहमियत भी जीता दी थी. उर्वशी राज को देखि ज़रूर पर गुस्सा नहीं कर पाई.

उर्वशी-- राज वो साला ठरकी.. no वे राज.. उसके साथ में नहीं कर सकती कुछ भी. साला ठरकी.. उसकी नज़रें में खूब पहचानती हों राज.. no मैं उसके साथ नहीं करुँगी राज. वो मे स्टैण्डर्ड भी नहीं है राज..

कोई और होता तोह उर्वशी उसे खरी खरी सुना क्र वहां से निकल ली होती. पर राज हरामी ने उर्वशी को पहले hi राउंड में चित कर दिए था. उर्वशी वैसे रियेक्ट नहीं कर पाई. जैसे उसे करना चाहिए था. महेश जैसे को तोह वो अपने पैरों के निचे रखने की आदि थी.

राज हरामी उर्वशी को देखता हुआ अपना लुंड पकड़ कर हिलने लगा. उर्वशी ने देखा तोह होंटो पे जीब फेरने लगी. उर्वशी राज की दीवानी तो बाद में हुई थी. पहले राज के लुंड की hi दीवानी हुई थी. सुपर स्टोर के बहार hi राज का लुंड थाम कर बहुत कुछ जज कर गई थी. राज के लुंड के लिए hi तोह वो यहाँ पर आई थी. उर्वशी ललचाई नज़रों से राज के लुंड को देखने लगी.

राज-- आओ चुसू न मेरे लुंड को. देखो तोह कैसे तुम्हारे इस सूंदर शरीर को देख कर झटके मार रहा है. देखो कैसे इसकी अकड़न बढ़ती hi जा रही है.

उर्वशी चलती हुई आई और राज के पैरों में बेथ गई.

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उर्वशी-- राज तुम ये काम मुझसे न करवाओ प्ल्ज़.

राज-- अभी छोडो महेश को, मेरे लुंड को टास्ते करो

उर्वशी ने भी राज के लुंड को थाम कर सहलाना शुरू कर दिए. वो भी मूड में आने लगी. कभी सहलाती तोह कभी चट्टी.. फिर राज के लुंड की एक गोली को मोह में भर कर चूसने लगी.

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उर्वशी धीरे धीरे मस्त होने लगी. गोली चूस कर लुंड को चूसने लगी.

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राज भी उर्वशी से कुछ और न बोल कर इस समय के मज़े लेने लगा. उर्वशी बड़ी महारत से राज के लुंड को चूसने लगी. उर्वशी अब रिलैक्स थी.

राज ने उर्वशी को उठाया और अपने खड़े लुंड पर बिठाने लगा. उर्वशी भी मस्त होते होक दोनों पेअर साइड में करके राज के लुंड पर बैठने लगी

उर्वशी- राज तुम कुछ न करना, मुझे खुद से काने देना. बहुत दिनों से कोई बड़ा लुंड नहीं लिया मेने, पहले कुछ दर्द होगा मुझे.

राज-- अरे मेरी रानी तुझे दर्द क्यों दूंगा में.. चल तू मज़े से बेथ मेरे लुंड पर. ले और खुद भी मज़ा ले और मुझे भी दे.

उर्वशी खिल उठी.-- मज़े तोह मेरे सच में hi हो रहे हाँ राज. तुम और तुम्हारा घोडा दोनों hi लाजवाब हाँ.

उर्वशी राज के लुंड पर बैठते हुए उसे अपनी छूट में लेने लगी. उर्वशी को कुछ कुछ दर्द भी हो रहा था. पर पुराणी खिलाडी थी. बिना डरे राज का लुंड लेती गई..

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राज और उर्वशी दोनों मस्त हो गए तोह उर्वशी फिर राज के लुंड को लेके छोड़ने लगी.

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धीरे धीरे ऊपर निचे होने लगी. राज उर्वशी के चुत्तड़ मसलने लगा. उर्वशी की छूट में राज का लुंड कास कास के जा रहा था. उर्वशी के तो मज़े hi हो गए थे. मज़े तोह राज के भी हो रहे थे. छूट के शिव उसे किसी और चीज में मज़ा hi कहाँ आता था.

कुछ देर उर्वशी ने पोजीशन बदली

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राज को किश करते हुए राज के लुंड पर मूव करने लगी..

राज-- सच में तुम बहुत हटके हो उर्वी

उर्वशी-- ख़ास तो तुम भी हो राज. उम्म्म्मः.. बहुत मज़ा ा रहा है तुम्हारे साथ राज. आठ बहुत दिनों बाद एक स्ट्रांग लुंड मिला है मुझे. तुम मैं के भी बहुत अच्छे हो राज..

राज-- मेरी रानी तेरे साथ इन लम्हो को जी के मैं भी खिल उठा हों. बहुत समय के बाद तेरे जैसी कोई मिली है.

उर्वशी स्माइल से--- और मुझे पहली बार कोई तुम जैसा मिला है. में इन लम्हों को कबि नहीं भूल पाऊँगी राज.

राज ने उर्वशी को पलट दिए और छोड़ने लगा.

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राज--- मुझे महेश स बड़ा ज़रूरी काम है उर्वी.. मुझे उसके घर में घुसना है. तुम समझ सकती हो, काम कितना खास है. एक बार मेरे लिए भी तुम महेश के साथ सेक्स नहीं कर सकती.

उर्वशी राज को देखने लगी. उसकी छूट में बारह आने लगी थी. राज के लम्बे मोठे लुंड ने भी उसे मज़ा से बेहाल कर रखा था.

उर्वशी--- पर राज

राज ने स्पीड से उर्वशी को छोड़ना शुरू कर dia..urvashi कुछ और भी मज़्ज़े में होने लगी.

राज-- पर वर छोडो उर्वी. हम दोस्त हाँ न तोह इतना काम तो तुम कर hi सकती हो. तुम ने भी तोह बोहत से पार्टनर बदले हाँ. एक बार मेरे लिए hi महेश को खुश कर दो.

उर्वशी-- okay... ठीक है. पर उसके बाद उसने मुझे कुछ कहा, मेरे पीछे आया तोह जहाँ होगा,, वहीँ उसकी पिटाई कर दूंगी.

राज उर्वशी को किश करने लगा-- मुझे पता था तुम मेरी बात नहीं तलोगी.

उर्वशी-- उसे फोन करके बुला लो raj..aj hi में इस काम से फ्री हो जाना चाहती हों. क्या पता बाद में मेरा मैं बदल जाये. ये काम इजी भी नहीं है मेरे लिए.

राज --- अरे तुम चिंता न करो मेरी रानी. वो भी बस पोहचता hi होगा. बस कॉल करने की देर है.

उर्वशी झाड़ गई तोह राज फिर भी उसे छोड़ता रहा. उर्वशी आनंद में डूबी लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी.

उर्वशी-- ी लव यू राज.. सच कहूं इस कुछ hi लम्हों में मैंने बहुत कुछ प् लिया है. तन से भी और मैं से भी. मुझे तुम बहुत भा गए हो राज.

राज-- और मुझे भी तुम.. तुम चहु तोह मैं महेश को मन कर देता हों. कुछ और जुगाड़ सोच लूंगा.

उर्वशी ने राज को किश करि और बोली-- नहीं राज. मेरे एक बार महेश के सतह सेक्स करने से अगर तुम्हारा काम बनता है तोह में मैं न होते हुए भी मैं पीछे नहीं हटूंगी. सही कहा था तुमने, ये मेरे लिए कोई नयी बात है. बात स्टैंडर की थी. पर तुम्हारी बात भी में नहीं ताल सकती. कार्डो उसे फोन राज. आज hi इस सब से फ्री हो जाओं तो अच्छा है.

राज उठा और मोबाइल उठा के महेश को कॉल लगा दी. महेश को आने को बोलै तोह वह साला फ़ौरन hi आने के लिए निकल पड़ा.

राज-- उर्वी डार्लिंग तुम्हारी गांड का छेड़ मुझे बहुत बेचैन कर रहा है.

उर्वशी- हेहेहे वह तोह करेगा hi. उसका भी खास धयान रखती हों में. तुम्हे पसंद है तो ले लो उसके भी मज़े.

उर्वशी खुद से घोड़ी बन गयी और राज उसकी गांड छटने लगा. चुतरस से सनी छूट में ऊँगली करते हुए राज उर्वशी की गांड चाटने लगा.

कुछ देर गांड के मज़े लेके राज सीधा हुआ और उर्वशी की गांड पर लुंड सेट करने लगा.

राज-- दर्द होगा, सहन करलोगी न.

उर्वशी-- रज तुम्हारे लिए तोह कुछ भी कर जाऊँगी.

राज ने धक्का मार दिए. थोड़ी सी खुली गांड राज के मोठे लुंड से और भी खुलने लगी. थोड़ा सा लुंड उत्वाशी की गांड में घुस गया.

उत्वाशी-- आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह राजज.. कसम से तुम्हारा लुंड बहुत हेअल्थी है यार. जितना दर्द देता है, उससे कहीं बढ़कर मज़ा देता है. डालो दो राज सारा hi मेरी गांड में. ी लव अस्स फूकिंग राज... खोल दो मेरी गांड को पूरा राज...

राज ने धक्का मार दिए. aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh उर्वशी चीख पड़ी.. उम्मम्मम राज और थोड़ा कास के धक्का मारो, सारा दाल दो.. हाँ सारा आअह्ह्ह ओह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ आआआआआदी

देखो कैसे छोड़ रहा है मुझे राज.. कभी तुम भी ऐसे hi मुझे छोड़ा करो न. आठ राज यू अरे अमेजिंग राज.. ी लव यू राज

राज पूरा लुंड उर्वशी की गांड में घुसा के उसे पेलने लगा.

जब तक महेश आया, तब तक राज अच्छी से उर्वशी की गांड मार कर उसकी गांड में hi झाड़ चूका था.

महेश तोह उर्वशी को नुदे देख के hi पागल हो गया था. साला ठरकी उर्वशी को नंगा देख कर hi अपने लुंड को पकड़ कर मसलने लगा था.

राज ने भी टाइम बचते हुए महेश के साथ मिलकर उर्वशी के साथ एक राउंड थ्रीसम के लगाया. महेश की तोह चंडी hi हो गई थी.

उर्वशी भी दो दो लुंड एक साथ लेके न चाहते हुए भी मस्त होने लगी थी. महेश बड़ी तारीफ कर रहा था उर्वशी के शरीर की. एक एक अंग की. उर्वशी ने कुछ नहीं कहा.

एक राउंड चुदाई के बाद उर्वशी राज को किश करने के बाद कपडे उठाये एक कमरे में घुस गई थी. नाहा धु क्र फ्रेश होकर उर्वशी राज और महेश को वहीँ छोड़ कर निकल पड़ी थी. राज ने एक डीपली किश करके उर्वशी को जाने दिए था.

राज-- उर्वी तुम्हे बुरा तोह नहीं लगा.

उर्वशी ने भी राज को किश करते हुए अपने दिल की बात कह दी.

उर्वशी- राज मेने ऐसा कभी सोचा नहीं था. पर तुम्हारे लिए सब कर गुज़री.. फिरसे तोह नहीं कहोगे न मुझे ऐसा सब करने के लिए

राज-- नहीं कहूंगा.

उर्वशी-- राज तुम खास हो, इसलिए भी मुझे बुरा नहीं लगा. अच्छा चलती हों. उस ठरकी को अच्छे से समझा देना. कहीं कोई बकवास करि न उसने. या किसी के सामने मुझे एक्सपोज़ किया तोह उसे वही थोक दूंगी.

राज-- तुम टेंशन न लो उर्वी. में हों न. कुछ गड़बड़ करेगा तोह मैं hi उसे थोक दूंगा. उर्वशी चली गई.

उर्वशी के जाने के बाद राज उससे बोलै-- कैसे लगा आपको फिर महेश उर्वशी के साथ टाइम स्पेंड करके..

महेश-- बहुत अच्छा. बहुत मस्त

राज-- आठ ऐसी hi लाइफ के तोह मज़े हुआ करते हाँ. आपने ऐसे लम्हे बहुत काम जिए होंगे महेश. कभी सोचा भी था आपने, उर्वशी के साथ ऐसा सब कर पाओगे.

महेश-- नहीं राज, मैं तोह बस सोच hi सकता था. इमेजिन hi कर सकता था. पर कुछ और नहीं कर सकता था.

राज-- महेश कभी इन्सेस्ट बारे भी सोचा है आपने... महेश तोह राज की बात पर हैरान hi रह गया था.

राज-- अरे यार आप तो परेशान हो गए. आज कल तोह पुरे देश में hi इन्सेस्ट का राज है. क्या आपने कभी भी अपने परिवार की किसी महिला को नहीं छोड़ा.

महेश अपने माथे पर आये पसीने को साफ़ करने लगा.

महेश--- nn..nahi.. mm..mene ऐसा कुछ नहीं किया कभी

राज-- ओह्ह्ह फिर तो आपने कभी सेक्स के मज़े hi नहीं लिए. क्या कभी आपके मैं में ऐसे विचार कभी नहीं आये. मैं तोह अपनी माँ और बहनो के साथ साथ चची और दूसरी बहुत सो के साथ कर चूका हों.

राज ने झूट बोल दिए. किया नहीं तो करने वाला था. पर महेश राज की इस बात पर कुछ घबरा गया था. वो अपने होंटो पर जीब फेरने लगा.

राज-- मतलब आप ने कभी कुछ नहीं किया.

महेश-- नहीं किया.. हिम्मत hi नहीं पड़ी कभी राज.

राज हस्ता हुआ-- इतने बड़े सेक्स लवर होक भी हिम्मत नहीं पड़ी. कभी मैं भी नहीं किया क्या

महेश-- मैं तोह बहुत रहा है मेरा राज.. महेश धीरे धीरे खुलने लगा. पर कभी हिम्मत नहीं हुई.

राज-- अगर मैं आपका साथ दूँ तोह..

महेश हैरान हुआ..

महेश- साथ मतलब??

राज-- अरे यार जैसे अभी उर्वशी के साथ आपका चांस बनाया है. ऐसे hi इन्सेस्ट के मज़े भी करवा सकता हों यार. सच कहूं तोह मुझे भी हमेशा से खालिस माल hi पसंद रहा है.

महेश हवस का अँधा था, राज ये बात जनता था. महेश दिन में भी सपने देखने लगा. उसे राज की इस बात पर ग़ुस्सा नहीं आया था. ये भी वो सोच गया था. राज पहले उसके परिवार की किसी लड़की या औरत को छोड़ेगा. पर वो ये सोच कर ग़ुस्से में नहीं आया. ठरकी था, राज से कुछ बेनिफिट्स भी उसे मिल रहे थे. अब खालिस और घर की छूट की बात हुई तोह उसका लुंड फिरसे खड़ा होने लगा.

महेश-- तुम ये सब कैसे करोगे.

राज--- सिंपल आप मुझे अपने परिवार के इंट्रूडस करवा देना. वहीँ कहीं रहने का भी जुगाड़ कर देना. बाकि का मैं खुद देख लूंगा. कुछ मज़े मरते हुए हम बिज़नेस को भी लेके चलते रहेंगे. सही कहा न मैंने.

महेश के अंदर की हवस बहुत बढ़ चुकी थी. अपनी hi बेटियों को नंगा इमेजिन करने लगा. अपने परिवार की सभी महिलाओं को इमेजिन करते हुए छोड़ने लगा. उसका लुंड झटके पर झटके खाने लगा. देर नहीं लगी और वो बिना कुछ किये hi झाड़ गया.

राज हसने लगा. हाहाहाहा-- महेश यार आप तोह अभी से hi सबको छोड़ने लगे.. महेश भी अपने लुंड को देख के बेशर्मी से हसने लगा.

दोनों कुछ देर में वहां से निकल पड़े....

3 घंटे बाद राज के फोन पर महेश की कॉल आई..

महेश-- राज तुम इस एड्रेस पर पोहंचो. राज मैं में सुहाने सपने देखता हुआ उस ाड्र्स पर जा पोहंचा. वो एक फ्लैट था. जैसे hi राज अंदर दाखिल हुआ महेश राज के पैरों में गिर पड़ा.

राज देख के हैरान हो गया-- ऐसे क्यों कर रहे हाँ आप महेश

महेश-- मुझे माफ़ कर दीजिये राज बीटा. मैं आपका साथ नहीं दे सकता. आप के साथ कुछ भी नहीं कर सकता. आपको अपने घर नहीं ले जा सकता.. आपके साथ बिज़नेस भी नहीं कर सकता.

रजा हैरान हो गया.. पर उसे देर नहीं लगी और बहुत कुछ समझ गया.. यहाँ भी सिमरन ने गेम बदल दी थी. राज के होंटो पर हरामी मुस्कान आ गयी. राज ने महेश को कन्धों से पकड़ कर उठा दिए.

राज-- पूरी बात क्या है..

महेश-- राज बीटा.. सिमरन मैडम!

राज-- क्या किया है सिमरन मैडम ने.

महेश -- पहले दिन से hi उसकी मुझपर नज़र पद गई थी. जब आप मुझसे मिलने फैक्ट्री आये थे.

राज-- तोह

महेश-- इन्सेस्ट वाली बात छोड़ के मुझे सिमरन मैडम को सब बताना पड़ा है राज बीटा. वर्ण मैडम मुझे बर्बाद कर देती. मैंने उनकी बात मणि तोह मेरे साथ 20 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट भी कर लिया है मैडम ने.. राज बीटा मुझे माफ़ कर देना. प्ल्ज़ मुझे बर्बाद मत करना. मैं मैडम से और आपसे नहीं लड़ सकता. मेरी इतनी हैसियत hi नहीं है.

राज ने महेश से कुछ और नहीं कहा और वहां से निकल पड़ा..

राज मैं में.. वहहहह मेरी भुलझडी तू कितनी फ़ास्ट निकली.. अरे तू ऐसी न होती तोह तू मुझे पसंद क्यों आती.

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अगले दिन के 9 बजे महेश के घर के दरवाज़े पर मेले कुचले कपड़ो में एक मेला कुचला लड़का खड़ा हुआ था.

उसके चेहरे पर ज़माने भर का दर्द था. ग़ुरबत कुछ लोगों को कितना सताती है. उस लड़के को देख कर बहुत अच्छे से पता चलता था.

दरवाज़ा खुला और महेश की पत्नी सुनैना बहार निकली..

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लड़के को देख कर, उसकी हालत को देख कर उसे उस लड़के पर बड़ा तरस आया. फ़ौरन लड़के को अंदर बुलवा कर एक सोफे पर बिठाया. दिल की अच्छी थी सुनैना. पर मैं की दुखी थी. लड़के को पानी लेक पिलाया तोह पानी पि कर लड़के ने सुनैना को धन्यवाद बोलै और उठ के लड़खड़ाते हुए जाने लगा.

सुनैना-- सुनो बीटा..

लड़का रुक कर, मुद कर देखने लगा.

सुनैना-- बीटा कोण हो, कहाँ से हो. ऐसी हालत क्यों हो रही है तुम्हारी. तुम्हारा घर कहाँ है. सब कहाँ हाँ. इतने बड़े शहर में होते हुए भी तुम्हारी ये हालत..

लड़के की आँखों में आंसू आ गए.

सुनैना का तोह दिल hi मचल उठा. जैसे भी थी, पर किसी का दुःख उससे भी नहीं देखा जाता था. अपने माता पिता से ग़ुस्से थी. उन्ही के कारन सुनैना की ज़िन्दगी बर्बाद हो गई थी. पर दिल की बुरी नहीं थी. बस इसी कारण अपने माता पिता के पास कभी नहीं गई थी. जाती थी तोह उन्हें देख कर सुनैना को बड़ा ग़ुस्सा आने लगता था. दुखी भी थी अपने माता पिता को लेके. पर ग़ुस्सा ज़यादा था.

लड़के के आंसू देखे तोह रहा नहीं गया.

सुनैना-- बीटा रो क्यों रहे हो..

लकड़ा-- गाओं से शहर आया था काम करने. पर कहीं काम नहीं मिला. पढ़ा लिखा भी नहीं होना. सब धक्के दे कर निकल देते हाँ. सीधा हों न, तो बहुत बुरा बर्ताव भी करते हाँ.

सुनैना का दिल कुछ और भी पिघल गया.

सुनैना-- बीटा तुम कुछ दिन यहाँ रह सकते हो.

लड़का खुश हो गया. और सुनैना के पैरों में गिर पड़ा. मुझे मेरी दीदी की शादी के लिए बहुत से पैसे कमाने हाँ. नहीं तो दीदी की शादी नहीं हो पायेगी.

सुनैना मैं में-- देखा पिता जी. अपने परिवार की बहु बेटियों के लिए लोग क्या कुछ कर जाते हाँ. एक भाई अपनी बेहेन के लिए किस हद तक जा रहा है. और एक आप थे जो अपनी hi बेटियों की ज़िन्दगियों को नर्ग बना दिए. क्या बेटियां इतनी सस्ती होती हाँ. नहीं पिता जी बेहेन, बहु बेटियां बड़ी कीमती होती हाँ. इस लड़के को देखिये पिता जी. कैसे अपनी बेहेन के लिए मेरे पैरों में गिर रहा है. अपणु की खशियों के लिए तोह ऐसा सब hi कर जाया करते हाँ. पर आप तोह कॅशे बन गए थे पिता जी. अपनी hi बेटियों की ज़िन्दगियों से खेल गए आप पिता जी..

सुनैना ने लड़के को उठाया और खड़ा कर दिए. लड़के आँखों में आंसू लिए सुनैना को देखने लगा.

सुनैना-- बीटा क्या काम कर सकते हो तुम..

लड़का-- खेतों में काम करते था चची.. और कुछ नहीं करना आता.

सुनैना सोच में पद गई.

सुनैना-- बीटा घर का काम कर सकते हो.

लड़का खुश होक-- हाँ चची घर का काम करलूँगा में. पर मेरी दीदी की शादी के लिए मुझे बहुत से पैसे कमाने हाँ.

सुनैना -- वह भी देख लुंगी मई बीटा. तुम यही राहु..

लड़का-- जी चची जी..

सुनैना-- नाम क्या है तुम्हारा बीटा.

लड़का-- जी चची मेरा नाम रघु है.

सुनैना रघु को लेके एक कमरे में गई.. आज से तुम यही रहोगे. आज के दिन तुम आराम करो. कल से तुम्हे काम डोंगी में.

रघु-- जी चची.. सुनैना चली गई तोह रघु मैं में सोचने लगा

"अह्ह्ह्हह मौसी जी आप कितनी गदराई हुई हाँ. कितनी प्यारी कितनी सेक्सी हाँ आप.. महेश मौसा जी, आपने मुझे घर में घुसने नहीं दिए था. मैं प्रवेश कर चूका हों आपके घर में मौसा जी..... मेरी भुलझडी, मेरी सिमरन मेरी रानी.. ढूंढ सकू तोह ढूंढ लेना mujhe..hahaha"
 
राज अपनी मौसी के घर पोहंच चूका था. राज कुछ बदले हुए हुलिए में था. मौसा के लिए उसे पहचान पाना मुश्किल तो था, नामुमकिन है. राज ने अपनी और से तोह पूरी कोशिश करि थी. अब देखना था, आगे का खेल कैसे चलता है.

राज भी ये सब सोच चूका था. और जनता था उसे अपना खेल कैसे खेलना था. हर बात hi सिमरन जीत जाती, ये ज़रूरी नहीं था. सिमरन राज को चित कर गयी तोह तोह एक बार राज ने भी सिरमन की पलटी बाज़ी को सुधर दिया था.

राज मौसी के कमरे में लेता हुआ सिमरन को याद करके हसने लगा. जब राज महेश से मिला था. जब महेश ने राज को बताया था, वोन की वजा से राज के साथ कोई भी डील नहीं कर सकता. किसी भी मामले में आगे नहीं बढ़ सकता.

राज महेश के पास से निकला तोह सिमरन की दादी को कॉल मिला दी. वहीँ से पता चला सिमरन ऊनि से लौट आई है. राज कोठी जा पोहंचा... सबसे मिल के राज चची का हाथ थाम कर अपने साथ चलने लगा.

चची-- क्या है, मुझे क्यों ऐसे सबके बीच में से खेंच लाये हो.

राज कामिनी स्माइल से अपने होंटो पर जीब फेरने लगा-- आप बहुत मीठी हाँ चची.. मुझे आपको चखना है.

चची-- हाहाहा मैं मीठी हों. इतनी मीठी कह मीठा भी ज़हर बन जाए.. भूल कर भी मुझे चखना की कोशिश मत करना.. वर्ण

राज-- वर्ण क्या... राज उसी स्माइल से बोलै

चची हस्ती हुई--- वर्ण किसी और टास्ते के लिए तैरते रहोगे.. नयी नयी शादी हुई है न तुम्हारी तोह ज़यादा मीठा तुम्हारे टास्ते वाली सेंस को डिस्टर्ब कर देगा.

चची पूरी 420 थी.. राज है पड़ा

राज-- कसम से चची आप बड़ी मज़े की चीज है. आपके साथ बात करके, छेड़ छड़ करके बड़ा अच्छा लगता है.

चची भी राज को ऊँगली दिखते हुए-- मुझसे बच के रहना बच्चू. जितनी मज़े की हों न मई.. उतनी hi तीखी मीचि भी हों मई.

राज-- ाचा धयान रखूँगा चची.. में जा रहा हूँ सिमरन के कमरे में. आप प्ल्ज़ दो कप कॉफ़ी के ले आएँगी वहां कमरे में.

चची-- ये तोह हमारी ड्यूटी भी है, दामाद जी की सेवा तोह करनी hi पड़ती है. मर्ज़ी से करो, चाहे बिना मर्ज़ी के. चची स्माइल से बोली तोह राज चची के गाल पर उल्टा हाथ फेर के खिसक लिया.

चची राज को पीछे से देखती हुई-- राज हों तेरी इन हरकतों में बच्चू.. कभी मेरे दाम में भी आओगे तुम.. तब देख लुंगी तुझे में

चची वापिस मुद गई. राज सिमरन के कमरे में घुस गया. सिमरन बीएड पर उलटी लेती लैपटॉप में बिजी थी. दूर खुलने पर मुद कर देखा तोह राज था. जैसे hi राज पर नज़र पड़ी तोह स्माइल देने लगी. राज को एक बार फिरसे चीट कर दिए था सिमरन ने तोह खुश थी राज को देख कर.

सिमरन-- आइये आइये पतिदेव जी.. आइये पधारिये.. सिमरन उठ बैठी और राज को बीएड पर

बैठने का कहने लगी. राज बहुत कुछ सोच के आया था. बीएड पर बैठते hi सिमरन को पकड़ कर अपनी बहन में भर लिया. और किश करने लगा. सिमरन पिछली बार कुछ डिस्टर्ब हो गई थी. इसलिए इस बार किश से जान छुड़ाने लगी. राज से अलग होने लगी.

राज -- क्या हुआ, किश नहीं करने डौगी क्या

सिमरन-- तुम बड़े कमीने हो राज. रूल्स ब्रेक कर रहे हो. तुम जानते भी हो, फिर भी मुझे किश करने लगते हो. एक तोह किश से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. दूसरा तुम बहुत आगे निकल जाते हो..

राज हरामी स्माइल से-- तो क्या हुआ. इतना तोह चलना hi चाहिए... बी थे वे कॉंग्रट्स.. तुमने एक बार फिरसे मुझे चीट क्र दिए. बेचारा महेश तोह दर क मारे फ़ौरन hi बदल गया. तुमसे पन्गा लेके कैसे वो इस शहर में रह सकता है.

सिमरन भी विनिंग स्माइल पास करने लगी.. पहले hi कह दिए था मेने राज तुमस. जब भी मौका मिलेगा, तुम्हे चीट करती रहूंगी. अभी तोह खेल शरू हुआ है. अभी तो बहुत से मरहले बाकि हाँ.

राज लम्बी सांस लेता हुआ. हाँ मरहले तोह बहुत से बाकि हाँ मेरी जान. अभी तुम्हारी छूट में भी बारह लानी बाकि है.

सिमरन बिदक गई. राज से दूर होने लगी. राज ने पकड़ कर खेंचा और अपनी बहन में भर लिया.

सिमरन-- देखो राज तुम सही नहीं कर रहे हो. मैं कहे देती हों. ऐसे मुझे तुम कभी जीत नहीं सकोगे. ऐसे तुम मुझे हमेशा के लिए हार डोज. मेरे अंदर प्यार वली फीलिंग्स जगाओ राज. न कह सेक्स वाली फीलिंग्स..

राज-- हाहाहा दिल तक पोहचने के लिए वही रास्ता सही लगता है मेरी जान. वहां की बंजर ज़मीन को पहले हरा भरा करूँगा. फिर उसके अंदर उतरूंगा. फिर उसी रस्ते से तुम्हारे दिल में भी प्रवेश कर जाऊँगा.. हर किसी का अपना अपना रास्ता होता है. एंड थैंक्स तुमने मुझे रास्ता पहले दिन hi दिखा दिया था. माँ कसम कितना सूंदर रास्ता है वह दिल तक पोहचने वाला. आठ सूंघ कर, चाट कर hi बड़ा आनंद आया. जब उतरूंगा तोह कितना आनंद प्राप्त होगा मुझे.

सिमरन राज को घूर कर देखने लगी. राज मई ये नहीं करने दूंगी तुम्हे समझे.;.

राज-- उसके लिए भी एक शर्त है.

सिमरन-- कैसी शर्त..

राज-- तुम्हे मेरे लुंड को चूसना होगा. मेरे लुंड का माल निकलना होगा. ये काम तोह तुम कर भी चुकी हो. ऐसे तुम्हारी छूट में बारह आने की टेंशन भी नहीं बनेगी.

सिमरन-- बड़ी हरामी हो तुम राज.. मैं ये भी नहीं करने वाली समझे.

राज ने सिमरन को पकड़ा और सिमरन की शर्ट ऊपर करने लगा

सिमरन-- राज मत करो, बाज़ आ जाओ. देखो, मैं अभी तुम्हे चीट करने के मामले में हाथ रख रही हों. तुम बाज़ नहीं ए न. तोह फिर मैं भी किसी भी हद तक जाने लगूंगी. फिर मुझे न कहना, सिमरन ये तुमने सही नहीं किया.

राज सिमरन की सुने बिना शर्ट ऊपर करके पंत भी खोलने लगा..

राज-- बोलो छूट चटवाओगी मुझसे या मेरे लुंड को चुसोगी.. 1..2..3..4..5..6

सिमरन-- ठीक है.. राज तुम बहुत बड़े हरामी हो. कोई ऐसा भी करता है. उर्वशी के साथ सब करके भी तुम्हे चैन नहीं मिल पाया.

राज-- अरे जो बात तुममे है वह उर्वशी या किसी और में कहाँ. राज पंत की ज़िप खोल कर लुंड को बहार निकल गया. सिमरन राज के लुंड को देख कर बोली--- इसे इतनी जल्दी क्यों रहती है खड़ा होने लगी. सिमरन बुरा सा मोह बना के बलि..

राज-- तेरे इस सूंदर शरीर की पूरी पूरी कीमत जनता है ये सिमरन. अगर टाइम पे खड़ा न हो सका तोह फिर तुम्हारी वैल्यू hi कहाँ रहेगी. चल अब चूस मेरे लुंड को. वर्ण

सिमरन राज को ग़ुस्से से देखती हुई झुकी और लुंड को थाम कर मसलने लगी. उसके पास राज ने कोई और चारा भी नहीं छोड़ा था.

सिमरन एक बार फिरसे भूल गई थी. दूर लॉक नहीं है. राज कोई हरामीपन भी कर सकता है.

सिमरन ने अपनी श्रित भी सही नहीं की. शर्ट ब्रा से भी ऊपर थी.. रेड कलर की ब्रा सिमरन के गोर बदन पर खूब जांच रही थी.

कुछ देर राज के लुंड को दबाने के बाद सिमरन ने मोह में भरा और चूसने लगी. सिमरन अनारी थी. तोह अनारी पैन से राज के लुंड को थोड़ा सा मोह में दाल के चूसने लगी. सिमरन मैं में बहुत कुछ सोच रही थी. इस बार वो राज को ऐसा सबक़ सीखना चाहती थी. राज कभी भूल न सके. राज को पति मान चुकी थी. पर राज को हमेशा चीट करते रहना चाहती थी. शायद उसके अंदर की लकड़ी अभी उसे से भिड़ाये रखना चाहती थी.

राज -- सिमरन तुम कितनी जल्दी एक्सपर्ट हो गई हो मेरे लुंड को चूसने में. एक सेल्फी ले लूँ. तुम्हारी अपने लुंड के साथ. अकेले में देख कर खुश हो लिया करूँगा.

राज बोलै तोह सिमरन लुंड मोह से निकल कर राज को खा जाने वाली नज़रों से बोली. तोह राज हसने लगा.

राज-- क्या लग रही हो इस रूप में कसम से.. बहुत पायरी, मैं करता है---

सिमरन-- मेरा मैं करता है तुम्हारा--

राज-- मेरा लुंड चबा चबा के खा जाऊं.. क्यों यही कहने वाली थी न.. राज फिरसे हस्ता हुआ बोलै.

सिरमन बस राज को घूरती hi रह गई.

राज-- जल्दी करो मेरे लुंड का पानी बस निकलने hi वाला है. जितनी जल्दी करोगी, उतनी जल्दी जान छूट जाएगी.. सिमरन ने भी सोचा राज की बात तोह सही है. जितनी जल्दी माल निकलेगा. उतनी जल्दी जान भी छूट जाएगी..

सिमरन फिरसे राज के लुंड को मोह में लेके चूसने लगी.

थोड़ी देर बाद दूर अचानक से खुला और इशिता कॉफ़ी की ट्रे लेके अंदर दाखिल होती हुई दिखाई दी. राज ने दूर थोड़ा सा खुला रहने दिए था. सिमरन ने लुंड मोह में लिए हुए hi मुर के देखा तोह इशिता को देख कर वह शॉकेड रह गई. उसका धयान नहीं रहा और राज के लुंड पर दांत गाढ़ गई.. आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह राज चीख पड़ा.

इशिता तोह सन देख कर hi झटके खा रही थी. वो सोच भी नहीं सकती थी. इतना बढ़िया सन देखने को मिलेगा. सोच तोह राज भी नहीं सकता था. वह तोह चची का वेट कर रहा था. सोचा था चची को सन दिखायेगा. फिर चची पर लाइन मारेगा. पर इशिता आ गई थी चची की जगा..

सिमरन फ़ौरन hi राज के लुंड को मोह से निकल कर साइड होक मोह फेर गई. राज अपने लुंड को पकड़ कर देखने लगा. जहाँ खून की बोंडे चमक रही थी.

इशिता जल्दी से ट्रे रख के सॉरी बोल के निकल पड़ी.

जैसे hi उसके जाने की चाप सिमरन ने सुनी मुद कर देखा तोह इशिता जा चुकी थी..

सिमरन पलटी और राज को बीएड पर गिरा कर उसके लुंड पर आ कर बेथ गई. सिमरन बहुत ज़यादा ग़ुस्से में थी.

सिरमन- क्या ज़रूरत थी तुम्हे ये सब करने की. कोई ऐसा चीप प्लान बनाया तुमने. पत्नी हों में तुम्हारी मुझे दुसरो की नज़रों में क्यों एक्सपोज़ कर रहे हो.

अब राज हरामी था, उसे तोह सन दिखा कर सबको अपनी राह पर लाना था. अपने मतलब के लिए सब कर रहा था. कुछ सिमरन को भी डिस्टर्ब करना था. सिमरन के खेल अनोखे थे तोह राज के भी खेल फुल ऑफ़ हरामीपन लिए हुए होते थे..

राज-- मेरे शोना को ग़ुस्सा आ गया क्या.

सिमरन-- राज तुमने ये सही नहीं किया. पहले मम्मी के सामने मुझे एक्सपोज़ किया अब इशिता के सामने.. क्यों राज क्यों

राज-- सिंपल सब यही समझे. तुम मेरे साथ बहुत खुश हो और मेरे साथ प्यार से रहने लगी हो..

सिमरन-- उसके लिए ऐसा सब नहीं करना चाहिए था..

राज-- चलो एक बात बताओ..

सिमरन-- क्याआ

राज-- तुमने कभी अपनी मम्मी को अपने पापा के साथ. अपनी चची को चाचा के साथ. दादी को दादा के साथ. बुआ को फूफा के साथ कभी नहीं देखा..

सिमरन -- बड़े कमीने हो तुम राज.. घर में रहते हुए ऐसे सन देखने को मिल hi जाया करते हाँ. कभी दूर लॉक करना भूल जाते हाँ घर के बड़े. तोह दिखाई पद जाता है.

राज-- अब भी तोह गलती से hi दूर खुला रह गया था.

सिमरन-- गलती से नहीं.. ये सब तुम्हारा प्लान था.

राज-- कसम से मेरा इशिता को लेके ऐसा कोई प्लान नहीं था. तुम्हारी कसम मेरी शोना

राज ने तोह चची को लेके प्लान बनाया था. इशिता को लेके नहीं. राज ने सिमरन की कसम खाई तोह सिमरन पता नहीं क्यों राज की इस बात का यकीं कर गई. शायद उसके दिल ने उसे बता दिए था. राज उसकी झूटी कसम नहीं खा सकता.. पर सिमरन का दिल तोह राज के लिए धड़कता hi नहीं था. ज़रूर उसकी छूट ने उसे सिग्नल दिए होगा. लास्ट टाइम वही कुछ डिस्टर्ब हुई थी.

राज-- अब बेथ hi गई हो तो मेरे लुंड कर थोड़ी सी मूवमेंट hi दिखा दो. चूस के नहीं तोह रगड़ के hi मेरे लुंड को हल्का कर दो.

सिमरन राज के सीने पर मुक्का मरर्ते हुए उठ कड़ी हुई.. उठी तोह राज के लुंड पर नज़र पड़ी.. सिमरन को नज़र आ गया, उसके दांतो के कारण राज के लुंड पर ज़ख़्म आ गए थे.

सिमरन-- मैं कभी सॉरी नहीं बोलती. पर इस आये ज़ख़्म के लिए सॉरी राज.. वह इशिता के अचानक से आ जाने से मेरा धयान उसकी और हो गया था. शॉक के कारण में दांत गाढ़ बैठी.

राज-- तोह तुमने यकीं कर लिया न. मेने इशिता को लेके कोई प्लान नहीं किया था.

सिमरन के होंटो पर स्माइल आ गई. राज खुश होगया-- अच्छा ढीला नहीं करना तोह मलहम hi लगा दो. कुछ तोह आराम मिले मुझे और मेरे लुंड को. सिमरन दूर की और बढ़ी और लॉक करके ड्रेसिंग टेबल की दराज़ से एक क्रीम निकल लाइ और राज के लुंड की मालिश करने लगी.

राज-- कितनी जांच रही हो तुम सिमरन अपने पति के लुंड की सेवा करते हुए..

सिमरन-- ये पति की सेवा नहीं है समझे. ये तो मेरे किये काण्ड के चलते सब कर रही हों में.. सिमरन अब नार्मल थी.

सिमरन-- वैसे तुम्हे महेश के घर क्यों जाना था. अगर जाना चाहते हो तो मैं उसे बोल देती हों..

राज- कुछ नहीं बस एक बार उसकी बेटी को देखा तोह सोचा.. वहां रह के अच्छे से पता लूंगा. माल है वह पूरी की पूरी तोह सोचा, छोड़ोगे तोह कुछ दिन अच्छे निकल जायेंगे.

सिमरन के होंटो पर स्माइल आ गई-- अपनी पत्नी से अपने लुंड की मालिश करवा रहे हो और किसी दूसरी लड़की को छोड़ने की बात भी कर रहे हो.. कैसे अजीब बात है.

राज-- हाय मेरी सिमरन.. तुम तोह मुझे कुछ करने नहीं डौगी.. जब तक तुम्हारा सुंदर शरीर से खेलने का समय आएगा. तब तक कहीं मेरा लुंड मैदान फ़तेह करने लायक न रहे. इसलिए उसे रेगुलर कसरत करवाता रहता हों. बाद में शर्मिंदगी से भी बचत हो जायेगी..

सिमरन-- तुम ऐसी hi कसरत में लगे रहो.. मुझे कोई परेशानी नहीं है. मेरी और से तुम्हे पूरी पूरी छूट है राज. क्यूंकि मैं तो तुम्हे मिलने वाली हों नहीं. जैसे आज कर रहे हो. जैसा लास्ट टाइम किया था. अब तोह मेरे बारे में सोचना तोह भूल hi जाओ तुम..

मालिश पूरी हुई तोह सिमरन उठ कड़ी हुई..

राज-- तुम्हारी छूट भूल सकता हों में सिमरन पर--

सिमरन पलट कर-- पर क्या?

राज हरामीपन से-- जब से तुम्हारी गांड को टास्ते किया है. छूट भूल कर अब तोह बस गांड hi सपनो में दिखाई देती है. सिमरन पहले हैरान हुई फिर ज़ोर ज़ोर से हसने लगी.

राज भी हसने लगा--

""ऐसे क्यों है रहे हो रघु बीटा"

आवाज़ सुनकर राज होश में आया तोह दरवाज़े के अंदर सुनैना मौसी कड़ी हुई थी. उसके हाथ में खाने की ट्रे थी. राज उठ बैठा.

राज--------- कुछ नहीं चची जी.. बस अपनी दीदी की कुछ बातें याद आ गई थी.

राज ने अपना अंदाज़ बदल लिया था. मौसी राज बे पास आई और चराई पर खाने की ट्रे रखती हुई बोली..

मौसी-- कमरे के साथ hi वाशरूम बना है रघु बीटा. वहां का कर हाथ मोह धु आओ.

राज उठा और फ्रेश होक कमरे में आ गया. ट्रे में रखा हुआ खाना खाने लगा.. राज ने मौसी को भी खाने का कह दिए. पर मौसी ने कह दिए वह अभी नहीं खायेगी..

मौसी चली गई तोह राज अकेला कमरे में रह गया... राज कमरे को देखता हुआ खाना खाने लगा..
 
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