Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 170 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

उसने दोनों चुचियों को मजबूती से हाथों में ले लिया। ओवर स्लिप,और बेटी को सलाह दी कि वह एक पुरुष मित्र बनाये और नियमित रूप से उससे अपने शरीर के साथ मस्ती करने दे।



“वो जब तुम्हें रगड़ेगा, मसलेगा, चूसेगा तो बहुत जल्दी तू भी मस्त और बड़े मालवाली हो जाएगी और फिर तेरे दूल्हे को तेरे साथ बहुत मजा आएगा। यह जरुरी है बेटी। यह सब पीहर से सिख के ही जाना है।”

सलोनी ने अपने कूल्हों को अपनी चूत के नीचे अपने पिता के अब बढ़ते हुए लंड पर धकेलते हुए कहा कि कल रात वह महक और पूनम के साथ सुंदरी काकी के घर पर थी और वह उनकी पूरी तरह से विकसित छाती और जांघों को देखकर आश्चर्यचकित थी।

“बाबूजी, उन दोनो की एक-एक चुची मेरे दोनो बोब्लो से बड़ी है!”

पापा ने बोबले को कपड़ों के ऊपर से सहलाना जारी रखा और कहा: बेटी,ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी माँ सुंदरी और पुष्पा हैं और महक के बगल में विनोद जैसा दोस्त है और परम आनंद ले रहा है पूनम और रेखा के साथ, हर कोई जानता है।

“बाबूजी मुझे भी पूनम जैसी बड़ी-बड़ी चुची चाहिए…” सलोनी ने पापा का हाथ नीचे धकेल दिया और चुची को कस कर भींच लिया…कैसे बड़ा होगा?”

अब पापा के लिए यह असहनीय था। उन्होंने 500 से ज्यादा रंडियों को चोदा है लेकिन यह दुबली-पतली लड़की उन सबमें सबसे अच्छी है। और ऊपर से अपनी ही लंड की पेदाश! यानी की खुद की बेटी। उसने पैंटी के ऊपर से चुत को दबाना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से रेशमी जांघें सहलाने लगा।

“बोला ना,तू भी लड़के के साथ रह,तू भी जल्दी माल बन जाएगी…लडको को अपने बोबले से खेल ने दे।” उसने पैंटी दबा दी। “वरना मैं तो हूँ ही।“ उन्हों बड़े धरे स्वर में अपनी इच्छा जताई।

बेटी ने जाँघें खोल दीं, पैंटी खिंच गई और पिता को जघन बाल दिखाई देने लगे।

“सिर्फ लड़के के साथ रहने से बोबला और चूत बढ़ जाएगी…क्या?” सलोनी ने पूछा। वह चाहती थी कि पापा बिना देर किए उसे नंगा कर दें।

“लेकिन पापा, मै तो हमेशा आपके और मुन्ना के साथ रहती हूं, फिर तो मेरे भी बोबला बड़ा हो जाना चाहिए था अब तक!”

पापा ने पैंटी के किनारों को सहलाया और प्यूबिक हेर को खींच लिया।

“नहीं बेटी, खाली साथ रहने से नहीं होगा।” पिता ने जांघों को सहलाया और चुटकी काटी।
फनलव की रचना



“वो तुम्हें चूमेगा, तुम्हारे बदन को सहलाएगा, तुम्हारे साथ सेक्स की बातें करेगा तो जल्दी ही तुम भी पूरी जवान हो जाओगी…। बड़े बड़े बोब्लो वाली....फिर कोई भी तुम्हे चूसने के लिए बेताब रहेगा।”

“लेकिन मेरा तो कोई यार नहीं है…।” उसने पैरों को और अलग कर दिया और अब योनी पैड साइड से दिखाई देने लगे।

“एक परम को पसंद करती हूं लेकिन वो साला भी बस पूनम और रेखा की जवानी का मजा लेता है,मेरी ओर देखता भी नहीं…।”

उसने पापा का हाथ पैंटी पर दबाते हुए पूछा:”आप मुझे प्यार करते हैं ना।।?”



“हा बेटी, अपनी जान से ज़्यादा, उसमे पूछने की क्या बात है!” और इस बार चूत दबाते हुए उसने बेटी के होठों को चूम लिया…।

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बने रहिये ........................
 
“ओह्ह बेटी,बहुत टेस्टी हैं तेरे होंठ....एक दम ताज़ा मधु जैसा…रसीले, मुझे लगता है की तेरा रस बहोत ही मीठा होगा। जो भी लड़का तुम्हे चुसेगा उसकी तो लोटरी लग गई समजो।”



“बाबूजी, आप ही आज से मेरे यार बन जाइये, और मेरे बोबले, चूत और गांड को बड़ा कर दीजिये।” बेटी ने कहा।

यह बाप को अब तक मिला सबसे अच्छा चुदाई का प्रस्ताव था। उसका लंड बेटी के कूल्हों के नीचे पूरी तरह से कसा हुआ था। उसका लंड अब सलौनी की गांड के छेद से बाते करने के लिए उत्सुक होता जा रहा था और अन्दर ही अन्दर फुफाड़े लगा रहा था और ऐसा लग रहा था के सलौनी की गांड पर अपने होने की दस्तक देता रहता था।

“ठीक है बेटी, आज से मैं तेरा यार हूं…ओके! खुश!” उसने फिर से होठों को चूमा और बेटी से कहा: “लेकिन बेटी, वादा करो कि किसी और को पता नहीं चलेगा। क्यों जब मैं यार बनुगा तो मेरा हक बन जाता है की मैं तेरी जवानी से खेलु और यह सब बाहर वालो को पता नहीं चलना चाहिए। जैसे पुनम, महक या फिर रेखा हर कोई अपने घर में चुदवाती हो पर बाहर तो शरीफ ही बन के रहना पड़ता है।“

"मैं वादा करती हूँ…।" उसने पापा को कसकर गले लगा लिया। "आप मुझे जवान बनाइए,घर के बाहर किसी को मालूम नहीं पड़ेगा। और वैसे भी पापा का प्यार तो मुझे मिलता रहना चाहिए ना तभी तो मैं भी उन लोगो की तरह अक अच्छे माल की मालकन बन पाउंगी, पापा आप मेरी गांड और बोबले को जितना हो सके बड़ा कर दीजिये।"

"ठीक है, चलो, बताता हूँ कि लड़की को जवान कैसे बनाते हैं। मैं तुम्हारे सभी छेद को मस्त बड़े कर दूंगा मेरे इस साधन से बेटी। लेकिन बस घर की बात घर में रहे।"

“हा...हाँ...मैं माँ को नहीं बतौंगी पापा की आप मेरे सभी छेदों को बड़े करने में तुम्हे हुए हो।“

“अरे..नहीं बेटी तेरी माँ घर की ही तो है उसे मालुम पड़े तो कोई बात नहीं मैं संभाल लूँगा उसे। वैसे भी तेरी माँ को आज नहीं तो कल पता तो चलेगा ही की बाप अपनी खुद की बेटी को चोद रहा है। और क्या पता यह जानते हुए ही वह अपने बेटे को साथ लेकर तुम्हे यहाँ छोड़ गई।“

पापा को नहीं पता था कि उनकी मासूम सी दिखने वाली बेटी सुबह ही दो मर्दों से चुद चुकी है और कई मर्दों से चुद चुकी है।

पापा ने बेटी को उठाया और अपनी गोद में लिटा लिया। एक हाथ से उसकी पीठ को सहारा दिया और उसके हाथ से पापा ने बेटी की बोबले सहलाए। सुबह परम द्वारा चोदे जाने से पहले किसी ने उसकी चूचियाँ नहीं दबाई थीं। सलोनी ने आँखें बंद कर लीं। उसे कल रात का वो दृश्य याद आ गया जब महक के पापा को अपनी नग्नता दिखा रही थी और उनसे चुदने की मिन्नतें कर रही थी। उसने सोचा कि जैसे महक अपने पापा के लंबे और मोटे लौड़े को सहला रही थी, वैसे ही वो भी पापा का लंड सहलाएगी और चूसेगी भी। जब पिता स्लिप के कपड़े के ऊपर से निप्पल दबाते तो उसे बहुत मजा आता था।

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FunLver का जय भारत।।



 
चलिए दोस्तों अब आगे बढ़ते है .................
 
“कपड़े उतार दो तो और मजा आएगा...” पापा ने धीरे से, लेकिन गहरी कामुक आवाज में कहा।



सलोनी ने शरमाते हुए सिर झुका लिया और बोली, “पापा क्या जरूरी है मेरे कपड़े उतारने की? फिर मैं पूरी तरह नंगी हो जाऊंगी... मुझे बहुत शर्म आएगी।”
फनलव की पेशकश

पिताजी ने बेटी की कमर को कसकर पकड़ते हुए कहा, “बेटी, माल बनने के लिए कपड़ों की कोई जरूरत नहीं होती। कपड़े तो बस दिखावा होता है। वैसे भी जब तुम छोटी थी तब मैं तुम्हें नंगी ही देखता था, नंगी ही खेलता था, नहलाता था। उसमें कोई बड़ी बात नहीं है। और बाप के सामने क्या शर्म? बाप के सामने नंगी होना एक अच्छी बात है बेटी के लिए। तुम नाहक चिंता कर रही हो।

कोई दूसरा लड़का तेरी चूत और बोब्लो से खेलेगा तो भी तुम्हें शर्म आएगी, और मैं तो तेरा बाप हूँ। तुम्हें मेरे सामने नंगी होने में कोई शर्म नहीं आनी चाहिए। जब तुम छोटी थी, तब मैंने तेरी छोटी-छोटी चूत को कई बार देखा है, छुआ भी है। अब मुझसे क्या छुपाना? चलो आराम से कपड़े उतार दो। यहाँ कपड़ों की कोई जरूरत नहीं है।

जब भी हम बाप-बेटी का असली प्यार करेंगे, तब कपड़ों की कोई जरूरत नहीं होगी। समझी बेटी?”

सलोनी ने थोड़ी देर शर्म से सिर झुकाए रखा, फिर धीरे से बोली, “लेकिन फिर भी... आज तक मेरी चूत मम्मी के अलावा किसी ने नहीं देखी पापा। इसीलिए मुझे डर लगता है।”

“देखो बेटी, अपने माल को पापा से क्या छुपाना!”

पिताजी ने बेटी की जाँघों को जोर से दबाते हुए कहा, “तेरी चूत को देखकर मैं कोई खा तो नहीं जाऊँगा। बस उसे थोड़ा प्रेम करूँगा, ताकि तेरा माल बड़ा और सुंदर हो जाए। माल को बड़ा करने के लिए कपड़े तो उतारना ही पड़ेगा, तभी तो तेरे दोनों छेद सही तरीके से देख पाऊँगा और तय कर पाऊँगा कि कौन से छेद को कितनी मालिश करनी है।

बोब्लो को भी बड़ा करने के लिए कौन से कोण से दबाना चाहिए, कितना जोर लगाना चाहिए, यह सब मुझसे बेहतर कौन जान सकता है बेटी?”

सलोनी ने कुछ पल सोचा, फिर शर्मीली आवाज में बोली, “तो फिर ठीक है पापा... अगर कपड़े उतारना जरूरी है तो आप ही उतार दो जितना जरूरी हो। लेकिन मेरे माल को बड़ा करने में मदद कीजिए पापा। मुझे अपनी सहेलियों से भी अच्छे बोब्बे चाहिए। मैं जब चलूँ तो ऊपर से नीचे तक हिलने चाहिए। सब लड़कों की आँखें मेरे बोब्बों और मेरी गांड को घूरनी चाहिए... जैसे अभी पूनम और महक की घूरती हैं।”
फनलव की रचना

बेटी की इस हामी के साथ पिताजी का लंड और भी सख्त हो गया।

उन्होंने झटके से सलोनी की स्लिप ऊपर की और एक झटके में उतार दी। अब सलोनी सिर्फ एक पतली फैंसी पैंटी पहने पिता की गोद में लेटी हुई थी। उसके भारी, गोल स्तन पूरी तरह खुले हुए थे।

पिताजी ने तुरंत एक हाथ से बेटी की एक चुची को सहलाया, दूसरे हाथ से दूसरी चुची को मसलने लगे। फिर उन्होंने झुककर चूची को चूमा और निप्पल को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगे।



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बने रहिये...................
 
“ओह्ह्ह्ह... बाबूजी... बहुत मजा आ रहा है...” सलोनी कराह उठी। उसका पूरा शरीर सिहर गया।



“अभी और मजा आएगा बेटी...” पापा ने निप्पल को दाँतों से हल्का काटते हुए कहा।

फिर उन्होंने सलोनी के होंठों को चूमना शुरू कर दिया। गहरी, लंबी किस करते हुए एक हाथ सीधे बेटी की पैंटी के अंदर ले गए। उनकी उँगलियाँ सलोनी की चूत पर पड़ीं। चूत पूरी तरह भीगी हुई थी। गर्म, चिपचिपा रस उनकी हथेली पर लग गया।

“ओह्ह बेटी... तुम बहुत पनिया गई हो।” पिताजी ने चूत को पूरी हथेली से दबाते हुए कहा, “पैंटी निकाल दूँ? तो मेरे द्वारा तेरी चूत को सहलाने में और भी मजा आएगा और तुम्हें भी अपनी चूत की खुजली मिटाने में ज्यादा मजा आएगा।”

सलोनी ने साँसें फुलाते हुए कहा, “अगर जरूरी है तो... निकाल दो बाबूजी। आज से ये पूरा शरीर आपका है...”
फनलव रचित

पिता ने तुरंत सलोनी की पैंटी को जाँघों तक खींचकर उतार दिया। अब सलोनी पूरी तरह नंगी अपनी पिता की गोद में लेटी थी।

पिताजी ने जीवन में पहली बार अपनी जवान बेटी की चूत को इतने करीब से देखा। छोटी-सी, गुलाबी, लेकिन अब थोड़ी सूजी हुई चूत। ऊपर हल्के-हल्के बाल।

उन्होंने झुककर चूत पर गहरा चुम्बन लिया और बोले, “सलोनी... इतनी प्यारी चूत तो तेरी माँ की भी नहीं थी, न किसी और की।”

फिर उन्होंने बेटी के दोनों पैर अलग-अलग करके फैला दिए। चूत के होंठ खुल गए। अंदर का ताजा, गहरा गुलाबी मांस दिखने लगा।

“बेटी, तुम चुदी नहीं हो ना...” पिताजी ने चूत के होंठों को उँगलियों से अलग करते हुए पूछा।

“क्या मतलब...?” सलोनी ने मासूमियत दिखाते हुए पूछा।

पिताजी ने एक उँगली धीरे से चूत के छेद में डाली और अंदर घुमाते हुए पूछा, “किसी ने लौड़ा तो इस छेद में नहीं डाला?”

“क्या बाबूजी आप भी!” सलोनी ने सुबह की चुदाई याद करते हुए कहा, “आज तक किसी लड़के ने मेरे हाथ तक नहीं छुआ है। वह कैसे कपड़े उतारेगा और चूत में लौड़ा डालेगा?”

“ठीक है बेटा, मैं इसलिए पूछ रहा था क्योंकि तेरी चूत के होंठ कुछ सूजे हुए लग रहे थे। लेकिन अब पता चला कि शायद ऐसे ही हैं, नेचुरल।”

“अरे नहीं पापा...” सलोनी ने तुरंत कहा, “मेरे माल के होंठ ऐसे नहीं हैं। कल रात हम नाच रहे थे तब किसी का हाथ इतना जोर से मेरी चूत पर पड़ गया कि वो थोड़ी सूज गई है। माँ ने तभी बताया कि कोई बात नहीं, कल तक ठीक हो जाएगी। कोई दवाई की जरूरत नहीं। माँ ने कहा कि मेरी चूत अभी बहुत नाजुक है और अभी तक मारी नहीं गई है, इसलिए ऐसा हुआ। बहुत नाजुक चूत है तेरी... ऐसा माँ ने कहा था। फिर मैंने भी कोई ध्यान नहीं दिया पापा।”
फनलव की रचना

पिताजी ने बेटी की चूत को फिर से उँगलियों से सहलाते हुए कहा, “बेटी... चूची और बदन को सहलाने से चूचियों को बड़ा होने में 3-4 महीने लगेंगे...”

उन्होंने फिर से सलोनी की एक चुची को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगे, जबकि दूसरी उँगली बेटी की चूत के अंदर धीरे-धीरे अंदर-बाहर होने लगी।



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अभी यह बाप-बेटी का प्रणय प्रसंग चालु है..............

क्रमश:


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“लेकिन जब मैं अपना लंड इस चूत के अंदर डालूंगा तो सिर्फ 10-15 दिन में ही तुम जवान हो जाओगी... महक जैसी मोटी चूचियों वाली, भरी-भरी गांड वाली और रसीली चूत वाली।” पिताजी ने बेटी की चूत को उँगलियों से खोलते हुए कहा।

सलोनी की चूत अब जल रही थी। उसने अधीर होकर कहा, “फिर पूछ क्या रहे हैं बाबूजी! लौड़ा पेलिए, उंगली पेलिए या चाटिए... जो करना है जल्दी कीजिए। मेरी चूत बहुत गरम हो रही है... बहुत खुजली हो रही है। मुझे अब कुछ हो रहा है। समज में नहीं आ रहा है की कुछ हो रहा है या रहा नहीं जा रहा!”

पिताजी ने बेटी को अपनी गोद से उठाया और उसे मास्टर बेडरूम के बड़े बिस्तर पर लिटा दिया - उसी बिस्तर पर जहाँ वे अपनी पत्नी प्रभा को सालों से जोर-जोर से चोदते आए थे।


“लौड़ा देखेगी? चूत में लेगी?” पिताजी ने पूछा।



"बेटी, तुमने कभी लंड को देखा है?" पिताजी ने उसकी कमर को सहलाते हुए पूछा।

सलौनी को बड़ा झटका लगा। अब इस का क्या जवाब दूँ! ऐसा तो कह नहीं सकती की देखा क्या मेरी चूत दो लंडो को चबा चुकी है। पर बिना देरी किये उसके मगज के तरंगो ने जवाब दे दिया।

"आपने कभी ऐसा मौक़ा ही नहीं दिया पापा।"

"फिर भी कभी कुछ तो देखा होगा?" पिताजी ने उत्सुकता से पूछा। " आजकल की लोंडिया कही ना कही लंड को देख तो लेती ही है।"

"हाँ वैसे पिताजी आपका लंड देखा है लेकिन पूरा नहीं, जब आप नहाके आते थे और कभी कभी मम्मी से मस्ती करते थे तब कुछ हद तक आपका ही तो लंड देखा है लेकिन ज्यादा और करीबी से नहीं। नाही मैंने लम्बाई देखि है ना मोटाई बस आगे का सुपारा देखा है। जो की मुझे आकर्षित करता था।" सलौनी ने मादकता बढाई।



"कोई बात नहीं बेटी अब लंड को देखोगी?" पिताजी सलौनी के जवाब से खुश होते हुए बोले। बेटी ने सिर्फ मेरा सुपारा ही देखा है मतलब लंड को वे बड़े आराम से दिखा सकते है।

“हाँ...जो दिखाओगे देखूंगी भी और चूत में लुंगी भी। आप जल्दी कीजिये।” सलोनी ने साँसें फुलाते हुए कहा।

पिताजी खड़े हो गए और अपने सारे कपड़े उतार दिए। उनका मोटा, 7 इंच से ज्यादा लंबा और अच्छी मोटाई वाला लंड पूरी तरह खड़ा होकर तना हुआ था। सुपारा चमक रहा था। लेकिन मुनीमजी से कही कम था।
फनलव रचित कहानी

सलोनी ने पिता का लंड देखा तो उसकी आँखें फैल गईं। उसे उम्मीद थी कि पापा का लंड परम और मुनीमजी (जिसने कल रात महक को चोदा था) जितना बड़ा और मोटा नहीं होगा, लेकिन यह काफी मोटा और लंबा था। लेकिन जैसे की उसे उम्मीद थी पिताजी का लंड मुनीमजी जैसा तो बिलकुल भी नहीं था। लेकिन कुछ हद तक चले ऐसा था। मानो की अगर कोई लड़की पहली बार चुदवाती है तो उसे यह लंड अच्छा, बड़ा और मोटा लगेगा लेकिन जो लड़की मुनीमजी के निचे से गुजरी है उसे यह लंड उतना बड़ा नहीं लगेगा। अब यह तो स्वाभाविक था।

उसने आगे बढ़कर पिता के लंड को दोनों हाथों में पकड़ लिया और सहलाने लगी। “बाप रे... इतना मोटा और लंबा... ये मेरी चूत में कैसे जाएगा?” उसने ऐसा सोचा की ऐसे बोलने से पिताजी ज्यादा उत्साहित होंगे और वह उसकी सूजी हुई चूत के बारे में ज्यादा सवाल नहीं करेंगे।

उसने कुछ बार मुठ मारते हुए बोली, “माँ कैसे इसे रोज लेती है...?”
फनलव रचित कहानी

पिताजी ने मुस्कुराते हुए बेटी के क्लिटोरिस पर चुटकी काटते हुए कहा, “इससे भी मोटा और लंबा लंड तेरी चूत में जाएगा बेटी।”

फिर उन्होंने सलोनी की चूत को उँगलियों से फैलाते हुए कहा, “लगता है तू बिल्कुल कुंवारी है... किसी ने इसे अब तक नहीं चोदा है, है ना?”

सलोनी ने सीधे पिता की आँखों में देखकर ऐलान किया, “चोदा है बाबूजी...”
रचयिता फनलव है

ये सुनकर पिताजी का चेहरा उतर गया। वे दुखी हो गए। भारी मन से उन्होंने पूछा, “किसने चोदा? और कब?”

“अरे बाबूजी... कल रात पूनम और महक रात भर मेरी चूत में उंगलियाँ घुसा-घुसाकर मुझे चोदती रहीं...” सलोनी ने कहा।


पिताजी का चेहरा तुरंत चमक उठा। “मेरी जान, वो चुदाई नहीं होती बेटी...” वह खुश थी की वह अपने पापा को चुतिया बनाने में सफल हुई थी

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बने रहिये दोस्तों............
 
उन्होंने राहत की साँस ली, “बहुत सी लड़कियाँ आपस में एक-दूसरे की चूत में उंगलियाँ पेलकर मजा लेती हैं। कभी-कभी माँ-बेटी या दो बहनें भी घर में ऐसा कर लेती हैं। उसे चुदाई नहीं कहते। वो सिर्फ एक प्रकार का जातीय आनंद होता है। असली चुदाई तो किसी मोटे लंड को चूत में घुसने से कहते हैं। जब लंड की मार चूत पर पड़ती है बेटी तब उसे असली चुदाई कहते है।” पिताजी खुश हो गए की एक कच्चा माल आज पक्का बनाने का मौक़ा मिला है।

सलोनी ने अपनी टाँगें ऊपर उठाकर चूत को पूरी तरह उजागर करते हुए मासूमियत से पूछा, “फिर कैसे होता है असली चुदाई...? देखो उन दोनों ने मेरी चूत की क्या हालत बना रखी है, कोई देखे तो उसे तो यही लगे की यह तो चूत नहीं है पर भोस बनी हुई है। उन्हें ऐसा नहीं खेलना था।” फनलव रचित कहानी

“मैं दिखाता हूँ बेटी... चुदाई कैसी होती है। और येसा ख्हेल तू अपनी माँ से खले सकती है, बेटी, लंड से ही एक चूत भोंस बन सकती है।” पिताजी ने कहा।

सलौनी ने पिताजी के सामने देखा और एक संतुष्टि हुई की पापा को पक्का यकीं हो गया है की उनकी बेटी कभी लंड से नही चुदी। उसका यह कॉन्फिडेंस से कहना काफी काम कर गया था। एक बला टल गई थी।

वे बेटी की टाँगों के बीच आ गए। अपना मोटा लंड हाथ में पकड़कर उसकी गीली चूत पर रख दिया और दबाव डालने लगे।

सलोनी अपने पिता को बेवकूफ बनाना चाहती थी। उसे पहली बार की चुदाई का दर्दनाक अनुभव याद आ गया। उसने अपनी कमर हिलाई और जोर-जोर से चिल्लाई, “बाबूजी... बाप रे... बहुत दर्द कर रहा है... मर गई... लौड़ा निकालो... बाप रे...!”

उसने अपनी जाँघें और जघन क्षेत्र को कसकर बंद कर लिया।
मैत्री द्वारा एडिटेड

“साली कुतिया! भोसडिकी, चिल्ला मत... कोई सुन लेगा तो तेरी और मेरी माँ चुद जायेगी! भोस बन ना है तो सहन कर ना भी सिख।” पिताजी ने गुस्से और उत्तेजना के साथ कहा।

“बा...प...रे... मर गई...!” सलोनी अभी भी चीख रही थी। मन ही मन हस रही थी की चलो वह कामयाब हो रही है।

लेकिन पिताजी ने बेटी के कंधों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और बिना रुके खूब जमकर चुदाई शुरू कर दी। वे बहुत खुश थे कि वे अपनी बेटी की “कुंवारी” चूत को चोद रहे हैं - बीबी के बाद अब बेटी की चूत।

वे नहीं जानते थे कि मुनीम और परम के मुसल जैसे मोटे लौड़े ने पहले ही इस चूत को दो बार फाड़ चुका है। और चूत पर सुजन उन दो लोंड़ो की वजह से बनी हुई है।

पर उसे अब,सलोनी को असली दर्द हो रहा था क्योंकि कल रात माँ प्रभा के साथ लेस्बियन करते समय प्रभा के दाँतों से उसकी चूत के अंदरूनी हिस्से में कट लग गई थी। अब जब पापा का मोटा लंड उसी जगह पर जोर-जोर से घुस रहा था तो दर्द और बढ़ गया।

जैसे-जैसे बेटी को ज्यादा दर्द हो रहा था, पिताजी को और मजा आने लगा। उन्होंने दो जोरदार धक्के मारे और उनका पूरा लौड़ा सलोनी की चूत की सबसे गहरी तह तक पहुँच गया।

“आआह्ह्ह... बाबूजी... फट गई मेरी चूत...!” सलोनी चीखी।

पिताजी ने बेटी की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और तेज-तेज धक्के मारने लगे। हर धक्के के साथ सलोनी के भारी स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे। कमरे में चप-चप... थप-थप... की आवाजें गूँजने लगीं।
फनलव का निर्माण

पिताजी की आँखों में अब पिता का प्यार नहीं, बल्कि बेटी की जवानी को रौंदने की भूख थी। एक भूखा जानवर अब शिकार को खा रहा था। वासना ने सब भुला दिया था और अब सिर्फ वह दो शरीर ही थे जो मिल के एक हो रहे थे।

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आज के लिए बस यही तक दोस्तों।

फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ।

तब तक के लिए
FunLove का जय भारत।।
 
दस मिनट तक पिताजी ने अपनी बेटी सलोनी को ज़ोर-ज़ोर से और बेहद तेज़ गति से चोदा। हर धक्का इतना जोरदार था कि सलोनी का पूरा शरीर हिल रहा था। उसके भारी स्तन ऊपर-नीचे जोर-जोर से उछल रहे थे। कमरे में चूत की चप-चप की आवाज़ और दोनों की साँसों की हाँफती हुई आवाज़ गूँज रही थी। फनलव रचित

शुरुआत में दर्द के कारण चीख रही सलोनी अब चुदाई का पूरा मजा ले रही थी। उसकी चूत अब पिता के मोटे लंड के आकार में ढल चुकी थी। हर धक्के के साथ उसे गहरा सुख मिल रहा था।

उसे इस बात का गहरा संतोष था कि उसने अपने पिता के साथ चुदाई का फैसला सही लिया था। अब जब भी उसकी चूत में आग लगे, घर पर ही एक मोटा और तैयार लंड उपलब्ध था। उसे अब किसी बाहर के मर्द की जरूरत नहीं थी। जब चाहे वह अपनी चूत को विर्यपान करवा सकती थी, और वह भी बिना रोक-टोक। आज घर में उसकी चुदाई के श्री गणेश हो चुके थे।

दस मिनट की इस जोरदार चुदाई के बाद पिताजी बेटी के बदन पर पूरी तरह टिक गए। उनका लंड सलोनी की चूत के सबसे गहरे हिस्से में धँसा हुआ था। लेकिन सलोनी अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई थी। वह और चुदाई चाहती थी।

उसने पिता की पीठ पर हाथ फेरते हुए प्यार भरी, लेकिन कामुक आवाज में पूछा, “बाबूजी... थक गए क्या? मुझे तो बहुत मजा आ रहा है...”

पिताजीने हाँफते हुए मुस्कुराकर कहा, “तेरी माँ की भोसड़ी... नहीं रानी, अभी तो बहुत चोदना है तुझे। अब मेरे लिये तेरी यह चूत का दरवाजा खुल चूका है। बेटी बहोत चोदुंगा तुम्हे।”

यह कहते हुए उन्होंने फिर से अपनी बेटी को धीमी गति से चोदना शुरू कर दिया। अब धक्के गहरे और लंबे थे। सलोनी की आँखें बंद हो गईं। उसे और भी ज्यादा मजा आने लगा।
संपादिका मैत्री.

सुबह परम ने उसे दो बार 15-15-20 मिनट तक चोदा था, लेकिन पापा की चुदाई में कुछ और ही बात थी। पापाजी को झड़ने में काफी समय लग रहा था। लेकिन उफ्फ्फ बहनचोद वह मुनीमजी की चुदाई सब से बेस्ट थी। पिताजी ने गति धीमी की, फिर अचानक तेज कर दी। सलोनी की चूत से लगातार रस निकल रहा था।

आखिरकार पूरे 26 मिनट की लगातार चुदाई के बाद पिताजी जोर से गरजे और अपने गरम-गरम वीर्य की मोटी धार सलोनी की चूत की गहराई में छोड़ दी। हालाकि परम की धार और उसे भी अच्छी मुनीमजी के लंड की धार बढ़िया थी। उन दोनों बाप-बेटे के लंड की धार काफी घाटी थी। जब की पापा ने अन्दर छोड़ा तो असर तो हुई पर उतनी नहीं।

सलोनी भी उसी समय चीखकर दो बार झड़ गई। उसका चुतरस पिता के लंड के साथ मिलकर बिस्तर पर बहने लगा।

दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से कसकर लिपटे रहे। जब उनकी साँसें थोड़ी सामान्य हुईं, तब पिताजी ने बेटी को चूमते हुए अपनी बात शुरू की। उन्होंने सलोनी को बताया कि अपनी नौकरी के सिलसिले में वे अलग-अलग शहरों में वेश्याओं और कॉल गर्ल्स के साथ कैसे संबंध बनाते रहे।

सलोनी को सबसे ज्यादा खुशी तब हुई जब पिता ने कहा, “लेकिन अब तक तेरी माँ के अलावा तू ही एकमात्र कुंवारी लड़की है जिसे मैंने चोदा है।”

ये सुनकर सलोनी के मन में गुदगुदी हुई। उसे खुशी थी कि पिता अभी भी उसे कुंवारी समझ रहे हैं। उसने पिता को जोर से चूमा।

थोड़ी देर बाद सलोनी ने पिता को धक्का देकर खुद को अलग किया और नंगी ही कमरे से बाहर चली गई।

वह रसोई में गई और रात के खाने की तैयारी करने लगी। दाल-चावल के बर्तन चूल्हे पर रखने के बाद वह सब्जियों की ट्रे, प्याज और चाकू लेकर वापस पिता के पास आई।

अब सलोनी पूरी तरह नंगी थी। वह पिता के पास ऐसे बैठ गई कि उसकी टाँगें चौड़ी थीं और उसकी अभी-अभी चुदाई हुई, वीर्य से भरी चूत पूरी तरह खुली हुई पिता के सामने थी। चूत में से अभी भी उन दोनों की चुदाई का मिश्रण टपक रहा था।

पिताजी बेटी को सब्जियाँ काटते हुए देख रहे थे, लेकिन उनकी नजरें बार-बार सलोनी की खुली चूत पर जा रही थीं। उन्होंने एक हाथ बढ़ाकर बेटी की चूत को धीरे-धीरे सहलाना शुरू कर दिया। उँगलियाँ चूत के होंठों पर घूम रही थीं और बीच-बीच में अंदर भी जा रही थीं।

अचानक पिताजी को गहरा अपराधबोध हुआ।
फनलव की प्रस्तुति

वे एक पिता थे और उन्होंने अपनी इकलौती जवान बेटी का कौमार्य भंग कर दिया था। उनका चेहरा उदास हो गया। उन्होंने हाथ सलोनी की चूत से हटा लिया और बोले, “सलोनी... बेटी, मुझे माफ कर दो। मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया। मैंने बहुत बड़ा पाप कर दिया। एक बाप होकर मैंने अपनी बेटी को चोदा... यह बहुत गलत है।”

उनकी आवाज़ में पछतावा साफ झलक रहा था।

“किसी को भी यह कभी पता नहीं चलना चाहिए कि हमने चुदाई की है। यह हमारे बीच का राज रहेगा।” पिताजी ने पूरी तरह हाथ हटा लिया और सलोनी की तरफ देखा, इंतजार करते हुए कि बेटी क्या कहेगी।

सलोनी अभी भी नंगी, टाँगें फैलाए बैठी थी। उसकी चूत से पिता का वीर्य धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था...


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FunLove.


जय भारत।
 
जुड़े रहिये दोस्तों बाकी बाद में लिख देती हूँ
 
चलिए दोस्तों आगे बढ़ते है ..................
 
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