“अरे बेटी, कहाँ जा रही हो?” पिताजी ने सलोनी का हाथ कसकर पकड़ लिया। उसकी उँगलियाँ बेटी की नरम कलाई पर दब गईं। “चाय तो पी ले पहले।”
सलोनी ने पिता की कमर पर हाथ फेरते हुए, बहुत ही मीठी और शर्मीली आवाज में कहा, “बाबूजी... बहुत गर्मी लग रही है ना... बस दो मिनट में नहाकर आती हूँ।” फनलवर द्वारा रचित।
बाबूजी कुछ कह पाते, उससे पहले ही सलोनी बाथरूम की तरफ भाग गई। अंदर जाकर उसने अपने सारे कपड़े एक झटके में उतार दिए। कुर्ता, पायजामा, ब्रा, पैंटी — सब फर्श पर गिर गए। उसने बालों को गीला किए बिना सिर्फ एक बाल्टी ठंडा पानी अपने पूरे बदन पर उड़ेल दिया। ठंडे पानी से उसके निप्पल्स तुरंत खड़े हो गए।
उसने सिर्फ एक छोटा सा तौलिया अपनी कमर पर लपेटा, जिससे उसकी भारी चूचियाँ पूरी तरह खुले हुए थे और निचला हिस्सा भी आधा-आधा दिख रहा था। तौलिया इतना छोटा था कि उसके गोल नितंब नीचे से झाँक रहे थे।
वह अपने पिता के पास से गुज़रती हुई अपने कमरे में चली गई। उसके पिता की नज़र अपनी बेटी के नंगे स्तनों और थिरकते कूल्हों पर टिक गई। इस दृश्य को देखते ही, उनकी आँखें सलोनी के गुदा-द्वार को खोजने में मग्न हो गईं।
दो मिनट बाद सलोनी बाहर आई। अब वो सिर्फ एक बहुत छोटी, पारदर्शी स्लिप पहने हुए थी। स्लिप उसकी जाँघों के बीच तक ही थी। उसके नीचे कोई ब्रा नहीं थी, सिर्फ एक फैंसी, बहुत छोटी और कसी हुई पैंटी थी जो उसके चूत के उभार को साफ उभारा हुए थी। स्लिप के पतले कपड़े से उसके दोनों भारी, गोल स्तन और खड़े निप्पल्स पूरी तरह दिख रहे थे।
सलोनी पिता के पास आकर बहुत करीब बैठ गई। उसकी जाँघ पिता की जाँघ से सटी हुई थी। उसने चाय का कप उठाया और मुस्कुराते हुए बोली, “अब अच्छा लग रहा है बाबूजी...” फनलवर की प्रस्तुति।
पिताजी बेटी को इस अर्धनग्न हालत में देखकर दंग रह गए। उनकी आँखें सलोनी की छाती पर टिकी हुई थीं। स्लिप इतनी छोटी थी कि उसके दोनों स्तन नीचे से लगभग बाहर झाँक रहे थे। पैंटी का कपड़ा इतना पतला और कसा हुआ था कि सलोनी की चूत की फाँक और ऊपर के बालों की रेखा साफ दिख रही थी।
पिताजी को अचानक याद आ गया — उन्होंने अपनी पत्नी प्रभा के कहने पर खुद 22 इंच कमर वाली छोटी साइज की ये फैंसी पैंटी खरीदी थी। साथ ही 34 इंच वाली प्रभा के लिए और 32 इंच वाली सलोनी के लिए दो-दो जोड़ी ब्रा भी ली थीं।
अनजाने में ही पिताजी ने पूछ लिया, “बेटी... मैंने इस पैंटी के साथ दो जोड़ी ब्रा भी खरीदी थीं...”
उन्होंने अपना हाथ सलोनी की नंगी, गोरी और मोटी जाँघों पर रख दिया। उँगलियाँ हल्के से सहलाने लगीं।
“तुम नहीं पहनती...?”
“धत्त बाबूजी... क्या ऐसा पूछते हैं!” सलोनी ने शरमाते हुए लेकिन आँखों में शैतानी भरकर कहा।
फिर उसने अपना एक हाथ पिता के हाथ पर रख दिया, जो अब उसकी जाँघ पर था। सलोनी ने पिता को गौर से देखा और बोली, “बाबूजी, मैं अब ब्रा नहीं पहनती। मैं ब्रा से बाहर आ गई हूँ... जैसे इस गाँव में सब लड़कियाँ करती हैं। सिर्फ स्कूल और कॉलेज में ही सब पहनती हैं। माँ ने भी मुझे बताया था।”
पिताजी ने सलोनी का हाथ उठाया और अपनी हथेली से बेटी की एक चुची को हल्के से सहलाते हुए कहा, “हाँ... अभी तो ये छोटे हैं... इनकी ब्रा से बाँधने की जरूरत नहीं है। वैसे भी सब समय पर होना चाहिए बेटी...”
सलोनी ने अपनी टाँगें थोड़ी फैला दीं। अब उसकी पैंटी और भी ज्यादा खुलकर दिख रही थी। वह चाय की चुस्कियाँ लेती रही, लेकिन उसकी साँसें तेज हो रही थीं।
कुछ देर तक दोनों चुपचाप चाय और नाश्ता करते रहे। लेकिन दोनों के दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी — ‘अपने पार्टनर को कैसे रिझाएँ?’
सलोनी के पिता पिताजी एक बेहद खूबसूरत और ताकतवर आदमी थे। सरकारी विभाग में नौकरी करने के कारण वे अक्सर अलग-अलग शहरों में जाते रहते थे। शुरुआत में उन्होंने संयम रखा, लेकिन बाद में दोस्तों की जिद और सरकारी गेस्ट हाउस में अकेलेपन की वजह से उन्होंने वेश्याओं और कॉल गर्ल्स के साथ संबंध बनाने शुरू कर दिए। निर्मात्री फनलवर।
हर महीने वे कम से कम एक नई चूत चोदते थे, लेकिन उन्हें कभी सच्ची संतुष्टि नहीं मिलती थी। अब तक उन्हें अपनी पत्नी प्रभा से ज्यादा टाइट, गीली और रसीली चूत कोई नहीं मिली थी। कई जवान लड़कियों को उन्होंने चोदा, लेकिन सबकी चूत ढीली पड़ चुकी थीं।
जैसा कि परम ने सुबह प्रभा की चुदाई करते हुए महसूस किया था, पिताजी को भी प्रभा जैसी मोटी, मजबूत और सुडौल जाँघों वाली कोई औरत या लड़की नहीं मिली थी। और आज अपनी बेटी सलोनी की वो ही मजबूत, गोरी और मोटी जाँघें उनके सामने फैली हुई थीं — बिल्कुल उनकी पत्नी जैसी, लेकिन और भी जवां, और भी टाइट।
पिताजी की नजरें बार-बार सलोनी की जाँघों, उसके खुली पैंटी से झाँकती चूत के उभार और भारी स्तनों पर जा रही थीं। उनका लंड पैंट के अंदर धीरे-धीरे तनने लगा था।
सलोनी भी ये सब नोटिस कर रही थी। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी।
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