Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 169 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

“और तू भी अब पूरी जवान हो गई है बेटी...एक दम भरी हुई है बेटी।” पिताजी ने सलोनी की गोद में बैठी बेटी की जाँघों को और जोर से सहलाते हुए कहा:



“तेरी शादी कर देंगे तो तुझे भी जवानी का पूरा मजा मिलेगा। हाँ, यह बात है कि घर से ही सब सिख के जाना चाहिए — कि यौन आनंद कैसे लिया जाता है, कैसे चुदाई का लुत्फ उठाया जाता है। लेकिन वह तेरी माँ बता देगी बेटी। मुझे पक्का यकीन है कि शायद तेरी माँ ने कुछ तो बताया ही होगा। और यह अपने गाँव का रिवाज भी है। जो तुजे जल्द से जल्द सीखना चाहिए। तभी तो तेरा शरीर आकर्षक बनेगा। और अपने पति और ससुराल वालो को आकर्षित रख पाएगी।”
फनलव रचित कहानी



सलोनी पिता की गोद में और भी कसकर बैठ गई। उसकी छोटी स्लिप अब लगभग कमर तक चढ़ चुकी थी। उसकी फैंसी पैंटी पूरी तरह भीग चुकी थी और चूत का गीला उभार साफ दिख रहा था।

“हाँ बाबूजी... हम खूब बातें करते हैं। माँ भी बहुत कुछ कहती है।” सलोनी ने शरमाते हुए लेकिन आँखों में आग भरकर कहा, “जब मेरे ये भर रहे थे ना... तब माँ ने कहा था कि अब पैंटी और ब्रा से बाहर निकलो और घर में इनको खुलकर झूलने दो।”

पिताजी की आँखें सलोनी की भारी बोब्लो पर टिक गईं। स्लिप के पतले कपड़े से उसके स्तन की दिंटी (निप्पल्स) साफ उभरे हुए थे।

“अच्छा! तो तेरी माँ ने सही कहा है बेटी।” पिताजी ने बेटी की ऊपरी जाँघ को दबाते हुए कहा, “बुराई कुछ नहीं है। जहाँ हम रहते हैं, वहाँ के तौर-तरीके से ही जीना पड़ता है। यहाँ की सब लड़कियों के स्तन भरने लगते हैं तो उनकी माँएँ उन्हें ब्रा से बाहर निकलने को कहती हैं, ताकि वे आकर्षक बनी रहें। स्तन खुलकर झूलें, लड़कों की नजरें उन पर टिकें... यही तो चलन है।”

“हाँ बाबूजी, आप सही कह रहे हो।” सलोनी ने पिता की छाती से सटकर बोला, “इसीलिए मैंने ब्रा पहनना बंद कर दिया है। और आप हैं कि दो जोड़े खरीदकर लाए थे।”

पिताजी हँसे और बेटी की एक चुची के ठीक नीचे हाथ फेरते हुए बोले, “हाँ बेटी, तेरी माँ ने मुझे कहा था कि सलोनी अब ब्रा से बाहर निकालने का समय आ गया है। पर मैं चूतिया भूल गया और दो जोड़े ले आया। तेरी माँ ने कहा था कि कॉलेज में तो जरूरी है, वरना कोई भी लड़का इन झूलती हुई टेकरियों को पहाड़ बना सकता है। और निचे जब चरक्ति है तो पेंटी की जरुरत होती है वर्ना नहीं।”

सलोनी ने पिता की गोद में अपनी टाँगें और चौड़ी कर लीं। अब उसकी भीगी पैंटी पिताजी के कठोर लंड के बिल्कुल पास थी।

“ तो आप भी सही मानते है की मैंने ब्रा और पेंटी को तिलांजलि दे दी। लेकिन पापा... हमारी कॉलेज में सभी लड़कियों की टेकरियाँ अब पहाड़ बन रही हैं, क्या गलत है इसमें? और मेरे देखो... कितने छोटे हैं अभी मेरे...” उसने अपनी छाती को पापा के चहरे की ओर ले जाते हुए कहा।
फनलव निर्मित

सलोनी ने जानबूझकर अपनी छाती को आगे कर दिया, ताकि पिता उसके स्तनों को अच्छी तरह देख सकें।

“नहीं बेटी, कोई गलत नहीं है।” पिताजी ने बेटी की जाँघों को दोनों हाथों से दबाते हुए कहा, “लड़के लोग इसे दबाएँगे नहीं तब तक ये पहाड़ कैसे बनेंगे? लेकिन सब दबाव से करना होता है। कुछ लड़कियाँ तो घर में ही पहाड़ बनवा लेती हैं... अपनी माँ के सामने, या पिता के हाथों...भाई भी मदद कर देते है...दादाजी भी....मतलब घर के कोई भी आदमी से दबवा के अपने बोब्लो को सही आकार में ली आती है।”

“हाँ पापा, सही कह रहे हैं आप।” सलोनी ने पिता की गर्दन में हाथ डालते हुए कहा, “सभी लड़कियाँ घर और बाहर दबवा ही लेती हैं। माँ ने कहा था कि यह दबवाना जरूरी भी है। घर से हो तो बेहतर,बाहर इज्जत नहीं जाती। वरना सभी लोग दबा जाते हैं और फिर पीछे कहते हैं कि रंडी है।”

अब पिताजी की हालत खराब थी, उनका लंड पूरी तरह तन चुका था। पैंट के अंदर उनका मोटा, नसों वाला लंड खड़ा होकर फड़क रहा था। अगर सामने कोई वेश्या होती तो अब तक वे उसे सोफे पर लिटाकर जोर-जोर से चोद रहे होते। लेकिन यहाँ उनकी अपनी जवान बेटी सलोनी थी — अर्धनग्न, भीगी चूत और झूलते स्तनों के साथ उनकी गोद में बैठी हुई।

पिताजी की साँसें भारी हो गईं। उन्होंने बेटी को और कसकर अपनी गोद में दबाया, ताकि सलोनी को उनका खड़ा लंड साफ महसूस हो जाए।

“अब घर की बात है तो...” पिताजी ने गहरी आवाज में कहा, “मेरा पूरा हक है कि मैं अपनी बेटी को चुदाई सिखाऊँ...”

सलोनी का दिल जोरों से धड़कने लगा। उसकी चूत से और भी गर्म रस टपकने लगा। पैंटी का कपड़ा अब पूरी तरह भीगकर उसके चूत के होंठों से चिपक गया था। अब पेंटी भी उसकी चूत के रस को और पि नहीं सकती थी उतनी गीली हो गई थी की मानो अभी पेंटी को धो के राखी हो। वह पिता की गोद में हल्के से अपनी चूत को उनके कड़े लंड पर रगड़ने लगी।

पिताजी ने एक हाथ सलोनी की कमर पर रखा और दूसरे हाथ से उसकी एक भारी चुची को हल्के से दबाया। उनकी उँगलियाँ निप्पल के चारों ओर घूमने लगीं।

“बाबूजी...” सलोनी ने फुसफुसाते हुए कहा, लेकिन उसकी आवाज में शर्म की जगह सिर्फ़ भूख थी।
मैत्री द्वारा एडिटेड

“क्या हुआ बेटी?” उन्हों ने सलौनी की निपल पर थोडा सा भार देते हुए पूछा।

“बाबूजी, आप मेरी उस को दबा रहे थे न तो मेरे मुंह से बस ऐसे ही निकल गया।“ सलौनी ने अपने पिता के हाथ पर थोडा और जोर देते हुए कहा ताकि पिता का दबाव अपने बोब्लो पर ज्यादा पड़े और उन्हें कोई राह दिखे।

पिताजी की आँखों में अब पिता का प्यार नहीं, बल्कि बेटी की जवानी को चोदने की तीव्र इच्छा थी। उन्होंने सलोनी की जाँघों को और फैलाया और अपनी हथेली को धीरे-धीरे उसकी भीगी पैंटी की तरफ बढ़ाने लगे... अब मर्यादा टूटने पर है.................

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बने रहिये...............................


 
सलोनी की पूरी कहानी आगे---



बाप ने सोचा.....अगर आज यह लड़की है, अपनी बेटी को नहीं चोद पाया तो फिर कभी नहीं मौका मिलेगा....सलोनी को पूरा गरम कर चोदूंगा....माल तगडा है.....बहुत मजा देगी। कोई एक लड़की की शील तोड़ने का सही मौक़ा है फिर वह मेरी बेटी ही क्यों ना हो। और वैसे भी मैं कोई गुनाह तो नहीं कर रहा यह तो गाँव में चलता है। किसी को कोई खबर नहीं होती पर होता सभी घर में तो है ही। मेरी भी बहन की शील मेरे बाप ने ही तो ली थी। अब मेरी बारी है....कोई ओर चोदेगा उस से पहले मेरा लंड ही क्यों ना मजा ले.....गांड भी तो मटक रही है लचीली सी है और बोब्लो को मैं खुद ही विकसा दूंगा।
फनलवर की पेशकश

स्लिप के साइड और टॉप से छोटी छोटी चुची के साइड और टॉप दिख रहे थे लेकिन अब पापा नंगी चुची के साथ खेलना चाहते थे।

“धत्त,मैं थोड़े ही मस्त माल हूं…असल माल तो पूनम और महक है,स्टूडेंट से लेकर स्टूडेंट टीचर भी उनको लाइन मारते हैं।“

पापा ने उंगली को फिसलते हुए धकेला और जल्द ही उनकी उंगली बेटी की चुची पर थी। कल रात से ही पाँच लोग, मुनीम, महक, पूनम, परम और सलोनी की माँ सलोनी के नंगे शरीर के साथ आनंद ले चुके थे।

अब पापा का हाथ चुची पर छठा था लेकिन अभी भी ऊपर कपड़े थे।

“बाबूजी,शर्म आ रही है…और वैसे भी मेरे बोबले बहुत छोटे है, आपको मजा नहीं आएगा…।”

“बेटी, जब तुम्हारे ख़ास जगह पर थोड़ा और मांस बढ़ जाएगा तो पूनम के जैसा सब लोग तुम्हे भी लाइन मारेंगे, बस थोड़े दिनों की बात है। अब अगर सब सही जा रहा है तो हो जाएगा बेटी। मुझ पर भरोसा रखो बेटी मैं खुद ही तेरे बोब्लो को पहाड़ बना दूंगा। चिंता करने की बात ही नहीं है और वैसे भी अभी तो तेरी उम्र सही हुई है।“

सलोनी को पापा का हाथ स्लिप के ऊपर से अपनी चूची पर आसानी से घूमने में मजा आता था, लेकिन वह चाहती थी कि पापा स्लिप को हटा दें और नंगी चूची के साथ खेलें। जो भी करे वे खुद ही करे।

“कौन सी खास जगह बाबूजी…?” सलोनी ने पूछा।

उन्होंने स्लिप के ऊपर से दोनों निप्पल दबाते हुए कहा: "तेरे बोबले और गांड बेटी।"

"हाँ बाबूजी,मेरी सब सहेलियों की चूची बहुत बड़ी है,सुधा की भी।" सलोनी ने चूची को सहलाया और पूछा।

"फिर मेरे बोब्लो इतना छोटा क्यों है....ये कब बड़ा होगा?"
फनलवर की रचना है



सलोनी के पिता स्लिप और पैंटी के अंदर हाथ डालना चाहते थे, लेकिन उन्हें डर था कि बेटी नाराज़ हो जाएगी। वह उसे ज्यादा उत्तेजित और कामुक बनाना चाहते थे ताकि वह खुद ही कपड़े उतार दे।

उन्होंने फिर से अपनी हथेली उसकी कमर और पैंटी के ऊपर खुले हिस्से पर फिराई। सलोनी को दुख हुआ कि पिता ने उसकी चूची पर हाथ नहीं डाला। बेटी की मुलायम और रेशमी त्वचा को उसकी चूत के ठीक ऊपर सहलाते हुए, पिता ने कहा: “तेरी सहेलियों का कोई न कोई लड़का दोस्त ज़रूर होगा और वे अक्सर उनकी चूत सहलाते होंगे। या फिर वे लड़के उसके बोब्लो को दबा दबा के बड़े करने में मदद करते होंगे। और हो सकता है की उसके कुलहो पर अच्छे से थप्पड़ और लंड से मालिश भी होती होगी। क्या पता बेटी...तू सब तो जानती नहीं....घर में ही अपने पिता या भाई से गांड पर मालिश और लंड के माल लेती हो....“

“और वैसे भी तू अपनी माँ पर गई है…उसकी लड़की अभी भी बहुत बड़ी नहीं हुई लेकिन बहुत मजा आता है उसे दबाने और चूसने में…।”

उन्होंने आगे कहा…”तेरे बोबले भी बहुत बड़ी नहीं होगे, लेकिन तू भी अपने दोस्तों से थोड़ी मस्ती करती रहेगी, और तेरे लड़के दोस्त उसे थोडा दबाएंगे, ये तेरी चुंची (निपल) को थोडा थोडा खिचेंगे, मेरा मतलब किसी भी मर्दाना हाथ से तेरे बोबले का मर्दन होता तो ये दोनों बहुत टाइट रहेंगे। और यह जरुरी भी है बेटी, जब बच्चा होता है तो बोब्लो में दूध ज्यादा भरे रहते है। शादी के बाद अपने पति या ससुर की मेहरबानी की जरुरत नहीं रहती क्यों की घर से ही सब सिख के और कर के गई होती है।” और सलोनी के पिता अपना हाथ स्लिप और पैंटी के अंदर डालना चाहते थे लेकिन उन्हें डर था कि बेटी नाराज हो जाएगी। वह उसे गर्म और कामुक बनाना चाहते थे ताकि वह खुद ही कपड़े उतार दे।

उसने अपनी हथेली फिर से उसकी कमर और पैंटी के ऊपर खुले हिस्से पर फिराई। सलोनी को दुःख हुआ कि पापा ने उसकी चूची पर कपड़ों के अन्दर हाथ नहीं डाला। बेटी की चूत के ठीक ऊपर की मुलायम और रेशमी त्वचा को सहलाते हुए। पापा ने कहा कि “उसकी सहेलियों को कोई न कोई बॉयफ्रेंड होंगे और उन्हें माल मिलता होगा, अपने एज के हिसाब से वह सभी अपने माल के साथ प्यार करते होंगे। और हो सकता है बेटी, की घर में ही उन्हें माँ, बहन, और खास कर भाई, पिता के द्वारा अपने बोब्लो की मालिश करवाती होंगी, तबहू उनके बोबले अपनी उम्र से ज्यादा विकसित हो जाते है।“

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बस अब आगे नहीं लिख पायी.....................

आज के लिए बस यही तक दोस्तों। फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ तब तक के लिए
FunLover की ओर से जय भारत।।



 
शुक्रिया दोस्त

चलिए दोस्तों अब आगे की कहानी मैं लिखूंगी आपके सब के मनोरंजन के लिए
 
उसने दोनों चुचियों को मजबूती से हाथों में ले लिया। ओवर स्लिप,और बेटी को सलाह दी कि वह एक पुरुष मित्र बनाये और नियमित रूप से उससे अपने शरीर के साथ मस्ती करने दे।

“वो जब तुम्हें रगड़ेगा, मसलेगा, चूसेगा तो बहुत जल्दी तू भी मस्त और बड़े मालवाली हो जाएगी और फिर तेरे दूल्हे को तेरे साथ बहुत मजा आएगा। यह जरुरी है बेटी। यह सब पीहर से सिख के ही जाना है।”

सलोनी ने अपने कूल्हों को अपनी चूत के नीचे अपने पिता के अब बढ़ते हुए लंड पर धकेलते हुए कहा कि कल रात वह महक और पूनम के साथ सुंदरी काकी के घर पर थी और वह उनकी पूरी तरह से विकसित छाती और जांघों को देखकर आश्चर्यचकित थी।

“बाबूजी, उन दोनो की एक-एक चुची मेरे दोनो बोब्लो से बड़ी है!”

पापा ने बोबले को कपड़ों के ऊपर से सहलाना जारी रखा और कहा: बेटी,ऐसा इसलिए है क्योंकि उनकी माँ सुंदरी और पुष्पा हैं और महक के बगल में विनोद जैसा दोस्त है और परम आनंद ले रहा है पूनम और रेखा के साथ, हर कोई जानता है।

“बाबूजी मुझे भी पूनम जैसी बड़ी-बड़ी चुची चाहिए…” सलोनी ने पापा का हाथ नीचे धकेल दिया और चुची को कस कर भींच लिया…कैसे बड़ा होगा?”

अब पापा के लिए यह असहनीय था। उन्होंने 500 से ज्यादा रंडियों को चोदा है लेकिन यह दुबली-पतली लड़की उन सबमें सबसे अच्छी है। और ऊपर से अपनी ही लंड की पेदाश! यानी की खुद की बेटी। उसने पैंटी के ऊपर से चुत को दबाना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से रेशमी जांघें सहलाने लगा।

“बोला ना,तू भी लड़के के साथ रह,तू भी जल्दी माल बन जाएगी…लडको को अपने बोबले से खेल ने दे।” उसने पैंटी दबा दी। “वरना मैं तो हूँ ही।“ उन्हों बड़े धरे स्वर में अपनी इच्छा जताई।

बेटी ने जाँघें खोल दीं, पैंटी खिंच गई और पिता को जघन बाल दिखाई देने लगे।

“सिर्फ लड़के के साथ रहने से बोबला और चूत बढ़ जाएगी…क्या?” सलोनी ने पूछा। वह चाहती थी कि पापा बिना देर किए उसे नंगा कर दें।

“लेकिन पापा, मै तो हमेशा आपके और मुन्ना के साथ रहती हूं, फिर तो मेरे भी बोबला बड़ा हो जाना चाहिए था अब तक!”

पापा ने पैंटी के किनारों को सहलाया और प्यूबिक हेर को खींच लिया।

“नहीं बेटी, खाली साथ रहने से नहीं होगा।” पिता ने जांघों को सहलाया और चुटकी काटी। फनलव की रचना

“वो तुम्हें चूमेगा, तुम्हारे बदन को सहलाएगा, तुम्हारे साथ सेक्स की बातें करेगा तो जल्दी ही तुम भी पूरी जवान हो जाओगी…। बड़े बड़े बोब्लो वाली....फिर कोई भी तुम्हे चूसने के लिए बेताब रहेगा।”

“लेकिन मेरा तो कोई यार नहीं है…।” उसने पैरों को और अलग कर दिया और अब योनी पैड साइड से दिखाई देने लगे।

“एक परम को पसंद करती हूं लेकिन वो साला भी बस पूनम और रेखा की जवानी का मजा लेता है,मेरी ओर देखता भी नहीं…।”

उसने पापा का हाथ पैंटी पर दबाते हुए पूछा:”आप मुझे प्यार करते हैं ना।।?”

“हा बेटी, अपनी जान से ज़्यादा, उसमे पूछने की क्या बात है!” और इस बार चूत दबाते हुए उसने बेटी के होठों को चूम लिया…।



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बने रहिये ........................
 
“ओह्ह बेटी,बहुत टेस्टी हैं तेरे होंठ....एक दम ताज़ा मधु जैसा…रसीले, मुझे लगता है की तेरा रस बहोत ही मीठा होगा। जो भी लड़का तुम्हे चुसेगा उसकी तो लोटरी लग गई समजो।”

“बाबूजी, आप ही आज से मेरे यार बन जाइये, और मेरे बोबले, चूत और गांड को बड़ा कर दीजिये।” बेटी ने कहा।

यह बाप को अब तक मिला सबसे अच्छा चुदाई का प्रस्ताव था। उसका लंड बेटी के कूल्हों के नीचे पूरी तरह से कसा हुआ था। उसका लंड अब सलौनी की गांड के छेद से बाते करने के लिए उत्सुक होता जा रहा था और अन्दर ही अन्दर फुफाड़े लगा रहा था और ऐसा लग रहा था के सलौनी की गांड पर अपने होने की दस्तक देता रहता था।

“ठीक है बेटी, आज से मैं तेरा यार हूं…ओके! खुश!” उसने फिर से होठों को चूमा और बेटी से कहा: “लेकिन बेटी, वादा करो कि किसी और को पता नहीं चलेगा। क्यों जब मैं यार बनुगा तो मेरा हक बन जाता है की मैं तेरी जवानी से खेलु और यह सब बाहर वालो को पता नहीं चलना चाहिए। जैसे पुनम, महक या फिर रेखा हर कोई अपने घर में चुदवाती हो पर बाहर तो शरीफ ही बन के रहना पड़ता है।“

"मैं वादा करती हूँ…।" उसने पापा को कसकर गले लगा लिया। "आप मुझे जवान बनाइए,घर के बाहर किसी को मालूम नहीं पड़ेगा। और वैसे भी पापा का प्यार तो मुझे मिलता रहना चाहिए ना तभी तो मैं भी उन लोगो की तरह अक अच्छे माल की मालकन बन पाउंगी, पापा आप मेरी गांड और बोबले को जितना हो सके बड़ा कर दीजिये।"

"ठीक है, चलो, बताता हूँ कि लड़की को जवान कैसे बनाते हैं। मैं तुम्हारे सभी छेद को मस्त बड़े कर दूंगा मेरे इस साधन से बेटी। लेकिन बस घर की बात घर में रहे।"

“हा...हाँ...मैं माँ को नहीं बतौंगी पापा की आप मेरे सभी छेदों को बड़े करने में तुम्हे हुए हो।“

“अरे..नहीं बेटी तेरी माँ घर की ही तो है उसे मालुम पड़े तो कोई बात नहीं मैं संभाल लूँगा उसे। वैसे भी तेरी माँ को आज नहीं तो कल पता तो चलेगा ही की बाप अपनी खुद की बेटी को चोद रहा है। और क्या पता यह जानते हुए ही वह अपने बेटे को साथ लेकर तुम्हे यहाँ छोड़ गई।“

पापा को नहीं पता था कि उनकी मासूम सी दिखने वाली बेटी सुबह ही दो मर्दों से चुद चुकी है और कई मर्दों से चुद चुकी है।

पापा ने बेटी को उठाया और अपनी गोद में लिटा लिया। एक हाथ से उसकी पीठ को सहारा दिया और उसके हाथ से पापा ने बेटी की बोबले सहलाए। सुबह परम द्वारा चोदे जाने से पहले किसी ने उसकी चूचियाँ नहीं दबाई थीं। सलोनी ने आँखें बंद कर लीं। उसे कल रात का वो दृश्य याद आ गया जब महक के पापा को अपनी नग्नता दिखा रही थी और उनसे चुदने की मिन्नतें कर रही थी। उसने सोचा कि जैसे महक अपने पापा के लंबे और मोटे लौड़े को सहला रही थी, वैसे ही वो भी पापा का लंड सहलाएगी और चूसेगी भी। जब पिता स्लिप के कपड़े के ऊपर से निप्पल दबाते तो उसे बहुत मजा आता था।


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FunLove का
जय भारत।।


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“कपड़े उतार दो तो और मजा आएगा...” पापा ने धीरे से, लेकिन गहरी कामुक आवाज में कहा।

सलोनी ने शरमाते हुए सिर झुका लिया और बोली, “पापा क्या जरूरी है मेरे कपड़े उतारने की? फिर मैं पूरी तरह नंगी हो जाऊंगी... मुझे बहुत शर्म आएगी।”
फनलव की पेशकश।

पिताजी ने बेटी की कमर को कसकर पकड़ते हुए कहा, “बेटी, माल बनने के लिए कपड़ों की कोई जरूरत नहीं होती। कपड़े तो बस दिखावा होता है। वैसे भी जब तुम छोटी थी तब मैं तुम्हें नंगी ही देखता था, नंगी ही खेलता था, नहलाता था। उसमें कोई बड़ी बात नहीं है। और बाप के सामने क्या शर्म? बाप के सामने नंगी होना एक अच्छी बात है बेटी के लिए। तुम नाहक चिंता कर रही हो।

कोई दूसरा लड़का तेरी चूत और बोब्लो से खेलेगा तो भी तुम्हें शर्म आएगी, और मैं तो तेरा बाप हूँ। तुम्हें मेरे सामने नंगी होने में कोई शर्म नहीं आनी चाहिए। जब तुम छोटी थी, तब मैंने तेरी छोटी-छोटी चूत को कई बार देखा है, छुआ भी है। अब मुझसे क्या छुपाना? चलो आराम से कपड़े उतार दो। यहाँ कपड़ों की कोई जरूरत नहीं है।

जब भी हम बाप-बेटी का असली प्यार करेंगे, तब कपड़ों की कोई जरूरत नहीं होगी। समझी बेटी?”

सलोनी ने थोड़ी देर शर्म से सिर झुकाए रखा, फिर धीरे से बोली, “लेकिन फिर भी... आज तक मेरी चूत मम्मी के अलावा किसी ने नहीं देखी पापा। इसीलिए मुझे डर लगता है।”

“देखो बेटी, अपने माल को पापा से क्या छुपाना!”

पिताजी ने बेटी की जाँघों को जोर से दबाते हुए कहा, “तेरी चूत को देखकर मैं कोई खा तो नहीं जाऊँगा। बस उसे थोड़ा प्रेम करूँगा, ताकि तेरा माल बड़ा और सुंदर हो जाए। माल को बड़ा करने के लिए कपड़े तो उतारना ही पड़ेगा, तभी तो तेरे दोनों छेद सही तरीके से देख पाऊँगा और तय कर पाऊँगा कि कौन से छेद को कितनी मालिश करनी है।

बोब्लो को भी बड़ा करने के लिए कौन से कोण से दबाना चाहिए, कितना जोर लगाना चाहिए, यह सब मुझसे बेहतर कौन जान सकता है बेटी?”

सलोनी ने कुछ पल सोचा, फिर शर्मीली आवाज में बोली, “तो फिर ठीक है पापा... अगर कपड़े उतारना जरूरी है तो आप ही उतार दो जितना जरूरी हो। लेकिन मेरे माल को बड़ा करने में मदद कीजिए पापा। मुझे अपनी सहेलियों से भी अच्छे बोब्बे चाहिए। मैं जब चलूँ तो ऊपर से नीचे तक हिलने चाहिए। सब लड़कों की आँखें मेरे बोब्बों और मेरी गांड को घूरनी चाहिए... जैसे अभी पूनम और महक की घूरती हैं।”
फनलव की रचना।

बेटी की इस हामी के साथ पिताजी का लंड और भी सख्त हो गया।

उन्होंने झटके से सलोनी की स्लिप ऊपर की और एक झटके में उतार दी। अब सलोनी सिर्फ एक पतली फैंसी पैंटी पहने पिता की गोद में लेटी हुई थी। उसके भारी, गोल स्तन पूरी तरह खुले हुए थे।

पिताजी ने तुरंत एक हाथ से बेटी की एक चुची को सहलाया, दूसरे हाथ से दूसरी चुची को मसलने लगे। फिर उन्होंने झुककर चूची को चूमा और निप्पल को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगे।


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बने रहिये...................
 
“ओह्ह्ह्ह... बाबूजी... बहुत मजा आ रहा है...” सलोनी कराह उठी। उसका पूरा शरीर सिहर गया।

“अभी और मजा आएगा बेटी...” पापा ने निप्पल को दाँतों से हल्का काटते हुए कहा।

फिर उन्होंने सलोनी के होंठों को चूमना शुरू कर दिया। गहरी, लंबी किस करते हुए एक हाथ सीधे बेटी की पैंटी के अंदर ले गए। उनकी उँगलियाँ सलोनी की चूत पर पड़ीं। चूत पूरी तरह भीगी हुई थी। गर्म, चिपचिपा रस उनकी हथेली पर लग गया।

“ओह्ह बेटी... तुम बहुत पनिया गई हो।” पिताजी ने चूत को पूरी हथेली से दबाते हुए कहा, “पैंटी निकाल दूँ? तो मेरे द्वारा तेरी चूत को सहलाने में और भी मजा आएगा और तुम्हें भी अपनी चूत की खुजली मिटाने में ज्यादा मजा आएगा।”

सलोनी ने साँसें फुलाते हुए कहा, “अगर जरूरी है तो... निकाल दो बाबूजी। आज से ये पूरा शरीर आपका है...”
फनलव रचित

पिता ने तुरंत सलोनी की पैंटी को जाँघों तक खींचकर उतार दिया। अब सलोनी पूरी तरह नंगी अपनी पिता की गोद में लेटी थी।

पिताजी ने जीवन में पहली बार अपनी जवान बेटी की चूत को इतने करीब से देखा। छोटी-सी, गुलाबी, लेकिन अब थोड़ी सूजी हुई चूत। ऊपर हल्के-हल्के बाल।

उन्होंने झुककर चूत पर गहरा चुम्बन लिया और बोले, “सलोनी... इतनी प्यारी चूत तो तेरी माँ की भी नहीं थी, न किसी और की।”

फिर उन्होंने बेटी के दोनों पैर अलग-अलग करके फैला दिए। चूत के होंठ खुल गए। अंदर का ताजा, गहरा गुलाबी मांस दिखने लगा।

“बेटी, तुम चुदी नहीं हो ना...” पिताजी ने चूत के होंठों को उँगलियों से अलग करते हुए पूछा।

“क्या मतलब...?” सलोनी ने मासूमियत दिखाते हुए पूछा।

पिताजी ने एक उँगली धीरे से चूत के छेद में डाली और अंदर घुमाते हुए पूछा, “किसी ने लौड़ा तो इस छेद में नहीं डाला?”

“क्या बाबूजी आप भी!” सलोनी ने सुबह की चुदाई याद करते हुए कहा, “आज तक किसी लड़के ने मेरे हाथ तक नहीं छुआ है। वह कैसे कपड़े उतारेगा और चूत में लौड़ा डालेगा?”

“ठीक है बेटा, मैं इसलिए पूछ रहा था क्योंकि तेरी चूत के होंठ कुछ सूजे हुए लग रहे थे। लेकिन अब पता चला कि शायद ऐसे ही हैं, नेचुरल।”

“अरे नहीं पापा...” सलोनी ने तुरंत कहा, “मेरे माल के होंठ ऐसे नहीं हैं। कल रात हम नाच रहे थे तब किसी का हाथ इतना जोर से मेरी चूत पर पड़ गया कि वो थोड़ी सूज गई है। माँ ने तभी बताया कि कोई बात नहीं, कल तक ठीक हो जाएगी। कोई दवाई की जरूरत नहीं। माँ ने कहा कि मेरी चूत अभी बहुत नाजुक है और अभी तक मारी नहीं गई है, इसलिए ऐसा हुआ। बहुत नाजुक चूत है तेरी... ऐसा माँ ने कहा था। फिर मैंने भी कोई ध्यान नहीं दिया पापा।”
फनलव की रचना

पिताजी ने बेटी की चूत को फिर से उँगलियों से सहलाते हुए कहा, “बेटी... चूची और बदन को सहलाने से चूचियों को बड़ा होने में 3-4 महीने लगेंगे...”

उन्होंने फिर से सलोनी की एक चुची को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगे, जबकि दूसरी उँगली बेटी की चूत के अंदर धीरे-धीरे अंदर-बाहर होने लगी।



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अभी यह बाप-बेटी का प्रणय प्रसंग चालु है..............


क्रमश:


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आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए
FunLove की तरफ से जय भारत


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चलिए दोस्तों कहानी में आगे बढ़ते है.............

इस बार कोमेंट काफी कम रहे शायद सब की व्यस्तता के कारण.................
 
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