Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 77 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

बहोत बहोत धन्यवाद आपका

सभी सुझाव के स्वागत है..........रीडर्स के विचार को कही न कही प्लाट में शामिल कर लेंगे

आपका एक सुझाव महिलाओं को परम के द्वारा गर्भवती करना अच्छा सुझाव है आगे ध्यान में रखूंगी
 
जी बिलकुल

मैंने यहाँ इस कहानी में सभी व्यंजन रखे हुए है धीरे धीरे आते जायेंगे आपके पसंद्गिका व्यंजन का स्वाद लेते रहिये...............

बहोत कुछ है आगे.................

बहोत बहोत आभार आपका.............अगर कोई व्यंजन कम दिख रहा है तो वो भी बता दीजिये अगर हो सकेगा तो कहानी में जोड़ देंगे
 
महक ने अपनी चूत के फांके को ओर थोड़ी फैला दी और अपने बाप का लंड को उसके साथ सटा के बोली: “और एक बात कहू बाबूजी।“

अब आगे..............

“हां, बोलो बेटी!”


आप अपनी बेटी को चोद रहे है घर में ऐसा किसी को पता नहीं चलना चाहिए, इस से मेरी शादी बिगड़ सकती है। और मम्मी को भी थोड़ी ढील दिया करो ताकि मैं आपके लंड के निचे आराम से आ सकू।“ महक कहना चाहती थी की सुंदरी को अपने बदन का सौदा करने दो, और मुझे थोड़ी आज़ादी दे दो ताकि मैं भी दो पैसा कमा लू अपनी चूत से, और नए-पुराने लंड की मजा ले सकू। लेकिन डर गई थी।

इधर मुनीम भ यही सोच रहा था की महक का सौदा भी कर दे और कुछ पैसा कमाया जा सके, सुंदरी का माल तो अब बाज़ार में बिक ही रहा है। सुदरी से बात करनी पड़ेगी।

“क्या सोच रहे है पापा?”

“कुछ नहीं बेटी बस तेरी चूत मुझे मिलती रहे तो तुम विनोद से शादी करो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है।“

ओह्ह मेरे अच्छे चोदु पापा, सच कहती हु आपको चूतो की कमी कभी भी नहीं आने दूंगी, एक से एक बढ़कर माल आपके लंड को भेट करती रहूंगी, लेकिन पापा लआपके लंड पर मेरा पहला अधिकार रहेगा।“

“ठीक है बेटी, विनोद के माँ से बात करूँगा।”

तभी 'घड़ी' ने 4 बजे का 4 बार का घंटा बजाया।
फनलव की पेशकश

महकने बाप का हाथ अपनी चूत पर रखते हुए कहा, "अब से मुझे पकड़ कर सो जाओ और जब तक माँ ना उठाने आये मुझे छोड़ कर बाहर ना जाना। मैं चाहती हूं कि माँ देखे कि तुम मेरी बोबले और चूत का मजा लेकर सो रहे हो।"

“सच कहू तो मैं भी यही चाहता था की सुंदरी देखे और तुम्हे मेरे लंड के निचे अपना ले।“ मुनीम ने बेटी की गांड को थोडा फैला के छेद पर उगली फेरी।

“पापा, अब प्लीज़ यह छेद का उपयोग आपको ही करना है लेकिन अब बहोत थकी हुई हु, आपके लंड ने मुझे बहोत थका दिया है, अब सो जाते है।“

दोनो अपने अपने विचारों में खोये सो गुए। लेकिन उन दोनों को क्या पता कि सुंदरी दरवाजे के बाहर खड़ी होकर बाप-बेटी के चुदाई का मजा ले रही थी और उनकी बातें सुन रही थीं। सुंदरी को अच्चा लगा की, महक ने अपने बाप को मूर्ख बनाया हुआ विश्वास करा दिया कि बेटी को चोदनेवाला वही पहला हरामी है। और उसे यह भी अच्छा लगा की मुनीम ने कुछ भी नहीं कहा। मतलब सब को अपने-मतलब एक दुसरे को नहीं कह रहे थे और सुंदरी और मुनीम का जोड़ा सब से खेले जा रहे थे।

सुंदरी तो पेशाब करने बहार आई थी और अचानक उसको बाप-बेटी आवाज सुनायी दी। और फिर सुंदरी नंगी खड़ी हो कर 20-25 मिनट तक बाप बेटी के चुदाई का मजा लेती रही। उसने फच्च फच्च की मधुर आवाजे सुनी और मुनीम को गाली देती रही साला मादरचोद मुझे ऐसे नही चोदता था। लेकिन खुश हुई की मुनीम को नयी और जवान माल चोदने को मिला और घर की बात घर में रहेगी।

बाप-बेटी की चुदाई देखते-देखते सुंदरी की चूत पूरी गरम हो गई थी, उसकी चूत फिर से अपना रस उगल रही थी। कल की थकान ख़तम हो गई थी और उसने सोचा कि बेटे को उठाकर चुदाई का मजा लिया जाए। सुंदरी बेटे के कमरे में वापस आई और मुख्य लाइट चालू कर दी।

****

परम नंगा सोया था, करवट लेकर। पीछे से परम की गांड दिख रही थी। सुंदरी बेटे के बगल में बैठ गई और कुल्हे को सहलाने लगी। चुतर सहलाते-सहलाते सुंदरी ने गांड के मुख पर उंगली रगड़ने लगी। परम तो पूरा जवानमर्द नहीं हुआ था। सुंदरी ने अपनी नंगी जांघों से बेटे के जांघों की तुलना की। सुंदरी की जांघें बेटे की जांघों से मोटी हैं। सुंदरी को लगा कि परम और बढ़ जाएगा और 2-3 साल में पूरा जवान मर्द हो जाएगा तो उस से चुदवाने में और भी मजा आएगा। सुंदरी ने बेटे को धीरे से फ्लैट किया। परम एक कराहट के साथ फ्लैट हो गया। सुंदरी ने बेटे के सीने को सहलाया और हल्के से छोटी निपल को मसला। परम ने सोये-सोये ही अपने निपल्स से माँ का हाथ हटा दिया।

सुंदरी ने झुक कर परम को चूमा और हाथ को निचे बदन पर सहलाते हुए ढीला लंड को पकड़ लिया। सुंदरी को अच्छा लगाकी उसके बेटे का लंड काई औरतों और लड़कियों को चोद चुका है। सुंदरी को मालूम नहीं था का कल बेटे ने उसकी खास सहेली पुष्पा को जम कर चोदा और उस से पहले रजनी और उसकी नौकरानी को चोद आया था। सुंदरी ने ढीले लंड को मुंह में ले कर चुभलाने लगी। साथ ही बॉल्स को भी मसल रही थी। 3-4 मिनट में चुभलाने के बाद सुंदरी के मुँह में लंड खड़ा होने लगा, और सुंदरी का मुंह को चीरने लगा।

सुंदरी ने लंड को मुँह से बाहर निकाला तो देखा लंड में करापन आ गया था। सुंदरी थोडा आगे बढी और लंड को चूत पर रगड़ा। लंड को चूत के ऊपर नीचे रगड़ते-रगड़ते चूत गीली होने लगी और साथ ही लंड भी पूरा टाइट हो गया। सुंदरी ने फिर से लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी और एक बार जोर से सुपारा पर दांत दबाये।

परम की नींद खुल गई और उसने माँ को देखा कि वो लंड को मुँह में ले रही है और उसकी ओर देखकर मुस्कुरा भी रही है।

परमको जागे हुए देख कर लंड को बाहर निकाल कर मुठ मारने लगी..और कहा “बेटा, सुबह हो रही है जल्दी से मेरी गांड की सील तोड़ डाल।” वो परम के बगल में लेट गई और बेटे के लंड जांघों को रगड़ते हुए अपनी मस्त बोब्लो परम के शरीर से रगड़ने लगी।

“मैं तो देखूं कि तेरी प्यारी रेखा कैसी गांड मरवाती है मेरे बेटे से।”
नीता और मैत्री की प्रस्तुति

परम उठ गया और माँ को चिपक कर खूब जोर से चूमने लगा और माँ की नंगी चुतारो को सहलाने लगा। थोड़ी मस्ती के बाद परम बिस्तर से नीचे उठा और मां की टांगों को खींच बिस्तर के किनारे पर जांघों के बीच बैठा कर मां की टांगों को अलग फैला दिया। परम ने जांघों को सहलाया और माँ की चूत के होंठों पर दबा कर चूसा। सुंदरी को बहुत मजा आया, सुंदरी ने बाकी जितने लोगो से अबतक चुदवाया था कोई भी इतना प्यार से मजा दे कर चूत को नहीं चाटता था जितना की परम। परम की जीभ में अजीब सा जादू था की वह किसी भी चूत को एक से दो बार झाड देता था अपनी ही जिह्वा से।

कल बड़ी बहू भी परम की तारीफ कर रही थी कि परम जब चूत पर अपना हाथ और मुंह चलाता है तो उससे चुदाई ज्यादा मजा आता है। परम प्यार से माँ की चूत मसल रहा था और चाट भी रहा था। कभी उंगलियों को चूत के द्वार पर ऊपर नीचे करता था तो कभी योनि को मसल कर जीभ को चूत में घुसेड़ देता था। सुंदरी की खूबसूरत चूत अब पानी से लबालब हो गई थी। परम 3 अंगुलियों को एक साथ चाट के नीचे घुमा रहा था। बीच-बीच में उंगली पर चूत का रस लेकर गांड पर रगड़ देता है, ताकि गांड भी थोड़ी गीली हो के उसके लंड का स्वागत करे।


चूत को चाटते-चाटते परम गांड को भी चाट रहा था और सुंदरी की गांड भी अब उसी के छुट के पानी से पनिया गई। गांड पर उंगली रगड़ते परम ने उंगली गांड के अंदर घुसाया तो सुंदरी परम से चिपक गई। परमने सुंदरी को बिस्तर पर ढकेल दिया और उसकी दोनो जाँघों को माँ की निपल दबाया और आराम से माँ की चूत और गांड का स्वाद लेने लगा।

बस आज के लिए इतना ही ...............

अगर आपको एपिसोड अच्छा लगा हो तो जुरूर बताना....


जय भारत
 
आप शब्दों को और कहानी को बेहतर तरीके से पकड़ते हैं। इसलिए आप की हर टिप्पणी मुझे और बेहतर करने की चेतावनी देती है। इसलिए आप की हर टिप्पणी मुझे अच्छी लगती है। Aur saath-saath डर भी। डर इस बात का है कि कहीं कुछ गलती ना हो जाए या फिर choonk ना हो जाए।

आप इसी प्रकार से समीक्षा करते रहें और मुझे और बेहतर करने के लिए चुनौती देते रहें।

यही एपेक्सा है.

Sorry aapko confuse kar diya maine. Detail likhni thi.
 
Sorry....

आप शब्दों को और कहानी को बेहतर तरीके से पकड़ते हैं। इसलिए आप की हर टिप्पणी मुझे और बेहतर करने की चेतावनी देती है। इसलिए आप की हर टिप्पणी मुझे अच्छी लगती है। Aur saath-saath डर भी। डर इस बात का है कि कहीं कुछ गलती ना हो जाए या फिर choonk ना हो जाए।

आप इसी प्रकार से समीक्षा करते रहें और मुझे और बेहतर करने के लिए चुनौती देते रहें।

यही एपेक्सा है.

Sorry aapko confuse kar diya maine. Detail likhni thi.
 
Ji shukriya

Main aapki baat se sahmat hu.

Lekin unki baat se bhi sahamat hun kyo ki is kahani aur vastavikta me jojano ka difference hai. Jaise har kahani me hota hai ki hero apne skhalan ke baad turant errection paake dusari mahila ke saath sambhog kar sakta hai. Yah medically, scientifically aur real me bhi ek purush ke liye sambhav nahi hai. Dusara ek hi kriya ko bar bar doharane se bhi us kam me ruchi nahi rahati. Aise hi kai mahilao ke sath bhi hai. Ha yah bat hai ki mahila ek samay me ek se jyada bar sambhog kar sakti hai.

Par yah kahani hai aur kahani me vicharo aur vasana ka atikraman se apne vishay vasana ko trupti milti hai.

Ab yaha apni story ki bat kare to yah kahani gaanv se judi hai, kuchh limited sources aur limitation se chalana hai jo vastavikta ko thoda najdik leke chalte hai to maja aayega, imagination me..... Samaj gaye na.....

Dusara agar yah kahani scientifically hoti to param superman ho sakta tha.

Ladai jhagade se thoda dir rahna pasand kiya isliye yaha action nahi ke barabar hai. Pata nahi aage kuchh action samavesh ho jaye to. Jaise ek subjective running movie.

Chudai yaha subjected hai.

Ab strong ki paribhasha kya hai wah samajna padega.kahani me hero ke piche mahilae hai matlab staminal materialized hai.

Aisa mera maan na hai ya tha.

Aage param ki stamina ka praman de dungi. Bas dhairya rakhe.

Is kahani me sab vyanjan ka samavesh karungi, kuchh aise bhi ho sakte hai jo abnormal actions ho.

Thanks again of both of you.

All advise and suggestions are welcome.
 
Aapka bahot aabhaar

Comments jarur chahiye, ab fir ae keh rahi hu

Aapki har comment mere liye cautious hai. :DD:
 
बहोत बढ़िया

लेकिन आपने बताया नहीं की इस एपिसोड में क्या अधूरापन था??????????

बताएँगे तभी तो अगली बार बेहतर कर सकुंगी.............

वेइट करूंगी.........
 
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