सुंदरी ने घड़ी की ओर देखा, सुबह के साढ़े पांच बजे थे. “चल बेटा, तेरे साथ थोड़ी देर और सोती हूं…
अब आगे..........
अगली सुबह.. शनिवार था।
रोज की तरह सुंदरी सबसे पहले उठी। उसने परम को नंगा सोता हुआ देखा और उसका लंड आधा खड़ा हुआ था। वह उसे वैसे ही छोड़कर दूसरे कमरे में चली गई। बाप और बेटी अब भी उसी स्थिति में थे जैसे उसने उन्हें पिछली बार देखा था। मुनीम उसकी बेटी को पीछे से पकड़े हुए था। उसका एक हाथ उसकी चुची पर और दूसरा चूत पर था। उसने देखा की महक की चूत में से इसुके बाप का काफी माल निकल रहा था। माँ ने थोड़ी देर ऐसे ही देखा और फिर मुनीम का लंड को थोडा सहलाया और महक की ओर बढ़ी उसकी चूत पर उसकी ऊँगली रखी और थोडा चुतरस और वीर्य का मिश्रण को चाट लिया। वहा कुछ खून के सूखे हुए धब्बे भी साफ साफ दिखाई दे रहे थे लेकिन वह शील टूटनेवाले नहीं पर मुनीमजी का लंड ने जो खोदकाम किया था उसका नतीजा स्वरुप था। सुंदरी डर गई की एक बार शील टूटने के बाद भी खून निकल सकता है। सुंदरी ने महक के कुल्हे को थोडा फैलाया और पता लगाया की रात में उसके बाप ने उसकी गांड तो नहीं मारी! लेकिन उसकी गांड का छेद बड़े आराम से उसके सामने देख रहा था जैसे कह रहा हो की वह अपने बाप के लंड को निचोड़ नहीं पाया। वह थोडा मुस्कुराई और सोचा चलो अच्छा हुआ की महक की गांड बाकी रह गई। उसने महक की गांड के छेद कोथोदा सहलाया। उसने दोनों को हिलाया। दोनों जाग गए और सुंदरी को देखा। महक माँ की तरफ मुस्कुराई और अपनी चूत की ओर दिखाया और एक ऊँगली का इशारा किया की बाप का लंड उसकी चूत को खोद चूका है। और बिना कुछ कहे कमरे से बाहर चली गई। लेकिन उसकी चाल थी की डांस करते हुए जा रही थी! पता नहीं उसकी चाल में गजब की असामान्यता आ गई थी। वह लडखडाती हुई बाहर निकल गई। लेकिन महक के चहरे पर एक अजीब सी शान्ति और फ्रेशनेस दिख रही थी। सुंदरी अपने पति की तरफ मुस्कुराई,
"पूनम नहीं मिली तो अपनी बेटी को चोद दिया...! बहुत मज़ा आया होगा बेटी को चोदने में...!" सुंदरी ने मुनीम की और देखा और आँख मारी, सामने मुनीम ने भी उसको जवाब आँख मार के ही दिया और अपना हाथ लंड पर रखा पर सुंदरी कमरे से बाहर आ गई। उसे डर था किमुनिमजी उसे खिंच ना ले, वह जानती थी की गांड का छेद नहीं मिल पाया है तो वह उसकी गांड मारेगा। वह नहीं चाहती थी की मुनीम उसकी गांड में परम के अंश को देखे।
बेटे से की गांड मराने के बाद और सब को जगा के, सुंदरी आराम से सो गई।
चारों अपने काम में व्यस्त हो गए। हमेशा की तरह मुनीम घर से निकलने वाला पहला व्यक्ति था। निकलते समय उसने कहा कि वह शाम को वापस नहीं आएगा क्योंकि उसे पास के शहर में जाने के लिए कहा जा सकता है जैसा कि सेठजी कल बता रहे थे। मुनीम के जाने के बाद सुंदरी ने महक की ओर देखा और धीरे से पूछा,
“क्यो बेटी, बाप ने पूरा मजा दिया की नहीं.?” सुंदरी ने गौर से उसकी ओर देखा और फिर कहा, "मुझे तो उसने कुछ दिनों से नहीं चोदा है..."
महक ने माँ की ओर देखा और भाई भी उसकी बातें सुन रहे थे और बोले,
"तू तो बेकार का बाबूजी को अन-संन बोलती हो, क्यों की तुम्हे दुसरे लंड पसंद है। बाबूजी मे तो अभी पूरा दम है... चोद-चोद कर मेरी चूत का भोसडा बना दिया है पता नहीं कितनी बार मुझे झाड दिया, पानी निकाल दिया। और तुम दोनों मेरी इस लडखडाती चाल देख के हँस रहे हो, ये सब बाबूजी के लंड का कमाल है।"
उसने अपनी फ्रॉक खींच कर खोलीं और बोली, "देखो अभी तक चूत लाल और सूजी हुई है। तू जानती है, परसों बाबूजी ने पूनम कि सील को मेरे सामने तोड़ा और कल शाम पूनम और सुधा दोनों को चोदा और फिर रात में मुझे भी चोद-चोद कर थका दिया...बाबूजी मे अभी बहोत दम...कच्ची छोकरी को भी पूरा मजा दे सकता है..." महेक अपने पिता के बारे में गर्व से कहा। “मैं और मेरी चूत अब उनके लंड से हार गई है, कभी भी मेरी चूत मार सकते है, बाबूजी का लंड के मार खाने के लिए अब हररोज मेरी चूत तैयार ही रहेगी।“
सुंदरी ने देखा तो महक सच ही कह रही थी उसकी चूत काफी सूजी हुई थी और चलने फिरने में भी तकलीफ हो रही थी। सुंदरी को अपने पति पर गर्व हुआ की उसने अपनी ही बेटी की चूत फाड़ कर भोस बना रखी है।
महेकने हाथ बढ़ा कर परम का लंड को पैंट से बाहर निकाला और सहलाते हुए कहा “भैया (परम) बहुत अच्छा चुदाई करता है लेकिन भैया को बाबूजी की चुदाई देखना चाहिए… क्या सटा-सट अपना लौड़ा को चूत के अंदर पेलते हैं…जोरदार धक्के है मेरे बाबूजी के लंड में। मेरी चूत तो मेरे बाप के लंड की दीवानी हो गई है।”
महक परमका लंड सहला रही थी और लंड टाइट हो रहा था। लंड को पूरा टाइट देख कर सुंदरी बोली "क्यों रे रंडी तू तो कह रही है कि बाप ने चोद कर पानी निकाल दिया तो फिर क्यों लंड को सहला रही है...!"
महकने जोर से लंड को मसला और परम ने हाथ बढ़ा कर महक को अपनी बांहों मे लेकर उसकी चुचियो को मसलने लगा।
"माँ, मैं भले ही पूरी दुनिया का लंड चूत के अंदर ले लू, लेकिन भैया का लंड तो सबसे प्यारा है। जवानी का पहला मजा तो इसी लंड ने मुझे दिया था...मेरी चूत का शील इसी लंड ने तो तोडा है। और आज मेरे बाप ने मेरा बाकि बचा हुआ शील भी तोड़ दिया और दुबारा खून निकाल दिया। बाबूजी का सुपारा इतना बड़ा है की कोई भी भोंस से खून निकाल सकता है।“ महेक एक पल के लिए चुप रही और फिर अचानक बोली, "माँ 'विनोद' से मेरी शादी करवा दो।"
इतना सुनते ही परम ने चूची को छोड़ दिया और लंड भी महक के हाथ से वापिस खींचा। सुंदरी और परम दोनों बिल्कुल चुप हो गए। परम और सुंदरी दोनों इस अचानक प्रस्ताव से आश्चर्यचकित थे।
महक को असहजता महसूस हुई... "मैंने रात को बाबूजी से भी कहा है.. ।"
“लेकिन बेटी…विनोद तो बहुत बदनाम है गाँव में…लोग कहते हैं कि वो अपनी माँ और बहन को भी चोदता है…” सुंदरी ने धीरे से कहा। उसने यह नहीं बताया कि वह खुद उससे चुद चुकी है और बार-बार उससे चुदाई करवाना चाहती है। सुंदरी कैसे बोलती थी विनोद के साथ चुदाई में बहुत अच्छा लगा था।
“तो क्या हुआ? कौनसा घर है गाँव में,जहा घर में चुदाई नहीं होती? और मेरा ही भैया मुझे चोदता है, मेरे ही बाप ने मेरी चूत को एक बड़ी भोंस में तब्दील कर दिया, मुझे ठीक से चलने के काबिल नही रखा, मेरी माँ अपने बेटे से चुदवा रही है कल तो गांड भी मरवा ली, मुझे बताओ कौनसा घर है जहा मर्द घर की औरतो को नहीं चोदता? ” महक ने जवाब दिया।
“भैया भी तो माँ और छोटी बहन को चोद रहा है.. और तुम तो बहार के लोगो से भी चुदवाती हो… भैया ने भी तो रेखा की गांड मारी है…” महक ने परम का हाथ अपनी चूत पर खींचते हुए कहा, “भैया और तेरा घरवाला ( पति मुनीम) मुझे चोदेगा लेकिन मैं शादी करूंगी विनोद से ही और जल्दी,आज मौका मिलेगा तो उसके लंड का स्वाद भी लुंगी... ।”
तभी परम बोल पड़ा... "ठीक तो है माँ..." परम ने माँ को आँख मारी और कहा "विनोद बहुत पैसा वाला है, गाँव का ही लड़का है तो महक को भी हम जब चाहे घर बुला सकते हैं और चुदाई करेंगे... तुझे भी तो अच्छा लगेगा (जब विनोद तुम्हे और तुम्हारी बेटी को एक के बाद एक चोदेगा)।” मैत्री और नीता की प्रस्तुति।
सुंदरी भी समझ गई कि महक विनोद से शादी करेगी तो उससे भी विनोद का लंड मिलता रहेगा और महक भी अपने बाप और भैया से चुदवाती रहेगी… दोनों के लंड को शांत करती रहेगी और मैं (सुंदरी) विनोद के लंड को शांत करती रहूंगी। “लेकिन विनोद शादी करेगा तुमसे..?” सुंदरी को संदेह हुआ और उसने महक से पूछा। “तेरी चूत तो फट चुकी है..!”
“तो वो साला मादरचोद कौन सा कुंवारा है.. कितनी कुतिया को चोद चुका है…!” महेक ने आत्मविश्वास से कहा, जब मैं बोलूंगी तो वो तुरंत तैयार हो जाएगा। “ महक ने परमका लंड को मसलते हुए पूछा
“भैया रात में माँ की गांड मारी की नहीं?”
“बहना, पूछ मत, बहुत मजा आया… ऐसा लगा कि किसी कच्ची कली का वर्जिन चूत फाड़ रहा हूं...लगता था कि गांड की गर्मी से मेरा लंड पिघल जाएगा। एक दम टाइट था, तेरी चूत जैसा।”
“आज बाबूजी नहीं रहेंगे तो रात में मेरे सामने माँ की गांड मारना और फिर मेरी गांड फाड़ना…” महक ने लंड को दोनों हाथों में लेकर रगड़ने लगी…।”
परमको लगा कि लंड पानी छोड़ देगा तो वो उठ खड़ा हुआ “चल तैयार हो जा..कॉलेज नहीं जाना है?”
“चलो भैया साथ नहाते हैं..!” महक ने कहा और फिर सुंदरी से कहा, “मैं विनोद को बोलूंगी कि अपनी माँ को तुमसे बात करने के लिए भेजो…विनोद से चुदवाने के लिए मेरी चूत बहुत खुल रही है।”
और महेक बाथरूम चली गई और नंगी हो कर परम को पुकारा। दोनो ने नंगे हो कर एक-दुसरे को खूब रगड़ा और महक ने परम के गांड में उंगली घुसा कर मस्ती की। इधर परम महेक के पुरे बदन मे साबुन लगाने लगा। साबुन लगाते समय महक की चुतर फैला कर बहन के गांड में भी साबुन लगाया और एक के बाद एक साथ दो उंगली महक के गांड में घुसा दिया। कल रात परम को माँ की गांड मारने में पसीना निकल गया था, और अभी बिना कोई मुश्किल के, महक के गांड में 2-2 उंगलियों से अंदर बाहर आ जा रही थी, ताज्जुब है।
परम को लगा कि उसकी बहन विनोद या किसी और से या कल रात उस अजनबी सेठ से चूत का सील तुड़वाने के साथ-साथ बहन की गांड भी मारी थी। परम को बहुत गुस्सा आया और परम अपनी बहन को बाथरूम से खींच कर बहारवाले खाट पर पेट के बल लिटाया और महेक का चुतड फैला कर अपना तना हुआ लंड गांड के छेद में घुस गया और जोर से धक्का मारा। परम को आश्चर्य हुआ कि एक धक्के में ही पूरा लंड गांड के अंदर चला गया था।
महक ने एक बार जोर से 'आ'ह्ह्ह्ह..! कह कर तो गांड मार भैया।' मैत्री और नीता लिखित।
सुंदरी बोली, “कुतिया, तू पहले भी गांड मरवा चुकी है…!”
“नहीं माँ… विनोद की कसम… पहली बार गांड के अन्दर कोई लंड घुस रहा है… लगता है साबुन लगाने के कारण गांड ढीली हो गइ है.. लेकिन माँ, भैया खूब मजा देकर गांड मार रहा है... !“ महेक ने गांड को थोडा चौड़ा करते हुए और लंड को अपना रास्ता देते हुए जवाब दिया…” बहुत मजा आ रहा है..लगता है कोई गरम मोटा लोहे मेरी गांड के अंदर…आहहहह…भैया….जम कर गांड को चोदो….।”
“लेकिन मेरी तो गांड फट गई थी।” सुंदरी ने बेटी की गांड को ओर चौड़ा करते हुए कहा और किचन में मुस्कुराते हुए चली गई। सोच रही थी की महक अभी कच्ची खिलाड़ी है इसलिए वह अपनी गांड मरवा चुकी है वह छुपा नहीं सकी। लेकिन बहनचोद कौन मेरी बेटी की गांड मार गया! लगता है शायद वह अजनबी सेठ ने पुरे पैसे वसूल किये ही और महक कुछ बोल नहीं रही। बोले तो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता अभी वह जिस से भी चुदवाये। बस यह विनोद कहा मर गया साला! एक ही बार में मेरी चूत में खुजली छोड़ गया है!
चलो आज के लिए यही तक।
कल तक के लिए विदा चाहूंगी।
तब तक आप इस एपिसोड के बारे में अपने मंतव्य दे।
।। जय भारत ।।