Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 81 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

“लेकिन मेरी तो गांड फट गई थी।” सुंदरी ने बेटी की गांड को ओर चौड़ा करते हुए कहा और किचन में मुस्कुराते हुए चली गई। सोच रही थी की महक अभी कच्ची खिलाड़ी है इसलिए वह अपनी गांड मरवा चुकी है वह छुपा नहीं सकी। लेकिन बहनचोद कौन मेरी बेटी की गांड मार गया! लगता है शायद वह अजनबी सेठ ने पुरे पैसे वसूल किये ही और महक कुछ बोल नहीं रही। बोले तो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता अभी वह जिस से भी चुदवाये। बस यह विनोद कहा मर गया साला! एक ही बार में मेरी चूत में खुजली छोड़ गया है!

अब आगे...........

परमको बहुत ही मजा आ रहा था। उसने भी सोचा कि माँ के गांड में साबुन लगाकर फिर उसकी गांड मारेगा। एक के बाद एक दमा-दम गांड पर धक्क लगता रहा और महक भी “आआह्ह्ह्ह…।” “ऊऊहह…” करते हुए मजा लेती रही, और उसकी यह चीखे सुंदरी को सुनाई दे उस तरह से कराह रही थी। फिर परम के लंड ने गांड के अंदर ही पानी छोड़ दिया और फचाक से लंड बाहर निकला... लंड के बाहर निकलते ही गांड से परम का वीर्य, कंसन्ट्रेटेड मिल्क की तरह निकलने लगा। परम ने अपनी बहन को सीधा किया और महक कुछ सोचे उस से पहले परम ने के लंड को बहन के मुंह में घुसा दिया। महक को अपनी टट्टी “मल" का गंध मिला और वो प्यार से लंड चूसती रही। लंड को बहार निकाल कर बोली,


“तुमने तो कितनी आसानी से मेरी गांड मार ली…मुझे बहुत मजा आया।“

सुंदरी ने किचन के दरवाजे से देखा की महक अपने भाई का लंड जो अभी अभी उसकी गांड से बहार आया है वह चाट-चाट के साफ़ कर रही है, वह जानती थी की महक परम के धक्को से ज्यादा वह उसकी चींखे सुंदरी को सूना रही थी। वह अन्दर से ही चिल्लाई।

“महक बेटी भाई के लैंड कोअच्छे से साफ़ कर देना वह अभी अभी नहा के आया है। और वह किसी और चूत से टकराए तब वह साफ़ होना जरूरी है।“ वह बाहर आई और महक के मुंह को दबा के अच्छे से साफ़ करवा रही थी। और बोली: बेटी,अपना मुंह भी साफ़ कर के धो के जाना तेरा ही गांड का माल से स्मेल ना आ जाए वर्ना सहेलिय कहेगी माँ ने खाना नहीं दिया होगा तो टट्टी ही खा ली।“

और वह वापिस किचन में चली गई।

इधर सुंदरी किचन में खाना बनाते हुए सोचने लगी कि विनोद आ जाए तो मजा ले कर चुदवाएगी। उसने परम को पुकारा। महक अपनी गांड में से अभी भी भाई का वीर्य निकाल के अपने मुह में धकेल रही थी, बाद में वह रूम में गई और रूम में तैयार हो रही थी। परमको आते ही सुंदरी ने कहा; “परम, किसी तरह से विनोद को मेरे पास भेज दे.. विनोद से चुदवाने का मन कर रहा है…।“ सुंदरी फिर बोली कि “महक को पता नहीं चले कि उसकी माँ उसके यार विनोद से चुदवाती है...ठीक है?” सुंदरी ने परम के गोते को सहलाते हुए कहा।

परम ने माँ को चूमा और पूछा; “आज क्या का कार्यक्रम है!”
मैत्री और नीता की प्रस्तुति

सुंदरी ने जवाब दिया; “लंच के बाद मैं सेठ के यहां जाउंगी। तब तक महक भी वहा आ गई होगी।“

सुंदरी ने महक के सामने देखते हुए “तेरा क्या प्रोग्राम है?" सुंदरी ने बेटी से पूछा।

महक ने जवाब दिया कि वह कॉलेज से वापस आएगी और फिर सेठजी के घर जाएगी। सुंदरी ने महक से मज़ाक में कहा कि “उन सौतनो, पूनम और सुधा से कह देना कि आज रात तेरे पापा (मुनीम) नहीं आएगा, इसलिए वे यहाँ अपनी चूते फैला के चुदवाने न आएँ।“

दस बजे, दोनों भाई-बहन कॉलेज के लिए निकल पड़े। परम घर पर रह कर सुंदरी के साथ मस्ती करना चाहता था, लेकिन सुंदरी का कुछ और ही इरादा था। उसे आभास था कि आज विनोद आएगा और वह कोई खलेल नहीं चाहती थी। सुंदरी अपनी बड़ी बहू के आने का वादा भूल गई थी।

जैसे ही दोनों भाई-बहन कोने से गुज़रे, उन्होंने विनोद को अपनी साइकिल के साथ खड़ा देखा। विनोद को देखकर महक बहुत खुश हुई। परम कुछ कह पाता, उससे पहले ही विनोद पास आया और परम को बताया कि उसकी बहन और माँ ने उसे तुरंत बुलाया है। परम जानता था कि विनोद महक के साथ अकेले रहना चाहता है। परम चुदाई के बाद भूल गया था। विनोद की माँ और बहन विनोद की मौजूदगी में थीं। परम को याद आया कि कैसे वे दोनों चाहते थे कि वह (परम) बार-बार उनकी चूत चूसता और खाता रहे। परम ने महक से कहा कि वह उससे सेठजी के घर पर मिलेगा। उसने सोचा की ना जाने क्यों अब उसको सभी चुतो के रस अच्छा लगता था खास कर गांड और चूत दोनों चाटने में अब उसको बहोत मजा आता था। और चूतरस खाने में बहोत मजा आता था। उसे चूत से निकालता हुआ रस देखने में और चाटने में बहोत आनंद मिलता था। शायद अब उसे वह लत लग गई थी। परम को अब दिन में के बार तो चुतरस और गांड चाटने को चाहिए ही चाहिए लगता था। उसे अब उसके बिना अधूरापन लगता था।

महक विनोद की तरफ़ मुस्कुराई। वह उसे छूना चाहता था, लेकिन वहाँ कई लोग, जिनमें उनके कॉलेज के दोस्त भी शामिल थे, आ रहे थे। उसने महक को आगे की रॉड पर बैठने में मदद की और इस दौरान उसने उसकी स्कर्ट ऊपर करके उसकी जांघों को सिकोड़ दिया। महक शरमा गई और उसने अपनी स्कर्ट नीचे खींच ली। उसने खुद को पीछे धकेला ताकि पैडल मारते समय विनोद को उसके कसे हुए मुलायम कूल्हों और जांघों का एहसास हो। सब उन्हें देख रहे थे। जल्द ही वे कॉलेज पहुँच गए। नीचे उतरते समय महक ने विनोद का हाथ उसके बोबले पर रख लिया।

“महक, शाम को कहाँ जाना है, मैं इंतज़ार करूँगा.. सेठ जी के यहाँ?”

“नहीं, आज घर जाउंगी…बाद में सोचूंगी।”
मैत्री और नीता की प्रस्तुति

कहकर महेक कॉलेज के गेट की तरफ चली गई। वहा उसकी दोनों दोस्त सुधा और पूनम मिली और महक ने उन दोनों से मुनीम के साथ हुई चुदाई का पूरा विवरण लिया।

सुधाने कहा “महक तेरा बाप बहुत मस्त चुदाई करता है.. चल आज कॉलेज के बाद तीनो फिर से तेरे बाप से चुदवाऊँगे..!”

“लेकिन मेरा बाप तो 2-3 दिन के लिए सेठ जी के काम से बाहर को गया है।” महेक बोली, जब तक वो वापस नहीं आता है तब तक अपने बाप से क्यों नहीं चुदवाती है…?”

महक को कॉलेज मे ड्रॉप कर विनोद वापस सुंदरी के घर की ओर चला। उसे महक बहुत पसंद आई थी और उसने माँ और बहन से महक को 'बहू' बनाने के लिए तैयार कर लिया था। लेकिन महक के साथ-साथ वो सुंदरी को भी चोदना चाहता था, जिसका जिक्र भी अपनी माँ और बहन से कर चुका था। और उसकी माँ और बहन ने बिना अवरोध सुंदरी की चूत चोदते रहने का सुझाव दे दिया। लेकिन साथ-साथ परम को भेजते रहना भी कह दिया था। जिससे विनोद तो पहले सी ही सम्मत था। तो शायद अब उसके घर में महक को बहु की तरह देखने और रखने के लिए सभी तैयार थे।

उस दिन की चुदाई के बाद वो सुंदरी को दोबारा चोद पाया। कल भी आया था चोदने लेकिन जब उसने देखा कि परम कॉलेज नहीं गया तो वो वापस चला गया। परम के सामने तो सुंदरी को चोद चुका था लेकिन अब विनोद सुंदरी को बिल्कुल अकेले में खूब प्यार से आराम से चोदना चाहता था। विनोद को आज लगा कि उसकी इच्छा पूरी होगी। उसने परम को अपनी माँ-बहनों को चोदने भेजा था.. और अब वो परम की माँ को चोदेगा।

लेकिन, विनोद को तब झटका लगा जब उसने सुंदरी के घर को गंदगी से भरते देखा। विनोद को आश्चर्य हुआ कि 11 बजे मुनीम घर कैसे लौट आई। उसने सोचा कि वो किसी ज़रूरी काम से आया होगा और जल्दी ही लौट जाएगा। इसलिए विनोद ने साइकिल स्टैंड पर रख दी और पास वाली पुलिया पर बैठ गया। वो इंतज़ार करता रहा। विनोद के लिए एक-एक मिनट एक पूरे दिन के बराबर था और आखिरकार 25 मिनट बाद विनोद ने मुनीम को घर से बाहर आते देखा। विनोद को मुनीम के पीछे बंद दरवाज़े पर सुंदरी की एक झलक दिखाई दी। विनोद सुंदरी के घर पहुँचा और दरवाज़ा खटखटाया।


महक को कॉलेज छोड़कर सुंदरी के घर वापस आने में विनोद को ठीक एक घंटा लगा और इस दौरान सुंदरी ने क्या किया... और मुनीम ने 25 मिनट तक विनोद के इंतज़ार के दौरान क्या किया...

देखेंगे कल।

*****

आज के लिए इतना ही कल फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ

तब तक के लिए विदा और अपना कोमेंट की प्रतीक्षा

। जय भारत
 
जी शुक्रिया

आखिर मैं भी इसी ट्रिक का प्रयोग करती हु :DD:
 
वैसे भी यह सब बदनामी नारी जाती के लिए ही होती है

अफ़सोस यही है की सब गन्दा काम नारी जाती के लिए ही है

मुझे तो यही समज में नहीं आता की एक वेश्या को वेश्या बनाया किसने........

अगर वह सेक्स अनाचार या दुराचार है हटी तो नारी को ही क्यों वेश्या कहा जाता है ......वही पुरुष को कुछ भी नया शब्दों से नहीं नवाजा जाता है........तफावत है बहोत बड़ा.....

सोनेवाली वेश्या है लेकिन सुलानेवाला या उसका उपभोग करनेवाला अच्छा है....ताज्जुब है...है न?????????

यही हमारा भद्र समाज है दोस्त.............

शुक्रिया
 
शुक्रिया दोस्त

मजा आया बस यही चाहिए
 
शुक्रिया दोस्त

मेरे खयाल से सुंदरी को वेश्या कहना वाजिब नहीं होगा....क्यों की उसकी सुन्दरता का उपभोग करनेवाले वेश्या नहीं है तो सुंदरी भी नहीं है. सुंदरी अपनी सुन्दरता का उपयोग कर रही है. सभी की पत्नी है फिर भी सुंदरी ही क्यों???????? महक ही क्यों?????? इसमें सब आ गए परम,विनोद,सेठ,मुनीम सब के सब.............अगर वह लोग वेश्या नहीं है तो सुंदरी भी नहीं है.

अगर देनेवाला है तो लेनेवाला है और लेनेवाला है तो देनेवाला है..........आपस में गहरा संभंध है............

शुक्रिया दोस्त
 
जी आपका बहोत बहोत आभार
 
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