Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 106 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

जब दोनो अपने कमरेमे चले गये तब दोनो ओरतोका सर्बका बांध टुट चुका था.. सबाना साहीलकी बाहोमे थी.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुम रही थी.. तो यही हाल श्रीधरके रुममे भी था.. श्रीधर र्बीन्दाके उरोजोको मसलते उनके होठोका रसपान कर रहा था..

ओर ब्रीन्दा श्रीधरके नीतंबपे हाथ रखते उनकी चुतकी ओर दबा रही थी.. जैसे अकेह रही होकी मुजे अभी के अभी चोदलो.. फीर चारो फ्रेस होने चले गये.. ओर खाना वही रुममे मंगवा लीया.. जब खाना आगया तो साहीलने श्रीधरको अपने रुममे बुला लीया.. ओर दोनो आगये..

तो सबाना ब्रीन्दाको देखती ही रही.. क्युकी ब्रीन्दाने सारीको त्यागकर अ‍ेक बहुत ही खुबसुरत मोर्डन ड्रेस पहेनलीया था.. ओर सबानाने अभी भी अ‍ेक सलजार कमीज पहेना हुआ था.. चारो खानेकी मेजपे बैठ गये.. सबाना अबभी ब्रीन्दासे बहुत सरमा रही थी..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) सबाना.. कहो आपकी पढाइ कैसी चल रही हे..?

सबाना : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. बहुत अच्छी.. अभी अ‍ेक अ‍ेक्क्षाम खतम हुइ हे.. बहुत अच्छे माक्र्स मीले.. आप बताइअ‍े वहा सबलोग कैसे हे..?

ब्रीन्दा : (श्रीधरकी ओर कामुक मुस्कानसे) सब मजेमे हे.. सबलोग अपनी लाइफ खुलकर जी रहे हे.. अ‍ैसी लाइफ मेने जींदगीमे कभी नही देखी.. बस.. आप भी डोक्टर बनके जल्दीसे आजाओ.. सबलोग आपका इन्तजार कर रहे हे..

सबाना : (मुस्कुराते साहीलकी ओर देखते) अब तो वही आना ही हे.. मेभी वहा आनेके लीये बेताब हु.. बस.. अपनी पढाइ खतम करलु.. लगता हे वहा सब लोग कुछ ज्यादा ही खुस हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां.. बहोत.. क्युकी वहा सब लोगोने रीस्तेके नये नीयमको स्वीकार कर लीया हे.. अब वहा रीस्तेके कोइ मायने ही नही हे.. आज हमारा पहेला गांव अ‍ैसा होगया हे जहा अब कोइ वीधवा या त्यक्ता नही रही.. सबने आपसी रीस्तोमे सादीया करली हे..

साहील : (मुस्कुराते) सबु.. श्रीधरके मम्मी पापाके बीच डीवोर्स हो चुका हे.. इनकी मम्मी त्यक्ता थी तो गांवमे रीस्तोमे बदलावके नीयमके तहेत श्रीधरने उनकी मम्मीसे सादी करली.. ओर आंटी अब हमारी भाभी होगइ..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां सबाना.. ओर ये रीस्तोसे मे बहुत खुस भी हु..

साहील : (मुस्कुराते) सबु.. ये बता अब यहा ओर आजु बाजु देखने जैसा क्या हे..?

सबाना : (मुस्कुराते) अभी हम गार्डन चले..? क्युकी उनकी रोनक रातमे ही ज्यादा होती हे.. बहुत खुबसुरत गार्डन हे.. रातमे लोग ज्यादा वहा घुमने जाते हे.. कुछ कपल तो कुछ पुरी फेमीलीके साथ..

ब्रीन्दा : (खुस होते) तो जानु आज वही घुमने चले..? फीर कलका कुछ सोचेगे..

साहील : (हसते) भाभी.. आप तो हनीमुन मनाने आइ हो.. तो कही ओर घुमेगी..? हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सर्मसार होते हसते साहीलको अ‍ेक मुका मारते) साहील.. अ‍ेक मारुगी.. तो क्या आप सीर्फ मेरी देवरानीको मीलने आये हे..?

दोनोका जगडा देखकर श्रीधर ओर सबाना जोरोसे हसने लगे.. फीर खाना खाकर चारो गार्डनमे घुमने चले गये.. सबाना ओर र्ब्रीन्दा दोनोही धीरेसे हस हसके बाते करते आगे चल रही थी.. ओर श्रीधर साहील उनके पीछे चल रहे थे.. तभी साहीलका फोन बजा..

देखा तो फोनपे लखन था.. तो साहीलने फोन उठालीया.. तो लखन साहीलको सबकुछ बता देता हे.. साहीलने वापस आनेकी पेसकस की.. लेकीन लखनने उसे मना करदीया.. ओर कहाकी सबलोग आरामसे घुमकर ही आना.. बातकी गंभीरता समजके श्रीधरने पुछ लीया..

श्रीधर : (धीरेसे) साहील.. क्या हुआ..? कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

साहील : (थोडा धीरेसे) श्रीधर.. वो लखनकी भाभी.. भुमीका भाभी गुजर गइ.. बाथरुममे गीर गइ थी.. तो बच्चा पेटमे ही मर गया.. ओर ओपरेशनके दौरान भाभीने भी दम तोड दीया..

श्रीधर : (थोडी चीन्तासे) ओह गोड.. बहुत बुरा हुआ.. क्या हम वापस चले..?

साहील : (सामने देखते धीरेसे) लखनने मना कीया हे.. सुबह इसी बातके लीये फोन कीया था.. हम फ्लाइटमे थे.. तो उसने हमे नही बताया.. ताकी हम घुमकर आ सके..

श्रीधर : (धीरेसे) ये लखन भी कुछ अजीब हे.. कीतना समजदार हे..

तो दुसरी ओर इस बातसे अनजान र्ब्रीन्दा ओर सबाना अब खुलकर हस हसके बाते करते आगे चल रही थी.. ब्रीन्दाने अपने ओर श्रीधरके बारेमे सबानाको सबकुछ बता दीया.. फीर उसने मुना ओर बसंतीके बारेमे भी सबानाको सबकुछ बता दीया.. ओर कहा की सब इस रीस्तेसे बहुत खुस हे..

फीर चारोने वहा खुब अ‍ेन्जोय कीया.. दोनोने ब्रीन्दा ओर सबानाको गोलगपे खीलाये.. फीर आइसक्रीम.. फीर श्रीधर सबके लीये वहाकी नीबुवाली सोडा लेने चला गया.. तब कीसीको पता नही थाकी श्रीधरने चुपकेसे सबकी सोडाने कामोतेजक गोलीया मीलादी हे..

फीर सब कुछ देर वही बैठकर बाते करते रहे.. ओर गोलीने अपना असर सुरु करदीया.. ब्रीन्दाने सबको वापस चलनेको कहा.. ओर देर रात वापस होटेलपे आगये.. आकर दोनो कपल अपने अपने कमरेमे अ‍ेक दुसरेको गुडनााइट कहेकर चले गये.. ओर चेन्ज करलीया..

तो आज सबानाने भी पहेली बार साहीलकी दीलवाइ ट्रान्सफरन्ट नाइटी पहीनली.. जीसे देखकर साहीलका हथीयार जटके मारने लगा.. दोनो ओरतोके उपर गोलीका असर पुरी तराह छा गया था.. दोनो वासनाकी आगमे जलने लगी.. फीर पुरी रात दोनोके कमरेमे घमासान चुदाका युध्ध हुआ..

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दोनो कमरोमे चुदाइका अ‍ैसा दौर चला मानो चुदाइका भवंडर कमरेमे तबाही मचा रहा हो.. दोनो देर रात तक अपनी अपनी बीवीओकी चुदाइ अलग अलग अ‍ेन्गलसे करते रहे.. ओर सोने तक दोनोने अपनी बीवीओका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके ढीला करदीया.. फीर दोनो कपलमे साथमे सावर लीया.. ओर सबानाने सावधानीके लीये अ‍ेक आइपीलकी गोली खाली.. फीर अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९१

दोनो कमरोमे चुदाइका अ‍ैसा दौर चला मानो चुदाइका भवंडर कमरेमे तबाही मचा रहा हो.. दोनो देर रात तक अपनी अपनी बीवीओकी चुदाइ अलग अलग अ‍ेन्गलसे करते रहे.. ओर सोने तक दोनोने अपनी बीवीओका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके ढीला करदीया.. फीर दोनो कपलमे साथमे सावर लीया.. ओर सबानाने सावधानीके लीये अ‍ेक आइपीलकी गोली खाली.. फीर अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये.... अब आगे

गांवकी ओरसे कोइ ज्यादा लोग आने वाले नही थे.. तो सबने भुमीका कार्य बहुत ही सोर्ट टाइममे गांवमे हवेलीपे रखनेका तैय कीया.. क्युकी अब भुमीकाका ससुराल वही था.. अ‍ेक दीन रातको खान खानेके बाद सबलोग बैठकर बाते कर रहे थे.. तब सृती अब भी गुमसुम बैठी रहेती थी.. तो मंजुने उनसे बातकी..

मंजुला : (सामने देखते) सृती.. अब कबतक अ‍ैसे बैठी रहेगी..? अ‍ेक दीनतो सबको जाना ही हे..

सृती : (आंखसे आंसु नीकलने लगे) मोम.. क्या आपको ओर पुनोदीको सब पता थानां..? इसीलीये मुजे उस दीन वही रोक लीया.. ताकी मे अपनी मम्मीके साथ टाइम स्पेन्ड कर सकु..

मंजुला : (सामने देखते) हां.. हमे सब पता था.. लेकीन मेनेही पुनोको कुछ कहेनेसे मना कीया था..

सृती : (सामने देखते) लेकीन क्यु..? अगर हमे पता होता तो हम मोमको बचा सकते थे..

मंजुला : (द्रढ आवाजमे) नही.. क्युकी हमे प्रकृतीकी नीयतीमे कोइ छेडछाड नही करनी.. गुरुजीकी सख्त मना हे.. ओर ये बात तो तुजे भी पता हेनां..?

सृती : (सांत लहेजेमे) आइ नो मोम.. मुजे पता हे.. लेकीन फीर भी..

मंजुला : (सामने देखते) फीर भी क्या..? क्या तुम कुदरतकी नीयतीको टाल सकती हे..? अगर मेने बता भी दीया होता तो क्या होता..?

सृती : (सामने देखते धीरेसे) कमसे कम हम उसे सावधानी बरतनेको कहेते.. या फीर..

मंजुला : (सामने देखते) या फीर उसे नहानेके लीये रोकते.. वहीनां..? तो फीर वो तुमसे सवाल करती तो तुम उसे क्या कहेती..? जब तुजे बता भी देती तो तुम भी दुखी नही रहेती..?

सृती : (सर जुकनते) येस मोम.. सोरी..

मंजुला : (सरपे हाथ घुमाते) बीटु.. सोरी मत बोल.. तेरी चीन्ता करना लाजमी हे.. लेकीन सोच.. अ‍ेक दीन सबको जाना हे तो उनको वापस भी तो आना हे.. तेरी गोदसे.. तुजे मेरे बारेमे भी सब पता हेनां.. बल्की तुजे तो सब पहेसेही पता था.. क्या मेने वीजयको इस दुनीयामे आनेसे रोका..?

सृती : (आंसु बहाते) नही.. मेरे मना करनेके बावजुद भी आप प्रेगनेन्ट हुइ..

मंजुला : (सामने देखते) पता हे क्यु..? क्युकी हमे उनके आदेशका पालन करना हे.. नाकी हमारी मनमानी.. कुछ दीनोमे मेभी चली जाउगी.. ओर मेरी भावुकी कोखसे वापस भी आजाउगी.. तो क्या तुम इस नीयतीमे कोइ बदलाव कर सकती हो..?

सृती : (नांमे गरदन हीलाते) नही मोम..

मंजुला : (सामने देखते) बीटु.. सबकुछ बताया नही जा सकता.. कुछ बाते अ‍ैसी होती हे जो हम ना जाने तो ही बहेतर हे.. ओर आप सबको ये पता हेकी मे ओर पुनो सबकुछ जान जाती हे.. इसीलीये हमसे सब जाननेकी उमीद करती हेनां..?

सृती : (सर जुका लेती हे) सोरी मोम..

मंजुला : (सबकी ओर देखते) तो फीर सुनो सब लोग.. आजसे हम दोनोको कोइ जाननेके लीये सवाल नही पुछोगे.. जीनको जाननेकी जरुरत होगी हम उनको सामनेसे सबकुछ बता देगे.. अब कलसे तुभी अपनी रुटीन लाइफमे बीजी होजा.. ओर अपनी मम्मीके वापस आनेकी तैयारीया कर..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) येस मोम.. थेन्क्स..

मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) कमीनी.. मोम भी कहेती हे ओर थेन्क्स भी.. चल जा.. सोजा..

मंजुला बडी ही सावधानीसे सृतीको समजा देती हे.. तो पुनम बहुत ही खुस होजाती हे.. क्युकी यही सब सवाल सृती उनको पुछती.. तब उनके लीये सृतीको समजाना मुस्कील हो जाता.. फीर पांचवा दीन आया.. इनसे ठीक अ‍ेक दीन पहेले सबलोग गांव चले गये.. ओर दुसरे दीन भुमीका सभी कार्य नीपटा दीया..

उस दीन सबलोग आये थे.. भानु उनकी मां सरलाके साथ रमा ओर नीलमको भी लेकर आया था.. तो गांवसे देवायतकी सभी बीवीओके साथ वसुधा भी थी.. लखनके सभी दोस्त अपने परीवारके साथ आये थे.. उनमे बनवारी लालके साथ उनकी पत्नी बीन्दीया भी सामील थी..

सभी लेडीस सृती ओर मंजुको मीली.. ओर सोक व्यक्त कीया.. फीर कार्य खतम हुआ तो सबलोग चले गये.. नीलम वही हवेलीपे रुक गइ.. दुसरे दीन लखन भी अपनी सभी बीवीओको लेकर नीकल गया.. इस बार रजीया भी साथ थी.. तो कुछ दीनके लीये भावना ओर नीर्मला वही रुक गइ..
 
इन दीनोमे साहील ओर श्रीधर भी अपनी बीवीओके साथ खुब घुमा.. हर दीन दोनो कपल अलग अलग जगहपे घुमने जाते.. श्रीधर ओर साहीलने दोनो लेडीसके लीये खुब सोपींग की.. जीसे ब्रीन्दा ओर सबाना बहुत खुस होगइ.. ढेर सारे लेटेस्ट डीजाइनके कपडे के साथ लेटेस्ट अंतर वस्त्र भी सामील थे..

जैसे हर दीनका रुटीन हो गया हो.. रातमे अपनी बीवीओकी घमासान चुदाइ.. फीर देर सुबह तक सोना.. फीर लंच करके घुमने चले जाना.. इन चार दीनोमे सबाना ओर ब्रीन्दाकी चाल ही बदल गइ.. सबाना हर चुदाइके बाद आइ पील लेना नही भुलती..

लेकीन ब्रीन्दा लखनसे मीली तबसे ही पेटमे कुछ अजीब महेसुस होरहा था.. वो मनही मन समज चुकी थीकी वो लखनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. लेकीन जबतक प्रेगनन्सीकी पुष्टी नही होजाती तबतक उसने चुप रहेना ही बेहतर समजा.. ओर आखीर वापसीका दीन आगया..

ट्रेनके टीकीट नही मीली तो तीनोने फीरसे फ्लाइटकी टीकीट बुक करवाली.. सबाना तीनोको छोडने आइ.. तब साहीलसे गले मीलकर आंसु बहाये.. ओर साहीलने उसे पचास हजार केश पैसे दीये.. सबाना मना करने लगी.. लेकीन साहीलने उसे जबरदस्तीसे दे दीये..

इन चार दीनोमे सबाना ब्रीन्दाके साथ खुब खुल चुकी थी.. तो ब्रीन्दाने भी खुलकर अपनी ओर गांवकी सभी बाते सबानाके साथ सेरकी.. सबानाको पता चल गयाथा की कीन हालातमे उनका श्रीधरके साथ अफैर हुआ.. ओर कैसे उसने जयश्रीको श्रीधरके साथ सेट कीया ओर दोनोको भगाया..

तो सबानाने भी खुलकर कहाकी कैसे उनकी बडी बहेन ओर बडे भाइके बीच नाजायज सबंध थे.. ओर आखरी वक्तथे दोनो इनके सपनोको तोडके गये.. फीर साहीलने उनकी कैसे मदद की.. यहा आनेसे पहेले वो साहीलसे गांवमे मीलने आइ तब पहेली बार साहीलसे मीलन कीया..

ओर जबतब वहा रही वो कीतनी बार साहीलसे चुद चुकी थी.. फीर गांवकी सभी बाते सुनकर सबानाने फीरोज ओर सलमाके रीस्तोको भी अ‍ेक्सेप्ट करलीया.. ब्रीन्दाने उनसे बाते करते बडी सावधानी बरती.. उन्होने सलमा ओर साहीलके रीस्तोकी बात सबानासे छुपाइ..

ओर सबाना ये बात कभी नही जान पाइ की साहील ओर उनकी अम्माके बीच अ‍ेक पती पत्नीकी तराह नाजायज रीस्ता होगया हे.. ओर सलमा साहीलसे प्रेगनेन्ट भी हो चुकी हे.. साहील श्रीधर ओर ब्रीन्दाने इस बातका बहुत खयाल रखा.. फीर तीनो फ्लाइटमे बेठकर सहेर आगये.. ओर सीधे लखनके घर चले गये..

तो लखन कुछ देर पहेले अपनी बीवीओको लेकर गांवसे आया था.. सबलोग ब्रीन्दाका ये लेटेस्ट रुप देखकर दंग रेह गये.. तो ब्रीन्दा खुब सरमाइ.. ओर वही चेन्ज करने चली गइ.. उसने फीरसे सारी पहेनली.. वो आज लखनको देखकर कुछ ज्यादा ही सरमाकर हस रही थी..

श्रीधर ओर साहीलने भुमीकाका सोक व्यक्त कीया.. अब सृती पहेलेसे काफी बहेतर भी.. तो वो ओर पुनम भी ब्रीन्दासे बात करने लगी.. फीर तीनो जयश्रीके पास उनसे मीलने वृन्दाके घर चले गये.. ओर जयश्रीका हाल चाल पुछा.. ओर कहाकी वो बहार थे तो यहा सोक व्यक्त करने आये थे..

वृन्दा सबके लीये ठंडा बनाने कीचनमे चली गइ.. तब ब्र्रीन्दा ओर जयश्री अकेले होगये.. ओर ब्रीन्दाने जयश्रीको सबकुछ सच बता दीया.. तो जयश्री भी सरमाके हसने लगी.. ओर उसने धीरेसे ब्रीन्दाको कहाकी उनकी चाल बदल गइ हे.. तब ब्रीन्दा खुब सरमाइ..

सब लोग बच्चेके साथ थोडा खेले.. तबतक ठंडा भी आगया.. वृन्दा बडीही कामुक्तासे श्रीधरको देखकर मुस्कुरा रही थी.. ओर सब बातोमे बीजीथे तब वृन्दाने श्रीधरको मुस्कुराते आंख भी मारी.. ओर आंखोके इसारोसे उसे बेडरुमकी ओर इसारा भी कीया..

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तो श्रीधर नामे गरदन हीलाते हसने लगा.. लेकीन दोनोको नही पताथा की इनकी इस हरकतको साहीलने टेडी आखसे देख रहा था.. फीर ठंडा पीकर श्रीधर साहील ओर ब्रीन्दा केब करके वापस गांव चले गये.. ओर श्रीधर ब्रीन्दासे वीदा लेकर साहील अपने घर चला गया..

इन चार दीनोमे सलमा ओर जरीनाने फीरोजके सामने उनके साथ सेक्स करनेके लीये जुठमुठ जगडनेका खुब नाटक कीया.. दोनोने फीरोजको कोइ गोली नही खाने दी.. ओर नतीजाके फल स्वरुप फीरोज कीसी अ‍ेक के साथ ही सेक्स करपाता.. ओर ढेर होजाता..

तो दुसरी प्यासी रहेती.. ओर फीरोजको उनके साथ भी सेक्स करनेको कहेती.. लेकीन फीरोजको दुसरी बार खडा करना मुस्कील लगता.. फीर प्यासी रहेती वो फीरोजके साथ बहेस करते जगडती.. आखीर तीनो सलमाके दीये हुअ‍े सुजावसे सहेमत होगये.. की फीरोज हर रात बारी बारी अ‍ेक के साथ ही सोयेगा बाकी सलमाके कमरेमे सयेगी..

फीरोज : (थोडा परेसान होते) यार भले ही मे अ‍ेक के साथ सेक्स करु.. लेकीन दुसरीको दुसरे कमरेमे सोनेकी क्या जरुरत हे..? तीनो साथमे सोयेगेनां..

जरीना : (गुस्सेसे बहेस करते) क्यु..? तुम दोनो यहा मेरे सामने सेक्स करो.. ओर मे बैठी बैठी तुम दोनोको देखती रहु..? तो क्या मुजे भी इच्छा नही होगी..? ओर मेरे साथ सेक्स करोगे.. तो क्या दीदी देखती रहेगी.. इनसे तो अच्छा हे अ‍ेक अलग कमरेमे ही सोजाये..

सलमा : (कपडे पहेनते) फीरोज.. जरीना ठीक केह रही हे.. ये चार दीनोमे मेने देखा.. आपको तो बस.. पहेले मेरे साथ ही सेक्स करते हो.. तो आपपे जरीनाका हक भी इतना हे जीतना मेरा हे..

जरीना : (टोंट मारते) दीदी आप नइ बीवीहोनां इसीलीये..? क्यु..? अगर दो दो बीवीओको सम्हाल नही सकते तो दुसरा नीकाह ही क्यु कीया..?

फीरोज : (चीडते) बस बस.. मुजे नसीहत देनेकी जरुरत नही हे.. तुम दोनो गोली खाने नही देती.. वरना दो क्या मे चार बीवीया भी रख सकता हु..

सलमा : (सामने देखते) हां तो कहासे खाने देती.. हर दीन गोली खानेसे सेहत खराब हो जाती हे.. अगर आपको कुछ हो गया तो हम दोनो वीधवा नही होना चाहती.. इसीलीये गोली नही खाने देती.. बस.. अब फाइनल हो गया.. हर रात बारी बारी हम अ‍ेक आपके साथ सोयेगी..

फीरोज : (हाथ जोडते) ठीक हे मेरी मां.. अब जगडा तो मत करो.. जरीना.. कल तेरी बारी..

जरीना : (सलमाकी ओर कातील मुस्कानसे आंख मारते) हंम.. अब ठीक हे..

जीस दीन साहील देर साम घर वापस आया उसी दीनसे नया नीयम लागु हुआ.. आज फीरोजके साथ जरीना सोने वाली थी.. तो इस बातसे सलमा बहुत खुस थी.. तो जरीना थोडी मायुस होगइ थी.. फीर वो भी हसके साहीलके गले लग गइ.. क्युकी अब वोभी अ‍ेक दीन छोडकर साहीलके साथ सोने वाली थी..
 
इधर सहेरमे इस रात लखन सृतीका मुड ठीक करना चाहता था.. तो दुसरी ओर रजीया भी कइ दीनो तक गांवमे थी.. इसीलीये लखनने उन दोनोके साथ जमकर सेक्स कीया.. फीर राधीकाको भी संतुस्ट कीया.. लेकीन लखनने देखा आज रजीयाके साथ सेक्स करनेके बावजुद भी वो कुछ खोइ खोइ रहेती थी..

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दुसरे दीन सुबह राधीका भी लखनके साथ होस्टेल चली गइ.. देखा तो लखनने काफी नइ लडकीओकी बुकींग करली थी.. जीसे देखकर राधीका बहुत खुस होगइ.. ओर दोनोने सुबह सुबह ही खुसीके मारे अपने नीजी कमरेमे जमकर सेक्स कीया.. फीर लखन टीनाकी बुटीकपे चला गया..

तो टीना लखनको देखते ही खुस होगइ.. इस बार टीना थोडा खुलकर लखनको गले मीली.. ओर उसे भी वोही चुभन महेसुस हुइ.. जीनकी वजहसे टीनाकी चुत पानी छोडने लगी.. वो सरमाकर लखनसे दुर होगइ.. फीर उनके ओर्डरके सभी कपडे पेक करके दे दीये..

फीर दोनोके बीच थोडी केज्युअल बाते हुइ.. ओर बात थोडी अंतरंग होने लगी.. टीनाने उसे कोफी पे मीलनेकी पेसकस की.. ओर लखनने उसे स्वीकार करलीया.. फीर दोनो कोफी सोपपे चले गये.. क्युकी पुनमने दी हुइ जानकारी के मुताबीक लखन जानता थाकी टीना उनसे क्या चाहती हे..

जब लखनने घरपे सबके सामने नये डीजाइनके लेटेस्ट कपडे रखे तो सब देखते ही खुस होगइ.. उनमे नीलम भावनाके अलावा चंदाके ड्रेस भी सामील थे.. ओर सब लखनकी पसंद देखकर खुस हो गइ.. तो चंदा कुछ ज्यादा ही सरमाने लगी थी..

इसी बीच अ‍ेक दीन दोपहोरमे खाना खाकर सब आराम कर रहे थे तब सृतीके फोनपे भावीकाका फोन आगया.. ओर सृतीने उनकी पुनमके साथ भी बाते करवाइ.. ओर तैय हुआ की कल साम पांच बजे सबने भावीकाके पहेले वाले बंध पडे घरपे मीलनेका तैय कीया..

अब सबलोग अपने लाइफ पार्टनर ओर अपने अफैरके साथ खुलकर सेक्स करने लगे थे.. सहेरमे होटेलपे लेजानेके बाद मुना भी उनकी मामी यानीकी गीताको तीन बार उनके घरपे मील चुका था.. ओर मीलनेका मतलब.. उनके साथ जमकर सेक्स.. तो साहील भी बेगलोरसे आनेके बाद अ‍ेक बार सायराको मीलकर आगया..

ओर इसका मतलब अब कुछ ही दीनमे अ‍ेक के बाद अ‍ेक फटाके फुटने वाले थे.. ओर तीसरे ही दीन सायराका फोन साहीलके फोनपे दो पहेर तीन बजे आगया.. जो इस वक्त उनका पती अपनी ओफीसमे होता हे.. ओर सायरा सुबहसे ही साहीलसे बात करनेके लीये उत्सुक थी..

साहील : (फोन लेकर घरसे बहार नीकल गया फीर धीरेसे) हेलो डार्लींग सीस्टर.. कैसी हो..?

सायरा : (सरमाकर मुस्कुराते) परसो मेरी हालत बीगाडकर चले गये.. ओर पुछ रहे होकी मे कैसी हु..? आपकी करतुत की ही बात करनेके लीये फोन कीया हे..

साहील : (मुस्कुराते धीरेसे) मेरी करतुत..? कहो क्या हुआ..?

सायरा : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. गेस करो.. आप क्या बनने वाले हो..?

साहील : (खुस होते आस्चर्यसे हसते) क्या..? हें..हें..हें.. आप मजाक तो नही कर रही..?

सायरा : (जुठा गुस्सा करते) चुप.. कीतने कमीने हो.. अ‍ैसी बातोका कोइ मजाक करता हे भला..? बताओना.. आप पापा बनने वाले होकी मामा.. हें..हें..हें..

साहील : (कुछ सोचते मुस्कुराते) हं..म.. मामा..?

सायरा : (मुस्कुराते) अरे.. हम दोनोने इतनी महेनत कीहे.. फीर भी मामा..? नो वेय.. भाइ.. आप पापा बनने वाले हो.. ओर बडे भैया मामा.. हें..हें..हें..

साहील : (मुस्कुराते) दी आप इतना यकीनसे कैसे केह सकती हो..?

सायरा : (मुस्कुराते) क्यु..? मेरी बातपे वीस्वास नही हे क्या..? सुनो.. मेने कइ दीनोसे सेफ्टीका युस करना बंध करदीया हे.. ना मेने कीया ना भैयाको करने दीया.. फीर भी कुछ नही हो रहा था.. ओर क्या आपको लगता हे उनकी इतनीसी नुनीसे कुछ होगा.. बस.. जब हम पहेली बार मीले थे उसी दीनसे पेटमे कुछ अजीब लग रहा था.. ओर आप कीतना लोटा भर भरके जडते थे..

साहील : (हसते) यार यु स्योर..? क्या इस बातका बडे भैयाको पता हे..?

सायरा : (मुस्कुराते) हन्ड्रेड परसेंट स्योर.. भाइ.. इतने दीनोसे बडे भैयाके साथ खुब कोसीस की.. ओर जबसे हम दोनो मीले.. तबसे मेरे अंदर कुछ अजीब फील हो रहा था.. कल मुजे उल्टीया हुइ.. ओर आज सुबह प्रेगनन्सी कीटसे चेक करलीया.. ओर रीजल्ट पोजीटीव आया.. तो सोचा इस खुश खबरके पहेले हकदार आप ही हो.. अब सामको भाइ ओफीससे आयेगे तो मे उनसे बात करलुगी..

साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या आप सचमे हमारा बच्चा चाहती हो..?

सायरा : (मुस्कुराते) हां भाइ.. इतनी कोसीसोके बावजुद अब सीर्फ आपसे ही उमीद थी.. ओर हमारी महेनत रंग लाइ.. अब आप पापा ओर मे मम्मी हो जाउगी.. भाइ.. थेन्क्स.. मुजे इस सुख प्रदान करनेके लीये..

साहील : (मुस्कुराते) ओर कभी कादीर भैयाको पता चल गया तो..?

सायरा : (मुस्कुराते) कभी पता नही चलेगा.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगा.. दुनीया वालोके सामने भले ही आप मामा हो.. लेकीन आप ओर मे ही जानते होगेकी इनका असली बाप कौन हे.. भाइ.. प्रोमीस करो.. इस बातका कीसीको पता ना चले..

साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. आइ प्रोमीस.. कीसीको पता नही चलेगा.. कोन्ग्रेच्युलेशन..

सायरा : (मुस्कुराते) ओर आपको भी.. अब कहो.. दुबारा कब मीलने आ रहे हो..? हम दोनो सेलीब्रेशन करेगे..

साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. पहेले आप भाइसे बात करलो.. फीर कहेना वो क्या प्रतीक्रीया देते हे.. मे आजाउगा..

सायरा : (मुस्कुराते) वैसे भी दो दीन पहेले वो अपनी प्रोजेक्ट साइटपे जानेकी बात कर रहे थे.. तो वो खुद आपसे बात करलेगे.. ओर आपको बुला लेगे.. तब आजाना.. हम दोनो खुब मजे करेगे..
 
तो गांवमे आज सुबह ब्रीन्दा भी अपने घरपे उल्टीया कर रही थी.. ओर श्रीधर उनकी पीठ सहेला रहा था.. ब्रीन्दाको यकीन हो गयाकी वो लखनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. लेकीन ये बातको अभीके लीये लखनसे छुपानेका फैसला करलीया.. ओर मन ही मन तैय करलीया की वो इस बच्चेको जन्म देगी..

फीरसे सबलोग अपनी नोर्मल लाइफमे बीजी होगये.. लेकीन रजीयाकी आंखोमे देखकर पुनमको सबकुछ पता चल गया.. की इतने दीनो हवेलीपे रहेकर उसने दयाके साथ मीलकर क्या क्या खीचडी पकाली थी.. क्युकी उसे पता थाकी दया ओर रजीयाके बीच पहेलेसे ही लेस्बीयन रीलेशन था..

दोनोके बीच उनकी सादीसे पहेले ही बहुत कुछ तैय हो चुका था.. अब दोनो ही अपने अपने पतीसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. तो दोनोका मक्सद भी पुरा हो चुका था.. लेकीन अभी इसके लीये काफी टाइम था.. ओर पुनमके हीसाबसे सब सही चल रहा था.. ओर दोनोकी योजनासे वो मन ही मन खुस भी थी.. सबकुछ मंजुके कहेनेके हीसाबसे चल रहा था..

इस साम अ‍ेक बार फीर लखन चंदाको लेकर घुमने चला गया.. लेकीन चंदाको पता नही थाकी इनसे पहेले लखनने फोनपे धीरेनसे बात करली थी.. पार्कमे जाते ही चंदा जुठमुठ लखनसे इस बातपे जगडा करने लगी.. की अब वो उनसे रातको मीलने नही आता..

ओर लखनने उसे बडी मुस्कीलसे ये कहेकर मनालीया की इतनी बीवीयोकी वजहसे उनको अकेलेमे मीलनेकी प्रोबलेम हो रही हे.. चलो अभी मील लेते हे.. कहेकर लखनने चंदाको मना लीया.. क्युकी उन्होने पहेलेसे ही भुमीकाके खाली पडे घरकी चाबी लेली थी..

फीर कुछ देर बैठकर लखन चंदाको लेकर भुमीका वाले घरपे चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके दोनो ही अंदर नीचेके बेडरुममे चले गये.. अंदर जाते ही चंदा लखनसे लीपट गइ.. ओर उनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. ओर लखन उसे गोदमे उठाकर बेडपे चला गया..

कुछ ही देरमे पुरे कमरेमे चंदाकी चीखने ओर सीसकारीयोकी आवाज गुंजने लगी.. वो जब भी जडनेकी कगारपे होती लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लेती.. ओर उनसे लीपलोक कर लेती.. जैसे ही जडकर सुस्त हो जाती लखन हाथके बल फीरसे मोरचा सम्हालता..

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ओर चंदाको फीरसे उतेजीत करदेता.. हमेसाकी आदत के मुताबीक इस बार भी लखनने बीना हथीयार बहार नीकाले चंदाकी चुतको दो दो बार अपने पानीसे सीच दीया.. ओर चंदाको ठंडी करके उनको पुरी तराह संतुस्ट करदीया.. फीर दोनोने ही वहा स्नान कीया.. ओर कपडे पहेनकर तैयार होगये..

चंदा : (बाहोमे आकर होठ चुमते) हां तो जानु.. अब चले..?

लखन : (मुस्कुराते हां.. चलते हे.. लेकीन घरपे नही.. कीसी ओर जगाहपे..

चंदा : (सामने देखते) कीसी ओर जगाह..? देर नही होजायेगी..? कहा जाना हे..?

लखन : (दरवाजेपे लोक लगाते सामने देखते) धीरेनके घर.. आज आप उसे माफ करही दो..

चंदा : (सामने देखते) धीरेनके घर..? क्या अभी..? नही.. हम फीर कभी जायेगे..

लखन : (सामने देखते) क्यु..? अभी मीलनेमे क्या प्रोबलेम हे..?

चंदा : (नजरे जुकाते) जानु.. बस.. अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. ओर कुछ नही..

लखन : (मुस्कुराते) मे आपके साथ हुनां..? तो फीर काहेका डर..? आपको उनसे कोइ बात नही करनी.. बस.. वो माफी मांगे तो उसे माफ करदेना.. फीर हम घर वापस आजायेगे..

चंदा : (थोडा गभराते) आप साथ होनां..? अगर वो कुछ कहे तो आप सम्हाल लेना..

लखन : (मुस्कुराते) मेरे साथ होते इनकी कोइ मजाल हे..? जो आपसे कुछ केह सके.. डरो मत.. मे साथ हु..

फीर दोनो घरको लोक करके सीधे ही धीरेनके घर चले गये.. चंदा अ‍ेक बार ये घर देखने आ चुकी थी.. धीरेनने इसे रीनोवेशन करके बहुत ही डेकोरेट करलीया था.. लखनने बेल बजाइ.. ओर धीरेनने दरवाजा खोला.. तो चंदाको देखते ही वो जोरोसे रोने लगा.. ओर चंदाके पांवमे गीर गया..

धीरेनको अ‍ैसे रोते हुअ‍े पांवमे गीरते चंदाकी आंखोसे भी आंसे बहेने लगे.. उसने धीरेनको कंधा पकडकर खडा कीया.. ओर जोरोसे धीरेनको गले लगा लीया.. दोनोकी फुटफुटके रोने लगे.. ओर धीरेन रोते हुअ‍े चंदाकी माफी मांगता रहा.. फीर लखनने दोनोको सांत कीया..

वही बाथरुमके पास सीन्क था.. फीर दोनोने मुह साफ कीया.. ओर धीरेनने दोनोको पानी पीलाया.. फीर तीनो होलमे आकर सोफेपे बैठ गये.. धीरेन चंदासे सटकर बैठ गया.. ओर चंदाके पांव पकडकर फीरसे गीड गीडाते माफी मांगने लगा.. ओर आखीर चंदाने बोला..

चंदा : (आंग गीली करते सरको सहेलाते) चल जा.. माफ करदीया.. क्यु की अ‍ैसी नादानी..?

धीरेन : (नजरे जुकाते) मोम.. तब मुजमे इतनी समज नही थी.. बहुत गुस्सेमे भी था.. बादमे मुजे आप सबके बारेमे सचाइ पता चली.. की आप सब वास्तवमे कौन हे.. मोम.. मेने सही फैसला कीया.. क्युकी मे पुनोके लायक नही था.. पुनो मुजसे बहेतरकी हकदार थी.. ओर मे खुस हुकी उनको अपना बहेतर साथी मील गया हे..

चंदा : (सामने देखते) हां.. अब वो मेरी बेटी हे.. ओर मे खुस हु.. की उनको अपना बेस्ट पार्टनर मील गया हे.. मेरा लखन.. क्या अब भी तुम सींगल हो..?

धीरेन : (लखनकी ओर देखते धीरेसे) येस मोम..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. धीरेन अ‍ेक लडकीसे प्यार करता हे.. बस.. कुछ टाइमके बाद वो उनसे सादी करलेगा.. लडकी को मे मीला हु.. धीरेनके लीये बहुत अच्छी लडकी हे..

चंदा : (मुस्कुराते) क्या..? चलो अच्छा हुआ.. अगर लडकी अच्छी हेतो तुम अपना घर बसालो..

धीरेन : (हाथ थामते) मोम.. आपने मुजे माफ तो करदीयानां..?

चंदा : (सामने देखते) हां.. लेकीन लखन मुजे नही कहेता तो सायद मे तुम्हे कभी माफ नही करती.. खैर.. छोठो अब पुरानी बाते.. बस.. मे चाहती हुकी तुम भी अपना घर बसालो.. ओर नये सीरेसे जींदगीकी सुरुआत करो..

धीरेन : (मुस्कुराते) थेन्क्स लखन भैया.. आप बीलकुल अ‍ेक अच्छा दोस्त हे.. (चंदाकी ओर देखते) मोम.. अब आप कभी कभी मुजसे मीलने आओगीनां..?

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. पहेले तुम सादी करलो.. फीर सोचुगी.. क्युकी अब तो मे यहा मेरे देवरके साथ ही रहेती हु..

धीरेन : (असमजमे देखते) मोम.. क्या आप जीजुके साथ नही रहेती..? मतलब.. सब ठीक तो हेनां..?

चंदा : (मुस्कुराते) चीन्ता मत कर.. सबकुछ ठीक हे.. बस.. मेरे उपर अब वीजयकी जीम्वेवारी हे.. मेने उसे गोद लेलीया हे.. हमारी मंजुका बेटा.. जो अब मेरा बेटा हे.. इसे मे यही पढाउगी.. ओर अ‍ेक बहेतर ओर काबील इन्शान बनाउगी.. जो कमी मेने तुजसे पालनेमे की.. उस कमीको मे वीजयको पालकर पुरी करुगी..

धीरेन : (मुस्कुराते) तब कीतना छोटा था जब मे वहा आता था.. अब तो बडा होगया होगा..

चंदा : (मुस्कुराते) हां.. अभी अ‍ेक महीनेके बाद दो साल पुरे होजायेगे.. खैर.. अब हम चलते हे..

धीरेन : (मुस्कुराते पांव छुते) मोम.. कभी कभी मीलने आया करो.. ओर अगेइन सोरी..

फीर लखन ओर चंदा धीरेनको गले मीलकर वापस घर आगये.. तब चंदा बहुत खुस थी.. मानो उनके उपरसे अ‍ेक बहुत बडा बोज नीकल गया हो.. आते वक्त चंदा लखनसे हस हसके बाते कर रही थी.. ओर लखनकी मस्तीया करते उनसे फ्लर्ट कर रही थी..

इस रात खानेपे सब बैठे थे तब भी चंदा सबके साथ मस्तीया करते बहुत ही हस रही थी.. जैसे पुरानी चंदा वापस आगइ हो.. लेकीन अब रजीया बहुत ही सांत हो चुकी थी.. वो बहुत मुस्कीलसे हस रही थी.. ओर हर वक्त लखनसे नजरे चुरा रही थी.. मानो कीसी अपराध बोध जेल रही हो..

ओर इस बार लखनने भी नोटीस करलीया.. रातमे लखनने सृती राधीका ओर रजीयाको खुब जमकर पेला.. लेकीन इस बार रजीया कुछ खास प्रतीक्रीया नही दे रही थी.. देर रात सब सो गये तो लखन पुनमसे चीपककर सो गया.. तो पुनम भी लखनकी बाहोमे आ गइ.. ओर उनकी बाहेपे सर रख दीया..

लखन : (बहुत धीरेसे) पुनो.. अ‍ेक बात पुछनी थी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे सब पता हे आपको क्या पुछना हे.. लेकीन अभी नही.. हम अकेले होगे तब बात करेगे.. कल हम तीनो भावीकाके घर जा रहेहेनां..? तब बात करेगे..
 
आज सुबह धृवके घरपे भावीका धृव ओर उनकी मम्मी.. तीनो चाइ नास्ता कर रहे थे.. तब भावीकाने घरके नोकरोको दो हजार रुपीये दीये.. ओर यहा काम खतम होते ही उनके घरकी सफाइ करनेको कहा.. तो तीनो नोकर भी खुस होगये.. क्युकी वो भावीकाके घर सफाइ करनेको उत्सुक रहेते..

क्युकी भावीका हर पंद्नह दीनमे अ‍ेक बार अपने घरकी सफाइ नोकरोसे करवाती.. जहा वो सादीसे पहेले रहा करती थी.. हर वक्त वो नोकरोको दो हजार रुपये सफाइ.. ओर खानेके लीये देती.. नोकरो भी चारसो पांचसो रुपयेका खाना खाते.. ओर बाकीके पंद्नसो रुपये तीनो आपसमे बांट लेते..

ओर ये सब हर दो हप्तेके बादका रुटीन हो गया था.. तो धृव ओर उनकी मम्मीने भी कोइ सवाल नही कीये.. फीर चाइ नास्ता करते भावीका उनकी सास ओर धृवके गालको चुमकर अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. ओर यहा पहोंचकर उसने सृतीको फोन लगाया..

सृती : (फोन उठाते ही मुस्कुराते) हां कुती बोल.. आज सुबह सुबह ही तुजे फोन करनेका टाइम मील गया..?

भावीका : (मुस्कुराते) कमीनी सुबह सुबह गालीया तो मत दे.. सुन.. आज साम पांच बजे तुम ओर पुनमदीदी आ रहे होनां..?

सृती : (मुस्कुराते) हां.. सुबह चाइ नास्तेपे पुनोदी वही बता रही थी.. हम तीनो आ रहे हे.. मे पुनोदी ओर लखन..

भावीका : (सुनतेही खुस होते) सुन.. ठीक पांच बजे पहोंचजाना.. मे वहा थोडी जल्दी चली जाउगी.. वही कुछ नास्ता बास्ता करगे.. मे साथमे लेकर जाउगी..

सृती : (मुस्कुराते) ओके.. लेकीन हम आयेगे कहा..? कुछ अ‍ेड्रेस बेड्रेस तो दे..

भावीका : (मुस्कुराते) अभी तुजे सेन्ड करती हु.. चल बाय.. पेसन्ट हे..

कहेते भावीकाने फोन रख दीया.. ओर उसने आरतीको बुलाकर सामके सभी अ‍ेपोइटमेन्ट ना लेनेको कहा.. फीर उसने सृती ओर लखन दोनोको अपने पुराने घरका अ‍ेड्रेस सेन्ड करदीया.. वो खास करके लखनसे मीलनेके लीये बहुत ही उत्साहीत थी.. क्युकी अब उनको लखनको मीले बीना कही चेइन नही मीलता था..

तो दुसरी ओर भावीकाके जाते ही उनकी सास अपने बेटे धृवकी ओर देखकर कामुक स्माइल करने लगी.. उनको अ‍ेबोर्सन करवाये काफी दीन होगये थे.. ओर अब वो बीलकुल ठीक लग रही थी.. इसीलीये आज बडे बेसब्रीसे अपने बेटेको मीलनेके लीये भावीका ओर नौकरोके जानेका इन्तजार कर रही थी.. जैसे ही सब नोकर भावीकाके घरकी सफाइ करने चले गये..

तब वो धृवको उपरके बेडरुमकी ओर इसारा करते सीडीया चडने लगी.. ओर धृव भी घरका गेइट बंध करते उपरकी ओर अपनी मम्मीके पीछे चला गया.. जैसे ही वो रुममे गया.. उनकी मम्मीने रुमका दरवाजा बंध करदीया.. फीर धृवकी बाहोमे समा गइ.. धृव उनको अपनी गोदमे उडाकर बेडकी ओर चला गया..

कुछ ही देरमे दोनोके कपडे अ‍ेक मेजपे पडे अपनी कीस्मतपे रो रहे थे.. पुरे कमरेमे धृवकी मम्मीकी सीसकारीयोकी आवाज गुजने लगी.. अब दोनो ही अपने प्रोटेक्शनका खयाल रखने लगे थे.. धृव अपने हथीयारपे कोन्डम चडाकर अपनी मम्मीके दोनो पैर अपने कंधेपे लेकर उसे जोरोसे चोद रहा था..

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अ‍ैसा नही थाकी ये कभी कभार ही होता था.. भावीकाके घरसे नीकलते ही दोनोकी रुटीन लाइफ होगइ थी.. अब धृवकी मम्मीको धृवसे हर दिन ओर रात जमकर चुदवानेकी आदत हो चुकी थी.. इसी वजहसे वो धृवसे तीन बार प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. हाल ही मे अ‍ेक महीने पहेले ही उनका तीसरी बार अ‍ेबोर्सन हो चुका था..

अ‍ेबोर्सनके बाद दोनो कुछ दीन सख्तीसे अपनी प्रोटेक्शनका खयाल रखते.. फीर धीरे धीरे दोनो ही फीरसे बीना सेफ्टीसे चुदाइ करने लगते.. क्युकी धृवको कोन्डम लगाना अच्छा नही लगता था.. क्युकी उसे जो फीलींन्ग्स चाहीये उसे वो कोन्डम लगानेसे नही मीलती थी..

ओर उनकी मम्मी भी कइ बार आइपील लेना भुल जाती थी.. ओर सायद यही वजह थी जो ज्यादातर लडकी धृवसे चुदवाकर प्रेटनेन्ट हो जाती.. आज धृवकी बहेन पुजाकी कोखमे उन दोनोका दुसरा बच्चा पल रहा था.. ओर पुजा अपने ससुरालमे पाल रही थी..

बस.. उनमे सीर्फ भावीका ही बाकात रह थी.. क्युकी धृव हमेसा उनके पीछवाडेका दीवाना था.. ओर भावीका भी नही चाहती थीकी उनको धृवसे बच्चा पैदा हो.. धृव ओर उनकी मम्मीको लगता थाकी उनके अफैरके बारेमे भावीकाको कुछ नही पता.. लेकीन दोनोको पता नही थाकी भावीकाको उनका हर राज मालुम था..

जीसे भावीकाने छुपकर मां बेटेकी कइ वीडीयो क्लीप भी बनाली थी.. ओर आरतीसे भी सबुत अ‍ेकठा करलीया.. ताकी अपनी मुसीसबतमे वो उनका इस्तमाल कर सके.. लेकीन ज्यादार भावीका अपने इलीगल कामकी वजहसे चुप ही रहेती.. भावीका चार बजे ही अपनी क्लीनीक्स नीकल गइ..

ओर रास्तेसे कुछ ठंडेकी बोतल.. ओर नास्ता थी साथ लेगइ.. उनको नही पता थाकी आज सामसे ही उनकी जींदगी पुरी तराह बदलने वाली हे.. पुनमसे अपने अतीतके बारेमे जानकर वो काफी उत्साहीत थी.. लेकीन कुछ बात उनको पुनमने नही बताइ थी.. जो उसीका खुलासा करने आज पुनम आने वाली थी.. ठीक साम पांच बजे पुनम सृती ओर लखन घरसे नीकल गये.. ओर भावीकाने दीये हुअ‍े पते पे पहोंच गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९२

ओर रास्तेसे कुछ ठंडेकी बोतल.. ओर नास्ता थी साथ लेगइ.. उनको नही पता थाकी आज सामसे ही उनकी जींदगी पुरी तराह बदलने वाली हे.. पुनमसे अपने अतीतके बारेमे जानकर वो काफी उत्साहीत थी.. लेकीन कुछ बात उनको पुनमने नही बताइ थी.. जो उसीका खुलासा करने आज पुनम आने वाली थी.. ठीक साम पांच बजे पुनम सृती ओर लखन घरसे नीकल गये.. ओर भावीकाने दीये हुअ‍े पते पे पहोंच गये.... अब आगे

भावीकाका घर नही था.. वो अ‍ेक बंगलो था.. ना छोटा.. ना बडा.. बस.. चार पांच लोगोके लीये पर्याप्त था.. भावीकाने सबको गले मीलकर स्वागत कीया.. ओर लखनको गले मीलते थोडा जोरोसे भीच लीया.. ओर कमरपे चुटकी काटी.. तो सृती ओर पुनम दोनो ही हसने लगी.. फीर सब लोग अंदर आगये..

जबसे सृतीकी मंजु ओर पुनमसे बात हुइ.. ओर भवीस्यकी पुरी योजना बताइ तबसे सृतीकी भावीकाके प्रती जलनकी भावना खतम हो चुकी थी.. अब वो लखन ओर भावीकाको मीलनेकी वजहसे लखनसे नाराज नही रहेती थी.. भावीकाने तीनोको पुरा बंगलो दीखाया.. फीर सब लीवींगमे आकर सोफेपे बैठ गये..

सृती : (मुस्कुराते) कमीनी.. तेरा घर तो काफी बडा हे.. तेरा ससुराल वाला कीतना बडा हे..?

भावीका : (मुस्कुराते) वो आपके बंगलो जीतना ही बडा हे.. उपर चार कमरे.. नीचे दो.. बेड होल कीचन.. लेकीन ये मेरे लीये पर्याप्त हे.. अरे.. पानी देना तो भुल गइ.. बैठो मे लेकर आती हु..

सृती : (खडी होते) अरी तु बैठ.. बाते कर मे लेकर आती हु..

फीर कुछ औपचारीक बाते करते हे.. तबतक सृतीने सबको पानी पीलाया.. फीर वो भी सबके साथ आकर बैठ गइ.. पुनमने उसे अ‍ेक पुराने बक्षेके बारेमे पुछा.. तो भावीका याद करते सोचमे पड गइ.. लेकीन उसे कुछ याद नही आ रहा था.. तभी उसने उनके मम्मीके रुमके बारेमे पुछा.. ओर भावीकाको कुछ याद आ गया..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. सायद आपकी मम्मीके रुममे बाथरुमके उपर अ‍ेक छोटी जगाह हे.. जहा हम बेकारकी चीजे रखते हे.. वही मुजे दीख रहा हे.. अ‍ेक छोटासा बक्षा..

भावीका : (कुछ याद आते) अरे हां.. याद आगया.. लेकीन मेने उसे डीकसे देखा भी नही.. सायद उनमे तो मम्मीके ओफीसके कुछ कागजात ओर उनके पहेचानके कागजात हे.. ओर कुछ नही..

पुनम : (मुस्कुराते) अरे वो लेकर तो आइअ‍े.. फीर मे कुछ दीखाती हु..

भावीका : (खडी होते) बहुत उपर हे.. सायद छोटी सीडी लगानी पडेगी.. हे हमारे पास.. लखन.. प्लीज.. आप कुछ मदद कर दीजीयेनां.. मे वहा नही पहोंच सकती..

लखन : (हसते खडा होते) मुफ्तमे मजदुरी करवा रही हो.. देखना अगर कोइ खजाना बजाना नीकला तो मे भी हीस्सा लुगा.. भले ही मजदुरी समजके दे देना..

भावीका : (हाथ पकडकर खीचकर लेजाते) अरे पुरा खजाना दे दुगी.. चलो तो सही..

भावीका हाथ पकडर उसे रुममे ले गइ तो पुनम ओर सृती हसने लगी.. भावीकाने उसे अ‍ेक बडा टेबल लाकर दीया ओर लखन उनपे चड गया ओर अ‍ेक बक्षा लेकर भावीकाके हाथोमे दे दीया.. फीर टेबलसे उतर गया.. देखा तो भावीका बक्षा लेकर खडी थी.. ओर लखनने उनके दोनो उरोजोको थामते पीछेसे बाहोमे भीच लीया..

भावीका : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे फुस फुसाते) अरे क्या कर रहे हो.. वो दोनो बहार हे.. अभी छोडो मुजे.. अगर प्यार करना हेतो कल दोपहोर क्लीनीकपे आजाना.. फीर वहा जीतनी मरजी करे प्यार कर लेना..

कहा तो लखनने उनके होठोको चुमलीया ओर उसे छोड दीया तो भावीका लखनकी ओर कामुक स्माइल करते बक्षा लेकर बहार चली गइ.. फीर सबने उनको खोला.. ओर कागजात देखने लगे.. तधी पुनमने अ‍ेक दुसरे खानेमे से दो फाइल नीकाली.. ओर भावीकाको थमा दी..

पुनम : लीजीये.. ये देखीये.. इनमे कुछ मीलेगा.. बहुत बडा सरप्राइज..

भावीका : (सामने देखकर मुस्कुराते फाइल लेते) अरे.. इनको कहासे नीकाला.. येतो मेने देखी ही नही..

फीर चारो अ‍ेक फाइल देखने लगे.. ओर देखते ही भावसका सृतीकी आंख खुसीके मारे बडी होगइ.. देखा तो उनमे पचास पचास लाखकी ६(छे) बेन्ककी अ‍ेफ.डी.की रसीदे पडी हुइ थी.. ओर लगभग इनकी दो बार अवधी समाप्त हो चुकी थी.. जीनक आजकी तारीखमे १२(बाराह) करोडसे भी अधीक रासी होगइ थी..

उनको देखते ही भावीकाकी आंखोमे खुसीसे आंसु आगये.. क्युकी अबतक वो अपनी क्लीनीकसे दोसे ढाइ करोड ही जमा कर पाइ थी.. फीर सबलोग दुसरी फाइल देखने लगे.. तब उनमे उनके पापाकी फेक्टरीके कुछ कागजात नीकले.. जो अ‍ेक वसीयतकी तराह अनुबंध था..

सबने पढा.. ओर सबकी आंखे चकाचौंद होगइ.. उनमे भावीका उनकी अ‍ेक लौती संतान थी.. फीर उनमे अ‍ेक बचपनके दोस्तका जीक्र था.. जो फेक्टरीका लीगल अ‍ेडवोकेट था.. ओर उनमे उलेख था.. की जीस दीन वो या उनकी मम्मी नही रहेगे तबसे ये अनुबंध लागु हो जायेगा..

उनमे ये भी लीखाथा की इनकी अ‍ेक कोपी उनके वकीलके पास.. यानीकी उनके दोस्तके पास हे.. ओर भावीकाकी पुर्ण पहेचानके बाद उनका हक उनको दे दीया जायेगा.. इनमे उनके वकीलका नाम ओर उनका फोन नंबर पता भी दीया हुआ था.. ओर उनको कोन्टेक्ट करनेके लीये लीखा था..

वकीलका नाम सुनतेही भावीकाको बचपनकी यादे धुंधली होगइ.. की वो बचपनमे कैसे अपनी हम उम्रकी अ‍ेक लडकीके साथ खेलती थी.. जब उसे होस्टेलपे ले जा रहे थे तब वो लडकी अपनी मम्मीसे लीपटकर कैसे रो रही थी.. ओर उसे होस्टेलपे जानेके लीये मना कर रही थी..

तभी भावीकाका ध्यान अ‍ेक छोटेसे लीफाफे पे पडा.. तो भावीकाने उन लीफाफेको सावधानीसे खोला.. तो उनमे उनकी मम्मीका अ‍ेक पत्र था.. जो उसने भावीकाके नाम लीखा था.. ओर भावीका पत्र पढने लगी.. जब पत्र समाप्त हुआ तो पढते ही भावीका अपना चहेरा हथेलोओमे छीपाकर फुटफुटकर रोने लगी..

पुनम ओर सृतीने थोडी देर उनको रोने दीया.. फीर सृती पानी लेकर आइ ओर भावीकाको पीलाया.. जब भावीका सांत हुइ तो पत्र सृतीको देकर बाथरुममे मुह धोने चली गइ.. तब पुनम ओर सृती उनकी मम्मीका पत्र पढने लगी.. उनमे भावीकाको संबोधन करके लीखा था..
 
मेरी प्रीय बेटी भावीका.. मे ये पत्र इसीलीये लीख रही हु सायद मे ना रहु तो अपने दीलकी बात तुजे केह सकु.. जब ये पत्र तुजे मीलेगा तब तेरे पास सबकुछ होगा.. सायद तु सोच रही होगी की इतनी दोलत थी तो मुजे होस्टेलमे क्यु रखकर पढाया.. क्युकी मेने तेरे अ‍ेकाउन्टमे इतने ही पैसे रखे थे जीनमे तेरी पढाइ ओर होस्टेलका खर्चा ही पर्याप्त हो.. अगर मे तुजे तभी सबकुछ दे देती.. तो तुजे पैसोकी अहेमीयतका कभी पता नही चलता..

ओर हो सकता हे तु अ‍ेक अयास लडकी होजाये.. बेटा.. अ‍ेक दीन राजाका भंडार भी समाप्त हो जाता हे.. ओर मे चाहती हुकी मेरी बेटीको दुजीया दारीका ज्ञान हो.. तु पैसोके लीये थोडा संघर्स ओर महेनत करे.. ओर पुर्ण परीपकव होजाये.. ताकी तुजे पैसोकी अहेमीयतका पता चले.. बाकी तेरे लीये इतने पर्याप्त पैसे छोडे हे तुजे पुरी जींदगी कुछ करनेकी जरुरत ही नही हे..

मेने अ‍ेफडी की रसीदे ओर फेक्टरीके पेपर छोडे हे.. मेरा ये पत्र लेकर हमारे वकील पंकजभाइके पास चली जाना.. इनमे उनका कोन्टेक्ट नंबर हे.. तेरे पापाके बचपनके दोस्त हे.. मेरे चहीते देवर.. उसे पत्र दीखाना वो सबकुछ समज जायेगे.. बस.. वो जैसा कहे करती जाना.. ओर दुसरी बात.. बेटा.. मेरे ओर तेरे पापाके बारेमे दुनीया भले ही कुछ भी कहे.. कीसीकी बात मत सुनना.. क्युकी मे तेरे पापाकी रखैल नही थी..

हम दोनोने बाकायदा मंदीरमे फेरे लेकर सादी करली थी.. इनके साक्षी मेरा चहीता देवर ओर देवरानी भी हे.. ओर इन बक्षेमे हमारी सादी वाली तसवीर भी हे.. सीर्फ तेरे जानकारीके लीये.. ताकी तुजे दुनीया वालोसे ताने ना सुनना पडे.. बस.. भगवान तुजे खुस रखे.. तेरी प्यारी मम्मी..

पत्र इतना भावुक थाकी पुनम ओर सृतीकी आंखे भी नम होगइ.. पत्र पढा तबतक भावीका भी आ चुकी थी.. ओर बक्षेसे अ‍ेक तसवीर नीकालकर उसे देख रही थी.. उनमे उनकी मम्मी ओर पापाकी सादीकी तसवीर थी.. फीर भावीका ठंडेकी बोटल ओर समोसे लेकर आइ.. फीर सब बंडा ओर समोसा खाते बाते करने लगे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां तो भावीका दीदी.. अब आगे आपका क्या प्लान हे..?

सृती : (बीचमे ही) भावु.. अब तेरे पास इतने पैसे हे.. तो फीर छोडदे अपना इलीगल काम.. सब पैसोके लीये ही करती थीनां..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. मे भी यही सोच रही हु.. अब छोड दुगी ये इलीगइ काम..

पुनम : (मुस्कुराते) ओर सायद इसीलीये धृवभैयासे सादी कीथी.. हेनां..? तो फीर अब..?

भावीका : (हांमे गरदन हीलाते) हां.. अब..? अ..ब.. पहेलेतो वो वकील पंकज चाचासे मीलुगी.. फीर कुछ तैय करते हे.. दीदी.. आपको तो सबकुछ पता चल जाता हेनां..? तो फीर बताइअ‍े.. मेरा उजवल भवीस्य कैसा होगा.. मतलब.. मेरे लीये क्या उचीत होगा..? क्युकी अ‍ेक बात तो पकी हे.. अब मे उस घरमे तो नही रहुगी.. जहा मेरा मानसीक ओर सारीरीक सोसण हो रहा हे..

पुनम : (मुस्कुराते) अ‍ेक्जेटली.. मे भी आपको वही बताने वाली थी.. आप पहेले अपने वकील चाचासे मत मीलो उनसे पहेले अपने घरका मामला सुलजालो.. आपके लीये यही बहेतर हे.. वरना फसनेका डर हे..

भावीका : (मुस्कुराते) वोतो बहुत आसान हे.. मेरे पास उन मां बेटेकी कइ वीडीयो क्लीप हे..

लखन : (सामने देखते) ये.. हेलो.. मेडम.. आप जीतना सोच रही हो वो इतना भी आसान नही हे.. मत भुलो वो लोग कौन हे.. बडे पोलीटीशयन.. ओर वो भी मंत्री.. इनका मतलब भी जानती होनां..? आपका जीना हराम कर देगे.. आपको अपनी क्लीनीक चलानी हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. भैया सही केह रहे हे..

भावीका : (थोडा डरते मुस्कुराते) यार.. आप लोग थो मुजे डरा रहे हो.. इस बारेमे तो मेने सोचा ही नही हे.. मुजे नही रहेना इस सहेरमे.. मे कीसी ओर सहेरमे चली जाउगी.. जहा उनकी पहोंच नाहो.. बंध कर दुगी इस क्लीनीकको..

सृती : (गुस्सेसे देखते) कमीनी.. तो..? यहासे उनके डरसे भाग जाओगी..? (धीरेसे) क्लीनीक बंध करनी हे.. तो फीर क्लीनीक बंध करके क्या करोगी..? ये भी सोचा हे..?

भावीका : (थोडी परेसान होते) यार.. तो फीर मे क्या करु..? अब इतने पैसे आगये हे.. नही कमाना ओर पैसा.. मे कही दुर जाकर गरीब महीलाओका इलाज करके अब सीर्फ सेवा करुगी..

लखन : (जटसे बीचमे बोलते) हेय.. हेय.. हेय.. देवीओ.. अगर आप तीनो मुजे इजाजत देतो क्या इस केसको मे हेन्डल करु..? आपकी सुरक्षाकी पुरी गेरंटी मेरी..

भावीका : (अ‍ेक पल पुनम सृतीकी ओर आस्चर्यसे मुस्कुराते लखनकी ओर देखते) स्योर.. कहीये..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भावु दीदी.. भाइ हेन्डल कर लेगे.. वीस्वास रखो..

भावीका : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. इनपे मुजे पुरा वीस्वास ओर भरोसा हे.. लखन कहीये..

लखन : (मुस्कुराते) सबसे पहेले तो आप अपना डीवोर्सका पेपर तैयार रखो.. फीर दोनोको रंगे हाथो पकडकर वही साइन लेलो.. उनके पास पावर हेतो क्या हुआ..? वो भी इजतदार लोग हे.. अगर वो कोइ धमकी की भासामे बात करे तो केह देना.. मेरे दो दोस्त ओर मेरे वकीलके पास भी इनका बेकअप हे.. अगर मुजे कुछ हुआ तो वो लोग इनको सोसीयल मीडीयापे सार्वजनीक करदेगे.. आपको कुछ नही कहेगे.. चुपचाप साइन करदेगे..

भावीका : (मुहपे हाथ रखते हसते) वाव.. ये बहुत बडीया आइडीया हे.. आइ केन डु इट..

पुनम : (मुस्कुराते अपनी बात रखते) दीदी.. अगर आपको सेवा ही करनी हेतो हमारा गांव आपका स्वागत करता हे.. वहा बडे भैया अ‍ेक बहुत बडी होस्पीटल.. ओर स्कुल बनवा रहे हे.. आप वही आकर रेह सकती हे ओर सेवा भी कर सकती हे.. क्युकी कुछ दीनोके बाद हम वही वापस रहेने जा रहे हे..

सृती : (उत्साहसे सामने देखते) हां भावु.. पुनोदी ठीक केह रही हे.. वहा तुजे कोइ खतरा नही हे.. ओर सुन.. जबतक होस्पीटल कंपलीट नही हो जाती तबतक तु मेरी क्लीनीकपे मेरे साथ बैठ सकती हे.. ओर तु कलसे ही अपने पेसन्टको वहीका अ‍ेड्रेस दे देना.. ओर कहेना अब मे वहा मीलुगी..

भावीका : (खुसीसे आंखमे आंसु आगये) यार तुम सब मेरे लीये कीतना कुछ कर रहे हो.. ठीक हे.. कही तो जाना था.. तो आपका गांव क्यु नही..? मे वहा आउगी..

पुनम : (सबकुछ पता था फीर भी मुस्कुराते) दीदी.. वहा आपके रेहेना इन्तजाम होजायेगा.. क्या आप हमारे साथ रहेना पसंद करोगी..? हमारी बहुत बडी हवेली हे..

भावीका : (आंसु पोछते मुस्कुराते) दीदी.. क्यु सर्मीन्दा कर रही हो.. आप लोग रोयल फेमीली हो.. तो हवेलीतो बडी ही होगी.. मेरा सौभाग्य हे.. जो आप मुजे अपने साथ रहेनेके लीये केह रही हो.. सृती.. क्या तुम भी वहा रहोगी..?

सृती : (मुस्कुराते) दोनो जगाहपे.. यहा भी तो क्लीनीक चलानी हे.. लेकीन तु फीकर मत कर.. वहा अ‍ेक लेठी डोक्टर भी हे.. ओर अ‍ेक लडकी भी आ रही हे.. नइ फ्रेसनर.. दो साल वही पढ रही हे.. जहा हमने डोक्टरकी डीग्री लीथी.. बस.. तेरी नीगरानीमे उसे भी तैयार करदे.. फीर तुम दोनो लेडीसका पुरा डीपार्टमेन्ट सम्हाल लेना..

पुनम : (मुस्कुराते) पहेले आप डीवोर्स लेलो.. फीर इन रसीदका कुछ करो.. बादमे अपने वकील चाचाको मीलना.. सब आसान रहेगा..

भावीका : (मुस्कुराते) यार.. उसे अकेले मीलनेमे डर लग रहा हे.. मीन्स.. थोडी नर्वसेस.. लखन.. क्या आप उनसे मीलने मेरे साथ आओगे..?

लखन : (हसते) देखीये मेडम.. आप जहा कहोगी वहा हम चलेगे.. लेकीन इसके लीये मेरी फीस होगी..

सृती : (जोरसे हसते लखनकी जांगपे चपत लागाते) भाइ.. कीतने कमीने हो आप.. इसे दो दो बार होटेलपे ले गये.. फीर भी फीस वसुल करोगे..? वहा फीस वसुल नही की क्या..? हें..हें..हें..

इतना सुनते ही भावीका अपना दोनो हाथ मुहपे रख लेती हे.. फीर अ‍ेकदम सरमसे पानी पानी होते सृतीकी ओर देखकर मुस्कुराने लगती हे.. उसे पता ही नही थाकी वो लखनसे दो बार होटेलमे मीली इस बारेमे सृती या पुनमको भी पता होगा.. उनके गाल सर्मसे लाल होगये..
 
सृती : (हसते) कमीनी देख क्या रही हे.. मत भुल पुनोदीको सब पता चल जाता हे.. हें..हें..हें..

भावीका : (हाथोमे मुह छुपाते) सोरी.. मुजे लगा..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. सरमाओ मत.. उस दीन भैया मुजसे सब बताकर ही आपके पास आये थे.. ये हमसे कुछ नही छीपाते..

भावीका : (अभी भी मुहपे हाथ थे धीरेसे सरमाते) दीदी.. तो क्या आप दोनोको बुरा नही लगा..? मतलब..

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी हमे पता हे इनकी जींदगीमे कोन कोन ओरत या फीर लडकीया आयेगी.. ओर आप भी कोइ सामान्य ओरत नही हो.. हम मेसे ही अ‍ेक हो.. ओर वो सब आगे चलकर आपको सब पता चल जायेगा.. बस.. तीन चार दीन ओर इन्तजार कीजीये..

सृती : (मुस्कुराते) भावु.. तु फीकर मत कर.. हमे कोइ बुरा नही लगा.. बस.. थोडासा मजाक कर लीया.. लखन भैया तेरे साथ आयेगे.. जब जाना हो इस कोल कर देना.. (जोरोसे हसते) हां.. इसके लीये ये थोडी फीस वसुल करेगे.. तो तैयार रहेनां.. हें..हें..हें..

पुनम : (जोरसे हसते) सृतीदी.. इनकी ज्यादा टांगे मत खीचो वरना भावीकासे तो बादमे वसुल करेगे.. इनसे पहेले आपसे वसुल ना करले.. हें..हें..हें..

सृती : (भडकते) दी..दी.. क्यु इसे उक्सा रही हो.. ये तो सचमुच पागल हे.. आपको तो पता हेनां..?

लखन : (गरदनको दबोचते) अच्छा मे पागल हु.. अभी बताता हु..

पुनम : (जोरोसे हसते) क्यु..? उस दिन सरम नही आइ थी.. जो आप सबने इनको मेरे खीलाफ उक्साया था.. इन्होने सबके सामने ही मेरी कुटाइ करदी थी.. ओर आप सामने बैठकर सब मजे ले रही थी.. (लखनकी ओर इसारा करते) लखन भैया.. अच्छा मौका हे.. हो जाये.. हें..हें..हें..

सृती : (खडी होते भागनेकी कोसीस करते) नो लखन भैया.. नो.. नो प्लीज..

इनसे पहेले सृती जोरोसे हसते खडी होते भागनेकी कोसीस करती लखनने उसे हाथ पकडकर अपने उपर खीच लीया.. पुनम ओर भावीका जोरोसे हसते देखती रही.. तब लखन ओर सृती हाथ पाव चलाते अ‍ेक दुसरेके उपर हावी होनेकी कोसीस करने लगे.. तभी लखनने सृतीकी लंहेंगेका नाडा खीच लीया..

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अ‍ैसी बाते सुनते लखनका हथीयार तो पहेलेसे ही जटके मार रहा था.. ओर पुनमने उसे मौका दे दीया तो लखन कैसे छोडदेता..? लखनने सृतीका लहेंगा खीच लीया तो सृती जोरोसे हसते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही.. ओर लखनने भी पेन्ट घुटनो तक करते अपना हथीयार नीकाल दीया..

जीसे देखकर भावीका बहुत ही सर्मसार होते टेडी नजरोसे देखते हसती रही.. तबतक लखनने सृतीको वही सोफेपे पटक दीया ओर उनके उपर छा गया.. तब सृतीकी चुतपे लखनका लंड दस्तक देते अंदर घुसनेकी कोसीस कर रहा था.. तभी सृती नो.. नो.. नो.. करते जोरोसे चीख पडी..

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जो उनकी चीख लखनके मुहमे ही दब गइ.. क्युकी लखनके सांपने अपने बीलका रास्ता ढुंढ लीया था.. ओर बीलमे घुस चुका था.. तब लखन जोरोसे कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. तो सृतीने लखनसे छुटनेकी कोसीस छोडदी.. ओर कामुक सीसकारीया करते लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे..

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सृती भुल गइकी सामने भावीका ओर पुनम बैठे मजे ले रही हे.. उनकी कामाग्नी इतनी प्रजलीत होगइ की वो अपनी कमर उछालते बडी ही कामुक्तासे सीसकारीया करते लखनका साथ देने लगी.. जीसे देखते भावीका ओर पुनमकी चुतमे भी खुजली होने लगी.. ओर पानी छोडने लगी.. कुछ देर अ‍ैसे ही चुदाइ चलती रही..

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सृती अ‍ेक बार जड चुकी थी.. दोनो ही इतने जोसो चुदाइ कर रहे थेकी जल्दी जडनेकी कगारपे पहोंच गये.. लखनने जोरोसे सृतीके होठोसे लीपलोक करलीया तो सृतीने भी लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर बडी आंखोसे लखनको देखते अपनी कमरको जटके देने लगी.. तब लखन भी कमरको जटकते जडने लगा..

सृती अपनी सांस दुरस्त करते लखनकी पीठको सहेलाने लगी.. जब जोस ठंडा हो गया तब उसे अहेसास हुआकी सामने पुनम ओर भावीका हसते दोनोके मजे ले रही हे.. तब सृती सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनको अपने उपरसे हटाते चुतपे रुमाल रख दीया.. ओर सोफेसे जटसे खडी होगइ..

फीर अपना लहेंगा उठाकर दांत पीसते लखनको तीन चार मुके जड दीये.. ओर लहेंगा लेकर बाथरुममे भाग गइ.. तो पुनम ओर भावीका जोरोसे हसते उनको देखती रही.. तभी पुनमने भी हसते हुअ‍े लखनको बाथरुमकी ओर इसारा कीया तो लखन पुनमके होठोको चुमते बाथरुममे चला गया.. तब..

भावीका : (हसते धीरेसे) दीदी.. क्या लखन घरपे भी सभी बीवीओके साथ अ‍ैसे ही करते हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) अरे भावु.. पुछो ही मत.. भैया बडे ही कमीने हे.. अ‍ेक बार सबके सामने मेरी भी अ‍ैसी कुटाइ हो गइ थी.. सृतीके साथ ये दुसरी बार हे.. घरमे अ‍ैसे ही सब मस्ती मजाक चलते रहेता हे.. बस.. अ‍ेक बार आप आजाओ..

भावीका : (मुस्कुरते आस्चर्यसे देखते) मे आजाउ..? मतलब..? आपको सब पता हेनां..?

पुनम : (बातको सम्हालते) अरे कुछ नही.. बस अ‍ैसे ही मुहसे नीकल गया..

तधी इधरसे लखन तो रुमसे सृती फ्रेस होकर बहार आगये.. तो दोनो उनकी ओर देखने लगी.. तो लखनको देखते ही सृती कातील नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. जैसे ही लखन पास आया सृतीने फीरसे लखनकी पीठपे दो तीन मुके जड दीये.. तो लखनने सृतीको गोदमे उठालीया तो सृती जोरोसे हसने लगी.. फीर दोनो आकर सोफेपे अ‍ेक दुसरेसे सटकर बैठ गये.. तभी..

पुनम : (मुस्कुराते) तो दीदी.. अब तो हमारे गांव आ रही होनां..?

भावीका : (लखनकी ओर देखकर मुस्कुराते) हां.. अब तो आना ही पडेगा.. अब मेरा आसीयाना वही होगा.. ओर मे गांवके होस्पीटलके लीये कुछ ओर भी करुगी..

पुनम : (मुस्कुराते) तो फीर हम चले..? आप कल बेन्कका काम नीपटालो..

भावीका : (मुस्कुराते) दीदी.. थेन्क्स.. पता नही आपका सुक्रीया कैसे अदा करु.. मुजे तो पता ही नही थाकी मेरे पास इतनी दौलत हे.. ओर पता नही आगे क्या होगा.. (लखनकी ओर देखते) लखन.. आप कल मेरे साथ बेन्कपे आ रहे होनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. स्योर.. जब जाना हो कोल करदेनां..

भावीका : (मुस्कुराते) थेन्क्स..

सृती : (खडी होते जोरोसे हसते) तु फीकर मत कर.. तुजे सुक्रया अदा करनेकी जरुरत नही हे.. वो सब हम अपने पतीसे वसुल करवा लेगे.. हें..हें..हें..

कहतो भावीका फीरसे सर्मसार होगइ.. ओर वो हसते जुठा गुस्सा करते सृतीकी पीठमे मुका मारने लगी.. फीर पुनम ओर सृतीके गले लग गइ.. ओर आखीर लखनको गले मीली.. तब लखनने अचानक भावीकाको होठोपे चुम लीया.. तो भावीका सर्मसार होगइ.. लखनसे जटसे दुर हो गइ..
 
पुनम : (हसते) भाइ.. अब चलो भी.. वरना यही फीरसे सुरु होजाओगे.. बाय दीदी..

जब लखन पुनम सृती भी चले गये.. तो भावीकाने भी पेपरकी दोनो फाइल लेकर घरको ताला लगादीया.. ओर अपनी कलीनीकपे चली गइ.. वहा पेपर छुपाकर रखदीये.. वहीसे उसने अ‍ेक वकीलसे अ‍ेपोइटमेन्ट लेली.. फीर अपने घर चली गइ.. तो इधर घरकी ओर जाते पुनम कारमे..

पुनम : (सामने देखते थोडी गंभीर) भाइ.. मुजे आप दोनोसे कुछ बात करनी हे.. आप कारको कीसी आइसक्रीम पार्लरमे लेलो..

सृती : (सामने देखते) दीदी.. डीनरका टाइम भी होगया हे.. क्या हम घर जाकर रातमे बात करे..? सब सोजाये तब..

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. आप घरपे फोन करके बोलदो.. की भावीकाका काम अभी खतम नही हुआ.. आधा घंटा ओर लगेगा.. आप लोग डीनर करलो.. हम आकर कर लेगे..

सृती : (मुस्कुराते) अच्छा.. समज गइ.. बात थोडी गंभीर होगी.. मे फोन कर देती हु..

कहेते सृती घरपे फोन करके बता देती हे.. लखनने अ‍ेक प्राइवेट केबीन वाले पार्लरमे कार रोकदी.. ओर तीनो अंदर अ‍ेक प्राइवेट केबीनमे चले गये.. लखनने आइसक्रीम ओर्डर कीया.. ओर दो केजी घरके लीये पेक करनेको कहा.. जब आइसक्रीम आगइ तो लखन ओर सृती पुनमकी ओर देखने लगे..

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. आप रजीया दीदीके बारेमे पुछ रहे थेनां.. इस बारेमे मुजे आप दोनोसे कुछ बात करनी हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) रजुदीदीके बारेमे..? अब नया क्या हुआ..?

पुनम : (मुस्कुराते) अरे हुआ कुछ नही.. सुनोतो सही.. बस.. उनके बारेमे थोडी जानकारी देनी थी..

लखन : सृतीदी.. वो जबसे गांवसे आइ हे तबसे कुछ उखडी उखडी लग रही हे.. अ‍ैसा लगता हे उनको कोइ परेसानी हे.. तो मेने पुनोको पुछा था.. दीदी.. बताइये..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. बात उन दीनोकी हे जब बापु भी जीन्दा थे.. रजुदीदी ओर दया बहेन हमेसा साथ रही हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करती हे.. सायद दुसरा वाला प्यार.. दोनोके बीच सुरुसे ही लेस्बीयन रीस्ता रहा हे.. हालाकी बडे भैया उनके तनकी जरुरतोको पुरा करते थे..

सृती : (सामने देखते) क्या..? सचमे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. गांवमे अभी बदलाव हुआ हे.. लेकीन हमारे घरमे सुरुसे ही इस बदलाव आ चुका था.. दोनो अ‍ेक साथ ही भाइके साथ बीस्तर साजा करती थी.. तब कीसीको पता नही थाकी दया बहेन हमारी बहेन हे.. ओर तब ही दोनोने मीलकर कुछ वादे कीये थे..

सृती : (सामने देखते) कैसा वादा..?

पुनम : (मुस्कुराते) यहीे की दोनो हमेसा साथ रहेगी.. दोनो ही भाइसे अ‍ेक बच्चा चाहती थी.. तबही डीसाइड कीया थाकी जीस दीन दोनो प्रेगनेन्ट होजायेगी उस दीन दोनो सहेर जाकर अपनी अलग दुनीया बसायेगी.. ओर आज दयाबहेन भाइसे.. ओर रजुदी हमारे पतीसे प्रेगनेन्ट हो गइ हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) तो क्या वे दोनो हमे छोड देगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) सायद.. याद हे अ‍ेक बार मंजुमोमने कहा था.. कुछ आयेगी.. कुछ जायेगी.. ओर कुछ उपर चली जायेगी.. ओर वापस आयेगी.. बस.. इनमे जाने वाले ये दोनो भी सामील हे.. अभी हाल हीमे ये गांवमे रहेकर आइ हे.. तब दोनोको अपना वादा याद आगया.. लेकीन दोनो अ‍ेक उलजनमे फसी हे..

लखन : (मुस्कुराते) कैसी उलजन..?

पुनम : (हसते) जब दोनोने अ‍ेक दुसरेसे वादा कीयाथा तब उनको पता नही थाकी दोनोकी सादी इसी खानदानमे हो जायेगी.. क्युकी तब दोनो ही अपने आपको इस घरकी नौकरानी समजती थी.. ओर अब दयाबहेन हमारी बहेन हे ओर उसने भाइसे सादी करली.. ओर रजुने लखन भैयासे.. बस.. यही उलजनमे फसी हे.. की अब दोनो इस खानदानकी बहु हे तो कैसे घर छोडे..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. तो फीर क्या करना चाहीये..?

पुनम : (मुस्कुराते) सबकुछ तैय हे.. फीर भी फैसला आपके उपर छोडती हु.. की आप क्या नीर्णय लेते हे..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. आपने ओर मंजु मोमने मुजे पुरी छुट दी हे.. ओर कहा हेकी मुजे सबकी भावनाओका सन्मान करना चाहीये.. तो क्या भावनाओका मतलब सीर्फ सेक्स तक ही सीमीत हे..? तो फीर दयाभाभी ओर रजुओकी भावनाओका क्या..? मुजे लगता हे हमे उन दोनोकी भावनाओका भी सन्मान करना चाहीये..

पुनम : (आंख गीली करते हाथ थामते) भाइ.. आइ अ‍ेम प्राउड फोर यु.. बस.. मुजे आपसे यही अपेक्षा थी.. अब मेरा भाइ बीलकुल मेच्योर.. ओर परीपकव हो गया हे.. आप जो भी नीर्णय लोगे अच्छा ही लोगे..

सृती : (लखनकी ओर मुस्कुराते) हां वोतो हे..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. अगर उसे जाना हे तो हम उसे पुरी जीम्वेवारी ओर सन्मानके साथ भेजेगे..

लखन : (सामने देखते) लेकीन अब वो दोनो हमारे खानदानकी बहु भी हे.. तो हम अपनी जीम्वेवारीसे भाग भी नही सकते.. मे कोइ भी नीर्णय लेनेसे पहेले अ‍ेक बार मोमसे इस बारेमे बात करना चाहता हु..

सृती : (सामने देखते) कब जाना हे मोमके पास..?

पुनम : भाइ.. अब मोमके पास कुछ दीनोका ही समय बचा हे.. सायद अ‍ेक महीना.. या उनसे भी कम.. तो मे चाहती हुकी उनके आखरी दीनोमे मे उनके साथ टाइम स्पेन्ड करु.. ताकी कुछ ज्ञान.. ओर कुछ बाते उनसे समज सकु.. ओर अभी इन दोनोके बारेमे फीकर मत करो.. उन्होने कुछ ओर ही डीसाइड कीया हे..

लखन : (सामने देखते) ओर क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) यही की.. जबतक मोम हे तबतक वो घर नही छोडेगी.. उनको भी सबकुछ पता हे.. मोमके जानेके बाद भाइ दयाभाभीको प्यार करना कम करेगे तब ही वो दोनो जायेगी..

लखन : (सामने देखते) क्या अ‍ैसा कुछ होगा..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाइ.. मोम आने वाले वक्तके बारेमे सबकुछ जानती हे.. मोमने आपको अ‍ैसे ही जडी बुटी देकर छुट नही दी.. उनको सब पता हे.. मोमके जानेके बाद भाइ पुरी तराह टुट जायेगे.. ओर इन सब चीजोमे उनका इन्ट्ररेस्ट कम होजायेगा.. तब उनकी सभी बीवीओको सम्हालेगा कौन..? इसीलीये मोमने आपका चुनाव कीया हे..
 
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