- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 148,639
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २८७
पुनम सृती कीचनका काम समेटने लगी.. तो राधीका भी उनकी कदद करने बहारकी सफाइ करने लगी.. तब चंदा वीजयको लेकर सोफेपे बैटी थी.. ओर लखनसे धीरेसे फुसफुसाते बात कर रही थी.. तभी भावीकाकी क्लीनीक जाते समय लखनने सबसे छुपकर चंदाको आंख मारदी.. जीसे चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.... अब आगे
आज भावीकाने भी दो पहोरके बाद कोइ अेपोइटमेन्ट नही लीया.. इनडोरमे सीर्फ तीन पेसन्ट थे.. जीनकी हाल ही मे डीलीवरी हुइ थी.. भावीका पेसन्टको देखने जानेसे पहेले अपनी रीसेपनीस्ट आरतीको लखनके बारेमे सुचना देकर उपर गइ थी..
सृतीको यहा तीन दीन रखा था.. ओर लखन भी यहा तीन चार बार आ चुका था.. जीसे रीसेपनीस्ट आरती भी लखनको अच्छी तराह जानती थी.. जैसे ही लखन तीन बजे भावीकाकी क्लीनीकपे पहोंच गया.. ओर सीधे काउन्टरपे चला गया.. तो आरती लखनको देखकर मुस्कुराने लगी..
आरती : (मुस्कुराते) आइअे लखनजी.. मेडम आपहीका इन्तजार कर रही थी.. उपर पेसन्ट देखने गइ हे.. अभी आती ही होगी.. आप उनकी ओफीसमे बैठीये..
लखन : (मुस्कुराते) अरे मेडम.. टेन्शन मतलो मे यही ठीक हु..
आरती : (हसते) अरे.. आइअे मे ले चलती हु.. मेडमकी डांट खीलाओगे क्या..? हें..हें..हें..
लखन : (हसते साथ चलते) आपकी मेडम डांटती भीहे क्या..? क्या नाम हे आपका..?
रीसेपनीस्ट : (मुस्कुराते ओफीस खोलते) आरती नाम हे मेरा... मेडम बहुत कडक हे.. बेठीये.. मे जानती हु आपको.. सृती मेडमके हसबन्ड हेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) जी.. थेन्क यु..
आरती : (मुस्कुराते) मोस्ट वेलकम सर.. बैठीये मेडम आती ही होगी..
कहेते आरती लखनको ओफीसमे बीठाकर चली गइ.. तब कुछ ही देरमे भावीका नीचे आइ तो आरतीने उनको लखनके आनेकी सुचना दी.. तो भावीकाने हसते हुअे आरतीको आंख मारते अब कीसीको अंदर ना आनेकी सुचना दी.. तो आरती भी हसने लगी.. ओर भावीका ओफीसमे चली गइ..
लखनको देखते ही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. अंदर आते ही उसने दरवाजा लोक करदीया.. लखन भावीकाको देखकर खडा होगया.. अपना डोक्टरका लंबा वाइट कोट वही नीकालकर खुटेपे टांग दीया.. ओर फटाफट सेनेटाइजसे अपने हाथ धोने लगी.. फीर हाथ पोछते ही वो लखनकी ओर दोड पडी ओर लखनकी बाहोमे समा गइ..
फीर लखनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. दोनो हाथमे लखनका चहेरा थामते उनकी आंखोमे मुस्कुराते देखने लगी.. ओर धीरेसे लखनके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. लखनने भी कसके भावीकाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर चुंबन बहुत गहेरा होगया.. फीर..
भावीका : (सामने देखते) लखन.. आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार होगया हे..
लखन : (मुस्कुराते सर चुमते) आइ लव यु टु.. कहो.. कैसी हो तुम..?
भावीका : (मुस्कुराते) बस.. हम जबसे मीले हे तबसे ठीक नही हु.. आपने मेरी रातोकी नींद चुराली हे.. कही चेइन नही मीलता.. कल सृती ओर पुनोदीसे बात हुइ.. उनको आज साम मीलने जाना हे.. फीर कुछ ओर भी जरुरी बात हे.. जो आपसे करनी हे.. इसीलीये तो आज बुलाया हे..
लखन : (मुस्कुराते) चलो बैठो इधर.. बताओ क्या जरुरी बात करनी हे..
भावीका : (मुस्कुराते) बाते हम बादमे करेगे.. पहेले मे मेरे जानुको थोडा प्यार देदु..? चलो अंदर..
कहेते भावीका लखनका हाथ पकडकर उसे पेसन्ट देखनेके रुममे ले गइ.. ओर अंदर जातेही लखनकी बाहोमे समा गइ.. लखन भी उनके उरोजोको मसलते होठ चुमने लगा.. दोनोकी सासे तेज चलने लगी.. ओर कब दोनोके उपरसे कपडे हटने लगे दोनोको पता ही नही चला..
भावीका वही पेसन्टके टेबलपे बैठ गइ.. ओर लखनको अपने दोनो पैरोके बीच खीच लीया.. फीर उनका बडा हथीयार मुठीमे थामते अपनी चुतपे धीसने लगी.. दोनोके होठ लगातार अेक दुसरेके मुहके रसको पी रहे थे.. भावीकाने धीरेसे लंडके सुपाडेको अपनी चुतमे फसा लीया..
वो वासना भरी कातील नजरोसे लखनकी ओर देखने लगी.. ओर उसने लखनके दोनो नीतंबपे हाथ रखते अपनी चुतकी ओर दबाया.. लखनका गीला लंड चुतमे धकेलने लगी.. जब पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया फीर लखनकी कमरपे पैरोकी आंटी लगादी.. तो लखनने उसे नीतंबसे पकडते अपनी गोदमे उठा लीया..
लखन भावीकाको उछालने लगा.. भावीकाका स्थेटोस्कोप अभी भी उनके गलेमे था.. भावीका लखनके गलेमे बाहे डालते लखनके लंडपे उछलने लगी.. दोनोके उपर वासना हावी हो चुकी थी.. तो कुछ ही देरमे भावीकाकी चुतसे लावा फुट पडा.. ओर लखनके लंडको भीगो दीया..
अध्याय - २८७
पुनम सृती कीचनका काम समेटने लगी.. तो राधीका भी उनकी कदद करने बहारकी सफाइ करने लगी.. तब चंदा वीजयको लेकर सोफेपे बैटी थी.. ओर लखनसे धीरेसे फुसफुसाते बात कर रही थी.. तभी भावीकाकी क्लीनीक जाते समय लखनने सबसे छुपकर चंदाको आंख मारदी.. जीसे चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.... अब आगे
आज भावीकाने भी दो पहोरके बाद कोइ अेपोइटमेन्ट नही लीया.. इनडोरमे सीर्फ तीन पेसन्ट थे.. जीनकी हाल ही मे डीलीवरी हुइ थी.. भावीका पेसन्टको देखने जानेसे पहेले अपनी रीसेपनीस्ट आरतीको लखनके बारेमे सुचना देकर उपर गइ थी..
सृतीको यहा तीन दीन रखा था.. ओर लखन भी यहा तीन चार बार आ चुका था.. जीसे रीसेपनीस्ट आरती भी लखनको अच्छी तराह जानती थी.. जैसे ही लखन तीन बजे भावीकाकी क्लीनीकपे पहोंच गया.. ओर सीधे काउन्टरपे चला गया.. तो आरती लखनको देखकर मुस्कुराने लगी..
आरती : (मुस्कुराते) आइअे लखनजी.. मेडम आपहीका इन्तजार कर रही थी.. उपर पेसन्ट देखने गइ हे.. अभी आती ही होगी.. आप उनकी ओफीसमे बैठीये..
लखन : (मुस्कुराते) अरे मेडम.. टेन्शन मतलो मे यही ठीक हु..
आरती : (हसते) अरे.. आइअे मे ले चलती हु.. मेडमकी डांट खीलाओगे क्या..? हें..हें..हें..
लखन : (हसते साथ चलते) आपकी मेडम डांटती भीहे क्या..? क्या नाम हे आपका..?
रीसेपनीस्ट : (मुस्कुराते ओफीस खोलते) आरती नाम हे मेरा... मेडम बहुत कडक हे.. बेठीये.. मे जानती हु आपको.. सृती मेडमके हसबन्ड हेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) जी.. थेन्क यु..
आरती : (मुस्कुराते) मोस्ट वेलकम सर.. बैठीये मेडम आती ही होगी..
कहेते आरती लखनको ओफीसमे बीठाकर चली गइ.. तब कुछ ही देरमे भावीका नीचे आइ तो आरतीने उनको लखनके आनेकी सुचना दी.. तो भावीकाने हसते हुअे आरतीको आंख मारते अब कीसीको अंदर ना आनेकी सुचना दी.. तो आरती भी हसने लगी.. ओर भावीका ओफीसमे चली गइ..
लखनको देखते ही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. अंदर आते ही उसने दरवाजा लोक करदीया.. लखन भावीकाको देखकर खडा होगया.. अपना डोक्टरका लंबा वाइट कोट वही नीकालकर खुटेपे टांग दीया.. ओर फटाफट सेनेटाइजसे अपने हाथ धोने लगी.. फीर हाथ पोछते ही वो लखनकी ओर दोड पडी ओर लखनकी बाहोमे समा गइ..
फीर लखनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. दोनो हाथमे लखनका चहेरा थामते उनकी आंखोमे मुस्कुराते देखने लगी.. ओर धीरेसे लखनके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. लखनने भी कसके भावीकाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर चुंबन बहुत गहेरा होगया.. फीर..
भावीका : (सामने देखते) लखन.. आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार होगया हे..
लखन : (मुस्कुराते सर चुमते) आइ लव यु टु.. कहो.. कैसी हो तुम..?
भावीका : (मुस्कुराते) बस.. हम जबसे मीले हे तबसे ठीक नही हु.. आपने मेरी रातोकी नींद चुराली हे.. कही चेइन नही मीलता.. कल सृती ओर पुनोदीसे बात हुइ.. उनको आज साम मीलने जाना हे.. फीर कुछ ओर भी जरुरी बात हे.. जो आपसे करनी हे.. इसीलीये तो आज बुलाया हे..
लखन : (मुस्कुराते) चलो बैठो इधर.. बताओ क्या जरुरी बात करनी हे..
भावीका : (मुस्कुराते) बाते हम बादमे करेगे.. पहेले मे मेरे जानुको थोडा प्यार देदु..? चलो अंदर..
कहेते भावीका लखनका हाथ पकडकर उसे पेसन्ट देखनेके रुममे ले गइ.. ओर अंदर जातेही लखनकी बाहोमे समा गइ.. लखन भी उनके उरोजोको मसलते होठ चुमने लगा.. दोनोकी सासे तेज चलने लगी.. ओर कब दोनोके उपरसे कपडे हटने लगे दोनोको पता ही नही चला..
भावीका वही पेसन्टके टेबलपे बैठ गइ.. ओर लखनको अपने दोनो पैरोके बीच खीच लीया.. फीर उनका बडा हथीयार मुठीमे थामते अपनी चुतपे धीसने लगी.. दोनोके होठ लगातार अेक दुसरेके मुहके रसको पी रहे थे.. भावीकाने धीरेसे लंडके सुपाडेको अपनी चुतमे फसा लीया..
वो वासना भरी कातील नजरोसे लखनकी ओर देखने लगी.. ओर उसने लखनके दोनो नीतंबपे हाथ रखते अपनी चुतकी ओर दबाया.. लखनका गीला लंड चुतमे धकेलने लगी.. जब पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया फीर लखनकी कमरपे पैरोकी आंटी लगादी.. तो लखनने उसे नीतंबसे पकडते अपनी गोदमे उठा लीया..
लखन भावीकाको उछालने लगा.. भावीकाका स्थेटोस्कोप अभी भी उनके गलेमे था.. भावीका लखनके गलेमे बाहे डालते लखनके लंडपे उछलने लगी.. दोनोके उपर वासना हावी हो चुकी थी.. तो कुछ ही देरमे भावीकाकी चुतसे लावा फुट पडा.. ओर लखनके लंडको भीगो दीया..