Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 104 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८७

पुनम सृती कीचनका काम समेटने लगी.. तो राधीका भी उनकी कदद करने बहारकी सफाइ करने लगी.. तब चंदा वीजयको लेकर सोफेपे बैटी थी.. ओर लखनसे धीरेसे फुसफुसाते बात कर रही थी.. तभी भावीकाकी क्लीनीक जाते समय लखनने सबसे छुपकर चंदाको आंख मारदी.. जीसे चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.... अब आगे

आज भावीकाने भी दो पहोरके बाद कोइ अ‍ेपोइटमेन्ट नही लीया.. इनडोरमे सीर्फ तीन पेसन्ट थे.. जीनकी हाल ही मे डीलीवरी हुइ थी.. भावीका पेसन्टको देखने जानेसे पहेले अपनी रीसेपनीस्ट आरतीको लखनके बारेमे सुचना देकर उपर गइ थी..

सृतीको यहा तीन दीन रखा था.. ओर लखन भी यहा तीन चार बार आ चुका था.. जीसे रीसेपनीस्ट आरती भी लखनको अच्छी तराह जानती थी.. जैसे ही लखन तीन बजे भावीकाकी क्लीनीकपे पहोंच गया.. ओर सीधे काउन्टरपे चला गया.. तो आरती लखनको देखकर मुस्कुराने लगी..

आरती : (मुस्कुराते) आइअ‍े लखनजी.. मेडम आपहीका इन्तजार कर रही थी.. उपर पेसन्ट देखने गइ हे.. अभी आती ही होगी.. आप उनकी ओफीसमे बैठीये..

लखन : (मुस्कुराते) अरे मेडम.. टेन्शन मतलो मे यही ठीक हु..

आरती : (हसते) अरे.. आइअ‍े मे ले चलती हु.. मेडमकी डांट खीलाओगे क्या..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते साथ चलते) आपकी मेडम डांटती भीहे क्या..? क्या नाम हे आपका..?

रीसेपनीस्ट : (मुस्कुराते ओफीस खोलते) आरती नाम हे मेरा... मेडम बहुत कडक हे.. बेठीये.. मे जानती हु आपको.. सृती मेडमके हसबन्ड हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) जी.. थेन्क यु..

आरती : (मुस्कुराते) मोस्ट वेलकम सर.. बैठीये मेडम आती ही होगी..

कहेते आरती लखनको ओफीसमे बीठाकर चली गइ.. तब कुछ ही देरमे भावीका नीचे आइ तो आरतीने उनको लखनके आनेकी सुचना दी.. तो भावीकाने हसते हुअ‍े आरतीको आंख मारते अब कीसीको अंदर ना आनेकी सुचना दी.. तो आरती भी हसने लगी.. ओर भावीका ओफीसमे चली गइ..

लखनको देखते ही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ.. अंदर आते ही उसने दरवाजा लोक करदीया.. लखन भावीकाको देखकर खडा होगया.. अपना डोक्टरका लंबा वाइट कोट वही नीकालकर खुटेपे टांग दीया.. ओर फटाफट सेनेटाइजसे अपने हाथ धोने लगी.. फीर हाथ पोछते ही वो लखनकी ओर दोड पडी ओर लखनकी बाहोमे समा गइ..

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फीर लखनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. दोनो हाथमे लखनका चहेरा थामते उनकी आंखोमे मुस्कुराते देखने लगी.. ओर धीरेसे लखनके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. लखनने भी कसके भावीकाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर चुंबन बहुत गहेरा होगया.. फीर..

भावीका : (सामने देखते) लखन.. आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार होगया हे..

लखन : (मुस्कुराते सर चुमते) आइ लव यु टु.. कहो.. कैसी हो तुम..?

भावीका : (मुस्कुराते) बस.. हम जबसे मीले हे तबसे ठीक नही हु.. आपने मेरी रातोकी नींद चुराली हे.. कही चेइन नही मीलता.. कल सृती ओर पुनोदीसे बात हुइ.. उनको आज साम मीलने जाना हे.. फीर कुछ ओर भी जरुरी बात हे.. जो आपसे करनी हे.. इसीलीये तो आज बुलाया हे..

लखन : (मुस्कुराते) चलो बैठो इधर.. बताओ क्या जरुरी बात करनी हे..

भावीका : (मुस्कुराते) बाते हम बादमे करेगे.. पहेले मे मेरे जानुको थोडा प्यार देदु..? चलो अंदर..

कहेते भावीका लखनका हाथ पकडकर उसे पेसन्ट देखनेके रुममे ले गइ.. ओर अंदर जातेही लखनकी बाहोमे समा गइ.. लखन भी उनके उरोजोको मसलते होठ चुमने लगा.. दोनोकी सासे तेज चलने लगी.. ओर कब दोनोके उपरसे कपडे हटने लगे दोनोको पता ही नही चला..

भावीका वही पेसन्टके टेबलपे बैठ गइ.. ओर लखनको अपने दोनो पैरोके बीच खीच लीया.. फीर उनका बडा हथीयार मुठीमे थामते अपनी चुतपे धीसने लगी.. दोनोके होठ लगातार अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पी रहे थे.. भावीकाने धीरेसे लंडके सुपाडेको अपनी चुतमे फसा लीया..

वो वासना भरी कातील नजरोसे लखनकी ओर देखने लगी.. ओर उसने लखनके दोनो नीतंबपे हाथ रखते अपनी चुतकी ओर दबाया.. लखनका गीला लंड चुतमे धकेलने लगी.. जब पुरा लंड अपनी चुतमे नीगल लीया फीर लखनकी कमरपे पैरोकी आंटी लगादी.. तो लखनने उसे नीतंबसे पकडते अपनी गोदमे उठा लीया..

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लखन भावीकाको उछालने लगा.. भावीकाका स्थेटोस्कोप अभी भी उनके गलेमे था.. भावीका लखनके गलेमे बाहे डालते लखनके लंडपे उछलने लगी.. दोनोके उपर वासना हावी हो चुकी थी.. तो कुछ ही देरमे भावीकाकी चुतसे लावा फुट पडा.. ओर लखनके लंडको भीगो दीया..
 
भावीका सांत होगइ.. ओर लखनके कंधेपे सर डाल दीया.. लखनने उसे वही पेसन्ट देखनेके टेबलपे लीटा दीया.. तो भावीकाने अपने बाकी वस्त्रोको भी नीकाल दीया.. फीर स्टेथोस्कोप साइडमे रखते लखनको हाथ पकडकर अपने उपर खीच लीया.. लखनके होठोको जोरोसे चुसने लगी..

तभी लखनका लंड भावीकाकी चुतपे फीरसे दस्तक देते अपने बीलमे घुसनेका रास्ता ढुंढने लगा.. ओर कुछ ही देरमे उनको अंद घुसनेमे कामयाबी मील गइ.. लखन भावीकाके उपर छा गया.. ओर हाथके बल जोरोसे कमर हीलाते भावीकाकी फीरसे चुदाइ करने लगा.

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भावीका मदहोसीमे आधी आंख चडाते सीसकारीया करने लगी.. ओर लखन धीरे धीरे कमर हीलाते भावीकाकी चुदाइ करता रहा.. प्यार भरी चुदाइ कुछ ही पलोमे कब अ‍ेक भयंकर चुफानी चुदाइमे तबदील होगइ पता ही नही चला.. दोनो बहुत ही कामुक चुदाइमे मसगुल होगये..

हर बारकी तराह इस बार भी लखनने भावीकाको दो दो बार जडाकर आखीरमे दोनो साथ जड गये.. भावीकाके चहेरेपे संतुस्टी भरी मुस्कान तैरने लगी.. वो लखनकी पीठ सहेलाते धीरे धीरे उनके होठोके रसको पी रही थी.. उनकी चुतसे दोनोका कामरस अपना रास्ता बनाते बहार टपक रहा था.. तभी..

भावीका : (लंड अबभी चुतमे था) मुजे आपकी आदतके बारेमे पता हे.. बडी ही फुरसतमे आपको मीलने बुलाया हे.. हमे मीले अ‍ेक हप्ता हो गया हे.. अ‍ैसा लगता हे अ‍ेक हप्ता नही अ‍ेक साल हुआ हे.. लखन.. आइ रीयली लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार हो गया हे.. ओर मेने कुछ डीसीजन भी लीये हे..

लखन : (मुस्कुराते) कैसा डीसीजन..?

भावीका : (मुस्कुराते) बस.. वोही सब डीसकस करने आपके घर जा रही हु.. लखन.. मे येसब इलीगल अ‍ेबोर्सनका काम छोड रही हु.. जीतना पैसा कमाना था.. कमालीये.. अब मे सुकुनकी जींदगी जीना चाहती हु.. यहासे कही दुर.. जहा मुजे कोइ पहेचानता ना हो..

लखन : (सीरीयस होते धीरेसे) तुम हमे छोडकर जा रही हो..? तो फीर धृव..?

भावीका : (गोदमे बैठे ही बाहोमे भीचते सरको सहेलाते) सीर्फ धृवसे दुर जा रही हु.. सायद मे धृवको डीवोर्स देदु.. मे उस दलदलसे नीकलना चाहती हु.. बस.. यही सब चर्चा करने पुनोदी ओर सृतीको मीलने जा रही हु.. क्या पुनोदीको सब पता चल जाता हेनां..? आज साम उसने मुजे मीलनेके लीये बुलाया हे.. लेकीन मे आपको छोडकर कही नही जाउगी..

लखन : (बुब्स मसलते होठ चुमते) लेकीन अचानक अ‍ैसा क्या हो गया.. जो तुम इतना बडा डीसीजन ले रही हो..

भावीका : (सामने देखते धीरेसे) लखन.. जबसे धृव अपनी मम्मीका अ‍ेबोर्सन करवाके घरपे आया हे.. तबसे घरपे कुछ ठीक नही चल रहा.. सबलोग तनावमे रहेते हे.. सायद इस बातका मेरे ससुरको पता चल गया हे.. ओर मुजसे भी कोइ बात नही करते.. बस.. अ‍ेक बार मेने इसी बातको लेकर मेरे सास ससुरको बहेस करते सुन लीया था..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) कैसी बहेस..?

भावीका : (सामने देखते धीरेसे) पता नही ठीकसे सुन नही पाइ.. लेकीन अ‍ैसा लगाकी मेरी सास अपने पतीको इसी बातपे कन्वीस करा रही थी.. की ये बच्चा उन्हीका था.. तो मेरे ससुर बहेस कर रहे थेकी अगर ये हमारा बच्चा था.. तो तुमने मुजसे बात कीये बगैर इसे गीरा क्यु दीया..? बस.. इसी बातको लेकर घरमे तनाव हे..

लखन : (सामने देखते) फीर क्या हुआ..? आपके ससुरके संकाकी उनके पास कोइ तो वजह होगी..?

भावीका : (धीरेसे) पता नही.. लेकीन केह रहेथे.. की मेने डेढ महीनेसे तुजे छुआ भी नही हे.. तो बच्चा कहासे ठहेर गया..? अगर मेरा था तो मुजसे बताया क्यु नही..? बस.. इसी बातको लेकर दोनोके बीच बहेस छीड रही थी.. ओर आजकल वो पार्टीकी वजहसे भी कुछ परेसान रहेते हे..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. इनमे तुम तो कही नही होनां..? तो फीर तु क्यु टेन्शन ले रही हो..? आज पुनोको मीलनेतो जाही रही हो.. उनको सब पुछ लेना.. ओर मेरे खयालसे थोडा इन्तजार करलो.. सचाइ खुद बहार आजायेगी.. अ‍ेक बार पुनोसे मीललो.. फीर कोइ डीसीजन लेना..

इनके बाद लखनने फीर अ‍ेक बार भावीकाकी जबरदस्त घमासान चुदाइ करली.. फीर दोनो अंदरके बाथरुममे चले गये.. ओर सावर लेकर कंपलीट होगये.. देखा तो सामके पांच बज चुके थे.. भावीकाको भी लखनके घर जाना था.. लेकीन दोनोने अलग अलग जानेका फैसला कीया..

भावीका थोडा धीरे ओर लंगडाते चल रही थी.. उन्होने लखनको जोरोसे बाहोमे भरलीया.. ओर उनके होंठ चुम लीये.. फीर लखन वहासे सीधे घरकी ओर नीकल गया.. भावीका सही होगइ ओर अपनी चेरपे बैठकर बेल बजाइ.. फीर अपने बाल हाथोसे सही करने लगी.. तभी उनकी रीसेपनीस्ट आरती अंदर आगइ..
 
आरती : (रहस्य मुस्कानसे) जी मेडम..?

भावीका : (मुस्कुराते) आरती.. यार हम दोनोके लीये कोफी बनादे.. ओर कुछ खानेको बीस्कुट भी.. बहुत भुख लगी हे.. जालीमने थका दीया.. मुजे पुरी नीचोडली..

आरती : (हसते) जी मेडम.. लगता हे आपने बहुत महेनत कीहे.. हें..हें..हें.. बहुत हेन्डसम था..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. बहुत ही खास.. कभी मौका मीले तो तुमसे भी मीलवाउगी.. मीलोगी क्या..?

आरती : (कोफी बनाते मुस्कुराते) जी.. जरुर.. अ‍ैसे हेन्डसासे कौन मीलना नही चाहेगा.. लगता हे आपके लीये बहुत ही स्पेसीयल हे..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. बहुत ही स्पेसीयल.. दो बार मील चुकी हु.. जालीम अ‍ेक ही बारमे पुरी नीचोड लेता हे.. ओर दो बारसे पहेले बहार ही नही नीकालता.. हालत खराब कर देता हे..

आरती : (हसते) तब तो बहुत ही जल्द मीलना पडेगा.. हें..हें..हें.. उनकी दो बीवीया हेनां..? अ‍ेक आपकी फ्रेन्ड भी.. वो सृती मेडम..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. कमीनी बहुत लकी हे.. ये अ‍ेक रोयल फेमीलीसे हे.. पता नही इनकी कीतनी बीवीया होगी.. सृती इनकी रानी हे.. सब बहुत खुले वीचारोके हे.. अगली बार आयेगे तो मे बात करुगी.. तो मील लेना..

आरती : (थोडी जीजकते धीरेसे) जी.. मेडम.. आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी..

भावीका : (सामने देखते) हां बोल..

आरती : (सरमाते धीरेसे) मेडम.. वो.. वो धृव सरका फोन आया था.. अगले सेटरडे सामको मुजे बुलाया हे.. वोही होटेलमे.. होटेल आलीसान.. पुरी रात.. क्या करु..?

भावीका : (दोनो हाथसे अपना सर पकडते गुस्सेसे) ओह गोड.. ये कमीनेका मे क्या करु.. इस बाप बेटेसे तो मे तंग आ चुकी हु.. कीतने बजे बुलाया हे..?

आरती : (सरमाते धीरेसे) रात दस बजे होटेलपे पहोंचनेको बोला हे.. सुबह तक रुकनेको बोल रहे थे..

भावीका : (कुछ सोचते) आरती.. मेरा अ‍ेक काम करेगी..?

आरती : (सामने देखते) जी मेडम.. क्यु सर्मीन्दा कर रही हे..? कहीये.. मेरा ओर मेरी माका तो बस.. अ‍ेक आपही सहारा हे..

भावीका : (सामने देखते) आरती.. हम ये इलीगली काम छोड रहे हे.. मुजे इस आदमीसे छुटकारा पाना हे.. ओर ये आखरी बार होगा.. फीर मे जहा भी जाउ तुजे साथ लेकर जाउगी.. बस.. तु अपनी सेफ्टीका खयाल रखना.. काम खतम होतेही तु आइपील लेना मत भुलना..

आरती : (सामने देखते) जी मेडम.. आपकी मजबुरीका वो कुछ ज्यादा ही गलत फायदा उठा रहे हे.. दो दीन पहेले हमारी वो सफाइ करने वाली नइ लडकीको भी ले गये थे.. लगताहे उनको तगडे पैसे दीये होगे.. कमीनी बहुत खुस थी.. लेकीन फीकर मत करो.. मे आपके साथ हु.. कहीये.. क्या करना हे मुजे..?

भावीका : (सामने देखते) आजसे मुजे तुम्हारे मोबाइलमे वो हर रोकोडींग चाहीये.. जीसमे तुम्हारी ओर धृवकी बाते होती हो.. ओर उस रात तुम अपना मोबाइल कही छुपाकर रखना.. उनमे सब वीडीयो रेकोडींग कर लेना.. मुजे उनके खीलाफ सबुत चाहीये..

आरती : (आस्चर्यसे देखते) मेडम.. आर यु सीरीयस..? क्या सचमे आप उसे छोडना चाहती हे..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. इस विडीयोको मे सबुतके तौरपे इस्तमाल करुगी.. बहुत डर डरके ये सब सहेते रहे.. यकीन मानो मे तुजपे कोइ आंच आने नही दुगी.. तेरा नाम कही नही आयेगा..

आरती : (मुस्कुराते) जी मेडम.. सब समज गइ.. आप फीकर मत करो.. काम हो जायेगा..

कहेते भावीका ओर आरतीने धृवके खीलाफ अ‍ेक योजना बनाली.. ये पहेली बार नही था.. धृव कइ बार आरती ओर दुसरी नर्सोको होटेलमे बुला लेता.. ओर रात भर उनके साथ वासनाका नंगा खेल खेलता.. वो आरतीको भी अ‍ेक बार प्रेटनेन्ट भी कर चुका था..

जीसका अ‍ेबोर्सन भावीकाको ही करना पडा था.. अ‍ैसा नही थाकी आरती पहेलेसे बहुत सीधी थी.. वो इस सब चीजोकी बहुत सौकीन थी.. आरती अपनी बुढी माके साथ अकेली रहेती हे.. पहेले वो दुसरी होस्पीटलमे जोब करती थी.. ओर पतीके रहेते हुअ‍े भी जीस होस्पीटलमे जोब कर रही थी उस होस्पीटलके डोक्टरके साथ कइ बार सो चुकी थी..

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ओर अ‍ेक बार उनके पतीने सकके आधारपे उन डोक्टरके साथ रंगरेलीया मनाते पकड लीया.. जीसे उनका अपने पतीसे तलाक होचुका था.. तबसे वो भावीकाके यहा नोकरी कर रही थी.. उनको भावीकाके सारे राज मालुम थे.. लेकीन अब वो अपने तलाकके बाद काफी सुधर गइ थी..

अ‍ेक बार उनको धृवने होटेलपे बुला लीया.. तो उसने सारी बात भावीकाको बतादी.. ओर भावीकाको मजबुरीमे उनको धृवके साथ होटेलमे भेजना पडा.. ओर सब अन देखा कर लीया.. फीर तो धृव आये दीन आरती ओर दुसरी नर्सको भी होटेलपे लेजाने लगा..
 
लेकीन भावीका अपने इलीगल कामकी वजहसे सब कुछ अन देखा करती रही.. जीसकी वजहसे वो खुद दो बार अपने ससुरके वासनाकी सीकार होगइ थी.. तब उसे पता चलाकी बाप बेटा दोनोही उनके पीछवाडेके सौकीन हे.. फीर उनको धृव ओर उनकी मांके बारेमे भी पता चला..

अ‍ेक बार देर रात क्लीनीकसे घर आइ तो धृवकी कार घरपे ही थी.. तो वो समज गइकी धृव घरपे ही हे.. लेकीन धृव नीचे कही दीखाइ नही दीया.. तो वो उसे ढुंढनेके लीये अनायास ही उपरकी मंजीलपे चली गइ.. देखा तो अ‍ेक कमरेसे जोरोसे सीसकारीयोकी आवाज आ रही थी..

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भावीका आवाज सुनकर चौकनी हो गइ.. ओर वो दबे पांव उस कमरेकी ओर बढ गइ.. दुर्भाग्यवस दरवाजा खुला था.. उसने अंदर जाकते देखा तो दंग रेह गइ.. क्युकी धृव हाथके बल जोरोसे उनकी मम्मीकी चुदाइ कर रहा था.. फीर भावीका वापस जटसे नीचे आगइ..

तबसे वो उनकी सास ओर धृवपे नजर रख रही थी.. तब दोनोकी बातोसे उनको येभी पता चलाकी धृवका उनकी बहेनके साथ भी नाजायज रीस्ता हे.. तबसे वो इन सब चीजोसे उबर चुकी थी.. अब उसने अ‍ेक साफ सुथरी लीगल क्लीनीकके साथ कही ओर बसनेका फैसला करलीया था..

इधर जैसे ही लखन घरपे आया सीधा फ्रेस होने चला गया.. सृती अभी क्लीनीकपे थी.. तो पुनम राधीका ओर चंदा अपने बच्चोको लेकर सोफेपे बैठकर गपे लगा रही थी.. चंदा कंपलीट तैयार होकर बैठी थी.. चंदा खुले लहेराते बालोमे बहुत ही खुबसुरत ओर कयामत लग रही थी..

उसने साडीके बजाय लखनने गीफ्ट दीया सलवार सुटका ड्रेस पहेना हुआ था.. जीसमे वो अपनी उम्रसे बहुत छोटी दीख रही थी.. जैसे ही लखन आया वो बहुत ही सरमा गइ.. ओर लखन सीधा आकर राधीका ओर पुनमके बीच बैठ गया.. ओर पुनमकी बच्चीके साथ खेलने लगा..

पुनम : (कातील मुस्कानसे) आ गये आप..? आप तैयार होजाइअ‍े तबतक मे चाइ नास्ता बता देती हु.. हम सबने पहेले ही करलीया हे.. ओर भाभी भी रेडी हे.. फीर दोनो चले जाओ..

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) राधु तुभी चलना..

राधीका : (मुस्कुराते) नही भाभी.. आज पुरा दीन आराम ही करना हे.. आप दोनो चले जाओ..

पुनम : (खडी होते मुस्कुराते) चलीये मे आपके कपडे देती हु.. फीर चाइ नास्ता बना दुगी.. तबतक बेबी भाभीके साथ भले खेलती.. इनसे काफी घुलमील गइ हे.. इनको बच्चे सम्हालनेका काफी अ‍ेक्स्पीरीयंस हो चुका हे.. हें..हें..हें..

कहेते पुनम उपर जाने लगी तो लखन भी दोडकर उनके पीछे चला गया.. रुममे जातेही लखनने पुनमको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. फीर पुनम सरारत भरी नजरोसे लखनकी ओर देखते हसती रही.. ओर लखन सब कुछ समज गया..

लखन : (मुस्कुराते) सोरीनां.. वो मे भावीका भाभीसे मीलने गया था.. वो सामको तुजे मीलने आ रही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. बेचारीकी हालत खराब करदी आपने.. ठीकसे चल भी नही पा रही थी.. अच्छा सुनो.. आपसे अ‍ेक बात करेनी थी..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. बोलो..

पुनम : (सीनेको सहेलाते धीरेसे) रातमे जल्दीसे आनेकी कोइ जरुरत नही हे.. आज अच्छा मौका हे.. वीजयको मे यहा साथ लेकर आउगी.. वो यहा मेरे साथ ही सो जायेगा.. हो सकेतो सब आज ही खतम करदो.. समज गयेनां..?

लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या आज ही..? तुम सब इतनी आसानीसे कैसे केह पाती हो..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मे युही सब नही केह रही.. आगे आपको सब पता चल जायेगा.. ओर मुजे पता हे मेरे पतीका खयाल मुजे कैसे रखना हे.. आप सृतीदी ओर राधीका दीदीकी टेन्शन मतलो.. उनको गांव गयेथे तब मंजुमोमने सब समजा दीया हे.. अब तो बहुत कुछ बदलने वाला हे.. बस.. आप अपना काम करते जाइअ‍े.. अपनी बीवीओकी टेन्शन मत ले..

लखन : (थोडा हीचकीचाते) पुनो.. क्या वो.. सचमे..?

पुनम : (मुस्कुराते बीचमे ही बात काटते) हां भाइ.. अभी भी क्यु जीजक रहे हो..? वो अपना मन बना चुकी हे.. वो इस बातपे बीलकुल रेडी हे.. वो खुद आगे बढनेका फैसला कर चुकी हे.. आप जाओगे तो आपको खुद पता चल जायेगा.. बस.. इनकी भावनाओका सन्मान करना.. बीना हीच कीचाये..

कहातो लखनने पुनमको बाहोमे भीच लीया.. ओर बुब्स मसलते उनके होठोको चुमने लगा.. फीर थोडीसी छेडछाडके बाद पुनमने लखनको नये कपडे देदीये ओर जल्दीसे तैयार होकर नीचे आनेका कहेकर पुनम नीचे चली गइ.. ओर लखनके लीये चाइ नास्ता बनाने लगी..

फीर लखन कंपलीट होकर नीचे आगया तो पुनमने उसे चाइ नास्ता खीला दीया.. तबतक चंदा सरमाते लखनकी ओर देखती रही.. आज उनकी आंखोमे अ‍ेक अलग ही चमक थी.. लखनको उनकी नजरमे आज प्यारके साथ वासना भी साफ दीखाइ दे रही थी..
 
लखनने दीलवाये ड्रेसमे वो बहुत ही खुबसुरत लग रही थी.. सीर्फ ड्रेस ही नही.. चंदाने अपने अंतर वस्त्र भी वही पहेने थे.. जो उनको लखनने उस रात गीफ्ट कीये थे.. फीर चंदाके पुनम ओर राधीकाको भी आज चंदाका अलग रुप दीख रहा था.. चंदाके पाससे पुनमने वीजयको लेलीया..

ओर उसे आज रात अपने साथ सुलानेकी बात करते चंदाको लखनके साथ घुमने भेज दीया.. तो चंदा बहुत ही सर्मसार हुइ.. ओर वो लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते कामुक स्माइल करते लखनकी बाजु वाली सीटमे बैठ गइ.. ओर लखनने कार जाने दी..

लखन : (मुस्कुराते) हांतो मेडम.. कीधर चलना हे..?

चंदा : (मुस्कुराते तीरछी नजरोसे) मुजे क्या पता.. सब आप लोगोने ही डीसाइड कीया हे.. ले चलो.. जहा आपका मन करे..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर मुवी देखने चले..?

चंदा : (सामने देखते मुस्कुराते) क्या अभी..? सेकन्ड सोमे..? मुजसे इतनी जल्दी छुटकारा पानेका इरादा हे क्या..? ये आपकी गर्लफ्रेन्ट इतनी जल्दी आपका पीछा छोडने वाली नही हे.. अ‍ेक बार सोचलो.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) तो फीर आपही बतादो.. वही ले चलता हु.. मुजे कोइ जल्दी नही हे.. आज पुरी साम ओर रात आपके नाम..

चंदा : (हसते) रात भी..? गुड बोय.. तो पहेले ले चलो.. वोही गार्डन.. जहा हमारे नये रीस्तोकी सुरुआत हुइ थी.. फीर कुछ खा पीलेगे.. ओर आरामसे लास्ट सो मे चलेगे.. चलेगानां..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे चलेगा क्या.. दोडेगा.. आज मेरी मासुका जो साथमे हे..

चंदा : (तीरछी नजरोसे हसते) सोचलो ये मासुका तुमसे बहुत बडी हे.. आप मेरे धीरेनकी उम्रके बराबर हो.. चलेगी ये मासुका..?

लखन : (मुस्कुराते) ओ..हो.. तो ये दीकत हे आपको..? लेकीन मेडम.. प्यारमे उमर नही देखी जाती.. बस.. प्यार हो जाता हे.. अब आप मेरी पकी वाली मासुका हे..

चंदा : (सरमाते हसते) दीकत नही हे.. लेकीन प्यारके इजहारके बाद भी बहुत जल्द भुल जातेहो अपनी मासुकाको.. घरमे तो सामने भी नही देखते.. देखना अब जींदगी भर इस मासुकाको जेलना पडेगा.. मेने बहुत कुछ सोच साजकर फैसला लीया हे.. हम इस बारेमे आरामसे बात करेगे..

फीर लखनने कारको वोही गार्डनकी ओर लेली.. जहा दोनो पहेले भी आ चुके थे.. लखनने अ‍ेक खाली जगाह कार पार्क करदी.. चंदा उतरके जटसे लखनके पास आ गइ.. फीर दोनो गार्डनके अंदर चले गये.. तो चंदाने पहेली बार लखनके हाथमे हाथ डाल दीया..

जीसे लखन भी हसने लगा.. दोनो अ‍ैसे चल रहे थे जो नये नये प्रेमी जोडे हो.. दोनो धीरे धीरे सबकुछ देखते चल रहेथे.. लखनने उसे अ‍ेक बेन्चपे बैठनेकी पेसकस कीतो चंदाने वहा बहुत लोग हे कहेते आगे चलनेको कहा.. तो लखन भी समज गयाकी चंदाको क्या चाहीये..

काफी दुर चलते अ‍ेक छोटासा तालाब जैसा दीखा तो चंदा लखनका हाथ पकडकर उसे वहा लेगइ.. जहा लोग भी बहुत कम थे.. ओर जीतने भी थे वो सब लवर्स थे.. जो अपने अपने पार्टनरके साथ प्यार करनेमे बीजी थे.. चंदा लखनको वही लेगइ.. ओर अ‍ेक सुमसान जगहको चुनके वही नीचे घासपे बैठ गये..

चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. यहा कीतना रोमांन्टीक माहोल हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) जा..नु..? मेडम कही मे गलत तो नही सुन रहा..?

चंदा : (सरमाते पीठमे अ‍ेक मुका मारते) क्या गलत कहा मेने..? मेरे बोयफ्रेन्डको जानु नही तो ओर क्या कहु..? लखन.. अब मेने डीसाइड करलीया हे.. की मे अपनी बाकी जींदगी खुलकर जीयुगी.. सीर्फ मेरे लीये.. बस.. अ‍ेक ही बीनती हे.. कभी मेरा साथ मत छोडना..

लखन : (पीछेसे कंधा पकडकर अपनी ओर खीचते) कभी नही.. कभी नही छोडुगा.. अब आप सब मेरी जीम्वेवारी हो..

चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. पता हे यहा आनेसे पहेले पुनोदीने मुजे क्या कहा..?

लखन : (गाल चुमते) नही तो.. क्या कहा..?

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) कहा.. भाभी.. अपनी जींदगीकी नइ सुरुआत करने जा रही हो.. तो आपकी नइ जींदगीके लीये शुभकानाये.. क्या उनको मेरे मनकी बात भी पता चल जाती हे..?

लखन : (मुस्कुराते) सीर्फ मनकी बात नही.. उनको हमारे भुत भवीस्य ओर वर्तमानके बारेमे भी पता चल जाता हे.. मंजुमोम ओर पुनो जीनके बारेमे सोचती हे.. उनका पुरा पीक्चर उनके सामने आजाता हे..

चंदा : (मुस्कुराते) कीतना अजीब हेनां..? कोइ सोच भी नही सकतेकी आजके जमाने भी ये सब पोसीबल हे.. हमारा गांवभी कीतना अ‍ेडवान्स ओर खुली सोच वाला हो गया हे..

लखन : (मुस्कुराते चंदाके बालकी लट सही करते) डार्लींग.. सामान्य लोग.. ओर हम लोगोमे यही तो फर्क हे.. मंजु मोम सही केह रही हे.. की हम कोइ सामान्य लोग नही हे..
 
चंदा : (लखनकी कमरमे हाथ डालते) जानु.. आप अ‍ैसे बुलाते हो तो बहुत अच्छा लगता हे.. कीतने अरसोके बाद मुजे कीसीने डार्लींग कहा हे.. बस.. आप अ‍ैसे ही बुलाया करे.. आइ प्रोमीस.. मे मेरी ओरसे प्यारमे कोइ कमी आने नही दुगी.. अब मेने सबकुछ अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे..

लखन : (सामने देखते) सबकुछ..? इनका मतलब भी पता हेनां..?

चंदा : (लखनके होठ चुमते धीरेसे मुस्कुराते) हां.. सबकुछ.. बहुत अच्छी तराह.. मे जींदगीकी सुरुआत नये सीरेसे करना चाहती हु.. जैसे लडकीया जवानीमे कदम रखते नइ सुरुआत करती हे.. बस.. अब सीर्फ रोमान्स.. सीर्फ आपके साथ.. ओर मे वादा करती हु.. आपके प्रती मे पुरी वफादार रहुगी..

कहेते चंदाने लखनकी गरदनमे हाथ डालकर उनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनके होठोको चुमने लगी.. लखनको भी पता थाकी चंदाकी कामाग्नी पुरी तराह भडकते उफानपे हे.. लखनने धीरेसे चंदाके उरोजोको थामलीया.. जीसे चंदाकी कामाग्नी ओर भडक गइ..

ओर वो लखनके होठोको जोरोसे चुमते अपनी जुबान लखनके मुहमे डालने लगी.. लखन वही लंबा होते चंदाकी गोदमे सर रखके लेट गया.. चंदाने अपने खुले बालसे लखनके सरको ढक लीया.. ओर लखनके चहेरेपे जुक गइ.. दोनोका चुंबन बहुत ही गहेरा होगया..

लखन चंदाको चुमते उनके उरोजोको मसल रहा था.. तो चंदाकी सांसे भारी होने लगी.. उनकी आंख वासनाकी वजहसे लाल होने लगी.. उसने धीरेसे अपनी सलवार आगेसे थोडी उची करली.. तो लखन ने सलवारमे हाथ डाल दीया ओर ब्रामे हाथ घुसाते चंदाके बुब्सके साथ खेलने लगा..

दोनो प्यारमे मसगुल होगये.. ओर बीच बीचमे प्यार भरी बाते भी करते रहे.. लखनने चंदाको उनके सौकके बारेमे ओर उनके बचपनके बारेमे पुछा.. तो चंदाने बीना हीचकीचाये लखनको सब सच बता दीया.. की उनको क्या क्या सौक हे..

फीर वो बचपनमे कैसे उनकी बडी बहेन नीर्मला ओर अपने बडे भाइको रातमे छुपछुपके चुदाइ करते देखती थी.. बस.. तबसे उनको चुदाइका सौक हो गया था.. लखनको सारी बाते बताती रही.. वो भी बता दीयाकी देवु मंजुसे सादी करने जान लेकर आया..

उसी दीन उन्होने देवुके साथ फ्लर्ट करना सुरु करदीया था.. फीर दोनोका अफैर कैसे सुरु हुआ वोभी बतादीया.. दोनोने वहा अ‍ेक घंटेतक प्यार ओर बातेकी.. तभी लखनने अचानक उनकी चुतपे हाथ रखते चंदाको छेड दीया.. तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) जानु प्लीज.. वहा नही.. ये पब्लीक पेस हे.. हम कही अ‍ेकांतमे चले..?

लखन : (गोदसे हटकर बैठते) डार्लींग.. अब कंटोल नही होता.. ओर मुवीमे भी अभी टाइम हे.. तो खाना खाने चले..? फीर वहीसे मुवीमे चले जायेगे.. फीर आज रात सीर्फ मे ओर तुम..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. चलीये.. आप बहुत नोटी हो..

कहेते चंदा अपनी ब्रा ओर सलवारको ठीक करने लगी.. वो लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते हस रही थी.. फीर दोनो खडे होगये.. तो चंदाने लखनका हाथ थाम लीया.. ओर दोनो अ‍ेक प्रेमी जोडेकी तराह बहारकी ओर चलने लगे.. चंदा बार बार लखनकी ओर देखते अपना सर लखनके कंधेपे रख देती थी..

चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. थेन्क्स.. आज मेने अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह प्यार कीया.. जीसे हमारी कोलेज टाइममे मेरी बहुतसी फ्रेन्ड करती थी.. आपने मुजे कोलेजके दीन याद दीला दीया..

लखन : (मुस्कुराते कानमे) डार्लींग अभी घरपे तो चलो.. आज हमारी सुहागरात होगी.. तब आपको बहुत कुछ अहेसास करवाना बाकी हे..

कहा तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराती रही.. फीर लखन ओर चंदा अ‍ेक मंहेगे रेस्टोरन्टमे खाना खाने चले गये.. वहा लखनने अ‍ेक अलग प्राइवेट केबीन रखली.. फीर लखनने ओर्डर कीया.. ओर दोनो खाने लगे..

बीच बीचमे चंदा लखनको अपने हाथोसे खीलाने लगी.. तो लखन भी चंदाको अपने हाथोसे खीलाता.. लखन लगातार टेबलके नीचेसे चंदाके पैरोको सहेलाता रहा.. लेकन चंदाने पैर नही हटाये.. वो लखनकी ओर कामुक स्माइल करते हसती रही.. फीर खानेके बाद दोनो बहार नीकले..

तब थीयेटरमे भी लास्ट सोका टाइम हो गया था.. ओर लखन चंदाको लेकर अ‍ेक बडे मोलके थीअ‍ेटरपे आगया.. वहा उसने दो टीकीटके साथ दो बोटल ठंडा ओर कुछ स्नेक्स लीया.. फीर दोनो अंदर चले गये.. देखा तो पुरे थीअ‍ेटरमे कुछ गीने चुने लोग ही थे..

ओर जीतनेभी थे सब लखन चंदाकी तराह कपल लोग थे.. सभी कपल अलग अलग जगाहपे अ‍ेक दुसरेसे दुर बैठे थे.. जैसे वो फील्म देखने नही.. अपने पाटर्नरके साथ मजे करने आये हो.. लखन भी सबसे पीछली वाली रो पे चला गया.. वहा दुर दुर तक कोइ नही था..

चंदा अंदरका माहोल देखकर बहुत ही सरमाइ.. क्युकी उनके साथ अ‍ेक अ‍ैसा बोयफ्रेन्ड था जो उनके बेटेकी उमरका था.. लेकीन चंदाको कोइ अ‍ेतराज नही था.. वोतो बस लखनसे अपनी वासनाकी आगको ठंडा करना चाहती थी.. लखन कोनेकी सीटपे ठंडेकी बोटल ओर स्नेक्सके पेकेट रख देता हे.. फीर खुद बैठते अपनी दाइ ओर चंदाको बीठा देता हे.. चंदा बहुत ही सरमाते हस रही थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८८

चंदा अंदरका माहोल देखकर बहुत ही सरमाइ.. क्युकी उनके साथ अ‍ेक अ‍ैसा बोयफ्रेन्ड था जो उनके बेटेकी उमरका था.. लेकीन चंदाको कोइ अ‍ेतराज नही था.. वोतो बस लखनसे अपनी वासनाकी आगको ठंडा करना चाहती थी.. लखन कोनेकी सीटपे ठंडेकी बोटल ओर स्नेक्सके पेकेट रख देता हे.. फीर खुद बैठते अपनी दाइ ओर चंदाको बीठा देता हे.. चंदा बहुत ही सरमाते हस रही थी.... अब आगे

तो दुसरी ओर साम छे बजते ही भावीकाने सृतीको कोल कीया.. ओर घरका अ‍ेड्रेस पुछ लीया तो सृतीने तुरंत भावीकाको अपना अ‍ेड्रेस सेन्ड कर दीया.. ओर खुद भी अपनी क्लीनीकसे घर आनेके लीये नीकल गइ.. तो कुछ ही देरके बाद लगभग दोनो साथ ही घरपे आगइ..

अपनी अपनी कारसे उतरके दोनो अ‍ेक दुसरेके गले मीली.. फीर सृती बडे ही उत्साहसे भावीकाका हाथ पकडक उसे घरके अंदर लेकर आगइ.. तो पुनम राधीका उनको देखते बडे उत्साहसे गले मीली.. पुनमने भावीकाको सोफेपे बीठाया.. ओर सृती फटाफट फ्रेस होने चली गइ..

राधीका : (हसते) आप बाते करो.. मे पानी लेकर आइ.. दीदी.. क्या पीयोगी..?

भावीका : (हसते) अरे कुछ भी बनादो.. आज तो मे डीनर करके जाउगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां स्योर.. ये आपहीका घर हे.. कभी कभी आजाया करो.. हें..हें..हें.. क्या मस्त लग रही हे आप..

भावीका : (हसते अपने गोगल्स नीकालकर पर्समे रखते) थेन्क्स दीदी.. कैसी हे आप..?

पुनम : (मुस्कुराते) बस.. हम सब मजेमे हे.. आपहीका इन्तजार कर रहे थे..

भावीका : (मुस्कुराते) दीदी.. कीसी भी हालमे.. आज तो आपको मीलना ही था..

सृती : (मुह पोछते बहार आते) कमीनी.. काम हे इसीलीये तो आइ हो.. वैसे तो कभी नही आती..

भावीका : (जोरोसे हसते) कुती गालीया तो मत दे.. इधर दीदी बैठी हे..

सृती : (हसते पास आकर बैठते) अरे इनकी टेन्शन मतले.. इनको हमारे बारेमे सबकुछ पता हे..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. इसीलीये तो आज इनको मीलने आइ हु..

राधीका : (पानी देते) ये लीजीये दीदी पानी.. फीर कुछ ठंडा बनाती हु.. आजतो डीनर इधर ही करके जायेइगा.. आज मे बनाती हु..

सृती : (हसते) अरे दीदी आप बैठीयेना मे बना लुगी.. वैसे भी आज सीर्फ हम चारोकाही तो बनाना हे.. लखन ओर भाभीतो बहार करके ही आयेगे..

राधीका : (मुस्कुराते) अरे मे बनाती हुनां.. आपकी दोस्त आइहे.. आप लोग आरामसे बाते करीये.. अभी बन जायेगा.. वैसे भी मे खाली ही हु..

भावीका : (सरमाते मुस्कुराते) क्या.. ल..ख..न.. आइ मीन लखनजी नही हे..?

पुनम : (छुपकर भावीकाको सृतीकी ओर आंखोसे नामे इसारा करते) अरे.. वो आज भाभीको सहेरमे घुमाने ले गये हे.. क्या हेना भाभी गांवमे रही हे तो उन्होने यहा कुछ ज्यादा नही देखा..

सृती : (मुस्कुराते) हां तो कुती.. बोल.. क्या जानना हे तुजे.. हें..हें..हें..

भावीका : (पुनमकी ओर मुस्कुराते) सब कुछ.. मेरे अतीत.. ओर भवीस्यके बारेमे.. आप लोग मेरे घरपे आनेकी बात कर रहेथे.. हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब आपको सबकुछ जानना हे.. मे इनसोर्ट बताती हु.. लेकीन याद रहे.. ये बात सीर्फ हम लोगोके बीच ही रहेनी चाहीये.. क्युकी कुछ बाते अ‍ैसी हे जीनसे आपका पुरा भवीस्य बदलने वाला हे.. ओर अभी कुछ दीन आपको सयमसे काम लेना पडेगा.. जैसा मे कहु करती जाइअ‍े..

भावीका : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. अब सब आपको पुछकर ही आगे बढुगी.. कहीये..

फीर पुनमने धीरे धीरे करते भावीकाको अपने अतीतके बारेमे बताना सुरु कीया.. की कैसे उनके पीता अ‍ेक बडे उद्योगपती थे.. आधेड उमरमे वीधुर ओर नीसंतान थे.. उनकी मांने भी सीधे अ‍ैसे मुकाम हासील नही कीये थे.. इनसे पहेले वोभी कही दुसरी जगहपे अ‍ेक छोटेसे क्लार्क की जोब करती थी.. तो बीचमे..

भावीका : (धीरेसे) तो क्या मोमकी फेमीलीमे कोइ नही था..?

पुनम : (मुस्कुराते) थे.. उनके माता पीता.. तब आपकी मोम कोलेजमे पढ रही थी.. ओर नजदीकके रीस्तेमे आपकी मोमके सीर्फ अ‍ेक मामा मामी.. फीर अ‍ेक दीन अचानक आपके मोम डेड कारमे कही जा रहे थे.. ओर उनकी कारका अ‍ेक्सीडन्ट होगया..

भावीका : (थोडा दुखी होते) ओह गोड.. मीन्स मेरे नाना नानी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. फीर आपकी मोम अकेली होगइ.. फीर तो उनके मम्मी पापाकी सब संपतीया बेचकर उनके मामा मामीके घर रहेने चली गइ.. आपकी मोम पैसे लेकर गइ थी.. तो कौन रखनेको मना करते.. दो तीन साल सबकुछ सही चला.. फीर तो आपके मोमकी कोलेज भी खतम होगइ.. ओर उसने अ‍ेक प्राइवेट कंपनीपे क्लर्ककी जोबभी मील गइ..

भावीका : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो पहेले मोम कोइ दुसरी कंपनीमे जोब करती थी.. फीर..?

पुनम : (मुस्कुराते) फीर क्या.. आपकी मोमके बुरे दीन सुरु होगये.. इन तीन सालोमे उनके मामा मामीने छोटे मोटे खर्चे गीनवाकर आपकी मोमसे सभी पैसे लेलीये.. ओर उनकी सेलेरीसे भी खर्चा मांगने लगे.. फीर अ‍ेक दीन अ‍ैसा हुआ जो नही होना चाहीये था..?

भावीका : (आस्चर्यसे देखते) क्या हुआ..?

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) अ‍ेक दीन उनकी मामी.. कीसी कारणसे तीन दीनके लीये अपने मायके गइ थी.. ओर उसी रात उनके मामाकी नीयत बीगड गइ.. उसने आपकी मोमका गलत फायदा उठाया..

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भावीका : (आंख गीली करते मुहपे हाथ रखते धीरेसे) क्या..? मीन्स.. रे..प.. क्या उनके मामाने मोमपे रेप कीया..?

पुनम : (सामने देखते) हां.. ओर उसी सुबह आपकी मोम उनके मामा मामीसे सभी रीस्तेको तोडके घर छोडकर चली गइ.. ओर अ‍ेक वुमन होस्टेलमे रहेने लगी.. उसने अपनी बदनामी ओर केरीयरकी वजहसे कीसीसे सीकायत नही की.. ओर अपनी जोबपे फोकस करने लगी..

भावीका : (आंख पोछते) तो फीर मोम पापाकी कंपनीमे कैसे आइ..?

पुनम : (सामने देखते) दीदी.. कुछ बाते अ‍ैसी हे जो आपको अच्छी ना लगे..

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) इतनी बुरी बात तो सुनली.. अब ओर क्या बुरा होगा..? बताइअ‍े.. अब तो मोम भी नही हे.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा.. बस.. सीर्फ सच जानना हे..
 
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. तो फीर सुनीये.. फीर तो आपकी मोमके उपर भी अ‍ेक जुनुन सवार हो गया.. की कीसी भी हालमे अपनी केरीयरमे उचा पद हासील करना हे.. ओर खुब पैसे बनाना हे.. उस रेपके बाद अपने आपको बीलकुल बदल दीया.. ओर वो आपकी तराह अ‍ेक खुबसुरत बीन्दास्त लडकी बन गइ..

भावीका : (मुस्कुराते) अच्छा..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. ओर उसने भी वोही सोर्टकट अपनाया जो सोर्टकट आपने अपनी स्कुल कोलजमे अपनाया था.. अपने पदोनतीके लीये अपने बोस तक पहोंच बनाली.. ओर अपने जीस्मका इस्तमाल करते अ‍ेक कंपनीसे दुसरी कंपनीमे अच्छी पोजीसन हासील करने लगी..

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सृती : (जोरोसे हसते धीरेसे) कमीनी अब समजमे आयाकी तुजमे अ‍ैसा गुण कहासे आया था.. हें..हें..हें..

भावीका : (हसते अ‍ेक जांगपे चपत लगाते) कुती सुन तो सही.. दीदी क्या कहे रही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) फीर उसने अ‍ेक बहुत बडी कंपनीमे मालीककी पर्सनल सेक्रेटरीका पद हासील करलीया.. ओर वो मालीक आपके पापा थे.. फीरतो वो पुरी तराह उनकी पर्सनल सेक्रेटरीके साथ अ‍ेक खास सेक्रेटरी होगइ.. वो उनका अ‍ेक बीवीकी तराह नीजी तौरपे भी खयाल रखने लगी..

भावीका : (मुस्कुराते) नीजी तौरपे मतलब..?

पुनम : (मुस्कुराते) आप इतनी भी नासमज नही हे.. हें..हें..हें.. आपके पापा जहा भी टुरपे जाते उनके साथ ही रहेती.. होटेलपे दोनो अ‍ेकही कमरा साजा करते.. दीनमे ओफीसका काम.. ओर सामको होटेलपे आतेही उनकी बीवी होजाती.. दोनोने कइ राते साथमे रंगीनकी.. फीर तो उनके घरपे ही रहेने चली गइ.. ओर दोनो लीव इनमे रहेने लगे..

भावीका : (मुस्कुराते) तो फीर पापाके रीस्तेदारोने कोइ अ‍ेतराज नही कीया..?

पुनम : (मुस्कुराते) उनके रीस्तेदार थेही कीतने..? ओर जीतने थे उनपे आपके पापाके बहुत अहेसान थे.. सब उनसे डरते थे.. अ‍ेक बचपनका दोस्त था.. भाइ जैसा.. जो कंपनीका लीगल अ‍ेडवोकेट भी था.. मतलब.. अभी भी हे.. उनकी भी अ‍ेक लडकी हे.. जो बचपनमे आप दोनो सहेली थी.. ओर आखीर वो दीन आया जीस दीन आपकी मोमने उनको अपनी प्रेगनन्सीकी खबर दी.. तो आपके पापा बहुत खुस होगये..

भावीका : (मुस्कुराते) तो फीर पापाने उनको अलग बंगलो क्यु दीलाया.. सादी करके साथ रखते..

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. अ‍ेक तो आपके पापा आपकी मोमसे उमरमे बहुत बडे थे.. ओर दुसरा.. उनका इन्डस्ट्रीजमे बहुत बडा नाम था.. तोवो नही चाहतेथे की उनकी इजतपे कोइ आंच आये.. इसीलीये उन्होने आपकी मोमको अ‍ेक बंगलो दीलवाया ओर पैसेकी इतनी व्यवस्थाकी.. की आप दोनोकी जींदगी आरामसे चल सके..

भावीका : (मुस्कुराते) तो फीर कहा गये वो सब पैसे..? मोमके खातेमे तो मुस्कीलसे मेरी पढाइ तकके खर्चे ही थे.. ओर उनमे भी मे अकस्ट्रा ट्युशन नही रखपाइ.. सृतीको तो मेरे बारेमे सबकुछ पता हे.. की मुजे पढाइके लीये क्या क्या पापड बेलने पडे थे..

पुनम : (मुस्कुराते) बस.. इसीलीये हम आपके घर आना चाहती हे.. ताकी आपको कुछ दीखा सके.. फीर आपकी जींदगी बदल जायेगी.. आइ प्रोमीस..

भावीका : (खुसीसे हसते) तबतो आपको जल्द मेरे घर लेजाना पडेगा बाबा.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) कमीनी ज्यादा उछल मत.. इस सन्डे सामको मेने ओर पुनोदीने वहा तेरे घर आनेका तैय कीया हे.. लेकीन तेरे पुराने वाले घर.. तेरे ससुरके वहा नही.. समजी..?

भावीका : (सामने देखते) दीदी.. मुजे मेरे ससुराल वालोके बारेमे सबकुछ जानना हे.. क्युकी यहा उनके कोइ रीस्तेदार नही हे.. सीर्फ दुरकी अ‍ेक मौसीजी हे.. जो उनके लडकेसे मेरी ननंदकी सादी हुइ हे.. क्युकी आज कल वहा कुछ ठीक नही चल रहा.. मुजे बहुत कुछ पता चला हे.. सायद मे बहुत बडा डीसीजन लेने वाली हु..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. वो दीन भी बहुत जल्द आने वाला हे.. थोडा धैर्य रखीये.. अपने आप सब कुछ ठीक होजायेगा.. क्या आप अपना क्लीनीक बंध करना चाहती हेनां..?

भावीका : (आस्चर्यसे) हां.. आपको सब पता हेनां..?

सृती : (आस्चर्यसे) क्या..? तु अपना क्लीनीक बंध कर रही हे..? लेकीन क्यु..?

पुनम : (सृतीका हाथ थामते) दीदी.. इस बारेमे हम सन्डेको बात करेगे.. भावीका दीदीके घर.. ओर रही बात इनके ससुरालकी.. तो सुनो..

फीर पुनम भावीकाको उनके ससुरालके बारेमे बहुत कुछ बताती हे.. कस असलमे उनके सास ससुर सगे चाचा भतीजी हे.. दोनोके बीच कैसे अफैर हुआ.. ओर अफैरकी वजहसे उनकी सासको कैसे उनके चाचाने(ससुर) कुआरी प्रेगनेन्ट करदीया.. जीनकी वजहसे दोनोको घर छोडना पडा ओर दोनो यहा आ गये..

फीर उनके ससुरने पोलीटीक्समे अपना केरीयर बनाया.. ओर इस प्रतीस्ठीत मुकाम हासील कीया.. पुनमने भावीकाको सबकुछ बता दीया.. फीर उनको अ‍ेक प्लान भी समजाती हे.. जीसे सुनकर भावीकाके चहेरेपे खुसी छा जाती हे.. तब भावीकाको साफ साफ पता चल गयाकी उनका भवीस्य कहा उजवल हे..

फीर पुनम कुछ बातेको अभीके लीये छीपाकर भावीकाको सबकुछ बता देती हे.. ओर वोही बात छुपाइ.. जीनको भावीकाकी सरप्राइजके लीये रखा था.. फीर साम ढलतेही चारो डीनर करती हे.. ओर नौ बजे भावीका सबकी वीदाय लेकर खुसी खुसी अपने घर चली जाती हे.. तो उनके जाते ही..
 
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. आपको तो सब कुछ पता हे.. तो फीर भावु क्लीनीक बंध करके क्या करेगी..? उनके पास इतने पैसे हे जो सारी जींदगी उनका घर बैठे गुजारा कर सके..?

पुनम : (मुस्कुराते) अरे दीदी.. इनके पास इतने पैसे हे की अभी उनको बतादीया तो वो पागल होजायेगी.. ओर वो क्लीनीक बंध करके सीर्फ सेवा करेगी.. वोभी हमारे गांव.. हें..हें..हें..

सृती : (खुसीसे आस्चर्यसे) क्या..? हमारे गांव.. कैसे..? हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) हम उनके घर जारहे हेनां..? तब मे उनके सामने प्रपोजल रखुगी.. वो मान जायेगी.. बस.. आप देखती जाओ.. क्युकी कुछ महीनोके बाद हमे भी वहा जाना पडेगा.. चलो.. अब बाते बादमे करेगे.. पहेले वो सरप्राइज वाला काम करले..?

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या वाकइ आज वो दोनो.. मुजे देखना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) नही.. आज नीचे भटकनां भी नही.. क्युकी वो बहुत डरी हुइ हे.. बडी मुस्कीलसे आगे बढी हे.. कही हमारा प्लान चौपटना होजाये.. मेने ओर मोमने भी हमारे पतीको मुस्कीलसे इस कामके लीये मनाया हे.. क्युकी उनकी बडी भाभी जो हे.. तो जनाबको संकोच हो रहा था..

सृती : (हसते) दीदी.. बताइअ‍ेनां.. इस वक्त वो दोनो क्या कर रहे हे..? हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) कोइ जरुरत नही हे.. बस.. इतना जानलो.. भाभी सभी सरम त्यागके बहुत आगे बढ रही हे.. हमारे पती उनको बहुत अच्छी तराह सम्हाल रहे हे.. चलो.. उनके आनेसे पहेले काम खतम करना हे.. फीर हम सोने चले जोयेगे.. चाबी लखनके पास हे.. आज रात वो सब सम्हाल लेगे..

ठीक इसी वक्त लखनके कंधेथे सर रखते चंदा चीप्स खाते पीक्चर देख रही थी.. ओर बीच बीचमे लखनको भी अपने हाथोसे खीला रही थी.. तभी लखनने भी उनके पेकेट्से अ‍ेक चीप्स लेली.. ओर अपने मुहमे आधी बहार रखते मुहको चंदाकी ओर कीया..

तो चंदाने भी मुस्कुराते लखनके मुहकी ओर मुह करते चहेरेको आगे बढाया.. ओर लखनके मुहसे चीप्स लेली.. फीर खाते लखनकी ओर देखते हसने लगी.. दोनो ही मस्तीया करते अ‍ेक दुसरेके साथ छेडखानी करने लगे.. लखनने पीछे हाथ डालकर चंदाके कंधेको पकड लीया.. ओर अपनी ओर खीच लीया..

तो चंदा लखनसे चीपक गइ.. ओर उसने चीप्सका पेक छोडकर अपना सर लखनके कंधेपे डाल दीया.. फीर लखनकी ओर घुमते अपना दाया हाथ लखनके गलेमे डाल दीया.. मुह कंधेपे पीछे करते लखनके कानकी बुट चुमने लगी.. ओर अपने होठोसे दबाते उनको खीचने लगी..

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बस.. लखनके उतेजना होनेमे इतनी ही छेडछाड काफी थी.. लखनने बाये हाथोसे चंदाके उरोजोको थाम लीया.. ओर हल्केसे दबाते मसलने लगा.. तो चंदा पागल जैसी होने लगी.. उन्होने लखनको कसके गले लगा लीया.. ओर लखनके गालोपे चुमने लगी.. उनकी चुत भी पानी छोडने लगी..

चंदा : (उतेजनामे कांपते कानमे फुसफुसाते) जानु.. आइ लव यु.. प्यार करो मुजसे.. मे सीर्फ आपकी हु.. आपकी चंदा..

लखन : (उतेजनामे) डार्लींग.. आइ लव यु टु.. अब तुम सीर्फ मेरी अमानत हो.. मेरी चंदा..

चंदा : (सरमसे कंधेपे सर रगडते) हंम.. अंह.. प्लीज.. धीरे दबाओनां.. अब तो मे पुरी आपकी हु..

कहा तो लखनने चंदाके टोपमे हाथ डाल दीया.. ओर अंदरसे ब्राको उची करते उनका बुब्स अपनी मुठीमे थाम लीया ओर मसलने लगा.. चंदाके मुहसे सीसकारीया नीकलने लगी.. उसने लखनको जोरोसे अपने बदनको चीपका लीया.. लेकीन दोनो अलग अलग चेरपे थे..

तो लखनने चंदाको खीचकर अपनी जांगपे बीठा दीया.. चंदा लखनके कंधेपे सर रगडते उनके गलेको चुमने लगी.. उनके उपर पुरी वासना हावी हो चुकी थी.. ओर वो धीरेसे अपना दुसरा हाथ नीचे लेगइ.. ओर लखनके लंडको पेन्टके उपरसे ही थाम लीया.. ओर हल्केसे सहेलाने लगी..

चंदा : (कानमे फुसफुसाते) अंह.. जानु.. मुजे कुछ हो रहा हे.. क्या हम घर चले..? हंम..?

लखन : (चंदाके गलेको चुमते) नही बादमे.. यहा थीयेटरमे मुजे अपनी मासुकाके साथ पुरा आंनद लेना हे.. डरो मत.. आज रात तुम सीर्फ मेरी हो.. ओर घरपेभी सब अभी जाग रहे होगे..

चंदा : (लखनके तनसे तन रगडते) हंम.. लव यु जानु.. मेरा पब्लीक स्पेसपे ये पहेला अनुभव हे.. लेकीन डर लग रहा हे.. मुजसे नही रहा जारहा.. प्लीज.. लव मी.. मुजे ओर प्यार चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) डरो मत.. कुछ नही होगा.. तुम भी खुलकर प्यार करो..

चंदाने अपने हाथसे टोपको अपने सीने तक उचा करदीया ओर अपनी ब्राको थोडी उची करते अपने दोनो बुब्सको आजाद कर दीया.. फीर लखनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते थोडी पीछे जुक गइ.. तो लखन चंदाके दोनो बुब्सको बारी बारी चुमने लगा.. चंदाने लखनका सर उठाया..

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ओर लखनके होठोको चुमने लगी.. फीर चुमते उसने अपनी ब्राको सहीसे उची करदी.. ताकी लखन उनके बुब्सके साथ आरामसे खेल सके.. लखनने फीर बुब्सपे मुह लगा लीया ओर चंदाके बुब्सको चुमने लगा.. तो चंदा लखनके सरको सहेलाते अपने बुब्सपे दबाने लगी..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) जा..नु.. आरामसे.. दुसरा भी चुसोनां.. बहुत मजा आता हे..

कहेते लखनके गरदनमे दोनो हाथ डालकर लखनको अपने तनसे भीच लीया.. ओर अपना बुब्स लखनके सीनेपे रगडने लगी.. बुब्स रगडते लखनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. चंदा बेकाबु होने लगी.. तो अचानक खडी होगइ.. ओर आजु बाजु नजर घुमाते अ‍ेक नजर डालती हे..

तो जीतने भी कपल थे सभी अंधेरेमे अपने पार्टनरके साथ लगे हुअ‍े थे.. तभी उनका ध्यान अपनेसे दो रो आगे दुसरे कोनेपे गया.. तो अ‍ेक लडकी अपने पार्टनरकी गोदमे उछल रही थी.. जीसे देखकर चंदाकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. ओर वो बहुत ही सर्मसार होगइ..

ना जाने चंदामे कहासे हीमंत आगइ.. तो वोभी खडी होते लखनके दोनो पैरपे लखनकी ओर मुह करते उनकी गोदमे सामने बैठ गइ.. फीर लखनके कंधेपे सर डालके जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तो लखनने भी मुस्कुराते चंदाको अपने तनसे चीपका लीया..

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फीर लखनके चहेरेकी ओर देखते लखनकी नाकसे अपना नाक रगडने लगी.. तो लखनने जोरोसे चंदाके होठोको अपने होठोसे भीच लीया.. फीर दोनो ही वाइल्ड कीस करने लगे.. चंदा वासनामे अपना सुध्ध बुध्ध खो बैठी थी.. वो लखनकी पीठमे जोरोसे हाथ फीराते अपने नाखुन चुभोने लगी..
 
लखन : (मुस्कुराते कानमे) भाभी.. धीरे.. चुभता हे..

चंदा : (कानमे कामुकतासे फुसफुसाते) भाभी नही.. सीर्फ चंदा.. आपकी चंदा.. प्लीज.. प्यार करो मुजसे.. रहा नही जाता.. रगड डालो.. मुजे मसल डालो.. आजसे चंदा आपकी होगइ..

इतना सुनते ही लखनने अपना अ‍ेक हाथ नीचे घुसा दीया.. ओर चंदाकी चुतको टटोलने लगा.. तो चंदा आंख बंध करते सीसकारीया करने लगी.. ओर अपनी कमर थोडी उची करके खीसकाते लखनके हाथोको स्पेस देने लगी.. ताकी लखन सहीसे उनकी चुतको सहेला सके..

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लखन चंदाकी चुतको सलवारके उपरसे ही सहेलाने लगा.. तो चंदा लखनके गालोको अपने दांतोसे काटने लगी.. लखन समज गयाकी चंदा पुरी तराह गरम हो चुकी हे.. ओर चुदवानेके लीये बीलकुल रेडी हे.. तभी चंदा भी अपना हाथ नीचे लेगइ.. ओर लखनके पेन्टकी क्लीप खोलने लगी..

चंदा : (फुस फुसाते धीरेसे कानमे) प्लीज.. इसे खोलोनां..

लखन : (धीरेसे) यहा नही.. घर जाकर करते हेनां..

चंदा : (फुस फुसाते कानको चुमते) हंम.. सीर्फ हाथ लगाउगी.. मुजे देखना हे..

लखन : (कमर उची करते) थोडी उपर होजाओनां..

कहा तो चंदा थोडी जुकते खडी होगइ.. लखनने अपनी पेन्ट थोडी नीचे सरकादी.. ओर कुछ अ‍ैसा कीया चंदा फौरन लखनके पैरोपे बैठ गइ.. क्युकी लखनने चंदाके सरलवारका नाडा खीच लीया था.. ओर सलवारको थोडी नीचे करदी.. चंदा सरमके पारे पानी पानी होगइ..

चंदा : (बाहोमे भीचते कानमे फुसफुसाते) यहा करना हे..? हंम..? पेन्टी नीकालदु..?

लखन : (चंदाके कानकी बुटको चुमते धीरेसे) नही चंदा.. तुम सेह नही पाओगी.. घर चलकर आरामसे करते हेनां.. बस.. तेरी मुनीयाके साथ थोडासा खेलना हे..

लखन उनके नीकरमे हाथ डाल देता हे.. ओर सीधे चंदाकी चुतको सहेलाने लगा.. तो चंदाने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर अ‍ेक हाथसे लखनकी चडीमे हाथ डालते लखनके तगडे हथीयारको मुठीमे थाम लीया.. ओर लंडको पकडे ही चंदा सोक्ट होगइ.. ओर थोडा डरने लगी..

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चंदा : (फुसफुसाते) ओह गोड.. इतना बडा..? ओर मोटा भी हे.. आपका तो बहुत बडा हे..

लखन : (मुस्कुराते) सब आप जैसी भाभीओकी महेरबानी हे..

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या आपकी सभी बीवीया इसे जेल पाती हे..? मुजे तो बहुत डर लग रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) डरो मत.. अबतो इसी हथीयारसे सारी जींदगी आपकी सेवा करनी हे.. फीर आप बडे भैयाको भुल जाओगी..

चंदा : (बाहोमे भीचते कानमे धीरेसे) वैसे भी मे उनको भुल चुकी हु.. अब चंदा सीर्फ आपकी हे.. आइ.. धीरे डालीयेनां..

क्युकी तबतक चुतको सहेलाते लखन अ‍ेक उंगली चंदाकी चुतमे डाल देता हे.. ओर उनके चुतके दानेको सहेलाते खरोदने लगा.. बस.. यही हरकत चंदाको पागल करनेमे काफी थी.. चंदा जोरोसे लखनके लंडको मुडीमे थामकर उपर नीचे करते सहेलाने लगी.. ओर लखनके होठोको चुमने लगी..

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लखन धीरे धीरे करते पुरी उंगली चंदाकी चुतमे घुसेड देता हे.. ओर अंदर बहार करने लगा.. तो चंदाकी अपनी कमर लखनकी गोदमे आगे पीछे हीलाने लगी.. कइ दीनोसे अनछुइ थी.. तो लखनकी हरकत ज्यादा देर बरदास्त नही करपाइ.. ओर उसने कांपते हुअ‍े लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

ओर अपनी कमरको जटके मारने लगी.. लखनकी उंगलीपे गरमाहट महेसुस हुइ.. तभी अचानक चंदा सरकते लखनके लंडके नजदीक सरक गइ.. ओर लंडको अपनी चुतके नीचे फसाकर अपनी कमरको आगे पीछे करते लंडको अपनी चुतपे घीसने मर्दन करने लगी..

चंदा लखनकी गरदनपे दोनो हाथ डालकर लखनसे चीपक गइ.. फीर लखनके कानमे फुसफुसाते लखनको ओर प्यार करनेकी मनते करने लगी.. कुछ देरके बाद वो दोनो पैरोके बीच नीचे घुटनोके बल बैठ गइ.. फीर लखनके लंडको चडीसे पुरा बहार नीकाल दीया..

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लंडको बहार नीकालते तेजीसे लंडकी चमडीको उपर नीचे करने लगी.. लखन आंख बंध करते मजे लेने लगा.. तभी उसे लंडपे थोडी गरमाहट महेसुस हुइ.. उसने आंख खोलकर देखा तो चंदा लखनका पुरा लंड अपने मुहमे नीगल चुकी थी.. ओर तेजीसे लखनको ब्लुजोब देने लगी..

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लखनने भी चंदाके चहेरेको अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर धीरे धीरे कमर आगे पीछे करते चंदाके मुहको चोदने लगा.. लेकीन लखनको पता नहीथा की चंदा इस काममे माहीर थी.. वो पहेले देवायतको सादीसे पहेले कइ बार ब्लुजोब दे चुकी थी.. काफी देरके बाद लखनका लावा फुट पडा..

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ओर चंदाकी हलकमे चला गया.. चंदा लखनका पुरा माल गटक गइ.. जैसे कोइ अमृतका ज्युस हो.. चंदाने गनेकी तराह चुसके लखनके पुरे लंडको साफ कर दीया.. फीर चुनीसे अपना मुह साफ करते लखनकी ओर देखते मुस्कुराते बैठे ही अपनी चुतको रुमालसे साफ करने लगी..

फीर पेन्टीको सहीसे पहेनकर सलवारको ठीक करने लगी.. फीर अपनी ब्रा ओर टोपको भी सही कीया.. कुछ देर लखनके पैरोपे सर रखदीया ओर मुस्कुराती रही.. फीर खडी होते अपनी सीटपे बैठ गइ.. तभी इन्टरवेल हुआ.. लखन भी चडी सही करते पेन्टको सही करते पहेन लेता हे.. तो चंदा बहुत ही सरमाते धीरेसे हस रही थी..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु हस रही हो..?

चंदा : (उनके कंधेपे सर रखते धीरेसे) तो क्या करु..? मुजे अब भी यकीन नही होरहा की मेने अभी क्या कीया.. ओर वोभी पब्लीक स्पेसमे.. हें..हें..हें.. आपको पता हे.. वो आगेकी रोमे तो उन दोनोने अपना पुरा काम खतम करलीया.. वो लडकी कैसे उनकी गोदमे उछल रही थी..

लखन : (मुस्कुराते कानमे) आपको भी उछलना हे..? अभी आधी फील्म बाकी हे.. तो पुरी कर लेते हे..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) ना बाबा ना.. आपका कीतना बडा हे.. मेरी हालत खराब कर देगा.. अब जोभी करना हे घर जाके.. यहा नही.. घर चलो.. नही देखनी फल्म.. वैसे भी हमने फील्म देखी ही कहा.. लेकीन मजा बहुत आया..

लखन : (मुस्कुराते) अरे पुरी फील्म देखकर जाते हेनां..

चंदा : (सरमाकर कानमे फुसफुसाते) जानु.. पीसाब जाना हे.. आप मेरे साथ चलो बहार.. प्लीज..

चंदा खडी होगइ.. ओर लखनका हाथ पकडकर लगभग बहारकी ओर दौड ही पडी.. वो जड चुकी थी.. उसे जटसे बाथरुममे जाना था.. ओर होलसे बहार नीकलते ही वो लखनका हाथ छोडकर लेडीस टोयलेटमे घुस गइ.. लखन उनको हसते हुअ‍े देखता रहा.. फीर वोभी जेन्टस टोयलेटमे चला गया..
 
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