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लखन : (नजरे जुकाते धीरेसे) ठीक हे भाभी.. आप सीमा बता दीजीये.. मे इनसे आगे नही बढुगा.. आइ अेम सोरी..
चंदा : (सामने देखते मनमे मुस्कुराते) हंम.. गुडबोय.. अगर मे सीमा तैय करदु तो आप मान लोगे..?
लखन : (नजरे जुकाते धीरेसे) जी.. जी भाभी..
चंदा : (हाथ थामते मनमे मुस्कुराते) फीर मुकर तो नही जाओगे..?
लखन : (नजर उठाकर) नही.. आपको भी पता हे मे वादेका पका हु..
चंदा अेक नजरसे लखनको देखती रही.. लखन अेक पल उनके सामने देखकर नजर जुका लेता हे.. उनको मनमे थोडी गभराहट महेसुस हो रही थी.. लेकीन कोइ डर नही था.. तभी चंदाने कुछ अैसा कीया जीनकी लखनको उमीद नही थी.. चंदाने लखनके दोनो हाथ थाम लीये..
तो लखन नजर उठाके चंदाकी आंखोमे देखने लगा.. चंदा मंद मंद मुस्कुराते लखनकी आंखोमे देख रही थी.. उसने लखनका चहेरा थाम लीया.. ओर धीरेसे मुह आगे करते लखनके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. लखन आंख बडी करते चंदाकी ओर देखता रहा..
लखन कुछ समजे इनसे पहेले ही अचानक चंदा लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. धीरे धीरे करते कइ दीनोसे लखन उनकी कामाग्नीको भडका रहा था.. ओर आज सुबहकी कीसने उनके सब्रका बांध तोड दीया था.. वो पुरा दीन बैचेन रही.. ओर उसने अेक फैसला करलीया था..
सुबहसे अबतक वो तीन बार अपनी उंगलीसे अपने आपको सांत कर चुकी थी.. ओर लखनका बेसब्रीसे इन्तजार कर रही थी.. जब लखन देर रात आगया तब उनके दीलकी धकडन बढ गइ थी.. ओर आखीर उसने लखनको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया..
उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. लखनके सीनेपे हाथ घुमाते सरको सीनेमे छीपालीया.. फीर सीनेको चुमते सरको लखनके तनसे रगडते उपर लेजाने लगी.. ओर उसने लखनके कंधेपे सर रख दीया.. फीर लखनके कानकी बुट चुमते कानमे फुस फुसाने लगी..
चंदा : (धीरेसे कानमे) लखन.. सोरी.. मेने आपको डरा दीया.. हमारे प्यारमे कोइ सीमा नही होगी.. मे प्यारकी सारी सीमा लांघना चाहती हु.. हमारी सीमाकी कोइ हद नही होगी.. बस.. मुजे सीर्फ आपका प्यार चाहीये.. वही प्यार.. जो प्यारसे मे कइ दीनोसे वंचीत हु..
लखन : (बाहोमे भीचते) भाभी.. आ यु स्योर..? कही मे गलत तो नही सुन रहा..?
चंदा : (कंधेपे सर छुपाते) नही.. कोइ गलत नही.. मेने बहुत ठोकर खाइ हे.. मे सीर्फ प्यार चाहती हु.. ओर इसीलीये यहा आइ हु.. बस अेक ही बीनंती हे..
लखन : (बाहोमे भीचते) क्या..? आज खुलकर बतादो..
चंदा : (आंख गीली करते) अेक पती मुजे मजधारमे छोडकर उपर चला गया.. देवुने भी मुजे मजधारमे छोडा.. बस.. तुम मुजे मजधारमे मत छोडना.. वरना इस बार मे बीखर जाउगी..
लखन : (चहेरा थामथे) नही भाभी.. आइ प्रोमीस.. मे आपको मजधारमे नही छोडुगा.. पुरी जींदगी आपका साथ नीभाउगा.. लेकीन आप तो मेरे बारेमे सब जानती हे.. की मेरी कीतनी बीवीया हे..
चंदा : (आंखोमे देखते धीरेसे) हां.. ओर ये भी जानती हु.. की आपका अपनी बीवीओके अलावा ओरोके साथ भी रीलेशन हे.. आप अपनी सभी बीवीओको अेक जैसा प्यार देते हे.. तो मुजे भी उमीद हेकी आप मुजे भी नीरास नही करोगे..
लखन : (मुस्कुराते) क्या आपको मेरे बारेमे सब पता हे..?
चंदा : (मुस्कुराते) हां.. आज पता चला मंजुने अैसा फैसला क्यु लीया था.. वो हम सभी ओरतोकी भावनाओका खयाल रखना जानती हे.. आज पता चला मंजुने सही फैसला लीया हे.. उसी फैसलेकी वजहसे हमारी भावु भी हेनां..? मेने कइ बार आपको देर रात उनके रुममे जाते देखा हे.. ओर वो सब कुछ देखा हे वो अेक मीया बीवीमे होता हे.. लेकीन मुजे इनसे कोइ मतलब नही हे.. बस.. मुजे मेरे हीस्सेका प्यार चाहीये.. जो आपने हमारी भावुको दीया हे..
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भाभी.. मीलेगा.. जरुर मीलेगा..
चंदा : (बाहोमे समाते) अब भाभी नही.. सीर्फ चंदा.. आपकी चंदा.. जो जींदगी भर आपकी बाहोमे गुजारना चाहती हे.. बस.. सही वक्तका इन्तजार कीजीये.. सही वक्त आयेगा.. तब ये चंदा हमेसाके लीये आपको पुर्ण समर्पीत होजायेगी.. अब आप जाइअे.. थक गये होगे.. सो जाइये..
लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. कुछ देर आपकी आगोसमे रहेना चाहता हु..
चंदा : (मुस्कुराते) भाभी नही.. सीर्फ चंदा.. जाइअे वरना अभी कुछ गलत होजायेगा.. मे इसे यादगार पलोमे जीना चाहती हु.. पुरी रात हमारी होगी.. मंजुने सही फैसला कीया हे.. आज उनके फैसलेका मतलब समजमे आया.. आइ लव यु..
लखन : (होंठ चुमते) आइ लव यु टु.. अब आप सोजाइअे.. कल हमे गांव जाना हे.. मोमकी तबीयत खराब हे..
चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. पुनोदीसे बात हुइ.. लखन.. अब मे यही रहुगी.. मेरे वीजयको यही रहेकर पढाउगी.. सहेरमे.. हमारी अेक अलग ही दुनीया होगी.. बस.. मे उनको अेक मांका प्यार दुगी.. ओर आप अेक बापका फर्ज नीभाना.. हमारी मंजुका सपना हम पुरा करेगे..
दोनो खडे हो गये.. तब चंदाने अेक बार फीर लखनको अपनी बाहोमे भर लीया.. तो लखनने इस बार अेक हाथ उनके बुब्सको थामते होंठ चुम लीये.. तो चंदाके तनसे अेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर मुस्कुराते जटसे लखनकी बाहोसे आजाद होते अपने रुममे दोडकर भाग गइ..
लखन मुस्कुराते उपर रुममे चला गया.. ओर चेन्ज करके पुनमके पास जाकर लेट गया तो पुनम करवट लते लखनकी बाहोमे आगइ.. लखनने उनका सर चुम लीया तो पुनम नींदमे ही मुस्कुराने लगी.. सब सोगये.. लखन सुबह सबको लेकर दो दीनके लीये गांव जाने वाला था.. पता नही अगली सुबह सुरज कौनसा नया दीन लेकर आने वाला था.. बहुत कुछ नया होने वाला था....
कन्टीन्यु
चंदा : (सामने देखते मनमे मुस्कुराते) हंम.. गुडबोय.. अगर मे सीमा तैय करदु तो आप मान लोगे..?
लखन : (नजरे जुकाते धीरेसे) जी.. जी भाभी..
चंदा : (हाथ थामते मनमे मुस्कुराते) फीर मुकर तो नही जाओगे..?
लखन : (नजर उठाकर) नही.. आपको भी पता हे मे वादेका पका हु..
चंदा अेक नजरसे लखनको देखती रही.. लखन अेक पल उनके सामने देखकर नजर जुका लेता हे.. उनको मनमे थोडी गभराहट महेसुस हो रही थी.. लेकीन कोइ डर नही था.. तभी चंदाने कुछ अैसा कीया जीनकी लखनको उमीद नही थी.. चंदाने लखनके दोनो हाथ थाम लीये..
तो लखन नजर उठाके चंदाकी आंखोमे देखने लगा.. चंदा मंद मंद मुस्कुराते लखनकी आंखोमे देख रही थी.. उसने लखनका चहेरा थाम लीया.. ओर धीरेसे मुह आगे करते लखनके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. लखन आंख बडी करते चंदाकी ओर देखता रहा..
लखन कुछ समजे इनसे पहेले ही अचानक चंदा लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. धीरे धीरे करते कइ दीनोसे लखन उनकी कामाग्नीको भडका रहा था.. ओर आज सुबहकी कीसने उनके सब्रका बांध तोड दीया था.. वो पुरा दीन बैचेन रही.. ओर उसने अेक फैसला करलीया था..
सुबहसे अबतक वो तीन बार अपनी उंगलीसे अपने आपको सांत कर चुकी थी.. ओर लखनका बेसब्रीसे इन्तजार कर रही थी.. जब लखन देर रात आगया तब उनके दीलकी धकडन बढ गइ थी.. ओर आखीर उसने लखनको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया..
उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. लखनके सीनेपे हाथ घुमाते सरको सीनेमे छीपालीया.. फीर सीनेको चुमते सरको लखनके तनसे रगडते उपर लेजाने लगी.. ओर उसने लखनके कंधेपे सर रख दीया.. फीर लखनके कानकी बुट चुमते कानमे फुस फुसाने लगी..
चंदा : (धीरेसे कानमे) लखन.. सोरी.. मेने आपको डरा दीया.. हमारे प्यारमे कोइ सीमा नही होगी.. मे प्यारकी सारी सीमा लांघना चाहती हु.. हमारी सीमाकी कोइ हद नही होगी.. बस.. मुजे सीर्फ आपका प्यार चाहीये.. वही प्यार.. जो प्यारसे मे कइ दीनोसे वंचीत हु..
लखन : (बाहोमे भीचते) भाभी.. आ यु स्योर..? कही मे गलत तो नही सुन रहा..?
चंदा : (कंधेपे सर छुपाते) नही.. कोइ गलत नही.. मेने बहुत ठोकर खाइ हे.. मे सीर्फ प्यार चाहती हु.. ओर इसीलीये यहा आइ हु.. बस अेक ही बीनंती हे..
लखन : (बाहोमे भीचते) क्या..? आज खुलकर बतादो..
चंदा : (आंख गीली करते) अेक पती मुजे मजधारमे छोडकर उपर चला गया.. देवुने भी मुजे मजधारमे छोडा.. बस.. तुम मुजे मजधारमे मत छोडना.. वरना इस बार मे बीखर जाउगी..
लखन : (चहेरा थामथे) नही भाभी.. आइ प्रोमीस.. मे आपको मजधारमे नही छोडुगा.. पुरी जींदगी आपका साथ नीभाउगा.. लेकीन आप तो मेरे बारेमे सब जानती हे.. की मेरी कीतनी बीवीया हे..
चंदा : (आंखोमे देखते धीरेसे) हां.. ओर ये भी जानती हु.. की आपका अपनी बीवीओके अलावा ओरोके साथ भी रीलेशन हे.. आप अपनी सभी बीवीओको अेक जैसा प्यार देते हे.. तो मुजे भी उमीद हेकी आप मुजे भी नीरास नही करोगे..
लखन : (मुस्कुराते) क्या आपको मेरे बारेमे सब पता हे..?
चंदा : (मुस्कुराते) हां.. आज पता चला मंजुने अैसा फैसला क्यु लीया था.. वो हम सभी ओरतोकी भावनाओका खयाल रखना जानती हे.. आज पता चला मंजुने सही फैसला लीया हे.. उसी फैसलेकी वजहसे हमारी भावु भी हेनां..? मेने कइ बार आपको देर रात उनके रुममे जाते देखा हे.. ओर वो सब कुछ देखा हे वो अेक मीया बीवीमे होता हे.. लेकीन मुजे इनसे कोइ मतलब नही हे.. बस.. मुजे मेरे हीस्सेका प्यार चाहीये.. जो आपने हमारी भावुको दीया हे..
लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भाभी.. मीलेगा.. जरुर मीलेगा..
चंदा : (बाहोमे समाते) अब भाभी नही.. सीर्फ चंदा.. आपकी चंदा.. जो जींदगी भर आपकी बाहोमे गुजारना चाहती हे.. बस.. सही वक्तका इन्तजार कीजीये.. सही वक्त आयेगा.. तब ये चंदा हमेसाके लीये आपको पुर्ण समर्पीत होजायेगी.. अब आप जाइअे.. थक गये होगे.. सो जाइये..
लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. कुछ देर आपकी आगोसमे रहेना चाहता हु..
चंदा : (मुस्कुराते) भाभी नही.. सीर्फ चंदा.. जाइअे वरना अभी कुछ गलत होजायेगा.. मे इसे यादगार पलोमे जीना चाहती हु.. पुरी रात हमारी होगी.. मंजुने सही फैसला कीया हे.. आज उनके फैसलेका मतलब समजमे आया.. आइ लव यु..
लखन : (होंठ चुमते) आइ लव यु टु.. अब आप सोजाइअे.. कल हमे गांव जाना हे.. मोमकी तबीयत खराब हे..
चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. पुनोदीसे बात हुइ.. लखन.. अब मे यही रहुगी.. मेरे वीजयको यही रहेकर पढाउगी.. सहेरमे.. हमारी अेक अलग ही दुनीया होगी.. बस.. मे उनको अेक मांका प्यार दुगी.. ओर आप अेक बापका फर्ज नीभाना.. हमारी मंजुका सपना हम पुरा करेगे..
दोनो खडे हो गये.. तब चंदाने अेक बार फीर लखनको अपनी बाहोमे भर लीया.. तो लखनने इस बार अेक हाथ उनके बुब्सको थामते होंठ चुम लीये.. तो चंदाके तनसे अेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर मुस्कुराते जटसे लखनकी बाहोसे आजाद होते अपने रुममे दोडकर भाग गइ..
लखन मुस्कुराते उपर रुममे चला गया.. ओर चेन्ज करके पुनमके पास जाकर लेट गया तो पुनम करवट लते लखनकी बाहोमे आगइ.. लखनने उनका सर चुम लीया तो पुनम नींदमे ही मुस्कुराने लगी.. सब सोगये.. लखन सुबह सबको लेकर दो दीनके लीये गांव जाने वाला था.. पता नही अगली सुबह सुरज कौनसा नया दीन लेकर आने वाला था.. बहुत कुछ नया होने वाला था....
कन्टीन्यु