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लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) कमीने.. तुजे तो घरमे ही दो दो चुत मील गइ.. ओर तेरे चाचासे सबानाकी सादीकी बात भी करली.. बहुत अच्छा हे.. आगे बढ.. मे तेरे साथ हु..
साहील : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. कल कादीर भाइ ओर सायरा दीदीका फोन आया था.. वहासे सीधा ही उनके घर जा रहा हु.. अेक दीन पहेले.. सुबह कादीर भाइको रेल्वे स्टेशन छोडने जाना हे.. फीर तीन चार दीन वही हु.. मे ओर सायरा दीदी.. अकेले.. आप समज गयेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. मतलब मछली खुद ही जालमे फसना चाहती हे.. कमीने अैसा मौका बार बार नही मीलता.. करले कीला फतेह.. अगर वहा सामान बामान पेक करनम मेरी मददकी जरुरत होतो कहेनां..
साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. लेकीन तीन चार दीन हे.. मे मेनेज करलुगा.. मे घरसे कामका बहाना बनाकर आया हु.. वहा ओर यहा भी कीसीको नही पता.. तो प्लीज.. समज गयेनां..?
लखन : (हसते) बडा कमीना हे तु.. चल जा.. मोज कर.. कीसीको पता नही चलेगा.. इरादा तो नेक हेनां..? अगर वो आगे बढे तो तु पीछेहट मत करना..
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ मछली खुद ही जालमे फसना चाहती हेतो मे क्या करु..?
दोनो बाते करते रहे.. आधे घंटेके बाद सादी सम्पन हुइ.. मुनाने बसंतीकी मांग भरदी थी ओर मंगलसुत्र भी पहेनाया.. अब बरखा ओर बसंती मां बेटीके साथ अेक दुसरेकी सौतन भी होगइ थी.. सबलोग भोजन करने बैठ गये.. तब चंदा लखनके साथ बीलकुल सटकर बैठी थी..
चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) लखन.. आज यहा आपके दोस्तकी सादीमे आपके साथ अेक बीवी होनी चाहीये थी.. ओर आप मुजे लेकर आगये..
लखन : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) बीवीना सही.. आप मेरी गर्ल फ्रेन्ड तो हो.. आपको दीखानेके लीये ही लाया हु.. की देखो.. दुनीयामे कैसे रीस्ते पनप रहे हे.. यही तो हे रीस्तोमे हसीन बदलाव..
चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे) अच्छा.. तो आप पहेलेसे ही सब तैय करके मुजे यहा लाये हो.. क्या इरादा हे आपका..?
लखन : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) इरादातो नेक ही हे.. लेकीन आपने पुछ ही लीया हे तो यहा मंदीर भी हे.. मंडप भी रेडी हे.. रीस्तेदार जैसे दोस्त भी हे.. अगर आप कहोतो हम सादी करले..? हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाकर जुठे गुस्सेसे जांगपे अेक मुका मारते) पुनोदी ठीक ही केह रही थी.. कीतने कमीने हो आप.. चार चार सादी करके भी जी नही भरा.. मत भुलो मे पहेलेसे ही सादी सुधा हु.. आपके बडे भाइकी अमानत..
लखन : (धीरेसे) क्या सचमे आप सादी सुधा जींदगी जी रही हे..? मत भुलो इसीलीये भाभीमाने कुछ फैसले लीये हे..
चंदा : (सोक्ट होते सामने देखते) क्या आप मंजुकी इस बातको सीरीयस मानते हे..?
लखन : (मुस्कुराते) हां.. उनकी हर बात मानता हु.. मां हे वो मेरी.. हम सबकी जननी.. इसका मतलब भी जानती हे..?
चंदा : (अेक नजरसे देखते) सबकी जननी..? मुजे सब जानना हे.. ये सब क्या हो रहा हे..? मेतो समजी वो हम सबके साथ मजाक कर रही हे..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. हम वापसीमे बात करेगे.. मे आपको सबकुछ बता दुगा..
सब लोगोने भोजन करलीया.. जागृती लखनसे अकेलेमे बात करना चाहती थी.. कमसे कम उनका फोन नंबर लेना चाहती थी.. लेकीन सांती उनके साथ ही होती थी.. जीसकी वजहसे जागृती लखनसे बात नही करपाइ.. क्युकी जागृती ओर लखनका राज सीर्फ दो लोग ही जानते थे.. अेक जयश्री ओर दुसरी सांती..
फीर सबलोग बाबासे आशीर्वाद लेकर नीकल गये.. सबने लखन ओर चंदाको गांव आनेका बहुत आग्रह कीया.. लेकीन लखन ओर चंदाने मना कर दीया.. फीर सबलोग गांवकी ओर नीकल गये.. तो साहील भी अपनी बाइक लेकर कादीरके घरकी ओर सहेर नीकल गया..
ओर लखन चंदा कारमे बैठ गये.. चंदा लखनकी बाजुमे बैठकर बहुत ही सरमाने लगी.. अब सीर्फ दोनो ही अकेले थे.. चंदा मनसे चाहती थीकी लखन खुद आगे बढे.. फीर दोनो सहेरकी ओर नीकल गये.. चंदा अब भी लखनकी ओर सवालीया नजरोसे देख रही थी..
चंदा : (मुस्कुराते) लखन.. क्या अभी जीनकी सादी हुइ वो दोनो पहेले मां बेटे थेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. जब उनके पीताजी थे तब ही मुनाका उनकी मांके साथ अफैर था.. अब उनके पीताजी गुजर गये ओर बसंती आंटी वीधवा होगइ.. तो मुनाने उनसे सादी करली.. ओर वो फीरसे सुहागरन होगइ.. बस.. वही बदलाव तो मोम चाहती हे.. उस हीमाचल की तराह..
चंदा : (मुस्कुराते) लेकीन मंजुको यहा अैसे बदलावकी क्या आवस्यक्ता पड गइ..?
लखन : (सामने देखते) क्यु..? आप उन हीमालयकी कहानीको नही जानती..? आप भी तो उस कहानीका हीस्सा हो.. वो ही राजा तो हमारे घर पैदा होने वाला हे.. ओर ये सब उनके आनेसे पहेलेकी भुमीका हे.. जो मंजु मोम ओर पुनोदी कर रही हे..
चंदा : (सामने देखते) माना की मे भी वोही हु.. तो क्या अैसे मां बेटेकी सादीसे कुछ फर्क पडेगा..?
लखन : (सामने देखते) आपकी सादीके बाद आप छोटी ही उमरमे आप वीधवा होगइ थी.. तो क्या आपकी जींदगीमे कुछ फर्क पडा था..?
चंदा : (सामने देखते सरमाते) बहुत कुछ.. आप समज सकते हो अेक सादी सुधा ओरत अकेली होजाती हे तो क्या फर्क पडता हे.. उनको कीतनी मुस्कीलोका सामना करना पडता हे..
साहील : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. कल कादीर भाइ ओर सायरा दीदीका फोन आया था.. वहासे सीधा ही उनके घर जा रहा हु.. अेक दीन पहेले.. सुबह कादीर भाइको रेल्वे स्टेशन छोडने जाना हे.. फीर तीन चार दीन वही हु.. मे ओर सायरा दीदी.. अकेले.. आप समज गयेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. मतलब मछली खुद ही जालमे फसना चाहती हे.. कमीने अैसा मौका बार बार नही मीलता.. करले कीला फतेह.. अगर वहा सामान बामान पेक करनम मेरी मददकी जरुरत होतो कहेनां..
साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. लेकीन तीन चार दीन हे.. मे मेनेज करलुगा.. मे घरसे कामका बहाना बनाकर आया हु.. वहा ओर यहा भी कीसीको नही पता.. तो प्लीज.. समज गयेनां..?
लखन : (हसते) बडा कमीना हे तु.. चल जा.. मोज कर.. कीसीको पता नही चलेगा.. इरादा तो नेक हेनां..? अगर वो आगे बढे तो तु पीछेहट मत करना..
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ मछली खुद ही जालमे फसना चाहती हेतो मे क्या करु..?
दोनो बाते करते रहे.. आधे घंटेके बाद सादी सम्पन हुइ.. मुनाने बसंतीकी मांग भरदी थी ओर मंगलसुत्र भी पहेनाया.. अब बरखा ओर बसंती मां बेटीके साथ अेक दुसरेकी सौतन भी होगइ थी.. सबलोग भोजन करने बैठ गये.. तब चंदा लखनके साथ बीलकुल सटकर बैठी थी..
चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) लखन.. आज यहा आपके दोस्तकी सादीमे आपके साथ अेक बीवी होनी चाहीये थी.. ओर आप मुजे लेकर आगये..
लखन : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) बीवीना सही.. आप मेरी गर्ल फ्रेन्ड तो हो.. आपको दीखानेके लीये ही लाया हु.. की देखो.. दुनीयामे कैसे रीस्ते पनप रहे हे.. यही तो हे रीस्तोमे हसीन बदलाव..
चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे) अच्छा.. तो आप पहेलेसे ही सब तैय करके मुजे यहा लाये हो.. क्या इरादा हे आपका..?
लखन : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) इरादातो नेक ही हे.. लेकीन आपने पुछ ही लीया हे तो यहा मंदीर भी हे.. मंडप भी रेडी हे.. रीस्तेदार जैसे दोस्त भी हे.. अगर आप कहोतो हम सादी करले..? हें..हें..हें..
चंदा : (सरमाकर जुठे गुस्सेसे जांगपे अेक मुका मारते) पुनोदी ठीक ही केह रही थी.. कीतने कमीने हो आप.. चार चार सादी करके भी जी नही भरा.. मत भुलो मे पहेलेसे ही सादी सुधा हु.. आपके बडे भाइकी अमानत..
लखन : (धीरेसे) क्या सचमे आप सादी सुधा जींदगी जी रही हे..? मत भुलो इसीलीये भाभीमाने कुछ फैसले लीये हे..
चंदा : (सोक्ट होते सामने देखते) क्या आप मंजुकी इस बातको सीरीयस मानते हे..?
लखन : (मुस्कुराते) हां.. उनकी हर बात मानता हु.. मां हे वो मेरी.. हम सबकी जननी.. इसका मतलब भी जानती हे..?
चंदा : (अेक नजरसे देखते) सबकी जननी..? मुजे सब जानना हे.. ये सब क्या हो रहा हे..? मेतो समजी वो हम सबके साथ मजाक कर रही हे..
लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. हम वापसीमे बात करेगे.. मे आपको सबकुछ बता दुगा..
सब लोगोने भोजन करलीया.. जागृती लखनसे अकेलेमे बात करना चाहती थी.. कमसे कम उनका फोन नंबर लेना चाहती थी.. लेकीन सांती उनके साथ ही होती थी.. जीसकी वजहसे जागृती लखनसे बात नही करपाइ.. क्युकी जागृती ओर लखनका राज सीर्फ दो लोग ही जानते थे.. अेक जयश्री ओर दुसरी सांती..
फीर सबलोग बाबासे आशीर्वाद लेकर नीकल गये.. सबने लखन ओर चंदाको गांव आनेका बहुत आग्रह कीया.. लेकीन लखन ओर चंदाने मना कर दीया.. फीर सबलोग गांवकी ओर नीकल गये.. तो साहील भी अपनी बाइक लेकर कादीरके घरकी ओर सहेर नीकल गया..
ओर लखन चंदा कारमे बैठ गये.. चंदा लखनकी बाजुमे बैठकर बहुत ही सरमाने लगी.. अब सीर्फ दोनो ही अकेले थे.. चंदा मनसे चाहती थीकी लखन खुद आगे बढे.. फीर दोनो सहेरकी ओर नीकल गये.. चंदा अब भी लखनकी ओर सवालीया नजरोसे देख रही थी..
चंदा : (मुस्कुराते) लखन.. क्या अभी जीनकी सादी हुइ वो दोनो पहेले मां बेटे थेनां..?
लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. जब उनके पीताजी थे तब ही मुनाका उनकी मांके साथ अफैर था.. अब उनके पीताजी गुजर गये ओर बसंती आंटी वीधवा होगइ.. तो मुनाने उनसे सादी करली.. ओर वो फीरसे सुहागरन होगइ.. बस.. वही बदलाव तो मोम चाहती हे.. उस हीमाचल की तराह..
चंदा : (मुस्कुराते) लेकीन मंजुको यहा अैसे बदलावकी क्या आवस्यक्ता पड गइ..?
लखन : (सामने देखते) क्यु..? आप उन हीमालयकी कहानीको नही जानती..? आप भी तो उस कहानीका हीस्सा हो.. वो ही राजा तो हमारे घर पैदा होने वाला हे.. ओर ये सब उनके आनेसे पहेलेकी भुमीका हे.. जो मंजु मोम ओर पुनोदी कर रही हे..
चंदा : (सामने देखते) माना की मे भी वोही हु.. तो क्या अैसे मां बेटेकी सादीसे कुछ फर्क पडेगा..?
लखन : (सामने देखते) आपकी सादीके बाद आप छोटी ही उमरमे आप वीधवा होगइ थी.. तो क्या आपकी जींदगीमे कुछ फर्क पडा था..?
चंदा : (सामने देखते सरमाते) बहुत कुछ.. आप समज सकते हो अेक सादी सुधा ओरत अकेली होजाती हे तो क्या फर्क पडता हे.. उनको कीतनी मुस्कीलोका सामना करना पडता हे..