Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 89 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६३

ओर भावना इस मोकेको गवाना नही चाहती थी.. उनको पता था आज पुनम भी नही हे ओर रजीया दया दोनो साथमे सोइ हुइ हे.. आज लखनके साथ सीर्फ सृती ही हे.. तो भावना अ‍ैसा चान्स गवाना नही चाहती थी.. वो लखनको खुलकर नीमंत्रण दे चुकी थी.. ओर बार बार खडी होकर दरवाजेके पास जाते लखनके रुमकी ओर देखती थी.. इस उमीदमे की लखन अ‍ेक बार बहार नीकले.. ओर मानो इश्वरने भावनाके मनकी बात सुनली.... अब आगे

तो दुसरी ओर गांवमे भी आज मंजुने लताको अपने साथ लेलीया.. अब ज्यादातर चंदा दवाइकी वजहसे नींदकी आगोसमे ही रहेती थी.. ओर देवायत इस वक्त लताकी जोरोसे चुदाइ कर रहा था.. मंजु भी कपडे नीकालकर अपनी बारीका इन्तजार कर रही थी..

22771.gif


देर रात तब बारी बारी देवायत लता ओर मंजुकी चुतमे धमाके करता रहा.. आज देवायतने फीर लताकी हालत बीगाडदी.. लता भी अब देवायतसे खुलकर चुदवाती थी.. लेकीन फीर भी वो लखनको भुल नही पा रही थी.. खाली वक्तमे उसे लखनकी बहुत याद आती थी..

अब रातमे सांती ओर बंसीके साथ जागुती भी सोने लगी थी.. बंसी बारी बारी दोनोकी चुतमे धमाका करता.. लेकीन ज्यादातर सांती जागृती ओर बंसीको ही मीलनेका मौका देती.. ताकी दोनो भाइ बहेन अ‍ेक दुसरेके ओर करीब आजाये..

37069.gif


अबतक ना जाने बंसीने जागृतीको कीतनी बार चोद लीया था.. लेकीन जीतनी बार जागृती बंसीसे चुदवाती उतनी बार वो बंसी ओर सांतीसे छुपकर आइपीलकी गोली खा लेती.. ताकी वो बंसीसे प्रेगनेन्ट ना होसके.. उसने लखनको दीया हुआ वादा आज भी याद था..

36067.gif


तो इधर सहेरमे देर रात तीन बजे पुरे घरमे सनाटा छाया हुआ था.. ओर सबलोग वासनाका खेल खेलकर गहेरी नींद सो चुके थे.. सीवा लखन ओर भावना.. लखनको प्यास लगी.. तो वो आजु बाजु पानीकी बोटल ढुंढने लगा.. तभी उसे याद आयाकी भावना उनका इन्तजार करती होगी..

उसने अ‍ेक नजर सृतीकी ओर डाली.. सृती बेसुध जैसी हालतमे उनके सीनेपे हाथ रखते नंगी सो रही थी.. लखनने धीरेसे सृतीका हाथ हटाया.. ओर खडा होकर अलमारीसे भावनाके लीये लीया हुआ गीफ्ट जेबमे रख लीया.. ओर नीचे पहेले पानी पीने चला गया..

लखन फ्रिजसे पानीकी बोतल नीकालके पीने लगा.. उसे पता नही थाकी भावनाने उसे नीचे कीचनमे जाते हुअ‍े देख लीया हे.. ओर दबे पांव उनके पीछे आगइ हे.. लखन अंधेरे पानी पीकर जैसे जानेके लीये मुडा.. वो कीसीसे टकरा गया.. ओर धीरेसे सोरी सोरी बोलने लगा..

देखा तो हल्की रोसनीमे उसे भावनाका चहेरा दीखा.. तो भावना भी सर्मसार होते फ्रिजसे पानी नीकालकर पीने लगी.. लखन वही खडे रहेते उनकी ओर देखता रहा.. भावना पानी पीते हुअ‍े भी नजरे टेडी करते लखनकी ओर देखती रही.. फीर वो भी बोटल वापस रखते जाने लगी..

तभी लखनने उनका हाथ पकड लीया.. तो भावनाके तनसे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. वो सर्मसार होते हाथ छुडानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. लेकीन लखनने उनका हाथ कसके पकड रखा.. भावनाने हाथ छुडानेकी कोसीस छोडदी..

वो नजरे जुकाये अ‍ैसे ही खडी रही.. उनकी चुत हरकतमे आगइ.. ओर हल्कासा पानी छोडते फडफडाने लगी.. वो मनसे चाहने लगीकी अभी लखन उसे पुरी तराह मसलदे.. ओर यही उसे चोदले.. लेकीन वो कुछ बोल नही पाइ.. वो चाहती थीकी पहेल लखन करे.. तभी..

PUMg.gif


भावना : (सरमाते कांपती आवाजमे धीरेसे) लखन भैया.. छोड दीजीये.. उपर मेरी बच्ची सोइ हुइ हे..

लखन : (खीचते पीछेसे बाहोमे जकडते पेटको सहेलाते) भाभी.. आप मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. आइ लव यु.. कबतक मुजसे दुर भागती रहोगी..? अ‍ेक दिनतो हम मीलने ही वाले हे..

भावना : (सरमसे लखनके हाथपे हाथ रखते) लखन भैया.. अभी मुजे जाने दीजीये.. ये सही वक्त नही हे.. कोइ हमे देख लेगा.. हम बादमे मीलते हेनां..

लखन : (पीछे गलेको चुमते) कोइ देखता हेतो देखने दोे.. सबको पता हे अ‍ेक दिन हमारे बीच सब कुछ होने वाला हे.. तो क्या प्रोबलेम हे..? खुलके प्यार कीजीये..

erotic-gif-53.gif


भावना : (सरमाते अपने होंठ आपस भीचते धीरेसे) प्लीज.. मुजे थोडा वक्त चाहीये.. जाने दीजीये.. हम बादमे मीलते हेनां..

लखन : (दोनो हाथ बुब्सपे रखते) हंम.. बादमे भी मील लेगे.. ओर कीतना वक्त चाहीये आपको..? खाते वक्त मेरा पैर सहेलाते आपने जवाब तो देदीया था.. आपके रुममे आया था.. मुजे पता हे आप भी वोही चाहती हे जो मे चाहता हु..

erotic-gif-36.gif


भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. तो फीर इतनी देर क्यु करदी..? मे कबसे आपका इन्तजार कर रही थी.. क्या सृतीदी.. सबलोग..

लखन : (गलेको चुमते बुब्सपे हाथ रखते) भाभी.. वो सब सो गये हे.. रजु दया भाभीके पास सोइ हे.. चीन्ता मत कीजीये.. आज हम दोनोका मीलन होकर ही रहेगा..

कहेते लखन भावनाके बडे बडे बुब्सको मसलने लगा.. तो भावना मदहोस होने लगी.. वो आधी आंख चडाते पीछे लखनके कंधेपे सर डाल देती हे.. ओर लखनके हाथको पकडकर हटानेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. फीर खुद आंखोकी पुतलीया पलटते लखनके हाथको अपने बुब्सपे दबाने लगी..

giphy36.gif
 
तभी अचानक अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते लखनने भावनाकी चुतपे हाथ रख दीया.. तो भावनाकी सीसकारीया नीकल गइ.. उनकी चुत ओर पनीयाने लगी.. ओर अपना हाथ लखनके हाथपे रख दीया.. ओर अचानक लखनकी ओर पलटते लखनको बाहोमे भीचलीया..

1t-Vl.gif


लखन : (बाहोमे भीचते) भाभी.. मेने दिनमे आपकी आखोंमे मेरे लीये प्यार देखा हे.. आपका वो पैर सहेलाना.. रातकी हमारी बाते.. क्या प्यार जताना इतना काफी नही हे..? अ‍ेक बार मेरी आंखोमे देखकर कहीये.. आप मुजसे प्यार नही करती.. मे आपको छोड दुगा..

भावना : (लखनको जोरोसे बाहोमे कसते) नही नही.. आइ लव यु.. आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार हो गया हे.. मेने रातमे काफी इन्तजार भी कीया.. लेकीन आप आये ही नही..

लखन : (कसके बाहोमे भीचते) अभी आगयानां.. मुजे अभी मीलना हे.. चलो अभी नीचे कोइ नही हे.. हम इस रुममे चले जाते हे..

Ge-G9.gif


भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) यहा नही.. मे रुममे अकेली हु.. वही चलते हे.. ताकी वीभा जाग जाये तो हमे पता तो चलेगा.. फीर आप अपने रुममे चले जाना..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी..

कहेते लखनने भावनाको गोदमे उठालीया.. तो भावना सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर उसने लखनकी गरदमे हाथ डालकर सरको सीनेमे छुपा लीया.. उनकी चुत फडफडाने लगी.. दोनो बुब्स कठोर होगये.. ओर लखन भावनाको गोदमे लेकर सीडीया चडने लगा..

ओर भावना वाले कमरेमे चला गया.. भावनाको बेडपे लीटाकर दरवाजा बंध करने चला गया.. तो भावना बेडपे सोइ अपनी बच्ची वीभाको गोदमे उठाकर उसे जुलेमे डाल देती हे ताकी बेडपे लखन ओर उनको कोइ डीस्टर्ब नाहो.. फीर आकर बेडपे सीमटकर बैठते सरमाने लगी..

जैसे अपनी सुहागरातमे अपने पतीसे पहेली बार मील रही हो.. उनके चहेरेपे लज्जा ओर खुसी साफ दीख रही थी.. वो सरमाते मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. तभी लखन उनके पास आगया.. ओर भावनाको धीरेसे बेडपे लीटा दीया.. फीर खुदभी उनके उपर जुक गया..

giphy39.gif


तो भावनाने जोरोसे लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. भावनाके उपर आते लखनने उनके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थाम लीया.. ओर उनकी आंखोमे देखने लगा.. लखनको भावनाकी आंखोमे वासना साफ दीखाइ देने लगी..

वो लखनकी आंखोमे कामु्कातेसे देखे जा रही थी.. ओर लखनने धीरेसे अपने होंठ भावनाके होंठोपे रख दीया.. भावनाके तन कांप गया.. वो आंख बंध करते लखनके होठोको चुमने लगी.. ओर उनकी पीठको सहेलाने लगी.. दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमते पागल होने लगे.. लखन होंठ चुमते उनके बुब्सको भी मसलने लगा..

giphy33.gif


भावना : (कामुक सीसकारीया करते) ओह.. लखन भै..या.. आइ लव यु.. सीसस... आपने तो मुजे पागल करदीया.. कुछ कीजीयेनां.. आइ.. धीरे दबाओनां.. दर्द होता हे..

लखन : (कामुक्तासे धीरेसे बुब्स चुमते) क्या करु..? हंम.. बोलोनां..? डालदु..? हंम..?

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. डाल दीजीये.. मत तडपाइअ‍े..

लखन : (बुब्सको चुमते चुत सहेलाते) डाल दुगा.. थोडा प्यार तो करलु..

भावना : (अपने उपर खीचते) न..नही.. वो सब हम बादमे करगे.. अभी इतना समय नही हे हमारे पास.. वीभु जाग जायेगी.. डालीयेनां..

लखन : (होंठ चुमते) थोडा दर्द होगा.. सेह लीजीयेगा..

भावना : (जोरोसे बाहोमे भीचते धीरेसे कानमे) नही होगा.. दो दो बच्चे हो गये हे.. आपके भाइने मुजे अ‍ेक हप्ते खुब रगडा हे.. मेरे दर्दकी परवाह मत कीजीये.. कपडे नीकालदु..? हंम..?

कहा तो लखन फटाफट भावनाके उपरसे हट गया.. ओर अपने कपडे नीकालने लगा.. तो भावना भी बेडपे बैठकर अपना गाउन नीकालने लगी.. वो रातमे पेन्टी ओर ब्रा नही पहेनती थी.. तो गाउन नीकालते ही वो पुरी नंगी होगइ..

जब लखनने कपडे नीकाल दीये तो भावनाने उनका हाथ पकडकर अपने उपर खीचते बेडपे लेट गइ.. ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. दोनो वासनामे अंधे होगये.. ओर अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलने लगे.. भावना लखनके सरको अपने बुब्सपे दबाने लगी..

sex-love.gif


लखन दोनो बुब्सको बारी बारी चुमते चुमते सरकते भावनाके दोनो पैरोके बीच आ गया.. ओर भावनाकी चुतको खरोदने लगा.. तो भावना पागल जैसी होने लगी.. दोनो हाथसे चदरको पकडकर छटपटाने लगी.. अब इनसे लखनकी हरकत बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. भावना जटसे बेडपे बैठ गइ.. ओर लखनका हाथ खीचकर अपने उपर चडा देती हे..

36130.gif


भावना : (मदहोसीमे लडखडाती आवाजमे) ल..ख.न.. अब ओर नही.. डाल दीजीये.. मुजसे रहा नही जाता.. अ‍ैसा प्यार करनेके लीये हमारे पास पुरी जींदगी पडी हे.. अब आपको ही मेरा खयाल रखना हे.. चोद लीजीये मुजे..

कहेते अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर लखनके लंडको पकड लेती हे.. तभी उसे अहेसास हुआ की लखनका लंडतो देवायतसे भी बडा हे.. अ‍ेक पल तो वो लंडको पकडते ही कांप गइ.. ओर उसने हिंमत करते लखनके लंडको अपनी चुतपे सेट करदीया..

porno-gif-kp-47.gif


ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते अपनी कमर उची करने लगी.. तभी लखनने भावनाके दोनो पंजोको कसके पकडलीया.. ओर लीपलोक करते अपनी कमरको जोरोसे जटका दीया.. अ‍ेक ही बारमे लखनने अपना आधा लंड भावनाकी चुतमे धुसा दीया..

36752.gif


तो भावनाकी चीख नीकल गइ.. ओर लखनके मुहमे ही दब गइ.. उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर वो अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. तभी लखनने अ‍ेक ओर जटका मारा.. ओर पुरा लंड चुतकी गहेराइओमे धुसा दीया जो भावनाकी बच्चेदानीसे टकराया..

4628.gif


भावन चीखते बेहोस होगइ.. ओर लखन हाथके बल उचा होते भावनाको जोरोसे चोदने लगा.. लेकीन भावना बहुत जल्दी होसमे आगइ.. तो लखन भावनापे लेटते उनसे चीपक गया.. भावना दर्दसे मुह बीगाडते लखनकी पीठको अपने नाखुससे खरोदने लगी..

giphy40.gif
 
लखन उनके बुब्सको ओर होठोको चुमता रहा.. भावनाका दर्द बहुत जल्द खतम होगया.. ओर सीसकारीया करते अपनी कमर उछालने लगी.. लखन अ‍ेक बार फीर भावनाको जोरोसे चोदने लगा.. दोनो वासनामे अंधे हो चुके थे.. कुछ देरके बाद भावनाने लखनको जोरोसे अपने तनसे चीपका लीया..

19304845-1.gif


ओर लीपलोक करते अपनी कमरको उछालते जटके मारने लगी.. लखनके लंडको अपने पानीसे भीगोने लगी.. तो लखन लंडपे गरमाहट महेसुस करते ओर उतेजीत हो गया.. ओर हाथके बल उचा होते भावनाकी टांगोको अपने कंधेपे लेलीया ओर भावनाको जोरोसे चोदने लगा..

27664.gif


भावना : (दर्दसे तीलमीलाते) ल..ख..न.. धी.. धी..रे.. चो..दो.. दर्द.. हो..ता..हे..

भावना तीलमीला उठी.. वो भी चदर पकडकर छटपटाने लगी.. लखनने भावनाको अ‍ेक बार ओर जडा दीया.. ओर भावनाके उपर लेटते भावनाकी गरदनमे हाथ डाल दीया.. भावनाको अपने तबसे चीपकाते होठ चुमते चोदने लगा.. तो भावना भी उसे जोरोसे बाहोमे भीचते कमर उछालती रही..

34902.gif


दोनोके बीच २० मीनीट तक घमासान चुदाइ हुइ.. ओर आखीर लखन भावनाकी चुतमे जड तब लंड घुसाते अपनी कमरको जटके देने लगा.. ओर अपने गाढे पानीसे पीचकारीया छोडते जडने लगा.. भावनाको अपनी बच्चेदानीपे गरमाहट महेसुस हुइ..

24571969.gif


ओर वो उतेजनासे कांपते लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते लीपलोकर करते साथ जडने लगी.. दोनो पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. लखन भावनाके सीनेपे ढेर होते पडा था.. ओर भावना धीरे धीरे उनकी पीठ सहेलाते जुलेकी ओर देखने लगी.. की कही उनकी बच्ची जागतो नही गइ..

आखीर वो लखनसे चुद ही गइ.. जबसे पुनम ओर सृतीसे लखनके बारेमे बात सुनी तबसे ही भावना लखनके साथ रीलेशन रखनेका मन बना चुकी थी.. यहा आइ तबसे लखनके साथ मस्तीया ओर आंख मीचोली खेलते लंचके समय पैर सहेलाते मुक सहेमती देदी थी..

ओर रात मे तो लखनको खुला नीमंत्रण भी दे चुकी थी.. यही सब सोचते रातमे उसे लखनके इन्तजारमे नींद नही आ रही थी.. ओर देर रात उसने लखनको नीचे जाते देख लीया.. तो भावना भी अपने आपको रोक नही पाइ.. ओर लखनके पीछे नीचे चली गइ..

भावना : (सरमाते धीरेसे) लखन.. आइ अ‍ेम सो हेप्पी.. मजा आगया.. आखीर हम दोनोका मीलन हो ही गया.. मे कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रही थी.. जबसे आपने मुजे लंचपे नीचे छेडाथा तबसे कही चैइन नही मील रहा था.. ओर मे आपसे मीलन करनेका मन बना चुकी थी.. लखन.. आइ लव यु..

लखन : (होंठ चुमते) लव यु टु भाभी..

भावना : (मुस्कुराते) भाभी नही.. सीर्फ भावना..

लखन : (होंठ चुमते) आप मेरी भाभी हो..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभीको चोदलीया.. फीर भी भाभी कहोगे..? लखन.. आजसे मे आपकी भावना हु.. जब हम दोनो अकेलेहो तो नामसे बुलाना.. मुजे क्या पता आपका हथीयार जीजुसे भी दमदार हे.. वरना मे आपसे ही सादी कर लेती.. खैर छोडीये.. अब तो मंजुदीने हम सबको पुरी छुट देदी हे.. तो क्या फर्क पडता हे आपकी भाभी होकर चुदवाउ या आपकी बीवी.. अब उपरसे उतरना नही हे क्या..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. पहेली बात.. मुजे बीवीसे ज्यादा अ‍ैसे रीस्तोमे रीलेशन रखना अच्छा लगता हे.. मानो बहेन.. भाभी.. चाची.. बुआ.. तो आप मेरी भाभी ही ठीक हे.. ओर दुसरी बात.. मेरी कीसी भी बीवीको पुछ लेना मे भी भाइकी तराह दो बार करता हु..

भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) ओ बापरे.. दोनो भाइ अ‍ैसा कहासे सीखकर आये हे..? वो भी दो बारसे पहेले मेरे उपरसे उतरते नही थे.. ओर अ‍ेक आपके साले.. कमीनेको कुछ आता ही नही हे.. बस.. उपर चडा पानी नीकाला ओर सो गया.. सुना हे आज कल वहाके मजदुरकी बीवीको रखेलकी तराह रखता हे..

लखन : (बुब्स मसलते होंठ चुमते) भाभी.. छोडोना उनको.. आप उनसे अलग तो होगइ हे.. अब उसे याद करके क्या फायदा..? आप तो बस यहा मजे करो.. अब आपकी जीम्वेवारी हमारी हे..

भावना : (गालपे हल्कीसी चपत लगाते मुस्कुराते) फीर भाभी..? अरे बाबा अब मे आपकी भावना हु.. आप प्यारसे भावु भी बोल सकते हो.. अच्छा ये बताओ.. पुनोदीदीके साथ कीतना मजा कीया..?

लखन : (होंठ चुमते) भावु.. पुछो ही मत.. दोनोने पुरी रात प्यार कीया.. मेरी अ‍ेक फेन्टासी थी.. मेने डीसाइड कीया था.. की अ‍ेक बार उपर चडुगा ओर अंदर डालुगा तो सुबह ही नीचे उतरुगा ओर तब ही नीकालुगा.. मेने पुनोको लगातार पांच बार चोदा.. तब जाके नीचे उतरा.. फीर सुबह भी गुड मोर्नींग कीया.. उसे दो बार चोदकर..

भावना : (सरमाकर हसते) तभी बेचारीकी हालत बीगडी हुइ थी.. दोनो के दोनो भाइ बडे ही कमीने हो.. जीजुको भी.. ओह.. सोरी.. सोरी.. अब तो वो भी मेरे पती हे.. उनको भी अ‍ैसी गुड मोर्नींगकी आदत हे.. ओ बापरे.. अभीभी अंदर सख्त महेसुस होता हे.. ओर जटके मार रहा हे.. अगर कोइ दिकत नही हेतो फीरसे सुरु करे..?

38525.gif


ओर लखन फीरसे कमर हीलाते भावनाको चोदने लगा.. इस बार भी दोनोके बीच घमासान चुदाइ हुइ.. भावनाको दोदो बार जडाते तीसरी बारमे दोनो साथमे जड गये.. भावनाका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. फीर दोनो सावर लेने बाथरुममे घुस गये..

31139.gif


वहा भी साथमे सावर लेते अ‍ेक दुसरेको नहेलाने लगे.. ओर फीरसे दोनो उतेजीत हो गये.. तो लखनने अ‍ेक बार फीर भावनाको खडे अडे चोद लीया.. आज भावना पुरी तराह संतुस्ट हो चुकी थी.. वो ठीकसे चल भी नही पा रही थी.. फीर दोनोने अपने कपडे पहेनलीये.. तभी..
 
भावना : (सरमाते मुस्कुराते) लखन.. आजसे ये भाभी आपकी हो गइ हे.. आपको मुजसे जब भी मीलनेका मन होतो बता देना.. मे मना नही करुगी.. आजसे मेरा खयाल आपको ही रखना पडेगा.. मुजे अ‍ैसा ही प्यार चाहीये जो अभी आपने दीया.. समज गये..?

लखन : (मुस्कुराते जेबसे सोनेका चेइन नीकालते) आपतो मेरी होगइ.. लीजीये पहेना देता हु.. हमारे पहेले मीलनकी गीफ्ट.. जो आपको हर पल हमारे मीलनकी याद दीलायेगी..

भावना : (खुस होते चेइन डलवाते) हंम.. बहुत छुपे रुस्तम हो.. अपने हाथोसे पहेना दीजीये.. आजसे ये भावना आपकी होगइ.. प्रोमीस करो हम जब चाहे मीलन कर सकते हे..

ask-ve-mavi.gif


लखन : (चेइन पहेनाकर बाहोमे भरते) ठीक हे भावु.. आइ प्रोमीस.. चलो.. मे चलता हु..

ओर लखन वापस जाने लगा.. तो भावनाने उनका हाथ पकडलीया.. भावना लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर लखनके होठोको चुमते उनको थेन्क्स कहा.. फीर लखन अपने रुममे आगया.. ओर बेडपे आकर सृतीसे चीपककर सो गया.. ओर इधर भावना भी नींदकी आगोसमे चली गइ.. ओर अ‍ैसे ही रात बीत गइ..

सुबह रजीया ओर दया पहेले जागकर कंपलीट होगइ.. ओर आदतके हिसाबसे घरका काम नीपटाकर कीचनमे चली गइ.. ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. सृती आंख खोलकर देखती हे.. तो लखन घोडे बेचके सो रहा था.. तो सृती धीरे धीरे चलकर बाथरुममे चली गइ..

ओर अपना नीत्य करके कंपलीट होगइ.. उसे लखनको जगाना उचीत नही लगा.. ओर वो धीरे धीरे चलते नीचे चली गइ.. भावना अभी भी सो रही थी.. जब उनकी बच्ची रोने लगी.. तब जाके वो नींदसे जागी.. तो काफी देर होगइ थी.. वो उठकर बच्चीको दुध पीलाने लगी..

फीर वोभी कंपलीट होने बाथरुममे घुस गइ.. ओर अंदर जाते वक्त सृतीने दी हुइ कीट भी लेगइ.. उनपे पीसाब करके देखा तो रीजल्ट पोजीटीव था.. वो देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर भावनाके चहेरेपे खुसीकी मुस्कान आगइ.. ओर नहाकर कंपलीट होकर बच्चीको लेकर नीचे सृतीके पास आकर बैठ गइ..

भावना : (मुस्कुराते) गुड मोर्नींग अ‍ेवरी बडी..

सृती : (मु्स्कुराते) गुड मोर्नींग भावुदीदी.. क्या बात हे आज बडी खुस लग रही हो..? आप अ‍ैसे क्यु चल रही हे..? कुछ हुआ हे क्या..?

भावना : (थोडी जेंपते जुठ बोलते) नही.. न..ही.. वो.. कल रात बाथरुम जा रही थी.. बेडसे उतरते थोडा पैर मुड गया था.. तो थोडा दर्द हो रहा हे.. ओर कुछ नही..

सृती : (मुस्कुराते) ज्यादा चोटतो नही लगी..? दीदी.. वो कल मेने कीट दी थी.. चेक करलीया..?

भावना : (सरमाते मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाते) हंम.. करलीया.. सृतीदी.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट..

सृती : (खुस होते) व्होट..?

भावना : (थोडी मायुस होते) हंम.. क्या करु..? पता नही मंजुदीको इतनी जल्दी क्यु थी.. मेरी वीभाको थोडी बडे होने देती.. डेढ साल ही तो हुआ हे.. ओर फीरसे प्रेगनेन्ट..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) आपकी मंजुदीदीने सही कीया हे.. जब ये बच्चा होगा तब वीभा ओल मोस्ट ढाइ सालकी होजायेगी.. मोम अ‍ैसे ही कुछ नही कहेती.. कुछ तो रीजन होगा.. खैर वो लखन अभी भी सोये पडे हे.. उनको जगाना पडेगा.. पुनोदीको लानेके लीये जाना हे.. आप जगादोगी.. प्लीज..

भावना : (सरमाते जटसे) अरे नही नही.. आप.. रजुदीदीको कहीयेनां.. (सरमाते धीरेसे) दोनो भाइको गुड मोर्नींग मे करनेकी.. मीन्स.. आप समज गइनां..?

सृती : (जोरोसे हसते फीर धीरेसे) अरे तो क्या हुआ.. अ‍ेक दिनतो उसे मीलना ही हे.. कल रात बहुत अच्छा मौका था.. सीर्फ मे ओर लखन ही थे.. खैर छोडीये मे रजुदीको कहेती हु.. (जोरसे आवाज लगाते) रजुदी.. जरा लखनको जगा दीजीये.. उसे पुनोदीको लेने जाना हे.. फीर हमे भी नीकलना हे..

रजीया : (हाथ पोछते कीचनसे बहार आते) जी दीदी.. जगाती हु.. दया दीदी भी वोही केह रही थी..

कहेते रजीया उपर चली गइ.. ओर लखनको दुरसे ही खडी होकर हीलाकर जगाने लगी.. तो लखन सोने दोनां.. कहेते करवट लेकर सो गया.. तो रजीयाने पुनमको लेने जानेकी बात कही.. तो लखन उठकर बेडपे बैठ गया.. ओर रजीयाकी ओर सरारतसे मुस्कुराने लगा.. रजीया उनका इरादा जान गइ.. ओर जटसे दुर जाकर खडी होगइ..

रजीया : (हसते) आज कोइ गुड मोर्नींग वीस नही.. फटाफट नहा लीजीये मे बादमे कपडे देती हु..

लखन : (मुस्कुराते खडा होते) रजु.. चलना.. सीर्फ अ‍ेक बार.. यहा कोइ नही हे.. अभी हो जायगा..

रजीया : (हसते बहारकी ओर जाते) ना बाबा ना.. मुजे पता हे आपका अ‍ेक बार.. घडीमे देखो कीतने बजे हे.. नीचे सब आपका इन्तजार कर रहे हे.. ओर हमे जाना भी हे.. ओर अभी आपको पुनोदीको लेने भी जाना हे.. चलीये नहा लीजीये..

कहेते रजीया हसते हुअ‍े रुमसे बहार नीकल गइ.. ओर थोडी दुर जाकर खडी होगइ.. जैसे ही बाथरुमके दरवाजेकी बंध होनेकी अवाज आइ वो फटाफट अंदर आकर लखनके कपडे अलमारीसे नीकालती हे.. ओर बेडपे रखकर फटाफट नीचे चली गइ.. ओर हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ.. जीसे देखकर सृती ओर भावना भी जोरोसे हसने लगी..

सृती : (जोरोसे) रजुदीदी.. लगता हे आज आप बच गइ.. हें..हें..हें..

रजीया : (कीचनसे) ओर नही तो क्या..? इनको तो सारा दिन यही सुजता हे.. पता नही पुनोदीने इनको कौनसी जडी बुटी पीलाइ हे.. हर वक्त तैयार रहेते हे..

दया : (चाइ उबालते मुस्कुराते धीरेसे) रजु.. क्या लखन भैयाका सचमे बडा..? मीन्स..

रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे) अरे हां बाबा.. अभी तुमने देखा नही हे.. जब अ‍ेक बार इनका स्वाद चखोगीनां बडे भैयाको भी भुल जाओगी.. वैसे भी अब मंजुदीने सबको छुट देदी हे.. तो अ‍ेक बार आप भी सोचना..

दया : (सर्मसार होते धीरेसे) नही यार कैसे..? अभी अभी तो मेरी भाइके साथ नइ नइ सादी हुइ हे.. कुछ महीने तो इनके साथ गुजारने दे.. बाकी बादमे सोचुगी.. रजुदी.. आज हम दोनोका सपना पुरा होगया..

रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे) दयादी.. बस.. अब अ‍ेक ही सपना रेह गया हे.. मां बननेका.. मुजे लगता हे हम दोनोका वो सपना भी जल्द पुरा होजायेगा..

दया : (सरमाते धीरेसे) हंम.. मेरा भी.. हम दोनोका यही तो सपना था.. अरे सुन.. वो जया बहेन रमेशभाइको लेकर यहा सहेरमे आ गइ हे.. सुना हे हमारे बगलोके पास ही उनका नया घर हे..?

रजीया : (मुस्कुराते) हंम.. दोनोने कोर्टमे सादी करली हे.. यहा खानेपे आयेथे दोनो.. अभी हनीमुन मनाने गये हे.. पास ही सोसायटीमे रहेते हे..

दया : (मुस्कुराते) रजुदी.. गांवमे कीतना कुछ होने लगा.. हेनां..? सुना हे जया बहेनकी लडकीने भी उनके भाइके साथ सादी करली हे.. उनका भाइ भी लखन भैयाके दोस्त हेनां..?

दोनो गांवकी बाते करते चाइ नास्ता बनालेती हे.. तबतक लखन भी कंपलीट होकर नीचे आ गया.. ओर पुनमको फोन कीया.. तो पता चला उन्होने वही चाइ नास्ता करलीया हे.. ओर अभी लखनका इन्तजार कर रही हे.. तो सबलोग चाइ नास्ता करने बैठ गये..
 
आन भावना लखनसे नजरे चुराते बहुत सरमा रही थी.. उनकी चुत लखनको देखते ही फीरसे फडफडाने लगी.. ये सोचते की लखनने उनको दो घंटे लगातार चौदा था ओर उनकी हालत पतली करदी थी.. मंजु ओर पुनमके अलावा कीसीको पता नही थाकी भावनाने लखनसे अपनी चुदाइ करवाली हे.. तभी..

सृती : (मुस्कुराते अ‍ेक कागज देते) लखन भैया.. पुनोदीको लेने जा रहे होना..? तो प्लीज.. क्लीनीकसे मेरा कुछ सामान लेना हे.. लादोगे..?

लखन : (चीठी लेते) अभी..? जरुरी हे क्या..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे हां.. वो.. हम गांव जा रहे हेतो मम्मीका वंदना ओर कुछ दुसरी ओरतोको चेक करना हे.. आपके बडे भाइकी ओर बीवीया भी पेटसे हे.. उनको भी चेक करलुगी.. इसीलीये.. आप सामान लेकर पुनोदीदीको लेने चले जाना..

लखन : (होठ चुमकर) यस दीदी.. आइ मेनेज.. मे लेकर आता हु आप क्लीनीकपे फोन करदेना सामान तैयार रखे..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे कुछ तो सरम करो.. यहा सब हे.. हां.. वो रीसेपनीस्टको ये चीठी देना.. आपको दे देगी..

भावना : (हसते) सृतीदी.. अब सरमाना कैसे..? हम सब अ‍ेक ही कस्तीमे सवार हे..

रजीया : (हसते) भावुदी.. सीर्फ मे सृतीदी ओर पुनम दीदी सवार हे आप नही.. हें..हें..हें..

भावना : (मनमे) रजु अब तुजे कैसे कहु..? की तेरे पतीने कल रात ही मुजे भी अपनी कस्तीमे खीच लीया हे.. ओर मुजे खुब रगडा हे तेरे पतीने.. अभी भी नीचे थोडीसी जलन हो रही हे..

फीर चाइ नास्ता करते लखनने सबको रेडी रहेनेको कहेते वहासे नीकल गया.. ओर क्लीनीकसे सृतीका सामान लेकर सीधा राधीकाके घरपे पहोंच गया.. लखनने राधीकाकी मम्मीका हालचाल पुछा.. फीर राधीकाके रुममे चला गया.. तो वहा पुनम ओर राधीका बाते करते बैठी थी..

लखनको देखते ही राधीका उनसे लीपट गइ.. तभी लखनने राधीकाके होंठ चुमते उनके बुब्सको मसल दीया.. तो पुनम हसने लगी.. ओर लखनने राधीकाको छोडकर पुनमको भी जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर पुनमके होंठ चुम लीये..

8cd-P.gif


राधीका : (मुस्कुराते) लखन.. आपतो छुपे रुस्तम नीकले.. पुनोदी को मील लीया ओर मुजे पता भी नही चला..?

लखन : (मुस्कुराते) थेन्क्स राधु.. ये सब तुम्हारी बदौलत हुआ.. अगर मेरे दिलकी बात पुनोदी तक नही पहोंचाती तो आज मुने पुनोदी नही मीलती..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भैया.. सोरी अगेइन.. मेने आपका प्यार नही स्वीकारके बहुत बडी गलती की.. लेकीन अब मे बहुत बहुत खुस हु..

लखन : (होंठ चुमते) दीदी.. छोडो ये बाते.. अब तो हम दोनो मील गयेनां..? देखना मे तुम सबको बहुत खुस रखुगा.. अब चलीये देर हो रही हे.. राधु.. तुम ओर मम्मी भी चलोनां..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) नही जानु आप ही चले जाओ.. मम्मीको अ‍ैसी हालतमे लेजाना ठीक नही हे..

लखन : (मुस्कुराते हग करते) हंम.. चलो तो फीर हम ही चलते हे.. दो तीन दीनके बाद वापस आजाउगा..

राधीका : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) जानु.. अ‍ैसे ही चले जाओगे..? देखो यहा आपकी दो दो बीवीया हे.. मीलोगे नही..? हंम..? देखना बहुत जल्द हम तीनो अ‍ेक साथ बीस्तरपे होगे..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) राधुदी.. प्लीज..? इनको अभी याद मत दीलाइअ‍े.. बडे बेसर्म हे ये.. वरना ये जनाब अभी यही सुरु होजायेगे.. हम दोनो कंपलीट होगइ हे.. ओर हमे यहासे सीधा हमारे मंदिरपे जाना हे.. ओर हां.. हो सके तो आप हम दोनोकी सादीमे जरुर आना.. फीर तो सादी करके मे इधर ही आ रही हु.. ओर आप भी अपना बोरीया बीस्तर बांधलो.. अब आपको हमारे साथ ही रहेना हे..

राधीका : यार मुजे तो वहा बहुत मजा आ रहा था.. पर क्या करु..? मम्मीकी वजहसे यहा आना पडा.. ओर सायद इनकी वजहसे सादीमे भी नही आपाउगी..

लखन : (हसते) दी अभी तो चलो.. हम वापस आनेके बाद देख लेगे.. देखता हु ये वहा कैसे नही आती..

राधीका : (सरमाते बाहोमे समाते) अरे आजाउगी बाबा.. मेरा भी मन आपसे जुदा होनेका नही करता.. अब तो हम दोनो आपकी सौतन होजायेगी.. देखना हम आपको खुब प्यार करेगी..

पुनम : (हग करते) ठीक हे दी हम चलते हे मम्मीजीका खयाल रखीयेगा.. चलो बाय..

कहा तो लखनने अ‍ेक बार फीर राधीकाको बाहोमे भरते होंठ चुम लीये.. फीर बाय कहेते लखन पुनमको लेकर वहासे नीकल गया.. तो कारमे बैठते ही पुनम दांत पीसते जुठे गुस्सेसे लखनकी बाजुमे मुका मारने लगी.. तो लखन जोरोसे हसते पुनमसे बचनेकी कोसीस करने लगा..

लखन : (जोरोसे हसते बचते) दीदी.. क्यु मार रही हो..? बताओतो सही मेने क्या कीया..?

पुनम : (कातील नजरोसे) क्या कीया..? भाइ मुजसे पुछ रहे होकी क्या कीया..? मे अ‍ेक रात बहार क्या रही.. अपने भावना भाभीको ठोक भी लीया.. बेचारीकी हालत खराब करदी.. ओर मुजसे केह रहे हेकी मेने क्या कीया..?

लखन : (हसते) ओह.. सोरी सोरी.. दीदी.. क्या हेना.. वो सुबहसे ही मेरी मस्ती कर रही थी.. ओर लाइन दे रही थी.. रातको सृतीका गाउन लेने गया तो मुजे नीमंत्रण देदीया.. तो रातमे हम मील गये.. ओर हमारे बीच सबकुछ हो गया.. क्या आपको बुरा लगा..?

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) नही भाइ.. बुरा नही लगा.. अ‍ेक दिन तो ये सबकुछ होने ही वाला हे.. बस.. थोडीसी ज्वेलेसी फील हुइ.. अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. की कही हम दोनोके बीचका प्यार कम ना होजाये.. क्युकी मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (कारमे बैठते ही हग करलीया) दीदी.. अ‍ैसा क्यु सोच रही हो..? आप मेरा पहेला प्यार हो.. आइ प्रोमीस.. आपके ओर सृतीदीदीके साथ कभी प्यार कम नही होगा.. मे आपसे बहुत प्यार करता हु..

पुनम : (आंख साफ करते मुस्कुराते) भाइ.. थेन्क्स.. चलो.. सृतीदीदीके लीये कुछ सामान लेना हे.. तो कोइ दुकान दीखे तो रोक लेना..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. दीदी.. मुजे कुछ बताने वाली थी.. हमारी सरलाकाकीके बारेमे.. फीर हमे टाइम नही मीलेगा..

पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) बडी जल्दी हे उनके बारेमे जाननेकी..? ठीक हे सुनो.. भाइ वो बहुत ही कामी ओरत हे.. जब जवानीकी दहेलीजपे अपना कदम रखा.. तो अपने छोटे भाइकी नुनीके साथ खेलती थी..

लखन : (मुस्कुराते) क्या छोटी उमरमे ही..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. जब भाइ भी जवान होगया.. तो उसने अपने भाइसे ही अपना कौमार्य भंग कीया.. ओर उनसे प्रेगनेन्ट होगइ.. उनकी मांको सब पता चल गया तो बच्चा गीरवाके उनकी सादी छोटी उमरमे ही विरजी अंकलसे करदी गइ.. ओर सरला काकीको अपने घरपे आनेके लीये मना करदीया..

लखन : (आस्चर्यसे) तो क्या काकी उनके मायके कभी नही गइ..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. फीर तो उनका भाइ भी सादीके लायक होगया तो उनकी मांने उनकी सादी रमा भाभीसे करवादी.. वो भी पैसे देकर.. ओर यहा सरला काकी वीरजी अंकलसे संतुस्ट नही होती थी.. तो उसने हमारे बापुके साथ रीलेशन रख लीया.. ओर भानु भाइ ओर हमारी लता बापुकी ही संतान हे.. जब वीरजी अंकल ओर बापु नही रहे तो सरला काकीने बडे भैयाको फसालीया..
 
लखन : (आस्चर्यसे देखते) हमारे बडे भैयाको..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. भानु भाइ ओर भैया अच्छे दोस्त थे तो भैया अक्सर उनके घरपे जाते थे.. ओर भानु भाइसे छुपकर दोनो वासनाका खेल खेलते..

लखन : (हसते) ओ..ह.. गोड.. हमारे बडे भैया भी हमारे बापुके उपर गये हे..

पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां.. ओर आपको भी उसीकी राहपे चलना हे.. फीर हमारा वीजय..

इसके अलावा भी पुनमने लखनको बहुत कुछ बताया.. तभी अ‍ेक दुकान आगइ तो पुनम ओर लखन दुकानमे चले गये.. वहा पुनमने सृतीको सरप्राइज देनेके लीये कुछ सामान लेलीया ओर लखनको पुरा प्लान समजा दीया.. फीर सामानको कारमे ही रखते दोनो घरमे आगये..

आते ही पुनम सबको गले मीली.. तो लखनने सृतीको गोदमे उठा लीया.. ओर उपर अपने रुममे ले गया.. वहा पुनमके साथ सब उपर आगइ.. पुनमने अलमारीसे अ‍ेक लाल सारीके साथ अ‍ेक कपडेकी जोडी नीकालके सृतीको पहेननेके लीये देदी..

ओर बाकीको सब सामान नीचे लेजानेको कहा.. फीर सृती कंपलीट होगइ तो मना करनेके बावजुद लखन उसे गोदमे नीचे लाया.. सभीने खरीदी कीया हुआ सब सामान ओर कुछ कपडे भी साथमे लेलीये.. ओर घरको ताला लगाकर सबलोग गांवकी ओर नीकल गये..

सृतीको अभी भी समजमे नही आ रहा था की पुनमने उसे दुल्हन जैसे कपडे पहेननेके लीये क्यु कहा.. वो चुप चाप कारमे बैठी रही.. बीच रास्ते जंगल आया तब कबीलेकी ओर जानेके रास्तेमे लखनने कार मोडली.. तो सृतीको आस्चर्य हुआ..

लेकीन बाकीके सबलोग मुस्कुराते रहे.. सृतीने अ‍ेक बार सबको पुछा.. की हम इधर कहा जा रहे हे..? लेकीन कीसीने कुछ नही बोला ओर हसते रहे.. लखनने कबीलेकी ओर ना जाते कारको बीच जंगलमे लेली.. तो सृतीकी दिलकी धडकन भी बढने लगी.. ओर आखीर उनसे रहा नही गया..

सृती : (थोडा जोरोसे) लखन.. अब तो बता दीजीये हम कहा जा रहे हे..?

पुनम : (जोरोसे हसते) अरे दीदी सांत रहीये.. आपही के लीये जा रहे हे.. आपके लीये अ‍ेब बडीया सरप्राइज हे.. आप देखती जाइअ‍े.. हें..हें..हें..

सृती : (अपना सर पकडते) ओह गोड.. आप ओर हमारे भाइकी सरप्राइज.. कभी खतम ही नही होती..

आखीर सबलोग मंदिरपे आगये.. बीच जंगल डरावना लग रहा था.. सबलोग कारसे उतर गये.. ओर चारो ओर देखने लगे.. फीर मंदिरके परीसरमे चले गये.. वहा अंदर महादेवका मंदिर देखा.. अंदर जाकर सब लोगने थोडी साफ सफाइ करली..

फीर सबलोगोने दर्शन कीये.. तभी पुनमने लखन ओर सृतीको आगे आनेके लीये कहा.. तो सृती सरमाते हुअ‍े लखनके साथ आगेकी ओर आगइ.. तो पुनमने साथमे लीया हुआ सामान उठाया.. ओर अंदरसे दो फुल हार नीकालके लखन ओर सृतीको अ‍ेक अ‍ेक पकडा दीया..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) इनका क्या करना हे..? सीवलींगपे चडाना हे..?

पुनम : (अपना सर पीटते हसते) अरे बुध्धु.. यही तो हे सरप्राइज.. आप ओर लखन भैया अ‍ेक दुसरेके सामने खडे होजाइअ‍े.. आज आप दोनोका इधर गांधर्व विवाह हे.. मीन्स.. दोनोकी सादी.. चलीये दोनो अ‍ेक दुसरेको हार पहेनाइअ‍े..

Chat-GPT-Image-Aug-23-2025-06-49-33-PM.png


कहातो सृती सोक्ट होते पुनमकी ओर देखने लगी.. उनकी आंखसे खुसीके मारे आंसु नीकल गये.. वो समज गइ की घरसे आते वक्त इसीलीये पुनमने उनको सादी जैसे कपडे पहेनाये थे.. सृतीने सरमाके लखनको हार पहेना दीया तो लखनने भी सृतीके गलेमे वरमाला पहेनादी..

फीर पुनमने लखनको अ‍ेक मंगलसुत्र नीकालके लखनके हाथोमे थमा दीया.. जीसे लखनने सृतीके गलेमे पहेना दीया.. आखीर लखनने सृतीकी मांग भरदी.. तो सृती पुनमसे लीपटकर जोरोसे रोने लगी.. सबने हसते हुअ‍े सृतीको सांत कीया..

फीर पुनमने दोनोको सादीकी कसमे खीलाइ.. तब सृतीसे रहा नही गया.. ओर वो नीचे जुकते लखनके पांवको छुने लगी.. ओर लखनने उसे खडी करते अपनी बाहोमे भर लीया.. सृतीके अ‍ेक बार फीर आंसु नीकल गये.. आखीर सृतीकी सादी लखनसे होगइ..

दया : (गुलाबके फुलोकी बेग दीखाते) पुनोदी.. मेरे देवर ओर देवरानीकी सादी तो होगइ.. अब इतने सारे फुलोका हम क्या करेगे..? यही रखदु..?

रजीया : (पीठमे अ‍ेक मुका जडते थोडा डांटते) बुध्धु की बुध्धु ही रहेगी.. अभी अभी कुछ दिन पहेलेही तेरी सादी हुइ हे.. फीरभी नही पता..? आज इन दोनोकी सादी हुइ हे.. तो सुहागरात नही मनेगी..? ये फुल इसीके लीये हे समजी..? लेचल साथ..

कहा तो दयाने अपना सर पीट लीया तो सब जोरोसे हसने लगे.. फीर सब लोग दर्शन करके वहासे नीकल गये.. पुनम खुद सबके साथ बैठ गइ.. ओर सृतीको लखनके साथ बीठा दीया.. सबलोग मस्ती मजाक करते गांव पहोंच गये..

तो कारकी आवाज सुनते ही लता ओर मंजु बहार आगये.. सबको देखते ही दोनो दोड पडी ओर बारी बारी सबको गले मीलने लगी.. सृतीको सादीके जोडेमे मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र देखते मंजु खुस होगइ.. तो लता भी समज गइकी सृतीने लखनसे सादी करली हे..

मंजुला : (जोरोसे सृतीको गले लगाते) आगइ मेरी बहु.. सादी करली मेरे बेटेसे..? कैसा लगा हमारा सरप्राइज..? हें..हें..हें..

सृती : (आंख गील करते धीरेसे) मोम.. आप लोगोकी सरप्राइज कभी खतम ही नही होगी.. ये आप ओर पुनोदीका प्लान थानां..?

मंजुला : (हथलीमे चहेरा पकडते) हां मेरी बच्ची.. यहासे दुखी होकर गइ थी.. तो तुजे खुस होते देखन चाहती थी.. कैसा लगा मेरा बेटा..? तुजे खुस तो रखता हेनां..?

सृती : (वापस गले लगते) मोम.. वो हम सबको बहुत.. बहुत.. बहुत खुस रखते हे.. थेन्क्स.. कास मे आपकी बाते समज पाती.. सब कीतना कुछ बदल गया..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. चल घरमे.. तेरी गृह प्रवेसकी वीधी भी करनी हे.. फीर अपनी मम्मीको भी मीलले.. यहा कीसीको पता नही हे.. की तुमने लखनसे सादी कीहे.. सबको सरप्राइज मील जायेगी.. तुजे मेरी लखनकी सुहागन देखते बहुत खुस होजायेगी..

तभी लखन भी आकर मंजुका पांव छुता हे.. तो मंजु उसे भी गले लगा लेती हे.. तबतक लता भी सबको गले मीली.. लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखा.. तो लताको बहुत बुरा लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. तभी मंजु लताको पानीका कलश लानेको बोलती हे.. तबतक सबलोग सामान लेकर अंदर आजाते हे.. मंजुने सृती ओर लखनको दरवाजेपे ही रोक लीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६४

तभी लखन भी आकर मंजुका पांव छुता हे.. तो मंजु उसे भी गले लगा लेती हे.. तबतक लता भी सबको गले मीली.. लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखा.. तो लताको बहुत बुरा लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. तभी मंजु लताको पानीका कलश लानेको बोलती हे.. तबतक सबलोग सामान लेकर अंदर आजाते हे.. मंजुने सृती ओर लखनको दरवाजेपे ही रोक लीया.... अब आगे

ओर वही साथमे खडे रहेनेको बोला.. लखन ओर सृती सरमाते वही खडे रहे.. मंजुने उन दोनोके सरपे कलश घुमाकर गृह प्रवेस करवाया.. तबतक अंदर रजीया दया पुनम भुमीका ओर नीर्मलाको भी गले मीली ओर पुनम चंदाके पास चली गइ.. तो चंदा अ‍ैसे ही विजयको लेकर गुमसुम बैटी थी.. पुनमको देखते ही खुस होते मुस्कुराने लगी.. बेडसे खडी होगइ.. ओर पुनमको जोरोसे गले लगा लीया..

चंदा : (मुस्कुराते) आगइ मेरी बच्ची..? क्या मेरे दामाद भी साथमे आये हे..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. लेकीन वो अभी आपके दामाद नही हुअ‍े हे.. आपके देवर भीतो हे..

चंदा : (मुस्कुराते) नही.. मे उसे अपना दामाद ही मानुगी.. अब दामाद होने मे बचा ही क्या हे..?

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) क्या..? मतलब..? सादी बाकी हे..

चंदा : (हसते) सादी बादी तो होती रहेगी.. मे इतनी भी भोली नही हु.. जानती हु इस खानदानके मर्दोको.. दोनो भाइ अ‍ेक जैसे ही हे.. कोइ मौका हाथसे नही जाने देते.. तभी तो आप अ‍ैसे चल रही हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते गले लगते)) भाभी.. प्लीज.. मुजे सरम आ रही हे..

चंदा : (हसते) अरे.. सरमाओ मत.. मुजे सब पता हे.. बस तुम खुस रहो..

बहारकी ओर भुमीका ओर नीर्मला होलमे बैठे गपे लगा रही थी.. जैसे ही सृती लखनको देखा दोनो खडी होगइ.. तो सृती दोडकर उनकी मम्मीके गले लग गइ.. ओर जोरोसे रोने लगी.. तो भुमीका भी सृतीकी मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र देखके सोक्ट होगइ..

तो नीर्मला भी मुह फाडकर सृतीकी मांगको देखती रही.. दोनोके चहेरेपे खुसी ओर सरप्राइज के मीले जुले भाव थे.. ओर दोनो समज गइकी सृती लखनने सादी करली हे.. तभी लखन भी आकर दोनोके पांव छुलेता हे.. ओर सबलोग होलमे ही बैठ गये..

भुमीका : (सृतीको अपने पास बीठाते) बेटा.. ये सब क्या हे..? तुम दोनोने सादी करली..?

सृती : (सरमाकर लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) हां मोम.. हम आपको सरप्राइज देना चाहते थे.. क्या आपको बुरा लगा..?

भुमीका : (सरको चुमते) अरे नही नही.. इतना होनहार दामाद मीला हे तो कौन खुस नही होगे.. मे बहुत खुस हु.. की तुमने हमारे लखनसे सादी करली.. चलो अब मुजे तेरी चीन्ता ही नही हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) सृतीबेटा.. मुजे सब पता था.. मेभी भुमीको सरप्राइज मीलनेका रीअ‍ेक्शन देखना चाहती थी.. हम सब बहुत खुस हे..

लखन : (भुमीका नीर्मलाके पांव छुकर बीचमे बैठते) हां तो आंटी.. अब आपसे मे क्या कहु.. बुआ..? भाभी..? की सासुमां..? हें..हें..हें..

भुमीका : (कान खीचते) तु हेनां.. बहुत बदमास हो गया हे.. मुजे कुछ नही बनना.. तेरी बुआ ही ठीक हु.. जा अंदर रामु भाइ हे.. पहेले उनकी खबर तो पुछले..

जैसे ही सबको पता चलाकी रामुकाका यही रुममे हे.. तो दया दोडकर वहा चली गइ.. ओर रामुकाकासे लीपटकर रोने लगी.. तबतक सबलोग अंदर आचुके थे.. मंजुने दयाको सम्हाला.. तो लखन ओर सृतीने मीलकर रामुकाकाके पैर छुअ‍े ओर उनका आशीर्वाद लीया..

फीर कुछ देर वही रुकके सब लोगोने रामुकाकाके हालचाल पुछे.. ओर होलमे आगये.. तो रजीया ओर दया कीचनमे चली गइ.. ओर चंपा भाभीको गले मीलकर उनकी मदद करने लगी.. पुनम अब भी चंदाके पास थी.. तो भावना थोडी लंगडाते चलते बच्चीको लेकर पुनम वाले रुममे चली गइ..

तो मंजु उसे देखकर कातील स्माइल करती हे.. उसे सब पता चल गया थाकी पीछली रात वो लखनसे फीजीकल होकर आइ हे.. ओर लखनने उनकी अ‍ैसी हालत कीहे.. जीसे देखकर मंजु भी खुस होगइ.. होलमे भुमीका नीर्मला सृती मंजु लथा लखन सबलोग बैठकर बाते करने लगे..
 
लता बार बार लखनकी ओर देखती रही.. लेकीन लखनने अ‍ेक बार भी लताकी ओर नही देखा.. तो लता खडी होकर भावनाके पास चली गइ.. सृतीने भुमीकाका हाथ पकडकर उसे चेक करलीया.. ओर लंचके बाद भुमीको रुममे आकर देखलेनेको बोला..

ताकी भुमीकाकी सोनोग्राफी होजाये ओर सब सही पता चले.. तबतक दो पहोर होगइ.. तो देवायत भी घरपे आगया.. ओर सबके साथ बैठ गया.. सृती फोर्मालीटी करते देवायतका हाल चाल पुछकर भावनाके पास चली गइ.. सृतीने देवायतसे बातकी तो भुमीका ओर नीर्मलाने राहतकी सांस ली..

ओर देवायतने डो. वसुधाने कही बात मंजुको बतादी.. की रामुकाकाकी तबीयत ज्यादा खराब होनेकी वजहसे सायद उसे खानेके बाद होस्पीटल लेजाना पडे.. फीर सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. पुनमसे बाते करते आज चंदा थोडी खुस लग रही थी.. लता अब भी लखनकी ओर प्यारसे देख रही थी..

ओर मनमे मनते कर रही थीकी अ‍ेक बार तो लखन उनकी तरफ देखले.. लेकीन लखन साथमे बैठी पुनम ओर सृतीसे बाते करता रहा.. सृतीकी मांगमे सींदुर देखते देवायतभी समज गया थाकी लखन ओर सृतीने सादी करली हे.. फीर खाना खाकर देवायत ओर लखन अपने खेतोपे चले गये..

देवायत : (रास्तेमे) लखन.. अच्छा कीया तुमने सृतीसे सादी करली.. कमसे कम हमारी नजरके सामने तो रहेगी.. तो भुमी भी खुस रहेगी.. वो उन्हीकी चीन्ता कर रही थी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) सोरी भैया.. मे आपको नही बता सका.. लेकीन भाभीमां सब जानती थी.. ओर सृती दीदी भी मुजसे प्यार करने लगी थी..

देवायत : (मुस्कुराते) अरे तु टेन्शान मतले.. मुजे तेरी भाभीमांने सब कुछ बता दीया था.. ओर सुन.. तु आज कही मत जाना.. मुजे नही लगता रामुकाका आजकी रात नीकाल पायेगे..

लखन : (थोडा सीरीयस होते) भाइ.. क्या उनको ज्यादा तकलीफ हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. सुधीरको मीन्स.. वो वसुधाको बुलाया था.. रामुकाकाकी उमर होगइ हे.. कुछ नही हो सकता.. बस.. हमे उनकी सेवा करनी हे..

लखन : भाइ.. अ‍ेक बात पुछु..? क्या वो सुधीर भाइ ही वसुधा हेनां..? मुजे पुनोदीने बताया..

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. तुजे तो पता हे उनमे अ‍ेक मर्दसे ज्यादा ओरतके लक्षण थे.. तो बेचारेने अपना जेन्डर चेन्ज करवा लीया.. ओर ये अच्छा भी हे.. कमसे कम अपनी लाइफमे तो खुस रहेगी..

लखन : (सामने देखते) तो फीर नीशा भाभी..? उनका क्या..?

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. कुछ बाते हे जो आज तुजे खुलकर बताना चाहता हु.. तेरी भाभीमां ओर पुनोको सब कुछ पता हे.. मेने नीशा ओर चारु रश्मी तीनोसे सादी करली हे.. ओर लता वंदनाके साथ सादी करने जा रहा हु..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. अ‍ेक बात पुछु..? हम दोनोकी इतनी बीवीया हे.. आपने ओर भाभीमांने भी कुछ नीर्णय लीया हे.. कही हम कुछ गलत कदम तो नही उठा रहे..?

देवायत : (मुस्कुराते) नही लखन.. इस बारेमे तेरी भाभीमासे सब बाते होगइ हे.. वो ओर पुनो बहुत कुछ जानती हे.. हम सब वो नही हे जो तुम समज रहे हो.. हम सब लोगोसे अलग हे.. पुनोको सब पुछ लेना.. हमारे खानदानकी मुजे कुछ जीम्वेवारी नीभानी हे.. ओर इसके लीये सब जरुरी था.. जब मेरा वक्त खतम होजायेगा तब यही सब जीम्वेवारी तुजे ही उठानी हे.. जबतक मेरा विजय बडा नही होजाता..

लखन : (सरमाते धीरेसे) हां भाइ.. भाभीमाने मुजे भी ये बात कही हे.. चलो ठीक हे.. मुजे लगा कही आपको बुरा लगता होगा.. इसीलीये पुछ लीया..

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. पता हेना हम सब कौन हे..? हम दोनोमे कामका अंस हे.. हम सेक्सके बीना नही रेह सकते.. मुजे पता हे तेरी सादीसे पहेले बहुत सारी लडकीया ओर ओरतोके साथ तेरा रीलेशन रेह चुका हे.. इसी तराह मेरा भी कइ ओरतोके साथ रीलेशन हे.. हमे ओर मर्दोके मुकाबले ज्यादा सेक्स चाहीये.. वरना हमे तकलीफ होने लगती हे.. तो तु कोइ संकोच मत कर.. जो हो रहा हे होने दे.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा..

लखन : (धीरेसे) भाइ.. साहील मीला था.. वो कुछ अन्जान लोगोकी बात कर रहा था.. जो भानु भाइसे मीलते हे.. तो आप जरा ध्यान रखना..

देवायत : (मुस्कुराते) हां वहासे आकर मीला था मुजसे.. मेरी सब बाते होगइ हे.. मेने इस बारेमे भानुसे भी बात करली हे.. तु फीकर मत कर.. हम लोग देख लेगे..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. आपसे अ‍ेक बात ओर करनी थी.. हमारे साहीलके बारेमे..

देवायत : (मुस्कुराते) जानता हु.. फीर भी बता..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. अब उनके चाचा चाची गांवमे रहेने आजायेगे.. आपको उनके चाचाको मनाना हे.. साहील ओर उनकी अम्माके लीये.. आप समज गयेनां..?
 
देवायत : (मुस्कुराते) तु टेन्शन मत ले.. अ‍ेक बार यहा आनेदे उसे.. उनके चाचासे सब बाते कर लुगा.. साहील बहुत ही होशीयार लडका हे.. अच्छा हुआ उन्होने अपनी अम्माको सम्हाल लीया.. वरना उनका भी हाल मुनाकी मां जैसे होता..

लखन : (मुस्कुराते) क्या मुनाकी मां अभी भी भानु भाइसे मील रही हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) नही.. अब तो उनके सामने तक नही देखती.. लगता हे मुनाने उसे अच्छी तराह सम्हाल लीया हे.. ओर हेभी अच्छा.. घरकी बात घरमे ही रेह जायेगी..

फीर बाते करते दोनो खेतपे आगये.. वहा दोनो भानुसे मीले.. ओर रामुकाका की बाते करने लगे.. तो बातो ही बातोमे भानुको पता चलाकी सृती यहा आइ हे ओर पुनमकी सादी तक यहा रुकने वाली हे.. तो ये सुनकर भानुने रमाको सृतीको दीखानेकी बात करली..

फीर अ‍ेक घंटेके बाद दोनो घरपे आगये तो दया रामुकाकाके पास ही बैठे उनकी सेवा कर रही थी.. लखन भी रामुकाकाके पैर दबाने लगा.. घरपे गमगीन वातावरण होगया था.. क्युकी रामुकाकाकी हालत ओर बीगड चुकी थी.. वसुधाने देवायतको पहेलेसे ही सब बताके रखा था..

रामुकाका बेसुध जैसी हालतमे पडे थे.. कोइ उनको बुलाता तो मुस्कीलसे खांख खोलकर उनके सामने देख लेते.. वो अपनी जींदगीकी आखरी सांसे गीन रहे थे.. रामु काकाके पेर ठंडे पड गये थे.. उनके सीनेसे कुछ अजीब आवाज आने लगी थी..

लखनने श्रीधरको फोन कीया तो कुछ ही देरमे श्रीधर मुना बंसी साहील सभी दोस्तो घरपे आगये.. रामुकाका अंतीम समय था.. दयाने उसे पानी पीलाया.. ओर कुछ ही देरमे रामुकाकाकी सांसे थम गइ.. देवायतने वसुधाको फोन करके बुलालीया..

तो सृतीने उनका हाथ पकडकर नब्स चेक करली.. ओर मंजुकी ओर देखते नांमे गरदन हीलाइ तो दया उनसे लीपटकर जोरोसे रोने लगी.. भुमीका नीर्मला मंजु सबकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर दयाको सम्हालने लगे.. फीर वसुधाने वही डेथ सर्टी लीखकर देदीया..

तो कुछ देरमे चारु नीशा वंदना रश्मी ओर गांवकी सभी ओरते ओर कइ मर्द आगये.. जैसे जैसे सबको पता चला सबलोय आने लगे.. लखनने श्रीधर बंसीको कहेकर अर्थीका सामान मंगवाया.. ओर साम तक सब कंपलीट होगया.. सबने रामुकाकाके आखरी दर्शन कीये..

फीर रामुकाकाको लेकर स्मसान चले गये.. वहा उनको देवायतने मुखाग्नी दी.. ओर उनका अग्नी संस्कार करके सबलोग घरपे आगये.. फीर सब लोग देवायतको मीलकर अपने घर जाने लगे.. घरपे सीर्फ देवायत ओर लखनकी सब बीवीया ओर लखनके दोस्त रेह गये..

रातने सबने मीलकर खाना खाया.. फीर रश्मी नीशा चारु वंदना ओर वसुधा भी अपने घरपे चले गये.. ओर लखन दोस्तोके साथ बहार चला गया.. सभी लोग चोहारेपे अपनी जगह बैठ गये.. ओर लखनने सबको सृतीके साथ सादीके बारेमे बताया..

आज रामुकाकाकी मोतकी वजहसे लखन ओर सृतीकी सुहागरात मुमकीन नही थी.. ओर लखनको इस माहोलमे अ‍ैसा करने उचीत भी नही लगा.. तो लखनने हसते हुअ‍े बंसीको उनकी सादीके बारेमे पुछा तो बंसी सरमा गया ओर मुस्कुराने लगा.. ओर सुबह वापस सहेर जानेकी बात करने लगा..

श्रीधर : यार रुकजाना यहा.. वैसे तेरी सादी भी हे.. ओर सबलोग यहा भी हे.. तो वहा अकेला क्या करेगा..?

लखन : (मुस्कुराते) यार वहा तेरी होस्टेल वाली भाभी हेनां.. खाने पीनेकी कोइ तकलीफ नही हे.. ओर वैसे भी वहा मेरी सांसकी तबीयत भी ठीक नही हे.. ओर धंधा भी तो वही हे.. ओर हमारा गांव हे ही कीतना दुर.. अब तो नइ गाडी भी हे.. सादीके अगले दिन आजाउगा.. अब देखते हे भाभीमां कब हमारी सादी करवाती हे..

साहील : भाइ रामुकाका का बहुत बुरा हुआ.. वरना आपकी सादी होजाती..

लखन : खैर छोड सब.. होजायेगी.. तु बता.. सबानाका क्या हुआ..? उनका रीजल्ट आयाकी नही..?

साहील : (मुस्कुराते) भाइ.. आज ही उनसे बात हुइ.. सायद कल या परसो आजायेगा.. उन्होने तो जानेकी पुरी तैयारीया करली हे..

मुना : (जोरोसे हसते) चलो सही हो रहा हे.. अगर साहील भी सबानासे सादी करलेगा तो इनकी भी दो बीवीया होजायेगी..

साहील : (मुस्कुराते) कमीने पहेले उसे डोक्टरतो बनने दे.. क्या पता डोक्टर होनेके बाद उनका मन बदल जाये..

लखन : (मुस्कुराते) यार तु टेन्शन मत ले.. सबाना अ‍ैसी लडकी नही हे.. वो बहुत अच्छी लडकी हे.. सुन.. मेने भाइसे बात करली हे.. वो सब सम्हाल लेगे..

फीर सभी दोस्तो बाते घरके अपने अपने घर चले गये.. लखन हवेलीपे आया तो पुरी हवेलीमे अंधेरा ओर सनाटा छाया हुआ था.. जाहीरसी बात हे आज रामुकाकाकी वजहसे सबलोग थकके सो गये थे.. दया चंदा लता ओर मंजु देवायतके रुममे थी..

भावना नीचे पुनमके रुममे थी.. जो अपनी बच्चीको दुध पीलाते लखनके साथ बीताये पलको याद कर रही थी.. लखन सीधा उपर अपने रुममे चला गया.. तो वहा रजीया सृती ओर पुनम बेडपे लैटे बाते कर रही थी.. तो लखन भी वही जाकर बैठ गया.. तभी..
 
पुनम : (मुस्कुराते) सोरी भैया.. आज ही तुम दोनोकी सादी हुइ हे ओर आज ही रामुकाका चले गये.. तो तुम दोनोकी सुहागरात नही हो सकी..

सृती : (सरमकर मुस्कुराते) दीदी कोइ बात नही.. वैसे भी हमने सुहागरात तो मनाली हे.. ओर साथमे सोने भी लगे हे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. वैसे भी मम्मीने मुजे भी हमारी सादी तक आपसे दुर रहेनेको कहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) यार वैसे भी तुम सब इनकी टेन्शन मत लो.. मुजे पता हे सब..

रजीया : (कातील नजरोसे देखते) वैसे भी आज यहा मे ओर सृतीदी तो आपके साथ सो ही रही हे.. पुनोदी अभी नीचे भावनादीके पास चली जायेगी.. येतो आप नही आयेतो हम गप्पे लगा रही थी..

लखन : (पुनमके सामने देखते) दीदी.. अब वैसे भी यहा कुछ खास काम नही हे.. तो सोचा रहा हु कल मे नीकल जाता हु.. जब सादीका कंन्फोर्म होजाये तो फोन कर देना मे अ‍ेक दिन पहेले आजाउगा..

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. तो फीर आपके खाने पीनेका..? क्युकी अब रजुदी ओर सृतीदी हमारी सादी तक यहा रुकेगी.. क्युकी इनको मम्मीने बोला हे..

लखन : (मुस्कुराते) अरे मेरे खाने पीनेकी चीन्ता मत करो.. वहा मेरी बीवी हेना.. मे राधुके घर खा लुगा..

पुनम : (थोडी मायुसीसे खडी होते) ठीक हे भाइ.. सुबह मम्मीको पुछ लेना.. अगर वो आपको जानेकी परमीशन देती हेतो चले जाना.. चलो मे सोने जा रही हु.. मजे करो तीनो..

53.gif


लखन जटसे खडा होकर पुनमका हाथ पकडलेता हे.. ओर उसे हग कर लेता हे.. देखा तो पुनम लखनके जानेकी बात सुनकर थोडे नाराज जैसी दीख रही थी.. तो लखन समज गया.. ओर पुनमका चहेरा अपनी हथेलीओमे थामते उनकी आंखोमे देखते..

लखन : (मनाते धीरेसे) दीदी.. प्लीज.. आप कहोतो नही जाता.. अ‍ैसे नाराज मत हो.. आप मायुस होजाती हो तो अच्छा नही लगता..

पुनम : (सीनेमे सर रखते) भाइ.. क्या करु..? अब आपसे दुर रहेनेका जी नही करता..

लखन : दीदी.. आपको तो सब पता हे.. वहा राधुकी मम्मीकी तबीयत भी खराब हे.. अगर उनको कुछ होगया तो उनके पास भी कोइ नही हे..

पुनम : (जटसे अलग होते) हां भाइ.. सोरी.. मेतो भुल ही गइ थी.. आप चले जाना.. लेकीन फीकर मत करना.. हमारी सादी तक उनके पास वक्त हे.. हम सब अ‍ेक बार फीर उनको मीलेगे..

फीर पुनम सबको गुड नाइट कहेकर नीचे चली गइ.. तो भावना कल रातकी चुदाइकी वजहसे थकके सो गइ थी.. ओर पुनम भी उनकी बगलमे लेटकर सो गइ.. उपर लखनने भी आज रजीयाको दो बार चोद लीया.. जब रजीया सोगइ तो लखन देर रात तक सृतीको चोदता रहा..

20956.gif


सृतीको लखनके लंडको अपनी चुतपे लेनेमे काफी तकलीफ हो रही थी.. क्युकी लखन सृतीकी चुतमे जड तक घुसाता.. तो लंड उनकी बच्चेदानीसे टकराता.. ओर सृतीको दर्द होता था.. फीर भी अपने दर्दकी परवा कीये बगैर मजेसे लखनसे चुदवाती रही..

gif-passionate-sex-29.gif


सृती अबतक की अपनी सारी कशर लखनसे चुदवाते पुरी कर रही थी.. फीर तीनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. नीचेकी ओर आज दया साथमे थी तो सब लोग अ‍ैसेही सोगये थे.. लेकीन चंदाकी आंखोसे नींद कोसो दुर थी.. क्युकी आज कल देवायत भी उनसे दुर था.

सुबह सब लोग जल्दी जाग गये ओर कंपलीट होगये.. सबलोग चाइ नास्ता करते डीसकस करने लगे.. ओर तैय हुआकी रामुकाकाकी वीधी पांच दीनमे नीपटा लेगे.. ओर अ‍ेक हप्तेके बाद लखन ओर पुनमकी सादी कर देगे.. तबतक सृती रजीया यही रहेगी..

ओर लखनको जानेकी परमीशन मील गइ.. तो पुनम लखनसे अकेलेमे बात करना चाहती थी.. तो उसने लखनको आंखोके इसारोसे रुममे आनेको कहा.. सबलोग चाइ नास्ता करते होलमे चले गये.. दया रजीया चंपाभाभी सब काम नीपटाने लगे.. क्युकी रामुकाका का सोक मनाने अभी गांवकी ओरते आने लगेगी..

इसी बीच सृती ओर पुनम लखनको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर पुनमने दरवाजा बंध करलीया.. बंध करते ही पुनम जोरोसे लखनकी बाहोमे समा गइ तो दुसरी ओर सृतीभी लखनकी बाहोमे आगइ.. लखनने बारी बारी दोनोके होठ चुमलीये.. तभी..

पुनम : (सर उठाके सामने देखते) भाइ.. धिरेनसे बदला लेनेका अच्छा मौका हे आपके पास..

लखन : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. कैसे..?

पुनम : (मुस्कुराते कानमे धीरेसे) भाइ.. वहा जाकर राधुदीदीको फोन मत करना.. उसे मत बताना की मे सहेरमे हु.. आपके शीकारको लेकर सीधे हमारे घरपे चले जाना.. आप समज गयेनां.. मे चाहती हु धिरेनको आपका जुठन मीले.. मनालो अपना छोटासा हनीमुन.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते देखते) मेरा जुठन..? आपका मतलब खानेसे हे..?

सृती : (मुस्कुराते सरपे टपली मारते) बुध्धु के बुध्धु ही रहोगे.. अरे वो नीलुकी बात कर रही हे..

पुनम : (नैन नचाते) समज गयेनां..? चार पांच दिन दोनो अकेले ही घरपे रहोगे.. अ‍ैसी हालत करदो.. की धिरेनको नीलुके साथ सेक्समे कुछ फील ही ना हो.. अभी बीस दिनके बाद दोनोकी कोर्ट मेरीज हे.. आप समज गयेनां..?

सृती : (धीरेसे फुसफुसाते) यार पुनोदी मुजे ये सब ठीक नही लग रहा.. लखनको कीसीके साथ बांटते अच्छा नही लगता..

पुनम : (सामने देखते) अरे दीदी कुछ नही होगा.. समजोनां ये सब जरुरी हे.. हमारे आगेके प्लानका हीस्सा..
 
Back
Top