- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 148,789
पुनमने बहुत मना कीया.. फीर भी लखन नही माना.. ओर पुनमको गोदमे उठा लीया ओर सीडीया उतरके पुनमको लेकर नीचे आगया.. पुनम बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. नीचे आते ही पुनमको सृतीके पास बीठाकर खुदभी उन दोनोके बीच बैठ गया..
भावना : (जोरोसे हसते) ओ..हो.. आजकल होने वाली बीवीकी बहुत सेवा हो रही हे..? अैसा काम करते ही क्युहो जो बीवीकी सेवा करनी पडे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमसे पानी पानी होते अेक मुका मारते) दी.. आप बहुत कमीनी हो.. जब आपकी बारी आयेगीनां..? तब आपको पता चलेगा.. (लखनकी ओर देखते) भाइ.. थोडा प्यार भावना भाभीको भी देना.. ताकी उनको भी पता चले.. वो भी रेडी हे..
सृती : (जोरोसे हसते) हां लखन.. पुनोदी ठीक केह रही हे.. अब हम सबके बीच कैसा पर्दा..? आज भावना दीदीके साथ अपनी सुहागरात मनालो..
भावना : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) दीदी.. प्लीज.. मुजे थोडा टाइम चाहीये.. पता नही कल रातसे कुछ अजीब लग रहा हे.. मेरी तबीयत भी ठीक नही हे.. कुछ उल्टीया जैसा लग रहा हे..
सृती : (मनमे खुस होते) दीदी.. अभी आपको गोली देती हु.. आप ठीक होजायेगी.. जरा हाथ देना..
भावना : (मुस्कुराते हाथ लंबा करते) जी दीदी.. देख लीजीये..
सृती : (कलाइपे हाथकी नब्स पकडकर घडीमे देखते) दीदी.. आपकी बच्चीके जन्मको कीतना टाइम हुआ..? मेने आपकी ओर मंजुमोमकी डीलीवरी की उनको डेढ साल हुआ हे..
भावना : (मुस्कुराते) हंम.. कुछ दिनोमे मेरी विभा ओर विजय डेढ सालके हो जायेगे.. दोनोका जन्म साथमे ही हुआ हे.. सायद अेक दिन आगे पीछे होगा..
सृती : (हाथ छोडते धीरेसे) दीदी.. आपको मे अेक कीट देती हु.. कल सुबह चेक करलेना.. मुजे कुछ आसंकाये लगती हे.. सायद आप प्रेगनेन्ट हे.. (हसते) फीर भी लखनको मीलनेमे कोइ अेतराज नही..
भावना : (सरमाते लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) दीदी.. प्लीज.. बस.. थोडा सोचनेका टाइम दीजीये.. मुजे भी पता हे.. अब हम चारोको लखन भैया ही सम्हालेगे..
लखन : (मुस्कुराते बारी बारी पुनम ओर सृतीके गालको चुमते) भाभी.. कोइ बात नही.. अभी मुजे प्यार देनेके लीये ये मेरी दोनो बहेने हेनां.. आपके हीसेका प्यार मे इनसे लेलुगा..
सृती : अे.. हेलो.. हम दोनो आपको कीसीके हीस्सेका प्यार नही देने वाली.. जीनको प्यार चाहीये वो आपसे ले लेगी.. क्यु पुनोदी..?
पुनम : (भावनाकी ओर देखते हसते) ओर नही तो क्या..? मे भी नही देने वाली..
रजीया : (हाथ पोछते आते) अरे..? आ गये दोनो..? लखन.. आपको चाइ नास्ता बनादु..? हम सब करके बैठे हे.. की अब डायरेक्ट लंच करोगे दोनो..?
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) रजुदी.. बस थोडीसी चाइ पीलादो.. लंचका टाइम भी हो गया हे.. तो नास्ता नही करना.. लखन भैया आपको करना हे..?
लखन : (मुस्कुराते) नही रजु.. हम दोनोको थोडी चाइ ही पीलादे.. फीर लंच करके हमे शोपींगपे जाना हे..
सृती : (पुनमकी ओर देखते) इतनी जल्दी..? सामको आराम करके चले जाना..
पुनम : (सामने देखते) क्या चले जाना..? आपको भी आना हे.. ओर सुनो.. वहा शोपींग करके मे सीधी राधुदीदीके वहा चली जाउगी.. ओर रात वही रुकुगी.. मुजे उनसे अेक जरुरी काम हे.. फीर हम सबलोग वहेली सुबह गांव नीकल जायेगे.. आप मुजे वहीसे लेजाना..
भावना : क्या वहीसे लेजाना..? हमारा सब सामान इधर पडा हे.. लखन भैया आपको सुबह लेने आयेगे.. हम यहीसे सामान लेकर नीकल जायेगे.. क्या जल्दी हे..
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. वोभी ठीक हे..
लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. अेक दिन ओर रुक जाइअेना.. हम कही धुमने जायेगे..
पुनम : (कीचनकी ओर देखते धीरेसे) नही भैया.. समजोनां.. हमे जाना होगा.. दया बहेनके लीये.. समज गयेनां..? मे चाहती हु कल दो पहोरका लंच हम हमारे घरपे करे.. आपको कल सबकुछ पता चल जायेगा.. ओर रजुदी.. अंदर जाकर दया बहेनको कुछ मत कहेना.. ओके..?
रजीया : (आंख गीली करते) ठीक हे दीदी.. मे आप दोनोके लीये चाइ बनाती हु..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. मे चाइ पीकर ओफीसपे अेक चकर लगाकर आता हु.. फीर हम लंच करके नीकल जायेगे.. मे राधुको बता दुगाकी साम हमसब वहा डीनर करेगे..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाइ.. ये ठीक रहेगा.. वो सामको जल्दी घर चली जायेगी..
रजीया चाइ बनाने कीचनमे चली गइ.. तो पुनम धीरेसे बात करते तीनोको रामुकाकाके बारेमे बताने लगी.. कुछ देरके बाद लखन चाइ पीकर वहासे नीकल गया.. ओर सीधा राधीकाकी होस्टेलपे पहोंच गया.. वहा उसने पुनमके आनेकी खबर दी..
भावना : (जोरोसे हसते) ओ..हो.. आजकल होने वाली बीवीकी बहुत सेवा हो रही हे..? अैसा काम करते ही क्युहो जो बीवीकी सेवा करनी पडे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमसे पानी पानी होते अेक मुका मारते) दी.. आप बहुत कमीनी हो.. जब आपकी बारी आयेगीनां..? तब आपको पता चलेगा.. (लखनकी ओर देखते) भाइ.. थोडा प्यार भावना भाभीको भी देना.. ताकी उनको भी पता चले.. वो भी रेडी हे..
सृती : (जोरोसे हसते) हां लखन.. पुनोदी ठीक केह रही हे.. अब हम सबके बीच कैसा पर्दा..? आज भावना दीदीके साथ अपनी सुहागरात मनालो..
भावना : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) दीदी.. प्लीज.. मुजे थोडा टाइम चाहीये.. पता नही कल रातसे कुछ अजीब लग रहा हे.. मेरी तबीयत भी ठीक नही हे.. कुछ उल्टीया जैसा लग रहा हे..
सृती : (मनमे खुस होते) दीदी.. अभी आपको गोली देती हु.. आप ठीक होजायेगी.. जरा हाथ देना..
भावना : (मुस्कुराते हाथ लंबा करते) जी दीदी.. देख लीजीये..
सृती : (कलाइपे हाथकी नब्स पकडकर घडीमे देखते) दीदी.. आपकी बच्चीके जन्मको कीतना टाइम हुआ..? मेने आपकी ओर मंजुमोमकी डीलीवरी की उनको डेढ साल हुआ हे..
भावना : (मुस्कुराते) हंम.. कुछ दिनोमे मेरी विभा ओर विजय डेढ सालके हो जायेगे.. दोनोका जन्म साथमे ही हुआ हे.. सायद अेक दिन आगे पीछे होगा..
सृती : (हाथ छोडते धीरेसे) दीदी.. आपको मे अेक कीट देती हु.. कल सुबह चेक करलेना.. मुजे कुछ आसंकाये लगती हे.. सायद आप प्रेगनेन्ट हे.. (हसते) फीर भी लखनको मीलनेमे कोइ अेतराज नही..
भावना : (सरमाते लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) दीदी.. प्लीज.. बस.. थोडा सोचनेका टाइम दीजीये.. मुजे भी पता हे.. अब हम चारोको लखन भैया ही सम्हालेगे..
लखन : (मुस्कुराते बारी बारी पुनम ओर सृतीके गालको चुमते) भाभी.. कोइ बात नही.. अभी मुजे प्यार देनेके लीये ये मेरी दोनो बहेने हेनां.. आपके हीसेका प्यार मे इनसे लेलुगा..
सृती : अे.. हेलो.. हम दोनो आपको कीसीके हीस्सेका प्यार नही देने वाली.. जीनको प्यार चाहीये वो आपसे ले लेगी.. क्यु पुनोदी..?
पुनम : (भावनाकी ओर देखते हसते) ओर नही तो क्या..? मे भी नही देने वाली..
रजीया : (हाथ पोछते आते) अरे..? आ गये दोनो..? लखन.. आपको चाइ नास्ता बनादु..? हम सब करके बैठे हे.. की अब डायरेक्ट लंच करोगे दोनो..?
पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) रजुदी.. बस थोडीसी चाइ पीलादो.. लंचका टाइम भी हो गया हे.. तो नास्ता नही करना.. लखन भैया आपको करना हे..?
लखन : (मुस्कुराते) नही रजु.. हम दोनोको थोडी चाइ ही पीलादे.. फीर लंच करके हमे शोपींगपे जाना हे..
सृती : (पुनमकी ओर देखते) इतनी जल्दी..? सामको आराम करके चले जाना..
पुनम : (सामने देखते) क्या चले जाना..? आपको भी आना हे.. ओर सुनो.. वहा शोपींग करके मे सीधी राधुदीदीके वहा चली जाउगी.. ओर रात वही रुकुगी.. मुजे उनसे अेक जरुरी काम हे.. फीर हम सबलोग वहेली सुबह गांव नीकल जायेगे.. आप मुजे वहीसे लेजाना..
भावना : क्या वहीसे लेजाना..? हमारा सब सामान इधर पडा हे.. लखन भैया आपको सुबह लेने आयेगे.. हम यहीसे सामान लेकर नीकल जायेगे.. क्या जल्दी हे..
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. वोभी ठीक हे..
लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. अेक दिन ओर रुक जाइअेना.. हम कही धुमने जायेगे..
पुनम : (कीचनकी ओर देखते धीरेसे) नही भैया.. समजोनां.. हमे जाना होगा.. दया बहेनके लीये.. समज गयेनां..? मे चाहती हु कल दो पहोरका लंच हम हमारे घरपे करे.. आपको कल सबकुछ पता चल जायेगा.. ओर रजुदी.. अंदर जाकर दया बहेनको कुछ मत कहेना.. ओके..?
रजीया : (आंख गीली करते) ठीक हे दीदी.. मे आप दोनोके लीये चाइ बनाती हु..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. मे चाइ पीकर ओफीसपे अेक चकर लगाकर आता हु.. फीर हम लंच करके नीकल जायेगे.. मे राधुको बता दुगाकी साम हमसब वहा डीनर करेगे..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाइ.. ये ठीक रहेगा.. वो सामको जल्दी घर चली जायेगी..
रजीया चाइ बनाने कीचनमे चली गइ.. तो पुनम धीरेसे बात करते तीनोको रामुकाकाके बारेमे बताने लगी.. कुछ देरके बाद लखन चाइ पीकर वहासे नीकल गया.. ओर सीधा राधीकाकी होस्टेलपे पहोंच गया.. वहा उसने पुनमके आनेकी खबर दी..