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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १५५
तो चारु बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर नीशाकी ओर बडी आंख करते सरमाकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनोही बहार नीकलने लगे.. तब सुधीर आगे चलने लगा.. तो नीशा जान बुजकर पीछे रेह गइ.. ओर मौका मीलते ही वो देवायतका हाथ पकडलेती हे.. ओर उनके कानके पास मुल लेजाते उनको कल रातमे आनेको कहेती हे.. तो देवायतभी उनकी ओर देखके हसने लगा.. फीर वो ओर चारु दोनोसे विदाय लेकर अपने घरकी ओर चलने लगे.. तभी....अब आगे
चारु : (देवायतका हाथ पकडकर चलते) जानु.. पुरा गांवमे अंधेरा हे.. कोइ नही दीखता ओर रमेशकोभी पता हे हम दोनो सुधीरभाइके यहा गये हुअे हे.. तो चलीयेना कही चले जाते हे.. जबसे आपको साथ आइ हु तबसे मन कही काबुमे नही हे.. आज बहुत मन कर रहा हे..
देवायत : डार्लींग सब्रका फल मीठा होता हे.. बस कल तक इन्तजार करले.. कल नीशाके घर तुजे ओर उनको दोनोको प्यार करुगा.. ओर हां दुसरी बात.. सायद कल सुबह हमे कही जाना भी हे.. तुंम दोनो तैयार रहेना..
चारु : (सरमाते धीरेसे) जानु.. हम कल कहा जा रहे हे..? ओर कल सीर्फ आपको नीशाको प्यार देना हे.. तो फीर मे बीचमे कहा आउगी..?
देवायत : नही चारु नीशाका पहेली बार हे.. तो सायद वो मुजे कल दो से तीन बारही जेल पायेगी.. फीर हम दोनोके पास पुरी रात होगी.. कल मे मेरी इस बीवीको खुब प्यार करुगा.. कल तेरी सारी कशर पुरी कर दुगा.. क्या पता सायद कल हम दोनोकी भी सुहागरात होजाये..
चारु : (देवायतकी ओर सरमाते देखते) जानु.. क्या कल आप ओर वंदु सादी कर रहे हे..?
देवायत : (कमरमे हाथ डालकर खीचते) नही चारु.. मेने वंदनासे पहेले तुमसे सादीका वादा कीयाथा.. कल हम दोनो अेक मंदिरमे जाकर गांधर्व सादी कर रहे हे.. क्युकी मुजे तेरे बारेमे बहुत कुछ पता चल गया हे.. मे कल तुजे सुबह फोन करुगा.. तुम सीर्फ नीशाको लेकर आजाना.. हम दोपहर तक वापस आजायेगे..
चारु : (गलीमे ही देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते) देवु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मुजे नही पताथा की आप हमे इतना चाहते हे.. मे हमेसाके लीये आपकी हो जाना चाहती हु.. बस मुजे अपना लीजीये.. कल रमेश चला जायेगा तब मे रेडी रहुगी.. आप फोन करना..
देवायत : हां चारु.. अब तुम ओर वंदना दोनोही मेरी बीवी बनके तुम्हारे घरपेही रहोगी.. मे वहा आता जाता रहुगा.. बस अब वक्त आगया हे जो बहुत कुछ बदलने वाला हे..
चारु : (सामने देखकर) देवु.. जबसे मेने जयाभाभीसे बात कीहे.. तबसे ही मुजे कुछ कुछ अंदाजा होगया हे.. की आगे जाकर ना जाने क्या क्या होगा.. हो सकता हे रमेश हमसे अलग होजाये..
देवायत : चारु.. अभी इतनी दुर तक सोचनेका वक्त नही हे.. बस.. हमे कुछ वक्त इन्तजार करना चाहीये..
चारु : (देवायतको अेक सुमसान जगाहकी ओर खीचते) जानु चलोनां.. सीर्फ अेक बार.. मुजसे रहा नही जाता.. बस अेक बार.. मुजे आज मेरे इस पतीको खुब प्यार करना हे.. लेकीन अभी वक्त नही हे.. तो मुजे सीर्फ अेक बार ठंडी कर दीजीये.. फीर मुजे आप मेरे घर छोड देना..
देवायत : नही चारु यहा जोखीम हे.. हमे कोइभी देख सकता हे.. तो हम तुम्हारे घरपेही चलते हे.. वेसेभी रमेश सो गया होगा.. तो घरही चल..
चारु : (हाथ पकडते जटसे चलते) ठीक हे जानु.. आप दरवाजेपे खडे रहेना मे घरमे देखकर आती हु.. अगर रमेश हमारे बेडरुममे सोगया हे तो हम वंदनाके रुममे चले जायेगे.. फीर आप मुजे अेक बार ठंडी करके चले जाना.. अब मुजसे रहा नही जाता..
देवायत : (सरारतसे हसते धीरेसे) तो फीर अपने पतीके पासही सोजाओ.. उनसे करवा लेना.. हें..हें..हें..
चारु : (देवायतको पीठमे अेक मुका मारते) आप उस कमीनेका नामभी मत लो.. अब मेरा उनके साथ कोइ लेना देना नही हे.. आज अगर वो हमे देखभी ले.. फीर भी मुजे उनकी कोइ परवा नही.. चलो..
चारु बहुतही कामी औरत थी.. वो देवायतको लगभग हाथ पकडके घसीटते अपने घरपे ले गइ.. ओर देवायतको दरवाजेके अंदर ही रोक लीया.. ओर वो धीरेसे दरवाजा खोलकर अंदर चली गइ.. अंदर जाकर देखातो उनका पती रमेश घोडे बेचकर अपने बेडरुममे खर्राटा मारके गहेरी नींद सो रहाथा.. तो चारु उनको देखकर मुस्कुराइ.. फीर खुस होते बहारसेही अपने बेडरुमको धीरेसे लोक करदीया..
ओर जटसे बहार आकर देवायतका हाथ पकडके सीधेही होलमे आगइ.. ओर उनकाभी दरवाजा लोक करके देवायतको लेकर वंदनाके रुममे चली गइ.. तब देवायत चारुकी ठरक देकर मुस्कुराता ही रहा.. ओर जैसेही दोनो वंदनाके रुममे आगये तो चारु फटाफट अपने सब कपडे नीकालने लगी.. ओर देवायतके कपडेभी नीकाल दीये.. ओर देवायतको बेडपे लेजाकर अपने दोनो पैर फैलाकर लेट गइ.. तो देवायत चारुके उपर चडके जुक गया..
चारु : (जोरोसे बाहोमे भीचते होठ चुमते) जानु.. देर मत करो.. पहेले इसे अंदर घुसादो.. कीतने दिन होगये हमने नही कीया.. आप अपने हथीयारको अंदर डालदो.. मुजसे रहा नही जाता..
कहेतेही चारुने देवायतका तगडे लंडको अपनी मुठीमे पकड लीया.. ओर अपनी चुतपे घीसने लगी.. चारुकी चुतसे लगातार पानी छोड रहीथी.. तो कुछही देरमे पुरा लंड गीला होगया.. तो चारुने उसे अपनी चुतके लव होलमे दबाकर फसा दीया.. ओर देवायतके गालेमे दोनो हाथ डालके उनको जोरोसे बाहोमे भीचने लगी.. तभी देवायतनेभी चारुके होठोको लीपलोक करते अपनी कमरको जटका दीया..
तो देवायतका लंड चारुकी चुतमे धुस गया तो थोडी देरके लीये चारु मुह बीगाडते छटपटाने लगी.. ओर देवायतने लीपलोक छोडदीया ओर हाथके बल उचा होकर चारुको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तो चारु अपनी इतनी जबरदस्त चुदाइसे सीथील होगइ.. उनका मुह खुलाही रेह गया.. ओर वो देवायतके जबरदस्त सोटको जेलती रही.. देवायत उनको इतनी जोरोसे चोद रहा था.. की वो देखते ही रेह गइ..
चारुकी चुतमे दर्द होने लगा.. वो जानतीथी की आज वो देवायतको जबरदस्तीसे अपने घरपे लेगइ हे.. तो देवायत उनको छोडने वाला नही हे.. वैसेभी देवायतके लंडको जेलना इतना आसान नही हे.. ओर वो मनही मन देवायतको जल्दीसे जड जानेकी प्रार्थना करने लगी.. पता नही आज देवायतने अेकही बारमे चारुकी हालत कैसे खराब करदी.. वो चारुको बडेही जोरसे बेह रेहमीसे चोद रहाथा..
अबतक चारु दो बार जड चुकीथी.. वो सीथील होकर देवायतसे जबदस्त तरीकेसे चुदवा रहीथी.. ओर देवायतके जडनेका इन्तजार कर रहीथी.. जब देवायत छुटनेको आया.. ओर वो हाथोके बल उचा होते जोरोसे अपनी कमर हीलाते चारुको चोदने लगा.. तो चारु दर्दसे तील मीलाने लगी.. वो अपने मुहपे हाथ रखते धीरेसे चीलाने लगी.. तभी उसे अपनी बच्चीदानीमे गरम गरम महेसुस होने लगा.. तो वो समज गइ की देवु जड रहा हे..
तो चारुभी कांपने लगी.. ओर उनकी चुतसेभी अेक फवारा नीकल गया.. ओर देवायतके पुरे लंडको भीगोने लगा.. जब देवायत जड गया तो थोडी देर अैसेही रहेते अेकही जटकेमे अपने लंडको बहार नीकाल देता हे जीनकी वजहसे चारुको अपनी चुतमे दर्दसे जटका लगा.. ओर वो मुह बीगाडते करवट लेते अपनी चुतके दर्दको जेलने लगी.. तबतक देवायत अपने लंडको साफ करते कपडे पहेनने लगा..
ओर चारु उनसे कुछ कहे इनसे पहेलेही देवायत वहासे नीकल गया.. तो चारु अबभी दर्दके मारे मुह बीगाडते बेडपे इधर उधर करवटे ले रहीथी.. फीर काफी देरके बाद उनको कुछ राहत महेसुस हुइ.. तो वो बेडपे थोडी देर अैसेही पडी रही.. फीर धीरेसे बैठ गइ.. ओर अपनी चुतको अपने नीकरसे साफ करने लगी.. लेकीन तबतक बेडपे दोनोका कामरस गीरके फैल चुकाथा.. ओर चारु बेडसे उतर गइ..
ओर दरवाजा बंध करने होलमे जाने लगी.. तो वो दर्दके मारे वापस बैठ गइ.. ओर मनही मन उनकी इतनी बेदर्दीसे चुदाइके कारण देवायतको मनमे गालीया देने लगी.. फीर महा मुस्कीलसे लंगडाते चलते दरवाजा बंध करके वंदनाके रुममे वापस आकर सोगइ..आज देवायतने वाकइ चारुकी हालत बीगाडदी थी.. चारुका अेक अेक अंग दर्द कर रहाथा.. लेकीन वो पुरी तराह संतुस्ट हो चुकीथी..
अध्याय - १५५
तो चारु बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर नीशाकी ओर बडी आंख करते सरमाकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनोही बहार नीकलने लगे.. तब सुधीर आगे चलने लगा.. तो नीशा जान बुजकर पीछे रेह गइ.. ओर मौका मीलते ही वो देवायतका हाथ पकडलेती हे.. ओर उनके कानके पास मुल लेजाते उनको कल रातमे आनेको कहेती हे.. तो देवायतभी उनकी ओर देखके हसने लगा.. फीर वो ओर चारु दोनोसे विदाय लेकर अपने घरकी ओर चलने लगे.. तभी....अब आगे
चारु : (देवायतका हाथ पकडकर चलते) जानु.. पुरा गांवमे अंधेरा हे.. कोइ नही दीखता ओर रमेशकोभी पता हे हम दोनो सुधीरभाइके यहा गये हुअे हे.. तो चलीयेना कही चले जाते हे.. जबसे आपको साथ आइ हु तबसे मन कही काबुमे नही हे.. आज बहुत मन कर रहा हे..
देवायत : डार्लींग सब्रका फल मीठा होता हे.. बस कल तक इन्तजार करले.. कल नीशाके घर तुजे ओर उनको दोनोको प्यार करुगा.. ओर हां दुसरी बात.. सायद कल सुबह हमे कही जाना भी हे.. तुंम दोनो तैयार रहेना..
चारु : (सरमाते धीरेसे) जानु.. हम कल कहा जा रहे हे..? ओर कल सीर्फ आपको नीशाको प्यार देना हे.. तो फीर मे बीचमे कहा आउगी..?
देवायत : नही चारु नीशाका पहेली बार हे.. तो सायद वो मुजे कल दो से तीन बारही जेल पायेगी.. फीर हम दोनोके पास पुरी रात होगी.. कल मे मेरी इस बीवीको खुब प्यार करुगा.. कल तेरी सारी कशर पुरी कर दुगा.. क्या पता सायद कल हम दोनोकी भी सुहागरात होजाये..
चारु : (देवायतकी ओर सरमाते देखते) जानु.. क्या कल आप ओर वंदु सादी कर रहे हे..?
देवायत : (कमरमे हाथ डालकर खीचते) नही चारु.. मेने वंदनासे पहेले तुमसे सादीका वादा कीयाथा.. कल हम दोनो अेक मंदिरमे जाकर गांधर्व सादी कर रहे हे.. क्युकी मुजे तेरे बारेमे बहुत कुछ पता चल गया हे.. मे कल तुजे सुबह फोन करुगा.. तुम सीर्फ नीशाको लेकर आजाना.. हम दोपहर तक वापस आजायेगे..
चारु : (गलीमे ही देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते) देवु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मुजे नही पताथा की आप हमे इतना चाहते हे.. मे हमेसाके लीये आपकी हो जाना चाहती हु.. बस मुजे अपना लीजीये.. कल रमेश चला जायेगा तब मे रेडी रहुगी.. आप फोन करना..
देवायत : हां चारु.. अब तुम ओर वंदना दोनोही मेरी बीवी बनके तुम्हारे घरपेही रहोगी.. मे वहा आता जाता रहुगा.. बस अब वक्त आगया हे जो बहुत कुछ बदलने वाला हे..
चारु : (सामने देखकर) देवु.. जबसे मेने जयाभाभीसे बात कीहे.. तबसे ही मुजे कुछ कुछ अंदाजा होगया हे.. की आगे जाकर ना जाने क्या क्या होगा.. हो सकता हे रमेश हमसे अलग होजाये..
देवायत : चारु.. अभी इतनी दुर तक सोचनेका वक्त नही हे.. बस.. हमे कुछ वक्त इन्तजार करना चाहीये..
चारु : (देवायतको अेक सुमसान जगाहकी ओर खीचते) जानु चलोनां.. सीर्फ अेक बार.. मुजसे रहा नही जाता.. बस अेक बार.. मुजे आज मेरे इस पतीको खुब प्यार करना हे.. लेकीन अभी वक्त नही हे.. तो मुजे सीर्फ अेक बार ठंडी कर दीजीये.. फीर मुजे आप मेरे घर छोड देना..
देवायत : नही चारु यहा जोखीम हे.. हमे कोइभी देख सकता हे.. तो हम तुम्हारे घरपेही चलते हे.. वेसेभी रमेश सो गया होगा.. तो घरही चल..
चारु : (हाथ पकडते जटसे चलते) ठीक हे जानु.. आप दरवाजेपे खडे रहेना मे घरमे देखकर आती हु.. अगर रमेश हमारे बेडरुममे सोगया हे तो हम वंदनाके रुममे चले जायेगे.. फीर आप मुजे अेक बार ठंडी करके चले जाना.. अब मुजसे रहा नही जाता..
देवायत : (सरारतसे हसते धीरेसे) तो फीर अपने पतीके पासही सोजाओ.. उनसे करवा लेना.. हें..हें..हें..
चारु : (देवायतको पीठमे अेक मुका मारते) आप उस कमीनेका नामभी मत लो.. अब मेरा उनके साथ कोइ लेना देना नही हे.. आज अगर वो हमे देखभी ले.. फीर भी मुजे उनकी कोइ परवा नही.. चलो..
चारु बहुतही कामी औरत थी.. वो देवायतको लगभग हाथ पकडके घसीटते अपने घरपे ले गइ.. ओर देवायतको दरवाजेके अंदर ही रोक लीया.. ओर वो धीरेसे दरवाजा खोलकर अंदर चली गइ.. अंदर जाकर देखातो उनका पती रमेश घोडे बेचकर अपने बेडरुममे खर्राटा मारके गहेरी नींद सो रहाथा.. तो चारु उनको देखकर मुस्कुराइ.. फीर खुस होते बहारसेही अपने बेडरुमको धीरेसे लोक करदीया..
ओर जटसे बहार आकर देवायतका हाथ पकडके सीधेही होलमे आगइ.. ओर उनकाभी दरवाजा लोक करके देवायतको लेकर वंदनाके रुममे चली गइ.. तब देवायत चारुकी ठरक देकर मुस्कुराता ही रहा.. ओर जैसेही दोनो वंदनाके रुममे आगये तो चारु फटाफट अपने सब कपडे नीकालने लगी.. ओर देवायतके कपडेभी नीकाल दीये.. ओर देवायतको बेडपे लेजाकर अपने दोनो पैर फैलाकर लेट गइ.. तो देवायत चारुके उपर चडके जुक गया..
चारु : (जोरोसे बाहोमे भीचते होठ चुमते) जानु.. देर मत करो.. पहेले इसे अंदर घुसादो.. कीतने दिन होगये हमने नही कीया.. आप अपने हथीयारको अंदर डालदो.. मुजसे रहा नही जाता..
कहेतेही चारुने देवायतका तगडे लंडको अपनी मुठीमे पकड लीया.. ओर अपनी चुतपे घीसने लगी.. चारुकी चुतसे लगातार पानी छोड रहीथी.. तो कुछही देरमे पुरा लंड गीला होगया.. तो चारुने उसे अपनी चुतके लव होलमे दबाकर फसा दीया.. ओर देवायतके गालेमे दोनो हाथ डालके उनको जोरोसे बाहोमे भीचने लगी.. तभी देवायतनेभी चारुके होठोको लीपलोक करते अपनी कमरको जटका दीया..
तो देवायतका लंड चारुकी चुतमे धुस गया तो थोडी देरके लीये चारु मुह बीगाडते छटपटाने लगी.. ओर देवायतने लीपलोक छोडदीया ओर हाथके बल उचा होकर चारुको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तो चारु अपनी इतनी जबरदस्त चुदाइसे सीथील होगइ.. उनका मुह खुलाही रेह गया.. ओर वो देवायतके जबरदस्त सोटको जेलती रही.. देवायत उनको इतनी जोरोसे चोद रहा था.. की वो देखते ही रेह गइ..
चारुकी चुतमे दर्द होने लगा.. वो जानतीथी की आज वो देवायतको जबरदस्तीसे अपने घरपे लेगइ हे.. तो देवायत उनको छोडने वाला नही हे.. वैसेभी देवायतके लंडको जेलना इतना आसान नही हे.. ओर वो मनही मन देवायतको जल्दीसे जड जानेकी प्रार्थना करने लगी.. पता नही आज देवायतने अेकही बारमे चारुकी हालत कैसे खराब करदी.. वो चारुको बडेही जोरसे बेह रेहमीसे चोद रहाथा..
अबतक चारु दो बार जड चुकीथी.. वो सीथील होकर देवायतसे जबदस्त तरीकेसे चुदवा रहीथी.. ओर देवायतके जडनेका इन्तजार कर रहीथी.. जब देवायत छुटनेको आया.. ओर वो हाथोके बल उचा होते जोरोसे अपनी कमर हीलाते चारुको चोदने लगा.. तो चारु दर्दसे तील मीलाने लगी.. वो अपने मुहपे हाथ रखते धीरेसे चीलाने लगी.. तभी उसे अपनी बच्चीदानीमे गरम गरम महेसुस होने लगा.. तो वो समज गइ की देवु जड रहा हे..
तो चारुभी कांपने लगी.. ओर उनकी चुतसेभी अेक फवारा नीकल गया.. ओर देवायतके पुरे लंडको भीगोने लगा.. जब देवायत जड गया तो थोडी देर अैसेही रहेते अेकही जटकेमे अपने लंडको बहार नीकाल देता हे जीनकी वजहसे चारुको अपनी चुतमे दर्दसे जटका लगा.. ओर वो मुह बीगाडते करवट लेते अपनी चुतके दर्दको जेलने लगी.. तबतक देवायत अपने लंडको साफ करते कपडे पहेनने लगा..
ओर चारु उनसे कुछ कहे इनसे पहेलेही देवायत वहासे नीकल गया.. तो चारु अबभी दर्दके मारे मुह बीगाडते बेडपे इधर उधर करवटे ले रहीथी.. फीर काफी देरके बाद उनको कुछ राहत महेसुस हुइ.. तो वो बेडपे थोडी देर अैसेही पडी रही.. फीर धीरेसे बैठ गइ.. ओर अपनी चुतको अपने नीकरसे साफ करने लगी.. लेकीन तबतक बेडपे दोनोका कामरस गीरके फैल चुकाथा.. ओर चारु बेडसे उतर गइ..
ओर दरवाजा बंध करने होलमे जाने लगी.. तो वो दर्दके मारे वापस बैठ गइ.. ओर मनही मन उनकी इतनी बेदर्दीसे चुदाइके कारण देवायतको मनमे गालीया देने लगी.. फीर महा मुस्कीलसे लंगडाते चलते दरवाजा बंध करके वंदनाके रुममे वापस आकर सोगइ..आज देवायतने वाकइ चारुकी हालत बीगाडदी थी.. चारुका अेक अेक अंग दर्द कर रहाथा.. लेकीन वो पुरी तराह संतुस्ट हो चुकीथी..