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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १३७
कहेके नीलमने फोन काट दीया.. ओर तो धिरेन थोडा परेसान होगया.. ओर उसने दुबार फोन कीया.. तो इस बार नीलमने नही उठाया.. पुरी रींग बजादी.. तो धिरेनने दुबारा ट्राइ कीया.. फीरभी नीलमने नही उठाया ओर धिरेन परेसान होने लगा.. ओर वापस अपने टेबलपे आकर बैठ गया.. फीर कुछ सोचते मेनेजरके पास चला गया.. ओर थोडी जल्दी जानेको कहा तो मेनेजरने उसे नइ सादीकी वजहसे मुस्कुराते जानेकी परमीशन देदी....अब आगे
ओर धिरेन अपनी बाइक लेकर सीधेही होस्टेलपे पहोंच गया.. ओर होस्टेलकी ओफीसमे जाकर नीलमके जीजाजीके रुपमे अपनी पहेचान देदी.. तो मेडमने इन्टरकोमसे नीलमको नीचे बुला लीया.. जब नीलम आइतो उसे धिरेनको पहेचाननेके लीये कहा तो धिरेनकी गांड फटने लगी.. की नीलम कुछ ओरही ना कहेदे.. लेकीन नीलमने हां कहेते केह दीयाकी मेरे जीजाजी हे.. तब जाके उनको धिरेनसे मीलनेकी परमीशन देदी..
धिरेन : मेडम.. क्या मे इसे अेक घंटेके लीये बहार ले जा सकता हु..? इनके लीये कुछ खरीदारी करनी हे..
मेडम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. अगर आप इनके जीजाजी हेतो इसे ले जा सकते हे.. लेकीन इसे अेक घंटेके वापस इधर छोड दीजीयेगा.. आप अपना नाम ओर मोबाइल नंबर रजीस्टरमे लीख दीजीये..
सुनतेही नीलम बहुतही सरमाइ तब धिरेन अपना नाम ओर नंबर रजीस्टरमे लीख देता हे.. ओर बहार की ओर चलने लगता हे.. तब नीलमभी सरमाते मुस्कुराते उनके पीछे चलने लगी.. ओर दोनोही बहार आगये.. नीलम पहेली बार धिरेनके साथ अैसे अकेली बहार नीकल रहीथी.. तब उनके दिलकी धडकन बढ गइ.. तभी धिरेनने अपनी बाइक स्टार्ट करदी तो नीलम दोनो ओर पैर करके धिरेनके कंधेपे हाथ रखते धिरेनके पीछे बाइकमे बैठ गइ..
धिरेन : (पीछे मुह करते) कहो मेडम अब कीधर जाना हे.. आपतो नाराज होगइ..? फोनभी नही उठाया.. पहेले दुपटेसे अपना मुह ढकलो.. वरना कोइ पहेचान वालेने देखलीया तो पंगा होजायेगा.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते दुपटेसे मुह ढकते) तो क्या करती..? अेकतो इतने दिनोके बाद आप आये हो.. ओर उपरसे मीलने भी नही आये.. ओर मेडमको ये क्यु कहाकी हमे खरीदी करने जाना हे..? अगर वापसीमे उसने हमारे पास कोइ सामान नही देखा तो..?
धिरेन : (बाइक चलाते) अरे अैसे कैसे खाली हाथ आते.. आज हमारी मेडम जो साथ मे चल रही हे तो इनके लीये कुछना कुछ तो ले लेगे.. कहो.. पहेले कीधर जाना हे..?
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) मुजे क्या पता.. मेने इधर थोडीना कुछ देखा हे.. आप मुजे लेकर जा रहे हो.. कहीपे भी लेलो.. ओर अैसी जगाहपे लेलो जहा हम आरामसे बैठकर बातचीत कर सके.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे..
धिरेन : (मुस्कुरते पीछे देखते) सीर्फ बातचीत..? ओर कुछ नही..? हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते पीठमे मुका मारते) मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो..
धिररेन : (हसते) चलो.. आज हम दोनो पहेली बार डेटपे जा रहेहे. तो मेरी रानीको कुछ मुह मीठा करवाउ.. क्या आइसक्रिम खाओगी..? चलो पहेले वही चलते हे.. फीर कुछ लेलेगे..
तब धिरेन अेक बडे आइसक्रिम पार्लर पे बाइ रोक देता हे.. ओर दोनो अंदर चले जाते हे.. तभी धिरेनको छोटी छोटी प्राइवेट केबीन दीख जाती हे तो धिरेन केबीनकी ओर चलने लगा.. तब नीलम बहुतही सरमाने लगी.. ओर मुस्कुराते उनके पीछे जाने लगी.. फीर दोनोही केबीनमे जाकर बैठ गये.. तो वेइटर आके उनको दो ग्लास पानी देगया.. ओर आइसक्रिमका ओर्डर लेकर चला गया.. तो नीलम बहुतही सरमा रहीथी..
धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. वहा सामने नही.. इधर मेरे पास आकर बैठजाओनां..?
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) नही धिरेन.. वो अभी आइसक्रिम लेकर आयेगा.. फीर आजाउगी..
धिरेन : नीलु.. मुजे पहेले तेरे होस्टेलके रुल्सके बारेमे बताओ.. क्या वहा पुरे दिनकी कुछ छुटी बुटी मीलती हे की नही..? मेनेतो सुनाथा लखनभैया ओर पुनम फीर मंजुदीदी सृतीदीदी तो इधरसे घुमनेभी नीकल जाते थे..
नीलम : (सरमाते हसते) हां मीलती हे.. लेकीन सेटर डे संन्डे को.. ये दो दिनमे लडकीया अपने घर चली जाती हे.. तो कोइ अपने रीस्तेदारके घरभी चली जाती हे.. होस्टेल १० बजेतक खुला रहेता हे.. उसी टाइमके अंदर सबको वापस आजाना हे.. अगर आपने उसे दो तीन घंटेका केह दीया होता तो भी वो परमीशन दे देती.. सीर्फ पहेचान वालोके साथ ही बहार जाने देते हे.. बाकी हमारे रुममे भी मील सकते हे..
धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. तो मतलब हम दो दिन साथमे रेह सकते हे.. हें..हें..हें.. नीलु.. मे इधर अेक छोटा मकान ले रहा हु.. सीर्फ हम दोनोके लीये.. बस पहेले तुम अच्छेसे पढ लीखके ग्रेज्युअेशन करलो.. फीर मेरी बेंन्कमे ही तुजे जोब दीलवा दुगा.. फीर हम दोनोही मीया बीवी साथमे जोबमे आते जाते रहेगे.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. लगता हे आपने हमारे लीये बहुत सारी प्लानींग करके रखी हे.. अगर पुनोदीदी या कीसीको पता चल गया तो..? जोबतो क्या मेरी पढाइ ही रुकवा देगे.. तो बी केरफुल..
धिरेन : नही नीलु.. इस बारेमे मेने सबसे बात करली हे.. जीजुनेभी परमीशन देदी हे.. मेने उसे कहाकी कभी कभी रातमे देर होजाती हेतो रातमे ट्रावेल करना ठीक नही.. ओर मे हमारे मकानमे ही सो जाउगा.. कहातो मोम फौरन मान गइ ओर उसने परमीशन देदी.. अब हम सेटरडे सन्डे साथमे रेह सकते हे.. क्या आओगीना मेरे साथ रहेने..?
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) मुजे नही पता.. अगर कीसीको पता चल गया तो..?
धिरेन : नीलु.. कीसीको पता नही चलेगा.. तुम होस्टेलपे केह देनाकी दीदीके घर जा रही हु.. फीर मन्डेको सुबह तुजे छोड दुगा.. क्या कहेती हो..? आओगीनां..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) मुजे क्या पता..? फीर वहा दो दिन आप अैसेही थोडीना बैठोगे.. मेरे साथ सरारत करोगेतो..? मुजे नही आना.. हें..हें..हें..
धिरेन : (हसते) सरारत करनेतो लेजा रहा हु.. उस सादीवाले दिन हमने जो काम अधुरा छोड दीयाथा.. तो वही पुरा करेगे.. नीलु.. आइ लव यु.. मे तुमको बहोत चाहता हु.. मुजसे सादी करले.. मे तुजे रानी बनाके रखुगा.. मुजे तुम बहुत अच्छी लगती हो.. तेरे साथ पुरी जींदगी बीता दुगा.. क्या मुजसे सादी करोगीनां..?
नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) धिरन.. सादीतो मेभी तुमसे करना चाहती हु.. फीरभी अेक डरसा लग रहा हे.. मे मम्मी पापाको क्या कहुगी..? की मेने जीजुसे सादी करली..? धिरेन हमे सबको फेइस करना पडेगा.. खास करके पुनोदीदी.. बडे भैया मेरी मम्मी दादी सबलोग.. आप सबको कैसे हेन्डल करोगे..?
धिरेन : (मुस्कुराते) वो सब तु मुजपे छोडदे.. बस तुम नीडर ओर तटस्थ रहेनी चाहीये.. बाकी मे सबको हेन्डल करलुगा.. मुजेतो सीर्फ तेरे साथ रहेना हे.. नीलु.. मे तेरे साथ जींदगीका हर लह्मा जीना चाहता हु.. वोभी सादीसे पहेले.. हम हमारे गांव या कीसी होटेलमे चले जायेगे.. सेटरडे सन्डे ये दो दीन हम खुब मजे करेगे..
नीलम : (बहुतही सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. कैसे मजे..? सादीसे पहेले मे आपके साथ वहा दो दिन रहीतो.. आप अैसेही थोडीना रहोगे..? कही कुछ गलत होगया तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी.. क्या बीना सादी.. ये सब.. आइ मीन.. आप समज रहे हेनां..
धिरेन : नीलु.. अगर उस दिन भावुदीदी नही आइ होती तो उसी दिन हम दोनोके बीच सबकुछ हो गया होता.. तब हमने कहा सादी कीथी..? मेरा यकीन मानो.. मे तुमको कभी नही छोडुगा.. बस मेरी अेकही तम्मना हे जो पुनोने पुरी नही की.. मे सादीसे पहेले उनके साथ सबकुछ करना चाहता था.. मेने मेरी कोलेज लाइफमे जोभी सपने देखेथे.. वो मे उनके साथ पुरा करना चाहता था.. लेकीन उसने मुजे छुने तक नही दीया.. तो यही उमीद मुजे तुमसे हे.. क्या मेरी तम्मना पुरी नही करोगी..?
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. प्लीज.. उस दिन हम दोनोही बहेक गयेथे.. मेभी अपने आपको कंट्रोल नही करपाइ.. इसीलीये अेक डर लग रहा हे.. ओर मे आपके बीना रेहभी तो नही सकती.. मेरा दिल जानता हे.. की मेने यहा आपके बीना कैसे दिन काटे हे.. ओर आप फोनभीतो नही करतेथे..
तभी वेइटर दो कप आइसक्रिम लेकर आगया.. तो दोनोही अपनी बात रोकते चुप होगये.. ओर वेइटर आइसक्रिम रखके चला गया तो दोनोही अेक दुसरेके सामने देखने लगे तब नीलमने सरमाके अपनी नजरे जुकाली.. ओर अैसेही बैठी रही.. तब उनके मुहके पास अेक आइसक्रिमकी भरी हुइ चमच आगइ.. तब नीलमने सरमाके अपनी नजरको उठागा.. तो धिरेन उसे खीलानेके लीये चमच भरके दे रहा था..
तब नीलम सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते अपना मुह खोल दीया तो धिरेनने उसे आइसक्रिम खीलादी.. वो बडीही कस्मकस मे थी.. आज नीलमको धिरनने अपने मनकी बात बतादी.. वैसेतो नीलम कबसे धिरेनके साथ मीलन करनेको तैयार थी.. वो धिरेनको बहुत चाहने लगीथी.. जबसे लताने उसे धिरेनसे दुर करनेकी कोसीसकी.. ओर भावनाने उसे डांटके फटकाराथा.. तबसे गुस्सेमे धिरेनके साथ सबकुछ करनेकी ठानली थी..
धिरेन : नीलु.. क्या हुआ..? क्या सोच रही हे..? मे तुम्हारे साथ जबरदस्ती कोइ काम करवाना नही चाहता.. अगर तुम मुजसे प्यार नही करती तो मुजे मना कर सकती हो.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा.. हमारा रीस्ता दोस्तीकातो रहेगा ही.. लेकीन अेक बात खान खोलकर सुनलो.. मेने तुजे सच्चे दिलसे चाहा हे.. मे तुमसे हमेसा प्यार करता रहुगा..
नीलम : (फौरन) अरे.. नही नही.. धिरेन आप गलत सोच रहे हे.. मे भी आपको बहुत चाहती हु.. प्लीज.. मुजे गलत मत समजे.. मुजे थोडा टाइम चाहीये.. आपने सब अेकदमसे कहा तो.. आइ अेम सोरी.. (सोचते थोडी देरके बाद) ठीक हे.. जैसा आप चाहो.. लेकीन मेरा खयाल रखना.. मे मेरी जींदगीका बहुतही अहेम फैसला करने जा रही हु.. अगर आप मुजे छोड देगे तो मे कहीकी नही रहुगी.. मेरे पास ओर कोइ रास्ता नही बचेगा.. आप समज रहे हेनां..? मे आपके साथ रहेनेके लीये तटस्थ रहुगी..
धिरेन : नही नीलु.. अैसी कोइ नौबत ही नही आयेगी.. भलेही इसके लीये मुजे पुनमको छोडना पडे.. मेरी बीवी सीर्फ तुम ही रहोगी.. आइ प्रोमीस मे तुमसे सादी करलुगा.. बस दो तीन दीनमे हमारा मकान देख लुगा.. मेने आते ही ब्रोकरसे बात करली हे.. फीर उनका सौदा होतेही हम दोनो कही मंदिरमे जाकर सादी करलेगे.. फीर तुम मेरी बीवी बनके इघरही होस्टेलमे रहेना.. हम हर सेटरडे सन्डे साथमे रहेगे.. मेरी कसम..
नीलम : (जटसे धिरेनके पास आकर बैठते) प्लीज.. धिरेन.. आप अपनी कसम मत खाओ.. मे रेडी हु.. आप जोभी कहोगे मे करुगी.. आप जैसा कहोगे मे सबको जवाब दे दुगी.. मुजेतो आपके साथ जींदगी बीतानी हे.. अब मे आपके बीना नही रेह सकती..
धिरेन : (बैठेही हग करते हसते) तो क्या अपने होनेवाले पतीका मुह मीठा नही करवाओगी..? हें..हें..हें..
कहातो नीलम अेकदम सर्मसार होगइ.. ओर हसते हुअे उसने अेक चमच आइसक्रिम लेकर धिरेनके मुहके सामने रखदी.. तो धिरेनने उनको ओर प्यारभरी नजरोसे देखते आधी चमच खाइ ओर आधी चमच उसने नीलमको खीलादी तब नीलम बहुतही सरमाइ. ओर धिरेनने उसे बैठेही अपनी बाहोमे भीचलीया.. तब दोनोके होंठ मील गये.. ओर स्मुच करते अेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे..
दोनोही सबकुछ भुलके प्यारके आगोसमे चले गये.. तभी नीलुको अपने बुब्सपे धिरेनका हाथ बुब्स मसलते महेसुस हुआ तो नीलम सरसे पाव तक हील गइ.. ओर आधी आंख चडाते मदहोस होने लगी.. उसने धिरेनका कोइ विरोध नही कीया.. दोनोही भुल गयेकी दोनो कहा बैठे हे.. ओर धिरेनने बुबस्को मसलते अपना मुह थोडा खोल दीया तो दोनोही मदहोसीमे अेक दुसरेकी जीभसे पेच लडाने लगे..
तभी अचानक धिरेनने बुब्सको छोडके नीलमकी चुतपे हाथ रख दीया ओर उसे उंगलीसे सहेलाने लगा.. तो नीलम सीसकारीया करते उछलने लगी.. वो हाथ नीचे लेजाते धिरेनका हाथ पकड लेती हे.. ओर गुं..गुं.. करते अपनी गरदन नां मे हिलाते धिरेनको रोकनेकी कोसीस करती रही.. नीलम बहुतही गरम हो चुकीथी.. वो मनसेतो चाहतीथी की धिरेन उसे अभी पुरी तराह मसलदे.. लेकीन अन्जान जगहकी वजहसे..
नीलम : (जटसे दुर होते) नही धिरेन.. प्लीज.. वहा नही.. इधर कोइ आजायेगा.. आप जोभी करना हो बादमे करलेना.. लेकीन यहा नही..
धिरेन : (उखडी हुइ आवाजमे) नीलु.. आइ लव यु.. मे जल्दसे जल्द तुमसे मीलना चाहता हु.. क्या हम कही कोइ होटेलमे चले..? हंम..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) लव यु टु.. धिरेन.. लेकीन आज नही.. हम सीर्फ अेक घंटेकी परमीस लेकरही आये हे.. आप समजो प्लीज.. अब मुजसे भी आपके बीना नही रहा जाता.. लेकीन यहा नही.. हम आपके घरपे मीलते हेनां..? परसोही सेटरडे हे.. आप कुछ अेरेन्ज करलो..
धिरेन : नीलु.. मे जल्दी हम दोनोके मीलनका इन्तजाम करता हु.. पुनोको कहुगा सेटरडे सन्डे मायके उनके भाइ भाभीको मीलने चली जाये.. वरना हम यही कीसी होटेलमे चले जायेगे.. मे हमारे मीलनके लीये कुछ इन्तजाम करता हु..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. देखना.. कोइ दर्द बर्दतो नही होगानां..? मे ठीकसे चलतो सकुगीनां..?
धिरेन : अरे कुछ नही होगा.. तुम खामखा गभरा रही हो.. पुनोकोभी कुछ नही हुआ था.. वोभी ठीकसे चल रहीथी.. इनमे अैसा कुछभी नही होता.. जो तुम सोच रही हो.. मे तेरे साथ हुनां..?
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. तो ठीक हे.. आप ही कुछ देखलो..
धिरेन : नीलु.. कलतो नही.. लेकीन परसो सेटरडे हे.. अगर पुनो माइके जायेगी तो हम मेरे घरपे ही चलेगे.. लेकीन कल हम फील्म देखने चले..? ६ से ९ बजेके सोमे.. हंम..? चलोगीनां..?
नीलम : (सरमाते) हंम.. आप आजाना मे मेडमको केह दुगी.. थोडा जल्दी आइअेगा.. रीसेसके बाद मे स्कुल नही जाउगी.. हम ४ बजे नीकल सकते हे.. पहेले हम कही गार्डनमे घुमने जायेगे.. फीर फील्म देखेगे.. लेकीन वहा ओर कोइ सरारत नही.. हें..हें..हें..
धिरेन : (धीरेसे) नीलु.. मेडमको कहेना.. सेटबडे सन्डे जीजुके घर दीदीके पास जाना हे..
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. केह दुगी.. धिरेन.. बहुत डर लग रहा हे.. कीसीको पता तो नही चलेगानां..? देखना वरना मे कहीकी नही रहुगी.. मुजे मजधारमे मत छोडना.. मे सीर्फ आपहीके भरोसे चल रही हु.. हंम..?
धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुम खामखा गभरा रही हो.. अैसा कुछभी नही होगा.. मे तेरे साथ हुनां..? क्या मुजपे भरोसा नही हे..? हंम..? मे तुमसे सचमे सादी करना चाहता हु.. कहो.. मे तुमको कैसे यकीन दिलवाउ..?
नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) नही धिरेन.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. अब आपही मेरे सबकुछ हो.. हंम..
फीर दोनोही अपना प्रोग्राम बनाते आइसक्रिम खाने लगे.. ओर आइसक्रिम खतम होतेही दोनो वहासे नीकल गये.. तब धिरेन बाइक सीधे अेक मोलमे लेजाता हे.. वहा नीलमको अेक बहुतही खुरसुरत ड्रेस दिलवाता हे वहा धिरेन उनकी पसंदका दो अडरगारमेन्ट भी दीलवाता हे तब नीलम बहुत ही समराइ.. फीर धिरेन नीलमके लीये कुछ नास्ता लेलेता हे.. ओर दोनो वापस होस्टेलपे आगये..
तो मेडम दोनोको देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर धिरेनभी उनकी ओर देखके हसने लगा ओर नीलमको छोडके वहासे नीकल गया.. तब मेडम उसे कातील स्माइल करते देखती रही.. नीलम ओर धिरेनको नही पता थाकी दोनोके जातेही मेडने पुनमको फोन करके बता दीया था.. तब नीलम उपर अपने रुममे चली गइ.. तो उनकी रुम पार्टनर दीया.. मोबाइलमे कुछ देख रही थी.. तब माोबाइल साइडमे रखते ही..
दीया : (मुस्कुराते) आगइ महारानी.. नीलु.. कहा घुमने गइ थी..? कौन मीलने आया था..? कही कोइ बोयफ्रेन्ड तो सेट नही करलीया..? हें..हें..हें.. क्या सोपींग करने गइथी..?
नीलम : (मुस्कुराते बेग रखते) अरे नही.. वो मेरे जीजु मीलने आयेथे तो उनके साथही चली गइ थी.. मुजे कुछ सोपींग करनीथी.. तु बता.. वापस कब आइ..? क्या अपने यारको मीलने गइ थी..?
दीया : (हसते आंख मारते) हां यार.. आज हम दोनो फील्म देखने गयेथे.. क्या मस्त फील्म थी.. हें..हें..हें..
नीलम : (हसते) क्या उसने तुजे फील्म देखने दी..? हें..हें..हें.. सच बताना कमीनी..
दीया : (जोरोसे हसते) कमीनी तुजे सब पतातो हे तो फीर क्यु पुछती हे.. क्या कोइ बी.अेफ. उनकी जी.अफे. के साथ फील्म देखने थोडीना जाते हे.. उनकोतो वहा कुछ ओरही करना होता हे.. सालेने आज मुजे तीन तीन बार जडा दीया.. बहुत मस्त चुसता हे.. नीलु अब तुमभी कीसीको पटाले.. यहीतो होस्टेलमे रहेनेका मजा हे.. अैसा समय तेरी जींदगीमे दुबारा कभी नही आयेगा.. तुम खुलकर अपनी लाइफ जीलो.. ओर ये क्या सोपींग करके आइ..? दीखातो जरा..
नीलम : (हसते जटसे बेग दुर हटानेकी कोसीस करते) अरे नही नही.. कमीनी रहेने दे.. मेरे कपडे हे.. हें..हें..हें..
नीलम कुछ कहेती उनसे पहेलेही उनकी रुमपार्टनर दीयाने केरीबेग उल्टी करदी.. तो सब कपडेके बोक्ष बहार आगये.. ओर सुरुमेही नीलमके अंडरगारमेन्ट्स हाथ आगये.. तो दिया बोक्ष दोलकर देखने लगी.. तब नीलु बहुतही सरमाते हसती हुइ दीयाको देखती रही.. तो दियाभी नीलमकी ओर कातील स्माइल करते सभी कपडे गौरसे देखती रही.. तभी..
दीया : (खुस होते हसते) वाव.. क्या मस्त हे.. कमीनी सच बताना वो तेरे जीजाजी ही थेनां..?
नीलम : (सरमाते हसते) तो कुतीया क्या मे जुठ बोल रही हु..? जीजाजी ही थे.. तेरी कसम..
दीया : (कातील नजरोसे देखते हसते) नीलु.. सच बताना.. अैसे कपडे जीजाजी तो नही दिलवाते.. अच्छा तो फीर अपने दिलमे हाथ रखके सबसे ज्यादा चाहती हो उनकी कसम खाकर कहो.. की ये तेरे जीजाजी हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते अेक मुका मारते) नही.. कमीनी.. नही खाती कसम.. तुजे मानना होतो मान.. वरना जानेदे.. मे जुठ थोडीना बोलुगी.. बात करती हे..
दीया : (सब बोक्ष वापस देते) येले कमीनी.. अब मुजसे बात मत करना.. मेरी तो सब बाते उगलवा लेती हे.. ओर खुदकी बारी आइतो नखरे कर रही हे.. कमीनी मे कहा कीसीको बताने जाउगी.. तुम दोस्तीमे भी परदा कर रही हो..
नीलम : (पासमे बेठते) यार तुमतो नाराज होगइ.. मे सच कहेती हु.. ठीक हे.. सुन.. ये बात कीसीको मत कहेना.. वो मेरे जीजाजी भी हे.. ओर मेरा बोय फ्रेन्ड भी.. सब उसीने दिलवाया हे.. ओर ये मेरा मोबाइल भी.. हम दोनो अेक दुसरेको बहुत चाहते हे.. जब हम दोनो उनकी सादीकी खरीदी करने यहा सहेरमे आयेथे.. तबही हम दोनोके बीच प्यार होगया.. अभी अभी उनकी सादी हुइ हे.. तो हनीमुन मनाकर वापस आतेही मुजे मीलने आये थे.. दोनो आइसक्रिंम पार्लरमे गयेथे.. सुनलीया..? अब खुस..?
दीया : (खुस होते कातील स्माइल करते) अरे.. मेरी बनो.. हां बहुत खुस.. तुमने तो जीजाजीको ही सेट करलीया..? चलो अच्छा हे.. घरकी बात घरमेही रहेगी.. कीसीको पताभी नही चलेगा.. साला मेरातो कोइ मेरी जीतनी उमरका जीजा, भाइ या कजीन भी नही हे.. साले सब बडे हे दो दो तीन तीन बच्चेके बाप.. वरना मेतो पहेले उनकोही सेट करलेती.. ताकी कीसीको पतातो ना चले.. ओर घरमे आरामसे उनसे प्यार करके चुदवाओ.. कोइ कुछ कहेने वाला नही.. ओर नाही कोइ खतरा.. सीर्फ मजेही मजे.. हें..हें..हें..
नीलम : (हसते) कमीनी तु बहुत ठरकी हे.. तुजे हर वक्त चुदाइकी ही बात करनी हे.. हें..हें..हें..
दीया : (हसते) अरे नीलु.. अब तुमसे क्या कहु.. तुमने अभी नीचेका स्वाद चखा नही हेनां..? इसीलीये तुम अैसा केह रही हे.. बस अेक बार अपनी चुतमे कीसीका लंड लेकरतो देख.. फीर तु उनके बीना रेह नही पायेगी.. सच कहेती हु.. क्या तुमने ओर तेरे जीजाजीने अभी तक कुछ कीया नही..? हंम..?
नीलम : (सर्मसार होते नामे गरदन हीलाते) नही.. यार.. आज आइसक्रिम पार्लरमे वो इनके लीये बहुत केह रहेथे.. लेकीन मुजेतो बहोत सरम आ रहीथी.. दिया.. अेक बात पुछु..? क्या पहेली बारमे बहुत दर्द होता हे..? मेने सुना हे थोडा खुनभी नीकलता हे.. मुजे इसके बारेमे कुछ बताओनां.. आज वो बहुत फोर्स कर रहेथे..
दिया : (कातील स्माइल करते) हंम.. लगता हे.. तुम दोनोने कुछ तैय करलीया हे.. सुन..? जब पहेली बार अंदर डालते हेनां.. तो बस थोडा मामुली दर्द होता हे.. ओर वोभी कुछ ही देरमे खतम होजाता हे.. अगर तुम वर्जीन हे तो बस थोडासा खुन जैसा नीकलेगा.. बादमेतो मजे ही मजे.. हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (हसते) कमीनी सच बताना.. अभी तक कीतने लंड खाये हे.. हें..हें..हें..
दीया : (थोडा गुस्सा करते) कुतीया.. क्या मे तुजे रंडी लगती हु.. अेकही तो बोय फ्रेन्ट हे मेरा.. हमने अब तक चार पांच बार सेक्स कीया हे.. साला बहुत मजा देता हे.. सायद हम दोनो सादी भी करले.. बस वो मेरी पढाइ खतम होनेका इन्तजार कर रहा हे.. क्या तुमने उनसे मीलन करनेकी कुछ प्लानींग ब्लानींग कीहे की नही..?
नीलम : (सरमाते हसते धीरेसे) हंम.. आजही वो केह रहेथे की हमभी सादीसे पहेले कही मीले.. दिया.. वो हमारी सादीसे पहेले मेरे साथ सबकुछ करना चाहते हे.. फीर हमदोनो सादी करलेगे.. मेरे लीये यहा अेक मकान भी ले रहे हे.. मुजे अपनी बेन्कमे जोबके लीये भी केह रहेथे.. तो मे क्या करु..? हंम..?
दीया : (खुस होते) नीलु तबतो अच्छा हे.. मेतो कहेती हु.. अेक बार उसे अच्छेसे मीलले.. इनमे कुछ नही होता.. अगर वो दुबारा सेक्सके लीये कहे तोभी हां केहदेनां.. कोइ नखरे मत करना.. इसी बातपे कइ बार लडके हमे छोड देते हे.. अगर तुम दोनो सादी करलोगे तो तेरी लाइफ अच्छेसे सेट होजायेगी.. लेकीन फीर तेरी बहेनका क्या होगा..? इसके बारेमे तुम दोनोने कुछ सोचा हे..?
नीलम : दीया.. वो मेरी सगी बहेन नही हे.. मेरी बुआ की ननंद हे.. मे उनको दीदी कहेती हु.. मेरी छोटी मां की बडी बहेन ओर मेरी सगी बुआ देवरानी जेठानी हे.. थोडा दुरका रीलेशन हेतो कोइ दीकत नही हे..
दीया : (हसते) छोटी मां मीन्स..? चाची..?
नीलम : (सरमाते हसते) नही.. मेरी दो दो मां हे.. मेरे पापाने दो सादीया की हे.. मेरी सगी मां ओर अभीके जो मेरे पापा हे वो दोनो मामी भांजे थे.. दोनोके बीच पापा बीमारथे तबही रीलेशन हो गयाथा.. जब मेरे पापा गुजर गयेतो मांने उनके भांजेके साथही सादी करली.. अभी जो मेरे पापा हे उनकी पहेली बीवी हे उनको मे छोटी मां कहेती हु.. हें..हें..हें..
दीया : (हसते) वाव.. दो दो सादीया..? नीलु.. कीतना अजीब लगता हेनां.. वोभी आजके जमानेमे..
नीलम : (हसते) सुन.. वो पुनमदी हेना जो मेरी बुआकी ननंद हे.. अभी उनकी मेरे बोय फ्रेन्टके साथ सादी हुइ हे.. उनके बडे भाइने तीन तीन सादीया करली हे.. वो वहाके राजा हे.. मेरी बुआकी सादी उनके छोटेभासे ही हुइ हे.. वो अेक रोयल फेमीली हे.. तो उनके खानदानमे दो तीन सादीया आम बात हे.. हें..हें..हें..
दीया : (मुस्कुराते) नीलु.. अेक बात पुछु..? क्या अभी ये जो तेरे पापा हे वो तेरा खयाल तो रखते हेनां..?
नीलम : (फीकी मुस्कानसे) हां दिया.. मेरे घरमे सबको यही लगताहे की मुजे कुछ नही पता.. लेकीन तुमसे अेक बात कहु..? मेरे जो अभी ये पापा हेना.. वोही मेरे असली पीता हे.. मेरे बापु बीमारथे तब मेरे ये पापा हमारे घरपे बहुत आतेथे.. तबही मेरी मा ओर पापा रीलेशनमे आगये थे.. ओर पापाने मांको प्रेगनेन्ट कर दीया.. ओर मे आगइ.. यही मेरे असली पीता हे.. तो मेरा खयालतो रखेगेही..
दीया : (हसते) हंम.. तो फीर ये सब तुजे कैसे पता चला की यही तेरे असली पीता हे..?
नीलम : (सरमाते हसते) अेक बार मां.. ओर छोटीमां रुममे बाते कर रहीथी.. तब उनको नही पताथाकी मे उसी रुमके बाथरुममे हु.. ओर मेने सब सुनलीया.. दिया.. क्या तेरे साथभी कुछ अैसा हुआ हे..?
दीया : (आंख गीली करते) हां नीलु.. मेरी अभी जो मा हे वो मेरी सौतेली मां हे.. पहेले पापाकी सेक्रेटरी थी.. मेरी असली मां का उनके देवरके साथ यानी मेरे चाचाके साथ ही नाजायज रीस्ता था.. ओर उसने मांको पेटसे कर दीया.. फीर मेरा जन्म हुआ तब मांका सब भांडा फुट गया.. ओर मां चाचाके साथ भाग गइ.. अभी उनसे सादी करके दोनो अलग रेहते हे..
नीलम : (आस्चर्यसे) क्या केह रही हो तुम..? तेरे जन्मके बाद भांडा फुट गया मतलब..? कैसे..? आइमीन.. सबको कैसे पता चला..?
दीया : (तभी अपनी पीठपे अेक लाखका नीशान दीखाते) नीलु.. तुम ये देख रही हो..? हमारे खानदानमे यही नीशान इसी जगाहपे सीर्फ चाचाको हे.. ओर कीसीको नही.. तो सबको यही लगता हे की मे मेरे चाचाकी संतान हु.. ओर अभी चाचासे मेरी मांको अेक लडकी ओर हुइ हे.. उनकी पीठपे भी ये नीशान हे.. तो जाहीरसी बात हे.. सबको पता हे.. मेरे असली पीता मेरे चाचा ही हे..
नीलम : अच्छा.. तभी तेरे पापाने अपनी सेक्रेटरीसे सादी करली.. क्या उनके कोइ बच्चे हे..?
दीया : (आंख गीली करते) नही.. लेकीन फीरभी मेरे इस पापा मुजे बहोत प्यार करते हे.. लेकीन मां.. जानेदे सब.. उनकोभी कोइ संतान नही हेतो वोभी चाचाके साथ.. साला इनकी बात करके दीमाग खराब हो जाता हे.. नीलु अेक बात कहु..? तुजे जहासे भी खुसीया मीले बटोर लेना.. अपनी लाइफ खुलकर जीले.. फीर पता नही हमारी कीस्मतमे कहा मोड आजाये.. अब इस जमानेमे तो रीस्तेकी कोइ अेहमीयतही नही बची.. इनसेतो अच्छा वो राजा था.. जो सभी प्रकृतीके नीयमसे जीते थे..
नीलम : (खडी होकर दीयाको हग करते) हंम.. दिया.. आइ अेम सोरी.. मेरी वजहसे तुजे दुख हुआ.. लेकीन तुम कीस राजाकी बात कर रही हो..?
दीया : (मुस्कुराते) कमीनी.. दोस्तीमे नो सोरी.. नो थेन्क्स.. ओके..? मे उस राजाकी बात कर रही हु जो हमारे इसी सहेरमे रहेताथा.. उसने अपनी दोनो बहेनसेही सादी करली थी.. हमभी अैसे आपसी रीस्तोमे सादी करके हमारी जींदगी अच्छी तराह जी सकते हे.. उसी राजाकी मेरे पास अेक कीताब (ये केसी अनुभुती) पडी हे.. फुरसतमे पढ लेना.. बहुत मजा आयेगा.. इनमे सब आपसी रीस्तोमेही सादीया करते हे.. यानी की अपनी दोनो बहेने चाची यहा तक वो राजाने उनकी दादीसेभी सादी करली.. बहुत अच्छी कीताब हे..
नीलम : (सरमाते हसते) क्या..? दादीसे भी..? दीया वो कीताब मुजे देना.. मे पढना चाहती हु..
नीलम ओर दीया अैसेही अेक दुसरेके बारेमे पारीवारीक बाते करती रही.. फीर दियाने वो कीताब नीकालके नीलमको पढनेके लीये देदी.. तो नीलम वही पढने लगी.. तबतक धिरेन अपने गांवकी ओर नीकल गयाथा तब उनके घरपे दोपहरको सब लंच करके आराम कर रहे थे.. नीर्मलाने राजीवको अपनी दवाइ पीलाइ तो राजीव नीदकी आगोसमे चला गयाथा.. वो नीचेके रुममेही सो रहाथा.. तो साथमे नीर्मलाभी आराम करते सो गइथी.. तब देवायतको पुनमने चंदावाले रुममे आराम करने भेज दीयाथा..
फीर दया ओर पुनमने सब काम नीपटा लीया.. ओर पुनमने दयाको उनके रुममे भेज दीया.. फीर होलका दरवाजा अच्छेसे बंध करके राजीव वाले कमरेमे देखने चली गइ.. तो दोनो मीया बीवी नींदकी आगोसमे थे.. तब पुनम धीरेसे उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर देवायतके कमरेमे जांकते देखा तो देवायतभी अपनी सुहागरातमे पुरी रात जागनेकी वजहसे गहेरी नींद सो रहाथा..
तो पुनमने देवायतको आराम करने देनाही बहेतर समजा.. उनकोभी पता थाकी भाइ आज पुरी रात अपनी नइ बीवीके साथ सुहागरातमे जागा होगा.. तो वो अपने कमरेमे चली गइ.. ओर आराम करने लगी.. सब आराम करते रहे तब सामके चार बजनेको आयेथे.. फीर पुनम उठकर अपने बाथरुममे चली गइ.. ओर फ्रेस होकर हल्कासा सींगार करके नीचे चली जाती हे..
तभी नीर्मलाभी राजीवको जगाकर फ्रेस होकर बहार नीकली तब दया ओर पुनम दोनोही चाइ नास्ता बनाने कीचनमे चली गइ.. तभी देवायतभी कंपलीट होकर नीचे आगया.. ओर नीर्मलाके पास उनसे सटकर बैठ गया ओर उसे कंधेसे पकडकर अपनी ओर करके भीच लीया तो नीर्मला सरमाके हसने लगी.. तो राजीवभी हसने लगा.. फीर दोनो सही होकर बैठ गये.. तब..
राजीव : (हसते) क्या बात हे.. आज हमारे बेटेको सासुपे बहोत प्यार आ रहा हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हां.. पापा.. अब आप सबलोग चले जाओगे तो घर बहुत सुना सुना लगेगा.. कुछ दिन ठहेर जाइअेनां..? आप हमारे साथ हेतो बहुत अच्छा लगता हे.. आप हमारे साथ रहेने आजाओ.. हें..हें..हें..
राजीव : (हसते) बेटा तुजेतो सब पता हे.. कीतना कुछ काम करना हे.. ओर तुम दोनोभी तो हमारे साथ चल रहेहो.. तो वहा तुम दोनोही दो तीन दिन रुक जाना.. वोभी तो आपकाही घर हे..
देवायत : (मुस्कुराते) नही पापा.. अब काम बहुत बढ गया हे.. ओर दो तीन दिनमे लखनकोभी अब सहेर भेज रहा हु.. तो अब वो वहा हमारा सब काम देखेगा.. आपकी तबीयत ठीक नही हे.. वरना आप दोनोकोभी उनके साथ रहेने भेज देता.. तो लखनकोभी आपका कुछ अनुभव मीलजाता..
राजीव : (हसते) नही.. अबतो हमारे भानुभी बहुत कुछ सीख गये हे.. वोही लखनको तैयार कर देगा.. आप फीकर मत करो.. सबकुछ अच्छेसे चल रहा हे.. कास आपके बापु जीन्दा होते.. तो वो ये सब देखके बहुत खुस होते..
नीर्मला : (बापुका जीक्र होतेही टोपीक चेन्ज करते हसते) देवु.. सुना हे आप गांवमे बडी होस्पीटल बनवा रहे हो..? क्या ये सच हे..?
राजीव : (खुस होते) भाइ तबतो बहुत ही अच्छा हे.. इस गांवमे अेक बडी होस्पीटलकी सख्त जरुरत हे.. आप सृतीकोभी इधर गांवमे बुलालो..
देवायत : (हसते) जी पापा.. देखते हे.. हमे सरकार जमीन कब दे रहीहे.. स्कुलकी जमीनतो हमे देदी.. तो वहा अेक हप्तेमे कामभी सुरु होजायेगा.. मेने इस बारेमे सृतीसे बातभी करली हे.. अब आगे देखते हे..
राजीव : बेटा.. अगर स्कुल खुल रहीहे तो आप भावुका भी देखलो.. वो भी पढी लीखी हे तो अपने पावपे खडी होके कुछ कर लेगी.. बस हमे सीर्फ उनकीही चीन्ता हे..
देवायत : (मुस्कुराते) पापा भावुकी चीन्तातो छोड ही दो.. अब सब ठीक हो गया हे.. भावुभी वहा रहेने के लीये राजी होगइ हे.. फीरभी मे हुनां.. अगर भावुको कुछ हुआतो उनको मेरे साथही रखुगा.. ओर स्कुलमेभी नोकरीपे लगा दुगा..
राजीव : (खुस होते) चलो तबतो अच्छा हे अब उनकी चीन्ता नही करनी.. बस अेकही बीनंती हे आपसे.. अगर मुजे कुछ होजाये तो आप नीमुका खयाल रखीयेगा.. मे उनको वहा अकेली रखना नही चाहता.. इनको आपके साथ रखना.. बस यही कहेनाथा आपसे..
नीर्मला : (आंख गीली करते) अरे आप कैसी बाते कर रहे हे..? आपको कुछ नही होगा.. हमारा देवु हेनां..?
देवायत : पापा आपको कुछ नही होगा.. मे हुनां..? आप अैसा क्यु गलत सोचते हे..? इनको मे मरते दम तक मेरे साथ रखुगा.. आइ प्रोमीस.. बस..? आप उल्टा सीधा सोचना छोड ही दो..
पुनम : (बहार आते) भाइ.. मम्मी पापा.. चलो.. चाइ नास्ता रेडी हे.. आकर बैठ जाओ..
कहेते पुनम वापस कीचनमे चली गइ.. तब राजीव ओर नीर्मला उनको देखतेही रहे.. ओर तीनो उठकर डाइनींगपे चले गये.. तब दया ओर पुनम चाइ नास्ता लेकर आगइ.. ओर सब बैठकर चाइ नास्ता करने लगे.. तो नीर्मला ओर पुनम देवायतके आसपास बगल वाली चेयरपे बैठ गइ.. तभी..
नीर्मला : पुनो बेटा.. सारा दीन घरमे अकेली रहेके बोर होजाओतो सेटर डे सन्डे अपने मायके घुमने चली जाना.. तो थोडा फ्रैस होजाओगी..
पुनम : (सरमाते हसते) जी मम्मीजी..
दया : (हसते) मालकीन इसीलीये तो मे इनके साथ आइ हु.. इनको अकेली थोडीना रहेने दुगी.. हें..हें..हें..
राजीव : (हसते) दया तुमभी साथ चली जाना.. तो वहा सबको मीलकर तुजेभी अच्छा लगेगा.. इतने सालो तक तुमभी वहा रही हो.. तो वो तेराभी घर हे..
तभी पुनमके मोबाइलकी रींग बजती हे तो वो उठकर मोबाइल के पास चली गइ.. ओर फोन उठाकर बात करने लगी.. फीर बात करके वापस आकर बैठ गइ ओर देवायतके सामने देखके कातीलाना स्माइल करने लगी.. फीर सबने चाइनास्ता करलीया तो नीर्मला जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो राजीवभी फ्रेस होने अपने रुमके बाथरुममे चला गया.. तब पुनम देवायतको इसारेसे दुसरे रुममे बुलाती हे..
तो देवायत उठकर धीरेसे वही चला गया.. तब पुनम रुममे आतेही जटसे देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतके होठोको चुमने लगी.. फीर उनसे अलग होतेही धीरेसे बात करने लगी..
पुनम : (होंठ चुमते धीरेसे) भाइ.. लगता हे मे आपके पास जल्द आजाउगी..
देवायत : (मुस्कुराते) क्यु..? तुजे अैसा क्यु लगता हे..? कीसका फोन था..?
पुनम : (कातील स्माइल करते) हमारी होस्टेलकी मेडमका.. मेरी उनसे अच्छी पटती हे.. आज अभी धिरेन होस्टेल गयेथे.. नीलुको अेक घंटेके लीये कही ले गये हे.. बस ये बात अभी कीसीको मत कहेना.. आगे देखो होता हे क्या.. मे सेटर डे संन्डे उधर घरपे आ रही हु.. भाभीको कहेना.. वरना आप आकर हमे लेजाना..
देवायत : (हसते) हंम.. तुम टेन्शन मतलेना.. मंजु सब सम्हाल लेगी.. चल बहार वरना.. अभी दोनो आजायेगे..
फीर दोनोही बहार आगये.. तब कुछ देरके बाद नीर्मला ओर राजीवभी बेग लेकर बहार आगये तो देवायतने नीर्मलाके पाससे बेग लेली तब पुनम ओर दया राजीव ओर नीर्मलाके पैर छुने लगी.. तब दोनोने आशीर्वाद दीया.. ओर राजीवने दोनोको सगुनके तौरपे कुछ पैसेभी दीये.. तब पुनम देवायतके पास जाकर उनको हग करलेती हे.. ओर सबलोग बहार आगये..
फीर तीनो कारमे बैठ गये तब पुनम ओर दया वही दरवाजेपे खडी रहेकर उनको वीदा करने लगी.. ओर कार देवायतके गांवकी ओर चल पडी.. इघर धिरेन अपने गांवकी ओर आ रहाथा.. आज उसने नीलमके साथ बीताये पलसे बहुतही खुस ओर उतेजीत था.. उनको पता नही थाकी उनकी अेक अेक हरकत उनकी बीवी पुनमको पता चल जाती थी.. ओर पुनमभी इन दोनोके रीलेशन देखके मजा ले रहीथी..
पुनमको बाबाकी ओर मंजुकी अेक अेक बात सच होते दीख रहीथी.. धिरेन अब जल्दसे जल्द अेक मकान ओर अेक कारका इन्तजाम करना चाहता था.. तो दुसरी ओर देवायत आधेही घंटेमे गांवमे पहोंच गया.. ओर सीधा हवेलीपे जाके रुक गया.. तो मंजु चंदा ओर भावना.. तीनोको देखकर खुस होने लगी.. ओर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तब अभी सीर्फ पांच साडे पांचही बजनेको आयेथे....
कन्टीन्यु
अध्याय - १३७
कहेके नीलमने फोन काट दीया.. ओर तो धिरेन थोडा परेसान होगया.. ओर उसने दुबार फोन कीया.. तो इस बार नीलमने नही उठाया.. पुरी रींग बजादी.. तो धिरेनने दुबारा ट्राइ कीया.. फीरभी नीलमने नही उठाया ओर धिरेन परेसान होने लगा.. ओर वापस अपने टेबलपे आकर बैठ गया.. फीर कुछ सोचते मेनेजरके पास चला गया.. ओर थोडी जल्दी जानेको कहा तो मेनेजरने उसे नइ सादीकी वजहसे मुस्कुराते जानेकी परमीशन देदी....अब आगे
ओर धिरेन अपनी बाइक लेकर सीधेही होस्टेलपे पहोंच गया.. ओर होस्टेलकी ओफीसमे जाकर नीलमके जीजाजीके रुपमे अपनी पहेचान देदी.. तो मेडमने इन्टरकोमसे नीलमको नीचे बुला लीया.. जब नीलम आइतो उसे धिरेनको पहेचाननेके लीये कहा तो धिरेनकी गांड फटने लगी.. की नीलम कुछ ओरही ना कहेदे.. लेकीन नीलमने हां कहेते केह दीयाकी मेरे जीजाजी हे.. तब जाके उनको धिरेनसे मीलनेकी परमीशन देदी..
धिरेन : मेडम.. क्या मे इसे अेक घंटेके लीये बहार ले जा सकता हु..? इनके लीये कुछ खरीदारी करनी हे..
मेडम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. अगर आप इनके जीजाजी हेतो इसे ले जा सकते हे.. लेकीन इसे अेक घंटेके वापस इधर छोड दीजीयेगा.. आप अपना नाम ओर मोबाइल नंबर रजीस्टरमे लीख दीजीये..
सुनतेही नीलम बहुतही सरमाइ तब धिरेन अपना नाम ओर नंबर रजीस्टरमे लीख देता हे.. ओर बहार की ओर चलने लगता हे.. तब नीलमभी सरमाते मुस्कुराते उनके पीछे चलने लगी.. ओर दोनोही बहार आगये.. नीलम पहेली बार धिरेनके साथ अैसे अकेली बहार नीकल रहीथी.. तब उनके दिलकी धडकन बढ गइ.. तभी धिरेनने अपनी बाइक स्टार्ट करदी तो नीलम दोनो ओर पैर करके धिरेनके कंधेपे हाथ रखते धिरेनके पीछे बाइकमे बैठ गइ..
धिरेन : (पीछे मुह करते) कहो मेडम अब कीधर जाना हे.. आपतो नाराज होगइ..? फोनभी नही उठाया.. पहेले दुपटेसे अपना मुह ढकलो.. वरना कोइ पहेचान वालेने देखलीया तो पंगा होजायेगा.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते दुपटेसे मुह ढकते) तो क्या करती..? अेकतो इतने दिनोके बाद आप आये हो.. ओर उपरसे मीलने भी नही आये.. ओर मेडमको ये क्यु कहाकी हमे खरीदी करने जाना हे..? अगर वापसीमे उसने हमारे पास कोइ सामान नही देखा तो..?
धिरेन : (बाइक चलाते) अरे अैसे कैसे खाली हाथ आते.. आज हमारी मेडम जो साथ मे चल रही हे तो इनके लीये कुछना कुछ तो ले लेगे.. कहो.. पहेले कीधर जाना हे..?
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) मुजे क्या पता.. मेने इधर थोडीना कुछ देखा हे.. आप मुजे लेकर जा रहे हो.. कहीपे भी लेलो.. ओर अैसी जगाहपे लेलो जहा हम आरामसे बैठकर बातचीत कर सके.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे..
धिरेन : (मुस्कुरते पीछे देखते) सीर्फ बातचीत..? ओर कुछ नही..? हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते पीठमे मुका मारते) मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो..
धिररेन : (हसते) चलो.. आज हम दोनो पहेली बार डेटपे जा रहेहे. तो मेरी रानीको कुछ मुह मीठा करवाउ.. क्या आइसक्रिम खाओगी..? चलो पहेले वही चलते हे.. फीर कुछ लेलेगे..
तब धिरेन अेक बडे आइसक्रिम पार्लर पे बाइ रोक देता हे.. ओर दोनो अंदर चले जाते हे.. तभी धिरेनको छोटी छोटी प्राइवेट केबीन दीख जाती हे तो धिरेन केबीनकी ओर चलने लगा.. तब नीलम बहुतही सरमाने लगी.. ओर मुस्कुराते उनके पीछे जाने लगी.. फीर दोनोही केबीनमे जाकर बैठ गये.. तो वेइटर आके उनको दो ग्लास पानी देगया.. ओर आइसक्रिमका ओर्डर लेकर चला गया.. तो नीलम बहुतही सरमा रहीथी..
धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. वहा सामने नही.. इधर मेरे पास आकर बैठजाओनां..?
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) नही धिरेन.. वो अभी आइसक्रिम लेकर आयेगा.. फीर आजाउगी..
धिरेन : नीलु.. मुजे पहेले तेरे होस्टेलके रुल्सके बारेमे बताओ.. क्या वहा पुरे दिनकी कुछ छुटी बुटी मीलती हे की नही..? मेनेतो सुनाथा लखनभैया ओर पुनम फीर मंजुदीदी सृतीदीदी तो इधरसे घुमनेभी नीकल जाते थे..
नीलम : (सरमाते हसते) हां मीलती हे.. लेकीन सेटर डे संन्डे को.. ये दो दिनमे लडकीया अपने घर चली जाती हे.. तो कोइ अपने रीस्तेदारके घरभी चली जाती हे.. होस्टेल १० बजेतक खुला रहेता हे.. उसी टाइमके अंदर सबको वापस आजाना हे.. अगर आपने उसे दो तीन घंटेका केह दीया होता तो भी वो परमीशन दे देती.. सीर्फ पहेचान वालोके साथ ही बहार जाने देते हे.. बाकी हमारे रुममे भी मील सकते हे..
धिरेन : (मुस्कुराते) हंम.. तो मतलब हम दो दिन साथमे रेह सकते हे.. हें..हें..हें.. नीलु.. मे इधर अेक छोटा मकान ले रहा हु.. सीर्फ हम दोनोके लीये.. बस पहेले तुम अच्छेसे पढ लीखके ग्रेज्युअेशन करलो.. फीर मेरी बेंन्कमे ही तुजे जोब दीलवा दुगा.. फीर हम दोनोही मीया बीवी साथमे जोबमे आते जाते रहेगे.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते हसते) जानु.. लगता हे आपने हमारे लीये बहुत सारी प्लानींग करके रखी हे.. अगर पुनोदीदी या कीसीको पता चल गया तो..? जोबतो क्या मेरी पढाइ ही रुकवा देगे.. तो बी केरफुल..
धिरेन : नही नीलु.. इस बारेमे मेने सबसे बात करली हे.. जीजुनेभी परमीशन देदी हे.. मेने उसे कहाकी कभी कभी रातमे देर होजाती हेतो रातमे ट्रावेल करना ठीक नही.. ओर मे हमारे मकानमे ही सो जाउगा.. कहातो मोम फौरन मान गइ ओर उसने परमीशन देदी.. अब हम सेटरडे सन्डे साथमे रेह सकते हे.. क्या आओगीना मेरे साथ रहेने..?
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) मुजे नही पता.. अगर कीसीको पता चल गया तो..?
धिरेन : नीलु.. कीसीको पता नही चलेगा.. तुम होस्टेलपे केह देनाकी दीदीके घर जा रही हु.. फीर मन्डेको सुबह तुजे छोड दुगा.. क्या कहेती हो..? आओगीनां..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) मुजे क्या पता..? फीर वहा दो दिन आप अैसेही थोडीना बैठोगे.. मेरे साथ सरारत करोगेतो..? मुजे नही आना.. हें..हें..हें..
धिरेन : (हसते) सरारत करनेतो लेजा रहा हु.. उस सादीवाले दिन हमने जो काम अधुरा छोड दीयाथा.. तो वही पुरा करेगे.. नीलु.. आइ लव यु.. मे तुमको बहोत चाहता हु.. मुजसे सादी करले.. मे तुजे रानी बनाके रखुगा.. मुजे तुम बहुत अच्छी लगती हो.. तेरे साथ पुरी जींदगी बीता दुगा.. क्या मुजसे सादी करोगीनां..?
नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) धिरन.. सादीतो मेभी तुमसे करना चाहती हु.. फीरभी अेक डरसा लग रहा हे.. मे मम्मी पापाको क्या कहुगी..? की मेने जीजुसे सादी करली..? धिरेन हमे सबको फेइस करना पडेगा.. खास करके पुनोदीदी.. बडे भैया मेरी मम्मी दादी सबलोग.. आप सबको कैसे हेन्डल करोगे..?
धिरेन : (मुस्कुराते) वो सब तु मुजपे छोडदे.. बस तुम नीडर ओर तटस्थ रहेनी चाहीये.. बाकी मे सबको हेन्डल करलुगा.. मुजेतो सीर्फ तेरे साथ रहेना हे.. नीलु.. मे तेरे साथ जींदगीका हर लह्मा जीना चाहता हु.. वोभी सादीसे पहेले.. हम हमारे गांव या कीसी होटेलमे चले जायेगे.. सेटरडे सन्डे ये दो दीन हम खुब मजे करेगे..
नीलम : (बहुतही सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. कैसे मजे..? सादीसे पहेले मे आपके साथ वहा दो दिन रहीतो.. आप अैसेही थोडीना रहोगे..? कही कुछ गलत होगया तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी.. क्या बीना सादी.. ये सब.. आइ मीन.. आप समज रहे हेनां..
धिरेन : नीलु.. अगर उस दिन भावुदीदी नही आइ होती तो उसी दिन हम दोनोके बीच सबकुछ हो गया होता.. तब हमने कहा सादी कीथी..? मेरा यकीन मानो.. मे तुमको कभी नही छोडुगा.. बस मेरी अेकही तम्मना हे जो पुनोने पुरी नही की.. मे सादीसे पहेले उनके साथ सबकुछ करना चाहता था.. मेने मेरी कोलेज लाइफमे जोभी सपने देखेथे.. वो मे उनके साथ पुरा करना चाहता था.. लेकीन उसने मुजे छुने तक नही दीया.. तो यही उमीद मुजे तुमसे हे.. क्या मेरी तम्मना पुरी नही करोगी..?
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) धिरेन.. प्लीज.. उस दिन हम दोनोही बहेक गयेथे.. मेभी अपने आपको कंट्रोल नही करपाइ.. इसीलीये अेक डर लग रहा हे.. ओर मे आपके बीना रेहभी तो नही सकती.. मेरा दिल जानता हे.. की मेने यहा आपके बीना कैसे दिन काटे हे.. ओर आप फोनभीतो नही करतेथे..
तभी वेइटर दो कप आइसक्रिम लेकर आगया.. तो दोनोही अपनी बात रोकते चुप होगये.. ओर वेइटर आइसक्रिम रखके चला गया तो दोनोही अेक दुसरेके सामने देखने लगे तब नीलमने सरमाके अपनी नजरे जुकाली.. ओर अैसेही बैठी रही.. तब उनके मुहके पास अेक आइसक्रिमकी भरी हुइ चमच आगइ.. तब नीलमने सरमाके अपनी नजरको उठागा.. तो धिरेन उसे खीलानेके लीये चमच भरके दे रहा था..
तब नीलम सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते अपना मुह खोल दीया तो धिरेनने उसे आइसक्रिम खीलादी.. वो बडीही कस्मकस मे थी.. आज नीलमको धिरनने अपने मनकी बात बतादी.. वैसेतो नीलम कबसे धिरेनके साथ मीलन करनेको तैयार थी.. वो धिरेनको बहुत चाहने लगीथी.. जबसे लताने उसे धिरेनसे दुर करनेकी कोसीसकी.. ओर भावनाने उसे डांटके फटकाराथा.. तबसे गुस्सेमे धिरेनके साथ सबकुछ करनेकी ठानली थी..
धिरेन : नीलु.. क्या हुआ..? क्या सोच रही हे..? मे तुम्हारे साथ जबरदस्ती कोइ काम करवाना नही चाहता.. अगर तुम मुजसे प्यार नही करती तो मुजे मना कर सकती हो.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा.. हमारा रीस्ता दोस्तीकातो रहेगा ही.. लेकीन अेक बात खान खोलकर सुनलो.. मेने तुजे सच्चे दिलसे चाहा हे.. मे तुमसे हमेसा प्यार करता रहुगा..
नीलम : (फौरन) अरे.. नही नही.. धिरेन आप गलत सोच रहे हे.. मे भी आपको बहुत चाहती हु.. प्लीज.. मुजे गलत मत समजे.. मुजे थोडा टाइम चाहीये.. आपने सब अेकदमसे कहा तो.. आइ अेम सोरी.. (सोचते थोडी देरके बाद) ठीक हे.. जैसा आप चाहो.. लेकीन मेरा खयाल रखना.. मे मेरी जींदगीका बहुतही अहेम फैसला करने जा रही हु.. अगर आप मुजे छोड देगे तो मे कहीकी नही रहुगी.. मेरे पास ओर कोइ रास्ता नही बचेगा.. आप समज रहे हेनां..? मे आपके साथ रहेनेके लीये तटस्थ रहुगी..
धिरेन : नही नीलु.. अैसी कोइ नौबत ही नही आयेगी.. भलेही इसके लीये मुजे पुनमको छोडना पडे.. मेरी बीवी सीर्फ तुम ही रहोगी.. आइ प्रोमीस मे तुमसे सादी करलुगा.. बस दो तीन दीनमे हमारा मकान देख लुगा.. मेने आते ही ब्रोकरसे बात करली हे.. फीर उनका सौदा होतेही हम दोनो कही मंदिरमे जाकर सादी करलेगे.. फीर तुम मेरी बीवी बनके इघरही होस्टेलमे रहेना.. हम हर सेटरडे सन्डे साथमे रहेगे.. मेरी कसम..
नीलम : (जटसे धिरेनके पास आकर बैठते) प्लीज.. धिरेन.. आप अपनी कसम मत खाओ.. मे रेडी हु.. आप जोभी कहोगे मे करुगी.. आप जैसा कहोगे मे सबको जवाब दे दुगी.. मुजेतो आपके साथ जींदगी बीतानी हे.. अब मे आपके बीना नही रेह सकती..
धिरेन : (बैठेही हग करते हसते) तो क्या अपने होनेवाले पतीका मुह मीठा नही करवाओगी..? हें..हें..हें..
कहातो नीलम अेकदम सर्मसार होगइ.. ओर हसते हुअे उसने अेक चमच आइसक्रिम लेकर धिरेनके मुहके सामने रखदी.. तो धिरेनने उनको ओर प्यारभरी नजरोसे देखते आधी चमच खाइ ओर आधी चमच उसने नीलमको खीलादी तब नीलम बहुतही सरमाइ. ओर धिरेनने उसे बैठेही अपनी बाहोमे भीचलीया.. तब दोनोके होंठ मील गये.. ओर स्मुच करते अेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे..
दोनोही सबकुछ भुलके प्यारके आगोसमे चले गये.. तभी नीलुको अपने बुब्सपे धिरेनका हाथ बुब्स मसलते महेसुस हुआ तो नीलम सरसे पाव तक हील गइ.. ओर आधी आंख चडाते मदहोस होने लगी.. उसने धिरेनका कोइ विरोध नही कीया.. दोनोही भुल गयेकी दोनो कहा बैठे हे.. ओर धिरेनने बुबस्को मसलते अपना मुह थोडा खोल दीया तो दोनोही मदहोसीमे अेक दुसरेकी जीभसे पेच लडाने लगे..
तभी अचानक धिरेनने बुब्सको छोडके नीलमकी चुतपे हाथ रख दीया ओर उसे उंगलीसे सहेलाने लगा.. तो नीलम सीसकारीया करते उछलने लगी.. वो हाथ नीचे लेजाते धिरेनका हाथ पकड लेती हे.. ओर गुं..गुं.. करते अपनी गरदन नां मे हिलाते धिरेनको रोकनेकी कोसीस करती रही.. नीलम बहुतही गरम हो चुकीथी.. वो मनसेतो चाहतीथी की धिरेन उसे अभी पुरी तराह मसलदे.. लेकीन अन्जान जगहकी वजहसे..
नीलम : (जटसे दुर होते) नही धिरेन.. प्लीज.. वहा नही.. इधर कोइ आजायेगा.. आप जोभी करना हो बादमे करलेना.. लेकीन यहा नही..
धिरेन : (उखडी हुइ आवाजमे) नीलु.. आइ लव यु.. मे जल्दसे जल्द तुमसे मीलना चाहता हु.. क्या हम कही कोइ होटेलमे चले..? हंम..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे) लव यु टु.. धिरेन.. लेकीन आज नही.. हम सीर्फ अेक घंटेकी परमीस लेकरही आये हे.. आप समजो प्लीज.. अब मुजसे भी आपके बीना नही रहा जाता.. लेकीन यहा नही.. हम आपके घरपे मीलते हेनां..? परसोही सेटरडे हे.. आप कुछ अेरेन्ज करलो..
धिरेन : नीलु.. मे जल्दी हम दोनोके मीलनका इन्तजाम करता हु.. पुनोको कहुगा सेटरडे सन्डे मायके उनके भाइ भाभीको मीलने चली जाये.. वरना हम यही कीसी होटेलमे चले जायेगे.. मे हमारे मीलनके लीये कुछ इन्तजाम करता हु..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) धिरेन.. देखना.. कोइ दर्द बर्दतो नही होगानां..? मे ठीकसे चलतो सकुगीनां..?
धिरेन : अरे कुछ नही होगा.. तुम खामखा गभरा रही हो.. पुनोकोभी कुछ नही हुआ था.. वोभी ठीकसे चल रहीथी.. इनमे अैसा कुछभी नही होता.. जो तुम सोच रही हो.. मे तेरे साथ हुनां..?
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. तो ठीक हे.. आप ही कुछ देखलो..
धिरेन : नीलु.. कलतो नही.. लेकीन परसो सेटरडे हे.. अगर पुनो माइके जायेगी तो हम मेरे घरपे ही चलेगे.. लेकीन कल हम फील्म देखने चले..? ६ से ९ बजेके सोमे.. हंम..? चलोगीनां..?
नीलम : (सरमाते) हंम.. आप आजाना मे मेडमको केह दुगी.. थोडा जल्दी आइअेगा.. रीसेसके बाद मे स्कुल नही जाउगी.. हम ४ बजे नीकल सकते हे.. पहेले हम कही गार्डनमे घुमने जायेगे.. फीर फील्म देखेगे.. लेकीन वहा ओर कोइ सरारत नही.. हें..हें..हें..
धिरेन : (धीरेसे) नीलु.. मेडमको कहेना.. सेटबडे सन्डे जीजुके घर दीदीके पास जाना हे..
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. केह दुगी.. धिरेन.. बहुत डर लग रहा हे.. कीसीको पता तो नही चलेगानां..? देखना वरना मे कहीकी नही रहुगी.. मुजे मजधारमे मत छोडना.. मे सीर्फ आपहीके भरोसे चल रही हु.. हंम..?
धिरेन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुम खामखा गभरा रही हो.. अैसा कुछभी नही होगा.. मे तेरे साथ हुनां..? क्या मुजपे भरोसा नही हे..? हंम..? मे तुमसे सचमे सादी करना चाहता हु.. कहो.. मे तुमको कैसे यकीन दिलवाउ..?
नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) नही धिरेन.. मुजे आपपे पुरा भरोसा हे.. अब आपही मेरे सबकुछ हो.. हंम..
फीर दोनोही अपना प्रोग्राम बनाते आइसक्रिम खाने लगे.. ओर आइसक्रिम खतम होतेही दोनो वहासे नीकल गये.. तब धिरेन बाइक सीधे अेक मोलमे लेजाता हे.. वहा नीलमको अेक बहुतही खुरसुरत ड्रेस दिलवाता हे वहा धिरेन उनकी पसंदका दो अडरगारमेन्ट भी दीलवाता हे तब नीलम बहुत ही समराइ.. फीर धिरेन नीलमके लीये कुछ नास्ता लेलेता हे.. ओर दोनो वापस होस्टेलपे आगये..
तो मेडम दोनोको देखकर मुस्कुराने लगी.. ओर धिरेनभी उनकी ओर देखके हसने लगा ओर नीलमको छोडके वहासे नीकल गया.. तब मेडम उसे कातील स्माइल करते देखती रही.. नीलम ओर धिरेनको नही पता थाकी दोनोके जातेही मेडने पुनमको फोन करके बता दीया था.. तब नीलम उपर अपने रुममे चली गइ.. तो उनकी रुम पार्टनर दीया.. मोबाइलमे कुछ देख रही थी.. तब माोबाइल साइडमे रखते ही..
दीया : (मुस्कुराते) आगइ महारानी.. नीलु.. कहा घुमने गइ थी..? कौन मीलने आया था..? कही कोइ बोयफ्रेन्ड तो सेट नही करलीया..? हें..हें..हें.. क्या सोपींग करने गइथी..?
नीलम : (मुस्कुराते बेग रखते) अरे नही.. वो मेरे जीजु मीलने आयेथे तो उनके साथही चली गइ थी.. मुजे कुछ सोपींग करनीथी.. तु बता.. वापस कब आइ..? क्या अपने यारको मीलने गइ थी..?
दीया : (हसते आंख मारते) हां यार.. आज हम दोनो फील्म देखने गयेथे.. क्या मस्त फील्म थी.. हें..हें..हें..
नीलम : (हसते) क्या उसने तुजे फील्म देखने दी..? हें..हें..हें.. सच बताना कमीनी..
दीया : (जोरोसे हसते) कमीनी तुजे सब पतातो हे तो फीर क्यु पुछती हे.. क्या कोइ बी.अेफ. उनकी जी.अफे. के साथ फील्म देखने थोडीना जाते हे.. उनकोतो वहा कुछ ओरही करना होता हे.. सालेने आज मुजे तीन तीन बार जडा दीया.. बहुत मस्त चुसता हे.. नीलु अब तुमभी कीसीको पटाले.. यहीतो होस्टेलमे रहेनेका मजा हे.. अैसा समय तेरी जींदगीमे दुबारा कभी नही आयेगा.. तुम खुलकर अपनी लाइफ जीलो.. ओर ये क्या सोपींग करके आइ..? दीखातो जरा..
नीलम : (हसते जटसे बेग दुर हटानेकी कोसीस करते) अरे नही नही.. कमीनी रहेने दे.. मेरे कपडे हे.. हें..हें..हें..
नीलम कुछ कहेती उनसे पहेलेही उनकी रुमपार्टनर दीयाने केरीबेग उल्टी करदी.. तो सब कपडेके बोक्ष बहार आगये.. ओर सुरुमेही नीलमके अंडरगारमेन्ट्स हाथ आगये.. तो दिया बोक्ष दोलकर देखने लगी.. तब नीलु बहुतही सरमाते हसती हुइ दीयाको देखती रही.. तो दियाभी नीलमकी ओर कातील स्माइल करते सभी कपडे गौरसे देखती रही.. तभी..
दीया : (खुस होते हसते) वाव.. क्या मस्त हे.. कमीनी सच बताना वो तेरे जीजाजी ही थेनां..?
नीलम : (सरमाते हसते) तो कुतीया क्या मे जुठ बोल रही हु..? जीजाजी ही थे.. तेरी कसम..
दीया : (कातील नजरोसे देखते हसते) नीलु.. सच बताना.. अैसे कपडे जीजाजी तो नही दिलवाते.. अच्छा तो फीर अपने दिलमे हाथ रखके सबसे ज्यादा चाहती हो उनकी कसम खाकर कहो.. की ये तेरे जीजाजी हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (सरमाते अेक मुका मारते) नही.. कमीनी.. नही खाती कसम.. तुजे मानना होतो मान.. वरना जानेदे.. मे जुठ थोडीना बोलुगी.. बात करती हे..
दीया : (सब बोक्ष वापस देते) येले कमीनी.. अब मुजसे बात मत करना.. मेरी तो सब बाते उगलवा लेती हे.. ओर खुदकी बारी आइतो नखरे कर रही हे.. कमीनी मे कहा कीसीको बताने जाउगी.. तुम दोस्तीमे भी परदा कर रही हो..
नीलम : (पासमे बेठते) यार तुमतो नाराज होगइ.. मे सच कहेती हु.. ठीक हे.. सुन.. ये बात कीसीको मत कहेना.. वो मेरे जीजाजी भी हे.. ओर मेरा बोय फ्रेन्ड भी.. सब उसीने दिलवाया हे.. ओर ये मेरा मोबाइल भी.. हम दोनो अेक दुसरेको बहुत चाहते हे.. जब हम दोनो उनकी सादीकी खरीदी करने यहा सहेरमे आयेथे.. तबही हम दोनोके बीच प्यार होगया.. अभी अभी उनकी सादी हुइ हे.. तो हनीमुन मनाकर वापस आतेही मुजे मीलने आये थे.. दोनो आइसक्रिंम पार्लरमे गयेथे.. सुनलीया..? अब खुस..?
दीया : (खुस होते कातील स्माइल करते) अरे.. मेरी बनो.. हां बहुत खुस.. तुमने तो जीजाजीको ही सेट करलीया..? चलो अच्छा हे.. घरकी बात घरमेही रहेगी.. कीसीको पताभी नही चलेगा.. साला मेरातो कोइ मेरी जीतनी उमरका जीजा, भाइ या कजीन भी नही हे.. साले सब बडे हे दो दो तीन तीन बच्चेके बाप.. वरना मेतो पहेले उनकोही सेट करलेती.. ताकी कीसीको पतातो ना चले.. ओर घरमे आरामसे उनसे प्यार करके चुदवाओ.. कोइ कुछ कहेने वाला नही.. ओर नाही कोइ खतरा.. सीर्फ मजेही मजे.. हें..हें..हें..
नीलम : (हसते) कमीनी तु बहुत ठरकी हे.. तुजे हर वक्त चुदाइकी ही बात करनी हे.. हें..हें..हें..
दीया : (हसते) अरे नीलु.. अब तुमसे क्या कहु.. तुमने अभी नीचेका स्वाद चखा नही हेनां..? इसीलीये तुम अैसा केह रही हे.. बस अेक बार अपनी चुतमे कीसीका लंड लेकरतो देख.. फीर तु उनके बीना रेह नही पायेगी.. सच कहेती हु.. क्या तुमने ओर तेरे जीजाजीने अभी तक कुछ कीया नही..? हंम..?
नीलम : (सर्मसार होते नामे गरदन हीलाते) नही.. यार.. आज आइसक्रिम पार्लरमे वो इनके लीये बहुत केह रहेथे.. लेकीन मुजेतो बहोत सरम आ रहीथी.. दिया.. अेक बात पुछु..? क्या पहेली बारमे बहुत दर्द होता हे..? मेने सुना हे थोडा खुनभी नीकलता हे.. मुजे इसके बारेमे कुछ बताओनां.. आज वो बहुत फोर्स कर रहेथे..
दिया : (कातील स्माइल करते) हंम.. लगता हे.. तुम दोनोने कुछ तैय करलीया हे.. सुन..? जब पहेली बार अंदर डालते हेनां.. तो बस थोडा मामुली दर्द होता हे.. ओर वोभी कुछ ही देरमे खतम होजाता हे.. अगर तुम वर्जीन हे तो बस थोडासा खुन जैसा नीकलेगा.. बादमेतो मजे ही मजे.. हे.. हें..हें..हें..
नीलम : (हसते) कमीनी सच बताना.. अभी तक कीतने लंड खाये हे.. हें..हें..हें..
दीया : (थोडा गुस्सा करते) कुतीया.. क्या मे तुजे रंडी लगती हु.. अेकही तो बोय फ्रेन्ट हे मेरा.. हमने अब तक चार पांच बार सेक्स कीया हे.. साला बहुत मजा देता हे.. सायद हम दोनो सादी भी करले.. बस वो मेरी पढाइ खतम होनेका इन्तजार कर रहा हे.. क्या तुमने उनसे मीलन करनेकी कुछ प्लानींग ब्लानींग कीहे की नही..?
नीलम : (सरमाते हसते धीरेसे) हंम.. आजही वो केह रहेथे की हमभी सादीसे पहेले कही मीले.. दिया.. वो हमारी सादीसे पहेले मेरे साथ सबकुछ करना चाहते हे.. फीर हमदोनो सादी करलेगे.. मेरे लीये यहा अेक मकान भी ले रहे हे.. मुजे अपनी बेन्कमे जोबके लीये भी केह रहेथे.. तो मे क्या करु..? हंम..?
दीया : (खुस होते) नीलु तबतो अच्छा हे.. मेतो कहेती हु.. अेक बार उसे अच्छेसे मीलले.. इनमे कुछ नही होता.. अगर वो दुबारा सेक्सके लीये कहे तोभी हां केहदेनां.. कोइ नखरे मत करना.. इसी बातपे कइ बार लडके हमे छोड देते हे.. अगर तुम दोनो सादी करलोगे तो तेरी लाइफ अच्छेसे सेट होजायेगी.. लेकीन फीर तेरी बहेनका क्या होगा..? इसके बारेमे तुम दोनोने कुछ सोचा हे..?
नीलम : दीया.. वो मेरी सगी बहेन नही हे.. मेरी बुआ की ननंद हे.. मे उनको दीदी कहेती हु.. मेरी छोटी मां की बडी बहेन ओर मेरी सगी बुआ देवरानी जेठानी हे.. थोडा दुरका रीलेशन हेतो कोइ दीकत नही हे..
दीया : (हसते) छोटी मां मीन्स..? चाची..?
नीलम : (सरमाते हसते) नही.. मेरी दो दो मां हे.. मेरे पापाने दो सादीया की हे.. मेरी सगी मां ओर अभीके जो मेरे पापा हे वो दोनो मामी भांजे थे.. दोनोके बीच पापा बीमारथे तबही रीलेशन हो गयाथा.. जब मेरे पापा गुजर गयेतो मांने उनके भांजेके साथही सादी करली.. अभी जो मेरे पापा हे उनकी पहेली बीवी हे उनको मे छोटी मां कहेती हु.. हें..हें..हें..
दीया : (हसते) वाव.. दो दो सादीया..? नीलु.. कीतना अजीब लगता हेनां.. वोभी आजके जमानेमे..
नीलम : (हसते) सुन.. वो पुनमदी हेना जो मेरी बुआकी ननंद हे.. अभी उनकी मेरे बोय फ्रेन्टके साथ सादी हुइ हे.. उनके बडे भाइने तीन तीन सादीया करली हे.. वो वहाके राजा हे.. मेरी बुआकी सादी उनके छोटेभासे ही हुइ हे.. वो अेक रोयल फेमीली हे.. तो उनके खानदानमे दो तीन सादीया आम बात हे.. हें..हें..हें..
दीया : (मुस्कुराते) नीलु.. अेक बात पुछु..? क्या अभी ये जो तेरे पापा हे वो तेरा खयाल तो रखते हेनां..?
नीलम : (फीकी मुस्कानसे) हां दिया.. मेरे घरमे सबको यही लगताहे की मुजे कुछ नही पता.. लेकीन तुमसे अेक बात कहु..? मेरे जो अभी ये पापा हेना.. वोही मेरे असली पीता हे.. मेरे बापु बीमारथे तब मेरे ये पापा हमारे घरपे बहुत आतेथे.. तबही मेरी मा ओर पापा रीलेशनमे आगये थे.. ओर पापाने मांको प्रेगनेन्ट कर दीया.. ओर मे आगइ.. यही मेरे असली पीता हे.. तो मेरा खयालतो रखेगेही..
दीया : (हसते) हंम.. तो फीर ये सब तुजे कैसे पता चला की यही तेरे असली पीता हे..?
नीलम : (सरमाते हसते) अेक बार मां.. ओर छोटीमां रुममे बाते कर रहीथी.. तब उनको नही पताथाकी मे उसी रुमके बाथरुममे हु.. ओर मेने सब सुनलीया.. दिया.. क्या तेरे साथभी कुछ अैसा हुआ हे..?
दीया : (आंख गीली करते) हां नीलु.. मेरी अभी जो मा हे वो मेरी सौतेली मां हे.. पहेले पापाकी सेक्रेटरी थी.. मेरी असली मां का उनके देवरके साथ यानी मेरे चाचाके साथ ही नाजायज रीस्ता था.. ओर उसने मांको पेटसे कर दीया.. फीर मेरा जन्म हुआ तब मांका सब भांडा फुट गया.. ओर मां चाचाके साथ भाग गइ.. अभी उनसे सादी करके दोनो अलग रेहते हे..
नीलम : (आस्चर्यसे) क्या केह रही हो तुम..? तेरे जन्मके बाद भांडा फुट गया मतलब..? कैसे..? आइमीन.. सबको कैसे पता चला..?
दीया : (तभी अपनी पीठपे अेक लाखका नीशान दीखाते) नीलु.. तुम ये देख रही हो..? हमारे खानदानमे यही नीशान इसी जगाहपे सीर्फ चाचाको हे.. ओर कीसीको नही.. तो सबको यही लगता हे की मे मेरे चाचाकी संतान हु.. ओर अभी चाचासे मेरी मांको अेक लडकी ओर हुइ हे.. उनकी पीठपे भी ये नीशान हे.. तो जाहीरसी बात हे.. सबको पता हे.. मेरे असली पीता मेरे चाचा ही हे..
नीलम : अच्छा.. तभी तेरे पापाने अपनी सेक्रेटरीसे सादी करली.. क्या उनके कोइ बच्चे हे..?
दीया : (आंख गीली करते) नही.. लेकीन फीरभी मेरे इस पापा मुजे बहोत प्यार करते हे.. लेकीन मां.. जानेदे सब.. उनकोभी कोइ संतान नही हेतो वोभी चाचाके साथ.. साला इनकी बात करके दीमाग खराब हो जाता हे.. नीलु अेक बात कहु..? तुजे जहासे भी खुसीया मीले बटोर लेना.. अपनी लाइफ खुलकर जीले.. फीर पता नही हमारी कीस्मतमे कहा मोड आजाये.. अब इस जमानेमे तो रीस्तेकी कोइ अेहमीयतही नही बची.. इनसेतो अच्छा वो राजा था.. जो सभी प्रकृतीके नीयमसे जीते थे..
नीलम : (खडी होकर दीयाको हग करते) हंम.. दिया.. आइ अेम सोरी.. मेरी वजहसे तुजे दुख हुआ.. लेकीन तुम कीस राजाकी बात कर रही हो..?
दीया : (मुस्कुराते) कमीनी.. दोस्तीमे नो सोरी.. नो थेन्क्स.. ओके..? मे उस राजाकी बात कर रही हु जो हमारे इसी सहेरमे रहेताथा.. उसने अपनी दोनो बहेनसेही सादी करली थी.. हमभी अैसे आपसी रीस्तोमे सादी करके हमारी जींदगी अच्छी तराह जी सकते हे.. उसी राजाकी मेरे पास अेक कीताब (ये केसी अनुभुती) पडी हे.. फुरसतमे पढ लेना.. बहुत मजा आयेगा.. इनमे सब आपसी रीस्तोमेही सादीया करते हे.. यानी की अपनी दोनो बहेने चाची यहा तक वो राजाने उनकी दादीसेभी सादी करली.. बहुत अच्छी कीताब हे..
नीलम : (सरमाते हसते) क्या..? दादीसे भी..? दीया वो कीताब मुजे देना.. मे पढना चाहती हु..
नीलम ओर दीया अैसेही अेक दुसरेके बारेमे पारीवारीक बाते करती रही.. फीर दियाने वो कीताब नीकालके नीलमको पढनेके लीये देदी.. तो नीलम वही पढने लगी.. तबतक धिरेन अपने गांवकी ओर नीकल गयाथा तब उनके घरपे दोपहरको सब लंच करके आराम कर रहे थे.. नीर्मलाने राजीवको अपनी दवाइ पीलाइ तो राजीव नीदकी आगोसमे चला गयाथा.. वो नीचेके रुममेही सो रहाथा.. तो साथमे नीर्मलाभी आराम करते सो गइथी.. तब देवायतको पुनमने चंदावाले रुममे आराम करने भेज दीयाथा..
फीर दया ओर पुनमने सब काम नीपटा लीया.. ओर पुनमने दयाको उनके रुममे भेज दीया.. फीर होलका दरवाजा अच्छेसे बंध करके राजीव वाले कमरेमे देखने चली गइ.. तो दोनो मीया बीवी नींदकी आगोसमे थे.. तब पुनम धीरेसे उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर देवायतके कमरेमे जांकते देखा तो देवायतभी अपनी सुहागरातमे पुरी रात जागनेकी वजहसे गहेरी नींद सो रहाथा..
तो पुनमने देवायतको आराम करने देनाही बहेतर समजा.. उनकोभी पता थाकी भाइ आज पुरी रात अपनी नइ बीवीके साथ सुहागरातमे जागा होगा.. तो वो अपने कमरेमे चली गइ.. ओर आराम करने लगी.. सब आराम करते रहे तब सामके चार बजनेको आयेथे.. फीर पुनम उठकर अपने बाथरुममे चली गइ.. ओर फ्रेस होकर हल्कासा सींगार करके नीचे चली जाती हे..
तभी नीर्मलाभी राजीवको जगाकर फ्रेस होकर बहार नीकली तब दया ओर पुनम दोनोही चाइ नास्ता बनाने कीचनमे चली गइ.. तभी देवायतभी कंपलीट होकर नीचे आगया.. ओर नीर्मलाके पास उनसे सटकर बैठ गया ओर उसे कंधेसे पकडकर अपनी ओर करके भीच लीया तो नीर्मला सरमाके हसने लगी.. तो राजीवभी हसने लगा.. फीर दोनो सही होकर बैठ गये.. तब..
राजीव : (हसते) क्या बात हे.. आज हमारे बेटेको सासुपे बहोत प्यार आ रहा हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हां.. पापा.. अब आप सबलोग चले जाओगे तो घर बहुत सुना सुना लगेगा.. कुछ दिन ठहेर जाइअेनां..? आप हमारे साथ हेतो बहुत अच्छा लगता हे.. आप हमारे साथ रहेने आजाओ.. हें..हें..हें..
राजीव : (हसते) बेटा तुजेतो सब पता हे.. कीतना कुछ काम करना हे.. ओर तुम दोनोभी तो हमारे साथ चल रहेहो.. तो वहा तुम दोनोही दो तीन दिन रुक जाना.. वोभी तो आपकाही घर हे..
देवायत : (मुस्कुराते) नही पापा.. अब काम बहुत बढ गया हे.. ओर दो तीन दिनमे लखनकोभी अब सहेर भेज रहा हु.. तो अब वो वहा हमारा सब काम देखेगा.. आपकी तबीयत ठीक नही हे.. वरना आप दोनोकोभी उनके साथ रहेने भेज देता.. तो लखनकोभी आपका कुछ अनुभव मीलजाता..
राजीव : (हसते) नही.. अबतो हमारे भानुभी बहुत कुछ सीख गये हे.. वोही लखनको तैयार कर देगा.. आप फीकर मत करो.. सबकुछ अच्छेसे चल रहा हे.. कास आपके बापु जीन्दा होते.. तो वो ये सब देखके बहुत खुस होते..
नीर्मला : (बापुका जीक्र होतेही टोपीक चेन्ज करते हसते) देवु.. सुना हे आप गांवमे बडी होस्पीटल बनवा रहे हो..? क्या ये सच हे..?
राजीव : (खुस होते) भाइ तबतो बहुत ही अच्छा हे.. इस गांवमे अेक बडी होस्पीटलकी सख्त जरुरत हे.. आप सृतीकोभी इधर गांवमे बुलालो..
देवायत : (हसते) जी पापा.. देखते हे.. हमे सरकार जमीन कब दे रहीहे.. स्कुलकी जमीनतो हमे देदी.. तो वहा अेक हप्तेमे कामभी सुरु होजायेगा.. मेने इस बारेमे सृतीसे बातभी करली हे.. अब आगे देखते हे..
राजीव : बेटा.. अगर स्कुल खुल रहीहे तो आप भावुका भी देखलो.. वो भी पढी लीखी हे तो अपने पावपे खडी होके कुछ कर लेगी.. बस हमे सीर्फ उनकीही चीन्ता हे..
देवायत : (मुस्कुराते) पापा भावुकी चीन्तातो छोड ही दो.. अब सब ठीक हो गया हे.. भावुभी वहा रहेने के लीये राजी होगइ हे.. फीरभी मे हुनां.. अगर भावुको कुछ हुआतो उनको मेरे साथही रखुगा.. ओर स्कुलमेभी नोकरीपे लगा दुगा..
राजीव : (खुस होते) चलो तबतो अच्छा हे अब उनकी चीन्ता नही करनी.. बस अेकही बीनंती हे आपसे.. अगर मुजे कुछ होजाये तो आप नीमुका खयाल रखीयेगा.. मे उनको वहा अकेली रखना नही चाहता.. इनको आपके साथ रखना.. बस यही कहेनाथा आपसे..
नीर्मला : (आंख गीली करते) अरे आप कैसी बाते कर रहे हे..? आपको कुछ नही होगा.. हमारा देवु हेनां..?
देवायत : पापा आपको कुछ नही होगा.. मे हुनां..? आप अैसा क्यु गलत सोचते हे..? इनको मे मरते दम तक मेरे साथ रखुगा.. आइ प्रोमीस.. बस..? आप उल्टा सीधा सोचना छोड ही दो..
पुनम : (बहार आते) भाइ.. मम्मी पापा.. चलो.. चाइ नास्ता रेडी हे.. आकर बैठ जाओ..
कहेते पुनम वापस कीचनमे चली गइ.. तब राजीव ओर नीर्मला उनको देखतेही रहे.. ओर तीनो उठकर डाइनींगपे चले गये.. तब दया ओर पुनम चाइ नास्ता लेकर आगइ.. ओर सब बैठकर चाइ नास्ता करने लगे.. तो नीर्मला ओर पुनम देवायतके आसपास बगल वाली चेयरपे बैठ गइ.. तभी..
नीर्मला : पुनो बेटा.. सारा दीन घरमे अकेली रहेके बोर होजाओतो सेटर डे सन्डे अपने मायके घुमने चली जाना.. तो थोडा फ्रैस होजाओगी..
पुनम : (सरमाते हसते) जी मम्मीजी..
दया : (हसते) मालकीन इसीलीये तो मे इनके साथ आइ हु.. इनको अकेली थोडीना रहेने दुगी.. हें..हें..हें..
राजीव : (हसते) दया तुमभी साथ चली जाना.. तो वहा सबको मीलकर तुजेभी अच्छा लगेगा.. इतने सालो तक तुमभी वहा रही हो.. तो वो तेराभी घर हे..
तभी पुनमके मोबाइलकी रींग बजती हे तो वो उठकर मोबाइल के पास चली गइ.. ओर फोन उठाकर बात करने लगी.. फीर बात करके वापस आकर बैठ गइ ओर देवायतके सामने देखके कातीलाना स्माइल करने लगी.. फीर सबने चाइनास्ता करलीया तो नीर्मला जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो राजीवभी फ्रेस होने अपने रुमके बाथरुममे चला गया.. तब पुनम देवायतको इसारेसे दुसरे रुममे बुलाती हे..
तो देवायत उठकर धीरेसे वही चला गया.. तब पुनम रुममे आतेही जटसे देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतके होठोको चुमने लगी.. फीर उनसे अलग होतेही धीरेसे बात करने लगी..
पुनम : (होंठ चुमते धीरेसे) भाइ.. लगता हे मे आपके पास जल्द आजाउगी..
देवायत : (मुस्कुराते) क्यु..? तुजे अैसा क्यु लगता हे..? कीसका फोन था..?
पुनम : (कातील स्माइल करते) हमारी होस्टेलकी मेडमका.. मेरी उनसे अच्छी पटती हे.. आज अभी धिरेन होस्टेल गयेथे.. नीलुको अेक घंटेके लीये कही ले गये हे.. बस ये बात अभी कीसीको मत कहेना.. आगे देखो होता हे क्या.. मे सेटर डे संन्डे उधर घरपे आ रही हु.. भाभीको कहेना.. वरना आप आकर हमे लेजाना..
देवायत : (हसते) हंम.. तुम टेन्शन मतलेना.. मंजु सब सम्हाल लेगी.. चल बहार वरना.. अभी दोनो आजायेगे..
फीर दोनोही बहार आगये.. तब कुछ देरके बाद नीर्मला ओर राजीवभी बेग लेकर बहार आगये तो देवायतने नीर्मलाके पाससे बेग लेली तब पुनम ओर दया राजीव ओर नीर्मलाके पैर छुने लगी.. तब दोनोने आशीर्वाद दीया.. ओर राजीवने दोनोको सगुनके तौरपे कुछ पैसेभी दीये.. तब पुनम देवायतके पास जाकर उनको हग करलेती हे.. ओर सबलोग बहार आगये..
फीर तीनो कारमे बैठ गये तब पुनम ओर दया वही दरवाजेपे खडी रहेकर उनको वीदा करने लगी.. ओर कार देवायतके गांवकी ओर चल पडी.. इघर धिरेन अपने गांवकी ओर आ रहाथा.. आज उसने नीलमके साथ बीताये पलसे बहुतही खुस ओर उतेजीत था.. उनको पता नही थाकी उनकी अेक अेक हरकत उनकी बीवी पुनमको पता चल जाती थी.. ओर पुनमभी इन दोनोके रीलेशन देखके मजा ले रहीथी..
पुनमको बाबाकी ओर मंजुकी अेक अेक बात सच होते दीख रहीथी.. धिरेन अब जल्दसे जल्द अेक मकान ओर अेक कारका इन्तजाम करना चाहता था.. तो दुसरी ओर देवायत आधेही घंटेमे गांवमे पहोंच गया.. ओर सीधा हवेलीपे जाके रुक गया.. तो मंजु चंदा ओर भावना.. तीनोको देखकर खुस होने लगी.. ओर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तब अभी सीर्फ पांच साडे पांचही बजनेको आयेथे....
कन्टीन्यु