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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १२८/१
यही सब सोचते वोभी नीलमको जल्द से जल्द मीलनेकी प्लानींग करता रहा.. इसीलीयेतो आज उसने देवायतको नीलमसे मीलनेकी बात कही.. लेकीन सबके बारेमे देवायत मंजुसे बहुत कुछ जान चुकाथा.. ओर देवायतने सबको नीलमको मीलनेके लीये मना करदीया.. देवायतभी जानताथा की धिरेन ओर लखनको नीलमको मीलनेके लीये ज्यादा दिन दुर नही रख सकता.. सब अपे अपने विचारोमे खोये हुअे थे.. तब लता पुनम ओर मंजुला धीरेसे बाते करती रही.. ओर सब लोग हवेलीपे आगये....कन्टीन्यु
जैसेही कारकी आवाज आइ चंदा रजीया ओर दया दोडके बहार आगइ.. भावना अपनी बच्चीको लेकर वही खडी रही.. सब लोग कारसे उतरे तो चंदा दोडकर धिरेनके पास चली गइ.. तो धिरेनने उनके पांव छुअे.. तो पुनमभी उनको भाभी कहेते गले लग गइ.. फीर लता लखनने भी चंदाके पांव छु लीये.. तो चंदाने उनको भी गले लगाया.. तब रजीया सीर्फ लखनको देखते सरमाते हसती रही.. ओर लखनने दया ओर रजीयाको भी गले लगाया..
दया : (हसते) कहो लखनभैया.. कैसी रही आपकी हनीमुनकी टुर..
लखन : (हसते) दया बहुतही मस्त.. हें..हें..हें..
लखन जवाबतो दयाको दे रहाथा लेकीन देखताथा रजीयाकी ओर.. तब रजीया सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर लखन लताका सामान लेकर उपरकी ओर चलने लगी.. तो दयानेभी पुनम धिरेनका सामान लेलीया ओर उपरकी मंजीलपे उनके कमरेमे रखने चली गइ.. फीर सबलोग होलमे आगये.. ओर अपने अपने रुममे फ्रेस होनेके लीये चले गये.. तब भावना अपने रुममे जाकर बच्चीको दुध पीलाने लगी..
तो उपर जातेही लता बाथरुममे घुस गइ तो लखनभी दोडकर उनके साथ घुस गया.. ओर लखनने लताको अंदरही दबोच लीया.. तब लता जोरोसे हसते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर लखनने लताको पीछेसे पकडकर उनकी अेक टांग उची करके अपना लंड लताकी चुतमे पीछेसे घुसा दीया.. तब थोडी ही देरके बाद लखन लताकी खडे खडे ही चुदाइ कर रहा था.. तब लताभी हसते हसते मदहोस होने लगी ओर अपना अेक पैर उचा करते लखनको चुदवानेमे साथ देने लगी..
तो धिरेननेभी रुममे जातेही पुनमको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनके होठ चुमने लगा तब पुनम बहुत सरमाइ.. ओर लखनका साथ देती रही.. वैसेभी अपने भाइको देखकर वो काफी गरम हो चुकी थी.. तो धिरेनको ही देवायत समजकर धिरेनको प्यार करने लगी.. ओर धिरेन पुनमके बुब्सको मसलने लगा..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही.. धिरेन.. प्लीज.. अभी नही.. नीचे सब वेइट करते होगे.. आप रातमे करलेना..
धिरेन : पुनो तुम क्या मस्त लग रही हो.. तुजे देखतेही हर वक्त प्यार करनेका मन करता हे.. चलना अेक बार करलेते हे.. अभी होजायेगा.. फीर रातमे आरामसे करेगे..
पुनम : (सरमाते हसते) नही धिरेन.. प्लीज थोडा सबर करलो.. कलतो हम घर जाही रहे हे.. तब आपको जीतना प्यार करना हे कर लीजीयेगा.. दिनमे भी.. मे मना नही करुगी.. लेकीन अभी नही प्ली..ज..
धिरेन : (हसते पुनमको छोडते) ओके.. चल.. लेकीन याद रखना.. फीर कल मुकर मत जाना.. मे दिनमेभी तुजे कभी भी प्यार करलुगा.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते) हां कर लेना.. आपकोतो जब देखो प्यारही करना हे.. अबतो आपकी बीवी हु आपको मना थोडीना कर सकती हु.. हें..हें..हें..
धिरेन : पुनो.. क्या दयाभी वहा आ रही हे..? अगर वो साथमे होगीतो.. फीर..
पुनम : (हसते) जानु.. मुजे खाना बनाने कहा आता हे..? बस थोडा थोडा आता हे.. तो भाभी उनको काम करनेके लीये भेज रही हे.. ओर वैसेभी आप चीन्ता मत करो.. वो उपर हमारे कमरेमे बगैर परमीशन नही आयेगी.. तो हम आरामसे प्यार कर सकते हे.. अब चलीये फ्रेस होजाइये.. फीर मे होजाती हु..
कहेते ही धिरेन हसते हुअे बाथरुममे घुस गया.. जब सबलोग फ्रेस गये तो नीचे आगये.. तब लता आतेही कीचनमे काम करने चली गइ.. तो वहा रजीया दया ओर चंपाभाभीने उसे काम करनेको मना करदीया ओर बहार नीकाल दिया.. तो मंजु भावना ओर पुनम हसने लगी.. ओर लताभी सरमाकर हसती हुइ भावनाके पास चली गइ.. ओर उनके पास जाकर बैठ गइ तो भावनाने प्यारसे उनके गाल सहेलाये..
भावना : (प्यारसे धीरेसे हसते) अरे मेरी प्यारी बहेना.. यहा इतने काम करने वाली हे.. तो तुजे काम करनेकी क्या आवस्यक्ता हे..? हंम.. क्या हनीमुनपे घुम आये..?
लता : (सरमाते हसते धीरेसे) हां भाभी.. ओह.. सोरी.. हां दीदी.. हें..हें..हें.. कहो.. आप कैसी हो..?
भावना : (हसते) बस यहातो मजेमे हु.. तु बता.. कैसा रहा तेरा हनीमुन.. कुछ अन्जोय बेन्जोय कीयाकी नही..? देख तेरे चहेरेपे कैसा नीखार आ गया हे.. हें..हें..हें..हें..
लता : (सर्मसार होते हसते धीरेसे.) हां दीदी.. बहुत अन्जोय कीया.. बहुत मजा आया.. (धीरेसे) दीदी.. क्या भाइसे कुछ बात हुइ..? या कीसी ओरसे.. मतलब.. आपने क्या सोचा हे..?
लता : (धीरेसे) छोटी.. अभीतो चार बजनेको आये हे.. फीर चाइ नास्ता करके तुम मेरे रुममे आना.. हम दोनो अकेली होगी तब वहा बेठकर हम दोनो आरामसे बात करेगे.. ओके..?
लता : (सरमाकर हसते) जी दीदी..
चंदा : (हसते) अरे दोनो ननंद भोजाइ आपसमे क्या खुसर पुसर कर रही हो.. हमे भी बताओ.. हें..हें..हें..
भावना : (हसते) मौसी कुछ नही.. बस अैसेही बात कर रही थी.. ओर सुनीये.. ये मेरी ननंद नही हे..
लता : (सरमाते हसते) हां भाभी.. अब ये मेरी बडी दीदी हे.. अब भाभीतो सीर्फ रमाभाभी ही हे..
मंजुला : (हसते) अरे वाह.. मेरी देवरानीतो बहुत सयानी हो गइ हे.. क्या बात हे.. ब..डी..दी..दी..? हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) हा भाभी.. भाइने रमाभाभीसे सादी कीहे उनसे पहेलेही हम दोनो बहेने होगइ हे..
मंजुला : (हसते) चलो अच्छा हुआ.. कमसे कम उन घरमे भावनाका कोइ हम दर्द तो हे.. वरना तो इधर कीसीसे ज्यादा बात ही नही करती.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) भाभी.. चाहो जो भी परीस्थीती हो.. मे हमेसा भावना दीदीका ही साथ दुगी..
कहातो भावनाने इमोस्नल होते लताको बैठेही गले लगा लीया.. तभी धिरेन लखन ओर देवायतभी वहा आकर बैठ गये.. तो लता वहासे खडी होने लगी.. तो मंजुने हसते हुअे जबरदस्तीसे उनको हाथ पकडकर वापस बीठा दीया.. तब लता बहुतही सरमाइ.. तभी मंजुने कहा..
मंजुला : लता.. देख अबतो आये दिन सीर्फ हमही घरपे होगे.. मुजे अच्छा लगा तुमने तेरे जेठका रीस्पेक्ट कीया.. ओर खडी होगइ.. लेकीन.. अब हमे बदलना होगा.. कोइ महेमान घरपे हो तब ठीक हे.. लेकीन जब घरके सब लोग हो.. तो तुजे उठकर जानेकी जरुरत नही हे.. येभी तुम्हारे बडे भाइ ही हे.. ओके..? इनसेभी तुम बीन्दास्त बाते कीया कर..
लता : (सर्मसार होते हसते) जी भाभी.. कभी कभी बात करती हु..
मंजुला : (हसते प्यारसे सरको सहेलाते) सुन.. तुम्हारे लीये ओर लखनके लीये अेक खुस खबरी हे..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या भाभी.. हमारे लीये..? क्या खुस खबरी हे..?
मंजुला : (हसते) हां.. तुम दोनोके लीये.. सुन.. अब तुम अपनी बीवीके साथ सहेरमे रहेने जा रहे हो.. हमारे बंगलोपे.. अब तेरे भाइने डीसाइड कीया हेकी तुम अब वही रहेकर हमारा कारोबार देखोगे..
लखन : (आस्चर्यसे देवायतकी ओर देखते) भाइ..? ये भाभी क्या केह रही हे..?
देवायत : (हसते) हां लखन.. भानु तुजे वहाका सब सीखा देगा.. ओर वैसेभी तुम दोनो सहेरमे जाते यही तो करते हो.. तो मे चाहता हु.. की अब तुम वोही सब काम अकेला सम्हालो.. ओर भानु यहाकी खेतीबाडी देखेगा.. अब सहेरमेभी हमारा घरका कोइतो होना चाहीये.. ताकी जब हम वहा आयेतो हमे मस्त खानाभी मीले.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) हां भाइ.. आप आइअेतो सही.. मे आपको मस्त खाना खीलाउगी..
चंदा : (जोरोसे हसते) लोजी.. देवु.. आपके खानेकी समस्यातो हल हो गइ.. हें..हें..हें..
कहातो सब जोरोसे हसते लगे.. तब लता बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर देवायतकी ओर तीरछी नजरोसे देखते हसती रही.. तभी लखनने कहा..
लखन : (हसते) लेकीन भाइ.. क्या आपको लगता हे मे ये सब अकेला सम्हाल पाउगा..?
देवायत : (हसते) हां मुजे मेरे भाइपे पुरा यकीन हे.. की वो सब अकेला सम्हाल लेगा..
लता : (सरमाते हसते) लेकीन भाभी.. मे अभी अभी तो यहा सादी करके आइ हु.. तो क्या कुछ दिन मे आप सबके साथ यहा नही रेह सकती..?
मंजुला : अरे मेरी बच्ची.. बीलकुल रेह सकती हे.. तुजे जबभी यहा आनेका मन करे चली आना.. ओर जीतना दिन यहा रहेना हो रहेना बस..? अबतो खुस..?
लता : (सरमाते हसते) भाभी.. तो फीर आपके देवरका खाना पीना.. आइ मीन.. वो सब..
मंजुला : (हसते) हां.. मुजे पता हे.. लेकीन इनकी फीकर तुम मत करना.. क्युकी तुम दोनो अकेले थोडीना जा रहे हो.. आपके साथ वहा रजीयाभी तो आ रही हे.. तुम अकेली इतना बडे बंगलेका काम थोडीना देख सकती हो..? इसके लीये रजीया तुम दोनोका खानाभी देख लेगी ओर तुम्हारे काममे हाथभी बटायेगी..
इताना सुनतेही कीचनमे रजीया खुसीओके मारे पानी पानी होगइ.. ओर अेकदम सरमाके दयाको गले लग गइ.. तो दयानेभी उसे कसके गले लगा लीया.. ओर रजीयाका चहेरा अपनी हथेलीओमे थामकर आंखोमे देखा.. तो रजीया नजरे जुकाते मंद मंद मुस्कुराने लगी.. आखीर मंजुने उनका काम करही दीया..
दया : (धीरेसे हसते) देखा रजु.. आखीर भाभीने तेरा काम आसान कर ही दीया.. जा.. जीले अपनी जींदगी.. बस खयाल रखना.. की अभी तुम दोनो कीसीकी नजरमे ना आओ.. भाभी धीरे धीरे करते सब सही कर देगी..
रजीया : (सरमाते हसते) जी दीदी.. आइ लव यु..
दया : (सर चुमते) हंम.. आइ लव यु टु.. जा बहेन.. तु साथ जानेमे मना मत करना उनके साथ चली जाना.. मेभी पुनोदीदीके साथ जा रही हु.. अब यहा चंपाभाभी सब सम्हाल लेगी..
चंपा : (हसते) हां रजीया.. अबतो मे यही हु.. तुम दोनो यहाकी फीकर मत करना.. चलो अब चाइ नास्ता बन गया हे तो सबको देदो.. सब वेइट कर रहे हे..
जब सब चाइ नास्ता कर रहेथे तब मंजुने देवायतको कल सादीमे आनेके लीये रमेश सुधीर ओर रश्मीभाभी को न्योता देनेको कहा.. फीर सबने चाइ नास्ता करलीया तो लखन ओर धिरेन अपने खेतोपे चले गये.. तो पुनम ओर लताभी उपरकी मंजीलपे अपने कमरेमे चली गइ.. ओर वहा दोनोही बेडपे बैठकर बाते करने लगी.. तब लताने उस दिनकी दोनोके बीच हुइ अधुरी बातको फीरसे याद करके दोहराया..
तब पुनमने आज लताको सब कुछ खुलकर बतानेका नीर्णय कर लीया.. क्युकी इतने दिनोमे साथ रहेनेकी वजहसे पुनमने लताका दिल जीत लीयाथा.. ओर लताको सब परीस्थीतीको फेस करने मानसीक रुपसे तैयार कर दीयाथा.. पुनमने लताको वो सब कौन हे.. ओर यहा कीस मक्सदसे जन्म लेकर आयेहे.. आने वाले दिनोमे यहा क्या बदलाव आने वाला हे.. ओर धिरेन ओर लखन नीलमके बारेमे सब कुछ खुलकर बता दीया..
तो लता आस्चर्य भावसे सब सुनती रही.. पुनमने आनेवाले भविष्यके बारेमे लखनकी कुछ बाते छोडके कुछ बाते बतादी.. ओर पुनमने लताको अब कीसी भी रीस्तोमे इन्टरफीयर नही कहेन की सलाह दी.. ओर दोनोही बाते करते वही बैठी रही.. पुनमने लताको लखनका दुसरी लडकीयोसे अवैध रीस्ते ओर रजीयाके साथ सादीके बारेमे अभी नही बताया.. क्युकी लखन लताकी अभी अभीतो सादी हुइ थी..
लेकीन पुनमने भविस्यमे लताका देवायतके साथ रीलेशनकी थोडी हीन्ट जरुर दी.. जीसे सुनकर लता बहुतही सर्मसार रोमांचीत होगइ.. तो दुसरी ओर नीचे मंजुके रुममे मंजु चंदा ओर भावना कलकी सादीकी तैयारीया करने लगी.. देवायत हवेलीसे नीकलतेही सीधाही पंचायतकी ओफीसमे चला गया.. तो वहा सीर्फ रश्मी ओर वंदना आपसमे बैठकर बाते कर रही थी.. तो दोनोही देवायतको देखकर सरमा गइ.. ओर हसते हुअे उनको बैठनेके लीये कहा..
रश्मी : (हसते) कहो देवरजी.. आज इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? हें..हें..हें.. मुजे मीलने आये होकी वंदुको.. हें..हें..हें..
कहातो वंदना सर्मसार होगइ..ओर रश्मीको अेक मुका मारते दुसरी ओर मुह करते हसने लगी..
देवायत : (हसते) दोनोको.. आप दोनोको कल हमारे साथ आश्रमपे आना हे.. मेरी सादी हे सृतीके साथ..
रश्मी : (जोरोसे हसते) कीतने कमीने हो.. सादी पे सादी कीये ही.. जा रहे हो.. बीवीओसे थकते ही नही..
देवायत : (हसते) अरे.. बीवीओसे कोइ थोडीना थकता हे.. कहोतो तुम दोनोसे भी सादी करलु.. हें..हें..हें..
रश्मी : (कहातो वंदना सर्मसार होगइ) देवरजी अबतो मे विधवा होगइ हु.. हां अगर वंदु तैयार हे तो आप उनसे सादी कर सकते हो.. हें..हें..हें.. क्यु वंदु..? करनी हे सादी इनसे..? हें..हें..हें..
वंदना : (अेकदम सरमाते रश्मीको बाजुमे मुका मारते) भाभी.. कीतनी बेसर्महो आप.. चलो मे चलती हु..
रश्मी : (जोरोसे हसते) अरे बैठना मेतो मजाक कर रहीथी.. बैठ अब नही कहुगी.. कीतने दिनोके बादतो ये हाथमे आये हे.. कहो देवु.. हमे कब नीकलना हे..? ओर कौन कोन आ रहे हे..?
देवायत : (हसते) बस.. आप ओर रमेशकी फेमीली ओर सुधीर नीशाभाभी.. ओर हम सब घरके ही लोग.. ओर भानुकी फेमीली आयेगी.. बस कीसी ओरको नही कहेना..
रश्मी : (हसते) ठीक हे.. हम सब सुबह आपके घरपे आजायेगे.. ओर सुनीये.. वो मेरे घरका काम सुरु करवा दीया हे.. बस अेक महीनेमे कंपलीट होजायेगा.. ओर स्कुलके लीयेभी परमीशन आगइ हे.. कल ही आइ..
देवायत : (हसते) अरे वाह.. इतनी जल्दी आगइ..? तबतो उनकाभी टेन्डर नीकलवाके काम सुरु करदो..
रश्मी : हां सायद रमेशभाइ इसीलीये कीसी कोन्टड्ढाक्टरको मीलने दुसरे गांव गये हे.. देखते हे कल.. क्या करके आयेहे.. ओर देवु.. आसपासके बहुत सारे बच्चेका अेडमीशनभी हो रहा हे.. ये हमारे लीये अच्छा हे.. क्या पुनो लता जो घुमने गइथी.. वो आगइ..?
देवायत : (हसते) हां.. अभी दो घंटे पहेलेही उनको लेकर आये हे.. (वंदनाकी ओर देखते) वंदना.. तुम पुनोको मील लेना.. सायद कल वो सीधे आश्रमसे ही अपने घर चले जायेगे..
वंदना : (सरमाते धीरेसे) जी.. आज ही मील लुगी.. क्या आप हमारे घर जा रहे हे..?
देवायत : (हसते) हां.. पहेले सुधीरके घर जाकर उसे न्योता दे दु.. फीर तेरे घर चला जाउगा.. सायद तबतक रमेश भी आजाये.. क्यु.. तुजे घर आना हे..? तो चल छोड देता हु..
नंदना : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. मेतो बस अैसेही केह रहीथी..
रश्मी : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आपकी कल सादी हे तो.. आप कब फ्रि होजायेगे..?
देवायत : हमं.. सायद परसो.. या उनके बाद.. क्यु..? कुछ काम था..?
रश्मी : (वंदनाकी ओर हसते देखते) हां अेक जरुरी काम था.. आप दो दिनके बाद मेरे घर आजाना अेक जरुरी काम हे.. मे आपको वही बताउगी.. बहुत जरुरी हे..
देवायत : (हसते) अरे इतना जरुरी हेतो.. दो दिनके बाद क्यु..? अभी बतादो..
रश्मी : (वंदनाकी ओर कातील स्माइलसे देखते) अरे नही नही.. अभी नही आप जब मेरे घर आओगे तभी बताउगी.. मुजे आपकी कसीसे मीलवाना हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे आजाउगा.. सायद दो दिन नइ बीवीके साथ रहेना पडे.. मे ओर मंजु दोनो ही वही रुकेगे.. वो मंजुकी सहेलीजो हे.. ठीक हे चलो मे चलता हु.. तुम दोनो सुबह टाइमपे घर आजाना..
अध्याय - १२८/१
यही सब सोचते वोभी नीलमको जल्द से जल्द मीलनेकी प्लानींग करता रहा.. इसीलीयेतो आज उसने देवायतको नीलमसे मीलनेकी बात कही.. लेकीन सबके बारेमे देवायत मंजुसे बहुत कुछ जान चुकाथा.. ओर देवायतने सबको नीलमको मीलनेके लीये मना करदीया.. देवायतभी जानताथा की धिरेन ओर लखनको नीलमको मीलनेके लीये ज्यादा दिन दुर नही रख सकता.. सब अपे अपने विचारोमे खोये हुअे थे.. तब लता पुनम ओर मंजुला धीरेसे बाते करती रही.. ओर सब लोग हवेलीपे आगये....कन्टीन्यु
जैसेही कारकी आवाज आइ चंदा रजीया ओर दया दोडके बहार आगइ.. भावना अपनी बच्चीको लेकर वही खडी रही.. सब लोग कारसे उतरे तो चंदा दोडकर धिरेनके पास चली गइ.. तो धिरेनने उनके पांव छुअे.. तो पुनमभी उनको भाभी कहेते गले लग गइ.. फीर लता लखनने भी चंदाके पांव छु लीये.. तो चंदाने उनको भी गले लगाया.. तब रजीया सीर्फ लखनको देखते सरमाते हसती रही.. ओर लखनने दया ओर रजीयाको भी गले लगाया..
दया : (हसते) कहो लखनभैया.. कैसी रही आपकी हनीमुनकी टुर..
लखन : (हसते) दया बहुतही मस्त.. हें..हें..हें..
लखन जवाबतो दयाको दे रहाथा लेकीन देखताथा रजीयाकी ओर.. तब रजीया सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर लखन लताका सामान लेकर उपरकी ओर चलने लगी.. तो दयानेभी पुनम धिरेनका सामान लेलीया ओर उपरकी मंजीलपे उनके कमरेमे रखने चली गइ.. फीर सबलोग होलमे आगये.. ओर अपने अपने रुममे फ्रेस होनेके लीये चले गये.. तब भावना अपने रुममे जाकर बच्चीको दुध पीलाने लगी..
तो उपर जातेही लता बाथरुममे घुस गइ तो लखनभी दोडकर उनके साथ घुस गया.. ओर लखनने लताको अंदरही दबोच लीया.. तब लता जोरोसे हसते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर लखनने लताको पीछेसे पकडकर उनकी अेक टांग उची करके अपना लंड लताकी चुतमे पीछेसे घुसा दीया.. तब थोडी ही देरके बाद लखन लताकी खडे खडे ही चुदाइ कर रहा था.. तब लताभी हसते हसते मदहोस होने लगी ओर अपना अेक पैर उचा करते लखनको चुदवानेमे साथ देने लगी..
तो धिरेननेभी रुममे जातेही पुनमको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनके होठ चुमने लगा तब पुनम बहुत सरमाइ.. ओर लखनका साथ देती रही.. वैसेभी अपने भाइको देखकर वो काफी गरम हो चुकी थी.. तो धिरेनको ही देवायत समजकर धिरेनको प्यार करने लगी.. ओर धिरेन पुनमके बुब्सको मसलने लगा..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही.. धिरेन.. प्लीज.. अभी नही.. नीचे सब वेइट करते होगे.. आप रातमे करलेना..
धिरेन : पुनो तुम क्या मस्त लग रही हो.. तुजे देखतेही हर वक्त प्यार करनेका मन करता हे.. चलना अेक बार करलेते हे.. अभी होजायेगा.. फीर रातमे आरामसे करेगे..
पुनम : (सरमाते हसते) नही धिरेन.. प्लीज थोडा सबर करलो.. कलतो हम घर जाही रहे हे.. तब आपको जीतना प्यार करना हे कर लीजीयेगा.. दिनमे भी.. मे मना नही करुगी.. लेकीन अभी नही प्ली..ज..
धिरेन : (हसते पुनमको छोडते) ओके.. चल.. लेकीन याद रखना.. फीर कल मुकर मत जाना.. मे दिनमेभी तुजे कभी भी प्यार करलुगा.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते) हां कर लेना.. आपकोतो जब देखो प्यारही करना हे.. अबतो आपकी बीवी हु आपको मना थोडीना कर सकती हु.. हें..हें..हें..
धिरेन : पुनो.. क्या दयाभी वहा आ रही हे..? अगर वो साथमे होगीतो.. फीर..
पुनम : (हसते) जानु.. मुजे खाना बनाने कहा आता हे..? बस थोडा थोडा आता हे.. तो भाभी उनको काम करनेके लीये भेज रही हे.. ओर वैसेभी आप चीन्ता मत करो.. वो उपर हमारे कमरेमे बगैर परमीशन नही आयेगी.. तो हम आरामसे प्यार कर सकते हे.. अब चलीये फ्रेस होजाइये.. फीर मे होजाती हु..
कहेते ही धिरेन हसते हुअे बाथरुममे घुस गया.. जब सबलोग फ्रेस गये तो नीचे आगये.. तब लता आतेही कीचनमे काम करने चली गइ.. तो वहा रजीया दया ओर चंपाभाभीने उसे काम करनेको मना करदीया ओर बहार नीकाल दिया.. तो मंजु भावना ओर पुनम हसने लगी.. ओर लताभी सरमाकर हसती हुइ भावनाके पास चली गइ.. ओर उनके पास जाकर बैठ गइ तो भावनाने प्यारसे उनके गाल सहेलाये..
भावना : (प्यारसे धीरेसे हसते) अरे मेरी प्यारी बहेना.. यहा इतने काम करने वाली हे.. तो तुजे काम करनेकी क्या आवस्यक्ता हे..? हंम.. क्या हनीमुनपे घुम आये..?
लता : (सरमाते हसते धीरेसे) हां भाभी.. ओह.. सोरी.. हां दीदी.. हें..हें..हें.. कहो.. आप कैसी हो..?
भावना : (हसते) बस यहातो मजेमे हु.. तु बता.. कैसा रहा तेरा हनीमुन.. कुछ अन्जोय बेन्जोय कीयाकी नही..? देख तेरे चहेरेपे कैसा नीखार आ गया हे.. हें..हें..हें..हें..
लता : (सर्मसार होते हसते धीरेसे.) हां दीदी.. बहुत अन्जोय कीया.. बहुत मजा आया.. (धीरेसे) दीदी.. क्या भाइसे कुछ बात हुइ..? या कीसी ओरसे.. मतलब.. आपने क्या सोचा हे..?
लता : (धीरेसे) छोटी.. अभीतो चार बजनेको आये हे.. फीर चाइ नास्ता करके तुम मेरे रुममे आना.. हम दोनो अकेली होगी तब वहा बेठकर हम दोनो आरामसे बात करेगे.. ओके..?
लता : (सरमाकर हसते) जी दीदी..
चंदा : (हसते) अरे दोनो ननंद भोजाइ आपसमे क्या खुसर पुसर कर रही हो.. हमे भी बताओ.. हें..हें..हें..
भावना : (हसते) मौसी कुछ नही.. बस अैसेही बात कर रही थी.. ओर सुनीये.. ये मेरी ननंद नही हे..
लता : (सरमाते हसते) हां भाभी.. अब ये मेरी बडी दीदी हे.. अब भाभीतो सीर्फ रमाभाभी ही हे..
मंजुला : (हसते) अरे वाह.. मेरी देवरानीतो बहुत सयानी हो गइ हे.. क्या बात हे.. ब..डी..दी..दी..? हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) हा भाभी.. भाइने रमाभाभीसे सादी कीहे उनसे पहेलेही हम दोनो बहेने होगइ हे..
मंजुला : (हसते) चलो अच्छा हुआ.. कमसे कम उन घरमे भावनाका कोइ हम दर्द तो हे.. वरना तो इधर कीसीसे ज्यादा बात ही नही करती.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) भाभी.. चाहो जो भी परीस्थीती हो.. मे हमेसा भावना दीदीका ही साथ दुगी..
कहातो भावनाने इमोस्नल होते लताको बैठेही गले लगा लीया.. तभी धिरेन लखन ओर देवायतभी वहा आकर बैठ गये.. तो लता वहासे खडी होने लगी.. तो मंजुने हसते हुअे जबरदस्तीसे उनको हाथ पकडकर वापस बीठा दीया.. तब लता बहुतही सरमाइ.. तभी मंजुने कहा..
मंजुला : लता.. देख अबतो आये दिन सीर्फ हमही घरपे होगे.. मुजे अच्छा लगा तुमने तेरे जेठका रीस्पेक्ट कीया.. ओर खडी होगइ.. लेकीन.. अब हमे बदलना होगा.. कोइ महेमान घरपे हो तब ठीक हे.. लेकीन जब घरके सब लोग हो.. तो तुजे उठकर जानेकी जरुरत नही हे.. येभी तुम्हारे बडे भाइ ही हे.. ओके..? इनसेभी तुम बीन्दास्त बाते कीया कर..
लता : (सर्मसार होते हसते) जी भाभी.. कभी कभी बात करती हु..
मंजुला : (हसते प्यारसे सरको सहेलाते) सुन.. तुम्हारे लीये ओर लखनके लीये अेक खुस खबरी हे..
लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या भाभी.. हमारे लीये..? क्या खुस खबरी हे..?
मंजुला : (हसते) हां.. तुम दोनोके लीये.. सुन.. अब तुम अपनी बीवीके साथ सहेरमे रहेने जा रहे हो.. हमारे बंगलोपे.. अब तेरे भाइने डीसाइड कीया हेकी तुम अब वही रहेकर हमारा कारोबार देखोगे..
लखन : (आस्चर्यसे देवायतकी ओर देखते) भाइ..? ये भाभी क्या केह रही हे..?
देवायत : (हसते) हां लखन.. भानु तुजे वहाका सब सीखा देगा.. ओर वैसेभी तुम दोनो सहेरमे जाते यही तो करते हो.. तो मे चाहता हु.. की अब तुम वोही सब काम अकेला सम्हालो.. ओर भानु यहाकी खेतीबाडी देखेगा.. अब सहेरमेभी हमारा घरका कोइतो होना चाहीये.. ताकी जब हम वहा आयेतो हमे मस्त खानाभी मीले.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) हां भाइ.. आप आइअेतो सही.. मे आपको मस्त खाना खीलाउगी..
चंदा : (जोरोसे हसते) लोजी.. देवु.. आपके खानेकी समस्यातो हल हो गइ.. हें..हें..हें..
कहातो सब जोरोसे हसते लगे.. तब लता बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर देवायतकी ओर तीरछी नजरोसे देखते हसती रही.. तभी लखनने कहा..
लखन : (हसते) लेकीन भाइ.. क्या आपको लगता हे मे ये सब अकेला सम्हाल पाउगा..?
देवायत : (हसते) हां मुजे मेरे भाइपे पुरा यकीन हे.. की वो सब अकेला सम्हाल लेगा..
लता : (सरमाते हसते) लेकीन भाभी.. मे अभी अभी तो यहा सादी करके आइ हु.. तो क्या कुछ दिन मे आप सबके साथ यहा नही रेह सकती..?
मंजुला : अरे मेरी बच्ची.. बीलकुल रेह सकती हे.. तुजे जबभी यहा आनेका मन करे चली आना.. ओर जीतना दिन यहा रहेना हो रहेना बस..? अबतो खुस..?
लता : (सरमाते हसते) भाभी.. तो फीर आपके देवरका खाना पीना.. आइ मीन.. वो सब..
मंजुला : (हसते) हां.. मुजे पता हे.. लेकीन इनकी फीकर तुम मत करना.. क्युकी तुम दोनो अकेले थोडीना जा रहे हो.. आपके साथ वहा रजीयाभी तो आ रही हे.. तुम अकेली इतना बडे बंगलेका काम थोडीना देख सकती हो..? इसके लीये रजीया तुम दोनोका खानाभी देख लेगी ओर तुम्हारे काममे हाथभी बटायेगी..
इताना सुनतेही कीचनमे रजीया खुसीओके मारे पानी पानी होगइ.. ओर अेकदम सरमाके दयाको गले लग गइ.. तो दयानेभी उसे कसके गले लगा लीया.. ओर रजीयाका चहेरा अपनी हथेलीओमे थामकर आंखोमे देखा.. तो रजीया नजरे जुकाते मंद मंद मुस्कुराने लगी.. आखीर मंजुने उनका काम करही दीया..
दया : (धीरेसे हसते) देखा रजु.. आखीर भाभीने तेरा काम आसान कर ही दीया.. जा.. जीले अपनी जींदगी.. बस खयाल रखना.. की अभी तुम दोनो कीसीकी नजरमे ना आओ.. भाभी धीरे धीरे करते सब सही कर देगी..
रजीया : (सरमाते हसते) जी दीदी.. आइ लव यु..
दया : (सर चुमते) हंम.. आइ लव यु टु.. जा बहेन.. तु साथ जानेमे मना मत करना उनके साथ चली जाना.. मेभी पुनोदीदीके साथ जा रही हु.. अब यहा चंपाभाभी सब सम्हाल लेगी..
चंपा : (हसते) हां रजीया.. अबतो मे यही हु.. तुम दोनो यहाकी फीकर मत करना.. चलो अब चाइ नास्ता बन गया हे तो सबको देदो.. सब वेइट कर रहे हे..
जब सब चाइ नास्ता कर रहेथे तब मंजुने देवायतको कल सादीमे आनेके लीये रमेश सुधीर ओर रश्मीभाभी को न्योता देनेको कहा.. फीर सबने चाइ नास्ता करलीया तो लखन ओर धिरेन अपने खेतोपे चले गये.. तो पुनम ओर लताभी उपरकी मंजीलपे अपने कमरेमे चली गइ.. ओर वहा दोनोही बेडपे बैठकर बाते करने लगी.. तब लताने उस दिनकी दोनोके बीच हुइ अधुरी बातको फीरसे याद करके दोहराया..
तब पुनमने आज लताको सब कुछ खुलकर बतानेका नीर्णय कर लीया.. क्युकी इतने दिनोमे साथ रहेनेकी वजहसे पुनमने लताका दिल जीत लीयाथा.. ओर लताको सब परीस्थीतीको फेस करने मानसीक रुपसे तैयार कर दीयाथा.. पुनमने लताको वो सब कौन हे.. ओर यहा कीस मक्सदसे जन्म लेकर आयेहे.. आने वाले दिनोमे यहा क्या बदलाव आने वाला हे.. ओर धिरेन ओर लखन नीलमके बारेमे सब कुछ खुलकर बता दीया..
तो लता आस्चर्य भावसे सब सुनती रही.. पुनमने आनेवाले भविष्यके बारेमे लखनकी कुछ बाते छोडके कुछ बाते बतादी.. ओर पुनमने लताको अब कीसी भी रीस्तोमे इन्टरफीयर नही कहेन की सलाह दी.. ओर दोनोही बाते करते वही बैठी रही.. पुनमने लताको लखनका दुसरी लडकीयोसे अवैध रीस्ते ओर रजीयाके साथ सादीके बारेमे अभी नही बताया.. क्युकी लखन लताकी अभी अभीतो सादी हुइ थी..
लेकीन पुनमने भविस्यमे लताका देवायतके साथ रीलेशनकी थोडी हीन्ट जरुर दी.. जीसे सुनकर लता बहुतही सर्मसार रोमांचीत होगइ.. तो दुसरी ओर नीचे मंजुके रुममे मंजु चंदा ओर भावना कलकी सादीकी तैयारीया करने लगी.. देवायत हवेलीसे नीकलतेही सीधाही पंचायतकी ओफीसमे चला गया.. तो वहा सीर्फ रश्मी ओर वंदना आपसमे बैठकर बाते कर रही थी.. तो दोनोही देवायतको देखकर सरमा गइ.. ओर हसते हुअे उनको बैठनेके लीये कहा..
रश्मी : (हसते) कहो देवरजी.. आज इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? हें..हें..हें.. मुजे मीलने आये होकी वंदुको.. हें..हें..हें..
कहातो वंदना सर्मसार होगइ..ओर रश्मीको अेक मुका मारते दुसरी ओर मुह करते हसने लगी..
देवायत : (हसते) दोनोको.. आप दोनोको कल हमारे साथ आश्रमपे आना हे.. मेरी सादी हे सृतीके साथ..
रश्मी : (जोरोसे हसते) कीतने कमीने हो.. सादी पे सादी कीये ही.. जा रहे हो.. बीवीओसे थकते ही नही..
देवायत : (हसते) अरे.. बीवीओसे कोइ थोडीना थकता हे.. कहोतो तुम दोनोसे भी सादी करलु.. हें..हें..हें..
रश्मी : (कहातो वंदना सर्मसार होगइ) देवरजी अबतो मे विधवा होगइ हु.. हां अगर वंदु तैयार हे तो आप उनसे सादी कर सकते हो.. हें..हें..हें.. क्यु वंदु..? करनी हे सादी इनसे..? हें..हें..हें..
वंदना : (अेकदम सरमाते रश्मीको बाजुमे मुका मारते) भाभी.. कीतनी बेसर्महो आप.. चलो मे चलती हु..
रश्मी : (जोरोसे हसते) अरे बैठना मेतो मजाक कर रहीथी.. बैठ अब नही कहुगी.. कीतने दिनोके बादतो ये हाथमे आये हे.. कहो देवु.. हमे कब नीकलना हे..? ओर कौन कोन आ रहे हे..?
देवायत : (हसते) बस.. आप ओर रमेशकी फेमीली ओर सुधीर नीशाभाभी.. ओर हम सब घरके ही लोग.. ओर भानुकी फेमीली आयेगी.. बस कीसी ओरको नही कहेना..
रश्मी : (हसते) ठीक हे.. हम सब सुबह आपके घरपे आजायेगे.. ओर सुनीये.. वो मेरे घरका काम सुरु करवा दीया हे.. बस अेक महीनेमे कंपलीट होजायेगा.. ओर स्कुलके लीयेभी परमीशन आगइ हे.. कल ही आइ..
देवायत : (हसते) अरे वाह.. इतनी जल्दी आगइ..? तबतो उनकाभी टेन्डर नीकलवाके काम सुरु करदो..
रश्मी : हां सायद रमेशभाइ इसीलीये कीसी कोन्टड्ढाक्टरको मीलने दुसरे गांव गये हे.. देखते हे कल.. क्या करके आयेहे.. ओर देवु.. आसपासके बहुत सारे बच्चेका अेडमीशनभी हो रहा हे.. ये हमारे लीये अच्छा हे.. क्या पुनो लता जो घुमने गइथी.. वो आगइ..?
देवायत : (हसते) हां.. अभी दो घंटे पहेलेही उनको लेकर आये हे.. (वंदनाकी ओर देखते) वंदना.. तुम पुनोको मील लेना.. सायद कल वो सीधे आश्रमसे ही अपने घर चले जायेगे..
वंदना : (सरमाते धीरेसे) जी.. आज ही मील लुगी.. क्या आप हमारे घर जा रहे हे..?
देवायत : (हसते) हां.. पहेले सुधीरके घर जाकर उसे न्योता दे दु.. फीर तेरे घर चला जाउगा.. सायद तबतक रमेश भी आजाये.. क्यु.. तुजे घर आना हे..? तो चल छोड देता हु..
नंदना : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. मेतो बस अैसेही केह रहीथी..
रश्मी : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आपकी कल सादी हे तो.. आप कब फ्रि होजायेगे..?
देवायत : हमं.. सायद परसो.. या उनके बाद.. क्यु..? कुछ काम था..?
रश्मी : (वंदनाकी ओर हसते देखते) हां अेक जरुरी काम था.. आप दो दिनके बाद मेरे घर आजाना अेक जरुरी काम हे.. मे आपको वही बताउगी.. बहुत जरुरी हे..
देवायत : (हसते) अरे इतना जरुरी हेतो.. दो दिनके बाद क्यु..? अभी बतादो..
रश्मी : (वंदनाकी ओर कातील स्माइलसे देखते) अरे नही नही.. अभी नही आप जब मेरे घर आओगे तभी बताउगी.. मुजे आपकी कसीसे मीलवाना हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे आजाउगा.. सायद दो दिन नइ बीवीके साथ रहेना पडे.. मे ओर मंजु दोनो ही वही रुकेगे.. वो मंजुकी सहेलीजो हे.. ठीक हे चलो मे चलता हु.. तुम दोनो सुबह टाइमपे घर आजाना..