Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 12 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९९

तब दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकते सो जाती हे.. तब बाजुके रुममे चंदाभी पुरी रात देवायतके नीचे लेटकर चुदवाते थककर चकनाचुर हो चुकीथी.. वो देवायतके बालो ओर पीठ सहेलाती कब नींदकी आगोसमे चली गइ उनको पताही नही चला.. तब देवायतभी अभी तक उनकी चुतमे लंड डालके चंदाके सीनेपे सर रखके सो चुकाथा.. दोनो अनुभुतीमे पुरी रात चुदाइ करते रहे.. जीनकी वजहसे दोनोही थकके सो चुकेथे.. तब गांवमेभी जब सबको होंस आया तब सब फटाफट अपनी जगाह जाकर सोने लगे.. तब ओरते ओर लडकीयाभी महा मुस्कीलसे चलके अपने रुममे जाकर सोगइ....अब आगे

आज सुबहका सुरज नीकला तब अ‍ेक नइ रोसनी ओर नइ उर्जा लेकर नीकला.. आज गांवमे सबकुछ बदल चुकाथा.. आज सभी बहुत देरसे उठे.. तब कीसीको नही पताथाकी आने वाले समयमे गांवमे रीस्तोकी अ‍ेक नइ परंपराकी नीव लग चुकी हे.. कीतनी ओरते ओर लडकीयोके उदर मे अपने यारका बीज स्थापीत हो चुका हे.. गांवमे पुरी रात चुदाइकी वजहसे कीसीको नही पताथा की वो अपने यारसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे..

जब चंदाकी आंख देरसे खुली तब देवायत अभीभी उनकी चुतमे लंड डालके पडाथा.. तब चंदा खुब सरमाइ ओर देवायतको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस करने लगी तब देवायतने आंख खोलकर देखाकी वो अभीभी चंदाके उपर कैसे सोया हुआ हे.. तब चंदाको देखतेही उनका लंड फीरसे तन गया.. ओर चुतके अंदरही जटके मारने लगा.. तब चंदा अपनी चुतमे लंडकी हलचल होतेही खुब सरमाइ ओर देवायतसे नजरे चुराने लगी.. ओर सरमाते धीरेसे कहेने लगी..

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चंदा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. बहुत वजन लग रहा हे.. अब उपरसे हटोना.. आप पुरी रात अ‍ैसेही पडे हे.. मुजेतो आज आपने थका दीया.. कुछ पताही नहीथा की आप कीतनी देर तक करते रहे.. मेतो बेहोसीकी हालतमे चली गइ थी.. जानु अ‍ैसा लगता हे आप पुरी रात अ‍ैसेही अंदर डालके मुजे चोदते रहे हो..

देवायत : (गाल चुमते) अरे.. चंदा अब तुम मेरी बीवी हो.. ओर कल हमारी सुहागरात थी.. तो क्या मे तुजे छोडता..? अबतो हमारी हर रात अ‍ैसेही होगी..

चंदा : (सर्मसार होते) देवु आप पुरी रात मेरी बजाते रहे.. अभी भी जी नही भरा..? देखोना अभीभी आपका अंदर उछल कुद कर रहा हे.. मुजेतो चोद चोदके थका दीया.. अब हटीयेना उपरसे.. मंजु जाग गइ होगी..

देवायत : (हसते) बस अ‍ेक बार मेरी इस खुबसुरत बीवीको अच्छेसे गुडमोर्नींग करलु.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते सीनेमे अ‍ेक मुका मारते) क्या गुड मोर्नींग करलु..? अरे बाबा नीचे बहुत दर्द कर रहा हे.. पुरी राततो मुजे चोदते रहे.. अब कीतनी चुदाइ करनी हे.. इतना तो आपने मुजे कभी नही चोदा.. सारी कशर अ‍ेकही रातमे पुरी करली.. क्या अभीभी आपका जी नही भरा..? अब मुजे हीलनेकी भी ताकात नही हे.. आप कीतना जोसमे चोदते हो.. हमारीतो हालतही खराब कर देते हो..

देवायत : (कमर हीलाते) अरे बस अ‍ेक बार.. फीर मे तुजे बाथरुममे ले चलता हु.. फीर आराम करती रहेनां..

कहेते देवायत चंदाको धीरे धीरे कमर हीलाते चोदने लगा तब चंदाभी समज गइकी उनका पती अब उसे चोदे बगैर मानने वाला नही हे.. तो वोभी देवायतकी पीठ सहेलाते फीरसे गरम होने लगी ओर देवायतका साथ देने लगी.. अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी..

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तब देवायत हाथके बल उचा होकर चंदाको जोरोसे कमर हिलाते चोदता रहा.. ओर चंदाभी देवायतके हर धकेको आहे भरते जेलती रही.. देवायतने सुबहभी चंदाको दो बार जडा दीया.. ओर आखीर दोनोही अ‍ेक दुसरेसे चीपक गये ओर साथमे जड गये..

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तब देवायत जटसे चंदाके उपरसे हट गया.. तो चंदा अ‍ैसेही बेसुध जैसी हालतमे पडी रही.. उनकी चुतसे दोनोका कामरस बहेते नीचे बेडपे गीरने लगा.. तब देवायतने उनकी कमरमे हाथ डालके चंदाको गोदमे उठालीया ओर बाथरुमकी ओर चल पडा.. ओर अंदर जातेही चंदाको कमोडपे बीठा दीया ओर पहेले उनकी चुतकी सीकाइ करदी.. फीर दोनोने नहालीया तब देवायत फीरसे चंदाको गोदमे बहार लेकर आ गया.. ओर चंदाको अ‍ेक खुरसीपे बीठाकर चदरको चेन्ज करलीया तबतक चंदा देवायतको देखती ही रही..

बादमे देवायतने चंदाको उठाकर बेडपे सुला दीया.. ओर उनके उपर चदर डालके जैसेही जानेके लीये पलटा चंदाने फोरन देवायतका हाथ पकडलीया ओर उसे खीचकर अपने सीनेसे लगा लीया.. ओर चंदा देवायतको सीनेसे लगाकर लगातार थेन्कयु थेन्कयु कहे जा रहीथी.. आखीर देवायत सीसेके सामने जाकर तैयार होने लगा.. तभी उनके रुमका दरवाजा कीसीने खटखटाया.. तब देवायत समज गया ओर स्माइल कते दरवाजा खोलता हे..

तब सामने मंजु तैयार होकर मुस्कराते खडीथी.. जैसेही देवायतने दरवाजा खोला वो देवायतको हसते हुअ‍े धका मारके अंदर चली गइ ओर बेडके पास जाकर चंदाकी हालत देखने लगी.. ओर जोरोसे हस पडी.. तब देवायतभी वापस दरवाजा बंध करते हसते हुअ‍े मंजुकी ओर देखता रहा.. तब चंदा आंख बंध करते बेहोसी जैसी हालतमे पडी थी..

तभी मंजु मुस्कराते अपने दांत पीसते जुठे गुसेसे देवायतको मारनेके लीये उनके पीछे दोडने लगी.. तो देवायतभी हसते हुअ‍े बेडके आस पास चकर लगाता रहा.. ओर आखीर हसते हुअ‍े रुक गया.. ओर मंजुको अपनी बाहोमे पकड लीया तब मंजु देवायतकी बाहोमे आतेही उनके सीनेमे मुके मारते हसने लगी.. तो देवायतनेभी मंजुको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तब मंजु आउच.. करते हसने लगी..

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मंजुला : (हसते) जानु आपने मौसीकीतो हालतही खराब करदी.. दोनोने कीतनी बार कीया..? कहा तक जागे थे..? देखो बेचारी अभीभी बेहोस होकर पडी हे.. कुछतो उनपे रहेम करते.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते मंजुका सर चुमते) मंजु अभीतो हमने सीर्फ दो बारही कीयाथा.. फीर पता नही हमे क्या हो गया.. चुदाइ करते करते हम दोनोही नींदकी आगोसमे चले गये.. जैसे कोइ स्वर्गमे चले गये हो.. ओर मेने आज अ‍ेक अदभुत स्वप्न देखा.. जैसे मे अ‍ेक राजा हु ओर आप सभी मेरी रानीया हो.. फीरतो हम सुबह ही उठे तब अ‍ेक बार सुबह कीया.. ओर हमने नहालीया.. इनको सुलाके मे तैयार हो रहाथा तभी तुम आगइ.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मंजु देवायतको अनुभुतीकी बात अभी कहेना नही चाहतीथी) ठीक हे ठीक हे.. जानु आप फटाफट तैयार होजाओ आपको लता नीलुको उनके घर छोडने जाना हे.. फीर सरलामौसीसे सादीकी सब बात करके सीधेही मम्मीके घर चले जाना.. ओर मम्मी पापा आनेके लीये आनाकानी करे तो मुजसे फोनपे बात करवाना.. उन दोनोको यही लेकर आना हे.. अब सादी तक दोनो यही रहेगे..

देवायत : (हसते होठोपे कीस करते) हां मेरी डार्लींग अब तु जो कहेगी वोही करना हे.. ओर कोइ हुकुम..?

मंजुला : (हसते सीनेमे मुका मारते धीरेसे कानमे) देवु.. रातमे पुनोको उल्टी हुइ हे.. सी इस प्रेगनेन्ट.. बस इस बात अभी सबसे छुपाके रखनी हे.. फीर आप आओ तब हम आरामसे बाते करेगे.. अभी मौसी ओर पुनोको आराम करने दो.. चलो दयाने सब रेडी रखा हे ओर वो लता नीलु दोनो भी तैयार होकर बैठी हे.. चलीये.. मे आपको कपडे देती हु..

कहेते मंजु देवायतकी बाहोसे छुटकर अलमारीसे देवायतको कपडे नीकालकर देती हे ओर बहार चली जाती हे तब देवायत फटाफट तैयार होगया ओर बहार आकर डाइनींगपे बेठ गया.. तब दया देवायतकी ओर कामुक मुस्कान करते उसे चाइ नास्ता देती हे.. तब साथमे मंजु लता ओर नीलमभी चाइ नास्ता करने बैठ गइ.. तब लता चाइ नास्ता करते चोर नजरसे देवायतके पेन्टके उभारकी ओर देखती रहेती हे..

लता इस पेन्टके उभारमे छुपे हुअ‍े लंडको कइ बार अपनी आंखोसे देख चुकी हे.. जबभी देवायत अपनी मां सरलाकी चुदाइ करने आता.. वो छुपकेसे घरके आंगनसे होते कमरेके पीछे दबे पांव चली जाती.. ओर खीडकीसे दोनोकी चुदाइ देखती रहेती.. जब दोनोकी चुदाइ देखती तबतक वो वहा अपनी चुतको सहेलाती रहेती.. फीर चुदाइ खत्म होतेही वो जटसे बाथरुममे घुस जाती..

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ओर देवायतको इमेजींग करते अपनी चुतमे उंगली डालकर अपने आपको सांत करती.. फीर आरामसे हसती हुइ वापस अपने रुममे आजाती.. वो अपने रुमसे दरवाजेके छेदसे अपने भाइ भाभीको चोदते देखकर भी भानुके लंडका दीदार कर चुकी थी.. जीनकी वजहसे लखनके साथ सगाइ होतेही वो लखनसे सादीसे पहेलेही चुदवानेका मन बना चुकी थी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप खुद लखनके लंडसे कइ बार चुदवा चुकी..

लताने तीन तीन लंडके दिदार कीयाथा.. इनमे सबसे ज्यादा दमदार ओर तगडा मोटा उसे देवायतका लंड लगा.. ओर तबसे उनका पसंदीदा लंड देवायतका लंड था.. जबभी देवायतके सामने जाती.. वो देवायतके पेन्टके उभारको देखे बगैर नही रेहती.. लेकीन अब देवायत उनके जेठजी थे.. फीरभी देवायतके सामने आतेही वो सबकुछ भुलकर देवायतके लंडकी ओर घुरते हुअ‍े देखती रहेती.. आजभी वो देवायतके पेन्टके उभारको देखती हे तब उसे नीलमने घुरते हुअ‍े देखलीया..

तब नीलमभी सरमाते लताकी ओर देखकर मुस्कराती रहेती हे.. सब चाइ नास्ता करते हे तब नास्ता करते मंजु लतासे बाते करती हे ओर सबको सादीके तीन दिन पहेलेही आनेकी बात करती हे.. ओर सबने चाइ नास्ता करलीया तब देवायत कारकी ओर चला गया.. तो लता ओर नीलम अपने सामानकी केरी बेग लेकर कारमे बेठने लगी.. दोनोही पीछे बेठ गइ तब मंजु उनको कार तक छोडने आइ ओर बाते करती रही..

तब देवायत कार लेकर नीकल गया.. तो मंजु फटाफट चंदाके पास रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध करके बेडकी ओर चली गइ.. फीर बेडपे बैठकर धीरेसे चंदाका पेटीकोट उठाकर देखने लगी.. तो चंदाकी चुत सुजके पांव जैसी होगइ थी.. ओर पुरी लाल लाल दीख रहीथी तब मंजुको समजनेमे देर नही लगीकी देवु पुरी रात चंदाको चोद चुका हे.. ओर वो येभी जानतीथी की ये सब उस अनुभुतीकी वजहसे हुआ हे..

फीर मंजु चंदाके कपडे सही करके उनपे कंबल डाल देती हे ओर बहार आकर दरवाजा बंध कर देती हे फीर वो पुनमके पास चली जाती हे तब पुनमभी घोडे बेचकर सो रही थी.. ओर मंजु बच्चेको लेकर बेडके कोनेमे बेठ जाती हे ओर अपना ब्लाउस उचा करके विजयको दुध पीलाने लगती हे.. दया सब काम नीपटाने लगती हे तो रजीया जाडु पोछा लेकर उपरकी ओर जाने लगती हे तब दया उनके पास जाकर रोकती हे..

दया : (धीरेसे) रजीया.. जाडु पोछा लगाकर सीधी नीचे ही आजाना.. तु आगसे खेल रही हे.. आज कल तु जो खेल खेल रही हेनां.. मुजे सब पता हे.. याद रखना उनकी कुछ ही दिनोमे सादी होने वाली हे.. अगर तु फस गइतो कहीकी नही रहेगी.. कीतनोको नीदकी गोली पीलाती रहेगी..

रजीया : (गभराते गांड फटगइ) जी.. जी.. दया.. वो..वो.. मे..मे..तो जाडु पोछा लगाने जाती हु..

दया : (कातील मुस्कानसे धीरेसे) हां हां.. पता हे कहा जाडु पोछा लगाने जाती हे.. क्या तु हमारे बडे मालीकसे संतुस्ट नही हे..? वो हम दोनोका खयाल तो रखते हे.. ओर मेने मालीकसे हम दोनोके बारेमे बातभी करली हे.. तो फीर तुजे कीस बातकी जल्दी हे..? बस मुजे तुजे आगाह करना था करदीया.. बाकी तु जाने.. ओर तेरा काम.. जा.. फटाफट काम नीपटाले..

कहेते दया रजीयाकी ओर कातील मुस्कान करते कीचनमे चली गइ.. तब रजीया उनको मुह फाडके देखती ही रही.. मानो उनकी कोइ बडी चोरी पकडी गइ हो.. उनको पताही नही चलाकी उनके ओर लखनके नाजायज रीस्तोके बारेमे दयाको कैसे पता चल गया..? फीर वोभी भारी मनसे उपरकी ओर धीरे धीरे जाने लगी.. उनको लगताथा की उनके ओर लखनके बारेमे कीसीको पता नही हे.. लेकीन दयाको ये सब कैसे मालुम हुआ..?

मे पता लगाकर ही रहुगी यही सब सोचते वो उपरके सभी रुममे साफ सफाइ करने लगी.. ओर काम करते उनकी आंख गीली होने लगी.. उनको अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा.. ओर यहासे उसे नीकाल दियातो वो कहा जायेगी..? उनके मनमे यही सब सवालोका धमासान युध्ध हो रहाथा.. ओर वो आंसु बहाते काम करती रही.. जब लखनके रुममे जानेकी बारी आइ तब उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. आज पहेली बार लखनके रुममे जानेके लीये उनके पाव डग मगाने लगे..

जब कोइ रुममे होता हे तब आमतोरपे उनको रुममे जानेकी इजाजत नही थी.. लेकीन लखननेही रजीयाको अपने रुममे बीना परमीसन आनेकी छुट दे रखीथी.. तब आज पहेली बार वो डरते डरते लखनके रुममे चली गइ.. तब लखन बाथरुममे नहा रहाथा.. ओर रजीया चुपचाप जाडु पोछा लगाने लगी.. तभी लखन नहाकर बहार नीकला ओर उसने रजीयाको जाडु पोछा लगाते देख लीया..

तब उनके चहेरेपे कातील मु्सकान आगइ.. ओर वो दरवाजेकी ओर जाने लगा तब रजीया उनको भारी धडकनसे देखती रही.. तभी लखन दरवाजा बंध करके रजीयाकी ओर बढने लगा तब रजीया जाडु पोछा छोडके जटसे खडी होगइ ओर गभराते दो कदम पीछे हटते लखनकी ओर देखती रही.. आज पहेलीबार उसे लखनसे डर लगने लगा.. ओर लखनने आतेही रजीयाको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. लेकीन आज रजीया गभराते खीडकीकी ओर देखती यंत्रवत खडी रही..

लखन : (हसते) डार्लींग क्या हुआ.. अ‍ैसे क्यु गभरा रही हे..? कुछ हुआ क्या..?

रजीया : (आंसु बहाते लखनकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस करते धीरेसे) लखनभैया प्लीज.. छोडदो.. वो.. वो.. दया.. छोडदीजीये मुजे..

लखन : (उनको छोडके खीडकीकी ओर देखते) रजीया..? क्या हुआ तु इतनी क्यु गभराइ हुइ हे..? वहा खीडकीमे क्या देख रही हे..? कीसीने तुजे कुछ कहा क्या..? ओर दया.. क्या..?

रजीया : (सरमाते आंखमे आंसुके साथ धीरेसे) लखनभैया वो.. वो.. हमारे बारेमे दयाको सब पता चल गया हे.., मे कहीकी नही रहुगी.. प्लीज मुजे जानेदो.. दया अभी आती ही होगी.. मे बरबाद होजाउगी.. तो कहा जाउगी.. (आंसु बहाते रोने लगी)

लखन : (बाहोमे लेकर रजीयाके आंसु पोछते) रजीया तु मत गभरा मे तेरे साथ हु.. अगर तुजे कीसीने कुछ कहातो मेभी तुम्हारे साथ चलुगा.. मे तुजे सचमे प्यार करता हु.. हम दोनो सादी कर लेगे.. चुप होजा.. तु मेरी बीवी हे.. मेने तुजे सचे दीलसे अपनी पत्नी माना हे.. बस चुप होजा तुजे मेरी कसम हे..

रजीया : नही लखनभैया.. अ‍ैसी गलती मत करना अभी आपकी सादी होनेवाली हे.. मे नही चाहती मेरी वजहसे इस हवेलीमे कोइ हंगामा हो.. वरना मुजे ये हवेली छोडके जाना पडेगा.. प्लीज.. मुजे छोडदो.. ओर मतदो अपनी कसम.. मेभी आपको सचा प्यार करती हु..

रजीया बहुतही गभराइ हुइथी.. ओर लखनकोभी उनपे दया आगइ ओर उसने रजीयाको छोड दीया.. तब रजीया फटाफट जाडु पोछा लेकर अपने आंसु पोछते नीचे चली गइ.. तब लखनकोभी रजीयापे तरस आने लगी.. ओर उसने इस बारेमे दयासे बात करनेका फैसला करलीया.. ओर वोभी तैयार होने लगा.. तब नीचेकी ओर रजीया जाडु पोछा रखकर सीधेही आंसु बहाते दोडकर अपने रुममे चली गइ.. तब उनकी सब हरकत दो आंखे देख रही थी..

रजीया बेडपे पेटके बल लेटकर तकीयामे मुह छुपाकर जोरोसे रोने लगी.. तभी उनकी पीठपे कीसीका हाथ महेसुस हुआ तब रजीयाने आंख पोछते पीछे मुह घुमाते देखा तो दया उनके पास बेडपे बैठकर उनकी पीठ सहेला रहीथी तब रजीया बेडपे बैठ गइ ओर दयासे लीपटकर फीरसे रोने लगी.. दयाने उसे थोडी देर रोने दीया तबतक वो उनकी पीठ सहेलाती रही फीर रजीयाको बाहोसे अलग करदीया.. ओर उनका दोनो हाथ पकडके कहा..

दया : (धीरेसे) रजीया आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे नही पताथाकी तुम दोनो इतना आगे बढ चुके हो.. लेकीन सोच हम दोनो बहुत छोटे लोग हे.. हमतो मालीककी ओर हमारी जीस्मानी आगको ठंडी कर सकती हे.. हमारी क्या ओकात की हम मालीकसे प्यार करे..

रजीया : (आंसु बहाते धीरेसे) दया.. मे क्या करु..? पहेली बार उसने मेरे साथ जबरदस्तीसे कीया.. फीरतो आये दीन मुजे बुलाने लगे ओर मुजेभी अच्छा लगने लगा.. फीरतो पताही नही चला हम दोनोके बीच कब प्यार होगया.. वोभी मुजे बहुत चाहते हे.. ओर मुजसे सादी करनेकी बात करते हे तो मे क्या करु..? अब तुही बता.. मेभी उनको बहुत चाहने लगी हु.. मे उनके बगैर नही रेह सकती.. ओर वोभी मुजे बार बार सादीका फोर्स कर रहे हे.. मे क्या करु..? मे.. क्या.. करु....? (जोरोे रोने लगती हे..)

दया : (हाथ पकडके समजाते) रजीया.. हमतो यहा नौकरानी हे.. हमे प्यार करनेका कोइ हक नही हे.. येतो अच्छा हे बडे मालीक ओर मालकीन हमारी जरुरतको समजते हे.. ओर मालीक हमारे तनकी प्यास बुजाते हे.. वरना सोच हम क्या करती..? कीतने भेडीये इस गांवमे घुम रहे हे.. हमतो सबकी रंडी बनके रेह जाती.. अच्छा हे मालीककी वजहसे हमारी ओर कोइ आंख उठाके भी नही देखता.. वरना सोच में अ‍ेक विधवा ओर तु त्यक्ता.. हमारी हालत क्या होती.. हम कहा जाती..? तो हम मालीकको धोखा कैसे दे सकते हे..

रजीया : (धीरेसे) दया मुजे सब पता हे.. मालीकने हम दोनोका बहुत खयाल रखा हे.. तो क्या हमे कीसीसे प्यार करनेकाभी हक नही हे..? तो कमसे कम हम दोनोको अ‍ेक बच्चाही दे देते.. हम उसीके सहारे हमारी जींदगी जी लेते.. वो हमे बच्चा क्यु नही देते..? मुजे लखनभैयाने वादा कीया हे.. वो मुजे बच्चाभी देगे ओर उनका नामभी देगे.. तो मे क्या करती..? मे अपने आपको अब लखनभैयाको पुरी समर्पीत कर चुकी हु..

दया : (रजीयाके दोनो हाथ पकडते उनकी आंखोमे देखते धीरेसे) रजीया मुजे पुरी बात बताओ तुम दोनो कहा तक आगे बढे हो..?

रजीया : (नजर जुकाते धीरेसे) दया वो.. वो.. लखनभैया मेरी मांग भरचुके हे.. अ‍ेक दिन हवेलीमे कोइ नही था.. तब मे उनके कहेनेसे मेरे पास पडे सादीके जोडेमे चली गइ.. ओर उसी दीन मेरी मांग भरदी ओर हमने पुरी रात हमारी सुहागरात भी मनाइ.. तो अब तुही बता मे उनके बगैर कैसे रेह सकती हु.. बस मुजे उनकी सादी तक इन्तजार करनेको कहा हे.. फीर वो खुद बडे मालीकसे हम दोनोकी बात करने वाले हे..

दया : (सोक्ट होते धीरेसे) रजीया.. पागल होगइ हो क्या..? ये बात तु अभी सबसे छुपाले.. कीसीके सामने अपना मुह मत खोलना.. अभी लखनभैयाकी सादी हे तबतक तुम चुप रहेना.. अभी चल बहार.. सब काम पडा हे हम इस बारेमे रातमे आरामसे बात करेगे.. इसके बारेमे बाद मे सोचेगे.. तबतक कीसीको पता नही चलना चाहीये.. समजी..? तभी..

मंजुला : (दरवाजेके पास खडी रहेते) पता चलना नही चाहीये.. नही.. पता चल गया हे..

कहेते दरवाजा बंध करते दोनोकी ओर आती हे.. तब दया ओर रजीया मुह फाडके उनकी ओर गभराते हुअ‍े देखती ही रेह गइ.. दया ओर रजीया दोनोकी गांड फटने लगी.. उनको उमीद नही थी.. की मंजु कभी उनके रुममे आजायेगी.. तब मंजु धीरेसे बेडपे उन दोनोके पास आकर बेठ गइ.. ओर मुस्कुराते दोनोकी ओर देखती रही.. तो रजीया ओर दया दोनोही गभराते नजर जुकाते खामोस बैठी रही..

दया : (गांड फटते गभराते) दी..दी.. वो.. वो.. आ..प.. इधर..?

मंजुला : (हसते) हां.. तो मे इधर नही आ सकती..? ओर तुम दोनो इतनी गभराइ हुइ क्यु हो..? मे कोइ भुत नही हु.. मुजेतो तुमसे कामथा तो तुजे ढुंढते इधर आगइ.. ओर अच्छा हुआ में इधर आगइ.. ताकी मुजे पतातो चलाकी मेरे घरमे सब क्या हो रहा हे.. वरना मुजे कभीभी इस बातका पताही नही चलता..

दया : (गभरराते) दीदी.. वो.. वो.. में रजीयाको यही समजा रहीथी.. इसमे इनकी कोइ गलती नही हे..

मंजुला : (प्यारसे रजीयाके सरमे हाथ घुमाते) अरे इतना क्यु गभरा रहीहो.. मुजेतो पताही नही थाकी मेरी देवरानी हमारे घरमे नोकरानी बनके काम कर रही हे.. ओर हमने तो आप दोनोको कभी नौकर समजाही नही हे.. मेरे लखनको बहुत प्यार करती हे..?

रजीया : (सरमाते नजर जुकाते) मालकीन.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे बस अ‍ेक बार माफ करदो.. मे वादा करती हु आइन्दा अ‍ैसी गलती कभी नही होगी.. वरना में कहीकी नही रहुगी.. (आंसु बहाते रोने लगी)

कहेते रजीया रोते हुअ‍े बेडसे उतरकर मंजुके पैर पडने लगती हे तब मंजु उसे हसते हुअ‍े कंधेसे पकडकर खडा कर देती हे ओर अपने पास बीठा देती हे.. फीर रजीयाके आंसु अपनी साडीके पलुसे पोछते प्यारसे रजीयाके सरको सहेलाती हे.. तब रजीया सरमके मारे नजरे जुकाते मंजुके पास बैठ जाती हे तो दयाभी मंजुकी ओर मुह फाडके देखती रहेती हे.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : रजीया तुम गभराओ नही तुजे कुछ भी होने वाला नही.. ओर मे तुमसे नाराज भी नही हु.. मेने तुम दोनोकी पुरी बात सुनली हे.. अगर लखनभैयाभी तुमको चाहता हेतो मे तुमको तुम्हारा हक दीलवाउगी.. बस अ‍ेक बार मेरे लखनकी सादी होजानेदो.. पता नही लताका स्वभाव कैसा होगा.. फीर मे खुद लखनसे इस बारेमे बात करुगी.. अगर वोभी तुजे प्यार करता हेतो मे खुद तुम दोनोकी सादी करवा दुगी..

दया : (धीरेसे) दीदी.. ये आप क्या केह रही हे..? क्या बडे मालीक इस बातके लीये मानेगे..? हमतो नौकरानी हे.. अ‍ेक नौकरानीसे सादी..?

मंजुला : (हसते) दया हमने आजतक तुम दोनोको अपनी नौकरानी कभी नही समजा.. ओर तुम दोनो क्यु अपने आपको छोटी जात समजती हो..? क्या तुमको प्यार करनेका हक नही हे..? ओर कमसे कम मेतो उच नीच जातको कभी नही मानती.. बस तुम दोनोको अ‍ेक ही बिनंती हे.. सादी तक जैसा चल रहा हे चलने दो..

रजीया : मालकीन आप यकीन कीजीये इस बातकी सुरुआत मैने नही कीथी.. बस अ‍ेक दिन लखनभैयाने मेरे साथ..

मंजुला : (हसते) रजीया मेने तुम दोनोकी पुरी बात सुनी हे.. ओर मुजे पता हे इनमे गलती तेरी नही हे.. बस ये साली आगही कुछ अ‍ैसी हे.. फीर चाहे वो पुरुषकी हो या हम स्त्रीओकी.. हम सब प्रकृतीसे बंधे हुअ‍े हे.. बस कीसीपे दिल आजाना चाहीये.. फीर चाहे आपसमे कोइभी रीस्ता क्यु ना हो.. दोनो मीलकरही रहेते हे.. ओर अब ये मुजे मालकीन कहेना बंध करदे.. अबतो तुम मेरी देवरानी हो.. मुजेही नही सबको दीदी कहेके बुला वरना खुब पीटुगी.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाते हसते) जी मालकी.. ओर सोरी सोरी.. दीदी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (खडी होते) चलो तुम दोनो अपने कामपे लग जाओ.. अब तुजे तेरा हक दीलवानेकी जीम्वेवारी मेरी.. इस बारेमे हम अब सादीके बाद ही बात करेगे.. ओर दया.. तुम कभी हमारी नौकरानी नही हो सकती.. इस बारेमे हम कभी फुरसतमे बात करेगे.. ओके..?

दया : (हसते) जी दीदी.. हमतो आपको यहा देखकर गभरा गइ थी.. हें..हें..हें..

तभी तीनोही हसते हुअ‍े बहार आगइ.. तब लखन डाइनींगपे बेठा चाइ नास्तेका इन्तजार कर रहाथा तब मंजु उनके सामने हसते हुअ‍े पुनमके पास चली गइ.. तो दयाभी लखनकी ओर हलती हुइ कीचनमे लगी गइ तब उनके पीछे रजीयाभी लखनको देखतेही सरमाते हसने लगी ओर वोभी नजर जुकाते कीचनमे चली गइ तब लखनको कुछ समजमे नही आयाकी सब उनके सामने देखकर क्यु हस रही हे.. सब क्या हो रहा हे..

दया : (हसते धीरेसे मजाकमें) रजु.. जा अपने पतीको चाइनास्ता करादे.. बेचारा भुखा होगा.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमसे पानीपानी होते) धत्.. दया तुजे अ‍ेक मारुगी.. मुजेतो सरम आरही हे.. तुही जाकर देदे..

दया : (हसते) अरी जाना.. इनमे काहेकी सरम.. रातमेतो बडी उछल उछलकर उनसे चुदवा रहीथी.. तब सरम नही आइ.. ओर अबतो दीदीने भी हा कहेदी हे.. जा.. देदे.. हें..हें..हें..

कहातो रजीया सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर दयाकी पीठमे अ‍ेक मुका जड दीया.. फीर चाइ नास्ता लेकर बहार चली गइ.. आज वो लखनसे नजरे नही मीला पा रहीथी.. नइ नवेली दुल्हनकी तराह बहुतही सरमा रहीथी.. जब चाइ नास्ता देने लगी तब लखन उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखता रहा तब रजीयाने सरमाते हसते हुअ‍े नांमे गरदन हिलाइ ओर वो फटाफट वापस कीचनमे चली गइ.. तब दया हस रहीथी.. तो रजीया अंदर जातेही उनसे लीपट गइ..

दया : (धीरेसे कानमे) रजु.. क्या बात हे आजतो अपने पतीसे बहुत सरमा रही हो.. हें..हें..हें..

रजीया : (आज पहेलीबार दीदी कहा) दीदी.. प्लीज.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. मत छेडो मुजे..

दया : (खुस होते धीरेसे) क्या..? दी..दी..? कमीनी अब मुजे दीदीही कहेना.. अब तु मेरी बहेन नही.. मेरी भाभी होने वाली हे.. ओर मत भुलो मे बडे मालीक ओर लखनभैयाको अपना भाइ मानती हु..

रजीया : (जोरोसे हसते धीरेसे) तो कमीनी तु क्या अपने बडेभैयासे चुदवाती हे..? बापरे.. उनका कीतना बडा लंड हे.. दया मेनेतो इतना बडा लंड कभी नही देखा.. जैसे कोइ गधेका लंड हो..

दया : (सरमाते हसते) रजु.. अ‍ेक बात पुछु.? तो क्या लखनभैयाका लंड इतना बडा नही हे..?

रजीया : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) नही.. दीदी उनकातो बडेभैयासे आधाभी नही हे.. फीरभी काम चल जाता हे.. हें..हें..हें.. तुजे पता हे वोतो इस मामलेमे बीलकुल अनाडी थे.. मेने ही उसे सब सीखाया.. तब जाकर अब ठीक ढंगसे चुदाइ कर पाते हे.. वरना लताभाभीतो गइथी कामसे.. बेचारी सुहागरातमेही दुखी होजाती.. हें..हें..हें..

दया : (मुहपे हाथ रखते धीरेसे) क्या बात कर रही हे..? तो फीर कमीनी तुम इतनी आगे क्यु बढी..?

रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी अब आपसे क्या छुपाउ.. साली ये चुतकी आगही अ‍ैसी हे.. उसे अब रोज लंडकी आदत लग गइ हे.. उसे रोज लंड चाहीये.. तो मे कहासे नीकालु.. ओर अबतो बडेभैयाभी हमारे पास कम आते हे.. पहेलेतो कैसे हम दोनोको रात रात भर चोदते थे.. इसीलीये मेने लखनभैयाकी बात मानली..

अबतो वो काफी कुछ सीख गये हे.. पता हे अ‍ेक राततो हम दोनोही सुबह तक चुदाइ करते रहे.. वो गोली खाकर सुबह तक लगे रहे.. ओर अबतो मुजेभी उनसे प्यार होगया हे.. बस मुजेतो अ‍ेक बच्चा चाहीये.. फीर चाहे लखनभैया देदे या बडे भैया.. मुजे कोइ फर्क नही पडता.. कमसे कम अब मे सादीसुधातो कहेलवाउगी..

तभी बहारसे मंजुकी आवाज आइ तो दया बहार चली गइ.. ओर रजीया कीचनमे काम करने लगी.. आज दोनोही बहुत खुस थी.. तब लखनभी चाइनास्ता करके खेतोपे जा चुकाथा.. तो दया वहा डाइनींगपे सब बर्तन लेकर सब काम नीपटाने लगी.. तो दुसरी ओर पुनम ओर चंदा अभीभी गहेरी नींदमे सो रहीथी.. ओर मंजु विजयको लेकर होलमे सोफेपे बैठकर उनके साथ खेल रही थी.. अबतो विजयभी थोडा बडा हो चुकाथा ओर मंजु चंदा पुनम सबको पहेचान चुकाथा..

इधर देवायत चुपचाप कार चला रहाथा.. तब लता ओर नीलम दोनोही उनकी पीछेकी सीटमे बैठीथी.. तब अनायास ही लताका ध्यान कारमे सेन्टर मीररमे चला गया तब उसे देवायतका मुह साफ दीखाइ देने लगा तो वो मनही मन खुस होगइ ओर देवायतको मीररमे देखती रही.. वो ओर नीलम धीमी आवाजमे बात करने लगी.. लेकीन बात करते समयभी लता मीररमे देख रहीथी.. जैसे वो देवायतको लुभानेकी कोसीस करती हो..

नीलम : (धीरेसे कानमें) दीदी.. वो..वो.. धिरेनजीजुको फोन करके बात करलेना.. वरना वो नाराज होजायेगे.. उसने मुजे कसम दी हे..

लता : (नाराज होते मीररमे देखते) क्यु..? तुजे बहुत खुजली हो रहीहे.. क्या..? हंम.. तुजे बहुत चीन्ता हो रही हे धिरेन जीजुकी.. कही तेरा मनतो नही बहेक गया..?

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) नही.. दीदी.. उसने मुजे फोन करनेके लीये कसम दी हे.. तो..

लता : (तीरछी नजरोसे मीरमे देखते) ठीक हे.. ठीक हे.. कसम दीहे तो क्या हुआ..? मे बात करलुगी उसे.. कमीना कहीका..

तभी देवायतका ध्यान सीसेपे चला जाता हे.. तब उसने देखा लता सीर्फ उनकोही सीसेसे देख रही हे.. जैसेही दोनोकी नजर मीली लता उनके सामने सब सरम त्यागकर खुलकर मुस्कराने लगी.. तब देवायतभी मुस्कराने लगा.. फीरतो वोभी बार बार सीसेमे देखने लगा.. ओर जैसेही दोनोकी आंख मीलती लता सरमाकर अपने ओठोपे अपनी जीफ फीराते हसने लगती..

तब देवायतभी उनके सामने खुलकर हसने लगा.. ओर ये सीलसीला बार बार होने लगा.. अब लता बहुतही कामुक तरीकेसे देवायतको देखकर हस रहीथी.. तब अ‍ेक बारतो देवायतका मनभी डगमगा गया.. तब लताने हीमत करके देवायतसे बाते करना सुरु कीया..

लता : (सरमाते हसते) बडे भैया आप खाना खाकर ही जाना.. मे आपका मनपसंदका खाना बना दुगी.. कीतने दिन होगये आपने हमारे घर खाना नही खाया.. अबतो आप बहुतही कम आते हो.. भाभी भी आपको याद करती रहेती हे..

देवायत : (हसते) नही लता.. मुजे देर होजायेगी.. अब तु घर आयेगी तब तेरे हाथोका ही खाना खायेगे.. ओर तेरी भाभीको भी मील लुंगा.. हें..हें..हें..

लता : (मीररमे देखते हसते) भैया.. फीकर मत करो.. देखना मे आपके लीये बडीयासा खाना बनाउगी.. भैया अ‍ेक बात कहु..? अगर आप ससुरालपे जाही रहेहो तो आप भावु भाभीको भी साथ लेजाओनां.. वोभी उनके पीताजीको देख लेगी.. आपके साथ आनेमे उनकोभी अच्छा लगेगा.. कहोतो मे उनसे बात करलु..?

देवायत : (देवायत लताके कहेनेका मतलब समज जाता हे) नही.. लता अभी बच्चीभी छोटी हे ओर दिनभी कीतने हुअ‍े हे.. ओर वेसेभी मे उन दोनोको लेनेही जा रहा हु.. ओर आप सबकोभी तीन दिन पहेले हवेलीपे आजाना हेतो भावु वही उनको मील लेगी.. तुम दोनोभी सीर्फ अ‍ेक दो दिनके लीये इधर आइ वरना वही रुक जाती.. तुम दोनोके सब कपडे मे वापसीमे ले आता..

लता : (मीररमे देखते हसते) नही भैया.. बस अ‍ेक दो दिनही तो सबके साथ रहेना हे.. फीरतो मे उधर चली आउगी.. अबतो वोही मेरा घर होगा.. भैया.. ये नीलुका अ‍ेडमीशन होगया क्या..?

देवायत : नही.. जब सादी होजायेगी तब मे ओर भानु उनको लेकर जायेगे ओर तब वही पासमे होस्टेलमे जहा पुनो लखन थे.. मेने वहा बात करली हे.. वही जाकर दाखला दीलवा देगे.. बस अब तुम सबकी सादी होजाये.. तो गंगा नहाये.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) क्या भैया आपभी.. हमारी सादीमे कहा इतनी तामजाम करनी हे.. तो इतनी चीन्ता करते हो.. हें..हें..हें.. सीर्फ हम घरवाले तो हे.. भैया.. अ‍ेक बात कहु..? जबसे मेरी सगाइ हुइ हे तबसे आप कुछ कमही मुजसे बात करते हो.. पहेलेतो कैसे मेरे साथ मस्ती मजाक करते थे..

देवायत : (हसते) लता.. तब तुम मेरी बहेन थी.. ओर अब मेरी बहु हो.. आइमीन लखनकी पत्नी.. तो अब तुमसे कैसे मजाक करता.. क्या तुजे ये सब मजाक मस्ती अबभी पसंद हे..?

लता : (सरमाते हसते) तो फीर..? ओर नही तो क्या..? भैया भलेही मेरी सादी लखनसे हो जाये.. मेतो आपको अभीभी भाइही समजती हु.. मुजे अपसे बाते करना बहुत अच्छा लगता हे.. देखना मेतो वहा आकरभी आपकी अ‍ैसेही मस्ती करुगी.. हें..हें..हें.. बस अ‍ेक बार मेरी सादी होजाने दो..

देवायत : (हसते हुअ‍े हीमत करते केह देता हे) हां तभी तो.. लता मुजे तेरी सादीकी इतनी चीन्ता नही हे.. बस.. दुसरी चीन्ता हे.. हें..हें..हें.. तुम चारोने हम सबको बहुत परेसान करके रखा हे.. हें..हें..हें..

कहतो नीलम जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी.. तब लता सर्मसार होगइ ओर मीररमे तीरछी नजरसे देवातके सामने दखते हसती रही.. आज उनको देवायतसे बात करनेके कोइ सर्म नही आ रहीथी.. बल्के वोतो देवायतसे ओर खुलकर बात करना चाहती थी.. ओर देवायतभी आज लतासे खुलकर बाते कर रहाथा.. पता नही आज उसे लताके साथ बात करनेमे बहुत अच्छा लग रहा था.. लेकीन लताभी साथमे नीलमकी वजहसे ज्यादा खुलकर बात नही कर पा रहीथी..

वो देवायतसे बात करते लगातार मीररमे प्यासी नजरसे देख रहीथी तब देवायतभी उनकी कामुक नजरको पहेचान गया.. लेकीन लता उनके भाइकी होने वाली पत्नी थी.. वरना लताकी ओरसे इतनी हीन्ट मीलते ही देवायत लताके साथ काफी आगे बढ चुका होता.. ओर अबतो लता दीखनेकेभी बहुतही खुबसुरत ओर कामुक लग रहीथी.. उनकीभी नजर कीतने दिनोसे लताके उपर थी..

जबभी वो सरलाकी चुदाइ करता तब उन दोनोको लताको खीडकीसे देखते कइ बार देख चुकाथा.. तबसे वो लताको भी अपने नीचे लीटानेकी फीराकमे था.. ओर लताभी उनको कामुक नजरोसे घुरती रहेती.. लेकीन अबतो लखनकी बीवी होनेके साथ भावना ओर उनके बीचके प्यारकी अ‍ेकलौती साक्षी भी थी.. इसीलीये देवायतने अपने आपको बडी मुस्कीलसे सम्हाला.. तब उनकी नजर फीरसे लतासे मील गइ.. तो लता अभीभी मीररमे कामुक मुस्कानके साथ देवायतको देख कर हस रही थी..

तभी अचानक लताने देवायतकी ओर देखते अपने दोनो नैन नचाये.. ओर लताने देवायतकी ओर आंख मारदी.. तब दोनोही सर्मसार होते हसने लगे.. लता बाततो नीलमसे कर रहीथी लेकीन कारके सेन्ट्रल मीररसे देवायत ओर उनके बीच कुछ ओरही खेल चल रहाथा.. ओर तीनो घरपे पहोच गये.. तब आज पहेली बार लताको घरपे पहोच जानेसे अच्छा नही लगा.. वो अभी भी देवायतके साथ टाइम स्पेन्ड करना चाहती थी....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १००

तभी अचानक लताने देवायतकी ओर देखते अपने दोनो नैन नचाये.. ओर लताने देवायतकी ओर आंख मारदी.. तब दोनोही सर्मसार होते हसने लगे.. लता बाततो नीलमसे कर रहीथी लेकीन कारके सेन्ट्रल मीररसे देवायत ओर उनके बीच कुछ ओरही खेल चल रहाथा.. ओर तीनो घरपे पहोच गये.. तब आज पहेली बार लताको घरपे पहोच जानेसे अच्छा नही लगा.. वो अभी भी देवायतके साथ टाइम स्पेन्ड करना चाहती थी....अब आगे

ओर वो भारी मनसे कारसे बेग लेकर उतर गइ.. तब उनके पीछे नीलमभी सभी केरी बेग लेकर उतर गइ.. आज लता देवायतसे बाते करते बहुतही कामुक ओर उतेजीत होगइ थी.. वो देवायतको छुना चाहती थी.. इसीलीये देवायतके पास जाकर उनके सटकर खडी होगइ..

ओर लताने धीरेसे सरमाते देवायतका हाथ पकडकर उनको अंदर आनेका आग्रह कीया.. देवायतभी लताका इरादा क्या हे समज गया.. तो अंदरकी ओर जाने लगा.. तो लताभी उनके साथ अंदरकी ओर चलने लगी.. ओर तीनोही दरवाजेके अंदर आगये.. तब भानु खेतोपे चला गयाथा.. ओर भावना सरला बहार आंगनमे खटीयापे बैठीथी..

बहारकी ओर भावना सरलाके पास बैठकर अपना ब्लाउस उचा करके अपनी बच्चीको दुध पीला रहीथी.. रमा कीचनमे काम कर रहीथी.. कल ही उनकी भानुके साथ सादी हुइथी.. कल पुरी रात भानुने उसे वियाग्रा खाकर जमकर चोदा था.. ओर रमाकी हालत पतली करदी थी.. जीनकी वजहसे आज उनकी चालही बदल गइथी.. वो महा मुस्कीलसे चल पारही थी.. शींगारकी चुडीया अबभी उनके हाथोमे पहेनी हुइ थी..

तो काम करते चुडीयोकी खनखनाहट बहार तक साफ सुनाइ दे रहीथी.. जैसेही तीनो अंदर आगये तब भावना देवायतको देखतेही सरमाते मुस्कुराने लगी.. ओर फटाफट अपना ब्लाउज सही करते अपना बुब्स छुपालीया ओर बच्चीको सरलाको देकर वो सरमाते देवायतकी ओर मुस्कराते अंदर जाने लगी.. तभी लता देवायतकी ओर तीरछी नजरोसे देखकर हसने लगी.. ओर तीनो अंदर आगये.. तब..

सरला : (खुस होकर हसते) अरे.. आओ.. आओ.. देवा.. होगइ सब खरीदारी..? (अंदरकी ओर देखते जोरोसे) अरी.. रमा.. देख कौन आया हे.. तेरा देवर.. ओर हमारे समधी.. हें..हें..हें.. उनके लीये कुछ चाइ पानी तो लेआ.. हें..हें..हें.. देख अब तु देवाकी भाभी होगइ हे.. हें..हें..हें..

रमा : (अंदरसे सरमाते) जी.. अभी लाइ माजी..

देवायत : (उनके पास सटकर बैठते हसते) क्या काकी आपभी.. मे कोइ थोडी पराया हु..? ओर नइ भाभी को क्यु सरमींदा कर रही हो.. हें..हें..हें.. (धीरेसे हसते कानमे) वो ठीक तो हेनां..?

सरला : (जोरोसे हसते धीरेसे) तुम खुदही देखलो.. हें..हें..हें..

तभी लता अपने रुमसे नीकलते देवायतकी ओर कामुक नजरसे देखते कातील स्माइल करते भावनाके रुमकी ओर जाने लगी.. तब देवायतको भी कुछ अजीब लगा.. वो लताकी नजरको पहेचान गया.. ओर उनकी कामुक स्माइलसे भली भांती जान गयाकी लताकी नीयत उनके प्रती ठीक नही हे..

वो अब उनके छोटे भाइकी होने वाली बीवी हे.. लेकीन उनके दिलकी धडकनभी बढ चुकी थी.. तब लताके पीछे नीलमभी चली गइ.. तभी रमा थोडा लंगडाते धीरेसे चलकर पानी लेकर आ रहीथी तब देवायतको उनको देखतेही जोरोसे हसी आगइ.. तो रमा बहुतही सर्मसार होगइ..

रमा : (सरमाते हसते) लीजीये देवरजी पानी पीजीये.. फीर मे चाइ बनाकर लाती हु.. ओर आपको कीस बातकी हसी आ रही हे..?

देवायत : (जोरोसे हसते) भाभी.. आप अ‍ैसे क्यु चल रही हो.. आपके पैरमे क्या हुआ..? कही मोच बोचतो नही आगइ.. हें..हें..हें..

कहातो रमा फीर अ‍ेक बार अ‍ेकदम सर्मसार होगइ.. उनको समजमेही नही आयाकी देवायतको क्या कहे.. अगर वहा सरला ना होतीतो देवायतको बीन्दास्त जवाब दे देती.. लेकीन सरलाकी वजहसे वो चुप रही.. ओर सकपकाते सरमींदा होकर जटसे दांत पीसते जुठा गुसा करते देवायतकी पीठमे मुका जड दीया ओर कीचनमे चली गइ.. तब देवायत ओर सरला दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर जोरोसे हसने लगे.. तब सरलाने धीरेसे देवायतके कानमे कहा..

सरला : क्यु बेचारीको तंग कर रहे हो.. अ‍ेकतो भानुने कल पुरी रात उसे सोने नही दिया ओर उपरसे तुम.. पता नही भानुने कल उसे कुछ गोली बोली खाकर पुरी रात ठोका हे.. बेचारीकी हालत खराब करदी.. हें..हें..हें..

देवायत : (धीरेसे कानमें) सरला.. क्या तुजे उनकी सुहागरात से कुछ नही हुआ..?

सरला : (सरमाते धीरेसे) हाये.. क्या कहु.. बहुत कुछ हो रहाथा.. लेकीन तेरी भी तो कल चंदा बीटीयाके साथ सुहागरात थी.. वरना तुजे ही बुला लेती.. कल तुजे बहुत याद कीया.. तुनेभी तो परसो मेरी हालत खराब करदी थी.. बडी मुस्कीलसे आज ठीक हुइ हु.. अबतो सादीके बादही कुछ हो सकता हे.. कभी मौका मीलेतो फुरसतमे इधर आजाना.. तु कहेतो मे यही रुक जाती हु.. फीर दोनोही मजे करके तेरे घर चले जायेगे..

देवायत : नही काकी.. कल नही तो परसो.. सब लोग वहा आजाओ.. मंजुने सबको बुलालीया हे.. अब जोभी करना हे ये चारोकी सादीके बाद.. तुम बहुतही ठरकी होगइ हो.. हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते हसते धीरेसे) तो तुमभी कुछ कम नही हो.. मौका मीलतेही हमारी हालत खराब कर देते हो.. मुजे ठोकनेका अ‍ेकभी मौका नही जाने देता.. फीरतो जबतक मुजे दो बार मुजे चोद नही लेता तबतक छोडते ही नही हो..ओर क्या मस्त चुदाइ करते हो.. मेतो तेरी सुरुसे ही दिवानी हु..

तभी रमा कीचनमेसे नीलमको आवाज लगाती हे तो नीलम देवायतकी ओर हसते कीचनमे चली जाती हे.. तब रमा उसे देवायतके लीये चाइ लेजानेको कहेती हे.. वो अब देवायतके सामने जानेमे बहुतही सरमा रहीथी.. तभी भावना लताभी वापस बहार आकर सरलाके पास बैठ गये..

तब भावना देवायतकी ओर दखते मुस्करा रहीथी.. वो देवायतसे अकेलेमे मीलकर उनसे ढेर सारी प्यारकी बाते करना चाहती थी.. लेकीन सबके होनेकी वजहसे उसे मौकाही नही मीलताथा.. तो दुसरी ओर लताभी अब लखनसे ज्यादा देवायतके बारेमे सोचने लगीथी.. ओर तभी नीलम सबके लीये चाइ लेकर आगइ.. ओर सबने मीलकर चाइ पीली..

तबतक रमा सरमके मारे कीचनसे बहार ही नही नीकली.. तभी देवायतने मंजुसे फोन करके सरला ओर भावुसे बात करवादी.. ओर मंजुने सबको परसोके दिन सादी तक वही आनेके लीये केह दीया फीर देवायत वहासे नीकलने लगा तब उनको बहार तक छोडने लता ओर भावु चली गइ.. तब भावनाने बहार नीकलतेही धीरेसे देवायतसे कुछ बात करने लगी.. तबतक लता देवायतके सामने देखकर कातीलाना स्माइलसे मुस्कराती रही..

भावना : (धीरेसे) जीजु.. अब बहुत होगया.. आपतो मुजे मीलतेही नही.. बहुत बीजी हो क्या..?

देवायत : (धीरेसे) हां भावु.. अभी मे मम्मी पापाको लेने जा रहा हु.. उन दोनोको हमारे घर लेकर आना हे.. तुम उनको वही मील लेना.. ओर हमभी वही बात करलेगे.. बस तबतक तु अपना खयाल रखना..

लता : (धीरेसे हसते) बडे भैया.. अब मेरी इस बडी दीदीको आपकोही सम्हालना हे.. बस अ‍ेक बार आप मुजे वहा आनेदो.. फीर मेही आप दोनोके लीये कुछ करती हु.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. बहुत बडी होगइ हे तु.. जबतक तुम मेरी भावुके साथ हो तो मुजे मेरी भावुकी चीन्ता नही हे.. बस इनका खयाल रखना..

भावना : (हसते आंख गीली करते) हां जीजु.. वैसेभी जबसे भानुने दुसरी सादी करली हे तबसे ये कीमीनी मेरा कुछ ज्यादा ही खयाल रखती हे.. मेरी छोटी बहेनके साथ मेरी बेस्ट सहेली भी होगइ हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. चलो ठीक हे मे नीकलता हु.. तुम दोनो ही अपना खयाल रखना.. बाय..

तब भावना देवायतका हाथ पकड लेती हे ओर मुस्कुराते बाय कहेती हे.. तो लताभी भावनाकी नजर बचाते देवायतकी ओर कातील स्माइल करते आंख मार देती हे ओर बाय केह देती हे.. तो देवायतकी भी हसी नीकल गइ.. ओर देवायत वहासे नीकल गया.. सीधेही हाइवेकी ओर अपने ससुरके गांवका रास्ता पकड लीया.. आज वो लताके उनके प्रती व्यहारसे बीलकुल समज गयाकी लताभी इनकी ओर ढल चुकी हे..

तो उधर आज नीर्मलाभी सुबह उठकर सजधजके तैयार होकर देवायतका इन्तजार करते बैठी थी.. वो आज अपने ससुराल जानेको उत्सुक हो रहीथी.. वो अब देवायतकोही अपना पती मानकर उनकी ओर पुरी तराह ढल चुकी थी.. जबसे हवेली छोडदी उनके बाद आज वो पहेली बार वापस उसी हवेलीपे जा रही थी.. तब आधे घंटेकी ड्राइवके बाद देवायतभी उनके घर पहोंच गया.. ओर सीधा कार पार्क करके अंदर चला गया..

देखा तो राजीव अपने रुममे आराम कर रहाथा ओर नीर्मला कीचनमे थी.. तो देवायतको देखतेही खुस होकर हसते हुअ‍े बहार जटसे आगइ.. ओर दोडकर देवायतके गले लग गइ.. तभी देवायतने नीर्मलाको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया तो उनके मुहसे हसते हुअ‍ेभी आउच.. की आवाज नीकल गइ.. ओर देवायतने उनके होठोपे अपने होठ रख दीये.. ओर चुमलीया तब नीर्मला सर्मसार होगइ ओर अलग होकर उनके सामने उनकी आंखोमे देखते हसती रही..

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नीर्मला : (धीरेसे सरमाते) गंदे कहीके.. तुम बहुत नोटी हो.. अगर तुम्हारे पापाने देखलीया होता तो..?

देवायत : (हसते फीरसे कमरसे पकडके अपने तनसे सटाते) देखलीया होतातो क्या होता.. मे तुजे दुल्हन बनाकर घर लेजाता.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (बाहोमे खडी रहेते) अगर दुल्हन बनाके लेजाओगे तो मे रेडी हु.. चलो.. आज मेरा दुल्हा खुद मुजे लेने आया हे.. आप अपने पापाके पास बैठो मे पानी लेकर आती हु अभी खाना बन जायेगा.. फीर कुछ देर आराम करके आरामसे चलते हे.. आजतो मे आपके साथ आपकी दुल्हन बनकेही आउगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (धीरेसे कानमे) फीर देखना वहा मे सुहागरातभी मनाउगा.. तब मुकर मत जाना.. हें..हे..हें..

नीर्मला : (अ‍ेकदम सर्मसार होते जुठे गुसेसे) चलो चलो.. अंदर बैठो.. बडे आये सुुहागरात मनाने वाले.. सारा दिन यही सुजता हे.. दुसरा कोइ कामही नही हे.. क्या चंदाके साथ सुहागरात मनाकर जी नही भरा.. बेचारीकी हालत खराब करदी हे.. उठभी नही पा रही.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) क्या उनका फोन आया था..?

नीर्मला : (हसते धीरेसे) हां.. अभी कुछ देर पहेलेही चंदाने मुजसे बातकी.. फीर मंजुने भी मुजसे ओर अपने पापासे बातकी.. तभीतो हम दोनो रेडी होकर बैठे हे.. मेने तो केह दियाकी हम तीनो खाना खाकर सामको आरामसे आयेगे.. हें..हें..हें.. देवु.. मेरी चंदा बहुतही खुस लग रहीथी.. क्या दोनोने पुरी रात प्यार कीया..?

देवायत : (हसते) हंम..

राजीव : (अंदरसे आवाज लगाते) नीमु.. कोन आया हे वहा..? तुम कीससे बात कर रही हो..?

नीर्मला : (देवायतको अंदर धकेलते) जी.. कोइ नही आपका लाडला आया हे हमे लेने.. जाओ अंदर..

तब ना चाहते हुअ‍े भी देवायत नीर्मलाकी ओर देखते हसते हुअ‍े अंदर जाने लगा तभी नीर्मला सरारतसे उनके सामने मुह बीगाडते अपनी जीभ नीकालते देवायतको छेडने लगी.. ओर कीचनमे चली गइ.. तब देवायत राजीवके पास चला गया तो राजीव उनको देखकर खुसीसे हसने लगा ओर देवायत उनके पाव छुकर वही उनके पास अ‍ेक चेयर खीचकर उनपे बेठ गया..

देवायत : (हसते) पापा अब कैसी हे आपकी तबीयत.. लगता हे अब काफी सुधार दीख रहा हे..

राजीव : (हसते) अरे.. आओ आओ देवु.. अबतो बीलकुल ठीक हो गया हु.. आजतो मंजुसे ओर चंदासेभी बात होगइ.. उसने हमे वहा आनेका बहुत आग्रह कीया.. तो सोचा चलो सादीभी अ‍ेटेन्ड हो जायेगी.. ओर थोडा हवा पानीभी बदल जायेगा.. कब हे सादी..?

देवायत : (हसते) बस.. चार दिनके बाद.. वहा आपकी अ‍ेक दोस्तभी सादीमे आ रही हे.. हें..हें..हें..

राजीव : (आस्चर्यसे हसते) मेरी दोस्त..? कौन..?

देवायत : (हसते) भुमीका आंटी.. हें..हें..हें.. वो भी सीर्फ आपको मीलने.. हें..हें..हें..

राजीव : (जोरोसे हसते) ओह.. भुमी.. बडी चुलबुली लडकी थी.. तुम्हारे पापाको अपना भाइ मानती थी.. तुम्हारी बुआ हे वो.. उसे बुआ कहेकर बुलाना वो खुस होजायेगी.. हें..हें..हें.. क्या तुम्हे मीलती हे..?

देवायत : (हसते) हां पापा.. मेनेही उनकी प्रोपर्टी बीकवादी ओर नया बंगलो लेलीया.. दोनोही मां बेटी ये सब कहा बेचने खरीदने जायेगी.. तो उनका सब काम मेही देख रहा हु..

राजीय : (प्यारसे सरपे हाथ घुमाते) बहुत अच्छा कीया तुमने.. तुमभी बीलकुल अपने बापुकी तराह हो.. वोभी उनकी अ‍ैसेही मदद करते थे..

नीर्मला : (पानी लेकर आते) लीजीये पानी पीजीये.. अब चाइ बनादु की सीधा खाना ही खाना हे..?

राजीव : (हसते) अरे बादमे खा लेगे पहेले इसे थोडी चाइतो पीला.. हम दोनोके लीये लाना.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जुठा गुसा करते) हां.. आपकोतो चाइ पीनेका बहाना मील गया.. डोक्टरने ज्यादा चाइ पीनेको मना कीया हेनां..? (हसते) ठीक हे लाती हुं.. लेकीन थोडीही मीलेगी.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) अरे थीडी देना .. कुछ नही होता.. हें..हें..हें..

तभी नीर्मला हसती हुइ कीचनमे चली जाती हे तब राजीव ओर देवायतभी उनके सामने देखते हसते रहेते हे.. तभी राजीव देवायतका हाथ अपने हाथोमे थाम लेता हे.. ओर इमोस्नल होकर कहेता हे..

राजीव : (आंख गीली करते) बेटा.. थेन्कयु वेरी मच.. आपकी नीमुसे सब सुलाह होगइ.. तबसे वो बहुत खुस रहेने लगी हे.. वरना तो गुमसुम रहेती थी.. बस इसी तराह आप मेरी नीमुका खयाल रखीयेगा.. अब मेरा कोइ भरोसा नही.. मेरी नीमु अकेली हो जायेगी.. तो इनको वही लेजाना..

देवायत : पापा ये आप क्या केह रहे हे..? आपको कुछ नही होगा.. मे आपसे वादा करता हु.. मे मरते दम तक उनका अ‍ैसेही खयाल रखुगा.. बस.. आप खुस रहीये.. हमे ओर कुछ नही चाहीये.. ओर हो सकेतो आप दोनो वही हमारे साथही रहेने आजाइअ‍े.. आपतो जानते हे वहा बहुत जगाह हे..

राजीव : (हसते) थेन्कस बेटा.. मे वहा रेह चुका हु.. तब तुम्हारा जन्मभी नही हुआ था.. लेकीन बेटीके घर ज्यादा दिन नही रहेना चाहीये.. जबतक मे जींदा हु हम दोनो यही ठीक हे.. बस अब हम दोनो वहा आते जाते रहेगे..

देवायत : पापा.. आप अ‍ैसा क्यु कहेते हे..? आपसे अ‍ेक बात पुछु..? क्या आप सभी दोस्तो कभी बापुके साथ आश्रमपे गये हे..?

राजीव : (हसते) हां.. बहुत बार.. सभीतो दो तीन बारही गये होगे.. लेकीन मे ओर विरजी अक्सर तुम्हारे बापुके साथ आश्रमपे जाते रहेते थे.. लेकीन तुम ये सब क्यु पुछ रहे हो..?

देवायत : (हसते) तो क्या बाबाने या फीर मेरे बापुने आपसे कुछ नही कहा..? हमारे बारेमे.. हमारे गांवके बारेमे..

राजीव : (गहेरी सांस लेते) हां.. बाबासेभी ओर तुम्हारे बापुके मुहसेभी.. बहुत कुछ सुना हे हमने..

देवायत : (हसते) पापा.. तो फीर क्या इस बारेमे आप मुजे कुछ बता सकते हे..?

राजीव : (हसते) बेटा क्या करोगे जानकर.. सब उनके कहेनेके मुताबीक ही हो रहा हे.. इस बारेमे मेरी किशनसे अक्सर बाते होती थी.. ओर इसीलीयेतो तुम्हारे खानदानमे पीछली तीन पीढीसे सब अपनी बहेनसे ही सादी कर रहे हे.. ओर उनकी वजहसे मुजेभी मेरी बहेनसे सादी करनी पडी..

बहुत सारे रहस्य छुपा हे.. गांवमेभी बहुत बडा बदलाव आयेगा.. खैर छोडो ये सब बाते.. वो सबतो होकरही रहेगा.. अ‍ेक बार अपने पोतेको आने दो.. फीर देखना यहातो कोइ रीस्ताही नही बचेगा.. सब हमारी तराह आपसी रीस्तोसे बंधे होगे.. सभी प्रकृतीको मानते फीरसे उनके हिसाबसे जीने लगेगे..

देवायत : पापा तो फीर बापुने कभी बाबासे पुछा नही की ये सब हमारे खानदान मे ही क्यु..?

राजीव : (गहेरी सांस लेते) हां बेटा किशनने बाबाको कइ बार पुछा.. लेकीन बाबा अ‍ेक ही जवाब देते थे.. की ये सब अ‍ेक खास मक्सदकी वजाहसे हो रहा हे.. वो हिमाचलके राजा फीरसे पुर्न जन्म लेकर आपकेही खानदानमे आयेगे.. तब उनका मक्सदभी सामने आजायेगा.. ओर तब बहुत कुछ होगा.. बेटा जो भी होता हे होने दो.. हमे इस बारेमे ज्यादा सोचनेकी जरुरत नही हे.. ओर नाही हम उसे रोक सकते हे.. तो फीर ये सब सोचकर दुखी होना हे..

देवायत : पापा वो तो सब हो ही रहा हे.. लेकीन.. ये सब सुनके आपको बुरा नही लगता..?

राजीव : (हसते) बेटा मे आपका कहेनेका मतलब समज गया.. की आप मुजसे क्या पुछना चाहते हो.. यहीनां.. की मे सब जानते हुअ‍े भी मेरी मंजुकी सादी आपसे कैसे करदी..? तो सुनो.. मुजे ओर तुम्हारे बापुको सब पताथा की ये सब होने वाला हे.. मे पहेलेसे ही सब जानता था..

लेकीन मेने बाबाकी इस बातको नीमुसे छुपाया था.. इसीलीये आप दोनोके बीच कुछ अन्टर सेन्डींग होगइ.. लेकीन अब सब ठीक होगया.. जब ये सब होनेही वाला हे तो दुखी होनेका क्या फायदा..? वेसेभी आपके खानदानमे पीछली तीन पीढीसे सभी अपनी बहेनसे ही सादी करते आये हे..

नीर्मला : (अंदर चाइ लेकर आते) दोनो ससुर जमाइ क्या बाते कर रहे हो.. राजीव आप थोडा कम बोलना.. डोक्टरने मना कीया हेनां..?

राजीव : (हसते) अरे कुछ नही होता.. बस थोडी देवुके साथ पुरानी बाते कर रहाथा.. इनको कुछ जानकारीया चाहीये थी तो उसे सब बता रहा था.. ओर ये मेरा जमाइ नही हे.. बेटा हे मेरा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) ठीक हे.. ठीक हे.. लीजीये देवु चाइ पीजीये.. फीर मेरे साथ बहार चलीये.. वही हम बाते करगे वरना इधर बैठेतो आपके पापातो बोलते ही रहेगे.. अभी खाना बन जायेगा आप मुजे कीचनमे कंपनी दीजीये.. ओर राजीव आप थोडी देर आराम करलो.. फीर खाना खाकर हम सामको आरामसे चलेगे..

राजीव : (चाइ लेते हसते) ठीक हे बाबा.. पहेले हमे चाइतो पीनेदो फीर दोनो बाते करते रहेना.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही चाइ पीने लगे तब नीर्मला राजीवकी नजर बचाते देवायतको छुकर इसारा करती कीचनमे चली गइ.. ओर दोनो चाइ पीने लगे.. तब राजीवभी नीर्मला ओर देवायतको प्यारसे बाते करते देखकर खुस होने लगा.. लेकीन उनको नही पताथाकी अब उनकी बहेन नीर्मला अब उनकी पत्नी नही रही.. अब वो फीरसे अपने पीछले जन्मके पतीकी बीवी हो चुकी हे.. ओर उनसेही अपने तनकी प्यास बुजाती हे..

नीर्मला पीछले जन्मकी तराह इस जन्ममे भी सेक्सके मामलेमे बीन्दास्त थी.. इस जन्ममेभी उसने फीरसे वोही राजाके अंसको पा लीयाथा.. ओर अगले जन्ममेभी फीरसे दोनो मीलने वाले थे.. जब चाइ पीली तब देवायत दोनोके कप लेकर कीचनमे चला गया.. तो वहा नीर्मला रोटी बना रहीथी.. ओर देवायत खाली कप वोसमे रखतेही नीर्मलाके पीछे चला गया ओर उसे पीछेसे अपनी बाहोमे भरलीया.. उनके कंधेपे सर रखते दोनो आपसमे अपना गाल रगडने लगे..

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नीर्मला : (मुस्कराते धीरेसे) क्यु पतीदेव.. अपने ससुरके साथ बहुत बाते करली.. इस बीवीकी याद नही आती..? दोनो क्या बाते कर रहेथे..?

देवायत : (उनके गालको चुमते) कुछ खास नही.. नीमु.. तुम आज इस सारीमे बहुतही खुबसुरत लग रही हो.. जी चाहता हे तुमसे फीरसे सादी करलु ओर अभीके अभी यही प्यार करलु.. क्या मस्त लग रही हे तु.. तुजे देखकर तो कंट्रोलही नही होता.. बीलकुल मेरी दुल्हन लग रही हो..

नीर्मला : (हसते) सबर कीजीये पतीदेव.. मेने ये सब शींगार आपहीके लीये कीया हे.. क्युकी आज मे मेरे रीयल ससुराल जा रही हु.. बस खाना खाकर आप आराम करने उपर आपकी बीवीके रुममे चले जाइअ‍े.. फीर मे राजीव सोजाये तब आती हु.. तब आप मुजे जीतना प्यार करना चाहे कर लीजीये.. फीर हमे वहा अ‍ैसा मौका नही मीलेगा.. बस थोडा राजीवसे ध्यान रखीयेगा.. बस उनको हमपे सक नही होना चाहीये..

कहेतेही नीर्मला पलट जाती हे तब देवायत उनको अपनी बाहोमे भीचलेता हे ओर दोनोके होंठ मील जाते हे काफी देर अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते रहे.. कुछही देरमे दोनोही गरम होकर उतेजीत होगये.. देवायत नीर्मलाको पीछेसे बाहोमे भरते उनके गलेको चुमने लगा ओर दोनो हाथोसे नीर्मलाके बुब्सको थाम लीया तब नीर्मला आंख बंध करते मदहोस होने लगी.. दोनो सबकुछ भुलकर अ‍ेक दुसरेसे प्यार करने लगे..

तभी देवायतने नीर्मलाको प्लेटफोर्मपे बीठा दीया ओर आगेसे सारी ओर पेटीकोट उचा करते अपने लंडको बहार नीकाल लीया.. तो लंडको देखतेही नीर्मलाकी आंखे लाल होजाती हे.. ओर वो सरमाते लंडको मुठीमे पकडकर सहेलाने लगी.. दोनोही वासनाकी आगमे जलने लगे.. तभी देवायत नीर्मलाके पैरोके बीच आगया ओर खडे खडेही लंडको नीर्मलाकी चुतमे उतार दीया.. तब नीर्मला बडे लंडको चुतमे घुसतेही तीलमीलाने लगी..

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तभी देवायत अपनी कमरको आगे पीछे करते नीर्मलाको चोदने लगा.. तो नीर्मला मीठे दर्दके बावजुदभी मदहोस होते देवायतका साथ देने लगी.. तब कुछही देरकी धकापैनी चुदाइके बार देवायतने नीर्मलाकी चुतको अपने पानीसे भर दीया तो नीर्मलाभी साथमे जड गइ.. तभी उसे होस आयाकी दोनोने कीचनमे ही चुदाइ करली हे.. तब नीर्मला जटसे अपनी चुतको साफ करने लगी ओर प्लेटफोर्मसे उतरतेही अपने कपडे सही करने लगी..

फीर देवायतकी ओर देखकर हसते उसे कंधेपे मुका मार देती हे.. ओर जटसे बाथरुममे चली जाती हे.. फीर अपने आपको सही करते वापस कीचनमे आजाती हे.. तो देवायत नीर्मलाकी ओर देखते हसने लगता हे.. तो नीर्मला देवायतको वही प्लेटफोर्ममे बीठा देती हे ओर अपना काम करने लगती हे.. तब तक देवायतभी उनसे बाते करते उनका दिदार करता रहा..

नीर्मला : (तीरछी नजरसे देखते धीरेसे) देवु.. तुम बहुतही नोटी हो.. मुजे छेडनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडते.. करदीने मुजे गंदी..?

देवायत : (हसते) नीमु क्या करु.. तुजे देखतेही कंट्रोल नही होता.. बस अ‍ैसा लगता हे तुजे चोदताही रहु..

नीर्मला : (सर्मसार होते धीरेसे) देवु.. इसीलीयेतो हमने सामको नीकलनेका तैय कीया हे.. आज मे सारी कशर पुरी करलेना चाहती हु.. फीर पता नही हमे अ‍ैसा मौका कब दुबारा मीले.. आप खाना खाकर उपर मंजुके रुममे आराम करने चले जाना.. मे राजीवको सुलाकर आपके पास आजाउगी.. तब जीतनी मरजी हो अपनी मनमानी करलेना.. अबतो मेभी आपके बगैर नही रेह सकती.. चलो अब खाना बनानेदो..

जब नीर्मलाने खाना बनालीया तो दोनोही बहार आगये तब नीर्मलाने राजीवकोभी जगा दीया ओर खानेके लीये केह दिया.. फीर तीनो मीलकर खाना खाने बैठ गये.. तब नीर्मला जान बुजकर देवायतके पास राजीवके सामने बैठ गइ.. नीर्मला तीनोको खाना सर्व करने लगी तब देवायतने धीरेसे उनको जांगपे हाथ रख दीया ओर सहेलाने लगा..

फीरभी नीर्मला नोर्मल होते खाना परोसती रही.. फीर तीनोही खाना खाने लगे.. तब नीर्मला खाना खाते देवायतके पैरको अपने पेरसे सहेलाती रही.. आज देवायतकी हरकतसे फीरसे उनके तनकी आग भडकने लगी..

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खाना खाते वक्तभी राजीव देवायत बाते करते रहे तभी नीर्मलाने साम चार बजे नीकलनेको कहा.. वो खाना खाकरभी नीकल सकते थे.. लेकीन नीर्मला आज देवायतसे जीभरके प्यार करना चाहती थी.. इसीलीये तो देवायतकी मस्तीया करते उसे प्यार करनेके लीये उक्सा रही थी..

नीर्मलाने राजीवको बाहर धुप ओर आरामका बहाना बताकर सामको चार बजे जानेका तैय कीया.. जब सबने खाना खालीया तब नीर्मलाने राजीवको दवाइ पीलादी.. तब राजीव कुछही मीनीटोमे अपने रुममे जाकर नींदकी आगोसमे चला गया..

तो देवायतभी उपरकी मंजीलमे मंजु भावु वाले रुममे आराम करने चला गया ओर नीर्मला अपना सब काम फटाफट नीपटाने लगी.. काम खतम करतेही हाथ मुह धोकर राजीवके पास चली गइ.. देखातो राजीव खर्राटे मारते सो रहाथा तब नीर्मलाने धीरेसे उनके रुमका दरवाजा बहारसे कडी लगाके बंध करदीया.. फीर होलका मेइन गेइट लोक करते धीरेसे दबे पांव उपरकी मंजीलपे चली गइ.. ओर मंजुके रुममे जातेही उनकाभी दरवाजा बंध करदीया..

तभी दरवाजेकी आहट सुनकर देवायतने आंख खोलकर देखा तो नीर्मला धीरेसे अपने सब कपडे नीकालके अच्छेसे अ‍ेक टेबलपे रख रहीथी ताकी वो कपडे खराब ना हो ओर उसे दुबारा पहेन सके.. देवायत उनको कपडे नीकालते देखता रहा.. ओर नीर्मलाने सब कपडे नीकाल दीये.. अब वो केवल टु पीसमे रेह गइ ओर उसने तीरछी नजरसे देवायतकी ओर देखा.. तो देवायत सोनेका नाटक करने लगा.. ओर नीर्मलाने सरमाते धीरेसे अपनी ब्रा ओर पेन्टी भी नीकालदी..

वो अ‍ेकदम नंगी होकर धीरेसे देवायतके पास आकर लेट गइ ओर करवट लेकर देवायतकी ओर देखने लगी.. ओर आहीस्तासे देवायतके चहेरेपे जुकते अपने होंठ देवायतके होठोसे मीला दीया तभी अचानक देवायतने उसे कसके अपनी बाहोमे भीचलीया ओर नीर्मलाको खीचकर अपने उपर चडालीया.. तब नीर्मलाने अपने खुले बालोसे देवायतका चहेरा ढक दीया ओर उनकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखते धीरे धीरे देवायतके होठोकी ओर अपने होंठ लेजाते देवायतके होंठोको अपनी गीरफ्तमे लेकर चुमने लगी..

आज नीर्मलापे वासना पुरी तराह हावी हो चुकीथी.. उनकी चुत अभीसे फडफडाते पानीका रीसाव करने लगीथी.. वो अब सीर्फ देवायतकोही अपना पती समजने लगी थी.. ओर अचानक देवायतके उपरसे उतर गइ ओर देवायतको हाथ खीचकर बेडपे बीठा दीया..

ओर नसीली नजरोसे उनकी आंखोमे देखते फटाफट देवायतके कपडे भी नीकालने लगी.. ओर देवायतको बीलकुल नंगा करदीया..

तब वो बीना कुछ कहे बेडपे पीठके बल अपना पैर फैलाकर लेट गइ.. ओर देवायतको खीचकर अपने उपर चडा लीया.. ओर उनको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. वो कुछही देर पहेले देवायतका तगडा ओर विसाल लंड अपनी चुतमे लेकर कीचनमे चुदवा चुकी थी.. उनको राजीव ओर किशनके लंडसेभी ज्यादा देवायतका लंड बहुतही पसंद आने लगाथा इसीलीये वापस जल्दसे जल्द देवायतका विसाल तगडा लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आज दुसरा कोइ प्यार नही बस मुजे तृप्त करदो.. डालदो अंदर अपना मुसल हथीयार मे इनके बीना नही रह सकती.. आज मेरी सारी कशर पुरी करदो.. डालदो प्लीज.. कीतने महीनोसे मे इनके बीना तडपी हु.. अब सीर्फ आपही मेरे पती हो.. मे सीर्फ आपकी हु.. ओर अब आपसेही चुदवाउगी..

तभी देवायत उनके उपर लेटकर नीर्मलाको कीस करने लगा ओर नीर्मलाने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतका बडा लंड अपनी मुठीमे भरलीया ओर अपनी चुतपे तीन चार बार घीसते लव होलमे सेट करने लगी.. ओर देवायतने उनके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेलीया ओर कमरको अ‍ेक जटका दे दीया तब आधा लंड नीर्मलाकी चुत चीरते अंदर चला गया तो नीर्मला तीलमीलाते छटपटाने लगी..

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वो कुछ सोच समज पाती उनसे पहेले देवायतने अ‍ेक ओर जटका मार दीया.. तब पुरा लंड नीर्मलाकी चुतमे समा गया ओर उनकी बच्चेदानीसे टकरा गया.. तब नीर्मलाकी अ‍ेक जोरदार चीख नीकल गइ जो देवायतके मुहमेही दब गइ.. नीर्मलाकी आंखसे आंसु नीकलने लगे छटपटाते अपना मुह इधर उधर करते बेडपे अपने दोनो पैर पटकने लगी.. देवायत नीर्मलाको कइ बार चोद चुका था.. ओर अभी अभी कीचनमेभी उनसे चुदवाकर आइथी.. फीरभी देवायतके लंडको जेलना उनके लीये आसान नहीथा..

लेकीन नीर्मलाको नही पताथाकी जडी बुटीकी वजहसे देवायतके अंदर काफी बदलाव होने लगे थे.. उनका लंड पहेलेसे ज्यादा मोटा ओर लंबा होगया था.. देवायतकी उमरभी वही थंभ गइथी.. वो आजभी अ‍ेक जवान लडकेकी तराह दीख रहाथा.. अबतो लखनभी उनकी उमरके बरोबर दीख रहाथा.. भानुभी देवायतसे उमरमे बडा दीखने लगाथा.. फीरभी देवायत ओर मंजु आजभी अ‍ैसेही जवान ओर पहेलेसेभी आकर्सक दीख रहेथे.. ओर वो सब काम ओर रतीकी बदौलत हो रहाथा..

नीर्मलाभी बहुतही कामुक ओरत थी.. वो तीन तीन लंडको खा चुकी थी.. लेकीन देवायतके लंडने उनको अपना कायल बना दीयाथा.. अब देवायत ओर उनका लंडही उनकी आखरी मंजील थी.. देवायतका व्यक्तीत्व ओर उनका आकर्सणही अ‍ैसाथा की ओरत हो या लडकी अ‍ेक बार उनका लंड अपनी चुतमे ले लेती तब हमेसाके लीये उनकी होकर रेह जाती..

यही हाल आज नीर्मलाकाभी था.. देवायत नीर्मलाके होंठ ओर उनके गलेको चुमते उसे कमरको आगे पीछे करते होले होले नीर्मलाको चोद रहाथा.. तो नीर्मलाभी मदहोस हो चुकीथी ओर देवायतको अपनी बाहोमे आहे भरते मजेसे चुदवाने लगी..

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कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. नीर्मला जबभी जडनेकी कगारपे होती देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचलेती.. ओर उनसे लीपलोक करते जडने लगती.. तब देवायत नीर्मलाको चोदते हुअ‍े उनके दोनो उरोजोका मर्दन करता तो कभी उनके गलेको चुमने लगता तो कभी बुब्सकी नीपलको चुसने लगता.. उनकी यही हरकत नीर्मलाको पागल करदेती.. ओर उसे बार बार जडनेको मजबुर कर देतीथी..

आखीर लंबी चुदाइके बाद देवायतके लंडनेभी जवाब देना मुनासीब समजा.. ओर देवायतके तनमे सुरसुराहट होने लगी.. उनको अपने तनमे हजारो चीटीया रेदते हुअ‍े नीचे लंडकी ओर जाते महेसुस होने लगी.. वो कांपने लगा.. ओर उसने नीर्मलाको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया.. अपना लंड नीर्मलाकी चुतमे जडतक घुसा दीया ओर रुक रुककर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तभी नीर्मलाने अपनी बच्चेदानीपे देवायतके गरम वीर्यकी बोछार होते महेसुस होने लगी.. ओर उनका भी पुरा सरीर कांपने लगा..

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वोभी देवायतको अपनी बाहोमे कसके भीचते साथमे जडने लगी.. ओर जबरदस्त चुदाइका भवंडर जो तांडव मचा रहाथा वो सांत होगया.. दोनोही अपनी सांस दुरस्त करते अ‍ेक दुसरेसे चीपकते लेटे रहे.. नीर्मला देवायतकी पीठ सहेलाती रही ओर देवायत उनके बुब्सपे सर रखते ढेर होगया.. देवायत नीर्मलाकी चुतमे लंड डालकर अ‍ैसेही पडा रहा.. नीर्मला बीच बीचमे उनके कंधेको चुमती रही.. वो अभीभी लंड चुतमे होनेकी वजहसे मदहोसीकी हालतमे थी.. वो चाहतीथी की ये चुदाइ कभी खत्म ही नाहो.. तभी..

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नीर्मला : (धीरेसे सरमाते) देवु..आप अ‍ेक असली मर्द ओर मेरे पती हो.. आज आपने मुजे तृप्त करदीया.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. अब मे आपके बगैर अकेली नही रेह सकती.. मे हमेसाके लीये आपके साथ रहेना चाहती हु.. बस मुजे यही सुख देते रहीये..

देवायत : (होंठ चुमते) आइ लव यु टु.. बेबी.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. आजतो पापानेभी कहा हे.. की मेरे जानेके बाद तुम नीर्मलाको अपने साथ हमेसाके लीये साथ रखना.. तुम मेरी पहेली बीवी हो.. ओर हमेसा रहोगी.. तुजे देखतेही तुमको चोदनेका मन होने लगता हे.. क्या जादु करदीया हे मुजपे.. अभीतो अ‍ेक बार ओर करना हे.. आज चोद चोदके तुजे पका मेरे बच्चेकी मां बना दुगा.. क्यु.. मेरे बच्चेकी मां बनेगीनां..?

नीर्मला : (सरमाते मुस्कराते) हां.. कीतना पानी छोडते हो आप.. मेंतो पका प्रेगनेन्ट होजाउगी.. लेकीन लगता हे अब मुमकीन नही हे.. मेरी उमरभी काफी होगइ हे.. वरना में पका आपका बच्चा पैदा करती.. अब मुजे कीसीकीभी परवाह नही हे.. मे सबको जवाब दे दुगी.. कास मे आपका बच्चा पैदा कर सकती..

देवायत : (आंखोमे देखते उनके बालोको सहेलाते) तो फीर पापाको क्या जवाब देती..? हंम..

नीर्मला (सरमाते हसते) बस.. उनकीही चीन्ता हे.. वरना मे सचमे आपका बच्चा पैदा करती.. देवु.. कास आप पहेले पैदा होते ओर मुजे मीलते.. तो आज मे मंजुकी जगाह आपकी बीवी होती.. आप मुजे बहुत अच्छे लगते हो.. मे आपकी दिवानी हो चुकी हु.. लेकीन अ‍ेक बात पुछु..? बुरातो नही मानोगे..?

देवायत : (मुस्कुराते) अब देरसे ही सही.. अब तु मेरी बीवी हे.. मेरी पहेली बीवी.. तुम कुछभी पुछ सकती हे.. अब तेरा क्या बुरा मानना.. बीन्दास्त बोल..

नीर्मला : (आंखोमे देखते) क्या.. आप भुमीसे भी बार बार मीलते होनां..? तो क्या वो कभी आपकी ओर आकर्सीत नही हुइ..? मेतो आपको देखतेही पागल होजाती हु.. तो फीर वो कैसे.. बच गइ.. हें..हें..हें.. वोभीतो मेरी उमरकी हे.. मतलब मुजसेभी काफी छोटी उमर हे.. आजभी जवान दीख रही हे.. खुबसुरतभी हे ओर विधवाभी हे.. कीतने सालोसे बीना पतीके रहेती हे.. इसीलीये पुछ रही हु.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते कुछ बाते छुपाना चाहता हे तो जुठ बोलते) नही.. मे उनको अपनी बुआ मानता हु.. ओर उस नजरीयेसे उनको कभी देखाभी नही हे.. क्या उनको हमारे बारेमे पता हे..? कही तुमने उसे कुछ कहातो नही..? देखना बाबा.. में हमारे रीस्तोको सबसे छुपाकर रखना चाहता हु..

नीर्मला : (सरमाते नजरे चुराते) सोरी.. देवु.. बुरा मत मानना.. हम दोनो पहेलेसेही पकी सहेली हे.. ओर अ‍ेक राजकी बात बताती हुं.. कोलेज लाइफमे हम दोनो लेसीबीयन थी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके साथ सब बाते सैर करती हे.. मुजे उनके बारेमे ओर उनको मेरे बारेमे सबकुछ पता हे.. हमने आपसमे अ‍ेक दुसरेसे कोइ राज नही छुपानेकी कसम खाइ हे..

जब मे उनको इतने सालोके बाद पहेली बार मीली.. तो मेने उसी दिन हमारे बारेमे सबकुछ बता दिया हे.. लेकीन आप फीकर मत करो.. मेने उसे मेरी कसम खीलाइ हे.. वो हमारे बारेमे कीसीको कुछ नही कहेगी.. मुजे भुमीपे पका विस्वास हे.. बस सीर्फ वोही हमारे बारेमे सब जानती हे.. ओर कमीनी हमारे बारेमे सुनकर बहुतही खुसभी होगइ थी.. हें..हें..हें..

देवायत : (उनकी आंखोमे देखते) क्या..? नीमु.. ये तुमने अच्छा नही कीया.. अब मे उनको कैसे नजरे मीलाउगा.. मेरे बारेमे वो क्या क्या सोचेगी.. मेरे बारेमे ओर क्या क्या बता दिया हे..? वो ये सब सुनकर कुछ बोली नही..?

नीर्मला : (सरमाते हसते) कमीनी क्या बोलेगी.. वोतो उलटा सुनकर खुस होगइ.. मेने उनको आपके हथीयारके बारेमे बता दिया.. तो कमीनी अ‍ेक्साइटेड होगइ.. ओर मेरे सामनेही अपनी चुत सहेलाने लगी.. वो भी काफी सालोसे बीना पतीके अकेली रेह रही हे.. वोभी मेरी तराह बहुतही प्यासी ओरत हे.. बहारसे बहुत सीधी सादी ओर धार्मीक दीख रहीहे लेकीन वो भी बहुतही गरम ओरत हे..

देवायत : (हसते) क्या भुमी बुआ ओर कामी..? दिखनेमेतो बहुत धार्मीक लगती हे.. हें..हें..हें.. सारा दिन कोइ ना कोइ कीताब पढती रहेती हे.. उसे दखकर लगतातो नही की तेरी तराह प्यासी हे.. मुजसेतो बहुत बाते करती रहेती हे..

नीर्मला : (सरमाते धीरेसे) देवु आप कीसीको मत कहेना.. मे इतने सालोके बाद जबसे उनको मीली हु वो आजभी हप्तेमे मुजे अ‍ेक बार घरपे बुला लेती हे.. आपकोतो पता हे वो घरपे अकेली होती हे.. तब हम दोनो वही पुराना लेस्बीयन खेल खेलती हे ओर वो अपनी प्यास बुजा लेती हे.. बस मेतो आपसे अ‍ैसेही पुछ रहीथी.. नरेशके गुजर जानेके बाद आपके बापुने उनका बहुत खयाल रखा.. सृतीको उन्होने ही पढाया हे.. मुजेतो कुछ आसंकाये होती हे.. कही सृतीभी तो आपकी बहेन नही..? हें..हें..हें..

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देवायत : (हसते) नीमु तुम ये क्या बोल रही हो.. बापु उनको अपनी बहेन मानते थे.. ओर उनसे ही राखी बंधवाते थे.. बापु अ‍ैसा नही कर सकते.. हें..हें..हें.. सृती.. मेरी बहेन..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) देवु.. बुरा मत मानना.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? जब आपके बापुने उनकी सगी बहेनसे यानी आपकी मां से सादी करली.. तो येतो मुह बोली बहेन हे.. ओर अ‍ेक राजकी बात बताउ..? मे ओर आपके बापु जब कोलेजमे थे.. तब कइ बार भुमीके घरपे या कीसी होटेलमे मीले हे..

मे भुमीको लेकरही उनको मीलने जाती थी.. ताकी कीसीको मुजपे सक ना पडे.. ओर कइ बार जगाहकी प्रोबलेमकी वजहसे हम दोनो भुमीके सामने कइ बार सेक्स कर चुके हे.. तब वो आपके बापुकी ओर कामुक नजरोसे देखती रहेती.. अकेली हमसे दुर बेठकर अपनी चुत सहेलाती रहेती..

देवायत : (हसते) क्या भुमी आंटी आपके साथ रहेती..?

नीर्मला : (हसते) हां देवु.. अब आपही कहो.. क्या कोइ ओरत अपने पतीसे ज्यादा अपने भाइको तवजो क्यु देती हे..? ओर नरेशभी तो सृती १२ सालकीथी तबही गुजर गयाथा.. तबसे आपके बापुनेही उनका सब खयाल रखा हे.. वो सब मुजे भुमीने ही बताया.. इसीलीये मुजे उनपे आसंका रहेती हे.. मेरे पुछने परभी उन्होने मुजे आपके बापु ओर उनके रीस्तोके बारेमे ज्यादा कुछ नही बताया.. हर बार हसते हुअ‍े बातको टाल देती हे.. कहेती हे वो मेरा भाइ था.. कमीनी बहुतही सातीर दिमाग वाली हे..

देवायत : (नीर्मलाका मन टटोलते) नीमु.. अगर अ‍ैसा हेतो क्या तुजे बुरा नही लगता..?

नीर्मला : (होंठको चुमते) नही देवु.. वो मेरी सहेली हे.. ओर सहेलीसे पहेले वो अ‍ेक ओरत हे.. ओर मे ओरतोकी तकलीफ भलीभांती जानती हु.. इसी चकरमे मुजे अपने भाइसे सादी करनी पडी.. ओर जबसे हम दोनोके बीच मनमुटाव हो गया तबसे लेकर आज तक मे आपके बीना बहुतही तडपी हु..

तो फीर वो अगर इतने सालोसे बीना पतीके रहेती हे तो आपके बापुके साथ उनका रीलेशन होगा तो मुजे क्या अ‍ेतराज हो सकता हे.. ओर आपके बापुकी छोडो.. इनकी जगाह आपभी होते तोभी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. देवु.. अबतो आपके बापुभी नही हे.. ओर आपही उनका सब काम देख रहे हो.. तो फीर..

देवायत : (नीर्मलाकी आंओमे देखते) हां बोल.. बातको अधुरी क्यु छोडदी.. क्या कहेना चाहती हो तुम..

नीर्मला : (सरमाते नजर चुराते) देवु.. बुरा मत मानना.. आप भुमीके बारेमे कुछ सोचकर आगे बढना चाहो तो बढ सकते हो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बात सीर्फ हम तीनोके बीचही रहेगी.. कहोतो मे भुमीसे बात करु..? इनमे हमारा ही फायदा हे..

देवायत : (गालको चुमते) कैसा फायदा..? नही.. नीमु.. तुम मेरी बीवी हो.. क्या तुम तेरी सौतनको बरदास्त करपाओगी..?

नीर्मला : (हसते प्यारसे गाल सहेलाते) देवु.. मेरीतो ओलरेडी दो सौतन आगइ हे.. हें..हें..हें.. मेरी मंजु ओर मेरी चंदा.. अगर तीसरीभी आगइ तो क्या फर्क पडता हे.. लेकीन चंदाको हमारे रीस्तेके बारेमे नही पता.. तो फीर भुमीमे क्या प्रोबलेम हे.. कमसे कम वो हम दोनोके रीस्तेके बारेमे जानती तो हे.. ओर हमेभी वहा मीलनेमे आसानी रहेगी.. हम दोनोही अ‍ेक साथ आपके बीस्तरको गरम करते हमारी प्यास बुजाती रहेगी.. क्या कहेते हो..?

देवायत : (भुमीसे इस बारेमे बात करते बगैर आगे बढना नही चाहताथा) नीमु.. बाततो तेरी सही हे.. लेकीन इस बारेमे हम ये चारोकी सादीके बाद सोचेगे.. चल अब दुसरे राउन्डके लीये तैयार होजा.. तुनेतो बातोसेही गरम करदीया.. हें..हें..हें..

सुनतेही नीर्मला सरमाके हसने लगी.. दोनोही अ‍ैसी बाते करते फीरसे गरम होगये थे.. नीर्मला अभीभी देवायतका लंड अपनी चुतमे रखकर उनके नीचे लेटी उनसे बाते कर रहीथी.. उनको देवायतका लंड अपनी चुतमे रखकर बहुतही मजा आता था.. ओर वो फीरसे धीरे धीरे अपनी कमर हीलाकर देवायतको चुदवानेमे साथ देने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच जबरदस्त घमासान चुदाइ होने लगी..

दोनोही भुमीकाकी बाते करते काफी गरम हो गयेथे.. ओर उछल उछलकर चुदाइमे मसगुल होगये.. इसी बीच नीर्मला फीरसे दो बार जड चुकी थी.. देवायत बीना नीचे उतरेही नीर्मलाको लगातार साडे तीन बजे तक चोदता रहा ओर आखीर उनकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरते फीरसे खलास होगया.. आज नीर्मला फीरसे पुरी तराह संतुस्ट हो चुकीथी.. देवायत उनके उपरसे उतर गया फीरभी वो वैसेही पडी रही..

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तब उनकी चुत अभीभी फडफडा रहीथी.. ओर चुतसे दोनोका कामरस बहारकी ओर नीकलने लगा.. नीर्मला अभीभी देवायतसे चुदवाना चाहती थी.. वोतो चाहतीथी की देवायत उसे दिन रात लगातार चोदताही रहे.. लेकीन वक्तकी पाबंदीने उसे चुदाइ करवानेसे रोक लीया.. ओर दोनो अ‍ेक साथ बाथरुममे नहाने चले गये.. तब देवायतने वहाभी नीर्मलाको खडे खडे पीछेसे लंड डालकर चोद लीया.. तब नीर्मला बहुतही खुस होगइ..

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फीर दोनोही नहाकर फटाफट बहार आगये ओर तैयार होगये.. आज नीर्मला सजधजके पुरी दुल्हनकी तराह तैयार होकर बहुत खुस नजर आ रहीथी.. ओर नीचे आकर पहेले उसने चाइ नास्ता बना लीया.. तबतक देवायत बहार होलमे सोफेपे बेठकर भानुसे फीर रमेशसे फोनपे कामकी बात करता रहा..

ओर उसने रश्मीसेभी कुछ कामकी बाते करली.. ओर नीर्मलाने राजीवको जगाकर उसेभी तैयार करदीया ओर दोनो बहार आगये तब तीनोने साथमे मीलकर चाइ नास्ता करलीया.. नीर्मलाने अपने सब कपडे सुबहही बेगमे पेक करलीये थे.. राजीव भी हवेलीपे जानेके लीये बहुत उत्सुक था..

देवायत : (हसते) पापा.. तो अब चले..?

राजीव : (हसते) हां भाइ.. हां.. अबतो आनाही पडेगा.. चलो.. चलो..

नीर्मला : (हसते) आप दोनो कारमे बैठी मे घरको ताला लगाकर आती हु..

राजीव : (हसते) हां बाबा सब अच्छेसे बंध करलेना.. लाइट बाइट सब अच्छेसे बंध करना..

तब नीर्मलाके हाथसे देवायतने बेगको लेलीया ओर तीनो बहार नीकल गये.. तब नीर्मलाने सब चेक करके घरको ताला लगादिया.. आज वो ये मानके अ‍ैसे खुस हो रहीथी जैसे अपनी बेटी मंजुके घर नही वो आज सचमे अपने ससुराल जा रही हो.. ओर तीनो कारमे बैठ गये.. राजीव देवायतके साथ आगे बैठ गया तो नीर्मला राजीवके पीछे बैठ गइ ओर सेन्ट्रल मीररसे देवायतका दिदार करती रही.. ओर दोनो मीरर से इसारोमे बाते करते रहे.. ओर कार देवायतके गांवकी ओर दोड पडी..

कन्टीन्यु
 
Bhai thoda sabra karlo.. bus ab vohi hone vala hai.. lekin bicha mai jo bhi kuchh huva vo bhi to batana hai.. muje purane sabhi patroko nyay dilana hai.. abhi ek naya rista Ujagar hone vala hai.. or mai likane me 10 update advance chal rahahu.. agar aap ke hisabse likhuga to story jaldi khatam ho jayegi.. vese sajetion dene ke liye sukriya..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०१ / १

तब नीर्मलाके हाथसे देवायतने बेगको लेलीया ओर तीनो बहार नीकल गये.. तब नीर्मलाने सब चेक करके घरको ताला लगादिया.. आज वो ये मानके अ‍ैसे खुस हो रहीथी जैसे अपनी बेटी मंजुके घर नही वो आज सचमे अपने ससुराल जा रही हो.. ओर तीनो कारमे बैठ गये.. राजीव देवायतके साथ आगे बैठ गया तो नीर्मला राजीवके पीछे बैठ गइ ओर सेन्ट्रल मीररसे देवायतका दिदार करती रही.. ओर दोनो मीरर से इसारोमे बाते करते रहे.. ओर कार देवायतके गांवकी ओर दोड पडी....अब आगे

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उधर भानुके घरसे देवायतके जातेही भावना ओर लता आपसमे धीरेसे देवायतके बारेमें हस हसके बात करते घरके अंदर चली गइ.. भावना अपने रुममे चली गइतो पीछे रमाभी उनके साथ रुममें चली गइ.. तब लताभी सीधी बाथरुममे घुस गइ.. आज उसने हिमत करते दो बार देवायतके सामने आंख मारदी.. ओर जता दीयाकी मेभी आपसे प्यार करती हु.. ओर देवायतनेभी उनके सामने हसते ग्रीन सीग्नल देदीयाथा..

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तबसे लता बहुतही अ‍ेक्साइटेड होगइ थी.. उनकी चुत अ‍ेक बार फीरसे हरकतमे आ गइ ओर बाथरुममे जमतेही देवायतको इमेजींग करते अपनी चुतमे उगली डालकर जोरोसे हीलाने लगी.. फीर अपने आपको सांत करके रुममे जा रहीथी तब साथमे नीलमभी चली गइ ओर उसने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. वो लताके साथ बेडपे बेठ गइ.. तब लताने उनकी ओर सवालीया नजरोसे देखा तो नीलम कुछ परेसान दीख रहीथी.. तब.. लता सबकुछ समज गइ..

लता : नीलु.. क्या बात हे..? तुमने दरवाजा क्यु बंध कीया..? तुम कुछ परेसान दीख रही हो.. कही वो कमीनेका फोन बोनतो नही आगया..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मेरे पास कहा फोन हे.. जो उनका फोन आयेगा.. वो..वो.. आप धिरेन जीजुसे बात करलो.. उसने मुजे कसम दी हे..

लता : (थोडा गुसेसे) क्यु..? तुजे बडी चीन्ता हो रहीहे धिरेन जीजुके कसमकी.. कमीना कहीका.. चल उनका नंबर लगादे.. पहेले तुम उनसे बात कर फीर मुजे फोन दे देना.. ओर फोन स्पीकरपे लगादे.. मे उसे बात करलेती हु.. अ‍ेक बार फीरसे सोचले.. कही तेरा मनतो नही हेनां..? हंममम.. तो अभीसे बोलदे.. बादमे मुजे मत कहीयो.. की दीदीने मोका नही दीयाथा.. चल लगा फोन..

नीलम : (मनतो था फीरभी नीरास होते सरमाते) नही.. दीदी.. अ‍ैसा कुछभी नही हे.. वो बस.. हम दोनो अ‍ैसेही.. मस्ती कर रहेथे.. तो उसने मुजे फोन करनेको केह दीया..

नंबर लगाते नीलम मायुस होगइ.. नीलमको सब पताथाकी कारमे धिरेनने उनके साथ क्या क्या कीयाथा.. धिरेनकी छेडखानीसे नीलमकोभी बहुत अच्छा लगाथा.. ओर वो धिरेनकी ओर काफी ढल चुकी थी.. उनकी जींदगीमे ये पहेली बारथा जो कीसी लडकेने उसे इस तराह छेडाथा.. जीनकी वजहसे वो उनकी ओर आकर्सीत होगइ थी..

ओर वो नादान उसे अपनी जींदगीका पहेला प्यार समजने लगी.. लेकीन उनको क्या पता थाकी ये महज अ‍ेक विपरीत लींगका केवल आकर्सण था.. धिरेनभी उनको अभीतो प्यारके नामपे युस करना चाहता था.. बादमे पता नही क्या होगा.. ओर नीलमने नंबर लगा दीया.. तो लताने खुद फोनको स्पीकर फोनमे करदीया.. सामने धिरेनकी आवाज सुनतेही नीलमकी गभराते दिलकी धडकन बढ गइ..

धिरेन : (सामनेसे फोन उठाते) हेलो.. कौन..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) हेलो.. मे.. मे.. नीलम बोल रही हु.. कहीये जीजु.. क्या काम था मुजसे..?

धिरेन : (खुस होजाते) अरे नीलु तुम..? मुजेतो यकीनही नही हो रहाकी तुम मुजे फोन करोगी.. हें..हें..हें.. कहो.. कैसी हो तुम..? क्या मेरी कसमको मानलीया..? तुजे हमारी याद नही आती..?

नीलम : (गभराते लताकी ओर देखते) जी.. वो.. वो.. कहीयेना क्या काम हे मुजसे..? वरना में फोन रखती हु.. मुजे बहुत काम हे..

धिरेन : नीलु.. कारमे मुजे तेरे साथ कीतना मजा आया.. पता नही तुने मेरी रातोकी नींद चुराली हे.. मेने पुरी रात तेरी यादोमे करवट लेते काटी हे.. मुजे तुमसे सचमे प्यार होगया हे.. आइ लव यु नीलु.. बस मेरा प्यार कबुल करलो.. यकीन मानो मे तुजे सचमे प्यार करने लगा हु.. प्लीज.. अबतो मुजे तुम आइ लव यु कहेदो..

कहातो नीलम प्याका नाम सुनतेही सकपका गइ.. ओर वो गभराते लताकी ओर देखने लगी.. आज वो अकेली धिरेनसे बात करतीतो पका उनका प्यार कबुल करलेती.. लेकीन अभी लताकी हाजरीकी वजहसे वो मायुस होगइ.. क्युकी तब लताभी फोनपे धिरेनकी सब बात सुन रहीथी.. ओर उसने फोन नीलमके हाथोसे अपने हाथोमे लेलीया.. ओर फोनको मुहके पास रखते धीरेसे धिरेनसे बात करने लगी..

तब अ‍ेक बारतो नीलमकी गांडभी फट गइ.. क्युकी आज पहेली बारथा जो नीलमको कीसी लडकेने प्यारका इजहार कीयाथा.. ओर उनका सारा भांडा लताके सामने फुट गयाथा.. वो भगवानको मनमे प्रार्थना करने लगीकी बात अच्छेसे सम्हल जाये.. नीलमपे नइ नइ जवानी छाइ हुइथी.. धिरेनने उसे क्या क्या सपने नही दीखायेथे.. जीनकी वजहसे वो धिरनको खोना नही चाहती थी.. तभी..

लता : (थोडा सख्तीसे धीरेसे) हेलो.. धिरेन मे लताभाभी बोल रही हु.. ये सब क्या हे..? तुमको सरम नही आइ.. अ‍ेक छोटी बच्चीसे इस तराहकी बाते कर रहे हो.. मत भुलो तुम्हारी तीन दिनके बाद पुनोदीदीके साथ सादी होने वाली हे.. अगर मेने उसे बता दियातो सोचो तुम्हारा क्या हसर होगा..

धिरेन : (सकपकाते गांड फटजाती हे) हेलो..कोन..? कोन बोल रहा हे..? ठीकसे आवाज नही आती..

लता : (थोडी उची आवाजमे सख्तीसे) धिरेन.. मे लताभाभी बोल रही हु.. तुम्हारे सालेकी बीवी.. देखो.. धिरेन.. तुम नीलमका ख्वाब देखना छोडदो.. वो अभी बच्ची हे.. अगर तुम चाहते होकी मे ये सब बाते लखनको या पुनोदीदीको नाी बतादु.. तो नीलमको छोडदो.. मे तुम्हारी जींदगी खराब करना नही चाहती.. समज गयेनां..? वरना कहीके नही रहोगे.. मुजे पता हे तुमने नीलुके साथ कारमे क्या क्या कीयाथा..

धिरेन : (गांड फटते) जी.. लताभाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजसे गलती होगइ.. आइन्दा मे उनसे बात नही करुगा.. सोरी.. सोरी.. बस अ‍ेक बार माफ करदो.. प्लीज.. वरना मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगा..

लता : (थोडी नरम आवाजमे) देखो.. धिरेन अब तुम्हारी पुनोदीदीके साथ सादी होने वाली हे.. क्या वो तुम्हे ओर तुम उनको प्यार नही करते..? तो फीर अ‍ैसी बचकानी हरकत क्यु करते हो..? पता नही पुनोदीदीने तुम्हारे साथ क्या क्या सपने सजाये होगे.. ओर तुम होकी..

धिरेन : (गभराते) वो.. वो.. लताभाभी.. बुरा मत मानना.. मुजे लगता हे.. पुनो मुजसे प्यार नही करती.. इसलीये मे बहेक गयाथा.. आपने देखा नही वो मुजसे कैसे दुर ही रहेती हे.. ओर मे नीलमको मीला तो उनका साथ मुजे अच्छा लगा.. इसीलीये फोन कीया.. अब नही करुगा सोरी..

लता : (नरमीसे समजाते) देखो धिरेन.. हम लडकीया आपकी तराह खुलकर प्यार नही कर सकती.. आपको कुछ गलत फहेमी होगइ हे.. पुनोदीदीभी आपसे उतनाही प्यार करती हे.. बस अ‍ेक बार आप दोनोकी सादी होजानेदो फीर देखना.. वो आपको कैसे प्यार करती हे.. हो सकता हे कभी कभी कोइ सरीफ लडकी सादीके बादही सबकुछ.. तुम समज गयेनां..? कहोतो मे इस बारेमे पुनोदीदीसे बात करलु..?

धिरेन : (जटसे) अरे नही नही.. वो सब मे देखलुगा.. भाभी.. अ‍ेक बार फीर सोरी.. आप ये बात कीसीको मत कहेना.. वरना मे वहा कीसीको मुह दिखाने लायक नही रहुगा.. प्लीज.. मे पुनदकद खदना नही चाहता..

लता : (मनमे खुस होते) ठीक हे.. लेकीन ये आपके लीये आखरी मौका हे.. आइन्दा अ‍ैसी नादानी कीनां तो में सचमे सबको बता दुगी.. ओर हां.. अ‍ेक बात ओर.. आप नीलमसेतो दुरही रहेना.. समजे..

धिरेन : (राहतकी सास लेते) जी.. भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे फोन रखता हु..

कहेते धिरेनने फोन काट दीया.. ओर अपने सीनेपे दोनो हाथ रखते राहतकी सांस लेने लगा.. आज वो बाल बाल बच गयाथा.. लेकीन उनके दिलो दिमागमे नीलम हमेसाके लीये छा गइथी.. वो ना चाहते हुअ‍ेभी नीलमको अपने दिलसे नीकाल नही पा रहाथा.. ओर वो नीलमको पानेके लीये दुसरा रास्ता सोचने लगा.. लेकीन अभी उनकी सादी नही होजाती तबतकके लीये सबकुछ भुलकर वो काममे बीजी होगया..

तब दुसरी ओर लता ओर नीलम अपने रुममे बेठे थे तब फोन काटतेही लता तीरछी नजरसे नीलमको देखने लगी.. क्युकी नजरोके इस खेलमे लता महारत हासील कर चुकीथी.. वो अपनी माइ सरला - देवायतको ओर अपने भाइ भानु ओर भाभी भावनाके बीच कइ बार चुदाइ करते ओर दोनोके बीच कइ बार नजरोसे बाते करते देख चुकीथी.. खुद वो भी लखनसे सादीसे पहेले कइ बार नजरोसे बाते करते उनसे चुदवा चुकीथी..

उनको नीलमके चहेरेपे बहुत मायुसी नजर आइ.. ओर वो सबकुछ समज गइकी बात सीर्फ अ‍ेक तरफा नही हे.. नीलमके दिलमे भी धिरेनके लीये प्यारका बीज पलने लगा हे.. ओर वोभी धिरेनको प्यार करने लगी हे.. उसने नीलमको अभीके लीये अपनी नीगरानीमे रखनेकी ठानली.. वो जानतीथी अ‍ेक बार कोइ लडकी लंडका स्वाद चख लेती हे तो फीर वो उनके बगैर नही रेह सकती.. इसीलीये उसे अभी नीलमको इन सब चीजसे दुर रखना उचीत लगा.. ओर वो नीलमको समजाने लगी..

लता : (प्यारसे सरपे हाथ घुमाते) देख निलु.. अभी ये सब तेरे लीये ठीक नही हे.. अभी तेरी उमर ही क्या हे..? बस अ‍ेक बार अच्छेसे पढाइ लीखाइ करले.. फीर मे खुद जेठजीसे कहेकर तुम्हारे लीये अच्छा लडका ढुढुंगी.. समज गइनां.. ये धिरेन तेरे लीये ठीक नही हे.. मुजे वो अच्छा लडका नही दीखता.. कोइ अच्छा पढालीखा लडका मीले तब उनके साथ घर बसालेना.. वरना तेरी जींदगी खराब होजायेगी..

नीलम : (सरमाते नजर जुकाते) जी दीदी.. वो वहा सादीमे आयेगे ओर मेरी मस्ती करेगेतो में क्या करु..?

लता : (थोडी सख्तीसे) डफर.. तुम उनको अकेली मीलनाही नही.. तुम हमेसा मेरे साथही रहेना.. अब वो दुबारा अ‍ैसी हीमंत नही करेगे.. वरना इस बार मे उनको छोडने वाली नही हु.. समजी.?. ओर तुमभी खयाल रखना.. उनके सामने कोइ अ‍ैसी वैसी हरकत मत करना.. वरना तेरे साथ कुछ गलत करदीयानां.. तो तुम इस उमरमे अपना पेट फुलाकर घुमती रहेनां.. फीर देती रहेना सबको जवाब.. देख नीलु अभीभी वक्त हे तु समज जा.. वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. मुजे पता हे तुभी वही चाहती हे.. कमीनी..

नीलम : (सर जुकाते मायुसीसे धीरेसे) जी..दीदी.. मे आपके साथ रहुगी..

लता : (प्यारसे सरको सहेलाते) गुड गर्ल.. चल.. अब मुह लटकाना छोड.. ओर कीचनमे चल.. हें..हें..हें..

हसते हुअ‍े लता बेडसे खडी होगइ तब नीलमभी सरमाते हसने लगी.. ओर तीरछी नजरसे लताको देखते बहारकी ओर चलने लगी.. ओर दोनो कीचनमे खाना बनाने चली गइ.. तब लताको नही पताथा की नीलमके दिलमे अब धिरेन पुरी तराह छा चुका हे.. उसने धिरेनके फोन नंबरकी चीठी लतासे छुपकर अपने पास छुपाके रखली थी.. ओर दिनमे मौका मीलतेही रमाके फोनसे धिरेनसे फोनपे बात करनेकी ठानली थी..

तो दुसरी ओर देवायतके जातेही रमा भावनाके रुममे चली गइ.. ओर बहुतही सरमाते हसते हुअ‍े भावनाके पास जाकर बेडपे बैठ गइ.. जीस तराह देवायतने उनकी मस्ती की तबसे रमा.. बहुतही सर्मसार हो रहीथी.. ओर सचतो ये थाकी देवायतकी अ‍ैसी मस्ती उनको अच्छीभी लगने लगी थी.. वो अपने मनकी बात भावनासे करना चाहती थी.. भावनाने भी उनको देखकर हसते सवालीया नजरोसे रमाकी ओर देखा..

रमा : (बहुतही सरमाते हसते) दीदी.. देवरजीतो बहुत बीन्दास्त हे.. मेरी कैसे मस्ती करके गये.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) क्यु.. क्या हुआ..? उसने आपके साथ कैसी मस्तीकी..? कुछ कहा क्या..? कही आपके दुधु बुधु तो नही दबा लीये.. हें..हें..हें..

रमा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) धत्.. आपभी कैसी मस्ती करती हो..? मुजे अ‍ैसे चलते देखकर कहेते थे की आपके पैरमे क्या हुआ..? कही पैरमे मोचतो नही आगइ..? मुजेतो बहुत सर्म आइ.. अब मे उनको क्या जवाब दु.. वहा माजीभी बैठीथी.. वरना उनको मे आज जवाब दे देती.. हें..हें..हें..

भावना : (जोरोसे हसते) तो क्या हुआ केह देती उनको की अपने भाइसे ही पुछलो.. उन्होने ही मेरी अ‍ैसी हालत की हे.. हें..हें..हें..

रमा : (सर्मसार होते हसते पीठमे मुका मारते) दीदी क्या आपभी.. अ‍ैसी हालततो मेरी कभी नही हुइ.. पता नही कल वो क्या खाकर आयेथे.. पुरी रात मुजे सोने नही दिया.. क्या आपके साथभी अ‍ैसा करते हे..?

भावना : (सरमाते हसते) हां.. जब हम दीदीके घरथे तब दीदीनेही मुजे अ‍ेक गोली दीथी.. तब पहेली बार मेने उसे दुधमे मीलाकर पीलादी थी.. तभीतो इस बच्ची ठहेर गइ.. वरना उनमे अब इतना दम कहाकी हमे बच्चा दे सके.. दीदी.. अब भानुमे पहेले वाला जोस नही हे.. बस सादीके बाद मुजे अ‍ेक बच्चा ही दे पाया.. दीदी मुजे बच्चे बहुत अच्छे लगते हे.. मेने क्या क्या सपने देखे थे.. खैर जाने दीजीये सब..

रमा : (सीरीयस होते) दीदी.. बुरा मत मानना.. क्या आप अभी भी उनसे नाराज हे..? भानुके साथ मुजेतो कभी अ‍ैसा नही लगा.. भानु मुजे हर बार संतुस्ट करता हे.. तो फीर वो आपको संतुस्ट क्यु नही करपाया..?

भावना : (हसते) छोडीयेना दीदी.. अब मे कोइ उनसे नाराज नही हु.. लेकीन अब मे मेरी जींदगी अपने तरीकेसे जीना चाहती हु.. ओर अच्छा हे वो आपको संतुस्ट करपाता हे.. लेकीन उसने मुजे कभी संतुस्ट नही कीया.. इसीलीये मुजे उनको गोली खीलानी पडती थी.. सायद हो सकता हे वो मुजसे ज्यादा आपको पसंद करता हो.. ओर आप मेरीतो बीलकुल चीन्ता मत करना.. मुजे आपसे कोइ गीलासीकवा नही हे.. मे आपको आजभी अपनी दीदी मानती हु.. बस आप खुस रहीये.. ओर मुजे अपने तरीकेसे जीने दीजीये..

रमा : (प्यारसे गले लगाते) दीदी.. लगता हे आपने अपने दिलपे बहुत गहेरी चोट खाइ हे.. मेभी इस जखमको जेल चुकी हु.. जब जवानीकी दहेलीजपे कदम रखा.. तब छोटीही उमरमे मेरी सादी करदी गइ.. मानोनां मुजे पैसेके बदले बेचदी गइ.. तब प्यार क्या होताहे मुजेतो पताही नही था.. मुजे मेरे घरवालोने अ‍ेक बारभी नही जाना की मेरे दिलके क्या अरमान हे..

भावना : (हसते) दीदी तो फीर भानु ओर आप दोनोमे प्यार कब होगया..?

रमा : (सरमाते हसते) दीदी.. मेरा पती तब पुरुषमे नही था.. मेरे तो सारे अरमान मीटीमे मील गयेथे.. ओर मे प्यारके लीये बहुतही तरसी हु.. तभी मेरे जीवनमे भानु आगया.. जब मेरे पतीका अ‍ेक्सीडन्ट हुआ ओर वो होस्पीटलमे थे.. तब में ओर भानु वही २० दिन साथमे रहे.. ओर पताही नही चलाकी हम दोनोकी कब आंख मील गइ.. मुजे भानुसे प्यार होगया..

तब उसी रात घरके मंदिरके सामने भानुने मुजसे गांधर्व विवाह करलीया ओर हम दोनोने अपनी सुहागरातभी मनाइ.. मे अपने आपको भानुको पुर्ण समर्पीत कर बेठी.. ओर मेरा सबकुछ भानुको सोप दिया.. मेरा कौमार्य भी.. मे सादी होनेके बादभी अ‍ेक कुआरीथी.. ओर मेरा कुआरापन मेने हमारी सुहागरातमे भानुको सोंप दीया.. भानुने मुजे कुआरी लडकीसे ओरत बना दीया.

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भावना : (हसते) तो फीर ये नीलम..?

रमा : (सरमाते हसते) दीदी भानु वहा २० दिन रहा हे.. फीरतो हमने हर रात बीस्तरमे मीया बीवीकी तराह बीताइ.. हमने हर रात सुहागरातकी तराह रंगीन बनाइ.. भानुभी मेरे मेरे पीछे प्यारमे पागल था.. ओर इसके बादभी हम अक्सर मीलने लगे.. उसी नतीजेके फल स्वरुप भानुने मुजे प्रेगनेन्ट करदीया.. ओर पुरे नौ महीनेके बाद हमारी नीलम आगइ.. हमारे प्यारकी पहेली नीसानी.. बस तबसे मे भानुको पुर्ण समर्पीत हु.. मे तबसे भानुको अपना पती मान चुकी हु..

भावना : (हसते) दीदी.. आप बहुत खुसनसीब हे.. आपको अपना प्यार सादीके बादभी मील गया.. लेकीन मेरे बदनसीबमे वो प्यारभी नही मील पाया जीसे मे चाहती थी.. ओर मुजे भानुसे सादी करनी पडी.. यही सोचके भानुसे सादी करली की चलो वो प्यार मुजे भानुसेही मील जायेगा.. लेकीन मुजे नही पताथाकी भानु आपको प्यार करता हे.. वरना मे आप दोनोके बीच कभी नही आती.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे माफ करदो..

रमा : (भावुको गले लगाते) नही दीदी.. आप माफी मंत मांगो.. गलती आपकी नही भानुकी हे.. उनकोही सादीसे पहेले आपको हमारे रीस्तेकी सब सचाइ बता देनी चाहीये थी..

भावना : (आंसु बहाते) दीदी मेरी किस्मतही खराब हे.. अ‍ेकतो मुजे मेरा प्यारभी नही मील पाया ओर सादी करली तो पतीका सुख.. अब आपही बताओ मे क्या करु..? तंग आचुकी हु इस जींदगीसे..

कहेते भावनाकी आंखसे आंसु बहेने लगे तब रमाने खडा होकर भावनाको अपने सीनेसे लगा दीया.. ओर उनके आंसु बहेते रहे.. ओर रमा उनका सर अपने सीनेमे दबाते खडी रही.. फीर कुछ देरके बाद उनका सर सीनेसे अलग करते अपनी सारीके पलुसे भावनाके आंसु पोछने लगी.. तब भावनाके चहेरेपे फीकी मुस्कराहट आगइ.. ओर उसने अ‍ेक बार फीरसे रमाको हग करलीया.. ओर दोनो फीरसे बेडपे सटकर बैठ गइ..

रमा : (हसते) दीदी.. अपने आपको कभी अकेली मत समजना.. प्यारकी अहेमीत क्या होती हे.. वो भला हम दोनोके अलावा कौन जान सकती हे.. बस आपको बुरा ना लगेतो अ‍ेक बात कहु..? जबभी आपको अ‍ैसा लगेकी मुजे मेरा प्यार मील गया हे तब आप अपना प्यार पानेमें पीछेहट मत करना.. आपकी ये बडी दीदी आपके साथ हे.. मेनेभी सादीसुधा होनेके बावजुद अपना प्यार पालीया.. तो फीर आप क्यु नही..?

भावना : (हसते) क्या तो फीर आपको बुरा नही लगेगा..? अबतो हम सादीसुधा हे.. अब मेरा प्यार मीलभी गया तोभी क्या होगा..? में भानुको ओर इस परीवारको कैसे धोखा देदु..? आपकी बात अलग थी.. की आपके पती पुरुषमे नही थे.. पब भानु..?

रमा : (हसते) दीदी.. बुरा मत मानना.. अ‍ैसे घुट घुटकरतो तुम कैसे जीओगी..? मुजे पता हे तुम आजभी मेरे भानुको माफ नही करपाइ हो.. ओर उसे माफ करनाभी नही चाहीये.. क्युकी उसने तुमको सचमे हमारी बात ना बताकर तुम्हारे साथ धोखा कीया हे..

अगर आपकी जगह मे होती तो मेभी कभी भानुको माफ नही करती.. बस हमारे मा बापको हमारी फीलीग्सकी कुछ पडीही नही हे..

उनके लीये हम महज अ‍ेक जीम्वेवारी हे.. जो वो हमारी सादी करवाके उनमेसे वो मु्कत होजाना चाहते थे.. मेरे साथभी वही हुआ जो सायद आपके साथ हुआ हे.. पता नही आप इतनी पढी लीखी लडकी होकरभी भानुके साथ कैसे सादी करके आगइ.. कुछतो आपकी मजबुरी रही होगी.. जो भानुके पले पड गइ.. इसीलीये मे आपको कहेती हु.. की आपको अपना पुराना प्यार मीलेतो कभीभी पीछेहट मत करना.. ये कोइ धोखा नही हे.. में आपके साथ खडी हु..

भावना : (मुस्कुराते) थेन्क्स दीदी.. अब सायद मेरे दिलका बोज कुछ हल्का होगया.. कास सभी ओरते आपकी तराह सोचती.. अ‍ेक दुसरेका दर्द समजती.. लेकीन दीदी आप रातमे बहुत चीलाती थी.. क्या वाकइ उसने गोली खाइ थी.. हें..हें..हें..

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रमा : (सर्मसार होते धीरेसे हसते) ओर नही तो क्या..? पता नही कोनसी गोली खाकर आयेथे मुजेभी नही पताथा.. दीदी उनका पहेलेसे बहुत बडा होगया था.. ओर मेरी अ‍ेकभी नही सुनतेथे.. बस कैसा जोस चडाथा बीना सुने कीये ही जा रहेथे.. मुजेतो बहुत दर्द हो रहाथा.. अभीभी नीचे बहुत सुजन हे.. अच्छा हुआ कल नीलु ओर लतादीदी नही थी.. वरना वोभी सब चीखे सुन लेती.. हें..हें..हें..

भावना : (हाथ पकडते बाथरुमकी ओर लेजाते) चलीये मे आपको सीकाय करके ठीक कर देती हु.. ताकी आज रात आप फीरसे दोनो मजे कर सके हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते साथ चलते धीरेसे) दीदी.. आज मे उसे कुछ करने नही दुगी.. आपभी ठीक नही हुइ.. वरना आज मे आपकोभी साथ लेजाती.. मुजेतो बहुत सरम आ रही हे.. हें..हें..हें.. अ‍ैसातो मुजे हमारी पहेली सुरागरातमे भी नही चौदाथा.. पुरी रात मुजे बस चोदतेही रहे.. चोद चोदके मेरी मुनीया सुजादी.. हें..हें..हें..

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भावना : (बाथरुममे जाते दरवाजा बंध करते) दीदी.. अब सायद ही मे भानुके साथ फीरसे अ‍ेटेच हो पाउगी.. अब मुजे उनको अ‍ेकसेप्ट करते बहुत वक्त लगेगा.. ओर सायद उनसे अ‍ेटेच होभी ना पाउ.. बस मुजे मेरा खोया हुआ प्यार मील जाये.. मे यही भानुके साथ रहेकर ही अपना प्यार पालुगी.. यही उनकी सजा हे..

रमा : (कमोडपे बेठते) दीदी.. मे प्रार्थना करुगीकी आपके मनकी सब मुराद पुरी होजाये.. देखना अ‍ेक दिन आपको अपना प्यार जरुर मील जायेगा.. अब मुजसे सरमानेकी जरुरत नही हे.. आप चाहोतो मेरे सामनेही अपने प्यारको मील लेना.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी..

दोनोही रुमके बाथरुममे चली गइ तब भावना रमाको कमोडपे बीठाकर उनकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करने लगती हे.. तब रमा सीर्फ भावनाकी ओर देखती रहेती हे.. आज उसे भावनापे बहुत तरस आ रहीथी.. लेकीन उनको नही पताथाकी भावनाके दिमागमे क्या चल रहा हे.. पहेले लता फीर सरला ओर अब रमाको अपनी ओर करनेमे कामयाब होगइ थी..

तो दुसरी ओर रमाभी भावनाकी बातोसे भानुको भावनासे अलग करते भानुके साथ अकेली जींदगी बीतानेका सपना देखने लगीथी.. दोनोही ओरते अपने अपने फायदेके लीये सोचती रही.. फीर सीकाइ करतेही रमाको काफी राहत महेसुस हुइ.. ओर दोनो हसती हुइ बहार आगइ.. तब लता ओर नीलम खाना बना रहीथी.. ओर खाना बनाते लता नीलमके मनको जाननेकी कोसीस करते उनको समजाती रही..

तो भावना ओर रमा सादीमे लेजानेके लीये अपना सब सामान पेक करने लगी.. वहा सबको सादी तक रहेनाथा तो सभीके चार दिनके कपडे.. फीर लताके दहेजका सामान.. सभीको अच्छेसे पेक करनाथा.. फीर दो पहोरका खाना खाकर कुछ देर आराम करके फीरसे घरके सभी लोगोके कपडे ओर लताका दहेजका सामान दोनो अलग अलग पेक करती रही.. अ‍ैसेही पैकींग करनेमे साम ढल गइ..

इसी बीच नीलमने मौका देखतेही सबके कामपे होनेका पुरा फायदा उठालीया.. जैसेही सरलाने उसे गांवके कीरानेकी दुकानपे पेकींगकी रसी लानेको कहा तो वो छुपकेसे रमाका फोन लेकर बहार नीकल गइ.. तब ना रमाको पताथा तो नाही भावु ओर लताको.. सब अपने काममे बीजी थे.. ओर नीलम बहार दुकानपे दोडके चली गइ ओर फटाफट रसी लेकर वही साइडमे सुमसान गलीमे खडी रहेते धिरेनको फोन लगा दीया..

धिरेन : (अन्जान नंबर देखतेही फोन उठाते) हेलो.. कौन..? मे धिरेन बोल रहा हु..

नीलम : (भारी सांसोसे धीरेसे) जीजु.. में.. नीलम.. अभी मम्मीका फोन लेकर बहार आइ हु.. ये मम्मीका फोन नंबर हे सेव कर लीजीयेगा.. अब इसी फोनसे मे आपसे बात करुगी.. आप फोन मत करना.. ओर आइ अ‍ेम सोरी.. मेरी वजहसे लतादीदीने आपको डांट दीया.. उनको हमारे बारेमे सब पता चल गया हे.. अब हम क्या करेगे..?

धिरेन : (खुस होते) नीलु.. तुम फीकर मत करो.. मे तुजे अब फोन नही करुगा.. जब तु होस्टेलमे आजाओगी तब हम वही मीलते रहेगे.. तबतक मुजसे बात मत करना वरना.. वरना ओर लोगोको भी हमपे सक होजायेगा.. लेकीन तुमने मुजे जो कहेनाथा वो कहा नही.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते हसते) क्या..? जीजु मुजे बहुत सरम आरही हे.. अ‍ेक डर लग रहा हे.. अगर कीसीको हमारे बारेमे पता चल गया तो..?

धिरेन : नीलु अब कीसीको पता नही चलेगा.. ओर सुन सायद पुनम मुजे चाहती ही नही हे.. मुजे लगता हे वो कीसी ओरसे प्यार करती होगी.. तभीतो मुजसे दुर रहेती हे.. (जुठ बोलते) नीलु वो मुजसे सादी अपने घरवालो के दबावमे कर रही हे.. अ‍ैसा मुजे लगता हे लेकीन मे स्योर नही हु.. बस अब तुही पता मे क्या करु..? इनसे ज्यादा तो तुमने मुजे प्यार दीया हे.. कारमे हम दोनोने कीतने मजे कीये..

नीलम : (सरमाते धीरेसे हसते) जीजु मे फोन रखु..? मुजे घर जान होगा.. मे दुकानपे रसी लेने आइथी तो छुपकेसे मम्मीका फोन लेलीया मुने जाना होगा.. फीर मौका मीलतेही मे आपसे बात करलुगी..

धिरेन : (हसते) नीलु.. क्या अबभी मुजे जीजु कहेगी..? मेरी बात सुनले मे तुमसे सचमे प्यार करता हु.. ओर मे तुमसे मौका मीलतेही सादीभी करलुगा.. हम मीया बीवी दोनो सहेरमे रहेकर हमारी अलग दुनीया बसायेगे.. क्या मुजसे सादी करोगी..? ओर अभी तक तुमने मुजे आइ लव युभी नही कहा..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) धि..रे..न.. आइ.. लव.. यु.. बस..? अब फोन रखदु..? सायद कोइ आ रहा हे..

धिरेन : (खुस होकर हसते) नीलु.. तुमने सादीके बारेमे कुछ नही कहा..

नीलम : (सरमाते हसते) धिरेन.. पहेले मुजे सहेरमेतो आनेदो फीर हम वही मीलकर डीसाइड करेगे.. की क्या करना हे.. बस सादीमे मुजसे बात मत करना ताकी लतादीदीको मुजपे ओर आपपे विस्वास होजाये.. ओके.. चलो मे फोन रखती हु..

धिरेन : (हसते) बस अ‍ैसेही फोन बखदोगी..? कुछ कीस बीस.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते हसते) धिरेन.. आप बहुत नोटी हो.. मु..हां.. बुच..बुच.. बस.. आइ लव यु..

कहेते नीलमने फोन काटलीया ओर अपनी जेबमे छुपालीया फीर माही मन खुस होते हसने लगी.. ओर रसी लेकर खुस होते वापस घरपे आगइ.. ओर रसी लताको देदी.. तब अ‍ैसे बीहेव करने लगीकी कुछ हुआ ही नही.. ओर वही थोडी मदद करते अपनी मम्मीके रुममे चली गइ.. ओर फोनको चार्जींगपे रख दीया ताकी कीसीको सक नाहो.. ओर वो धिरेनसे बात करते मनमे बहुत खुस हो रहीथी.. ओर धिरेनके साथ सहेरमे उनकी बीवी बनकर घर बसानेका सपना देखने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०१ / २

तभी इधरभी देवायत अपनी कारमे हवेलीपे पहोंच गया.. पुरे रास्तेमे नीर्मला ओर देवायत मीररसे नैन मटक करते अ‍ेक दुसरेके साथ कामुक इसारे ओर मस्तीया करते रहे.. तब राजीवतो देवायतके साथ बातोमे ही बीजी रहा.. तब उनको नही पताथाकी उनकी बहेन कहो या उनकी पत्नी उनकी पीठके पीछे देवायतके साथ क्या क्या गुल खीला रहीथी.. ओर देवायतके कामुक इसारोसे उनकी चुतभी काफी गीली कर चुकी थी.. अगर राजीव उनके साथ कारमे नही होता तो आज पक्का वो देवायतसे कारमेही चुदवा लेती..

जैसेही कार हवेलीके अंदर आकर रुकी तब चंदा मंजु ओर पुनम दोडकर बहार आगइ.. तो कारमे राजीव ओर नीर्मलाको देखतेही मंजुकी आंखोसे खुसीके मारे आंसु बहेने लगे.. तब राजीव ओर नीर्मला कारसे उतर गये.. ओर उतरतेही पुरी हवेलीपे अ‍ेक नजर घुमाते देखने लगे.. तभी राजीवके पास मंजु दोडकर चली गइ.. ओर राजीवको देखती रही.. तभी राजीवकी नजर मंजुकी ओर गइ.. तो मंजु..

मंजुला : (आंसु बहाते) पापा..

राजीव : (अचानबक मंजुको देखकर खुसीसे) अरे.. मेरी बच्ची.. कैसी हे तु..?

कहेतेही दोनो आपसमे लीपट गये.. ओर मंजु उनके पापाको गले लगाकर फुट फुटकर रोने लगी.. तभी चंदाभी आंसु बहाते नीर्मलाको गले लग गइ.. फीर दोनोही राजीव ओर मंजु बाप बेटीका मीलन खुस होकर देखती रही.. तभी मंजुने अपने दोनो हाथोसे राजीवके चहेरेको अपने हाथोमे थाम लीया ओर आंसु बहाकर भी हसते हुअ‍े उनके पापाकी ओर देखती रही.. तब राजीवभी खुस होकर हसता रहा.. तभी..

नीर्मला : मेरी बच्ची.. मेभी यहा खडी हु.. आजा.. मेरे गले भी लगजा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते हुअ‍े) ओह.. मोम.. आपभीनां..

कहेते वो दोडके नीर्मलाके गले लग गइ.. ओर फीरसे रोने लगी तब बाजुमे खडी चंदा हसते हुअ‍े मंजुकी पीठ सहेलाती रही.. तो नीर्मला मंजुको गले लगाते सोरी.. सोरी कहेती रही.. तब मंजु नीर्मलासे अलग होगइ ओर उनका दोनो हाथ थामके उनके सामने हसते हुअ‍े देखती रही.. तो नीर्मलाने उसे अ‍ेक बार फीरसे अपने गले लगा लीया ओर मंजुके कानमे कहेने लगी..

नीर्मला : मेरी बच्ची मुजे माफ करदे.. मेने तुम्हे पहेचानेमे बहुत बडी गलती करदी.. आइ अ‍ेम सोरी..

मंजुला : (नीर्मलाको अपनी बाहोमे कसते) मोम.. भुल जाइअ‍े सब.., सभी बाते अ‍ेक हादसा समजकर उसे भुल जाइअ‍े.. मुजे आपसे कोइ गीला सीकवा नही हे..

कहेते दोनो आपसमे बाते करने लगी तब चंदा राजीवके पास चली गइ ओर उनके पैर छुकर उनके गले लग गइ तो राजीवकी आंखोसे दो बुंद आंसु गीर गये.. ओर चंदाके सरपे हाथ रखकर उनको आशीर्वाद दीया.. तब पुनमभी अपने सरपे दुपटा ढकते राजीव ओर नीर्मलाके पांव छुने लगी.. तो राजीवने उनको धिरेनकी बहु समजकर सगुनके पैसेभी दिये.. तब पुनम बहुतही सरमाइ.. ओर नीर्मलानेभी पुनमको हसते हुअ‍े गले लगा लीया..

फीर सभी लोग हवेलीमे अंदर आगये तब राजीव ओर नीर्मला अंदर आतेही होलका इन्टीरीर देखकर बहुत खुस होगये.. क्युकी उनके जानेके बाद इस हवेलीमे काफी कुछ बदल गयाथा.. ओर दोनो सब जगह नजर घुमाते देखते रहे.. ओर खुस होते रहे.. तब मंजुने दोनोको सोफेपे बीठा दीया ओर खुद नीर्मलाके पास उनसे सटकर बैठ गइ ओर नीर्मलाका हाथ थामलीया.. तब देवायत ओर चंदाभी अ‍ेक साथ साथमे बेठ गये..

राजीव : (खुस होकर हसते) देवु बेटा.. अबतो मेरी दो दो बीटीया इस घरमे बहु बनके आगइ हे.. तुम अपना ध्यान रखना.. हें..हें..हें..

कहतो चंदा ओर मंजु दोनोही सरमा गइ ओर सर नीचा करते हसने लगी.. तभी रजीया ओर दया हसती हुइ सबको पानी देने लगी.. तो राजीव दयाको पहेचान गया ओर दया ओर रामुकाका का हाल चाल पुछने लगे तब दयाभी खुस होगइ.. ओर खाली ग्लास लेकर वापस कीचनमे चली गइ.. तब पुनमभी कीचनमे दयाकी मदद करने लगी.. क्युकी नीर्मला ओर राजीवमे उसे अपने सास ससुर नजर आ रहेथे..

तो वो उनसे बहुत सरमा रहीथी.. तभी भानु ओर लखनभी आगये तब भानुने आतेही अपने सास ससुरके पाव छुअ‍े.. ओर राजीवके पास बैठ गया फीर उनका हालचाल पुछने लगा.. तब लखनभी दोनोके पांव छुकर वही बैठ गया.. तो नीर्मला ओर राजीव भानुसे बाते करते भावनाकी खबर पुछने लगे तभी पुनम ओर रजीया सबके लीये चाइ नास्ता लेकर आगइ ओर सबको चाइ नास्ता देने लगी..

तब नीर्मलाने पुनमका हाथ पकडकर अपने पास बीठा दीया तब पुनम खुब सरमाइ ओर मुस्कराने लगी.. पुनमने अभीभी अपने सरपे दुपटा डालके रखाथा.. तो इसे देखकर चंदाभी खुस हो रहीथी.. आज उसे पुनमके व्यवहारपे गर्व होने लगा.. तभी नीर्मला उनके सरपे हाथ रख दती हे..

नीर्मला : (हसते) चंदा.. तुमने मेरे धिरेनके लीयेतो बहुतही खुबसुरत कुडी ढुंढी हे हें..हें..हें.. अब ये तेरी नही मेरी बहु हे.. मेरी बच्चीको कीसीकी नजर ना लग जाये..

कहेते नीर्मला अपनी आंखोसे काजल लेकर पुनमके कानके पीछे लगा देती हे तब सभी लोग हसने लगते हे तब पुनम सरमसे पानीपानी होगइ ओर जटसे खडी होकर हसते सरमाते अपने रुममे चली गइ.. ओर सब हसते रहे.. फीर भानुने परसो इधर आजानेकी बात करली ओर वो सबकी इजाजत लेकर नीकल गया.. तब चंदा ओर मंजु उसे देखती रही.. तब चंदाको नीर्मलासे भानुकी सादीके बारेमे बता देना उचीत लगा..

सबने चाइ नास्ता कीया.. फीर मंजु ओर चंदा नीर्मलाको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तब मंजुने नीर्मलाको भानु ओर उनकी मामीके बीच जोभी हुआ वो सब सचाइ बतादी.. जीसे सुनकर अ‍ेक बारतो नीर्मलाको भी दुख हुआ.. लेकीन जैसेही बतायाकी ये सबतो होनेही वाला हे.. ओर अपनी कुछ सचाइ बतानेकी बातकी तब जाके नीर्मलाको कुछ राहत महेसुस हुइ.. मंजु ओर नीर्मलाके बीच बहुत कुछ बाते हुइ..

इधर देवायत ओर राजीव आपसमे बाते करने लगे तब लखनभी वही बैठकर दोनोकी बाते सुनता रहा.. देवायत राजीवको इस गांवके बारेमे सब बाते बताने लगा.. ओर उसने यहाके सरपंच ओर उनके कारनामे उनकी जमीनके कागजातके बारेमेभी सब बतादीया.. जीसे सुनकर राजीव बहुतही खुस होगया.. फीर दोनोने भुमीका ओर सृतीके बारेमेभी बातकी.. ओर कहाकी उनका सब मेही देख रहा हु..

तब अ‍ेक बार राजीवने भुमीकाको मीलनेकी इच्छाभी जाहीर की.. तो देवायतने आज सामकोही भुमीका ओर सृतीके इधर आनेकी बात कही.. जीसे सुनते राजीव खुस होते मुस्कुराने लगा.. तो दुसरी ओर भुमीका ओर सृतीके आनेसे देवायतभी मनही मन खुस हो रहाथा.. खास करके भुमीकाके आनेसे.. देवायतने अपने मनमे कइ रहस्योको छुपाके रखाथा.. फीर दोनोही गांवकी बाते करने लगे..

राजीव : बेटा.. तुमने गांवकी सकलही बदलदी.. ओर गांववालोको उनकी जमीन वापस देनेका फैसला लेकर बहुतही नेक काम कीया हे.. अब मेरे किशनके आत्माको सांती मीलेगी..

देवायत : पापा.. सब कागजात मेरे पास हे.. मेने उस नये सरपंचको ओर पुराने सरपंचकी बीवीको सब गांव वालोकी जमीनकी सुची मंगवाइ हे.. ओर मे ये नेक काम आपके हाथोसे सादीके दिन करवाना चाहता हु.. आपही अपने हाथोसे सबको उनकी जमीन वापस सोंप दीजीये..

राजीव : (हसते) लेकीन बेटा में..? ये नेक काम आपही अपने हाथोसे करदो..

देवायत : नही पापा अगर आज बापु जींदा होतेतो मे उनके हाथोसे ये काम करवाता.. लेकीन आपभी मेरे पीता समान हो.. अरे पीता समान क्या आप मेरे पीता ही हो.. तो ये नेक काम आपही अपने हाथोसे करदो..

राजीव : (खुस होकर हसते) चलो ठीक हे.. बेटा मुजे तुमपे गर्व हे.. मे खुसकीस्मत हु की मेरी दोनो बेटी इस घरकी बहु हे.. आप सचमे अ‍ेक राजा हो.. जो गांवकी भलाइ चाहते हो.. मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ हे..

देवायत : (हसते) पापा क्या आप उपरकी मंजीलपे चल सकते हो..? तो आइअ‍े मे आपको हमारी पुरी हवेली दीखाता हु.. हमने कीतना बडा बदलाव करदीया हे..

राजीव : (हसते) नही बेटा अभीतो डोक्टरने ज्यादा ट्रेस लेनेको मना कीया हे.. ओर मेने पुरी हवेली देखी हुइ हे.. यहा ही इतना बढीया डेकोरेशन इन्टीरीयर हेतो उपरभी वही कीया होगा.. मे जब ठीक होजाउ तब देख लुंगा.. क्या अभीभी यहा १६ बडे कमरे हेनां..? की कुछ बदलाव कीया हे..

देवायत : (हसते) ओह.. ठीक हे पापा.. तो आप ज्यादा मत घुमना.. ओर वोही कमरे हे.. कुछ ज्यादा कम नही कीया.. आपका कमरा इधरही होलमे हे आप उनमे आराम कीजीयेगा.. क्या अभी वहा जाना हे..?

राजीव : (हसते) अरे नही.. कुछ देर बैठते हेनां.. जब थक जाउगा तब वहा चला जाउगा.. ओर आपभी कोइ अपना काम होतो करलेना.. मेतो अकेले बेठनेका आदी हु.. हें..हें..हें.. अबतो चार पांच दीन हम यही हे..

देवायत : (हसते) जी पापा..

फीर दोनोही अ‍ैसे पारीवारीक बाते कर रहेथे तब मंजु चंदा ओर नीर्मला मंजुके रुममे बेठकर बाते कर रहीथी.. तो आज दया ओर रजीया बहुत बडीया खाना बना रहीथी.. ओर सब खाना मंजुके कहेनेपे बन रहाथा.. तभी मंजु ओर चंदा नीर्मलाको पुरी हवेली दीखाने लगी.. ओर घुमते घुमते पुनमके रुममे आगइ.. तब पुनम अपने बेडपे लेटकर मोबाइल देख रहीथी तो तीनोको देखतेही जटसे बेडसे उतर गइ ओर सर जुकाके मुस्कराते हुअ‍े खडी होगइ.. तब नीर्मलाने उसे हसते हुअ‍े हाथ पकडके फीरसे बेडपे बीठा दीया..

नीर्मला : (हसते) अरे मेरी बच्ची लेटी रहो.. हमतो तेरा ये रुम देखने आये हे.. (चारो ओर देखते) अरे वाह.. रुमतो तुमने बढीया सजाया हे.. बहुतही सुंदर.. बुलकुल तेरी तराह.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरारतसे हसते) दीदी.. अबतो हमारी पुनो सीर्फ आपकी बहु हे.. मेरी तो अब ननंद हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) हां तो सहीतो हे.. अब तुम उनकी भाभी होगइ हो.. तो तेरी ननंद ही हुइनां..? (पुनमकी ओर देखते) पुनमबेटा.. अबतो इसे तुम भाभी ही कहेना.. ओर खबरदार जो इसे तुमने अपनी सांस मानातो.. हें..हें..हें.. धिरेन मेरा बेटा हे.. समजी..? मे तेरी सास हुं.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) मोम.. आपतो मेरी बेटीको सरमादोगी..

नीर्मला : (हसते) क्या..? ये तुम्हारी बेटी हे..? हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां मम्मीजी.. ये सीर्फ मेरी भाभीही नही.. मेरी मांभी हे.. मेरी गुरुभी मेरी सबकुछ..

नीर्मला : (प्यारसे पुनके सरपे हाथ रखते) अरे वाह मेरी बेटीसे इतना प्यार करती हे.. साबास बेटी.. भाभीभी मां होती हे.. मुजे खुसी हुइ मेरी मंजुको इतनी प्यारीसी मासुम बेटी मील गइ.. क्या पढना खतम होगया..?

चंदा : (हसते) नही दीदी.. अब इनकी सादीके बाद ओपन युनीर्वसीटीमे दाखला दीलवा देगे.. कहेती हे घरमे बेठकर पढाइ करुगी..

पुनम : (सरमाते हसते) मम्मीजी.. अब दिल नही हे पढनेका.. मुजे अब नही पढना..

नीर्मला : बेटी अभी तेरी उमरही क्या हे.. अगर तु पढना चाहेतो जरुर पढले.. तेरे ही काम आयेगा..

मंजुला : नही मोम.. अब पुनमको नही पढना.. उनका मनही नही हे.. अबतो सादी करके अपने बाल बच्चेको सम्हाले.. वोही काफी हे.. पढाइ करके उसे कहा नोकरी करनी हे.. तो घरही सम्हालेगी.. क्यु पुनो..?

पुनम : (अकदम सर्मसार होकर हसते) जी.. भाभी.. ओर सोरी.. मम्मीजी आइअ‍ेना इधर बैठीयेनां..

नीर्मला : (हसते) नही बेटी.. आज तुम्हारी हवेली पुरी देखलु.. तुम आराम करो.. हम चलते हे.. अबतो हम चार पांच दीन यही हे..

चंदा : (हसते) दीदी आप मंजुको लेकर हवेली देखो मे कुछ कीचनका काम देख लेती हु.. देखुतो सही दया आज क्या बना रही हे.. हें..हें..हें.. दयाभी आपको पहेचानती हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हां.. वो रामुभाइकी लडकी हे..

कहेते तीनोही बहार आगइ.. तब पुनम वापस बेडपे लेट गइ.. ओर तीनो नीचे सब कमरेमे घुमते देखती रही.. फीर मंजु नीर्मला दोनोही उपरकी मंजीलकी ओर जाने लगी.. तब चंदा कीचनमे चली गइ.. ओर नीर्मला मंजु उपरकी मंजीलपे आगइ.. वहाभी नीर्मलाने सबकुछ देख लीया.. हवेलीमे तकरीबन सोलाह बडे बडे कमरे थे.. हर अ‍ेक कमरेको देखकर उसे किशनके साथ बीताये हुअ‍े हर रंगीन पल याद आने लगे..

अ‍ैसा कोइ कमरा नहीथा वहा जहा किशनने उसे प्यार(चोदा) नां कीया हो.. नीर्मलाको सब याद आने लगा.. ओर अ‍ेक बार फीर उनकी यादे ताजा होगइ.. तब उनकी चुत फीर अ‍ेक बार फडफडाने लगी.. नीर्मलाने देखा की हवेलीमे काफी कुछ बदल गया हे.. तभी उपरकी मंजीलसे अचानक उनकी नजर दया ओर रजीयाके कमरेकी ओर चली गइ.. जहा अ‍ेक जमानेमे वो अपने परीवारके साथ वहा रहेती थी..

मां तो पहेलेही चल बेसीथी.. वहा सीर्फ उनके बुढे बापु खुद ओर राजीव रहतेथे तब चंदातो बहुतही छोटी थी.. ओर उस कमरेको देखकर उनकी आंखोसे कुछ आंसु छलक गये.. इस कमरेके साथ नीर्मला ओर किशनकी बहुत कुछ यादे जुडी हुइथी.. नीर्मलाको अ‍ेक बार फीर सबकुछ याद आने लगा.. किशनके साथ बीताये हर पल अ‍ेक बार फीर नीर्मलाको रोमांचीत करने लगा.. ओर उनकी चुत फीरसे फडफडाने लगी..

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नीर्मला जबभी अपने कमरेमे अकेली होती तब किशन अक्सर वही आकर उनके कमरेमे रातभर ठहेरके नीर्मलाकी खुब चुदाइ कर लेताथा.. ओर किशनने उसे वही कमरेमे चोद चोदकर प्रेगनेन्ट कर दियाथा.. मंजु यही कमरेमे उनके पेटमे ठहेर गइथी.. तब नीर्मला उन कमरेकी ओर देखकर मंजुकी ओर देखने लगी.. तभी मंजुने देख लीया.. ओर उन कमरेकी ओर देखते उसे सबकुछ ज्ञात होने लगा.. ओर वो नीर्मलासे कहेने लगी..

मंजुला : (धीरेसे हसते) मोम.. ये वोही कमरा हेनां.. जहा आप ओर पापा रहेते थे.. मेरे ससुरने पुरी हवेलीको बदल दीया सीर्फ इस कमरेको छोड दिया.. कहेते थे इस कमरेको अ‍ैसेही रखना हे.. ओर उसने वहा कोइ चेन्ज नही करने दीया.. तब उसने नही बदलनेका कारण नही बताया था.. लेकीन आज मुजे सब ज्ञात होगया हे.. मोम.. यही कमरा हे.. जो असलमे मेरे जन्मके बीज यही आपके गर्भमे स्थापीत हुआ था.. क्या मे सही केह रही हुनां..?

नीर्मला : (सरमाते अपने आंसु पोछते मुस्कराकर) हां बेटी.. मुजे माफ करदे.. मे अभागन तुजे पहेचान नही पाइ.. की मेरी बेटी कोइ सामान्य लडकी नही कीसी ई--का अंस हे.. क्या तुजे हम सबके बारेमे सब ज्ञात होजाता हे..? तो फीर तुजे मेरे ओर किशनके बारेमे जानकर दुख नही हुआ..?

मंजुला : (नीर्मलाको गले लगाकर) नही मोम.. हम सब प्रकृतीसे बंधे हुअ‍े हे.. सायद मे खुदको नही पहेचान पाइ होती तो मुजे जरुर दुख होता.. लेकीन अब कीसीभी रीस्तेसे कोइ दुख नही होता.. क्युकी हमारा जीवन हमारे हाथोमे हे ही नही.. सब हमारे स्वामीके हाथोमे हे.. हम सब तो केवल हमारे स्वामीकी सेवामे यहा अपना कर्तव्य नीभाने आइ हे..

नीर्मला : (हसते) हम सब मतलब..? ओर कोन कौन हे..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) मोम.. मे.. आप.. मेरी सास विमला.. चंदामौसी.. सरलाचाची.. हमारी भावु पुनम लता सृती यहा तक की हमारी भुमीका बुआभी.. ओर कुछ अ‍ैसेभी नाम हे जीसे अभी आप उसे नही जानती.. हम सबका कोइना कोइ रोल होता हे.. तो आप ये सब सोचकर दुखी मत हो.. जबसे मेने ये सब जानलीया तबही मेने आपको मनसे माफ करदीया था.. मोम.. आपभी हम सबका हिस्सा हो.. तभीतो हम सब इस परिवारके सम्पर्कमे आये हे.. जो मे हु वही आपभी हे.. मुजमे ओर आपमे कोइ फर्क नही हे..

नीर्मला : (मंजुसे अलग होते उनके चहेरेको अपनी हथेलीमे थामते) मेरी बच्ची.. इतनी समजदार होगइ हे..? हंम.. की अपनी मांकी गलतीको भी माफ करदीया.. मुजे तुमपे गर्वहे.. बस भगवान करे हम दोनोका हर जन्ममे रुणानुबंध अ‍ैसेही बरकरार रहे.. बेटी तुम सबके बारेमे कैसे सब जान लेती हो.. अ‍ैसी कोनसी शकितया आगइ हे तुममे..?

मंजुला : (हसते) मोम.. आज अनजानेमे ही सही.. आपके मुहसे फीरसे वोही प्रार्थना नीकल गइ.., जो हर जन्ममे आप करती हो.. बस अभी इतनाही केह सकती हु.. की हम दोनो कही जन्मोसे रुणानुबंधसे बंधे हुअ‍े हे.. कभी मे आपकी बेटी बनकर जन्म लेती हु.. तो कभी आप मेरी कोखसे बेटी बनकर आती हो.. ओर वास्तवमे आपही मेरी बेटी हो..

आप नही जानतीकी आप कौन हे.. किशन अंकल कौन थे.. ओर हमारा पती.. हमारा देवु कौन हे.. मे आपको फुरसतमे सब बताउगी.. क्युकी कुछ बाते जानना आपके लीये जरुरी हे.. ये सब बाबाकी दि हुइ शकितीयोके कारण हे.. मोम.. हमारी भावुभी हम दोनोकी तराह हमारे इस परीवारका हिस्सा हे.. आगे बहुत कुछ बदलाव होने वाला हे.. तो आप उसे जानकर वीचलीत मत होना..

नीर्मला : (अ‍ेक नजरसे मंजुकी आंखोमे देखते) बेटी.. तेरी बातोसे अ‍ेक बाततो पता चल गइकी हम सभी कोइ सामान्य ओरत नही हे.. मुजे सब जानना हे.. तेरे बारेमे.. मेरे बारेमे.. हमारी भावुके बारेमे हम सबके बारेमे.. की वास्तवमे हम सब कौन हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) हां मोम.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. बस अ‍ेक बार ये सादी नीपट जाये.. फीर आप दोनोको अब यही रहेना हे.. हमारे पास..

नीर्मला : (हसते) नही बेटा.. हमतो सीर्फ सादी अ‍ेटेन्ड करने आये हे.. इसी बहाने तेरे पापाका हवापानीभी बदल जाये ओर उनको अच्छा लगे.. हम सीर्फ पांच छे दिनही रुकेगे.. फीर हमारे घर चले जायेगे.. तेरे पापाभी कहेते हे बेटीओके घर ज्यादा दिन नही रहेना चाहीये.. तु हमे रुकनेके लीये फोर्स मत करना..

मंजुला : (हसते) ठीक हे मोम.. लेकीन ये सीर्फ आपकी बेटीओका घर नही हे.. मोम.. बुरा मत मानना.. ये घरपे आपकाभी इतना हक हे जीतना आपकी बेटीओका हे.. अ‍ेक दिनतो आपको इधर हमारे पती देवुका दामन थामने आनाही पडेगा.. अपने ससुराल..

नीर्मला : (सरमाकर धीरेसे) मंजु.. प्लीज.. मत कर अ‍ैसी बाते.. मत कर मुजे सर्मीन्दा.. तुमतो सब जानती हे.. मेरा अतीत कैसा हे.. क्या तुजे मेरे बारेमे जानकर दुख नही होता..? मे बहुत गंदी ओरत हु.. ना मे ठीकसे अ‍ेक बेटी बन पाइ.. नाही मे अ‍ेक अच्छी बहेन बन पाइ.. नाही ठीकसे बीवी बन पाइ.. ओर नाही मे ठीकसे मां बन पाइ.. बेटी.. मे अपने हर रोलको ठीकसे नही नीभा पाइ.. में देवुसे रीलेशन रखके तेरे सामने अपने आपको बहुतही सर्मीन्दा महेसुस कर रही हु..

मंजुला : (हसते) मोम.. आपको सर्मीन्दा होनेकी जरुरत नही हे.. ओर सर्मीन्दा होगीतो भी कीससे..? मुजसे..? मोम.. आप बहुतही भोली ओर अच्छी हो.. आपने सबको अपना प्यार बांटा हे.. आपकी हमसब की जींदगीमे क्या अहेमीत हे आपकोतो पताही नही हे.. आपने अपनी जींदगीका हर रोल अच्छी तराह नीभाया हे.. ये सब हमारे उस स्वामीकी मरजीसे हुआ हे.. तो अपना दिल छोटा मत कीजीये.. हमारे देवुके साथ रीलेशनसे मुजे कोइ दुख नही हे.. आपही उनकी पहेली बीवी रहेगी..

नीर्मला : (आंखमे आंसुके साथ) बेटी.. फीरभी मे तेरी गुनेहगार हु.. मे तुमसे क्या कहु..? तेरे ही पती.. जो मेरा जमाइ हे.. उनके साथही.. मेने सादी.. हमारे जीस्मानी तालुकात.. तो मे इधर कैसे आसकती हु..?

मंजुला : मोम.. आप कुछभी मत बोलीये.. आपको नही पता आपका रोल क्या था.. मुजे आपके ओर देवुके रीस्तेसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. आप इधर आजाइअ‍े.. मे खुद केह रही हु.. तो फीर क्या प्रोबलेम हे..? ओर ये आपका हकभी हे.. हमारा देवु इतना सक्षम हेकी हम सबको सम्हाल सकता हे..

हम सबको संतुस्ट कर सकता हे.. मोम.. आप अपनी लाफ खुलकर जीलो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. आप उनकी पहेली बीवी थी.. आजभी हे.. ओर आगेभी हमेसा रहेगी.. सीर्फ इस जन्ममे नही हर जन्ममे आपही उनकी पहेली बीवी रहेगी.. आपका ये हक कोइ नही छीन सकता.. पीछले जन्मकी आपही मेरी सोनु हो..

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जब मंजुलाने इतनी बाते खुलकर कहेदी तब नीर्मला मंजुके गले लग गइ ओर फुट फुटकर रोने लगी.. तब उनकी आवाज सुनने वाला उपरकी मंजीलपे कोइ नही था.. मंजु उनकी पीठ सहेलाती रही.. ओर नीर्मला उनकी बाहोमे उनके कंधेपे सर रखकर आंसु बहाती रही.. कुछ देरके लीये मंजुनेभी उनको रोने दिया ताकी नीर्मलाका जी रोकर कुछ हद तक हल्का होजाये.. फीर मंजुने उसे अपने आपसे अलग करके उनके आंसु पोछ दीये.. तब नीर्मलाने मंजुको प्यारभरी नजरोसे देखते उनके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थामलीया..

नीर्मला : (मंजुके गालोको हाथोमे थामते) बेटी.. मे बहुत खुसकिस्मत हुकी तुम मेरी बेटी हो.. तुमने मुजे कीतनी आसानीसे माफ करदीया.. ओर मे अभागन आजभी तेरी सास विमलाको माफ नही करपाइ..

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. अब आप उसेभी माफ करदो.. कबतक बदलेका बोज अपने दिलमे रखकर रहोगी.. अबतो वोभी इस दुनीयामे नही हे.. ओर वोभीतो कीसीना कीसी रोल नीभाने इधर आइ होगी..

नीर्मला : बेटी सही कहा तुने.. अब मुजे कीसीसेभी कोइ गीला सीकवा नही हे.. ओर नाही कोइ अपने कीयेपे अफसोस.. आज मेरी बेटीने मुजे बहुत कुछ सीखा दीया.. तु वाकइ मेरी बेटी नही मेरी मां हे.. बेटी मुजे सबकुछ जानना हे.. बस मेरे लीये कुछ टाइम नीकाल.. हम दोनो अकेली फुरसतमे सब बाते करेगे..

मंजुला : (हसते) ठीक हे मोम.. आपको अ‍ेक ओर बातभी कहेनी हे.. सायद कल आपकी बेस्ट फ्रेन्डभी इधर आजायेगी.. वो ओर उनकी बेटी.. सृती ओर भुमीका बुआ.. क्या आप उनके बारेमे कुछ जानती हे..?

नीर्मला : (हसते) भुमीका..बु..आ.. हें..हें..हें.. लगता हे तुम काफी कुछ जानचुकी हो.. चल कोइ बात नही.. कमीनी कीतने दिनोसे मीली ही नही.. फोनपे भी बात नही हुइ.. उसे राजीवका तो पताही नही होगा.. मीलेगी तब मुजे बहुत गालीया देगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही मोम.. पापाके बारेमे उनकी देवुसे बात होगइ हे.. इसीलीयेतो इधर आ रही हे.. सादीभी अ‍ेटेन्ड करलेगी ओर आप दोनोको मील भी लेगी.. ओर सृती..? मोम.. इनके बारेमेभी मुजे आपसे बात करनी हे.. वो हम फुरसतमे बात करेगे.. अब चले नीचे.. डीनरभी बन गया होगा..

नीर्मला : (खुस होकर हसते) हां मेरी बच्ची.. चलो.. आजतो तुमसे बाते करते जी हल्का होगया.. हें..हें..हें..

दोनोही मां बेटी मुस्कुराते नीचेकी ओर आने लगी.. तब लखनके कमरेके पास गुजरे तब लखनभी अपने बेडपे लेटकर मोबाइलपे लतासे बात कर रहाथा तो वहा दरवाजेके पास रुकते मंजुने लखनकोभी नीचे डीनरके लीये आनेको केह दीया.. ओर दोनो मां बेटी नीचे आगइ तब राजीव ओर देवायत अभी दोनो गांवकी बाते करते गप्पे लगा रहेथे.. ओर नीर्मला मंजु उनके पास आकर सोफेपे बैठ गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०२/१

दोनोही मां बेटी मुस्कुराते नीचेकी ओर आने लगी.. तब लखनके कमरेके पास गुजरे तब लखनभी अपने बेडपे लेटकर मोबाइलपे लतासे बात कर रहाथा तब वहा दरवाजेके पास रुकते मंजुने लखनकोभी नीचे डीनरके लीये आनेको केह दीया ओर दोनो मां बेटी नीचे आगइ तब राजीव ओर देवायत अभी दोनो गांवकी बाते करते गप्पे लगा रहेथे.. ओर नीर्मला मंजु उनके पास आकर सोफेपे बैठ गइ....अब आगे

तभी डीनरभी बन गया ओर दयाने सबको डीनरके लीये बुलालीया.. तब राजीव ओर नीर्मला अपने रुममे फ्रेस होने चले गये.. तो देवुभी मंजुके साथ अपने रुममे चला गया.. तो उनके पीछे चंदाभी आगइ.. तीनो बारी बारी फ्रेस होगये.. आज चंदा बहुतही सरमा रहीथी.. तभी देवायतने उसे अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होंठ चुमलीया.. तो मंजु ठहाका मारते हसने लगी.. तो देवुने उसनके बुब्स दबालीये..

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तो चंदा खुब सरमाते हसते हुअ‍े देवुके सीनेपे मुके मारने लगी.. ओर उनसे छुटकर बहार भाग गइ.. तब मंजु ओर देवायत दोनोही हसने लगे.. ओर मंजु हसते हुअ‍े देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेका हाथ थामते बहार आगये.. तभी नीर्मला ओर राजीवभी डाइनींगपे आगये तो पुनमभी आकर देवायतके दुसरी ओर बैठ गइ.. ओर दया रजीयाने सबको खाना परोस दीया..

ओर सभी लोग डीनर करने लगे.. तो पुनम खाना खाते नीचेसे देवायतके पैर सहेलाने लगी.. तो देवायतभी अ‍ेक हाथ नीचे इेजाते पुनमकी जांघोपे रख देता हे तब पुनम सीहरसी गइ.. वो कामुक होते तीरछी नजरोसे देवायतको देखने लगी.. तभी देवायत सबसे छुपकर पुनमकी जांघको सहेलाने लगा.. तो पुनमने धीरेसे देवायतके कानमे रश्मीभाभीको वहा मीलनेकी बात कहेदी.. तभी..

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मंजुला : (खाना खाते) देवु आप डीनर करके यहाभी कुछ लोगोको न्योता देना हे उसेभी कहेदो.. तब मे सृती ओर भुमीआंटीको भी फोन कर देती हु.. वो रश्मीभाभी चंपाभाभी रमेशभाइ चारु ओर आपके वो डोक्टर उनीकी बीवी नीशाकोभी कहेदो.. बाकीको जीनकोभी बुलाना हो उसे कल साम तक कहेदो.. कलतो सरलाचाचीके घरके लोगभी आजायेगे..फीरतो आपको टाइमही नही मीलेगा..

राजीव : (सरारतसे मुस्कुराते) कौन हमारी समधन..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाकर हसते) हां.. आपकी समधन.. हें..हें..हें.. उनसे तो बहुत लटु पटु होकर बात करते हो.. हें..हें..हें..

राजीव : (जोरोसे हसते) नीमु.. देखतो सही इधर बच्चेभी बैठे हे.. क्या तुमभी.. हें..हें..हें.. अब वोही तो हमारी अ‍ैक लौती भाभी हे.. तो भाभीसे बात नही करुगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) कोइबात नही पापा.. आप लगे रहो.. हमने कुछभी नही सुना.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) लो..जी.. आगइ पापाकी परी.. हें..हें..हें..

कहातो सब खाना खाते ठहाका मारते हसने लगे.. इसी तराह सब मस्ती मस्ती मजाक करते डीनर करने लगे.. जब डीनर फीनीस कीया तब नीर्मला ओर राजीव बहुतही खुस लग रहेथे.. ओर सभी उनके साथ घुलमील गयेथे.. तब देवायत अपनी बाइक लेकर सीधा रश्मीके घर चला गया.. तो रश्मी उसे देखकर ही खुस हो गइ.. ओर उसे सरपंच वाले रुममे लेजाकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. वो काफी देर तक उनकी बाहोमे खडी रही..

रश्मी : जानु.. कीतने दिनोके बाद आयेहो.. क्या इस बीवीको मीलनेका मन नही करता..? क्या इतना बीजी होगये थे..? सुनाहे आपके ससुरकी तबीयत खराब होगइ थी..?

देवायत : हां रश्मी.. मे वही था ओर कुछ सादीकी खरीदीमे बीजी था.. अब कैसीहे तेरी तबीयत..

रश्मी : (मुस्कुराते होंठ चुमते) जानु.. सब ठीक हे.. ओर मे हरदिन पंचायतकी ओफीसमे जाती हु.. ओर आपने जो कहाथा वो कामभी पुरा होगया हे.. सब लीस्ट रमेशभाइके पास हे.. ओर उसी हीसाबसे हमने सभी दस्तावेजोकी फाइल कंपलीट करदी हे..

देवायत : रश्मी कल सायद सृतीभी इधर आजायेगी.. मे चाहता हु तुम ओर पुनो उसे अ‍ेक बार यही सब दीखादो..

रश्मी : (होंठ चुमते) जानु.. क्या पुनोदीदीका भी काम होगया..? कही दीखाकर कंन्फर्म कीया..?

देवायत : रश्मी वो मंजुकी फ्रेन्ड उन्हीकी डोक्टर हे.. वो कल इधरही आ रहीहे तो वोही सब कल कन्फर्म करलेगी.. वो यही आकर तुम दोनोको चेक कलेगी.. तुमभी उसे दीखादो..

रश्मी : जानु मे जानती हु उनको.. मेराभी उन्हीके पास चेकअप करवायाथा.. ओर उनकीही दवाइआ चालु हे..

देवायत : ओर सुन.. तीन दिनके बाद पुनो ओर लखनकी सादी हे.. तुम्हे अब उधर रोज आना हे..

रश्मी : जानु वोतो आप नही कहेते तोभी मे आजाउगी.. लेकीन आपसे अ‍ेक बातभी कहेनी हे.. आप जरा उस रमेशभाइको समजा देना.. उनकी नीयत मुजे ठीक नही लगती.. मुजे अजीब नीगाहोसे घुरते रहेते हे.. साला सब सरपंच बनतेही सब हरामी होजाते हे.. तो मेने पहेले आपसे बात करनेका उचीत समजा..

देवायत : (कुछ सोचते) रश्मी.. तुभी कुछ कम नही हे.. तु आजभी जवान ओर सेक्सी दीखती हेतो रमेशतो क्या सबकी नजर तुजपे रहेती हे.. बस तुम सीर्फ उनको इतनाही कहेना.. की मुजे घुरना बंध करदो वरना मे ठाकुर साहबको तुम्हारी सीकायत करदुगी.. फीर देखना कैसे उनकी गांड फटती हे.. साला अपनी बीवीकोतो ठीकसे चोद नही पाता ओर दुसरी ओरतोको घुरता हे.. इसीलीयेतो चारुभाभीभी मुजसे चुदवाती हे..

रश्मी : (सरमाते हसते) जानु मे इतनीभी सेक्सी हुतो क्या आप अ‍ैसेही चले जाओगे..? अभी मेरा पेट उतना नीकला नही हे.. कमसे कम मेरी जरुरतको तो पुरा करदीजीये.. बस अ‍ेक बार.. अ‍ेक बार इनके सामनेही मुजे चोद लीजीये.. आज कल खटीयापे पडे हे फीरभी नखरे कर रहे हे.. यही इनके सामने ही मुजे खडे खडे चोद लीजीये..

देवायत : (हसते) रश्मी.. तुभी चारुभाभीकी तराह ठरकी होगइ हे.. चल आजा..

कहेते देवायत रश्मीको वही दिवालसे सटाकर खडा कर देता हे ओर रश्मीका ड्रेस उचा करते उनकी पेन्टी नीचे सरका देता हे.. फीर अपनी पेन्टको ढीली करते लंडको बहार नीकाल लीया ओर रश्मीकी कमर पकडते अपने तनसे सटाते लंड पकडकर उनकी चुतमे घुसा दीया तो रश्मीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. देवायत वही खडे खडे रश्मीको चोदने लगा.. तो रश्मीभी सीसकारीया करते मजेसे देवायतसे चुदवाने लगी..

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दोनो काफी देर चुदाइ करते रहे तभी देवायतने रश्मीको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर नीचेसे कमरको जटके देने लगा.. तो रश्मीका मुह खुला रेह गया ओर आधी आंख चडाते वोभी मदहोसीमे देवायतके साथ जडने लगी.. ओर दोनो सांत होके अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडे रहे.. तब सरपंच गुसा होते रश्मीको देवायतसे चुदवाते हुअ‍े देखता रहा की कैसे उनकी बीवी अ‍ेक रंडीकी तराह उनके सामनेही देवायतसे चुदवा रही हे..

रश्मी : (चुतको साफ करते) जानु.. वो चारुभाभी मीलीथी.. हम दोनोमे आपके बारेमे बात हुइ.. वो आपसे अकेलीमे मीलना चाहती हे.. तो मेने केह दियाकी जबभी मीलना हो मेरे घर चली आना.. मे फोन करके आपको बुला दुगी..

देवायत : (हसते) हां अब वोभी तेरी तराह मेरे लंडकी आदी होगइ हे.. इसीलीये मेनेही उसे तुमसे मीलनेके लीये कहाथा.. लेकीन अभी ये सब सादी बादी नीपटाने दे.. फीर तुम दोनोको मे यहा ठंडी करता रहुगा..

रश्मी : (सरमाते होंठ चुमते) जानु.. अ‍ैसी कीतनी आपकी सीक्रेट बीवीया हे.. ओर हां आप अ‍ेक बार चारुभाभीको मील लेना.. बेचारी आपका कीतना खयाल रखती हे.. वो उनकी सहेलीको आपसे मीलवाना चाहती हे.. क्युकी उनकी सहेलीके घरमे दोनो मीया बीवीके साथ बहुत बडा इस्यु चल रहा हे.. इसीलीये उसे आपकी मदद की जरुरत हे.. सायद उनकाभी चारुभाभी जैसा इस्यु हे.. लगता हे वोभी आपसे चुदवाना चाहती हे.. क्या मस्त माल हे.. आप अ‍ेक बार उनसेभी मीललो..

देवायत : (हसते) ठीक हे.. चल मे चलता हु.. अभी मुजे कइ जगाहपे जाना हे ओर सबको न्योता देना हे..

रश्मी : (जोरोसे बाहोमे भीचते) जानु.. क्या अ‍ैसेही चले जाओये..? रुक जाइअ‍ेनां.. कीतने दिनोके बादतो आये हो.. आपके लीये मे कुछ बनाती हु..

देवायत : (होंठ चुमते) नही रश्मी.. आज जान जरुरी हे.. फीर आउगा तब तेरा दुध पीउगा.. ओर तुम अपना खयाल रखना ओर टाइमपे आजाना.. अब हम सादीके बादही अच्छी तराह मीलेगे.. ओर अब तुभी मीलन करनेमे थोडा ध्यान रखना.. समजी..? कही बच्चेको चोटना लगजाये..

रश्मी : (सरमाते हसते) जी.. समज गइ.. इसीलीये तो आज खडे खडे कीया.. ओर कोइ हुकुम.. हें..हें..हें..

देवायत : हां.. सायद सादीसे पहेले मुजे मीलनेके लीये पुनम इधर आजाये.. तब मुजे फोन करना.. ओर हो सकता हे मेरी कुछ सीक्रेट बीवीभी मीलना चाहे.. तो मे उसे इधर लेकर आउगा.. तुम समज जानाकी ये मेरी सीक्रेट वाइफ हे..

रश्मी : (हसते) हां.. सायद पुनमदीदी अपने पतीके साथ आखरी बार मीलन करना चाहती होगी.. हें..हें..हें.. जानु.. अब इस मकानका क्या करु..? यहा सबकी नजर रहेती हे.. साले सब मुजे ताडते रहेते हे..

देवायत : पुनोकी सादीके बाद तुम हमारे गांवके बहार घर बनवाना चालु करदे.. तो वहा हम सबको मीलनेमे आसानी रहेगी.. रमेशको कहेना लास्ट वाला प्लोट नीकालकर देदे.. मे उनसे बात करलुगा..

फीर देवायत वहासे नीकल गया तब राघव दोनोकी बाते सुन रहाथा ओर देवायतके जातेही रश्मीकी ओर गुस्सेसे घुरने लगा.. तो रश्मी उनकी ओर कातील स्माइल करने लगी.. ओर अपने पेटपे हाथ घुमाते जोरोसे हसने लगी.. तभी अचानक उसने अपना ब्लाउस उचा करदीया ओर उनके बुब्स बहार आगये.. ओर रश्मी राघवकी कमरपे चडके बेठ गइ ओर राघवपे जुकते उनका बुब्स राघवके मुहमे दे दीया.. ओर कहेने लगी..

रश्मी : (थोडा गुसेसे) देखले भडवे.. अभी जो आयाथानां उसीने तेरी बीवीको चोद चोदकर प्रेगनेन्ट कीया हे.. असली मर्द वोही हे.. देखते होनां वो यहा आकर कैसे तेरी बीवीको चोदता हे.. अब कुछही दिनोमे इधरसे दुध नीकलेगा.. तब तु जींन्दा होगातो तुजेभी पीलाउगी..

नामर्द कहीका.. वो कैसे मेरी चीखे नीकलवाता हे.. तुमने भी तेरी बहेनका बहुत दुध पीया हेनां.. अब मे तुजे पीलाउगी.. ओर जबतक तु जीन्दा हे तेरे सामनेही उनसे अ‍ैसेही चुदवाउगी.. तुजे चोदनाका बहुत सोक थानां.. हंम.. देख वो तेरी चंपाको भी अ‍ैसे चोदता हे.. ले देखले..

कहेते रश्मी राघवके उपरसे खडी होजाती हे.. राघवके मुहके पास जाकर अ‍ेक पग उनके बेडपे रखदेती हे ओर अपना पेटीकोट उचा करके अपनी चुत राघवके मुहके पास रखकर उनमे अपनी उंगली घुसा देती हे ओर देवायतको इमेजींग करते जोरोसे चुतमे उंगली अंदर बहार करने लगी.. तब कुछही देरमे चुतसे अ‍ेक पानीका फवारा नीकलकर राघवके चहेरेको भीगो देता हे.. फीर रश्मी ड्रेस सही करते बहार चली जाती हे..

तो राघव उसे गुसेसे आंख घुमाते जाते हुअ‍े घुरने लगता हे.. उनका चहेरा रश्मीके कामरससे भीगा हुआथा फीरभी उनकी मजबुरीथी.. वो अपने आप चहेरेको पोछभी नही सकताथा.. राघवको कामरसकी अ‍ेक अजीबसी खुस्बु आ रहीथी.. रश्मी राघवको जलील करनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडती थी.. राघवभी रश्मीको अ‍ैसेही जलील करता था.. तो अब रश्मीभी राघवसे बदला ले रहीथी.. इधर रश्मी फ्रेस होकर कीचनमे खाना नीकालकर खाने लगी..

दुसरी ओर देवायत रमेशके घर चला जाता हे.. तब रमेश घरपेही था.. ओर वो रश्मी ओर वंदना तीनोही खाना खाकर टीवीमे न्युज देख रहेथे जैसेही देवायतको देखा तो रमेश टीवी बंध करके उनके गले लग गया.. ओर रमेशने उसे हाथ पकडते उनके पास बीठा दीया तब चारु ओर वंदना दोनोही पास बेठते हसती रही.. तभी वंदना अपने रुममे जानेके लीये सरमके मारे खडी होने लगी तब चारुने उनका हाथ खीचके रखा ओर वही बैठे रहेनेका इसारा कीया..

ओर वो देवायतकी ओर कामुक नजरोसे हसती रही.. तब वंदनाभी सर्मसार होते वही बैठी रही तभी रमेशने चारुकी ओर देखातो चारु खडी होकर पानी लेने कीचनमे चली गइ.. ओर अंदर जातेही वो वंदनाको कीचनकी खीडकीसे हाथोके इसारेसे वही बेठनेको कहेती हे.. तब वंदनाकोभी उनकी मम्मीकी हरकतसे सरम आने लगी.. वो जानतीथी की उनकी मम्मी अ‍ैसा क्यु कर रही हे.. ओर वो सर जुकाते बैठी रही.. तब चारु पानी लेकर आगइ.. ओर देवायतको देते उनके हाथोको छुलीया..

चारु : (हसते) कहो देवरजी.. कैसेहो आप ओर मेरी देवरानी..? क्या सादीकी सब खरीदी होगइ..?

देवायत : (हसते) हां भाभी.. बस उसीका न्योता देने आया हु.. तीन दिनके बाद हमने घरके लोगोमेही सादी रखी हे.. तो आप सबको तीन दिन वही आना हे..

रमेश : भाइ क्या सब तैयारीया होगइ..? अरे कुछ काम होतो मुजे या चारुको कहेना.. हम आजायेगे..

देवायत : यार.. वो भानुकी फेमीलीभी इधर आयेगी तो तुम चारुभाभी ओर वंदनाको उधर भेज देना.. ओर वंदना तु अपने सब कपडे लेकर ही उधर आजा.. जबतक पुनो इधर हे तुम उनके साथही रहेना..

वंदना : (सर्मसार होकर हसते) जी..

चारु : (कामुक नजरोसे देखते) देवरजी आप फीकर मत करो मे ओर वंदु दोनोही आजायेगी.. वेसेभी पुनोदीदी वगैरे सबका मेकअप भी तो करना हे.. तो वंदना उधरही रुक जायेगी.. हम कल सुबहही उधर आजायेगे.. कुछ काम बाममे हाथ बट जायेगा.. अ‍ेजी.. क्या कहेतेहो आप..?

रमेश : (हसते) अरे तो चली जाओनां मुजसे क्यु पुछती हो.. वोभीतो हमारा ही घर हे.. क्यु भाइ..?

देवायत : (रमेशकी ओर देखते) ओर नहीतो क्या..? रमेश.. मेने तुजे कुछ काम सोंपाथा.. क्या हुआ इनका..?

रमेश : (हसते) बस इस बारेमे मे कल आपको फोन करनेही वाला था.. अच्छा हुआ आज आप आगये.. सब रेडी हे.. मेने ओर रश्मीभाभीने मीलकर सब पेपर रेडी रखे हे.. कमीनो ने कीतनी गडबड कीथी..

चारु : (जोरोसे हसते) अरे वो बेचारा तो खटीयामे पडा हे.. क्यु उसे गाली देते हो.. हें..हें..हें..

रमेश : चारु वो कोइ बेचारा नही हे.. तुम उनकी सब करतुत सुनतीनां.. तो हमसे पहेले तुमही उनको मार देती.. साला अ‍ेक नंबरका हरामी था.. अब मर जायेतो अच्छा हे..

चारु : (हसते) छोडो ये सब कामकी बाते.. देवरजी कहो आप क्या पीयोगे चाइ या कुछ ठंडा..?

देवायत : (हसते) अरे कुछ नही पीना मुजे ओर जगह भी जाना हे फीर कभी पीलुगा.. हें..हें..हें..

चारु : (कामुक मुस्कानसे) अरे बैठोनां मे अभी फटाफट बनाकर लेआइ.. वंदुकोभी आपसे कुछ कामथा.. तबतक आप दोनो बाते करो मे अभी बनाकर लेआइ.. (कहेते अंदर चली गइ)

देवायत : (हसते) हां वंदना.. बोल सब पेपर रेडी करलीया..?

वंदना : : (सरमाचे हसते) हां.. बस वोही कहेनाथा आपसे.. मेने सब पेपर कंपलीट रखे हे..

देवायत : रमेश.. अबतो सादीके बादही हम जा सकेगे.. अभीतो मेरे सास ससुर ओर कलभी सब महेमान आजायेगे तो मे सादी तक बीजी रहुगा.. ओर तुमभी आजाना.. ओर हमारे पंचायतके सभी सदस्योकोभी आना हे मे उनको मीलकर केहतो दुगा लेकीन तुमभी सबको केहदेना..

रमेश : भाइ उनकी चीन्ता आप मत करो.. ओर कीसीको कहेना हे..? तो बोलो उनकोभी मे केह दुगा..

देवायत : हां यार.. गांवमे हमारे जीतनेभी जान पहेचानके हे सबको कहेना हे.. ओर तुजेतो सब पता हे हमारे जान पहेचान वाले कौन हे.. बस मे वो सुधीरके घर अभी जा रहा हु.. कमीना मेरे स्कुलका दोस्तभी हे.. अगर नही कहुगातो वोतो साला अकडु हे.. मुजसे नाराज होजायेगा.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) ठीक हे भाइ.. लेकीन भाइ.. आजकल वो कुछ ज्यादाही परेसान लगता हे.. उनका कुछ प्रोबलेम हे.. आप उसे बात करके नीपटालो.. मुजेतो कुछभी नही कहेता..

चारु : (ठंडा लाते) लीजीये देवरजी.. पीजीये.. मे ओर वंदु कल आजायेगे..

चारु सबके लीये ठंडा लाइ तो सब पीने लगे.. तब आज पहेली बार वंदनाको चारुने जबरदस्तीसे वही बीठाके रखा.. तो वंदना खुब सरमा रहीथी.. इनके पीछे चारुका बस अ‍ेकही इन्टेस था.. की वंदना ज्यादासे ज्यादा देवायतके साथ वक्त बीता सके.. ओर वंदनाके दिलमेभी देवायतके लीये अपनी फीलींग्स बढ सके.. उसके बाद देवायत वहासे जाने लगा तब रमेश ओर चारु उनको बहार तक छोडने आये..

तबभी चारु अपनी हरकतोसे बाज नही आइ.. उसने मौका मीलतेही देवायतका हाथ पकडलीया ओर अपनी चुचीपे रखदीया फीर उनकी ओर देखते कामुक मुस्कान करने लगी.. ओर देवायत जटसे अपना हाथ खीचकर वहासे सीधाही डो. सुधीरकी क्लीनीकपे चला गया.. जो महज सुधीरके घरसे कुछही दुरी पर थी.. उसी समय रातके तकरीबन ८.४५ बजनेको आयेथे....कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०२/२

सुधीर अपनी क्लीनीक पेसन्टकी वजहसे रात ९ बजेतक खुली रखता था.. ओर कभी कभीतो रातके दस साडे दसभी बज जाते थे.. उन्होने क्लीनीकपे सीर्फ दवाइ देनेके लीये उसी गांवके अ‍ेक पढे लीखे लडके मुनाको रखाथा.. ओर सुधीरके साथही वो घर जाता था.. क्युकी दोनो आसपासही रहेते थे.. ओर केस नीकालनेके लीये अ‍ेक लडकीको रखाथा.. जो मुनाकीही छोटी बहेन बरखा थी.. वोभी पढीलीखी थी.. वो आठ बजतेही अपने घर चली जाती थी..

दोनोही छोटे परीवारसे थे.. उनके पीताजी रमेशके वहा उनकी दुकानपे नोकरी करते हे.. रमेशनेही मुना ओर उनकी बहेन बरखाको पढाया था.. दोनोही भाइ बहेन सहेरमे साथमे बसमे पढने जाते ओर सामको वापस आजाते जीनकी वजहसे दोनो भाइ बहेनको साथमे रहेनेका मोका ज्यादा मीलताथा.. कभी कभी बसमे जगाह कम होती तो दोनो अ‍ेकही सीटमे अ‍ेडजेस्ट करके बैठ जाते..

तो कभी ज्यादा भीडकी वजहसे दोनोही खडे खडे मुसाफरी करते तब मुना उनकी बहेनको प्रोटेक्ट करते उनके पीछे खडा रहेता जीनकी वजहसे उनका लंड तनके खडे होजाता ओर अपनी बहेनकी चुतडपे घुसे मारता.. तब उनकी बहेन सर्मसार होजाती ओर ये कइ बार होता था.. फीरतो वोभी भीड ना होती तबभी मुनासे अपनी गांड सटकर खडी रहेती.. कभी कभी अ‍ेक जगाह मीलती तो मुनाकी गोदमेही बैठ जाती.. ओर दोनोके बीच अ‍ेक दुसरेके प्रती आकर्सण बढने लगा..

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जब दोनो कोलेजमे आगये.. बार बार दोनो अ‍ेक दुसरेके छुनेकी वजहसे नजदीक आने लगे.. फीरतो घरपेभी दोनो अकेले होते तब अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करने लगे.. ओर बात मस्तीयोसे सुरु होकर छेडछाड तब पहुंच गइ.. मुना मस्यीया करते उनकी बहेनके चुतडको दबाता.. तो कभी जान बुजकर उनके बुब्सको छु लेता.. उनकी बहेनभी मुनाकी अ‍ैसेही म्सया करने लगती.. उनकोभी इस खेलमे मजा आने लगा..

ओर अ‍ेक दिन मुनाने कोलेज जाते वक्त मौका देखते उनकी बहेनसे अपने दिलकी बात कहेदी.. तो उनकी बहेनने सरमाते मुनाको सबको पता चल जानेका डर जाहीर कीया तो मुनाने उसे सबसे बात छुपाने ओर जींदगीभर साथ नीभानेकी बात कहेते उसे मनालीया ओर उनकी बहेन बरखाने मुनाका प्यार अ‍ेक्सेप्ट करलीया.. नइ जवानीकी वजहसे आपसमे ही दोनो सबसे छुपकर प्यार करन लगे.. जबभी घरमे कोइ नही होता तो दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा जाते.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगते..

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आखीर अ‍ेक दिन घरपे दोनो अकेलेथे तब दोनोही बहेक गये.. उस दिन मुनाने अपनी बहेनका कौमार्य भंग कर दीया.. ओर तबसे दोनोके बीच जीस्मानी तालुकात बन गये.. फीरतो अक्सर मौका मीलतेही दोनो मील जाते.. मुनाने उनकी बहेनको चोदकर उसे ओर कामुक्त करदीया.. उसेभी मुनासे चुदवानेकी लत लग गइ.. फीरतो दोनोही सबके सोजानेके बाद उपर छतपे मीलते.. यातो बरखा मुनाके रुममे देर रात चली जाती..

ओर खुब चुदाइ करते.. उनकी बहेनभी पढीलीखी होनेकी वजहसे समय समयपे आइपील लेलेती.. दोनोके रीस्तेके बारेमे आज तक कीसीको पता नही चला.. जब पढाइ पुरी होगइ तब दोनोही सुधीरके वहा नोकरीपे लग गये.. सबके सामने भाइ बहेन जैसा व्यहार करते ओर अपनी मयार्दामे रहेते.. ओर रात होतेही दोनो अ‍ेक दुसरेको मीया बीवी मानकर अ‍ेक होजाते.. ओर खुब चुदाइ करते..

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देवायत जेसेही क्लीनीकमे गया वहा कोइ पेशन्ट नही था ओर सुधीरकी केबीनमेभी कोइ नही दिख रहाथा तब देवायत अंदरकी ओर जाने लगा.. तभी पेशन्टको चेक करनेकी केबीनसे उनका आदमी मुना अपने दांतोमे सर्ट दबाकर अपने पेन्टकी क्लीप बंध करते बहार नीकल रहाथा जैसेही देवायतकी ओर नजर गइतो अ‍ेकदा गभराते डर गया.. ओर सर नीचे करते जटसे बहार नीकल गया तो देवायतको कुछ अजीब लगा..

ओर वो उस केबीनकी ओर गया जहासे अभी मुना अपनी पेन्ट पहेनते बहार नीकलाथा.. ओर अंदर जाकते देखा तो सुधीरकी पेन्ट उनके घुटनो तकथी ओर वो जुककर टीस्यु पेपरसे अपनी गांड पोछ रहाथा.. तब देवायतको जरासीभी समजनेमे देर नही लगीकी सुधीर अंदर बेकीनमे अपने आदमी मुनासे गांड मरवा रहाथा.. ओर देवायत सुधीरकी नजर पडे इसे पहेलेही वहासे हट गया ओर बहार चला गया..

फीर कुछ देर रुककर फीरसे अंदर आगया.. तब सुधीरभी अपनी पेन्टमे क्लीप लगाते बहारकी ओर आ रहाथा ओर देवायतको अंदर आते देखकर अ‍ेकबार तो वोभी गभरा गया.. ओर फौरन नोर्मल होनेकी अ‍ेक्टींग करते देवायतकी ओर स्माइल करने लगा ओर उसे आवकार देते अपनी सामनेकी चेरपे देवायतको बेठनेका इसारा करने लगा.. तो देवायत उनके सामने बेठ गया ओर अ‍ेक नजरसे सुधीरकी ओर देखता रहा..

तब सुधीरकी गांड फटने लगी.. क्युकी वो देवायतको कोलेजसे जानता था ओर उसे येभी पताथाकी उनकी कोलेजमे सब उसे गांडु कहेके बुलातेथे.. तब अ‍ेक देवायतही था जो उनके लीये कीसीसेभी लडाइ करलेता था.. तबसे उनकी देवायतसे दोस्ती होगइ थी.. ओर उसने अपनी सादीमे देवायतकोभी न्योता दीयाथा ओर देवायतही उनके साथ सादीके मंडपमे उनके पासही अणवर बनके बैठाथा था..

देवायतकोभी पताथाकी सुधीरको सब गांडु क्यु कहेते थे.. लेकीन उसने आजतक सुधीरकी अ‍ैसी कोइ हरकत नही देखीथी जो सबपे विस्वास कर सके.. ओर आज उसने अपनी नजरोसे सुधीरकी सब हरकतोको देख लीया.. ओर उसे यकीन हो गयाकी वाकइ सुधीर गांड मरवानेका सौकीन हे.. तो वो अपनी खुबसुरत बीवीको कैसे चोदता होगा..? ओर उसे सुधीरकी बीवी नीशाका उनके प्रती देखनेका नजरीया समजमे आने लगाकी वो उनके प्रती क्यु आकर्सीत होने लगी हे..ओर उसे नीशाके लीये हम दर्दी होने लगी.. तभी..

डो.सुधीर : (हसते) आओ भाइ.. कहो आज यहाका रास्ता कैसे भुल गये.. हें..हें..हें.. बहुत दिनोके बाद हमारी याद आगइ..

देवायत : (हसते) भाइ तुजे ओर भाभीको सादीका न्योता देने आयाथा.. लखन ओर मेरी बहेन पुनमकी सादी हे.. तो तुम दोनो मीया बीवीको सादीमे आना हे.. ओर दोनोकी सादी हवेलीपे रखी हे..

सुधीर : (हसते) अरे वाह.. तो फीर घरपे आना चाहीयेनां.. चलो हम दोनो घरपे चलते हे.. आपकी भाभी सुनकर खुस होजायेगी.. आपको बहुत याद कर रही हे.. कभीतो घरपे भाभीको लेकर आया करो..

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. तेरे घरतो चलते हे लेकीन मुजे तुमसे ओर बातभी करनी हे.. बैठ थोडी देर..

कहातो सुधीरकी गांड फटने लगी.. वो गभराने लगा ओर सोचने लगाकी कही अभी देवायतने उसे मुनासे गांड मरवाते देखतो नही लीया.. जो इस बारेमे बात करना चाहते हो.. ओर वो धीरेसे कहेने लगा..

सुधीर : (थोडा गभराते) भाइ.. वो.. वो.. आप कीस बारेमे मुजसे बात करना चाहते हे..?

देवायत : (जोरोसे हसते) अबे साले तो तुम इतना गभरा क्यु रहे हो.. तुम आज भी इतना फंटुसही हो..

सुधीर : (हसते सरमाते) नही यार.. अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. बस तुम मुजसे बहुत कम मीलता हे तो तुमसे बात करनेमे अ‍ेक डरसा लगता हे.. तुम ठहेरे अ‍ेक ठाकुर ओर में.. अ‍ेक गांवका मामुली डाक्टर..

देवायत : (थोडा गुसेमे) साले अ‍ेक जापट लगाउगांना.. बात करता हे.. साले मे तुजे आजभी अपना वोही पुराना दोस्त मानता हु.. ओर मे दुसरोके लीये ठाकुर होगा.. तुम्हारे लीये नही समजा..? देख जाकर रमशेको.. वो आजभी मुजसे अ‍ेक दोस्तकी हेसीयतसे बीन्दास्त बाते करता हे.. साले उनके कहेनेपे तुमसे बात करने आया हु.. सोचा चलो बातभी करलुगा ओर साथमे सादीका न्योताभी देदुगा..

सुधीर : (थोडी आंख गीली करते) सोरी यार.. पता नही अब मुजे क्या होगया हे.. मुजे सबसे डर लग रहा हे.. साला मुजे कोइ समजने वालाही नही हे.. खुद मेरी बीवी भी नही..

देवायत : हां उसीके बारेमे तुमसे बात करनीथी.. बोल दोनोके बीच क्या इस्यु चल रहा हे.. तुम दोनोके बीच कुछ जगडा बगडा हुआ हे क्या..? येतो आज रमेशने कहा तभी मुजे मालुम हुआ..

सुधीर : (आंखमे आंसु बहाते) भाइ मे अब आपसे क्या कहु.. मे टुट चुका हु.. अंदरही अंदर घुट घुटके मर रहा हु.. साला सबका इलाज करता हु.. पर खुदका इलाज नही कर सकता..

कहेते सुधीरका सब्रका बांध टुट चुका ओर वो फुट फुटकर रोने लगा तब देवायत खडा होकर उसे सीनेसे लगा लेता हे.. ओर उनकी पीठ सहेलाता हे.. तब कुछ देर रोनेके बाद सुधीर सांत होजाता हे तब वहीसे अ‍ेक मटकेसे देवायत उसे पानी भरके पीला देता हे.. ओर सुधीर सांत होजाता हे.. फीर वो अपना मुह पानीसे धीकर पोछ लेता हे ओर वापस अपनी जगाहपे बेठ जाता हे.. ओर अपने सीनेमे दबे हुअ‍े राज अपने यारको केह देनेका फैसला करलेता हे..

देवायत : हां सुधीर.. अब बोल तुजे क्या प्रोबलेम हे..? तु बतायेगा तभीतो उनका हल नीकलेगा..

सुधीर : भाइ.. अब आपसे क्या छुपाउ.. भाइ.. में.. में.. आपकी भाभीको डीवोर्स देना चाहता हु..

देवायत : (चोंकते) अरे पागलतो नही होगया क्या..? दोनोके बीच जगडा बगडातो नही हुआ..?

सुधीर : (सरमींदा होते) नही भाइ.. हम दोनो मीया बीवीके बीच कोइ जगडा नही हे.. हम दोनोही अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार भी करते हे.. फीरभी मे उसे डीवोर्स देना चाहता हु.. ताकी उनकी जींदगीतो सुधर जाये.. लेकीन वो मना कर रही हे.. कहेती हे डीवोर्स दियातो मे सुसाइड करलुगी.. अब आपही बताओ मे क्या करु..? उसे दुखी होते भी तो नही देख सकता.. वो बहुतही मासुम ओर अच्छी हे..

देवायत : (थोडा गुसेसे) तो फीर डफर.. अगर तुम दोनोमे इतना प्यार हेतो तुम उसे डीवोर्स देना क्यु चाहते हो..? कुछतो रीजन होगा.. बता क्या प्रोबलेम हे..?

सुधीर : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. प्लीज.. ये बात कीसीको मत कहेना.. दरसल.. दरसल मे आपकी भाभीको सारीरीक सुख ओर बच्चा देनेमे समर्थ नही हु.. ओर वो मुजे बार बार बच्चेके लीये फोर्स कर रही हे.. कहेती हे अपना इलाज करवाओ.. लेकीन अब उसे कैसे समजाउकी मेरा इलाज नही हो सकता.. मे उसे बच्चा नही दे सकता..

देवायत : (थोडा चींतीत होते) क्यु..? तेरा इलाज क्यु नही हो सकता..? अबतो विज्ञानभी काफी आगे बढ चुका हे.. ओर तुम खुद अ‍ेक डोक्टर हो.. तो इलाज करवानेमे क्या प्रोबलेम हे..?

सुधीर : (सरमाते) भाइ.. अब आपसे क्या कहु.. आपतो सब जानते हो.. बस बचपनसे मेरी कुछ गलत आदतकी वजहसे.. जो मे आपको नही बता सकता.. मेरे होर्मोन्स सामान्य मानीवसे कुछ अलगही हे..

देवायत : (थोडा सख्त लहेजेमे) मुजे पता हे तेरी आदत.. कोलेजमे सब सचही कहेते थे.. लेकीन में नही मानता था.. ओर आज देखभी लीयाकी वो लोग सच ही कहेते हे.. कमीने तुजे अ‍ैसी गलत आदत कहासे लग गइ.. हंम..? क्या इनकी वजहसे तुजे प्रोबलेम होगइ हे..? मुजे सब सच बताना..

सुधीर : (सर नीचे करते सरमाते) भाइ.. सोरी.. क्या आपने आज देखलीया..?

देवायत : (थोडी सख्तीसे) हां देखलीया.. अभी अभी वो रमशेके आदमीका लडका गया हे.. अपनी पेन्ट पहेनते.. सधीर तु अ‍ेक डोक्टर हे.. ओर डोक्टर होकर तुजे अ‍ैसी आदत कहासे लग गइ..? बात कुछ समजने नही आइ.. अगर तुजे पताही थाकी मे सारीरीक सुख ओर बच्चे देनेमे सक्षम नही हु.. तो फीर तुमने नीशाभाभीसे सादीही क्यु की..? क्युकी उनकी जींदगी खराब..

सुधीर : (खडे होते) भाइ.. सोरी.. अब मुजे आपको सब सचाइ बतानीही पडेगी वरना आपभी मुजे गलतही समजते रहोगे.. भाइ मेरे घरपे ये बात कोइ नही जानता.. मेने कीसीको नही बताया.. लेकीन मे आपको फुरसतमे सबकुछ सच बता दुगा.. अभीतो जानेका टाइम हे ओर आपकोभी ओर जगाह न्योता देने जाना हे..

तो आइअ‍े हम घर चलते हे आपही अपनी भाभीको न्योता देदो.. जब सादीका नीपट जायेतो हम दोनो अकेले मीलेगे तब मे आपको सबकुछ बतादुगा.. अभीतो मेरे साथ घर चलो.. ओर आपकी भाभीसेभी बात करलो उनको कुज समजाओ.. सायद आपकी बात मानजाये..

देवायत : (खडे होते बहारकी ओर नीकलते) साले समजना उनको नही तुजे हे.. तु उनको डीवोर्स देना चाहता हे वो नही.. समजे..? चल उनसेभी मील लेता हु.. कइ दिनोसे भाभीको मीलाही नही..

कहेते दोनोही क्लीनीकके बहार चले जाते हे.. तब सुधीर क्लीनीकको ताला लगा देता हे ओर देवायतके पीछे बाइकमे बैठ जाता हे फीर देवायतने बाइक सीधेही पासमे सुधीरके घरपे लेली.. ओर दोनो उतर कर अंदर चले गये.. तो सुधीरकी बीवी नीशा टीवी देख रहीथी.. जैसेही देवायतको देखा उनके चहेरेपे चमक आगइ ओर हसते हुअ‍े देवायतको नमस्ते करने लगी.. ओर सुधीरने देवायतको सोफेपे बीठाया..

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नीशा : (खुस होते हसते) आइअ‍े देवरजी.. आज इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? मुजसे नही तो कमसे कम अपने फ्रेन्डको मीलनेतो आजाते.. हें..हें..हें..

सुधीर : (हसते) नीशा.. उनके छोटे भाइ बहेनकी सादी हे.. तो हमे न्योता देने क्लीनीकपे आयेथे.. तो मे इसे इधर लेकर आगया.. कहा आपही अपनी भाभीको न्योता देदो.. हें..हें..हें..

नीशा : (हसते) हांतो सही हेनां.. न्योता देने क्लीनीकपे थोडीनां जाते हे.. वोतो घरका व्यवहार हे.. ओर मेरी इस बारेमे चारुभाभी ओर रश्मीभाभीसे बातभी होगइ हे.. आप नही कहेते तोभी हम कल आने वाली हे.. कलही मुजे चारुभाभीके साथ आपके घर जाना हे.. मंजुभाभीने कहेलवाया हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) देखा..? देख डफर.. तुजे कैसी समजदार बीवी मीली हे.. ओर तु हेकी.. हें..हें..हें..

नीशा : (हसते) देवरजी समजाइअ‍े अपने भाइको.. कैसी कैसी नादानीया करते हे.. उनको मुजे डीवोर्स देना हे.. कुछतो सोच समजकर बोलते.. क्या ये सब बच्चोका खेल हे..? समजाइअ‍े इसे..

सुधीर : (हसतेअपने कान पकडते) सोरी नीशा.. अब अ‍ैसी गलती नही करुगा बस..? मेने इस बारेमे भाइसे बात करली हे.. वोही कुछ रास्ता नीकालेगे.. मे तुजे खोना नही चाहता..

नीशा : (हसते) हंम.. अब ठीक हे.. सुधीर तुम जरा फ्रेस होजाओ मे देवरजीके लीये कुछ बनाती हु..

देवायत : (हसते) भाभी कुछ नही पीना.. बस मुजे जाना हे.. अभी तीन चार घरपे ओर जाना हे..

सुधीर : (खडा होते) भाइ.. कीतने दिनोके बाद हमारे घर आये हो.. आप कुछ पीकरही जाना.. बैठो मे अभी फटाफट फ्रेस होकर आता हु..

कहेते वो बाथरुममे टोलीया लेकर चला गया तब नीशा जटसे अपने बेडरुममे चली गइ ओर थोडीही देरमे हाथमे अ‍ेक बंध कवर लेकर आगइ.. ओर देवायतके पास उनसे सटकर बैठ गइ फीर कवरको देवायतसे देते धीरेसे बात करने लगी..

नीशा : देवरजी ये चीठी हे.. अभी अपनी जेबमे फटाफट रखलो.. आप घर जाकर अकेलेमे फुरसतमे पढलेना.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. जो बात मेने चीठीमेभी लीखी हे आप पढोगे तो सब कुछ समज जाओगे..

देवायत : (हसते धीरेसे) भाभी ये सब मै क्या सुन रहा हु.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

नीशा : देवरजी मेने चीठीमे सबकुछ लीखा हे आप पढलीजीयेगा.. ओर हां इस बारेके कीसीसे जीक्र करनेकी जरुरत नही हे.. बात सीर्फ हम दोनोकेबीचही रहेनी चाहीये.. ये मेरी पर्सनल बात हे.. जो मे आपको रुबरु नही केह सकती.. इस बारेमे सीर्फ चारुभाभी जानती हे.. ओर कोइ नही.. अब आप बैठीये मे कुछ ठंडा बनाकर लाती हु.. अभी सुधीर आजायेगा.. हम फुरसतमे बात करेगे..

कहेते नीशा सरमाती हुइ कीचनमे चली गइ.. तब कुछही देरमे सुधीरभी अपना हाथ ओर मुह पोछते हुअ‍े नीकला तबतक नीशाकी चीठी देवायतने जेबमे रखली थी.. तो कुछही देरमे नीशाभी दो ग्लास ठंडा लेकर आगइ ओर देवायतको देते उनकी ओर कातील स्माइल करने लगी.. जैसे कोइ जंग फतेह करली हो.. वो बहुतही खुसथी.. ओर देवायत ठंडा पीकर वहासे नीकलने लगा.. तब सुधीर ओर नीशा उनको दरवाजे तक बहार छोडने आये तब नीशा बहुतही सरमा रही थी..

फीर देवायत तीन चार जगाह ओर न्योता देकर सीधाही चंपाभाभीके घर चला गया.. तब वो सोनेकी तैयारीया कर रहीथी.. वो देवायतको देखतेही खुस होगइ ओर उनके अंदर जातेही उन्होने घरका दरवाजा बंध करलीया फीर देवायतको लेकर अपने बेडरुममे चली गइ.. जाहीरसी बात हे चंपाभाभी बहुतही कामी ओरत थी ओर देवायतको कभीभी अ‍ैसे बीना चुदवाये नही जाने देतीथी.. देवायत उसे कुछ कहे उनसे पहेलेही वो अपने सब कपडे नीकालकर अपने बेडपे पैर फैलाके लेट गइ.. ओर देवायतकी ओर देखकर हसने लगी..

फीर देवायतका हाथ खीचकर अपने उपर गीरा दीया.. तभी देवायत उसे कुछ कहेता इनसे पहेले चंपाभाभीने देवायतके मुहपे हाथ रखदीया ओर देवायतके सर्टके बटन खोलने लगी.. वो उसे कुछ बोलनेही नही देतीथी.. ओर लेटे लेटेही देवायतके कपडेभी नीकाल दीया ओर अपने उपर चडालीया.. फीर हाथ नीचे लेजाते उनके लंडको मुठीमे पकडलीया..

अपनी गीली चुतमे घीरसे चुतके लव होलमे लंडको अपना रास्ता दीखा दीया.. तभी देवायतने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड चंपाभाभीकी चुतमे उतार दीया तब चंपाभाभी दर्दके मारे मुह बीगाडते छटपटाने लगी.. ओर उसने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया ओर अपने पैर उनकी कमरपे रखते पैरकी आंटी लगादी.. फीर कुछ देर अ‍ैसेही देवायतकी कमरको अपनी चुतमे दबाते पडी रही.. ओर उनका दर्द कम होगया..

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देवायत : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. तुजेतो बहुत आग लगी हुइ हे.. हंम.. मुजे बोलनेही नही देती..

चंपा : (मुस्कुराते) मुजे सब पता हे आप मुजे न्योता देने आयेहो.. लेकीन मुजे मालकीनने केह दीया हे.. बस आपतो अपना कामही करो.. मुजे अ‍ेक बार ठंडी करदो.. जब आप मुजे अ‍ैसे बेहरीमेसे चोदते हो तो मुजे बहुत अच्छा लगता हे.. आजतो आप मेरी हालत खराब करही दो..

देवायत : (हसते कमर हीलाते) भाभी तु बहोत ठरकी होगइ हे.. इतनी ठरकीतो रश्मीभी नही हे..

चंपा : (कमर उछालते) आपको जोभी कहेना हो कहीये.. मेतो अ‍ैसेही आपसे चुदवाती रहुगी.. ओर कमसे कम तीन दिनमे तो मेरी अ‍ेक बार चुदाइ करकेही जाना.. अब आपकी आदतजो लग गइ हे..

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फीर देवायत हाथके बल उचा होकर बडेही जोसमे चंपाकी चुदाइ करने लगता हे तब चंपा दर्दके मारे छटपटाते अपनी कमर उछाल उछालकर देवायतसे चुदवाती रही दोनोके बीच घमासान चुदाइ हुइ.. ओर काफी धकोपैनीके बाद दोनोही साथमे जड गये.. तब देवायतने चंपाभाभीकी चुतको अपने पानीसे लबालब भरदी.. ओर वो चंपाभाभीके उपरसे उतरकर बाथरुममे चला गया ओर अपना लंड साफ करेके बहार आगया..

फीर अपने कपडे पहेनकर चंपाभाभीकी ओर देखता हे तब वो बेसुध्ध जैसे बीस्तरे पडीथी ओर मुह बीगाडते दर्दके मारे कणस रहीथी.. आज देवायतने उनको बहुतही बहेरहेमीसे चोद लीया था.. तब देवायतको उनको देखकर हसी आगइ.. तो चंपाभी दर्द होते हुअ‍े भी सरमाकर मुस्कराने लगी.. ओर देवायतने उनके उपर जुकते चंपाभाभीके होंठ चुमलीये ओर वो बहार नीकलकर अपनी हवेलीकी ओर नीकल गया..

इधर हवेलीपेभी सभी लोग अपने अपने रुममे जाकर सो चुकेथे.. होलमे सीर्फ नीर्मला चंदा ओर मंजुही बैठे थे ओर आपसमे बाते कर रहेथे.. कल पुरी रात देवायतने अपनी सुहागरातमे बीना नीचे उतरे चंदाको चौद लीयाथा.. इसीलीये वोभी काफी थकी हुइथी ओर उसे बहुत जोरोकी नींद आ रहीथी.. तो कुछ देर बाते करते वोभी सोने चली गइ.. तब होलमे सीर्फ मंजु ओर नीर्मलाही रहे गइ.. ओर देवु देरसे आने वाला था..

इसीलये मां बेटीको बाते करनेका पुरा मौका मील गया.. ओर मंजुने नीर्मलाको बाबाने कही हुइ सृतीकी पुरी बात बतादीकी सृतीभी उनकी सौतन हे.. तब अ‍ेक बारतो नीर्मलाकोभी सृतीसे ज्वेलेसी होने लगी.. फीर मंजुकी सब बाते याद आतेही अपने आपको नोर्मल करलीया.. फीरतो मंजुने सुरुसे लेकर अबतक की सब बाते नीर्मलाको बतादी की वो सब वास्तवमे कौन हे.. सभीका देवायतके साथ रीलेशन क्यु हे..

उसने भावना लता सरला.. सभीके बारेमे बात करली भानुको रमासे सादी क्यु करनी पडी वोभी मंजुने विस्तारसे नीर्मलाको बता दीया बस कुछ रीस्ते ओर पुनमके देवायतके साथ रीस्तेकी बात नही बताइ.. क्युकी नीर्मला धिरेनको बहुत प्यार करती हे ओर उसे अपना बेटा मानती हे.. तो जाहीरसी बात हे वो पुनमको अपनी बहु मानने लगी थी.. अब उसे देवायतकी कीतनीभी सौतन आजाये उसे बुरा नही लगा.. तभी मंजुने सृतीको फोन लगा दीया....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०३/१

उसने भावना लता सरला.. सभीके बारेमे बात करली भानुको रमासे सादी क्यु करनी पडी वोभी मंजुने विस्तारसे नीर्मलाको बता दीया बस कुछ रीस्ते ओर पुनमके देवायतके साथ रीस्तेकी बात नही बताइ.. क्युकी नीर्मला धिरेनको बहुत प्यार करती हे ओर उसे अपना बेटा मानती हे.. तो जाहीरसी बात हे वो पुनमको अपनी बहु मानने लगी थी.. अब उसे देवायतकी कीतनीभी सौतन आजाये उसे बुरा नही लगा.. तभी मंजुने सृतीको फोन लगा दीया....अब आगे

मंजुला : (सृतीने फोन उठातेही हसते) हेलो.. क्या मेरी सौतन बोल रही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते फोनपे) कौन.. मंजु..? तुम अपनी हरकतोपे बाज नही आओगी.. हें..हें..हें.. कहो.. क्या बात हे.. अभी तक जाग रही हो.. ओर वोभी गांवमें.. यहा सीटीकी बात अलग हे.. यहातो सब देर तक जागते रहेते हे.. रातमेही रोनक होती हे जैसे दिन नीकला हो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही.. मम्मी पापा आये हे.. सबलोग सो गये हे ओर देवु बहार गया हे.. तो मे ओर मम्मी दोनो इधर उनका इन्तजार करते बैठीथी तो तुजे फोन करदीया.. क्या बुआ जाग रही हे..?

सृती : (हसते) हां सायद कोइ अपनी कीताब पढ रही होगी.. पता नही सारा दिन क्या पढती रहेती हे.. लो अभी उनको फोन देती हु..

मंजुला : (जटसे) सृती.. सुन.. कल तुजे ओर बुआको इधर आना हे.. ओर सादी तक यही रुकना हे.. ले.. मम्मीसे बात कर.. (कहेते फोन नीर्मलाको पकडा देती हे)

नीर्मला : (हसते) हेलो.. सृती.. कैसी हो..? ओर क्या कर रही हे तुम्हारी मम्मी..? सो गइ क्या..?

सृती : (हसते) अरे मौसी.. बस मजेमे.. अभी ठहेरो मे मम्मीको फोन देती हु.. जागती होगी.. (कहेते भुमीकाके रुममे जाते फोन उसे पकडा देती हे) लीजीये मोम.. नीर्मला मौसी आपसे बात करना चाहती हे..

भुमीका : (हसते फोन लेते) क्या कमीनीको फोन करनेका टाइम मील गया..? ला.. दे.. हेलो..

नीर्मला : (जोरोसे हसते फोनपे) कुती गालीयातो मत दे.. हमारी बेटीया साथमे हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां तो गालीयातो दुगीनां.. ना कोइ फोन ना मुजसे मीलने आइ.. ओर राजीवको इतना कुछ होगया.. फीरभी तुजे फोन कनेका टाइम नही मीला..? अरे फोन कर देती.. तो मे वहा आजाती.. तु अकेली वहा क्या करती..? अब कैसा हे राजीव..

नीर्मला : सोरी भुमी.. वो अचानक इतना कुछ होगया तो मेरा तो दिमागने ही काम करना बंध कर दीयाथा.. बडी मुस्कीलसे उनको होस्पीटल लेकर आइ.. येतो अच्छा हुआ सुबह ही देवु उधर आगया.. ओर रीपोर्ट बीपोर्ट करवालीया तो सब सही होगया.. अब बीलकुल ठीक हे.. हम दोनो देवुके साथ मंजुके घर आये हे..

भुमीका : (धीरेसे) सुन नीमु.. क्या अब देवु तुमसे बोत करने लगा हे..? कुछ कहातो नही..?

नीर्मला : (धीरेसे) सुन भुमी.. अभी नही.. तु कल मीलेगी तब हम इस बारेमे हम बात करेगे.. कल तुजे ओर सृतीको इधर आना हे.. ओर राजीवभी आज तुमको याद कर रहा था.. कल आजा हम दोनो चार पांच दिन अब यही हे.. ओर तुभी इसी हीसाबसे तैयारीया करके आना.. हम खुब अ‍ेन्जोय करेगे..

भुमीका : (हसते) चल ठीक हे.. मेने सृतीको केह दीया हे.. उसने क्लीनीकपे अपनी सहेलीको कहेकर सारा इन्तजाम कर लीया हे.. अब सृतीभी वही मेरे साथ रुकेगी.. हम दोनोही कल सुबह नीकल रही हे.. तो अ‍ेक डेढ घंटेमे उधर आजायेगी.. ओर सुन.. मुजे तुमसे कल मीलकर कुछ बतानाभी हे.. हमारी सृतीके बारेमे.. आकर बात करुगी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हां.. मंजुने अभी मुजे सब बतादीया.. भुमी.. मे बहुत खुस हु.. हम दोनोकी बेटीया.. अ‍ेकही घरमे साथमे बहेन बनकर रहेगी.. कीतना अच्छा हेनां..? तुम कल मील.. फीर बात करेगे..

भुमीका : (हसते) क्या..? तुजे सब पता चल गया..? ओर तुम इस बातसे खुस हो..? चलो अच्छा हुआ.. मेरीतो सब टेन्शन खतम होगइ.. चल सृतीको देती हु.. कल मीलते हे.. (उधर नीर्मलाने फोन मंजुको देदीया)

सृती : (फोन लेते) मौसी.. आप फीकर मत करना मे मम्मीको लेकर सुबह आजाउगी..

मंजुला : (हसते) मौसीकी बच्ची मे तेरी सौतन बोल रही हु.. हें..हें..हें.. मेने सुनलीया हे.. कल सुबह तेरा इन्तजार करुगी.. चल अब रखती हु.. कल मीलते हे.. बाय..

सृती : (सरमाते हसते) बाय.. दी..दी.. हें..हें..हें.. (फोन कट करतेही) मोम.. अब सो भी जाओ.. हमे सुबह जल्दी नीकलना हे.. ओर मेने हम दोनोके सब कपडे पेक करलीये हे.. ओर मेभी सो जाती हु.. आपभी सुबहमे सब मेरे ओर आपके गहेने बहेने जोभी लेना हे याद करके ले लीजीयेगा..

भुमीका : (हसते) हां.. बाबा वो मे सुबह ले लुंगी.. अबतो तुजेतो जानेकी जल्दीही होगी.. अपने ससुरालजो जा रही हो.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) मोम.. आपभीनां.. चलो सो जाओ मे चलती हु.. जब देखो टांग खीचती रहेती हो..

कहेते सृती सरमाते हसती हुइ बहार नीकल गइ.. ओर सब लाइटे बंध करते दरवाजा चेक करलेती हे.. ओर अपने रुममे जाकर दरवाजा बंध करते मीररके सामने चली जाती हे.. ओर उनके डड्ढोअरसे अ‍ेक फोटो नीकालते उसे देखती हे वो देवायतका फोटोथा.. जो मंजुकी सादीमे उसने सबसे छुपकर मोबाइलमे लेलीया था.. ओर यहा फोटो नीकलवाकर हमेसा अपने डड्ढोअरमे रखती.. ओर अक्सर उनसे बाते करती..

सृती : (फोटो देखते) अरे.. मेरे सोना.. मु..हा.. कल तुमसे मीलनेके लीये आरही हु.. अपने ससुराल.. अब देखती हु.. मुजसे बचकर कहा जाते हो.. बहुत तडपाया हे तुमने अपनी सृती को.. बस अ‍ेक बार अपने हथीयारके दर्शन करादो.. वो कमीनी मंजु इनकी बहुत तारीफ करती रहेती हे.. आपको कीतनी हीन्टदी फीरभी कुछ समजतेही नही हे.. हें..हें..हें..

कहेते देवायतके फोटोको मीररके पास उनके सामने रख देती हे.. ओर उनसे बाते करते अपने अ‍ेक अ‍ेक कपडेको नीकालने लगती हे.. जबसे देवायतके पेन्टके उभारको देखाथा.. तबसे सृती देवायतको पानेकी कामना कर रहीथी.. जब पुरी नंगी होगइ तब दोनो हाथोमे अपने बुब्सको थामलीया.. ओर मीररमे देखकर उसे मसलने लगी.. ओर मदहोस होने लगी.. फीर देवायतका फोटो लेकर अपने बेडपे चली गइ ओर उसे चुमते हुअ‍े अ‍ेक हाथसे बुब्सको मसलते दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाने लगी..

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जबसे सृतीसे उनके लंडके बारेमे सुना तबसे सृती पागल जैसे होगइ थी.. की कीसाका इतना बडा लंड कैसे हो सकता हे..? ओर वो तबसे उसे देखनेके लीये मचल रहीथी.. ओर आज यही सोचकर अपनी चुतमे उंगली डालकर उसे हिला रहीथी की अब वही लंड उनकी चुतको नसीब होगा.. यही सब सोचकर वो बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर अपनी आंख आधी बंध करते मदहोसीमे जोरोसे चुतमे उंगली हीलाने लगी..

तब कुछही देरमे उनकी चुतने जवाब देदीया ओर अ‍ेक तेज फवारा उनकी चुतसे नीकलकर देवायतकी फोटोको भीगोने लगा.. फीर सृती सांत होगइ.. ओर जैसेही फोटोकी ओर देखा उसे हसी आगइ.. ओर फोटो लेकर बाथरुममे घुस गइ फीर नहाकर फोटोकोभी साफ करलीया ओर ड्रायरसे सुखा दीया.. फीर वोभी बहार नीकलकर फोटोको वापस ड्रोअरमे रखते नाइटगाउन पहेनकर सोगइ..

तो इधर सृतीके जातेही भुमीने कीताबको रख दीया ओर रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करलीया.. फीर अपने सब कपडे नीकालकर बेडपे आकर बेठ गइ.. सृतीसे ज्यादा कल उनको जानेकी जल्दीथी.. अपने यारको मीलनेके लीये वो बहुतही अ‍ेक्साइटेड थी.. जेसे सृती नही वो अपने ससुराल जा रही हो.. भुमी आजभी इतनी जवान दीख रहीथी.. उन्होने अपना सरीर बहुत मेइन्टेइन कीयाथा..

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सृतीकी तराह वोभी अपने अतीतको याद करते अपनी चुत सहेलाने लगी.. अपने यारको इमेजींग करते जोरोसे चुतमे उंगली डालकर हीलाने लगी.. तो कुछही देरमे वोभी जडकर सांत होगइ.. भुमी भी नीर्मलाकी तराह बहुतही कामुक्त ओरतथी.. सायद नीर्मलासेभी ज्यादा.. उसने आज तब अपने नये रीस्तेको कीसीके सामने उजागर होने नही दीया.. फीर वोभी गाउन पहेनकर सब सही करके सो गइ..

उधर मंजु ओर नीर्मला आपसमे बात कर रहीथी तब मंजुने नीर्मलाको बाबाके बारेमे उनकी शक्तिओके बारेमे.. देवायतके बारेमे फीर इस गांवके बारेमे उनकी जमीनके बारमे बहुत कुछ बता दीया.. ओर नीर्मला सबकुछ सुनती रही.. मंजुने नीर्मलाको पीछले जन्मके बारेमे ओर आने वाले समय ओर उनके जन्मके बारेमे भी नीर्मलाको बता दीया.. जीसे सुनकर नीर्मलाभी अचंभीत होकर सुनती रही..

तब जाके नीर्मलाको बात समजमे आने लगीकी वास्तवमे वो सब कौन हे.. फीर मंजुने नीर्मलाको भानु ओर उनकी मामीके बीच जोभी कुछ हुआ उनके बारेमेभी बता दीया.. की कीन हालातोमे भानुको उनकी मामीसे सादी करनी पडी.. मंजुने नीर्मलासे देवायतके नये रीस्तोके बारेमेभी बात करलीकी देवुको क्यु सबके साथ रीलेशन रखना पडता हे.. तब जाकर नीर्मलाको कुह राहत महेसुस हुइ..

नीर्मला : (हसते) बेटी.. हम जो सोचते हे ओर कीसके बारेमे जो भी धारणा करते हे.. अ‍ैसा कुछ भी नही होता.. तुम कीतनी स्ट्रोंग हो.. इतना सबकुछ होगया.. फीरभी तुमको जरासाभी गुसा नही आया.. सबके साथ अपने प्यारको बडी आसानीसे बांटती हो.. ओर देखो में.. जब पता चलाकी तुमभी हमारे देवुसे प्यार करती हो.. मे उसी बातकोभी सहेन नही करपाइ.. ओर तुम दोनोपे गुसा करदीया.. ओर नतीजा.. इतने महीनो तक तुम दोनोसे मुजे दुर रहेना पडा..

मंजुला : (हसते) मोम.. ये सब बाते अ‍ेक हादसेकी तराह भुल जाओ.. जो हुआ सो हुआ.. अब हमे कीसीसे भी कोइ गीला सीकवा नही रखना.. येतो सीर्फ हम तीनोके बीचकी बातथी.. लेकीन आगे जाकर आपको अ‍ैसा बहुत कुछ दिखनेको मीलेगा.. तब आप क्या करोगी..?

नीर्मला : (हसते) मंजु मे कुछ समजी नही.. तुम किसके बारेमे बात करना चाहती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) मोम.. आप केह रहीथीनां मुजे सबके बारेमे जानना हे..? लेकीन अभी इतना टाइम नही हे.. फीरभी देवुके आने तक मे आपको कुछ बताती हु.. हमारी भावुके बारेमेही बात करते हे..

नीर्मला : (हसते) हमारी भावु..? अब इसके बारेमे क्या बाते हे.. मंजु मुजे सुरुसे बता..

मंजुला : (हसते) मोम.. आपको पता हे..? जब मे ओर भावु कोलेजमे थी.. तो भावु तबसेही हमारे देवुको प्यार करती हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) क्या..? हमारी भावु..? वोभी देवुसे प्यार करती थी.. तो फीर हमे बताया क्यु नही..? कमसे कम तुजेतो बता देती.. तेरी तो इनके साथ बनती भी हे..

मंजुला : (हसते) मोम.. वो बहुतही सर्मीली हे.. जबतक देवुको अपने दिलकी बात बताती इनसे पहेलेही मे ओर देवु बहुत आगे बढ चुके थे.. आप समज गइनां..? जीस दिन हम दोनो हमारे घरमे आपके सामने पकडे गये तब उसी दिन भावुभी अपना प्यारका लजहार करने आइथी.. ओर आपसे पहेले उसनेभी हम दोनोको देख लीयाथा.. तब हम दोनोने आपसमे पुरी बात करली.. ओर भावुको मेने सम्हाल लीया..

नीर्मला : मंजु तो फीर तुजे बादमेतो मुजे बताना चाहीये था.. क्युकी देवुतो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. वो कीतनीभी सादीया कर सकते हे तो फीर मे तबही भावुकी बातभी देवुसे करती..

मंजुला : मोम.. जो होनाथा होगया.. तब सीचुअ‍ेशनशी अ‍ैसी थी.. तो आपसे मे कैसे बात करती..? लेकीन मोम.. आज आपको अ‍ेक राजकी बात बता रही हु.. जो बात आप अपने तकही सीमीत रखेगी..

नीर्मला : (अ‍ेक नजरसे आस्चर्यसे देखते) अब कोनसी बात..? क्या भावुके बारेमे हें..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां मोम.. बस आप तब भावुको कुछ मत कहेना.. या उनसे कुछ मत पुछना.. क्युकी सब प्रकृतीका खेल हे.. ओर मत भुलो हमारी भावुभी हम मेसे अ‍ेक हे..

नीर्मला : (हसते) मंजु अब तुने मुजे सब सचाइ बतादी हे.. तो अब मुजे कीसीभी ओर के बारेमे सुनकर बुरा नही लगता हें..हें..हें.. बता क्या कहेना चाहती हे तु..?

मंजुला : (हसते) मोम.. जबसे भावुको भानुभाइ ओर उनकी मामीके बीचके रीलेशनके बारेमे पता चल गया तबसे हमारी भावुने अ‍ेक फैसला करलीया हे.. वो अब अपने पुराने प्यारको फीरसे हासील करके भानुभाइसे दुर होजायेगी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप हमारी भावु अपने पुराने प्यार यानी हमारे देवुसे अपना प्यारका इजहार कर चुकी हे.. ओर ठीक होतेही जल्दसे जल्द वो देवुके साथ फीजीकल रीलेशनमे आजायेगी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) मंजु क्या ये सही होगा..?

मंजुला : (सोचमे डुबते) हां मोम.. हमारी भावुका देवुके साथ रीलेशनमे आना जरुरी हे.. बलकी.. बहुत जरुरी हे.. सीर्फ मेरे लीये ही नही.. आपके लीयेभी.. क्यु जरुरी हे ये बात मे आपको अभी नही बता सकती..

नीर्मला : तेरे ओर मेरे लीये मतलब..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : (सरमाते हसते) मोम.. हमारा देवु हमारे लीये सबकुछ हे.. फीर विजयका बेटा आयेगा.. तब सायद हम दोनो नही होगी.. हम दोनोकोही नया जन्म लेकर आना पडेगा.. तबभी हम दोनो मां बेटी होते हुअ‍ेभी आजकी तराह अ‍ेक दुसरेकी सौतन होगी.. तब आपको मेरी कोखसे जन्म लेना हे.. ओर हम दोनोही मेरे पोतेकी रानीया होजायेगी.. बस अभी सीर्फ इतना ही कहेना हे..

दोनोही बात कर रहीथी तब देवायत नीशाका लेटर कारमे रखते अंदरकी ओर आगया ओर दोनो मां बेटीकी बाते अधुरी रेह गइ.. तब देवायत आतेही मंजुके पास उनसे सटकर बैठ गया ओर मंजुके कंधेपे हाथ रखकर उसे अपने नजदीक खीचलीया तो मंजु ओर नीर्मला दोनोही हसने लगी.. ओर देवायतने मंजुका सर चुमलीया.. तब मंजुने जुठा गुसा करके देवायतकी जांगपे अ‍ेक चपत लगादी ओर सरमाते हसने लगी..

नीर्मला : (हसते) देवु.. बस अ‍ैसेही मेरी बेटीओको प्यार देते रहेना.. में तुम ओर चंदाकी सादीसे बहुत खुस हु.. मेने चंदाको कभी अपनी छोटी बहेन नही माना.. वोभी मेरी बडी बेटी हे.. इनको इतनी खुस कभी नही देखा.. वो यहा कीतनी खुस हे..

देवायत : (हसते) मंजु ओल मोस्ट सभी जगहपे न्योता देकर आयाहु.. बस भुमीआंटीसे बात करलेना..

मंजुला : (हसते) पतीदेव.. अभी अभी बात होगइ हे.. कल सुबह वो दोनो मां बेटीभी इधर आजायेगी ओर सामको सरलाचाचीके घरके लोगभी इधर आजायेगे.. ओर वंदनातो सादी तक इधर ही रहेगी..

देवायत : (हसते) हां चारुभाभीभी वही केह रही थी.. चलो अब सोना नही हे क्या..?

मंजुला : (हसते) बस हम दोनो आपहीका वेइट कर रहे थे.. चलीये..

फीर तीनो खडे होगये तब नीर्मला देवायतकी ओर सरमाते हसती रही.. ओर जटसे राजीवके पास चली गइ तब मंजु ओर देवायत दोनोही अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडकर अपने रुममे चले गये.. ओर देवायतने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तब चंदा घोडे बेचकर गहेरी नींदमे सो रहीथी.. तो मंजु उनकी ओर अ‍ेक नजर देखकर देवायतको देखते हसने लगी.. फीर देवायतकी बाहोमे समा गइ..

मंजुला : देवु.. लगताहे दीदी अभी तक ठीक नही हुइ.. बेचारी कल पुरी रात जागनेकी वजहसे सो गइ हे.. आपनेतो उनकी हालतही खराब करदीथी.. फीरभी बेचारी सारा दीन काम करती रही..

देवायत : (हसते) हंम.. मंजु हमे इनको डीस्टर्ब नही करना.. चल.. हम दोनो यही नीचे बीछाना डालकर सो जाते हे..

फीर मंजुने अ‍ेक गदा बेडके पास नीचेही बीछा दीया ओर दोनो चेन्ज करके वही नीचे सो गये तब मंजुने देवायतके सीनेपे सर रख दीया.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. तभी मंजु अ‍ेक पैर उठाकर देवायतकी कमरपे डाल देती हे.. ओर देवायतके उपर चडकर लेट जाती हे.. तो देवायतभी मंजुको कसके अपनी बाहोमे भीच लेता हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे.. जबभी मंजु देवायतके साथ सोती तब उनका अ‍ेक अलगही रुप होता मानो वो कीसी कामदेवकी मुरत रती हो..

मंजुला : (धीरेसे कामुक आवाजमे) दे..वु.. पली..ज.. अंदर डालदो.. मुजे अंदर लेके सोना हे..

देवायत : (धीरेसे) मंजु अभी तुम ठीक नही हुइ.. बस सही होने तक इन्तजार करलो.. अभी ये सब करना तेरे लीये ठीक नही हे..

मंजुला : (होंठ चुमते) नही देवु.. में ठीक हु.. आप अंदर डालदो.. मुजे कुछ नही होता..

देवायत : मंजु क्या होगया हे तुजे..? क्यु जीद कर रही हे..? कुछ हुआहे क्या..? कीसीसे कुछ बात हुइ हे..? जो तुम इतनी गरम होगइ हो..

मंजुला : (धीरेसे) जानु.. लगताहे आज मुजे आपकोभी कुछ सचाइ बतानी पडेगी.. मेने सृतीको दीखाया तबही मे ठीक होगइ थी.. ओर कुछ बाते मे अभी आपको नही बताउगी.. इस बारेमे हम बादमे अकेले होगे तब डीस्कस करेगे.. बस यही समजलो मे अभीभी कवारी हु.. खब आप अ‍ेक बार घुसादो.. फीर मे आपको कुछ दीखाती हु..

देवायत : (धीरेसे हसते) मंजु तु बहुत बडा रीस्क ले रही हे.. अ‍ेक बार फीर सोचले..

मंजुला : (हसते) अरे बाबा कुछ नही होगा.. में केह रही हुनां.. चलो.. आप लेटे रहो.. मेही कुछ करती हु..

कहेते मंजु देवायतके उपरसे उतर गइ फीर खुदका ओर देवायतका गाउन नीकाल दीया.. ओर देवायतके पैरोके बीच बैठ गइ.. ओर उनके लंडपे जुककर अपनी जीभ नीकालकर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते उनके लंडको चाटने लगी.. देवायतको आज मंजु अ‍ेक अलगही रुपमे दीख रहीथी.. जैसे स्वर्गसे कोइ अप्सरा उतरके आइ हो.. आज पहेली बार देवायतको मंजुकी आंखोमे अ‍ेक अलगही चमक देखनेको मीली....

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कन्टीन्यु
 
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