Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 114 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो गांवमे आज सुबह ब्रीन्दा भी अपने घरपे उल्टीया कर रही थी.. ओर श्रीधर उनकी पीठ सहेला रहा था.. ब्रीन्दाको यकीन हो गयाकी वो लखनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. लेकीन ये बातको अभीके लीये लखनसे छुपानेका फैसला करलीया.. ओर मन ही मन तैय करलीया की वो इस बच्चेको जन्म देगी..

फीरसे सबलोग अपनी नोर्मल लाइफमे बीजी होगये.. लेकीन रजीयाकी आंखोमे देखकर पुनमको सबकुछ पता चल गया.. की इतने दीनो हवेलीपे रहेकर उसने दयाके साथ मीलकर क्या क्या खीचडी पकाली थी.. क्युकी उसे पता थाकी दया ओर रजीयाके बीच पहेलेसे ही लेस्बीयन रीलेशन था..

दोनोके बीच उनकी सादीसे पहेले ही बहुत कुछ तैय हो चुका था.. अब दोनो ही अपने अपने पतीसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. तो दोनोका मक्सद भी पुरा हो चुका था.. लेकीन अभी इसके लीये काफी टाइम था.. ओर पुनमके हीसाबसे सब सही चल रहा था.. ओर दोनोकी योजनासे वो मन ही मन खुस भी थी.. सबकुछ मंजुके कहेनेके हीसाबसे चल रहा था..

इस साम अ‍ेक बार फीर लखन चंदाको लेकर घुमने चला गया.. लेकीन चंदाको पता नही थाकी इनसे पहेले लखनने फोनपे धीरेनसे बात करली थी.. पार्कमे जाते ही चंदा जुठमुठ लखनसे इस बातपे जगडा करने लगी.. की अब वो उनसे रातको मीलने नही आता..

ओर लखनने उसे बडी मुस्कीलसे ये कहेकर मनालीया की इतनी बीवीयोकी वजहसे उनको अकेलेमे मीलनेकी प्रोबलेम हो रही हे.. चलो अभी मील लेते हे.. कहेकर लखनने चंदाको मना लीया.. क्युकी उन्होने पहेलेसे ही भुमीकाके खाली पडे घरकी चाबी लेली थी..

फीर कुछ देर बैठकर लखन चंदाको लेकर भुमीका वाले घरपे चला गया.. ओर दरवाजा बंध करके दोनो ही अंदर नीचेके बेडरुममे चले गये.. अंदर जाते ही चंदा लखनसे लीपट गइ.. ओर उनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. ओर लखन उसे गोदमे उठाकर बेडपे चला गया..

कुछ ही देरमे पुरे कमरेमे चंदाकी चीखने ओर सीसकारीयोकी आवाज गुंजने लगी.. वो जब भी जडनेकी कगारपे होती लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लेती.. ओर उनसे लीपलोक कर लेती.. जैसे ही जडकर सुस्त हो जाती लखन हाथके बल फीरसे मोरचा सम्हालता..



ओर चंदाको फीरसे उतेजीत करदेता.. हमेसाकी आदत के मुताबीक इस बार भी लखनने बीना हथीयार बहार नीकाले चंदाकी चुतको दो दो बार अपने पानीसे सीच दीया.. ओर चंदाको ठंडी करके उनको पुरी तराह संतुस्ट करदीया.. फीर दोनोने ही वहा स्नान कीया.. ओर कपडे पहेनकर तैयार होगये..

चंदा : (बाहोमे आकर होठ चुमते) हां तो जानु.. अब चले..?

लखन : (मुस्कुराते हां.. चलते हे.. लेकीन घरपे नही.. कीसी ओर जगाहपे..

चंदा : (सामने देखते) कीसी ओर जगाह..? देर नही होजायेगी..? कहा जाना हे..?

लखन : (दरवाजेपे लोक लगाते सामने देखते) धीरेनके घर.. आज आप उसे माफ करही दो..

चंदा : (सामने देखते) धीरेनके घर..? क्या अभी..? नही.. हम फीर कभी जायेगे..

लखन : (सामने देखते) क्यु..? अभी मीलनेमे क्या प्रोबलेम हे..?

चंदा : (नजरे जुकाते) जानु.. बस.. अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. ओर कुछ नही..

लखन : (मुस्कुराते) मे आपके साथ हुनां..? तो फीर काहेका डर..? आपको उनसे कोइ बात नही करनी.. बस.. वो माफी मांगे तो उसे माफ करदेना.. फीर हम घर वापस आजायेगे..

चंदा : (थोडा गभराते) आप साथ होनां..? अगर वो कुछ कहे तो आप सम्हाल लेना..

लखन : (मुस्कुराते) मेरे साथ होते इनकी कोइ मजाल हे..? जो आपसे कुछ केह सके.. डरो मत.. मे साथ हु..

फीर दोनो घरको लोक करके सीधे ही धीरेनके घर चले गये.. चंदा अ‍ेक बार ये घर देखने आ चुकी थी.. धीरेनने इसे रीनोवेशन करके बहुत ही डेकोरेट करलीया था.. लखनने बेल बजाइ.. ओर धीरेनने दरवाजा खोला.. तो चंदाको देखते ही वो जोरोसे रोने लगा.. ओर चंदाके पांवमे गीर गया..

धीरेनको अ‍ैसे रोते हुअ‍े पांवमे गीरते चंदाकी आंखोसे भी आंसे बहेने लगे.. उसने धीरेनको कंधा पकडकर खडा कीया.. ओर जोरोसे धीरेनको गले लगा लीया.. दोनोकी फुटफुटके रोने लगे.. ओर धीरेन रोते हुअ‍े चंदाकी माफी मांगता रहा.. फीर लखनने दोनोको सांत कीया..

वही बाथरुमके पास सीन्क था.. फीर दोनोने मुह साफ कीया.. ओर धीरेनने दोनोको पानी पीलाया.. फीर तीनो होलमे आकर सोफेपे बैठ गये.. धीरेन चंदासे सटकर बैठ गया.. ओर चंदाके पांव पकडकर फीरसे गीड गीडाते माफी मांगने लगा.. ओर आखीर चंदाने बोला..

चंदा : (आंग गीली करते सरको सहेलाते) चल जा.. माफ करदीया.. क्यु की अ‍ैसी नादानी..?

धीरेन : (नजरे जुकाते) मोम.. तब मुजमे इतनी समज नही थी.. बहुत गुस्सेमे भी था.. बादमे मुजे आप सबके बारेमे सचाइ पता चली.. की आप सब वास्तवमे कौन हे.. मोम.. मेने सही फैसला कीया.. क्युकी मे पुनोके लायक नही था.. पुनो मुजसे बहेतरकी हकदार थी.. ओर मे खुस हुकी उनको अपना बहेतर साथी मील गया हे..

चंदा : (सामने देखते) हां.. अब वो मेरी बेटी हे.. ओर मे खुस हु.. की उनको अपना बेस्ट पार्टनर मील गया हे.. मेरा लखन.. क्या अब भी तुम सींगल हो..?

धीरेन : (लखनकी ओर देखते धीरेसे) येस मोम..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. धीरेन अ‍ेक लडकीसे प्यार करता हे.. बस.. कुछ टाइमके बाद वो उनसे सादी करलेगा.. लडकी को मे मीला हु.. धीरेनके लीये बहुत अच्छी लडकी हे..

चंदा : (मुस्कुराते) क्या..? चलो अच्छा हुआ.. अगर लडकी अच्छी हेतो तुम अपना घर बसालो..

धीरेन : (हाथ थामते) मोम.. आपने मुजे माफ तो करदीयानां..?

चंदा : (सामने देखते) हां.. लेकीन लखन मुजे नही कहेता तो सायद मे तुम्हे कभी माफ नही करती.. खैर.. छोठो अब पुरानी बाते.. बस.. मे चाहती हुकी तुम भी अपना घर बसालो.. ओर नये सीरेसे जींदगीकी सुरुआत करो..

धीरेन : (मुस्कुराते) थेन्क्स लखन भैया.. आप बीलकुल अ‍ेक अच्छा दोस्त हे.. (चंदाकी ओर देखते) मोम.. अब आप कभी कभी मुजसे मीलने आओगीनां..?

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. पहेले तुम सादी करलो.. फीर सोचुगी.. क्युकी अब तो मे यहा मेरे देवरके साथ ही रहेती हु..

धीरेन : (असमजमे देखते) मोम.. क्या आप जीजुके साथ नही रहेती..? मतलब.. सब ठीक तो हेनां..?

चंदा : (मुस्कुराते) चीन्ता मत कर.. सबकुछ ठीक हे.. बस.. मेरे उपर अब वीजयकी जीम्वेवारी हे.. मेने उसे गोद लेलीया हे.. हमारी मंजुका बेटा.. जो अब मेरा बेटा हे.. इसे मे यही पढाउगी.. ओर अ‍ेक बहेतर ओर काबील इन्शान बनाउगी.. जो कमी मेने तुजसे पालनेमे की.. उस कमीको मे वीजयको पालकर पुरी करुगी..

धीरेन : (मुस्कुराते) तब कीतना छोटा था जब मे वहा आता था.. अब तो बडा होगया होगा..

चंदा : (मुस्कुराते) हां.. अभी अ‍ेक महीनेके बाद दो साल पुरे होजायेगे.. खैर.. अब हम चलते हे..

धीरेन : (मुस्कुराते पांव छुते) मोम.. कभी कभी मीलने आया करो.. ओर अगेइन सोरी..

फीर लखन ओर चंदा धीरेनको गले मीलकर वापस घर आगये.. तब चंदा बहुत खुस थी.. मानो उनके उपरसे अ‍ेक बहुत बडा बोज नीकल गया हो.. आते वक्त चंदा लखनसे हस हसके बाते कर रही थी.. ओर लखनकी मस्तीया करते उनसे फ्लर्ट कर रही थी..

इस रात खानेपे सब बैठे थे तब भी चंदा सबके साथ मस्तीया करते बहुत ही हस रही थी.. जैसे पुरानी चंदा वापस आगइ हो.. लेकीन अब रजीया बहुत ही सांत हो चुकी थी.. वो बहुत मुस्कीलसे हस रही थी.. ओर हर वक्त लखनसे नजरे चुरा रही थी.. मानो कीसी अपराध बोध जेल रही हो..

ओर इस बार लखनने भी नोटीस करलीया.. रातमे लखनने सृती राधीका ओर रजीयाको खुब जमकर पेला.. लेकीन इस बार रजीया कुछ खास प्रतीक्रीया नही दे रही थी.. देर रात सब सो गये तो लखन पुनमसे चीपककर सो गया.. तो पुनम भी लखनकी बाहोमे आ गइ.. ओर उनकी बाहेपे सर रख दीया..

लखन : (बहुत धीरेसे) पुनो.. अ‍ेक बात पुछनी थी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे सब पता हे आपको क्या पुछना हे.. लेकीन अभी नही.. हम अकेले होगे तब बात करेगे.. कल हम तीनो भावीकाके घर जा रहेहेनां..? तब बात करेगे..
 
आज सुबह धृवके घरपे भावीका धृव ओर उनकी मम्मी.. तीनो चाइ नास्ता कर रहे थे.. तब भावीकाने घरके नोकरोको दो हजार रुपीये दीये.. ओर यहा काम खतम होते ही उनके घरकी सफाइ करनेको कहा.. तो तीनो नोकर भी खुस होगये.. क्युकी वो भावीकाके घर सफाइ करनेको उत्सुक रहेते..

क्युकी भावीका हर पंद्नह दीनमे अ‍ेक बार अपने घरकी सफाइ नोकरोसे करवाती.. जहा वो सादीसे पहेले रहा करती थी.. हर वक्त वो नोकरोको दो हजार रुपये सफाइ.. ओर खानेके लीये देती.. नोकरो भी चारसो पांचसो रुपयेका खाना खाते.. ओर बाकीके पंद्नसो रुपये तीनो आपसमे बांट लेते..

ओर ये सब हर दो हप्तेके बादका रुटीन हो गया था.. तो धृव ओर उनकी मम्मीने भी कोइ सवाल नही कीये.. फीर चाइ नास्ता करते भावीका उनकी सास ओर धृवके गालको चुमकर अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. ओर यहा पहोंचकर उसने सृतीको फोन लगाया..

सृती : (फोन उठाते ही मुस्कुराते) हां कुती बोल.. आज सुबह सुबह ही तुजे फोन करनेका टाइम मील गया..?

भावीका : (मुस्कुराते) कमीनी सुबह सुबह गालीया तो मत दे.. सुन.. आज साम पांच बजे तुम ओर पुनमदीदी आ रहे होनां..?

सृती : (मुस्कुराते) हां.. सुबह चाइ नास्तेपे पुनोदी वही बता रही थी.. हम तीनो आ रहे हे.. मे पुनोदी ओर लखन..

भावीका : (सुनतेही खुस होते) सुन.. ठीक पांच बजे पहोंचजाना.. मे वहा थोडी जल्दी चली जाउगी.. वही कुछ नास्ता बास्ता करगे.. मे साथमे लेकर जाउगी..

सृती : (मुस्कुराते) ओके.. लेकीन हम आयेगे कहा..? कुछ अ‍ेड्रेस बेड्रेस तो दे..

भावीका : (मुस्कुराते) अभी तुजे सेन्ड करती हु.. चल बाय.. पेसन्ट हे..

कहेते भावीकाने फोन रख दीया.. ओर उसने आरतीको बुलाकर सामके सभी अ‍ेपोइटमेन्ट ना लेनेको कहा.. फीर उसने सृती ओर लखन दोनोको अपने पुराने घरका अ‍ेड्रेस सेन्ड करदीया.. वो खास करके लखनसे मीलनेके लीये बहुत ही उत्साहीत थी.. क्युकी अब उनको लखनको मीले बीना कही चेइन नही मीलता था..

तो दुसरी ओर भावीकाके जाते ही उनकी सास अपने बेटे धृवकी ओर देखकर कामुक स्माइल करने लगी.. उनको अ‍ेबोर्सन करवाये काफी दीन होगये थे.. ओर अब वो बीलकुल ठीक लग रही थी.. इसीलीये आज बडे बेसब्रीसे अपने बेटेको मीलनेके लीये भावीका ओर नौकरोके जानेका इन्तजार कर रही थी.. जैसे ही सब नोकर भावीकाके घरकी सफाइ करने चले गये..

तब वो धृवको उपरके बेडरुमकी ओर इसारा करते सीडीया चडने लगी.. ओर धृव भी घरका गेइट बंध करते उपरकी ओर अपनी मम्मीके पीछे चला गया.. जैसे ही वो रुममे गया.. उनकी मम्मीने रुमका दरवाजा बंध करदीया.. फीर धृवकी बाहोमे समा गइ.. धृव उनको अपनी गोदमे उडाकर बेडकी ओर चला गया..

कुछ ही देरमे दोनोके कपडे अ‍ेक मेजपे पडे अपनी कीस्मतपे रो रहे थे.. पुरे कमरेमे धृवकी मम्मीकी सीसकारीयोकी आवाज गुजने लगी.. अब दोनो ही अपने प्रोटेक्शनका खयाल रखने लगे थे.. धृव अपने हथीयारपे कोन्डम चडाकर अपनी मम्मीके दोनो पैर अपने कंधेपे लेकर उसे जोरोसे चोद रहा था..



अ‍ैसा नही थाकी ये कभी कभार ही होता था.. भावीकाके घरसे नीकलते ही दोनोकी रुटीन लाइफ होगइ थी.. अब धृवकी मम्मीको धृवसे हर दिन ओर रात जमकर चुदवानेकी आदत हो चुकी थी.. इसी वजहसे वो धृवसे तीन बार प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. हाल ही मे अ‍ेक महीने पहेले ही उनका तीसरी बार अ‍ेबोर्सन हो चुका था..

अ‍ेबोर्सनके बाद दोनो कुछ दीन सख्तीसे अपनी प्रोटेक्शनका खयाल रखते.. फीर धीरे धीरे दोनो ही फीरसे बीना सेफ्टीसे चुदाइ करने लगते.. क्युकी धृवको कोन्डम लगाना अच्छा नही लगता था.. क्युकी उसे जो फीलींन्ग्स चाहीये उसे वो कोन्डम लगानेसे नही मीलती थी..

ओर उनकी मम्मी भी कइ बार आइपील लेना भुल जाती थी.. ओर सायद यही वजह थी जो ज्यादातर लडकी धृवसे चुदवाकर प्रेटनेन्ट हो जाती.. आज धृवकी बहेन पुजाकी कोखमे उन दोनोका दुसरा बच्चा पल रहा था.. ओर पुजा अपने ससुरालमे पाल रही थी..

बस.. उनमे सीर्फ भावीका ही बाकात रह थी.. क्युकी धृव हमेसा उनके पीछवाडेका दीवाना था.. ओर भावीका भी नही चाहती थीकी उनको धृवसे बच्चा पैदा हो.. धृव ओर उनकी मम्मीको लगता थाकी उनके अफैरके बारेमे भावीकाको कुछ नही पता.. लेकीन दोनोको पता नही थाकी भावीकाको उनका हर राज मालुम था..

जीसे भावीकाने छुपकर मां बेटेकी कइ वीडीयो क्लीप भी बनाली थी.. ओर आरतीसे भी सबुत अ‍ेकठा करलीया.. ताकी अपनी मुसीसबतमे वो उनका इस्तमाल कर सके.. लेकीन ज्यादार भावीका अपने इलीगल कामकी वजहसे चुप ही रहेती.. भावीका चार बजे ही अपनी क्लीनीक्स नीकल गइ..

ओर रास्तेसे कुछ ठंडेकी बोतल.. ओर नास्ता थी साथ लेगइ.. उनको नही पता थाकी आज सामसे ही उनकी जींदगी पुरी तराह बदलने वाली हे.. पुनमसे अपने अतीतके बारेमे जानकर वो काफी उत्साहीत थी.. लेकीन कुछ बात उनको पुनमने नही बताइ थी.. जो उसीका खुलासा करने आज पुनम आने वाली थी.. ठीक साम पांच बजे पुनम सृती ओर लखन घरसे नीकल गये.. ओर भावीकाने दीये हुअ‍े पते पे पहोंच गये....

कन्टीन्यु
 
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