Incest यह क्या हुआ - Page 40 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

सावित्री अपने कमरे में जाकर राजेश की आने का इंतजार करने लगी।

सुमित्रा _राजेश, अब क्या होगा? मुझे लगता है कि सावित्री दीदी को सब पता चल गया।

क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में वैसे भी आज मुझे देर तक करवाने का मूड था सब गुड गोबर हो गया।

राजेश _मामी आप चिन्ता मत करो। तुम तैयार रहना। जैसे ही मैं आवाज लगाऊंगा कमरे में आ जाना।

सुमित्रा _क्यू दीदी के कमरे में जाकर मै क्या करूंगी?

राजेश _थ्रीसम करेंगे और क्या?

वैसे भी मैं 2/3दिन ही यहां रहूंगा फिर अपना घर चला जाऊंगा। मेरी याद आयेगी फिर सारी रात जागती रहोगी।

आज हम थ्रीसम करेंगे। फिर जब भी मेरी याद आयेगी तुम और बड़ी मामी एक दूसरे की प्यास बुझा लेना।

सुमित्रा _इसका मतलब तुम सावित्री दीदी का भी भोग लगा लिए।

राजेश _मुस्कुराने लगा।

सुमित्रा _हे भगवान, पर ये सब huwa कैसे? सावित्री दीदी तो धार्मिक संस्कारी और पतिव्रता स्त्री है वह किसी गैर मर्द के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकती फिर तुमने उसे राजी कैसे किया।

राजेश _अरे मामी छोड़ो न जानकर क्या करोगी?

अच्छा मै जा रहा हूं बड़े मामी के कमरे में तुम तैयार रहना।

राजेश सुमित्रा के कमरे से निकल कर सावित्री के कमरे में चला गया।

सावित्री _कब से चल रहा है तेरे और सुमित्रा के बीच।

राजेश _क्या ? मै समझा नही।

सावित्री _ज्यादा भोले मत बनो। मैंने सुमित्रा की सिसकारी सुनी।

बताओ सच सच।

राजेश _जब इलाज के लिए, शहर गई थी तब।

सावित्री _इसका मतलब, उसके बच्चे का असली बाप तू है।

राजेश _छोटे मामा में ही कमी थी, उसके बीज मे वो क्षमता नही था कि वो छोटे मामी को मां बना सके।

तो मैंने उसकी मदद की।

क्या मैंने ठीक नहीं किया?

सावित्री _क्या ये बात किसी और को मालूम है?

राजेश _हा, प्रिया दी और मां को पता है।

सावित्री _ओह, ये बात किसी बाहर वाले को पता नही चलनी चाहिए। नही तो बड़ी बदनामी होगी।

राजेश _जी।

अच्छा अब मैं चलता हूं।

सावित्री _क्यों, मन भर गया क्या मुझसे?

राजेश _जी यह जानने के बाद शायद आपका मूड खराब हो गया हो।

सावित्री _पता नही, तुमने क्या जादू कर दिया है, बेड पर सोते ही, तेरा घोड़ा याद आने लगता है। ऊपर से सुमित्रा की सिसकारी सुनकर आग और भड़क गई है।

आज मुझे जमकर चोद।

सावित्री ने राजेश की लोवर खिसका कर उसका लंद बाहर निकाल लिया और उसका लंद पकड़ कर चूसना शुरू कर दी।

राजेश, प्यार से उसकी बालों को सहलाने लगा। सावित्री

लंद चूसते चूसते कही खो गई।

राजेश _मामी कहा खो गई।

सावित्री होश में आई।

सावित्री _मै कुछ सोच रही थी।

राजेश _क्या सोचने लगीं।

सावित्री _सुप्रिया बता रही थी कि उसकी सास उसे ताने मारती रहती है।

राजेश _क्यूं?

सावित्री _उसका कोई लडका नही है न इस कारण।

राजेश _तो लडके के लिए दीदी और जीजू और प्रयास क्यों नहीं करती।

सावित्री _उन लोगो ने दो बार और प्रयास किया था, पर जांच में पता चला की वे भी लड़किया है तो उसकी सास ने तीन माह में ही बच्चे गिरा दी।

राजेश _ओह।

सावित्री _ज्यादा गर्भपात कराने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसलिए डॉक्टर ने और गर्भ पात न कराने की सलाह दी है। इसलिए उन दोनो ने अब उम्मीद छोड़ दी।

राजेश मै सोच रही हूं कि क्यू न तुम सुप्रिया को एक बच्चा दो?

राजेश _मामी ये आप क्या कह रही है?

सावित्री _मेरी बेटी को कोई ताना मारे, ये मुझे बर्दास्त नही होता जबकि मेरी बेटी की कोई गलती नही है। लडका या लड़की होना ये तो पुरष पर निर्भर करता है न। औरतों पर नही।

तुम ज्यादा दिन तो यहां रुकोगे नही। इसलिए मैं सोच रही हूं की क्यू न आज से ही शुरू करे।

राजेश _पर क्या दीदी इसके लिए तैयार होगी।

सावित्री _मै उसे मनाऊंगी।

तुम तैयार हो न।

राजेश _अगर आप दोनो, तैयार हो तो पर मेरी एक शर्त है।

सावित्री _कैसी शर्त?

राजेश _आपके सामने ही, उसके गर्भ में अपना बीज डालूंगा।

सावित्री _ये कैसी शर्त है, मेरे सामने ही।

राजेश _हा और सुमित्रा मामी भी साथ होगी।

सावित्री _ये कैसा हो सकता है?

राजेश _हो सकता है, अगर आप चाहे तो।

सावित्री _पर सुमित्रा की सामने मौजुद रहने की क्या जरूरत है, मै रह जाऊंगी।

राजेश _मेरी इच्छा है, क्या मेरी इच्छा के लिए ये आप नही कर सकती।

वैसे भी, छोटी मामी की इच्छा अभी पूरी नही हुई थी आपके कारण, मुझे उसे बिना संतुष्ट किए ही, आना पड़ा।

वो साथ में रहेगी तो, मै तीनो को ठंडा कर पाऊंगा। और सभी चैन से सो पाएंगे।

सावित्री _पर अपनी बेटी के सामने मै नंगी नही हो पाऊंगी।

सुप्रिया क्या सोचेगी मेरे बारे में, उसकी मां जो सती सावित्री बनी फिरती थी वो रण्डी निकली।

न बाबा मै उसके सामने नही कर पाऊंगी।

मैं शर्म से मर ही जाऊंगी।

राजेश _अरे मामी, अपनी ही बेटी के सामने चुदने में आपको डबल मजा आयेगा।

सावित्री _न बाबा न मुझसे नही हो पाएगा।

राजेश _ठीक है फिर रहने दो, मुझे नही बनना है सुप्रिया दीदी के बच्चे का बाप।

सावित्री _तू समझ क्यू नही रहा है? मै सुप्रिया के सामने नही chud पाऊंगी।

राजेश _अच्छा ठीक है, तुम मत chudna पर साथ में रहना।

सावित्री _ठीक है। तुम सुमित्रा को बुला लो। मै सुप्रिया को लेकर आती हूं।

सावित्री अपने कमरे से निकल कर सुप्रिया के कमरे के पास जाकर दरवाज़ा खटखटाया।

सुप्रिया ने दरवाज़ा खोली।

सुप्रिया _मां, आप इस समय, कुछ काम था क्या?

सावित्री _हा बेटी, बच्चे सो गए क्या?

सुप्रिया _हा, दोनो सो रहे हैं।

सावित्री _इधर आओ, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

सावित्री और सुप्रिया दोनो हाल में आ गए।

सुप्रिया _क्या बात है मां?

सावित्री _बेटी, क्या तुम्हारी सास तुम्हे अब भी ताना देती है, लडका पैदा न कर पाने को लेकर।

सुप्रिया _मां, ये सब बातें इतनी रात को क्यों पूछ रही हो।

सावित्री _हा बेटी, तुम्हे अजीब तो ज़रूर लग रहा होगा, पर मै तुम्हारी खुशियां चाहती हूं, मै नही चाहती की मेरी बेकसूर बेटी को कोई ताना मारे।

सुप्रिया _मां, आप कहना क्या चाह रही हो?

सावित्री _बेटी, लड़की या लडका पैदा करना, पुरुषो के ऊपर होता है, औरतों के ऊपर नही, दामाद जी और तुमने चार बार कोशिश की, मुझे लगता है कि दामाद जी में लडका पैदा करने की क्षमता नही है, बार बार गर्भपात कराने से तुम्हारे जान पर भी बन सकती हैं।

सुप्रिया _तो क्या सकते हैं मां? हमारे बस में तो कुछ है नही।

सावित्री _बेटी, दामाद जी के बस में भले ही न हो पर तुम्हारे बस में है, अगर तुम चाहो।

सुप्रिया _मै कुछ समझा नही मां?

सावित्री _बेटी मै चाहती हु,तुम किसी और के साथ एक बार कोशिश करके देख लो, शायद लडका हो जाय।

सुप्रिया _मां, ये आप क्या कह रही है?

सावित्री _हा बेटी, काफी सोचने के बाद मैंने ये तुम्हे सलाह देने की सोंचा है।

सुप्रिया _पर मां मैं किसी और से बच्चा पैदा करू,ये मुझसे नही हो पाएगा।

सावित्री _अरे बेटी कब तक अपनी सास की ताना सुनती रहेगी, तुम्हारी सास गर्भपात करा करा कर तुम्हारी जान ही ले लेगी। तुम मेरी सलाह मान लो।

सुप्रिया _मां वैसे इसकी क्या गारेंटी है जिसके साथ मै सोऊंगी, उससे लडका ही होगा।

सावित्री _क्यों की वह लडका पैदा कर चुका है?

सुप्रिया _कौन है वो, जिसके साथ मुझे सोने को बोल रही हो, मै भी तो जानू।

सावित्री _तुम्हारा भाई।

सुप्रिया _मेरा भाई, मै समझा नही। तुम किसकी बात कर रही हो।

सावित्री _अरे राजेश, और कौन है, तेरा भाई।

सुप्रिया _क्या?

सावित्री _हां मै चाहती हूं की तुम राजेश से बच्चा पैदा कर लो।

सुप्रिया _मां आप तो कह रही थी, वो एक लडके का बाप है?

राजेश का तो अभी शादी नहीं हुई है।

सावित्री _बाप बनने के लिए क्या शादी होना जरूरी है?

सुप्रिया _मतलब , राजेश ने किसीदूसरी की औरत को पेट से किया? मै भी तो जानू, वो किसके बच्चे का बाप है?

सावित्री _तुम्हारी, चाची के,,

सुप्रिया _क्या?

सावित्री _तुम्हारे चाचा के बीज में बच्चा पैदा करने की क्षमता नही था, तो सुमित्रा ने राजेश का मदद लिया। मै चाहती हूं, तुम भी राजेश से लडका पैदा कर लो।

सुप्रिया मुस्कुराने लगी।

वह अपने आप से कहने लगी,,

ये राजेश तो छुपा रुस्तम निकला, मतलब ये प्रिया दीदी के साथ साथ चाची का भी बजा रहा है।

हे भगवान मै तो पहले से ही सोच रही थी की क्यू न मै राजेश से लडका पैदा करने की कोशिश कर लूं।

पर डर रही थी किसी को पता न चल जाए। अब तो मां खुद ही कह रही है।

मै राजेश की बच्चे की मां बनूंगी, इससे अच्छी बात तो और हो ही नहीं सकती।

सावित्री _बेटी क्या सोचने लगी।

सुप्रिया _पर मां क्या राजेश इसके लिए तैयार होगा।

सावित्री _, मैने राजेश से बात कर ली है। वो तैयार है पर उसकी एक शर्त है।

सुप्रिया _कैसी शर्त मां।

सावित्री _वो चाहता है की, जब तुम दोनो एक दूसरे के क़रीब आओ तो उस समय मैं और तेरी चाची भी मौजुद रहे।

सुप्रिया _क्या?

मतलब शैतान, चाची और मां के सामने ही मेरी लेना चाहता है, वह अपने मन में बोली।

सावित्री _बेटी फिर क्या सोचने लगी?

सुप्रिया _मां, मुझे बड़ी शर्म आयेगी, मै आपके और चाची के सामने ही कैसे राजेश के साथ सो पाऊंगी?

सावित्री _शर्म तो मुझे भी बहुत आयेगी बेटी, पर कमबख्त की यही ईच्छा है।

अब मजबूरी है।

सुप्रिया सुबह ही राजेश से chudi थी, जिसका दर्द अभी गया नही था।

अब जब उसे उसे पता चला कि वह अपनी मां और चाची के सामने ही राजेश से चुदेगी यह सोचकर उसे शर्म तो आ रही थी। पर उसकी boor में फिर से पानी रिसना शुरू हो गया।

उधर राजेश ने सुमित्रा को सारी बाते बता दी थी।

सुमित्रा और राजेश सावित्री के कमरे में इन्तजार कर रही थी।

सुप्रिया और सावित्री दोनो कमरे में पहुंची।

राजेश और सुमित्रा दोनो पहले से मौजूद थे।

राजेश _मामी क्या दीदी तैयार है मेरे बच्चे की मां बनने के लिए।

सावित्री _खुद ही पूछ लो।

सुप्रिया _मां तुम भी न, शर्म से पानी पानी होते हुए बोली।

राजेश _दीदी तो शर्माने लगी।

सावित्री _सुप्रिया की हां है।

राजेश _तो शुरू करे।

सुमित्रा _हां, पहले तुम अपने कपड़े उतारो।

राजेश अपना कपड़ा उतार कर नंगा हो गया।

उसका तना huwa लंद झटका मारते हुए सबके सामने आ गया।

सुमित्रा _तेरा घोड़ा तो पहले से और लंबा और मोटा लग रहा है re, कही अपनी बहन को मां बनाने का सोच कर तो और ज्यादा फूल कर, ठुमक तो नही रहा।

सुप्रिया शर्म से पानी पानी हो गई।

राजेश _हा मुझे भी लगता है। मेरा नुनु दीदी को मां बनाने के लिए ज्यादा मोटा और लंबा हो गया है।

सुमित्रा _चल सुप्रिया तू भी उतार दे अपने कपड़े और दिखा दे अपनी गुफा अपनी भाई को, ताकि वहा घुस कर तेरी कोख में अपना बीज डालकर अपना पानी निकाल सके।

सुप्रिया _चाची तुम भी न,

सावित्री और सुमित्रा हसने लगी।

सुप्रिया _मां मै अपने कपड़े नही उतारूंगी। आप लोगो के सामने मुझे बड़ी शर्म आ रही है।

सुमित्रा _

अरे लडका पैदा करना है तो शर्म छोड़नी पड़ेगी।

सावित्री _अच्छा ठीक है, तू अपना नाइटी पहनी रह, अपनी पेंटी उतार दे।

सुप्रिया अपनी पेंटी, खिसका कर उतार दी।

सुमित्रा _चल अब घोड़ी बन जा।

सावित्री हसने लगी।

सुप्रिया _चाची आप भी न।

सुमित्रा _अरे झुकेगी तभी तो तुम्हारे गुफा में राजेश घुसेगा।

सावित्री हसने लगी।

सुप्रिया बेड पकड़ कर घोड़ी बन गई।

सुमित्रा ने उसकी नाइटी ऊपर उठा दिया।

सुमित्रा _दीदी, अब शुरू हो जाओ, राजेश का घोड़ा को तैयार करो, गुफा में घुसने के लिए। मै गुफा को तैयार करती हूं।

सावित्री राजेश के पैरो के नीचे बैठ गई और राजेश का लंद पकड़ कर चूसने लगी।

इधर सुमित्रा, सुप्रिया की chut चाटने लगी।

जिससे सुप्रिया सिसकने लगीं।

राजेश नीचे झुक कर सावित्री की ब्लाउज के ऊपर से ही चूची मसलने लगा।

जिससे सावित्री गर्म होने लगी।

राजेश _मामी खोल दो न अपनी ब्लाउज। तुम्हारी चूंची से खेलना है मुझे।

सावित्री गर्म हो गई थी वह अपनी ब्लाउज निकाल दी।

राजेश नीचे झुक कर उसकी चूची मसलने लगा।

राजेश _छोटे मामी तुम भी अपने सारे कपड़े उतार दो, मुझे तुम्हारे दूध पीना है।

सुमित्रा, एक एक कर अपनी सारे कपड़े उतार दी और पूरी नंगी हो गई।

फिर से वह सुप्रिया की boor चाटने लगी।

सुमित्रा _सावित्री दीदी अब राजेश का घोड़ा सुप्रिया की गुफा में डाल दो।

सावित्री ने राजेश का लंद पकड़ कर उसे सुप्रिया की boor में सेट कर दिया।

राजेश ने एक जोर का धक्का मारा।

लंद boor चीरकर आधा से ज्यादा अदंर समा गया।

सुप्रिया _उई मां,

सावित्री _क्या huwa बेटी?

सुप्रिया _मां देखो न बदमाश ने एक ही बार में पुरा घुसा दिया।

सावित्री हसने लगी।

अब राजेश सुमित्रा को अपने पास खीच लिया और उसकी चूची को मुंह में भर कर चूसते हुए।

सुप्रिया को चोदना शुरु कर दिया।

उसका लंद सुप्रिया की boor में गपा गप अदंर बाहर होने लगा।

यह दृश्य देखकर सावित्री उत्तेजित हो गई और अपने कपडे उतार कर नंगी हो कर अपनी हाथ boor खुजाने लगी।
 
सभी मित्रों का शुक्रिया।
 
उस रात राजेश ने सुप्रिया, सुमित्रा और सावित्री को जमकर चोदा। तीनो औरते नंगी होकर राजेश से रात भर chudi राजेश ने अन्त में अपना बीज सुप्रिया की योनि में छोड़ दिया।

अगले दिन खेत जाने से पहले राजेश और सुप्रिया को बुलाकर कहा की, राजेश 3_4 दिन ही और यहां रुकेगा इसलिए जितनी बार हो सके तुम लोग संबंध बनाओ । ताकि सुप्रिया पेट से हो जाए।

अब राजेश और सुप्रिया दिन में भी chudai करने लगें।

रात में तीनो औरते राजेश से जी भरकर चुदाते और अंत में राजेश अपना बीज सुप्रिया के boor में छोड़ देता ताकि वह पेट से हो जाए।

इस तरह 3रोज और गुजर गए।

अगले दिन राजेश के दोनो मामा घर आ गए।

सतपाल सिंह ने बताया की भईया को फिर से समाज का अध्यक्ष चुन लिया गया है, सभी लोग खुश हुवे।

उस रात प्रिया सब के सो जानें के बाद चुपके से राजेश के कमरे में गई और जमकर chudi

अगले दिन राजेश अपना बैग लेकर अपने घर के लिए निकल पड़े, सभी ने उसे कुछ दिन और रुकने के लिए कहा, पर राजेश ने काम का बहाना बनाकर अपने घर के लिए निकल पड़ा।

सतपाल सिंह उसे कार से बस स्टैंड छोड़ने के लिए गया। राजेश बस से अपने घर राजधानी के लिए निकल पड़ा।

जब वह घर पहुंचा तो शाम हो चुका था।

सुनीता कीचन में काम कर रही थी।

राजेश अपना बैग सोफे पर रखी और चुपके से किचन में गया और पीछे से सुनिता को अपनी बाहों मे भर लिया।

सुनीता चौंक गई।

सुनीता _अरे तू आ गया।

राजेश _हा मां।

सुनीता _अरे छोड़ मुझे, दूर रह मुझसे।

सुनीता ने राजेश को खुद से अलग किया।

राजेश _क्यू मां क्या हुआ?

सुनीता _ऐसे ही।

राजेश ने फिर से सुनिता को बाहों में भर लिया, नाराज हो क्या मुझसे?

सुनीता ने फिर से राजेश को अपने से अलग किया।

सुनीता _अरे कहा न, मुझसे दूर रहो। दूर रहकर बात करो।

राजेश _, क्या बात है मां? मुझसे कोई गलती हुई है क्या?

सुनीता _नही, तुमसे कोई गलती नही हुई है।

राजेश _फिर मुझे अपने से क्यू दूर कर रही हो?

सुनीता _क्यों की अभी मैं गंदी हूं?

राजेश _मै समझा नही।

सुनीता _औरतों को जो हर माह प्रॉब्लम आती है न, वो वाली प्रॉबलम है मुझे, सुनिता शर्माते हुए बोली।

राजेश _ओह, आपका मासिक धर्म चल रहा है।

सुनीता _चुप बेशरम मां के सामने गंदी बातें करता है।

राजेश फिर से सुनिता से लिपट गया,

मां इसमें गंदी वाली क्या बात है, ये तो नार्मल है।

सुनीता _न न, दूर रहो मुझसे, ऐसे समय में एक मर्द को औरत से दूर रहना चाहिए।

तुम्हारे मामा लोग, समाजिक अधिवेसन से लौट आए।

राजेश _हा मां, मामा जी फिर अध्यक्ष चुने गए हैं।

सुनीता _ये तो बड़ी खुशी की बात है।

राजेश _मामा मामी तो बड़े जिद कर रहे थे और रुकने के लिए।

बड़े मुस्कील से आने दिए।

सुनीता _अरे, तो और रुक जाना था कुछ दिन। तुम्हारी छोटे मामी तुम्हारा ख्याल नही रख रही थी क्या?

राजेश _नही मां, मामी तो बड़े अच्छे से ख्याल रख रही थी।

सुनीता _अच्छा फिर क्यों चले आए।

राजेश सुनिता से फिर लिपट गया।

आपकी याद आ रही थी।

सुनीता _चल झूठा कही का।

और छोड़ मुझे, दूर रह मुझसे।

सुनीता ने, खुद को राजेश से छुड़ाते हुए कहा।

जा अब अपने कमरे में जाकर फ्रेश होकर आराम कर, तू सफर से थक गया होगा।

मै काफी बनाकर लाती हूं।

राजेश अपने कमरे में गया फ्रेश होकर नहाया फिर अपने कमरे मे आराम करने लगा।

कुछ देर बाद सुनिता काफी लेकर उसके कमरे में आई।

सुनीता _, लो बेटा काफ़ी पिलो।

राजेश _मां बैठो न।

सुनीता _न, बताया था न, अभी मैं अशुद्ध हूं।

राजेश,_मां तुम भी न, एक दम पुराने खयालात की हो।

सुनीता, वहा से चली गई।

राजेश कॉफी पीने के बाद। अपने कपड़े पहन लिए और फिर किचन में पहुंचा।

राजेश _मां मै दोस्तों से मिलने जा रहा हूं।

सुनीता _कुछ ही देर तो huwa है आए हुवे, आराम करना छोड़कर दोस्तों से मिलने जा रहे हो।

भोजन के समय तक घर आ जाना।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश बाइक लेकर भगत से मिलने उसके पार्टी कार्यालय पहुंचा। वहा भगत के साथ उसके पार्टी के कार्यकर्ता भी मौजुद थे।

भगत _अरे राजेश भाई, तुम कब आए, अपने मामा के यहां से।

राजेश_आज ही आया यार घर में बोर हो रहा था तो सोचा तुमसे मिल हूं।

भगत _भाई अच्छा किया, आपको देख कर बड़ी खुशी हुई।

भगत न अपने कार्यकर्ताओं से कुछ बात चीत किया फिर कल मिलने को कहा।

भगत,_, सॉरी भाई सामने चुनाव आने वाली है बस उसी की तैयारी चल रही है।

राजेश _कोई बात नही यार। मुझे तो खुशी हो रही है। तुमको बीजी देख के।

भगत _चलो भाई कहा चले कही टहलने।

राजेश _कही भी।

भगत ने राजेश को नदी किनारे ले गया, शहर की शोर शराबा से दुर। नदी किनारे गार्डन बना था।

वहा बेंच पर बैठ गए।

भगत _भाई, निशा जी का कोइ फोन या मैसेज आया क्या?

राजेश _नही यार, वो मुझे भूल चुकी है। निशा जी को ऐसा लड़का चाहिए जो उसके प्रति वफादार हो। कितनी औरतों के साथ मैने संबंध बनाए हैं, मुझे खुद को याद नही। मै उसके लायक नहीं।मैने दोनो मा बेटी का बहुत दिल दुखाया है। अब तो सुजाता मैम भी मूझसे नफरत करती है।

सुजाता मैम से मैने कह दिया है कि आज के बाद मैं कभी उसके सामने नही आऊंगा।

मेरा तो इस शहर में अब रहने का भी मन नही करता।

यहां रहता हूं तो , पुरानी बाते याद आने लगती है। देखो वहां पर मै और निशा जी बैठ कर घंटो समय बिताया करते थे। ओ पल याद आती है तो दिल को बडा दर्द होता है। इसलिए मैं कल ही सूरज पुर के लिए निकल जाऊंगा।

भगत _मै समझ सकता हूं भाई आपकी हालत। भाई मुझे पुरा यकिन है निशा जी तुम्हे भूली नहीं होगी। और मुझे लगता है वह एक दिन जरूर आएगी।

राजेश _वह आ भी गई तो क्या होगा भगत। मैने तो अपनी गलती सुधारी नही है।

बल्कि मौका मिलते ही, हवस के खेल में डूब जाता हूं। वो मेरे सामने आएगी, तो मैं उससे नजर मिलाने के लायक नहीं हूं।

राजेश और भगत कुछ समय वहा और बिताया फिर वे दोनो वहा से चले गए।

राजेश जब घर पहुंचा तो, शेखर अपने ड्यूटी से आ चुका था। दोनो ने एक दूसरे का हाल चाल पूछा।

सुनीता _राजेश बेटा जाओ अपने कमरे में फ्रेश होकर आ जाओ, तब तक मैं खाना लगाती हूं। स्वीटी अपने कमरे मे होगी उसे भी भोजन के लिए बुला लेना।

राजेश _ठीक है मां।

सभी भोजन के लिए, डायनिंग टेबल पर बैठ चुके थे। सुनिता ने सबको भोजन परोशी।

आज राजेश का पसंदीदा भोजन बना था।

सुनीता _राजेश बेटा क्या huwa, ठीक से भोजन नहीं कर रहा है। कुछ खोया खोया सा है। क्या बात है। सुनिता ने राजेश के बालो को प्यार से सहलाते हुए कहा।

राजेश _कुछ नही मां।

सुनीता _मै तेरी मां हूं। तुम्हारे चेहरे की भावो को अच्छी तरह पढ सकती हूं।

राजेश _मां मै कल सुरज पुर वापस जा रहा हूं।

सुनीता _बेटा, अभी तो गांव से लौटे हो, कुछ दिन बाद चले जाते।

स्वीटी _हा भईया, आज ही गांव से आए हो फिर जानें की बात कर रहे हो।

सुनीता _वैसे भी बेटा, मुझे तुम्हारा सुरज पुर जाना अच्छा नही लगता, मुझे तुम्हारी चिंता लगी रहती हैं।

तुम्हे अब वहां जानें की क्या जरूरत? अब तो तुम्हारा इंटरव्यू भी हो गया है कुछ दिनों में रिजल्ट भी जारी हो जायेगा।

शेखर _हां बेटा तुम्हारी मां ठीक कह रही है। तुम्हे अब यही रहना चाहिए। वैसे भी तुम्हारा आईएएस में चयन होने के बाद, तुम्हे ट्रैनिंग के लिए बाहर जाना पड़ेगा। फिर पता नही तुम्हारी पोस्टिंग कहा होगी।

इसलिए तुम यहीं रहो।

राजेश _नही पिता जी, मेरा सुरज पुर जाना जरूरी है। वहा के लोगो को मुझसे काफी उम्मीदें है। गांव की स्थिति तो आप जानते ही हैं। गांव से फोन भी आया था, कब आ रहे हो?

सुनीता _बेटा कल ही जानें की क्या जरूरत है कुछ दिन रुक कर चले जाते।

राजेश _नही मां मैं कल ही जाऊंगा। वैसे भी इस शहर में मेरा मन नही लगता।

सुनीता _मै जानती हूं, उस लङकी को तुम अब तक भूल नहीं पाए हो।

बेटा उसे तुम भूल जाओ, उसी में हम सबकी भलाई है। ये बड़े लोगो की न तो दोस्ती अच्छी होती है न दुश्मनी। मैने तुम्हे बार बार चेताया था , बड़े घर की लड़की से दुर रहने के लिए, पर तुमने माना नही, अगर तुमने मेरा कहा माना होता तो आज तुम्हारा दिल नही टूटता।

खैर जो huwa सो huwa, अब तुम अपने लिए कोई दूसरी लड़की ढूंढ लो, ताकि उस निशा की याद तुम्हारे दिल से निकल जाए।

शेखर _हा राजेश तुम्हारी मां ठीक कह रही है।

निशा _भईया, आपको तो कोई भी लड़की मिल जाएगी। उस निशा में रखा क्या है भूल जाओ उसे।

उसे पता नही वो किस हीरे को छोड़कर गई है।

सुनीता _तुम्हे कोई लड़की पसंद आए तो मुझे बता देना, मै उससे तुम्हारी शादी की बात करूंगी।

भोजन करने के बाद सभी लोग अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गए।

सुनीता, कीचन का काम निपटाने के बाद राजेश के कमरे में पानी का बॉटल लेकर गई।

सुनीता _बेटा सो गया क्या?

राजेश _नही मां , कुछ काम था क्या?

सुनीता _, ओ पानी बॉटल लेकर आई थी।

और किसी चीज की जरूरत तो नही।

राजेश _नही मां।

सुनीता _अच्छा ठीक, अब मैं भी अपने कमरे में सोने जा रहीं हूं। तुम भी सो जाओ।

राजेश की बालो के सहलाते हुए बोली।

राजेश _ठीक है मां।

सुनीता अपने कमरे में चली गईं।

राजेश, बीते दिनों को याद कर रहा था। एक साल में कितना कुछ बदल गया है।

उसे आज नींद नहीं आ रही थी।

वह अपने बेड से उठ कर, अपने आलमारी से सिगरेट का पैकेट निकाला और अपने कमरे से निकल कर,

छत पर चला गया।

वह सिगरेट जलाया और पीते हुए छत से, सड़क पर चल रहे वाहनों को देखने लगा। किसी विचार में मग्न।

उधर सुनिता को राजेश के चेहरे के भाव देखकर पता था। वह आज कुछ उदास है। इसलिए उसे भी नींद नहीं आ रही थी।

वह यह जानने के लिए की राजेश सोया है कि नही वह अपने कमरे से निकल कर राजेश के कमरे में गई।

राजेश कमरे में नही मिला तो वह इधर उधर ढूंढने लगी।

जब घर में कही नही मिला तो वह छत पर गई।

छत पर उसे राजेश सिगरेट पीता छत से बाहर झांकते पाया।

सुनीता _राजेश बेटा, तुम छत पर क्या कर रहे हों? नींद नहीं आ रही क्या? और ये क्या? तुम सिगरेट पी रहे हो।

राजेश _मां, आप। आप यहां क्यों आ गई?

सुनीता _वो तुम्हारे कमरे में गई थी, तू सोया है कि नही देखने। मुझे पता था की आज तू कुछ उदास है।

राजेश,_मां मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं छत पर चला आया।

सुनीता _तुम सिगरेट पी रहे हो।

राजेश _ओह सॉरी मां, राजेश ने सिगरेट को बुझाया और छत से फेक दिया।

सुनीता _क्या बात है बेटा? क्या सोच रहे थे।

राजेश _कुछ भी तो नहीं मां।

सुनीता _मै तुम्हारी मां हूं सब समझती हूं।

सच बात तो ये है की जब तुम इस शहर में रहते हो तो निशा के साथ बिताए पल तुम्हे सताने लगती है।

तुम्हे इस तरह उदास देखकर मुझे अच्छा नहीं लगता।

राजेश _सॉरी मां।

राजेश,सुनिता के गले लग कर कहा।

सुनीता _बेटा ये सिगरेट वगैरा मत पिया कर ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

राजेश _जानता हूं मां।

सुनीता _रात बहुत हो चुकी है, नीचे चलो, अपने कमरे में।

मै तुम्हारे सिर की मालिश कर दूंगी, फिर तुम्हे अच्छी नींद आएगी।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश और सुनिता दोनो छत से नीचे आ गए।

सुनीता _बेटा तुम अपने कमरे में चलो मै कीचन से तेल लेकर आती हूं।

राजेश अपने कमरे में चला गया। और बेड पर लेट गया। कुछ देर बाद सुनिता उसके कमरे में तेल लेकर आई।

वह राजेश के बालो में तेल लगाकर मालिश करने लगी।

सुनीता _कैसा लग रहा है।

राजेश _बहुत अच्छा मां।

सुनीता _बेटा तुम अपने शर्ट और लोवर भी उतार दो, मै तुम्हारे हाथ और पैरों की भी मालिश कर देती हूं, इससे तुम्हे अच्छा फील होगा और जल्दी नींद आयेगी।

राजेश _मां, रहने दो न क्यों तकलीफ उठा रही हो, मेरा हाथ पैर की, आप मालिश करे मुझे अच्छा नहीं लगेगा।

_सेवा तो मुझे आपकी करना चाहिए।

सुनीता _कर लेना जब मैं बीमार पढूंगी। अभी तो तुम्हे मेरी मदद की जरूरत है। चलो उतारो अपने टी शर्ट। सुनिता ने राजेश के टी शर्ट को ऊपर खीच कर अलग कर दिया।

फिर उसे हाथ पीठ सीने को मालिश करने लगी।

सुनीता _तुम अपने लोवर को भी उतार दो बेटा, मै पैरों की भी मालिश कर देती हूं। तुम्हे अच्छा महसूस होगा।

सुनीता ने राजेश के लोवर को नीच की , राजेश अब सिर्फअंडरवियर में था।

सुनीता राजेश के पैरो की मालिश करने लगी।

पैरो की मालिश के बाद टांगो की भी मालिश की।

राजेश _ आपका मासिक धर्म चल रहा है आपको आराम करना चाहिए था, मेरी सेवा कर रही हो।

सुनीता _तू जागता रहेगा, तो क्या मैं चैन से सो सकूंगी।

राजेश _आप मेरी इतनी चिंता करती हो।

सुनीता _अब बाते बंद करो और सोने की कोशिश करो। लगता हैं तुम्हे अभी भी नींद नहीं आ रही।

लगता है तुम्हारे घोड़े की भी मालिश करनी पड़ेगी तभी तुम्हे नींद आयेगी।

राजेश _आप की मर्जी।

सुनीता ने राजेश का अंडरवियर भी खीच कर उतार दिया।

और तेल लगाकर उसके घोड़े की मालिश करने लगी।

सुनीता की हाथ लगते ही। राजेश का लंद तन कर खड़ा हो गया।

सुनीता उसके लंद पर तेल लगा कर मालिश करने लगी।

लंद और मोटा होकर एकदम कठोर हो गया।

राजेश _ये क्या मां, पहले तो मुझे नींद नहीं आ रही थी, अब तो आपने घोड़े को भी जगा दिया। अब जब तक घोड़ा सोएगा नही मुझे नींद नहीं आएगी।

सुनीता _जानती हूं। जब तक तुम्हारा घोड़ा उल्टी नही करेगा, तुम्हे नींद नहीं आएगी।

राजेश _घोड़े को उल्टी कराने के लिए आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी। तुम तो जानती हो इतनी आसानी से यह घोड़ा उल्टी नही करता। वैसे भी तुम्हारा मासिक धर्म चल रहा है। आपने घोड़े को जगाकर मुसीबत मोल ली।

सुनीता, राजेश के लंद को मुंह में भर कर चूसने लगी। उसके अंड कोश सहलाने लगी।

वैसे सुनिता की भी हालत खराब हो चुकी थी। मासिक धर्म के समय उसकी सेक्स इच्छा बड़ जाती है। ऊपर से राजेश का लंद उसके हाथो में था। उसका मासिक स्राव और बड़ गया।

वह पैड पहनी थी, एकदम गीला महसूस कर रही थी।

पर ऐसी अवस्था में सेक्स करने से मना किया जाता है, इन्फेक्शन का खतरा जो रहता है। इसलिये वह भी आज तक ऐसी अवस्था में कभी सेक्स नहीं कीथी।

सुनीता ने काफी देर तक लंद चूसा पर लंद का पानी नहीं निकाल पाई।

सुनीता _लगता है मैने तुम्हारे घोड़े को जगाकर गलती कर दी। तुम्हारा पानी तो निकल ही नहीं रहा है।

राजेश _मां, अब तो ये नाग तभी उल्टी करेगा जब आपके बिल में जायेगा ।

सुनीता _न बाबा, अभी मैं अशुद्ध हूं, अभी मैं इसे अपने अदंर नही ले सकती।

राजेश _तो अपनी सकरी बिल में ले लो वो तो अशुद्ध नही है।

सुनीता _तुम्हारा कोई भरोशा नही कही बड़े बिल में डाल दिया तो,,, तुम्हे इन्फेक्शन हो सकता है।

क्या तेरे पास कंडोम है।

राजेश _हा, आलमारी में रखा था, पता नही कब जरूरत पड़ जाए।

सुनीता _ठीक है, तू अलमारी से कंडोम निकाल लो, तब तक मैं आती हूं।

सुनीता बाथरूम में गई और अपने अपनी नाईटी उतार कर अपनी पेंटी के अदंर जो पैड लगाई थी उसे निकाल दी। पैड रक्त स्राव से गीली हो चुकी थी। सुनिता नहाई और अपनी chut को अच्छे से ऊंगली डाल कर साफ की। अपने शरीर पर साबुन लगा कर, नहाई।

फिर तौलिए से पोंछ कर। नंगी ही बाहर आई।

राजेश से इत्र मांगी,

राजेश _अरे मां आपके बदन से तो ऐसे ही बड़ी अच्छी खुशबू आती है इत्र लगाने की क्या जरूरत।

जो कहा है वो करो। राजेश ने अलमारी से इत्र निकाल कर दे दिया।

सुनीता अपने पूरे बदन पर इत्र छिड़की।

चूंकि मासिक धर्म के समय औरत के शरीर से एक अलग गंद आती हैं जो कुछ पुरुषो को अच्छा लगता है तो कुछ को यह गंध पसंद नही आता।

सुनीता _दो कंडोम मुझे।

राजेश ने सुनिता के हाथ में कंडोम पकड़ा दिया।

सुनीता राजेश के लंद को मुंह में लेकर फिर से चूसी, उसके बाद कंडोम निकाल कर लंद पर चढ़ा दी।

राजेश ने सुनिता को खडा किया और उसे जकड़ लिया फिर उसकी ओंठ चूसने लगा।

उसकी गर्दन चूमने लगा। धीर धीर नीचे बडा और उसकी चूची मसलने लगा, निप्पल को मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुनीता तो पहले ही बहुत गर्म थी। मासिक धर्म के समय उसकी सेक्स इच्छा बड़ जाती थी, वह पहली बार ऐसी अवस्था में चुदने वाली थी,। राजेश की हरकतों से उसकी योनि का स्राव और बड़ गया।

राजेश ने कुछ देर तक उसकी खूबसूरत नाभी और पेट को खूब चूमा चांटा।

उसके बाद सुनिता को बेड पकड़ा कर झुका दिया।

सुनीता की योनि को देखा, उसकी योनि एकदम गीली थी कुछ लाल स्राव नजर आया। एक अलग गंध पाकर उसका लंद और शख्त हो गया।

राजेश ने लंद योनि में रखा और एक जोर का धक्का मारा, लंद एक ही बार में सर सराता huwa अंदर घुस गया।

सुनीता सिसक उठी।

ऐसी अवस्था में बच्चेदानी का द्वार खुला रहता है।

राजेश एक और धक्का मारा लंद का टोपा बच्चेदानी के अदंर तक घुस गया।

सुनीता को एक अलग ही अहसास हुआ। जैसा लंद पुरा पेट में घुस गया हो।

राजेश अब सुनिता की कमर को पकड़ कर, लंद को योनि में अदंर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद फाच फैच की आवाज करता huwa पूरी जड़ तक अन्दर बाहर होने।

सुनीता जन्नत में पहुंच गई।

वह मासिक धर्म के समय पहली बार chud रही थी। ऐसी अवस्था में उसकी सेक्स इच्छा काफी बड़ जाती थी। आज ऐसी अवस्था में राजेश से चुदने में दोगुना आनंद मिल रहा था। जिसकी कल्पना उसने नही की थी।

उसकी मादक सिसकारी पुरे कमरे में गूंजने लगी।

इधर लंद, मासिक धर्म के रक्त और boor का पानी से सन गया। कुछ रक्त तो नीचे टपकने लगा।

सुनीता को इतना मजा आ रहा था किखुद ही अपनी कमर हिला हिला कर राजेश का साथ देने लगी।

कुछ ही देर में सुनिता झड़ गई।

राजेश उसे बेड किनारे लिटा कर उसकी ओंठ चूसने लगा उसकी चूचियां दबाने लगा। निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगा।

सुनीता ने अपनी टांगे खोल दी। वह फिर चुदने तैयार थी।

राजेश उसके टांगो के बीच पोजीसन सम्हाल लिया।

राजेश ने एक ही धक्के में लंद को फिर से जड़ तक अन्दर घुसा दिया।

सुनीता सिसक उठी।

राजेश ने सुनिता की चूची को पकड़ कर तेज तेज धक्का लगा कर चोदना शुरु कर दिया।

सुनीता फिर से स्वर्ग में पहुंच गई।

कमरे में दोनो की आह उह आह उह की आवाज गूंजने लगी।

मासिक धर्म का स्राव और बड़ गया था, स्राव बेड पर टपकने लगा।

दोनो को chudai के खेल में बहुत मजा आ रहा था। सुनीता राजेश को अपने अंदर पुरी तरह समा लेना चाहती थी।

कमरे में उसकी मादक सिसकारी आह उन आई माई,

चूड़ियों की खनक खन खन खन खन,,

फ्च फ्च फच की आवाज गूंजने लगीं।

राजेश _मां आपको मजा तो आ रहा है न, ऐसी अवस्था में चुदने से कही दर्द तो नहीं हो रहा है।

राजेश चोदना बंद कर के पूछा।

सुनीता _तू रुक मत, बहुत मजा आ रहा है, जमकर चोद मुझे, ऐसा मजा आज से पहले कभी नहीं मिला।

चोद मुझे,,

फाड़ दे अपनी मां की chut

सुनीता चीखते हुए बोली।

राजेश _ले शाली रण्डी,chud मेरे लंद से,,

सबके सामने तो बड़ी संस्कारी बनती हैं, मेरे लंद के नीचे आते ही रण्डी बन जाती है।

बूरचोदी साली।

सुनीता _हा हा मै रण्डी हूं, मै तेरी रखैल हूं। तू ही मेरा असली मरद है, तेरा बाप तो मेरी प्यास बुझा नही पाता,चोद अपनी औरत को, दिखा अपनी ताकत फाड़ दे मेरी chut , भड़वे।

राजेश और तेज तेज चोदने लगा।

राजेश _ले बुरचोदी साली, तेरी chut की सारी आग आज मैं निकालता हूं।

ले एक और ले,

जोर जोर से धक्के लगाते हुए कहा।

सुनीता _थोड़ा और दम लगा भड़वे, फाड़ मेरी chut, दिखा अपनी ताकत, मेरी दुध का कर्ज चुका तू,,,

फाड़ दे chut साले मेरी boor बहुत परेशान करती है मुझे, अगर तू मेरा बेटा है तो आज बुझा दे इसकी सारी प्यास। सुनिता चीखते हुए बोली।

राजेश _लगा तो रहा हूं धक्के साली, तेरेboor के अदंर घुस जाऊं क्या? छीनाल कही को।

सुनीता _मादर चोद भड़वे, और तेज चोद मै आनी वाली हूं।

राजेश _ले साली kutiya, हरामजादी, ले chud मेरे लंद से

राजेश तेज तेज चोदने लगा।

तेज धक्के से कंडोम फट गया।

राजेश रुक गया।

रसुनिता _क्या huwa re रुका क्यू? तेरा पानी निकल गया क्या?

राजेश _मां कंडोम फट गया।

सुनीता _फटने दे तू, रुक मत चोद मुझे। फाड़ मेरी chut मादरचोड मै आने वाली था, सारा मूड खराब मत कर।

राजेश _ले साली बेटा चोद कही की ले अब तो राजेश ने कंडोम को निकाल फेका और एक ही धक्के में फिर से लंद को योनी में जड़ तक घुसा दिया।

फिर तेज़ तेज धक्के मारने लगा।

दोनो इतने जोश में थे कि उसके मुंह से क्या निकल रहा है दोनो को होश नही था।

पुरी चादर सुनिता की रक्त स्राव से गीली हो गई।

कमरे में सुनिता की मादक सिसकारी चीखने तो कभी सिसकने तो कभी गाली निकलती।

दोनो को संभोग का अद्भुत आनंद मिल रहा था।

और सुनिता एक बार फिर झड़ गई। वह राजेश से कस कर लिपट गई।

राजेश भी उसके सीने से लग कर सुस्ताने लगा।

कुछ देर सुस्ताने के बाद।

राजेश _तुम ठीक तो हो न मां।

सुनीता _हूं।

बेटा अब जल्दी करो मै काफी थक गई हूं।

राजेश ने अपने लंद पे लगा खून साफ़ किया और अपने आलमारी से चिकनाई वाली क्रीम निकाल कर, अपने लंद पर लगाया और सुनिता की गाड़ में भर दिया।

सुनीता को घोड़ी बनाकर उसकी गाड़ में लंद डालकर चोदना शुरु कर दिया।

वह तब तक गाड़ मारता रहा जब तक वह झड़ नही। गया उसे लगा की वह झड़ने वाला है तो लंद को गाड़ से निकाल कर योनि में डाल दिया और तेज तेज चोदने लगा।

अपनी वीर्य से सुनिता की गर्भाशय को पुरी तरह भर दिया। क्यू की वह जानता था ऐसी अवस्था में पेट से होने की संभावना नहीं की बराबर होती है।

Chudai से दोनो थक चुके थे। सुनिता राजेश के बाहों में कुछ देर लेटी रही फिर, जब वह उठी तो देखा की चादर उसके रक्त स्राव से गंदा हो गया है। वह चादर को बेड से निकाल दी। फिर राजेश को नहलाई और खुद नहाई।