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- Dec 5, 2013
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मैं सुबह में उठा तय्यार होके नीचे गया
बड़ी नानी बड़ी मामी किरण मासी छोटी मामी मौसी की बेटी सबका आशीर्वाद लिया
अब बारी थी मेरी बहनो की
विदू तो बड़ी मामी के साथ किचन में थी
मैं अरुणा दी के रूम में आ गया
अरुणा- बिल्कुल भी डरना मत सब सोच समझके लिखना
दिलीप- जी अब आप आशीर्वाद दीजिए
अरुणा- मारूँगी मैं क्या तुझसे 10 साल बड़ी हूँ
दिलीप- मैं तो आशीर्वाद लेके रहूँगा
अरुणा- लेके तो दिखा
[मेघा दी और सुनीता दी हंस रही थी अवनी दूसरी तरफ मुँह किए हुई थी]
अरुणा- समझ गयी बता क्या चाहिए
दिलीप- विदू को यहाँ पे लेके आओ
अरुणा- हॉल में चाचा जी बैठे हैं
दिलीप- आप जाती हो कि पैर छुऊ
अरुणा- आजा तुझे आशीर्वाद देती हूँ
दिलीप- [मेरा तो पोपट हो गया अब मेरी जुड़वा बहने]
मेघा दी सुनीता दी अगर अरुणा दी विदू को लेके यहाँ पे नही आई
तो मैं आप दोनो का आशीर्वाद ज़रूर लूँगा
मेघा- अरुणा दी चलो ना प्लीज़
अरुणा- तुम दोनो भी शुरू हो गयी
सुनीता- आप चलेंगी कि मैं बताऊ
अरुणा- चल रही हूँ ना और दिलीप के बच्चे तुझे तो देख लूँगी
[फिर सब रूम से बाहर चली गयी
थोड़ी देर बाद विदू रूम में आ गई अकेली
दिलीप- आज आप कल से ज़्यादा खूबसूरत लग रही हैं
विदू- आप को देर हो रही है
दिलीप- अभी बहुत टाइम है
विदू- मैं नाश्ते के बारे में कह रही हूँ
[मैं विदू को अपनी बाहो में ले लिया विदू मेरी बाहो में सिमट ती चली गयी]
मैं विदू के गले लगा हुआ था
विदू- आप फर्स्ट आयंगे ना
दिलीप- यह आप फर्स्ट आने के पीछे क्यूँ पड़ी हैं
विदू- वो इसलिए मेरे पति देवजी की अगर आप फर्स्ट नही आए
तो मैं हमेशा अपने आपको कोसुन्गि
कि आप मेरी वजह से पढ़ाई नही कर पाए
दिलीप- तो आप चाहती हैं कि मैं आपके लिए फर्स्ट आऊँ
विदू- हां
[विदू इतना ही बोली थी कि बड़ी मामी रूम में आ गई
विदू एक झटके में मुझसे अलग हो गयी
बड़ी मामी- दामाद जी अपनी भावनाओ को कंट्रोल में रखिए
आपके ससुरजी आपको याद कर रहे हैं
दिलीप- मामी आप बहुत अच्छी हैं
बड़ी मामी- हां मैं जानती हूँ कि मैं बहुत अच्छी हूँ लेकिन उससे भी अच्छे आप हैं अब जाइए नीचे
[मैं नीचे आ गया बड़े मामा वोही बोले कि सोच समझके लिखना
और 2 4 टिप्स भी दिए
जो मैं किसी को भी नही बताउन्गा
फिर मैं नाश्ता किया
और वँया के साथ स्कूल आ गया
वँया अपने क्लासरूम में चली गयी
और मैं अपने क्लासरूम में आ गया
दीपा मुझे देख कर अपना मुँह फेर ली
आज मेरे बगल में अदिति बैठी थी
मैं रवि के पास गया
दिलीप- तैयारी कैसी रही
रवि- ठीक ही थी पास तो हो ही जाउन्गा तू अपना सुना
दिलीप- देखते हैं क्या होता है
[फिर मैं अपनी जगह पे आके बैठ गया]
[सब लड़के आए तो थे एग्ज़ॅम देने लेकिन सबकी नज़र अदिति पे थी
मुझे अदिति के साथ बैठते देख सब की फॅट गयी
अदिति- हेलो मैं अदिति
[मेरी तरफ हाथ आगे बढ़ाई]
दिलीप- मैं दिलीप
[मैं अदिति से हाथ मिलके कहा]
अदिति- मैने सुना है आप हर साल सेकेंड आते हैं
दिलीप- जी आता हूँ
अदिति- आप मेरी मदद करेंगे
दिलीप- कैसी मदद
अदिति- जी वो मेरे घर में किसी की डेत हो गयी थी इसी लिए मैं पढ़ नही पाई
दिलीप- तो आप चाहती हैं कि मैं अपना पेपर आपको दिखाऊ और आप कॉपी करे
अदिति- मैं बस कह रही हूँ कि आप मुझे सिर्फ़ कुछ ही क्वेस्चन के आन्सर बता दे
दिलीप- [मैं अदिति को घूर्ने लगा
लेकिन मेरा क्या जाता है मदद करने में
वैसे भी वो कह रही है कि उसके घर में कोई मर गया था
लेकिन यह तो ग़लत होगा
आइडिया]
मैं आपको सिर्फ़ दस मिनट अपना पेपर दिखाउन्गा
अदिति कुछ सोचने लगी
अदिति- ठीक है
दिलीप- [पहला पेपर इंग्लीश का था
जो मेरा फॅवुरेट था
थोड़ी देर बाद पेपर शुरू हो गया
मेरे पास 2 घंटा था
1 घंटा 40 मिनट में ही मैं पूरा पेपर लिख डाला
फिर मैं अपना पेपर अदिति की तरफ कर दिया
10 मिनट में अदिति 3 आन्सर ही लिख पाई
फिर मैं अपने पेपर को देखने लगा
कही कुछ छूट तो नही गया
लेकिन सब कुछ सही था
वँया के साथ पढ़ाई करने का मुझे बहुत फ़ायदा हुआ
हर चॅप्टर को पूरी तरह से समझा
मैं तो अपनी तरफ से कोशिश ही कर सकता था
बाकी तो मेरी किस्मत की बात थी
मैं पेपर सब्मिट करके बाहर आ गया
वँया मेरा वेट कर रही थी
हम दोनो घर की तरफ आने लगे
वँया- कैसा गया पेपर
दिलीप- 99 मार्क्स मिलेंगे इंग्लीश में
वँया- 100 क्यूँ नही
दिलीप- एक हॅंडराइटिंग का कटेगा
हम हँसने लगे
फिर मैं और वँया घर पहुँचे
बड़ी मामी मुझसे कुछ कहना चाहती थी
मैं बिना ध्यान दिए जल्दी से अरुणा दी के रूम में गया
वहाँ कोई नही था
मैं उपर का सारा रूम में देखा कोई नही था
मैं दौड़के नीचे आया
सब किचन में थी
दिलीप- मामी सब लोग कहाँ हैं
बड़ी मामी- वापस शहेर चले गये
[इतना सुनना था कि मेरा दिमाग़ घूम गया
आज फिर से विदू मुझसे बिना मिले चली गयी]
बड़ी मामी- विद्या को भी तो पेपर देना है
दिलीप- मुझे पता है मामी आप चिंता मत करो
यह कहके मैं अपने रूम में आ गया
अब मुझे समझ में आया कि कल विदू क्यूँ कह रही थी रोना मत
मुझसे ज़्यादा तो विदू रो रही होगी
छोटा मैं हूँ उनसे
लेकिन बच्ची वो बन जाती हैं
मन किया कि एक बार फोन कर लूं
लेकिन मेरी आवाज़ सुनके पता नही कितना रोती
तीन पेपर्स लगातार थे
बाकी एक दिन बीच करके
मैं फिरसे पढ़ाई करने लगा
आँखो से आँसू तो निकल ही रहे थे
दोपहर का खाना ख़ाके फिर से पढ़ाई करने लगा
अच्छा हुआ आज वँया मेरे रूम में नही आई
ऐसे ही पढ़ाई करते हुए रात हो गई
फिर मैं सो गया..
मैं सुबह में उठा तय्यार होके नीचे गया
बड़ी नानी बड़ी मामी किरण मासी छोटी मामी मौसी की बेटी सबका आशीर्वाद लिया
अब बारी थी मेरी बहनो की
विदू तो बड़ी मामी के साथ किचन में थी
मैं अरुणा दी के रूम में आ गया
अरुणा- बिल्कुल भी डरना मत सब सोच समझके लिखना
दिलीप- जी अब आप आशीर्वाद दीजिए
अरुणा- मारूँगी मैं क्या तुझसे 10 साल बड़ी हूँ
दिलीप- मैं तो आशीर्वाद लेके रहूँगा
अरुणा- लेके तो दिखा
[मेघा दी और सुनीता दी हंस रही थी अवनी दूसरी तरफ मुँह किए हुई थी]
अरुणा- समझ गयी बता क्या चाहिए
दिलीप- विदू को यहाँ पे लेके आओ
अरुणा- हॉल में चाचा जी बैठे हैं
दिलीप- आप जाती हो कि पैर छुऊ
अरुणा- आजा तुझे आशीर्वाद देती हूँ
दिलीप- [मेरा तो पोपट हो गया अब मेरी जुड़वा बहने]
मेघा दी सुनीता दी अगर अरुणा दी विदू को लेके यहाँ पे नही आई
तो मैं आप दोनो का आशीर्वाद ज़रूर लूँगा
मेघा- अरुणा दी चलो ना प्लीज़
अरुणा- तुम दोनो भी शुरू हो गयी
सुनीता- आप चलेंगी कि मैं बताऊ
अरुणा- चल रही हूँ ना और दिलीप के बच्चे तुझे तो देख लूँगी
[फिर सब रूम से बाहर चली गयी
थोड़ी देर बाद विदू रूम में आ गई अकेली
दिलीप- आज आप कल से ज़्यादा खूबसूरत लग रही हैं
विदू- आप को देर हो रही है
दिलीप- अभी बहुत टाइम है
विदू- मैं नाश्ते के बारे में कह रही हूँ
[मैं विदू को अपनी बाहो में ले लिया विदू मेरी बाहो में सिमट ती चली गयी]
मैं विदू के गले लगा हुआ था
विदू- आप फर्स्ट आयंगे ना
दिलीप- यह आप फर्स्ट आने के पीछे क्यूँ पड़ी हैं
विदू- वो इसलिए मेरे पति देवजी की अगर आप फर्स्ट नही आए
तो मैं हमेशा अपने आपको कोसुन्गि
कि आप मेरी वजह से पढ़ाई नही कर पाए
दिलीप- तो आप चाहती हैं कि मैं आपके लिए फर्स्ट आऊँ
विदू- हां
[विदू इतना ही बोली थी कि बड़ी मामी रूम में आ गई
विदू एक झटके में मुझसे अलग हो गयी
बड़ी मामी- दामाद जी अपनी भावनाओ को कंट्रोल में रखिए
आपके ससुरजी आपको याद कर रहे हैं
दिलीप- मामी आप बहुत अच्छी हैं
बड़ी मामी- हां मैं जानती हूँ कि मैं बहुत अच्छी हूँ लेकिन उससे भी अच्छे आप हैं अब जाइए नीचे
[मैं नीचे आ गया बड़े मामा वोही बोले कि सोच समझके लिखना
और 2 4 टिप्स भी दिए
जो मैं किसी को भी नही बताउन्गा
फिर मैं नाश्ता किया
और वँया के साथ स्कूल आ गया
वँया अपने क्लासरूम में चली गयी
और मैं अपने क्लासरूम में आ गया
दीपा मुझे देख कर अपना मुँह फेर ली
आज मेरे बगल में अदिति बैठी थी
मैं रवि के पास गया
दिलीप- तैयारी कैसी रही
रवि- ठीक ही थी पास तो हो ही जाउन्गा तू अपना सुना
दिलीप- देखते हैं क्या होता है
[फिर मैं अपनी जगह पे आके बैठ गया]
[सब लड़के आए तो थे एग्ज़ॅम देने लेकिन सबकी नज़र अदिति पे थी
मुझे अदिति के साथ बैठते देख सब की फॅट गयी
अदिति- हेलो मैं अदिति
[मेरी तरफ हाथ आगे बढ़ाई]
दिलीप- मैं दिलीप
[मैं अदिति से हाथ मिलके कहा]
अदिति- मैने सुना है आप हर साल सेकेंड आते हैं
दिलीप- जी आता हूँ
अदिति- आप मेरी मदद करेंगे
दिलीप- कैसी मदद
अदिति- जी वो मेरे घर में किसी की डेत हो गयी थी इसी लिए मैं पढ़ नही पाई
दिलीप- तो आप चाहती हैं कि मैं अपना पेपर आपको दिखाऊ और आप कॉपी करे
अदिति- मैं बस कह रही हूँ कि आप मुझे सिर्फ़ कुछ ही क्वेस्चन के आन्सर बता दे
दिलीप- [मैं अदिति को घूर्ने लगा
लेकिन मेरा क्या जाता है मदद करने में
वैसे भी वो कह रही है कि उसके घर में कोई मर गया था
लेकिन यह तो ग़लत होगा
आइडिया]
मैं आपको सिर्फ़ दस मिनट अपना पेपर दिखाउन्गा
अदिति कुछ सोचने लगी
अदिति- ठीक है
दिलीप- [पहला पेपर इंग्लीश का था
जो मेरा फॅवुरेट था
थोड़ी देर बाद पेपर शुरू हो गया
मेरे पास 2 घंटा था
1 घंटा 40 मिनट में ही मैं पूरा पेपर लिख डाला
फिर मैं अपना पेपर अदिति की तरफ कर दिया
10 मिनट में अदिति 3 आन्सर ही लिख पाई
फिर मैं अपने पेपर को देखने लगा
कही कुछ छूट तो नही गया
लेकिन सब कुछ सही था
वँया के साथ पढ़ाई करने का मुझे बहुत फ़ायदा हुआ
हर चॅप्टर को पूरी तरह से समझा
मैं तो अपनी तरफ से कोशिश ही कर सकता था
बाकी तो मेरी किस्मत की बात थी
मैं पेपर सब्मिट करके बाहर आ गया
वँया मेरा वेट कर रही थी
हम दोनो घर की तरफ आने लगे
वँया- कैसा गया पेपर
दिलीप- 99 मार्क्स मिलेंगे इंग्लीश में
वँया- 100 क्यूँ नही
दिलीप- एक हॅंडराइटिंग का कटेगा
हम हँसने लगे
फिर मैं और वँया घर पहुँचे
बड़ी मामी मुझसे कुछ कहना चाहती थी
मैं बिना ध्यान दिए जल्दी से अरुणा दी के रूम में गया
वहाँ कोई नही था
मैं उपर का सारा रूम में देखा कोई नही था
मैं दौड़के नीचे आया
सब किचन में थी
दिलीप- मामी सब लोग कहाँ हैं
बड़ी मामी- वापस शहेर चले गये
[इतना सुनना था कि मेरा दिमाग़ घूम गया
आज फिर से विदू मुझसे बिना मिले चली गयी]
बड़ी मामी- विद्या को भी तो पेपर देना है
दिलीप- मुझे पता है मामी आप चिंता मत करो
यह कहके मैं अपने रूम में आ गया
अब मुझे समझ में आया कि कल विदू क्यूँ कह रही थी रोना मत
मुझसे ज़्यादा तो विदू रो रही होगी
छोटा मैं हूँ उनसे
लेकिन बच्ची वो बन जाती हैं
मन किया कि एक बार फोन कर लूं
लेकिन मेरी आवाज़ सुनके पता नही कितना रोती
तीन पेपर्स लगातार थे
बाकी एक दिन बीच करके
मैं फिरसे पढ़ाई करने लगा
आँखो से आँसू तो निकल ही रहे थे
दोपहर का खाना ख़ाके फिर से पढ़ाई करने लगा
अच्छा हुआ आज वँया मेरे रूम में नही आई
ऐसे ही पढ़ाई करते हुए रात हो गई
फिर मैं सो गया..