Update..No..56*
वैसे तो मैंने स्टोरी के सभी ख़ास करैक्टर का इंट्रोडक्शन दे दिया था...
बूत अभी भी दो करैक्टर के बारे में डिटेल्स देना बाकि रह गया था..
जिस पर कुछ रीडर्स का कहना था की जैन और रिया का भी डिटेल्स देना चाहिए..
तो चलिए इन दोनों के बारे में भी कुछ जरुरी बातें जान लेते है... की कैसे यह कबीर फॅमिली में शामिल हुए और जल्द hi एक फॅमिली मेंबर का दर्जा हासिल कर लिया....
शार्ट इंट्रो....
जैन.....
जैन, इंडियन एयरफोर्स के सेंट्रल एयर कमांड (कै) अल्लाहाबाद, उत्तर प्रदेश, में ग्रुप कप्तान रैंक का अफसर था,
अपनी क़ाबलियत के बलबूते पर उसने 30 साल की काम आगे में कप्तान की पोस्ट हासिल कर ली थी...
बूत इससे एक गलती हो गयी..
लेकिन इसे गलती नहीं कहेंगे क्युकी जैन ने आक्रोश में आकर अपने चीफ मार्टिकल को उसकी दरिद्रता और कुकर्म के चलते शूट कर दिया था..??
तिरुवनंतपुरम में पोस्टिंग के दौरान, बेस पर नक्सलवादी अटैक के दौरान जैन ने अपने मार्टिकल पर गोली चला दी थी जो नक्सली लड़की का रपे कर रहा था,
जैन ने उसे बहुत रोकने की कोसिस की वो ऐसा न करे बूत सीनियर ने जैन की एक न सुनी,
और जैन को दूर होने का आर्डर दिया...
बूत जैन से ये सब देखा न गया और उसने अपने सीनियर अफसर पर गोली दाग दी...
जिसका नतीजा ये निकला की जैन का Court-Martial कर दिया गया...
जैन की रैंक, ओहदा, नौकरी सब चली गयी
जैन ने खुद को निर्दोष साबित करने की बहुत्वकोशिशवकइ बलूत वो नका रहा...
बहुत गिड़गिड़ाया लेकिन मार्टिकल ने उसकी एक न सुनी और उसे निकल दिया गया....
कबीर को जैन और उसकी क़ाबलियत के बारे में ऑफिस के स्टाफ मेंबर के थ्रू से जानकारी मिली...
कबीर ने जैन से मुलाकात की जिसके फलस्वरूप जैन भरोसे लायक साबित हुआ
कबीर ने जैन को अपना प्रपोजल दिया,
जिसे जैन ने एक्सेप्ट कर लिया....
जैन एक ग्रुप कप्तान था वो भी इंडियन एयरफोर्स का तो उसकी पावर एबिलिटी शायद बताना जरुरी nahi...ki वो क्या कर सकता है और क्या नहीं...??
रिया.....
रिया एक अनाथ लड़की थी, जो की देहरादून के एक अनाथालय में Pali-Badhi किन्तु 18 साल कम्पलीट होने के बाद उसे वह से जाना पड़ा..
रिया देहरादून के एक कॉलेज में पढ़ती थी और पैसों के लिए K.M.Group के पास बने एक कैफ़े में Part-time जॉब भी करती थी,
वही कबीर की मुलाकात हुयी थी रिया से...
रिया दिखने में जितनी खूबसूरत थी उतनी hi बातों में सबको अपनी ओर अत्त्रक्ट करने वाली थी....
उसकी बातों और हार्डवर्क 6 की वजह से कबीर का ध्यान उस पर डेली जाता था जब भी वो दोपहर में ब्रेक टाइम कैफ़े आता था...
एक दिन कबीर ने रिया से उसके बारे में पूछ डाला..
रिया की साड़ी कहानी जानने के बाद उसे अपने बच्चों के टुटर के तौर पर रखने का प्रपोज़ल दिया....
बदलने में राणे के लिए ठिकाना और अच्छी खशी तनख्वाह भी...
रिया भी इतने बड़े बिजनेसमैन का ऑफर ठुकरा न सकीय और कबीर की है में है मिला दी...
और बतौर टुटर कबीर के घर आकर रहने लगी...!!
चलिए अब हम वापस कहानी की तरफ चलते हैं....
सदनं जी और आदिगुरु महाराज सोनपुर से जा चुके थे....
रात के 9 baje.....At डिनर...
अपने बच्चों की भावनाये एक माँ से ज्यादा भला कौन समझ सकता है....??
माँ का दिल तो बहुत था आज हम दोनों के साथ वक़्त बिताने का लेकिन अन्य ! के आँखों की तड़प देख कर उन्होंने अपनी इक्षाओं का गाला घोंट दिया...
दरअसल माहि दी का कहना था की आज वो मेरे और अन्य ! के साथ सोयेंगी,
माँ ने भी कुछ ऐसा hi सोंच रखा था...
लेकिन माहि दी के ऐसा कहने से अन्य ! का चेहरा एकदम से उतर गया....
उसके फेस से ऐसा लग रहा था जैसे कोई सबसे प्यारा खिलौना उससे बनता जा रहा हो....
और अन्य के चेहरे से साफ़ पता चला रहा था की उसका जरा सा भी दिल नहीं था अपनी प्यारी चीज़ कप किसी और से बाटने की.....
माँ से अन्य ! की बेचैनी न छिपी रह सकीय
माँ ने अन्य! के फेस को तुरंत पढ़ लिया और बीच में hi बात को काटते हुए बोल उठी...
माँ - अच्छा तो सिर्फ अपने भाई - बहन के लिए hi प्यार दिखाया जा रहा....
अपने मौसी की जरा सी भी फ़िक्र नहीं.....
माहि दी - नहीं नहीं मौसी जी ! ऐसी कोई बात नहीं है...
वो तो बस मैं ऐसे hi अन्य और हयान के साथ लेटने के लिए बोली... बहुत दिनों बाद मिले है न...
माँ (हस्ते हुए ) - बहुत दिन बाद तो हमसे भी मिल रही हो लेकिन हमारे लिए कहाँ इतना प्यार उमड़ने लगा...
डैड - क्यों बेचारी को छिद्रही हो देखो वो कैसे परेशां हो रही है....
बीटा परेशां होने की जरुरत नहीं...
ऐसा करते है आज रात हम सभी एक साथ सोयेंगे....??
माँ - नहीं नहीं ऐसा करने की कोई जरुरत नहीं...
आज सभी थके होंगे इतना लम्बा सफर करके आये है....
बातें कल भी हो सकती hai..aaj रत सभी रेस्ट करेंगे.....
माँ की बात सुनकर अन्य! का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा जबकि माहि दी और जिन थोड़ा उदास हो गयी....
मैं जिन ! के दिल का हाल समझ गया की आखिर क्यों वो इतना उदास है....
डैड - ये भी सही है...
आज रात सब लोग आराम करते hai...Gup-sup तो होती hi रहेगी...
ऐसे hi बाटे करते हुए सबने डिनर फिनिश किया...
जिन (रूखे मन से ) - गुड नाईट एवरीवन ! अब मैं चलती हु....??
माँ - अरे बेटी यहीं सो जाओ न, ये भी तो तुम्हारा hi घर है....
जिन - नहीं आंटी जी..... ी मैं मुआसि जी ! माँ वेट कर रही होंगी....
अन्य - तुम कहीं नहीं जा रही हो...
आंटी से मैं बात कर लुंगी तुम आज मेरे साथ रहोगी....
अन्य ! की बात सुन कर जिन का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा...
जहा अभी सबकी बातें सुनकर उसके फेस में उदासी छ गयी थी...
अन्य ! की बात से ख़ुशी से झूम उठी....
शायद जिन को डर था की जब माहि दी को हमारे साथ लेटने के लिए रोका जा रहा है तो शायद उसे भी na....Rok दिया जाये...
बूत अन्य के आगे किसी की न चली....
सबको गुड नाईट विश करके हम तीनो रूम की तरफ जाने लगे....
जिन - थैंक्स अन्य !
एक तू hi तो है जो बिन कहे मेरे दिल की बातों को समझ जाती है...
वर्ण ये बेवक़ूफ़ तो किसी काम का नहीं...
मैं - ोये मोती,. बेवक़ूफ़ किसे बोल रही...
कही ऐसा न हो मेरे साथ वक़्त बिताने का चांस hi खो दे...
जिन - तुझे क्यों ऐसा लग रहा की मैं तेरे लिए रुकी हु..
मैं तो अन्य के लिए आयी हु..
मैं - चल अब ज्यादा नाटक मत कर...
तेरी आँखों ने सब बयां कर दिया hai...Tu किसके लिए मरी जा रही है...
अन्य - अब बास भी karo..tum दोनों
जब देखो लड़ना शुरू कर देते हो..
अब सोने भी चलना है या फिर यही खड़े खड़े रात गुजरने का इरादा है...
मैं - मैं तो रूम hi जा रहा था.. इस जंगली बिल्ली ने मेरा hi मेरा रास्ता काट दिया....
इतना कहकर मैं रूम की तरफ भाग गया....
पीछे से....
जिन - रुक रुक गधे अभी तुझे बताती hu...Bhagta कहाँ hai....rukk
हम तीनो एक साथ बीएड पर जाकर लेट गए...
मैं, जिन और अन्य ! एक दूसरे से बातें करने लगे...
जिन तो बस ख़ामोशी से मेरी और अन्य ! की बातों को बास सुन रही थी...
बस है और न में जवाब दे रही थी...
मेरे गैर मौजूदगी में यहाँ क्या क्या हुआ.. सभी बातों को सुनकर मुझे बहुत अफ़सोस हुआ....
अन्य ! ने सिर्फ इतना hi कहा की तुम लौट आये मेरे लिए बास उतना hi काफी है...
बाकी सभी बातों से मुझे कोई मतलब नहीं की तुमने झूट बोलै या सच....
मैं - जिन ! तुम्हें भी कुछ जानना था मुझसे, बे झिझक पूछ सकती हो...??
जिन - पूछना तो बहुत चाहती थी,
लेकिन अन्य की बातें सुनकर अब और कुछ जानने की कोई भी छह न रही...
जितना भी तुमने बताया चाहे सच या झूठ मुझे भी तुम पर पूरा यक़ीन है...!!
मेरे लिए भी बस इतना Hi काफी है की मैं तुम दोनों के साथ हु.....
मैं - बास कर पगली अब रुलायेगी क्या...??
वैसे तुम इतनी सेंटी बातें कब से करने लगी...
4..5दिनों के लिए गायब क्या हुआ तुम तो अन्य के रंग में रंग चुकी हो..!!
जिन - बात रंग में रंगने की नहीं विश्वास की है..
कुछ बातें ऐसी होती है जो कही नहीं जाती बस महसूस कर लिया जाता है...
मैं - ऐसा क्या...
वैसे अन्य ! आज इसे हुआ क्या है, कुछ बदली बदली सी नहीं दिख रही...??
अन्य (मुस्कुराते हुए ) - शायद जिन को तुमसे प्यार हो गया है तभी ऐसी बहकी बहकी बातें कर रही है....
अन्य ! की इस बात से जिन एकदम से झेंप जाती है..
और हम दोनों खूब ठहाके मर मरकर हसने लहते है...
जिन - धत्त ! तू भी न अन्य ! कुछ भी बोलती रहती है....
अन्य - बूत शर्मा तो ऐसा रही हो जैसे सच में प्यार हो गया हो...?
जिन आगे कुछ नहीं बोलती ... शायद इस वक़्त चुप रहने में hi भलाई थी...
मैं - वैसे मैं भी जिन ! को प्रोपोज़ करने की सोंच रह था....
लेकिन इसकी पिचकी नाक बीच में आ जाती है...
अब भला ऐसे कौन इससे प्यार करेगा...??
जिन (रुहांसि और गुस्से में ) - मैं जा रही हु अपने घर,
मुझे तुम दोनों से कोई बात नहीं करनी... हरदम बस मुझे परेशां करते रहते हो...
इतना बोलकर जिन बीएड से उठने लगी...
मैं उसका हाथ पकड़ते huye....Apni तरफ खींच किया...
मैं - अरे मेरी प्यारी जंगली बिल्ली किधर जा रही हो, मुझे अकेला छोड़कर...
अभी तो हम दोनों के प्यार की शुरुआत हुयी है....
अन्य ने भी आगे बढ़ कर जिन को पकड़ लिया...
जिन हम दोनों के बीच में आकर फंस गयी...
जिन (गुस्सा और शर्म से इठलाते हुए ) - मुझे जाने दो मुझे कोई बात नहीं करनी...
अन्य - अले मेरी जान ! ये वक़्त गुस्सा दिखने का नहीं प्यार दिखने का है..
तुम कहो तो मैं चली जाती हु यहाँ से....
तुम दोनों को अकेला छोड़ कर...
अन्य ! की बातों से जिन का चेहरा शर्म से एकदम लाल हो गया...
बेचारी आज बहुत बुरी फांसी थी अकेले...
उससे कुछ बोलै भी न जा रहा था अब तो...
अन्य - कोई देखो तो इसे कैसे शर्मा रही है...
ऐसा लग रहा जैसे कोई नयी - नवेली दुल्हन हो...??
ख़ामोशी और शर्म को तोड़ते हुए...
जिन - स्टॉप आईटी ! बोथ ऑफ़ यू...
मेरी ख़ामोशी का फायदा उठाकर
कुछ भी बोले जा रहे हो तुम दोनों...
अब आगे एक भी लफ्ज़ नहीं वर्ण मैं सच में चली जाउंगी...
मैं - Ok time-up अब कोई कुछ नहीं बोलेगा...
लेकिन जो तुम अब इस दिल के बास गए हो तो... वह से कैसे बहार जाओगे...
अन्य - वह क्या बात कह दी...
कितना प्यार है दोनों में किसी की नज़र न लगे...
काश की हमे भी कोई इतना प्यार करने वाला मिला होता हम तो अपनी जान Hi दे देते उसे... लेकिन एक तुम हो की कब से बस शर्माए जा रही हो...!!
जिन - मुझे अब कुछ नहीं कहना.. तुम दोनों को जो जी में आये बकते रहो... मैं चली सोने....
इतना कहकर जिन ! बीएड के साइड में होकर लेट गयी...
मैं - मैं भी सोंच रह हु इस छोटी नाक वाली के चक्कर में क्यों अपना टाइम वेस्ट करूँ...
जबकि प्यार में अपनी जान कुर्बान वाली मेरे बगल में है..
तो पहला प्रपोजल कैंसिल..
मैं तो अपनी अन्य ! से प्यार करूँगा... जो की सबसे खाश है..!!
अन्य - ओह्ह हय्यू ! तुमने मेरे दिल की बात समझ ली..
तुम कितने क्यूट हो लव यू !
अन्य ! मुझसे लिपट जार केट गयी...
मैं - लव माय डिअर अन्य ! तुमसे कोई नहीं...
मैंने अन्य ! गाल पे एक किश कर दी...
जिन - ये कुछ ज्यादा नहीं हो रहा अब...
कुछ तो शर्म करो मैं भी हु यहाँ...
अन्य - हेई ! कहीं से जलने की बू आ रही जरा देखो तो सही...
मैं - हम्म अन्य ! आ तो रही है... बूत हमें उससे क्या हम तो दीवाने है हमे दूसरों से क्या लेना देना...!!
जिन - बास बहुत हुआ...
अभी मैं तुम दोनों का प्यार का बुखार उतरती हु..
इतना कहकर जिन मुझपर झपट पड़ती है...
और मेरे पेट के ऊपर बैठ कर मुझे किश करने की कोशिश करने लगती है...
मैं - अरे बचाओ अन्य ! इस जंगली बिल्ली से वर्ण ये मेरा रपे कर देगी...
अन्य - ोये मोती दूर हैट मेरे हय्यू ! से.. अब वो सिर्फ मेरा है...
जिन - नहीं हयान मेरा hai...Usne मुझे पहले प्रोपोज़ किया...
अब ये मेरे हाथ से न बचने वाला है...
मैं - उठ जा मोती...
पहले अपनी नाक ठीक करा के आ फिर मुझपर अपना हक़ जाताना....
मैं सिर्फ अन्य ! का हो हु...
तुम तो मुझसे दूर hi रहियो...
इतना कहकर मैंने जिन को खुद के ऊपर से हटा दिया और बीच में पटक दिया...
मैं और अन्य ! मिलकर उसकी गुदगुदी करने करने लगे...
ऐसे Hi हंसी मजाक करते हुए हम तीनो कब सो gaye...Kuch पता न चला....
आज के लिए बस इतना hi.....
सॉरी फॉर डिले....