Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 16 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

QUOTE="Abbasi, पोस्ट: 1156487, मेंबर: 2972"]वेटिंग फॉर अपडेट ...............[/QUOTE]

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QUOTE="DEVILKING@786, पोस्ट: 1064894, मेंबर: 3344"]नीस अपडेट भाई वेटिंग फॉर नेक्स्ट अपडेट[/QUOTE]

शाहब...

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ात पेज No. 286
 
ही गाइस बिजी होने के कारन ज्यादा बड़ा अपडेट नहीं दे पाया....

और यह अपडेट जल्द बजी में लिखा गया...

क्युकी मुझे जल्द से जल्द यह मेल मिलाप ख़त्म करना था...

और एक बार फिर से स्टोरी के करैक्टर को रिवाइंड करना था....

सो मंद न करे....

नेक्स्ट अपडेट बड़ा और जल्दी आएगा....

अब सब ठीक हो गया है...

सो अब फॅमिली ड्रामा स्टार्ट होगा....

जो की काफी दिलचस्प होगा....

थैंक यू....



नई अपडेट ात पेज No.286...
 
बहारों फूल बरसाओ....

मेरा मेहबूब आया है.....!!

वेलकम बैक जणू सर...

बड़ी देर कर दी महेरबान आते आते.....

शुक्र है आप आये तो....

एक बार फिर से कोई अनकही दास्तान कही जाएगी....

काफी कुछ बदल चूका है....??

हमने गलती भी की Aapko.....Aapko याद करना hi छोड़ दिया....

बूत आप हमें नहीं भूले.....!!

थैंक्स भाई जी.....!!
 
Update..No..56*

वैसे तो मैंने स्टोरी के सभी ख़ास करैक्टर का इंट्रोडक्शन दे दिया था...

बूत अभी भी दो करैक्टर के बारे में डिटेल्स देना बाकि रह गया था..

जिस पर कुछ रीडर्स का कहना था की जैन और रिया का भी डिटेल्स देना चाहिए..

तो चलिए इन दोनों के बारे में भी कुछ जरुरी बातें जान लेते है... की कैसे यह कबीर फॅमिली में शामिल हुए और जल्द hi एक फॅमिली मेंबर का दर्जा हासिल कर लिया....

शार्ट इंट्रो....

जैन.....

जैन, इंडियन एयरफोर्स के सेंट्रल एयर कमांड (कै) अल्लाहाबाद, उत्तर प्रदेश, में ग्रुप कप्तान रैंक का अफसर था,

अपनी क़ाबलियत के बलबूते पर उसने 30 साल की काम आगे में कप्तान की पोस्ट हासिल कर ली थी...

बूत इससे एक गलती हो गयी..

लेकिन इसे गलती नहीं कहेंगे क्युकी जैन ने आक्रोश में आकर अपने चीफ मार्टिकल को उसकी दरिद्रता और कुकर्म के चलते शूट कर दिया था..??

तिरुवनंतपुरम में पोस्टिंग के दौरान, बेस पर नक्सलवादी अटैक के दौरान जैन ने अपने मार्टिकल पर गोली चला दी थी जो नक्सली लड़की का रपे कर रहा था,

जैन ने उसे बहुत रोकने की कोसिस की वो ऐसा न करे बूत सीनियर ने जैन की एक न सुनी,

और जैन को दूर होने का आर्डर दिया...

बूत जैन से ये सब देखा न गया और उसने अपने सीनियर अफसर पर गोली दाग दी...

जिसका नतीजा ये निकला की जैन का Court-Martial कर दिया गया...

जैन की रैंक, ओहदा, नौकरी सब चली गयी

जैन ने खुद को निर्दोष साबित करने की बहुत्वकोशिशवकइ बलूत वो नका रहा...

बहुत गिड़गिड़ाया लेकिन मार्टिकल ने उसकी एक न सुनी और उसे निकल दिया गया....

कबीर को जैन और उसकी क़ाबलियत के बारे में ऑफिस के स्टाफ मेंबर के थ्रू से जानकारी मिली...

कबीर ने जैन से मुलाकात की जिसके फलस्वरूप जैन भरोसे लायक साबित हुआ

कबीर ने जैन को अपना प्रपोजल दिया,

जिसे जैन ने एक्सेप्ट कर लिया....

जैन एक ग्रुप कप्तान था वो भी इंडियन एयरफोर्स का तो उसकी पावर एबिलिटी शायद बताना जरुरी nahi...ki वो क्या कर सकता है और क्या नहीं...??

रिया.....

रिया एक अनाथ लड़की थी, जो की देहरादून के एक अनाथालय में Pali-Badhi किन्तु 18 साल कम्पलीट होने के बाद उसे वह से जाना पड़ा..

रिया देहरादून के एक कॉलेज में पढ़ती थी और पैसों के लिए K.M.Group के पास बने एक कैफ़े में Part-time जॉब भी करती थी,

वही कबीर की मुलाकात हुयी थी रिया से...

रिया दिखने में जितनी खूबसूरत थी उतनी hi बातों में सबको अपनी ओर अत्त्रक्ट करने वाली थी....

उसकी बातों और हार्डवर्क 6 की वजह से कबीर का ध्यान उस पर डेली जाता था जब भी वो दोपहर में ब्रेक टाइम कैफ़े आता था...

एक दिन कबीर ने रिया से उसके बारे में पूछ डाला..

रिया की साड़ी कहानी जानने के बाद उसे अपने बच्चों के टुटर के तौर पर रखने का प्रपोज़ल दिया....

बदलने में राणे के लिए ठिकाना और अच्छी खशी तनख्वाह भी...

रिया भी इतने बड़े बिजनेसमैन का ऑफर ठुकरा न सकीय और कबीर की है में है मिला दी...

और बतौर टुटर कबीर के घर आकर रहने लगी...!!

चलिए अब हम वापस कहानी की तरफ चलते हैं....

सदनं जी और आदिगुरु महाराज सोनपुर से जा चुके थे....

रात के 9 baje.....At डिनर...

अपने बच्चों की भावनाये एक माँ से ज्यादा भला कौन समझ सकता है....??

माँ का दिल तो बहुत था आज हम दोनों के साथ वक़्त बिताने का लेकिन अन्य ! के आँखों की तड़प देख कर उन्होंने अपनी इक्षाओं का गाला घोंट दिया...

दरअसल माहि दी का कहना था की आज वो मेरे और अन्य ! के साथ सोयेंगी,

माँ ने भी कुछ ऐसा hi सोंच रखा था...

लेकिन माहि दी के ऐसा कहने से अन्य ! का चेहरा एकदम से उतर गया....

उसके फेस से ऐसा लग रहा था जैसे कोई सबसे प्यारा खिलौना उससे बनता जा रहा हो....

और अन्य के चेहरे से साफ़ पता चला रहा था की उसका जरा सा भी दिल नहीं था अपनी प्यारी चीज़ कप किसी और से बाटने की.....

माँ से अन्य ! की बेचैनी न छिपी रह सकीय

माँ ने अन्य! के फेस को तुरंत पढ़ लिया और बीच में hi बात को काटते हुए बोल उठी...

माँ - अच्छा तो सिर्फ अपने भाई - बहन के लिए hi प्यार दिखाया जा रहा....

अपने मौसी की जरा सी भी फ़िक्र नहीं.....

माहि दी - नहीं नहीं मौसी जी ! ऐसी कोई बात नहीं है...

वो तो बस मैं ऐसे hi अन्य और हयान के साथ लेटने के लिए बोली... बहुत दिनों बाद मिले है न...

माँ (हस्ते हुए ) - बहुत दिन बाद तो हमसे भी मिल रही हो लेकिन हमारे लिए कहाँ इतना प्यार उमड़ने लगा...

डैड - क्यों बेचारी को छिद्रही हो देखो वो कैसे परेशां हो रही है....

बीटा परेशां होने की जरुरत नहीं...

ऐसा करते है आज रात हम सभी एक साथ सोयेंगे....??

माँ - नहीं नहीं ऐसा करने की कोई जरुरत नहीं...

आज सभी थके होंगे इतना लम्बा सफर करके आये है....

बातें कल भी हो सकती hai..aaj रत सभी रेस्ट करेंगे.....

माँ की बात सुनकर अन्य! का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा जबकि माहि दी और जिन थोड़ा उदास हो गयी....

मैं जिन ! के दिल का हाल समझ गया की आखिर क्यों वो इतना उदास है....

डैड - ये भी सही है...

आज रात सब लोग आराम करते hai...Gup-sup तो होती hi रहेगी...

ऐसे hi बाटे करते हुए सबने डिनर फिनिश किया...

जिन (रूखे मन से ) - गुड नाईट एवरीवन ! अब मैं चलती हु....??

माँ - अरे बेटी यहीं सो जाओ न, ये भी तो तुम्हारा hi घर है....

जिन - नहीं आंटी जी..... ी मैं मुआसि जी ! माँ वेट कर रही होंगी....

अन्य - तुम कहीं नहीं जा रही हो...

आंटी से मैं बात कर लुंगी तुम आज मेरे साथ रहोगी....

अन्य ! की बात सुन कर जिन का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा...

जहा अभी सबकी बातें सुनकर उसके फेस में उदासी छ गयी थी...

अन्य ! की बात से ख़ुशी से झूम उठी....

शायद जिन को डर था की जब माहि दी को हमारे साथ लेटने के लिए रोका जा रहा है तो शायद उसे भी na....Rok दिया जाये...

बूत अन्य के आगे किसी की न चली....

सबको गुड नाईट विश करके हम तीनो रूम की तरफ जाने लगे....

जिन - थैंक्स अन्य !

एक तू hi तो है जो बिन कहे मेरे दिल की बातों को समझ जाती है...

वर्ण ये बेवक़ूफ़ तो किसी काम का नहीं...

मैं - ोये मोती,. बेवक़ूफ़ किसे बोल रही...

कही ऐसा न हो मेरे साथ वक़्त बिताने का चांस hi खो दे...

जिन - तुझे क्यों ऐसा लग रहा की मैं तेरे लिए रुकी हु..

मैं तो अन्य के लिए आयी हु..

मैं - चल अब ज्यादा नाटक मत कर...

तेरी आँखों ने सब बयां कर दिया hai...Tu किसके लिए मरी जा रही है...

अन्य - अब बास भी karo..tum दोनों

जब देखो लड़ना शुरू कर देते हो..

अब सोने भी चलना है या फिर यही खड़े खड़े रात गुजरने का इरादा है...

मैं - मैं तो रूम hi जा रहा था.. इस जंगली बिल्ली ने मेरा hi मेरा रास्ता काट दिया....

इतना कहकर मैं रूम की तरफ भाग गया....

पीछे से....

जिन - रुक रुक गधे अभी तुझे बताती hu...Bhagta कहाँ hai....rukk

हम तीनो एक साथ बीएड पर जाकर लेट गए...

मैं, जिन और अन्य ! एक दूसरे से बातें करने लगे...

जिन तो बस ख़ामोशी से मेरी और अन्य ! की बातों को बास सुन रही थी...

बस है और न में जवाब दे रही थी...

मेरे गैर मौजूदगी में यहाँ क्या क्या हुआ.. सभी बातों को सुनकर मुझे बहुत अफ़सोस हुआ....

अन्य ! ने सिर्फ इतना hi कहा की तुम लौट आये मेरे लिए बास उतना hi काफी है...

बाकी सभी बातों से मुझे कोई मतलब नहीं की तुमने झूट बोलै या सच....

मैं - जिन ! तुम्हें भी कुछ जानना था मुझसे, बे झिझक पूछ सकती हो...??

जिन - पूछना तो बहुत चाहती थी,

लेकिन अन्य की बातें सुनकर अब और कुछ जानने की कोई भी छह न रही...

जितना भी तुमने बताया चाहे सच या झूठ मुझे भी तुम पर पूरा यक़ीन है...!!

मेरे लिए भी बस इतना Hi काफी है की मैं तुम दोनों के साथ हु.....

मैं - बास कर पगली अब रुलायेगी क्या...??

वैसे तुम इतनी सेंटी बातें कब से करने लगी...

4..5दिनों के लिए गायब क्या हुआ तुम तो अन्य के रंग में रंग चुकी हो..!!

जिन - बात रंग में रंगने की नहीं विश्वास की है..

कुछ बातें ऐसी होती है जो कही नहीं जाती बस महसूस कर लिया जाता है...

मैं - ऐसा क्या...

वैसे अन्य ! आज इसे हुआ क्या है, कुछ बदली बदली सी नहीं दिख रही...??

अन्य (मुस्कुराते हुए ) - शायद जिन को तुमसे प्यार हो गया है तभी ऐसी बहकी बहकी बातें कर रही है....

अन्य ! की इस बात से जिन एकदम से झेंप जाती है..

और हम दोनों खूब ठहाके मर मरकर हसने लहते है...

जिन - धत्त ! तू भी न अन्य ! कुछ भी बोलती रहती है....

अन्य - बूत शर्मा तो ऐसा रही हो जैसे सच में प्यार हो गया हो...?

जिन आगे कुछ नहीं बोलती ... शायद इस वक़्त चुप रहने में hi भलाई थी...

मैं - वैसे मैं भी जिन ! को प्रोपोज़ करने की सोंच रह था....

लेकिन इसकी पिचकी नाक बीच में आ जाती है...

अब भला ऐसे कौन इससे प्यार करेगा...??

जिन (रुहांसि और गुस्से में ) - मैं जा रही हु अपने घर,

मुझे तुम दोनों से कोई बात नहीं करनी... हरदम बस मुझे परेशां करते रहते हो...

इतना बोलकर जिन बीएड से उठने लगी...

मैं उसका हाथ पकड़ते huye....Apni तरफ खींच किया...

मैं - अरे मेरी प्यारी जंगली बिल्ली किधर जा रही हो, मुझे अकेला छोड़कर...

अभी तो हम दोनों के प्यार की शुरुआत हुयी है....

अन्य ने भी आगे बढ़ कर जिन को पकड़ लिया...

जिन हम दोनों के बीच में आकर फंस गयी...

जिन (गुस्सा और शर्म से इठलाते हुए ) - मुझे जाने दो मुझे कोई बात नहीं करनी...

अन्य - अले मेरी जान ! ये वक़्त गुस्सा दिखने का नहीं प्यार दिखने का है..

तुम कहो तो मैं चली जाती हु यहाँ से....

तुम दोनों को अकेला छोड़ कर...

अन्य ! की बातों से जिन का चेहरा शर्म से एकदम लाल हो गया...

बेचारी आज बहुत बुरी फांसी थी अकेले...

उससे कुछ बोलै भी न जा रहा था अब तो...

अन्य - कोई देखो तो इसे कैसे शर्मा रही है...

ऐसा लग रहा जैसे कोई नयी - नवेली दुल्हन हो...??

ख़ामोशी और शर्म को तोड़ते हुए...

जिन - स्टॉप आईटी ! बोथ ऑफ़ यू...

मेरी ख़ामोशी का फायदा उठाकर

कुछ भी बोले जा रहे हो तुम दोनों...

अब आगे एक भी लफ्ज़ नहीं वर्ण मैं सच में चली जाउंगी...

मैं - Ok time-up अब कोई कुछ नहीं बोलेगा...

लेकिन जो तुम अब इस दिल के बास गए हो तो... वह से कैसे बहार जाओगे...

अन्य - वह क्या बात कह दी...

कितना प्यार है दोनों में किसी की नज़र न लगे...

काश की हमे भी कोई इतना प्यार करने वाला मिला होता हम तो अपनी जान Hi दे देते उसे... लेकिन एक तुम हो की कब से बस शर्माए जा रही हो...!!

जिन - मुझे अब कुछ नहीं कहना.. तुम दोनों को जो जी में आये बकते रहो... मैं चली सोने....

इतना कहकर जिन ! बीएड के साइड में होकर लेट गयी...

मैं - मैं भी सोंच रह हु इस छोटी नाक वाली के चक्कर में क्यों अपना टाइम वेस्ट करूँ...

जबकि प्यार में अपनी जान कुर्बान वाली मेरे बगल में है..

तो पहला प्रपोजल कैंसिल..

मैं तो अपनी अन्य ! से प्यार करूँगा... जो की सबसे खाश है..!!

अन्य - ओह्ह हय्यू ! तुमने मेरे दिल की बात समझ ली..

तुम कितने क्यूट हो लव यू !

अन्य ! मुझसे लिपट जार केट गयी...

मैं - लव माय डिअर अन्य ! तुमसे कोई नहीं...

मैंने अन्य ! गाल पे एक किश कर दी...

जिन - ये कुछ ज्यादा नहीं हो रहा अब...

कुछ तो शर्म करो मैं भी हु यहाँ...

अन्य - हेई ! कहीं से जलने की बू आ रही जरा देखो तो सही...

मैं - हम्म अन्य ! आ तो रही है... बूत हमें उससे क्या हम तो दीवाने है हमे दूसरों से क्या लेना देना...!!

जिन - बास बहुत हुआ...

अभी मैं तुम दोनों का प्यार का बुखार उतरती हु..

इतना कहकर जिन मुझपर झपट पड़ती है...

और मेरे पेट के ऊपर बैठ कर मुझे किश करने की कोशिश करने लगती है...

मैं - अरे बचाओ अन्य ! इस जंगली बिल्ली से वर्ण ये मेरा रपे कर देगी...

अन्य - ोये मोती दूर हैट मेरे हय्यू ! से.. अब वो सिर्फ मेरा है...

जिन - नहीं हयान मेरा hai...Usne मुझे पहले प्रोपोज़ किया...

अब ये मेरे हाथ से न बचने वाला है...

मैं - उठ जा मोती...

पहले अपनी नाक ठीक करा के आ फिर मुझपर अपना हक़ जाताना....

मैं सिर्फ अन्य ! का हो हु...

तुम तो मुझसे दूर hi रहियो...

इतना कहकर मैंने जिन को खुद के ऊपर से हटा दिया और बीच में पटक दिया...

मैं और अन्य ! मिलकर उसकी गुदगुदी करने करने लगे...

ऐसे Hi हंसी मजाक करते हुए हम तीनो कब सो gaye...Kuch पता न चला....

आज के लिए बस इतना hi.....


सॉरी फॉर डिले....
 
कोटे=" , पोस्ट: 1200760, मेंबर: 2972"]

वैरी नीस & फैंटास्टिक अपडेट .............

कीप आईटी उप बीआरओ ..............

भाई नेक्स्ट अपडेट मई फिर इंट्रो स्टार्ट न क्र देना .......... :अंगरीनो:

वेटिंग फॉर नेक्स्ट अपडेट ..................


[/QUOTE]

भाई जी रीडर्स की मांग थी ...

सबका डिटेल्स देना भी जरुरी था..

अब जो भी किरदार aayenge...intro साथ में होगा..


थैंक्स भाई...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड नीस सुप्पोर्टस..

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखें....
 
बहुत बहुत शुक्रिया आओ सभी का...

यह सिर्फ मेरे अकेले की म्हणत नहीं...

उसमें आप सभी का शानदार Supports...Shamil है.?

जो स्टोरी को यह मुकाम हाशिल हुआ...

मैं मंटा hu....thoda डिसपपॉइन्ट हो गायक हु स्टोरी के थीम से बूत यक़ीन kijiye....Jara सा भी वक़्त नहीं मिलता की अपडेट लिख सकू ठीक ढंग से....

मैं आप सभी से तह इ दिल से माफ़ी चाहुगा अपनी गलतियों के लिए...


जो आप सभी को निराश किया...
 
अपडेट No..57*

MeGa..UpDaTe

Abb...Takk...

अब तक आप सभी ने पढ़ा गुरुवार जा चुके थे...

और उनके जाने के बाद फॅमिली ड्रामा चलता रहा....

मैं, जिन और अन्य ! रात के वक़्त एक साथ कमरे में सोने के लिए चल दिए...

हम तीनो के बीच इस वक़्त Nik-Jhonk चल रही थी...

मैं और अन्य ! मिलकर जिन की गुदगुदी करने करने लगे...


ऐसे Hi हंसी मजाक करते हुए हम तीनो कब सो gaye...Kuch पता न चला....

Abb...Aage...

अभी सोये हुए लगभग 2 घंटे hi बीते थे की अचानक किसी की आहात से मेरी आँख खुल गयी....

मैं Had-badata हुआ उठ बैठा....

मैंने रूम के चरों तरफ नजर दौड़ाई पर मुझे कोई न नजर आया..

मैं एकदम से सोंच में पद गया की आखिर मुझे जगाय किसने..

कितने दिनों बाद सुकून भरी नींद सो रहा था फिर ये अचानक माजरा कैसा.....??

मैं बड़े hi आराम से बिना किसी को डिस्टर्ब किये, अपने बिस्तर से उठा और हर तरफ देखने लगा....

किसे के होने का अहसास तो हो रहा था लेकिन कोई दिख नहीं रहा था...

हर तरफ देखने के बाद जब कोई न नजर आया तो...

मैं वही बीएड के पास राखी कुर्सी पर बैठ गया..

और अपनी आंतरिक शक्तियों की हेल्प से हालात को समझने की कोशिश करने लगा...

लकिन ऐसा करना मेरे लिए गलत साबित हुआ क्युकी ऐसा करने से अचानक मेरे सीने और सर पे दर्द उठने लगा....

मेरे साडी सोचने समझने की शक्ति जैसे ख़त्म होने लगी...

कुछ समझ नहीं आ रहा था की अचानक मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है...

सर बिलकुल गरम हो गया और दर्द से फटा जा रहा था... .

जब दर्द बर्दाश्त से बहार होने लगा तो मैं हिम्मत करके बाथरूम की तरफ भगा और वाश बेसिन का नल चालू करके अपने सर को पानी से भिगोने लगा....

सर पर ठंडा पानी पड़ने से मुझे जल्द hi रहत मिलने लगी...

की तभी अचानक...

""बस इतनी सी hi ताक़त है तुम में...

मेरा दिया हुआ एक छोटा सा दर्द भी न बर्दाश्त कर पाए""

मैं हद बढ़ाकर इधर - उधर देखने लगा..

आवाज़ जनि पहचानी लगी... जो की अभी हल - फ़िलहाल में सुनी थी...

इस्सलिये उसे पहचानने में मुझे जरा भी वक़्त न लगा...

लेकिन मुझे अंदेशा था की जो मैं सोंच रहा हु शायद वो न हो....??

मैं - क्या चाहते हो tum...Aisa क्यों कर रहे हो मेरे साथ...??

सामने आकर बात करो...

अननोन - खुद के अंदर झांको मैं तुम्हारा hi अक्ष हु..

मैं तो बस तुम्हारी शक्ति को परख रहा था....

"
"मेरे ज़ौक़ में रहता है तेरा अक्स Hayaa’n,

तेरा होना मेरे होने का वजूद हो जैसे""


मैं - अगर मेरी शक्ति को देखना है तो सामने आकर मुक़ाबला करो...

यूँ बुज़दिलों की तरह मेरी पहचान का शहर मत लो....

अननोन - जब तुम hi मैं हूँ, तो अब इसमें क्या फर्क करना...??

मेरा मुक़ाबला करने लायक अभी तुम नहीं...

रही बात बुज़दिली की यो शायद मेरी शक्ति से तुम वाक़िफ़ हो की मैं क्या कर सकता हूँ..??

मेरा अंदेशा सही निकला वो मास्क मन hi था...

उसके ऐसा कहने से उसकी फैलाई गयी सभी दरिंदगी मेरे आँखों के सामने उभरने लगी....

मैं - है है देखा है मैंने...

लेकिन सिर्फ इतना hi की एक नक़ाब पॉश बेरहम दरिंदा...

जो खुद की पहचान दिखने से डरता है...

मास्क मन - हम्म सही कहा दरिंदा तो हूँ मैं.. और दरिंदगी hi मेरी पहचान है...

और अगर नक़ाब हटा दिया तो पहचान बुरा मान जाएगी...

रही बात डरने की वो तो वक़्त बताएगा... कौन किस्से डरता है....??

मैं - जब वक़्त hi आने पर सब पता लग्न है तो फिर इस वक़्त आने का कारन भी बता दो...??

मास्क मन - मैं तो बस बुरे वक़्त से आगाह करने आया था..

जो की मुझे नहीं करना चाहिए फिर भी किया...

क्युकी तुम्हारे साथ बुरा होने पर hi मेरी भलाई है...

बाकी का तुम खुद hi पता लगा लो....

एक भयंकर खतरा तुम्हारी ओर बढ़ रहा है...??

मैं - कैसा बुरा वक़्त... मैं कुछ समझा नहीं...??

शायद वो अब जा चूका था क्युकी न तो कोई जवाब आया और न hi कोई आवाज़....

हवा के झोंके की तरह आया और मुझे अजीब सी परेशानी के आलम में छोड़ कर चला गया...

मैं वही बाथरूम में खड़े खड़े उसकी कही गयी बातों पर गौर करने लगा और और उसमें छिपी सचाई को परखने लगा....

लेकिन मुझे कुछ भी समझ न आया...

की वो कौन सा तूफ़ान है जो धीरे धीरे मेरे करीब आ रहा है....??

मुझे अपनी साडी परेशानी और उलझन को अभी के लिए विराम देना hi सही लगा...

क्युकी जो होना है सो तो होक hi रहेगा...

फिर भला क्यों अभी से खुद को परेशानी में उलझाए बैठा राहु...

मैं एक बार फिर चेहरे के पानी से धुलने लगा...

तभी अचानक मेरी नजर मिरर पर गयी...

जिसे देख कर मैं एकदम से हैरान रह गया...

मुझे साडी बातें समझ में आ गयी की वो मास्क मन क्या कहना चाहता था और किश पहचान की बात कर रहा था...??

लेकिन क्या ये सच मेरे लिए सही साबित होगा या फिर मुझे अँधेरे की ओर गहरी खायी में खींचता हुआ ले जायेगा...??

"
"आईने में अब मुझे दो अक़्स दिखायी पड़ते है,

जिस्म में मेरे अब इक और भी शख़्स रहता है!!''


मेरी उलझन अब और बढ़ चुकी थी मैं इस परेशानी का हल जानना चाहता था लेकिन रात के 3 बज रहे थे इस वक़्त कुछ भी कर पाना संभव नहीं था...

इस्सलिये खुद की परेशानियों को दर किनार कर मैं वापस बिस्तर की तरफ चल दिया...

क्युकी अब इसका सही जवाब सिर्फ गुरु महाराज hi दे सकते थे....

मैं वापस बीएड में आकर लेट गया....

और सोने की कोशिश करने लगा....

अब तो बस सुबह होने का इंतेज़रर था...

चिड़ियों की छह - चाहत ने भोर होने का संकेत दे दिया...

बड़ी hi मुश्किल भरी रात गुज़री थी क्युकी दिमाग में अजीब अजीब से ख्याल उठ रहे थे....

और बेचैनी में होने के कारन नींद भी बहुत देर से आयी..

मैं तुरंत अपने बीएड से उठा और फ्रेश होकर सीधा गार्डन में पहुँच गया और ध्यान मुद्रा में बैठ गया....

अपने सवालों के हल खोजने के liye....Guruwar ! को याद करने लगा...

आदिगुरु - कहो पुत्र कैसे याद किया...??

मैंने गुरुवार के चरण स्पर्श किये और उन्हें प्रणाम किया....

मैं - गुरुवार ! मैं बहुत hi विचित्र दुविधा में हु...

सब समझ कर भी कुछ समझ नहीं आ रहा...??

कृपया मेरा मार्गदर्शन करें.....??

आदिगुरु - मैं तुम्हारी दुविधा को समझ सकता हु किन्तु एहि सत्य है तुम सत्य से भाग नहीं सकते.....

यदि तुम वर्तमान हो तो वो तुम्हारा भविष्य....

ऐसा होक रहेगा बस अंतर इतना है की तुम कैसे अपने मार्ग पर चलते हो...??

मैं - किन्तु गुरुवार मैं ऐसा नहीं हु...

मैंने यह नहीं चुना..

आदिगुरु - पुत्र अब भी मेरा वही जवाब होगा...

जो लिख गया है उसे बदला नहीं जा सकता..

मैं सिर्फ इतना hi कहूंगा कर्म करते Jao....Fal की चिंता मत करो....

मैं - जो आज्ञा गुरुवार !

गुरुवार पुनः गायब हो गए और मेरा भी ध्यान टूट गया...

अब तो एक बात साफ़ हो गयी थी...

की अब मुझे hi कुछ करना होगा और अपने भविष्य को अपने हिसाब से बदलना होगा...

कुछ प्लान बनाना होगा....??

मैं वापस हॉल की तरफ चल दिया...

जहा सभी नाश्ते की टेबल में बैठे हुए थे...

मैंने सबको गुड मॉर्निंग विश किया...

और हाथ धोकर टेबल पे बैठ गया....

माँ - लो आ गया मेरा बचा...

बहुत जल्दी उठ गए थे...

मैं - वो बस थोड़ा मैडिटेशन करना था सो जल्दी उठना पड़ा...

डैड - ये तो अच्छी बात है सुबह जल्दी उठना हेल्थ के लिए बहुत अच्छा होता है...

इन दोनों को देखो जब से तुम गए हो 7 बजे के बाद hi उठती है..

कल से इन्हें भी अपने साथ ले जाया करो...

अब तो दोनों ने प्रैक्टिस करना भी छोड़ दिया है...

मैं - ये तो सही न किया...

अब मैं आ गया हु न इनको भी अपने रंग में रंग दूंगा...

अन्य - चुपचाप नाश्ता कर...

बड़ा आया मुझे सीखने वाला..

कल से मैं भी तेरी क्लास लेती हु देखती हु क्या क्या सीख के आया है गुरुवार से....

माहि दी - इसकी तो बात hi मत करो मैंने सिंगापुर में फाइट करते हुए देखा था...

हयान इस अवेसमे..!!

अन्य - है आप तो हमेशा इसी की साइड लेते हो...

आज देखती हु न कितना अवेसमे है...

अखिल - मेरे ख़याल से अन्य अभी भी इस दुफर से बेस्ट होगी...

तुम क्या कहती हो जिन !....??

जिन - मुझे इस लफड़े में मत खींचों मेरे लिए दोनों hi एक जैसे है...

न कोई किसी से काम न Hi कोई किसी से ज्यादा...!!

माँ - जिन ! ये तुमने ये बिलकुल सही कहा...

तुम सब मेरे लिए एक सामान हो...

मैं भी सबको एक Hi नजरिये से देखती हु

मेरे लिए इन दोनों और तुम तीनो में कोई अंतर नहीं...

ऐसे हंसी मजाक और बातें करते हुए...

हम सभी ब्रेकफास्ट करने लगे....


चलिए इनको कुछ देर आराम से नाश्ता करने देते है.... और हम चलते है एक अनजान जगह.... देखते है वह क्या हो रहा है...??

वीडियो कॉल कांफ्रेंस में.....

आदमी - सर ! जैसा आपने कहा था मैंने साडी रिपोर्ट्स हासिल कर ली है...

और आपने जो भी इंजेक्शन और ड्रग्स कहे थे वो भी अर्रंगे कर लिए है...

बूत उस लैब में सिर्फ दो hi इंजेक्शन अवेलेबल थे जिनको मैं अपने साथ ले आया हु....

दूसरी तरफ से...........

आदमी - यस सर ! मैंने यह काम बिलकुल सफाई से किया है.. किसी को भी कानो - कान भनक भी न लगी...

लेकिन उस नकाब पॉश की अब तक कोई खबर नहीं लगी..

मैंने अपने सभी आदमी उसके पीछे लगा दिए है जैसे hi उसके बारे में कुछ खबर मिलती है आपको तुरंत इन्फॉर्म कर दूंगा...

दूसरी तरफ से..........

आदमी - नहीं सर ! हम इस बार बिलकुल सफाई से अपने काम को अंजाम देंगे किसी भी प्रकार गलती नहीं होगी....

सर ! एक खुश खबरि है....

वो जो सिंगापुर फॅमिली थी हमें उसकी लोकेशन मिल गयी है......

अब बस आपके आर्डर का इंतेज़रर है....??

दूसरी तरफ से......

आदमी - Okay ! सर आपके आदेश का इंतेज़रर रहेगा...

मैं खुद आऊंगा आपको एयरपोर्ट रिसीव करने...!!

इसकी के साथ वीडियो कॉल डिसकनेक्ट हो जाती है....!!


आज के लिए बस इतना Hi.....

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नेक्स्ट अपडेट आपकी खिदमत में जल्द hi हाजिर हो जायेगा....!!


थैंक यू वैरी मच गाइस ! इतना ज्यादा सपोर्ट करने के लिए... और कंटिन्यू साथ निभाने के लिए. .!!
 
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    • सर ...
    मैं मंटा हु वक़्त की कमी के कारन मैं ठीक से अपडेट न दे पाया.... बूत उससे पहले तो डेली अपडेट देता... वक़्त सबका बदलता है मेरा भी बदला... बूत अब फ्री हु तो जल्द अपडेट दूंगा.... अगर स्टोरी बुरी है तो सुग्गेस्टिव दे.... बूत स्टोरी को सीधे दिस्लिके न करे...
  • रीज़न भी मेंशन करे... थैंक्स
 
Update..No..58*

MeGa..UpDatE

Abb..Takk...

माँ - तुम सब मेरे लिए एक सामान हो...

मैं भी सबको एक Hi नजरिये से देखती हु

मेरे लिए इन दोनों और तुम तीनो में कोई अंतर नहीं...

ऐसे हंसी मजाक और बातें करते हुए...

हम सभी ब्रेकफास्ट करने लगे....


Abb...Aage...

ब्रेकफास्ट कम्पलीट होने के बाद सभी सोफे पे बैठ गए


और एक दूसरे से बातें करने लगे..

डैड - हम्म तो बच्चो! अब आगे क्या करने का प्लान बनाया है..??

डैड की बात सुनकर माहि दी हसरत भरी निगाह से मेरी तरफ देखने लगी जैसे आँखों hi आँखों में विनती कर रही हो...

अन्य ! को देर न लगी इशारों को समझने में मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी...

माँ - आगे करना क्या है..

जैसा अभी तक चलता आ रहा है वैसा hi चलेगा...

मैं नहीं चाहती की अब कोई भी मेरी नजरों से दूर जाये...

डैड - बूत बचे अब बड़े हो गए है..

उनकी आगे की स्टडी के लिए कुछ तो करना hi होगा....

हमरे पेरैंट्स होने का फ़र्ज़ बनता है की हम उनकी शिक्षा का सही इंतेज़ाम करे...

अब तक जैसा चलता आया वैसा अब पॉसिबल नहीं..

माँ - अगर फिर कोई अनहोनी हुयी तो...??

नहीं नहीं सब एहि एक साथ घर में रहेंगे...

मैं - मैं कुछ कहु यदि आप दोनों की इजाजत हो तो...

मेरे बस इतना कहने से hi माहि दी चहक उठी ऐसा लगा जैसे उनकी कोई विश पूरी होने जा रही हो...

डैड - इसमें इजाजत मांगने की जरुरत है...

सबको हक़ है अपनी बात रखने का...

मैं - तो डैड ! जहा तक मुझे पता है मेरे और अन्य ! पर जो अब तक खतरा था वो अब ताल चूका है ऐसा गुरुवार का कहना है...!!

जैसा की जैन अंकल ने बताया अब हमारी सिर्फ एक hi प्रॉब्लम है आपका बिज़नेस एनिमी...

तो क्यों न अब हम इस प्रॉब्लम को अब ख़त्म करें....

क्लो हल निकले इस मुसीबत से छुटकारा पाने का..

कब तक यूँही डर डर कर जियेंगे...

वापस चलें सभी देहरादून

आप, मौसी जी और मौसा जी वापस अपनी कंपनी ज्वाइन करें...

हम सभी भी वह के किसी अच्छे कॉलेज में अपना एडमिशन करवा लेंगे....

मेरी बात सुनकर अन्य! और जिन एकदम खुश हो गयी...

बूत माहि दी का फेस उतर गया...

तभी बीच में अन्य! बोल पड़ी...

अन्य - मैं हय्यू! की बात से सहमत हु....

मेरा भी एहि कहना है...

डैड - हम्म आईडिया तो बहुत अच्छा है...

एक साथ सभी प्रॉब्लम सोल्वे हो जाएगी...

तुम्हारी क्या रे है मीरा....

माँ - मुझे क्या..??

जहा मेरे बचे वही मैं... ये सभी hi तो मेरी दुनिया है...

बस एक डर सा दिल में अब बना रहता है..

डैड - हम्म सही कहा... इनकी ख़ुशी में hi हमारी भी ख़ुशी है...

देखो मीरा! होनी को कोई ताल नहीं सकता जो होना है वो होक रहेगा चाहे इस घर में रहे या कही और...

जब तक हम साथ सब सेफ है...!!

रही बात खतरे की तो मैं आज Hi जैन से कह कर इस मुसीबत को अब जड़ से ख़त्म करने का इंतेज़ाम करता हु...

मैं - इंतेज़ाम करने की कोई जरुरत नहीं है..

मैंने सब सोंच रखा है कैसा क्या करना है..

मैंने सारा प्लान बना रखा है...??

अब बस आपके परमिशन का वेट है मुझे..

डैड - कहना क्या चाहते हो तुम...??

कैसा प्लान..??

मैं - है एक प्लान जो शाम को जैन अंकल के वापस आने के बाद डिसकस करेंगे...??

डैड - तो क्या जैन ! को तुमने hi किसी काम से भेजा है...??

मैं - हम्म, कुछ डिटेल्स चाहिए थी मुझे,

और देहरादून वाले घर की मरम्मत भी करवानी थी...

डैड - वह बीटा जी ! आज कल अपने डैड से भी बातें छिपाई जा रही है...

Chacha-Bhatije की बीच आज कल खिचड़ी पकाई जा रही..??

चलो इससे साबित होता है की मेरा बीटा अब बड़ा हो गया है !!

मैं - वो तो बस हम दोनों ऐसे डिसकस कर रहे थे...

सोंचा जो काम बाद में करने hi है उन्हें पहले hi कम्पलीट कर लिया जाये...

सॉरी ! जो आपसे बातों को छुपाया...!!

डैड - अरे नहीं इसमें सॉरी बोलने वाले कली बात नहीं...

मैं तो बहित खुश हु की तुम्हें अपनों की फ़िक्र है..

अपनी जिम्मेदारी को समझते हो !!

अन्य - जिम्मेदारी को समझता नहीं... समझाया गया है...

वर्ण इस बुद्धू को अभी समझ कहाँ,

वो तो मेरे कहने पर इसने जैन अंकल से बात की और प्लान बनाया..!!

मैं - चल झूठी...

कुछ भी बोलती...

ये सब मेरा प्लान था...

अन्य - अच्छा वो देहरादून में स्टडी का सुग्गेस्टिव तुझे किसने दिया था...

मैं - बस स्टडी बस न...

वो बुसिनेस्स एनिमी और देहरादून में रहने का प्लान तो मेरा था न....

माँ - शांत शांत ! दोनों एक डैम चुप !

यह प्लान मेरे दोनों बच्चों का था... दोनों ने मिलकर बनाया.. इस्सलिये इसका श्रेया दोनों को जाता है...

अब खुश न दोनों...

डैड - दोनों उतने बेस हो गए लेकिन इनका बचपना अभी तक न गया..

जरा जरा सी बात पर लड़ने लगते हो...

मैं - डैड ! वो आप नहीं समझोगे..

ये हम दोनों के बीच की बात है..

वैसे एक सच बताना था आप सभी से...

मैं आगे कुछ लहता उससे पहले hi अन्य ! मुझे चुप रहने का इशारा काटने लगी...

शायद वो मेरी बातों को समझ गयी थी की आगे मैं क्या कहने वाला हु...??

डैड - कैसा सच...??

मैं - अन्य ! मैं बताऊँ या फिर तुम कहोगी...??

मेरे ऐसा कहने से न चाहते हुए भी अन्य! को बोलना पड़ा...

अन्य - दरअसल बात ये है की...

माहि दी छाती थी की हम सभी दिल्ली में स्टडी करने चलें..

बूत जिन ने hi हमारे बुसिनेस्स और बिरथ प्लेस की वजह से देहरादून में स्टडी करने की रे दी...

सो ये प्लान हम दोनों का नहीं... जिन का है...!!

डैड - ओह्ह तो यह प्लान जिन! का था और वह वही दोनों लड़ झगड़ के लुटे जा रहे थे...

यह तो बहुत न इंसाफ़ी है...??

माँ - जिन ! बेटी इधर आओ मेरे पास..

जिन ! मेरे बाजु से उठकैत माँ के पास जाकर बैठ गयी..

माँ जिन के सर ओर हाथ फेरते हुए...

माँ - थैंक्स जिन बीटा ! इतना अच्छा सुग्गेस्टियन्स देने का लिए और सबके बारे में सोचने के लिए...

जिन - नहीं मौसी जी ! इसमें थैंक्स की कोई बात नहीं..

अब जब मैं भी इस फॅमिली का हिस्सा हु.. आपने मुझे अपनी बेटी का दर्जा दिया है तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की मैं भी अपनी फॅमिली के लिए सही रे दू...

डैड - शाब्बाश बीटा ! आज तुमने बड़े होने का फ़र्ज़ ऐडा किया और बिलकुल सही फैसला लिया...

इस्सलिये तुम तारीफ के हक़दार हो !!

माँ - डैड जिन ! की तारूफ करने लगे...

जिन भी बहुत खुश हो गयी..

मैं और अन्य ! भी खुश हो गए क्युकी जिन को भी उसको हक़ मिला..


ऐसे hi हंसी मजाक में सभी लगे rahe...aur सभी अपना टाइम - पास करने लगे..

आईये अब चलते हैं.. दूसरी तरफ...


जहाँ शैतान मण्डली किसी विचार - विमर्श में लगी हुयी थी...

बुमलीन - कौन सी मुसीबत ाँ पड़ी थी जो मुझे ऐसे अर्जेंट बुलाया....??

नरकिस्सा - मुसीबत तो नहीं आयी अभी लेकिन आने के आसार दिख रहे है.. अगर उसे ठीक समय पर रोका न गया...??

बुमलीन - जो भी कहना है साफ़ साफ़ कहो...

नरकिस्सा - कहना क्या है आओ खुद hi देख लो...

.नरकिस्सा अपने मोबाइल में मास्क मन की वीडियो प्ले करके दे देती है...

बुमलीन वीडियो देखने लगता है..

सभी वीडियो देखने के बाद...

बुमलीन - हम्म तो इसमें कौन से खतरे की बात है...??

सक्कूबी - शायद आपने ठीक से देखा नहीं..

उसने हमारे गैंग के आदमियों पर अटैक किया है..

और जिस प्रकार से उसने सबको मारा उससे तो एहि पता चलता है की वो बहुत खतरनाक है और हम में से hi एक है...!!

बुमलीन - वो हम में से एक है, यह बात तुम किश बिना पर कह रही हो..

अगर तुम्हारा यह दावा गलत साबित हुआ तो..??

कोई बहरूपिया निकला तो...??

नरकिस्सा - मैंने महसूस किया है की वो एक काली शक्ति का प्रतीक है...

बूत उसके करीब पहुंचने से पहले hi वो गायब हो जाता है..

रही बात बहरूपिया वाली,

चाहे कोई भी हो हमें सतर्क रहना चाहिए... उसे ऐसे अनदेखा करना ठीक भी तो नहीं..

बुमलीन - मुझे समझ नहीं आ रहा उसमे ऐसा है क्या जो तुम दोनों डर गए हो...

और एक शैतान होक भी उस इंसान से सतर्क रहने को बोल रहे हो...!!

सक्कूबी - हम डरे नहीं.. बस एक नयी मुसीबत से बचने की कोशिश कर रहे...

वैसे भी हमारे उद्देश्य में न जाने कितनी बढ़ाएं बढ़ती जा रही हैं..

बुमलीन - तो मैंने कब मन किया है की तुम यूँ hi हाथ पे हाथ धरे बैठे रहो..

तुम दोनों खुद उसका पता लगा सकती थी...

मुझे बुलाने की क्या आवश्यकता थी...!!

नरकिस्सा - अब हम ऐसा hi करेंगे...!!

कुछ न कुछ तो गड़बड़ चल रहा है..

हमारे गिरोह के काम से काम 20 आदमी मरे गए और किसी भी सदस्य ने अब तक हमें इन्फॉर्म भी न किया...

कोई तो वजह होगी...??

मैं इसका पता लगा रहूंगी...??

बुमलीन - हम्म देखो क्या पता चलता है...

तब तक मैं भी अपने जरुरी कामों से फ्री हो जाता हु..

फिर मिलकर इस मास्क मन का काम तमाम करते है...??

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ात देहरादून इंटरनेशनल एयरपोर्ट...

एयरपोर्ट के बहार एक आदमी बड़ी बेसब्री से किसी के आने की राह देख रहा था...

की तभी उसकी नजर एग्जिट से आ रहे एक शख्श पर पड़ती है...

तुरंत सलूट मरता है और भागकर उसके पास जाता है और अभिनन्दन करने लगता है...

आदमी - मेरे साथ चलिए सर !

दोनों सामने कड़ी कार अपर बैठ जाते है...

आदमी - सर ! कहाँ चलना है..??

चेयरमैन (डी6) - सीधे फार्म हःसे चलो...

और अपने सभी आदमियों को इन्फॉर्म कर दो की मैं आ रहा हु..

एक अर्जेंट मीटिंग है अभी 10 मं में...

आदमी - सभी पहले से Hi फार्म हाउस में hi हैं..

सभी आपके आने की राह देख रहे...

चेयरमैन - हम्म, तो सभी इंतेज़ाम पहले से हो रखे है..

सरे हथियार मंगवा लिए जो भी मैंने कहे थे...??

आदमी - यस सर ! सब रेडी है..

बस अब आपके आर्डर की देर है..

पूरा शहर का शहर उड़ने लायक वेपन्स जमा कर रखे हैं...

चेयरमैन - गुड जॉब ! अब तो बस हर तरफ तबाही hi तभी होगी कोई नहीं बचेगा... बहुत हुआ चूहा बिल्ली का खेल...!!

ऐसे hi बातें करते हुए 10 मं में फार्महाउस पहुँच जाते है...

आज तो फार्महाउस में हथियार और गुंडों का जमवाड़ा लगा हुआ था..

लगभग 250 हतियार बंद आदमी मुजूद थे...

चेयरमैन भी कार से उतारकर सीधा सबके बीच पहुँच जाट है..

चेयरमैन - तो सबको यहाँ आने का रीज़न पता चल चूका होगा...

आज रात hi हमें एक पल भी गवाए बगैर hi अचानक से अटैक करना है जिससे किसी को भी सँभालने का मौका न मिले...

लोकेशन तुम सबको रात में बता दी जाएगी...

इतना कहकर चेयरमैन अपने ख़ास आदमी के साथ फार्महाउस में बने सीक्रेट रूम की तरफ चल देता है....

सामने बीएड में लेते साक्ष को देख कर चेयरमैन मुस्कुराने लगता है...

चेयरमैन - मैं तुमसे बहुत खुश हु.. तुमने बहुत अच्छा काम किया है....

चेयरमैन ख़ुशी से झूमने लगता है....

ख़ुशी से चिल्लाते हुए....

चेयरमैन - अब मुझे कोई नहीं रोक sakta...Koi भी नहीं..!!


आज के लिए बस इतना hi.....

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गुश्ताखि माफ़ Ho..deri के लिए..

आपका दोस्त हयान.... प्ल्ज़ वोट एंड लाइक्स
 
हम्म भाई जी...

आपका कहना बिलकुल सही है...

सस्पेंस बरकरार रखने की कोशिश कर रहा हु...

स्टोरी हर पल एक नए मोड़ की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा....

बहुत Hi बेहतरीन रिव्यु दिया आपने....

एक लम्बे अर्शे के बाद एक बड़ा रिव्यु देखने को आँखें तराश गयी थी....

थैंक्स भाई जी....

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड फैंटास्टिक रेविएवस...

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखें ..



थैंक यू सो मच....
 
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