अपडेट No..51*..
MeGa..UpDaTe
Abb..Aage..
मैं आदिगुरु के पास से गायब होकर सीधा सिंगापुर पहुंचा...
मैं एक बिल्डिंग के सामने खड़े सिंगापुर आने के बारे में सोंच hi रहा tha...Ki आखिर गुरुवार ने मुझे इस जगह hi क्यों भेजा है...
कहीं रश्मि मौसी की फॅमिली पर कोई खतरा तो नहीं...
जरूर कोई बात होगी वर्ण यूँही यहाँ नहीं भेजते...
लेकिन मुझे तो मौसी के घर का एड्रेस भी नहीं पता....
और नहीं इस वक़्त मेरे पास मोबाइल है की उनसे बात हो जाती...
अभी मैं इन सब बातों को समझने की कोशिश कर hi रहा था की.... धन्य धंएं....
जिस बिल्डिंग के सामने मैं खड़ा था उस बिल्डिंग के अंदर से गोली चलने की आवाज़ आयी....
मैं गोली की आवाज़ सुनकर चौंक गया,
फिर किसी के दर्द में चीखने की आवाज़ आयी....
और अचानक hi फायर अलार्म भी बजने लगा....
एक साथ कई प्रतिक्रिया होने से अंदर किसी खतरे की शंका हुयी....
मैं भी सभी बातों को साइड रख उस बिल्डिंग के अंदर घुश गया...
की आगे जो भी होगा देखा जायेगा..
3रद फ्लोर से अलार्म बजने की आवाज़ आ रही थी इस्सलिये सीधा वहीँ सीढ़ियों के रस्ते रूम के बहार जा पहुंचा....
दरवाज़ा खोलने की कोशिश करने लगा बूत रूम अंदर से लॉक था...
अंदर से चीखने की आवाज़ें और तेज़ हो गयी मुझे और ज्यादा देर रुका न गया...
मैं दरवाज़े को तोड़ते हुए सिद्ध रूम के अंदर घुश गया...
अंदर का नज़ारा देख कर मेरे तो होश hi उड़द गए...
सामने जमीन पर मौसी, मौसा, अखिल भैया और महिमा दीदी बेहोश पड़े थे...
मैं दौड़ कर उनके पास गया और उनकी नब्ज़ चेक करने लगा...
सभी बेहोशी की हालत में थे
देखने में ऐसा लग रहा था की जैसे इन्हें जबरदस्ती बेहोश किया गया हो...
ये सब तो बेहोश है फिर चिल्लाया कौन...??
मैं इधर उधर पानी ढूंढने लगा की तभी दूसरे रूम से फिर किसी के चीखने की आवाज़ आयी...
मैं भी उसी रूम की तरफ बढ़ गया...
अनादर का नज़ारा देख कर तो मेरी हालत hi ख़राब हो गयी...
एक नकाब पॉश शख्श दो आदमियों के पेट में अपना हाथ घुसाए हुए खड़ा था..
और उसके बगल में hi 3 लोगों के सर धड़ से अलग गिरे हुए पड़े थे... तीनो को बड़ी बेरहमी से मारा गया था...
हाथ - पेअर को कटे हुए टुकड़े वहीँ जमीन पर इधर उधर बिखरे पड़े थे ..
हर तरफ बस खून hi खून दिख रहा था...
मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर यहाँ हो क्या रहा है...??
कौन है ये नकाब पॉश शख्श जो इतनी बेदर्दी से लोगों को मारा रहा है....??
तभी वो नकाब पॉश शख्श अपने हाथों को उनके पेट से बहार निकलता है...
उसके हाथ इस वक़्त खून से साणे हुए थे हाथ में दोनों की अतड़ियां पकडे हुए था....
उस ज़ालिम ने तो दोनों के शरीर से गुर्दे hi निकल लिए थे...
ऐसा खौफ नक् दृश्य देख कर मेरी चीख निकल गयी...
नकाब पॉश शख्स मेरी तरफ पलटा....
अब हम दोनों एक दूसरे के बिलकुल सामने थे...
वो मेरी तरफ देख कर अपनी गर्दन को टेढ़ी करके ऊपर से लेकर निचे तक देखने लगा...
मास्क मन - बहुत देर कर दी आने में...
अपनों की जरा सी भी फ़िक्र नहीं...??
मैं - कौन हो तुम...??
इन्हें क्यों इतनी बेरहमी से मर रहे हो...??
मास्क मन जोरर जोरर से हसने लगता है...
मास्क मन - मैं कौन हु... इतना बचकाना सवाल...??
और मैं क्या हु तुमसे बेहतर कौन जनता होगा...?? हयान !!
और रही बात इनकी ये तो भाड़े के तत्तो थे जीने मैंने नरक की शेर करवा दी...
अब इनके मालिक की बारी है....!!
मैं उसके मुँह से अपना सुनकर सॉलिड चौंक उठा... लेकिन खुद ओर काबू किये रहा..
मैं - मेरी फॅमिली से दूर hi रहना अगर उन्हें हाथ भी लगाया तो... ज़िंदा नहीं छोडूंगा...??
मास्क मन - मैं तो तुम्हारा साथी हु..
तुम्हारे फॅमिली की जान बचायी है..
वर्ण आज तुम्हें यहाँ सिर्फ उनकी लाशें hi मिलती...
रही बात मुझे मरने की तो... मैं अमर हु.... मुझे कोई नहीं मर सकता...
अभी तुम मेरे बारे में नहीं जानते... जल्द hi जान जाओगे...??
मैं - मुझे कुछ भी नहीं जानना...
अपनी जान प्यारी है तो यहाँ से चले जाओ...
फिर तुम चाहे अमर हो या अकबर मेरे हाथ से नहीं बच पाओगे... ??
मजाकिये अंदाज़ में.. हँसते हुए...
मास्क मन - अमर अकबर तो कहा अन्थोनी को भूल गए...
डायलाग पूरा बोलने का...
वैसे मैं तुम्हारा शुभचिंतक hu..Hayaan !!
मैं यहाँ से चला jaunga..Bass मेरा एक काम कर दो...
न जाने क्यों मुझे उसकी बातों पर गुस्सा नहीं आ रहा था... इतनी बकचोदी भरी बातें करने बाद भी...
मैं - क्या करना होगा मुझे..??
मास्क मन - ज्यादा कुछ नहीं bass..Tumhein एक वीडियो रिकॉर्डिंग करनी hai..Meri, जिसे मैं यूट्यूब में डालकर फेमस होना चाहता हु...??
अब तो मेरा दिमाग hi ख़राब होने लगा...
एक तरफ मेरी फॅमिली बेहोश पड़ी थी..
ऊपर से इसकी बिना सर - पेअर की बातें ...
मैं झल्लाते हुए...
ठीक है ठीक hai...Jo भी करना है जल्दी करो... और यहाँ से दफा हो जाओ...
मास्क मन - ये लो मेरा मोबाइल..
सीधा यूट्यूब पे लाइव अपलोड करो इस वीडियो को....
मैं उसका मोबाइल लेकर वीडियो शूट करने लगा....
ऐसे माहौल में होते हुए भी उसकी बातें सुनकर मुझे एकतरफ ुसस्पर गुस्सा आ रहा तो दूसरी तरफ उसकी बातें सुन कर बहुत हंसी आ रही थी...
वीडियो में...
""सबसे पहले 5 डेड बॉडी को दिखाया, फिर दो आदमी के सर को अपने हाथ में लेकर फुटबॉल की तरह उछाल कर वीडियो में दिखाया...
काफी देर अपनी दरिंदगी का नमूना शो करता रहा...
फिर बोलना शुरू किया..
ट्रेलर देखने के बाद भी तुम नहीं सुधरे,
अब तुम अपनी सजा भुगतने के लिए तैयार रहना... इससे भी बड़ी...
साथी तो गए.. .अब तेरा क्या होगा कालिया...?? ओह्ह सॉरी िमरब चेयरमैन....!!
वौइस् मॉग...
ही गाइस !! आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया... आप सभी ने पहले वीडियो को बहुत पसंद किया...
अब दूसरी वीडियो आपकी खिदमत में हाज़िर है..
पसंद आये तो शेयर और लिखे करना न भूले..., ब्बये..
म्यूजिक Hello हनी बन्नी.......""
मेरे हाथ से उसने मोबाइल ले लिया...
मैं तो चेयरमैन का नाम सुनकर hi गहरी सोंच में डूब गया था...
अचानक से मोबाइल छीने जाने पर मुझे होश आया...
सामने का नज़ारा बिलकुल बदल चूका था...
देखने में ऐसा लग रहा था की जैसे यहाँ कुछ हुआ hi नहीं....
सभी डेड बॉडी गायब थी... मास्क मन भी वह पर नहीं था... और न hi एक भी खून के निसान....
अचानक से सब कुछ गायब हो जाने से मुझे बहुत ज्यादा हैरानी हुयी...
फिर मुझे मेरी फॅमिली का ख्याल आया तो तुरंत दूसरे रूम की तरफ भगा....
चारो अभी भी बेहोशी के आलम में जमीन पर पड़े थे...
सबको अपने सामने देख कर दिल को थोड़ा सुकून मिला...
मैं जल्दी से सब के ऊपर पानी के छींटे दाल कर होश में लेन की कोशिश करने लगा....
कुछ देर बाद सबको होश आ गागा...
मुझे अपने सामने देख कर सभी चौंक गए....
कुछ देर यूँही असमंजस भरी निगाह से देखती रहे...
फिर अचानक मौसी जी और माहि दीदी तुरंत आगे बढ़कर मुझसे लिपट कर रोने लगी....
मौसी जी - मेरा बचा तू Yaha...Kaise ..??
कैसा है तू..??
तुझे कोई चोंट तो नहीं लगी...~~
दोनों को अपने से अलग करते हुए...
आगे बढ़कर मौसा जी और मौसी जी के पेअर छूने लगा तो वो मुझे अपने गले से लगा लिए....
मैं - एक मं पहले आप सब लोग रिलैक्स हो जाईये..
अब सब ठीक है..
अपनी हालत तो देखिये....
सबको सहारा देकर सोफे पर बिठाया...
मैं - मैं बिलकुल ठीक हु मौसी जी... मुझे कुछ भी नहीं हुआ...!!
लेकिन आप सब की यह हालत कैसे.. कौन थे ये लोग..??
और क्यों किया ये सब...??
मौसी के जवाब देने से पहले hi बीच में...
मौसा जी - कुछ नहीं बीटा, वो सब बस ऐसे hi चोर थे... हमें बंदी बनाकर पैसे चुराने आये थे ..
लेकिन तुमने वक़्त पर आकर हमारी जान बचा ली..
लेकिन बीटा तुमने हमें बेहोश क्यों किया था....??
मौसा जी के इस बात से मुझे तगड़ा झटका लगा...
मैं एकदम शॉक हो गया....
मैं - मैं कुछ समझा नहीं आप क्या कह रहे हो...??
मौसी जी - समझ में तो हमें भी नहीं आ रहा, की तुम अचानक यहाँ कैसे आये... तुमने हमें उन लुटेरों से बचाया बूत हम कुछ समझ पते उससे पहले hi तुमने स्प्रे डालकर बेहोश कर दिया.....
ये सब बातें मुझे हैरानी और बेचैनी के आलम में दाल दिए.....
एक तो उस मास्क वाले बन्दे का मुझे पहचानना,
उसकी आवाज़ बिलकुल मेरे जैसी होना...
और दूसरी तरफ हमला करने वाली की पहचान को मुझसे छिपाना...
ये सब मेरे समझ के बिलकुल परे था...
मैं बात को बदलते हुए....
मैं - सॉरी ! आप लोगों को जो तकलीफ हुयी,
वो दरअसल मैंने आप सबको सेफ करने के लिए बेहोश करके रूम में लॉक कर दिया था... ताकि किसी की भी जान का कोई खतरा न हो...
दीदी जो अब तक शांत बैठे मुझे बड़ी hi अजीब नज़रों से घूर रही थी... अचानक बोल पड़ी...
माहि दीदी - तू ऐसे कैसे कर सकता है..??
अगर तुझे कुछ हो जाता तो....
तुमने हमारे लिए अपनी जान की भी परवाह न की..
इतना सब बोलकर दीदी रोने लगी...
मैं दीदी के पास गया.... और उन्हें अपनी बाँहों में भरकर शांत करने लगा....
मैं - जिस्सकी इतनी फ़िक्र करने वाली प्यारी दीदी हो,
उसका भला कौन कुछ बुरा कर सकता है...
वैसे भी आप जानते हो मैं 10 पर भरी हु वो तो फिर भी 5 थे...
अब सब कुछ ठीक हो चूका था...
लेकिन एक चिंता की लकीर मुझे उनके चेहरे पे साफ़ नजर आ रही थी...
कुछ तो था जो मुझसे छिपाने की कोशिश कर रहे थे...
तभी मुझे गुरुवार के द्वारा दिए गए अंतिम ज्ञान यानि की मंत्र की याद आयी मैंने तुरंत...
अनुभवति और दर्शनम मंत्र का उच्चारण किया...
और मौसा जी की आँखों में झाकने लगा...
सभी बातों को जानने में मुझे जरा सा भी समय न लगा...
क्या कब कैसे और क्यों हुआ..??
हर एक पहलु खुलकर मेरे सामने आ चुके थे...
बस इतना hi नहीं अब आगे मौसा जी क्या करने की सोंच रहे उसके बारें में भी मुझे सब पता चल गया...
गुरुवार के दिए गए इस सीख्शा से तो मेरी हर एक राह आसान होने वाली थी...
लेकिन एक बात मुझे सबसे ज्यादा परेशानी में दाल चुकी थी की आखिर वो मास्क मन था कौन...
मेरे इन मन्त्रों का उस पर कोई असर क्यों न हुआ...??.
मैं काफी देर यूँही गम शूम बैठा सोंचता रहा तभी अखिल भाई ने मुझे हिलाते हुए पूछा....
अखिल - क्या हुआ भाई..??
कहाँ गम - शूम हो..??
मैं - हद - बढ़ाते हुए...
वो मैं मैं तो इस चोरी की अजीब घटना के बारे में सोंच रहा था...
यहाँ तो सब कुछ एकदम ठीक है..
जैसे ki...Kuchh हुआ hi नहीं...
मौसी जी - वो सब छोडो बीटा, ये बताओं तुम यहाँ अचानक कैसे...??
मौसी जी की इस बात से मैं थोड़ा घबरा सा गया की अब क्या जवाब दू.. अभी कोई प्लान सोंच hi रहा था की...
माहि दी - है भाई आपने अभी तक इस बात का जवाब नहीं दिया...
अगर तुम सिंगापुर आने वाले थे तो तुमने मुझे बताया क्यों नहीं....??
मैं एकदम शांत होते हुए....
दीदी के पास जा baitha...Aur उनका हाथ अपने हाटों में थामते हुए...
मैं - वो इस्सलिये नहीं बताया क्युकी....
मैं अपनी प्यारी सी दीदी को सरप्राइज देना चाहता था...
बूत आप सबने तो पहले hi मुझे शॉक में दाल दिया...
मैं तो यहाँ सिंगापुर एक चैंपियनशिप टूर्नामेंट्स में पार्टिसिपेट के लिए आया था तो सोंचा पहले आप सभी लोगों से मुलाकात कर lu....But यहाँ का तो नज़ारा hi बिलकुल बदला हुआ सा था...
मौसा जी - छोडो इन सब बातों को...
अच्छा क्या तुम्हारा पार्टिसिपेट करना बहुत ज्यादा जरुरी है...??
मैं - पार्टिसिपेट करना तो एक बहाना था मैं तो आप सब से मिलने आया था...
ऐसा क्यों पूछ रहे आप...??
मौसा जी - वो क्या है हम इंडिया वापस सेटल होने की सोंच रहे थे...
हम तो 2 दिन बाद जाने वाले hi थे की आज ये सब हो गया...
इस्सलिये मैं सोंच रहा था की 2 बाद क्यों जाएं आज की फ्लाइट से चलते हैं..
अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम न हो तो...
मैं मौसा जी की बातों को सुनकर मन hi मन मुस्कुराने लगा...
मन में... और कितने झूट बोलोगे मौसा जी... और कितनी बातों को छिपाओगे...
मैं - मुझे कोई परेशानी नहीं है..
बूत मेरी एक शर्त है...??
अगर आप सभी को मेरी शर्त मंज़ूर है तो मैं नेक्स्ट 4 हरष के बाद वाली फ्लाइट से वापस घर जाने को रेडी हु....??
मेरी बात सुनकर चरों लोग मुझे घूरने लगे...
मौसी जी - तेरी जो भी शर्त हो बीटा हमें सब मंज़ूर है..
हाहाहा hahah....heheh
मैं तो मज़ाक कर ारः था...
बस ऐसे hi माहौल को हल्का करने के लिए...
बस आप सब से रिक्वेस्ट है की अभी कोई भी माँ डैड को इन्फॉर्म नहीं करेगा की हम सब लोग अपने गांव वापस आ रहे है...
सब वहीँ जाकर सरप्राइज देंगे...
मौसी जी - तूने तो हमें डरा hi दिया था...
तेरी सबको ोारेषण करने की आदत अभी तक गयी नहीं...
माहि दी - माँ आप जाकर जो पैकिंग बची है कम्पलीट kijiye...Mujhe भाई से जरुरी बात करनी है..
हयान !! तुम मेरे साथ मेरे रूम चलो... कुछ काम है तुमसे...??
मैंने माहि दी की आँखों में एक बार गौर से देखा और सारा माज़रा समझ में आ गया...
मैं भी मुस्कुराते huye....Unke साथ चल दिया.....
......
आज के लिए बस इतना hi...
थैंक्स गाइस..... फिर रीडिंग एंड सपोर्टिंग....!!
लाइक्स, कमैंट्स और वोट्स का रखना Dhyan...Aapka दोस्त हयान..!!