Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 13 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

Update..No..46*

MeGa..UpDatE




Abb..Takk..

आदिगुरु - पुत्र तुम्हे घबराने की कोई जरुरत नहीं है...

मैं hi तुम्हारा गुरु हु, आदिगुरु...

तुम्हारे मैं में उठ रहे सभी प्रश्नो का उत्तर देने..

और तुम्हे तुम्हारा जीवन उद्देश्य समझने और मार्गदर्शन के लिए आया हु...!!

Abb..Aage...

अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा था....

मुझे अपनी फॅमिली की बहुत ज्यादा फ़िक्र सत्ता रही थी.....

थोड़ा डर और संकुचाते हुए......

मैं - गुरुवार ! मैं बहुत बड़ी उलझन में हु कृपा करें मुझ पर....

मेरे सवालों के जवाब देकर मेरे मन को शांति दीजिये !

आदिगुरु - पुत्र तुम्हे घबराने की जरुरत नहीं है..

तुम्हारे मस्तिष्क में उठ रहे सभी प्रश्नो का उत्तर दूंगा....

तुम्हे तुम्हारे जीवन का उद्देस्य समझने और मार्गदर्शन के लिए आया हु...

किन्तु यहाँ नहीं पुत्र ! मेरे साथ चलो, तुम्हें तुम्हारे सवालों का जवाब मिल जायेगा....

गुरुवार ! ने मेरा हाथ थाम लिया और आखें बंद करने को कहा...

मैंने आखें बंद कर ली...

ऐसा लगा जैसे मई हवा में तैर रहा हु...

आदिगुरु - पुत्र अब तुम अपनी आखें खोल सकते हो...

मैंने धीरे से आखें खोल दी....

सामने का नजारा देख कर मेरी आखें आश्चर्य से फटी की फटी रह गयी..









पर्वत में फैली हुयी हरियाली के बीच बहते हुए झरने..

और हरे भरे Pedh-Paudhon की वजह से वह की सुंदरता बहुत hi नखर कर आ रही थी..

आज मुझे शॉक के ऊपर शॉक मिलते जा रहे यही...

लेकिन मैं खुद फीलिंग को रोकते हुए मन मन में परिश्थिति को समझने की कोशिश कर रहा था.....

आदिगुरु - क्या हुआ पुत्र कहा खो गए...

मैं हड़बते हुए बोलै...

"गुरूजी ये हम किश जगह पर है..

आदिगुरु - यह मेरा घर है, यह जगह पृथ्वी लोक से बहार है...









बस एक आस लगाए की शायद अब होश आ जाये...

तभी अचानक हॉस्पिटल पे चहल - पहल ज्यादा बढ़ जाती hai..Room के बहार शोर सुनाई पड़ता है...

कबीर जैसे hi दरवाजा खोलता है..

किसी का जोरर से धक्का पड़ता है जिससे कबीर वापस रूम आकर गिरता है...

तभी आवाज़ गूंजती है...

सबको पकड़ लो कोई भी भागने न पाए...

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तो गाइस !

सभी को उनके हाल में छोड़ देते है कुछ समय के लिए...

हम चलते है...

कुछ वक़्त पीछे जब फाइट स्टार्ट होने वाली थी....

कबीर के घर से कुछ दूर जंगल में...

लगभग 11 लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था..

एक दूसरे के ऊपर दोष थोप रहे थे काफी Garma-Gahmi का माहौल था...

तामुल्लू, बुमलीन, सक्कूबी, नरकिस्सा, ये थे चारो...

जिन पर तामुल्लू अपना गुस्सा बरपा रहा था....

आईये गुस्से का कारन जान लेते है...

हुआ कुछ यूँ था की....

तामुल्लू ध्यान में बैठा कुछ पढ़ रहा था की अचानक से चीखते हुए उठ गया...

गुस्से में उसकी आखों से अंगारे निकलने लगे...

नहहीइ ये नहीं हो सकता चैलाते हुए अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ....

तभी वह पर बुमलीन, सक्कूबी, और नरकिशा प्रकट होते है...

बेहद मज़बूर और लाचार दिख रहे थे...

बुमलीन - इसमें हमारा कोई दोष नहीं है,

जैसा आपने कहा था,

ठीक वैसा hi किया...

लेकिन अचानक न जाने क्या हुआ..

कुछ पता hi नहीं चला सब कुछ जैसे एक समय के लिए रुक गया था...

और जब समय चक्र पुनः शुरू हुआ तो वो वह पर नहीं था.....

तामुल्लू - ऐसा कैसे हो सकता है,

समय चक्र रोकने की शक्ति तो किसी के भी बास में नहीं...

नरकिस्सा - जो कोई भी था कोई बहुत शक्तिशाली था, इसमें भी मुझे किसी के षड़यंत्र की बू आ रही है...

सक्कूबी - है मालिक ! ये जरूर किसी ईश्वरीय दूत का कोई छल था..

नहीं तो हम अपने मकसद के बिलकुल करीब hi थे...

की अचानक किसी शक्ति का वह पर आह्वान हुआ और फिर तो सब कुछ जैसे बदल गया....

हम लोग उस्सकी पहुँच से बहुत दूर जा गिरे..

जब दुबारा वह पहुंचे तो सब कुछ सामान्य हो चूका था.....

तामुल्लू - अब मैं मालिक को क्या जवाब दूंगा...

की हम एक फिर असफल हो गए...

एक बार फिर वो अपने षड़यंत्र में सफल हुए और हमारा षड़यंत्र बेकार गया...

बुमलीन - किन्तु हमारा जो मकसद था वो तो पूरा हुआ...

उसकी काली शक्तियां जागृत हो गयी है...

मैंने खुद अपनी आँखों से देखा था...

उसका विकराल और भयानक रूप...

उस वक़्त मुझे महामहिम की शक्तियों का आभाष हो रहा था....

तामुल्लू - मुर्ख हो तुम सब,

शैतानी शक्तियां पूर्ण रूप से नहीं जागृत हो पायी है...

जो उसे ले गया है वह अपनी शक्ति के दम पर फिर से उसकी शक्तियों को बांध देगा...

और उसे शैतान बनाने का षड़यंत्र व्यर्थ हो जायेगा...

बुमलीन - तो अब हम क्या kare..Uski शक्तियां तो कही भी अब महसूस नहीं हो रही..

ऐसे में तो उसे ढूंढ पाना मुश्किल है...

ताम्मुलु - सक्कूबी और नरकिस्सा तुम अपने कार्य की तरफ पुनः लौट jao...Aur उसकी रक्षा करो...

बुमलीन तुम,

उसके परिवार को पकड़ो और उन्हें अपने कब्जे में लो वो वापस जरूर आएगा अपने परिवार के पास...

मैं जा रहा हु वापस शैतान लोक...

लो भाई इनका प्लान तो फ़स हो गया....

इन्ही चरों ने अपने शैतानी दिमाग से रचा था षड़यंत्र

"हयान को एक इंसान से एक शैतान" बनाने का...

लेकिन कुछ न कर पाए और खली हाथ वापस चले गए...!!



आज के लिए बस इतना hi...

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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan.....Aapka दोस्त हयान...!!
 
भाई नाराज़ तो नहीं ho...Na..

पिछले तीन अपडेट अच्छे नहीं थे शायद मेरी नजर में....

ऐसा रिएक्शन तो इतर रीडर देते है...

आप तो ख़ास हो मेरे लिए...

सर जी ऐसा न ho....ki मेरी खामियां बहार hi न निकल के आ पाएं...


आपका ऐसा रिएक्शन मुझे सोंच में दाल रहा.....

आपके रिव्यु पसंद करता हु.. न की मंद करता हु..!!
 
ही गाइस !!

थैंक्स फॉर रीडिंग एंड सपोर्टिंग माय थ्रेड !!

ी होप की आपको स्टोरी पसंद आ रही होगी...

फिर भी कुछ खामियां रह जाती होगी..

सो गाइस अपने अपने थॉट्स, सुग्गेस्टिव

दीजिये जिससे मैं और बेहतर लिख सकू...

आपके सुग्गेस्टिव का इंतज़ार रहेगा....

थैंक यू सो मच गाइस !!

गुड नाईट एंड स्वीट ड्रीम्स !!

नई अपडेट ात पेज No.210
 
थैंक्स आनंद भाई..!!

फॉर रीडिंग एंड ब्यूटीफुल कमेंट..

आदिगुरु अब सायद सब कुछ बता दे...

अब हीरो का समय आ चूका है....

आदिगुरु ने कहा हैबकी कुछ भी होने से पहले फॅमिली तक पहुँच जाओगे...

इसका अर्थ है की अब हीरो का सिर्फ मार्गदर्शन होगा..

थैंक्स भाई जी..

अपना कीमती वक़्त निकल कर...

इतने बेहतरीन रिव्यु के लिए..

नेक्स्ट अपडेट रात 10 बजे..
 
Update..No..47*

MeGa..UpDatE

Abb..Takk...

आदिगुरु - ठीक है पुत्र,

तुम्हे यहाँ लेन का एक मात्रा कारन है, तुम्हारा मार्गदर्शन !!

अब मेरी बात को ध्यान से सुन्ना....??

Abb..Aage...

आदिगुरु - पुत्र ! अब मेरी बात को ध्यान से सुन्ना....??

अब तक तुम्हे खुद ज्ञात हो चूका होगा की तुम कोई साधारण इंसान नहीं हो...

तुम्हारे अंदर कुछ दिव्या शक्तियां समाहित है...

किन्तु दिव्या शक्ति के साथ - साथ शैतानी शक्तियों का विशाल भंडार तुम्हारे अंदर समाहित है....

तुम्हारे जन्म का एक मात्रा उद्देश्य है जान कल्याण...

ये शक्तियां कैसे आयीं ये तुम्हें खुद पता करना होगा...??

तुम एक होकर भी एक नहीं हो बल्कि तुम्हारी अंदर दो इंसान का वास है... एक अच्छाई का प्रतीक है तो दूसरा बुराई का...

और तुम्हारी अच्छाई के प्रतीक से जन्म हुआ है अन्य का...

अन्य तुम्हारे hi शरीर का एक अभिन्न अंग है, दोनों एक दूसरे से अलग होकर भी एक शक्ति पुंज से जुड़े हुए हो...

इस्सलिये तुम दोनों को एक दूसरे की सभी बातों का ज्ञान होता है...

तुम्हारे शरीर में इतनी ज्यादा शक्ति विद्यमान है की अगर तुम्हारा खुद पर से धैर्य छूट गया तो इस सृष्टि का विनास संभव है...

और इसी दोष को दूर करने के लिए अन्य का जन्म हुआ है....

एक मात्रा वही एक जरिया है जो तुम्हारी सभी ऊर्जा को खुद में सोख सकती है...

इस्सलिये उसका हमेशा खुद से भी ज्यादा ख़याल रखना अगर उसको कुछ भी हुआ या तुम्हे कुछ हुआ तो दोनों को इसकी कीमत चुकानी होगी...

अब सुनो तुम्हारे साथ क्या हुआ था...??

तुम्हारे गुरु सदनं ने तुम्हारे घर को सुरक्षा घेरा से बंधा हुआ था... ऐसा करने को मैंने hi कहा था..

जब तक तुम सभी उस घेरे के अंदर हो कोई भी मामूली शैतान तुम पर हमला नहीं कर सकता था..

किन्तु जिस दिन तुम्हारी परीक्षा थी एक महाशक्ति धारक ने धरती पर आगमन किया..

उसका एक मात्रा उद्देश्य था तुम्हे हानि पहुंचना...

उसने hi ध्यान में बैठ कर अपनी काली शक्तियों से सुरक्षा घेरे को नष्ट किया...

तभी उसके और साथी रूप बदल कर तुम पर हमला किया....

अब तीसरी सबसे जरुरी बात तुम्हें आगे कब और कैसे सामना करना है...??

वहीँ दूसरी तरफ....

हॉस्पिटल में चेयरमैन के आदमी घुश चुके थे...

हर तरफ Afra-tafri का माहौल था..

इतने बड़े हॉस्पिटल में दिन दहाड़े मार - कूट उत्पात मचा राखी थी...

गुंडों की तादाद ज्यादा होने की वजह से कोई भी उन्हें रोक न पाया....

कबीर, मीरा, रिया, सदनं जी, जैन, गार्ड्स सबको पकड़ लिया कोई भी कुछ न कर पाया....

क्युकी ये फुल प्लांड किडनेपिंग थी...

जो काफी समय से नजर रख कर की जा रही थी.....

सभी को एक वन में ले जाकर बांध दिया गया....

लास्ट में एक एम्बुलेंस में अन्य और माजी को भी दाल दिया गया...

किसी को भी न छोड़ा...

बड़ी hi निर्दयता के साथ गुंडों ने अपने काम को अंजाम दिया....

कबीर और जैन बेबस हुए बस तमाशा देखते रहे ...

उन्हें तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर हो क्या रहा है...??

कौन कर रहा है ये सब और क्यों....??

एक मुसीबत से पीछा नहीं छूट रहा था की दूसरी पहले हाज़िर हो जाती थी....

अभी हयान के गायब होने का कुछ पता भी न चला था की आज पूरी फॅमिली को बंधक बना लिया गया....

अब तो कबीर की बस एक hi उम्मीद बची थी आदिगुरु.....!!

जिनका अभी तक कुछ पता भी न था....??

तीनो गाड़ियां फुल स्पीड में शहर के बहार की तरफ जाने लगी....

गाड़ियां सून सां रस्ते से होते हुए किसी जंगल की ओर बढ़ रही थी....

तभी सामने बीच रोड पर बड़ा सा पत्थर रखा दिखा...

जिसे देखकर एहि लग रहा था की किसी ने जानबूझ कर रास्ता रोकने के लिए किया है ये सब...

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सभी गाड़ियां रुक चुकी थी बीच रस्ते पे..

पहली गाड़ी से गुंडों का बॉस उतरा और उस पत्थर को हटाने के लिए कुछ साथियों के साथ आगे बढ़ा...

इधर कबीर की और हालत ख़राब हो गयी,

इस तरह बीच रस्ते में गाडी के रुकने से...

उसे सब विंडो से साफ़ दिख रहा था की वो लोग किसी जंगल के रस्ते में है....

इधर गुंडे उस पत्थर के पास पहुँचते है....

पत्थर को देख कर हैरान हो जाते है...

क्युकी उस पत्थर के ऊपर एक मास्क रखा था... व् फॉर वेंडेटा मास्क...

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और मास्क के जस्ट बगल में एक टेप रिकॉर्डर रखा हुआ था...

ये सब देख कर गुंडों का बॉस समझ जाता है की जरूर कुछ गड़बड़ है...

तुरंत अपने सभी आदमियों को चरों तरफ नजर रखने को बोलता है....

सभी आदमी बन्दूक के साथ गाड़ियों के चरों तरफ फ़ैल गए...

बॉस उस मास्क को उठा कर देखता है...

और फिर वापस उसी जगह रख देता है और टेप रिकॉर्डर उठा लेता है...

प्ले बटन दबा देता है....

एक फनी म्यूजिक प्ले होता है..

""ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग,

Hello हनी बन्नी, hello....

फीलिंग समथिंग समथिंग,

Hello हनी बन्नी, hello....

You're माय पम्पकिन पम्पकिन,

Hello हनी बन्नी !

तोको तोको....!!"""

G.Boss - ये क्या मज़ाक है...

इतनी रात में

यहाँ कोई तफरी चल रही है.....??

टेप रिकॉर्डर को जमीन पे पटक देता है...

और मास्क को अपने पर से पटक कर तोड़ देता है...

G.Boss - फटाफट इस पत्थर को हटाओ और जल्दी चलो यहाँ से इससे पहले की कुछ गड़बड़ हो....

अभी वो पत्थर हटा hi रहे थे की अचानक सब एक एक कर के बेहोश होकर गिरने लगे...

तभी एक जोररदरर चींख गूंज उठी.... हय्यान्नं !!!!!

कबीर यह चीख सुनकर बहुत ज्यादा घबरा गया क्युकी यह अन्य की आवाज़ थी..

खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगता है...

इधर बॉस भी ये सब देख कर घबरा गया....

और तुरंत गाडी की तरफ भागता है...

गाडी तक पहुँचता उससे पहले hi Lad-khada कर गिर जाता है....

और दर्द में चिल्लाने लगा कौन हो तुम....??

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तभी बॉस के सामने वेंडेटा मास्क पहने एक शख्श खड़ा हुआ दीखता है...

G.Boss कुछ बोलने वाला होता है की..

वह शख्श बॉस के पेअर को पकड़ कर एक गाडी तक खींचते हुए लेकर जाता है...

बॉस बस दर्द से चिल्ला रहा था...

उस गुंडे को उठाकर

गाडी के अंदर फेंक देता है,

इसी तरह सभी गुंडों को गाडी में दाल देता है...

और खुद गाडी की ड्राइविंग सीट पे बैठ कर गाडी आगे बढ़ा देता है...

गाडी में बास अब एक hi आवाज़ आ रही thi...music की...

""फीलिंग समथिंग समथिंग,

You're माय पम्पकिन पम्पकिन,

Hello हनी बन्नी

तोको तोको.. !!""

इधर कबीर और जैन किसी तरह खुद को छुड़ा लिया...

और तुरंत गाडी के बहार निकले...

कबीर एम्बुलेंस की तरफ भगा और दरवाज़ा खोल कर अन्य के पास पहुंचा...

अन्य बिलकुल सेफ थी..

बूत अन्य अभी भी बेहोश थी.....

जैन हर तरफ देखने लगा लेकिन उसे वह कुछ नहीं दिखा...

सिवाय जमीन पे पड़े टूटे हुए मास्क और रिकॉर्डर के....

सब लोग सेफ थे...

बस सभी गुंडे गायब थे..

कबीर और जैन को यहाँ ज्यादा देर रुकना ठीक न लगा...

कबीर और जैन ने सबको वापस छुड़ाया और एम्बुलेंस लेकर हॉस्पिटल की तरफ वापस चल दिए...

रस्ते में....

सदनं जी - कबीर ! हमें हॉस्पिटल जाने की कोई आवश्यकता नहीं है..

हमें वापस अपने घर चलना चाहिए यहाँ रहना ठीक नहीं...

अन्य को कुछ नहीं होगा...

कबीर - जी गुरूजी ! मैं तो बस अपनी गाड़ियां लेने जा रहा हु हॉस्पिटल,

उनको वह छोड़ना भी ठीक नहीं...

वैसे बी हम इस चोरी की गाड़ी पे गांव नहीं जा सकते..

कबीर वापस हॉस्पिटल पहुँच कर अपनी गाड़ियों में बैठ कर गांव के लिए रावण हो जाते है...

कबीर - जैन जो भी आज हुआ ठीक नहीं हुआ...

हमारी सिक्योरिटी को उन्होंने इतनी आसानी से तोड़ दिया...

कोई भी कुछ न कर पाया....

इतनी बड़ी चूक हुयी कैसे....??

जैन - सर ! उन्होंने हमारे सभी गार्ड्स के पीछे 3-3 आदमी लगा रखे थे...

हमे कुछ भी समझने का मौका नहीं दिया गया...

उनको हमारे हर पहल की एक एक खबर थी...

कबीर - जो भी हो मुझे उससे कोई मतलब नहीं,

दुबारा ऐसी चूक नहीं होना चाहिए...

जैन - Ok सर ! नेक्स्ट टाइम कोई गलती नहीं होगी...

कबीर - गुरु जी ! अन्य तो बेहोश थी...

फिर वो अचानक चीखी कैसे...

सदनं जी - मुझे भी यह बात कुछ समझ नहीं आ रही...

अचानक अन्य का यूँ चिल्लाना, गुंडों का गायब होना...

सब कुछ समझ से परे है.....??

कबीर - जैन ! जो भी हुआ है आज,

उसकी जाँच करो...

हयान के गायब होने के पीछे कहीं इन्ही का हाथ तो नहीं...

सरे आदमियों को इस काम पे लगा दो...

साडी जेड खोद डालो मुझे रिजल्ट चाहुये....!!

जैन - एस सर ! मैं कल सुबह hi इस काम में लग जाता हु...

ऐसे hi बात करते करते..

सब लोग गांव पहुँच जाते है...

अन्य और माजी को उनके कमरे पे लिटाया जाता है...

मीरा को तो जैसे किसी बात से परवाह hi न थी..

वो तो बस खामोश थी.. एक मूरत के जैसे बेहवे कर रही थी...

रात ज्यादा हो गयी थी.. इस्सलिये सभी आराम करने लगे..

कबीर भी मीरा को लेकर अन्य के रूम पे आ गया...

रिया माजी के कमरे पे सो गयी..

उनकी देखभाल के लिए...

इधर जैन सिक्योरिटी रूम में जाकर वीडियो फुटेज चेक करने लग जाता है...

सामने स्क्रीन में चल रही वीडियो को देख कर बहुत बुरी तरह चौंक जाता है...??

आज के लिए बस इतना hi..

सो गाइस मेगा अपडेट दे दिया है..

कुछ मिस्टेक्स हुयी हो तो बताइयेगा.... ठीक कर दूंगा..

थैंक्स गाइस !!

कीप कमैंट्स एंड Support....Hayaan !!

 
Update..No..48*

MeGa..UpDatE

Abb..Aage..

अब तीसरी सबसे जरुरी बात तुम्हें आगे कब और कैसे सामना करना है...??

आदिगुरु - एक बात का ध्यान सदैव रखना अन्य को कभी भी खुद से अलग मत करना....

तुम्हारे अंदर छिपी बुराई ऐसा करने के लिए बाध्य करेगी...

यदि तुमने अन्य को खुद से अलग कर दिया तो...

तुम्हारे अंदर सिर्फ बुराई बचेगी अर्थात शैतान की जीत होगी और वो तुम हावी हो जायेगा... फिर शुरू होगा का सृष्टि का विनाश.....



आदिगुरु - पुत्र हयान ! अब तुम एक इंसान नहीं रहे एक शैतान बन चुके हो,

तुम्हारे दोनों रूप अब खुलकर सामने आ जायेंगे...

दिन में इंसान तो रात में एक शैतान..!!

मैं - लेकिन गुरुवार मैं तो बिलकुल ठीक हु रात में भी.... अगर ऐसा होता तो अब तक मैं एक दानव बन चूका होता....??

आदिगुरु - अभी तुम इंसान रूप में इस लिए हो क्युकी तुम अभी धरती लोक से बहार हो...

यह दोहरा रूप तुम्हें पृथिवी पर दिख जायेगा...

तुम्हारा दूसरा रूप तुम्हारे वश में नहीं होगा...

वो बहुत hi खतरनाक और निर्दयी होगा..

उस रूप में तुम अपने और पराये सबको नुकसान पहुंचा डोज...

इस्सलिये अब से तुम्हें प्रतिदिन शाम होने से पहले यहाँ आकर अपने शैतानी रूप पर काबू पाने के लिए प्रशिक्षण लेना होगा...

इससे कुछ हद्द तक तुम्हारे सोचने - समझने की शक्ति जागृत हो जाएगी...

और तुम सही गलत का फैसला कर सकोगे...

नहीं तो तुम अपने hi हाथों से अपनों की ज़िन्दगी छीन लोगे..

मैं - जब आप सब जानते थे उनका षड़यंत्र भी समझ चुके थे...

मुझपर हमला होने के परिणाम से अवगत थे तो आपने मुझे पहले hi क्यों नहीं बचाया...

ये सब क्यों होने दिया..??

आदिगुरु - पुत्र ! तुम्हारा कहना उचित है की मुझे सभी दोष परिणामों की जानकारी थी...

किन्तु नियति के आगे मैं मज़बूर था...

कुछ चीज़े हम कभी नहीं बदल सकते...

मुझसे जितना हो सका उतना किया...

मैं - अगर वो अपने षड़यंत्र में कामयाब हो जाते और मैं शैतान बन जाता तो क्या होता...??

आदिगुरु - तब तो तुम इस पृथिवी लोक के विनाश का कारन बनते...

कुछ हद्द तक तो कामयाब हो hi चुके है...,

लेकिन अब यह तुम पर निर्भर करता है की कौन सी राह चुनते हो अच्छे की या फिर बुराई की...??

मैं - ठीक है गुरुवार! जैसा आपको अनुचित लगे वैसा कीजिये...

अभी मैं इंसानी रूप में हु फैसला कर सकता हु...

मुझे अच्छे की राह पर चलना आप मेरा मार्गदर्शन कीजिये....

किन्तु अब मैं अपनी ज़िन्दगी को अपने तरह से जीना चाहता हु,

क्या अब भी मेरे परिवार पर कोई खतरा है...??

आदिगुरु - पुत्र ! खतरा तो हमेशा hi बना रहेगा किन्तु अब उतने परिपक्व हो चुके हो की तुम उस खतरे का सामना कर सको..

मैं सिर्फ राह दिखाऊंगा चलना तुम्हें hi होगा...

मैं - गुरुवार ! मुझे स्वप्न आते है,

जैसे कोई मेरे लिए रो रहा हो..

आदिगुरु - जैसे की मैंने तुम्हे पहले बताया की कुछ पहेलियाँ तुम्हें खुद hi सुलझाने होंगी,

वही तुम्हारी परीक्षा भी होगी...

शायद अब तुम्हारे सभी प्रश्नो का उत्तर प्राप्त हो गए है...

जितना भी अभी तुम्हें जानना आवश्यक था मैंने सब बता दिए...

बाकि समय आने पर स्वतः ज्ञात हो जायेगा..

तो प्रशिक्षण के लिए तैयार हो अब...??

मैं - धन्यवाद गुरुवार ! मुझे मेरे जीवन के उद्देश्य से अवगत करने के लिए....

मैं तैयार हु गुरुवार....

जानना तो बहुत कुछ था..

लेकिन धीरे धीरे सब समझ आ जायेगा...

एक बात न समझ आयी मैं hi क्यों..??

मेरी इस बात पर गुरुवार मुस्कुराने लगे..

आदिगुरु - "मैं hi क्यों" प्रश्न में तो तुम्हारे जीवन की सचाई और उद्देश्य छिपा है...

जिस दिन तुमने इसका उत्तर खोज लिया पुत्र ! उस दिन इस मनुष्य जाती का उद्धार हो जायेगा..!! एक बार पुनः शांति और Sukh-Samridhi इस लोक में लौट आएगी..!!

चलो पुत्र ! अब तुम्हें कुछ जरुरी क्रिया समझ लेनी चाहिए...

एक लम्बी वार्तालाप का समापन हुआ...

कुछ प्रश्नो के उत्तर मिले तो कुछ नए प्रश्नो ने फिर से घेर लिया...

मैं सभी बातों को एक साइड रख गुरुवार के साथ उनके आश्रम में बने एक खुले मैदान पे आ गया....

आदिगुरु - पुत्र ! क्या तुम्हें ध्यान लगाना आता है..??

मैं - जी गुरुवार ! किन्तु ज्यादा देर तक नहीं लगा पता.. न जाने क्यों..

ऐसा लगता है कोई अजीब सी शक्ति मुझे ऐसा करने से रोकती है...??

आदिगुरु - वो उचित समय नहीं था..

अब प्रयाश करो आ जायेगा...

पहले कुछ जरुरी बातें समझ लो..

ध्यान क्या है..??

""ध्यानवस्था में हमें अपने आप को धरती से जुड़ कर धरती में समय ऊर्जा शक्ति से अपने आपको जो जोड़ना होता है..

परमपिता परमात्मा यानि की ईश्वर एक ऐसी शक्ति है जिससे इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ है.

तुम अपने आसपास जो कुछ बी देख रहे हो ये सब उनकी hi शक्ति का छोटा सा अंश है..

इस्सलिये हमे इस धरती से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए क्युकी यही हमारी पालन हार है,

धरती के अंदर बसी ऊर्जा शक्ति से hi हम इस काबिल बनते है की अपना जीवन जी सकें..

ये धरती सिर्फ ऊर्जा का स्त्रोत hi नहीं बल्कि ये हमारे माँ सामान है,

इस्सलिये हम ध्यान कर न सिर्फ अपने आप को उनसे जोड़ते है अपितु ध्यान में रह कर उनकी आराधना भी करते हैं,

जब सब कुछ उस परमपिता का hi अंश है तो एक प्रकार से हम उनकी भी तो आराधना कर hi रहे ह...

ऐसा करने के पश्चात् hi उस ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग मिलेगा...

कुछ समझे...??

मैं तो गुरुवार की वाणी में mantra-Mugdh हो गया था..

कितने अच्छे से इस क्रिया को समझा रहे थे...

ध्यान का पथ पढ़ते पढ़ते...

ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग hi मुझे समझा दिया...

मैं - कोटि कोटि धन्यवाद् गुरुवार ! आपने तो ध्यान के जरिये मुझे ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग बता दिया...

मैं पूरी निष्ठां से ध्यान में उस ऊर्जा तक पहुंचने की कोशिश करूँगा....

आदिगुरु - अति उत्तम पुत्र !

मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है...

सफल होकर hi ध्यान से उठना....

अब तुम इस क्रिया का आरम्भ कर सकते हो...

गुरुवार की अनुमति मिलते hi मैं ध्यान में बैठ गया......

इस बार मेरा मैं शांत था क्युकी मुझे मेरे सवालो के जवाब मिल चुके थे…

मैं ध्यान में बैठते hi जैसे hi खुद को धरती की ऊर्जा शक्ति से जोड़ा तो मुझे बहुत hi ज्यादा ऊर्जा शक्ति का एहसास होने लगा ,



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अब मैं धरती के अंदर की ऊर्जा स्त्रोत को देख प् रहा था जो की बेहद चमकदार और मनमोहक नजर आ रहा था..

मैं धीरे शैर उस रौशनी की तरफ बढ़ने लगा..

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ऐसा लग रहा था की जैसे मैं किसी और दुनिया में आ गया हु..

उस रौशनी के करीब पहुंचते hi मुझे बहुत hi सुखद अहसास की अनुभूति होने लगी..

मुझे अहसास हुआ की शायद शायद यही ह वो धरती के अंदर की ऊर्जा शक्ति का स्त्रोत जिसके बारे में गुरुवार ने बताया था...

आदिगुरु हयान के पास बैठे उसे ध्यान से देख रहे थे...

अभी हयान के चेहरे पर एक मनमोहक मुस्कान थी और साथ में उसके चारो तरफ हलकी हलकी सफ़ेद रौशनी फैली हुई थी. वो रौशनी धीरे धीरे बढ़ने लगी...

वो रौशनी एक ऊर्जा क रूप में धीरे धीरे हयान के शरीर में समाहित होने लगी...

इधर....

मैं उस रौशनी के करीब पहुँच कर उस शक्ति पुंज को महसूस करने के किये जैसे हाथ बढ़ाया....

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अचानक hi वो श्वेत ऊर्जा मेरे शरीर के चारो ओर घूमने लगी और मुझे खुद में घेर लिया...

धीरे - धीरे वो संपूर्ण ऊर्जा मेरे शरीर में समां गयी और मैं ध्यान से बहार आ गया...

सामने गुरुवार मुझे देख कर मुस्कुरा रहे थे..

ादुगुरु - अति उत्तम पुत्र ! अब तुम इस धरती से जुड़ चुके हो.

इस धरती में रहने वाले प्रत्येक जीव - जंतु से तुम्हारा संपर्क जुड़ गया है...

तुम शक्तियां धारण करने लायक हो चुके हो..

अब तुम जो भी शक्तिया अर्जित करोगे तुम्हारा शरीर उन्हें संभल सकेगा.

आदिगुरु - पुत्र हयान ! अब तुम जितना ज्यादा म्हणत और कठिन तपस्या करोगे उसी के अनुशार hi तुम्हें शक्तियां प्राप्त होगी....

मैं - जैसा आप कहे गुरुवार !

किन्तु अब मुझे करना क्या होगा...??

आदिगुरु - पाप...??

मैं - कक्किय्या...?? पाप !!

आज के लिए बस इतना hi....

बिजी hu..Jitna हो सका दे दिया.. आदिगुरु टॉपिक थोड़ा सा और बचा है...

माफ़ी चाहूंगा डेली अपडेट नहीं आ पाएंगे...

थैंक्स फॉर रीडिंग एंड सपोर्ट...

हो सके कमेंट करते रहना taki...Taki मेरी स्टोरी बैकेंड पे न चली जाये..

थैंक्स आल ऑफ यू..

स्टोरी कम्पलीट होगी..



 
बहुत बहुत शुक्रिया शाहब...

वापस आने के लिए...

और आते hi हमेशा की तरह बेहतरीन रिव्यु देने के लिए....

बिजी हु डेली अपडेट न ागेंगे... और न hi रिप्लाई कर पाउँगा...

फ्री टाइम निकल क्र अपडेट लुखुंगा और पोस्ट कर दूंगा...

सो अगर कमेंट का जवाब न मिले तो नाराज़ मत होईएएगा..

थैंक्स भेज..
 
सॉरी भाई जी...

अपडेट न आएगा...

फ्री हुआ तो चेक करने चला आया...

अब जा रहा लिखने..

अगर हो सकेगा तो कल अपडेट दे दूंगा...

जब से मेरा बैकअप ख़त्म हुआ है सब गड़बड़ सा हो गया है...

रदम बिगड़ सा गया है...

कोशिश है जारी है फिर से ट्रैक पे लौटने की...

बस एक बार फ्री हो जॉन

..
 
बहुत बहुत शुक्रिया लास्ट बेंचर्स शाहब हमेशा की तरह बेहतरीन रिव्यु के लिए...

....सरे सवालों का जवाब मिलेगा भाई...

अपडेट न देकर मैं खुद अपने रीडर्स खोते जा रहा हु...

मुझे अपडेट से ज्यादा अपने रीडर्स से लगाव है...

कोशिश रहेगी जल्दी अपडेट देने किम.

थैंक्स भाई...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड सपोर्टिंग...

कीप वेटिंग एंड स्टे विथ उस...
 
Update..No..49*

MeGa..UpDatE



Abb..Takk...


इधर जैन सिक्योरिटी रूम में जाकर वीडियो फुटेज चेक करने लग जाता है...

सामने स्क्रीन में चल रही वीडियो को देख कर बहुत बुरी तरह चौंक जाता है...??



Abb..Aage...

इधर जैन सिक्योरिटी रूम में जाकर वीडियो फुटेज चेक करने में लग जाता है...

ताकि उस दिन क्या हुआ था गार्डन में यह देख सके...

और उसके जरिये हयान का पता लगा सके..

images---2020-02-21T223204.421.jpg


सिस्टम ों कर देता है और वीडियो प्ले कर देता है....

लेकिन ये क्या उस दिन की वीडियो रिकॉर्डिंग तो गायब थी....

उसे समझ नहीं आ रहा था की ऐसा कौन कर सकता है...

पासवर्ड तो केवल जैन को hi पता है....

जैन का शक अन्य की तरफ जाता है क्युकी उसको भी हैकिंग की नॉलेज थी...

लेकिन ट्रेनिंग वाले दिन से तो अन्य बेहोश है...

और हयान गायब है...

अब बची एक शख्स Tenzin....Lekin वो भी जैन के hi साथ थी....

जैन का दिमाग चकराने लगता है इन सब बातों को सोंच कर....

फिर न जाने क्या सूझता है पिछले dino(traning के बाद ) की रिकॉर्डिंग देखने लगता है..

शायद उनकी गैर हाजिरी में कोई घुसा हो घर में...

बूत पिछले दो दिनों की वीडियो में कुछ नहीं मिलता....

ऐसे hi वीडियो चलती रहती hai..ki अचानक आज के वीडियो में..

सामने स्क्रीन में चल रही वीडियो को देख कर जैन बहुत बुरी तरह से चौंक जाता है...??

जैन - ये ये तत्तो वही लोग hai....lekin ये सब इनके sath...kaun...??

जैसे -जैसे वीडियो आगे बढ़ रही थी वैसे - वैसे जैन की हालत ख़राब होने लगती है...

जैन सामने का सन देख कर एकदम डर जाता है...

फिर आगे जो भी हुआ उसको देख कर जैन को वोमिटिंग होने लगती है...

जैन तुरंत बाथरूम की तरफ भागता है...

और वही वाश बेसिन में वोमिटिंग करने लगता है...

जैन की हालत काफी ख़राब हो चुकी थी..

वो लगातार वोमिट किये जा रहा था....

ऐसे hi काफी देर वह रहा...

फिर खुद को फ्रेश किया..

और खुद पर कण्ट्रोल करते हुए वापिस सर्वर रूम चल दिया....

फिर से वीडियो को प्ले किया और सीधा एंडिंग फॉरवर्ड करके वौइस् सुनने लगा...

लास्ट में एक वौइस् मेल tha...Jo की इस प्रकार था....

""ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग, Hello...

फीलिंग समथिंग समथिंग,

You're माय पम्पकिन पम्पकिन,

Hello हनी बन्नी

तोको तोको.. !!""

एकबार फिर से जैन चौंक जाता है....

ये तो मैंने वह सुना था इसका मतलब इसी ने हमें बचाया....

लेकिन यह है कौन...??

दीखता तो इंसान hai..Lekin काम शैतान का...

जैन को कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे...??

कैसे पता लगाए इन सब के बारे में...??

कैसे ढूंढें हयान को...??

आखिर इस वीडियो का हमसे या फिर हयान से क्या कनेक्शंस हो सकता है..??

जैन बेचैनी के आलम में इधर उधर टहलता रहा,

उससे इस बात की खबर कबीर तक पहुंचने की जल्दी थी...

लेकिन अभी सही वक़्त न था...

इस्सलिये कल सुबह जल्दी कबीर से इस बारे में बात करने की सोंच कर वह अपने रूम जाकर सोने की कोशिश करने लगा...

लेकिन जैन को नींद न आयी उसके मन में बहुत से सवाल और उस वीडियो को देख कर डर बैठ गया था...

लगभग 2 हरष तक बिस्तर में पड़े रहने के बाद भी नींद न आयी तो फिर से उठ कर जैन सर्वर रूम आ गया...

अपने डर पर काबू पते हुए एक बार फिर से उस वीडियो को बारीकी से देखने लगा...

एक एक पॉइंट को गौर से देखने और समझने laga...Ki शायद कोई क्लू मिल जाये...

सुबह के 6 बज चुके थे लेकिन जैन अभी भी अपनी छान बीन में लगा हुआ था...

तभी जैन को अपने पीछे आहात सुनाई पड़ी पीछे पलट कर देखा तो कबीर सर खड़े थे...

जैन - गुड मॉर्निंग सर !

कबीर - G.M. जैन तुम इतनी सुबह सुबह सर्वर रूम में...??

जैन - सर मैं तो रात से hi लगा हु...

कुछ ऐसा दिखा जिसे देख कर मेरी नींद गायब हो गयी...

कबीर - ऐसा क्या हो गया...??

क्या ये हयान के बारे में है...??

बताओ कहा है मेरा बीटा....??

जैन - No सर ! ये हयान के बारे में नहीं...

हम सबके लिए है..

मैं क्या बताऊँ आप खुद देख लीजिये...

कबीर और जैन एक बार फिर से वीडियो प्ले करते है....

वीडियो में.....

13 लोगों को एक जगह पर बिना कपड़ो के लिटाया गया था...

सभी को उस जगह पर नुकीले तारों से बंधा गया था...

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हाथ की कलाई, पेअर और गर्दन से खून रिष रहा था नुकीले तार से जकड़े होने के कारन..

जिस जगह पर लेते हुए the..wah लोहे की चद्दर का एक बीएड था जिसके निचे आग जल रही थी...

और उन लोगों के पेट और छाती के ऊपर बर्फ के बड़े बड़े टुकड़े रखे हुए थे...

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एक तरफ ऊपर से ठंडक का अहसास तो निचे तपते लोहे की गरमी का अहसास दिया जा रहा tha...Bahut hi भयानक मंज़र था..

सभी दर्द से चींख रहे थे...

लेकिन हिल जरा से भी न प् रहे थे...

सभी बस इतना कह रहे थे बॉस प्ल्ज़ नाम बता दो...

उन सभी 13 लोगों के सामने एक शख्श को एक लकड़ी की कुर्सी में सिकंजे से बांध कर बैठाया गया था..

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जिसके बैठने की जगह पर छोटी छोटी नुकीली कील चुभी हुयी थी..

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उसकी बैक से खून टपक र

अहा था...

वो भी लगातार दर्द से बिलख रहा था...

तभी उस रूम का दरवाज़ा खुलता है एक शक्श रूम में एंटर करता है जिसके चेहरे पर मास्क लगा होता है...

मास्क मन - क्या तुम लोगों ने अपना फैसला बदला...??

कुर्सी में बंधा हुआ शख्श - तुम हमें जान से मार क्यों नहीं देते,

क्यों ऐसा जुल्म कर रहे हो..

मुझे नहीं पता वो कौन है...

उसने भी तुम्हारी तरह अपना चेहरा ढाका हुआ था...

मेरी उससे वीडियो कॉल में बात हुयी थी और हमें ऐसा करने को कहा था...

हमें छोड़ दो प्ल्ज़.. जितना पता था सब बता दिया...

मास्क मन - मुझे उसका नाम चाहिए..??

वर्ण मैं अभी इससे भी ज्यादा कुछ कर सख्त हु तुम लोगों के साथ...

वो 13 लोग - प्ल्ज़ सर हमें तो छोड़ दो..

हमने तो बस इसके कहने पर साथ दिया..

हम किसी को नहीं जानते...

मास्क मन - फिर तो तुम सभी इसके साथी होने के कारन बराबर की सजा के हक़दार हो...

कुर्शी में बंधा शक्श hi सभी का बॉस था...

बॉस - प्ल्ज़ सर हमें जाने दो या फिर मार दो.. लेकिन ऐसी सजा मत दो...

मास्क मन - तो तुम ऐसे नहीं मानोगे...

मैं अब तुम्हें दिखता हु मैं क्या हु...

मास्क मन आगे बढ़ता है बॉस की तरफ और उसके हाथ को पकड़ कर जड़ से उखाड़ देता है..

बॉस की जोरर दर चींख रूम में गूंज जाती है..

सभी की ये नज़ारा देख कर रूह कम्प जाती है..

बॉस तो दर्द से तड़पते हुए बेहोश हो जाता है...

तभी मास्क मन आगे बढ़ कर उसके चेहरे पे पेशाब करने लगता है..

जिससे बॉस को दुबारा होश आ जाता है...

और दर्द मून तड़पते हुए रहें की भीख मांगने लगता है..

मास्क मन - क्या अब भी तुम अपना फैसला न बदलोगे...

बॉस - प्ल्ज़ मुझे मार दो.. मुझे कुछ नहीं पता...

मास्क मन - ठीक है जब तुम लोगों को कुछ नहीं पता तो फिर तुम मेरे किसी काम के नहीं...

मास्क मन बॉस को कुर्सी से खोलकर अपने सामने खड़ा करता है और उसकी आखों में देखने लगता है...

मास्क मन - तुम्हारी तो आत्मा अंदर से साद चुकी है...

तुमने इतने पाप किये है की तुम्हें माफ़ कर देना मतलब की एक और बेक़सूर की जान को खतरे में दाल देना है...

मेरी आखों में देखो... तुम्हें तुम्हारे सभी किये हुए दुष्कर्म दिख जायेंगे...

बॉस की गर्दन को पकड़ के उसे जबरदस्ती अपनी आखों में दिखाना लगता है....

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इस वक्त उस मास्क मन की आखों में अंगारें नज़र आ रहे थे..

उस दहकती हुयी आग को बॉस ज्यादा देर तक न देख पाया बहुत जोरर जोरर से दर्द में चीखने लगा और उसकी

आखें अपने आप बाह कर बहार निकल कर जमीन पर गिर्र पड़ी...

मास्क मन ने उन आखों को अपने पेअर के निचे कुचल दिया...

बीएड पर लेते सभी 13 को बस अब अपनी अंतिम घडी का अहसास हो गया था..

किसी भी पल शायद उनके साथ भी ऐसा होने वाला था..

वो तो डर के मरे एक डैम शांत लेते हुए थे...

दर्द में होने के बावजूद भी अब उनकी कोई आवाज़ न निकल प् रही थी...

अभी वो डरे सहमें सामने का नजारा देख hi रहे थे की अचानक उनकी डर से चीख निकल गयी सामने की तरफ देख कर...

क्यूंकि इस वक़्त मास्क मन ने बॉस का गाला अपने दांतो से दबाया हुआ था...

ऐसा लग रहा था की जैसे खून चूस रहा हो...

बॉस तो बस सूखे में पड़ी तपड़ती मछली की तरह तड़प रहा था...

ऐसे hi कुछ देर तड़पने के बाद उसका शरीर शांत हो गया.....

अब उसके शरीर में सिर्फ हड्डियां hi हड्डियां दिख रही थी..

उसका सारा खून चूसे लिया गया था...

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उस मास्क मन ने अपनी दरिद्रता को यहीं नहीं ख़त्म होने दिया...

रूम में hi एक कोने जमीन में एक गड्ढा बना हुआ था जिसमें आग जल रही थी...

उस बॉस के शरीर को कागज़ की तरह टुकड़े टुकड़े करके अपने हाथ से चीरते हुए आग में फेकने लगा...

बॉस को आग में जलने के बाद...

मास्क मन - क्या कोई है जो मुझे बता सकता है की आखिर उन्हें किडनैप करके तुम कहा ले जाने वाले थे...??

13 जो अब तक यह खौफ नक् नजारा देख कर सदमे में चले गए थे...

अचानक से होश में आये...

आवाज़ को सुनकर

उनमें से 3 चिल्लाने लगे मुझे पता है हम उन्हें कहा ले जाने वाले थे...

मास्क मन - चलो किसी को तो कुछ पता है..

फिर मास्क मन उन तीनो को छोड़कर बाकी 10 के साथ भी वही सलूक करता है जैसा की बॉस के साथ किया था....

वीडियो के लास्ट में वही फनी म्यूजिक बजता है और फिर एक वौइस् मश्ग होता है....

Hello एवरीवन ! थिस इस माय फर्स्ट वीडियो, अगर आप सभी को यह वीडियो पसंद आया हो तो लिखे कीजिये और शेयर कीजिये ताकि यह वीडियो जिसके लिए बनाया गया है उस तक पहुँच जाये...

अगर सभी ने मेरा साथ दिया तो ऐसे Hi आप सभी का एंटरटेन करता रहूँगा और एक दिन यूट्यूब का बेस्ट वीडियो मेकर बन जाऊंगा...

थैंक्स गाइस !! नेक्स्ट वीडियो में आप सभी को मैं अपना नाम बताऊंगा.... Bye Bye...Agla No. तुम्हारा है....!!

कबीर तो जैसे शॉक पे चला गया था वीडियो देखने के बाद...

जैन - Hello सर ! क्या हुआ आओ ठीक तो है न...

हड़बड़ाते हुए...

कबीर - है है मैं ठीक हु.. ये है कौन... यह इंसान तो नहीं हो सकता... इंसान का खून पी गया...??

जैन - है सर ! मुझे भी लगता यह कोई इंसान नहीं... इतना खतरनाक और बेरहम कोई भी इंसान नहीं हो sakta...Yeh एक जल्लाद है जल्लाद से भी बढ़ कर शैतान है ये ....

कबीर - लेकिन इसका हमसे क्या सम्बन्ध..

यह वीडियो हमारी रिकॉर्डिंग में कैसे...??

जैन - सर एहि तो सबसे मैं सवाल है.. जिसका हल हमें हर हल में खोजना होगा...

कबीर - हमें उन तीन किडनैपर द्वारा बताये गए एड्रेस पे चलना चाहिए शायद वह कोई सुराग मिल जाये..

जैन - बूत सर ! क्या हमारा उस खुनी राक्षस के रस्ते में आना ठीक रहेगा...??

इस प्रकार तो हम खुद hi अपने लिए कब्र खोद रहे...

कबीर - लेकिन उसने हमें बचाया भी तो था...??

जैन - क्या पता उसे सिर्फ उन 14 लोगों से मतलब रहा हो...??

कबीर - कोई भी वजह हो सकती है.. बूत हम यूँही खामोश नहीं बैठ सकते ... कुछ न कुछ तो करना hi पड़ेगा...

किसी भी सूरत में मुझे हयान चाहिए....??

हयान के लिए मैं किसी भी हद्द तक जा सकता..??

जैन - Okay सर ! हम अपनी खोज आज से hi सुरु करेंगे... वो भी उसी एड्रेस से.....

देखते है क्या मिलता है उस एड्रेस में...??

आज के लिए बस इतना hi..

थैंक्स गाइस !! फॉर Co-operation !!

 
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