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- Dec 5, 2013
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Update..No..46*
MeGa..UpDatE
Abb..Takk..
आदिगुरु - पुत्र तुम्हे घबराने की कोई जरुरत नहीं है...
मैं hi तुम्हारा गुरु हु, आदिगुरु...
तुम्हारे मैं में उठ रहे सभी प्रश्नो का उत्तर देने..
और तुम्हे तुम्हारा जीवन उद्देश्य समझने और मार्गदर्शन के लिए आया हु...!!
Abb..Aage...
अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा था....
मुझे अपनी फॅमिली की बहुत ज्यादा फ़िक्र सत्ता रही थी.....
थोड़ा डर और संकुचाते हुए......
मैं - गुरुवार ! मैं बहुत बड़ी उलझन में हु कृपा करें मुझ पर....
मेरे सवालों के जवाब देकर मेरे मन को शांति दीजिये !
आदिगुरु - पुत्र तुम्हे घबराने की जरुरत नहीं है..
तुम्हारे मस्तिष्क में उठ रहे सभी प्रश्नो का उत्तर दूंगा....
तुम्हे तुम्हारे जीवन का उद्देस्य समझने और मार्गदर्शन के लिए आया हु...
किन्तु यहाँ नहीं पुत्र ! मेरे साथ चलो, तुम्हें तुम्हारे सवालों का जवाब मिल जायेगा....
गुरुवार ! ने मेरा हाथ थाम लिया और आखें बंद करने को कहा...
मैंने आखें बंद कर ली...
ऐसा लगा जैसे मई हवा में तैर रहा हु...
आदिगुरु - पुत्र अब तुम अपनी आखें खोल सकते हो...
मैंने धीरे से आखें खोल दी....
सामने का नजारा देख कर मेरी आखें आश्चर्य से फटी की फटी रह गयी..

पर्वत में फैली हुयी हरियाली के बीच बहते हुए झरने..
और हरे भरे Pedh-Paudhon की वजह से वह की सुंदरता बहुत hi नखर कर आ रही थी..
आज मुझे शॉक के ऊपर शॉक मिलते जा रहे यही...
लेकिन मैं खुद फीलिंग को रोकते हुए मन मन में परिश्थिति को समझने की कोशिश कर रहा था.....
आदिगुरु - क्या हुआ पुत्र कहा खो गए...
मैं हड़बते हुए बोलै...
"गुरूजी ये हम किश जगह पर है..
आदिगुरु - यह मेरा घर है, यह जगह पृथ्वी लोक से बहार है...

बस एक आस लगाए की शायद अब होश आ जाये...
तभी अचानक हॉस्पिटल पे चहल - पहल ज्यादा बढ़ जाती hai..Room के बहार शोर सुनाई पड़ता है...
कबीर जैसे hi दरवाजा खोलता है..
किसी का जोरर से धक्का पड़ता है जिससे कबीर वापस रूम आकर गिरता है...
तभी आवाज़ गूंजती है...
सबको पकड़ लो कोई भी भागने न पाए...
________________________________
तो गाइस !
सभी को उनके हाल में छोड़ देते है कुछ समय के लिए...
हम चलते है...
कुछ वक़्त पीछे जब फाइट स्टार्ट होने वाली थी....
कबीर के घर से कुछ दूर जंगल में...
लगभग 11 लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था..
एक दूसरे के ऊपर दोष थोप रहे थे काफी Garma-Gahmi का माहौल था...
तामुल्लू, बुमलीन, सक्कूबी, नरकिस्सा, ये थे चारो...
जिन पर तामुल्लू अपना गुस्सा बरपा रहा था....
आईये गुस्से का कारन जान लेते है...
हुआ कुछ यूँ था की....
तामुल्लू ध्यान में बैठा कुछ पढ़ रहा था की अचानक से चीखते हुए उठ गया...
गुस्से में उसकी आखों से अंगारे निकलने लगे...
नहहीइ ये नहीं हो सकता चैलाते हुए अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ....
तभी वह पर बुमलीन, सक्कूबी, और नरकिशा प्रकट होते है...
बेहद मज़बूर और लाचार दिख रहे थे...
बुमलीन - इसमें हमारा कोई दोष नहीं है,
जैसा आपने कहा था,
ठीक वैसा hi किया...
लेकिन अचानक न जाने क्या हुआ..
कुछ पता hi नहीं चला सब कुछ जैसे एक समय के लिए रुक गया था...
और जब समय चक्र पुनः शुरू हुआ तो वो वह पर नहीं था.....
तामुल्लू - ऐसा कैसे हो सकता है,
समय चक्र रोकने की शक्ति तो किसी के भी बास में नहीं...
नरकिस्सा - जो कोई भी था कोई बहुत शक्तिशाली था, इसमें भी मुझे किसी के षड़यंत्र की बू आ रही है...
सक्कूबी - है मालिक ! ये जरूर किसी ईश्वरीय दूत का कोई छल था..
नहीं तो हम अपने मकसद के बिलकुल करीब hi थे...
की अचानक किसी शक्ति का वह पर आह्वान हुआ और फिर तो सब कुछ जैसे बदल गया....
हम लोग उस्सकी पहुँच से बहुत दूर जा गिरे..
जब दुबारा वह पहुंचे तो सब कुछ सामान्य हो चूका था.....
तामुल्लू - अब मैं मालिक को क्या जवाब दूंगा...
की हम एक फिर असफल हो गए...
एक बार फिर वो अपने षड़यंत्र में सफल हुए और हमारा षड़यंत्र बेकार गया...
बुमलीन - किन्तु हमारा जो मकसद था वो तो पूरा हुआ...
उसकी काली शक्तियां जागृत हो गयी है...
मैंने खुद अपनी आँखों से देखा था...
उसका विकराल और भयानक रूप...
उस वक़्त मुझे महामहिम की शक्तियों का आभाष हो रहा था....
तामुल्लू - मुर्ख हो तुम सब,
शैतानी शक्तियां पूर्ण रूप से नहीं जागृत हो पायी है...
जो उसे ले गया है वह अपनी शक्ति के दम पर फिर से उसकी शक्तियों को बांध देगा...
और उसे शैतान बनाने का षड़यंत्र व्यर्थ हो जायेगा...
बुमलीन - तो अब हम क्या kare..Uski शक्तियां तो कही भी अब महसूस नहीं हो रही..
ऐसे में तो उसे ढूंढ पाना मुश्किल है...
ताम्मुलु - सक्कूबी और नरकिस्सा तुम अपने कार्य की तरफ पुनः लौट jao...Aur उसकी रक्षा करो...
बुमलीन तुम,
उसके परिवार को पकड़ो और उन्हें अपने कब्जे में लो वो वापस जरूर आएगा अपने परिवार के पास...
मैं जा रहा हु वापस शैतान लोक...
लो भाई इनका प्लान तो फ़स हो गया....
इन्ही चरों ने अपने शैतानी दिमाग से रचा था षड़यंत्र
"हयान को एक इंसान से एक शैतान" बनाने का...
लेकिन कुछ न कर पाए और खली हाथ वापस चले गए...!!
आज के लिए बस इतना hi...
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--++--
लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan.....Aapka दोस्त हयान...!!
MeGa..UpDatE
Abb..Takk..
आदिगुरु - पुत्र तुम्हे घबराने की कोई जरुरत नहीं है...
मैं hi तुम्हारा गुरु हु, आदिगुरु...
तुम्हारे मैं में उठ रहे सभी प्रश्नो का उत्तर देने..
और तुम्हे तुम्हारा जीवन उद्देश्य समझने और मार्गदर्शन के लिए आया हु...!!
Abb..Aage...
अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा था....
मुझे अपनी फॅमिली की बहुत ज्यादा फ़िक्र सत्ता रही थी.....
थोड़ा डर और संकुचाते हुए......
मैं - गुरुवार ! मैं बहुत बड़ी उलझन में हु कृपा करें मुझ पर....
मेरे सवालों के जवाब देकर मेरे मन को शांति दीजिये !
आदिगुरु - पुत्र तुम्हे घबराने की जरुरत नहीं है..
तुम्हारे मस्तिष्क में उठ रहे सभी प्रश्नो का उत्तर दूंगा....
तुम्हे तुम्हारे जीवन का उद्देस्य समझने और मार्गदर्शन के लिए आया हु...
किन्तु यहाँ नहीं पुत्र ! मेरे साथ चलो, तुम्हें तुम्हारे सवालों का जवाब मिल जायेगा....
गुरुवार ! ने मेरा हाथ थाम लिया और आखें बंद करने को कहा...
मैंने आखें बंद कर ली...
ऐसा लगा जैसे मई हवा में तैर रहा हु...
आदिगुरु - पुत्र अब तुम अपनी आखें खोल सकते हो...
मैंने धीरे से आखें खोल दी....
सामने का नजारा देख कर मेरी आखें आश्चर्य से फटी की फटी रह गयी..

पर्वत में फैली हुयी हरियाली के बीच बहते हुए झरने..
और हरे भरे Pedh-Paudhon की वजह से वह की सुंदरता बहुत hi नखर कर आ रही थी..
आज मुझे शॉक के ऊपर शॉक मिलते जा रहे यही...
लेकिन मैं खुद फीलिंग को रोकते हुए मन मन में परिश्थिति को समझने की कोशिश कर रहा था.....
आदिगुरु - क्या हुआ पुत्र कहा खो गए...
मैं हड़बते हुए बोलै...
"गुरूजी ये हम किश जगह पर है..
आदिगुरु - यह मेरा घर है, यह जगह पृथ्वी लोक से बहार है...

बस एक आस लगाए की शायद अब होश आ जाये...
तभी अचानक हॉस्पिटल पे चहल - पहल ज्यादा बढ़ जाती hai..Room के बहार शोर सुनाई पड़ता है...
कबीर जैसे hi दरवाजा खोलता है..
किसी का जोरर से धक्का पड़ता है जिससे कबीर वापस रूम आकर गिरता है...
तभी आवाज़ गूंजती है...
सबको पकड़ लो कोई भी भागने न पाए...
________________________________
तो गाइस !
सभी को उनके हाल में छोड़ देते है कुछ समय के लिए...
हम चलते है...
कुछ वक़्त पीछे जब फाइट स्टार्ट होने वाली थी....
कबीर के घर से कुछ दूर जंगल में...
लगभग 11 लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था..
एक दूसरे के ऊपर दोष थोप रहे थे काफी Garma-Gahmi का माहौल था...
तामुल्लू, बुमलीन, सक्कूबी, नरकिस्सा, ये थे चारो...
जिन पर तामुल्लू अपना गुस्सा बरपा रहा था....
आईये गुस्से का कारन जान लेते है...
हुआ कुछ यूँ था की....
तामुल्लू ध्यान में बैठा कुछ पढ़ रहा था की अचानक से चीखते हुए उठ गया...
गुस्से में उसकी आखों से अंगारे निकलने लगे...
नहहीइ ये नहीं हो सकता चैलाते हुए अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ....
तभी वह पर बुमलीन, सक्कूबी, और नरकिशा प्रकट होते है...
बेहद मज़बूर और लाचार दिख रहे थे...
बुमलीन - इसमें हमारा कोई दोष नहीं है,
जैसा आपने कहा था,
ठीक वैसा hi किया...
लेकिन अचानक न जाने क्या हुआ..
कुछ पता hi नहीं चला सब कुछ जैसे एक समय के लिए रुक गया था...
और जब समय चक्र पुनः शुरू हुआ तो वो वह पर नहीं था.....
तामुल्लू - ऐसा कैसे हो सकता है,
समय चक्र रोकने की शक्ति तो किसी के भी बास में नहीं...
नरकिस्सा - जो कोई भी था कोई बहुत शक्तिशाली था, इसमें भी मुझे किसी के षड़यंत्र की बू आ रही है...
सक्कूबी - है मालिक ! ये जरूर किसी ईश्वरीय दूत का कोई छल था..
नहीं तो हम अपने मकसद के बिलकुल करीब hi थे...
की अचानक किसी शक्ति का वह पर आह्वान हुआ और फिर तो सब कुछ जैसे बदल गया....
हम लोग उस्सकी पहुँच से बहुत दूर जा गिरे..
जब दुबारा वह पहुंचे तो सब कुछ सामान्य हो चूका था.....
तामुल्लू - अब मैं मालिक को क्या जवाब दूंगा...
की हम एक फिर असफल हो गए...
एक बार फिर वो अपने षड़यंत्र में सफल हुए और हमारा षड़यंत्र बेकार गया...
बुमलीन - किन्तु हमारा जो मकसद था वो तो पूरा हुआ...
उसकी काली शक्तियां जागृत हो गयी है...
मैंने खुद अपनी आँखों से देखा था...
उसका विकराल और भयानक रूप...
उस वक़्त मुझे महामहिम की शक्तियों का आभाष हो रहा था....
तामुल्लू - मुर्ख हो तुम सब,
शैतानी शक्तियां पूर्ण रूप से नहीं जागृत हो पायी है...
जो उसे ले गया है वह अपनी शक्ति के दम पर फिर से उसकी शक्तियों को बांध देगा...
और उसे शैतान बनाने का षड़यंत्र व्यर्थ हो जायेगा...
बुमलीन - तो अब हम क्या kare..Uski शक्तियां तो कही भी अब महसूस नहीं हो रही..
ऐसे में तो उसे ढूंढ पाना मुश्किल है...
ताम्मुलु - सक्कूबी और नरकिस्सा तुम अपने कार्य की तरफ पुनः लौट jao...Aur उसकी रक्षा करो...
बुमलीन तुम,
उसके परिवार को पकड़ो और उन्हें अपने कब्जे में लो वो वापस जरूर आएगा अपने परिवार के पास...
मैं जा रहा हु वापस शैतान लोक...
लो भाई इनका प्लान तो फ़स हो गया....
इन्ही चरों ने अपने शैतानी दिमाग से रचा था षड़यंत्र
"हयान को एक इंसान से एक शैतान" बनाने का...
लेकिन कुछ न कर पाए और खली हाथ वापस चले गए...!!
आज के लिए बस इतना hi...
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--+--
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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan.....Aapka दोस्त हयान...!!