Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 5 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

वेलकम मिश्रा जी,. तो ज्वाइन माय थ्रेड्स...

थैंक्स तो रीड एंड सपोर्ट माय स्टोरी...

सॉरी बोलने की कोई जरुरत नहीं...

नई हु तो ज्यादा लोगों तक नहीं पहुँच प् रहा ....

कोशिश कर रहा हु अच्छा लिखने की....

बस यूँही साथ देते rahe....Update डेली आएंगे..
 
हयान - एक इंसान या शैतान



IMG_20200127_001614.md.jpg




थ्रेड पोस्टर Released.....At पेज No.1
 


  1. िंघ 72

























  2. बॉय

  3. ेंट








  4. सर






  5. . मेरी स्टोरी को No.Vise ज्यादा सपोर्ट करने वाले मेंबर्स के naam...Mai इन सभी मेंबर्स का शुक्रगुज़ार हु जो मुझे इतना सपोर्ट kiya....Sayad hi इनके और इनके सपोर्ट केबिना मेरी स्टोरी चल पति... थैंक यू वैरी मच...
 
Abb..takk..

ये सब इतनी जल्दी बनाने में पैसा पानी की तरह बहाना पड़ा..

साथ hi सारे वर्कर को बहुत हार्ड वर्क करना पड़ा...

सायद इसी दिन के लिए मैंने इतने पैसे कमाए थे...

अब महाशिवरात्रि के 10मदिन बचे थे..??




अपडेट No. 25

Abb..Aage..


इधर अननोन प्लेस में ृषीधर और मंजुला के सम्पूर्ण विधि समाप्त करने बाद....

एलिज़ाबेथ का शरीर धीरे - धीरे पत्थर का बनने लगा...

अब एलिज़ाबेथ के शरीर के जगह पर बहुत hi खूबसूरत पत्थर की प्रतिमा बन गयी...

IMG_20200126_225605.jpg


Hu-Bahu एलिज़ाबेथ की तरह जीवित दिख रही thi...Kintu थी तो एक बेजान मूरत,

संग - इ - मर्मर का तराशा हुआ बदन..

दो खूबसूरत सफ़ेद पंख,

आखें बंद जैसे सो रही हो...

पत्थर की मूरत होकर भी जीवित मालूम पद रही थी...

मंजुला मूरत के गले लगकर रोने लगी...

ृषीधर उसे समझने लगा, सांत्वना देना लगा....

ृषीधर - खुद को सम्भालो मंजुला, ईश्वर ने चाहा तो जल्द hi सब ठीक हो जायेगा...

मंजुला - है ठीक तो होगा किन्तु कब..

न जाने कितने वर्षों तक यूँही इंतज़ार में रहना पड़ेगा....

ृषीधर - और हम कर भी क्या सकते है..?

जो होना होता है वो होकर hi रहता है...

अब हमे इस मूरत को यहीं छोड़कर वापस पारी लोक जाना होगा..

मंजुला - ऐसा क्यों..?? पारी लोक क्यों नहीं साथ ले जा सकते.. ??

ृषीधर - क्युकी अब यह एक बेजान मूरत है..

और इसकी सुरक्षा हेतु हमे इसे यहीं रखना होगा ताकि कोई भी इस मूरत को नुक्सान न पहुंचा सके..

यह जगह सभी से छिपी हुयी है..

और मूरत सबसे ज्यादा यहीं सुरक्षित रहेगी...

मंजुला - मुझपर क्यों और सितम कर रहे हैं.. सब तो लूट गया मेरा, अब बस एहि एक मूरत थी जिसे देखकर hi मई खुद संभल लेती किन्तु वो भी अधिकार छिना जा रहा है...

ृषीधर - मंजुला धैर्य रखो,

हम समय समय पर आते रहेंगे देखने,

किन्तु शुभ घडी आने तक इसकी सुरक्षा करना हमारा दायित्व है,

ृषीधर और मंजुला उस मूरत को वहीँ पर स्थापित कर पारी लोक को पुनः लौट जाते है...

इधर पृथ्वी लोक में...

सोनपुर का सारा काम सपाट हो गया...

मई अपनी सिक्योरिटी के साथ देहरादून वापस आ गया...

जब मई घर पहुंचा मीरा दर्द से छटपटा रही थी,

माजी ने उसे गुरु द्वारा दिया गया प्रशाद खिलाया किन्तु कोई असर न पड़ा...

एक परेशानी से मुक्ति नहीं मिल पति थी की दूसरी सामने आ जाती...

मई तुरंत गाडी लेकर उन ऋषि कन्या के पास पहुंचा और मीरा का हाल बयान किया..

वो मेरे साथ hi गाडी में आ गयी...

और मीरा के दर्द का निवारण करने लगी....

ऋषि कन्या - आप लोगों का यहाँ रुकना ठीक नहीं....

आप सबको महागुरु के पास जाना चाहिए

वो hi इस दर्द का निवारण कर सकते है...

मई जानती हु मीरा तुम इस वक्त बहुत तकलीफ में हो,

लेकिन तुम्हे कुछ वक़्त तक और बर्दाश्त करना होगा ये कष्ट,

मई जाकर आदिगुरु से शीघ्र hi तुम्हारे कष्ट के निवारण के लिए उपाय पूछती हु,

इतना कहकर वो ऋषि कन्या चली गयी....

मई मीरा के पास बैठकर उसके हाथों को पकड़कर उसे सांत्वना देने लगा....

मीरा को अब थोड़ा सा तो आराम मिला था, किन्तु ये नहीं पता कब तक के लिए....

उसे तो खुद के दर्द की परवाह नहीं थी वो तो बस सही जा रही थी..

उसे तो तकलीफ इस बात से थी की वो अपनी बेटी को माँ का प्यार नहीं दे प् रही थी..

मीरा के पेट के दर्द के कारन से गुड़िया की देखभाल भी ठीक से न कर प् रही थी...

मैंने रश्मि दीदी को कॉल करके मिलने को कहा और रश्मि दी के घर चला गया...

मई - मीरा और माजी को मई आदिगुरु के आश्रम ले जा रहा हु,

क्या पता मीरा और माजी शायद अब देहरादून वापस न आये,

रश्मि - ऐसा क्यों कह रहे हो..?? क्या प्रॉब्लम hai..saf साफ बताओ...

मई - सच में दीदी मुझे भी नहीं पता, गुरु जी, कुछ तो जरूर छिपा रहे है हमसे..

वो बस इतना कह रहे, यहाँ मीरा और गुड़िया को खतरा है...

किस्से और क्यों..??

मुझे नहीं पता और न hi बताया है..

इतना तो आप भी जानती है की गुरु जी की कृपा से मई पिता बन पाया हु,

मुझे उनकी बातों पर विश्वास है,

मई मीरा और गुड़िया की सुरक्षा में कोई भी भूल नहीं करूँगा....

रश्मि दी - तो कब जा रहे हो उन्हें लेकर. ??

मई - कल जा रहा हु,

लेकिन आपको मेरा एक काम करना पड़ेगा...

रश्मि दी - कौन सा काम ??

मई - गुरु जी का आदेश है घर खली मत छोड़ना,

इस लिए आप हमारा घर किसी को किराये पे दे देना जिसके परिवार में दो स्त्री और एक पुरुष और एक बचा हो...

रश्मि दी - ठीक है मई कोसिस करुँगी...

मई - थैंक्स दी, मई जल्द hi वापिस आ जाऊंगा,

जैसे hi मीरा की तबियत ठीक हो जाएगी...

मई विजय जीजू और बद्री भैया से मिलकर उन्हें उनका काम समझा दूंगा जाने से पहले...

रश्मि दी - ठीक है भाई,

मीरा और गुड़िया का ख्याल रखना..

हम सब महाशिवरात्रि को वह आएंगे तुमसे मिलने...

मैंने एक बार दीदी को गले लगाया और उनसे मिलकर वापस अपने घर आ गया...

इधर ऋषि कन्या सफानन जी के पास जा पहुंची और मीरा का हाल से अवगत करवाया...

सदनं जी - वक़्त आ गया है, महाशिवरात्रि के लिए सिर्फ दो दिन बचे है,

उन्हें शीघ्र hi यहाँ आने को कहो....

""यहाँ पर जगह खली करो और एक कुटिया का निर्माण करो,

सबको इस कुटिया से कुछ दूर रहने का आदेश दो...""

ऋषि कन्या - जो आज्ञा ऋषिवर..!!

किन्तु महागुरु कब तक पधारेंगे...

सदनं जी - उन्हें सभी बातों का ज्ञान है सही समय पर आ जायेंगे...

इधर देहरादून में...

मुझे सदनं जी का आदेश मिल गया था...

मैं जाने से पहले यहाँ भी कुछ बदलाव किये..

कबीरा पैलेस में भी सर्विलांस लग चुके थे और 3 गार्ड्स को यहाँ के सुरक्षा की जिम्मेदारी दे दी थी..

हमारे गैर हाजिरी में में इस घर की हलचल की खबर रखने के लिए...

गुड़िया के जन्म के बाद से खुशियां और कारोबार में वृद्धि तो हुयी थी...

किन्तु साथ साथ जिम्मेदारी भी बढ़ गयी थी एक पल को भी आराम नहीं था ki...Mai गुड़िया और मीरा के साथ ख़ुशी के पल बिता सकू...

हर पल एक अनहोनी होने की आशंका होती रहती थी इतनी सुरक्षा के बावजूद भी...

किसी तरह दर्द और डर के साये में आज की रात गुजर गयी.....

हम सुबह अपनी वन में मीरा को बीएड सहित रखा,

गुड़िया को माजी ने अपनी गॉड में लेकर बैठ गयी...

मई मीरा के बीएड को पकड़ के बैठ गया

हमारी वन माना गांव के लिए निकल गयी धीरे - धीरे आराम से....

सिक्योरिटी गार्ड से भरी हुयी एक गाडी वन के आगे और एक गाडी वन के पीछे चल रही थी....

अभी के लिए इतना hi गाइस..!!

कीप रीडिंग एंड सपोर्टिंग..!!

 
Abb..takk..

हमारी वन माना गांव के लिए निकल गयी धीरे - धीरे आराम से....

सिक्योरिटी गार्ड से भरी हुयी एक गाडी वन के आगे और एक गाडी वन के पीछे चल रही थी....


अपडेट No. 26

Abb..Aage..

""पर्दे में रहने दो ....पर्दा न हटाओ,

पर्दा जो उठ गया...तो भेद खुल जायेगा..!!""

वन में गाना बज रहा था...

करीब 2.5 हरष के बाद हमारी गाड़िया माना गांव पहुँच गयी...

जब हम व्यास गुफा में पहुंचे तो हमारे रहने के लिए

पहले से सारा इंतेज़ाम हो रखा था,

सदनं जी ने हमे हमारे रहने के स्थान बताया....

सदनं जी - कबीर इन आदमियों को कहो की धोती और कुरता पहन कर रखवाली करे,

अपना भेष बदलकर जिससे की किसी को भी शक न हो और इनसे अपने हथियारों को गाड़ी में छिपकर रखने को कहो....

मई - जैसा आप कहे ऋषिवर ...

सारे गार्ड्स अपना भेष बदलकर कुटिया की रक्षा करने लगे....

कल महाशिवरात्रि thi...Kintu अभी तक गुरु महाराज के दर्शन नहीं हुए थे...

रात के 8 बजे के समय मीरा को फिर दर्द उठा मैंने सदनं जी को बुलाया...

उन्होंने मीरा के ऊपर गंगाजल छिड़का और कुछ मात्रा Padhe....jisse आराम मिला...

""ऋषिवर क्या मेरी भेंट गुरुमहारज से हो सकती hai...mujhe बहुत जरुरी बात करनी है.."

धैर्य रखो कबीर !!

जब उचित समय आएगा गुरुवार खुद तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत होंगे और तुम्हे साडी चिंताओं का हल भी देंगे...

अब मुझसे मीरा का यह हाल बर्दाश्त के बहार हो रहा था...

न जाने कैसे सह रही थी रोज रोज ये दर्द

आज तो मीरा का पेट भी रोज की अपेक्षा ज्यादा बहार को निकला हुआ प्रतीत हो रहा था....

न जाने कौन सा इन्फेक्शन हो गया था...

डॉक्टर को दिखते तो सायद कुछ समझ भी आता

परन्तु महागुरु की वचनो के कारन मई खुद को रोके हुए हु....

मई मीरा के बाजु मई बैठा मीरा का दर्द बाँट ने लगा,

मेरी जब भी नन्ही गुड़िया के चेहरे पे नजर पड़ती सरे दुःख दर्द दूर हो जाते थे....

ऐसे hi वक़्त गुजरता जा रहा था पास बैठे हुए....

रात्रि 11.30 बजे

गुरुमहाराज कुटिया में पधारे...

मैंने उन्हें प्रणाम किया और गिड़गिड़ाने लगा मीरा के दर्द निवारण के लिए...

आदिगुरु - संयम रखो पुत्र सब अच्छा hi होगा...

फिर महागुरु मीरा के बीएड के चक्कर लगते हुए मंत्र जाप करने लगे...

और हाथों में लिए लाल रंग के पाउडर से बीएड के चारो ओर एक घेरा बना दिया...

मई चुपचाप खड़ा सब देखने लगा

आदिगुरु - पुत्र कबीर इस कन्या को अपनी गॉड में लो, और मीरा के पास बैठ जाओ...

माजी की तरफ इशारा करते हुए..

तुम बहार जाकर प्रतीक्षा करो...

जब तक मेरी अनुमति न हो कोई भी अंदर या बहार मत जाना...

आदिगुरु ने एकबार मीरा के सर पर हाथ फेरा फिर मुझे गुड़िया के साथ मीरा की दाहिनी तरफ बैठा दिया...

खुद मीरा के करीब एक टेबल में बैठकर मन्त्रों का उच्चारण करने लगे....

यह सब लगभग 15 मं चला और गुरुमहाराज उठे और बहार की तरफ इशारा किया....

बहार से 1 ऋषि कन्या आयी जो मीरा के डिलीवरी के दौरान थी...

गुरु जी ने उन्हें कुछ समझाया....

और फिर ध्यान में बैठकर मन्त्रों को जोरर से पढ़ने लगे....

बहार से भी मंत्रो और कीर्तन की ध्वनि गूंजने लगी....

ऋषि कन्या - गुड़िया का दाहिना हाथ मीरा के पेट में रखो....

मैंने गुड़िया का दाहिना मीरा के पेट पर रखा..

तभी मीरा को तेज दर्द उठा वो जोरर जोरर से चिल्लाने लगी....

हाथों को पटकने lagi...Aankhein दर्द से बहार को आने lagi...aansu लगातार बहने लगे..

मई तो फटी आँखों से मीरा के इस दर्द भरे रूप को देख रहा tha....na जाने कितना असहनीय दर्द सह रही थी इस वक्त मीरा...

मन्त्रों की गूँज और मीरा के दर्द की दर्दनाक चीख और तेज़ हो गयी....

तभी आदिगुरु उठे और मीरा के पेट पर हाथ रखकर मंत्र पढ़ा और पुनः अपनी जगह में दूसरी तरफ मुँह करके बैठ गए....

"गुड़िया को मीरा के दाहिनी तरफ लिटाकर शीघ्र hi बहार जाओ और इंतज़ार करो....." ऋषि कन्या जोरर से कहा..

मई बहार आ गया...

बहार भी कुछ अजीब रंगत थी..

खुशनुमा माहौल...

और साथ मेरी परेशानियां..

बहार कुटिया के बहार लगभग 7 ऋषि कन्या और 15 ऋषिवर इस वक़्त बैठे मंत्र पढ़ रहे थे ऊँची आवाज़ में तभी.....

अचानक से मेरे सीने में दर्द उठने लगा...

सांस लेने में तकलीफ होने लगी...

चांदनी रात अमावस्या की खौफ नाक काली रात का रूप ले लिए,

हवा भी रुक गयी...

ये सिर्फ मेरा hi हाल नहीं था...

माजी भी अपने सीने को पकडे तेज़ तेज़ साँस लेने की कोशिश कर रही थी....

बहार बैठे ऋषि भी खुद को सँभालते हुए मन्त्रों का उच्चारण कर रहे थे...

सारे गार्ड्स वही पर छाती पकडे बैठे हुए थे..

हर तरफ सन्नाटा पसर गया...

अगर कुछ सुनाई दे रहा था तो सिर्फ मीरा की चीख और मंत्रो की ध्वनि...

ठीक 12 बजे अचानक तेज़्ज़ हवा और बिजली चमकने lagi....Mausam ने अचानक अपना रौद्र रूप ले लिया....

तभी तेज़्ज़ बिजली चमकी और उधर मीरा की बहुत दर्दनाक चीख सुनाई पड़ी...

अचानक से मुझे, माजी और गार्ड्स को तेज़ झटका लगा हम सभी कुटिया से दूर जा गिरे...

ऐसा लगा किसी साये ने हमे उठा कर दूर फेंक दिया और खुद कुटिया की तरफ गया..

फिर अचानक हर तरफ श्वेत प्रकाश फ़ैल gaya...Jo कुटिया के भीतर से आता प्रतीत हो रहा था...

अचानक वो प्रकाश बंद हो गया...

हर तरफ घुप्प कला अँधेरा...

उस श्वेत प्रकाश के फैलने से वह पर किसी की दर्द भरी चीख गुंजी और और अचानक आग में जलता हुआ कोई आसमान की तरफ उड़द गया...

फिर मुझे अंदर से गुड़िया के रोने की आवाज़ सुनाई दी.....

मैं तुरंत उठकर कुटिया की तरफ भगा...

किन्तु अंदर न जा पाया...

अब सब कुछ ठीक हो चूका था माजी भी ठीक थी और गार्ड्स भी...

सब इस विचित्र घटना से परशान तो थे लेकिन सब चुप थे...

सवाल तो हजार थे किन्तु जवाब एक भी नहीं..

करीब 30 मं बाद ऋषि कन्या बहार आयी

और मुझे बस अंदर जाने को कहा

माजी को बहार hi रुकने को बोलै...

मई तुरंत अंदर गया मीरा के पास....

जब मीरा के करीब पहुंचा तो डर के मरे मेरी चीख निकल गयी.....


शैतान लोक

वहीँ दूसरी तरफ शैतान लोक में....

कस्सदेया ध्यान में बिठा था...

की अचानक उसकी आखें खुल गयी..

उसकी आखें ख़ुशी से चमक रही थी...

और चेहरे पे एक विजयी मुश्कान दिख रही थी....

""हहहह ः वक़्त आ गया है...

जिसकी मुझे न जाने कब से प्रतीक्षा थी..."", कस्सदेया बोलै.

डेमों 1 - क्या हुआ मालिक ?

आज कितने दिनों के बाद आपके चेहरे पे हंसी..??

कस्सदेया - क्या करू बात hi इतनी ख़ुशी की है..

जाओ सरे शैतान लोक को खबर कर दो की आज बहुत ख़ुशी का दिन है...

जश्न की तयारी करो...

बहुत जल्द सब कुछ बदलने वाला है...??

""बुमलीन !!""कस्सदेया जोर से चिल्लाया...

बुमलीन तुरंत कस्सदेया के समक्ष प्रस्तुत हो गया...

""क्या खबर लाये हो वह से.."" कस्सदेया बोलै,

बुमलीन - मालिक मुझे वह बहुत hi बड़ी काली शक्ति का श्रोत महसूस हुआ,

किन्तु जब मैं वह उस शक्ति के पीछे पहुंचा तो वह का नजारा hi बदल गया...

जहाँ पहले मुझे ब्लैक पावर की स्ट्रांग एनर्जी महसूस हो रही थी..

की अचानक मेरे करीब पहुँचते hi वो ब्लैक एनर्जी वाइट एनर्जी में बदल गयी...

मैं उस शक्ति तक नहीं पहुँच पाया

और मुझे उस शक्ति से दूर भागना पड़ा...

वर्ण मई जलकर खख हो जाता...

कस्सदेया - ओह्ह तो ये बात है...

आखिर कब तक के लिए..??

और कस्सदेया जोर जोरर से हंसने लगा...

कस्सदेया - बुमलीन एक काम करो..??

बुमलीन - हुक्म कीजिये मालिक,

मेरे लिए क्या कार्य है. ??

कस्सदेया - जो कुछ भी मैंने समझाया था,,

उसका वक़्त आ गया है..

अब से तुम अपने काम लग जाओ..

बिलकुल सावधानी से...

बिना किसी के नजर में आये...

कस्सदेया - जश्न की शुरुआत करो...

पारी लोक में...

ृषीधर कुछ तो बुरा हो रहा है...??

किन्तु ये अच्छे संकेत कहा से आ रहे हैं...??

आज के लिए बस इतना hi...

""जो अपना वाडेंपूरे करने का रखे Dhyaan......Wo मई हु !! आपका दोस्त हयान..!!""

ामे यार एक लिखे तो तो बनता है न...

 
थैंक्स यू वैरी वैरी वैरी मच लास्ट बेंचर्स शाहब...

मैंने ये अपडेट आपके लिए पोस्ट किया...

थैंक गॉड आपको पसंद भी आ गया...

बहुत ज्यादा ख़ुशी हुयी मुझे...

और सबसे ज्यादा ख़ुशी आपका बेहतरीन, Qabil-e-Tareef रेविएवस पढ़कर हुयी....

मई वडा करता हु जितना अच्छा हो सकेगा उतना अच्छा लिखने की कोशिस करूँगा..

जो बी गलतियां हो माफ़ करें और मुझे मेरी खामियों को बताये...

थैंक यू सो मच !!
 
26 उपदटेस इन 18 डेज



फ्री था तो अपडेट कंटिन्यू आ रहे ...बूत जैसा की मैंने बताया था मैं चेन्नई आया hu..Sankra नेत्रालय...

सो अब अपडेट आने में लेट हो सकता है....

सो गाइस !! बुरा मत मन्ना....

थैंक्स फॉर रीडिंग एंड सपोर्टिंग..!!

गुड नाईट गाइस टेक केयर !!
 
Abb...Takk..

मई तुरंत अंदर गया मीरा के पास....

जब मीरा के करीब पहुंचा तो डर के मरे मेरी चीख निकल गयी.....



Update...No..27

Abb..Aage....

013_zpsbaf948ca.md.jpg


काला शरीर,

सर पे दो छोटी छोटी शिंघ राक्षस जैसे,

हरी हरी आँखें और पुतलियां बिलकुल काली जैसे अमावस्या की खौफ नक् काली रात...

किसी वहसि की तरह नुकीले दांत बिलकुल tedhe-medhe,

ऐसा खूंखार और कुरूप बचा आज तक मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा था...

जो इस समय मीरा के बगल में गुड़िया का हाथ पकडे हुए लेता था,

मीरा बेहोश थी सायद

लेकिन वो बचा ऊपर की तरफ देखकर डरावनी मुस्कान

मुस्का रहा था...

मेरे पेअर तो वंही

बर्फ की तरह जैम गए थे...

उस बचे के इस रौद्र रूप को देखकर मई Tharr-tharr कम्प रहा था...

मेरी तो मनो बोलती hi बंद हो गयी थी

मई डर से चिल्लाना चाहता था किन्तु मेरे मुँह से एक भी शब्द नहीं फुट रहा था....

अचानक मेरे कंधे पर किसी का हाथ महसूस हुआ,

मैं डर के तुरंत पलटा....

आदिगुरु - पुत्र डरो मत,

यह तुम्हारी hi संतान है...

यह कोई अभिशाप नहीं अपितु ईश्वर का वरदान है...

मई - लेकिन यह......

आदिगुरु - मई समझ सकता हु तुम्हारी मनोदशा को,

तुम्हारे मैं बहुत से सवाल उत्पन्न हो रहे इस समय...

किन्तु अभी यह सही समय नहीं इन बातों का....

फिर गुरुमहाराज आगे बढे और बचे के माथे को चूमा और

अपनी पोटली से एक लाल धागा निकल कर उस बचे दाहिने हाथ पर बांध दिया...

फिर से एकबार मुझे बहुत जोरर का झटका लगा किन्तु इस बार वो झटका काफी आनंदमयी था...

मई तो उस पल में जैसे खो गया मुझे खुद का कुछ भी होश न रहा ..

हयान

images-889ba22315ddd31867.jpg


उस बचे का Rang-Roop पूरा बदल चूका था....

उसके सौंदर्य बखान के लिए मेरे पास तो शब्द काम पद गए.....

बहुत hi सुन्दर हरी - हरी आँखे ऐसे चमक रही थी जैसे आसमान में टारे चमक रहे हो..

दूध से भी ज्यादा सफ़ेद उसका रूप मनो की स्वर्ग से उतरा कोई राजकुमार हो,

अन्य

images-272a41b224943800f.jpg


Hu-Bahu गुड़िया का फोटोकॉपी लग रहा था,

ांयश hi मेरे मुँह से फुट पड़ा...

""तुझे पलकों पर बिठाने को दिल करता है,

तुझे अपनी बाहों से लिपटाने का दिल करता है,

खूबसूरती की मिशाल है तू...

तुझपे अपनी तमाम ज़िन्दगी

लूटाने को दिल करता है..""

मेरी तंत्र तब टूटी जब गुरूजी ने मुझे हिलाया....

मई - हे गुरुवार ये कैसा करिश्मा है इस कुदरत का....

एक पल देखने में किसी भयानक दानव की तरह tha....Dusre hi पल किसी स्वर्ग देवता जैसा हो गया....

आदिगुरु - सही कहा पुत्र तुमने....

यह स्वर्ग से hi आया हुआ hai...Kintu यह कोई देवता नहीं एक इन्शान का पुत्र है जिसमें अपार शक्तियां और तेज़्ज़ विद्यमान है....

""मई तुम्हें दोनों रूप के दर्शन करवाना चाहता था,

ताकि भविष्य में किसी सत्य से अनजान न रहो""

अब इस बचे की शक्तियां बांध चुकी है,

अब यह एक साधारण मनुष्य के बचे के सामान है किन्तु अभी भी सबसे उत्तम और बुद्धिमान होगा""

रात्रि ज्यादा हो गयी है...

पुत्र अब संयम रखो और अपने परिवार के पास जाकर समय बिताओ...

कल महाशिवरात्रि है,.

सुबह याग और पूजा होगी जिसमे नाम कारन होगा उसके बाद सभी प्रश्नो उत्तर मई स्वयं दूंगा...

अब तक मीरा को भी होश आ चूका था...

उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना न था...


अपने सारे दुःख दर्द भूल चुकी थी आज ऐसी ख़ुशी मिली उसे..

हो भी क्यों न हमने तो बस एक संतान की कामना की थी किन्तु ईश्वर ने हमे do-do संतान का सुख प्रदान किया...

ऊपर वाला जब भी deta...deta छप्पर फाड़के..

मीरा कभी गुड़िया को चूमती तो कभी उस बचे ko...dono को अपने सीने से लगाए आंसू बहा रही थी...

मई मीरा के सर के पास बैठ जाता हु और उसके माथे पर अपने हाथों का स्पर्श देने लगता हु...

गुरुमहाराज के बहार जाते hi,

ऋषि कन्याओं और ऋषि मुनियों का कुटिया में प्रवेश होता hai...Sabhi बरी बरी आकर बचे के दर्शन करके है

और हाथ को चूमकर बहार चले जाते है...

ऐसा काफी देर चलता रहा अंत में माजी और सदनं जी आते है...

माजी बचे को प्यार से सहलाती है और उसके माथे को चूम कर,

सच में आज मैं बहुत खुश हु तुम दोनों के liye..aaj मैं दो बच्चों की नानी बन गयी हु...

गुड़िया को अपने गोदी में उठाने की कोसिस करती hai...kintu उस बचे ने गुड़िया के हाथ को बहुत मज़बूती से पकड़ा था...

सदनं जी - माजी रहने दे अभी...

उन्हें साथ में hi लेटने दे...

सदनं जी करीब आते है और बचे के हाथो को छूकर आशीर्वाद लेते है....

सदनं जी - बहुत भाग्यशाली हो तुम दोनों जो इन बचो के Mata-Pita बनने का सौभाग्य मिला....

इनका ख्याल Rakhna...itna कहते हुए बहार चले गए....

मैंने उठकर मीरा को गंगाजल दिया और साथ में प्रशाद भी

ग्रहण करने को दिया जो गुरूजी दे गए थे....

दोनों बचो को बीच में करके हम दोनों किनारे लेटकर आराम करने लगे....

मजी वहीँ पास में पड़ी चौकी में लेटकर सो गयी.....

सुबह 7 बजे मोबाइल के रिंग से नींद खुली देखा तो रश्मि दी का कॉल आया था,

मई - Hello दी, गम कैसी हो..??

रश्मि दी - सब अच्छा है,

ये बता हमें आना कहा है,

हम लोग माना गांव पहुंचने वाले है...

मई - व्यास गुफा चले आईये मई यही मिलूंगा....

मीरा भी जग चुकी थी किन्तु दोनों बचे अभी सो रहे थे....

कितनी मासूमियत थी दोनों के चेहरे में सोते हुए दोनों मुस्कुरा रहे थे...

न चाहकर भी हर बार उनके रूप में खो hi जाता था मैं....

मीरा ने हिलाकर मुझे कहा की, जाओ फ्रेश हो जाईये, मुझे भी जांस है.....

माजी बच्चों के पास बैठ गयी,


और उंहृण पुचकारते huye.khelane लगीं..

मई मीरा को शहर देने लगा बहार ले जाने के लिए....

किन्तु मीरा ने मन कर diya...ki वो बिलकुल ठीक है...

आराम से चल प् रही thi...ekdam नार्मल दिख रही थी...

अब तो जैसे आदत पद गयी थी ऐसे चमत्कारों की जबसे गुड़िया ने हमारी ज़िन्दगी में कदम रखा....

हम दोनों फ्रेश होकर वापस कुटिया में आ gaye...Pooja शुरू होने को कुछ hi समय बचा था...

हम सब रेडी हो गए...

इतनी hi देर में एक शिष्य के साथ रश्मि दी,

विजय जीजू और उनके बचे अखिल और माहि आते दिखे...

तब मीरा दोनों बचो को स्तनपान करा रही थी...

रश्मि दीदी तो ये सब देखकर चौंक gayi...kyuki वही आगे आयी थी और आकर मीरा के पास गयी थी...

उनके मन में बहुत से सवाल उठने लगे मुझसे पूछने भी लगी,

मैंने कुछ बाटे बता दी....

बाकी बाद में बताने को कहकर

पूजा श्ठल में चलने को कहा....

आज व्यास गुफा में बहुत भीड़ दिख रही थी..

साधु, ऋषि, अघोरी, इंसान सभी पधारे थे,

एक बड़े से पंडाल के निचे पूजा स्थल बना हुआ था...

हम सभी सदनं जी के पास पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया....

अभी गुरुमहाराज कही नजर नहीं आ रहे थे...

कुछ देर बाद पूजा स्थल की ओर ऋषियों की टोली आती नजर आयी जिसमे सबसे आगे आदिगुरु महाराज थे....

कुल 7 हवन कुंड बनाये गए थे,

1 बीच में जो सबसे बड़ा tha..aur बाकी 6 उसके चरों ओर...

सभी कुंड को 7 - 7 rishi-muni घेर कर बैठ गए,

तभी सदनं जी हमारे पास आये मुझे, मीरा और मेरे बचो को होने साथ लेकर आदिगुरु महाराज के दाहिनी तरफ बैठा diya....Aur खुद गुरुवार के बाएं तरफ बैठ गए....

रश्मि दी परिवार और माजी को दूसरे अग्नि कुंड के पास बैठाया गया...

फिर सभी पूजा श्ठल के समीप आकर बैठ गए और गुरुमहाराज और उनके साथ आये Rishi-Muniyon ने मिलकर पूजा का शुभारम्भ किया.....

मंत्रो का जाप, अग्नि कुंड में आहुति प्रारम्भ हो गयी....

बड़ा hi मनमोहक दृश्य था...

मंत्रो के शुर जहाँ कान को भ रहे थे वही कुंड की अग्नि वातावरण में एक नयी जान भर रही रही थी....

आदिगुरु बार बार कोई मंत्र पढ़ते और दोनों बचो के सर पर डैम कर देते

वही दोनों बचे मुस्कुरा रहे थे...

जैसे वो भी आनद ले रहे हो इस मनोरम दृश्य का....

लगभग एक घंटे तक यह कार्यक्रम चलता रहा....

पूजा समाप्ति के बाद मुझे और मीरा को गंगाजल और प्रशाद ग्रहण करने को दिया....

सबने भी प्रशाद ग्रहण किया...

पूजा समाप्ति के बाद,

आदिगुरु महाराज,

मुझे, मीरा और मेरे बचो को सदनं जी के साथ उनकी कुटिया में आने को कहा....

मैंने रश्मि दी और माजी को अपनी कुटिया मैं वेट करने को कहा और सदनं जी के साथ चल दिया......

हम सभी गुरूजी के चरणों को स्पर्श किया और उनका आशीर्वाद लेकर उनके सामने शीश झुककर बैठ गए....

आदिगुरु महाराज ने बोलना शुरू किया....

देखो पुत्र इतना तो तुम जान hi चुके हो की ये सोनो बचे ईश्वर का वरदान है,

ये कोई साधारण नहीं है इनके पास अपार शक्तिया हैं. .

जिनका एक मात्रा उद्देश्य Jan-sansar लोक का कल्याण करना है...

तुम्हारी पुत्री में साक्षात देवी का वास है और दैवीय शक्तियां है जो सदा hi भलाई hi करेगी...

किन्तु तुम्हारे पुत्र बिलकुल विपरीत शक्तियों का धारक hai....uske अंदर अच्छाई और बुराई दोनों की ापर शक्तियों का निवास है.....

जीवन के दो पहलु हो सकते है...

अब तुम दोनों के संस्कार पर निर्भर है की तुम इसका जीवन कैसा बनाते हो....

वैसे तो यह बचा हमेसा शांत वृत्ति का प्रतीत होगा किन्तु इसे क्रोध आने पर इसका दोहरा रूप सामने आएगा रौद्र रूप जो सबकुछ नष्ट कर सकता है..

यद्यपि आपकी पुत्री इस बचे के सामने आ जाये तो पुनः अपनी वास्तविक प्रवृत्ति में आ जायेगा....

यह हमेशा अपनी मर्जी का मालिक होगा अपितु कोई इसे बाध्य न करे....

नहीं तो इसका परिणाम बहुत भयंकर होगा...

अपने पुत्र को अँधेरे से बचाकर रखना वह हमेसा अँधेरे और बुरे कर्मों की ओर भागेगा....

कई बुरे लोग और बुरी शक्तियां इस तक पहुँचने की कोसिस करेंगी....

वैसे भी कल रात तुमने एक जलते हुए शैतान को ऊपर की तरफ भागते हुए देखा होगा...

किन्तु तुम्हे इसको सबसे बचा कर रखना है जब तक की यह 12 वर्ष का न हो जाये....

12 वर्ष तक जिस प्रवृत्ति में यह पालेगा उसी का हो जायेगा...

इस्सलिये अब तुम दोनों को सोनपुर में 12 वर्ष तक रहना होगा सबसे बचाकर रखना होगा इन्हें....

कबीर - ठीक है गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा...

किन्तु हमें hi क्यों चुना गया...??

आप तो सब जानते थे फिर छुपाया क्यों.??

ासीगुरु - ईश्वर की महिमा ईश्वर hi जाने,

मई तो बस उनका भक्त हु उनके निर्देशों का पालन कर रहा हु,..

कबीर - किन्तु गुरूजी,

जब ये दोनों बचे जुड़वाँ थे,

तो फिर ये चमत्कार कैसा..??

आदिगुरु - ये समझ लो तुम्हारे पुत्र के लिए वो समय उचित नहीं था, इस्सलिये उसे गर्भ में hi रखा गया...

और महाशिवरात्रि के पवन रात्रि में जन्म हुआ....

हर बात का एक सही समय होता है,

आज उचित समय आया तो ज्ञात हो गया....

जितना आवश्यक था मैंने बता दिया,

बाकी समय आने पर फिर dhire-dhire स्वतः पता चल जायेगा....

अब सभी चलें नामकरण का समय हो गया...

मैं और भी सवाल पूछना चाहता था किन्तु गुरूजी के मन करने के कारन हिम्मत न हुयी....

एक बार फिर हम सभी एक जगह इकठ्ठा हुए....

आदिगुरु महाराज,

दोनों बचो के आँखें और मष्तक को बड़े ध्यान से देखने लगे...

फिर ध्यान में बैठ गए.....

कुछ देर बाद आँखें खोली....

हयान और अन्य.....

होगा इन दोनों का नाम...

अन्य - गॉड है शौन फवौर, "केयर" “प्रोटेक्शन” "डिलिजेंस”

हयान - ानोथेर नाम फॉर लार्ड शिवा; ओने हु इस फुल ऑफ़ लाइफ...

हम सबने आदिगुरु महाराज का आशीर्वाद liya..aur धन्यवाद् ऐडा किया उनके उपकार का....

कबीर - अब क्या आदेश है हमारे लिए गुरुवार...??

आदिगुरु - सदनं !!

इनके साथ इनके घर जाओ और,

इनके घर को सुरक्षित कर दो....

सुरक्षा मंत्र और घर का सुधि कारन कर देना.. और घर के अंदर और बहार पूजा स्थल की जगह सुनिश्चित कर दो...""

हम सबने गुरु महाराज को प्रणाम कर हम सभी अपने घर सोनपुर के लिए निकल गए......


..

..

..

..

आज के लिए बस इतना hi...

..

..

कैसा लगा और खामियां दोनों बताएं..??
 
Abb...Takk..

सुरक्षा मंत्र और घर का सुधि कारन कर देना.. और घर के अंदर और बहार पूजा स्थल की जगह सुनिश्चित कर दो...""

सबने गुरु महाराज से आशीर्वाद लिया, और हम सभी अपने घर सोनपुर के लिए निकल गए......


Update..No..28.


Abb..Aage..


दो घंटे जे सफर के बाद..

3 बजे तक्क हम सभी सोनपुर पहुँच गए...


गोडाउन

images-80.md.jpg


गुफा के बहार बने गोडाउन में गाड़िया पार्क की और घर की तरफ चल पड़े...

रश्मि दी हर चीज़ पर गौर कर रही थी...

जैन (आगे-35).. सेक्विर्ती हेड.

IMG_20200118_011104.jpg


images-87.md.jpg


पीछे आ रहे गार्ड्स, गोडाउन,

फिर जब घर को देखा तो आश्चर्य से आँखे सबने निकल दी...

पूछना तो सभी चाहते थे किन्तु चुप थे...


सोनपुर हाउस

images-81.md.jpg


रश्मि दी - तो यहाँ खर्चा हुए पैसे....

मैं थोड़ा सा muskuraya...aur आगे बढ़ गया..

मैंने अपने हाथो को गेट के स्कैनर पर रखा तभी दरवाजा खुला और हम सभी अंदर चल दिए...

images-56febc8af55aaaf6f4.md.jpg


मैं गेट अंदर छोटा सा गर्दन..

फिर थोड़ा स्पेस देकर हॉल और कमरे ेट्स..

images-82.md.jpg


सबको फ्रेश होने को बोलकर मई सदनं जी को,

पूरे घर का निरिक्षण करने लगा...

उन्होंने मेरे काम की प्रशंसा की..

सब चीज़ देखने के बाद हॉल में जगह चिन्हित की जहा पर देवी की मूर्ति स्थापना की सलाह दी,

और दूसरी जगह बहार गार्डन के पास लार्ड शिवा का मंदिर बनाने की आज्ञा दी...

फिर सदनं जी घर के कोने कोने में जाकर गुरुमहाराज के बताये गए अनुसार अपना कार्य करने लगे...

सभी कार्य समाप्ति के बाद सबने भोजन किया और सदनं जी खूब आदर सत्कार करके...

उन्हें एक ड्राइवर के साथ जाने के लिए भेज,

मैंने छोड़ने जाने को कहा किन्तु उन्होंने मन कर दिया था....

हम सभी हॉल में रखे डबल बीएड में बैठ गए...

अखिल और माहि, हयान और अन्य के साथ खेलने लगे....

विजय जीजू और रश्मि दी ने सवालों की झड़ी लगा दी....

फिर मैंने बोलना शुरू किया....

ये सब मैंने गुरु महाराज के कहने पर किया है,

उनका कहना है की हमारे बच्चों पर बुरी शक्तियों और बुरे लोगो से खतरा है,

इस लिए मैंने ये सब किया..

रही हयान की बात तो गुरूजी के एल्वा किसी को भी पता नहीं था की मीरा की कोख में एक और बचा पल रहा है,

सभी से छुपकर रखने के लिए hi डॉक्टर के पास जाने से मन किया था....

उनका कहना है की जब तक दोनों 12 साल के नहीं हो जाते इनका यही कड़ी सुरक्षा में Palan-Poshan हो....

अब आप hi बताओ भला कैसे मई अपने परिवार खतरे में दाल सकता हु उनकी बात न मानकर,

मेरे भले की hi बात तो बोली है वैसे ऐसा करने में मेरा कोई नुकसान तो नहीं है...

विजय - इसका मतलब अब तुम यही Rahoge..Bussiness का क्या..??

मैं - डेली आऊंगा जाऊंगा...

दिन में बुसिनेस्स और रात में फॅमिली,

वैसे भी आप दोनों और बद्री भैया तो साथ हो hi....

रश्मि दी - सो तो hain...Yani अब 12 साल मीरा यही रहेगी,

मैं - हम्म, फ़िलहाल तो एहि आदेश है..

रश्मि दी - वैसे गांव अंदर से ज्यादा खूबसूरत है,

हमेशा बहार hi घूमते रहे अंदर कभी नहीं लाये..

मैं - क्युकी यह गांव छिपा हुआ है,

और मई इसकी जानकारी बहार फैलाकर यहाँ की सुंदरता को बर्बाद होते नहीं देख सकता...

अब आप लोग आये हो तो घूम लेना बूत किसी को बताना मत...

ऐसे hi बातों का सिलसिला जारी रहा....

सबने घर को देखा,

बहार गार्डन बैठे बातों का सिलसिला जारी रहा,

रात में डिनर किया और सब अपने अपने कमरे में सो गए.....

अगले दिन सबको गांव की सैर कराई...

शंकर चाचा से मिलाया...

अपने पुराने घर को भी दिखाया..

जिसे मैं, मीरा और बंसी ने मिलकर अपने हाथों से बनाया था....

मैंने जैन से उस तिब्बती फॅमिली की साडी इनफार्मेशन निकलने को kaha...jisse की यहाँ हमें कोई खतरा तो नहीं....

एकबार फिर जिंदगी ट्रैक पर आ चुकी थी....

सुरक्षा के सरे पुख्ता इंतेज़ाम हो रखे थे....

गए....

शंकर चाचा अब इस गांव के मुखिया थे....

हम सभी नास्ते के लिए डाइनिंग टेबल पे बैठे थे... टोटल 9 कुर्सियां थी बैठने ko...Table एग शेप का था...

सबसे बीच में मई,

मेरे दाहिने तरफ मीरा...,

फिर माजी...

ये हम लोगो की फिक्स जगह थी...

सबने अपने पसंद के हिसाब से सेलेक्ट क्र राखी थी...

हमने अभी ब्रेकफास्ट करना स्टार्ट hi किया था की बहार से जैन आता हुआ दिखा....

जैन - G.M. सर & मम

मीरा - मैंने कितनी बार तुम्हे समझाया है की मुझे दीदी और इन्हे भैया बुलाया kari...lekin तुम्हे समझ नहीं आता है...

जैन - सॉरी मम उफ़ ी मैं दीदी !!

सर ! काम हो गया है..??

कबीर - ठीक है पहले बैठो और नाश्ता करो फिर बात करते है...

सब मिलकर ब्रेकफास्ट ख़त्म करते है..

मीरा दोनों बचो को लेकर, रूम चली जाती है...

मई और जैन बहार गार्डन में आकर बैठ जाते है.

कहो जैन क्या पता चला..??

जैन - सर वो तिब्बतन के निवासी है..

तिब्बत के एक टेम्पल में योग के टीचर थे...

फादर - डचेन (40)

images-67080af7c27396ecaa.jpg


मदर - दोरजी (36)

डॉटर - तेंजिन (3)

images-68.md.jpg


इनकी एक बड़ी बेटी भी thi..Lekin वह के राजघराने के एक लड़के ने उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला और हत्या कर दी..

जिसके कारन डचेन ने उस लड़के को मौत के घाट उतार दिया....

लेकिन ऐसा करने से डचेन के पीछे राजघराने के सैनिक पीछे पद गए...

डचेन अपनी फॅमिली को लेकर जंगल और नदी के रस्ते यहाँ भाग आया है...

बिलकुल क्लियर रिकॉर्ड hai...Lekin बहुत शक्ति शैली है,

वह उस्तादों का उस्ताद कहा जाता है इसे...

मई - चलो ठीक है इनसे हमें कोई खतरा नहीं...

किसी दिन इन्विते karo..mil लिया जाये इनसे भी..

जैन से बात करने के बाद मई ऑफिस चला गया..

अब सब कुछ ठीक हो गया था...

कोई परेशानी नहीं थी..

मेरे कहने पर हमारा एक सिक्योरिटी गार्ड जो ज्यादा पढ़ा लिखा था वो गांव के बच्चों के थोड़ा बहुत शिक्षा देने लगा जिससे की उनके जीवन में भी सुधर आये...

K.M. ग्रुप 5तह रैंक से गिरकर 6तह पे आ गयी थी..

अब गए तो होना hi था समय जो नहीं था..

लेकिन बुसिनेस्स अच्छे से चल रहा था...

समय के साथ ठीक हो hi जाना था..

मई डेली देहरादून आता जाता रहता था..

समय गुजरता गया...

मई और मीरा अपने दोनों बचो के साथ बहुत hi खुशहाल जीवन व्यतीत करने लगे...

इस बीच कुछ छोटी -मोती अनहोनी हुयी थी हमारे घर में किन्तु कोई सुराग नहीं मिला हमें,

मैंने इस विषय में सदनं जी से भी बात की,

उनका कहना था की कोई बुरी शक्ति है जो घर में प्रवेश करने की कोसिस करती किन्तु वह के सुरक्षा मंत्र और मंदिर के पवन भूमि को भेद नहीं पति और वही नष्ट हो जाती है.....

हयान और अन्य जब 5 साल के हुए तो उनका एडमिशन हमने देहरादून के एक स्कूल में करवा दिया...

लेकिन वो घर में Hi रहते थे...

रिया (आगे-20)

images-5175c28b29c953dfc.jpg


एक प्राइवेट टुटर का अर्रंगे किया जो

शाम को मेरे साथ देहरादून से आती और बचो को.7 से 9.30 टूशन देती...

images-60392806e18df32845.md.jpg


रात यहीं रूकती और सुबह मेरे साथ वापिस चली जाती...

डेली यही रूटीन हो गया था...

अब मेरा और मीरा का प्यार बात गया था....

मेरी लाड़ली अन्य...

मीरा का लाडला हयान..

दोनों काफी तेज़ी से बढ़ रहे थे इतर बचो की कपरिसों mein...Dimag और बॉडी दोनों से...

बोलो मेरे प्यारे बचो पापा आज तुम्हारे लिए क्या लेकर आये..??

अन्य - मेले लिए चोटलाटे और एक डॉल अच्छी wali...pahli वाली नहलाने में तालाब हो दायी..

हयान - पापा मुझे मोबाइल तहिये, और एक बाला सा वीडियो दामे...

मैं - बीटा हयान !! अभी तुम बहुत छोटे हो मोबाइल नहीं , तुम्हारे लिए ice-cream ले आऊंगा तुम्हे बहुत पसंद है न...

हयान - नहीं पापा, देखो मई बाला हो दया हु, अन्य से भी बाला हु...

मैं - ठीक है, ठीक है मई ले आऊंगा अब जाने दो लेट हो रहा है...

मीरा खड़े मुस्कुरा रही थी...

मीरा - सुन ली अपने बचो की फरमाइश देखा कितने बड़े हो गए है....

मैं - हमन मेरी जान वो तो बड़े हो गए है लेकिन मई तो छोटा हु,

जल्दी से एक किश दे do....aur पकड़कर किश कर लेता हु...

मीरा - तुम न कभी बड़े होना हमेशा बचे जैसी हरकत करते हो...

देखो कब से बेचारी रिया वेट कर रही है उसे भी तो कॉलेज जाना है...

रिया हमें देखते हुए मुस्कुरा रही थी...

मई रिया को लेकर बहार आ जाता hu....Godown से कार में बैठकर देहरादून के लिए निकल जाते है....

मैं - तो रिया क्या रिपोर्ट है दोनों की..??

रिया - सर दोनों बचे लाजवाब hai..itni काम आगे में मैंने इतने इंटेलीजेंट बचे कभी नहीं dekhe...Ek hi बार में मंद में कॉपी कर लेते है....

वैसे सर आप इन्हे स्कूल क्यों नहीं भेजते..??

मैं - मेरे बचे सबसे अलग है इतना तो तुम जान चुकी हो..

बाकी तुम्हे पहले भी बता चूका हु...

अगर तुम्हे कोई प्रॉब्लम हो रही हो इन्हे पढ़ने में तो कह सकती हो...

रिया - नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं hai...Jitna आप मेरे लिए कर रहे hai..utna तो कोई भी नहीं करता है..

मैं तो बस इसलिए कह रही थी की स्कूल में इतर बचो के साथ घुल मिलकर और अच्छा परफॉर्म करेंगे...

मैं - जब सही टाइम आएगा वो भी हो जायेगा....

ऐसे hi बात करते - करते हम देहरादून पहुँच गए....

रिया को कॉलेज ड्राप किया और मैं अपने ऑफिस निकल आया....

ऑफिस में घुसते hi

मैं बोलै...

क्या बात है दीदी आज बहुत खुश लग रही ho..Aur खूबसूरत भी...??

रश्मि दी - खूबसूरत तो मई बचपन से हु, और रही ख़ुशी की बात तो आज माहि का बर्थडे है...

मैं - हम्म तो ये बात है,

आज सभी शाम को मेरे घर चलेंगे पार्टी मेरी तरफ से...

वैसे है कहा बर्थडे गर्ल..??

दीदी - स्कूल में है दोनों..

ये सब छोडो,

क्लिऐंट्स आये हुए है जर्मनी से तुम्हारी उनसे 15 मं बाद मीटिंग्स है मर. काइल से...

अगर ये प्रपोजल एक्सेप्ट हो गया तो हमारी कंपनी को 10म डॉलर का बेनिफिट्स होगा..

बस एक बार हमारी अकादमी और जर्मन साइंस रिसर्च दोनों मिलकर प्रोजेक्ट कम्पलीट करने को रेडी हो जाये....

मैं - हम्म थैंक्स,

मैंने साडी प्रेपरेशन कम्पलीट कर्ली है,

प्रपोजल एक्सेप्ट समझो...??

आज के लिए बस इतना hi..

कोई मिस्टेक हुयी हो तो बताना जरूर..??

कीप सपोर्टिंग...
 
  1. िंघ 72
  2. बॉय
  3. ेंट
  4. सर
  5. .



  6. ......टुडे अपडेट Has-been पोस्टेड.. At..page no.78
 
Back
Top