GOLU BHAI - AMMI KE SHIKARI - Page 14 - SexBaba
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GOLU BHAI - AMMI KE SHIKARI

अपडेट - 73

गोलू भाई- लगता है मेरा मक़सद जल्दी hi पूरा होने वाला hai.....sala....kaddu खुद छुरे पर गिरने aaya...haha....haha...aaahahahahah.....

रात के सन्नाटे में गोलू भाई की हसी भले hi पुरे कमरे में गूँज रही thi.....par उस हसी के पीछे की वजह हवाओ को भी पता नहीं थी.....

आखिर गोलू भाई का मक़सद है क्या.....?????

अब आगे..........

[ आगे की KAHANI....KHALEEL की जवानी.....]


सुबह मैं जब जगा तो घर में सबकुछ ठीक hi tha....abbu हमेशा की तरह नास्ता कर के मदरसा निकल गए the....ammi किचेन में खाना बना रही थी और अप्पी अपने कमरे में बैठी पढ़ रही थी....

पर अप्पी को देखते hi मुझे रात की बात याद aai...ki आज अप्पी को गोलू भाई ने अपने कमरे में बुलाया hai...aur मैं ये मौक़ा किसी भी हालत में गवाना नहीं चाहता था...

क्योकि मैं जनता था की गोलू भाई का कमरा कुसी नाजुक और कमसिन लड़की के लिए वैसा hi hai...jaisa की एक हिरन का शेर की गुफा में जाना....

मतलब की जैसे.... शेर की गुफा में जा कर हिरन बच कर नहीं आ sakta...waise hi गोलू भाई के कमरे में जा कर एक जमसीन ladki...juske अंगो ने जवानी छलक रही ho...wo अपने हुश्न का रास गोलू भाई को चखाए बिना बापूस नहीं आ सकती थी....

इसलिए मैंने जल्दी से नास्ता किता और बहाने से बहार निकल gaya...taki अप्पी को काम से मेरी टेंशन न रहे.....

बहार निकल कर मैं कुछ देर यु hi टहलता raha...aur फिर चुपके से घर में आ kar....seedha ऊपर वाले कमरे में चला gaya...jaha से मैं दीवाल में बने एक छेद के सहारे गोलू भाई का कमरा saaf-saaf देख सकता था....

और मैंने वह जा कर जब भीतर jhanka...to मुझे गोलू भाई दिख gaye...jo एकदम नंगे हो कर बिस्टेर पर लेते the...aur इस वक़्त उनका लुंड भी सोया हुआ था....

फिर भी उनका लुंड इतना तगड़ा था की जिसे देख कर मेटि आँखे चमक उठी.....

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Main(man में)- क्या बाला है yaar....ye तो सोया हुआ भी खतरनाक दिख रहा hai....aaj तो मेरी अप्पी की खैर nhi....pata नहीं बेचारी का क्या होगा.....

Khair....kuch देर देखने के बाद मैंने वह से नजरें हटा li...aur सही वक़्त का इंतज़ार करने लगा....

और फिर वक़्त अपनी रफ़्तार से gujra...aur वो वक़्त भी आ gaya...jab गोलू भाई के कमरे पर दस्तक हुई....

दस्तक सुनते hi मेरे कान खड़े हो गए और मैंने अपनी नजरे उस छेद पर गदा दी....

तो मैंने देखा की गोलू भाई सिर्फ एक शार्ट पेण्ट पहने हुए खड़े थे और उनके सामने मेरी प्यारी अप्पी thi...jo abhi-abhi दरवाजे से भीतर दाखिल हुई थी....

गोलू bhai(darwaja लगा कर)- तुम्हे आने में कोई परेशानी तो नहीं हुई....

Appi(najre झुका कर)- nhi...maine अम्मी को बोल दिया है की मैं सहेली के घर जा रही हु....

गोलू भाई- ैव्हा kiya....waise तुम्हारी ड्रेस अच्छी hai....chalo आओ......

ये बोल कर गोलू भाई ने अप्पी के गले में हाथ डाला और उन्हें बिस्टेर के पास ले aaye....aur सबसे पहले अप्पी का चस्मा निकाल दिया....

गोलू भाई- आज इसकी कोई जरूरत नहीं...

अप्पी - hmm..to ab...matlab आगे...

गोलू भाई- बताता hu....pat pahle...hmm....to कल रात तुम ये तो समझ hi चुकी हो की मर्द को क्या पसंद hai...aur ायरत को kya....hai न....

Appi(najren झुकाये)- हम्म...

गोलू भाई- बहुत khoob....ab आज तुम्हे ये बताता हु की मर्द और ायरत ek-dusre को कैसे खुश कर सकते hai....to तुम तैयार हो न....

Appi(sahmi हुई)- इसमें kuch...kuch गलत तो नहीं न....

गोलू भाई- बिलकुल nhi...are तुम एक हसीं और जवान लड़की ho....aur तुम जैसी लड़कियां मर्द का सुख नहीं लेगी तो कौन lega....aur फिर तुम्हे ये साबित भी तो करना है na...ki तुम किसी भी मर्द को खुश कर सकती ho...hai न....

अप्पी- हम्म...

Main(man में)- अब ये क्या माजरा hai....aakhir अप्पी को क्या जरुरत ाँ पड़ी ये साबित करने ki....ohh...unki saheli...to ये बात hai....tabhi अप्पी उस वक़्त रो रही thi...lagta है उनको ये शक है की वो मर्द को खुश नहीं कर sakti....par appi....aap तो वो हुश्न रखती ho...juse देखने बस से मर्द पानी छोड़ dega...jaisa की कल गोलू भाई ने किया था....

यहाँ मैं सोच hi रहा था की इस बीच गोलू भाई ने अप्पी को एक हुकुम दे diya....jise सुन कर अप्पी थोड़ा jhijhki....par फिर बड़े प्यार से अपना टॉप ऊपर कर के अपने रास भरे दूध गोलू भाई को दिखने लगी....

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गोलू भाई- uff...ye दोनों तो मेरी जान hi ले lege...kya खूब रास भरा है दोनों me...uummm...

Appi(sharma कर)- आप bhi...inme कैसा रास....

गोलू भाई- वो भी समझा duga....filhaal इन्हे जी भर कर देखने तो do...dekho to...kya मस्त आकार है inka...aur ये nippal...uff....kitna प्यारा दिख रहा hai...inhe तो देख कर hi मुँह में पानी आ जाता है.....

वह गोलू भाई अप्पी के दूधो की तारीफ़ कर रहे the...aur मेरी प्यारी अप्पी अपनी तारीफ सुन कर बेहद hi खुश हो कर शर्मा रही थी......

Fir....thodi देर तक अप्पी के दोनों दूधो की तारीफ करने के बाद गोलू भाई ने अप्पी का जिनसे भी निकलवा diya...aur फिर उनसे पंतय निकलने का बोलै....

और इस बार अप्पी एक लम्हे के लिए भी झिझकी nhi...ulta मुस्कुराते हुए अपनी पंतय उतार फेकि.....

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गोलू भाई- wah.....tumhe नंगा देखते hi मेरा लुंड फनफना उठा yaar...kya कातिल जिश्म है tumhara...uuff...

Appi(sharmate हुए)- ऐसा तो सबका होता है na....matlab लड़की का...

गोलू भाई- होता hai....par ऐसा सबाब कहा देखने मिलता hai...ye तो किस्मतवालो को मिलता hai....aur इसका नजारा भी किस्मत वाले hi देख सकते है.....

अप्पी- आप भी na.....ab और क्या करू....

गोलू भाई- hmm...tum ये तो जानती hi हो की एक लड़की को मर्द से क्या chahiye...hai न...

Appi(sharma कर)- जी...

गोलू भाई- बहुत khoob....par ये भी जान लो की मर्द को लड़की से kya-kya चाहिए होता है...

अप्पी- क्या matlab...use भी लड़की का जिश्म hi चाहिए न....

गोलू भाई- ha...par मर्द को गरम करने के तरीके कई होते hai....aur उनमे से एक hai....mard के लुंड को प्यार karna....aur हर मर्द ये चाहता है की कोई भी लड़की या aourat....uske ोास आये तो उसके लुंड को प्यार kare.....use choome...choose....use ऐसा प्यार दे की जैसे उसी लुंड से लड़की की जिंदगी जुडी ho....samjhi...

अप्पी- hmm..par मुझे ये आता hi नहीं...

गोलू भाई- तो कोई भी ये पेट से सीख जार नहीं aata....tumhe ये कर के hi सीखना hoga.....to अब aao...aur मेरे लुंड को प्यार karo...chalo....ghutno पर baitho...taki जब तुम लुंड को कपड़ों की कैद से आज़ाद karo...to वो बिलकुल तुम्हारे मुँह के सामने ho...chalo...nikalo...

ये बोल कर गोलू भाई ने अप्पी को घुटनो पर बैठाया और खुद उनके सामने खड़े हो गए.....

और मेरी अप्पी ने भी बिना देर किये गोलू भाई का लुंड उनके शार्ट से निकाल लिया और उसे देखते hi अप्पी की आँखे ख़ुशी से चमक उठी....

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गोलू भाई- अब इसे प्यार karo....le जाओ इसे अपने मुँह की गहराई में......

अप्पी - पर मैं jaise....matlab ये बहुत बड़ा hai.....mere मुँह में पूरा नहीं जायगा....

गोलू भाई- चलो मुँह खोलो....

अप्पी - जी...

और जैसे hi अप्पी ने मुँह खोला तो गोलू भाई ने अपनी चारो उँगलियाँ अप्पी के मुँह में दाल di...aur उन्हें andar-bahar करने लगे....

इस हरकत पर अप्पी मुस्कुरा उठी और बड़े प्यार से उँगलियों को अपने मुँह में महसूस करने लगी...

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गोलू भाई- dekha.....jab ये चारो उंगलिया इतनी आसानी से तुम्हारे मुँह में घुस सकती hai...to लुंड क्यों nhi....tum कोडिस तो करो....

अप्पी- ऊम्मम...

गोलू bhai(ungli निकल कर)- chalo...suru karo....dheere-dheere कर के भीतर lena....chalo....

और फिर क्या tha....appi ने अपने हाथ में गोलू भाई का तगड़ा लुंड थमा और उसे हिलने lagi....jaise की वो लुंड से खेलने में माहिर खिलाडी हो....

गोलू भाई- सिर्फ हिलने से कुछ नहीं होगा....

अप्पी - जानती hu....par पहले इसकी गर्मी का जायजा तो ले lu...kahi मेरा मुँह hi न जला de....hehe...

गोलू bhai(muskura कर)- ये ठीक हुआ की तुम्हारी शर्म ख़त्म hui...ab आगे bado.....kafi कुछ बाकि है abhi...chalo...

और गोलू भाई की बात सुन कर अप्पी ने अपना मुँह आगे किया और बड़े प्यार से मुँह खोल कर वो तगड़ा लुंड मुँह में भर लिया.....

और उनकी इस हरकत पर मेरे लुंड ने पिचकारी मार di....aur वह अप्पी में बड़ी खूबी के साथ लुंड चूसना सुरु कर दिया.....

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अप्पी - uummmhh.....aah...ye तो बहुत hi बड़ा hai....theek से आ hi नहीं रहा मुँह में....

गोलू भाई- तुम कोसिस तो karo....aa jayga....tumne देखा नहीं की तुम्हारी अम्मी कैसे इसे पूरा निगल जाती hai....haa...chalo....kosis karo...muh खोलो और डालो...

अप्पी- hmm...karti हु....

और फिर अप्पी ने दूसरी कोसिस ki....aur इस बार वो कामयाब भी हो gai....ab गोलू भाई का आधा लुंड अप्पी के मुँह में tha...aur अप्पी उसे बड़े मज़े से चूस रही थी....

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अप्पी- uuummmmmmm......uuuummmmm...uuuuummmmmm...uuuummmmm....

गोलू बगै- aah....ye हुई न baat....dekha...kitni आसानी से चला gaya....chooso...acche से चूसो....

अप्पी- uuummmm...uuummmm...uuummmm...uuummmmm.....

गोलू भाई- hmm...maza आ gaya....tera मुँह भी मस्त hai....ye तो लुंड को पागल hi कर dega......aahh...karti रहो....

और फिर कुछ देर तक अप्पी ने बड़ी सिद्दत से लुंड की चुसाई जारी rakhi....aur फिर गोलू भाई का इसरा प् कर अप्पी ने पूरा लुंड अपने गले में भरने की कोसिस सुरु कर दी....

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अप्पी- ggggguuuuuppppppppppppp.......

गोलू भाई- aaahh...aise hi....pura लेना hai....kosis करती raho.....aahh...aise hi....

अपोइ- gggggglllluuuuppppppppppp......uuummmmm...gggglllluuuuupppppppp......uuummmm...

गोलू भाई- aahh...bahut khoob....ab तुम सही जा रही ho.....dekho...aise hi मर्द खुश होता hai....jab एक सरीफ लड़की बिलकुल सड़क छाप रंडी की तरह मर्द के सामने पेश आती hai....aaahhh.....maza आ गया यार.....

मैंने देखा की अप्पी baar-baar पूरा लुंड मुँह में bharti...aur फिर जोर से सांस leti...aur फिर से लुंड को गले तक ले जाती.....

उन्हें देख कर मुझे बिलकुल भी यकीन नहीं हो रहा था की ये मेरी वही अप्पी है जो की एक पढ़ने वाली सरीफ लड़की थी....

क्योकि यहाँ तो वो एक बहुत hi कामुक रंडी दिख रही thi...jo अपने मालिक के हर हुक्म को सिद्दत से पूरा करने में जुटी थी.....

Khair....appi ने थोड़ी देर तक अच्छे से म्हणत की और फिर गोलू भाई का पूरा लुंड अपने गले में भरने में कामयाब हो गई.....

अप्पी- uuummmhhh...aahh...ab ठीक है न....

गोलू भाई- अभी तो सुरुवात hai....ruko...

और ये बोल कर गोलू भाई खड़े हो गए और अप्पी को इसरा kiya....aur अप्पी ने तुरंत लुंड को गले तक भर लिया.....

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गोलू भाई- uufff....ye हुई न baat....ab तुम्हारा मुँह छोड़ने को तैयार हो गया है...

अपोइ- uuuummmmmhhhh..aahh...muh...matlab...muh कौन छोड़ता hai...wo तो choo...matlab वह नीचे न....

गोलू bhai(muskura कर)- haa...choot hi चुदती hai....par लड़की का मुँह छोड़ना हर मर्द की ख्वाहिस होती hai....kyoki इससे मज़ा दोगुना हो जाता है...

अप्पी- पर मुँह कैसे....

गोलू भाई- मैं बताता हु na....chalo मुँह खोलो...

और फिर जैसे hi अप्पी ने मुँह khola...waise hi गोलू भाई ने अप्पी का मुँह छोड़ना सुरु कर diya.....par बड़े प्यार से......

गोलू भाई- तुम अब काफी अच्छा चूसने लगी ho.....good...aise hi करती रहोगी na...to जल्द hi पूरी तरह से बदल jaogi....fir कोई भी मर्द तुम्हारी गिरफ्त से बाहर नहीं hoga....sab तुमसे खुश हो कर hi जायेगे....

आपौ- uuuummmmmmmhhh...aaahh...sach me....kya ऐसा होगा.....

गोलू bhai(bister पर लेट कर)- बिलकुल hoga....par तुम्हे पहले वो सब सीखना hoga...jo मर्द को खुश करने के लिए जरूरी है....

अप्पू- तो बताइये na....ab तो मुझे कोई शर्म भी नहीं rahi....ab क्या करू...

गोलू भाई- अभी तो मेरा लुंड chooso....maza आ रहा है तुमसे चुसवा kar.....aao...

और अप्पी भी तुरंत बिस्टेर पर पहुंची और झुक कर गोलू भाई का लुंड चूसने लगी....

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अप्पी- uuummm...uuummmm...uuummmm...uuummmm...uuummmm..uuummmm....

गोलू भाई- hmm...thoda और chooso...fir तुम्हे बताउगा की अगला काम क्या है....

अप्पी- uuummmm..uuummmm..uummmmm...uummm....

अप्पी अब इस कदर लुंड चूस रही thi...jaise की ये उनके रोज का काम ho.....pata नहीं गोलू भाई में ऐसा क्या हुनर hai...jo किसी भी मासूम बच्ची को एक निहायती बिगड़ैल रंडी की माफिक बना देते hai...jaise की इस वक़्त मेरी अप्पी बानी हुई थी....

अप्पी पूरी सिद्दत से लुंड को पूरा मुँह में भर कर चूस रही thi....aur गोलू भाई इसका पूरा मज़ा लेते हुए अप्पी का सर सहला रहे थे.....

Khair....thodi देर बाद गोलू भाई ने अप्पी को फिर से फर्श पर बैठा diya...aur खुद उनके सामने खड़े हो गए.....

गोलू भाई- chalo...ab बोना हाथ लगाए अपने मुँह का कमाल dikhao....aur याद rahe....pura लुंड भीतर जाना chahiye....chalo...suru हो जाओ....

और फिर क्या tha....appi ने तुरंत अपना कमाल dikhaya....unhine लुंड को हाथ लगाए बिना hi अपने गले तक बगैर liya....aur चूसना सुरु कर दिया....

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मैं ये देख कर ोागल हो रहा tha....mujhe अब अप्पी एक रंडी के अलावा कुछ नहीं दिख रही थी....

मैं यो बस अब इंतज़ार कर रहा था की कब मेरी अप्पी की छूट फाटे और मैं उस नज़ारे का लुफ्त उठाओ....

पर गोलू भाई का इरादा कैच और tha....unhone अप्पी से भरपूर लुब्द चुसवाने के बाद उन्हें उठा कर पास hi टेबल पर बैठा दिया और उनकी जाँघे फैला कर छूट सहलाने लगे....

अप्पी- sshhh.....kuch होता है...

गोलू भाई- जनता hu....dekho to....kaise गीली हो गई है.....

अप्पी- ये आपकी वजह से हुआ hai...itni देर से बस लुंड चुसवा रहे ho.....to मेरा दिल भी तो करेगा न....

गोलू भाई- accha....to क्या है तेरे दिल me...bolo...

Apoi(sharma कर)- आप भीतर डालिये न....

गोलू भाई- accha....theek hai...daluga...par पहले देख तो लू की ये मेरा लुंड खाने लायक है की नहीं....

और इतना बोल कर गोलू भाई ने अपनी 2 ऊँगली अप्पी की छूट में दाल di...aur अप्पी सिसक कर उछाल पड़ी....

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अप्पी- aahhh...ungli nhi...lund daliye...aaahh...

गोलू भाई- वो भी daluga.....thoda तो रुक....

और गोलू भाई ने बड़े प्यार से अपनी 2 उँगलियों से अप्पी की छूट छोड़ना सुरु कर diya....aur अप्पी सिसकते हुए अपनी गांड उचकने लगी....

फिर थोड़ी देर बाद गोलू भाई ने अप्पी की छूट से ऊँगली निकली और अप्पी को थोड़ा पीछे लिटा कर उनकी गांड के छेद पर ऊँगली दबा दी...

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अप्पी- aahhh...yaha नहीं....

गोलू भाई- अरे यही तो मर्द की नजर होती hai.....kyoki छूट तो कोई भी छोड़ लेता hai....par असली मर्द के लुंड में hi वो ताक़त होती hai...jo लड़की की गांड फाड़ सके.....

अप्पी- aah...par ये तो बहुत छोटा है na...usme kaise....aahhh..

और तभी गोलू भाई ने वही ऊँगली थोड़ी सी अप्पी की गांड में दाल di...jisse अप्पी सिसक उठी....

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अप्पी- aahh...ungli में hi तकलीफ हो रही hai....fir आपका तो बहुत बड़ा hai...aahh...nhi जायगा....

गोलू भाई- सब jayga....tum बस सब्र रखो और dekho.....sab ठीक hoga...tum बस ये batao...ki मज़ा आ रहा है न....

अप्पी- पता nhi..par...par कुछ अजीब सा लग रहा hai....kuch अच्छा सा.....

गोलू भाई- बस यही बहुत hai....ab dekho...ab और मज़ा aayga.....doguna मज़ा....

और फिर गोलू भाई ने अप्पी की गांड के sath-sath उनकी छूट में भी ऊँगली दाल di...aur बड़े प्यार से bheeter-bahar करने lage....jisse अप्पी की सिसकी थोड़ी तेज हो गई....

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अप्पी- aaahhh...sach me....ab to...aahh...maza आ रहा है...

गोलू भाई- चुदाई का असली मज़ा hi तब hai...jab दोनों को मज़ा aaye.....samjhi...

अप्पी- haa.....par ऊँगली से ज्यादा लुंड का मज़ा आएगा न....

गोलू bhai(muskura कर)- लगता है लुंड खाने की बड़ी जल्दी hai....hai न....

अप्पी - aah....kya karu....jabse अम्मी को ये कहते dekha....tabhi से दिल कर hai...ki कब ये मेरे भीतर jaaye.....aaahh...

गोलू भाई- तो chalo....abhi खिला देते है....

ये बोल कर गोलू भाई ने अपनी ऊँगली बहार निकली और अप्पी को उसी टेबल पर लिटा कर उनकी तागे फैला दी....

और फिर बड़े प्यार से अपना लुंड अप्पी की गीली छूट पर लगा दिया....

गोलू भाई- थोड़ी तकलीफ होगी....

अप्पी- जानती huuuu...aaahhh...ammi.....

अप्पी कुछ बोल पति उससे पहले hi गोलू भाई ने एक धक्का मार कर लुंड भीतर कर दिया...

अप्पी- aaahhhh....bahar nikalo....ye तो बहुत jyadaaaaaa.....aaahhhhhhhhh...

और तभी गोलू भाई ने दूसरा धक्का मार कर आधे से ज्यादा लुंड अप्पी की छूट में उतार दिया....

अब अप्पी दर्द से तिलमिला रही थी और लुंड बाहर निकलने की मिन्नतें कर रही thi...par गोलू भाई ने बिना कोई बात सुने एक आखिरी धक्का मार कर पूरा लुंड अप्पी की छूट में दाल दिया....

अप्पी को इतना दर्द हो रहा था की वो अपने hath-paav फटकारने लगी thi....unki आँखों में आँशु थे और पुरे कमरे में उनकी चीखे सुनाई दे रही थी...

पर गोलू भाई एक अच्छे खिलाडी the....isliye उन्होंने अप्पी को दवाये रखा और उनके जिश्म को सहलाते हुए उन्हें काबू करने लगे....

ये सब कुछ देर चलता raha....aur जब अप्पी थोड़ी से शांत padi.....to गोलू भाई ने हलके धक्को के साथ चुदाई सुरु कर दी....

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अभी भी अप्पी को हर धक्के पर बेतहासा दर्द हो रहा tha....par गोलू भाई के धक्को के कमाल से अप्पी कुछ hi देर बाद अपनी कमर हिलने लगी....

अप्पी- aaahhh....itni तकलीफ होती hai.....pata नहीं kaise...aaahhh...sab लड़कियां ये करती है....

गोलू भाई- अरे तकलीफ तो कुछ hi देर की होती hai....fir तो मज़ा hi मज़ा hai....dekho....tumhe भी मज़ा आने लगा न....

अप्पी- aaahhhh...ha...mera pani...saayad...aahhh.. ha....abhi...aahhh..aahhh...

और अप्पी joor-joor से कमर हिला कर पसत पद gai....jiska मतलब साफ़ tha...ki अप्पी झाड़ चुकी है....

और जैसे hi अप्पी jhadi....waise hi गोलू भाई ने धक्को की रफ़्तार बड़ा di....aur अप्पी को चुदाई का मज़ा देने लगे.....

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गोलू भाई- अब आएगा तुझे मज़ा.....

अप्पी- aahh...aahh...abhi bhi...thoda दुःख रहा है...

गोलू भाई- वो सब भी चला jayga....are तेरी छूट में बहुत डैम है....

अप्पी- aaahhh....par आपका बड़ा hai....to ज्यादा hi...aaahhh...

गोलू भाई- अरे तेरी छूट ऐसे hi लुंड के लिए बानी hai...tu dekh...ab ये छूट कैसे मेरे लुंड को कहती hai....yeehhh...yeehhh..

और गोलू भाई ने अप्पी की जोरदार चुदाई सुरु कर di....aur बेचारी appi...apni जिंदगी की पहली चुदाई की चीखे मारने लगी....

फिर थोड़ी देर बाद जब अप्पी की छूट ने दोवारा पानी chhoda...to गोलू भाई ने अप्पी को अपनी मजबूत बाहों में उठा लिया और उठा कर सोफे पर बैठ गए....

अप्पी- aaahhh...abhi भी तकलीफ हो रही है...

गोलू भाई- अब ये तो होता hi rahega....tum जल्दी hi समझ jaogi...chalo....ab तुम्हे मेरे लुंड की सवारी करवाता हु...

अप्पी- sawaari...matlab...

गोलू भाई- मतलब की अब तुम मेरे ऊपर ucchlo....dekho...lund तो तुम्हारी छूट में hi hai....to अब सुरु हो jao...aur मज़े लो....

और फिर अप्पी ने बड़े सलीके से अपने आपको सेट किया और uchhal-ucchal कर गोलू भाई का लुंड खाने लगी....

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अप्पी- aaahhhh...aaahhh....ye to...aaahhh...

गोलू भाई- क्या hua...maza नहीं आया क्या....

अप्पी- aaahhh...nhi...bahut...aahh...vahut मज़ा आ raha....aahhh...aahhh...

Main(man में)- लगता है अप्पी एक hi दिन में चुदाई का पूरा खेल सीख jaygi....uff...appi की गांड तो dekho....kaise uper-neeche होते हुए लुंड खा रही है....

अप्पी की चौड़ी हुई gaand....uske बीच की line....aur नीचे choot....jisme गोलू बगै का लुंड सटासट aa-ja रहा hai...ufff....aisa नजारा और किसे देखने मिलेगा....

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अप्पी- aaahhh.....main...aahh...main फिर se....ohh ammi....aaahh...aahhh...

गोलू भाई- अम्मी को भी लुंड milega....pahle तू तो ले le....yeehhh...

और जैसे hi अप्पी झाड़ कर ढीली padi....waise hi गोलू भाई ने अप्पी को नीचे से छोड़ना सुरु कर दिया....

और अबकी बार अप्पी की चीखे दरदबगरी नहीं nikli....balki वो चीखे मज़े की thi...jo उन्हें गोलू भाई का लुंड खा कर मिल राग था....

गोलू भाई बड़ी तेजी से अप्पी को छोड़ने में लगे the...aur अप्पी इस मज़ेदार पल का पूरा लुफ्त उठा कर अपनी नाजुक सी छूट छुड़वा रही थी.....

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अप्पी- aahhh....ammi....aapka to...aaahh...ye तो रुकता hi nhi....aaahhh...

गोलू भाई- are...ye तेरी जैसी छूट मिलने पर दोगुनी रफ़्तार से दौड़ता है....

अप्पी- पर मेरी छूट to....aaahhhh.....main फिर se.....aaahhhh...aaahhhh....

और अप्पी उम्मीद के मुताबिक फिर से झाड़ gai....kyoki कोई नै लड़की इतने तगड़े लुंड के आगे ज्यादा देर टिकती hi कहा है....

अप्पी- aahh...aahhh....aaah..

गोलू भाई- चल अब घूम ja....teri गांड देखते हुए तुझे छोड़ने का ज्यादा मज़ा आएगा....

और अप्पी कुछ समझ pati...usse पहले hi गोलू भाई ने अप्पी को उठा कर अपने लुंड पर घुमा दिया....

और अब अप्पी का भोसड़ा मेरी तरफ आ gaya....ab मैं अप्पी की चूड़ी हुई लाल छूट साफ़ देख सकता था....

अप्पी- aaahh...thoda रुको na....mujh में ताक़त नहीं है....

गोलू भाई- तेरी ताक़त को अभी जगा देता हु....

और ये बोल कर गोलू भाई ने अपना हाथ आगे कर के अप्पी की छूट का दाना सहलाना सुरु कर दिया....

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अप्पी- uuummm...ye क्या है....

गोलू भाई- तेरी छूट की ताक़त बढ़ाने का तरीका....

अप्पी- aah...gudgudi होती है....

गोलू भाई- अरे dekh...ab तू खुद hi उछलने lagegi....thoda सा रुक जा....

और फिर वही हुआ जो गोलू भाई ने बोलै tha....appi की छूट का दाना सहलाने से अप्पी फिर से गरम हो gai...aur खुद hi लुंड पर उछलने लगी....

गोलू भाई- dekha...ab जोर से kar....gaand utha-utha कर लुंड खा....

और फिर अप्पी ने अपने हाथो को पीछे किया और पूरी ताक़त से उछाल कर लुंड खाने लगी.....

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अप्पी- aaahhhh....sach me.....chudaai में इतना मज़ा bhi...aahhh...aata hai....aaahhh...

गोलू भाई- अब पता चला न.....

अप्पी- aahhh...haa...ab samjhi...ammi क्यों आपकी दीवानी hai...aaahhh....mera तो pani...aaahhh....ruk hi नहीं raha....aaahhh...

गोलू भाई- तो रोकना क्यों hai....choot तो बानी hi है पानी बहाने ko....joor se....nikaal दो सारा पानी....

गोलू भाई की बातों से अप्पी और जिस के साथ उछालने lagi...aur कुछ hi देर बाद एक जोरदार चीख के साथ रुक गई....

अप्पी- aaaahhhhhh.......main gaaiii....ooohhh..aammmiii....kitna मज़ा है isme...aaahhh...aaahhh...

अप्पी झाड़ कर गोलू भाई की गॉड में hi लेट गई और joor-joor से हाफने lagi....aur तभी गोलू भाई बड़े प्यार से अप्पी के दूध सहलाते हुए उन्हें चूमने लगे...

गोलू भाई- uuummhh...tum खुश तो हो न....

अप्पी- aah....bahut...bahut khush....aur ये ख़ुशी मुझे हमेशा चाहिए....

गोलू भाई- तुम फ़िक्र मत karo....ye ख़ुशी तुम्हे रोज़ duga....aauuummmhhhh....

अप्पी- aaahh..par ammi....unhe पता नहीं चलना चाहिए.....

गोलू भाई- नहीं चलेगा.....

अप्पी- पर आप तो अम्मी को छोड़ने में बिजी rahoge...fir मेरा क्या होगा....

गोलू भाई- तू फ़िक्र बहुत करती hai...are मेरा लुंड एक साथ कई छूटों को ठंडा कर सकता hai....ye थकता nhi...tu फ़िक्र मत kar....ye लुंड तेरी अम्मी के sath-sath तेरा भी पूरा ख्याल रखेगा.....

अप्पी- सच me...aaauuummmm...uuummmm..uuummmm...

और अप्पी खुश हो कर गोलू भाई को चूमने lagi....aur तभी गोलू भाई ने अप्पी की कमर पकड़ी और उन्हें utha-utha कर चुके दने लगे....

अप्पी- aaahhh....aapka कब होगा....

गोलू भाई- जब इसका मन hoga...tujhe कोई तकलीफ.....

अप्पी- aahh..bolkul nhi....aapka जितना दिल करे उतना chodo....aaahhh....faad दो meri.....aaahhh... छोड़ते रहो....

और हुआ भी ऐसा hi....golu भाई ने अप्पी को utha-utha कर करीब 10 मिनट तक चलता डा और फिर अप्पी की छूट में hi झाड़ गए.....

गोलू भाई- chal...ab थोड़ा आराम कर le.....fir दोवारा छोड़ता हु.....

अप्पी- aahhh...par अम्मी को क्या bolugi...wo डाँटेगी....

गोलू भाई- तू उसकी फ़िक्र मत kar....tu यहाँ आराम kar.....main उसे समझा कर आता hu....aur sun....ye गोली खा lena...takleef दूर है जायगी....

फिर क्या tha....golu भाई अप्पी को एक गोली खिला कर बाथरूम में चले gaye....aur अप्पी जैसे hi बिस्टेर पर leti...to थकान की वजह से उनकी आँख लग गई......

और थोड़ी देर बाद गोलू भाई तैयार हो कर कमरे से निकल gaye.....tab मैंने अपनी अप्पी को थोड़ा गौर से देखा....

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उसकी choot...jo कल तक कासी हुई thi...aaj फैली हुई और एकदम लाल नजर आ रही थी....

उनके जिश्म पर चुदाई की वजह से आया पसीना अब भी कई जगह दिख रहा tha....aur सबसे खास था उनकी छूट से बहा हुआ गोलू भाई का गाड़ा lundras....jo छूट से निकल कर उनकी गांड से होते हुए बिस्टेर पर जा चूका था.....

इस वात मेरी अप्पी एक बहुत बड़ी चूड़ाकड लड़की नजर आ रही thi....jo की घंटे भर से ज्यादा चुद कर छूट फाड़े पड़ी थी....

अप्पी को इस नए रूप में देख कर मेरे लुंड ने एक बार फिर से पानी निकला और मैं अपने आपको ठीक कर के नीचे आ गया....

क्योकि मैंने गोलू भाई की कार का हॉर्न सुन लिया tha...aur मैं समझ चूका था की गोलू भाई कही बहार निकल गए hai....isliye अभी चुदाई होने का कोई सवाल hi नहीं था....

Khair....neeche जाते hi मैं भी अपने कमरे में सो gaya....aur ख्वाबो में बस यही सोचता रहा की अब मेरे घर में क्या hoga....ek तरफ ammi...aur एक तरफ appi....dono hi गोलू भाई के लुंड की deewaani....to आखिरकार वो कौन hoga....jo गोलू भाई की खास रखेल banegi....ammi या अप्पी.....???

======

आलम- बस bhai....ab बस kar....ab और नहीं सब सकता.....

खलील - kyo...kya hua...abhi तो बहुत कुछ बाकि है....

जावेद- तो वो कल sunana....aaj तेरी अप्पी का सुन कर बहुत पानी निकल चूका hai....ab और निकला तो सायद चल भी न सके hum....to बस कर....

माजिद- है khaleel....aaj के लिए बस kar....waise भी रात होने को aai....hume घर चलना चाहिए......

खलील- तो ठीक hai....meri हालत भी अब और पानी निकलने वाली नहीं hai...chalte hai....aage की कहानी बाद में....

फिर सब दोस्तों ने अपने आपको ठीक किया और hasi-mazaak करते हुए apne-apne घर पहुंच गए....

और इन दोस्तों में से एक दोस्त ने घर पहुंचने पर वो नजारा dekha....jise देख कर उसकी धड़कने बाद gai...aur आँखे फटी की फटी रह गई......

आखिर कौन था वो दोस्त......

माजिद...??

आलम...?

खलील....?

या फिर जावेद....???

और क्या था वो नजारा.....???

नोट - अपडेट पोस्टेड frnds.....hope ु लिखे आईटी.....

थैंक्स फ्रेंड्स.....


कीप रीडिंग.......
 
अपडेट - 74

और इन दोस्तों में से एक दोस्त ने घर पहुंचने पर वो नजारा dekha....jise देख कर उसकी धड़कने बाद gai...aur आँखे फटी की फटी रह गई......

आखिर कौन था वो dost......maajid...??

आलम...? , खलील....? या फिर जावेद....???

और क्या था वो नजारा.....???

अब आगे.....

असल में जब आलम अपने घर पंहुचा तो उसने देखा की उसके घर का मैं दरवाजा खुला हुआ hai....jo की ज्यादातर बंद hi रहता tha....kyoki जब आलम और उसके अब्बू घर पर नहीं होते the...to उसकी अम्मी और डडिजान दरवाजा बंद hi रखती थी....

इसलिए दरवाजे को खुला देख जार आलम को लगा की अब्बू घर में hi hoge.....aur आलम बेफिक्र हो कर घर में घुस गया....

और जैसे hi उसने भीतर देखा तो सामने का नजारा देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह गई....

सामने उसकी डडिजान अपना बड़ा सा भोसड़ा खोले बैठी thi....aur एक लड़की उनके भोसड़े को joor-joor से चाटने में लगी थी...

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ये नजारा आलम के ख्वाबो से भी परे tha....kyoki वो अपनी डडिजान को निहायती सरीफ और पाक ायरत मानता था.....

इसलिए आलम ने जब अपनी सराफ डडिजान को इस हालत में देखा तो उसके दिल की धड़कन बाद gai...aur मारे हैरानी के उसके माथे से पसीना आने लगा....

Aalam(man में)- या al**ha....ye सब क्या hai....dadijaan......wo भी इस हालत me....aur ये लड़की कौन hai......main...main अब क्या करू.....

तभी आलम को बाहर से कुछ आवाज़ aai...jaise की कोई घर की तरफ hi आ रहा हो.....

तो आवाज सुन कर आलम घबरा गया और जल्दी से हाल के एक तरफ बने ग़ुसलख़ाने में घुस गया.....

तभी बाहर से एक ायरत की आवाज़ aai...jo आलम की पडोसी hi थी....

Aourat(bahar से)- अरे आलम की ammi......jara सुनो तो.....

और जैसे hi ये आवाज़ आलम की डडिजान ने सुनी तक उनकी आँखे खुल gai....jo अब तक छूट चटवाने की मस्ती में बंद थी....

फिर उन्होंने जल्दी से दरवाजे की तरफ dekha...aur उसे खुला देखते hi जल्दी से उस लड़की को रोक कर अपनी सलवार ऊपर कर ली....

डडिजान- या al**h.....ye दरवाजा किसने खोला......

लड़की- kya...darwaja खुला tha....ya a**ha....kahi कुसी ने देखा तो नहीं....

Dadijaan(khadi हो कर)- अगर देखा होता तो बबाल न मच jata.....raham है उपरवाले का की कुछ नहीं hua...par ये खुला kaise....koi तो जरूर आया होगा.....

लड़की- वही to....aur सायद जिमे ऐसा देख कर भाग गया hoga...saayad बाद में परेशान karega....ab क्या होगा चचीजां.....

डडिजान- तू घबरा mat.....pahle जरा देख तो लू की बाहर कौन hai.....kya पता उसी ने दरवाजा खोला हो....

तभी आलम की अम्मी घर में दाखिल हुई....

अम्मी- घबराओ mat....darwaja मैंने hi खोला था....

डडिजान- kya...par kyo...aur खोला तो theek....band कर के क्यों नहीं गई....

अम्मी- अब बहार hi तो thi....to मैंने जरूरत नहीं समझी...

डडिजान- kya...jaroorat नहीं samjhi...are तेरी इस जरूरत के चक्कर में कोई हमे देख लेता to...janti है न की फिर क्या hota....are सरेआम बदनाम हो जाती मैं तो....

अम्मी- accha....tumhe बदनामी का इतना दर hai..haa...are अगर दर था तो मेरा कहा क्यों नहीं mana...bola था न की कमरे में jao...par nhi.....tumhe तो छुडास लगी थी na....bhosda चटवाने है बस....

Dadijaan(gusse से)- dekh...jawaan संभल कर बात kar...bhool mat...main तेरे सौहार की अम्मी hu...samjhi न....

अम्मी- kya...ammi...are वो पहले thi...ab तुम किसी की रखेल हो bas....ek randi....ek चूड़ाकड aourat...jiske भोसड़े में हर वक़्त बस आग hi लगी रहती है.....

डडिजान- देख तू....

Ladki(beech में)- बस karo.....kya दोनों सुरु हो gaye....are हम एक hi थाली के chatte-batte hai....to ek-dusre पर इल्जाम लगाना बंद karo.....aur bhabhijaan....aap दरवाजा बंद karo....aur chachijaan...aap कमरे ने chalo....abhi आपको मेरी छूट का पानी भी पीना है...

अम्मी- ha...le जाओ इस बुध्दि घोड़ी ko...badi आग लगी है ise.....waise भी आलम आता hi hoga.....jao ammijaan...chudaas मिटा लो अच्छे से....

Dadijaan(ghoor कर)- बोल ले randi...bol le....jab तू छुड़वाने जायगी na...tab मैं bolugi....hmm..chal बेटी.....

आउट फिर डडिजान उस लड़की को ले कर अपने कमरे में चली गई और अम्मी अपने कमरे में.....

Aalam(man में)- या khuda....ye सब क्या hai...ye हो क्या रहा है मेरे घर me...meri dadijaan...ammi....sab कैसे बात कर रहे hai....aur वो लड़की कौन thi...uska तो चेहरा तक नहीं dikha....aakhir ये सब हो क्या रहा है....

आलम कुछ देर तक वही रुक कर अपने आपको नार्मल करता रहा और फिर jaise-taise छिप कर एक खिड़की के बहरे घर से बाहर आ गया......

बहार आने के बाद भी आलम के दिल को सुकून नहीं tha....uska दिमाग ये soch-soch कर फटा जा रहा था की उसके घर में ये सब क्या होने लगा....

उसकी डडिजान खुले आम किसी लड़की से अपनी छूट चटवा रही thi...aur अम्मी ये सब जान कर भी चुप थी...

उल्टा अम्मी कैसे डडिजान को khari-khoti सुना रही thi....randi, रखेल, chudaasi.....kaise....???

और डडिजान भी अम्मी को कैसे बोल रही thi...ki तू छुड़वाने जायगी तब dekhugi.....aakhir वो कहा क्या चाहती thi...kya मेरी अम्मी भी चुदवाती गई कुसी se.....kya ये हो सकता है....

Nhi....bilkul nhi...meri अम्मी तो कितनी पाक ायरत hai....sare वक़्त उपरवाले की इबादत में लगी रहती hai.....pure घर का बखूबी ख्याल रखती है....

तो ऐसी ायरत किसी गैर से छुड़वाने जैसा kaam.....nhi...ye तो हो hi नहीं सकता......

पर डडिजान ने ऐसा कहा kyo...aur उनके कहने पर अम्मी ने कुछ जवाब क्यों नहीं दिया.....

क्या ये हो सकता है की अम्मी सच में किसी से चुदवाती ho...aur डडिजान bhi....are तभी तो दोनों ek-dusre से बत्तमीज़ी से गाँधी बातें कर रही थी....

या al**h.....agar ऐसा है तब तो ये बहुत बड़ी बात hogi....aur इतनी बड़ी बात का मुंझे अब तक पता hi nhi...are पता kya....mujhe तो शक भी नहीं हुआ.....

क्या खूब है dono....humare सामने तो ऐसे पेश आती है की मनो इनसे ज्यादा पाक और सरीफ ायरत इस दुनिया में hi नहीं hai...aur अकेले में इस कदर की गाँधी बातें....

Aalam(man में)- hmm..ab मुझे कुछ करना hoga....mujhe पता लगाना होगा की आखिर माजरा क्या है.....

मैं जो सोच रहा hu...wo सच hai...ya कुछ aur....aur अगर ये सच hai...to इसकी वजह क्या है....

और सबसे बड़ी baat...ye सब सुरु कैसे hua....aur जो हुआ bhi...wo अब तक मेरी नजरों से दूर कैसे रहा.....

Bas....ab कल से मेरा एक hi मक़सद hoga....sach का पता lagana......par उससे पहले मुझे अपना मूड ठीक करना hoga.....nhi तो बेकार में किसी को शक हो सकता है.....

Khair.....ye सब तय करने के बाद आलम पास वाली एक दूकान पर रुका और मुँह धोकर वह चाय pi...aur फिर बिलकुल नार्मल हो कर अपने घर आ गया......

और जब आलम घर पंहुचा तो उसने देकजा की सामने उसके अब्बू और डडिजान बैठ कर बातें कर रहे थे और उसकी अम्मी किचेन में खाने की तयारी में लगी थी....

डडिजान- are...aa गया beta....aaj बड़ा वक़्त लगा दिया.....

आलम- ha...wo आज खेलने के बाद माजिद के घर रुक गया था थोड़ा....

अब्बू- hmm...chal hath-paav धो le....khana कहते है....

आलम- जी अब्बू....

और फिर थोड़ी देर बाद सब खाना खाने बैठ गए.....

अम्मी- ammijaan...ye lijiye...aapke लिए खास रसमलाई मगवाई है....

डडिजान- अरे wah.....ek तू hi hai...jo मेरा पूरा ख्याल करती hai...la दे....

अब्बू- अच्छा ammi...main ख्याल नहीं karta.....jo सिर्फ उसी पर इतना प्यार आ रहा hai....haa....

डडिजान- अरे तू तो मेरा बीटा hai....tu तो हमेशा rakhega....par ये तो बाद में मेरी बेटी bani....to उस पर तो ज्यादा प्यार आएगा na....sach me....badi तक़दीर वाली hu...jo ऐसी प्यारी बच्ची मेरे घर आई....

अम्मी- नहीं ammi....tadeer वाली तो मैं hu...jo मुझे आप जैसी प्यारी अम्मी मिली है....

Aalam(man में)- wah...inki नौटंकी तो dekho......abhi कोई देख ले तो कभी नहीं बोल सकता की ये दोनों ek-dusre को रंडी जैसे अल्फाज भी बोल सकती hai.....huh....kamaal है दोनों....

अब्बू- अरे ammi....kal हमे एक दावत में जाना hai...to साम को तैयार रहना....

अम्मी- अरे नहीं beta....ab इस उम्र में दावत में जाना मुझे अच्छा नहीं lagta....waise भी दावतों का लुफ्त उठाने की उम्र तो तुम सब की hai.....mera तो ये इबादत का वक़्त hai....to मेरा तो रहने do...tum सब हो आना....

अम्मी- ये क्या बोल रही hai.....umar होगी आपके दुश्मनो ki.....aap तो अभी बेहद hi तंदरुस्त और जवान दिखती है...

Dadijaan(muskura कर)- ये तो तेरा प्यार है beti...par सच तो सच hi है na.....nhi beta....main नहीं जा paugi...tum सब चले jana.....main तो आराम करूगी....

अब्बू- ठीक hai...jaisa आपको ठीक lage...hum लोग जल्दी hi आ jayge....theek....

डडिजान- kyo...jaldi kyo...are इत्मीनान से दावत का लुफ्त ले कर aana.....meri फ़िक्र मत karna....main तो आराम से रह लगी....

अब्बू- hmm....theek है....

Aalam(man में)- देखो to....kaisi सराफत और प्यार से बातें हो रही है yaha.....inhe देख कर मुझे भी शक होने लगा की जो मैंने dekha-suna tha...wo सायद झूठ tha.....par सच तो सच hi है na.....aur सच ये है की अभी ये दोनों नाटक hi कर रही hai...aur मुझे इस नाटक के पीछे की साड़ी वजह जानना है बस.....

यही सब सोचते हुए सबका खाना ख़त्म हुआ और फिर सब apne-apne कमरे में सोने को निकल गए....

पर आलम को नीड कहा आने वाली thi...uske दिमाग में तो बस डडिजान की चोइट चटाई का नेहरा और अम्मी के साथ उनकी बाहियाद बस्तें hi आ रही थी....

आलम ये सब सोचते हुए गरम हो रहा था की वाकई उसकी अम्मी और दाफिजां कुसी से चुदवाती होगी.....

और यही सोचते हुए उसने आँखे बाद की तो सामने उसने अपनी अम्मी को paya....jo पूरी तरह से नंगी कड़ी थी......

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आलम- uufff....touba....ammijaan....aapka जिश्म to...uuffff...ise देख जार hi नेरा पानी निकलने को हो gaya.....aaahh...kya कमाल जिश्म है aapka....uuummmm....

तभी आलम ने देखा की उसकी अम्मी आगे को बड़ी और फिर सब कुछ धुंधला पद गया.....

और थोड़ी देर बाद आलम को अपनी अम्मी किसी मर्द की बाहों में नजर aai....jo जाहिर टूर पर आलम का अब्बू नहीं tha....kyoki उस मर्द का बदन एकदम कैसा हुआ tha...uski बाहें मजबूत thi....jo की उसके अब्बू की हो hi नहीं सकती थी....

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फिर आलम ने देखा की वो मर्द उसकी अम्मी के bade-bade दूधो को बेरहमी से चूस रहा hai....aur उसकी अम्मी मस्ती में सिसक रही थी....

वो मर्द आलम की अम्मी के दूध मसलते हुए अपना एक हाथ उसकी छूट पर ले gaya....aur छूट को मुट्ठी में दवा liya.....jis से आलम की अम्मी जोर से सिसक पड़ी.....

फिर उसने देखा की थोड़ी देर बाद hi उस मर्द ने अम्मी को आगे की तरफ झुकाया और उसको छोड़ना सुरु कर दिया.....

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Aalam(man में)- aahh....ammi....aap गैर मर्द से छुड़वा रही ho...uufff...ye देख कर तो मेरा लुंड फटने लगा hai...aahhh..ammi....aur तेजी se....aaahh.. aahh...aaahh....aammiiii....

और आलम के लुंड ने एक जोरदार पिचकारी मार di.....aur आलम हाफने लगा....

और फिर उसकी आँख कब लग gai....iska पता तो खुद आलम को भी नहीं लगा.......

===============

Khair......agle दिन जब आलम जगा तो उसने देखा की घर का माहौल बिलकुल ठीक tha...matlab उसकी अम्मी और अप्पी ek-dusre से बड़ी अच्छी तरह बर्ताब कर रही थी...

आलम ये सब देख कर थोड़ा पागल सा हो रहा tha....kyoki वो सच जान चूका था.....

इसलिए आलम ने अपने दिमाग में ये ठान लिटा था की अब वो जल्द से जल्द अम्मी और डडिजान की असलियत जान कर रहेगा....

Khair....fir कुछ खास नहीं hua.....dopahar के वक़्त आलम घर से निकला और दोस्तों के साथ नदी पर आ गया.....

जगा पर सारे दोस्त खलील की कहानी सुनने को बेताब the....aur खलील ने भी उनकी बेताबी न बढ़ाते हुए आगे की कहानी सुननी सुरु कर दी......

[ आगे की KAHANI......KHALEEL की जवानी.......]

तो जैसा की तुम सब जानते hi हो की आखिरकार मेरी अप्पी भी गोलू भाई का लुंड खेमे वालो की लिस्ट में आ hi गई थी....

उस दिन एक शानदार चुदाई के बाद अप्पी सो गई और गोलू भाई कही बहार निकल gaye....aur मैं अपनी जगह बैठा अप्पी के जागने का इंतज़ार करने लगा....

Khair....shaam के वक़्त अप्पी ने अपनी आँखे खोली l...aur सबसे पहले अपनी छूट को हाथ लगा कर देखने लगी...

और जैसे hi अप्पी ने अपनी छूट को छुआ तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई....

अप्पी- मैंने कहा था na..ki मैं गोलू जी का लुंड ले कर hi rahugi...saali....bada बोल रही थी की झेल नहीं paaygi...ab बताऊगी उसे की dekh....kaise मैंने उस बड़े लुंड को आसानी से झेल liya....huh...mujhse शर्त लगाने चली थी....

इतना बोल कर अप्पी उठी और थोड़ा लगड़ाते हुए बाथरूम में घुस gai....par उनकी बातों ने मेरे दिमाग में कई सवाल छोड़ दिए....

Main(man में)- या al**h.....ye appi....to क्या ये सब जानभूझ कर रही thi...matlab गोलू भाई ने इन्हे nhi...bapki इन्होने गोलू भाई को fasaya.....par क्यों...??

क्या अप्पी खुद hi गोलू भाई का लुंड खाना चाहती thi....haa....yakeen नहीं होता की मेरी अप्पी असल में ऐसी भी हो सकती है....

और ये किसको बताने का बोल रही thi...koun है जिसने अप्पी से ऐसी बहियाद शर्त लगाई थी...

Arrre.....aakhir ये सब हो क्या रहा है मेरे घर me....ek मेरी अम्मी hai...jo खुल कर मेरे सामने रान्दीपन करती hai...aur एक मेरी appi....jo छुप कर रान्दीपन कर रही hai....sala....mere घर में रंडियां hi भरी पड़ी है.....

मैं ये soch-soch कर पागल हुआ जा रहा था की मेरी appi...jise मैं निहायती सरीफ लड़की समझता tha.....wo असल में एक पहुंची हुई रंडी hai...jo एक गैर मजहबी का लुंड खाने जैसी शर्त लगा कर अपनी आबरू को सरेआम रुशवा करती hai....aur मैं पागल ये सोच रहा था की गोलू भाई ने मेरी सरीफ अप्पी का सत्यानास कर दिया.....

Khair...main कुछ भी sochta...usse सच्चाई बदलने वाली नहीं thi...aur सच्चाई ये थी की मेरी अप्पी ने जो भी किया tha...wo अपनी मर्जी से किया था.....

और यकीन mano....mera दिल इस बात से उतना ग़मगीन नहीं था की मेरी अप्पी jaante-bujhte गोलू भाई से chudi.....balki इस बात से ज्यादा खुश मसहूस कर रहा था की अब मैं अपनी अप्पी के गरदाये बदन को एक मस्त लुंड से रगड़ कहते हुए देख पाउगा....

Main(man में)- bas...kisi तरह मेरी अप्पी भी मेरी अम्मी की तरह मेरे सामने खुल कर छोड़ने lage....tab तो कसम से जिंदगी जन्नत हो jaygi....apne घर में hi लाइव चुदाई का रोज मज़ा लगा.....

मैं यहाँ दिल hi दिल में खुश हो रहा था की जब तक अप्पी फ्रेश hi कर बहार आ गई और आते hi अपने कपडे पहन कर तैयार हो gai.....aur गोलू भाई का इंतज़ार करने लगी....

Khair....kuch वक़्त बाद गोलू भाई आ भी gaye....aur आते hi उन्होंने अप्पी को एक बड़ा सा बैग दे दिया.....

अप्पी- ये क्या है....

गोलू भाई- तुम्हारी छूट चुदाई का तोहफा समझ lo....kuch कपडे hai....jo तुम मेरे लिए पहनोगी....

अप्पी- पर इसकी क्या जरूरत thi...main तो आपके लिए नंगी भी हो गई हु na....aur अब तो होती hi रहूगी....

गोलू भाई- वो तो होगी hi...par ये खास hai.....main अपनी हर एक रंडी को खास कपडे देता hu....aur तुम अब मेरी रंडी ho....tum अब वैसे hi jiogi...jaisa मैं चाहुगा....

Appi(hairani से)- इसका क्या मतलब....

गोलू भाई- are...tum तो घबरा gai....are...ghabrane की बात nhi...main तुम्हे गुलाम नहीं बना raha....bas जब मैं तुम्हे छोड़ने aauga....us वक़्त तुम पर मेरा हक़ hoga...samjhi...

Appi(sharma कर)- तो ऐसा कहिये na....par...agar ये सब अम्मी ने देख लिया to...ise अपने कमरे तक कैसे ले jaugi....koi देख लेगा तो बबाल हो जायगा....

गोलू भाई- तुम उसकी फ़िक्र मत karo...main जा कर तेरी अम्मी को फसा कर रखता hu....aur तेरा बाप तो अभी आया hi nhi...raha khaleel....to वो कंप्यूटर में hi घुसा hoga....is बीच मौका मोल jayga....ab आओ मेरे piche....kyoki आज की रात मुझे अपनी रंडी इन नए कपड़ो में chahiye....samjhi na...chalo...

और फिर क्या tha....golu भाई aage-aage और अप्पी उनके piche....aur मैं उन्हें जाता देख कर तुरंत भाग कर अपने कमरे में आ gaya.....kyoki मैं जनता था की गोलू भाई अम्मी को कैसे फ़साने वाले है....

Khair....apne कमरे में बैठ कर मैंने कुछ देर इंतज़ार kiya....us बीच गोलू भाई अम्मी को ले कर उनके कमरे में चले गए और अप्पी अपने कमरे में घुस गई....

फिर मैंने मौका देखा और अम्मी के कमरे में जानने laga....to वह अम्मी की मस्त चुदाई चालु थी....

अम्मी का लिवास कमर तक चढ़ा था और गोलू भाई उनको बिस्टेर पर कुटिया बना कर चोदे जा रहे थे.....

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अम्मी- aahhh..aaj क्या हो गया aapko...na लुंड chuswaya..na कुछ aur....seedha छोड़ने hi लगे ...आह्हः...

गोलू भाई- क्या karu...teri गदराई जवानी लुंड को खड़ा कर hi देती है....

अम्मी- aahhh..par मेरा souhar...aahhh...wo आता hi होगा....

गोलू भाई- तो माँ छुड़ाए sala....tu बस छोड़ने पर ध्यान दे.....

अम्मी- aaahh.....to छोड़िये na....joor se...aaahh...main कब रोक rahi...aaahh...aahhh...

और अम्मी गांड hila-hila कर मस्ती में गोलू भाई का लुंड खाने lagi....ki तभी दरवाजे पर दस्तक हुई....

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अब्बू- अरे begum.....bheeter हो क्या....

Ammi(dheere से)- uumm...ye तो आ hi gaya.....ab क्या करे....

गोलू bhai(dheere से)- तू बात करती रह bas....bol दे की कपडे बदल रही hai....rok उसे....

अम्मी- uumm..ji,.....

अब्बू- अरे begum....jawaab तो दो....

अम्मी- aaiiii....wo main...uumm...main कपडे बदल रही hu......uuummm...

अब्बू- इस waqt....kyo...kahi जा रही हो या जा कर आई....

अम्मी- aah...nhi....wo bas.....aaahhhh...

अब्बू- begum...ye आवाज kaisi...kya हुआ....

अम्मी- uumm..wo कपड़ो में chheti...aaahhh...main...aahh...cheetiyan हो gai....aahh....

अब्बू- ohh...to जल्दी से नाहा लो....

अम्मी- aah...wahi करने जा रही hu...aap...uumm..aap ruko....main आती हु...

अब्बू- ठीक hai...aaraam से कर lo...main रुकता हु....

और फिर अम्मी ने जल्दी से अपना लिवास निकल फेका और पूरी नंगी हो कर गोलू भाई का लुंड चूसने लगी....

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अम्मी- uummm..uummm..uummhhh...aahh..ab जी भर कर छोड़ lo....wo इंतज़ार कर lega,....aaauummm..uuummm...uuummm...

गोलू भाई- क्यों nhi...tu पहले जी भर के चूस le....fir तेरी गांड मरता हु.....

और फिर अम्मी ने कुछ देर तक गोलू भाई का तगड़ा लुंड पूरी सिद्दत से चूसा और फिर गोलू भाई ने अम्मी को बापिस कुटिया बना कर उनकी गांड मारना सुरु कर दिया.....

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मैंने देखा की अब अम्मी पूरी बेफिक्री से अपनी गांड मरवा रही thi...bas अपनी चीखो को काबू में कर रही thi...taki अब्बू न सुन ले.....

फिर क्या tha....golu भाई ने अगले 20 मिनट तक अम्मी को कई तरीको से छोड़ा और लास्ट में अपना गाड़ा पानी अम्मी के मुँह पर निकाल दिया.....

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गोलू भाई- aahhh....maza आ गया.....

अम्मी- uummmm.....bahut मज़ा aaya.....aahhh....

अब्बू- अरे begum....nahana हुआ की नहीं....

अम्मी- है ji....bas 2 minute...kapde पहन लू....

अब्बू- जल्दी करो yaar.....mujhe वो थकान मिटने वाला सिरप पीना hai....aaj बदन दुःख रहा है मेरा....

वह मेरा अब्बू अपने सिरप के लिए बेकरार हो रहा था तो यहाँ अम्मी गोलू भाई का लुन्द्रास ऊँगली की मदद से अपने मुँह से उठा कर पि रही थी....

अम्मी- uummmhh....ji...abhi लती hu....(dhere से)- पहले अपना सिरप तो पि लू....

गोलू भाई- अब जल्दी kar....kahi दर्द से मर न जाए सका.....

अम्मी- ji....are....wo तो ठीक hai...par अब मैं क्या karu.....aapko वो यहाँ देखेगा to....to क्या kahugi...ya al**h....ab क्या करे...

गोलू बगै- कुछ खास nhi....tu बस दरवाजा खोल कर उसे भीतर कर le....jab वो भीतर आएगा.. तो मैं दरवाजे के बाजु में rahuga....aur उसके भीतर घुसते hi मैं बहार....

अम्मी- पर कही उसकी नजर आप पर पद gai....to....fir क्या होगा....

गोलू भाई- नहीं padegi...kyoki तू मेरे सामने hi कड़ी rahegi...samjhi...

अम्मी- hmm...samjh गई.....

गोलू भाई- तो अब कपडे पहन...

Ammi(liwaas उठा कर)- कपड़ो में क्या hai...sirf लुवास hi डालना hai...bheeter तो आप कुछ पहनने hi नहीं देते....

गोलू भाई- पता hai....wahi दाल le.....kyoki अभी तो तुझे और भी छोड़ना hai...tu बस इसे nipta...fir छोड़ता hu...chal अब...

फिर सब गोलू भाई के प्लान के हिसाब से ठीक hua....abbu सीधा भीतर आ कर बिस्टेर की तरफ gaye...ki तभी गोलू भाई चुपचाप बहार निकल gaye...aur उनके निकलते hi अम्मी ने दरवाजे लटका diye...taki अब्बू को कुछ दिख न सके....

Main(man में)- chalo....ab ये मामला तो khatm...dekhte है अब अगली चुदाई किसकी hogi,....ammi की या अप्पी की.....???

Khair....ammi की एक मज़ेदार चुदाई देखने के बाद मैं भी हॉल में आ gaya...jaha मुझे गोलू भाई नहीं dikhe....to मैंने सोचा की वो अप्पी के कमरे में hoge....par तभी मुझे गोलू भाई बाहर से आते दिखे....

गोलू भाई- अरे khaleel...tere अब्बू आ गए क्या....

Main(man में)- ohh...puch तो ऐसे रहे है जैसे पता hi न हो....

गोलू भाई- अरे बोलता क्यों नहीं...

मैं- ji...ji वो आ gaye....kamre में hai...bas अभी आये है.......

गोलू भाई- ohh..koi nhi....aaram कर्म दो thoda....main थोड़ी देर बाद आता हु....

इतना बोल कर गोलू भाई अपने कमरे में निकल gaye....par मुझे समझ नहीं आया की आखिर वो बापिस किसलिए आये the....kyoki मैं इतना तो जनता hi था की गोलू भाई बिना किसी मतलब के यु hi आ कर जाने वाले तो नहीं hai...to फिर बात थी क्या....???

यही सवाल ले कर मैं वही हॉल में बैठ कर जवाब के बारे में सोच hi रहा था की तभी मेरे सामने अब्बू के एक खास दोस्त आ gaye....hasan khan...jo उस मदरसे के ट्रस्टी the....jisme अब्बू तालीम दिया करते the.....aur इस वक़्त उनके साथ कुछ और लोग भी the....aur वो सब इस वक़्त काफी गुस्से में दिख रहे थे.....

Main(man में)- हसन chacha....wo भी इतने गुस्से me.....aur ये इनके साथ wale...inme से कुछ तो पुरे गुंडे hai...main जनता हु inko......psr ये सब इतने गुस्से में मेरे घर क्यों aaye....wo भी इस waqt.....pata नहीं अब कौन सी मुसीबत होने वाली है......????

नोट - अपडेट पोस्टेड frnds....hope ु लिखे आईटी....

थैंक्स फ्रेंड्स.....

कीप रीडिंग.......
 
अपडेट - 75

यही सवाल ले कर मैं वही हॉल में बैठ कर जवाब के बारे में सोच hi रहा था की तभी मेरे सामने अब्बू के एक खास दोस्त आ gaye....hasan khan...jo उस मदरसे के ट्रस्टी the....jisme अब्बू तालीम दिया करते the.....aur इस वक़्त उनके साथ कुछ और लोग भी the....aur वो सब इस वक़्त काफी गुस्से में दिख रहे थे.....

Main(man में)- हसन chacha....wo भी इतने गुस्से me.....aur ये इनके साथ wale...inme से कुछ तो पुरे गुंडे hai...main जनता हु inko......psr ये सब इतने गुस्से में मेरे घर क्यों aaye....wo भी इस waqt.....pata नहीं अब कौन सी मुसीबत होने वाली है......????

अब आगे.......

[ खलील की जवानी........]


मैं हसन चाचा को हैरानी से देख hi रहा था की मेरे कानो में उनकी रोबदार आवाज गूँज uthi......jo गुस्से से भरो हुई thi...jisse मैं थोड़ा सा सहम भी गया....

Hasan(gusse से)- कहा है तेरा अब्बू.....

Main(chounk कर)- wo..wo भीतर hi है चचाजान.....

हसन- तो बुला unhe....jaldi...

मैं- ji...abhi बुलाता हु....

और फिर मैंने अब्बू को हसन चाचा का बोल diya....jiske बाद अब्बू फ़ौरन बहार आये और हसन , अब्बू को साथ ले कर बहार चले गए....

मैं- ammi...ye आज हसन चाचू कुछ परेशान नहीं दिख rahe....aur अब्बू को बहार क्यों ले gaye...haa...

अम्मी- होगी कोई paresani...madarse का मामला hoga...tu परेशान मत हो....

फिर थोड़ी देर बाद अब्बू बापिस आ gaye....aur हसन बहार से hi निकल गए.....

अम्मी- are...hasan भाईजान रुके hi नहीं...

अब्बू- nhi...wo थोड़ा परेशान है......

मैं- abbu...paresan तो आप भी दिख रहे ho....kya हुआ....

अब्बू- huh...kuch nhi...madarse का मामला hai....tum इस सब में मत pado.....accha begum...tumne खाना बना liya.....wo मुझे खाना खा कर हसन के पास जाना होगा....

अम्मी- बस बना hi रही hu......bas कुछ hi देर में बन जायगा....

एयर फिर अम्मी किचेन में घुस गई और अब्बू परेशानी में कुछ सोचते हुए अपने कमरे में घुस गए....

Main(man में)- अब्बू कुछ ज्यादा hi परेशान दिख रहे hai....lagta है कैच संगीन मामला hai.....khair...isse मुजगे kya...ye तो बड़ो का काम hai...mujhe तो बस अपनी अम्मी और अप्पी का चुदाई का इंतज़ार hai....jo अब तो खुल कर hi hogi...abbu जो जाने वाला hai....hmm...

और फिर मैं भी अपने कंप्यूटर में लग gaya...aur उस वक़्त का इंतज़ार करने laga...jis वक़्त गोलू भाई मेरे घर में दाखिल होंगे....

फिर करीब 30 मिनट तक मैंने कंप्यूटर chalaya....aur जब मैं उठ कर हॉल में आया और पानी लेने की हैं की तरफ गया hi tha...ki मुझे कूचें से कुछ हलकी सी आवाज़ आई....

और जैसे hi मैंने चुपके से किचेन में dekha...to मैं चौंक gaya....kyoki किचेन में अम्मी के साथ गोलू भाई भी the.....jo की अम्मी को वही झुका कर छोड़ने में लगे थे.....

अम्मी- uummm...dheere....aap आज मरवा hi doge...aaahh....koi भी आ सकता है यहाँ....

गोलू भाई- तो आने de....tu मेरी रखेल hai...main तुझे खुलेआम भी छोड़ू तो कोई नहीं रोक sakta...samjhi....

अम्मी- uummm...to फिर ले चलो mujhe....aur जहा चाहे choodo....b दो सबसे की main...aahh..ki आपकी hu...bas आपकी....

गोलू भाई- वो दिन भी aayga....abhi तू मज़ा ले......

पर अम्मी और गोलू भाई का मज़ा खराब करने अब्बू हॉल में आ gaya...aur उनकी आवाज़ आते hi गोलू भाई ने अम्मी की छूट से लुंड निकाल कर अपने लोअर में कैद कर लिया और अम्मी ने तुरंत अपना लिवास सही कर लिया....

अब्बू- अरे khaleel....yaha क्या हो रहा है....

मैं- वो मैं पानी पिने आया था....

Abbu(golu भाई को देखते hi)- aree..golu ji...aap कब aaye...aur की हैं में क्या कर रहे है....

गोलू भाई- bas....wo मटन की खुसबू किचेन में ले aai....bas वही देख रहा था.....

अब्बू- ohh...to आइये na....khate hai...bas मैं hath-muh धो lu.....fir कहते है...

गोलू भाई- क्यों नहीं.....

अब्बू- begum...jara जल्दी कर do...mujhe जाना भी है....

अम्मी- ji....bas थोड़ा सा वक़्त lagega....aap hath-muh धो aaiye....tab तक बन जायगा ...

Ammi(abbu के जाते hi)- suniye....abhi खाना बना lu....fir वो जा hi रहा hai...to...

गोलू bhai(beech में)- समझ gaya....tum काम karo......baad में मिलता hu...aur kjaleel...ab तू आराम से पानी पि le.....fir तेरी अम्मी का पानी निकलते dikhauga....chal...

इतना बोल कर गोलू भाई किचेन से बहार आ गए और मैं अम्मी को देख कर मुस्कुराने लगा....

अम्मी- अब तुझे क्या हुआ....

मैं- आपका पानी nikalte-nikalte रह गया न....

अम्मी- है beta..kambakhat तेरा abbu...galat वक़्त पर aaya...vas थोड़ा और रुकता तो पानी निकल hi जाता...

मैं- कोई बात nhi...abbu के जाते hi सारा पानी निकल jayga....aur आज मैं भी वो पानी पिऊंगा....

अम्मी- besharam....ammi का पानी piyega...haa....

मैं- है ammi...aapka पानी मज़ेदार hi hoga....aaj मन मत करना....

Ammi(muskura कर)- ठीक hai....pi lena....par अब्जी तो ये पानी पि le....chal...

Khair....main पानी पि कर khushi-khusi अपने कमरे में जा hi रहा था की मैं अप्पी के कमरे को देख कर रुक गया.....

मैं- hmm....ammi की चुदाई तो बाद में hogi....par तब तक kya....chalo...appi को देखता hu.....dekhe तो क्या कर रही है मेरी appi....itna तगड़ा लुंड खाने के बाद....

और फिर मैं उस जगह pahucha...jaha से मैं अप्पी के कमरे में आराम से जहां सकता tha.....matlab की मेरे कमरे में बानी दीवाल के ऊपर से...

असल में मेरा और अप्पी का कमरा पहले एक बड़ा हॉल हुआ करता tha....par फिर अब्बू ने एक दीवाल बना कर उस हॉल के 2 कमरे करवा दिए.....

पर वो दीवाल छत से नहीं जुडी thi....isliye मैं आराम से स्टूल की मदद से दीवाल के उस पार अप्पी के कमरे का सारा नजारा देख सकता था....

असल में यही से मैंने कई बार अप्पी को आधा नंगा और नंगा भी देखा था....

Khair...jaise hi मैंने स्टूल लगा कर देखा तो मुझे उस पार अप्पी के साथ गोलू भाई भी दिखे....

अप्पी- पर abhi.....abbu-ammi आ गए to...khane को बुलाया तो....

गोलू भाई- तो बोल देना की पढ़ रही ho....baad में खा lena....aur तुझे कोई पढमे से रोकता भी नहीं....

अप्पी- ठीक hai...par धीरे karna....aawaaz न सुन ले कोई....

गोलू भाई- billul.....ab जल्दी से वो ड्रेस पहन le....fir तो तुझे नंगा होना hi है.....

अप्पी- जी...

Main(man में)- वह रे मेरी kismat.....jab तक अम्मी नहीं chudti...tab तक अप्पी की चुदाई hi देखने milegi....par खाने का क्या karu....ammi-abbu बुलाएंगे jaroor....kya करू...

फिर कुछ सोच कर मैं अम्मी के पास गया और उन्हें बहाना बनाया की मुझे सोना है क्योकि कंप्यूटर चलने से मेरी आँखे दुखने lagi....to मुझे सोने dena...taki बाद में..... मैं इत्मीनान से उनकी चुदाई देख सकू....

अब ये सब सुन कर अम्मी को भला क्या हर्ज tha....isliye उन्हीने मुझे सोने का बोल diya....aur मैं तुरनर अपना कमरा भीतर से बंद कर के स्टूल पर चढ़ गया......

और वह मैंने देखा की मेरी अप्पी एक नै ड्रेस पहन भी चुकी है और इस वक़्त वो घुटनो पर आ कर गोलू जी का लोअर नीचे कर रही है.....

मैं- ohh...to लुंड निकलने का वक़्त भी आ गया....

तभी अप्पी ने लिवर नीचे किया और गोलू भाई का तगड़ा लुंड अप्पी के सामने झूमने laga...jise देख कर अप्पी मुस्कुरा उठी....

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Appi(lund सहला कर)- uumm....kitna प्यारा दीखता है ye.....dil तो करता है की अपने पास hi रख लू....

गोलू भाई- तुम ऐसा hi समझो की तुम्हारे पास hai....jab मन करे बस मेरे पास आ जाया करो...

अप्पी- jaroor....waise ये कभी बइठरा भी है की नहीं....

गोलू भाई- ये लम्बी रेस का घोडा hai....baithne में नहीं बल्कि दौड़ने में मन लगता hai.....ab इसे अपने मुँह का स्वाद de....fir देख ये क्या धमाल करता है....

Appi(muh खोल कर)- aaaawww...kyo nhi....mere मुँह में भी इसे देख कर पानी भर aaya...dekho न....

ये बोल कर अप्पी ने मुँह खोल कर गोलू भाई को दिखा दिया और फिर मुस्कुराती हुई आगे झुकी....

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गोलू भाई- nhi...pahle अपने ये दोनों दूध बाहर करो....

अप्पी- आपको मेरे दूध बड़े पसंद आये na.....ye lo....ab तो चूसने दो न....

गोलू भाई- है तो le...le चूस.....

और ये बोल कर गोलू भाई ने अप्पी का सर दवा दिया और अप्पी में तुरंत मुँह खोल कर लुंड जातक लिया.....

अप्पी- hhmm..aauuummm.....uuummm..uummm..uummm...

और अप्पी बड़े प्यार से आधा लुंड मुँह में भरते हुए चूसने लगी....

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Main(man में)- ओह appi....tum तो इतनी गरम हो ki...aah...kash मुझे ये पहले पता hota...to मैं आपको भी मेला बुला कर din-raat chudwata...aur सायद अब तक आपके सामने खड़ा हो कर आपकी चुदाई देखने का काम भी सेट हो जाता...

वह अप्पी बड़े प्यार से लुंड चूसने में लगी थी और यहाँ मैं उन्हें देख कर पूरी तरह गतम हो चूका था...

पर गोलू भाई सायद हम दोनों से ज्यादा गरम the...isliye उन्होंने खुद hi अप्पी का मुँह छोड़ना सुरु कर दिया.....

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गोलू भाई- aahh...tera मुँह भी na....uummm..ise तो छोड़ने का hi दिल जरता hai...yeehh.....yeehh..

अप्पी- uummm..uuummm..uuummmm...uuummm...

गोलू भाई- aahh....ab तो तेरा मन ह hi choduga.....aaj के बाद तू मुँह छुड़वाने में माहिर हो jaygi.....dekh अब....

ये बोल कर गोलू भाई ने अप्पी का मुँह छोड़ने की रफ़्तार बड़ा di...par अप्पी कक इससे जरा भी फर्क नहीं पड़ा....

न hi अप्पी पीछे हुई और न hi ghabrai...balki पूरा मुँह फाड़ कर लुंड को अपने हलक तक पहुंचने लगी....

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एक तरफ अप्पी लुंड की ठोकरों का मज़ा उठा रही थी और दूसरी तरफ गोलू भाई की रफ़्तार बाद रही थी....

मैंने देखा की थोड़ी देर बाद hi गोलू भाई जोरदार तरीके से अप्पी का मुँह छोड़ने लगे.....

उनके धक्को की रफ़्तार इतनी तेज थी की हर धक्के पर अप्पी का पूरा बदन हिल रहा था....

पर न hi गोलू भाई रुकने को तैयार थे और न appi...aur न hi मेरा lund....jo पूरी रफ़्तार से पानी निकालते हुए मज़ा ले रहा था.....

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गोलू भाई- aaahhh....ab थोड़ा आराम से मज़ा मारते hai.....kafi देर से खड़े -खड़े hi मज़े हो रहे है...

अप्पी- aahhh...aahh...to बिस्टेर पर आइये na.....fir आराम से कर लेना....

गोलू भाई- हम्म....

और गोलू भाई जा कर बिस्टेर पर लेट गए और अप्पी को लुंड चूसने का इसरा कर दिया.....

उनका इसरा होते hi अप्पी बड़ी सराफत से बाजु में बैठ कर लुंड चूसने को हुई hi थी की गोलू भाई ने उनका सर पकड़ा और फिर से अप्पी का मुँह छोड़ने लगे.....

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मैं ये देख कर खुश भी था और हैरान bhi....ki आखिर मेरी सरीफ अप्पी एक hi दिन में इतनी बड़ी खिलाडी कैसे हो गई....

मैं देख रहा था की मेरी अप्पी को अब किसी भी तरह की कोई शिकायत और कोई तकलीफ नहीं थी....

अपोइ तो अब ऐसे दिख रही thi...jaise की वो सालों से गोलू भाई का लुंड खाने की आदि हो...

Khair.....golu भाई कुल मिला कर 30 मिनट से अप्पी का मुँह छोड़ रहे the.....is वजह से उनका लुंड अब आग उगलने लगा था....

और उनके तगड़े लुंड की आग को सिर्फ एक कासी हुई छूट और तगड़ी गांड hi बखूबी बुझा सकती थी...

इसलिए गोलू भाई ने अप्पी को रोका और उन्हें लिटा कर तागे फैलाइए और खच्च की आवाज के साथ पूरा लुंड अप्पी की छूट में उतार दिया.....

Appi(muh दवा कर)- uuuuuummmmmmmmm......aahuumm......

गोलू भाई- shhh...aawaaz nhi...muh दवाये rakhna.....kyoki मैं जोर से hi peluga...yeehhh....yeehh....

आउट गोलू भाई पूरी रफ़्तार से अप्पी को छोड़ने दने lage....aur अप्पी अपनी चीखो को दावते हुए चुदाई का मज़ा लेने लगी.....

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फिर कुछ देर बाद जब अप्पी की तकलीफ काम हुई तो उन्होंने गांड hila-hila कर लुंड खाना सुरु कर diya....aur ये देख कर गोलू भाई दोगुनी रफ़्तार से अप्पी को छोड़ने लगे....

गोलू भाई- अब तो तकलीफ नहीं न....

अप्पी- aahh..nhi....maza hi मज़ा hai...aaahh...karte rahiye....main bas...aahh..aahh...

और अप्पी झाड़ gai...par वो पास्ट नहीं हुई उल्टा मुस्कुराते हुए छुड़वाने लगी....

गोलू भाई- wah.....aaj तो तू अलग hi लग रही है....

अप्पी- aahh....sab आपकी मेहरवानी hai...aauummmm.....uuummm..

और अप्पी ने गोलू भाई का हाथ पकड़ कर अंगूठा चूसना सुरु कर diya....ye देख कर मेरे sath-sath गोलू भाई भी थोड़े हैरान थे....

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गोलू भाई- ये लिसलिये.....

अप्पी; uuummmhhh..aahh...chhoste हुए छोड़ने का मज़ा hi अलग hai...aaahh....laiye....mujhe चूसना है....

गोलू भाई- तो चूस na.....tu चूस और मैं तेरी फाड़ता hu....yeehhh..yeehhh. ईहहह...

और फिर कुछ देर तक मुझे बस अप्पी की चुसाई और उनके जिश्मो के टकराने की hi आवाज़ आती रही....

और ये आवाज़े तब तक नहीं thami...jab तक की अप्पी की छूट ने दोवारा से पानी नहीं बहा दिया....

अप्पी- uumnhh..aahhhh...aaahh...main फिर se...aahh..ammi....aapka लुंड to...aahh...

यु hi सिसकते हुए अप्पी दोवारा से खाद gai....par गोलू भाई इतनी जल्दी कहा झड़ने वाले थे....

इसलिए उन्होंने अप्पी को पलटा कर झुकाया और पीछे से चुदाई सुरु कर दी.....

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अप्पी- aahhh...aise तो और भी jyada...aaahh...maza aata.....aahh...

गोलू भाई- क्यों nhi....ye कुटियो के लिए खास चुदाई का तरीका hai....aur तू मेरी प्यारी सी चूड़ाकड कुटिया banegi...bol...banegi न....

अपोइ- aaahh...kyo nhi....jo kaho...aahh..wo banugi....bas छोड़ते raho....ab तो इस लुंड की तलफ सी होने lagi...aaahhh....joor से karo...aahh..aahhh...

अप्पी के मुँह से इस कदर की बातें सुन कर मुझे बिलकुल भी यकीन नहीं आ रहा था की ये मेरी hi अप्पी है...

क्योकि मेरी अप्पी तो चुदाई के बारे में खटाल भी नहीं करती thi...aur ये dekho...ye तो चुदाई की माहिर खिलाड़िन लग रही है....

अप्पी- aaah.....aaj रात ko..aahh...raat को क्या करना है....

गोलू भाई- तू bata....kya करू....

अप्पी- aahh..aap तो ammi...aahh..ammi को छोड़ोगे न....

गोलू भाई- beshaq....par तू क्यों पूछ रही है.....

अप्पी- aahh...kyoki मुझे bhi..aahh...mujhe रात ko...chudwana..aahhh...ammi....main..ahhh....aahh...

और एक बार अप्पी की छूट गोलू भाई के लुंड के सामने नहीं टिक सकीय और पानी छोड़ने लगी....

पर गोलू भाई का सायद अभी भी काम नहीं हुआ tha....isliye उन्होंने अप्पी को घुटनो से मोड़ कर झुका दिया....

अब अप्पी बिलकुल कुटिया की तरह अपनी गांड उठा कर गोलू भाई के सामने thi......to फिर गोलू भाई कहा रुक सकते थे....

उन्होंने अप्पी की बड़ी सी गांड सहलाई और फिर से चुदाई सुरु कर di....aur एक बार फिर से चुदाई का माहौल जैम गया......

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अप्पी कुटिया बानी हुई गांड हिला रही थी और गोलू भाई जोरदार धक्के मार कर उनकी छूट फाड़ रहे the.....jisse गोलू भाई की मजबूत जाँघे अप्पी की मोती गांड पर पद कर तड़का मचा रहो thi....aur साथ में अप्पी की हलकी सिसकियाँ मेरे लुंड को baar-baar झड़ने का काम कर रही थी....

Khair....golu भाई ने अप्पी को कुल 1 घंटे से ज्यादा तक छोड़ा और लास्ट में पूरा लुन्द्रास अप्पी की छूट में भर कर चुदाई को ख़त्म किया....

अपोइ- aaahhh....ab तो कुछ देर उठ भी नहीं sakti...aahh...kitna जोर से choda....aahh...

गोलू भाई- कोई nhi...tu आराम kar....aur फिर खाना खा lena...kyoki रात को इस से भी बुरा हाल होगा....

अप्पी- पर आप तो अम्मी के sath...to फिर...

गोलू भाई- मैं तुम दोनों के लिए काफी hu....dono ढेर हो jaogi...par मैं nhi....tu बस वो कर जो कहता hu....baki रात में आ कर batauga.....samjhi...ab ये चॉइस जार साफ़ kar...aa जा....

और फिर गोलू भाई ने अप्पी से अपना लुंड चुसवा कर साफ़ करवाया और फिर कपडे पहन कर बहार आ गए.....

और मैं चुपचाप आराम करने laga....kyoki अप्पी की चुदाई में मेरा हाल भी अप्पी की hi तरह tha....sala कितना पानी nikla....ye याद hi नहीं रहा....

Khair....golu भाई जब बहार nikle....tab अब्बू घर में थे hi nhi...wo तो पहले hi हसन चचाजान से मिलने निकल गए थे.....

इसलिए गोलू भाई को बहार निकलने में कोई परेशानी नहीं hui....unhone अम्मी को किचेन में देखा और दबे पाँव घर से निकल गए.....

Khair....appi की चुदाई दाई देख कर एक बार फिर से मैंने अपने लुंड को बड़ी तकलीफ दे दी thi...isliye मैं सीधा बिस्टेर पर लेट गया....

और थोड़ी देर बाद जब मैं कमरे से निकला तो वह अप्पी और अम्मी साथ बैठी हुई thi...aur अप्पी खाने की तैयारी में थी....

अम्मी- अरे khaleel...tujhe भूख नहीं लगी क्या....

मैं- लगी है na....bahut भूख लगी hai...main खाने hi आया था....

अम्मी- तो तू भी बैठ ja....teri अप्पी ने भी नहीं खाया अब tak....wo भी बेचारी भूखी है....

Main(man में)- अब अप्पी को क्या भूख lagegi....aaj दिन भर तो गोलू भाई जा तगड़ा लुंड खाया hai....huh.....

अप्पी- अरे ammi...aapne भी तो नहीं खाया na....chalo साथ में कहते है....

अम्मी- अरे nhi.....main बाद में khaugi...abhi भूख nhi...tum दोनों खा लो...

मैं- क्यों ammi...abhi गोलू भाई ने खाना नहीं खाया क्या....

अम्मी- नहीं na....pata नहीं वो जहा रह गए....

मैं- कोई nhi...aate hi hoge....aapko छोड़ कर जायगे कहा....

मेरी बात सुन कर अम्मी एकदम से मुझे घूरने lagi....to मुझे याद आया की वो अप्पी की वजह से ऐसा कर रही hai...kyoki उन्हें कहा पता था की अप्पी को अम्मी और गोलू भाई के रिश्ते की साड़ी खबर है....

मैं- wo..mera मतलब था की आपके हाथ का खाना उन्हें खींच ले aayga....wo आते hi होंगे....

गोलू bhai(bheeter आते हुए)- आते hi होंगे नहीं khaleel....aa gaya....chalo खाना लगाओ jaldi....fir मुझे बहुत काम है...

अम्मी- ji...aap baithiye...main अभी लाइ...

गोलू भाई अम्मी को इस तरह हुकुम दे रहे the...jaise की वो hi इस घर के मालिक ho....aur अम्मी भी उनकी बेगम की तरह सर झुका कर उनका हुकुम बजने चल दी...

वैसे अब मेरे घर के मालिक तो वही the....abbu की किसी को पड़ी hi नहीं thi....ammi और अप्पी के जिश्म तो अब गोलू भाई के लिए hi थे....

खैर..... थोड़ी देर बाद अम्मी हम सबके लिए खाना ले aai...aur हम सब एक परिवार की तरह साथ बैठ कर खाने का लुफ्त लेने लगे.....

फिर हम खाना ख़त्म कर के बैठे hi थे की तभी अब्बू आ gaye....jo की बहुत hi ज्यादा परेशान दिख रहे थे....

मैं- अरे abbu....aa गए आप....

अब्बू- हम्म...

अप्पी- क्या हुआ abbu...koi परेशानी....

अब्बू- अरे nhi.....bas काम की परेशानी hai...tum लोग अपनी पढाई karo...jao...

अब्बू के कहने पर मैं और अप्पी अपने कमरे में तो आ गए the....par मुझे यकीन था की अब्बू को कुछ खास परेशानी hai....jo की सायद हसन चचाजान की वजह से आई है....

यहाँ मेरे और अप्पी के कमरे में जाते hi अम्मी ने अब्बू से कुछ बोलना chaha....par अब्बू ने उन्हें रोक दिया....

गोलू भाई- bhaisaab....chalo घूम कर आते है....

अब्बू- नहीं गोलू ji...aaj दिल नहीं है...

गोलू bhai(khade हो कर)- दिल नहीं है तो हो jayga...aap थोड़ा चले to....dekhna...aap जब बापिस aayege...to ये साडी परेशानी भूल jayge....yakeen मानिये....

अब्बू- par...sach में मेरा दिल....

गोलू bhai(beech में)- बस कुछ देर के liye....aaiye न....

अब्बू- ठीक hai....ab आपको न कैसे kahu....chaliye....

और फिर अब्बू , गोलू भाई के साथ बहार निकल gaye....aur यकीन मनो dosto....jab वो बापिस आये तो उनके चेहरे पर परेशानी की कोई सिकन नहीं thi....balki वो बेहद खुश दिखाई दे रहे थे....

मैं ये soch-soch कर हैरान था की आखिर गोलू भाई ने ऐसा क्या जादू कर diya...jo मेरे अब्बू इतनी जल्दी खुश दिखने लगे....

क्योकि आम टूर पर मेरे अब्बू तभी परेशान होते थे जब परेशानी बड़ी ho...aur वो उस परेशानी की वजह से कई दिनों तक परेशान hi रहते थे....

पर आज गोलू भाई ने कुछ hi देर में उनका मूड ठीक कर दिया tha....jo की एक अजूबा hi tha....jis से मुझे ये जानने की ज्यादा hi बेताबी होने लगी थी की आखिर अब्बू की परेशानी का सबब क्या tha....aur गोलू भाई ने उसे दूर कैसे किया....???

पर फिलहाल ये सब जानना मेरे लिए मुमकिन नहीं tha....isliye मैं वो सब भूल कर उस वक़्त का इंतज़ार करने laga....jis वक़्त गोलू भाई आ कर मेरी अम्मी को छोड़ने वाले the....kyoki मैं ये जनता hi था की गोलू भाई रात को अम्मी को छोड़ कर hi जायगे....

पर उस वक़्त का इंतज़ार करते हुए मेरी आँख लग gai....aur जब आँख खुली तो काफी देर हो चुकी थी....

Main(man में)- ओह teri....main सो कैसे gaya....pata नहीं अब तक क्या हुआ hoga...kahi गोलू भाई अम्मी को छोड़ कर चले न गए हो....

ये सब सोचते हुए मैं जल्दी से अम्मी के कमरे की तरफ bhaga....aur मैंने जैसे hi भीतर झाँका तो वह अम्मी की ताबड़तोड़ चुदाई जारी थी....

एक तरफ मेरा मोटा अब्बू खर्राटे मारते हुए सो रहा था और दूसरी तरफ मेरी अम्मी गोलू भाई से अपनी गांड मरवा रही थी....

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ये नजारा देखते hi मेरे लुंड में जान आ gai....par जैसे hi मेरा लुंड खड़ा hua...waise hi गोलू भी ने अम्मी की गांड में अपने गरम लुन्द्रास की पिचकारी मार दी....

Main(man में)- अरे yaar.....yaha तो काम ख़त्म hi हो gaya....ohh..main सो क्यों गया tha.....haattt...

मुझे अम्मी की चुदाई न देख पाने का बेहद अफ़सोस tha.....par वही मेरी अम्मी को बड़ा सुकून tha...kyoki उन्होंने अपनी छूट और गांड इत्मीनान से मरवा ली थी...

Khair....ammi को छोड़ने के बाद गोलू भाई सीधा अपने कमरे में निकल gaye....jise देख कर मैं फिर से हैरान हो gaya...kyoki मुझे याद था की गोलू भाई ने अप्पी को रात में छोड़ने का कहा था....

Main(man में)- सायद गोलू भाई को नीड आ रही hogi....hmm...bechari appi....unki छूट तो बिना मरे hi रह gai....huh...chalo....ab मैं भी सो जाता hu....ab कुछ होने वाला तो है नहीं...

ये सोच कर मैं फिर से अपने बिस्टेर पर लेट gaya....par करीब ाफहए घंटे लेटने के बाद भी मुझे नीड नहीं aai....to मैंने सोचा की क्यों न अप्पी के रूम में झाँक कर देख lu....dekhu तो की अप्पी कर क्या रही hai...so रही है या फिर कुछ और,...

ये सोच कर मैंने स्टूल लगाया और दीवाल के उस पार देखने laga....par मुझे अप्पी नजर नहीं आई....

Main(man में)- सायद बाथरूम में hogi....bechari.....choot की आग ने नीड भी उदा di....huh...

पर मेरी सोच गलत nikli....kyoki 10-15 मिनट देखने के बाद भी अप्पी बाथरूम से नहीं nikli...to मुझे कुछ शक हुआ....

मैंने सोचा की सायद अप्पी , अब्बू के पढाई वाले कमरे में hogi...isliye मैं भाग कर उस कमरे की खिड़की पर gaya...par अप्पी वह भी नहीं thi...jisse मैं परेशान हो गया....

फिर मैं भगा और सीधा अप्पी के कमरे में घुस gaya.....jiska गेट भीतर से खुला tha....jisse मेरी परेशानी और बाद gai...aur फिर मैंने अप्पी का बाथरूम भी dekha...jo खुला हुआ tha...wo भी khali....to मेरी परेशानी बहुत hi ज्यादा बाद गई....

Main(man में)- ये kya...yaha भी nhi...to अप्पी गई kaha.....na कमरे me...na बाथरूम में और न hi ोाधै वाले कमरे me....to आखिर अप्पी gai....aa...ek minute....ya khuda....kahi appi...nhi...wo इतना जोखिम कैसे ले सकती hai...nhi....par saayad....ya al**ha.....dekhna तो होगा hi.....

यहाँ खलील इतना बोल hi पाया था की तभी हमे कुछ अयर्तों की आवाज सुनाई di....jise सुन कर हम सब दर गए और जल्दी से अपने लुंड को भीतर दाल कर सराफत से खड़े हो गए.....

[AAGE KI KAHANI....MAAJID KI JUWAANI.......]

तो हमने देखा की हमारे बाजु से hi कुछ आयतें जंगल की तरफ से आ रही थी....

ायरत- अरे ladko...yaha क्या कर रहे ho....wo भी इस वक़्त....

मैं- wo..wo हम तो bas..bas यु hi...

ायरत- यु hi kya....are यहाँ रात को जंगली जानवर भी आ जाते hai...chalo घर jao....dekho अँधेरा भी होने वाला hai....aur tum...tum तो मुमताज़ के लड़के हो न....

मैं- jj..ji...

ायरत- देखो beta...raat के वक़्त इस तरफ आना ठीक nhi...chalo...ghar चलो....

मैं- hmm..hum बस जा hi रहे थे...

जावेद- है chachijaan....hum बस निकलने hi वाले the....chal khaleel...ab कल खेलेंगे...

खलील- ha....chalo...kal hi khelege....abhi अँधेरा होने वाला hai...chalo...

और फिर हम सब दोस्त जल्दी से वह से निकल aaye...aur वो एयरटेन भी हमारे piche-piche hi गाओं की तरफ चल दी.....

Javed(basti में आ कर)- अबे कौन थी wo...aur कर क्या रही थी वह....

खलील- मैं क्या jaanu...aur हमे करना भी क्या hai...gai होगी jungle....chhod न...

मैं- है yaar....aur है तो गाओं की hi...tabhi तो मुझे जानती है...

जावेद- सही kaha....par अब आगे की कहानी कहा sune.....kyoki मुझे ये जानने की बड़ी बेताबी है की खलील की अप्पी फिर मिली kaha...mili भी या फिर....

Khaleel(beech में)- अरे मिली न....

जावेद- तो bol...kaha मिली...

Khaleel(muskura कर)- अब ये तो बाद में hi batauga...aur haa...uske साथ hi कुछ ऐसा भी batauga...jo सायद आम टूर पर सुनने में भी नहीं आता....

मैं- kya...ab ऐसा क्या है जो आम टूर पर सुनाई भी नहीं देता....

खलील- कुछ aisa....jisne मेरे घर की तस्वीर hi बदल di.....par वो सब अभी nhi....tum लोग भी थोड़ा tadpo...tab तो सुनने में मज़ा आएगा....

जावेद- ठीक है bhai....ab अपनी अम्मी का रसभरा जिश्म देख कर तो तड़पते hi hai....ye सोच कर भी तड़प lege....kyo माजिद....

मैं- है bhai.....ab तो तड़पना hi लिखा है अपनी तकदीर में....

खलील- अरे तड़प के बाद hi तो मज़ा आता है dosto.....are socho....jab हमारी घर की छूटें किसी तगड़े लुंड से फैट रही होती hai...tab हमे सुकून मिलता है की nhi...sach bolna....kyo मजीद....

मैं- ab....sukoon तो मिलता hi hai....aur मैं तो चाहता हु की रोज hi मेरी अम्मी गोलू भाई से chude...aur मैं मज़ा lu...kyo javed...tu क्या बोलता है...

जावेद- मैं तो सब बाद में hi boluga....tu आलम से पूछ le....kyo आलम...

Aalam(chounk कर)- huh...kya...kya बोलै...

खलील- abe...tu कहा खो gaya...kya तू भी अपनी अम्मी की चुदाई देखने लगा...

जावेद- गोलू भाई के sath....haa..aahahaha...

और फिर जावेद के साथ मैं और खलील भी हसने lage....jisse आलम थोड़ा सा शर्मा गया और मुस्कुरा उठा....

आलम- अबे nhi....abhi तो ऐसा कुछ हुआ nhi...khair....main चलता hu...mujhe अब्बू का एक काम याद आ gaya....chal...kal मिलते है....

इतना कह कर आलम चला gaya...aur फिर खलील और जावेद भी घर निकल गए...

पर आलम jate-jate मेरे दिल में एक सवाल छोड़ gaya....ki आखिर आलम को आज हुआ क्या था.....

आलम तो हम सब दोस्तों में सबसे ज्यादा बकचोदी करने वाला बाँदा tha....par आज वो पुरे वक़्त खामोश raha....aur अभी भी अपनी अम्मी का यु जिक्र आने पर बिना कुछ बोले चला gaya......jabki वो तो अपनी अम्मी के बारे में सबसे ज्यादा गंधा सोचता था.....

Khair....ab इस सवाल का जवाब तो आलम hi दे सकता tha.....isliye मैं भी ये सब भूल कर अपने घर चल diya...kyoki मुझे पता tha...ki मेरे घर पर भी कुछ ऐसा माहौल hoga....jisse मेरा दिमाग फिर किसी सोच में डूब जायगा...

पर जब मैं घर pahucha....to मैंने अपनी आँखों के सामने जो dekha....use देख कर मेरा दिमाग एक बार फिर से चक्र गया.....

Main(man में)- आखिर ये सब हो क्या रहा है मेरे घर me......har दिन कुछ अलग और हैरानी वाला मंजर hi देखने मिलता है mujhe....huh....pata nhi...ab ये क्या माजरा है.......????

नोट - अपडेट पोस्टेड frnds.....hope ु लिखे आईटी.....

थैंक्स फ्रेंड्स.....


कीप रीडिंग.......
 
अपडेट - 76

पर जब मैं घर pahucha....to मैंने अपनी आँखों के सामने जो dekha....use देख कर मेरा दिमाग एक बार फिर से चक्र गया.....

Main(man में)- आखिर ये सब हो क्या रहा है मेरे घर me......har दिन कुछ अलग और हैरानी वाला मंजर hi देखने मिलता है mujhe....huh....pata nhi...ab ये क्या माजरा है.......

अब आगे........

[ आगे की KAHANI......MAAJID की जवानी.......]


जब मैंने घर में दाखिल hua...to उम्मीद के मुताबिक सब उल्टा hua.....kyoki आज अम्मी घर में hi thi...aur अब्बू के साथ बैठी हुई है कर बातें कर रही थी....

और मेरा दिमाग इसलिए घूम रहा tha...kyoki अम्मी अभी अब्बू की गॉड में बैठी थी....

और मेरे अचानक आ जाने पर वो दोनों चौंक गए और शर्मिंदा हो कर जल्दी से अलग हो गए....

फिर उन्होंने मुझसे भी बड़े प्यार से बातें की और फिर हमने काफी दिन बाद एक साथ खाना khaya...aur खाना खा कर अम्मी, अब्बू अपने कमरे me....aur मैं अपने कमरे में सोने चला गया.....

Main(man में)- ये आज हो क्या रहा hai...sab अपनी तबियत से उलट काम कर रहे hai....ek तरफ aalam...jo जिंदादिल इंसान hai...wo आज bujha-bhuja सा dikha...aur एक मेरी ammi...jinke लिए मेरे अब्बू और मेरी अहमियत अब न के बराबर hi thi....wo आज बिलकुल पहले की तरह dikhi....kyo....aakhir माजरा क्या है...??

Khair....aalam का तो कल hi कुछ पता कर sakuga....par अम्मी ka....chalo देखु to...ki आज अम्मी सुकून से सो रही है या आज रात को फिर से कुछ धूम मचने वाली है....

यही सोच कर मैं अम्मी के कमरे की खिड़की पर gaya...aur मैंने देखा की अम्मी पूरी नागि हो जार अपनी जाँघे फैलाये लेती गई और अब्बू अम्मी की छूट चाट रहे है.....

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अब्बू- sssrrruuuuppppp....sssrrruuuupppp....sssrrruupppp......

अम्मी- aahh.....aahh...aakhirkaar...tum सीख hi गए....

अब्बू- sssrrruuuupppp....sssrrruuuppppp...sssrrruuuupppp.....

अम्मी- uuummmm..apni जवान भीतर दाल na.....aaahhh...puri दाल कर chooso....aaahhh..aise hi....aahhh...aahhh...

अम्मी ने अब्बू का सर अपनी छूट पर दवा लिया और अब्बू किसी कुत्ते की तरह अम्मी की छूट चूसने लगे.....

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फिर कुछ देर बाद hi अम्मी का जुषम अकड़ने लगा और उन्होंने अपना चुतरस अब्बू के मुँह में दाल diya....aur अब्बू भी बिना किसी शिकायत के पूरा रास जातक गए....

अम्मी- aaahhh....kaash तुम पहले hi ऐसे होते to....khair....maza आया न...

अब्बू- uumm...haa...behad मज़ा aaya....accha एक बात बोलू....

अम्मी- क्यों nhi....aaj तुम्हारी रात hai...jo दिल में आये वो कहो....

अब्बू- अगर इजाहत do...to क्या मैं गांड भी चॉइस सकता हु....

Ammi(muskura कर)- are....itni सी baat...maine कहा na....ye तुम्हारी रात hai....tumhe आज कुछ पूछने की जरूरत nhi.....jo दिल में आये karo....lo...meri गांड चाटना है na.....to lo....acche से चाटो....

ये बोल कर अम्मी पलट गई और एक टांग टेडी कर के अपनी गांड खोल di....aur अब्बू ने बिना वक़्त गवाए उनकी गांड में अपना मुँह दाल दिया.....

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अब्बू- aauuummmmm....uuuummmm...uuummmmm...

अम्मी- aahhh...choos...joor से choos....bheeter तक choos....aaj रात भर chois...aahhh..aahh.......

वह अब्बू , आंकी की गांड चाटने में लगे थे और ये देख कर मेरे दिल को सुकून मिल रहा था.......

आखिरकार बड़े दिनों बाद मेरे ammi-abbu इस तरह साथ the....jo मेरे लिए एक झटका भी tha...aur सुकून की बात bhi......kyoki मैंने खुद देखा था की अम्मी ने अब्बू के साथ क्या किया था और क्या कहा था....

पर आज वो दोनों एक अच्छे miya-biwi की तरह मज़ा कर रहे the...jise देख कर मैं खुश तो जरूर hua...par मेरे दिमाग में कई सवाल भी जाग गए....

Khair....ab इन सब सवालो के जवाब तो आने वाला वक़्त hi दे सकता tha...isliye मैं भी सब भूल कर सो गया....

===========================

[ आलम के घर पर.......]

यहाँ आलम जब अपने घर पंहुचा तो उसके घर का माहौल भी बिलकुल ठीक tha....uske घर में उसकी अम्मी, अब्बू, फूफी और डडिजान एक साथ बैठे गप्पे मार रहे थे.....

Khair....aalam को ये देख कर बेहद ख़ुशी हुई और उसने सोच लिया की जो भी उसकी अम्मी और डडिजान के बीच हुआ tha...wo तो सिर्फ hasi-majaak tha....jo अयर्तों के बीच चलता रहता है...

और रही डडिजान की छूट चुसवाने वाली baat....to उसमे कोई बड़ी बात तो थी nhi.....kyoki आलम के दादाजान तो फूफी के पैदा होते hi खुदा को प्यारे हो चुके the....to सायद डडिजान ने अपनी छूट को शांत करने का ये तरीका चुना ho...isme बदनामी भी नहीं हुई और मज़ा भी मिल रहा है.....

और डडिजान का गरम होना लाज़िमी भी tha...kyoki उनकी उम्र कोई ज्यादा थोड़े hi thi.....wo तो निकाह जल्दी हो गया तो बच्चे भी जल्दी हो gaye...warna अभी तो उनकी छोड़ने की उम्र बाकि hi है...

ये सब आलम खाना कहते वक़्त सोच राग tha....aur दिल hi दिल शुक्र मन रहा था की अभी उसके घर में कुछ भी गलत नहीं....

पर कही न कही उसे इस बात का अफ़सोस भी था की वो अपनी अम्मी के मदमस्त बदन को नंगा नहीं देख sakta....aur उनकी किसी तगड़े लुंड से चुदाई होते देखने का ख्वाब भी अधूरा सा लग रहा था....

Khair....khane के बाद सब apni-apni जगह सोने को चल diye....aur आलम भी सुकून से सोने लगा और ख्वाबो में अपनी अम्मी के जिश्म को कैसे हुए बुर्के में देखते हुए गहरी नीड में चला गया.....

फिर करीब रात को 2 बजे आलम की नीड tooti....aur उसने पाया की उसका लुंड पानी छोड़ते हुए उसकी चड्डी को भीगा रहा है.....

आलम- uuff...ammi....tumne तो बिना कपडे निकाले hi मेरे लुंड का पानी निकाल diya....pata नहीं कभी तुम्हे नंगा देख भी पाउगा की nhi....par अगर ऐसा हुआ na....tab तो मेरा लुंड पानी निकलते रुकेगा hi nhi.....aur अगर कभी तुम कुसी तगड़े लुब्द से चुदवाती दिख गई na....aaahh...tab तो समझो मेरा लुंड काम से jayga....ufff..ammi.....kab पूरा करोगी मेरा khwaab....tum भी माजिद की अम्मी के माफ़िक़ गोलू भाई से छुडवालो na.....tumhe भी मज़ा और मुझे bhi.....aahh..

ये सब सोचते हुए आलम ने अपने लुब्द की पूरा खली किया और फिर बाथरूम में जा कर अपने आपको साफ़ किया.....

पर इस सब से उसकी नीड जाती rahi...isliye वो दिल बहलाने ऊपर वाली मजिल के खुले बरामदे में चला गया....

पर इससे पहले की वो हलकी ठंडी हवा के झोको का मज़ा ले pata.....uske कानो में एक हलकी सी आवाज padi....jo किसी ायरत के सिसकने की थी.....

Aalam(man में)- ये aawaaj...ye कहा से aai...aur है कौन ये aourat....uh...sirf एक बार hi आई thi....saayad मेरा वहां hoga....waise भी मैं खुले बरामदे में hu.....ghar के सामने से आई hogi...huh...

फिर आलम आराम से अपने घर के सामने फैली बस्ती को देखते हुए ठंडी हवा खाने laga....ki तभी उसे दोवारा आवाज aai....aur इस बार आवाज तेज thi....wo भी सिसकी की आवाज nhi...balki एक हलकी चीख ki...jaise कोई ायरत तकलीफ से तदपि हो.....

आलम- आखिर ये हो क्या रहा hai...ye आवाज....

तभी फिर से एक हलकी चीख आलम के कानो में पड़ी और आलम चौकन्ना हो गया.....

आलम- अब तो ये बात पक्की है की कोई तो है जो तकलीफ में hai....par है koun...aur kaha.....kyoki यहाँ तो नैन अकेला hi hu....aur जो पीछे कमरा hai....kahi कमरे से तो nhi....par वह कौन हो सकता है.....

ये सोचते hi आलम का दिमाग घूम ा सुरु हो gaya....kyoki उसे पता था की अम्मी तो अब्बू के साथ सोइ हुई है और फूफी भी डडिजान के साथ लेती hai...to उसके घर में अब कौन सी ायरत है जो इस कमरे में हो सकती है....

Aalam(man में)- ये मैं क्या सोचने laga....nhi...ye कमरा तो खली hi रहता hai....bas तभी खुलता है जब कोई मेहमान आता hai.....to ye..nhi....yaha नहीं हो सकता कोई भी....

आलम का दिल भले hi इस बात से इंकार कर रहा था की कमरे में कोई हो सकता hai...par दिमाग के किसी कोने में ये ख्याल जरूर था की सायद कमरे में कोई hai....ab कौन है ये तो देख कर hi पता चलेगा.....

इसलिए आलम ने अपने फील को मजबूत किया और उस कमरे के दरवाजे तक pahucha....par हाथ लगते hi उसे पता चल गया की दरवाजा बंद है....

आलम- ओह teri.....matlab सच में कोई भीतर hai....par koun.....kya ammi...dadijaan...ya fir....ya khuda.....yaad aaya.....aaj सुबह फूफी इसी कमरे में thi....aur जब मैं ऊपर आया तो जल्दी में इसे बंद कर के नीचे निकली thi....to क्या फूफी....

आलम अब पूरी तरह से हैरान tha...kyoki उसने तो aaj-tak अपनी फूफी के बारे में गलत सोचा भी नहीं tha....uper से उसकी फूफी थी भी बेहद hi sareef.....wo तो हमेशा बुरखे में hi रहती thi....matlab की घर के baahar....aur तो aur...aaj तक उन्होंने गाओं में भी किसी के मुँह से फूफी की कोई बुराई नहीं सुनी thi....jisne भी bola...usne फूफी को बेहद hi सरीफ और मजहबी खातून bataya.....jo उपरवाले की इबादत और घर के कामो के अलावा कुछ सोचती भी नहीं थी....

आलम- और फूफी के सौहार भी तो कितने अच्छे hai....fufi की िन्दगी को खुशाल रखने की खातिर दूर सहर में काम करते hai...aur जब भी आते hai...fufi को और बाकि सबको तोहफे लेट hai...auf फूफी को घूमने ले जाते है....

आलम का दिल एक बाद फिर उसके दिमाग से अलग सोचने लगा tha.....uska दिल बोल रहा था की फूफी सरीफ ायरत hai....par दिमाग बोल रहा था की फूफी साल में 2 महीने के लिए hi अपने सौहार के साथ रहती hai...baki वक़्त तो वो अकेले hi रहती hai...kyoki उनके सौहार हर 6 महीने में 1 महीने को आते है.....

आलम- हो सकता है फूफी को बदन की गर्मी परेशान करती ho...aakhir है तो एक बगरे जिश्म की malkin.....to उसके लिए koi....nhi....fufi ऐसा तो नहीं कर sakti....par हो सकता है की वो खुद hi अपनी garmi...jaise dadijaan....haa...saayad यही होगा....

जैसे hi आलम के दिल में ख्याल आया की उसकी फूफी सायद अपने जिश्म की ठंडा कर रही है तो उसके लुंड में सनसनी सी होने लगी.....

आलम- फूफी भी अम्मी से काम nhi...unka जुषम भी जबर hai....saayad मुझे उनके नंगे जिश्म का नजारा मिल jaaye....haa...aur इस कमरे की खिड़की भी खुली हुई hai.....ab तो कोई परेशानी hi नहीं hogi...main अभी दावे पॉब्लब जाता hu...aur मज़ा लेता हु ...

ये सोच कर आलम दावे पाब खिड़की तक पंहुचा और फिर अँधेरे से भरे कमरे में देखने की कोसिस करने laga...aur जैसे hi उसे कुछ समझ आया तो उसकी धड़कन बाद गई...

क्योकि भीतर फूफी अकेली नहीं thi.....balki कोई और भी tha....wo एक मर्द था....

Aalam(man में)- या al**h....matlab फूफी किसी गैर मर्द के sath.....ye तो मैंने कभी सेक्स च भी नहीं tha...ki फूफी ऐसा karegi.....par कुछ भी ho......ye नजारा देख कर मेरी तो रात बन gai....bas थोड़ी रौशनी होती तो सब साफ़ दिख jata....abhi तो बस इतना समझ आ रहा है की मर्द लेता हुआ फूफी के डॉइड मसल रहा है और फूफी उसका लुंड हिला रही है.....

फिर आलम ने ये मान लिया की भीतर फूफी किसी गैर मर्द से छुड़वाने वाली hai....isliye आलम सब कुछ भूल कर बड़े गौर से आँखे गड़ाए भीतर देखने लगा.....

भीतर वो मर्द फूफी के दूधो को जोर से मसल रहा tha...jisse फूफी की आह निकल रही thi....par फूफी तकलीफ से सिसकते हुए भी उसका लुंड नहीं चूड रही thi...balki हिलती hi जा रही थी.....

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मर्द- क्या बात hai....aaj कुछ chup-chup सी है मेरी रांड......

Aalam(man में)- ये aawaaj....lagta तो है की कभी सुनी hai....par kiski....khair chhodo....mujhe kya......dekhe तो फूफी क्या बोलती hai...kuch बोलती भी है की नहीं.....

Mard(doodh मसल कर)- बोल न randi....koi मर गया क्या.....

फूफी- uuuiii......main mari....aahh....kitni जोर से मसलते ho....thoda तो रहम करो....

Aalam(khush हो कर)- ये फूफी की आवाज को क्या hua....kuch अलग लग रही hai.....saayad चुदाई के नशे में hogi...haha.....

मर्द- क्या hua.....tere गांडू सौहार ने कुछ बोलै kya....ya उसकी अम्मी ne......haa....

आलम- ohh..to इसे भी पता है की फूफी की सास आई थी आज दिन me.....lagta है काफी गहरा रिश्ता है दोनों का.....

फूफी- नहीं ji.....mera सौहार तो कुछ नहीं bolta....bada सरीफ hai.....mujhe सवाल भी नहीं karta....tabhi तो मैं आपके साथ पूरी रात बिता पति hu....aur उनकी ammi....wo तो मेरे hi तरफ बोलती है....

Mard(nippal दवा कर)- तो फिर किसने गांड मार ली teri.....jo इतनी खामोश है....

फूफी- bas...wahi पुराणी paresaani....wo...

Mard(beech में)- है पता hai....ab फिर से मत सुरु हो ja....jaldi hi तेरा काम हो jayga.....aur याद rakhna....ye आखिरी बार hai....agli बाद मुझे हां में जवाब चाहिए.....

Fufi(lund चूम कर)- uuummmhhh....vaada...agli बार कोई शिकायत का मौका नहीं दूगी.....

मर्द- ठीक haii...kal कर hi lena...ab तो खुश है न.....

फूफी- bahut..bahut...bahut खुश हु मेरे maalik....ab आप हुक्म करो....

मर्द- अब भी हुक्म karu....maine तुझे किस kiya.....ab तू मुझे खुश कर....

फूफी- वो तो करूगी hi....aur ऐसा करूगी की आप मज़े से झूम uthooge....aur बोलोगे की ऐसी रखेल किसी की नहीं हो sakti...jaisi मैं हु आपकी....

Mard(muskura कर)- accha....to देर किस बात ki......suru हो जा....

और फिर क्या tha.....fufi ने उस मर्द का लुंड हिलाते हुए अपना सर झुकाया और लुंड का सूपड़ा होंठो में दवा कर चूसने lagi....aur साथ hi साथ लुंड भी जोरों से हिलने लगी.....

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मर्द- aah.....tu है बड़ी chalu.....baat भी मनवा लेती है और मज़ा भी खूब देती hai....uumm....karti रह......

फूफी अब पुरे जोश में गर्दन hila-hila कर सुपडे को चॉइस कर थूक से सराबोर कर रही thi.....is वजह से उनके bade-bade डॉइड हवा में हिचकोले खाने लगे the...jise देख जार आलम की गर्मी और ज्यादा बाद गई.....

आलम- uummm..fufi के दूध to...ye तो पहले आम की तरह the....par अब तो पापीती की तरह bade-bade हो गए hai...lagta है डैम से मसलवटी hai...uffff... फूफी.....

यहाँ आलम मज़े में डूब रहा था और वह उस मर्द का तगड़ा लुंड अब अपनी पूरी ायकाट पर आ चूका था.....

और जैसे hi मर्द गरम हुआ तो उसने फूफी जा सर दवा दिया और फूफी भी बिना किसी सवाल के पूरा लुंड गले में भर्ती चली गई....

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फिर कुछ देर तक वो मर्द फूफी के सर को दवाये हुए उनके गले में लुंड भरे रहा और जब फूफी की सांस पूरी तरह से बंद होने lagi....tab जा कर उसने फूफी का सर छोड़ा.....

फूफी- aaauuukkk...aaahh......aap na....aahh..meri जान ले लोगे एक दिन....

मर्द- अरे तेरी जान कैसे luga...tujhe तो अभी बहुत काम जरने hai...chal..dowara से.....

फूफी- पता नहीं आपको मुझे तड़पा कर चुके दने में hi मज़ा क्यों आता hai....is बार थोड़ा रहम करना....

ये बोलते हुए फूफी ने फिर से पूरा लुंड गले में भर लिया और उस मर्द ने फिर से फूफी का सर दवा liya....aur इस बार तो उसने तब फूफी को chhoda..jab फूफी फड़फड़ाते हुए बिस्टेर पर हाथ पटकने लगी....

फूफी- aaaauuuukkkkk.....aaahh...aammii....maar hi गई thi...aaahhh....

मर्द- तू मुझे खुश करना कघ्टि है na....bas मैं ऐसे hi खुश होता हु....

फूफी- aaahhh...main आपको आज इतबा किस करुँगी की आप अपनी बाकि रखेलों को भूल jayge.....aaauuummmmmmm........uuummmmmm....uuuummmm...

और फिर फूफी खुद से hi पूरा लुंड गुप्प कर के जोरों से चूसने lagi....aur वो मर्द फूफी की गांड पर हाथ थपथपाने लगा....

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आला ने ऐसा नजारा पहले कभी नहीं देखा tha....wo भी अपने घर की किसी खातून के sath.....isliye आलम का लुंड अब पूरी तरह से ताव में आ चूका था.....

वह फूफी ने जी भर कर लुंड को चूसा और फिर लुंड को अपने थूक से नहलाने के बाद अपना मुँह गोतो पर लगा दिया और गोतो को मुँह में दवा कर चूसने लगी....

एक तरफ फूफी गोते चूस रही थी तो दूसरी तरफ लुंड को joor-joor से हिला रही थी....

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मर्द- aahh...maza आ गया randi.....joor से kar....aahh....tu तो सच में लाजवाब रखेल गई meri....uuumm...

आलम- या al**h....ye फूफी तो एक नुमनवर की रंडी hai....aur दिखने में to....saka कोई बोल भी नहीं सकता की फूफी इस कदर किसी मर्द को किस कर सकती hai....aaahhh....fufi...nain गया.....

यगा आलम के लुंड ने पानी की पिचकारी मार di....par वह उस मर्द का तगड़ा लुंड किसी कड़क लोहे की रोड की तरह सीधा खड़ा tha....aur फूफी झुकी हुई उसके गोतो को थूक से तरबतर कर रही थी....

कुछ देर बाद फूफी ने जब दोनों गोतो को अपने थूक से नहला diya...to वो उठ कर उस मर्द के पैरो की तरफ बैठ गई और फिर उस मर्द की टाँगे खोल कर उसकी गांड को फैलाया और एक लम्हे में अपना मुँह उस मर्द की गांड में घुसा दिया.....

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मर्द- aaahhh...tu saali....randi गांड चाट कर hi मानेगी....

फूफी- aaauuummmmmmhhh...aahh...kya kare...hum पर्दापरस्त आयतों को असली गैर मजहबी मर्द की गांड चाटने का बेहद सूक hai....hum तो चाहते है की गैर मजहबी मर्द हमारे परदे को फाड़ जाए गुमे हलील करते हुए thoke....hume वो सब पसंद है जो सड़क चाप रंडी भी न kare....jaise आपका पेशाब अपने हलक में उतरना.....

मर्द- वो भी milega.....tu जो कहे वो milega....chal.....karti रह.....

यहाँ फूफी फिर से उस मर्द की गांड में अपना मुँह चिपका कर गांड का छेद चाटने lagi...aur वह आलम हैरानी से पागल होने लगा.....

आलम- ये kya.....fufi क्या बोल रही hai...matlab हमारी खातून गैर मजहबी से जलील होना पसंद करती hai.....uski गांड चेतना और pesaab....kya सच में फूफी इसकी पेशाब पीती है या fir....uuff...waise क्या नजारा होगा ye....ek असली मर्द के तगड़े लुब्द से निकलती गरम पेशाब और एक पर्देदार खातून का सुराही दार gala.....aaahh...

काश एक बार मेरी अम्मी भी गोलू भाई के लुब्द से निकलने वाली पेशाब अपने हकक में उतारते दिख jaaye....uummmmm.....kitna गरम नजारा होगा wo....uuff ammi.....tum क्यों नहीं बन जाती गोलू भाई की rakhel....aahh....

यहाँ आलम अपने hi ख्यालों में खोया हुआ दोवारा गरम हो रहा था और वह फूफी ने उस मर्द की गांड chat-chat पूरी गीली कर दी थी....

फिर भी फूफी जा दिल नहीं भरा tha.....isliye उन्हीने अपनी जवान को नुकीला कर के उस मर्द की गांड में दाल दिया और उसे ऐसे चैहटन लगी जैसे की भीतर कोई मीठी चीज भरी हुई हो.....

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ये सब देख कर आलम का लुंड फिर से भर gaya.....aur वो मर्द भी पूरा जोश में आ गया....

मर्द- बस कर raand......chal यहाँ aa.....ab तेरी गांड मरता hu......aaja....

फूफी- aaahhh.....aap क्यों तकलीफ लेते ho....aapki गुलाम खुद hi अपनी गांड मरवा लेगी....

ये बोल कर फूफी उठी और उस मर्द की कमर के दोनों तरफ घंटे टिका कर बैठ gai....aur फिर फूफी ने खुद hi उसका तगड़ा लुंड अपनी गांड के छेद पर लगाया....

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मर्द- ruk....agar तेरी चीख तेरे घर में न goonji....to आज के बाद तुझे हाथ भी नहीं lagauga....samjh गई न....

Aalam(man ने)- ohh...matlab ये है की फूफी को पूरा लुंड एक साथ गांड में घुसवाना hoga...par ये पूरा jayga....kutna बड़ा hai...aur मोटा भी.....

आलम लुंड का आकार देख कर हैरान था पर उसकी फूफी को कोई हैरानी नहीं thi.....usne लुंड को ठीक से गांड के छेद पर फसाया और फिर जोर से अपनी भरी भरकम गांड को दवा दिया.....

फूफी- aaaaammmiiiiiiii........aaaaahhhh.......maar gai......aaaahhh....

फूफी ने सच में एक बार में लगभग पूरा लुंड गांड में डलवा लिटा tha....aur उनकी चीख भी इतनी जोर से गूंजी की सायद नीचे तक ammi-abbu और डडिजान को भी सुनाई दे गई हो.....

मर्द- शाबाश मेरी randi.....tujhme कोई बात तो hai....chal अब बैठने का वक़्त nhi.....apni गांड को utha-utha कर मज़ा le....chal...aur रफ़्तार में कोई कमी न ho.....samjhi....

फूफी- aaahhh....ji malik.....koi शिकायत नहीं hone...aaahhh....main abhi...bas...aahhh..aahh..aahhh...aahhh...

और आलम की फूफी बिना वक़्त गवाए तड़पती हुई गांड uchaal-uchaal कर वो तगड़ा लुंड खाने लगी.....

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फूफी इतनी जोर से उछाल रही थी की जब उनकी गांड उस मर्द की मजबूत जांघो पर gieti....to एक थपका सा maarti....jiski आवाज सुन कर hi आलम का लुब्द झटक जाता था.....

Aalam(man में)- ओह्ह्ह fufi....tum तो सबसे बड़ी रंडी ho....saala गांड फतवा dali....aur देखो to....har धक्के पर रोने की आवाज आ रही hai...par हिम्मत dekho....raftaar में कोई कमी नहीं.....

Khair.....aalam बड़े गौर से अपनी फूफी की गांड में उस मर्द का तगड़ा लुंड aata-jata देख रहा tha...ki तभी उसे कुछ अजीब laga....jisse वो सोच में पद गया....

Aalam(man में)- एक बात समझ नहीं aai...ye फूफी की गांड अचानक बड़ी कैसे हो gai....ye तो अम्मी की गांड के माफ़िक़ hai....waise hi बगरी भरकम और भरी हुई चौड़ी gaand.....hmm...lagta है अब से फूफी को भी गौर से देखना hoga.....tabhi तो पता चलेगा की उनका जिश्म किस कदर बाद रहा hai....baki अम्मी पर तो मेरी नजर हर वक़्त रहती है.....

आलम अपने आप में hi मस्त था की तभी उसकी फूफी की जोरदार चीख निकली और वो अचानक से गांड टिका कर बैठ gai....jisse आलम समझ गया की फूफी झाड़ चुकी है....

Khair.....fufi के झड़ते hi उस मर्द ने फूफी को अपने सेने पर झुका लिया और जोर से उनकी गांड मरने लगा....

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मर्द- क्यों रे saali....bada बोल रही थी की खुश karegi....ab क्या hua....itni जल्दी जवाब दे गई....

फूफी- aaahh...ye आपका lund....aaahhh...ye तो 5-6 बार पानी निकाल कर hi...aaahhh....dam lega....aahh..aahh...

मर्द- accha....waise तेरा सौहार कितना ोानी निकलता था.....

फूफी- aaahhh...muskil से ek...aaahhhh....ammi....aahhh...ek बार hi....aaahhh...

मर्द- थोड़ा रुक saali.....abhi मत झाड़ jaba....yeeehhh..yeehhhh...yeeehhhh...

और वो मर्द फूफी का जिश्म अपनी मजबूत बाहों में दबोच कर पुरे जोश से फूफी की गांड फाड़ने लगा......

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फूफी उस ताक़तवर मर्द की बाहों में फांसी हुई joor-joor से चीख रही thi....par वो बेरहमी से फूफी की गांड का भरता बनाये जा रहा tha....uska तगड़ा लुंड sata-sat की आवाज के साथ फूफी की गांड में aa-ja रहा tha....jise देखते हुए आलम के लुंड ने फिर से पिचकारी मार दी......

आलम- aaahh...fufi....tum तो मेरी बंद hi बजा dalogi....itni गरम और चुड़क्कड़ कब हो गई tum......aaahhh.....ammi....kaash तुम भी मुझे ये नजारा दिखा दो to...uummm...

आलम भले hi अपनी अम्मी की चुदाई दाई नहीं देख रहा tha....par उसकी आँखों में तो उसकी अम्मी hi चाय हुई थी...

Khair....aalam अपनी मस्ती में मस्त था और यहाँ उस मर्द के जोरदार धक्को ने उसकी फूफी को दोवारा झड़ने ओर मजबूर कर diya....aur फिर से वो एक जोरदार चीख मार कर पास्ट पद गई....

फूफी- aaahhh....aap किस बात का बदला ले रहे hai....itni जोर se...aaahhh...kaha है मेरा souhar.....aaahhh.....mujhe बचा लो inse...nhi तो मैं मर jaugi.....aaahh...

मर्द- उसकी अम्मी की गांड maaru.....wo गांडू क्या कर lega.....haa...

फूफी- aahh...ab करने को तो एक hi काम कर सकता है वो....

मर्द- accha...aur वो कौन सा काम है....

फूफी- वो खुद की गांड खोल कर कुत्ता बन jayga....aur आपके इस तगड़े लुंड से अपनी गांड मरवा lega....hehehe....

फूफी की बात सुनते hi उनके sath-sath वो मर्द भी ठहाका लगा कर हसने laga.....aur ये सब सुन कर आलम बहुत hi ज्यादा हैरान हो गया.....

Aalam(man में)- ये kya...fufi तो अपने hi सौहार को जलील कर रही hai....par kyo....are मज़ा ले रही है वो तो ठीक hai....par अपने सौहार को जलील jarna..ye तो ठीक बात नहीं.....

मर्द- चल मेरी randi....ab खुश कर मुझे.....

फूफी- है मेरे sartaaj.....aaj रात आप हमारे मेहमान hai....to आपकी खातिरदारी में कोई कमी नहीं aaygi....aapki ये रखेल आपको पूरी तरह खुश कर के hi अपने गांडू सौहार के पास जायगी......

इतना बोल कर फूफी उठी और उस मर्द को लिटा कर उसका चौड़ा सीना चाटने lagi....aur फिर उन्होंने उसके निप्पल को मुँह में भर कर चूसना सुरु कर दिया.....

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मर्द- aahh...ye क्या जार रही है randi....chhod.....

फूफी- uuummmmhhh...aahh...nhi मेरे sartaaj.....aapki ये रांड आज आपके जिश्म के हर कोने को चूसना चाहती hai.....ijajat दे दीजिये......

Mard(has कर)- ठीक hai....aaj वैसे भी मैं बहुत खुश hu....to चल तू कर ले अपने दिल की......

फूफी- सुक्रिया मेरे malik.....aaauuummmm..uuummmmm...

और फिर फूफी ने bari-bari उस मर्द के दोनों निप्पल चूसे और फिर अपनी जवान निकल जार उसके पुरे सीने और पेट को chaat-chaat कर गीला कर दिया.....

पर फूफी इतने पर भी नहीं ruki....unhone उस मर्द को पलटाया और उसकी पूरी पीठ भी अणि जवान से चाट li....aur फिर जवान घूमते हुए उसके पैरो तक आ gai....aur फिर उसके तलवे ऐसे चाटने लगी जैसे की उसमे सहद भरा हो.....

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फूफी ने बेशर्मी की इंतहा कर di....aur ये देख जार आलम एक बार फिर से झाड़ गया.....

आलम- या khuda......aaj तो मैं gaya.....fufi to....uummm....

वह फूफी ने उस मर्द के तलवो को अच्छे से छठा और पैरों की हर एक ऊँगली को तरीके से chhos-choos कर लेट गई....

फूफी- मेरे malik....ab आप मेरे ऊपर aaiye....aur मुझे वो दीजिये जो मुझे बेहद पसंद है....

ये सुन कर आलम तो कुछ नहीं समझा पर वो मर्द समझ gaya....aur वो उठ कर फूफी के मुँह पर बैठ गया....

वो मर्द फूफी के मुँह पर इस कदर बैठा था की उसकी गांड का छेद फूफी के मुँह पर tha...aur फूफी बड़े ने से उसकी गांड चाटने में लगी हुई थी.....

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Aapam(man में)- बस fufi...bas karo....aisi गाँधी chudaai....uufff...kaash मेरी अम्मी भी इस कदर गाँधी चुदाई जा लुफ्त उठती तब तो उन्हें देखने में मज़ा hi आ jata....uff....fufi....tum hi अम्मी को समझा लो na.....dekhi मन न कैसे तरस रहा हु ुसलंकी चुदाई देखने ko.....kaash मैं मजीद या खलील hota....kambakht दोनों hi अपनी अम्मी की चुदाई एक तगड़े लुंड से होते देख कर मज़ा करते hai...aaahh...kaash नेरी अम्मी भी ऐसे hi गोलू भाई के sath....uufff...

यहाँ आलम अपनी अम्मी को गोलू भाई के साथ सोच रहा था और वह वो मर्द बड़े मज़े से फूफी के मुँह पर बैठ कर अपनी गांड चटवा रहा था.... .

Khair....kuch देर बाद उस मर्द का सब्र ख़त्म हो गया और वो उठ कर खड़ा हो गया....

फूफी - aahhh..kya हुआ मेरे malik...khushi नहीं हुई....

मर्द- hui...bahut hui...par अब तेरी छूट मुझे खुस करेगी....

फूफी- aahhh..meri छूट तो आपको chatte-chatte hi 2 बार झाड़ gai....aur फिर से आपके लुब्द के लाइट तड़पने लगी hai....ab फाड़ डालिये ise....uuummm.....aise फड़िये की मेरा सौहार सुने तो उसकी नीड भाग jaaye.....aaiye malik.....maariye इस तगड़े लुंड से अपनी रखेल की choot....jo एक सरीफ इंसान की अमानत thi...par अब आपकी और सिर्फ आपकी गुलाम hai...aaahhhh...

फूफी बोल hi रही थी की उस मर्द ने फूफी के पेअर हवा के उठाये और बिना वक़्त गवाए अपना तगड़ा लुंड उनकी छूट में घुसा दिया....

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फूफी- aaaahhhhhhhh.....mar gai....aahhh....ab तो जाग जा kameene....dekh तेरे घर की ज़ीनत की एक gair-majhabi धज्जियाँ उदा रहा hai....aaahhhh....kab तक सोता रहेगा gaandu......aaahhh.....

फूफी चुदाई के नशे में पूरी तरह डूब कर ऍबे सौहार को जलील करते हुए उस तगड़े लुंड का पूरा मज़ा ले रही thi....aur उन्हें dekh-dekh आलम भी अपने मज़े में डूब चूका था.....

फूफी- aaahhh....faad दो मेरे maalik....wo तो sala....aahhh....wo गांडू नहीं jagega....aap इत्मीनान से उसकी पाक बेगम को नापाक karo....aaahhh.....sone दो उस गांडू को.....

मर्द- है मेरी randi....ab तू dekh...ki मैं कैसे एक दिन उसी के सामने तेरे जैसे शं की धज्जियाँ उडाता hu....aur फिर उसे बताउगा की असली मर्द की चुदाई कटा होती hai....yeeehhhhh....

Aalam(man में)- oohhh...kaash गोलू भाई भी मेरी अम्मी को मेरे अब्बू के सामने चेंज दते और अब्बू को अम्मी hi जलील jarti.....aahhh..kaash ऐसा ho....aahh..kaash.....

वह thap-thap की आवाज के साथ वो मर्द और फूफी जाँबाट की सैर पर थे तो यहाँ आपम भी अपनी अम्मी के ख्यालों में डूबा ज़न्नत देख रहा था....

फिर कुछ देर बाद एक जोरदार चीख nikli....jo सबूत थी की फूफी फिर से झाड़ चुकी है.....

और इस बार फूफी के sath-sath वो मर्द भी जोर से gurraya..jis से आलम समझ गया की वो मर्द भी अब झड़ने वाला है...

Khair....fir कुछ देर तक कमरे में ख़ामोशी चाय rahi......aur फिर आलम ने देखा की वो मर्द उठ कर फर्श पर खड़ा हो गया....

फूफी- क्या हुआ malik....koi कमी रह गई खातिरदारी में....

मर्द- nhi....aaj में तुमसे बहुत खुश hua....par अब मुझे जाना hoga....kuch जाम है....

फूफी- आप जैसा kahe....par अपनी गुलाम की आरज़ू तो पूरी कर दे....

Mard(has कर)- ohh...samjh gaya....tu भी na...chal आ ja.....aaj तेरा पेट भर जायगा....

Aalam(man में)- पेट भर jayga....matlab....ye करने क्या वाले है....

ाकम ने अपनी आँखे गड़ाए rakhi....aur उसने देखा की फूफी फर्श पर घुटनो पर बैठी हुई अपना मुँह खोले इस मर्द के लुंड को देख रही hai....aur वो मर्द बड़े प्यार से अपने लुंड को पकडे हुए मुस्कुरा रहा है....

फिर जो आलम ने dekha...use देखते hi उसका दिमाग सुन्न हो गया और पुरे बदन में एक बिजली का झटका सा मार गया....

ाकम ने देखा की इस मर्द ने फूफी के मुँह में पेशाब करना सुरु कर diya....aur फूफी बड़े मज़े से उसकी पेशाब को अपने हलक में उतरने लगी....

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Aalam(man में)- या al**h....ye to..ye सिर्फ चुदाई nhi...ye तो बहशीपन gai.....yaar एक ायरत इतना कैसे गिर सकती है की वो किसी मर्द जा पेशाब पि जाए.....

Huh...par ये मुझे अच्छा क्यों laga....mere जिश्म में ये देख कर सनसनी क्यों hui...kya ये नजारा इतना दिलकस tha....kya सच में....

क्या मैं अपनी अम्मी को भी इस तरह se.....saayad...pata nhi...par अगर अम्मी गोलू भाई का पेशाब पिए to.....aaahhh...ye kya....ye सोचते hi मेरा लुंड फड़क utha...matlab ये मुझे pasand....uuufff....ye क्या हो रहा गई mujhe....aahh..ammi....ab तो तुमको गोलू भाई से मिलवाना hi hoga...chahe जो भी हो... मैं अम्मी को गोलू भाई से छुड़वा कर hi rahuga....aaahhhh...

ये सोचते -सोचते आलम का लुंड एक बार फिर से पानी वाहन laga....aur अबकी बार आलम की हालत इतनी खराब हुई की वो वही सरक जार फर्श पर बैठ गया और अपनी साँसों को काबू करने लगा.....

आलम उसी जगह करीब 10 मिनट तक बैठा raha...is बीच न hi उसने कुछ सुना और न कुछ देखा.....

फिर अचानक से उसे कुछ आवाज aai...to वो चौंक कर कमरे में jhaaka...par उसे भीतर कोई नहीं dikha....sirf अबलंधेरा hi था.....

पर फिर उसे नीचे की तरफ से दरवाजा खुलने और बंद होने की आवाज आई.....

आलम- ये पता करने का सही मौका है की ये मेरी फूफी hi thi....aur सायद नीचे उस मर्द का चेहरा भी दिख jaaye...kyoki आया तो वो वही से होगा....

ये सोच जार आलम आगे बड़ा hi था की उसे फिर से दरवाज़ा खुलने और बंद हो ने की आवाज aai....aur जब तक आलम सीढ़ियों से नीचे pahucha...tab तक तो वह कुछ भी नहीं था....

आलम- अरे yaar....der हो gai...main बैठता नहीं तो saayad....ye kya..ye तो कोई कार...

तभी आलम को एक कार के स्टार्ट होने और जाने की आवाज aai...to आलम तुरनर ऊपर छाजे पर pahucha...par यहाँ भी उसे देर हो गई...

क्योकि कार बहुत दूर जातो दिख रही thi.....aur धुल उड़ने की वजह से न तो उसे कार का रंग dikha...aur न hi ये की विथ कौन सी कार थी....

आलम- hmm...sab कांड हो gaya...aur लोग सोने भी चले gaye...ab मेरा क्या kaam..chalo...hum भी सो लेते hai...waise भी आज हालत खराब हो गई....

फिर आलम अपने कमरे में आ कर लेट gaya....aur लेते हुए एक hi बात से छटा raha...ki कैसे वो कभी अपनी अम्मी की चुदाई होते देख payga....dekh भी पाएगा की नहीं.....??

ये सब सोचते हुए आलम गहरी नीड में खो गया.......

=====================

[ आगे की KAHANI......MAAJID की जवानी.......]

अगले रोज जब मैं सुबह jaga....to मुझे अपने घर में कई लोगो की आवाज़े सुनाई di......jinme मर्द भी थे और आयतें भी....

Subah-subah मेरे घर पर इतने लोगो का होना मेरी समझ से बहार tha.....asal में हैरानी वाली बात थी...

इसलिए मैं बिस्तर से उठ कर तुरत हॉल में भगा और मैंने देखा की मेरे घर के बाहर भीड़ जमा है....

मुजगे भीड़ देख कर कुछ समझ तो नहीं aaya....par मैं इतना जरूर समझ गया की हो न हो कुछ बबाल हुआ hai....aur इस बबल की वजह कही न कही मेरे घर से hi जुडी है....

इसलिए मैं तुरंत भागा और भीड़ को चीरते हुए आगे पंहुचा......

और जैसे hi मैंने वह का नजारा dekha.....to मुझे मेरे रात के सवाल का जवाब मिल गया.....

अब वो जवाब क्या tha.....kaisa tha...accha tha.....ya बुरा.....????

और उस जवाब से मेरी जिंदगी पर क्या असर hua....ye तो आने वाले वक़्त में hi पता चलेगा....

तो इंतज़ार kijiye...ek धमाकेदार जवाब ka....jisne मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल कर रख दी.......

नोट - अपडेट पोस्टेड frnds.....hope ु लिखे आईटी.......

थैंक्स फ्रेंड्स.....

कीप रीडिंग.......
 
अपडेट -77

अब वो जवाब क्या tha.....kaisa tha...accha tha.....ya बुरा.....????

और उस जवाब से मेरी जिंदगी पर क्या असर hua....ye तो आने वाले वक़्त में hi पता चलेगा....

तो इंतज़ार kijiye...ek धमाकेदार जवाब ka....jisne मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल कर रख दी.......

अब आगे........

[ माजिद की जवानी......]


जब मैंने जगा तो मुझे कई लोगो की आवाज़े सुनाई di...to मैं तुरंत ड्रेस हो जार हॉल में aaya....aur वह देखा की मेरे घर के बाहर लोगो का जमाबड़ा लगा ह्या है...

ये देख कर मैं हैरान हो गया और तुरंत भाग कर बहार pahucha....aur जैसे hi मैं भीड़ को चीरते हुए आगे पहुव्हा तो मेरा दिल धक् कर गया....

क्योकि मेरे सामने मेरी अम्मी thi....jo मेरे अब्बू का सर अपनी गॉड में रखे जोरो से रो रही थी......

क्योकि वो मेरे अब्बू nhi....balki अब्बू की लाश थी......

अब्बू की लाश देखते hi मैं टूट कर घुटनो पर आ गया और मेरे अंदर का दर्द आँशु बन कर बहने लगा.....

मैं समझ hi नहीं प् रहा था की यर सब रकया hua....kyo hua....kaise hua.....aur इस वात मैं क्या करू.....

मैं बस अब्बू को देखता raha....rota raha...mera दिमाग इस वक़्त पूरी तरह से कोमा में tha....na मुझे ये पता था की मेरे पास कौन खड़ा है और न hi ये की कौन क्या कर रहा है......

काफी देर ro-ro कर जब मेरे दिल का दर्द कुछ काम हुआ तो मुझे होश आया और मैं अपनी अम्मी को सँभालने लगा....

मैं- ammi....ye...ye कैसे हो गया....

Ammi(rote हुए)- क्या बताऊ beta....subah जब घर से निकले तो बड़े अच्छे the....fir अभी उनकी लाश hi बापिस aai....pata नहीं कुआ हो kya.....main तो बर्बाद हो गई बीटा.....

और अम्मी ने मुझे सीने से चिपका कर जोर से रोना सुरु कर दिया.....

हम दोनों रो रहे थे और हुनर aas-paas वाले हमे दिलाशा दे रहे the...par उनकी दिलाशा किसी काम की नहीं थी....

मैंने अपने अब्बू को खोया था और अम्मी ने अपने सौहार ko......aaj हमारे घर का मालिक जा चूका tha...to ऐसे में हमारे दिल को इतनी आसानी से चैन कैसे मिलता.....

Khair....hum दोनों रो hi रहे थे की तभी एक कार वह आ कर ruki..aur उसमे से निकला वो saks...jo अब सही मायनो में मेरी अम्मी और मेरे घर का मालिक बन चूका tha....wo थे गोलू भाई....

गोलू भाई ने हमारे पास आ कर हम दोनों को चुप होने को kaha....par हम रट रहे....

गोलू भाई ने 2-3 बार हमे और roka....par हम नहीं maane......to फिर गोलू भाई ने वो kiya....jise देख कर aas-paas वाले लोग भी हैरान रह गई....

गोलू भ्सी ने अम्मी का नाम ले कर उन्हें खड़े होने को bola...aur जब अम्मी नहीं उठी तो उन्होंने खुद hi अम्मी को पकड़ कर उठा दिया...

गोलू भाई- बस करो mumtaaj...ab बहुत हो गया....

Ammi(rote हुए)- देखिये न ये क्या हो गया....

गोलू- ssshhhh.....chup...ekdam chup...chalo...bheeter chalo.....maajid....tum भी aao....chalo उठो....

गोलू भाई की बात मान कर मैं भी खड़ा हो gaya....par मेरे आँशु अभी भी थामे नहीं थे....

गोलू bhai(ek आदमी से)- तुम लोग इसकी मिटटी का इंतज़ाम karo....main जब तक इनको संभालता hu....theek....

इतना बोल कर गोलू भाई ने अम्मी के गले में हाथ डाका और उन्हें सीने से चिपका कर भीतर चल पड़े......

ये देख कर वह खड़े सब लोग हैरान रह gaye...khas कर की aourten.....par मैं हैरान नहीं tha...kyoki मैं तो जनता था की अगर गोलू भाई अम्मी को नंगा कर के भी संलबके सामने खड़ा कर dege...to भी अम्मी आसानी से कड़ी रहेगी....

Khair....ammi को साथ ले जाते हुए गोलू भाई ने मुझे भी इसरा किता और मैं भी उनके पूछे घर में आ गया....

भीतर आ कर गोलू भाई अम्मी को उनके कमरे में ले गए और मैं भी उनके साथ चला गया....

गोलू भाई- maajid....chalo पानी पि lo....aur ये आँशु पॉच dalo....ab इनका कोई मतलब नहीं....

मैं- पर....

गोलू भाई- पर kya....yu तेरे रोने से वो बापिस जिन्दा होगा kya.....jao...ye आँशु साफ़ करो और पानी पियो और मुमताज के लिए भी ले आना.....

गोलू भाई का हुकुम होते hi मैंने वही किया जो वो चाहते the....main खुद को चुप करा कर अम्मी के लिए पानी ले आया और गोलू भाई ने अपने हाथो से अम्मी को पानी पिलाया......

गोलू भाई- maajid....apne कमरे में jao....mujhe तुम्हारी अम्मी को समझाना है......

मैं- कमरे में....

गोलू भाई- haa...kyoki तुम सामने रहोगे तो ये ठीक से समझेगी nhi...jao....

मैं क्या karta....main जाना तो नहीं चाहता tha....par गोलू भाई को मन करने की मेरी ायकाट नहीं थी....

इसलिए मैं चुपचाप अपने कमरे में चला आया और मेरे आते hi गोलू भाई ने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया.....

और जैसे hi मैंने दरवाजा बंद होते देखा तो मेरा दिमाग घूम गया....

मैं सोचने लगा की इस waqt...aise माहौल me...aakhir गोलू भाई बंद कमरे में क्या करना चाहते hai...kya वो इस वक़्त अम्मी को छोड़ने वाले hai.....aur उनका तो theek...kya अम्मी इस वक़्त उनसे चुद जायगी....

ये सब ख़याल आते hi मैं तुरंत अम्मी के कमरे की उस खिड़की पर पहुंच gaya...jaha से मैं कई बार गोलू भाई और अम्मी के भींच होने वाला चुदाई का खेल देख चूका था....

मैंने देखा की दरवाजा बंद कर के गोलू भाई अम्मी के पास आये और उनका दुपट्टा निकाल कर अलग कर diya.....aur मेरी अम्मी ने एक बार भी उन्हें नहीं रोका....

गोलू भाई- आओ mumtaaj....mere पास आओ....

अम्मी तुरंत गोलू भाई के सीने से लग कर सिसकने लगी....

गोलू भाई- अब रो क्यों रही हो.....

अम्मी- क्या karu...dard तो होता hi hai....maine ऐसा तो नहीं चाहा था....

गोलू भाई- कोई बात nhi....sabke मन का कभी होता है kya.....chalo...tumhara दर्द दूर कर देता दू...

ये बोल कर गोलू भाई ने अम्मी का चेहरा उठाया और अपने होंठ अम्मी के होंठो पर टिका दिए.......

अम्मी- uummmhh....aah...kya इस वक़्त ये सही होगा.....

गोलू भाई- ha....yahi सही वक़्त hai...uuummmm...uuummmmm...

अम्मी- uuummmm...uummmhhh..aah....koi भीतर आ गया तो....

गोलू भाई- तो kya....wo भी जान जायेगे की तू अब कुसी की बेगम nhi...balki मेरी रखेल hai....samjhi...

अम्मी- वो तो हु hi....par maajid....use क्या बोलूगी....

गोलू भाई- उसको मैं देख luga.....ab मज़ा करो बस....

अम्मी- hmm...mujhe तो बस आपका hi सहारा hai....aauummm...uuummmm...uuummmm.....

और फिर दोनों ऐसे किश करने लगे जैसे की सालों के बिछड़े प्रेमी हो.....

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Ek-dusre को चूमते हुए दोनों के जिश्म गरम हो गए और तभी गोलू भाई अम्मी की कुर्ती निकलने lage......aur अम्मी ने भी अपने हाथ उठा कर कुर्ती को आसानी से निकलवा लिया.......

मैं- ये kya....ammi तो इसी waqt.....laanat है ऐसी ायरत पर.....

वह गोलू भाई ने अम्मी को लिटाया और उनकी सलवार का नाडा खोल कर सलवार भी निकाल diya...aur इस बार भी अम्मी ने गांड उचका कर सलवार को निकल जाने diya.....ab अम्मी सिर्फ bra-panty में थी....

फिर गोलू भाई ने अम्मी की पंतय भी निकाल di...aur उसी वक़्त अम्मी ने गांड उचकते हुए खुद की ब्रा भी निकाल डाली....

अब अम्मी पूरी नंगी हो कर बिस्टेर पर पड़ी thi....aur उनको नंगा कर के गोलू भाई ने अपनी t-shirt निकली और अम्मी के ऊपर झुक कर उनके bade-bade दूध चूसने लगे.....

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गोलू भाई- aauuummmm...uuummmm...uuummmm....

अम्मी- aahhh....dheere....uuummm.....aah.....

गोलू भाई- uuummmmm...uuummmhhh...aahh.....tera दर्द काम हुआ.....

अम्मी- hhmm..thoda सा....

गोलू भाई- बाकि भी चला jayga.....aa जा....

ये बोल कर गोलू भाई ने बैठ कर अपने आपको नीचे से नंगा कर diya....aur उनका लुंड बाहर आते hi अम्मी उठी और झुक कर उनका लुंड चाटने लगी.....

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अम्मी- sssrrruuuuppppp....sssrrruuuppp..aah....usne ऐसा क्यों किया....

गोलू भाई- क्या pata...par ठीक hi किया....

अम्मी- sssrrruuuupppp......sssrrruuupppp....sssrruuuuppppp....aahh....par kyo.....aise तो उसने हमे मुसीबत में दाल दिया.....

गोलू - कोई मुसीबत नहीं hui...tum बेफिक्र raho.....ab चूसो जल्दी....

अम्मी- aahh.....mujhe बस मजीद की फ़िक्र hai...aaauuummmmm...uuuummmm...uuummmmm....

गोलू bhai(ammi का सर सहला कर)- मैं हु na....tu बस मज़े kar...baki मैं देख लगा....

फिर अम्मी बिना कुछ कहे जोर से लुंड चूसने लगी...

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और ये नजारा देख कर न चाहते हुए भी मेरा लुंड कड़क हो गया....

मुझे अब तक उनकी बातों से कुछ समझ तो नहीं आया tha....par मुझे kuch-kuch शक हो रहा था की कही तो कुछ गलत हुआ है....

Khair....kuch देर तक लुंड चूसने के बाद अम्मी ने लुंड छोड़ा और गोतो को चूसने lagi....aur गोलू भाई मस्ती में आँखे बंद कर के मज़ा लेने लगे....

अम्मी एक हाथ से लुंड को हिला रही थी और साथ hi साथ ek-ek गोते को baari-baari मुँह में भर कर चूस रही थी....

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अम्मी की हरकतों से कुछ hi देर बाद गोलू भाई का लुंड पूरा ायकाट पर आ गया......

और फिर उन्होंने अम्मी को रोका और खुद खड़े हो कर अम्मी को थोड़ा झुकाया और लुंड को छूट में दाल दिया....

अम्मी- aaahhh....ab जा कर सुकून mila...aahhh...

अम्मी ने कराहते हुए अपनी तागो को थोड़ा फैला दिया और गोलू भाई ने तेजी से चुदाई सुरु कर दी.....

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अम्मी- aahhh..aahh.....aahhh...aise hi...joor se......main बहुत गम में hu....aahh...mujhe इस गम से निजाद do....maaro....aahhh..aahh....

गोलू भाई- ha.....ab कोई गम नहीं rahega.....kabhi bhi...yeehhh..yeehhh...

Main(man ने)- साला गम से निजात चुद कर milegi....haattt....ammi को तो बस लुंड खाना hai.....bas....

अम्मी- aaahh....oh saddam....ye तुमने क्या kiya....aaahhh.....kaash तुम ये देख pate....ki main....aahhh.....kitne मज़े में hu.......aahhh...aaahh....

गोलू भाई- वो देख रहा hai...aur तुम्हे खुश देख कर वो भी खुश hoga.....yeehhhh...yeehhhh...

और फिर थोड़ी देर की दमदार चुदाई के बाद अम्मी की छूट बलबला उठी और अम्मी पास्ट हो कर हाफने लगी.....

गोलू भाई- अब कैसा लग रहा है....

अम्मी- aaahh....thoda halka.....par अभी भी बहुत गम hai....khas कर माजिद की तरफ se......use कैसे संभालोगी....

अम्मी एक तरफ मेरी फ़िक्र का बोल रही thi....aur साथ hi साथ बिस्टेर पर जा कर कुटिया बन गई थी.....

गोलू bhai(gaand में लुंड सेट करते हुए)- उसको मैं समझा duga...fikr मत karo...yeehhh......

अम्मी- aaahhhh.....par वो manega...aahh....

गोलू bhai(dhakka मार कर)- haa....uska बाप भी तो माना था na...to वो क्या है....

अम्मी- aaahhh.....beta है mera...thoda प्यार से.....

गोलू भाई- गांड नहीं मारनी uski....samjhana है....

अम्मी- aahhh..pata hai....gaand तो मैं hi marwaugi....ab जोर से maaro....main ये गम भूलना चाहती hu...aahhh..joor se.....aahhh..aahhh...

और अम्मी joor-joor से सिसकते हुए दमदार गांड चुदाई का मज़ा लेने लगी...

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ये सब देखते हुए मेरा लुंड एक बार फिर से कड़क हो gaya...jo कुछ देर पहले hi झाड़ा था.....

मैं सोच रहा था की आखिर अम्मी और गोलू भाई आगे क्या करने का सोच रहे hai...jo मुझे समझने की जरूरत है...

क्या मेरी अम्मी गोलू भाई से सदी करने वाली hai....par अगर ऐसा है तो मैं क्यों ऐतराज karuga......mujhe तो सब पता hi है...

पर हो भी सकता hai...kyoki उनकी नजर में तो मैं इस सब से अनजान hu....tabhi....tabhi वो मुझे समझने का बोल रही है....

यहाँ मैं लुंड हिलाते हुए आने वाले वक़्त का सोच रहा था और वह अम्मी गांड मरवाते हुए दूसरी बार झाड़ चुकी thi...par गोलू भाई रुके नहीं the....balki जब अम्मी पास्ट हो कर बिस्तर पर पसर gai...tab भी गोलू भाई ने उनकी गांड मरना जारी रखा.....

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पुरे कमरे में बस अम्मी की सिसकिया और उनकी गांड ओर पड़ने वाली गोलू भाई की जांघो की थाप hi सुनाई दे रही थी....

उस कमरे का ऐसा माहौल था की अगर कोई और सुन le....to वो ये सोचेगा भी नहीं की इस ायरत का सौहार बाहर मारा पड़ा हुआ hai.....balki उसे तो यही लगेगा की ये दोनों mita-biwi hai....aur आज कोई ख़ुशी का दिन hai...isliye भरी दोपहर में दमदार चुदाई जार के जश्न मन रहे है......

तभी मेरे पदोष की कुछ आयतें कमरे के बाहर से अम्मी को बुलाने lagi......aur उनकी आवाज सुन कर अम्मी चौंक उठी....

Main(man में)- अब क्या hoga.....ammi और गोलू भाई को एक बंद कमरे में देख कर क्या सोचेंगे sab.....ab मैं क्या करू.....

पड़ोसन- mutaaj.....darwaja खोल मुमताज....

Ammi(dheere से)- aah....ab क्या का kare....aahh....aahh...

गोलू- तुम बस जवाब देती रहो....

अम्मी- aahh...theek है......

पड़ोसन- मुमताज......

अम्मी- aah.....koun.....

पड़ोसन- मैं तेरी मरियम chachi....darwaja खोल बेटी....

अम्मी- aahh..chachijaan....abhi nhi...aahh......main...main अभी नहीं खोल सकती.....

मैं- है bilkul...abhi दतवाजा कैसे kholegi...abhi गांड जो खुलवाए हुए है...

पड़ोसन- ऐसा मत बोल beti....hum तेरा गम गलाक करने आये है....

अम्मी- chachijaan.....main भी wahi...aahh...wahi कर रही hu....mujhe थोड़ा वक़्त और lagega....aahh....main gaaiii........aaaahhh....

पड़ोसन- gai...ye क्या बोली बेटी...

Ammi(jhadte हुए)- kk..kuch नहीं chachijaan....wo main.....aap थोड़ा रुको....

पड़ोसन- ठीक hai...hum यही तेरा इंतज़ार करते है......

अम्मी- ji...main बस aaahhh.....aaai....

यहाँ अम्मी बोल hi रही थी की गोलू बीएड पर बैठे और अम्मी को फर्श पर सर के बल jhukaya....aur बिना देर किये hi उनकी गांड में लुंड सटाक उतार दिया.....

अम्मी- aaahh......saddam.....dekho....aise तो तुम कभी सोच bhi...aaahh....aahh....mar गई...

अम्मी इस नए तरीके से गांड मरवाते हुए बेहद खुश हो गई थी और पूरी मस्त हो कर गांड मरवा रागी thi......aur गोलू भी भी पूरी ताक़त से अम्मी की गांड के फरखचचे उदा रहे थे.....

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अम्मी- aahhh....ab क्या karege....wo तो बहार hi बैठी है....

गोलू- तो बैठने do...kab तक बैठेगी....

अम्मी- aahh..wo मुझे जाना तो hoga....aahhh...

गोलू भाई- nhi.....tum इस कमरे से तभी jaogi...jab मैं chahuga......samjhi....

और गोलू भाई जोर से गांड मरने लगे और अम्मी भी पूरी मस्ती में चूर मज़ा लेने लगी...

तभी किसी ने मुझे आवाज दी और मैं बहार भाग gaya.....waha सब लोग अब्बू की मिटटी ले जाने की तयारी कर रहे थे.....

आदमी- बीटा majid....tumhare रिश्तेदार कब तक आयगे....

माजिद- उन्हें तो सायद वक़्त लग jayga.....kareeb 3-4 ghante....(mere नाना की फॅमिली)

आदमी- ohh...to फिर क्या करना hai.....apni अम्मी से पूछ कर आओ...

मैं- हम्म...

और मैं अम्मी के कमरे के बाहर आ गया....

मैं- अम्मी.....

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अम्मी- uuummmmhhh...ha..ha majid...aauummmm.....uuummmm...

मैं- वो पडोसी पूछ रहे थे की अब्बू की मिटटी के लिए मामू लोगो का इंतज़ार करे या नहीं....

अम्मी- ssslluuggg..sslluuggg...sslluugg....sslluugg.....

मैं- ammi....batao न...

अम्मी- uummmhhh...aaahhhh....aah....ha...unko आ जाने do...aaauuummm...gggrrrooommm..ggrrooommm..ggrrooommm...

मुझे आवाजों से साफ़ समझ आ गया था की इस वक़्त अम्मी का बुरी तरह से मुँह छोड़ा जा रहा hai...isi वजह से अम्मी ठीक से जवाब नहीं दे प् रही थी.,.

Khair....maine बहार सबको बता दिया की अभी इंतज़ार kare....to कुछ लोगो को छोड़ कर बाकि लोग idhar-udhar हो गए....

तभी मैंने देखा की मेरे दोस्त भी वही खड़े the...jo मुझे देखते hi उदास मन से मेरे पास आ गए....

आलम- तुम ठीक हो न माजिद....

जावेद- है maajid...jyada गम मत karna...sab उपरवाले की मर्जी है....

सैफ- सही kaha....aur हम है na...tu अकेला मत समझना खुद ko...haa...

मैं- hmm..waise saif...tu कब लौटा...

सैफ- आज hi....aur आते hi ये मनहूस खबर सुन ली....

आलम- accha....chachijaan तो ठीक है न...

Main(man में)- ठीक kya...wo तो बहुत ज्यादा ठीक hai...filhaal छोड़ने में लगी है...

सैफ- उन पर तो गमो का पहाड़ टूट पड़ा hai....wo तो बेचारी रो रही होगी...

Main(man में)- bilkul....wo रो भी रही है और चीख भी रही hai...par गमो के पहाड़ की वजह से nhi....balki पहाड़ जैसे ताक़तवर गोलू भाई के तगड़े लुंड की वजह से....

जावेद- वैसे तेरे mamu-mami कब तक आ रहे है....

मैं- बस कोई 4 घंटे lagege.....tab तक तो रुकना hi होगा....

आलम- तू अपनी अम्मी के पास ja....unka ख्याल rakh...yaha हम सब देख lege...ja...

मैं- hmm...(man में)- अब गोलू भाई के होते हुए उन्हें मेरी क्या jaroorat.....wo रख रहे है उनका khayaal....wo भी अपने hi तरीके से....

Khair.....ammi ने जी भर के छोड़ने के बाद भी कमरे से बहार आना जरूरी नहीं samjha.....to मैंने सोचा की सायद आराम कर रही होगी....

पर जब 2 घंटे बीत गए तो मैंने झांक कर dekha....to उस वक़्त भी अम्मी मस्त हो कर छुड़वा hi रही थी....

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अम्मी को देख कर मुझे गुस्सा तो बहुत aaya...par मैंने सोचा की गुस्से का क्या मतलब निकलता hai...kyoki मेरी अम्मी के लिए तो मेरे अब्बू कब के मर चुके थे....

Khair....agle 4 घंटे तक अम्मी और गोलू भाई कमरे में rahe...aur इस बीच हुनर पहचान के लोग मेरे घर के बाहर जमा हो gaye....aur मुझे सबसे झूठ बोलना पड़ा की अम्मी बहुत hi ज्यादा गम में है तो कुछ देर अकेला रहना चाहती है....

तो लोगो ने समझा की chalo...bechari अपने सौहार की याद में अकेले में बैठ कर रो रही hogi....to उसे परेशान नहीं करते....

पर उन्हें क्या पता था की वो बेचारी गोलू भाई के लुंड से चुद कर सारा गम भूल चुकी hai...aur अब तो ऐसे चुद रही थी जैसे की उसे और कोई काम hi न बचा हो....

Khair....fir जब मेरे mama-mami आये तो मैं तुरंत अम्मी के कमरे में देखने भागा....

और मैं देख कर हैरान था की अभी भी अम्मी कुटिया बानी अपनी गांड मरवा रही थी...

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मैं सोचने लगा की अम्मी को हुआ क्या hai...kam से काम अब्बू की मिटटी तो उठ जाने देती...

की तभी मेरी ममी ने रट हुए मुझे आवाज दी तो मैं उनके पास पहुंच गया....

ममिजान- माजिद beta...ye सब क्या हो gaya...kaise हो गया....

मैं - बस mami....uski मर्जी thi.....aap संभालते अपने आपको....

ममिजान- beta...teri ammi...wo कहा hai...us बेचारी पर तो फामो का पहाड़ टूट पड़ा......

मैं- है mami...isliye वो कमरे में hai...aur गोलू भाई उन्हें समझा रहे है...

गोलू भाई का नाम आते hi ममिजान के sath-sath मेरी छोटी ममिजान और ममिजान की बेटी की आँखे बड़ी हो gai....aur मेरी खला की bhi....par उनकी आँखे बड़ी होने की वजह अलग थी....

मैं- अब आप सब आ गए hai...to सम्भालिये unhe....main मामू लोगो को देखता हु...

खला- चलो bhabhijaan......appi से मिलते hai...pata नहीं बेचारी का क्या हाल होगा....

Mamijaan(chounk जार)- ha....tum एक काम karo...tum लोग थोड़ा अपने souhar...abbu और भाईजान लोगो को pani-bani pilao....wo सफर से यहकड़ hoge....main अकेली जाती hu.....pahle उसे समझा lu...fir तुम सब को बुला loogi....hmm..

खला- ठीक hai.....par जल्दी karna...ab मिटटी जाने में भी देर nhi....unhe अपने सौहार का चेहरा भी तो देखना होगा....

ममिजान- hmm...ab तुम लोग jao...main उसे देखती हु...

इतना बोल कर ममिजान कमरे के पास गई और अम्मी को आवाज देने लगी....

अम्मी- aahh...ab कौन है...

ममिजान- अरे mumtaaj.....hum आ गए hai....darwaja खोलो...

अम्मी- bgabhijaan....aap अकेली है या कोई साथ में है....

Mamijaan(dheere से)- अभी तो अकेली hu...par बाकि सब भी आये hai...ab दरवाजा khol.....jaldi..kahi कोई आ न जाए...

ममिजान के बोलते hi दरवाजा खुला और एक हाथ nikla....aur फिर उस हाथ ने ममिजान का हाथ पकड़ा और भीतर खींच liya....aur दरवाजा फिर से बंद हो गया....

ममिजान- aahh...chhod....aise kyo...haay al**hh....ye..ye क्या हाल बना रखा hai...tu पूरी nangi...aur aise....kya तू....

अम्मी- अरे bhabhijaan...waha dekho...sab समझ जाओगी...

और जैसे hi ममिजान ने नजर घुमाई तो सामने गोलू भाई खड़े the....wo भी पुरे nange....aur उनका लुंड पूरा कड़क tha.....jis पर अम्मी के छेड़ो का रास लगा हुआ था....

ममिजान- haay....to तू यहाँ चुद रही thi...aur वह तेरा souhar...tujhe शर्म नहीं आई...

अम्मी- इसमें शर्म kaisi....souhar तो मेरा वो कबका नहीं रहा tha......bas समाज की नजर में hi बाकि tha.....aur फिर मैं क्या karti..inhone मुझे दिलाशा di..to मैं पिघल gai....kya karu...gam में थी na...to ये मेरा गम दूर कर रहे थे....

ममिजान- ओह ho...to कितनी देर से ये गम दूर हो रहा है....

अम्मी- बड़ा वक़्त लगा.....4 घंटे से बराबर थोक रहे hai....tab जा कर दिल को सुकून mila....wo तो आप सब आ gaye...nhi तो अभी भी थूक रही hoti...khair...ab तुम ruko...main ख़त्म कर लू....

ममिजान- चुप kar....ab कुछ नहीं hoga...tu बाथरूम में जा कर अपनी सकल ठीक kar.....teri बेहेन, भाई, और अब्बू तेरे से मिलने aayge....samjhi...ab जा जल्दी...

अम्मी- पर इनका क्या hoga....inko ऐसे अधूरे में छोड़ कर मैं कैसे जा सकती hu...nhi....inki मर्जी के बिना मैं नहीं जाने वाली....

गोलू भाई- कोई बात nhi...tum तैयार ho...main ठीक हु...

अम्मी- पर आपका....

गोलू bhai(beech में)- बोलै na....ab जा....

अम्मी- ठीक है...

इतना बोल कर अम्मी गांड मटकते हुए बाथरूम में घुस गई और गोलू भाई ने इसारे से ममिजान को अपने पास बुलाया....

ममिजान- अभी nhi....abhi सब बहार hi है....

गोलू भाई- सोच lo....tum नहीं तो मुमताज तो गई hi...main उसे जाने नहीं duga....aur बिना मेरी मर्जी के वो जायगी nhi...to क्या बोलोगी sabko...sach बताओगी...

ममिजान- nhi..aisa मत karna....nhi तो...

गोलू bhai(beech में)- तो आजा fir.....waise भी मेरा ख़त्म होने को hai....tujhe भी एक बार मज़ा मिल jayga...aaja...

ममिजान- ठीक hai...par जल्दी करना....

इतना बोल कर ममिजान गोलू भाई के पास आई और उन्हें बेतहासा चूमने लगी...

ममिजान- uuummmm...uuummmhh..kitne दिनों से बेकरार थी मैं ाओंके liye....uummm..aap तो मुजगे भूल hi गए थे na..uummm..uummm...

गोलू भाई- uummhhh..nhi....bilkul nhi....aur अभी इस सबका वक़्त नहीं hai....chal...jaldi से सलवार निकाल और झुक ja.....jaldi कर....

गोलू भाई का हुक्म होते hi ममिजान ने अपना लुवास कमर तक चढ़ाया और सलवार का नाडा खोल diya....jusse सलवार जा कर उनके पंजो में फास गया....

गोलू bhai(gaand सहला कर)- ैवगा हुआ तूने पंतय नहीं pahni....ab....ye ले....

और गोलू भाई ने बिना देर किये ममिजान की छूट में लुंड पेल diya.....jisse ममिजान की चीख निकल gai...par उन्होंने हाथ से मुँह दवा लिया....

ममिजान- aahhhh....aaraam से करते na.....tabhi से नहीं chudi...jabse आपने छोड़ा tha....aaahhh..mar गई....

गोलू भाई- कोई बात nhi...ab आ गई हो na...to छोड़ना तो होता hi rahega....jee भर कर छुड़वा lena.....yeehhhh....yeehhh...

ममिजान- aahhh....dheere....aaahh..meri छूट to...aahhh....

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यहाँ ममिजान की चुदाई हो रही थी और वह खला और बाकि सब दरवाजे के बाहर ममिजान के बुलाने का इंतज़ार कर रही thi....aur मेरी अम्मी अपने चूड़े हुए जिश्म को साफ़ कर के एक सरीफ खातून बन रही थी....

खैर....10 मिनट बाद जब अम्मी बाथरूम से निकली तो ममिजान को देख कर हसने लगी....

अम्मी- क्या bhabhijaan....aate hi लुंड खाने लगी....

ममिजान- aahh...ab मैं kya...aahh..kya karu....inko शांत जो करना tha...aahh..warna तू कैसे बहार आने को तैयार hoti...aahh...main तो झाड़ भी gai...par ye....aahhh...

गोलू भाई - yeehhh....le...main भी aaya....chal....muh खोल....

इतना बोल कर गोलू भाई ने ममिजान को घुटनो पर बैठा दिया और उनका मुँह छोड़ते हुए पूरा लुन्द्रास उनके हलक में उतार दिया.....

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गोलू भाई- aaahhh....ab शांति mili....oohh...

ममिजान- uummmhhh....aah....ab आप भी कपडे पहन lo....taki मैं सबको बुला सकू....

गोलू भाई - hmm..mumtaaj...mere कपडे uthao....main बाथरूम में जाता हु...

Khair....finally गोलू भाई मान गए और कपडे ले कर बाथरूम में घुस gaye....wahi ममी ने भी जल्दी से अपना सलवार पहना और लिवास ठीक किया....

ममिजान- mumtaaj...ab तुम बिस्टेर पर सर झुका कर बैठ jao...main दरवाजा खोलती हु....

अम्मी- ठीक hai....ab ये नाटक भी करा lo....lo..baith gai....haaye मेरा सौहार....

ममिजान- sshhh...chup रह न....

फिर ममिजान ने जा कर गेट खोला और सबको भीतर बुला liya......aur मैं भी खिड़की से हैट कर बहार आ गया....

Khair....thodi देर बाद गोलू भाई भी घर के बाहर आ गए और फिर देखते hi देखते अब्बू की मिटटी ले जाए gai...aur अब्बू को ख़ाक के सुपुर्ट कर दिया गया......

अब्बू को आखिरी बार बीड़ा दे कर हम सब apne-apne घर निकल aaye.....aur फिर कुछ खास नहीं hua....raat को घर में अब्बू की hi बातें होती रही और फिर सब सो गए.......

=========================

रात के अँधेरे में गोलू भाई की कार सीधा उस जगह ruki...jaha पर मजीद के अब्बू को दफनाया गया था.....

कार रोकते hi गोलू भाई निकले और सीधा अब्बू की कबर के पास पहुंच गए.....

फिर गोलू भाई ने एक मुट्ठी मिटटी को उठाया और बड़ी इज्जत के साथ अब्बू की कबर पर दाल दिया.....

तभी पीछे से एक साक्ष ने गोलू भाई को टोक diya.....wo था raju.....golu भाई का नौकर.....

राजू- ये आप क्या कर रहे hai....ye इज्जत के लायक नहीं था....

गोलू- सही कहा tumne...ye इज्जत के लायक नहीं tha....nhi tha....matlab समझते हो इसका....

राजू- क्या मतलब.........

गोलू- था और है में बड़ा फर्क होता है beta.....jo tha....wo है hi ho...ye जरूरी nhi....samjhe....

राजू- मैं तो आपकी एक भी बात नहीं समझ प् रहा hu....jara मेरे लेवल का समझाइये न....

Golu(muskura कर)- hmm...dekho raju....ye dosti...dushmani....pyaar....nafrat...badla.....ye सब इंसानो से होता hai....jinda इंसानो se....murda लसो से nhi.....jante हो न......

राजू- hmm...janta हु.....

गोलू- तो फिर उठाओ mitti...aur दुआ karo...ki सद्दाम की आत्मा को शांति mile...aur अगले जन्म में वो इस जन्म की तरह कमीना nhi...balki एक नेकदिल इंसान bane.....aao...

राजू- आप कहते हो तो theek...warna मैं तो इसकी लाश पर भी तरस नहीं खता....

गोलू भाई- नहीं raju....nafrat को इतना हावी कभी मत होने देना की वो उपरवाले के खिलाफ जाने lage....nafrat को अपने काबू में rakho...usko दिमाग में रख कर socho....use गुस्से का nhi...balki चालाकी का रूप do...aur फिर उस इंसान को तोड़ do....jisse तुम्हे वो नफरत thi.....par ये भी याद rakho...ki तुम्हारी नफरत को जायज भी होना chahiye....tabhi भगवन तुम्हारे साथ hoga....samjhe...

राजू- समझ गया bhai....ab मैं भी सच्चे दिल से दुआ करता हु की सद्दाम को अगले जन्म में एक नेकदिल इंसान बनने का मौका मिले.....

ये बोल कर राजू भी एक मुट्ठी मिटटी को सद्दाम की कबर पर दाल देता है और फिर दोनों वह से निकल जाते है.......

Raju(car में)- bhai...ab अगला कौन....

गोलू- बहुत जल्द पता चल jayga......waise bhi....agla कोई भी ho...marna तो सबको hi hai.....ye तो उसकी खुशकिस्मती hogi.....jo पहले मरेगा.....

Raju(musura कर)- hmm....aap भी na....dushman को पहले जिन्दा लाश बनाते ho...aur फिर मारते ho....seedha मारते hi नहीं....

गोलू- दुश्मन को जितना तड़पा कर मारा jaaye....badla लेने का उतना ज्यादा मज़ा आता hai.....waise bhi....ye दुश्मनी सिर्फ जान की nhi.....inhone जो किया hai....uske लिए तो उन सबको मरने के पहले हज़ार मौत मरना hoga....hazaar mout....haaatt....

और ये बोलते- बोलते गोलू की आँखे गुस्से से लाल हो गई और उसने कार को फुल स्पीड से दौड़ा दिया.....

नोट - अपडेट पोस्टेड frnds....hope ु लिखे आईटी.....

थैंक्स फ्रेंड्स.....


कीप रीडिंग.......
 
अपडेट - 78

गोलू- दुश्मन को जितना तड़पा कर मारा jaaye....dushmani निहाने का उतना ज्यादा मज़ा मिलता hai.....waise bhi....ye दुश्मनी सिर्फ जान की nhi.....inhine जो किया hai....uske लिए तो उन सबको मरने के पहले हज़ार मौत मरना hoga....hazaar mout....haaatt....

और ये बोलते- बोलते गोलू की आँखे गुस्से से लाल हो गई और उसने कार को फुल स्पीड से दौड़ा दिया.....

अब आगे.......

[ आगे की KAHANI...AALAM की जवानी.......]


यहाँ जब माजिद के अब्बू को मिटटी देने के बाद मैं अपने घर पंहुचा तो उस वक़्त शाम का वक़्त हो गया tha...lagbhag 4 बज रहे थे.......

मैं इस वक़्त पर रोज घर से बाहर hi होता tha.....aaj कई दिनों बाद इस वक़्त अपने घर पर था....

Main(man में)- बेचारा maajid.....kitna बड़ा गम मिला बेचारे ko.....uske abbu.....hmm...ab al**h की मर्जी के आगे कर भी क्या सकते है.....

डडिजान- अरे aalam...tu आ gaya.....ho गई सद्दाम की मिटटी....

मैं- है dadijaan...ho gai....aahh....thak गया हु chal-chal कर....

डडिजान - तो जा कर थोड़ा आराम कर ले.....

Main(man में)- अब तो वही karuga....waise भी आज नदी पर जाना नहीं hai...maajid के बिना तो कोई जाने का सोचेगा भी nhi...to आराम hi कर लेता हु....

डडिजान- अब क्या सोचने laga....ja कर कर आराम....

मैं- है dadijaan....thoda अम्मी से मिल lu...unse बोलना था की शाम को माजिद के घर....

Dadijaan(beech में)- वो अभी घर में नहीं है...

मैं- kya..matlab कहा गई...

डडिजान- और kaha...golu जी के ghar.....roj वही तो जाती है....

ये सुन कर तो मेरे पैरों टेल ज़मीन hi खिसक gai.....meri अम्मी और गोलू भाई के ghar...wo भी रोज जाती hai...par क्यों...??

डडिजान- अब तुझे क्या हुआ....

मैं- कुछ nhi..wo ammi...wo गोलू जी के ghar....par kyo....aur रोज जाती है मतलब...

डडिजान- are...tujhe नहीं पता क्या....

मैं- नहीं na...batao तो...

डडिजान- अरे वो गोलू जी की ममी है na...kya नाम hai...haa...neelam....to उसे तेरी अम्मी सिलाई, बुनाई, kadaai...ye सब सीखने जाती है...

मैं- सिलाई sikhane...par kyo...unhe क्या जरूरत पद गई...

डडिजान- क्यों bhai...jaroorat क्यों nhi...are उसके बदले गोलू जी उसे 10000 रुपये देते है महीने ke....samjha....

मैं- वो ठीक hai....par हमे पैसों की क्या kami....abbu का धंधा तो है hi...

डडिजान- अब तुझे क्या bolu...lagta है तुझे ये भी नहीं पता की तेरे अब्बू का धंधा भी अब गोलू जी के भरोशे hi चल रहा hai....bada नुक्सान हो गया था उन्हें ...वो तो गोलू जी ने आ कर मदद की तब जा कर कुछ सम्भला hai....aur इसीलिए उन्होंने hi तेरी अम्मी को अपने घर आने को bola..taki उनकी ममी सिलाई, बुनाई, कड़ाई सीख सके और बदले में जो पैसे milege...us से इस घर का भला भी हो जायगा....

मैं- dadijaan...main कुछ भी नहीं समझ प् raha...aap मुझे सब सुरु से samjhao....aakhir हुआ क्या tha...sab सुरु से....

डडिजान- सुरु se..ohh.... .याद aaya...tu तो उस दिन था hi नहीं yaha....tabhi....

मैं- मैं कहा गया tha...aur किस दिन की बात कर रही है...

डडिजान- बताती hu....tu उस दिन सायद अपनी फूफी के साथ सहर गया tha...wo मेरे दूर के भाई है na...unke यहाँ साडी में नहीं गया था......

मैं- haa..mujhe याद hai...main और फूफी 5-6 दिन रुक कर आये थे वह....

डडिजान- ha...to ये उसी वक़्त की बात hai....wo क्या हुआ....

एक दिन आलम के अब्बू को एक बड़ा आर्डर mila....order इतना बड़ा था की उनको पूरी दूकान का सामान hi ले जाना पड़ा...

फिर वो पूरा सामान ट्रक में भर कर पास के गाओ जा hi रहे थे की कुछ लोगो ने उन पर हमला कर दिया.....

आलम के अब्बू और उनके साथियों को मारा और बाढ़ diya....aur फिर पूरा ट्रक ले गए.....

बाद में जब किसी की मदद से आलम के अब्बू लोग आज़ाद हुए तो उन्होंने ट्रक खोजै...

और फिर उन्हें ट्रक मिल भी gaya....wo पास में hi जंगल में mila....par उस ट्रक का पूरा सामान गायब था....

Bas....fir क्या tha....aalam के अब्बू को एक बहुत बड़ा नुक्सान हो gaya....use समझ hi नहीं आ रहा था की क्या करे....

एक तो आर्डर भी गया और अपना पूरा सामान bhi....jis से वो बड़ा परेशान हो गया....

तब गोलू भाई आगे आये और उन्होंने आलम के अब्बू को कर्जा दिलवाया और सामान kharidwaya.....tab जा का उनका धंधा दोवारा सुरु हुआ....

इस तरह तेरे अब्बू पर गोलू भाई का 2 लाख का कर्ज़ा चढ़ gaya.....jise वो अब तक चूका नहीं सके है..

और फिर गोलू भाई ने hi आलम के अब्बू को ये सलाह दी की वो अपनी बीवी को उनके घर भेजने lage..taki वो जा कर उनकी ममी को सब सीखा sake....aur इसके बदले वो 10000 रुपये dege...har महीने...

तो इससे उनको मदद भी हो जायगी और कर्ज़ा चुकाने के लिए बचत भी हो सकती है....

तो इस तरह से आलम की अम्मी लगभग पिछले 2 महीनो से गोलू भाई के घर रोज जाती है.....4 बजे जाती है और 6-6:30 तक आती है....

ये सब सुन कर मैं hakka-wakka रह gaya...mujhe समझ hi नहीं आ रहा था की क्या kahe...kyoki मुझे तो इस बात की भनक तक नहीं थी की मेरे घर में इतना बड़ा मसला हो चूका है....

इसलिए मैं अपना सर झुका कर बैठ गया.......

डडिजान- अरे beta....tu क्यों उदास हो रहा hai....tere abbu-ammi है na....wo सब ठीक कर dege...aur फिर गोलू जी भी तो है हमारी मदद के लिए....

मैं- गोलू जी....

डडिजान- और नहीं तो kya...are जब तेरे अब्बू का नुक्सान हुआ था na...to पुते 5 दिन गोलू जी रोज घर आते the....yaha 1-2 घंटे हम सबको समझते the...dilasa देते the...aur यकीन दिलाते थे की हमारा सब अच्छा hoga...wo भी जल्दी से jald.....samjha....

मैंने जैसे hi सुना की गोलू भाई हमारे घर कई दिन आये वो भी 1-2 घंटे के liye.....to मैं झटक utha....pata नहीं kyo...par मुझे कुछ गलत होने का शक पैदा हो गया था....

Main(khada हो कर)- dadijaan...ammi कितनी देर पहले गई है...

डडिजान- अरे बताया तो था....4 बजे जाती hai....abhi क्या वक़्त हुआ...

Main(ghadi देख कर)- 4...अभी तो 4:25 hi बजे है...

डडिजान- तो वो भी तो अभी हाल में hi निकली ha...par तू क्यों पूछ रहा है......

मैं- कुछ नहीं......

ये कह कर मैं भी तेजी से बहार जाने लगा.....

डडिजान- are...ab तू कहा भाग रहा है....

Main(bina देखे)- जावेद के ghar....shaam तक आ जाउगा....

डडिजान- ये lo....abhi थका हुआ tha....ab ऐसे भाग रहा जैसे की...

इतना बोल कर डडिजान मुस्कुरा उठी और वह मैं तेजी से गोलू भाई के घर की तरफ निकल गया......

Main(chalte हुए)- उम्मीद है की मेरा शक गलत nikle....aur अम्मी सच में silaai-bunaai hi शिकणे गई ho.....par गोलू भाई का कुछ कह नहीं sakte.....wo अयर्तों के लिए बड़े खतरनाक है....

और खलील तो इसका jeeta-jagta सबूत hai...aur फिर मैंने खुद अपनी आँखों से देखा tha....kaise उस ायरत को छोड़ रहे the....uske लिवास के साथ.....

पर मेरी अम्मी तो बड़ी सरीफ hai....wo तो किसी गैर मर्द से ज्यादा बात भी नहीं karti...are सामने तक नहीं आती....

फिर bhi....golu भाई तो गोलू भाई hai....khaleel की अम्मी भी तो बड़ी सरीफ thi...main जनता था unhe...par dekho...kya बना दिया गोलू भाई ने उन्हें....

Nhi-nhi...mujhe खुद जा कर देखना hi hoga..kahi गोलू भाई मेरी अम्मी के साथ....

ये ख्याल आते hi मेरा जिश्म कांपने लगा.....

Main(man में)- पर मैं वह जा कर कहुगा kya....ki मैं क्यों aaya....golu भाई से मिलने का बोल du...par अगर वो सामने आ कर पूछेंगे की kyo...to क्या boluga....aahh..fir क्या bolu...ammi से मिलने आया बोल du....par अम्मी भी वजह पूछेगी to...nhi...ye भी ठीक नहीं...

अगर ऐसे पूछा तो सायद सच कभी न पता chalega....to क्या करू....

Haa....raju bhai....use तो भूल hi गया tha...wo तो पुराण दोस्त है apna....usi के पास जाता hu...aur उसे सब साफ़ बोल duga...nhi...abhi nhi...abhi तो सिर्फ शक hai...to ऐसा नहीं बोल sakta....hmm..kya बोलू फिर....

Main(soch कर)- haa...ye सही rahega....use खलील की कहानी सुनाने का बहाना बोल duga...aur तभी पूछ भी लगा की गोलू भाई इस वक़्त कहा hoge...haa..yahi सही होगा....

Bas...to फिर हो gaya....ab पता लग hi जायेगा की मेरा शक सिर्फ शक hi है या फिर इसमें कैच सच्चाई भी है.....

ये सब सोच कर मैं गोलू भाई के घर पहुंच गया और गॉर्ड से बोल कर सीधा राजू से मिलने घर के अंदर चला गया.....

अंदर पहुंच कर मैं राजू को देख रहा tha...par राजू किसी रूम में बैठा हुआ टीवी देखते हुए मुस्कुरा रहा था....

फिर राजू रूम से बहार आया और एक नौकर को कुछ बोल कर निकल गया....

यहाँ मुझ को राजू नहीं मिल रहा था तो मेरा दिमाग घूम रहा था....

तभी एक नौकर aaya...aur उससे पूछने पर मुझे पता चला की राजू घर के पीछे बने स्विमिंग पूल के पास गया है....

मैं- ohh..to तुम उसे बुला डोज....

नौकर- nhi...mujhe काम hai...tum खुद चले जाओ waha....rasta उस तरफ से hai...wo मिल जायेगा वही....

मैं- ठीक है....

Khair...main आगे बड़ा और कुछ hi देर में घर के पीछे बने स्विमिंग पूल के पास पहुंच gaya....par वह मुझे राजू कही नहीं दिखा...

फिर मैं थोड़ा और आगे बाद कर राजू को देख hi रहा था की एक नौकर फिर मिल गया....

मैं- अरे suno...wo राजू कहा है...

नौकर- पता nhi...yahi hoga...dekh लो...

मैं- achha...waise मेरी ammi...(man में)- nhi...ammi का नहीं पूछुंगा...

नौकर- अम्मी क्या...

मैं- अरे अम्मी nhi...wo..wo गोलू भाई की mami....wo कहा होगी...

नौकर- उनका मुझे नहीं पता...

मैं- ठीक hai....main राजू को ढूंढ कर पूछ लगा....

और फिर से मैं उस पूल के aas-paas राजू को देखने लगा....

तभी मुझे पूल के एक तरफ कुछ कमरे dikhe....aur मैंने सोचा की सायद राजू किसी कमरे में hoga...to मैं कमरे की तरफ बाद गया.....

पर मैं कमरे तक pahuchta...usse पहले hi मेरी नजर कमरे के बाजु में बने हॉल पर padi...jo सामने से खुला हुआ था और बाहर से अंदर का नजारा देखा जा सकता था....

मैंने देखा की उस हाल में एक ायरत सोफे पर झुकी पड़ी हुई है और गोलू भाई khade-khade उसे चोदे जा रहे है....

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ये देखते hi मैं घबरा गया और तुरंत आड़ ले कर छिप गया.....

मैं - ये kya...ye गोलू भाई तो खुले आम hi....kya आदमी है ye....aur वो aourat...wo कौन hai...use भी शर्म नहीं aati...are ऐसे तो उसे कोई भी देख सकता है....

Khair...Main कुछ देर तक तो छिपा raha...par फिर मैंने सोचा की आखिर मैं क्यों दर रहा hu....jab उन दोनों को कोई शर्म नहीं तो मैं क्यों शर्माओ......

यही सोच कर मैंने चुपके से देखना सुरु kiya...aur देखा की सामने उस ायरत की चुदाई जोरो पर थी....

वो ायरत अब कुटिया बानी हुई थी और गोलू भाई उसे दनादन चोदे जा रहे थे.....

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मैं- aahh...ye गोलू भाई की बॉडी भी na....sala जब ब्बि देखता hu..bas एक hi ख्याल आता hai...ki काढ़ ये मेरी अम्मी के भरे हुए जिश्म को मेरे सामने kuchle....uuff....ammi कितना मज़ा करेगी इनके sath.....aahh..

मैं अचानक से hi चुदाई देख कर गरम होने laga...aur अपने hi ख्यालों में खो कर मैंने सामने वाली ायरत को अपनी अम्मी समझ लिया....

मैं- wah...ammi तो मस्त लग रही है ऐसे चुड़ते huye...aahh..dekho to..kaise गांड hila-hila कर लुंड खा रही hai...bahut खूब ammi....aise hi...joor से हिलाओ अपनी gaand...aur पूरा मज़ा lo....golu भाई का तगड़ा लुंड hi आपको मज़ा दे सकता hai...aaahh...aur तेज ammi...aur तेज....

मैं मस्ती में इतना खो गया की मुझे उस ायरत की चीखे सुनने की तमन्ना जाग gai...aur मैं चुपके से बिलकुल हाल के पास आ gaya...aur एक तरफ की दीवाल के सहारे छिप कर मज़ा लेने लगा...

अब मैं उस ायरत की सिसकारियां साफ़ सुन प् रहा था.....

वो ायरत पूरी मस्त में सिसकते हुए अपनी गांड धकेल रही thi...aur गोलू भाई का तगड़ा लुंड उसकी छूट में सटासट andar-baahar हो रहा था...

ये देख कर मेरा लुंड फटने को आ gaya...ki तब्बी वो ायरत जोर से सिसकी और पास्ट पद gai....aur उसकी सिसकी के साथ hi मेरे लुंड ने भी पानी छोड़ दिया....

थोड़ी देर तक वो ायरत हफ्ते हुए पड़ी rahi....aur फिर गोलू भाई ने उसे पलटा कर सीधा लिटा दिया और फिर से चुदाई सुरु कर दी....

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अब मैं उस ायरत के bade-bade तने हुए दूध भी साफ़ देख सकता tha....par उसके बालों की वजह से उसका चेहरा नहीं देख प् रहा था....

मैं- wah...mast दूध है इसके to.....bilkul मेरी अम्मी के बराबर hi hoge....saayad कुछ kam-jyada ho....par मुजगे kya...mere लिए तो ये मेरी अम्मी है...

Ammi.....tum सच में कमाल ho....kya मस्त बदन है tumhara...bilkul गोरा और chikna...aur ये तुम्हारे दूध to...uummm...ye तो बने hi है दवा के चूसने के liye....aur ये तुम्हारी gaand.....kasam se...ise मारने का हक़ सिर्फ गोलू भ्सी को hi है.....

Aahh..ammi....aise hi chudwao....aur गोलू भाई के sath-sath होने बेटे को भी मज़ा कराओ....

ायरत- aahhh....jalan होने lagi....aahh....

गोलू भाई- चुप कर randi.....chudwate वक़्त नखरे नहीं...

ायरत- aahh..nhi...nakhre nhi...aahh....thoda dheere....aaaiii...

गोलू भाई- dheere...tera गांडू सौहार नहीं hu....asli मर्द hu..aur तू मेरी बीवी nhi...randi hai...bas चुदती रह चुपचाप.....

ायरत- aaahhh....theek hai...joor से maaro....aaahh..aahh..aahh...

ालन- शाबाश ammi....ye हुई न baat...golu भाई को गुस्सा मत karo.....dam से छुड़वाओ....

ये सब देखते हुए मैं एक बार फिर से गरम होने laga...aur यहाँ वो ायरत एक बार फिर से झाड़ कर पास्ट पद गई....

उसके झड़ते hi गोलू भाई ने उसे उठाया और लुंड की तरफ इसरा कर दिया.....

उनका इसरा प् कर ायरत फर्श पर बैठी और गोलू भाई का लुंड गले तक भर कर चूसने लगी...

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मैं- aahh..ammi..tum तो कमाल की रंडी ho....pura लुंड गपक liya...wah ammi...mujhe फक्र है तुम par...tum तो खलील की अम्मी को भी मात दे dogi...aahhh..joor से चूसो ammi...joor से.....

यहाँ मैं अपनी अम्मी को सोचते हुए मज़े मार रहा था तो वह वो ायरत पूरी सिद्दत से गोलू भाई का लुंड चूस रही थी....

गोलू भाई- aahh...saali...tujhe रोज पेलता hu....par तू आज भी लुंड चूसते वक़्त कमाल लगती hai...itna शानदार चूसती है की क्या kahu...aahh...

मैं- गोलू bhai.....ek बार मेरी अम्मी को फसा lo.....mujhe यकीन है की वो आपका लुंड ऐसे choosegi....ki आप अपनी तमाम रंडियों को भूल jayege...uuff..kya खूब नज़ारा hoga....meri अम्मी के नाजुक होंठ और गोलू भाई का तगड़ा lund.....aahh....jab वो लुंड अम्मी के होंठो से होता हुआ उनके गले में ठोकर मारेगा na....uuff...mera तो सोच कर hi....aahhh..ammi....

और मेरे लुंड ने एक बार फिर से पिचकारी मार दी और मैं हाफने लगा...

वह कुछ देर बाद वो ायरत कड़ी हुई और गोलू भाई ने उसकी एक टांग उठा कर हाथ में पकड़ ली...

और फिर उस ायरत ने खुद hi अपनी कमर आगे की और गोलू भाई का लुंड छूट में दाल लिया और खुद hi गांड hila-hila कर छुड़वाने लगी.....

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मैं- सुभान al**h .....ये क्या तरीका hai...wah....kamaal का तरीका hai...bahut खूब....

काश मेरी अम्मी सच में इसी तरह गोलू भाई से chudwaaye....aahh....kab होगा aisa...kab छुड़ेगी मेरी अम्मी.....

मैं अब मस्ती में डूब चूका tha...mujhe अब कुछ भी होश नहीं tha...main तो बस उस ायरत को अपनी अम्मी समझ कर आहें भर रहा था....

वही वो ायरत भी पूरी तरह मस्त थी और सटासट अपनी छूट में लुंड पिलवा रही थी...

और फिर गोलू भाई को भी मस्ती छड़ी और उन्होंने उस ायरत को हाथ में कैसा और ताबड़तोड़ धक्के मरने लगे...

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जिस से उस ायरत की चीखे निकलने लगी और चुदाई की थापे जोर से गूजने लगी...

गोलू भाई की मजबूत जाँघे उस ायरत की जांघो से टकरा कर थपका मार रही थी और मैं ये आवाज़े सुन कर पागल हो रहा था....

मैं आहें भरता हुआ उस ायरत को देख रहा tha...uske दूध उसकी gaand...lambai....sab की सब मुझे अपनी अम्मी की hi याद दिला रही थी....

बस उस ायरत का चेहरा hi मुझे अब तक नहीं dikha...kyoki मेरी तरफ उस ायरत के खुले हुए बाल थे....

चुदाई जोरो पर thi...aourat की सिसकियाँ और भी ज्यादा तेज होने lagi....aur वह मेरा लुंड भी उफान पर आ चूका था....

फिर एक चीख के साथ ायरत फिर से झाड़ गई और थक कर गोलू भाई के सीने में दुबक गई....

ायरत- aaahh....maar डाला....

गोलू भाई- क्या karu.....tu चीज hi ऐसी hai....tujhe देख कर लुंड बैठता hi नहीं hai...dekho...abhi भी खड़ा हुआ है...

Aourat(muskura कर)- तभी तो इसने मुझे इतना पागल कर diya.....jo मैं अपने सौहार और बाकि परिवार को भूल कर यहाँ छोड़ने भागी आती हु....

गोलू- hmm..chalo तो अब पागलपन सुरु करते hai....rukna मन है..

ये बोल कर गोलू भाई ने उस ायरत को उठा लिया और ायरत ने भी जल्दी से अपने हाथ उनके गले में और पेअर उनकी कमर में कास liye...jabki लुंड अभी भी उस ायरत की छूट में था.....

ायरत- aaahhh...isiliye तो आपकी रंडी बन gai....kitne मस्त तरीके से छोड़ते है aap.....meri जैसी ायरत भी जवान हो जाती है....

गोलू भाई- अरे तू तो है hi jawaan....par उसको dekh...saali को बुढ़ापे में जवानी चढ़ गई...

ायरत- hhmm..sab आपकी मेहरवानी hai....aap छोड़ते hi ऐसे है की हर छूट गरम हो जाती आअह्ह्ह.....

तभी गोलू भाई ने उसे ऊपर कर के लुंड पर पटक दिया और लुंड सीधा उसकी बच्चादानी से टकरा gaya...jis से ायरत चीख पड़ी..

पर गोलू भाई रुके nhi....wo लगातार उसे ुटलछलते हुए पेलते रहे और वो ायरत गरम हो कर सिसकने लगी.....

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जबकि मैं ये नजारा देख कर सन्न रह गया tha....kyoki मैंने इतने करीब से ऐसी चुदाई पहले कभी नहीं देखि थी....

एक बार फिर उस ायरत की सिसकी और जिश्म के टकराने की आवाजे गूंजने lagi...aur उन्हें सुन कर मैं मस्ती से पागल होने लगा...

एक तो वो कामुक आवाज़े और ऊपर से शानदार नजारा....

क्योकि गोलू भाई उस ायरत को उठा कर घूम गए the....jis से मेरी तरफ इस वक़्त उस ायरत की गांड थी....

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और उस गांड को अपनी अम्मी की गांड समझ कर मैं तेजी से अपना लुंड मसल रहा था.....

ायरत- aaaahhh.....main फिर se....aaaahhhhhhh...

मैं- aaahhh...main भी आया ammi.....uuufff......

वह वो ायरत झड़ी और यहाँ मेरे लुंड ने पिचकारी मार di.....aur वह उस औरत के झड़ते hi गोलू भाई ने उसे नीचे बैठाया और तेजी से उसका मुँह छोड़ने लगे....

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और फिर एक तेज गुर्राहट के साथ उसका मुँह अपने लुन्द्रास से भरने लगे....

ये नजारा मैं आज पहली बार इतने पास से देख रहा tha....uper से वो ायरत मुजगे अपनी अम्मी दिख रही thi...isliye मैं मस्ती में चूर था की तभी किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा...

और मैं चौंक कर मुँह खोलने hi वाला था की एक हाथ ने मेरे मुँह को बंद कर दिया....

राजू- sshhh...chup rahna....ab चल यहाँ से....

और फिर राजू मुझ को खींच कर वह से एक रूम में आ गया....

Raju(gusse से)- तू कर क्या रहा था वह....

मैं- वो main....main तो bas...wo चुदाई...

राजू- chudaai...haa...abe saale...agar गोलू भाई तुझे देख लेते na...to उस ायरत को छोड़ कर तेरी गांड मार dete....samjha....

मैं- main...main क्या karu...wo नजारा hi ऐसा था की main.....maaf कर दे भाई...

राजू- maaf..are वो तो अच्छा हुआ की गोलू भाई ने तुझे देखा nhi.....nhi to...khair....tu वह गया क्यों...

मैं- वो तो मैं तुम्हे ढूँढ़ते हुए पंहुचा tha...kisi ने बोलै की तू वह गया hai...to बस....

राजू- ohh.....par तू मुझे ढूंढ क्यों रहा tha...koi काम था...

मैं- kaam....wo..are haa...wo मैं अपनी अम्मी का पूछने आया tha.....wo आती है न यहाँ...

राजू- ha...wo भीतर hi hogi....par वो तो 6-6:30 तक hi जाएगी bapis....tujhe उनसे काम था क्या कोई...

मैं- nhi...bas ऐसे hi....socha की देखता chalu....bas...main to....wo माजिद के घर आया था न....

राजू- अरे haa...mujhe भी जाना था उसके पास...

मैं- तो चले...

राजू- nhi...abhi nhi...mujhe गोलू भाई का काम करना होगा thoda..tum jao...main बाद में आ जाउगा....

मैं- ठीक hai...waise राजू bhai...ek बात बोलू...

राजू- है...

मैं- वो ायरत थी koun....maine उसकी सकल नहीं देखि....

राजू- wo...golu भाई की रंडी hi है.....

मैं- randi....par कहा ki..isi गाओं की या....

Raju(bech में)- इसी गाओं ki.....aur गाओं में इसे सब एक बेहद नेक और सरीफ निकाहि खातून समझते hai....par ये यहाँ रोज आ कर रान्दीपन की साड़ी हाडे पार कर जाती है...

मैं- ohh...jaise...kya करती है ये....

राजू- चलो दिखता हु....

ये बोल कर राजू मुझे छज्जे पर ले गया और वह मैंने देखा की गोलू भाई पेशाब कर रहे थे और वो ायरत अपना मुँह खोले उसे पि रही थी....

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Main(man में)- ohh...ye to....kya एयरटेन ऐसा भी करती hai....kya मेरी अम्मी भी ऐसे पेशाब पि सकती hai...agar मेरी अम्मी भी गोलू भाई का पेशाब पिए to.....aahh...main तो ये सोच कर hi गरम हो gaya...uff.....

राजू- देख liya...ab चल...

मैं- bhai...iska चेहरा तो देख लू...

राजू- अभी nhi..abhi chal....warna अपने साथ मुझे भी marwayega....chal...

ये बोल कर राजू मुझे खींच लाया और हम दोनों बॉउंड्री में आ गए....

राजू- अब तू ja....aur किसी के सामने मुँह मत kholna..samjha...

मैं- है bhai....par bhai...kya मुझे फिर से ऐसा नजारा देखने मिलेगा...

राजू- hmm..main batauga...tab aana...abhi जा.....

मैं- ठीक hai....phon करना मुझे....

और फिर मैं वह से निकला और मजीद के पास आ gaya...jaha जावेद और सैफ भी बैठे थे...

तो हम सब दोस्त कुछ वक़्त तक वही बातें करते रहे और फिर करीब 7 बजे मैं घर पहुंच gaya....tab तक मेरी अम्मी भी आ चुकी थी...

जो की सलवार- कमीज पर पूरा दुपट्टा ले कर रसोई में काम कर रही थी...

Khair....main आ कर फ्रेश हुआ और सीधा अपने बिस्टेर में लेट gaya......kyoki मैं कई बार झाड़ कर थक चूका tha...to कब सो gaya...ye मुझे पता hi नहीं चला.......

और फिर मैं सीधा तब jaga...jab फूफी मुझे खाने के लिए उठाने आई....

पर जब मैं सबके साथ खाना खा रहा था तो मैंने कुछ ऐसा dekha....jisne मेरे दिमाग में परेशानी भर दी....

असल में खाना कहते वक़्त जब फूफी झुकी तो मुझे उनकी कुर्ती के भीतर उसी रंग की और वैसी hi ब्रा दिखी....

जिस तरह की ब्रा पहन कर वो ायरत गोलू भाई से चुद रही थी....

ये देख कर मेरे दिमाग में कई सवाल जाग गए....

और मैं खाना ख़त्म कर के अपने बिस्तर पर leta-leta अपने hi सवाल पैदा करने laga.....jaise की....

क्या ये वही ब्रा hai....jo उस ायरत ने पहनी थी....???

हो भी सकती hai...kyoki ऐसी ब्रा तो गाओं में मिलती भी nhi...aur कोई पहनता भी नहीं hoga...to क्या ये गोलू भाई ने hi दी ...???

क्या वो ायरत सच में मेरी फूफी hi थी....??

क्या उस रात गोलू भाई hi फूफी के साथ ऊपर वाले कमरे में थे.....???

क्या फूफी भी अम्मी के साथ गोलू भाई के घर जाती hai...ya अकेले hi...??

क्या मेरी अम्मी को ये पता है की जिस वक़्त वो गोलू भाई के घर में thi....us वक़्त hi फूफी भी वही thi....aur गोलू भाई फूफी को छोड़ रहे थे....?????

अपने दिमाग में पैदा किये सवालों से मैं परेशान हो रहा tha....halaki मुझे इस से कोई फर्क नहीं padta...wo फूफी hoti...to भी मैं उन्हें देख कर मज़ा hi लेता....

पर मुझे सच जानना tha....aur उस सच को कैसे जाना jaaye....bas यही sochte-sochte मैं सो गया.....

==========================

वही दूसरी तरफ माजिद के घर रात को सोने के वक़्त कुछ ऐसा इंतज़ाम किया गया था.....

की मजीद के मामू लोग , खालू और ननजान को बाजु वाले पडोसी के एक कमरे में सुलाया गया था.....

वही ममिजान की अप्पी के सौहार हॉल में सोफे पर सोये the....uske बाजु में एक पलग लगा कर अप्पी को सोने बोलै गया tha.......aur माजिद की खला को माजिद के साथ सुला दिया गया था.....

क्योकि माजिद की ममिजान ने उसकी खला को ये कहा था की माजिद की हालत अभी ठीक nhi...wo गम में hai..isiliye मजीद अपनी कला के साथ सोया हुआ था.....

और मजीद की ammi....yani की मुमताज के कमरे में 4 लीग सो रहे थे.....

माजिद की ammi.....uski दोनों mamijaan...aur बड़ी ममिजान की बेटी....

[ आगे की KAHANI....MAAJID की जवानी......]

घर में हम सभी सोये हुए the......tabhi करीब रात के 2 बजे अचानक मेरी आँख खुल गई.......

और आँख खुलते hi मुजगे मेरी खला का चेहरा dikha...jo मेरी तरफ मुँह कर के सो रही थी...

फिर मेरी नजरें थोड़ी नीचे gai...to मुझे उनकी कुर्ती के बाहर हो चूका दूधो का हिंसा और गहली दरार नजर आने लगी...

Khair...mera लुंड तो पहले hi तना tha...pesaab जो लगी thi...uper से खला का गोरा जिश्म देख कर तो और भी फड़क उठा....

पर मैंने अपने सर को झटका और बाथरूम गया और फिर मुझे नीड hi नहीं aai...to मैं खला के पीछे की तरफ जा कर उनका पिछवाड़ा देखने लगा....

मैंने देखा की खला की गांड एकदम बड़ी और गद्देदार thi....aur इस वक़्त उनकी कुर्ती भी अपनी जगह से सरक चुकी thi..to मुझे उनकी सलवार का नाडा और कमर का कुछ गोरा हिस्सा भी दिख गया....

पर फिर से मैंने सर झटक जार अपने ख्यालों को रोका और पानी पीने किचेन में आ गया.....

पर हॉल से निकलते वक़्त hi मुझे कुछ आहात hui...par मैंने उस पर गौर न कर के सीधा किचेन की तरफ कदम बड़ा दिए....

और फिर जब मैं बापिस कमरे में आने laga....to मेरा दिल किया की चलो एक बार अम्मी के कमरे में देख लू...

क्योकि मुझे पता tha....ki वह गोलू भाई की 3-3 रंडियां साथ में सोइ हुई hai....meri ammi...badi ममिजान और उनकी beti.....bas छोटी ममिजान hi thi...jo अब तक गोलू भाई का लुब्द नहीं खा सकीय थी...

Khair...main खिड़की पर गया और जैसे hi मैंने भीतर का नजारा देखा तो मेरे होश उड़ गए....

क्योकि भीतर वो चरों एयरटेन बिलकुल नंगी thi...aur उनके साथ था एक ताक़तवर , गठीले जिश्म वाला मर्द....

जी haa...wo गोलू भाई hi the....jo आराम से बीएड पर नंगे हो जार पसरे थे और चारो aourten(ammi, दोनों ममिजान, अप्पी ) उनके दोनों तरफ नंगी बैठी हुई thi....saayad लुंड hi चूस रही थी.....

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गोलू भाई- to....ab कौन आएगा...

अम्मी- पहले मैं....

ममिजान - अरे haatt....din भर से चुद रही hai...fir भी चैन nhi....pahle तो मैं hi खाऊगी....

छोटी ममिजान- kya...nhi-nhi...tum दोनों तो कई बार खा चुकी ho...aaj तो मेरा हक़ बनता है....

अप्पी- अरे nhi..main सबसे छोटी hu...to मेरा हक़ पहले....

अम्मी- पर तू तो पहले से hi अपने पेट में इनकी अओलाद ले कर घूम रही hai....abhi क्या jaroorat...isko निकाल le...fir डलवा lena...hehehe....

अप्पी- नहीं fufi....kam से काम एक बार तो करने दो न....

ममिजान- है beti...tu पहले कर le.....aur फिर जा कर अपने सौहार के पास सो ja....warna कही तेरा सौहार जाग गया और तू उसे न दिखी to....badi मुश्किल होगी...

छोटी ममिजान- पर मेरा kya...koi मेरा भी सोचो...

अम्मी- अरे तेरा नंबर भी aayega.....pahle इसे ले लेने do....bechari पेट से hai...thoda तो तरस खाओ.....

ममिजान- चल beti....ab चढ़ ja....aur जल्दी से खा कर निकल ले....

अप्पी- वह ammi...main जलफलदी jaau...aur आप रात भर खूँदती raho..huh...

ये बोलते हुए अप्पी उठी और दोनों तागे गोलू भाई के aaju-baju कर के उनके ऊपर आ गई....

फिर ममिजान ने गोलू भाई का लुंड अप्पी की छूट पर लगाया और अप्पी धीरे से बैठ गई....

अप्पू- aaahh....abhi भी तकलीफ देता hai....aahh...

ममिजान- अरे तकलीफ तो देगा hi...ye कोई आधा लुंड nhi...tere सौहार की tarah...ye पूरा hai...aur वो भी इतना tagda....ab आराम से चुद ले....

अम्मी- वैसे bhi..maza लेना है तो थोड़ी तकलीफ साहनी hi पड़ती hai...kyo...

ममिजान- अरे thodi....abhi dekhna.....ye हमारी चीखे nikalwayege.....aur ऐसी हालत कर के जायेगे की सुबह उठा भी न जायगा.....

गोलू भाई- अब चुप रहो तुम sab...aur बीएड से नीचे jaao...mujhe मेरी छोटी सी रॉड को अच्छे से मज़ा देना hai....waise भी अब ये 6-7 महीने किसी काम की नहीं rahegi....samjhi na....chalo...utro बीएड से....

गोलू बगै का हुकुम सुन कर बाकि सब बीएड के नीचे आ गई और गोलू भाई मेरी अप्पी को प्यार से छोड़ने lage...kyoki वो पेट से थी.....

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अप्पी- aaahh....kitna याद किया aapko....aahh....ab जा कर मिले हो....

गोलू भाई- क्या karu...tu हल्दी सदी जार gai....kuwari होती na...to यही रख लेता तुझे....

अप्पू- aahh..to अब रख लो....

गोलू भाई- फिर तेरा सौहार....

अप्पी- uska...aahhh..uska वो jane....mere तो मज़े होंगे na....aur waise..aahhh..waise bhi...is पेट में आपकी hi अओलाद hai...uski नहीं....

गोलू- तभी to...use पलने दो मेरी aoulaad....aur तू फ़िक्र मत kar....tera पेट खली नहीं रहने duga...tu बस इसे पैदा kar...fir तुझे यही बुलवा luga....aur fir....yeehhhh...

अप्पी- aaahhh...mar gai..aahh..ammi.....aaahh..

गोलू भाई ने अप्पी की कमर पकड़ कर तेजी से धक्के मरने सुरु कर दिए और अप्पी चीखने लगी....

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अम्मी- are...chup rah..marwayegi क्या.....

ममिजान- और kya...bhool गई क्या की तेरा सौहार सोया है baahar...aur तेरी एक फूफी भी इसी घर में सोइ hai..tere भाई माजिद के साथ...

अप्पी- aahh...maaf karna....par क्या karu....ye बहुत बुरा मारते है.....

गोलू- तुझे मज़ा भी तो देता हु न...

अप्पी- aahh..wo to...aahhh..main aai..aaahh..aahhh..aahh...aah...

और अप्पी झाड़ कर पास्ट पद gai...aur फिर ममिजान ने उन्हें उठाया और बहार जाने को कहा...

हलाकि अप्पी को बहार नहीं जाना tha..par एक तो वो पेट से thi...aur फिर हॉल में उनके सौहार अकेले सोये the....to वो मजबूर हो कर हॉल में चली gai....taki अगर उनके सौहार jaage...to वो सबको चौकंबा कर सके....

Khair...appi के जाते hi अम्मी और ममिजान बीएड पर चढ़ गई और अप्पी के चुतरस से सना हुआ लुंड चूसने लगी....

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छोटी ममिजान - are...mujhe भी तो जगह do...mujge भी चूसना है...

अम्मी- uummhhhh..aahh..nhi...choosna हमारा काम है aaj....tu बस लुंड खाने को तैयार हो जा....

ममिजान- uummmhhhh...aahh..bilkul...tu और चुद le...fir तो हम दोनों hi छुड़ेगे साड़ी रात....

छोटी ममिजान- kyo...main क्या एक hi बार छुड़वाने आई हु...

अम्मी- uuummmhh.....nhi...par एक बार में तेरी वो हालत hogi..ki आज की रात तो तू छोड़ने से रही....

छोटी ममिजान- रहने do...aisa कुछ नहीं होगा...

ममिजान- uummmhh...are तू इसे खा तो sahi....ise पहली बार खाने वाली को वैसी hi तकलीफ होती hai..jaisi छूट की शील टूटने के वक़्त होती है....

छोटी ममिजान- वो मैं देख lugi...ab हटो.....

गोलू भाई- haa..ab हटो तुम dono...mujhe मेरी नैरंडी को मज़ा देना hai...aa जाओ मेरी jaan....aaj तुझे जाँबाट की सैर करता हु....

Main(man में)- lo....ek और gai....mamijaan....uperwala आपको ताक़त de.....kyoki आप नहीं जानती की अब आपकी कैसी बुरी हालत होने वाली है...

और मैं सोच hi रहा था की एक जोरदार चीख से मैं चौंक गया.....

ये चीख किसकी थी......??????

नोट - अपडेट पोस्टेड frnd....hope ु लिखे आईटी......

थैंक्स फ्रेंड्स.....


कीप रीडिंग........
 
अपडेट - 79

Main(man में)- lo....ek और gai....mamijaan....uperwala आपको ताक़त de.....kyoki आप नहीं जानती की अब आपकी कैसी बुरी हालत होने वाली है...

और मैं सोच hi रहा था की एक जोरदार चीख से मैं चौंक गया.....

ये चीख किसकी थी......??????

अब आगे.......

[ माजिद की जवानी.......]


ये चीख थी मेरी छोटी ममिजान ki......jiski छूट में गोलू भाई ने एक hi धक्के में पूरा लुंड पेल दिया था.....

ममिजान की चीख निकलतर hi अम्मी ने उनका मुँह दवा लिया.....

अम्मी- क्या कर रही hai....pura गाओं बुलाएगी क्या....

छोटी ममिजान- uummmm..uuummmmmmmmm......

अम्मी- अब मत ckeekhna....main हाथ हटती hu...theek....

स ममिजान (हाथ निकलते hi)- aahhh....maar डाला re....aaahh.....ek बार में hi....aaahh....

गोलू भाई- मैंने सोचा की thoda-thoda दर्द देने से अच्छा होगा की एक साथ hi दर्द दे du....taki टाइम बच जाए....

स ममिजान- aahhh...time के चक्कर me...aahh..meri फाड़ dali....aahh..

ममिजान- अब नखरे मत kar...tujhe hi लुंड खाना था na...to अब आराम से kha....samjhi....bhool mat...hum भी लाइन में है...

Appi(bahar से)- सब ठीक तो है न अम्मी...

ममिजान- ha...tu आराम kar....aur तेरा सौहार तो नहीं जगा न....

अप्पी- अरे nhi...wo तो घोड़े बेच कर सोते hai....lekin इतनी जोर से चीखा कौन....

ममिजान- तेरी chachijaan.....pura लुंड एक बार में hi घुसा लिया न....

अप्पी- hehe...tab तो चचीजां की फैट hi गई hogi....chachijaan....ye चचाजान का आधा लुंड nhi....golu जी का पूरा लुंड hai....to संभल कर....

स ममिजान- aahhh..chup कर के सो ja...main जानती हु की mujhe...aahh..kya करना है...

अप्पी- ठीक hai...ab आराम से chudwao...cheekhna मत....

स ममिजान- aaahh..haa...tu ja...aahh..golu ji...ab रुके क्यों ho....faad तो डाली hi hai...aahh..

गोलू- तो ले फिर...

और गोलू भाई ने छोटी ममिजान की टांग पकड़ी और लुंड पेलना सुरु कर diya.....aur दूसरी तरफ बड़ी ममिजान भी अम्मी की छूट से खेलने लगी.....

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पुर रूम में सिर्फ हवस का नंगा नाच छाया हुआ tha....ammi और दोनों ममिजान मस्ती में सिसक रही thi...aur गोलू भाई मेरे घर की एक और नेक खातून को अपनी रंडी बना कर छोड़ रहे थे.....

छोटी ममिजान के लिए गोलू भाई का तगड़ा लुंड कुछ ज्यादा hi असरदार साबित hua....aur वो एक जोरदार चीख के साथ झड़ने लगी.....

पर गोलू भाई ने उन्हें छोड़ना जारी rakha...aur वह बड़ीमामिजान अम्मी के पीछे आ कर उनकी छूट में ऊँगली करने लगे.....

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अम्मी- ohh..bhabhijaan...tum तो छूट में आग भड़का रही ho....aahh....tej karo...aise hi...

बड़ी ममिजान- ha.....ab तो ऊगली से hi जाम hoga.....aaj लुंड तो छोटी ने पकड़ रखा है......

छोटी ममिजान- aaahh...to..aah....tum दोनों ने to...aahh...khoob khaya.....mujhe तो आज mila...aaahh...holu ji....joor se...aahh...aahh...

छोटी ममिजान पूरी मस्ती से अपनी छूट में गोलू भाई के लुंड का लुफ्त ुतलहा रही thi...aur वह बड़ीमामिजान की उँगलियाँ अम्मी के छूट लरस से भीगती जा रही थी....

फिर जैसे hi छोटी ममिजान दोवारा से झड़ी तो गोलू भाई ने बड़ी ममिजान को खींच कर कुटिया बना liya...aur उनकी छूट में लुंड उतार दिया....

अम्मी- aahh...ab मैं क्या karu....meri छूट में बड़ी तेज खुजली हो रही है....

बड़ी ममिजान- aaahh...tu इससे चुसवा le....aaahhh...main इसकी चूसती hu...aaahh.uuummm...

ममिजान की बात सुन कर अम्मी तुरंत अपनी छूट खोल कर छोटी ममिजान के मुँह पर आ gai...aur वह बड़ी ममिजान गोलू भाई का लुंड कहते हुए hi छोटी ममिजान की छूट का पानी चाटने लगी.....

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अम्मी- aaahhh...bhabhijaan....tum तो बड़ा अच्छा चूसती ho...uuummm...thoda तेज karo...main...aahh...

छोटी ममिजान- sssrrruuupppp....ssssrrruuupppp...aaahhh..bgabhijaan....jawaan hi दाल di...uuumm...sssrrruuupppp....sssrruuupppp....

बड़ी ममिजान - uuuuummmmmmmhhh...aah....teri छूट का पानी to..aaahhh...golu ji....dheeree...aaahh..uuummmm..uummm..

पुरे रूम में इस वक़्त सिर्फ चुदाई और चुसाई की आवाजें hi शोर मचा रही थी....

मेरी अम्मी और दोनों ममिजान सायद सब भूल कर इस गरम चुदाई का मज़ा लूट रही thi...na hi उन्हें मेरी फ़िक्र thi...aur न hi किसी और की....

वो तीनो तो इस वक़्त रंडियों की तरफ अपने मालिक को खुश करने में लगी थी...

ये सब देखते हुए मैं इतना गरम हो चूका था की मैंने अपना लोएर नीचे सरका कर लुंड हिलना सुरु कर दिया tha..aur मेरा लुब्द एक बार फिर से पिचकारी मारने की तैयारी में लगा था....

वह कुछ देर बाद बड़ी मामिजान भी झाड़ gai....to गोलू भाई ने उन्हें बीच से हटाया और दोवारा से छोटी ममिजान की छूट मरने लगे.....

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छोटी ममिजान फिर से लुंड कहते hi मस्ती में आ गई और अम्मी की छूट को रगड़ने lagi...wahi बड़ी ममिजान अपनी छूट को सहलाते हुए खुद को दोवारा से गरम करने लगी....

गोलू भाई- क्यों मेरी randi....maza आ रहा है न.....

छोटी ममिजान - aaahhh....bahut ..aahh...aisa ahsaas....uuummm..pahli दफा hua...aaahhh...joor se...aaahh..aaahh...

अम्मी- कुआ हुआ bhabhijaan....apne हाथ से hi सुरु हो गई....

बड़ी ममिजान- तो क्या karu....golu जी तो आज नै छूट प् कर हम पर ध्यान hi नहीं दे रहे....

अम्मी- कोई बात nhi...main हु na....aaiye...main चूस देती हु....

ये बोल कर अम्मी उठ कर बड़ीमामिजान की छूट चाटने lagi...aur यहाँ गोलू भाई पूरी रफ़्तार से छोटी ममिजान को ठोकने लगे....

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ममिजान की सिसकियाँ अब और तेज हो चली thi...sur साथ में hi अम्मी और बड़ी ममिजान भी मस्ती में सिसके जा रही थी...

वही गोलू भाई का लुंड सटासट छोटी ममिजान की छूट फाड़ने में लगा था और मेरा हाथ मेरे लुंड पर पूरी रफ़्तार से aage-piche हो रहा था.....

मरे घर का तापमान इस वक़्त चरम पर tha.....hawas की आग में 5 जिश्म धहक रहे the....aur फिर लगभग एक साथ hi सारे जिश्मो की गर्मी निकलना सुरु हो गई....

अम्मी और ममिजान झाड़ कर शांत हो gai...aur छोटी ममिजान भी एक बार फिर से अपनी छूट से गर्मी छोड़ने लगी...

मेरे लुंड ने भी पिचकारी मार कर मुझे ठंडा कर दिया.....

और फिर गोलू भाई भी अपनी गर्मी को निकलने के लिए तैयार थे....

गोलू- aaahh...main भी आया....

गोलू भाई की बात सुनते hi अम्मी और दोनों ममिजान गोलू भाई के लुंड के पास मुँह खोल कर आ गई...

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और गोलू भाई ने भी उन्हें निराश नहीं किया....

गोलू भाई ने bari-bari तीनो के मुँह में लुन्द्रास की पिचकारी मार दी....

अम्मी- uummhh...maza आ गया...

बड़ी ममिजान- uummm...kitna गरम और कितना सारा माल nikla....uumm..

छोटी ममी- uummhh...ab तुम दोनों hato...baki का मैं चुसोगी....

अम्मी- haa...aaj तेरा hi वक़्त hai....acche से चूस le....fir तो रोज hi milega..hehehe....

बड़ी ममिजान- है chhoti....choos le...gale में भर कर चूस....

और फिर छोटी ममिजान ने लुंड को मुँह में भर कर लुन्द्रास की आखिरी बूँद भी छत ली.....

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अम्मी- aahh...ab थोड़ा आराम कर lo....fir मेरा नंबर hoga...koi बीच में मत आना....

बड़ी ममिजान- hmm..aur मेरा bhi....chhoti....tu अब आराम करना....

छोटी ममिजान- पर मेरा तो पहली वलबार hai....thoda तो सोचो..

गोलू भाई- तू फ़िक्र मत kar....sabko मज़ा milega...abhi आराम कर लो...

फिर सब बीएड पर लेट कर आराम फरमाने लगे और मैं थकान की वजह से अपने कमरे में आने लगा.....

Main(man में)- क्या किस्मत है meri....mere घर की ये नेक khatoone.....saali एक नंबर की रंडियां hai...sab की sabbb...aaaahh...aaaa...mar गए.....

मैं जा hi रहा था की अचानक मेरे सामने वो आ gaya.....jise देख कर मेरी बोलती बंद हो गई......

Main(man में)- अब इन्हे क्या बोलू....????

=============================

मजीद के घर जहा सच में चुदाई चल रही thi....wahi आलम अपने बिस्टेर पर सोया हुआ सपने में hi अपनी अम्मी की चुदाई देख रहा था....

आलम ने आज गोलू भाई के घर पर जिस ायरत को चुड़ते हुए देखा tha.....wo उसे अपनी अम्मी सोच कर वो चुदाई याद कर रहा था.....

और फिर जैसे hi उसके सपने में उसकी अम्मी की चुदाई ख़त्म hui....to आलम की आँख खुल gai...aur उसने देखा की उसका ुंडेरवेरे गीला हो चूका hai..kyoki वो सपना देखते हुए झाड़ चूका था......

[ आगे की KAHANI.....AALAM की जवानी......]

मेरी आँख खुली तो मैं अपने बिस्टेर पर tha....wo भी गीली ुंडेरवेरे के साथ....

Main(man में)- अगर सपने में अम्मी को चुड़ते देख कर मेरा ये हाल hua....to असल में क्या hoga.....kua होगा जब गोलू भाई सच में मेरी अम्मी को chodege....uumm..par ये होगा kaise....aisa क्या करू की अम्मी गोलू भाई से छोड़ने को राजी हो jaaye...hmm...saayad मुझे कुछ सोचना होगा...

Khair....wo सब बाद की बातें hai...filhaal मुजगे ये ुंडेरवेरे बदलना होगा....

ये सोच कर मैं उठा और बाथरूम में चला gaya.....aur जब मैंने ुंडेरवेरे बदल कर पुराणी वाली को धो कर हंगल पर त्यागने का socha....to कुछ देख कर मैं चौंक गया...

असल में उस हंगल पर बिलकुल उसी रैंड की ब्रा ठगी हुई thi...jo उस ायरत ने पहनी हुई thi...jo गोलू भाई से चुद रही थी....

वो देखते hi मेरी आँखे बड़ी हो गई और मैंने उसे उठा कर देखना सुरु कर दिया....

उसे देखते हुए मुझे ये यकीन हो गया की ये वही ब्रा है.....

मैं- ये तो पक्का वही ब्रा hai...par ये यहाँ kaise....ohh..samjh gaya....fufi...ha..wahi तो इस बाथरूम में आती hai...warna अम्मी तो अपने कमरे से लगे बाथरूम का इस्तेमाल करती hai...aur डडिजान तो ये पहन hi नहीं सकती....

तो क्या वो ायरत फूफी hi hai....ya al**h...meri fufi....golu भाई के sath....ye तो सच me....par कैसे.....

और इसका matlab.....us रात गोलू भाई hi ऊपर वाले कमरे में the....jo फूफी को छोड़ रहे the....haa...wahi होंगे...

पर ये हुआ kaise....fufi आखिर गोलू भाई से फास कैसे gai...aur फूफी hi kyo....ammi क्यों नहीं फांसी....

मुझे तो अम्मी की चुदाई देखनी hai...fufi to...halaki उनकी चुदाई भी मुझे पसंद hai...par अम्मी के सामने नहीं....

Hmm..to अगर गोलू भाई फूफी को छोड़ रहे hai....tab तो मेरा काम और भी आसान हो jayga....haa...ye काम कर सकता है...

मैं फूफी को रागे हाथ pakduga...aur फिर उनकी मदद से अम्मी को गोलू भाई से chudwauga.....haa....yahi सही रास्ता hai....ab फूफी hi मेरे काम आएगी...

पर फूफी को कैसे pakdu...hmm...kuch सोचना padega...taki फूफी भी फास jaaye...aur गोलू भाई को भी भनक न lage....par क्या.....???

ये सब सोचते हुए मैं बापिस बिस्टेर पर आ कर सो gaya.......aur फिर से सपने में अम्मी को गोलू भाई से चुड़ते देखता रहा....

अगले दिन जब मैं जगा तो सुबह के 10 बज चुके the....isliye मैं जल्दी से उठा और तैयार हो कर हॉल में आ gaya....jaha मेरा पूरा परिवार tha.....sirf अब्बू hi नहीं the....wo दूकान पर जा चुके थे.....

डडिजान- अरे aalam...aaj बड़ा सोया तू....

आलम- है dadijaan.....wo कल रात माजिद के बारे में सोचता raha...to नीड देर से आई...

अम्मी- कोई nhi....baith..main chai-nasta कटी हु....

ये बोल कर अम्मी किचेन में जाने लगी और मैं उनकी बलकटी गांड देख कर सपनो में खोने लगा....

पर मैंने अपना सर झटका और सोच से बापिस आ कर फूफी के पास बैठ गया....

मैं- fufi....aaj आप क्या कर रही है...

फूफी - matlab...aur पहले ये बता की आज तू मुझसे ये क्यों पूछ रहा है....

मैं- ऐसे hi...batao na...kya करने वाली हो आप...

फूफी - कुछ खास nhi....ghar पर hi rahugi....kyo...kuch काम है क्या मेरा...

मैं- nhi...wo...(man में)- अब क्या bolu...golu भाई की बात karu...hmm..dekhe तो क्या कहती है...

फूफी- अरे ..अब बोल भी...

आलम- wo...accha fufi...aap गोलू भाई को तो जानती हो न....

फूफी- ha...kyo...

मैं- मतलब कैसे जानती hai...sirf नाम से या कभी मिली भी है....

फूफी- अरे मिली hu...aur कई बार मिली hu...wo कई बार घर आ चुके hai....abhi भी आते है kabhi-kabhi....

Main(hairani से)- अपने ghar....par kisliye....kus से मिलने....

Ammi(piche से )- तुम उनका chhodo....aur नास्ता करो....

मैं- ha...main तो बस पूछ रहा था.....

अम्मी- पर तुझे करना क्या hai....wo आते थे pahle...tere अब्बू के काम se...ab नहीं aate....chalo...nasta करो चुपचाप.....

ये बोल कर अम्मी ने मेरे सामने chai-nasta रखा और किचेन में जाने lagi.....aur इससे पहले की मैं फूफी से और कोई सवाल karta...wo भी उठ कर कमरे में चली गई.....

Main(man में)- hmm...ammi को देख कर तो लगता hai...ki इन्हे गोलू भाई पसंद hi nhi.....iska मतलब इन दोनों को पास लेन के लिए मुझे काफी म्हणत करनी hogi....par ये करू kaise....khair....nasta कर lu...fir देखता हु....

फिर मैं नास्ता कर के बाहर निकल गया और मटरगस्ती करने के बाद दोपहर को 2 बजे बापिस आया......

और मैं जब घर में आया तो घर में सिर्फ मेरी डडिजान hi थी.....

डडिजान- are...aa गया तू....

मैं- है dadijaan.....aap क्या कर रही है.....

डडिजान- कुछ nhi...ja....khana खा le...teri अम्मी बोल कर गई hai......garam कर लेना...

मैं- ठीक hai....par अम्मी गई kaha....aur फूफी भी नहीं दिख रही...

डडिजान- wo...teri ammi...wo....yahi पदोष में गई hai....aur तेरी फूफी सायद कमरे में hogi.....pata nhi...main अभी बहार से aai...to मुझे वो दिखी hi nhi....tu खाना खा pahle....fir कुछ बात करना...

मैं- hmm..abhi खता हु...

फिर मैंने muh-hath धो कर खाना गरम किया और दादी के पास बैठ कर खाने लगा....

मैं- अच्छा dadijaan....ye गोलू भाई हमारे घर कितनी बार आये होंगे....

डडिजान - पहले bata...ki तू ये क्यों पूछ रहा है....

मैं- अरे wo..maine उन्हें अपने घर कभी देखा नहीं na....aur पता चला की वो कई दफा आ चुके है....

डडिजान- hmm...aate रहते है kabhi-kabhi...tere अब्बू के दोस्त है न....

मैं- ohh...par मुझे क्यों नहीं दिखे....

डडिजान- wo...wo क्या है beta....ki wo...wo दोपहर को आते the....aur तू उस वक़्त रहता कहा है घर पर....

मैं- hmm...accha dadi....golu भाई को आप सब पसंद करती है की नहीं...

Dadijaan(gusse से)- ये क्या बक रहा hai....haa..

मैं- अरे nhi...mera मतलब था की उनका घर आना आप सबको पसंद है की नहीं...

डडिजान- पर तू ऐसा पूछ क्यों रहा है....

मैं- wo...maine सुना है की गोलू भाई बड़े घमंडी है na....isliye पूछा....

डडिजान- अरे nhi...wo तो बड़े अच्छे hai...tune बेकार सुना है....

मैं- ohh..to मतलब की वो आप सबको पसंद है....

डडिजान- haa....waise तो पसंद hi hai....par तू आज उनके बारे में क्यों पूछने laga....sach bata...kya बात है...

Main(man में)- अब क्या बोलू.....

डडिजान- अब बोल....

मैं- अरे wo...kya hua...wo सुबह मैं फूफी से गोलू भाई के बारे में बात कर रहा tha...to अम्मी गुस्सा हो गई thi...to मैंने सोचा की आपसे पूछ lu....kya अम्मी को गोलू भाई पसंद नहीं है....

डडिजान- nhi...aisa कुछ नहीं hai....wo भी उन्हें पसंद करती hai.....aur अब तो रोज उनके घर भी जाती hai...bataya था न तुझे....

मैं- अरे haa....main भूल hi गया tha....(man में)- सच बात बोली डडिजान ne.....main क्यों न गोलू भाई के घर जा कर राजू से मदद maagu.....halaki पहले उसे सब बताना hoga....par और कोई रास्ता nhi....ab मुझसे रहा नहीं jata....main गोलू भाई को अम्मी को छोड़ते देखना चाहता हु....

डडिजान- अब क्या hua....khana खा...

मैं- huh..ha..ha dadijaan....khata हु...

फिर मैंने जल्दी से खाना खाया और राजू से मिलने का प्लान कर ke.....waqt बिताने ऊपर छज्जे पर आ गया....

और जैसे hi मैं छाजे पर पंहुचा तो मुझे फिर से वैसी hi आवाज aai...jo उस रात को आई थी....

Main(man में)- ये आवाज to..matlab आज भी चुदाई चल रही hai....ye गोलू भाई भी न.....

ये सोचते hi मैं भाग कर कमरे की खिड़की पर aaya...par मुझे भीतर कोई नहीं दिखा....

Main(man में)- कमरा तो खली दिख रहा hai....to फिर ये आवाज.....

फिर मैंने हलकी सिसकियों को सुनते हुए उनका पीछा kiya...aur पीछा करते हुए उस कमरे के दूसरी तरफ पहुंच गया.....

वह पर एक छोटा सा स्टोर रूम tha....jo कमरे से hi जुड़ा हुआ tha....aur यहाँ भी खिड़की पर कोई गेट नहीं लगा था....

मैंने खुश हो कर तुरंत खिड़की पर आँख गदा li....par भीतर इतना अँधेरा था की मुझे सिर्फ दो साये दिख रहे the.....baki ये नहीं समझ आ रहा था की भीतर है कौन...

Main(man में)- अरे फूफी hi hogi.....pakka....ammi तो ऐसा सोच भी नहीं sakti....huh...

और फिर मैंने देखा की भीतर वो मर्द उस ायरत को khade-khade hi चोदे जा रहा था.....

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ायरत - aaahhh..aahhh..aahh....aahh...

मर्द- आवाज काम कर randi.....gaon को बुलाएगी क्या....

ायरत- aaahh...main..main क्या karu...aapka हर dhakka...aahh...meri हालत बिगाड़ देता hai....aaahh...

मर्द- तो तुझे छोड़ना छोड़ दू....

ायरत- aahhh..nhi.....kabhi nhi....aahh...aap hi तो hai...aahh...jisne मुझे कुछ ख़ुशी di...aahh...main..aaahh...aaai....aahh..aah..

ये बोलते होते वो ायरत झड़ने lagi....main उसको ठीक से देख तो नहीं सकता tha....par आवाज से अंदाजा जरूर लगा सकता....

Khair...uske झड़ते hi उस मर्द ने ायरत को आगे की तरफ झुका diya...aur फिर से पेलना सुरु कर दिया....

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ायरत- aaahh....aapko दलसबर तो बिलकुल नहीं न...

मर्द- तू bata...tujhe क्या लगता है...

ायरत- aahh..nhi hai....warna इस वक़्त न aate....aaahhhh...main...aaahh....

मर्द- तो समझा fir....are तू चीज hi ऐसी hai...ki तुझे 24 घंटे भी छोड़ता राहु...

ायरता- aahh...al**h...itni पसंद आई मैं....

मर्द- और नहीं तो kya....tu मेरी मनपसंद रंडी hai...jo मुजगे पूरी तरह से खुश करती है...

ायरत- aahh...aap भी काम nhi....mere जैसी सरीफ ायरत ko...aahh...koi आप जैसा असली मर्द hi रंडी बना सकता tha....aaahh..bana hi दिया na....aaahh...joor से....

और उस मर्द ने पूरी रफ़्तार से चुदाई सुरु जार di.....jisse मुझे उस ायरत की गांड की थाप saaf-saaf सुनाई देने लगी....

उस छोटे से कमरे में सिर्फ दोनों के जिश्म की तकरार और ायरत की कामुक आहें hi गूँज रही थी....

और ये सब देखते होते मेरा लुंड फटने को तैयार हो चूका था....

Khair...thodi देर बाद hi एक चीख मार कर वो ायरत फिर से झाड़ gai....aur यहाँ मेरा लुंड भी पानी फेकने लगा....

उस ायरत के झड़ने के बाद उस मर्द ने ायरत की गांड ओर थप्पड़ बरसाने सुरु जार दिए....

ायरत - aaahh...maarte क्यों हो...

मर्द- मुझे नाज़ा आता hai...waise आज रात को तैयार रहना....

ायरत- आप जब kahe...main तौयार hi milugi...chaho तो मुझे अपने पास hi रख लो....

मर्द- तो फिर तेरे घरवाले क्या karege...aur तेरा सौहार....

ायरत- उनका वो जाने....

मर्द- तेरी यही बातें मुझे बड़ी पसंद hai...chal...isi बात ओर तेरी ये मोती गांड मर लेता हु....

ायरत- जरा धीरे dalna....warna मेरी चीख से सब यहाँ जमा हो जायेगे....

मर्द- फ़िक्र मत kar....main जनता हु की तू मेरा लुंड गांड में खाना ज्यादा पसंद करती है....

ायरत- hehe...kyo न karu..aakhir इसी ने तो मेरी गांड को खोला tha...warna मेरे सौहार की लुल्ली तो कभी खोल hi न paaaaa....aaaaiiiii....bata तो देते...

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मर्द- बता देता तो तेरी चीख जैसे सुनता...

ायरत- aaahhhh.....jab भी जाता hai....maar hi देता hai...aaahhh.....

मर्द- असली लुंड ऐसा hi होता hai....tere सौहार का आधा लुल्ला नहीं hai....samjhi न...

ायरत- haa...aahh..janti hu..ye मेरे मालिक का तगड़ा लुंड hai....jiski मैं गुलाम हो chuki...aahh...ab फाड़ do....aahh..joor se...aahh...

और मर्द ने तेजी से ायरत की गांड मरना सुरु कर दिया.....

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उसके हर धक्के पर ायरत की दर्द बगरी आह निकल रही thi...fir भी वो पूरी सिद्दत से अपनी गांड मरवा रही थी....

Main(man में)- यार ये फूफी तो सच me...kya बाला hai....inhe देख जार यकीन hi नहीं हुआ था की ये din-dahade hi अपने hi घर में ऐसे गांड marwayegi...hmm...fufi तो अब gai...na उन्हें अपने सौहार की फ़िक्र rahi...na hi अपने परिवार की....

मैं यहाँ फूफी के बारे में सोच कर गरम हो रहा था और वह वो मर्द उस ायरत को तेजी से थोक रहा tha...jo ायरत मेरी फूफी थी....

Khair....agle 15-20 मिनट तक मुझे सिर्फ umm-aah की आवाज के साथ गांड की थाप hi सुनाई दी....

और फिर अचानक से वो मर्द गुर्राया और एक जोर का धक्का मार कर रुक गया....

ायरत- aaahhh.,....bhar do...aahh..main महसूस कर सकती hu...aapka गरम pani...meri गांड me...aaahh...kitna सारा hai...aahh...sama hi नहीं raha...aaahh...aahh..

और इस तरह की बातें सुन कर मेरा लुंड एक बार फिर पानी फेक कर खड़ा हो gaya.....jise देख जार मैं भी हैतान था....

Main(man में)- कमाल hai....main झड़ने के बाद bhi....to इसका मतलब ये hua...ki अपने घर की खातूनों की चुदाई मुझे ज्यादा hi पसंद hai..wo ज्यादा hi गरम करती hai...haa....

यहाँ मैं अपने लुंड के कड़क रहने से हैरान tha....aur वह वो दोनों चुदाई ख़त्म कर के आराम फार्मा रहे थे....

Mard(thodi देर बाद)- chalo....main चलता हु....

ायरत- bas...ek hi बार...

Mard(beech में)- बाकि बाद me....aur रात को तो आउगा hi....

ायरत- हम्म...

मर्द- अब मुझे बाथरूम जाना है....

ायरत- समझ गई....

Main(man में)- ये क्या samjhi.....aur ye...ye क्या...

मैंने देखा की वो ायरत घुटनो पर आ कर बैठ गई और फिर वो मर्द खड़ा हुआ उस ायरत के मुँह में पेशाब करने लगा...

Main(man में)- ओह teri...to ये हमेशा का काम hai....matlab इस मर्द की पेशाब फूफी ko....ye...ye कौन hi हवस है यार....

मैं हैरानी से उन्हें देख रहा था और वह वो ायरत उस मर्द की साड़ी पेशाब अपने हलक में उतार चुकी थी....

Aourat(lund चूस कर)- uuummmmhhh...aahh..ab असली मज़ा मिला....

Mard(has कर)- तू भी बड़ी वाली hai....chal...main जाता hu....jaldi मिलेंगे...

ायरत- जी....

और फिर वो दोनों रूम में आने lage....to मैंने सोचा की अभी फूफी को रागे हाथ पकड़ लगा....

पर मेरी kismat....main अपने लुंड के पानी पर hi फिसल गया और मेरा घुटना फर्श पर टकरा गया...

Khair...main कुछ देर में hi उठा और रूम के आगे आ gaya...aur इंतज़ार करने लगा उन दोनों के निकलने का....

Main(nan में)- आज अगर दोनों मान gaye....tab तो वो दिन दूर nhi...jis दिन मैं अपनी अम्मी की चुदाई अपनी आँखों से देखूगा....

Khair....main कमरे के बाहर काफी देर तक खड़ा raha.....par मुझे कोई निकलते नहीं dikha...to मैंने खिड़की से भीतर dekha...par हैरानी की बात thi...ki कमरा बिलकुल खली था....

मैं सोच hi रहा था की आखिर दोनों गए kaha....tabhi मुझे कार स्टार्ट होने की आवाज आई....

आवाज सुन कर मैं कमरे के पीछे bhaga....aur पीछे वाले छज्जे पर से मुझे कार जाती हुई dikhi....par मुझे फिर से समझ नहीं आया की वो कार गोलू भाई की hi थी या नहीं.....

Main(man में)- कार पीछे कड़ी thi...par...ya al**h....main कैसे भूल gaya....us कमरे का एक गेट पीछे भी hai....aur घर के पिछवाड़े जाने की सीढ़ियां bhi...offhh...aaj फिर निकल gaya...par fufi...wo...

मैं फूफी का सोच कर जल्दी से बीचे aaya....to मुझे फूफी अपने कमरे में घुसते दिखाई दी....

Main(man में)- तो एक बात तो पक्की hui,....fufi hi वो ायरत है जो ऊपर चुदती hai...aur बाथरूम में वो ब्रा देख कर ये भी पक्का हो जाता है की फूफी , गोलू भाई की रंडी है.....

तो अब bas...main फूफी से seedhe-seedhe बात karuga....aur उनको मजबूर कर के अपनी अम्मी को गोलू भाई के नीचे लिताऊगा....

Ammi....ab तैयार हो jao....golu भाई का असली , पूरा और तगड़ा लुंड खाने के लिए.....

ये सब सोचते हुए मैं हॉल में आ कर बैठ gaya....aur आगे क्या और कैसे करना hai...is बारे में सोच hi रहा था की एक हाथ मेरे कंधे पर आ गया......

मैं- huh..koun...

अम्मी- are...main hu...kya hua...tu इस वक़्त घर पर kaise...aaj खेलने नहीं जाना....

मैं- ha..matlab nhi...wo मजीद के अब्बू की वजह से अभी बंद है खेलने jana....waise आप कब aai...aur ये आपको इतना paseena....aapke कपडे भी....

अम्मी- wo....are इतनी धुप है baahar....to पसीना तो आएगा hi.....main अभी मुँह धो लेती हु....

ये बोल कर अम्मी जल्दी से अपने कमरे में चली gai....aur मैं उठ कर अपने कमरे में.....

Main(man में)- मैंने जो सोचा hai....wo करना सही तो hoga....ya फिर मैं एक बार फिर से फूफी की चुदाई dekhu...aur बीच चुदाई में hi पकड़ lu....aise में वो कुछ बोल भी नहीं paygi...warna अभी तो वो कोई भी बहाना मार सकती hai....hmm...

एक काम करता hu..aaj फिर गोलू भाई के घर जा कर राजू से मिलता hu...aur अगर आज फूफी वह aai....to मैं बीच चुदाई में hi चला जाउगा...

पर क्या आज फूफी jayegi...abhi-abhi तो छुड़वा कर आई hai.....chalo देखता हु...

Khair....main अपने कमरे में साम को 5 बजे तक बैठा raha....aur फिर मुझे फूफी की आवाज आई.....

जो डडिजान को बता कर बहार जा रही थी....

मैं- pakka...ye गोलू भाई के घर hi jaygi...sach me....badi वाली रंडी hai.....kuch देर पहले hi चूड़ी hai....aur रात को भी छोड़ना hai....fir भी उनके घर जा कर chudwayegi...fufi....aaj तो तुम गई....

फिर मैं भी जल्दी से फ्रेश हुआ और गोलू भाई के घर पहुंच गया....

वह पहुंच लने पर मुझे राजू तो नहीं mila....par उसे ढूँढ़ते हुए मैं पीछे गार्डन में pahucha....to मैंने वो dekha...jise देख कर मेरी आँखे बाहर hi आ गई....

Main(hairani से)- या all**h....ye...ye kaise...nhi...ye सच nhi...ye सच नहीं हो सकता.....

नोट - अपडेट पोस्टेड frnds....hope ु लिखे आईटी.....

थैंक्स फ्रेंड्स.....


कीप रीडिंग.......
 
अपडेट - 80

आलम जल्दी से फ्रेश हुआ और गोलू भाई के घर पहुंच गया....

वह पहुंचने पर आलम को राजू तो नहीं mila....par उसे ढूँढ़ते हुए वो पीछे गार्डन में pahucha....to उसने वो dekha...jise देख कर उसकी आँखे बाहर hi आ गई....

Aalam(hairani से)- या all**h....ye...ye kaise...nhi...ye सच nhi...ye सच नहीं हो सकता.....

अब आगे.......

[ आलम की जवानी.......]


असल में जब मैं राजू को ढूँढ़ते हुए घर के पीछे बने गार्डन में ोाहुचा तो वह मुझे गोलू भाई dikhe....wo भी एक लड़की के साथ.....

और उस लड़की को देख कर hi हैरानी के मारे मेरी आँखे फटी रह gai.....kyoki वो लड़की कोई और nhi....balki मेरे अब्बू के खास दोस्त की बेटी thi....hina...

और वो भी अपने मुँह में गोलू भाई के तगड़े लुंड की ठोकर सहते हुए दिख रही थी....

मतलब की गोलू भाई उसका मुँह चूड रहे the...wo भी पूरी रफ़्तार से....

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हिना अभी मुश्किल से जवान hi हुई thi...uper से वो दिखने में भी छोटी सी thi...matlab की उसकी लम्बाई बहुत काम थी और सरीर भी काफी dubla-patla....

ऊपर से वो अपने बालों की 2 छोटियाँ बांधती thi..jisse वो ज्यादा hi छोटी और मासूम लगती थी....

मैं ये देख कर हैरान था की जिस गोलू भाई का लुंड acchi-khasi एयरटेन भी लेते वक़्त रो देती hai.....usi लुंड लेने के लिए आखिर ये छोटी सी बच्ची राजी कैसे हो गई.....

मैंने आज तक कभी भी न hi सुना था और न hi देखा ths.....ki हिना के घरवालों से गोलू भाई का कोई lena-dena hai....par आज उसकी बेहेन को देख कर मेरा दिमाग घूम रहा था.....

Main(man में)- आखिर ये हुआ kaise....ye हिना फांसी kaise.....kaise....

ये सब सोचते हुए मुझे याद आया की मैं बिना किसी आड़ के hi खड़ा hu....mujhe यहाँ से कोई भी देख सकता था.....

इसलिए मैं जल्दी से वह से हटा और दावे पाँव गोलू भाई के काफी करीब जा कर छिप गया.....

हिना- uuuummmmmhhhhhh....aahh...mujhe सास तो लेने दो....

गोलू भाई- चुप कर randi.....mere मज़े में दखल मत de...samjhi...

हिना- मैं भी आपको मज़ा देने आई hu....kyoki घर पर तो आप मुझे देखते भी नहीं....

गोलू भाई- मुझे पता होता की तेरी छूट में इतनी आग लगी hai....to रोज आ कर पेलता....

हिना- रहने do....aapko अम्मी से फुर्सत मिले तब na....aur अब तो वो मेरी सौतेली अप्पी भी आ gai....wo साली तो आपको छोड़ती hi नहीं....

गोलू भाई- अरे मेरी छोटी randi....tu जल mat....mera हथ्यार तुम सबका ख्याल rakhega....samjhi....ab chal....ye कपडे nikaal....dekhu तो की कितनी आग है तेरी छूट में.....

हिना- ha...aur अच्छे से बुझा dena....bedardi se...jaise अम्मी को ठोकते ho.....par yaha....us कमरे में chale....kahi मेरे अब्बू....

गोलू bhai(becch में)- ha...tu कमरे में hi chal....tera अब्बू यहाँ आ सकता hai....halaki मुझे उसकी घंटा फ़िक्र nhi...par...tu चल....

फिर गोलू भाई और हिना सामने बने रूम में चले gaye.....aur कुछ देर बाद मैं भी चुपके से उस रूम की खिड़की के पास पहुंच गया.....

और मैंने वह देखा की गोलू भाई बिस्टेर पर पुरे नंगे लेते हुए थे और हिना भी पूरी नंगी हो कर गोलू भाई का लुंड छूट में ले कर uper-neeche हो रही थी......

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हिना- aaahhh....aur कितना बचा hai....aahh..

गोलू भाई- तू आराम से लेती ja....wo पूरा घुस jayga...chal....thoda और.....

हिना- aaaaiii....mar gai....aaahh...pata नहीं अम्मी और अप्पी इसे kaise...aaahh...

गोलू भाई- तू फ़िक्र मत kar....tujhe भी आदत हो jaygi.....dam laga....pura ले ja....joor से कुण्ड....

हिना- aaahh..aaaaiiiiiiiiiiiiiii.....aaaammmmmiiiii...aaaahhhhhh.....maaarr...ggggaaaiiii.......

हिना ने अचानक hi एक जोर का झटका लिटा और पूरा लुंड उसकी छूट में समां gaya....aur हिना तड़प उठी.....

गोलू भाई- तू तो ऐसे मर रही है जैसे पहली बार चुद रही ho....seal तो टूट चुकी तेरी....

हिना- aaaaahhhhhhh........tab to...aaahh...aadja hi ले पाई थी na.....fir अम्मी आ गई thi....aaahhh.....mar गई....

गोलू भाई - कोई बात nhi...aaj नहीं aayegi...tu आराम से kha.....samjhi....ab सुरु हो जा....

और गोलू भाई की बार सुन कर हिना ने फिर से uthak-baithak सुरु कर di....aur लुंड खाने लगी.....

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हिना आराम से uper-neeche हुए लुंड खा रही thi....aur dheere-dheere उसका दर्द काम होता जा रहा था.....

कुछ hi देर बाद हिना के मुँह से मस्ती भरी सिसकिया निकलने lagi....aur उसने उछालने की रफ़्तार बड़ा दी..

अब मैं साफ़ टूर पर देख सकता था की गोलू भाई का तगड़ा लुंड हिना की छूट में सटासट aa-ja रहा था......

हिना अब मस्त हो कर लुंड को छूट में समां चुकी thi....ab उसकी छूट को दर्द नहीं बल्कि ख़ुशी मसळ्हसूर हो रही थी....

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हिना- aaahhh.....aaahhh...aaahhh...aaahhh...kitna maza....aaahhh...

गोलू भाई- yes.....ab मज़ा आया न....

हिना- aaahhh....bahut....aaahh..aaahhh....aahhh...

गोलू भाई- तो मज़ा kar....joor से....

हिना- aaaa...aaahhh.....aaaaaa.......aaaaaaiiiiii....aaammmiiiiii....

और हिना एक जोरदार चीख मार कर गोलू भाई के सीने पर लुढ़क गई....

वो झाड़ चुकी thi...par उसकी गर्मी ख़त्म नहीं hui....wo गांड हिलाते हुएए लुंड को बराबर कहती रही....

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ये देख कर मैं पागल हो रहा tha..ki आखिर इतनी छोटी उम्र में कोई लड़की इतनी गरम कैसे हो सकती है.....

हिना लगातार अपनी कमर हिलाते हुए लुंड का मज़ा लेती rahi.....par उसकी रफ़्तार अब धीमी हो चली थी....

इसलिए गोलू भाई ने उसकी कमर पकड़ी और नीचे से जोरदार धक्के मार कर उसे छोड़ने lage....aur एक बार फिर हिना की सिसकियाँ कमरे में शोर मचने लगी.....

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हिना- aaaahhhhhhh.....dheere....aaahhhh....main अम्मी की तरह nhi...aaahhhhhh.....

गोलू भाई- अब तकलीफ हुई na.....to jhel....bada लुंड खाना था na....haa....

हिना- aaaaahhhhh....khana hai....aaaahhh.....aur khaugi.....aaaahhh....aaanmmii.....

हिना लगतार तड़प रही thi....par गोलू भाई उसे बेदर्दी से चोदे जा रहे थे.....

और फिर कुछ hi देर में हिना की तकलीफ फिर से मस्ती में बदल गई और वो एक बार फिर मज़े से ucchal-uchhal कर लुंड पिलवाने लगी......

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हिना- aaaahhhh....ab और nhi....main...aaahhh...main ....आअह्ह्ह...

गोलू भाई- क्या साली बकरी की तरह मिमयाने lagi......tujhe आज ऐसे छोड़ूगा की तू चल भी न sake.....samjhi....

हिना- aaaahhhhhhhhh....main...aah..gai...oohhh....oohh...mmm...

हिना एक बार फिर से झाड़ कर पड़त पद gai....par गोलू भाई तो अभी फॉर्म में आये थे.....

उन्होंने हिना को उठा कर बीएड पैट पटक दिया और हिना उलटी हो कर joor-joor से हाफने लगी.....

गोलू- तुझे बेदर्दी से छोड़ना था na....to अब देख....

और फिर गोलू भाई हिना के ऊपर आये और हिना की जोरदार चुदाई सुरु कर दी....

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हिना- aaaammmmiiiiiii.....mar gaiiii.....aaaaaiiiii.....

गोलू भाई- अभी kaha....maregi तो ab....ya फिर असली रंडी बन jaygi...yeeehhhhh.....yeeehhhh.....

हिना- aaaahhhhh....to....aaahh....maro....aaahhh...aaahhhh....

Main(man में)- क्या करू yaar.....is छोटी सी लड़की की इतनी दमदार chudaai....sala मेरा लुंड तो पानी बहाना बंद hi नहीं कर raha....uummm....ye मरे न mare...main जरूर मर रहा हु.....

हिना- aaahhh....ab ठीक है....

गोलू भाई- theek....to फिर le....tu आज tadap-tadap कर मज़ा legi....le...

और गोलू भाई ने उसकी दोनों छोटियाँ पकड़ी और ताबड़तोड़ धक्के मारने lage...aur हिना दर्द से तड़पने लगी......

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हिना- आआह्ह.... ammmmiiiiii....mar gaaiiii....aaaiii..aaaaiii....

गोलू भाई - ऐसे hi छोड़ना था न tujhe...haaa...

हिना- aaaahhh.....aaaahhhh....aaaahhhh....

उस फूल सी बच्ची की चुदाई देख कर मैं तक सहम गया tha.....par गोलू भाई बेदर्दी के साथ उसे थोक रहे थे....

गोलू भाई छोड़ते वक़्त बिलकुल भी रहम नहीं दिखते the...ye बात तो मैं समझ चूका tha....par एक बच्ची को इतनी बेदर्दी से chodna....aakhir क्यों....

यहाँ मैं उस बच्ची के लिए गम मन रहा tha....aur वह वो लड़की इस चुदाई का मज़ा लेने लगी थी....

हिना- aaaahhhh....ab ऐसे hi...aaahhh..marna mujhe....aaahhh...hamesha.....

गोलू भाई- है मेरी छोटी सी randi....ab तो तुझे रोज peluga...kamaal की कसावट है तेरी छूट me....aur तेरी गांड भी तो मारनी है.....

हिना- aaaahhhhh...abhi nhi....main mar...aaahhh..mar जोगी.....

गोलू- घबरा mat....aaj सिर्फ छूट.....

हिना- aaahhh....main फिर se....aaahhh...aaahhh......aaahhh...aah...

और हिना एक बार फिर से गरम हो कर छूट से पानी निकालने lagi...aur उसके झड़ते hi गोलू बगै ने उसे छोड़ा और खड़े हो गए.....

और फिर एकदम से हिना घुटनो पर आई और गोलू भाई का चुतरस से सना हुआ लुंड चूसने लगी....

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हिना- uuummmm...uuummm...uuummm..uuummm...

गोलू bhai(muskura कर)- aah...main जनता था की तुझे मेरे लुंड पर लगा अपनी छूट का पानी चेतना बड़ा पसंद hai....saali...puri अपनी अम्मी पर गई hai.....hahaha...

Main(man में)- क्या yaar...ye लड़की है या aafat....are मैं तो इसे छोटी बच्ची समझ रहा tha....par ये तो पूरी रंडी हो gai...aur इसकी ammi....matlab अब्बू के दोस्त की biwi....par वो kaise....wo तो बड़ा खतरनाक आदमी hai...aut उसकी बीवी भी बड़ी बेकार hai....to वो गोलू भाई के साथ kaise.....use अपने सौहार का भी दर नहीं लगा.....

खैर जो भी ho....filhaal तो मुझे अपनी अम्मी की पड़ी hai....aur ये लड़की to....ufff..saali ने आज लुंड को थका दिया मेरे.....

मैं भले hi थक गया tha...par वो दोनों nhi....isliye गोलू भाई ने हिना को खड़ा किया और khade-khade hi चुदाई सुरु कर दी....

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और एक बार फिर उसकी मादक सिसकियाँ पुरे कमरे में शोर मचने लगी....

हिना अब गोलू भाई के हर धक्के का मज़ा ले रही thi....aur पूरी सिद्दत से अपनी गांड hila-hila कर मज़ा मार रही थी.....

हिना- aaahhh....aahhh....ab जोर se....aaahhh.. आअह्ह्ह...

गोलू भाई- कमाल है saali......to ले fir.....yeehhh...yeehhhh...

हिना- aaahhh...meri taage.....aaahhh..main कड़ी नहीं रह प् rahi...aaaaiiiii....kuch करो...

गोलू भाई- तो aaja....let कर फाड़ता हु तेरी....

और गोलू भाई ने हिना को लिटाया hi था की हिना ने अपनी तागे पकड़ कर ऊपर कर li...aur अपना भोसड़ा खोल कर गोलू भाई को परोस दिया....

और फिर क्या tha....golu भाई ने एक बार फिर से tej-tarraar चुदाई सुरु जार दी....

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हिना- aaaahhhhh.....aise hi chodna....kal bhi...aaahhh..

गोलू भाई- haa...par कल नहीं.....

हिना- आआह्ह्ह.. aaahhh...kyo जी....

गोलू भाई- कल मुझे बहार जाना hai...saayad...aa....kuch फिन बाद aauga....fir तेरे घर आ कर छोड़ूगा....

हिना- aaahhh...ghar me....par अम्मी का kya...aur appi....abbu....aaahh....sab होंगे न....

गोलू भाई- तब भी छोड़ choduga....tu dekhna.....unke सामबे hi....yeeehhhhhh...

हिना- aaaiii......unke saamne.....aaahhh...main तो सुन कर hi.....aaahhhh...gaaaiii....gaai....aaahh...aah....

गोलू - मैं भी aaya......kaha लेगी....

हिना- aaahh..muh में....

इतना सुनते hi गोलू भाई ने लुंड बाहर खींच लिया और हिना भी घुटनो पर आ gai...aur फिर गोलू भाई ने पूरा लुन्द्रास हिना के मुँह में दाल दिया....

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Khair....golu भाई के झड़ते hi...dono बीएड पर पसर gaye.....aur फिर थोड़ी देर तक दोनों वही आराम करते rahe....aur इस बीच मैंने अपना लुंड भी साफ़ कर लिया......

गोलू भाई- अब तू nikal....mujhe दूसरा काम है....

Hina(khadi हो जार)- aahh...meri तागे....

गोलू भाई- तू मेरे रूम में ja....waha तेरी टांगों का इलाज आ jayga....aur sun....raju को भेज देना....

हिना- छ्हम्म..

और हिना ने अपने कपडे पहने और लगड़ाते हुए वह से निकल gai.....aur यहाँ गोलू भाई ने भी शार्ट पहन लिया और फिर एक पेग बना कर पिने लगे....

Khair...thodi देर बाद वह राजू आ gaya.....aur वह आते hi वो बीएड देख कर मुस्कुराने लगा.....

राजू- bhai....kya उसे....

गोलू भाई- hmm...tu वो chhod...ye बता की मेरा काम हो gaya....ki नहीं...

राजू- सायद....

गोलू भाई- सायद का क्या matlab...ha या न....

राजू- नहीं bhai...wo बात ये hai...ki मुझे यकीन है की काम हो गया hai....bas सही टाइम का इंतज़ार कर रहा हु...

गोलू भाई- hmm...to suno....main सायद आज गाओं से बहार jauga....aur हो सकता है की कुछ दिन बाद बापिस aau....to तुम्हे करना ये hai...ki इस बीच मेरा काम पूरी तरह सेट हो जाना chahiye...samjhe...

राजू- मेरी तरफ से सब हो jayga...par आपको उसे भी बोलना padega....hai na...warna...

गोलू bhai(beech में)- जनता hu....tum उसकी फ़िक्र मत karo....wo तैयार है....

राजू- तो समझो सब हो gaya....waise bhai...ek बात पूछ सकता हु....

गोलू भाई - यही na...ki मैंने हिना को kyo....yahi पूछना चाहते हो न....

राजू- जी bhai....wo तो अभी बच्ची है....

गोलू- जनता hu....par क्या karu....badle की आग में गलती होती hi hai.....badle में गेहू के sath-sath घुन भी पीस दिया जाता hai......aur मैं भी वही कर रहा hu....ye जानते हुए भी की इन गलतियों की मुझे सजा भी भुगतनी होगी....

राजू- तो आप ऐसा क्यों कर रहे hai.....matlab...main नहीं चाहता की आपको कोई सजा भुगतनी पड़े....

गोलू bhai(muskura कर)- तू टेंशन मत le....bas ये याद रख की आखिर में सब तुझे hi करना hai.....samjha न....

राजू- भाई आप...

गोलू bhai(hath दिखा कर)- bas...ab ja..aur काम पूरा kar....ok....mujhe भी एक काम से निकलना है....

राजू - जी भाई...

ये बोल कर राजू वह से निकल gaya...aur गोलू भाई दूसरा पेग बनाने lage....tabhi मैं भी chhip-chhip कर वह से निकल आया....

फिर मैं गर्दन से बापूस घर में आ gaya....par मेरा दिमाग घूम रहा tha...isliye मैं एक जगह खड़ा हो गया.....

और abhi-abhi मैंने जो कुछ भी सुना tha....us बारे में सोचने लगा....

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की गोलू भाई और राजू किस बारे में बात कर रहे the.....par उन दोनों का लहजा देख कर ये समझ आ रहा tha....ki मामला संगीन है....

Main(man में)- पता नहीं ये कुस काम की बात हो रही thi...aur फिर badla....are कुस बात का badla...aur किस se....aur गोलू बगै जांभोज कर गलतियां कर रहे hai.....par kyo....aakhir इस सबकी वजह क्या है.....

मैं अपने ख्यालों में hi था की तभी मुझे कुछ आहात hui...aur इससे पहले मैं कुछ देख pata....mujhe एक आवाज aai....jise सुन कर मैं सहम गया.....

"" तुम yaha.....tum क्या कर रहे हो यहाँ....""

[ माजिद के GHAR.....MAAJID की जवानी......]

जैसे hi मैंने देखा की गोलू भाई मेरी अम्मी और दोनों ममिजान को छोड़ने के बाद आराम फरमाने lage...to मैं अपने कमरे में बापिस आ गया....

पर जैसे hi मैं कमरे में दाखिल हुआ तो मुझे मेरे सामने मेरी खला कड़ी हुई दिखी....

Main(man में)- या al**h.....ab इन्हे क्या बोलू....

खला- तू बहार se....kaha गया tha...haa....

मैं- wo...wo khala....main वो....

खला- ये wo-wo क्या hai...seedhe से बोल न.....

मैं- वो main...haa..pani...pani पिने गया था.....

Khala(ghoor कर)- pani....par पानी तो यहाँ रखा tha....to फिर बहार क्यों गया....

Main(saham कर)- wo...maine देखा hi nhi....main नीड में था na....achanak jaga...aur प्यास भी जोर से लगी thi...to देखा hi नहीं....

खला- ohh...theek hai...chal सो ha...aaja...

और फिर खला और मैं बिस्टेर पर जा कर लेट गए.....

Main(man में)- शुक्र है खला ने ज्यादा शक नहीं kiya....aur सायद उन्होंने कोई आवाज भी नहीं सुनी hogi...warna वो तो बबाल hi मचा deti.....oohhh.....bach gaye....chalo सो जाता hu...golu भाई तो अभी सोने नहीं wale....par मैं और नहीं देख sakta.....aah....thak गया...

और फिर मैं आराम से सो gaya....aur जब मैं सुबह जगा तो मुझे पता चला की मेरे ननजान, खलु, अप्पी और उनके सौहार बापिस चले गए है......

घर में अब सिर्फ मर्दो में मेरे दोनों मामू hi the...aur अयर्तों में दोनों ममिजान, और खला रुकी हुई थी......

Khair...main उठा जब तक खाने का वक़्त हो चूका tha...to मैंने खाना khaya...aur जब बहार जाने की सोच hi रहा tha...to ममिजान ने मुजगे टोक दिया.....

मामिजान- maajid.....tu जा कर जरा गोलू जी को तो बुला ला.....

Main(man में)- ohh...to अब छोड़ने की इतनी ज्यादा तालाब हो गई की बुला कर छुड़वाना है.....

ममिजान- are...suna नहीं kya....ja बुला ला....

मैं- haa...waise उनसे कोई काम था क्या....

ममिजान- haa.....jaroori काम है....

मैं- ऐसा क्या जरूरी काम आ गया mamijaan...wo भी गोलू भाई से....

ममिजान- तू बुला तो sahi...tujhe बाद में बता दूगी.....

मैं- ठीक hai....main बुला कर लता हु....

फिर जैसे hi मैं जाने के लिए हुआ तो तभी मैंने देखा की ममिजान ने मेरी छोटी ममिजान को मुस्कुरा कर कुछ इसरा कर diya....aur फिर मेरी तरफ आँखे घुमा कर उनको रुकने का इसरा कर दिया.....

Main(man में)- इस सबका क्या matlab....ye चल क्या रहा hai....kahi कोई प्लानिंग तो नहीं हो rahi...hmm...pata तो करना padega...ki साला मेरे घर में ये सब हो क्या रहा है....

इसलिए मैं बाहर तो aaya...par गोलू भाई के घर नहीं gaya....balki घर के पीछे से घुस कर अम्मी के कमरे की खिड़की पर पहुंच गया......

और जैसे hi मैं वह पंहुचा तो मुझे भीतर से सबकी हसने की आवाजें सुनाई di.....matlab मेरी अम्मी, दोनों mamijaan...aur साथ में मेरी खला भी....

Main(man में)- इन तीनो का तो samjha....par khala....wo kaise...wo ऐसे वक़्त में कैसे है सकती hai...wo तो हमारे rashm-riwaaj को तहे दिल से मानती hai...to फिर ये sab....khair....sunu तो की आखिर ये हसी किस बात की है.....

ममिजान- तो अब batao....aage क्या socha....golu जी की बात मने या नहीं...

छोटी ममिजान- क्या तुम्हारे पास और कोई रास्ता hai.....haa...

ममिजान- nhi...par ये होगा कैसे.....

अम्मी- उन्होंने बोलै है na....to समझो हो jayga....wo जो कहते hai...wo कर के hi मानते है....

खला- haa...tujhe बड़ा यकीन hai....par मुझे नहीं लगता की ये काम इतना आसान hai....nhi....ye नहीं हो पाएगा....

अम्मी- accha....ye तू बोल रही hai...huh...wo तू hi है na....jo हमसे बोल रही थी की तू कभी किसी गैर के सामने तागे नहीं खोल sakti....yaad है न....

छोटी ममिजान- अरे haa...subah से कितनी बातें सुनाई thi...ki हम तो रंडी hai....jo छोड़ने की खातिर मजहब और रिश्ते भी भूल gaye.....aur फिर khud.....huh...

खला- are....tum सब मुझ पर भड़को मत....

ममिजान- क्यों न bhadku...are तुमने आज इतना सुनाया था की जितना हमने जिंदगी में नहीं सुना.....

अम्मी- पर सुना कर मिला भी kya....humara तो खुश नहीं बिगड़ा न....

ममिजान- वो तो hai....par इसे तो सब मिल गया na....hehehe....

ममिजान- अरे मिला भी kya.....ek शानदार लुंड से शानदार chudaai...sach me...iski तो सुबह मस्त रही....

Khala(sharma कर)- चुप करो तुम sab....main तो bas....wo तो एक hi बार kiya....par तुम सब तो कब से छुड़वा रही हो....

अम्मी- तो क्या हुआ मेरी प्यारी behen....aaj के बाद तू भी जी भर के chudwana.....kyo भाभीजाण....

ममिजान- और नहीं तो kya...aur वैसे भी गोलू जी इसकी गांड के दीवाने हो गए hai....wo तो आज hi मार lete....par इसकी हालत देख कर रुक गए.....

अम्मी- वैसे तुझे मज़ा तो आया na....kyo...

खाका- क्या bolu....maza तो aaya....par इतनी तकलीफ भी हुई na....sshhh...ab तक तीस उठ रही hai....ek तो इतना mota...ki छूट hi फाड़ di....aur लम्बा भी itna...ki मेरे सौहार के 2 लुंड मिल कर भी इतने गहरे में न पहुंचे.....

Ammi(has कर)- तो क्या hua....chhod तेरे सौहार ko....aur उनकी रखेल बन कर जी....

खला- पर kaise....mere सौहार तो कुछ hi दिन में आ जायेगे मुझे लेने....

ममिजान- वो आयगे तब उसका भी इंतज़ाम कर dege....jaise अभी हमारे सौहरों का इंतज़ाम होने वाला hai....kyo...theek कहा न.....

अम्मी- hmm..wo आ कर बतायेगे की आगे करना क्या hai......aur dekhna.....wo माजिद के दोनों मामू को लाइन पर ले आएंगे....

ममिजान- ऐसा hi ho...taki हम खुल कर मज़ा करे और गोलू जी की रखेल बन कर यही रह सके....

अम्मी- bhabhijaan....aisa hi hoga....ab हम यही रहेंगे....

खला- पर main....aur maajid....uska क्या....

अम्मी- maajid....pata nhi...use वही समझा dege....aur तू फ़िक्र मत kar...jald hi तेरा सौहार भी राजी हो jayga...samjhi....tu बस आज सारे बाल साफ़ कर lena....nhi तो वो बुरा marege...hehehe....

खला- अच्छा याद dilaya....subah उन्होंने मेरी जानते kheech-kheech कर बहुत rulaya....main अभी सारे बाल निकाल लगी....

अंकु- hmm..aur bhabhijaan...hum भी आराम कर लेते hai....baad में वक़्त नहीं मिलेगा...

ममिजान- सही kaha...baad में तो बस धक्के milege...hehehe....

खला- hehe...tum लोग आराम karo....main बाल निकाल कर आई.....

ये बोल कर खला uthi...aur मैं समझ गया की वो मेरे कमरे में hi jaygi.....kyoki उनका सामान वही था....

और मेरे कमरे में जाने पर उन्हें मैं भी दिख jata....isliye मैं दावे पाँव घर से निकल गया.....

Main(man में)- या al**h.....ye हो क्या गया है मेरे घर की इन नेक खातूनों ko.....saali सब की सब गोलू भाई से छोड़ने lagi.....huh....kyo....aur khala...unki चुदाई कब हो gai....saayad मेरे सोते वक़्त हुई hogi...uff...chook gaya....khala का बगरा हुआ बदन कमाल है वैसे....

Khair...main ऐसे hi ख्यालातों के साथ गोलू भाई के घर चल pada.....par जब मैं वह पंहुचा तो गोलू भाई घर में hi नहीं थे.....

Main(man में)- गोलू भाई तो है nhi...chalo...bapis घर चल कर देखु की मेरे घर की रंडियां करने क्या वाली है....

पर जब मैं घर पर बापिस आया तो मुझे गोलू भाई की कार मेरे घर के सामने hi मिली....

Main(man में)- ohh..to ये मेरे hi घर में hai....aur मेरे दोनों mamu....saale बहार घूम रहे hoge....huh....iska मतलब गोलू भाई पक्का किसी न किसी ko.....dekhna पड़ेगा....

मैं जल्दी से घर के पीछे से घर में ghusa....par जैसा मैंने सोचा tha....waisa कुछ नहीं था.....

मेरे घर की साड़ी एयरटेन गोलू भाई के साथ हॉल में hi बैठे बातें कर रहे थे.....

ये देख कर मैं चुपचाप बहार निकला और सामने से घर में आ गया.....

और जब मैं आया तो गोलू भाई बापिस जा रहे the....unhone मुझसे प्यार से haal-chaal पूछे और कार से निकल गए.....

मैं- ammi....ye गोलू भाई क्यों आये थे....

ममिजान- अरे beta....main बताती hu....asal में तुम्हारे अब्बू ने तुम सबके लिए एक नया घर लिया tha.....wo खेत के sath....kya कहते है उसे....

खला- फार्म हाउस....

ममिजान- haa...wahi....aur उनकी ख्वाहिस थी की वो तुम सबको ले कर वह रहने jaaye...aur मज़े करे.....

मैं- kya...ammi.....abbu ने फार्महाउस khareeda.....par kab...bataya क्यों नहीं....

अम्मी- क्या कहु beta....mujhe भी नहीं पता tha...abhi उन्होंने बताया तो जाना....

ममिजान- अरे beta...tere अब्बू तुम सबको wo...wo क्या कहते है....

खला- सरप्राइज....

ममिजान- haa...wahi देना चाहते the.....par खुदा की कुछ और hi मर्जी थी...

मैं- hmm..wo to...khair...to अब....

ममिजान- अब kya.......teri अब्बू की आखिरी ख्वाहिस थी की तुम लोग उस नए घर में raho....bas यही बताने आये थे गोलू जी....

मैं- to...iska मतलब हम यहाँ नहीं रहेंगे....

ममिजान- nhi...matlab कुछ दिन बाद तो यही रहना hai....bas घूम कर आ जायेगे......

मैं- पर ऐसे हालातों में ghoomna....kya ये सही होगा....

ममिजान- है beta....dekho....ghoomne से तुम्हारी अम्मी और तुम्हारा गम भी काम हो jayega....samjhe....

Main(man में)- अम्मी और gam..huh....ye तो वो रंडी hai...jo अपने सौहार की लाढ़ को घर में रख कर अपने मालिक से छुड़वा रही thi....huh...

ममिजान- क्या सोचने लगा बीटा.....

मैं- huh..kuch nahi.....agar ऐसा है तो हम चलते hai...aaj hi...

ममिजान- नहीं beta....aaj nhi....wo गोलू जी भी चलेंगे हमारे sath......hum उन्ही के साथ जायगे....

मैं- पर वो क्यों.....

ममिजान- क्योकि वो घर आधा उनका भी है....

मैं- इसका क्या मतलब....

ममिजान- मतलब ये की वो घर गोलू जी और तुम्हारे अब्बू ने मिल कर लिया था.....

मैं- तो क्या वो भी हमारे साथ....

ममिजान- है beta.....wo भी कुछ दिन तक वही rahege.....humare साथ....

मैं- पर aise....aap लोगो को कोई परेशानी.......

Mamijaan(beech में)- नहीं beta....isme परेशानी kya....aur तेरे अब्बू की ख्वाहिस थी की गोलू भाई भी साथ में chale......aur वैसे bhi...wo बड़े अच्छे इंसान hai....hume तो उल्टा उनके साथ बड़ा मज़ा आएगा.....

मैं- hmm...sach में......

अम्मी- हां beta......aur fir....waha वो खेत में कुछ फसल ुगवाने वाले hai....aur कुछ और भी काम hai....to वो भी हो जायेगे....

मैं- ohh...par उनका हमारे साथ rahna...kya ये ठीक hoga....matlab मामूजान log....aur आप sab....kisi को कोई परेशानी तो नहीं होगी न.....

अम्मी- नहीं beta....sab राजी hai....kisi को कोई परेशानी नहीं......

ममिजान- है beta...tere मामू लोग तो खुश hai.....ki इसी बहाने तेरे अब्बू की आखिरी ख्वाहिस तो पूरी hogi.....ab तू bata....tujhe क्या परेशानी है.....

मैं- mujhe...are nhi...mujhe क्या paresaani....main तैयार hu...bolo कब चलना है....

अम्मी- वो बता dege....jab वो फ्री हो जायेगे तो चलेंगे.......

मैं- हम्म...

ममिजान- चल beta.....tu फ्रेश हो aa...main सबके लिए chai-nasta बनती हु....

फिर मैं अपने कमरे में आ gaya....aur सोचने laga...ki आखिर ये फार्महाउस कहा से आ गया.....

अगर ऐसा कुछ hota...to अब्बू पहले hi बता dete....aur जितना मैं अब्बू को जनता hu.....us हिसाब से अम्मी की हरकतें देखने के baad...wo कभी सरप्राइज देने की सोचते भी नहीं.....

तो ये सब नाटक kyo...kisne ये फार्महाउस का मामला socha....aur क्यों...??

अगर ये सब गोलू भाई का प्लान hai......to सवाल ये उठता hai...ki उन्हें इसकी जरूरत क्यों पड़ी....

अगर चुदाई की बात hoti.......wo तो रोज मेरे घर में hi कर सकते the.....to ये फार्महाउस ले jana.....samjh नहीं आ रहा...

गोलू bhai....aakhir अब आप करने क्या वाले hai...kya....kya...kya.....???????

नोट - अपडेट पोस्टेड frnds.....hope ु लिखे आईटी......

थैंक्स फ्रेंड्स.....


कीप रीडिंग.......
 
Dosto.....actually मैं ओरिगिओनल स्टोरी को एडिट कर के पोस्ट कर देता tha...matlab..ki सामने वाला मुझे कुछ लाइन्स देता tha...usse मैं कई अपडेट बना देता था...

और उसकी स्टोरी में सिर्फ 4 अम्मियों कस खेल tha....baki मेरी सोच hai....matlab सारे incodent....situations....ye सब मैंने hi डीडे किया...

तो मुझे नहीं लगता की ओरिगिओनल 4 सन आपको ज्यादा अच्छे lagege....fir bhi...main उससे बापिस मांग कर मेल कर duga...baki कोई बात करनी हो तो हैंगऑउट पर aao....ok

थैंक्स फ्रेंड्स....

कीप रीडिंग......
 
Hello फ्रेंड्स.....

चेकआउट माय नई स्टोरी.....

मेरी बीवी रुखसार और मेरे ख्वाब....




अडुल्टेरी - मेरी बीवी रुखसार और मेरे ख्वाब

HELLO..... नमस्कार.... ससरियाकाल.... सलाम..... Hello फ्रेंड्स......... मैं एक नई स्टोरी पोस्ट करने जा रहा हु..... Well...mujhe तो आप जानते hi ho.....aur जो नहीं jante....wo भी जान ने lagege....sahi कहा na....hahaha.... ये स्टोरी एक सौहार और उसकी पाकीजा बेगम की hai.....aur ये...

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