Erotica मोहे रंग दे - Page 64 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

are maayke jane ke pahle Nanad Rani ka pakka intezaam hona chahaiye na,

ab apni shcool ki ladkiyon ke saamne , saath saath tang utha utha ke school men to mashoor ho jaayengi par mohalle men unka naam ho to koyi mohalle vaali

aur aakhir 21 din baad yaaron se milne ke liye jagah ka jugaad sirf daravja khulne se thode hi, ... hardm ke liye aane jaane vaalon ka inyezzam ho
 
Nahi nahi ye story Khatam hone ke baad bhi is story men 50 ke aas paas posts hain jsimen aage aane vaali khaniyon ka jikr hai aur maine is kahanai ke bare men bhi kyi posts likhi hain unhe jaroorr padhiyegaa aur un pe apane cooment bhi dijiyegaa

aur jab tak aap meri do chhoti chhoti kahaniyan kahatam karaegi iske baad

promise main banaras vaali story start kar dungi,... and as a tribute to your writing skill usmen Tantra Mantra ka Tadka bhi lagaaungi
 
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Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २६४ पृष्ठ १६६७ रिपोर्ट - रविवार और दो और दिन ( १ ) अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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जोरू का गुलाम भाग १६५ अपडेट पोस्टेड

तैयारी ननद की सुहागरात की

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बारी कुँवारी कच्ची ननदिया की फड़वाने की तैयारी

और गुड्डी के बचपन का यार

तैयारी साजन की पेसल मालिश

please do read, enjoy like and share your comments,....

साजन की तैयारी -बहिनिया पे,...
 
मेरी कहानियां

समय समय पर अलग लाग फोरम में पोस्टेड मेरी कहानियों की सूची , लेकिन ये सिर्फ याद पर आधारित है मित्र पाठक पाठिकाएं इसमें और जोड़ घटाना कर सकते हैं

१, होली में फट गयी -यह मेरी पहली कहानी थी और इस फोरम में भी कोमल के किस्से वाले थ्रेड में मैंने इसे फिर से पोस्ट किया है।

२. चांदनी चली गाँव

३. साजन चले ससुराल होली में

४. मजा लूटा होली में

५. साजन बने नन्दोई

६. एक रात सलहज के साथ या लाइफ आफ अ सेल्समैन

७. इट हैपन्ड या शादी के लड्डू या इंडियन वेडिंग

८ Autumn Sonata

9. Yellow Roses

१०. जीजा साली की दास्तान ( तीन कहानियां )

११. एक छोटी सी होली स्टोरी

१२ लेट अस प्ले होली

१३. होली के रंग

१४. ना भूली वो होली

१५. मजा लुटा होली का ससुराल में ( यह कहानी इस फोरम में हैं और छुटकी इसी का सीक्वेल है )

१६. लला फिर अइयो खेलन होरी ( एक छोटी सी रोमांटिक कहानी , जो इस फोरम में है कोमल के किस्से थ्रेड में )

१७. बरसन लागी बदरिया

१८. सावन के झूले पड़े

१९. सोलहवां सावन ( इसका परिमार्धित संस्करण इस फ़ोरम में है जिसमें ढेर सारे नए प्रसंग जोड़े गए हैं ) .

२०. It's a hard hard rain ( in English section in this forum )

21 Red little riding hood or 666 ( unavailable )

२२ ननद की ट्रेनिंग

२३ फागुन की दिन चार

२४ मोहे रंग दे ( इस फोरम में मूल रूप से पोस्टेड )

२५ जोरू के गुलाम ( इस फोरम में जारी, इसका अंग्रेजी रूप पहले पोस्ट हुआ फिर हिंदी रूप जो काफी अलग था पिछले फोरम में अधूरा और अब यहाँ )

२६ छुटकी - होली, दीदी की ससुराल में ( इस फोरम में ही पहली बार और अभी जारी ) ,

यह लिस्ट मैं इसलिए शेयर कर रही हूँ, क्योंकि कई बार मेरे मित्र कहानी का शीर्षक देख के सोचते हैं की शायद ये उनकी पढ़ी हो,... और कई के नाम मिलते जुलते है जैसे मोहे रंग दे के नाम और पहली पोस्टों से शायद लगा होगा की होली की एक और कहानी ,... लेकिन वो कहानी तन से ज्यादा मन को रंगने की है और वो भी नव दम्पति की

उसी तरह फागुन के दिन चार में शुरू में तो बनारस की होली का एक दृश्य है पर वो कहानी एक लम्बे थ्रिलर के रूप में बढ़ी जिसमें तीन शहरों , बनारस, बंबई और बड़ौदा में आंतकवादी साजिश तक मामला जाता है और अफगानिस्तान की टोरा बोरा की पहड़ियाँ , कुछ पडोसी देश भी पर साथ साथ एरोटिक और रोमांटिक प्रसंग भी है पर नाम से कई बार भ्रम रहता है

और एक कारण ये भी ही ये स्मृति के पृष्ठों से धूल उड़ाने का भी काम करेगी,... और अगर कुछ छूटा बचा होगा तो सहृदय पाठक गण याद भी दिलाएंगे।

and jo stories is forum men hain unhe maine bold kar diya hai

happy reading
 
asal men main us samay is kahani ka sequel soch rhai thi jo Phagun ke din chaar ki tarj pe hota lekin focus alag hota , vo ek cyber thriller jismen ek dystopian world ki kalapna thi jahan Big data ka istemaal mind control ya behaviour control ke liye hota thoda bahoot science fiction thoda bahoot political overtones 1984 ki tarj pe , ... lekin ek to mujhe laga ki is forum men kiite reaaders padhenge science fiction par usase bhi jyada mujhe khood kaafi padhana padata par ismen kayi baar data se related baaten huyi haim convergence , mera plan tha sequel men Holi ko bahoot short men nipata ke phir story township jahan ye kaam karate hain aur vahan factory ke kaam se hi jod ke ek naye tarah ke card ki design lekin facial rcognition AI aur big data ke convergence ke misuse , lekin yahi laga ki audience pata nahi hai ki nahi yahan aur audience kam bhi to main justice kar paaungi ki nahi , lekin kabhi na kabhi likhungi jaroor aur islie Reet ki vapasi ho rahi thi ,.... aap story jab kahatam karengi uske baad bhi meri 4-5 posts possible sequel ke baare men hain padhiyegaa jaroor
 
Thanks so much for such perfect pics for my story , aapko to main kis kis baat ke liye thanks bolun samjh men nahi aatata , aap meri is story ki sabse badi regular reader hain , comment karti han aap ke sahyong se 12.5 lakh views ho gaye

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वो कहानी एक इंटरफेथ स्टोरी थी और मूल रूप से बी डी एस एम् के भी एलिमेंट्स थे

और एक विशेष माहौल में लिखी गयी थी , जिस फोरम में सबसे पहले वो पोस्ट हुयी वहां मेरी एक मित्र आरती की कई इंटर फेथ कहानियां पोस्ट हुयी थी और कुछ भी नेट पर मिलती हैं जैसे , आरती की वासना, रूपा की बस की मस्ती और संगीता और ,... बस कुछ लोगों ने उसका विरोध किया और मैंने आरती के सपोर्ट में यह कहानी लिखी जिसमें मेरे उस समय के सहयोगी , संदोकान का भी नाम जुड़ा था , चित्र संयोजन उन्ही का था,

यद्यपि उस कहानी में कुछ इतिहास भी था , भारत के विभाजन का दंगो का दर्द भी था

रूमी की सूफियाना बाते भी थी

लेकिन आज के माहौल में उसे न पोस्ट करना ही श्रेयस्कर है ,और इस फोरम के साथ अनेक फोरमों ने इंटर फेथ कहानियों पर और मेरे हिसाब से बहुत सही और आवश्यक नियम बना दिए हैं , जिसमें उसकी पोस्टिंग असम्भव है

मैंने एक दो मित्रों के साथ वह कहानी बांटी भी किस शायद पी डी ऍफ़ फ़ार्म में , पर उन्होंने भी यही सलाह दी

आपने पहले भी एक दो बार ये बात उठायी है , लेकिन आज मैंने सोचा की आपको बता दूँ साफ़ साफ़ ,....

और उसी कहानी के चलते मैं याहू ग्रुप हिल्म्स छोड़ा क्योंकि उन्होंने वह पोस्ट हटा दी थी , मेरा यह मानना था की फोरम की जिम्मेदारी है की वह लेखक के सूत्र से कुछ भी छेड़खानी के पर्ने के पहले उसे अपने कारण बता दे और अगर लिखने वाला सहमत हो तो खुद ही हटा लेगा वरना फिर फोरम उसे हटा ले। लेकिन बिना बताये नहीं।

इसी फोरम में मैंने लाउंज में कुछ थ्रेड शुरू किये थे , बिहारी के दोहे , सत्यजीत रे के बारे में कविता और शायरी जिसमें बारी बारी से के शायर की जिंदगी और शायरी पे बात होती थी और बात खुदाए सुखन मीर तकी मीर से शुरू हुयी थी उन सब को किसी मॉडरेटर ने लाउंज से हटा के कहीं और रख दिया , बिना बताये ,.. और मैंने उन थ्रेड्स पे पोस्ट करना बंद कर दिया।

लेकिन मैं मानती हूँ की आप जिस फ़ोरम में है उसके पहले नियम कानून पढ़े , मानें , इसलिए मैंने जोरू का गुलाम में कुछ कांट छांट भी की , पाठकों को बता के उनसे क्षमा मांग के ,

इस के अलावा लिटिल राइडिंग हुड कहानी भी अब मैं नहीं शेयर करती ,अंडर एज के चक्कर में , उसके बारे में जोरू का गुलाम में मैंने एक मित्र की पोस्ट पर लंबा कारण भी बताया था

आशा है आप संतुष्ट होंगे।
 
ekdam lekin maine aapse request kiya tha naa ki iske baad bhi kuch posts hain meri is thread me jismne is kahani ke sequel , Banars vaali kahani ke ansh hai aur baaki sequels ka bhi to ek baar please un posts ko bhi aap ek writer ki najar se dekh len,...aur suggestion den aaj hi main do stories ke link aapko dungi lekin vo posts bhi ek writer ke naate iportant hain
 
जोरू का गुलाम भाग १६६

अपडेट पोस्टेड

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Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २५२ तीज पार्टी की तैयारी पृष्ठ १५६८ अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें, और कमेंट जरूर करें

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please do read enjoy and share your comments
 
OK ek to is story ki jo post main chah rahi thi aap pdhe aur comment den jas ki tas yahi post kar de rahi hun, pdh ke comment de dijiyegaa

और अब यह कहानी यहीं ख़तम होती है , पढ़ने वालों , सुनने वालों, और कहने सुनने वालों से बस अब यहीं अलविदा



………………………………………

हो सकता है इस कहानी के अब तक बचे, कुछ गिने चुने पाठकों में से दो चार को अच्छा न लगे, एक दो शायद सोचें भी यहाँ क्यों रुक गयी ये कहानी , तो बस उनके लिए,

पहली बात, इस कहानी का नाम ही है , था, मोहे रंग दे , एक दुसरे के रंग में रंगने की कहानी, साजन के सजनी के और सजनी की साजन के रंग में डूबने सराबोर हो जाने की कहानी, जब बिना कहे बोले , एक की बात दूसरा समझ ले , इशारे की भी जरूरत न पड़े, .. जो अंग्रेजी में कहते हैं , व्हेयर इच इज बोथ,... तो बस ये कहानी वही कहना चाहती थी , और मेरे नेते वो कहानी, कहानी नहीं जो कुछ कहे नहीं। पति पत्नी का रिश्ता, बनने और आगे बढ़ने की कहानी, और शादी के पहले की भी थोड़ी ताकाझांकी जो कहते हैं न लव कम अरेंज्ड तो उसमें भी तो लव पहले आता है,... गाँव जो आलमोस्ट क़स्बा बन चुका है , और शहर जो अपने दिल में अभी भी गाँव है , ... उन के बीच के रिश्तों की कहानी , रिश्तों की गर्माहट और मीठी मीठी छेड़छाड़ की कहानी,... तो बस जब दोनों रंग चुके हैं , तो बस मुझे लगा एक यही मुकाम है , ठहरने का,...

दूसरी बात, ... मैंने पहले ही तय कर लिया था की १,००० पेज ( एम् एस वर्ड्स में ) से ज्यादा नहीं,... जोरू का गुलाम को लम्बा करने की सज़ा मैं अभी तक भुगत रही हूँ, फोरम पहले बंद हो गया , कहानी पूरी हो नहीं पायी, खैर उस बात को अभी यहीं छोड़ती हूँ , तो १,००० पेज जब पूरे हुए तो मेरे एक मित्र ने जिन्होंने मेरी ढेर सारी कहानियों को पी डी ऍफ़ किया,... बताया की उनके हिसाब से तो १००० कभी के पूरे हो गए, और होली आगयी तो मैंने पिछले साल कुछ होली के सीन डाल दिए बस उसके बाद , अब होली में कोई लिमिट तो होती नहीं, अपने यहाँ तो होली का लिमिट और शराफत दोनों से कोई नाता नहीं, ... इसलिए और फिर ननद भाभी वाला मामला , तो थोड़ी फंतासी नुमा,... लेकिन अब इस कहानी के मेरी लैपी पर १,१५४ पन्ने और ३,१८, ७२४ शब्द हो चुके हैं। तो फिर ,...

तीसरी बात, शायद आप में से अभी नहीं लेकिन बाद में कोई कभी, मरा पुराना पाठक भटकता हुआ और रवायतन पूछ बैठे, इसके आखिर में डाटा की और भी ढेर सारी कन्सर्न्स हैं तो क्या इस कहानी का दूसरा भाग भी आएगा , नहीं और हाँ,

और सही बात है की मैं नहीं जानती,

जब पिछला फोरम बंद हुआ था तो मैंने सोचा था, बस और नहीं, फिर कुछ पुरानी कहानियां लेकिन उनमे भी इतनी चीजें जुड़ गयी की वो एकदम नया वर्ज़न ( नमूने के तौर पर सोलहवां सावन, कितने नए हिस्से उसमें जुड़ गए ) और फिर ये कहानी शुरू हुयी तो , बढ़ती गयी, और जब उसमें एक बार रीत घुस गयी, और जिसने पुराने फोरम में रीत से भेंट मुलाकात की होगी, या मेरी कहानी फागुन के दिन चार पढ़ी होगी, वो जानते हैं की अगर रीत कहीं घुस गयी तो उसके बाद जो होता है वो रीत करती है,... लेकिन अगर अगला भाग आया तो , एक तो वो इरोटिक नहीं होगा , शायद बहुत हुआ तो एरोटिक थ्रिलर हो, हो सकता है एक डिस्टोपियन दुनिया का किस्स्सा हो , ... लेकिन कहानी सुनाने के साथ अक्सर हम सुनाने वाले सुनने वाले की पसंद नापसन्द भूल जाते हैं और फिर सर धुनते है, कोई सुनता नहीं , सुनता है तो हुँकारी नहीं भरता,.. और डिस्टोपियन किस्सों के अपने,... और फोरम के भी कानून कायदे, तो आप जिसके मेहमान है , जब आप ने जहाँ बरसों से अड्डा जमा रखा था, और वो नशेमन उजड़ गया, किसी ने अपने यहाँ सर छुपाने की जगह दी , पर उसके यहाँ अगर कायदा है की चप्पल घर के बाहर उतार दें, रात में दस के बाद गाना न बजाएं तो उसे मानना ही होगा,...

तो मैं नहीं जानती और अगर कुछ हुआ भी तो अगले छह महीने साल भर, जिस तरह की बातें मैं सोच रही हूँ , उसके लिए बहुत इंटेंसिटी चाहिए,

चौथी बात , शायद कोई ये भी पूछे अब क्या होगा मेरी छुटकी ननदिया का जो इत्ती सारी प्लानिंग थी मेरी और कम्मो की, और वो अनुज जो बनारस में है,

छुटकी ननदिया के साथ वही होगा है जो होना होना है , लेकिन शुरू से अबतक यह कहानी फर्स्ट परसन में हैं और फिर जिस जगह कहानी सुनाने वाली ही नहीं होगी तो वहां की बातें कैसे होंगी , फिर मैंने पहले भी कहा था न यह कहानी थी मोहे रंग दे , साजन सजनी के एक दूसरे के रंग में रंगने रंगाने की,...

तो यह कहानी तो यही ख़तम हो रही है लेकिन थ्रेड मैं नहीं बंद कर रही,



हाँ पर देवर ननद की बातें कुछ उनके ऊपर कुछ आपकी कल्पनाओं पर छोड़ती हूँ , ... लेकिन कोई यह कहे की ऐसा थोड़े ही होता है,... तो घबड़ाइये मत, , दोनों के मेरी ननद के और देवर के, देवर की बातें देवर की अनुज की जुबान से , और ननद की बातें , कम्मो की ओर से , ... लेकिन अभी नहीं , पर जल्द ही , कुछ बातें ,... कम्मो और अनुज की ओर से,...



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तो इतने दिनों तक धैर्य तक साथ देने के लिए धन्यवाद, और अगर किसी के कमेंट आएंगे तो मैं सर झुका के धन्यवाद देने जरूर आउंगी।
 
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