Erotica मोहे रंग दे - Page 62 - SexBaba
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Erotica मोहे रंग दे

HOLI mera priya subject raha hai chaahe devar bhabhi ki ho ya Jija saali ki ya nandoyi slahj ki

maine apni pahli kahani HOLI pe hi likhi thi aur meri kuch Holi ki kahaniyan is forum me

होली है - होली के किस्से , कोमल के हिस्से

ye sab short stories hain 2-3 page vaali jo main pahle har holi ke mauke pe jaroor post karti thi

uska link de rahi hun aur Holi ki meri sabse HOT story ka bhi

मजा पहली होली का, ससुराल में
 
aap ko HOLI ka prasang accha laga so many thanks

meri pahli story jo Hinglish men thi aur short thi,... ka main link de rahi hun,

kabhi time mile to

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Erotica - होली है - होली के किस्से , कोमल के हिस्से

होली है - होली के किस्से , कोमल के हिस्से होली है - होली के किस्से , कोमल के हिस्से ये थ्रेड मेरी होली की उन कहनियों की हैं जब मैंने किस्से कहने शुरू किये थे , लिखने की कला तो मुझे अभी तक नहीं आयी उस समय तो और,... इंटरनेट पर याहू के ग्रुप होते थे , अटैचमेंट मेल के ३ एम् बी के इसलिए...

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होली है - होली के किस्से , कोमल के हिस्से

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होली है - होली के किस्से , कोमल के हिस्से

ये थ्रेड मेरी होली की उन कहनियों की हैं जब मैंने किस्से कहने शुरू किये थे , लिखने की कला तो मुझे अभी तक नहीं आयी उस समय तो और,... इंटरनेट पर याहू के ग्रुप होते थे , अटैचमेंट मेल के ३ एम् बी के इसलिए कहानियों की साइज भी छोटी , पिक्चर का सवाल नहीं , फ़ॉन्ट के लफड़े , पोस्टिंग के झगडे , इसलिए ज्यादातर कहानियां अंग्रेजी में कुछ डायलॉग हिंदी में ,

और मेरी पहली कहानी ' होली में फ़ट गयी ' उसी समय की है ,

लेकिन कुछ चीजें उस समय की अभी भी मेरी कहानियों में हैं

ननद भाभी की छेड़खानी

जीजा साली की ठिठोलियां

और सबसे बढ़कर होली की मस्ती ,... इस थ्रेड में होली की ऐसी ही कहानियां , शेयर करुँगी , ... मेरी पहली कहानी , ....

होली में फट गयी
 
Aur HOLI ki meri sabse HOT story jismen maine koyi seema nahi rkhi thi

Chhutaki jiska sequel hai

मजा पहली होली का, ससुराल में

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Erotica - मजा पहली होली का ससुराल में

मजा पहली होली का, ससुराल में ( इस कहानी के सभी पात्र वयस्क हैं और सभी चित्र इंटरनेट से लिए गए हैं यदि किसी को कोई आपत्ति हो तो टिप्पणी कर सकता है। अंडर एज सेक्स न सिर्फ इस फोरम के नियमों के खिलाफ है बल्कि वैधानिक रूप से भी निषिद्ध है , और मैं वयक्तिगत रूप से भी इसे नहीं पसंद करती।) मुझे...

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मजा पहली होली का, ससुराल में

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मुझे त्योहारों में बहुत मज़ा आता है, खास तौर से होली में.

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पर कुछ चीजें त्योहारों में गड़बड़ है. जैसे, मेरे मायके में मेरी मम्मी और उनसे भी बढ़ के छोटी बहनें कह रही थीं

कि मैं अपनी पहली होली मायके में मनाऊँ. वैसे मेरी बहनों की असली दिलचस्पी तो अपने जीजा जी के साथ होली खेलने में थी.

परन्तु मेरे ससुराल के लोग कह रहे थे कि बहु की पहली होली ससुराल में हीं होनी चाहिये.

मैं बड़ी दुविधा में थी. पर त्योहारों में गड़बड़ से कई बार परेशानियां सुलझ भी जाती हैं. इस बार होली २ दिन पड़ी.

मेरी ससुराल में 17 मार्च को और मायके में 18 को.

मायके में जबर्दस्त होली होती है और वो भी दो दिन. तय हुआ कि मेरे घर से कोई आ के मुझे होली वाले दिन ले जाए और ‘ये’ होली वाले दिन सुबह पहुँच जायेंगे. मेरे मायके में तो मेरी दो छोटी बहनों नीता और रीतू के सिवाय कोई था नहीं.

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Ekdam sahi kaha aapne

so many thanks is support ke liye har comments ke lye

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Thanks, I have a story in English and i am sharing the link, please do have a look Will try to post English/Hinglish version of at least a few stories

thanks so much

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It’s a hard rain

It’s a hard rain When the evening is spread out against the sky Like a patient etherized upon a table… Dusk was dawning on glass panes of his window, smoke rubbing its muzzle, peeping from outside , streets following like tedious argument, …every evening, it reminded him of Prufrock’s love...

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t’s a hard rain

When the evening is spread out against the sky

Like a patient etherized upon a table…


Dusk was dawning on glass panes of his window, smoke rubbing its muzzle, peeping from outside , streets following like tedious argument, …every evening, it reminded him of Prufrock’s love poem, more than 12 years has gone, him occupying this cabin, but today was to be last day ,last evening,

Clock on wall reminded him, 10 minutes more, 10 minutes to move out, move out for ever.

When day started, it was like any other.
 
एकदम

रसिया को नार बनाउंगी, रसिया को

कटि लहँगा गल माल कंचुकी वाह रे रसिया वाह

चुनरी शीश उढ़ाओ री रसिया को

रसिया को नार बनाओ री रसिया को

बाँह बरा बाजूबन्द सोहे

बाँह बरा बाजूबन्द सोहे

नकबेसर पहनाओ री रसिया को |

रसिया को नार बनाओ री रसिया को

गाल गुलाल दृगन बिच काजल

गाल गुलाल दृगन बिच काजल

बेंदी भाल लगाओ री रसिया को

रसिया को नार बनाओ री रसिया को

आरसी-कंगन-छल्ला पहनाओ

आरसी कंगन छल्ला पहनाओ

पैंजनी पाँव सजाओ री रसिया को

रसिया को नार बनाओ री रसिया को

सिर्फ एक फर्क है तो क्या हुआ आगे की जगह पीछे वाला, फागुन में देवर को ननद बना के न आंगन में नचाया और उसी रूप में बिदा किया तो

होली क्या और भौजाई क्या
 
faagun ka mjaa hi devar bhaabhi ki holi ka hai

Jija saali ki holi to kabhi kabhi hoti hai, saali ki shaadi ke pahle

par devar bhabhi ki holi to har saal aur phagun aate hi phagunahat chadhti hai , aur hamaare yahan to kahate hain Devar Bhabhi ka Phagun saal bhar chalta hai

thanks for such nice comment story ke rs ka sahi rsaswadan kar rahi hain , ... baar baar dhanyvaad
 
जोरू का गुलाम भाग १६२

गुड मॉर्निंग

update posted

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Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

जोरू का गुलाम भाग २४५ , गीता और गाजर वाला, पृष्ठ १५२४ अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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Please do read, like and share your comments
 
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Adultery - छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

छुटकी - होली दीदी की ससुराल में भाग १२० -- अगला दिन - बुच्ची का दिन पृष्ठ १२५४ अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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UPDATE POSTED

भाग ३८

मेरे पास माँ है- इनसेस्ट् कथा गीता और अरविंद की

please do read,enjoy, like and post your comments, my debut in this genre
 
छुटकी की भी नथ उतराई का किस्सा खूब विस्तार से है और ५-६ बड़ी बड़ी पोस्टों में तीन चार पन्नो में,

और उसका भी हांका कर शिकार करवाने में उसकी भी भौजाई ही थीं, अपने नन्दोई को बड़े जतन से अपनी ननद का भोग आराम आराम से लगवाया, ...

उसकी और मेरी भौजी रीतू भाभी ने,

और मैं भी मौजूद थी मौके पे लेकिन साथ मैं अपने साजन का दे रही थी बहन का नहीं,... तो दो दो लोग वहां भी थे शिकार को पकड़ के शिकारी की बन्दूक के सामने लाने के लिए,

इस कहानी को पढ़ के पढियेगा जरूर उस कहानी को , जहाँ से छुटकी की कहानी शुरू हुयी है, ... लेकिन एकदम शुरू से ,...

इस कहानी में तो रोमांस का पुट ज्यादा है , एरोटिक उसके बाद , लेकिन वो तो हर पन्ने हर लाइन पे

लिंक आपको दे चुकी हूँ , फिर से दे रही हूँ

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Erotica - मजा पहली होली का ससुराल में

मजा पहली होली का, ससुराल में ( इस कहानी के सभी पात्र वयस्क हैं और सभी चित्र इंटरनेट से लिए गए हैं यदि किसी को कोई आपत्ति हो तो टिप्पणी कर सकता है। अंडर एज सेक्स न सिर्फ इस फोरम के नियमों के खिलाफ है बल्कि वैधानिक रूप से भी निषिद्ध है , और मैं वयक्तिगत रूप से भी इसे नहीं पसंद करती।) मुझे...

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मजा पहली होली का ससुराल में

कहानी छोटी सी है लेकिन भूत झोलकिया मिर्च की तरह बेहद तीखी,...

और छुटकी वाले प्रसंग का सीधा लिंक नहीं दे रही हूँ , कहानी पढ़ते पढ़ते वहां पहुँचिएगा तो ज्यादा मजा आएगा

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लेकिन दो चार ;लाइने

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और छुटकी आई तो,

उसकी कसी-कसी छोटी स्कूल की टाप के नीचे दोनों छोटे-छोटे चूजे चोंच मार रहे थे।

वो कच्चे-कच्चे टिकोरे, जिसके न सिर्फ वो, बल्की मेरे नंदोई भी दीवाने थे, टाप के नीचे से साफ झलक रहे थे।

और उसे देखकर न सिर्फ मुँह सूख गया उनका, बल्की खड़ा खूंटा और तन के शार्ट के बाहर से झांकने लगा।

और अब मुँह सूखने की बारी छुटकी की थी।

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जान सूख गई थी, उसकी। उसे मालूम पड़ गया था कि अब थोड़ी देर में यहाँ क्या होने वाला था।

और ऊपर से रितू भाभी, उन्होंने शार्ट नीचे सरका दिया और रामपुरी 9” इंच के स्प्रिंग वाले चाकू की तरह, मोटा कड़ियल पगलाया लण्ड बाहर-

“क्यों लेगी इसे?”

मुट्ठी में उसे सहलाते, दबाते रितू भाभी ने पूछा।

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कितने अहसास एक साथ छुटकी के चेहरे पर से उतर गए।

1॰ लालच- मन कर रहा था बस गप्प से अंदर ले ले।

2॰ डर, और दहशत- क्या हालत होगी उस बिचारी की छोटी सी बिल की, जब ये कलाई ऐसा मोटा बालिश्त भर लम्बा, फाड़ता हुआ घुसेगा अंदर।

3॰ चाहत- कितना मजा आएगा, सुबह वो अपनी दो सहेलियों को देख चुकी थी, इसे घोंटते दोनों चीख चिल्ला रही थी लेकिन बाद में कितना मजा आया। और… और मंझली ने भी तो लिया था, इसे। एक ही साल तो बड़ी है वो।

4॰ घबड़ाहट- बहुत दर्द होगा, और खून भी निकलेगा। खून से बहुत डरती थी वो।



वो हिरणी की तरह डर के मेरी ओर मुड़ी, पर रितू भाभी की कोई ननद बच सके तो रितू भाभी कैसी

.....

रितू भाभी, छुटकी की गीली पनियाई चूत को एक हाथ से फैला रही थीं

और दूसरे हाथ से नंदोई के मस्त मोटे लण्ड को अंदर घुसेड़ रही थी साथ में ललकार रही थीं-

“पेल दो साले, साल्ली की फुद्दी में, फाड़ दो रज्जा इसकी चूत…

और वो भी दोनों हाथ से उसकी पतली कमर पकड़े हुए थे और उन्होंने करारा धक्का मारा, आधा सुपाड़ा अंदर।

हाथ मेरे कब्जे में थे और उसके मुँह में मेरी मोटी चूची घुसी हुई थी। बिचारी गों-गों करती रही, दर्द से बिलबिलाती रही।

लेकिन ऐसे मौके पे वो दया माया दिखाने वालों में से नहीं थे। और दिखानी चाहिए भी नहीं (ये बात मुझसे बढ़कर कौन जानता था)

बल्की उससे उनका जोश और बढ़ जाता था।

और यहाँ आग में घी डालने वाली, उनका जोश बढ़ाने वाली, रितू भाभी भी थीं।

अगला धक्का उन्होंने दूने जोर से मारा।

मेरे लाख जोर से पकड़ने के बावजूद उसकी एक कलाई छूट ही गई, इतनी जोर से छटपटा रही थी वो।

पानी के बाहर मछली की तरह तड़प रही थी, बिचारी छुटकी।

मैंने पूरी ताकत से अपनी चूची उसके मुँह में पेल रखी थी। तब भी उसके होंठों से चीखें, गों-गों की आवाज आ रही थी, वो जोर-जोर से अपने चूतड़ पटक रही थी।
 
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