छुटकी की भी नथ उतराई का किस्सा खूब विस्तार से है और ५-६ बड़ी बड़ी पोस्टों में तीन चार पन्नो में,
और उसका भी हांका कर शिकार करवाने में उसकी भी भौजाई ही थीं, अपने नन्दोई को बड़े जतन से अपनी ननद का भोग आराम आराम से लगवाया, ...
उसकी और मेरी भौजी रीतू भाभी ने,
और मैं भी मौजूद थी मौके पे लेकिन साथ मैं अपने साजन का दे रही थी बहन का नहीं,... तो दो दो लोग वहां भी थे शिकार को पकड़ के शिकारी की बन्दूक के सामने लाने के लिए,
इस कहानी को पढ़ के पढियेगा जरूर उस कहानी को , जहाँ से छुटकी की कहानी शुरू हुयी है, ... लेकिन एकदम शुरू से ,...
इस कहानी में तो रोमांस का पुट ज्यादा है , एरोटिक उसके बाद , लेकिन वो तो हर पन्ने हर लाइन पे
लिंक आपको दे चुकी हूँ , फिर से दे रही हूँ
Erotica - मजा पहली होली का ससुराल में
मजा पहली होली का, ससुराल में ( इस कहानी के सभी पात्र वयस्क हैं और सभी चित्र इंटरनेट से लिए गए हैं यदि किसी को कोई आपत्ति हो तो टिप्पणी कर सकता है। अंडर एज सेक्स न सिर्फ इस फोरम के नियमों के खिलाफ है बल्कि वैधानिक रूप से भी निषिद्ध है , और मैं वयक्तिगत रूप से भी इसे नहीं पसंद करती।) मुझे...
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मजा पहली होली का ससुराल में
कहानी छोटी सी है लेकिन भूत झोलकिया मिर्च की तरह बेहद तीखी,...
और छुटकी वाले प्रसंग का सीधा लिंक नहीं दे रही हूँ , कहानी पढ़ते पढ़ते वहां पहुँचिएगा तो ज्यादा मजा आएगा
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लेकिन दो चार ;लाइने
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और छुटकी आई तो,
उसकी कसी-कसी छोटी स्कूल की टाप के नीचे दोनों छोटे-छोटे चूजे चोंच मार रहे थे।
वो कच्चे-कच्चे टिकोरे, जिसके न सिर्फ वो, बल्की मेरे नंदोई भी दीवाने थे, टाप के नीचे से साफ झलक रहे थे।
और उसे देखकर न सिर्फ मुँह सूख गया उनका, बल्की खड़ा खूंटा और तन के शार्ट के बाहर से झांकने लगा।
और अब मुँह सूखने की बारी छुटकी की थी।
जान सूख गई थी, उसकी। उसे मालूम पड़ गया था कि अब थोड़ी देर में यहाँ क्या होने वाला था।
और ऊपर से रितू भाभी, उन्होंने शार्ट नीचे सरका दिया और रामपुरी 9” इंच के स्प्रिंग वाले चाकू की तरह, मोटा कड़ियल पगलाया लण्ड बाहर-
“क्यों लेगी इसे?”
मुट्ठी में उसे सहलाते, दबाते रितू भाभी ने पूछा।
कितने अहसास एक साथ छुटकी के चेहरे पर से उतर गए।
1॰ लालच- मन कर रहा था बस गप्प से अंदर ले ले।
2॰ डर, और दहशत- क्या हालत होगी उस बिचारी की छोटी सी बिल की, जब ये कलाई ऐसा मोटा बालिश्त भर लम्बा, फाड़ता हुआ घुसेगा अंदर।
3॰ चाहत- कितना मजा आएगा, सुबह वो अपनी दो सहेलियों को देख चुकी थी, इसे घोंटते दोनों चीख चिल्ला रही थी लेकिन बाद में कितना मजा आया। और… और मंझली ने भी तो लिया था, इसे। एक ही साल तो बड़ी है वो।
4॰ घबड़ाहट- बहुत दर्द होगा, और खून भी निकलेगा। खून से बहुत डरती थी वो।
वो हिरणी की तरह डर के मेरी ओर मुड़ी, पर रितू भाभी की कोई ननद बच सके तो रितू भाभी कैसी
.....
रितू भाभी, छुटकी की गीली पनियाई चूत को एक हाथ से फैला रही थीं
और दूसरे हाथ से नंदोई के मस्त मोटे लण्ड को अंदर घुसेड़ रही थी साथ में ललकार रही थीं-
“पेल दो साले, साल्ली की फुद्दी में, फाड़ दो रज्जा इसकी चूत…
और वो भी दोनों हाथ से उसकी पतली कमर पकड़े हुए थे और उन्होंने करारा धक्का मारा, आधा सुपाड़ा अंदर।
हाथ मेरे कब्जे में थे और उसके मुँह में मेरी मोटी चूची घुसी हुई थी। बिचारी गों-गों करती रही, दर्द से बिलबिलाती रही।
लेकिन ऐसे मौके पे वो दया माया दिखाने वालों में से नहीं थे। और दिखानी चाहिए भी नहीं (ये बात मुझसे बढ़कर कौन जानता था)
बल्की उससे उनका जोश और बढ़ जाता था।
और यहाँ आग में घी डालने वाली, उनका जोश बढ़ाने वाली, रितू भाभी भी थीं।
अगला धक्का उन्होंने दूने जोर से मारा।
मेरे लाख जोर से पकड़ने के बावजूद उसकी एक कलाई छूट ही गई, इतनी जोर से छटपटा रही थी वो।
पानी के बाहर मछली की तरह तड़प रही थी, बिचारी छुटकी।
मैंने पूरी ताकत से अपनी चूची उसके मुँह में पेल रखी थी। तब भी उसके होंठों से चीखें, गों-गों की आवाज आ रही थी, वो जोर-जोर से अपने चूतड़ पटक रही थी।