Doctor Maa ke Sath Sambandh - Page 2 - SexBaba
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Doctor Maa ke Sath Sambandh

सुबह की ताजी हवा और रसोई से आती गरम चाय की खुशबू ने घर के माहौल को बिल्कुल सामान्य बना दिया था। आर्यन जब नाश्ते की टेबल पर पहुँचा, तो उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। कल रात का वह नग्न मंजर उसकी बंद आँखों के सामने अभी भी किसी बिजली की तरह कौंध रहा था। वह अपनी माँ की नज़रों से नज़रें मिलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

अंजलि ने प्लेट में गरमा-गरम परांठा रखते हुए बहुत ही सहजता से पूछा, "अब कैसा महसूस कर रहा है आर्यन? कल रात तो तू बिना कुछ कहे ही गहरी नींद में चला गया था।"

आर्यन ने चाय का कप पकड़ा, उसके हाथ थोड़े कांप रहे थे। "माँ... वह... मुझे पता नहीं क्या हुआ। अचानक सिर घूमने लगा और फिर मुझे कुछ याद नहीं।" वह थोड़ा अजीब और शर्मिंदा महसूस कर रहा था। उसे लग रहा था कि वह कितना कमज़ोर साबित हुआ कि अपनी माँ की खूबसूरती को देख कर ही बेहोश हो गया।

अंजलि उसकी इस उलझन को भाँप गई। उसने टेबल के दूसरी तरफ से आर्यन का हाथ अपने हाथ में लिया और उसे हल्का सा दबाया।

"आर्यन, मेरी तरफ देख," अंजलि ने बहुत ही कोमल और शांत स्वर में कहा।

आर्यन ने धीरे से नज़रें उठाईं। अंजलि की आँखों में कोई गुस्सा या उपहास नहीं था, बल्कि एक गहरी सांत्वना थी।

"डरने की या अजीब महसूस करने की कोई बात नहीं है बेटा। कल रात जो हुआ, वह तेरे दिमाग के लिए एक बहुत बड़ा 'शॉक' था। जब शरीर और मन एक साथ इतनी उत्तेजना और सच्चाई का सामना करते हैं, तो कभी-कभी ऐसा हो जाता है। इसमें तेरी कोई गलती नहीं है," अंजलि ने उसे तसल्ली देते हुए कहा।

आर्यन को थोड़ा सुकून मिला, पर उसके मन में कल रात की वह तस्वीर अभी भी छपी हुई थी। "माँ, क्या हम... क्या हम उस बारे में बात करेंगे?"

अंजलि ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ हटाया और नाश्ता शुरू किया। "अभी नहीं। अभी तुझे कॉलेज जाना है और मुझे क्लिनिक। दिन भर इस बारे में सोचकर अपना दिमाग भारी मत करना। हम शाम को आराम से बैठकर बात करेंगे। तब तक तू बस शांत रह और यह नाश्ता खत्म कर।"

अंजलि की इस 'मैच्योर' बात ने आर्यन को एक सुरक्षित अहसास दिया। उसे लगा कि उसकी माँ ने उसे फिर से उस 'गिल्ट' के गड्ढे में गिरने से बचा लिया है। शाम का इंतज़ार अब उसके लिए किसी चुनौती की तरह नहीं, बल्कि एक नई और गहरी समझ की शुरुआत जैसा लग रहा था।

दोपहर का वक्त था और अंजलि अपने क्लिनिक के केबिन में बैठी थी। सामने मेज पर कुछ मरीजों की फाइलें खुली थीं, लेकिन उसका ध्यान फाइलों से कहीं दूर अपने बेटे आर्यन पर अटका हुआ था। सुबह से ही उसके दिमाग में कल रात का वह मंजर किसी फिल्म की रील की तरह घूम रहा था।

उसने अपनी कुर्सी के पीछे सिर टिकाया और एक गहरी ठंडी सांस ली।

अंजलि के मन में एक अजीब सी उलझन थी। वह खुद से ही बुदबुदायी, "सिर्फ Boobs को देखकर ही वह लड़का बेहोश हो गया? इतना गहरा असर पड़ा उस पर?"

एक डॉक्टर के तौर पर वह जानती थी कि आर्यन इस वक्त 'हाइपर-स्टिमुलेशन' (Hyper-stimulation) के दौर से गुजर रहा है। उसकी उम्र, उसकी जिज्ञासा और फिर अपनी ही माँ को उस रूप में देखना—यह उसके कोमल मन के लिए किसी बिजली के झटके जैसा था। अंजलि को फिक्र इस बात की नहीं थी कि आर्यन उत्तेजित हुआ, फिक्र इस बात की थी कि वह उस उत्तेजना को मानसिक रूप से संभाल नहीं पाया।

"मुझे इस स्थिति को बहुत ही सही ढंग और समझदारी से संभालना होगा," अंजलि ने खुद से कहा। "अगर मैंने उसे अभी बीच मझधार में छोड़ दिया, तो वह ज़िंदगी भर औरतों के सामने असहज महसूस करेगा। उसे 'सेक्सुअलिटी' और 'शारीरिक सच्चाई' को एक सामान्य चीज़ की तरह स्वीकार करना सिखाना होगा।"

अंजलि ने तय कर लिया था कि वह अब पीछे नहीं हटेगी। उसने जो दरवाज़ा कल रात खोला था, उसे अब पूरा खोलना होगा ताकि आर्यन के मन का सारा डर और अचरज निकल जाए। वह जानती थी कि जिज्ञासा जब तक अधूरी रहती है, तब तक वह पागलपन बनी रहती है।

उसने घड़ी देखी। शाम होने वाली थी। उसने मन ही मन एक योजना बनाई कि आज रात वह आर्यन को सिर्फ 'स्पर्श' नहीं कराएगी, बल्कि उसे इस शारीरिक बनावट और खिंचाव के प्रति इतना सहज कर देगी कि उसका 'शॉक' हमेशा के लिए खत्म हो जाए।

"आज रात... उसे यह समझना होगा कि यह शरीर सिर्फ एक मांस का लोथड़ा नहीं, बल्कि भावनाओं और संवेदनाओं का एक सुंदर मेल है। उसे डराना नहीं, उसे सिखाना है," अंजलि के चेहरे पर एक दृढ़ संकल्प था।

उसने अपना बैग उठाया और क्लिनिक से घर की ओर चल दी। आज की शाम और रात उनके रिश्ते की सबसे महत्वपूर्ण रात होने वाली थी।

शाम का वक्त था और घर में वही जानी-पहचानी खुशबू फैली हुई थी। अंजलि क्लिनिक से एक नए संकल्प के साथ लौटी थी। उसने देखा कि आर्यन थोड़ा गुमसुम था, शायद वह अभी भी रात की उस 'बेहोशी' और अपनी प्रतिक्रिया को लेकर शर्मिंदा था। अंजलि जानती थी कि उसे सबसे पहले इस भारीपन को खत्म करना होगा।

उसने आज रात का खाना थोड़ा जल्दी लगा दिया और आर्यन को आवाज़ दी।

डिनर टेबल पर अंजलि ने आज उसकी पसंद के राजमा-चावल बनाए थे। आर्यन चुपचाप अपना निवाला तोड़ रहा था, उसकी नज़रें प्लेट में ही गड़ी थीं।

अंजलि ने उसे गौर से देखा और फिर एक शरारती मुस्कान के साथ बोली, "वैसे आर्यन, आज मुझे क्लिनिक में एक बहुत ही 'नाजुक' पेशेंट मिला। बिल्कुल तेरी तरह।"

आर्यन ने चौंककर नज़रें उठाईं। "मेरी तरह? मतलब? उसे क्या हुआ था?"

अंजलि ने अपनी ठुड्डी पर हाथ रखा और थोड़ा नाटक करते हुए कहा, "बेचारा... बस थोड़ा सा ब्लड प्रेशर लो हो गया था। मैंने जैसे ही उसका चेकअप करने के लिए Stethoscope निकाला, वो तो डर के मारे पीला ही पड़ गया। मुझे तो लगा कहीं कल रात की तरह वो भी वहीं... 'ढेर' न हो जाए।"

आर्यन का चेहरा एकदम से लाल हो गया। वह समझ गया कि माँ उसकी टांग खींच रही हैं। "माँ! आप भी न... वो... वो बस अचानक हुआ था। मेरा मतलब है, मैं तैयार नहीं था।"

अंजलि ज़ोर से हँस पड़ी। उसकी हँसी ने कमरे के तनाव को एक पल में पिघला दिया। "अच्छा? तैयार नहीं था? तो अगली बार क्या मुझे 'नोटिस' भेजना पड़ेगा? 'मिस्टर आर्यन, आज रात 10 बजे प्रदर्शन होने वाला है, कृपया अपना दिल थाम कर बैठें'?"

आर्यन भी अब अपनी हँसी नहीं रोक पाया। "नहीं-नहीं, नोटिस की ज़रूरत नहीं है। बस... इस बार मैं थोड़ा 'बैकअप' लेकर बैठूँगा।"

अंजलि ने अपनी थाली से एक चम्मच राजमा उसे चखाया। "चल, अब ये उदास चेहरा छोड़। देख, तूने कल रात जो देखा, वो कोई जादू या डरावनी चीज़ नहीं थी। वो सिर्फ तेरा ही एक हिस्सा है जिससे तू आज तक अनजान था। और जो बेहोशी हुई... उसे मैं अपनी 'खूबसूरती' की तारीफ समझूँ या तेरी 'कमज़ोरी'?"

आर्यन ने शरारत से अंजलि की आँखों में झाँका। "खूबसूरती की तारीफ ही समझिये माँ। क्योंकि उतनी 'खूबसूरती' झेलना हर किसी के बस की बात नहीं है।"

अंजलि ने हल्के से उसका कान खींचा। "बड़ा शातिर हो गया है तू बातों में। चल, जल्दी खाना खत्म कर। आज रात मुझे तुझे कुछ और 'मेडिकल ज्ञान' देना है, ताकि अगली बार तू कम से कम होश में तो रहे।"

खाने के बाद दोनों ने साथ मिलकर बर्तन समेटे। माहौल अब पूरी तरह से हल्का और खुशनुमा हो चुका था। लेकिन उस हँसी-मज़ाक के पीछे एक गहरी उत्तेजना और इंतज़ार था। दोनों जानते थे कि आज रात अंजलि उसे उस 'अधूरी' मंज़िल तक ले जाएगी जहाँ से कल वह लौट आया था।

बेडरूम में उस रात एक अजीब सी खामोशी थी, लेकिन यह खामोशी भारी नहीं, बल्कि सुकून भरी थी। कोने में रखा छोटा सा लैंप अपनी हल्की पीली रोशनी पूरे कमरे में बिखेर रहा था, जिससे माहौल बहुत ही आरामदायक (Cozy) और सुरक्षित लग रहा था। इतनी रोशनी काफी थी कि वे एक-दूसरे के चेहरे के भाव देख सकें, पर इतनी कम कि कोई झिझक न हो।

दोनों बिस्तर पर टिक कर बैठे थे। अंजलि ने अपनी रेशमी जुल्फों को पीछे किया और आर्यन की ओर मुड़कर एक बहुत ही निजी सवाल पूछा।

"आर्यन... सच-सच बता, क्या तेरी कॉलेज में कोई गर्लफ्रेंड है? या कभी रही है?" अंजलि की आवाज़ में एक सहेली जैसी जिज्ञासा थी।

आर्यन ने अपनी नज़रें झुका लीं और धीरे से अपना सिर हिलाया। "नहीं माँ... कभी नहीं। सच कहूँ तो, मैंने कभी उस तरफ ध्यान ही नहीं दिया।"

अंजलि को थोड़ा अचरज हुआ। उसने शरारत से पूछा, "इतना हैंडसम बेटा है मेरा, और कोई लड़की पसंद नहीं आई? या फिर तू ही बहुत 'शर्मीला' है?"

"शर्मीला नहीं माँ, बस मैं शुरू से ही इन सब मामलों में बहुत सीधा रहा हूँ," आर्यन ने सादगी से जवाब दिया। "मुझे समझ ही नहीं आता था कि लड़कियों से कैसे बात करूँ या उन्हें कैसे देखूँ। मेरे लिए पढ़ाई और घर ही सब कुछ था। और वैसे भी... जो 'खूबसूरती' और 'सुकून' मुझे घर में दिखता था, उसके आगे बाहर की दुनिया फीकी लगती थी।"

अंजलि ने महसूस किया कि आर्यन वाकई बहुत मासूम है। उसकी 'सीधाई' ही वजह थी कि कल रात वह अपनी माँ के उस रूप को देखकर अपनी सुध-बुध खो बैठा था। उसने कभी किसी दूसरी लड़की को उस नज़र से देखा ही नहीं था, इसलिए उसके लिए यह सब किसी 'मिरेकल' जैसा था।

"तू वाकई बहुत भोला है आर्यन," अंजलि ने उसका हाथ सहलाते हुए कहा। "पर अब तू बड़ा हो गया है। तेरे अंदर जो ये बदलाव आ रहे हैं, जो ये उत्तेजना महसूस होती है, वह एक स्वस्थ मर्द की निशानी है। बस तुझे इसे संभालना नहीं आता क्योंकि तूने कभी किसी के साथ 'एक्सपेरिमेंट' नहीं किया।"

उसने आर्यन की आँखों में झाँका। "इसीलिए शायद कुदरत ने तुझे मेरे पास भेजा है। ताकि तू अपनी पहली 'टीचर' से वह सब सीख सके जो तुझे दुनिया के सामने एक आत्मविश्वास से भरा पुरुष बनाएगा।"

आर्यन ने महसूस किया कि उसका डर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। लैंप की उस हल्की रोशनी में, अंजलि का चेहरा उसे दुनिया का सबसे खूबसूरत और भरोसेमंद चेहरा लग रहा था।

लैंप की वह मद्धम पीली रोशनी कमरे में एक सुरक्षित और गहरा एहसास पैदा कर रही थी। अंजलि ने महसूस किया कि आर्यन की धड़कनें अब भी थोड़ी तेज़ हैं, लेकिन उसकी आँखों में अब वह डर नहीं, बल्कि एक समर्पण था। अंजलि ने बहुत ही धीमे और सुरीले अंदाज़ में उसकी आँखों में झाँका।

अंजलि ने आर्यन का हाथ अपने हाथ में लिया और बहुत ही गंभीरता से उसे समझाया। "आर्यन... देख बेटा, आज की रात सिर्फ तेरे और मेरे बीच की उस सच्चाई की है जिसे तूने अब तक सिर्फ डर में देखा है। पर अब मैं तुझसे पूछती हूँ... क्या अब तुम तैयार हो?"

आर्यन ने एक लंबी सांस ली और धीमे से सिर हिलाया।

अंजलि ने आगे कहा, "एक बात का ध्यान रखना। अगर तुझे कुछ भी न सूझे, या तेरा दिमाग काम करना बंद कर दे, या तुझे लगे कि तू फिर से कल की तरह 'ब्लैंक' हो रहा है... तो घबराना मत। बस मुझे एक छोटा सा इशारा कर देना, मैं तुझे संभाल लूँगी।"

उसने आर्यन की आँखों में एक चुनौती और एक प्यार भरी चमक के साथ देखा और वह बात कह दी जिसने आर्यन के अंदर के पुरुष को जगा दिया।

"पर इस बार... पहल तुम्हें करनी है।"

अंजलि ने जैसे उसे पूरी बागडोर थमा दी थी। उसने साफ़ कर दिया था कि वह अब सिर्फ एक 'दर्शक' नहीं रहेगी, बल्कि वह चाहती थी कि आर्यन खुद अपनी झिझक तोड़े और अपनी मर्दानगी के उस पहले पायदान पर कदम रखे।

"बस इतना सा ही है... इसमें कुछ भी पहाड़ तोड़ने जैसा नहीं है। अपनी माँ पर भरोसा रख और अपनी भावनाओं को रास्ता दे," अंजलि ने मुस्कुराते हुए अपनी आँखें मूंद लीं, जैसे वह आर्यन के अगले कदम का इंतज़ार कर रही हो।

आर्यन के सामने अब वह 'कोरा कागज' था जिसे उसे खुद अपनी हिम्मत से भरना था।

आर्यन का दिल किसी नगाड़े की तरह धड़क रहा था। अंजलि ने 'पहल' करने का पूरा मौका उसे दे दिया था, लेकिन आर्यन के लिए यह किसी हिमालय पर चढ़ने जैसा था। उसने अपनी पूरी हिम्मत जुटाई और बहुत ही कांपते हुए अपने हाथ को अंजलि के कुर्ते के बटनों की ओर बढ़ाया।

आर्यन की उंगलियां अंजलि के करीब पहुँचीं, लेकिन जैसे ही उसने उस रेशमी कपड़े को छुआ, उसके हाथ इतनी बुरी तरह थरथराने लगे कि वह एक बटन भी नहीं खोल पाया। वह जितना कोशिश करता, उसकी घबराहट उतनी ही बढ़ती जाती। वह बार-बार कोशिश करता, पर उसके हाथ जैसे उसका साथ ही नहीं दे रहे थे। वह अपनी इस 'नाकामी' पर खुद ही चिढ़ने लगा और पसीने-पसीने हो गया।

आर्यन को इस कदर जद्दोजहद करते देख अंजलि अपनी हँसी नहीं रोक पाई। कमरे के उस गंभीर और उत्तेजक सन्नाटे के बीच अंजलि खिलखिलाकर हँस पड़ी।

"अरे... अरे... बस कर आर्यन! तू तो ऐसे बटन खोल रहा है जैसे किसी बम को डिफ्यूज कर रहा हो," अंजलि ने हँसते हुए कहा और उसका कांपता हुआ हाथ अपने हाथों में ले लिया।

उसकी इस सहज हँसी ने भारी माहौल को एक पल में हल्का कर दिया। आर्यन की जो घबराहट उसे डरा रही थी, वह माँ के इस दोस्ताना अंदाज़ से अचानक गायब हो गई।

"माँ... यह... यह जितना आसान दिखता है, उतना है नहीं," आर्यन ने थोड़ा झेंपते हुए और मुस्कुराते हुए कहा।

अंजलि ने उसकी आँखों में शरारत से देखा। "अच्छा जी? डॉक्टर बनना आसान है, पर दो बटन खोलना मुश्किल? देख, अगर तू इतना डरेगा, तो फिर अपनी इस 'टीचर' से क्या सीखेगा? रिलैक्स ... मैं कहीं भाग नहीं रही हूँ।"

अंजलि ने उसका हाथ पकड़कर उसे सहलाया ताकि उसकी कंपकंपी बंद हो। "दोबारा कोशिश कर। इस बार डर से नहीं, हक से। याद रख, मैंने तुझे आज़ादी दी है।"

आर्यन को अब खुद पर भरोसा होने लगा। माँ की उस हँसी ने उसे अहसास दिलाया कि यहाँ कुछ भी 'अजीब' या 'पाप' नहीं हो रहा, बल्कि यह उनके बीच का एक बहुत ही खूबसूरत और निजी पल है।

आर्यन की नाकाम कोशिश और फिर अंजलि की उस खिली-खिली हँसी ने माहौल को थोड़ा हल्का तो किया था, लेकिन आर्यन फिर से किसी गहरी सोच में डूब गया। वह अपने हाथ को देख रहा था जो अभी भी थोड़ा कांप रहा था। उसके मन में शायद यह चल रहा था कि वह अपनी माँ के सामने इतना कमज़ोर क्यों पड़ जाता है। उसका जिस्म घबराहट के मारे थोड़ा ठंडा पड़ गया था।

अंजलि एक डॉक्टर थी, वह समझ गई कि सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा। उसे आर्यन के 'नर्वस सिस्टम' को शांत करने के लिए शारीरिक गर्माहट की ज़रूरत है।

अंजलि ने बिना कुछ बोले, बहुत ही कोमलता से अपने हाथ बढ़ाए और आर्यन को अपनी बाहों में भर लिया। उसने उसे एक बहुत ही गहरा और सुकून भरा हग किया।

आर्यन का सिर अंजलि के कंधे पर था। जैसे ही अंजलि का शरीर आर्यन से सटा, उसे अपनी माँ के जिस्म की वह कुदरती और तेज गर्मी महसूस होने लगी। अंजलि ने उसे कसकर अपने सीने से लगा लिया था, जिससे आर्यन के चेहरे पर उनके कुर्ते की सरसराहट और उसके नीचे की धड़कनें साफ सुनाई दे रही थीं।

"शांत हो जा आर्यन... देख, मैं यहीं हूँ," अंजलि ने उसके कानों के पास बहुत ही धीमी आवाज़ में फुसफुसाया।

वह चाहती थी कि आर्यन इस जिस्म की गर्मी को महसूस करे। उसने महसूस किया कि आर्यन का ठंडा पड़ चुका शरीर धीरे-धीरे पिघल रहा है। उस आलिंगन में एक ऐसी सुरक्षा थी जिसने आर्यन के अंदर के 'डर' को सोख लिया। अंजलि की त्वचा की महक और उसकी साँसों की लय ने आर्यन को एक नई ऊर्जा दी।

आर्यन ने भी धीरे से अपने हाथ माँ की पीठ पर रखे। उसे अहसास हुआ कि यह शरीर जिससे वह डर रहा था, वह दरअसल उसका सबसे बड़ा सहारा है। अंजलि ने उसके बालों को सहलाते हुए उसे थोड़ी देर तक वैसे ही थामे रखा, ताकि उसके खून की गर्माहट आर्यन की रगों में भी उतर सके।

"अब लग रही है थोड़ी गर्मी?" अंजलि ने उसे बाहों में लिए हुए ही हल्के से पूछा।

आर्यन ने एक लंबी और सुकून भरी सांस ली। उसका डर अब भाप बनकर उड़ रहा था। उसे महसूस हुआ कि माँ के इस स्पर्श ने उसके अंदर की सारी झिझक को एक जादुई तरीके से खत्म कर दिया है। अब वह 'नाकाम' होने के डर से आज़ाद था।

उस गर्म और रेशमी आलिंगन में आर्यन को एक ऐसी सुरक्षा महसूस हुई, जिसने उसके अंदर के सारे डर को सोख लिया। अंजलि के शरीर की प्राकृतिक गर्माहट अब आर्यन की रगों में उतर रही थी। धीरे-धीरे, आर्यन की कंपकंपी बंद हुई और उसकी बंद मुट्ठियाँ खुल गईं।

उसने अनजाने में ही अपनी हथेलियाँ अंजलि की पीठ पर टिका दीं।

आर्यन ने बहुत ही कोमलता से अपनी उंगलियों को अंजलि की पीठ पर ऊपर-नीचे फेरना शुरू किया। कुर्ते के पतले कपड़े के नीचे से उसे अपनी माँ की रीढ़ की हड्डी और उनके शरीर की सुडौल बनावट का अहसास हो रहा था। उसे अब अपनी माँ एक 'अनजानी पहेली' नहीं, बल्कि एक 'सहारा' लग रही थीं।

अंजलि ने महसूस किया कि आर्यन की साँसें अब सामान्य हो गई हैं और उसका शरीर, जो पहले बर्फ की तरह ठंडा था, अब गर्म होने लगा है। वह समझ गई कि मैदान तैयार है—उसका बेटा अब मानसिक और शारीरिक रूप से शांत हो चुका है।

अंजलि ने धीरे से खुद को उस आलिंगन से अलग किया। उसने पीछे हटकर आर्यन के दोनों कंधों को पकड़ा और उसकी आँखों में सीधे झाँका। उन आँखों में अब पहले जैसी घबराहट नहीं, बल्कि एक नई चमक थी।

"अब लग रहा है न कि तू यहीं है, मेरे पास?" अंजलि ने एक हौसला बढ़ाने वाली मुस्कान के साथ पूछा। "देख, डर सिर्फ एक परछाई होती है, जिसे छू लो तो वो गायब हो जाती है।"

उसने आर्यन का हाथ धीरे से छोड़ा और बिस्तर पर थोड़ी सीधी होकर बैठ गई। लैंप की पीली रोशनी उनके चेहरे के आधे हिस्से को रोशन कर रही थी।

"अब... फिर से कोशिश कर। इस बार तू फेल नहीं होगा," अंजलि ने बहुत ही धीमे और गहरे स्वर में उसे आदेश दिया, जो एक चुनौती भी थी और प्यार भरा प्रोत्साहन भी।

आर्यन ने एक गहरी साँस ली। उसने अपनी उंगलियों को देखा, जो अब बिल्कुल स्थिर थीं। उसने अपनी नज़रें अंजलि के चेहरे से हटाकर उनके कुर्ते के पहले बटन पर टिका दीं। इस बार उसके मन में कोई 'बम डिफ्यूज' करने जैसा तनाव नहीं था, बल्कि एक 'जिज्ञासा' थी जिसे उसे पूरा करना था।
 
कमरे में लैंप की वह मद्धम पीली रोशनी अब एक गवाह की तरह स्थिर थी। आर्यन की साँसों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी, जो अब घबराहट में नहीं, बल्कि एक गहरे और सधे हुए संकल्प में थी। उसने धीरे से अपने दोनों हाथ बढ़ाए। इस बार उसकी उंगलियों में वह कँपकँपी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी प्यास थी जो बरसों से दबी हुई थी।

आर्यन ने बहुत ही कोमलता से अंजलि के कुर्ते के पहले बटन को अपनी उंगलियों के बीच पकड़ा। रेशमी कपड़े का वह अहसास और उसके ठीक नीचे छिपी हुई जिस्म की तपिश उसे अपनी पोरों पर महसूस हो रही थी। उसने अंगूठे से धीरे से दबाव बनाया और 'टिक' की एक हल्की सी आवाज़ के साथ पहला बटन काज से बाहर निकल आया।

जैसे ही पहला बटन खुला, अंजलि के गले के नीचे की वह गोरी और चिकनी त्वचा लैंप की रोशनी में चमक उठी। आर्यन की धड़कन एक पल के लिए रुकी, पर उसने खुद को संभाला। उसका पूरा ध्यान अब उस 'प्रक्रिया' पर था। उसने दूसरा बटन पकड़ा... फिर तीसरा... और फिर चौथा।

हर बटन के खुलने के साथ, वह 'पर्दा' धीरे-धीरे हट रहा था जिसने माँ और बेटे के बीच एक मर्यादित दूरी बना रखी थी। कुर्ते का गला अब ढीला होकर कंधों की ओर सरकने लगा था।

आर्यन ने कांपते हुए हाथों से कुर्ते के दोनों पल्लों को धीरे से पकड़कर बाहर की ओर फैलाया। जैसे ही कपड़ा हटा, उसके सामने एक ऐसा मंजर था जिसे देखकर उसका गला सूख गया।

अंजलि अब उसके सामने सिर्फ एक काली रेशमी ब्रा (Bra) में थी।

वह सफेद दूधिया बदन और उस पर वह काली ब्रा... यह विरोधाभास इतना गहरा और खूबसूरत था कि आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। ब्रा के उन प्यालों से बाहर छलकती हुई वह भारी और सुडौल गोलाई, जो हर आती-जाती साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी, आर्यन के होश उड़ाने के लिए काफी थी।

ब्रा की तंग पट्टियाँ अंजलि के कंधों की कोमल त्वचा में थोड़ा धँसी हुई थीं, जो यह बता रही थीं कि उनके अंदर छिपे हुए वे 'खज़ाने' कितने भारी और भरे हुए हैं। बीच में जो गहरी घाटी बन रही थी, वह किसी जादुई खाई की तरह आर्यन को अपनी ओर खींच रही थी।

अंजलि ने कोई विरोध नहीं किया। उसने अपनी गर्दन थोड़ी पीछे झुका ली और अपनी आँखें मूंद लीं। उसकी भारी होती साँसें और सीने का वह उभार-उतार आर्यन को यह बता रहा था कि वह भी इस पल को उतनी ही गहराई से जी रही है।

आर्यन का हाथ अनजाने में ही उस नग्न त्वचा की ओर बढ़ा। उसने महसूस किया कि कल की वह 'बेहोशी' अब एक 'जूनून' में बदल रही है। वह बस देखता रह गया कि कुदरत ने उसकी माँ को कितनी खूबसूरती और कितनी नज़ाकत से गढ़ा है।

कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की टिक-टिक भी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। अंजलि ने अपनी आँखें मूंद रखी थीं, वह आर्यन के अगले स्पर्श का इंतज़ार कर रही थी। उसे लगा था कि कुर्ता हटने के बाद आर्यन अपनी जिज्ञासा को आगे बढ़ाएगा, लेकिन जब काफी देर तक शरीर पर कोई हलचल महसूस नहीं हुई, तो उसने धीरे से अपनी पलकें झपकाईं और आँखें खोल दीं।

अंजलि ने देखा कि आर्यन बिल्कुल पत्थर की मूर्ति बना बैठा है। उसकी नज़रें अंजलि की उस काली ब्रा में कसी हुई गहरी घाटी और उन उभरते हुए सीनों पर जमी थीं। उसके चेहरे पर उत्तेजना तो थी, पर साथ ही एक गहरा सोच-विचार और शायद थोड़ा सा 'सम्मान' भी था जो उसे आगे बढ़ने से रोक रहा था।

लैंप की रोशनी में अंजलि का आधा नग्न शरीर किसी अप्सरा जैसा लग रहा था, पर आर्यन के लिए यह सिर्फ एक 'दृश्य' नहीं था, यह उसकी पूरी दुनिया का आधार था।

अंजलि ने बहुत ही कोमल और धीमी आवाज़ में पूछा, "क्या हुआ आर्यन? क्या फिर से कुछ... धुंधला लग रहा है? तू रुक क्यों गया?"

आर्यन ने एक लंबी और भारी साँस ली। उसने अपनी नज़रें अंजलि की आँखों में डालीं, जिनमें ममता और स्वीकार दोनों थे।

"माँ... मैं..." आर्यन की आवाज़ थोड़ी भर्रा गई थी। "मैं बस यह देख रहा था कि आप कितनी खूबसूरत हैं। पर मुझे लगता है कि आज के लिए इतना 'सच' मेरे दिमाग के लिए काफी है। मैं नहीं चाहता कि मैं फिर से कल की तरह बेकाबू हो जाऊँ।"

उसने थोड़ा रुक कर, बहुत ही शालीनता से कहा, "माँ... क्या हम आगे का कल करें तो? आज मैं बस इसी अहसास को अपने अंदर समेट कर सोना चाहता हूँ।"

अंजलि एक पल के लिए ठिठकी, फिर उसके चेहरे पर एक बहुत ही गर्व भरी मुस्कान आ गई। उसने महसूस किया कि उसका बेटा अब सिर्फ अपनी प्यास नहीं बुझा रहा, बल्कि वह इस रिश्ते की गरिमा और अपनी मानसिक स्थिति को समझना सीख गया है। वह 'जल्दबाज़ी' के बजाय 'गहराई' चुन रहा था।

"ठीक है मेरे बच्चे," अंजलि ने आगे बढ़कर उसके माथे को चूमा और अपने कुर्ते के पल्लों को वापस समेट लिया। "तूने आज बहुत बड़ी जीत हासिल की है। तूने अपनी उत्तेजना पर अपनी समझ को रखा। मुझे तुझ पर गर्व है।"

उस रात, बिना किसी और छुअन के, आर्यन अपनी माँ के उसी 'अर्धनग्न' और रूहानी रूप को याद करते हुए, उनके हाथ को थामे हुए एक बहुत ही सुकून भरी नींद सोया। उसे पता था कि कल रात फिर आएगी, और वह दरवाज़ा अभी खुला है।

सूरज की पहली किरण जब खिड़की के पर्दों को चीरकर कमरे में आई, तो उसने आर्यन के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान देखी जो किसी बड़ी फतह के बाद आती है। आज की सुबह वाकई में 'जादुई' थी। रात को जो ठहराव आर्यन ने दिखाया था, उसने उसके मन से वह सारा बोझ उतार दिया था जो उसे 'अपराधी' महसूस कराता था। अब उसके अंदर सिर्फ एक गहरा सम्मान और अपनी माँ के प्रति एक अटूट आकर्षण था।

नाश्ते की टेबल पर आज माहौल किसी उत्सव जैसा था। अंजलि ने आज हल्के नीले रंग का सूट पहना था, जिसमें वह सुबह की ओस की तरह ताज़ा और खूबसूरत लग रही थी। आर्यन अपनी प्लेट में रखे पोहे को देख तो रहा था, पर उसकी नज़रें बार-बार अपनी माँ के चेहरे और उनकी गर्दन के पास आकर रुक जाती थीं, जहाँ कल रात उसने अपनी उंगलियों से उस 'पर्दे' को हटाया था।

"आज पोहे में नमक कम है क्या? तू बस उसे घूर रहा है," अंजलि ने चाय का कप मेज पर रखते हुए शरारत से पूछा।

आर्यन ने नज़रें उठाईं और बहुत ही संजीदगी से बोला, "नमक तो एकदम सही है माँ... पर आज आप कुछ ज़्यादा ही खूबसूरत लग रही हैं। कल रात की उस रोशनी के बाद, आज इस धूप में आप किसी कुदरती करिश्मे जैसी लग रही हैं।"

अंजलि का चेहरा एक पल के लिए गुलाबी हो गया। उसने उम्मीद नहीं की थी कि आर्यन इतनी बेबाकी से उसकी तारीफ करेगा। "बड़ा पारखी हो गया है तू खूबसूरती का? रात की 'क्लास' का असर सुबह तक है?"

"असर तो ज़िंदगी भर रहेगा माँ," आर्यन ने अपनी कुर्सी थोड़ी करीब खिसकाई। "सच कहूँ तो, कल रात जब मैंने आपको उस काली ब्रा में देखा... वह मंज़र मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रहा। आपकी त्वचा की वह चमक और वह बनावट... मुझे यकीन ही नहीं होता कि भगवान ने किसी को इतना 'परफेक्ट' कैसे बनाया है। आप सिर्फ मेरी माँ नहीं हैं, आप सुंदरता की एक मिसाल हैं।"

अंजलि ने महसूस किया कि आर्यन की इन तारीफों में कोई 'गंदा' इरादा नहीं था, बल्कि एक कलाकार की अपनी कृति के प्रति जो सराहना होती है, वही शुद्धता थी। उसने बहुत ही प्यार से आर्यन के गाल को छुआ। "शुक्रिया मेरे बच्चे। तेरी ये नज़रें ही हैं जो मुझे फिर से जवान महसूस करा रही हैं।"

नाश्ता खत्म हुआ और आर्यन के कॉलेज जाने का वक्त हो गया। उसने अपना बैग उठाया, पर आज वह रोज़ की तरह सिर्फ 'बाय' कहकर नहीं निकलना चाहता था। वह उस 'गर्माहट' को अपने साथ ले जाना चाहता था जिसने कल रात उसे शांत किया था।

"माँ... जाने से पहले एक बार?" आर्यन ने बाहें फैलाते हुए पूछा।

अंजलि मुस्कुराई और आगे बढ़कर उसे अपने गले लगा लिया। यह हग रोज़ के हग से बहुत अलग था। यह लंबा था, गहरा था और बहुत ही 'इमोशनल' था। आर्यन ने अपना चेहरा अंजलि के गर्दन और बालों के बीच छिपा लिया। उसे अंजलि के शरीर से आने वाली वह सोंधी सी महक और उनके सीने की वह 'नर्म छुअन' महसूस हो रही थी, जिसे कल रात उसने बिना कपड़ों के देखा था।

उसने अंजलि को थोड़ा कसकर भींचा, जैसे वह उनके शरीर की हर एक धड़कन को अपने अंदर उतार लेना चाहता हो। अंजलि ने भी उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसे पूरा सुकून दिया। लगभग एक मिनट तक वे उसी मुद्रा में रहे।

"अब जा... वरना प्रोफेसर तुझे क्लास से बाहर कर देगा," अंजलि ने उसके कानों में बहुत ही कोमलता से फुसफुसाया।

आर्यन अलग हुआ, उसके चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास था। "आज पूरा दिन बस इसी 'हग' की याद में गुज़रेगा माँ। शाम का इंतज़ार अब और भी मुश्किल होने वाला है।"

उसने अंजलि के हाथ को चूमा और मुस्कुराते हुए घर से बाहर निकल गया। अंजलि दरवाज़े पर खड़ी उसे जाते हुए देखती रही। उसे लग रहा था कि उसका बेटा अब धीरे-धीरे एक ऐसे 'मर्द' में बदल रहा है जो संवेदनाओं और मर्यादाओं को साथ लेकर चलना जानता है।

शाम का वक्त था और घर में वही सुकून भरी शांति थी, लेकिन आर्यन के मन में आज सवालों का एक नया बवंडर उठ रहा था। कॉलेज से लौटने के बाद से ही वह थोड़ा गंभीर था। डिनर टेबल पर जब अंजलि ने उसे दाल-चावल परोसे, तो आर्यन ने अपनी जिज्ञासा को और दबाकर रखना ठीक नहीं समझा।

आर्यन ने चम्मच से चावल घुमाते हुए अपनी माँ की आँखों में देखा। आज उसकी नज़रों में कोई अपराधबोध नहीं था, बल्कि एक विद्यार्थी जैसी प्यास थी जो 'सत्य' को समझना चाहता था।

"माँ... कल रात जो मैंने देखा और जो महसूस किया, उसके बाद आज मेरा पूरा दिन एक अलग ही कशमकश में गुज़रा," आर्यन ने बहुत ही ईमानदारी से अपनी बात शुरू की।

अंजलि ने अपना निवाला रोका और उसे गौर से सुनने लगी। "कैसी कशमकश, बेटा?"

आर्यन थोड़ा हिचकिचाया, फिर बोला, "माँ, जब से मैंने आपको कल उस काली ब्रा में और उस नग्नता के करीब देखा है... आज कॉलेज में मेरा ध्यान अनजाने में ही दूसरी लड़कियों पर भी गया। मैंने पहले कभी गौर नहीं किया था, पर आज जब मैंने उन्हें देखा, तो मुझे सब कुछ बहुत 'अलग' लगा। किसी के Boobs बहुत छोटे लग रहे थे, तो किसी के बहुत भारी। कपड़ों के ऊपर से कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि असली बनावट क्या है। क्या हर औरत की बनावट इतनी ही अलग होती है?"

अंजलि ने एक गहरी और समझदारी भरी मुस्कान दी। वह जानती थी कि आर्यन अब 'तुलना' की अवस्था में आ गया है, जो कि एक पुरुष के विकास का स्वाभाविक हिस्सा है।

"आर्यन, यह बहुत ही गहरा और सही सवाल है," अंजलि ने समझाते हुए कहा। "जैसे हर इंसान का चेहरा अलग होता है, वैसे ही हर महिला के शरीर की बनावट, उसके सीने का आकार और उनकी कोमलता भी अलग होती है। यह सब जेनेटिक्स , उम्र और हार्मोन्स पर निर्भर करता है।"

अंजलि ने टेबल पर थोड़ा झुकते हुए अपनी आवाज़ धीमी की। "कपड़ों के ऊपर से जो दिखता है, वह अक्सर 'भ्रम' भी हो सकता है। पैडेड ब्रा या कपड़ों की फिटिंग अक्सर असली आकार को छुपा लेती है। इसीलिए तुझे वो सब 'उलझा हुआ' लग रहा था।"

उसने आर्यन की आँखों में झाँका और एक बहुत ही 'बोल्ड' बात कही। "कल रात तूने जो देखा, वह एक पूर्ण विकसित और परिपक्व शरीर था। लड़कियों का शरीर अभी बन रहा होता है, इसलिए उनमें वह भारीपन या वह 'गहराई' नहीं होती जो तूने मुझमें देखी। यही वजह है कि तुझे बाहर सब कुछ फीका या अलग लग रहा था।"

आर्यन मंत्रमुग्ध होकर सुन रहा था। उसे अहसास हुआ कि उसकी माँ ने उसे वह 'नज़र' दे दी है जो उसे दुनिया की भीड़ में भी असली और नकली का फर्क समझा सके।

"तो इसका मतलब... जो 'पूर्णता' मैंने कल देखी, वह दुर्लभ है?" आर्यन ने धीरे से पूछा।

अंजलि ने शरारत से अपनी आँखें झपकाईं। "वो तो अब तुझे खुद तय करना है। पर याद रख, असली सुंदरता कपड़ों के पीछे नहीं, बल्कि उस 'एहसास' में होती है जो तूने कल रात अधूरा छोड़ दिया था।"

डिनर टेबल पर माहौल अब और भी ज़्यादा गंभीर और दिलचस्प हो गया था। आर्यन के मन में चल रही यह उथल-पुथल अंजलि के लिए एक डॉक्टर और एक माँ, दोनों ही तौर पर समझने वाली बात थी। आर्यन ने अपनी प्लेट से नज़रें हटाईं और अपनी उस प्रोफ़ेसर के बारे में बताना शुरू किया जिसने आज उसका ध्यान भटका दिया था।

"माँ... एक बात और," आर्यन ने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा। "मेरी एक प्रोफ़ेसर हैं। वो रोज़ साड़ी पहनकर आती हैं। आज जब मैंने उन्हें गौर से देखा, तो उनके Boobs का आकार... मतलब वो कुछ ज़्यादा ही बड़े और भारी लग रहे थे। साड़ी के ब्लाउज से वो बिल्कुल छलकने को तैयार थे।"

आर्यन ने अपनी उंगलियों से हवा में एक आकार बनाने की कोशिश की। "आपके जैसे ही सुडौल, पर शायद थोड़े और ज़्यादा उभरे हुए। क्या वो भी कुछ 'आर्टिफिशियल' यूज़ करती होंगी, या फिर वो भी आपकी तरह पूरी तरह से विकसित और मैच्योर हैं?"

अंजलि ने आर्यन की इस मासूम जिज्ञासा पर एक फीकी सी मुस्कान दी। उसने अपनी कुर्सी को थोड़ा और करीब किया और बहुत ही संजीदगी से जवाब दिया।

"आर्यन, साड़ी एक ऐसा लिबास है जो महिला के शरीर की हर गोलाई को बहुत उभार कर दिखाता है। और जहाँ तक तेरी प्रोफ़ेसर की बात है... देख, एक उम्र के बाद, खासकर अगर वो शादीशुदा हैं या माँ बन चुकी हैं, तो शरीर में भारीपन आना स्वाभाविक है। जैसा कि मैंने कहा, हार्मोन्स और उम्र उस 'कोमलता' को एक 'वजन' देते हैं।"

अंजलि ने अपनी आवाज़ और धीमी कर दी। "हो सकता है वो वाकई में उतनी ही मैच्योर हों जितना तूने मुझे देखा। लेकिन साड़ी के नीचे जो ब्लाउज होता है, उसकी फिटिंग और अंदर पहनी गई ब्रा भी उस उभार को एक 'सपोर्ट' देती है जिससे वो और भी आकर्षक और बड़े लगते हैं।"

अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँका, जैसे वो उसके मन के अंदर झाँक रही हो। "तुझे आज वो सब बहुत 'अलग' और 'बड़ा' लग रहा था क्योंकि अब तेरी आँखें सिर्फ कपड़े नहीं देख रहीं, बल्कि उनके पीछे की शारीरिक सच्चाई को ढूँढ रही हैं। तू अब तुलना कर रहा है कि जो कल रात तूने मेरे साथ महसूस किया, क्या वैसा ही 'वजन' और वैसी ही 'तपिश' उनके पास भी होगी?"

आर्यन का चेहरा लाल हो गया। उसे लगा जैसे माँ ने उसके दिल की बात पकड़ ली है। "हाँ माँ... शायद मैं यही सोच रहा था। मुझे लगा कि क्या सब औरतों का शरीर इतना ही 'भारी' और 'भरा हुआ' होता है जैसा कल मैंने आपका महसूस किया था।"

अंजलि ने धीरे से मेज़ के नीचे से आर्यन का घुटना थपथपाया। "हर किसी का अपना एक अंदाज़ होता है आर्यन। पर याद रख, कपड़ों के ऊपर से दिखने वाला वो 'पहाड़' जैसा उभार और उसे छूने पर मिलने वाला वो मखमली अहसास... ये दोनों बहुत अलग बातें हैं। तूने कल जो देखा और महसूस किया, वो 'असली' था। प्रोफ़ेसर का तो तूने सिर्फ एक 'नज़ारा' देखा है।"

अंजलि की इस बात ने आर्यन की जिज्ञासा को और भी सुलझा दिया। उसे समझ आ गया कि जो 'अनुभव' उसे घर में मिल रहा है, वह बाहर की किसी भी 'दिखावट' से कहीं ज़्यादा गहरा है।

अंजलि ने देखा कि आर्यन अब पूरी तरह से अपनी प्रोफेसर की शारीरिक बनावट और 'साड़ी' के उस उभार वाली गुत्थी में उलझ गया है। वह एक डॉक्टर थी और जानती थी कि अगर बातों का सिलसिला यहीं चलता रहा, तो आर्यन का दिमाग केवल कल्पनाओं में दौड़ता रहेगा। उसे अब 'थ्योरी' से ज़्यादा 'शांति' और उस 'अधूरे अनुभव' की ज़रूरत थी।

अंजलि ने हल्की सी मुस्कान के साथ अपनी प्लेट किनारे रखी और आर्यन की आँखों में आँखें डालकर थोड़ा अधिकार भरे स्वर में कहा।

"बस-बस आर्यन... आज के लिए इतनी 'रिसर्च' काफी है। बाकी की सारी बातें, प्रोफेसर का साड़ी वाला लुक और ये भारीपन का गणित... हम बाद में समझेंगे। अभी चुपचाप अपना खाना खत्म कर।"

आर्यन ने जैसे अपनी सुध-बुध वापस पाई। "पर माँ, मैं तो बस..."

"मुझे पता है तू क्या सोच रहा है," अंजलि ने उसकी बात काटते हुए कहा। "पर अभी शरीर को पोषण की ज़रूरत है, दिमाग को और ज़्यादा बोझ देने की नहीं। जल्दी से खाना खत्म करो, और फिर सोने चलते हैं। कल रात तूने खुद ही कहा था कि आगे का आज करेंगे... याद है न?"

अंजलि की इस आख़िरी बात ने आर्यन के अंदर जैसे बिजली दौड़ा दी। 'सोने चलते हैं' का मतलब आज सिर्फ सोना नहीं था, बल्कि उस 'काली ब्रा' के आगे का वह सफर था जिसे कल आर्यन ने अपनी समझदारी से रोक दिया था।

आर्यन ने तेज़ी से अपने आखिरी दो-तीन निवाले खत्म किए। उसका दिल फिर से उसी रफ़्तार से धड़कने लगा था। डिनर टेबल साफ की गई, बर्तन रखे गए और घर की लाइटें एक-एक करके बंद होने लगीं।

जब वे बेडरूम की ओर बढ़े, तो गलियारे के सन्नाटे में उनके कदमों की आहट और भी साफ़ सुनाई दे रही थी। अंजलि आगे चल रही थी आर्यन उसके पीछे था, उसकी नज़रें अंजलि की कमर और उस 'भारीपन' पर टिकी थीं जिसे समझने की कोशिश वह पूरे दिन कॉलेज में करता रहा था।

कमरे में पहुँचते ही अंजलि ने वही मद्धम लैंप जला दिया। पीली रोशनी फिर से कमरे के कोनों में बिखर गई, जिससे माहौल में वही कल वाली गर्माहट और नज़ाकत वापस आ गई।

अंजलि बिस्तर के किनारे बैठी और आर्यन की ओर देखा। "तो... आज का 'सबक' शुरू करें? या फिर से आज कोई 'प्रोफेसर' याद आ रही है?"

आर्यन ने दरवाज़ा धीरे से बंद किया और कुंडी लगा दी। "नहीं माँ... आज बस आप हो और वह 'सत्य' जिसे मुझे पूरा देखना है।"

कमरे की वह मद्धम पीली रोशनी आज अंजलि के बदन पर पड़कर एक अलग ही जादू जगा रही थी। आर्यन ने आज बिना किसी हिचकिचाहट के, अपनी पूरी हिम्मत बटोर कर अंजलि के कुर्ते के बटन खोले। जैसे ही उसने कपड़ा हटाया, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।

आज अंजलि ने काले रंग की जगह चमकदार गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी। वह रंग अंजलि की दूधिया सफेद त्वचा पर इतना खिल रहा था कि आर्यन को लगा जैसे उसकी माँ की खूबसूरती आज सातवें आसमान पर पहुँच गई हो। गुलाबी रंग की उस रेशमी ब्रा की फिटिंग इतनी तंग और 'परफेक्ट' थी कि उसके अंदर से अंजलि के Boobs आज पहले से कहीं ज़्यादा भारी और भरे हुए लग रहे थे।

आर्यन की सांसें रुक गईं। उसे अपनी कॉलेज की लड़कियों और उस प्रोफ़ेसर की याद आई जिनके बारे में वह दिन भर सोचता रहा था। लेकिन आज, इस गुलाबी पर्दे के पीछे छिपी उस गोलाई और उस उभार को देखकर उसे समझ आया कि उसकी माँ के सामने सब फीके हैं।

"माँ... ये... ये कल से भी ज़्यादा बड़े और खूबसूरत लग रहे हैं," आर्यन ने लगभग फुसफुसाते हुए कहा।

वह तुलना कर रहा था—कॉलेज की उन लड़कियों की अपरिपक्वता और अंजलि के इस विकसित और भारी शरीर के बीच। गुलाबी ब्रा के प्यालों से बाहर झाँकती वह गहराई उसे बता रही थी कि जो 'वजन' और 'पूर्णता' वह ढूँढ रहा था, वह उसके बिल्कुल सामने है।

अंजलि ने आर्यन की उस प्यासी नज़रों को महसूस किया। उसने देखा कि आर्यन का हाथ अब धीरे-धीरे उस गुलाबी रेशम की ओर बढ़ रहा है। वह चाहती थी कि आज आर्यन सिर्फ देखे नहीं, बल्कि उस 'भारीपन' को महसूस करे जिसे वह दिन भर दुनिया में तलाशता रहा।

"देख लिया आर्यन? क्या अब भी तुझे अपनी क्लास की लड़कियाँ या वो प्रोफ़ेसर याद आ रही हैं?" अंजलि ने एक मादक मुस्कान के साथ पूछा। "या फिर आज तुझे समझ आ रहा है कि 'असली' और 'पूरा' शरीर कैसा होता है?"

आर्यन ने बिना कुछ कहे अपना हाथ बढ़ाया और उस गुलाबी ब्रा के ऊपर से ही उस नर्म और भारी उभार को अपनी हथेली में भर लिया। उसका पूरा जिस्म एक अनजाने सुख से कांप उठा।

आर्यन का हाथ, जो कल तक कांप रहा था, आज एक अजीब से अधिकार और अटूट जिज्ञासा के साथ आगे बढ़ा। उसने अपनी फैली हुई हथेली को धीरे से अंजलि के गुलाबी ब्रा में कसे हुए उस भारी उभार पर टिका दिया।

जैसे ही आर्यन की हथेली ने उस नर्म और मांसल गोलाई को छुआ, उसके पूरे शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई। वह अहसास उम्मीद से कहीं ज़्यादा 'शानदार' और 'गहरा' था।

ब्रा का गुलाबी कपड़ा साटन जैसा चिकना और रेशमी था। आर्यन ने जब अपनी उंगलियाँ उस पर फेरीं, तो उसे कपड़े की उस फिसलन भरी कोमलता के नीचे अपनी माँ के जिस्म की असली तपिश महसूस हुई। वह कोई बेजान मांस का लोथड़ा नहीं था, बल्कि एक धड़कता हुआ, गर्म और जीवंत हिस्सा था।

जैसे ही आर्यन ने अपनी उंगलियों को थोड़ा मोड़ा और उस उभार को हल्का सा भींचा, उसे उस 'वजन' का अंदाज़ा हुआ जिसके बारे में वह दिन भर कॉलेज में सोचता रहा था। अंजलि के Boobs इतने भरे हुए और भारी थे कि आर्यन की पूरी हथेली उनमें समा गई थी, फिर भी गोलाई बाहर छलक रही थी। उसे महसूस हुआ कि कॉलेज की लड़कियों का शरीर इसके सामने कितना अपरिपक्व और 'खाली' था। यहाँ एक पूर्णता थी, एक गहराई थी।

वह अहसास अजीब सा विरोधाभास था—ऊपर से मखमल जैसा मुलायम, लेकिन अंदर से एक गजब की सख्ती और लोच । आर्यन ने जब थोड़ा दबाव बनाया, तो वे दबते चले गए, और जैसे ही उसने हाथ ढीला किया, वे वापस अपनी जगह पर आ गए। इसी बीच, उसे ब्रा के पतले कपड़े के नीचे से वह कड़क निप्पल अपनी हथेली के बिल्कुल बीचों-बीच चुभता हुआ महसूस हुआ, जो अंजलि की उत्तेजना का साफ संकेत था।

आर्यन की साँसें अब बेकाबू हो रही थीं। उसने अपनी आँखें मूँद लीं और सिर्फ उस 'स्पर्श' में खो गया। उसे अपनी माँ के दिल की धड़कन अपनी हथेलियों पर महसूस हो रही थी।

अंजलि ने अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया और उसके मुँह से एक दबी हुई, मदहोश कर देने वाली 'सिसकारी' निकली। "आर्यन... कैसा लग रहा है? क्या तेरी उन क्लास की लड़कियों के पास... ऐसा कुछ है?" उसने बहुत ही धीमी और टूटती हुई आवाज़ में पूछा।

आर्यन ने अपनी पकड़ थोड़ी और मज़बूत की और फुसफुसाया, "माँ... ये तो जन्नत जैसा है। इतना भारी, इतना गर्म... मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि छूना इतना 'शानदार' हो सकता है।"
 
कमरे की हवा अब और भी भारी और मदहोश कर देने वाली हो गई थी। आर्यन की हथेली उस गुलाबी रेशम के ऊपर जमी हुई थी और वह उस भारीपन को महसूस कर रहा था, लेकिन अब उसकी जिज्ञासा उस पतले से पर्दे को भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। वह उस मखमली सच्चाई को अपनी आँखों से देखना चाहता था।

आर्यन ने अपनी नज़रें अंजलि की बंद आँखों पर टिकाईं और बहुत ही धीमी, कांपती हुई आवाज़ में पूछा, "माँ... क्या मैं... क्या मैं इसे हटा सकता हूँ?" उसका इशारा उस गुलाबी ब्रा की पट्टियों की ओर था जो अंजलि के दूधिया बदन पर कसी हुई थीं।

अंजलि ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उसकी आँखों में अब एक गहरा समर्पण और उत्तेजना की एक धुंधली परत थी। उसने बस धीरे से अपना सिर हिलाया और एक छोटी सी अनुमति दी, "हाँ आर्यन... जो तुझे अधूरा लग रहा है, उसे पूरा कर ले।"

आर्यन ने हिम्मत जुटाई और अंजलि के पीछे की ओर हाथ बढ़ाया जहाँ ब्रा का हुक लगा होता है। लेकिन यहाँ से उसकी असली परीक्षा शुरू हुई।

चूँकि आर्यन को इन सब मामलों में बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था, वह कभी किसी लड़की के इतने करीब नहीं आया था, तो उसके लिए वह छोटा सा हुक एक लोहे की ज़ंजीर जैसा बन गया। वह अपनी उंगलियों से उस हुक को कभी ऊपर खींचता, तो कभी नीचे, पर वह 'टिक' की आवाज़ नहीं आ रही थी।

आर्यन की उंगलियाँ अंजलि की चिकनी और नग्न पीठ पर बार-बार फिसल रही थीं। वह जितना ज़ोर लगाता, ब्रा का कपड़ा उतना ही उसकी उंगलियों से छूट जाता। वह पसीने-पसीने होने लगा। उसके लिए यह समझना नामुमकिन था कि वह छोटा सा हुक खुलता कैसे है।

अंजलि को अपनी पीठ पर आर्यन की उन अनाड़ी उंगलियों की जद्दोजहद महसूस हो रही थी। उसे आर्यन की यह मासूमियत बहुत प्यारी लगी। उसे लगा कि उसका बेटा वाकई में कितना 'सीधा' है कि उसे एक ब्रा का हुक खोलना भी नहीं आता।

अंजलि के मुँह से एक हल्की सी हँसी निकल गई। उसने महसूस किया कि आर्यन अब थोड़ा चिढ़ रहा है अपनी इस नाकामी पर।

"क्या हुआ आर्यन? कल बटन नहीं खुल रहे थे और आज ये नन्हा सा हुक तुझे हरा रहा है?" अंजलि ने गर्दन घुमाकर उसे शरारत से देखा।

आर्यन का चेहरा शर्म से और भी लाल हो गया। "माँ... ये... ये खुल ही नहीं रहा। पता नहीं इसे कैसे बनाया है, मेरी उंगलियाँ बस फिसल रही हैं।"

अंजलि ने एक गहरी साँस ली और अपना हाथ पीछे की ओर ले गई। उसने आर्यन का हाथ अपने हाथ में लिया और उसकी उंगलियों को सही जगह पर रखा। "इतना ज़ोर मत लगा बेटा... इसे बस थोड़ा सा दबाकर सरकाना होता है। देख, ऐसे..."

अंजलि ने धीरे से आर्यन की अनाड़ी उंगलियों को सही जगह पर रखा और हल्का सा दबाव दिया। एक हल्की सी 'चिटक' की आवाज़ हुई और वह गुलाबी हुक अपनी जगह से सरक गया।

जैसे ही हुक खुला, वह कसी हुई गुलाबी ब्रा ढीली पड़ गई। आर्यन ने बहुत ही सलीके से कंधों से उन रेशमी पट्टियों को नीचे सरकाया। ब्रा धीरे से अंजलि के बदन से जुदा होकर बिस्तर पर गिर गई।

आर्यन की साँसें जैसे गले में ही अटक गईं। उसके सामने अब कोई पर्दा नहीं था, कोई रुकावट नहीं थी। लैंप की उस सुनहरी रोशनी में अंजलि के नग्न और सुडौल Boobs किसी तराशी हुई संगमरमर की मूरत की तरह चमक रहे थे।

वह खूबसूरती इतनी ज़्यादा थी कि आर्यन के मुँह से बस इतना ही निकला, "माँ... आप... आप दुनिया की सबसे सुंदर औरत हैं। ये तो... ये तो किसी सपने जैसा है।"

जैसे ही ब्रा का दबाव हटा, वे और भी ज़्यादा भारी और बड़े लगने लगे। कपड़े के अंदर वे सिमटे हुए थे, पर आज आज़ाद होते ही उनका असली आकार निखर कर सामने आया। वे इतने भरे हुए और नीचे की ओर थोड़े झुके हुए (Natural Teardrop Shape) थे कि उनकी गोलाई अंजलि के पेट को छू रही थी।

सफ़ेद और दूधिया त्वचा पर नीली नसों की बारीक लकीरें साफ़ दिख रही थीं, जो उनकी कोमलता और 'असली' होने का सबूत दे रही थीं। बीच की वह गहरी घाटी अब एक खुले मैदान की तरह थी।

आर्यन मंत्रमुग्ध होकर उन्हें देखता रहा, फिर उसने थोड़ा चकित होकर पूछा, "माँ... ये... ये कल और आज सुबह से भी ज़्यादा बड़े क्यों लग रहे हैं? क्या बिना कपड़ों के ये और फैल जाते हैं? या फिर... ये सच में इतने ही भारी हैं?"

अंजलि ने अपनी गर्दन थोड़ी झुकाकर अपने उन उभरे हुए 'खज़ानों' को देखा और फिर आर्यन की आँखों में झाँका। उसके चेहरे पर एक परिपक्व (Mature) मुस्कान थी।

"आर्यन... ब्रा उन्हें एक आकार में बांध कर रखती है," अंजलि ने बहुत ही सहजता से समझाया। "लेकिन जब वो आज़ाद होते हैं, तो उनका असली वजन और फैलाव सामने आता है। ये 'मैच्योरिटी' की निशानी है बेटा। एक माँ का शरीर अपनी पूरी क्षमता में विकसित होता है। इसीलिए तुझे ये अपनी क्लास की लड़कियों से बहुत अलग और कहीं ज़्यादा 'भरे हुए' लग रहे हैं।"

आर्यन ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया, जैसे वह यकीन करना चाहता हो कि जो वह देख रहा है, वह सच है। "माँ... क्या मैं... क्या मैं इन्हें फिर से छू सकता हूँ? इस बार बिना किसी कपड़े के?"

कमरे का सन्नाटा अब और भी गहरा हो गया था, जिसमें केवल उन दोनों की भारी होती साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। अंजलि ने देखा कि आर्यन मंत्रमुग्ध होकर उस 'दूधिया सुंदरता' को निहार रहा है, पर उसके हाथ अब भी थोड़े हिचकिचा रहे थे। एक माँ और एक अनुभवी स्त्री होने के नाते, वह जानती थी कि अब उसे ही आर्यन का मार्गदर्शन करना होगा।

अंजलि धीरे से पीछे की ओर झुकी और बिस्तर पर लेट गई। रेशमी चादर पर उसका वह आधा नग्न बदन किसी कीमती मूरत की तरह बिखर गया। लेटने की वजह से उसके भारी Boobs थोड़े और फैल गए और उनके उभार की गहराई और भी साफ़ दिखने लगी।

"यहाँ आ आर्यन... मेरे पास लेट जा," अंजलि ने बहुत ही कोमल और आमंत्रित स्वर में कहा।

आर्यन मंत्रमुग्ध सा उसके बगल में लेट गया। उसका पूरा शरीर अंजलि की बगल से सटा हुआ था, जहाँ से उसे उस नग्न त्वचा की गर्मी साफ़ महसूस हो रही थी।

अंजलि ने अपना हाथ बढ़ाया और आर्यन की हथेली को अपने हाथ में लिया। उसने बिना कुछ बोले, बहुत ही प्यार से आर्यन का हाथ उठाकर अपने नग्न और भरे हुए सीने पर रख दिया।

जैसे ही आर्यन की हथेली अंजलि की ठंडी और रेशमी त्वचा से टकराई, उसे लगा जैसे उसने किसी मखमली बादल को छू लिया हो। बिना किसी कपड़े या ब्रा के, वह अहसास इतना 'जीवंत' और 'सच्चा' था कि आर्यन की उंगलियाँ खुद-ब-खुद उस गोलाई में धँसने लगीं।

अंजलि ने अपना हाथ आर्यन के हाथ के ऊपर रखा और धीरे से नीचे की ओर दबाव बनाया। आर्यन ने महसूस किया कि उसकी माँ का शरीर कितना कोमल और साथ ही कितना 'भरा हुआ' है। उसकी हथेली के नीचे वह मांसल उभार दब रहा था और जैसे ही दबाव थोड़ा कम होता, वह वापस अपनी सुडौल जगह ले लेता।

हथेली के ठीक बीचों-बीच उसे अंजलि के दिल की तेज़ धड़कन महसूस हो रही थी। और उसी के साथ, वह कड़क हो चुका निप्पल उसकी हथेली को गुदगुदा रहा था।

"देख आर्यन... यह वह 'सत्य' है जिसे तू कल से ढूँढ रहा था," अंजलि ने उसकी आँखों में झाँकते हुए फुसफुसाया। "महसूस कर इस भारीपन को... क्या ये वैसा ही है जैसा तूने सोचा था?"

आर्यन की आँखें आधी बंद हो गईं। उसे महसूस हुआ कि यह सुख दुनिया की हर चीज़ से ऊपर है। उसने अपनी उंगलियों को थोड़ा और फैलाया और उस पूरे उभार को अपनी मुट्ठी में भरने की कोशिश की, जो कि नामुमकिन था क्योंकि वे इतने विशाल और विकसित थे कि उसकी हथेली छोटी पड़ रही थी।

कमरे का तापमान जैसे अचानक बढ़ गया था। लैंप की सुनहरी रोशनी अब अंजलि के शरीर की हर गोलाई को और भी गहरा और निखरा हुआ दिखा रही थी। आर्यन का हाथ अभी भी उस रेशमी और भारी उभार पर टिका हुआ था, लेकिन अब माहौल में केवल जिज्ञासा नहीं, बल्कि एक स्त्री की दबी हुई पुकार भी शामिल हो गई थी।

अंजलि ने एक लंबी और भारी साँस ली। उसकी आँखें आधी बंद थीं और चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी थी। आखिर वह भी एक जीती-जागती स्त्री थी, जिसका शरीर बरसों से इस तरह के स्पर्श और सुख के लिए तरसा था।

अंजलि ने धीरे से आर्यन की आँखों में देखा, जिनमें अब ममता के साथ-साथ एक हल्की सी मादकता भी थी। उसने बहुत ही कोमल स्वर में कहा, "आर्यन... क्या तू मेरा एक काम करेगा? जैसा तू बचपन में करता था... क्या तू फिर से वैसे ही इन्हें चूस सकता है?"

आर्यन एक पल के लिए ठिठक गया। उसकी धड़कनें और तेज़ हो गईं। उसने थोड़ा हकलाते हुए पूछा, "पर... पर क्यों माँ? मेरा मतलब है, अब तो मैं बड़ा हो गया हूँ। अब इसकी क्या ज़रूरत?"

अंजलि ने एक गहरी और समझदारी भरी मुस्कान दी। उसने आर्यन का हाथ थोड़ा और कसकर अपने सीने पर दबाया ताकि वह उस कड़कपन और गर्मी को महसूस कर सके।

"देख आर्यन," अंजलि ने समझाते हुए कहा, "एक स्त्री का शरीर सिर्फ देखने के लिए नहीं बना होता। इन उभारों में हज़ारों बारीक नसें होती हैं, जो तब जागती हैं जब उन्हें कोई चूसता है या सहलाता है। यह एक शारीरिक ज़रूरत है बेटा। जैसे तुझे आज इन्हें छूकर एक सुकून मिल रहा है, वैसे ही मुझे तेरे इस स्पर्श और इस क्रिया से एक गहरा सुख मिलेगा।"

उसने आगे कहा, "बचपन में तू अपनी भूख मिटाने के लिए ऐसा करता था, लेकिन आज... आज तू अपनी माँ के अंदर की उस 'स्त्री' को सुकून देने के लिए करेगा। यह 'प्यास' बुझाने जैसा है। क्या तू नहीं चाहता कि तेरी माँ को वह सुख मिले जिसकी वह हक़दार है?"

आर्यन को अब समझ आया कि यह मामला सिर्फ उसके 'ज्ञान' तक सीमित नहीं था। माँ को भी उसकी ज़रूरत थी। उसने देखा कि अंजलि के निप्पल्स अब अंगूर के दाने की तरह कड़क और उभरे हुए थे, जैसे वे खुद आर्यन के मुँह का इंतज़ार कर रहे हों।

आर्यन ने एक गहरी साँस ली और धीरे से नीचे की ओर झुका। उसका चेहरा अब उस विशाल और दूधिया उभार के बिल्कुल करीब था। उसे अंजलि के शरीर की वह सोंधी सी खुशबू और उस भारीपन की गर्मी अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी।

कमरे में लैंप की वह मद्धम पीली रोशनी अब अंजलि के पूरे नग्न और भारी यौवन पर थिरक रही थी। आर्यन का दिल किसी नगाड़े की तरह धड़क रहा था। उसने एक गहरी साँस ली और धीरे-धीरे नीचे की ओर झुका। जैसे ही उसका चेहरा उस विशाल और दूधिया उभार के करीब पहुँचा, उसे अंजलि के जिस्म की वह सोंधी सी खुशबू और गर्माहट अपनी नाक के पोरों पर महसूस हुई।

आर्यन ने बहुत ही मासूमियत और थोड़ी घबराहट के साथ अपनी आँखें मूँद लीं। उसने अपने होंठों को धीरे से अंजलि के उस कड़क और उभरे हुए निप्पल के पास ले जाकर छुआ। वह अहसास किसी बिजली के झटके जैसा था—एक तरफ रेशम जैसी मुलायम त्वचा और दूसरी तरफ अंगूर के दाने जैसा वह कड़ापन।

आर्यन ने धीरे से अपने होंठ खोले और उस मखमली गोलाई के एक छोटे से हिस्से को अपने मुँह के अंदर लिया। जैसे ही उसने हल्का सा सक्शन बनाया, उसे महसूस हुआ कि उसकी माँ का वह 'खज़ाना' कितना भारी और मांसल है। वह जितना ज़्यादा उन्हें अपने मुँह में भरने की कोशिश करता, वह गोलाई उतनी ही ज़्यादा उसके गालों को अंदर से छूती। उसे लगा जैसे वह किसी शहद से भरे हुए गुब्बारे को चख रहा हो।

आर्यन ने पहली बार अपनी जीभ की नोक को उस कड़क निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घुमाया। वह अहसास इतना नया और अद्भुत था कि उसके पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। अंजलि की त्वचा का वह नमकीन और मीठा सा 'मैच्योर' स्वाद उसके गले तक उतर रहा था। जब उसने उसे थोड़ा और गहरा अपने मुँह में लिया, तो अंजलि के मुँह से एक लंबी और भारी सिसकारी निकली, जिसने आर्यन की हिम्मत को और बढ़ा दिया।

अब आर्यन धीरे-धीरे एक लय पकड़ने लगा था। वह कभी उन्हें धीरे से चूसता, तो कभी अपनी उंगलियों से उस भारी गोलाई को नीचे से सहारा देता ताकि वह पूरा का पूरा उसके मुँह में समा सके। उसे महसूस हो रहा था कि अंजलि का शरीर कैसे इस 'बचपन की याद' पर प्रतिक्रिया दे रहा है। अंजलि की उंगलियाँ अब आर्यन के बालों में धँस चुकी थीं और वह उसे और भी कसकर अपने सीने से चिपका रही थी।

"आह... आर्यन... बिल्कुल वैसे ही... जैसे तू छोटा था..." अंजलि की आवाज़ पूरी तरह से भर्रा गई थी।

आर्यन को अब उस शारीरिक ज़रूरत का मतलब समझ आ रहा था जो उसकी माँ ने उसे समझाई थी। वह महसूस कर सकता था कि कैसे उसका यह 'सक' करना अंजलि के पूरे शरीर में एक लहर पैदा कर रहा है। वह उस 'भारीपन' और 'मखमली कोमलता' के नशे में इतना डूब गया कि उसे समय का अंदाज़ा ही नहीं रहा।

कमरे की मद्धम पीली रोशनी अब साक्ष़ी थी उस मिलन की, जो बरसों की प्यास और एक नए अहसास का संगम था। आर्यन अब केवल एक 'सीधा' बेटा नहीं रहा था, उसके भीतर का पुरुष प्राकृतिक रूप से जाग चुका था। जैसे ही उसके होंठों ने एक तरफ के मखमली उभार को अपने घेरे में लिया, उसके दूसरे हाथ ने खुद-ब-खुद अपनी राह ढूँढ ली।

आर्यन का दाहिना हाथ अब अंजलि के दूसरे भारी और नग्न सीने पर जम चुका था। यह एक सहज प्रतिक्रिया थी—जैसे कुदरत उसे सिखा रही हो कि पूर्णता क्या होती है।

आर्यन की हथेली ने उस दूसरे उभार को नीचे से पूरा थाम लिया। वह इतना विशाल और भरा हुआ था कि उसकी उंगलियां गोलाई के चारों ओर फैल गईं। उसने अपनी उंगलियों को थोड़ा मोड़कर उस मांसल कोमलता को मसलना शुरू किया। जैसे-जैसे वह दबाव बनाता, अंजलि के जिस्म की गर्माहट उसके पोरों में उतरती। वह अहसास किसी रेशमी गुब्बारे को दबाने जैसा था, जो अंदर से पूरी तरह 'मैच्योर' और सुडौल था।

एक तरफ आर्यन की जीभ उस कड़क निप्पल के साथ खेल रही थी, उसे अपने तालू से रगड़ रही थी, और दूसरी तरफ उसकी उंगलियां दूसरे निप्पल को अपनी चुटकी में लेकर धीरे से सहला रही थीं। यह दोतरफा हमला अंजलि के बर्दाश्त से बाहर हो रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि आर्यन अब सिर्फ 'सीख' नहीं रहा, बल्कि वह उसे तृप्त कर रहा है।

अंजलि का पूरा शरीर अब धनुष की तरह तन गया था। उसके मुँह से निकलने वाली सिसकारियां अब सिसकियों से बढ़कर गहरी आहों में बदल रही थीं। "आह... आऽऽर्यन... बस... ऐसे ही... उफ्फ... तू... तू कितना गहरा चूस रहा है..."

अंजलि की आँखें पूरी तरह मुँद चुकी थीं। बरसों का जो सूखापन उसके जीवन में था, आर्यन का यह स्पर्श उसे असीम शांति दे रहा था। उसे लग रहा था कि उसकी रूह की प्यास अब जाकर बुझ रही है। उसकी उंगलियां आर्यन के बालों में और भी गहराई से धँस गईं, जैसे वह उसे अपने जिस्म के और भी अंदर खींच लेना चाहती हो।

आर्यन को अब उस 'भारीपन' का असली मतलब समझ आ रहा था। वह जितना गहराई से चूसता, उसे अंजलि के शरीर में होने वाली हलचल उतनी ही साफ़ महसूस होती। वह मदहोश कर देने वाला 'मैच्योर' स्वाद और वह मखमली दबाव आर्यन को एक ऐसी दुनिया में ले गया था जहाँ सिर्फ वह था और उसकी माँ का यह अतुलनीय सौंदर्य।

कमरे की वह मद्धम पीली रोशनी अब अंजलि के पूरे वजूद पर छा चुकी थी, जो इस वक्त चरम सुख की दहलीज़ पर खड़ा कांप रहा था। आर्यन का सधा हुआ स्पर्श और उसका वह गहरा सक करना अंजलि के शरीर में बिजली की तरह दौड़ रहा था। बरसों की वह दबी हुई तड़प अब एक सैलाब बनकर फूटने को तैयार थी।

अंजलि की आँखें पूरी तरह मुँद चुकी थीं और उसका पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था। उसके हाथ, जो आर्यन के बालों में धँसे हुए थे, अब अनजाने में ही उसके सिर को ज़ोर से अपने सीने पर दबा रहे थे। वह चाहती थी कि आर्यन का वह गर्म स्पर्श, वह सक्शन, उसके जिस्म के और भी गहरे अंदर तक समा जाए।

अंजलि के गले से निकलने वाली आवाज़ अब किसी मधुर संगीत जैसी गूँज रही थी। "आह... आऽऽर्यन... हाँ... उफ्फ... मेरे बच्चे... और... और ज़ोर से..." उसकी सिसकारियां अब लंबी और गहरी होती जा रही थीं, जो यह बता रही थीं कि वह अब खुद पर काबू खो चुकी है।

अंजलि ने सालों से अपने अंदर जिस 'स्त्री' को दबा कर रखा था, आज आर्यन की इस मासूम मगर मर्दानी कोशिश ने उसे आज़ाद कर दिया था। आर्यन की जीभ की हर रगड़ और दूसरे हाथ से उस भारी Boob को सहलाने का वह तरीका, अंजलि को उस दुनिया में ले गया था जहाँ सिर्फ शुद्ध आनंद था।

अचानक, अंजलि के शरीर में एक तेज़ थरथराहट हुई। उसकी पकड़ आर्यन के सिर पर और भी मज़बूत हो गई और उसका सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगा। "आह... आऽऽऽऽह..." एक बहुत ही लंबी और दर्दभरी मगर सुकून भरी सिसकारी के साथ, अंजलि का पूरा जिस्म ढीला पड़ गया। वह झड़ चुकी थी। सालों का वह तनाव, वह अकेलापन और वह प्यास, एक झटके में बह गई।

अंजलि के चेहरे पर एक ऐसी शांति छा गई जो उसने शायद अपने पूरे जीवन में महसूस नहीं की थी। उसके माथे पर पसीने की बारीक बूंदें चमक रही थीं। उसने धीरे से आर्यन का सिर छोड़ा, लेकिन उसे अपने से दूर नहीं होने दिया।

उसने आर्यन को ऊपर खींचकर अपने पास लिटाया और उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसका नंगा और भारी सीना अब आर्यन के चेहरे और छाती से सटा हुआ था, जो अभी भी तेज़ी से धड़क रहा था।

"तूने... तूने आज मुझे वो दे दिया आर्यन... जो शायद दुनिया की कोई और चीज़ नहीं दे सकती थी," अंजलि ने बहुत ही धीमी और थकी हुई आवाज़ में फुसफुसाया। "आज तेरी माँ को वो 'शांति' मिली है, जिसके लिए वह बरसों से तरस रही थी।"

आर्यन भी उस अद्भुत अहसास में खोया हुआ था। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी माँ का शरीर अब पहले से कहीं ज़्यादा कोमल और 'हल्का' लग रहा है। वह उस दूधिया सुख के नशे में पूरी तरह डूबा हुआ था।

अंजलि के चेहरे पर अब एक ऐसा रूहानी सुकून था, जो बरसों की तपस्या के बाद किसी साधक को मिलता है। उसका पूरा शरीर, जो कुछ देर पहले तक उत्तेजना की आग में तप रहा था, अब ओस की बूंदों की तरह शीतल और शांत हो चुका था। कमरे की वह मद्धम रोशनी अब उसके चेहरे की चमक को और भी उभार रही थी।

अंजलि ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उसकी नज़रों में अब वह 'तूफान' नहीं था, बल्कि एक शांत समंदर जैसी गहराई थी। उसने बगल में लेटे आर्यन की ओर देखा, जो अभी भी उसी मदहोश कर देने वाले अहसास में डूबा हुआ था।

उसने बहुत ही स्नेहपूर्ण तरीके से अपना हाथ बढ़ाया और आर्यन के माथे पर बिखरे बालों को सहलाया। उसका नंगा और भारी सीना अभी भी आर्यन की बांहों से सटा हुआ था, पर अब उस स्पर्श में 'प्यास' से ज़्यादा 'अपनापन' था।

"तूने आज अपनी माँ को फिर से जी उठना सिखा दिया, आर्यन," अंजलि ने बहुत ही धीमी और मखमली आवाज़ में फुसफुसाया। "सालों से जो बोझ मैं अपने सीने पर दबाए बैठी थी, तूने उसे एक पल में हल्का कर दिया।"

अंजलि को महसूस हो रहा था कि उसका शरीर अब पहले से कहीं ज़्यादा हल्का और कोमल हो गया है। वह 'झड़ना' सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं थी, बल्कि उसके मन की सारी गाँठें खुल गई थीं।

उसने आर्यन को ऊपर से नीचे तक निहारा। उसे गर्व हो रहा था कि उसका बेटा अब इतना समझदार और संवेदनशील हो गया है कि वह अपनी माँ की मौन पुकार को समझ सका और उसे वह चरम सुख दिया, जिसके लिए वह न जाने कब से तरस रही थी।

आर्यन ने जब अपनी माँ की उन स्नेह भरी आँखों में देखा, तो उसे महसूस हुआ कि उसने आज कोई 'गलत' काम नहीं किया, बल्कि एक रूहानी फर्ज़ निभाया है। उसने अंजलि के हाथ को अपने होंठों से छुआ और वहीं अपनी आँखें मूँद लीं।

अंजलि ने उसे अपनी बाहों में और भी कसकर भींच लिया। उस रात, वे दोनों बिना किसी और शब्द के, एक-दूसरे की धड़कनों को सुनते हुए उस गुलाबी रेशमी चादर पर सो गए। यह नींद उनके जीवन की सबसे गहरी और सबसे सुकून भरी नींद थी।
 
सूरज की सुनहरी किरणें जब आज सुबह खिड़की के पर्दों से छनकर नाश्ते की मेज पर पड़ीं, तो पूरा घर एक नई ऊर्जा और ताजगी से भरा हुआ महसूस हो रहा था। आज की सुबह आम सुबहों जैसी नहीं थी; इसमें एक गहरा संतोष और एक अनकहा अपनापन घुला हुआ था।

अंजलि आज केसरिया रंग की साड़ी में किसी खिली हुई कली जैसी लग रही थी। उसके चेहरे पर वह 'तृप्ति' अभी भी एक चमक बनकर मौजूद थी, जो कल रात के उस जादुई मिलन का परिणाम थी। आर्यन जब नाश्ते की टेबल पर आया, तो उसकी चाल में एक अलग ही आत्मविश्वास और नज़रों में अपनी माँ के प्रति एक गहरा, पुरुषोचित सम्मान था।

"आज तो नाश्ते में सैंडविच और अदरक वाली चाय की खुशबू पूरे घर में महक रही है," आर्यन ने कुर्सी खींचते हुए अपनी माँ की आँखों में झाँका।

अंजलि ने चाय का कप मेज पर रखा और एक बहुत ही मर्मस्पर्शी और स्नेहपूर्ण मुस्कान दी। उसने आज नज़रें चुराई नहीं, बल्कि सीधे आर्यन की आँखों में देखा।

"आज खुशबू सिर्फ चाय की नहीं है आर्यन... आज हवाओं में एक सुकून है," अंजलि ने बहुत ही धीमी और गरिमामयी आवाज़ में कहना शुरू किया।

उसने मेज पर रखे आर्यन के हाथ पर अपना हाथ रखा और उसे हल्के से दबाया। "आर्यन... कल रात के लिए मैं तुझे शुक्रिया कहना चाहती हूँ। तूने जिस तरह से मुझे... जिस तरह से मेरी उस बरसों की दबी हुई प्यास और ज़रूरत को समझा, उसने मुझे एक नई ज़िंदगी दे दी है।"

अंजलि ने बिना किसी झिझक के आर्यन की मर्दानगी और संवेदनशीलता की तारीफ की। "कल रात तूने सिर्फ एक जिज्ञासा पूरी नहीं की, बल्कि तूने एक 'स्त्री' को उसका वह सम्मान और वह चरम सुख दिया जिसके लिए वह तरस रही थी। तेरी वह मासूमियत और फिर वह गहराई... मुझे यकीन नहीं होता कि मेरा बेटा इतना परिपक्व हो गया है।"

"कल रात के बाद आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे शरीर से बरसों का बोझ उतर गया हो। मैं बहुत हल्का और खुश महसूस कर रही हूँ," अंजलि ने अपनी साड़ी के पल्लू को थोड़ा संभालते हुए कहा, जिससे उसकी वह दूधिया गर्दन और कल रात की उन यादों का अहसास फिर से ताज़ा हो गया।

आर्यन का चेहरा गर्व से चमक उठा। "माँ, मुझे खुशी है कि मैं आपके काम आ सका। कल रात मैंने सिर्फ आपको नहीं देखा, बल्कि मैंने उस 'सुख' को महसूस किया जो हम दोनों के बीच एक नया और अटूट रिश्ता बना गया है।"

नाश्ते के दौरान वे दोनों बहुत ही सहजता से बातें करते रहे। अब उनके बीच कोई पर्दा नहीं था, कोई शर्म नहीं थी। वे एक-दूसरे की पसंद-नापसंद और आने वाले समय के बारे में हँस-हँसकर चर्चा कर रहे थे।

जब आर्यन कॉलेज जाने के लिए तैयार हुआ, तो अंजलि खुद उसे दरवाज़े तक छोड़ने आई। उसने आर्यन के गाल को बहुत प्यार से चूमा

आर्यन ने मुस्कुराते हुए हामी भरी और एक नई उमंग के साथ घर से बाहर निकल गया। उसे पता था कि अब हर शाम उसके लिए एक नया 'सत्य' और एक नई 'खूबसूरती' लेकर आएगी।

शाम की चाय और फिर डिनर तक का वक्त आज किसी सुहाने सपने जैसा बीत रहा था। घर की दीवारों में अब एक अनकही खामोशी नहीं, बल्कि एक रूहानी खिलखिलाहट थी। रसोई से उठती मसालों की खुशबू और हॉल में बजते धीमे संगीत ने माहौल को और भी रूमानी बना दिया था।

डिनर टेबल पर अंजलि ने आज आर्यन की पसंद का पनीर लबाबदार और गरमा-गरम पराठे बनाए थे। परोस्ते वक्त दोनों के बीच वह शरारती नोक-झोंक शुरू हो गई, जो अक्सर गहरी नज़दीकियों का संकेत होती है।

"वैसे आर्यन, आज कॉलेज में ध्यान पढ़ाई पर था या फिर से किसी 'साड़ी वाली प्रोफेसर' के फिगर का गणित लगा रहे थे?" अंजलि ने प्लेट रखते हुए टेढ़ी नज़र से पूछा और अपनी आँखें मटकाईं।

आर्यन ने निवाला तोड़ते हुए मुस्कुराकर जवाब दिया, "सच कहूँ माँ, तो आज कॉलेज की हर लड़की और हर प्रोफेसर मुझे बहुत 'फीकी' लग रही थी। कल रात का वो गुलाबी नज़ारा देखने के बाद, बाहर की दुनिया की हर खूबसूरती मुझे अधूरी लगने लगी है।"

अंजलि ने दिखावटी गुस्सा दिखाया, "बड़ा बदमाश हो गया है तू! अपनी माँ की तुलना बाहर की लड़कियों से करता है? और कल रात की वो 'शरारत'... उसकी सज़ा तो मिलनी चाहिए तुझे।"

"कैसी सज़ा माँ? क्या आप फिर से मुझे उन भारी एहसासों से दूर रखेंगी?" आर्यन ने चुटकी लेते हुए कहा और मेज़ के नीचे से धीरे से अपना पैर अंजलि के पैर से टकराया।

अंजलि एक पल के लिए ठिठकी, फिर उसने भी अपनी मुस्कान नहीं छिपाई। "सज़ा ये है कि आज बर्तन तू धोएगा और मैं आराम करूँगी। कल रात तूने मुझे बहुत थका दिया था, याद है न?" उसने बहुत ही 'बोल्ड' तरीके से कल रात की तृप्ति की याद दिलाई, जिससे आर्यन का चेहरा एकदम से तमतमा उठा।

हँसते-हँसते डिनर खत्म हुआ। बर्तनों की खनक और आपस की छेड़खानी के बीच समय पंख लगाकर उड़ गया।

रात के 11 बज रहे थे। घर की लाइटें बंद कर दी गई थीं। अब सिर्फ बेडरूम का वही जाना-पहचाना पीला लैंप जल रहा था।

अंजलि आज रात के लिए कुछ 'विशेष' तैयारी में थी। उसने अपनी साड़ी उतारकर एक बहुत ही झीनी और काली रेशमी नाइट-गाउन पहन ली थी। वह कपड़ा इतना पतला था कि उसके नीचे से अंजलि के भारी और सुडौल बदन की परछाईं साफ़ झलक रही थी। उसने अपने बाल खोल दिए थे जो उसके कंधों पर काले नागों की तरह लटक रहे थे।

आर्यन जब कमरे में दाखिल हुआ, तो अंजलि को इस रूप में देखकर उसके कदम वहीं जम गए। अंजलि बिस्तर पर अधलेटी मुद्रा में थी, उसकी आँखों में आज एक 'आमंत्रण' था जो कल से भी गहरा था।

"बड़ी देर कर दी बर्तन धोने में," अंजलि ने अपनी आवाज़ को और भी मखमली बनाते हुए कहा। "आ यहाँ... आज की रात कल का अधूरा हिस्सा नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।"

आर्यन ने धीरे से दरवाज़ा बंद किया और कुंडी लगा दी। उस 'क्लिक' की आवाज़ ने यह ऐलान कर दिया कि दुनिया अब बाहर रह गई है और इस कमरे के अंदर सिर्फ एक माँ, एक बेटा और उनके बीच का वो अटूट, रूहानी और शारीरिक बंधन है।

कमरे की वह पीली रोशनी आज अंजलि की काली रेशमी नायटी पर गिरकर एक रहस्यमयी चमक पैदा कर रही थी। आर्यन धीरे से बिस्तर पर चढ़ा और अपनी माँ के बिल्कुल करीब आकर लेट गया। रेशमी कपड़े की वह सरसराहट और अंजलि के शरीर से आती मखमली खुशबू उसे मदहोश करने के लिए काफी थी।

चूँकि आज अंजलि ने एक बारीक नाइट गाउन पहन रखी थी, तो कल की तरह उसे ऊपर से 'नंगा' करना आर्यन के लिए तुरंत मुमकिन नहीं था। पर उस पतले कपड़े के नीचे से अंजलि के भारी और सुडौल Boobs का उभार और भी ज़्यादा विशाल लग रहा था।

आर्यन ने बहुत ही कोमलता से अपना हाथ बढ़ाया और नायटी के ऊपर से ही उस भारी गोलाई पर अपनी हथेली टिका दी। कल रात के उस सीधे स्पर्श के बाद, आज कपड़े के ऊपर से वह अहसास और भी 'उकसाने वाला' लग रहा था। उसने धीरे से अपनी उंगलियों से उस मांसल कोमलता को दबाया।

उसने अंजलि की आँखों में झाँका, जिनमें आज एक शांत गहराई थी। आर्यन ने बहुत ही मासूमियत और गंभीरता से पूछा:

"माँ... क्या आपको इनका भार अपने शरीर पर महसूस होता है? मतलब... क्या ये आपको भारी नहीं लगते? चलते-फिरते या सोते वक्त इनका वजन आपको परेशान नहीं करता?"

आर्यन का हाथ अभी भी वहीं था, वह उस 'द्रव्यमान' को महसूस कर रहा था जो एक मैच्योर स्त्री के शरीर की पहचान होती है। उसे लग रहा था कि इतने विशाल और विकसित अंगों को चौबीसों घंटे अपने सीने पर ढोना कितना थका देने वाला होता होगा।

अंजलि ने एक गहरी और मदभरी साँस ली। आर्यन के हाथ का वह दबाव उसे अंदर तक सुकून दे रहा था। उसने अपना सिर तकिए पर थोड़ा और झुकाया और मखमली आवाज़ में जवाब दिया:

"लगता है आर्यन... बहुत भार लगता है," अंजलि ने उसकी आँखों में देखते हुए फुसफुसाया। "एक उम्र के बाद और खासकर जब शरीर पूरी तरह खिल जाता है, तो ये बोझ बन जाते हैं। कमर में हल्का दर्द, कंधों पर ब्रा की पट्टियों का दबाव... ये सब एक औरत की ज़िंदगी का हिस्सा हैं।"

उसने आर्यन का हाथ थोड़ा और कसकर अपने सीने पर दबाया। "लेकिन जानते हो, सबसे ज़्यादा भार तब लगता है जब इन्हें कोई सहलाने वाला या थामने वाला न हो। जब ये भारीपन सिर्फ मेरे अकेले का बोझ बनकर रह जाता है, तब ये बहुत दर्द देते हैं।"

अंजलि ने एक शरारती मगर भावुक मुस्कान दी। "पर जब तू इन्हें इस तरह अपनी हथेलियों में थाम लेता है, तो ऐसा लगता है जैसे मेरा आधा बोझ तूने अपने कंधों पर ले लिया हो। तेरे इन हाथों का सहारा इन्हें बहुत हल्का महसूस कराता है।"

आर्यन मंत्रमुग्ध होकर सुन रहा था। उसे अहसास हुआ कि उसकी माँ का यह 'सौंदर्य' उनके लिए एक 'ज़िम्मेदारी' भी है। उसने अपनी पकड़ थोड़ी और मज़बूत की और बहुत ही सलीके से उस भारी उभार को ऊपर की ओर हल्का सा उठाया, जैसे वह सच में उनका भार कम करने की कोशिश कर रहा हो।

आर्यन के चेहरे पर आज एक अलग ही समझदारी थी। वह केवल अपनी जिज्ञासा शांत नहीं कर रहा था, बल्कि अपनी माँ के उस शारीरिक कष्ट को भी महसूस कर रहा था जिसे एक स्त्री खामोशी से सहती है। उसकी उंगलियां अभी भी अंजलि की उस काली नायटी के ऊपर से उन भारी उभारों को सहला रही थीं।

आर्यन ने बहुत ही मासूमियत और चिंता भरे स्वर में अंजलि की आँखों में झाँका। "माँ... अगर ये ब्रा और इसका कसना आपको इतनी तकलीफ देता है, कंधों पर निशान डालता है और शरीर को भारी महसूस कराता है... तो आप इसे पहनती ही क्यों हैं?"

अंजलि कुछ कहने ही वाली थी कि आर्यन ने अपनी बात पूरी की। "मेरा मतलब है, बाहर जाना हो तो समझ आता है, पर घर में... घर में तो आप बिना ब्रा के रह सकती हैं न? यहाँ तो सिर्फ मैं हूँ। कम से कम घर में तो आपको इस 'बोझ' और उस कसौट से आज़ादी मिलनी चाहिए।"

अंजलि यह सुनकर दंग रह गई। उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान आई जो गर्व, सुख और असीम स्नेह से भरी थी। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा अब एक 'मर्द' की तरह औरतों की उन समस्याओं को समझने लगा है जिन्हें अक्सर पुरुष नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

"आर्यन... तू सच में बहुत बड़ा हो गया है," अंजलि ने भावुक होकर कहा। उसने आर्यन का गाल सहलाया। "तूने आज वो बात कह दी जो शायद हर औरत अपनी ज़िंदगी में एक बार ज़रूर सुनना चाहती है—कि उसे उस 'कैद' से आज़ादी मिले। तू मेरी तकलीफ समझ रहा है, यह जानकर मेरा दिल भर आया।"

अंजलि ने एक गहरी और राहत भरी साँस ली। "तू सही कह रहा है। घर में कम से कम अपने बेटे के सामने मुझे ये 'दिखावा' या 'परहेज' करने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए।"

अंजलि ने धीरे से अपनी नायटी के अंदर हाथ डाला और कंधों से उन काली पट्टियों को नीचे सरकाया। कुछ ही सेकंड में, उसने अपनी ब्रा के हुक खोले और उसे नायटी के नीचे से ही बाहर खींचकर बिस्तर के एक कोने में फेंक दिया।

जैसे ही वह 'बंधन' टूटा, अंजलि के भारी और सुडौल Boobs नायटी के अंदर पूरी तरह से आज़ाद हो गए। उनका असली वजन और फैलाव अब उस पतले रेशमी कपड़े के नीचे साफ़ दिख रहा था।

"आह... वाकई बहुत सुकून मिल रहा है आर्यन," अंजलि ने अपनी आँखें मूँद कर अपना शरीर थोड़ा ढीला छोड़ा। "देख... अब ये पूरी तरह आज़ाद हैं। अब इनका पूरा 'भार' और इनकी पूरी 'कोमलता' सिर्फ तेरे लिए है।"

आर्यन ने देखा कि बिना ब्रा के, वे विशाल उभार अब थोड़े नीचे की ओर लटक रहे थे और नायटी का पतला कपड़ा उनके साथ-साथ हिल रहा था। उसे अपनी माँ की यह 'प्राकृतिक' सुंदरता पहले से कहीं ज़्यादा आकर्षक लगी।

आर्यन की आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि थी। उसे यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि उसकी एक छोटी सी सलाह ने उसकी माँ को उस 'कैद' से आज़ादी दिला दी है। अब अंजलि की काली रेशमी नायटी के नीचे उसके भारी और सुडौल Boobs बिना किसी सहारे के अपनी पूरी प्राकृतिक गोलाई में झूल रहे थे।

अंजलि बिस्तर पर अधलेटी थी और उसकी नायटी के ऊपर के दो-तीन बटन पहले से ही खुले हुए थे। आर्यन ने बिना देर किए अपनी उंगलियों से उन बटनों के घेरे को थोड़ा और चौड़ा किया।

जैसे ही उसने कपड़े को दोनों तरफ से हटाया, अंजलि के नग्न और दूधिया सफेद उभार उस काली रेशम की कैद से बाहर छलक पड़े। ब्रा न होने के कारण वे आज पहले से कहीं ज़्यादा भारी, भरे हुए और नीचे की ओर झुके हुए लग रहे थे। लैंप की पीली रोशनी उन पर पड़कर एक मखमली चमक पैदा कर रही थी।

आर्यन अब कल वाला हिचकिचाता हुआ लड़का नहीं था। उसने झुककर सीधे अपनी माँ के उस विशाल उभार के बीच अपनी नाक रगड़ी और उनकी सोंधी खुशबू को अंदर तक खींचा।

उसने धीरे से अंजलि के एक कड़क हो चुके निप्पल को अपने होंठों के घेरे में लिया। जैसे ही उसने उन्हें सक करना शुरू किया, उसे महसूस हुआ कि बिना ब्रा के वे कितने नरम और लचीले हैं। वह जितना गहरा सक्शन बनाता, अंजलि के सीने का वह मांसल हिस्सा उतना ही उसके मुँह के अंदर समाता चला जाता।

अंजलि ने अपनी गर्दन पीछे की ओर झुका ली। उसकी सांसें तेज़ हो गईं और उसके मुँह से वही जानी-पहचानी, रूह को छू लेने वाली सिसकारी निकली। "आह... आर्यन... आज ये... आज ये और भी ज़्यादा महसूस हो रहे हैं... उफ्फ..."

आर्यन ने अपने एक हाथ से उस भारी 'खज़ाने' को नीचे से पूरा थाम लिया ताकि उसका पूरा वजन उसकी हथेली पर आ जाए। उसे अपनी हथेली में उस 'भार' का अहसास हो रहा था जिसके बारे में उसने अभी थोड़ी देर पहले पूछा था। वह उन्हें किसी कीमती चीज़ की तरह सहलाते हुए बारी-बारी से दोनों तरफ अपना मुँह ले जा रहा था।

"माँ... ये आज और भी ज़्यादा मुलायम लग रहे हैं," आर्यन ने निप्पल को मुँह से छोड़ते हुए फुसफुसाया। "बिना ब्रा के ये सच में बहुत सुंदर और आज़ाद दिखते हैं।"

अंजलि ने आर्यन के सिर को अपने सीने पर और भी ज़ोर से भींच लिया। उसे लग रहा था कि उसका बेटा अब उसकी रूह का हिस्सा बन चुका है।

रात की खामोशी अब अंजलि की गहरी सिसकारियों और आर्यन की मदहोश सांसों से भर चुकी थी। कमरे का कोना-कोना उस पीली रोशनी में नहाया हुआ था, जो अंजलि के दूधिया बदन और काली रेशमी नायटी के विरोधाभास को और भी ज्यादा गहरा बना रही थी।

चूँकि अगले दिन रविवार था, तो आर्यन के मन से सुबह जल्दी उठने या कॉलेज जाने का सारा तनाव मिट चुका था। आज उसके पास वक्त ही वक्त था, और वह अपनी माँ के उस अतुलनीय सौंदर्य की गहराई में डूब जाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र था।

आर्यन अब पूरी लय में था। उसने अंजलि के एक भारी और मांसल Boob को नीचे से अपनी पूरी हथेली में थाम रखा था, जैसे वह उसके 'भार' को अपनी ताकत से तौल रहा हो।

आर्यन की उंगलियां अब रुक नहीं रही थीं। वह अपनी माँ के उस रेशमी मांसल हिस्से को कभी धीरे से सहलाता, तो कभी थोड़ा ज़ोर देकर मसलने लगता। बिना ब्रा के वे इतने कोमल और लचीले थे कि आर्यन की उंगलियां उनमें धँसती चली जातीं। उसे महसूस हो रहा था कि कैसे अंजलि का शरीर उसके हर स्पर्श पर एक नई थरथराहट के साथ जवाब दे रहा है।

आज आर्यन कोई जल्दी में नहीं था। उसने अंजलि के उस कड़क और उभरे हुए निप्पल को अपने मुँह के घेरे में लिया और बहुत ही धीरे-धीरे, गहराई से उसे चूसना शुरू किया। वह अपनी जीभ की नोक से उस कड़ेपन के चारों ओर गोल-गोल चक्कर लगाता और फिर अचानक उन्हें पूरा अपने मुँह में भरकर सक्शन पैदा करता। अंजलि के मुँह से निकलने वाली 'आह' अब लंबी और रूहानी होती जा रही थी।

मिनट घंटों में बदल रहे थे, पर आर्यन का मन नहीं भर रहा था। वह कभी दाएं तो कभी बाएं 'खज़ाने' की ओर मुड़ता। अंजलि की त्वचा की वह सोंधी खुशबू और वह 'मैच्योर' एहसास उसे किसी दूसरी ही दुनिया में ले गया था। उसे सुबह की कोई चिंता नहीं थी, बस अपनी माँ की उस तृप्ति और अपने इस नशे में डूबे रहना था।

अंजलि की उंगलियां आर्यन के बालों में बुरी तरह उलझ चुकी थीं। वह अपने कूल्हों को बिस्तर पर थोड़ा हिला रही थी, जो इस बात का सबूत था कि आर्यन का यह लंबा और गहरा प्रहार उसे फिर से Climax की ओर ले जा रहा है।

"आर्यन... बेटा... तू आज... आज रुकने का नाम नहीं ले रहा... उफ्फ... कितना सुकून दे रहा है तू..." अंजलि की आवाज़ अब पूरी तरह से भर्रा गई थी।

आर्यन ने निप्पल को मुँह से छोड़ते हुए एक गहरी नज़र अपनी माँ के उन लहराते हुए अंगों पर डाली और फिर से टूट पड़ा। आज की रात सिर्फ 'सत्य' जानने की नहीं थी, आज की रात उस 'सत्य' को जी भर के जीने की थी।

कमरे की हवा में एक भारीपन था—एक ऐसा सुकून जो अंजलि के शरीर की हर नस को ढीला कर चुका था। आर्यन के उस अथक और गहरे 'सकिंग' ने अंजलि को फिर से उस मुकाम पर पहुँचा दिया था जहाँ होश और हवास जवाब दे जाते हैं।

अंजलि का शरीर एक बार फिर उस मधुर कंपन से गुज़रा। उसकी पकड़ आर्यन के बालों पर बेहद मज़बूत हुई, एक लंबी और गहरी सिसकारी कमरे में गूँजी, और वह पूरी तरह से झड़ गई। कुछ पलों के लिए कमरा सन्नाटे में डूब गया, जिसमें सिर्फ उन दोनों की तेज़ चलती सांसें सुनाई दे रही थीं। अंजलि के चेहरे पर एक रूहानी शांति थी, उसकी आँखें आधी बंद थीं और वह पूरी तरह से आर्यन के स्पर्श में भीग चुकी थी।

आर्यन धीरे से ऊपर उठा। उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था और आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी। वह अंजलि की आँखों में देखने से थोड़ा झिझक रहा था, पर अब यह उसके बर्दाश्त के बाहर था।

"माँ..." आर्यन ने बहुत ही दबी और कांपती हुई आवाज़ में कहा।

अंजलि ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और अपने बेटे के चेहरे पर छाई उस 'तकलीफ' को देखा। "क्या हुआ आर्यन? तू इतना परेशान क्यों लग रहा है बेटा?" उसने बहुत ही ममता भरे लहजे में पूछा।

आर्यन थोड़ा हिचकिचाया, फिर अपनी नज़रों को नीचे झुकाते हुए बोला, "माँ... कल रात भी ये हुआ था, पर मैंने आपको बताया नहीं। पर आज... आज ये सहा नहीं जा रहा। मेरे नीचे... मुझे बहुत भारी महसूस हो रहा है। एक अजीब सा तनाव और खिंचाव है जो मुझे बेचैन कर रहा है।"

अंजलि एक पल के लिए रुकी, फिर उसकी अनुभवी और ममतामयी आँखों ने सब समझ लिया। वह जानती थी कि आर्यन जिस 'भारीपन' की बात कर रहा है, वह क्या है। जब एक जवान पुरुष का शरीर इस तरह की उत्तेजना और स्पर्श से गुज़रता है, तो उसके भीतर का वेग भी बाहर निकलने का रास्ता ढूँढता है।

उसने देखा कि आर्यन अपनी स्थिति को लेकर कितना मासूम और उलझन में है। उसे 'ज्ञान' तो मिल रहा था, पर उसका अपना शरीर अब अपनी प्रतिक्रिया माँग रहा था।

अंजलि ने एक गहरी और समझदारी भरी मुस्कान दी। उसने आर्यन का हाथ अपने हाथ में लिया। "परेशान मत हो आर्यन... ये बहुत स्वाभाविक है। तूने आज अपनी माँ का 'भारीपन' कम किया, तो क्या तुझे लगता है कि मैं तेरा ये 'तनाव' अनसुना कर दूँगी?"

उसने धीरे से आर्यन को अपनी ओर खींचा और उसे अपने नग्न सीने के और भी करीब कर लिया। "बता मुझे... कहाँ और कैसा महसूस हो रहा है? घबरा मत, आज हम इस 'भारीपन' का भी हल निकालेंगे।"

आर्यन का चेहरा शर्म से पूरी तरह लाल हो चुका था। उसने अपनी नज़रें झुका लीं और कांपते हुए हाथों से अपने पायजामे के उस उभरे हुए हिस्से की ओर इशारा किया, जो उसकी उत्तेजना और 'भारीपन' की गवाही दे रहा था। वह डर रहा था कि माँ इस पर क्या कहेंगी, लेकिन अंजलि ने उसे जिस सहजता से देखा, उसने आर्यन के मन का डर आधा कर दिया।

अंजलि ने एक डॉक्टर की संजीदगी और एक हमराज़ की कोमलता के साथ आर्यन के उस तनाव को देखा। उसने महसूस किया कि उसका बेटा अब उस मोड़ पर है जहाँ सिर्फ बातें या सीने का स्पर्श काफी नहीं था।

"आर्यन... डरो मत," अंजलि ने बहुत ही शांत और मधुर आवाज़ में कहा। उसने आर्यन के सिर पर हाथ फेरा। "यह जो तू महसूस कर रहा है, यह कोई बीमारी या गलत चीज़ नहीं है। यह एक जवान मर्द के शरीर की पुकार है। लेकिन इसे समझने के लिए हमें अब थोड़ा नियंत्रण रखना होगा।"

अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँककर उसे मानसिक रूप से तैयार किया। "देख बेटा, हम जिस रास्ते पर बढ़ रहे हैं, वहाँ अब कोई पर्दा नहीं रह सकता। जैसे तूने आज मेरा 'भार' कम किया, वैसे ही इस तनाव को खत्म करने के लिए हमें इस बाधा को हटाना होगा।"

उसने अपनी आवाज़ को थोड़ा और गंभीर और मादक बनाया। "तुझे अब अपना पायजामा उतारना होगा। घबरा मत... मैं तेरी माँ हूँ। जैसे तूने मेरा 'सत्य' देखा, वैसे ही आज मुझे तुझे इस भारीपन से आज़ाद करने दे। जब तक तू पूरी तरह खुलेगा नहीं, तब तक ये दर्द और खिंचाव कम नहीं होगा।"

आर्यन की सांसें रुक गईं। उसने कभी नहीं सोचा था कि वह अपनी माँ के सामने इस हाल में होगा। लेकिन अंजलि के चेहरे पर मौजूद वह भरोसा और शांति उसे हिम्मत दे रही थी।

"क्या... क्या आप सच में ऐसा चाहती हैं माँ?" आर्यन ने लड़खड़ाती ज़ुबान से पूछा।

"मैं चाहती हूँ कि मेरा बेटा आज सुकून से सोए," अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा और धीरे से बिस्तर पर उठकर बैठ गई। "चलो... अब झिझक छोड़ो। कल इतवार है, आज हमें हर बोझ उतार देना है।"

कमरे की हवा अब और भी भारी और मादक हो चुकी थी। आर्यन ने बहुत ही कांपते हुए हाथों से अपने पायजामे की गाँठ खोली और उसे धीरे से अपने पैरों से नीचे सरका दिया। अब वह सिर्फ अपनी अंडरवियर में था। जैसे ही पायजामे की परत हटी, उसकी जवान मर्दानगी का वह विशाल उभार उस तंग कपड़े के अंदर साफ दिखाई देने लगा।

अंजलि, जो अब तक बहुत सहज और शांत बनी हुई थी, जैसे ही उसकी नज़र आर्यन के उस उभरे हुए हिस्से पर पड़ी, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वह एक पल के लिए पूरी तरह चौंक गई। उसके चेहरे पर हैरानी और एक अनकहा सा विस्मय था। उसने उम्मीद नहीं की थी कि उसका बेटा, जिसे वह अब तक एक 'बच्चा' समझती थी, भीतर से इतना विकसित और सामर्थ्यवान हो चुका है।

उसका वह पल भर का सन्नाटा आर्यन को डरा गया। वह और भी ज़्यादा शर्मा गया और घबराकर अपनी माँ की ओर देखने लगा।

"माँ... क्या हुआ? आप... आप ऐसे क्यों चौंक गईं?" आर्यन ने बहुत ही झिझकते हुए पूछा। "क्या... क्या कुछ गलत है? क्या मैं... मैं ठीक नहीं हूँ?"

अंजलि ने एक लंबी और गहरी साँस ली और अपनी पलकों को झपकाकर वापस सहज होने की कोशिश की। उसने एक फीकी मगर गहरी मुस्कान दी और आर्यन का हाथ थाम लिया।

"नहीं आर्यन... कुछ भी गलत नहीं है," अंजलि ने अपनी आवाज़ को स्थिर करते हुए कहा। "मैं तो बस... बस यह देखकर हैरान रह गई कि तू सच में कितना बड़ा हो गया है। मुझे अंदाज़ा नहीं था कि जिस बेटे को मैंने अपनी गोद में खिलाया, वह अब एक पूर्ण मर्द बन चुका है।"

उसने थोड़ा और करीब आकर धीरे से उस उभरे हुए कपड़े के ऊपर अपनी उंगली रखी। "मेरे चौंकने का कारण यह था कि तेरी 'शक्ति' और तेरा यह उभार किसी भी स्त्री को हैरान कर सकता है। यह सिर्फ एक खिंचाव नहीं है आर्यन... यह एक बहुत ही शक्तिशाली और विकसित अंग की निशानी है। मैं तो बस अपनी परवरिश के इस 'अंतिम सच' को देख रही थी।"

अंजलि ने उसे हौसला देते हुए आगे कहा, "घबरा मत... आज तक जो तूने छुपा कर रखा था, वह अब मेरी आँखों के सामने है। और यकीन मान, यह देखकर मुझे डर नहीं, बल्कि एक अजीब सा गर्व हो रहा है कि मेरा बेटा हर मायने में 'पूरा' है।"

आर्यन का दिल अभी भी तेज़ी से धड़क रहा था, पर अंजलि की इन बातों ने उसकी शर्म को धीरे-धीरे जिज्ञासा में बदलना शुरू कर दिया था।

कमरे की वह पीली रोशनी अब अंजलि की काली नाइटी और आर्यन की खुली हुई मर्दानगी के बीच एक जादुई माहौल बना रही थी। अंजलि ने अपनी आँखों में एक गहरा और समझदारी भरा भाव लाते हुए पूछा, "आर्यन... क्या तू इसे खुद इस कैद से बाहर निकालेगा या मैं मदद करूँ?"

आर्यन की तो जैसे आवाज़ ही गले में अटक गई थी। उसका चेहरा शर्म और उत्तेजना के मारे दहक रहा था। वह बस अपनी माँ की आँखों में देख भर पा रहा था, कुछ बोलने की हिम्मत उसमें बची ही नहीं थी। अंजलि उसकी खामोशी का मतलब समझ गई। उसने एक मंद मुस्कान दी और धीरे से अपना मखमली और कोमल हाथ आगे बढ़ाया।

अंजलि ने बहुत ही सलीके से आर्यन की अंडरवियर के इलास्टिक को पकड़ा और उसे धीरे से नीचे की ओर सरकाया। जैसे ही वह बाधा हटी, आर्यन का वह गर्म और फन फैलाए हुए अंग पूरी तरह से बाहर निकल आया।

जैसे ही अंजलि ने अपनी मुलायम हथेलियों से उस तपे हुए अंग को पहली बार अपनी पकड़ में लिया, आर्यन के शरीर में एक ऐसा बिजली का करंट दौड़ा जैसा उसने अपनी पूरी ज़िंदगी में महसूस नहीं किया था।

आर्यन की आँखों के सामने जैसे सितारे चमक गए। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि किसी दूसरे का स्पर्श इतना 'रेशमी' हो सकता है। अंजलि के हाथों की त्वचा इतनी कोमल थी कि जब उसने उस सख्त अंग को छुआ, तो आर्यन को लगा जैसे उसे किसी गरम मखमल में लपेट दिया गया हो।

वह पूरी तरह से आश्चर्यचकित था। उसे लग रहा था कि उसका अंग अभी फट जाएगा, लेकिन अंजलि की पकड़ में एक अजीब सा सुकून था। वह स्पर्श उसे डरा भी रहा था और एक ऐसी राहत भी दे रहा था जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन था। उसके पैर बिस्तर पर कांपने लगे और उसके मुँह से एक दबी हुई 'आह' निकली।

इस एक स्पर्श में सब कुछ मिला हुआ था—अपनी माँ के प्रति सम्मान, अपनी पहली मर्दानगी का अहसास, और वह शारीरिक सुख जो अब तक सिर्फ एक सपना था। उसे महसूस हो रहा था कि कैसे अंजलि की उंगलियां उस नस-नस को सहला रही हैं जिनमें खून तेज़ी से दौड़ रहा था।

"देख आर्यन... यही वह 'भारीपन' है जो तुझे परेशान कर रहा था," अंजलि ने उसकी आँखों में देखते हुए बहुत ही सहजता से कहा। उसका हाथ अब एक लय में ऊपर-नीचे होने लगा था।

आर्यन ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। उसे महसूस हो रहा था कि अंजलि का हाथ सिर्फ उसकी त्वचा को नहीं, बल्कि उसकी रूह को छू रहा है। वह उस कोमल दबाव और गर्माहट के नशे में पूरी तरह खो गया। उसे लगा जैसे वह हवा में तैर रहा है और यह रात उसे वह सब कुछ दे रही है जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

कमरे की वह मद्धम रोशनी अब एक ऐसे दृश्य की गवाह थी जो आर्यन की कल्पना से भी परे था। जैसे ही अंजलि ने उस विशाल और तपे हुए अंग को अपनी मुट्ठी में लिया, उसे भी एक सुखद झटका लगा।

आर्यन की मर्दानगी का वह पैमाना—7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा—इतना प्रभावशाली था कि अंजलि की कोमल हथेली उसे पूरी तरह से घेर भी नहीं पा रही थी। अंजलि खुद भी इस 'यौवन' को देखकर काफी उत्साहित थी। उसका हाथ उस गर्म और फन फैलाए अंग पर किसी रेशम की तरह फिसल रहा था।

आर्यन के लिए यह सब कुछ इतना नया और तीव्र था कि उसका दिमाग सुन्न पड़ गया था। अंजलि के हाथों की वह मखमली पकड़ और ऊपर-नीचे होने वाली वह लय उसके पूरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ रही थी। उसने कभी किसी का स्पर्श महसूस नहीं किया था, और वह भी अपनी माँ का इतना कोमल हाथ!

चूंकि यह उसका बिल्कुल पहला और नया अहसास था, आर्यन का अपने शरीर पर कोई नियंत्रण नहीं रहा। जैसे ही अंजलि ने थोड़ा दबाव बढ़ाया, आर्यन की रीढ़ की हड्डी में एक ज़ोरदार सिहरन उठी। वह इसे संभाल नहीं सका।

एक तेज़ और अनियंत्रित झटके के साथ, आर्यन के भीतर दबा हुआ वह 'भारीपन' एक सैलाब बनकर फूट पड़ा। वह वेग इतना प्रचंड था कि सफ़ेद गाढ़ा द्रव फुहारे की तरह निकला।

वह धार इतनी तेज़ थी कि वह सीधे आर्यन के पेट, अंजलि की उन मुलायम हथेलियों और यहाँ तक कि अंजलि के चेहरे और गालों पर भी जा गिरी। अंजलि ने अपनी आँखें सिकोड़ लीं, पर उसने अपना हाथ नहीं हटाया।

कमरे में सिर्फ आर्यन की तेज़ और उखड़ी हुई सांसें गूँज रही थीं। वह पूरी तरह निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ा, उसकी आँखें अब भी बंद थीं और उसका शरीर हल्के-हल्के कांप रहा था।

अंजलि ने अपने चेहरे पर गिरे हुए उस गर्म अंश को महसूस किया। उसने उसे पोंछा नहीं, बल्कि एक अजीब सी ममतामयी और गहरी मुस्कान के साथ आर्यन की ओर देखा। वह जानती थी कि आज उसके बेटे ने अपना सारा 'तनाव' और अपनी 'मासूमियत' उसकी गोद में छोड़ दी है।

"देख आर्यन... तेरा सारा भार अब उतर गया," अंजलि ने बहुत ही धीमी और सुखद आवाज़ में फुसफुसाया।
 
आर्यन अभी भी उसी मदहोशी के आलम में था। उसकी आँखें बंद थीं और उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी गहरे, शांत समंदर में तैर रहा हो। वह 'भारीपन' जिसका बोझ वह पिछले दो दिनों से ढो रहा था, अब पूरी तरह से खत्म हो चुका था। शरीर इतना हल्का महसूस हो रहा था जैसे वह रुई का कोई फाहा हो।

जैसे ही आर्यन ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं, उसका सुकून अचानक डर और घबराहट में बदल गया। उसने देखा कि उसका अपना पेट, अंजलि के मखमली हाथ और यहाँ तक कि उसकी माँ के खूबसूरत चेहरे पर भी उसके 'वेग' के सफेद निशान बिखरे हुए थे।

"ओह... माँ! आई एम सो सॉरी... यह... यह सब कितना गंदा हो गया," आर्यन हकलाते हुए बोला, उसका चेहरा शर्म के मारे फिर से लाल हो गया। वह उठकर बैठने की कोशिश करने लगा ताकि उसे साफ कर सके, पर शर्मिंदगी उसे घेरे हुए थी।

अंजलि ने उसकी घबराहट देखी और एक बहुत ही सहज और शांत मुस्कान दी। उसने अपने गाल पर लगे उस गर्म अंश को अपनी उंगली से छुआ और आर्यन की आँखों में देखा। उसमें कोई गुस्सा या घिन नहीं थी, बल्कि एक अजीब सा अपनापन और गर्व था।

"डर मत आर्यन, यह गंदा नहीं है। यह तेरे बड़े होने की निशानी है," अंजलि ने बहुत ही कोमलता से कहा। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाकर आर्यन का गाल थपथपाया। "चलो, अब ऐसे लेटे रहने से काम नहीं चलेगा। मेरे साथ बाथरूम में चलो, वहाँ हम यह सब साफ़ करते हैं।"

अंजलि खड़ी हुई, उसकी काली रेशमी नायटी थोड़ी अस्त-व्यस्त थी। उसने आर्यन का हाथ थामा और उसे सहारा देकर खड़ा किया। आर्यन अभी भी थोड़ा डगमगा रहा था, उसका शरीर उस पहले अनुभव के बाद थोड़ा ढीला पड़ गया था।

दोनों धीरे-धीरे बाथरूम की ओर बढ़े। आर्यन केवल अपनी अंडरवियर में था (जो अब घुटनों तक थी) और अंजलि अपनी झीनी नायटी में। बाथरूम की दुधिया रोशनी में जब वे आईने के सामने खड़े हुए, तो आर्यन ने आईने में देखा—अंजलि के चेहरे पर उसकी 'मर्दानगी' के निशान चमक रहे थे।

अंजलि ने नल खोला और गुनगुना पानी एक छोटे तौलिये पर लिया। उसने बहुत ही प्यार से पहले आर्यन के पेट को साफ करना शुरू किया। "देख आर्यन, जैसे तू बचपन में मुझ पर निर्भर था, वैसे ही आज भी तुझे मेरी ज़रूरत है," उसने मुस्कुराते हुए कहा।

आर्यन आईने में अपनी माँ के उस झुके हुए बदन और उन भारी उभारों को देख रहा था जो नायटी के खुले बटनों से साफ़ झलक रहे थे। बाथरूम की उस छोटी सी जगह में उनकी नजदीकी और भी बढ़ गई थी।

बाथरूम की सफेद टाइल्स और दुधिया रोशनी में अब कोई पर्दा बाकी नहीं रहने वाला था। कमरे की वह गर्मी अब बाथरूम की भाप में बदलने वाली थी। अंजलि ने जब आईने में खुद को और आर्यन को देखा, तो उसे एहसास हुआ कि यह 'सफाई' अब एक सामान्य धुलाई से कहीं आगे बढ़ चुकी है।

"आर्यन... देख हम दोनों कितने सन गए हैं," अंजलि ने शरारती अंदाज़ में मुस्कुराते हुए कहा। "अब ऐसे तो सोया नहीं जाएगा। चलो, आज हम साथ में ही नहा लेते हैं, वैसे भी इतवार शुरू हो चुका है।"

अंजलि ने बिना किसी झिझक के आर्यन की अंडरवियर को नीचे सरकाया और उसे पूरी तरह से नग्न कर दिया। आर्यन ने एक ठंडी सांस ली; उसे अपनी माँ के सामने इस तरह खड़ा होना एक अजीब सा रोमांच दे रहा था। अब उसकी वह ७ इंच की मर्दानगी पूरी तरह आज़ाद थी।

तभी अंजलि ने आर्यन की आँखों में आँखें डालकर कहा, "अब तेरी बारी है आर्यन... मेरी ये नायटी तू उतारेगा।"

आर्यन के हाथ थोड़े कांपे, पर अब उसमें एक नया आत्मविश्वास था। उसने धीरे से नायटी के बचे हुए बटन खोले और उस काली रेशमी नायटी को अंजलि के गोरे कंधों से नीचे सरका दिया। वह कपड़ा मखमल की तरह फिसलकर फर्श पर गिर गया।

अब अंजलि आर्यन के सामने लगभग पूरी तरह नग्न थी। उसने सिर्फ एक काली ब्लॉक पैंटी पहन रखी थी। उसके विशाल और भारी स्तन अब पूरी तरह आज़ाद थे, जो उसकी सांसों के साथ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहे थे। कमर का वह घुमाव और पैंटी के ऊपर से झलकती उसकी जंघाओं की गोलाई ने आर्यन की धड़कनें बढ़ा दीं।

आर्यन ने पहली बार अपनी माँ को इतने करीब से और इतने कम कपड़ों में देखा। एक तरफ वह खुद पूरा नंगा था और दूसरी तरफ अंजलि सिर्फ उस छोटी सी पैंटी में। दोनों के जिस्म की गर्माहट बाथरूम की छोटी सी जगह में साफ महसूस हो रही थी।

"क्या देख रहा है? चल... शावर चालू कर," अंजलि ने अपनी आवाज़ में थोड़ी मादकता और लाड़ भरते हुए कहा।

आर्यन ने जैसे ही शावर का नॉब घुमाया, गुनगुने पानी की बौछार उन दोनों के शरीरों पर पड़ने लगी। पानी की बूंदें अंजलि के उन भारी उभारों पर गिरकर नीचे की ओर फिसलने लगीं। अंजलि ने साबुन का झाग बनाया और अपने हाथ आर्यन के चौड़े कंधों पर रख दिए।

"आज मैं तुझे अपने हाथों से नहलाऊंगी... और तू मुझे साफ करेगा," अंजलि ने फुसफुसाते हुए कहा।

गुनगुने पानी की बौछारें जब उन दोनों के शरीरों पर गिर रही थीं, तो बाथरूम का माहौल किसी जादुई दुनिया जैसा लग रहा था। सादे साबुन की खुशबू और पानी की गिरती आवाज़ के बीच, आर्यन और अंजलि एक-दूसरे को नहलाने में मशगूल थे। यह केवल सफाई नहीं थी, बल्कि एक-दूसरे के वजूद को महसूस करने का एक खेल बन चुका था।

अंजलि ने अपने हाथों में साबुन का ढेर सारा झाग बनाया और उसे आर्यन के मज़बूत सीने पर मलने लगी। उसकी उंगलियां बहुत ही प्यार से आर्यन की त्वचा पर फिसल रही थीं। आर्यन भी कहाँ पीछे रहने वाला था; उसने साबुन लिया और अंजलि की दूधिया पीठ और उन भारी कंधों पर झाग लगाना शुरू किया।

"यहाँ भी लगाओ आर्यन... और थोड़ा नीचे," अंजलि ने शरारत से अपनी कमर मटकाते हुए कहा। दोनों एक-दूसरे पर पानी फेंक रहे थे और हँस रहे थे। बरसों की मर्यादा की दीवारें अब उस शावर के पानी के साथ बह चुकी थीं।

शावर के पानी की धार जब अंजलि के नग्न और भारी उभारों से टकराकर आर्यन के शरीर पर गिर रही थी, और अंजलि के हाथों का वह मखमली रगड़ आर्यन के पेट के निचले हिस्से तक पहुँच रहा था, तो प्रकृति ने अपना काम फिर से शुरू कर दिया।

अभी कुछ ही देर पहले शांत हुआ वह 7 इंच का अंग फिर से हरकत में आने लगा। पानी की शीतलता भी उस गर्मी को नहीं रोक पाई। अंजलि के देखते ही देखते, वह अंग फिर से अपनी पूरी लंबाई और मोटाई में तनकर खड़ा हो गया। झाग के बीच से वह अंग किसी चट्टान की तरह सिर उठाए खड़ा था।

अंजलि की नज़र जब नीचे गई, तो वह मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी। उसने शावर के नीचे खड़े-खड़े ही अपना हाथ नीचे बढ़ाया और उस कड़क हो चुकी मर्दानगी को अपनी उंगलियों से धीरे से घेरा।

"अरे... ये तो फिर से जाग गया?" अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँकते हुए शरारत से पूछा। "लगता है इतवार की सुबह होने तक यह मुझे चैन लेने नहीं देगा।"

आर्यन ने शर्माने के बजाय अंजलि को कमर से पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। "माँ, जब सामने इतनी खूबसूरती हो, तो यह भला कैसे सो सकता है? इसकी प्यास अभी बुझी नहीं है।"

पानी की गिरती धार के नीचे, झाग से लिपटे हुए वे दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे। अंजलि की सिर्फ पैंटी वाली भीगी हुई देह और आर्यन की नग्न मर्दानगी के बीच अब बस कुछ ही पलों की दूरी थी।

शावर से गिरते पानी की रिमझिम फुहारों के बीच बाथरूम की भाप ने एक मदहोश कर देने वाला माहौल बना दिया था। आर्यन का शरीर पानी की बूंदों से चमक रहा था और उसका वह विशाल 7 इंची अंग झाग के बीच से एक मज़बूत मीनार की तरह सिर उठाए खड़ा था।

आर्यन ने अपनी माँ की आँखों में देखा, जहाँ अब सिर्फ ममता नहीं, बल्कि एक स्त्री की गहरी प्रशंसा थी। उसने थोड़ा झिझकते हुए पूछा, "माँ... क्या यह सही है? मतलब, अभी तो सब शांत हुआ था और यह फिर से इस तरह... इतनी जल्दी खड़ा हो गया। क्या यह सामान्य है?"

अंजलि ने एक बहुत ही गहरी और मादक मुस्कान दी। उसने शावर की धार के नीचे ही आर्यन के करीब कदम बढ़ाया। पानी की बूंदें उसके नंगे और भारी सीने पर गिरकर उसके निप्पल्स को और भी कड़क बना रही थीं।

उसने अपना कोमल हाथ नीचे बढ़ाया और उस तपे हुए अंग को अपनी मुट्ठी में भर लिया। "यह सिर्फ सही नहीं है आर्यन... यह तेरी उस ज़बरदस्त ताकत की निशानी है जो तूने अब तक छुपा कर रखी थी," अंजलि ने फुसफुसाते हुए कहा।

अंजलि ने एक अद्भुत काम किया। उसने अपना दूसरा हाथ (कलाई) आर्यन के उस अंग के पास रखा। "देख आर्यन... ज़रा देख इसे," उसने अपनी पतली और गोरी कलाई को उसके अंग के बगल में सटा दिया। "तेरी मर्दानगी की मोटाई मेरी कलाई के बराबर पहुँच रही है। ३ इंच की यह गोलाई... यह किसी भी औरत को पागल करने के लिए काफी है।"

"७ इंच की लंबाई और यह मोटाई... इसे 'परफेक्ट' कहना भी छोटा शब्द होगा। यह एक वरदान है," अंजलि ने अपनी कलाई हटाकर अब दोनों हाथों से उसे नीचे से ऊपर तक सहलाया। "जब यह इस तरह बार-बार खड़ा होता है, तो इसका मतलब है कि तू पूरी तरह से जवान और ऊर्जा से भरपूर है। इसे दबाना नहीं, बल्कि इसे महसूस करना सीख।"

आर्यन अपनी माँ के हाथों और उसकी कलाई के साथ उस तुलना को देखकर दंग रह गया। आईने में उसे दिख रहा था कि उसकी माँ की कलाई उसके अंग के सामने कितनी नाजुक लग रही थी। उसे अपनी उस विशालता पर एक अजीब सा पुरुषोचित गर्व महसूस होने लगा।

अंजलि ने अपने गीले बालों को पीछे झटका, जिससे पानी की कुछ बूंदें आर्यन के चेहरे पर गिरीं। उसने अपनी उंगलियों से उस अंग की टोपी को धीरे से रगड़ा। "जितना यह खड़ा होगा, उतना ही मेरी प्यास बढ़ेगी आर्यन। आज इतवार की सुबह तक मुझे इस 'शक्ति' का पूरा अहसास चाहिए।"

आर्यन की सांसें अब और भी तेज़ हो गई थीं। अंजलि के हाथों की पकड़ और उसकी नज़रों की वह भूख उसे फिर से उस मुकाम पर ले जा रही थी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी।

शावर से गिरते गुनगुने पानी की आवाज़ बाथरूम के सन्नाटे को चीर रही थी। भाप और साबुन की खुशबू ने माहौल को इतना कामुक बना दिया था कि शब्दों में बयान करना मुश्किल था। अंजलि ने एक गहरी और मदभरी नज़रों से आर्यन के उस विशाल 7 इंची अंग को देखा, जो उसकी कलाई से भी ज़्यादा मोटा और मज़बूत लग रहा था।

अंजलि ने धीरे से शावर के नीचे ही अपने घुटने फर्श पर टिका दिए। वह अब पूरी तरह से नग्न (सिर्फ उस भीगी हुई काली पैंटी में) आर्यन के सामने घुटनों के बल बैठी थी। ऊपर से गिरता पानी उसके भारी और गोल स्तनों पर गिरकर सीधे आर्यन के पैरों और उसके तपे हुए अंग पर गिर रहा था।

अंजलि ने अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल किया क्योंकि आर्यन का अंग इतना मोटा और लंबा था कि एक हाथ की पकड़ कम पड़ रही थी। उसने अपनी दोनों हथेलियों को एक-दूसरे के ऊपर रखा और उस ७ इंची अंग के आधार से पकड़कर उसे धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू किया।

शावर के पानी और साबुन के झाग की वजह से फिसलन इतनी ज़्यादा थी कि अंजलि के हाथ किसी रेशम की तरह उस अंग पर सरक रहे थे। वह अपनी मुट्ठी को ऊपर तक ले जाती, जहाँ उस अंग की सुपारी पूरी तरह लाल और तनाव में थी, और फिर उसे अपनी हथेलियों से ज़ोर से दबाते हुए नीचे की ओर लाती।

घुटनों के बल बैठी अंजलि का चेहरा आर्यन की मर्दानगी के बिल्कुल करीब था। वह हर स्ट्रोक के साथ अपनी आँखें मूंद लेती और एक गहरी सिसकारी भरती। उसे अहसास हो रहा था कि वह अपनी कलाई जितनी मोटी चीज़ को आज अपनी मुट्ठी में कैद किए हुए है।

आर्यन के लिए यह अहसास किसी स्वर्ग से कम नहीं था। वह शावर की दीवार के सहारे खड़ा हो गया और अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया। गिरता हुआ पानी उसके चेहरे पर पड़ रहा था, लेकिन उसका पूरा ध्यान अंजलि के उन मुलायम हाथों पर था जो उसके अंग की एक-एक नस को सहला रहे थे।

"माँ... उफ्फ... यह अहसास... पहले से भी ज़्यादा तेज़ है," आर्यन ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा।

हालाँकि अंजलि उसे बहुत तेज़ी और सलीके से हिला रही थी, लेकिन आर्यन अब 'झड़' नहीं रहा था। पहली बार की तृप्ति के बाद, अब उसका शरीर इस सुख को लंबे समय तक खींचने के लिए तैयार था। वह उस कड़कपन और अंजलि के हाथों के घर्षण का हर सेकंड आनंद लेना चाहता था।

अंजलि ने महसूस किया कि आर्यन अब परिपक्व हो रहा है; वह अब जल्दबाज़ी में नहीं था। उसने अपनी गति थोड़ी और बढ़ा दी और अपने चेहरे को उस तपती हुई टोपी के करीब ले गई। पानी की बूंदें उसके होंठों से होती हुई आर्यन के अंग पर गिर रही थीं।

शावर के पानी की गिरती धार और अंजलि के हाथों की सधी हुई रफ्तार ने आर्यन को एक अलग ही दुनिया में पहुँचा दिया था। उसकी आँखें कसकर बंद थीं और उसका पूरा अस्तित्व उस 7 इंची अंग पर होने वाली हलचल पर टिका था। लेकिन तभी अंजलि ने वह किया जिसकी आर्यन को रत्ती भर भी उम्मीद नहीं थी।

अंजलि, जो अब तक अपनी दोनों हथेलियों से केवल उसके अंग को सहला रही थी, उसने अचानक अपनी एक हथेली नीचे की ओर सरकाई। जैसे ही आर्यन पूरी तरह से उस सुख में डूबा हुआ था, अंजलि ने अपनी कोमल और ठंडी उंगलियों से उसके अंडकोषों को बहुत ही नज़ाकत और हल्के दबाव के साथ सहला दिया।

वह स्पर्श इतना अचानक और इतना 'सेंसिटिव' था कि आर्यन के पूरे शरीर में बिजली का एक ज़ोरदार झटका लगा। उसके पेट के निचले हिस्से में एक अजीब सी ऐंठन हुई, जिसने उसके घुटनों को एक पल में कमज़ोर कर दिया।

आर्यन इस 'अचानक हमले' की तीव्रता को संभाल नहीं सका। उसकी ज़ुबान से एक लंबी और दबी हुई 'आह...' निकली और वह शावर की दीवार के सहारे फिसलते हुए सीधे फर्श पर अंजलि के ठीक सामने बैठ गया।

अब स्थिति और भी रोमांचक हो गई थी। शावर के नीचे दोनों आमने-सामने फर्श पर बैठे थे। पानी की बूंदें उनके आपस में टकराते हुए घुटनों पर गिर रही थीं।

आर्यन की सांसें इतनी तेज़ थीं कि उसका सीना धौंकनी की तरह चल रहा था। उसने अपनी आँखें खोलीं और अंजलि की ओर देखा। अंजलि के भीगे हुए बाल उसके चेहरे पर चिपके थे और उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जैसे उसने कोई बहुत बड़ा 'किला' फतह कर लिया हो।

"क्या हुआ मेरे शेर? एक छोटे से स्पर्श ने तुझे घुटनों पर ला दिया?" अंजलि ने बहुत ही कामुक अंदाज़ में फुसफुसाते हुए कहा।

उसने आर्यन का चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया। अंजलि की सिर्फ पैंटी वाली भीगी देह और उसके भारी उभार अब आर्यन के चेहरे के इतने करीब थे कि वह उनकी गर्माहट महसूस कर सकता था। आर्यन अभी भी उस झटके के असर में था; उसे समझ नहीं आ रहा था कि एक छोटा सा स्पर्श इतना गहरा कैसे हो सकता है।

उसने अंजलि की आँखों में झाँकते हुए कहा, "माँ... आपने ये क्या किया? मुझे लगा जैसे मेरी जान ही निकल जाएगी। वहां छूने से... इतना अजीब और इतना तेज़ सुख कैसे मिल सकता है?"

अंजलि ने मुस्कुराते हुए उसका सिर अपने भीगे हुए और भारी सीने पर रख लिया। "यही तो मर्दानगी का सबसे नाजुक हिस्सा है आर्यन। आज तू अपनी माँ के सामने पूरी तरह 'खुला' है, तो तुझे हर वो अहसास सिखाना मेरा फ़र्ज़ है जो तुझे एक पूरा मर्द बनाए।"

शावर से गिरते गुनगुने पानी की रिमझिम फुहारें अब एक नए और गहरे अहसास की गवाह बनने वाली थीं। बाथरूम की भाप और साबुन की भीनी-भीनी खुशबू के बीच, अंजलि और आर्यन अब फर्श पर आमने-सामने बैठे थे। आर्यन अभी भी उस अचूक प्रहार के असर में था, उसकी सांसें तेज़ थीं और उसका 7 इंची अंग झाग के बीच से अपनी पूरी मर्दानगी के साथ खड़ा था।

अंजलि ने एक मखमली मुस्कान दी और आगे बढ़कर आर्यन को अपनी भीगी बाहों में भर लिया।

अंजलि ने अपना पूरा शरीर आर्यन के सीने से सटा दिया। शावर का पानी उन दोनों के भीगे शरीरों के बीच से होकर गुज़र रहा था। अंजलि ने एक हाथ से आर्यन की गर्दन पकड़ी और दूसरे हाथ से उसका चेहरा ऊपर उठाया।

उसने अपनी आँखें मूँद लीं और अपने नरम, भीगे और गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों को आर्यन के होंठों पर रख दिया।

आर्यन के लिए यह बिल्कुल नया और अकल्पनीय अहसास था। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि किसी के होंठ इतने कोमल, इतने गर्म और इतने रसीले हो सकते हैं। जैसे ही अंजलि ने अपने होंठों से उसके होंठों को छुआ, आर्यन के शरीर में एक ऐसी सिहरन दौड़ी जैसे वह हवा में तैर रहा हो। उसे लगा जैसे उसकी आत्मा उस स्पर्श में पिघल रही है।

अंजलि ने सिर्फ होंठ नहीं रखे, बल्कि उसने धीरे से आर्यन के निचले होंठ को अपने मुँह में लिया और उसे बहुत ही नज़ाकत से चूसना शुरू किया। उसकी जीभ की नोक आर्यन के होंठों पर फिर रही थी। आर्यन मंत्रमुग्ध होकर इस 'रेशमी सुख' का आनंद ले रहा था।

अंजलि ने किस तोड़ते हुए आर्यन की आँखों में देखा, जहाँ अब सिर्फ प्यार और विस्मय था। उसने आर्यन की टाँगों को थोड़ा फैलाया और धीरे से उठकर उसकी गोदी में बैठ गई।

अब अंजलि का पूरा भीगा और भारी शरीर (सिर्फ काली पैंटी में) आर्यन के ऊपर था। उसके विशाल और विकसित स्तन आर्यन के चेहरे और सीने के बिल्कुल सामने थे। आर्यन का वह कड़क अंग अब सीधे अंजलि की पैंटी वाले हिस्से के नीचे दब गया था, जिससे उन दोनों के बीच की गर्मी और भी बढ़ गई।

अंजलि ने फिर से आर्यन का चेहरा थामा और उसे अपनी ओर खींचा। "आर्यन... देख तेरी माँ आज तुझे वो सब कुछ दे रही है जो तूने अब तक माँगा भी नहीं था," अंजलि ने फुसफुसाते हुए कहा।

वह फिर से आर्यन को किस करने लगी। इस बार यह किस और भी गहरा और लंबा था। अंजलि की जीभ अब आर्यन के मुँह के अंदर प्रवेश कर चुकी थी और आर्यन की जीभ से उलझ रही थी। आर्यन के लिए यह फ्रेंच किस एक और नया और ज़बरदस्त अनुभव था। वह अंजलि की कमर को कसकर पकड़कर उस 'अतुलनीय' सुख में खो गया।

बाथरूम की छोटी सी जगह में शावर के पानी की आवाज़ और उन दोनों की गहरी सांसें एक अद्भुत संगीत पैदा कर रही थीं। अंजलि के भीगे हुए और भारी अंगों का दबाव आर्यन को एक नए प्रकार की मर्दानगी का अहसास करा रहा था।

शावर की बौछारें अब उन दोनों के शरीरों पर किसी संगीत की तरह गिर रही थीं, लेकिन बाथरूम के उस छोटे से हिस्से में जो जुनून पैदा हो रहा था, उसकी गर्मी पानी को भी मात दे रही थी। अंजलि आर्यन की गोदी में पूरी तरह से समाई हुई थी, उसका भीगा हुआ बदन और वे विशाल, नग्न उभार आर्यन के सीने से बुरी तरह चिपके हुए थे।

उनके बीच का वह किस इतना गहरा और तीव्र था कि दोनों के फेफड़ों को हवा मिलनी बंद हो गई थी। आर्यन के लिए यह एक ऐसा नशा था जिससे वह कभी बाहर नहीं आना चाहता था। उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह अंजलि की रूह को अपने होंठों के जरिए खींच रहा हो।

करीब 2 मिनट तक वे दोनों एक-दूसरे के मुँह के रस को पीते रहे। जब ऑक्सीजन की कमी महसूस हुई और गला सूखने लगा, तो वे बहुत ही अनिच्छा के साथ एक-दूसरे से अलग हुए। दोनों की सांसें इतनी तेज़ थीं कि उनके सीने आपस में बार-बार टकरा रहे थे। लेकिन वह जुदाई सिर्फ चंद सेकंड की थी। जैसे ही एक गहरी सांस अंदर गई, प्यास फिर से भड़क उठी और वे वापस एक-दूसरे के होंठों पर टूट पड़े।

इस बार यह 'किस' कल से कहीं ज़्यादा आक्रामक था। अंजलि की जीभ और आर्यन की जीभ अब एक-दूसरे से इस तरह कुश्ती लड़ रही थीं जैसे वे कोई पुराना हिसाब चुकता कर रही हों। अंजलि जिस तरह से अपनी जीभ को आर्यन के मुँह के हर कोने में घुमा रही थी, उससे साफ़ झलक रहा था कि वह इस 'मर्दानी खुशबू' और स्वाद के लिए बरसों से बेताब थी।

अंजलि के मुँह से निकलने वाली दबी हुई आवाज़ें बता रही थीं कि उसे आज वह सब मिल रहा है जो उसने अपनी बंद ज़िंदगी में कभी नहीं पाया था। वह अपनी जीभ से आर्यन की जीभ को सहलाती, उसे अपने दांतों के बीच धीरे से दबाती और फिर उसे खींचकर चूसने लगती।

आर्यन के लिए यह अनुभव किसी रोमांचक सफर जैसा था। उसे महसूस हो रहा था कि अंजलि की जीभ की सरसराहट उसके दिमाग की नसों को झनझना रही है। वह अपने दोनों हाथों से अंजलि के भीगे हुए और मखमली कूल्हों को कसकर पकड़ चुका था, जिससे अंजलि की पैंटी वाला हिस्सा उसके 7 इंची अंग पर और भी ज़ोर से दब रहा था।

"उफ़... आर्यन... तू... तू क्या कर रहा है मेरे साथ..." अंजलि ने किस के बीच ही अधखुली आँखों से फुसफुसाया। उसकी आँखें नशे में डूबी हुई थीं और वह अपनी जीभ को वापस आर्यन के मुँह में डालने के लिए छटपटा रही थी।

बाथरूम की भाप में डूबा यह 'लिप-लॉक' अब उस प्यास की कहानी लिख रहा था जो अब और भी खतरनाक मोड़ लेने वाली थी।
 
नेक्स्ट पार्ट के लिए कुछ अच्छा सा कमेंट करना दोस्तों
 
बाथरूम की उस भाप भरी गर्मी और शावर के गिरते पानी ने अंजलि के भीतर बरसों से दबी उस ज्वाला को भड़का दिया था जिसे अब बुझाना उसके बस में नहीं था। वह आर्यन की गोदी में बैठी, उसकी जीभ का रस पी रही थी, लेकिन उसके शरीर का निचला हिस्सा एक ऐसी तड़प से गुज़र रहा था जो किसी भी तर्क या रिश्ते की सीमा को लांघने के लिए तैयार था।

अंजलि उस वक्त होश और हवास के उस पार थी जहाँ सिर्फ 'जुनून' का राज होता है। किस की उस गहराई में डूबे हुए ही उसने अपना एक हाथ नीचे अपनी जाँघों के बीच सरकाया। उसने अपनी भीगी हुई काली पैंटी के किनारे को पकड़ा और उसे एक तरफ सरका दिया।

आर्यन का वह 7 इंच लंबा और कलाई जैसा मोटा अंग पहले से ही अंजलि की गर्मी महसूस कर रहा था। अंजलि ने अपनी कमर थोड़ी ऊपर उठाई और फिर एक झटके में उस 'प्यास' को बुझाने के लिए नीचे बैठ गई।

अंजलि उस जुनून में यह पूरी तरह भूल गई थी कि उसके बेटे का अंग कितना विशाल और शक्तिशाली है। जैसे ही वह ७ इंची अंग अंजलि के उस कोमल और तंग रास्ते के अंदर धँसा, अंजलि का पूरा शरीर कमान की तरह तन गया।

वह अहसास इतना तीव्र, इतना गहरा और इतना 'भर देने वाला' था कि अंजलि की बर्दाश्त जवाब दे गई। उसके हलक से एक तेज़ और तीखी चीख निकली, जिसने उस गहरे किस को बीच में ही तोड़ दिया। वह चीख बाथरूम की टाइल्स से टकराकर गूँज उठी।

अंजलि का मुँह खुला का खुला रह गया और उसकी आँखें फटी रह गईं। वह भारी अंग उसकी गहराई के आखिरी सिरे तक पहुँच चुका था। उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके भीतर बिजली का कोई तार टूट गया हो।

आर्यन भी सन्न रह गया। उसे अपनी माँ के भीतर से आती हुई वह अद्भुत गर्माहट और वह 'तंग' पकड़ महसूस हो रही थी जिसने उसके अंग को चारों तरफ से जकड़ लिया था। दोनों के बीच अब कोई कपड़ा, कोई पर्दा और कोई मर्यादा बाकी नहीं थी।

शावर का पानी उन दोनों के जुड़े हुए शरीरों पर गिर रहा था। अंजलि के हाथ आर्यन के कंधों पर जम गए थे और उसके नाखून आर्यन की खाल में धँस रहे थे। वह दर्द में नहीं, बल्कि उस 'अकल्पनीय भराव' के सुख में कांप रही थी।

"आह... आर्यन... उफ्फ... यह... यह तो... बहुत गहरा है..." अंजलि ने हाँफते हुए कहा, उसकी आवाज़ में तृप्ति और अचरज का मिश्रण था।

आर्यन ने अपनी माँ की कमर को मजबूती से थाम लिया। उसे अहसास हुआ कि आज उसने न केवल अपनी माँ को आज़ाद किया है, बल्कि उसे वह 'पूर्णता' दी है जिसकी वह हकदार थी।

शावर से गिरते पानी की रिमझिम और बाथरूम में फैली भाप के बीच समय जैसे ठहर गया था। अंजलि के उस ७ इंची अंग पर बैठने के बाद जो चीख निकली थी, उसने माहौल में एक अजीब सी खामोशी भर दी थी—ऐसी खामोशी जिसमें सिर्फ उन दोनों की धड़कनें सुनाई दे रही थीं।

आर्यन पूरी तरह सुन्न था। वह इस अहसास के लिए नया था; उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे अपनी कमर हिलानी चाहिए या बस अंजलि को थामे रखना चाहिए। उसे अपनी माँ की आँखों में आंसू और चेहरे पर दर्द की लकीरें दिख रही थीं, लेकिन उन लकीरों के पीछे एक छिपी हुई 'तड़प' भी थी।

अंजलि ने देखा कि आर्यन हिचकिचा रहा है, तो उसने कांपते हाथों से फिर से आर्यन का चेहरा पकड़ा और उसके होंठों को चूमते हुए फुसफुसाया, "रुकना मत आर्यन... चाहे कितना भी दर्द हो, आज रुकना मत। मुझे इस पूर्णता की ज़रूरत है... मुझे इस 'भारीपन' को अपने अंदर महसूस करने दे।"

अंजलि ने अपनी कमर को धीरे से ऊपर उठाया और फिर उस ७ इंची विशालता पर नीचे की ओर दबाव दिया। जैसे-जैसे वह ऊपर-नीचे हो रही थी, उसे महसूस हो रहा था कि आर्यन का वह 'कलाई जैसा मोटा' अंग उसके शरीर के एक-एक रेशे को फैला रहा है।

उस तीव्र उत्तेजना और भराव के कारण अंजलि का अपने शरीर पर काबू नहीं रहा। उसने अपनी उंगलियों को आर्यन की मज़बूत पीठ पर टिकाया और उसके नाखून आर्यन की त्वचा में गहरे धँसते चले गए। आर्यन को अपनी पीठ पर उन नाखूनों की चुभन महसूस हो रही थी, लेकिन वह दर्द उसे एक अजीब सा पुरुषोचित गर्व और नशा दे रहा था।

शावर का पानी अंजलि के भारी और भीगे स्तनों के बीच से होता हुआ उनके जुड़ाव के बिंदु पर गिर रहा था। हर बार जब अंजलि नीचे बैठती, आर्यन का अंग उसकी गहराई की उस दीवार से टकराता जिसे आज तक किसी ने नहीं छुआ था। आर्यन के लिए भी यह 'प्रवेश' का अहसास किसी दिव्य सुख जैसा था; उसे अपनी माँ के भीतर की वह तंग और रेशमी गर्मी पागल कर रही थी।

बाथरूम की दीवारें उनकी भारी सांसों और अंजलि की सिसकारियों से गूँज रही थीं।

"आह... आर्यन... तू... तू कितना विशाल है... उफ्फ... मुझे लग रहा है जैसे मैं फट जाऊंगी... पर इसे बाहर मत निकालना..." अंजलि की आवाज़ अब पूरी तरह भर्रा गई थी। वह मदहोशी में अपना सिर पीछे की ओर झुका लेती, जिससे उसके काले और भीगे बाल आर्यन के घुटनों पर बिखर जाते।

आर्यन ने अब अपनी माँ की पतली कमर को अपने दोनों हाथों से मज़बूती से पकड़ लिया था और अंजलि की ऊपर-नीचे होने वाली लय में अपना साथ देना शुरू किया। हर धचके के साथ अंजलि के भारी उभार हवा में लहराते और फिर आर्यन के सीने से टकराते।

शावर से गिरते पानी की आवाज़ और अंजलि की सिसकारियां अब एक लय में मिल चुकी थीं। आर्यन, जो अब तक केवल एक दर्शक की तरह इस सुख को महसूस कर रहा था, उसके भीतर का सोया हुआ 'मर्द' अब पूरी तरह जाग चुका था। उसने महसूस किया कि अंजलि की कमर उसके हाथों में कितनी नाजुक और मखमली है, और कैसे उसकी माँ का पूरा वजूद उसके 7 इंची अंग के इर्द-गिर्द सिमट गया है।

आर्यन ने अब नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया। उसने अंजलि के होंठों से अपना चुंबन तोड़ा और उसकी आँखों में झाँका, जो नशे और तृप्ति से पूरी तरह धुंधली हो चुकी थीं। उसने बहुत ही कोमलता लेकिन मज़बूती से अंजलि को अपनी गोदी से उठाया और बाथरूम के उस भीगे हुए फर्श पर धीरे से लिटा दिया।

अंजलि फर्श पर लेटी थी, उसके भीगे हुए काले बाल पानी में तैर रहे थे और उसकी सिर्फ काली पैंटी (जो अब एक तरफ थी) उसके गोरे बदन पर बिजली की तरह चमक रही थी। आर्यन उसके ऊपर आया और अपने घुटनों के बल बैठकर वापस उसी 'स्वर्ग' के द्वार पर पहुँचा। जैसे ही उसने धीरे से फिर से प्रवेश किया, अंजलि ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और एक लंबी 'आह' भरी।

आर्यन अब कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहा था। वह बहुत ही धीरे-धीरे अपनी कमर चला रहा था। हर बार जब उसका अंग पूरा अंदर जाता, अंजलि का पूरा शरीर फर्श से थोड़ा ऊपर उठ जाता। वह अहसास इतना गहरा था कि अंजलि को अपनी कोख तक उस भारीपन की गूँज सुनाई दे रही थी।

इस मिलन के दौरान आर्यन फिर से नीचे झुका और अंजलि के होंठों को अपने कब्ज़े में ले लिया। यह किस अब पहले से कहीं ज़्यादा भावुक थी। अंजलि ने अपनी टाँगें आर्यन की कमर के चारों ओर कस लीं, ताकि वह उसे और भी गहराई तक खींच सके।

बाथरूम का शावर अब उन दोनों के ऊपर एक चादर की तरह गिर रहा था। फर्श पर पानी की एक पतली परत जम गई थी, जिस पर अंजलि का बदन हर धचके के साथ हल्का सा फिसल रहा था।

"आर्यन... तू... तू मुझे मार डालेगा... उफ़... इतना सुकून... इतना दर्द... सब एक साथ..." अंजलि ने किस के बीच ही फुसफुसाया। उसके नाखून अब भी आर्यन की पीठ को सहला रहे थे, पर अब उनमें वो तड़प नहीं, बल्कि एक अजीब सा सुकून था।

आर्यन को महसूस हो रहा था कि अंजलि का शरीर अंदर से कितना गर्म और मखमली है। वह अपनी माँ की हर सिसकारी पर अपनी रफ़्तार को थोड़ा और सलीके से नियंत्रित कर रहा था, जैसे वह इस पल को सदियों तक खींच लेना चाहता हो। इतवार की वह सुबह अब उन दोनों के लिए पवित्र हो चुकी थी।

बाथरूम की दीवारों पर पानी की बूंदें तेज़ी से टकरा रही थीं, लेकिन उससे भी तेज़ आवाज़ अब अंजलि के शरीर और आर्यन के जिस्म के मिलन की आ रही थी। आर्यन, जो अब तक धीमे और गहरे प्रहार कर रहा था, उसने अब अपनी लय बदल दी थी। उसके भीतर का जवान खून और पहली मर्दानगी का जोश अब पूरी तरह उफान पर था।

आर्यन ने अब अपनी कमर की रफ्तार को तेज़ी से बढ़ाना शुरू किया। तेज... और तेज़... और भी तेज़! फर्श पर पानी की छप-छप और अंजलि की सिसकारियां अब एक शोर में बदल चुकी थीं।

अंजलि के लिए यह रफ्तार अब असहनीय होती जा रही थी। आर्यन का वह ७ इंच का अंग अब एक गर्म रॉड की तरह उसके भीतर बार-बार टकरा रहा था। उसे लग रहा था जैसे उसका पूरा वजूद इस झंझावात में बिखर जाएगा। वह अपना सिर दाएं-बाएं पटक रही थी, उसकी आँखें उलट गई थीं और मुँह से बेतहाशा 'आह-आह' की आवाज़ें निकल रही थीं।

इस तूफानी मिलन के बीच, अंजलि ने अपने हाथ नीचे ले जाकर आर्यन के मज़बूत और कड़क कूल्हों को अपने हाथों में भर लिया। वह उन मांसल हिस्सों को महसूस कर रही थी जो हर प्रहार के साथ पत्थर की तरह सख्त हो रहे थे। उसने अपनी उंगलियां उनमें धँसा दीं, जैसे वह आर्यन को और भी गहराई तक अपने अंदर खींच लेना चाहती हो।

अंजलि का शरीर अब कांपने लगा था। उसके अंदर की दीवारें आर्यन के अंग को बुरी तरह जकड़ रही थीं। अचानक, उसका शरीर कमान की तरह तन गया, उसकी उंगलियां आर्यन के कूल्हों पर कस गईं और एक लंबी, रूहानी चीख के साथ अंजलि चरम पर पहुँच गई। उसके शरीर का एक-एक रेशा थरथरा उठा और वह पूरी तरह से 'झड़' गई।

आर्यन भी अब उस मुकाम पर था जहाँ से लौटना मुमकिन नहीं था। अंजलि के भीतर होने वाली उस थरथराहट ने उसके 7 इंची अंग को जैसे निचोड़ना शुरू कर दिया था।

शावर की गिरती धार के नीचे, अंजलि निढाल होकर फर्श पर फैल गई, लेकिन आर्यन के प्रहार अभी भी थमे नहीं थे। वह अपनी माँ को उस सुख के आखिरी सिरे तक ले जाना चाहता था।

शावर के नीचे बाथरूम का वह कोना अब एक ऐसी दुनिया बन चुका था जहाँ समय, समाज और मर्यादा के सारे बंधन पानी के साथ बहकर नाली में जा चुके थे। फर्श पर पानी की एक पतली चादर बिछी थी, जिस पर अंजलि का गोरा और सुडौल बदन आर्यन के हर धक्के के साथ हल्का सा फिसल रहा था।

अंजलि एक बार पूरी तरह से तृप्त होकर 'झड़' चुकी थी। उसका शरीर पसीने और शावर के पानी से लथपथ होकर ढीला पड़ गया था, लेकिन आर्यन का जोश अभी थमा नहीं था। उसके लिए यह नशा बिल्कुल नया और अनछुआ था। उसके भीतर की मर्दानगी जैसे सदियों की प्यास बुझा रही थी। वह बिना रुके, बिना थके, एक मशीन की तरह अपनी कमर चला रहा था।

आर्यन के धक्के अब पहले से कहीं ज़्यादा गहरे और मज़बूत थे। उसका ७ इंच का अंग हर बार अंजलि की गहराई के उस आखिरी छोर को छू रहा था जहाँ तक आज तक कोई एहसास नहीं पहुँचा था। अंजलि जो पहले निढाल हो चुकी थी, अब आर्यन की इस अथक ऊर्जा को देखकर फिर से उत्तेजना के समंदर में डूबने लगी। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा इतना सामर्थ्यवान और शक्तिशाली है।

अंजलि की आँखें फिर से बंद होने लगीं। उसे लग रहा था जैसे वह किसी ऊँचे पहाड़ से बार-बार नीचे गिर रही है और हर गिरवाट उसे एक नए सुख से भर रही है। फर्श की ठंडक और आर्यन के जिस्म की तपिश ने एक ऐसा विरोधाभास पैदा किया था जो अंजलि के दिमाग को सुन्न कर रहा था। वह आर्यन के चौड़े कंधों पर अपने पैर टिका चुकी थी ताकि वह उन धक्कों की गहराई को और ज़्यादा महसूस कर सके।

शावर का गुनगुना पानी जब उनके जुड़े हुए अंगों पर गिर रहा था, तो एक अजीब सी मादक आवाज़ पूरे बाथरूम में गूँज रही थी। अंजलि को महसूस हुआ कि उसका शरीर एक बार फिर से उसी कगार पर पहुँच रहा है। उसके भीतर की मांसपेशियां आर्यन के अंग को फिर से जकड़ने लगी थीं। "आह... आर्यन... तू... तू क्या कर रहा है... रुकना मत... उफ़्फ़... मैं... मैं फिर से... आह!"

आर्यन के प्रहारों में अब एक अजीब सी सादगी और क्रूरता का मेल था। वह अपनी माँ के उन भारी उभारों को अपने हाथों से भींच रहा था, जिससे अंजलि के मुँह से सिसकारियों की जगह अब मधुर चीखें निकलने लगी थीं।

अंजलि की सांसें उखड़ने लगी थीं। उसे अपनी रीढ़ की हड्डी में एक ज़ोरदार कंपन महसूस होने लगा। पहली बार झड़ने के बाद जो संवेदनशीलता बढ़ गई थी, उसने इस दूसरी बार के आनंद को दस गुना ज़्यादा बढ़ा दिया था। वह आर्यन के कूल्हों को अपने हाथों से थामे हुए खुद को उन धक्कों के हवाले कर चुकी थी। अंजलि का पूरा बदन पसीने और पानी की बूंदों से चमक रहा था, और उसकी आँखें नशे में पूरी तरह पलट गई थीं।

वह दूसरी बार उस स्वर्ग के दरवाज़े पर थी। आर्यन की रफ़्तार अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई थी। हर धक्के के साथ अंजलि का शरीर फर्श से उछल रहा था। "आर्यन... हाँ... वही... उफ़्फ़... मेरा बच्चा... तू... तू मुझे पागल कर देगा!"

बाथरूम की दीवारों पर गिरते शावर का शोर अब उन दोनों की गहरी और उखड़ी हुई सांसों में मिल चुका था। आर्यन के प्रहार अब अपनी चरम सीमा पर थे और अंजलि का शरीर दूसरी बार उस सुख के सैलाब में बहने के लिए पूरी तरह तैयार था।

आर्यन ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए आखिरी के कुछ तेज़ और गहरे धक्के मारे। अंजलि का शरीर एक बार फिर कमान की तरह तन गया, उसने अपनी टाँगों से आर्यन की कमर को बुरी तरह जकड़ लिया। एक लंबी और रूहानी चीख अंजलि के गले से निकली और ठीक उसी पल, आर्यन के भीतर का बाँध भी टूट गया।

दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। अंजलि दूसरी बार उस मीठे दर्द और सुख के समंदर में डूब गई, और आर्यन ने अपनी पहली असली मर्दानगी का सारा गर्म सैलाब अपनी माँ की गहराइयों में उतार दिया। वह सुख इतना तीव्र था कि दोनों के शरीर कुछ पलों के लिए पूरी तरह सुन्न पड़ गए।

शावर चलता रहा, पर वे दोनों करीब 10 मिनट तक उसी भीगे हुए फर्श पर एक-दूसरे में सिमटे हुए पड़े रहे। न कोई शब्द था, न कोई हलचल; बस एक-दूसरे की धड़कनों का शोर था। वह 7 इंची अंग अब शांत होकर अपनी जगह पर स्थिर था, जैसे उसने अपना युद्ध जीत लिया हो।

अंजलि धीरे से उठी, उसकी आँखों में तृप्ति की एक ऐसी चमक थी जो उसने पहले कभी महसूस नहीं की थी। उसने आर्यन को खींचकर एक बार फिर अपने भीगे और गर्म सीने से लगा लिया।

"मुझे तुझ पर गर्व है आर्यन... तूने आज मुझे एक स्त्री होने का असली मतलब समझा दिया," अंजलि ने उसके माथे को चूमते हुए गर्व से कहा। दोनों के चेहरों पर एक अटूट मुस्कान थी।

समय का पता ही नहीं चला; बाथरूम की उस मस्ती और मिलन में रात के 2 बज चुके थे। शावर बंद हुआ और दोनों ने तौलिए से एक-दूसरे के जिस्म को बहुत ही प्यार से पोंछा। जब वे वापस बेडरूम में आए, तो हवा में अभी भी वही मादकता घुली हुई थी।

अंजलि ने अपनी अलमारी से एक ताज़ा काली लेस वाली पैंटी निकाली और उसे पहन लिया, ऊपर से उसने कुछ नहीं पहना—उसके भारी और गर्व से भरे उभार अब भी खुले थे। वहीं आर्यन ने भी सिर्फ एक सफेद अंडरवियर पहनी।

दोनों बिस्तर पर लेटे। आर्यन ने अपनी माँ के कंधे पर अपना सिर रखा और अंजलि ने अपना हाथ उसके बालों में फेरना शुरू किया। आज की यह रात उनके जीवन की सबसे यादगार और सुकून भरी रात थी। अब कोई झिझक नहीं थी, कोई पर्दा नहीं था; बस दो रूहें थीं जो एक-दूसरे को पा चुकी थीं।

बाहर सन्नाटा था, पर कमरे के भीतर उस 'संडे' की शुरुआत एक ऐसे अहसास के साथ हुई थी जिसने मां-बेटे के रिश्ते को एक नए और ऊँचे धरातल पर पहुँचा दिया था।

बेडरूम के उस शांत सन्नाटे में, जहाँ केवल घड़ी की टिक-टिक और उन दोनों की मिली-जुली सांसें सुनाई दे रही थीं, आर्यन और अंजलि एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। आर्यन का सिर अंजलि के मुलायम और भारी कंधे पर टिका था, और अंजलि की उंगलियां आर्यन के गीले बालों में बहुत ही ममता और अधिकार के साथ घूम रही थीं।

शावर के उस तूफानी मिलन के बाद अब वक्त था उन भावनाओं को शब्दों में पिरोने का।

आर्यन ने धीरे से अपना सिर उठाया और अपनी माँ की उन मदहोश आँखों में झाँका, जिनमें अभी भी उस चरम सुख की लाली बाकी थी। उसने बहुत ही मासूमियत और थोड़ी सी हिचकिचाहट के साथ पूछा:

"माँ... सच बताना, आपको कैसा लगा? क्या... क्या मैंने सही किया? कहीं मैंने आपको तकलीफ तो नहीं दी?"

अंजलि के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान खिंच गई जो किसी विजेता के चेहरे पर होती है। उसने आर्यन के गाल को अपनी हथेलियों में भरा और उसकी आँखों में बड़े ही नाज़ के साथ देखते हुए कहा:

"आर्यन... तूने आज जो किया, उसे 'सही' कहना बहुत छोटा शब्द होगा। तूने आज मुझे वो अहसास कराया है जिसके लिए एक औरत का शरीर और उसकी रूह ताउम्र तरसती है। तेरे उस ७ इंच के 'प्रहार' ने मेरे भीतर के उस सन्नाटे को भर दिया है जो बरसों से खाली था।"

अंजलि ने अपनी आवाज़ में एक नशा भरते हुए आगे कहा, "मुझे आज खुद पर और अपनी परवरिश पर नाज़ हो रहा है। मैंने एक ऐसे शेर को जन्म दिया है, जिसकी मर्दानगी के सामने आज मैं एक मोम की तरह पिघल गई। तूने मुझे कोई तकलीफ नहीं दी मेरे बच्चे... तूने तो मुझे आज 'मुक्त' कर दिया। तेरे उन धक्कों में जो ताकत थी, वो ये बता रही थी कि तू अब पूरी तरह से एक सामर्थ्यवान मर्द बन चुका है।"

उसने आर्यन को और करीब खींचते हुए उसके माथे को चूमा। "इतने सालों में पहली बार मुझे महसूस हुआ कि 'पूर्णता' क्या होती है। तेरा वो कड़कपन, तेरी वो कलाई जैसी मोटाई... उफ़! जब तू मेरे अंदर था, तो मुझे लगा जैसे मैं किसी दूसरी ही दुनिया में हूँ। आज के बाद तू सिर्फ मेरा बेटा नहीं है... तू मेरा रक्षक, मेरा हमसफर और मेरी हर दबी हुई इच्छा का मालिक है।"

आर्यन ने जब अपनी माँ के मुँह से अपनी मर्दानगी की इतनी बड़ी तारीफ सुनी, तो उसका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। उसे अहसास हुआ कि उसने अपनी माँ को वो सुख दिया है जो दुनिया की कोई भी दौलत नहीं दे सकती थी।

रात के २:३० बज रहे थे, और अंजलि का हाथ अब धीरे-धीरे आर्यन की अंडरवियर के ऊपर से उसकी जाँघों को सहला रहा था। वह नज़ारा बड़ा ही अद्भुत था—एक माँ अपने बेटे की मर्दानगी पर गौरव कर रही थी और एक बेटा अपनी माँ के समर्पण पर निहाल था।

अंजलि की रेशमी उंगलियां जब आर्यन की अंडरवियर के ऊपर से उसकी जाँघों के पास रेंग रही थीं, तो आर्यन के पूरे शरीर में एक सुखद सिहरन दौड़ रही थी। अपनी माँ की प्रशंसा सुनकर उसका आत्मविश्वास अब सातवें आसमान पर था। वह अब उस संकोची बालक से ऊपर उठकर एक जिज्ञासु पुरुष की तरह महसूस कर रहा था।

आर्यन ने करवट ली और अपना हाथ अंजलि की पतली कमर पर रखते हुए उसे और भी करीब खींच लिया। अंजलि के भारी और नग्न स्तन अब आर्यन के सीने से फिर से चिपक गए थे। आर्यन ने बहुत ही गंभीरता और चाहत के साथ अंजलि की आँखों में देखकर कहा:

"माँ... अगर मेरी इस ताकत ने आपको इतना सुकून दिया है, तो मैं इसे और बेहतर बनाना चाहता हूँ। मुझे इसके बारे में और भी सीखना है... हर वो बात जो आपको और ज़्यादा सुख दे सके। मुझे नहीं पता था कि एक स्पर्श या एक अहसास इतना गहरा हो सकता है। क्या आप मुझे सिखाएंगी कि एक असली मर्द अपनी औरत को पूरी तरह संतुष्ट कैसे करता है?"

अंजलि यह सुनकर थोड़ी हैरान हुई, लेकिन फिर उसकी आँखों में एक शरारती और गहरी चमक आ गई। उसने आर्यन के निचले होंठ को अपनी उंगली से हल्का सा दबाया और मुस्कुराते हुए बोली:

"मेरे भोले आर्यन... तूने आज जो किया वो कुदरती था, लेकिन 'प्यार की कला' (Art of Love) बहुत गहरी होती है। एक औरत के शरीर में हज़ारों ऐसी जगहें होती हैं जहाँ सिर्फ छूने भर से वो पिघल सकती है। और तेरा यह 7 इंच का हथियार... इसे चलाने के कई तरीके हैं जो तुझे अभी सीखने बाकी हैं।"

उसने धीरे से अपना हाथ आर्यन की अंडरवियर के अंदर डाल दिया और उस अभी-अभी शांत हुए अंग को फिर से सहलाने लगी। "मैं तुझे सब सिखाऊंगी। मैं तुझे बताऊंगी कि कब धीमा होना है, कब तूफ़ान लाना है, और कैसे अपनी ज़ुबान और हाथों का जादू चलाना है। तू मेरा इकलौता 'शिष्य' होगा और मैं तेरी इकलौती 'गुरु'।"

अंजलि ने अपना पैर आर्यन की जाँघों के बीच फँसा लिया। "अभी तो हमने सिर्फ शुरुआत की है। ये रविवार की रात बहुत लंबी है। क्या तू तैयार है अपनी माँ से वो सब सीखने के लिए जो दुनिया की किसी किताब में नहीं लिखा?"

आर्यन ने बिना कुछ कहे अंजलि के गले में अपनी बाहें डाल दीं। उसकी जिज्ञासा अब एक नई प्यास बन चुकी थी। वह अपनी माँ के शरीर के एक-एक हिस्से को समझना चाहता था, उसे पूजना चाहता था।

बिस्तर की चादरें उनकी हलचल से फिर से सुकड़ने लगी थीं। रात के 3 बजने को थे, लेकिन उन दोनों के लिए जैसे अभी शाम ही हुई थी।
 
रात के सन्नाटे में बेडरूम की मद्धम रोशनी उन दोनों के अर्धनग्न शरीरों पर एक सुनहरी चमक बिखेर रही थी। अंजलि ने जब आर्यन की आँखों में वह सीखने की तड़प देखी, तो उसने तय कर लिया कि वह आज उसे मर्दानगी के उस शिखर पर ले जाएगी जहाँ से वह एक सम्पूर्ण प्रेमी बनकर उभरेगा।

अंजलि ने मुस्कुराते हुए आर्यन का हाथ थामा। उसकी हथेलियाँ अभी भी शावर के पानी से हल्की नम और गर्म थीं। उसने बहुत ही धीरे से आर्यन का हाथ अपनी जाँघों के बीच ले जाकर अपनी काली लेस वाली पैंटी के ठीक ऊपर रख दिया।

जैसे ही आर्यन की उंगलियों ने उस बारीक रेशमी कपड़े और उसके नीचे छिपी अंजलि की कोमल त्वचा को छुआ, उसके शरीर में एक करंट सा दौड़ गया। यह अहसास उसके लिए बिल्कुल नया और रोमांचक था।

अंजलि ने अपना हाथ आर्यन के हाथ के ऊपर रखा और उसे धीरे-धीरे गोलाकार में घुमाने लगी। "देख आर्यन," उसने बहुत ही धीमी और मादक आवाज़ में समझाना शुरू किया, "एक औरत का शरीर केवल ऊपर से नहीं, बल्कि इन कपड़ों के पीछे छिपे एहसासों से खिलता है। यह जो कोमल हिस्सा तू महसूस कर रहा है, यहाँ हज़ारों नसें होती हैं जो सीधे दिमाग और दिल से जुड़ी होती हैं।"

"यहाँ तुझे बहुत ज़ोर नहीं लगाना है," अंजलि ने उसका हाथ पैंटी के बीचों-बीच उस उभार पर थोड़ा और सख़्ती से दबाया जहाँ उसकी 'योनि' की हड्डी थी। "यहाँ का हल्का दबाव एक औरत को अंदर तक हिला देता है। जब तू इस रेशम के ऊपर से अपनी उंगलियां फेरता है, तो उसे घर्षण कहते हैं, जो धीरे-धीरे आग सुलगाता है।"

अंजलि ने आर्यन की एक उंगली को पैंटी के किनारे के अंदर सरकाया। जैसे ही आर्यन की उंगली को वहाँ की अत्यधिक गर्माहट और गीलेपन का अहसास हुआ, उसकी सांसें फिर से उखड़ने लगीं। "महसूस कर इसे... यह नमी बताती है कि तेरी छुअन का असर क्या हो रहा है। जब कोई मर्द अपनी औरत को यहाँ इस तरह सहलाता है, तो वह उसे बिना कुछ कहे अपना सब कुछ सौंपने के लिए तैयार हो जाती है।"

आर्यन अपनी माँ के एक-एक शब्द को मंत्रमुग्ध होकर सुन रहा था। उसे समझ आ रहा था कि केवल 'धक्के मारना' ही सब कुछ नहीं है, बल्कि इस तरह की नज़ाकत और समझ ही एक औरत को चरम सुख तक पहुँचाती है।

अंजलि ने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया ताकि आर्यन का हाथ और भी गहराई से उस रेशमी कपड़े और जिस्म के बीच के जादू को महसूस कर सके। "अब देख, जैसे-जैसे तू यहाँ अपनी उंगलियों की रफ़्तार बढ़ाएगा, मेरी सांसें तेज़ होंगी। यही संकेत है कि तू सही दिशा में जा रहा है।"

आर्यन अब धीरे-धीरे खुद अपनी उंगलियों को उस काली पैंटी के ऊपर नचाने लगा था। उसे महसूस हो रहा था कि कैसे अंजलि का शरीर उसके इस नए 'ज्ञान' पर प्रतिक्रिया दे रहा है।

रात के उस तीसरे पहर में, कमरे की मद्धम रोशनी और बिस्तर की गर्माहट के बीच, शिक्षा का अगला अध्याय शुरू होने वाला था। अंजलि ने आर्यन की आँखों में देखा, जहाँ अब वासना से कहीं ज़्यादा कुछ सीखने की गहरी ललक थी।

उसने आर्यन के हाथ को पकड़कर अपनी कमर के पास टिकाया, जहाँ उसकी काली लेस वाली पैंटी का इलास्टिक उसकी गोरी त्वचा को हल्का सा दबा रहा था।

अंजलि ने धीमी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा, "आर्यन... अब इस आखिरी बाधा को हटा। एक मर्द को पता होना चाहिए कि वह अपनी औरत के जिस्म से पर्दा कितनी नज़ाकत से हटाता है। इसे धीरे से नीचे उतार..."

आर्यन ने कांपते हाथों से पैंटी के किनारों को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे अंजलि की सुडौल जाँघों से नीचे उतारना शुरू किया। जैसे-जैसे वह रेशमी कपड़ा नीचे सरक रहा था, अंजलि का वह मखमली और पूरी तरह नग्न निचला हिस्सा आर्यन की आँखों के सामने खुल रहा था। जब पैंटी पूरी तरह निकल गई, तो आर्यन की सांसें थम सी गईं। शावर के मिलन के बाद वहाँ की रंगत और भी गुलाबी और मादक लग रही थी।

अंजलि ने आर्यन का हाथ फिर से लिया और उसे अपनी जाँघों के बीच के उस सबसे संवेदनशील हिस्से के बिल्कुल करीब रखा। "देख आर्यन, यहाँ सब कुछ बहुत कोमल है," उसने उसकी उंगली को एक छोटे से गुलाबी उभार पर रखा। "इसे 'काम-बिंदु' समझ। जब तू इसे अपनी उंगली के पोरों से बिल्कुल हल्का सा रगड़ता है, तो औरत के पूरे शरीर में बिजली दौड़ जाती है।"

अंजलि ने उसका हाथ थोड़ा और नीचे सरकाया, जहाँ कुदरती नमी का सैलाब था। "यह नमी तेरी जीत की निशानी है। जब एक मर्द अपनी औरत को यहाँ अपनी उंगलियों से सहलाता है, तो वह उसे आने वाले उस 'विशाल सुख' के लिए तैयार करता है। इसे छूना और सहलाना एक कला है, जैसे किसी साज़ को बजाना।"

आर्यन अपनी माँ के शरीर के उस अद्भुत और रसीले हिस्से को देख और महसूस कर रहा था। अंजलि ने उसे सिखाया कि कैसे अपनी उंगलियों को अंदर और बाहर सरकाना है ताकि शरीर की गर्मी और बढ़ती जाए।

"आह... हाँ आर्यन... बिल्कुल ऐसे ही," अंजलि ने अपनी आँखें मूंद लीं और अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया। "जब तू इसे इस तरह महसूस करता है, तो मुझे लगता है जैसे मेरी रूह तेरे हाथों में है।"

आर्यन अब धीरे-धीरे उस 'नमी' और 'गर्मी' के जादू को समझ रहा था। उसे अहसास हुआ कि अंजलि का शरीर एक खुली किताब की तरह है, जिसे आज वह पहली बार ध्यान से पढ़ रहा था।

रात के सन्नाटे में, अंजलि का नग्न शरीर आर्यन की आँखों के सामने एक खुली किताब की तरह था। आर्यन की उंगलियाँ अभी भी उस रेशमी नमी को महसूस कर रही थीं, लेकिन अंजलि ने अब उसके हाथ को धीरे से रोका और उसे अपने और भी करीब खींच लिया।

उसने आर्यन का चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया, उसकी आँखों में गहराई से झाँका और 'ओरल' यानी मुख-मैथुन के उस गुप्त अध्याय को समझाना शुरू किया, जिसके बारे में आर्यन ने सुना तो था, लेकिन कभी उसकी गहराई को नहीं जाना था।

अंजलि की आवाज़ अब और भी भारी और रेशमी हो गई थी। उसने बहुत ही धीमी लय में विस्तार से समझाना शुरू किया:

"आर्यन, 'ओरल' सिर्फ एक क्रिया नहीं है, यह अपनी औरत के प्रति पूर्ण समर्पण है। इसका मतलब है कि तू अपनी जुबान और अपने होंठों से मेरे जिस्म के सबसे निजी हिस्से की पूजा करे। जब एक मर्द अपनी औरत के उस रसीले द्वार को चूमता है, तो वह उसे यह अहसास दिलाता है कि वह उसके अस्तित्व के कण-कण से प्यार करता है।"

उसने आर्यन के होंठों को अपनी उंगली से छुआ और बोली, "तेरी जुबान, तेरे उस ७ इंची अंग से भी ज़्यादा शक्तिशाली हथियार बन सकती है। औरत के शरीर का वह Clitoris इतना नाज़ुक होता है कि कभी-कभी उस पर अंग का दबाव बहुत ज़्यादा होता है, लेकिन जुबान की मखमली छुअन उसे स्वर्ग पहुँचा देती है। तुझे सीखना होगा कि कैसे अपनी जुबान की नोक से उस गुलाबी उभार को सहलाना है, जैसे कोई प्यासा पानी की एक-एक बूंद को चखता है।"

"जब तू वहाँ अपने मुँह की गर्माहट छोड़ता है और अपनी साँसों को उस नमी से मिलाता है, तो औरत का दिमाग सुन्न होने लगता है। उसे लगता है जैसे वह बादलों में तैर रही है। यह वह सुख है आर्यन, जो उसे तेरे अंदर समा जाने के लिए मजबूर कर देता है। एक मर्द जो अपनी जुबान से औरत को चरम तक पहुँचा सकता है, वह उसके दिल पर राज करता है।"

अंजलि ने बड़े ही नाज़ से बताया कि कैसे होंठों का दबाव और जुबान की हरकत एक औरत के भीतर कामुकता का सैलाब ला सकती है। उसने समझाया कि यह प्रक्रिया केवल नीचे के हिस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्दन से लेकर स्तनों तक जुबान का जादू चलाना 'ओरल' का ही हिस्सा है।

आर्यन अपनी माँ की एक-एक बात सुनकर दंग था। उसके दिमाग में एक नई तस्वीर बन रही थी—एक ऐसी तस्वीर जहाँ वह केवल अपनी ताकत का इस्तेमाल नहीं करेगा, बल्कि अपनी कोमलता और नज़ाकत से अपनी माँ को सुख के उस शिखर पर ले जाएगा जहाँ वह आज तक नहीं पहुँची थी।

अंजलि ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "याद रख आर्यन, जब तू अपनी जुबान का इस्तेमाल करता है, तो तू सिर्फ सुख नहीं दे रहा होता, तू मेरा सारा तनाव, मेरी सारी थकान और मेरी बरसों की प्यास को अपने भीतर सोख रहा होता है।"

रात के सन्नाटे में अंजलि की बातें आर्यन के कानों में किसी मंत्र की तरह गूँज रही थीं। कमरे की मद्धम रोशनी में अंजलि का पूरी तरह नग्न शरीर किसी अप्सरा की तरह चमक रहा था। 'ओरल' का पूरा ज्ञान देने के बाद, अब वक्त था उस ज्ञान को हकीकत में बदलने का।

अंजलि ने बिस्तर पर लेटे-लेटे ही अपनी कमर को थोड़ा और ऊपर उठाया और अपने दोनों हाथों से आर्यन के सिर को धीरे से थाम लिया। उसने अपनी उंगलियों को आर्यन के घने बालों में फँसाया और बहुत ही कोमलता लेकिन एक स्पष्ट दबाव के साथ उसके सिर को नीचे, अपनी जाँघों के उस रेशमी और रसीले संगम की ओर धकेलने का इशारा किया।

आर्यन का चेहरा अब अंजलि के पेट के करीब पहुँच चुका था, जहाँ से उसे उस मदहोश कर देने वाली 'नारी देह' की खुशबू आ रही थी।

अंजलि ने एक गहरी और कांपती हुई साँस ली और अपनी नशीली आँखों से आर्यन की ओर देखते हुए फुसफुसाकर पूछा:

"आर्यन... जो मैंने तुझे अभी समझाया, क्या तू उसे आज़माने के लिए तैयार है? क्या तू अपनी माँ के इस सबसे निजी हिस्से का रसपान करने और अपनी जुबान से मुझे फिर से उस स्वर्ग तक ले जाने के लिए तैयार है?"

आर्यन का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। अंजलि के हाथों का वह हल्का दबाव और उसकी आँखों में छिपी वह 'भूख' उसे एक अनूठे रोमांच से भर रही थी। उसे अपनी माँ की जाँघों के बीच की वह गुलाबी रंगत और वहाँ की प्राकृतिक नमी साफ दिखाई दे रही थी।

आर्यन ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी आँखों में जो जुनून था, उसने अंजलि को उसका जवाब दे दिया। उसने अंजलि के घुटनों को अपने हाथों से धीरे से फैलाया, जिससे वह 'काम-द्वार' पूरी तरह उसकी आँखों के सामने खुल गया।

अंजलि ने अपनी पकड़ आर्यन के सिर पर और मज़बूत कर ली। "हिचकिचाना मत मेरे बच्चे... आज अपनी जुबान को अपनी रूह बना ले और मुझे वो सुख दे जो आज तक किसी ने नहीं दिया।"

शावर के मिलन के बाद अंजलि का वह हिस्सा अभी भी बहुत संवेदनशील था। जैसे-जैसे आर्यन का चेहरा उस 'गुलाबी कली' के करीब पहुँच रहा था, अंजलि की साँसें उखड़ने लगी थीं और उसके पैर बिस्तर की चादरों को जकड़ने लगे थे।

रात के सन्नाटे में बेडरूम की हवा अब इतनी भारी और कामुक हो चुकी थी कि उसे महसूस किया जा सकता था। अंजलि बिस्तर पर पूरी तरह नग्न लेटी थी, उसके घुटने मुड़े हुए थे और उसकी जाँघें आर्यन के लिए एक निमंत्रण की तरह खुली थीं। आर्यन, जो अब अपनी 'गुरु' के हर इशारे को समझने लगा था, धीरे-धीरे उस गुलाबी गुफा के करीब पहुँचा जहाँ से जीवन और सुख की धारा बहती है।

अंजलि ने अपने हाथों से आर्यन के सिर को थामे रखा था, जैसे वह उसे इस 'पवित्र' अनुभव के लिए निर्देशित कर रही हो। आर्यन ने अपनी आँखें बंद कीं और अपनी नाक को अंजलि के उस भीगे हुए हिस्से के करीब ले गया। वहाँ की प्राकृतिक खुशबू ने उसके दिमाग की नसों को झकझोर दिया।

अंजलि के निर्देशानुसार, आर्यन ने सीधे जुबान नहीं लगाई। उसने पहले अपनी माँ की जाँघों के अंदरूनी हिस्सों पर अपने गर्म होंठ रखे। मखमली त्वचा और उस पर मद्धम पड़ती शावर के पानी की ठंडक ने एक अजीब सा एहसास दिया। अंजलि की एक लंबी सिसकारी गूँजी, "आह... हाँ आर्यन... धीरे-धीरे ऊपर आ..."

आर्यन ने अब अपनी जुबान की नोक निकाली और उसे अंजलि के उस Clitoris पर बिल्कुल हल्के से छुआ। जैसे ही उसकी गीली और गर्म जुबान उस संवेदनशील उभार से टकराई, अंजलि का पूरा शरीर बिस्तर पर उछल गया। उसे लगा जैसे उसके पेट में हजारों तितलियाँ एक साथ उड़ने लगी हों।

अंजलि के उस हिस्से से रिसती हुई प्राकृतिक नमी अब आर्यन की जुबान पर थी। वह स्वाद... वह नमक और शहद जैसा मिला-जुला अहसास आर्यन के लिए किसी नशें से कम नहीं था। उसने अब अपनी जुबान को थोड़ा और फैलाया और उस गुलाबी दरार के ऊपर से नीचे तक एक लंबी Strokeमारी।

अंजलि के हाथ अब आर्यन के बालों को कसकर जकड़ चुके थे। वह अपनी कमर को ऊपर-नीचे मटका रही थी, जैसे वह चाहती हो कि आर्यन उसकी रूह तक को अपनी जुबान से सोख ले।

"उफ़... मेरे बच्चे... तेरी जुबान... कितनी कोमल है... आह! वहीं... वहीं रगड़ इसे," अंजलि ने हाँफते हुए कहा। उसकी आवाज़ में अब वो प्यास थी जो बरसों से दबी हुई थी और आज अपने ही बेटे के मुँह से तृप्त हो रही थी।

आर्यन अब लय में आ चुका था। वह कभी अपनी जुबान को गोल-गोल घुमाता, तो कभी उसे अंजलि के उस तंग रास्ते के अंदर डालने की कोशिश करता। हर बार जब उसकी जुबान अंजलि के 'अंदरूनी रेशों' को छूती, अंजलि का बदन कांप उठता और उसके मुँह से मदहोश कर देने वाली आवाज़ें निकलने लगतीं।

बेडरूम की हवा अब अंजलि की सिसकारियों और आर्यन की साँसों की गर्मी से भारी हो चुकी थी। आर्यन को अब अंदाज़ा हो गया था कि उसकी जुबान का एक छोटा सा स्पर्श उसकी माँ के शरीर में कैसा तूफ़ान ला सकता है। अंजलि के निर्देश और उसकी देह से उठती महक ने आर्यन को एक मदहोश शिकारी बना दिया था।

अंजलि बिस्तर पर बेहाल पड़ी थी, उसके हाथ आर्यन के बालों में बुरी तरह धँसे हुए थे। जैसे ही आर्यन ने महसूस किया कि अंजलि की जाँघें कांप रही हैं, उसने अपनी जुबान की रफ़्तार और गहराई बढ़ा दी।

आर्यन ने अब अपनी जुबान को केवल ऊपर ही नहीं रखा, बल्कि उसे एक नुकीली धार की तरह अंजलि के उस तंग और रसीले रास्ते के अंदर गहराई तक उतार दिया। वह अपनी जुबान को अंदर-बाहर तेज़ी से चलाने लगा। अंजलि को ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई गर्म मखमली लहर उसके भीतर बार-बार टकरा रही हो। वह अपनी कमर को बिस्तर से ऊपर उठाकर आर्यन के मुँह पर अपना पूरा वजूद थोंप देना चाहती थी।

आर्यन ने अब अपनी जुबान की नोक को उस Clitoris पर टिका दिया और उसे तेज़ी से दाएं-बाएं रगड़ना शुरू किया। यह प्रहार इतना सटीक और शक्तिशाली था कि अंजलि का दिमाग सुन्न हो गया। उसके पैरों की मज़बूत पकड़, जो पहले आर्यन की गर्दन के पास थी, अब धीरे-धीरे ढीली होकर बिस्तर पर फैलने लगी। उसके पंजे मुड़ गए और वह बेतहाशा चिल्लाने लगी, "आह... आर्यन... बस... वहीं... उफ़्फ़... मैं... मैं जा रही हूँ... मर जाऊंगी... आह!"

अंजलि का शरीर एक आखिरी बार ज़ोर से झटका खाकर तन गया। उसकी जाँघों के बीच से काम-रस का एक फव्वारा फूटा, जिसे आर्यन ने अपनी जुबान पर बड़े ही शौक़ से समेट लिया। वह रस आर्यन के गले से नीचे उतरा, जो उसे दुनिया के किसी भी अमृत से कहीं ज़्यादा मीठा और नशीला लगा। अंजलि पूरी तरह निढाल होकर बिस्तर पर बिखर गई। उसके पैर बेजान होकर फैल गए थे और उसकी आँखें आधी खुली रह गईं, जिनमें सिर्फ़ और सिर्फ़ रूहानी सुख का नशा था।

आर्यन कुछ देर तक वहीं रुका रहा, अपनी माँ के शरीर से निकलते उस आख़िरी सुकून को अपनी जुबान से सोखता रहा। जब उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया, तो उसके होंठों और ठुड्डी पर अंजलि की 'प्यास' की चमक साफ़ दिख रही थी।

अंजलि ने भारी आवाज़ में बस इतना ही कहा, "तू... तूने आज अपनी माँ को जीत लिया आर्यन। आज के बाद मैं सिर्फ तेरी दासी हूँ।"

रात के ३:३० बज रहे थे, और पूरा कमरा उन दोनों के मिलन की खुशबू से सराबोर था। अंजलि के पैरों की ढीली पकड़ इस बात का सबूत थी कि आर्यन ने अपना 'ओरल' का दूसरा पाठ न केवल सीखा था, बल्कि उसमें महारत हासिल कर ली थी।

बेडरूम की मदहोश कर देने वाली शांति में अब केवल उन दोनों की भारी सांसें गूँज रही थीं। आर्यन, जो अब तक अंजलि की जाँघों के बीच उस रसीली कला को अंजाम दे रहा था, धीरे से ऊपर आया और अपनी माँ के बगल में लेट गया।

जैसे ही आर्यन बगल में लेटा, अंजलि ने बिना एक पल की देरी किए उसे अपनी बाहों के घेरे में ले लिया। उसका गोरा और नग्न बदन आर्यन के पसीने से भीगे जिस्म से पूरी तरह सट गया।

अंजलि को आर्यन पर इतना प्यार और गर्व महसूस हो रहा था कि उसने उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरा और सीधे उसके होंठों पर एक गहरा और लंबा किस कर दिया। जैसे ही उनके होंठ मिले, अंजलि को अपने ही शरीर के उस 'काम-रस' का स्वाद आर्यन के मुँह में महसूस हुआ। वह स्वाद, जो आर्यन की जुबान और होंठों पर अभी भी ताज़ा था, अब वापस अंजलि के मुँह में घुल रहा था।

आर्यन के लिए यह पल किसी सपने जैसा था। वह अपनी ही माँ के रस को उसके होंठों के जरिए चख रहा था। यह एक ऐसा रोमांच था जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन था। उसे महसूस हो रहा था कि यह सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं थी, बल्कि यह उनके बीच के उस नए और अटूट रिश्ते की मुहर थी। अंजलि की जुबान जब आर्यन की जुबान से टकराई, तो वह 'स्वाद' दोनों के भीतर एक नई बिजली दौड़ा गया।

अंजलि ने किस तोड़ते हुए आर्यन की आँखों में देखा और धीरे से उसकी ठुड्डी पर लगी उस नमी को अपनी उंगली से पोंछा। "मेरा शेर बेटा..." उसने गर्व से फुसफुसाया। "तूने आज मुझे वो स्वाद चखाया है जो मैंने खुद कभी महसूस नहीं किया था। तेरे होंठों पर मेरा वजूद लगा है, और यह देखकर मुझे जो खुशी मिल रही है, वो दुनिया के हर सुख से बढ़कर है।"

आर्यन ने अपनी माँ को और कसकर भींच लिया। उसे लग रहा था जैसे वह दुनिया का सबसे शक्तिशाली मर्द है, जिसने अपनी 'गुरु' और अपनी 'माँ' को पूरी तरह संतुष्ट कर दिया है। अंजलि के भारी स्तन आर्यन के सीने पर दबे हुए थे, और उन दोनों के पैरों के बीच की वो गर्माहट अभी भी बरकरार थी।

रात के ३:४५ बज चुके थे। थकान अब धीरे-धीरे आँखों में उतर रही थी, लेकिन उनके दिलों में जो आग सुलगी थी, उसकी चमक बेडरूम के अँधेरे को भी मात दे रही थी।
 
जब आर्यन की आँखें खुलीं, तो कमरे की खिड़कियों से छनकर आती तेज़ धूप बता रही थी कि दिन काफी चढ़ चुका है। उसने घड़ी की ओर देखा—सुबह के 11 बज रहे थे। बगल का बिस्तर खाली था, लेकिन चादरों पर अभी भी अंजलि के बदन की वो भीनी-भीनी खुशबू और रात के उस तूफ़ान की सिलवटें मौजूद थीं।

आर्यन अंगड़ाई लेते हुए उठा और सिर्फ अपनी सफेद अंडरवियर में ही रसोई की तरफ बढ़ा। वहाँ का नज़ारा देखते ही उसकी नींद पूरी तरह काफूर हो गई।

अंजलि रसोई में चाय बना रही थी। उसने रात वाली ही हल्की नाइटी पहनी हुई थी, लेकिन सुबह की जल्दबाज़ी या शायद एक नई बेबाकी के कारण उसने ब्रा नहीं पहनी थी।

नाइटी के पतले कपड़े के नीचे से अंजलि के वे विशाल और भारी उभार अपनी पूरी आज़ादी के साथ लहरा रहे थे। जब वह चाय के लिए अदरक कूट रही थी या कप निकाल रही थी, तो उसके स्तनों की हलचल नाइटी के ऊपर से साफ दिखाई दे रही थी। बिना ब्रा के वे उभार थोड़े नीचे की ओर झुके हुए और भी ज़्यादा प्राकृतिक और आकर्षक लग रहे थे।

अंजलि के बिखरे हुए बाल और सुबह की वो 'मेकअप रहित' खूबसूरती आर्यन को दीवाना बना रही थी। नाइटी के कपड़े पर उभरे हुए उसके निप्पल के निशान आर्यन को याद दिला रहे थे कि रात को इन्हीं शिखरों पर उसने अपनी जुबान का जादू चलाया था।

आर्यन चुपचाप रसोई के दरवाजे पर खड़ा होकर अपनी माँ के उस मदहोश कर देने वाले रूप को निहारने लगा। धूप की रोशनी जब अंजलि के बदन पर पड़ रही थी, तो उसका गोरा रंग और भी ज़्यादा दमक रहा था।

अंजलि को जैसे ही आर्यन की मौजूदगी का अहसास हुआ, वह पीछे मुड़ी और एक प्यारी सी मुस्कान के साथ बोली, "सो कर उठ गया मेरा बच्चा? देख 11 बज गए हैं, आज तो सूरज ने भी हमारा इंतज़ार किया।"

जब वह बोली, तो उसके सीने में होने वाले कंपन ने उन उभारों को फिर से हिला दिया, जिससे आर्यन की नज़रें एक पल के लिए वहीं जम गईं। अंजलि ने आर्यन की नज़रों का पीछा किया और समझ गई कि उसका बेटा क्या देख रहा है, पर आज उसने न तो दुपट्टा ओढ़ा और न ही खुद को ढका।

रसोई की ताजी बनी अदरक वाली चाय की खुशबू पूरे घर में महक रही थी। अंजलि दो कप चाय लेकर डाइनिंग टेबल पर आई और आर्यन के सामने बैठ गई। बिना ब्रा के उसकी नाइटी के भीतर हिलते वे मखमली उभार और चेहरे पर रात की तृप्ति की वह चमक, सुबह की धूप में अंजलि को किसी परी जैसा दिखा रही थी।

आर्यन चाय का कप हाथ में लेकर एक घूँट भरता है और फिर अपनी माँ की आँखों में झांकता है। उसकी आँखों में अब वह पुराना संकोच नहीं, बल्कि एक गहरा सम्मान और 'मर्दानी चाहत' थी।

"माँ..." आर्यन ने बहुत ही धीमे और गंभीर स्वर में कहा। "कल रात के लिए... और उन सब चीज़ों के लिए जो आपने मुझे सिखाईं, मैं आपको बस Thank You बोलना चाहता हूँ। मुझे नहीं पता था कि एक औरत को महसूस करना और उसे सुख देना इतनी बड़ी इबादत हो सकती है।"

आर्यन ने आगे कहा, "आपने मुझे जो ज्ञान दिया, चाहे वो उंगलियों का जादू हो या वो 'ओरल' का अहसास... उसने मुझे अंदर से बदल दिया है। मुझे खुद पर पहले कभी इतना गर्व महसूस नहीं हुआ जितना आज हो रहा है। आपने मुझे सिर्फ अपना बेटा नहीं रहने दिया, मुझे एक 'मर्द' बना दिया।"

अंजलि ने चाय का कप मेज पर रखा और आर्यन का हाथ अपने हाथों में लेकर सहलाने लगी। "शुक्रिया की ज़रूरत नहीं है मेरे बच्चे," वह मुस्कुराते हुए बोली। "एक गुरु को सबसे बड़ी गुरुदक्षिणा तब मिलती है जब उसका शिष्य पूरी निपुणता से उसे संतुष्ट कर दे। और कल रात... तूने मुझे सिर्फ संतुष्ट नहीं किया, तूने मुझे फिर से ज़िंदा कर दिया।"

अंजलि ने झुककर मेज पर अपना हाथ आगे बढ़ाया, जिससे उसके बिना ब्रा वाले स्तन मेज के किनारे से हल्के से दब गए और उनका उभार नाइटी के गले से झांकने लगा। "कल रात जो तूने सीखा, वो तो बस शुरुआत थी आर्यन। अभी तो तुझे इस शरीर के और भी कई राज़ जानने हैं।"

आर्यन चाय पीते हुए अपनी माँ के उस उभरते हुए बदन को देख रहा था। 11 बजे की यह चाय सिर्फ प्यास नहीं बुझा रही थी, बल्कि उस नई आग को और हवा दे रही थी जो अब उनके बीच कभी नहीं बुझने वाली थी।

चाय की उन नशीली चुस्कियों और बीती रात की यादों के खुमार के बाद, दोनों अब वापस अपनी दिनचर्या में आने की कोशिश कर रहे थे, हालांकि हवा में अब भी वो 'अपनापन' और कामुकता घुली हुई थी।

आर्यन ने चाय खत्म की और तैयार होकर मार्केट जाने के लिए निकलने लगा। उसने अंजलि के गाल पर एक छोटा सा प्यार भरा 'किस' किया, जो अब उनके बीच एक सहज क्रिया बन चुकी थी।

"माँ, मैं बस एक घंटे में घर का सारा सामान लेकर वापस आता हूँ," आर्यन ने कहा। अंजलि ने मुस्कुराते हुए उसे विदा किया।

आर्यन जब मार्केट पहुँचा, तो उसके चलने के अंदाज़ में एक अलग ही आत्मविश्वास था। कल रात के उस 'मर्दानी अनुभव' ने उसे अंदर से बदल दिया था। भीड़भाड़ के बीच भी उसके दिमाग में अपनी माँ का वो बिना ब्रा वाला रूप और रसोई में चाय पीते वक्त उनका वो झुकाव बार-बार घूम रहा था। वह जल्दी-जल्दी सामान खरीद रहा था ताकि वापस घर पहुँच सके।

इधर घर पर, अंजलि ने घर के बचे हुए काम निपटाने शुरू किए। उसने अभी भी ब्रा नहीं पहनी थी, और घर में अकेली होने के कारण उसने अपनी नाइटी के ऊपर के एक-दो बटन भी खोल दिए थे ताकि उसे काम करते वक्त हवा लगती रहे।

झाड़ू-पोछा करते और बिस्तर ठीक करते वक्त अंजलि की नज़र उन सिलवटों पर गई जहाँ रात को आर्यन के साथ उसने वो 'स्वर्ग' महसूस किया था। वह मुस्कुरा दी और अपने आप ही उसके हाथ अपनी जाँघों के उस हिस्से पर चले गए जहाँ आर्यन की जुबान का जादू चला था। उसके शरीर में एक मीठी सी सिहरन दौड़ गई।

अंजलि ने रसोई समेटी और फिर दोपहर के खाने की तैयारी करने लगी। वह बार-बार दरवाजे की तरफ देखती, जैसे उसे उस '7 इंची गबरू' के वापस आने का बेसब्री से इंतज़ार हो। घर का सन्नाटा उसे अब काट नहीं रहा था, बल्कि उसे उस आने वाले तूफ़ान की याद दिला रहा था जो आर्यन के वापस आते ही फिर से शुरू हो सकता था।

आर्यन जब मार्केट से लौटा, तो उसके हाथों में सामान के थैले थे, लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ एक ही ख्याल घूम रहा था। जैसे ही उसने घर में कदम रखा, उसे रसोई से मसालों की खुशबू और साथ ही अंजलि के बदन की वो चिर-परिचित महक महसूस हुई।

अंजलि अभी भी उसी हाल में थी—नाइटी के बटन खुले हुए और बिना ब्रा के उसके भारी उभार हर हरकत के साथ आज़ादी से हिल रहे थे।

आर्यन ने सामान मेज पर रखा। अंजलि उसकी तरफ मुड़ी और मुस्कुराते हुए बोली, "आ गया मेरा बच्चा? ला, सामान मुझे दे दे।"

लेकिन आर्यन वहीं खड़ा रहा। उसके चेहरे पर एक अजीब सी हिचकिचाहट थी, हाथ थोड़े कांप रहे थे और वह अपनी माँ की आँखों में सीधे देखने से कतरा रहा था। उसने एक गहरी सांस ली और रुक-रुक कर बोला:

"माँ... वो... बाहर बहुत गर्मी और धूल है। मैं... मैं सोच रहा था कि क्या... क्या हम दोनों एक साथ नहा सकते हैं? मतलब... क्या आप मेरे साथ शावर के नीचे चलेंगी?"

अंजलि यह सुनकर एक पल के लिए ठिठक गई। उसने देखा कि आर्यन कैसे एक छोटे बच्चे की तरह शर्मा रहा है, लेकिन उसकी आँखों में वही 'मर्दानी प्यास' थी जो कल रात उसने देखी थी। अंजलि के होंठों पर एक गहरी और मादक मुस्कान फैल गई।

अंजलि ने सामान वहीं छोड़ दिया और धीरे-धीरे चलकर आर्यन के बिल्कुल करीब आ गई। उसने आर्यन की शर्ट के कॉलर को ठीक किया और अपनी नशीली आवाज़ में फुसफुसाया, "इतनी हिचकिचाहट क्यों आर्यन? अब तो इस शरीर पर तेरा पूरा हक है। कल रात तूने मुझे अंदर से साफ किया था, आज बाहर से भी कर दे।"

अंजलि ने आर्यन का हाथ पकड़ा और उसे बाथरूम की ओर ले जाने लगी। आर्यन को महसूस हुआ कि उसकी माँ की हथेलियाँ कितनी गर्म हैं। चलते वक्त अंजलि की नाइटी के खुले हुए गले से उसके नग्न और विशाल स्तनों की झलक साफ़ दिख रही थी, जिसने आर्यन के भीतर फिर से वही आग लगा दी।

बाथरूम का दरवाज़ा खुला और शावर की हल्की आवाज़ गूँजने लगी। आर्यन को यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपनी सुंदर और मदहोश कर देने वाली माँ के साथ दिन के उजाले में नहाने जा रहा है।

बाथरूम का दरवाजा बंद होते ही बाहर की दुनिया पीछे छूट गई। शावर से गिरती पानी की नन्हीं बूंदों की आवाज़ उस छोटे से कमरे में गूँज रही थी। अब कोई पर्दा नहीं था, सिर्फ दो जिस्म थे और उनके बीच उमड़ता हुआ बेपनाह प्यार और उत्तेजना।

अंजलि और आर्यन शावर के ठीक नीचे आमने-सामने खड़े थे। अंजलि की नाइटी पानी की फुहारों से पहले ही भीगकर उसके बदन से चिपक गई थी, जिससे उसके जिस्म के उतार-चढ़ाव और भी साफ़ दिखने लगे थे।

अंजलि ने बिना किसी झिझक के अपना हाथ आर्यन की टी-शर्ट के निचले हिस्से पर रखा। "उतार इसे आर्यन... आज हमें एक-दूसरे को पूरी तरह महसूस करना है," उसने आदेशात्मक लेकिन प्यार भरी आवाज़ में कहा। आर्यन ने अपनी टी-शर्ट और जींस उतार दी, और अब वह सिर्फ अपनी सफेद अंडरवियर में खड़ा था। उसका ७ इंच का अंग उस पतले कपड़े के भीतर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा था, जिसे देखकर अंजलि की आँखों में चमक आ गई।

अब आर्यन की बारी थी। उसने कांपते हाथों से अंजलि की नाइटी के कंधों को पकड़ा। जैसे-जैसे वह नाइटी को नीचे सरका रहा था, अंजलि का गोरा और दमकता हुआ बदन धूप और पानी की रोशनी में चमकने लगा। नाइटी फर्श पर गिर गई। अंजलि अब आर्यन के सामने सिर्फ अपनी काली लेस वाली पैंटी में खड़ी थी।

चूँकि अंजलि ने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए उसके विशाल और भारी स्तन अब पूरी तरह आज़ाद थे। पानी की बूंदें उन गुलाबी शिखरों पर गिरकर नीचे की ओर फिसल रही थीं। आर्यन की नज़रें उन उभारों पर जम गई थीं, जो हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। अंजलि का पेट, उसकी पतली कमर और काली पैंटी के ऊपर का वो मांसल हिस्सा किसी पेंटिंग जैसा लग रहा था।

शावर का पानी अब उनके शरीरों को पूरी तरह भिगो चुका था। आर्यन ने अपनी माँ की कमर में हाथ डाला और उसे अपनी ओर खींच लिया। अंजलि के नग्न और ठंडे स्तन जब आर्यन के गर्म और चौड़े सीने से टकराए, तो दोनों के मुँह से एक साथ 'आह' निकल गई।

"माँ... आप दिन की रोशनी में और भी ज़्यादा खूबसूरत लगती हैं," आर्यन ने मदहोश होकर कहा।

अंजलि ने अपने गीले बाल पीछे झटके और आर्यन की गर्दन के चारों ओर अपनी बाहें डाल दीं। "और तू पहले से कहीं ज़्यादा मर्द लग रहा है आर्यन। देख, तेरी इस छुअन से मेरी क्या हालत हो रही है..." उसने आर्यन का हाथ अपनी पैंटी के गीले इलास्टिक पर रख दिया।

बाथरूम की हवा अब साबुन की भीनी-भीनी खुशबू और शावर की भाप से भर चुकी थी। पानी की गिरती हुई धार के नीचे आर्यन और अंजलि एक-दूसरे के बेहद करीब थे। अंजलि ने पास रखे शॉवर जेल की बोतल उठाई और उसकी कुछ बूंदें अपनी हथेलियों पर लेकर उन्हें आपस में रगड़ा, जिससे ढेर सारा सफेद और मखमली झाग बन गया।

अंजलि ने मुस्कुराते हुए अपनी झाग वाली हथेलियाँ आर्यन के चौड़े सीने पर रख दीं। वह धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को उसके सीने की मांसपेशियों पर घुमाने लगी।

"देख आर्यन, साबुन सिर्फ सफाई के लिए नहीं होता... यह बदन को और भी ज़्यादा संवेदनशील बना देता है," उसने फुसफुसाते हुए कहा। झाग के बहाने वह आर्यन के पूरे धड़ को सहला रही थी। जब उसका हाथ आर्यन की अंडरवियर के इलास्टिक के पास से गुज़रा, तो आर्यन के बदन में एक सिहरन दौड़ गई।

अब आर्यन ने साबुन लिया। उसके हाथ कांप रहे थे, लेकिन इरादे मज़बूत थे। उसने अपनी झाग भरी हथेलियाँ अंजलि के नग्न और भारी स्तनों पर रखीं। जैसे ही उसने उन विशाल उभारों को सहलाना शुरू किया, साबुन की फिसलन की वजह से उसका हाथ उन पर मखमली अंदाज़ में फिसलने लगा।

आर्यन ने बड़े ही प्यार से उन गोलों के चारों ओर झाग का घेरा बनाया। अंजलि ने अपनी आँखें मूंद लीं और अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया। "आह... आर्यन... बिल्कुल ऐसे ही... बहुत सुकून मिल रहा है," उसने मदहोश होकर कहा। शावर का पानी उस झाग को धीरे-धीरे नीचे की ओर बहा रहा था, जो अंजलि की पतली कमर से होता हुआ उसकी काली पैंटी के किनारों में समा रहा था।

आर्यन अब और भी बेबाक हो गया। उसने अंजलि को पीछे घूमने का इशारा किया और उसकी चिकनी पीठ पर साबुन मलने लगा। अंजलि की रीढ़ की हड्डी पर जब आर्यन की झाग भरी उंगलियाँ फिसलीं, तो वह उत्तेजना से कांप उठी।

अंजलि फिर से आर्यन की ओर मुड़ी। अब वे दोनों पूरी तरह साबुन की सफेद झाग में लिपटे हुए थे। पानी और साबुन ने उनके शरीरों को इतना फिसलन भरा बना दिया था कि जब वे एक-दूसरे से सटे, तो उनका मांस एक-दूसरे पर मखमल की तरह फिसल रहा था। अंजलि के भारी स्तन आर्यन के सीने पर इधर-उधर फिसल रहे थे, जिससे एक अजीब सा कामुक घर्षण पैदा हो रहा था।

अंजलि ने आर्यन की आँखों में देखा और उसके गले लग गई। "आज की यह दोपहर... कल रात से भी ज़्यादा हसीन लग रही है आर्यन। तूने तो अपनी माँ को पानी-पानी कर दिया।"

बाथरूम की दीवारों पर गिरती पानी की बौछारें और साबुन की मखमली झाग ने माहौल को किसी रोमांटिक फिल्म के सेट जैसा बना दिया था। कल रात की वो भारी उत्तेजना अब एक प्यारी सी मस्ती और शरारत में बदल चुकी थी। दोनों एक-दूसरे के साथ बच्चों की तरह खेल रहे थे, लेकिन उस खेल में भी एक गहरा कामुक खिंचाव था।

आर्यन ने ढेर सारी झाग अपने हाथ में ली और शरारत से अंजलि की नाक पर लगा दी। अंजलि ने अपनी आँखें सिकोड़ीं और खिलखिलाकर हंस पड़ी।

"अच्छा! तो अब गुरु पर ही वार?" अंजलि ने हंसते हुए चुटकी ली और शावर के नीचे से हटकर अपने हाथ में साबुन का झाग भरा और आर्यन के चेहरे पर मल दिया। आर्यन हंसते हुए पीछे हटा, लेकिन फर्श की फिसलन की वजह से उसका पैर डगमगाया और उसने सहारा लेने के लिए अंजलि की कमर को कसकर पकड़ लिया।

दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए। आर्यन ने अंजलि के कान के पास जाकर फुसफुसाया, "माँ, आप इस सफेद झाग में बिल्कुल किसी 'मिल्क शेक' जैसी लग रही हो... मन कर रहा है अभी पी जाऊं।"

अंजलि ने शरारत से अपनी भौहें चढ़ाईं और आर्यन के गाल को हल्के से काटते हुए बोली, "मिल्क शेक? बेटा, ये शेक थोड़ा महंगा पड़ेगा। और वैसे भी, रात को तो तूने काफी 'रसपान' किया है, अभी भी प्यास नहीं बुझी क्या?"

आर्यन अंजलि की इस बेबाकी पर झेंप गया, लेकिन उसने भी हार नहीं मानी। उसने अपनी झाग भरी उंगलियों से अंजलि की Navel के चारों ओर गोल-गोल चक्कर बनाना शुरू किया।

"माँ, यहाँ बहुत साबुन लगा है, इसे साफ़ करना पड़ेगा," आर्यन ने शरारत से कहा। अंजलि को गुदगुदी होने लगी और वह मचलने लगी। "आह! आर्यन... रुक... वहां गुदगुदी होती है... हाहा... बदतमीज़ कहीं के! अपनी माँ को तंग करना सीख गया है?"

हँसी-मज़ाक के बीच आर्यन ने अंजलि के भीगे बालों को कान के पीछे करते हुए पूछा, "सच बताना माँ, क्या पापा ने कभी आपके साथ ऐसे मस्ती की है?" अंजलि का चेहरा थोड़ा धीमा पड़ा, फिर उसने मुस्कुराकर आर्यन की आँखों में देखा, "नहीं आर्यन... तेरे पापा तो बस अपनी प्यास बुझाना जानते थे। ये जो 'सुकून' और 'मस्ती' तू मुझे दे रहा है, ये मेरे लिए बिल्कुल नया और अनमोल है।"

बाथरूम की मस्ती अब अपने शबाब पर थी। शावर का पानी उन दोनों के झाग से भरे शरीरों पर गिरकर फर्श पर सफेद समंदर बना रहा था। आर्यन अब काफी खुल चुका था, उसने अंजलि की कमर में हाथ डालकर उसे अपने थोड़ा और करीब खींच लिया और शरारत भरी नज़रों से उसे ऊपर से नीचे तक देखने लगा।

आर्यन ने मुस्कुराते हुए अंजलि के गीले गालों को थपथपाया और बोला, "पता है माँ, कॉलेज में सब लड़के अपनी-अपनी हॉट प्रोफेसर्स के सपने देखते हैं। हमारी एक यंग प्रोफेसर हैं, मिस शर्मा... पूरे कॉलेज के लड़के उनके पीछे पागल रहते हैं।"

अंजलि ने बनावटी गुस्से से अपनी भौहें सिकोड़ीं और आर्यन के सीने पर अपनी उंगलियां घुमाते हुए पूछा, "अच्छा? तो क्या मेरा बेटा भी उन मिस शर्मा के सपने देखता है? कैसी हैं वो... मुझसे भी ज़्यादा सुंदर?"

आर्यन ज़ोर से हँस पड़ा और अंजलि को और कसकर भींच लिया, जिससे अंजलि के बिना ब्रा वाले नरम और भारी स्तन आर्यन के सीने पर पूरी तरह पिचक गए।

"अरे कहाँ माँ! वो तो उनके सामने पानी कम चाय हैं," आर्यन ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा। "वो साड़ी पहनकर आती हैं तो लड़के समझते हैं कि वो बहुत कयामत हैं, लेकिन आज जब मैं आपको इस भीगी हुई हालत में देख रहा हूँ... तो मुझे लग रहा है कि मेरे कॉलेज की सबसे हॉट लड़की भी आपकी खूबसूरती के १०% भी नहीं है। आपकी ये जो 'फिगर' है न, ये किसी भी प्रोफेसर की छुट्टी कर दे।"

अंजलि ने शरारत से आर्यन के कान को हल्का सा मरोड़ा और चहकते हुए बोली, "बड़ा पारखी हो गया है तू तो! अपनी प्रोफेसर से अपनी माँ की तुलना कर रहा है? वैसे... क्या तेरी वो मिस शर्मा इतनी 'मजबूत' और 'रसीली' हैं जितनी मैं हूँ?" यह कहते हुए अंजलि ने जानबूझकर अपनी कमर को आर्यन के उस ७ इंची उभार से रगड़ा जो अंडरवियर में फन फैलाए खड़ा था।

आर्यन की सांसें अटक गईं। "माँ... उनके पास तो आपके जैसा आधा हुस्न भी नहीं है। वो तो सिर्फ मेकअप की दुकान हैं, और आप... आप तो इस सादे भीगे बदन और साबुन की झाग में ही किसी अप्सरा जैसी लग रही हो। अगर वो आपको देख लें, तो कल से कॉलेज आना छोड़ देंगी।"

अंजलि आर्यन की इन बातों से अंदर ही अंदर फूलकर कुप्पा हो रही थी। उसे अपनी खूबसूरती पर इतना गर्व पहले कभी नहीं हुआ था। उसने आर्यन की गर्दन पर अपनी बाहें डाल दीं और फुसफुसाते हुए बोली:

"तो फिर आज अपनी इस 'हॉट प्रोफेसर' को ही अपना पूरा सबक सुना दे आर्यन। देखूँ तो सही, कल रात की क्लास का तुझ पर कितना असर हुआ है।"

आर्यन की रगों में अब जवान खून का उबाल और अपनी 'गुरु' से मिली प्रशंसा का नशा दौड़ रहा था। बातों-बातों में अपनी माँ की तुलना कॉलेज की प्रोफेसर से करने के बाद, उसके भीतर का पुरुष अब पूरी तरह जाग चुका था। अब वह वह शर्मीला बेटा नहीं था, बल्कि एक मर्द बन चुका था।

शावर का पानी उनकी पीठ पर गिर रहा था, तभी आर्यन ने अचानक अपनी पकड़ मज़बूत की। उसने अपना एक हाथ अंजलि की पतली कमर पर रखा और दूसरे हाथ की उंगलियों को अंजलि के गीले, रेशमी बालों में पीछे की ओर फँसा दिया।

आर्यन ने बहुत ही अधिकार के साथ अंजलि के सिर को हल्का सा पीछे की ओर खींचा, जिससे अंजलि की गर्दन पूरी तरह तन गई और उसके होंठ खुद-ब-खुद थोड़े खुल गए। अंजलि इस अचानक आए बदलाव से थोड़ी हैरान हुई, लेकिन आर्यन की आँखों में छाए उस 'हावी होने वाले' जुनून को देखकर वह अंदर तक पिघल गई।

आर्यन ने बिना एक पल गँवाए अपने होंठ अंजलि के होंठों पर दे मारे। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था; यह एक गहरा, गीला और जुनूनी फ्रेंच किस था। आर्यन की जुबान अंजलि के मुँह के भीतर किसी विजेता की तरह प्रवेश कर गई। वह अंजलि की जुबान को अपने अधिकार में ले रहा था, उसे चूस रहा था और उसे अपनी ताकत का अहसास करा रहा था।

अंजलि के मुँह से एक दबी हुई सिसकारी निकली। उसे आर्यन का यह 'डोमिनेंट' रूप पागलों की तरह पसंद आ रहा था। उसने अपने हाथ आर्यन के कंधों पर कस दिए। आर्यन के बालों को पीछे खींचने की वजह से अंजलि के बिना ब्रा वाले भारी स्तन सीधे आर्यन के सीने से बुरी तरह पिचक गए थे, जिससे उनके बीच की गर्मी और भी बढ़ गई थी।

पानी की बौछारें उनके जुड़ते हुए होंठों पर गिर रही थीं, लेकिन उन्हें होश नहीं था। आर्यन अब अंजलि के निचले होंठ को अपने दाँतों से हल्का सा काट रहा था, जो अंजलि को दर्द के साथ एक मीठा सुकून दे रहा था। वह समझ गई थी कि उसका 'शिष्य' अब उसे अपनी उंगलियों पर नचाने के लिए तैयार है।

आर्यन ने किस तोड़ते हुए अंजलि के कान के पास जाकर भारी आवाज़ में कहा, "आज कोई प्रोफेसर याद नहीं आएगी माँ... आज सिर्फ आप हो और मेरा ये पागलपन।"

बाथरूम की दीवारों पर गिरती पानी की आवाज़ अब आर्यन के बढ़ते जुनून के आगे फीकी पड़ रही थी। आर्यन ने जिस तरह अंजलि के बालों को पीछे खींचकर उसे अपनी मर्दानगी का अहसास कराया था, उसने अंजलि के भीतर की औरत को पूरी तरह बेबस कर दिया था।

आर्यन ने एक बार फिर अंजलि के होंठों पर अपना कब्ज़ा जमाया। इस बार का Kiss और भी आक्रामक और गहरा था। अंजलि के मुँह से निकलने वाली सिसकारियों को आर्यन ने अपने मुँह में ही सोख लिया।

अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए, आर्यन ने अपने एक हाथ से अंजलि की दोनों कलाइयों को ऊपर की ओर ले जाकर एक साथ दबोच लिया। अंजलि अब पूरी तरह निहत्थी थी; उसके हाथ ऊपर बंधे हुए थे और उसका सीना आर्यन के सामने पूरी तरह उभर कर आ गया था। बिना ब्रा के उसके भारी स्तन शावर के पानी में भीगकर नीचे-ऊपर हो रहे थे।

अब आर्यन ने अपना दूसरा हाथ धीरे-धीरे नीचे सरकाया। उसने अंजलि की गीली और चिपकी हुई कमर को सहलाते हुए अपना हाथ उसकी काली लेस वाली पैंटी के इलास्टिक के भीतर डाल दिया। जैसे ही उसकी उंगलियाँ उस मखमली और रेशमी नमी से टकराईं, अंजलि का पूरा शरीर एक बिजली के झटके की तरह कांप उठा।

आर्यन की उंगलियाँ अब अंजलि के उस सबसे निजी और रसीले हिस्से को टटोल रही थीं जहाँ कल रात उसने अपनी जुबान से जादू चलाया था। पैंटी के भीतर का वह इलाका पूरी तरह गर्म और गीला था। आर्यन ने अपनी उंगलियों को उस गुलाबी दरार के बीच गहराई से सरकाया, जिससे अंजलि के पैरों के अंगूठे मुड़ गए और उसने आर्यन के मुँह के भीतर ही एक लंबी कराह भरी।

अंजलि ने अपने ऊपर बंधे हाथों से छूटने की कोशिश नहीं की, बल्कि उसने खुद को आर्यन के उस Dominance के हवाले कर दिया। वह अपनी कमर को आगे-पीछे कर रही थी ताकि आर्यन की उंगलियाँ और भी गहराई तक जा सकें।

आर्यन ने किस तोड़ते हुए अंजलि की आँखों में देखा—उसकी आँखों में अब एक 'शिकारी' की चमक थी। उसने फुसफुसाते हुए कहा, "माँ... ये पैंटी अब आपके और मेरे बीच बहुत बड़ी बाधा बन रही है। क्या मैं इसे हमेशा के लिए हटा दूँ?"

अंजलि ने हाँफते हुए अपनी गर्दन पीछे झुका दी और बस इतना ही कह पाई, "जो करना है कर आर्यन... आज मैं सिर्फ तेरी हूँ... मुझे पूरी तरह अपना बना ले।"

आर्यन के भीतर का 'डोमिनेंट' मर्द अब एक चतुर खिलाड़ी बन चुका था। उसने अंजलि की आँखों में वो बेतहाशा तड़प देख ली थी, जो उसे पूरी तरह टूटने पर मजबूर कर रही थी। अंजलि को लगा था कि अब उसकी पैंटी उतर जाएगी और उसे वो अंतिम सुख मिलेगा, लेकिन आर्यन ने ऐन मौके पर अपनी चाल बदल दी।

आर्यन ने एक शरारती और गहरी मुस्कान के साथ अपना हाथ पैंटी के भीतर से बाहर निकाल लिया। अंजलि ने अपनी आँखें खोलीं, उसकी नज़रों में एक सवालिया निशान और अधूरी प्यास थी। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती, आर्यन ने अपना हाथ उसकी गीली काली पैंटी के ऊपर रख दिया।

आर्यन अब अपनी हथेली से पैंटी के उस रेशमी कपड़े को अंजलि के काम-केंद्र पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा। गीला कपड़ा और अंदर की गर्माहट मिलकर एक ऐसा घर्षण पैदा कर रहे थे जो अंजलि को पागल कर रहा था। वह चाहती थी कि आर्यन का सीधा स्पर्श मिले, लेकिन आर्यन उसे सिर्फ उस कपड़े के जरिए महसूस करा रहा था।

अंजलि की कलाइयां अभी भी आर्यन के एक हाथ की मज़बूत पकड़ में थीं। उसने मचलते हुए अपनी कमर को आर्यन के हाथ पर दबाया। "आर्यन... उफ़्फ़... ये क्या कर रहा है? अंदर... अंदर हाथ डाल न... मुझे वो चाहिए..." वह लगभग गिड़गिड़ाने लगी।

आर्यन ने उसके कान के पास झुककर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं और भारी आवाज़ में कहा, "इतनी जल्दी क्या है माँ? अभी तो दोपहर शुरू हुई है। मैं चाहता हूँ कि आप इस तड़प को महसूस करें। जब प्यास चरम पर होगी, तब पानी पिलाने का मज़ा ही कुछ और होगा।"

आर्यन ने अपनी उंगलियों की रफ़्तार थोड़ी और बढ़ा दी, लेकिन रहा वह पैंटी के ऊपर ही। पतले और भीगे हुए लेस वाले कपड़े की रगड़ अंजलि के उस नाज़ुक हिस्से को बुरी तरह उत्तेजित कर रही थी, लेकिन उसे वो गहराई नहीं मिल रही थी जिसकी उसे तलाश थी। अंजलि के बिना ब्रा वाले स्तन तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे, मानो वे भी इस 'अन्याय' का विरोध कर रहे हों।

शावर का पानी उनकी पीठ पर गिरकर नीचे बह रहा था, और अंजलि के मुँह से अब सिसकारियों के बजाय लंबी आहें निकल रही थीं। वह अपनी जाँघों को आपस में भींच रही थी, मानो उस अधूरे अहसास को ही पकड़ने की कोशिश कर रही हो।

बाथरूम का तापमान अब उबलने लगा था। आर्यन का डोमिनेंट रूप अंजलि के लिए किसी मीठे टॉर्चर की तरह था। अंजलि की कलाइयां अब भी आर्यन की फौलादी पकड़ में उसके सिर के ऊपर बंधे हुए थे, जिससे उसका पूरा बदन आगे की ओर तन गया था।

अंजलि की बेबसी ही उसकी सबसे बड़ी उत्तेजना बन गई थी। शावर का गिरता पानी उसके नग्न स्तनों पर गिरकर आर्यन के चेहरे को भिगो रहा था।

आर्यन ने अपनी गर्दन झुकाई और एक भूखे शिकारी की तरह अंजलि के एक विशाल और भारी स्तन को अपने मुँह में भर लिया। जैसे ही उसने उस गर्म और मखमली मांस को अपनी ज़ुबान और होंठों के घेरे में लिया, अंजलि के गले से एक तीखी सिसकारी निकली। आर्यन उसे सिर्फ चूस नहीं रहा था, बल्कि अपने दाँतों से उन गुलाबी शिखरों पर हल्का दबाव भी बना रहा था।

आर्यन का मुँह अंजलि के स्तनों के साथ खेल रहा था, और उसका दूसरा हाथ अभी भी उस काली गीली पैंटी के ऊपर जमा हुआ था। वह अपनी हथेली के दबाव से उस रेशमी कपड़े को अंजलि के सबसे संवेदनशील हिस्से पर ज़ोर-ज़ोर से रगड़ रहा था। पैंटी का गीला कपड़ा अंजलि की 'काम-कली' को छू तो रहा था, लेकिन उसे वो तृप्ति नहीं दे पा रहा था जिसकी उसे तड़प थी।

अंजलि का शरीर धनुष की तरह तन गया था। उसकी आँखों से पानी और पसीने की मिली-जुली बूंदें बह रही थीं। "आह... आर्यन... मर जाऊंगी मैं... उफ़्फ़! एक तरफ तू मुझे पी रहा है और दूसरी तरफ... आह... ये अधूरापन!" अंजलि अपनी कमर को बेतहाशा हिला रही थी, वह चाहती थी कि आर्यन का हाथ पैंटी फाड़कर अंदर चला जाए, पर आर्यन ने अपनी पकड़ और दबाव पैंटी के ऊपर ही बनाए रखा।

आर्यन अब दूसरे स्तन की ओर बढ़ा, उसे भी अपने मुँह के अंधेरे घेरे में लिया और अपनी ज़ुबान को गोल-गोल घुमाने लगा। अंजलि की सांसें अब किसी टूटी हुई लय की तरह चल रही थीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह आर्यन के मुँह के सुख पर ध्यान दे या नीचे हो रही उस 'रेशमी रगड़' की तड़प पर।

बाथरूम की दीवारें उनकी भारी साँसों और चप-चप की आवाजों से गूँज रही थीं। आर्यन ने अंजलि को पूरी तरह अपने नियंत्रण में कर लिया था—वह उसका बेटा भी था, उसका गुरु भी, और आज उसका सबसे क्रूर प्रेमी भी।

बाथरूम की दीवारों के बीच उमड़ती उस सघन कामुकता ने अंजलि के संयम के सारे बांध तोड़ दिए थे। आर्यन का एक हाथ उसकी कलाइयों को मज़बूती से जकड़े हुए था, उसका मुँह उसके भारी स्तनों का रसपान कर रहा था, और उसकी हथेली गीली काली पैंटी के ऊपर से जो दबाव बना रही थी, उसने अंजलि के भीतर एक ऐसा बवंडर पैदा कर दिया जिसे झेल पाना उसके बस में नहीं था।

अंजलि का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था। वह जो 'अधूरापन' महसूस कर रही थी, वही उसकी उत्तेजना का सबसे बड़ा कारण बन गया। पैंटी के गीले कपड़े की रगड़ ने उसके संवेदनशील हिस्से में इतनी गर्मी पैदा कर दी थी कि उसे महसूस हो रहा था कि अब उसके भीतर से लावा फूटने वाला है।

अंजलि का सिर पीछे की ओर लुढ़क गया और उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। "आह... आर्यन... रुक मत... उफ़्फ़! मैं... मैं नहीं रोक पा रही... आह! मेरा शरीर... फट जाएगा... आर्यन!" उसकी आवाज़ अब सिसकारियों से बदलकर चीखों में तब्दील हो रही थी।

आर्यन ने जब महसूस किया कि उसकी माँ का शरीर बुरी तरह कांप रहा है, तो उसने अपने मुँह से स्तन को और ज़ोर से चूसा और नीचे पैंटी के ऊपर से अपनी हथेली की रगड़ को और भी तेज़ कर दिया। वह रेशमी कपड़ा अब अंजलि की त्वचा के साथ मिलकर एक ऐसा घर्षण पैदा कर रहा था जो उसे सीधे स्वर्ग के द्वार पर ले आया।

अचानक, अंजलि के गले से एक लंबी और रूहानी कराह निकली, "आह्ह्ह्ह... आर्यन!" उसका पूरा बदन एक तेज़ झटके के साथ ऐंठ गया। बिना किसी सीधे शारीरिक स्पर्श के, सिर्फ उस 'तड़प' और 'रेशमी रगड़' के जादू से अंजलि का बांध टूट गया। उसकी जाँघों के बीच से काम-रस का वह गर्म सैलाब फूटा जो पैंटी को पूरी तरह भिगोता हुआ फर्श पर बह रहे शावर के पानी में मिल गया।

अंजलि की पकड़ आर्यन के कंधों पर ढीली पड़ गई और उसका शरीर निढाल होकर आर्यन के सीने पर आ गिरा। उसकी सांसें इतनी तेज़ थीं मानो वह अभी-अभी कोई लंबी दौड़ दौड़कर आई हो। उसके पैरों की मज़बूती खत्म हो गई थी और वह पूरी तरह आर्यन की बाहों के सहारे खड़ी थी।

आर्यन ने अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की और अपनी माँ के माथे को चूमा। अंजलि ने अपनी आधी खुली आँखों से उसे देखा, जिनमें एक अजीब सी शांति और समर्पण था। वह समझ गई थी कि आज उसके बेटे ने उसे उस तरीके से जीत लिया है जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
 
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