Antarvasna kahani वक्त का तमाशा - Page 6 - SexBaba
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Antarvasna kahani वक्त का तमाशा

जहाँ ज्योति इस बात से खुश थी कि उसको जो चाहिए उसकी तरफ बढ़ता उसका पहला कदम कामयाब रहा है, वहीं शीना और रिकी परेशान थे, शीना और रिकी एक दूसरे के साथ वक़्त बिताना चाहते थे, लेकिन वो हो नहीं पा रहा था, और अब शीना यह भी नहीं कह सकती थी के वो भी उन दोनो को जाय्न करे, क्यूँ कि ऐसे कहने से अमर को दिख जाता कि शीना जान बुझ के ज्योति के प्लान में टाँग अड़ा रही है.. इसलिए अब उन्हे कुछ और सोचना होगा.. लेकिन वो जानते थे इसका कोई रास्ता नहीं है शायद, इसलिए दोनो चुपचाप नाश्ता कर रहे थे और एक दूसरे को देख रहे थे

मानो कि दोनो के दिल में एक ही बात चल रही हो... धीरे धीरे सब लोग नाश्ता करके अपने अपने काम में लग गये, अमर और राजवीर फाइनली महाबालेश्वर के लिए निकल गये ज़मीन देखने..

स्नेहा अभी भी शॉक में थी, लेकिन उसने अपने एक्सप्रेशन्स पे कंट्रोल रखा हुआ था और चुप चाप अपने कमरे के लिए निकल गयी.. ज्योति भी थोड़ी देर में उठ गयी



"भैया, मैं तब तक वेन्यू देखती हूँ कि हम कहाँ जाएँगे.. आंड हे शीना, तुम भी चलो ना साथ, मज़ा आएगा.." ज्योति ने दोनो के पास खड़े रहके कहा



"अरे नो नो, थ्ट्स ओके, यू गाइस कॅरी ऑन.. आइ डोंट वॉंट टू बी आ पार्टी पूपर.. आंड भाई और मैं तो घूमते रहते हैं, तुम लोग जाओ, आइ विल स्टे बॅक आंड रिज़ॉर्ट के लिए कुछ कर लूँगी, आफ्टर ऑल दिस ईज़ माइ लाइफ टाइम ऑपर्चुनिटी.." शीना ने कुछ सोच के जवाब दिया, वो जानती थी कि भले ज्योति ने यह पूछा लेकिन वो भी नहीं चाहती थी कि शीना उन्हे जाय्न करे, अगर शीना उन्हे जाय्न करती तो ज्योति इतनी चालाक है के किसी तरह वो शीना से ही कुछ देर में ना बुलवा देती.. इसलिए शीना ने उसे ना करके अच्छा ही किया, और ज्योति को रिज़ॉर्ट वाली बात बोलके फिर उसने ज्योति को यह एहसास दिलाया कि उसने क्या खोया है... शीना का जवाब सुन ज्योति हल्के से मुस्कुराइ, और वहाँ से बिना कुछ बोले निकल गयी



"आप जानते हो, मैने सोचा था हम बहामास जाएँगे और मज़े करेंगे, पर यह देखो.. बीच में आई कूद के , आइ म जस्ट हेटिंग हर नाउ.." शीना ने रिकी से फुसफुसाके उसके कान में कहा



"ना ना, डोंट डू तट.., तुम अपनी नफ़रत या तो ख़तम कर दो या तो उसे बाहर नहीं निकलना... अगर बाहर निकलोगि तो उसमे भी तुम ही दोषी निकलोगी, आइ मीन तुमने देखा ना उसने अपनी बात कैसे मनवा ली पापा से, अब अगर वो ऐसा कर सकती है, तो सोचो तुम्हे ग़लत साबित करने में उसको कितना टाइम लगेगा..." रिकी ने शांति से शीना को कहा और उसे अपने हाथ से पानी पिलाने लगा..



"उम्म्म, क्या बात है, अपने हाथ से पिला रहे हो पानी..ज्योति की वजह से कुछ तो फ़ायदा हुआ मुझे.." शीना ने रिकी के हाथ को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन रिकी ने उससे हाथ छुड़वा के उसको इशारा किया जगह का और दोनो फिर नाश्ता करने लगे



"लेकिन भाई, अब क्या करें, उसको मना कैसे करोगे.." शीना ने फिर रिकी से कहा



"उम्म्म... सोचना पड़ेगा, बट आइ डोंट थिंक यह आसान होगा, मतलब मैं फिलहाल तो फ्री ही हूँ, तो ऐसा कोई बहाना नहीं कर सकता, और तुम जानती हो कि रिज़ॉर्ट में वो इन्वॉल्व्ड नहीं है जब कि पापा वोही चाहते थे, इसलिए उसे इस बात का दुख है, और अगर अब मैं मना करूँगा तो फिर उसे और बुरा लगेगा.." रिकी ने इतना ही कहा के फिर शीना बोल पड़ी



"आइ नो, इस बार राजवीर चाचू भी शायद हर्ट हो, आइ मीन उन्हे ऐसा एहसास होगा ना के वो हमारे बीच नहीं रहते इसलिए हम उनके साथ ऐसा बिहेव करते हैं.." शीना ने अपनी प्लेट खाली करके कहा



"एग्ज़ॅक्ट्ली, बट लेट मी थिंक सम्तिंग एल्स.. तुझे बताता हूँ कुछ देर में.."



"नहीं भाई, इट'स ओके... आप लोग जाओ, बट स्टे अवे फ्रॉम हर ओके.." शीना ने अपने हाथ में चाकू उठा के उसको दिखाते हुए कहा



"हहा, जेलस सिस... डॉन'ट वरी, शीना की जगह कोई नहीं ले पाएगा.... " कहते हुए रिकी ने उसके हाथ को हल्के से चूमा और दोनो हँस के वहाँ से बाहर निकल गये गार्डेन की तरफ



ज्योति कुछ देर अपने कमरे में ही थी, लेकिन जब उसने देखा कि कोई नहीं आ रहा, वो धीरे से शीना के कमरे की ओर बढ़ी.. उसके कमरे के पास जाके उसने दरवाज़े को हल्का धक्का लगाया

तो वो खुल गया.. ज्योति जल्दी से अंदर गयी और दरवाज़ा लॉक करके कमरे की दीवार के हर कोने को देखने लगी लेकिन उसे कॅमरा नहीं मिला, वॉर्डरोब के नीचे, उपर या कहीं और.. वो हर जगह देखने लगी लेकिन उसे कहीं नहीं मिला कॅमरा.. थक हार के वो बेड पे बैठी और अपनी नज़रें छत की तरफ की, जहाँ उसने देखा कि कुछ वाइर्स लटक रहे हैं, वो जल्दी से उठ खड़ी हुई

और एक लंबा स्टूल लेके चढ़ गयी, वाइर्स देख के वो समझ गयी कि कॅमरा पहले यहाँ था, अब नहीं है, इसका मतलब शीना ने ही निकाल फेंका है.. ज्योति नीचे उतरी और सब कुछ ठीक करने लगी, इतने में उसके मोबाइल पे एसएमएस आया



"तुम मेरे कमरे में हो, अपने कमरे का रास्ता भूल गयी हो या मेरे कमरे में कुछ चीज़ छुपी है जिसे इतनी देर से ढूँढ रही हो..." शीना ने ज्योति को भेजा



एसएमएस पढ़ के ज्योति की तो मानो हालत खराब हुई थी, उसका चेहरा पसीना पसीना हो चुका था, उसने अपनी नज़रें फिर एक बार चारो तरफ घुमाई, अगर शीना का यह एसएमएस है मतलब कॅमरा कहीं है, लेकिन कहाँ.. ज्योति ये सोचते सोचते फिर इधर उधर देख ही रही थी कि फिर एसएमएस आया



"कोई पॉइंट नहीं है, तुम्हे कॅमरा नहीं मिलेगा... बेहतर है तुम अपने कमरे में जाओ या बाहर गार्डेन में आओ, भाई और मैं गोल्फ कोर्स जा रहे हैं, तुम आ सकती हो हमारे साथ.. ब्लडी पार्टी पूपर.."



शीना का यह एसएमएस पढ़ ज्योति कुछ और किए बिना ही वहाँ से निकल गयी, लेकिन अपने कमरे में जाने के बदले वो सीधा शीना और रिकी के पास चली गयी.. अगर उसकी जगह स्नेहा होती तो वो शीना से आँख भी नहीं मिलाती, लेकिन ज्योति की बात अलग थी.. भले ही ग़लती उसकी क्यूँ ना हो, लेकिन जंग मतलब जंग, उसे पूरा करना ही पड़ता है... इसलिए ज्योति ने खुद को फ्रेश किया और कपड़े बदल के शीना और रिकी के पास चल दी...



"चलें भैया..." ज्योति ने गार्डेन में आते हुए कहा



ज्योति की आवाज़ सुन, रिकी चौंक उठा, लेकिन ताज्जुब उसे इस बात का था कि ज्योति कहाँ चलने की बात कर रही है...



"हमारे साथ चलेगी भाई, मैने ही इन्वाइट किया ज्योति को... घर पे अकेले बैठे बैठे इंसान का दिमाग़ कुछ ज़्यादा ही काम करता है जिससे प्रेशर बढ़ सकता है, बेहतर है हमारे साथ रहेगी

तो शांत रहेगी.." शीना ने अपना हाथ ज्योति के पास बढ़ाया और ज्योति ने भी उसका हाथ थाम लिया



"तुम और तुम्हारी बातें, रूको मैं गाड़ी निकलता हूँ..." कहके रिकी ड्राइवर के पास चला गया



"वैसे, मेरे कमरे में क्या ढूँढ रही थी ज्योति.." शीना ने बिना झिझक या गुस्से के ज्योती से सवाल किया और दोनो आगे देख रहे थे



"कुछ ख़ास नहीं, यू सी, तुम्हारे कमरे का इंटीरियर बहुत खूबसूरत है, इसलिए मैं देख रही थी कि इसे और खूबसूरत कैसे बनाया जाए" ज्योति और शीना दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़ के धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे, दोनो के आँखों पे चढ़े एवियेटर ग्लासस, दोनो ने गोल्फ पॅंट्स पहने थे और पोलो टी-शर्ट.. दोनो इस वक़्त ऐसे बात कर रही थी जैसे मँझे हुए खिलाड़ी एक
दूसरे से करते हैं किसी बड़ी मॅच के पहले



"जानती हो ज्योति, जिस चीज़ की तारीफ़ करो, उसे बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, नहीं तो वो तारीफ़ के काबिल नहीं रहती. और रही बात मेरे कमरे की, तुम जो ढूँढ रही थी वो मेरे कमरे में कहीं नहीं मिलेगा.. और वैसे भी, कॅमरा से तुम्हारा क्या काम.. तुम यहाँ रहो, पढ़ो, मज़े करो, तुम यह सब क्यूँ कर रही हो, मुझे अब तक समझ नहीं आया कि इतनी दिलचस्पी क्यूँ दिखा रही हो तुम यह पता करने में कि इस घर में क्या चल रहा है... यह घर ना तुम्हारा कभी था, और ना ही इस घर की प्रॉब्लम्स या खुशियाँ तुम्हारी थी.. लेकिन अब तुम यहाँ रहने वाली हो तो जिस खुशी से हम ने तुम्हे आक्सेप्ट किया है, मुझे उम्मीद है के तुम हमे निराश नहीं करोगी और अपनी पढ़ाई में टॉप करोगी.." इस बार शीना ने ज्योति को एक नज़र देखा और अपने ग्लासस निकाल के फिर कहा



"भाई के साथ जहाँ जाना चाहती हो जाओ, लेकिन जो चीज़ तुम सुनना चाहती हो वो सुनो... मैं रिकी भाई से बहुत प्यार करती हूँ, और शायद यह प्यार भाई बहेन के प्यार से भी बढ़कर है.. मैं जानती हूँ तुम कितने दिनो से हमें अब्ज़र्व कर रही हो, लेकिन जैसे मैने कहा, तुम आराम से रहो, इस घर में क्या हो रहा है क्या नहीं... यह सब में दिलचस्पी नहीं लो, और हां.. अभी कुछ देर में रिकी भाई तुमसे पूछेंगे के कहाँ जाना चाहती हो.. तुम प्लीज़ गोआ का नाम मत लेना.. तुम्हे लग रहा होगा कि वहाँ बीचस पे अपनी बॉडी से भाई को सिड्यूस करके तुम उनके पास जाओगी, तो आइ आम सॉरी टू डिसपायंट यू, ऐसा कुछ नहीं होगा... यू बेटर थिंक सम्तिंग एल्स.." शीना ने जैसे ही यह बात कही, उन दोनो को रिकी की आवाज़ सुनाई दी
 
"अरे, चलो भी.. कितनी देर करोगी तुम दोनो.."



"कमिंग भाई, अब चलो नहीं तो भाई समझ जाएँगे कि ई हॅव फक्ड यू लेफ्ट , राइट आंड सेंटर.." कहके शीना ने ज्योति का हाथ छोड़ा और दौड़ के रिकी की तरफ पहुँच गयी.. ज्योति भी जल्दी से वहाँ पहुँच गयी और तीनो गोल्फ कोर्स की तरफ चल दिए. पूरे रास्ते में ज्योति सोचती रही कि आख़िर शीना को यह सब पता कैसे चला, और उसने सोचा था कि उन दोनो के रिश्ते की बात से वो उन्हे ब्लॅकमेल करेगी, लेकिन उससे पहले शीना ने खुद क़ुबूल किया, जिसका मतलब शीना को बिल्कुल डर नहीं है इस बात से.. मैं उन्हे अब्ज़र्व कर रही हूँ यह बात शीना भी देख रही है, और फिर मैं रिकी के करीब जाना चाहती हूँ... आख़िर शीना का दिमाग़ इतनी तेज़ी से कैसे चलने लगा.. ज्योति यह सोच सोच के पागल हो रही थी और बस खिड़की के बाहर ही नज़रें जमा के बैठी थी



"तो ज्योति, लाइकिंग मुंबई... ? रिकी ने उसकी तरफ मिरर से देख के कहा



"लविंग इट भैया.." ज्योति का ध्यान टूटा और उसने रिकी को कहा



"सो कहाँ जाना है तुम्हे घूमने, बताओ कुछ सोचा या नहीं.."



"गोआ बोल रही थी भाई, बोलो, " शीना ने बीच में कूद के कहा



"गोआ.. ना इट्स टू क्राउडेड, आइ डोंट लाइक दट प्लेस"



"कुछ और सोचती हूँ फिर भैया..." ज्योति ने सिर्फ़ इतना ही कहा और फिर खिड़की के बाहर देखने लगी



उधर स्नेहा जल्दी अपने कमरे से निकली और सुहसनी से छुपते छुपाते बाहर निकल गयी.. बाहर जाके टॅक्सी पकड़ी और रास्ते से प्रेम को फोन करके उसे मिलने के लिए बुलाया.. स्नेहा ने अपना मोबाइल बंद रखा था क्यूँ कि वो नहीं चाहती थी के शीना का कोई कॉल आए.. प्रेम और वो दोनो कोलाबा के एक कॉफी शॉप में मिले



"क्या हुआ दीदी, इतना अर्जेंट में बुला लिया" प्रेम ने स्नेहा के पास बैठ के कहा



स्नेहा ने उसे सब बातें बता दी, स्नेहा की बात सुन प्रेम भी थोड़ी देर के लिए चौंक गया, लेकिन अगर वो भी स्नेहा जैसे हैरान होता तो बात बिगड़ सकती थी, इस स्थिति में ज़रूरी था कि कोई एक अपना दिमाग़ शांत रखे और यह काम प्रेम ने चुना.. स्नेहा की बातें सुन कुछ देर दोनो खामोश रहे..



"उः, टू एस्परेससॉस प्लीज़.. नो क्रीम.." प्रेम ने वेटर को ऑर्डर दिया



"दीदी, वैसे आप का मोबाइल मिलेगा.. मैं कुछ देखना चाहता हूँ इसमे.." प्रेम ने स्नेहा की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा



"हां देख, बट फिर ऑन करेगा तू इसे और शीना का फ़ोन आया तो फिर मुझे मेंटली टॉर्चर करेगी यार.." स्नेहा अभी भी पसीना पसीना हो रही थी..



"रूको तो यार", कहके प्रेम ने मोबाइल ऑन किया और सब से पहले उसे फ्लाइट मोड पे डाल दिया ताकि किसी का कॉल ना आए.. फिर उसने मोबाइल में सब कुछ चेक किया कि शायद कोई ऐसा अप हो जिससे शीना को यह सब पता चल रहा हो.. लेकिन जब उसे ऐसा कुछ नहीं दिखा, उसने बिना स्नेहा को बोले मोबाइल को फ्लाइट मोड से हटाया और वेट करने लगा शीना के कॉल का.. वो देखना चाहता था कि शीना क्या कहेगी कॉल करके, उसने मोबाइल अपने पास रखा और स्नेहा की चिंता कम करने की कोशिश करने लगे.. इतने में कॉफी आ गयी और दोनो धीरे धीरे कुछ सोचते सोचते कॉफी का
आनंद लेने लगे... करीब एक घंटा होने आया था दोनो को, और 45 मिनिट हुए थे प्रेम को मोबाइल ऑन करके , लेकिन शीना की कॉल अब तक नहीं आई थी



"दीदी एक बात बताओ, आज की हमारी इस मुलाक़ात में और उस दिन जब शीना ने आपको परेशान किया था.. क्या डिफरेन्स है दोनो मुलाक़ातों में" प्रेम के दिमाग़ ने काम करना शुरू किया



"प्रेम मैं कुछ भी नहीं सोच सकती...तुम पहेलियाँ भुजाना बंद करो..." स्नेहा ने कॉफी ख़तम करके कहा



"दीदी, मैं आपके घर चलता हूँ, मुझे कुछ काम है, आपकी सास को कोई दिक्कत तो नहीं होगी.." प्रेम ने स्नेहा से फिर हँस के कहा



"नहीं, चलो, पर क्या काम है.." स्नेहा ने फिर परेशानी में कहा और प्रेम के चेहरे पे एक विजयी मुस्कान थी



दोनो ने जल्दी से बिल भरा, और टॅक्सी पकड़ के राइचंद'स की ओर चल दिए, जहाँ पूरे रास्ते में स्नेहा बार बार परेशानी के पसीने से भीग रही थी, वहीं प्रेम बार बार स्नेहा के मोबाइल को देखता , लेकिन शीना का कॉल अब तक नहीं आया था.. वो जान चुका था कि ऐसा क्यूँ.." करीन 20 मिनट में दोनो घर पहुँचे और प्रेम सुहसनी देवी से मिला.. फीके मन से ही सुहसनी ने उससे बात की और फिर वहाँ से चली गयी.. तब तक प्रेम के कहने पे स्नेहा ने ड्राइवर से गाड़ी की चाबी मँगवाई और प्रेम को दे दी.. प्रेम ने बिना वक़्त गँवाए गाड़ी अनलॉक की और बोनेट खोल के वीरिंग्स चेक करने लगा



"मेकॅनिकल इंजिनियरिंग पढ़ी है इसका मतलब यह नहीं कि तू मेरे ससुराल में आके गाड़ी बनाएगा, पहल से ही इनके नाटक कम हैं जो अब यह कर रहा है तू.." स्नेहा ने आस पास नज़रें फेर के कहा



"रूको यार.." कहके प्रेम ने फिर इग्निशन मारा और कुछ चेक करके बोनेट बंद किया...



"ह्म्म्मल, चलो अब मुझे छोड़ दो कहीं पे, और यह लो अपना मोबाइल..." प्रेम ने अपने हाथ सॉफ करके कहा



स्नेहा ने बिना मोबाइल को देखे अपने क्लच में डाल दिया और प्रेम को छोड़ने के लिए गाड़ी में निकल गयी.. दोनो भाई बहेन गाड़ी में सी लिंक क्रॉस करने लगे तभी प्रेम ने उसका क्लच खोला और उसमे से मोबाइल निकाला



"दीदी, करीब 2 घंटे हुए हैं आपके मोबाइल को ऑन किए हुए.. लेकिन अब तक शीना का फोन नहीं आया, और अब आएगा भी नहीं..." प्रेम की यह बात सुन स्नेहा ने अचानक गाड़ी साइड में रोकी और उसे गौर से देखने लगी.. स्नेहा ने अपने दिमाग़ पे ज़ोर लगाया और उसने देखा प्रेम सही कह रहा है.. जब सवालिया नज़रों से उसने प्रेम की ओर देखा, प्रेम के चेहरे पे फिर एक ऐसी मुस्कान टायर गयी जिसे देख स्नेहा को कुछ कुछ समझ आने लगा.
 
उधर गोल्फ खेलते खेलते शीना बार बार अपने मोबाइल में देख रही थी कि उसे कुछ मिल जाए, या ऐसा लग रहा था कि किसी का कॉल या मेसेज आने वाला है.. लेकिन बार बार मोबाइल की स्क्रीन पे देख के उसे निराशा होती, गेम ख़तम करके जब तीनो भाई बहेन रेफ्रेशमेंट्स के लिए बैठे बातें कर रहे थे, तभी शीना को मेसेज आया



"मिस्सिंग माइ ट्रॅक स्वीटहार्ट.." यह एसएमएस स्नेहा ने उसे भेजा था



एसएमएस पढ़ के शीना के दिमाग़ में दो बातें आई, एक तो यह के सामने से स्नेहा ने उसे एसएमएस किया है मतलब वो जान गयी थी कि शीना उसकी खबर कैसे रख रही है, और दूसरी के अब वो कुछ नहीं कर पाएगी स्नेहा का... काफ़ी कुछ सोच रही थी लेकिन दिमाग़ में कुछ ना आने से उसने स्नेहा के एसएमएस का रिप्लाइ नहीं दिया और रिकी से बातें करने लग गयी... रिकी और शीना बातों में उलझे हुए थे वहीं ज्योति अपनी दुनिया में कहीं खोई हुई थी..



"ह्म्म्मन, ज्योति.. तुम्हारा ड्रिंक गरम ना हो जाए.." रिकी ने ग्लास देते हुए कहा और फिर शीना के साथ बातों में उलझ गया..



"भैया, इफ़ इट ईज़ आन इंटरनॅशनल डेस्टिनेशन, तो कोई प्राब्लम तो नहीं है ना आपको.." ज्योति ने फाइनली अपने दिमाग़ को अपने काबू में किया और रिकी से ग्लास लेते हुए कहा



ज्योति का सवाल सुन रिकी एक सेकेंड के लिए तो मानो स्टंप्ड ही हो गया था, कोई और होता तो शायद मना कर देता, लेकिन रिकी जानता था कि उसके पास मना करने का कोई कारण नहीं है... ना तो पैसा प्राब्लम है, ना ही वक़्त... तो मना करता भी तो कैसे..इसलिए अगले ही पल उसने जवाब दिया



"ऑफ कोर्स नोट यार, बट उससे पहले टेल मी, इंडिया छोटा पड़ गया है या तुमने पूरा घूम लिया है.."



"नहीं भैया, नतिंग लाइक दट, बट मुझे एग्ज़ोटिक लोकेशन पे जाना है. यू नो, जहाँ मस्त खूबसूरत बीचस हो, वॉटर स्पोर्ट्स हो.. ब्यूटिफुल सनसेट्स हो.. सम्तिंग लाइक दट, इसलिए , गोआ तो आपने मना किया, आंड उसके अलावा आइ डोंट सी एनी सच प्लेस हियर.. इसलिए इंटरनॅशनल, बट कोई प्राब्लम है तो टेल मी, कुछ और सोच लूँगी" ज्योति ने अपनी ड्रिंक में स्ट्रॉ घूमाते हुए कहा और फिर शीना को देखने लगी, जो आराम से रेक्लीनेर पे लेट के उनकी बातें सुन रही थी



"नोप, दट ईज़ ओके.... कोई जगह सोची है..." रिकी ने फिर पूछा



"थाइलॅंड या सिंगपुर सोचा था, बट रहने दिया.. आइ थिंक बलि विल बी नाइस, व्हाट से.." ज्योति ने अपना चश्मा उतारा और रिकी की आँखों में देख के पूछा



"आअहह, इंडोनेषिया, उम्म्म.. कूल, हियर ईज़ माइ कार्ड.. तुम बुकिंग स्टार्ट कर दो वहाँ की.. आंड मेक शुवर वॉटेवर वी डू, हैज टू बी दा बेस्ट ऑलराइट.." रिकी ने ज्योति को अपना कार्ड देते हुए कहा



"ओके, एक्सक्यूस मी फॉर आ मिनिट.." ज्योति ने कार्ड लिया और वहाँ से निकल गयी



"भाई, कुछ ज़्यादा ही होशयार बन रही है यह.. पहले आप के साथ अकेले में ट्रिप, फिर एग्ज़ोटिक लोकेशन्स... अब बस यह देखना रह गया है कि शॉपिंग लिस्ट में कितने स्विम सूट्स और बिकिनीस आती हैं..." शीना ने अपने ग्लासस उपर चढ़ा दिए और रिकी को देख के कहा



"सम्वन'स जेलस हाँ..." रिकी ने उसे आँख मारते हुए कहा



"नोट अट ऑल...पता नहीं क्यूँ, आइ स्मेल सम्तिंग फिशी हियर... देखो ना, सडन्ली इन लोगों का आना, फिर यहीं रहना, ज्योति का हमे यूँ क्लोस्ली अब्ज़र्व करना, फिर आपके साथ वाकेशन... आइ मीन, यह सब एक साथ, कुछ ज़्यादा ही स्ट्रेंज लग रहा है मुझे..." शीना ने अपनी बात इस तरह कही कि एक पल के लिए रिकी भी परेशान हो उठा और कुछ सोचने लगा, तब तक शीना ने भी अपने पॉकेट से सिगरेट निकाली और उसके कश लेने लगी







"तुम क्या कहना चाहती हो शीना.." रिकी ने भी उसकी सिगरेट ले ली और कश लेने लगा



"भाई, आप जाने के लिए मना कर दो.. सिंपल" बिना ज़्यादा बात को घुमाए शीना ने उसे जवाब दिया



"जाना तो मैं भी नहीं चाहता यार, बट यू नो ना, पापा के कहने पे जा रहा हूँ... उपर से अब मना करूँगा तो शी विल नोट फील गुड, आंड पापा की अलग सुननी पड़ेगी" रिकी की बात ग़लत नहीं थी, अमर किसी भी हालत में यह नहीं से सकता था.. अगर रिकी मना करता तो उसे खरी खोती तो सुननी ही पड़ती, लेकिन ज्योति के लिए उसके दिल में एक सहानुभूति जागती जिसका फ़ायदा उसे कैसे मिलता वो कोई सोच भी नहीं सकता था.. शीना ने इस बात को समझा इसलिए उसने ज़्यादा बहेस नहीं की और रिकी के साथ बैठ के सिगरेट के कश लेती रही... कुछ ही देर में ज्योति वहाँ आई और तीनो वापस घर की तरफ निकल पड़े... वापस जाते वक़्त गाड़ी में बिल्कुल खामोशी थी, रिकी सोच रहा था कि कैसे ज्योति के साथ वो यह ट्रिप इग्नोर कर सकेगा, शीना स्नेहा के बारे में सोच रही थी, और ज्योति क्या सोच रही थी वो खुद भी कन्फ्यूज़्ड थी उसमे.. कभी बलि ट्रिप के बारे में सोचती, तो कभी शीना की बातों के बारे में जो सुबह ही उसने कही थी... सोचते सोचते घर कब आया इन्हे पता ही नहीं चला, ड्राइवर को गाड़ी की चाबी देके जब तीनो अंदर जाने लगे, तब बीच में खड़ी स्नेहा को देख तीनो को बहुत अजीब लगा..



"यह ऐसे क्यूँ खड़ी है इधर.." शीना ने आगे बढ़ते हुए रिकी के कान में फुसफुसाया जिसका जवाब रिकी ने कुछ नहीं दिया और बस कंधे उपर कर दिए जिसका मतलब था कि मैं भी नहीं जानता..



"उः शीना , एक मिनट प्लीज़ रूको, मुझे कुछ काम था तुमसे.." स्नेहा ने शीना को अंदर जाने से रोका, शीना तो वहीं रुक गयी लेकिन ज्योति और रिकी बिना कुछ कहे वहाँ से आगे बढ़ के अपने अपने कमरे की ओर बढ़ने लगे...



"शीना, एक सेकेंड मेरे साथ आजा, मेरी गाड़ी में कुछ दिखाना चाहती हूँ तुझे..." कहके स्नेहा अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ने लगी और शीना सोचने लगी अचानक स्नेहा उसके साथ तू करके बात कर रही है... शीना शॉक हुई लेकिन उसने अपने आप को संभाला और स्नेहा की गाड़ी की तरफ चलने लगी..



तीन महीने पहले इंपोर्टेड ऑडी, विक्रम ने स्नेहा को उसके बर्तडे पे गिफ्ट की थी, यह मॉडेल अब तक इंडिया में नहीं आया था इसलिए स्नेहा को अपनी गाड़ी से बहुत प्यार था, शायद तभी उसकी गाड़ी घर की सभी गाड़ियों से अलग रखी जाती थी और उसकी चाबी भी स्नेहा अपने पास रखती क्यूँ कि वो नहीं चाहती थी कि उसे स्नेहा के अलावा भी कोई हाथ लगाए...



"शीना, जानती है इस गाड़ी की ख़ासियत क्या है..." स्नेहा ने गाड़ी को अनलॉक किया और ड्राइवर्स सीट पे जाके बैठ गयी, और साथ ही पास वाली सीट का दरवाज़ा भी खोल दिया जिससे शीना भी अंदर बैठ सके... शीना स्नेहा की बातों को सुनते सुनते उसके पास जाके बैठ गयी...
 
"इस गाड़ी में काफ़ी छोटी छोटी चीज़े हैं जो इसे यूनीक बनाती हैं, लाइक अगर इस गाड़ी को प्री डिफाइंड उँचाई से फेंका जाए तो इसके सेफ्टी सेन्सर्स आक्टीवेट होते हैं और गाड़ी को पैराशूट में तब्दील कर देते हैं... दूसरा, इसका जीपीएस सिस्टम... इस गाड़ी में गूगल मॅप्स के अलावा किसी दूसरी कंपनी के मॅप्स भी हैं जो ड्राइवर को यह बताते हैं कि वो एग्ज़ॅक्ट किस लोकेशन पे हैं.. और जैसे जैसे वक़्त जाता है, हमें इसको नेट से कनेक्ट करके अपडेट करना पड़ता है, अगर हम ऐसे नहीं करते तो हमें ऑडी जर्मनी से कॉल आता है कि जल्द से इसको अपडेट कर दें, नहीं तो यह उनके सेफ्टी पॉइंट का एक ब्रीच माना जाता है.. ऐज ए कंपनी ऑडी यह नहीं चाहती कि उनकी गाड़ी में कोई भी आक्सिडेंट हो या अगर कोई कहीं मिस्प्लेस हो जाए या किडनॅप हो जाए या गाड़ी कहीं खो जाए तो उसे एक लॅप्स माना जाए... इसलिए तो जब गाड़ी बंद रहती है तब यह मॅप्स काम नहीं करते , लेकिन हां स्पेशल रिक्वेस्ट पे यूज़िंग दा एंजिन नंबर आंड जीपीएस सिस्टम नंबर गाड़ी के मॅप्स को ऑफलाइन भी आक्टीवेट किया जा सकता है..." स्नेहा शीना को ऐसी चीज़ें बता रही थी जिनका तर्क शीना को पल्ले नहीं पड़ रहा था, लेकिन शीना समझ चुकी थी कि स्नेहा इसके बाद क्या कहेगी इसलिए वो अब तक खामोश थी



"बट तू जानती है, कि इसका एक छोटा सा प्राब्लम है.. और प्रोबेल्म यह है कि यह सिस्टम जितना ही अपडेटेड होता रहता है, उतने ही बग्स इसमे क्रियेट होते हैं, जिससे यह वल्नरबल बनता जाता है.. वल्नरबल टू एनितिंग, जैसे वाइरस या यह ईज़िली हॅक भी हो जाता है.... मैने इसे लास्ट मंत ही अपडेट करवाया था वर्कशॉप से.." स्नेहा इतना कहके खामोश हो गयी और शीना की आँखों में देखने लगी किसी जवाब की उम्मीद में लेकिन शीना अब तक खामोश स्नेहा को ही देख रही थी



"हहाः,. इंट्रेस्टिंग.. शीना, तुझे क्या लगा, तू अगर इसे हॅक कर लेगी तो किसी को पता नहीं चलेगा... जब तूने यह सोचा कि एक मामूली सिस्टम को हॅक करके स्नेहा को दबाती फ़िरेगी तो वो तेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी बेवकूफी थी.. तूने सोचा मैं तो कहीं इस गाड़ी के बगैर आती जाती नहीं, इसलिए क्यूँ ना तू डाइरेक्ट इसके ज़रिए मेरी खबर रखे और मैं बस यह सोच सोच के पागल होती रहूंगी कि आख़िर तू यह सब कैसे कर रही है... खैर अच्छी कोशिश थी, मुझे यकीन है कि इतना सब सोच के तेरे घुटनों में दर्द चालू हो गया होगा.. है ना.." स्नेहा की आखरी लाइन सुन शीना का खून गरम होने लगा, उसका चेहरा लाल होते दिख रहा था जिसे स्नेहा काफ़ी अच्छे से एंजाय कर रही थी, लेकिन शीना खामोश रही



"और एक बात सुन ले, क्या कहा था तूने विक्रम वाली बात का.. जाके कह दे घरवालों से... मेरे सब कॉल रेकॉर्ड्स चेक करवा ले, लेकिन ग़लत निकलने पर तू ही अपने घरवालों की नज़र में गिरेगी.. और हां, अपने भाई, तेरे होने वाले यार की नज़रों में तो नहीं गिरेगी, इतना प्यार जो करता है तुझ से, बस पूरी ज़िंदगी उसी के सहारे निकाल देना, पर अफ़सोस वो भी शायद ना कर पाए.. उसके लिए तो तेरी दूसरी बहेन, तेरी सौतन बनने को तो तैयार ही है... है ना.." स्नेहा ने फिर शीना की आँखों में देखा और स्टाइल से अपनी आँखों को ग्लासस से कवर करके अपने लिए सिगरेट जलाई और धुआँ शीना के मूह पे छोड़ दिया







"अब और क्या सुनना चाहती है... गेट आउट................. प्लीज़...." स्नेहा ने एक बार फिर धुआँ शीना के मूह पे छोड़ा और शीना बिना कुछ कहे वहाँ से निकल गयी.. इस छोटी सी जीत से स्नेहा काफ़ी खुश हुई और अपनी सिगरेट ख़तम करके अपनी गाड़ी को लॉक किया और वहाँ से अपने कमरे की ओर निकल पड़ी...



इंग्लीश में एक कहावत है, गेटिंग आ टेस्ट ऑफ युवर ओन मेडिसिन.. मतलब दुश्मन आपको आपके अपनाए हुए तरीके से ही हरा देता है.. इधर स्नेहा ने भी ठीक वही किया जो शीना ने उसके साथ किया, ननद और भाभी, अब आप और तुम से तू पे आ चुकी थी, जहाँ शीना ने अपने दिमाग़ को इतना चलाया कि यह सब हाथ में किया था, वो सब एक ही पल में ज़मीन पा आ गया था, वहीं स्नेहा भी प्रेम की मदद से फिर नॉर्मल हुई और अब हर छोटी बात का ध्यान रखने लगी... इसी लिए उसने एक मोबाइल और नया सिम कार्ड ले लिया जिससे वो अपने काम के सभी कॉल्स आराम से कर सकती है.. यह नया कार्ड उसने शीना के नाम पे लिया था..शीना को अब तक यकीन नहीं हो रहा था कि स्नेहा ने उसकी इस चाल का तोड़ निकाल दिया था और अब वो फिर से उसके सामने अपनी गर्दन उँची कर के चलेगी.. यह चोट शीना के लिए बहुत बड़ी और गहरी थी, अपने कमरे में आते ही रूम के चक्कर काटने लगी, सिगरेट पे सिगरेट फूकने लगी लेकिन दिमाग़ बिल्कुल नहीं चल रहा था..



"हेलो, हां , एक प्राब्लम हो गयी है...." शीना ने किसी को फोन करके कहा और सब बता दिया जो आज हुआ



"उम्म्म, स्नेहा इतनी स्मार्ट नहीं हो सकती... खैर अब उसने कुछ पता लगाया है तो उसे इसका इनाम तो मिलना चाहिए ना... ठीक है, तुम चिंता नही करो, यह इनाम कब और कहाँ देना है, आइ विल इनफॉर्म यू.." सामने से शीना को जवाब मिला



"बट.." शीना ने इतना ही कहा के फिर उसे रोक दिया गया



"आइ टोल्ड यू टू रिलॅक्स डियर.. बाय.." कहके फोन तो कट हुआ, लेकिन शीना अब तक परेशान थी



स्नेहा राइचंद'स के पीछे पड़ी थी, लेकिन वो एक बादे की खिलाड़ी थी, जस्ट आ पॉन, चाल तो कोई और ही चल रहा था, इसमे उसके साथ था प्रेम.. प्रेम उसका भाई और उसका यार.. स्नेहा जितनी शातिर, प्रेम उतना ही ठंडा और चालाक.. स्नेहा की गाड़ी का सिस्टम हॅक है वो उसने एक मिनिट में पकड़ लिया, क्यूँ कि जब उसने स्नेहा की सब बातें सुनी और जब वो कॉफी शॉप में मिले, उन दोनो बातों में सिर्फ़ एक ही डिफरेन्स था.. स्नेहा की गाड़ी की मौजूदगी.. इसलिए उसने तुरंत इस बात को कॅच किया और अपना तीर छोड़ा जो ठीक निशाने पे जा बैठा.. शीना अपने भाई रिकी से प्यार में थी, उसे हासिल करने के लिए वो कुछ भी कर सकती थी, उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल के उसने यह बात स्नेहा को बता दी थी, शायद अब इसी भूल को ठीक करने के लिए वो किसी तीसरे की मदद ले रही थी, लेकिन आज की बात के बाद फिर उसके दिमाग़ में यह संदेह हुआ कि क्या यह तीसरा उसकी मदद कर पाएगा.. रिकी शीना की मौजूदगी को एंजाय करने लगा था, धीरे धीरे वो खुलने लगा था शीना के साथ...अब तक उसकी ज़िंदगी काफ़ी सीधी थी, शीना के साथ रहो और उसकी प्रॉब्लम्स को सॉल्व करो जिससे उनका रिश्ता और गहरा बने... अमर इन सब बातों से अंजान अब तक अपने बड़े बेटे विक्रम की मौत में डूबा हुआ था, इसलिए तो वो अकेले में रोने लगता और घरवालों को दिखाने के लिए फिर मज़बूत बन जाता... सुहसनी में एक नयी उर्जा पैदा हुई थी अपने यार और देवर राजवीर के आने से.. अमर से वो काफ़ी खुश थी और अमर भी उसको आज उतना ही प्यार करता जितना कि जवानी में, लेकिन खानदानी रईस शायद ऐयाशी जान बुझ के करते हैं, बिना किसी वजह..और इसे वो ग़लती ना कहके ज़िंदगी के मज़े लेना बोलते हैं.. राजिवर की बेटी ज्योति आज की तारीख में घर में सबसे ज़्यादा चोकन्नि नज़रों वाली थी, उसकी नज़रों से कुछ नहीं छुप सकता था, इसलिए तो आते ही उसने शीना और रिकी के बीच एक पनपते प्यार को देखा, लेकिन इधर वो अपनी राह से भटक गयी.. वो रुकी तो थी यहाँ पढ़ाई के लिए लेकिन पढ़ाई के अलावा वो यह सब बातों के बारे में सोचने लगी थी...



जैसे जैसे दिन ढलता वैसे वैसे सिगरेट के पॅकेट से सिगरेट ख़तम होने लगी, शीना शायद अपने फेफड़ों को एक ही दिन में जला देना चाहती थी.. इसलिए तो बार बार सोच रही थी कि स्नेहा का अब क्या किया जाए, और उपर से अब ज्योति की मुसीबत भी थी.. शीना अपने ख़यालों में बाल्कनी में खड़ी सिगरेट ही फूँक रही थी कि पीछे से एक हाथ उसके कंधों के तरफ आया और उसको महसूस करके शीना पसीना पसीना होने लगी और पीछे मूड के देखा



"फ़ेववव.व... डरा देते हो भाई..." शीना ने फिर अपनी नज़रें सामने की जहाँ समंदर की लहरें पत्थरों से टकराती



"मैने डराया या तुमने डराया है.." रिकी ने अपने हाथ में खाली सिगरेट का बॉक्स दिखाते हुए कहा जिसका जवाब शीना ने कुछ नही दिया



"एक ही दिन में पूरा बॉक्स, आर यू क्रेज़ी..." रिकी ने शीना के हाथ से सिगरेट छीन के फेंक दी



"ओके नाउ टेल मी, व्हाट्स दा प्राब्लम... शायद मैं कुछ मदद कर सकूँ.." रिकी ने जैसे ही यह बात शीना से कही, शीना पहले कुछ देर तो रिकी को घुरती रही, लेकिन फिर उसे सब बता दिया, हर बात , जहाँ से यह शुरू हुआ था और जहाँ पे आज यह बात पहुँच चुकी थी... उसकी बातें सुन रिकी भी कुछ देर खामोश रहा और फिर अपनी नज़रें सामने लगा दी जहाँ शीना देख रही थी.. समंदर की हवा काफ़ी तेज़ थी, आज लहरें भी कुछ ज़्यादा ही उँची थी, इसलिए जैसे जैसे वो पत्थरों से टकराती, वैसे वैसे रिकी और शीना के दिल छलानी होने लगते, शीना की बात सुन रिकी कुछ देर तो बस यूँ ही खड़ा रहा जैसे वो एक मूर्ति बन चुका हो, शीना की आँख में आँसू आने लगे थे



"आइआम सॉरी भाई, शायद मैने अपनी लाइफ की सबसे बड़ी ग़लती कर दी " शीना ने बड़ी रुआंदी सी आवाज़ में रिकी से यह कहा जो अभी भी एक मूरत के समान खड़ा था और समंदर के शोर को महसूस कर रहा था.. अपनी बात कहके शीना का रोना कुछ देर में बंद तो हो गया, लेकिन वो अभी भी सूबक रही थी...



"ह्म्म्मा, शीना.. आइ नेवेर थॉट कि मैं यह बात ऐसे कहूँगा, लेकिन अब जब सब पता चल गया है तो कहना ही पड़ेगा.." कहके रिकी ने शीना का हाथ अपने हाथों में लिया और उसे हल्के से चूम दिया, जिससे शीना की आँखों में एक चमक आ गयी



"चाहे कुछ भी हो, मेरी आखरी साँस तक मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ूँगा..मैं नहीं जानता यह सब सही है या ग़लत, यह जानते हुए भी कि इस रिश्ते के कोई मायने नहीं, यह जानते हुए भी के इस रिश्ते को समाज में, दुनिया में ग़लत माना जाएगा.. लेकिन मैं यह भी जानता हूँ के इस रिश्ते से हम खुश रहेंगे, हमारे दिल खुश रहेंगे, और उससे ज़्यादा मुझे ज़िंदगी में कुछ नहीं चाहिए... शीना राइचंद, क्या तुम अपनी पूरी ज़िंदगी मेरे साथ बिता पाओगी... मैं नहीं जानता कैसे, मैं नहीं जानता कि क्या कभी हम इस रिश्ते को कुछ नाम भी दे पाएँगे या नहीं... लेकिन मैं यह ज़रूर जानता हूँ कि भले मैं ज़िंदगी में अकेला रहूं, पर हमेशा तुम्हारे साथ तुम्हारा साया बनके चलूँगा... शीना राइचंद... आइ लव यू.." रिकी ने शीना की आँखों में देखते हुए कहा जिसे सुन शीना की दिल की धड़कने तेज़ी से बढ़ने लगी, आज उसे ऐसा लग रहा था कि उसे एक नयी ज़िंदगी मिली है...



"अगर मेरे साथ रहोगे, तो अकेले कैसे हुए डफर.." शीना ने हल्के से हंस के जवाब दिया और धीरे धीरे रिकी के पास आने लगी और अपने हाथ मज़बूती से रिकी के हाथों में थाम के उसे गले लगा लिया



"आइ लव यू टू..रिकी राइचंद..." शीना ने जैसे ही यह कहा, अब तक जो हवा तेज़ चल रही थी वो धीमी हुई , जो लहरें अब तक काफ़ी शोर मचा रही थी और पत्थरों से टकराके अपनी मौजूदगी का आभास करा रही थी, वो भी अब एक दूं शांत हो गयी... ऐसा लग रहा था मानो कुद्रट ने भी इनके रिश्ते की मज़ुरी दे दी थी.. रिकी का हाथ पकड़ के शीना वहीं खड़ी रही और अपना सर उसके कंधे पे रख दिया.. दोनो सामने देख रहे थे, कोई कुछ नहीं कह रहा था..



"लेकिन अब तक मेरी प्राब्लम का सल्यूशन नहीं दिया आपने.." शीना ने अपने सर को उँचा किया और रिकी को देख के कहा, शीना जो अब तक "आपने भाई" कहने की आदि थी, अब बातों से "भाई" शब्द को निकालने लगी थी



"ह्म्म्मब, अब भाभी की प्राब्लम का सल्यूशन तो इतना जल्दी नहीं मिलेगा, लेकिन रही बात मेरी और ज्योति की ट्रिप की.. मैं उसी का सल्यूशन लेके आया था तुम्हारे पास पर तुमने ही मुझे अपनी बात से डिसट्रॅक्ट कर दिया" रिकी ने आँख मार के कहा, जिससे शीना हल्के से शरमाई और अपनी नज़रें नीची कर ली...



"सल्यूशन मिल गया..." शीना ने तुरंत रिकी की बातों पे गोर किया और अपनी नज़रें उँची कर के रिकी से आँखें मिला दी, शीना की आँखों की गहराई में एक अलग किस्म की चमक थी जिसे सिर्फ़ रिकी ही देख सकता था उस वक़्त