Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम) - Page 12 - SexBaba
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Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

Update 099 -

इससे पहले मैं पूजा और मनीष को ऐसे घूरने से रोक पाती, पूजा बुरी तरह से शॉक्ड होते हुए बोली

पूजा- व्हॉट अपनी खुद की आई.टी. कम्पनी…. आर यू सीरियस… तुम्हें पता भी है कि एक आई.टी. कम्पनी शुरू करने में कितना खर्चा आता है और फिर उसके सक्सेस होने के चांस कितने कम हैं।

अमृता- यस आई एम… मैंने पहले से ही सब कुछ प्लान कर लिया है…. रही बात फंड की तो उसकी कोई प्राब्लम नहीं है। अगर तुम लोग अपना खुद का बिजिनेश शुरू करना चाहो तो मैं पार्टनशिप एग्रीमेंट करके तुम लोगों को भी फंड कर सकती हूँ।

मनीष- ना बाबा ना…. हमारे अंदर अपना बिजिनेश शुरू करने का कांफिडेंस नहीं है।

अमृता- तो फिर तुम लोग चाहो तो मेरी आई.टी. कम्पनी में जॉब कर सकते हो। इस तरह से हम लोग एक साथ भी रह सकते हैं।

पूजा- हुम्म आईडिया तो अच्छा है…. ठीक है हम इस बारे में जरूर सोचेंगे… लेकिन बेचारी श्रेया हमारे साथ नहीं रह पाऐगी।

अमृता- उसका भी मेरे पास एक सॉलूशन है।

श्रेया- क्या

अमृता- देखो यार तुम्हें तो पता ही है कि मैंने रवि और रघू के साथ मिलकर अलग अलग शहरों में अपने शॉपिंग मॉल का बिजिनेश शुरू किया था। तो मैं सोच रही हूँ कि अपने इंदौर और भोपाल के शॉपिंग मॉल को छोडकर बाकी सारे शॉपिंग मॉल बेचकर दिल्ली में अपने कुछ नए शॉपिंग मॉल शुरू करूँ।

श्रेया- यार मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि तुम आखिर कहना क्या चाहती हो

अमृता- अरे डफर मैं सोच रही हूँ कि एम.पी. के अपने सभी शॉपिंग मॉल का इंचार्ज में रघू को बना दूँगी और दिल्ली के अपने सभी शॉपिंग मॉल का इंचार्ज रवि को बना दूँगी। इस तरह से रवि भी दिल्ली में ही सेटल हो जाऐगा और उसके साथ तुम भी दिल्ली आ जाओगी।

मेरी बात सुनकर श्रेया की आँखों में कुछ पलों के लिए चमक आ गई थी। लेकिन फिर वो उदास होते हुए बोली

श्रेया- नहीं यार अमृता तुम मेरी बजह से अपने शॉपिंग मॉल क्यों बेच रही हो।

अमृता- बेबकूफ लडकी अलग अलग शहरों में शॉपिंग मॉल होने के कारण उन्हें मैनेज करने में प्राब्लम होती है। अपनी आई.टी. कम्पनी शुरू करने के बाद मैं रवि और रघू को बिल्कुल भी सपोर्ट नहीं कर पाऊँगी। इसलिए उन दोनों को ही अलग अलग शहरों में जाकर सारा बिजिनेश हैंडिल करना होगा। जिससे तुम लोगों की पर्सनल लाईफ में भी तो प्राब्लम हो सकती है ना। इंदौर और भोपाल के बीच ज्यादा दूरी नहीं है, इसलिए रघू और रश्मि उन्हें आसानी से मैनेज कर लेंगे, और दिल्ली इतना बडा शहर है कि उसमें एक दो शॉपिंग माल से काम तो चलेगा नहीं। यहाँ भी हमें कम से कम 5-6 शॉपिंग मॉल खोलने ही होंगे। जिन्हें दिल्ली में रहकर रवि आसानी से मैनेज कर लेगा। बैसे भी मैं जिन शॉपिंग मॉल को बेचने के बारे में सोच रही हूँ, उनकी मुझे अच्छी खासी प्राईस ऑफर हो रही है। जिससे हम दिल्ली में आसानी से अपने नए शॉपिंग मॉल खोल सकते हैं।

मेरी बात सुनकर श्रेया खुश होते हुए बोली

श्रेया- अगर ऐसा है तो फिर मुझे कोई प्राब्लम नहीं है। फिर तो मैं भी तुम्हारी आई.टी. कम्पनी में तुम्हारे साथ काम करने के लिए पूरे दिल से तैयार हूँ।

श्रेया की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली

अमृता- तो फिर ठीक है… सभी लोग अपने अपने सारे पर्सनल और दूसरे पेंडिंग काम निपटा लो। तब तक मैं शॉपिंग माल बाला काम पूरा करके कबीर के साथ अपनी आई.टी. कम्पनी शरू करने की तैयारी पूरी करती हूँ।

मनीष- लो भई हो गई कैरियर प्लानिंग.. तो फिर आज की प्लानिंग और सेट कर लेते हैं

कबीर- भाई तू ही बता दे… क्या करना है आज

मनीष- देखो अभी तो दोपहर के बस 3 ही बजे हैं। इसलिए मैं सोच रहा था कि क्यों ना हम कहीं पर घूमने चलते हैं, उसके बाद रात में किसी पव में जाकर इंजॉय करेंगे… बैसे भी कल हमें अपने अपने घर के लिए भी निकलना है। इसलिए जितना समय बचा है, क्यों ना एक साथ बिताया जाऐ।

कबीर- हाँ ठीक है… आईडिया अच्छा है… लेकिन लडकियोें से तो पूछ लो… वो रेडी हैं या नहीं…..

अमृता- मुझे कोई प्राब्लम नहीं है

पूजा- मुझे भी नहीं

श्रेया- तो फिर मैं घर पर अकेली क्या करूँगी…. मैं भी चलती हूँ… लेकिन फिर रात में तुम लोग अपने हॉस्टल बापिस कैसे जाओगे

कबीर- अरे यार हॉस्टल का पीछे बाला रास्ता है ना… हॉस्टल बालों ने अभी तक उसे बंद नहीं करवाया है।

श्रेया- तो फिर ठीक है… आधे घंटे बाद हम लोग यहीं पर मिलते हैं। उसके बाद चलते हैं घूमने

सारी प्लानिंग करने के बाद मैं श्रेया और पूजा तैयार होने के लिए अपने घर बापिस आ गए, जबकि कबीर और मनीष हॉस्टल बापिस चले गए। उस पूरे दिन दोस्तों के साथ इंजॉय करने के बाद अगले दिन मैं और कबीर कानपुर से आगरा के लिए निकल गए। चूंकि कानपुर से आगरा की दूरी करीब 300 किलोमीटर है, इसलिए हमें आगरा पहुँचने में करीब 5 घंटे का समय लगा। आगरा पहुँचते ही हम सीधे हमारे यानि कबीर के घर पहुंचे। शाम के करीब 4 बज चुके थे और कबीर ने कानपुर से निकलने से पहले ही पापा को कॉल कर दिया था, इसलिए पापा पूरे दिन से हम लोगों के आने का ही इंतजार कर रहे थे।

मैं इस वक्त बहुत ज्यादा नर्वस थी और पापा से आमना सामना करने में मुझे डर भी लग रहा था, हाँलाकि मेरे चेहरे में अब तक काफी ज्यादा चेंजिस आ गए थे, इसलिए मुझे पूरा यकीन था कि कबीर की तरह पापा भी मुझे पहचान नहीं पाऐंगे, लेकिन अपने अंदर के डर को मैं चाह कर भी कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। क्योंकि मेरा चेहरा अब भी निशा यानि मेरे पुराने चेहरे से काफी हद तक मिलता जुलता था। हुआ भी बिल्कुल वही, जिसका मुझे डर था। जैसे ही मैं पापा के सामने पहुँची तो वो बुरी तरह से हैरान होकर मुझे देखने लगे और अचानक से उनके मूँह से निकला

पापा- निशा…. बेटा त त तुम जिंदा हो…..

पापा के मूँह से अपना असली नाम सुनकर मेरा पूरा शरीर एकदम से ठंडा पड गया था, जिस कारण मैं दरवाजे पर ही किसी बुत की तरह खडी रह गई। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं उन्हें क्या जबाब दूँ, लेकिन तभी कबीर बात को संभालते हुए बोला

कबीर- अरे पापा यह निशा दीदी नहीं बल्कि अमृता है… मैंने बताया तो था आपको अमृता के बारे में

कबीर की बात सुनकर पापा एक बार फिर हैरान होकर मुझे देखते हुए बोले

पापा- मुझे यकीन ही नहीं हो रहा कि यह निशा नहीं बल्कि कोई दूसरी लडकी है। इसका चेहरा निशा से इतना ज्यादा मिलता जुलता है कि मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरी बेटी मेरे सामने ही खडी है।

पापा की बात सुनकर आखिरकार मैंने अपने अंदर हिम्मत जुटाई और आगे बडकर पापा के पैर छूते हुऐ बोली

अमृता- तो फिर आप मुझे अपनी बेटी ही समझ लीजिए… क्या फर्क पडता है कि मैं कौन हूँ। फर्क बस इस बात से पडता है कि आप मुझे किस रूप में देखना चाहते हैं।

मेरे यूँ अचानक पैर छूने और मेरी बात सुनकर पापा होश में आते हुए बोले

पापा- जुगजुग जिओ मेरी बच्ची….. सॉरी बेटा मैंने तुम्हें किसी दूसरे नाम से बुलाया….

पापा की बात सुनकर मैं खडी हुई और मुस्कुराते हुए बोली

अमृता- कोई बात नहीं अंकल… मैं आपकी फीलिंग समझ सकती हूँ…. इसलिए आप जिस नाम से चाहें मुझे बुला सकते हैं…. बैसे कबीर ने मुझे निशा दीदी के बारे में बताया था, उनके बारे में जानकर मुझे बहुत दुख हुआ और सच कहूँ अंकल तो जैसा आज आपका रिऐक्शन है, मुझे पहली बार देखने पर कबीर का भी कुछ ऐसा ही रिऐक्शन था। कबीर ने जब मुझे निशा दीदी की फोटो दिखाई थी तो मैं खुद भी बहुत हैरान थी, आखिर मेरा चेहरा उनसे इतना मिलता जुलता कैसे हो सकता है। पर फिर मुझे याद आया कि एक बार मेरी दादी माँ ने मुझे बताया था कि इस दुनिया में एक ही शक्ल के सात लोग होते हैं। हाँलाकि इस बात पर मुझे तब तक यकीन नहीं था, जब तक कि मैंने कबीर के मोबाईल में निशा दीदी की फोटो नहीं देखी, और अब जब मैं जान गई हूँ कि निशा दीदी और मेरा चेहरा इतना ज्यादा मिलता जुलता है, तो मुझे इस बात का बुरा लग रहा है कि मैं आप लोगों से पहले क्यों नहीं मिली। अगर हमारी मुलाकात कुछ सालों पहले होती तो मैं भी निशा दीदी से मिल सकती थी।

मेरी बात सुनकर पापा मुस्कुराते हुए बोले

पापा- सही कहा था तुम्हारी दादी ने, इस बारे में मैंने भी सुन रखा है लेकिन आज तुम्हें देखकर मैं भी इस बात पर यकीन करने लगा हूँ और रही बात निशा की तो शायद भगवान ने उसे इतनी ही जिंदगी दी थी, अब किस्मत में जो पहले लिख चुका है उसे हम तुम तो बदल नहीं सकते। बैसे बेटा तुम कहाँ से हो…..

अमृता- वो अंकल मैं असल में उत्तराखण्ड़ के एक छोटे से गाँव की हूँ, लेकिन पिछले कुछ सालों से दिल्ली में ही रह रही हूँ।

तभी कबीर बीच में टोकता हुआ बोला

कबीर- अरे पापा अमृता को अंदर आने के लिए भी कहोगे या दरवाजे पर यूँ ही खडे खडे उसका पूरा इंटरव्यू ले लोगे।

कबीर की बात सुनकर पापा को अपनी गलती का एहसास हुआ और वो तुरंत बोले

पापा- ओह सॉरी सॉरी बेटा… मैं तुम्हें देखकर इतना एक्साईटेड हो गया कि तुमसे अंदर आकर बैठने के बारे में बोला ही नहीं।

पापा की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

अमृता- कोई बात नहीं अंकल

पापा- आओ बेटा अंदर आओ… हम आराम से बैठकर बातें करते हैं….

इतना बोलकर पापा कबीर को देखते हुए बोले

पापा- अरे बेटा कबीर तुम अमृता बिटिया से बातें करो, तब तक मैं तुम लोगों के लिए चाय नाश्ता का इंतजाम करता हूँ

कबीर- अरे नहीं पापा आप बैठकर अमृता से बातें करो… मैं बस 5 मिनट में चेंज करके आया, उसके बाद चाय नाश्ते का इंतजाम भी कर दूँगा।

इतना बोलकर कबीर अपना सामान लेकर अपने रू की तरफ चला गया, जबकी मैं और पापा हॉल में ही सोफे पर जाकर बैठ गए। कुछ देर की खामोशी के बाद पापा ने एक बार फिर से सबाल किया

पापा- बेटा तुम्हारे पापा क्या करते हैं

मैं पहले से ही इन सबालों के लिए तैयार होकर आई थी, इसलिए पापा का सबाल सुनकर मैंने थोडा उदास होते हुए कहा

अमृता- वो असल में अंकल जब मैं छोटी थी, तभी एक कार एक्सीडेंट में मेरे माता पिता की डेथ हो गई थी, मेरी दादी ने ही मुझे पाल पोसकर बडा किया है। लेकिन कुछ सालों हमारा गाँव लैंडस्लाईट के कारण पूरी तरह से तबाह हो गया था, जिसमें मेरी दादी की भी डेथ हो गई थी, इसलिए अब मेरी फैमली में बस मेरे अंकल हैं जो आर्मी में मेजर हैं।

पापा- ओह आई एम सॉरी बेटा… मैंने अनजाने में ही तुम्हारे जख्मों को कुरेद दिया है

अमृता- नहीं कोई बात नहीं अंकल… मेरी दादी ने कभी मुझे माता पिता की कमी महसूस नहीं होने दी थी और सच कहूँ तो मुझे तो उनके चेहरे भी याद नहीं है, रही बात दादी की, तो उस घटना को भी अब काफी समय हो गया है। इसलिए मैं उस दुख से भी उबर चुकी हूँ। बैसे भी भगवान ने मुझसे दादी को छीना तो मुझे इतने प्यारे और अच्छे अंकल दे दिए, जो मुझे अपनी सगी बेटी से ज्यादा प्यार करते हैं।

पापा- मैं कुछ समझा नहीं बेटा… क्या तुम्हारे अंकल तुम्हारे साथ नहीं रहते थे

अमृता- वो असल में मेरे जन्म से पहले ही मेरे अंकंल एक मिशन के दौरान गलती से बार्डर पार करके दुशमन देश पहुँच गए थे, जहाँ उन्हें कैद कर लिया गया था, अंकल कई सालों तक दुशमनों की कैद में रहे। उस दौरान आर्मी बालों ने हमारे घर पर बताया था कि मेरे अंकल दुशमनों से लडते वक्त शहीद हो गए हैं। इसलिए हम लोगों को उनके जिंदा होने के बारे में कुछ भी पता नहीं था, कुछ सालों तक दुशमनों की कैद में रहने के बाद मेरे अंकल अपने कुछ साथियों के साथ दुशमनोें की कैद से भाग कर बापिस आ गए, लेकिन जब वो घर बापिस आऐ तो उन्हें पता चला कि एक कार एक्सीडेंट में उनका पूरा परिवार मारा जा चुका है, जबकि उस एक्सीडेंट में मैं और मेरी दादी जिंदा बच गए थे। अपने दोनों बेटों को खोने के बाद दादी हमारे पुराने घर में रहना नहीं चाहती थीं, इसलिए वो मुझे लेकर एक छोटे से गाँव में चली गईं, जहाँ उन्होंने मेरी परवरिस की थी। वहीं दूसरी तरफ मेरे अंकल को भी यही लगता था कि उनका पूरा परिवार मारा जा चुका है। इसलिए उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देश के नाम कर दी और कभी भी शादी नहीं की। लेकिन कुछ सालों पहले किश्मत ने हम दोनों को मिला दिया। तब से अंकल मुझे ही अपनी बेटी समझकर मुझे प्यार करते हैं।

पापा को अपने बारे में सब कुछ बताने के बाद मैं मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देखने लगी।

कहानी जारी है......
 
Update 100 -

मेरी पूरी कहानी सुनने के बाद पापा मुझे समझाते हुए बोले

पापा- किसी ने सही कहा कि कि भगवान एक रास्ता बंद करते हैं तो दूसरा जरूर खोल देते हैं, जब तुम्हारा पूरा परिवार तुम्हें छोड गया तो उन्होंने तुम्हारे अंकल से मिलवा दिया, तुम्हारी कहानी सुनने के बाद मुझे इस बात का पूरा यकीन हो गया है कि तुम्हारे अंकल एक बहुत अच्छे इंशान हैं।

पापा की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

अमृता- हाँ वो तो है… मेरे बिकाश अंकल दुनिया के सबसे अच्छे और प्यारे इंशान है।

पापा- और तुम भी बहुत प्यारी और बहादुर बच्ची हो…. इतना सब कुछ सहने के बाद भी तुम मुस्कुरा रही हो… इसके लिए बहुत हिम्मत की जरूरत होती है मेरी बच्ची।

अमृता- अब आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं अंकल…. मैं उतनी भी काबिल नहीं हूँ… बस पुरानी यादों से मूवऑन करके खुश रहने की कोशिश कर रही हूँ।

पापा- बैसे कबीर ने मुझे तुम दोनोें के रिलेशन के बारे में कुछ दिनों पहले ही बताया है, इसलिए मैं खुद भी तुमसे मिलना चाहते था। सच कहूँ तो तुमसे मिलकर मुझे ऐसा लग ही नहीं रहा है कि मैं अपनी होने बाली बहू से बात कर रहा हूँ, बल्कि तुम तो मुझे अपनी बेटी जैसी लग रही हो। इसलिए मुझे इस रिश्ते से कोई आपत्ति नहीं है। अब तुम जल्दी से जल्दी अपने अंकल से बात कर लो, ताकि मैं तुम्हारे घर जाकर कबीर के लिए तुम्हारा हाथ माँग सकूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम जल्द से जल्द इस घर में आ जाओ ताकि यह घर एक बार फिर खुशियों से भर जाऐ।

इससे पहले मैं पापा की बात का कोई जबाब देती कबीर हमारे सामने टेबिल पर चाय नाश्ता रखते हुए बोला

कबीर- पापा अमृता ने अपने अंकल से मेरे बारे में ऑलरेडी बात कर ली है और वो भी मुझसे मिलना चाहते हैं। इसलिए कल मैं अमृता के साथ उसके घर जा रहा हूँ। ताकि अंकल से मिल सकूँ। उसके बाद जो करना है आपको और अमृता के अंकल को करना है।

पापा- यह तो बहुत अच्छी बात है….

इतना बोलकर पापा ने चाय का कप उठाकर मुझे दे दिया और फिर अपने लिए भी एक कप उठाकर चाय शिप करने लगे। चाय नाश्ता करने के बाद मैंने कहा

अमृता- तो फिर ठीक है अंकल जी मैं अब चलती हूँ

पापा- पर बेटा अभी अभी तो कबीर ने बताया था कि तुम दोनों कल दिल्ली जाओगे। फिर अभी तुम कहाँ जा रही हो।

अमृता- हाँ अंकल दिल्ली तो हम कल ही जाऐंगे, लेकिन आज रात के लिए मुझे अपने लिए होटल रूम भी तो बुक करना है ना।

पापा- अरे बेटा होटल में रुकने की क्या जरूरत हो… इसे अपना ही घर समझो… बैसे भी कुछ दिनों बाद तो तुम्हें इसी घर में रहने आना है।

अमृता- पर अंकल शादी से पहले मेरा यहाँ रुकना ठीक नहीं होगा और फिर आप लोगों को भी मेरे कारण प्राब्लम होगी

पापा- अरे अमृता बेटा हमें कोई प्राब्लम नहीं होगी, बल्कि मुझे तो अच्छा लगेगा, कम से कम इस बहाने मुझे भी तुम्हारे साथ कुछ और समय विताने का मौका मिल पाऐगा।

इतना बोलकर पापा ने कबीर की तरफ देखते हुए कहा

पापा- अरे कबीर तुम अमृता बेटा को निशा का कमरा दिखा दो और उसका सामान भी उसी कमरे में रख दो।

अमृता- ठीक है अंकल अगर आप कह रहे हैं तो आज मैं यहीँ रुक जाती हूँ। लेकिन मेरी भी एक शर्त है

मेरी बात सुनकर पापा थोडा सीरियस होते हुए बोले

पापा- कैसी शर्त बेटा

पापा की बात सुनकर मैंने उनसे मुश्कुराते हुए कहा

अमृता- आज रात का डिनर मैं अपने हाथों से बनाकर आपको खिलाऊँगी,

मेरी बात सुनकर पापा भी मुस्कुराते हुए बोले

पापा- ठीक है…. मुझे कोई प्राब्लम नहीं है…. कम से कम इस बहाने मुझे कुछ स्वादिस्ट खाने के लिए तो मिलेगा

इसके बाद मैं कबीर के साथ अपने कमरे में चली गई। कबीर के जाने के बाद मैंने सबसे पहले बाथरूम में जाकर नहाया और फिर कपडे चेंज करके बापिस से हॉल में आगई। जहाँ पापा टी.वी. पर न्यूज देख रहे थे और कबीर मार्केट से कुछ सामान लेने गया हुआ था। इसलिए मैं भी पापा के पास बैठकर उनसे बातें करते हुए टी.वी. पर न्यूज देखने लगी। कुछ देर तक पापा से बातें करने के बाद मैं किचिन में रात के डिनर की तैयारी करने चली गई, तब तक कबीर भी बापिस आ चुका था, इसलिए वो भी मेरे साथ किचिन में आकर मेरी हेल्प करने लगा। हांलाकि वो मेरी हेल्प कम कर रहा था और मेरे साथ छेडछाड ज्यादा कर रहा था। जिसमें मुझे भी काफी ज्यादा मजा आ रहा था।

इसलिए मैं भी बडे आराम से अपना काम कर रही थी, ताकि हमारे बीच की यह छेड छाड कुछ देर तक यूं ही चलती रहे। खाना तैयार होने के बाद हम तीनों ने एक साथ मिलकर डिनर किया और फिर हॉल में बैठकर कुछ देर आपस में बातें करने के बाद अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गए। अपने कमरे में आने के बाद मैं जैसे ही दरवाजा अंदर से बंद करने लगी, ठीक तभी कबीर वहाँ आ गया। कबीर को अपने कमरे के बाहर देखकर मैं बुरी तरह से हैरान रही गई। इससे पहले मैं कुछ समझ पाती कबीर एक झटके में कमरे के अंदर दाखिल हो गया और मुझे अपनी बाहों में भरकर किस करने लगा।

किचिन में कबीर ने मेरे साथ जो छेडछाड की थी, उससे मैं पहले से ही काफी ज्यादा उत्तेजित थी ऊपर से कबीर के यूँ अचानक मेरे कमरे में आकर मुझे किस करने से मैं धीरे धीरे अपना सेल्फ कंट्रोल खोने लगी थी, इसलिए मैं भी उसका पूरा साथ देते हुए किस को इंजाय कर रही थी। मैंने इस वक्त टॉप-स्कर्ट पहनी हुई थी, जिसमें मैं कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी। इसलिए कबीर धीरे धीरे अपना कंट्रोल खोता जा रहा था और मैं भी वासना की आग में जलकर उसकी बाहों में पिघलती जा रही थी। हम दोनों का यह किस काफी देर तक चलता रहा और जब हमारी सांसे उखडने लगीं तो कबीर मुझसे अलग हो गया। उसके बाद कबीर ने मेरे कमरे को अंदर ले लॉक किया और मुझे अपनी गोद में उठाकर विस्तर की तरफ जाने लगा।

अब तक मैं पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और मेरा मन अब चुदने का कर रहा था। इसलिए मैंने मन ही मन तय किया कि अगर कबीर आज मेरे साथ फिजीकल होने की कोशिश भी करेगा तो मैं उसे मना नहीं करूँगी, आखिरकार अब हम दोनों रिलेशनशिप में आ चुके थे और जल्दी ही हमारी शादी भी होने बाली थी। विस्तर के पास पहुँचकर कबीर ने मुझे आहिस्ता से बिस्तर पर लेटा दिया और फिर वो मेरे ऊपर आकर एक बार फिर से मुझे किस करने लगा। कबीर के इस उताबलेपन को देखकर मैं समझ गई थी कि आज मेरी चुदाई पक्का होकर ही रहेगी। कबीर बिना रुके लगातार मेरे चेहरे पर किस करता ही जा रहा था।

कभी वो मेरे होंठों को चूमता तो कभी गालों को और कभी मेरी गर्दन को चूमने लगता, कबीर के इस तरह मुझे किस करने से मेरे मूँह से हल्की हल्कि सिस्कियां निकलने लगीं थी, जो माहौल को और भी ज्यादा कामुक बना रहीं थी, मेरे चेहरे पर किस करने के बाद कबीर नीचे की तरफ बडने लगा, वो मेरी गर्दन से होता हुआ मेरी क्लीबेज तक आ पहुँचा था। असल में मैंने लूज टॉप पहना हुआ था, जिसका फ्रंट कुछ ज्यादा ही डीप था, जिस कारण मेरी क्लीवेज बाहर की तरफ उभर आईं थीं, जैस ही कबीर ने अपने होंठों से मेरे क्लीबेज को छुआ तो मेरे पूरे बदन में सनसनाहट दौड गई और मैं मदहोश होने लगी।

वहीँ दूसरी तरफ कबीर अपने हाथों से मेरे बूब्स को सहलाते हुए लगातार मेरे क्लीवेज को किस कर रहा था। मेरी क्लीवेज को जी भरकर चूमने के बाद वो धीरे धीरे नीचे की तरफ बडने लगा। मैं तो अब तक पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और इस लम्हे को इंजॉय कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ कबीर किस करते करते मेरी नाभी तक आ पहुँचा था, मेरा टॉप नीचे से थोडा शार्ट था, जिस कारण मेरी नाभी टॉप से बाहर झाँक रही थी, मेरी नाभी को देखते ही कबीर उसपर टूट पडा और उसे चूमने के साथ साथ अपनी जीभ से छेडछाड करने लगा।

कबीर की इस हरकत से मेरे पूरे बदन में ऐंठन होने लगी थी और मेरी चूत में से पानी भी रिसने लगा था, जिससे मुझे एहसास हुआ कि अगर कबीर ऐसे ही मेरी नाभी के साथ छेडछाड करता रहा तो पक्का मैं झर जाऊंगी। इससे पहले मैं कबीर को रोक पाती, कबीर नीचे की तरफ बडने लगा, जिससे मैं समझ गई कि अब वो पक्का मेरी चूत को किस करने बाला है, ऊपर से मैंने स्कर्ट पहन रखी थी, जिस बजह से वो आसानी से मेरी स्कर्ट ऊपर करके मेरी चूत तक पहुँच सकता था। कबीर ने मुझे अब तक इतना ज्यादा उत्तेजित कर दिया था कि मैं अब उसे रोकना नहीं चाहती थी, लेकिन फिर भी मैंने अपनी सारी ताकत इकट्ठी करते हुऐ कबीर से कहा

अमृता- कबीर प्लीज अब रुक जाओ

पर कबीर ने मेरी बात को जैसे सुना ही नहीं, इसलिए मैंने इस बार थोडी तेज अबाज में उससे कहा

अमृता- कबीर प्लीज एक बार मेरी बात सुन लो… उसके बाद तुम जो चाहो मेरे साथ कर सकते हो, मैं तुम्हें नहीं रोकूँगी

कबीर अब तक किस करते हुए मेरी चूत के बिल्कुल पास आ पहुँचा था, लेकिन जैसे ही उसने मेरी बात सुनी तो वो तुरंत रुक गया और उठकर मेरे बगल में आकर लेट गया। इसके बाद वो वासना भरी नजर से मुझे देखते हुए बोला

कबीर- हुम्मममम… कहो क्या कह रही थी तुम….

अमृता- वो वो मैं कह रही थी कि अभी हमें यह सब नहीं करना चाहिए….

कबीर- हम दोनों ही एक दूसरे से प्यार करते हैं और जल्द ही शादी भी करने बाले हैं, तो भला यह सब करने में क्या प्राब्लम है।

अमृता- कोई प्राब्लम नहीं है कबीर… लेकिन तुम समझने की कोशिश करो, मैं अब तक वर्जिन हूँ और मैं अपनी वर्जनिटी सुहागरात पर तुम्हें गिफ्ट करना चाहती हूँ। ताकि मैं हमारी सुहागरात को यादगार बना सकूँ। बस इतनी सी बात है… लेकिन अगर तुम अब भी मेरे साथ फिजीकल होना चाहते हो तो मैं तुम्हें नहीं रोकूँगी…

मेरी बात सुनकर कबीर कुछ पलों तक मेरी आँखों में ही देखता रहा और फिर मेरे माथे पर प्यार से किस करते हुए बोला

कबीर- ठीक है… तो फिर हम यह सब हमारी सुहागरात पर ही करेंगे…

अमृता- प्रामिस….

कबीर- हाँ बाबा प्रामिस… लेकिन मैं तुम्हें किस करने और तुम्हारे साथ छेडछाड करने से अपने आप को रोक नहीं सकता।

अमृता- कोई बात नहीं…. उसे मैं कंट्रोल कर लूँगी…

कबीर- तो फिर ठीक है, अब तुम सो जाओ…. कल हमें दिल्ली के लिए निकलना है…

इतना बोलकर कबीर बिस्तर से उठ खडा हुआ और जैसे ही दरवाजे के पास पहुँचा तो मैंने उससे कहा

अमृता- तुम चाहो तो मेरे साथ सो सकते हो

कबीर- नहीं… अगर मैं तुम्हारे साथ सोया तो अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाऊँगा, बैसे भी मुझे लग रहा है कि अपने आप को रिलेक्स करने के लिए मुझे ठंडे पानी से नहाना पडेगा।

इतना बोलकर कबीर दरवाजा खोलकर बाहर निकल गया। कबीर की बात सुनकर मेरे चेहरे पर एक कातिलाना मुस्कान आ गई थी, हाँलाकि मैं भी काफी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी, जिस कारण मेरा भी प्लान इस वक्त ठंडे पानी से नहाकर अपने आप को रिलेक्स करने का था। इसलिए कबीर के बाहर जाते ही मैं भी बिस्तर से उठ खडी हुई और अपने कमरे को अंदर से लॉक करने के बाद बाथरूम में घुस गई। बाथरूम के अंदर जाकर मैंने अपने सारे कपडे उतार दिए और आदमजात नंगी होकर शॉवर के नीचे खडी हो गई। जैसे ही ठण्डा ठण्डा पानी मेरे बदन पर गिरा तो धीरे धीरे मेरी उत्तेजना शांत होने लगी। मैं काफी देर तक यूँ ही शावर के नीचे खडी रही और जब मैं पूरी तरह से रिलेक्स हो गई तो मैंने शावर बंद कर दिया।

इसके बाद अपने बदन को टॉबल से सुखाने के बाद मैंने अपने किपडे पहने और फिर बाथरूम से बाहर आ गई। चूँकि मेरे बाल पूरी तरह से गीले हो चुके थे, इसलिए सोने से पहले मैंने हेयर ड्रायर से अपने बालों को सुखाया, उसके बाद बिस्तर पर लेट गई। लेकिन जैसे ही मैंने अपनी आँखें बंद की तो कुछ देर पहले कबीर से साथ बिताऐ वो सारे पल मेरी आँखों के सामने किसी बीडियो की तरह चलने लगे। इसलिए मैंने तुरंत अपनी आखें खोल ली और फिर अपने मोबाईल में कबीर को आई लव यूँ लिखकर मैसेज कर दिया। करीब 5 मिनट बाद कबीर का रिप्लाई आया जिसमें लिखा हुआ था।

“लव यू टू मेरी जान… अब सो जाओ… गुड नाईट एण्ड स्वीट ड्रीम”

कबीर का मैसेज पडने के बाद मैंने मुस्कुराते हुए अपना मोबाईल साईड टेविल पर रख दिया और सोने की कोशिश करने लगी। जिसके कुछ देर बाद ही मैं गहरी नींद में चली गई। अगले दिन सुबह सुबह कबीर जब मुझे कॉफी देने आया तो उसने बताया कि पापा भी हमारे साथ दिल्ली चल रहे हैं, ताकि वो विकाश अंकल से हमारी शादी की बात फाईनल कर सकें। इससे मुझे कोई प्राब्लम नहीं थी, इसलिए मैं तुरंत मान गई और कबीर के जाने के बाद मैंने विकाश अंकल को कॉल करके इस बारे में बता दिया। उसके बाद हम लोग तैयार होकर दिल्ली के लिए निकल गए, रास्ते में हमने एक ढावे पर रुककर चाय नास्ता भी कर लिया था।

कहानी जारी है..........
 
सॉरी दोस्त ऑफिस के काम से कुछ दिनों के लिए आउट ऑफ सिटी गया हुआ था.... पूरे एक हफ्ते से रेगुलर सफर में रहने के कारण अपडेट पोस्ट नहीं कर पया था। कल रात को ही घर बापिस आया हूँ। इसलिए आज शाम तक पक्का अपडेट पोस्ट कर दूँगा।
 
Update 101 -

हम लोग दोपहर कबीर 1 बजे दिल्ली में मेरे घर पहुँच गऐ थे। चूँकि संडे का दिन था, इसलिए आज विकाश अंकल घर पर ही थे। विकाश अंकल ने कबीर और पापा का बडी गर्मजोशी से स्वागत किया। सबका इंट्रोडक्शन करवाने के बाद मैं अपने रूम में चेंज करने के लिए चली गई, तब तक घर पर काम करने बाले नौकरों ने चाय नाश्ते का इंतजाम कर दिया था। अपने कपडे चेंज करने के बाद मैं बापिस से हॉल में आकर सबके साथ बैठ गई। कुछ देर नॉर्मल बातें करने के बाद पापा ने विकाश अंकल से कहा

पापा- मिस्टर चौहान अब आपको तो पता ही है कि मेरा बेटा कबीर और आपकी भतीजी अमृता दोनों ही एक दूसरे को पसंद करते हैं। इसलिए आज मैं आपसे कबीर के लिए अमृता का हाथ माँगने आया हूँ।

पापा की बात सुनकर विकाश अंकल कुछ देर तक खामोश रहे और फिर थोडा सीरियस होकर बोले

विकाश- देखिए मिस्टर शर्मा मुझे इस रिश्ते से कोई एतराज नहीं है, इनफेक्ट अगर अमृता ने कबीर को पसंद किया है तो जरूर कबीर एक अच्छा और बेहद टेलेंटेड लडका होगा। लेकिन शादी की इतनी क्या जल्दी है। कुछ दिनों तक बच्चों को साथ घूमने फिरने और समय बिताने देते हैं। शादी तो होती ही रहेगी

पापा- मिस्टर चौहान असल में मैं हार्ट पेसेंट हूँ और जल्द ही मेरी बाईपास सर्जरी होने बाली है। मुझे नहीं पता कि मैं उस सर्जरी को सरवाईब कर भी पाऊँगा या नहीं। इसलिए अपनी सर्जरी से पहले ही अपने बेटे का घर वसता हुआ देखना चाहता हूँ। इस दौरान मुझे भी कुछ समय अपनी बहू के साथ समय बिताने का मौका मिल जाऐगा। आप मुझपर यकीन कीजिए मैं अमृता को अपनी सगी बेटी की तरह रखूँगा।

विकाश- अरे मिस्टर शर्मा आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं…. मुझे आप लोगों पर पूरा यकीन है कि आप लोग अमृता को हमेशा खुश रखेंगे। लेकिन शायद आपको इस बारे में पता ना हो कि मैं भी अभी कुछ समय पहले ही अमृता से मिला हूँ। उससे पहले हम दोनों को ही एक दूसरे के बारे में कुछ भी पता नहीं था। मैंने अपनी पूरी जिंदगी देश के नाम समर्पित कर दी है और अमृता ही हमारे परिवार की एकमात्र उत्तराधिकारी है। मैंने अपनी लगभग आधी से ज्यादा जिंदगी अकेले ही बिताई है। अब जब मेरी अपनी भतीजी अमृता मेरे पास है तो मैं उसके साथ कुछ समय बिताना चाहता हूँ। बैसे भी मैं आर्मी से हूँ तो मेरी जिंदगी का भी कोई भरोसा नहीं है।

पापा- मैं आपकी बात समझ रहा हूँ मिस्टर चौहान लेकिन बच्चों की खुशी के लिए हमें कुछ ना कुछ बलिदान तो करना ही पडता है।

पापा की बात सुनकर विकाश अंकल थोडा निराश होते हुए बोले

विकाश- हाँ वो बात तो है…………

इतना बोलकर विकाश अंकल खामोश होकर कुछ देर यूँ ही सोचते रहे और फिर अचानक से बोले

विकाश- अच्छा ठीक है… मुझे यह रिश्ता मंजूर है….. आप जब भी कहेंगे मैं दोनों बच्चों की शादी के लिए तैयार रहूँगा। लेकिन मेरी एक शर्त है

विकाश अंकल की बात सुनकर पापा थोडा हैरान होते हुए बोले

पापा- कैसी शर्त

विकाश- दोनों बच्चों की शादी के बाद आप लोगों को यहीँ दिल्ली में रहना होगा। इससे मुझे भी अपनी भतीजी से दूर नहीं होना पडेगा और आप भी अपने बेटे बहू के साथ रह सकेंगे।

विकाश अंकल की बात सुनकर पापा ने कुछ देर तक इस बारे में सोचा और फिर मुस्कुराकर बोले

पापा- ठीक है मिस्टर चौहान मुझे आपकी शर्त मंजूर है….

विकाश- तो फिर ठीक है, मैं जल्द ही किसी अच्छे पण्डित से मिलकर शादी की तारीख निकलवा कर आपको बता दूँगा।

पापा- जैसा आपको सही लगे… बैसे मैं सोच रहा था कि क्यों ना शादि से पहले हम दोनों की इंगेज्मेंट करवा दें

विकाश- मुझे कोई ऐतराज नहीं है।

पापा- तो फिर ठीक है…. एंगेज्मेंट हम आगरा से करेंगे

पापा की बात सुनकर विकाश अंकल थोडा चौंकते हुए बोले

विकाश- आगरा से क्यों…..

पापा- अरे भाई हम लोग वर्षों से आगरा में रह रहे हैं, वहाँ हमारे कई जान पहचान बाले लोग हैं। इसलिए मैं उन सभी से अमृता को मिलवाना चाहता हूँ। बैसे भी बारात लेकर तो हमें दिल्ली ही आना है और शादि के बाद भी हम लोग यहीं सैटल होने बाले हैं। तो मैं चाहता हूँ कि कम से कम शादि का कोई एक प्रोग्राम तो हम लोग आगरा में ही करें।

पापा की बात सुनकर विकाश अंकल तुरंत बोले….

विकाश- हाँ यह ठीक रहेगा…. इस वहाने हम लोग भी आपके रिलेटिव्स से मिल लेंगे और आगरा भी घूम लेंगे।

इसी तरह कुछ देर और बातें करने के बाद हम सभी लोगों ने एक साथ लंच किया। जिसके बाद कबीर और पापा आगरा के लिए बापिस निकल गए। अगले दिन मैं दिल्ली के एक फेमस प्रापर्टी डीलर से मिलने चली गई। असल में मैं हमारी कॉलोनी में ही कबीर के लिए एक घर लेना चाहती थी, ताकि शादि के बाद भी मैं विकाश अंकल के एकदम पास रह सकूँ। किस्मत से इस वक्त हमारे घर के पास ही एक मकान विकाऊ था। हाँलाकि वो हमारे घर से काफी बडा और मंहगा भी था। लेकिन उस लोकेशन पर मकान मिलना ही मेरे लिए बहुत बडी बात थी। ऊपर से मेरे पास इस वक्त पर्याप्त पैसे भी थे।

इसलिए मैं उस प्रापर्टी डीलर के साथ उस मकान को चैक करने जा पहुँची। वो मकान पूरी तरह से खाली था, यहाँ तक कि उसमें कोई फर्नीचर बगैरह भी नहीं था। शायद मंहगा होने के कारण किसी ने भी उस मकान को कंस्ट्रक्शन कंपनी बालों से खरीदा नहीं था, इसलिए कंस्ट्रक्शन के बाद से अब तक उस मकान में कोई रहने नहीं आया था। असल में वो एक दो मंजिला मकान था, जिसमें 4 बेडरूम और एक मास्टर बेडरूम के अलावा, किचिन हॉल, गैराज बगैरह बने हुऐ थे, साथ ही साथ उस मकान में एक अच्छा खासा गार्डन भी था, जिस कारण वह मकान मुझे तुरंत पसंद आ गया। इसलिए मैंने तुरंत ही उस मकान को खरीदने की डील फाईनल कर ली।

मैं वो मकान कबीर के नाम से खऱीदना चाहती थी, इसलिए मैंने कबीर से पहले ही उसके डॉक्यूमेंट्स की एक कॉपी ले ली थी। हांलाकि वो मकान पूरे 3 करोड रूपये का था, लेकिन डील फाईनल होते ही मैंने अपने डिजीटल कैश कार्ड से तुरंत सारा पेंमेंट कर दिया और कबीर के डॉक्यूमेंट भी उस प्रापर्टी डीलर को दे दिए। ताकि वो जल्दी से जल्दी मकान का रजिस्ट्रेशन कबीर के नाम करवाकर मुझे उस मकान के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट दे सके। पूरा पेमेंट एडवांस में होने के कारण प्रापर्टी डीलर कॉफी खुश था, वो समझ गया था कि मेरे कांटेक्ट में रहने से आगे चलकर उसे और भी ज्यादा फायदा हो सकता है। इसीलिए उसने मुझे तुरंत उस मकान का चाबियाँ दे दीं थी और एक हफ्ते के अंदर रजिस्ट्रेशन कबीर के नाम ट्रांशफर करवाने का वादा भी कर दिया।

मकान का सारा काम होने के बाद मैं एक इंटीरियल डिजाईनर से मिलने चली गई और उसे अपने मकान को रिन्यूवेट करके रहने लायक बनाने का काम सौंप दिया। क्योंकि वह मकान काफी लम्बें समय से खाली पडा हुआ था और उसमें सामान के नाम पर एक सुई भी नहीं थी। जिस कारण उस मकान के लिए सारा जरूरी सामान इकट्ठा करके उसे रहने लायक बनाने का मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं था। इसलिए यह काम मैंने किसी इंटीरियल डिजाईनर को सौंपने का फैसला किया था। इंटीरियल डिजाईनर से डील फाईनल करने के बाद मैं अपने घर बापिस आ गई। अब चूँकि शादि के बाद यहाँ दिल्ली में रहने के लिए मकान का इंतजाम भी हो चुका था। इसलिए मैं अपने दूसरे जरूरी कामों को पूरा करने में लग गई।

सबसे पहले तो मैं उसी दिन शाम के समय सोढी, विक्रांत, साक्षी और पूर्वी से मिली। उनसे मिलने के बाद मैंने उन्हें कबीर और मेरी शादी फिक्स होने की खुशखबरी दी और फिर उन लोगों से हमारी शादि के सेम वेन्यू पर एक दो दिन आगे पीछे करके शादी करने के लिए कहा। थोडी सी ना नुकुर के बाद वो लोग भी सेम बेन्यू पर शादी करने के लिए मान ही गए। वहीं दूसरी तरफ श्रेया ने रवि और रघू से पहले ही इस बारे में बात कर ली थी। इसलिए हम लोगों का सेम बेन्यू पर शादी करने का प्लान ठीक ठाक आगे बड रहा था। अपने दोस्तों से कुछ देर बातें करने के बाद मैं अपने घर बापिस लौट आई।

अगले दिन विकाश अंकल ने मुझे बताया कि दो महिने बाद हमारे देश में फॉरेन लीडर्स का एक बहुत बडा सम्मिट होने बाला है। जिनकी सिक्योरिटी की पूरी जिम्मेदारी एन.एस.जी. को सौंपी गई है। इसलिए कुछ दिनों तक वो होममिनिस्टर और एन.एस.ए. के साथ सिक्योरिटी प्लानिंग को लेकर जरूरी मीटिंग्स में बिजी रहेंगे। जिस कराण मेरी और कबीर की शादी के साथ साथ इंगेज्मेंट की डेट फाईनल करने के लिए पण्डित जी से मिलने का काम विकाश अंकल ने मेरे जिम्मे छोड दिया था। बैसे भी मैं खुद भी यही चाहती थी। असल में अब जब मैं कबीर से शादी करने का फैसला कर ही चुकी थी। तो मैं चाहती थी कि हमारी शादी शुभ मुहूर्त में हो।

लेकिन उसके लिए मुझे अपनी यानि निशा की ऑरीजनल डेट ऑफ वर्थ की जरूरत पडने बाली थी। बैसे तो मेरी और अमृता की डेट ऑफ बर्थ सेम ही थी, बस वर्थ ईयर में डिफरेंस था। जिस बजह से मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इसलिए अगले दिन ही मैंने एक पण्डित के पास जाकर मेरी ऑरीजनल डेट ऑफ वर्थ और कबीर की ऑरीजनल डेट ऑफ वर्थ से हमारी शादी की डेट और इंगेज्मेंट की डेट निकलवा ली। पण्डित जी के अनुसार अगले महिने इंगेज्मेंट और तीन महिने बाद शादी का शुभ मुहूर्त था। इतना समय मुझे अपने पेंडिंग कामों को निपटाने के लिए काफी था। इसलिए घर पर आकर मैंने विकाश अंकल और कबीर को कॉल करके इस बारे में बता दिया।

अब चूँकि विकाश अंकल अगले कुछ दिनों तक बिजी रहने बाले थे, इसलिए मैं दिल्ली से इंदौर के लिए निकल गई, जहाँ रवि और रघू से मीटिंग करके मैंने अपने इंदौर और भोपाल के शॉपिगं मॉल छोडकर बाकी सभी शॉपिंग मॉल को बेचकर दिल्ली में शॉपिंग मॉल शुरू करने के प्लान पर डिस्कस किया, साथ ही साथ मैंने इंदौर और भोपाल का सारा बिजिनेश रघू को हैंडओवर करने और दिल्ली का बिजिनेश रवि को हैंडओपर करने के प्लान के बारे में भी उन्हें बता दिया था। जिसमें उन दोनों को कोई प्राब्लम नहीं थी। पूरा प्लान डिस्कस होने के बाद अगले दिन से हम तीनों अपने अगल अलग शहरों के शॉपिंग मॉल बिजिट करने निकल गए। चूँकि वहाँ के प्रापर्टी डीलर्स से मैं पहले ही बात कर चुकी थी। इसलिए वहाँ जाते ही हमने अपने शॉपिंग मॉल को सैल करने की डील फाईनल कर ली।

करीब दो हफ्तों में ही मैंने इंदौर और भोपाल के शॉपिंग मॉल छोडकर अपने बाकी के सभी शॉपिंग मॉल बेच दिए थे। इस डील में हमें अच्छा खासा प्रॉफिट भी हुआ था। क्योंकि हमारे शॉपिंग मॉल पहले से ही काफी अच्छा बिजिनेश कर रहे थे। सारा काम पूरा होने के बाद रघू बापिस से इंदौर चला गया, जबकि मैं रवि के साथ दिल्ली आ गई। जहाँ मैं रवि के साथ उसी प्रापर्टी डीलर के पास गई, जिससे मैंने वो घर खरीदा था। जैसे ही मैं उस प्रापर्टी डीलर के पास पहुँची तो उसने मेरे मकान के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट मुझे दे दिए। जिसके बाद मैंने और रवि ने उसे दिल्ली में अपने शॉपिंग मॉल का चेन बिजिनेश शुरू करने के बारे में बताया।

हमारा पूरा प्लॉन जानने के बाद उस प्रापर्टी डीलर ने दिल्ली में पहले से ही चल रहे कुछ शॉपिंग मॉल के बारे में बताया जो लॉस के चलते अब बंद हो चुके थे और उनके ऑनर उन्हें बेचना चाहते थे। उस प्रापर्टी डीलर की बात सुनकर मैंने सोचा कि खाली जमीन खरीदकर उसपर शॉपिगं मॉल बनाने में अच्छा खासा समय लगेगा। अगर पहले से ही बना हुआ शॉपिंग मॉल हमें मिल जाऐ। तो उसमें कुछ जरूरी चेंजिस करवाकर हम उन्हें नऐ शिरे से लॉंच कर सकते हैं। कुछ देर रवि से इस बारे में डिस्कस करने के बाद मैं और रवि उस प्रापर्टी डीलर के साथ उन सभी शॉपिंग मॉल को विजिट करने चले गऐ।

अगले दो दिनों में हमने करीब 30 से ज्यादा बंद पडे शॉपिंग मॉल को बिजिट किया। लोकेशन और अपनी रिक्वार्यमेंट को देखत हुए उनमें से हमने कुल 8 शॉपिंग मॉल सिलेक्ट किऐ और अगले ही दिन उनके ऑनर से मिलकर हमने एक साथ उन सभी शॉपिंग मॉल को खरीद लिया। हमारी पूरी डील फाईनल होने के बाद रवि बापिस से भोपाल लौट गया, ताकि वो अपना जरूरी सामान पैक करके दिल्ली शिफ्ट हो सके। क्योंकि अब उन शॉपिंग मॉल को रीफर्निश करके दोबारा शुरू करने की सारी जिम्मेदारी रवि की थी। जिसके लिए उसे यहीँ दिल्ली में ही रहना था।

कहानी जारी है............
 
Update 102 -

अपने शॉपिंग मॉल का सारा मामला सेट करने के बाद मैंने कबीर को दिल्ली बुला लिया और फिर अपनी आई.टी. कम्पनी शुरू करने के प्लान में लग गई। सबसे पहले हमने अपने प्रापर्टी डीलर की हेल्प से अपनी आई.टी. कम्पनी के लिए एक बिजनेश कॉम्प्लेक्स खरीदा और फिर अपने नाम से एक कम्पनी रजिस्टर्ड करवाने की प्रासेश शुरू कर दी। इस दौरान मैं कबीर को वो मकान भी दिखाने ले गई, जो मैंने हमारे लिए खरीदा था। उस मकान को देखते ही कबीर ने कहा

कबीर- अरे वाह… वडा शानदार घर है…. किसका है…

कबीर की बात सुनकर मैंने अपने बैग में से घर के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट निकाल कर कबीर को देते हुए कहा

अमृता- हमारा…..

मेरी बात सुनकर कबीर हैरानी से कभी मुझे देखता और कभी अपने हाथों में पकडे डॉक्यूमेंट्स को, कुछ देर तक यूँ ही परेशान रहने के बाद आखिरकार कबीर ने कहा

कबीर- यह घर तुमने कब लिया

अमृता- जिस दिन हम दिल्ली आऐ थे, उसी के अगले दिन मैंने यह खरीद लिया था

कबीर- पर सच में तुम्हें यह सब करने की कोई जरूरत नहीं थी…. मैं खुद भी यहाँ दिल्ली आकर हमारे लिए एक घर खरीदने वाला था।

अमृता- कोई बात नहीं… अब हम दोनों अलग थोडे ही हैं… तुमने लिया या मैंने लिया बात तो एकर ही है ना।

कबीर- लेकिन मैं अपने पैसों से हमारे लिए घर खरीदना चाहता था।

अमृता- अगर ऐसा है तो जब हमारा बिजिनेश अच्छा चलने लगेगा, तो उससे होने बाले प्राफिट में से तुम मुझे पैसे बापिस कर देना, बैसे भी मेरे पास जो भी पैसे हैं, वो मैं अपनी फैमली पर ही तो खर्च करूँगी ना और तुम्हारे पास जो भी पैसे हैं या फिर फ्यूचर में तुम जो कुछ भी कमाओगे, उनपर तुम्हारी बीबी होने के नाते मेरा बैसे भी पूरा अधिकार होगा ही, जिस बजह से अगर तुम फ्यूचर में मुझे इस घर के पैसे बापिस भी करोगे, तो एक तरह से वो पैसे भी तुम्हारे पास ही रहने बाले हैं।

मेरी बात सुनकर कबीर ने मुस्कुराकर मुझे अपनी बाहों में भरते हुए कहा

कबीर- अरे वाह… अब तुम मस्का लगाना भी सीख गई…..

कबीर की बात सुनकर मैं थोडा शरारती अंदाज में बोली

अमृता- मैं तो पहले से ही बहुत कुछ सीखी हुई हूँ…. लेकिन अब देखना यह है कि तुमने अब तक क्या क्या सीखा है…..

मेरी बात सुनकर कबीर अपना सिर खुजलाता हुआ बोला

कबीर- क्या मतलब

अमृता- कुछ नहीं… अब छोडो मुझे….

कबीर- नहीं पहले मुझे बताओ कि तुम्हारे कहने का क्या मतलब है

अमृता- कहा ना कुछ नहीं… बैसे भी तुम्हें अभी कुछ समझाने का फायदा भी नहीं है। जो कुछ समझाना होगा वो मैं हमारी शादी के बाद समझा दूँगी।

इतना बोलकर मैंने कबीर को धक्का दिया और मुस्कुराते हुए उससे दूर भाग गई। मेरे इस शरारती अंदाज को देखकर कबीर कंफ्यूज होकर कुछ देर सोचता रहा और जैसे ही उसे मेरी डबल मीनिंग बातों का मतलब समझ में आया तो वो मुस्कुराकर मुझे पकडने के लिए मेरे पीछे भागते हुए बोला

कबीर- अच्छा तो तुम्हारा मतलब उससे था… रुको जरा मैं अभी बताता हूँ तुम्हें कि मैंने क्या क्या सीखा है…..

कबीर की बात सुनकर मैंने कहा

अमृता- नहीं… मुझे नहीं जानना… मैं तो बस मजाक कर रही थी

इससे पहले मैं कबीर से दूर भाग पाती कबीर ने एक बार फिर मुझे अपनी बाहों में भरते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए, कबीर की इस हरकत से मेरा पूरा बदन सनसना उठा और मैं भी उसे अपनी बाहों में भरकर उसका साथ देने लगी। कुछ देर एक दूसरे को किस करने के बाद हम लोग अलग हुए और फिर उस घर से बाहर निकल आऐ। अगले दिन हमने अपने दोस्तों यानि श्रेया, मनीष और पूजा को भी दिल्ली बुला लिया। क्योंकि अपनी आई.टी. कम्पनी शुरू करने से पहले हमें अपने दोस्तों के साथ पार्टनरशिप डील करनी थी। हाँलाकि हमारे दोस्त एक कॉमन इम्प्लॉय के रूप में हमारे साथ काम करने के लिए तैयार थे।

लेकिन मैं उन्हें कॉमन इम्प्लॉय की जगह अपने बिजिनेश पार्टनर के रूप में अपनी कम्पनी से जोडना चाहती थी। जैसे ही हमारे सारे दोस्त दिल्ली आ गए तो सबसे पहले हम लोग उन्हें उस बिजिनेश कॉम्प्लैक्स में ले गए, जहाँ हम अपनी कम्पनी का ऑफिस बनाने बाले थे। वो एक पाँच मंजिला अच्छी खासी बडी बिल्डिंग थी। जिसमें फिलहाल रेनोबेशन का काम चल रहा था। एक आई.टी. कम्पनी के लिए उसमें पर्याप्त जगह थी। चूंकि मैं अपनी पुरानी जिंदगी में यानि जब मैं निशा के रूप में थी, तब एक आई.टी. कम्पनी में काम करती थी।

इसलिए एक आई.टी. कम्पनी की सारी रिक्वायरमेंट मैं अच्छी तरह से जानती थी। जिस कारण मैंने सारे जरूरी सामान का आर्डर पहले ही दे दिया था। रेनोबेशन के बाद उस बिल्डिंग में सारा सामान मंगवाकर उसे एक आई.टी. कम्पनी का रूप दिया जाना था। जिसमें करीब एक महिने का समय लग सकता था। इतना बडा बिजिनेश काम्प्लेक्स देखकर हमारे दोस्त पहले से ही शॉक्ड थे, और फिर उस बिल्डिंग में चल रहे कामों को देखकर उन्हें इस बात का भी यकीन हो गया था कि मैंने जो अपनी आई.टी. कम्पनी शुरू करने की बात कही थी, उसके लिए मैं पूरी तरह से सीरियस हूँ। पूरी बिल्डिंग घुमाने के बाद मैंने कहा

अमृता- तो बताओ कैसा लगा हमारा ऑफिस

श्रेया- मतलब तू सच में अपनी आई.टी. कम्पनी खोलने के लिए सीरियस है

अमृता- डफर अगर सीरियस ना होती तो यह बिजिनेश काम्प्लैक्स खरीदती क्या

मेरी बात सुनकर मनीष हैरान होते हुए बोला

मनीष- व्हॉट…. तुमने यह पूरा बिजिनेश काम्प्लैक्स खरीद लिया है…. हमें तो लगा कि यह रेंटेड है

कबीर- हाँ भई इसे हमने खरीद लिया है और अपनी आई.टी. कम्पनी के लिए सारा जरूरी सामान भी आर्डर कर दिया है। जैसे ही बिल्डिंग का रेनोबेशन कम्प्लीट हो जाऐगा। तो सर्वर, पी.सी. लैपटॉप, प्रिंटर, फर्नीचर और दूसरा जरूरी सामान यहाँ पर डिलेवर हो जाऐगा।

कबीर की बात सुनकर पूजा हैरान होते हुए बोली

पूजा- तुम लोगों के हाथ क्या कोई कुबेर का खजाना लगा है… जो इस तरह बेहिसाब पैसे खर्च कर रहे हो।

अमृता- नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है…. असल में मेरे मम्मी-पापा और मेरी दादी अच्छा खासा पैसे मेरे लिए छोडकर गए थे, इसके अलावा मैंने खुद भी पार्ट टाईम काम करके ठीक ठाक पैसा कमयाा था, जिनसे मैंने शॉपिंग मॉल का बिजिनेश शुरू किया था। उसमें भी मुझे अच्छा खासा प्रॉफिट हुआ है। वस वही पैसा आज मैं अपनी आई.टी. कम्पनी में लगा रही हूँ।

पूजा- हूम्म तो इसका मतलब है कि तुम्हारे साथ काम करना हमारे लिए घाटे का सौदा नहीं होगा।

श्रेया- वो तो है… हमारी अमृता जिस बिजिनेश में भी अपना हाथ डालती है, उसमें जरूर सफल होती है।

अमृता- तो फिर अब क्या सोचा है तुम लोगों ने, क्या तुम लोग हमारे साथ काम करने के लिए तैयार हो ना।

श्रेया- यस बॉस….

अमृता- तो फिर हम लोग आज ही पार्टनरशिप एग्रीमेंट साईन कर लेते हैं। उसके बाद तुम लोग जल्द से जल्द यहाँ दिल्ली शिफ्ट हो जाओ।

पूजा- दिल्ली तो हम शिफ्ट हो जाऐंगे। लेकिन यह पार्टनरशिप एग्रीमेंट क्या है

कबीर- देखो गाईज हम दोनों चाहते हैं कि तुम लोग हमारे साथ हमारे पार्टनर के रूप में काम करो ना कि एम्प्लॉय के रूप में। इसलिए हमने यह डिसाईड किया है कि तुम लोग हमारी इस आई.टी. कम्पनी में पाँच पाँच परसेंट के पार्टनर्स रहोगे। इसके अलावा तुम लोगों की कम्पनी में जो भी जॉब प्रोफाईल होगी उसके हिसाब से तुम लोगों को सैलरी भी मिलती रहेगी।

मनीष- पर यार इसकी कोई जरूरत नहीं है। हम लोग नॉर्मल एम्प्लॉय के रूप में भी इसे अपनी ही कम्पनी समझकर काम करेंगे और कभी भी इसे नहीं छोडेंगे।

कबीर- भाई हमें तुम लोगों पर पूरा भरोसा है। लेकिन आज नहीं तो कल हमें इस कमप्नी को आई.पी.ओ. से लिंक करके, इसे पब्लिक करना ही पडेगा। उस समय हमें कम्पनी के कम से कम 30 परसेंट शेयर भी पब्लिक करके शेयर मार्केट में लाँच करने ही होंगे।

मनीष- हाँ तो ठीक है ना… आखिर उससे प्राब्लम क्या है।

कबीर- जब भी कम्पनी को आई.पी.ओ. से लिंक किया जाता है तो कम्पनी के पाँच पर्सेंट या उससे ज्यादा के शेयर होल्डर्स को कम्प्नी के बोर्ड मेंमबर्स में सामिल करना पडता है। इसलिए हम चाहते हैं कि तुम लोग भी उन बोर्ड मेंबर्स में सामिल रहो। ताकि फ्यूचर में कोई भी बडा डिसीजन लेने में हमें कोई प्राब्लम ना हो।

मनीष- पर यार हमारे पास कम्पनी में इन्बेस्ट करने के लिए बिल्कुल भी पैसे नहीं है।

कबीर- अबे तुमसे पैसे माँग कौन रहा है। हम बस इतना चाहते हैं कि तुम सभी लोग हमेशा हमारे साथ रहो और पूरी इमानदारी से इस कम्पनी को आगे बडाने में हमारी मदद करो।

पूजा- पर यह सब ठीक नहीं है….. हम लोग तुमसे वो शेयर नहीं ले सकते

अमृता- गाईज हम लोग तुम लोगों पर कोई एहसान नहीं कर रहे हैं। हम तुम्हें अपना फैमली मैंबर्स मानते हैं और अगर परिवार में कोई एक दूसरे को गिफ्ट दे तो उसे मना नहीं करते। हाँ यह बात अलग है कि तुम लोग हमें अपना नहीं मानते।

पूजा- ऐसी बात नहीं है अमृता…. लेकिन…..

अमृता- अब कोई लेकिन बेकिन नहीं…. फैसला हो चुका है और हम लोग आज ही पार्नरशिप एग्रीमेंट पर शाईन कर रहे हैं।

पूजा- यार श्रेया तुम ही समझाओ ना इन बेबकूफों को… कोई भला अपना पैसा अपने दोस्तों पर ऐसे लुटाता है क्या

श्रेया- ना बाबा ना… मैं अमृता और कबीर से कुछ नहीं कह सकती…. अमृता मेरी दोस्त होने के साथ साथ मेरी गुरू भी है… इसलिए इसकी किसी भी बात को टालना मेरे वस की बात नहीं है। बैसे भी अगर तुम्हें बिना कुछ एन्बेस्ट किए शेयर लेना अच्छा नहीं लग रहा है। तो फ्यूचर में जब कम्पनी अच्छा प्रॉफिट कमाने लगेगी और हम लोग पर्याप्त पैसा कमा लेगें तो उस समय के शेयर वैल्यू के हिसबा से हम इन शेयरों का पैसा अमृता और कबीर को लौटा देंगे। लेकिन फिल्हाल हम इन शेयरों को लोन मानकर चलते हैं। बोलो क्या कहती हो।

श्रेया की बात सुनकर पूजा को सोचते हुए बोली

पूजा- ठीक है….. हमें मंजूर है

कबीर- तो फिर चलो… हमारे एडवोकेट ने पहले ही सारे डॉक्यूमेंट रेडी कर लिए हैं। हमें बस चलकर उनपर शाईन करने हैं। उसके बाद हम सभी लोग ऑफीशियली पार्टनर्स हो जाऐंगे।

कबीर की बात खत्म होते ही मैं और कबीर उस बिल्डिंग से बाहर की तरफ चल दिए, हमारे पीछे पीछे, श्रेया, मनीष और पूजा भी उस बिल्डिंग से बाहर आ गए। उसके बाद हम लोग मेरी कार में बैठकर एडवोकेट के पास पहुँचे, जहाँ हमने पार्टनरशिफ एग्रीमेंट पर शाईन किए, उसके बाद हम लोगों ने एक रेश्टोरेंट में जाकर लंच किया। इस दौरान हमने कम्पनी से रिलेटेड आपास में ढेर सारी बातें की, तभी श्रेया ने सबाल किया

श्रेया- बैसे अमृता….. तुम्हारी और कबीर की इंगेज्मेंट इसी मंथ में होने बाली है ना।

अमृता- हाँ यार… इसीलिए मैं चाहती हूँ कि तुम लोग जल्दी से जल्दी यहाँ दिल्ली सिफ्ट हो जाओ। ताकि तुम और पूजा मेरी इंगेज्मेंट की तैयारियों में हेल्प कर सको।

कबीर- वाह भई वाह… अपना प्लान तो सेट कर लिया और मेरा क्या

श्रेया- तुम्हारे साथ मनीष तो है ही… और फिर अमृता तुम्हें रवि से भी मिलवा चुकी है। तो वो दोनों तुम्हारी हेल्प् कर देंगे।

कबीर- नहीं यार फिर भी यह सब गलत है… यहाँ दिल्ली में ही अमृता के कुछ पुराने दोस्त पहले से ही हैं। इस तरह से तो अमृता को सपोर्ट करने बाले लोग कुछ ज्यादा हो जाऐंगे ना।

कबीर की बात सुनकर मैं चिढते हुए बोली

अमृता- हाँ तो ठीक है ना… मैं सोढी और विक्रांत को तुम्हारी हेल्प करने के लिए बोल दूँगी… वो दोनों तो कबसे अपने प्यारे जीजा जी से मिलने और उनकी हेल्प करने के लिए मरे जा रहे हैं। लेकिन तुम अच्छी तरह सो सोच लो कि क्या तुम उन्हें हेंडिल कर पाओगे या नहीं। क्योंकि पिछली बार जब वो लोग कानपुर आऐ थे और हम लोगों ने साथ में पार्टी की थी, तो उनके स्टार्ट होने से पहले ही तुम पीछे हट गए थे।

मेरी बात सुनकर कबीर अपने दोनों कान पकडता हुआ बोला

कबीर- अरे नहीं… उन दोनों को तुम ही संभालो… उन्हें हेंडिल करना मेरे वस की बात नहीं है।

श्रेया- कोई नहीं… मैं रघू और रश्मि को भी तुम्हारी हेल्प करने के लिए आगरा भेज दूँगी।

कबीर- पर मैं उन दोनों से कभी मिला नहीं हूँ।

श्रेया- रवि तुम्हें उनसे मिलवा देगा

कबीर- क्यों ना तुम और पूजा भी मेरे साथ ही रहो…. यहाँ अमृता के साथ उसके दोस्त पहले से ही हैं और फिर इंगेज्मेंट सेरेमनी भी तो आगरा में ही हो रही है। तो वहाँ पर कुछ ज्यादा ही काम होगा। यहाँ तो बस अमृता को अपनी थोडी बहुत शॉपिगं ही करनी है और वो लोग भी तो आखिरकार आगरा ही आऐंगे। बैसे भी मैं तुम्हें रवि से और पूजा को मनीष से जुदा नहीं करना चाहता।

कबीर की बात सुनकर श्रेया कुछ देर सोचते हुए बोली

श्रेया- उम्मममम… क्यों ना मैं और पूजा यहाँ कुछ दिनोें तक दिल्ली में रहकर अमृता की शाॉपिगं और दूसरे कामों में हेल्प करें। उसके बाद इंगेज्मेंट से कुछ दिन पहले हम दोनों आगरा आ जाऐंगे।

कबीर- हाँ… यह ठीक रहेगा…….. तुम क्या कहती हो अमृता

अमृता- मुझे कोई प्राब्लम नहीं है…. बैसे गाईड तुम लोग कब इंगेज्मेंट कर रहे हो

मनीष- यार अभी हमारा कुछ भी फिक्स नहीं हो पा रहा है।

कबीर- मतलब

मनीष- मतलब शायद हम लोग डायरेक्ट शादी ही करेंगे….

श्रेया- और हो सकता है कि हम सभी दोस्तों का एक साथ शादि करने बाला प्लान भी फैल हो जाऐ

श्रेया की बात सुनकर सभी लोग हैरानी से श्रेया को देखने लगे

कहानी जारी है.......
 
Update 103 -

जब श्रेया ने कहा कि हम सभी दोस्तों की एक साथ शादी करने बाला प्लान फैल हो सकता है। तो सभी लोग हैरानी से श्रेया को देखने लगे थे, पर किसी ने भी कुछ कहा नहीं। आखिरकार मैंने ही श्रेया से सबाल किया

अमृता- क्यों क्या हुआ….

श्रेया- यार मेरी और रवि की कुंडली के हिसाब से हमारी शादी की डेट तुम दोनों की शादी के एक महिने बाद की निकल रही है।

पूजा- सेम हियर… हमारी शादी की डेट भी करीब एक महिने बाद की निकली है। लेकिन वो श्रेया और रवि से एक हफ्ते पहले की है।

श्रेया- हाँ यार और रघू और रश्मि के साथ भी यही प्राब्लम है। उनकी डेट तो हमारी शादि के बाद की निकली है।

अमृता- बासै मेरे दिल्ली बाले दोस्तों की शादी की डेट भी हमारी शादि के 2 हफ्ते बाद है। लेकिन किस्मत से उन लोगों की शादी के डेट सेम है। इसलिए हम एक साथ दोनों की शादी अटैंड कर सकते हैं।

कबीर- तो फिर अब क्या करें गाईज…….

अमृता- करना क्या है…. शादियाँ इंजॉय करेंगे… बैसे भी इसमें हमारे प्लान फैल होने बाली बात कहाँ से आ गई। हम लोग तो वस यह डिस्कस कर रहे थे ना कि एक साथ शादी करने के बाद हम लोग अपने अपने हनिमून पर साथ में जा सकेंगे। एट लीस्ट हमने ट्राई तो किया ही ना…. इससे एक फायदा यह हुआ कि हम सभी दोस्त एक ढेड महिने के अंदर ही शादी कर लेंगे। अगर हम उस समय यह प्लान नहीं बनाते, तो हो सकता है कि हम लोग अपनी अपनी शादी को डिले करते जाते और हमारी शादी अगल अलग सीजन में एक दो साल के अंतर से होती।

श्रेया- हाँ यार… इस तरह तो हम सभी की शादी में खूब इंजॉय भी कर सकेंगे… बैसे भी एक ढेड महिने का अंतर भी ज्यादा नहीं है।

कबीर- लेकिन मैं अपने हनीमून पर जाने के लिए इतने दिनों का इंतजार नहीं कर सकता।

कबीर की बात सुनकर मैंने उसे छेडते हुए कहा

अमृता- तो फिर हम शादी के तुरंत बाद अपने हनीमून पर चले जाऐंगे और बाकी लोगों की शादी के बाद दूसरा हनीमून मना लेंगे…. अगर तुम्हें मेरे साथ दूसरा हनीमून मनाने में कोई प्राब्लम ना हो तो…

कबीर मेरी शरारत को तुरंत समझ गया और मुस्कुराते हुए बोला

कबीर- तुम्हारे साथ तो मैं अपनी पूरी जिंदगी हनीमून मनाने के लिए तैयार हूँ मेरी जान

मनीष- पर गाईज यह गलत है… तुम लोग हमारे बिना हनीमून पर कैसे जा सकते हो….

श्रेया- हाँ यार… और फिर तुमने अभी अभी तो बताया कि अमृता के दिल्ली बाले दोस्तों की शादि तुम दोनों की शादी के दो हफ्ते बाद ही है और उसके बाद फिर हम लोगों की शादियों की तैयारियाँ भी तो तुम लोगों को ही करनी होंगीं ना।

पूृजा- हाँ यार… यह गलत है….

अमृता- अरे यार हम लोग तो बस मजाक कर रहे हैं….

कबीर- नहीं मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ… देखो हम सभी दोस्तों की शदियाँ पूरी होने में एक ढेड महीना लग ही जाऐगा, फिर शादि के बाद बाली रस्में चलेंगीं। इस तरह तो दो महीेने बीत जाऐंगे। भला शादी के दो महिने बाद कौन हनीमून पर जाता है।

अमृता- तो तुम क्या चाहते हो कि हम दोनों अपने दोस्तों की शादियाँ अटेंड करने की जगह हनीमून पर चले जाऐं।

कबीर- अरे बाबा ऐसा मैंने कब कहा। मैं तो बस इतना कह रहा हूँ कि शादी के कुछ दिनों बाद हम दोनों 2-3 दिन के लिए गोवा या फिर किसी हिल स्टेशन का छोटा सा ट्रिप मारकर अपना आधा हनीमून मना लेंगे… उसके बाद अपने दोस्तों के साथ प्लान करके लॉग विकेशन पर भी चले जाऐंगे।

कबीर की बात सुनकर मैंने उसे फिर से छेडते हुए कहा

अमृता- सीधे सीधे कहो ना कि तुम मुझे बिकनी में देखना चाहते हो… यह हनीमून बाला बहाना बनाने की कोई जरूरत नहीं है मेरी जान…..

कबीर- अरे बाबा मैं कोई बहाना नहीं बना रहा….. मैं तो वस सजेशन दे रहा था

अमृता- अगर तुम्हें मेरे साथ गोवा घूमने ही जाना है तो वहाँ पर तो मैं अभी भी तुम्हारे साथ चलने के लिए तैयार हूँ…. तुम एक बार कहो तो सही…..

कबीर- वाह क्या बात है…. तो फिर हमारी इंगेज्मेंट की तैयारियाँ कौन करेगा यहाँ….

अमृता- ऐ लोग हैं ना….

श्रेया- ओह हैलो…. कोई कहीं नहीं जा रहा है…. हम सभी की शादी होने के बाद हम सब एक साथ हनीमून पर जाऐंगे। तब तक अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल करो… और रही बात शार्ट हनीमून की…. तो हम सभी दोस्तों की शादियाँ अलग अलग लोकेशन पर होने बाली हैं… तो तुम दोनों का वो शार्ट हनीमून हमारी शादियाँ अटैंड करते करते ही पूरा हो जाऐगा।

हम लोग काफी देर तक एक दूसरे के साथ इसी तरह हंसी मजाक करते रहे। अगले दिन श्रेया, मनीष और पूजा अपने अपने घर बापिस चले गए, ताकि वो लोग अपना सामान पैक करके दिल्ली शिफ्ट होने के लिए बापिस आ सकें। चूँकि शॉपिंग मॉल के काम को देखने के लिए रवि पहले से ही दिल्ली शिफ्ट हो चुका था, इसलिए उसने श्रेया, पूजा और मनीष के दिल्ली में रहने का इंतजाम पहले ही कर दिया था। एक हफ्ते बाद श्रेया, मनीष और पूजा अपना सारा जरूरी सामान लेकर दिल्ली में शिफ्ट हो गए थे। जबकि कबीर मेरे साथ मेरे घर पर ही रुका हुआ था। असल में मैंने जो घऱ खऱीदा था, उसके रेन्योवेशन में अभी काफी समय लगने वाला था। बैसे भी जल्द ही हमारी शादी भी होने बाली थी, इसलिए विकाश अंकल को भी कबीर के हमारे साथ रहने में कोई प्राब्लम नहीं थी।

उन लोगों के आने के बाद मैंने एक मीटिंग करके सभी को काम बाँट दिए। चूँकि मैं एक आई.बी. ऐजेंट थी, इसलिए मुझे कभी भी और किसी भी समय अपने मिशन को पूरा करने के लिए जाना पड सकता था। साथ ही साथ मुझे अपने शॉपिंग मॉल का बिजिनेश भी मैनेज करना पडता था, जिस कारण मैं कम्पनी में कोई भी पोस्ट अपने जिम्मे नहीं लेना चाहती थी। इसलिए सभी लोगों से डिस्कस करने के बाद कबीर को कम्पनी का सी.ई.ओ. बना दिया गया था। लेकिन मेरे दोस्त और कबीर किसी भी तरह मुझे भी कम्पनी का हिस्सा बनाना चाहते थे, इसलिए मैंने कम्पनी की चेयरमैन बनकर सभी लोगों के कामों को मॉनेटाईज करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली थी।

हाँलाकि मेरी और कबीर की इंगेज्मेंट को बस दो हफ्ते बचे थे। इसलिए हम लोगों ने अपने काम के बीच में से थोडा थोडा ब्रेक लेकर अपने लिए शॉपिंग करने का फैसला किया। चूँकि अभी मेरे अपने मॉल पूरी तरह से तैयार नहीं हुए थे, इसलिए आज मैं कबीर और अपने दोस्तों के साथ एक दूसरे शॉपिंग मॉल में शॉपिगं करने आई हुई थी, इसी बीच मेरे पास राजीव सर का कॉल आया, तो मैं अपने दोस्तों से अलग होकर एक खाली जगह पर जाकर उनसे बात करने लगी

अमृता- गुड ऑफटरनून सर

राजीव- तो फिर कैसी चल रही इंगेज्मेंट की तैयारी

अमृता- सर अभी तो हमने शॉपिंग करने की शुरूआत ही की है।

राजीव- पर मेरे पास तो अभी तक इन्विटेशन आया ही नहीं

अमृता- ओह सॉरी सर.. वो असल में अभी इंगेज्मेंट में दो हफ्ते बाकी हैं ना…. इसलिए मैंने अभी किसी को भी इन्वाईट नहीं किया है। एक दो दिन में मैं खुद ऑफिस आकर आप सभी को इन्वाईट करने बाली थी।

मेरी बात सुनकर राजीव सर हंसते हुए बोले

राजीव- हुम्म…. तो फिर ठीक है…. वर्ना मैं तुमसे नाराज हो जाता… बैसे मुझे पता चला है कि तुम अपने होने बाले हसबैंड और कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक आई.टी. कम्पनी भी शुरू करने बाली हो।

अमृता- इसका मतलब आप मेरी जासूसी करवा रहे हैं सर….

राजीव- अरे नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है… लेकिन दिल्ली में जो कुछ भी नया होता है, उसकी जानकारी हम तक पहुँच ही जाती है। खासकर अभी जो हालात हैं, उनकी बजह से हर छोटी बडी बातों पर मेरी पूरी नजर है। बैसे तुम्हारा यह डिसीजन काफी अच्छा है। तुम सारी दुनिया की नजरों में एक बिजिनेश वुमन के रूप में रहोगी, तो किसी को तुम्हारे आई.बी. एजेंट होने के बारे में शक भी नहीं होगा।

अमृता- बस सर इसीलिए मैंने यह फैसला किया है, वैसे भी मुझे रोज रोज तो किसी मिशन पर जाना नहीं पडता है, तो घर पर मैं बैसे भी बोर हो जाती हूँ।

राजीव- तो फिर अब तुम्हारे एक्टिव होने का समय आ चुका है

अमृता- मैं कुछ समझी नहीं सर

राजीव- तुम्हें तो पता ही होगा कि अगले महिने हमारे देश में फॉरेन लीडर्स का एक बहुत बडा सम्मिट होने बाला है। जिसमें कई देशों के राष्ट्र अध्यक्ष हमारे देश में आने बाले हैं.

अमृता- हाँ सर मुझे पता है…

राजीव- तो फिर तुम यह बात भी जानती ही होगी कि, ऐसे कार्यक्रमों से पहले कई सारे विदेशी जासूस और दूसरे देश की इंटेलिजेंश ऐजेंशियों के ऐजेंट भी एक्टीवेट हो जाते हैं।

अमृता- जी सर मैं यह भी जानती हूँ… लेकिन मुझे करना क्या है… क्या आप मुझे साफ साफ बताऐंगे।

राजीव- असल में हमें अपने दूसरे ऐजेंट्स से जानकारी मिली है कि इस वक्त दिल्ली में दूसरे देशों के कई ऐजेंट एक्टीवेट हो चुके हैं, जो हमारे देश की सेंसटिव इन्फॉर्मेशन दूसरे देशों को बेच सकते हैं। फिलहाल हमारे पास बस 10 लोगों की जानकारी है। जिनकी सारी डिटेल मैंने तुम्हें मेल कर दी है, लेकिन जल्द ही हमें बाकी के बारे में भी पता चल जाऐगा।

अमृता- तो क्या मुझे उन सभी पर नजर रखनी है, या उनसे वो सेंसटिव इन्फॉर्मेशन चुरानी है।

राजीव- नहीं… तुम्हें उन सभी ऐजेंट्स को खत्म करना है और ध्यान रहे कि यह काम पूरी सफाई से होना चाहिए और तुम्हें किसी की नजरों में भी नहीं आना है।

अमृता- ठीक है सर हो जाऐगा….

राजीव- दैट्स मई गर्ल…. तो फिर ठीक है, आज से ही अपने मिशन पर लग जाओ

इतना बोलकर राजीव सर ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया। राजीव सर का फोन डिस्कनेक्ट होते ही मैंने अपने मोबाईल में राजीव सर का भेजा हुआ मेल चैक किया और फिर बापिस से अपने दोस्तों के पास आकर शॉपिंग करने लगी। शॉपिंग खत्म होेने के बाद हम लोगों ने रात में पव में जाकर मस्ती करने का प्लान बनाया था। इसलिए रात ठीक 9 बजे हम लोग दिल्ली के एक फेमस पव में जा पहुँचे। जहाँ हम सभी दोस्तों ने मिलकर ड्रिंक की और फिर डांस फ्लोर पर जाकर अपने अपने पार्टनर के साथ डांस करने लगे। कुछ देर कबीर के साथ डांस करने के बाद मैं उसे वॉसरूम जाने की बात बोलकर डांस फ्लोर से नीचे उतर गई और वॉसरूम जाने के स्थान पर चुपके से स्टॉफ रूम की तरफ चली गई।

जब मैं वहाँ पहूँची तो वहाँ पर कोई भी नहीं था। इसलिए मैंने वहाँ रखे एक बेट्रेस के कपडे उठाऐ और स्टॉफ रूम में बने अटैच्ड बाथरूम में जाकर कपडे चेंज कर लिए। अब मैं पूरी तरह से एक वेट्रेस लग रही थी। इसके बाद मैंने अपने हैंड बैग में से एक छोटा सा फ्लॉस्क निकालकर अपने कपडों में छिपा लिया और अपने कपडों और बैग को स्टॉफ रूम में बने लॉकर के अंदर छिपाकर वाहर आ गई। चूँकि पव बगैरह में काम करने बाली लडकियों को अक्सर लोग गलत नजरों से देखते हैं। इसलिए उस पव में काम करने बाली कई लडकियाँ अपनी रियल आईडेंटिटी छिपाने के लिए अपने चेहरे पर मास्क लगाकर रखती थीं।

इस बात का फायदा उठाते हुए मैंने भी अपने चेहरे पर मास्क लगा लिया था, ताकि कोई भी मुझे पहचान ना सके। स्टॉफ रूम से बाहर आकर मैंने वॉर काऊंटर से दो खाली गिलास उठाकर एक ट्रे में रख लिए और सबकी नजरों से बचते हुए मैंने अपने कपडों में छिपाऐ फ्लास्क को बाहर निकाला और उसमें भरा लिक्विड उन दोनों ग्लास के अंदर डाल दिया। इसके बाद मैं उस ट्रे को उठाकर कार्नर सीट पर बैठे दो आदमियों के पास जा पहुँची, जो आपस में बातें करते हुए ड्रिंक कर रहे थे। उन दोनों के पास जाकर मैंने उनसे कहा

अमृता- सर हमारे पव में आज एक नई ड्रिंक लॉंच हुई है। क्या आप उसे ट्राई करना चाहेंगे

मेरी बात सुनकर उनमें से एक आदमी बोला

आदमी- नहीं…. तुम यहाँ से जा सकती हो

उस आदमी की बात सुनकर मैंने उसे इनसिस्ट करते हुए कहा

अमृता- सर यह एक काम्प्लीमेंट ड्रिंक है। इसके लिए आपको अलग से कुछ भी पे करने की जरूरत नहीं है।

मेरी बात सुनकर वो आदमी बोला

आदमी- अगर फ्री है तो फिर ठीक है। यहाँ टेबिल पर रख दो और दफा हो जाओ।

मैंने उस आदमी की बातों का बिल्कुल भी बुरा नहीं माना और मुस्कुराते हुए दोनों ग्लास उन दोनों आदमियों के सामने रखकर तुरंत वहाँ से सीधे स्टॉफ रूम के अंदर चली गई।

कहानी जारी है.........
 
Update 104 -

करीब 5 मिनट बाद ही मैं बापिस से कबीर के साथ डांस फ्लोर पर थी। कबीर मेरे साथ डांस करते हुए मुझे भीड भाड से थोडी दूर ले गया और फिर मेरे कान में धीरे से फुसफुसाया

कबीर- उस ड्रिंक में तुमने क्या मिलाया था

कबीर की बात सुनकर मैंने हैरान होते हुए उसकी आँखों में देखते हुए सबाल किया

अमृता- कौन सी ड्रिंक में

कबीर- उसी ड्रिंक में जो तुमने कार्नर में बैठे उन दोनों आदमियों को एक बेट्रेस बनकर सर्व की है।

चूँकि कबीर पहले से ही जानता था कि मैं एक आई.बी. एजेंट हूँ, इसलिए उससे कुछ भी छिपाने की मुझे कोई जरूरत नहीं थी, लेकिन मैं यह सोच सोच कर हैरान थी कि कबीर को मेरे बेट्रेस बनकर उन दोनों आदमियों को ड्रिंक सर्व करने के बारे में पता कैसे चला। कुछ देर तक इस बारे में सोचने के बाद आखिरकार मैंने कबीर से सवाल किया

अमृता- तुम्हें कैसे पता चला कि मैंने बेट्रेस बनकर उन दोनों को ड्रिंक सर्व की है

कबीर- अरे यार जब तुम वॉशरूम के लिए जा रही थी तो मैंने सोचा कि क्यों ना एक और ड्रिंक ले ली जाऐ, इसलिए मैं भी तुम्हारे पीछे पीछे डांस फ्लोर से नीचे उतर गया था, लेकिन तभी मैंने देखा कि तुम वॉसरूम की जगह स्टॉफरूम के अंदर जा रही हो। इसलिए अपनी ड्रिंक लेने के बाद मैं स्टॉफ रूम के पास ही खडा होकर तुम्हारे बाहर आने का इंतजार करने लगा। लेकिन स्टॉफ रूम से तुम्हारी जगह एक बेट्रेस बाहर निकली जिसने अपने चेहरे पर मास्क लगाकर रखा हुआ था। जब मैंने ध्यान से उसे देखा तो उसका फिगर देखकर मैं समझ गया कि वो वेट्रेश कोई और नहीं बल्कि तुम हो। उसके बाद मैंने तुम्हें बॉर काऊंटर से ड्रिंक लाकर उन दोनों आदमियों को सर्व करते हुए भी देखा। जिसके बाद तुमने बापिस से स्टॉफ रूम में जाकर अपने कपडे चेंज किए और यहाँ आ गई।

कबीर की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- मतलब तुम मेरा पीछा कर रहे थे।

कबीर- अरे नहीं मेरी जान… मैंने तुम्हें बताया तो है कि मैं बस अपने लिए ड्रिंक लेने गया था, लेकिन गलती से तुम पर नजर चली गई। तुम्हारा पीछा करने का मेरा कोई इरादा नहीं था, बैसे भी तुम खुद ही अपने बारे में मुझे सब कुछ बता चुकी हो तो, भला मैं तुम्हारा पीछा क्यों करूँगा।

अमृता- अरे मैं तो बस मजाक कर रही थी…

कबीर- क्या तुम इस वक्त ऑन ड्यूटी हो

अमृता- हुम्म…

कबीर- क्या वो दोनों क्रिमनल्स हैं

अमृता- नहीं…. विदेशी ऐजेंट हैं… जो हमारे देश के सीक्रेट दुशमनों को बेचना चाहते हैं

कबीर- तो फिर तुम उनके साथ क्या करने बाली हो….

अमृता- कुछ भी नहीं….

कबीर- अगर तुम उनके साथ कुछ भी नहीं करने बाली हो तो आखिर तुमने उन दोनों को वो ड्रिंक क्यों दी….

कबीर की बात सुनकर मैंने चिढते हुए उसे देखा और सबाल किया

अमृता- तुम मेरे काम में कुछ ज्यादा ही इन्टफेयर नहीं कर रहे हो

कबीर- अरे नहीं बाबा… मैं तो बस इसलिए पूछ रहा था, ताकि अगर कुछ गडबड हो तो मैं संभाल सकूँ। अगर तुम नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं

अमृता- असल में मैंने उन्हें ड्रिंक के रूप में लिक्विड नाईट्रोजन दिया, जिसे पीते ही उनके शरीर में मौजूद सारा खून जमकर वर्फ बन जाऐगा

मेरी बात सुनकर कबीर ने कुछ पलों तक हैरानी से मुझे देखा और बोला

कबीर- तो फिर अब चलते हैं यहाँ से…. आज सारा दिन शॉपिंग करते वक्त मैं काफी थक गया हूँ और मुझे भूख भी लग रही है। बैसे भी कुछ देर बाद यहाँ पर कुछ भी खाने पीने ाका सामान हमें नहीं मिलेगा

कबीर की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- ठीक है चलो चलते हैं

इतना बोलकर मैंने एक नजर उन दोनों आदमियों की तरफ देखा तो किसी बुत की तरह अपनी चेयर पर बैठे हुए थे। लेकिन उनके शरीर में कोई भी हरकत नहीं हो रही थी। जिसका मतलब था कि वो दोनों पहले ही मारे जा चुके हैं। इसलिए मेरे हाँ कहते ही कबीर मेरे साथ डांस करते हुए हमारे दोस्तों के पास आया और उन्हें यहाँ से चलने का इशारा किया। करीब एक घंटे बाद मैं और कबीर डिनर करके अपने घर जा पहुँचे, जहाँ विकाश अंकल हॉल में बैठकर न्यूज देख रहे थे, जिसमें पव में दो आदमियों के बडे ही अजीब तरीके से मारने के बारे में बताया जा रहा था। हम दोनों भी वहीँ विकाश अंकल के पास जाकर बैठ गए और न्यूज देखने लगे। कुछ देर बाद कबीर अपने रूम में सोने के लिए चला गया, कबीर के जाते ही विकाश अंकल ने मुझसे सबाल किया

विकाश- तो आई.बी. ने यह काम तुम्हें सौंपा है

विकाश अंकल की बात सुनकर मैंने हैरानी से उन्हें देखा, मुझे इतना हैरान देखकर विकास अंकल मुस्कुराते हुए बोले

विकाश- इतना ज्यादा हैरान होने की जरूरत नहीं है… मैं पहले से ही जानता हूँ कि मरने बाले दोनों आदमी विदेशी ऐजेंट हैं और उनको मारने का यह तरीका एकदम नया है। आज से पहले हमारे देश की किसी भी ऐजेंसी ने दुश्मनों को ठिकाने लगाने के लिए लिक्विड नाईट्रोजन का यूज नहीं किया है। जिसका मतलब है कि किसी नऐ एजेंट ने यह काम किया है। तुम्हारे काम करने के तरीके और कबीलियत को देखते हुए इस बात का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह काम तुम्हारे अलावा कोई दूसरा इंशान नहीं कर सकता है।

विकाश अंकल की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- हाँ वो मैं थी

विकाश- तो क्या कबीर उस वक्त तुम्हारे साथ था

अमृता- नहीं… वो मेरे दूसरे दोस्तों के साथ डांस फ्लोर पर बिजी था, लेकिन उसे मेरे बारे में पहले से ही सब कुछ पता है।

मेरी बात सुनकर विकाश अंकल ने हैरान होते हुए कहा

विकाश- पर क्यों…. तुमने कबीर को अपने बारे में आखिर क्यों बताया…. तुम जानती हो ना कि एक एजेंट के लिए अपनी पहचान छिपाकर रखना कितना जरूरी है।

अमृता- मैंने उसे कुछ भी नहीं बताया… कानपुर में जब मैं अपना ऑपरेशन पूरा कर रही थी, तब गलती से उसे मेरे बारे में पता चल गया था। उस वक्त तक हम दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे, इसलिए मैंने भी अपनी असली पहचान छिपाने के लिए कुछ नहीं किया। बैसे भी शादी के बाद उसे आज नहीं तो कल मेरी असली पहचान पता चलनी ही थी।

विकाश- हाँ वो तो है.. बैसे क्या तुम्हें उसपर पूरा यकीन है कि वो तुम्हारी असली पहचान हमेशा सीक्रेट रखेगा

अमृता- मुझे कबीर पर अपने आप से भी ज्यादा भरोसा है अंकल

विकाश- अगर ऐसा है तो मुझे अब तुम्हारे लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पडेगा, क्योंकि कम से कम कबीर तो तुम्हारे साथ तुम्हारी मदद करने के लिए हमेशा साथ होगा

इसी तरह हम दोनों ने कुछ देर यूँ ही एक दूसरे से बातें की और उसके बाद हम दोनों ही अपने अपने रूम में सोने चले गए। अब चूँकि मैं मिशन पर थी, इसलिए अगले दिन से मैंने कम्पनी जाना बंद कर दिया और पूरी तरह से अपने काम पर फोकस करने लगी। क्योंकि मैं अपनी इंगेज्मेंट से पहले ही अपने मिशन को पूरा करना चाहती थी। बैसे भी मैंने अपने सभी दोस्तों को उनके काम सौंप दिए गए थे और कबीर को कंपनी का सी.ई.ओ. बना दिया गया था। इसलिए मुझे कम्पनी के पेंडिग कामों की कोई चिंता नहीं थी। इसलिए फिलहाल मैं फ्री माईँड से अपना मिशन पूरा कर सकती थी। मैं पहले ही कल रात में अपने दो टारगेट को निशाना बना चुकी थी, अब मेरी लिस्ट में आठ आदमी बचे थे। इसलिए एक नजर उस लिस्ट को देखने के बाद मैं अपना काम पूरा करने के लिए निकल गई।

सुबह के करीब 10 बज रहे थे और मैं दिल्ली शहर से बाहर एक बडे से ग्राउंड में खडी हुई थी, जहाँ कई सारे लडके लडकियाँ बाईक पर स्टंड कर रहे थे। उनमें से एक लडके पर मेरी काफी देर से नजर थी। जैसे ही वो लडका अपना स्टंड पूरा करने के बाद वॉसरूम की तरफ गया। तो मैं टहलते हुए उसकी बाईक के पास जा पहुँची जो, ग्राऊंड से बाहर एक पेड के नीचे पार्क थी। मैंने एक नजर अपने आस पास देखा और फिर अपनी हेयरपिन से उस बाईक के फ्यूल टैंक का लॉक खोलकर उसके अंदर ब्लैक कलर की एक बॉल डाल दी। फिर उस फ्यूल टैंक को लॉक करने के बाद मैं दोबारा से टहलते हुए उस बाईक से दूर हो गई।

असल में मैंने उस बाईक के फ्यूल टैंक में फास्फोरस का एक बडा सा टुकडा डाल दिया था। जिसके ऊपर तारकोल की एक लेयर चढी हुई थी। कुछ ही देर में तारकोल की वो लेयर धीरे धीरे पैट्रोल में घुल जाऐगी और जैसे फास्फोरस का वो टुकडा पैट्रोल के कांटेक्ट में आऐगा तो कैमिकल रिऐक्शन के कारण उस बाईक का फ्यूल टैंक किसी बाम्ब की तरह फट जाऐगा और बाईक चलाने बाले उस लडके की भी चिथडे उड जाऐंगे। जैसा मैंने प्लान किया था, हुआ भी बिल्कुल बैसा ही, मेरे उस बाईक से दूर जाने के कुछ देर बाद वो लडका बापिस आकर दोबारा अपनी बाईक से स्टंड करने लगा था, मैं दूर से ही भीड में खडे होकर सारा तमाशा देख रही थी।

करीब 15 मिनट बाद अचानक से उस लडके की बाईक में बिस्फोट हुआ, जिससे उस बाईक के साथ साथ उस लडके के भी चिथडे उड गए। अचानक से हुए उस विस्फोट के कारण वहाँ पर भगदड मच गई, जिसका फायदा उठाते हुए मैं भी वहाँ से निकल गई। इसके बाद मैं सीधे अपनी कम्पनी ऑफिस पहुँची, जहाँ मैंने कबीर और अपने दोस्तों के साथ लंच किया। कुछ देर उन लोगों के साथ समय बिताने के बाद मैं अपने अगले शिकार की तलाश में निकल गई। इस बार मै गुडगाँव हाईवे पर बने एक पुराने गैराज में जा पहुँची। उस गैराज में फिलहाल कोई कस्टमर नहीं था, लेकिन वहाँ पर दो मैकेनिक पूरानी टूटी फूटी चेयर पर बैठकर शराब पी रहे थे।

वो गैराज एक सुनसान इलाके में था और वहाँ काम करने बाले दोनों मैकेनिक इस वक्त शराब के नशे में थे, जिस कारण मेरी जैसी हॉट लडकी को देखते ही उनके अंदर की वासना भडक उठी थी। लेकिन मैं यहाँ पर उन दोनों की वासना शांत करने नहीं आई थी, बल्कि उन दोनों को नर्क भेजने आई हुई थी। इससे पहले वो दोनों कुछ समझ पाते मैंने अपने हैंड बैग से पिस्टल निकालकर दोनों पर गोली चला दी। गोली सीधीं उन दोनोें के सिर पर लगी थीं, जिससे ऑन द स्पॉट उन दोनों की मौत हो गई। उन दोनों को खत्म करने के बाद मैंने गैराज की तलासी ली तो मुझे वहाँ पर एक प्लास्टिक कैन में पैट्रोल मिल गया।

जिसे मैंने उन दोनों आदमियों और गैराज में अलग अलग जगह पर छिडक दिया। इसके बाद मैंने टेबिल पर रखे सिगरेट के पैकेट में से एक सिगरेट और लाईटर को उठाया और सिगरेट को सुलगाकर कस लेने लगी। दो कस लेने के बाद मैंने लाईटल जलाकर उन दोनों के ऊपर फेंक दिया। जिस कारण पैट्रोल ने तुरंत आग पकड ली। इसके बाद मैं चहल कदमी करते हुए उस गैराज से बाहर निकल आई और अपनी कार में बैठकर वहाँ से निकल गई। अगले दो दिनों में मैं अपने सभी टारगेट को ठिकाने लगा चुकी थी। जिनकी रिपोर्ट मैंने राजीव सर को भेज दी थी। इतनी जल्दी पूरा काम होने से राजीव सर भी हैरान थे। शायद उन्हें लगा था कि मैं पूरी प्लानिंग करने के बाद एक एक करके उन सभी लोगों को निशाना बनाऊंगी।

लेकिन मैंने यह काम 2-3 दिनों में ही पूरा कर दिया था। सबसे बडी बात मैंने उन सभी को मारते वक्त किसी भी प्रकार का कोई सबूत नहीं छोडा था। जिस कारण राजीव सर के अलावा आई.वी. के मेरे दूसरे सीनियर्स भी मुझसे काफी ज्यादा इम्प्रैस थे। अपने सारे टारगेट हिट करने के बाद मुझे 15 लोगों की एक न्यू लिस्ट दी गई। वो सभी लोग काफी ज्यादा हाईप्रोफाईल थे, इसके अलावा उनमें से कुछ लोग फॉरेनर्स भी थे। शायद मेरे सीनियर्स को लगा होगा कि मैंने अब तक जिन 10 लोगों को हिट किया है। वो सभी लो प्रोफाईल थे, जिस बजह से मैंने आसानी से उन्हें ठिकाने लगा दिया था, लेकिन जिन 15 लोगों की नई लिस्ट मुझे दी गई है, वो सभी हाईप्रोफाईल और पावरफुल लोग हैं, जिन्हें ठिकाने लगाने में मुझे अच्छा खासा समय लगेगा।

लेकिन मैंने उनकी सोच को गलत सबित करते हुए अगले एक हफ्ते में ही उन सभी लोगों को ठिकाने लगा दिया था। फिलहाल दिल्ली में जो विदेशी एजेंट मौजूद थे, उन सभी को मैं नर्क भेज चुकी थी। इसलिए मैं अब अपनी इंगेज्मेंट की तैयारियों में बिजी हो गई। कबीर और मेरे बाकी दोस्त पहले ही आगरा जा चुके थे। इसलिए मैं पूर्वी, साक्षी, विक्रांत और सोढी के साथ अपनी इंगेज्मेंट की तैयारियों में लगी हुई थी। देखते ही देखते मेरी इंगेज्मेंट का दिन भी आ गया। अपनी इंगेज्मेंट के एक दिन पहले ही मैं विकाश अंकल और अपने दिल्ली बाले दोस्तों के साथ आगरा आ गई थी। जहाँ मुझे श्रेया, पूजा, रश्मी और दूसरे दोस्त भी मिल गए थे।

कहानी जारी है............
 
Update 057 -

कुछ देर बाद उसने अपने हाथों से हरकत करनी शूरू कर दी और अपना एक हाथ मेरे टॉप के अंदर डाल कर मेरे पतले ओर चिकने पेट को सहलाने लगा। मेरे तो पूरे शीरर में सनसनाहट दौड गई। कुछ देर मेरे पेट को सहलाने के बाद उसने अपने हाथ को उपर खिसकाना शूरू कर दिया। आज मैंने अपने टॉप के अंदर ब्रा की जगह मात्र कैमिसोल पहना हुआ था, जिस कारण उसका हाथ बिना किसी प्राप्लम के आसानी से मेरे बूब्स तक पहूँच गया। लेकिन उस लडके ने जैसे ही मेरे बूब्स को छुआ, तो मेरी तो हालत ही खराब हो गई थी। इससे पहले मैं उसे कुछ करने से रोकती, उसने अपना दूसरा हाथ भी मेरे टॉप के अंदर डाल कर मेरे दोनों बूब्स को पकड लिया और उन्हें सहलाने लगा।

उस लडके कि हरकतों से मैं पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी और मेरी सांसें भी अब तेज तेज चलने लगी थी। तभी अचानक से उस लडके ने पीछे से ही मेरी गर्दन को किस करना शुरू कर दिया। जिस कारण मैं अब पूरी तरह से पागल होने लगी थी और खुद ही अपनी गाँड उस लडके के लण्ड पर रगने लगी थी। मेरा बैग जो अब तक मेरे हाथों में था, उसे अब मैंने नीचे फर्स पर एक साईड रख दिया था। क्योंकि उस लडके की हरकतों के कारण मुझे अब वो बैग अपने हाथों में थामे रखना मुश्किल हो रहा था।

कुछ देर तक मेरे यूँ ही मजे लेने के बाद उस लडके ने अपना हाथ फिर से नीचे की तरफ सरकना शूरू कर दिया और कुछ ही देर में उसका एक हाथ मेरी कमर तक आ पहुँचा था। इसके बाद वो लड़का अपनी उंगलियों को मेरी स्कर्ट की इलास्टिक के अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा। पहले तो मैंने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया था, क्योंकि मैं पहले से ही उस लडके की हरकतों से काफी एक्साईटेड हो चुकी थी। लेकिन जब तक मुझे एहसास हुआ कि वो क्या करने बाला है, तब तक काफी देर हो चुकी थी और मेरे रोकने से पहले ही उस लडके ने अपना पूरा हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर घुसा दिया था।

जिस कारण उस लडके का हाथ मेरी पैंटी के ऊपर से होते हुए मेरी चूत तक जा पहूँचा था। उस लडके का हाथ अपनी चूत पर महसूस करते ही अचानक मेरे पूरे शरीर में करंट दौड गया गया और मैंने तुरंत ही अपना एक हाथ उस लडके के हाथ के ऊपर रखकर उसे कुछ की करने से रोक दिया। लेकिन वो अपनी उंगलियों को मेरी चूत के ऊपर धीर धीरे चलाने लगा, जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मुझपर एक अजीब सा नशा छाने लगा था। जिस कारण कुछ ही देर में मेरे हाथ की पकड ढीली हो गई। जिसका फायदा उठाकर उस लडके ने अपना हाथ छुडाकर मेरी पैंटी के अंदर डाल दिया।

अब मैं कुछ भी नहीं कर सकती थी। क्योंकि अब सिचुऐशन पूरी तरह से उसके हाथ में थी। वो लड़का अपने हाथ से काफी देर तक मेरी चूत को सहलाता रहा। जिस कारण मेरी चूत अब गीली होने लगी थी। आखिरकार मैंने भी अपने आप को ढीला छोड दिया और मजे लेने लगी। वो लड़का काफी देर तक मेरे शरीर को यूँ ही सहलाता रहा। इस दौरान कितना समय बीत गया और ट्रेन कितने स्टेशन पर रुकी, इसका मुझे कोई अंदाजा नहीं था। काफी देर तक मेरे भरपूर मजे लेने के बाद वो लड़का भी पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और अब वो बस किसी भी तरह अपने आप को शांत करता चाहता था।

इसलिए उसने अपने पैंट की जिप खोल कर अपना लण्ड बाहर निकाला और पीछे से मेरा स्कर्ट उठाकर मेरी पैंटी नीचे खिसकाने लगा। उस लडके की इस हरकत को देखकर मैं तुरंत समझ गई कि अब वो लड़का क्या करने बाला है। लेकिन मैं इस चलती ट्रेन में और इतने सारे लोगों के बीच चुदना नहीं चाहती थी। इसलिए मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी पैंटी पकड ली और उसे नीचे करने से रोक दिया, मेरी इस हरकत को देखकर वो लड़का मेरे कान के एकदम पास आकर धीरे से फुसफुसाया

लड़का- जब इतनी देर से मजे ले रही हो, तो फिर अब नखरे क्यों दिखा रही हो

उस लडके की बात सुनकर मैं भी धीमी आवाज में फुसफुसाई

निशा- नहीं नहीं…. यह सब मत करो। ऊपर ऊपर से जो मजे लेने हो, बस वही ले लो

लड़का- लेकिन अब मुझपर कंट्रोल नहीं हो रहा है

निशा- पागल हो क्या.... कितने सारे लोग हैं यहाँ। किसी को पता चल गया तो… नहीं नहीं मैं इतने सारे लोगों के सामने यह सब नहीं करने दे सकती

मेरी बात सुनकर वो लडका मुझे समझाने की कोशिश करते हुए बोला

लड़का- अरे किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा। बैसे भी सभी लोंगों का मूंह दूसरी तरफ है और यहाँ अंधेरा भी है।

निशा- नहीं प्लीज अब कुछ भी मत करो, बर्ना मैं शोर मचा दूँगी

मेरी बात सुनकर वो लडका डर के कारण कुछ पलों के शांत खडा रहा, लेकिन कुछ देर बाद वो एकबार फिर धीमे से फुसफुसाया

लड़का- अरे यार इतने नखरे क्यों दिखा रही हो, चाहो तो पैसे ले लो

पैसों की बात सुनते ही अचानक से मेरे अंदर की रण्डी जाग गई। पता नहीं मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा था, लेकिन जबसे मैंने भोपाल में रण्डी बनकर चुदाई करवाई थी, तब से पैसों की बात सुनकर ही मेरे अंदर की रण्डी जाग जाती थी और मेरे सोचने का नजरिया बदल जाता था। आज एक बार फिर मेरे साथ यही हुआ था। जैसे ही उस लडके ने पैसे देने की बात की तो मैंने मन ही मन सोचा,

“जब इतना सब करवा ही लिया है, तो आगे भी इस लडके को कुछ करने से रोकने का कोई मतलब नहीं है।”

बैसे भी मैं उस लडके की हरकतों से काफी उत्तेजित हो गई थी। इसलिए मैं बोली

निशा- ठीक है… लेकिन आराम से करना

मेरी बात सुनकर वो लडका खुश होते हुए बोला

लड़का- तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो…. बस मजे लो

निशा- पहले पैसे

लड़का- हाँ हाँ ये लो

इतना बोलकर उस लडके ने अपने बॉलेट में से 500 रूपये के कुछ नोट निकाल कर मेरे हाथों में थमा दिए। जिन्हें मैंने बिना गिने ही अपनी जैकेट की अंदर बाली पॉकेट में रख लिए। इतनी देर में बो लड़का मेरी पैंटी नीचे खिसका चुका था और अब उसका लण्ड मेरी नंगी गांड के से टकरा रहा था। इसके बाद उस लडके ने अपने एक हाथ से मेरी कमर को मजबूती से पकडा और दूसरे हाथ से अपना लण्ड मेरी चूत पर सेट करने के बाद अपने लण्ड का दबाव मेरी चूत पर लगाना शुरू कर दिया।

खडे होने के कारण मेरी चूत के दोनों लिप्स आपस में जुडे हुए थे। जिस कारण मेरी चूत काफी टाईट हो गई थी। इसलिए उस लडके का लण्ड मेरी चूत के अंदर जाने पर मुझे काफी दर्द हो रहा था, साथ ही साथ मुझे उसका लण्ड काफी मोटा और बड़ा भी महसूस हो रहा था। जब काफी देर तक कोशिश करने के बाद भी उसका लण्ड मेरी चूत में नहीं घूसा तो उसने अपने साथ खडे दो लडकों से इशारों में कुछ कहा। जिसके बाद उस लडके के साथ खडे दो लडके मेरे बगल से होते हुए ठीक मेरे सामने आकर खडे हो गए। अब मेरे पीछे बस दो लडके खडे हुऐ थे, साथ ही साथ वहाँ कुछ जगह खाली भी हो गई थी। जिसके बाद वो लड़का मेरे कान के पास आकर एकबार फिर फुसफुसाया

लड़का- अब पर्याप्त जगह खाली हो गई है। इसलिए अब अगर तुम कुतिया बन जाओगी, तो सब कुछ आराम से हो जायेगा। बैसे भी अब तुम्हारे आगे मेरे ही दोस्त खडे हुए हैं, इसलिए किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा।

मुझे भी उस लडके का यह आईडिया ठीक लग रहा था। इसलिए मैं बिना कुछ कहे चुपचाप खाली जगह में घुटनों के बल बैठ गई। इसके बाद मैंने अपना बैग ठीक अपने सामने खिसका लिया और उसपर अपने दोनों हाथ और सिर को रखकर मैं किसी कुतिया की तरह खडी हो गई। मेरे कुतिया बनते ही वो लड़का भी मेरे पीछे घुटनों के बल बैठ गया। इसके बाद उसने मेरी स्कर्ट दोबारा से मेरी कमर के ऊपर कर दी और मेरी कमर को मजबूती के साथ अपने दोनों हाथों से पकडकर अपना लण्ड मेरी चूत से टिका दिया।

मैं अच्छी तरह से जनती थी कि अब बस मेरी चुदाई शुरू होने ही बाली है और उस लडके के बाकी के दोस्त मेरी लाईव चुदाई देखकर अपनी आँखें सेंकने बाले हैं। इसलिए मैंने शर्म के कारण अपनी आँखें बंद कर ली। कुछ ही देर बाद उस लडके ने एक बार फिर अपना लण्ड धीरे धीरे मेरी चूत में घूसाना सुरू कर दिया। लेकिन इस बार उसका लण्ड आसानी से मेरी चूत के अंदर चला गया था। जैसे ही उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में गया, तो ना चाहते हुए भी मेरी एक हल्की सी चीख निकल गई।

निशा- आआआहहहहहह

मेरे यूँ चीखते ही उस लडके ने तुरंत मेरे मूँह पर अपना हाथ रख दिया और धीमी आवाज में फुसफुसाया

लड़का- अरे बेबकूफ लडकी मरवाओगी क्या… चिल्ला क्यों रही हो

इतना बोलकर उस लडके ने जैसे ही मेरे मूंह से अपना हाथ हटाया तो मैंने धीमी आवाज में उसे डाँटते हुए कहा

निशा- दर्द होगा तो क्या करूँगी। तुम थोडा आराम से नहीं कर सकते थे क्या

लड़का- चलो ठीक है जो हो गया सो हो गया। अब आराम से करूँगा। लेकिन अब तुम बिल्कुल भी आबाज मत करना। बर्ना जितने लोग याहँ खडे हैं, तुम उन सबको झेल नहीं पाओगी।

इतना बोलते ही उस लडके ने अपनी कमर हिलाकर मेरी चुदाई शुरू कर दी। हाँलाकि मुझे अभी भी थोडा थोडा दर्द हो रहा था। पर मैं किसी भी तरह से उस दर्द को बरदास्त करते हुए बिल्कुल चुपचाप अपनी चुदाई करवाती रही। करीब 5 मिनट की चुदाई के बाद ही मेरी चुत पानी छोडने लगी, जिस कारण कुछ ही देर बार मेरा दर्द पूरी तरह से गायब हो गया और अब मुझे भी इसमें मजा आने लगा था, इसलिए मैं भी अपनी कमर हिला हिलाकर उसका साथ देने लगी। वो लड़का काफी देर तक यूँ ही मेरी चूदाई करता रहा। इस दौरान मैं 3 बार झर चुकी थी और मेरी चूत से रिस्ता मेरा पानी जाँघों से होता हुआ मेरी पेंटी तक जा रहा था। जो अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

आखिरकार उस लडके ने अपनी स्पीड बड़ा दी, जिसे देखकर मैं समझ गई कि अब बो भी झरने बाला है। करीब 5 मिनट और जबरदस्त चुदाई करने के बाद उस लडके ने अपना सारा पानी मेरी चूत अंदर छोड दिया। चलती ट्रेन में इतने सारे लोगों के बीच चुदाई करवाने से मैं मुझे काफी मजा आया था। लेकिन जैसे ही वो लड़का मुझसे अलग हुआ तो उसके पास ही खड़ा दूसरा लड़का मेरे पीछे आ गया और मेरी कमर पकड कर अपना लण्ड मेरी चूत पर टिका दिया। जिसे देखकर मैं बुरी तरह से चौंक गई और तुरंत पलट कर उससे बोली

निशा- नहीं नहीं.... यह तुम क्या कर रहे हो

लडका2- वही जो मेरे दोस्त ने किया है

निशा- पागल हो क्या... जो हो गया सो हो गया। बस अब और नहीं

लडका2- क्यों पालतू में नखरे कर रही हो... इतनी देर से तेरी चुदाई देख देख कर मेरी हालत पहले से ही खराब हो गई है। अब तुम फालतू में नखरे दिखाकर टाईम खराब कर रही हो। फ्री में थोडे ही कर रहा हूँ।

इतना बोलकर उस दूसरे लडके ने भी अपने बॉलेट से कुछ पैसे निकाल कर मुझे थमा दिए, जो मैंने चुपचाप अपने जैकेट की अंदर बाली पॉकेट में ऱख लिए और बोली

निशा- ठीक है कर लेना। लेकिन कुछ देर तो मुझे रेस्ट करने दो

लडका2- रेस्ट बाद में करती रहना। मुझपर अब और कंट्रोल नहीं होगा।

इतना बोलकर उस लडके ने बिना मेरा जबाब सुने अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया। अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी, इसलिए मैं चुपचाप कुतिया की तरह खडी अपनी चुदाई करवाती रही। उस लडके के हटते ही उनके बाकी के दो दोस्त जो मेरे आगे खडे हुए थे वो मेरे पीछे आ गए और जिन दो लडकों ने अभी अभी मेरी चुदाई की थी, वो मुझसे आगे जाकर खडे हो गए। यह सब देखकर मैं समझ गई कि अब ऐ दो लडके भी मेरी चुदाई किये बिना नहीं मानेंगे। इसलिए मैं चुपचाप पहले की ही तरह कुतिया बनकर खडी रही। जैसा कि मैंने सोचा था, उन लडकों ने भी बारी बारी मेरी चुदाई की और मुझे पैसे भी दिए।

जब बो चारों लडके मेरी चुदाई कर चुके तो मैंने अपनी पैंटी फिर से पहन ली और खडी हो गई। लेकिन तभी मेरे आगे खडे तीन आदमी उन लडकोंं को आगे की तरफ धकेलते हुए मेरे पास आ गए। उन लोगों में वो आदमी भी शामिल था जो पहले मेरे आगे खड़ा हुआ था और जिसकी पीठ से मेरे बूब्स बार बार टकरा रहे थे। मेरे पास आकर वो तीनों आदमी भी मेरे साथ छेडछाड करने लगे। जिस कारण मैं उन्हें रोकने की नाकामा कोशिश करने लगी, तभी एक आदमी धीमी आवाज में बोला

आदमी- अरे मैडम नखरे क्यों दिखा रही हो। हमें पता है कि पीछे क्या चल रहा था। चुपचाप पैसे लो और हमें मजे करने दो।

उस आदमी की बात सुनकर मैं समझ गई कि अब मैं बुरी तरह फंस गई हूँ। अगर मैंने उनकी बात नहीं मानी, तो हो सकता है ऐ लोग वाकी लोगों के सामने मेरी पोल खोल दें। जिससे मेरी बडी बेइज्जती होगी। हालाँकि उनमें से कोई मेरी जान पहचान का नहीं था। पर फिर भी चलती ट्रेन में सबके सामने मैं शर्म के कारण खडी होने लायक भी नहीं रहती, साथ ही साथ पता नहीं कितने और दावेदार मेरी चुदाई करने के लिए खडे हो जाते। क्योंकि मेरी जहाँ तक नजर जा रही थी, वहाँ तक शिर्फ मर्द ही मर्द दिखाई दे रहे थे।

कहानी जारी है......
 
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