Adultery Raj-- hero of the family - Page 64 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Raj-- hero of the family

अपडेट 205..

तू तोह गया बेटे…

मनीषा धयान से राज के चेहरे और बॉडी को चेक करती हुवी “हम्म्म घाव अभी भी गहरे ह टाइम लगेगा घाव भरने मई …वैसे ये क्या चक्कर ह तुम्हारा….”

राज “अब क्या कहु मैं….”

मनीषा “तोह करते क्यों हो पहले उलटे काम और तोह और तुमने पूनम को भी गुसा दिला दिया ये कैसे कर लिया तुमने …उसे तोह कभी ऐसे नहीं dekha…uske चेहरे पर तोह सिर्फ हंसी हे रहती ह”

राज “पता नहीं ……बस दोनों आती ह केयर करती h….par बोलती कुछ नहीं ह …और तोह और ये सुनील भी नहीं दिख रहा ह पता नहीं कान्हा गायब हो गया ह…”

मनीषा राज के सर पर हाथ फेरते हुवे बोली “हीई मेरा भोला मासूम devar…tum नहीं samjhoge….jalan ह ये …कोई भी लड़की …जब किसी को पसंद करती ह वो किसी और लड़की को कैसे उसके पास dekhegi…..aur तुम्हारे पास तोह वो ालिता चलती फिरती बम ह जो सुभे शाम तुम्हारे पसद अति h….isliye वो दोनों खफा ह शुक्र मनाओ तुम अभी तक और टूटे फूटे नहीं हो”

राज “हे भगवन ….भाभी मैंने सिर्फ हेल्प की h…aur जल्द हे वो चली भी jayegiii…baki आपकी कसम ऐसा वैसा कुछ भी नहीं ह”

मनीषा मुस्कारने लगी राज के सर को अपनी गोदी मई लेकर बोली “सोनाली मम की फीलिंग्स और नेचर तुम्हे पता ह न कोई बात नहीं मैं बात करती हु दोनों से”

राज “भाभी छोड़ो उन्दोनो को आप तोह ऐसे हे हाथ फेरती raho…baat करने से पता नहीं कब फैट पड़े दोनों ऐसे हे तीख h…waise आप अगली साल शादी करोगी न वडा याद ह न apko…pata ह मैं आपको जब भी देखता मुझे आप मई हमेशा मुझे एक भाभी और दोस्त दिखती और देखो मेरा सपना सच हो जायेगा …करोगी न शादी अगले साल”

मनीषा “हम्म्म जो तुम कहो वैसे तुम्हारा दोस्त दिख नहीं रहा ह”

Raj“bechara पीटने के दर से गायब ह कहता था हर दुःख मई तेरे साथ रहूँगा और देखो गायब हो gaya….bhabhi थोड़ा सा स्पाइसी सा खिलाओ न…. दलीय खिचड़ी खाके ुब्ब गया हु और ये लोग कुछ खाने नहीं देते ह….”

मनीषा “अले ले ये तोह बचे पर अन्याय हो रहा ह तीख ह मैं सूप लेकर आती हु तुम्हारे लिए”

राज के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आगयी वो मनीषा को जाते देख मन मई बोलै की “अब देखता हु की अपनी भाभी के आगे कैसे वो छू चपड़ करती ह ऐसे तोह मेरे लिए गोली तलवार सब खा लेंगी पर खाने के टाइम डॉ ने ये कहा ह डॉ ने वो कहा ह करती रहेंगी… ऊपर से ये कब्बू भी इनके साथ हो गयी ह”

कुछ वक़्त बाद राज आराम से मनीषा के हाथ से सूप पि रहा था और बाकि चारो उसे घूर रही थी…

राज “वाह भाभी क्या जादू ह आपके हाथो मई आज कितने दिनों बाद कुछ ाचा खाया h…warna यंहा तोह दलीय खिचड़ी और जूस हे पिलाया जाता ह”

पूनम “सही ह चूरमा आलू के परांठे पनीर सरसो का साग वो भी अब अपनी भाभी से हे खाना”

सोनाली “हम तोह बस दलीय और खिचड़ी हे खिलाएंगे आगे भी”

मनीषा “बस अब कोई नहीं डांटेगा राज को और वैसे भी डॉ को पूछ लिया ह मैंने सूप दे सकते हो”

राज “देखा ….देखा ….ये होता ह प्यार ….”

कविता chidkar“its नॉट फेयर bhai…chupke चुपके मैंने भी पनीर पीसेज खिलाये थे आपको मैं कटती हु आपसे “

सोनाली और पूनम एक साथ “खिलाये तोह मैंने भी थे”

सरे एक साथ एक दूसरे को देखने लगे और राज ने मनीषा के हाथ से आराम से सूप का बाउल अपने हाथ मई लिया और पिने laga…baki सरे उसे हे अब एक तक देख रहे थे…

राज सबको अपनी तरफ घूरता देख kar“kya …..इतना हक़ तोह मेरा बनता हे ह …ह न थोड़ा थोड़ा …सब से ले लिया…”

पर सब अभी भी उसे हे घूर रहे थे…

राज “kyaaa….ab आप सब ऐसे मत देखो मैं बीमार हु मुझे नज़र लग जाएगी”

शिवानी अब ये भी बता दो फिर ालिता ने क्या सेवा की तुम्हारी….

राज “वो क्या वो बहुत स्वीट ह वो मेरे लिए स्नैक्स लाती ह तोह कभी चॉकलेट छिपकर…”

सब ….दुबारा से राज की बाते सून एक दूसरे को देखने लगे….

राज “के ों पिछले 15 दिनों से हिलने तक नहीं दिया ह रूम se….matlb टीवी फ़ोन कुछ भी नहीं देखने दिया ह कितना अत्याचार हुवा ह मुझपर” उसकी नौटंकी देख सरे हैरान थे की राज इतनी नौटंकी भी कर सकता ह…

मनीषा “रज्जज्ज”

राज “मेरी स्वीट भाभी आप इनकी बातो मई मत आना …वो डॉ भी रहम दिल ह इनके आगे …देखो क्या हालत हो गयी ह आज़ाद पंछी की बंद कमरे मई रह रह कर देखो देखो चेहरा भी कला पड़ने लगा ह..….”

Sonali”fine तुम्हे व्हील चेयर पर बहार ले जायेंगे पर चलना सख्त मन ह समझे …घाव भरे नहीं ह…”

राज खुसी se“deal डील डील“

पूनम “डॉ से मेंपुछ लुंगी क्या स्पाइसी खिला सकते ह पर अब बिना पूछे कुछ नहीं खाओगे ऐसे ….”

राज “डील डील डील साडी शर्ते मंजूर ह साडी दवाई लू गए साडी बात मानुगा बला बला बला डील डील डील”

राज मन मई “ वह शिवानी मम आपका जवाब नहीं क्या आईडिया दिया था”

45 डेज लेटर ….इन कॉलेज…

रजनी राज को ऐसी हालत मई देख कर रो रही थी…

रजनी “तुम्हे कुछ हो जाता तोह देखो न तुम्हे कितनी छोटे लगी ह …यंहा भी… यंहा भी और यंहा भी “

राज रजनी को पकड़कर सामने बिठाते हुवे “मैं तीख हु आप शांत हो जाइये कॉलेज की कोल्ड ब्यूटी को ऐसे देख लिया तोह सरे मुझे मरने ajayenge…aur फिर हमारी सुहागरात भी तोह अधूरी ह”

रजनी सीरियस होकर “सुहागरात गयी चले मई …पहले अपनी तबियत का पूरा ख्याल रखो समझे ही मैं क्या करू तुम बहुत गंदे हो मन तोह करता ह पितु ”

राज “है है है बस ऐसे हे अछि लगती हो आप “

रजनी के चेहरे पर भी मुस्कान आगयी “तुम सच मई बहुत गंदे हो बहुत मज़ा ह तंग करने मई”

राज “बिलकुल मैं गन्दा हु”

रजनी “पर फिर भी मैं तुम्हे बहुत चाहती हु” इतना कह वो उठकर राज को बांहो मई ले लिया… “मैंने तुम्हे बहुत मिस किया हर पल मेरा दिल घबराता रहता था तुम्हरे लिए की कैसे होंगे tum…but थैंक गॉड अब मेरे पास हो ी मि सो मच राज.” इतना कह उसके होठो पर अपने नरम नरम गुलाभी होठ रख दिए ….और किश कितनी दिएर तक चली इसका कोई अंदाज़ा नहीं था पर जब टूटी तब रजनी का सीना ज़ोरो से ऊपर निचे हो रहा था….

राज और रजनी की आंखे एक दूसरे को निहारती रही …. तब रजनी बोली “एग्जाम आरहे ह तुम्हारे लिए नोट्स रेडी ह इन्हे पढ़ लेना बाकी कुछ समाज नहीं आया तोह मैं पढ़ा हे दूंगी और अनु को भी दे देना उसकी स्टडी भी बहुत डिस्टर्ब हुवी ह….”

राज “वो आज रात आजायेगी वो तयारी कर रही थी और फिर ab…hum साथ हे पढ़ लेंगे ”

रजनी “2 मोनथस बाद तुम्हारा कॉलेज टूर ह उसमे भी जाना ह”

राज “जो हुकुम आपका husan-a-malika”

रजनी “बाते बहुत आने लगी ह इतने दिनों मई… पढ़लो सेमेस्टर एग्जाम सर पर ह”

राज रजनी से थोड़ी दिएर और बात करके निकल गया …क्लास की तरफ

पीछे रजनी के चेहरे पर अब जाकर सुकून दिखा था उसने मिरर निकला और खुद के लिप्स को देखा जिसकी लिपस्टिक गायब थी और वो और जायदा गुलाभी हो रखे थे वो sharmayi….aur खुदसे हे बोली “ये. लड़का भी पूरी दुनिया को ख़ुशी देता ह और कुढ़ के लिए कुछ नहीं चाहता “

रात के 9 बजे …..

मुम्बई मई अनिरुद्ध गोस्वामी के घर ….

अनु “ी मिस यू सूऊओ ममममुच भाई “

राज “मिस यू तो मेरी जंगली बिल्ली ….पर अभी तेरे भाई की हालत नहीं ह तुजसे लड़ने की “

अनु “गले लगी रही और कुछ नहीं बोली “

राज “पगली मैं यही हु ….अब रोना बंद कर ….चल अजा क्या पता तेरे चक्कर मई कुछ खाने को ाचा मिल जाये”

पूनम “बिलकुल नहीं 1.5 महीना हुवा ह सिर्फ जड़ी बूटियों वाला सूप और अनु आयी ह तोह मामूली सी पनीर की सब्जी मिल जाएगी समझे आप ….अपने प्रॉमिस किया था”

राज “मुझे नहीं रहना ह ये भी कोई बात होती ह“

पूनम “achaaa…toh तीख ह मैं अभी दिव्या आंटी और दादाजी को कॉल लगाती हु” इतना कह वो किचन की तरफ मोबाइल लेने गयी तोह…

अनिरुद्ध “बेटे तू तोह gaya…”galat पन्गा ले लिया ये सोनाली से चढ़कर ह ये तेरे साथ तोह फिर भी बहुत नरम ह मुझे तोह दलीय खिचड़ी हे मिली थी …हेल्थ के मामले मई ये बिलकुल भी कोम्प्रोमाईज़ नहीं करती ह…..

राज “मैं तोह मज़ाक कर रहा tha…hey भगवान् क्या जुल्म ह ye…ab मज़ाक भी नहीं कर सकते ह”

तभी पूनम आयी “लो दादाजी से बात करो”

राज “ddddadajiiii….hhhh हहआ दादाजी मैं वो तोह ऐसे हे मज़ाक कर रहा था” फिर उसने फ़ोन को देखा जो लॉक था उसे समाज आया की पूनम ने अभी अभी क्या किया ह”

वंही पूनम जोर जोर से खिलखिलाकर हंस रही थी….

पूनम “बड़े पापा इन्हे बोलिये की सबको आपकी बहुत परवा ह पहले तीख हो जाईये पूरी तरह फिर जो बोलेंगे जितनी बार बोलेंगे वो बना के खिला दूंगी ….पर तीख होने तक खुदका ख्याल रखे….”

राज पूनम की बात सुनकर मंद मंद मुस्कुराता रह गया …पर बोलै कुछ nahi…usne खुद सूप का बाउल उठाया और पिने laga….raat को काफी दिएर उसने अनु से बाते ki…..aur फिर अनु चली गयी ….राज बीएड पर सो नहीं प् रहा था …उसे अब आदत हो गयी थी सर मई पूनम से हाथ फिरवाने की …दवाई की वजह से नींद हावी थी पर आधी नींद मई हे था और उसे कुछ पल बाद हाथो का स्पर्श सर पर महसूस huva……aur जैसे उसके बेचें दिल को सुकून आगया हो …उसके होठो पर मुस्कान agayi….aur उसने अपनी आंखे बंद कर्ली…

पूनम आज भी बीएड के किनारे निचे बैठे हुवे उसके बालो को सहला रही थी …

सायद ये पहला अहसास था जब राज के दिल मई पूनम के लिए अहसास जगह हो ….उसे आज पहली बार लग रहा था की इतनी दिएर से वो बेचैन क्यों था …उसे महसूस हो रहा था की पूनम अब उसकी आदत हो रही ह …..और ये सोचते हुवे कब वो गहरी नींद मई चला गया उसे अहसास तक नहीं हुवा …पूनम ने राज के फोरहेड पर किश करि और बोली “आज कल बहुत बदमाश हो गए शिकायत भी करने लगे हो आप तीख हो जाओ फिर जो कहोगे वो बना कर khilaungi…good नाईट लव यू …माय हस्बैंड एक दिन ऐसे हे आप मेरी बांहो मई सोया करोगे”

पूनम बहुत खुस थी क्योकि वो राज के साथ पिछले कई दिनों से अचे पल बिता रही thi…raj की केयर करना उसे संभाला …कभी कभी वो खुद हे शर्मजाति थी क्योकि वो उसी तरह राज का ख्याल रख रही थी जैसे एक पत्नी अपने पति का रखती ह…

अगले दिन ….पूनम अनु और राज ने जमकर स्टडी करि …और जो समाज नहीं आया उसे रजनी ने वीडियो कॉल पर क्लियर कर दिया….

1 मंथ लेटर…

प्लेस दिल्ली ….

सुनील सिंघनिया ग्रुप ऑफ़ बिल्डिंग से बहार निकल रहा tha….toh सामने की बिल्डिंग से उस पर निगरानी राखी जा रही….

“वो बहार निकल रहा h….xxxxxxxxx कार का नंबर भी वही h…par एक हे नंबर की 4 कार ह “

दूसरी तरफ से “ok”Itna कह वो हेलमेट मई कैमरा लगाए सुनील के काफिले का पीछा करने लगा ..और थोड़ी दिएर पीछा करने के बाद रूक gaya….aur वंहा से फिर एक दूसरी कार उनका पीछा करने लगी …ऐसे हे तीन बार व्हीकल चेंज होते हुवे सुनील का पीछा करते rahe…..sunil की सिक्योरिटी को ानन्दजा भी नहीं था की …कोई उनका पीछा कर रहा ह वो कार मई सेकेरेट्री से रिपोर्ट्स के बारे मई डिस्कशन कर रहा था ….

जब सुनील अपने बंगलो पंहुचा तब सामने से दूर दीपिका ने ओपन किया…

दीपिका “आगया अजा मैं लंच हे रेडी कर रही हु …अरे तुम भी आयी हो ाजाओ लंच साथ करते ह”

सेकेरेट्री “ no मम मैं”

दीपिका “ाजाओ मुझे पता ह तुमने लंच नहीं किया ह ….और इसे काम के सिवाए कुछ दीखता नहीं h….chalo बैठो”

सुनील “बैठ जाओ इनकी बात कौन ताल सकता ह”

दीपिका किचन से “ाचा जैसे तुम दोनों बड़ी मानते हो मेरी एक को चोट लगी ह जिसका अब पता लगा ह मुझे और तुम …तोह मुझे कुछ बताते नहीं ho…kuch दिएर मई श्वेता भी अति हे होगी कॉलेज से”

सुनील “क्या वो चुड़ैल आरही h…..dii जल्दी जल्दी खिला दो मुझे ऑफिस जाना ह वापस”

दीपिका “कंही नहीं जाना ह शाम को शॉपिंग पर जाना ह याद ह न परसो तूने हे कहा था उसे…”

सुनील “हे भगवन….” फिर गहरी सांस छोड़कर “एक बात बताओ दी आप सब उसे क्यों कुछ नहीं कहती हो ….वो जरा भी काम नहीं करता h….even शॉपिंग भी नहीं करता ह”

तभी श्वेता पीछे से अति हुवी “बेकौसे यू अरे थे बेस्ट इन थे वर्ल्ड”

सुनील “मस्का लगवालो कितना भी”

श्वेता गाल पर किश करती हुवी “ूऊमम्महठ्ह लव यू सो मुउउउउछहह”

सुनील “बस कर पूरा गिला कर दिया ह”

श्वेता “ हे हे हे”

दीपिका खाना लगते हुवे “अब सब तीख ह न मुम्बई मई“

श्वेता “सब तीख हे ह दी तभी तोह हम सबको वापस बुला लिया ह”

सुनील “डीई सब तीख ह “

दीपिका “कुछ तोह सच बता हमे अगर तू चाहता ह की हम तीख रहे तोह”

सुनील “दी वैसे सब तीख ह पर खतरा अभी भी ह बस आप दोनों कभी बॉडी गॉर्डस को बताये बिना कोई काम न करे न इधर उधर जाये ..वर्ण एक की वजह से बहुत कुछ खो सकता ह ….”

दीपिका “किसी खतरा ह”

सुनील “ये अभी पता नहीं ह पर ह वो कब अटैक करेगा कुछ पता नहीं ह ….पर हर बार मुझे ऐसा अहसास होता ह की कोई हमारी निगरानी कर रहा ह पर कितना भी धुन्धु कुछ नहीं मिलता ह इस लिए बे carefull….Raj चाहता ह की उसकी बहने उसका परिवार आज़ादी और सुकून से जिए इसलिए उसने आप दोनों को वापस बुला लिया …और अब अगर कोई निगरानी कर रहा ह तोह उसकी नज़र जरूर आप दोनों पर भी होगी”

दीपिका “प्रॉमिस हम दोनों हमेशा धयान रखेंगे ….”

सुनील “अंजना दी कान्हा ह”

दीपिका “सो रही ह पढ़ रही thi…itni दिएर toh…raj से कब मिल सकते ह”

सुनील “एग्जाम के बाद आएगा वो ….बोल रहा था सब हॉलिडे पर कुछ दिन घूमने चलेंगे ….”

श्वेता “फिर तोह मज़ा आएगा”

सुनील “आप दोनों को बहुत मिस करता h….agai वो उप जायेगा तब काफी वक़्त हमसे दूर रहेगा….”

दीपिका “राज की जिंदगी बहुत मुश्किल ह ….”

सुनील “डोंट वोर्री मैं हु न”

दीपिका मुस्कराकर “तू तोह हम सबकी जान ह ….मुझे पता ह तेरे रहते राज को कुछ नहीं होगा”

श्वेता “थॉट्स व्हाई ी लव सोऊ मच …”

सुनील “तू न जायदा बदमाश हो गयी ह ….अब जल्दी खले फिर चलते ह शॉपिंग पर आज मीटिंग ह यार”

दीपिका ok मैं अंजना को भी जगा देती हु…


मुम्बईई….

प्रोजेक्टर पर…..

एक आदमी प्रोजेक्टर पर काफी साडी इमेजेज डिस्प्ले कर रहा था…

“अप्पाराव सर …ये ह दीपिका”

अपूर्व सिंह“ जनता हु इसे इसकी वजह से डेथ हेलो सर के भाई की जान गयी थी …ये काफी वक़्त से गायब भी थी”

आदमी “यस सर अभी लौट आयी ह पर कोई रिकॉर्ड नहीं मिले ह की कान्हा गयी थी और कैसे वापस आयी ह”

अपूर्व सिंह “हम्म्म और इसके साथ कमिश्नर की लड़की भी पड़ती ह न”

आदमी “यस सर ये रही रिसेंटली साथ हे आयी ह …ी मैं साथ हे कॉलेज मई दिखी ह …4बॉडी गॉर्डस दोनों के साथ रहते ह और सिविल यूनिफार्म मई पुलिस वाले भी इन पर निगरानी कर रहे ह …सिर्फ जान पहचान वाला हे इनके पास जा सकता ह”

अपूर्व सिंह के चेहरे पर एक ऐसी शांति थी जिसका मतलब था की मौत ….बरसने वाली हो “

आदमी “सर ये ह सुनील सिंघानिया की डिटेल 16 बॉडी गॉर्डस ह 10 साथ चलते ह बाकी 6 स्नाइपर के साथ पुरे रूट को कवर करते ह ताकि बैक उप दे सके और पॉसिबल थ्रेट को पहले हे ख़तम karde…iska सचदुले सिर्फ इसकी सेकेरेट्री हे जानती ह जो ऑलमोस्ट इसके साथ हे रहती ह और इसके पास के हे बंगलो मई रहती ह उसकी सिक्योरिटी भी टाइट रहती ह”

अपूर्व सिंह “डेथ हेलो ने इन सबको पिछली बार पता नहीं क्यों छोड़ दिया था है याद आया इन सबका क्लोज एक लड़का भी ह न जिसकी 50कर की बौनतय लगी थी “

आदमी “ यस सर पर अभी तक उसकी कम्पलीट डिटेल नहीं आयी ह…”

अपूर्व सिंह “शो में व्हाट यू हैवे कलेक्टेड”

आदमी “यस सर ……सर ये डिटेल h…1mahine के लिए गायब हो गया था और जब दिखा तोह पता लगा ह की एक्सीडेंट हो गया tha…..simple सा रूटीन ह कॉलेज सुर कॉलेज से घर …अनिरुद्ध गोस्वामी के घर रूका हुवा h….iska कोई बैक ग्राउंड नहीं ह अनाथ ह और कमिश्नर जोगिन्दर सिंह ने लागली इसे गोद लिया हुवा ह ….और ऊपर दिखाई गयी दीपिका से भी कनेक्टेड ह”

अपूर्व सिंह “ no no समथिंग इस मिस्सिंग बूत whatttt….oh ओह्ह्ह्ह…. हमे हमारा जैकपोट मिल गया ….बौनतय वाले ने ये बताया था की इस लड़के का वंहा होना जंहा निर्वाण का होना होता ह वो महज एक इत्तेफ़ाक़ तोह नहीं हो सकता h….aur इसके ऊपर अटैक होने से पहले हे निर्वाण का अजना सब कक्तव इरेस हो जाना …पुलिस का इंटरफेर न करना …ये सब जुड़े हुवे ह”

आदमी “सर ओने मोरे थिंग”

अपूर्व “व्हाट”

आदमी “सर सुपर कप सोनाली भी एक कॉमन फैक्टर ह ….heemachal…delhi …मुंबई मई वो भी थी”

अपूर्व “और उत्तराखंड देहरादून मई”

आदमी चेक करते हुवे “नौपे सर ये नहीं थी वंहा “.अपूर्व तोह फिर वो कॉमन नहीं ह पर ये लड़का जरूर कॉमन ह बौनतय वाला शख्स सही था अब यही हमे निर्वाण तक ले जायेगा…”

आदमी “मैं और डिटेल निकलता हु सर “

अपूर्व “तुमसे न हो पायेगा तुम सब बस इनकी जड़ को ढूंढ निकालो कोई तोह जो इन सबके पीछे ह ….जो दीखता नहीं h…ek काम करो हर कक्तव एयरपोर्ट रेलवेज हर जगह ढूंढो कुछ तोह जरूर मिलेगा ….जब तक मैं डेथ हेलो को रिपोर्ट देता हु”

आदमी “यस सर”

अपूर्व सिंह सबके जाने के बाद राज की फोटो के पास आकर “तोह इस खेल मई तुम क्या रोले रखते हो मर raj….maine तुम्हे मिस कैसे कर दिया ….तोह क्या ये साडी स्टोरी तुम्हारे आसपास हे घूम रही ……कौन हो तुम आखिर अब वक़्त आगया ह तुमसे फेस तो फेस मिलने का ज़रा मैं भी देखु की इस नकाब के पीछे कोई दूसरा चेहरा भी ह क्या…”

तभी पीछे से एक जाना आकर सर जाने का टाइम हो गया…

अपूर्व “बिलकुल चलो “

मंडावा…..

जगमाल सिंह “बाबा ये शेरदिल ह अली का बीटा और राज का भाई”

बाबा “शेरदिल का हाथ देख कर …जैसा नाम वैसा तेरे काम honge…ek वक़्त आएगा जब तुझे निर्णय लेना होगा उस वक़्त जो तेरा दिल कहे बस वो कर देना …और तू चिंता मत कर तेरी बहन और माँ हमेशा सुखी रहेंगी उन्हें वो सब मिलेगा जो तूने चाहा ह पर इसकी कीमत तुझे चुकानी होगी … तेरे जीवन मई शांति नहीं लिखी ह putra….maut से खेलेगा tu….jab तक जिए शान से जीना ऊपर वाला सब मंगल करेगा”

शेरदिल हैरानी से बाबा को देखता रह gaya…toh दादाजी का दिल बैठ गया क्योकि वो समाज रहे थे की बाबा के कहने का क्या मतलब था….

दादाजी “बाबा आप जा रहे ह”

बाबा “सब ऊपर वाले का रचाया खेल ह कब किसी कान्हा बुला ले कोई पता नहीं ह”

दादाजी बाबा को हैरानी से जाते देखते रह गए तोह बाबा बिना पालते जाते हुवे बोले “अब वक़्त ह उद्धार का अब वक़्त ह अपनों से जुदाई का …..अब वक़्त ह काली घनेरी रात ka…par तू हीमत मत हारना ा pathik…..andhero के बाद हे आनंद अत ह उजाले का…. अलख nirajan…alakh निरंजन”

दादाजी कुछ नहीं बोले और चुप चाप घर के अंदर आगये ….उनका दिल भरी भरी हो रखा था…

ममता “दादाजी छाए लौ…

दादाजी “नहीं ममता बहु को भेज दे बास्त करनी ह”

ममता “जी “

जगमाल सिंह अपने स्टडी रूम मई पहुंचे और आराम करने lage….kuch पल बाद हे सुप्यार आगयी और बोली “बाबूजी अपने बुलाया”

जगमाल सिंह “वैसे ये सवाल हमे दिव्या से पूछना चाहिए था पर हम सही जवाब चाहते ह और आप भी राज की छोटी माँ हे आपका भी उसपर पूरा हक़ ह”

सुप्रिया “बाबूजी मेरा दिल घबरा रहा ह क्या हुवा ह राज को सब तीख ह न”

जगमाल सिंह “ क्या राज के लिए कोई लड़की देखि ह या पसंद ह आपको …”

सुपीरिया कुछ पल रूक कर “ऋचा उसे राज पसंद करता ह या था ….पता नहीं पर प्यार को बहलाया नहीं जा सकता ह और राज उन्ही मई से ह जो बोलता नहीं ह …और दूसरी तरफ सोनाली ने एक पत्नी के सरे कर्त्तव्य अब तक निभाए h….wo उसके लिए मरने जीने के लिए तैयार ह गरम मिजाज की होने के बावजूद उसने कभी हम मई से किसी को पलटकर जवाब नहीं दिया ह जो उसके समर्पण को दिखता ह …मेरी नज़र मई सोनाली बेटी राज के लिए एक पत्नी के रूप मई हर तरह से उचित ह”

जगमाल सिंह “तीख ह बहु अब जा सकती हो” और सुप्रिया के जाने के बाद वो गहरी दुविधा मई पद gaye….aur सोचने लगे बाबा की बातो को…

दादाजी “बाबा आप तोह उसकी किस्मत जानते ह मुझे कुछ नहीं जानना ह बस इतना बता दीजिये की इन तीनो बच्चियों मई से उसकी जीवन साथी कौन होगी …आपका कहना ह सोनाली की वजह से ये परिवार एक rahega..aur ऋचा बिटिया उसके जीवन को राह दिखाएगी जबकि वो तोह उसको देखते हे रास्ता बदल लेता ह ..और पूनम बेटी से उसको जिंदगी भर गहरा लगाव रहेगा और वो बिलकुल विद्या की तरह बनेगी सबको प्यार अपनापन देने वाली….”

बाबा “ स्वार्थी हो रहे हो”

जगमाल सिंह “बाबा किरपा करे मुझे बताये क्योकि अभी तक तोह उसकी जिंदगी मई प्यार का नामोनिशान तक नहीं ह और मुझे मेरी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं ह की कब ख़तम हो जाये प्लीज बाबा बता दीजिये इस बूढ़े को कुछ”

बाबा आंख बंद करते हुवे “तुम्हारी अधीरता देखते हुवे मैं तुम्हे कुछ बताता हु पर उसे आगयी कोई सवाल नहीं तोह suno….Raj की शादी हो जाएगी पर तुम जान नहीं paoge…aur न वो खुद जान पायेगा अभी मैं सिर्फ तुम्हे इतना हे बता सकता हु ….और जैसा मैंने कहा था तुम्हारी हर ीचा पूरी होगी फ़िलहाल इतना कह सकता हु तुम्हे”

दादजी मन मई “कैसे होगी कौन होगी उसकी वो लड़की जिसका न उसे पता लगेगा न मुझे …हे ईश्वर ये कैसा खेल रहा मेरे बचे की जिंदगी mai…main अब अपनी बुद्धि आँखों से और दुख नहीं देख पायंगे …किरपा रखना भगवन”

शेरदिल माँ पीछे से अति हुवी boli“allah सब तीख करेगा babuji…hamare बचे हर मुसीबत से लड़ जायेंगे ….मुझे पता ह आप बाबा की बात के बारे मई सोच रहे ह….”

दादाजी “है बेटी …”

शेरदिल माँ “मैं बस उन घुनगरो की मौत देखना चाहती हु अगर मेरे बेटे की जिंदगी छोटी लिखी ह तोह भी मुझे ग़म नहीं बाबूजी बस वो अपने मां और बाप के हत्यारे को मार कर mare”itna कहते कहते उसके आंसू फुट पड़े…. “

दादाजी खड़े होकर गले लगते हुवे “मत रो मेरी बची ईश्वर कभी हमारे साथ इतनी न इंसाफ़ी नहीं karega…sab तीख होगा तू रो मत “

दादाजी ने कहने को कह तोह दिया पर वो खुद अंदर हे अंदर रो रहे थे ….

मुम्बईई….

राज बीएड पर बैठा हुवा कुछ गहरी सोच मई था …उसके दिमाग मई हर बीती बात अभी घूम रही thi….usai बस एक हे बात बार उलझाए जा रही थी की डेथ हेलो डेथ हेलो डेथ हेलो आखिर ये ह कान्हा …इसने अभी तक कुछ क्यों नहीं करा ….जबकि सुनील शिवानी सोनाली अभय अज्जू श्रुति पर इसने अटैक करवाया फिर चुप हो gaya….uska खास आदमी जैसें भी मारा गया ….जितना मैं समझा हु उसे वो चुप रहने वालो मई से तोह बिलकुल नहीं h…editor कुंदन अंकल को मार कर उसनने ये साफ़ बता दिया था की वो निरवाना के पीछे ह और अंडरवर्ल्ड राज के पीछा ह …और किलर आर्गेनाइजेशन और अंडरवर्ल्ड वाले दोनों मिले हुवे ह तोह फिर इतनी शांति क्यों ह कुछ तोह गलत h….jo मुझे दिख नहीं रहा ह …पर क्या ….फिर उसने अपनी वाच से वौइस् मैसेज भेजा तभी मित्युदूत अंदर आगया…

मित्युदूत “ यस मास्टर”

राज “घर के आसपास कक्तव लगवा दो कोई जगह नहीं चुटनी चाहिए ह …और चेक करो की क्या कोई हमारा पीछा करता ह क्या इसके लिए अलग से आदमियों को लगाओ सोनाली मम से kahkar….aur है मैच और मार्क को शिवानी मम के टच मई रहने को कहो कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए ह …बहुत बड़ा होने वाला h…mera दिल कहता ह ….

मित्युदूत “जी मास्टर”

राज “मड़वा मई भीमा चाचा को भी कह दो सिक्योरिटी बढ़ा दे और जरुरत न हो तोह घर से न निकले …क्योकि मुझे पूरा यकीन ह डेथ हेलो हाथ लगाकर बैठा ह बस एक गलती और सब तहस नहस हो jayega…uski न सकल पता ह न चेहरा हमे …”

मित्युदूत “मास्टर कोई प्लान ह आपके पास”

राज “जिसका चेहरा नहीं पता ह उसे कैसे फंसाये …हमे उसके अटैक का इंतज़ार करना होगा अब वो आएगा …और पूरी तयारी से आएगा और उसकी बेहरहमी आप जानते हे ho”phir राज मन मई “आखिर क्या प्लानिंग ह तुम्हारिई डेथ हेलो कान्हा हो तुम क्या करना chahte….alhir क्या चल रहा तुम्हारे दिमाग मई”

मुम्बई कॉलेज….

दीं “अरे अपूर्व सर आपको कौन नहीं जनता ह लीजिये न एडमिशन आपको कोण मन कर सकता ह बोलिये किस क्लास मई लेना ह “

अपूर्व सिंह के चेहरे पर हंसी आगयी और धीरे से बोलै “गेम ों Raj”itna कहते हुवे वो कार की चाबी घूमते हुवे बहार आगया…


मेरा रिवॉर्ड आपके लाइक्स और रेवोएस ह जिसमे काफी रीडर कंजूसी कर रहे ह ….जो मुझे समाज नहीं अत की kyo…..kosis रहेगी सैटरडे या संडे अगला अपडेट दू
 
कांसेप्ट लिखने मई और उसमे चेंज करने मई उतना हे फर्क ह जितना जमीं आसमान मई होता ह ...

दिमाग को दुरुस्त करो...

पहले भी नेगेटिव हे किया था अब भी वही करने ए हो..

पहले जियोग्राफी ेट्स को लेकर ज्ञान दिया था और अब यंहा...

ज्ञानी बाबा🤣🤣🤣🤣 नयी स्टोरी विस्टोर्य लिखो ताकि हम भी पढ़े पर nahi....baba को ज्ञान पेलना ह ....lol कॉमेडी हो गयी ...
 
अपडेट 206



बलौर….

पूनम “हम ऑलमोस्ट रेविसिओं हो गया ह मेरे एकाउंट्स का सब्जेक्ट क्लियर ह”

अनु “ 11तह 12तह मई कॉमर्स लेने का यही फायदा होता h…concept क्लियर हो तोह कोई प्रॉब्लम नहीं होती ह”

पूनम “राइट वैसे तुम्हे बता दू तुम्हारा भाई 10 सीबीएसई बोर्ड मई आल इंडिया टोपर रहा हुवा ह”

अनु चौंककर “ह्ह्ह्हहह्ज इसलिए भाई को हर चीज इतनी जल्दी आजाती ह”

पूनम “मुझे भी अभी हे पता लगा ह”

पीछे से राज अत हुवा बोलै और अनु ये सीबीएसई 10तह बोर्ड मई आल इंडिया 2ंद रैंकर थी …

अनु “क्या …मेरा क्या hoga….waise तुम दोनों की जोड़ी अछि लगेगी ….एक शांत और नरम दिल की ह तोह ये ladku..chidchida ह”

राज उसके सर पर masrkar“itni सी ह पर पातर पातर दिन भर तोते की तरह बाते करवालो इसे ….”

अनु अभी बोलने को हुवी तोह राज ने हाथ मई पकड़ी गाजर उसके मू मई ठूस दी…

राज “है है है बड़ी आयी “

अनु गाजर निकल कर bhaiiiii….main तुझे आज बहुत पिटूंगी….

राज और अनु हंसी मज़ाक करने लगे

पूनम “मैं टिया बना लेती हु बड़े पापा आने वाले ह”

राज “मैं किचन से हे ारः हु आपकी बड़ी मम्मी लगी हुवी ह खाना बनाने मई इसलिए उन्होंने पहले हे कह दिया था की पूनम सिर्फ पढ़ाई करे ….और दूसरा कोई काम न करे तोह आप बैठी रहिये और पढ़ाई पर फोकस करिये जब तक मैं इस जंगली बिल्ली के नाख़ून काट दू….”

अनु “मैं छोडूंगी नहीं ..एक बार हाथ छोड़ो मेरे”

पूनम “तोह आप भी बैठ जाईये ….और पढ़ लीजिये “

राज “मुझे जितना पढ़ना था पढ़ लिया h…aur बाकी क्या करना ह …”

अनु लड़ना chodkar“are डोंट वोर्री मेरे भाई मैं हु न बहुत पैसे ह मेरे पास हम भाई बहन मजे से जिंदगी गुजरेंगे”

राज “ाचा …पर मैं तोह तेरी शादी करके दूर भेज दूंगा फिर सब मेरा हे होगा तोह अकेले खर्च करूँगा न,”

बस अनु का चेहरा उतर गया और रोनी सी सूरत बन गयीईइ…

राज मजाक कर रहा था ….तेरी कसम ाचा… बस तीख ह हम घर जमाई ढूंढ लेंगे बस ….

अनु अभी भी ऐसे हे देख रही थी…

राज “सॉरी लव यू न “

अनु “भाई वो माँ को सच बताना ह हम कब तक छिपाएंगे उन्हें कुछ बाटे हे पता ह”

राज “ok मैं जाऊंगा उनके पास और सब बता दूंगा …मुझे दादाजी से भी मिलना ह…..”

जाने की बात सुनकर एक पल के लिए पूनम का चेहरा उतर गया जिसे अनु ने गौर कर लिया…

पूनम मैं आपके लिए सूप लेकर अति हु ….

राज “आप बैठो”

पूनम “आपकी तबियत से जरुरी कुछ नहीं ह…”

इतना कह वो चली गयी पीछे …

अनु पूनम को जाता dekhkar“bhai देखो आपको आज नहीं तोह कल शादी तोह करनी हे ह ….पूनम बहुत अछि लड़की ह …मैंने देखा ह कैसे वो कॉलेज से लेकर घर क हर छोटी सी छोटी चीज तक आपकी केयर करती ह ..”

राज उसके सर पर मरते हुवे“ कुछ bhi…ha वो बहुत अछि ह पर मैं उसके लायक नहीं हु हमारा कोई मेल नहीं h…aur मेरी जिंदगी तू जानती हे ह ..मैं चाहता हु उसे वो लड़का मिले जो उसकी उससे जायदा केयर करे उसकी रेस्पेक्ट करे उसकी हर छोटी बड़ी ख़ुशी का धयान रखे ….पूनम ने बहुत ढक देखे ह अनु …और पता ह दुख इस बात का ह की उसके दुख की वजह भी मेरा हे परिवार ह ..”

अनु कन्फूसिओं से “भाई क्या मतलब”

राज “लम्बी कहानी ह फिर बताऊंगा तुझे बस इतना जान ले की मैं उसकी ख़ुशी के लिए सब कर सकता हु अगर वो मेरी जान भी मांगे तोह भी मैं ख़ुशी ख़ुशी देदू अगर इससे उसे ख़ुशी मिलती ह तोह”

अनु नई सब्द हो गयी उसे समाज हे नहीं आया की वो क्या बोले पर उसकी नज़र मई उसके भाई का काढ़ और ऊँचा हो गया ….

पर ये सब बहार पूनम भी सून रही थी जो बहार तोह निकली थी पर गेट के बहार दुखी होने के कारन से रूक गयी थी …वो पहले से हे राज के जाने की बात की वजह से बहुत दुखी thi…har दिन वो राज जब तक यंहा ह उसके साथ ख़ुशी ख़ुशी बिताना चाहती थी इसलिए एक मुस्कान हमेशा चेहरे पर लिए रहती thi….aur इसी वजह से राज के जाने की बात सुनकर वो सूप के बहाने से बहार आगयी और अपने दुखी दिल को समझा रही thi…par अभी राज की बाते सुनकर आँखों मई आंसू थे पर होठो पर एक मुस्कान प्यारी सी मुस्कान आगयी थी ….उसने अपने आंसू पूँछे और राज के लिए सूप लेने चली gayi……..aur वापस आयी तब अनु और राज को लड़ता देख उसके चेहरे पर हंसी आगयी ….क्योकि कविता श्वेता और अनु के साथ राज हमेशा लड़ता रहता ह और खासकर उनके बालो को बिगड़ने मई उसे बड़ा मज़ा अत ह और अभी भी वो यही कर रहा था…

पूनम “भगवन करे भाई बहन के प्यार को किसी की नज़र न लगे”

अनु “अरे ये इसी लायक ह मेरे बाल बिगड़ देता ह हमेशा …कितनी म्हणत लगती h..waise भाई मम्मी दिल्ली से सीधे जाएँगी या आप लेकर जाओगे”

राज “तू जायदा मत सोच सब हो जायेगा वैसे मैं तुझे बताना भूल गया सुनील का कॉल आया था साडी प्रॉपर्टी शक्ति के नाम थी “

अनु “पता हे था …घटिया आदमी का घटिया बीटा यही कर सकता ह”

राज “अरे शांत शांत अब सब तेरा ह शक्ति से सिग्न ले चुके ह और सब तेरे नाम पर ह”

अनु “मुझे नहीं चाहिए कुछ भी मुझे माँ और आप चाहिए बस आग लगादो पैसो को”

राज “ाचा ाचा समाज गया जो हुकुम आपका …चल सूप पि ले फिर मैं भी रेस्ट करता हु रात को निकलना ह पेपर भी पास आगये ह वो भी देने ह”

पूनम “आज हे जाओगे ….वापस कब वापस आओगे”

राज “3 दिन लग जायेंगे दादाजी और बाकी सबकी याद अति ह”

पूनम “पर आपको वंहा सूप टेबलेट सब टाइम पर लेना h…ap रहने दीजिये मैं रिफत और ममता को कह दूंगी वो अपने आप आपको खिला पीला देंगी आपके भरोसे कुछ नहीं होगा“

अनु साइड से पूनम की करेनेस्स के पीछे छिपी फेरलिंग अचे से समाज रही थी इसलिए वो साथ साथ मुस्करा भी रही थी

कुछ दिएर बात करके तीनो ने खाना खाया और फिर तीनो पढ़ाई करने लगे…

वंही pune……same डे मॉर्निंग से नाईट तक…

दिव्या “ऋचा ये क्या ह अभी तक मेडिसिन का स्टॉक क्यों नहीं आया ह”.

ऋचा “मम मतलब छोटी माँ ….कल आजायेगा अभी कुछ दिएर पहले हे सुप्प्लिएर से मेरी बात हुवी thi…truck मई प्रॉब्लम आगयी थी इसलिए डिले ह”

दिव्या muskurakar“tum अभी भी मुझसे बात करते हुवे नर्वस क्यों हो जाती ho”divya को सब पता था पर वो फिर भी जान भुजकर सवाल कर रही थी ..

ऋचा “मैंन वो….”

दिव्या “ाचा कोई बात नहीं ….चलो सुभे से लगी हुवी लंच करते ह” इतना कह दिव्या ने उसके कंधे पर हाथ रख लिया और उसे अपने साथ कैंटीन ले जाने लगीई … “राज से बात हुवी “

ऋचा हड़बड़ा गयीईइ….

दिव्या “इतना क्यों हड़बड़ा गयी तुम तोह दोनों दोस्त हो क्लासमेट रहे हो”

ऋचा “उनके पेपर स्टार्ट होने वाले ह छोटी माँ इसलिए उन्हें डिस्टर्ब नहीं किया मेरी पूनम से बात हुवी थी और डॉ अंकल से जब भी उनका चेक उप होता ह मैं तब डिटेल ले लेती हु अभी रिब्स की साइड मई पैन रहता ह जिसे तीख होने मई टाइम लगेगा …”

दिव्या “है मेरी भी बात हुवी thi….dr se…ok अब सुनो मैंने टीम्स को डिवाइड कर दिया ह एक टीम तुम्हारे अंडर रहेगी …फर्स्ट ईयर ki…aur एक सीनियर डॉ तुम्हारे साथ रहेंगे गुइडेन्स के liye….tum डिटेल्स कलेक्ट करती रहना ताकि फ्यूचर मई हम एक परफेक्ट प्लानिंग के साथ वंहा सेटअप कर सके और हरगाह का देता सभी से तुम्हारा असिस्टेंट कलेक्ट करेगा तुम्हे फाइनल रिपोर्ट चेक करनी ह और मुझे भेजनी ह तीख ह“

ऋचा “जी मैं कर लुंगीय छोटी माँ“

दिव्या “ये सब इतनी तकलीफ सहना ये तुम किसके लिए कर रही हो ऋचा ….सिर्फ ओनर हो इसलिए तोह नहीं करोगी” ये कहते हुवे वो धयान से ऋचा को देखने लगी क्योकि बहुत समय से वो ऋचा से जानना चाहती थी की उसके मन मई आखिर क्या चल रहा ह क्योकि आज 11तह क्लास से फर्स्ट ईयर तक ऑलमोस्ट थ्री ईयर से वो दिन रात विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स के लिए वर्क कर रही थी जिसमे उसने अपना घर तक भी छोड़ दिया था…

ऋचा ने दिव्या की बात सुनी तोह खाना कहते हुवे उसके हाथ रूक गए ….फिर कुछ पल रूक कर नीची गर्दन करते हुवे हे बोली …. “छोटी माँ ….मेरे पास सब ह पैसा फॅमिली h…ap जैसी प्यार करने वाली छोटी माँ h…dadaji h…sunil जैसा एक प्यारा भाई और प्यार करने बहने ह par….jo नहीं ह वो विस्वास…. मुझे वो बनाना h….aur वो तभी होगा जब इस ग्रुप को बनाते समय देखा गया सपना पूरा होगा ..बस यही लड़ाई ह मेरी जिसके आगे मुझे साडी खुशिया अधूरी सी लगती h….isiliye मुझे कंही आना जाना पसंद नहीं ह”

दिव्या ऋचा को एक तक देखती रही पर ऋचा ने गर्दन ऊँची नहीं करि …

दिव्या “और ये अधूरी ख़ुशी राज से पूरी hogi…h न ..उसी के लिए हे ह न ये सब”

ऋचा ने एक नज़र उठाकर दिव्या को देखा और अपनी गर्दन नीची कर्ली और फिर बोली “आगे क्या होता ह मुझे वो नहीं पता ह पर …जो सपना विद्या माँ ने देखा था मैं उसे पूरा करने की कोसिस करुँगी …और ..अंतिम साँस तक करुँगी …राज और मेरा रिस्ता विद्या माँ करना चाहती थी इसलिए सायद किस्मत ने हमे मिलाया पर एक गलत फहमी की वजह से हम अलग हो गए …न उसने मुज पर भरोसा किया और न मैंने उसकी बातो par…usne सच बताने की कोसिस करि मुझे बनाया पर मुझे जो दिखा वो मेरे लिए सच था इसे जायदा मैं कुछ नहीं कह पाऊँगी …मैं हैंड वाश करके अति hu”itna कह वो कड़ी हुवी और जल्दी से उठकर हैंड वाश करने चली गयी..

दिव्या “अगर ऋचा सच कह रही ह तोह गलती दोनों की ह पर कीमत सिर्फ ये लड़की हे चूका रही ह ….इसने सबकुछ छोड़ दिया सिर्फ इसलिए ताकि वो राज को पा सके उसका प्यार विस्वास पा सके पर ऐसा क्या हुवा दोनों के बिच जोनलग हो gaye….ab सच तोह सुनील हे बता सकता ह या फिर वो लड़की क्या नाम बताया था श्वेता न …कक्क से नाम था है कृति …पर वो मिलेगी कान्हा …मैं ये कैंप वाला प्रोजेक्ट पूरा कर दू फिर पता करती hu…….richa 16 साल की हे रही होगी उस वक़्त …और उतनी मातुरे नहीं थी पर अब ये 19 साल की लड़की होकर भी किसी 30 साल की लड़की से जायदा काबिल और समझदार ह …ममता रिफत तीख कह रही थी ऋचा परफेक्ट ह राज के लिए ….और आज इसकी बातो ने साफ़ कर दिया ह की ये बची सच मई राज से बहुत प्यार करती ह…

कुछ पल बाद ऋचा आगयी …

ऋचा “अपने खाना नहीं खाया “

दिव्या “खा लिया ह हैंड वाश कर लेती हु main…aur है तुम्हारी टीम उत्तराखंड jayegi…..tumhari विद्या माँ को वो जगह बहुत पसंद थी और मैं चाहती हु तुम वंही सब सम्भालो “

ऋचा “तीख h…ek बार सभी फ़ूड सप्लायर का स्टेटस और व्हीकल स्टेटस भी चेक कर लेती हु”

दिव्या “है तीख ह जब तक मैं बाकि अपने दूसरे हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर से टीम स्टेटस ले लेती हु ताकि लास्ट मोमेंट कई गड़बड़ न हो”

दोनों अलग अलग अपने काम के लिए निकल गए और सुभे से शाम तक इसी तरह लगातार काम मई लगे रहे …

वंही मुम्बई एयरपोर्ट …

शिवानी “कुछ भी हो दीदी तुम्हे अब अकेला तोह न जाने देती”

राज “इसलिए अभी जा रहा हु वो परेशां हो जाती ह मेरी वजह से आप उनका धयान रखना …’

शिवानी “तक हैंडसम bye मैं अब वापस जाती हु वर्ण उन्हें डाउट हो जायेगा की इतनी रात क्या जरुरी काम पद गया और दोनोट वोर्री साडी टीम अलर्ट पर ह”

राज ने उन्हें bye कहा और अभय और मित्युदूत के साथ चॉपर मई रवाना हो गया”

अभय पायलट से मुम्बई से गोवा का डायरेक्शन लो और 20 किलोमीटर बाद टर्न लेकर अपने डेस्टिनेशन मंडावा की तरफ ले चलो “

राज “ऐसा क्यों”

अभय “सेफ्टी के लिए अगर कोई निगरानी रखेगा तोह उनका धयान गोवा की हे तरफ जायेगा “

राज “गुड वैसे अब अज्जू काफी रिकवर हो गए ह”

अभय “वो तोह अपने रोक रखा ह वर्ण वो तोह कबका आजाता यंहा”

राज “पूरी तरह तीख हो जाने दो और जैसे हे पूरी तरह तीख होने का डॉ कन्फर्म कर दे तोह सबसे पहले दोनों की शादी करा देना वर्ण तुम बिना उन्दोनो की शादी के हे मां बन जाओगे…”

अभय “है भाई …मैं भी चाहता हु दोनों की शादी जल्द से जल्द हो जाये … फिलहाल अब नींद ले लीजिये अभी टाइम लगेगा लगेगा पहुंचने मई …”

राज मिर्त्युदूत से “वैसे हमे गुरूजी के पास भी जाना ह”

मित्युदूत “तीख ह मास्टर मैं गुरु जी से कल सुभे बात कर लूंगा”

राज “वैसे मेरे दिमाग मई एक बात बार बार खटकती ह मतलब मुझे डाउट क्या पूरा यकीन ह की किलर आर्गेनाइजेशन एक छोटी सी कड़ी थी जो मिट गयी par….abhi बहुत कुछ ऐसा ह जो हमे नहीं पता ह और गुरूजी ,xabhi,aag,dadaji मुझसे छिपा रहे ह”

अभय “मतलब “

राज “मतलब ये की हमने अभी तक जो जो लोग माँ पापा को मरने ए थे उन्हें हे पूरी तरह धुंध नहीं पाए ह …मतलब ये की विक्टर को आधी खबर thi…uttarkhand का पशुपति उसने ात्तक किया और माँ बुआ को दूसरे को हैंडओवर कर दिया ….विक्रम को पूरी तरह से न पता होना उसका काम जंहा तक मुझे लगता ह सिर्फ इनफार्मेशन देना tha….par बड़ी बात ये ह की पापा रणवीर अंकल नरपत अंकल विपिन अंकल ये सब बहुत ताकतवर थे तोह कोई इतनी आसानी से इन्हे कैसे मार सकता ह फिर उनके साथ बॉडी गॉर्डस भी होंगे”

मित्युदूत “मास्टर आपके पापा के कई काम थे और उनका हर काम अलग अलग लोगो के साथ था जंहा तक मुझे पता ह रविंदर सिंह को भी नहीं पता ह की आपके पापा क्या और किनके साथ काम रहे थे या वो पूछते हे नहीं थे सायद बाकि के बारे मई”

राज “यही बात तोह सोचने पर मजबूर करती ह की सबको थोड़ा थोड़ा पता ह पापा कैसे मरे किसने मारा …माँ को कौन लेकर गया और कौन ह इनके पीछे और कौनसा राज जानना ह उन्हें …एक सवाल का जवाब ढूंढ़ता हु तोह एक नया सवाल तैयार रहता ह…

अभय “राज भाई आपकी तभियात ख़राब ह अब पूरी तरह तीख नहीं हुवे ह अब रेस्ट कीजिये जब सवाल ह तोह जवाब भी होंगे ……और आपको भी जवाब वक़्त आने पर मिल जायेगा”

राज “है अभय तुम सही कह रहे हो हर साल का जवाब होता ह और मुझे भी उम्मीद ह ..की एक दिन सच सामने आएगा और तब तक हर गुनेगार को जिन्दा रहकर तड़पना होगा और अपने कर्मो की सजा भुगतनी होगी….

अभय “किलर आर्गेनाइजेशन के तहिखने से बहुत साडी ब्लैक मनी मिली ह “

राज “कितनी “

अभय “ 4 अरब के करीब ह और बाकी गोल्ड ह और गुमनामी प्रॉपर्टी भी मिली ह”

राज “सुनील ने सब देख लिया होगा “

अभय “है हमारे जितने साथी मरे गए ह उनकी फॅमिली को जरुरत से जायदा पैसा दे दिया ह और फुटरे मई जॉब या किसी भी सहायता का कह दिया ह”

राज “तुम बहुत ाचा कर रहे हो अभय मुझे बहुत ख़ुशी की तुम अब आगे बढ़ रहे हो”

अभय “आपकी लड़ाई आचायी के लिए ह और मेरा अज्जू और श्रुति के सिवाए आप सब हे परिवार हो तोह फॅमिली के लिए सब करूँगा और ये dekhiye”phir एक कैप्सूल निकलकर दिखाया

राज “ये क्या ह”

अभय “वही जो आप समाज रहे ह हम टेरनो ने ये कसम ले राखी ह की कोई हमे एक दूसरे की वजह से काम जबरदस्ती करवाने पर मजबूर नहीं करेगा और आपके खिलाफ गाडरी करने पर मजबूर नहीं करेगा और अगर करता ह तोह हम तीनो ये कैप्सूल खा कर सुइड कर लेंगे और हमे यकीन ह आप हमारा बदला जरूर ले लोगे ” ये कहने के बाद उसके चेहरे पर मुस्कान आगयी…

राज को अभय की बात सुनकर पहली बार अहसास हुवा की श्रुती अज्जू अभय उसके लिए बहुत जायदा लॉयल h…uska दिल जोश और भावुकता से भर आया “ऐसा दिन कभी नहीं आएगा मेरे भाई हम साथ जियेंगे और जी भर कर जियेंगे जाम से जाम भिड़ाकर साथ नाचेंगे ….और हम सब पूरी जिंदगी एक साथ रहेंगे ….”

मित्युदूत “बोतल तोह अभी भी ह एक पेग तोह पि हे सकते ह मास्टर”

राज मतलब साथ लेकर ए हो“ बिलकुल एक जाम भाई का भाई के नाम जियेंगे साथ और मरेंगे साथ”

दोनों एक साथ ….”वडा ह वडा ह”

तीनो की दुनिया अलग थी पर आज तीनो साथ थे और जीने मरने की कसम खा चुके थे….

वंही मंडावा…..4 ऑवर पहले..

सुप्रिया बचो “वो सुभे पहुंचेगा तुम तीनो भी पागलो की तरह लगी हो“

जानवी “ नहीं ममी ji…mere सुपर हीरो का रूम …अभी रेडी करेंगे और हम यही वेट करेंगे …हम आज तीनो इसी रूम मई सोयेंगे”

अजय “माँ ये तीनो नहीं मैंने वाली ह आप चलो मुझे भूक लगी ह …”

रिफत “है तू जाकर खले हम तीनो अब सुभे हे खाएंगी …”

शेरदिल “चलिए अब ये तीनो नहीं सुनेगी किसी की भी आखिर इनका भाई जो ारः ह चल अजय अपन दोनों कहते ह“

वंही भीमा “आपकी याद आरही थी उसे इसीलिए आरहा ह”

जगमाल सिंह “नहीं भीमा योगी बाबा जो कहकर गए उस बात का बहुत बड़ा मतलब h…jo मैं समाज नहीं प् रहा हु और खासकर शादी वाली बात की उसकी शादी भी हो जाएगी और उसे भी नहीं पता लगेगा न हमे ऐसा क्यों कहा “

भीमा “गहराई से सोचकर बाबूजी शादी तोह हर धरम मई अलग अलग रीती रिवाज से होती ह और अकेले अपने राजपूतो मई भी ईश्वर को साक्षी मान कर भी जीवन साथी बनाया जाता ह ..या मांग भरकर भी …या मंगलसूत्र बांध कर भी ….रिवाज तोह बहुत ह अपने धरम मई भी पर इनमे भी दोनों को पता होता ह …चाहे रजामंदी हो या नहीं…

जगमाल सिंह “पता नहीं भीमा क्या होना वाले ह …पर किस्से और है हम आपको बताना भूल गए ह की ….बाबा ने एक बात और कही थी की …राज की पहली संतान उसकी पत्नी से नहीं होगी और उसकी शादी से पहले हे हो चुकी होगी….”.

भीमा हैरानी से “ह्ह्हह्ह्ह्ह राज से पूछना चाहिए हमे वो क्या कर रहा ह मतलब ऐसे कैसे”

जगमाल सिंह “नहीं भीमा …राज ऐसा लड़का नहीं ह जो किसी भी लड़की के साथ इस हद तक जाये जरूर इसमे वजह होगी ये राज राज हे रहे तोह ाचा hoga…par योगी बाबा ने कहा ह की मैं पहचान लूंगा जब भी राज का बचा सामने होंगे …”

भीमा “मतलब पर दादा तोह आप जरूर बनेंगे और मैं दादा banunga”itna कह वो हसने लगे

जगमाल सिंह “नालायक मैं जरुरी बात कर रहा हु और तुजे दादा परदादा की पड़ी ह”

भीमा “तोह और क्या कहु आप हे तोह कहते रहते हो की राज की शादी कब होगी …और अब देखो बिना शादी के हे आपको परदादा बना देगा है है है है है”

जगमाल सिंह के चेहरे पर भी हंसी आगयी और वो भी मिसकारने लगे कुछ भी हो आखिर वो जीते जी पर दादा बननेवाले थे…

भीमा “अब सो जाईये बाबूजी …राज वंहा से रात को हे चलेगा कॉल आगया था…”

जगमाल सिंह के लेट ते हे भीमा उनके पेअर दबाने लगा ……और कुछ दिएर बाद उन्हें ुधा कर वापस चला गया …

राज का हेलीकाप्टर बिच मई फ्यूल भरवाने के लिए रूका और दुबारा से मंडावा के लिए उड़ान भर गया जो सुभे 5 बजे पंहुचा ….राज को आश्चर्य हुवा जब ममता रिफत ने आगे बढ़ उसकी आरती उतरी और जानवी तोह भागते हुवे सीधी गोदी मई हे कुढ़ गयी …

सुप्रिया “जानू निचे उतरो आपके भैया को चोट लगी ह न “

राज “छोटी माँ मैं तीख हु और एक हाथ अब पूरी तरह तीख हो गया ह “

शेरदिल “मेरे शेर जैसे भाई को क्या हो सकता ह …..छोटी मोती छोटे लगती हे रहती ह इतना कह उसने राज को गले लगा लिया “

राज “कैसा ह मेरे भाई “

शेरदिल “तैयार हो रहा हु जब हम कंधे से कन्धा मिलकर ladenge…ek दूसरे के साथ “

तब जगमाल सिंह बोले “वो वक़्त भी आएगा ….अब चलो अंदर ाजाओ …बाकी बाते नास्ते पर करते ह”

राज ने जानवी को निचे उतरा और दादाजी के पेअर चुकार काफी दिएर उनके गले लगा रहा ये पहली बार था जब उसने काफी दिएर तक अपने दादा को गले लगाए रखा था …पर आज बात कुछ और थी उसकी आंखे बंद थी पर आँखों के आंसू तोह बंद पलकों से भी बहार आहे जाते ह …..और यही हाल राज का था जो अभी भावुक हो रखा था …क्योकि उसकी साडी दुनिया उसके दादाजी के ीर्ध गिर्द हे थी …बचपन से लेकर आज तक उसके दादा हर पल उसके लिए खड़े रहे the…chahe जुंग हो pyar…aur अब कुछ वक़्त पहले हे पहली बार उसे मौत का सामना करते वक़्त अपने दादाजी का चेहरा सामने दिखा था”

जगमाल सिंह को अपने कंधे पर गीला महसूस हुवा तोह वो समाज गए और एक पल वो भी इमोशनल हो गए क्योकि उनके सबसे लादले बेटे का अंश था राज जो हर पल उन्हें सहदेव की याद दिला देता tha….unhone तुरंत कुढ़ को संभाला और बोले “आप तोह हमसे ऐसे गले मिल रहे ह जैसे हम मरने वाले ह”

राज तुरंत दादाजी को देखने लगा…

जगमाल सिंह “अरे हमारी हडियो मई अभी बहुत जान h….aur वैसे भी हमे योगी बाबा ने आश्रीवाद दिया ह की हम तुम्हरे आधा दर्जन बचो को अपनी गोद मई खिलाएंगे ….”

ममता “उसके लिए इनकी शादी करनी पड़ेगी पहले दादाजी ….वैसे भी घोड़े जैसे हो गए ह….”

रिफत “है भैया इसी बहाने हमे भी भाभी मिल जाएगी क्यों ममता”

ममता “राइट”

जानवी “ये भाभी आएगी आएगी”

दादा जी “चुप करो तुम dono…kitna बोलती हो “

जानवी “मैं माँ से शिकायत करुँगी आपकी और अब तोह ये भी बताउंगी कल मेले मई अपने चाट खायी थी …..मुझे डांटा न “

सरे जानवी की बात सून एक साथ हसने lage…aur अंदर आगये ….

राज शेरदिल की माँ के गले लगते हुवे … “आप कैसी हो mousi…..ye सब आपको तंग तोह नहीं करते ह न ..

शेरदिल माँ “अरे नहीं मेरे बचे …ये तोह मेरा घर ह और तुम सब मेरी जान …”

राज तोह मेरी मौसी और मेरी छोटी माँ मैं नाहा कर अत हु जब तक अब नास्ता बनाइये….

वंही मिरतिदूत और अभय …भीमा और शेरदिल के साथ बैठक की तरफ चले gaye….janha वो रेस्ट करने वाले थे….

4 ऑवर बाद ….हवेली के बेस मेन्ट मई….

“तुम मुझे मार क्यों नहीं देते हो आखिर क्या चाहते हो …” दर्द मई तड़पते हुवे झांझीरो से लटके हुवे हे एक दर्द भरी आवाज राज को सुनाई डीई….

राज “अरे अरे ये क्या जर विक्टर जो 15 साल की उम्र से हथियार समुगलिंग लड़किया सप्लाई करने लग गया था वो मौत की बिख मांग रहा ह नहीं नहीं …shakti…itni आसानी से नहीं …इन सबको देख रहा ह ये तेरे पास वाला सप ह और ये तेरा खास उत्तराखंड का पशुपति ह और इसे देख रहा ह ये मेरा भाई ह सुरेंद्र और जल्द हे एक और आने वाला h….in सबने भी वही किया ह जो तू करना चाहता था …..DHOKHA….APNO को मरना…

और जब कोई मेरे अपनों का मरता ह तब उनका यही हल होता ह यंहा इनको तीख किया जाता ह और फिर से तड़पाया जाता h….yahi तेरे साथ होगा और बार बार होगा….

शक्ति “नहीं मुझे मार्दो मुझसे ये सब बर्दास्त नहीं होता ह”

राज “ये सब उस माँ को बताना जो आने वाली हे होगी अभी जिसके निर्दोष बेटे को तुम दोनों ने मर दिया“

पीछे मित्युदूत आकर “मास्टर वो आगयी ह”

राज इसे लेकर औ ऊपर ….

राज तुरंत हवेली से बहार आया….

अनु माँ बिलकुल शांत थी क्योकि अनु ने उन्हें बहुत कुछ बताया था पर सचाई अभी भी बहुत बाकी थी जो उन्हें जननी thi…isliye वो राज की तरफ देख रही थी….

राज “इसे आप अपना हे घर समजिये ….ये अनु की सगी बुआ का घर ह जो इस दुनिया मई नहीं ह यानि मेरी माँ”

अनु की माँ को कुछ सचाई पता थी इसलिए वो हैरान तोह हुवी पर नार्मल thi…phir राज ने सबसे उनका इंट्रो करवाया ….

अनु माँ “राज मेरा बीटा कान्हा ह मेरे पति ने उसे भी मार दिया क्या”

राज उन्हें हवेली के अंदर ले आया और रिफत जानवी और ममता अजय को ऊपर जाने को बोल दिया पर वो सब छिपकर निचे की तरफ देखने lage….phir मित्युदूत शक्ति को घसीट कर ऊपर लेकर aya….uski ऐसी हालत देख कर अनु की माँ घबरा गयी और शकतीई…. चीखते हुवे उसकी तरफ भागी पर राज ने बिच मई हे रोक लिया…

अनु माँ “छोड़ दो मुझे राज ….तुम ऐसे निकलोगे मुझे ऐसी उम्मीद नहीं thi….tumhari दुश्मनी मेरे पति से पर मेरा बीटा निर्दोष ह ….छोड़ो मुझे”

पर राज ने उन्हें नहीं छोड़ा …तोह उन्होंने खींचकर एक थपड राज को mara….jiski गूंज हवेली मई गूंज गयी…

राज “सिर्फ 5 सुर रूक जाईये फिर आप जैसा कहेगी मैं वचन देता हु वैसा हे करूँगा”

अनु माँ “ चुप रहो तुम samjhe…aur पहले छोड़ो muje….mujhe तुम्हारी कोई बकवास नहीं सुन्नी ह”

राज “तीख ह अगर आप नहीं रुकी तोह मैं अनु को मार दूंगा …और मैं जो कहता हु वो करता hu…ye आपको पता ह “ इतना कह उसने हाथ छोड़ दिया अनु की माँ बूट बानी कड़ी रह गयी ….फिर राज बोलै बैठ जाईये 5 मिनट की बात ह sirf….phir पलटकर बोल तू अब बकेगा या…

शक्ति “ममममें शकतीई नाहीइ हु ….मैंने तोह उसे 8 साल पहले हे मार दिया था”

अनु की माँ को कुछ समाज नहीं आया जो अभी शक्ति ने kaha….tab राज बोलै

राज “जिस दिन अनु ने गुसाई मई शक्ति को चाकू मारा था और वो घर से अलग हो गया था याद ह आपको “

अनु माँ “है पर उस बात का इस बात से क्या तालुक ह”

राज “ है ….आपके पति ने अनु का पसंदिता खिलौना जान भुजकर तोड़ दिया था ….ताकि अनु को लगे शक्ति ने जान भुजकर उसे तोडा ह और वो शक्ति पर गुस्सा हो जाये और हुवा भी वही दोनों की लड़ाई हुवी और अनु बहुत जायदा गुसाई मई आगयी थी इसलिए उसने चाकू फेंक कर मार diya……phir आपके पति शक्ति को अपने साथ ले गए …और उसी दिन रात को हे उसे दोनों ने पानी मई डूबा कर जान से मार दिया tha…aur ये जो आपके सामने ह ये आपके पति की हे नाजायज औलाद ह ..अंडरवर्ल्ड मई अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उसने दूसरी शादी भी की इसलिए तोह लेट ana…jarurat से जायदा प्यार दिखने का नाटक किया ….ताकि आपको सक न हो ….ये लीजिये डीएनए टेस्ट आपके पति से तोह मैच करता ह पर आपसे नहीं ……कोई भी बीटा अपनी माँ को कभी नहीं भुला सकता ह और खासकर अगर आप जैसी प्यार करने वाली माँ हो इसने बहुत पहले हे प्लास्टिक सर्जरी करवा ली थी तभी ये आपसे मिलने नहीं अत और कभी कभी फ़ोन पर बायत करता tha…kyoki आप इसकी माँ थी हे नहीं“

अनु की माँ ने साडी रिपोर्ट देखि तोह उनके आंसू जहर जहर का आंखे से फुट पड़े….

छोटी चची सुप्रिया ने पास आकर उन्हें गले लगा लिया तोह रिफत की माँ ने उन्हें पानी पिया…

राज “मैं आपके घर रहा तब मुझे सब पता लग गया था आप कहे तोह उनकी शादी से लेकर साडी फोटो भी दिखा दोऊ….” फिर राज उनके पास आगया और बोलै “अनु मेरी बहन ह मैं उसे कभी कुछ नहीं होने दूंगा …उस दिन भी ये कुत्ता उसके sath….”itna कह राज चुप हो gaya…tab दादा जी आकर बोले …

जगमाल सिंह “तुम राज की ममी हो और अनु बहन ह राज की अब आप दिल्ली मुम्बई या हमारे पास यंहा रह सकती हो या जो तुम्हारा दिल कहे …”

पर अनु की माँ की नज़र शक्ति पर हे थी वो सब जानकार भी सच मैंने के लिए तैयार नहीं थी….

राज “बहुत मुश्किल होता ह सच को मैंने मई …मैं और यंहा मौजूद हर एक शख्स जो जिस सिचुएशन मई ह उसे गुजर चूका h…..ab आपको अपनी बेटी के लिए जीना ह …आपकी साडी प्रॉपर्टी अनु के नाम हो चुकी ह और उसकी सेफ्टी हमारे सबसे भरोसे मंद गॉर्ड कर रहे ह और बिज़नेस हम देख रहे ह इसलिए अब बेफिक्र रहे aur….ap पढ़ी लिखी ho….jald हे आप भी सब सिख jayengi….aur आपकी मदद के लिए हम सब ह हे”

अनु माँ “मुझे अनु के पास जाना ह राज मुझे उसके पास भेज दो”

जगमाल सिंह ने भीमा की और देखा तब….

अभय “मैं ले जाऊंगा दादाजी खुद “

जगमाल सिंह “छोटी बहु अजय को बोलो फ्लाइट्स की 2 टिकट बुक करे और भीमा …अपने आदमियों को एयरपोर्ट तक पूरी सिक्योरिटी मई इन्हे भेजे ….देखे कोई तकलीफ न हो “

भीमा “जी बाबूजी”

5 मिनट बाद हे अभय और अनु की माँ जयपुर के लिए रवाना हो गए जंहा से मुम्बई के लिए उनकी फ्लाइट thi….jate हुवे अनु की माँ ने राज से अनु का हमेशा बड़ा भाई बांके ख्याल रखने का वडा लिया …..जिसे पूरा करने का राज ने वडा भी कर दिया…..

राज दादाजी के पैरो के पास घुटनो पर सर कर बैठा हुवा था और भीमा भी वंहा मौजूद थे….

जगमाल सिंह “क्या बात ह बरखुरददार”

राज “एक कड़ी मिल गयी ह बाबूजी …..”

जगमाल सिंह “है मुझे बहुत ख़ुशी ह”

राज “आखिर ये विक्रम कौन था और ये गुरूजी सभी और आग सर पापा सबको कैसे जनता ह”

जगमाल सिंह “विक्रम सिंह ….है एक बार मिला था मैं उससे ….और तब सहदेव ने बताया था की इसे सब मां कहते मैंने पूछा था की मां kyo….tab सहदेव ने कहा था की वो बेंगलोरे एक डील करने गए थे ….जंहा वंहा के बिज़नेस करने वालो ने बहुत परेशानी कड़ी कर राखी थी …और वंही ये सब देख कर रविंदर का गुसा फुट गया था और धमकाने ए लोगो को उसने गाजर मूली की तरह काटना सुरु कर दिया tha….agar सहदेव नरपत विपिन ने पकड़ा नहीं होता तोह सबको हे मार dalta…usi रात रविंदर तुम्हारे पिता को सोता छोड़ कर नरपत के साथ उस बिज़नेस में की फैक्ट्री पर चला गया और पूरी रात चुन चुन कर सबको मार दिया तब उन्हें ये विक्रम सिंह एक कौन मई किसी फैक्ट्री मई बंधा हुवा पड़ा मिला ….

और उन दोनों ने उसे छोड़ दिया पर विक्रम ने उनके पेअर पकड़ लिए सुर अपने साथ लेजाने को कहा लाख समझने पर भी वो दूर नहीं गया तोह मज़बूरी मई उसे भी साथ ले ए दोनों जाने जंहा सहदेव ने रविंदर को बहुत डांटा …..और तुम्हारे रविंदर अंकल मुस्कुराते हुवे दन्त सुनते रहे …..दुनिया मई तुम्हारी माँ के बाद वो हे ऐसा शख्स था जो उसकी दांत सुनकर हँसता रहता था क्योकि उन्ही पता था की उसका गुसा सिर्फ दिखावे का ह…. और उसी दिन से ये विक्रम उर्फ़ मां साथ हो गया था”

राज के चेहरे पर मुस्कान आगयी क्योकि पूनम भी ऐसा हे करती ह …फिर वो बोलै “पापा ने उसे ऐसे हे साथ रख लिया ये तोह मुमकिन नहीं लगता ह”

जगमाल “नहीं राज …वो बहुत तेज़ था जैसे हे उसे पता लगा तुम्हारे पापा क्या चाहते ह उसने तुरंत उनका काम करवाने की हामी bhari….aur सबने एक मौका देने का वडा किया …और उस वक़्त मई पुरे 4 कर रस लगवा कर तुम्हारे पापा का काम उसने 2 दिन मई करवा दिया जिसके बाद सब उसे मां हे कहने लगे और वो भी साथ काम करने लगा”

राज “और क्या जानते ह आप उसके बारे मई “

जगमाल सिंह “बस इतना हे पता ह बीटा तुम्हारे पिता ने मुझे उदयपुर मई हे पकड़ मजबूत करने को कहता इसलिए मैं बहुत काम हे जाता था तुम्हारे पापा के पास ….पता ह आज भी उदयपु मई हमारी बहुत बड़ी हवेली ह जिसे ….कप्तान हे संभालता ह उसने उसे ख़रीदा और होटल diya….jab तुम साडी सचाई जान लोगो और दुश्मनो को मार डोज तब हम वंहा चलेंगे…..

राज “दादाजी ….आप मुझसे अभी भी बहुत कुछ छुपा रहे ह न “

जगमाल सिंह “हर चीज का वक़्त होता ह समझे बरखुरददार”

राज ने है मई गर्दन हिला

शामे डे ….मुम्बई क्या क्या हुवा….

पूनम “ये सुभे सुभे सेमिनार हॉल मई क्यों बुला लिया गया “

कविता “फाइनल एग्जाम सर पर ह पर इन्हे पढ़ने नहीं देना ह”

मनीषा “कतई सब पढ़ लिया ह तूने इसलिए ड्रामा मत कर चल देखते ह न किसलिए बुलाया ह..”

अनु “बेब्स मुझे यकीन ह ये हमरे टूर से जुड़ा हे होगा …जैसे जायदा लड़किया साथ नहीं rahengi….boys रात को गर्ल्स के रूम मई नहीं जायेंगे बला बला”

कविता “ये भी कोई बात ह फिर भाई हमरे पास कैसे आएंगे”

अनु “ले मैंने सोचा अपने बॉय फ्रेंड को बुलाएगी तोह हम भी उसके साथ मज़े मार लेंगे पर ये तोह भाई को बुला रही ह”

कविता ने अनु की पीठ पर मारा और बोली छी अनु दी “वैसे टूर पर रात को वोडका का जुगाड़ कर दो तोह मज़ा आजायेगा”

मनीषा “डील ये मैं कर दूंगी”

पूनम “तुम तीनो पिताजी राज को पता लगा तोह”

मनीषा “मैं नहीं तुम तीनो को दन्त पड़ेगी पता ह न मैं कौन हु हे हे हे “

वो चारो हँसते हुवे सेमिनार हॉल मई आगयी …इन्हे फुर्सत नहीं थी की आसपास भी देख ले पर आसपास से सब उन्हें हे देख रहे the….aur जल्द हे वो सेमिनार हॉल के अंदर agayi….tabhi उन्हें आवाज सुनाई थी….

“सिलें प्लीज……”

और सब शांत हो गए …

तब दीं आगे आकर बोलै …. “ये सेमिनार आप सबके सेमेस्टर के बाद होने वाली स्पेशल क्लासेज को लेकर और टूर को लेकर ह टूर के बारे मई बात करने से पहले आप सबको मैं किसी से मिलाना चूँगा आपके नई लेक्चरर से….

नई लेक्चरर के नाम से हे सब मई खुसर फुसर सुरु हो गयीईइ….

दीं “silent….silent …..आप आगे कॉर्पोरेट वर्ल्ड मई जायेंगे इसलिए आपकी पर्सनालिटी बहुत इम्पोर्टेंस रखती ह ….और उसी को इम्प्रूव करेंगे हमारे नई लेक्चरर मर अपूर्व सिंह…..”

और सामने आया एक हॅंडसमे चेहरा जिसने वाइट shirt…black पेण्ट और जैकेट पहन रखा था….

अनु “बेब्स ये तोह रियली बहुत हैंडसम ह यार “

पूनम “हम पर्सनालिटी तोह शानदार ह”

मनीषा “यार इसे कंही देखा ह”

कविता “आप सबको देख के ऐसे हे कहती हो मुझे देख कर भी ऐसा हे कहा था”

मनीषा “ह्ह्हह्ह्ह्ह” और वो कविता को देखने लगी जो स्टेज की हे तरफ देख रही थी…

दीं प्लीज मर अपूर्व सिंह ….

इतना कहते हे अपूर्व स्टेज पर माइक के पास आगया …और सबको देखना लगा ….पर वो जिसे देखना छह रहा था वो नहीं दिख रहा था ….तब उसकी नज़र पूनम पर gayiii….aur वो मुस्कुराता हुवा बोलै …. “पर्सनालिटी …क्या h….kaise बनानी होती h…iski कोई डेफिनेशन नहीं ह और अगर ह तोह उसमे सबसे पहला वर्ड आएगा confidence……agar आप अपने वे ऑफ़ talking..way ऑफ़ वाकिंग वे ऑफ़ ड्रेसिंग मई खुद कॉंफिडेंट नहीं ह तोह आपकी पर्सनालिटी कभी इम्प्रूव नहीं होती ह जस्ट फॉर एक्साम्प्ले …..हम्म्म यस आप…..

कविता …. “ वो आपकी तरफ इशारा कर रहा ह”

पूनम सीट से कड़ी हो गयी…

अपूर्व “ये सिंपल सूट मई ह और उसी के अकॉर्डिंग इन्होने बिलकुल नार्मल मेक उप kiya..h जो इन्हे इतनी भीड़ मई भी सबसे अलग बना रहा ह …और सबसे इम्पोर्टेन्ट फैक्टर कॉन्फिडेंस जो इनके फेस पर दीखता h…..what इस योर गुड नाम मिस ..

पूनम “पूनम कँवर”

अपूर्व “नीस नाम poonam…jo डार्क नाईट मई अपनी लाइट से सबको पथ …दिखती ह म ी राइट मिस पूनम”

पूनम “यस सर”

अपूर्व “नीस तो मीट यू …प्लीज सीट down….so आल ऑफ़ यू मस्ट बिल्ड कॉन्फिडेंस ों योर ओन सेल्फ …थैंक यू all….kal से फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स की क्लास स्टार्ट hogi….so मस्ट के “

अपूर्व के जाते हे दीं आगया और बोलै …ी होप आपको अपने नई लेक्चरर पसंद ए होंगे ….

निचे ….सीट्स पर ..

मनीषा “क्या बात ह मेरी जान कॉलेज के लड़को पर तोह तेरा जादू था हे अब तो लेक्चरर भी तेरा दीवाना हो गया ह…..

अनु छेड़ते हुवे “है यार खास कोई हमे भी इतने प्यार से बोलता नीस नाम”

पूनम शरमाते हुवे “शट उप वर्ण बहुत मरूंगी….”

वंही स्टेज मई साइड मई बैठा अपूर्व भी सब देख रहा था …और छोटी हे सही पर उसके होठो पर कुटिल मुस्कान थी उसके …..और मन मई बोलै “तोह ये दिखी ह उसके आसपास पर मुझे तोह एक टीचर की रिपोर्ट मिली थी जो उसका खास फवौर करती ह वो नहीं दिख रही ह कोई बात नहीं ….मज़ा आएगा अगर मेरा सक सही निकला तोह ….बदला लेने मई एक रोमांच होगा एक्ससिटेमेंट होगा….”

इधर स्टेज पर दीं गिडलीने देता रहा …इधर अपूर्व अपने अगले कदम की तईयारी करने लगा …



आज के लिए इतना हे जल्द मिलते ह अगले अपडेट मई …तोह मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का
 
अपडेट

बलौर -डार्क साइड

एडिटिंग
 
अपडेट 207

बलौर —-डार्क साइड….

प्लेस उत्तरप्रदेश….

एक बड़ी सी हवेली जिसके चप्पे चप्पे पर हथियार से लेस्स आदमी खड़े थे …उस हवेली की भव्यता दूर से हे देखने पर दिखती thi….charo तरफ हरियाली …सामने बड़ा सा लॉन जिसमे हाथ जोड़कर लोग खड़े हुवे the…….aur उस हवेली के अंदर हॉल के बिच मई बड़ा सा सिंहासन रखा हुवा था ..जिस पर बैठा हुवा था एक शख्स जिसकी बड़ी बड़ी मूंछे और सवा 6 फ़ीट का सुडोल सरीर उसकी मर्दानगी दिखा रहा था और उसके सामने स्टेट के बड़े बड़े मंत्री और बुसिनेस्स्में बैठे हुवे the…aur बिच मई एक आदमी को घुटने के बल पकड़ कर बैठा रखा tha….jisko देख कर हे साफ़ पता लग रहा था की उसे बहुत पिता गया ह …

सिंहासन पर बैठे हुवे शख्स ने अपनी दुमदार आवाज मई कहा “ये मेरा साम्राज्य ह और इस साम्राज्य से बहार मेरी इज़्ज़ज़त के बैगर न कोई जा सकता ह और ना आसक्त ह और तू तोह सबूत लेकर जा रहा था मेरे खिलाफ”

निचे खड़ा शख्स “ठाकुर हर इंसान का वक़्त होता ह और जल्द हे तेरा बुरा वक़्त भी ayega..tune इतने बुरे करम किये ह की कोई सपने मई भी नहीं सोच सकता h…..koyi….koyi…toh होगा इस धरती पर जो तेरे पापा की सजा तुझे dega…tu देखना तेरी अबखो मई आंखे दाल कर तुजे मरेगा जंहा पापी ह वंहा पाप के खिलाफ लड़ने वाला यौद्धा भी होता ह बस तू इंतज़ार कर तेरा वक़्त भी आएगा….”

ठाकुर “है है है है “ उसकी हंसी सून बाकि भी जोर जोर से हसने लगे….

ठाकुर “ बहुत अचे मौत के सामने खड़े होकर भी धमकी दे रहा ह है है है ये देख रहा ह पुलिस और मिनिस्टर आदमी , हथियार सब ह मेरे पास ….पुरे उत्तरप्रदेश मई कोई नहीं ह जो मुझे छू भी सके ……” फिर अपने पास खड़े अपने बेटे की तरफ इशारा करके “और जो बचे हुवे ह उन्हें मैंने जमीन के 3फ़ीट निचे दफना दिया ह अब सेंट्रल के इलेक्शन जीतूंगा उसके लिए ….तुम्हारे उस रखवाले ठाकुर की बेटी सिम्मी से मेरे बेटे की शादी होगी और …..फिर सब मेरा होगा इस दंगल के बाद …. मेरा साम्राज्य पुरे भारत मई फ़ैल जायेगा समजा…”

आदमी गुसाई से थूकता हुवा “नीच ह चू नीच …”

ठाकुर “तेरी जुबान बहुत चलती h….iski मौत आसान नहीं होनी चाहिए इसे कुत्तो के बाड़े मई फेंक दो अरे है मई तोह भूल हे गया तेरी तोह 2 जवान बेतिया भी ह न वो आज रात हमरे मेहमानो का खास मनोरंजन करेगी”

निचे घुटनो के बल बैठा शख्स खड़ा होता हुवा और अपने बहते आंसुओ को पॉंच कर छीकते हुवे बोलै…. “याद रखना papi….teri भी ऐसी हे हालत hogi….tu भी ऐसे हे तड़पेगा …मेरी बद्दुआ ह तुजे” पीछे से 2 आदमी ए और उसे घसीट ते हुवे ले गए ….और हवेली के पीछे बने बड़े मई फेंक दिया जंहा खूंखार पिटबुल …खुले घूम रहे the…aur वो सब अपने भूखे सीकर पर टूट pade….us आदमी की आँखों मई आंसू हे थे ….ढक के पछतावे ke…..kutto उसे जिन्दा हे फाड़ते नोचते रहे…

हवेली मई …

बिजनेसमैन “ठाकुर सब …आप चाहे तोह जबरदस्ती भी शादी करवा सकते ह फिर दंगल और सब की क्या जरुरत ह इस राज्य मई कोई नहीं ह जो आपके खिलाफ जाये ….”

मंत्री भी bola“ha ठाकुर सब बाकि हम देख लेंगे वैसे भी छोटे ठाकुर ह हे”

ठाकुर “आप सब उसे काम समाज रहे हो उसकी इज़्ज़त आज भी पुरे उप मई ह अगर जोर जबरदस्ती हुवी तोह लोग भड़क सकते ह और हमारा काम ख़राब हो सकता h….maar तोह उसे कभी भी सकता हु पर मुझे उसके समर्थन से सेंट्रल मिनिस्टर की पोस्ट चाहिए ह…”

ठाकुर का बीटा बलराम बोलै “पर पिताजी “

ठाकुर “balram….us बूढ़े की वजह से मेरी बहुत बेज़्ज़ती हुवी thi…dukh मई आकर मेरे पिता ने आत्महत्या कर्ली थी वो सब सहन कर सकते थे पर अपनी बेज़्ज़ती नहीं और उनकी तोह सबके सामने बेज़्ज़ती हुवी thi…aur मैं कुछ नहीं कर पाया क्योकि हम कमजोर थे इसलिए मैं खून का घुट पीकर रह गया tha…sirf उस विद्या और सहदेव की वजह से हुवा था सब …तब मैंने कसम ली थी बेज़्ज़ती का बदला बेज़्ज़ती se….muje बदला चाहिए ह मैं चाहता हु उसका पूरा परिवार घुट घुट कर मरे उसके घर की हर औरत विद्वा रहे और कुंवारी हमारे घर की नौकरानी बने समझे मैं उन्हें इतना मजबूर कर दूंगा की उनके घर की हर लड़की हमारे यंहा की नौकरानी बनकर रहेंगी और सबके सामने nachengi..beizzat होंगी उनका पूरा परिवार तड़प तड़प कर मरेगा….”

बलराम “मैं समाज गया पिताजी “

ठाकुर “तुम सिर्फ अखाड़े पर धयान दो और उसे जीतो उनका पहलवान जिन्दा नहीं बचना चाहिए बाकी सब मैं देख लूंगा …अब जाओ “

बलराम के जाते हे ठाकुर के चेहरे पर गहरी मुस्कान आगयी …जैसे उसके बदले का मौका पल पल पास ारः हो …

वंही …उप मई हे…

गजेंद्र “पिताजी ये ह सरे पहलवानो की लिस्ट आप इनमे से एक पहलवान उनके खिलाफ दंगल मई लड़ने के लिए चुन सकते ह ये सभी एक से बढ़कर एक ह”

विद्या के पिता ठाकुर सुमेर सिंह “तीख ह gajendra(raj के मां) तुम्हे ये तीख लगते ह तोह इन सभी को बुलाओ और आपस मई लड़वाओ और बेहतरीन 5 को चुन लो उनके खाने पिने की व्यवस्ता कार्डो इन्ही मई से फिर एक को चुन लेंगे दंगल के लिए वैसे तोह उस रक्षास बलराम को हराना नामुकिन ह फिर गहरी सांस chodkar…gajendra… उसे कोई हरा सकता तोह सिर्फ एक हे हरा सकता था…

गजेंद्र “आप सहदेव जीजाजी की बात कर रहे ह”

सुमेर “है अगर आज वो दोनों जिन्दा होते तोह मुझे यकीं ह की वो उस ठाकुर की गर्दन डेढ़ से अलग कर चूका होता …पर अब समय बीत गया h…usne उनदिनों हे इतने दुश्मन बना लिए थे की मेरी बेटी विद्या भी उसकी दुश्मनी की बलि चढ़ गयी…”

गजेंद्र दुखी होकर “विद्या की कभी कभी बहुत याद अति ह पिताजी हम भाइयो की लाड़ली बहन थी ….ये कहते वक़्त गजेंद्र का चेहरा लटक सा गया फिर वो आगे bola….unke परिवार से कोई तोह बचा होगा पिताजी“

सुमेर सिंह“ कोई जिन्दा नहीं बचा ह उनकी हवेली थी उदयपुर मई जब मैंने सहदेव के मरने की खबर सुनी तोह मैंने भेजे थे वंहा हमारे आदमी पर कुछ नहीं मिला …मैंने सालो तक विद्या की खोज करि चुपके से पर कोई खोज खबर नहीं मिली अभी कुछ साल पहले भी दुबारा से आदमी भेजे उदयपुर उन्हें कुछ नहीं पता चला और अब उस हवेली को होटल बना चूका ह कोई मुझे जंहा तक पता ह सब के सब मरे गए थे उस हवेली मई लगी आग मई झूटी आस मई जीने के सिवाए हम कुछ नहीं कर सकते ह …बस आज भी एक ढक हमेशा रह रह कर दिल मई उठता h…ki उसको बीटा हुवा तब उसने बुलाया था ये कह कर की सिर्फ एक बार उसके बेटे को आशीर्वाद दे du…aur देखो आज वो और उसकी माँ हे इस दुनिया मई नहीं ह मेरस दिल बहुत दुखता ह गजेंद्र उस मासूम की कोई गलती नहीं थी”

गजेंद्र अभी कुछ बोलता तभी परिवार के और सदया भी आगये……

सुमेर सिंह “अरे आज सभी यंहा अखाड़े मई “

Dimpii“nanaji हमे तोह यही हे होना चाहिए न अपने वडा किया था आप हमे आज सहर मेले लेकर जायेंगे ….भूल गए न पोता होता तोह जल्दी से ले जाते ”

सुमेर सिंह “अरे गलती हो गयी हम अभी के अभी चलते h….chalo भाई कार निकालो वर्ण हुक्का पानी बंद हो जायेगा”

राज के मां मम्मी बहन भाई सब सहर के लिए निकल गए ….

वंही मंडावा….

राज “गुड मॉर्निंग”

ममता “गुड मॉर्निंग माय स्वीट लवली बरोथेर …ये रहा आपका जूस ….और टेबलेट ….”

राज “थैंक यू बूत मैंने सुना ह मेरी लवली सीस पास्ता बहुत टेस्टी बनती ह ….और रिफत कान्हा ह वो तोह खाने मई कुक को भी फ़ैल कर देती h…afternoon कुछ स्पेशल बनाकर खिलाडो…”

ममता “मिल जायेगा भाई डोंट वोर्री बूत पहले अपना जूस ी मैं सूप फिनिश कीजिये “

रिफत आती हुवी “है भाईजान आपको सब मिलेगा आखिर हमे भी तोह अपने भाई को खिलने का मौका मुश्किल से हे मिलता ह “

राज “और अजय तू क्या इंवेंट कर रहा ह नया “

अजय “ ड्रोन मई गन फिट करने की कोसिस कर रहा हु पर फायर करने से जो फाॅर्स पैदा होता ह उसको एडजस्ट नहीं कर प् रहा हु “

राज “ड्रोन मई गन तू क्या करने वाला ह”

अजय “आपको फुल सपोर्ट भाई ताकि आप टेक्नोलॉजी मई 2 कदम आगे हो जाये ….और यंहा की सेफ्टी के लिए टेंशन न ले अपने जो पैसे दिए थे वो पुरे इसी काम मई लगाए ह”

राज “गुड गुड कीप आईटी उप और चाहिए पैसे तोह बोल”

अजय “नहीं भैया जो चाइये अब दादाजी हे दे देते ह”

राज “ये तोह और अछि बात ह ब्रेकफास्ट करले फिर मंदिर चलेंगे माँ भवानी के “

अजय “जी भाई”

राज “दादाजी हमे हिमचाल भी चलना ह विक्रम कुछ कहना चाहता ह मुझसे …”

जगमाल सिंह “तीख ह हम कल सुभे हे चलेंगे …कुछ बताया उसने “

राज “है इसलिए आपको भी साथ चलने के लिए कह रहा हु क्योकि मुझे कुछ डाउट ह जो वंहा आपके सामने हे क्लियर होंगे “

जगमाल सिंह “है मुझे भी जानना ह की आखिर क्या हुवा ह पास्ट मई जिसकी वजह से सब उजाड़ गया …एक एक धोखेबाज़ को अपने हाथो से माँ भवानी को बलि चढ़ाऊंगा ताकि मेरे बहु और बेटे की आत्मा को शांति मिल सके ….”

राज “ऐसा हे होगा दादाजी आप अपने हाथो से हे उन्हें सजा देंगे कुछ हाथ चुके और बहुत सरे मिलने बाकी ह सबका नंबर आएगा ….चाहे आसमान मई छिपे हो या पटल मई सबको धुंध निकलूंगा ….और घसीट ते हुवे आपके कदमो मई लाकर डालूंगा ….यही मेरे जीवन का लख्षय h.aur जब तक ये पूरा नहीं होगा मैं रुकूंगा नहीं”

जगमाल सिंह “ाचा राज कुछ वक़्त पहले मुझे पता लगा था की तुम्हारे नाना की स्तिति सही नहीं ह उप मई”

राज गुसाई से “दादा जी मुझे कोई फरक नहीं पड़ता की वो कैसे ह चाहे जिए या मरे …..”

जगमाल सिंह “नहीं राज ऐसे नहीं कहते ह”

राज “क्यों न बोलू दादाजी …माँ पापा को कितनी हे बार बेज़्ज़ती करके अपने घर के बहार से हे निकल दिया था उन्होंने ….आप हे कहते ह न की माँ बहुत बहुत अछि थी और वो तोह उनकी अपनी सगी बेटी थी na..unhone इतनी बार माफ़ी मांगने और मानाने पर भी माफ़ क्यों नहीं किया कितनी बार माफ़ी मांगी उन्होंने …क्या मेरी माँ को दुख नहीं पंहुचा होगा बताओ ap…wo कितना दुखी होई होंगी…. नहीं दादाजी बिलकुल भी नहीं मैं उन लोगो को कभी माफ़ नहीं करूँगा …जनता हु माँ चाहती थी की उनके पापा उन्हें माफ़ karde….par मैं कभी माफ़ नहीं karunga….maa पापा की ख़ुशी के लिए एक बार दिल से उन्हें मानूंगा फिर कभी नहीं जाऊंगा”

जगमाल सिंह “बीटा वक़्त सबको अहसास करा देता ह की क्या खो दिया ह क्रोध मई अपनी जिद मई और किस्मत की बात देखो कुछ चीजे खोने के बाद वापस नहीं अति ह और हम सिर्फ उसका अफसोस करते हे रह जाते ह और आज यही उनके साथ हो रहा ह“

राज ने कोई जवाब नहीं दिया और शांति से सूप पिने लगा ….

भीमा “ओह तीख ह मेरे शेर बस कर गुसा थूक de….chal अजा तेरी मालिश करवाता हु सरीर मई जान ajayegi…thaka थका सा लग रहा ह”

राज “चाचा कुछ घाव अभी भी ह”

भीमा “तोह कोई न चल तेरे सर की चम्प्पी करता हु अपने हाथो से ये गरम दिमाग ठंडा हो जायेगा“

राज के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और वो सोऊ पिने और नास्ता करने के बाद पहले मंदिर गया जंहा माँ भवानी से परिवार के लिए दवा mangi…sherdil भी उसके साथ हे था ….

शेरदिल “परेशां क्यों ह”

राज “अरे कुछ नहीं …बस ऐसे हे तू बता कोई लड़की पसंद आयी “

शेरदिल “ भाई देख अपनी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं इसलिए क्यों किसी की जिंदगी बर्बाद करना मैं सिंगल हे ाचा hu….waise तेरे बारे मई बहुत सुनता हु कविता और श्वेता से ….चक्कर क्या ह “

राज “तू भी उनकी बातो मई आगेस उन्हें और कोई कामनाही ह “

शेरदिल “करले शादी नानाजी के चेहरे पर तेरे लिए फ़िक्र देखि ह तेरी शादी की”

राज “यार उनकी ख़ुशी के लिए सब करलु पर सच बोलू तोह …वो मेरी कमजोरी बनेगी यार और मेरी जिंदगी कब ख़तम हो जाये मुझे भी नहीं पता h…dhushman कब कान्हा से आएगा कुछ पता नहीं h…teri तरह मैं भी सिंगल हे तीख हु मेरे भाई….”

शेरदिल “वैसे एक बात बोलू अगर सबका जोर चले न तोह तेरी काम से काम 3 या 4 शादी करा दे माँ अलग दादाजी अलग और साडी बहने अलग …”

राज और शेरदिल दोनों एक साथ जोर से हंस pade…raj के लिए ये पल बहुत बेहतरीन गुजर रहे थे पिछले काफी दिनों से वो चैन से परिवार के साथ गुजर रहा था….

शामको …

जगमाल सिंह… “ये आपके लिए मंगवाई ह क्या नाम ह haa….jack डेनिएल ….सोचा आज आपके साथ पिएंगे…”

राज “पर मैं “

जगमाल सिंह “हमे पता ह आप नहीं पिटे ह पर उस दिन खेत वाले माकन मई तोह पि thi…aj हम आपके साथ पिएंगे और वैसे भी 1,2,पेग से कुछ नहीं होता ह…..” फिर 2 पेग बनाये और एक खुद और एक राज को दे दिया …

जगमाल सिंह “ये जाम तुम्हारी कामयाभी के नाम “और एक हे सांस मई दोनों जानो ने पेग खली कर दिया …

जगमाल सिंह ने दूसरा बनाया ….और उसे भी एक झटके मई खली कर दिया जबकि राज दूसरा पेग हाथ मई लिए बैठा रहा जगमाल सिंह ने तीसरा बनाया तोह राज ने रोक दिया…

जगमाल सिंह “ये तोह ख़ुशी के लिए ह ाचा सुनो आपके पिता पता ह क्यों ड्रिंक नहीं करते थे …. “

राज “क्यों”

जगमाल सिंह “क्योकि वो नालायक विद्या बेटी से डरता था है है है …उसके दर से वो ड्रिंक भी नहीं करता था क्योकि मेरी बहु उसकी क्लास लगा देती थी ये कहते हुवे जगमाल सिंह ने तीसरा पेग भी खली कर चौथा पेग बना लिया और आगे bole….are उसकी क्या मेरी भी क्लास लगा देती थी मैं और तुम्हारे पिता चुप चुप कर पिटे the…..jagmaal सिंह फिर भावुक होकर bole….kabhi लगा हे नहीं नहीं की वो घर की बहु h…..hamesha ऐसा लगा जैसे बेटी हे ह घर की सब पर अपना हक़ jatati….danti ….ladti…par कभी नाराज नहीं hoti….jab से वो गयी सब सुना हो गया …raj…rakhsas भी उस बची को मरने से पहले सोच मई पद जाये …पता नहीं कौन होगा वो …जिसने ये किया होगा” फिर लड़खड़ते हुवे खड़े हुवे राज ने उन्हें सँभालने की कोसिस की तोह …

जगमाल सिंह “कुछ नहीं हुवा …कान्हा ह मेरी दोनाली लेकर aa…us हराम के पिल्लै के गोलिया सर के आरपार करदूंगा“

राज ने पहली बार अपने दादाजी को ऐसे देखा था जो अपने आप से बहार हुवे थे….

राज “आपको सोना चाहिए ह दादाजी “

जगमाल सिंह राज का गालापथपते हुवे “छोड़ना मत सालो को …यंहा मेरे पैरो मई लाकर पटकना ….जब तक मैं मरूंगा नाहीइ ….मौत भी आएगी तोह भी अंत तक लडूंगा पर उन सबको मरूंगा मैं हे”

राज दादाजी को बीएड के पास लाया और उन्हें सुलाया कुछ दिएर मई हे वो सो गए तब राज बोलै “ऐसा हे होगा दादाजी बिलकुल ऐसा होगा उन कुत्तो को उनके कर्मो की सजा भुगतनी होगी….. “

तोह वंही आज दिन भर कॉलेज मई….

“वैरी वैरी गुड मॉर्निंग ….”

सामने से गुड मॉर्निंग सर…

“Nope….morning ह शो सम एनर्जी स्पीक अगेन…

“Veryyyy…veryyyy गुड़ मॉर्निंग सर ..”

अपूर्व सिंह “No सर जस्ट कॉल में अपूर्व”


सभी “ok सर”

अपूर्व “अगेन”

सभी “सॉरी अपूर्व”

अनु धीरे से “हूउउ इम्प्रेस करने की कोसिस कर रहा ह”

कविता “चुप कर कंबाइन क्लास ह यार शांति रख मज़ा ारः ह”

“पर्सनालिटी बिल्ड करने का सबसे फर्स्ट स्टेप ह वे ऑफ़ ड्रेसिंग जो किसी को भी आपकी तरफ अत्त्रक्ट कर सकता ह ….इनफैक्ट मोर्डर्न दिखने के चक्कर मई बहुत जायदा फैंसी ड्रेस वियर करलेते ह …सो फॉरगेट ……जस्ट लिखे अतरंगीय ड्रेसेस स्टाइल…”

अतरंगी नाम सुनकर सब हंसने लगे ….

अपूर्व सबके देखते हुवे “ यस बोथ ऑफ़ you…i रेमेम्बेरेद यू मिस पूनम एंड….”

पूनम कड़ी हो गयी..

अपूर्व “आप भी मिस”

मनीषा कड़ी होते हुवे “मेंशा”

अपूर्व “बेऔतीफुल्ल name…….ap सभी अभी कॉलेज मई ह यंहा आपको सीनियर स्टूडेंट्स सीनियर lecturers…milte ह और बाद मई आपके जूनियर भी milenge….miss पूनम और मिस मनीषा ने जो ड्रेस पहनी ह वो सीनियर से लेकर लेक्टरर्स तक उनकी सिम्पलिसिटी और एटिकेट्स टोवोर्ड्स सीनियर्स टीचर्स शो होता ह… और ट्रस्ट में हाफ ऑफ़ थे वर्क आपकी ड्रेसिंग सेंस कर देती ह और बाकि आप उनसे कैसे इंटरैक्ट होते ह कैसे बात करते ह वो कर देता ह ….और फाइनल इम्प्रैशन आपकी नॉलेज कर देती h…i होप आप सब समाज गए होंगे आज के लिए ी थिंक एनफ rahega….kal मिलते h…aur है कल मैं चेक करूँगा आप कितना लर्न कर रहे ह अलवयस रेमेम्बेर ओने थिंग ….किसी बी डिस्टेंस को कवर करने के लिए स्टेप बी स्टेप हे बढ़ना होता ह शार्ट कट्स की कोई जगह नहीं ह….”

इतना कह अपूर्व सिंह ने सबको देखा और वापस मूड gaya…..uske जाते हे…

कविता “कितना हॉट ह यार श्वेता होती तोह डेफिनिटेली थोड़ा फन करते ह” उसने इतना हे कहा था की उसके मू से ाहुछः की आवाज निकल गयी क्योकि मनीषा ने धीरे से स्लैप किया था उसकी बैक पर …

कविता “क्या करती हो आप पीछे कोई मरता ह “

उसकी ये बात सून मनीषा के चेहरे पर मंद मंद मुस्कान आगयी तोह अनु खिलखिलाकर हंसपदी और बोली “पीछे से तोह तेरा बॉय फ्रेंड he”usne कितना हे बोलै था की…

कविता “छी छी कितनी गन्दी हो आप दोनों”

और कुढ़ भी हंस पड़ी वंही …पूनम को कुछ समाज हे नहीं को क्या हो रहा ह …

मनीषा पूनम को हैरानी से देखकर “होई पूनम कितनी मासूम और भोली ह….”

पूनम क्या

कविता “कुछ नहीं दी आप चलो ये फालतू बाते कर रही ह”

अनु “ओह ….हो गन्दी बाते …मतलब तूने वंहा ….”

कविता “चुप रहिये कुछ नहीं किया ह वैसे पहली बरी मनीषा भाभी की हे ह.

….हे हे हे ….”

अनु “चलो कॉफ़ी पिटे ह घर से तोह पूनम ने पिने नहीं डीई”

पूनम “ाचा गोड़ीई की तरह उलटी लेती हुवी सो रही थी कितनी बार जगाया था पर नहीं मैडम को राजकुमार के सपने आरहे थे”

कविता “तभी मैं सोचूओ चेहरा खिला खिला क्यों ह आख़िरररर कर सपने मई”

वो आगे कुछ बोलती अनु उसे मरने दौड़ पड़ी और कविता आगे आगे भागने लगीई….

“अनु रूक तुझे मैं बताती hu..bahut मस्ती आरही तुझे“

वंही कैंटीन मई अपूर्व एक कौन की टेबल पर बैठा हुवा मोबाइल मई कुछ कर रहा था ….

उसी वक़्त उन चारो ने भी कैंटीन मई एंट्री ली…

कविता “अनु ये लगता ह पूनम दी और मनीषा भाभी पर लट्टू हो गया ह फुल “

अनु “हम्म लगता तोह h…chal न बात करते ह”

मनीषा “ख़बरदार कुछ भी उल्टा पुल्टा सोचा भी चलो बैठ जाओ”

पूनम “उसकी हे टेबल खली ह चलो वंही बैठ जाते ह न “

मनीषा “अब तुझे क्या हुवा “

पूनम “मुस्करा कर कुछ भी तोह नहीं अब चल न “

चारो जाकर उसके पास बैठ गयी ….और कैंटीन वाला वेटर जो पूनम को दीदी बोलता था वो गया .

वेटर “दीदी वही जूस या कॉफ़ी”

मनीषा “हमे भी देख लिया कर दीदी के भाई…”

पूनम “वेट phir…apoorav सिंह की तरफ dekhkar…ap कॉफ़ी या जूस कुछ लेंगे”

अपूर्व ने 2 सेकंड बाद मोबाइल से नज़र हटाई और बोलै… “आप सब …..yanha…fir मुस्करा कर बोलै हॉट कॉफ़ी प्लीज “

पूनम “3 हॉट coffee…aur 2 जूस और 2 हमेशा वाले सैंडविच”

अपूर्व सिंह “अपने बिना सबसे पूछे हे आर्डर कर दिया”

कविता “ये मर परफेक्शनिस्ट को भी फ़ैल करती ह ….इन्हे छोटी सी छोटी चीज भी धयान रहती ह ….और ये इस वर्ल्ड मई सबसे बेस्ट ह कुकिंग से लेकर dressing…ho स्टडी ho….sab कुछ पर्फेक्ट ह“

अपूर्व सिंह “हम्म्म्म साउंड्स गुड रियली मिस poonam…itni क्वालिटीज़ किसी मई भी देखने को नहीं मिलती ह ..वैसे मैं गलत नहीं हु तोह फिर आप सब भी इनकी हे तरह कंही न कंही परफेक्ट हे होंगी किसी न किसी फील्ड मई….”

कविता कुछ कहने वाली हे थी की मनीषा बोल पड़ी …. “ हम स्टडी मई अचे ह और मैनेजमेंट मई”

अपूर्व सिंह “एक्सीलेंट आईटी मीन्स आप या तोह बिज़नेस फॅमिली से ह या फिर फार्मर फॅमिली से “

कविता या अनु बोलती मनीषा ने उनके पेअर पर पेअर रख कर दबा दिया ….और बोली “मेरे फादर बिज़नेस में ह और मदर कलेक्टर ह और कविता की तरफ इशारा करके इसकी दीदी पुलिस मई ह अपने नाम सुना होगा …सुपर कप सोनाली….

अपूर्व सिंह ने चमकती हुवी आँखों से कविता को देखा और बोलै “ बिलकुल सुना ह ….क्रिमिनल्स तोह नाम से हे डरते ह उनके ….”

मनीषा “और अनु …रियल स्टेट किंग मोहर सिंह की दौघ्तर ह और पूनम एक फार्मर फॅमिली से ह “

अपूर्व सिंह “वेल मैंने सही गेस किया एक्चुअल मेरा कहने का ये मतलब था की अगले मंथ आप सबका टूर ह और उस टूर की साडी रेस्पोंसिब्लिटी मुझे मिली हुवी ह और मेरे लिए काफी तुफ्फ h…isliye आप सब क्यों नहीं ज्वाइन करती ह मुझे …सब ैसिलय मैनेज हो जायेगा…..”

पूनम “पर हम सब “

अपूर्व “डोंट वोर्री आप मैनेजमेंट मई रहोगे तोह डेफिनिटेली कुछ एडवांटेज भी आपको एक्स्ट्रा milega…but जो लिमिट मई ho….meri हेल्प भी हो जाएगी “

अनु कविता मनीषा पूनम ने एकदूसरे को देखा और फिर है मैं सर हिला कर ….

कविता “ok डील दोने हम आपकी हेल्प करेंगे ….एग्जाम के बाद “

अनु “आप टास्क बता दीजियेगा”

मनीषा “पर “

कविता कान मई “वोडका का जुगाड़ हो जायेगा मान भी जाओ”

मनीषा “ok “

अपूर्व थॉट्स नीस मिस मनीषा “आप बिलकुल अपने पापा की तरह वो भी सोच कर हे फैसला लेते ह”

मनीषा “आप मेरे पापा को जानते ह”

अपूर्व “एक बार उनकी कंपनी मई मैनेजर्स की पद क्लास लेने गया था तब मिला था इसीलिए मुझे लगा जैसे मैंने आपको कंही देखा ह…”

मनीषा मुस्कुराकर रह गयी…

अपूर्व “वेल बहुत ाचा लगा आप सबसे milke…jald मिलते ह कॉफ़ी पर और अबकी बार ट्रीट मेरी तरफ से होगी…”

कविता “महंगी पद जाएगी आपको “

अपूर्व “महंगी पड़ेगी तोह सोनाली मम के नामसे सस्ती करवा लेंगे “

अपूर्व की बात सुनकर सब एक साथ हसने लगे ….तभी वंहा रजनी की एंट्री हुवी अपूर्व और रजनी की आंखे मिली पर इंट्रो नहीं हुवा था इसलिए अपूर्व जानकार भी अनजान बनकर पास से निकल गया….

पूनम “Hi मम”

सभी “hi मम बैठिये”

रजनी “ये वही नई पद टीचर ह न”

पूनम “है मम ये वही ह नीस पर्सन ह”

रजनी सीरियस होकर “ये कभी मत भूलना तुम चारो कौन हो … इंग्लिश के कई थॉट सुने ह न वही यंहा अप्लाई होते h…isliye भूलकर भी कुछ ऐसा मत बता देना जिससे बाद मई तुम्हे अफसोस हो”

मनीषा “डोंट वोर्री मम हम धयान रखेंगे “

रजनी “डोंट बे केयरलेस manisha…hamesha याद रखना …तुम क्या हो और तुम सब भी… मैं मिलती हु उसे जाकर “

रजनी के जाने के बाद …

पूनम “मम जायदा सीरियस नहीं हो रही “

मनीषा “है यार …”

अनु “हम कौनसा उसके साथ फ़्लर्ट कर रहे थे”

कविता “लेटस go…ab पढ़ ले नंबर काम ए तोह भाई वापस भेज देंगे आउट ऑफ़ इंडिया “

ये साडी एक साथ उठकर लाइब्रेरी की तरफ चली गयी वंही …..कॉलेज मई दूसरी तरफ….

दीं हॉस्टल मेस इंचार्ज से “ ये नए हेल्पर्स ह जो आपको बहार से सब्जिया ….या जो भी मेस से रिलेटेड रिक्वायरमेंट्स होंगी उसे पूरी करेंगे टेम्पररी स्टाफ के टूर पर भर्ती किया ह inhe…tour तक के लिए….”

मेस इंचार्ज “थैंक यू सर हमे एक्स्ट्रा स्टाफ की नीड भी थी मैं इन्हे तुरंत काम समझा देता हु”

दीं उन्हें मिलवा कर वापस चला gaya….aur वो नया स्टाफ काम समझने लग गया…

दूसरी साइड ….

अपूर्व सिंह स्टाफ रूम मई “तुम यंहा के कॉलेज प्रेजिडेंट हो “

लड़का घबराते हुवे जी जी भाई …

अपूर्व सिंह “घबराओ मत तुम्हारे पापा मेरे दोस्त ह “

लड़का “बबबभाईए आप जो बोलेंगे मैं वो करूंगा..”

अपूर्व सिंह “घबराओ मत मैं कुछ नहीं करूँगा ….” फिर मोबाइल से रजनी कविता अनु garvit,manisha,poonam की फोटो निकलकर बोलै “ तुम्हे बस अपने लड़को से इन सब पर पूरी निगरानी करनी ह क्या करती ह किसके बारे मई बात करती ह किस्से मिलती ह सब इवन बाथरूम मई भी अपनी फीमेल दोस्तों को lagao…aur इस काम के लिए उन्हें पैसा दो”

लड़का “हो जायेगा भईई माईं किसी को भी पता लगने नहीं दूंगा”

अपूर्व “ये लो नंबर और इस नंबर पर जो भी जानकारी मिले रोज मुझे बताना par…par ..पर …अगर कोई भी जानकारी jhutti…toh ..तेरी गफ जिसे तू शादी करना चाहता h…uske साथ…”

लड़का जिसे उसके बाप ने सब पहले हे बता दिया था वो अब और डरते huve“nahi कुछ नहीं छूटेगा साडी जानकारी मिलेगी apko….bhaiiii माँ कसम साडी जानकारी दूंगा”

अपूर्व “दफा हो जा”

लड़के को जल्दी से बहार निकलते हुवे रजनी ने देख लिया जो अपूर्व के ऑफिस की तरफ आरही थी “

रजनी ने अपूर्व सिंह के दूर पर नॉक किया और अंदर चली गयी…

अपूर्व “यस”

रजनी “रजनी”

अपूर्व “प्लीज सीट …दीं सर से बहुत तारीफ सुनी ह आपकी …और ट्रस्ट में रियलिटी मई भी आप बिलकुल वैसी हे ह “

रजनी “ थैंक यू ये रहे सरे स्टूडेंट्स के डाक्यूमेंट्स जो इस टूर पर जायेंगे”

अपूर्व “ ी म सॉरी मेरी वजह से आपको टूर से हटना पद रहा ह ाक्टुअलय ये सब टॉप मैनेजमेंट ने हे डीएड किया ह”

रजनी “इतस ok मुझे पता ह आपकी कोई गलती नहीं ह”

अपूर्व “तोह फिर आप जब तक मेरी हेल्प कर दीजिये प्लीज आईएम वैरी वेल इन पद बूत नॉट इन मैनेजमेंट …प्लीज”

रजनी जिसे राज के साथ रहना था पर उसने दीं ने पहले हे हेल्प के लिएबॉल दिया था वो दुखी मन से बोली “ok सर “

अपूर्व “कॉल में जस्ट अपूर्व”

रजनी “सर हे तीख rahega….Kal मिलते ह मीटिंग मई” इतना कह वो चली गयी पीछे अपूर्व “ोोू कड़क तीखी मिर्ची ह साली दूर से हे हे करंट मारती h…sach मई रुस्सियन वसिआ सब फ़ैल ह इस जैसी के आगे …..तभी वो छोकरा इसके आगे पीछे घूमता ह नॉट बाद नॉट बाद…”

वंही नेक्स्ट मॉर्निंग…. मंडावा से राज और दादाजी मिर्त्युदूत के साथ हेलीकाप्टर से हिमाचल के लिए उड़ pade….janha उन्हें कितने हे सवालो के जवाब जान्ने the….par राज को अंदाज़ा तक नहीं था की दुश्मन उस तक और उसके अपनों तक उसके पीछे से पहुंच गया h….ek लम्बी दुरी तय करके राज और जगमाल सिंह हिमाचल सीधे हेलिपैड पर उतरे जंहा आश्रम की ब्लैक फोर्टरनेर पहले से हे उन्हें लेने के लियर कड़ी थी और खुद सभी उन्हें लेने ए थे जिन्होंने जगमाल सिंह के पाँव chuve….kuch दिएर बाद तीनो गाड़िया आशाराम के अंदर दाखिल हुवी ….

गुरूजी “सभी आराम के लिए कुटिया तैयार करवाओ”

जगमाल सिंह “गुरूजी पहले उस गद्दार को देखना चाहता हु “

गुरूजी बिना कुछ बोले आगे आगे चलने लगे और फिर एक कुटिया के अंदर चले गए और एक चेयर को 3 बार घुमाया जिसे फर्श पर से एक जगह फर्श खिसक गया और निचे जाने लिए सिडिया आगयी …..वो सभी उस सीढ़ियों से निचे उतर gaye….aur कुछ पल बाद दिखाई दिया एकबाडा सा हॉल जिसमे एकबेद पर विक्रम बंधा हुवा था और डॉ उसके पास बैठा हुवा था जो गुरूजी को देखते हे तुरंत खड़ा हो गया …….

गुरूजी “आप कुछ दिएर ऊपर कुटिया मई आराम करे “

डॉ “जी गुरूजी”

जगमाल सिंह की आंखे राज से मिली तोह उसने है मई इशारा किया जगमाल सिंह उसके करीब गए और उसे देखने लगे ….और बोले ये तोह विक्रम ह ….

राज ने कोई जवाब नहीं दिया ….

सभी “है …”

जगमाल सिंह “है यही मैं कह रहा हु की ये मां नहीं ह ये विक्रम ह”

राज “आपको पूरा यकीं ह दादाजी “

जगमाल सिंह “बिलकुल ये मां नहीं ह भले हे मैं एक बार इसे मिला हु पर मां से मैं कई बार मिल चूका हु “

सभी “ मां ….”

राज … “अब ये साफ़ हो गया ह की आप सब पापा के बारे मई सबकुछ नहीं जानते हो सबको पूरी सचाई नहीं पता ह”

सभी “मैं और आग विक्रम तुम्हारे पापा के साथ जो जुर्म करते थे उन्हें मरते थे कई बार तुम्हारे पिता कुछ दिन गायब रहते थे तब इतना हे कहते थे की परिवार से मिलने जा जा रहे ह बस आगे हम पूछते हे नहीं थे…”

गुरूजी “मुझे उसने एक बार कहा था की बहुत जल्द गुरूजी एक वक़्त आएगा जब हमे इस पावर की जरुरत पड़ेगी पर वो वक़्त आने से पहले हे वो गायब हो गए और फिर विद्या बेटी और तुम्हारे पापा के दोस्त भी गायब हो गए …..पर है …उनके साथ एक लड़की भी थी जो काम कर रही थी ..कई बार उन्हें बात करते हुवे सुना था”

राज “लड़की “

गुरूजी “सायद किसी चीज पर साथ काम कर रही थी इसे जायदा नहीं पता ह क्योकि हमारा सारा फोकस हमारे इस आश्रम को खड़ा करने पर था …”

राज “दादाजी की तरफ गौर से देखने लगा”

राज को अपनी तरफ ऐसे घूरता देख ….जगमाल सिंह बोले “ मुझे नहीं पता ह ….पर है इतना जरूर कह सकता हु कभी कभी वो साउथ की तरफ ट्रेवल करता था”

राज “आप कैसे कह सकते इतने यकीन के साथ”

जगमाल सिंह “वो वंहा से कुछ न कुछ जरूर भेजता था मेरे और तुम्हारी दादी के लिए”

राज गाह्रो सोच मई डूब गया क्योकि तार सुलझने के बाजए और उलझे जा रहे थे ….अब एक लड़की और आगयी थी जिसके बारे मई कोई नहीं जनता था …

गुरूजी “तुम्हे पहले विक्रम से सच जानना चाहिए ह ये तुम्हारा हे इंतज़ार कर रहा ह”

राज अपनी सोच से बहार आया और विक्रम की तरफ बढ़ा

राज “मुझे नहीं पता ह की तुम क्यों मेरा इंतज़ार कर रहे थे पर एक बात जरूर कहूंगा तुम कुछ नहीं भी बताओगे तोह भी मैं दिएर सवेर सच क्या ह पता लगा हे लूंगा”

विक्रम ने राज को देखा और एक फीकी मुस्कान के साथ बोलै “मैं सायद बच नहीं पाउँगा अब”

राज “बच भी गए तोह रोज यही सोचोगे की क्यों बच गया”

तभी जगमाल सिंह ने उसके कंधे पर हाथ रखा ….जिसकी वजह से राज चुप हो गया ….

विक्रम “ बचे ….मुझे मौत का दर न तब था न अब h…..main बस जो मेरा था उसे वापस चाहता tha….maine कभी नहीं चाहा था की तुम्हारी माँ को कुछ भी हो …..फिर कुछ दिएर के लिए रूक गया जैसे अतीत की यादो मई डूब गया हो राज और बाकि सब उसके करीब आगये……

फलेश बैक…….

एक ब्लैक मास्क लगाया हुवा आदमी …विक्रम के सामने खड़ा था…….

विक्रम “तुम्हे पता ह तुम क्या बोल रहे हो …”

ब्लैक मास्क “वही जो तुमने सुना h….keemat वही ह सब कुछ तुम्हारा होगा …”

विक्रम का दिल घबराने लगा क्योकि उसे सहदेव से जायदा रविंदर का दर लगता था सहदेव फिर भी बख्स दे पर रविंदर धोखेबाज़ को बहुत बुरी मौत देता tha…ye याद करते हे उसके सरीर मई कंपकंपी सी आ गयी

ब्लैक मास्क “दर रहे हो तोह फिर किलर आर्गेनाइजेशन कैसे तुम्हारी होगी …ये तोह इस दुनिया मई एक छोटी सी ताकत हे ह “

विक्रम “तुम उसके बारे मई कुछ नहीं जानते हो सहदेव बहुत ताकतवर h…usai अहसास भी हो गया तोह वो चीयर देगा तुम्हे भी “

ब्लैक मास्क जोर जोर से हसने लगा और फिर बोलै “ मैं क्या हु कौन हु तुम कुछ नहीं जानते हो …पर मैं सब जनता हु ….वैसे भी मुझे सिर्फ उसकी बीवी की जानकारी चाहिए ह ….रही बात सहदेव की तोह उसे कोई और हे मरेगा ….सबकी मौत तय ह तुम सोचलो की तुम क्या चाहते ह दस सेकंड ह तुम्हारे पास”

विक्रम इधर उधर घूमने laga…aur गहराई से सोचते हुवे बोलै “उसके बाकी दोस्त “

ब्लैक मास्क “मैं ताकत का एक टुकड़ा हु विक्रम ….मैं जंहा से हु उन्हें न किसी ने देखा ह न कोई देख payega…..samjhe उसके दोस्त भी मरे जायेंगे…”

विक्रम “किलर आर्गेनाइजेशन मेरी होगी”

ब्लैक मास्क “सिर्फ तुम्हारी पर जब भी आर्डर तुम्हे दिया जायेगा वो हर हाल मई पूरा करना होगा चाहे कुछ भी हो वर्ण तुम भी मरे जाओगे“

विक्रम “तीख ह मंजूर ह मैं जरूर करूँगा”

राज जो फलेश बैक सून रहा था वो धयान से विक्रम को देखता रहा

विक्रम “मुझसे हर 5 साल mai…un लड़को को खोजना होता ह जिनका जनम तुम्हारे गृह नक्षत्र मई हुवा होता ह….”

राज बुरी तरह चौंक गया की आखिर उसके जैसे हे क्यों …

राज “मेरे जैसे हे क्यों”

विक्रम “ये तोह मुझे भी पता नहीं ह तुम्हारे पुरे खंडन की मौत के एक साल बाद से ह ये सुरु huva….par उस ब्लैक मास्क शख्स की ताकत देखि थी मैंने मेरे फाइटर लेवल 4 के 20 लड़के भी एक साथ मिलकर उसे खरोच तक नहीं दे पाए थे “

विक्रम की बात सुनकर सबके सब हिल गए क्योकि ये कोई ऐसी बात नहीं थी की जिसे हलके मई लिया जा सके ….

राज “मेरी माँ के बारे मई क्या जानते हो”

विक्रम मैंने सिर्फ तुम्हारी माँ की जानकारी दी थी की वो घूमने देहरादून गयी ह अली और उसके भाइयो के साथ पर उसे पकड़ने और अली और उसके भाइयो को मरने का काम मां का था जो सहदेव के साथ सरे इधर उधर के सरे तिकड़म वाले काम करता था …वही था जिसने पशुपति को पैसे देकर काम पर रखा था वो चाहता था की तुम्हारी माँ पापा सब मर jaye….wo लालची था…”

राज के चेहरे पर कड़वी सी मुस्कान आगयीऔर बोलै “तुम्हारी औकात से तीन गुना तुम्हे दिया फिर भी धोखा दिया और बात करते हो वो लालची था”. विक्रम के चेहरे पर गुसाई के भाव आगये और वो बोलै “4 गोलिया खायी थी तेरे बाप के लिए samjha…jo मेरा था वो हे माँगा बाकि कुछ नहीं चाहा था”

राज “है है है जो तेरा था ….क्या तूने पैसे लगाए ….आदमी तूने इखट्टे किये ….टीम कान्हा से ayiii……..thuuuu बात करता ह जो मेरा था उसे मांगने की ….फिर पलट कर …..इन्हे देख ये ह गुरु जो अपने शिस्य के बेटे को अपनी जान से जायदा प्यार करते ह ये आज अभी मेरा सर मांगे तोह काट कर दे दू ये ह प्यार विस्वास h…inhe देख ये होते ह दोस्त bhai….jo आज भी अपने भाई के बदले के लिए लड़ रहे h…paisa सबकुछ नहीं होता h…par तू नहीं समझेगा क्योकि तू अँधा हो चूका ह पर तूने 4 गोलिया खायी ह तोह तेरी मौत बहुत ासनहोगी बस यही कर सकता हु तेरे लिए आखिरी सवाल मेरी माँ के बारे मई क्या जनता ह साफ़ बता दे”

विक्रम “तू कुछ नहीं कर सकता h…..aur न तेरे साथ खड़े ये लोग वो एक अकेला इतना ताकतवर ह तोह बाकी कितने होंगे तू सोच भी नहीं सकता ह”

राज बस घूरता रहा …

विक्रम “ अगर तेरे माँ बाप जिन्दा ह तोह वो उन्ही के पास होंगे पर उनके जिन्दा होने की सम्भावना बिलकुल भी नहीं ह और वो मस्क्वाला शख्स कौन ह मुझे नहीं पता h….par है जब भी वो अत ह उसकी चेस्ट पर स्कोर्पियन का बड़ा सा टट्टू बना होता ह ..और फिलहाल वो अभी एक साल पहले हे आकर गया ह वो अब 4 साल बाद ayega….aur आएगा तब मैं उसे नहीं मिलूंगा तब वो सच जान जायेगा ….और उसे पता लगा की तुम सहदेव के बेटे हो तोह वो तुम्हारे कंही से भी धुंध निकलेगा और फिर दुनिया की कोई ताकत तुम्हे नहीं बचा पायेगीइ न पुलिस न आर्मी न कोई और ”

विक्रम की बाते मनो उस सन्नाटे मई सबकुछ चीयर कर जा रही थी.. कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था सब चुप हो गए थे…

राज “ मां कौन ह”

विक्रम “तुम बचे हो …”

राज “तू सीधा क्यों नहीं बोलता ह ….मैं बचा हु धयान से देख इस चेहरे को जिसकी सुपारी लेकर तुम्हारा अंडरवर्ल्ड घूम रहा ह जिस निर्वाण को तू मरना चाहता ह …वो मैं हे hu….Haa…main है मैं मैं main….main हे हु निर्वाण जो तड़पता h….tadpata ह उनकी रूह को ….और पता ह तुझे …मुझे मेरा कोई अपना धोखा नहीं दे सकता ह क्योकि मैं बचपन से हे इसके लिए तैयार किया गया hu….bilkil बेरहम….”

विक्रम हैरानी से राज को देखने लगा और अचानक उसके सामने साडी चीजे घूमने लगी और उसको बहुत बड़ा झटका लगा और उसके दिमाग की नस फैट गयी और वो उसी पल मर गया

राज विक्रम को देखकर“ एक झटका सहन नहीं कर पाया बात करता h….gaddar ….तुम और वो लोग कितने हे ताकतवर क्यों न हो सबके सब मरोगे …….”

वंही दूर कंही …

एक साधु के चेहरे पर मुस्कान आगयी और वो बोलै “जैसे तुमने चाहा था पुत्र सहदेव बिलकुल वैसे हे तुम्हारा पुत्र आज एक सच जान गया ह… वो अब और ताकतवर बनेगा तुम्हारी एक ीचा पूरी होने का वक़्त हो गया ह…. tatha….astu”


मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का अपडेट डिले होना या न होना आप सबके हाथ मई ह यंहा कोई टारगेट नहीं ह बस एक्सपेक्टेशंस ह हर रीडर्स से जैसे आपको मुझसे ह ...आप अपना बेस्ट दीजिये मैं डबल बेस्ट दूंगा...
 
अपकमिंग ....अपडेट 208......

प्लानिंग.....
 
Back
Top