Adultery Raj-- hero of the family - Page 16 - SexBaba
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Adultery Raj-- hero of the family

अपडेट 61

रेतुर्न तो होम......

फलेश बैक

Dadaji—ruk जाओ ..और तुम अनिरुद्ध तुम्हे सिखाया था गरीबो का भल करना न की मजाक उड़ाना हमने तुम्हे उस वक़्त बी कहा था कभी खुद का बुरा वक़्त मत भूलना और सज तुम भूल गए की तुम खुद क्या थे वो राज के पिता थे जिन्होंने तुम्हे इस मुकाम पर पहुंचाया .........आज हम अचे मन से ह 5 साल बाफ हम हमारे पोते से मिले ह . हम चलते ह जाओ समझाओ खुदको.. और जिसकी वजह से ये हुवा.....


जब ऋचा और उसके पापा जाने के लिए मुड़े तब कृति ने ऋचा को रोका..

Kriti—kaha था कभी कभी जो दीखता ह वो होता नहीं ह ....ये तेरे लिए गिफ्ट ह इसे सिर्फ अकेले मई ढकना और डिस्ट्रॉय कर देना मेरी जिंदगी ह ye.....umid ह तुजे मेरी बाद बाद मई समाज आजाएगीइ पर है ढकने के बाद ....एक नयी शुरुवात करना bye........

अब अजैईईई.......



ऋचा सोच मई पड़ी बस चुप चाप अपने पापा के साथ बैठ गयी और अपने पापा की तरफ ढकने लगी

र डैड – घर चलके बात करेंगे पर बीटा अगर तुम्हारी दोस्त ने जो कहा ह उस पर धयान देना क्योकि तुमने आज बहुत गलत किया ह..


ऋचा बस सपने पापा के गले लग बैठी रही.... सायद वो बी गहरी सोच मई चली गयी और सोचने लगी.....

इन स्कूल......

मैं--- दादा जी ये ह ....

दादा जी--- कैसे हो कप्तान बीटा सहदेव के जाने के बाद कभी हम मिल नहीं पाए ....

क. अंकल--- दादाजी के पेअर चुकार आप मेरे पिता सामान ह बल्कि उसे भड़कर ह जरूर मज़बूरी होगी वर्ण ऐसा नहीं होता....

मैं--- दादाजी आप जानते हो...

दादाजी--- पुत्र कप्तान से ाचा नेक दिल विस्वास का रूप मैंने नहीं देखा ह ....अभी तुम्हे कुछ नहीं पता ह धीरे धीरे पता लग जायेगा......

मैं--- तीख ह दादाजी ये सुनील ह मेरा मित्र मेरा भाई ......और कप्तान अंकल का बीटा ह...


दादाजी---- फिर सुनील परिचय का मोहताज नहीं ह ..

सुनील--- दादाजी जिस प्रकार मेरे पिता रहे ह वैसे हे मैं राज की परछाई बनकर रहूँगा पिता जी ने मुझे सब बताया ह


Main—kya बताया ह ...

Dadaji---wo ये कहना चाहता ह की तुम्हारे बारे मई और अधिक परशान नहीं और ये प्यारी सी बछिया कौन ह ......


मैं --- ये मेरी दोस्त कृति ह....

कृति ने पाँव चुवे तोह दादाजी ने आश्रीवाद दिया और कहा खूब पढ़ो लिखो और हम चाहते ह आगे बी तुम राज के साथ जुडी रहो पढ़ाई पूरी करने के बाद जरूर मिलना ......और बीटा आँखों की सचाई कभी खोना mat.....khus रहो...

मैं--- और ये बदमाश मेरी बहन ह....

बिच मई हे मेरी बात काट के ....श्वेता दादाजी के पैरो को पकड़ रोने लगी...


श्वेता --- दादाजी क्या हम अछि बची नहीं ह ....हमारी तरफ देखिये ...

मैं तोह उसकी एक्टिंग ढक के हे ढंग रह गया tha....aur यही हाल सुनील का था वो बी मू फाडे उसे हे ढक रहा था.....

श्वेता--- दादाजी मेरा दादाजी को मैंने कभी देखा हे नहीं अगर वो होते तोह आप जैसे हे होते जो अपनी पोती की हर ीचा को पूरी karte....phir मेरी तरफ आंख मरकर दादाजी से बोली करते न दादाजी

Dadaji—utho बेटी है है है जरूर करते हम बी तुम्हरे दादाजी ह हम से कहो हम करेंगे तुम्हारी ीचा. पूरी आखिर तुम राज की बहन हो....

श्वेता --- पका न दादा जी

Dadaji—hamra वचन ह...

मैं – दादाजी...

दादाजी--- आप चुप रहे राज


श्वेता--- वह दादा जी मैं ह न मुझे ह न....

दादाजी--- आप यही चाहती ह न की आप राज के साथ रहे....


श्वेता – शॉक से है है कहके गर्दन ऊपर निचे करने लगी...

दादाजी --- मुस्करा बची हमने साडी जिंदगी आंखे पढ़ी ह और तुम्हरी आँखों मई तुम्हारे भाई के लिए प्रेम दीखता ह ...जाओ अपना सामान ले औ...

श्वेता मेरे और सुनील की तरफ जीब निकल के चली गयी और सब उसे ढक मुस्कराने लगे...

अस्स पास की भीड़ पूरी शॉक थी तभी काफी साडी गाड़िया और ayi..jismai हिमाचल के कम और होम मिनिस्टर और कमिश्नर थे उन सभी ने ग्रीट किया

मैं--- हहहह ये क्या ये सब दादाजी को जानते ह ....आखिर कैसे .....

सुनील श्वेता कृति सब शॉक थे बस अंकल मुस्करा रहे थे ..

दादाजी – ाचा लग रहा ह 15 साल बाद मिलके तोह अब कम बन हे गए ..

Cm—sab आपकी किरपा ह अपने हे हिमाचल को इतना डेवेलोप करवाया ह तोह मुझे बी प्रसाद के रूप मई कम की सीट मिल गयी..

दादाजी चलो खुसी की बात ह हमेसा खुस रहो तरक्की करो...

कम--- राज आपका पोता ह...


मेरी गांड फैट गयी की अब सब पता चल जायेगा मैं तरस भरी निघाओ से कम को ढकने लगा ..

दादाजी –है पर ये बात अभी खुद तक हे सीमित rakhe...aur आप कैसे जानते ह ..

ये फटी मेरी....


Cm—meri तरफ ढक कर राज ने रेसलिंग मई हमारा नाम इंडिया मई प्रसिद्ध किया था इसलिए हम मिले थे बहुत ाचा बचा ह..

दादाजी--- आप क्या समझते हमे पता नहीं ह हमे सब पता ह ....हम खुस ह की आप राज के राज को राज रखते h..phir मेरी तरफ मुड़कर आप क्या सोचते ह हमें पता नहीं ह....

सब ऐसे हे बात करते रहे फिर दादाजी और कप्तान अंकल गुरूजी से मिलने चले गए और हम चले गए सुनील के घर जंहा कृति रुक कर अगले दिन अपने घर जाने वाली thi......maine उसे कहा मेरे साथ घूमने चल तोह उसने कहा काबिल बांके आउंगी तेरी मदद करने मैंने उसे गले लगाया और कहा जब जरुरत हो याद karna.....muje...

आज घर पर सब मेरी और श्वेता की पसंद का बना हुवा था ...जंहा श्वेता बेहद खुस थी तोह सुनील मेरे समझने के बाद नार्मल huva...par श्वेता जो बरी बरी सबको चिड़ा रही थी उसकी खुसी मनो फुट फुट के बहार आरही थी उसने अपने पापा को बी बता दिया था की वो राज के साथ जा रही ह ..पहले तोह उसके पापा मम्मी ने मन किया पर इसके आगई किसकी चली थी जो आज चलती अंत मई है करनी padi....raat को सब कप्तान अंकल के पास हे रुके जंहा अंकल उल्टी ने दादाजी की खूब सेवा की.....

दादाजी और अंकल मई एक ऑवर तक अकेले मई खूब बात हुवी फिर हम सब खाना खाके सो गए.....

पर दादाजी और अंकल मई बात जारी थी ..

दादाजी – किसी को पता तोह नहीं ह न की राज कौन ह ...

Uncle—nahi अभी तक किसी को नहीं बस अनिरुद्ध को मालूम ह

दादाजी--- वो कभी नहीं बताएगा ...वो जनता ह की उसके लिए हमने क्या किया ह

अंकल --- तोह मैं सबको इखट्टा करना शुरू kardu....kyoki राज का सामना इंडिया के नहीं दुनिया के बहुत ताकतवर लोगो से होगा तोह हमें बी तैयार रहना चाहिए...

दादाजी--- नहीं कप्तान दोस्त की खाल मई कौन भेड़िया ह पता नहीं ....पर जो बी ह उसे हम ढूंढ निकालेंगे... इसे लड़ाई अकेली लड़नी h......iska पहला पड़ाव शुरू होगा और वंहा से सुरु होगा जंहा सब बिच UTRAKHAND...janha हमला हुवा और जिसका अंत उप और ंप मई होगा वंही उस हर दरिंदे को मारा जायेगा चाहे वो दुनिया के किसी बी कौन मई क्यों न ho.....yahi मेरा बदला ह पर पहले मुझे मेरी बेतिया चाहिए अगर वो जिन्दा ह तोह सब बिछड़ गए थे उस हादसे मई....


अंकल--- बाबूजी आप ढुकि मत होईये ऊपरवाला जरूर मिलाएगा...

दादाजी--- उन्हें मिलवाना हे होगा कप्तान हजारो लोग मरे गए थे उस लड़ाई मई कितने हे लापता हुवे the...khun की नदिया बही थी पता हे नहीं चला था की इतने दुश्मन एक साथ कब एक हो गए सतर्क होते हुवे बी ....और सबसे बड़ी बात अली ने उस दिन अपना पूरा परिवार अगर राज को बचने नहीं लगाया होता तोह सायद आज राज बी जिन्दा नहीं होता ....आज तक ये बी नहीं पता की उसके परिवार मई कोई जिन्दा बचा ह क्या...

अंकल--- मैं लगता हु लोगो को जानकारी निकलने के लिए ...और विस्वास रखिये आपके आश्रीवाद से अब आपका बीटा कप्तान इस लायक बन गया ह की किसी को पता लगे बिना जानकारी निकल सकता ह .

Dadaji---thik ह तुम जानकरी निकल के रखो भविष्य मई राज के काम ayegi.......ab सजाओ और सुनील को तैयार करो बिज़नेस सिखाओ आगे बहुत काम ayega....kyoki राज के पास समय नहीं होगा तोह सब उसे हे संभालना ..

अंकल--- जी बाबूजी ....


मैं --- अंकल से बाइक के बारे मई बताने आया था दोनों की बाटे सुन ढक और गुसाई मई मेरी आँखों से आंसू निकलने लगे .मैं अपने कमरे मई आगया और सोचने लगा अगर वंहा मुझे जाना ह तोह तीख ह सुरुवात बी वंही से होगी और मुझे मदद बी chahiyegi.koun...koun...karega.ha ....वो करेगा मदद उसी से सुरुवात करूँगा .....

उत्तराखंड मैं ारः हु राज नहीं निर्वाण आरहा ह और निर्वाण सिर्फ तड़पता ह तड़पता ह रूह को ...

मेरी आँखों मई गुसा था अब मेरे सफर मई प्यार के लिए जगह नहीं थी ....... अब सिर्फ तांडव होगा मौत का तांडव.........

इन मॉर्निंग ..


अंकल आंटी ने मुझे गले लगाया मैं बी भावुक हो गया क्योकि उन्होंने मुझे माबाप की तरह प्यार किया ह...

अंकल – तुम्हरी बाइक वंहा पहुंच जाएगी जंहा तुम जाओगे ...

आंटी ने मुझे ी फ़ोन दिया ...और बोली की सबसे ये तुम्हारे पास रहना चाहिए ह ...और लास्ट जब मैं सुनील के गले लगा तोह मेरी आँखों मई आंसू थे...

सुनील--- तू कंही बी जा मेरी नज़र तुज पैट रहेगी मुझे पता ह तू मेरे बिना बेवकूफी जरूर करेगा....

मैं--- तुजे जल्दी हे बुला लूंगा भाई..

सुनील--- नहीं अब मैं खुद आऊंगा मुझे क्या करना ह पता चल गया ह बस कॉल करते rahna....ab तेरे पास फ़ोन ह ...और फिर श्वेता को गले लगा कर बहुत याद आएगी तेरी चुड़ैल लव ु .....मेरी प्यारी चुड़ैल...


श्वेता बी रोने लगी क्योकि एक भाई जो दूर हो रहा था उसे..

श्वेता--- सबके गले लगी ....और bye कहा...


मैंने सबकी ग्रुप फोटो ली .....

फिर उड़ चले हम मंडावा की तरफ ...

श्वेता जंहा दादाजी और भीमा चाचा की लाड़ली बन गयी थी और मैं गाँव जाने के लिए खुस था..


तोह वंही पर

निर्वाण को नहीं पता था की गाँव के बहार उसका बचपन का दुश्मन हरी सिंह भेड़िया बांके हाथ लगाए बैठा ह.......... पर अब राज वो राज नहीं रहा वो खुद चलती फिरती मौत ह जो अभी घायल शेर की तरह जिसका दिल टुटा और दिमाग मई बस प्रतिशोध की जवाला ह....

आज के लिए इतना हे...
 
टुडे अपडेट टाइमिंग 2 पं

आज का अपडेट अतीत के पन्नो को छेड़ेगा तोह धयान से जरूर पढियेगा काफी कुछ होगा उसमे......... गुड नाईट 😴😴😴

अपडेट ऑलमोस्ट दोने कर लिया ह ..
 
अपडेट 62



Home......after 5 इयर्स.

मिस्ट्री बॉक्स .........



फलेश बैक .....




श्वेता--- सबके गले लगी ....और bye कहा...


मैंने सबकी ग्रुप फोटो ली .....

फिर उड़ चले हम मंडावा की तरफ ...

श्वेता जंहा दादाजी और भीमा चाचा की लाड़ली बन गयी थी और मैं गाँव जाने के लिए खुस था..

तोह वंही पर

निर्वाण को नहीं पता था की गाँव के बहार उसका बचपन का दुश्मन हरी सिंह भेड़िया बांके हाथ लगाए बैठा ह.......... पर अब राज वो राज नहीं रहा वो खुद चलती फिरती मौत ह जो अभी घायल शेर की तरह जसिका दिल टुटा और दिमाग मई बस प्रतिशोध की जवाला ह....



अब अजैईईई....




सिटी के बहार ..




अरे भाई सुनो आज इतनी चल पहल क्यों ह ..




आदमी --- आज ठाकुर साब के यंहा भंडारा ह खास मेहमान आरहे ह...




ाचा ठाकुर साब का क्या लगते ह ..




Admi—Bhai वो तोह पता नहीं पर हवेली मई कभी हे मेहमान एते ह ..पर आज का भंडारा खास h...Koyi बहुत खास मेहमान ए ह यही सुनने को मिला ह...




ाचा धन्यवाद् भाई ....




आदमी--- तुम कान्हा से हो भाई अस्सपस्स के तोह नहीं लगते कौनसा गाँव ह क्या नाम ह था भाई...




वो घबराकर भाग जाता ह ..




आदमी--- बड़ो अजीब आदमी थो ...बिना बताया हे भेज गया....




वो आदमी दूर जाकर...




Hello ठाकुर साब आज हवेली मई प्रोग्राम ह कोई खास ारः h...shamko बड़ी दावत ह ...अस्सपस्स के सरे गाँव वालो को बुलाया ह अंदर जाना मुश्किल ह गांव वाले पहचान लेंगे.. तोह काट डालेंगे


ठाकुर हरी सिंह--- कुछ तोह बात ह तू कोसिस कर पता करने की मैंने आदमी लगा रखे ह अगर मंडावा से बहार निकला तोह पता चल जायेगा....



हेलिकोप्तेर्स हवेली से दूर लैंड हुवे...




मेरी और श्वेता की आंखे चौड़ी हो गयी थी एक बड़ा रास्ता कालीन से बांया गया था चारो तरफ लोगो की भीड़ thi...aur उनके हाथो मई फूल थे ....दादाजी जैसे हे निचे उतरे सब जय जय कार करने लगे बहुत तेज नरो का शोर गूंज उठा वातावरण मई ..




श्वेता --- कान मई ओह माय गॉड भाई अपने आजतक इतना सब छुपा के rakha...mujse ..आप हो क्या ....इतनी भीड़ तोह मैंने कभी नहीं देखी....




मैं--- ये सब पुरखो और दादाजी की कमाई इज़्ज़त ह .....मुझे तोह कोई जनता तक नहीं ह .....




श्वेता बस एन्जॉय कर रही thi.....awesome भाई...


दादाजी सबको हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे थे चारो तरफ से फूलो की बारिश हो रही थी .....

हम करीब एक कम पैदल चलकर हवेली पहुंचे तोह बहार दादी हाथ मई थाली लेके कड़ी थी और उनके पास छोटी चची जिनका चेहरा उतरा हुवा था वो कड़ी थी और उनके पास बड़ी चची चाचा और सुरेंद्र कविता खड़े थे मैंने उनको देखा तोह नफरत आज बी उनकी आँखों मई thi....jo मुझे साफ़ साफ़ दिख रही थी दादी और फिर छोटी चची ने आरती उतरी ....मेरी ..फिर श्वेता की बी आरती utari...hum घर के अंडर आगये ..मैं अंदर एते हे

मैं--- चलो बहुत हुवा तुम दोनों का अब ाजाओ.... बहार....



पर कोई जवाब नहीं आया..




मैं--- देखो ये मजाक का वक़्त नहीं मैंने बहुत मिस किया ह प्लीज ाजाओ वर्ण मैं रो दूंगा प्लीज ाजाओ मैं माफ़ी मांगता हु ......प्लीज एक बार मेरी बात sunlo.....i म सॉरी मेरी गलती नहीं ह ....वंहा फ़ोन अल्लोव नहीं था ......




जब काफी दिएर कोई नहीं आया तोह main...upar जेक ढूंढ़ने लगा पर होता तोह मिलता मई निचे आके ढकने लगा दादाजी की तरफ .....




दादा ji---Raj वो यंहा नहीं ह ....


मैं--- उन्हें पता था न मैं आज आऊंगा तोह स्कूल क्यों gayiii....dono ...



छोटी चची ये सब ढक के रोने लगी मैंने उनको रट देखा तोह मेरा जी घबराने लगा..




मैं--- क्या हुवा ह मुझे कोई बताएगा ...




दादाजी--- निर्वाण सब तीख ह तुम्हरी चची ने उन्हें पढ़ने के लिए लंदन भेज दिया था...




Main---kya??? नाराजगी से क्यों छोटी चची क्यों आप सबको मुझसे नफरत थी तोह मैं चला गया था न फिर उन दोनों मासूमो को kyo....kya ...आपको पता ह छोटी चची बहुत याद अति ह अपनों की जब आपको अकेले सब ढक ढकने होते ह बहुत रोटा ह दिल जब अकेला महसूस होता ह और वो तोह बहुत छोटी थी क्या बीतेगी उन par....apne मेरी नफरत उनपे निकली सिर्फ इसलिए क्योकि वो मुझे अपना भाई मानती h....ha वो क्या कहती थी आप muje...manhus. ह न यही कहती थी na.....toh मैं तोह दूर हो गया था पर उन्हें सजा kyuuu.....chachii ....kyu.....wo मेरी bahan....h ...आप कैसे कर सकती ह ऐसा ... मेरे साथ तोह समाज अत ह मैं इस घर मई दादाजी के शिव सबके लिए मनहूस हे तोह हु .......




छोटी चची--- मुझसे गलती हो गयी थी बीटा. तू क्या गया मेरी खुसिया हे चली गयी तेरे जाने के बाद मेरी बच्चियों ने बी मुझसे बात करना छोड़ दिया और आज तक मुझसे बात नहीं की ह ...तब मुझे पता लगा की कैसा लगता ह जब अपने मू मोड़ लेते ह मैं बिता वक़्त वापस नहीं दे सकती पर आगे एक माँ बनने की पूरी कोसिस करुँगी हो सके तोह मुझे माफ़ karde...aur रोने लगी ..




मैं--- अपने दादाजी उन्हें रोका नहीं ....




दादाजी--- बीटा कभी कभी न रोकने मई भी भलाई होती ह ........


मैं--- आप सबने गलत किया .......वो बची थी आप सबने उन्हें अकेला भेज दिया पता नहीं कैसी होंगी वो...



इतना कह मैं अपने रूम मई आगया और उल्टा लेट gaya..aur उनकी फोटो ढक बचपन की बाटे याद करने लगा


ममता--- भाई आप हमें कभी छोड़ के नहीं जाओगे न ..

मैं--- हो सकता ह क्या kabhi....aisa.. तुम दोनों के बिना मेरा दिल लगता हे नहीं ....और मुझे फिर चुपके से लड्डू कौन खिलायेगा ...

यही सोचते सोचते मेरी आँखों से आंसू कब बाह निकले पता हे नहीं लगा

निचे ..



दादाजी--- बहु मैंने कहा था की जो कर रही हो गलत कर रही हो और ढेकलो आज न ममता कविता का अपने भाई के लिए प्यार काम हुवा न इसका काम हुवा.. जाओ श्वेता एक बहन हे अभी उसे संभल सकती ह .....




श्वेता--- मैं ढकती हु दादाजी...




दादाजी ने है मई सर हिलाया और फिर छोटी चची की तरफ ढक कर कहा लोग अपनी सगी बहनो को इतना प्यार नहीं करते ह जितना वो करता ह कविता ममता से


छोटी चची सिर्फ आंसू बहा रही थी ...



ऊपर श्वेता मेरे रूम मई ईई तोह मैं फोटो को हाथ मई लेके लेता हुवा था .....




श्वेता--- मेरे भाई का रूम राजा महाराजा जैसा होगा मुझे पता नहीं tha....itne ठट्ट भट्ट वाला मेरा भाई वो ..क्या बात ह किस्मत हो तोह ऐसी साला अपनी तोह लाइफ िच हे बन गयी ह सपूण को अब क्या मांगता ह बस भाई की चमची बन के ाखा लाइफ मस्तीय.. करने का ह ..अब अपुन ाखा वर्ल्ड ghumengi.....apun ने तोह सॉलिड हाथ मारा ह भिड़ूऊ...




मैं--- तुजे अभी बी मस्ती सूझ रहियी ह...




श्वेता--- भाई आप ह न यार इतने बड़े बड़े काम कर लिए पर जंहा दिल की बात अति ह वंहा अब ह न फिसड्डी बम से


ho.....are आप आगये हो न अब भुला लेंगे हम दोनों ko...ab जो बीत गया उसको बदला नहीं जा सकता ह पर जो कर सकते ह वो तोह kare...baith गए लड़कियों की तरह रोने धोने ....ये हम लड़कियों का काम h....ladko का नहीं...



मैंने उसे पकड़कर बीएड पे गिरा दिया फिर बोलै मेरा मजाक उड़ाती ह रूक तुजे और गुदगुदी करने लगा वो भाई गलती हो गयी हे हे हे सॉरी सॉरी अब नहीं karungi...m मैं रौंदू हु बात आने लगी ह tuje....aur वो बोलती रही बस भाई अब नहीं बोलूंगी प्लीज गुदगुदी मत करो...


दादाजी जो पीछे खड़े सब ढक रहे थे वो बी मुस्कराने लगे ..........



दादाजी--- अभी आप दोनों रेस्ट करलो और बेटी आपका रूम ममता कविता वाला ह मतलब पास वाला क्योकि दूर तुम रहोगी नहीं...




श्वेता--- न बिलकुल nahiii....main तोह आपके साथ रहूंगी पूरा गाँव ghumungi....kya शान भान ह मेरे दादाजी की वह वह लाइफ हो तोह ऐसी दादाजी ..




दादाजी--- मुस्करा अगर ऐसी बात ह तोह जरूर हम घुमाएंगे tumhe....shamko अस्सपस्स के 50 गाँव के लोग दावत पे आएंगे तुम्हे तैयार रहना h...aur तुम्हारे लिए बी ड्रेस मंगवा दी ह तुम बी राजस्थानी ड्रेस मई तैयार रहना...




श्वेता--- मैं तोह हमेसा रेडी रहती हु बस इन्हे हे लड़कियों जैसे नखरे एते ह हमेसा लेट करते h......pata नहीं किसके लिए सजना स्वर्ण होता ह......




दादाजी--- मुस्कारने लगे है है है ha.........ab आराम करो .....


शामको 5 बजे मैं जब तैयार होने के बाद श्वेता के पास गया तोह श्वेता ड्रेस के सामने अपना सर पकडे हुवे बैठी थी .....



मैं--- अरे रे क्या हुवा ....




श्वेता--- मु लटका के भाई देखो न मैंने आज तक ऐसी ड्रेस नहीं पहनी ह .... मैं क्या करू.. कुछ समाज नहीं ारः ह...




Main—gale लगा कर ..ऐसे साद नहीं होते ह मई. कुछ करता हु...




फिर मैं निचे गया तोह छोटी चची टिया ला रही थी ...मैंने उन्हें देखा और उन्होंने मुझे देखा.......




मैं--- मुझे एक मदद चाहिए आपसे..




छोटी चची मेरी तरफ धयान से ढक के बोली मुझे पता ह तुम टिया पियो मैं ढकती हु फिर श्वेता के रूम की तरफ चली गयी....




स चची--- चलो कड़ी हो जाओ ...




श्वेता--- चची ...




स चची--- आप कड़ी हो जाये .....




और फिर एक ऑवर बाद श्वेता जब निकली तोह ऐसी दिख रही थी...






मैंने जब उसे देखा तोह बस ढकता हे रह गया ....वो दोनों हाथो से घूँघट सा बनके पुरे सोने के गहने पहने हुवे मुस्करा कर कड़ी थी



मैं--- ये श्वेता हे ह न ...हम्म्म अब लग रही ह प्रिंसेस ....बहुत सुन्दर ....थैंक यू छाछीइ मेरी दोनों बहने बी ऐसी हे लगेंगी ....




स चची--- दुखी मन से खास वो मुझसे बात करती ....मैंने उनके प्यार को समजा होता ..




श्वेता--- आप दुखी मत होईये ये लाएंगे न उन्हें यंहा ......वापस.




फिर हम सब निचे आगये जंहा फंक्शन स्टार्ट हो गया tha.....bus गाँव वालो को पता था की पोता और पोती ए ह क्योकि सभी वफादार the........jo दादाजी के लिए जान दे और ले सकते थे .....फंक्शन बड़े हे धूम धाम से पूरा हुवा श्वेता तोह सच मई हे किसी राज्य की राजकुमारी बन कर घूम रही थी .....सुरेंद्र और बबिता की जाली हुवी thi....yahi हाल शैतान और इंद्रा का बी था पर वो कुछ कर नहीं सकते थे ........ क्योकि श्वेता को स्पेशल ट्रीटमेंट मिल रहा था....




नाईट मई श्वेता मेरे पास हे सो गयी.....




नेक्स्ट मॉर्निंग 5 ऍम मैं उठा और जॉगिंग के लिए निकल गया ... मुझे जाता हुवा दादाजी ढक रहे थे और उनके चेहरे पे मुस्कान थी मैं हाफ ऑवर मई वापस आगया ..




दादाजी --- जाओ स्नान करके ाजाओ साधु बाबा प्रतीक्षा कर रहे ह हवन के लिए


मैं--- जी..



6 बज गए थे मैं पूजा मई बैठ गया जो करीब एक ऑवर चली फिर सबको दान दखषणा दी...




कूल गुरु बी ए हुवे थे और वो साधु बाबा जी बचपन मई आया करते थे जिन्होंने मेरा हाथ ढक के कहा tha.....ki ये परिवार का रक्षाक और उन्हें एक करेगा ..सबका ढक दूर karega..wo बी ए हुवे थे


कूल गुरु कुंडली ढक कर ...



कूल गुरु --- ठाकुर साब हम सब ने कुंडली ढक ली ह और कुंवर राज की यात्रा की सुरुवात उत्तर दिशा से होगी......




दादाजी--- मुस्कराकर उत्तराखंड जायेंगे निर्वाण आप हमारी दिली ीचा थी ये और अब आपका कुछ सच जानने का वक़्त आगया ह तोह सुनिए...


आज से 15 साल पहले आपकी माँ विद्या और तुम्हारी सबसे छोटी बुवा दिव्या और उनसे बड़ी बुआ और तुम्हारे छोटे चाचा पर्वत सिंह ...और तुम्हारे माँ के भाई सामान बॉडीगार्ड अली उनके भाई देहरादून हरिदवार नैनीताल मसूरी घूमने गए थे ....तुम्हारे पिता अगले दिन जाने वाले थे वंहा सब हंसी खुसी गए थे सब तीख था..... क्योकि अली और उसके भाई ताकतवर और हीमती थे वो अकेले दस से भीड़ सकते थे.... तुम उस वक़्त 3 साल के थे तुम्हारी माँ की गोद mai.....tumahri बुवा जो 17 साल की थी वो तुम्हे कभी अपने से दूर नहीं करती थी तुम उसके खिलोने थे.... बाकि हम सब उस वक़्त उदयपुर मई थे ....... तुमसब के उत्तराखंड घूमने जाने के 5 दिन बाद हमें संचार मिला की अली उसके भाई को टुकड़ो टुकड़ो मई काट दिया गया ह... तुम्हरी माँ लापता हो गयी तुम्हरी बुआओँ की लाश कंही नहीं मिली ..... तुम्हरे चाचा पर्वत ने बाद मई उन्हें ढूंढ़ने की कोसिस की तोह उनकी बी सर करि लाश मिली बेदर्दी के साथ काट दिया गया था उनके सरीर पर 50 बार वॉर किये गए थे.

मैं जिसकी आंखे नाम थी दादाजी को धयान से ढक रहा tha...Dadaji रुके फिर कुछ वक़्त बाद बोले ......



दादाजी--- अली का पांचवा भाई उदयपुर तुम्हे लेके पंहुचा वो. उसकी सांस अटक अटक कर चल रही थी उसने तुम्हे मुझे गोदी मई दिया और सिर्फ कुछ हे सब्द बोल पाया ......




5 तह भाई---- धोका बाबूजी धोखा सब मार्गए ह भैया भाबी sab....mere घरवालों का धयान..




दादाजी --- बस इतना हे कह पाया था ...मैं समाज गया था की कुछ तोह बहुत गलत हुवा ह ...इसलिए तुम सब को लेके यंहा मंडावा हमरी पुस्तैनी हवेली आगया ह.... तुम्हारे पिता का कुछ पता नहीं tha.......wo उप या ंप मई थे ....फिर कुछ दिन बाद पता लगा की उदयपुर हवेली जला दी गयी उसकी रक्षा करने वाले गॉर्डस और नौकरो को जिन्दा जला दिया गया ....तुम्हारे पापा के सभी वफादार साथी चीप गए जो आज तक जिन्दा ह या नहीं ये बी नहीं पता ह ... ... अगले एक साल तक खून की नदिया बही ......हजारो लोग मरे गए ....जिसने बी धोखा दिया था वो कोई अपना था तुम्हारे पिता का khass.........wo कोई बी हो सकता ह पर अब बहुत पावर फुल होगा .....बहुत पावर फुल ....पर इतना कह सकता हु उसने तयारी बहुत पहले से सुरु करदी थी और तुम्हारे पापा का विस्वास पत्र था इसीलिए अचानक इतना बड़ा हमला हो पाया...




मैं--- और मेरे पापा का क्या हुवा ..




दादाजी--- वो तुम्हे बाद मई बता दिया जायेगा ...एक महीने बाद उत्तराखंड जाओगे और बिना किसी को बताये उस इतिहास को खोद निकलोगे तुम्हारा एडमिशन दूँ स्कूल मई करा दिया ह .....वंही आप पढ़ेंगे आपके लिए घर की व्यवस्था कर दी गयी ह........


आपको जो चाहिए मिल जायेगा बस आप छिपकर सबसे बदला लेंगे जानकारी इखट्टा करो वंहा तुम्हे कप्तान के आदमी मिल जायेंगे ...एक एक को ढूंढ निकालो.....



मैं--- गुसाई के साथ नहीं दादाजी ये लड़ाई मेरी ह...... और मैं अकेला लडूंगा उन्होने जो किया ह उन्हें उसकी सजा भुगतनी होगी उन्हें जिन्दा रखूँगा और तड़पाऊंगा उन्हें जीते जी नरक दिखायेगा आपका ये निर्वाण. दादाजी हैवानियत क्या होती ह ....वो महसूस करेंगे .........




दादाजी---- राज तुमने अकेले ने नहीं खोया ह तुम्हारे पिता के साथी मरे गए ह उनका परिवार और लाखो गरीब थे जिनका घर तुम्हारे माता पिता की वजह से चलता था...... इसलिए सबका साथ लोंजाब वक़्त आएगा और तुम्हरे बारे मई पता लगेगा की तुम जिन्दा हो ...तोह सब भागे चले ayenge...tab तुम्हे अहसास होगा की तुम कौन हो और क्या मायने रखते हो सबके लिए...




मैं--- सर निचा करके बैठा रहा .....




श्वेता बी बस चुप चाप दूर कड़ी सुन रही थी उसे बी पहली बार पता लगा था की उसके भाई के दिल मई कितना दर्द ह क्यों वो अपनों के लिए जान लड़ा देता ह खुदकी ....क्यों उसके लिए रिश्ते इतने मायने रखते ह ..उसकी संख्या से भी आंसू बाह रहे थे.




दादाजी--- अब रोना नहीं ह


निर्वाण ...अब समय ह हमारे इन्तेक़ाम का मैंने बी 19 साल परतीक्षा की ह तुम्हारे जवान होने की क्योकि जब तुम उन्हें मरोगे तब मैं देखना चाहता हु की खोफ्फ़ क्या होता ह उन्हें महसूस हो ...मेरे दिल को तब चैन आएगा जब उन्हें घसीट के तुम उन्हें तड़पा तड़पा के मरोगे मैं ढकना चाहूंगा उस गद्दार का चेरा जिसने ये सब किया.... पता नहीं मेरी फूल जैसी बेटी विद्या कान्हा होगी ..जिन्दा बी ह या नहीं ....अब जाओ आराम करो तुम्हारा ....इन्तेक़ाम शुरू होगा जल्द हे. बुराई का अंत तुम्हे करना ह ........बुराई को ख़त्म करो .... किसी को मत छोड़ना तुम्हारे पिता को सब मंजूर था पर बेकसूर पर झुलम नहीं और तुम्हे बी वही हे करना ह....

मेरे सीने mai...ek तूफ़ान सा चल रहा था की मेरी माँ मर गयी या जिन्दा ह और वो जिन्दा ह तोह कान्हा ह ....कैसी ...hogi...par अगर वो जिन्दा ह तोह मैं ढूंढ निकलूंगा उन्हें चाहे वो कंही बी हो ....और उन सबको अपने किये की सजा भुगतनी होगी मैं अपना नरक बनाऊंगा जंहा उन्हें सजा दूंगा....



आज के लिए इतना हे ....
 
आप सभी से माफ़ी चाहूंगा की अपडेट थर्सडे का मिस हो गया गोवेर्मेंट ने नेट बंद करदिया था जस्ट अभी ों किया हे ह ...इसलिए वैरी वैरी सॉरी कल सैटरडे को 1 अपडेट और संडे को 2 उप्दत मिल जायेंगे.... एक साथ....

मेरी समस्या को समझने के लिए थैंक यू सो मच मैं बिना आपको इन्फॉर्म किये कभी गैप नहीं लूंगा .....
 
अपडेट -63



हरी सिंह टाइम स्टार्टस नाउ.....

निर्वाण टार्चर....

फ्लेशबैक

दादाजी--- अब रोना नहीं ह

निर्वाण ...अब समय ह हमारे इन्तेक़ाम का मैंने बी 19 साल परतीक्षा की ह तुम्हारे जवान होने की क्योकि जब तुम उन्हें मरोगे तब मैं देखना चाहता हु की खोफ्फ़ क्या होता ह उन्हें महसूस हो ...मेरे दिल को तब चैन आएगा जब उन्हें घसीट के तुम उन्हें तड़पा तड़पा के मरोगे मैं ढकना चाहूंगा उस गद्दार का चेरा जिसने ये सब किया.... पता नहीं मेरी फूल जैसी बेटी विद्या कान्हा होगी ..जिन्दा बी ह या नहीं ....अब जाओ आराम करो तुम्हारा ....इन्तेक़ाम शुरू होगा जल्द हे. बुराई का अंत तुम्हे करना ह ........बुराई को ख़त्म करो .... किसी को मत छोड़ना तुम्हारे पिता को सब मंजूर था पर बेकसूर पर झुलम नहीं और तुम्हे बी वही हे करना ह....

मेरे सीने mai...ek तूफ़ान सा चल रहा था की मेरी माँ मर गयी या जिन्दा ह और वो जिन्दा ह तोह कान्हा ह ....कैसी ...hogi...par अगर वो जिन्दा ह तोह मैं ढूंढ निकलूंगा उन्हें चाहे वो कंही बी हो ....और उन सबको अपने किये की सजा भुगतनी होगी मैं अपना नरक बनाऊंगा जंहा उन्हें सजा दूंगा....

अब अजैईईई.....

मैं--- दिन भर कमरे मई सोचता रहा की पास्ट मई क्या हुवा था क्या nahi......shweta बी मेरे साथ हे थी वो बी मेरे दुखी होने से दुखी thi...shamko खाना बी बड़ी मुश्किल से हे खा पाया क्योकि वर्ण सायद श्वेता और दादाजी बी नहीं कहते....

रात को हम भाई बहन साथ हे सो गए क्योकि मुझे बी किसी अपने की बहुत जरुरत थी जब ये पता लगे की किसी ने उसके परिवार उसकी माँ पर तलवारो से हमला किया हो और ये बी न पता हो की कोई जिन्दा ह या नही

..मैं सुभे 6 बजे उठा मेरा मन अब शांत हो गया था और इसे अब पूरा शांत करना था इसलिए योग करने हवेली के पीछे चल गया जंहा ...बहुत सरे देसी पहलवान जो हवेली की सिक्योरिटी भी करते ह सब खुलती मई वयश्त the...main योग छोड़ उन्हें ढकने लगा कुछ दिएर मई दादाजी और श्वेता बी आगये मैंने दादाजी को झुक कर पाँव चुवे ..

दादाजी--- आज एक्सरसाइज नहीं की अपने

Main—man नहीं था योग करने आया था पर बचपन मई खुलती देखी थी आज वापस देखी तोह ढकने रूक गया ...

दादाजी--- हम्म्म सिक्योरिटी बहुत जरुरी ह बीटा वैसे बी जल्द हे दंगल होने वाला ह अस्सपस्स के 50 गाँव के पहलवान आएंगे. बहुत बड़ा मेला लगता ह ......

श्वेता--- मेला हम्म्म मुझे ढकना ह दादाजी ...

Dadaji---kyo नहीं beti...hum खुद तुम्हे घूमने लेके चलेंगे हमारे साथ....

भीमा चाचा--- औ राज देखे जरा क्या सिख के ए हो.... थोड़ा दम ख़म आजमाइश हो जाये

मैं--- रहने दो भीमा chacha...phir कभी ....

भीमा chacha---dar रहे हो अपने चाचा से...

मैं--- आप जीते chacha...main हरा

श्वेता--- भाई के साथ चाचाजी मत उलझो लेने देने पढ़ जायेंगे..

बी chacha—acha ऐसा ह तोह औ जरा ....हम बी तोह dhekhe......tumhare भाई का दम

सब पहलवान .....चीयर करने लग gaye...ki हो जाये हो जाये तोह मुझे आना हे पड़ा ...

मन और भीमा चाचा आमने सामने हो गए .....

भीमा--- भरखुद्दर संभल के देसी अखाडा ह ..

दादाजी--- भीमा बचा समाज के मत लड़ना ... दिखा दो जरा देसी पहलवानी.. हमें बी तोह पता लगे की 5 साल क्या किया ह राज ने...

श्वेता--- ओह चामे ों दादाजी भाई ु उठा के पटकेंगे की चाचा की साडी हड्डिया हिल जाएँगी .. चाहे तोह शर्त लगा ला मैंने तोह देखा ह की वो क्या कर सकते ह.....

हम दोनों एक दूसरे के सामने खड़े थे अचानक भीमा चाचा ने झुक कर मेरी कमर को पकड़ा और मुझे पीछे उठाकर फेंक दिया मैं हक्का बक्का रह गया भीमा चाचा मई बहुत फुर्ती थी मैं दुबारा खड़ा हुवा और मुस्कराने लगा चाचा की और ढक के हम दोनों ने हाथ मई हाथ फंसाये और एक दूसरे को पीछे ढाका देने लगे फिर फुर्ती से मैं मुद के झुका और भीमा चाचा को पीठ पे उठा के आगे की तरफ फेंक दिया वो निचे गिरे तोह एक बार तोह उन्हें टारे दिख गए जब वो खड़े हुवे तब मैं मुस्करा रहा था वो बी मुस्कराने लगे और मेरी और ए जैसे हे वो मेरा सर अपने हाथो से निचा करके पकड़ने की कोसिस करने लगे मैं झुक कर उनकी कमर पकड़ी और उन्हें उठे के खुदके ऊपर से पीछे फेंका ... इस बार थोड़ी जायदा ताकत लगा दी थी तोह भीमा चाचा जब निचे गिरे तोह उनकी कमर अकड़ गयी

मैं---- आप तीख तोह ह न माफ़ करना मुझे

भीमा चाचा--- खड़े होकर बहुत अचे राज मज़ा आगया बहुत दिनों बाद कोई बराबर का मिला....

श्वेता--- चाचा बात बदलो मत ू बोलो की भाई ने हरा diya......kaha था न टारे दिखेंगे

B.chacha--- है है है तीख ह तीख ह आप सही हम हर मानते ह

सब हसने लगे....

थोड़ीदेर बाद श्वेता तोह दादाजी के साथ गांव घूमने चली गयी जंहा सब लोग उसकी आवभगत करने मई लगे थे पुरे दिन भर घूम के घर आयी तोह सामने सुरेंद्र और बबिता खड़े थे और दादाजी अंदर चले गए थे.....

सुरेंद्र--- तंज कस्ते हुवे मनहूस के साथ रहने वाले को बबिता क्या खाहेंगे

Babita---kya भाई उसे बी मनहूस हे कहेंगे ...

सुरेंद्र --- पता नहीं वो जिसके माँ बाप का अत पता नहीं ह इसलिए अपने जैसी हे किसी को उठा लाया होगा.....

बबिता--- और नहीं तोह kya...pata नहीं जैसे ये धर्मशाला हो koyi...mu उठा के आजाते ह...

श्वेता बस उन्हें घर का ढकती रही फिर बोली ...

श्वेता--- राज जैसा भाई मनहूस ह तोह मुझे yahi.bhai हमें हर जनम चाहिए ....और रही बात अनाथ की तोह तुम जैसो के होने से ाचा ह वो अनाथ हे तीख ह .....वैसे बी मेरे रहते तुम्हरे जैसो की जरुरत हे kya....aur अब मेरी बात मैंने सुना ह तुम दोनों दिल्ली की किसी कॉलेज मई पढ़ते हो.. फिर दोनों के पास गयी और धीरे से बोली मेरे पापा दिल्ली मई कमिश्नर ह एक बार उठवा के पिछवाड़ा बन्दर के पिछवाड़े की तरह लाल करवा दूंगी इसलिए धयान से और मुझसे दूर रहना samjhe....aur है राज मेरे पापा के लिए बेटे सामान ह तोह सोच समाज के हे uljhna...usai बी कंही लेने के देने न पढ़ जाये

बबिता--- तू जायदा बोल रही ह.....

श्वेता--- मैं जो बोलती हु वो करके दिखती हु और कहा तोह करके दिखाऊ ... आपका ये नाजुक बदन झेल नहीं पायेगा मार और चाहकर बी आप किसी को बता नहीं पाओगे की किसने किया ह सब क्योकि मैं तोह नादाँ बची हु ..

सुरेंद्र--- ढक लूंगा तुजे बहुत अकड़ ह ..

श्वेता--- आप ह न लातो के भूत हो ok मैं पापा को बोल हे देती हु और फिर फ़ोन निकलकर टाइप करने लगी नंबर

तोह सुरेंद्र बबिता निकल लिए पतली गली..

श्वेता--- बड़े ए मुझे डरने ...

मैं ऊपर से खड़ा ढक रहा था और बबिता और सुरेंद्र का चेहरा ढक मई समाज गया tha..ki उनको करारा जवाब दिया ह श्वेता ne....mere चेहरे पे भी मुस्कान आगयी ....

गाँव से बहार

शख्स ठाकुर साब एक लड़की दिखी ठाकुर साब के साथ

हरी सिंह--- तोह कहना क्या चाहता ह..

वो शख्स – एक लड़का और आया था वो नहीं दिखा मतलब कुछ तोह गड़बड़ ह ..

हरी सिंह – भोस्डिके कोई खास बात हो तोह हे बताना वर्ण गांड मई लुंड दाल दूंगा फ़ोन रख.

2 दिन बाद ..

श्वेता --- भाई हमें घूमना ह हमने सुना ह जयपुर बहुत अछि जगह ह ...

मैं--- हम तीख ह चलते ह जयपुर तोह हमने बी नहीं देखा ह.....

श्वेता – तोह तीख ह कब चलना ह आप सुनील को और कृति. को भी बुला लो न...

Main---dhek कृति अभी अभी टेंशन से बहार निकली ह उसे थोड़ा वक़्त फॅमिली मई रहने दे उसके पास मेरे नंबर ह वो खुद याद करेगी और सुनील की जिमेदारिया जायदा ह उसे अब स्कूल और बिज़नेस दोनों सँभालने ह ..

तोह तीख ह हम दोनों हे तीख ह...

शामको ..

मैं--- दादाजी हम जयपुर घूमने जा सकते ह ..

दादाजी – हमें कोई दिकत नहीं ह पर भीमा को साथ लेके जाना पड़ेगा.....

श्वेता --- ये तोह खुसी की बात ह......

मैं---- तीख ह हम कल सुभे चलेंगे.....

इन नाईट

दादाजी--- भीमा धयान रखना खतरा हो तोह जो चाहे वो करना....

भीमा--- जी बाबूजी ....

हमदोनो मेरे रूम मई हे थे और मैं उसे मेरे बचपन की अछि बाते बता रहा था.....

बड़ी चाचा चची रूम--- वो अब कल जयपुर जायेगा यही टाइम ह एक्सीडेंट दिखा के मरवा दो ...

शैतान--- बेवक़ूफ़ मत bano...samjii थोड़ा सबर और करलो जब इतने दिन किया ह तोह सब मिल जायेगा अब सजाओ....

पर खतरा तोह हरिसिंह नाम के बन्दे का था.... जो बस इंतज़ार कर रहा था.......

नेक्स्ट सुभे हम तीनो निकल गए हलकी ठण्ड थी..... 2 हॉर्स लगने थे भीमा चाचा राकेट की तरह चलते h...carko क्यकि उनकी ट्रेनिंग हे ऐसी हुवी थी पास्ट मई

और ये इन्फोर्मशन हरी सिंह को भी मिल गयी ....की हम बहार निकले ह

हरी सिंह --- 5 साल पहले हे सुनील टीचर हे गायब हुवा था और 5 साल पहले हे ठाकुर की हवेली से कोई बचा बहार गया था जरूर ये दोनों एक जे ह इसको पकड़के जानकारी लेनी पड़ेगी की ये कौन ह तभी आगे इनफार्मेशन दे पाउँगा.....

फिर हरी सिंह अपने दस बन्दों को बोलता ह जाओ और जयपुर वाले रस्ते पे और ये कार नंबर रज 07 ---.........नंबर ह इसमे जो लड़का और लड़की ह इनदोनो को उठा lo....aur कोई बिच मई ए तोह मार दो...

हम रोड पर दादाजी की कार से स्पीड से जा रहे थे तोह रक कार हमारे पीछे आरही thi...main जो पीछे बैठा था सेंटर से कार के अंदर से उसका नंबर याद कर लेता हु क्योकि कार जितनी हमारी स्पीड तेज़ होती वो बी उतनी हे होती तोह मेरे दिल मई शक उठ गया था.......

मैं--- चाचा क्या अपना मंडावा मई कोई दुश्मन ह क्या..

चाचा--- नहीं तोह अस्सपस्स के पचास गाँव तक तोह नहीं ह... क्यों क्या हुवा अचानक कैसे पूछा ..

मैं--- बस ऐसे हे ..

श्वेता--- होगा बी तोह ...क्या उसकी जीने की ीचा ख़त्म होगी तोह आजायेगा आपके पास

मैं--- तुजे नहीं लगता आजकल तेरे पंख कुछ जायदा हे निकल ए ह .

Shweta—he हे he...kyo नहीं निकले पंख अब सोचो जिसका भाई इतना ताकतवर जिसके दादाजी इतनी बड़ी टॉप ho.jiske पापा कमिश्नर हो जिसके भीमा चाचा इतने हिमतवाले हो बड़े बड़े मंत्रियो से जान. पहचान हो तोह इतना तोह बनता ह मेरा...

मैं और चाचा तोह उसे हे ढक रहे थे और मस्त चिप्स कहते हुवे एन्जॉय कर रही thi....khair उसकी बी बात सही thi...itna तोह बनता हे ह...

भीमा चाचा--- बताओ पहले कान्हा चलना ह..

मैं बोलने वाला हे था की श्वेता बोल पड़ी

Shweta—inse क्या पूछते हो मैं बताती हु मुझे पहले जयपुर फोर्ट घूमना ह फिर हवामहल ....ढकना ह फिर गत के पास शॉपिंग करेंगे फिर मूवी और फिर चोखी धनि मई खाना खाना ह फिर घर बस इतना हे..

मैं--- क्या कहा बस इतना हे तू थकती नहीं क्या मेरी माँ....

फिर वही हुवा पहले हम फोर्ट गए वंहा एन्जॉय किया श्वेता ने फोर्ट सिर्फ दिल्ली का हे देखा था उसे नयी चीजे ढकने को मिली ाक्टुअलय देखा तोह मैंने बी नहीं था कुछ तोह मैंने बी ढक लिया ....पर इनसब के बिच अभी कुछ बन्दे हमारा पीछे कर रहे थे फिर हम गत गए शॉपिंग करि मैंने बी काफी जीन्स और टी शर्ट पंत शर्ट्स ली क्योकि मेरे पास नहीं the....maine सिर्फ स्कूल ड्रेस और एक्सरसाइज के टाइम लोअर टी शर्ट्स हे पहनी थी .....

मेरी नज़र पीछे वालो पे हे थी जो अब 3 से भड़कर 13 हो गए थे ...मैंने धीरे से भीमा चाचा को इशारा किया तोह उन्होंने मुझे बताया की मुझे पता ह फिर हम मूवी ढकने गए जंहा भीमा चाचा हमसे सिनेमा हॉल से अलग हो गए और हाफ ऑवर बाद कोल्ड डिंक्स और स्नैक्स हमारे लिए लेके ए ....

हमने मूवी एन्जॉय की और रात को 11 बजे घर पहुंच गए खाना खाकर हम सब सोने के लिए चले गए रात के एक बजे हवेली के निचे बेसमेंट मई मैं दादाजी और भीमा चाचा खड़े थे...

ाक्टुअलय हुवा ये था की एक टीम हमारी बी हमरे से 2 कम पीछे चल रही थी ...क्योकि दादाजी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे इसलिए उन्होंने सिर्फ मेरा मन रखने के लिए सिर्फ भीमा को साथ ले जाने को कहा जबकि पीछे एक टीम भेज दी थी..... और वही टीम उन सब को उठा के लायी थी

अब करंट टाइम

भीमा --- बताओ किसके कहने पे तुम लोग ए थे और क्या करना कहते थे तुम...

पर वो सब चुप रहे....

भीमा--- अगर और मार नहीं कहानी ह तोह बताओ .....

वो लोग हमें बस फ़ोन आया था और हम आगये हमें फ़ोन पे कहा गया था लड़का लड़की को उठाना ह और बाकि को मार देना ह..

दादाजी--- किसने कहा था ये बताओ...

वो लोग --- हमें नहीं पता ह .....

फिर भीमा चाचा सबको मरने लगे पर किसी ने मु नहीं खोला ...मैं कब से ये सब ढक रहा था ...

मैं--- दादाजी एक कोसिस मैं करू...

दादाजी ने है मई गर्दन हिलायी मैं उन सबके पास गया सबको पानी पिलाया ताकि सबको होश ए जब सबकी आंखे अचे से खुली तोह एक आदमी को पकड़ा और बोलै

मैं – इसे धयान से ढकना और सबक ले लेना सिर्फ एक बार पूछूंगा ..जवाब नहीं दिया तोह बिलकुल ऐसा हे करूँगा...

फिर उस आदमी की आंख मई अंगूठा दाल के आंखे फोड़ दी .वो आदमी पूरा दम लगा के चिल्ला रहा था दर्द se..phir सबको देखा मैंने aur...phir चाकू हाथ मई लेके उसकी उंगलिया काटने लगा वो दर्द से चिल्ला और बिलबिला रहा था ......मैंने उसके एक हाथ और एक पेअर की उंगलिया काट दी फिर दूसरी हाथ और पेअर की बी काट दी.... वो चिल्ला रहा था मैंने फिर उसकी जीब भी काट diji...aur पलट के कहा..

मैं--- अब देखो इसे ये मेरा तौरतूरे का तरीका ह ऐसे हे तुम्हारे साथ करूँगा फिर थोड़ा ठीक करके रेगिस्तान मई छोड़ दूंगा जंहा चील और गिद्ध नोच नोच के जिन्दा खाएंगे या हो सकता ह कोई लकड़भगे बी जिन्दा खा जाये तुम्हे चीयर फाड़के मेरा सिर्फ एक सवाल ह सिर्फ नाम बताओ नाम......3 गिनने से पहले ....फिर मैंने काउंटिंग स्टार्ट की 1.......2...

तभी उनमे से एक बोलै भाई ये हमारा लीडर ह यही बात करता ह ...इसे सब पता ह आप इसे पूछो हम दिर्फ़ इसके आदेश पे काम करते h....hume जाने दो भाई हमे माफ़ कार्डो....

मैं--- गजब मान गया इसे मतलब इतना दर्द और खोफ्फ़ देखने के बाद बी इसने मु नहीं खोला बहुत पक्का ह तू ....तूने नरक नाम सुना होगा पर देखा नहीं होगा की वंहा कैसे ताड़पत्र ह आज तुम्हे दिखता हु फिर तुम जिंदगी भर कभी गलत काम नहीं karoge......Chacha इसे खड़ा करके बांधो तोह जरा और कुछ चूहे लाओ .......

भीमा चाचा एक पिंजरा लाये जिसमे मोठे और भूखे चूहे थे .....

मैं हसने लगा पीछे दादाजी बी मुस्करा रहे थे ये ढक के की दर नाम की चीज नहीं ह मुज मई....

दादाजी--- आपके पापा इतनी दिएर मई तोह काट देते थे ...साबरा नहीं था उसमे बिलकुल पर तुम मई ह ..

Main—muskrakar उन चूहों को बाल्टी मई डाला और उस बोलती को उसके पेट से बांध दिया

वो भूखे चूहे उसके पेट पे धीरे धीरे कुतरने लगे जिसे वो दर्द से छटपटाने लगा ..

Main—maza नहीं चाचा जरा 2 कील से इसके पेअर जमीं मई अचे से ठोखो ..ताकि हिले नहीं

सब दर से बोल पड़े जल्लाद ह ये ..हवेली की सिक्योरिटी के गॉर्डस बी दर से मुझे ढक रहे थे और मैं हंस रहा था....

मैं – अब मज़ा आया न चाचा ..फिर बोलै चाचा इसे दर्द थोड़ा काम ह जरा थोड़ी सी आग जला के देना .....

फिर भीमा चाचा ने छोटी मसल टाइप जला के दी मैंने वो बाल्टी के पीछे लगायी और गर्मी से चूहे बिलबिलाते हुवे उसके पेट को कुतरने लगे और चिल्ला pada...batata हु बताता हु इन्हे हटाओ मैं बताता hu....par मैं नहीं रुका दस मिनट बाद जब बाल्टी हटाई तब चूहे शांत हुवे और उन्हें वापस पिंजरे मई दाल दिया ....उसके पेट की अंतड़िया दिखने. लगी थी...

लीडर धीरे धीरे बोल रहा था ठाकुर ....thakur.....dungarpur ...ठाकुर ....

मैं – जोर से बोल...

लीडर ---- hariii.....singh....

मैं --- ये कौन आगया

ab....par जब आ हे गया ह यही सही...

मैं चाचा इनसब ने न जाने कितने खून और लूट पात की होंगी इनकी आंखे हाथपैर की उंगलिया और जीब काट के फिर आंखे फोड़ के भीहड़ मई छोड़ दो बच गए तोह किस्मत वर्ण लकड़भगे चील गिद्ध हमें दूवये देंगे.......

दादाजी----- हरी सिंह का हमने क्या बिगाड़ा ह....

मैं--- हमने उसका न सही उसने तोह कोसिस कर हे ली ...चाचा जी जानकारी निकालो इसकी इसके दिन भर गए h....jarur किसी भेड़िये न जानकारी दी ह गाँव के बहार आदमी भेजो जो अनजान मिले उठा के ले ao......hum बी एक जानकारी भेजेंगे उसे.... हाथ लगा के हमला करना उसे आया हे नहीं हम बताएँगे उसे हमला क्या होता ह.......... हरी सिंह बहुत जल्द हमरी मुलाकात hogi.....time स्टार्टस नाउ टिक टोक टिक टोक .......



आज के लिए इतना हे..
 
अपडेट 64

महा पंचायत........

फ्लेशबैक...

लीडर धीरे धीरे बोल रहा था ठाकुर ....thakur.....dungarpur ...ठाकुर ....

मैं – जोर से बोल

लीडर ---- hariii.....singh....

मैं चाचा इनसब ने न जाने कितने खून और लूट पात की होंगी इनकी आंखे हाथपैर की उंगलिया और जीब काट के फिर आंखे फोड़ के भीड़ मई छोड़ दो बच गए तोह किस्मत वर्ण लकड़भगे चील गिद्ध हमें दूवये देंगे.......

दादाजी----- हरी सिंह का हमने क्या बिगाड़ा ह....

मैं--- हमने उसका न सही उसने तोह कोसिस कर हे ली ...चाचा जानकारी निकालो इसकी इसके दिन भर गए h....jarur किसी भेड़िये न जानकारी दी ह गाँव के बहार आदमी भेजो जो अनजान मिले उठा के ले ao......hum बी एक जानकारी भेजेंगे उसे.... हाथ लगा के हमला करना उसे आया हे नहीं हम बताएँगे उसे हमला क्या होता ह.......... हरी सिंह बहुत जल्द हमरी मुलाकात hogi.....time स्टार्टस नाउ टिक टोक टिक टोक .......

अब ागैई.....

अगले दिन श्वेता मुझे जगाने आयी तब मेरी नींद खुली......

श्वेता--- bhaii....apki आंखे लाल क्यों ह ....

और मेरे चेहरे को ढकने लगी....

मैं--- रात को नींद टूट गयी थी इसलिए और तू गयी नहीं दादाजी के साथ पंचायत मई .

श्वेता--- इसिलए हे तोह आयी हु आपको बी आना ह ..गाँवो को लेके अहम् फैसला ह तोह ुवा पीढ़ी की बी सुनी जाएगी....

मैं --- यार तू ह न बहुत बदल गयी ह मतलब अब पोलटिक्स मई बी घुसेगी ...तीख ह तू चल मैं आजाऊंगा पंचायत मई....

उनके जाने के बाद मैं तैयार हुवा और मेरी बाइक जो आगयी थी उसपे बैठ के चल दिया.... मैं धीरे धीरे गांव घूमता हुवा जा रहा tha...kyoki महापंचायत 40 कम दूर थी जो मेरी बाइक के लिए नार्मल थी मैं गाँवो की हालत ढकते हुवे जा रहा tha...ek घर के बहार एक औरत बैठी हुवी थी और रो रही thi...main थोड़ी दूर बाइक रोकर धयान से देखा तोह मुझे उसके साथ मर पीट जैसा कुछ हुवा प्रतीत हो रहा था ....मैं उतर गया और चल दिया उस घर की और बहार पेड़ के निचे कुछ बुजुर्ग बी बैठे हुवे the...maine उन्हें देखा और उन्होंने मुझे ....मैं उन सबको अवॉयड करके उस औरत के पास गया ...

मैं--- माँ जी आप बहार क्यों बैठी ह और रो क्यों रही ह...

औरत – ने मुझे देखा तोह कड़ी हो गयी और बोली कुंवर सा आप ...कोई बात नहीं ....ह

मैं--- आपके बेटे सामान हु आप सच बताये muje....warna समझूंगा की मैंने आपको ma..samjha और अपने मुझे पराया कर दिया...

औरत ---नहीं कुंवर sa...ap हमारे सन्न डाटा हो दरशल मैं बेटी को आगे पढ़ना चाहती हु सुर मेरे पति और मेरे ससुर उसकी शादी करना चाहते ह .मेरी बेटी बहुत होसियार ह और उसके 12तह मई 80 प्रतिशत नंबर ए ह .. और अपने जीवन मई आगे कुछ बनना चाहती ह

मैं--- हम तोह ये बात ह ..और इसलिए आपके साथ ये मारपीट की गयी ...

औरत निचे गर्दन करके बैठ gayi......aur है मई सर हिलाया

मैं--- आपके पति का क्या नाम ह और कान्हा ह वो....

औरत --- जी शयाम सिंह नाम ह उनका वो और मेरे ससुर जी पंचायत मई गए ह घरपर मैं मेरी बेटी और सास अंदर ह...

मैं--- आपकी बेटी को भेजिए वो मेरे साथ जा रही ह ..आप चिंता न करे मेरे रहते उनके साथ कुछ गलत नहीं होगा...

औरत --- जी आप पर... महापंचायत मई तोह स्त्री का आना मन ह वर्ण गाँव निकला दे देंगे

मैं--- मैं विस्वास कीजिये मेने आपको माँ कहा ह....

फिर उस लड़की को लेके मैं सीधा महापंचायत पहुंच गया.....

सब मुझे और उस लड़की को हे ढक रहे थे दादा जी बी गौर से मुझे ढक रहे थे और मैं उन्हें और सब पांचो और सभी सरपंचो को. श्वेता कार के पास कड़ी थी वो बी आगयी ....मैंने उसे इशारे से चुप रहने को कहा फिर ..दादाजी ने भीमा चाचा को मुझे बुलाने के लिए bheja....main बी जेक दादाजी के पीछे खड़ा हो गया आगे गाँवो के मुखिया और गाँवो के लोग बैठे थे....

दादाजी ने सबको मेरा परिचय दिया और मैंने बी उनका अभिवड़ां किया... 2 लड़किया मेरे साथ थी कुछ लोग बोलना चाहते थे पर दादाजी को ढक बोल न पाए क्योकि सबको उनका गुस्सा पता था. तोह कोई कुछ न कह पाया ....पर शयाम सिंह अपनी बेटी को हे ढक रहा tha....gusai से और मैं उसे ढक रहा था गुसाई से ..

फिर सबके सवाल जवाब शुरू हुवे सबकी समसय सुनने लगे ....सभी अपने अपने गाँव की समस्या बता रहे थे ...और महापंचायत उसपे अपना फैसला दे रही थी

मैं बी दादाजी के पीछे से खड़ा होक आगे भीड़ मई चला गया और अपना हाथ ऊँचा kiya....mera हाथ ऊँचा ढक के सबकी आंखे मेरी तरफ हो गयी ...

दादाजी--- कहो आप क्या कहना चाहते हो ......

मैं--- जी मेरा नाम राज सिंह ह और मैं ठाकुर जगमाल सिंह जी का पोता hu....mere कुछ सवाल और एक समस्या ह महा पंचायत से मुझे उम्मीद ह की उसका सही जवाब मिलेगा ... और समस्या का निदान होगा...

दादाजी --- मिलेगा जरूर milega.....ap साफ़ साफ़ कान्हे क्या कहना चाहते ह..

मैं--- हमे जनम देने वाले को हम क्या कहते ह

जो हमे अन्न देती ह उसे हम क्या कहते ह .........

जिसे निस्वार्थ प्यार की जीती जगती देवी कहते ह उसे हम क्या कहते ह.........

सरे ढक दर्द सहके बी जो हमें प्यार हे देती ह उसे हम क्या कहते ह...........

खुद भूखा रहकर बी जो पहला निवाला हमें खिलाये उसे हम क्या कहते ह........

सब मेरे सवाल सुन भोखला गए ....

पर जवाब सबको देना था हे और सबको पता था...

तब एक आवाज आयी बीटा उसे माँ कहते ह.......

मैं ---जी सुना नहीं मुझे .

फिर जोर से काफी आवाज ayi....usai माँ कहते ह...

मैं--- और उसे नारी स्त्री बी कहा जाता h....bilkul सही न ..

सब एक साथ है......

मैं--- जब वंश को आगे भेदने वाली स्त्री h...toh वो यंहा क्यों नहीं ह ....

एक घर के अंदर सब कुछ करने के लिए स्त्री ह एक दिन अगर उसकी तबियत ख़राब हो जाये तोह पुरे घर का काम रूक जाता तोह फिर वो यंहा क्यों नहीं ह ...

क्या उसके ढक शुक का कोई मोल नहीं ह....... जो पुरे घर को संभाले सब की दे रेख खरे क्यों उसकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं h....wo यंहा क्यों नही ह....

फिर मैं माइक हाथ मई लेके श्वेता और लड़की के पास गया...

मैं--- अब आपको बता हु एक स्त्री किसी की माँ बीवी बेटी होने के अल्वा क्या कर सकती ह ये आप सबको बताता हु इनसे मिलिए ये दोनों एक स्त्री बेटी ह और भविष्य मई माँ बहु दादी सब बनेगी ...अब मैं आपको इनका परिचय और काबिलियत बताता हु ...जो ये और बी बन सकती ह उन सबके इलावा

इसका नाम श्वेता सिंह ह और इसके पापा पुलिस कमिश्नर ह दिल्ली मई और आप सबको पता ह इसने 11 तह मई 90 परसेंट बनाये ह और इसका सपना आईपीएस या आईएएस बांके देश सेवा करना ह और इसे देश की संस्कृति और मर्यादा का बी अचे से पता ह... ये ह इसकी वो पहचान जो ये खुद बनाना चाहती ह समाज के बनाये रिश्तो से अलग ....और इनसे मिलये ये हमारे यंहा की अंकिता कँवर ह पुत्री श्री शयाम सिंह जी की ह इन्होने 12 क्लास मई 80 पर्तिस्थ अंक बनाये ह गाँव मई रहकर बी खुद की हीमत par....gharka सारा काम करते हुवे ताकि खुदकी अलग पहचान बना सके पर इनके पिता श्याम सिंह जी ने इनकी शादी करने की थान ली ह क्योकि ये पिता ह इनके और इन्होने ये सिर्फ इसलिए किया क्योकि इनको सिर्फ आगे वंश हे तोह भड़ाना ह किसी बीवी बनना ह और घर संभालना ह क्यों शयाम सिंह जी इसिलए इन्होने अपनी मर्दानगी उसे दिखाई जो अपना घर छोड़कर इनके घर दुल्हन बांके आयी अपने माबाप का ढक भूलकर इनके माता पिता की सेवा कर रही h....isliye इन्होने अपने हाथो से उसे समझाया अरे थू ह ऐसी मर्दानगी पर जो ऐसा मर्द हो अरे मर्दानगी दिखानी ह तोह जाओ फौज मई पुलिस मई फिर दिखा mardangi....inse अछि तोह मुझे माँ जी लगी जिन्होंने अपने पति की बुराई तक न की सिर्फ बेटी के भविष्य के लिए इनसे ladii....ap सब लोग सोचा जरा अगर इनके ऊपर थोड़ा धयान दिया जाये तोह ये बी किसी सरकारी महकमे मई या किसी और जगह अपना नाम बना सकती h...par सब यही चाहते ह की स्त्री की शादी करवा दो क्या इनकी िछाये नहीं ह क्या इनके सपने नहीं ह जिसमे कबि लियत ह उसे तोह आगे भड़ने का मौका दो क्या फायदा ऐसी महापंचायत का जो सिर्फ मर्दो का ढक ढके और खोखली मर्दानगी का दावा kare...main शमा chahunga....meri बातो से बुरा लगे toh....par ये सब अपनी आँखों से ढक के मैं मू नहीं फेर सकता हु

पर जाने से पहले एक बात कहना चाहूंगा ...एक दुखी औरत बेटी या बहु की बद्दुआ मत lo....warna कभी सुखी नहीं रह पाओगे एक बेटी लक्समी का रूप ह उसकी बी ख़ुशी उसकी इछाओ की क़द्र करो..

इतना मैं कहके मुदा हे था की ...आवाज आयी ठहरो....

मैंने पीछे मुड़के देखा toh..ek बुजर्ग इंसान खड़े थे वो खड़े हुवे और बोले

मैं महापंचायत का सदसय होने के नाते इस बचे की बात से सहमत hu...aur मैं ये एलन करता हु की अबसे दस औरते एक गाँव से आगे आएंगी और अपनी समस्याएं रखेंगी और होशियार बच्चियों का खर्चा महापंचायत उठाएगी उन्हें आगे पढ़ाएगी ताकि वो हमारा और अपने माता पिता का नाम ऊँचा कर सके... और कोई बी मर्द बिना वजह मारपीट करता हुवा किसी औरत के साथ दोषी पाया गया तोह उसे सजा बी मिलेगी.....

दादाजी ने खड़े होकर अपनी मंजूरी दी तोह सबने है कहा फिर दादाजी ने कहा अगर कोई बेटी सरकारी महकमे जैसे पुलिस या कानून से जुडी हो उनमे सेलेक्ट होती ह तोह 5 लाख रस नगद मैं उन्हें खुद देके पुरुस्कृत करूँगा ...

और अब आज एक महत्व पूर्ण सुचना कई वर्षो मई होने वाला दंगल जो हर गाँव के लिए महत्वपूर्ण रहा ह वो 10 दिन बाद होगा तोह सब तैयार rahe.....is बार मुकाबला का केंद्र डूंगरपुर के ठाकुर के बेटे और ठाकुर जगमाल सिंह के मु बोले बेटे भीम सिंह के साथ होगा.....

फिर ु हे महापंचायत मई अलग अलग समसयाओ को लेके बाते होती रही......

इधर

मेरे चेहरे पे मुस्कान थी दंगल की बाते सुनके मेरे पास कड़ी लड़की ने बी मेरे आगे हाथ जोड़ लिए

मैं--- दुबारा ऐसा मत कीजियेगा आगे पढ़ई कोई बी दिकत ए तोह दादाजी को जरूर बताईयेगा ...

फिर काफी बाटे हुवी वंहा और हम घर आगये ....

शामको बेसमेंट मई

मैं--- तोह तू ह खबरि एक फ़ोन कर तेरे ठाकुर को की दंगल के बाद मैं भवानी मंदिर अकेला जाऊंगा ये बात tune....gharke माली से सुनी ह ....

वो आदमी घबराकर जी जी करता हु...

और फिर जैसे जैसे मैं उसे बताता गया उसने ठाकुर को इनफार्मेशन दे दी..

मैं--- बी तोह देखु जरा हरी सिंह को मुझपे इतना प्यार क्यों ारः ह ..........जल्द हे मुलाकात होगी हमरी हरी सिंह .....तेरे टाइम हो गया ह अपने कर्मो की सजा भुगतने की ...जिन्दा नरक देखने का ....

मुझे ए काफी दिन हो गए थे मैंने श्वेता को बुलाया

Main---mere पास बैठ ...

श्वेता--- मुझे घूरकर काम ह तोह रिस्वत लगेगी....

मैं--- क्या कहा अभी...

श्वेता --- वही जो सुना रिस्वत लगेगी...

मैं--- मुझसे रिस्वत लेगी चल तीख ह मंजूर h....ab सुन तू एक काम कर कविता ममता से बात कर और पता कर कैसी ह वो नाराज तोह नहीं ह न.....

श्वेता--- हद ह आपकी भाई तीख ह इस टाइम वंहा सभी जगे हे होंगे लाओ नंबर लाओ ..

मैंने स्कूल के नंबर दे दिए श्वेता ने कॉल लगाया तोह वंहा किसी लेडीज ने कॉल उठाया और बोली hello ..

श्वेता--- कैन ी टॉक तो मिस ममता एंड कविता फ्रॉम इंडिया ...

सामने से ok वेट प्लीज...

कुछ दिएर बाद सामने से hello हु इस स्पीकिंग

श्वेता--- आप कविता हो या ममता

सामने से मैं ममता बोल रही हु..

श्वेता--- ओह लड्डू चोरी करने वाली....

ममता --शॉक से कौन बोल रही हो आप ये बात तोह सिर्फ मेरा भाई हे जनता ह..

श्वेता--- बिलकुल मैं बी. बहन हे uski....mera नाम श्वेता ह..

ममता--- पर उसकी बहने. तोह हम हे आप कान्हा से आगयी खैर श्वेता भाई कान्हा ह

श्वेता – मैं उनके स्कूल मई बानी ...और उन्हें एक साल और लगेगा आने मई मैसेज देने को कहा था की वो तुम्हे बहुत प्यार करते ह.... और हर पल हर लम्हा हर दिन तुम्हे याद करते ह एक साल बाद तुम्हे वो इंडिया बुला लेंगे ....

ममता--- नहीं उन्हें तोह अजना चाहिए था अब तक वो तोह 5 साल के लिए हे गयेथे फिर रुक kar...ok एक साल और इंतज़ार करलूँगी मैं तोह.. पर उन्हें बोल देना छोटी बहुत नाराज ह उनसे वो माफ़ नहीं करेगी....

मैं जो सुन रहा था मुझे ढक huva....ye सब सुनके की मेरी बहने मुझे कितना प्यार करती ह और मुझे कितना मिस करती ह...

श्वेता--- हम्म्म मैं साथ हु आप दोनों को तीनो मिलके सजा देंगे ok...

ममता--- थैंक्यू सो मच....

श्वेता--- मेरे नंबर ह सेव करलो जब दिल करे तब कॉल कर लेना मैं उठा लुंगी मैं बी बहन हे हु तुम्हारी और उनके साथ हे पढ़ती आरही हु और आगे बी पढूंगी जल्द हे बात karwaungi...apki

ममता--- थैंक यू सो मच shweta....thank यू ...

कॉल कट...


आज के लिए इतना हे....

ट्यूसडे मेघा अपडेट दंगल...
 
आज की अपडेट टाइमिंग

अपडेट अप्प्रोक्स 3पं के नियर आएगा ...

गुड मॉर्निंग........
 
अपडेट - 65

टिक टोक टाइम फिनिश.......

फ्लेशबैक

श्वेता--- हम्म्म मैं साथ हु आप दोनों को तीनो मिलके सजा देंगे ok...

ममता--- थैंक्यू सो मच....

श्वेता--- मेरे नंबर ह सेव करलो जब दिल करे तब कॉल कर लेना मैं उठा लुंगी मैं बी बहन हे हु तुम्हारी और उनके साथ हे पढूंगी जल्द हे बात करवाउंगी...

ममता--- थैंक यू सो मच shweta....thank यू ...

कॉल कट...

अब अजैईईई....


मैं सुभे सुभे अपना योग कर रहा था तब बहार सप आयी हुवी थी मैं योग और एक्सरसाइज से फ्री हुवा तोह अंदर आया तब 7 बज रहे थे दादा जी ने मुझे देखा तोह अपने पास बुलाया .....

दादाजी--- औ बीटा ao...inse मिलो ये ह हमरे यंहा की सप शिवानी जैस्वाल बहुत कड़क और ईमानदार ये दंगल मई होने वाली पुलिस की सुरक्षा की बात करने आयी ह

Main—good मॉर्निंग मम...

शिवानी--- गुड मॉर्निंग ...

Dadaji-----apko जो तीख लगे आप वैसा कीजिये और हमारी कोई मदद चाहिए तोह वो बी बताईये......

सप shivani---dhanyawad ठाकुर साब आपकी जैसी तरफ आज तक सुनी थी आप उसे बी अचे ह सच हे कहते ह दया और हीमत की पहचान कोई ह तोह वो ठाकुर जगमाल सिंह ह..

दादाजी--- मुस्कराकर नाश्ता बन गया ह हम चाहते ह आप नाश्ता हमारे साथ हे करे ... और निर्वाण जाओ सबको बता दो आज सप साहिबा हमरे साथ नाश्ता करेंगी.....

मैं जी दादाजी कहके अंदर आगया और सबको सूचित किया तो चोटिचचि ने अल्लू के परांठे और. सप साहिबा के हिसाब से सैंडविच ेट्स तैयार करदी ....

श्वेता बी किचन मई छोटी चची के पास कड़ी हो गयी...

श्वेता--- चची सबका धयान आप हे रखती हो क्या हमेसा..

स चची--- है नौकर ह पर खुद के हाथ के बनाये हुवे खाने की कोई तुलना नहीं ह और तुम्हारे दादा दादी को बिलकुल पसंद नहीं खाने मई कुछ बी गड़बड़ हो ..

श्वेता--- हम्म्म तभी मई सोचु भाई बहार का कुछ क्यों पसंद नहीं ह खाने mai...waise गुड न्यूज़ ह

स चची--- मेरे लिया क्या गुड न्यूज़ हो सकती बेटी मेरे लिए तोह एक बीटा अजय ह बस वो हे बात करता ह बाकि राज नाराज ह सुर बेतिया बी और बबिता सुरेंद्र को किसी से कोई मतलब नहीं ह .

श्वेता--- आप ह न साद. मत हुवा करो जो बिट गया उसे भूल जाओ... और आप सुनो मैंने ममता से बात की थी वो बिलकुल तीख ह और राज का सुनके बी खुस ह ....और 12तह क्लास पास करके जब राज वापस आएगा तब वो दोनों बी आजाएंगी खुस आप अब toh...Bus एक साल की बात ह

स चची--- सच बोल रही ह श्वेता ...थैंक यू बेटी बस अब वो मुझे माफ़ बी करदे ...मैंने कितना बुलाया पर वो जिद पे हे अध् गयी की राज भाई आएंगे तब हे हम आएंगे....

Shweta—oh हो मेरी चची आप भावुक हो जाती हो अपने मेरे ड्रामा नहीं देखे ह मैं सब संभल लुंगी ...और देखो मैं तोह भूल गयी सब नाश्ते का वेट कर रहे ह...


सब नाश्ते की टेबल पे बैठे तब दादाजी ने कहा ये श्वेता सिंह इनके पापा दिल्ली मसि पुलिस कमिश्नर ह ...

सप shivani---oh कंही आप सिंह सर की बेटी तोह नहीं ह

शिवानी--- जी मम मैं उन्ही सिंह सर की beti....hu

सप शिवानी--- बहुत ाचा लगा मिलके आपसे सिंह सर से तोह सबको सिख मिलती ह उनसे ाचा और ईमानदार और दिलेर कमिश्नर मैंने नहीं देखा ह उनसे तोह नेता तक डरते h...wo अकेले ह जो किसी से नहीं डरते ह....

ऐसा हे सबकी बाते हुवी फिर सप मम चली गयी...

श्वेता और दादाजी मेले की तैयारियां ढकने चले गए मैं हवेली से बाइक निकाल के बहार घूमने निकल gaya..main घूमते घूमते एक गाँव मई पंहुचा वंहा काफी भीड़ लगी थी और गाँव का लाला खड़ा था ...मैंने माजरा समझने की कोसिस की तोह समाज मई आया की एक परिवार ने खेती के लिए लाला से पैसे उधर लिए थे और लाला समय से पहले हे बयाज जबरदस्ती वसूल रहा था...

लाला--- बयाज तोह देना हे पड़ेगा रामु वार्ना है है है तुजे पता हे ह....

रामु--- लाला जी अभी तोह भेदज बी नहीं बोये ह तोह आमदनी तोह फसल बेचने के बाद हे होगी न तब आपको पूरा पैसे लौटा देंगे बिटिया की शादी की थी तोह सारा पैसा वंहा लग गया......

लाला--- अरे मुझे क्या करना ह .....फिर रामु की छोटी बेटी की तरफ ढक कर धीरे से है अगर इसे एक रात मेरे पास भेज दे तोह मई तेरा सारा कर्जा माफ़ करदूंगा..

रामु – ने गुसाई मई लाला की गर्दन पकड़ी ली

तब लाला के लठैत जो खड़े थे रामु को मरने लगे ...

Main—lala मैंने ये सिर्फ फिल्मो मई हे देखा था आज हकीकत मई भी ढक लिया तुम जैसे लोग वाकई मई समाज पे कलंक हो...

लाला – छोकरे सहरी लगता ह निकल जा वर्ण हड्डी पसली तुड़वा के फेंकवा दूंगा समजा..

Main—sayad तूने पहचाना नहीं कोई बात नहीं जो तू करने की सोच रहा ह वही मैं करने की सोच. रहा हु ..

फिर उनके पास जाकर शुरू करे

लाला--- मारो रे इस होशियार चाँद को .

फिर जैसे हे लैटहैट ने मरने की कोसिस की मैंने उसका लेथ पकड़ा और अपनी तरफ खिंच के जबड़े पे दिया जबड़ा फुरा खुल गया और वो निचे लेट के बिलबिलाने laga...phir दूसरे ने लेथ घुमाया तोह मैं झुक गया फिर दुबारा मेरे सर पर मरने की कोसिस की तोह मैंने पकड़ लिया और उसके अंडो पर एक लात मरी बेचारे की दोनों गोलिया फुट गयी..

मैं--- लाला ये सब बचे ह मेरे ागैई फिर लाला के गाल पे एक दिया खिंच कर थप्पड़ लाला को चाँद टारे सरे नज़र आगये

फिर लाला को अपनी बाइक से बंधा और घसीट कर गाँव के बिच मई ले गया जंहा सारा गाँव खड़ा थे...

मैं--- मेरा नाम राज सिंह और मैं ठाकुर जगमाल सिंह जी का पोता हु...

सभी लोग खुसुर पुसुर करने लगे क्योकि सबने सजा धजा देखा था आज नार्मल कपड़ो मई देखा तोह कंफ्यूज होने के कारन पहचान नहीं paye..phir सबने अपने हाथ जोड़ लिए .

Main---is लाला को यंहा टेंगा कर जा रहा हु आज से इसका हुक्का पानी बंद h....isai कोई बी खोलने ए उसे पहले हवेली आके मिलना hoga....aur आप सब अगर इसकी जोर जबरदस्ती के सीकर हुवे ह तोह अपना हिसाब बनके हवेली कल सुभे अजय ......और धयान रखना मैंने जो कहा वो पूरा हो वर्ण फिर आप सब अछि तरह जानते ह ये ऐसे हे लटका रहना चाहिए...

मैं हवेली 4 ऑवर के बाद पंहुचा अलग अलग गाँव घूमकर ..फिर दादाजी के पास बैठकर

Main—dadaji आपके राज मई आपसे बहुत कुछ छुपा ह कंही कोई लड़की घर मई अत्याचार सह रही ह तोह कंही कोई लाला गाँव वालो का खून चूस रहा ह .....

दादाजी--- गंभीर होते हुवे अगर ऐसी बात ह तोह कोई उपाए बताओ ...

मैं--- हर गाँव मई एक बॉक्स लगवाओ और उसकी चाबी भीमा चाचा के पास रहेगी सब उसमे अपना नाम और शिकायत रखेंगे आप उन्हें सुलझा देना और यंहा का जो मला ह उसे साथ लीजिये या जिस पार्टी को आप सपोर्ट करते ह उसे साथ लीजिये और एक एरिया इंस्पेक्टर को साथ रखिये फैसला हाथो हाथ कीजिये आपका रुतबा और भडेगा ...सबकुछ जायज तरीके से hoga..jo आगे हमारी पकड़ और मजबूत बनाएगा....

दादाजी--- वह बीटा एक महीने ए हो उसमे बी सिर्फ भलाई हे बाँट रहे हो


Main—Dadaji अपना हे सहर अपने हे गाँव ह तोह सबका ढक अपना ढक ह...

डूंगरपुर सिटी---

ठाकुर हरी singh—toh अबकी बार ताने उस भीमा न धूल चतनीज h...mahro नाम नीचे नहीं होने चाहिए....

हरी सिंह का बीटा –

हरेंद्र सिंह--- न बापू मेरी बॉडी के आगे भीमा न टिक pavago....biki साडी हड्डिया तोड़ दंगो...

हरी सिंह --- साबस साबस और है 100 आदमी लेके चलना ह जो भवानी मंदिर के कानन चुपके रहेंगे वंहा ठाकुर जगमाल सिंह का पोता आएगा उसे उठाना ह अगर वो सहदेव की औलाद ह तोह हम करोड़ो मई खेलेंगे...

Harendra—itna पैसा कौन देगा....

हरिसिंह – पता नहीं कौन ह पर बहुत सालो से पीछा पड़ा ह कहता सहदेव के वरिष्ठ तक को ख़त्म कर दूंगा सिर्फ इतना हे बोलता ह और सही सुचना देने के 50 कर बोले ह जब बी पुख्ता हो जाये की ये सहदेव का बीटा ह फ़ोन करने को बोलै ह खुद तोह फ़ोन किये हुवे कई साल हो गए ह उसे...

Harendra—dangal परसो हे तोह ह तीख ह मैं तयारी करता हु पर 100 लोगो की क्या जरुरत ह उस अकेले को उठाने ki...waise अपने देखा ह क्या उसे ..

हरी singh—dekha तोह नहीं पर मंदिर के रस्ते अकेला हे होगा और अपना आदमी उस रस्ते पे होगा जिसने उसे देखा होगा वो हमे फ़ोन से इशारा दे देगा बस फिर उठा lenge....aur दुश्मन को कमजोर नहीं संजना चाहिए अस्सपस्स के और अपने गाँव के मिला के सबसे शानदार लठैतो को तैयार करो जब बी मौका milega...hum उसे उठा लेंगे ....

और फिर दोनों जोर से हँसाने लगे

इधर हवेली मई ---

मैं--- भीमा चाचा एक काम करना गाँव के अपने भरोसे वालो को बोल्दो मंदिर के अस्सपस्स रहने को बोलना और मेरे इशारा पे घेरने को बोल देना.. बस मुझे हरी सिंह जिन्दा चाहिए ह ....... ताकत क्या होती ह वो दिखते ह usai.....is बार मैं और हरिसिंह होंगे और होगा माँ भवानी का मंदिर जंहा उसकी बलि dunga....sabke सामने.....

भीमा chacha—ye लो गन मेड इन जर्मनी अगर उनके पास गन हुवी तोह काम ायेगीजी

मैं--- खुस होकर थैंक यू पर अभी ...

बी चाचा--- ओह हीरो अभी आप इतने बी बड़े नहीं हुवे ह जब आप उत्तराखंड जायेंगे वंहा मिल जाएगी अगर चाहिए तोह हे वर्ण नहीं मिलेगी अभी आपके मस्ती के दिन ह थोड़ी मस्ती और बाकि जिमेदारी ..अभी हथियारों के साथ नहीं खेलना ह जो सुकून तड़पा के मरने मई ह वो मज़ा झटके मई मरने मई कान्हा और वैसे बी ये गन मेरी ह..

Main—tikh तीख ह.... ....

इन delhi.......after 2 डेज...

अंजना और दीपिका दोनों सोनाली के घर जा रही thi.......aj संडे था तोह उनका बी ऑफ था और सोनाली फ्री थी आज... कुछ दिएर मई दोनों पहुंच गयी सोनाली के घर...

दीपिका --- hello

अंजना --- hello डीई

Sonali—dono को गले लगा के no formality....meri क्यूट क्यूट कुटी पायियो...

वो दोनों मुस्कराने लगी

सोनाली – राज कैसा ह ...

दीपिका--- ओह हो .....मतलब दिन बा दिन प्यार की तड़प भड़ती हे जा रही h....kya बात ह.....

अंजना--- 😱😱😱😱

दीपिका--- अरे पगली अब इन्हे मम बोलू या भाभी समाज से बहार ह ये अब इतनी पागल ह इनके बैडरूम मई सिर्फ उसी की हे फोटो ..ह

Sonali—shut उप बहुत बोलने लगी ह पता नहीं कैसा होगा वो ..

अंजना सुर दीपिका मुस्कराने लगीई

सोनाली--- व्हाटटटटट ......???

सोनाली सुर deepika—hum तोह अब दिल चाहे तब कर लेते ह उसे .....

सोनाली---- हो नहीं सकता ह वंहा पर सेल फ़ोन अल्लोवेद हे नहीं ह और वो ह की कभी याद हे नहीं करता ह तुम बी तोह 3 महीने बाद मिली हो ..

Deepika---wo एक्चुअल वो ाक्टुअलय..

सोनाली--- टेंस होक बात क्या ह बताओगीय...

दीपिका--- साद होक राज बात अभी इसलिए नहीं करता ह क्योकि उसका दिल टुटा हुवा ह बस वो दिखने के लिए हे खुस ह......

Sonali—darte हुवे साफ़ बताओ मुझे घुमाओ मत..

फिर दीपिका सोनाली को पूरी बात बताती ह तोह सोनाली की आँखों से आंसू निकलने लगते ह....

कुछ दिएर बाद...

सोनाली--- तुम्हे पता ह जब मैं उसके साथ होती थी तोह वो खुद को रोकता था मुझे प्यार करने से क्योकि वो ऋचा से बहुत प्यार करता ह ..वो उसके साथ अपनी जिंदगी के हर सपने पूरा करना चाहता था .....और मुझे बी पता था की ऋचा मुझे अपनाएगी तोह हे मैं राज हो पाऊँगी बूत ऋचा ने अब राज का प्यार के ऊपर से विस्वास हे उठा दिया h.......muje उसे बात करनी होगी पता नही वो अंदर से कितना दुखी और फ़्रस्ट्रेटेड hoga....aur अगर उसको नहीं संभाला तोह वो पता नहीं क्या करता फिरेगा ...

दीपिका--- उसके साथ श्वेता ह ...वो तीख ह.. सप बेवकाः टेंशन ले रही हो....

सोनाली--- यही तोह नहीं पता ह तुजे ....याद नहीं जब तुम्हे हाथ लगाया तोह उसने क्या किया था उसका गुस्सा उसके अंदर ह .....तू नहीं समझेगी मुझे उसे बात करनी होगी..... उसका ढक यही ह की सब उसे दूर हो गए ह बचपन मई उसके मम्मी पापा फिर उसे उसके परिवार से नफरत mili...phir उसकी जान से प्यारी बहनो और दादाजी से दूर होना पड़ा फिर तुम और मैं और अब ऋचा जिसे वो बहुत प्यार करता था उसने धोखा diya....muje उसे बात करनी ह अभी ..इसे पहले की उसे उसका गुसा फ़्रस्ट्रेशन बहार निकलने की वजह मिले.....

दीपिका –मेरे पास उसके नंबर ह मैं कॉल करती हु .आप चिंता मत करो...

सोनाली--- क्या उसके पास फ़ोन ह...

Deepika—ha वो मंडावा आगया ह ab.....aur फ़ोन बी रखता ह ..

सोनाली--- देखा फिर बी उसने बात नहीं करि मुझसे. अब तुम समझी .....की उसके दिमाग मई क्या चल रहा ह ..

दीपिका कई बार कॉल करती ह जो रिंग करती ह पर राज साल पिछ नहीं करता ह और फिर वो श्वेता को बी रिंग करती ह पर वो बी पिछ नहीं करती ह ..

Deepika—busy होंगे वपा कॉल बैक करेंगे

सोनाली--- हम्म्म ी होप जल्दी करे कॉल..

मंडावा----

मैं दंगल ढकने आगया था तोह शोर सरबे मई मुझे कुछ सुनाई नहीं diya....waise बी मेरी नज़र सिर्फ एक इंसान पे थी जिसे देख मेरे अंदर का निर्वाण जाग गया और निर्वाण सिर्फ सजा देना चाहता ह ....


आज के लिए इतना हे
 
5000 प्लस वर्ड्स का अपडेट दिया h....i थिंक सब हैप्पी ह सैटरडे और संडे अपडेट के लिए
 
ट्यूसडे बिग मेघा अपडेट नियर अबाउट 6000 वर्ड्स का 2 पं तक आजायेगा.......
 
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